SAB KUCH JAYAZ HAI... - Page 15 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

SAB KUCH JAYAZ HAI...

वेल साइड भय....

यू अरे अब्सोलुतेल्य राइट एंड सॉरी की मैं अपनी स्टोरी में ऐसा कुछ भी डालने में कामयाब नहीं हुआ जिससे की आपको पढ़ने में अच्छा भी लग सके और दिलचश्प भी....

मैंने स्टोरी को बेवजा लम्बा किया इसके लिए भी सॉरी यारा. ये भी आपने सच कहा की मेरे पास इसके आगे लिखने के लिए अब कुछ नहीं है. सो अगर आप मेरे ऊपर मेहरबानी करना चाहे तो ये बता कर कर सकते हैं की अब मैं इस स्टोरी में आगे क्या और कैसे लिखू.???

आपकी मेहरबानी का इंतज़ार रहेगा भय....
 
बिलकुल भय....

जब तक आप लोग मुझे मेरी कमिया नहीं दिखाएंगे तब तक भल कैसे मुझे पता चलेगा की मेरी राइटिंग और समझ में कहा कमी है. रीडर्स जब अपने रिव्यु में स्टोरी की कमिया बताते हैं तभी राइटर को पता चलता है और फिर वो अपनी उस कमी को सुधरता है. एक तरह से इसे इस तरह भी समझा जा सकता है की रीडर्स hi वरिटेरस को तराश तराश कर एक दिन उसे एक अच्छा राइटर बनाते हैं. अगर रीडर्स वरिटेरस को खुश करने के लिए सिर्फ उसकी तारीफ hi करेंगे तो उससे कोई भी राइटर एक अच्छा राइटर नहीं बन सकेगा....

इस लिए भय मैं तो चाहता हु की हर रीडर रिव्यु दे और अपने रिव्यु में राइटर की कमिया भी बताये जिससे वो अपनी कमी को सुधरते हुए और भी बेहतर लिख सके....

यहाँ तो ज़्यादातर रीडर्स अवेसमे अपडेट लिख कर गायब हो जाते हैं और जो सच में बेहतरीन रिव्यु देते हैं वो तो बस लिखे मार के hi निकल जाते हैं. रिव्यु तभी देते हैं जब उनका रिव्यु देने का बहुत hi ज़्यादा मन करता है जैसे आप और भय....

फ़िरेफोक्स भय के बारे में मुझे अलग अलग जगहों पर उनके रिव्यु से hi पता चला है की वो किसी भी राइटर का और उसकी स्टोरी का ऐसा ऑपरेशन करते हैं जैसे राइटर ने किसी का कटला कर दिया हो और वो उस हत्या की इन्वेस्टीगेशन कर रहे हो हाहाहा. एनीवे मेरा तो अभी ऑपरेशन नहीं किया उन्होंने मगर मैं चाहता हु की वो स्टोरी पर अपना रिव्यु दे, फिर चाहे जैसा भी रिव्यु दे....

कामदेव भय खूब कमिया निकालिये मगर रिव्यु तो देते रहिये. लिखे मार के गायब होने वाला काम आपको शोभा नहीं देता.... :डी
 
भय मैं किसी का दिल नहीं तोड़ रहा....

ऐसा होता है की हम जैसा चाहते हैं वैसा नहीं होता और शायद यही वो बात होती है जिसकी वजह से गड़बड़ होने लगता है. उम्मीदें हर कोई रखता है और जब अपनी उम्मीद के अनुसार रिजल्ट नहीं निकलता तो सब थोड़ा दुखी और निराश होते हैं. बस इतनी सी hi बात है....

