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राखी देवी बाथरूम के अंदर आती है आवर अपनी साड़ी निकल देती है राखी देवी जैसे hi ब्रा पेंटी मैं होती है तभी राखी देवी की नज़र सामने सीसे मैं खुद को जिस्म पर नज़र जाती है आवर राखी देवी अपनी जिस्म को देख कर मन hi मन मुस्कुराने लगती है आवर अपनी लम्बी चौड़ी छाती को थोड़ा ऊपर उठा देती है जिससे राखी देवी की पहाड़ जैसी चुकी उठ जाती है
अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह क्या जिस्म होती है राखी देवी की
दूध की तरह गोरी लम्बी चौड़ी छाती आवर पतली कमर उसके निचे फैली हुई चौड़ी अनमोल गांड जिसको देख कर हर मर्द राखी देवी का दीवाना हो जाता था
राखी देवी 40 से 41 की होने के बाद भी 29 से 30 सल्ल की लग रही होती है
राखी देवी खूबसूरती का कोई मोल नहीं होती है
राखी देवी की पेंटी मैं फूली हुई छूट की छाप दिख रही होती है जिससे पता चल रही होती है राखी देवी की छूट पूवे की तरह फूली हुई है जिसको मर्द सिर्फ राखी देवी की छूट को कितने मस्ती मैं चाट चाट कर मस्त हो जायेगा
राखी देवी अपनी जिस्म को देखती हुई ब्रा को ऊपर कर देती है जिससे राखी देवी की बड़ी टाइट चुकी ब्रा की क़ैद से आजाद हो जाती है
Ahhhhhhhhhh .... राखी देवी की चुकी भी एक जवान लड़की की तरह बिलकुल टाइट कड़ी होती है राखी देवी की निप्पल भी ऐसी होती है जिसको मर्द चूस कर राखी देवी की चुकी से दूध निकल दे कुल मिला कर राखी देवी को भगवन ने बड़ी hi सिद्दत से बनाये हुआ होते है जैसे राखी देवी को बना कर साबित किये हो राखी देवी सच मैं एक सवर्ग की अप्सरा है जिसको मई धरती पर उतर रहा हुईं
राखी देवी अपनी जिस्म को देख देख कर खुद hi शर्मा रही होती है
अह्हह्ह्ह्ह भगवन जी कैसी किस्मत बंसी है आप ने इतनी खूबसूरत जिस्म देकर आप ने मुझे इस दुनिया मैं अकेला क्यू छोड़ दिया क्या करूँ मैं इस जिस्म की अह्हह्ह्ह्ह Ahhhhhhhhhh राखी देवी की हाथ खुद hi पेंटी के अंदर छूट मैं चली जाती है
राखी देवी की छूट पहले से पानी छोड़ रही होती है लेकिन राखी देवी की छूट अभी भी गर्म होती है आवर हाथ लगते hi राखी देवी की छूट मैं चल मच जाती है जिससे राखी देवी एक बार पानी छोड़ने के बाद भी छूट मैं ऊँगली करने लगती है
उम्मा अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्हह स्स्स्सस्स्स्स Hhhhhhhhhh
राखी देवी छूट मैं ऊँगली आवर ज़ोर ज़ोर से करने लगती है
Ahhhhhhhhhh क्या करूँ मैं भगवन जी किसका लैंड अपनी छूट मैं डालूं कौन है जिसको मैं अपनी छूट दूँ Ahhhhhhhhhhh किसको दूँ मैं अपनी छूट अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मेरी छूट मैं इतनी आग क्यू भर दिया आप ने अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मैं आउट खुद को नहीं संभल सकती हुईं. भगवन जी Ahhhhhhhhhhhhhhh मेरी छूट
भगवन जी आप ने मेरे साथ अच्छा नहीं किया Ahhhhhhhhhh मैं भी बहुत सह लिए अब मुझे मर्द चाहिए वर्ण मैं मार जाउंगी
मुझे ऐसा मर्द चाहिए जो मेरी जिस्म की गर्मी संत कर सके Aahhhhhhhhhh ओह्ह्ह्हह्हह आप ने कोई मर्द मेरे लिए नहीं भेजा तो मैं अपने अर्जुन का लैंड
Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa
राखी देवी अर्जुन का नाम लेता है अपनी छूट से पानी छोड़ देती है आवर कनपटी हुई निचे बैठ जाती है
हे भगवन ये मैं क्या सोच रही थी छी मेरी मन मैं ये ख्याल आया भी कैसे अर्जुन मेरा बीटा है ....
राखी देवी छूट की आग मैं जलती हुई अर्जुन के बारे मैं सोच तो लेती है मगर जैसे hi राखी देवी की छूट से पानी निकलती है राखी देवी खुद मैं सर्मिन्दा महसूस करने लगती है
राखी देवी कुछ देर बैठी हुई होती है आवर फिर नहाने लगती है
राखी देवी नहाने के बाद रूम मैं आती है आवर कपडे पहनने लगती है जब राखी देवी कपडे पहन लेती है तो वह खुद को मिरर मैं देखने लगती है आवर फिर मिरर मैं देखती हुई राखी देवी को पता नहीं क्या होता है वह सिंदूर उठती है आवर ऊँगली मैं लेकर टिका की तरह सिंदूर को मांग मैं लगा देती है आवर अपनी मांग मैं सिंदूर को देख कर राखी देवी की चेहरा पर सरमाती हुई एक मुस्कान आ जाती है
राखी देवी की गोल चेहरा छोटी छोटी आँखें कड़ी हुई नाक आवर राश से भरी लाल होंठ राखी देवी इस वक़्त खिलता हुआ गुलाब की तरह लग रही होती है जैसे अभी hi गुलाब खिल रहा हो
राखी देवी बहुत hi खूबसूरत लग रही होती है
राखी देवी खुद को मिरर मैं देख कर शर्मा रही होती है फिर राखी देवी रूम से निकल कर अपनी माँ की रूम मैं जाती है तो देखती आँचल की माँ उनके साथ बैठी हुई होती है
किसी की नज़र न लगे राखी बेटी तुम तो बहुत खूबसूरत लग रही हो जैसे तुम्हारी अभी शादी hi नहीं हुई है आवर तुम गीता की बड़ी बहन हो ..... आँचल की माँ बोल पड़ती है
वही राखी देवी आवर भी जयादा शर्मा जाती है
सही कह रही हो बहन मेरी राखी बेटी तो अभी भी जवान लगती है भगवन ने पता नहीं मेरी किस पाप की सजा मेरी भूल जैसी बेटी को दे दिए ..... राखी देवी की माँ थोड़ी दुखी सवार मैं बोलती है
मायआ ...... अपनी माँ की बात सुन कर राखी देवी भी थोड़ी दुखी होकर अपनी माँ से लिपट जाती है
रूम मैं कुछ देर तक सन्ति छ जाती है
राखी बेटी मैं दोकान पर जाती हुईं तुम खाना गर्म कार्डो अर्जुन को भूख लगी होगी ..... आँचल की माँ बोलती है आवर रूम से चली जाती है
