Jaisa bhi hai mera bhai hai (Completed) - Page 8 - SexBaba
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Jaisa bhi hai mera bhai hai (Completed)

अपडेट _ 62

कारन कुछ वकत बहार रहा फिर घर के अंदर चला गया अंदर रूपा एक टेबल पर चढ़े कर एक डंडे को लेकर दीवार पर से मकरी के झोल साफ कर रही थी जो रूपा दर भी रही थी के टेबल से गिर न जॉन क्यू के साफ करते हुवे रूपा टेबल पर डगमगा रही थी फिर रूपा की नज़र बहार गयी तो देखा कारन बहार खड़ा था सर निचे किया हुवा

रूपा : कारन बीटा कहा चला गया था चल आ ये टेबल पकड़ वरना मैं गिर जाउंगी आवर रूपा ने ने अपनी पल्लू को खोल कर अपने नाभि को धक् लिया क्यू के रूपा की नाभि अभी भी दिख रही थी तो रूपा ने पल्लू खोल कर धक् लिया क्यू के नाभि देख कारन फिर से उसे पकड़ न ले इस लिए रूपा ने आएसा किया

कारन : ममी सॉरी वह गलती से हो गया मुझे कुछ समझे मैं नहीं आया मैंने आएसा क्यू किया मुझे मांफ कर दीजिये कारन को आवर भी सर्मिन्दा हुवा के रूपा कारन को देख अपने पल्लू से नाभि को धक् लिया है

रूपा : कोई बात नहीं बीटा गलती मेरी भी थी मुझे वैसे तेरे सामने नहीं करना चाहिए था चल छोड़े आ टेबल को पकड़ जल्दी से हमेह घर भी जाना है सफाई कर के रूपा को भी अब थोड़ी सरम आ रही थी जो रूपा यह से सफाई कर के जल्दी जाना चाहती थी

कारन जाकर रूपा के पीछे खड़ा हो गया रूपा सफाई करने लगी जब रूपा ऊपर झोल साफ करने लगी तभी डगमगा गयी मगर रूपा संभल भी गयी आवर पलट कर कारन को देखने लगी जो कारन अभी भी निचे hi देख रहा था

रूपा : कारन बीटा अब क्या हुवा चल मेरी कमर पकड़ ले निचे क्या देख रहा है अभी मैं गिर जाती तो

कारन : ममी मैं कैसे ये पकड़ कारन बोलना तो छह रहा था के ममी मैं कैसे आप की कमर पकड़ सकता हुईं मगर कह न सका जो रूपा समझ गयी कोई नहीं बीटा तू मेरा बेटे की तरह है आवर बीटा अपनी माँ को पकड़ सकता है चल पकड़ ले आवर रूपा फिर ऊपर देखते हुवे साफ करने लगी कारन कुछ देर तक निचे देखता रहा फिर अपना सर ऊपर किया तो कारन का मुंह रूपा के गांड से लग गयी जो रूपा की एक आआह्ह्ह्हह्ह निकल गयी कारन को भी झटका लगा क्यू के रूपा की गांड कारन को गद्दे की तरह लगा कारन जल्दी hi अपना मुंह रूपा के गांड से हटा लिया आवर रूपा के कमर पकड़ लिया दोनों हांथो से आवर कारन का मुंह रूपा के ठीक गांड के ऊपर लग रहा था रूपा के हिलने से जो अब हर बार रूपा को अजीब अहसास हो रहा था जो रूपा को अब कुछ जयादा hi पसीने निकल रहा था कारन के पकड़ने से रूपा के जिसम सनसना जा रहा था

ये आज मुझे क्या हो रहा है कारन के पकड़ने से मुझे ैजब क्यू लग रहा है आवर मेरी वह भी गुदगुदी हो रही है रूपा रुक कर सोचने लगी आवर फिर पीछे पलट कर कारन को देखने के लिए पलटी आवर रूपा की एक सिसकियाँ निकल गयी आवर रूपा के हाँथ से डंडा निचे गिर गया आवर रूपा ने कारन का सर पाकर कर अपने पेट पर दबा दिया आवर कारन का मुंह सीधे रूपा के गहरी नाभि पे टाच होते hi कारन ने उसे चुम लाया आआह्ह्ह्हह्ह कारन बीटा रूपा के मुंह से एक माधोसी मैं ाःह निकल गयी आवर रूपा सीधे कारन पर अपनी गदराया हुवा जिसम लेकर गिर गयी ये तो अच्छा हुवा के पीछे बीएड था जो कारन बीएड पर रूपा को लेकर गिर गया आवर कारन ने रूपा को भर अकसर मैं पकड़ लिया आवर कारन का एक हाँथ से रूपा की चुकी डाब गयी अब कारन का मुंह ठीक रूपा के चुकी के निचे था कारन ने अपना मुंह उठा कर रूपा के चुकी के निप्पल को बलाउज के ऊपर से hi उसे मुंह मैं लेकर जइब से उसे चुने लगा जो रूपा की एक सिसकियाँ के साथ मदहोशी मैं आअह्ह्ह निकल गयी आउट रूपा का पूरा सरीर hi हिल गया आवर रूपा कारन का सर पर हाँथ फिरने लगी अभी रूपा पूरी hi मदहोस हो गयी थी रूपा की छूट से बून्द बून्द पानी निकल रहा है ऐसा रूपा को अहसास हो रहा था आवर ऊपर से कारन रूपा की निप्पल को बलाउज के ऊपर से hi चूसे जा रहा था आवर कारन एक हाँथ से रूपा की पेट पर चला रहा था आवर दूसरा हाँथ रूपा के पेअर को छूटे हुवे रूपा के छूट की तरफ ला रहा था कारन का हाँथ अभी रूपा के छूट पर जाने hi वाला था के रूपा ने कारन का हाँथ पकड़ लिया आवर रूपा कारन से अलग हो गयी रूपा की सांसे बहुत ज़ोर ज़ोर से चल रहा था फिर रूपा की नज़र कारन पर पड़ी जो कारन रूपा को hi एक आस से देख आवर पूछ रहा हो के ममी आप मुझसे दूर क्यू गयी

फिर रूपा की नज़र निचे कारन के पेंट पर पड़ी जहा कारन का लैंड पेंट मैं hi फुफकार मार रहा था रूपा की नज़र कारन के पेंट पर hi टिक गयी कारन की लैंड की बेताबी देख रूपा की छूट भी अब गरम होने लगी थी क्या कारन मेरे साथ सेक्स करना चाहता है जो कारन का लैंड ऐसा हो रहा है मगर कारन कैसे गलत सोच सकता है आवर कारन का लैंड कितना बड़ा है जो पेंट मैं है फिर भी इतना उठा हुवा है रूपा के कारन के लैंड को देख कर सोच रही थी रूपा के होंठ भी बिलकुल सुख गया था मगर रूपा के चहरे पर पसीना अभी भी बाह रहा था रूपा फिर पयासी नज़र से कारन को देखने लगी कारन उठ काट फिर रूपा के पास चला गया आवर रूपा के होंठ पर अपना होंठ रख दिया आवर रूपा के नरम मोलायम रास से भरी होंठ को चूसने लगा इस बार रूपा ने कारन को दूर नहीं किया बल्कि रूपा भी कारन के सर को पकड़ कर उसपे हाँथ फेरने लगी कारन एक हाँथ रूपा के पेटीकोट के ऊपर से hi रूपा के छूट को पकड़ लिया जो कारन को रूपा की छूट किसी भट्टी की तरह गरम लगा कारन का हाँथ अपने छूट पर पते hi रूपा की एक सिसकियाँ निकल गयी आवर रूपा ने अपना मुंह कारन के मुंह से निकल लिया आवर रूपा फिर से कारन को पयासी नज़र से देखने लगी मगर कारन का हाँथ अभी भी रूपा के छूट के ऊपर hi था क्यू के रूपा ने कारन का हाँथ हटाने के बगैर खुद अपना हाँथ कारन के हाँथ पर रख कर दबा दिया आवर अपना चेहरा ऊपर कर के झड़ने लगी रूपा 30 सेक् तक झड़ी रही झड़ने के बाद रूपा अपने हाँथ से कारन के हाँथ को झटका से हटा कर बाथरूम मैं जाने लगी तब कारन को अहसास हुवा आवर कारन रूपा का हाँथ पकड़ लिया

कारन : ममी मुझे मनाफ़ कर दीजिये मैं आप के साथ ऐसा नहीं करना चाहता था मुझसे गलती हो गयी मगर कारन सच मैं रो रहा था मगर रूपा ने कारन के तरफ देखा भी नहीं आवर चली गयी कारन बस रूपा को जाते हुवे देखता रहा

रूपा बाथरूम मैं जाने के बाद अपना पेटीकोट को निकल कर पेंटी को देखा तो रूपा की पेंटी आगे से पूरी भींग गयी थी ये मुझे क्या हो गया था जो मैं कारन को रोकने के बगैर मैं उसके साथ दे रही थी मैं ऐसा कैसे कर सकती हुईं मैं एक लड़के के आगे कैसे इस तरह कमज़ोर पद सकती हुईं आवर कारन का लैंड कैसे उसके पेंट मैं मचल रहा था जैसे वह मेरी छूट मैं जाना चाहता हो आअह्ह्ह कितना बड़ा लग रहा था कारन का लैंड मेरी छोटी सी छेद मैं वह कैसे जायेगा हे भगवन मैं ये कैसे सोच सकती हुईं मैं अपने पति से बहुत प्यार करती हुईं आवर मैं आज उन्ही को ढोकला देने वाली थी रूपा बाथरूम में अपने आप से hi बात कर रही थी फिर रूपा अपनी पेंटी को देख कर उसकी आँखे लाल हो गयी कारन के साथ आज पहली बार मेरी छूट से इतना पानी कैसे निकल रहा है जैसे मुझे लग रहा है मेरी छूट से अभी भी पानी निकल रहा है ये सब उनके वजह से हुवा है अगर वह मुझे जवानी मैं इतना नहीं चौड़ाई की होती तो मैं इतनी पयासी नहीं रहती जवानी मैं तो मुझे जी भर के छोड़ा आवर कितने सल्ल से मुझे छोड़ भी नहीं रहे है आज भी मुझे छोड़ते तो मैं आज एक लड़के के साथ इतनी कमज़ोर नहीं पड़ती रूपा के आँख नम हो गयी थी आवर रूपा खुद से hi बोले जा रही थी

अभी रूपा बाथरूम में पेंटी आवर बलाउज मैं थी जो बहुत कामुक ोुरत आवर कामदेवी लग रही थी कुछ देर रोने के बाद रूपा अपना मुंह धोकर अपनी साड़ी को ठीक कर के आई तो कारन रूम मैं नहीं था कारन कहा चला गया अभी तो एहि था कही कारन को भी मेरी तरह दुःख तो नहीं हुवा होगा वह अभी बच्चा है अगर कारन मायुश होगा तो कही अपने आप को कुछ कर न ले मैं कारन से इस बारे मैं बात करुँगी आवर उससे मैं समझाउंगी रूपा कारन को रूम मैं नहीं देखा तो रूपा को कारन की चिंता होने लगी रूपा फिर अकेले hi जल्दी जल्दी रूम साफ की आवर घर के लिए निकल गयी मगर हर बार रूपा कारन के बारे मैं hi सोच रही थी के कारन अभी कहा होगा वह अपने आप को कुछ कर न ले रूपा का मन बेचैन था

*******************************************गीता कब तक बेहोश रही गीता को पता नहीं था जब गीता को होश आया तो देखा गीता के एक तरफ पायल तो एक तरफ शांति थी शांति गीता के सर पर हाँथ फेरते हुवे रो रही थी आवर डॉ गीता को चेक कर रहा था

शांति : क्या हुवा है मेरी बेटी को डॉ साहब जो गीता बेटी बेहोश थी कब से

डॉ : आप को घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है ये बिलकुल ठीक है ये बस किसी चीज को कुछ जयादा hi सोचने के लिए अपने दिमाग पर ज़ोर दिया होगा जो बेहोश हो गयी बाकि सब ठीक है बस इन्हे आओ लोग जयादा मत सोचने दे ये ठीक है आवर प्लीज इनके सामने रूट मत इनके लिए अच्छा रहेगा डॉ के कहने पर शांति आवर पायल चुप हो गयी डॉ गीता को फिर से नींद का इंजेक्शन दे कर चला गया

रात के 11पं को गीता के घर का बेल बजा तो पायल ने गेट खोला जो एक लड़की थी

पायल : कौन हो आप किस्से मिलना है

लड़की : मैं तुम्हारी गीता दीदी की दोस्त हुईं मेरा नाम शीतल है मुझे गीता से मिलना है मैं कब से गीता को फ़ोन लगा रही थी मगर गीता का फ़ोन लगा नहीं तो मुझे आना पड़ा

पायल : ठीक है आप आ जाइये दीदी का फ़ोन ख़राब हो गया है वह मेरे से hi गिर गया था पायल शीतल को अंदर लेकर गेट बंद कर दिया आवर पायल गेट के बगल से एक चीज उठा कर शीतल के पीछे चलने लगी

शीतल : कही तुम पायल तो नहीं हो न शीतल बोल पड़ी जो पायल थोड़ी हैरानी से शीतल को देखने लगी आवर शीतल को पकड़ के उसके गले पर चाकू रख दिया

पायल : कौन हो आप आवर आप को मेरा नाम कैसे पता आवर मुझे अच्छे से पता है गीता दीदी की कोई भी यहाँ दोस्त नहीं है तो आप मुझे बताइये कौन हो आप आवर यह क्यू आई हो वरना मैं आप की गाला काट दूंगी

मगर शीतल झटके मैं सरीर से पायल को झटका दिया आवर पायल के हाँथ से चाकू चीन कर अपने हाँथ मैं ले लिया

शीतल : तुम भी अपनी गीता दीदी की तरह चालक आवर बहादुर हो मगर मैं सच कह रही हुईं मैं तुम्हारी गीता दीदी की दोस्त hi हुईं अगर तुमेह बिस्वास नहीं तो ये लो चाकू आवर मुझे मर दो आउट शीतल ने चाकू पायल की तरफ भाषा दी जो पायल ने चाकू लेकर फिर से शीतल के ऊपर रख दिया मगर इस बात पायल ने शीतल को मज़बूती से पकड़ लिया था आवर उसी तरह पायल गीता के रूम के पास गयी आवर गेट के पास hi रुक गयी

पायल : दीदी क्या आप जाग रही हो

गीता : है पायल क्या हुवा पहले अंदर तो आजा तुझे पता है गेट खुला है

पायल : दीदी क्या आप की कोई शीतल नाम की दोस्त है

गीता : पायल क्या हुवा तू ये क्यू पूछ रही है आवर तू अंदर क्यू नहीं आ रही है गीता को थोड़ी हैरानी हुयी के शीतल के बारे मैं पायल क्यू पूछ रही है

पायल : दीदी पहले बोलिये आप की कोई शीतल नाम की दोस्त है की नहीं प्लीज बताइये गीता बोल दे यार नहीं तो तेरी बहन मेरी गाला काट देगी गीता के बोलने से पहले hi शीतल बोल पड़ी

गीता : शीतल तू अभी इतनी रात को यह क्या कर रही है है पायल ये मेरी दोस्त है इसे अंदर आने दे

गीता के कहने पर पायल शीतल को अंदर लेकर गयी मगर अभी भी पायल ने शीतल के गले से चाकू नहीं हटाया था दीदी एहि है शीतल आप क दोस्त पायल शीतल की चेहरा गीता को देखते हुवे पूछा

