Teri tadap jaldi khatam nahi hogi - Page 2 - SexBaba
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Teri tadap jaldi khatam nahi hogi

उपडेट ___ 9

आँचल आवर राखी देवी रात मैं की लेस्बियन सेक्स करने के बाद थक कर एक दूसरे से लिप्त कर नंगी hi सो रही होती है तभी आँचल का फ़ोन बजने लगता है आँचल अंगड़ाई लेते हुआ उठ जाती है आवर फ़ोन को देखती है तो आँचल के घर के बगल का एक लड़के का फ़ोन होता है आँचल जल्दी से उठ कर फ़ोन उठा लेती है

बुआ आप जल्दी से घर आ जाइये दादा जी का हालत बहुत जयादा ख़राब है हम उनेह गाँव के hi हॉस्पिटल मैं लेकर ए है दादी बहुत जयादा रो रही है लड़का कहता है

वही लड़के की बात सुन कर hi आँचल सिसक के रोने लगती है आँचल की सिसक कर रोना सुन के राखी देवी भी उठ जाती है आवर आँचल को पकड़ के पूछने लगती है क्या हुआ

दीदी पापा का हालत ठीक नहीं है वह अभी हॉस्पिटल मैं है दीदी मुझे जल्दी से घर जाना होगा माँ बहुत दुखी है ... आँचल रोटी हुई कहती है

तू परेशां मत हो सब ठीक होगा कुछ नहीं होगा ौंकल को राखी कहती है

आँचल कुछ देर रोने के बाद बाथरूम मैं चली जाती है वही राखी देवी भी दूसरे रूम के बाथरूम मैं चली जाती है आवर फिर कॉफ़ी बनाने लगती है सबह जब अर्जुन की नींद खुलती है तो अर्जुन पहले बाथरूम जाता है फिर फ्रेश होकर रूम से बहार आता है तो देखता है उसकी ममी माँ रो रही होती है जो अर्जुन थोड़ा दर जाता है क्या हुआ है उसकी ममी माँ को

माँ क्या हुआ आप रो क्यू रही है प्लीज आप चुप हो जाइये प्लीज माँ क्या हुआ मुझे बताइये आप ... अर्जुन आँचल की आंसू पोछते हुआ कहता है

आँचल के पापा की तबियत ख़राब है आवर वह अभी हॉस्पिटल मैं है पीछे से ... राखी देवी कहती है

अर्जुन अपनी माँ की तरफ देखता तो नहीं है मगर अपनी माँ की बात सुन कर अर्जुन को बहुत दुःख होता है अर्जुन भाग कर अपने रूम मैं जाता है आवर अपने कुछ कपडे लेकर फिर अपनी ममी माँ के रूम मैं जाता है तो देखता है उसकी ममी माँ बैग राखी हुई है अर्जुन बैग उठा कर जल्दी से आँचल के पास आता है

माँ चलिए मैं भी आप के साथ चलूँगा .... अर्जुन अपनी ममी माँ से कहता है आवर बहार जाकर अपना बाइक निकलने लगता है

आँचल ये कुछ पैसे रख ले आवर वह जाने के बाद आवर भी पैसे की ज़रूरत हो तो मुझे फ़ोन करना मैं जल्द hi आवर पैसे भेज दूंगी ..... राखी एक नोटों को गद्दी देते हुआ कहती है

दीदी इतने पैसे क्या होंगे मेरे पास कुछ पैसे है काम चल जायेगा ..... आँचल कहती है

तू चुप कर कुछ भी मत बोल मैं सब जानती हुईं तू अपने बचाये हुआ पैसे hi लेकर सिर्फ जाएगी आवर मैं ये भी जानती हुईं तेरे घर की हालत क्या है मगर तेरे पापा मेरे पापा की तरह है समझी .... राखी कहती है

आँचल पैसे लेकर रट हुआ राखी से लिपट जाती है

आँचल की माँ बाप बहुत गरीब थे आँचल की शादी भी बिना कोई दहेज़ की हुई थी क्यू के आँचल के माँ बाप के पास इतने भी पैसे नहीं थे जो आँचल की अच्छे घर मैं शादी कर सके मगर आँचल की किस्मत अच्छी थी के किसी शादी मैं राखी की माँ की नज़र आँचल पर पद गयी थी आवर आँचल की खूबसूरती देख कर राखी की माँ ने आँचल की शादी अपने बेटे से कर दी आवर फिर आँचल गरीब घर से आमिर घर मैं आ गयी मगर आँचल इतनी स्वाभिमान थी के अपने पति के घर के पैसे कभी अपने माँ बाप के पास नहीं लेकर गयी ...... आँचल दूकान पर जो रहती थी वह अपनी महीने की पैसे अलग से निकल लेती थी आवर कभी कभी अपने माँ को भेज देती थी ये बात राखी आवर उसके भाई को भी पता था ..... राखी कई बार बोल चुकी थी ये सरे पैसे तेरे है तू चाहे कुछ भी कर मगर आँचल फिर भी अपने मन की करती थी ... इस लिए आज राखी ने अपने पैसे आँचल को दिए

अर्जुन अपने बाइक निकल कर आँचल को पुकारता है आवर फिर अपनी ममी माँ को लेकर अपनी ममी माँ की गाँव के लिए निकल पड़ता है

अर्जुन आवर आँचल के जाने के बाद जाने के घर मैं सभी थोड़ी दुखी हो जाते है

वही गीता तो कुछ जयादा hi दुखी थी ..... क्यू के गीता रात मैं कितने सपने देख रही थी अर्जुन को अपने घर लेकर जाने की मगर सुबह होते hi गीता की सपना टूट गया था आवर गीता अपनी ममी के लिए दुखी हो रही थी आवर भगवन से दुआ कर रही थी ममी के पापा जल्द से जल्द ठीक हो जाये

दीदी मैं आप के लिए कॉफ़ी लेकर आई हुईं क्या आप कॉफ़ी पीना चाहेंगी .... अंजलि रूम मैं आकर कहती है

गीता को कॉफ़ी पिने का मन तो नहीं होता है मगर वह अंजलि से कॉफ़ी लेकर पिने लग जाती है गीता जानती है की अभी अंजलि भी दुखी है आवर अगर मैं इसके सामने दुखी रही तो ये रोने लग जाएगी .... क्यू की अंजलि कितनी भी नटखट थी मगर अपनी परिवार वाले को दुखी देख कर अंजलि की आँखें नाम हो जाती थी

अंजलि चल आज हम दोनों साथ मिल कर हर रूम की सफाई कर देते है पता नहीं ममी अब कब आएँगी ममी जब घर आएँगी तो उनेह बहुत काम करना पद जायेगा इस लिए हम पहले hi सफाई कर देते है .... गीता कहती है

अपनी दीदी की बात अंजलि को भी अच्छी लगती है तो अंजलि पहले अपनी ममी की रूम सफाई करने के लिए चली जाती है आवर गीता पहले वही रूम साफ़ कर ने लगती है अपने रूम साफ़ करते हुआ गीता को 1 घंटे लग जाते है गीता फिर अपनी नानी की रूम साफ़ करती है वही अंजलि भी अपनी ममी की रूम साफ़ कर के एक दूसरे रूम साफ करने लगती है

इधर गीता भी अपनी नानी की रूम साफ़ कर के अर्जुन के रूम मैं चली जाती है आवर साफ़ करने लगती है अर्जुन के रूम साफ करने के बाद गीता अब अर्जुन के बीएड की तरफ चली जाती है आवर अर्जुन के बीएड पर से सरे ठोसक हटाने लगती है आवर सभी बीएड के निचे गिरा देती है फिर बीएड सर कर के एक एक बिस्तर को जहर कर फिर से बीएड पर लगाने लगती है की तभी गीता की हाँथ मैं एक पेंटी आ जाती है गीता अभी उस पेंटी को देख hi रही होती है के गीता की नज़र निचे की तरफ जाती है जो कई साडी पेंटी ब्रा होती है गीता की आँखें बड़ी हो जाती है इतने सरे ब्रा पेंटी अर्जुन के बिस्तर मैं कैसे है क्या करता है अर्जुन इन सब का

तभी गीता को याद आता है ये तो वही ब्रा पेंटी है जो मैंने कल अपने लिए आवर अंजलि के लिए लेकर आई थी गीता मन मैं सोचती है गीता दीदी मैं बहुत थक गयी हुईं मैं नहाने जा रही हुईं प्लीज बाकि आप hi अकेले साफ कर दीजियेगा अंजलि की आवाज़ आती है जो गीता जल्दी से सभी ब्रा पेंटी वही तकिया के निचे छिपा देती है ताकि अंजलि रूम मैं आकर देख न ले आवर फिर गीता अर्जुन का रूम साफ़ कर के निकल जाती है

अर्जुन आवर आँचल को गाँव मैं पहुँचाने तक शाम हो जाती है आँचल अर्जुन को बाइक हॉस्पिटल की तरफ hi लेकर चलने को बोलती है तो अर्जुन भी गाड़ी हॉस्पिटल की तरफ लेकर चल देता है ..... आँचल जब हॉस्पिटल मैं जाती है तो अपनी माँ को देखती है जो एक जगह बैठ तड़प तड़प कर रो रही होती है वही साथ मैं एक औरत भी होती है जो वह भी तो रही होती है आँचल की माँ जैसे hi आँचल को देखती है भाग कर आँचल से लिपट जाती है आवर खूब रोने लगती है अपनी माँ को रट सुन कर आँचल भी रोने लगती है

बेटी तेरे पापा नहीं रहे मैं इस दुनियां मैं अकेली हो गयी तेरे सर पे बाप का साया नहीं रहा आँचल की माँ बोल कर आवर रोने लगती वही आँचल जब सुनती है उसके पापा नहीं रहे तो आँचल भी आवर रोने लगती है अपनी माँ से लिपट कर जो अर्जुन जाकर अंचल को संभालता है कुछ समय तक हॉस्पिटल मैं hi आँचल रोटी रहती है

तब तक वह लड़का हॉस्पिटल का कागज बना कर आँचल के पापा के बोड्डी घर जाने के लिए गाड़ी मैं रखवा देता है फिर अर्जुन अपनी ममी माँ आवर नानी को घर लेकर आया जाता है आवर अपनी गीता दीदी को फ़ोन कर के बता देता है की ममी माँ के पापा नहीं रहे जो गीता भी रोने लगती है आवर अपनी माँ आवर नानी को बता देती है फिर गीता आवर उसकी माँ नानी आवर अंजलि भी उसी वक़्त गाँव के लिए निकल पड़ती है

अभी थोड़ा दिन होता है तो उसी दिन अंतिम संस्कार करने को गोंवाले बोलते है गाँव के पास मैं आँचल के पापा का अंतिम संस्कार हो जाता है जो अर्जुन hi अपने नाना का अंतिम संस्कार करता है क्यू के अर्जुन के सिवा आवर कोई नहीं होता है क्यू के आँचल का कोई भाई भी नहीं थे तो अर्जुन को hi करने को आँचल कहती है वह रत सभी रट हुआ बिता देते है

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हहह क्या कर रहे हो छोडो नहीं तो मैं अभी सासु माँ को आवाज़ देकर बुला लुंगी फिर न कहना मैं बुरी हुईं ....... लड़की कहती है

वही लड़का फिर से लड़की को पकड़ लेता है आवर लड़की के पल्लू गिरा कर लड़की के बालों की खुशबु लेने लगता है जो लड़की अपनी आँखें बंद कर लेती है सिसक कर आवर अपनी दोनों हाँथ से अपनी जिस्म को छिपाने की कोशिश करने लगती है मगर लड़की की गोल नाभि आनर की तरह दिख रही होती है लड़की अपनी चुकी को छिपाने की कोशिश करती है मगर लड़की की काली बलाउज मैं एक चुकी उभर कर दिख रही होती है

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लड़का फिर लड़की को उठा कर बीएड पर गिरा देते है

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आवर आवर लड़की के पेट पर अपना हाँथ फेरने लगता है जो लड़की अपनी सर दूसरी तरफ कर के सिसकियाँ लेने लगी है अपना एक हाँथ अपनी चुकी पर रख देती है लड़का अब धीरे धीरे लड़की की कमर पर हाँथ फेरते हुआ लड़की की साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगता है जो लड़की आवर ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेन लगती है लड़की की छूट मैं एक मीठी मीठी गुदगुदी सी होने लगाती है लड़की लड़के का सर पकड़ कर अपनी साड़ी के ऊपर से hi छूट पर दबाने लगती है फिर लड़की लड़के का सर पकड़ कर उठा देती है आवर अपनी चुकी से होते हुआ मुंह के पास लेकर लड़के का मुंह चूसने लगती है तभी लड़का का लैंड लड़की को अपनी छूट पर महसूस होती है आवर लड़की एक आवर ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह लेकर सिसक पड़ती है

आस्था आस्था छोड़ मुझे क्या कर रही है

तभी आस्था हड़बड़ा कर उठ जाती है आवर सामने की तरफ देखती है तो उसकी दादी उसे गुस्से मैं घर रही होती है उसकी दादी की बॉल भी बिखरे हुआ होते है आवर उसकी दादी अपनी मुंह पोछ रही होती है आस्था मुंह बना कर देखने लगती है

कौन सी गंदे सपने देख रही थी तू जो इतनी गन्दी हरकत कर रही थी अभी से तुझे जवानी तंग करने लगी ..... दादी गुस्से मैं कहती है

क्या बोल रही हो दादी मैं तो आप के साथ hi कर रही थी आप जब रूम मैं आई तो मैं जाग रही थी आवर जब आप बीएड पर आई तो मैं आप के साथ थोड़ी मस्ती करने लगी कुछ भी बोलती हो लगता है आप की दिमाग अब ठीक से काम नहीं कर रहा है आओ न दादी एक बार फिर से करते है बड़ी मज़ा आने रहा था आप की होंठ चूसते हुआ ..... आस्था मुस्कुराते हुआ बोलती है आवर अपनी दादी की तरफ फिर से बढ़ने लगती है

तू सच मैं पागल हो गयी है मुझे कुछ नहीं करना है तू जल्दी से निचे है तेरे पापा बोलै रहे है ..... दादी बोलते हुआ रूम से निकल जाती है

वही आस्था मुस्कुरा पड़ती है आआआ

आज तो बच गयी अब मुझे अपनी रूम का गेट बंद कर के सोना चाहिए .... आस्था मन मैं सोचती है फिर आष्टा को सपना याद आता है

कहा पर हो तुम फिर कब मिलोगे तुम तुमने मेरी नींद भी चुरा लिया है अब तो तुम सपने मैं भी तुम आने लगे हो क्या मैं भी तुम्हारे सपने मैं आती हुईं मैं कह देती हुईं अपने सपने मैं मुझे hi लाना नहीं तो मैं तुमसे शादी भी नहीं करुँगी फिर तुम एक अच्छी आवर प्यारी बीवी को खो डोज ...... आस्था मन मैं मुस्कुराते हुई सोचती है फिर उठ कर बाथरूम मैं चली जाती
 
उपडेट __ 10

राखी सुबह तक आँचल के गाँव पहुँच जाती है जो साथ मैं गीता अंजलि उसकी माँ आवर भाई रंजीत भी होता है राखी को जैसे hi पता चलता है राखी अपनी भाई को भी बता देती है जो रंजीत भी जल्दी से अपने घर आ जाता है आवर फिर वह से आँचल के घर आ जाते है आँचल अपनी पति रंजीत से लिपट कर रोने लगती है

वही अर्जुन जब अपने मां को देखता है तो अर्जुन को गुस्सा आने लगता है जो अर्जुन घर से निकल जाता है

अर्जुन गाँव मैं आने के बाद एक दूकान पर जाता है आवर एक सिगरेट का पैकेट लेता है आवर गाँव के बहार खेतों के तरफ जाने लगता है

ये मां को किसने बता दिया दुखी तो आयी हो रहा था जैसे उसे माँ की फिकर है मन तो कर रहा था घर से hi भगा दू मगर माँ आवर भी दुखी हो जाती मैं माँ को आवर दुखी नहीं कर सकता हुईं आवर वह घटिया औरत कैसे बन थान कर आई है जैसे शादी मैं आई है ..... अर्जुन अपनी माँ आवर मां को देख कर गुस्से मैं घर से निकल सोच रहा होता है

फिर खेतों मैं एक जगह पे बैठ कर सिगरेट पिने लगता है अर्जुन सिगरेट पि रहा होता है तभी अर्जुन को आष्टा की याद आती है आवर अर्जुन सिगरेट को देखने लगता है

कैसी पागल लड़की थी वह न मैं उसे जनता था न वह मुझे जानती थी फिर भी उसने मुझे तप्पड़ मार दिया .... अगर कोई लड़का होता तो सेल को इतना मरता की सिगरेट पिने वाली से दूर hi भागता रहता .... अर्जुन मन मैं कहता है

अर्जुन कुछ देर वही खेतों मैं बैठा रहता है कोई 2 घंटे के बाद अर्जुन घर जाता है अर्जुन जब घर जाता है तो देखता है सभी घर के आँगन मैं hi बैठे होते है अर्जुन सीधे रूम मैं घुस जाता है अर्जुन के रूम मैं जाते देख गीता आवर अंजलि भी रूम मैं चली जाती है गीता आवर अंजलि जब रूम मैं जाती है तो देखती है अर्जुन मायूसी से बैठा हुआ है तो गीता अर्जुन के पास hi बैठ जाती है आवर अर्जुन के सर पर हाँथ फेरने लगती है जो अर्जुन अपना सर गीता के जांघ पर रख कर लेट जाता है आवर गीता के जांघ पकड़ लेता है जो गीता समझ जाती है अर्जुन बहुत दुखी है

भाई जो होना था वह तो हो गया अब रोने से कुछ नहीं होने वाला है अभी ममी को कैसे चुप कराया है आवर फिर तुझे दुखी देखेंगी तो ममी फिर से रोने लग जाएँगी क्या तू एहि चाहता है ममी को फिर से रोलणा ..... गीता कहती है वही अंजलि भी अर्जुन के पास बैठ जाती है आवर अर्जुन के आँखों से आंसू पोछने लगती है

वही अर्जुन अपनी दोनों दीदी का प्यार देख कर चुप हो जाता है वह दिन भी उन्ही निकल जाता है

रात मैं गीता आवर राखी मिल कर खाना बना देती है आवर ज़िद्द कर के आँचल आवर उसकी माँ को खिलाती है फिर गीता आवर अंजलि अर्जुन को भी खिला देती है रात मैं अर्जुन आवर गीता अंजलि रूम मैं सो जाते है आवर एक रूम मैं आँचल उसकी माँ आवर राखी आवर उसकी माँ 4 एक रूम मैं सो जाती है आवर रंजीत बहार एक खत पर सो जाता है क्यू के आँचल के घर मैं बस दो hi रूम होते है रात मैं कोई सोता नहीं है सभी अपने आप मैं दुखी होते है

सुबह मैं सभी उठ कर एक एक कर के फ्रेश होते है जो घर मैं hi एक बाथरूम होते है जो कपडे से चरों तरफ से घेरा होता है

आँचल अपनी माँ को भी साथ लेकर घर चल अब यह अकेली कैसी रहेंगी वह ..... अर्जुन की नानी कहती है जो आँचल हां मैं सर हिला देती है दो पहर तक सभी घर के लिए निकल जाते है

