My Complete Intentions - The Beginning - Page 2 - SexBaba
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My Complete Intentions - The Beginning

:थैंक्स: बरोथेर फिर योर ब्यूटीफुल रिव्यु

आँखे तरस गयी थी ऐसा रिव्यु देखने के लिए

एक प्रमुख तो है लेकिन वो हीरो नहीं है न hi विलन है क्युकी उसमे हीरो वाली एक क्वालिटी भी नहीं है, हां वो थोड़ा इमोशनल है लेकिन उसको खुद के इमोशंस छुपाना और दूसरो के इमोशंस के साथ खेलना बहुत अचे से आता है.

विवेक की बेहेन के सुसडे का रीज़न जो अभी दिखाया वो तो बस जो लिखा है वो दिखाया सच क्या है वो आगे पता लगेगा, इस बात पे तो एक को भी यकीन नहीं है की इतने छोटे से रीज़न पे वो सुसडे करेगी.

ी ऍम नूब राइटर बरोथेर एंड थांग्स अगेन फॉर अप्प्रेसिअशन

ी होप आपका साथ एन्ड तक बना रहेगा. :पीस:
 
अपडेट:-6 ( रिकवरी )

मुझे रूम में छोड़ के विवेक अपने घर चला गया फ्रेश वगैरह होने और सायद वो रात को ठीक से सोया नहीं था तो सोना भी होगा उसे, और उसे अपने घर पे होना भी चाहिए इस वक़्त उसके पेरेंट्स को उसकी जरूरत है.

मैं लेता हुआ ये सब सोच hi रहा था की वो औरत मेरे रूम में आयी.

औरत:- बीटा कुछ चाहिए हो तो मुझे आवाज़ दे दे देना .

मैंने हां में मुंडी हिल्ला दी, पूछना तो चाहता था पर पूछा नहीं सोचा जाने दो अपने आप पता लग जायेगा.

मैंने दिन में खाना और मेडिसिन खाये जो उस औरत ने hi दिए थे (ऑब्वियस्ली वो hi देगी मेरी गांड में दम नहीं था खड़ा होने का भी). मैं अपने बापू के बारे मैं सोच रहा था की एक बार भी मिलने क्यों नहीं आया वो, खैर जाने दो मुझे घंटा फर्क नहीं पड़ता. ये सब सोचते सोचते कब आँख लगी पता hi नहीं चला.

"लौड़े खड़ा होजा ड्रग्स लेके सोया है क्या"

"अबे उठ न भसडक"

मेरे कानो में ये आवाज़ गुंजी जब मेरी आँख खुली तो और सामने देखा तो विवेक खड़ा था.

मैं:- क्यों चीला रहे है लोदु, सोने दे न अभी तो सोया था.

विवेक:- तू 8 घंटो से सो रहा है ड्रग्स लिए है क्या?

मैं:- ड्रग्स तू छोड़ के गया था यहाँ या तेरा बाप.

विवेक ने मुझे घुरा, मैंने भी उसे घुरा.

मैं:- घर मत मुझे बाथरूम लेके चल मूतना है मुझे.

विवेक:- युक्क मैं नहीं लेके जा रहा .

मैं:- और कोण ले जायेगा फिर, लेके चल भसडक नहीं तो यही मूट दूंगा.

विवेक कुछ नहीं बोलै बस मुझे उठा के बाथरूम में लेके गया और मैं अपनी टंकी खली की.

मैं बीएड पे लेता था और विवेक मेरे सामने बैठ के मुझे सूप पीला रहा था रात का समय था, वो आज घर नहीं जाने वाला था क्युकी रात को मुझे उसकी जरूरत पद सकती है.

विवेक:- वैसे तू अपनी नयी माँ से मिला.

ये लगा मुझे एक और झटका, फूक्कखकक! क्या बोल रहा है बे ये बस माँ इस नाम से hi नफरत है मुझे.

मैं:- ये कब हुआ और क्यों और मेरी इज़्ज़ज़त के बगैर कैसे हुआ.

विवेक:- पहली बात ये 3 दिन पहले हुआ, दूसरी बात ये तेरी दादी की डेथ और तेरे बाप के बुढ़ापे के प्यार की वजह से हुआ, और तीसरी बात तू मुखिया नहीं है घर का तेरा दादा है और बुड्ढे ने इज़्ज़ज़त दे दी क्युकी घर को एक औरत hi संभल सकती है.

मैं कुछ नहीं बोलै बस इस बारे मैं सोचता रहा, विवेक ने भी कुछ नहीं बोलै सायद उसे मेरी हालत का अंदाज़ा था सायद नहीं उसे यक़ीनन अंदाज़ा था.

थोड़ी देर बाद मेरे दादा मेरे पास आये वो कुछ बोलते उससे पहले मैं hi बोल पड़ा.

मैं:- उस औरत को बोल देना मेरे से दूर रहे और उस छोटे बचे को भी, मैं उसे माँ नहीं मंटा और न मानूंगा.

दादा:- ठीक है बोल दूंगा, तू कैसा है अब और मेरी बात माने तो तू इनसब से दूर रह तू दिल्ली पढ़ ले, मैं तेरा एडमिशन वह के अचे स्कूल में करवा दूंगा.

मैं:- पहली बात मैं बिलकुल ठीक हु और दूसरी बात मैं कही नहीं जा रहा और तुम्हारे पास इतने पैसे कहा से आ गए.

दादा:- वो मैं तुझे बताना जरूरी नहीं समझता.

और ये बोल के वो चले गए और विवेक अंदर आ गया.

मैं:- कल से काम पे लग जा, जो मैंने बोलै था वो कर बस इनफार्मेशन निकल दूर से गलती से भी भिड़ने की न सोचियो किसी से.

विवेक:- देख एक बार फिर सोच ले.

मैंने उसे घूरा और वो समझ गया की डिसिशन लिया जा चूका है.

खैर उसके बाद कुछ नहीं हुआ मैं मेडिसिन के नशे में सो गया, बस क्या दे दिया उस चुटिया डॉक्टर ने इतनी नींद आ रही मुझे.

अब ये पूरा वीक मैंने रिकवरी मैं लगा दिया और विवेक ने उनके इनफार्मेशन निकलने मैं, उसने बहुत कुछ पता लगा लिया था जो बहुत शॉकिंग था उसके लिए उसने मुझे बताना चाहा पर मैंने hi मन कर दिया क्युकी मैं अभी अपने मंद को पूरी तरह रेस्ट देना चाहता था.

इस पुरे वीक में हर दिन शामे hi गुज़रा सुबह लेट उठना विवेक के सहारे चलना एक्सरसाइज करना हलकी फुलकी सुरु में दिक्कत हुयी लेकिन लास्ट डे तक मैं खुद से चल पा रहा था वो भी ठीक से रिब्स भी रिकवर हो चुकी थी घुटने और कन्धा भी फिक्स थे बॉडी पे निशान थे लेकिन स्टिल हैंडसम था मैं, बस दिक्कत थी तो एक की मेरे सर मैं कई बार पैन उठता था जो ुणबीरबले होता था और ऐसा तब होता जब मैं सिगग्रेटे और दारू के बारे में सोच रहा हु.

मेरे मन करने पर वो औरत जो मेरी सो कॉल्ड माँ थी वो नहीं आयी मेरे पास लेकिन उसका लड़का आता था 3 टाइम मेरे को खाना देने.

और मैं चाहते हुए भी उसको मन नहीं कर पा रहा था क्युकी उसके चेहरे की मासूमियत देख के मुझे अपने भाई की याद आ जाती थी ( उस भाई की जो सायद मुझे जनता भी न हो)

वो औरत का तो पता नहीं कैसी थी लेकिन वो लड़का बहुत मासूम था, वो मेरी तरफ हमेशा आशा भरी नज़रो से देखता था की मैं उससे बात करू या कुछ बोलू या उसे कुछ बोलने दू, लेकिन मैं तो ठहरा पत्थर दिल इंसान मुझे क्या फर्क पड़ता है किसी की मासूमियत से या पड़ता है, सायद इसका जवाब भी मेरे पास नहीं है या फिर मैं खुद से hi झूट बोलता रहता हु, अपने इमोशन का खून करना कोई मुझसे सीखे लेकिन मुझे पता था की इन सब लोगो और इमोशंस के चक्कर में फसा तो लाइफ में आगे नहीं बढ़ पाउँगा, यही सबकी तरह अटक के रह जाऊंगा और वो hi आर्डिनरी लाइफ हो जाएगी मेरी भी जो आज के टाइम हर इंसान जीने की कामना करता है भगवन से लेकिन मैं उनमे से नहीं हु, मैं कोई कामना, ख्वाब और प्राथना नहीं करता किसी से मैं अपने इंटेंशन रखता हु और उनको पूरा करने का दम भी, मुझे पता है की मैं अपने सरे इंटेंशन पुरे कर लूंगा चाहे कितनी hi बार हारना क्यों न पड़े मुझे लेकिन मुझे कोई रोक नहीं पायेगा.

