My Complete Intentions - The Beginning - SexBaba
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My Complete Intentions - The Beginning

hotaks

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Dec 5, 2013
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Hello गाइस,

सो ी ऍम बैक ( कही गया hi नहीं था :सिघ: )विथ ा नई स्टोरी :हहै: . सो अब मैं एक नयी स्टोरी स्टार्ट करने जा रहा. (लौड़े थ्रेड स्टोरी के लिए hi खुलता है.) अब थोड़ा डिस्क्लेमर हो जाये. तो बसीकली ये स्टोरी रियल लाइफ से बिलकुल भी तालुकात नहीं रखती है :डेड: . अगर कोई संयोगवस सम्बन्ध मिल भी जाता है तो वो संयोग hi होगा. ये सिर्फ मेरे दिमाग की एक इमेजिनेशन है :पोएट: . और टाइटल में थे बिगनिंग लिखा है इसका मतलब समझ रहे हो न की स्टोरी के और भी पार्ट्स आएंगे :हिंट: . सो एन्जॉय. :हिप्पी:
 
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तो थोड़ा स्टोरी के बारे में बता दू...

  1. ये मेरी बाकी स्टोरीज से डिफरेंट होने वाली है :रेडफास:
  2. इतस ा लॉन्ग स्टोरी, इसमें काम से काम 200 उपदटेस होंगे और सायद 250 भी. और अगर बहुत ज्यादा प्यार मिला तो नेक्स्ट part भी जल्दी hi लिख दूंगा :लिएर्:
  3. ये एक ऐसे लड़के की कहानी होगी जो कुछ नहीं बहुत साड़ी इंटेंशन्स लेके आया है, और इस लड़के का करैक्टर काफी डिफरेंट होगा, ी मैं रौदे, क्रुएल, पहसिको, पैथेटिक, ड्रग एडिक्टेड, ी don't गिव ा फ़क वाला :पिंप: . और ये चेंज नहीं होगा, ी मैं ये कमजोर नहीं पड़ेगा. और इस स्टोरी में रोमांस की थोड़ी सी जगह है, ब्रूटलिटी और सस्पेंस hi मैं होगा इसमें और न कोई सुपरनैचरल पावर्स होगी इसमें. कॉमेडी होगी अडुल्टेरी होगी, एक्शन होगा फॅमिली ड्रामा बहुत काम होगा.
  4. अपडेट भी डेली एक दूंगा और कुछ जरूरी काम आ गया तो कह नहीं सकता :डेड: .
  5. मैं बात रेबु देना पड़ेगा सबको :बात: चाहे छोटा दो. :प्रे:
  6. और ये स्टोरी फर्स्ट पर्सन में चलेगी तो बकचोदी भी खूब होगी... :डेड:

तो मिलते है कल 1सत अपडेट के साथ...... :पचगुरु:
 
अपडेट:-1 ( थे बिगनिंग एंड इंट्रो)

Hello लोगइस, तो ये कहानी सुरु होती है मेरे जनम से.

(टेंशन न लो पकाऊँगा नहीं बॉलीवुड माफिक 1अपडेट में बड़ा हो जाऊंगा और स्टोरी स्टार्ट हो जाएगी.)

फ़ीर्स्तल्य ये बाटाडू मेरा जनम हरयाणा के एक गाओं में हुआ, गाओं पहले था अब तो एक वेल डेवलप्ड गाओं हो चूका है लिखे ा टाउन.

मेरे दादाजी सरपंच रह चुके है गाओं के कई दफा तो पैसा भी ठीक थक है उनकी नज़र में, मेरी नज़र में तो मई गरीब hi था. मेरा बाप एक नंबर का कमीना इंसान है और वही मेरी मम्मी बिलकुल सीधी सिंपल लेकिन गुस्से वाली.

मेरा बापू को दो काम आते थे एक दारु पीना और फिर नशे में मेरी माँ को मारना, उस समय में भी बहुत छोटा था तो इतनी समझ नहीं थी की ये क्यों हो रहा है मैं तो बस अपनी मम्मी को पित्त देखके रोने लग जाता था. और ये सब देख के बड़ा होने लगा तो मेरे दिल में एक दर ने जगह बना ली और मैं एक दम फत्तू किस्म का इंसान बनता जा रहा था.

मैं जब 7 साल का हुआ तो मेरे को एक छोटा भाई मिल गया. मैं बहुत खुश हुआ लेकिन ये ख़ुशी ज्यादा दिन चलने वाली थोड़ी थी क्युकी भगवन ने मेरी किस्मत किसी गधे के लुंड से जो लिखी थी 8 9 साल का हुआ तो पापा मम्मी की लड़ाईया बढ़ने लगी और नौबत यहाँ तक आ गयी की उन्दोनो का डाइवोर्स हो गया. अब डाइवोर्स तो हो गया लेकिन मेरी मम्मी मुझे यही मेरे शराबी बाप और बूढ़े हो चुके दादा दादी के पास छोड़ गयी.

मेरे भाई को साथ ले गयी और मुझे छोड़ गयी ये बात मुझे हज़म नहीं हो रही थी. उस टाइम मेरा छोटा दिमाग यही सोचता था की मम्मी मुझसे प्यार नहीं करती. या फिर मैं उनका बीटा नहीं हु, मंदिर से तो न लाये मुझे उठके.

इतनी बकचोदी का एक मतलब है की मेरा बचपन बिलकुल ाचा नहीं गुज़रा. अब दिन बीतने लगे मेरा बाप बावला हो गया मेरी मम्मी के जाने से अब उसकी मार मुझे कहानी पड़ती थी, दादा दादी भी बिच में नहीं आते थे क्युकी उन्हें दर लगा रहता था की कही उनका सुपुत्र उन्हें भी न लपेट ले और मेरे पूजिनिये चाचा चची जी तो हमसे दुरी बना के रखते थे.

मेरे दादा भी पुरे वित्त थे अपनी इज़्ज़त बचने के लिए अपने पोते को पीटते हुए देखते थे. अगर वो चाहते तो मेरे बाप को जेल में डलवा सकते थे इतनी चलती थी उनकी लेकिन नहीं उनको तो अपनी इज़्ज़त प्यारी है बाकि सब गांड मारो.

धीरे धीरे मैं बड़ा होने लगा और मेरे अंदर का दर भी बढ़ने लगा लेकिन अब दर के साथ साथ नफरत पागलपन और भी कई चीज़ो ने जगह ले ली थी. अब मेरी कंडीशन ये थी की मुझे पता रहता था की मेरे साथ क्या होने वाला है बोले तो बिलकुल एक्सपेक्टेड होता था की अब इस टाइम मेरा बाप घर से जायेगा इस टाइम मैं पढूंगा इस टाइम वो वापिस आएगा दारु पाइक और इस टाइम वो मुझे पलेगा और फिर मैं रोऊँगा और फिर सो जाऊंगा.

साला मेरा बाप इतना मरता था की धीरे धीरे बॉडी में पैन होना भी बंद हो गया और बॉडी भी मुझे अपनी थोड़ी मजबूत लगने लगी अब इसके फायदे मुझे 10तह क्लास में पता लगे जब सर हमे मरते और मेरे अकेले को ज्यादा दर्द नहीं होता मैं तो बस एक्टिंग करता था चिल्लाने की ताकि मास्टर की गांड फाटे और वो जल्दी छोड़ दे. अब स्कूल में भी सब मुझे चिढ़ाते थे की तेरी माँ भाग गयी, फत्तू वगैरह बोलते थे मरते भी थे गालिया भी देते थे और मैं सुन लेता था. अब क्या करे सुन्नी तो पड़ेगी बस उनका लौड़ा कुछ नहीं उखड सकता था मैं.

अब धीरे धीरे घर की हालत थोड़ी डाउन जाने लगी इकॉनमी के मामले मैं, ऐसा मुझे लगता था मुझे ये नहीं पता था की मेरे दादा ने पैसा दबा रखा है अपने निचे.

मुझे दुखी भी बहुत होता था फेस्टिवल्स वगैरह पे जब सब बचो को एन्जॉय करते देखता, अपने पेरेंट्स के साथ खुसिया मानते हुए. तो इस बात के मेरे ऊपर दो रिएक्शन होते एक तो मैं छुप के रोटा दूसरा मुझे नफरत सी होने लगी थी इन रिलेशनशिप से और मम्मी पापा से भी की बस पैदा करके छोड़ दिया करो जो करना है अब.

दुःख तकलीफ और गुस्सा तो इस बात से आता था की मेरी माँ ने मुझे एक बार फ़ोन भी नहीं किया जाने के बाद मैंने कितना तरय किया अपने मां के पास भी बूत किसी ने फ़ोन नहीं उठाया बस. मुझे सबसे ज्यादा गुस्सा इस बात का था बस मैं अपने भाई के साथ नहीं रह सका वो कैसा होगा, क्या मैं उसे याद भी होऊंगा?

(लौड़े कैसे याद रहेगा तू उसे वो उस टाइम दो ढाई साल का था, कुछ भी बोलता है चुटिया.)

टूटने लगा था मैं बस अब दिल सिर्फ दो जगह लगता था स्कूल मैं और क्रिकेट में.

स्कूल मैं भी इसलिए लगता था क्युकी वह एक लड़की थी मनीषा नाम की जो मेरा पहला क्रश थी. कह सकते हो की वो पहला प्यार थी लेकिन मैं भेनचोद फत्तू डरता था की कही ये भी मेरी माँ जैसी निकली तो और ये ख्याल आते hi मैं फालबैक कर लेता था.

मैं 10तह पास अचे मार्क्स से की क्युकी मेरा दिमाग बचपन से hi तेज़ था और ये कोई सुपरनैचरल पावर नहीं थी ये बस था बस.

और अब अपुन की पिलाई भी मेरे बापू ने बढ़ा दी थी मेरा सरीर देखके के क्युकी बड़ा होने लगा था मैं लेकिन मुझे लौड़ा फर्क नहीं पड़ता था अब उसकी मार से. वो सराबी आदमी सरब पाइक अंदर से ख़तम होने को था लेकिन हत्ता कट्टा था अभी भी.