आँचल की माँ साथ जाने के लिए राज़ी नहीं हो रही होती है मगर आँचल बहुत ज़िद्द करती है आवर रोने लगती है तब उसकी माँ जाने के लिए मन जाती है

रात के 10 :पं तक घर आ जाते है सभी थके हुआ भी रहते है तो अपने अपने रूम मैं चले जाते है अगली सुबह

अर्जुन उठ कर पहले अपनी ममी के रूम मैं जाता है तो देखता है उसकी ममी माँ उदास बैठी हुई है तो अर्जुन भी अपनी ममी के गॉड मैं सर रख कर बीएड पर लेट जाता है जब आँचल को जब अर्जुन का अहसास होता है तो आँचल अपनी आँखों से आंसू पोछ लेती है आवर अर्जुन के सर पर हाँथ फेरने लगती है

क्यू के आँचल को अहसास हो जाता है अर्जुन भी उसे देख कर दुखी है

आज बड़ी जल्दी उठ गया मेरा राजा बीटा आवर मुझे गुड मॉर्निंग किश भी नहीं दिया ..... आँचल अपनी चहरे पर नाराजगी लेकर बोलती है

जो अर्जुन उठ कर अपनी ममी माँ के गलों पर किस कर देता है फिर अपनी ममी के गॉड मैं सर रख देता है

जो आँचल थोड़ी मुस्कान के साथ अर्जुन के माथा को चुम लेती है

चलो अब जल्दी से फ्रेश होकर आई मैं कॉफ़ी बना देती हुईं .... आँचल कहती है आवर जाते जाते हुआ फिर से अर्जुन के माथा चुम लेती है

आँचल क्या कर रही है जो होना था वह हो गया अब से तुझे दुखी नहीं रहना चाहिए तू जानती है अर्जुन तुझे अपनी माँ से भी कही जयादा प्यार करता है वह तुझे दुखी देख कर खुद भी दुखी हो जाता अभी देखि नहीं कैसे बच्चे की तरह आकर तेरी गॉड मैं गिर गया वह पहले से hi दुखी है जो तू खुद दुखी होकर उसे आवर भी दुखी कर रही है ..... आँचल किचेन मैं होती है आवर अर्जुन के बारे मैं सोच रही होती जो आँचल की आंसू निकल जाते है मगर आँचल अपनी आंसू पोछ लेती है आवर सोच लेती है अर्जुन के सामने दुखी नहीं होगी

आँचल कॉफ़ी बना रही होती है तो वह राखी भी आ जाती है फिर दोनों साथ मैं कॉफ़ी बना कर पीती है फिर आँचल कॉफ़ी लेकर अर्जुन के पास चली जाती है तो देखती है अर्जुन अभी भी रूम मैं उदास hi बैठा हुआ है तो आँचल भी अर्जुन के पास बैठ जाती है

ओह मेरा राजा बीटा अब क्यू उदास है देख तेरी माँ तो अब हस्स रही है अच्छा मेरे राजा बेटे को दूध पीना है चल मैं अभी दूध पीला देती हुईं ...... आँचल बोलते हुआ अपनी आँचल हटाने लगती है

तभी अर्जुन अपनी मणि माँ को मरने लगता है जो आँचल हसने लगती है आवर साथ मैं अर्जुन भी शरमाते हुआ हस्स देता है

माँ अब मैं छोटा बच्चा नहीं हुईं अब मैं बड़ा हो गया हुईं जब मैं छोटा था तो बोल डाटा था समझी .... अर्जुन शरमाते हुआ कहता है

ओह्ह ओह्ह मेरा बीटा मगर आज भी मेरा राजा बीटा मेरे लिए छोटा hi है ..... वैसे मैं अपने बेटे को दूध नहीं पिलाने वाली थी क्यू के दूध तो है नहीं इसमें अगर होती तो मैं कब की पीला देती ताकि मेरा राजा बीटा पूरी तरह से मेरा बीटा हो जाये .... आँचल थोड़ी मायूसी से कहती है

माँ आप क्या बोल रही मैं सिर्फ आप का बीटा हुईं समझी आप hi मेरी माँ हो .... अर्जुन आँचल से लिपट कर बोलता है जो आँचल की ख़ुशी मैं आंसू निकल जाती है आँचल अर्जुन के सर पर चूमने लगती है

हां तू बस मेरा बीटा है बस मेरा तू तो मुझे माँ की कमी कभी महसूस नहीं होने दिया तुझे दुखी देखती हुईं तो मेरे दिल जलने लगती है भले hi मैंने तुझे जनम नहीं दिया है मगर तेरी दिल की हर बात मुझे समझ आती है तू बस मेरा बीटा है ...... आँचल मन मैं सोचती है

चलो दूध नहीं पीना तो जल्दी से कॉफ़ी पियो ठंडी हो रही है मैं नाश्ता लगा देती हुईं तब तक ..... आँचल कहती है जो अर्जुन दूध की बात सुन कर मुस्कुरा देता है

वही आँचल थोड़ी शर्मा कर चली जाती है

इसी तरह कुछ दिन बिट जाता है राखी आवर गीता अनजलि आवर रंजीत फिर से गाँव चले जाते है आँचल अब पहले से ठीक हो चुकी होती है आवर अपनी माँ का भी पूरा ख्याल रखती है जो उसकी माँ भी थोड़ी थोड़ी खुश रहने लगती है

अब वह दिन भी आ जाता है जब अर्जुन को सोल्लगे मैं जाना होता है अब अर्जुन सोचने लगता है किस सोल्लगे मैं वह एडमिशन ले क्यू की अर्जुन को अपनी गीता दीदी की भी याद आने लगता है वह गाँव मैं एडमिशन लेने को बोल चुकी थी आवर अर्जुन भी अपनी दीदी से बोल चूका था अगर माँ गाँव जाएँगी तभी वह गाँव जायेगा इस लिए अर्जुन एडमिशन कहा ले सोचने लगा था फिर अर्जुन सोचता है माँ से बात कर hi लेता हुईं

मगर फिर अर्जुन रुक जाता है अगर ममी माँ फिर से दुखी हो गयी तो मैं उस घटिया औरत आवर कमीना मां के बारे मैं बता कर ममी माँ को दुखी नहीं कर सकता हुईं मैं बस माँ से पूछ लेता हुईं क्या वह गाँव जाएँगी अगर हां बोलेंगी तो मैं उनेह बोल दूंगा मैं नहीं जाऊंगा फिर सायद माँ नहीं जाएगी

एहि सोचते हुआ अर्जुन अपनी माँ के रूम मैं चला जाता है

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इधर आस्था आज अपने रूम मैं बहुत उदास बैठी होती है जैसे आस्था का कोई कीमती चीजें खो गयी है

क्या हुआ महारानी जी क्या सोच रही है आप आष्टा के रूम मैं एक लड़की आकर बोलती है

कुछ नहीं नीता तू किश सोल्लगे मैं अपना एडमिशन करवा रही है ... आस्था कहती है

किश सोल्लगे मैं क्या मेरी दोस्त की इतनी बड़ी सोल्लगे है उसी मैं एडमिशन लुंगी ये अपना सोल्लगे है तो कोई परेशानी भी नहीं होगी नहीं तो सहर के सोल्लगे मैं गयी तो पता नहीं कैसे कैसे आवारा लड़के मिलेंगे जो परेशां करेंगे मैं तो गाँव मैं hi रहूंगी तू सहर जाएगी क्या ..... नीता कहती है

पता नहीं मैं समझ नहीं पा रही मैं सहर जाने के लिए hi सोच रही हुईं ..... आस्था कहती है

तू सहर क्यू जाना चाहती है यार आवर सच कहु तो मैं सहर जाना चाहूंगी भी तो नहीं जा सकती क्यू की तू जानती है मेरे पास पैसे नहीं है मेरे माँ कैसे कैसे कर के घर चलती है बाबू तो सारा कमाई सरब मैं उदा देते है .... नीता कहती है

मैं सहर नहीं जाउंगी तो मेरा हीरो कैसे मिलेगा वह सहर मैं hi तो मुझे मिला था मैं भी कितनी पागल हुईं मैं थोड़ा रुक कर नाम भी नहीं सुन पाई पता नहीं कहा होगा वह वैसे लग तो रहा था वह पढ़ने वाला लड़का है मैं एक बार सहर जाउंगी अगर मिला तो ठीक नहीं तो मैं अपने hi सोल्लगे मैं पढूंगी ..... आस्था मन मैं सोचती है

अब क्या सोचने लगी बता मुझे सहर के सोल्लगे मैं जाएगी या एहि रहेगी .... नीता फिर कहती है

नीता मैं तुझे कुछ दिन के बाद बता दूंगी वैसे मैं पापा से बात कर लुंगी तेरा एडमिशन हो जायेगा आवर कोई भी पैसे नहीं लगेगा तेरा ..... आस्था कहती है

थैंक्स आष्टा तू मेरी बहुत मदद करती है मैं तेरी वजह से पढ़ रही हुईं .... नीता आष्टा के सामने हाँथ जुड़ कर कहती है

पागल है क्या हाँथ क्यू जुड़ रही है जब तुझे अच्छी नौकरी मिल जाएगी तो मेरी सरे पैसे मुझे दे देना समझी ....... आष्टा कहती है जो नीता मुस्कुरा पड़ती है
 
उपडेट __ 11

अर्जुन जैसे hi आँचल की रूम मैं जाता है गेट पर hi रुक जाता है अर्जुन के पेअर भी थोड़ी देर के लिए डगमगाने लगता है

क्यू के सामने आँचल अभी सिर्फ पेटीकोट आवर ब्रा मैं होती है आवर बलाउज पहन रही होती है

अर्जुन क्या हुआ कोई काम है बीटा .... आँचल अर्जुन को सीसे मैं देख कर बोलती है आवर अपनी बलाउज पहन कर घूम जाती है ..... आँचल को थोड़ी शर्म तो आ रही होती है अर्जुन के अचानक आने से मगर आँचल मुस्कुरा कर बोलती है ताकि अर्जुन को बुरा न लगे सोच कर के अपनी माँ को इस हालत मैं देख लिया

सॉरी माँ मुझे पता नहीं था आप इस हालत मैं होंगी आप कपडे पहन लीजिये मैं बाद मैं आता हुईं .... अर्जुन अपना सर निचे कर के बोलता है आवर जाने लगता है

कोई बात नहीं अर्जुन बीटा तुझे शर्मिंदा होने की ज़रूरत नहीं है तू मेरा बीटा है आवर माँ को इस हालत मैं कभी कभी बीटा देख लेते है माँ बेटे के बिच ये कोई बड़ी बात नहीं है चल बोल क्या बात है ...... आँचल बोलते हुआ साड़ी भी पहन लेती है आवर अर्जुन के पास आ जाती है

ूम्मा मेरी सबसे अच्छी आवर प्यारी माँ मैं इस लिए आप को बहुत प्यार करता हुईं आप कभी मुझे शर्मिंदा नहीं होने देती है ..... अर्जुन आँचल के गाल को चूमते हुआ कहता है ...... जो आँचल भी मुस्कुरा देती है .... फिर अर्जुन आँचल को साथ लेकर बीएड पर बैठ जाता है

माँ आप जानती है अब मुझे सोल्लगे मैं एडमिशन लेना है मगर मैं समझ नहीं पा रहा हुईं के किस सोल्लगे मैं एडमिशन लू ...... गीता दीदी चाहती है मैं गाँव के hi सोल्लगे मैं एडमिशन लू मगर मैं गाँव नहीं जाना चाहता हुईं आवर मैंने गीता दीदी से भी बोल दिया है अगर आप साथ गाँव मैं चलेंगी तभी मैं जाऊंगा आप प्लीज गीता दीदी से बोल देना आप नहीं जाएँगी प्लीज प्लीज मेरी अच्छी माँ प्यारी माँ प्लीज ..... अर्जुन आँचल के गाल को पकड़ कर कहता है जो आँचल मुस्कुरा पड़ती है

ओह्ह मेरे बच्चे को इतना परेशां कर दिया है गीता ने मैं तो साफ साफ बोल दूंगी मैं गाँव नहीं जाउंगी अपने अर्जुन के लिए ...... लेकिन मैं भी चाहती हुईं तुम गाँव मैं जाकर पढाई करे क्यू की तू बचपन से अपनी दीदी से दूर रहा है ... वह दोनों भी तुमसे बहुत प्यार करती है .... उनेह भी अपने भाई के साथ रहने का दिल करता होगा मैं देखती हुईं जब भी दोनों तेरे पास आती है बहुत खुश होती है आवर तेरे भी चहरे पर ख़ुशी आ जाती है .... मैं नहीं जानती तेरे आवर दीदी के बिच मैं क्या हुआ है मैं बस एहि जानती हुईं तू दीदी से इस लिए गुस्सा है के ... दीदी ने तुमको पढाई करने के लिए हॉस्टल मैं भेज दिया मगर बीटा इसमें गीता आवर अंजलि का क्या कसूर है उनेह भाई की ज़रूरत है एक बार फिर से सोच ले अगर तेरा जाने का मन नहीं है तो तेरी ये माँ हमेशा तेरा hi साथ देगी क्यू की तू मेरा राजा बीटा है ....... आँचल ये जानती थी अर्जुन राखी से क्यू गुस्सा है मगर आँचल अभी जयादा कुछ नहीं कहती अर्जुन से बस गीता आवर अंजलि के प्यार के बारे मैं बताती है ... आवर कहते हुआ अर्जुन के सर पर हाँथ फेर देती है

अपनी ममी माँ की बात को सुन कर अर्जुन भी अपनी गीता दीदी आवर अंजलि दीदी के बारे मैं सोच कर थोड़ा उदास हो जाता है ....... क्यू की जो भी गलती की थी वह बस अर्जुन की माँ की थी उसमे गीता आवर अंजलि की कोई गलती नहीं थी जो अर्जुन को अपनी दोनों दीदी के लिए बुरा लगता है

माँ अगर आप चाहती है तो मैं गाँव जाऊंगा मगर मैं उस औरत से कोई बात नहीं करूँगा आवर आप भी बोल दीजियेगा वह मुझसे कोई बात न करे नहीं मैं यह आ जाऊंगा .... अर्जुन कहता है

ओह मेरा राजा बीटा मैं आज बहुत खुश हुईं मेरा बीटा हर किसी का ख्याल रखता है ..... आँचल अर्जुन के माथे को चूमते हुआ कहती है .... अर्जुन भी अपनी ममी माँ से लिपट जाता है

अर्जुन बीटा मैं कभी तुझसे पूछी नहीं मगर क्या सच मैं तू दीदी से इस लिए गुस्सा रहता है की दीदी ने तुझे हॉस्टल भेज दिए पढाई करने के लिए ....... आँचल अभी पूछ तो ली मगर आँचल का दिल बड़ी ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगती है ये सोच कर की क्या अर्जुन आज दीदी आवर उसके पति के बारे मैं बता देगा फिर मैं कैसे अर्जुन के सामने अनजान बनाने की नाटक करुँगी

माँ वह औरत मुझे कितनी मरती थी मैं उस वक़्त छोटा था कभी कभी नदी नहाने चला जाता था तो वह मुझे प्यार से समझा भी तो सकती थी मगर नहीं वह बस मुझे मरने लगती थी आवर फिर मुझे हॉस्टल भी भेज दी वह बहुत गन्दी औरत है .... अर्जुन आज भी नहीं बता पता है अपनी माँ की करतूत अपनी ममी माँ को

वही अर्जुन की बात सुन कर आँचल बहुत खुश होती है ये जान कर के अर्जुन सिर्फ मेरे लिए सच नहीं बता प् रहा है .... आवर आँचल अर्जुन को अपनी साइन से लगा लेती है आवर आँचल की आँखें नाम भी हो जाती है

अर्जुन भी अपनी ममी माँ को बड़ी hi ज़ोर से पकड़ लेता है अर्जुन की भी आँखें नाम हो जाती है .... माँ मुझे मांफ कर दीजियेगा मैं आप को ये नहीं बता सकता मेरी घटिया मैं आवर आप के पति के बिच एक घटिया रिस्ता है मैं आप को बता कर दुखी नहीं देख सकता हुईं मैं बस आप की चहरे पर मुस्कान देखने चाहता हुईं जैसे आप मुझे बचपन से कभी दुखी नहीं होने दी मैं भी आप को अब दुखी नहीं कर सकता हुईं .... अर्जुन मन मैं सोचता है

ठीक है मैं सासु माँ से बात करती हुईं अगर वह भी साथ मैं चलेंगी तो अच्छा रहेगा नहीं तो फिर तुझे अकेले hi जाना होगा .... आँचल कहती है

माँ मैं कुछ नहीं जनता अगर नानी नहीं जाएँगी फिर भी आप को साथ जाना होगा तभी मैं जाऊंगा .... अर्जुन कहता है

ठीक है मेरे पल्लू के पीछे रहने वाला बदमाश बीटा मैं भी चलूंगी ... आँचल हस्ते हुआ कहती है .. जो अर्जुन भी मुस्कुरा देता है

फिर अर्जुन अपनी ममी माँ की रूम से निकल कर दूकान पे चला जाता है दूकान पर अभी नानी बैठी होती है अर्जुन भी अपनी नानी के पास बगल मैं बैठ जाता है

नानी आप जाकर आराम कीजिये मैं दूकान पर अभी रहता हुईं .... अर्जुन कहता है

ओह ओह मेरा प्यारा बीटा अपनी नानी का कितना ख्याल रखता है मैं बस एक दोस्त की इंतज़ार कर रही हुईं उसके आने के बाद चली जाउंगी .... अर्जुन की नानी कहती है

तो अर्जुन भी बैठ कर फ़ोन चलने लगता है

थोड़ी hi देर मैं एक औरत आती है जो अर्जुन के नानी की उम्र की होती है अर्जुन भी उस औरत को जनता है वह अर्जुन की नानी की सहेली होती है अर्जुन एक दो बार उस औरत के घर जा चूका होता है अपनी नानी के साथ अर्जुन

अर्जुन उस औरत को देख कर पेअर छूने वाला होता है की वह औरत अर्जुन को गाला लगा लेती है अर्जुन जैसे hi औरत के गले लगता है औरत की मोती चुकी अर्जुन के साइन मैं डाब जाती है जो अर्जुन को बड़ी hi अजीब लगता है औरत की मोती चुकी थोड़ी निचे की तरह गिरी होती है तो अर्जुन समझ जाता है वह अनादर ब्रा नहीं पहनी है अर्जुन फिर अलग होकर बैठ जाता है आवर वह औरत भी पास मैं बैठ जाती है

सिला तेरा अर्जुन तो अब जवान हो गया है लगता hi नहीं ये अभी 18 सल्ल का है .... औरत कहती है

सही बोल रही है अर्जुन बिलकुल अपने पापा की तरह लम्बा हो गया है हर कोई एहि कहता है अर्जुन बड़ा हो गया है बोल क्या बात है तेरा बीटा बोल रहा था तू मुझसे मिलने के लिए आएगी ..... अर्जुन की नानी कहती है

क्या बताओ सिला उसकी बीवी कब से परेशां कर के राखी है मेरी ब्रा नहीं है पेंटी नहीं साड़ी नहीं वह नहीं ये नहीं है बस रोटी रहती है कह कह कर आवर मेरा बीटा उसके लिए कुछ लेन मैं शर्माता है जब के उसके बेटे की शादी तक हो गयी है ...... वह औरत कहती है

