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अपडेट- 44(बी) (मेघा अपडेट)
वो आसमा के गुर्दें को कुछ देर तक अपने डेंटन के बीच दबाये रखा और अपने मुँह से गधा गधा थूक और लार गिरता रहा जो बेहटा हुआ उसकी गुर्दें से होकर नीचे उसके चूचियों की तरफ आ रहा tha....................magar आसमा बिलकुल चुप चाप सी उसी पोजीशन में थी न hi वो हिल दल रही थी और न खुद को हरी के चंगुल से आज़ाद करने की कोशिश कर रही thi..............kuch देर बाद जब हरी अपने डेंटन को आसमा की गुर्दें पर से जब हटाया तो उसके डेंटन के गहरे निशान उसकी जुड़ें पर लग gaye.............aur साथ में ढेर सारा थूक और लार भी उसपर रह gaya..............jisey हरी कुछ देर बाद अपने जीभ से चाटकर खुद hi साफ़ करने लगा............
खेल की शुरुवात हो चुकी thi.............aasma अपनी पूरी तरह से मरवाने के लिए तैयार thi.................aur हरी मरने के liye..................hari हौले हौले नीचे की तरफ आने लगा और जैसे जैसे उसके जीभ आसमा के बदन पर सरक रहे थे वैसे वैसे आसमा के अंदर की बेचैनी भी बढ़ती जा रही thi......................hari पहले एक हाथ से आसमा की एक चूचियों को कसकर मसलने लगा वहीँ दूसरी चुकी को अपने मुँह में भरता हुआ उसे धीरे धीरे से फिर चूसने laga................choosney और चूची मसलने का ये दौर कुछ देर तक चलता रहा जब तक हरी का दिल नहीं भर gaya..................aab भी आसमा की दोनों चूचियां दर्द कर रही थी मगर पहले से काफी कम थी..............
हरी धीरे धीरे और नीचे आने लगा और आसमा की सांसें बढ़ती चली gayi.....................wo उसके नैवेल में अपना जीभ पूरा घुसता हुआ उसे हौले हौले से चटनी laga............uspar ढेर सारा थूक गिरने laga...........wo पूरा मुँह खोलकता हुआ ज़ोरों से आसमा की गहरी नाभि में जीभ डालता रहा और आसमा की आहें बढ़ती चली gayi..............wo तब तक अपना जीभ वहां से नहीं हटाया जब तक वो सारा हिस्सा पूरी तरह से साफ़ नहीं हो gaya............fir जैसे hi वो नीचे आया आसमा की aaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh निकल gayi.............uska जिस्म रोमांच से भर गया..................
हरी को एक और शरत सूझी और वो साइड में रखे उस थाली को सरकता हुआ उसे आसमा के दोनों टांगों के बीच नीचे रख दिया जिसमें अब भी दो केले और अंगूर पहले से रखे हुए they....................aasma को जैसे कोई मतलब नहीं था की वो उसके साथ कौन सा खेल खेलेगा मगर वो इतना ज़रूर जानती थी की हरी के इस गंदे खेल में उसे मज़े की कोई सीमा नहीं rahegi....................jitna नंगापन हरी उसके साथ करेगा उसे इस खेल में उतना hi मज़ा आएगा....................
" मेरा नास्ता कहाँ hain....................mujhe तो कहीं दिखाई नहीं दे रहा......................" और हरी आसमा के दोनों टांगों के बीच नीचे से हाथ रखता hua..............uske गांड को पकड़ता hua...............aagey की तरफ खींचता हुआ बोल pada...............wahin आसमा का जिस्म हवा में लहराता हुआ थोड़ा आगे की तरफ आ gaya...................dono पवन उसके और भी फ़ैल गए थे और पैरों में दो ऊँची ब्लैक रंग की हाई हील्स सैंडिल thi..................unchi हिल्स होने की वजह से आसमा के छूट और गांड का वो हिस्सा पूरी तरह से हवा में लहरा रहा tha.............aur पूरी तरह से खुला हुआ सामने बैठे हरी को एकदम स्पष्ट नज़र आ रहा tha....................aisa लग रहा था जैसे आसमा अपनी छूट को हरी के सामने पूरा परोस दी ho.............aab वो जैसा चाहे उसे khaye.................usey तो बस खिलाने से मतलब था...................
