My Complete Intentions - The Beginning - Page 9 - SexBaba
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My Complete Intentions - The Beginning

अपडेट:-40


जानवर:- no एक!

मैं:- मंजूर है, लेकिन एक बात क्लियर कर दू तुझे की "मैं हीरो नहीं हु"

अब आगे:-

मैं उसकी तरफ बढ़ गया और वो भी मेरी तरफ लेकिन उसके पास पहुंच के पंच मारा लेकिन उसने खड़े खड़े मेरा हाथ पकड़ा और एक लात घुमा के मेरे लात पे मारी जिससे मैं वही घूम के गुर गया ( ये क्या था भेनचोद इतना फ़ास्ट )

Janwar:-he इस त्रिनेड फाइटर.

"ओह्ह्ह कोई नहीं अब तो ले लिया तीर पिछवाड़े में अब अपने बात से पलट जाए वो एक नहीं अब या तो ये यहाँ से मुझे हरा के जायेगा या मरेगा." मैं भी झटके से खड़ा हुआ और उसने मेरे खड़े होते hi एक मेरे रिब्स पे पंच मारना चाहा लेकिन मैं थोड़ा सा साइड हुआ और घुमा के कोहनी उसके सर में दी जो की बहुत तेज़ लगी थी क्युकी मेरे भी हाथ में करंट सा दौड़ गया था तो उसका तो पता नहीं क्या hi हुआ होगा लेकिन वो थोड़ा सा भी सम्भल पाटा उससे पहले मैंने उसकी गार्डन पकड़ी और उसके फेस पे लगातार बहुत सारे मुक्के मारे जिससे वो बौखला गया और मुझे ढाका दिया लेकिन मैंने पीछे होते होते उसकी गोटियों पे लात जड़ दी जिससे वो झुका और उसके झुकते hi मैं आगे आया और सर में घुटना दिया जिससे वो वही लेट गया.

मैं:- क्यों बे तेरा त्रिनेड फाइटर तो लेट गया 5 मिनट में.

जानवी:- यू अरे एनिमल एक.

मैं:- :-तारीफ के लिए शुक्रिया आपका.

अब वो पाब्लो भी वही ज़मीन पे बैठ गया था हार मान के लेकिन बिचारा सस्पेंस में नहीं मरना चाहता था इसलिए बोल पड़ा.

पाब्लो:- तेल्ल में तुमने कैसे किया ये सब ये एक बन्दे का प्लान नहीं हो सकता.

मैं:- सही कहा तूने ये एक बन्दे का प्लान नहीं hai,chal तुझे सुरु से बताता हु पर उससे पहले एक सवाल है मेरा तू जानवी को किडनैप क्यों करना चाहता था.

Pablo:-kyuki मुझे थोड़े दिन पहले पता चला था की सिंगापुर के एक बैंक में एक सेफ है वह 5000 करोड़ की एक हार्ड ड्राइव राखी है और वो आज से नहीं बहुत पहले से है वह पे और उसको बस दो लोगो के रेटिना स्कैन से खोला जा सकता है एक तो बलराम सिंह जो अब कम है और दूसरी उसकी बेटी.

मैं:- चलो ये तो तेरा रीज़न हो गया किडनैपिंग का अब आते है असली प्लान क्या था हमारा. तो कम सर के सूत्रों से पता लगा की जानवी की जान को खतरा है एक लोकल गैंगस्टर जिसका नाम है पाब्लो लेकिन तुझे किसी ने देखा नहीं था तो कैसे बचते उसे और बचते भी तो किस्से बचते, पर फिर हमारे राज सर ने और कम सर ने दिमाग लगाया और इस जानवर को जो की जापान में hi है पिछले 3 साल से इसको बोलै जानवी को किडनैप करले ताकि वो सेफ हो जाए और ऐसा hi हुआ जानवी सेफ हो गयी तेरे से लेकिन कब तक सेफ रहती वो पर तू बहुत शयना निकला जैक बन के जानवी का सिक्योरिटी इंचार्ज बन गया, पर तुझे बता दू मैं इस प्लान में शामिल नहीं था और ये लोग साड़ी उम्र जानवी को बचने के लिए उसे चुप्पा के नहीं रख सकते थे और उसका सलूशन एक hi था और वो था तेरा पकडे जाना और इस काम के लिए मुझे अप्पोइंट किया गया और मुझे पहले से फैला हुआ रायता समेटने को बोलै गया लेकिन जब मुझे तेरी डिटेल दी गयी तो मुझे तेरी सकल में कमीना पैन दिख गया पर मुझे ये नहीं पता था की ये जानवर कोण है पाब्लो कोण है और मेरा दुश्मन कोण है जानवी को कहा रखा है ये भी नहीं बताया गया था मुझे क्युकी ये लोग मुझे hi चेक कर रहे थे पर जैसे hi मैं एयरपोर्ट पे आया तो तू थोड़ा बौखलाया हुआ लगा, गुस्से में लगा तू मुझे क्युकी हमने खबर तो यही फैलाई थी की पाब्लो ने किडनैप किया है लेकिन पाब्लो तो तू है और तेरे को यही बात खटक रही थी की कोण तेरा नाम उसे कर रहा है, मैं एयरपोर्ट से बहार निकला तो स्निपर्स दिखे जो की इस जानवर के लोग थे क्युकी इसको तेरे पे शक था और इसे पता था कोण आने वाला है इंडिया से इसलिए इसने वह सिक्योरिटी बैठा दी ताकि तू कुछ चुटिया हरकत न करे. पर तूने फिर एक छुटियापन्ति की और वो ये की तूने हमे गलत कहानी सुनाई तू हम लोगो को ऐसे hi फसके खुद जानवी तक पहुंचना चाहता था, लेकिन मुझे तेरे पे पहले hi शक था लेकिन ये नहीं पता था की तू hi पाब्लो है. और यार डेविड के लिए बुरा लगा मुझे क्युकी उसको तूने hi मरवा दिया ताकि वो अपना मुँह न खोले लेकिन वो मरते मरते भी हमसे वही बोलके गया जो तूने उससे कहा था, मतलब मैं फिर से भटक गया था पर फिर मुझे कुछ याद आया और वो ये था की मैंने तेरा रिकॉर्ड चेक करवाया आकाश से और उस काम में हमारी गांड फैट गयी थी क्युकी जापान की गवर्नमेंट के रिकॉर्ड हैक करे थे हमने लेकिन उसमे तेरे जैसा कोई नहीं मिला, अब अगले दिन ये जानवर मुझे ले गया उठा के हलाकि एक बार तो मेरी गांड फैट गयी थी की कही पाब्लो hi ने किडनैप कर लिया मेरा पर जब मैंने इसकी शकल देखि तो मेरा तो दिन hi बन गया जिसको चार साल से मिस कर रहा था वो मिल गया मुझे. और फिर मैंने आरव को तेरे बारे में बताया तो उसने तुझे यहाँ लाने को बोलै क्युकी हमको तुझपे सिर्फ शक्क था लेकिन यकीन तब हुआ जब मैंने तुझे मिलने बुलाया और तू अपनी गैंग लेके hi आ गया, वैसे तो तू अकेला बॉडीगार्ड था जानवी का लेकिन एक दम से इतने बन्दे लेके आ गया तो शक्क और गहरा हो गया और यहाँ आने के बाद तो मैंने मजाक में पाब्लो बोलै था तुझे लेकिन तेरी स्माइल ने तो कन्फर्म कर दिया. बस अब नहीं बोल पाउँगा मैं माँ छुड़ा तू अपनी.

लेकिन मैं ये सब बोलते बोलते इतना खो गया था की मुझे क्या किसी को पता नहीं लगा की कब वो एक दम किनारे पे पहुंच गया और मैं कुछ करता उससे पहले उसने दोनों हाथ फैलाये और निचे गिरा लेकिन इससे पहले राज की एक बुलेट उसकी चेस्ट में घुस गयी और वो निचे गिरने लगा

"हस्सश्ठ मर गया लौड़ा".

आकाश:- देख तूने जो भी बकचोदी पेली है वो मुझे बिलकुल समझ नहीं आयी.

मैं:- समझ के क्या करेगा मर गया पाब्लो, खेल ख़तम अब आगे का देखते है.

तभी वो जानवी कम के गले मिली पापा बोलते हुए

(हां वो दो शक्श कम और राज hi थे जो पीछे से आये थे)

मैं भी उस जानवर की तरफ हो लिया और उसके पेट में लात दी.

मैं:- भें के लौड़े कहा चला गया था तू.

राज:- एक लैंग्वेज.

मैं:- सॉरी, लेकिन तू अब पूरी बात बता मुझे तू कहा था क्या किया और अब तू मेरे साथ रहेगा और अंकल आंटी कहा है?

वो कुछ नहीं बोलै बस अपनी मुंडी निचे कर ली तभी वो कम भी हमारे पास आ गया और बाकि सब भी.

मैं:- अबे बोल भी.

कम:- आरव नहीं बता पायेगा मैं बताता हु ये और इसके पेरेंट्स रात के टाइम घूमने निकले थे और दिल्ली को क्रॉस करते हुए इनका एक्सीडेंट हो गया था जिसमे इसके पेरेंट्स ों थे स्पॉट मर गए पर ये बच गया लेकिन बचते बचते इसकी यादास्त चली गयी और मैं वह से गुज़र रहा था तो एक्सीडेंट हुआ देखके हेल्प करने की सोची पर दो लोग आलरेडी मर चुके थे बस आरव जिन्दा था इसलिए मैं इसे अपना साथ ले गया और इसका इलाज़ करवाया लेकिन जब इसे होश आया तो इसको कुछ याद नहीं था तो मैंने इसे अपने पास रख लिया इसकी हैघट और बॉडी अछि थी तो मैंने इसे जापान भेज दिया सिखने के लिए और ये दो साल में त्रिनेड हो गया अब ये वापिस इंडिया आना नहीं चाहता क्युकी इसके मुताबिक इसका यहाँ कोई नहीं है इसलिए मैंने इसे जापान में hi जानवी की हिफाज़त में रख लिया लेकिन एक दिन इसके सर में तेज़ दर्द हुआ और ये बेहोश हो गया और उठा तब इस यादास्त आ चुकी थी और इसने अपना नाम आरव बताया और इसकी यादास्त वापिस आते hi ये इंडिया मैं तुम्हारे पास आने की ज़िद करने लगा लेकिन तभी इस पाब्लो ला हमे पता लगा और फिर मैंने इसे यही रोक दिया लेकिन जैसे hi 3 दिन पहले इसे पता लगा की इंडिया से एक आ रहा है तो ये खुश हो गया और इसने तुम्हारी सिक्योरिटी के लिए hi वाह स्निपर्स रखे थे ताकि तुम्हे कुछ न हो जाए.

कम चुप हुआ लेकिन मेरी आँखों में फिर भी आंसू आ गए क्युकी बेशक आरव मुझसे दो साल बड़ा था लेकिन सबसे करीब वो hi था मेरे जिस टाइम में दर्द में था तब इसने hi मुझे उससे निकला था लेकिन उस रात अचानक गायब हो जाने से मुझे बहुत बड़ा झटका लग था लेकिन आगे बढ़ने का नाम hi जिंदगी है तो मैं भी आगे बढ़ गया और आरव के गले लग गया और फिर झटके से अलग होते hi बोलै

मैं:- तू तेरा बैग पैक कर ले अब तू मेरे साथ रहेगा.

राज:- नहीं अरब सीबीआई ज्वाइन करेगा और इसने पहले hi कहा था.

मैं:- कोई ज्वाइन नहीं कर रहा सीबीआई और हे हट्स सीबीआई वो तो इसकी यादास्त वापिस नहीं थी इसलिए बोल दिया होगा इसने, अब ये मेरे साथ रहेगा और कोई मेरे अगेंस्ट जाके दिखाओ.

आरव:- अबे सांत हो जा तू कबसे गुस्सा होने लगा और ये लड़ाई झगड़ा, मार पीट, सीबीआई देलिए सब क्या है?

मैं तो कुछ नहीं बोलै पर उस लौड़े राज ने मेरे सारे काण्ड और क्या क्या हुआ सब बता दिया.

आरव:- मुझे तुझसे ये उम्मीद नहीं थी की तू एक क्रिमनल बन जाएगा.

मैं:- देख करना पड़ता है ये सब.

आरव:- मैं नहीं रहूँगा तेरे साथ

मैं:- दिल्ली चल के बात करेंगे इस बारे में.

और इतना बोलके मैं वह से निकलने लगा क्युकी गुस्सा आ रहा था मुझे क्युकी सब लोग ज्ञान पेलने लगते है, मेरे पीछे पीछे आकाश और जॉन भी आ गए बहार से मैंने पाब्लो की कार उठायी और हम तीनो hi उसमे होटल पहुंचे रात का टाइम था तो सो गए.

सुबह आँख खुली तो राज का मैसेज आया हुआ था की एयरपोर्ट पहुँचो 2 घंटे में उनका प्राइवेट जेट रेडी है. मैंने उन दोनों को उठाया और फिर हम तीनो फ्रेश हुए ब्रेकफास्ट किया और अपना सम्मान बैग में डालके टैक्सी पकड़ के एयरपोर्ट पहुंचे वह वो चारो आलरेडी पहुंच चुके थे मैं आरव से गले मिला और आगे बढ़ गया क्युकी मेरा किसीकी बकवास सुनने का वक़्त नहीं था इसलिए मैं सीधा जेट में जाके बैठ गया और वो सब भी मेरे पीछे आये और एक साथ बैठ के गप्पे लड़ने लगे, पर मेरा कोई इंट्रेस्ट नहीं था क्युकी आरव ने कल पहली बार मुझे मन किया था किसी चीज़ के लिए उल्टा मुझे hi बोलै की ये क्रिमिनल एक्टिविटीज छोड़ दू, क्यों छोड़ दू वो कह रहा है इसलिए, खैर मैं ये सब सोचते सोचते फिर से सो गया.

मेरी आँख आरव के उठाने से खुली मैंने उसे कुछ नहीं बोलै बस वाशरूम जाके फ्रेश हुआ और वापिस चुचाप बैठ गया.

आकाश:- यययय तू क्यों मुँह लटका के बैठा है?

आकाश:- अबे बोल भी मिशन पूरा हो तो गया अब क्या हुआ?

मैं:- सुन भसडक एक बार और बोलै न तो प्लेन से निचे फेक दूंगा.

उसके बाद वो कुछ नहीं बोलै फिर फ्लाइट लैंड हुयी हम लोग एयरपोर्ट से बहार आये कम और राज के लिए कार आयी हुयी थी और आरव और जॉन भी उनके साथ चले गए बचे मैं और आकाश हमने भी कैब बुक की और निकल गए पहले आकाश को ड्राप किया और फिर मैं अपने घर के आगे उतरा और अंदर गया तो गेट बंद था लेकिन लॉक नहीं था इसलिए मैं सीधा अंदर घुस गया और हॉल में कोई नहीं था लाइट भी ऑफ थी इसलिए हॉल में अँधेरा था, मुझे प्यास लगी थी इसलिए मैंने बैग को वही सोफे पे रखा और किचन से पानी पिटे हुए बहार आके सोफे पे बैठा hi था की मेरे कानो में बिलकुल धीरे से आवाज़ पड़ी लेकिन ये आवाज़ कई तरफ से आ रही थी

"तू, ताऊ, ताऊ, ताऊ, ताऊ" मेरा दिमाग एक सेकंड में घूम गया और मैं जितना तेज़ भाग सकता था उतना तेज़ उठ के भगा और गेट खोलने का टाइम नहीं था इसलिए सीधा गेट को टक्कर मार्के तोड़ते हुए बहार गिरा और फिर खड़ा हो के बहार की बाउंड्री वाली दिवार के पीछे छलांग लगायी थी की बहुत तेज़ धमाके हुए " बोओओओओओओम" , "बुऊममम" ..........

और उन धमाकों की चाप्पेट में तो नहीं आया लेकिन पीछे से गैस का इतना तेज़ प्रेशर आया की मैं उड़ता हुआ बहार की साइड की गिरा और मेरा सर दिवार से टकराया, भेनचोद सब कुछ घूम गया, सर से खून की एक तेज़ धार बह निकली और फिर मैंने एक हाथ अपने माथे पे लगाया और मूड के देखा तो घर की जगह पे सिर्फ मलबा बचा था आसपास के घर भिड़े हुए नहीं थे लेकिन फिर भी उनकी दीवारों में दरार आ गयी थी.

मेरे पास अब कुछ नहीं बचा था एक फ़ोन और जो कपडे पहने है उनके अलावा, घर, गाड़ी कपडे, पैसे, यहाँ तक की डाक्यूमेंट्स, बुक भी नहीं बची थी. एक झटके में सब साफ़ वो तो ाचा हुआ मैं पानी पिने रुक गया वर्ण अब तक तो मैं भी इस मलबे में दबा हुआ होता लेकिन जिसने भी ये किया है उसे कुत्ते की मौत मारूंगा.

लेकिन अचानक से मेरे सर का दिरद बढ़ने लगा और खून भी रुकने का नाम नहीं ले रहा था इसलिए मैंने फ़ोन निकला जेब से और कांपते हाथ से "हेल्प" लिख के आरव को सेंड कर दिया और फिर फ़ोन को जेब में रखा तब तक पड़ोस वाले लोगो की भीड़ ीखता हो गयी थी आसपास लेकिन कोई भी मेरे पास तक नहीं आ रहा था सब मुझे घर के देख रहे थे और मैं दिवार का सहारा लेके उन्हें घर रहा था और बस अपने फ्यूज हुए दिमाग को दौड़ा रहा था की कोण हो सकता है और अगले hi झटके में एक साथ कई लोगो के नाम मेरे दिमाग में आये पर इतने मैंने एक वाइट ऑडी मेरे आगे आके रुकी और उसमे से आरव और जानवी निकले.

आरव:- एक आँखे बंद मत करियो मैं आ गया हु न कुछ नहीं होगा तुझे.

मैं:- सुन ज्ञान न पेल जल्दी से हॉस्पिटल ले चल.

ये सब बोलते हुए मैं बहुत अटक रहा था लेकिन वह खड़े सब लोग मुझे घर रहे थे क्युकी मैं मरने को हो रहा हु लेकिन अकड़ अभी तक थी मेरी बातो में खैर आरव ने मुझे उठाया और पीछे की सीट पे लिटाया और जानवी मेरे सर को अपनी गौड़ में लेके बैठी.

जानवी:- ओह्ह्ह गॉड डेविड जल्दी चलो इसके सर पे बहुत चोट लगी है.

और वो अपने दुप्पटे से मेरी चोट को दबाने लगी लेकिन मेरे तो दिमाग कही और hi घूम गया "क्युकी आरव HI डेविड है तो फिर जो मारा वो कोण था और उस तक हम पहुंचे कैसे, और तो और जो मैंने पाब्लो को बात बताया क्या वो सच थी या जो आरव ने मुझे बोलै मैं बस उतना HI जान पाया"

तो बे कॉन्टिनोएड 🙏🙏

 
अपडेट:-41

मैं हॉस्पिटल तक ऐसे hi कुछ न कुछ सोचते हुए पंहुचा, आरव ने मुझे गौड़ में उठाया और हॉस्पिटल में ले गया लेकिन मुझे होश होते हुए भी नहीं था, ना मुझे दर्द हो रहा था न मैं बेहोश हो रहा था, बस एक चीज़ हो रही थी की मेरा दिमाग बहुत तेज़ स्पीड से काम कर रहा था मतलब बहुत तेज़. डॉक्टर्स ने मेरे सर पे पट्टी बंधी मुझे इसका भी पता नहीं लगा.