राखी देवी भी अपनी माँ से अलग होकर किचेन मैं चली जाती है आवर खाना गर्म करने लगती है
अर्जुन आता है आवर हॉल मैं बैठ जाता है जो थोड़ी hi देर मैं राखी देवी खाना दिंनिंग टेबल पर रखने लगती है जो अर्जुन भी आकर बैठ जाता है
माँ आप बहुत सुन्दर लग रही है .... खाना कहते हुआ अर्जुन बोलता है जो अर्जुन की नज़र जब से अपनी माँ पर पड़ी होती है तब से देख कर बोलना छ रहा होता है
अर्जुन के मुंह से खुद की तारीफ सुन कर तो राखी देवी पहले तो सरमाती है मगर फिर राखी देवी की आँखें भर आती है मगर चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान भी होती है
राखी देवी मन मैं अभी बहुत खुश होती है की अर्जुन ने कितने सल्ल के बाद आज उनकी खूबसूरती की तारीफ किया है
थैंक यू अर्जुन ..... राखी देवी मुस्कुराती हुई बोलती है
अर्जुन अपनी माँ को एक नज़र देखता है आवर खाना खाने लगता है वही राखी देवी अर्जुन को मुस्कुराती हुई देख कर खाना खा रही होती है
अर्जुन खाना खाने के बाद के चला जाता है वही राखी देवी भी खाना खा कर पलेट किचेन मैं रखने लगती है
अर्जुन तूने कही कोई गलती तो नहीं कर दिया अपनी माँ को इतने बुरा भला बोल कर उनकी आँखों मैं देख कर तुझे कभी भी लगा है वह तुझसे प्यार नहीं करती है
नहीं अर्जुन माँ तुझसे बहुत प्यार करती है उनकी आँखों मैं देख कर पता चलता है .... अर्जुन कोई तो मज़बूरी होगी जो माँ ने वह कदम उठाई होगी सायद इसमें तेरे मां की गलती हो .... या फिर कोई आवर भी वजह हो सकती है
अर्जुन तूने जो कुछ भी देखा है सायद वह येते आँखों का भरम हो अर्जुन अब वह वक़्त आ गया है
अर्जुन तेरे दिल मैं जो कुछ भी अपनी माँ को लेकर गलत फहमी या सक है वह बातें तू अपनी माँ से जान ले ....
अर्जुन मुझे यकीन है माँ वैसी hi है जैसा तू बचपन मैं माँ को जनता था
अर्जुन इस वक़्त मार्किट मैं बैठा सिगरेट पि रहा होता है आवर अर्जुन की दिमाग मैं ये साडी बातें चल रही होती है
अर्जुन को खाना कहते हुआ अपनी माँ की आँखों मैं आंसू को देख कर बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा हुआ होता है
अर्जुन सिगरेट पिने के बाद वह से बाइक लेकर दूसरी तरफ निकल जाता है ....
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अह्हह्ह्ह्ह आज क्या हो रही है मेरे साथ मेरी जिस्म इतनी गर्म क्यू हो रही है अह्हह्ह्ह्ह जब से अर्जुन का लैंड देखा है मेरी छूट मैं आग लगी हुई है अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह
मेरी दिमाग से अर्जुन का लैंड निकल क्यू नहीं रहा है
ज्योति सायद तुझे अर्जुन का लैंड पसंद आ गया है तेरा पति तो कई सैलून से छोड़ भी नहीं रहा है तू कब से खुद पर काबू करती आ रही है मगर इतना बड़ा लैंड अचानक देख कर तेरी जिस्म की आग भड़क चुकी है
तू जब तक अर्जुन से मिलेगी नहीं तेरी ये आग भड़कती hi रहेगी
ज्योति इस वक़्त अपनी रूम मैं सोइ हुई होती है आवर ज्योति की साइन से पल्लू भी दूसरी तरफ गिरी हुई होती है आवर ज्योति की एक हाथ चुकी पर तो एक हाथ साड़ी के ऊपर से छूट पर होती है आवर ज्योति अर्जुन के लैंड को याद कर के अपनी चुकी आवर छूट को मसल रही होती है
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कैसे अर्जुन से मिलूं मैं अर्जुन मेरे बेटे जैसा है कैसे उससे बोलूं की अर्जुन बीटा तेरी आंटी तुझसे छोड़ना चाहती है छोड़ दे मुझे ..... क्या मैं राखी से बात करूँ .... वह मानेगी
कही राखी मुझसे गुस्सा तो नहीं हो जाएगी कैसे रस कर चली गयी थी
ज्योति ये सही रहेगा अगर राखी मान गयी तो अर्जुन तेरी जिस्म की आग बुझा सकती है
राखी तेरी बहुत अच्छी दोस्त है वह तुझे कभी मन नहीं करेगी तू बात कर के तो देख मुझे यकीन है तेरी मज़बूरी जान कर वह मान जाएगी ..... ज्योति मन मैं सोचती है
रूम मैं एक चलने के बाद भी ज्योति की पूरी जिस्म पसीने से भींगी हुई होती है ज्योति उठ कर बाथरूम मैं चली जाती है
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अर्जुन रात होने पर घर आता है तो देखता है दोकान बंद हो गयी है तो अर्जुन बाइक लगा कर घर मैं आ जाता है आवर अपने रूम मैं जाकर कपडे चेंज करता है आवर फिर हॉल मैं आता है तो देखता उसकी माँ आवर नानी दिंनिंग टेबल पर खाना लगा रही है तो अर्जुन भी जाकर बैठ जाता है आवर खाना खाने लगता है
आंटी मुझे नींद आ रही है क्या आप माँ की मालिश कर देंगी .... खाना कहते हुआ राखी देवी बोलती है तो आँचल की माँ हां बोलती है
अर्जुन बीटा आज से हम दोनों आँचल के रूम मैं सोते है तुझे कोई प्रॉब्लम न हो तो .... वह दरअसल तेरी ये नानी बहुत खरंटे लेती है जो मैं कल रात सो नहीं पायी बीटा
अर्जुन को चैंकते हुए देख कर राखी देवी पूरी बात बता देती है
मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है माँ हम माँ की रूम मैं सो सकते है ... अर्जुन बोलता है जो राखी देवी मुस्कुरा कर अर्जुन को देखती है
राखी देवी खाने के बाद पलट किचेन मैं रखने लगती है
राखी देवी किचेन का काम कर के रूम मैं आती है तो देखती है अर्जुन रूम मैं नहीं है तो राखी देवी बीएड पर सो जाती है
अर्जुन ये अच्छा मक्का है तू माँ से बातें कर सकता है मुझे यकीन है माँ तुझसे वह साडी बातें ज़रूर बता देंगी ....