"aaaaaaasssssssssss......................mere दोनों टांगों के बीच mein........................meri बुर के ander....................tumhara नाश्ता रखा हुआ हैं......................" और आसमा की छूट में गीलापन फिर से बढ़ने लगा वहीँ हरी का भी खून धीरे धीरे गरम होने laga...................uske सामने अप्सरा जैसी जवान लड़की आज पूरी बेशर्मी के साथ अपनी दोनों टांगें पूरा फैलाये अपनी छूट हरी को परोसकर राखी हुई थी ऐसे में कोई भी मर्द कैसे अपने बस में rahega...................wahin हरी जैसा मर्द तो पूरी तरह से अपने बस में था मगर आसमा कब तक खुद पर काबू कर पति ये देखना अभी बाकि tha................hari आज उसे पूरी तरह से बेबस करना चाहता था..................
" मगर मुझे तो कहीं नज़र नहीं आ raha.............jab कुछ नज़र नहीं आ रहा तो मैं क्या खाउंगा................." और हरी कुर्सी पर आराम से बैठा हुआ आसमा के फैले हुए बुर की तरफ बड़े गौर से देखने लगा वहीँ आसमा की सांसें और तेज़्ज़ हो गयी............
" मेरे बुर की दोनों लिप्स को फैलाकर dekho............tumein तुम्हारा नास्ता मिल jayega....................iske अंदर एक बड़ा सा केला हैं और कुछ angoor................jo ख़ास तुम्हारे लिए hi हैं.............." और आसमा सिसकते हुए धीरे से बोल पड़ी वहीँ हरी टकटकी लगाए आसमा की बुर को बस निहारता रहा. ......................
" मगर यहाँ तो एक और छोटी सी छेद hain................tumhare गांड की ched....................kya उसके अंदर मेरा नास्ता नहीं हैं क्या .........!!!!!!!!!!!!!!..................और हरी आसमा के बुर पर अपने हाथ हौले से रखता हुआ उसके दोनों लिप्स को धीरे धीरे फैलाने लगा वहीँ अंदर उसे काळा रंग की अंगूर नज़र आने लगी जो आसमा के छूट रूस में पूरी तरह से सनी हुई और गीली नज़र आ रहा थी जिसे देखकर उसकी आँखें चमक gayi................aasma समझ चुकी थी की हरी उससे गन्दी बातें करने के मूड में हैं तो वो भला कहाँ पीछे रहने वाली थी..................
" nahin.....................meri गांड की छेद बहुत छोटी hain.................aaj तक मैंने उस छेद में कभी कुछ लिया नहीं hain................jab उसमें कुछ जायेगा नहीं तो उसका छेद कैसे बड़ा hoga...............aur जब छेद बड़ा नहीं होगा तो मैं कैसे उसके अंदर कुछ डालकर तुम्हें khilaungi...............agar तुम्हें उसके अंदर डालकर कुछ खाना हैं तो सबसे पहले मेरी गांड की छेद को बड़ा करना hoga....................aur तुम तो छोटी सी छेद को बड़ा करने में माहिर हो.................." और आसमा अब सब कुछ खुलकर हरी से बातें कर रही थी अब उसे ऐसी बातें बोलने में थोड़ी भी झिझक महसूस नहीं हो रही थी बल्कि उसे और भी मज़ा आ रहा tha................aasma के मुँह से ऐसी बातें सुकर हरी का लौड़ा एकदम से फड़क utha....................uske लुंड में खून का संचार और भी बढ़ गया..............
