Kasam - Love is not Everything (Completed) - Page 8 - SexBaba
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Kasam - Love is not Everything (Completed)

अपडेट 61

अतुल Uncle...Atul अंकल

एक बच्चे की आवाज पुरे घर में gunja...Dhire धीरे घर की सभी सदस्य हॉल में जमा हो गए.

कुछ देर सोचने के बाद अतुल समझ गया की ये गौरव का बीटा है.

दादी, दादा अतुल अंकल आ गए.

इसी तरह वो बच्चा सभी से यही बात कह रहा tha...Uski मासूम बातें सुन कर अतुल की चेहरे में मुस्कान आ गया.

एक नजर सभी को देखा अतुल ne...Apne पापा, भैया और भाभी को देखते hi मुंह फेर liya...Maa पर नजर पड़ते hi नजरे वही थम गए.

आँखों के जरिये दिल को एक सुकून सा mila...Aankho में आंसू और ख़ुशी का कोई ठिकाना nahi...Atul का वही हाल था जैसे एक छोटे बच्चे का अपने माँ से बहुत दिनों के बाद मिलने पर होता है.

अतुल अपने माँ के पास गया.

ा. माँ:- तू तो गायब hi हो गया? एक बार भी हम सब का ख्याल नहीं आया?

अतुल:- Maa...Aapko और दीदी की तो हमेशा याद करता hu...Dur रहने की दर्द तो मुझे भी होता hai...Lekin क्या करू ये सेहर से जैसे नफरत सी हो गयी है.

ा. माँ:- कैसा hai...Apna ख्याल भी नहीं रखता?

अतुल की माँ अतुल की लम्बे लम्बे बाल पकड़ती हुई बोली.

अतुल:- ठीक हु माँ.

(इन हिज मंद) किसी तरह जी रहा हु.

ा. माँ:- झूठ बोलना अभी भी नहीं sikha...Kya ठीक hai...Itna दुबले पतला हो गया hai...Thik से खाना भी नहीं खता होगा तू.

अतुल कुछ जवाब देता उससे पहले hi उसकी भाभी बोल पड़ी. "इतना मोठे तो है देवर ji...Aapko दुबला पतला कैसे दिख रहे है."

अतुल ने जवाब में ऐसा घुरा की उसका होश बिलकुल hi उड़द gaya...Kuch बोलने की जरुरत नहीं pada...Aankho में hi इतना नफरत था की सामने वाला दर कर कांपने में मजबूर हो जाता.

ा. माँ:- मई भी बातो में hi उलझ gayi...Tu आराम kar...Mai लंच बना कर लाती हु.

इतना कह कर वो लंच बनाने चली गयी.

Hello अंकल.

इस मासूम सी आवाज ने अतुल का गुस्सा को पिघला दिया.

अतुल:- Hello beta...Kya नाम है तुम्हारा?

आरव

अतुल:- बहुत प्यारा नाम है.

आरव:- थैंक यू अंकल.

अतुल:- अच्छा ये बताओ Aarav...Tum मुझे कैसे जानते हो.

आरव:- दादी ने बताया था आपके बारे me...Aap बहुत बड़े डॉक्टर hai...Aur Uncle...Mai भी बड़ा हो कर डॉक्टर बनूँगा.

अतुल:- बहुत अच्छा beta...Lekin इसके लिए तुम्हे बहुत पढ़ना पड़ेगा.

आरव:- Padhunga...Abhi से पढ़ रहा hu...Aapki बुक्स भी पढ़ रहा हु लेकिन मच समझ में नहीं आ रहा hai...Aap मुझे पढ़ाएंगे ना?

आरव की इस बात पर अतुल को हंसी आ गया.

अतुल:- जरूर padhaunga...Ye bataao...Tum डॉक्टर क्यों बनना चाहते हो?

आरव:- वो हमारे क्लास में मैडम है? बहुत होमवर्क देती hai...Nahi करने प् मारती hai...Mai बड़ा हो कर डॉक्टर banunga...Aur उनको इंजेक्शन लगा dunga...Tab पता चलेगा दर्द क्या होता है.

आरव की इस मासूम बात पर अतुल के साथ साथ सभी की हंसी छूट गया.

अतुल:- आरव अब्ब जाओ khelo...Shaam में हम ice-cream खाने चलेंगे.

आरव:- थैंक यू अंकल.

फिर आरव झूमता हुआ वह से खेलने चला गया.

अतुल भी अपने माँ से दी की रूम पूछ कर मिलने जाने लगा.

गौरव:- अतुल.

अतुल वस् वही रुक gaya...Picche मुद कर दुख भी नहीं.

गौरव:- कुछ बात करनी है.

अतुल:- लेकिन मुझे नहीं करना है.

गौरव:- लेकिन सुन्न तो.

अब्ब अतुल का गुस्से पर कोई कण्ट्रोल नहीं tha...Gaurav के पास जा कर.

अतुल:- क्या सुनु? बोल न? क्या सुनु?

अतुल गुस्से में बोलता चला gaya...Gaurav को भी लगा ये सही वक्त नहीं है अतुल से बात करने के लिए.

अतुल:- तू sunn...Aur कान खोल कर sunn...Abb तेरा एक बीटा भी hai...Aur मई नहीं चाहता की एक बाप अपने hi बेटे के सामने पिट जाए या फिर उसकी बेइज़्ज़ती हो.

माफ़ तो पहले भी नहीं किया था और ना hi कभी karunga...Lekin अब्ब जान से मारना भी पड़े तो पीछे नहीं हटूंगा.

इतना कह कर अतुल वह से जाने laga...Fir एक बात याद आया.

अतुल:- बीटा बहुत अच्छा है tera...Accha हुआ की तेरा कोई भी गुण नहीं है usme...Aur एक सलाह देता हु अपने जैसे कभी मत बनाना.

फिर अतुल दी की रूम में चला gaya...Andar की जो हालत था उससे देख अतुल को विश्वाश hi नहीं हुआ.

अतुल:- (इन हिज मंद) ये कैसे हो सकता hai...Ye ये ये नहीं हो सकता.

जोर से चिल्ला कर.

अतुल:- दी.

Hello. डॉ. समीर.

समीर here...But हु इस तेरे?

मई निशा.

निशा को समीर की बात आज बहुत अजीब लग रहा था.

समीर:- कौन निशा? ओह्ह अच्छा याद aaya...Tum तुम वही हो ना जो मुझे मेडिकल एथिक्स और ह्यूमैनिटी का लेक्चर दे रही thi...Tumhara लेक्चर वैसे बहुत सही था.

निशा:- है मई वही hu...Lekin आपकी आवाज को क्या हुआ है?

समीर:- ी ऍम drunk...Nashe में हु mai...Aaj मेरा ऑफ डे hai...So आज चिल कर रहा हु.

बोलिये डॉ. क्या बात है? आज भी कोई लेक्चर देना है क्या? आज के दिन तो जीने dijiye...Please.

समीर ऐसे hi बाद बड़ा रहा था फ़ोन में.

निशा:- व्हाट?

समीर:- क्या हुआ? आप तो शॉकेड हो गयी? बोलिये क्या बात है?

निशा को कुछ समझ में नहीं आ रहा tha...Itna इमरजेंसी केस है और समीर नशे की हालत में hai...Wo बात को सुन भी नहीं रहा tha...Bas ऐसे hi बड़बड़ा रहा था नशे में.

निशा:- सर एक इमरजेंसी केस है.

समीर:- वो तो रोज होता hai...Kuch नया कहो.

निशा:- डॉ. थिस इस नॉट ा joke...Please समझने की कोशिश कीजिये.

समीर:- Hmm...Bolo.

निशा:- सर एक सर्जरी करना hai...Emergency है ... प्लीज आप हॉस्पिटल आ जाइये.

समीर:- बाकी की सर्जन को क्या हो gaya...Unhe bolo...Muft की रोटी खाने आते है saale...Salary लेते है लेकिन काम से दूर भागते है नालायक.

निशा:- नहीं sir...Wo सब तरय कर चुके hai...Lekin उनसे नहीं हो पा रहा hai...Wo कहते है या तो पेशेंट को रेफेर करना padega...Yaa फिर आप hi कर सकते है सर्जरी.

समीर:- लेकिन मई kaise...Mai तो नशे में hu...Kaatna कुछ है और काट कुछ और hi दूंगा.

निशा फ़ोन रख देती है.

फिर 2 मं में hi निशा का फ़ोन आता है समीर को.

समीर:- अब्ब क्या गाली देने के लिए फ़ोन कर रही ho...You अरे इर्रेस्पोंसिबले doctor...Aap को नशे में नहीं होना chaahiye...Yaa फिर कोई और लेक्चर.

लेट में से something...Aaj मैंने कुछ गलत नहीं kiya...Aaj मेरा छूती hai...Ye मेरा दिन hai...Aaj एन्जॉय करने का पूरा हक़ है mera...Aaj मैंने कोई गलती नहीं किया है.

समीर नशे की हालत में बक बक कर hi रहा था.

निशा:- बस बस sir...Maine ये करने के लिए फ़ोन किया था की बाकी के सर्जन कह रहे थे की आप जितने भी नशे में क्यों ना हो सर्जरी में मिस्टेक नहीं करते.

प्लीज सर जल्दी से हॉस्पिटल आ jaaiye...Kisi की जिंदगी की सवाल है.

समीर:- ये एथिक्स के खिलाफ नहीं hai...Uss दिन तो बहुत लेक्चर दे रही थी तुम.

निशा:- प्लीज sir...Ye किसी की जिंदगी की सवाल hai...Aap प्लीज हॉस्पिटल आ जाइये.