मैं आगे कुछ ज्ञान भरी बाते सोचता इससे पहले मेरे कानो में कुछ मीठे सब्द पड़े.

"यहाँ क्या कर रहा है चूतिये"

शाम का टाइम था संडे का दिन था मैं सूरज को डूबते हुए देखके अपने दिमाग में ज्ञान की बाते सोच रहा था की मेरे पीछे से विवेक ने मुझे ये वर्ड्स बोले थे.

मैं:- तू कब आया बे.

विवेक:- अभी आया हु बे दीखता नहीं, वैसे कल तो स्कूल चलेगा न.

मैं:- हां चलूँगा कल स्कूल.

विवेक :- तो अब इनफार्मेशन दू तुझे क्युकी ऐसी बाते है जो मैं अपने अंदर नहीं पचा पा रहा हु.

मैं:- नहीं अभी नहीं कल स्कूल से आने के बाद डिसकस करेंगे.

विवेक:- ठीक है. तो एक और बात सुन ये आर्डर है तेरे दादा का की कल से तेरा भाई भी तेरे से साथ स्कूल जायेगा.

मैं:- हेल्ल्ल न्यू ! बिलकुल भी नहीं जाऊंगा किसीको साथ लेके, बस बॉडीगार्ड नहीं हु मैं जो उसको साथ लेके जाऊंगा बस ऐसी तैसी करवाए वो अपनी.

विवेक:- तू इतना पत्थर दिल इंसान कैसे हो सकता है बे, वो बचा है और कितना मासूम और प्यारा है.

मैं:- सुन लौड़े ज्ञान देना है तो निकल ले यहाँ से.

विवेक ने मुझे घुरा और चला गया क्युकी वो बेहेस नहीं कर सकता था मुझे.

अब मैं बता दू मैंने इस बचे को साथ ले जाने से मन क्यों किया, एक मिनट पहले तो इसका नाम hi बता दू कब तक बचा बचा बोलूंगा, तो इसका नाम है मोनू, कैसा नाम है बस कोण रखता है ऐसा नाम. खैर इन दोनों के बारे में बता दू उस औरत का नाम अनीता है और वो पास के गांव की एक विधवा औरत है मेरे बाप से क्या देख के प्यार करा मुझे पता नहीं लेकिन मेरी नज़रो में अभी तक ये सरीफ लगी मुझे लेकिन ी don't केयर अबाउट एनीवन.

वैसे इस बचे को ले जाने से इसलिए मन किया क्युकी मैं नहीं चाहता इसको मेरी वजह से कुछ हो कल को पता नहीं कोण दुश्मन बन जाए मेरा और वो इसको मेरे साथ देखके इसे नुक्सान न पंहुचा दे, मुझे इसकी फ़िक्र तो नहीं थी या थी पता नहीं मुझे बस मैं नहीं चाहता था की इस परिवार को मेरी वजह से मातम मानना पड़े.

मैं ये सब बकचोद बाते सोच रहा था की एक आवाज़ और आयी मेरे कानो में जो की बहुत प्यारी और मासूम थी, बस मैं तो हैंग हो गया आवाज़ सुनके मेरे कान ऐसी आवाज़ और ये वर्ड सुनने के लिए तरस रहे थे.

मोनू:- भैया निचे चलो दादाजी बुला रहे है आपको.

मैंने उसे कुछ नहीं बोलै बस हाँ में मुंडी हिल्ला दी और मैंने मेरे ऐटिटूड में आके नहीं किया, एक्चुअली मेरी आवाज़ hi नहीं निकली इसके सामने नर्वस सा हो गया मैं की क्या बोलू इसे.

खैर मैं उसके पीछे पीछे निचे आया और दादाजी से बात की, बात क्या की वो बस हिदायत दे रहे थे की ऐसा करना, वैसा करना, लड़ाई मत करना, मोनू का ध्यान रखना, ब्लाह ब्लाह. ( मेरा लौड़ा फॉलो करेगा ये बाते यहाँ मैं बन्दों को टपकने का प्लान बना रहा और यहाँ सराफत की सिख दी जा रही) खैर मैंने सुन ली क्युकी मेरा मूड नहीं था बेहेस करने का.

बाकि टाइम मैंने कुछ नहीं किया बस फ़ोन उसे किया, डिनर किया और कल के दिन के बारे में सोच के सो गया क्युकी कल दिन से नयी लाइफ स्टार्ट करने वाला था मैं जो मैंने खुद चुनी है.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
फर्स्ट ऑफ़ आल :थैंक्स: फॉर योर ब्यूटीफुल एंड वैल्युएबल रिव्यु ji.☮️

:सिघ: ऐसा बिलकुल भी नहीं है वो, न आवारा है न कमीना हरामी ये सब है, वो टुटा हुआ है अंदर से उसके अंदर एक दर है बचपन का की कही वो वापिस से इन रिश्तो में बांध न जाए और अगर बांध गया तो वो फिर से वैसे हुआ तो वो बिखर जायेगा, ये हसी मकाक गली गलोच सिर्फ दिखावा असल में उसका करैक्टर मिस्टीरियस है.

वासना बिलकुल भी नहीं है, इस स्टोरी में और ये बाते आजकल हर तीसरा लड़का करता है अपने दोस्त के साथ, एक में हवस नहीं है बस वो विवेक का साथ देने के लिए ये सब बोलता है और रही बात प्रिय की तो उसका तो कोई खास एक्सिस्टेंस hi नहीं है, नए चरक्टेर्स आएंगे आगे और बहुत आएंगे. जो लम्बा चलेंगे

नॉट काइंड ऑफ़ बगावत बस वो किसी के सामने झुकना नहीं चाहता, वो किसी के इशारो पे नहीं चलना चाहता, वो खुद का रास्ता चुन के उसपे आगे जाना चाहता है और यही उसकी इंटेंशन है और वो इन्हे पूरा करेगा लेकिन देखने वाली बाते ये है की वो करेगा कैसे.

एप काइंड ऑफ़ अरमान बोल सकते हो बूत बसीकली हे इस उप्ग्रडाबले वर्शन ऑफ़ अरमान ये उसके जैसा तो है लेकिन खतरनाक उससे कही ज्यादा है, इसे फर्क नहीं पड़ता की कोण मारा या कोण जिया इसे बस अपने आप से मतलब है एंड ी थिंक यही डिफरेंस है इस स्टोरी में , और यही डिफरेंस सोच के मैं लिख रहा हु एंड इसका अंत अरमान से भी बुरा होगा :हिंट:

Btw थैंक्स अगेन वैसे तारीफ से ज्यादा बजती करदी

मैं फिरसे कहना चाहूंगा हीरो से होप न रखे क्युकी वो और हीरो जैसा ाचा नहीं है, और हीरो को लेके मुझे गालिया न देना क्युकी यही डिफरेंस है इस स्टोरी में और दूसरी स्टोरी में.

:वेटिंग: फॉर मोरे रिव्यु
 
:थैंक्स: भाई फॉर योर ब्यूटीफुल एंड वैल्युएबल रिव्यु. :यूरोक:

एक मंद बूढी करैक्टर नहीं है भाई वो ये सब सोच समझ के कर रहा है, वो खुद सबसे बड़ा बनना चाहता है लेकिन वो फ्रंट फुट पे नहीं खेल सकता इसलिए वो उनको खुद के पीछे लगा रहा है ताकि ये न लगे की एक उनके पीछे पड़ा है , अगर एक चाहता तो हाथ जोड़ के माफ़ी मांगके निकल जाता, बूत वो किसी के आगे झुकेगा नहीं ये उसके प्लान का hi part समझ लो बेशक

दादी की मौत का दुःख तो एक को अंदर से बहुत था लेकिन उसने ऐसा दिखाया नहीं, और ये फॅमिली जो बानी है नयी ये ज्यादा दिन नहीं चलने वाली और न एक इसे फॅमिली मंटा है क्युकी उसके लिए इमोशंस फॅमिली ड्रामा सब फेक है.