" तुम कहो तो मैं तुम्हारी गांड की छेद को बड़ा कर doon...................itna बड़ा की तुम उसके अंदर कुछ भी आसानी से ले sako...............magar उसके लिए मुझे तुम्हारी गांड की ाचे से चुदाई करनी hogi.................din रात उसमें लुंड डेल रहना hoga...................gand फटने का दर्द भी तुम्हें बर्दास्त करना होगा............." और हरी अपने अंडरवियर के ऊपर से अपने लुंड को सहलाता हुआ बोल pada.....................wahin आसमा जवाब में बस मुस्कुराती रही...............
" तो फाड़ दो न मेरी गांड ko...................bada कर दो मेरी इस छेद को bhi.................tumhein रोका किसने hain.........................jab इसके छेद भी बड़े हो जाएंगे तो तुम्हारा जो दिल करेगा वो तुम इसमें डालकर खाना............." और आसमा की सांसें एक बार फिर से भरी होने lagi......................uski छूट में गीलापन बढ़ता चला गया वहीँ हरी जवाब में बस मुस्कुराता रहा और आसमा की छूट को अपने हाथों से फैलाये बस देखता रहा......................
" फ़िक्र मुट्ठ कर मेरी jaan.................in 15 दिनों में मैं तेरी छूट और गांड की छेद को छोड़ छोड़कर इसका पूरा भोंसड़ा बना doonga.................waise कल मैंने सिर्फ तेरी छूट मरी थी naa....................aaj की रात तेरी गांड का उद्घाटन hoga..................mera ये बड़ा सा लौड़ा जब तेरी इस छोटी सी सूराख के अंदर जब पूरा घुसेगा naa.............tab तो असली मज़ा aayega................tujhe थोड़ा दर्द तो होगा मगर तू मेरे खातिर उसे बर्दास्त कर lena.................fir तो अपने मज़े hi मज़े hongey...............waise तुमने बताया नहीं की मैं तेरे बुर के अंदर रखे उस नास्ते को कैसे खवुन................." और हरी आसमा की छूट को और फैलता हुआ धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा की aahhhhhhhhhhhh निकल gayi......................aab उसे हरी के साथ ऐसी गंदे बातें करने में बड़ा hi मज़ा आ रहा tha.................wo हरी के सामने बहुत हुड्ड तक ओपन हो चुकी थी................
"तो दाल दो न अपने इस मोठे लुंड को पूरा मेरी गांड के ander.................aur छोड़ लो मेरी इस गांड ko.................bada कर दो मेरी इस छेद को bhi...............aur तुम्हें अब ये भी बताना पड़ेगा की तुम मेरी बुर के अंदर रखे उस अंगूर और केले को किस तरह से khawogey................naasta तुम्हारे सामने रखा हैं तुम्हारी मर्ज़ी जैसा तुम khawo...............mera काम तो बस तुम्हें खिलाना हैं..............." और आसमा का एक्ससिटेमेंट में गाला सूखने लगा वहीँ हरी के चेहरे पर एक कमीनी सी मुस्कान तैर गयी...............
" खा तो मैं लूँगा उस केले को मगर................ मेरी आदत हैं जब भी मैं ऐसे नास्ता करता हूँ मुँह के साथ साथ ऊँगली का भी इस्तेमाल करता hoon..............yu समझ लो की मैं अंदर का माल घोप घोप कर खता हूँ..................." और हरी आसमा के बुर पर हल्का सा जीभ फेरता हुआ उसके छूट रूस को हौले से चाटता हुआ बोल पड़ा .....................वहीँ आसमा की ज़ोरों से aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh निकल gayi.................lajaat से उसकी आँखें पूरी तरह से बंद हो गयी और वो एक बार फिर बुरी तरह से मचल उठी..............
"aaaaaaaaaahhhhsiiiiiiiiiiiiiiiiiiii............tumhein जैसा मुन्न करे वैसे तुम khawo..................chahe उसमें अपना जीभ dalkar.................ya फिर घोप घोप kar.............mujhe तो बस तुम्हारी इस भूख को मिटाना hain................chahe जैसे मिठे......................." और आसमा की आवाज़ कांपने lagi...................uski बुर पूरी तरह से पनिया गयी thi..............wo चाहती थी की हरी उसके बुर के अंदर रखे उस नास्ते को खाये मगर वो जान बूझकर खुद कुछ नहीं कर रहा था.................