समीर:- नहीं मई हॉस्पिटल नहीं aaunga...Tum पेशेंट को लेकर मेरे क्लिनिक में आओ...5 मिनट दूर है हॉस्पिटल se...Address मई सेंड कर रहा हु.

निशा:- (इन हेर मंद) क्लिनिक me...Paise के लिए कुछ भी karega...Huh.

हॉस्पिटल में क्या प्रॉब्लम है सर.

समीर:- डोंट worry...Aaj पैसे के लिए नहीं बुला रहा हु क्लिनिक में जैसे तुम समझ रही ho...Hospital में किसी ने मुझे इस हालत में देख लिया तो लीगल केस हो सकता है.

क्लिनिक में चांस काम hai...Waise भी मई ऐसे इलीगल सर्जरी तो नहीं karta...Lekin किसी की जिंदगी की सवाल है इसलिए.

फिर समीर एड्रेस सेंत कर देता है मैसेज में.

और वो खुद को सर्जरी के लिए खुद को तैयार करने लगा.
 
अपडेट 62

अतुल:- Di...Nidhi दी

अतुल की आवाज में थोड़ा गुस्सा और थोड़ा हैरानी था.

निधि:- बहुत जल्दी आ gaya...Chal आ बैठ.

अतुल:- ये सब क्या hai...Itna बड़ा झूठ.

निधि:- बैठ पहले.

फिर अतुल अंदर बीएड में जा कर बैठ जाता hai...Lekin गुस्सा था की बढ़ता hi जा रहा था.

फिर निधि अतुल को गौर से देखने लगती hai...Khush तो बहुत थी वो अतुल को इतने सालो बाद देखने se...Aankho में कुछ बूँद आंसू भी आ गए.

लेकिन फिर अतुल का ये roop...Chehra कितना मुरझा सा गया tha...Aankho में एक खालीपन बहुत कुछ कह रहा tha...Di को समझते देर नहीं लगा की आज भी उसका भाई वही खड़ा है जहा वो 5 साल पहले था.

निधि:- (अतुल के बालो पर हाथ फेरते हुए) तू तो अभी तक वैसा hi hai...Apna थोड़ा तो ख्याल कर.

दी की आवाज में दर्द था जो हर किसी को होता है अपनों को ऐसे हाल में देख कर.

अतुल:- (दर्द के साथ) जीने की वजह hi चली gayi...Abb क्यों ख्याल करू और किसके लिए?

अतुल ने दी की आँखों में देखते हुए कहा.

निधि:- हिम्मत rakh...Sab ठीक हो जाएगा.

अतुल:- आपको ऐसा लगता है...5 साल हो gaye...Har दुआ हर उम्मीद बेकार हो gayi...Abb तो आदत हो गयी है ऐसे जीने ki...Bas एक दुआ अब्ब भी निकलता है इस टूटा हुआ दिल se...Meri Nishu...Jaha भी रहे खुस रहे.

आँखों में आंसू और होंठो में muskaan...Ajeeb सा हालत हो गया था अतुल का.

दी फिर अतुल की आंसू पोंछने लगती hai...Atul पीछे हैट जाता है.

अतुल:- लेकिन आपने बहुत गलत kiya...Mujhse झूठ.

निधि:- याद है तुझे तेरे vaade...Har रक्षाबंधन में यही वादा करता tha...Di इस राखी का मई मान rakhunga...Aap पर कभी कोई तकलीफ आने नहीं dunga...Aap जहा कही भी हो एक आवाज देना सब कुछ छोड़ कर आ जाऊँगा.

आज वही तो किया maine...Aaj मुझे अपने भाई की जरुरत है और माँ को एक बीटा ki...Kya अभी भी तुझे बुलाना गलत है?

अतुल:- लेकिन तबियत खराब होने की बहाना? एक आवाज दे देती आ जाता.

निधि:- सच में? 5 साल से यही सुन्न रही हु की कल आऊंगा, परसो आऊंगा, जल्दी aaunga...Lekin ना hi कल आता है, ना परसो और ना hi tu...Aati है तो सिर्फ एक झूठी उम्मीद.

दी की बात से अतुल का चेहरा झुक गया.

निधि:- (अतुल के सर उठाते हुए) ये सर झुकने के लिए नहीं है.

तेरे साथ साथ हम भी तड़प रहे है 5 सालो se...Mujhe भी अपने भाई की फ़िक्र hai...Maa को अपने बीटा ki...Tu क्या चला गया सारा खुशियां hi चली gayi...Mai अब्बप्न पुराना भाई को देखना चाहती hu...Bas इसी लिए तुझे बुलाया है.

अतुल:- लेकिन मई कर भी क्या सकता hu...Dum घुटता है मेरा यहाँ.

निधि:- जानती hu...Lekin कब tak...Kabhi न कभी तो आगे बढ़ना hi पड़ेगा.

अतुल:- कोशिश तो कर hi रहा हु ना.

निधि:- Koshish...Kitna कामयाब हो पाया तू इस कोशिश में? दूर हो कर तू और भी अलग होता जा रहा है हम सब se...Pehle थोड़ा बहुत बात भी कर लेता tha...Abb तो वो भी नहीं.

अतुल:- आप तो सब जानती है न?

निधि:- जानती hu...Aur ये भी जानती हु की अब्ब तुझे ऐसे अकेले नहीं रहने dungi...Tujhe आगे बढ़ना hai...Nisha बहुत अच्छी thi...Aur मुझे भी तुम दोनों की जोड़ी बहुत अच्छा लगता tha...Lekin अब्ब क्या कर सकते hai...Sacchai से मुंह तो नहीं फेर sakte...Nisha आगे बढ़ गयी hai...Tujhe भी आगे बढ़ना होगा.

अतुल:- लेकिन बढ़ नहीं पा रह hu...Aap जानती है न कितना प्यार करता हु मई निशु se...Nisha मुझसे दूर हो कर भी मेरे पास hi है.

जहा जहा अतुल का वजूद है वह वह निशा hai...Mobile के पासवर्ड से लेकर क्लिनिक के नाम tak...AN Clinic...Har बुक के हर पेजेज me...White कोट me...Clinic के हर इंस्ट्रूमेंट me...Apne रूम के दिवलो में.

अपने खालीपन me...Apne ख्वाब me...Ateet me...Yaad me...Khwahish me...Dhadkan me...Har जगह निशा है.

यहाँ तक की आप अगर निशा को हर जगह से हटा भी दो तो वो मेरे साँसों में है.

इतने अंदर तक बसी है निशा mujhme...Itna गहरा है हमारा pyar...Jab तक निशा है तब तक अतुल का वजूद hai...Bin निशा के अतुल कुछ भी नहीं.

अतुल का प्यार देख दी को कभी अतुल पर गर्व होता तो कभी अतुल की हालत देख रोना आता.

निधि:- क्या तू निशा को भुला कर आगे बढ़ नहीं सकता?

अतुल:- कोशिश किया tha...Lekin एहसास हुआ की अगर ऐसा सोचु भी तो ये प्यार kaisa...Pyar किया है maine...Saccha प्यार...7 जन्मो में साथ रहने की कसम खाने वाले थे ham...Aur मेरा प्यार इतना कमजोर कैसे हो सकता है की इसी जन्म में मई निशु को भुलाने की कोशिश करू.

फिर दी अतुल को समझाने की नाकाम कोशिश करती rahi...Apne भाई पर तो हमेशा से गर्व था unko...Aaj भी था.

इतना तो जान गयी थी वो की अतुल निशा से बढ़ कर आगे कुछ नहीं sochega...Atul के सारे दर्द को महसूस करते हुए वो भगवन से एक hi दुआ कर रही थी, "काश वो अतुल को उसकी निशु से मिलादे."

नेक्स्ट डे

आरव:- बहुत टेस्टी है ice-cream...Aap भी खाइये न अंकल?

2 मिनट में पूरा ice-cream छत्त कर गया आरव.

अतुल:- ठीक hai...Lekin एक शर्त पर.

आरव:- क्या?

अतुल:- यही की तुम मुझे अंकल नहीं चाचा बुलाओगे.

आरव:- Ok चाचू.

आरव की मासूम बातो से अतुल मुस्कुराये बिना नहीं रह पाया.

वो ice-cream लेने hi वाला था की आगे से 2 बच्चो की आवाज सुनाई दिया.

सामने एक छोटा लड़का और एक लड़की थी.

लड़की:- भैया मुझे भी ice-cream खाना है?

लड़का:- लेकिन पैसे नहीं है मेरे पास.

लड़की:- मुझे खाना है खाना है.

फिर लड़की रोने लगती है.

लड़का:- माँ को आने do...Fir खा लेना.

लड़की:- नहीं मुझे अभी खाना है.

ये देख अतुल दो ice-cream ले कर बच्चो के पास चला जाता hai...Aur दोनों को दे देता है.

"थैंक यू अंकल" बच्चे बहुत खुस थे और उनकी ख़ुशी देख अतुल भी खुस हो गया.

फिर आरव के साथ वो भी ice-cream खाने लगता है.

"ज्यादा देर तो नहीं हुआ." एक जानी पहचानी आवाज अतुल के कानो पर पड़ा.

तुरंत मुद कर अतुल उस तरफ देखने लगा.

एक औरत थी करीब 30 साल ki...Wo दोनों बच्चो को लेकर जा रही thi...Achanak hi अतुल की मुंह से निकला,

अतुल:- निशा

वही चाल और वही आवाज.

फिर वो औरत आगे भीड़ में गायब हो gaya...Atul भी बेचैन सा उस भीड़ में से निशा को ढूंढ़ने लगा.