गीता : है पायल एहि है मेरी दोस्त शीतल अब चाकू हटा भी ले तब जाकर पायल ने शीतल के गले से चाकू हटाया चाकू हट्टे hi शीतल खाने लगी क्यू के पायल ने अंदर आते हुवे आवर ज़ोर से शीतल की गाला पाकर लिया था कुछ देर तक पायल खासते रही तब तक पायल जाकर गीता के पास बैठ गयी

शीतल : सुक्रिया महा रानी मेरी जान बचाने के लिए वर्ण आप की ये बहन मेरी गाला काट देती वैसे सच कह रही हुईं गीता अगर ये मेरी टीम मैं रही तो ये तुझसे भी आगे निकल सकती है

गीता : शीतल क्या बकवास कर रही है किस लिए यह आई है ये बता पहले गीता ने चिल्ला कर गुस्से मैं कहा जो शीतल के साथ पायल भी दर गयी गीता के गुस्से को देख कर तब शीतल को अहसास हुवा के शीतल ने अभी क्या बोल गयी

पायल : ये क्या कह रही है के आप से भी आगे मैं निकल जाती ये किस बारे मैं बात कर रही है पायल आज पहली बार गीता को चीला कर गुस्से मैं बोलते सुना था इस लिए पूछा भी तो निचे देखते हुवे जो गीता को भी अपनी बहन को निचे देखते हुवे पूछना अच्छा नहीं लगा तो गीता पायल के सर पर हाँथ रख दिया

गीता : छोटी अभी तू रूम मैं जाकर सो जा मैं तुझे कल बताउंगी अभी बहुत रात हो गयी है मुझे शीतल से कुछ बात करनी है " पायल भी कुछ नहीं बोली आवर अच्छे लड़की की तरह उठा कर चली गयी मगर उसके दिमाग मैं शीतल की बात ज़रूर चल रही थी आवर पायल अभी पूछ भी नहीं सकती थी क्यू के गीता ने कल बताने को कहा था तो पायल सीधे अपने कमरे मैं चली गयी

गीता : सॉरी यार के मैं तुझपे चिलाती मैं नहीं छाती के कोई जाने के मैं क्या हुईं मगर अब पायल जब तक जाएगी नहीं मुझे नहीं छोड़ने वाली खैर शीतल इतनी रात को यह आई कोई बात है क्या

शीतल : मुझे भी मनाफ़ करदे यार मैं बस पायल की बहादुरी देख कर मेरी मुनाह से निकल गयी कितनी आसानी से उसने मुझे अंदर लिया आवर मेरी गले पर चाकू रख दिया एक वकत के लिए तो मैं खुद दर गयी थी सच मैं तेरी बहन बहादुर आवर चालक है शीतल की बात सुन गीता के चहरे पर मुस्कान आ गयी

गीता : है आखिर बहन भी तो मेरी hi है मगर अभी तक शीतल तुमने बताई नहीं तू अचानक इतनी रात को मेरे घर क्यू आई है

शीतल : गीता यार एक बुरी खबर है तुझे तो पता है मैं अपने बन्दे को धरमपुर भेजा था जो 4 आदमी थे मगर मेरे 3 बंदी मरे गए आवर एक धरमपुर मैं hi छिपा है आवर उसी ने कुछ तस्वीरें भेजी है जिसे देख मुझे रहा नहीं गया मैं कब से तुझे फ़ोन कर रही थी मगर तेरा फ़ोन ऑफ आ रहा था तो मुझे आना पड़ा इतनी रात को क्यू के ये तस्वीर तुझे देखना ज़रूरी था

गीता : क्या ज़रूरी था ऐसा क्या है उस तस्वीर मैं जो मुझे देखना ज़रूरी था

शीतल : ले तू खुद देख ले आवर 10 से 12 तस्वीर शीतल ने बीएड पर रख दिया जो गीता उसे हैरानी से देखने लगी ये कैसे hi सकता है शीतल मेरी फॅमिली तो कभी उस आंटी से मिली भी नहीं है आवर कारन तो यह भी नहीं था फिर ये तस्वीर आंटी के पास कैसे है आवर ये तस्वीर हाँथ से बनाया हुवा है आखिर ये आंटी है कौन आवर मेरा रिस्ता है आंटी से गीता को दिमाग फिर से चकराने लगा आवर गीता ने अपना सर पकड़ लिया
 
अपडेट _ 63

शीतल : गीता तुम ठीक हो आवर शीतल ने गीता को पकड़ लिया फिर कुछ देर के बाद गीता संभल गयी तो शीतल ने गीता को पानी दिया पिने को

गीता : शीतल मुझे कुछ समझ मैं नहीं आ रहा है ये मेरी कारन आवर नैना मुसकान की तस्वीर आंटी ने क्यू बनाया है मैं आउट न मेरी परिवार से कोई रिस्ता है आंटी से फिर आंटी ने ये तस्वीर कैसे बनाई है आवर आंटी अगर मेरे परिवार को जानती है तो फिर सिर्फ उन्होंने ने मेरी गुड़िया आवर कारन की hi तस्वीर क्यू बनाई है पायल काजल आवर कोमल की क्यू नहीं वह भी तो मेरी बहन hi है मगर उन्होंने ने मेरी तीनो बहन को छोड़ कर मुस्कान की तस्वीर क्यू बनाई है क्या आंटी मुस्कान को भी जानती है अगर जानती है तो कैसे शीतल मुझे कुछ समझ मैं नहीं आ रहा है आवर तुम ने बताया के धरमपुर मैं तुम्हारे आदमी को भी किसी ने मार दिया किसने मारा होगा उनेह गीता को बहुत हैरानी हो रही थी तस्वीर को देख कर

शीतल : गीता किसने मारा ये तो नहीं पता मगर मेरे बंदी जहा गए थे वह एक महल था जब वह लोग वह गए तो उस महल मैं कोई भी नहीं था बस गेट पर गार्ड थे तो वह लोग रात के अँधेरे मैं अंदर चले गए आवर फिर उन्होंने ने महल मैं हर जगह अच्छे से तलासी ले रहे थे जो उनेह ये सब तस्वीरें मिली बस उन्होंने गलती कर दी के वह लोग रात मैं वह से नहीं निकले आवर सुबह hi वह कुछ लोग आ गए हांथो मैं गन लिए आवर उनेह देख कर गोली चलने लगे मेरे कुछ बंदी तो मरे गए मगर एक वह से किसी तरह बच के निकल गया आवर उसने ये तस्वीरें मुझे सेंड किया

गीता : शीतल मुझे सर से बात करनी है फ़ोन लगा उनेह मुझे खुद धरमपुर जाना होगा मुझे जानना है आखिर ये आंटी कौन है आवर उन्होंने ने ये तस्वीर क्यू बनाई है

शीतल : गीता तेरी हालत अभी ठीक नहीं है जो तू धरमपुर जाएगी आवर सर अभी इंडिया मैं नहीं है वह अपनी फॅमिली के साथ कही घूमने गए है उन्होंने अपना नंबर भी बंद रखा है तू जयादा परेशान मत हो मैं खुद धरमपुर जाउंगी आवर आंटी के बारे मैं सब पता कर लुंगी

गीता : नहीं शीतल ये मेरी पर्सनल है तुम इसमें मत पदों मैं नहीं चाहती मेरी वजह से तुमेह कुछ हो

शीतल : गीता तू कैसी बात कर रही है तुमने ये बात कह के सच मैं मुझे बेगाना कर दिया मैंने कभी तुझे बेगाना नहीं समझा मैं तुझे हमेशा एक सच्ची दोस्त आवर अपनी बहन मन है ठीक है तू मिझे कुछ नहीं मानती तो मैं अभी यह से चली जाती हुईं मगर मैं धरमपुर तो हर हाल मैं जाउंगी hi क्यू के मेरे बंदी को किसने मारा है मुझे ये जानना है आवर शीतल नम आखो के साथ जाने लगी क्यू के गीता की बात शीतल को अच्छी नहीं लगी थी

गीता : सॉरी शीतल मुझे मनाफ़ कर दे मेरा वह मतलब नहीं था मैं भी तुझे एक सच्ची दोस्त आवर बहन मन है इस लिए मैं तुझे वह जाने से मन कर रही हुईं मैं नहीं चाहती के मेरी बहन को कुछ हो मगर तू जाना चाहती hi है तो मैं तुझे मन भी नहीं करुँगी मगर तू मेरी बस एक बात मन ले तू वह एक आम लड़की बन के जाएगी आवर तुझे सिर्फ आंटी के बारे मैं पता करना आवर कुछ नहीं तुझे मेरी दोस्ती की कसम

शीतल : ठीक है तू जैसा चाहती है मैं वैसे hi करुँगी

गीता : ठीक चल अभी बहुत रात हो गयी है चल एहि पर सो जा शीतल भी गीता को मन नहीं किया आवर शीतल भी वही सोफे पर सो गयी

*************************************** रूपा को आज नींद नहीं आ रही थी रूपा बार बार करवट बदल रही थी रूपा कारन के बारे मैं सोच सोच कर पर्सन हो रही थी जब से रूपा घर आई थी उसने कारन को नहीं देखा था रूपा ने

रूपा क्या कर रही है एक तो लाइट काटने से यह सोना पद रहा है आवर मैं ऐसे hi काम जगह मैं सोइ हुईं आवर तू है के बार बार हिल रही है जो मैं गिर जाउंगी सुनीता ने कहा जो दोनों एक hi खटिया पर सो रही थी आँगन मैं एक तो दोनों का जिसम गदराया हुवा था सुनीता अपनी गांड रूपा की तरफ कर के सो रही थी आवर ऊपर से रूपा के हिलने से सुनीता को परेशानी हो रही थी आएसा नहीं था के जगह नहीं था सोने के लिया मगर अभी लाइट काट गया था तो सुनीता रूपा के साथ सोने आ गयी थी खुली हवा मैं

सुनीता : रूपा क्या हुवा है तुझे तू सो क्यू नहीं रही है कोई बात है तो मुझे बता

रूपा : दीदी कुछ भी नहीं है बस मुझे नींद नहीं आ रही है आवर कोई बात नहीं है

सुनीता : देख रूपा मुझे पता है कुछ तो बात ज़रूर है जो तू मुझे बताना नहीं चाहती है मैं जानती हुईं तू कभी रात को नहीं जगती है मैं कुढ़ कितनी बार तुझे रात को जागते हुवे परेशान हुयी हुईं तू रात मैं सोने के बाद तुझे कोई होश नहीं रहता है आवर तू रात मैं जल्दी hi सो जाती थी पहले मुझे पता है चल बता भी दे क्या बात है मैं तेरी बड़ी जेठानी के साथ बड़ी बहन जैसी हुईं

दीदी वह कारन के वजह से परेशान हुईं रूपा कुछ बताना तो नहीं चाहती थी मगर उसके मुंह से निकल hi गया अचानक क्यू के रूपा को कारन की फिकर हो रही थी

सुनीता : कारन की वजह से अब मेरा कारन ने क्या कर दिया जो तू उसके लिए परेशान है मेरा कारन तो बहुत मस्सों आवर अच्छा लड़का है तो तुझे उसने परेशान क्यू किया कारन के नाम सुना सुनीता थोड़ी जोश मैं कहा

रूपा : दीदी कारन ने मुझे परेशान नहीं किया है मैं खुद परेशान हुईं उसके लिए दरअसल बात ये है के " क्या मैं सुनीता दीदी को बता दू कही सुनीता दीदी ने मुझे गलत समझ लेगी तो रूपा सोचने लेगी

सुनीता : रूपा क्या हुईं है मेरा कारन को जो तू परेशान है प्लीज बता न रूपा मेरे दिल घबरा रहा है रूपा की बात सुन सुनीता को बेचैनी होने लगी की कारन को क्या होगा है जो रूपा भी परेशान है सुनीता उठ कर बैठ गयी

रूपा : दीदी आप परेशान मत हो कारन को कुछ नहीं हुवा है बात ये है के रूपा फिर चुप हो गयी रूपा को समझ मैं नहीं आ रहा था के वह सुनीता को कैसे बताये के वह करने के लिए क्यू परेशान है आवर ऊपर से सुनीता भी जानने के लिए बेचैन है

सुनीता : अरे आगे भी कुछ बोलेगी कारन को कुछ नहीं हुवा तो तू परेशान क्यू है देख बता दे रूपा मेरी बहन वर्ण मुझे रात भर नींद नहीं आएगी दीदी अगर बता दिया तो सच मैं आप को नींद नहीं आएगी गई रूपा ने सोचा

रूपा : दीदी आप मुझे गलत मत समझिये गए बात ये है की दिन मैं मैं आवर कारन दूसरे घर गयी थी सफाई करने के लिए आवर रूपा जैसे जैसे बताती गयी सुनीता की धड़कन बढ़ती गयी सुनीता के होंठ भी सुख गयी रूपा की पूरी बात सुनने के बाद जब रूपा ने पूरी बात बता कर सुनीता को पुकारा तो सुनीता को निशा आया

रूपा : दीदी ये आप क्या कर रही है रूपा ने अपने हाँथ से इसरा कर के कहा जो सुनीता का एक हाँथ उसके साड़ी के ऊपर से hi सुनीता अपनी छूट को पकड़ कर छूट को मसल रही थी रूपा के कहने पर सुनीता ने अपनी छूट पर से हाँथ हटा दिया आवर सुनीता कुढ़ शर्मा गयी

सुनीता : तो तुझे क्या ज़रूरत थी कारन के सामने अपनी साड़ी उस तरह बांधने की वह जवान लड़का है अपने आप पर काबू न कर पाया होगा आवर वह तुझसे मांफी तो मांग रहा था न

रूपा : दीदी मैं जान भुज कर थोड़ी साड़ी को उस तरह बंधी थी मैं तो कारन को अभी बच्चा hi समझे रही थी मुझे नहीं पता था कारन देख कर बहक जायेगा

सुनीता रूपा की बात सुन कर गर्म हो गयी थी रूपा जो भी बता रही थी सुनीता अपने ऊपर सोच रही थी के कारन उसके साथ कर रहा है इस लिए सुनीता का हाँथ छूट तक पहुँच गया था क्या सच मैं कारन वह (लैंड) बड़ा हो गया है कस रूपा की जगह वह मैं होती ची ची ये मैं क्या सोच रही हुईं कारन मेरा बीटा है मैं ऐसे सोच भी कैसे सकती हुईं आवर सुनीता रूपा से आवर कुछ नहीं कहा आवर अपनी गांड रूपा की तरफ कर के सोने लगी मगर सुनीता के छूट पानी ज़रूर छोड़ दिया था जो सुनीता सोते हुवे अपनी हाँथ से साड़ी को छूट पर रहत रही थी जो रूपा ने भी देख लिया था मगर कुछ कहा नहीं फिर दोनों एक दूसरे की गांड सत्ता कर सो गयी

