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रात के तकरीबन 8.30 बजे। सोमेश के घर अजिंक्य पहुंचा। जैसे ही वो अपस्यु के पास पहुंचा… "उन लोगो का पता चल गया है। पुरानी दिल्ली के चूड़ी बाजार के पीछे का मोहल्ला हैं। एक ओर कसाई की बस्ती है और दूसरे ओर क्रिमिनल्स का कॉलोनी। दिल्ली के छीना झपटी वाले 40% केस उसी 500 मीटर के इलाके से अंजाम दिए जाते है। प्रॉपर फोर्स के बगैर किसी को वहां अरेस्ट करने भी नहीं जा सकते। अब तक उस गली में कितने लोगो को काटा होगा इस बात का अंदाजा सिर्फ इस बात से लगा लो की वहां 20 पुलिसवाले मरे है।"
अपस्यु:- क्या आप पूरे सुनिश्चित है।
अजिंक्य:- सौ फीसदी सुनिश्चित। क्योंकि ऐसे ही एक हाई प्रोफ़ाइल किडनैपिंग का केस था, जिसके तार उसी इलाके से जुड़े थे। उस इलाके की एक नहीं 50 घटनाएं है। जैसा डिस्क्रिप्शन तुमने दिया कि जहां पहुंचने मै इतनी परेशानी हो की जब तक कोई पहुंचे तबतक वहां का माहौल ही पुरा खाली हो जाए तो उसके लिए इससे बेहतर इलाका कोई नहीं।
फिर अजिंक्य कुछ तस्वीर दिखाते हुए कहने लगा… "ये तस्वीर मेरे एक खबरी ने आज दिन में ली है। यहां देखो ये पुरा इलाका, जहां केवल भिड़ ही भिड़ है। अब देखो ये ट्रिपल स्टोरी बिल्डिंग.. लगभग गली के सेंटर में है, फिर भी यहां कोई भिड़ नहीं लग रही। आस पास की 3 दुकानें बंद है और कोई भी वहां खड़ा नहीं रह सकता।
अपस्यु:- इतनी बड़ी बिल्डिंग किस मकसद से बनाई गई थी?
अजिंक्य:- ऑन पेपर तो कोल्ड स्टोरेज ही है, लेकिन अंदर क्या है वो किसी को नहीं पता। मुझे पक्का यकीन है कि वो लोग यहीं होंगें।
अपस्यु:- वहां कैद में मासूम लोग है और हमे पता नहीं कि अंदर कितने हथियारबंद लोग। एक छोटी सी गलती किसी की भी जान ले सकती है। कैसे निपटा जाए ऐसे स्तिथि में?
अजिंक्य:- मेरे पास एंट्री प्लान है, लेकिन एग्जिट प्लान नहीं। और वहां से एग्जिट होना लगभग नामुमकिन, क्योंकि अंदर भले 100 हथियारबंद लोग हो, लेकिन बाहर 10000 की तादात में हथियारबंद लोग होंगे, जो हर गली के एंट्री पर ऐसी भिड़ लगा चुके होंगे, कि बाहर वाला तब तक अंदर नहीं जा सकता, जब तक कि वो लोग गली के बीच का मामला साफ करके सबूत मिटा ना दे।
अपस्यु:- आप बस एंट्री करवाकर 5 मिनट का विंडो तो दीजिए, उसके बाद का एग्जिट देखकर तो फिर वहां कसाई और क्रिमिनल्स दोनो ही उस घड़ी को कोसेंगे की क्यों मैंने रास्ता रोका।
अजिंक्य:- हां लेकिन एंट्री के लिए मुझे एक हेल्प की जरूरत होगी। एक पॉलिटिकल बकरा चाहिए, जिसके इंतजाम के लिए सिक्योरिटी फोर्स की जरूरत परे। फिर आगे का सब मै संभाल लूंगा। बस समय तय कर लो।
अपस्यु:- समय 31 दिसंबर दोपहर के 2 बजे से।
ऐमी:- ओह मतलब हम अब भी प्लान से ही हैं।
अजिंक्य:- कौन से प्लान से..
ऐमी:- 31 दिसंबर शाम के 5 बजे टीवी के जरिए सब पता चल जाएगा।
थोड़ी देर और मीटिंग चली उसके बाद हर बात को बारीकी से समझने के बाद अजिंक्य वहां से चला गया। उसके जाते ही अपस्यु, नीलू और उसके साथियों पर पानी डालते हुए… "काम चोरों, कम से कम बैठकर कुछ राय विचार ही दे दिया करो।"..