मैं चाहता तो पेल सकता था उसे लेकिन बस दर लगता था और अब तो दर इतना बढ़ गया था की वो दर अब पीक पे था मेरे.

अब 10तह क्लास पास की तो मेरे दादा ने मुझे एक मोबाइल ला दिया बस. जो उन्होंने लाइफ में पहली चीज़ अछि की थी. अब बस मोबाइल आ गया तो मैं सोशल मीडिया से जुड़ने लगा और बहार के लोगो और लाइफस्टाइल को भी जानने लगा, जनता तो बस पहले से था टीवी बहुत देखता था इसलिए.

लेकिन अब मुझे एक अलग hi चस्का चढ़ गया था लड़ना सिखने का अब यहाँ पे कोई सीखने वाला तो था नहीं इसलिए मैं यूट्यूब पे वीडियो देख के प्रैक्टिस करने लगा और सुबह रनिंग करने लगा और इसका फर्क मुझे पता लगने लगा था.

अब इन सब के बिच एक मस्त घटना घाटी या कहु ये मेरी लाइफ की पहली सही घटना थी जिससे मुझे खुसी हुयी थी काफी दिनों बाद.

हुआ ये की मेरे बाप ने अचानक से सरब छोड़ दी बस ये पॉसिबल नहीं है कोई नहीं छोड़ सकता ऐसे पर मेरे बाप को पता नहीं ऐसा क्या हो गया था की उसने एक दम से सरब छोड़ दी कही प्यार वयर तो नहीं हो गया. ( लौड़े कुछ भी मत बोल)

अब सरब छोड़ दी तो इसके कई साइड इफेक्ट्स हुए एक तो ये की अब मेरे बाप ने मेरी पिलाई बंद कर दी और मेरे से बात करनी भी बंद कर दी और ये सब तो फिर भी ठीक उसने तो मेरी गलतियों पे भी डाटना बंद कर दिया. और मेरे बाप के ऐसे रवैये से मुझमे एक अलग लेवल का कॉन्फिडेंस आने लग गया था. अब तक जो बचा दर के भीगी बिल्ली बन के रहता था उसके पर निकलने लगे थे. एक तो फ़ोन मिल जाना दूसरा अब किसी का दर न रहना ये 2 चीज़ काफी होती है बिगड़ने के लिए. अब 11तह क्लास के अंदर मैं हरामी होने लग गया था, जो लड़का बस पढ़ाई से मतलब रखता वो बस मुठ मरने लग गया था :हहै: स्कूल के अंदर जिसकी गाली सुनके फैट जाती थी वो खुद दूसरो की माँ- बेहेन एक करने लग गया था. जो पिट- पिट के बड़ा हुआ था वो दुसरे लोंडो को पेलने लग गया था. मतलब इतने चंगेस आने लग गए थे मेरे अंदर की मेरे दोस्तों के साथ- साथ मेरे घरवाले भी थोड़े से हैरान थे.

अब मैं कई चीज़े स्टार्ट कर दी थी, जिनसे मुझे कभी नफरत थी लिखे सिगग्रेटे pina,daaru पीना, लड़ना, गाली देना, लड़किया ताड़ना ये सब अब मैं करने लगा था. लेकिन जो चीज़ मेरे अंदर नहीं बदली थी वो थी लोगो के बिच के रिलेशनशिप जिनसे मुझे नफरत थी और रहेगी. हां लड़किया ताड़ने अलग था लेकिन सिर्फ छोड़ने के लिए प्यार के लिए नहीं क्युकी ये प्यार वयर हमारे लिए तो न बने थे.

अब ये सब तो बता दिया मैंने अपने 11तह तक का सफर अब बात कर लेते है अपनी फॅमिली के बारे में जिनका ज्यादा रोले तो रखूँगा नहीं लेकिन आगे आ जाए क्या पता.

दादाजी:- बलदेव चौधरी. ये हमारे गाओं के 3 बार सरपंच रह चुके है, गाओं के लोग इनकी इज़्ज़त भी करते है और नफरत भी. लेकिन ये इतने बड़े वित्त है की इनको अपनी इज़्ज़त के अलावा कुछ नहीं चाहिए..

दादी जी:- सावित्री चौधरी. ये मेरी लाइफ में एक ऐसी महिला है जिनकी मैं रेस्पेक्ट भी करता हु और प्यार भी इनके बारे में आज तक कुछ गलत नहीं सोचा मतलब नफरत नहीं की मैंने ( गलत न सोच लेना बस तुम लोग). ये बहुत hi स्वीट और पतिव्रता टाइप की है.

पापा, पिता, बाप (जो भी है) :- राजेश चौधरी. एक नंबर का कमीना, ऐयाश और सराबी आदमी अभी फ़िलहाल सुधरे है पर देखते है आगे क्या गुल खिलते है.

मम्मी:- सुनीता चौधरी. ये कहने को तो माँ है पर मुझे न लगता इनकी वजह से hi दुनिया से नफरत कर बैठा और दुनिया की माँ छोड़ दी आगे जाके.

विशाल चौधरी:- ये सागा भाई है मेरा इससे बहुत प्यार करता हु मैं, आगे रोले आएगा इसका स्टोरी में लेकिन फ़िलहाल तो ये मुझे जनता भी न होगा.

चाचा- चची और उनका एक बीटा है रवि

रवि:- वैसे तो ये भी मेरा भाई है लेकिन ये मेरे से एक साल बड़ा भी है पर गवर मेरी क्लास में पढता है, मेरेको तो ये कुछ समझता hi नहीं था सुरु में लेकिन धीरे धीरे अपुन ले आया लाइन पे इसको.

मेरे दो मां और दो ममी भी है और ये चारो बड़े छोड़ू लोग है बस, मुझे तो ये नहीं पसंद वैसे इनका रोले न है तो माँ छुड़ाए अपनी अपनी

मनीष:- मेरे बड़े मां का लड़का, मेरे से 2 साल बड़ा है एक no का हरामी और ठरकी है बेटीचोद. इस भड़वे ने बचपन में बहुत मारा है मुझे, लेकिन इसका नंबर भी आएगा ल

कारन:- ये मनीष का छोटा भाई है सागा, ये मेरे से 1 साल बड़ा है पर ये है अपने भाई जैसा.

सिमरन:- ये है मेरी एक लोटी बेहेन, मेरे छोटे मां की लड़की इसका करैक्टर मिस्टीरियस है थोड़ा.

देखो भाईलोग ये जो भी चरक्टेर्स मैं बताये है ये इतने इम्पोर्टेन्ट न है ये तो इसलिए बता दिए क्युकी ये सो कॉल्ड फॅमिली मेंबर्स है. लेकिन मैं करैक्टर बहुत सारे है जो आगे आते जायेंगे और उनके बारे में बताते जायेंगे.

अब थोड़ा अपने बारे में भी बाटाडू

मैंने 11 तह पास कर ली थी अब बस प्रॉब्लम ये आ गयी थी की हमारे स्कूल का प्रिंसिपल मर गया और अब उसके फॅमिली मैं कोई था नहीं जो स्कूल चला सके तो उन्होंने स्कूल बंद कर दिया और ऐसा करने से हमे अड्मिशन लेना पड़ा दुसरे स्कूल में अब यहाँ तो ाचा स्कूल था नहीं तो मैंने अड्मिशन ले लिया हमारे गाओं से 10 कम दूर एक सिटी है उसके स्कूल में. मैंने अकेले ने नहीं ऑलमोस्ट हमारी स्कूल के अधिकतर बचो में वही अड्मिशन ले लिया था.

अंकित कुमार चौधरी (प्यार से एक बुलाते है सब):- हीरो और विलेन जो भी बोल लो मुझे फर्क नहीं पड़ता अभी अभी 12तह मैं आया हु बॉडी भी अछि खासी है है खेतो में काम करने और घी, दूध खाने से, स्मार्ट भी हु दिखने में लड़किया प्यार तो करती है मुझसे लेकिन अपुन हेट लव स्टोरीज. मेरे बारे में आगे पता चलेगा बाकि सब

(एक लौड़े को तो भूल hi गया)

विवेक चौधरी:- दोस्त है हे मेरा लिखे बरोथेर फ्रॉम ानोथेर मदर मेरे जैसा hi बकचोद है एक नंबर का बिलकुल हत्ता कट्टा गोरा munda,ladkiyo के आगे बहुत हवाबाज़ी दिखता है, बस एक यही है जो मेरे साथ आगे तक टिकेगा.

राइटर नोट:- ों पब्लिक डिमांड आज hi दे दिया :सिघ: . सो गाइस कल से स्टार्टिंग हो जाएगी प्रॉपरलय तो साथ बने रहे.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
अपडेट:-2 (फर्स्ट डे)

आज सुबह 4 बजे सके उठा में तो एक अलग सा hi जोश था बॉडी में क्युकी आज नए स्कूल में पहला दिन था. मेरा मैं खुश होये जा रहा था की बस नयी लड़किया तादूँगा क्या पता कोई दे hi दे. लेकिन इनसब बातो को साइड करके मैं निकल गया ग्राउंड में रनिंग और वर्कआउट करने 6 बजे घर आया और नाहा धो के एक दम चका चक रेडी हो गया. शीशे के सामने खड़ा होक खुद को देखा तो एक अंदर से आवाज़ की बस माल लग रहा है तू.

खैर इनसब बातो को छोड़ के मैंने अपना बैग उठाया और बस स्टैंड की तरफ चल दिया रास्ते में जहा से भी जा रहा था वह पे जो भी मुझसे छोटा मिलता वो नमस्ते भैया नमस्ते भैया बोलता, साले इज़्ज़त नहीं करते थे बस डरते थे क्युकी इनको खेलने नहीं देता था मैं. ये सब बकचोद बाते सोचते हुए मैं बस स्टैंड पे पहुंच 7:15 हो रहे थे स्कूल बस आने में अभी टाइम था तो मैं आ गया पनवाड़ी की दुकान पे.

मैं:- ाएय छोटू! एक गोल्ड फ्लैक दे बे.

छोटू:- लाया चौधरी साहब.

मैं:- भसडक के मुझे ये चौधरी वगैरह न बोलै कर.