यहाँ की सबसे बड़ी प्रॉब्लम यही है की स्टोरी तो बहुत से रीडर्स पढ़ते हैं, फिर चाहे वो साइलेंट रीडर्स हो या वो जो साफ़ दीखते हैं मगर जब बात कमेंट की आती है तब सब गायब. पुराने वरिटेरस की स्टोरीज चाहे जैसी भी हो और चाहे उन स्टोरीज महीनो कोई अपडेट न आये मगर तब भी बहुत से रीडर्स उन स्टोरीज पर वेटिंग वेटिंग की लाइन लगते रहते हैं बूत नई वरिटेरस के साथ ऐसा नहीं होता. वो अगर डेली अपडेट भी दे तो उस स्टोरी पर गिने चुने कमेंट hi दिखेंगे वो भी ऐसे कमेंट जो "अवेसमे अपडेट" वाले होते हैं. मेरा सवाल ये है की सपोर्ट की सबसे ज़्यादा ज़रूरत ओल्ड वरिटेरस को होती है या नई वरिटेरस को.???

यारा अपडेट से रिलेटेड आप जैसा भी रिव्यु देना चाहे dijiye...par दीजिये तो सही. मैं ये नहीं कहता की आप मुझे खुश रखने के लिए अवेसमे अपडेट लिखो, बल्कि दिल से कहता हु की वो लिखो जो आपको समझ में आये मगर लिखो तो. आखिर राइटर को भी तो समझ आये की उसमे कहा पर क्या कमिया हैं. जब आप कुछ बताओगे hi नहीं तो वो अच्छा कैसे लिखेगा.???

एनीवे सॉरी भय, लगता है की मैं भावनाओ में बाह कर ज़्यादा hi बोले जा रहा हु. रही बात अपडेट देने की तो कोशिश करुगा की जल्द hi स्टोरी को रीस्टार्ट कर सकू और अपडेट दे सकू....
 
भय सबसे पहले तो मैं ये बता दू की मुझे ये देख कर बेहद ख़ुशी हुयी की आपने वो सब यहाँ पर खुले दिल से बयान किया जो आपने मन में स्टोरी से रिलेटेड आया. मैं यही तो चाहता हु की रीडर्स सिर्फ राइटर को खुश करने के लिए "अवेसमे अपडेट" लिख कर अपना फ़र्ज़ ऐडा न करे बल्कि वो खुल कर अपने रिव्यु में वो सब लिखे जो उन्हें अपडेट पढ़ कर लगता है. आखिर राइटर को भी तो समझ आना चाहिए की उसने कहा पर क्या कमी की....

अब आते हैं आपके उन विचार या सवालों पर जो आपने यहाँ पर रखे हैं. आपने कहा की चची जेठानी का सन क्रिएट करने से स्टोरी कमज़ोर पद गयी और इतना hi नहीं ऐसे कई जगहों पर ऐसे सन क्रिएट किये गए जहा पर हीरो कमज़ोर दिखा. ये बात बिलकुल सही है भय. खैर आपकी इन बातो के बारे में मैं बस यही कहुगा की मैं इस स्टोरी को वास्तविकता से जोड़ कर लिखना चाहता था ना की वो सब दिखाना चाहता था जो वास्तविकता से हैट कर हो....

यहाँ पर ऐसी स्टोरीज का चलन है जिसमे हीरो या तो सुपरहेरो होता है या फिर इतना ताकतवर होता है की उसके सामने बड़े से बड़ा सूरमा भी दो पल में पानी भरता नज़र आता है. जबकि वास्तविक लाइफ में क्या ऐसा पॉसिबल है.???

हम जिस दुनिया में रहते हैं वह वैसा कुछ भी नहीं होता जो सिर्फ और सिर्फ हमारी इच्छा से या हमारे सोचने से हो जाये. लाइफ में अच्छे और बुरे दौर का आना जाना लगा रहता है. कोई ज़रूरी नहीं की हर इंसान अपनी लाइफ में वैसा hi हीरो नज़र आये जैसा हीरो यहाँ की हर स्टोरीज में दिखाया जाता है....