स्टोरी में तरुण आना स्टार्ट हो गए है और स्टोरी अब अपनी थीम की तरफ बढ़ रही है, खुशाल बदला लेने के लिए इन सब को नहीं बिध रहा वो खुद इनसे बड़ा बनना चाहता है ये तो उसे बहाना मिल गया विवेक को उसे करने का, और वो क्रिमनल नहीं क्रिमिनल्स का बाप बनेगा :हिंट:

Btw अगेन :थैंक्स: बरोथेर
 
अपडेट:-7 ( स्कूल + प्लानिंग )

सुबह जब आँख खुली तो सामने देखा की मोनू मुझे उठा रहा है, नोर्मल्ली कोई मुझे उठाये तो मुझे गुस्सा आता है लेकिन इसका फेस देखके गुस्सा गायब हो गया मेरा. मैं खड़ा हुआ और बाथरूम में घुस गया बिना उसे कुछ बोले और बहार निकला तो एक दम माल लग रहा था कई दिनों बाद.

निचे आया खाना खाया और मोनू को साथ लेके निकल गया बस स्टैंड की तरफ, लेके तो नहीं आता इसको पर हमारे दादा ने बोलै है तो मान लिया क्युकी उनके पैसो पे hi तो पल रहे है हम. खैर हम दोनों चलते चलते बस स्टैंड पे पहुंचे रस्ते में न मैं कुछ बोलै और न वो.

मैंने उसे पनवाड़ी की दुकान के बहार बिठाया उसके उम्र के बचो के पास और खुद अंदर जाके एक सिगग्रेटे मांगी, सिगग्रेटे जला के पिने लगा तो ऐसा लगा जैसे जन्नत मिल गयी हो कई दिनों बाद इसकी hi तो कमी महसूस हो रही थी बस,

मैं:- जा मोनू नाम का लड़का बैठा है बहार उसको एक चिप्स का पैकेट दे आया.

छोटू कुछ नहीं बोलै बस हाँ में मुंडी हिल्ला के चला गया. मैं भी सिगग्रेटे के काश खिचके धुएं को चले का आकर देते हुए सोचने लगा जो मैंने आज सुबह से नोटिस कर रहा था की मेरे से कोई बात क्यों नहीं कर रहा आज रस्ते में मिलने वाले बचे भी अजीब नजरो से देख रहे थे और छोटू ने भी आज कुछ नहीं बोलै मुझे.

मेरी सिगग्रेटे ख़तम होने के साथ मैंने अपनी सोच को भी ख़तम किया और बहार आया तो विवेक आता हुआ दिखा, कुछ भी हो मेरा लोंदा स्मार्ट है पर मुझसे काम :कूल:

विवेक:- और कैसा है?

मैं:- गफ न बन मेरी.

विवेक:- चल बे गे नहीं हु तेरी तरह.

मैं:- ये सब छोड़ तू ये बता की ये लोग मुझे अजीब नज़र से क्यों देख रहे.

विवेक:- wtf! तुझे रीज़न नहीं पता, भसडक तू इस एरिया के मला के लड़के से पिता है सब इसलिए दर रहे की तेरे साथ रहे तो उन्हें न धार ले कोई.

मैं:- तुझे दर नहीं लगता फिर.

विवेक:- तेरे लिए जान दे सकता हु मैं.

वो थोड़ा सेंटी होने लगा था इसलिए मैं hi बोल पड़ा.

मैं:- चल बे गांडू बस आ गयी.

विवेक ने मोनू का हाथ पकड़ा और उसे बस में ले जाके उसकी क्लास के बचो के पास बिठा दिया और हम दोनों असुसुअल बैक सीट पे चले गए जहा कोई नहीं था, होता तो गांड तोड़ दी जाती.

प्रिय आज भरी माल बांके आयी थी लेकिन वो मेरी तरफ देख भी नहीं रही थी और ये बात विवेक ने भी नोटिस कर ली.

विवेक:- रोहन ने सेट कर लिया इसे.

खुशाल:- गांड मरए अपनी, मैं उसकी बेहेन को सेट कर लूंगा.

विवेक:- वो तेरी तरफ देखे भी न.

मैं:- अबे देखता जा कैसे उसे पता के पलके छोड़ता हु.

विवेक:- लीचर साला.

स्कूल बस में एंटर हुयी और हम लोग गए प्रेयर में, करेक्शन मैं नहीं गया अकेला क्युकी मैं क्लास में बैठा था क्युकी हिम्मत न थी मेरी इतनी देर खड़े होने की.

क्लास में अकेला बैठा सोच रहा था की बस इज़्ज़त दुब गयी उस दिन और उस इज़्ज़त को दुबारा उठाने के लिए एक काण्ड करना पड़ेगा और उस रोहन को दुबारा पेलने से ाचा और क्या होगा. लेकिन इस बार उसके सामने नहीं जाऊंगा बस.

मैंने अपने दिमाग में रोहन को पेलने का प्लान बना लिया और जितनी देर में प्लान बनाया उतनी देर में सभी स्टूडेंट्स क्लास में आ गए थे.

रोहन ने मुझे देखा और मैंने दोनों की आँखे मिली लेकिन मेरी आँखों की इंटेंसिटी वो झेल नहीं पाया, लौड़ा झेलेगा वो, वो तो उस दिन इतने लड़के थे और पीछे से मार दिया नहीं तो भूत बना देता इसको मार मार्के.

खैर वो झाँटु अमित आया और पढके निकल लिया, मैं भी शांति से पढ़ रहा था क्युकी बहुत पीछे हो चूका था मैं पढ़ाई में,

इसलिए ऐसे hi क्लास निकली बाकी की और कूंच होते है मैंने विवेक को अपना प्लान समझाया और उसने दीपक को बताया ( दीपक वही चेला अपना)

मैं और विवेक जल्दी से बाथरूम में गए विवेक ने अपना बैग उठा लिया था खली करके, अब हम दोनों बॉयज टॉयलेट में घुस गए,

मैं गेट के पीछे चुप गया बैग पकड़ के और विवेक गेट के सामने खड़ा हो गया.

बस इंतज़ार था रोहन के आने का और वो पल भी जल्दी आ गया.

दीपक रोहन को ले आया था और एक्टिंग भी सही कर रहा था साला पक्का टिकटोकेर है.

दीपक:- रोहन भाई ये मेरे साथ लड़ाई कर रहा है देखो इसे,

रोहन ने भर से विवेक को देखा तो एक मं के लिए तो रुका विवेक का सरीर देख के और विवेक ने मुँह पे रुमाल बांध रखा था ताकि भसदक़ा पहचान न ले, लेकिन फिर अपनी छोड़ में अंदर आया टॉयलेट के, और वो जैसे hi अंदर घुसा मैं तो वेट hi इसी चीज़ का कर रहा था.

पहना दिया उसके सर पे बैग और फिर बस धो दिया उसे हम तीनो ने मिलके अब मेरे तेज़ दिमाग ने एग्जिट प्लान भी बना रखा था बिना दिखे जाने का, दीपक तो बोल देता की मुझे नहीं पता कोण थे और उसने हमे देखा नहीं था.

मैंने उसे गार्डन से पकड़ के बहार लाया दूर के सामने वह कोई नहीं था देखने वाला मैंने एक हाथ से बैग पकड़ा एयर खींच के एक किक दी उसके पेट में वो पीछे को गिरा और बैग निकल गया लेकिन वो मुंडी उठा के हमारा फेस देखता इतने में विवेक ने दरवाज़ा बंद कर दिया और हम दोनों गोली हो लिए वह से, ये था हमारा प्लान बस उसे पता भी नहीं लगा कोण पेल गया और हमे ये भी पता था की वो हमारे पीछे नहीं आएगा क्युकी इतना तो पेल दिया था हमने उसे की वो 10 मिनट तक कुछ न कर सके.