वह राज और मेरी माँ भी आ गए थे जॉन भी आ गया था, मुझे ऐसे चुपचाप बैठे हुए पता नहीं कितनी देर हो गयी थी और सब लोग मुझे अजीब नज़रो से देख रहे थे. आरव ने मुझे do-teen बार आवाज़ भी दी लेकिन मैंने उसकी तरफ देखा hi नहीं. क्युकी मुझे कुछ महसूस hi नहीं हो रहा था बस उनकी आवाज़ आ रही थी पर मेरा मंद रेस्पोंद नहीं कर रहा था, सब लोग मेरे पास बैठे हुए थे, तभी रूम का डूब तेज़ी से खुला और जो शख्स अंदर आया उसको देख के मेरे हार्टबीट तेज़ हो गयी, उसको देखके मैं अपनी साड़ी प्रॉब्लम भूल गया, मेरे दिमाग को फ़ास्ट स्पीड से चल रहा था वो भी एक दम रुक गया और जब दिमाग ने काम करना बंद किया तो मेरे सर में दर्द हुआ और मुझे कमजोरी महसूस हुयी और मेरी आँख बंद होते होते मेरे मुँह से एक नाम निकला सामने वाले शख्स को देखके "प्रीती". और आँखे बंद.

मेरी आँखे सूरज की रौशनी से खुली तो उस टाइम रूम में कोई नहीं था और सुबह के 7 बज रहे थे. मैं बीएड से खड़ा हुआ और बाथरूम में फ्रेश हुआ, अब मुझे सर में दर्द भी नहीं हो रहा था और कमजोरी भी महसूस नहीं हो रही थी, मेरे उठने की वजह से डॉक्टर आया उसने मुझे चेक किया और डिस्चार्ज करने की बोलके चला गया. लेकिन एक सवाल छोड़ गया मुझपे की मैं कहा जाओ, कुछ भी तो नहीं बचा मेरे पास, एक झटके में सब खो गया, किसपे विश्वास करू ये भी समझ नहीं आ रहा था, कोण अपना कोण पराया कैसे फर्क करू उनमे, जहा से सुरु किया था वही वापिस आ गया था मैं.

खैर वो डॉक्टर आया और डिस्चार्ज पेपर मेरे हाथ में रख गया और मेडिसिन का बैग. वो गया hi था की प्रीती रूम में एंटर हुयी फेस से hi दुखी लग रही थी वो. मैं तो उसकी चेहरे की मासूमियत में hi खो गया था, वो कब मेरे बगल में आके बैठी और कब मुझे देखने लगी मुझे पता hi नहीं चला.

प्रीती:- अंकित,,,,

मैं:- it's एक,,,,

प्रीती:- देखो जो भी हुआ बुरा हुआ, लेकिन कोई तुम जैसे अचे और सरीफ इंसान को कोई नुक्सान पहुंचना चाहेगा.

मैं:- मुझे भी नहीं पता और मैं ठीक हु.

प्रीती:- ाचा अब तुम स्कूल कब आओगे, पहले ठीक होना और फिर स्कूल आना.

मैं:- मेरे पास कुछ नहीं बचा, ी लॉस्ट एवरीथिंग अब क्या करूँगा स्कूल जाके और जाऊँगा भी कैसे?

प्रीती:- देखो एक जो चीज़ गयी उसे तो मैं वापिस नहीं ला सकती लेकिन मैं तुंहरे साथ हु, भगवन भी हमेसा अचे लोगो का टेस्ट लेता है.

मैं( मैं में) :- कितनी मासूम है ये इसे सच पता लगेगा तो क्या करेगी ये.

मैं:- और मान लो मैं बुरा इंसान निकला तो क्या करोगी.

प्रीती:- बस वो बुरे होने की बात किसी और से पता नहीं लगनी चाहिए? यू अरे माय बेस्ट फ्रेंड.

मैं:- ाचा बेस्ट फ्रेंड कब से हो गया मैं तुम्हारा.

प्रीती:- मुझे नहीं पता, मैं बहुत काम लोगो को दोस्त बनती हु और तुम्हे देख के लगता है की तुम दिल के बहुत अचे हो बस इसीलिए.

मैं:- ोकक, ोकक, ये सब छोड़ो और ये बताओ तुम्हे कैसे पता चला मैं यहाँ हु.

प्रीती:- तुम कल मीडिया में चाहे हुए थे, और कल तो मीडिया तुम्हारे हॉस्पिटल के बहार भी थी, मैंने जब देखा तो मैं आ गयी लेकिन कल मेरे आते hi तुम मेरा नाम लेके बेहोश हो गए.

मैं:- हां वो थोड़ा कमजोर सा महसूस का रहा था

प्रीती:- ाचा मैं चलती हु और मैं तुम्हारा वेट करुँगी स्कूल में क्युकी मुझे पता है तुम सब सही कर डोज.

मैं:- ी विल एंड ी प्रॉमिस.

उसके बाद वो एक प्यारी सी स्माइल देके चली गयी और उसके जाते hi मैंने अपनी रिपोर्ट्स और मेडिसिन उठायी hi थी की आरव और जानवी अंदर आ गए.

आरव:- अब कैसा है तू?

मैं:- ठीक हु अभी.

जानवी:- वैसे लड़की अछि है पर तुम जैसे क्रिमनल के चक्कर में फास गयी.

Main:-hmmm, लेकिन एक बाद ध्यान रहे उसको मेरे बारे में कुछ भी पता चला तो दिल्ली का नक्शा बदल दूंगा मैं, एंड ी प्रॉमिस नूंए कैन स्टॉप में.

आरव:- शट उप जानवी, अबकी बार कोई बेहूदा मजाक किया तो भूल जाऊंगा तुम्हारे बाप का मुझपे एहसान है, भाई है वो मेरा.

मैं:- तुम दोनों लड़ो मत, मैं चलता हु.

आरव:- लेकिन जायेगा कहा?

मैं:- जहा हालत ले जाए.

आरव:- मेरी एक बात मानेगा.

मैं:- बोल.

आरव:- देख मानता हु तू हर्ष को मारना चाहता है और उसकी जगह लेना चाहता है, पर एक बार ठन्डे दिमाग से सोच उसने पूरी दिल्ली का खून चूस रखा है, क्या तू उसकी जगह लेके उसके जैसा बनना चाहता है, देख इसमें मैं तेरे साथ नहीं हु, लेकिन अगर तू दिल्ली के मासूम लोगो के लिए क्राइम हटाने के लिए हर्ष को मारेगा तो मैं तेरे साथ हु. मैं क्या फिर सब तेरे साथ होंगे, लेकिन अगर तू खुद की बजाय सब के लिए लड़ेगा तो.

मैं:- हो गया तेरा, हां मैं जनता हु हर्ष ने लाखो बेगुनाहो का खून पिया है, हां मुझे लोगो के लिए लड़ना चाहिए पर मुझे क्या मिलेगा लौड़ा, अबे बचपन से अब तक मुझे मिला hi क्या लौड़ा मिला है. तू साथ दे या न दे मैं हर्ष को मारूंगा और जो बिच में आएगा उसे भी.

आरव:- चाहे वो मैं hi क्यों न हो.

मैं:- ाचा तो अब तू एक डॉन को बचने के लिए अपने छोटे भाई के सामने आएगा.

आरव:- उसे बचने के लिए नहीं तुझे बचने के लिए, देख भाई तू मार उसे लेकि. कानून की हद्द में रहके बाकी लोगो को अरेस्ट करेंगे और सिर्फ हर्ष को मारेंगे, और मुझे पता है अगर तुझपे किसी का दबाव नहीं रहा तो तू सब को मारता चला जाएगा और यर बहुत गलत बात है.

मैं:- सोचूंगा, पर एक बात पहली hi बता दू एक बिना फायदे के काम नहीं करता.

उसके बाद मैं नहीं रुका वह पे बस सीधा हॉस्पिटल से बहार निकला लेकिन बहार निकलते hi एक और मुसीबत मेरा इंतज़ार कर रही थी जो थी मीडिया, पता नहीं किस भें के लौड़े ने इन्हे बता दिया की मैं डिस्चार्ज होने वाला हु आ गए हाथ में लुंड पकड़ के झांट खुजाते हुए :सिघ:

रिपोर्टर:- hello मर. एक तो आप को किन लोगो पे शक है, कोण आप पे अटैक कर सकता है?

एक:- देखो जो कोई भी होगा वो सामने आ जायेगा.

रिपोर्टर:- अब आप क्या करेंगे? हमने सुना है आपका कोई नहीं है अब.

मैं कुछ बोलता उससे पहले एक आवाज़ आयी पीछे से "कोण कहता है इसका कोई नहीं है हम है न अभी" ये आवाज़ कम की थी और उसको देखते है hi मीडिया वाले उससे सवाल जवाब करने के लिए आगे बढे लेकिन इतने में कम के साथ आये पुलिस वालो ने सब को पीछे धकेल दिया.

कम:- चलो मेरे साथ.

मेरे पास कोई और रास्ता कोई और जगह तो थी नहीं जाने की तो उसके साथ hi जाना सही लगा मुझे क्युकी थोड़ा टाइम चाहिए था मुझे इस चीज़ को सोल्वे करने के लिए, इसीलिए मैं उसके साथ चल दिया हम दोनों एक लाल बत्ती वाली कार में बैठे और निकल पड़े कम के घर की तरफ.

(अब इसके बारे में थोड़ा बता दू क्युकी ये बहुत काम का बाँदा है और मैं रोले है इसका)

सरेंडर सिंह (कम) :- बहुत ाचा इंसान है हमेसा ाचो का साथ देता है ये भी पॉलिटिक्स में आने से पहले एक गुंडा था लेकिन पार्टी ज्वाइन करने के बाद इसने सब कुछ छोड़ दिया पर भुला नहीं है. बाप दादा राईस खानदान से तो anaap-snaap पैसा है इसके पास.

जानवी सिंह:- इसकी बेटी है खूबसूरत और डेडली, फुल त्रिनेड फाइटर है, आरव की लवर. कम ने कोई साडी नहीं की लेकिन वो किसी से प्यार करता था और उसी का नतीजा है जानवी लेकिन इसके माँ इसको जनम देते hi मर गयी तब कम ने hi इसे पाला है अडॉप्टेड चाइल्ड दिखा के.

रॉकी:- कम का सिक्योरिटी इंचार्ज, सांड है पूरा कोई दिमाग नहीं है इसमें, जानवर है एक तरह से कम इसे बोल दे की खुद की गार्डन काट दे तो ये वो भी काट देगा.

बैक तो स्टोरी :-

हम लोगो की कार रुकी तभी मैं अपनी सोच से बहार आया और कार से बहार आके उनका घर देखा तो "वाओ" निकल गया क्युकी बहुत बड़ी हॉली टाइप घर था ये दिल्ली में ऐसे घर मुश्किल से देखने को मिलते है, खैर हम लोग अंदर पहुंचे हमारे पीछे पीछे आरव और जानवी भी आ गए आरव ने मुझे मेरा रूम दिखाया जो की सही था मैं किसी से कुछ नहीं बोल रहा था क्युकी मैं आगे क्या करना है ये सोच रहा था लेकिन ये लोग समझ रहे थे की मैं सदमे में हु :डी

मैं:- सुन कोई भी मेरे पास न आये दो दिन बस तीन दिन का खाना दे देना.

आरव:- देख तू टेंशन न ले जो भी इन सब के पीछे है वो पकड़ा जाएगा. और तू रेस्ट कर 2 दिन तेरे को कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा, इतने मैं तेरे डाक्यूमेंट्स और बुक्स और कपड़ो का अरेंजमेंट करता हु.

मैं:- कृपा होगी आपकी.

और मैंने उसके जाते hi दरवाजे बंद किया और जेब से जल्दी से सिगग्रेटे निकली और जलके वही सोफे पे बैठ गया और सोचने लगा.

कोण हो सकता है इसके पीछे और ये किरण कहा है लेकिन किरण ऐसा क्यों करेगी मेरे साथ, मैंने तो उसे जिन्दा छोड़ दिया था, और वो कर भी रही है तो क्यों कर रही है और उसके साथ कोण मिला हुआ है क्युकी उस अकेली में इतना दम नहीं की वो बम फिट कर दे, मैंने अपनी जेब से फ़ोन निकला और आकाश को फ़ोन मिलाया.

आकाश:- hello भाई, अब कैसा है?

मैं:- सुन फालतू बाते बाद में, पहले मेरे घर के बहार की कक्तव फुटेज चेक कर उस दिन की.

आकाश:- उसके लिए मुझे परमिशन चाहिए गई.

मैं:- राज से बात कर और उनको बोल की मैंने बोलै है वो दिलवा देंगे और किरण का कॉल डिटेल्स निकल के उसके हर के कांटेक्ट की क्रिमनल डिटेल और लोकेशन चेक कर.

आकाश:- बहुत टाइम लगेगा इसमें.

मैं:- सुन 2 दिन है तेरे पास, 2 दिन तक मैं सो रहा हु उसके बाद मैं उठूंगा और मेरे उठते hi कई लोग सोयेंगे.

आकाश:- no प्रॉब्लम हो जायेगा.

मैं:- ठीक और कोई दिक्कत हो तो जॉन की हेल्प ले लियो.

इतना बोल के मैंने फ़ोन कट किया और फिर से सोचने लगा लेकिन इस बार टॉपिक अलग था इस बार पाब्लो और डेविड घूम रहे थे दिमाग में लेकिन कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या हो रहा है. खैर एक फ़ोन कॉल से वापिस ध्यान टूटता और इस बार कॉल प्रीती का था, अभी फिलहाल यही एक चीज़ थी जिसका नाम सुनते hi मेरे दिमाग से साड़ी टेंशन गायब हो जाती थी.

मैं:- hello मैडम.

प्रीती:- hello को छोड़ो और ये बताओ की ये कम सर तुम्हे क्यों अपने साथ ले गए और ये मीडिया वाले तुम्हे किसका दुश्मन बता रहे है.

मैं:- हे हे कलम डाउन मीडिया पे ध्यान मत दो और कम अंकल मेरे को पहले से जानते है और अपने hi है वो.

प्रीती:- फिर ठीक है लेकिन तुम इन सब में मत पड़ना मुझे ये मार धाड़ पसंद नहीं है.

मैं:- मेरे को भी पसंद नहीं है ( पर क्या करू करना पड़ता है)

प्रीती:- ाचा स्कूल कब आ रहे हो?

मैं:- 2 दिन बाद आपके सामने हाज़िर हो जाएगा बाँदा.

प्रीती:- हेहेहे सुबह साद थे और अब मजाक करने लगे.

मैं:- अब उदास रहके तुंहरे खूबसूरत चेरे पस उदासी थोड़ी न लाऊंगा तुमतो गुलाब की तरह खिलखिलाती हुयी अछि लगती हो.

सामने से कोई आवाज़ नहीं आयी सायद शर्मा गयी होगी :ब्लश1:

प्रीती:- स्टॉप बलुशिंग में, ाचा बाद में बात करते है.

और फ़ोन कट कर दिया उसने बिना मेरे आंसर सुने लेकिन फ़ोन कट होते hi विशाल का कॉल आ गया और उससे थोड़ी देर बाते की और फिर खाना खाके सो गया रात को उठा खाना खाके आरव और मैं मेरे रूम में सिगग्रेटे पि रहे थे.

मैं:- मुझे ड्रग्स चाहिए.

आरव:- व्हाट ड्रग्स क्यों चाहिए अब तुझे.

मैं:- क्युकी ी ऍम फ़्रस्ट्रेटेड और मेरे दिमाग फैट जायेगा अगर ड्रग्स नहीं लिए तो पागल हो जाऊँगा में और मेरा दिमाग हत्ता न तो मैं फिर सबके लिए बुरा होगा.

आरव:- अबे डरा क्यों रहा है, जुगाड़ करवाता हु तेरे ड्रग्स का, क्या नाम था 'टिगों' तेरे जैसा hi अजीब नाम.

मैं:- भाग लौड़े गांड तोड़ दूंगा नहीं तो.

आरव:- हलवा है क्या? साले बहुत मारूंगा.

मैं पानी की बोतल उसकी तरफ फेकि लेकिन वो वह से उठ के भाग गया और मैं भी मुस्कुराते हुए बीएड पे लेत गया और आँख कब लगी पता hi नहीं चला.

खैर आगे के दो दिन भी ऐसे hi शान्ति से गुज़र गए पता hi नहीं चला बस सोना और आरव के साथ बकचोदी में और इन बकचोदी में मुझे विवेक की याद आ रही थी.

कल से स्कूल जाना था और आज शाम का टाइम था ज्यादा तर हर चीज़ वापिस मिल गयी थी मुझे कपडे, बुक्स, डाक्यूमेंट्स, बाइक, गन्स, ड्रग्स, और क्या चाहिए मुझे. खैर इस वक़्त main,CM अंकल और आरव बैठे हुए थे लॉन में चाय की चुस्किया ले रहे थे वो दोनों, मुझे तो ऐसी चीज़े बिलकुल पसंद नहीं इसलिए मैं शांति से बैठा हुआ था.

कम अंकल:- बीटा इसे अपना hi घर समझो और बिलकुल भी टेंशन न लेना तुम भी मेरे hi बचे हो.

अब इस बुड्ढे को कोण बताये मैं तो आलरेडी hi समझ चूका हु इसे अपना घर :हहै:

मैं:- ठीक है अंकल.

अंकल:- वैसे अब क्या करने वाले हो तुम, मतलब अब आगे का क्या इरादा है.

मैं:- अभी कुछ सोचा नहीं है मैंने.

अंकल:- देखो बीटा मेरे से झूट बोलने की कोसिस न करो तुमने कुछ सोचा न हो ऐसा हो hi नहीं सकता, तुमने तो उसी दिन सोच लिया होगा की आगे क्या करना है?

मैं बस मुस्कुरा दिया बुद्धा तेज़ है भेनचोद मजा आएगा.

मैं:- देखते है वक़्त कहा लेके जाता है.

अंकल:- चलो कोई नहीं, वैसे मैं ये चाहता हु तुम हर्ष को मार दो उसने बहुत गंध फैलाई हुयी है यहाँ पे.

आरव:- ये आप क्या कह रहे है? इसे तो दूर रखना था इन सब से.

अंकल:- हां पर कुछ कंडीशंस है.

मैं:- कैसी कंडीशंस?

अंकल:- देखो मैं एक टीम बनाऊंगा उसको लीड आरव करेगा लेकिन मैं लीडर तुम hi हो, टीम अपना काम करेगी जब तक तुम्हारी जरूरत नहीं होती तुम अपनी पढ़ाई पे ध्यान डोज और मैं बात तुम किसी मासूम को नहीं मारोगे.

मैं:- मंजूर है ( भेनचोद इनकी कंडीशंस पे मुटु भी न मैं )

अंकल:- लेकिन हर्ष का ध्यान अपनी तरफ तुम खुद करोगे, तुमने थोड़े दिन पहले किया था उसके आदमियों को मार्के उससे उसे कुछ फर्क नहीं पड़ता तुम्हे उसके करीबी को चोट पहुचानी होगी ताकि तुम उसके दुश्मन बनो और फिर चले असली खेल..

मैं:- वो मैं देख लूंगा. वैसे टीम में कोण कोण है.

