My Complete Intentions - The Beginning - Page 10 - SexBaba
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My Complete Intentions - The Beginning

थैंक्स फॉर योर ब्यूटीफुल रिव्यु सर जी :हुग:

एक का सिंपल सा फंदा है वो अपने फायदे के लिए कुछ भी कर सकता है और इस टाइम हर्ष के बाद सबसे पावरफुल कम hi है तो अगर कम एक का बुरा चाहे भी तो एक दिमाग का hi उसे करेगा जब तक कम सही तब तक एक सही, जिस दिन कम ने कुछ हरकत की उस दिन एक भी हरकत में आ जायेगा :हिप्पी:

और मैंने समझा दिया है अंकित को अब सही से काम करेगा वो :डी
 
थैंक्स फॉर योर एकाउंटिंग रिव्यु :हुग: :डी

राज सायद विशाल को hi एक के सामने न खड़ा कर दे और अब एक ने भावनाओ में बह के या गुस्से में राज को कुछ कर दिया और फिर विशाल के दिमाग में किसी ने भर दिया की एक ने ऐसा किया है तो वो तो दुश्मन hi मान लेगा उसे, इसलिए एक ने दिमाग का उसे किया है और अपना गुस्सा शांत करने के लिए पुष्प को थोक दिया :डी
 
अपडेट:-48


इस टाइम मेरे पुरे फेस पे खून था लेकिन मेरी आँखों में अफ़सोस की एक झलक तक नहीं थी, इस हालत में मुझे कोई देख ले तो उसकी फैट के हाथ में आ जाए क्युकी पुष्प का पूरा फेस उड़ चूका था और पता नहीं क्यों मैं अब खुदमे शांति महसूस कर रहा था. लेकिन अब नयी प्रॉब्लम थी की गोली की आवाज़ से सब सतर्क हो गए होंगे और यहाँ से निकलते हुए मुझे सावधानी भी बरतनी होगी. अभी तक खून के नशे में था लेकिन जल्दी से दिमाग सेण्टर में आ गया और मैं झटके से खड़ा हुआ और खड़े होते hi कपडे पहने और पुष्प की साड़ी से अपना खून साफ़ किया, फेस पे पोल्लुशण मास्क लगाया और चुपचाप बहार गेट से बहार झाका तो सब लोग हॉल में ीखता हो रखे थे और इसी तरफ hi बढ़ रहे थे धीरे धीरे.

मैं गेट से नहीं जा सकता था इसलिए एक बार रूम के चारो तरफ देख तो एक विंडो नज़र आयी लेकिन वो पूरी गिलास से बानी हुयी थी और उसको खोलने का लॉक भी नहीं दिख रहा था मुझे. मैं उसको देख hi रहा था की मुझे कई लोगो की बहार से गेट खटखटाने की आवाज़ आने लग गयी, गेट न खोला तो सेकंड के हिसाब से तोड़ देंगे और मैं सोच hi रहा था की बहार से गेट पे एक भयानक लात पड़ी जिससे अंदर का लॉक मुद गया, मतलब एक और लात और सब अंदर अब मैं सोच लिया था क्या करना है इसलिए थोड़ा पीछे हटा और भाग के उस कांच की खिड़की को तोड़ते हुए कूद गया, लेकिन गांड जब मरी जब मैं मेरी hi कार की छत पे गिरा.

मैं:- अह्ह्ह्ह भेनचोद! :ीामक:

मैं जल्दी से लुड़कते हुए निचे उतरा और जल्दी से कार में बैठ के निकल गया लेकिन कईओ ने उस विंडो से मेरी कार देख ली थी लेकिन मैं सूरे था की नंबर नहीं देखे होंगे इन्होने. आज तो बाल बाल बच गया :स्वेट:

मैं 15 मिनट में hi हवेली पहुंच गया रात बहुत हो गयी थी लेकिन आरव लॉन में hi अकेला बैठा था मैंने कार को ठीक उसके सामने hi रोका और जैसे hi मैंने उतरा तो आरव की भी फैट गयी क्युकी मेरी शर्ट फैट गयी थी शोल्डर पर से और छोटे छोटे कांच के पीेछे घुसे हुए थे और फेस पे भी बहुत सारा खून अभी भी लगा हुआ था, हाथ भी खून से साणे हुए थे, ये सब मुझे तब पता लगा जब आरव मुझे मेरे रूम में ले गया चुपचाप और मैंने बाथरूम में जाके शर्ट निकल के खुद को मिरर में देखा तब खुद की हालत पता लगी लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पद रहा था इनसब से. इसलिए मैं शावर लिया और रूम में आया तो आरव अभी भी था उसने मेरी छोटो पे दवाई लगाई,

आरव:- अब बता क्या करके आया है. :बात:

मैंने उसे फिर पूरी बात बताई तो वो मुझपे चिल्लाने लगा :अर्घ:

आरव:- अबे तो चूतिये तूने उसे मार क्यों दिया

Main:-usmaan का ध्यान इधर खींचने के लिए.

Aarav:-pagal है तू, चल सो जा मैंने विवेक को कॉल कर दी वो कल आ जायेगा यहाँ पे.

Main:-Chal कुछ तो ाचा सुना आज.

उसके बाद मैं भी सो गया और आरव भी चला गया, सुबह मैं थोड़ा लेट उठा रेडी होक निचे आया तो अंकल, बलबीर, आरव, जानवी, रॉकी बैठे हुए थे. उन्होंने मुझे देखा और गुड मॉर्निंग विश किया.

मैं:- गुड मॉर्निंग सब को, और बलबीर अंकल कैसे आना हो गया इतनी subah-subah.

बलबीर:- अरे बीटा तुम्हे वो 5 लोगो की फाइल मंगवाई थी न और वो कल एक कोठा चलने वाली का खून हो गया है, तो मैं सोच रहा था की आप लोग hi देखो इस केस को जैसा अपने कहा था.

उसकी बात सुनके मैंने और आरव ने आँखे बड़ी करके एक दुसरे को देखा और ऐसा करते हुए कम अंकल और जानवी ने हमे देख लिया और वो समझ गए की कुछ काण्ड जरूर हुआ है :शाय:

मैं:- अरे अंकल उसे केस को छोड़ो किसी ने मार दिया होगा दारु पाइक, लोकल पुलिस स्टेशन को देखने दो केस वैसे भी उसकी कोई फॅमिली तो है नहीं और चाहने वाले गुंडे है तो केस कोई चलवायेगा hi नहीं. आप बस मुझे फाइल्स दो मैं अभी बता देता हु आपको.

अंकल:- अरे एक सेकंड ये केस हमारे किसी काम का नहीं लेकिन जैसा तुमने कल कहा था वैसा hi करते है, रॉकी को बोलके किसी अपने आदमी को इस जुड़ुम में अरेस्ट करवाओ और उसे सजा दिलवाओ कोर्ट से अछि सी और सजा का दिन आये और जब पब्लिक शांत हो तो निकल लेंगे उसे.

आरव:- मैं बोलता हु रॉकी को वो कर लेगा और जज साहब को भी बोल दूंगा.

मैं:- चलो अब फाइल्स दो मुझे, मैं अपने रूम में जाके पढता हु इतने आप यही रुको.