ऊपर छत पर कारन को हवा चलने के बाद भी उसके चेहरे पर पसीने आ रहे थे क्यू के कारन का लैंड पूरा हार्ड हो रहा था माया की खुली गांड देख कर अभी कारन छत पर माया के साथ सो रहा था माया तो घोड़े बेच कर सो रही थी एक तो माया नाईट डरेस मैं सो रही थी ऊपर से माया की मैक्सी माया के कमर तक उठ गयी थी जो माया की पूरी गांड कारन को नज़र आ रही लाल पेंटी मैं कारन कभी माया की गांड देख रहा था तो कभी अपनी नज़र हटा रहा था बड़ी माँ प्लीज आप अपनी कपडे ठीक कर लीजिये कारन मन मैं hi कहा कारन को बुरा भी लग रहा था अपनी बड़ी माँ की गांड देखते हुवे मगर कारन का लैंड बार बार उसे परेशान कर रहा था कर अपने लैंड को मारिए भी रहा था के लैंड साथ हो जाये मगर उसका लैंड साथ होने के बजाये आवर फुफकार मार रहा था क्यू के उसे सामने माया की बड़ी गैंग लाल पेंटी मैं नज़र आ रही थी कारन कभी देर तक देखता रहा माया की गांड को आवर सोचता रहा सायद बड़ी माँ पलट कर अपनी गांड दूसरी तरफ कर लेगी मगर माया उसी तरह hi सोती रही कारन से आवर रहा नहीं गया आवर कारन ने अपना हाँथ माया के गांड पर रख दिया कारन को दर भी लग रहा था के बड़ी माँ उठ न जाये कारन माया के गांड पर हाँथ फेरते लगा आवर एक हाँथ से अपना लैंड को हिलने लगा कारन ने अब माया के गांड को धीरे धीरे दबाने लगा मगर माया अभी भी नहीं उठी तो कारन ने अपनी ऊँगली आया की पेंटी हटा कर माया के गांड मैं दाल दिया जो माया एक सिसकियाँ के साथ उठ कर बैठ गयी माया के उठने से कारन को झटका लगा कारन को कुछ समझ मैं नहीं आया क्या हुवा कारन अपने दोनों हाँथ से लैंड पकड़ कर पलट कर सो गया
 
अपडेट _ 64

माया उठ कर बैठ गयी आवर कारन की तरफ देखने लगी मगर कारन को माया सोते हुवे देख कारन देखा माया भी कुछ कहा नहीं माया कारन से थोड़ी दूर होकर सो गयी कर कारन भी उसी तरह hi सो गया दीदी आप अभी तक जाग रही है नींद नहीं आ रही है क्या रूपा ने कहा सुनीता से सुबह के 4 ऍम को रूपा जगी तो देखा सुनीता आसमान की तरह देख रही थी आवर कुछ सोच रही थी

सुनीता : अरे नहीं रूपा मैं अभी थोड़ी देर पहले hi जगी हुईं सुनीता नज़रे चुराते हुवे कहा मगर रूपा देख चुकी थी के सुनीता अपनी आँखे बार बार मॉल रही थी आवर सुनीता की पूरी साड़ी खुल चुकी थी आवर बलाउज के बटन भी 2 से 3 खुले थे जो सुनीता के ब्रा दिख रहा था आवर निचे से सुनीता की पेटीकोट का नाडा भी खुला हुवा था

रूपा : दीदी आप झूठ बोल रही है आप रात भर जगी है जो आप अपनी आखे मॉल रही है आवर आप की ये साड़ी भी पूरी खुल चुकी है आवर आप की दोनों कबूतर भी दिख रहे है कही आप रात भर विनय भैया को याद तो नहीं कर रही थी बोल के रूपा हसने लगी

रूपा की बात सुन सुनीता झट से खत से उठ गयी आवर अपनी साड़ी के साथ अपनी बलाउज के बटन लगा कर ठीक कर लिया अब तुझे क्या बताऊ रूपा तेरी बात सुन कर के मैं रात भर कारन के बारे मैं hi सोच रही मेरा दिल कर रहा है के एक बार मैं भी कारन का लैंड देख लेती क्या सच मैं मेरा कारन अब जवान हो गया है सुनीता ने मन सोचा आवर शर्मा गयी सुनीता बस कारन के बारे मैं hi सोच कर अपनी छूट के साथ चुकी hi दबती रही सुनीता की छूट ने रात मैं 2 बार अपनी छूट से पानी निकल चुकी थी

सुनीता : नहीं रूपा आएसा कुछ नहीं है तू भी सुबह सुबह कैसी बात कर रही है तुझे सरम नहीं आती चल तू भी अब उठ hi गयी है तो चल खेत की तरफ चलते है वरना सूरज निकल जायेगा सुनीता सरम से पानी पानी हो रही थी रूपा की बात सुन कर

दीदी मगर आप घर मैं भी तो फ्रेश हो सकती है फिर खेत पर क्यू जाना चाहती है आप घर पर hi फ्रेश हो लीजिये बहार आप की ये जवानी देख कर गाँव की ोुरत आवर लड़किया आप की ये कातिल जिसम को देख कर जल जाएगी आवर कही कारन ने अभी देख लिया तो वह तो आप पर रूपा भी आज सुनीता से फॉल मज़ा लेते हुवे कहा मगर आगे कुछ नहीं कहा

सुनीता : क्या कारन मुझे देख लगा तो रूपा तू कुछ भी बोल रही है चल जयादा बकवास मत कर मेरे से रूपा के बात की मतलब समझे कर सुनीता के छूट मैं गुदगुदी सी हो गयी फिर रूपा ने भी कुछ नहीं कहा फिर दोनों जाने लगी तो माया को भी निचे आते हुवे देखा

माया : इतनी सुबह सुबह कहा जा रही हो तुम दोनों

सुनीता : भाभी हम खेत की तरफ जा रहे है क्या आप भी चलोगी क्या

माया : है सुनीता चलो मैं भी आज चलती हुईं बहुत दिन हो गया है फिर तीन ननद भाभी खेत की तरफ चल दी माया आगे चल रही थी रूपा आवर सुनीता माया के पीछे चल रही थी रूपा रह रह कर है रही थी जो सुनीता रूपा को देख कर शर्मा रही थी

रूपा तू हसना बंद करेगी की नहीं सुनीता रूपा के कमर पर चुटी काटते हुवे कहा ये बात सुनीता ने धीरे से रूपा से कहा टेक माया सुन न ले फिर भी माया ने रूपा की सिसकियाँ सुन hi लिया

पीछे से बार बार कोई लाइट बार रहा था सुनीता पर जब सुनीता पीछे देखती तो लाइट बंद हो जाता था इनके पास एक hi लाइट था जो माया आगे लेकर चल रही थी

माया : रूपा भाभी क्या हुवा कुछ कटा तो नहीं है न

रूपा : नहीं माया दीदी पेअर के निचे कंकर पर गया था तो फिर माया चलने लगी मगर सुनीता पर बार बार कोई लाइट बार रहा था जब सुनीता पीछे देखती तो लाइट बंद हो जाता सुनीता को अजीब लग रहा था क्यू के जो भी था वह लाइट सुनीता के गांड पर बार रहा था

सुनीता : रूपा देख कोई बार बार मेरे पिच लाइट बार रहा है कौन हो सकता है

रूपा : दीदी क्या कह रही हो आप के पीछे कौन लाइट बार सकता है सुबह का टाइम है तो हर कोई इधर आएगा hi तो लाइट बार रहा है अब अँधेरे मैं तो कोई नहीं चल सकता न माया तो आगे चल रही थी ये दोनों थोड़ी पीछे चल रही थी दोनों बात करते हुवे खेत पर पहुँच गयी माया तो कुछ दूर जाकर अपनी साड़ी उठा कर बैठ गयी मगर रूपा सुनीता के साथ hi कड़ी हो गयी

सुनीता : रूपा जा उधर तू भी बैठ जा यह क्यू कड़ी हो गयी है जब रूपा सुनीता के साथ hi रुक गयी तो सुनीता ने रूपा को जाने को कहा

रूपा : दीदी आप भी मेरे साथ hi बैठ जाइये आप बहुत सल्ल के बाद इधर आई है आउट खेत मैं कही कही बहुत गड्ढा भी है आप गिर जाएँगी आवर रूपा वही साड़ी उठा कर बैठ गयी सुनीता रूपा के सामने न बैठ कर थोड़ी दूर जाकर बैठ गयी माया आगे बैठी थी फिर सुनीता फिर रूपा तीन बैठ कर अपना काम करने लगी तभी अचानक सुनीता पर लाइट की रोशनी पड़ी आवर सुनीता कड़ी हो गयी सुनीता को खड़े होते देख रूपा तथा कर हसने लगी

सुनीता : कौन है जो मुझपे hi लाइट बार रहा है सुनीता ने गुस्से मैं कहा अँधेरा था तो सुनीता को दिख नहीं रहा था वह कौन लोग है तब तक वह लाइट वाली उसके पास आ गयी जो गाँव की hi एक ोुरत थी जिसे सुनीता अच्छे से जानती थी

ोुरत : अरे सुनीता मैं हुईं तू उठ क्यू गयी मैं तो तेरी बुर देखना चाहती थी की अभी भी तू अपनी छूट को जंगल मैं रखती है या तू सरे जंगल काट कर अपनी छूट को चिकनी रखती है तू यह आकर भी मुझसे मिलने क्यू नहीं आई

सुनीता : मल्टी भाभी आप हो आप अभी तक नहीं बदली है अगर कोई देख लेता तो क्या होता आप चिनार के चिनार hi रहोगी अपनी बुर तो हर लड़के को देने के लिए साफ रखती है आवर चली है मेरी बुर देखने के लिए

मल्टी आवर सुनीता मैं बहुत बनती थी जो दोनों एक सहेली की तरह रहती थी जब तक सुनीता यह थी दोनों खूब मस्ती करती थी एक दूर से

मालती : है तो तू बस है कर तेरी भी बुर के लिए लैंड का इंतज़ाम कर दूंगी तू भी मस्ती कर लेना अब तो विनय भैया भी तेरी बुर लेते हुवे थक जाते होंगे जो तू इतनी गदरा गयी है पीछे से तेरी गांड देख देख कर मैं तो सोच रही थी मेरे पास लैंड होता तो तेरी साड़ी उठा कर खुद तेरी गांड मैं लैंड दाल देती

सुनीता : देख रूपा मैं बोल रही थी तुझसे कोई मेरे पीछे लाइट बार रहा है एहि थी चिनार जो मेरी गांड पर लाइट बार रही थी मालती भाभी आप की भी गांड तो बड़ी hi है आप कहो तो मैं एक लैंड की इंतज़ाम कर देती हुईं जो आप की गांड बुर को छोड़ छोड़ के पहाड़ देगा क्यू रूपा सही कहा ने जो तूने देखा था वह मालती भाभी का गांड बुर फाड़े देगा की नहीं

सुनीता की बात सुन कर रूपा ने कुछ नहीं बोल पायी बस दीदी कह कर रह गयी तब सुनीता को अहसास हुवा के जोश मैं उसने क्या कह दिया

मालती : ओह ओह तभी मैं सोचु तेरी गांड इतनी बड़ी क्यू हो गयी है क्यू के तू बड़े लैंड से अपनी गांड बुर फड़ेवा रही है तब तो मैं भी वह लैंड अपनी बुर गांड मैं लेना चाहती हुईं कौन है बता न सुनीता अब सुनीता खुद से hi फस गयी थी अब मालती बिना जाने सुनीता की पीछा नहीं छोड़ने वाली थी

मेरा बीटा का भी लैंड बड़ा है लेना चाहोगी मालती भाभी तो कहो आज hi अपने बेटे को आप के घर भेज देती हुईं पीछे से माया ने आते हुवे कहा

मालती : नहीं मुझे तेरे बेटे से नहीं छुड़वाना है तू hi अपने बेटे का लैंड अपनी छूट मैं दाल ले ये चिनार भी तुम लोगो के साथ है क्या ये तो पक्की बेशर्म है इसके साथ तो मैं नहीं जित सकती हुईं इतना कह कह मालती शरमाते हुवे आगे चली गयी जो सुनीता मालती को रोटी रही मगर मालती वह रुकी hi नहीं

तीनो एक साथ हसने लगी वरना सुनीता को समझे मैं नहीं आ रहा था अब मालती को क्या जवाब दे माया के बोलने पर सुनीता को रहत मिली क्यू के जानती थी मालती अब कभी इस बारे मैं बात भी नहीं करेगी माया की जब शादी नहीं हुयी थी तो एहि मालती माया से बहुत मस्ती करती थी कितनी बार तो माया मालती की बात सुन सुन कर उसके पास से शर्मा कर भाग जाती थी मगर जब माया की शादी हो गयी तब से माया भी मालती से बहुत मजाक करने लगी कभी कहती के मेरे पिता जी से छोड़वाते लीजिये मालती भाभी तो कभी कहती मेरे भतीजे से छोड़वाते लीजिये माया हर किसी के नाम लेकर मालती को परेशान करने लगी तब से मालती माया के साथ कभी ठीक से बात भी नहीं करती था क्यू के मालती जानती थी ये एक दिन कह देगी की भाभी अपने बेटे दे hi छोड़वा लीजिये आवर आज माया ने कह भी दिया के मेरे बेटे से छोड़वा लीजिये

तीनो फिर वह से हस्ती हुयी चल दिए

************************************** इधर सुबह जब शांति गीता के रूम मैं कॉफ़ी लेकर गयी तो शीतल को देख कर चौक गयी शीतल अभी भी सो रही थी

शांति : गीता बेटी अब उठ भी जा सुबह क्र 10 ऍम बज गए है शांति के उठाने पर गीता अंगराई लेते हुवे उठ गयी आवर शांति के गाल पर गुड मॉर्निंग किस कर दिया फिर शांति के चेहरे को देख कर मुस्कुरा दी जो शांति ने शीतल की तरफ इसरा से पूछा कौन है

गीता : छोटी माँ ये मेरी फ्रेंड है शीतल तब तक शीतल भी आवाज़ सुन कर उठ गयी

शीतल : गुड मॉर्निंग आंटी गुड मॉर्निंग गीता ठीक है गीता अब मैं चलती हुईं बहुत टाइम हो गया है घर पर भी माँ परेशान हो रही होगी

गीता : नहीं शीतल नास्ता कर के जाना पायल नास्ता बना दिया होगा छोटी माँ आप शीतल के लिए ज़रा नास्ता भेजवा दीजिये पायल से तब तक शीतल तू फ्रेश हो ले वह अलमारी मैं मेरी कपडे होंगे छोटी माँ शीतल को पायल के कमरे के बाथरूम मैं ले जाइये शीतल गीता की कपडे लेकर शांति के साथ चली गयी

पायल : गीता दीदी वह दीदी कहा गयी मैं उनके लिए नास्ता लेकर आई थी

गीता : पायल वह फ्रेश तेरे hi रूम मैं गयी है अच्छा किया तू नास्ता ला दिया

पायल : दीदी चलिए मैं आप को भी लेकर चलती हुईं बाथरूम मैं आप भी फ्रेश हो जाइये पायल बोल रही थी आवर गीता मायुशि से पायल को देख कर कुछ सोच रही थी पायल गर्मी से पूरी तरह भींग चुकी थी

पायल : दीदी क्या हुवा ऐसे क्यू देख रही है क्या हुवा है आप ठीक है न कही दर्द तो नहीं हो रहा है न आप को आवर पायल गीता के सरीर को दबाने लगी

गीता : अरे पगली मैं ठीक हु मैं बस सोच रही थी अब मेरी छोटी बहन बड़ी हो गयी है जो सब का धयान रखती है आवर मेरी इतना सेवा करती है की जैसे मैं तेरी छोटी बहन

पायल : दीदी आप भी न क्या क्या सोचती रहती है आप मेरी छोटी बहन नहीं बड़ी बहन है समझी

वही दोनों की बात सुन शांति गेट पर hi मुस्कुरा रही थी भगवन आप मेरे बच्चो के दिल मैं इसी तरह एक दूसरे के दिल मैं प्यार रखना शांति ने सोचा आवर मुस्कुरा कर चली गयी

ठीक है गीता अब मैं चलती हुईं नास्ता करने के बाद शीतल ने कहा

गीता : ठीक है शीतल जैसा मैंने तुझे कहा था तू वह एक साधरण लड़की की तरह जाइएगा आवर वह पर अगर किसी ने तुझे पर सक की नज़र से देखा तो तू वह से निकल जाना मैं नहीं चाहती तुझे कुछ हो गीता ने शीतल की चिंता जताते हुवे कहा