अंकल:- तुम, आकाश हो लेकिन सिर्फ सिचुएशन उनकंट्रोल होने पे और तुम्हारे अलावा आरव, जानवी, और तुम्हारी वो पुराणी टीम और इनके उप्पेर मेरी और राज की नज़र रहेगी, पं से बात हो चुकी है मेरी.

मैं:- पं से क्यों आप भी तो आर्डर दे सकते हो?

अंकल:- ः नहीं बीटा ये सेंटर गवर्नमेंट देखती है लेकिन तुम इन सब की टेंशन न लो बस पढ़ाई और हर्ष पे ध्यान दो.

मैं:- वो तो ठीक है लेकिन इस टीम में आशीष नहीं होना चाहिए नहीं तो उसको मैं अपने हाथो से थोक दूंगा.

आरव:- अबे नहीं होगा वो उसे भेज दिया यहाँ से.

मैं:- अछि बात है.

उसके बाद ज्यादा कुछ नहीं हुआ बस खाना खाया रात को प्रीती और विशाल से बात की और सो गया क्युकी कई दिन बाद स्कूल जा रहा था तो अलग सा एक्ससिटेमेंट था.

तो बे कॉन्टिनोएड 🙏🙏
 
अपडेट:-42


सुबह आँख खुली किसी के हिलने से और हिलने वाला और कोई नहीं आरव hi था.

आरव:- उठ न भसडक 10 मिनट से उठा रहा हु उठ hi नहीं रहा.

मैं:- मुँह में लोढ़ा लेके उठाया कर फिर.

आरव ने मेरे पिछवाड़े पे लात दी और चला गया, मैं भी खड़ा हुआ और बाथरूम में जाके नाहा धो के एक दम बढ़िया रेडी हुआ और स्कूल बैग उठा के निचे आया और ब्रेकफास्ट ठूसा, अब दिक्कत एक थी की स्कूल कैसे जाओ लेकिन आरव ने मुझे अपनी कार की के दे दी आज आज के लिए और इसीलिए मैं सीधा कार में बैठा और निकल लिया स्कूल की तरफ.

पहले रहता था वह से तो स्कूल पास में hi पड़ता था लेकिन यहाँ से स्कूल थोड़ा दुरी पे था लेकिन कोई दिक्कत नहीं थी मेरे को, खैर मैं किसी तरह स्कूल पंहुचा कार पार्क करके जब क्लास की तरफ जाने को हुआ तो ध्यान आया की अभी तो बहुत टाइम है क्लास में तो क्यों न कैंटीन में hi चला जाए.

और मैंने कैंटीन की तरफ परस्थान किया और वह गया तो देखा एक टेबल पे प्रीती, अंजलि और आकाश बैठे हुए थे और वो आर्यन वह खड़ा होक कुछ बोल रहा था, मैंने सोचा चलो हम भी सुन लेते है भाईसाहब की बाते.

आर्यन:- देख आकाश बात ऐसी है की.....

मैं:- गुड मॉर्निंग एवरीवन...

और सबका ध्यान मेरी तरफ हो गया जहा मेरे दोस्त खुस हुए वही आर्यन ने मुझे एक लुक दिया और मेरी तरफ अपना सदा सा मुँह करके बोलै.

आर्यन:- तो कप्तान सर कहा भाग गए थे आप अपनी टीम को छोड़ गए जो बिचारि हार गयी.

मैंने कोई जवाब नहीं दिया बस उसे देखे जा रहा था.

आर्यन:- वैसे एक बात और बोलनी थी तुझे ये जो दोस्ती यारी बढ़ा रहा है न उसे यही रोक दे नहीं ाचा नहीं होगा.

अब मैं कुछ बोलने को हुआ तो प्रीती सोची सायद मैं घबरा गया हु इसलिए बोल पड़ी.

प्रीती:- देख आर्यन तू बेफालतू की बात मत कर और तू स्कूल में लड़ाई नहीं कर सकता.

आर्यन:- तो क्या हुआ प्रिंसिपल को तो हर्ष अंकल संभल लेंगे.

Wtf ये हर्ष भें का लौड़ा कितनो का अंकल है, लेकिन मुझे ये बात बढ़ानी नहीं थी इसलिए बोल पड़ा.

मैं:- भाई हो गया तेरा अब हम जाए.

आर्यन:- जा बीटा लेकिन मेरी बाते याद रखियो, नहीं तो अगली बार नहीं बख्शुंगा.

मैं:- धन्यवाद् प्रभु.

उसके बाद अंजलि और प्रीती आगे चल दी क्लास की तरफ अब मैं और आकाश रह गए थे जैसे hi वो कैंटीन से बहार निकली मैंने आर्यन को आवाज मारने को हुआ लेकिन आकाश मुझे खींचता हुआ बहार ले गया.

मैं:- रुक लौड़े.

आकाश:- अबे छोड़ न उसे, चल क्लास चलते है.

मैं:- हट मादरचोद तू मेरा दोस्त नहीं हो सकता, विवेक होता न तो अब तक उसकी गांड तोड़ देता बाद में चाहे कुछ हो.

आकाश:- अब विवेक कोण है.

मैं:- मिल लियो जल्दी hi.

मैं:- वैसे मैंने तुझे काम दिया था वो पूरा हुआ या नहीं.

आकाश:- हो गया है.

मैं:- स्कूल के बाद वह आ जइयो.

आकाश:- गे तो नहीं है न तू, कही मेरी इज़्ज़त लूटने की फ़िराक में हो.

मैं:- अबे जा बे गांडू अपने जैसा समझा है क्या.

फिर हम दोनों क्लास में पहुंचे और सबसे पीछे जाके बैठ गए, वैसे हमारी क्लास का हर स्टूडेंट मुझे घर रहा था और उसका रीज़न भी पता था मुझे लेकिन लोढ़ा फर्क नहीं पड़ता मुझे. बस जैसे तैसे करके आज का स्कूल का दिन कम्पलीट हुआ और मैंने कार उठायी और सीधा हवेली पंहुचा तो हॉल में hi आरव और जानवी मिल गए जो सोफे पे बैठे टीवी देख रहे थे और वो भी न्यूज़.

वैसे तो मुझे टीवी वगैरह पसंद नहीं है लेकिन राज और कम को एक साथ देख के मैं भी सोफे पे बैठ गया

जानवी:- तुम कब आये?

मैं:- जब तुम अपने पापा को आँखे फाड़ के टीवी में देख रही थी.

आरव:- अबे चुप हो जाओ तुम दोनों, प्रेस- कॉन्फ्रेंस सुरु हो गयी है.

उसके बाद मैं भी टीवी पे देखने लगा लेकिन सुरु में तो ऐसे hi पोलटिकल बाते हुयी लेकिन फिर एक काम का सवाल आया.

रिपोर्टर:- अचानक ये press-confrence बुलाने की वजह क्या है? और कितनी इम्पोर्टेन्ट है.

कम अंकल:- वजह तो बहुत खास है, खासकर दिल्ली की जनता के लिए, जैसा की आप सब लोग जानते है दिल्ली का क्राइम रेट बढ़ता जा रहा है और इसके पीछे कोण है उसका पता होते हुए भी हम लोग कुछ नहीं कर पा रहे है, लेकिन मैंने और मर. राज जी ने मिलके एक टीम बनायीं है जिनके पास स्पेशल पावर्स अल्लोवेद होंगी सेंट्रल गवर्नमेंट से, ना तो उनपे किसी पॉलिटिशियन, बिजनेसमैन, पुलिस, सीबीआई किसी का जोर चलेगा न कोई रूल्स उनपे लागू होंगे. और टीम कुछ इस प्रकार से है :- वर्षा (लीडर), सारा, अजय, जॉन, पायल, आरव, जानवी. और इनके उप्पेर सिर्फ पं सर के और मेरे आर्डर hi लागू होंगे बाकी किसी के भी नहीं और ये दिल्ली को फिर से क्राइम फ्री सिटी बनाएगी.

उसके बाद बुढऊ ने और भी बकचोदी पेली लेकिन मुझे उनमे कोई इंटरेस्ट नहीं था इसलिए खड़ा होक अंदर चला गया अपने रूम में लेकिन एक बात है बुढऊ सही खेल रहा है भेनचोद ने नाम तक नहीं लिया मेरा, कोई नहीं मुझे पता है ये झांट भी न उखड पाएंगे हर्ष की मेरे बिना :ेविलौगह:

खैर मैंने सारे थॉट साइड किये और फ्रेश होक खाना ठूसा और शाम तक पढ़ाई की और जैसे hi शाम हुयी मैंने आकाश को कॉल लगा दिया.

आकाश:- बोल भाई.

मैं:- सुन जगह पे मिल में आ रहा हु और साड़ी इनफार्मेशन लेके ायियो.

आकाश:- ठीक है भाई आ जा तू मैं बस पहुंच hi गया.

मैं:- हम्म्म्म..

कॉल डिस्कनेक्टेड. मैं उठा और तैयार होक निचे आया तो कम अंकल, जानवी और आरव लॉन में बैठे कॉफ़ी पि रहे थे.

मैं:- यययय कुत्ते चल मेरे साथ एक काम है.

आरव:- इज़्ज़त से बोल.

मैं:- सुकर मन सिर्फ कुत्ता बोलै है, अब जल्दी चल.

अंकल:- कहा जा रहे हो.

Main:-kiran कहा है पता करने.

अंकल:- जाओ जाओ इसके बाद सिर्फ पढ़ाई करोगे तुम.

मैं:- धन्यवाद्.

और फिर मैं और आरव हवेली से सीधा मेरी बताई हुयी जगह पे निकल पड़े, रस्ते भर बकचोदी करते हुए हम एक बिल्डिंग के सामने पहुंचे और फिर उस बिल्डिंग के 7तह फ्लोर के एक अप्पार्टमेन्ट का गेट खटखटाया तो जॉन ने खोला और हम दोनों अंदर आये.

मैं:- और जॉन भाई कैसे हो?

जॉन:- बस काट रही है जिंदगी.

मैं:- lol. सीबीआई वाले भी ये बोलने लगे अब, चलो काम की बात पे आते है.

फिर हम तीनो एक रूम के अंदर गए जहा आकाश पहले से मौजूद था और वह तीन पक रखे थे उन्ही पे लगा हुआ था वो.

मैं:- लोदु तू तो बोल रहा था काम हो गया, अब क्या कर रहा है.

आकाश:- सर्वर मेन्टेन कर रहा हु.

मुझे झांट समझ नहीं आया इसीलिए मैंने उसपे से ध्यान हटाया और आकाश को बोलै.

मैं:- इन सब को छोड़ और ये बता किरण का कुछ पता लगा.

आकाश:- बॉस no क्लू, उसका फ़ोन बंद आ रहा है जबसे आपने उसे लास्ट मैसेज भेजा था की आप इस टाइम पहुंच जाओगे. और तो और मैं उसके कांटेक्ट नंबर की कॉल हिस्ट्री भी नहीं निकल पा रहा हु क्युकी वो व्विप नंबर था, वैसे उसकी कॉल डिटेल्स निकल सकती है अगर गवर्नमेंट मांगे तो.

मैं:- न न, गवर्नमेंट को इन्वॉल्व नहीं करना इसमें, इसको छोड़ और ये बता की कक्तव में क्या मिला.

आकाश:- कक्तव में बहुत कुछ मिला है और उसके बाद उसने एक वीडियो प्ले की जिसमे 4 लोग अंदर गए और 4 लोग बहार आये लेकिन उन 4 लोगो ने मास्क पेहेन रखा था लेकिन आखरी में 4तह बन्दे ने अपना मास्क निकल दिया और वो hi उसकी गलती थी.

आकाश:- ये सब तुम्हारे घर पहुंचने के सिर्फ 20 मिनट पहले की फुटेज है मतलब जिसने भी ये किया है वो पहले से सब कुछ जनता था.

आरव:- मेरे हिसाब से किरण होगी इन सब के पीछे क्युकी तूने सिर्फ उसे hi बताया था की तू कब पहुंचेगा और वो उस टाइम से गायब भी है.

मैं:- मेरे हिसाब से किरण नहीं है, लेकिन जो भी होगा बहुत पछतायेगा.

जॉन:- पहले इस आदमी को ढूंढे.

मैं:- हां इसका क्रिमनल रिकॉर्ड चेक कर आकाश.

आकाश:- नाम मिथुन है इसका लेकिन कालू बोलते है इसे, जहा हमारा घर है वही का लोकल गुंडा है और इसका लीडर रघु है अभी ये वही मिलेगा.

मैं:- तो देर किस बात की चल बे आरव.

आकाश:- तुम दोनों यूँ अकेले कैसे जा सकते हो मुस्लिम एरिया है वो काट के फेक देंगे.

आरव:- बचा है अभी तू चल एक.

उसके बाद आरव और मैंने आकाश से एड्रेस लिया और कार मैं बैठ के निकल पड़े वैसे ज्यादा दूर नहीं थी इसलिए जल्दी पहुंच गए अब आगे की गालिया थोड़ी सकरी थी इसलिए हमने उस बस्ती के बहार hi कार कड़ी की और अपनी अपनी गन लोड करके जीन्स में डाली और पैदल hi अंदर चल दिए.

हम दोनों जिस गली से गुज़र रहे थे वह के हर लोग हम दोनों को घर रहे थे लेकिन हम दोनों आगे बढ़ते रहे बिना किसी दर के और थोड़ी सी आगे चलने पे एक चौराहा आया और वह वो कालू बैठा कर्रम खेल रहा था और वो रघु भी वही था.

आरव:- क्या करे अब?

मैं:- जो करना है मैं करूँगा तू बस चल.

हम दोनों सीधा उनके पास गए और मैं जाते hi जो चार लोग थे जिनमे से एक रघु और कालू और दो पता नहीं कोण थे उसमे से एक को लात मारी वो गिरा निचे और सबका ध्यान आया हम पर अब वह जितने भी लोग थे काम से काम 20 तो होंगे सब हमारी तरफ बढ़ने को हुए लेकिन रघु के इशारे से वापिस अपनी जगह बैठ गए.

मैंने भी वो पड़ी हुए चेयर उठायी और रघु के आगे बैठ गया और जो बगल में लोंदा बैठा था वो अपने आप खड़ा हो गया उसकी जगह आरव बैठा अब वो लोग और कुछ बोलते उससे पहले मैं अपनी गन निकली और लोड करके उस carrom-board पे रख दी.

रघु:- कोण है तू? और हमारे एरिया में आके हमे hi डरने की सोच रहा है.

मैं:- एक नाम है मेरा और यहाँ दर कैसा क्युकी ये एरिया जिस एरिया में आता है न वो हमारा एरिया है.

रघु:- क्या चाहिए.

मैं:- तेरा ये कालू.

रघु:- क्यों?

मैं:- इसने मेरा घर उदा दिया और तू बोल रहा है क्यों?

रघु:- एआईए मादरचोद इसने कुछ नहीं किया चल अब निकल नहीं तो काट के फिकवा दूंगा दोनों को.

मैं:- इसे तो लेके जाऊँगा चाहे तुम सबको मारना क्यों न पड़े.

और मेरी बात ख़तम होते hi कई रिएक्शन हुए एक तो ये की रघु ने इशारा किया जिससे उसके लोग उठे और वो कालू भागने को हुआ लेकिन मैंने भी आरव को इशारा किया और खुद स्पीड से खुद की गन उठायी और मेरे सामने बैठा रघु मुझपे झपटने को हुआ उससे पहले मैं उस कर्रम बोर्ड को निचे से लात मारी जिससे वो रघु को लगा और इतने में मेरी गन से एक बुलेट निकली जो सीधी कालू के घुटने में लगी और वो वही गिर गया, और गन की आवाज़ से सब रुक गए और कालू के घुटने की हालत देख के तो उनकी गांड hi फैट गयी क्युकी बेशक वो हमसे 10 गुना थे लेकिन उनके पास हथियार नहीं थे. आरव ने उस कालू की गुड्डी पकड़ के उठाया अब हम चाहते तो चुपचाप निकल सकते थे लेकिन मेरे दिमाग में पता नहीं क्या आया मैं चलता हुआ उस रघु के पास गया और वो कुछ बोलता उससे पहले उसके माथे में बुलेट उतर दी और वो धड़ाम से पीछे गिर गया. और मैं बहुत तेज़ चिल्लाया.

मैं:- मादरचोद!

और अब वह सबकी गांड फैट चुकी थी इसलिए आरव और मैं उस कालू को लेके बहार आये और उसको कार की डिक्की में डालके निकल पड़े.

आरव:- उस रघु को क्यों मारा.

मैं:- माँ की गाली दी थी उसने.

आरव कुछ नहीं बोलै लेकिन रुक के बोलै.

आरव:- इसे कहा लेके चलना है?

मैं:- ऐसे इमीडियेट नहीं सोचा है लेकिन सोचता हु.

आरव:- भसडक डायलाग न मार जल्दी बता ऐसे गाडी तो नहीं घुमा सकता न मैं.

मैं:- सुन किसी सुनसान सी जगह लेले वही पूछताछ करके छोड़ देंगे.

आरव:- ठीक है.

उसके बाद ने बहुत देर के बाद एक गन्दा सा इलाका धुंध निकला और वह कार पार्क करके हम दोनों बहार आये और डिक्की से उस कालू को निकला तो वो बेहोश हो चूका था सायद लेकिन आरव ने उसपे पानी डाला तो उसकी आँखे खुली.

कालू:- भाई,, भाई,,, मुझे मत मारो मैंने कुछ नहीं किया.

मैं:- हां हां पता है तूने कुछ नहीं किया, अब तू तेरे बाकी साथियो के बारे में बता और तेरे को किसने काम दिया वो बता.

कालू:- भाई मैं बस एक को जनता हु उनमे से और काम किसने दिया ये नहीं पता मुझे, और उस एक का नाम उस्मान है, मुझे तो रघु भाई ने बस साथ जाने को बोलै था

मैं:- और कुछ भी रह रहा है सायद वो भी बता दे.

कालू:- भाई मैं आदमी नहीं था मुझे तो वो बम लगाना भी नहीं आता मुझे तो बस वो साथ ले गए थे अपने और सालो ने डाटा भी बहुत बोले की तेरा फेस कैमरा में आ गया है, अब तू नहीं बचेगा.

मैं:- बकवास न कर और दिमाग पे जोर दाल थोड़ा और ये बता की वो बात कैसे कर रहे थे.

कालू:- हां याद आया वो लोग बार बार किसी सर को और किसी मैडम से बात कर रहे थे.

आरव:- वो मैडम तो पक्का किरण hi होगी भेनचोद?

मैं:- चल बीटा कालू अब तेरा काम ख़तम और तेरा टाइम भी.

इतना बोलके मैं गन निकल के उसे भी शूट कर दिया जिसके कुछ चित्ते आरव पे भी पड़े.

आरव:- ेववव भेनचोद क्यों मारा इसको.

मैं:- छोड़ के कोनसा फायदा होता, वैसे भी किल काउंट बढ़ गया मेरा.

Aarav:-chal साले पिस्को.

मैं:- हम्म्म चल.

फिर हम दोनों ने उसकी बॉडी को वही नाले में गेरा और हवेली के लिए निकल पड़े,,,

आरव:- वैसे तुझे बुरा नहीं लग्र रहा की कम ने तेरा नाम नहीं लिया टीम में.