हम दोनों क्लास में पहुंचे विवेक ने अपने बैग में किताब डाली और फिर हम दोनों सरीफ सकल बना के बैठ गए जैसे कुछ किया न हो.

10 मं बाद लंच ख़तम हुयी और रोहन क्लास में आया लंगड़ा के चल रहा था बिचारा फेस भी लाल हो रखा था, उसने एक बार हमारी तरफ देखा लेकिन हमारे इनोसेंट चेरे देख के वो चुपचाप बैठ गया.

बाकी के पीरियड्स पढ़ने में निकल गए हमने भी ज्यादा बकचोदी नहीं की और बस में भी शान्ति से घर को आ गए.

मैंने घर आके खाना खाया और मेडिसिन ली और लेट गया लेकिन फिर अचानक सिगग्रेटे पिने का मैं करने लगा मेरा और सिगग्रेटे का ख्याल आते hi और सिगग्रेटे न होने पे मेरे सर में भयानक दर्द होने लगा जो की मुझसे सहा ना जाए. इसलिए मैं खड़ा हुआ और डॉक्टर की बताई हुयी टेबलेट निकली जो उसने दर्द के टाइम लेने को बोलै था.

वो काम से काम 20 टेबलेट्स थी मेरे सर में इतना तेज़ दर्द था की मैंने उन 20 टेबलेट्स में से 10 निकली और सुखी hi जातक गया और ऊपर से पानी की बोतल उड़ेल ली मुँह में और बीएड पे धाम से गिर गया.

5 मिनट में दिमाग एक दम शांत हो चूका था और मेरी कब आँख लगी पता hi नहीं.

"उठ लौड़े कितना सोता है"

"अबे उठ न भसडक, टंकी पे नहीं चलना"

मेरी आँखे खुली तो मेरे कानो में आज फिरसे विवेक के प्यार भरे सब्द सुनाई दिए लेकिन मैं कुछ न बोलै क्युकी हमारा रोज़ का था ये सब.

विवेक:- तू ड्रग्स लेने लग गया क्या.

मैंने उसे घुरा और बाथरूम में जाके फ्रेश हुआ बहार आया आया तो विवेक कॉफ़ी का कप लिए बैठा था मैंने कॉफ़ी पि तो मजा नहीं आया क्युकी कॉफ़ी में कड़वाहट नहीं थी वो नशा नहीं था बस.

भेनचोद हर बार नशे के बारे में क्यों सोच रहा हु, खैर इन सब बातो को दरकिनार करके हम टंकी पे पहुंचे.

हूँ दोनों टंकी के उप्पेर बैठे थे आसपास कोई नहीं था हमारे जो हमारी बाते सुन सके, दोनों के हाथो में एक एक सिगग्रेटे थी जिसके काश खींच के हम धुएं को चले बना के उदा रहे थे.

मैं :- अब बता भसडक ा तो ज़ इनफार्मेशन.

विवेक:- तो सुन पर बिच में न बोलियों बिलकुल भी.

मैंने हां में मुंडी हिल्लायी और सिगग्रेटे फुक्ने लगा. सिगग्रेटे पिने में डबल मजा आ रहा था आज.

विवेक:- वो दोनों लड़के मला के hi लड़के है, दोनों hi दीदी के कॉलेज में पढ़ते थे एक उनकी क्लास में था और एक उनसे सीनियर, क्लास वाले से तो मिल hi चूका है जिसने तेरी गांड तोड़ी थी और जो दूसरा है वो कॉलेज का डॉन टाइप है एक तरीके से उससे पूरा कॉलेज डरता है, लेकिन अब आते है मैं बात पे, हुआ ये की उस छोटे वाले लोंदे ने दीदी को पर्पस किया तो उन्होंने मन कर दिया लेकिन वो कुत्ते की दम माना नहीं फिर पीछे पड़ा रहा तो दीदी ने उसे थप्पड़ मार दिया तो वो बोखला गया और दीदी से बदला लेने की सोचने लगा तब उसने अपनी एक दोस्त को दीदी का दोस्त बनाया और उसके जरिये दीदी को ड्रग्स की लत लगवाई और उसी नशे में उनकी वीडियो शूट की और सेक्स किया, रपे नहीं बोल सकते क्युकी दीदी ने साथ दिया था उनका भले hi नशे में हो, दीदी को अगले दिन से उनके क्लिप्स आने लग गए दोनों के साथ के और उन्होंने ड्रग्स देना भी बंद कर दिया दीदी को अब तुझे पता है बिना ड्रग्स किया होता है अब दीदी से सहा नहीं गया तो उन्होंने सुसडे कर लिया, और लेटर में झूट लिख दिया ताकि हम उनको गलत न समझे.

मेरे को गुस्सा आ रहा था बहुत ज्यादा तो नहीं लेकिन फिर भी बहुत ज्यादा इसलिए मैं कुछ नहीं बोलै और उसे आगे बोलने के लिए बोलै.

विवेक:- तो अब आते है मैं मुद्दे पे जो है इनकी इनफार्मेशन, ये लोग बहुत लीचर है बोले तो बहुत ज्यादा इस एरिया में ड्रग्स सप्लाई करते है पुलिस की नाक के निचे से, कॉलेज तो ठीक था लेकिन अपने स्कूल में ड्रग्स का धंधा चला रखा है सालो ने.

ये सुन के झटका लगा मुझे बस ड्रग्स का धंधा वो भी स्कूल में लेकिन मुझे इसकी उम्मीद थी क्युकी मैंने सेकंड डे को एक लड़की को रट हुए देखा था रिया के सामने और उसकी आँखों में एक डेस्पेरशन थी जो एक ड्रग एडिक्ट के आँखों में होती है.

विवेक ने आगे बोलना जारी रखा.

विवेक:- एक राजेश नाम का बाँदा है वो ड्रग्स लाता है दिल्ली से जफर का आदमी है, दिल्ली का सबसे बड़ा ड्रग डीलर है वो, सायद इंडिया का हो, हर संडे को ड्रग्स के आर्डर आते है जिन्हे ये राजेश नाम का बाँदा लेके आता है पर अपनी लिस्ट में तो ये है नहीं. तो सुन उस छोटे लड़के का नाम है देव और उस बड़े वाले का नाम है रोहित दोनों सैटरडे नाईट को ाव बार में मिलते है, वह भी ड्रग्स पार्टी hi होती है, और वो लड़की मला के दोस्त की बेटी है सोनल नाम है उसका वो सिक्योरिटी के साथ रहती है लेकिन सैटरडे को अपनी फ्रेंड्स के घर रूकती हो, एक नंबर की हरमन है ये.

मैं:- फर्स्ट ऑफ़ आल बता दू मला का हर बाँदा मेरी लिस्ट में है तो अब प्लान सुन, हमलोग सीधा बड़े पे हाथ नहीं दाल सकते तो पहले पकड़ते है स्कूल वाले को और इस सैटरडे को उस देव और सोनल को उठाते है, रोहित को अगली बार देखेंगे. उठाना कैसे है ये मैं बॉस में बताऊंगा, बस अभी तू फ़िलहाल प्रिय ले नज़र रख मुझे डाउट है उसपे वो कोई डर्टी गेम खेलने वाली है उसकी आँखों में साफ़ दिख रही थी मकरी और कल शाम को पुलिस स्टेशन चलेंगे.

विवेक ने अपनी मुंडी हिल्ला के मंजूरी दी और बोलै

विवेक:- बस कितना मजा आएगा न हमे ऐसे लीचर लोगो को मारने में.

मैं:- करेक्शन मारूंगा मैं तू बस इनफार्मेशन निकलेगा, और इसके दो रीज़न है तेरे माँ बाप का बस तू hi सहारा है अब और मैं नहीं चाहता की मेरी वजह से तुझे कुछ हो मेरा क्या है मैं तो मर गया तब भी किसी को दुःख नहीं होगा और मेरी कोई फॅमिली वमिली नहीं है.

विवेक कुछ नहीं बोलै बस हाँ में मुंडी हिल्ला दी क्युकी मैंने बहुत सीरियस होक ये बात बोली थी.