अर्जुन छत पर सिगरेट पिटे हुए सोचता है
अर्जुन सिगरेट पिने के बाद रूम मैं आता है तो देखता है उसकी माँ सो चुकी होती है
अर्जुन माँ को सोते हुए देख कर दूसरी तरफ आ जाता है
अर्जुन दूसरी तरफ जैसे hi आता है अर्जुन की नज़र माँ की चिकनी कमर पर चली जाती है आवर अर्जुन नज़र माँ की चिकनी कमर पर टिक जाती है
अर्जुन माँ की चिकनी जिस्म को कुछ देर देखता है फिर चद्दर उठा कर माँ के ऊपर दाल देता है आवर बीएड पर वह भी लेट जाता है
अगली सुबह
अर्जुन जब उठता है तो देखता है माँ बीएड पर नहीं है तो अर्जुन उठ कर बाथरूम मैं चला जाता है आवर फ्रेश होकर हॉल मैं आता है तो देखता माँ कॉफ़ी पि रही है
गुड मॉर्निंग माँ .... अर्जुन सोफे पर बैठते हुआ बोलता है
गुड मॉर्निंग अर्जुन .... मैं कॉफ़ी लेकर आती हुईं ..... राखी देवी बोलती है आवर उठ कर कॉफ़ी लेन चली जाती है
माँ के कहा है मैं दोकान खोल देता हुईं ..... अर्जुन कॉफ़ी लेते हुए बोलता है
अर्जुन बीटा नीलू ने दोकान खोल दिया है .... राखी देवी बोलती है तो अर्जुन कॉफ़ी पिने लगता है
अर्जुन कॉफ़ी पीकर दोकान पर चला जाता है तो देखता है नीलू आंटी कपडे देखा रही होती है कुछ आंटी लोग को
गुड मॉर्निंग आंटी .... अर्जुन बोलता है
गुड मॉर्निंग अर्जुन ..... नीलू बोल कर आंटी लोग से बात करने लगती है वही अर्जुन जाकर कुर्सी पर बैठ जाता है
अर्जुन बीटा ज़रा 34 डी वाला पेंटी देना तो नीलू बोलती है
नीलू आंटी की बात सुन कर अर्जुन पेंटी लेन चला जाता है वही बहार कड़ी आंटी थोड़ी शर्मा कर नीलू को देखने लगती है जो नीलू बस मुस्कुरा पड़ती है
तो अब बता कितनी गफ बनाया कॉलेज मैं ..... आंटी लोग के जाने के बाद नीलू आंटी मुस्कुराती हुई अर्जुन से पूछती है
कहा आंटी कोई मुझे पसंद hi नहीं आती है ..... अर्जुन भी मुस्कुराता हुआ बोलता है
ओह्ह अच्छा मतलब अब भोले अर्जुन को गफ बनाने का अरमान दिल मैं जाग गया है ..... नीलू आंटी फिर से मुस्कुराती हुई बोलती है
हां आंटी मैं हर वक़्त भोला बन कर तो नहीं रह सकता हुईं न हर लड़के की गफ होती है तो सोचा मैं भी एक रख लूँ .... अर्जुन भी फिर से मुस्कुराता हुआ बोलता है
चलो अच्छी बात है .... बुद्धू को ये अकाल तो आई ..... बता कैसी लड़की चाहिए तुझे .... नीलू आंटी फिर मुस्कुराती हुई पूछती
नीलू आंटी को अभी अर्जुन से बात करते हुआ मज़ा आ रहा होता है क्यू के पहले नीलू आंटी अर्जुन से लड़की के बारे मैं बात करती तो अर्जुन कोई जवाब नहीं देता था आवर अर्जुन दोकान से चला जाता था मगर आज अर्जुन हर बार बोल रहा होता है
आंटी मुझे वैसी लड़की चाहिए जिसकी जिस्म भरा हुआ हो .... आवर हर चीज उसकी परफेक्ट हो .... आंटी आप की जैसी लड़की मिलेगी तो भी चलेगा ..... अर्जुन नीलू आंटी की जिस्म को घूरता हुआ बोलता है
वही अर्जुन को खुद की जिस्म को घूरती हुई देख कर नीलू आंटी शर्मा जाती है आवर अपनी पल्लू को साइन पर रख देती है
ये देखों इसको लड़की की चाहत भी हुई तो इसको मेरी जैसी जिस्म वाली लड़की चाहिए मतलब इसको लड़की नहीं मेरी जैसी आंटी चाहिए .... आखिर अर्जुन को भी आंटी hi पसंद आई ये आज कल के लड़के भी न आंटी के पीछे hi क्यू पद जाते है .... नीलू आंटी मन मैं सोचती है
अच्छा तो तू मुझपे hi लाइन मरने लगा .... तुम मैं आँचल से बोल देती हुईं किसी आंटी से तेरी शादी करा दे .... नीलू आंटी बोलती है
ौनतययययययय
क्या बता रही है नीलू आँचल ..... अर्जुन आगे बोलता के माँ की आवाज़ सुन कर चुप हो जाता है
माँ मैं थोड़ा आरती दीदी से मिल कर आता हुईं .....
अर्जुन कुर्सी से उठता हुआ बोलता है वही नीलू आंटी अर्जुन को भागते देख कर मुस्कुरा पड़ती है .....