मैं:- ाचा है नहीं लिया तो वैसे भी मुझे नहीं मारना हर्ष को आखिर दुश्मनी hi क्या है मेरी उससे कुछ भी नहीं, उसने तो मेरा कुछ बिगाड़ा भी नहीं है तो मैं क्यों उसको मारु ौड क्यों दुश्मनी लू और रही बात उसे अस ा क्रिमिनल ट्रीट करके मारने की क्युकी उसने बहुत लोगो की जिंदगी बर्बाद की है तो ध्यान से सुन ले मुझे samaj-sewa का कोई शौक नहीं है, तुम लोग करो ये सब मैं लाइफ एन्जॉय करूँगा बस.

आरव:- :शॉकेड: प्रीती की वजह से तो सरीफ नहीं बन रहा तू.

मैं:- उसकी वजह से होता तो आज 2 को नहीं मारता, वैसे भी मुझे लोगो को मारने में मजा आता है लेकिन अभी मैं कुछ नहीं करूँगा अब बस ड्रग्स और स्कूल hi इम्पोर्टेन्ट है .

उसके बाद न वो बोलै न मैं और हम हवेली पहुंच गए और फ्रेश होक डिनर किया उसके बाद सब अपने रूम में, उसके बाद मैंने प्रीती और विशाल से बात की फिर सिगग्रेटे पिटे पिटे सोचता रहा की कोण हो सकता है इसके पीछे और ये उस्मान कहा मिलेगा.

फ़िलहाल तो यही दो टारगेट थे मेरे, कैसे धुन्धु इन्हे.. फ़क!!!!

तो बे कॉन्टिनोएड 🙏🙏

 
अपडेट:-43


10 मोनथस लेटर:-

अब इन 10 महीनो में ज्यादा कुछ ख़ास नहीं हुआ मतलब हुआ भी लेकिन इतना नहीं हुआ लेकिन इन 10 महीनो में काफी चीज़े बदल गयी थी, जिसमे कुछ चीज़े अछि थी और कई चीज़ी बुरी भी.

इन 10 महीनो में मैंने पढ़ाई और प्रीती के अलावा कुछ नहीं किया बस 12तह क्लास के एग्जाम दे दिए थे मैंने और एक दम ड्रग एडिक्ट हो चूका था मैं. लेकिन इन 10 महीनो में खाली था इसलिए आरव के साथ गयम जाने लग गया और गाँडफाँड बॉडी बना ली थी जो मेरी पर्सनालिटी को सूट करती थी, जानवरो टाइप नहीं बनायीं बे. प्रीती और मैं काफी क्लोज आ गए थे लेकिन जो हमारे दिल में है वो अब भी दिल में hi था बस हम दोनों एक दुसरे को बेस्ट फ्रेंड्स मानते थे लेकिन इस वक़्त में मैं मनीषा को भूल सा गया था और उसने भी मुझे एक कॉल तक नहीं किया था . एक चीज़ अछि और हुयी की आरव और जानवी ने सगाई कर ली थी. एक चीज़ और अछि हुयी मेरी नज़र में लेकिन औरो की नज़र में बुरी तो बात ये है की कम अंकल का नाम डूबने लगा था क्युकी उनकी बनायीं हुयी टीम अभी तक घंटा कुछ नहीं उखड पायी थी बस कुछ केसेस सोल्वे करने के अलावा, खैर ये तो होना hi था क्युकी वो लोग अकॉर्डिंग तो लॉ चल रहे थे.

अब मेरे साथ बुरी चीज़ ये हुयी की मैं आज तक किरण और उस्मान को धुंध नहीं पाया खूब कोसिस करि लेकिन सब बेकार एक सिंगल क्लू भी नहीं मिला इसलिए मैंने काम वक़्त पे छोड़ दिया.

अब मेरे एग्जाम ख़तम हुए एक दिन hi हुआ था अब मैं बिलकुल फ्री था लेकिन एक दिक्कत थी की कम अंकल का नाम डूब रहा था और एक साल बाद इलेक्शन थे और अगर यही हाल रहा तो इलेक्शन में हार पक्की थी बस एक चीज़ hi उन्हें बचा सकती थी और वो थी हर्ष की मौत और दिल्ली की सफाई लेकिन वो उनसे हो रही थी और मेरा मैं नहीं था अब ये सब करने का क्युकी कोई रीज़न hi नहीं था मेरे पास, मैं करने को रेडी भी था ये काम लेकिन फिर मेरे उप्पेर को पाबन्दी न और वो ये मैंने को तैयार नहीं थे. वैसे मुझे फर्क नहीं पड़ता था की वो इलेक्शन जीते या न जीते लेकिन उनकी पावर का फायदा तो मुझे भी होता इसलिए मुझे ये प्रॉब्लम लग रही थी.

आज स्कूल लाइफ ख़तम हुए पहला hi दिन था, मैं और आरव गयम से आ रहे थे तो लॉन में कम और राज बैठे हुए थे और दोनों hi टेंशन में लग रहे थे, इसलिए मैं और आरव भी उनके पास चेयर लेके बैठ गए लेकिन कुछ बोल नहीं रहे थे उन दोनों ने भी हमारी तरफ देखा और बात करने लगे.

अंकल:- देख भाई राज कुछ तो करना पड़ेगा हम लोगो अगर ऐसे चलता रहा तो दिल्ली हाथ से निकल जायेगी और मेरी पं साहब के सामने बजती होगी वो अलग.

राज:- इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता अब तूने बोलै टीम बना मैंने बनायीं लेकिन अब टीम अपना फुल एफर्ट दे रही है लेकिन कोई सबूत hi नहीं मिल रहा और ऐसे hi किसी को तो उठा नहीं सकते.

अब तुम लोग ये मत बोलना की ये तू तड़क करके बात क्यों कर रहे है, एक्चुअली ये दोनों दोस्त है भेनचोद.

अंकल:- और एक इसको देखो पहले तो शौक चढ़ा था हर्ष को मारने का लेकिन अब हम बोल रहे है तो भी मन कर रहा है. अरे मेरे बाप मान जा तू जो बोलेगा वही होगा.

मैं:- ना ना मेरे बस की बात न है अब.

अंकल:- देख अंकित बीटा मेरी कल पं सर से मीटिंग है तो मुझे उन्हें जवाब देना hi होगा देख तू जो बोलेगा वो होगा बस तू मान जा.

मैं:- हम्म्म ठीक है मान जाता हु, लेकिन कुछ कंडीशन है.

अंकल:- मंजूर है मेरे बाप जो तू बोले.

राज:- अरे ये क्या बोल रहा है तू वो कुछ भी बोलेगा तू सुन तो ले.

मैं:- अब मंजूरी मिल गयी है तो काम सुरु करते है कल से.

अंकल:- अरे बता के तो जा क्या चाहिए तुझे.

मैं:- फिर कभी बताऊंगा अंकल अभी चलता हु अपने पं को बोलना अब दिल्ली दूर नहीं.

और मैंने अंदर आ गया लेकिन मेरे पीछे ये तीनो बाते करते रहे.

राज:- आरव देखना ये कुछ उल्टा सीधा न करे.

आरव:- उसे कोई कण्ट्रोल नहीं कर सकता वो खुद भी नहीं तो उसे करने दो जो वो करे और मुझे विश्वास है उसपे की वो हमसे ाचा hi करेगा उसका दिमाग बहुत तेज़ चलता है.

अंकल:- हां हां वो तो पता है बस एक बार हर्ष निपट जाए तो दिल्ली मेरी होगी.

इधर अंदर मैंने भी नहाते हुए शामे बात बोली

" अगर हर्ष निपट जाए तो दिल्ली मेरी होगी"

आज शाम तक मैं फ्री था क्युकी शाम को प्रीती का बर्थडे था तो उसने एक क्लब बुक किया हुआ था, मैं भी बहुत एक्ससिटेड था आज की रात के लिए, आकाश भी उस दिन के बाद नार्मल लाइफ जी रहा था वो और अंजलि तो रिलेशनशिप में आ गए थे. मैं नाहा के बहार निकला और कपडे पेहेन के हॉल में गया तो सब आलरेडी ब्रेकफास्ट के लिए बैठ चुके थे तो मैं भी बैठ गया और जानवी ने मुझे ब्रेकफास्ट दिया जो मैंने जल्दी से निपटाया और फिट जल्दी से मैं और जानवी उप्पेर गेमिंग रूम में जाके गेम खेलने लगे और पूरा दिन मैंने आरव और जानवी ने गेम खेला शाम को मैंने अपने रूम में आया और फ्रेश होक आकाश को कॉल किया.

आकाश:- बोल बीटा

मैं:- तैयार मिलियो मुझे तेरे को पिक कर लूंगा मैं.

आकाश:- अंजलि को और ले चलना है.

मैं:- अबे यार उसकी गांड में घुस जा हर जगह अंजलि, अपने आप आ जाएगी न वो.

आकाश:- भाई नहीं है क्या मेरा, ले चल न.

मैं:- हां, हां ठीक है बोल दियो उसे भी.

कॉल डिस्कनेक्टेड. फिर मैं जल्दी रेडी हुआ लेकिन सही मैं मैंने बहुत टाइम लिया रेडी होते हुए और फिर बहार आया और जो अंकल ने मुझे कार गिफ्ट की थी उसे लेके निकल पड़ा आकाश के घर पे वह से मैंने आकाश और अंजलि को पिक किया और हम उस क्लब में पहुंचे जो पहले से बुक था. हमने कार पार्क की और अंदर गए तो मस्त माहौल था और हमारी क्लास के हर स्टूडेंट था बस प्रीती को छोड़ के. आर्यन भी आया हुआ था और मुझे hi घर रहा था ( अब इसके और मेरे बारे में बता दू तो इन 10 महीनो में हमारा अकड़ा 36 का है, इसने मुझे थप्पड़ भी मार दिया था लेकिन मैं कुछ कर नहीं पाया क्युकी उस टाइम प्रीती थी वह और ये भाईसाहब खुद को उस इंसिडेंट के बाद तुर्रमखां समझने लगे थे खैर हमे क्या)

अब वह ड्रिंक्स वगैरह सर्वे हो रही थी तो मैंने और आकाश ने भी ले ली और एक सोफे पे बैठ के पिने लगे, अंजलि अपनी फ्रेंड्स के पास चली गयी थी. अब मेरी नज़ारे बस प्रीती के दीदार को तरस रही थी और ये बात आकाश भी समझ रहा था.

आकाश:- आने वाली है वो इतना मत तड़प.

मैं:- चल बे लोदु ऐसा कुछ नहीं है, मैं तो बस दारू धुंध रहा था.

आकाश:- बस मुझे मत सीखा.

मैं:- वैसे मैं आज उसे सब सच बता दूंगा अपने बारे में और पर्पस भी कर दूंगा.

आकाश:- हहहहहहहह भेनचोद उसके सामने तो फैट जाती है तेरी, तू क्या घंटा पर्पस करेगा.

मैं:- अबे देख लियो तू, उसको एक बार आने तो दिए.......

मैं बोलता बोलता रुक गया क्युकी सब लाइट्स ऑफ हो गयी और उसके बाद सीधे दूर पे एक गोल सी लाइट पड़ी और फिर दूर खुला और प्रीती निकल के आयी, भेनचोद टाइम रुक गया मेरे लिए क्युकी वो इतनी प्यारी जो लग रही थी उसके बाद वो आयी और वापस लाइट नार्मल हुयी उसके बाद लोदु लोग उसको विश करने लगे, फिर वो चलते हुए हमारे पास आयी, हमने भी उसे विश किया.

फिर केक कट किया उसके बाद गांडू लोग खाने पे टूट पड़े और हम चारो साइड में खड़े होक बात कर hi रहे थे की.

प्रीती:- तुम मेरे लिए गिफ्ट नहीं लाये.

अब मैं कुछ बोलता उससे पहले आर्यन साहब आ टपके और उसके साथ 3 4 लड़के और थे जो सकल से मुझे ठीक नहीं लग रहे थे.

आर्यन:- अरे इसकी औकात कहा की ये हमारे बराबर तुम्हे गिफ्ट दे सके.

मैं कुछ बोलने को हुआ लेकिन उससे पहले प्रीती hi बोल पड़ी

प्रीती:- देखि आर्यन तुम्हारे पापा मेरे पापा के दोस्त है बस इसलिए इन्विते किया है तुम्हे तो तुम तमीज में रहो.

आर्यन:- तुमसे कोण बात कर रहा है मेरी जान, इसके मुँह में जुबान नहीं है क्या? या लड़कियों के पीछे छुपना आता है इसे.

मैं:- देख आर्यन कल बात करियो तू मुझसे अभी प्रीती का बर्थडे स्पोइल मत कर.

आर्यन:- ालेलेलेले बचा बोलता भी है, चल माफ़ किया आज आज.

और वो और उसके बन्दे साइड में गए और प्रीती मुझे बोली.

प्रीती:- क्या जरूरत है उससे बेहेस करने की, और कल क्या करोगे तुम, पीटना है क्या तुम्हे उससे. अगर तुम्हे कुछ हो गया तो.

मैं:- तो?

प्रीती:- तो कुछ नहीं.

Main:-preeti!

प्रीती:- हम्म्म्म,

मैं:- ी लव यू.

मैंने बोल तो दिया लेकिन गांड फैट गयी कुछ सेकंड बाद प्रीती को रीलीज़ हुआ तो वो मुझे आँखे फाड़के देखने लगी.

मैं:- ऐसे क्या देख रही है, ी लव यू hi तो बोलै है.

अंजलि:- अबे घड़ी ऐसे कोण पर्पस करता है.

मैं:- मुझे कोनसा एक्सपीरियंस है, अब जो दिल में था वो बोल दिया मैंने. अब तुम्हारे जवाब से पहले मैं तुम्हे कुछ बताना चाहता हु अपने बारे मैं असल में मैं....

"मादरचोद" और मेरे पीठ पे लात पड़ी जिससे मैंने आगे को गिर गया और पलट के देखा तो माजरा समझ गया मैं की आर्यन भाई साहब की गांड जल गयी है लेकिन मैं ये रात ख़राब नहीं करना चाहता था इसीलिए आराम से बोलै.

मैं:- देख आर्यन बेफालतू की लड़ाई मत कर वो वैसे भी तुझे पसंद नहीं करती.

आर्यन:- अबे तू 2 कोड़ी का लड़का बहुत बोलने लगा है रुक तेरी अभी माँ छोड़ता हु.

अब दूसरी बार फिरसे ये गाली सीधे दिल पे लगी और मैं खड़ा होक आर्यन की तरफ बढ़ा hi था की प्रीती बोल पड़ी, ( भेनचोद हो क्या रहा )

प्रीती:- देखि आर्यन तुम होते कोण हो उसपे हाथ उठाने वाले, वो तुम्हारी तरह नहीं है, वो बहुत सरीफ है समझे

आर्यन:- तू साइड हैट रंडी, तुझे बाद में देखता हु.

और उसने प्रीती को साइड धकेला और मेरे सामने आके खड़ा हो गया, अब मुझे भी गुस्सा आ रहा था क्युकी एक तो माँ की गाली और फिर प्रीती को गाली, और वैसे भी मैं सचाई बताने वाला तो था hi तो क्यों न दिखा hi दी जाए. और मेरी पेट में एक पंच पड़ा जो की काफी तेज़ था और ये आर्यन ने मारा था और पंच पड़ते hi मैं थोड़ा पीछे हुआ क्युकी दर्द हुआ था ज्यादा नहीं लेकिन हुआ था.

आर्यन:- मैं बनता हु आज तुझे आशिक़

मैं:- लौड़ा मेरा बतायेगा.

अब मैंने जैसे hi गाली दी तो आर्यन और प्रीती, अंजलि की आँखे बड़ी हो गयी क्युकी वो मुझे सरीफ टाइप समझते थे लेकिन प्रीती घबरा रही थी अब भी और वो आकाश को बोल रही थी की मेरी मदद करे लेकिन वो बस मुस्कुरा रहा था.

इधर मेरे गाली देने से आर्यन गुस्से में वापिस मेरे पेट में पंच मारने को हुआ लेकिन उससे पहले उसकी नाक से खून बहने लगा क्युकी जितने में उसका हाथ मुझ तक पहुँचता उससे पहले उसके मुँह पे मेरा पहुंच भी चूका था और पंच इतना पावरफुल था की वो धड़ाम से पीछे गिरा और जब उसने अपनी नाक से हाथ हटाया तो वह से खून बह रहा था, अब ये देखके तो प्रीती शॉक hi हो गयी, लेकिन आर्यन को पित्त देख वो उसके साथ आये तीनो बन्दे मेरी तरफ बढे और एक ने मुझे पंच मारना चाहा तो मैंने उसका हाथ पकड़ा और दुसरे वाले की गोटियों पे लात दी और तीसरा मुझे मारता उससे पहले उसके घुटने पे लात दी और उसका घुटना कटक की आवाज़ से गया और वो गाँडफाँड चिल्लाया और एक साइड को हो गया. अब वो दो बचे थे, एक ने फिरसे मुझे मुँह पे मारा लेकिन मैं निचे बैठा और खींच के उसकी चीन पे एक मुक्का मार और फिर खड़े होक उसका हाथ पकड़ा और कोहनी खींच के उसके शोल्डर पे मारी और कड़क की आवाज़ से वो भी चिल्लाता हु साइड हो गया अब एक बचा था मैं उसकी तरफ बढ़ा hi था

"एक" प्रीती और अंजलि तेज चिल्लाई और वह कड़ी बाकि लड़की भी आआआ करने लगी, मैंने पलट के देखा तो आर्यन ने मेरे पे गन तान राखी थी.

आर्यन:- आज तेरा किस्सा hi ख़तम कर देता हु बहुत हीरो बन रहा है न, अब देख कैसे तेरी माँ छोड़ता हु.

अब मैं bol-bachan करने के मूड में बिलकुल भी नहीं था इसलिए सीधा अपनी गोल्डन बेर्रेट निकल के तान दी उसपे, अब फिरसे उसकी गांड फैट गयी क्युकी उसके पास नार्मल पिस्तौल थी और मेरे पास इम्पोर्टेड आटोमेटिक गोल्डन कलर की (ये मुझे आरव ने गिफ्ट की थी वैसे) अब वो कुछ करता ये बोलता इससे पहले मैं डायरेक्ट पीछे घुमा और जो बाँदा बचा था वो मेरे को पीछे से मारता उससे पहले hi उसके कंधे में बुलेट घुस चुकी थी और वो पीछे को गिरा और वह कड़ी लड़कियों की चीख निकल गयी थी, प्रीती की आँखों में भी आंसू थे, आर्यन के हाथ से छूट गयी उसकी फैट चुकी थी, मैंने अपनी गुने वापिस पेंट में डाली और आर्यन को गले से पकड़ के उसके मुँह पे non-stop कई पंचेस मारे उसका मुँह पूरा खून से भर चूका था, वह सब बोल रहे थे की इसे छोड़ do-chod दो लेकिन मैं उसे बस पेलता जा रहा था.

खैर मैंने उसे छोड़ा और वो धड़ाम से निचे गिरा लेकिन मुझे तो अभी भी सुकून नहीं मिला था इसलिए मैंने सीधा उसका हाथ पकड़ा और घुटनो में फसके कड़क से तोड़ दिया और वो गाँडफाँड चिल्लाया, हाथ जोड़ लिए उसने लेकिन वो कुछ बोल नहीं पा रहा था क्युकी उसके होठ फैट चुके थे. अभी मैंने उसका दूसरा हाथ पकड़ा hi था की किसने मेरा नाम बहुत तेज़ी से चिल्लाया, मैंने पलट के देखा तो प्रीती ठीक मेरे पीछे कड़ी थी.