अच्छा तुझे कपडे चाहिए बोल क्या क्या चाहिए अर्जुन निकल देगा ..... अर्जुन की नानी कहती है

एक दो साड़ी आवर ब्रा पेंटी बस एहि चाहिए अर्जुन बीटा ज़रा जल्दी से निकल दे मुझे अभी मार्किट भी जाना है .... औरत कहती है

अर्जुन बीटा ब्रा पेंटी निकल कर दिखा इसे आवर मैं साड़ी दिखा देती हुईं ... अर्जुन की नानी कहती है

बार बार ब्रा पेंटी सुन कर अर्जुन को कुछ शर्म आने लगता है आएसा नहीं था के अर्जुन ब्रा पेंटी पहली बार किसी को दिखने वाला था मगर अपनों के सामने अर्जुन कभी ब्रा पेंटी नहीं दिखता था क्यू के उस वक़्त अर्जुन अपनी ममी माँ या वह दोनों औरत को बोल देता था मगर अभी अर्जुन hi दूकान पर था आवर उसकी नानी भी बोल रही थी दिखने के लिए तो अर्जुन उठ कर ब्रा पेंटी का डिब्बा निकल कर औरत को दे देता है औरत उसमे से ब्रा पेंटी निकल लेती है

अर्जुन बीटा ज़रा 38 की ब्रा आवर 42 की पेंटी देना .... औरत कहती है

नानी जी ममी की वही साइज होती है ... अर्जुन बोल पड़ता है

अरे बीटा तेरे ममी के लिए नहीं मैं खुद के लिए मांग रही हुईं देख नहीं रहा कितनी बड़ी है जी निचे की तरफ गिर रही है ...... औरत अपनी चुकी अर्जुन को देखते हुआ बोलती है

जो अर्जुन शर्मा जाता है आवर अर्जुन फिर औरत की चुकी की तरफ देखता है तो औरत की चुकी बहुत बड़ी होती है आवर पल्लू को हटाने से औरत की चुकी देख कर अर्जुन की हालत ख़राब होने लगता है आवर लैंड भी खड़ा होने लगता है अर्जुन बस एक तक औरत की चुकी को देखने लगता है

क्या कर रही है कामिनी वह अभी बच्चा है शर्म नहीं आती तुझे इस तरह देखते हुआ तू अभी भी बेशर्म की बेशर्म hi रह गयी है .... अर्जुन की नानी कहती है आवर पल्लू को औरत के साइन पर दाल देती है

वही अर्जुन अपनी नानी की बात सुन कर अपनी नज़रे हटा लेता है

अरे इसमें बेशर्मी की बात कहा से आ गयी अर्जुन मेरा भी पोते की तरह है देख भी लिया तो क्या होगा अगर तू ये सोच कर दुखी हो रही है की तेरा नहीं देख रहा तो तू भी दिखा दे न काफी वक़्त से तूने किसी को नहीं दिखाई होगी ....... औरत मुस्कुराते हुआ बोलती है

जो अर्जुन की नानी भी थोड़ी मुस्कुरा देती है

तू कभी नहीं सुधरने वाली है अर्जुन बीटा तू शर्मा मत ये भी तेरी नानी की तरह है ये बस तेरे से मस्ती कर रही है ..... अर्जुन की नानी कहती है

फिर अर्जुन भी जल्दी जल्दी ब्रा पेंटी देकर हिसाब जोड़ता है तब तक आँचल भी दूकान मैं आ जाती है तो अर्जुन फिर दूकान से निकल जाता है

आँचल तेरा बीटा बिलकुल शर्मीला है ज़रा उसे हुसियार बना आयी तो लड़कियां तेरे बेटे को बहुत परेशां करेंगी .... औरत कहती है

आंटी मेरा बीटा बहुत समझदार है आवर अपनों की बहुत इज़्ज़त करता है रही लड़कियों की बात तो जब किसी लड़की की मेरे बेटे से सामना होगा तो मेरा बीटा उस लड़की को शर्माने पर मज़बूर कर देगा मुझे अपने बेटे पर पूरा यकीन है ..... आँचल बहुत गर्व के साथ कहती है

जो औरत भी समझ जाती है आँचल किस बारे मैं बोल रही है अर्जुन की नानी तो मुस्कुरा देती है मगर वह औरत चुप हो जाती है

अर्जुन दूकान से निकल कर पान की दूकान पर जाता है आवर एक सिगरेट का पैकेट लेकर पार्क की तरफ निकल जाता है

बाप रे कितनी बड़ी बड़ी थी उस नानी की चुकी मेरे दोनों हाँथ मैं भी नहीं आती साला मेरा तो लैंड भी खड़ा होने लगा था मन कर रहा था पकड़ कर मसल दू छी छियई मैं क्या सोचने लगा वह मेरी नानी की दोस्त थी

अर्जुन सिगरेट पि रहा होता है आवर औरत की चुकी के बारे मैं सोच रहा होता

अर्जुन सिगरेट पिने के बाद कुछ देर पार्क मैं रहता है फिर घर के लिए निकल जाता है घर जाने के बाद आँचल अर्जुन को खाना खिलाती है फिर अर्जुन अपनी रूम मैं जाकर सो जाता है

अगली सुबह आँचल अपनी सास से गाँव जाने के बारे मैं पूछती है जो उसकी सास साफ मन कर देती है आवर मगर ये भी कहती है तुम जाना चाहो तो जा सकती हो आँचल को उस वक़्त कुछ समझ मैं नहीं आता है इस लिए अपने सास से कुछ नहीं बोलती है आवर अपना काम करने लगती है

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गाँव मैं आज एक घर मैं शादी होती है जो अभी उस घर मैं गीता आवर अंजलि भी आई होती है

दीदी कितनी अच्छी लग रही है न शादी की जुड़ा मैं कविता .... अंजलि कहती है

हां बहुत खूबसूरत लग रही है एक दिन तू भी इससे भी कही जयादा खूबसूरत लगेगी जब तेरी शादी होगी मैं अपने हांथों से अपनी बहन को सजाऊंगी ..... गीता कहती है

बक दीदी पहले आप की शादी होगी आवर आप की शादी जब होगी तो मैं आवर अर्जुन खूब डांस करेंगे .... दीदी अभी यह अर्जुन होता तो कितना अच्छा होता है हम भाई बहन खूब मस्ती करते ..... अंजलि थोड़ी उदासी से कहती है

तो हम्हरा साथ मस्ती करलो न हम तुम्हारे भाई बन जाते है

जब गीता आवर अंजलि बाते कर रही होती है के वही कुछ लड़के आ जाते है आवर उनमे से एक लड़का बोल पड़ता है

देख सोनू बकवास मत कर आवर तुझे मस्ती करनी है तो अपनी बहन के साथ जाकर कर नहीं तो अपनी माँ के साथ कर मगर जा यह से ..... गीता गुस्से मैं कहती है

तेरी क्यू फैट रही है मैं तो अंजलि से बोल रहा हुईं अगर तुझे भी मस्ती करनी है तो चल मेरे घर आज कोई नहीं है तेरी साडी गर्मी निकल दूंगा बड़ी गर्म लग भी रही है हहहह aaaaaaaaaa कदम से तुम दोनों की जिस्म कमल की है .... लड़का एक हहहहहह लेते हुआ बोलता है

मगर फिर चीख भी पड़ता है ..... क्यू की अंजलि एक खींच के लगा देती है आवर फिर मरने वाली होती है तभी दूसरा लड़का अंजलि के हाँथ पकड़ लेता है अंजलि उसे भी मरने लगती है

वही सोनू अंजलि को मरने वाला होता है मगर सामने देख कर रुक जाता है

क्यू की सामने गीता के मां आ रहे होते है

चलो अभी बाद मैं इसका बदला लूंगा इस साली से ... लड़का बोल कर चला जाता है

गीता आवर अंजलि भी अपने मां के साथ उसी वक़्त घर आ जाती है

दीदी हर वक़्त वह कुछ न कुछ बोलता hi रहता है एक दिन मैं उसकी जान ले लुंगी देख लेना आप ..... वह समझता है मैं लड़की हुईं तो कुछ नहीं करुँगी .... कास अर्जुन रहता तो कितना अच्छा रहता .... अंजलि उदासी से बोलती है

कोई बात नहीं आज तुमने बहुत अच्छा किया अब वह तुमसे दूर hi रहेगा मुझे यकीन है चलो अब सो जाओ ... गीता कहती है

आवर दोनों बहन साथ मैं सो जाती है बेचारी शादी भी ठीक से नहीं देख पति है
 
उपडेट __ 12

नेक्स्ट मॉर्निंग अंजलि सुबह hi उठ जाती है तो देखती है उसकी दीदी बिंदास सो रही है मगर उसकी गीता दीदी की मैक्सी गांड तक ऊपर चली गयी है आवर गीता की बड़ी गांड उभर कर दिख रही है अंजलि भी अपनी गीता दीदी की गांड घर कर देखने लगती है फिर गीता के चहरे की तरफ फिर से देखती है जो गीता की आँखें बंद होती है

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उफ्फ्फ्फ़ माँ दीदी की गांड कितनी बड़ी है आएसा लग रहा है ये दीदी की नहीं माँ की गांड है दीदी अभी से hi औरत की तरह दिखने लगी है .. दीदी अंदर पेंटी भी पहनी हुई है की नहीं दीदी अभी सो रही है क्या मैं देख लू दीदी पेंटी पहनी हुई है की नहीं ... अंजलि मन मैं सोचती है आवर फिर अपना हाँथ गीता की गांड पे रख कर मैक्सी हटाने लगती है अंजलि के हाँथ भी कैफ रहे होते है आवर थोड़ी दर भी रही होती है ... ये सोच के की दीदी उठ गयी तो क्या कहेंगी फिर भी अंजलि मैक्सी को थोड़ी ऊपर उठा hi देती है

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गीता की पेंटी मैं गांड को देख कर अंजलि की आँखे भी बड़ी हो जाती है उफ़ माँ सच मैं दीदी की गांड बहुत बड़ी है मगर अपने हाँथ मैक्सी से नहीं हटती है ... अंजलि मन मैं सोचती है .... तभी गीता पलट जाती है ...... जो अंजलि दर कर जल्दी से मैक्सी निचे कर के फिर से लेट जाती है आवर अपनी आँखें बंद कर लेती है ... अंजलि को लगता है गीता को पता चल गया है जो अंजलि डरने लगती है

क्या देख रही थी मेरी बहन अभी ... गीता बोल पड़ती है

अपनी गीता दीदी की बात सुन अंजलि की धड़कन तेज चलने लगती है अंजलि की आवाज़ भी नहीं निकल प् रही होती है .... ये हरकत आज पहली बार अंजलि ने की थी जो पकड़ी गयी थी

कुछ नहीं दीदी वह आप की मैक्सी ऊपर की तरफ चली गयी थी जो मैं नीच कर रही थी .... अंजलि डर्टी हुई कहती है

ओह्ह अच्छा मगर मुझे लगा मेरी छोटी बहन कुछ आवर देख रही थी ...... गीता थोड़ी मन मैं मुस्कुरा कर कहती है .... क्यू की गीता भी पहले hi उठ गयी थी गीता अंजलि के साथ hi उठने वाली थी मगर फिर अंजलि को अपनी जिस्म को घूरते देख गीता उठ नहीं पति है आवर अपनी आँखें बंद कर लेती है

दीदी मैं सच कह रही हुईं मैं आप की मैक्सी ठीक कर रही थी दीदी मैं सच बोल रही हुईं ..... अंजलि बहुत hi धीरे आवर नरमी से बोलती है

तू इतनी दर क्यू रही है कुछ देख भी रही होगी तो मैं अपनी छोटी बहन को थोड़ी कुछ बोलने वाली थी तू मुझसे इतनी डरा नहीं कर समझी ूउम्मम्मा तू मेरी प्यारी बहन है ... गीता अंजलि को चूमते हुआ कहती है जो अंजलि भी मुस्कुरा देती है

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पूनम क्या कर रही है चल न जल्दी कितनी कहती है मोती हो जाएगी तू फिर तेरी शादी करने मैं बहुत परेशानी होगी मोती ..... आस्था कहती है जो कब से अपनी मां की लड़की को बोल रही थी साथ चलने के लिए

दीदी आप इतनी क्यू परेशां हो रही है अभी थोड़ी शाम हो जाने दीजिये फिर पार्क की तरफ चलते है अभी तो धुप भी इतनी तेज़्ज़ लग रही है थोड़ी देर के बाद चलेंगे न हम .... पूनम कहती है

ममी क्या ये मां की लड़की है ये फिर आप के बॉयफ्रेंड की सच बताइये नहीं तो मैं आप से बात नहीं करुँगी ...... आस्था मुंह बना कर बोलती है

वही आस्था की ममी आवर नानी आस्था को घूरने लगती है मगर दोनों के चहरे पर मुस्कान होती है ... मगर आस्था मुंह बना कर कड़ी रहती है

मैं अपने पापा की बेटी हुईं समझी पगली दीदी कुछ भी बोलती हो .... पूनम कहती है

अअअअअअअ माआआआ क्या कर रही है आस्था हहहहहह दर्द कर रहा बेटी छोड़ दे मैंने तो कुछ किया hi नहीं .... आस्था की नानी दर्द मैं कहती है जो आस्था अपनी नानी के चुकी पकड़ कर खींच रही होती है गुस्से मैं

बुद्धि नानी अपनी बहु कहो बोलने के लिए जो मैंने पूछी है नहीं तो मैं अभी घर चली जाउंगी .... आस्था गुस्से मैं कहती है आवर जाने लगती है

अरे बहु कुछ भी बोल दे नहीं तो ये कही सच मैं घर न चली जाये आवर घर जाकर मेरी बुराई करेगी अपनी दादी से ..... आस्था की नानी अपनी बहु से कहती है

वही आस्था की ममी कभी अपनी सास तो कभी आस्था को देख रही थी वही पूनम भी अपनी माँ को देख रही थी क्या बोल रही है उसकी माँ

अब बोलो बोलो ये मोती किसकी बेटी है बोलो ...... आस्था जैसे खुश होकर बोलती है

ये लड़की कब बड़ी होगी इतनी बड़ी घोड़ी हो गयी है मगर इसका दिमाग अभी भी बच्चे जैसा hi है ... आस्था की ममी मन मैं सोचती है

तुमेह क्या लगता है पूनम किसकी बेटी है मेरी आस्था जिसे बोल देगी पूनम उसी की बेटी है ....... आस्था की ममी कहती है

ये ममी बहुत चालक है मैं तो अपने मां को hi कहूँगी क्या मैं बोल दू ये मोती ममी की बॉयफ्रेंड की बेटी है ... नहीं नहीं मैं क्यू बोलूंगी ये मोती तो मेरे मां की बेटी है ..... आस्था मन मैं सोचती है

मेरी ममी माँ बहुत अच्छी है मुझे लगता है मां की hi बेटी है मगर इसके अंदर मां की एक भी खूबी नहीं है ये तो ममी आप के बहन पर गयी है जो मुझे सिर्फ मरती रहती थी ... हुईं जैसी इसकी मसि वैसी बेटी ..... आस्था मुंह बना कर बोलती है

जो आस्था की नानी आवर ममी दोनों मुस्कुरा देती है .... आस्था की नादानी देख कर

जाइये मैं आप के साथ नहीं जाउंगी मैं अपनी मसि की तरह हुईं तो अब आप अकेले hi जाइये हुईं बड़ी आई ..... पूनम बोल कर चली जाती है

प्लीज प्लीज सॉरी सॉरी मैं तो बस मजाक कर रही थी तुम तो मेरी माँ पर गयी है ...... आस्था पूनम को पकड़ कर कहती है आवर अपनी कान पकड़ लेती है

आप दोनों मुंह क्या देख रही है बोलिये न पूनम मेरी माँ पर गयी है बुद्धि नानी आप भी बोलो न ..... आशा घर कर बोलती है

तो दोनों हां मैं हआ मिला कर बोलती है आवर मुस्कुराने लगती है जो पूनम भी मुस्कुरा देती है

ठीक है चलिए मगर फिर कभी आप ाएसि बात करेंगी तो मैं आप को मांफ नहीं करुँगी ... पूनम कहती है

उफ्फ्फ्फ़ मैं सब को डरती हुईं मगर ये मोती मुझे hi डरा देती है जाने दो है तो मेरी प्यारी नन्ही सी छोटी बहन hi न ..... आस्था मन मैं सोचती है

हआ में साहब मैं अब कोई गलती नहीं करुँगी मुझे अब मांफ कर दी है तो चले हम पार्क मैं ..... आस्था हाँथ जुड़ कर कहती है

कितना अच्छा लगता है जब आप मुझे में साहब कहती है तो दीदी एक बार आवर बोलिये न ..... पूनम हस्ती हुई कहती है

क्या तुम मैं अभी बोलती हुईं आस्था कहती है आवर पूनम को मरने के लिए भगति है मगर पूनम घर के बहार भाग जाती है जो आष्टा भी उसके पीछे भगति है आवर दोनों पार्क की तरफ चल पड़ती है

दोनों पार्क मैं जाती है वही पार्क मैं अर्जुन को देख कर आस्था मुस्कुरा पड़ती है

पूनम तुझे आइसक्रीम कहानी है न ये ले पैसे आवर दो आइसक्रीम लेकर आ .... आस्था कहती है

दीदी मैं अकेली नहीं जाउंगी आप भी साथ चलिए न .... पूनम कहती है

हहहहह मेरी पेअर दर्द करने लगी है ह्ह्हह्ह्ह्ह अच्छी बेबी प्लीज तुम लेकर आओ न फिर हम दोनों साथ मैं मस्ती से आइसक्रीम खायेगी .... आस्था कहती है

नहीं मैं अकेली नहीं जाउंगी मुझे दर लगता है आप भी साथ चलो मैं जानती हुईं आप को कोई दर्द नहीं हो रही है ..... पूनम कहती है

उफ्फ्फ ये लड़की भी न बहुत ज़िद्दी है मुझे अपने हीरो से बात भी नहीं करने देगी ये जाएगी नहीं तो मैं कैसे जाकर बात करुँगी अगर इसे साथ लेकर गयी तो ये नानी को भी बता देगी ...... आशा मन मैं सोचती है

पूनम वह लड़की तेरी दोस्त तो नहीं देख तुझे बुला रही है ..... आस्था कहती है

जो सच मैं एक लड़की पूनम को इशारे से बुला रही होती है

पूनम को जाने का मन तो नहीं होता है मगर आस्था पूनम को ज़िद कर के भेज hi देती है

उफ्फ्फ्फ़ बहुत ज़िद्दी है बिलकुल मेरी तरह मगर मैं भी इसकी बड़ी बहन हुईं मुझसे बड़ी ज़िद्दी नहीं हो सकती है

चलो अब अपने हीरो से मिल लेती हुईं ..... आस्था खुश होकर सोचती है आवर अर्जुन की तरफ चलने लगाती है
 
अपडेट __ 13

ही हीरो कैसे हो .. आआआउच ... अभी आस्था ही बोल कर अर्जुन के पास बैठने वही होती है तभी अर्जुन हड़बड़ा कर उठ जाता है आवर आस्था से टकरा जाता है जिससे आस्था आए करते हुआ निचे गिर जाती है आवर अर्जुन को जाते हुआ बस देखती रही जाती है आस्था को थोड़ा गुस्सा भी आता है मगर अर्जुन वह से निकल जाता है