कुछ देर बाद वो औरत फिर से दिखाई दी बच्चे की saath...Lekin इस बार अतुल को सिर्फ निराशा hi मिला.

वो औरत निशा नहीं थी.

अतुल:- (इन हिज मंद) हल्लुकिनाशन...46 baar...Paagal हो गया हु तुम्हारे प्यार में.

हर जगह दिखती हो tum...Paas से हो कर निकल जाती ho...Pal भर में करीब आती हो और पल भर में gaayab...Kabhi तो ठहर jaao...Jindagi भर के liye...Kabhi तो पूरा करो साथ भर रहने की kasam...Saath जीने की कसम.

प्लीज निशु, Please...Jee नहीं सकता तुम्हारे बिन.
 
अपडेट 63

आज क्या कंप्लेंट है डॉ. निशा?

निशा:- कंप्लेंट नहीं sir...Thank यू बोलने आयी थी.

समीर:- थैंक यू !!! किस लिए?

निशा:- वो आप इतने नशा में होने के बाद भी सर्जरी के लिए तैयार हो gaye...Aur इतनी कॉम्प्लिकेटेड केस को भी सक्सेस्स्फुल्ली हैंडल kiya...Wo भी बिना कोई पैसे ki...Agar आप नहीं होते तो...

समीर:- तो फिर इसमें थैंक यू की क्या बात hai...Farz था मेरा.

निशा:- सर शायद आपके बारे में गलत सोचती thi...Talented सर्जन तो आप है hi साथ में दिल भी है आपके paas...Patient के दर्द को समझते है और उनके साथ कैसे काउंसलिंग करना है ये सब आपको पता है.

समीर:- इतना भी ग़लतफहमी में मत रहिये madam...Aaj भी वैसा hi हु जैसा आप समझती thi...Money माइंडेड.

निशा:- तो फिर कल क्या tha...Free का सर्जरी.

समीर:- है कल फ्री में सर्जरी किया tha...Vajah है मेरी Maa...Maa कहती है पैसा तो आता रहता hai...Kabhi किसी जरुरत मंद लोगो की मुफ्त में इलाज karo...Dua मिलेगा.

बस इसी वजह से मंथ के लास्ट डेट हॉस्पिटल से लीव ले कर अपने क्लिनिक में रहता hu...Aur कल वही लकी लास्ट डेट था.

निशा:- ये तो बहुत अच्छी बात hai...Aap को नहीं लगता की जितने इलाज आप मुफ्त में करेंगे उतना hi दुआ ज्यादा मिलेगा.

समीर:- (समिलिंग) तो फिर कमाऊंगा कैसे...10 साल का मेडिकल career...Din और रात की mehnat...Kya समाज सेवा के लिए है?

पैसे सभी को अच्छे लगते hai...Aur ये मेरी जरुरत भी hai...Mera मानना ये है की ईमानदार रहो अपने ड्यूटी से और जितना कमा सको कमाओ.

प्लीज डोंट mind...Aapko नहीं कह रहा hu...Lekin आप जैसे लोग होते है वो कहते है की गरीब को जितना हो सके उतना मदद karo...Acchi बात है.

लेकिन प्रॉब्लम ये है की अक्षर जो लोग ये बात कहते है वही लोग गरीब और जरुरत मंद का खून चूसने की कोई मौका नहीं छोड़ते.

फॉर ेग, अगर सरक को किसी मूवी में कुछ करोड़ पैसा मिले तो लोग कहेंगे, "इतना पैसा ले कर क्या karega...Kuch डोनेट करेगा तो किसी का भला हो जाएगा." लेकिन ये लोग वही होते है जिनके सामने कोई 2 रुपैया के लिए हाथ फैलाये, रोये और छीके ये लात मार कर निकल जाते है.

एडवाइस देना आसान है लेकिन जब खुद पर आये तो करना बहुत मुश्किल.

वैसे भी आज ये दुनिया इतना तेजी से बढ़ रहा है वह सर्वाइव करने के लिए पैसा चाहिए ना की dua...Dua तो बस अपने माँ की मान रखने के लिए और मेन्टल सटिस्फैक्शन के लिए करता हु.

निशा बस समीर की बात सुन hi रही thi...Tabhi समीर को फ़ोन कॉल आता है.

समीर:- (ों फ़ोन) बस आ रहा हु 2 min...Vodka रेडी रखना.

व्हाट? बियर? आज सिर्फ vodka...Thak गया हु बियर पीते पीते.

Ok...Bye...Aa रहा हु.

(तो निशा) अच्छा डॉ. चलता हु.

निशा:- इतना भी नशे में मत rahiye...Apna करियर के बारे में तो sochiye...Itne टैलेंटेड और स्किलफुल्ल है आप और आप अपनी hi जिंदगी को बर्बाद कर रहे है नशे में.

लेकिन समीर कुछ जवाब दिए बिना hi वह से निकल जाता है और सोचने लगता है.

समीर:- (इन हिज मंद) Career...Ye ladkiya...Career के बारे में समझाती hai...Ek थी जो सब कुछ छोड़ कर चली gayi...Har vaade...Kasme...Sapne...Career तो क्या जिंदगी बर्बाद कर दिया.

और ये Nisha...Kehti है जरुरत मांडो की मदद karo...Lekin मेरा kya...Jab मुझे जरुरत थी तो सभी जिन्हे अपना कहता था बिच में छोड़ कर चले gaye...Kisi ने मदद नहीं kiya...Mai hi जानता हु कितनी मुश्किल से अपने बीमार माँ और पापा का इलाज कर रहा हु.

दुनिया स्वार्थी hai...Jeena है तो खुदगर्ज़ bano...Apne लिए जीयो.

अतुल जब आरव के साथ अपने घर वापस लौटा तो सामने मौजूद शख्स को देख कर गुस्सा सातवे आसमान में चढ़ गया.

अतुल:- गांव बसा नहीं की लूटेरे पहले hi आ गए.

अतुल खुद से hi बड़बड़ाते हुए अपने रूम की तरफ जाने लगा.

भाभी:- अरे देवर ji...Kaha जा रहे है aap...Preeti आयी hai...Aapse मिलने.

पहले तो अतुल आरव को धुंध रहा tha...Lekin वो अपने रूम में चला गया tha...Fir

अतुल गुस्सा से अपने भाभी और प्रीती को देखता है फिर सामने गौरव से.

अतुल:- समझा दे अपनी बीवी ko...Jyada चापलूसी ना करे.

भाभी:- Chaaplusi...Aap कहना क्या चाहते है?

प्रीती:- अतुल.

अतुल:- Chup...Agli बार मेरे सामने भी दिखी ना तो...

फिर अतुल वह से अपने रूम में चला जाता है.

प्रीती अतुल को जाते देखते रह जाती hai...Aaj भी अतुल का नफरत वैसा hi है जैसा 5 साल पहले tha...Vaada का पक्का था Atul...Bas यही बात प्रीती को याद आ रहा था आज भी.
 
अपडेट 64

अलग जगह, अलग माहौल और अलग raat...Lekin वही दर्द, वही मुस्कान और वही यादें.

"ोुछ्ह" इसी आवाज से अतुल होश में आया.

"साला अब्ब तो सिगरेट भी साथ नहीं दे रहा है." अतुल ने सिगरेट की टुकड़ा को फेंक कर दूसरा जलाया.

वो अभी भी घर की एक कोना को घूरे जा रहा tha...Ghar hi बदल गया tha...Atul की फॅमिली शिफ्ट हो चुके the...Abb तो निशा के साथ साथ निशा की घर भी यादें hi बन कर रह गया था.

अतुल को फिर से याद आने लगा अतीत की उन् yaadein...Jaha छठ के एक कोने में दोनों प्रेमी जोड़ी रात के अँधेरे में मिल कर बातें करते थे और अपने भविस्य की सुनहरे सपने देखते थे.

निशा:- सो मर. AK...Congratulations.

अतुल:- Congratulations...Kyu?

निशा:- नाउ वे अरे इन Internship...Doctor वाली फीलिंग्स आ रही है.

अतुल:- हम्म सही hai...Abb कुछ वक्त के लिए no पहाइ no study...Only डॉक्टर गिरी.

निशा:- तुम पढ़ाई से कबसे डरने लगे.

अतुल:- कौन कम्बख्त डरता है पढ़ने se...Ham तो डरते hai...darte hai...darte है.

निशा:- आगे भी तो बोलो.

फिर निशा हसने लगी.

अतुल:- हसो मत यार :बीए: ...डायलाग भूल गया.

निशा:- (अतुल के गालो में पिंच करते हुए) बहुत hi फनी ho...Issi लिए तुम पर इतना प्यार आता है.

अतुल:- कितना प्यार?

निशा:- बहुत ज्यादा?

अतुल:- तो फिर प्रोवे करो?

निशा:- कैसे?

अतुल:- एक मिट्ठी सी किसी दो.

निशा अतुल के गालो पर प्यार से किश करती है.

निशा:- कर दिया प्रोवे.

फिर निशा अतुल को देखती hai...Atul निशा को घर रहा tha...Nisha भी वजह से अच्छी तरह वाकिफ थी.

अतुल:- गाल पर नहीं लिप्स में. लिप तो lip...Bahut दिन हो गए.

निशा:- न बाबा न.

फिर निशा छठ से जाने लगती है.

अतुल:- कहा जा रही ho...Pehle किश तो देती जाओ.

निशा बातो को सुन कर भी अनसुना कर देती है.

अतुल:- Accha...Tum नहीं तो कोई और hi सही.

अतुल की इस बात पर निशा दौड़ कर वापस आती है.

निशा:- (घर कर) कौन?