छोटू कुछ न बोलै बस मेरी तरफ देख के मुस्कुरा दिया मतलब साफ़ था की उसे घंटा फर्क नहीं पड़ता वो तो मुझे यही बोलेगा.

मैं:- तेरी सेटिंग का क्या हाल है बस, कल मिली थी वो मुझे टंकी पे.

छोटू:- काहे की सेटिंग भाई, साली बात करने के अलावा कुछ करने hi नहीं देती.

मैं:- भसडक वो खुद नहीं बोलेगी आ के मेरी मार लो, तुझे खुद कुछ करना होगा.

मैंने ये सब बकचोदी करते हुए सिगग्रेटे जला hi ली थी की पीछे से आवाज़ आयी.

"लौड़े एक मेरी भी ले लियो" और ये आवाज़ मैं सपने में भी पहचान सकता हु ये विवेक की आवाज़ थी जो की एकलौता दोस्त था मेरा अभी फ़िलहाल जिसपे मुझे भरोसा था दोस्त तो एक और भी था पर पता नहीं वो कहा गायब हो गया एक साल पहले.

मैं:- आजा लौड़े इसी में तू भी सत्ता मार ले बस आने वाली है.

तभी मेरे चाचा का लड़का भी आ गया और बोलै.

रवि:- ला मुझे भी पीला नहीं तो तेरे बाप को बता दूंगा.

मैं:- भसडक ऐसी गांड तोडूंगा तेरी और तेरे चाचा की सब कुछ भूल जाओगे, अपने पैसो की पि, मैं न पिलाने वाला तुझे.

रवि:- बीटा बड़ा हु तेरे से तमीज़ से बोलै कर.

मैं:- बड़ा है तो लोढ़ा चूस ले मेरा.

रवि मेरेको मारने आया hi था की इतने में बस आ गयी मैंने और विवेक ने सिगग्रेटे निचे फेकि और भाग के बस में छड़ गए रवि बिचारा घूरते हुए hi रह गया हमे. मैं और विवेक सीधा गए पीछे की सीट पे जहा एक और लौंडा बैठा था 10तह क्लास का उसको विवेक ने एक थप्पड़ मार्के भगा दिया. हम दोनों बैठे और विवेक ने निकला अपना फ़ोन और गलीच आदमी ने पोर्न लगा दी सुबह सुबह बस ये धर्म भ्रस्ट करवाएगा मेरा.

मैंने उसकी और ज्यादा ध्यान न दिया मैं तो बस आगे माल ताड़ रहा था. खैर हम ऐसे hi स्कूल पहुंच गए लेकिन थोड़ा लेट हो गए थे प्रेयर वगैरह ख़तम हो चुकी थी क्लास भी स्टार्ट हो hi गयी हो गई क्युकी शान्ति थी स्कूल में लेकिन हमे कोई कुछ नहीं कहने वाला था क्युकी हम बस में आये थे.

मैं और विवेक अपनी सीनियर विंग की और भागे और एक लड़के को पकड़ के पूछा की 12तह सेक्शन ा कहा है. उस लड़के ने एक क्लास की और इशारा किया और हम दोनों चले गए उस तरफ.

क्लास के दूर के पास आके मैंने अंदर झाँक के देखा तो कोई टीचर नहीं था तो हम दोनों चुपचाप अंदर आ गए और पीछे की सीट खली थी तो उस तरफ हो लिए, लेकिन भेनचोद सारे स्टूडेंट्स हमे hi घूर रहे थे.

विवेक:- भसडक तूने कोई काण्ड तो न कर रखा न यहाँ पे.

मैं:- मेरा लौड़ा काण्ड करेगा यहाँ आया तो दूसरी बार हु आज. तू इग्नोर मार इनको और पीछे चल. सालो ने स्मार्ट लोंदे नहीं देखे होंगे आज तक.

विवेक:- चल चल.

मैंने और विवेक ने पीछे की बेंच पे अपना बैग रखा hi था की एक लोंदा खड़ा हुआ छोटी सी हैघट का और उसने स्कूल ड्रेस भी नहीं पहनी सकल से भी थोड़ा हमारी उम्र से बड़ा लग रहा था.

वो:- यययय तुम दोनों पूछ के नहीं आ सकते थे अंदर.

मैं उसको कुछ बोलता उससे पहले विवेक बोल पड़ा अपना इम्प्रैशन बनाने के लिए

विवेक:- तू प्राइम मिनिस्टर है क्या क्लास का जो तुझसे पूछ के अंदर आऊंगा. भसडक निचे बैठ जा नहीं तो और छोटा कर दूंगा.

ये बात सुनके पूरी क्लास हसने लगी तभी वो छिलके बोलै.

वो:- साइलेंस!

और सब चुप हो गए बस बिलकुल सनता.

विवेक मेरे कान में:- बस कही ये कोई दादा वगैरह तो न है यहाँ का सब चुप हो गए.

मैं:- होगा मुझे लुंड फर्क न पड़ता इससे.

तभी हमारी बाते सुन रहा एक चश्मिश बोलै भाई फिजिक्स के सर है वो. इतना सुनते hi हम दोनों की गांड चौक खा गयी.

मैं:- सॉरी सर हमे पता नहीं था आप टीचर हो हमे लगा कोई बचा दादागिरी कर रहा है आपके राज़ में, वर्ण हमारी इतनी मज़ाल की हम आपसे बिना पूछे अंदर आये, आपके बारे में तो बहुत सुना है मैंने.

वो चुटिया टीचर अपनी तारीफ सुन के खुस हो गया और बोलै

P.sir :- तुम समझदार लगते हो बैठ जाओ और तुम निकलो क्लास से.

विवेक बिचारे ने एक दो बार सॉरी भी बोलै लेकिन कोई फायदा न हुआ.

मैं:- और हीरो बन ले भसडक.

विवेक:- बीटा रुक जा इस मास्टर की तो माँ में hi छोडूंगा.

और वो बहार चला गया. खैर ये पीरियड भी इंट्रोडक्शन में ख़तम हुआ मैं तो वह आधी क्लास को जनता था बस और मुझे भी वह सब जानते थे तो मैंने कोई ज्यादा ध्यान न दिया उनपे. ऐसे hi नेक्स्ट पीरियड स्टार्ट हुआ एक मैडम अंदर आयी, भारी माल थी वो लुंड खड़ा हो गया एक दम से, लेकिन यहाँ के बचे इतने बड़े छोड़ू थे की सब एक सूर में बोले.

सब:- मॉर्निंग मैडम

बकलोडे कैसे जहातु स्टूडेंट है यहाँ. मैं ये सब सोच hi रहा थी की इतने में मम ने विवेक को भी अंदर बुला लिया.

मम:- hello स्टूडेंट्स माइसेल्फ दीपिका और मैं आप सबको केमिस्ट्री पढ़ाऊंगी. और इंट्रो वगैरह बाद में होते रहेंगे हम सब पढाई स्टार्ट करते है.

मेरा मैं किया की एक चुम्मी फेक के मारु मम को कोई तो स्याना निकला इस स्कूल में.

ऐसे hi पीरियड बीतते गए और छोड़ू टीचर्स इंट्रो इंट्रो खेलते रहे. खैर इन सब के बीच मैं एक चेहरे को तलाश रहा था वो थी मनीषा पर वो आज आयी नहीं थी बस लेकिन उसकी कमी उसकी दोस्त प्रिय पूरी कर रही थी, वैसे मनीषा तो मेरी तरफ देखती भी नहीं थी लेकिन ये प्रिय पूरी लाइन देती थी मुझे और साली माल भी एक नंबर थी.

विवेक:- अबे घूरना बंद कर लड़कियों को और ग्राउंड में चल लंच हो गया.

मैं:- चल बस भूक लगी है भरी .

हम दोनों ग्राउंड में आये तो मेरे को एक बात याद आयी.

मैं:- लौड़े वैसे तू अगर फिजिक्स वाले अमित की माँ को छोड़ेगा तो तुझे उसकी बूढी छूट के अंदर घुसना पड़ेगा क्युकी वह तो गुफा मिलेगी.

मैं ये बात बोलके हसने लगा लेकिन विवेक चुटिया मुझे घूरने लगा, दोस्त न होता तो गांड तोड़ देता ऐसे घूरने पे.

खैर लंच ख़तम हुआ और बाकी की क्लासेज भी ऐसे hi निकल गयी.

तभी एक बेल्ल बजी और इसका मतलब था छुट्टी भेनचोद पूरी क्लास के बचे चुतियो जैसे भागे जैसे भंडारे में जाना हो और वह लिमिटेड खाना मिलेगा, लेकिन मैं और विवेक तो मस्त आराम से चलते हुए अपनी बस के पास पहुंचे.

कंडक्टर:- ू हीरो जल्दी चढ़ जा गार्डन में आया है के.

मैं:- सुन बस खुश भी बोल ले लेकिन हीरो न बोलियों, बिकॉज़ ी ऍम नॉट ा हीरो बीच.

उस लौड़े को कुछ समझ न आया लेकिन आगे बैठी लड़किया मुझे घूरने लगी. लेकिन मैं सबकी इग्नोर करके पहुंच पीछे की सीट पे जहा प्रिय बैठी थी.

विवेक:- आए कड़ी हो हमारी सीट है.

प्रिय:- क्यों नाम लिखा है क्या तेरा.

विवेक:- नहीं लिखा तो लिख दूंगा.

प्रिय:- जा बे पका मत मुझे वैसे भी एक से बात करनी है.

मैं तो खुस हो गया बस ये माल मुझसे बात करेगी.

विवेक:- नहीं करेगा ये तेरे से बात.

मैं:- विवेक तू आगे जा मुझे बात करने दे.

विवेक:- भसडक देख लूंगा तुझे लड़की दीखते hi दोस्त को भूल गया.

प्रिय:- जा न क्यों नखरे दिखा रहा है.

विवेक आगे चला गया मुझे पता था उसका मूड ऑफ है और वो कैसे सही होगा ये भी पता था.

प्रिय ने मेरा हाथ पकड़ के अपने पास बिठा लिया और मैं भी अचे बचे की तरह उससे चिपक के बैठ गया, क्या सरीर था साली की एक दम रुई जैसा मुलायम.

