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- Dec 5, 2013
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उपडेट ___ 9
आँचल आवर राखी देवी रात मैं की लेस्बियन सेक्स करने के बाद थक कर एक दूसरे से लिप्त कर नंगी hi सो रही होती है तभी आँचल का फ़ोन बजने लगता है आँचल अंगड़ाई लेते हुआ उठ जाती है आवर फ़ोन को देखती है तो आँचल के घर के बगल का एक लड़के का फ़ोन होता है आँचल जल्दी से उठ कर फ़ोन उठा लेती है
बुआ आप जल्दी से घर आ जाइये दादा जी का हालत बहुत जयादा ख़राब है हम उनेह गाँव के hi हॉस्पिटल मैं लेकर ए है दादी बहुत जयादा रो रही है लड़का कहता है
वही लड़के की बात सुन कर hi आँचल सिसक के रोने लगती है आँचल की सिसक कर रोना सुन के राखी देवी भी उठ जाती है आवर आँचल को पकड़ के पूछने लगती है क्या हुआ
दीदी पापा का हालत ठीक नहीं है वह अभी हॉस्पिटल मैं है दीदी मुझे जल्दी से घर जाना होगा माँ बहुत दुखी है ... आँचल रोटी हुई कहती है
तू परेशां मत हो सब ठीक होगा कुछ नहीं होगा ौंकल को राखी कहती है
आँचल कुछ देर रोने के बाद बाथरूम मैं चली जाती है वही राखी देवी भी दूसरे रूम के बाथरूम मैं चली जाती है आवर फिर कॉफ़ी बनाने लगती है सबह जब अर्जुन की नींद खुलती है तो अर्जुन पहले बाथरूम जाता है फिर फ्रेश होकर रूम से बहार आता है तो देखता है उसकी ममी माँ रो रही होती है जो अर्जुन थोड़ा दर जाता है क्या हुआ है उसकी ममी माँ को
माँ क्या हुआ आप रो क्यू रही है प्लीज आप चुप हो जाइये प्लीज माँ क्या हुआ मुझे बताइये आप ... अर्जुन आँचल की आंसू पोछते हुआ कहता है
आँचल के पापा की तबियत ख़राब है आवर वह अभी हॉस्पिटल मैं है पीछे से ... राखी देवी कहती है
अर्जुन अपनी माँ की तरफ देखता तो नहीं है मगर अपनी माँ की बात सुन कर अर्जुन को बहुत दुःख होता है अर्जुन भाग कर अपने रूम मैं जाता है आवर अपने कुछ कपडे लेकर फिर अपनी ममी माँ के रूम मैं जाता है तो देखता है उसकी ममी माँ बैग राखी हुई है अर्जुन बैग उठा कर जल्दी से आँचल के पास आता है
माँ चलिए मैं भी आप के साथ चलूँगा .... अर्जुन अपनी ममी माँ से कहता है आवर बहार जाकर अपना बाइक निकलने लगता है
आँचल ये कुछ पैसे रख ले आवर वह जाने के बाद आवर भी पैसे की ज़रूरत हो तो मुझे फ़ोन करना मैं जल्द hi आवर पैसे भेज दूंगी ..... राखी एक नोटों को गद्दी देते हुआ कहती है
दीदी इतने पैसे क्या होंगे मेरे पास कुछ पैसे है काम चल जायेगा ..... आँचल कहती है
तू चुप कर कुछ भी मत बोल मैं सब जानती हुईं तू अपने बचाये हुआ पैसे hi लेकर सिर्फ जाएगी आवर मैं ये भी जानती हुईं तेरे घर की हालत क्या है मगर तेरे पापा मेरे पापा की तरह है समझी .... राखी कहती है
आँचल पैसे लेकर रट हुआ राखी से लिपट जाती है