"lekin................ghop कर खाने से एक नुक्सान ये भी हैं की अंदर रखा वो केला कहीं फंस गया to...................fir बहार कैसे niklega...................usey निकलने के लिए मुझे तुम्हारी गांड में भी ऊँगली घुसना पढ़ सकता hain....................aisa करने पर तब जाकर बात बनेगी................." और हरी आसमा को और भी गरम करता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा की आँखें सुर्ख लाल हो चुकी thi................uska जिस्म फिर से टप्प रहा tha..............wo अंदर hi अंदर पूरी तरह से बेचैन हो चुकी थी..............
" अंदर रखा केला कैसे बहार निकलेगा अब ये भी मुझे hi बताना padega....................agar केला अंदर फंस गया तो जैसा तुम्हें सही लगे वैसा karna...............maine सब कुछ तुमपर छोड़ा hain...................aab खाओगे भी या सिर्फ बातें hi करोगे........................" और आसमा थोड़ी परेशां होती हुई सिसकते हुए बोल पड़ी वहीँ हरी मुस्कुराता हुआ अपना चेहरा आसमा के बुर के पास ले गया और उसके लिप्स को पूरा फैलता हुआ हौले हौले से उसके अंदर अपना जीभ घुसने laga....................hari के जीभ का एहसास होते hi आसमा का रोम रोम सिहर उठा और वो इस बार ज़ोरों से सिस्का padi.................aab हरी पूरी तरह से अपना नास्ता करने के लिए तैयार tha.........aur आसमा नास्ता करवाने के लिए...............
हरी अपने दोनों हाथों को आसमा के छूट के लिप्स पर दोनों तरफ से फैलाये hue.......................dheere धीरे उसकी छूट के अंदर अपने जीभ को पेल रहा tha................aur हौले हौले से चाट रहा tha..................jaise जैसे हरी के जीभ अंदर की तरफ घुस रहे थे वैसे वैसे आसमा की हालत बिगड़ती जा रही thi....................wo पूरी तरह अपनी बुर को failaye.............hari के सामने किसी पेशावर रंडी की तरह उससे अपना बुर खिला रही थी और हरी बड़े इतेमेंआन के साथ उसकी कमसिन जवानी को नूच नोचकर खा रहा था.................
वो आसमा के गुर्दें को कुछ देर तक अपने डेंटन के बीच दबाये रखा और अपने मुँह से गधा गधा थूक और लार गिरता रहा जो बेहटा हुआ उसकी गुर्दें से होकर नीचे उसके चूचियों की तरफ आ रहा tha....................magar आसमा बिलकुल चुप चाप सी उसी पोजीशन में थी न hi वो हिल दल रही थी और न खुद को हरी के चंगुल से आज़ाद करने की कोशिश कर रही thi..............kuch देर बाद जब हरी अपने डेंटन को आसमा की गुर्दें पर से जब हटाया तो उसके डेंटन के गहरे निशान उसकी जुड़ें पर लग gaye.............aur साथ में ढेर सारा थूक और लार भी उसपर रह gaya..............jisey हरी कुछ देर बाद अपने जीभ से चाटकर खुद hi साफ़ करने लगा............
खेल की शुरुवात हो चुकी thi.............aasma अपनी पूरी तरह से मरवाने के लिए तैयार thi.................aur हरी मरने के liye..................hari हौले हौले नीचे की तरफ आने लगा और जैसे जैसे उसके जीभ आसमा के बदन पर सरक रहे थे वैसे वैसे आसमा के अंदर की बेचैनी भी बढ़ती जा रही thi......................hari पहले एक हाथ से आसमा की एक चूचियों को कसकर मसलने लगा वहीँ दूसरी चुकी को अपने मुँह में भरता हुआ उसे धीरे धीरे से फिर चूसने laga................choosney और चूची मसलने का ये दौर कुछ देर तक चलता रहा जब तक हरी का दिल नहीं भर gaya..................aab भी आसमा की दोनों चूचियां दर्द कर रही थी मगर पहले से काफी कम थी..............