नीलू थोड़ा चिढ़ती हुई… "कम से कम सीनियर्स की रेस्पेक्ट तो किया कर गधे।"..
अपस्यु:- सॉरी दीदी, गलती हो गई। अब जरा चलोगी, थोड़ा देख लिया जाए कि मेरी 2 कार दिल्ली राजस्थान हाईवे पर क्या कर रही है।
कुल 4 लोग वहां से दिल्ली-राजस्थान हाईवे के उस लोकेशन से थोड़ा पीछे पहुंचे जहां कार थी।… "वो देखो ट्रेलर खड़ा है, अपनी कार उसी में होगी।"… अपस्यु अंदाज़ा लगाते हुए कहने लगा…
ऐमी:- अपस्यु कुछ अजीब नहीं लग रहा यहां केवल 2 ट्रेलर पार्क है, और दूर दूर तक कुछ भी नहीं।
नीलू:- तो क्या यहां पब होगा। ये कंटेनर यहां रखा हुआ मतलब केवल कार नहीं होगा। हम भी यही करते थे, कंटेनर में डालकर लोगों को दूर पैक कर देते थे। हालांकि ये जगह सहर से दूर नहीं है, इसका मतलब अंदर जो भी इंसान है उसे बेहोश करके रखा गया है।
अपस्यु:- सीआईए के मुख्यालय में घुसने वाली एक महान सक्सियत मेरे साथ है ये मै कैसे भुल सकता हूं, मैम अब आगे क्या करना है। यू आर दि बॉस।
नीलू:- पुराना पैंतरा..
अपस्यु:- क्या..
देखते जाओ… "सोभन (नीलू का एक साथी वीरदोयी) आग लगा दो कंटेनर के आसपास, लेकिन कंटेनर बचाकर।
अपस्यु बिना कुछ बोले उन दोनों को देखने लगा। थोड़ी ही देर में दोनो ट्रेलर के चारो ओर आग थी, आग की ऊंची ऊंची लपटें चारो ओर। अपस्यु उनके कारनामे देखकर दंग सा था।… "अब मुंह क्या देख रहे हो, पुलिस स्टेशन फोन करके सूचना तो दे दो, यहां भीषण आग लगी है। बाकी काम वो खुद कर लेंगे।"
अपस्यु अपना सिर झुकाए…. "जीनियस हो सीनियर तुम। ऐसे खतरनाक आइडिया आते कहां से है।"..
नीलू:- किसी और दिन बताउंगी, पहले मीडिया को कॉल तो करो, वरना ये पुलिस वाले कंटेनर की छान बिन नहीं करेंगे, मीडिया रहेगी तो मजबूरन इन्हे कंटेनर खोलना पड़ेगा।
अपस्यु ने मीडिया को भी आग लगने की सूचना दे दी। पुलिस वाले फायर स्टेशन कॉल करके जबतक दमकल लेकर उस जगह पर पहुंचते, उससे पहले ही मीडिया पहुंचती न्यूज को ब्रेकिंग बाना दिया और सनसनी फैलाने के लिए उन्होंने कंटेनर में किसी प्रकार के सबूतों को मिटाने की आशंका जताने लगे।
इस न्यूज़ के फ़्लैश होते ही, श्रेया ऑपरेटिंग रूम से बैठकर सीधा अनुप्रिया से बात की और उसे न्यूज देखने के लिए कहने लगी। न्यूज़ देखकर अनुप्रिया थोड़ी चिंतित जरूर हुई, लेकिन अगले ही पल उसने श्रेया को वहां नजर बनाए रखने बोली, और कुछ गड़बड़ हो तो तुरंत इक्तल्ला करने।
अनुप्रिया के यहां भी अलग ही माहौल चल रहा था, दोनो भाई बहन बैठकर 31 दिसंबर के कार्यक्रम की चर्चा कर रहे थे। चर्चा के दौरान ही बात चलते-चलते फिर पैसे और बच्चो की बातें होने लगी..