मैं अपने रूम में आया और वो प्रोफाइल देखने लगा जो की 5 की लड़की थी, लड़को या आदमियों को नहीं ले सकता पता नहीं भसडक कब बिक जाए या किसके आदमी हो. मैंने पांचो प्रोफाइल देखि उनमे से दो hi सेलेक्ट की एक ैप थी दूसरी इंस्पेक्टर थी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट रिकॉर्ड भी अचे थे दोनों के. मैं निचे आया और बलबीर को दोनों को की फाइल दी.

मैं:- लो अंकल नेहा और स्वाति का ट्रांसफर करवा लो इनके एरिया से यहाँ पे और यहाँ के जो इस पोस्ट पे है उनमे से आदित्य नाम का इंस्पेक्टर है उसको छोड़ के बाकि सीनियर्स को भेज दो ज्यादा नहीं चाहिए मुझे.

बलबीर:- ठीक है बीटा, मैं उन्हें अभी बुला लेता हु फ़ोन करके वो आधे घंटे में आ जाएँगी, आप सब समझा देना.

मैं:- बुला लीजिये लेकिन एक बात कान खोल के सुनलो उनको कोई भी हर्ष के अलावा एक भी बात नहीं बताएगा.

बलबीर:- ठीक है बीटा.

जानवी:- चलो इतने लंच कर लेते है, आइये अंकल आप भी.

मैं:- चलो मैं एक कॉल करके आया.

वो सब दिंनिंग टेबल पे गए इतने मैंने आकाश को कॉल करके बुलाया और फिर उस इंस्पेक्टर आदित्य के पास कॉल की.

आदित्य:- हल्लो सर, आज कैसे याद कर लिया.

मैं:- सर वीर न बोलै कर मुझे, और हवेली आजा जल्दी से कुछ काम है.

अब आदित्य की फैट गयी गांड क्युकी उसे पता है की हवेली पे या तो किसी की गलती हो और या कोई खास हो उन्हें hi बुलाया जाता है.

आदित्य:- साहब कोई गलती हो गयी क्या?

मैं:- अबे आजा कोई गलती न हुयी.

आदित्य:- आता हु अभी.

कॉल डिस्कनेक्टेड. मैंने भी जाके सबके साथ लंच किया थें हम लोग वापिस हॉल में आये तो आदित्य अंदर आया रॉकी के साथ उसकी फटी हुयी लग रही थी और अंदर आते hi कमिश्नर और कम को देख के नर्वस सा हो गया वो बिचारा. लेकिन फिर भी उसने आते hi सलूट ठोका उनको और मुझे मिनटों वाली नज़र से देखने लगा.

अंकल:- अरे बर्खुदार खड़े क्यों हो बैठो.

वो बैठा इतने में hi दो जवान पुलिस अफसर अंदर आयी, भेनचोद माल थी दोनों और आगे भी उनकी 25- 26 के ाररौंद लग रही थी, मैं और आरव तो आँख और मुँह फाड़के उनको घर रहे थे :द्रूल: तो जानवी ने आरव का मुँह बंद किया और मुझे आँख दिखाई तो हम ठीक से बैठे. लेकिन ये दोनों बिना किसी नर्वस्नेस के सीधा आयी और खींच के सलूट मारा कम अंकल को और कमिश्नर को.

फिर दोनों वही कड़ी हो गयी.

बलबीर:- अरे नेहा और स्वाति आओ आओ बैठो.

स्वाति:- सर हम कैसे मतलब कुछ काम था क्या?

आरव:- अरे तुम्हारा जूनियर बैठा तुम भी बैठ जाओ.

उसकी इस बात पे मुझे हसी आ गयी, और तब उन दोनों का ध्यान हमारी तरफ गया, वो स्वाति तो हमे घूरने लगी और नेहा मुस्कुरा रही थी.

नेहा:- थैंक्स

और वो दोनों भी विराजमान हुयी.

स्वाति:- तो बताइये सर कैसे याद किया हमे, ये तो हमारे अंडर में भी नहीं है एरिया.

बलबीर:- बताओ इन्हे एक बीटा, समझाओ.

मैं:- अरे रुक जाओ मेरे दोनों महारथियों को तो आ जाने दो.

"एक तो आ गया" "दूसरा भी"

हम सब ने उस साइड देखा तो विवेक और आकाश खड़े थे, आकाश और विवेक ने भी एक दुसरे को देखा क्युकी पहली बार मिल रहे थे. लेकिन विवेक की नज़र जैसे hi मुझसे मिली वो भागता हुआ आया और गले लग गया मेरे.

मैं:- भसडक लड़की है क्या :गे: और ये कैसे झांट जैसे कपडे पेहेन के आया है?

विवेक ने कुछ नहीं बोलै बस मेरे पेट में मुक्का दिया

मैं:- ऊऊऊऊछह! मार क्यों रहा है बे.

विवेक:- भसडक एक बार भी फ़ोन नहीं किया यहाँ आने के बाद और नंबर भी चेंज कर लिया

( और आरव के सामने जाके उसको मारते हुए) और तू मादरचोद एक बार भी मिलने नहीं आया अब एक दिन पहले कॉल करके बुला लिया.

ये भसडक दिल्ली के कम, कमिश्नर, ैप, 2 इंस्पेक्टर के सामने गाली बक रहा था वैसे भी विवेक को लौड़ा फर्क नहीं पड़ता लेकिन सब उसे hi घर रहे थे. :एक्स:

मैं:- अब तेरी बकचोदी हो गयी हो तो बेथ.

उसके बाद हम सब बैठे और आरव ने सबको आपस में इंट्रोडस करवाया सबने पानी वगैरह पिया और अब बारी आयी मैं मुद्दे की.

अंकल:- तो अब तुम सब हो एक टीम और तुम्हे लीड करेगा एक और तुम्हारा एक hi टारगेट है क्राइम फ्री दिल्ली और उसकी मैं रुट है हर्ष चौधरी . एक बहुत टाइम वास्ते हो चूका है, मैं और नहीं संभल पाउँगा, सेण्टर से दबाव है मुझपे अब तुम लोगो को करना है जो करना है, सीबीआई वाले टांग अड़ाएंगे और उसमे मैं ज्यादा हेल्प नहीं कर पाउँगा तो वो तुम खुद देखना..

स्वाति:- सॉरी सर, मैं और नेहा रेडी है लेकिन एक लड़का हमे लीड करेगा क्या?

बलबीर:- ये को नार्मल लड़का नहीं है, हे इस राइट हैंड ऑफ़ कम सरेंडर सिंह और इसे सब जानते है दिल्ली में की ये कोण है तो इस बात पे क्वेश्चन न करो और एक टीम की तरह काम करो, अगर टीम में कुछ भी खोट हुआ तो दिक्कत होगी जैसे सीबीआई वालो के साथ हुयी थी.

नेहा:- सॉरी सर, वे अरे रेडी और हम भी जानते है इन्हे पहले से इन्हे बहुत सी सेरेमनीज और पार्टीज में कम सर के साथ देखा गया है.

मैं:- :ब्लश1: ोककक ोककक, अब काम की बात जो यहाँ बात हो गई वो बहार नहीं जानी चाहिए, हम सब टीम में है तो सब बराबर है कोई भी जूनियर सीनियर वाली चीज़े न करना और सबसे मैं बात अभी हर्ष को भूल जाओ, हमारा मैं टारगगगग....

विवेक:- हर्ष को क्यों भूल जाओ बे.