खैर हम दोनों ने थोड़ी और बकचोदी पेली आउट फिर घर आ गए रस्ते में मैंने एक पैकेट सिगग्रेटे ले लिया था ताकि दुबारा दर्द न सहना पड़े.

घर आके शावर लिया डिनर किया और अपने रूम में आके गेट बंद किया और सिगग्रेटे जलाई और किताब उठा के पढ़ने लगा, जब तक पढता रहा तब तक सिगग्रेटे चली, आखरी सिगग्रेटे के साथ किताब भी रख दी मैंने, बस पूरा पैकेट पि गया में एक साथ.

लेकिन सोचा अब सर में दर्द तो नहीं होगा लेकिन ये तो बस नाम लेते hi सुरु हो गया , और इस बार डिमांड थी उन मेडिसिन की मैंने जल्दी से निकली और दो टेबलेट जातक ली, हाश शान्ति मिली खोपड़ी में, मैं बीएड पे लेता और लेटते hi आँख लग गयी. इन दवाइयों में कुछ तो बात थी बॉडी को एक दम रिलैक्स कर देती थी बस कल के बारे में सोच कर सो गया.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
ऐसा लड़के का प्यार पर से भरोसा उठ जायेगा उसे नफरत हो जाएगी इंसानी रिश्तो उसके दिल में हमेसा दर रहेगा की कही ये भी ऐसा न निकले, ऐसा लड़का गुस्सा रहेगा सबसे नफरत करेगा सबसे और इसका खामियाज़ा भूतो को भुगतना पड़ेगा. मैं भी यही दिखाना चाहता था और बात बस आपने पकड़ ली :डोरे:

लड़का खुद गलत रस्ते पे नहीं जाना चाहता पर सिचुएशन के अकॉर्डिंग वो चला जायेगा, और रही बात ड्रग्स की तो वो आगे देखते है क्या होता है, और इन बड़े लोगो से उसे पन्गा लेना hi था क्युकी उसके इंटेंशन्स है दुनिया पे राज़ करने के सीधे रस्ते काट नहीं सकता बुरा रास्ता आसान नहीं , इंटेंशन तो पता है उसके बस देखने वाली बात उसकी जर्नी होगी की वो कैसे अपने इंटेंशन पुरे करता है जब सब उसके अगेंस्ट हो.

ये तो कुछ भी नहीं है नेक्स्ट part में बहुत हाई लेवल के चरक्टेर्स आने वाले है

Btw,

:थैंक्स: सर :बाउ:

फॉर योर लवली एंड वैल्युएबल रिव्यु

:यूरोक:
 
थैंक्स बरोथेर फॉर योर वैल्युएबल कमेंट

बूत ी ऍम सॉरी तो से आप अलग चीज़ो में गम हो गए हो, माँ छोड़ गयी ये तो बस o.ooo1% है स्ट्रोय का और ये इसलिए बताया था की दिखा सकू एक ऐसा क्यों बना. ये स्टोरी फॅमिली ड्रामा पे नहीं है भाई, ये है एक लड़के के इंटेंशन्स पे की वो कैसे पूरा करता है उन्हें जब सब उसके अगेंस्ट हो.

और वो पिता इसलिए है क्युकी सिचुएशन ऐसी थी ये कोई फंतासी या सुपरनैचरल स्टोरी नहीं चल रही की हीरो सब को पेल देगा, आईटी इस बेस्ड ों रियलिटी और रियलिटी में 20 बन्दों से 1 बाँदा पित्त hi है. बूत एक बहुत स्ट्रांग करैक्टर है आगे आगे वो और भी स्ट्रांग हॉट आजायेगा.

Btw अगेन थैंक्स ी होप आप ऐसे hi साथ बने रहे आउट स्टोरी को अलग नज़र से देखे :यूरोक:
 
अपडेट:-8 ( मंद फ़क)

सुबह जब सो के उठा तो आज सर थोड़ा भरी भरी सा लग रहा था, पता नहीं क्यों सोचा मेडिसिन ले लेता हु लेकिन देखा तो बस 2 hi बची है तो रहने दिया क्युकी जब दर्द होगा तब काम आएगी ये, मैं फ्रेश हुआ naha-dhoke रेडी हुआ. आज पुलिस स्टेशन भी जाना था अंजलि दीदी के केस के बारे में पता करने के लिए. वैसे मैं कोई पुलिस पे देपेंद नहीं था मैं तो बस देखना चाहता था की पुलिस दर की वजह से उसके खिलाफ नहीं जा रही या फिर उससे मिली हुयी है. अगर मिली हुयी है तो उसके अकॉर्डिंग प्लान बनाऊ नहीं तो अलग तरीके से हर चीज़ देखके चलना पड़ेगा क्युकी एक गलती उप्पेर पंहुचा सकती है.

मैंने बस स्टैंड पे जाने से पहले अपना फ़ोन उठाया तो उसपे प्रिय के मस्सग आ रखे थे hello, ही , बाबू सोना के मुझे वो मस्सग देखके हसी आ गयी की ये कितनी इनोसेंट है बिचारि है या फिर खुदको ज्यादा तेज़ समझती है.

मैंने मोनू को बस स्टैंड पे छोड़ा और विवेक के साथ बाइक पे स्कूल निकल गया. दरअसल हम दोनों ने अब बाइक से आने जाने की सोच ली थी क्युकी बस में कोई भी रुकवा के गांड तोड़ सकता है हमारी.

हम स्कूल पहुंचे और क्लास रूम में हो लिए क्युकी प्रेयर वगैरह का मैं न था क्युकी आज मूड थोड़ा ऑफ सा था चिड़चिड़ा टाइप और इसलिए मैंने विवेक को पहले hi बोल दिया की भाई बकचोदी न करियो नहीं तो गांड तोड़ दूंगा.

इसलिए आज का दिन शान्ति से गुज़रा स्कूल का बस एक चीज़ स्ट्रेंज थी जो की प्रिय लाइन दे रही थी मुझे और मैं भी न चाहते हुए दे रहा था.

हम दोनों छुट्टी होते hi पार्किंग में आये और बाइक निकल के पुलिस स्टेशन की तरफ दौड़ा दी.

15 मिनट में हम पुलिस स्टेशन पहुंचे क्युकी बाइक तुम्हारा भाई चला रहा था.

हम अंडर गए तो कुछ हवलदार टाइप लोग हमे देख के है रहे थे, हम और आगे जाने लगे तो एक बोलै

हवलदार:- बचो का काम न है यहाँ, चलो निकलो यहाँ से.

विवेक:- हमे इंस्पेक्टर से मिलना है.

हवलदार:- नहीं मिल सकते मैडम बिजी है.

विवेक:- मुझे मेरी बेहेन के केस के बारे में बात करनी है.

हवलदार:- जा कल आना बोलै न.

अब इस हवलदार का ज्यादा हो रहा था, इतना hi बर्दास्त होता है मुझसे नए लोगो की chak-chak बाज़ी सुनी नहीं जाती. और ये दो कोड़ी का हवलदार बाप बन रहा है.

मैं:- ऊऊऊओ इंस्पेक्टर मैडम.

मैं बहुत तेज़ चिल्लाया, इतना तेज़ की मेरी आवाज़ पुरे स्टेशन में गूंज गयी होगी. सब लोग अपना अपना काम छोड़ के हमारी तरफ देखने लगे.

मैं:- ोोोू मैडम सुनाई नहीं देता क्या?

हवलदार:- मेरे बाप क्यों चिल्ला रहा मैडम गुस्से वाली है, हमारी नौकरी और जाएगी.

मैं:- अबे घोंचू वो इंस्पेक्टर है बस वो लौड़ा न उखाड़ पायेगी तेरा. मर्द बन.

मेरे इस मोटिवेशनल बात कोबसउनके उसकी सिकुड़ी हुयी चाहती चौड़ी हो गयी और वो साइड हो गया.

तभी एक केबिन में से 24- 25 साल की भरी माल निकल के आयी, गोरी चिट्टी मध्यम हैघट, देखके hi लुंड खड़ा करदे लेकिन मैं अभी उस मूड में नहीं था लेकिन विवेक भसदक़ा अपनी लार टपका रहा था, मैंने उसके चेस्ट में कोहनी मारी तो वो शांत खड़ा हुआ.