आँचल की माँ बाप बहुत गरीब थे आँचल की शादी भी बिना कोई दहेज़ की हुई थी क्यू के आँचल के माँ बाप के पास इतने भी पैसे नहीं थे जो आँचल की अच्छे घर मैं शादी कर सके मगर आँचल की किस्मत अच्छी थी के किसी शादी मैं राखी की माँ की नज़र आँचल पर पद गयी थी आवर आँचल की खूबसूरती देख कर राखी की माँ ने आँचल की शादी अपने बेटे से कर दी आवर फिर आँचल गरीब घर से आमिर घर मैं आ गयी मगर आँचल इतनी स्वाभिमान थी के अपने पति के घर के पैसे कभी अपने माँ बाप के पास नहीं लेकर गयी ...... आँचल दूकान पर जो रहती थी वह अपनी महीने की पैसे अलग से निकल लेती थी आवर कभी कभी अपने माँ को भेज देती थी ये बात राखी आवर उसके भाई को भी पता था ..... राखी कई बार बोल चुकी थी ये सरे पैसे तेरे है तू चाहे कुछ भी कर मगर आँचल फिर भी अपने मन की करती थी ... इस लिए आज राखी ने अपने पैसे आँचल को दिए
अर्जुन अपने बाइक निकल कर आँचल को पुकारता है आवर फिर अपनी ममी माँ को लेकर अपनी ममी माँ की गाँव के लिए निकल पड़ता है
अर्जुन आवर आँचल के जाने के बाद जाने के घर मैं सभी थोड़ी दुखी हो जाते है
वही गीता तो कुछ जयादा hi दुखी थी ..... क्यू के गीता रात मैं कितने सपने देख रही थी अर्जुन को अपने घर लेकर जाने की मगर सुबह होते hi गीता की सपना टूट गया था आवर गीता अपनी ममी के लिए दुखी हो रही थी आवर भगवन से दुआ कर रही थी ममी के पापा जल्द से जल्द ठीक हो जाये
दीदी मैं आप के लिए कॉफ़ी लेकर आई हुईं क्या आप कॉफ़ी पीना चाहेंगी .... अंजलि रूम मैं आकर कहती है
गीता को कॉफ़ी पिने का मन तो नहीं होता है मगर वह अंजलि से कॉफ़ी लेकर पिने लग जाती है गीता जानती है की अभी अंजलि भी दुखी है आवर अगर मैं इसके सामने दुखी रही तो ये रोने लग जाएगी .... क्यू की अंजलि कितनी भी नटखट थी मगर अपनी परिवार वाले को दुखी देख कर अंजलि की आँखें नाम हो जाती थी
अंजलि चल आज हम दोनों साथ मिल कर हर रूम की सफाई कर देते है पता नहीं ममी अब कब आएँगी ममी जब घर आएँगी तो उनेह बहुत काम करना पद जायेगा इस लिए हम पहले hi सफाई कर देते है .... गीता कहती है
अपनी दीदी की बात अंजलि को भी अच्छी लगती है तो अंजलि पहले अपनी ममी की रूम सफाई करने के लिए चली जाती है आवर गीता पहले वही रूम साफ़ कर ने लगती है अपने रूम साफ़ करते हुआ गीता को 1 घंटे लग जाते है गीता फिर अपनी नानी की रूम साफ़ करती है वही अंजलि भी अपनी ममी की रूम साफ़ कर के एक दूसरे रूम साफ करने लगती है
इधर गीता भी अपनी नानी की रूम साफ़ कर के अर्जुन के रूम मैं चली जाती है आवर साफ़ करने लगती है अर्जुन के रूम साफ करने के बाद गीता अब अर्जुन के बीएड की तरफ चली जाती है आवर अर्जुन के बीएड पर से सरे ठोसक हटाने लगती है आवर सभी बीएड के निचे गिरा देती है फिर बीएड सर कर के एक एक बिस्तर को जहर कर फिर से बीएड पर लगाने लगती है की तभी गीता की हाँथ मैं एक पेंटी आ जाती है गीता अभी उस पेंटी को देख hi रही होती है के गीता की नज़र निचे की तरफ जाती है जो कई साडी पेंटी ब्रा होती है गीता की आँखें बड़ी हो जाती है इतने सरे ब्रा पेंटी अर्जुन के बिस्तर मैं कैसे है क्या करता है अर्जुन इन सब का
तभी गीता को याद आता है ये तो वही ब्रा पेंटी है जो मैंने कल अपने लिए आवर अंजलि के लिए लेकर आई थी गीता मन मैं सोचती है गीता दीदी मैं बहुत थक गयी हुईं मैं नहाने जा रही हुईं प्लीज बाकि आप hi अकेले साफ कर दीजियेगा अंजलि की आवाज़ आती है जो गीता जल्दी से सभी ब्रा पेंटी वही तकिया के निचे छिपा देती है ताकि अंजलि रूम मैं आकर देख न ले आवर फिर गीता अर्जुन का रूम साफ़ कर के निकल जाती है