वही अर्जुन भागता हुआ घर आता है अर्जुन के आँखों मैं नमी होती है

क्या मेरे बच्चे को किसी से लड़ाई हुई क्या .... आँचल कहती है ... अर्जुन को देख कर

माँ वह अंजलि दीदी .... अर्जुन रट हुआ बोलता आवर आँचल के गले लग जाता है

वही अर्जुन रट हुआ प् कर आँचल का दिल मचल जाता है आँचल बड़ी परेशां हो जाती है क्या हुआ है अंजलि को जो अर्जुन आज इस तरह रोने लगा है

क्या हुआ अंजलि को पहले तुम रोना बंद करो मेरा बीटा बहुत बहादुर है फिर भी लड़की की तरह रो रहा है अपनी माँ को बताओ क्या बात है ..... आँचल अर्जुन के आंसू को पोछते हुआ कहती है

माँ मुझे भी नहीं पता बस गीता दीदी का फ़ोन आया के अंजलि दीदी हॉस्पिटल मैं है माँ पता नहीं क्या हो गया है मेरी अंजलि दीदी को माँ मुझे अभी दीदी के पास जाना है माँ मुझे अभी है ...... अर्जुन रट हुआ कहता है

क्या अंजलि हॉस्पिटल मैं है गीता ने मुझे फ़ोन क्यू नहीं की अरे गीता बेटी ने मुझे भी फ़ोन किया है मैंने धयान नहीं दिया बीटा हम अभी चलते है .... आँचल कहती है

आँचल जल्दी से अपनी सास को बोलती है आवर अर्जुन के साथ निकल जाती है ..... अर्जुन की नानी भी जाने को बोलती है मगर आँचल बोल देती है बाद मैं आने के लिए

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आस्था अभी भी वही बैठी थी आवर अभी क्या हुआ सोच रही होती आस्था की आँखें नाम होती है आस्था रोने भी छह रही होती है मगर वह रो भी नहीं प् रही होती है बस अर्जुन जिस रस्ते से गया होता उसी तरफ देख रही होती है तभी आस्था को पूनम आती हुई दिखाई देती है जो आस्था जल्दी से अपनी आँखों से आंसू पोछ लेती है

दीदी वह बहुत बुरा लड़का था आप कितने ख़ुशी से उससे मिलने आई आवर वह आप को धक्का देकर चला गया मैं होती तो उसे पथल से मरती मेरी कितनी अच्छी प्यारी दीदी को रोला दिया वह मुझे फिर मिला तो मैं उसे तप्पड़ मर दूंगी ..... पूनम रोटी हुई बोलती

वही आस्था अपनी छोटी बहन की प्यार देख कर गले लगा लेती है आवर आस्था के चहरे पर मुस्कान आ जाती है

आयी नहीं बोलते बेबी वह बहुत अच्छा लड़का है .. लगता है कुछ हुआ है उसके साथ इस लिए इस तरह चला गया .... रट नहीं मैं रो नहीं रही हुईं .... आस्था पूनम के माथे को चूमते हुआ कहती है

नहीं वह बुरा लड़का है आप से थोड़ी से बात नहीं कर सकता था क्या .. बात भी नहीं किया आवर धक्का देकर भाग गया .. दीदी आप भी उससे बात नहीं करना उसकी वजह से आप रोने लगी थी वह बुआ लड़का है आप को घर मैं कोई नहीं बोलता ताकि आप रोये नहीं मगर उसकी वजह से आज अभी आप रो रही थी ..... दीदी आप को चोट तो नहीं लगी न .... पूनम फिर रोनी सी होकर बोलती है

ठीक है वह फिर कभी मिला तो मैं भी उससे बात नहीं करुँगी जब तक मेरी बेबी नहीं कहेगी ...... आस्था अर्जुन पर थोड़ी नाराजग होकर कहती है

फिर दोनों बहन घर के लिए निकल जाती है मगर आस्था के चहरे पर अभी एक भिक्का सा मुस्कान रहता है मगर आस्था पूनम को देख देख कर मुस्कुरा रही होती है ताकि उसकी छोटी बहन दुखी न हो

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अर्जुन 3 घंटे के बाद हॉस्पिटल पहुँच जाता है ...जो गाँव मैं hi एक छोटा हॉस्पिटल होता है

अर्जुन बाइक खड़ा कर के हॉस्पिटल मैं भागता है वही आँचल भी अर्जुन के पीछे भगति है अर्जुन हॉस्पिटल मैं जाता है तो उसकी नज़र पहले अपनी माँ पर पड़ता है जो अंजलि के पास hi बैठी होती है मगर अर्जुन अपनी माँ को एक नज़र देख कर अपनी अंजलि दीदी के हाँथ पकड़ लेता है

दीदी क्या हुआ आप को चोट कैसे लगी दीदी दर्द तो नहीं हो रहा ....... अर्जुन अपनी अंजलि दीदी के सर को देख कर अंजलि के सर को छूटे हुआ रोनी सी आवाज़ मैं कहता है ....... अंजलि के सर पर पट्टी बंधी होती है अंजलि को आवर कही पर चोट नहीं लगी होती है

वही आँचल भी अंजलि के पास आकर बैठ जाती है आवर अंजलि सर को अपने गॉड मैं रख कर गाल को सहलाने लगती है

अर्जुन देख मैं ठीक हुईं बस पहले थोड़ी सी दर्द हो रही थी मगर तुझे देख कर वह भी चली गयी मैं तो आज बहुत बहुत खुश हुईं मन कर रहा है अभी यह से भाग कर गाँव मैं चिल्ला चिल्ला कर बता दू के मेरा भाई घर आ गया है ममी मैं बहुत खुश हुईं ..... अंजलि बहुत ख़ुशी मैं कहती है जो अर्जुन आवर आँचल मुस्कुरा देते है

वही गीता भी मुस्कुराते हुआ अर्जुन को गले लगा लेती है मगर अर्जुन अपनी माँ को देखता भी नहीं है जो राखी नाम आँखों से अर्जुन को देख रही होती है

राखी को बहुत दुःख हो राहु होती है अर्जुन सभी से कितने प्यार से बात कर रहा है मगर मुझे देख भी नहीं रहा जो राखी का दिल बहुत दुखने लगता है मगर आज राखी खुश भी थी आवर अपने दिल को तसल्ली दे रही होती है के अर्जुन काम से काम अब साथ तो रहेगा

कुछ वक़्त के बाद राखी देवी डॉ से बात कर लेती है जो डॉ घर लेकर जाने को बोल देता है

माँ क्या बोले डॉ साहब ने अंजलि ठीक है ..... गीता अपनी माँ से पूछती है

गीता बेटी डॉ ने बोल दिया है अंजलि ठीक है घर लेकर जा सकते है है मैं अभी जाती हुईं तुम अर्जुन को साथ लेकर hi घर आना .... राखी देवी मायूसी से बोलती है आवर अर्जुन को एक दर्द भरी नज़र से देखती है जो अर्जुन अपनी अंजलि दीदी से बात कर रहा होता है मगर राखी देवी की तरफ देखता भी नहीं है ... जो राखी देवी मायूसी से निकल जाती है

अर्जुन तू अंजलि को लेकर गाड़ी मैं चल मैं डॉ से मिल कर आती हुईं ममी के साथ .... गीता कहती है

अपनी गीता दीदी की बात सुन कर अर्जुन अपनी ममी माँ की तरफ देखता है जो आँचल भी साथ चलने का इशारा करती है तब अर्जुन अपनी अंजलि दीदी को लेकर चलने लगता है ..... अर्जुन के बहार जाते hi गीता अपनी ममी के गले लग जाती है

ममी आप की वजह से भाई आज घर आया है मैं आप की ये अहसान कभी नहीं भूलूंगी ..... गीता रोटी हुई आँचल से कहती है

मरूंगी अहसान की बात की तो माँ कभी अपने बच्चो पर कोई अहसान नहीं करती है तुम तीनो मेरे बच्चे हो मैं तुम तीनो को माँ की तरह hi प्यार किया है फिर ाएसि बात की तो मैं कभी तुझसे बात नहीं करुँगी ....... आँचल थोड़ी नाराज होकर कहती है

सॉरी ममी माँ मैं फिर कभी ाएसि बात नहीं करुँगी मैं भी आप को माँ की तरह hi प्यार करती हुईं ..... गीता आँचल के गले लगे hi बोलती है

फिर गीता आवर आँचल भी हॉस्पिटल से निकल जाती है आवर घर की तरफ निकल जाती है वही अर्जुन अपनी अंजलि दीदी को लेकर घर की तरफ निकल गया होता है

अर्जुन अपने घर के सामने बाइक रोकता है अर्जुन की जिस्म कंपनी लगता है कोई सल्ल के बाद आज अर्जुन अपने घर आया हुआ होता है अर्जुन की आँखें नाम हो रही होती है अर्जुन बस अपने घर को एक तक देख रहा होता है अर्जुन के आँखों के सामने बचपन की याद दिखाई देने लगता है कैसे वह अपनी डूडीयों के साथ खेलता खुदता रहता था अर्जुन बाइक पर hi बैठा रहता है आवर बस अपने घर को देख रहा होता है

अर्जुन अर्जुन

अपनी अंजलि दीदी के पुकारने पर अर्जुन होश मैं आता है आवर बाइक खड़ा करता है फिर अंजलि बाइक से उतर जाती है

भाई चल अंदर मैं तुझे अपनी रूम दिखती हुई तू भी मेरे hi रूम मैं रहना .... अंजलि ख़ुशी मैं कहती है

दीदी आप चलो मैं अभी आता हुईं ..... अर्जुन थोड़ा मायूसी से कहता है

नहीं तू फिर ममी के घर भाग जायेंगे मैं तुझे कही नहीं जाने दूंगी प्लीज भाई अपनी दीदी के लिए चल मेरे साथ अपनी दीदी के लिए नहीं जा सकता है अंदर अपनी दीदी से प्यार नहीं करता है ..... अंजलि थोड़ी दुखी होकर कहती है

दीदी मैं आप से बहुत प्यार करता हुईं आप के लिए ये घर क्या मैं किसी भी घर मैं जा सकता हुईं दीदी बस कुछ देर के लिए मुझे अकेला रहने दीजिये फिर मैं आप की रूम मैं आ जाऊंगा प्लीज दीदी मैं ममी माँ के घर नहीं जाऊंगा ..... अर्जुन अपनी अंजलि दीदी को गले लगा कर कहता है

अर्जुन बहुत दुखी होता है जो अंजलि को भी लगता है थोड़ा अर्जुन को वक़्त देना चाहिए इस लिए अंजलि मुस्कुरा कर अर्जुन से अलग होती है आवर अर्जुन के गाल पर किश कर के ठीक है बोलती है ..... फिर अर्जुन को देखते हुआ घर मैं चली जाती है

वही अर्जुन बाइक लेकर गाँव की तरफ निकल जाता है आवर एक पान की दूकान पर बाइक रोक कर दूकान पर जाता है उस दूकान पर पहले से 2 लड़के होते है आवर बाते कर रहे होते है वही अर्जुन को देख कर पान के दूकान वाला लड़का उन दोनों लड़कों को जाने को बोलता है मगर वह दोनों लड़के वही बैठ कर सिगरेट पिने लगते है

पंकज एक सिगरेट का पैकेट दे .... अर्जुन पान वाले से बोलता है गाँव मैं बहुत काम hi लोग अर्जुन को पहचानते थे जो सिर्फ अर्जुन के साथ हॉस्टल मैं पढ़े हुआ थे आवर उनमे से पंकज भी था

अरे अर्जुन इतने साल के बाद आज घर कैसे आ गया बहुत ख़ुशी की बात है इस लिए पार्टी होने चाहिए .... पंकज हस्ते हुआ कहता है

अबे सिगरेट दे ... तू जनता है मैं दारू नहीं पिता हुईं ..... अर्जुन कहता है फिर पंकज कुछ नहीं बोलता है आवर अर्जुन को सिगरेट का पैकेट दे देता है अर्जुन वही एक सिगरेट निकल कर जलाता है तभी अर्जुन को एक नाम सुनाई देता है जो अर्जुन सिगरेट भी नहीं जलता है आवर एक लड़के को पकड़ कर पीटने लगता है

अर्जुन जब एक लड़के को मरने लगता है तो दूसरा भी अर्जुन को मरने के लिए होता है मगर अर्जुन उस लड़के को ज़ोर से धक्के दे देता है जो वह लड़का चीखता हुआ दूर गिरता है फिर अर्जुन दूसरे को भी मरने लगता है

तभी दूसरा लड़का उठ कर अर्जुन को धक्का दे देता है जो अर्जुन भी गिर जाता है तब तक वह दोनों बाइक से भाग जाते है अर्जुन भी जल्दी से उठ कर बाइक के पास जाता है आवर चलो करने लगता है मगर अर्जुन के पास चाभी नहीं होता है अर्जुन चाभी ढूंढने लगता है

अर्जुन चाभी यह पर है ..... पंकज कहता है तब तक वह लड़के कभी दूर चले जाता है जो दिख भी नहीं होते है

अर्जुन बाइक से गुस्से मैं उतर कर पंकज के पास जाता है आवर पंकज के गाला पकड़ लेता है

कौन थे वह दोनों वह मेरी अंजलि दीदी के बारे मैं बात कर रहे थे कही वह दोनों की वजह से दीदी के सर पर छोट तो नहीं लगी .... ये सोनू कौन है जनता है तो बता दे अगर झूट बोलै आवर बाद मैं मुझे पता चला तो मैं तुझे भी कुत्ते की तरह मरूंगा तेरे hi घर मैं .... अर्जुन बहुत गुस्से मैं कहता है

अर्जुन जब से दूकान पर आया था दोनों लड़कों की बाते सुन रहा था मगर जैसे hi उनमे से एक ने अंजलि का नाम लिया आवर बोलै वह अभी हॉस्पिटल मैं होगी तभी अर्जुन को समझने मैं आ गया वह दोनों उसकी दीदी की बात कर रहे है इस लिए कुछ बोले hi पीटने लगा

अर्जुन वह दोनों पास के गाँव के है आवर सोनू भी उसी गाँव का है इन दोनों का दोस्त है वह ठाकुर का लड़का है बहुत बदमाश है वह ..... पंकज डरते हुआ कहता है पंकज को बताना hi पड़ा क्यू के पंकज को अर्जुन के बारे मैं अच्छी तरह पता था ये कैसा लड़का है आवर अभी तो इसकी दीदी की बात है नहीं बताया तो ये मुझे जान से भी मार देगा

चल दूकान बंद कर आवर मुझे उसके घर लेकर चल मैं भी देखता हुईं कितना बड़ा बदमाश है वह भड़वे का औलाद ..... अर्जुन गुस्से मैं कहता है

अर्जुन के गुस्सा देख कर पंकज को अपनी दूकान बंद करना hi पड़ा आवर पंकज जल्दी से दूकान बंद कर के अर्जुन के साथ गाँव मैं चल दिया
 
अपडेट __ 14

कोई 30 मिनट्स के बाद पंकज अर्जुन को बाइक रोकने को बोलता है अर्जुन जब सामने देखता है तो एक हवेली होती है

भाई एहि है सोनू का घर .... पंकज डरता हुआ कहता है

वही अर्जुन बाइक से उतर कर हवेली मैं चला जाता है तो देखता है एक औरत गर्दन मैं कड़ी है आवर दूसरी तरफ देख रही है अर्जुन सीधे उस औरत के पीछे चला जाता है वही औरत की चीखना पीठ पूरी तरह दिख रही होती है औरत अपनी कमर पर हाँथ रख कर कड़ी होती है आवर औरत की गांड थोड़ी बहार की तरफ निकली हुई होती है औरत पीछे से सेक्स की देवी लग रही होती है मगर अर्जुन औरत की जिस्म पर ध्यान नहीं देता है

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आंटी सोनू का एहि घर है क्या .... अर्जुन प्यार से पूछता है

अर्जुन की आवाज़ सुन कर औरत पलट जाती है तो सामने अपने बेटे की उम्र की एक लड़के को देखती है

हां बीटा एहि घर है तुम कौन हो मेरे बेटे को कैसे जानते हो मैं सोनू के सभी दोस्त को जानती हुईं तुमेह कभी नहीं देखि मैं उसके साथ ..... औरत कहती है

aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

क्या कर रहे हो छोडो मेरी साड़ी को .. मैं तुमेह जान से मार दूंगी रामु शामू किधर हो तुम लोग बचाओ मुझे इस कमीने लड़के से .... औरत चीखती हुई कहती है जो हवेली के अंदर से 3 से 4 बंदी भागते हुआ आते है आवर अर्जुन को घेर लेते है .... क्यू के औरत अभी बोल hi रही होती है की अर्जुन औरत की पल्लू पकड़ लेता है जो औरत की साइन से पल्लू हटने से औरत की दोनों चुकी उभर कर दिखने लगती है जो औरत अपनी चुकी पर हाँथ रख कर पुकारने लगती है औरत को शर्म से पानी पानी होने लगती है ऊपर से अर्जुन ने औरत की मोती गांड के ऊपर कमर भी पकड़ लिया होता है जो औरत को दर भी लगने लगती है

वही अर्जुन बस औरत को हल्का सा पकड़े हुआ होता है मगर अर्जुन का हाँथ औरत के मोलायम पेट पर होता है जो औरत एक वक़्त सिसक भी पड़ती है

क्या हुआ आंटी मुझपे गुस्सा आ रहा है आप को जो इतने लोग को बुला लिया आप ने .... मैंने तो सिर्फ आप को पकड़ा है वह भी आप के घर पर जो किसी ने देखा भी नहीं है एहि काम मैं बिच गाँव मैं करता तो क्या हालत होती आप की ........ अर्जुन बोलते हुआ औरत को छोड़ देते है

औरत को छोड़ते hi अर्जुन को वह सरे बंदी पाकर लेते है आवर मरने लगते है मगर अर्जुन बस बचने की कोशिश करता है मगर फिर सभी मिलकर अर्जुन को पकड़ लेते है ... ... तब वह औरत अर्जुन के पास आती है आवर फिर ज़ोर से अर्जुन को एक तप्पड़ मरती है औरत बड़ी गुस्से आवर शर्मिंदगी से अर्जुन को देख रही होती है ..... मगर अर्जुन बस मुस्कुरा कर औरत को देख रहा होता है .... उस औरत के देखते देखते hi उन सभी बंदी को मार कर ज़मीन पर लेता देता है ..... जो औरत को बड़ी हैरानी होती है आवर वह औरत पीछे की तरफ हैट जाती है

आप का मन कर रहा होगा की आप मुझे जान से मार दे ...... मैं सही बोल रहा हुईं न आंटी ...... तो समझ लीजिये मुझे कितना गुस्सा आ रहा होगा .... अभी अगर सामने आप का बीटा होता तो मैं उसका भी इन सब से बुरी हालत कर देता ... उसका हाँथ पेअर उखड देता उसके जिस्म से उस कुत्ते की हिम्मत कैसे हुई मेरी अंजलि दीदी को छूने की ...... अर्जुन गुस्से मैं बोलता है

औरत गुस्सा मैं दरी हुई बस पीछे हैट रही होती है मगर औरत को समझ आ जाती है उसके बेटे ने कुछ किया है इस लड़का के बहन के साथ

क्या किया है मेरे बेटे ने जो तुम मेरे hi घर आकर पहले मुझसे बतमीज़ी की आवर मेरे बेटे को मरने के लिए बोल रहे हो अभी मेरे पति होते तो वह तुमेह जान से मर देते ....... औरत पीछे कड़ी होकर कहती है