प्रीती:- छोड़ो इसे क्या जान से मार डोज. तुम जानवर हो एक मैं तुम्हे बहुत सरीफ और दुसरे लड़को से अलग समझती थी लेकिन तुम तो इससे भी बड़े गुंडे निकले, सायद मैं तुम्हे हां कह देती आज लेकिन इस सब के बाद तो तुम मुझे अपनी सकल भी मत दिखाना नहीं तो मेरे मारा हुआ मुँह देखोगे, ी हेट यू, ी हेट यू....

और वो रट हुए चली गयी वह से और उसके साथ साथ अंजलि भी, आकाश भी साद सा हो गया था लेकिन मुझे और गुस्सा आने लगा था इसलिए मैं निचे पड़े आर्यन के खींच के पसलियों में लात मारी जिससे वो फिर चिल्लाया, मैं और कुछ करता उससे पहले आकाश ने मुझे पकड़ लिया और बोलै.

आकाश:- जल्दी चल यहाँ से पुलिस आने hi वाली होगी.

मैं:- रुक इस कुत्ते को तो मार दू, इसी की वजह से सब हुआ है.

आकाश:- अभी चल यहाँ से देख पुलिस आ गयी है बस.

इसके बाद मुझे वो खींचता हुआ पार्किंग में लेके आया और उसके बाद आकाश ड्राइव करने लगा और मैं उसके बगल में बैठा अभी के बारे में सोचने लगा, और फिर जोर जोर से हसने लगा,

आकाश:- अबे पागल हो गया है क्या?

मैं:- तू नहीं समझेगा, सीधा हवेली ले ले.

उसके बाद हम हवेली पहुंचे और सीधा अंदर गए, पुलिस किसी भी वक़्त आ सकती है इसलिए वक़्त काम था. हम हॉल में आये तो आरव और जानवी बैठे हुए थे और अंकल टीवी देख रहे थे, हम दोनों को देखा उन्होंने और फिर आरव की नज़र मेरे हाथ पे लगे हुए खून पे गयी.

आरव:- एक ये खून कैसा है?

आरव:- अबे बोल न क्या कर के आया है.

मैं कुछ नहीं बोलै तो आकाश ने उन्हें साड़ी बात बताई.

अंकल:- यार अंकित तू क्यों करता है ऐसा और अब तुझे बहार कैसे निकलू तुहि कुछ बता.

मैं :- सुनो मैंने जिसको गोली मारी थी वो सकल से hi दृगी था और उसके पास गन भी थी, बस आप को इतना बोलना है की वो सस्पेक्ट था और मैं आपका आदमी हु सेल्फ डिफेंस में गोली चलायी है बस, वैसे भी कोई मारा नहीं है.

अंकल:- ये तो हो जाएगा.

इतने मैं पुलिस आ गयी उन्होंने कम को सलूट किया और फिर उनसे बात करके मुझे ले जाने लगे.

तो बे कॉन्टिनोएड 🙏🙏

 
अपडेट:-44


इतने मैं पुलिस आ गयी उन्होंने कम को सलूट किया और फिर उनसे बात करके मुझे ले जाने लगे.

अब आगे:-

जब वो इंस्पेक्टर अंकल से बात करके मेरी तरफ आया तो उसने हवलदार के हाथ से हथकड़ी लेली और मेरे सामने आके मेरे हाथ पकड़ने को हुआ उससे पहले अंकल तेज़ आवाज़ में बोले.

अंकल:- इंस्पेक्टर गलती से भी उसके हाथ में हथकड़ी डालने की सोच भी मत लेना नहीं तो जिस हाथ में हथकड़ी डालोगे उस हाथ को तुम्हारे जिस्म से अलग कर दिया जाएगा.

अब इतनी भारी धमकी सुनके उस इंस्पेक्टर की गांड फैट गयी इसलिए उसने हथकड़ी वापिस जिससे ली थी उसे दी और मुझे बोलै.

इंस्पेक्टर:- तो चले साहब.

मैं:- चलूँगा लेकिन दो शर्त है मेरी.

अंकल:- अबे अब इस बात में कैसी कंडीशन, सुबह से पहले निकल लूंगा तुझे.

मैं:- फिर भी है 2 कंडीशन.

अंकल:- बोल बीटा बोल.

मैं:- पहली मैं फ़ोन लेके रखूँगा अपने साथ और दूसरी ये की मैं जो मैं में आये वो करूँगा और इंस्पेक्टर कुछ नहीं बोलेगा.

अंकल ने इंस्पेक्टर की तरफ देखा तो वो दर गया और बोलै.

इंस्पेक्टर:- कोई दिक्कत नहीं है सर, मंजूर है.

उसके ऐसा बोलते hi मेरे फेस पे कामिनी स्माइल गयी जिसने सबको अंदर तक हिला दिया था. खैर मैं पुलिस वालो के साथ बहार आया और उनकी जीप में बैठ गया और थोड़ी देर में hi पुलिस स्टेशन पहुंचे. वो लोग मुझे अंदर लेके गए और एक सेल में दाल दिया जहा 2 लोग पहले से hi थे चोर टाइप के.

मैंने उनपे कोई ध्यान नहीं दिया बस वह जाके एक पत्थर की बेंच सी थी उसपे बैठ गया और सोचने लगा की अब आगे क्या करना है और फिर प्रीती की बात याद आने लगी, मैं अपनी सोच में hi गम था और वो दोनों मुझे ताड़ रहे थे क्युकी एक तो मैं कपड़ो से और सकल से क्रिमिनल नहीं लग रहा था और मेरे हाथ में मेरा फ़ोन देख के उनकी गांड में चुल्ल मच गयी थी इसलिए उनमे से एक बोलै.

पहला:- ोयी भिड़ु क्या काण्ड कियेला है तूने.

अब मैंने उसकी बात सुनी जरूर थी लेकिन कुछ बोलै नहीं, इसलिए दूसरा गुस्से में बोलै.

दूसरा:- आईयी लौड़े बोल न तू जनता नहीं है हमे हम उस्मान भाई के गुंडे है.

मैं:- सुनो मादरचोद अगर अबकी बार तुम दोनों ने मुँह खोला न तो लौड़ा दाल दूंगा मुँह में और गांड तोडूंगा वो अलग, भें के लौड़े बकवास पेले जा रहे है. तुम दोनों बहार मिलना मुझसे देखना कैसी गांड तोडूंगा फिर तुम दोनों की, अब चुपचाप कोने में बैठ जाओ.

अब मैंने ये बात थोड़ी छिलके बोली इसलिए उन दोनों की थोड़ी फटी लेकिन वो कुछ बोलते उससे पहले पुरे स्टेशन में shor-sharaba होने लगा इसलिए हम तीनो का ध्यान भी उस साइड चला गया और वह देखा तो पता लगा की एक ब्लैक टुक्सेडो में आदमी खड़ा था 50-55 का और वो इंस्पेक्टर पे चिल्ला रहा था.

आदमी:- कहा है वो कमीना? मुझे मिलना है उससे.

इंस्पेक्टर:- देखो सर आप उससे नहीं मिल सकते.

मैं समझ गया ये आर्यन का बाप है और ऑब्वियस सी बात है बन्दे को तो गुस्सा आएगा hi जब उसका लोंदा पिल गया हो बहुत बुरी तरह से.

आदमी:- तुम मुझे जानते नहीं हो दो दिन में तुम्हारी पोस्टिंग करवा दूंगा.

इंस्पेक्टर:- हां आप तो पोस्टिंग करवाओगे और कम सर तो सीधा ससपेंड hi करवा देंगे. ी ऍम सॉरी.

आदमी:- ाचा तो वो उस कम का आदमी है, हर्ष भाई सही कहते है की इस कम को हटा देना चाहिए रस्ते से.

इंस्पेक्टर:- आप यहाँ स्टेशन में हंगामा ना करे तो ाचा होगा.

वो आदमी कुछ बोलता उससे पहले मैं hi चिल्ला के बोलै क्युकी थोड़ा दूर थे वो हमसे.

मैं:- ोोू अंकल इधर मैंने hi तेरे बेटे को फोड़ा है और इंस्पेक्टर जी आने दीजिये बस आप आराम करे अपने केबिन में हम देख लेंगे अपना

और उसे कुछ इशारा किया जिससे वो इंस्पेक्टर थोड़ा पीछे हटा और आर्यन का बाप तेज़ी से मेरी सेल के बहार आया और बोलै.

Aryan's फादर:- ाएय हवलदार लॉक उप खोल तो जरा इसकी गर्मी निकालता हु.

इंस्पेक्टर:- आप ऐसे सेल में नहीं घुस सकते, ये कानून के बहार है.

मैं:- अरे आने दो इन्हे ( हवलदार से) खोल भाई लॉक उप.

उस हवलदार ने इंस्पेक्टर को देखा तो उसने भी इशारा किया की खोल दे तो उसने लॉक उप खोला और वो आर्यन का बाप तेज़ी से अंदर आया और आते hi मुझे थप्पड़ मारा लेकिन मैंने हाथ पकड़ लिया.

मैं:- ोू hello अंकल थोड़ा आराम से कही ऐसा न हो आगे बुढ़ापे में एक हाथ से काम चलना पड़े.

Aryan's फादर:- तू जनता नहीं है बचे मैं कोण हु राजेश सक्सेना नाम है मेरा, आज तू बचेगा नहीं तेरी साडी गर्मी निकालता हु और फिर इन निकम्मे पुलिस डिपार्टमेंट की माँ छोड़ता हु.

मैं:- अरे अपनी उम्र का लिहाज़ करिये क्या बाके जा रहे हो, थोड़ा आराम से कही ये पुलिस वाले आपको hi न धार ले.

राजेश:- तू जनता नहीं है सायद मैं हर्ष का ख़ास दोस्त हु, भाई मंटा है वो मुझे और उसके रहते मुझे कोई हाथ नहीं लगा सकता मादरचोद

मैं:- बुढऊ तूने भी तेरे बेटे वाली गलती कर दी गाली देके और मेरे में एक ख़ास चीज़ बता दू तुझे की मैं मारने से पहले ये नहीं देखता सामने वाला कोण है बचा है बूढ़ा है आदमी है या औरत है.

इतना बोलके मैं दिया उसके पेट में मुक्का ये अचानक से था और बहुत तेज़ था इसलिए वो पेट पकड़ के झुका और झुकते hi उसकी खोपड़ी प लात दी तो वो वही लेट गया, अब न उठने वाला था वो उसका सब कुछ हैंग हो गया था और जो दो आदमी मेरी सेल में थे वो मुझे घूर रहे थे गुस्से और दर से लेकिन वो कुछ करते या समझ पाते उससे पहले मैंने उसका राजेश का हाथ पकड़ा और उप्पेर खींच के एक लात उसके एल्बो जॉइंट पे मारी जो कटक की आवाज़ से टूट गयी और वो गाँडफाँड चिल्लाया,

राजेश:- बीटा माफ़ करदे देख में तेरे बाप सम्मान हु, बीटा क्या यही संकर दिए है तुझे तेरी माँ ने की बड़ो से कैसे पेश आते है.

वो ये सब बाते atak-atak के बोल रहा था, और मैं उसे अब नहीं मारता क्युकी वो नहीं झेल पता लेकिन ये दो नाम उसके मुँह से सुनते hi मैंने उसकी गुड्डी पकड़ के उठाया और खींच के दो मुक्के मारे उसके फेस जिससे उसका होठ फैट गया और आँख काली हो गयी. मैंने उसे छोड़ा और इंस्पेक्टर से बोलै.

मैं:- कोई बोले तो बोलना self-defense में मारा है मैंने.

इंस्पेक्टर ने मुंडी हिल्लायी और उसको हवलदार उठके ले गए अब बस कुछ hi घंटे बचे थे सुबह होने में और मैं बहार :वूहू: लेकिन उससे पहले मैंने उन दोनों आदमियों को देख के बोलै.

मैं:- तुम दोनों सुनो बे कल दोपहर में मेरे आदमी लेने आएंगे स्टेशन के बहार chup-chap आ जाना उनके साथ नहीं तो ऐसी गांड तोडूंगा न की बस समझ जाओ तुम दोनों और अब सांस लेने की भी आवाज़ न निकलना.

उसके बाद मैं आगे की प्लानिंग करने लगा की क्या करना होगा मुझे और इन सब में मैं इतना खो गया की मुझे टाइम का कुछ पता नहीं लगा लेकिन होश में तब आया जब एक हवलदार ने आके हिलाया और बोलै की आप रिहा हो चुके हो. इतना सुनके मैं उठा और एक अंगड़ाई लेके बहार आया सेल से

मैं:- हासष्ठ भेनचोद अब चैन से सोऊंगा पूरा दिन, छोड़ू मचारो ने चैन से बैठने भी नहीं दिया यहाँ.

खैर मैं उस इंस्पेक्टर के केबिन में आया तो उसने बताया की कम सर ने मीडिया में बता दिया है जो तुमने बोलै था और उन तीनो लड़को को गिरफ्त में ले लिया जाएगा क्युकी वो तीनो hi द्रुग्गिए निकले है.

मैं:- न न ये केस पुलिस वाले नहीं हम लेंगे लेकिन तुम मेरे लिए काम करना चाहो तो कर सकते हो मैडल और प्रमोशन पैसे की तरह मिलेगा.

इंस्पेक्टर:- जैसा आप चाहे वैसा hi सही, मैं तो बल्कि खुस हु की कानून ने हमारे हाथ जो बाँध रखे फिर भी मैं आपके साथ इस पुण्य काम में आपकी मदद करू इससे अछि क्या बात हो सकती है.

बिचारा पुण्य काम समझ रहा :रोफ्लोल: लौड़े का पुण्य मैं खुद पापी हु एक नंबर का.

मैं:- ठीक है तो फिर कल ये जो मेरे सेल में दो बन्दे है इनको रिहा कर देना और दो दिन बाद एक मैडल पक्का तुम्हारा.

इंस्पेक्टर:- जी शुक्रिया.

मैं:- वैसे तुम्हारा नाम क्या है.

इंस्पेक्टर:- जी आदित्य सिंह.

मैं:- चलो चलता हु.

उसके बाद मैंने उसे अपना कांटेक्ट नंबर दिया और स्टेशन बहार आया तो रॉकी खड़ा था ( अंकल का बॉडीगार्ड है, इससे भी दोस्ती हो गयी थी इन 10 महीनो में, एक ख़ास बात ये है इसकी ये लॉयल है क्युकी सड़क से उठा के लाये थे अंकल इसे)

रॉकी:- आओ सरकार, कही कुटाई तो न हुयी तुम्हारी.

मैं:- चल बे लौड़े, इनकी गांड न तोड़ देता वह पे.

रॉकी:- वैसे मैंने सुना है की प्रीती भाभी ने दिल तोड़ दिया तुम्हारा.

मैंने उसे एक लुक दिया जिसका का मतलब वो समझ गया की इस मटर पे बकचोदी नहीं करनी. इसलिए वो भी चुप हो गया और मैं भी ये सोचने लगा की प्रीती ने मुझसे नफरत क्यों की इसलिए की मैंने उससे सच छुपाया या इसलिए की मैंने उन्हें पेल दिया खैर कोई नहीं मैडम ने बोलै की उनसे बात करने की कोसिस भी न करू तो उनका हुकुम सर आँखों पे. वैसे उसने मुझे हर जगह से ब्लॉक कर दिया था और अपने सोशल एकाउंट्स से मेरे साथ की साड़ी पिक्स उदा दी थी कोई नहीं कोई नहीं देख लेंगे इसे भी :रोल:

खैर हम हवेली पहुंचे मैं कार से उतर के अंदर गया और रॉकी भी मेरे साथ आ गया, हम हॉल में पहुंचे तो अंकल, राज, आरव, वर्षा, पायल, जॉन, सारा, अजय, जानवी सब बैठे थे और मुझे घर रहे थे.

मैं:- :wtf: घर क्यों रहे हो सब?

जानवी :- तुमने कल तीन लड़को को मारा चलो कोई नहीं लेकिन अपने रिलेशन क्यों बिगाड़ा प्रीती के साथ और वो भी छोड़ो तुमने तो आर्यन के बाप तक को पेल दिया स्टेशन में ये क्या है सब.

राज:- देखा सरेंडर मैंने बोलै था न इसको थोड़ी सी छूट मिली नहीं इसकी गुंडा गर्दी सुरु, हम इसे हर्ष के लिए कह रहे लेकिन ये कल के लड़को से पंगे करता घूम रहा है.

आरव:- अरे आप सब चुप होवोगे उसको तो कुछ बोलने दो.

अंकल:- आरव सही कह रहा है, वो बिना सोचे समझे कुछ नहीं करता तो बताओ एक

मैं:- एक बार बोलूंगा ध्यान से सुन लो सब बिच में बात मत काटना तो सुनो बात करते है सुरु से तो आर्यन ने मुझे माँ की गली दी मुझे घंटा फर्क नहीं पड़ा, उसने प्रीती को गाली दी मुझे घंटा फर्क नहीं पड़ा, बस फर्क पड़ा तो इतनी बात से की वो बार बार बोल रहा था की हर्ष उसका अंकल है तो पेल दिया क्युकी हर्ष हमपे तभी ध्यान देगा जब उसका को करीबी घायल होगा और उसके बाप को इसलिए पेला क्युकी मुझे नहीं लग रहा था की वो आर्यन की छोटी सी धुलाई पे गुस्सा होगा, इसलिए राजेश ने बोलै की वो खाश है हर्ष कस इसलिए पेला की हर्ष अब कुछ करेगा और मुझे पता है वो कुछ न कुछ तो करेगा और अगर नहीं भी करेगा तो हमे और कुछ बड़ा करना पड़ेगा. ी होप आप सब समझ गए होंगे.

उसके बाद सब लोग शांत थे कोई कुछ नहीं बोल रहा था और मैंने जो इनको बोलै वो झूट था एक्चुअल में मुझे गुस्सा गली सुन के आया था वो हर्ष का क्या लगता है मुझे उससे घंटा फर्क नहीं पड़ता लेकिन इन सब के सामने कूल दिखने के लिए बोल दिया :कूल:

जानवी:- तो अब प्रीती का क्या?

मैं:- प्रीती के बिना जीना छोड़ दूंगा क्या? नहीं न तो वो अपने रस्ते और मैं अपने रस्ते.

वर्षा:- लेकिन अब आगे क्या करना है?

मैं:- तो मैडम अब वक़्त आ गया है हर्ष को सीरियसली लेने का तो रॉकी तुम अपने सारे खबरि एक्टिव करो हर्ष की छोटी से छोटी इनफार्मेशन कलेक्ट करवा और वर्षा तुम उसके बन्दों का देखो कोण क्या है, कोण उसके आगे है और कोण पीछे, पायल तुम हर्ष का बिज़नेस देखोगी ब्लैक मार्किट का, की वो क्या करता है और क्या नहीं, कोण दुश्मन कोण दोस्त. और सारा और अजय कल दो आदमी जेल से रिहा होंगे दोनों को उठा लेना बिना सकल दिखाए, और कल रात को यही मिलो मुझे अपनी रिपोर्ट्स लेके.

सब मुझे आँखे फाड़े देख रहे थे की वो लोग जो इतने दिन से नहीं कर रहे थे है इन्होने ऐसा करने का सोचा भी नहीं था, खैर मैं hi बोलै.

मैं:- देखो अब सब काम पे लग जाओ, अंकल आप ओप्पोसिशन सम्भालो और राज सर आप पुलिस डिपार्टमेंट को क्युकी कई दोस्त होंगे आपके. अब मैं चला सोने भरी तालाब लगी है मुझे.