हमारी लाइफ में बहुत से ऐसे हालात आते हैं जहा पर हम बेबस और लाचार भी हो जाते हैं और सामने वाला हम पर बहुत ज़्यादा भरी पद जाता है. मैं इस कहानी को उसी वास्तवकिता को बेस बना कर लिखने की कोशिश कर रहा हु भय. अब आप ये कहेंगे की अगर ये स्टोरी वास्तविकता को बेस बना कर hi लिखी जा रही है तो ऐसा भला कहा होता है की अपने hi भाई बहन के बिच ऐसा रिश्ता बन जाये और फिर उनकी आपस में शादी भी हो जाये तो भय ऐसा भी होता है. यकीन न हो तो भय से पूछ लो. उनकी एक स्टोरी है "मोक्ष- तृष्णा से तुष्टि तक". ये स्टोरी उनकी आप बीती है. इस स्टोरी में आपको इस बात का प्रमाद मिल जायेगा....

भय आपने अपने विचार रखे इससे मुझे सच में बहुत ख़ुशी हुयी क्यों की आपने खुल कर अपने मन की बात कही है, आपके विचारो या सवालों का यही आंसर है की मैं स्टोरी को वास्तविक जीवन से जोड़ कर लिख रहा हु. मैं वो नहीं दिखाना चाहता जो वास्तविक जीवन में पॉसिबल hi न हो. ज़िन्दगी इंसान को कहा से कहा ले जाती है ये आप भी अच्छी तरह से जानते हैं. दक्षिणा के दामाद वाला किस्सा और फिर इंस्पेक्टर वाला किस्सा उसी का एक छोटा सा हिस्सा है जो ये दिखा रहा है की हमारी ज़िन्दगी में ऐसे भी मोड़ आते हैं और ऐसा भी हो जाता है जिसकी हमने कभी उम्मीद भी नहीं की होती....

एंड भय स्टोरी अभी कम्पलीट नहीं हुयी है, अभी तो बहुत कुछ बाकी है. गांव का किस्सा फिर से शुरू होगा और शहर वाला किस्सा भी चलता रहेगा. इस लिए अभी ये भी मत सोच लीजिये की ये होना चाहिए था या फिर ये नहीं होना चाहिए था....
 
फ़िरेफोक्स भय, इनकी स्टोरी ऐसी है की एक बार हर रीडर उसे ओपन करके पढ़ना चाहेगा. मैंने भी वही किया था. गायब हुए टाइम में थोड़ा थोड़ा करके मैंने पढ़ा है और इसी लिए जनता हु की वो स्टोरी कैसी है....

रही बात इनके द्वारा पका देने की तो ये भी मैंने देखा है और अब तक में ये समझा हु की इनकी स्टोरी में सबसे ज़्यादा आप hi पके हैं. मगर इस पकने में आपने अपने दिल की अच्छी खासी भड़ास भी निकली है. मैंने तो ये देख कर शॉकेड था की इसके बावजूद कामदेव भय वही करते हैं जो सिर्फ और सिर्फ ये hi चाहते हैं. आपको जितना चीखना है चीखिये, जितनी भड़ास निकालनी है निकालिये मगर अपने भय जी तो दुनिया के इकलौते ऐसे इंसान हैं जो सबको बच्चा समझते हैं और उनकी इन सब बातो को बचकानी बाते समझ कर बस ज़रा सा मुस्कुरा देते हैं....

फ़फ़ भय ये सब बाते आपके hi रेविएवस द्वारा पता चली हैं मुझे. ये अपने अलावा हर राइटर से उम्मीद करते हैं की वो डेली अपडेट दे.... :डी

और ये भी पता चला है की इनके गांव में बिजली का बड़ा संकट है और साथ hi इनका लैपटॉप इनके लिए भरोसे की चीज़ नहीं है.... :डी

यारा मैंने कामदेव भय को इतना कुछ बोल दिया है इस लिए अब तो शायद भगवन hi मेरा मालिक होगा....
 