बस लुंड खड़ा न हो जाए बजती हो जाएगी.

प्रिय:- एक मेरा बाँदा बनेगा.

व्हाट थे फ़क! भेनचोद ये क्या बोल गयी ये, बड़ी फ़ास्ट है.

मैं:- मैं इन सब प्यार वयर के लफड़ो में न पड़ता, और अगर पड़ता तो मनीषा को सेट कर चूका होता.

प्रिय:- मनीषा को तो भूल जा वो आमिर लड़के से hi पटेगी बस.

मैं:- फिर भी मैं ये प्यार वयर के लिए न बना और मुझे कोई फर्क न पड़ता मनीषा किसी के साथ हो चाहे.

प्रिय:- अबे घोंचू तो मैं कोनसा प्यार करने को बोल रही हु बस मेरा एक बर्फ होगा स्मार्ट सा और तेरी एक माल गफ हो जाएगी और क्या चाहिए तुझे.

मैं:- फिर ठीक है लेकिन बाद में प्यार का चुतियापा न करियो मेरे साथ.

प्रिय:- नहीं करुँगी.

एक:- चल तो किश दे.

प्रिय:- इतनी जल्दी नहीं. जा तेरा स्टॉप आ गया.

मैं खड़ा हुआ और एक फ़ास्ट किश प्रिय के गाल पे करके भाग गया. मैं और विवेक निचे उतरे और घर की तरफ चल दिए, पर ये बकलोदा अपना मुँह फुलाए चल रहा था.

मैंने भी ज्यादा बकचोदी नहीं की बस इतना बोलै

मैं:- सुन श्याम को ग्राउंड चलियो राजपुरा वाले लोंदे को पेलना है और फिर रात को दारु पिएंगे.

विवेक की आँखों में चमक आ गयी दारु का नाम सुनके और साला मेरे गले मिला भाग के

मैं:- यययय गे कही के दूर हो मुझसे.

विवेक हटा और अपने रस्ते चला गया और मैं अपने घर की तरफ....

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
:थैंक्स: शुभम सर

एंड फ़ास्ट नहीं हु मैं क्युकी ये बहुत लम्बी स्टोरी होने वाली है और न hi मुझे कोई जल्दी है और रही हीरो की बात तो मैंने पहले बोलै की हीरो या विल्लन कुछ भी कह लो और ये हीरो वैसे भी इतर हीरोज से डिफरेंट है ऐसा कुछ नहीं है की दुनिया की लोग चुटिया है हीरो भी पिटेगा बहुत बार :हिंट:

और इमोशंस तो सब दिखते है और ाचा हीरो भी लेकिन बुरा हीरो बहुत काम

Btw अगेन थैंक्स फॉर योर ब्यूटीफुल रिव्यु
 
अपडेट:-3 (daaru+backchodi)

शाम का टाइम था और मैं अभी सके उठा था बस दिन में सोने का मज़ा hi अलग होता है.

मैंने अपनी आँखे मसलते हुए फ़ोन उठाया उसपे विवेक की कई मिस्ड कॉल थी.

मैंने विवेक को कॉल लगाया और बाथरूम में मूतने चला गया.

विवेक ने कॉल पिक किया एक hi रिंग में (वेल्ला आदमी और कोई काम नहीं है )

vivek:-bhen के लोडे क्या कर रहा है, तू आधा घंटा लेट है.

मैं:- बाथरूम में मुठ मार रहा हु लौड़ा पकड़ के.

विवेक:- मुठ लोढ़ा पकड़ के hi मरते है.

मैं:- ोूप्स सॉरी, तूने एक बार बताया था की तू गांड में ऊँगली करता है खुद के.

और ये बोलके मैं हसने लगा रावण जैसे. :ेविलौगह:

विवेक:- भसडक बकचोदी न कर जल्दी आजा ये राहुल तेरी फील्डिंग बैठा रहा है. और दारु के पैसे लेके ाइयो सिगग्रेटे मैं ले लूंगा.

मैं:- सुन तू पन्गा न लियो उनसे बस 10 मिनट में आया यु.

विवेक:- लौड़े सुपरमैन है क्या जो उड़के आ जायेगा.

मैं:- मेरे बाप की बाइक लेके आ रहा हु तू फ़ोन रख.

उसने फ़ोन रखा और मेरा मूतना भी बंद हुआ मैंने जल्दी से मुँह हाथ धोये और पैसे जेब में डाले और बाइक लेके निकल गया ग्राउंड की तरफ.

इस राहुल के बारे में थोड़ा बता दू ये हमारे पास वाले गाओं का लड़का है, वैसे तो हम दोनों के गाओं की आपस में बिलकुल नहीं बनती लेकिन फिर भी हम साथ खेलते है शर्त लगा के. ये लौड़ा मेरे से दो साल बड़ा है और कॉलेज मैं पढता है.

अब इसकी और मेरी लड़ाई एक चीज़ पे है की मैं इससे पैसे मांगता हु जो मैं शर्त में जीते है और ये देता नहीं है, और अपना एक वसूल है की उधर माफ़ कर दूंगा लेकिन जीती हुयी चीज़ नहीं छोडूंगा चाहे वो एक रूपया hi हो, वैसे ये उसूल बस मेरा और विवेक का hi है.

मैं बाइक भगाता हुआ ग्राउंड में पंहुचा वह पे देखा तो राहुल के साथ 5 लड़के और खड़े थे कॉलेज के hi थे, सकल से hi गलीच लग रहे थे, और वह पे विवेक अकेला खड़ा था और हमारे गांव के दो तीन लड़के साइड में खड़े थे.

मैंने बाइक को एक दम विवेक के बगल में स्किड मारते हुए रोका तो विवेक उछाल के साइड हो गया और मुझपे चिल्लाया.

विवेक:- लौड़े अँधा है क्या? बनाऊ तुझे फ1 रेसर.

लेकिन मैं बाइक से उतरा और विवेक को कुछ बोलता उससे पहले मेरे कानो में एक बात पड़ी.

"अबे इसकी तो माँ छोड़ के भाग गयी इसे और इसका बाप भी पेलता है इसे अब तू भी पलेगा तो ये किधर जायेगा बिचारा" और ये बात राहुल के बढ़े मुँह से निकली थी और ये मुझे गुस्सा दिलाने के लिए काफी थी.

मुझे एक दम से बहुत तेज़ गुस्सा आ गया और मैंने विवेक को छोड़ के उनकी तरफ पलटा तो विवेक समझ गया की अब ये सब पीटेंगे.

विवेक:- अबे एक गुस्सा न कर बचे है ये लोग.

लेकिन मैंने उसकी बातो पे कोई ध्यान न देते हुए उस राहुल की तरफ बढ़ गया.

राहुल:- अबे तू तो ऐसे बोल रहा है जैसे ये हम 5 को पेल देगा, ालेलीले एक को गुस्सा आ रहा है.

और ये सब्द उसके मुँह से निकले हुए आखरी सब्द थे क्युकी मैं उसके पास पहुंच चूका था और मैंने उसके पास पहुंचते टाइम बात उठा लिया था.( अब ये न बोलना बात कहा से उठाया और सुपर स्पीड से कैसे पंहुचा 5कदम दूर थे वो)

वो कुछ समझ पता उससे पहले मैंने बात दिया घुमा के उसके सर पे और ये चीज़ सब के लिए अनएक्सपेक्टेड थी वो भेनचोद सब ब्लेंक हो गए कुछ सेकण्ड्स के लिए लेकिन मुझे पता था ये साथ वाले भी चौड़े होक लड़ेंगे लेकिन वो कुछ करते उससे पहले hi मैं अपने राइट साइड खड़े लड़के के घुटनो पे बात देके मारा और वो भसदक़ा गांड फाड़ चिलाय उसके चिल्लाने से सब होश में आ गए और मेरी तरफ बढे लेकिन मैंने लेफ्ट साइड वाले के दी ाँद पे लात और वो झुका और झुकते hi उसकी कमर पे बात दिया बस बात इतना ज़ोर से मारा था की बात हठी से अलग हो गया अब वो दो और मैं अकेला वो दोनों एक साथ आये और एक ने मुझे पंच मारा पर मैंने उसका हाथ पकड़ा और उसके मुँह पे एक पंच दिया लेकिन मैं बस कोई सुपरमैन तो हु न की जो सब को पेल देगा अब देर हो चुकी थी इतने में दुसरे लोंदे में मेरी कोहनी पे विकेट देके मारी और मैं चिल्लाया गांड फाड़ भेनचोद अब मुझे पता लग गया था की इनको कितना दर्द हुआ होगा इनके तो खून भी आ रहा था बस. तभी दुसरे ने मुँह पे पंच दिया मेरे जिससे कोई ख़ास फर्क न पड़ा लेकिन मुझे पता था अब गांड टूट सकती है भाई.

मैं:- भसडक वह खड़ा हो के क्या मुठ मार रहा है जल्दी आ गांड टूट जाएगी.

विवेक भी मेरी बातो से जोश में आ गया, अब वो दोनों मुझे और मारते उससे पहले विवेक गांडू जैसे चिलता हुआ आया और रोमन रैगन्स स्टाइल में उस विकेट वाले पे कूद गया और उसे लेके निचे गिर गया और उसे पेलने लगा और मैंने भी उस दुसरे लड़के के एक दो ग़ुस्से मारे तो वो दोनों भी लेट गए क्युकी कैपेसिटी न थी उनकी.

उन 5 को लिटा के मैंने बाइक की चाबी विवेक को दी और उसने बाइक स्टार्ट की और मेरे पीछे बैठते hi दौड़ा दी.

मैं:- भेनचोद गांड फाड़ दर्द हो रहा है कोहनी में.

विवेक:- और बन ले हीरो बस तुड़वा ली न गांड.

मैं:- बीटा सामने वाले की मुझसे ज्यादा टूटी है.

विवेक:- वो तो है, पर तूने आज अपना गुसा कण्ट्रोल कर लिया जल्दी hi, मेरेको लगा और पलेगा इनको.