शीतल : ठीक है गीता मैं तेरी बात का धयान रखूंगी आवर शीतल चली गयी

hello रहीम चाचा मैं गीता बोल रही हुईं शीतल के कटे hi गीता ने रहीम को फ़ोन लगा दिया

रहीम : है बोलो गीता बेटी सब ठीक तो है न

गीता : है चाचा सब ठीक है चाचा एक काम है जो आप hi काट सकते है क्या आप करेंगे मुझे आप पर hi विश्वास है

रहीम : मुझे खुसी हुयी गीता बेटी की तुम मुझपे इतना विश्वास करती हो बोलो क्या करना है मुझे

गीता : चाचा मैं आप को एक लड़की की फोटो भेज रही हुईं ये लड़की आज धरमपुर के लिए निकलने वाली है आप को सिर्फ उसकी रक्षा करना है मगर उसे पता नहीं चला चाहिए की आप उसके साथ है

रहीम : ठीक है गीता बेटी मैं वैसा hi करूँगा

गीता : रहीम चाचा वह जगह बहुत खतरनाक है तो संभल के आवर आप अपना भी ख्याल रखिये गए चाचा मैं अभी आप के पास लड़की की घर का पता भेज रही हुईं आप उसपे नज़र रखियेगा आवर फिर गीता ने फ़ोन काट कर रहीम को शीतल के घर के पता के साथ उसकी फोटो भी रहीम को भेज दिया
 
अपडेट _ 65

जब तीनो घर आई तो रूपा तो अपने घर के काम मैं लग गयी मगर माया आवर सुनीता कुछ टाइम के बाद दोनों कमरे मैं चली गयी भाभी आप ने कुछ जयादा hi बोल दिया उसे बेचारी शर्मा कर भाग गयी एक पल वह रुकी भी नहीं सुनीता ने हस्ते हुवे माया से कहा

माया : तो क्या करती मैंने देख तू कुछ जवाब hi नहीं दे रही थी उसे तो मुझे hi बोलना पद गयी वैसे तूने किसका इतना बड़ा देख लिया जो तू उसे बता रही थी माया ने मज़ा लेते हुवे पूछा

सुनीता : क्या भाभी आप भी न मैं तो बस ऐसे hi बोल दिया था सुनीता ने सरमते हुवे कहा

माया : तो फिर शर्मा क्यू रही है कुछ तो बात ज़रूर है बता न सुनीता मैं भी देख लुंगी आवर मुझे भी पता चल जाइएगा कौन है वह खुसनसीब जिसका हतियार देख कर मेरी नन्द जी उसे याद कर रही है इस बार माया सुनीता के बिलकुल कारण जाकर कहा जो सुनीता शर्मा कर निचे देखने लगी भाभी मैं सच कह रही हुईं मुझे नहीं पता मुझे तो रूपा ने बताया के कारन का वह बड़ा है

माया : क्या मतलब तुझे रूपा ने बता के कारन का वह बड़ा है रूपा को कैसे पता क्या रूपा कारन के साथ " इस के आगे माया कुछ नहीं बोल पायी आवर सुनीता को देखते हुवे अपने मुंह पर हाँथ रख लिया माया ने जैसे माया को यकीन हो गया है के रूपा ने कारन का लैंड सच मैं देख लिया " अब सुनीता को कौन बताये के माया कारन का लैंड पहले hi देख चुकी है

सुनीता : नहीं भाभी रूपा ने कारन के साथ कुछ भी नहीं किया है कल कारन आवर रूपा दूसरी घर गए थे घर की सफाई करने के लिए फिर जो कुछ भी रूपा ने सुनीता को बताया था सब माया को बता दिया

सुनीता बता रही थी आवर इधर माया अपनी साड़ी के ऊपर से hi छूट मसल रही थी अभी तक सुनीता की नज़र माया पर नहीं पड़ी थी क्यू के सुनीता खुद बताते हुवे शर्मा कर निचे देख रही थी जो एक स्स्स्सस्स्स्स सुन कर सुनीता ने माया की तरफ देख जो माया अपनी साड़ी के ऊपर से hi छूट को मसल कर सिसक रही थी आवर सुनीता को देख भी रही थी

माया : आआआ ोुह्ह्हह्ह सुनीता हहहह जल्दी से गेट लगा आअह्ह्ह्ह कोई आ हहह जायेगा ह्ह्हह्ह्ह्ह ऊऊऊऊ माया अपनी साड़ी उठा कर अपनी ऊँगली छूट मैं दाल कर हिलने लगी माया अपनी छूट मैं ऊँगली करते हुवे अपनी साड़ी पेटीकोट निकल कर बीएड पर लेट कर पेंटी को अपने छूट से निचे कर के अपनी एक ऊँगली छूट मैं दाल रही थी आवर माया की लम्बी लम्बी आआअह्ह्ह्हह ले रही थी वही माया की गरम कामुक सिसकियाँ सुन कर सुनीता के छूट मैं भी चींटिया रेंगने लगी क्यू के गेट पर hi सुनीता अपनी साड़ी का पल्लू गिरा कर आआअह्ह्ह्हह अपनी बड़ी चूंकि मसल रही थी सुनीता को पता नहीं था के उसके पास कितने बड़े चूंकि है जो अभी बलाउज मैं क़ैद बहुत hi जयादा कामुक लग रहा था अभी यह कोई बुद्धा भी होता आवर उसका लैंड खड़ा नहीं होता होगा तो सुनीता का ये रूप देख कर उसके भी लैंड मैं जोश आ जाता इतना जबरजस्त था सुनीता का जिसम सुनीता अपनी एक हाँथ से चूंकि मसल रही थी आवर एक हाँथ अपने पेट से होते हुवे छूट की तरफ कर रही थी मगर अपना हाँथ छूट मैं नहीं दाल रही थी बस छूट के ऊपर से hi हटा ले रही थी सुनीता माया को देख इतनी गरम हो गयी के सुनीता को पता भी नहीं चला रहा था सुनीता धीरे धीरे माया की तरफ बैज रही थी आवर सुनीता के साड़ी निचे गिर रहा था सुनीता माया के पास जाकर माया के पेअर को चुम लिया जो माया स्स्स्सस्स्स्स कर के रह गयी आवर अपनी छूट से एक हाँथ निकल कर अपनी ऊँगली सुनीता की मुंह की तरफ कर दिया जो सुनीता ने उसे मुंह मैं ले कर चूस लिया माया की छूट का पानी सुनीता माया की ऊँगली चूस कर माया के छूट के पास आगयी आवर माया की छूट की अपने होंठ से पकड़ कर खींच दिया माया की एक hhhhhhhhhh निकल गयी आवर माया उठ कर अपनी छूट के ऊपर हाँथ रख दिया टेक सुनीता फिर से उसके छूट पे होंठ रख कर खिंच न दे माया को अपने छूट पर हाँथ रखे देख सुनीता मुस्कुरा दी आवर फिर सुनीता माया के सर पकड़ कर उसे मुंह मैं दाल कर माया के होंठ चूसने लगी जब माया की सांसे फ़ोन लगी तो सुनीता ने माया को छोड़े दिया जो माया उसी तरह बीएड पर गिर गयी माया की सांसे तेज़ चल रही थी जो माया की पहाड़ जैसी चूंकि दिल रहे थे जिसे देख सुनीता माया की चूंकि को मुंह मैं ले कर चूसने लगी माया आवर सिसकने लगी ये दोनों अपने मैं मस्त थी आवर वही कारन बाथरूम के गेट से नंगा होकर देख रहा था अपनी बड़ी माँ आवर बुवा की रासलीला

कारन पहले से hi बाथरूम मैं था जब कारन फ्रेश होकर बाथरूम से निकलने के लिए गेट खोलने hi वाला था तभी उसे अपनी बड़ी माँ की सिसकियाँ सुनाई दिया तो कारन निकलना चाहा के क्या हुवा उसकी बड़ी माँ को मगर फिर अपनी बुवा को देख कर वही रुक गया फिर दोनों का रासलीला चालू हो गया कारन का 9 इंच का लैंड टाइट था आवर ज़ोर ज़ोर से फुफकार मार रहा था आवर कारन अपना लैंड को सहला रहा था मगर कारन का आँख रेड हो गया था वह हवस की नज़र से अपनी बड़ी माँ आवर बुवा के जिसम को बस देख रहा था

इधर अब सुनीता माया की चूंकि को चूसते हुवे अपना हाँथ निचे लेजा कर माया के छूट मैं ऊँगली करने लगी माया की मुंह से आआआअह्ह्ह्हह स्स्स्सस्स्स्स आआआ निकल रहा था अअअअअ सुनीता अच्छा लग रहा है ऊऊओह्ह्ह्ह सुनीता बहुत पयासी है मेरी छूट अअअअअ ह्ह्हह्ह्ह्ह ोोोुस्स्सस्स्स्स आवर ज़ोर से hhhhhhhhhh सुनीता अअअअअ अपनी मोती ऊँगली दाल मेरी छूट मैं हहहहह माया बोलती जा रही थी आवर सुनीता इतनी hi तेज़ मैं माया की छूट मैं ऊँगली करती hi जा रही थी आवर सुनीता अपनी छूट माया के पेअर पर रगड़े रही थी रूम मैं बस दोनों की hi सिसकियाँ गूंज रही थी कारन भी अब अपना लैंड ज़ोर ज़ोर से हिला रहा था सुनीता की बड़ी मसलदर गांड देख कर आआआ अअअअअ अअअअअ आवर माया तुक तुक कर अपनी छूट से पानी गिराने लगी माया के झड़ने के बाद hi सुनीता उठ कर अपनी छूट माया के मुंह पर रख दिया भाभी चूस लीजिये मेरी छूट को अअअअअ भाभी जल्दी से अपनी जॉब मेरी बूत मैं अअअअअ डालिये ह्ह्हह्ह्ह्ह भाभी मेरी छूट जल रही है अअअअअअअ काश मेरी ये छूट मैं मेरा कारन का लैंड होता अअअअअ आवर कारन मुझे पटक पटक के मेरी बूत को छोड़ता अअअअअ मेरी छूट तो पूरी तरह से प्यार जायेगी सुनीता अपनी छूट माया की मुंह पर रगडते हुवे कारन के बारे मैं सोच रही थी जब कारन का लैंड मेरी बूत मैं जाइएगा तो मैं तो मर hi जाउंगी अअअअअअअ आवर सुनीता ने भी अपनी पानी माया के मुंह मैं hi गिरा दिया जो माया ने सुनीता की सारा पानी पि गयी अअअअअअअ माया भाभी आज कितने दिन के बाद मेरी छूट में से आज इतना पानी गिरा है आज मुझे बहुत सकूँ मिल रहा है सुनीता भी माया के बगल मैं लेट कर कहा

माया : है सुनीता सही कह रही है आज कितने दिन के बाद मुझसे भी आज बहुत सकूँ मिल रहा है मैं कारन के बारे मैं सोच कर hi इतनी जल्दी झड़े गयी तो जब कारन का मोटा आवर लम्बा लैंड मेरी बूत मैं जाइएगा तो मुझे कितना सकूँ मिलेगा माया ने मन मैं सोचा

सुनीता : भाभी चलिए फ्रेश हो लेते है बहुत टाइम हो गया है कही गुड़िया आ गयी तो वह गेट पर hi हंगामा कर देगी की जल्दी से गेट खोलो

माया : सही कह रही है उसे हम कुछ बोल भी नहीं सकते है क्यू के वह हम्हारी जान है फिर दोनों उठ कर बाथरूम की तरफ जाने लगी अभी कटे हुवे दोनों निचे hi देख रही थी गेट हल्का से खुला था आवर वही कारन अभी भी अपना लैंड हिला रहा था सुनीता ने जिसे hi बाथरूम के गेट पर हाँथ रख कर ठेला तभी कारन ज़मीन पर गिर गया आआआआआ भाभी कारन अंदर है सुनीता के मुंह से निकला आवर दोनों एक दूसरे को देखने लगी
 
अपडेट _ 66

दोनों कारन को बाथरूम मैं नंगा देख कर दोनों एक दूसरे को कुछ देर देखने लगी मगर माया जल्द hi कारन को पकड़े लिया कारन बीटा तुझे चोट तो नहीं लगी न माया कारन को अपने गॉड मैं लेते हुवे कहा अभी माया बिलकुल नंगी थी माया की बड़ी Ra's से भरी चूंकि कारन के मुंह से लग गए थे माया वही कारन को लेकर बैठ गयी कारन अभी भी कुछ बोल नहीं रहा था वह माया की चूंकि अपने मुंह के पास प् कर माया की बड़ी चूंकि की निप्पल को मुंह मैं लेकर उसे चूसने लगा कारन के मुंह मैं अपनी चूंकि के अहसास से माया को एक सकूँ महसूस हुवा आवर माया अपनी सर ऊपर कर के एक आआह्ह्ह्हह ले लिया माया के चेहरे पर मुस्कराहट थी जैसे माया कारन को बरसो से hi उसे अपना दूध पिलाना चाहती थी जो आज पूरी हो रही थी माया कारन के सर पर hi हाँथ फेरते हुवे कारन को देखे जा रही थी आवर कारन माया की चूंकि को गीच गीच कर पि रहा था जैसे कारन माया की चुकी से दूध निकल रहा हो मगर कारन को नहीं पता था के अब माया की चूंकि को कितना भी गीच ले इस इ से अभी दूध तो नहीं निकलने वाला है

भाभी देखिये कारन बीटा का आँखे बहुत लाल हो गयी है भाभी कारन को कुछ हुवा तो नहीं है न सुनीता भी दोनों माँ बेटे का प्यार देख कर अपनी चुकी मसल रही थी तभी उसे कारन के आँख पर नज़र पड़ी जो पूरी तरह लाल हो गया था आवर कारन माया की चुकी को गीच गीच कर पि रहा था माया सिर्फ आआह्ह्ह्हह्ह ऊऊह्ह्ह्ह सससस कर रही थी मगर कारन को रुकने को नहीं बोल रही थी सुनीता से आवर नहीं देखा गया तो वह कारन को माया से अलग कर दिया आवर कारन कारन कहने लगी मगर कारन अब सुनीता की चूंकि को पकड़ लिए आवर मसलने लगा अअअअअ मत कर कारन बीटा दर्द हो रहा है हहहहह भाभी प्लीज कारन को रोकिये आआआआ ये मेरी बूब्स को नोच लेगा माया भाभी हहहह मेरी बूब्स कारन बीटा रुक जा आआआआ भाभी प्लीज कारन सुनीता की चूंकि को दोनों हाथ से बुरी तरह मसल रहा जो सुनीता को अब दर्द होने लगा था तो सुनीता चिल्ला कर माया से कहने लगी कारन को दूर करने को माया उठ कर जल्दी से कारन को अपने बहन मैं भर लिया

सुनीता : माया भाभी कारन को आएसा क्यू कर रहा है कारन को कुछ हुवा तो नहीं है न कारन के बेताबी को देख कर सुनीता हैरत मैं पद गयी के कारन को क्या हो गया है भाभी इसे पहले बीएड पर ले चलिए आवर माया भी कारन को पकड़े लिया अब माया को भी कारन की फिकर होने लगी थी क्यू के अभी माया कारन को पूरी ताकत से कारन को अपनी बहन मैं ज़ोर से पकड़े राखी थी फिर दोनों मिल के कारन को बीएड पर ले गयी मगर कारन अभी भी माया की चूंकि को मुंह मैं hi ले रखा था दोनों ने कारन को बीएड पर ले जाकर सोला दिया मगर अभी भी कारन ने माया को छोड़ा hi नहीं रहा तो सुनीता ने कारन को दो तीन टेपार मर दिया तब जा कारन हो होश आया आवर कारन अपनी बड़ी माँ आवर बुवा को बीएड पर नंगी देख कर कारन शर्मिदा होकर अपना मुंह चादर मैं छुपा लिया माया आवर सुनीता ने भी अपनी साड़ी को पहन लिया माया फिर जाकर कारन के सर को अपने गोद मैं रख लिया बड़ी माँ मुझे मनाफ़ कर दीजिये मुझे नहीं पता था मैं क्या कर रहा था मेरा यकीं कीजिये सॉरी बड़ी माँ कारन कह कर माया के बहन मैं रोने लगा जो माया कारन के सर पर हाँथ फेरती रही माया के आँख से आंसू बाह रहे थे फिर भी माया कारन का सर सहला रही थी