इंस्पेक्टर:- कोण है बे? ओह्ह्ह तो तुम हो, लड़के मैंने तुम्हे बोलै था न की तुम्हारी बेहेन के बारे में कुछ पता लगा तो जरूर बताएँगे.

विवेक कुछ बोलता उससे पहले मैं बोल पड़ा

मैं:- अंदर बैठ के बात करे?

उस इंस्पेक्टर ने मेरेको उप्पेर से निचे तक देखा और फिर अपने केबिन में हो ली और हम दोनों भी उसके पीछे पीछे पहुंच गए.

मैंने उसके टेबल उसका नाम देखा किरण.

किरण:- तो मैं ये बता दू.

मैं:- ma'am हम आपसे ये जानकारी लेने नहीं आये है की केस की प्रोग्रेस क्या है? हम ये जान्ने आये है की मुजरिम का पता लगने पे आप सजा देंगी या नहीं उनको?

किरण:- ाचा और उनका पता कैसे लगेगा?

मैं:- आलरेडी पता काग चूका है, कॉलेज में थोड़ी से पूछताछ की थी बता दिया सबने की ये काम मला के लड़को की वजह से हुआ है.

किरण का चेहरा सफ़ेद पद गया, माथे पे पसीने की बूंदे आ गयी, वो कुछ बोलने को हुयी तो मैंने उसे रोक दिया.

मैं:- तुम्हारा जवाब पता है मुझे की तुम उसका कुछ नहीं बिगड़ सकती ब्लाह ब्लाह, देखो ma'am सीधा पॉइंट पे आता हु, आप कुछ करोगी नहीं तो हम कुछ करे तो बिच में न आना.

किरण:- और क्या करोगे तुम?

मैं:- वो मैं देख लूंगा की मुझे क्या करना है? बस इस वर्दी का ज़रा सा भी ख्याल हो तो बीचमे न आना क्युकी एक लड़की के कातिलों की बात है.

मैं खड़ा हुआ और उसका जवाब बिना सुने जाने लगा और मेरे पीछे पीछे विवेक भी.

किरण:- और तुम्हे ये नहीं लगता की मैं मला को बता दूंगी की तुम कुछ करने वाले हो.

मैं पीछे मुदा और मुस्कुराते हुए बोलै.

मैं:- सकल से छोटा दीखता हु लेकिन हु नहीं, तुम्हारे माथे का पसीना और आँखों में दर देख के hi पहचान गया था की तुम उसकी पालतू नहीं हो, अगर पालतू होती तो हमपे एक्शन हो चूका होता अब तक.

किरण:- नाम क्या है तुम्हारा ?

मैं:- एक ! याद रखना अब ये नाम चलने वाला है हर जगह.

मेरी बात सुनके वो मुस्कुरा दी, बस ऐसा लगा जैसे 100 वाट का बल्ब जल गया हो.

खैर शाम का टाइम था मेरे फ़ोन पे कॉल आने की वजह से मेरी आँख खुली तो मैंने देखा प्रिय का कॉल था, मैंने न चाहते हुए भी उठाया.

मैं:- हां बोल प्रिय.

प्रिय:- hello बेबी, सिटी चले क्या?

मैं:- किसलिए?

प्रिय:- आज पहली डेट पे चलते है न.

मैं:- नहीं फिर कभी, आज बिजी हु थोड़ा.

प्रिय:- प्लीज चलो न बेबी वो भी करने दूंगी.

मैं:- ोकक. 15 मिनट में बस स्टैंड पे मिल.

मैं फ्रेश हुआ जल्दी से कपडे पहने और निकलने से पहले एक मस्सग किया दोने का और बाइक उठा के निकल गया. बस स्टैंड से प्रिय को बिठाया, वैसे जो भी हो प्रिय माल है बस. हम 20 मिनट में सिटी पहुंचे, हमने कॉफ़ी वगैरह पि थोड़ी नार्मल बात वात की, लेकिन प्रिय मैडम तो बार बार फ़ोन देखे जा रही थी अपना, अचानक से उसका चेहरा खिल गया और वो बोली चलो चलते है

मैं:- कहा?

प्रिय:- अरे यहाँ लेफ्ट में एक सुनसान कॉलोनी है वह प्लाट है छोटे छोटे उधर कोई नहीं आता, तो उधर चलके वो सब करते है.

मैंने हाँ में मुंडी हिल्लायी और चल दिया उसके साथ.

कुछ देर में हम ऐसी जगह खड़े थे जहा 3 साइड दीवार थी और एक जगह से रास्ता, वह कोई आता जाट भी नहीं था कोई, क्युकी नयी कॉलोनी बन रही थी ये.

मैं प्रिय की तरफ बढ़ hi रहा थी मुझे अपने पीछे कुछ महसूस हुआ, और बसीकली मुझे वेट भी इसी चीज़ का था इसलिए मैं झट से निचे झुका और मेरे सर के उप्पेर से बेसबॉल का बात निकल गया ( बच गया भेनचोद नहीं तो पक्का मर जाता )

मैं पीछे मुद्दा तो सामने रोहन खड़ा अस एक्सपेक्टेड और उसके पीछे 10 लोंदे ये भी हमारी स्कूल के थे आर्ट सेक्शन के थे, चिन्दी चोर साले.

रोहन:- आज फिर फास गया न तू.

मैं:- हाहाहाहा लौड़ा फसेगा मेरा. तू और तेरी ये आइटम प्लान बना के मुझे यहाँ ले आओगे और मैं चुटिया हु जो यहाँ आ जाऊंगा, चलो आ भी गया तो क्या अकेला आऊंगा.

रोहन:- क्या बोलै तू?

मैं:- लुंड मेरा .

और ये बोल के उसके मैं पॉइंट पे एक लात दी वो अपना लोढ़ा पकड़ के झुका तो उसके सर पे दिया एक घुटना वो लेट गया वही,

ये देख के वो 10 लोंदे आगे बढे मारने के लिए लेकिन ऐसे कैसे हलवा है क्या बस जो हर बार पेल डोज. वो कुछ करते उससे पहले एक बाइक आके रुकी उस पर से 3 बन्दे उतरे हाथो में डंडे लिए और फिर क्या था उन 10 बन्दों को ऐसा तोडा की साले अपने झूठे चप्पल तक छोड़ के भाग गए, सो बता दू ये तीन थे विवेक, दीपक और एक नई एंट्री अभय.

विवेक और दीपक को तो जानते hi हो तुम लोग अभय के बारे में बता दू तो ये है विवेक के मां का लड़का हमारे जैसा हरामी है ये भी इसके माँ बाप नहीं है तो ये दिल्ली हॉस्टल में रहता है इसको मैंने 2 दिन पहले hi बुला लिया था और ये इस रोहन पे नज़र रखे हुए था. तो मुझे इनके टुच्चे से प्लान के बारे में पहले hi पता लग गया था की प्रिय मुझे यहाँ लेके आएगी और ये बन्दे बुला के अकेले को पेल देगा, पर हलवा थोड़ी है बस.

मैं अभय के गल्ले मिला. प्रिय और रोहन हमारे सामने hi खड़े थे, ओह्ह सॉरी करेक्शन रोहन सर पकड़ के पड़ा था और प्रिय सर निचे करके बैठी थी मैं प्रिय के पास गया.

मैं:- तुझे क्या लगा एक तो ठरकी है उसे जो बोलो मान लेगा, और तू काम से काम एक्टिंग तो सही से कर लेती जानेमन, वैसे एक बात बता दू तुझे ी हेट गर्ल्स और तूने सोच भी कैसे लिया की तेरे जैसी लड़की के चक्कर में आ जाऊंगा मैं, तेरी डेस्पेरशन देख के hi समझ गया था की कुछ लफड़ा है इसलिए इनको पहले hi इन्फॉर्म कर दिया था मैंने. अब सुन chup-chap निकल जा यहाँ से जो भी यहाँ हुआ उसका किसी को पता लगा तो तू मुझे जानती तो है की मैं क्या क्या कर सकता हु.

वो बस एक मिनट नहीं रुकी जब की जब भाग गयी.

विवेक:- इस लौड़े का क्या करना है.

अभय:- करना क्या है खेल ख़तम करते है

मैं:- असली तकलीफ तो जिंदगी देती है, और ये उसका जीता जगता सबूत बनेगा.