अतुल:- (विथ स्माइल) Preeti...Abhi भी मेरे आगे पीछे घूमती रहती है.

अतुल मुस्कुराते हुए कहता hai...Usse पता था निशा का रिएक्शन क्या hoga...Aur निशा सच में जल भून जाती है.

निशा:- नाम मत लो उस चुड़ैल का.

अतुल:- चुड़ैल नहीं बहुत क्यूट है वो.

जवाब में निशा अतुल को मारने लगती है. :अंगरीवीफे:

निशा:- और लो उसका नाम.

अतुल:- Sorry...Sorry...Please...Please.

निशा:- उस चुड़ैल की आस पास भी दिखे ना तो टांग तोड़ दूंगी.

अब्ब निशा मारना बंद कार्ति है.

अतुल:- फिर मुझे दोष मत देना की लंगड़ा पति मिला तुम्हे.

अतुल ने बहुत hi मासूमियत से कहा तो निशा एक दम से शर्मा गयी.

निशा:- (बलुशिंग) तुम भी ना.

अतुल:- हो जाए इस बात पर एक मीठी मीठी किसी.

फिर दोनों प्रेमी अपने प्यार को किश के जरिये जाहिर करने लगते hai...Kiss करते वक्त भी दोनों सिर्फ एक दूसरे के प्यार महसूस कर रहे थे.

किश के बाद हमेशा की तरह निशा वह से भाग जाती hai...Aur अतुल पीछे खड़ा मुस्कुराता हुआ रह जाता tha...Aise hi छोटे छोटे पल दोनों के प्यार और भी गहरा होता जा रहा था.

"आठ आठ" एक खांसी के साथ अतुल फिर से होश में आता है.

पहले के पल जितना सुहाना था अब्ब ये यादें उतना hi दर्दनाक.

"सिगरेट और दारु तो ऐसे hi बदनाम hai...Asli जानलेवा चीज तो ये कम्बख्त इश्क़ hai...Adhuri इश्क़ की दास्ताँ.

अतुल की आँखें फिर भर जाती है.

सुनी निघावो से अतुल छठ की एक कोने को देखे जा रहा था इस झूठी उम्मीद में की शायद उसकी निशु की दर्शन हो jaaye...Shaayad.

लेकिन सब जानते हुए भी वो ये नहीं मान रहा था की "अब्ब निशु और उससे जुडी यादें बहुत दूर जा चुकी hai...Abb वो कभी नहीं लौटने वाले."

अतुल:- Nishu...Aa जाओ yaar...Please आ jaao...Nahi जी सकता तुम्हारे bin...Akela हो गया hu...Kamjor हो गया hu...Jeene की चाह भी ख़त्म हो गयी hai...Tumhaari यादें hi है जो मुझे जिन्दा रख रही hai...Ek उम्मीद है... "मई और मेरी निशु, हमारा छोटी सी और प्यारी सी duniya...Tum रानी और मई तुम्हारा Raja...Ek छोटी सी duniya"...Bas यही उम्मीद की सहारे जी रहा हु.

प्लीज आ जाओ jaan...Kahi मेरी जान ना निकल jaaye...Andar से और भी टूट ता जा रहा hu...Jindagi का भी कोई भरोषा nahi...Baahar से दीखता कुछ और हु और अंदर से कुछ और hu...Toot रहा hu...Har पल मर रहा hu...Dil का दर्द बढ़ता hi जा रहा hai...Tum नहीं जानती कैसे 5 साल गुजारे है maine...Tanhaayi में हर पल मर रहा hu...Please लौट आओ कही सच में ना मर जाओ.

प्लीज Nishu...Please jaan...Hamaare प्यार की khaatir...Hamaare कसम के khaatir...Hamaare सपनो की khaatir...Hamaari संजोयी हुई उस छोटी सी दुनिया की khaatir...Please.

अब्ब अतुल अपने पेअर पर भी खड़ा नहीं हो paata...Wo वही निचे गिर जाता है.

पीछे कड़ी निधि से अपना भाई की हालत देखा नहीं jaata...Jaldi से वो आ कर अतुल को संभालने लगती है. एक बार वो अतुल की आँखों में देखती hai...Atul उससे लाचार निघावो से देख रहा tha...Ek हारा हुआ आशिक़ की तरह.
 
अपडेट 65

"क्यों भाई? क्यों कर रहा है ऐसा? अपने साथ और हम सब के साथ?"

अतुल का हाल देख निधि भी रो पड़ी.

अतुल:- नहीं Di...Aap मत रोईए.

अतुल फिर निधि की आंसू पोंछने लगता है.

निधि:- लेकिन अपना आंसू क्यों नहीं पोंछता तू कभी?

अतुल:- बहने dijiye...Kabhi कभी hi तो बहते hai...Warna आँखों से तो जैसे आंसू सुख hi गए है.

अतुल ने मुस्कुरा कर कहा लेकिन मुस्कान के पीछे का दर्द निधि से छुपा नहीं पाया.

निधि:- हिम्मत रख bhai...Vakt के साथ सब ठीक हो jaayega...Lekin खुद को इतना तकलीफ तो मत दे.

अतुल:- क्या आपको सच में ऐसा लगता है? वक्त सब ठीक कर dega...Vakt भी मुझसे ऐसे रूत गया है जैसे किस्मत...5 साल हो गए है दी लेकिन जो घाव है दिल में वो भरने की जगह वो और भी गहरा होता जा रहा hai...Aur इस ना भरने वाली घाव जिंदगी भर साथ निभाएगा.

अतुल छठ का दूसरा कोना में चला gaya...Aur आसमान की तरफ देख मुस्कुराने laga...Usse ऐसा लग रहा था जैसे ये "चाँद सितारे भी उसकी इस हालत और ना कामयाबी पर है रहे है."

"कोशिश तो कर?" तू हार कैसे मान सकता है? मेरा भाई ऐसा नहीं hai...Jo सोचता है कर के दिखाता hai...Yaad है मेरे कहने पर hi तूने मब्ब्स पढ़ा था.

"10तह में था tu...Mai भी डॉक्टर बनना चाहती thi...Papa ने साफ़ मन कर diya...Aur मई कुछ बोल भी नहीं सकती thi...Scholarship भी नहीं मिला tha...Kaise पापा को मन सकती थी इतने पैसो के लिए जब उन्होंने साफ़ इंकार कर दिया था.

और बस इसी वजह से तूने 11तह से hi मब्ब्स को टारगेट कर के दिन रात म्हणत करने laga...Aur पहली बार में hi तुझे स्कालरशिप मिल gaya...Fir पापा के खिलाफ जा कर डॉक्टर बन गया तू.

जानता है तुझ से ज्यादा खुस मई thi...Meri अधूरी इच्छा को तूने पूरा kiya...Aisa लगा जैसे मई ना सही लेकिन मेरा भाई तो डॉक्टर बनेगा."

अगर मेरी इतनी छोटी ख्वाहिश के लिए इतना कर सकता है तू फिर मेरी इस ख्वाहिश को क्यों पूरा नहीं करेगा जिसकी बहुत जरुरत है.

मेरी ख्वाहिश यही है की तू जिंदगी में खुश reh...Tanhaayi और ऐसी दर्द से बाहर निकल और खुल कर जिंदगी तो जी."

अतुल:- (विथ स्माइल) दी आपको मई कभी मन कर सकता हु क्या? बच्चपन से ले कर आज तक आप मेरे साथ है और हमेशा rahengi...Kya कुछ नहीं किया है आपने मेरे liye...Bachpan में एक दोस्त बन कर मुझे sambhala...Galtiya करता था तो माँ और पापा से बचाती थी और इलज़ाम खुद पर लेती thi...Aur जवानी में कदम रखा तो हर बुरी आदत से दूर rakha...Aur आज तक आपने हर मुश्किल वक्त में साथ निभाया यहाँ तक की आज भी.

आप, माँ और मेरा duty...Inke अलावा मेरा अब्ब है hi kaun...Aapki ख्वाहिश पूरी करना मई भी चाहता hu...Aakhir कौन चाहता है इतना दर्द में जीना? लेकिन दर्द और ये यादें जो है वो कभी साथ hi नहीं छोड़ती.

लेकिन कोशिश करूँगा Di...Koshish karunga...Jaise भी आगे बढ़ने की.

अतुल की इस बात पर निधि कुछ देर सोचती rahi...Usse समझ में नहीं आ रहा था की क्या ये बात पूछना सही है? हिम्मत कर के पूछने का फैसला किया.

निधि:- भाई तू शादी कर le...Fir सब ठीक हो जाएगा.

निधि ने कह तो दिया लेकिन ये बात अतुल के लिए किसी झटका से काम नहीं था.

अतुल:- नहीं.

फिर अतुल दूसरे कोने में चला gaya...Chehra में हैरानी और गुस्सा का मिला जुला भाव था.

निशि:- आखिर कब तक? उम्र भी हो गया है अब्ब तो...30 के करीब हो गया.

लेकिन अतुल चुप hi रहा.

निधि:- निशा मुझे भी अच्छी लगती thi...Bilkul "मेड फॉर एच इतर" लगते thhe...Maine भी बहुत कोशिश किया था तुम दोनों के liye...Lekin अब्ब एक hi जगह पर तो नहीं रह सकता न तू bhi...Aage बढ़ना तो पड़ेगा ना.

अतुल:- निशा एक वजह है शादी ना करने ki...Iske अलावा मई खुद भी तैयार नहीं hu...Aur अगर किसी से शादी कर भी लिया तो उसकी जिंदगी बर्बाद हो jaayega...Ye सिर्फ नाम की शादी होगा और कुछ nahi...Aise में कौन करना चाहेगा मुझसे शादी?