मैं:- बिच में न बोल और हर्ष का टाइम नहीं आया है अभी, अभी उस्मान हमारा मैं टारगेट है और उसके लिए हमे हर क्राइम सोल्वे करना होगा. तो स्वाति और नेहा आप दोनों का ट्रांसफर समझो हो गया है यहाँ पे कल से ऑपरेट करोगे यहाँ पे, जितने भी केस आते है सब मुझे बताओगे उनमे से जो मुझे इम्पोर्टेन्ट लगेंगे उन्हें अपनी टीम सोल्वे करेगी बाकी के केस आदित्य करेगा पुलिस के साथ.

स्वाति:- no प्रॉब्लम हम कल से hi काम पे लग जायेंगे.

मैं:- थें यू आल अरे फ्री नाउ.

उसके बाद सब चले गए अब बच गए थे मैं, आरव, आकाश, विवेक, जानवी क्युकी रॉकी और अंकल चले गए थे पार्टी की किसी मीटिंग में.

जानवी:- चलो मॉल चलते है शॉपिंग करने विवेक लिए.

मैं:- तुम लोग जाओ मैं न आ रहा.

जानवी:- पूछ नहीं रही बता रहे हु सब चलेंगे, आज का दिन एन्जॉय कर लो फिर बिजी hi रहने वाले हो सब.

मैं:- चलो फिर.

हम पांचो मॉल गए और वह जाके जानवी और विवेक ने लूट मचाई और फिर शाम तक फ्री हुए तो मैडम को भूख लग गयी और हम मॉल के hi रेस्टोरेंट में चले गए और मेरी किस्मत में आज फिर लौड़े लगे थे क्युकी सामने प्रिय, प्रीती, अंजलि उसकी फ्रेंड्स बैठी थी :डोह: और आज भी प्रिय ने देख लिया मुझे और चिल्ला के बोली.

प्रिय:- एक इधर आना जरा.

हम सब का ध्यान उस तरफ गया तो जानवी ने मुझे जाने का इशारा कर दिया, अब मरता क्या न करता उस साइड मुदा hi था की विवेक और आकाश को भी साथ खींच लाया क्युकी एक अकेले की बजती हो और 3 no की तो फर्क पड़ता है, लेकिन मैं भूल गया था की मेरे साथ विवेक भी है और इसकी और प्रिय झांट बराबर भी नहीं बनती आपस में.

विवेक:- ोयी लोदु ये भें की लौड़ी क्या कर रही है यहाँ, रुक अभी इसकी माँ छोड़ता हु.

मैं:- अबे छोड़ न उस बात को अब.

आकाश:- अबे कैसा दोस्त है तेरा लड़कियों के बारे में बोलने की तमीज नहीं है.

विवेक:- चुप लौड़े, लड़की है तो क्या सर पे बिठा लू.

मैं:- अबे तुम दोनों चुप रहो.

हम तीनो उनके पास पहुंचे तो उन्होंने जगह बनायीं हमारे लिए हम बैठे.

प्रिय:- एक ये जानवर यहाँ क्या कर रहा है.

मैं:- वो दरअसल.....

विवेक:- क्यों तुझे क्या दिक्कत है कही भी जाओ मैं और तू यहाँ क्या कर रही है, जरूर अपने रिश्तेदारों के घर आयी होगी तुम्हारा रसन ख़तम हो गया क्या.

प्रीती:- हिएयीय यू वाच योर टंग, तमीज नहीं क्या लड़की से बात करने की.

विवेक:- ोू झाँसी की रानी ज्यादा न उड़, एक रैप्ट में सारा ऐटिटूड निकल दूंगा.

प्रिय:- तू मेरे से बात कर न गवर उससे क्या बोल रहा है

मैं और आकाश तो अपना माथा पकड़ के विवेक v/s गर्ल्स देख रहे थे भेनचोद कुत्तो माफिक लड़ाई हो रही थी :रेडफास: वो तो मैंने जानवी को इशारा किया और उसने आके विवेक को शांत कराया और अपने साथ ले गयी.

मैं:- चलो मैं भी चलता हु.

प्रीती:- जाओ वैसे भी हमे गुंडों के साथ बैठने का शौक नहीं है.

मैंने उसे एक लुक :रोल: दिया और आकाश के साथ वह से बहार आ गया..

ये दिन जितना बचा था वो हमने बकचोदी करते हुए बिता दिया यही नहीं 6-7 दिन ऐसे hi बकचोदी में निकल गए, स्वाति और नेहा का भी ट्रांसफर हो चूका था हम लोगो ने बहुत से केस सोल्वे किये थे लेकिन उस्मान रिलेटेड अभी तक कुछ नहीं मिल रहा था लेकिन एक चीज़ हमारे हिसाब से हो रही थी वो ये की क्राइम रेट के साथ साथ क्राइम केस सोल्वे भी तेज़ी से हो रहे थे और इसकी वजह से ओप्पोसिशन भी शांत हो चूका था, लेकिन मुझे उस्मान से मतलब था न की ओप्पोसिशन से.

एक रात मैं आरव, आकाश, विवेक हवेली की टेरेस पे बैठ के दारू पि रहे थे और पि भी पेट भर के रहे थे, हम चारो फुल नशे में थे मतलब बिलकुल फ़ैल हो चुके थे :ड्रंकमण: कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या बोल रहे है क्यों बोल रहे है बस बकचोदी पेले जा रहे थे.

आरव:- यार एक ये साला उस्मान तो शांत बैठा है अब क्या करे.

विवेक:- माँ छोड़ दूंगा उस्मान की बहन के लौड़े ने गांड में दर्द कर रखा है.

अब विवेक तेज़ तेज़ चिल्लाने लगा तो अंकल ने रॉकी को उप्पेर भेज दिया हमसब को शांति से अपने रूम में सुलाने के लिए. लेकिन जैसे hi रॉकी उप्पेर आया और वो कुछ बोलने को उससे पहले विवेक ने अपनी गन रॉकी पे तान दी 2 उंगलियों वाली :lol:

Vivek:-AK ये रहा उस्मान इसकी गांड में गोली मारूंगा भें के लोडे के " ढिस्क्यू" "ढिस्क्यू"

:गुंफिरे:

सब:- हजहहहह लौड़े नहीं मारा उस्मान. :हहै:

रॉकी:- बकचोदी हो गयी हो तो निचे चले. :माध:

आरव:- रुक भसडक ये तो मेरा लड़का रॉकी है, आजा बीटा दारू पि पापा के साथ.

रॉकी:- चुप भसडक निचे चल नहीं तो जानवी दीदी आ जाएँगी.

मैं:- चल न भाई क्यों डरा रहा है.

आकाश:- लेकिन गाडी तेरा भाई चलाएगा. :फ्लेक्स:

मैं:- चूतिये निचे जाना है लंदन नहीं जो गाडी चलनी पड़े.

विवेक:- मैं तो पहले सुसु करूँगा.

आरव:- आजा पीछे लड़ाई जैसे पहले लड़ते थे.

रॉकी:- निचे चलो मेरे बाप.

मैं:- रुक जा भसडक आज तो सब पीछे लड़ाएंगे तू भी आ.

रॉकी:- लेकिन मुझे तो सुसु hi नहीं आ रही.

विवेक:- तू फिर भी मुटेगा चोरिचोड.