भय बात ये नहीं है की मैं स्टोरी में कही अटक गया हु या फिर मुझे ये समझ नहीं आ रहा की मैं आगे क्या likhu....baat है रीडर्स के रिएक्शन की. रीडर्स स्टोरी तो पढ़ते हैं मगर न लिखे करते हैं न hi कमेंट करते हैं. कुछ लोग तो ये भी कहते हैं की उन्हें रिव्यु देना ंशी आता अगर आता तो क्या वो खुद कोई स्टोरी न लिखते. अजीब बात है भय की इन्हे कुछ बोलना नहीं aata...magar जब आप अपडेट नहीं डोज या फिर स्टोरी बिच में hi स्टॉप कर डोज तो इन्हे राइटर को गालिया देना और फ़ालतू की बाते करना आने लगता है. है न मज़ेदार बात.????

यहाँ किसी को कुछ नहीं मिलता है. न राइटर को लिखने के पैसे मिलते हैं और न hi रीडर्स को पढ़ने के. लोग सिर्फ एन्जॉय करने आते हैं. वरिटेरस स्टोरी लिख के एन्जॉय करते हैं तो रीडर्स स्टोरी पढ़ कर मगर इसके बिच जो एक इम्पोर्टेन्ट चीज़ होनी चाहिए वो नहीं है. वरिटेरस और रीडर्स के बिच का कॉम्बिनेशन सही नहीं है. राइटर स्टोरी लिखता है और एक अपडेट तैयार करने में काम से काम 3 से 4 घंटे लग जाते हैं मगर रीडर्स उस अपडेट को मुश्किल से 5 या 10 मिनट में पढ़ कर गायब हो जाते hain...wo ये भी नहीं सोचते की राइटर ने अगर इतनी म्हणत करके और टाइम लगा कर अपडेट लिखा है तो उस पर अपने कुछ विचार भी रख दे....

मैं ये देख कर हैरान होता हु की जिन स्टोरीज में महीनो कोई अपडेट नहीं आता उस पर दाना दान लोग वेटिंग वेटिंग लिख कर पेज भर रहे हैं और जिस स्टोरी में अपडेट आता है उसमे रीडर्स गायब हैं. स्टोरी को बिच में छोड़ देने के पीछे सिर्फ राइटर hi जिम्मेदार नहीं है बल्कि रीडर्स भी उतने hi जिम्मेदार हैं....

राइटर सिर्फ लिखे कमेंट hi चाहता है मगर उसे वो भी नहीं मिलता. हमारे कामदेव भय और फ़िरेफोक्स भय हमें समझते हैं की हमें इस सब पर ध्यान नहीं देना चाहिए बल्कि अपनी प्रतिभा को चुप चाप यहाँ दिखते रहो. मतलब की आप पागलो और बेवकुफो की तरह लगे रहो और सामने वाला आपकी तरफ देखे तक न.???

स्टार्टिंग में मुझे भी लगता था की ये राइटर लोग क्यों अपनी स्टोरी को बिच में छोड़ कर भाग जाते hain...mujhe ऐसे वरिटेरस पर गुस्सा भी आता था मगर जब मैंने स्टोरी स्टार्ट की और आगे बढ़ा तो समझ आया की ऐसा क्यों होता है. मैंने सोचा था की इस स्टोरी के बाद और भी स्टोरीज लिखुगा मगर गलत सोचा था भय....

यहाँ बड़े बड़े वरिटेरस की स्टोरीज का भी यही हाल है. यहाँ उन स्टोरीज पर लोग चिपके हुए हैं जिनमे बे सर पेअर का सेक्स भरा हुआ है. एनीवे लीव थिस टॉपिक भय. ये स्टोरी ज़रूर कम्पलीट करुगा, भले hi इसके लिए वक्त लगे....