और साथ hi मई भी जबरदस्ती के शादी और जिम्मेदारी के बोझ में नहीं जी सकता.

निधि:- एक लड़की है मेरे नजर में जो तुझसे शादी करना चाहती hai...Bas जरुरत है तो तुझे इस रिश्ते को वक्त देने की.

अतुल:- कही आप प्रीती के बारे में तो नहीं बोल रही है?

अतुल ने निधि को घूरते हर पूछा.

निधि:- Nahi...Uske साथ तो सोचना भी mat...Mai तो....

अतुल बिच में hi बोल पड़ा.

अतुल:- नहीं Di...Mujhe इस बारे में कुछ बात नहीं karna...Aapki ख्वाहिश जरूर पूरा karunga...Lekin बिना शादी के भी खुश रहना.

मैंने खुद से hi वादा किया था, "निशा के अलावा किसी के बारे में सोचूंगा भी नहीं." अब्ब ऐसे में खुद की नजरो में गिर jaaunga...Mera कसम का कोई मोल नहीं rahega...Khud में hi घुट घुट कर मर जाऊँगा.

आप मुझे खुस देखना चाहती है na...To फाॅर्स मत kijiye...Aap hi सोचिये "खुद की नजरो में गिरा हुआ इंसान कभी खुस रह पायेगा?" थोड़ा सा वक्त dijiye...Koshish करूँगा जीने की लेकिन शादी के लिए फाॅर्स मत कीजिये.

निधि भी समझ गयी की अतुल उसकी ये बात नहीं maanega...Jor जबरजस्ती करने का भी कोई मतलब नहीं.

वो बस अतुल को hi देख रही thi...Atul चुप था और इस शादी की बात सुन कर दुखी भी था.

तभी निधि को फ़ोन आता है.

अतुल:- किसका फ़ोन है?

निधि:- तेरा bhanja...Lekin तुझे तो किसी से कोई मतलब hi नहीं.

निधि मजाक में कहती है तब अतुल को एहसास होता है और खुद के सर पर मारता hai...Sach में उसने अपने अलावा किसी से अच्छे से बात भी नहीं किया था.

अतुल:- सॉरी.

फिर निधि फ़ोन उठाती hai..Aur कुछ देर फ़ोन करने के बाद अतुल को फ़ोन देती है.

अतुल भी कुछ देर अपने भांजा और जीजू से बात करता hai...Bhanja से बात करते वक्त उसकी मासूम बातो में अतुल की खोयी हुई हंसी फिर से लौट आती है.

ये देख निधि को भी थोड़ा थोड़ा समझ में आता है की अब्ब उससे क्या करना चाहिए.

फिर निधि से कुछ देर बात करके अतुल अपने रूम में चला जाता है.

इस बार उसका दिल हल्का हो जाता है निधि से बात कर ke...Usse इस बात की ख़ुशी था की उसके पास भी कोई है जो उससे हर हाल में साथ देंगे.

अपने रूम में पहुँच कर.

अतुल:- देखा न Nishu...Abb शादी की बातें चल रही hai...Di की भी कोई गलती nahi...Abb तो हर कोई ये सवाल pucchega...Aur मई क्या क्या जवाब दूंगा और कितनो को जवाब दूंगा?

शादी करने जी सोच भी कैसे सकता hu...Aakhir मेरा कसम का क्या? मेरा वादा का क्या? मेरे सपने में तुम ho...Sirf tum...Tumhaare अलावा किसी और के साथ जिंदगी का सोच भी नहीं sakta...Tumhara था और तुम्हारा hi rahunga...Always लव यू जान.

दूसरी तरफ एक घर के छत में दो आँखें ऐसे thhe...Jo कही खोये हुए थे और आंसू की कुछ बूँद से भींग गया tha...Dil था की आज कुछ ज्यादा hi बेचैन हो रहा tha...Kisi की यादो me...Kisi की यादो में!!!
 
अपडेट 66

आप अभी तक नहीं सोये? और खिड़की के पास क्या कर रहे है?

आधी रात में अतुल के पापा को खुदकी के पास देख कर उसकी माँ बोली.

ा. डैड:- कुछ नहीं बस ऐसे hi?

ा. माँ:- आप सिगरेट पी रहे है?

ा. डैड:- प्लीज आज मन मत करो.

इतना कह कर अतुल के पापा सिगरेट का एक कास लगाते है और सुनी आँखों से बाहर देखते हुए धुआँ फेंकते है.

ा. माँ:- आप अतुल से बात क्यों नहीं करते?

ा. डैड:- क्या लगता है tumhe...Wo मुझसे बात karega...Yaha आने के बाद मुझे एक नजर देखा तक नहीं usne...Nafrat करता है mujhse...Aur मुझमे इतना हिम्मत नहीं है की उसके सामने जा सकू.

अतुल की माँ कुछ नहीं kehti...Haalaat को देख कर उन्हें भी रोना आ रहा tha...Kaha वो अपने घर में खुशियों का सपना देखती thi...Khwahishein थी की घर के सभी लोग में प्यार रहे.

लेकिन दरार इस तरह पद गया था की एक बीटा अपने बाप से नफरत करता hai...Baap दूसरे बीटा से गुस्सा hai...Didi अपने भाई से नफरत करती hai...Aur सबसे बड़ी बात की वो अपने बेटे को ऐसे देवदास जैसे देख भी नहीं पा रही hai...Maa को मजबूर में चाहते हुए भी ये सब देखना पद रहा hai...Abb बस एक उम्मीद hi है की सब ठीक हो jaaye...Sirf उम्मीद.

ा. डैड:- जानती हो कितना बदनसीब हु mai...Bahut बदनसीब बाप hu...Apna बीटा और बेटी के लिए बहुत कुछ सोचा tha...Unke लिए अच्छा hi करना चाहता tha...Lekin अनजाने में इतनी बड़ी गलती कर diya...Apni बेटी से उसकी सपना छीन liya...Beta से नहीं छीन पाया तो उससे उसकी जिंदगी hi छीन liya...Wo भी अनजाने me...Abb तो खुद से hi नफरत होने लगी है!

ा. माँ:- नहीं....

ा. डैड:- मुझे बोलने do...Aaj तक चुप hi hu...Kahi इस खामोशी में hi घुट कर मर न जाओ.

ना hi मई अपने बीटा को समझ पाया और ना hi उसने मुझे समझाया.

हमेशा मैंने अतुल में एक जोश देखा tha...Bahut गर्व था मुझे अपने बीटा par...Aisa लगता था की ये बड़ा हो कर कुछ karega...Mehnat करेगा नाम कमायेगा.

जो मई नहीं कर पाया ये वो कर dikhayega...Jaanti hi हो तुम कितनी म्हणत से मैंने एक बिज़नेस स्टार्ट kiya...Socha मेरा बीटा इससे आगे badhayega...Aur उस मुकाम तक ले जाएगा जो कोई सिर्फ सोच hi सकता hai...Itna काबिलियत था उसमे.

लेकिन उसने साफ़ मन कर diya...Kaha की डॉक्टर banega...Lekin जिस घर में गौरव जैसा नालायक बीटा हो उस घर में सुख शान्ति कैसे रहेगा.

और मई बेवकूफ भी उसकी बातो में आ gaya...Kehta था डॉक्टर बनने के बाद इतना पैसा नहीं होगा जितना बिज़नेस में hai...Mehnat और कम्पटीशन ज्यादा है और कमाई kam....Nidhi को भी इसी बात के लिए मन कर दिया था मैंने.

लेकिन अतुल उसको मन नहीं कर paaya...Man मुटाव हुआ लेकिन अतुल को रोक नहीं paaya...Atul भी मुझसे नाराज रहने laga...Bataya तो बहुत बार उसने की वो डॉक्टर क्यों बनना चाहता है लेकिन समझा नहीं paaya...Aur मई भी समझ नहीं paaya...Aur ये नाराजगी यहाँ तक बढ़ गया की आज बाप बीटा में इतनी दूरियां है.

और मेरा mentality...Shayad मई गलत tha...Sochta था पैसा hi खुशियां दे सकता hai...Jitna कमायेगा उतना खुश rahega...Aur सोच भी puraani...Yahi मानता आया की बिज़नेस में hi सबसे ज्यादा पैसा है.

और दूरियां बढ़ाने की काम में गौरव ने कोई कमी नहीं rakha...Mai उसकी बातें मानता गया और अतुल को गलत समझते गया.

यहाँ तक की उसको उसके प्यार से अलग भी कर diya...Mujhe निशा से कोई प्रॉब्लम नहीं था और ना hi उनके प्यार se...Atul के लिए फिर भी निशा के पापा के सामने झुक जाता लेकिन गौरव ऐसा होने दे तब न.

मई वो सब पाप करता गया जो गौरव करवाता raha...Aur मई अतुल की नजरो में गिरता gaya...Samajh में ये बात तब आया जब अतुल यहाँ से दूर चला गया.

आज पता चल रहा है पैसा hi सब कुछ नहीं hota...Rishto में प्यार और खुशियां होना चाहिए.

मेरा बीटा डॉक्टर है आज बहुत गर्व महसूस होता hai...Aaj लोग मुझे डॉक्टर के पिता के रूप में जानते है और इज़्ज़त भी कुछ और hai...Isse ज्यादा ख़ुशी की बात क्या हो सकती hai...Lekin ये सब बातों का एहसास हुआ भी तब जब बहुत देर हो गया है.

ा. माँ:- ये बात आप अतुल को क्यों नहीं बताते? वो समझ जाएगा.

ा. डैड:- बता कर भी क्या karunga...Kya उसकी खुशियां लौट आएगा?