उसके बाद हम सब तीरके के किनारे पे खड़े हुए और पीछे की साइड सब मूतने लगे, अब हम चारो ने तो पि राखी थी इसलिए लम्बा मूत रहे थे लेकिन रॉकी बिचारा 5 सेकंड में hi रुक गया.

विवेक:- एक ये भादवा छोटी लुल्ली वाला है, रुक गया भसदक़ा.

फिर रॉकी को सब छोटी लुल्ली वाला, छोटी लुल्ली वाला चिढ़ाने लगे, लेकिन फिर निचे जाना पड़ा क्युकी जानवी उप्पेर आके सुनाने लगी थी :बलहबलाह: . हम सब अपने अपने रूम में आये hi थे की मेरा फ़ोन बजा, मैंने स्क्रीन पे देखा तो ठीक से नाम नहीं दिख रहा था, पिक भी बड़ी मुश्किल से किया.

मैं:- कोण है भाई.

नेहा:- एक एक मला किडनैप हुआ है,. 24 घंटे की डेडलाइन है और मेरे हिसाब से इससे उस्मान का कुछ तो लिंक होगा.

मैं:- ठीक है ब्यय :केओ: बेबी गुड night.ummmahhhh :किसी:

और आँख बंद पीछे फ़ोन भी कट नहीं कर पाया मैं और सो गया माँ छुड़ाए मला और माँ छुड़ाए उस्मान, हु केयर्स :up-urs:



तो बे कॉन्टिनोएड 🙏🙏
 
अपडेट:-49

"एक उठो" "एक उठो" "एक उठ न"

जानवी मुझे उठा रही थी और मैं घोड़े बेच के सो रहा था या बेहोश पड़ा था पता नहीं लेकिन वो थोड़ी लाउड थी इसलिए आँखे खुल गयी मेरी.

मैं:- क्या है यार भाभी सोने दो न.

जानवी:- मला किडनैप हुआ है, पूरी दिल्ली में ये न्यूज़ आग की तरह फ़ैल राखी है, 24 हॉर्स की डेडलाइन दी थी उन्होंने बस 14 हॉर्स बचे और भाईसहाब को और सोना है.

मैं:- :wtf: पहले नहीं बता सकती थी.

और मैं झटके से बीएड पे से उठा तो सर भरी था मेरा रात का कुछ ज्यादा याद नहीं था ठीक से बस इतना पता था की दारू पानी की तरह पि थी, खैर में खड़ा होक बाथरूम की तरफ भगा.

जानवी:- रात को स्वाति का फ़ोन आया तो था तब तो बेबी सोना बोलने लगा उसे, अब कैसे भाग रहा है, जल्दी से लोकेशन पे पहुंच आरव और विवेक वही गए है. :बलहबलाह:

मैं:- ठीक है आप निम्बू पानी बनाओ में 5 मिनट में आया.

मैंने जल्दी से ठन्डे पानी का शावर लिया तो दिमाग एक दम खुल गया मेरा, मैंने बहार आके जल्दी से कपडे पहने गन पेंट में डाली और भाग के निचे आया तो जानवी लेके कड़ी थी गिलास मैंने जल्दी से पिया और कार में बैठ के हवेली से निकला 2 मिनट hi चला की दिमाग में आया "भेनचोद जाना कहा है" :रेडफास: मैं कार चलते हुए आरव को कॉल लगाया.

आरव:- उठ गए जनाब.

मैं:- सुन बकचोदी बाद में, जल्दी से एड्रेस भेज मला का और ये अपनी पार्टी का है ओप्पोसिशन.

आरव:- ओप्पोसिशन का है और यहाँ राज भी आया हुआ है तो इग्नोर करियो उसे, एड्रेस सेंड कर दिया है मैंने.

मैं:- नीस ढूढे, ये राज कुछ न कुछ बकचोदी जरूर पलेगा.

आरव:- सरेंडर अंकल ने कहा है की उसे इग्नोर करो और यही हमे करना है, वैसे भी ये मला उसका जानकर था इसलिए आया हुआ है यहाँ.

मैं:- पहुँचता हु.

कॉल डिस्कनेक्टेड. मैं मसाज में एड्रेस देखा तो माथा सटक गया मेरा और इसके 2 रीज़न थे एक तो ये एड्रेस प्रीती के बिलकुल बगल वाले घर था और दूसरा ये की में इस एड्रेस की अपोजिट डायरेक्शन में चल रहा था और काफी आगे आ गया था, लेकिन अब काम तो करना hi था इसलिए जल्दी से मैंने ु टर्न लिया और गाड़ी पेल दी स्पीड में. 30 मिनट के अंदर में एड्रेस पे पंहुचा तो वह पुलिस कड़ी थी और आदित्य भी बहार hi खड़ा था...

आदित्य:- आओ आओ.

मैं:- क्या सन है यहाँ का?

आदित्य:- सन तो मैडम को पता है,

मैं:- तू अंडे देने के लिए खड़ा है क्या, चल ये जितने भी इनकी पार्टी के लोग है उन सब को निकल यहाँ से बस रिश्तेदार और घरवालों को छोड़ दे.

आदित्य:- जी भाई.

मैं अंदर आया तो ओप्पोसिशन के लोग खड़े थे जो मुझे जानते थे अस ा " गुंडा ऑफ़ कम" इसलिए सब मुझे hi घर रहे थे लेकिन आदित्य ने उन सब को बहार निकला. आरव, विवेक, स्वाति और नेहा मेरे पास आये.

मैं:- क्या सन है.

स्वाति:- सन एक दम क्लियर है लेकिन इतना भी नहीं, दरअसल एक गैंग है यहाँ पे वो लोग सिक्योरिटी वगैरह देते है पॉलिटिशियन और बुसिनेस्स्में को....

मैं:- वेट ा सेकंड लेकिन सिक्योरिटी किस्से देते है.

स्वाति:- सुन तो लो पहले, ये सिक्योरिटी खुदसे hi देते है मतलब जब तक इनके पास पैसे पहुंचते रहेंगे तब तक सामने वाली पार्टी सेफ नहीं तो ये खुद hi उनपे अटैक या ये कहु उनकी फॅमिली पे अटैक कर देते है.

मैं:- तो ये काम उस्मान का होगा फिर तो.

स्वाति:- मई बे हो सकता है, लेकिन सुरित्य नहीं है पूरी.

Main:-hmmm, एक बार इनके फॅमिली मेंबर्स से बात कर लू..

विवेक:- चल आजा, माल है एक से एक.

स्वाति:- शट उप विवेक एंड बे सीरियस.

मैं:- तुम लोग रुको मैं hi बात करता हु.

आरव:- चल मैं चलता हु.

मैं और आरव उनके ड्राइंग रूम में आये तो 4 लेडीज थी और 4 गेट्स थे और 4 लड़किया थी एक लड़का था :डी लेकिन अंदर प्रीती प्रिय और उसके पेरेंट्स थे और जो बाकि के थे वो मला की फॅमिली से थे. मुझे यहाँ देख के प्रीती और प्रिय शॉक तो हुयी लेकिन इतना नहीं. बाकी सब भी मुझे hi देखने लगे.

मैं:- hello एवरीवन, क्या कुछ सवाल पूछ सकता हु.

आदमी:- तुम तुम यहाँ क्या कर रहे हो तुम तो सरेंडर के आदमी हो न.