मैं:- मेरा लौड़ा कण्ट्रोल करेगा गुस्सा, बस गुस्सा तो आया hi नहीं वो तो मैं हवाबाज़ी में आ गया था. तू ये सब छोड़ और दर्द दूर कर बस.

विवेक:- अभी ठेके चलके एक िब की बोतल लेते है सब दर्द दूर हो जायेंगे तेरे.

मैं:- हां जल्दी चल.

फिर हम दोनों पहले एक मेडिकल शॉप पे आये और वह से पैन किलर ली मैंने और फिर हमे बाइक ठेके की तरफ मोड़ दी.

विवेक की गांड फैट रही थी की कोई देख न ले बस जान पहचान का वैसे तो अँधेरा होने लगा था.

अब उस फत्तू को बाइक के पास छोड़ के मैं गया ठेके पे और एक िब की बोत्तल मांगी.

ओनर:- पहले तो बाप ले जाता था और अब बीटा ले जा रहा है, क्या बात है चौधरी साहब?

मैं:- भसडक ाँद न खा मेरे और फिर ये चौधरी न बोलियों और मेरे दादा को पता लगा की मैंने दारु ली है तो भाभी को बता दूंगा की तेरी सेटिंग कोण है.

ओनर:- नहीं बता रहा मेरे बाप, ये ले तेरी दारु और सोडा.

मैंने बोतल ली और उसे शर्ट के अंदर डाली, मैं ये सब कर रहा था उस टाइम दो आँखे घर के देख रही थी मुझे लेकिन मैं और विवेक इन सब से बेखबर बाइक पे बैठे और निकल पड़े टंकी पे.

वह पहुंच के विवेक ने 3 पेग बनाये और फिर हमने उन तीनो पेग को आपस में भिड़ा की चियर्स करा और दो पेग पि गए और तीसरा पेग फेक दिया. अब तुम लोग सोचोगे की ये क्या बकचोदी है बस दारु क्यों फेक रहे हो तो बता दू ये पेग हमारे जिगरी दोस्त आरव के नाम का होता है जो 1 साल पहले गायब हो गया विथ फॅमिली बस पता hi नहीं चला कहा गया.

खैर हम दोनों दारु पिटे रहे और बकचोदी करते रहे और पिटे पिटे टाइम का पता hi नहीं लगा की कब 8 बज गए. और मेरा फ़ोन बज गया जो की मेरे दादा का था.

दादाजी:- कहा है बीटा.

मैं:- आ रहा हु अभी विवेक के घर था.

दादाजी:- आजा तेरे से बात करनी है कुछ.

मैं :- 10 मिनट में आया.

और फ़ोन काट दिया.

मैं:- सुन लौड़े खड़ा हो तुझे घर छोड़ दू

विवेक को चढ़ चुकी थी लेकिन मैं अभी भी नार्मल hi था .मैंने उसे माउथ फ्रेशनर दिया वैसे भी ज्यादा स्मेल नहीं आ रही थी फिर भी रिस्क क्यों ले.

विवेक:- माँ छोड़ देंगे सबकी और बुढऊ भें के लौड़े देख क्या रहा है ,रुक भसडक.

मैं उसे जल्दी से बाइक पे बिठाया और पेल दी बाइक रोड पे, अब वो बस मुझे गालिया देना लग गया था. खैर मैंने उसे कुछ नहीं बोलै क्युकी मुझे पता था अगर कुछ बोलूंगा तो ये फिर सुरु हो जायेगा इसलिए मैंने जल्दी से उसे उसके घर छोड़ा और उसे उसके रूम में लिटा के भी आया उसके घरवालों को बहाना मारा की चक्कर आ गए इस को ज्यादा खेल लिया उसको आराम करने दो वो लोग भी मान गए मेरी बात को क्युकी उन्हें मैं सरीफ लगता था :कूल:. लेकिन मैंने एक बात नोटिस की विवेक साला अपने घर आते hi सांत और सरीफ दोनों हो गया उसके प्रवचन रुक गए सेकंड में और अचे बचे की तरह गया अपने रूम में. वह बस ओवरएक्टिंग करता है मेरे सामने.

बस फिर से बाइक घर की तरफ मोड़ दी और इन सब के अंदर मैं अपनी कोहनी के बारे में तो भूल hi गया जिसमे दर्द नहीं हो रहा था नशे की वजह से लेकिन कल होने वाला था.

मैं घर पंहुचा और सीधा हॉल में जाके बैठ गया खाने के लिए जहा पहले से hi दादा दादी मौजूद थे, मेरा बाप भी वही था लेकिन उसका ध्यान बस टीवी में था.

दादाजी:- तूने उन राजपुरा वाले लड़को को इतना बुरा क्यों मारा? पता है वो हॉस्पिटल में है वो तो पुलिस में नहीं गए मेरी वजह से.

मैं:- गाली बक रहे थे मुझे.

दादाजी:- तो सुन लेता कोनसा मर जाता और तेरे कुछ हो जाता तो.

मुझे इन झूटी हमदर्दी से hi नफरत है इसलिए मैं बोल पड़ा.

मैं:- कुछ न होता मुझे ज्यादा से ज्यादा मर जाता न तो ाचा hi होता वैसे भी अभी तक कोनसे झंडे गाड़ लिए मैंने और अभी तक सुनता hi आया हु दूसरो की लेकिन अब नहीं सुन सकता.

मेरा मूड ख़राब हो गया था तो मैं अपने खाने की प्लेट और दूध का मग उठाया और अपने रूम में आ गया, और खा पाइक मुठ मार्के सो गया बस, मेरा लौड़ा सुनेगा इन लोगो की छोड़ दूंगा एक एक को (सो जा बे पक्का मत)

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
:थैंक्स: फॉर योर लवली रिव्यु बरोथेर

ऐसे रिव्यु से मोटिवेशन मिलता है बहुत

विवेक के लिए क्युकी उसकी गांड टूट सकती थी

एक छोटा सा करैक्टर

वही शामे जैलसयसय आगे बढ़ने की होड़

इम्पीरियल ब्लू :दारू:

आगे आएगी उसकी भी स्टोरी

ावेज़ों पोसम मर्डर था अपडेट का

एप आगे से ध्यान रखूँगा

टैग करने का क्या फायदा तुझे अपडेट hi नहीं मिलता :सिघ: इंडेक्स में जाके देखा कर
 
अपडेट:-4 (फुकेद उप बदली)

मैं सुबह 4 बजे सो के उठा और रनिंग करने के लिए तैयार होने के लिए t-shirt पेहेन hi रहा था की तभी अचानक से पता लगा बस कोहनी में भयानक दर्द है हाथ भी न उठ रहा था, लौड़ा एक्सरसाइज करेगा मेरा और सायद ये आखरी दिन था जब में इतनी जल्दी उठा हु. मैंने देर न करते हुए एक पेनकिलर ली और सो गया दुबारा.

2 घंटे hi सोया था की दादीजी ने जगा दिया अगर कोई और होता तो पक्का गाली खता लेकिन दादी को कुछ कह भी नहीं सकता था न इसलिए चुपचाप उठा और naha-dho के सब किर्या करम निपटा, एक दम हॉट माल बन गया , कोहनी में दर्द था पर इतना नहीं था.

मैंने ब्रेकफास्ट किया और बस स्टैंड की तरफ चल दिया, लेकिन आज मुझे एक चीज़ थोड़ी बदली बदली सी लगी की मेरे से काम उम्र के लड़के मुझसे दर रहे है और पता नहीं क्यों उनकी आँखों में दर देख के मुझे ख़ुशी हो रही थी अंदर से. और दर इसलिए रहे थे क्युकी कल मैंने राहुल को जो फोड़ा था और पुलिस केस भी नहीं हुआ.

खैर ये uut-pataang चीज़े सोचता हुआ में पनवाड़ी की दूकान पे आया.

मैं:- ताऊ एक सिगग्रेटे दियो.

ताऊ:- लो चौधरी साहब.

ये वर्ड सुनके मैंने उसे घूरा लेकिन उस लौड़े को कोई फर्क नहीं पड़ा.

मैं:- ताऊ आज छोटू कहा है, दिखाई नहीं दे रहा.

ताऊ :- बीटा तबियत ख़राब है उसकी, कल टंकी पे गया था तबसे बोल रहा है की बदन में दर्द है.

मैंने अपना तेज़ दिमाग :रोल: लगाया और पता कर लिया की छोटू बेटीचोद पिट के आया है अपनी आइटम के चक्कर में, वैसे सही हुआ उसके के साथ आशिकी का भूत तो उतरा.

मैंने ये सब सोचते सोचते सिगग्रेटे भी पि ली और दूकान से बहार भी आ गया.

बस आज ये विवेक कहा रह गया लौड़ा अकेला तो नहीं जाना पड़ेगा स्कूल. अब अकेले जाने में कोई दिक्कत नहीं थी पर दुसरे गाओं के लड़के अकेला देख के गांड जरूर तोड़ सकते थे मेरी, लेकिन मैं बाहुबली बांके जाने को तैयार था.

तभी बस आयी और उसमे चाहड़ गए मैं और रवि, रवि मेरी बात नहीं कर रहा था आज, और मुझे भी कोई फर्क नहीं पद रहा था उससे.

बस चली तो मैंने एक लड़के से पूछा जो विवेक के घर के पास रहता है

मैं:- यययय लोंदे विवेक क्यों नहीं आया आज.

वो:- भाई उसके सर भारी है, और उन्होंने कहा था की आपको बोलू की संभल के जाए.

मैं :- हम्म्म ठीक है.

मैं बैठा और खिड़की से बहार देखने लगा तो कल की बात ध्यान में आयी बस प्रिय से तो सेटिंग हो गयी मेरी तो जुगाड़ क्यों नहीं बिठाता मैं.

लेकिन मेरे अरमानो पे पानी फिर गया जब उसे मनीषा के साथ बैठा देखा. बस मेरा तो दिल hi धड़कना बंद हो जाता है मनीषा को देख के, दुनिया भर की क्यूटनेस भगवन ने उसे hi दे दी सायद. अब प्रिय को छोड़ के मैं बस मनीषा को hi देखे जा रहा था उसने भी ये नोटिस कर लिया था लेकिन वो इग्नोर मार रही थी मेरे को.