अर्जुन आरती को मेरा प्यार देना बोलना मैं भी उसको मिस करती हुईं .... आवर मैं भी उससे मिलने कभी आउंगी .... राखी देवी बोलती है
वही अर्जुन जाते हुए ठीक है बोलता है
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अर्जुन बाइक चलते हुए एक महल जैसा घर के सामने बाइक रोकता है तो देखता है सामने 2 पुलिस वाला गेट के पास खड़े है तो अर्जुन बाइक खड़ा कर के गेट के पास आ जाता है
कौन हो तुम किस्से मिलना है ..... एक पुलिस वाला आगे आता हुआ बोलता है
जी मेरा नाम अर्जुन है मुझे आरती दीदी से मिलना है .... अर्जुन बोलता है
तुम आरती मेडम के भाई हो मगर तुम पहले कभी यह नहीं आये आवर मैंने सुना है उनका कोई भाई नहीं है ... तुम झूट बोल रहे हो ...... सच बताओ क्या करने यह आये हो ..... पुलिस वाला गंभीर आवाज़ मैं बोलता है
जी मैं उनका अपना भाई
क्या तुम अर्जुन हो .... अर्जुन आगे बोलता तभी पीछे से एक लड़की बोल पड़ती है जो बाइक पर होती है अर्जुन पीछे देखता है तो एक बहुत hi खूबसूरत लड़की बाइक पर बैठी हुई होती है तो अर्जुन हां मैं सर हिला देता है
ठीक है बाइक पर बैठ जाओ .... रंजीत इनका बाइक अंदर लगा दो ..... लड़की बोलती है तो अर्जुन बाइक पर बैठ जाता है
तुम्हारे बारे मैं भाभी हर वक़्त बात करती रहती है ........ भाभी आरती भाभी लड़की अर्जुन से बोलती हुई आरती दीदी को पुकारने लगती है क्या हुआ
नाआ ........ अर्जुनननननननन
आरती दीदी अर्जुन को देख कर पहले तो हैरान होती है मगर खुश भी हो जाती है
इतने दिन के बाद तुझे मेरी याद आई .... आरती दीदी अर्जुन को गले लगते हुआ बोलती है
दीदी आप को पता है मैं गाओं मैं रहता हुईं ..... कुछ दिन यह रहना है तो आप से मिलने आ गया .... अर्जुन बोलता है
हां मुझे पता है .... फिर भी मुझसे एक बार तो मिलने आ जाता कभी कभी .... आ तो गया दीदी .... अर्जुन बोल पड़ता है
हां ठीक है बड़ा अहसान किया ..... आरती थोड़ी मुंह बनती हुई बोलती है
भाभी इतनी भाव क्यू खा रही हो पहले तो आप सिर्फ इनको याद कर के खुश हो जाती थी ..... लड़की बोल पड़ती है
भाभी मैं कुछ खाने को लती हुईं तब तक आप अपने भाई से दिल खोल कर मिल लीजिये ..... लड़की बोलती हुई मुस्कुरा देती है आवर वह से भाग जाती है आरती
अर्जुन को अपने रूम मैं लेकर चली जाती है
अर्जुन मैं अभी आई .... आरती भी बोल कर रूम से चली जाती है कुछ देर के बाद
आरती आवर वह लड़की खाने का बहुत सारा सामान लेकर अर्जुन के आगे रख देती है
दीदी ये सब ..... क्यू आप कहते नहीं है क्या ... आरती के पहले hi वह लड़की बोल पड़ती है
क्याआ ..... चौंक क्यू रहा है .... वह बोल रही है खाने को चल खा .... भाभी
वह सॉरी सॉरी ..... अर्जुन ये मेरी नटखट नन्द रानी है नैना है आवर तुमेह तो पता है ये अर्जुन है
आरती दीदी नैना आवर अर्जुन की परिचय करवाती है
अर्जुन भी नैना से ही करता है तभी नैना को फ़ोन आता है तो वह चली जाती है तो अर्जुन आवर आरती साथ मैं नास्ता करने लगते है
अर्जुन माँ कैसे है आवर दोनों बहाने कैसी है .... आरती पूछती है
ओह सॉरी दी भूल गया ..... माँ ने आप मिस किया बोल रही थी आवर वह भी आप से मिलने के लिए बोल रही थी .... दीदी दोनों दीदी भी अच्छी है ....
मुझे भी माँ से मिलना का दिल कर रहा है ..... बोल देना माँ से मैं उनसे मिलने आउंगी जब तेरे गाओं रस्ते मैं पड़ता है ..... आरती दीदी बोलती है
ठीक है दीदी अर्जुन बोलता है
मगर अर्जुन कुछ सोच कर ये नहीं बताता है माँ भी सहर मैं है
ही गुड़िया कैसी है ..... आरती फ़ोन उठती हुई बोलती है
अच्छी हुईं डीई .... क्या कर रही हो आप ..... कोमल उधर से बोलती है
अच्छा वक़्त पर फ़ोन किया है गुड़िया .... देख एहि है ा
अर्जुननननननननन
आरती अभी अर्जुन का नाम लेती उसके पहले hi कोमल बोल पड़ती है
कोमल की मुंह से अर्जुन का नाम सुन कर आरती चौंक जाती है वही अर्जुन भी हैरानी से फ़ोन मैं कोमल को देखने लगता है
दी ये अर्जुन हम्हरा अपना भाई आप को बताया था न जिस हवेली को हम अपना कहते थे वह हवेली दादा के भाई का है अर्जुन उन्ही का पोता है
क्याआ
कोमल की बात सुन कर आरती इतनी खुश हो जाता है की चौंक hi जाती है
मुझे पता था तेरा मेरा कोई तो रिस्ता है जो पहली नज़र तुझे देख कर मुझे ऐसा लगा जैसे तुझे भाई बना लूँ आवर देख आज तू सच मेरा भाई निकला .... बोलती हुई आरती की आँखों मैं आंसू आ जाती है
वही आरती दीदी को रट हुआ देख कर अर्जुन की भी आँखें नाम हो जाती है
दोनों भाई बहन एक दूसरे को देखने लग जाते है आरती दीदी खुद को आवर रोक नहीं पति है आवर अर्जुन को गले लगा लेती है .....
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राखी देवी अपनी रूम मैं सोइ हुई फ़ोन चला रही होती है
कल अच्छा नहीं किया ज्योति के साथ वह मेरी कॉलेज मैं सबसे अच्छी दोस्त थी जो देखि वही बोली मैं भी अर्जुन के बारे मैं सोच hi लिया था ..... मुझे ज्योति से बात करनी चाहिए
राखी देवी मन मैं सोचती है आवर ज्योति की नंबर लगा देती है तो कल hi ज्योति ने नंबर दी हुई होती है
राखी देवी के फ़ोन करते hi ज्योति फ़ोन उठा लेती है
सॉरी राखी मुझे वह सब अर्जुन के बारे मैं नहीं बोलना चाहिए था प्लीज मुझे मांफ करदे यार .... ज्योति बहुत hi प्यार से बोलती है
वही राखी देवी को थोड़ा अजीब फील होता है के कल उसके उस तरह सड़क पर छोड़ कर जाने से सायद ज्योति को बुरा लगा हो इस लिए वह आज थोड़ी दुखी होकर बात कर रही है
क्यू की राखी देवी ये बात अच्छे से जानती थी ज्योति हर किसी से है कर बात करने वाली औरत है आवर राखी के साथ तो आवर भी है कर बात करती थी मगर आज ज्योति की आवाज़ मैं वह बात नहीं होती है जो राखी देवी को बुरा फील होता है
ज्योति सॉरी यार मुझे तू मांफ करदे मुझे कल ऐसा नहीं करना चाहिए था .... राखी देवी भी थोड़ी दुखी मन से बोलती है ....
राखी सच मैं तू मुझसे नाराज़ तो नहीं है न .... ज्योति अभी भी दुखी सवार मैं बोलती है
नहीं यार ज्योति मैं तुझसे नाराज़ क्यू होने लगी प्लीज तू मुझे मांफ करदे .... कल मेरे घर आ सकती है क्या ...... राखी देवी पूछती है
सॉरी व व वहहहह मुझे ..हां वह तेरे जीजू आने वाला है कल ..... इतना बोल कर ज्योति फ़ोन रख देती है
ये क्या था ..... मैंने उसे बस घर आने को कहा जो वह इतना सोच कर बोल रही थी
सायद वह मेरी हरकत की वजह से बुरा फील कर रही हैं ... ज्योति बोलना कुछ आवर छह रही थी मगर बोली कुछ आवर .... मुझे ज्योति से मिल कर सॉरी बोलना चाहिए ..... राखी देवी मन मैं सोचती है
अब राखी देवी को कौन बताये की ज्योति आखिर किस वजह से राखी देवी से मिलने से मन कर दिया .....
लेकिन राखी देवी तो सोच ली होती है वह ज्योति से कल मिलेंगी ....