मैं:- वेट ा मिनट, पहली बात तो ये मैं यहाँ कोई पार्टी वर्तय खेलने नहीं आया, दूसरी बात आइंदा से सोच समझ के बोलना.

लेडी:- आप शांत रहिये वो पुलिस के साथ है देखो.

लड़का:- तुम मेरे पापा से ऐसे कैसे बात कर सकते हो, तमीज नहीं है क्या?

मैं:- ोू भाई शांति का दान दे और बड़ो के बिच में न बोल तो बताओ आप सब मला की किसी से दुश्मनी थी क्या या फिर लड़ाई झगड़ा.

आदमी:- नहीं पापा जी का किसी से लड़ाई झगड़ा नहीं था वो तो बहुत शांत इंसान थे और तुम्हारी पार्टी में भी उनकी इतनी hi इज़्ज़त है, लेकिन एक कॉल आता था उन्हें जिनसे उनके फेस पे टेंशन आ जाती थी.

मैं:- कुछ पता है इस बारे में आपको.

आदमी:- नहीं जी.

मैं:- थैंक्स, मैं पूरी कोसिस करूँगा उनको सही सलामत वापिस लाने की.

प्रीती:- प्लीज एक दादू को ठीक थक वापिस ले आओ, देखो तानिया ने क्या हाल बना रखा है अपना.

मैंने बस आँखों के इशारे से भरोसा जताया और उस तानिया की तरफ देखा तो वो रो रही थी लेकिन उस के जैसी hi लड़की फ़ोन चला रही थी "असंस्कारी पेओप्लेस" :सिघ:

मैं और आरव बहार आये और मैंने स्वाति से पूछा.

मैं:- स्वाति अब बताओ मला का किडनैप कैसे, कब और कहा हुआ है, और डेडलाइन क्या है.

स्वाति:- सी मला का किडनैप मग रोड की रेड लाइट पे हुआ, लेकिन देखने वाली बात ये है की किडनेपिंग से जस्ट एक दिन पहले hi कक्तव ख़राब हुआ, किडनैप रात के टाइम हुआ जब मला सर ऑफिस से घर आ रहे थे और सिक्योरिटी के लिए एक कार भी थी उनके साथ पर जैसे hi रेड लाइट आने को हुयी तो उनकी सिक्योरिटी की कार की हवा निकल गयी वो थोड़ा पीछे हुए और इतने टाइम में काण्ड हो गया और डेडलाइन सिर्फ 24 घंटे की है धुंध सको तो धुंध लो नहीं तो डेड बॉडी की होम डिलीवरी कर देंगे.

मैं:- नीस ढूढे नीस सही खेल रहे है वो, चलो कोई नहीं, तुम एक काम करो उनके ड्राइवर को बुलाओ स्टेशन.

उसके बाद हम सब स्टेशन के लिए निकले क्युकी अब यहाँ कोई काम बचा hi नहीं था हमारा. मैंने रस्ते में आकाश को कॉल करके कह दिया की स्टेशन आ जाए अपना सामान लेके.

आकाश:- बोल भाई क्या करना है.

मैं:- सुन बुड्ढे की कॉल डिटेल्स निकल और जो नंबर दौब्त्फुल लगे उसकी जनम पटरी भी निकल और एक्सेस तुझे यहाँ से मिल hi जाएगा तो लग जा काम पे.

विवेक:- तुम दोनों काम करो हम लंच करते है.

मैं:- वाह बस मैंने भी कुछ नहीं खाया है लेकिन तुम लोग खाओ खाना.

वो लोग खाना खाने लगे और मैं सोचने लगा की क्या किया जाए मेरे लिए मला जरूरी नहीं था मुझे तो वो किडनैपर चाहिए था, मैं अकेला बैठा सोचे जा रहा था और पता नहीं कितना टाइम हो गया था मुझे मेरे दिमाग में एक दम से एक बात हिट हुयी तो मैं खड़ा होक टीम के पास गया तो वह वो ड्राइवर बैठा था.

मैं:- ये कोण है.

आरव:- ड्राइवर है.

मैं:- हां तो ड्राइवर साहब क्या हुआ था रात को.

ड्राइवर:- पता नहीं साहब हमने तो कार रेडलीगत पे रोकी थी, सुनसान रोड था इसलिए हवा खाने के लिए विंडो निचे किया hi था की पीछे से एक हाथ हमारे मुँह पे आया और उसके बाद हमे कुछ पता नहीं हम तो हॉस्पिटल में थे सुबह.

स्वाति:- हे इस राइट, टेस्ट हुआ था इसका क्लोरोफॉर्म दिया था इसे.

मैं:- ोककक इसे भेज दो, वैसे भी ये काम का नहीं अब काम की बात सुनो.

नेहा:- या बोलो.

मैं:- टाइम कितना बचा है?

आरव:- ऑलमोस्ट 6 हॉर्स.

मैं:- चलो अछि बात है अब नेहा एक काम करो मला के ऑफिस की और उसके घर के बहार की 2 दिन की कक्तव फुटेज मंगवा लो.

विवेक:- अब उसका क्या करेगा.

मैं:- अबे मुर्ख, उन्होंने इतना ाचा प्लान बनाया है और वो भी एक रेप्युटेटेड मला को किडनैप करने के लिए तो उन्होंने मला को फॉलो तो किया hi होगा न, मुझे लगता है की कुछ तो जरूर मिलेगा उसमे.

स्वाति:- और नहीं मिला तो.

मैं:- हम्म्म, तो भी ाचा hi है बुड्ढे की डेड बॉडी आएगी तब पकड़ लेंगे किडनैपर को :ेविलौगह:

स्वाति:- :wtf: तुम्हे उनकी जान की फ़िक्र नहीं है बल्कि तुम उस किडनैपर की ज्यादा फ़िक्र है.

आरव :- अरे मजाक कर रहा है वो, तुम जल्दी मंगवाओ ये.

उसके बाद स्वाति और आरव चले गए फुटेज लाने और हम सब गए आकाश के पास.

मैं:- यययय लोदु कुछ मिला या नहीं.

आकाश:- मिला है.

विवेक:- तो बेटीचोद बोल न मुँह में लोढ़ा फसा है क्या.

नेहा:- हे मैं भी हु यहाँ तो ऐसी लैंग्वेज उसे न करो.

विवेक:- हां देखा है तुझे स्वाति नहीं होती जब कितनी गन्दी गालिया देती है तू.

मैं:- तुम्हारा हो गया हो तो काम की बात करे.

आकाश:- भाई मला के पास जावेद नाम के बन्दे के बहुत से कॉल है और मैंने hi इस जावेद का नंबर चेक किया तो ये भी बंद आ रहा है जबसे मला किडनैप हुआ है, और ये जावेद का नंबर ट्रैक भी नहीं हो पा रहा कुछ इश्यूज के चलते लेकिन इसका क्राइम रिकॉर्ड देखा है मैंने बहुत ज्यादा केसेस है इस्पे लेकिन ये कहा है किसी को पता नहीं.

उसके बाद उसने जावेद की फोटो दिखाई तो कोई 40-45 के लगभग का आदमी था हत्ता- कट्टा सा, मैंने वो पिछ ली और आदित्य को सेंड की और उसको बोलै की पूरी दिल्ली में इसका सर्च वारंट निकलवा कोई दिक्कत होती है तो कमिश्नर को बोल वो कर देंगे सोल्वे.