इस बात को सिर्फ आरव और जानवी hi समझे की मुझे तालाब ड्रग्स की लगी है क्युकी बाकी सब को लगता था की मैंने ड्रग्स छोड़ दिए है...

जानवी:- रुको पहले खाना खाओ फिर सोना.

सब अपने अपने काम पे लग गए और आरव भी चला गया कुछ काम है बोलके उसके बाद जानवी ने मुझे खाना खिलाया उसके बाद में रूम में आया और जल्दी से नहाया और नहाते hi कपडे पेहेन के ड्रग्स निकल के टेबल बिछाया और सत् से खींच गया और अब तो पहले से भी डबल दोसे लेने लगा था मैं क्युकी खोपड़ी सांत हो जाती थी और मेरी बॉडी को आदत हो गयी थी इसकी, उसके बाद मैंने एक जॉइंट जलाया और उसको पूरा धुआँ धुआँ करके सो गया.

तो बे कॉन्टिनोएड 🙏🙏

 
अपडेट:-45


मैं रात को उठा खाना खाया और वापिस रूम में आया और आके फ़ोन उठा के देखा तो उसपे बहुत सी कॉल्स थी आकाश की. मैंने वापिस कॉल किया उसे तो उसने एक सेकंड में उठा लिया नल्ला आदमी :सिघ2:

मैं:- बोल कैसे फ़ोन किया तूने.

आकाश:- तू कैसा है और स्टेशन से आने के बाद कॉल क्यों नहीं किया मुझे.

मैं:- भसडक तू कोनसी लुगाई है मेरी जो तुझे हर टाइम की इनफार्मेशन दू.

आकाश:- ाचा गुस्सा न हो और ये बता की अब प्रीती को कैसे मनाएगा.

मैं:- भाई किस लिए मनौ उसे.

आकाश:- अबे वो तुझसे नाराज है न और तुझसे बात भी नहीं करना चाहती तो तू उसे मनाएगा न जैसे हर आशिके मनाता है.

मैं:- अबे बकचोदी न पेल ये सब मेरे बस का ना है, हां प्यार करता हु उससे लेकिन ये मानाने वगैरह का रंडी रोना नहीं आता मुझे :रेडफास: और आज के बाद प्रीती की कोई बात नहीं करेगा मुझसे.

आकाश:- ाचा ाचा गुस्सा क्यों होता है, ये बता की आगे क्या करना है.

मैं:- हां तुझे बताना तो भूल hi गया की आज रात को आ जइयो मीटिंग है हवेली पे.

आकाश:- एक्चुअली मुझे तुझे कुछ बताना था पर समझ नहीं आ रहा की कैसे बताऊ.

मैं:- अबे बता न क्यों शर्मा रहा है.

आकाश:- अरे वो अंजलि को तेरी सचाई पता लगी तो उसको मुझपे भी शक हुआ तो उसने मुझे अंजलि ने अपनी कसम देके मेरे बारे में पूछा तो मैंने सब बता दिया तो अब वो तुझमे और उसमे से किसी एक को चुनने को बोल रही है, अब क्या करू मैं.

मैं:- देख पहली बात तो तू एक नंबर का चुटिया है जो ये कसम वसं के चकरो में आ गया और दूसरी बात मैं इसमें तेरी कोई मदद नहीं कर सकता जो तुझे ठीक लगे वो कर, अगर तुझे नार्मल middle-class झांट बराबर लाइफ जीनी है तो अंजलि के साथ रह है और लाइफ में कुछ करना है और अपने सपने पुरे करने है तो कल आ जइयो रात को हवेली पे.

कॉल डिस्कनेक्टेड. भेनचोद कैसे चुटिया लोग है कसम मान लेते है :सिघ2: . साले लड़कियों के लिए खुद को बदल लेते है, अरे जब लड़की तुम्हारी रियल साइड को चेंज करना चाहती है मतलब तुम्हे बदलना चाहती है तो वो घंटा तुमसे प्यार करती है, अगर प्यार करती तो जो तुम हो उस साइड से प्यार करती न की तुम्हे अपने हिसाब से बदलती, पर मैं ये सब क्यों सोच रहा हु सब अपनी गांड मारो मुझे क्या.

खैर मैं ये सब सोचते सोचते फिर सो गया. सुबह मेरी आँख जल्दी hi खुल गयी क्युकी बहुत ज्यादा सो लिया था कल, मैं उठा फ्रेश हुआ और गयम में जाके 2 घंटे पसीना बहाया और फिर गयम से आके नाहा धोके ब्रेकफास्ट की टेबल पे पंहुचा जहा जानवी और आरव पहले से मौजूद थे, अंकल किसी मीटिंग में गए हुए थे, हमने ब्रेकफास्ट निपटाया और फिर हॉल में आके बैठे hi थे की सारा और अजय आ गए.

अजय:- गुड मॉर्निंग एवरीवन.

सबने उसे मॉर्निंग विश किया और फिर कुछ बातचीत हुयी थी की इंस्पेक्टर का कॉल आ गया.

मैं:- बोलो इंस्पेक्टर साहब.

इंस्पेक्टर:- जी वो उन दोनों गुंडों को कब रिलीज़ करना है.

मैं:- आधे घंटे बाद जब मैं बोलू.

इंस्पेक्टर:- जी साहब.

कॉल डिस्कनेक्टेड.

मैं:- चलो सारा और अजय मैं भी तुम्हारे साथ चलता हु.

अजय:- क्यों क्या हुआ?

मैं:- अरे ऐसे hi यहाँ वैसे भी बोर हो जाऊंगा मैं.

अजय:- चलो फिर.

उसके बाद हम तीनो बहार आये और उनकी कार में बैठे और निकल पड़े स्टेशन की तरफ ठीक 20 मिनट में पहुंच गए थे हम लोग. हमने स्टेशन से थोड़ा पहले कार रोकी, मैंने इंस्पेक्टर को फ़ोन मिलाया.

मैं:- छोड़ दो उनको.

इंस्पेक्टर:- जी साहब.

कॉल डिस्कनेक्टेड. अब हम तीनो कार में बैठ के उनका वेट कर hi रहे थे की मुझे गन लोड करने का साउंड आया तो मैंने और अजय ने पीछे देखा तो सारा अपनी गन लोड कर रही थी.

अजय:- सारा गन क्यों निकल रही है?

सारा:- उन 2 लोगो को उठाना है न.

मैं:- अरे मेरी माँ प्यार से बैठ जाएंगे वो इसको मत निकल अभी.

सारा:- ोककक no प्रॉब्लम.

उसके बाद सारा ने वापिस अपनी गन राखी और हम शांत हुए hi थे की वो दोनों गुंडे स्टेशन से बहार निकले, वो दोनों बड़े खुस लग रहे थे सायद मैंने उन्हें जो कल बोलै था वो भूल चुके थे और खुस इसलिए थे की उन्हें बिना बात छोड़ दिया गया था पुलिस द्वारा. तो वो जैसे hi हमारी कार के पास आये वैसे hi सारा और अजय मेरे इशारे पे कार से बहार निकल के उन दोनों के सामने खड़े हो गए.

अजय:- चलो कार में बैठो चुपचाप

पहला:- अब कोण है तू और साले पता किस्से बात कर रहा है तू, उस्मान भाई के आदमी है हम

मुझे समझ आ चूका था की वो लोग प्यार से तो नहीं आएंगे इसलिए मैं भी कार से बहार निकला और मेरी सकल देखते hi वो थोड़ा सा हड़बड़ाए लेकिन वापिस अपनी टोन में आके बोले.

दूसरा:- अरे ये तो कल वाला लोंदा है न जो थाने में राजेश साहब को पीट रहा था, साले कल तो तू बच गया लेकिन आज तुझे नहीं छोड़ेंगे हम.

मैं उनसे बोलबचन करने के मूड में नहीं था इसलिए मैं सिर्फ इतना बोलै.

मैं:- अजय जल्दी दाल इनको कार में.

उसके बाद अजय ने उसके पास खड़े वाले के सर में एक मुक्का मारा और वो तो बिचारा चकराने लगा क्युकी कहा अजय जानवर जैसा और मरियल सा नशेड़ी. खैर दुसरे वाले को भी मारने को हुआ लेकिन वो समझदार था इसलिए पहले hi हाथ जोड़ लिए और बोलै

दूसरा:- चलते है न साहब, क्यों मार रहे हो?

अजय:- तेरी सेहत के लिए ाचा रहेगा.

उसके बाद उन्दोनो को सबसे लास्ट वाली सीट पे बिठाया और निकल दिए हवेली की तरफ, मुझे पता था ये दोनों जल्दी hi इन्फो दे देंगे, ज्यादा टार्चर नहीं करना पड़ेगा. अगले 20 मिनट में हम हवेली पहुंचे आरव हमे लॉन में hi मिल गया, उसको मैंने जब बताया की ये उस्मान के बन्दे है तो उसको भी गुस्सा आ गया, लेकिन ये वक़्त गुस्से का नहीं था इसलिए उन दोनों को आरव अंडरग्राउंड पार्किंग में लेके गया और वह पे कई रूम्स थे तो उनमे से एक रूम में उन दोनों को डाला और रूम को बहार से लॉक कर दिया. वैसे एक तरह की जेल टाइप hi था वो.

इसके बाद सारा और अजय भी चले गए और हमने भी पूरा दिन मूवी और गेम्स खेलने में निकल दिया. रात हुयी मीटिंग का टाइम हुआ और धीरे धीरे सब आ गए लेकिन मेरी नज़र अभी भी गेट पे थी पता नहीं क्यों मुझे लग रहा था की आकाश जरूर आएगा क्युकी मैंने उसकी आँखों में वो जानूं देखा था जब वो मेरे साथ मिल के काम करता था और हर चीज़ एक्सप्लेन करता था. खैर सब ेख्ता हुए और ड्राइंग रूम में बैठे, सब एक दम शांत थे तो सबसे पहले मैंने बोलना सुरु किया.

मैं:- देखो मुझे पता है....

इतना hi बोल पाया था की ड्राइंग रूम में आकाश भी एंटर हुआ जिसको देखके सब चौंक गए, मुझे और आरव को छोड़ के, मैंने आकाश को बैठने का इशारा किया तो वो चुटिया अंकल और राज के बिच में बैठ गया, भेनचोद ये मरवाएगा इनके बराबर तो मैं भी नहीं बैठता, मैंने उसको घर के देखा और उसे भी रीलीज़ हुआ इसलिए सॉरी बोलता हुआ वह से खड़ा हुआ और आरव के पास जाके बैठ गया, बाकी सब तो सिर्फ उसकी चुटिया हरकतों को hi देख रहे थे. लेकिन राज की गांड में चल न उठे ऐसा हो सकता है क्या इसलिए वो बोलै.

राज:- एक ये तुमने आकाश को क्यों बुलाया है, उसे इन सब से दूर रखो क्युकी उसे अभी इन सब का नहीं पता.

मैं:- वो सब आप छोड़िये, मुझे पता है की वो क्या है और क्या नहीं, और वो भी इसी टीम में है.

आकाश:- राज अंकल एक का लेफ्ट हैंड हु मैं.

मैं ( मैं में) :- ये लोदु मरवाएगा आज.

आरव:- व्हाट थे फ़क ये क्या राइट हैंड लेफ्ट हैंड चल रहा है तुम दोनों का और तू लेफ्ट है तो राइट कोण है.

आकाश:- विवेक नाम का है कोई, एक बोल रहा था की उसके एंट्री मस्त वाली करवाएगा बाद में.

आरव:- ाचा और मैं क्या हु फिर.

अब आकाश कुछ बोलता उससे पहले मैं बोल पड़ा.

मैं:- तू मिडिल है मेरा और मैंने अपने लौड़े की तरफ इशारा किया.

जहा सभी लड़के है दिए अंकल समेत वही राज ने मुँह बना लिया अजीब सा और लड़कियों को तो समझ hi नहीं आया कुछ इसलिए जानवी बोली.

जानवी:- ये मिडिल क्या होता है एक.

मैं:- आरव बताएगा अकेले में तुम्हे, क्यों बताएगा न मेरे मिडिल हैंड. हहहहह.

आरव:- रुक तुझे अभी बताता हु.

लेकिन वो कुछ करता उससे पहले राज बोल पड़ा.

राज:- देखा तूने सरेंडर ये ऐसे लड़ेंगे हर्ष से इतने सीरियस मटर पे कैसे जोके मारे जा रहे है और हम लोग हर्ष को मार भी देंगे तो एक भाई साहब दुसरे हर्ष है तो उसकी जगह लेने के लिए.

मुझे उसकी बात बिलकुल अछि नहीं लगी सायद किसी को भी नहीं लगी थी लेकिन मैं कुछ बोलता उससे पहले अंकल ने चुप रहने का इशारा किया और बोले.

अंकल:- तुम सब शांत हो जाओ और एक तुम भी सीरियस होक बोलना सुरु करो.

मैं:- ोककक एंड सॉरी. देखो मेरी बात बीचमे कोई मत काटना और मैं जानता हु तुम सबने इनफार्मेशन निकल ली होगी अभी तक और बता भी डोज, लेकिन प्रॉब्लम ये है की तुम लोग नार्मल से नार्मल चीज़ भी मिस नहीं करोगे, क्युकी कई बार जो चीज़ नार्मल दिखती है वो होती नहीं है इसलिए जो बोलो सोच समझ के बोलना क्युकी एक गलत इन्फो हम सबको खतरे में दाल देगी. तो बात करते है उसकी ताकत की, और उसकी ताकत है पैसा मीन्स बिज़नेस तो पायल हो जाओ सुरु.

पायल:- हर्ष दिल्ली का बिज़नेस किंग है, सबको पता है ये क्रिमिनल है लेकिन फिर भी कोई इसका कुछ नहीं बिगड़ सकता क्युकी इसके खिलाफ कुछ है hi नहीं, अब आते है इसके बिज़नेस पे जो वाइट मार्किट और ब्लैक मार्किट में है, वाइट मार्किट में हर्ष का बिज़नेस एक लड़की संभालती है और उसके बारे में कोई जानकारी नहीं है और उससे हमारा लेना देना भी नहीं है क्युकी हमारा टारगेट ब्लैक मार्किट है, और उसकी ब्लैक मार्किट का जो मैं हेड है वो है रखा और इसके बारे में किसी को कुछ नहीं पता, ी मैं न इसकी ताकत के बारे में न कोई कमजोरी, हर्ष तक पहुंचना है तो इससे निपटना hi होगा और ये मौत का दूसरा नाम है, वैसे इसके अंडर hi सब बिज़नेस चलता है जिन्हे 4 लोग हैंडल करते है. पहला ड्रग्स का जो अब्दुल जफर देखता है, दूसरा आर्म्स का जो शिवराज देखता है, तीसरा लड़कियों और human's ऑर्गन ट्रैफिकिंग का वो हर्ष का छोटा भाई मोहन देखता है, और लास्ट में आते है जिसमे इसकी एक गैंग है और वो हर गलत काम करते है मतलब पैसे के लिए रपे, मर्डर, स्मगलिंग, बम- ब्लास्ट, किडनेपिंग, sharp-shooting और इनका हेड है उस्मान.

अब ये नाम सुनके मैंने और आरव ने एक दुसरे की तरफ देखा और फिर मैंने इशारो मैं hi उसे शांत रहने को बोलै और फिर मैंने सबको देख के बोलै.

मैं:- थांग्स पायल इनफार्मेशन के लिए लेकिन जो ये लड़की है न जिसका किसी को नहीं पता, इसका पता लगाओ ये बहुत डेंजरस हो सकती है हम सबके लिए. और रॉकी अपने खबरियो को एक्टिव कर और उस्मान का bio-data निकल.

उसके बाद मैं बिना कुछ बोले उठा और अपने रूम में चला गया क्युकी दिमाग घूम गया था मेरा, दो दो उस्मान कैसे हो सकते है भेनचोद, और अगर दोनों एक है तो भी दिक्कत हो जाएगी मतलब उस्मान तक नहीं पहुंच पाउँगा आसानी से और अलग अलग हुए तो दूगनी दिक्कत क्युकी फिर पहले वाले उस्मान को कैसे ढूंढूंगा और जो हमने बन्दे पकडे है आज वो कोनसे उस्मान के है. फ़क! दिमाग फटा जा रहा था मेरा इस उस्मान के चाकर में. इसलिए मैंने टिगों निकला और टेबल पे बिछा के सत् से खींच गया क्युकी दिमाग को शांत रखके सोचना था मुझे और बिना ड्रग्स के बहुत सारे थॉट्स दिमाग में होते है तो काम नहीं हो पता अचे से. मैं बैठा सोचता रहा और फिर जैसे hi एक आईडिया दिमाग में स्ट्राइक हुआ और मैंने झट्ट से फ़ोन उठके पूरी टीम को बुलाना चाहा लेकिन टाइम देखके गांड फट गयी मेरी क्युकी रात के 2 बज रहे थे :सिघ: फिर मुझे रीलीज़ हुआ की मैंने कैसे पागल की तरह एक जगह बैठा हुआ 5 6 घंटे से और अब तो भूक भी लगने लगी थी इसलिए मैं चुपचाप निचे गया और किचन में कुछ धुंध के खाया और जब रूम में वापिस आने लगा तो अंकल के रूम की लाइट जल रही थी, एक बार को तो मैंने जाने दिया लेकिन फिर गांड में चुल्ल मची की देखु तो हो क्या रहा है और मैं चुपचाप पास गया और विंडो को थोड़ा खोल के देखा तो वो दारू पिटे हुए किसी से कॉल पे बात कर रहे थे. लेकिन जैसे hi उनकी बात मेरे कानो में पड़ी मेरे तो पैरो टेल जमीन hi खिशक गयी, मैं किया की अभी इस बूढ़े की गांड तोड़ दू लेकिन कण्ट्रोल किया और मुझे ये भी पता लग चूका था की ये राज से बात कर रहा है. खैर मैंने उनकी पूरी बात सुनी और खून की घूँट भरके वापिस रूम में आके सो गया.

"अब दिखाऊंगा इन्हे की एक कोण है, और उसका पागलपन क्या है :ेविलौगह: "

तो बे कॉन्टिनोएड 🙏🙏

 
थैंक्स भाई

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अपडेट:-46


सुबह मेरी आँख खुली मैं फ्रेश हुआ और सीधा गयम में गया और बहुत जयादा पसीना बहाया क्युकी मैं गुस्से में था बहुत ज्यादा और इसका सिंपल सा रीज़न था अंकल और राज की बाते लेकिन अब मैं कोई गलती नहीं कर सकता था क्युकी एक गलती और उप्पेर का टिकट कब काट जाए किसी को पता नहीं, अब गुस्सा मेरा शांत सिर्फ एक चीज़ से शांत होता है, जब प्रॉब्लम ख़तम हो जाए लेकिन प्रॉब्लम अभी मैं छह के भी ख़तम नहीं कर सकता और इतना इस गुस्से को कैर्री करना बहुत मुश्किल है इसलिए गयम में इस गुस्से को किसी तरह काम कर रहा था.

मैं गयम से आया नाहा धो के ब्रेकफास्ट किया chup-chap और फिर निचे बेसमेंट में जाने लगा उन दोनों आदमियों के पास, तो आरव बोल पड़ा.

आरव:- कहा जा रहा है?

मैं:- उस्मान का पता लगाने.

आरव:- रुक मैं भी आता हु.