मैं एक डंडा उठाया और रोहन के पास जाके उसके घुटने पे दिया खींच के, वो गांड फाड़ चिल्लाया पर मुझे तो भेनचोद बदला चाहिए था बस इसलिए मैंने दुसरे घुटने पे दिया खींच के और दोनों कंधो पे भी. वो रोने लग गया हाथ जोड़ने लग गया लेकिन मुझे उसपे कोई रेहम न था मेरा दिमाग कुछ सुनने को मंजूर hi न था मेरे पीछे से विवेक और बोल रहे थे की रहने दे वगैरह वगैरह लेकिन मैं तो अलग नशे में था. अब मेरे दिमाग से आवाज़ आयी खून और में वो डंडा दिया उसकी खोपड़ी में उसकी खोपड़ी फैट गयी और खून की धार निकलने लगी, खून देखके एक अजीब सी खुसी मिली एक सटिस्फैक्शन मिल रहा था.

विवेक:- चल अब यहाँ से मर जायेगा वो.

मैंने रोहन की तरफ देखा तो वो बेहोश हो चूका था. मैंने अभय की तरफ देखा तो उसने इशारा कर दिया की एम्बुलेंस आ जाएगी.

इसलिए मैं भी पीछे मुड़के चलने को हुआ तो मेरे दिमाग में अलग बकचोदी हुयी.

"बीच ी वांट मोरे ब्लड" और ये आवाज़ सुनके मैं वापिस मुदा और डंडा उठा के तेज़ी से दिया उस रोहन के मुँह पे वह से भी खून की धार निकलने लगी, मैं उसके पास बैठा और उसके फेस से खून अपनी ऊँगली पे लगा के अपनी नाक पे पास लाया और वो स्मेल हास्सश्ह मदहोश कर गयी एक बार में क्या नशा था उसमे.

लेकिन विवेक ने मुझे पकड़ा और गालिया देता हुआ ले जाने लगा.

मैं:- खा ले जा रहा है भसडक, ी वांट ब्लड बीच.

विवेक:- लौड़े वो मर जायेगा...

उन्होंने मुझे बाइक पे बिठाया और निकल लिए वह से रस्ते में मेरे सर में अचानक से बहुत तेज़ दर्द हुआ और मैं चिल्लाता हुआ बेहोश हो गया.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
:थैंक्स: फॉर योर ब्यूटीफुल एंड वैल्युएबल रिव्यु :पीस:

हीरो बहुत हार्ड नेचर का बनाया है इस बार कोई रेहम नहीं होगा और इस सर दर्द से भी छुटकारा मिल जायेगा लेकिन इसके लिए भी एक कीमत चुकानी ोडेगी और आज के अपडेट में पता लगेगी.

एप पुरे रीयलिस्टिक hi है और 3 hi कहो दीपक तो टेम्पररी है उसको तो प्लान भी नहीं पता होगा इनका क्युकी एक खुद की परछाई पे भी भरोसा नहीं करता :कूल:
 
अपडेट:-9 ( ा रीयूनियन एंड रिलैक्स)

मेरी आँख अस उसुअल हॉस्पिटल के बीएड पे खुली और मेरी आँख खुली तो सामने देखा की अभय उस डॉक्टर पे चिल्ला रहा है.

अभय:- लिसेन डॉक्टर अगर इसे कुछ भी हुआ तो छोडूंगा नहीं तुम्हे, तुम इसको इतनी हाई मग की मेडिसिन कैसे दे सकती हो.?

डॉक्टर:- सॉरी पर ये सही है.

मैं:- किसने कहा सही हु मैं.

मेरी आवाज़ सुनके सब मुझे देखने लगे, लेकिन मैंने बोलना जारी रखा,

मैं:- कहा से सही हु मैं, सिगग्रेटे न मिले तो सर में दर्द, दारू न मिले तो सर में दर्द, और ये कल क्या हुआ था मेरे साथ ये ब्लड वगैरह का चक्कर, पागल हो गया हु क्या मैं.

डॉक्टर:- देखो तुम ठीक हो बिलकुल बस तुम्हे उन मेडिसिन का हाई दोसे नहीं लेना चाहिए था अब तुम्हारा मंद ऐसी चीज़ो की डिमांड करेगा और इसका तीन hi सलूशन है, एक ये दवाई कंटिन्यू करो जो की अछि बात नहीं है क्युकी एक टाइम पे ये पागल कर देगी तुम्हे. सेकंड अपनी एडिक्शन पूरी करो या जो तुंहारा मंद तुम्हे बोले वो करो लेकिन ये भी सही नहीं है क्युकी स्लेव बन जाओगे तुम खुदके. तीसरा मोस्ट इम्पोर्टेन्ट ड्रग्स लेने लग जाओ.

विवेक:- व्हाट थे फ़क दो यू मैं डॉक्टर ड्रग्स लेने लग जाओ इसका क्या मतलब है.

डॉक्टर:- बसीकली एक ड्रग है जिसको लेने से इनका दिमाग और तेज़ हो जाएगा और इनका चक्कर आना भी बंद हो जायेगा. जब जब ये ड्रग्स लेंगे इनका खुदके दिमाग पे कण्ट्रोल होगा पूरा. पर इसके कॉन्सीक्वेन्स है थोड़े लिखे इनको गुस्सा जल्दी आने लगेगा फ़्रस्ट्रेशन लेवल बढ़ेगा.

मैं:- तो दो वो ड्रग.

विवेक:- अबे पागल है क्या? जो बोल रहा ड्रग्स दो मुझे.

मैंने अभय की तरफ देखा तो वो विवेक को बहार ले गया, दीपक तो घर जा चूका था वैसे भी, सुबह का टाइम था पूरी रात बेहोश था मैं घर वालो को कोई चिंता नहीं थी बस मरू या जिन्दा राहु.

मैं:- डॉक्टर ी वांट तहत ड्रग.

डॉक्टर:- hello ी ऍम ा डॉक्टर मैं ड्रग्स लेके नहीं घूमती कोई ड्रग डीलर को पकड़ो और उससे लो, लेकिन बहुत महंगा होगा वो.

मैं:- आप बस नाम बताओ, कैसे लेना है मैं देख लूंगा.

Doctor:-LSD!

मैं:- ोककक! चलते है हम, जितने ड्रग्स नहीं मिल जाते उतने एडिक्शन hi पूरी कर लूंगा अपनी.

डॉक्टर:- ोककक!

मैं बहार आया तो विवेक और अभय कुछ बात कर रहे थे, मुझे देखते hi विवेक मेरे पास आके बोलै.

विवेक:- don't तेल्ल में की तू ड्रग्स लेगा.

मैं:- सडली यस.

विवेक:- फ़क यू!

हम तीनो बहार आये हॉस्पिटल से और मैं अभय के साथ बाइक पे बैठा और विवेक अपनी बाइक पे. हम रस्ते में थे शांति से चल रहे थे क्युकी सबके दिमाग में कुछ न कुछ चल रहा था. तभी मेरा फ़ोन बजा मैंने देखा तो वो इंस्पेक्टर किरण का था.

किरण:- एक के तो था पुलिस स्टेशन.

मैं:- ोकक.

मैंने अभय को देखा तो वो समझ गया कहा जाना है, एक्चुअली हमे पता था ये तो होना hi है, हमने विवेक को इशारा किया वो भी हमारे पीछे हो लिया.

हम स्टेशन पहुंचे तो वह बस ब्लैक मेरसेदेज़ कड़ी थी और 2 ब्लैक फोर्टनेर, वह पे गॉर्डस भी खड़े थे बिलकुल suited-booted, हम तीनो अंदर गए तो हवलदार ने केबिन की तरफ इशारा किया, सामने देखा तो गांड फैट गयी मेरी, मेरी नहीं बे हम तीनो की क्युकी सामने 5 बन्दों ने एक साथ गन तान दी हमारे उप्पेर, बस असाल्ट रिफ्फ्ले थी गलती से भी चल जाती तो छेद हो जाते बहुत सारे. खैर तभी पीछे से आवाज़ आयी.

"कूल बॉयज" और उन लोगो ने गन हटाई तब जाके सांस आयी, मैंने किरण को देखा तो उसकी भी फटी हुयी थी तभी मेरी नज़र उस आदमी पे गयी जो चेयर पे बैठा था 40-45 साल का रोबदार आदमी, सकल से बहुत अमीर लग रहा था, इंडिया का भी नहीं लग रहा था ये तो.