माया : कारन कुछ नहीं हुवा सब ठीक है मैं. नाराज़ नहीं हुईं अपने बेटे से चलो उठो आवर जाकर अपने कपडे को पहन ले सुनीता कारन का कपडा ला कर दे सुनीता ने कारन के कपडे लेकर दी कारन अपने कपडे को ले कर बिना अपनी बड़ी माँ आवर बुवा को देखे सीधे hi बाथरूम मैं चला गया आवर कपडे पहन कर रूम से निकल गया माया कारन को पुकार कर रोक रही थी मगर कारन बहार चला गया माया वही पे गिर गयी आवर अपनी बलाउज की तीन बटन को खोल दिया मगर सुनीता बाथरूम मैं चली गयी माया को अभी लेते बीएड पर थोड़ी hi देर हुयी थी के उसे फिर अपनी चुकी पर मुंह का अहसास हुवा जो माया ने हड़बड़ा कर उठ कर बैठ गयी आआआ क्या कर रही है बड़ी माँ आप ने मुझे गिरा दिया नैना ने कहा कारन के जाने के बाद गेट खुला hi रह गया था आवर उसी वक़्त नैना भी रूम मैं आ गयी आवर अपनी बड़ी माँ माया की बड़ी चूंकि को खुला देख कर उसे दूध पिने का मन किया आवर माया ने पहले से hi अपनी बलाउज की बटन खोली हुयी थी तो नैना ने उसमे मुंह लगा दिया

माया : ये क्या है गुड़िया तू अभी क्या कर रही थी मरूंगी आवर तू कहा थी मैं कब से तुझे धुंध रही थी आवर काजल कोमल आवर मुस्कान कहा है

नैना : बड़ी माँ हम सब उसपर थे ये देखिये ये लगा रहे थे आवर नैना ने अपनी हाँथ माया के सामने कर दिया जो नैना के हाँथ मैं मेहदी लगी थी बड़ी माँ भैया को क्या हुवा है मैं कब से उनेह पुकार कर बोलै रही थी मगर भैया ने मुझे देखा भी नहीं आवर वह घर के बहार चले गए क्या कारन भैया मुझसे नाराज़ है नैना ने मासूम सी सूरत बना कर माया से पूछा

माया : ये क्या बोल रही है कारन भला तुझसे भी कभी नाराज़ हो सकता है क्या वह बहार कदम से गया है उसे मैंने hi भेजा है आवर जल्दी बाज़ी मैं कारन ने तेरी आवाज़ नहीं सुना होगा ला देखें तो मेरी गुड़िया ने कैसी मेहदी लगाई है

नैना : बड़ी माँ मैं अभी आप को नहीं देखूंगी पहले मैं भैया को देखूंगी फिर आप को आवर नैना उठ कर चली गयी नैना के जाने के बाद माया फिर से बीएड पर गिर गयी आवर अपनी चूंकि सहलाने लगी आआआहहह मेरी बोब्ब्स हहहहह मम्मा बहुत जल रहा है माया बीएड पर कहर रही थी माया की चूंकि बहुत दर्द कर रहा था

माया भाभी क्या हुवा आप ठीक तो है जब सुनीता बाथरूम से निकली तो माया को कहरते हुवे सुन कर कहा सुनीता की आवाज़ सुन कर माया जल्दी मैं अपनी बलाउज की बटन लगाने लगी जो सुनीता ने देख लिया है मैं ठीक हूँ सुनीता बस थोड़ी आराम कर रही हुईं माया ने सरे बटन लगा लिया

सुनीता : भाभी नहीं मुझे देखिये आप झूट बोल रही है मुझे पता है आप को दर्द हो रहा है जो आप कहर रही थी सुनीता कहते हुवे माया की बटन खोलने लगी माया सुनीता को रोक रही थी मगर सुनीता ने सरे hi बटन खोल दिया आवर माया की चूंकि देखा कर उसके मुंह से है राम निकल गया क्यू के माया की चूंकि पर बहुत सरे दन्त के निशान थे आवर कही कही पर खून का भी असर लग रहा था जो कारन ने कटा था भाभी ये कारन ने किया है न आप ने उसे रोका क्यू नहीं कितने ब्राह्मी से कटा है कारन ने माया भाभी दर्द जयादा तो नहीं हो रहा है न सुनीता माया की चूंकि पर मुंह से फूंकते हुवे कहा

माया : है सुनीता मैं ठीक हुईं कारन ने जान बुझ कर नहीं कटा आवर जब कारन काट रहा था मुझे दर्द आवर मज़ा दोनों मिल रही थी तो मुझे मैं कारन को रुक नहीं पाया रही थी अअअअअ मगर अभी सुनीता मेरी ये थोड़ी दर्द कर रही है ऊपर से गुड़िया भी आकर चूसने लगी आआअह्ह्ह्हह सुनीता सच कहो तो मुझे आज बहुत ख़ुशी हो रही है कस मेरी इसमें दूध होता तो मैं आज अपने कारन को सारा दूध पीला देती सुनीता आज सच मैं बहुत बहुत खुश हुईं मेरी ख़ुशी के आगे ये दर्द कुछ भी नहीं है

सुनीता : है भाभी मैं जानती हुईं आप कारन को अपना दूध पिलाना चाहती थी मगर इस वकत भी आप के दूध नहीं होते थे ये बात मुझे छोटी भाभी ने बता था ठीक है भाभी मैं अभी आप की मालिश कर देती हुईं

माया : नहीं तू रहने दे मैं लगा लुंगी जा तू देख शादी की तयारी मैं रूपा की मदद कर दे मैं भी कुछ देर मैं आती हुईं

कारन घर से निकल कर एक झोपड़ी में बैठा उसे झोपड़ी मैं एक बुद्धा ने छोटा सा दोकान किया हुवा था वह कुछ जयादा hi बुद्धा था आदमी तो कारन ने उससे एक सिगरेट माँगा तो वह बुद्धा अपने चश्मा थोड़ी उठा कर कारन को देखा फिर कारन को सिगरेट दे दिया कारन सिगरेट का पैसा दे कर झोपड़ी से आगे खेतों के तरफ निकल गया आवर एक जगह बैठ कर सिगरेट जला कर पिने लगा मैं आएसा जैसे कर सकता हुईं अपनी बड़ी माँ आवर बुवा के साथ क्या मुझे हो क्या गया था मेरे साथ ये हो क्या रहा है मैं जब भी किसी के जिसम को देख रहा हुईं मैं उसके hi खो जा रहा हुईं मैं कही पागल तो नहीं हो गया मुझे बस हर वकत एक बड़ा सा हो रहा है आज तो मैं बड़ी माँ के जिसम को काट भी दिया है कारन सिगरेट पिटे हो बोलते जा रहा था

अरे यार सुबह सुबह hi उन तीनो को देख कर मेरा तो दिन बन गया क्या सरीर था वैसे तो हम रूपा चची के जिसम को रोज hi देखते है मगर सुनीता चची आवर माया बुवा का क्या जिसम था यार आवर तुझे पता मैंने तो माया बुवा की गांड भी दबा दिया था सुबह मैं उनकी पेअर छूने के बाद साला माया बुवा की गांड आआ हहहहहह नरम आवर सॉफ्ट था यार कस फिर मक्का मिल जाये उनकी भरी भरकम गांड को दबाने का तीन लड़के वही कारन के कुछ आगे बैठ कर बातें करने लगे वह लड़कों ने कारन को नहीं देखा था क्यू कारन अपना सर निचे किया हुवा बैठा था वह लड़के बात करते हुवे कारन से आगे निकल गए कारन तो पहले उनके बातों पर धयान नहीं दिया मगर जब अपनी बड़ी माँ का नाम सुना तो कारन का पारा गरम हो गया कारन उठ कर जो लड़का बोल रहा था उसका गाला पकड़े लिया जब कारन ने एक लड़का का गाला पकड़ा तो बाकि दो लड़कों ने कारन को पकड़ लिया आवर कारन के हाँथ को हटाने लगे तूने मेरी माँ को गली कैसे दी मदर छोड़ मैं तुझे जान से मार दूंगा आआ तुझे मज़ा आया था मेरी माँ के जिसम को छोड़ा के इसी हाँथ से तूने मेरी माँ को छोवा है न मैं तेरा ये हाँथ hi उखड़े दूंगा कारन ने उस लड़के के गाला छोड़े कर उसके हाँथ को पकड़े लिया वह दोनों लड़के कारन को लड़के से दूर कर रहे थे आवर कारन को मार भी रहे थे मगर कारन उस लड़के को हाँथ पकड़ कर उसे मरते hi जा रहा था जब दोनों लड़के कारन से लड़के को नहीं छोड़ा पाए तो एक ने पाथेर उठा कर कारन के सर पर मार दिया अचानक सर पर लगाने से कारन के हाँथ से लड़का छोट गया लड़का छुट्टे hi बिना कारन को देखे वह से भाग गया आवर उसके पीछे दोनों लड़के भी भाग गए सेल कुत्ते तुम सब को जान से मार दूंगा अगर मेरी माँ बुवा के बारे मैं गन्दा बोलै तो वह भाग रहे थे आवर कारन बोलते जा रहा था कारन फिर वही बैठ कर सोचने लगा
 
अपडेट _ 67

इधर घर पर माया परेशां थी के कारन अभी तक घर क्यू नहीं आया सूरज भी डूबने वाला है आवर कारन अभी भी घर नहीं आया जब कारन नहीं आया तो माया खुद घर से निकल गयी कारन को ढूंढते हुवे गाँव मैं माया जा रही थी तभी माया को लड़का दिखा वह लड़का अपने घर के बहार खड़ा था जब माया को अपने तरफ आते दिखा तो वह अपने घर मैं जाने लगा तब तक माया उसके पास पहुँच गयी थी अरे मोहन बीटा कही तूने मेरा कारन बीटा को देखा है पता नहीं सुबह से hi कहा चला गया जो अभी तक घर पे नहीं आया माया ने लड़के से पूछा

लड़का : नहीं माया बुवा मैंने तो आप के बेटे को नहीं देखा मैं तो घर पे अभी कुछ देर पहले आया हुईं मैं सुबह hi सहर चला गया था मुझे नहीं पता आप का बीटा कहा है लड़का माया को ठीक से देखा भी नहीं वह घर के अंदर से जवाब दिया आवर अपना दरवाजा बंद कर दिया इसे क्या हुवा सुबह तो मुझसे सात के बात कर रहा था आवर अभी मुझे देख कर hi घर मैं जाने लगा है माया ने सोचा आवर ठीक है बीटा कह के आगे निकल गयी

माया गाँव मैं हर तरफ कारन को देख रही थी आवर हर कोई से कारन को पूछ रही थी मगर कोई माया को बोल रहा था मैंने कारन को नहीं देखा माया अब उधास हो गयी थी माया का दिल घबराने लगा कारन कहा चला गया है कारन कही मेरे वजह से शर्मिदा तो नहीं है न कारन बीटा कहा है तू आजा बीटा मैं तुझसे गुस्सा नहीं हुईं देख मेरा दिल बहुत घंटा रही है माया सोचते हुवे चलती जा रही थी अरे माया तू कहा जा रही है आवर किस सोच मैं है जो मैं तुझे कब से बोल कर आवाज़ दे रहा हुईं मगर तू है के अपने hi धुन मैं बस चली जा रही है एक आदमी ने माया से कहा तब hi माया होश आया आवर माया वही रुक गयी

माया : अरे संभु काका आप हो काका नमस्ते कैसे हो संभु काका ठीक तो है न आप आवर आप का दोकान अच्छा तो चल रहा है न माया काका से बात तो कर रही थी मगर माया की नज़र हर तरफ कारन को hi देख रही थी जो काका को अजीब लगा के माया अभी किसे धुंध रही है

काका : है माया बेटी दोकान तो ठीक चल रही है आवर मैं भी ठीक हुईं बस ये घुटनो मैं कभी कभी दर्द होने लगता है वैसे माया बेटी तू धुंध किसे रही तू मुझे परेशां भी लग रही क्या बात है माया बेटी तू मुझे बता सकती है तुझे क्या परेशानी है शायद मैं तेरी मदद कर सकूँ

माया : काका कोई परेशानी नहीं है मैं बस अपने बेटे को धुंध रही थी पता नहीं कहा चला गया है वह यह पहली आया है तो कही भूल कर कही आवर न चला जाये बस इस लिए मैं उसे ढूंढते हुवे आ रही हुईं आप तो जानते है काका एक वही तो है जिसके लिए हाँ सब उसे देख देख कर खुश रहते है

काका : माया बेटी मैं समझा सकता हुईं बेटी तेरी दर्द को तुमने बहुत hi दुःख सहा है तेरी जैसी दुःख भवन किसी दुश्मन को भी न दे माया बेटी सुबह शायद 10 से 11 बजे के करीब एक लड़का मेरे दोकान पे आया था जो बुलु कलर का सरत पहनता था वह मेरे hi दोकान से एक सामान लेकर उधर खेत की तरफ गया है काका ने माया को नहीं बताया के उसने मेरे दोकान से सिगरेट भी लिया है

माया : है काका वही है मेरा कारन बीटा ठीक है काका मैं जाकर कारन को उधर देख लेती हुईं सुक्रिया काका माया कह कर खेतों की तरफ भागने लगी माया जल्दी जल्दी चल रही थी अब रात भी होने वाली थी ठीक से दिखाई भी नहीं दे रहा था माया खेतों के ारी पर चल रही थी आवर कारन कारन चिल्ला रही थी इधर कारन सोच मैं hi घूम था तभी उसे अपनी बड़ी माँ की चिकने की आवाज़ सुनाई दिया कारन को तब कारन को होश आया कारन जल्दी से उठ खड़ा हुवा आवर अपनी बड़ी माँ की तरफ चल दिए बड़ी माँ मैं यह गुनी कारन ने भी चिल्ला कर कहा तब तक माया उसके पास hi आ गयी

माया : क्या हुवा मेरे बच्चे को तू यह क्या कर रहा है मैं कब से तुझे धुंध रही हुईं माया कारन को अपने बहन मैं भर कर कहने लगी आवर कारन को चूमने लगी माया की धड़कन बहुत तेज़्ज़ चल रही थी जो कारन को साफ़ पता चल रहा था गले लगने से कारन को फिर माया की जिसम का नशा होने लगा तो कारन माया से अलग हो गया

कारन : बड़ी माँ मैं ठीक हुईं मैं बस यह पे थोड़ी देर बैठा था पता hi नहीं चला कब आँख लग गया आवर इतनी रात कब हो गया मुझे पता भी नहीं चला कारन ने माया से कहा आवर चलने लगा माया को अच्छा नहीं लगा के कारन ने उसे अपने से अलग किया अभी मगर माया ने कुछ कहा नहीं कारन का हाँथ पकड़ कर उसके साथ चलने लगी घर पर सुनीता आवर रूपा भी कुछ परेशां थी क्यू के माया को जाते सुनीता ने देखा था जाते हुवे जो सुनीता भी माया के पीछे जाने वाली थी मगर जा न सकीय क्यू रूपा ने सुनीता को रोक लिया क्यू के रूपा जानती थी दोनों को न देख कर नैना भी परेशां हो जाएगी इस लिए रूपा ने सुनीता को जाने नहीं दिया माया के पीछे