मैंने कुछ नहीं बोलै बस चल पड़ा और ाईव भी मेरे पीछे पीछे आ गया. हम दोनों 5 मिनट के अंदर उनके रूम के बहार खड़े थे, हमारे साथ रॉकी भी था क्युकी उसकी लोकल गुंडों पे पकड़ अछि थी.

मैं:- रॉकी बहार निकल तो इन दोनों को.

रॉकी ने भी मेरा मूड ख़राब है ये देख लिया था इसलिए उसने बिना बकचोदी किये हुए गेट खोला और उन दोनों को बहार लेके आया और उन्हें मेरे इशारे पे हमारे सामने चेयर पे बिठाया गया, उन दोनों की गांड फटती हुयी थी क्युकी हम मैं और आरव उनके सामने खड़े थे और वो बैठे थे और वो सवालिया नज़रो से हमे देख रहे थे.

मैं:- उस्मान कोण है?

पहला:- हमे नहीं पता और हम नहीं बताएँगे अगर उन्हें पता लगा तो हमे मार देंगे.

मैं:- चल मुझे पता था तू यही बोलेगा, इसलिए सीधा दूसरा सवाल.

मैं:- 10 महीने पहने ****** इस जगह और **** इस घर में एक बम ब्लास्ट हुआ था, तुझे पता है किसने किया.

पहले तो उन दोनों ने एक दुसरे की सकल देखि और फिर दुसरे ने बोलै.

दूसरा:- देखो हमे नहीं पता उस बारे में, और हम कुछ नहीं बताने वाले.

मैं:- चलो मुझे इसका भी ोाता था यही बोलोगे. अब कुछ सवाल तो बचा hi नहीं तुम लोगो के लिए, तो क्या किया जाए, छोड़ दिया जाए.

पहला:- हां साहब छोड़ दो हमे, हमने तो कुछ बिगाड़ा hi नहीं आपका.

मैं:- चल तुम दोनों आजाद.....

आरव:- रुक मेरे को पूछने दे इनसे

मैं:- अबे अब तू क्या पूछेगा, इन्होने बोलै न की ये लोग नहीं जानते और ये झूट क्यों बोलेंगे हमसे, चलो खड़े हो जाओ दोनों और निकलो.

उन दोनों को भरोषा नहीं हो रहा था की इतनी जल्दी बक्श दिया गया उन्हें, वो भी बिना किसी टार्चर के. उन दोनों ने एक दुसरे को देखो और फिर हास्य क्युकी वो लोग मुझे चुटिया समझ रहे थे. आख़िरकार वो दोनों उठे और जाने लगे लेकिन फिर अचानक से पीछे मुड़े और पहला वाला बोलै.

पहला:- वैसे एक बात बोलू तुम न बड़े चुटी......

उसकी जबान उसके मुँह में hi अटक गयी क्युकी उसके वर्ड्स पुरे होते उससे पहले मेरी गन निकली और गन से एक बुलेट और सीधा उसकी खोपड़ी में और वो धड़ाम से पीछे गिरा, और दूसरा तो शॉक में था और वो जैसे hi रियलिटी में आया तो दूसरी गोली उसके सर में घुस चुकी थी. फ़क! अब जाके थोड़ी फ़्रस्ट्रेशन काम हुयी.

आरव:- अबे मार क्यों दिया इन दोनों को.

मैं:- मैं कर रहा था मेरा.

आरव:- अबे तू आसानी से उनसे सब कुछ उगलवा सकता था, लेकिन तूने बकचोदी कर दी, बेफालतू में थोक दिया.

मैं:- सुन ज्ञान न पेल, मुझे पता है मैं सचाई निकलवा लेता उनसे लेकिन मैं ऐसे बिच में अब कोई काम सुरु न करने वाला और रही बात उस्मान की उसके बारे में ये भी ठीक से नहीं जानते थे बस नाम उसे कर रहे थे उसका, और उनको मारा इसलिए क्युकी मेरा बहुत ज्यादा मैं कर रहा था, मैं तो उनको पीछे से मारता लेकिन साले bol-bachan करने लगे थे तो थोक दिया.

आरव:- अबे दिमाग हिल्ला हुआ है क्या तेरा? अपने मजे के लिए किसी को थोक देगा क्या?

मैं:- अबे तेरे कोनसा जीजा था इनमे से, गुंडे थे मारे गए? शाम को मीटिंग बुला अर्जेंट.

आरव:- अबे अब मीटिंग किस लिए वो भी अर्जेंट में.

मैं:- देख जितना कहा है उतना कर. और मैं बहार जा रहा हु शाम को मीटिंग के टाइम आ जाऊंगा.

इतना बोलके मैं सीधा उप्पेर अपने रूम में आया और गन को रीलोड करके और थोड़ा सा ड्रग्स भी ले लिया साथ. निचे आया कार निकली और आकाश के घर के घर पंहुचा. बेल्ल बजायी आंटी ने दूर खोला और मुझे अंदर आने दिया.

मैं:- आकाश कहा है आंटी?

आंटी:- बीटा वो तो बहार गया हुआ है, तुम बोलो तो बुलाऊ उसे.

मैं:- बुलाओ.

आंटी ने उसे फ़ोन किया और कुछ बात करके मुझे बोली.

आंटी:- बीटा 15 मिनट में आ रहा है वो. इतने वेट करो.

मैं:- मैं उसके रूम में हु और आप कॉफ़ी वगैरह मत लाना.

उसके बाद मैं सीधा आकाश के रूम में गया जो की ज्यादा बड़ा नहीं था लेकिन उसमे बुक्स भरी पड़ी थी हैकिंग रिलेटेड, मैं ऐसे hi टाइम पास करने के लिए ऐसे hi बुक्स खोल खोल के देख रहा, समझ झांट नहीं आ रहा था लेकिन टाइमपास जरूरी है, मैंने एक दो बुक खोल के राखी लेकिन एक बुक खोली तो उसमे से फोटोग्राफ निकल के निचे गिरी, मैंने उस फोटो को उठाया तो वो उलटी थी अब मैं उसको पलट के देखने hi वाला था की किसी ने झटके से मेरे हाथ से वो पिछ खींच ली, मेरी गांड फैट गयी भेनचोद कोण आ गया फ़्लैश के जैसे, लेकिन पलटा तो पता लगा आकाश लोदु है, वैसे देखा जाए तो मुझे उसपे चिल्लाना चाहिए क्युकी उसने अचानक से आके डरा दिया मुझे लेकिन वो साला मुझे पे hi चिल्लाने लगा.

आकाश:- अबे मेरी बुक्स किस से पूछ के छेद रहा था? देख कुछ भी हो जाए मेरी बुक्स और उनमे राखी चीज़े न छेड़ा कर, मुझे बिलकुल पसंद नहीं है.

वो इतना बोलके अपनी बुक्स को जल्दी जल्दी समेटने लगा और फिर उसने मेरी नज़रो से छुपा के वो फोटोग्राफ एक रेड बुक में घुसा दिया, उसे लगा की मैंने देखा नहीं लेकिन मैंने देख लिया था, खैर मैंने उसपे ज्यादा ध्यान न देते हुए सीधा काम की बात पे आ गया.

मैं:- चल अब तेरा हो गया हो तो काम की बात कर ले.

आकाश:- हां बोल और चिल्लाने के लिए सॉरी.

मैं:- अबे सॉरी को दाल अपनी गांड में और एक बात बता, तुझे तो अंजलि ने मेरे पास आने से मन किया था तो तू क्यों आया कल मीटिंग में.

आकाश:- हां उसने मन किया था लेकिन मैंने खूब सोचा की वो तो अमीर बाप की बेटी है लेकिन मैं एक मिडिल क्लास फॅमिली से हु अब पढ़ लिख के कितना कमा लूंगा, जितने से मेरा घर चल सके और मैं एक नार्मल और सिंपल लाइफ जी लूंगा. लेकिन मैं ऐसी लाइफ नहीं जीना छठा, ये देख रहा है तू इस झात बराबर कमरे में लाइफ गुज़री है मेरी और आगे भी इसी में गुज़रने वाली है लेकिन अब मैंने सोच लिया है की खुदको और अपनी फॅमिली को अछि लाइफ दूंगा, चाहे वो कैसा भी रास्ता हो.

मैं:- अबे चूतिये मैं कोनसा तुझे नौकरी पे रख रहा हु और इस लाइन में जो तू अपनी और अपनी फॅमिली को अछि लाइफ देने की सोच रहा है न इसमें खतरा भी बहुत है.

आकाश:- कोई नहीं देखा जाएगा और वैसे भी आरव ने इतना तो मुझे भी सीखा hi दिया है की खुद को कैसे सेफ रखते है.

मैं:- तू चुटिया तेरा गुरूजी चुटिया, चल छोड़ मैं बात ये है की तू शाम को हवेली पहुंच जाइयो, कुछ काम है.

आकाश:- और तू कहा जा रहा है.

मैं:- चल बे बंदी न बन मेरी, अपना काम कर.

उसके बाद मैं आकाश के घर से निकला और हवेली जाने का मैं नहीं था मेरा इसलिए सोचा कोई मूवी hi देख लू और थोड़ी शॉपिंग कर लू, इसलिए मॉल में चला गया. कार पार्क की और जैसे hi मॉल में एंटर हुआ तो गॉर्ड ने एक दम से सलूट मारा.

मैं:- बस आराम से सलूट मार न, गांड hi फाड़ देगा क्या.

वो:- सॉरी सर.

मैं:- सॉरी को क्या अपने पिछवाड़े में दालु

उसके बाद में आगे को हो लिया, आज पता नहीं क्यों चिड़चिड़ा सा हो रखा था, वैसे अंकल मुझे कई जगह अपने साथ लेके गए है बिज़नेस मीटिंग्स और उनके होटल्स माल्स में तो वह का स्टाफ जनता है मुझे. मैं सीधा आया टिकट ली और एक मस्त सी मूवी देखि और फिर बहार आके शॉपिंग करने लगा, शॉपिंग करते करते शाम हो गयी थी लेकिन भूख लगी थी इसलिए फ़ूड कोर्ट चला गया और अपना आर्डर देके काउच ोकुप्य किया hi था की किसी ने मेरा नाम लिया "एक" मैंने पलट के देखा तो हमारे क्लास की एक लोंड़िया थी रिया नाम की और उसके साथ दो लड़की और अंजलि और बैठी थी.

मैं:- होई.

रिया:- के ज्वाइन उस.

मैं:- तुम्हारी फ्रेंड्स को कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगी न.

मैंने ये इसलिए बोलै क्युकी अंजलि की सकल बन गयी थी मुझे देखते hi.

रिया:- अरे इसमें प्रॉब्लम क्या होगी भला, आखिर तुम तो अंजलि और प्रीती के बेस्टफ्रेंड हो.

मैं (मैं में) :- लौड़े का बेस्ट फ्रेंड, वो तो प्रीती न है यहाँ पे नहीं तो यहाँ खा जाती मुझे.

रिया:- अरे आओ न.

मैं भी अपनी जगह से खड़ा हुआ और उनके पास बैठ गया और वेटर मेरा आर्डर भी वही ले आया. मैंने अपनी पिज़्ज़ा का स्लाइस उठके मुँह तक पहुंचाया hi था की तभी सामने से मुझे दो लोग आते हुए दिखे और उन्दोनो को देख मेरी डबल गांड फैट गयी, मतलब उनको देख के फटी लेकिन उन्दोनो को साथ में देख के फैट क्या भेनचोद बिखर hi गयी :रेडफास:

(देखा कितना गाँडफाँड अपडेट है ये :कूल: )

अब दिक्कत की बात ये थी किस सामने से प्रीती आ रही थी और उसके साथ थी प्रिय (गाओं वाली) अब इन्हे देख के उतनी नहीं फटी जितनी उन्दोनो को हस्ते हुए बाते करते देख के फैट गयी. कहने का मतलब है की फैट के 64 हो गयी थी आज. उन्दोनो ने मुझे नहीं देखा था लेकिन मेरा खाना मेरे गले से निचे नहीं उतरने वाला था. मेरे मैं में आया की यहाँ से भाग जाओ और मैं खड़ा होक पीछे मुदा hi था की, भें की लौड़ी प्रिय बोल पड़ी क्युकी हमारे पास आ चुकी थी प्रीति के साथ.

प्रिय:- एक तुम यहाँ.

अब लोडे तो लग hi गए थे सोचा अब ढंग से लगवा लू.

मैं:- इंडिया hi है ये पागल लड़की, ऐसे क्यों रियेक्ट कर रही है.

प्रिय:- अरे तू इतने महीनो बाद मिला है तो खुसी तो होगी न तुझे नहीं हुयी क्या खुसी.

मैं:- हां हां बहुत ज्यादा खुस हु मैं तो :रेडफास: ( चुड़ैल, डायन, भूतनी)

प्रिय:- तो बैठ न भाग कहा रहा है.

मैंने उसकी बात पे हाँ में मुंडी हिल्लायी और एक बार अंजलि का फेस देखा जो की टेढ़ा मेधा, सदा सा था, फिर प्रीती का देखा, हाय! गुस्से में उसका रेड फेस कितना क्यूट लग रहा था.

प्रिय:- वैसे तुम इन लड़कियों के साथ क्या कर रहे हो.

अब मैं कुछ बोलता उससे पहले रिया बोल पड़ी.

रिया:- अरे ये प्रीती का बेस्ट फ्रेंड है और बहुत hi सरीफ इंसान है.

मैं (मैं में) :- लगता है पार्टी में नहीं आयी ये.

लेकिन उसकी बात पे अंजलि को खासी आ गयी और प्रिय भी मुझे घर के देखने लगी, मैं शर्मिंदा तो नहीं लेकिन बहुत ावक्वार्ड फील कर रहा था इस मोमेंट पे, भेनचोद मेरे साथ hi क्यों होता है ऐसा.

मैं:- मेरी छोड़ तू ये बता की तू दिल्ली में क्या कर रही है.

प्रिय:- प्रीती मेरी मौसी की लड़की है, तो हूँ कौसिन्स हुए और इसीलिए मैं यहाँ आयी हु अब कॉलेज भी यही रहके करुँगी.

( ये लो भेनचोद अंजलि और प्रीती काम थी जो ये तीसरी और आ गयी मेरी लगाने)

अब मैं कुछ बोलता उससे पहले मेरा फ़ोन बजा जो की आरव का था मैंने पिक किया लेकिन गलती से फ़ोन स्पीकर पे हो गया लेकिन मैं उसे स्पीकर पर से हटाता इतने में स्क्रीनलॉक हो गयी मतलब चुद गयी बसंती और आरव लोदु चिल्ला के बोलै

आरव:- भसडक, शाम के 6 बज रहे है, कहा गांड मरवा रहा है, शाम को मीटिंग बुला ली सुबह उन दोनों को थोक के हमारा दिमाग ख़राब कर दिया और अब खुद गायब है, बोल न भसडक कहा मरवा रहा है और एक तो इस हर्ष ने दिमाग का भोसड़ा कर रखा है और उप्पेर से तूने.

अब इतने अनमोल वचन सुनके वह बैठी सभी लड़कियों का सांप सूंघ गया हो, उनकी आँखे बहार आने को हो गयी थी लेकिन हमारे आरव भैया को अभी भी चैन नहीं मिला था इसलिए दुबारा बोल पड़े.

आरव:- अबे बोल न मादरचोद, क्या तेरी रखेल किरण के भोसड़े में घुस गया.

मैं:- आ रहा हु..

और मैंने फ़ोन जल्दी से कट किया और उन लड़कियों की तरफ बिना देखे सीधा निकल गया, आज तो लौड़े काग चुके थे, भेनचोद प्रीती मुझे क्या पता माफ़ भी कर देती सायद आगे जाके, लेकिन अब तो डिलडो से गांड मार लेगी मेरी और ये प्रिय न बता दे मेरे काण्ड उसे. फ़क!!!!

तो बे कॉन्टिनोएड 🙏🙏

 
अपडेट:-47


दिमाग छुड़ा पड़ा था सुबह से वो अब और ज्यादा चुद गया था, क्युकी इज़्ज़त नीलम हो गयी थी लड़कियों की भरी सभा में, अब मूड ऐसा हो रखा था बस किसीको फाड़ के रख दू लेकिन ये पॉसिबल नहीं था. इसलिए मैंने अभी अपना सारा फोकस मीटिंग पे सेट करने का सोचा और जल्दी से घर की तरफ निकल पड़ा. रस्ते में मैंने अंकल को कॉल किया.

अंकल:- खा पे है बीटा सब वेट कर रहे है तेरा.

मैं:- 11 मिनट में आया, एक काम करो कमिश्नर को भी बुला लो.

अंकल:- कमिश्नर को क्यों बुलाना है.

एक तो पहले hi खोपड़ी सत्की हुयी वो भी इन्ही की वजह और उप्पेर मुझे इनसे hi बात करनी पद रही है और ये भसडक मुझसे सवाल जवाब करके और गुस्सा दिलाना छह रहे है. :माध:

मैं:- लिसेन अंकल, मजाक के मूड में और सवाल जवाब के मूड में नहीं हु इसलिए कमिश्नर को बुलाओ बाकी खुद पता लग जाएगा आपको.

अंकल:- अभी बुलाता हु, तू हवेली पहुंचे गए, इतने में वो भी आ जाएगा, वैसे भी अपना hi आदमी है वो.

कॉल डिस्कनेक्टेड. मैंने अपने गुस्से की गठरी बंधी और शांति का मास्क पेहेन के हवेली पंहुचा, मुझे पता था वैसे भी मेरे वह पहुंचते hi सबके सब सवाल करने लगेंगे एंड ी हेट तहत सहित :रेडफास:

मैं हवेली पंहुचा तो मेरे साथ hi कमिश्नर भी पहुंच गया, हम दोनों ने साथ में hi कार पार्क की और बहार निकलते hi वो मेरे पास आया और बोलै.

कमिश्नर:- और कैसे हो एक साहब!

मैं इसे झांट बराबर भी नहीं जनता हु, थोबड़ा hi पहली बार देखा हुआ लग रहा है, लेकिन इसने देखा होगा मुझे सायद किसी पार्टी या मीटिंग में, और जिस तरह से ये चापलूसी कर रहा है उस हिसाब से मैं समझ गया की कम अंकल का पालतू कुत्ता है.

मैं:- ठीक हु अंकल, चलो अंदर चलो लेट हो रहा है.

कमिश्नर:- हां हां, क्यों नहीं.

उसके बाद हम दोनों अंदर आये तो हॉल में hi रॉकी मिल गया.

रॉकी:- जल्दी चल भसडक सब लोग कब से वेट कर रहे है.

कमिश्नर:- रॉकी लैंग्वेज.

रॉकी:- चुप साले. और एक वो....

कमिश्नर:- ये कैसे बात कर रहे हो मुझसे, ी ऍम फूकिंग कमिश्नर.

रॉकी:- हां तो क्या कर लेगा.

अब ये दोनों मुझे पक्का रहे थे इसलिए मैं hi बिच में बोल पड़ा थोड़ी तेज़ आवाज़ में

मैं:- तुम दोनों अंदर चलो, क्या ये लड़कियों की तरह लड़ने लगे.

उसके बाद हम मीटिंग रूम में आये तो सब लोग मुझे ऐसे घर रहे थे मानो अभी मार देंगे मुझे लेकिन होना इनसे लौड़ा कुछ नहीं है, बाकी सब घर बेशक रहे थे लेकिन शांत थे सब लेकिन राज की गांड में जो कीड़े वो चैन से कहा बैठ सकते है लेकिन आज कुछ ज्यादा बोल गए जोश जोश में.