अर्जुन आवर आँचल को गाँव मैं पहुँचाने तक शाम हो जाती है आँचल अर्जुन को बाइक हॉस्पिटल की तरफ hi लेकर चलने को बोलती है तो अर्जुन भी गाड़ी हॉस्पिटल की तरफ लेकर चल देता है ..... आँचल जब हॉस्पिटल मैं जाती है तो अपनी माँ को देखती है जो एक जगह बैठ तड़प तड़प कर रो रही होती है वही साथ मैं एक औरत भी होती है जो वह भी तो रही होती है आँचल की माँ जैसे hi आँचल को देखती है भाग कर आँचल से लिपट जाती है आवर खूब रोने लगती है अपनी माँ को रट सुन कर आँचल भी रोने लगती है
बेटी तेरे पापा नहीं रहे मैं इस दुनियां मैं अकेली हो गयी तेरे सर पे बाप का साया नहीं रहा आँचल की माँ बोल कर आवर रोने लगती वही आँचल जब सुनती है उसके पापा नहीं रहे तो आँचल भी आवर रोने लगती है अपनी माँ से लिपट कर जो अर्जुन जाकर अंचल को संभालता है कुछ समय तक हॉस्पिटल मैं hi आँचल रोटी रहती है
तब तक वह लड़का हॉस्पिटल का कागज बना कर आँचल के पापा के बोड्डी घर जाने के लिए गाड़ी मैं रखवा देता है फिर अर्जुन अपनी ममी माँ आवर नानी को घर लेकर आया जाता है आवर अपनी गीता दीदी को फ़ोन कर के बता देता है की ममी माँ के पापा नहीं रहे जो गीता भी रोने लगती है आवर अपनी माँ आवर नानी को बता देती है फिर गीता आवर उसकी माँ नानी आवर अंजलि भी उसी वक़्त गाँव के लिए निकल पड़ती है
अभी थोड़ा दिन होता है तो उसी दिन अंतिम संस्कार करने को गोंवाले बोलते है गाँव के पास मैं आँचल के पापा का अंतिम संस्कार हो जाता है जो अर्जुन hi अपने नाना का अंतिम संस्कार करता है क्यू के अर्जुन के सिवा आवर कोई नहीं होता है क्यू के आँचल का कोई भाई भी नहीं थे तो अर्जुन को hi करने को आँचल कहती है वह रत सभी रट हुआ बिता देते है
***************
हहह क्या कर रहे हो छोडो नहीं तो मैं अभी सासु माँ को आवाज़ देकर बुला लुंगी फिर न कहना मैं बुरी हुईं ....... लड़की कहती है
वही लड़का फिर से लड़की को पकड़ लेता है आवर लड़की के पल्लू गिरा कर लड़की के बालों की खुशबु लेने लगता है जो लड़की अपनी आँखें बंद कर लेती है सिसक कर आवर अपनी दोनों हाँथ से अपनी जिस्म को छिपाने की कोशिश करने लगती है मगर लड़की की गोल नाभि आनर की तरह दिख रही होती है लड़की अपनी चुकी को छिपाने की कोशिश करती है मगर लड़की की काली बलाउज मैं एक चुकी उभर कर दिख रही होती है
लड़का फिर लड़की को उठा कर बीएड पर गिरा देते है
आवर आवर लड़की के पेट पर अपना हाँथ फेरने लगता है जो लड़की अपनी सर दूसरी तरफ कर के सिसकियाँ लेने लगी है अपना एक हाँथ अपनी चुकी पर रख देती है लड़का अब धीरे धीरे लड़की की कमर पर हाँथ फेरते हुआ लड़की की साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगता है जो लड़की आवर ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेन लगती है लड़की की छूट मैं एक मीठी मीठी गुदगुदी सी होने लगाती है लड़की लड़के का सर पकड़ कर अपनी साड़ी के ऊपर से hi छूट पर दबाने लगती है फिर लड़की लड़के का सर पकड़ कर उठा देती है आवर अपनी चुकी से होते हुआ मुंह के पास लेकर लड़के का मुंह चूसने लगती है तभी लड़का का लैंड लड़की को अपनी छूट पर महसूस होती है आवर लड़की एक आवर ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह लेकर सिसक पड़ती है