राखी देवी उठ कर फिर किचेन की तरफ चली जाती है
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राखी देवी बाथरूम के अंदर आती है आवर अपनी साड़ी निकल देती है राखी देवी जैसे hi ब्रा पेंटी मैं होती है तभी राखी देवी की नज़र सामने सीसे मैं खुद को जिस्म पर नज़र जाती है आवर राखी देवी अपनी जिस्म को देख कर मन hi मन मुस्कुराने लगती है आवर अपनी लम्बी चौड़ी छाती को थोड़ा ऊपर उठा देती है जिससे राखी देवी की पहाड़ जैसी चुकी उठ जाती है
अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह क्या जिस्म होती है राखी देवी की
दूध की तरह गोरी लम्बी चौड़ी छाती आवर पतली कमर उसके निचे फैली हुई चौड़ी अनमोल गांड जिसको देख कर हर मर्द राखी देवी का दीवाना हो जाता था
राखी देवी 40 से 41 की होने के बाद भी 29 से 30 सल्ल की लग रही होती है
राखी देवी खूबसूरती का कोई मोल नहीं होती है
राखी देवी की पेंटी मैं फूली हुई छूट की छाप दिख रही होती है जिससे पता चल रही होती है राखी देवी की छूट पूवे की तरह फूली हुई है जिसको मर्द सिर्फ राखी देवी की छूट को कितने मस्ती मैं चाट चाट कर मस्त हो जायेगा
राखी देवी अपनी जिस्म को देखती हुई ब्रा को ऊपर कर देती है जिससे राखी देवी की बड़ी टाइट चुकी ब्रा की क़ैद से आजाद हो जाती है
Ahhhhhhhhhh .... राखी देवी की चुकी भी एक जवान लड़की की तरह बिलकुल टाइट कड़ी होती है राखी देवी की निप्पल भी ऐसी होती है जिसको मर्द चूस कर राखी देवी की चुकी से दूध निकल दे कुल मिला कर राखी देवी को भगवन ने बड़ी hi सिद्दत से बनाये हुआ होते है जैसे राखी देवी को बना कर साबित किये हो राखी देवी सच मैं एक सवर्ग की अप्सरा है जिसको मई धरती पर उतर रहा हुईं
राखी देवी अपनी जिस्म को देख देख कर खुद hi शर्मा रही होती है
अह्हह्ह्ह्ह भगवन जी कैसी किस्मत बंसी है आप ने इतनी खूबसूरत जिस्म देकर आप ने मुझे इस दुनिया मैं अकेला क्यू छोड़ दिया क्या करूँ मैं इस जिस्म की अह्हह्ह्ह्ह Ahhhhhhhhhh राखी देवी की हाथ खुद hi पेंटी के अंदर छूट मैं चली जाती है
राखी देवी की छूट पहले से पानी छोड़ रही होती है लेकिन राखी देवी की छूट अभी भी गर्म होती है आवर हाथ लगते hi राखी देवी की छूट मैं चल मच जाती है जिससे राखी देवी एक बार पानी छोड़ने के बाद भी छूट मैं ऊँगली करने लगती है
उम्मा अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्हह्हह स्स्स्सस्स्स्स Hhhhhhhhhh
राखी देवी छूट मैं ऊँगली आवर ज़ोर ज़ोर से करने लगती है
Ahhhhhhhhhh क्या करूँ मैं भगवन जी किसका लैंड अपनी छूट मैं डालूं कौन है जिसको मैं अपनी छूट दूँ Ahhhhhhhhhhh किसको दूँ मैं अपनी छूट अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मेरी छूट मैं इतनी आग क्यू भर दिया आप ने अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मैं आउट खुद को नहीं संभल सकती हुईं. भगवन जी Ahhhhhhhhhhhhhhh मेरी छूट
भगवन जी आप ने मेरे साथ अच्छा नहीं किया Ahhhhhhhhhh मैं भी बहुत सह लिए अब मुझे मर्द चाहिए वर्ण मैं मार जाउंगी
मुझे ऐसा मर्द चाहिए जो मेरी जिस्म की गर्मी संत कर सके Aahhhhhhhhhh ओह्ह्ह्हह्हह आप ने कोई मर्द मेरे लिए नहीं भेजा तो मैं अपने अर्जुन का लैंड
Aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa
राखी देवी अर्जुन का नाम लेता है अपनी छूट से पानी छोड़ देती है आवर कनपटी हुई निचे बैठ जाती है
हे भगवन ये मैं क्या सोच रही थी छी मेरी मन मैं ये ख्याल आया भी कैसे अर्जुन मेरा बीटा है ....
राखी देवी छूट की आग मैं जलती हुई अर्जुन के बारे मैं सोच तो लेती है मगर जैसे hi राखी देवी की छूट से पानी निकलती है राखी देवी खुद मैं सर्मिन्दा महसूस करने लगती है
राखी देवी कुछ देर बैठी हुई होती है आवर फिर नहाने लगती है
राखी देवी नहाने के बाद रूम मैं आती है आवर कपडे पहनने लगती है जब राखी देवी कपडे पहन लेती है तो वह खुद को मिरर मैं देखने लगती है आवर फिर मिरर मैं देखती हुई राखी देवी को पता नहीं क्या होता है वह सिंदूर उठती है आवर ऊँगली मैं लेकर टिका की तरह सिंदूर को मांग मैं लगा देती है आवर अपनी मांग मैं सिंदूर को देख कर राखी देवी की चेहरा पर सरमाती हुई एक मुस्कान आ जाती है
राखी देवी की गोल चेहरा छोटी छोटी आँखें कड़ी हुई नाक आवर राश से भरी लाल होंठ राखी देवी इस वक़्त खिलता हुआ गुलाब की तरह लग रही होती है जैसे अभी hi गुलाब खिल रहा हो
राखी देवी बहुत hi खूबसूरत लग रही होती है
राखी देवी खुद को मिरर मैं देख कर शर्मा रही होती है फिर राखी देवी रूम से निकल कर अपनी माँ की रूम मैं जाती है तो देखती आँचल की माँ उनके साथ बैठी हुई होती है
किसी की नज़र न लगे राखी बेटी तुम तो बहुत खूबसूरत लग रही हो जैसे तुम्हारी अभी शादी hi नहीं हुई है आवर तुम गीता की बड़ी बहन हो ..... आँचल की माँ बोल पड़ती है
वही राखी देवी आवर भी जयादा शर्मा जाती है
सही कह रही हो बहन मेरी राखी बेटी तो अभी भी जवान लगती है भगवन ने पता नहीं मेरी किस पाप की सजा मेरी भूल जैसी बेटी को दे दिए ..... राखी देवी की माँ थोड़ी दुखी सवार मैं बोलती है
मायआ ...... अपनी माँ की बात सुन कर राखी देवी भी थोड़ी दुखी होकर अपनी माँ से लिपट जाती है
रूम मैं कुछ देर तक सन्ति छ जाती है