हरी धीरे धीरे और नीचे आने लगा और आसमा की सांसें बढ़ती चली gayi.....................wo उसके नैवेल में अपना जीभ पूरा घुसता हुआ उसे हौले हौले से चटनी laga............uspar ढेर सारा थूक गिरने laga...........wo पूरा मुँह खोलकता हुआ ज़ोरों से आसमा की गहरी नाभि में जीभ डालता रहा और आसमा की आहें बढ़ती चली gayi..............wo तब तक अपना जीभ वहां से नहीं हटाया जब तक वो सारा हिस्सा पूरी तरह से साफ़ नहीं हो gaya............fir जैसे hi वो नीचे आया आसमा की aaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh निकल gayi.............uska जिस्म रोमांच से भर गया..................
हरी को एक और शरत सूझी और वो साइड में रखे उस थाली को सरकता हुआ उसे आसमा के दोनों टांगों के बीच नीचे रख दिया जिसमें अब भी दो केले और अंगूर पहले से रखे हुए they....................aasma को जैसे कोई मतलब नहीं था की वो उसके साथ कौन सा खेल खेलेगा मगर वो इतना ज़रूर जानती थी की हरी के इस गंदे खेल में उसे मज़े की कोई सीमा नहीं rahegi....................jitna नंगापन हरी उसके साथ करेगा उसे इस खेल में उतना hi मज़ा आएगा....................
" मेरा नास्ता कहाँ hain....................mujhe तो कहीं दिखाई नहीं दे रहा......................" और हरी आसमा के दोनों टांगों के बीच नीचे से हाथ रखता hua..............uske गांड को पकड़ता hua...............aagey की तरफ खींचता हुआ बोल pada...............wahin आसमा का जिस्म हवा में लहराता हुआ थोड़ा आगे की तरफ आ gaya...................dono पवन उसके और भी फ़ैल गए थे और पैरों में दो ऊँची ब्लैक रंग की हाई हील्स सैंडिल thi..................unchi हिल्स होने की वजह से आसमा के छूट और गांड का वो हिस्सा पूरी तरह से हवा में लहरा रहा tha.............aur पूरी तरह से खुला हुआ सामने बैठे हरी को एकदम स्पष्ट नज़र आ रहा tha....................aisa लग रहा था जैसे आसमा अपनी छूट को हरी के सामने पूरा परोस दी ho.............aab वो जैसा चाहे उसे khaye.................usey तो बस खिलाने से मतलब था...................
"aaaaaaasssssssssss......................mere दोनों टांगों के बीच mein........................meri बुर के ander....................tumhara नाश्ता रखा हुआ हैं......................" और आसमा की छूट में गीलापन फिर से बढ़ने लगा वहीँ हरी का भी खून धीरे धीरे गरम होने laga...................uske सामने अप्सरा जैसी जवान लड़की आज पूरी बेशर्मी के साथ अपनी दोनों टांगें पूरा फैलाये अपनी छूट हरी को परोसकर राखी हुई थी ऐसे में कोई भी मर्द कैसे अपने बस में rahega...................wahin हरी जैसा मर्द तो पूरी तरह से अपने बस में था मगर आसमा कब तक खुद पर काबू कर पति ये देखना अभी बाकि tha................hari आज उसे पूरी तरह से बेबस करना चाहता था..................
" मगर मुझे तो कहीं नज़र नहीं आ raha.............jab कुछ नज़र नहीं आ रहा तो मैं क्या खाउंगा................." और हरी कुर्सी पर आराम से बैठा हुआ आसमा के फैले हुए बुर की तरफ बड़े गौर से देखने लगा वहीँ आसमा की सांसें और तेज़्ज़ हो गयी............
" मेरे बुर की दोनों लिप्स को फैलाकर dekho............tumein तुम्हारा नास्ता मिल jayega....................iske अंदर एक बड़ा सा केला हैं और कुछ angoor................jo ख़ास तुम्हारे लिए hi हैं.............." और आसमा सिसकते हुए धीरे से बोल पड़ी वहीँ हरी टकटकी लगाए आसमा की बुर को बस निहारता रहा. ......................