आस्था आस्था छोड़ मुझे क्या कर रही है
तभी आस्था हड़बड़ा कर उठ जाती है आवर सामने की तरफ देखती है तो उसकी दादी उसे गुस्से मैं घर रही होती है उसकी दादी की बॉल भी बिखरे हुआ होते है आवर उसकी दादी अपनी मुंह पोछ रही होती है आस्था मुंह बना कर देखने लगती है
कौन सी गंदे सपने देख रही थी तू जो इतनी गन्दी हरकत कर रही थी अभी से तुझे जवानी तंग करने लगी ..... दादी गुस्से मैं कहती है
क्या बोल रही हो दादी मैं तो आप के साथ hi कर रही थी आप जब रूम मैं आई तो मैं जाग रही थी आवर जब आप बीएड पर आई तो मैं आप के साथ थोड़ी मस्ती करने लगी कुछ भी बोलती हो लगता है आप की दिमाग अब ठीक से काम नहीं कर रहा है आओ न दादी एक बार फिर से करते है बड़ी मज़ा आने रहा था आप की होंठ चूसते हुआ ..... आस्था मुस्कुराते हुआ बोलती है आवर अपनी दादी की तरफ फिर से बढ़ने लगती है
तू सच मैं पागल हो गयी है मुझे कुछ नहीं करना है तू जल्दी से निचे है तेरे पापा बोलै रहे है ..... दादी बोलते हुआ रूम से निकल जाती है
वही आस्था मुस्कुरा पड़ती है आआआ
आज तो बच गयी अब मुझे अपनी रूम का गेट बंद कर के सोना चाहिए .... आस्था मन मैं सोचती है फिर आष्टा को सपना याद आता है
कहा पर हो तुम फिर कब मिलोगे तुम तुमने मेरी नींद भी चुरा लिया है अब तो तुम सपने मैं भी तुम आने लगे हो क्या मैं भी तुम्हारे सपने मैं आती हुईं मैं कह देती हुईं अपने सपने मैं मुझे hi लाना नहीं तो मैं तुमसे शादी भी नहीं करुँगी फिर तुम एक अच्छी आवर प्यारी बीवी को खो डोज ...... आस्था मन मैं मुस्कुराते हुई सोचती है फिर उठ कर बाथरूम मैं चली जाती
आँचल आवर राखी देवी रात मैं की लेस्बियन सेक्स करने के बाद थक कर एक दूसरे से लिप्त कर नंगी hi सो रही होती है तभी आँचल का फ़ोन बजने लगता है आँचल अंगड़ाई लेते हुआ उठ जाती है आवर फ़ोन को देखती है तो आँचल के घर के बगल का एक लड़के का फ़ोन होता है आँचल जल्दी से उठ कर फ़ोन उठा लेती है
बुआ आप जल्दी से घर आ जाइये दादा जी का हालत बहुत जयादा ख़राब है हम उनेह गाँव के hi हॉस्पिटल मैं लेकर ए है दादी बहुत जयादा रो रही है लड़का कहता है
वही लड़के की बात सुन कर hi आँचल सिसक के रोने लगती है आँचल की सिसक कर रोना सुन के राखी देवी भी उठ जाती है आवर आँचल को पकड़ के पूछने लगती है क्या हुआ
दीदी पापा का हालत ठीक नहीं है वह अभी हॉस्पिटल मैं है दीदी मुझे जल्दी से घर जाना होगा माँ बहुत दुखी है ... आँचल रोटी हुई कहती है
तू परेशां मत हो सब ठीक होगा कुछ नहीं होगा ौंकल को राखी कहती है
आँचल कुछ देर रोने के बाद बाथरूम मैं चली जाती है वही राखी देवी भी दूसरे रूम के बाथरूम मैं चली जाती है आवर फिर कॉफ़ी बनाने लगती है सबह जब अर्जुन की नींद खुलती है तो अर्जुन पहले बाथरूम जाता है फिर फ्रेश होकर रूम से बहार आता है तो देखता है उसकी ममी माँ रो रही होती है जो अर्जुन थोड़ा दर जाता है क्या हुआ है उसकी ममी माँ को
माँ क्या हुआ आप रो क्यू रही है प्लीज आप चुप हो जाइये प्लीज माँ क्या हुआ मुझे बताइये आप ... अर्जुन आँचल की आंसू पोछते हुआ कहता है
आँचल के पापा की तबियत ख़राब है आवर वह अभी हॉस्पिटल मैं है पीछे से ... राखी देवी कहती है