और बात करने की हिम्मत भी तो नहीं hai...Jab अभी उसका उदास चेहरा देखता हु इसका जिम्मेदार खुद को मानता हु.

ा. माँ:- लेकिन...

ा. डैड:- नहीं रहने do...Shayad यही सजा है मेरा.

लेकिन तुम से कुछ माँगना चाहता hu...Atul की ख़ुशी.

किसी तरह उसको संभाल ko...Bahut टुटा हुआ है wo...Pata नहीं कब क्या हो जाए? किसी तरह घर बसा दो उसकी?

एक बोझ काम हो जाएगा जिंदगी से.

ये कहते वक्त अतुल की पापा की आँखों में कुछ बूँद आंसू भी आ गए.

वो जल्दी से रूम से बाहर निकल gaye...Apne पत्नी के सामने रू भी नहीं सकते thhe...Akele में आ कर उन्होंने अपने आंसुओ को बहने से नहीं roka...Aaj उन्होंने अपने खामोशी और आंसू की बाँध को तोड़ दिया लेकिन फिर भी उनका दर्द और पश्चाताप काम नहीं हो रहा tha...Hamesha की तरह अभी भी वो अपने आप को बहुत मजबूर महसूस कर रहे थे.

नेक्स्ट डे

अगली दिन अतुल ऐसे hi बाहर निकला था घूमने के liye...Raat भर की तन्हाई और घूम से बाहर निकलने के लिए.

बाहर ऐसे hi बाजार में घूम रहा था की सामने एक भीड़ dikhi...Wo भी भीड़ में घुस गया सामने का नजारा देखने.

लेकिन उसने आगे जो भी देखा वो उसके होश उड़ाने के लिए काफी tha...Dil में दर्द की लहर उठ gayi...Din में भी अब्ब उससे अपनी अतीत याद आ गया.

सामने एक इंसान thhe...Sharir खून से lathpath...Behoshi के हालत में अपने जिंदगी से लड़ रहे उस इंसान को पहचाने में अतुल को वक्त नहीं लगा.

मुंह से इतना hi निकला. "ओह माय गॉड!!! निशा के पापा."

नफरत का भले hi कोई इन्तहा नहीं tha...Lekin एक डॉक्टर की फ़र्ज़ और निशा की याद आते hi सामने का नजारा देख उसका दिल भी कांपने पर मजबूर हो गया.
 
अभी तक गौरव के बारे में जितना भी लिखा है और आपने कमेंट में जैसे उसके बारे में मेंशन किया है वो वैसा hi hai...Kuch फ्लैशबैक सन है और कुछ आने वाला सन उसमे उसके बारे में पता चल jaayega...Till नाउ हे है थे करैक्टर ऑफ़ वर्स्ट ह्यूमन being...Aur आज अतुल और निशा की जो हाल है उसमे गौरव बहुत हद्द तक जिम्मेदार hai...Aise hi साथ बने रहिये.
 
अपडेट 67

"आप कब बात करेंगे अतुल और प्रीती की रिश्ते के लिए?"

गौरव की बीवी रिया ने गौरव से पूछा.

जवाब में गौरव कुछ देर रिया को गुस्से से देखता है.

गौरव:- बात करू और mai...Abhi समझा रहा हु तुम अपनी बहिन को भेज दो यहाँ se...Agar किसी को उस की वजह से कोई प्रॉब्लम हुआ तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा.

रिया:- आप गुस्सा क्यों हो रहे hai...Preeti अतुल से प्यार करती hai...Aur शादी की बात करेंगे तो क्या गलत है.

गौरव:- इस प्यार की तो.....

क्यों मुझे गाली देने पर मजबूर कर रही है.

तू अपने काम से मतलब rakh...Jindagi में पहले hi इतने गलत काम करवा चुकी है.

रिया:- तो क्या आप अचानक से साधू बन gaye...Jaante है न कुछ भी करो अपने लिए karo...Apne लिए जीयो.

गौरव:- जिंदगी में बहुत से गलत काम किया है लेकिन औरत पर कभी हाथ नहीं uthaya...Agar जरुरत पड़े तो तुझ जैसी औरत की जान लेने से भी पीछे नहीं हटूंगा.

बार बार समझा रहा हु मुझ से दूर hi रह और फ़ालतू की बात मत कर.

इतना कह कर गौरव रूम से बाहर निकल गया.

आराम se...Abhi आपको रेस्ट की जरुरत है.

निशा की पापा को होश में आते और हलचल करते देख अतुल ने kaha...Man hi मन उसने भगवान् को शुक्रिया कहा.

जैसे hi निशा की पापा ने आँख खोला सामने अतुल को देख उन्हें एक झटका सा laga...Vishwas नहीं हुआ तो आँखों को बंद कर के फिर खोला लेकिन सामने अतुल hi था.

न. डैड:- तुम?

फिर अतुल किसी तरह निशा के पापा को उनके एक्सीडेंट की बारे में बता देता है.

निशा की पापा हैरानी से उससे देख रहे थे.

न. डैड:- तुम मुझे यहाँ लेकर आये?

अतुल:- (मुस्कुरा कर) उस वक्त डॉ. अतुल को आप मिले thhe...Bas अपना फ़र्ज़ hi याद था उससे उस vakt...Aur आपको पेशेंट के रूप में hi देख रहा था wo...Makshad यही था आपको किसी तरह bachana...Aur शायद इसी वजह से आप पर कोई खतरा नहीं आया.

अगर अतुल को आप मिलते तो शायद वो कुछ देर सोचता कुछ वक्त लेता लेकिन फिर भी आपको बचाने की कोशिश करता.

अतुल बातें तो मुश्कुराते हुए कर रहा tha...Lekin बातो में कही दर्द छुपा हुआ tha...Uski मुस्कान निशा के पापा को असहज महसूस करवा रहा था.

न. डैड:- पुलिस केस का दर भी नहीं? अगर मुझे कुछ हो जाता तो तुम्हे सजा हो सकता था?

अतुल:- (इन हिज मंद) Sajaa...Jindagi hi एक सजा बन गयी है.

लेकिन वो कुछ बोलता नहीं.

न. डैड:- कैसे हो?

कुछ देर की खामोशी को तोड़ते हुए निशा की पापा बोले.

अतुल:- बहुत accha...Sab कुछ सही चल रहा है जिंदगी me...Jo कुछ भी खोया था अब्ब सब मिल गया hai...Kehte है भगवान् के घर देर है अंधेर नहीं.

अतुल ने कॉन्फिडेंटली kaha...Wo एक पल भी निशा के पापा के सामने टूटना नहीं चाहता था.

(इन हिज मंद) है सब कुछ मिल गया hai...Dard, तन्हाई, पागलपन और ना जाने बहुत कुछ.

इधर निशा के पापा अपने सोच में hi व्यस्त थे.

अतुल ने अपना फ़र्ज़ तो निभाया लेकिन अब्ब उससे वह रहा नहीं जा रहा tha...Har पल के साथ उसकी अतीत की यादें ताजा हो रहा tha...Wo दर्द और वो गुस्सा जिससे आज तक अतुल भुला नहीं पाया tha...Usse भी बढ़कर उसकी laachari...Aaj भी लाचार था वो की कुछ कर नहीं सकता था.

अतुल जाके निशा के पापा के पेअर छू कर कहता है.

अतुल:- अब्ब इजाजत dijiye...Chalta हु.

हीछाकटे हुए निशा की पापा अपना हाथ अतुल की सर पर रख देते है आशीर्वाद देने के लिए.

और वो अतुल को कुछ सवाल भरी निगाहो से देखने लगे.

अतुल:- कहना भूल gaya...Maine सिर्फ आपको यहाँ तक वक्त पर लाया hi hai...Aapka इलाज राहुल सर कर रहे है.

इतना कह कर अतुल गेट से निकला hi था की वो फिर से पूछे मुद कर निशा की पापा से पूछता है.

अतुल:- निशा कैसी है?

बहुत हिम्मत जुटाने के बाद अतुल ये सवाल पूछ पाया tha...Aur जवाब सुनने के लिए उसका दिल धड़क रहा था.

न. डैड:- वो भी अच्छी है.

ये जवाब सुन अतुल की ख़ुशी की कोई ठिकाना नहीं raha...Aankho में ख़ुशी की आंसू के साथ वो रूम से बाहर निकल गया.

अतुल:- (इन हिज मंद) थैंक्स God...Nisha की ख़ुशी की दुआ और अपनी दर्द ने hi तो ज़िंदा रखा है आज mujhe...Kaash मेरी निशु ऐसे hi खुश rahe...Hamesha हमेशा के लिए.

अतुल रूम से तो निकल गया लेकिन निशा के पापा के पास सोचने के लिए बहुत कुछ छोड़ gaya...Atul का संस्कार उसका फ़र्ज़ सब कुछ दिख गया आज unhe...Ek बार अपने फैसले पर सवाल भी किया unhone...Lekin अब्ब पछताने से क्या होगा जब छिड़िया चुग गयी खेत.

"हे रोमियो!" ये सुनते hi अतुल पीछे मुद gaya...Picche राहुल सर थे.

अतुल:- Sir...Aapko hi ढूंढ रहा था.

डॉ. राहुल:- चल केबिन me...Bahut साल हो गया तुझसे बात किये.

फिर अतुल राहुल सर के साथ उनके केबिन में चला गया.
 
अपडेट 68

वाह! Sir..Aaj भी आपके हाथो में जादू hai...Itna कॉम्प्लिकेटेड सर्जरी को भी कितनी आसानी से कर दिया.