राखी बेटी मैं दोकान पर जाती हुईं तुम खाना गर्म कार्डो अर्जुन को भूख लगी होगी ..... आँचल की माँ बोलती है आवर रूम से चली जाती है
राखी देवी भी अपनी माँ से अलग होकर किचेन मैं चली जाती है आवर खाना गर्म करने लगती है
अर्जुन आता है आवर हॉल मैं बैठ जाता है जो थोड़ी hi देर मैं राखी देवी खाना दिंनिंग टेबल पर रखने लगती है जो अर्जुन भी आकर बैठ जाता है
माँ आप बहुत सुन्दर लग रही है .... खाना कहते हुआ अर्जुन बोलता है जो अर्जुन की नज़र जब से अपनी माँ पर पड़ी होती है तब से देख कर बोलना छ रहा होता है
अर्जुन के मुंह से खुद की तारीफ सुन कर तो राखी देवी पहले तो सरमाती है मगर फिर राखी देवी की आँखें भर आती है मगर चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान भी होती है
राखी देवी मन मैं अभी बहुत खुश होती है की अर्जुन ने कितने सल्ल के बाद आज उनकी खूबसूरती की तारीफ किया है
थैंक यू अर्जुन ..... राखी देवी मुस्कुराती हुई बोलती है
अर्जुन अपनी माँ को एक नज़र देखता है आवर खाना खाने लगता है वही राखी देवी अर्जुन को मुस्कुराती हुई देख कर खाना खा रही होती है
अर्जुन खाना खाने के बाद के चला जाता है वही राखी देवी भी खाना खा कर पलेट किचेन मैं रखने लगती है
अर्जुन तूने कही कोई गलती तो नहीं कर दिया अपनी माँ को इतने बुरा भला बोल कर उनकी आँखों मैं देख कर तुझे कभी भी लगा है वह तुझसे प्यार नहीं करती है
नहीं अर्जुन माँ तुझसे बहुत प्यार करती है उनकी आँखों मैं देख कर पता चलता है .... अर्जुन कोई तो मज़बूरी होगी जो माँ ने वह कदम उठाई होगी सायद इसमें तेरे मां की गलती हो .... या फिर कोई आवर भी वजह हो सकती है
अर्जुन तूने जो कुछ भी देखा है सायद वह येते आँखों का भरम हो अर्जुन अब वह वक़्त आ गया है
अर्जुन तेरे दिल मैं जो कुछ भी अपनी माँ को लेकर गलत फहमी या सक है वह बातें तू अपनी माँ से जान ले ....
अर्जुन मुझे यकीन है माँ वैसी hi है जैसा तू बचपन मैं माँ को जनता था
अर्जुन इस वक़्त मार्किट मैं बैठा सिगरेट पि रहा होता है आवर अर्जुन की दिमाग मैं ये साडी बातें चल रही होती है
अर्जुन को खाना कहते हुआ अपनी माँ की आँखों मैं आंसू को देख कर बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा हुआ होता है
अर्जुन सिगरेट पिने के बाद वह से बाइक लेकर दूसरी तरफ निकल जाता है ....
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अह्हह्ह्ह्ह आज क्या हो रही है मेरे साथ मेरी जिस्म इतनी गर्म क्यू हो रही है अह्हह्ह्ह्ह जब से अर्जुन का लैंड देखा है मेरी छूट मैं आग लगी हुई है अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह
मेरी दिमाग से अर्जुन का लैंड निकल क्यू नहीं रहा है
ज्योति सायद तुझे अर्जुन का लैंड पसंद आ गया है तेरा पति तो कई सैलून से छोड़ भी नहीं रहा है तू कब से खुद पर काबू करती आ रही है मगर इतना बड़ा लैंड अचानक देख कर तेरी जिस्म की आग भड़क चुकी है
तू जब तक अर्जुन से मिलेगी नहीं तेरी ये आग भड़कती hi रहेगी
ज्योति इस वक़्त अपनी रूम मैं सोइ हुई होती है आवर ज्योति की साइन से पल्लू भी दूसरी तरफ गिरी हुई होती है आवर ज्योति की एक हाथ चुकी पर तो एक हाथ साड़ी के ऊपर से छूट पर होती है आवर ज्योति अर्जुन के लैंड को याद कर के अपनी चुकी आवर छूट को मसल रही होती है
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कैसे अर्जुन से मिलूं मैं अर्जुन मेरे बेटे जैसा है कैसे उससे बोलूं की अर्जुन बीटा तेरी आंटी तुझसे छोड़ना चाहती है छोड़ दे मुझे ..... क्या मैं राखी से बात करूँ .... वह मानेगी
कही राखी मुझसे गुस्सा तो नहीं हो जाएगी कैसे रस कर चली गयी थी
ज्योति ये सही रहेगा अगर राखी मान गयी तो अर्जुन तेरी जिस्म की आग बुझा सकती है
राखी तेरी बहुत अच्छी दोस्त है वह तुझे कभी मन नहीं करेगी तू बात कर के तो देख मुझे यकीन है तेरी मज़बूरी जान कर वह मान जाएगी ..... ज्योति मन मैं सोचती है
रूम मैं एक चलने के बाद भी ज्योति की पूरी जिस्म पसीने से भींगी हुई होती है ज्योति उठ कर बाथरूम मैं चली जाती है
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अर्जुन रात होने पर घर आता है तो देखता है दोकान बंद हो गयी है तो अर्जुन बाइक लगा कर घर मैं आ जाता है आवर अपने रूम मैं जाकर कपडे चेंज करता है आवर फिर हॉल मैं आता है तो देखता उसकी माँ आवर नानी दिंनिंग टेबल पर खाना लगा रही है तो अर्जुन भी जाकर बैठ जाता है आवर खाना खाने लगता है
आंटी मुझे नींद आ रही है क्या आप माँ की मालिश कर देंगी .... खाना कहते हुआ राखी देवी बोलती है तो आँचल की माँ हां बोलती है
अर्जुन बीटा आज से हम दोनों आँचल के रूम मैं सोते है तुझे कोई प्रॉब्लम न हो तो .... वह दरअसल तेरी ये नानी बहुत खरंटे लेती है जो मैं कल रात सो नहीं पायी बीटा
अर्जुन को चैंकते हुए देख कर राखी देवी पूरी बात बता देती है
मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है माँ हम माँ की रूम मैं सो सकते है ... अर्जुन बोलता है जो राखी देवी मुस्कुरा कर अर्जुन को देखती है
राखी देवी खाने के बाद पलट किचेन मैं रखने लगती है
राखी देवी किचेन का काम कर के रूम मैं आती है तो देखती है अर्जुन रूम मैं नहीं है तो राखी देवी बीएड पर सो जाती है
अर्जुन ये अच्छा मक्का है तू माँ से बातें कर सकता है मुझे यकीन है माँ तुझसे वह साडी बातें ज़रूर बता देंगी ....