मैं अपनी दीदियों के लिए कुछ भी कर सकता हुईं वह मेरी सब कुछ है ..... माँ बाप भाई बहन सब कुछ ... मैं उनेह कभी दुखी नहीं देख सकता हुईं मगर आप के उस कुत्ते बेटे की वजह से मेरी दीदी को चोट लगी है मेरी दीदी को कितनी दर्द हुआ होगा ..... आप के उस बेटे ने मेरी दीदी के साथ सोल्लगे मैं इससे भी कही जयादा घटिया हरकत की है ...... तो मुझे कितना गुस्सा आया होगा सोचिये ज़रा ... जो मैं कभी सह नहीं सकता हुईं ..... अपने बेटे को समझा दीजियेगा मेरी दीदी से दूर रहे नहीं तो मैं उसका आएसा हालत करूँगा की वह कभी किसी लड़की के सामने जाने मैं भी डरेगा ...... अर्जुन उस औरत के करीब जाकर गुस्से मैं बोलता है आवर फिर निकल जाता है वह से

औरत बस अर्जुन को गुस्से मैं बोलते सुन रही होती है फिर जाते हुआ देखती रह जाती है औरत को अब समझ आ जाती है उसके बेटे ने सायद फिर किसी लड़की के साथ बतमीज़ी की है ..... ये तो औरत पहले से जानती थी उसका बीटा कितना कमीना है मगर औरत करे भी तो क्या .... क्यू के उसका बीटा उसकी बात hi नहीं सुनता था ... कितना अच्छा लड़का है जो अपनी बहनो के खातिर इस हवेली के अंदर आ गया बिना अपनी जान की परवाह किया कास मेरा बीटा भी आएसा होता ..... औरत दिल मैं सोचती है मगर औरत के आँखें नाम होती है

फिर औरत को अपनी कमर पे अर्जुन का मजबूत हाँथ याद आता है जो एक वक़्त के लिए उसे बहुत अजीब सा महसूस हुआ होता है औरत खुद hi अपने कमर पर हाँथ रख देती है आवर अपनी आँखें बंद कर लेती है

वही अर्जुन जब हवेली से बहार आता है तो देखता है पंकज वह पर नहीं है तो अर्जुन कुछ दूर चल कर आता है तो देखता है पंकज गाँव के बहार खड़ा है तो अर्जुन उसके पास बाइक रोक देता है

क्या हुआ सेल तू यह की भाग आया वह तेरा कोई गांड मर रहा था क्या .... अर्जुन कहता है

अर्जुन तू जनता है वह औरत कौन थी सोनू की माँ थी आवर ठाकुर परताब सिंह की बीवी थी आवर तुमने उनकी पल्लू hi पकड़ लिया अच्छा हुआ अभी हवेली मैं कोई नहीं था वर्ण आज हम दोनों की लॉस इस गाँव से जाता ..... पंकज डरता हुआ कहता है

ठाकुर भी होता तो कुछ नहीं कर पता मुझे मैं भी कोई सड़क का भिखारी नहीं हुईं मैं भी ठाकुर कारन सिंह का बीटा हुईं ....... अर्जुन हस्ते हुआ कहता है ...... आवर फिर पंकज को बाइक पर बैठने को बोलता है फिर अपने गाँव की तरफ निकल पड़ता है

वही हॉस्पिटल से हवेली मैं आने के बाद राखी देवी बड़ी खुश थी आवर नौकरानी को आज घर भेज दी थी .... ताकि अर्जुन के लिए खुद से खाना बना सके ...... मगर हवेली मैं जब अंजलि को अकेली आवर आंसू पोछते हुआ आते देख राखी देवी भाग कर अंजलि के पास आई

बेटी अर्जुन कहा है क्या वह गीता के साथ आ रहा है बेटी अर्जुन कहा है तेरे साथ क्यू नहीं आया बता न कहा है अर्जुन ........ राखी देवी निराश होकर बोली आवर राखी देवी की आँखें भी भर आई .... क्यू की राखी देवी अब समझ गयी थी अर्जुन सायद वही से घर के लिए निकल गया होगा जो तड़पती हुई अंजलि से पूछने लगी थी

माँ प्लीज रोइये नहीं अर्जुन मेरे साथ hi आया है मगर अभी वह अंदर नहीं आया है वह कुछ वक़्त के बाद आ जायेगा आप परेशां मत होइए ........ अंजलि अपनी माँ से कहती है

वह अब नहीं आएगा मुझे पता है तूने उसे जाने hi क्यू दिया अर्जुन अर्जुन ..... राखी देवी अर्जुन को पुकारते हुआ बहार तक आती है मगर अर्जुन वह से जा चूका होता है राखी देवी बहार hi बैठ कर रोने लगती है ...... अंजलि बहुत बार अपनी माँ को अंदर जाने को बोलती है मगर राखी देवी नहीं जाती है बस अर्जुन अर्जुन पुकार कर रोटी रहती है

कुछ देर के बाद गीता आवर आँचल भी घर आ जाती है आवर राखी देवी को हवेली के बहार रोटी देख दोनों राखी देवी के पास भगति है

गीता अपनी माँ को पकड़ कर अंदर लेकर जाती है आवर बोलती है अर्जुन बोलै है घर आने को तो आएगा तब जाकर राखी देवी संत होती है आवर फिर अर्जुन के पसंद के खाना बनाने लगती है .. अपनी माँ को खुश देख कर दोनों बहाने भी बहुत खुश हो जाती है जो उनकी आँखें भी ख़ुशी के मरे भर आती है

अर्जुन फिर गाँव आता है आवर इधर उधर घूमता रहता है तभी उसके पास उसकी ममी माँ की फ़ोन आता है अर्जुन झट से फ़ोन उठा लेता है

hello माँ क्या हुआ ..... अर्जुन कहता है

अर्जुन कहा है अब रात होने वाली है आवर तू अभी तक घर नहीं आया मुझे तेरी चिंता होने लगी थी देख अंजलि भी रोने लगी है ....... बोल रही तू सहर चला गया है ...... तेरी गीता दीदी भी रो रही है तू बस जल्दी से घर आजा बीटा .... आँचल कहती है

माँ मैं गाँव मैं हुईं आप प्लीज उनेह चुप होने के लिए बोलिये मैं अभी घर आ रहा हुईं ...... अर्जुन थोड़ा मायूसी से बोलता है

ठीक है बीटा जल्दी से घर आने मैं अंजलि आवर गीता को बोल दे रही हुईं तू थोड़ी देर मैं घर आ रहा है .... आँचल कहती है आवर फ़ोन रख देती है

आँचल के फ़ोन रखते hi तीनो माँ बेटी आँचल को देखने लगती है तो आँचल मुस्कुरा कर अंजलि के माथा चुम लेती है जो अंजलि गीता आवर राखी भी समझ जाती है अर्जुन घर आ रहा है जो खुश हो जाती है .... जो कब से अर्जुन का रह देख रही होती है परेशां होकर

जब अर्जुन सुनता है उसकी दोनों दीदी रो रही है तो अर्जुन जल्दी से बाइक चालू कर के घर की तरफ चल पड़ता है
 
अपडेट __ 15

अर्जुन जब घर के बहार आता है तो अर्जुन के बाइक की आवाज़ सुन कर राखी देवी को पता चल जाता है अर्जुन घर आ गया है .....

जो राखी देवी के चहरे पर थोड़ी मुस्कान आ जाती है ......

राखी देवी कब से अर्जुन के घर आ जाने की रह देख रही थी ....

राखी देवी जल्दी जल्दी किचेन से खाना लेकर दिंनिंग टेबल पर रखने लग जाती है आवर फिर वही कड़ी हो जाती है

वही अर्जुन अभी अपने घर के गेट के बहार hi खड़ा रहता है .....

अर्जुन के पेअर डगमगा रहे होते है अर्जुन कुछ देर गेट पर खड़ा रहता है फिर अपनी आँखें बंद कर के गेट पार कर देता है .....

अर्जुन जैसे hi अपने घर का गेट पार करता है अर्जुन को एक अजीब सी ख़ुशी महसूस होती है जो अर्जुन को एक वक़्त के लिए वही रुक जाता है ....

आवर अर्जुन अपने आप को देखने लगता है ......

कैसे वह बचपन मैं खेल रहा होता है ....

अर्जुन खुद को भागते हुआ पता है जो हस्ते हुआ भाग रहा होता है गेट के बहार आवर उसकी माँ अर्जुन को पकड़ रही होती है हाँथ मैं खाना की पलट लेकर आवर अर्जुन को बुला रही होती है जो अर्जुन गेट के बहार रुक कर हस्ते हुआ अपनी माँ को देख रहा होता है आवर उसकी माँ भी हस्ते हुआ बोलै रही होती है

अर्जुन अपनी बचपन की यादों को देखते हुआ बहुत खुश होता है अर्जुन के चहरे पर मुस्कान आ जाता है .....

अर्जुन थोड़ा मुस्कुरा कर फिर वह से आगे जाने लगता है मगर जब अर्जुन अंदर जाता है अर्जुन के चहरे से मुस्कान चला जाता है आवर अर्जुन बस अपनी माँ को देखने लगता है ...

क्यू के सामने राखी देवी कड़ी होती है जो अर्जुन को मायूसी से देख रही होती है

एक वक़्त के लिए अर्जुन बस अपनी माँ को देखता hi रह जाता है अर्जुन को अपनी माँ पर दया आने लगता है अर्जुन एक वक़्त के लिए अपना एक पेअर आगे बढ़ा कर अपनी माँ की तरफ जाने को होता है अर्जुन अब दूसरा पेअर भी आगे बढ़ा लेता है अर्जुन बस अपनी माँ के चहरे को देखता हुआ आगे बढ़ रहा होता है .....

तभी एक आवाज़ सुन कर अर्जुन वही पर रुक जाता है आवर फिर एक नज़र पीछे देखता है जो अर्जुन के मां आ रहे होते है अर्जुन अपने मां को गुस्से मैं देखता है फिर उसी गुस्से से अपनी माँ को देखता है आवर फिर वही से घूम कर ऊपर रूम की तरफ चल देता है

जब अर्जुन राखी के तरफ आगे बढ़ रहा होता है तो राखी देवी के दिल मैं बहुत ख़ुशी हो रही होती है आवर राखी देवी भी धीरे धीरे आगे की तरफ बढ़ रही होती है राखी देवी के आँखों से ख़ुशी की आंसू भी निकलने लगते है अर्जुन को अपने तरफ आते देख राखी देवी के जिस्म मैं अभी एक अजीब सी हलचल होती है राखी देवी भी आगे बढ़ाते हुआ सोच रही होती है की अर्जुन को आज अपने साइन से लगा कर अर्जुन को पल्लू मैं छुपा लुंगी ये सोचते हुआ आगे बढ़ रही होती है

मगर जैसे hi राखी देवी अपने भाई की आवाज़ सुनती है राखी देवी की ख़ुशी चली जाती है आवर फिर से चहरे पर मायूसी दर्द आ जाती है ....

राखी देवी की पेअर वही रुक जाते है राखी देवी तड़प कर रोने लगती है आवर फिर रोटी हुई अपने रूम की तरफ भाग जाती है

राखी देवी को रट हुआ भाग कर जाते हुआ आँचल भी देख लेती है जो राखी देवी के पीछे जाती है

इधर अर्जुन अपने रूम की तरफ जाता है जो अर्जुन का रूम बंद होता होता है फिर अर्जुन आगे जाता है
अपनी डूडीयों की रूम की तरफ तो अर्जुन को एक रूम मैं गीता दीदी आवर अंजलि दीदी की आवाज़ सुनाई देता है तो अर्जुन उसी रूम मैं चला जाता है तो देखता है गीता दीदी आवर अंजलि दीदी एक दूसरे से बात कर रही है जो गीता अंजलि को समझा रही होती है कुछ बात को लेकर गेट पर आवाज़ होते hi दोनों चुप हो जाती है .....

आवर पीछे देखती है तो अर्जुन को पति है जो दोनों बहाने खुश हो जाती है आवर दोनों hi उठ कर अर्जुन को गले लगा लेती है

दीदी देखिये हम्हरा भाई घर आ गया ...

दीदी मैं बहुत खुश हुईं मेरा अर्जुन घर आ गया आज मैं बहुत बहुत खुश हुईं ओह मेरा प्यारा भैया ोूमा .....

अंजलि ख़ुशी मैं बोलती है आवर अर्जुन को साथ लेकर बीएड पर बैठ जाती

वही गीता अर्जुन का सर अपनी गॉड मैं रख लेती है आवर अर्जुन के सर पर हाँथ फेरने लगाती है

अपनी दीदियों का प्यार देख कर अर्जुन सब कुछ भूल जाता है आवर अपनी गीता दीदी की मोती मोती जांघ पर सर रख कर आँखें बंद कर लेता है

अंजलि आवर गीता अर्जुन के सर पर प्यार से हाँथ फेर रही होती है

अर्जुन चल पहले खाना कहते है पता नहीं दिन मैं तू खाना भी खाया होगा की नहीं .... गीता कहती है

दीदी मुझे बहुत भूख लगी है आप खाना एहि पर लेकर आ जाइये मैं एहि खा लूंगा .... अर्जुन गीता के जांघ से सर उठा कर कहता है

अर्जुन का चेहरा देख कर गीता समझ जाती है अर्जुन खाना यह क्यू लेन के लिए बोल रहा है फिर भी गीता कुछ कहती नहीं है बस अर्जुन को देख अपनी चहरे पर एक फीकी मुस्कान के साथ सर हिला देती है .....

वही अंजलि भाग कर रूम से निकल जाती है आवर अपना आवर गीता अर्जुन का खाना निकल कर रूम मैं आ जाती है

गीता आवर अंजलि दोनों बरी बरी से अर्जुन को खाना खिलाती है अर्जुन भी अपनी दीदियों के हाँथ से खाना बस कहते hi जा रहा होता है

अर्जुन को खाने कहते हुआ हसी भी आ रही होती है अपनी दोनों दीदियों को देख कर जो जल्दी जल्दी रोटी के टुकड़े अर्जुन के मुंह के पास ला रही होती है आवर खुद भी खा रही होती है

दीदी मैं आवर नहीं खाऊंगा आप दोनों ने बहुत खिला दिया मुझे ..

अर्जुन अपना मुंह दूसरी तरफ करते हुआ मुंह बना कर बोलता है

ठीक है बस एक आवर नीलवा मेरा खले फिर मैं नहीं खिलाऊंगी मेरा अच्छा बाबू ... गीता बड़ी प्यार से कहती है जो अर्जुन अपना मुंह खोल देता है

जब तीनो खाना खा लेते है तो गीता पलट लेकर चली जाती है अर्जुन भी जाने लगता है रूम से मगर अंजलि अर्जुन का हाँथ पकड़ लेती है

आज मेरा साथ मैं सो जा बाबू प्लीज ...

अंजलि प्यार से बोलती है जो अर्जुन भी मुस्कुरा कर अपनी अंजलि दीदी के बाद पर सो जाता है

***********

इधर आस्था अपनी रूम मैं बैठी होती है आस्था के चेहरा मुरझाई हुई होती है आस्था बस अर्जुन के बारे मैं सोच रही होती है अर्जुन इस तरह कैसे चला गया

तुमने अच्छा नहीं किया मुझसे मिले बिना hi चले गए मैंने कितनी ज़िद्द कर के तुमसे मिलने के लिए आई थी बस थोड़ी देर रुक कर मुझसे बता देते तुम कहा पर रहते हो आवर किस सोल्लगे मैं पढ़ते हो मैं भी उसी सोल्लगे मैं आ जाती मगर तुमने मुझे कुछ नहीं बताया अब मैं तुमेह कहा पर तलाश करुँगी तुम बहुत बुरे हो मैं तुमसे कभी बात नहीं करुँगी .....

ओह ओह सॉरी सॉरी बात नहीं करुँगी तो तुम गुस्सा हो जाओगे इस लिए मैं बात करुँगी मगर तुमेह भी मुझसे सॉरी कहना होगा तब बात करुँगी

मगर तुम मुझे मिलोगे कहा पर कल मुझे सोल्लगे मैं एडमिशन भी लेना है प्लीज तुम मुझसे एक बार मिल लेना प्लीज प्लीज .....

आस्था अपने आप से hi बाते कर रही होती है तभी आस्था का फ़ोन बजने लगती है तो आस्था फ़ोन उठा लेती है

hello गुड़िया क्या हुआ अभी तक सोइ नहीं तुम .....

आस्था फ़ोन पर no देख मुस्कुरा कर कहती है क्यू के फ़ोन पूनम की होती है

दीदी आप सो गयी थी क्या मुझे लगा आप सोइ नहीं होंगी ... उधर से पूनम कहती है

मेरी बेबी को आएसा क्यू लगा की मैं अभी तक सोइ नहीं होंगी मैं तो सो गयी थी मगर जब बेबी की कॉल देखि तो उठा लिया ... आस्था कहती है

दीदी मुझे लगा आप उस लड़के के बारे मैं सोच कर रो रही होंगी जो मुझे ये बात परेशां कर रही थी इस लिए मैंने आप को कॉल किया लड़के बहुत बुरे होते है ...

मेरी एक दोस्त की दीदी के साथ भी एक लड़के ने आएसा hi किया था मैंने देखि थी वह बहुत रो रही थी ..

आप उस लड़के से कभी बात नहीं करना ..

उस लड़के की वजह से आप उदास हो गयी थी .... पूनम दुखी होकर कहती है

बेबी तुम परेशां न हो मैं नहीं रो रही चलो मैं अभी रख रही हुईं मुझे नींद आ रही है ...

आवर तुम भी सो जाओ बहुत रात हो गयी उउउउउम्म्माआ .. ी लव मेरी स्वीट बेबी ... आस्था बोलती है

वही पूनम भी ी लव यू बोल कर फ़ोन रख देती है

कितना प्यार करती है मेरी पूनम बेबी ....

ओह्ह्ह मेरी बेबी गुड़िया मैं कैसे उससे बात न करू वह मेरी नस नस मैं बस चूका है उसने तेरी दीदी का दिल चुरा लिया है वह तुमेह भी पसंद आई जायेगा ...

बेबी वही तेरा जीजा जी है ......

आस्था अर्जुन आवर पूनम को याद करते हुआ मन मैं सोचती है आवर अपनी आँखें बंद कर लेती है

रात 1:पं

राखी देवी अपनी रूम मैं अभी भी रो रही होती है आवर वही आँचल सो रही होती है फिर राखी देवी बीएड से उठ कर रूम से निकल जाती है पहले गीता की रूम मैं जाती है तो देखती है गीता गेट खुला छोड़ कर सो रही है तो राखी देवी गेट सत्ता देती है फिर आगे चल देती है जब राखी देवी अंजलि के रूम के पास जाती है तो पति है अंजलि की भी रूम खुला है बस सत्ता हुआ है अंजलि के साथ अर्जुन भी सोया हुआ दिखता है तो राखी देवी धीरे से रूम मैं चली जाती है

बीएड पर अर्जुन आवर अंजलि सोये हुआ थे अंजलि का एक हाँथ अर्जुन के साइन पर होती है राखी देवी कुछ देर कड़ी होकर बस अर्जुन को देखती रहती है अर्जुन का चेहरा पर मुस्कराहट देख कर राखी देवी भी मुस्कुरा देती है फिर राखी देवी धीरे धीरे चल कर अर्जुन के बगल मैं लेट जाती है आवर अपने एक हाँथ अर्जुन के सर पर फेरने लगती है ...