अनुप्रिया:- महि, 2008-09 में सबको अलग काटने के हमने इतनी मेहनत करके मात्र 80 हजर करोड़ बनाए, समझो कि इस वक़्त एक तरह से कंगाल ही है, बस पैसे के नाम पर को 2000, 3000 करोड़ की संपत्ति हो। उस चन्द्रभान के दूसरे सौतेले लड़के को देखो, 2-3 महीने की प्लांनिंग किया और 300 बिलियन यूरो की चोरी कर गया। इतने झूट इतने मर्डर फिर भी वो अपने एक प्लान से हमसे कितना आगे निकल गया।
महिदिपी:- अनु मै भी वही सोच रहा था। लौंडे में दिमाग और जिगर दोनो है। काश उसकी असलियत पहले पाता होती, तो हम ही उसे अपने पास रख लेते।
अनुप्रिया:- महि कैसी बात कर रहे हो, उसे देखती हूं तो घीन आती है। मजबूरी में मुझे अपना पति बांटना परा था।
महिदिपी:- खैर छोड़ो इन बातो को। अभी मीडिया पर फोकस करते है। हफ्ते के एक प्रोग्राम के लिए हमे 200 करोड़ मिले है अनु, ये धंधा भी शानदार ही है। भक्तो के दान से कितना गुना ज्यादा का इनकम है पता है तुम्हे, ऊपर से इनकम टैक्स पे किया हुए पैसा है, बिल्कुल सफेद पैसा।
अनुप्रिया:- धन्य हो उस लड़की का जिसने हमसे सवाल जवाब किया और रुद्रा ने इसे कैश करने में कोई कसर नहीं छोड़ी..
महिडिपू:- वैसे ये चारो है कहां कोई खबर नहीं, 3-4 दिन तो हो गए।
अनुप्रिया:- जाओ लाइन पर कलिका ही मिलेगी। मूड उसका ठीक रहा तो कोई बात नहीं है वरना झेलना तुम ही, मै तो नहीं बात नहीं करने वाली।
महिदिपू:- अनु मुझे ना कुछ ठीक नहीं लग रहा है। जब भी मै बच्चो के बारे में सोच रहा हूं, पता नहीं क्यों मुझे चिंता हो रही है?
अनुप्रिया:- हम्मम ! एक काम करते हैं यूक्रेन चलकर देखे क्या?
महीदीपु:- नहीं 31 दिसंबर के प्रोग्राम को हम कैंसल नहीं कर सकते। एक काम करो, श्रेया को भेज देते है वहां, वहां जाकर आंखो देख हमे बता देगी।
अनुप्रिया ने 28 दिसंबर की रात 10.30 श्रेया से संपर्क किया और अपने 3 लोगो के साथ तुरंत युक्रेन रवाना होने के लिए बोल दी। इधर मीडिया के प्रेशर के कारन पुलिस को दोनो कंटेनर खोलना परा और उसके अंदर 2 कार के साथ 15 लोग अचेत अवस्था में पाए गए। तुरंत ही उन 15 लोगो को मेडिकल सहायता दी गई।
पूछताछ पर उनमें से एक आदमी ने बताया की वो नंदनी रघुवंशी की प्राइवेट सिक्यूरिटी करता था, लेकिन कुछ दिन पहले उन्हें किसी तरह इंजेक्शन दिया गया, उसके बाद वो लोग भूखे प्यासे इन्हो कंटेनर में बंद है। मीडिया के हाथ एक और बड़ा नाम लग गया था। मीडिया की नाक सूंघते हुई इस बात की तह तक पहुंच ही चुकी थी कि नंदनी रघुवंशी के साथ उसके पूरे परिवार को किडनैप कर लिया गया है।
लेकिन इस खबर के प्रकाशित होने से पहले ही होम मिनिस्टर ने पूरे मीडिया को मैनेज करते हुए, इस खबर को दबा दिया। नीलू, अपस्यु और ऐमी यह सोच रहे थे कि उनके 15 साथी भी पूरे परिवार के साथ ही किडनैप होंगे, लेकिन उन्हें यहां देखकर तीनों जैसे खुश हो गए हो।
रात को ही उन्हें एंटीडोट देकर सरकारी हस्पताल से उन्हें उड़ा लिया गया और सभी एक साथ सोमेश के आवास पर डेरा जमाए थे। नीलू सबको देखकर खुश होती हुई कहने लगी… "शर्म करो तुम लोग एक इंजेक्शन से नहीं निपट पाए।"
उन 15 की टीम को लीड कर रहे एक युवक नारफा कहने लगा… "नीलू हमारे साथ धोका हुआ है, और ये धोका घर के किसी आदमी ने दिया है।"..