अर्जुन छत पर सिगरेट पिटे हुए सोचता है
अर्जुन सिगरेट पिने के बाद रूम मैं आता है तो देखता है उसकी माँ सो चुकी होती है
अर्जुन माँ को सोते हुए देख कर दूसरी तरफ आ जाता है
अर्जुन दूसरी तरफ जैसे hi आता है अर्जुन की नज़र माँ की चिकनी कमर पर चली जाती है आवर अर्जुन नज़र माँ की चिकनी कमर पर टिक जाती है
अर्जुन माँ की चिकनी जिस्म को कुछ देर देखता है फिर चद्दर उठा कर माँ के ऊपर दाल देता है आवर बीएड पर वह भी लेट जाता है
अगली सुबह
अर्जुन जब उठता है तो देखता है माँ बीएड पर नहीं है तो अर्जुन उठ कर बाथरूम मैं चला जाता है आवर फ्रेश होकर हॉल मैं आता है तो देखता माँ कॉफ़ी पि रही है
गुड मॉर्निंग माँ .... अर्जुन सोफे पर बैठते हुआ बोलता है
गुड मॉर्निंग अर्जुन .... मैं कॉफ़ी लेकर आती हुईं ..... राखी देवी बोलती है आवर उठ कर कॉफ़ी लेन चली जाती है
माँ के कहा है मैं दोकान खोल देता हुईं ..... अर्जुन कॉफ़ी लेते हुए बोलता है
अर्जुन बीटा नीलू ने दोकान खोल दिया है .... राखी देवी बोलती है तो अर्जुन कॉफ़ी पिने लगता है
अर्जुन कॉफ़ी पीकर दोकान पर चला जाता है तो देखता है नीलू आंटी कपडे देखा रही होती है कुछ आंटी लोग को
गुड मॉर्निंग आंटी .... अर्जुन बोलता है
गुड मॉर्निंग अर्जुन ..... नीलू बोल कर आंटी लोग से बात करने लगती है वही अर्जुन जाकर कुर्सी पर बैठ जाता है
अर्जुन बीटा ज़रा 34 डी वाला पेंटी देना तो नीलू बोलती है
नीलू आंटी की बात सुन कर अर्जुन पेंटी लेन चला जाता है वही बहार कड़ी आंटी थोड़ी शर्मा कर नीलू को देखने लगती है जो नीलू बस मुस्कुरा पड़ती है
तो अब बता कितनी गफ बनाया कॉलेज मैं ..... आंटी लोग के जाने के बाद नीलू आंटी मुस्कुराती हुई अर्जुन से पूछती है
कहा आंटी कोई मुझे पसंद hi नहीं आती है ..... अर्जुन भी मुस्कुराता हुआ बोलता है
ओह्ह अच्छा मतलब अब भोले अर्जुन को गफ बनाने का अरमान दिल मैं जाग गया है ..... नीलू आंटी फिर से मुस्कुराती हुई बोलती है
हां आंटी मैं हर वक़्त भोला बन कर तो नहीं रह सकता हुईं न हर लड़के की गफ होती है तो सोचा मैं भी एक रख लूँ .... अर्जुन भी फिर से मुस्कुराता हुआ बोलता है
चलो अच्छी बात है .... बुद्धू को ये अकाल तो आई ..... बता कैसी लड़की चाहिए तुझे .... नीलू आंटी फिर मुस्कुराती हुई पूछती
नीलू आंटी को अभी अर्जुन से बात करते हुआ मज़ा आ रहा होता है क्यू के पहले नीलू आंटी अर्जुन से लड़की के बारे मैं बात करती तो अर्जुन कोई जवाब नहीं देता था आवर अर्जुन दोकान से चला जाता था मगर आज अर्जुन हर बार बोल रहा होता है
आंटी मुझे वैसी लड़की चाहिए जिसकी जिस्म भरा हुआ हो .... आवर हर चीज उसकी परफेक्ट हो .... आंटी आप की जैसी लड़की मिलेगी तो भी चलेगा ..... अर्जुन नीलू आंटी की जिस्म को घूरता हुआ बोलता है
वही अर्जुन को खुद की जिस्म को घूरती हुई देख कर नीलू आंटी शर्मा जाती है आवर अपनी पल्लू को साइन पर रख देती है
ये देखों इसको लड़की की चाहत भी हुई तो इसको मेरी जैसी जिस्म वाली लड़की चाहिए मतलब इसको लड़की नहीं मेरी जैसी आंटी चाहिए .... आखिर अर्जुन को भी आंटी hi पसंद आई ये आज कल के लड़के भी न आंटी के पीछे hi क्यू पद जाते है .... नीलू आंटी मन मैं सोचती है
अच्छा तो तू मुझपे hi लाइन मरने लगा .... तुम मैं आँचल से बोल देती हुईं किसी आंटी से तेरी शादी करा दे .... नीलू आंटी बोलती है
ौनतययययययय
क्या बता रही है नीलू आँचल ..... अर्जुन आगे बोलता के माँ की आवाज़ सुन कर चुप हो जाता है
माँ मैं थोड़ा आरती दीदी से मिल कर आता हुईं .....
अर्जुन कुर्सी से उठता हुआ बोलता है वही नीलू आंटी अर्जुन को भागते देख कर मुस्कुरा पड़ती है .....