आदमी:- बैठो बैठो इधर आके.

हम लोग वह चेयर पे बैठ गए.

आदमी:- तो मेरा नाम है विजय चौधरी, हर्ष चौधरी का भाई और रोहन का फादर.

इतना सुनते hi विवेक खड़ा हो गया लेकिन मैं और अभय बैठे थे, मैं तो इसलिए बैठा था क्युकी मैंने इस बन्दे को पढ़ लिया था अंदर आते hi की ये हर्ष जैसा नहीं है और ये उसे पसंद भी नहीं करता.

विजय:- अरे बैठो बीटा. देखो घुमा फिरके बात नहीं करता मैं तुम लोगो मैं से रोहन को किसने मारा है.

मैं:- मैंने.

मेरी आवाज़ में अभी भी अकड़ थी बेशक गांड फैट रही हो,

वो विजय मुझे देख के मुस्कुराया.

विजय:- ऐटिटूड है निडर हो, अछि बात है. तो तुमने मेरे बेटे को इतना मारा की वो कोमा मैं है, लेकिन तुमने मारा उससे मुझे कोई मतलब नहीं क्युकी यहाँ वो हर्ष के पास रहके बिगड़ hi जाता, लेकिन अब मैं उसे लेके लंदन जा रहा हु. अब एक फ्री की एडवाइस दू.

विवेक:- हां सर दो न.

विजय:- हर्ष से दूर रहो बचो, उसे जरा भी भनक लगी की तुम लोगो ने ऐसा कुछ किया है की उसे तकलीफ हो तो वो तुम्हारे पुरे परिवार को मरवा देगा. तुम बचे हो अभी तुमलोगो के पास न पैसा है न पावर है न नाम है न दर है कुछ नहीं कर पाओगे तुम ऐसे. इसलिए उससे दूर रहो

विवेक:- नहीं होगा सर बिलकुल नहीं होगा ऐसा.

विजय:- तुम्हारे दोस्त ने तो कुछ बोलै hi नहीं.

विवेक:- अरे सर वो पागल है, उसके दिमाग के तार हिले हुए है.

मैंने विवेक को घुरा तो वो चुप हुआ, भेनचोद कितना बोलता है.

मैं:- तो फर्स्ट ऑफ़ आल अंकल, ी don't केयर अबाउट योर बरोथेर वो कुछ भी हो, कितना भी पैसा हो, कितना भी नाम, पावर, दर, रुतबा कुछ भी हो, सब कुछ चीन लूंगा उससे.

विजय:- ये ऐटिटूड फिल्मो में ाचा लगता है बचे.

मैं:- ओह्ह्ह come-on अंकल, लुक ईंटो माय आईज मेरी आँखों में दर दिख रहा है क्या? और ये डीएलओगे नहीं है फ्यूचर है, एक दिन एक किंग होगा यहाँ का.

और इतना बोलके मैं वह से खड़ा हुआ और निकल गया, मेरे पीछे पीछे वो दोनों भी बहार आ गए. दोपहर का टाइम हो गया था तो हम एक ढाबे पे गए और खाना खाया सिगग्रेटे पि.

इन सब चीज़ो में मैं बिलकुल सांत था मेरे दिमाग में विजय की बात घूम रही थी की अगर हर्ष ने फॅमिली को कुछ कर दिया तो लेकिन अगले hi पल ध्यान आया कैसी फॅमिली बे, फ़क फॅमिली फ़क एवरीथिंग मुझे आगे जाना है लोग मरे तो मरे जब मेरे बुरे दिन थे तब कोनसा कोई साथ था मेरे.

हम सब रस्ते में जा hi रहे थे की मैं बोलै.

मैं:- ठेके पे लेले दारू पिएंगे आज अभय के आने की खुसी में.

हम तीनो ठेके पे गए वह से अभय 2 िब की बोतल लेके आया और हम पहुंचे एक नए अड्डे पे, ये एक कुटिया (हूत) टाइप कमरा था हमारे खेतो में, यहाँ कोई नहीं आता था बस कोई नहीं क्युकी बहुत दूर था ये गांव से और यहाँ पे लूट वगैरह की वारदात भी होती रहती थी.

खैर हम उसके कमरे में बैठे फैन ों किया, वैसे कमरे में साफ़ सैफई थी पूरी एक बीएड था चेयर थी, फैन था और क्या चाहिए, बसीकली ये कमरा मैं और विवेक रंग रलिया मानाने के लिए उसे करते थे, लेकिन कुछ दिनों से लाइफ अलग रूट पे जा रही है.

4 पेग बने, ऑब्वियस्ली आरव को कैसे भूल सकते है..

अभय:- दिल्ली कब आ रहा है, उस हर्ष के लिए तो आना पड़ेगा अभी सही मौका है आजा हॉस्टल में.

मैं:- नाना अभी तो मला की माँ छोडूंगा और फिर आऊंगा दिल्ली.

विवेक:- आऊंगा नहीं आएंगे.

मैं:- ना तू यही रहेगा मला के काण्ड तक, हर्ष बचा नहीं है कोई, इसलिए तू नहीं आएगा.

विवेक:- आऊंगा बस देखता हु कोण रोकता है.

मैं:- देख तेरे और दीपक के पीछे फॅमिली है और मैं, अभय है बिलकुल फ्री कोई न है हमारे पीछे और हम तुझे खतरे में न दाल सकते.

विवेक:- चुप भसडक, ज्यादा ज्ञान न पेल मैं भी दिल्ली आऊंगा दोनों भाई साथ मरेंगे.

अभय:- अबे लौड़े दोनों नहीं तीनो.

मैंने अभय को घुरा तो उसने मुझे इशारा किया विवेक की तरफ और मैंने उसकी तरफ देखा तो समझ गया की लोदु फुल सेट है अब.

मैं:- हां विवेक भी चलेगा हमारे sath.(lawda चलेगा ऐसा निकलूंगा यहाँ से की कानो कान खबर नहीं होगी और विवेक को रोकने का प्लान था मेरे पास)

विवेक:- माँ की छूट दुनिया की, दुनिया मादरचोद है भें की लौड़ी, रुक अभी उस हर्ष को थोक के आता हु भड़वे को.

विवेक का मिछ चालू हो चूका था अभय ने उसे बीएड पे लिटाया और हम दोनों दूसरी बोतल खोल के पिने लगे..

अभय:- प्लान है तेरे पास.

मैं:- बीटा सब प्लान है मेरे पास.

अभय:- ड्रग का जुगाड़ कैसे करेगा.

मैं:- अरे वो राजेश नाम के बन्दे को उठाएंगे तो ले लेंगे उससे.

अभय:- सही है लेकिन उसके लिए बहुत दिन है अभी.

मैं:- कहा बे तीन दिन बाद तो सप्लाई आएगी दिल्ली से तब hi उठा लेंगे.

अभय:- लोदु तीन दिन बाद तो उस लड़के और लड़की को उठाना है न.

मैं:- हां बे, दिमाग काम न कर रहा.

अभय:- दिल्ली के बाद क्या प्लान है?

मैं:- मुंबई, अंडरवर्ल्ड.

अभय:- ी ऍम विथ यू बेबी.

मैं:- वो तो तू होगा hi बस, नहीं होगा तो जबरदस्ती रख लूंगा साथ.

हम दोनों ने ऐसे hi आगे के प्लान डिसकस करते रहे( जो की अभी नहीं बता सकता)

हम दोनों ने बोतल खली की और खड़े हुए तो बस पता चला की भारी चढ़ चुकी है और हम काम से काम 4 5 घंटे से बैठे थे तो पेअर अकड़ गए थे. खैर हम दोनों फ्रेश हुए और खाना खाया जो पैक करा के लाये थे, विवेक को देखा तो वो सो गया था लेकिन भसदक़ा अभी भी गाली दे रहा था किसी को.

हम दोनों भी पद गए उसके बगल में और कब नींद आयी पता hi न चला, लेकिन आधी रात को विवेक भाई साहब निचे गिर गए और वही सो गए. ( सही हुआ साले के साथ अब हम खुल के सोयेंगे)

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
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