ये काम ख़तम हुआ hi था की कक्तव फुटेज आ गयी और हम सब से उन्हें प्ले किया और शांति से देखने लगे बिलकुल डेड साइलेंस में, हमने दोनों प्लेस की एक दिन की रिकॉर्डिंग 2 बार देखि तो कुछ नहीं मिला फिर हमने किडनेपिंग वाले दिन की वीडियो भी 3 बार देखि तो हमे कुछ नहीं मिला. अब हमारे पास टाइम भी सिर्फ 2 हॉर्स बचे थे और मिला कुछ भी नहीं इसलिए सब लोग एक एक करके उठके बहार को चले गए, लेकिन मैं स्टिल उस ऑफिस वाली रिकॉर्डिंग को देखे जा रहा था फ़ास्ट फॉरवर्ड में सायद कुछ मिल hi जाए. और ऐसे 10 बार और देखि होगी की मैं एक दम से चिल्ला पड़ा.

मैं:- ी गोत हिम! ी गोत हिम! ी गोत हिम!

मेरे ऐसे चिल्लाने से सब अंदर आये और मेरे को देखने लगा.

विवेक:- पागल हो गया है क्या चूतिये, जो चिल्ला रहा है.

मैं:- शट थे फ़क उप बीच, मैंने धुंध लिए इस रिक्शा वाले को देख ये सुबह यहाँ आया और ऑफिस की साइड hi मुँह करके बैठा रहा जब तक मला नहीं आ गया, और फिर ये लंच के टाइम फिर वापिस आया और पूरा दिन वही बैठा रहा, इसके पास सावरिया भी आ रही है लेकिन ये उन सबको मन कर रहा है वो भी झगड़ के इसके एक्सप्रेशन से साफ़ पता लग रहा है ये डरा धमका के मन कर रहा है लेकिन जैसे hi रात हुयी सब रिक्शा वाले चले गए लेकिन ये स्टिल खड़ा रहा और जैसे hi मला निकला तो ये भी निकल गया, मतलब इसने किडनैप नहीं किया लेकिन इसे पता जरूर होगा.

विवेक:- शाबास मेरे लड़के.

आकाश:- लेकिन प्रॉब्लम ये है की इसको ढूंढे कहा और हमारे पास 1:30 ऑवर है.

मैं:- आरव इसकी सकल तो देखेलि लग रही हैना :डी

आरव ने उसे गौर से देखा और फिर बोलै.

आरव:- अरे ये तो वही है :हिंट:

तो बे कॉन्टिनोएड 🙏🙏
 
अपडेट:-50

मैं:- आरव इसकी सकल तो देखेलि लग रही हैना :डी

आरव ने उसे गौर से देखा और फिर बोलै.

आरव:- अरे ये तो वही है :हिंट:

अब आगे:-

विवेक:- अबे किसकी बात कर रहे हो तुम दोनों.

मैं:- अबे तू देख hi लियो दिमाग न चाट.

आरव:- अब तुम दोनों लड़ने मत लग जाना, नेहा जल्दी से कार निकालो.

मैं:- आदित्य को बोलो हमारे पीछे रह के बैकअप दे.

नेहा ने जल्दी से सब को इन्फॉर्म की आरव ने जानवी के पास भी कॉल कर दिया था तो वो भी आ गयी थी, अब हमारे पास सही 75 मिनट बची थी. हम सब गाड़ियों में बैठे.

स्वाति:- लेकिन जाना कहा है.

मैं:- ोोोप्पस! वो गुंडों की कॉलोनी है न यहाँ से 15 की दूरी पे **** इस जगह पे वह चलो जल्दी.

नेहा ने कार दौड़ा दी.

स्वाति:- अरे यू आउट ऑफ़ योर मंद, वह पुलिस वालो को देखते hi मार देते है या गायब कर देते है.

मैं:- हां लेकिन जब एक साथ न हो.

जानवी:- डीएलओगे बाज़ी छोड़ और काम पे फोकस कर, अगर तूने मला को बचा लिया तो प्रीती वापिस से तुझसे बात करने लगे.

मैं इसके बाद कुछ नहीं बोलै, मेरा चेरा सख्त हो गया एक दम से दरिंदगी तो कूट कूट के दिख रही थी मेरे फेस पे, अब बस किसी भी तरह बुड्ढे को बचाना था प्रीती के लिए न सही तो हर्ष की तरफ एक स्टेप बढ़ने के लिए.

हम सही 15 मिनट में उस कॉलोनी के बहार रुके क्युकी अंदर कार तो जा नहीं सकती थी. और रात हो रही थी तो ये जगह खतरे से खाली नहीं थी. खैर हम लोगो ने अपनी अपनी गन्स निकली और तेज़ी से आगे बढ़ने लगे क्युकी 59 मिनट बची थी ( 15 मिनट यहाँ पहुंचने की और 1 मिनट गन वगैरह लोड करके बढ़ने की :स्मार्त्य: )

आगे मैं और आरव चल रहे थे और हम उसी चाय की टापरी जैसी जगह पे जा रहे थे जहा मैंने उस कालू के चाकर में उनके बॉस को मार दिया था और जो बाँदा मला पे नज़र रखे हुए था, (जिससे मैंने और आरव ने पहचान लिया था क्युकी वो उस दिन यही कालू के साथ hi बैठा था)

हम लोग जल्दी से उस चाय की टापरी के पास पहुंचे, और हमारी किस्मत अछि थी जो वो वही बैठा था लेकिन जैसे hi हम आगे बढ़ने को हुए तो उसने हमे देख लिया और उसकी आँखे मेरी आँखों से मिली और वो वह से खड़ा होक भागने लगा और उसके भागते hi हम भी उसके पीछे भागने लगे, लेकिन अब प्रॉब्लम ये थी को गालिया बहुत पतली थी और वो अकेला आराम से भाग पा रहा था और हम झुण्ड में थे इसलिए प्रॉब्लम हो रही थी लेकिन विवेक और मेरी रनिंग अछि थी इसलिए हम दोनों तेज़ भाग रहे थे बाकी सब से स्वाति और नेहा भी बहुत फ़ास्ट थी.

वो भसदक़ा बहुत तेज़ भाग रहा था और मुझे अब गुस्सा आने लगा था इसलिए मैंने एक बार घडी की तरफ देखा और फिर पूरी गांड का जोर लगा के भगा और विवेक से भी आगे निकला hi था की किसी भड़वे ने घर की विंडो खोल दी और वो सीधा मेरे मुँह पे बाज़ी, भें का लौड़ा पूरा दिमाग hi हिल गया वो तो लकड़ी की खिड़की थी अगर लोहे की होती तो मेरा सर hi खुल जाता.

मैं निचे गिरा और बाकी सब मेरे पास रुके लेकिन विवेक और आरव भागते रहे और मैं पीछे से चिल्लाया.

मैं:- विवेक पकड़ भें के लौड़े को मैं बनाऊ इसे मिल्खा सिंह. आआह्ह्ह्ह भेनचोद ये खिड़की किसने खोली उसकी माँ की छूट.

जानवी:- हे वाच योर टोँगे, और ज्यादा तो नहीं लगी.

मैं:- अरे टोँगे की माँ की आँख बस पूरा थोबड़ा हिल गया.