अर्जुन आरती को मेरा प्यार देना बोलना मैं भी उसको मिस करती हुईं .... आवर मैं भी उससे मिलने कभी आउंगी .... राखी देवी बोलती है
वही अर्जुन जाते हुए ठीक है बोलता है
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अर्जुन बाइक चलते हुए एक महल जैसा घर के सामने बाइक रोकता है तो देखता है सामने 2 पुलिस वाला गेट के पास खड़े है तो अर्जुन बाइक खड़ा कर के गेट के पास आ जाता है
कौन हो तुम किस्से मिलना है ..... एक पुलिस वाला आगे आता हुआ बोलता है
जी मेरा नाम अर्जुन है मुझे आरती दीदी से मिलना है .... अर्जुन बोलता है
तुम आरती मेडम के भाई हो मगर तुम पहले कभी यह नहीं आये आवर मैंने सुना है उनका कोई भाई नहीं है ... तुम झूट बोल रहे हो ...... सच बताओ क्या करने यह आये हो ..... पुलिस वाला गंभीर आवाज़ मैं बोलता है
जी मैं उनका अपना भाई
क्या तुम अर्जुन हो .... अर्जुन आगे बोलता तभी पीछे से एक लड़की बोल पड़ती है जो बाइक पर होती है अर्जुन पीछे देखता है तो एक बहुत hi खूबसूरत लड़की बाइक पर बैठी हुई होती है तो अर्जुन हां मैं सर हिला देता है
ठीक है बाइक पर बैठ जाओ .... रंजीत इनका बाइक अंदर लगा दो ..... लड़की बोलती है तो अर्जुन बाइक पर बैठ जाता है
तुम्हारे बारे मैं भाभी हर वक़्त बात करती रहती है ........ भाभी आरती भाभी लड़की अर्जुन से बोलती हुई आरती दीदी को पुकारने लगती है क्या हुआ
नाआ ........ अर्जुनननननननन
आरती दीदी अर्जुन को देख कर पहले तो हैरान होती है मगर खुश भी हो जाती है
इतने दिन के बाद तुझे मेरी याद आई .... आरती दीदी अर्जुन को गले लगते हुआ बोलती है
दीदी आप को पता है मैं गाओं मैं रहता हुईं ..... कुछ दिन यह रहना है तो आप से मिलने आ गया .... अर्जुन बोलता है
हां मुझे पता है .... फिर भी मुझसे एक बार तो मिलने आ जाता कभी कभी .... आ तो गया दीदी .... अर्जुन बोल पड़ता है
हां ठीक है बड़ा अहसान किया ..... आरती थोड़ी मुंह बनती हुई बोलती है
भाभी इतनी भाव क्यू खा रही हो पहले तो आप सिर्फ इनको याद कर के खुश हो जाती थी ..... लड़की बोल पड़ती है
भाभी मैं कुछ खाने को लती हुईं तब तक आप अपने भाई से दिल खोल कर मिल लीजिये ..... लड़की बोलती हुई मुस्कुरा देती है आवर वह से भाग जाती है आरती
अर्जुन को अपने रूम मैं लेकर चली जाती है
अर्जुन मैं अभी आई .... आरती भी बोल कर रूम से चली जाती है कुछ देर के बाद
आरती आवर वह लड़की खाने का बहुत सारा सामान लेकर अर्जुन के आगे रख देती है
दीदी ये सब ..... क्यू आप कहते नहीं है क्या ... आरती के पहले hi वह लड़की बोल पड़ती है
क्याआ ..... चौंक क्यू रहा है .... वह बोल रही है खाने को चल खा .... भाभी
वह सॉरी सॉरी ..... अर्जुन ये मेरी नटखट नन्द रानी है नैना है आवर तुमेह तो पता है ये अर्जुन है
आरती दीदी नैना आवर अर्जुन की परिचय करवाती है
अर्जुन भी नैना से ही करता है तभी नैना को फ़ोन आता है तो वह चली जाती है तो अर्जुन आवर आरती साथ मैं नास्ता करने लगते है
अर्जुन माँ कैसे है आवर दोनों बहाने कैसी है .... आरती पूछती है
ओह सॉरी दी भूल गया ..... माँ ने आप मिस किया बोल रही थी आवर वह भी आप से मिलने के लिए बोल रही थी .... दीदी दोनों दीदी भी अच्छी है ....
मुझे भी माँ से मिलना का दिल कर रहा है ..... बोल देना माँ से मैं उनसे मिलने आउंगी जब तेरे गाओं रस्ते मैं पड़ता है ..... आरती दीदी बोलती है
ठीक है दीदी अर्जुन बोलता है
मगर अर्जुन कुछ सोच कर ये नहीं बताता है माँ भी सहर मैं है
ही गुड़िया कैसी है ..... आरती फ़ोन उठती हुई बोलती है
अच्छी हुईं डीई .... क्या कर रही हो आप ..... कोमल उधर से बोलती है
अच्छा वक़्त पर फ़ोन किया है गुड़िया .... देख एहि है ा
अर्जुननननननननन
आरती अभी अर्जुन का नाम लेती उसके पहले hi कोमल बोल पड़ती है
कोमल की मुंह से अर्जुन का नाम सुन कर आरती चौंक जाती है वही अर्जुन भी हैरानी से फ़ोन मैं कोमल को देखने लगता है
दी ये अर्जुन हम्हरा अपना भाई आप को बताया था न जिस हवेली को हम अपना कहते थे वह हवेली दादा के भाई का है अर्जुन उन्ही का पोता है
क्याआ
कोमल की बात सुन कर आरती इतनी खुश हो जाता है की चौंक hi जाती है
मुझे पता था तेरा मेरा कोई तो रिस्ता है जो पहली नज़र तुझे देख कर मुझे ऐसा लगा जैसे तुझे भाई बना लूँ आवर देख आज तू सच मेरा भाई निकला .... बोलती हुई आरती की आँखों मैं आंसू आ जाती है
वही आरती दीदी को रट हुआ देख कर अर्जुन की भी आँखें नाम हो जाती है
दोनों भाई बहन एक दूसरे को देखने लग जाते है आरती दीदी खुद को आवर रोक नहीं पति है आवर अर्जुन को गले लगा लेती है .....
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राखी देवी अपनी रूम मैं सोइ हुई फ़ोन चला रही होती है
कल अच्छा नहीं किया ज्योति के साथ वह मेरी कॉलेज मैं सबसे अच्छी दोस्त थी जो देखि वही बोली मैं भी अर्जुन के बारे मैं सोच hi लिया था ..... मुझे ज्योति से बात करनी चाहिए
राखी देवी मन मैं सोचती है आवर ज्योति की नंबर लगा देती है तो कल hi ज्योति ने नंबर दी हुई होती है
राखी देवी के फ़ोन करते hi ज्योति फ़ोन उठा लेती है
सॉरी राखी मुझे वह सब अर्जुन के बारे मैं नहीं बोलना चाहिए था प्लीज मुझे मांफ करदे यार .... ज्योति बहुत hi प्यार से बोलती है
वही राखी देवी को थोड़ा अजीब फील होता है के कल उसके उस तरह सड़क पर छोड़ कर जाने से सायद ज्योति को बुरा लगा हो इस लिए वह आज थोड़ी दुखी होकर बात कर रही है
क्यू की राखी देवी ये बात अच्छे से जानती थी ज्योति हर किसी से है कर बात करने वाली औरत है आवर राखी के साथ तो आवर भी है कर बात करती थी मगर आज ज्योति की आवाज़ मैं वह बात नहीं होती है जो राखी देवी को बुरा फील होता है
ज्योति सॉरी यार मुझे तू मांफ करदे मुझे कल ऐसा नहीं करना चाहिए था .... राखी देवी भी थोड़ी दुखी मन से बोलती है ....
राखी सच मैं तू मुझसे नाराज़ तो नहीं है न .... ज्योति अभी भी दुखी सवार मैं बोलती है
नहीं यार ज्योति मैं तुझसे नाराज़ क्यू होने लगी प्लीज तू मुझे मांफ करदे .... कल मेरे घर आ सकती है क्या ...... राखी देवी पूछती है
सॉरी व व वहहहह मुझे ..हां वह तेरे जीजू आने वाला है कल ..... इतना बोल कर ज्योति फ़ोन रख देती है
ये क्या था ..... मैंने उसे बस घर आने को कहा जो वह इतना सोच कर बोल रही थी
सायद वह मेरी हरकत की वजह से बुरा फील कर रही हैं ... ज्योति बोलना कुछ आवर छह रही थी मगर बोली कुछ आवर .... मुझे ज्योति से मिल कर सॉरी बोलना चाहिए ..... राखी देवी मन मैं सोचती है
अब राखी देवी को कौन बताये की ज्योति आखिर किस वजह से राखी देवी से मिलने से मन कर दिया .....
लेकिन राखी देवी तो सोच ली होती है वह ज्योति से कल मिलेंगी ....
राखी देवी उठ कर फिर किचेन की तरफ चली जाती है
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