इग्नोर मारने के भी कई रीज़न थे उसके जिनमे से कुछ तो मुझे पता है. एक तो वो राजपुरा की है मतलब हमारे दुश्मन गाओं की. नंबर दो वो थोड़े अमीर घर से है और उसे मिडिल क्लास लड़के नहीं पसंद, बस ये लॉजिक समझ तो नहीं आया मेरे बूत हु केयर्स.

खैर बस स्कूल में घुसी और हम सब उतरके अपनी अपनी क्लास में चल दिए, मुझे पता था आज का दिन बस बोर होऊंगा बिना विवेक के क्युकी मैं और किसी से ज्यादा बोलता नहीं हु क्युकी मैं विस्वास नहीं करता किसी पे.

खैर हम क्लास में बैग रखके प्रेयर में गए और वो सदी सी प्रेयर गयी जो बचपन से सुनते और गाते आ रहे है मैं तो बस सामने कड़ी मांस को ताड़ रहा था, दीपिका मम तो माल लग रही थी आज ब्लैक पंजाबी सूट में.

हम लोगो ने प्रेयर की और क्लास की तरफ हो लिए, लेकिन मैं चल दिया मूतने और पानी पीने क्युकी पैन किलर लेनी थी मुझे कोहनी के लिए.

सब काम निपटाके मैं क्लास के दूर पे खड़ा था और अंदर वो छोटी हिघ्त का मास्टर अमित खड़ा था.

मैं:- मई ी के इन सर!

अमित:- के इन, आगे से जल्दी आना और वो तुम्हारा बिगड़ा हुआ दोस्त कहा है.

मैं:- ोकक सर और उसकी तबियत ख़राब है थोड़ी.

अमित:- तुम उससे दूर रहा करो नहीं तो वो बिगाड़ देगा तुम्हे भी तुम सरीफ लड़के लगते हो.

मैं: ोकक

सरीफ वर्ड सुनके पूरी क्लास निचे मुंडी करके हसने लगी कुछ को छोड़ के और वो सब नए फेस थे मेरे लिए और मैं भी इनके लिए नया hi होऊंगा.

बस एक को नहीं जानते ये :wtf:

खैर वो अमित पढ़ा के निकल गया और सेकंड पीरियड का टीचर आने में थोड़ा टाइम था तो मैं ऐसे hi बैठा था गुमसुम क्युकी मेरा यार नहीं आया था.

लेकिन तभी एक लड़का आगे ब्लैकबोर्ड के सामने खड़ा होक जोर से बोलै

लड़का:- Hello गाइस, मेरा नाम रोहन है और मैं हु दिल्ली के बड़े बुसिनेस्स मन हर्ष चौधरी का भतीजा. मैं इस स्कूल में बचपन से पढ़ा हु तो मेरी hi चलेगी यहाँ और कोई नया लौंडा तेज़ बना तो तोड़ के बैठा दिया जायेगा.

मुझे उसकी ghisi-piti बातो में बिलकुल भी इंट्रेस्ट नहीं था और ना hi फर्क पद रहा था की वो किसका लोंदा है और किसका नहीं, मैं तो मस्त लड़किया ताड़ रहा था बस.

लड़का:- तो सब लोग एक एक करके इंट्रो दो अपना अपना और कोई लड़ाई हो तो मुझे बताना मैं कोम्प्रोमाईज़ करवा दूंगा मेरी चलती है यहाँ.

वो लड़का रोहन सब का इंट्रो लेता रहा जो नए थे बस सब छोड़ू डरके अपना इंट्रो दे रहे थे. तभी प्रिय का नंबर आया और उसने अपना इंट्रो दिया तो उस रोहन की लार टपक रही थी उसको देखके. और फिर मनीषा ने अपना इंट्रो दिया.

रोहन:- नीक मनीषा, कोई दिकत हो तो मुझे बताना तुम.

मनीषा ने हां में सर हिला के बैठ गयी चुप चाप

और वो चुटिया सबका इंट्रो लेते लेते मेरे पे आ गया और में ये दुआ कर रहा था की टीचर आ जाये पर सभी टीचर्स मीटिंग में थे नए पीरियड्स सचेडूले को लेके.

रोहन:- यययय लास्ट बेंच वाले खड़ा होक अपना इंट्रो दे.

मैंने उसकी बात को अनसुना कर दिया क्युकी मैं किसी के आर्डर पे नहीं चलता.

मेरी तरफ से कोई जवाब न पाकर वो चिल्लाया,

रोहन:- यययय लड़के समझ नहीं आता क्या एक बार में, अपना नाम बता चल.

उसकी इस हरकत से साड़ी क्लास की नज़र मुझपे आ गयी और जो मुझे पहले से जानते थे उन्हें पता था की मेरी सत्की तो मैं फोड़ दूंगा इसे बिना कुछ सोचे समझे.

मैं खड़ा हुआ तभी मेरी आगे बैठा लड़का बोलै भाई क्यों पन्गा लेते हो छोड़ो न उसे बड़ी पार्टी है.

मैं:- चुप बे लौड़े .

मैं उसको इग्नोर करके रोहन के बिलकुल सामने जाके खड़ा हो गया, हैघट वगैरह शामे थी हमारी बॉडी में वो थोड़ा हल्का था मेरे से सेहरी जो था बस मग्गी खाके बड़ा हुआ होगा

रोहन:- चल नाम बता अपना

Main(ghurke):- एक

रोहन:- अबे पूरा नाम बता, चुटिया है क्या गवर.

अब इसका बहुत ज्यादा हो रहा था और मुझे गुस्सा भी आने लगा था की ये झात जैसा लोंदा बहुत बोल रहा है.

मैंने कुछ नहीं बोलै बस उसके कालर पकडे और अपने से थोड़ा दूर करके एक रैप्टा दिया खिचके वो चुटिया सुन हो गया एक थप्पड़ में बस लाइफ में नहीं खाया होगा उसने ऐसा थप्पड़ और मैंने बचपन से अब तक ऐसे थप्पड़ अनगिनत खाये है.

थप्पड़ की आवाज़ इतनी तेज़ थी की सब बचे शांत हो गए एक छमिया को छोड़ के वो बस मेरे सामने आके कड़ी हो गयी.

लड़की:- मेरे भाई को हाथ कैसे लगाया तुमने.

मैं:- फिर मार्के दिखाऊ क्या?

लड़की:- यू?

मैं:- बस बस अब कोई फ़िल्मी डायलाग न मारियो दिमाग घूम गया तो तेरे भी धार दूंगा.

रोहन:- बहुत महंगा पड़ेगा तुझे ये, तेरी ज़िन्दगी नर्क बना दूंगा.

मैं:- सुन लौड़े मेरी ज़िन्दगी पहले से hi नर्क है और तेरे जैसे लोंदे बहुत देखे है मैंने लड़ने से पहले थोड़ी रिसर्च कर ले मेरे पे एक ये दो वर्ड hi काफी है मेरी पहचान के लिए.

लड़की:- लड़कियों से बात करने की तमीज नहीं है क्या तुम्हे?

मैं:- नहीं!

लड़की:- देख लुंगी तुम्हे!

मैं:- देख लियो जी भर के, फोटो भेज दूंगा अपनी शादी के लिए.

अब आगे कोई डायलाग मारता इससे पहले तीसरे पीरियड की बेल्ल बजी और एक तकला टीचर आ गया मैथ का.

खैर मैं भी अपनी जगह पे आके बैठा तो वो आगे वाला लड़का बोलै जिसका नाम दीपक है ख़ास चेला है ये मेरा.

दीपक:- एक भाई प्रिंसिपल इसके पापा का दोस्त है.

मैं:- तो क्या लौड़ा काट लेंगे मेरा.

वो कुछ नहीं बोलै

मैं:- वैसे इस हॉट लोंड़िया का नाम क्या है,

दीपक:- रिया है भाई.

हम्म्म रिया! मस्त माल है वैसे.

वो दीपक भी चुप हो गया क्युकी उसे पता था वो मुझसे बेहेस नहीं कर सकता इवन कोई नहीं कर सकता.

मैंने आज का दिन बड़ी मुश्किल से निकला स्कूल में. जब छुट्टी हुयी तो बस जैसे मुक्ति मिल गयी इस संसार से.

मैंने एक कागज़ पे अपना नंबर लिखा जो प्रिय को देना था बस में. बस में भी मैं चुपचाप बैठा था की तभी अचानक से बस ने ब्रेक मारी बहुत तेज़ मेरा ध्यान कही और था इसलिए मेरा सर बजा आगे वाली सीट पे, दर्द के साथ गुस्सा भी बहुत आया इसलिए कुछ मीठे सब्द निकल गए सबके सामने,

मैं:- लौड़े अँधा है क्या, देख के न चका सकता.

मैं बोल hi रहा था और पूरी बस मुझे घर रही थी की कैसी सटकली खोपड़ी है ये लेकिन तभी एक लड़का बस में चढ़ा, सकल से hi गुंडा टाइप लग रहा था

लड़का:- यययय एक कोण है तुममे से ?

सब बचे मेरे को देखने लगे.

मैं:- अपॉइंटमेंट लेके मिलियो अभी मूड न है मेरा, या नंबर लेजा मेरा कॉल कर लियो. :रोल3: इस

उस लड़के ने मिझे घुरा और बोलै

लड़का:- चल निचे उतर तुझसे बात करनी है.

मुझे पता था बस जो भी है ये बात तो नहीं करनी इन्हे पेलने hi आये होंगे ,पर भेनचोद ये है कोण.

मैं:- ैय्य ड्राइवर बस चला बे कोई भी ऐसी कैसे स्कूल की बस में चढ़ सकता है उतर इसको.

ड्राइवर:- बीटा ये मला साहब का बीटा है.

:WTF: मला का लड़का मेरे पीछे क्यों पड़ा है.

काहिर मैं कोई सन क्रिएट नहीं करना चाहता इसलिए सोचा निचे उतर के बात करता हु ज्यादा बोलेगा तो पेल दूंगा.

मैं:- चल भाई निचे क्या बात करनी है तेरे को.