ये रास्ता लम्बा था इसलिए वो हमे अभी भागते हुए दिख रहे थे, हम लोग भी खड़े होक उनके पीछे भागने लगे वापिस से लेकिन विवेक को पता नहीं क्या हुआ सायद गुस्सा आ गया होगा और उसकी स्पीड तेज़ हुयी और उस आदमी की धीरे क्युकी थक गया था वो भी बेचारा है तो इंसान hi :सिघ:

विवेक ने उछाल के उसपे झपटा मारा तो वो दोनों एक साथ निचे गिर गए, वो आदमी फिर से खड़े होक भागने को हुआ लेकिन अब क्या फायदा अब विवेक जैसे जानवर के हाथ में आ चूका था इसलिए उसके खड़े होते hi विवेक ने दिया उसेक थोबड़े पे बहुत भयानक पंच.

विवेक:- भेनचोद रुक मैं बनाऊ तुझे मिल्खा सिंह, लौड़े आ जा गोल्ड मैडल ले ले.

हम सब भी उनके पास पहुंचे, मैं उस आदमी को उठाया और उसके खिचके रैप्टा दिया, वो निचे गिर गया, एक तो विवेक के पंच से उसका पूरा थोबड़ा खून का हो चूका था दूसरा एक थप्पड़ से उसके कानो में चिड़िया उड़ने लगी थी.

मैं:- सुन मला पे नज़र किसके कहने पे रख रहा था एड्रेस दे दे, नहीं तो कुत्ते की मौत मार दूंगा, तू जनता hi है मुझे.

वो:- देख,, देखो,,, मैंनं कुचछह नाहठी जनता.

स्वाति:- ये ऐसे नहीं बोलेगा, हमारे पास सिर्फ 30 मिनट बचे है.

मैंने विवेक को इशारा किया और उसने इशारा मिलते hi उसके पेट में एक पंच दिया तो उसकी आँखे बहार आने को हो गयी और वो झुक गया लेकिन विवेक ने उसे खड़ा किया और उसके फेस पे बहुत से पंच मारे खींच खींच के, बहुत ज्यादा ताकत से उसका पूरा फेस पिचक गया, जानवी और आकाश ने तो मुँह फेर लिया ऐसा सन देख के.

वो:- बताता हु बताता हु छोड़ दो मुझे.

विवेक:- न न तू मत बता.

और एक पंच और दिया उसको, मैं विवेक को साइड किया और उस आदमी का कलर पकड़ा.

मैं:- चल जल्दी भूख.

वो:- शःह्हब्ब्ब मूउज्ज्झी ज्यादा ंणआह्ही पट्टा लेकककिननं एई काम्म्म सूयंनीय भहहभाई ने कार्रवाया है वो ुस्स्समान भाआईई की खाससस है, ोूँकक्का नंमंब्बीरर मेरी पासस हैई. लिक्खकींनन वोऊ इस्सस व्वाककट पासस म्मीीिन्न जोऊ जापपन्नेस्सी जोनी है उसस्कीई जो बंद खाँड़ररर बिलडिंग्ज मेऐईंण हैई.

वो:- ाब्ब छ्हूदड़ ड्डूओ मुझही.

मैं:- ठीक है

और मैं उसकी कलर छोड़ी और उसका सर पकड़ के दिवार में इतना तेज़ी से बजाय की उसकी ों थे स्पॉट डेथ हो गयी, उसके खून के चित्ते हुम्म्म सब पे भी आजके गिरे.

स्वाति:- व्हाट थे फ़क, उसको मार क्यों दिया.

जानवी :- एक! व्हाट इस थिस.

मैं:- लिसेन! वे हैवे ओनली 30 मिनट्स तो ये बाते छोड़ो और जल्दी निकलो, वैसे भी यहाँ इसका कोई पुलिस केस नहीं करेगा.

हम लोग तेज़ी से भागते हुए hi कार्स की तरफ आये क्युकी 1 -1 मिनट हमारे लिए बहुत कीमती था, और मेरे दिमाग में एक चीज़ बहुत तेज़ी से चल रही थी, लेकिन मैंने इस बारे में ज्यादा ध्यान न दिया और जल्दी से कार्स के पास आये और कार में बैठ के जापानी जोन ( जो की एक इंडस्ट्रियल एरिया है और वह दो तीन बिल्डिंग का काम चालू है तो वह ज्यादा रश नहीं होता और वो बहुत पास थी लिखे 10 मिनट की दूरी पे)

एक कार में ड्राइव कर रहा था दूसरी स्वाति और हम दोनों काफी स्पीड से ड्राइव कर रहे थे, हमारे पास सिर्फ 25 मिनट बचे थे और रात के टाइम में थोड़ा ट्रैफिक भी होता है लेकिन हम दोनों कार्स को भगाये जा रहे थे ठीक 10 मिनट में हमने उस जोन का फाटक तोड़ कर एंट्री ली. हममे कार रोकी और मैं घडी की तरफ देखा तो सिर्फ 15 मिनट थे लेकिन असली प्रॉब्लम यहाँ थी क्युकी यहाँ 3 बिल्डिंग्स थी और तीनो 6-6 फ्लोर की थी और एक सेण्टर वाली 10 फ्लोर की टाइम सिर्फ 15 मिनट मेरे पे बहुत ज्यादा प्रेशर था और इस टाइम मुझे एक दम क्विक डिसिशन लेना था और जोकि मैंने लिया भी.

मैं:- लिसेन गाइस, टाइम काम है 3 ग्रुप में बात जाओ और 3 बिल्डिंग छान मारो जो सामने आये उदा दो, बस मला को छोड़ के.

सब:- ोककक.

Main:-aarav, जानवी, विवेक तुम लेफ्ट वाली में जाओ, neha,aakash और आदित्य और ये 2 हवलदार तुम राइट वाली में जाओ, मैं और स्वाति सामने वाली में जा रहे है. लेटस जो.

मेरे इतना बोलते hi सब अपनी अपनी बुलिडिंग्स की तरफ भागे, मैं और स्वाति बिल्डिंग में घुसे.

Main:-swati सीधा ऊपर से चेक करते है, चलो लिफ्ट में.

हम दोनों भाग के लिफ्ट के पास आये और जैसे hi स्वाति उसमे एंटर हुयी, वैसे hi सटक से लिफ्ट बंद हो गयी और धड़ धड़ धड़ की आवाज़ के साथ उप्पेर की तरफ चली गयी. व्हाट थे फ़क भेनचोद ये क्या हो रहा है, और मेरे दिमाग की घंटी एक दम से जाली.

मैं:- ओह माय गॉड, इतस ा ट्रैप.

"जो बंद खण्डार बिल्डिंग है उसमे है" यही बोलै था उस आदमी ने और इन तीनो बिल्डिंग्स में यही एक बंद बिल्डिंग थी बाकी दोनों ओपन थी, और एक बात उस आदमी से सिर्फ मैं पूछा था की कोण है इसके पीछे लेकिन उसने एड्रेस बता दिया मतलब वो सनी मुझे यहाँ लाना चाहता था लेकिन ये सनी है कोण :माध1:

मैंने अपनी घडी में देखा तो सिर्फ 7 मिनट बचे थे लिफ्ट थी नहीं इसलिए मैं गाँडफाँड तेज़ भगा स्टैर्स से रस्ते में मैंने भागते हुए फ़ोन निकल के बाकियो को इन्फॉर्म करने की कोसिस की लेकिन गांड तब मरी जब सिग्नल hi नहीं थे फ़ोन, हाउ इस थिस पॉसिबल इन दिल्ली, जरूर कोई गेम खेल रहा है. मैंने फ़ोन वापिस पॉकेट में डाला और फिर और तेज़ भागने लगा.