" मगर यहाँ तो एक और छोटी सी छेद hain................tumhare गांड की ched....................kya उसके अंदर मेरा नास्ता नहीं हैं क्या .........!!!!!!!!!!!!!!..................और हरी आसमा के बुर पर अपने हाथ हौले से रखता हुआ उसके दोनों लिप्स को धीरे धीरे फैलाने लगा वहीँ अंदर उसे काळा रंग की अंगूर नज़र आने लगी जो आसमा के छूट रूस में पूरी तरह से सनी हुई और गीली नज़र आ रहा थी जिसे देखकर उसकी आँखें चमक gayi................aasma समझ चुकी थी की हरी उससे गन्दी बातें करने के मूड में हैं तो वो भला कहाँ पीछे रहने वाली थी..................
" nahin.....................meri गांड की छेद बहुत छोटी hain.................aaj तक मैंने उस छेद में कभी कुछ लिया नहीं hain................jab उसमें कुछ जायेगा नहीं तो उसका छेद कैसे बड़ा hoga...............aur जब छेद बड़ा नहीं होगा तो मैं कैसे उसके अंदर कुछ डालकर तुम्हें khilaungi...............agar तुम्हें उसके अंदर डालकर कुछ खाना हैं तो सबसे पहले मेरी गांड की छेद को बड़ा करना hoga....................aur तुम तो छोटी सी छेद को बड़ा करने में माहिर हो.................." और आसमा अब सब कुछ खुलकर हरी से बातें कर रही थी अब उसे ऐसी बातें बोलने में थोड़ी भी झिझक महसूस नहीं हो रही थी बल्कि उसे और भी मज़ा आ रहा tha................aasma के मुँह से ऐसी बातें सुकर हरी का लौड़ा एकदम से फड़क utha....................uske लुंड में खून का संचार और भी बढ़ गया..............
" तुम कहो तो मैं तुम्हारी गांड की छेद को बड़ा कर doon...................itna बड़ा की तुम उसके अंदर कुछ भी आसानी से ले sako...............magar उसके लिए मुझे तुम्हारी गांड की ाचे से चुदाई करनी hogi.................din रात उसमें लुंड डेल रहना hoga...................gand फटने का दर्द भी तुम्हें बर्दास्त करना होगा............." और हरी अपने अंडरवियर के ऊपर से अपने लुंड को सहलाता हुआ बोल pada.....................wahin आसमा जवाब में बस मुस्कुराती रही...............
" तो फाड़ दो न मेरी गांड ko...................bada कर दो मेरी इस छेद को bhi.................tumhein रोका किसने hain.........................jab इसके छेद भी बड़े हो जाएंगे तो तुम्हारा जो दिल करेगा वो तुम इसमें डालकर खाना............." और आसमा की सांसें एक बार फिर से भरी होने lagi......................uski छूट में गीलापन बढ़ता चला गया वहीँ हरी जवाब में बस मुस्कुराता रहा और आसमा की छूट को अपने हाथों से फैलाये बस देखता रहा......................
" फ़िक्र मुट्ठ कर मेरी jaan.................in 15 दिनों में मैं तेरी छूट और गांड की छेद को छोड़ छोड़कर इसका पूरा भोंसड़ा बना doonga.................waise कल मैंने सिर्फ तेरी छूट मरी थी naa....................aaj की रात तेरी गांड का उद्घाटन hoga..................mera ये बड़ा सा लौड़ा जब तेरी इस छोटी सी सूराख के अंदर जब पूरा घुसेगा naa.............tab तो असली मज़ा aayega................tujhe थोड़ा दर्द तो होगा मगर तू मेरे खातिर उसे बर्दास्त कर lena.................fir तो अपने मज़े hi मज़े hongey...............waise तुमने बताया नहीं की मैं तेरे बुर के अंदर रखे उस नास्ते को कैसे खवुन................." और हरी आसमा की छूट को और फैलता हुआ धीरे से बोल पड़ा वहीँ आसमा की aahhhhhhhhhhhh निकल gayi......................aab उसे हरी के साथ ऐसी गंदे बातें करने में बड़ा hi मज़ा आ रहा tha.................wo हरी के सामने बहुत हुड्ड तक ओपन हो चुकी थी................