डॉ. राहुल:- 10 साल से यही तो करता आ रहा hu...Padhaata भी आ रहा हु और हर केस के साथ कुछ सीख भी रहा हु.

ये सब छोड़ और बता कहा गायब है तू आज kal...Phone नंबर भी चेंज और सोशल मीडिया में भी नहीं है तू.

राहुल सर की बात सुन अतुल कुछ देर चुप raha..Usse समझ में नहीं आ रहा था की कहा से सुरु करे और कहा ख़त्म.

डॉ. राहुल:- कोई प्रॉब्लम है क्या?

अतुल कुछ देर राहुल सर को देखता है एयर फिर.

अतुल:- सर अब्ब आप से क्या झूठ bolu...Life hi प्रॉब्लम बन गयी है.

राहुल सर अतुल की बात को समझने की कोशिश कर रहे thhe...Tabhi उन्हें कुछ याद आया.

डॉ. राहुल:- निशा कब आएगी? उसकी पापा का एक्सीडेंट हुआ है और वो अभी तक नहीं आयी यहाँ.

अतुल:- Aayegi...Jab उससे पता chalega...Shayad उन्होंने कॉल कर दिया hoga...Aa जाएगी कुछ देर में.

डॉ. राहुल:- उन्होंने कॉल किया होगा? मतलब? तूने नहीं बुलाया.

अतुल ने कोई जवाब नहीं दिया.

डॉ. राहुल:- तुम दोनों साथ तो हो ना?

अब्ब राहुल सर की धड़कन भी तेज होने laga...Unhe दर था अतुल की ना में जवाब सुनने ka...Aur उनका दर सच भी हो गया.

अतुल:- नहीं sir...Bahut पहले hi हम दोनों अलग हो गए है.

राहुल सर बस अतुल को hi देख रहे thhe...Unhe यकीं hi नहीं हो रहा था अतुल की बातों पर. मन में खुद से hi सवाल पूछ रहे थे,

"आखिर इतना प्यार करने वाले जोड़ी कैसे अलग हो सकते है? वो भी इतनी आसानी से?"

अतुल का उदास चेहरा देख अब्ब उन्हें भी यकीं होने लगा था.

डॉ. राहुल:- कब? कैसे? और क्यों?

एक hi पल में सब कुछ जाना चाहते थे वो.

डॉ. राहुल:- बता आखिर ऐसा क्या हुआ?

फिर अतुल एक लम्बी सांस ले कर बताना सुरु कर देता hai...Vakt के साथ साथ अतुल के चेहरे में भी कई सारे भाव आते जाते रहे.

अतुल अपनी बात ख़त्म कर के एकदम से चुप हो gaya...Wo बस निचे की तरफ hi देख रहा था.

राहुल सर को भी समझ में नहीं आ रहा था की ये सब क्या से क्या हो गया? कभी उन्हें लगता की ये सब अतुल की गलती है तो कभी लगता की हालात की वजह से ये सब हो गया.

अतुल की हालत पर उन्हें भी बहुत दुःख हो रहा tha...Atul सिर्फ उनका स्टूडेंट hi नहीं वो अतुल को अपना भाई जैसा मानते थे.

और जिस अतुल को वो इतने दिन से ढूंढ रहे थे आज मिला भी तो किस हालत me...Ek देवदास के रूप me...Ek हारा हुआ इंसान के रूप me...Jise वो एक बड़ा, कामयाब और जिम्मेदार डॉक्टर के रूप में देखना चाहते थे वो आज इंसान के रूप में hi हार गया था.

डॉ. राहुल:- काश तूने कोशिश किया होता?

अतुल:- हालात hi ऐसा हो गया था sir...Kuch समझ नहीं paaya...Naa hi अपनों की साजिश और ना hi वक्त ko...Dekhte hi देखते निशा मुझसे दूर हो गयी.

अब्ब अतुल की आँखों में आंसू आने लगा.

अतुल:- सर आपको मेरी और निशा की लव स्टोरी याद था? भूले नहीं आप?

डॉ. राहुल:- कुछ बातें और कुछ इंसान को कभी भुला नहीं jaata...Jaise की तू और तेरा फ्रेंड सर्किल.

तेरा लव स्टोरी भी यूनिक tha...Jitne भी कपल्स को देखा है या तो वो स्टडी में एवरेज होते है या फिर poor...Lekin तुम दोनों की तो बात hi और thi...Kabhi तू टॉप करता था तो कभी निशा?

पढ़ाई के अलावा भी स्पोर्ट्स और बाकी के एक्सट्राकररिकुलर एक्टिविटीज. जब भी तुम दोनों को साथ देखता तो एक hi बात मुंह से निकलता "मेड फॉर एच इतर."

जवाब में अतुल सिर्फ मुस्कुराने की कोशिश करने लगा.

डॉ. राहुल:- निशा सच में लकी hai...Bahut काम लोग hi होते है जो आज कल सच्चा प्यार करते hai...Aur बहुत hi काम जो प्यार में देवदास बन जाए.

अतुल:- सर सच कहु तो निशा नहीं मई लकी था की निशा ने मुझसे प्यार किया.

सर आप तो मेरी हालत जानते hai...Lekin मई निशा को बिना देखे बिना मिले hi यकीं के साथ कह सकता hu...Nisha जहा कही भी होगी उसका हाल भी मेरा जैसा hi hoga...Aur यही बात मुझे और परेशान करता है.

निशा का पेशेंस भी अलग hi लेवल का tha...Ye जानते हुए भी की मुझे प्यार में विस्वास नहीं hai...Ye जानते हुए भी की मेरा पहला प्यार वो नहीं काजल thi...Ye जानते हुए भी की मुझे उसका प्यार सायद hi कभी दिखे.

उसने मुझसे प्यार करना कभी नहीं chhoda...Wo मुझसे प्यार करती रही जब तक मुझे उसका प्यार नहीं दिखा.

सर अगर निशा की जगह मई होता तो जल भून कर उससे अलग हो jaata...Aur ऐसा हुआ भी था.

सर कुछ तो बात थी निशा me...Jisne मुझ जैसे नास्तिक को देवदास बना diya...Pyar करना सिखाया, प्यार का मतलब bataya...Pyar पर विस्वास और इंतजार करना सिखाया.

शायद यही वजह है की आज भी मुझे निशु का इंतजार hai...Ek झूठी ाश के साथ.

राहुल सर अतुल की बात को बहुत ध्यान से सुन रहे थे.

डॉ. राहुल:- तेरा पहला pyar...Kajal?

अतुल:- है sir...Isse बेवकूफी hi कह लीजिये लेकिन ये सच है.

फ्लैशबैक

What's गोइंग ों मर. एक?

ओह! निशा तुम?

अतुल ने पीछे मुद कर कहा.

निशा:- Ha..Leki तुम क्या कर रहे ho...Itni रात ko...Raat के 10:00 पं बज रहे है.

अतुल:- कुछ nahi..Bas ऐसे hi...Thoda घबराहट हो रहा था तो ऐसे hi छत पर आ गया.

निशा:- तुम भी na...Exam को लेकर इतना घबरा रहे ho...Result अच्छा hi आएगा.

अतुल:- नहीं रिजल्ट की कोई दर नहीं.

निशा:- तो फिर?

अतुल:- अब्ब तुम से क्या छुपाना?

निशा:- बताओ क्या बात है?

अतुल:- ी थिंक ी ऍम इन लव.

अतुल ने हिम्मत कर के बता hi दिया.

जैसे hi निशा ने ये सुना उसका ख़ुशी का कोई ठिकाना hi नहीं raha...Aaj अतुल को उसका फर दिख hi gaya...Lekin एक शिकायत भी थी, अतुल का प्रोपोज़.

निशा:- हु इस तहत लकी गर्ल?

फॉर्मेलिटी के लिए निशा ने pucha...Lekin उससे क्या पता था की अतुल का जवाब ुस्किल दिल का टुकड़ा टुकड़ा कर देगा.

अतुल:- काजल.

हिम्मत करके अतुल ने जवाब diya...Jawaab सुन कर निशा को यकीं hi नहीं hua...Atul को प्यार का एहसास तो हुआ लेकिन kaun...Kajal?

मन hi मन टूटे हु दिल से निशा ने सवाल किया.

निशा:- (इन हेर मंद) मेरा प्यार तो तुम्हे दीखता hi नहीं?

लेकिन कर भी क्या सकती थी bechari...Naa hi रू पा रही थी और ना hi अतुल के लिए खुश हो पा रही थी.

अतुल:- मुझे पता tha...Tum शॉकेड हो jaaogi...Tumne सोचा था की मुझे कभी प्यार नहीं hoga...Mai भी ऐसा hi सोचता tha...Lekin वक्त और सोच को बदलते वक्त नहीं लगता.

निशा:- अच्छी बात है.

अतुल: निशा एक हेल्प करोगी?

निशा:- क्या हेल्प?

अतुल:- प्यार तो करने लगा हु काजल se...Lekin कैसे प्रोपोज़ करू समझ में नहीं आ रहा hai...Ladkiyo को क्या पसंद है क्या नहीं ये भी पता नहीं? प्लीज कुछ सुग्गेस्ट करो ना.

सिर्फ तुम hi मेरी हेल्प कर सकती ho...Please.

अतुल की ये बात निशा की जख्म में नमक का काम कर रहा tha...Itna ताक़त तो नहीं था निशा में की वो इस बात में अतुल का हेल्प कर सके? लेकिन अतुल को मन भी नहीं कर सकती thi...Aakhir कार अतुल की ख़ुशी के लिए वो तैयार हो गयी.

निशा:- Ok...Thik है.