अर्जुन अपनी माँ की तरफ देखता तो नहीं है मगर अपनी माँ की बात सुन कर अर्जुन को बहुत दुःख होता है अर्जुन भाग कर अपने रूम मैं जाता है आवर अपने कुछ कपडे लेकर फिर अपनी ममी माँ के रूम मैं जाता है तो देखता है उसकी ममी माँ बैग राखी हुई है अर्जुन बैग उठा कर जल्दी से आँचल के पास आता है
माँ चलिए मैं भी आप के साथ चलूँगा .... अर्जुन अपनी ममी माँ से कहता है आवर बहार जाकर अपना बाइक निकलने लगता है
आँचल ये कुछ पैसे रख ले आवर वह जाने के बाद आवर भी पैसे की ज़रूरत हो तो मुझे फ़ोन करना मैं जल्द hi आवर पैसे भेज दूंगी ..... राखी एक नोटों को गद्दी देते हुआ कहती है
दीदी इतने पैसे क्या होंगे मेरे पास कुछ पैसे है काम चल जायेगा ..... आँचल कहती है
तू चुप कर कुछ भी मत बोल मैं सब जानती हुईं तू अपने बचाये हुआ पैसे hi लेकर सिर्फ जाएगी आवर मैं ये भी जानती हुईं तेरे घर की हालत क्या है मगर तेरे पापा मेरे पापा की तरह है समझी .... राखी कहती है
आँचल पैसे लेकर रट हुआ राखी से लिपट जाती है
आँचल की माँ बाप बहुत गरीब थे आँचल की शादी भी बिना कोई दहेज़ की हुई थी क्यू के आँचल के माँ बाप के पास इतने भी पैसे नहीं थे जो आँचल की अच्छे घर मैं शादी कर सके मगर आँचल की किस्मत अच्छी थी के किसी शादी मैं राखी की माँ की नज़र आँचल पर पद गयी थी आवर आँचल की खूबसूरती देख कर राखी की माँ ने आँचल की शादी अपने बेटे से कर दी आवर फिर आँचल गरीब घर से आमिर घर मैं आ गयी मगर आँचल इतनी स्वाभिमान थी के अपने पति के घर के पैसे कभी अपने माँ बाप के पास नहीं लेकर गयी ...... आँचल दूकान पर जो रहती थी वह अपनी महीने की पैसे अलग से निकल लेती थी आवर कभी कभी अपने माँ को भेज देती थी ये बात राखी आवर उसके भाई को भी पता था ..... राखी कई बार बोल चुकी थी ये सरे पैसे तेरे है तू चाहे कुछ भी कर मगर आँचल फिर भी अपने मन की करती थी ... इस लिए आज राखी ने अपने पैसे आँचल को दिए
अर्जुन अपने बाइक निकल कर आँचल को पुकारता है आवर फिर अपनी ममी माँ को लेकर अपनी ममी माँ की गाँव के लिए निकल पड़ता है
अर्जुन आवर आँचल के जाने के बाद जाने के घर मैं सभी थोड़ी दुखी हो जाते है
वही गीता तो कुछ जयादा hi दुखी थी ..... क्यू के गीता रात मैं कितने सपने देख रही थी अर्जुन को अपने घर लेकर जाने की मगर सुबह होते hi गीता की सपना टूट गया था आवर गीता अपनी ममी के लिए दुखी हो रही थी आवर भगवन से दुआ कर रही थी ममी के पापा जल्द से जल्द ठीक हो जाये
दीदी मैं आप के लिए कॉफ़ी लेकर आई हुईं क्या आप कॉफ़ी पीना चाहेंगी .... अंजलि रूम मैं आकर कहती है
गीता को कॉफ़ी पिने का मन तो नहीं होता है मगर वह अंजलि से कॉफ़ी लेकर पिने लग जाती है गीता जानती है की अभी अंजलि भी दुखी है आवर अगर मैं इसके सामने दुखी रही तो ये रोने लग जाएगी .... क्यू की अंजलि कितनी भी नटखट थी मगर अपनी परिवार वाले को दुखी देख कर अंजलि की आँखें नाम हो जाती थी
अंजलि चल आज हम दोनों साथ मिल कर हर रूम की सफाई कर देते है पता नहीं ममी अब कब आएँगी ममी जब घर आएँगी तो उनेह बहुत काम करना पद जायेगा इस लिए हम पहले hi सफाई कर देते है .... गीता कहती है