:थैंक्यू:
 
भय मुझे किसी के गलत कमैंट्स से कोई ऐतराज़ नहीं है, बल्कि ऐतराज़ इस बात से है की लोग स्टोरी पढ़ कर भी लिखे कमेंट नहीं करते. रीडर्स के लिखे कमैंट्स से ऐसा अक्सर होता है की राइटर को कोई ऐसा पॉइंट मिल जाता है जो उसकी स्टोरी के लिए इम्पोर्टेन्ट होता है. कॉपी पेस्ट वाले कमेंट किसी भी राइटर को मोटीवेट नहीं करते हैं और न hi उससे किसी राइटर को कोई पॉइंट मिलता है. रिव्यु का मतलब होता है की आप उसमे राइटर की स्टोरी का निचोड़ उसे समझते हैं और अगर कही किसी चीज़ की ज़रूरत होती है तो आप उसे अस ा सुग्गेस्टिव बताते हैं. इससे राइटर को काफी मदद मिलती हैं मगर जब ऐसा कुछ होता hi नहीं तो स्टोरी में वो बात हो hi नहीं पति जो ये बताये की स्टोरी परफेक्ट है....
 
OMG इतना लम्बा पोस्ट यारा....

भय मुझे आपकी बातो का बुरा नहीं लगा. इनफैक्ट मुझे अच्छा लगा की आपने दिल से अपनी बाते राखी हैं और इसके लिए थैंक्स....

वरिटेरस और रीडर्स दोनों के hi अपने पंगे होते हैं. वरिटेरस 3 से 4 घंटे लिखते हुए म्हणत करता है, जबकि रीडर्स को 5 से 10 मिनट रीड करने में म्हणत लगती है. जब वो इतनी म्हणत करते हैं तो दो मिनट कमेंट करने या रिव्यु देने में म्हणत करने में उनका क्या जाता है.?

मैं हर रीडर्स के कमैंट्स का रिप्लाई देता हु भय मगर रेडर्स उस रिप्लाई को देखते hi नहीं बल्कि उन्हें सिर्फ अपडेट पढ़ने से मतलब होता है और अपडेट पढ़ कर गायब हो जाना उनकी फितरत होती है. मैं ये नहीं कहता की सब ऐसा hi करते हैं मगर ऐसा करने वालो की शंख्या बहुत है. रीडर्स अगर ईमादारी से वरिटेरस का साथ दे और सहयोग करे तो स्टोरी बिच में स्टॉप hi नहीं होगी....

अभी तो बिजी हु यारा इस लिए नहीं लिख सकता बूत इतना जरूर कहुगा की ये स्टोरी 100% कम्पलीट होगी....
 
मक भय मैं आपकी बात समझ गया हु. इसी लिए तो बोलै था की स्टोरी ज़रूर कम्पलीट करुगा बूत उसके लिए टाइम तो मिले. मैं चाहता हु की जब स्टार्ट करू तो फिर रुकू न. बकज़ रुकने से फ्लो बिगड़ जाता है और रीडर्स भी नाराज़ होते हैं. टाइम ऐसा हो जिससे हप्ते में दो या तीन अपडेट तो ज़रूर पोस्ट हो. इस टाइम तो इस तरह का टाइम hi नहीं मिल रहा यारा. मैं भी चाहता हु दिल से की स्टोरी को जल्दी से कम्पलीट करू....
 
यारा पर्सनल लाइफ में थोड़ी प्रोब्लेम्स चल रही हैं इस लिए स्टोरी की तरफ ध्यान hi नहीं गया. दिवाली के बाद स्टार्ट करने का सोचा था और अपडेट लिखना भी स्टार्ट कर दिया था मगर फॅमिली में ज़मीन जायदाद के चलते विवाद शुरू हो गया जो की अभी भी चल रहा है....

सभी से आग्रह है की थोड़ा वक्त दीजिये. स्टोरी ज़रूर स्टार्ट करुगा और कम्पलीट भी करुगा मगर ये प्रोब्लेम्स क्लियर हो जाये तो मज़ा आये कुछ और मूड भी ठीक हो. अगर सब कुछ अच्छा हुआ तो नेक्स्ट ईयर से स्टोरी स्टार्ट कर दुगा. यारा मुझे भी लगता है की मैं भी लिखू और आपके साथ साथ मुझे भी स्टोरी में मज़ा आये. इस लाइफ में कोई न कोई परेशानी बानी hi रहती है जिसके चलते हम कोई काम ठीक से कर नहीं paate....:dazed:
 
Back
Top