जब उतरने लगा तो चुपके से वो कागज़ प्रिय की गॉड में दाल दी जो मनीषा ने देख लिया और वो हम दोनों को आँखे फाड़ के देखने लगी.

बस निचे उतरा तो गांड फैट गयी क्युकी सामने 20 लड़के खड़े थे और सारे कॉलेज स्टूडेंट्स लग रहे थे. बस दिमाग में एक बात आयी की चुद गया आज तो.

सारे बस के बचे हमे hi देख रहे थे, मतलब बजती पक्की है :सिघ:

मैं:- बोल भाई क्या बात है.

लड़का:- तू उस स्कूल से नाम कटवा ले.

मैं:- और मैं ऐसा क्यों करू.

लड़का:- तुझे पता भी है आज तूने किस के लड़के पे हाथ उठाया है जगदीश चौधरी के बेटे पे जो हर्ष चौधरी का भाई है.

मैं:- कोण हर्ष चौधरी, वेट वेट तू कही उस की तो बात नहीं कर रहा.

भेनचोद! अंदर hi अंदर चिल्लाया मैं क्युकी रोहन ने बताया था सबको लेकिन मैं हवाबाज़ी में ध्यान नहीं दिया.

अब इस हर्ष चौधरी के बारे में बता दू

ये बसीकली एक वाइट क्रिमिनल है, मतलब दिल्ली का डॉन है ये, हर काले धंधे में नाम है इसका लेकिन इसको कोई टच नहीं कर सकता क्युकी कोई सबूत नहीं है किसी के पास, नार्मल लोग तो इसे बिज़नेस मन समझते है.

मतलब गांड फैट चुकी थी मेरी क्युकी मैंने एक डॉन के भतीजे को थप्पड़ मारा.

लड़का:- अबे कहा खो गया.

मैं:- सुन बे लौड़े मुझे झांट फर्क नहीं पड़ता कोण है वो और तू कोण है.

हवाबाज़ी मैं बोल तो गया लेकिन इसका अंजाम बुरा होगा सोचा न था,

क्युकी पीछे से एक बात मेरे घुटने के पीछे वाले हिस्से पे पड़ा और वो इतनी तेज़ था की मैं गांड फाड़ चिल्लाया लेकिन स्टिल खड़ा था और तभी उस लड़के ने सामने से एक पंच दिया मुँह पे बस सब कुछ हिल गया मेरा,

2 सेकंड के लिए पूरा ब्लेंक हो गया मैं, पर एक बात और पड़ा घुटने पे और मैं फिर चिल्लाया और इस बार सीधा घुटनो पे निचे गिरा मैं क्युकी जान hi न बची थी बे अब विवेक की याद आ रही थी की वो लौड़ा यहाँ होता तो आधी मार उसे पड़ती.

खैर वो लोंदा मेरे सामने आया जिसने पीछे से मारा था मुझे और ये लौड़ा रोहन hi था.

रोहन:- अरे अरे एक सर तो घुटनो पे आ गए.

मैंने उसे घर के देखा

रोहन:- आँखे नीची करके बात कर.

मैं:- तू खुद hi करवा के देख ले.

उसने मेरी चेस्ट में लात मारनी चाही लेकिन मैं लात पकड़ी और उसे अपनी तरफ खींचा और वो निचे गिरा मैं उसका पड़े पड़े का गल्ला पकड़ लिया और बहुत जोर से दबा दिया लिखे उसकी आँखे लाल हो गयी थी उस चूतिये ने नाखून तक गदा दिए थे मेरे हाथो में. लेकिन वो मरता उससे पहले मेरे सर पे एक डंडा पड़ा और मेरा हाथ अपने आप छूट गया मैं ब्लेंक हो चूका था और पीछे की तरफ गिर गया और फिर लात डंडे जो पड़े वो पड़े मुझे कुछ महसूस नहीं हो रहा था, वो सब रुके और उस लोंदे ने मेरा गाला पकड़ के उठाया मेरा फेस पूरा खून से सना हुआ था कोई पहचान भी न पाए ऐसा था,

लड़का:- अब भी आँखे निचे नहीं हुयी तेरी

मैं:- कोई नहीं करवा सकता भसडक.

लेकिन वो मुझे और मरते इससे पहले पुलिस की कार का साईरन सुना और वो सब rafu-chakar हो लिए और मैं पीछे को लुढ़क गया और मेरी नज़र जब बस की तरफ गयी तो बस दिल hi रुक गया, क्युकी मनीषा का फेस पूरा अंशू से भीगा हुआ था और प्रिय का फेस बस डरा हुआ सा था मतलब मनीषा के दिल में कुछ तो है यही सोच के मेरे दर्द भरे फेस पे स्माइल आ गयी.

अब ब्लड बहुत ज्यादा निकल चूका था और इसलिए आँखे बंद हो रही थी मेरी लेकिन धुंधली आँखों से मनीषा मेरी तरफ आती हुयी नज़र आ रही थी, वो आयी और मेरे सर को अपनी गॉड में रख लिया.

मनीषा:- एक प्लीज आँखे बंद मत करना पुलिस आ hi गयी बस

मैं बोलना तो चाहता था लेकिन बोल न पाया इसलिए बस मुस्कुरा दिया.

और मेरे मुस्कुराने से वो और तेज़ रोने लगी, बस रोटा कोण है यार मेरी गांड टूट गयी मैं फिर भी न रोया और न ये बोलै की और मत मारो.

मनीषा:- क्यों करते हो तुम ऐसा, क्या जरूरत थी लड़ने की नार्मल लड़को की तरह भी तो रह सकते हो.

अब मुझे फिर से अपनी पिटाई याद आ गयी जो मनीषा को देखके मैं भूल चूका था.

मैं:- कलम डाउन. पहले उस मला को मरूंगा और फिर उस हर्ष चौधरी के पुरे खंडन को जिन्दा जला दूंगा, एक को भी नहीं छोडूंगा.

और ये बोलते बोलते मेरी आँखे बंद हो गयी, बस अब आग लग चुकी थी पूरी बॉडी मैं, बॉडी बेहोश हो चुकी था लेकिन दिमाग स्टिल काम कर रहा था और बस एक hi बात गूंज रही थी की

" ी वांट रिवेंज बीच, लेटस थे डेविल केस आउटसाइड"

और ये सायद मेरी पहली इंटेंशन थी जो मुझे पूरी करनी थी, अब धीरे धीरे दिमाग भी सुन्न पद गया और मैं सो गया गहरी नींद में या दिमाग जो भी हो, क्युकी उसके बाद क्या हुआ मुझे कुछ याद नहीं.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
अपडेट:-5 (ब्रोकन और नॉट?)

मेरी आँखे खुली तब मैं हॉस्पिटल के एक बीएड पे था और मेरे सामने विवेक बैठा था एक कुर्सी पे उसकी आँखे लाल थी और साइड के सोफे पे मेरे दादा सो रहे थे, विवेक दीवार को घूरे जा रहा था non-stop, मेरी आँख तो खुल गयी पर बस ये नहीं पता था की दिन है या सुबह है क्या है.

मैंने अपने चारो तरफ मुंडी घुमाई लेकिन कोई घडी न थी, फिर सोचा उठके बैठ जाता हु और जैसे hi उठ के बैठने को हुआ मेरी अह्ह्ह्ह निकल गयी जोर से और तब मुझे रीलीज़ हुआ दर्द क्या होता है पूरी बॉडी मैं पैन सा था, मेरी आह्हः सुनके वायरस ने मेरी तरफ देखा और वो भाग के मेरे पास आया और रोने लगा बैठ के.

मैं:- लौड़े रो क्यों रहा है मारा नहीं हु?

उसने एक थप्पड़ दिया मेरे जो तेज़ तो नहीं था पर बस एक को थप्पड़ लेकिन कुछ कर भी नहीं सकता मैं,

मैं:- अब बोलेगा रो क्यों रहा है लुगाई थोड़ी हु तेरी.

वो फिर भी कुछ नहीं बोलै.

मैं:- ाचा दिन है या रात.

विवेक:- रात.

मैं:- फिर ठीक है बे जल्दी hi होश आ गया, अब उनकी माँ छोडूंगा.

विवेक:- 7 दिन बाद होश आया है तुझे.

मैं:- wtf इतने दिन बेहोश क्यों था मैं, भेनचोद वॉर में से थोड़ी आया था दो चार चोट hi तो आयी थी.

विवेक :- चुप लौड़े, 75%रिब्स दंगे थी दोनों घुटने टूट चुके थे, एक कन्धा डिस्लोकाते था सर फुट चूका था और डॉक्टर ने बताया की तेरे सर मैं एक नस भी काट गयी है. एयर छोटी मोती चोट पूछ hi मत पूरी बॉडी भरी पड़ी है.

फ़क! बस इतनी कैसे लग गयी खैर कोई नहीं ठीक हो जाऊंगा फिर देख लूंगा उन्हें.

मैं:- वैसे तूने मनीषा को देखा क्या बस वो रो रही थी tab,mujhe देखने आयी थी क्या वो?

विवेक चुप रहा थोड़ी देर.

मैं:- बोल न छोड़ू.

विवेक:- वो आगरा चली गयी फॅमिली के साथ उसके पापा आर्मी में है तो वह गयी और वैसे भी उसके और तेरे बारे में सब को पता लग गया था उसको तो वैसे भी ले जाते उसके घरवाले.

ये लगा मुझे पहला झटका जिससे मैं 2 सेकंड के अंदर उभर गया.

मैं:- कोई न अपनी माँ छुड़ाए वो लोग, प्यार के बिना भी बहुत काम है करने को.

वायरस:- दादी नहीं रही अब!

ये सुनके ब्लेंक हो गया मैं, बस ये सेकंड झटका लगा मुझे, दादी नहीं रही ये कैसे हो सकता है

मैं:- देख मजाक न कर बहुत मरूंगा.

विवेक:- तेरे इस सन के बाद उन्हें 3रद हार्ट अटैक आ गया और वो चली गयी हमे छोड़ के.