अपनी दीदी की बात अंजलि को भी अच्छी लगती है तो अंजलि पहले अपनी ममी की रूम सफाई करने के लिए चली जाती है आवर गीता पहले वही रूम साफ़ कर ने लगती है अपने रूम साफ़ करते हुआ गीता को 1 घंटे लग जाते है गीता फिर अपनी नानी की रूम साफ़ करती है वही अंजलि भी अपनी ममी की रूम साफ़ कर के एक दूसरे रूम साफ करने लगती है
इधर गीता भी अपनी नानी की रूम साफ़ कर के अर्जुन के रूम मैं चली जाती है आवर साफ़ करने लगती है अर्जुन के रूम साफ करने के बाद गीता अब अर्जुन के बीएड की तरफ चली जाती है आवर अर्जुन के बीएड पर से सरे ठोसक हटाने लगती है आवर सभी बीएड के निचे गिरा देती है फिर बीएड सर कर के एक एक बिस्तर को जहर कर फिर से बीएड पर लगाने लगती है की तभी गीता की हाँथ मैं एक पेंटी आ जाती है गीता अभी उस पेंटी को देख hi रही होती है के गीता की नज़र निचे की तरफ जाती है जो कई साडी पेंटी ब्रा होती है गीता की आँखें बड़ी हो जाती है इतने सरे ब्रा पेंटी अर्जुन के बिस्तर मैं कैसे है क्या करता है अर्जुन इन सब का
तभी गीता को याद आता है ये तो वही ब्रा पेंटी है जो मैंने कल अपने लिए आवर अंजलि के लिए लेकर आई थी गीता मन मैं सोचती है गीता दीदी मैं बहुत थक गयी हुईं मैं नहाने जा रही हुईं प्लीज बाकि आप hi अकेले साफ कर दीजियेगा अंजलि की आवाज़ आती है जो गीता जल्दी से सभी ब्रा पेंटी वही तकिया के निचे छिपा देती है ताकि अंजलि रूम मैं आकर देख न ले आवर फिर गीता अर्जुन का रूम साफ़ कर के निकल जाती है
अर्जुन आवर आँचल को गाँव मैं पहुँचाने तक शाम हो जाती है आँचल अर्जुन को बाइक हॉस्पिटल की तरफ hi लेकर चलने को बोलती है तो अर्जुन भी गाड़ी हॉस्पिटल की तरफ लेकर चल देता है ..... आँचल जब हॉस्पिटल मैं जाती है तो अपनी माँ को देखती है जो एक जगह बैठ तड़प तड़प कर रो रही होती है वही साथ मैं एक औरत भी होती है जो वह भी तो रही होती है आँचल की माँ जैसे hi आँचल को देखती है भाग कर आँचल से लिपट जाती है आवर खूब रोने लगती है अपनी माँ को रट सुन कर आँचल भी रोने लगती है
बेटी तेरे पापा नहीं रहे मैं इस दुनियां मैं अकेली हो गयी तेरे सर पे बाप का साया नहीं रहा आँचल की माँ बोल कर आवर रोने लगती वही आँचल जब सुनती है उसके पापा नहीं रहे तो आँचल भी आवर रोने लगती है अपनी माँ से लिपट कर जो अर्जुन जाकर अंचल को संभालता है कुछ समय तक हॉस्पिटल मैं hi आँचल रोटी रहती है
तब तक वह लड़का हॉस्पिटल का कागज बना कर आँचल के पापा के बोड्डी घर जाने के लिए गाड़ी मैं रखवा देता है फिर अर्जुन अपनी ममी माँ आवर नानी को घर लेकर आया जाता है आवर अपनी गीता दीदी को फ़ोन कर के बता देता है की ममी माँ के पापा नहीं रहे जो गीता भी रोने लगती है आवर अपनी माँ आवर नानी को बता देती है फिर गीता आवर उसकी माँ नानी आवर अंजलि भी उसी वक़्त गाँव के लिए निकल पड़ती है
अभी थोड़ा दिन होता है तो उसी दिन अंतिम संस्कार करने को गोंवाले बोलते है गाँव के पास मैं आँचल के पापा का अंतिम संस्कार हो जाता है जो अर्जुन hi अपने नाना का अंतिम संस्कार करता है क्यू के अर्जुन के सिवा आवर कोई नहीं होता है क्यू के आँचल का कोई भाई भी नहीं थे तो अर्जुन को hi करने को आँचल कहती है वह रत सभी रट हुआ बिता देते है