तभी अर्जुन घूम जाता है आवर अर्जुन का मुंह राखी देवी की चची के पास चला जाता है

राखी देवी तो सिसक hi पड़ती है मगर जल्द hi अपना हाँथ मुंह पर रख देती है राखी देवी को दर भी लगने लगती है कही अर्जुन उठ न जाये राखी देवी की धड़कन ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगती है राखी देवी को एक अजीब से ख़ुशी भी महसूस होती है जो राखी देवी अर्जुन के उठाने का दर भूल जाती है आवर अर्जुन के सर अपने साइन पर आवर लगा लेती है तभी राखी देवी को अर्जुन की आवाज़ सुनाई देती है जो राखी देवी अपने मुंह पर हाँथ रख कर सिसकने लगती है .....

कके सोते हुआ अर्जुन माँ माँ पुकार रहा होता है आवर अपने हाँथ को राखी देवी के जिस्म पर रख देता है आवर अपना मुंह राखी देवी की चुकी मैं आवर गुसा देता है ...

जो राखी देवी अर्जुन के मुंह से माँ सुन कर बहुत hi ख़ुशी होती है राखी देवी को आज इतनी ख़ुशी होती है की राखी देवी एक वक़्त के लिए कुछ बोलने को होती है मगर बोल नहीं पति है आवर तड़प कर रह जाती है .....

क्यू के राखी देवी जानती थी अर्जुन उठाने के बाद यह देख कर कितना गुस्सा होगा राखी देवी बस आंसू बहती रहती है

वही अर्जुन बेहोश सोया हुआ बस राखी देवी से आवर चिपकते hi जाता है अर्जुन के चिपकने से राखी देवी के दिल को बहुत सकूँ मिलती है

अर्जुन के साइन लगने से राखी देवी इतनी ख़ुशी थी के वह अभी धयान भी नहीं दे पा रही थी के अर्जुन का मुंह मैं अभी उनकी एक चुकी का निप्पल चली गयी है आवर अर्जुन सोते हुआ hi मुंह से पकड़ के चूसने की कोशिश कर रहा है मगर बलाउज आवर ब्रा मैं क़ैद होने से ठीक से चूस नहीं पा रहा होता

आवर जैसे hi राखी देवी को अपनी चुकी पर अर्जुन का मुंह का अहसास होती है राखी देवी का जिस्म सनसना जाता है राखी देवी अब क्या करे उनेह कुछ भी समझ मैं नहीं आती है

तभी राखी देवी की एक चीख निकल पड़ती है मगर राखी देवी जल्द hi रूम से निकल कर अपनी रूम मैं चली जाती है

किसी की चीख सुन कर अर्जुन झट से उठ जाता है आवर अपनी अंजलि दीदी के माथे पर फुख मरने लगता है जो अंजलि भी उठ जाती है

अर्जुन क्या कर रहा है .... अंजलि मुस्कुराते हुआ कहती है

दीदी आप को जयादा दर्द तो नहीं हो रही ..... अर्जुन अभी भी फुख मरते हुआ कहता है ....

क्यू के अर्जुन को लगा था अंजलि hi चीखी थी सर मैं दर्द होने से जो अर्जुन उठ कर फुख मरने लगा था

अर्जुन मुझे दर्द नहीं हो रही है मैं ठीक हुईं चलो अब तुम भी सो जाओ ..... अंजलि कहती है

दीदी मैंने सुना आप चीख रही थी आवर आप बोल रही दर्द नहीं हो रही ....

दर्द हो रही है तो आप दवा खा लीजिये चलिए उठाइये मैं दवा देता हुईं वर्ण फिर आप सोते हुआ चीखने लग जाएँगी .... अर्जुन कहता है

अंजलि को कोई दर्द तो नहीं हो रही होती है मगर अर्जुन को थोड़ा परेशां देख कर अंजलि उठ कर दवा खा hi लेती है

फिर दोनों सो जाते है ...

मगर अंजलि सोये हुआ मुस्कुरा रही होती है सोच कर के अर्जुन उसे कितना प्यार करता है जो एक चीख सुन कर उठ गया मगर मैंने चीखी थी मुझे पता hi नहीं है

अंजलि अर्जुन को अपने बाँहों मैं लेकर सो जाती है

इधर राखी देवी की सांसे बहुत hi तेज़ी से चल रही होती है आवर आंसू भी निकल रहे होते है मगर चहरे पर ख़ुशी साफ़ दिख रही होती है ....

क्यू की राखी देवी ने अर्जुन को कोई सल्ल के बाद आज अपने साइन लगायी थी जो राखी देवी दिल से बहुत ख़ुशी थी जो राखी देवी की आंसू बता रहे होते है ...

राखी देवी जो अर्जुन को गले लगाने के लिए कई सल्ल से रोटी आ रही थी मगर आज जब अर्जुन को गले लगाया तो उनकी आंसू रुक नहीं रही होती है राखी देवी फिर से अर्जुन के रूम मैं जाने को होती है मगर राखी देवी के पेअर आगे नहीं बढ़ रहे होते है ये सोच कर के अर्जुन इस बार उठ गया होगा आवर वह मुझे देख कर hi कही घर से न चला जाये इतनी रात मैं राखी देवी बीएड पर लेट जाती है आवर अपने दोनों हाँथ से सीना पकड़ कर आँखें बंद कर लेती है आवर उन लम्हों को याद करने लगती है जब अर्जुन साइन से लगा होता है ....

राखी देवी उन लम्हों को याद करती हुई मुस्कुरा कर सो जाती है
 
अपडेट __ 16

अगली सुबह आँचल की नींद पहले hi खुल जाती है तो वह उठ जाती है आवर रसखान देवी को उठाने को होती है मगर फिर कुछ सोच कर बाथरूम मैं फ्रेश होने के लिए चली जाती है

आँचल जब बाथरूम से आती है तो देखती है अभी भी राखी देवी सो रही है फिर आँचल की नज़र राखी देवी पर पड़ती है जो राखी देवी के चहरे पर मुस्कान होती है

राखी दीदी हस्ती हुई कितनी अच्छी लगती है मैं तो कब से राखी दीदी के चहरे पर मुस्कान नहीं देख रही हुईं मगर आज दीदी ज़रूर कोई अच्छा सपना देख रही है जो दीदी के चहरे पर मुस्कान है दीदी को अभी सोने hi देती हुईं .....

ये सोच कर आँचल रूम से निकल जाती है आवर फिर किचेन मैं जाकर कॉफ़ी बनाने लग जाती है

आँचल अभी कॉफ़ी बना रही होती है के राखी देवी के घर काम करने वाली एक नौकरानी भी आ जाती है

कुछ देर मैं कॉफ़ी भी बन जाती है तो आँचल कॉफ़ी कैप मैं लेकर किचेन से निकल जाती है

आँचल कॉफ़ी लेकर पहले राखी देवी के रूम मैं जाती है तो देखती है राखी देवी उठ गयी होती है आँचल राखी देवी को कॉफ़ी देती है फिर अपने पति के रूम मैं जाती है तो देखती है उसका पति रूम मैं नहीं है तो आँचल समझ जाती है वह खेतों की तरफ चला गया है फिर आँचल गीता की रूम मैं जाती है तो देखती है गीता उठ गयी है

आँचल जब गीता की रूम मैं जाती है तो गीता जल्दी से बीएड से उठ कर आँचल के पास आ जाती है आवर गुड मॉर्निंग कहते हुआ आँचल के गाल पर किश कर देती है

गीता के किश करते hi आँचल बहुत खुश हो जाती है आवर कॉफ़ी टेबल पर रख कर आँचल गीता को गले लगा लेती है आवर गीता को प्यार से चुम लेती है

आँचल के अपने बच्चे तो नहीं थे मगर आँचल को आएसा कभी नहीं लगा था के आँचल बिना बच्चे की है क्यू के गीता अंजलि आवर अर्जुन इतना प्यार hi करते थे आँचल से की आँचल बहुत खुश रहती थी आवर तीनो को अपने बच्चे की तरह hi प्यार करती थी

आँचल फिर गीता को कॉफ़ी देकर अंजलि के रूम मैं चली जाती है

अंजलि के रूम मैं जाते hi आँचल की आँखें बड़ी हो जाती है आवर आँचल के मुंह से एक आवाज़ निकल जाती है

हे भगवन ये लड़की कभी नहीं सुधरने वाली है ..... आँचल के मुंह से एहि निकलती है

क्यू की आँचल जब अंजलि की रूम मैं जाती है तो देखती है अंजलि आवर अर्जुन एक दूसरे से लिपट कर सोये हुआ है आवर अंजलि की एक तंग अर्जुन के जिस्म के ऊपर है आवर अंजलि की टीशर्ट कमर के ऊपर चली गयी है आवर अंजलि की लूजर निचे की तरफ आ गयी है आवर अंजलि की गुलाबी पेंटी दिख रही है

आँचल जल्दी से कॉफ़ी टेबल पर रख कर अंजलि के लूजर अंजलि के गांड के ऊपर करती है आवर टीशर्ट को निचे करती है आवर फिर अंजलि को धीरे से उठा देती है

अंजलि अंगड़ाई लेते हुआ उठ जाती है मगर फिर अपनी ममी को खुद को घूरते हुआ पति है

क्या हुआ ममी अब मैंने क्या कर दिया जो आप घर रही है मैं तो अभी उठ रही हुईं ... अंजलि मुंह बना कर कहती है

वही अंजलि को बोलते देख के आँचल जल्दी से अंजलि के मुंह पर हाँथ रख देती है आवर चुप रहने का इशारा करती है आवर अंजलि को पकड़ कर रूम से बहार आने जाती है जो अंजलि आवर भी मुंह बना कर देखने लगाती है

ममी मैं सच कहती हुईं मैंने कुछ भी नहीं किया फिर आप मुझे इस तरह क्यू घर रही है हहहहहह ममी हहहह .....

अंजलि फिर मुंह बना कर कहती है के आँचल उसी वक़्त अंजलि के लूजर पकड़ के निचे कर देती है जो अंजलि जल्दी से लूजर ऊपर कर देती है

ये आप कर रही गन्दी ममी जाइये मैं आप से बात नहीं करुँगी इतनी बड़ी होकर भी ाएसि हरकत कर रही है ..... अंजलि शर्माती हुई कहती है

ओह ओह देखो तो मेरी गुड़िया रानी तो शर्मा रही है आवर मुझे गन्दी है बोल रही है गन्दी मैं नहीं तू है मेरी पगली बेटी अभी तू अर्जुन के साथ किस हालत मैं सो रही थी तुझे पता भी है तेरी दोनों कपडे ऊपर निचे हो गयी थी आवर तेरी ये पेंटी दिख रही थी अगर अर्जुन पहले उठ जाता तो क्या सोचता तेरे बता मैं बता मुझे ..... आँचल अंजलि के सर पर करते हुआ कहती है

क्या सोचता ममी कुछ नहीं वह तो अभी बहुत छोटा है मेरी पेंटी भी देख लेता तो क्या हो जाता .. वह मेरा भाई है किसी से कहेगा थोड़ी न ...

अंजलि इस तरह कहती है जैसे अंजलि को कोई फर्क नहीं पड़ता अगर अर्जुन उसे पेंटी मैं भी देख लेता तो

अंजलि की बात सुन कर आँचल अपने मुंह पर हाँथ रख लेती है आवर फिर से अंजलि को घूरने लगती है

पागल लड़की भले hi वह किसी से न कहेगा मगर तेरी इस जिस्म को देख कर अर्जुन को कैसा लगेगा तुझे पता भी है अब तू छोटी बच्ची नहीं है घोड़ी जैसी हो गयी है आवर नंगी सोयेगी

आवर इतनी टाइट ब्रा क्यू पहनी है थोड़ा ढीला नहीं पहन सकती है

मरूंगी अगर फिर कभी ाएसि कपडे पहन कर अर्जुन के साथ सोई तो

आँचल फिर अंजलि को मरते हुआ बोलती है

मैं एहि कपडे पहन कर सोया करुँगी अर्जुन के साथ आप भी कोई कपडे पहन के सो जाइएगा ये नंगी भी सो जाइएगा अर्जुन के साथ मैं कुछ नहीं कहूँगी

ममी आप की तो दुधु भी बड़े बड़े है अर्जुन दूध भी पि लेगा कितना मज़ा आएगा जब एक मैं आप की दुधु पिऊँगी आवर एक अर्जुन

hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

बड़ा मज़ा आएगा ममी आप कहे तो आज रात मैं अर्जुन आवर मैं दूध पिलएंगे आप की

अंजलि हस्ते हुआ बोल कर भाग जाती है

हे भगवन इस लड़की को थोड़ा अकाल भी दे दीजिये इस लड़की की जिस्म तो औरत की तरह होती जा रही है मगर अकाल अभी भी बच्चे की तरह है

लगता hi नहीं ये गीता से छोटी है बड़ी hi लगाने लगी है भगवन जी थोड़ी अकाल से दीजिये मेरी अंजलि को

कैसी कैसी बाटे भी करने लगी है ये लड़की ..... आँचल अपनी सर पकड़ते हुआ शर्मा कर कहती है

आँचल का जिस्म भी सनसना सी जाती है आवर आँचल सोचने लग जाती है अंजलि के बातो को

जब अंजलि आवर अर्जुन एक साथ मेरी इस दूध को पिएंगे तो कितना मज़ा आएगा मुझे ये पागल लड़की तो मेरी चुकी hi नोच लेगी

मगर मेरा अर्जुन अपनी माँ की दूध बड़े hi प्यार से पियेगा मेरा बच्चा मुझे बहुत प्यारा करता है वह मुझे दर्द बिलकुल भी नहीं होने देगा

आँचल को बड़ी शर्म आने लगती है आँचल को वही पर आएसा लगने लगता है अर्जुन इस जगह पर hi दूध पिने लगा है जो आँचल अपनी आँखें बंद कर के अपने चुकी पर हाँथ फेरने लग जाती है आँचल को एक अजीब सी ख़ुशी महसूस होने लग जाती है आवर अर्जुन को सोचते हुआ आँचल पता नहीं कब दिवार से सात जाती है आवर आँचल की एक आह निकल जाती है

hhhhhhhhhhhhh अर्जुन बीटा

आँचल आँचल क्या बोल रही है क्या किया अर्जुन ने अर्जुन तो यह है भी नहीं फिर तू आयी क्यू सिसक रही है

राखी देवी पास आ कर कहती है आवर आँचल को घूरने लग जाती है जो आँचल शर्माने लगी जाती है

मगर फिर राखी की आवाज़ सुन के आँचल अपनी आँखें खोलती है आवर राखी देवी को खुद को घूरते हुआ पा कर आँचल हड़बड़ा जाती है

आँचल अभी क्या जवाब दे राखी को आँचल को समझ नहीं आती है

दीदी मैं तो रूम मैं थी आवर अर्जुन को उठा रही थी जो अर्जुन उठ नहीं रहा था आवर मुझे धक्का दिया तब मैं दर्द मैं सिसक पड़ी मगर मैं यह कैसे आई ...

आँचल आंजन बनाते हुआ कहती है

आँचल लगता है तेरी नींद पूरी नहीं हुई जा फिर से सोना अर्जुन रूम मैं सोया है आवर तू रूम के बहार है फिर यह किसे उठा रही है

नाश्ता बन गयी है तू जाकर नाश्ता लगा मैं अर्जुन को लेकर आती हुईं

दीदी आप रहने दो मैं उठा देती हुईं अर्जुन को ...

आँचल बोल पड़ती है क्यू के आँचल जानती थी अगर राखी उठाने गयी तो अर्जुन गुस्सा हो जायेगा इस लिए बोल पड़ी

नहीं तू रहने दे मैं उठा देती हुईं

राखी देवी बोलती हुई अर्जुन के रूम मैं चली जाती है

आँचल देखती है राखी देवी कितनी दुखी सवार मैं बोलती हुई रूम मैं जाती है थोड़ी देर के लिए आँचल भी दुखी हो जाती है

आवर फिर चली जाती है वह से

राखी देवी जब रूम मैं जाती है तो देखती है अर्जुन बीएड पर नहीं है

तभी राखी देवी को बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आती है जो राखी देवी समझ जाती है अर्जुन उठ गया है आवर नाहा रहा है तो राखी देवी धीरे से रूम से निकल जाती है

अर्जुन फ्रेश होकर निचे आता है तो देखता है सभी दिंनिंग टेबल पर बैठ कर अर्जुन का इंतज़ार कर रही है

अर्जुन पहले अपनी ममी माँ के पास जाता है आवर आँचल को गुड मॉर्निंग बोलते हुआ आँचल के गाल पर किश कर देता है जो बदले मैं आँचल भी अर्जुन के गाल को चुम लेती है

फिर अर्जुन अपनी गीता दीदी को भी गुड मॉर्निंग बोलते हुआ गाल चुम लेता है जो गीता भी खुश होकर अर्जुन को किश कर देती है गाल पर

फिर अर्जुन अपनी अंजलि दीदी के पास जाने वाला होता है मगर उससे पहले hi अंजलि उठ कर अर्जुन के पास आ जाती है आवर अर्जुन को गले लगा लेती है आवर अर्जुन के गाल पर किश करने लगती है कुछ देर के बाद जब अंजलि किश करना बंद नहीं करती है तो अर्जुन खुद से hi अपनी अंजलि दीदी को अलग करता है आवर कुर्सी पर बैठ जाता है

मगर अंजलि अभी भी वही पर कड़ी रहती है आवर मुंह बना कर अर्जुन को देख रही होती है जब अर्जुन को लगता है उसकी अंजलि दीदी अभी तक कुर्सी पर नहीं बैठी तो अर्जुन पीछे देखता है तो पता है उसकी अंजलि दीदी उसे घर रही होती है जो अर्जुन भी समझ जाता है आवर उठ कर फिर अपनी अंजलि दीदी के पास जाता है

अर्जुन के पास आते hi अंजलि फिर से अर्जुन के गाल को चुम लेती है

ओह ओह मेरा प्यारा भाई अपनी दीदी से इतना प्यार करता है बोलती हुई अंजलि कुर्सी पर बैठ जाती है

वही अर्जुन आवर अंजलि का प्यार देख कर आँचल राखी आवर गीता बहुत खुश होती है

राखी देवी अभी थोड़ी देर के लिए खुश तो हो जाती है मगर अर्जुन को सभी के साथ प्यार देख कर राखी देवी का दिल अंदर से जल रही होती है

राखी देवी की दिल भी बहुत दुःख रही होती है आवर ऊपर से अर्जुन एक बार भी राखी देवी की तरफ नहीं देखा होता है जो राखी देवी की आँखें भी भर आती है

राखी देवी को अभी बहुत रोना आ रही होती है मगर राखी देवी रो नहीं पा रही होती है

राखी देवी एक बार अर्जुन की तरफ देखती है जो अर्जुन अपनी ममी माँ को देखते हुआ खाना खा रहा होता है आवर मुस्कुरा रहा होता है मगर राखी देवी की तरफ देख भी नहीं रहा होता है

अर्जुन आवर आँचल का प्यार को देख राखी देवी को अब आवर बर्दाश्त नहीं होती है जो राखी देवी के आँखों से आंसू निकल जाती है