अतुल:- थैंक you...Thanks ा lot...Mujhe पता था तुम मेरा हेल्प जरूर karogi...Once अगेन थैंक यू.

इतना कह कर अतुल एक्ससिटेड हो कर निशा को गले लगा लिए और खुश हो कर अपने रूम में चला gaya...Aur पीछे छोड़ गया टूटी हुई निशा ko...Abb एक आंसू hi था जो निशा का साथ दे रहा था इस वक्त.

भीगे हुए आँखों से वो अतुल की रूम की तरफ देख रही थी बेबसी से.
 
अपडेट 69

किस सोच में खोये हो?

अतुल:- सोच रहा hu...Propose कैसे karu...Kabhi वक्त और जगह सही नहीं होता तो कभी हिम्मत hi नहीं कर पा रहा हु.

प्यार करना आसान है प्रोपोज़ उससे भी मुश्किल.

निशा:- सीधे जा कर बोल दो अपनी दिल की baat...Pyar किया तो डरना क्या?

अतुल:- ये सभी डायलाग फिल्म में hi अच्छे लगते hai...Yaha हकीकत में बहुत फैट रही है.

निशा:- क्या बात है? कभी किसी से नहीं डरने वाला अतुल की बातो में आज दर?

अतुल:- इंसान हु yaar...Bhoot प्रेत और प्यार से दर लगता है.

निशा:- माउंटेन देव् पीयो और सुरु हो jaao...Dar के आगे जीत है.

अतुल:- क्या तुम bhi...Meri हेल्प करने की जगह मेरा hi मजाक उड़ा रही हो.

Hmm...Idea!

निशा:- क्या आईडिया?

अतुल:- माउंटेन देव् से याद aaya...Kajal को धोखे से वोडका पीला देता hu...Fir करता हु propose...Agar इंकार भी करेगी तो नशे में गुस्सा नहीं hogi...Mujhe बहुत दर लगता है यार उसके गुस्सा से.

फिर अतुल निशा की तरफ देखने लगता hau...Nisha उससे hi घर रही थी.

अतुल:- कैसा लगा मेरा आईडिया?

निशा:- बकवाश.

अब्ब निशा से रहा नहीं जा रहा tha...Atul की हेल्प करने के लिए उस पर क्या बीत रही थी ये सिर्फ वही जानती thi...Lekin ना जाने क्यों वो भी अतुल के साथ मजाक करने लग गयी थी.

अनजाने में hi दोनों का दोस्ती इतना गहरा हो गया था की निशा के लिए अतुल का सामने रहना hi काफी tha...Haalaath जैसा भी हो अतुल का साथ और अतुल की बातों में ऐसे खो जाती की वो अपना सारा दुःख दर्द भूल कर बस सामने चल रहे पल में जीने लगती थी.

अतुल:- प्लीज हेल्प करो ना.

निशा:- तुम मजाक कर रहे हो ना?

दिल से एक दुआ निकली की अतुल हां बोल दे.

अतुल:- Nahi...Sach में प्यार करता हु काजल से.

निशा:- लेकिन ऐसा लग तो नहीं रहा hai...Tum तभी से मजाक hi कर रहे ho...Abhi प्रोपोज़ करने की बात कर रहे thhe...Fir उसी बात का मजाक बना रहे थे?

अतुल:- वो तो बस दिल का दर को हल्का करने के liye...Abb सीरियस हु.

फिर अचानक से अतुल सीरियस दिखने लगा और साथ hi निशा को यकीं.

कुछ देर की खामोशी को तोड़ कर अतुल ने कहना सुरु किया.

अतुल:- ी think...Itne वक्त हो गए हम दोनों को साथ me...Abb तो एक दूसरे को अच्छे से जानते भी hai...Pata नहीं ये दोस्ती कब प्यार में बदल gayi...Shayad काजल मुझे पहले से hi अच्छी लगती thi...Lekin उस वक्त ये एहसास कभी नहीं hua...Jab से प्यार को जाना है, महसूस किया है तब पता चला "ी लव हेर. ी लव हेर सो मच."

रियली इतस वंडरफुल feeling...Bata नहीं सकता दिन रात बस काजल के बारे में hi सोचना, उसकी फ़िक्र karna...Chhoti छोटी खुशियों में जीना.

थैंक्स ा लोट Nisha...Agar तुम मुझे प्यार के बारे में नहीं बताती तो शायद hi कभी मुझे इस बात का एहसास hota...You अरे माय बेसटेस्टट्ट्ट्ट friend...Thanks ा लोट.

अतुल एक्ससिटेमेंट में बोले जा रहा था और उसकी हर बात निशा की दिल में चुभ रही थी.

निशा:- मई कैसे हेल्प कर सकती हु?

अतुल:- प्यार तो करता हु बूत अभी भी ज्यादा कुछ पता nahi...Kajal को कैसे प्रोपोज़ karu...Impress करू ये सब अच्छे से जानता नहीं.

प्लीज बताओ na...Ladkiyo को क्या ज्यादा पसंद आती hai...Kaise वो इम्प्रेस होती hai...Unki क्या ख्वाहिश होती है की कोई उनसे ऐसे प्रोपोज़ करे.

निशा:- लेकिन मुझे क्या पता काजल की चॉइस क्या है?

अतुल:- तुम अपने बारे में bataao...Yaa फिर गेनेराल्ल्य किसी लड़की की बारे me...Sample समझ कर कोशिश करूँगा.

निशा:- Ok ठीक hai...Raat में bataaungi...Tumhe क्या करना है?

दिल पर पत्थर रख कर निशा ने हां कह diya...Ye बात वो भी जानती थी की अतुल उसकी पसंद की हर चीज करेगा लेकिन फिर भी उसका कभी नहीं हो paayega...Wo जानती थी की उसकी दिल किस तरह से टूटेगी फिर भी वो तैयार हो gayi...Shayad अतुल की ख़ुशी के लिए.

अतुल ने एक बार फिर निशा को एक्ससिटेमेंट में गले लगा लिया.

अतुल:- Thanks...Thanks ा lot...Mujhe पता था सिर्फ तुम hi मुझे हेल्प कर सकती हो.

निशा:- अच्छा अब्ब चलती hu...Ghar में कुछ काम है.

फिर निशा वह से निकल जाती hai...Atul कुछ सोचते हुए उससे पीछे से देखता रहता है जब तक वो अतुल की आँखों से ओझल ना हो gayi...Usse थोड़ा अजीब भी लग रहा tha...Aur खुद से hi एक सवाल "क्या वो सही है या फिर सही कर रहा है?"

जिसका जवाब अभी भी उससे पता नहीं था.

ये सब क्या चुतियापा है?

गुस्से से अजय ने अतुल को pucha...Tab उससे याद आया.

अतुल:- क्या हुआ?

अजय:- तुझे नहीं लगता तू कुछ ज्यादा hi बदल गया है?

अतुल:- Hmm...Sach में बहुत बदल गया hu...I ऍम इन love...May बे that's व्हाई.

अजय:- किस से? काजल से?

अतुल:- यस बीआरओ.

अजय:- तुझे ये ग़लतफहमी क्यों हो रहा है?

अतुल:- क्या ग़लतफहमी?

अजय:- तुझे लगता है तू काजल से प्यार करता है?

अतुल:- हां.

अजय:- लेकिन तुम दोनों को देखने से ऐसा बिलकुल भी नहीं लगता.

अतुल:- ये तू कैसे कह सकता है?

अजय:- कॉमन सेंस नाम की भी कोई चीज होती hai...Notice कर रहा हु 2 मोनथस से जब से टूर से वापस आये hai...Pyar जैसा कुछ है hi नहीं तुम दोनों के बिच.

अतुल:- अब्ब तुझे मेरे बारे में मुझसे ज्यादा पता चल गया?

अजय:- जब तुझे खुद के बारे में hi पता नहीं तो ऑब्वियस्ली मुझे hi ज्यादा पता hoga...Agar पता होता तो तू ऐसे खुद को hi धोखा नहीं देता.

अतुल कुछ जवाब नहीं deta...Bas अजय को hi देखता रहता है.

अजय:- मेरी बात maan...Abb और खुद से झूठ मत bol...Maan ले की तू निशा से प्यार करता hai...Aur ये दिख भी रहा है.

अतुल:- नहीं ऐसा कुछ नहीं है और नहीं हो सकता.

अजय:- क्यों नहीं हो सकता?

अतुल:- क्यों की निशा किसी और से प्यार करती hai...Aur वो मेरी सिर्फ बेस्ट फ्रेंड hai...Mai सिर्फ काजल से प्यार करता हु.

फिर इतना कह कर अतुल भी अपने घर के लिए निकल जाता hai...Ajay सिर्फ देखता hi रह जाता है और उसकी मुंह से इतना hi निकलता है.

"Bewkoof...Iska कुछ नहीं हो सकता."

रूम में पहुँच कर अतुल 2 सिगरेट निकाल कर जला लेता है.

अतुल:- ये साला प्यार भी पता नहीं क्या hai...Kabhi कभी तो लगता है प्यार से ज्यादा चुतियापा और कुछ नहीं.

निशा से कुछ और कहना चाहता हु कहता कुछ और hu...Ajay की सवालों का जवाब देने की हिम्मत नहीं.

(सिगरेट को देख कर) काजल प्रपोजल एक्सेप्ट करे या ना करे लेकिन ड्रगिस्ट जरूर बना देगा एक दिन.

जब से प्यार का एहसास हुआ है 2 मोनथस से हर रोज सिगरेट पीने लगा hu...Har वीकेंड घर वालो से छुपा कर vodka...Pata नहीं हो क्या रहा है और क्यों हो रहा है.
 
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