सुनीता बार बार घर के बहार hi देख रही थी सुनीता भी परेशां थी के कारन कहा चला गया है बुवा बड़ी माँ आवर भाई कही गए है क्या मैं कब से बड़ी माँ आवर भाई को धुंध रही हुईं काजल ने सुनीता से पूछा जो सुनीता ने काजल की बात का कोई जवाब दिए सिर्फ बहार देख रही थी कहा हो भाभी प्लीज जल्दी से कारन को लेकर आ जाइये भाभी सुनीता देख रही थी आवर सोच रही थी बुवा आप बार बार बहार क्यू देख रही है बड़ी माँ आवर भाई कहा गए है आप को पता है इस बार काजल ने थोड़ी ज़ोर से कहा जो अपनी बुवा सुनीता से कहा तब सुनीता काजल को देखा है

सुनीता : है काजल बेटी माया भाभी आवर कारन खेत पर गए है कारन का मन नहीं लग रहा था तो माया भाभी उसे खेत देखा इ ले गयी है उनके गए हुए कभी वक़्त हो गया है इस लिए मैं बहार देख रही हुईं अब तक वह लोग आये क्यू नहीं चलिए हाँ भी देख कर आते है बड़ी माँ आवर भाई कहा रह गए है काजल सुनीता का हाँथ पकड़ कर गिच्ने लगी जाने के लिए काजल

तभी घर के बहार कारन आवर माया को आते देखा सुनीता ने तब सुनीता ने चैन की शंश लिया काजल बेटी देख वह आ रही है माया भाभी कारन के साथ सुनीता के कहने पर काजल ने सुनीता का हाँथ छोड़े कर कारन की तरफ भागी

काजल : बड़ी माँ कहा चली गयी थी इसे लेकर मैं कब से धुंध रही थी आवर माया के जवाब सुने hi काजल कारन का हाँथ पकड़ कर चलने लगी कारन भी काजल के साथ hi चलने लगा काजल सीधे कारन को अपने रूम मैं ले गयी आवर कारन को बीएड पर बैठा दिया

काजल : कारन कहा गया था दिन भर तू मैं कब से तुझे देखा इ के लिए मरी जा रही थी देख अच्छी लग रही है की नहीं मेरी मेहंदी आवर काजल अपना हाँथ कारन के सामने कर दिया काजल शर्मा भी रही थी

मगर कारन काजल के हाँथ को नहीं देख रहा था कारन अभी भी अपनी बड़ी माँ के बारे मैं hi सोच रहा था भाई क्या हुवा तुझे अच्छा नहीं लगा मेरी मेहंदी तो मैं मिटा देती हुईं काजल ने जब देखा के कारन कुछ नहीं बोल रहा है तो मायूसी से कहा नहीं काजल दीदी ये मेहंदी आप पर बहुत अच्छा लग रहा है मैं बस सोच रहा था के मेरी काजल दीदी कल कितनी हॉट आवर सेक्सी लगेंगी इस मेहंदी के साथ कारन जल्दी बाज़ी मैं बोल दिया जिसे सुन काजल शर्मा कर रूम से भाग गयी काजल को शर्मा कर जाते देख के कारन को अहसास हुवा के उसने अभी क्या बोल दिया अपनी दीदी को मगर इस बार कारन भी मुस्कुरा दिया

इधर रूम से निकल कर काजल बहुत खुश थी वह हस्ती हुयी नाच रही थी क्यू के काजल ने मेहंदी को सिर्फ कारन को देखने के लिए hi लगायी थी जो कारन ने मेहंदी देख कर आज पहली बार हॉट आवर सेक्सी कहा था जो काजल का दिल ख़ुशी से मचल रहा था

कोमल देख आज कितनी खुश लग रही है न काजल दीदी जो चलते हुवे भी नाच रही है लगता है इस गाओं मैं कोई मिल गया है काजल दीदी को मुस्कान ने कमल से कहा कोमल तो काजल को देख कर हैश रही थी आवर मुस्कान को कुछ कहा नहीं मगर नैना बिच मैं बोल hi पड़ी

नैना : आप ठीक कह रही है मुस्कान भाभी काजल दीदी आज बहुत खुश लग रही है इतना खुश मैंने कभी नहीं देखा काजल दीदी को मैं भगवन से प्रार्थना करती हुईं मेरी काजल दीदी बस आयी hi हस्ती रहे नैना बोल कर काजल की तरफ चली गयी मुस्कान को शरमाते छोड़े कर क्यू के नैना ने मुस्कान को भाभी कह गयी थी जो मुस्कान ख़ुशी के साथ शर्मा गयी थी

चल जयादा मत शर्मा अभी तेरी शादी नहीं हुयी है मेरे कारन से जो इतना शर्मा रही है कोमल ने मज़ा लेते हुवे मुस्कान से कहा जो मुस्कान आवर भी जयादा शर्मा गयी कोमल दीदी इतना कह के मुस्कान कोमल के गले लग गयी कोमल भी हस्ते हुवे मुस्कान को गले लगा लिया
 
अपडेट _ 68

नैना तब तक काजल के पास hi पहुँच गयी दीदी क्या बात है आप आज बहुत hi खुश लग रही है नैना भी मुस्कुरा कर काजल से कहा नैना की बात सुन के काजल को फिर से कारन की बात याद आ गयी जो काजल के चेहरे पर मुस्कान के साथ शर्मा गयी ओह ओह दीदी आज आप तो बहुत hi जयादा शर्मा रही है कही आप को यह कोई लड़का पसंद तो नहीं आ गया न नैना ने फिर से काजल से कहा

काजल : गुड़िया चुप कर कुछ भी बोलती है चल कुछ भी नहीं हुवा है मैं बस कुछ सोच कर मुस्कुरा रही थी तू भी न कुछ भी बोलती रहती है मेरी नटखट गुड़िया चल हैट आगे से मुझे नहाने जाना है काजल नैना के सर पर प्यार से मार कर काजल वह से चली गयी नैना बस अपनी काजल दीदी को जाते देख कर हसने लगी

गुड़िया क्या कहा काजल दीदी ने तुझसे जो तू है रही है कोमल ने नैना से आकर पूछा नैना को मुस्कुराते देखा तो

नैना : इस लिए तो कोमल दी मुझे हसी आ रही है दीदी ने कुछ कहा hi नहीं बस शर्मा कर चली गयी मगर दीदी कुछ तो बात ज़रूर है जो काजल दीदी ने मुझे नहीं बताया मैं काजल दीदी से जान कर hi रहूंगी के काजल दीदी है क्यू रही नैना भी इतना बोल कर चली गयी जो कोमल को भी कुछ समझ मैं नहीं आया के नैना ने क्या कहा गुड़िया भी न कब क्या बोलती है मुझे कुछ समझ मैं नहीं अत है कोमल ने अजीब मुंह बना कर कहा

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शीतल धरमपुर पहुँच गयी थी शीतल को धर्मपुर गाँव मैं अच्छा लग रहा था क्यू हर तरफ खेतों मैं हरियाली थी शीतल थक भी गयी थी तो शीतल एक पड़े के निचे जाकर बैठ उस पड़े से आती ठंडी हवा से शीतल को कब निनाद लग गयी पता भी नहीं चला एक बूढी औरत की आवाज़ सुन कर शीतल झट से उठ गयी बेटी तुम कौन हो आवर यह पर क्या कर रही हो बूढी औरत ने पूछा शीतल से जब शीतल की पूरी तरह उठ गयी तो शीतल की नज़रे औरत पर पड़ी जो औरत जयादा बूढी तो नहीं थी वह करीब 50से55 सल्ल की होगी शीतल को लगा

शीतल : वह आंटी मैं यह खेतों पे कुछ सर्च करने इस गाँव मैं आई थी आते वक़्त थोड़ी थक गयी तो सोचा एहि पर थोड़ी आराम कर लेती हुईं जो ठंडी हवा के कारन मेरी आँखें लग गयी वैसे आंटी क्या मुझे यह पे कोई रूम मिल सकता है दो तीन दिन के लिए रहने को

औरत: बेटी ये गाँव है कोई सहर नहीं जो एक दो दिन के लिए रूम मिल जाये आवर तुमेह रहने के लिए रूम भी चाहिए तो तुम मेरे साथ रह सकती हो मेरे घर पर अगर तुम चाहो तो शीतल को औरत की बात सही लगी शीतल को बस एक रहने का ठिकाना चाहिए था एक से दो दिन के लिए शीतल उस औरत के साथ जाने के लिए तैयार हो गयी शीतल औरत के साथ गाड़ी मैं बैठ कर उसके साथ चल पड़ी क्यू के औरत के पास अपनी गाड़ी थी गाड़ी जाकर एक हवेली के सामने जा कर रुकी शीतल उस बंगले को देख कर दर गयी क्यू के ये वही हवेली था जिसके लिए शीतल आई थी शीतल को गाड़ी मैं से निकलने मैं भी दर लग रहा था बेटी आ जाओ हाँ आ गए है औरत ने कहा शीतल से शीतल डर्टी हुयी गाड़ी से निकली अभी हवेली मैं शीतल को कोई दुःख नहीं रहा था बस एक दो नौकर hi दिख रहे थे जो शीतल को हरण भी हो रही थी क्यू के उसके साथियो ने कहा था के हवेली मैं चरों तरफ से आदमी पहरा दे रहे थे गन के साथ शीतल सोचते हुवे चल रही थी अच्छा बेटी तुम्हारा नाम क्या है औरत ने शीतल से पूछा

शीतल : आंटी मेरा नाम शीतल है

औरत : अच्छा नाम है तुम्हारी बेटी गंगा शीतल बेटी को मेरे बगल वाला रूम दिखा दे मैं ज़रा ऊपर से आती हुईं बोल कर औरत चली गयी

गंगा ने शीतल को औरत के बगल वाला रूम मैं ले गयी में एहि रूम है आप फ्रेश हो लीजिये तब तक मैं खाना लगा देती आप दोनों के लिए गंगा यह आवर कोई नहीं रहता क्या मेरा मतलब आंटी के बीटा या बेटी या उनके पति कोई दुःख नहीं रहा मुझे

गंगा : मेडम मुझे जयादा तो नहीं पता मगर मालकिन के दो बेटियां है जो दोनों की शादी हो गयी है एक बेटी को तो मैंने देखा है जो मालकिन की बड़ी बेटी है जो वह आती रहती है मगर मालकिन की छोटी बेटी को मैंने नहीं देखा है अभी तक क्यू के वह यह आती hi नहीं है ठीक है मेडम चलती हुईं नहीं तो मालकिन गुस्सा हो जाएँगी गंगा बोल कर चली गयी क्या ये मालकिन है इस हवेली की तो फिर वह कौन लोग है जो इस हवेली की देखभाल कर रहे थे आज तो कोई पहरा भी नहीं दे रहा है कोई शीतल फिर फ्रेश होने चली गयी फ्रेश होकर शीतल रूम मैं hi थी के शीतल को गंगा ने आवाज़ दिया खाना खाने को तो शीतल खाना खाने चली गयी जो वह पर औरत पहले से बैठी शीतल का इंतज़ार कर रही थी आओ बेटी मैं तुम्हारा hi इंतज़ार कर रही थी शीतल को देख कर औरत ने कहा तो शीतल भी कुर्सी पर बैठ कर खाना खाने लगी आंटी आप यह पर अकेली रहती है क्या मेरा मतलब आप के बीटा या बेटी साथ नहीं रहते है शीतल ने फिर से औरत से पूछ लिया शीतल की बात को सुन कर औरत के चहरे पर उदासी आ गयी

औरत : बेटी खाना खा कर आराम करो तुम थक गयी होगी बोल कर औरत उठ कर चली गयी आंटी सॉरी अगर मेरी बात से आप को दुःख हुवा तो मुझे मांग कर दीजिये मैं बस यही पूछ लिया प्लीज मुझे मनाफ़ कर दीजिये शीतल के कहने पर औरत बैठ कर खाना खाने लगी फिर शीतल ने कुछ नहीं पूछा शीतल खाना खा कर उठ कर रूम मैं चली गयी

नेक्स्ट मॉर्निंग

सुबह मैं शीतल जब उठी तो खिड़की से देखा तो औरत गार्डन मैं टहल रही थी शीतल भी फ्रेश होकर गर्दन की तरफ चली गयी गुड मॉर्निंग आंटी शीतल ने औरत से कहा आवर औरत के साथ hi टहलने लगी गुड मॉर्निंग बेटी कैसी निनाद आई तुमेह औरत ने प्यार से पूछा शीतल से औरत एक टेबल पर बैठ गयी

शीतल : सॉरी आंटी अगर रात को मेरी बात से आप की दिल दुख हो तो मैंने आप की दिल दुखने के लिए नहीं पूछा था शीतल ने फिर से बात को छेद दिया क्यू के शीतल को जानना था आखिर वजह क्या है जो इनकी एक बेटी यह नहीं आती है आवर वही रागनी तो नहीं है जिसके लिए शीतल यह पर पता करने आई है

औरत : बेटी मुझे तुम्हारी बात बुरी नहीं लगी अब मेरी किस्मत hi ाएसि है तो इसमें कोई क्या कर सकता है अब देख लो इतनी बड़ी जायदाद है जो कई पुस्ते बैठ कर खा सकती है इतनी जायदाद है अभी देखो मेरी फूटी किस्मत जो मेरी छोटी बेटी hi पता नहीं कहा पे चली गयी है उसे मैंने कहा कहा पे नहीं ढूंढा मगर मेरी बेटी आज तक मुझे नहीं मिली पता नहीं कहा चली गयी है मुझे हर वक़्त बस उसकी hi चिंता लगी रहती है कहा आवर किस हल मैं होगी मेरी बच्ची बोल कर औरत रोने लगी उसके आँखों से आंसू रुक hi नहीं रहे थे

शीतल : आंटी क्या हुवा था जो आप की बेटी घर से चली गयी जो अब तक घर नहीं आई अगर आप चाहे तो मुझे बता सकती है नहीं तो कोई बात नहीं है औरत को रट देख कर शीतल की भी आँखें नाम हो गयी थी

औरत : मेरी छोटी बेटी का नाम रागनी है रागनी जब पैदा हुयी तो हम बहुत खुश थे क्यू के इस परिवार मैं दूसरी लड़की ने जनम लिया था रागनी बहुत hi सूंदर थी उसकी मुस्कान को देख कर मेरे दिल को बहुत सकूँ मिलता था जब रागनी 6से7 सल्ल की हुयी तो वह रात रात रट हुवे उठ जाती थी आवर बोलने लगाती थी मेरे बच्चो को मत मारो रागनी की बात सुन कर हमेह बहुत हैरानी होती थी के इतनी छोटी बच्ची क्या बोल रही है इसी तरह रागनी बड़ी होती गयी आवर एक दिन रागनी के लिए एक रिश्ता आया तो मैंने है बोल दिया मगर रागनी शादी नहीं करना चाहती थी वह बस बोलती थी माँ मेरी शादी पहले से hi गयी है आवर मेरे बीटा बेटी भी है फिर मैं आवर मेरी बड़ी बेटी ने रागनी को बहुत समझाया हाँ दोनों ने मरने की धमकी दी तब जाकर मेरी रागनी बेटी शादी के लिए मान गयी आवर शादी के 1 सल्ल बाद पता चला के मेरी रागनी कही चली गयी है पता नहीं उसके साथ वह क्या हुवा था मुझे नहीं पता मैं पहले अपनी बेटी को धुंध लूँ तब hi पता चलेगा मेरी बेटी के साथ क्या हुवा था तब से मैं उसे हर जगह ढूंढती रहती हुईं