मगर राखी देवी जल्द hi आंसू को पोछ भी लेती है

राखी देवी बस एक रोटी hi कहती है आवर उठ कर चली जाती है

जो आँचल गीता आवर अंजलि तीनो को थोड़ा दुःख होता है मगर वह कुछ कहती नहीं है

वही अपनी माँ को जाते देख अर्जुन भी एक नज़र देखता है फिर खाना खाने लगता है

भाई जल्दी कर हमेह सोल्लगे भी जाना है देख काफी टाइम हो गयी है ...... अंजलि कुर्सी से उठ कर बोलती है

दीदी तो आप जाइये मैं अभी सोल्लगे हालत क्या करूँगा मैंने अभी एडमिशन भी नहीं लिया है सोल्लगे मैं .... अर्जुन कहते हुआ कहता है

भाई इस लिए तो बोल रही हुईं जल्दी सोल्लगे चल हम जल्दी से जायेंगे तो जल्दी एडमिशन हो जायेगा गीता दीदी ने बात कर ली है प्रिंसिपल से .... अंजलि कहती है

मगर दीदी मैं तो कोई डॉक्यूमेंट लाया hi नहीं हुईं तो कैसे होगा मेरा एडमिशन .... अर्जुन कहते हुआ hi कहता है

कितना खा रहा है देख तेरे पलेट की रोटी भी ख़तम हो गयी चल अब उठ भी जा आवर तेरे सरे डोकुमेंट मेरे पास है जा जल्दी से तैयार होकर आ बहुत दूर जाना है जमीन .... अंजलि अपनी आँचल ममी की तरफ देख कर मुस्कुराती हुई कहती है

माँ आप मेरे डोकुमेंट भी साथ लेकर आ गयी मैंने तो नहीं कहा था आप लेन के लिए आवर मुझे बताया भी नहीं आप ने ..... अर्जुन थोड़ा रूठने जैसा बोलता है

जो आँचल गीता आवर अंजलि एक दूसरे को देख मुस्कुरा देती है

ओह ओह मेरे मुन्ना राजा ओह ओह मेरा बाबू तो अपनी माँ पर गुस्सा हो गया सॉरी सॉरी जो नहीं बताया ूमा प्लीज प्लीज अपनी माँ को मांफ करदे प्लीज ुम्माआ ऊम्ममाआ

बोलती हुई आँचल बार बार अर्जुन के किश करने लगती है जो अर्जुन हसने लगता है

ठीक है आप की पहली गलती है ीा लिए मैंने मांफ किया आप भी मेरी गलती को मांफ कर देना

अब छोड़ भी दीजिये माँ नहीं तो मैं सोल्लगे नहीं जाऊंगा

अर्जुन आँचल को दूर करते है बोलता है जो आँचल भी फिर किश नहीं करती है

अर्जुन थोड़ी देर मैं तैयार होकर आता है जो बहार hi अंजलि आवर गीता कड़ी होती है तो अर्जुन बाइक निकलने लगता है

क्या कर रहा है अर्जुन बाइक से नहीं हम आयी hi चलते है ....... गीता कहती है

मगर दीदी सोल्लगे तो काफी दूर है न फिर हमेह लेट नहीं हो जायेगा जाने मैं .... अर्जुन थोड़ा चिंतित होकर कहता है

हमेह जाने मैं बस 52 मिनट लगेंगे अगर हम खेत के रस्ते से चलेंगे आवर अभी हम्हारे पास 1: 15 मिनट है हम टाइम से पहले hi पहुँच जायेंगे

अर्जुन आयी hi जाने मैं हमेह बहुत मज़ा आती है

चल तुझे भी अच्छा लगेगा ..... गीता कहती है

अर्जुन का पैदल जाने का मन तो नहीं होता है क्यू के अर्जुन को पता चल जाता है खेतों से जाने मैं उसे कितने परेशां होना पड़ेगा

मगर अर्जुन अपनी दीदियों के लिए मान जाता

फिर तीनो बहन भाई सोल्लगे के लिए निकल जाते है

*******

वही सोल्लगे के गेट पर तीन से चार लड़के खड़ा होते है आवर हर लड़की को कुछ न कुछ बोल रहे होते है लड़कियों को सोल्लगे जाते हुआ

यार अभी तक अंजलि आवर उसकी बहन नहीं आई लगता है आज वह दोनों सोल्लगे नहीं आने वाली है ...... उनमे से एक बोलता है

अगर वह आज नहीं आएगी तो साला मेरा लैंड से पानी भी नहीं निकलेगा एक अंजलि की गांड hi है जो देख कर मेरा लैंड खुद hi पानी गिरने लगता है ...... उनमे से दूसरा बोलता है

अरे बस छोड़ रंडी रोना बंद करो मुझे पता है अगर अंजलि को जयादा चोट नहीं लगी होगी तो वह सोल्लगे ज़रूर आएगी मैं उसे बचपन से जनता हुआ वह कभी पढाई बंद नहीं करती है तो बस इंतज़ार करो आवर अभी इन सब की गांड देख कर अपना लैंड खड़ा करो ..... उनमे से तीसरा बोलता

ये चार अंजलि आवर गीता का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे होते है

वही अर्जुन खेत मैं चल रहा होता है आवर कभी कभी चलते हुआ डगमगा जा रहा होता है जो अंजलि आवर गीता देख देख कर है रही होती है

दीदी आप दोनों मुझपे है रही है मैं नहीं जाऊंगा इस तरह सोल्लगे आप दोनों जाइये मैं बाइक से आता हुईं ये खेत कितना ऊंच खाल है

बराबर रहता तो कितना अच्छा होता ..... अर्जुन खेत के ारी पर बैठ कर कहता है

ये क्या बाबू हम बस सोल्लगे पहुँचाने वाले है बस 20 मिनट आवर लगेगा आवर देख अब खेत भी ख़तम होने वाला है फिर हम रस्ते से चलेंगे ..... गीता कहती है

भाई तेरी वजह से आज हमेह सोल्लगे पहुँचाने मैं 1 घंटे से भी जयादा लगने वाला है हुईं तू हम्हरा भाई होकर भी इतना कमोज़र कैसे हो गया ..... अंजलि थोड़ी मुंह बना कर बोलती है

अर्जुन खेतों मैं चलने मैं हमेह बहुत मज़ा आता है तुझे भी आएगा बस कुछ दिन के बाद अब चल भी हम दोनों अब नहीं हसेंगे ... गीता मुस्कुरा कर कहती है

जो अर्जुन फिर से धीरे धीरे चलने लगता है

खेतो मैं चलते हुआ अर्जुन अर्जुन का दिमाग घूमने लगता है अर्जुन जैसे hi खेत के बहार आता है अर्जुन को बहुत रहत मिलता है

अर्जुन का चेहरा देख दोनों बहाने हसने लगती है अंजलि तो अर्जुन के पास hi चली जाती है आवर अपनी दुप्पटे से अर्जुन का चहरे पर आई पसीना पोछने लगती है

जो अर्जुन को थोड़ा शर्म भी आने लगता है आवर अर्जुन अपनी अंजलि दीदी को दूर करने लगता है

मगर अंजलि दूर नहीं होती है आवर अर्जुन के बहते हुआ पसीना पोछ देती है

भाई देख वह रहा हम्हरा सोल्लगे चलो मैं तुमेह सहारा देकर चलती हुईं .... अंजलि अर्जुन के पसीना पोछते हुआ बोलती है

अर्जुन भी उस तरफ देखता है तो सामने सोल्लगे दिख जाता है

वही अंजलि के पकड़ने से अर्जुन मुस्कुराते हुआ दूर हैट जाता है

फिर तीनो सोल्लगे के तरफ बढ़ जाते है
 
अपडेट __ 17

अर्जुन अपनी दीदियों के साथ सोल्लगे के पास पहुँच गया होता है जो अर्जुन को बहुत जयादा पसीने हो रहे होते है आवर अर्जुन अपने पसीने को पोछते हुआ आगे बढ़ रहा होता है आवर अर्जुन के आगे hi गीता आवर अंजलि जा रही होती है अर्जुन पीछे होता है जो दिख नहीं रहा होता है बस अपने पसीने को पोछ रहा होता है

वही चरों लड़के गीता आवर अंजलि को आते देख बहुत hi खुश हो जाते है गीता आवर अंजलि के आते देख अंजलि की उछलती हुई चुकी देख कर उन लड़कों का लैंड भी खड़ा होने लगता है

वही दोनों बहन बाते करते हुआ चल रही होती है

यार गजब की खूबसूरत लग रही है देख कर सबर नहीं हो रहा दिल कर रहा है अभी जाकर पकड़लू अंजलि की उफान मरती हुई चुकी को ..... उनमे से एक लड़का बोलता

सुमित अभी चुप होजा तू आवर कुछ भी मत बोल चल निकलते है अभी हम यह से नहीं तो वह कमीना सोल्लगे मैं hi भगा भगा कर मरेगा .... उनमे से दूसरा लड़का कहता है

क्यू के उस लड़के की नज़र अर्जुन पे पद गयी थी जो अंजलि आवर गीता के पीछे आ रहा होता है

आवर वह लड़का भी जनता था अर्जुन कैसा है इस लिए सुमित को चुप रहने को बोलै

मगर देरी हो गयी सुमित को चुप करने मैं उसे आवर सुमित बोल पड़ता है

वाओ आज बहुत खूबसूरत लग रही हो अंजलि ....... कहा बिजली गिराने की इरादा है ..... कहो तो मैं भी साथ चलता हुईं एक साथ बैठ के पढाई करेंगे हम दोनों ....... सुमित हँसते हुआ कहता है

तू अपनी माँ के साथ क्यू नहीं बुला लेता ... आवर अपनी माँ के साथ hi बैठ जाना ....... सुना है तेरी माँ हर किसी को अपने साथ कही भी बैठ जाती है .... अंजलि निडर होकर कहती है

आएसा नहीं था के अंजलि आज hi आएसा बोल रही थी अंजलि पहले भी आएसा बोलती थी लेकिन बोलती हुई वह से चली जाती थी आवर लड़के बस हस्ते रह जाते थे अंजलि के जाते हुआ देख कर

मगर आज अंजलि बोलते हुआ hi जाकर सुमित के पास कड़ी हो गयी थी आवर बहुत hi गुस्से से सुमित को घूरने लगी है सुमित के आँखों मैं देख कर

आज अंजलि के आँखों मैं कोई दर नज़र नहीं आ रही होती है आवर नहीं कोई भी शर्मिंदगी होती

वही अंजलि की आज शाहश को देख कर वह दूसरा लड़का तो समझ गया था अंजलि आज क्यू इतने पास आकर बोल रही है वह भी बिना डरे

मगर सुमित को बहुत गुस्सा आता है अंजलि पर ... क्यू के आज अंजलि सिर्फ बोल कर चली नहीं गयी थी बोलते हुआ उसके पास भी आ गयी थी ..... आवर सुमित की माँ के बारे मैं भी बोल चुकी थी

अंजलि जैसे hi सुमित के पास कड़ी होती है सुमित अपना एक हाँथ उठा देता है अंजलि को मरने के लिए

मगर सुमित का हाँथ हवा मैं hi रह जाता है सुमित के डैम घुटने लगता है सुमित के हालत ख़राब होने लगाती है सुमित के पेअर भी बहुत जयादा कैम्पे कहते है

वही जब गीता को लगता है की सुमित उसकी बहन को मरने वाला है तो गीता अंजलि को अपने साइन से लगा लेती है आवर फिर घूम जाती है ताकि सुमित का तप्पड़ अंजलि को न लगे

चल अब मार के दिखा मुझे .... भड़वे तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी अंजलि दीदी पे हाँथ उठाने की ..... अर्जुन बोलते हुआ सुमित को धक्का दे देता है जो सुमित चीखते हुआ ज़मीन पर गिर जाता है

सुमित का पूरा जिस्म कैंप रहा होता है सुमित की आँखे भी लाल पद चुकी होती है सुमित दर कर कैंप रहा होता है आवर सुमित कुत्ते की तरह हांफ रहा होता है

भाग जा मेरी नज़रों के पास से मैं अभी अपनी दीदियों के सामने बुरा भाई नहीं बनना चाहता हुईं

कुत्ते सेल फिर कभी किसी भी लड़की के सामने तुझे भोकते हुआ देखा तो फिर मांफ नहीं करूँगा .... अर्जुन गुस्से मैं कहता है

वही 2 लड़के भी अर्जुन को मरने के लिए आगे बढ़ रहे होते है मगर जो लड़का अर्जुन को जान रहा होता है वह दोनों का हाँथ पकड़ लेता है आवर मन कर देता है

लड़के के आँखों मैं दर को देख वह दोनों लड़के रुक जाते है

वही गीता अपनी बहन अंजलि को बाँहों मैं लेकर कड़ी होती है मगर गीता के जिस्म पर तप्पड़ नहीं पड़ता है जो गीता इस लिए घूम गयी थी के सुमित का तप्पड़ अंजलि पर न लगे

मगर तभी गीता आवर अंजलि को अर्जुन की आवाज़ सुनाई देता है जो अर्जुन सुमित को धक्का देकर बोल रहा होता है

अर्जुन की आवाज़ सुन अंजलि भी गीता से अलग होकर देखती है जो अर्जुन गुस्से मैं बोल रहा होता है

वही सुमित कुत्ते की तरह बस हांफ रहा होता है सुमित का सर निचे होता है क्यू के अब तक सोल्लगे के बहार बहुत से लड़के आवर लड़कियां आ चुकी थी जिससे सुमित को शर्म आणि रहा होता

तभी वह पर एक गाड़ी आती है जो सभी लड़के लड़कियां सोल्लगे मैं जाने लगते है वह गाड़ी प्रिंसिपल की होती है जो लड़के लड़किया सोल्लगे मैं जाने लगते है

गीता भी अर्जुन को साथ लेकर सोल्लगे के अंदर चली जाती है

वही अंजलि की आँखों मैं बहुत ख़ुशी होती है .. अंजलि बस रह रह कर अर्जुन को बस देखती जा रही होती है

अंजलि को इस वक़्त अपने छोटे भाई पर बहुत प्यार आ रहा होता है ये सोच कर के मेरे खातिर अर्जुन ने सुमित को आज अच्छा सबक सिखाया अब वह मुझे कभी परेशान नहीं कर सकता है

अभी कुछ देर hi गए होते है की अंजलि खुद को रोक नहीं पति है आवर सोल्लगे मैं hi अर्जुन को गले लगा लेती है आवर अर्जुन के गलों पर किश करने लगती है जो अर्जुन को शर्म आने लगता है

अर्जुन चरों तरफ देखता है तो पता है सोल्लगे मैं कई सरे लड़के लड़कियां उसे hi देख रहे होते है जो अर्जुन अपनी अंजलि दीदी को अलग करने लगता है

दीदी क्या कर रही है देखिये कैसे सब लोग घर रहे है ... अर्जुन शरमाते हुआ कहता

अपने भाई की बात सुन न चाहते हुआ भी अंजलि अर्जुन से अलग हो जाती है आवर अंजलि की नज़र जब गीता पर पड़ती है है तो पति है गीता भी उसे गुस्से से घर रही होती है जो अंजलि अपनी सर निचे कर लेती है

भाई तू एहि बैठ मैं अभी प्रिंसिपल सर से मिल कर आती हुईं फिर मैं तुझे कॉल करती हुईं तब अंजलि के साथ आ जाना ........ गीता कहती है

तो अर्जुन भी ठीक है बोल देता है फिर गीता एक बार फिर से अंजलि को देखती है जो अंजलि अभी भी निचे की तरफ hi देख रही होती है तो गीता देख के चली जाती है

वही अंजलि अपनी सर निचे किये hi मुस्कुरा भी रही होती गीता के जाते hi अंजलि झट से अपनी सर उठा देती है

बहुत अच्छा उस हरामी को मर कर भाई आज मैं बहुत खुश हुईं आवर तू शर्मा क्यू रहा है मैं तेरी दीदी हुईं किश करते किसी ने देख भी लिया तो क्या फर्क पड़ता है तू मेरा बॉयफ्रेंड थोड़ी है आवर अगर होता भी तो तू क्यू शर्माता शर्माना तो मुझे चाहिए था ..... अंजलि बिंदास बोलती है

जो अर्जुन को बहुत अजीब लगता है आवर अर्जुन फिर अपनी अंजलि दीदी को घूरने लगता है क्या बोल रही है उसकी अंजलि दीदी ये सब

दीदी क्या बोल रही है आप

कोई बात नहीं शर्मा मत तू एहि बैठ मैं अभी कॉफ़ी लेकर आती हुईं

अभी अर्जुन कुछ बोलता उससे पहले hi अंजलि बोल पड़ती है आवर शर्माती हुई चली जाती है

जो अर्जुन को कुछ समझ नहीं आता है उसकी अंजलि दीदी क्या क्या बोल रही है

वही अर्जुन गीता आवर अंजलि के आने के बाद वह तीनो लड़के सुमित के पास जाते है मगर सुमित कुछ बोले hi वह से उठ कर चला जाता है

तभी एक गाड़ी बहुत hi तेज़्ज़ी मैं सोल्लगे मैं आती है जो उस गाड़ी की हॉर्न की आवाज़ सुन कर उस वक़्त सभी लड़के आवर लड़कियां उस गाड़ी की तरफ मुड़े कर देखने लगते है गाड़ी भी सोल्लगे के अंदर आकर रूकती है

सभी लड़के लड़कियों की नज़र उस गाड़ी पर hi होती है आखिर इतनी तेज़्ज़ गाड़ी लेकर कॉलेज मैं कौन आया है

तभी गाड़ी से पहले एक बूढ़ा आदमी निकलता है जो देखने से गाड़ी का ड्राइवर लगता है जो गाड़ी चलने वाला कपडा को पहना होता है जो थोड़ा डरा हुआ भी होता है

वह जल्दी से गाड़ी से निकल कर गेट खोलता है

जो गाड़ी के दूसरी तरफ से एक खूबसूरत लड़की बहार आती है लड़की की चहरे पे बहुत ख़ुशी होती है वह लड़की पीला कमीज़ सलवार मैं बहुत hi खूबसूरत लग रही होती है आवर अपनी सर के ऊपर चश्मा लगाने से आवर भी खूबसूरत लग रही होती है

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वह लड़की गाड़ी से निकल कर फिर दूसरी तरफ आती है तभी उस गाड़ी की गेट खिलती है आवर फिर एक लड़की दिखती है जो गाड़ी के सीट पर बैठ होती है वह लड़की लाल सूत आवर उजला सलवार पहनी होती है आवर आँखों मैं कला चश्मा लगाई होती है

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वह लड़की बड़े hi कैटल अंदाज मैं गाड़ी से बहार आती है उन दोनों लड़कियां को देख कर लड़के तो लड़के लड़कियों के भी दिल मचलने लगती है

वह लड़की फिर गाड़ी से बहार आती है आवर बड़े hi कातिल अदा से गाड़ी के पास कड़ी हो जाती है

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जब वह लड़की गाड़ी के बहार कड़ी होकर कातिल अदा से देखती है तो कुछ लड़कों के लैंड खड़े हो जाते है लड़की की चुकी सूत मैं कैद सीना थोड़ा निकली हुई होती है आवर उस लड़की की जिस्म दूध की तरह गोरी होती जो लड़की की चहरे आवर गर्दन को देख कर पता चल रही होती है लड़की इस तरह कड़ी होती है की लड़की की गांड थोड़ी पीछे की तरफ अभी निकली हुई होती है लड़की कुछ देर कड़ी रहती है आवर सामने की तरफ देख रही होती है