"तो दाल दो न अपने इस मोठे लुंड को पूरा मेरी गांड के ander.................aur छोड़ लो मेरी इस गांड ko.................bada कर दो मेरी इस छेद को bhi...............aur तुम्हें अब ये भी बताना पड़ेगा की तुम मेरी बुर के अंदर रखे उस अंगूर और केले को किस तरह से khawogey................naasta तुम्हारे सामने रखा हैं तुम्हारी मर्ज़ी जैसा तुम khawo...............mera काम तो बस तुम्हें खिलाना हैं..............." और आसमा का एक्ससिटेमेंट में गाला सूखने लगा वहीँ हरी के चेहरे पर एक कमीनी सी मुस्कान तैर गयी...............
" खा तो मैं लूँगा उस केले को मगर................ मेरी आदत हैं जब भी मैं ऐसे नास्ता करता हूँ मुँह के साथ साथ ऊँगली का भी इस्तेमाल करता hoon..............yu समझ लो की मैं अंदर का माल घोप घोप कर खता हूँ..................." और हरी आसमा के बुर पर हल्का सा जीभ फेरता हुआ उसके छूट रूस को हौले से चाटता हुआ बोल पड़ा .....................वहीँ आसमा की ज़ोरों से aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh निकल gayi.................lajaat से उसकी आँखें पूरी तरह से बंद हो गयी और वो एक बार फिर बुरी तरह से मचल उठी..............
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"lekin................ghop कर खाने से एक नुक्सान ये भी हैं की अंदर रखा वो केला कहीं फंस गया to...................fir बहार कैसे niklega...................usey निकलने के लिए मुझे तुम्हारी गांड में भी ऊँगली घुसना पढ़ सकता hain....................aisa करने पर तब जाकर बात बनेगी................." और हरी आसमा को और भी गरम करता हुआ बोल पड़ा वहीँ आसमा की आँखें सुर्ख लाल हो चुकी thi................uska जिस्म फिर से टप्प रहा tha..............wo अंदर hi अंदर पूरी तरह से बेचैन हो चुकी थी..............
" अंदर रखा केला कैसे बहार निकलेगा अब ये भी मुझे hi बताना padega....................agar केला अंदर फंस गया तो जैसा तुम्हें सही लगे वैसा karna...............maine सब कुछ तुमपर छोड़ा hain...................aab खाओगे भी या सिर्फ बातें hi करोगे........................" और आसमा थोड़ी परेशां होती हुई सिसकते हुए बोल पड़ी वहीँ हरी मुस्कुराता हुआ अपना चेहरा आसमा के बुर के पास ले गया और उसके लिप्स को पूरा फैलता हुआ हौले हौले से उसके अंदर अपना जीभ घुसने laga....................hari के जीभ का एहसास होते hi आसमा का रोम रोम सिहर उठा और वो इस बार ज़ोरों से सिस्का padi.................aab हरी पूरी तरह से अपना नास्ता करने के लिए तैयार tha.........aur आसमा नास्ता करवाने के लिए...............
हरी अपने दोनों हाथों को आसमा के छूट के लिप्स पर दोनों तरफ से फैलाये hue.......................dheere धीरे उसकी छूट के अंदर अपने जीभ को पेल रहा tha................aur हौले हौले से चाट रहा tha..................jaise जैसे हरी के जीभ अंदर की तरफ घुस रहे थे वैसे वैसे आसमा की हालत बिगड़ती जा रही thi....................wo पूरी तरह अपनी बुर को failaye.............hari के सामने किसी पेशावर रंडी की तरह उससे अपना बुर खिला रही थी और हरी बड़े इतेमेंआन के साथ उसकी कमसिन जवानी को नूच नोचकर खा रहा था.................