मैं 8तह फ्लोर पे आया तो लिफ्ट से स्वाति की आवाज़ आ रही थी " कोई है" "एक कहा हो तुम" "बहार निकालो कोई मुझे" . मैंने एक बार उसको बहार निकलने की सोची लेकिन फिर अपनी घडी पे देखा तो सिर्फ 2 मिनट बचे थे इसलिए मैं वापिस उप्पेर की और भगा 9तह एंड थें आया 10तह पे तो सामने गेट बंद था जोकि वुडेन का था इसलिए मैं थोड़ा सा पीछे आया और खींच के उसपे लात मारी और मैं सीधा अंदर, और अंदर का सन देखके मेरी गांड hi फैट गयी. क्युकी मेरे जस्ट सामने वो मला चेयर पे बंधा हुआ था और उसकी चेयर पे एक बम फिट था, दिक्कत एक थी और वो ये की वो बंधा हुआ था बुरी तरह से और उसके ठीक पीछे एक लेद लगी थी जिसपे दो बन्दे बैठे थे, और उनमे से एक बोलने लगा.

वो:- सॉरी एक लेट हो गए, अब इस बुड्ढे के साथ साथ तुम भी मरोगे और फिर पूरी दिल्ली जान जाएगी की उस्मान से पन्गा लेने का नतीजा क्या होता है. टिक टिक टिक.

और फिर वो दोनों जानवरो जैसे हसने लगे. लेकिन मैंने उनसे ध्यान हटके उस बुड्ढे के पास गया तो उस बम में 40 सेकंड बचे थे और 24 घंटे पुरे होने में भी. मैं इन जैसे चुतियो से हार नहीं मान सकता था और हार मान लेता तो मेरा ईगो सटिस्फी नहीं होता और अब मुझे गुस्सा आ रहा था और मुझे गुस्सा आता है तो मेरा दिमाग बहुत तेज़ काम करने लगता है और उस रस्सी को खोलने के लिए अभी के लिए दिमाग hi चाहिए था. मैं भाग के बुद्धि के पास आया और पुरे दिमाग के साथ उस रस्सी को खोलने लगा. लेकिन बुड्ढे की गांड में चुल्ल थी.

मला:- बीटा चले जाओ यहाँ से क्युकी अपनी जान खतरे में दाल रहे हो, तुम तो जवान हो अभी मेरी तो उम्र हो चुकी, बीटा तुम जाओ यहाँ से सिर्फ 20 सेकंड बची है.

मैंने लगभग रस्सी खोल hi दी थी लेकिन इस बुड्ढे के रंडी रोने ने मेरा कंसंट्रेशन बिगड़ दिया और मेरा दिमाग फिर से घूम गया और मैंने अपनी गन निकल के बुड्ढे के माथे पे रख दी.

मैं:- सुन भसडक अब मुँह से एक वर्ड न निकल दियो नहीं तो मैं खुद hi पेल दूंगा तुझे.

उसने हाँ में गार्डन हिल्लायी और मैंने अपनी गन वापिस दाल के रस्सी की तरफ देखा तो लौड़ा कुछ समझ नहीं आया और तभी वो बम आवाज़ करने लगा टिक टिक.

10 9 भेनचोद ऐसे नहीं मरना मुझे, लेकिन अचानक से मेरे दिमाग में पता नहीं क्या आया मैंने बुड्ढे की छाती में लात मारी जिससे वो कुर्सी समेत गिरा और कुर्सी टूटी और रस्सी हुयी ढीली मैंने और उसने मिलके तेज़ी से रस्सी निकली.

5 4 3 2 1 एंड बुऊममममम बहुत तेज़ धमाका हुआ लेकिन जब 2 सेकंड बचे थे उससे पहले hi मैंने बुड्ढे का हाथ पकड़ा और पास की विंडो का कांच तोड़ते हुए जम्प लगाया लेकिन ब्लास्ट का इम्पैक्ट वैसा hi था जैसा मेरा घर ब्लास्ट हुआ तब था. अब ब्लास्ट के इम्पैक्ट से मैं और बुद्धा और बिल्डिंग से दूर होक निचे गिरने लगे, भेनचोद बम से बचे तो अब 10तह फ्लोर से निचे गिर के मर जाएंगे, हम तेज़ी से निचे जा रहे थे और हम बिलकुल नीचे आ गए तो हमारे निचे मेरी hi कार दिखी मुझे, मैं समझ गया की मरूंगा नहीं तो काम से काम गांड तो ढंग से टूटेगी, लेकिन तभी मुझे बुड्ढे का ख्याल आया और अब मैं इसे तो मरने नहीं दे सकता था इतनी म्हणत के बाद.

इसलिए मैं निचे गिरते हुए hi उसका हाथ पकड़ा और उसको खुद से सत्ता के अपने उप्पेर कर लिया और खुद पीठ के बल निचे जाने लगा. और भायंमममम से कार की रूफ पे मेरी बहुत तेज़ी से टकराई मतलब जान hi निकल गयी हो, मेरी मैं एक दम ब्लेंक हो गया था मेरी आँखे खुल रही थी और बंद हो रही थी, कार के सरे मिर्रो टूट गए थे मैंने अपने राइट साइड में देखा तो बुद्धा एक दम सही सलामत लेता था और लेफ्ट साइड में देखा तो आरव, विवेक और बाकी सब मेरा नाम चिल्लाते हुए मेरी तरफ आ रहे थे लेकिन मेरी गांड फिर से फटी जब पीछे मीडिया को लाइव कवरेज करते हुए देखा, नीस बीटा नीस सही गेम खेल गया उस्मान..

लेकिन अब मेरे अंदर खड़े होने तक की ताकत नहीं थी मेरी आँखे किसी भी टाइम बंद हो सकती थी पूरी बॉडी में बहुत तेज़ पैन था, सर में तीस सी उठ रही थी लेकिन दिमाग में एक ख्याल था की मैंने इस बुढऊ को क्यों बचाया, मुझे तो किसी की परवाह नहीं होती तो मैंने इसे क्यों बचाया, क्या मैं सच में हीरो बनने लगा हु? नहीं नहीं मैं हीरो नहीं बन सकता. तो फिर अपनी जान की परवाह करे बगैर इसको क्यों बचाया?

मेरे को खुदसे कोई जवाब मिलता इससे पहले आरव और आ गए.

आरव:- एक उठ न! भाई उठ न! भाई.

विवेक:- उठ न भसडक.

आकाश:- एक आँखे बंद न करियो एम्बुलेंस आ hi गयी है बस.

अब इन लाडो को कोण बताये की साडी हड्डियों का कीमा बन गया है और मेरी आँखे इनके बाते सुनते सुनते कब बंद हुयी मुझे पता hi नहीं चला. और दिमाग भी मेरा सुन्न हो गया एक सवाल के साथ की " मैंने बुढऊ को क्यों बचाया खुद की जान पे खेल के?" जवाब कुछ मिला नहीं लेकिन आप लोग जरूर देना इसका जवाब :डी

तो बे कॉन्टिनोएड 🙏🙏
 
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