नीलू:- होश में तक हो, ये क्या बहकी-बहकी बातें कर रहे हो?
अपस्यु:- हां वो शायद सही कह रहा है, वक़्त नजदीक आ रहा है जब मै सबका हिसाब एक साथ पुरा कर दूंगा। खैर सुक्र की बात है, ये सभी लोग सुरक्षित है।
नरफा:- सुरक्षित कैसे है भाव, हमे तो तड़पा तड़पा कर भूखे मारने की योजना थी, पता नहीं कैसे हमे सहर के इतना नजदीक रखा गया था, वरना हमे तो राजस्थान के किसी सुनसान इलाके में रखने कर आदेश मिले थे।
ऐमी:- जाको राखे साइयां मार सके ना कोई। आप लोग खाना खाकर आराम कीजिए, कल बात करते है।
रात बहुत हो गई थी इसलिए अपस्यु और ऐमी भी आराम करने चल दिए। सुबह सुबह ऐमी की जब नींद खुली, वो पास में सोए अपस्यु को मुस्कुराती हुई देखने लगी, और देखते हुए उसके सर को अपने गोद में लेकर उसके बाल पर प्यार से हाथ फेरने लगी।
अपस्यु सुकून की श्वांस लेते ऐमी के गोद में थोड़ा सिकुड़ गया।… "काश मेरा भी ऐसा कोई लवर होता।".. नीलू सुकून भरी श्वांस छोड़ती, ऐमी के पास बैठती हुई कहने लगी।
ऐमी, मुस्कुराती हुई… "लवर ऐसे बैठकर सोचने से थोड़े ना मिलता है, उसके लिए काम के बाद बचे फ्री टाइम को अपने लिए जीना परता है। शायद लवर ना भी मिले, लेकिन सुकून कि जिंदगी तो जरूर मिल जाती है।"..
नीलू:- "हां शायद सही कही। लेकिन मै भी क्या करूं तय नहीं कर पाती हूं कि इंसान हूं या कोई साइंस एक्सपेरिमेंट। आंख खुली तो खुद को एक बड़े से एक्सपेरिमेंट हाउस में देखा। प्यार और इमोशंस कभी सिखाए ही नहीं गए, केवल लक्ष्य और लक्ष्य को भेदने की प्लानिंग चलती रही। भावनाएं कहां से जागती, जब सरिरिक सुख के लिए हर लड़का और लड़की को फ्री छोड़ दिया गया हो। वीरदोयी के बीच लड़की पटाना, लव अफेयर, प्यार मोहब्बत और धोका जैसी कोई बात ही नहीं थी।"
"हार्मोन्स शरीर को एक्साइटेड करता और लोग अपनी मर्जी से पार्टनर चुन लेते। लैब के बाहर निकलो तो हर किसी में प्रतियोगिता चलते रहती, कौन कितने बंदो को मार रहा है। लेकिन कहते है ना जैसा करोगे वैसा पाओगे। इन लोगों को इनसे भी बड़ा जल्लाद मिला, दृश्य। वो जब मारने पर आता था ना, तब गिनती भी नहीं करता की कितनो को मार चुका है। किस्मत देखो, वो हमसे कई गुना ज्यादा ताकतवर था और उसका डीएनए सैंपल के लिए मुझे और काया को चुना गया।"
"काया समझदार निकली, अपना काम खत्म करके वहीं गोवा में ही परी रही। मै बेवकूफ थी जो दृश्य की सहायता के लिए गई, और वहां उससे प्यार हो गया। जानती थी वो मेरा नहीं है। लेकिन ये दिल है कि मानता नहीं।"
ऐमी, नीलू का हाथ थामती… "दिमाग को बॉक्स में क्यों बंद करके रखी हो। थोड़ा गहरी स्वांस लो। खुद को रिलैक्स करो और जिंदगी को दूसरा मौका दो। साइंस एक्सपेरिमेंट रोबोट होते है, इंसान नहीं। इसका सबसे बड़ा सबूत तुम्हारी भावनाएं है। स्माइल करी, और एक लड़का पटाओ, घर बसाओ, मस्त लाइफ जियो।