राज:- ये क्या मजाक बना रखा है तुमने हम सब का, जब मैं करता है आते हो जब मैं करता है जाते हो, भूलो मत यहाँ सब तुमसे बड़े और पोस्ट में भी बड़े है और जो ये ऐटिटूड आ रखा है न तुममे वो सरेंडर की बदौलत है, अगर वो तुम्हे सहारा न देता तो उस ब्लास्ट के बाद रोड पे आ गए होते तुम. और ये कोई वक़्त है आने का, हम तुम्हारी तरह खाली नहीं बैठे है 100 काम होते है हमे, लेकिन मैं समझा किसी रहा हु, जैसा गन्दा खंडन है उससे और उम्मीद hi क्या की जा सकती है.

:wtf: ये बात उसकी सीधे दिल पे लगी थी पूरी नहीं बस लास्ट वाली लाइन सुरु की बात उसने जो भी बोली, उसके लिए तो ी don't गिव ा फ्लाइंग फ़क तो एनीथिंग कोण क्या बोल रहा है मुझे लुंड फर्क नहीं पड़ता लेकिन लास्ट तो किसी बुलेट की तरह घुस गयी थी और अब गुस्सा जो पहले से भरा हुआ तो वो दुगना हो गया और इसलिए मैंने सीधा अपनी गन निकली और उस राज की खोपड़ी पे रख दी, अब राज की तो गांड फैट गयी क्युकी एक तो वो खाली हाथ दूसरा उसे पता था मैं सटकली खोपड़ी हु और गोली चलते हुए बिलकुल भी नहीं सोचूंगा की सामने कोण है.

मेरी गन राज की खोपड़ी पे तन्ने से कई रिएक्शन हुए, पहला तो ये की सीबीआई वालो ने मुझे 5 गन तान दी जिसमे वर्षा, सारा, अजय, पायल, जॉन, अब इस रिएक्शन से एक और रिएक्शन और आरव, जानवी, आकाश, रॉकी, कमिश्नर ने उन 5 पे गन तान दी ( भेनचोद मूवी की शूटिंग चल रही हो जैसे :डी )

राज:- अईय्य कमिश्नर पूत योर गन्स डाउन , ी ऍम योर सीनियर एंड इतस माय आर्डर

कमिश्नर:- सॉरी सर नौकरी से प्यारी जान है.

अब राज की गांड फटी तो उसने एक बार अंकल को देखा और मैंने भी अंकल को देखा जो चुपचाप सोफे पे बैठ के हम सब को देख रहे थे.

राज:- एक ये तुम्हे बहुत महंगा पद सकता है, एक सीबीआई चीफ पे गन पॉइंट करना.

आरव:- ोू hello ज्ञान न दे अपने इन नमूनों को बोल गन डाउन करे और आज तो तेरे मुँह से एक के लिए एक बात निकल गयी है, अगली बार ऐसा न हो..

मुझे उनकी बाते झात नहीं समझ आ रही थी या फिर मैं सुन hi नहीं रहा था मैं बस एक तक राज को घूरे जा रहा था, और धीरे-2 मेरी ऊँगली ट्रिगर पे पहुंच गयी थी, मैंने जोर से ट्रिगर दबाया और सब शांत हो गए,

मैं:- सुन राज आज पहली और लास्ट बार बोल रहा हु आगे से मेरे काम में, मेरे बारे में कोई बात अपने मुँह से निकल दियो वर्ण ये जुबान तेरे हलक से निकल के पिछवाड़े में दाल दूंगा.

राज की तो गांड फैट गयी थी और इसलिए उसने बस मुंडी हिल्लायी और बहार चला गया, और उसके piche-piche पूरी टीम भी. एक्चुअली हुआ ये की मैंने अपना पूरा मूड बना लिया था उसे ठोकने का बेशक बाद में मैं खुद क्यों न निपट जाओ लेकिन जैसे hi ट्रिगर दबा तभी मेरे आँखों के आगे विशाल का फेस आ गया और मैंने इतना हरामी भी नहीं हु की अपने भाई के सर के उप्पेर से बाप का साया हटा दू इसलिए मैं गोली छत की तरफ चलायी थी.

आरव:- थैंक गॉड तूने उसे नहीं मारा, मेरी तो फट गयी थी कही थोक न दे तू उसे.

अंकल:- वैसे अब तुम लोगो का तमाशा ख़तम हो गया हो तो काम की बात करे, अब ये राज तो तुम्हारा साथ देने से रहा और प्रॉब्लम बढ़ती जा रही है.

मैं:- अंकल राज और उसकी टीम का मेंबर हमारे आसपास भी नहीं दिखना चाहिए, आपका दोस्त है दोस्ती निभाओ लेकिन मेरे काम के बिच में ना आये वो.

अंकल:- बीटा अब वो खुद hi नहीं आएगा लेकिन मैं उसे जनता हु वो तुझसे बदला जरूर लेना चाहेगा इसलिए संभल के..

मैं:- उसको छोड़ो और ये बताओ की अब क्या करना है.

अंकल:- देख मुझे नहीं पता क्या करना है वो काम तेरा है, पर प्रॉब्लम अब ये आ रही है की इलेक्शन सर पे है, ओप्पोसिशन ने हंगामा कर रखा है की दिल्ली का क्राइम रेट बढ़ता hi जा रहा है और हमारी सर्कार कुछ कर नहीं रही है. और अब तो भेनचोद सीबीआई की टीम भी हाथ से गयी अब क्या होगा

मैं:- कुछ नहीं होगा, वही होगा जो मैं चाहूंगा, आप बस पॉलिटिक्स सम्भालो असली क्रिमिनल नहीं पकड़ सकते तो रॉकी को बोलो लोकल गुंडों से क्राइम करवाए और फिर उन्हें अरेस्ट करो, मीडिया में दिखाओ की कितने बड़े क्रिमिनल है वो और फिर 3-4 दिन उनकी हाइप बढ़ाओ और फिर नया केस ले आओ और जब पहले वाला केस सब भूल जाए तो उन गुंडों को बहार निकालो और बोलो की आप की सर्कार ने उन्हें रिहा करवाया है तो उनका वोट भी आपका और आम जनता का तो होगा आपका.

अब सब लोग एक दम शांत हो चुके थे क्युकी एक 20 साल के लड़के ने बात hi ऐसी बोल दी थी, मुझे वैसे पॉलिटिक्स में झांट बराबर इंटरेस्ट नहीं है लेकिन कुछ तो करना hi था कुर्सी बचने के लिए और अभी फ़िलहाल हाइप है क्राइम की तो इसी की जरिये जनता का चुटिया काटना सही लगा.

अंकल:- वाह बहुत खूब बीटा! देखा मैंने कहा था न बलबीर लड़का बहुत तेज़ है.

कमिश्नर:- जी सर एक दम सच कहा था आपने, हम तो फैन हो गए इनके.

मैं:- फैन बाद में बनियेगा, लेकिन उससे पहले काम की बात करले.

बलबीर:- हां हां जरूर.

मैं:- देखो अभी तक जो एक कम्पलीट टीम थी वो गयी अब कुछ नहीं बचा, अंकल संभालेंगे पॉलिटिक्स रॉकी उनको गॉर्ड करेगा, बलबीर अंकल आप अपना डिपार्टमेंट संभालेंगे बचा कोण मैं, आरव, आकाश, जानवी, हम 4 लोग क्या उखाड़ लेंगे तो सबसे पहले कुछ बन्दे चाहिए मेरे को एक मेरे पास है बाकी तुम लोग सुग्गेस्ट करो.

Aakash/janvi/ आरव :- हमारे पास ऐसा कोई नहीं है.

मैं:- तुम तीनो से तो पूछा भी नहीं मैंने.

रॉकी:- देखो मेरा छोटा भाई सनी कर लेगा सर की सिक्योरिटी और मैं तुम लोगो को ज्वाइन कर लूंगा क्यों सर सही कहा न मैंने

अंकल:- हां ये ठीक रहेगा.

मैं:- बलबीर अंकल कल आप मुझे आपके डिपार्टमेंट के सबसे बेस्ट 6 ऑफिसर्स का रॉर्ड भेजेंगे उनमे से 3 सेलेक्ट कर लूंगा मैं और अंकल आप उन तीनो का यहाँ ट्रांसफर करवाओगे, और जो **** इस एरिया का लोकल इंस्पेक्टर है उसे कोई नहीं हटाएगा.

बलबीर:- हां मैं कल hi भेजता हु उनकी प्रोफाइल.

मैं:- अब आते है मैं बात पे देखो जो उस दिन पायल ने बताया था हर्ष के बारे में वो आधा सच था और आधा झूट तो रॉकी दुबारा से पता कर सबके मारे में बिलकुल आराम से कोई जल्दी नहीं है. और उस्मान हमारा पहला टारगेट है तो जिसको जितना उसके बारे में पता है अभी बोल दो.

रॉकी:- भाई उस्मान हर्ष के अंडर काम करता है और दिल्ली के हर छोटे क्राइम के पीछे वही होता है, मतलब उसके hi लोग होते है, दिल्ली के आधे से ज्यादा गुंडे उसके लिए काम करते है, वो बहुत काम बहार निकलता है और रहता कहा है किसी को नहीं पता सब काम फ़ोन पे hi होते है उसके.

मैं:- नीस और कुछ पता है किसी को.

बलबीर:- एक बात है सायद किसी काम की हो तुम्हारे.

मैं:- बता दो क्यों मैं में रख के बात की अहमियत बढ़ा रहे हो.

बलबीर:- अभी थोड़े दिन पहले पुलिस ने 6 कोठो पे राइड मारी थी जिनमे से 3 कोठो की धंधे वलियो को उस्मान के आदमी ने छुड़वा लिया था.

मैं:- ग्रेट और पुलिस ने छोड़ दिया.

बलबीर:- ओप्पोसिशन के मला ने छुड़वाया था.

मैं:- कोई उन तीनो कोठो की डिटेल चाहिए.

बलबीर:- दो का पता तो कल बता दूंगा लेकिन एक कोठा तो यहाँ पास में है न पुष्प का उसका hi है.

मैं:- हम्म, अब एक और ज़रूरी बात सुनलो, उस्मान बहार निकलता नहीं मतलब उसे पकड़ना बहुत मुश्किल है और उसके बारे में पता लगाना भी बहुत मुश्किल है, लेकिन उस तक पहुंचने का सबसे आसान रास्ता है हर क्रिमिनल एक्टिविटी चोरी से लेके रपे तक सब केसेस मुझे चाहिए आगे से जब दिल्ली में क्राइम वो करवाता है तो ुस्तक पहुंचने का तरीका भी यही से hi है, सुरु से hi सुरु करना होगा.

बलबीर:- ठीक है बीटा, मैं और सर करते है कुछ.

मैं:- चलो आप लोग बात करिये इस पार हम चलते है.

उसके बाद मैं, आरव, जानवी आकाश बहार आ गए हॉल में. आकाश अपने घर चला गया, जानवी किचन में चली गयी और मैं भी बहार जाने को हुआ तो आरव बोल पड़ा.

आरव:- अबे अब कहा चल दिया.

मैं:- गर्मी मिटने.

उसके बाद उसने मुझे स्माइल की और वो अंदर को गया और मैं बहार को, मैंने कार निकली और पुष्प के कोठे की तरफ मोड़ दी, वैसे मैं जाता रहता हु इसके कोठे पे लेकिन मुझे कभी शक नहीं हुआ की ये उस्मान से कनेक्टेड है और यहाँ एक लड़की है ज़रीना नाम की जो की पर्सनल है मेरी, मतलब जब भी जाता हु उसे बजा के आता हु.

खैर मैं वह पंहुचा, कार पार्क की और सीधा अंदर चला गया, वह खड़े गॉर्डस ने नहीं रोका मुझे क्युकी मैं कई बार आ चूका हु यहाँ.

मैं सीधा हॉल में गया तो पुष्प हॉल में सोफे पे बैठी थी, मैं भी उसके सामने जाके बैठ गया, वो भी मुझे देखके खुस हो गयी क्युकी मैं रोकड़ा hi इतना देता था उसे.

पुष्प:- ओह्ह्हू एक बाबू आज तो बड़े दिनों बाद दर्शन दिए.

मैं:- सुन मूड की माँ चूड़ी पड़ी है जल्दी से बता ज़रीना कहा है.

पुष्प:- ज़रीना तो नहीं है लेकिन तुम कहो तो कुछ नयी कालिया आयी है उनको बुलाऊ.

मैं:- न न मुझे कोई नया माल नहीं चाहिए, बस ज़रीना.

पुष्प:- अब वो है hi नहीं तो कहा से ले औ.

मैंने उसकी बात का जवाब नहीं दिया बस उप्पेर से निचे तक घुरा, वो भी क्या माल थी मतलब वो फिमो की तरह को बुद्धि और पान चबाने वाली मालकिन नहीं थी, बल्कि एक दम साफ़ सुथरी, सूंदर, औरत थी, अब मुझे अपनी फ़्रस्ट्रेशन के लिए कुछ तो करना hi था इसलिए उसे घूरने लगा और उसने भी मेरी आँखों की चुभन महसूस कर ली, इसलिए जल्दी से बोली.

पुष्प:- देखो एक बाबू गलत जगह निघा दाल रहे हो, यहाँ no एंट्री का बोर्ड लगा है.

Main:-paisa बोल कितना लेगी.

और मैंने अपनी जेब से एक नोटों का बंडल उसकी तरफ फेक दिया जिसे उसने उठाया और एक स्माइल देते हुए मेरे पास आयी और मेरा हाथ पकड़ के एक कमरे में ले गयी. कमरे में पहुंचते hi उसने मुझे बीएड पे धक्का दिया, रूम काफी साफ़ था सायद इसका पर्सनल था, उसने वो रोकड़ो का बंडल टेबल पे रखा और मुद के गेट बंद किया और उसने गेट बंद किया hi था की मैंने उसे पीछे से जकड लिया और उसके भरी भरकम बूब्स को ज़ोर से दबाने लगा,

पुष्प:- आह्ह्ह्ह, धीरे दबाओ भाग नहीं रही मैं.

और वो पलट के मुझे किश करने लगी बहुत ज़ोर से और मैं भी किसी शैतान की तरह उसके होठो पे टूट पड़ा, मेरा दिमाग काम करना बंद कर चूका था और वैसे भी मैं रंडियो के साथ ज्यादा फोरे प्ले नहीं करता इसलिए मैं उसको खुद से दूर किया और उसके ब्लाउज में हाथ दाल के खींच दिया, झट्ट से सारे बटन टूट गए, उसने भी जल्दी से फाटे हुए ब्लाउज को उतरा और होने हाथ से अपनी ब्रा खोलने को हुयी लेकिन मेरे अंदर के जानवर को तो सबर hi नहीं था इसलिए दोनों से उसके ब्रा की स्ट्राप पकड़ी और खींच के तोड़ दी और दुसरे कंधे के साथ भी यही किया.

Pushpa:-aahhh, नयी ब्रा थी ये इसे भी फाड़ दी.

Main:-ruk जा कुटिया अभी देख क्या क्या फाड़ता हु

इतना बोलके मैंने उसकी साडी जा पल्लू पकड़ के जोर से खींचा जिससे वो गोल गोल घूमने लगी और उसकी साड़ी भी अलग हो गयी अब मैं उसका पेटीकोट भी फाड़ता उससे पहले hi उसने अपना पेटीकोट और पंतय निकली और मैंने भी अपने सारे कपडे निकल और गन को बीएड के सिराहने पे रखा. और उसे पकड़ के बीएड पे लिटाया और उसके उप्पेर आके किश करने लगा, वो भी पुरे जोश में किश कर रही थी और अपने दोनों हाथ से मेरे लुंड को सेहला रही थी और मैं दोनों हाथ से उसके बूब्स दबा रहा था. जब उसकी सांस उखाड़ने लगी तो मैंने किश तोड़ी और उसके उप्पेर से खड़े होक उसके मुँह में लुंड दे दिया. वो अब लेती लेती मेरा लोढ़ा चूस रही थी, उसने थोड़ी hi देर चूसा होगा की मेरा पागलपन मेरे सर पे सवार होने लगा था और मुझे गर्मी निकालनी थी जल्दी इसलिए मैं उसके मुँह से लुंड निकला और उसको पेट से पकड़ के घोड़ी बनाया औरवो कुछ समझ या बोल पाती उससे पहले उसके छूट पे लुंड सेट करके फेछह से पूरा दाल दिया.

पुष्प:- आह्ह्ह्हह मर गयी माँ, ाःह हरामी बता के नहीं दाल सकता था.

लेकिन मुझपे उसकी बातो का कोई असर नहीं हो रहा था मैंने एक हाथ से उसके बाल पकड़ रखे थे और दुसरे हाथ से उसकी गांड को पकड़ के सत्ता सत्ता शॉट मारे जा रहा था और वो बस आह्ह्ह्ह, अह्ह्ह्हह, आआह्ह्ह, और ज़ोर से लौड़ा लहसुन किये जा रही थी 20 मिनट बाद मेरे सुर की नशो में खून की रफ़्तार बढ़ गयी, मुझे उस कमरे की हर एक चीज़ महसूस हो रही थी और मुझे पता था की मैं अब झड़ने वाला हु इसलिए मैं उसे पलटा और वापिस उसकी छूट में लुंड डालके छोड़ने लगा.

Pushpa:-aaahhhh हरामी रुक जा कंडोम भी नहीं पहना तूने, आअह्ह्ह्ह.

Main:-drugs,

Main:-drugs,.

मैं:- ड्रग्स,

पुष्प:- ahhhhh,ahhhh,ahhhh धीरे आआह्ह मैं गयी

और वो झड़ने लगी मैंने भी 5-6 शॉट खींच के मारे और फिर उसकी छूट में hi पिचकारी छोड़ दी और फिर उसके उप्पेर hi लेट गया, और धीरे, धीरे बड़बड़ाने लगा

Main:-drugs! ड्रग्स!

मैं अपना एक हाथ टेबल के पास ले गया और वह से अपनी गन उठायी और उसको धीरे धीरे अपने पास ले आया और फिर पुष्प की छूट से लुंड निकला और उसकी छाती पे बैठ के उसके मुँह में लुंड दाल दिया .

मैं:- साफ़ कर इसे.

उसने मेरा लुंड साफ़ किया और मैं उसकी चेस्ट पे hi बैठा रहा तो वो बोली.

पुष्प:- खड़ा हो चुचो में दर्द हो रहा है मादरचोद, एक तो कंडोम नहीं पहना और उप्पेर से अंदर hi माल गिरा दिया भादवा कही का अब नज़र क्यों झुका राखी है.

एक्चुअली मैं उसकी चेस्ट पे बैठ के निचे को घर रहा था लेकिन उसकी इस बात से मेर नज़र उठी और मैं उसकी आँखों में देख के बोलै

मैं:-

"मेरी झुकी नज़र में हर अदा,

तुझे कह रही है माँ छुड़ा"

और गन उठा के सीधा उसकी खोपड़ी उदा दी. ेव्वव्व! :युक:

तो बे कॉन्टिनोएड 🙏🙏



Writter's नोट:- देखो मुझे सेक्स सन नहीं लिखने आते और मैं यहाँ भी नहीं लिखता लेकिन सन में रिक्वायर्ड था तो काम चलौ सा लिख दिया, डिटेल में लिखना नहीं आता तो उसके लिए सॉरी 😐
 
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