शीतल : आंटी क्या आप को बेटी की कोई तस्वीर है तो मुझे दे दीजिये मैं सहर मैं रहती हुईं तो सायद कभी मुझे दिख जाएँगी आप की बेटी तो मैं उनेह पहचान जाउंगी तो आप को बता दूंगी है बेटी रागनी की तस्वीर है रुको मैं अभी लती हुईं आंटी उठ कर चली गयी कुछ देर के बाद hi आंटी तस्वीर ला कर दे दिया शीतल को जिसे देख कर शीतल को पसीने आने लगी
 
अपडेट 69

शीतल को अब पूरा यकीन हो गया था के वह औरत इस आंटी की बेटी रागनी hi है आवर कुछ तो हुवा है जो रागनी अपने hi ससुराल से भाग गयी है शीतल अब आवर यह नहीं रुकना चाहती थी आंटी क्या आप ने पता किया आखिर वह पे हुवा क्या था आप की बेटी के साथ शीतल फिर से आंटी से पूछा कुछ तो हुवा है जो आप की बेटी वह से कही चली गयी है जो आप को भी नहीं बताया कुछ भी

औरत : बेटी मैंने कई बार पूछा अपने दामाद से मगर वह बस बोल रहा है की मेरी बाटी अचानक hi घर से भाग गयी मेरा दामाद भी तब से रागनी बेटी को धुंध रहा है मैं तो भगवन से ये डोवा करती हुईं मेरी रागिनी बेटी मुझे मिल जाये फिर वह जैसा कहेगी मैं वही करुँगी वह बोलती थी उसके बच्चे है जो मेरी रागनी बेटी सच hi कह रही थी मुझे उसकी बात पर यकीं करना चाहिए था उसकी बात मान लेती तो आज मेरी बेटी मेरे पास होती आंटी ने अपने ांसो पूछते हुवे कहा

शीतल : क्या मतलब मान लेती तो मैं कुछ समझी नहीं क्या सच कह रही थी आप की बेटी आंटी कुछ आवर जो आप मुझे बताना नहीं चाहती है शीतल को लगा कुछ बात आंटी छिपा रही है मुझसे तब शीतल फिर पूछा आंटी से

औरत : बेटी कुछ दिन पहले hi मैं एक बाबा के पास गयी थी रागनी की कुंडली लेकर आवर रागिनी बेटी जो भी मुझे बाटे बताई थी सब बाबा को बताया आवर रागनी की कुंडली बाबा को दे दी बाबा जी रागनी की कुंडली को देख कर वह हैरानी से मुझे देखने लगे जो मुझे ठीक नहीं लगी फिर अचानक hi उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी मुझे भी अब हैरानी हुवी आवर चिंता भी के बाबा पहले तो मुझे हैरानी से देखा फिर मुस्कुरा भी रहे है बाबा क्या बात है क्या है मेरी बेटी के कुंडली मैं सब ठीक तो है न बाबा जी

बाबा : है बेटी तुम किस्मत वाली हो जो वह तुम्हारे घर मैं जनम ली है उसने जो भी तुमेह बताया है वह सब कुछ सच है तुम्हारी बेटी की ये दूसरा जनम है बरसो पहले तुम्हारी बेटी की जनम हुवा था उसके घर सिर्फ बेटी hi जनम ले रही थी जो किसी सराफ से जनम लेते hi मर जाती थी उसकी जो बड़ी बेटी थी उसकी कठिन तपस्या से तुम्हारी बेटी को एक लड़का आवर एक लड़की ने जनम लिया जो उसकी बड़ी बेटी बहुत hi बहादुर आवर निडर थी वह अपने छोटे भाई बहन से बहुत प्यार करती थी एक दिन सभी तुम्हारी बरी के आँखों के सामने एक डस्ट राजा ने मार दिया मगर तुमेह पता है वह बच्चे किसके आशीर्वाद से जनम लिए थे बोल कर बाबा जी मुझे फिर से के देखने लगे मैं भी जल्दी hi बोल पड़ी जिसके वजह से बाबा जी तब पता है बेटी ने बाबा जी ने क्या जवाब दिया उन्होंने ने बताया के वह लड़का आवर लड़की की जनम देवी माँ के सहस सी हुयी जो मेरी बरी की बड़ी बेटी ने hi देवी की बहुत कठिन तपस्या से देवी माँ की सेवा की थी इस लिए देवी माँ के वजह से hi उन सब की दुबारा जनम हुवा है आवर साथ मैं उनकी भी जो पहले जनम लेते hi लड़की मर गयी थी ये सब उन सब की तस्वीर है जो मेरी बेटी ने बनाई है आंटी ने आवर कुछ तस्वीर शीतल के सामने रख दी शीतल आंटी की बात सुन कर शीतल के मन मैं बहुत से सवाल आ रहे थे शीतल के मन मैं शीतल ने आवर कुछ नहीं पूछा आंटी से आवर शीतल उठ के आंटी के पास बैठ कर उनेह चुप होने को कहने लगी

**************************************** कारन भैया आ जाइये हम्हारी गाड़ी मैं नैना ने कारन से कहा शाम को सभी तैयार थे जाने के लिए लड़की पास के hi गाँव की थी तो शादी भी सहर के hi होटल मैं राखी गयी थी जो दोनों घर के लोग वह पर आ रहे थे कारन उस गाड़ी मैं जाना नहीं चाहता था क्यू उसमे माया भी थी जो कारन अपनी बड़ी माँ से नज़र नहीं मिला प् रहा था मगर नैना के बार बार कहने पर कारन को जाना hi पड़ा गाड़ी मैं गाड़ी काजल चलने वाली थी काजल के साथ आगे कोमल बैठी थी कारन नैना के पास गया तो देखा बिच मैं माया थी आवर नैना मुस्कान दोनों किनारे किनारे बैठी थी कारन अपनी बड़ी माँ के पास नहीं बैठना चाहता था तो कारन नैना को ठेलने लगा

नैना : भैया क्या कर रहे है मैं एहि गेट पर hi बैठूंगी आप अंदर आ जाइये नैना कुछ जयादा hi ज़ोर से बोल पड़ी जो माया ने सुन लिया

माया : कारन बीटा तू hi अंदर आजा माया ने कहा तो कारन नैना को सर पर मार कर गाड़ी मैं बैठ गया माया के बगल मैं अब दोनों तरफ नैना आवर मुस्कान बैठी थी नैना के बगल मैं कारन बैठ गया कारन के बगल मैं माया थी सब के बैठने के बाद काजल ने गाड़ी चला दी कारन माया की तरफ देख नहीं रहा था जो माया भी समझा रही थी के कारन अभी भी उससे शर्मिदा है जो माया को अच्छा नहीं लग रहा था कारन बीटा तो वह सब भूल जा मैं तुझपे गुस्सा नहीं हुईं माया ने धीरे से कारन के कारन मैं कहा माया के टाच होने पर माया की एक चूंकि कारन के जिस्म मैं टाच हो गयी जो कारन को फिर से नशा सा होने लगा कारन के जिस्म भी अब गर्म होने लगा ये मुझे फिर से क्या हो रहा है मैं फिर कुछ कर न दूँ बड़ी माँ के साथ माया के टाच से hi कारन का जिस्म गरम होने लगा कारन को पसीने भी आने लगे जो माया ने देख लिया कारन बीटा तू ठीक से तो बैठा है न बोल कर माया ने कारन को अपने तरफ खिंच ली अब कारन का सर माया के एक चूंकि पर था नैना आवर मुस्कान गेट पर बैठी थी तो वह दोने बहार की तरफ hi देख रही थी कारन बीटा क्या हुवा तुझे तेरा सर से इतना पसीना क्यू आ रहा है माया ने कारन का पसीना अपने आँचल से पूछ कर धीरे से पूछा मगर कारन ने कोई जवाब नहीं दिया अपनी बड़ी माँ को क्या करूँ मैं मुझे आवर नहीं रुका जा रहा है आवर बड़ी माँ भी मुझे मज़बूर कर रही है मुझे अपनी जिस्म से टाच कर के कारन मन मैं सोचा आवर कारन का हाँथ अपने आप hi माया के जांघों पर फेरने लगा जो माया की आआह्ह्ह्हह्ह निकल गयी मगर माया ने अपना अंचल अपने चेहरे पर रख लिया कारन माया के जांघों पर चला रहा था जो माया के छूट तक पहुँच रहा था माया की छूट भी अब गरम होने लगी थी माया अंचल अपने मुंह पर रख कर अपने चेहरे पर आई आए को छिपा रही थी बड़ी माँ मेरा वह बहुत दर्द कर रहा है कुछ कीजिये नहीं तो मैं मर जाऊंगा कारन माया से धीरे से कहा आवर माया के हाँथ को अपने पेंट के ऊपर रख दिया माया की धड़कन तीज चलने लगी क्यू कारन का लैंड सच मैं पंडित मैं लोहे की तरह टाइट था अब मैं क्या करूँ जिसे कारन को आराम मिले कारन का लैंड सच मैं खड़ा है आआआआ कारन माया अचानक चीख पड़ी जो काजल ने गाड़ी रोक दी सब माया की तरफ देखने लगी तब तक माया कारन का हाँथ अपने जिस्म से हटा दी थी कारन भी अपनी बड़ी माँ की अचानक आवाज़ सुन कर कारन भी ठीक से बैठ गया

नैना : बड़ी माँ क्या हुवा आप ने चीखा क्यू काजल आवर कमल भी माया को hi देख रही थी के क्या हुवा है बड़ी माँ को

माया : बेटी बहुत गर्मी हो रही है मुझे मैं गाड़ी के पीछे जा रही हुईं माया कह कर गाड़ी से उतर गयी बड़ी माँ मुझे भी निनाद आ रहा है मैं भी आप के साथ पीछे आ रहा हुईं बोल कर कारन भी उतर गया दोनों माँ बीटा गाड़ी के पीछे जाकर बैठ गए तब काजल ने फिर से गाड़ी आगे की तरफ चला दी
 
अपडेट _ 70

अब माया आवर कारन गाड़ी के पीछे थे गाड़ी चलते hi कारन माया के एक चूंकि को पकड़ कर मसलने लगा आआह्ह्ह्ह कारन बीटा मत कर अअअअअ मुझे दर्द हो रहा है माया सिसकते हुवे कारन से धीरे से कहा मगर कारन माया की पल्लू को निचे कर के माया की बलाउज की बटन खोलने लगा बड़ी माँ अअअअअ कुछ कीजिये नहीं तो मैं दर्द से मर जाऊंगा ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कारन अपने जींस की चैन को खोलते हुवे कहा आवर माया का हाँथ अपने लैंड पर रख दिया कारन का लैंड को अपने हाँथ मैं आते hi माया को एक अजीब आहःसा हुवा आवर माया शर्म के मरे सिसक पड़ी मगर कारन का तड़प देख कर माया कारन के लैंड को अपने नरम हांथो से हिलने उसे हिलने लगा आअह्ह्ह बड़ी माँ ाःह बड़ी माँ अच्छा लगा रहा है कारन बोल रहा था आवर माया की चूंकि को मसलते जा रहा था माया एक कारन का टाइट लैंड को हिला रही थी आवर ऊपर से कारन माया की चुकी को मसलते hi जा रहा था माया की छूट भी अब गीली होने लगी थी माया के होंठ भी अब सूखने लगे थे माया सिर्फ सिसक रही थी कारन का लैंड हिलाते हुवे माया अपने मुंह कारन के आगे कर दी आवर कारन के मुंह को देख माया कारन के होंठ पर होंठ रखने के लिए सोच रही थी के कारन ने hi माया के होंठ पर अपना होंठ रख दिया आवर माया के सूखे हुवे होंठ को अपने मुंह मैं लेकर उसे गिला करने लगा माया भी उठ कर अपनी बड़ी मसालेदार बड़ी गांड को कारन के लैंड पर रख दिया आवर कारन के सर को परदे कर कारन का होंठ को चूसने लगा अब दोनों माँ बीटा एक दूसरे के होंठ को चूस रहे थे जो दोनों hi जोश मैं थे इधर कारन का लैंड माया के छूट के सामने खड़ा था कारन किस करते हुवे hi माया को उठा कर माया की साड़ी को ऊपर उठा कर अपना लैंड पेंटी के ऊपर से hi माया की छूट पर धक्का मरने लगा आआअह्ह्ह्हह कारन बीटा यह पर कुछ मत कर हहहहह कारन मेरी साड़ी भी ख़राब हो जाएगी आह तेरा ये बड़ा है बीटा जयादा अंदर चला गया तो आआह्ह्हह्ह्ह्ह मुझे कभी दर्द भी होगा जो मैं ठीक से चल भी नहीं पाऊँगी ह्ह्हह्ह्ह्ह बीटा मत कर ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माया को लगा कारन उसके पेंटी मैं hi धक्के मरते हुवे झड़े गया तो माया की साड़ी के साथ उसकी हालत भी ख़राब हो जाएगी इस लिए माया कारन को रोक रही थी मगर कारन धक्का मरते hi जा रहा था माया ने पेंटी भी बहुत hi पतली पहनी थी जो कारन के धक्के मरने पर कारन का लैंड का टोपा भी बार बार अंदर से बहार आ रहा था पेंटी पतली थी तो लैंड भी माया की छूट मैं जा रहा था माया कारन को मन कर रही थी आवर कारन धक्के पे धक्का मरते hi जा रहा था माया की सिसकियाँ भी अब तेज़्ज़ होने लगी थी माया कारन के सर को अपने चूंकि मैं दबा रही थी कारन भी माया के कमर अपने दोनों हांथो से पकड़ लिया था माया को आवर खुद hi धक्के मर रहा था माया की छूट पर कारन बहुत तेज़ी से धक्का मरने लगा माया की छूट मैं आह्ह्ह्हह बीटा मममम हहहह सससससस बीटा रुक जा हहहहह मेरी छूट आआह्ह्ह्ह ममममम सससससस रुक जा कारन बीटा ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह माया कारन को रोक रही थी मगर कारन रुक hi नहीं रहा था फिर अचानक hi कारन ने माया को बहुत hi ज़ोर से पकड़ लिया मममममममआ कहते हुवे जो माया समझने गयी के कारन ने उसकी छूट तो बछड़े दिया मगर साड़ी को ख़राब कर दिया रहा माया को पता चल गया कारन मेरी साड़ी भी ख़राब कर देगा जो कारन झड़ते hi माया के चुकी पढ़ hi गिर गया माया भी कारन को अपने सीने से लगा ली कुछ देर उसी तरह रहने के बाद जब कारन को अहसास हुवा तो कारन ने अपना सर माया की चुकी पर से हटा लिया आवर अपना अभी भी टाइट खड़ा हुवा लैंड को जींस मैं दाल कर सीट पर ठीक से बैठ गया जो माया को हैरानी हुयी के कारन अभी hi तो झाड़ा है फिर भी उसका लैंड खड़ा hi है मगर माया ने खुश कहा नहीं माया अपनी साड़ी को ठीक करने लगी मगर कारन ने तो अपना सारा मॉल माया के पेंटी पर hi गिरा दिया था