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हहह क्या कर रहे हो छोडो नहीं तो मैं अभी सासु माँ को आवाज़ देकर बुला लुंगी फिर न कहना मैं बुरी हुईं ....... लड़की कहती है
वही लड़का फिर से लड़की को पकड़ लेता है आवर लड़की के पल्लू गिरा कर लड़की के बालों की खुशबु लेने लगता है जो लड़की अपनी आँखें बंद कर लेती है सिसक कर आवर अपनी दोनों हाँथ से अपनी जिस्म को छिपाने की कोशिश करने लगती है मगर लड़की की गोल नाभि आनर की तरह दिख रही होती है लड़की अपनी चुकी को छिपाने की कोशिश करती है मगर लड़की की काली बलाउज मैं एक चुकी उभर कर दिख रही होती है
लड़का फिर लड़की को उठा कर बीएड पर गिरा देते है
आवर आवर लड़की के पेट पर अपना हाँथ फेरने लगता है जो लड़की अपनी सर दूसरी तरफ कर के सिसकियाँ लेने लगी है अपना एक हाँथ अपनी चुकी पर रख देती है लड़का अब धीरे धीरे लड़की की कमर पर हाँथ फेरते हुआ लड़की की साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगता है जो लड़की आवर ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेन लगती है लड़की की छूट मैं एक मीठी मीठी गुदगुदी सी होने लगाती है लड़की लड़के का सर पकड़ कर अपनी साड़ी के ऊपर से hi छूट पर दबाने लगती है फिर लड़की लड़के का सर पकड़ कर उठा देती है आवर अपनी चुकी से होते हुआ मुंह के पास लेकर लड़के का मुंह चूसने लगती है तभी लड़का का लैंड लड़की को अपनी छूट पर महसूस होती है आवर लड़की एक आवर ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह लेकर सिसक पड़ती है
आस्था आस्था छोड़ मुझे क्या कर रही है
तभी आस्था हड़बड़ा कर उठ जाती है आवर सामने की तरफ देखती है तो उसकी दादी उसे गुस्से मैं घर रही होती है उसकी दादी की बॉल भी बिखरे हुआ होते है आवर उसकी दादी अपनी मुंह पोछ रही होती है आस्था मुंह बना कर देखने लगती है
कौन सी गंदे सपने देख रही थी तू जो इतनी गन्दी हरकत कर रही थी अभी से तुझे जवानी तंग करने लगी ..... दादी गुस्से मैं कहती है
क्या बोल रही हो दादी मैं तो आप के साथ hi कर रही थी आप जब रूम मैं आई तो मैं जाग रही थी आवर जब आप बीएड पर आई तो मैं आप के साथ थोड़ी मस्ती करने लगी कुछ भी बोलती हो लगता है आप की दिमाग अब ठीक से काम नहीं कर रहा है आओ न दादी एक बार फिर से करते है बड़ी मज़ा आने रहा था आप की होंठ चूसते हुआ ..... आस्था मुस्कुराते हुआ बोलती है आवर अपनी दादी की तरफ फिर से बढ़ने लगती है
तू सच मैं पागल हो गयी है मुझे कुछ नहीं करना है तू जल्दी से निचे है तेरे पापा बोलै रहे है ..... दादी बोलते हुआ रूम से निकल जाती है
वही आस्था मुस्कुरा पड़ती है आआआ
आज तो बच गयी अब मुझे अपनी रूम का गेट बंद कर के सोना चाहिए .... आस्था मन मैं सोचती है फिर आष्टा को सपना याद आता है
कहा पर हो तुम फिर कब मिलोगे तुम तुमने मेरी नींद भी चुरा लिया है अब तो तुम सपने मैं भी तुम आने लगे हो क्या मैं भी तुम्हारे सपने मैं आती हुईं मैं कह देती हुईं अपने सपने मैं मुझे hi लाना नहीं तो मैं तुमसे शादी भी नहीं करुँगी फिर तुम एक अच्छी आवर प्यारी बीवी को खो डोज ...... आस्था मन मैं मुस्कुराते हुई सोचती है फिर उठ कर बाथरूम मैं चली जाती