क्या कर रही है तू जल्दी से फोटो निकल न ..... लड़की बोलती है जो सामने से वह दूसरी लड़की उस लड़की की फोटो खिंच रही होती है

हो गया बाबा आवर लेनी है या अब क्लास मैं जाना है ... वह दूसरी लड़की कहती है

नहीं चल बस एक hi काफी है काका अभी आप गाड़ी लेकर जा सकते है मैं आप को फ़ोन करुँगी तब आ जाइएगा ... वह लड़की अपने ड्राइवर से कहती है तो वह ड्राइवर ठीक है बोलता है आवर गाड़ी लेकर चला जाता है

वह दोनों लड़की हस्ती हुई एक साथ अपने क्लास की तरफ चलने लगाती है जो वह सभी दोनों लड़कियों को प्यासी नज़रों से देख कर आअह्ह्ह भरने लग जाते है

वव क्या लड़की है यार वह अंजलि अब तेरी टक्कर देनी वाली लड़की इस सोल्लगे मैं आ गयी है देख कैसे सभी उस लड़की को घर रहे है लगता है आँखों से hi लड़की को नंगा कर रहे है ये सब जो पहले सायद तुझे नंगा करते होंगे ..... एक लड़की उन दोनों लड़कियों मैं से एक लड़की को देखती हुई अंजलि से कहती है

लड़की की बात सुन अंजलि भी उस तरफ देखती है जो अभी कॉफ़ी ले रही होती है मगर जैसे hi अंजलि की नज़र उस लड़की पर पड़ती है अंजलि की भी आँखें बड़ी हो जाती है आवर अंजलि कुछ देर उन दोनों मैं लड़कियों मैं एक को hi देखने लगती है

हां खूबसूरत तो है मगर मुझसे जयादा नहीं है अभी नै नै है तो कुछ दिन उसे hi देखेंगे मगर मुझे तो हर वक़्त देखेंगे ..... अंजलि मुंह बना कर कहती है आवर कॉफ़ी लेकर वह से चली जाती है

वही वह लड़की एक कामिनी सी मुस्कान के साथ अंजलि को जाते देखती रही

अंजलि को बिलकुल भी अच्छी नहीं लगी थी उस लड़की की बात क्यू की सोल्लगे मैं कोई सबसे जयादा खूबसूरत थी तो वह सिर्फ अंजलि थी आवर अंजलि कभी अपनी तारीफ नहीं करती थी अगर कोई लड़की बोलती भी थी तो अंजलि उसी वक़्त बोल देती थी मुझसे खूबसूरत तो मेरी दीदी है आवर वह बात बोलते हुआ अंजलि मुस्कुरा भी देती थी अंजलि को बहुत अच्छा लगता था जब हर लड़का अंजलि के जिस्म को देख कर आअह्ह्ह्हह भरते थे जो अंजलि मन hi मन खुश होती थी अंजलि को कई लड़के ी लव यू भी बोल चुके थे मगर अंजलि ने कभी किसी का प्यार काबुल नहीं की थी

मगर जब उस लड़की ने दूसरी लड़की की तारीफ की तो अंजलि को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा जो अंजलि आज अपनी तारीफ खुद hi कर दी

अंजलि कॉफ़ी लेकर जा रही होती है मगर अंजलि की नज़र बार बार उन दोनों लड़कियों को जाते हुआ देख रही होती है आवर अंजलि मन मैं बहुत खुश बुदबुदा रही होती है

aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

दीदी क्या कर रही है आप ये कॉफ़ी मुझे पिलाने के लिए लेकर आये रही है ये मुझे जलने के लिए ..... अर्जुन अपना सरत झड़ते हुआ कहता है

ओह ओह सॉरी सॉरी भाई मैंने धयान नहीं दिया

aaaaaaaaaa जल तो नहीं रहा भाई aaaaaaaaaaaa अंजलि फुक मरते हुआ कहती है

नहीं दीदी बस थोड़ा सा लगा है आप दीजिये कॉफ़ी मुझे ... अर्जुन सरत झड़ने के बाद कहता है जो अंजलि भी कॉफ़ी अर्जुन को दे देती है

मुई पता नहीं कहा से मेरे hi सोल्लगे मैं आ गयी ..... अंजलि मन मैं कहती है आवर कॉफ़ी पिने लगती है
 
अपडेट __ 18

अंजलि कॉफ़ी पि रही होती है आवर बुदबुदा रही होती है उस लड़के के बारे मैं सोच सोच कर आज पहली बार किसी लड़की से अंजलि को जलन हो रही थी आवर उसकी वजह थी अंजलि की दोस्त की बात आएसा नहीं था के वह लड़की अंजलि से कही जयादा खूबसूरत थी मगर अंजलि की दोस्त ने उस लड़की की तारीफ करने से अंजलि को भी लगने लगा था वह लड़की अंजलि से भी कही जयादा है जो अंजलि को थोड़ा वह बात परेशां कर रही थी आवर अंजलि उसी लड़की के बारे मैं सोच रही थी

दीदी क्या हुआ आप उदास क्यू लग रही है कही उस लड़के से दर तो नहीं रही न आप ..... अर्जुन कहता है जब अपनी अंजलि दीदी को गुमसुम सी देखता है तो

नहीं भाई अब मैं भला क्यू उस लड़के से डरने लगी अब मैं तो बिलकुल भी नहीं डरने वाली जब मेरा राजा भाई साथ हो .... अंजलि मुस्कुरा कर कहती है

अभी ये दोनों भाई बहन बात कर रहे होते है की गीता भी वह आ जाती है

भाई तेरा एडमिशन हो गया है अगर तू चाहे तो आज क्लास जा सकता है नहीं तो घर भी जा सकता है जैसा तेरा दिल करे ..... गीता कहती है

दीदी आज मैं क्लास नहीं जाना चाहता हुईं आज मैं बस इस सोल्लगे मैं घूम कर घर जाना चाहता हुईं ..... अर्जुन कहता है

फिर ठीक है भाई .... अंजलि तू अर्जुन को सोल्लगे घुमा दे फिर तू अपनी क्लास मैं चली जाना ..... गीता कहती है

ok दीदी मैं अर्जुन को सोल्लगे घुमा देती हुईं आप जाइये ..... अंजलि कहती है तो गीता अपनी क्लास मैं चली जाती है

अंजलि पहले अर्जुन को सोल्लगे घूमती है फिर गीता की आवर अपनी क्लास रूम भी अर्जुन को दिखती है ... फिर उसके बाद अंजलि एक क्लास रूम के पास जाकर रुक जाती है

भाई यह क्लास रूम तेरा है ...... अर्जुन को उसका क्लास रूम दिखती हुई अंजलि कहती है

अर्जुन भी अपना क्लास रूम को देख कर अंदर जाने को होता है आवर अर्जुन ने अपना पहला पेअर भी क्लास रूम के नादर कर देता है .... तभी अर्जुन को एक लड़की दिखाई देती है मैं जो अर्जुन झट से क्लास रूम के बहार आ जाता है

अरे साला ये छिपकली भी एहि पढ़ती है क्या ..... अर्जुन क्लास रूम के बगल मैं होकर hi मैं सोचता है

क्या हुआ भाई अगर अभी तुझे अंदर जाकर देखना है तो तू देख सकता है अभी टीचर के आने मैं थोड़ा वक़्त है ....... अर्जुन को अचानक क्लास के बहार आने पर अंजलि कहती है

दीदी अभी मेरा मन नहीं कर रहा चलिए घर चलते है ..... अर्जुन कहता है

अर्जुन का अभी मन तो किया था क्लास मैं जाने का मगर उसी वक़्त अर्जुन की नज़र पद गयी थी आस्था पर जो अभी अपनी दोस्त नीता से बात कर रही होती है जो आस्था तो अर्जुन को नहीं देख पति है मगर अर्जुन की नज़र जैसे hi आस्था पे पड़ती है अर्जुन क्लास के बहार भाग आता है

ठीक है फिर हम घर चलते है मेरा भी आज मन नहीं कर रहा है पढाई करने का ...... अंजलि कहती है

फिर अर्जुन आवर अंजलि घर के लिए निकल जाते है

वही अर्जुन जैसे hi क्लास के अंदर न जाकर बहार भागता है तभी कुछ लड़कियों आवर लड़कों का नज़र पद जाता है अर्जुन पर

वही आस्था के पीछे बैठी दो तीन लड़की आपस मैं बात करने लगती है

लड़की 1 ::: कितना स्मार्ट हो गया है न अंजलि का भाई आवर वह बहुत गुस्से वाला भी है आते hi सुमित को पिट दिया अंजलि आवर गीता दीदी बड़ी किस्मत वाली है जो अर्जुन जैसा भाई मिला

लड़की 2 ::: हां यार हैंडसम तो बहुत है अंजलि दीदी का भाई आवर ताक़तवर भी उस वक़्त तो लग रहा था सुमित मर hi जायेगा मगर फिर अर्जुन ने उसे छोड़ दिया जो सुमित उस वक़्त कुत्ते की तरह हांफ रहा था

लड़की 3 ::: तुम दोनों सही कह रही हो अर्जुन मैं हर चीज मौजूद है जो एक लड़की को चाहिए होता है अर्जुन की जो भी गर्लफ्रेंड बनेगी वह किस्मत वाली hi होगी कस के अर्जुन मेरा बॉयफ्रेंड बन जाता वह लड़की सोचती हुई बोलती है जो दोनों लड़कियां हस्ती हुई उस लड़की को देखने लग जाती है

हीई .... मेरा नाम आस्था है आवर ये मेरी बेस्टफ्रेंड नीता है ..... आस्था अपनी हाँथ को आगे कर के बोलती है

आस्था के अचानक बोलने आवर फिर हाँथ मिलाने के लिए आगे करने पर वह लड़कियां थोड़ी देर तो सोचने लगती है फिर वह तीनो भी अपनी अपनी नाम बता कर आस्था आवर नीता से हाँथ मिलती है

तुम सभी इस वक़्त किस लड़के के बारे मैं इतना तारीफ कर रही हो क्या उस लड़के के अंदर इतना सब कुछ है या तुम सब बस आयी hi बोल रही हो ...... आस्था कहती है

मैं अर्जुन को जयादा तो नहीं जानती क्यू के अर्जुन बचपन से अपनी ममी के पास रहा है आवर कल hi वह गाँव आया है मगर आज सोल्लगे मैं आते hi सोल्लगे के बदमाश सीनियर को पिट दिया अर्जुन ने वह भी अपनी बहन की वजह से जो लड़का अपनी बहन को इतना प्यार करता है वह अच्छा तो होगा hi ... आवर अर्जुन कितना हैंडसम है सोल्लगे के अभी किसी लड़की से पूछ सकती हो यह तक के सीनियर लड़की भी अर्जुन के बारे मैं एक दूसरे से बात कर रही थी ..... लड़की 2 कहती है

ओह इतना अच्छा है वह लड़का फिर तो मिलना चाहिए मुझे भी उस लड़के से ... आस्था बोलती है

कही तुम्हारे भी दिल मैं अर्जुन के लिए प्यार तो नहीं जग रहा न अर्जुन की तारीफे सुन कर तुम इतनी खूबसूरत हो की तुमेह कोई लड़का इंकार भी नहीं कर सकता है ....... लड़की 1 आस्था की खूबसूरती को देखती हुई कहती है

आएसा कुछ नहीं है उससे भी कही जयादा हैंडसम लड़का भी आ जाये फिर भी आस्था प्यार नहीं कर सकती .... क्यू की इस महारानी साहिबा ने किसी को अपना ये नन्हा सा दिल सहर मैं hi दे बैठी है आवर बस इनका दिल उसी के लिए धड़कता है ....... आस्था का जवाब नीता देती है

जो आस्था दिल hi दिल मैं खुद मुस्कुराने लगती है

क्या तुमने अपना बॉयफ्रेंड बना लिया है फिर हमेह कब मिला रही हो अपने बॉयफ्रेंड से ..... लड़की 3 कहती है

तीनो लड़कियों को ख़ुशी होती है की आस्था अब अर्जुन से प्यार नहीं करेगी तो हम अर्जुन पर लाइन मार सकती है

अभी तो मैं खुद उससे ठीक से नहीं मिली आवर अब वह पता नहीं कहा होगा अगर मुझे मिला तो तुम सब से ज़रूर मिलवा दूंगी ...... आस्था थोड़ी नीरस होकर कहती है ...... क्यू की आस्था को अर्जुन की याद आने लगी होती है

फिर कोई बात नहीं होती है उन लड़कियों मैं .... क्यू की टीचर आ जाते है तो सभी संत होकर बैठ जाती है

वही अर्जुन आवर अंजलि एक साथ घर जा रहे होते है अंजलि फिर अर्जुन को खेत के रस्ते hi घर लेकर जा रही होती है इस बार अर्जुन खेत मैं थोड़ा जल्दी जल्दी चल रहा होता है ताकि खेत से जल्दी निकल सके जो पीछे चल रही अंजलि मन hi मन मुस्कुरा रही होती है अर्जुन को तेज़्ज़ चलते हुआ देख कर

अर्जुन खेत के बहार निकल कर बैठ जाता है आवर अपने हाँथ से माथा पोछने लगता है जो बहुत तेज़्ज़ पसीना हो रहे होते है

अर्जुन अपना पसीना पोछ hi रहा होता है की अंजलि ठीक अर्जुन के आगे बैठ जाती है आवर फिर अर्जुन के पैरों के सामने सर रख कर लेट जाती है

अंजलि दीदी के अचानक लेटने से अर्जुन थोड़ा शर्मा जाता है ये सोच कर के उसकी अंजलि दीदी कितनी नटखट है जो बिच सड़क के किनारे इसी तरह लेट गयी मगर अर्जुन अपनी अंजलि दीदी को कुछ कहता नहीं है

अर्जुन जयादा पसीना आ रहा है तो ले मेरी दुप्पटे मैं पोछ ले वर्ण तेरा सरत भी ख़राब हो जायेगा ....... अंजलि बोलते हुआ अपनी साइन से दुपट्टा हटा कर अर्जुन के आगे कर देती है

वही अर्जुन तो पहले अपनी दीदी की दुप्पटे को लेकर पोछने लगता है चहरे का पसीना मगर जब अर्जुन अपना पसीना पोछ कर दुप्पट्टे को देने को होता है तभी अर्जुन की नज़र अपनी अंजलि दीदी के साइन पर जाता है जो अंजलि की दोनों चुकी आधी आधी दिख रही होती है आवर अंजलि की साइन पर पसीने होने से अंजलि की सीना चमक रही होती है आवर उससे भी कही जयादा अंजलि की टाइट चुकी उभर कर उठी हुई थी अपनी दीदी की उठी हुई चुकी को देख कर अर्जुन के लैंड एक बार फुफकार मर देता है

अर्जुन का लैंड आज कुछ जयादा hi जोश मैं खड़ा होने लगा था अंजलि की भरपूर उठी हुई चुकी को देख कर इस वक़्त अगर अर्जुन के जगह कोई होता तो यकीनन अंजलि की मोती बड़ी चुकी को पकड़ कर मसल देता आवर अंजलि की मोती मोती रसभरी चुकी का रास पि जाता

मगर अर्जुन बस अपनी अंजलि दीदी की चुकी को बड़े गौर से देख रहा होता है अर्जुन का मन तो कर रहा होता है अंजलि की चुकी पकड़ने का मगर अर्जुन अपना हाँथ को आगे नहीं बढ़ा पा रहा होता है

कुछ देर तक तो अर्जुन अंजलि की चुकी देखता रहा मगर जब अर्जुन को अहसास हुआ की अंजलि उसकी दीदी है तो अर्जुन अपनी नज़र अंजलि की चुकी से हटा लिया आवर दूसरी तरफ मुंह कर के देखने लगा

वही अंजलि बिंदास खेत के किनारे लेती हुई थी अंजलि को ज़रा भी अहसास नहीं था के उसके छोटे भाई की हालत कितनी ख़राब हो रहा है उसकी चुकी को देख कर अंजलि बस ऊपर आसमान की तरफ देख रही होती है जो आसमान अभी बिलकुल उजला होता है आवर सूरज बादलों मैं छिपा हुआ होता है

दीदी लगता है बारिश होने वाली है चलिए हम जल्दी से घर चलते है ........ अर्जुन खड़ा होते हुआ बोलता है

अंजलि भी अर्जुन की बात सुन जल्दी से उठ जाती है आवर दोनों भाई बहन घर की तरफ चल पड़े है

रस्ते भर अर्जुन अपनी अंजलि दीदी की तरफ देखता भी नहीं है आवर अर्जुन आगे की तरफ hi चल रहा होता है ताकि उसकी नज़र फिर से अपनी अंजलि दीदी की जिस्म पर न पड़े कुछ देर मैं hi अर्जुन आवर अंजलि घर पहुँच जाते है

घर जाते hi अंजलि तो जल्दी से अपनी रूम मैं चली जाती है बोल कर के मैं नहाने जा रही हुईं

अंजलि के रूम मैं जाने के बाद अर्जुन अपने रूम मैं जाने को होता है मगर अर्जुन के रूम अभी भी बंद होता है

अर्जुन को थोड़ा अजीब लगता है उसका रूम आखिर बंद क्यू है मैं तो कल hi घर आ गया हुईं तो मेरा रूम अभी तक किसी ने सफाई नहीं किया क्या

मैं हर दिन अंजलि दीदी के रूम मैं तो नहीं सो सकता न

ये सोचते हुआ अर्जुन वह से अपनी गीता दीदी के रूम मैं चला जाता है

गीता की रूम अभी खुला हुआ होती है तो अर्जुन जाकर सीधे बीएड पर गिर जाता है

अर्जुन बीएड पर लेट कर ऊपर की तरफ देख रहा होता है आवर अर्जुन को फिर से अपनी बचपन की यादें दिमाग मैं चलने लगाती है जो वह सब सोच सोच कर अर्जुन मन hi मन मुस्कुरा रहा होता है फिर अर्जुन की ज़ोर से पिसाब लगता है जो अर्जुन बीएड से उठ कर तेज़ी से चैन को खोलते हुआ बाथरूम मैं भाग्य है मगर अर्जुन जैसे hi बाथरूम मैं जाता है अर्जुन का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगता है अर्जुन की आँखें बस एक जगह पर टिक जाती है

अर्जुन अपना लैंड छिपाने के लिए लैंड अंदर डालते हुआ जल्दी से रूम से भागता है मगर जल्दबाजी मैं अर्जुन का लैंड चैन मैं छापा जाता है जो

अर्जुन चीख पड़ता है अर्जुन इतना ज़ोर से चीखता है की उस रूम मैं गूंज जाता है

तभी एक औरत की आवाज़ आती है

अर्जुन मेरा बच्चा क्या हुआ औरत बोलते हुआ बाथरूम से भगति हुई आती है जो अभी सिर्फ पेंटी पहनी हुई होती है आवर उसकी चुकी बिलकुल नंगी होती है

मगर औरत को अभी सिर्फ अपने बेटे की फ़िक्र होती है जो भगा कर अर्जुन के पास कड़ी हो जाती है

माँ कुछ नहीं हुआ आप जाइये ... अर्जुन इतना बोल कर चादर अपने ऊपर दाल देता है आवर अपनी आँखें बंद कर लेता है
 
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