माया : मैं तुझसे बोल रही थी यह मत कर देख तूने मेरी पेंटी भी ख़राब कर दिया आवर इतना गिराया है की उसी तरह पहनी तो मेरी पेंटी से बाह कर साड़ी भी ख़राब हो जाएगी ये पेंटी नहीं होती तो तू कारन आज मुझे चलने लायक भी नहीं छोटा आआआ कारन का लैंड भी तो कितना बड़ा है बस टोपा hi जा रहा था तो मुझे इतना दर्द हो रहा था जब ये लैंड मेरी छूट मैं जायेगा तो हहहह हहहहह मैं सोच के लगता है मेरी छूट ने पानी छोड़े दिया माया मन मैं सोच hi रही थी के माया भी झाड़ गयी कारन के लैंड को सोचते हुवे शांति देख तुझे जैसा लैंड चाहिए वह खुद तेरे बेटे कारन के पास है माया ने फिर से सोचा

कारन : बड़ी माँ मेरी क्या गलती है मैं इस लिए तो आप से दूर रह रहा था मैं जब आप के करीब आता हुईं तो मुझे आप की जिस्म की नशा होने लगता है मन करता है मैं बस आप को प्यार करूँ बोल कर कारन फिर माया की तरफ बढ़ने hi लगा तभी काजल ने गाड़ी रोक दी जो कारन पीछे हैट गया कारन आवर ठीक से बैठ गया माया भी जल्दी से अपनी पेंटी को निकल कर अपने बेग मैं रख ली जिसे देख कर कारन हसने लगा चुप कर बदमाश कही गुड़िया ने तेरा हसी सुन ली तो बिना जाने वह छोड़ेगी नहीं के तू हैश क्यू रहा है कारन बीटा चुप हो जा तू तो मेरा राजा बीटा है कारन चुप तो हो गया मगर माया को गाड़ी से उतारते देख कर मुस्कुरा रहा था माया भी एक बार कारन को देख कर मुस्कुरा दी फिर सभी उतर कर होटल की तरफ चल दिए

**************************************** आआआआ रागनी बेटी भाग जाओ तुम यह से वह यह hi आ रहा है अचानक hi सोते हुवे बाबा उठ कर बोलने लगे रागनी भी थोड़ी दूर सो रही थी बाबा की आवाज़ सुन कर रागनी की नींद खुल गयी आवर वह बाबा के पास भागी बाबा क्या हुवा कौन आ रहा बाबा बताये न क्या कोई बुरा सपना देखा है आप ने रागनी बाबा को पानी देते हुवे कहा

बाबा : नहीं बेटी ये कोई सपना नहीं है वह सच मैं यह आ रहा है तुमेह मैंने बताया था के कारन का जनम कैसे हुवा था आवर मेरा hi एक दोस्त इसमें बढ़ा बन रहा था के कारन का जनम न हो जब शांति मेरे पास आई तो मैंने उसकी बुरी सकती को नष्ट कर दिया तब कारन का जनम हुवा वही दुसट मेरा दोस्त फिर से आ रहा है वह कई वार्स से तपस्या कर रहा था उसकी सकती बहुत बढ़ गयी है उसे मैं अब नहीं रोक सकता हुईं उसे सूरत दो hi लोग रोक सकते है मगर अभी सिर्फ कारन hi उसे रोक सकता है इस लिए तुमेह जल्द hi कारन ये गीता से तुमेह मिलना होगा रागनी बेटी जल्दी करो जयादा वक़्त नहीं है

रागनी : बाबा ये आप क्या कह रहे है उसे आप नहीं रोक सकते तो अभी उसे कारन कैसे रोक सकता है आवर मैं अभी अपनी बेटी गौरी बेटी की सामना नहीं करना चाहती हुईं

बाबा : रागनी बेटी अब तुमेह गौरी की सामना करनी hi होगी आवर मेरी बात को धयान से सुन्ना ये थोड़ी कठिन है मगर ये सब करने के बाद hi कारन को सकती प्राप्त होगी कारन को अभी जितना जल्दी हो सके अपनी माँ बहन के साथ सम्भोग करना होगा वह चाहे तुम hi क्यू न हो आवर अगर कारन ने गीता के साथ सम्भोग कर लिया तो कारन के साथ गीता भी उतनी hi सकती शैली हो जाएगी जिआना कारन होगा ये सब कुछ hi दिन मैं करना होगा तुमेह बाबा ये कैसे हो सकता है कारन कैसे अपनी माँ बहन के साथ सम्भोग कर सकता है बाबा आवर भी कोई रास्ता होगा जिससे मेरे कारन को सकती प्राप्त हो जायेगा कोई तो होगा hi बाबा रागनी ने परेशां होते हुवे कहा है बाबा क्या मैं कारन की शादी मुस्कान से करा दूँ तो उसका सकती मिल जाएगी क्या रागनी बोल पड़ी रागनी को सुन कर hi उसका जिस्म हिल गया था के कारन को किसी के भी साथ सम्भोग करना hi पड़ेगा

बाबा : रागनी बेटी आवर कोई रास्ता नहीं है कारन आवर तुम सब की किस्मत मैं एहि लिखा है कारन को तुम सैम मैं hi किसी के साथ सम्भोग करेगा तभी उसको सकती मिलेगा ये hi उसे के किस्मत मैं है तुमेह ये किसी भी हालत मैं करना hi होगा अब तुम जितना जल्दी हो सके पहले अपनी बाटी गीता से मिल लो वह समझने जाएगी तुमेह देख कर शायद उसे कुछ याद आ जाये रागनी को आखिर बाबा की बात माननी hi पड़ी आवर उसी रात मैं रागनी सहर की तरफ निकल पड़ी अपनी बेटी गीता से मिलने के लिए
 
अपडेट _ 71

शीतल अभी गीता के सामने hi बैठी थी शीतल को अभी कुछ समझी मैं hi नहीं आ रहा था की वह गीता को कैसे बताया की वह आंटी आवर कोई नहीं वह तुम्हारी hi माँ है जो तुम्हारी तरह hi इनका भी दूसरा जनम हुवा है आवर सायद उनेह पता भी है तुम उसकी बेटी हो तभी तो वह यह आती है !

शीतल तू सोच क्या रही है मैं देख रही जब से तू आई है घूम सुन बैठी है बस बता मुझे की तुझे वह क्या पता चला है ये आंटी के बारे मैं गीता ने फ़ोन मैं रागनी की फोटो को देखते हुवे कहा !

शीतल : देख गीता सायद मेरी बात पे तुझे यकीन न हो मगर एहि सच है मैं वह गयी तो मुझे वह पे इस आंटी की माँ मिली थी जानती है उन्होंने क्या बताया मुझे ये फोटो वाली आंटी आवर कोई नहीं तेरी माँ है है !

शीतल बोल कर गीता को देखने लगी की गीता अब क्या बोलती है मगर गीता अब फ़ोन मैं रागनी की फोटो को एक तक बस देखे जा रही थी आवर कुछ याद करने की कोसिस कर रही थी मैं जानती थी आप मेरी माँ हो वह सपना झूट नहीं था जो मुझे बार बार आ रहा था आप की फोटो देख कर hi मेरा दिल बोल रहा था आप से मेरा कोई रिश्ता ज़रूर है इस लिए मुझे जानना था आप कौन हो माँ आप कहा हो पे अब मुझे सब कुछ याद आ रहा है है माँ मैं hi आप की बेटी गौरी हुईं माँ माँ गीता बस बोले जा रही थी गीता के आँखों से आंसू गिर रहे थे जैसे गीता कुछ देख रही हो अभी अपने आँखों के सामने गीता के आँखों से बहते हुवे आंसू को देख कर शीतल का दिल भी तड़प गया आवर शीतल अपनी जगह से उठ कर गीता को गले लगा लिया शीतल गीता के आँखों से बहती ांसो अपने टुप्पट से पोछने लगी मगर गीता की ांसो नहीं रुक रहे थे गीता चुप हो जा देख आंटी को कुछ नहीं हुवा है वह तुझसे मिलने ज़रूर आएँगी शीतल आज पहली बार गीता को इतना रट हुवे देख रही थी शीतल गीता को चुप भी करा रही थी !

शीतल तू नहीं जानती मैंने कितनी दर्द सहा था अपने भाई बहन के लिए आवर एक दिन मेरे आँखों के सामने वह नीच कमीने हवन ने मेरी बहन भाई माँ को बेदर्दी से जान से मर दिया आवर मैं बस देख रही थी उनेह मरते हुवे शीतल मुझे ज़रा सी भी जान होती तो मैं मरने नहीं देती आवर मेरी छोटी बहन तो अभी बच्ची थी उसे भी मार दिया गीता रट हुवे बस बोले जा रही थी फिर अचानक गीता को कुछ याद आया तो गीता चरों तरफ देखने लगी गीता क्या हुवा शीतल ने पूछा गीता को चरों तरफ देखते हुवे पाया तो !

गीता : शीतल मेरा फ़ोन कहा पे है मुझे अभी अपनी गुड़िया से बात करनी है शीतल कहा है मेरा फ़ोन गीता कुछ जयादा hi चिल्ला कर बोलने लगी जो गीता की आवाज़ रूम के बहार पायल आवर शांति ने भी सुन लिया आवर दोनों hi भागी गीता के रूम मैं आ गयी दीदी दीदी क्या हुवा पायल गीता को पागलों जैसी चिल्लाते हुवे देखा तो पायल ने गीता को पकड़े लिया तब तक शांति भी रूम मैं आ गयी आवर शांति ने गीता को अपने सीने से लगा ली क्या हुवा है मेरी बच्ची को शांति शीतल को गुस्से मैं देख कर कहा !

गीता : छोटी माँ मुझे गुड़िया से अभी बात करनी है मेरा फ़ोन कहा है फ़ोन दीजिये मुझे अभी गुड़िया से बात करनी है गीता बस बोले जा रही थी तब तक पायल ने जल्दी hi कारन को फ़ोन लगाडी छोटी माँ मुझे अभी गुड़िया से बात करनी है गीता रुक hi नहीं रही थी बस बोले hi जा रही थी है दीदी ये लो बात करो गुड़िया से पायल ने जल्दी से गीता को फ़ोन को दे कर कहा hello गुड़िया कहा है तू ठीक तो है न गुड़िया तुझे कुछ हुवा तो नहीं है न गुड़िया तू बोल क्यू नहीं रही है गुड़िया गीता फ़ोन लेकर बोलने लगी !

इधर फ़ोन काजल के पास था आवर अभी काजल गाड़ी चला रही थी उसे जैसे hi अपनी गीता दीदी रोने की आवाज़ आई काजल ने वही गाड़ी रोक दी फिर काजल को गीता को गुड़िया गुड़िया बोलते सुना तो वह फ़ोन नैना को दे दिया नैना को भी अपनी गीता दीदी को रट हुवे सुन कर नैना भी परेशां हो गयी !

नैना : दीदी मैं गुड़िया बोल रही हुईं क्या हुवा है आप को दीदी आप रो क्यू रही है बड़ी माँ देखिये न दीदी रो रही है क्या हुवा है मेरी दीदी को गीता दीदी क्या हुवा है नैना भी गीता को रट हुवे सुन कर रोने लगी तब काजल ने नैना से फ़ोन को छीन लिया यह सभी परेशां हो गए थे नैना को रट हुवे देख कर माया ने नैना को अपने सीने से लगा कर उसे चुप होने को बोलने लगी !

काजल : दीदी क्या हुवा आप रो क्यू रही है दीदी बोलिये न गीता दीदी क्या हुवा है जो आप बस रट जा रही है पहले आप रोना बंद कीजिये आप की रोने की आवाज़ सुन गुड़िया भी रो रही है आप फ़ोन माँ को दीजिये नहीं तो मैं फ़ोन को रख रही हुईं गीता गुड़िया गुड़िया hi बोले जा रही थी आवर कुछ बोल hi नहीं रही थी तो काजल बोल पड़ी !

काजल तुम सब अभी कहा हो पायल ने गीता से फ़ोन लेकर पूछा !

काजल : पायल दीदी क्या हुवा है गीता दीदी वह रो क्यू रही है आवर बस गुड़िया गुड़िया बोल रही है बोल दीजिये गुड़िया ठीक है आवर वह घर hi आ रही है हाँ बस 2 घंटे मैं पहुँचने hi वाले है !

पायल : ठीक है काजल तू गाड़ी जयादा तेज़ मत चलना गीता दीदी ठीक है गुड़िया जयादा तो नहीं रो रही है न तू बोल दे उसे गीता दीदी ठीक है वह बस अभी सायद सोते हुवे बुरा सपना देख ली है जो थोड़ी दर गयी है दीदी को कुछ नहीं हुवा है ! देख सुन लिया न गीता दीदी को कुछ नहीं हुवा है वह बस दर गयी है सोते हुवे कोई बुरा सपना देख कर काजल ने नैना से कहा आवर नैना ने भी सुन लिया था पायल की बात को फिर भी नैना रो hi रही थी माया भी परेशां थी मगर वह नैना आवर कोमल की वजह से चुप थी क्यू के कोमल के भी आँखें मैं ांसो आ गए थे !

छोटी माँ गुड़िया मुझसे बात क्यू नहीं कर रही है छोटी माँ अभी पायल से बोलिये न मुझे फ़ोन देने को अभी मुझे गुड़िया से बात करनी है गीता शांति से अलग होते हुवे कहा !

दीदी गुड़िया ठीक है वह घर hi आ रही है आप संत हो जाइये गुड़िया को कुछ नहीं हुवा है वह बड़ी माँ के साथ hi है पायल ने थोड़ी तेज़ आवाज़ मैं बोली गीता से तब गीता संत हुयी

शांति गीता को उसी तरह बीएड पर लेकर बैठ गयी आवर गीता के माथे को बार बार चूमने लगी क्या हुवा है मेरी बच्ची तुझे बता मुझे क्या कहा है इस लड़की ने जो तू इस तरह की हरकत कर रही है शांति के भी आँखों से आंसू निकल रहे थे तब तक पायल शीतल को लेकर गीता के रूम से निकल गयी थी

मैं जानती हुईं गीता दीदी आप के कुछ कहने से hi वह इतना रो रही है मेरी गीता दीदी बहुत बहादुर है आप ने उनेह क्या बताया नैना के बारे मैं जो मेरी दीदी की ऐसी हालत हो गयी है प्लीज मुझे बताई पायल ने शीतल के सामने अपना दोनों हाँथ जोड़े दी !

शीतल : पायल मैंने गीता से सिर्फ उसकी सच्चाई को बताया है आवर कुछ नहीं कुछ दिन पहले गीता ने एक आंटी की फोटो भेजी थी मुझे आवर उनके बारे मैं पता करने को कहा था तो मैं एक गाँव मैं गयी वह पे मुझे उस आंटी की माँ मिली फिर शीतल ने रागनी की माँ से हुयी साडी बातें पायल को भी बता दी ! तुम सभी भाई बहनो की ये दूसरा जनम है क्यू उस आंटी की माँ ने आंटी की कुंडली एक बाबा को देखा था आवर वही बाबा ने hi आंटी की माँ को साडी बातें बताई मैंने बस गीता को एहि बात कहा फिर गीता के आँखों से आंसू बहाने लगी फिर गीता फ़ोन ढूंढने लगी गुड़िया गुड़िया बोल कर !

शीतल बस बोले जा रही थी आवर शीतल की बाते सुन कर पायल का सर भी दर्द करने लगी जो पायल अपनी सर को बहुत hi ज़ोर से दबा रही तह अभी पायल की भी आँखों से आंसू बाह रहे थे पायल देखो तुम भी अपनी दीदी की तरह रोने लगेगी तो उसे कौन संभालेगा शीतल पायल को समझा रही थी तभी गेट पर किसी के पीटने की आवाज़ आई तो शीतल ने जाकर गेट खोला आवर एक औरत को देख शीतल के आँखों मैं अभी ख़ुशी के आंसू निकल गए आंटी आप शीतल के मुंह से बस इतना hi निकला
 
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