विवेक फिर रोने लगा लेकिन मेरी आँखों में आंशू नहीं आये पर अंदर hi अंदर टूट रहा था मैं, दिल घबरा सा रहा था मेरे साथ hi क्यों ऐसा होता है मेरी दादी hi मेरी माँ थी वो भी छोड़ के चली गयी मुझे, खैर जाने वाले कोण रोक सकता है मैंने खुद को मजबूत किया अंदर से और वायरस को बोलै

मैं:- चुप हो जा रोने से कुछ नहीं होता.

वायरस:- कैसा इंसान है बे तू तकलीफ नहीं होती तेरे को.

मैं:- तकलीफ तो इतनी होती है की पूछ मत दिल कर रहा है खुद की जान दे दू यही लेकिन अभी तो बहुत कुछ करना बाकी है.

वायरस:- चल तू आराम कर.

मैं:- अंजलि दीदी से बात करवा मेरी अभी.

वायरस सुन्न हो गया ये सुनते hi और हड़बड़ा के बोलै

विवेक:- न न रहने दे कल करियो बात.

मैं:- अबे करवा न उनको कुछ बोलना है.

(वैसे अंजलि दीदी के बारे में बता दू विवेक की बड़ी बेहेन है कॉलेज मैं है अभी, ये मुझे सबसे ज्यादा प्यार करती है और मैं भी.)

विवेक:- छोड़ न.

और वो मुझसे नज़रिए चुराने लगा

मैं:- सुन भसडक तू मुझसे झूट नहीं बोल सकता इधर आँखों में देख के बता क्या हुआ.

विवेक कुछ नहीं बोलै बस बैठा रहा, मैंने जैसे hi उसका हाथ पकड़ा तो मुझसे लिपट के रोने लगा इतना ज़ोर से की पूछो मत उसके रोने से मैं घबरा सा गया.

मैं:- देख विवेक बात क्या है बता मुझे. मुझपे भरोसा है न सब ठीक कर दूंगा मैं.

विवेक:- भाई अब कुछ ठीक नहीं हो सकता क्युकी कुछ बचा hi नहीं.

मैं:- साफ़ साफ़ बतायेग.

विवेक:- अंजलि दीदी ने सुसडे कर लिया.

ये सुनते hi मैं एक दम चुप हो गया और मेरी आँखों के सामने दीदी के साथ बिताये हुए पल याद आने लगे की कैसे जॉब मेरी घर पे पिटाई होती या मैं उदास होता तो वो कैसे खुस कर देती मुझे, अपने सेज भाई से भी ज्यादा मानती थी मुझे और अब वो भी छोड़ गयी मुझे.

मैंने अपनी आँखे बंद कर ली क्युकी जो दिल में दर्द उठ रहा था वो बॉडी के दर्द से बहुत ज्यादा था मैंने आँखे खोली तो मैं फुल घुसे मैं था. मैं hi मैं सोच लिया था मैंने की छोडूंगा नहीं जिसकी वजह से उन्होंने ये कदम उठाया है.

मैं:- क्या हुआ था उनके साथ कुछ पता चला, कोई लेटर वगैरह.

विवेक ने मेरी तरफ देखा तो उसकी भी फट गयी क्युकी मेरी आवाज़ hi ऐसी हो गयी थी, गुस्सा आँखों मैं साफ़ झलक रहा था.

विवेक:- देख गुस्सा न कर एक अभी तू ठीक नहीं है, और दीदी ने लेटर दिया था आखिरी सास लेते हुए और बोली थी की सबसे पहले ये लेटर टी पढ़े.

उसने अपनी जेब से लेटर निकल के दिया मुझे.

मैंने लेटर खोला और पढ़ना स्टार्ट किया

लेटर:-

  • एक जब तुम ये लेटर पढोगे तब तक मैं तुमसे बहुत दूर जा चुकी होउंगी, मुझे पता है मैं बहुत गलत कदम उठा रही हु लेकिन करती भी क्या और कोई रास्ता hi नहीं छोड़ा था उनलोगो ने मेरे लिए. कॉलेज मैं 2 भाई है उनकी नज़र मुझपे थी फ्रेशर पार्टी वाले दिन उन्होंने एक लड़की की हेल्प से मेरे नुदे पिक्स ले लिए ड्रेस चेंज करवाने के बहाने और अब वो फ़ोन करके रोज़ धमकी देते थे की या तो उनकी रखैल बन जाओ या वो लोग मेरा रपे करके मार देंगे. पर मैं अपने दमन पे दाग नहीं लगने दे सकती थी और तुम लोगो के बता के तुमको खतरे मैं नहीं दाल सकती थी, इसलिए मैंने खुद ख़तम करना hi सही समझा. जब तक तू इसे पढ़ेगा मैं बहुत होउंगी इसलिए अपना और विवेक का ख्याल रखना वो तेरे जितना हिम्मतवाला नहीं है. तुम दोनों की प्यारी दीदी- अंजलि.

मैंने लेटर को मुठी में भींच लिया और आँखे बंद कर ली और आँखे बंद होते hi एक बूँद आंसू मेरे गाल से तैरते हुए निचे जा गिरा, लेकिन ये वक़्त रोने का नहीं था इसलिए खुद को मजबूत कर लिए मैंने.

मैं:- पुलिस क्या कर रही है, कुछ पता किया उन्होंने और मुश्किल नहीं है पता करना, बता क्या कहा पुलिस ने.

विवेक:- कुछ नहीं किया है उन्होंने बस ताल देते है हमे कुछ न कुछ बोलके और डरते है की सामने वाले बहुत बड़े लोग है इसलिए दूर रहो नहीं तो फास जाओगे.

मैं:- फ़क पुलिस! कल से उन दोनों लड़को की जनम कुंडली चाहिए मुझे और उस लड़की की भी, मुझे नहीं पता तू कैसे करेगा कब करेगा, लेकिन पता कर वो कोण है क्या करते है, कहा रहते है, कहा जाते सब कुछ. मैं जब अपने पैरो पे खड़ा होऊंगा तो बहुत से लोग अपने घुटनो पे आने वाले है.

विवेक ने कुछ नहीं बोलै और हां में मुंडी हिल्ला दी बस.

मैं:- डॉक्टर को बुला,

विवेक:- अभी

मैं:- ी साइड अभी

विवेक हैरानी से मुझे देखता हुआ बहार निकल गया उसे हैरानी इस बात की थी की मैंने आज तक उससे ऐसे बात नहीं की है, लेकिन वो समझ रहा था की मैं गुस्से में हु.

विवेक जाते hi मैं खुद से बोलै.

मैं:- ी प्रॉमिस यू दी, ी विल किल एच एंड एव्री फूकिंग पर्सन जिसकी वजह से तुम दूर हुयी हो, कुत्तो की मौत मारूंगा सबको यमदूत भी बॉडी देख के घबरा जायेंगे उनकी. दुनिया मेरे कदमो में होगी.

मैंने खुद से ये बोलै hi था की तभी विवेक अंदर आया एक लेडी डॉक्टर के साथ, वैसे अगर मैं नार्मल होता तो लट्टू हो जाता इस डॉक्टर पे लेकिन अभी गुस्सा था मेरे अंदर.

डॉक्टर:- कैसा फील कर रहे हो अब?

मैं:- बाद अस हेलल, काम की बात करे मेरी करंट पोजीशन बताओ बॉडी की और फुल रिकवरी कितनी दिन में हो जाएगी और डिस्चार्ज कब होगा.

डॉक्टर:- वेल तुम्हारी 25% रिब्स अभी भी डैमेज घुटने और कन्धा ठीक हो चूका है लेकिन अभी तुम ज्यादा उसे नहीं कर सकते, मैं दिक्कत है तुम्हारे सर में, उस रोड का नुकीला हिस्से ने तुम्हारी ब्रेन की एक सेल को डिस्ट्रॉय कर दिया है तो ये बहुत ख़राब बात है.

मैं:- कुछ ख़राब नहीं है एक नस से कुछ नहीं होता.

डॉक्टर इस बात पे है दी.

डॉक्टर:- ये कोई मामूली बात नहीं है MR.AK, अब तुम्हारा एडिक्शन लेवल इनक्रीस होगा और अब तुम्हे जिस चीज़ का एडिक्शन होगा अगर वो नहीं मिला तो पागल हो जाओगे, काम मिला तो पागल हो जाओगे, पागल हो जाओगे मतलब डेंजरस हो जाओगे तुम.

ोकक थिस इस बाद, वैरी बाद लेकिन कोई नहीं एक इंजरी नहीं रोक सकती मुझे कुछ करने से.

मैं:- ोकक डिस्चार्ज कब होगा.

डॉक्टर कल हो जायेगा तुम ठीक हो अब बस रिकवर होना है जो घर पे हो जाओगे तुम.

वो डॉक्टर गयी तो देखा मैंने मेरे दादा उठ चुके थे और वो शकल से बहुत ज्यादा उदास लग रहे थे उन्होंने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर बहार निकल गए, मतलब बुढऊ गुस्सा है मुझसे और मेरा बाप कहा है वो नहीं आया.

खैर इन सब की आदत पद चुकी थी मुझे.

ये सब सोचते सोचते पता नहीं कब आँख लग गयी मेरी, और जब आँख खुली तो chahl-pehel की आवाज़ आ रही थी मतलब सुबह हो चुकी,

मुझे उठा देखके विवेक मेरे पास आया और मुझे फ्रेश करवाय और व्हील चेयर पे बिठाया डॉक्टर ने कुछ चेकउप किये छोटे मोठे और फिर मुझे रिहा किया इस जेल रुपी हॉस्पिटल से. यहाँ से जाते हुए लग रहा था की बहुत बार आऊंगा यहाँ तो.

खैर मुझे एक कार में बिठाया गया पता नहीं किसकी थी लेकिन मुझे क्या हो किसी की भी कुछ देर की ड्राइविंग के बाद हम घर पहुंचे लेकिन रस्ते भर मैं सोच रहा था की कैसा बाप है आया नहीं मिलने एक बार भी.

खैर हम घर पहुंचे तो मुझे झटका लगा क्युकी हॉल के सोफे पे एक औरत बैठी थी होगी कोई 30 साल की और उसके पास एक लड़का था छोटा, खैर मैंने ध्यान न दिया और अपने रूम में चला गया विवेक के साथ.

तो बे कॉन्टिनोएड ??
 
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