Jaisa bhi hai mera bhai hai (Completed) - Page 5 - SexBaba
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Jaisa bhi hai mera bhai hai (Completed)

अपडेट. 36

दीदी फिर आप चीखी क्यू आप कोई बोरा सपना तू नहीं देख लिया था आप ने कारन चिंतित होते हुवे कहा .. है भाई मैंने बोरा सपना hi देख लिया था गीता ने कारन आवर पायल को देखते हुवे कहा चोलो अब मैं ठीक हुईं .... अब गीता िनेह कैसे बताती के वह सपने मैं माता रानी को देखा अपनी आँखों के सामने.. तब तक सुबह भी हो गयी थी नरः भी गीता को अच्छे से देख कर चली गयी................... घर पे रागनी भी सुबह hi उठ गयी थी आवर वह शांति को देख रही थी आवर सोच भी रही थी ....... भगवन ने कैसा खेल खेला है मेरे साथ जो बच्चे सिर्फ मेरे थे आज वही बच्चे के 3 माँ है मगर मैं बहुत खुश हैं के मेरे बच्चे को इतनी पैर करने वाली माँ मिली है कास ये लोग मेरी हकीकत जान कर मुझे भी अपने परिवार मैं शामिल कर ले ..... रागनी अभी सोच hi रही थी तब तक शांति उठ कर बाथरूम मैं चली गयी ........... के सोच रही हो बहन शांति बाथरूम से निकल कर कहा

रागनी : नहीं कुछ भी नहीं आप कब उठी अभी तू आप सो रही थी ... रागनी को थोड़ी ार्चाये हुवा के शांति कब उठ कर बाथरूम जा कर आ भी गयी आवर मुझे पता भी नहीं चला

शांति : बहन मैं तू उठ कर बाथरूम से भी आ गयी पता नहीं तुम किस यादो मैं खोई हो ... ठीक है तुम बाथरूम हो कर आओ मैं कॉफ़ी बना देती हुईं ...... रागनी उठ कर बाथरूम चली गयी .... आवर शांति किचन मैं चली गयी कॉफ़ी बनाने के लिए ......... रागनी बाथरूम से आकर अपनी साड़ी अच्छे से पहन रही थी ...... तभी काजल माँ माँ कहती हुवे शांति के रूम आ गयी ..... आवाज़ सून कर रागनी जब पलटी तू काजल के खूब सूरत चेहरे को देख कर खो गयी .

काजल : रागनी के सामने छोटकी बजाते हुवे कहा आप कौन हो आवर मेरी माँ कमरे मैं के कर रही है ........ मगर रागनी बस काजल को hi देख रही थी आवर सोच रही थी कितनी पेयरी है मेरी बेटी ये मेरी माँ की तरह दिख रही है ....... hello कहा खो गयी आप मैं पूछ रही हुईं कौन हो आप आवर मेरी माँ के कमरे के कर रही है काजल थोड़ी चिल्ला कर कहा .......... काजल बेटी तू कैसी बाटे कर रही है मैंने तुझे एहि सिखाया है बड़े से ऐसे बाटे नहीं करते चलो सॉरी बोलो .... तब तक रागनी भी होश मैं आ गयी

काजल : सॉरी जो आप से ऐसी बात की

रागनी : कोई बात नहीं मैं कही खो गयी थी ......... फिर शांति ने रागनी को कॉफ़ी दी पिने को आवर चली गयी .... बाबा भी उठ गए थे तू शांति ने उनेह भी कॉफ़ी दी पिने को आवर नास्ता बनाने चली गयी ............ बाबा के बात है आप अचानक यह आ गए नास्ता करते हुवे माया ने कहा

बाबा : नहीं बेटी मैं एहि था तू पता चला गीता बेटी का एक्सीडेंट हुवा है तू देखने चला आया तुम तू जानती हो गीता मेरे साथ कितने दिन रही साथ मैं तू मैं गीता से एक रिस्ता बन गया है इस लिए देखने चला आया

शांति : है बाबा जी हमेह सब मालूम है गीता ने बताया था थी है बाबा जी नास्ता कर के चलते है हॉस्पिटल ........ रागनी बस नैना काजल आवर कोमल को hi देख रही थी आवर सैयद उसके के आँखों मैं ांसो भी आ रहा था मगर वह ांसो खोसी का था

शांति : बहन नास्ता करो न के सोच रही हो .... जब शांति ने देखा रागनी नास्ते करने के बजाये बस उसके के बेटियों को hi देख रही है

रागनी : हहहहह दीदी मैं कुछ नहीं सोच रही हुईं ...... आवर नास्ता करने लगी मगर कभी कभी उनेह देख भी रही थी .......... अरे बहन मैंने तुम से तुम्हारा नाम नहीं पूछ के नाम है तुम्हारा गाड़ी मैं बैठते हुवे शांति ने कहा


रागनी : रागनी नाम है दीदी मेरी ... है अच्छा नाम है .......... कोमल तू अपने मोबाइल मैं बिज़ी थी ..... मगर नैना बार बार रागनी को देख रही थी आवर सोच रही थी मुझे ऐसा क्यू लग रहा है मैंने कही देखा है िनेह महार पूछा नहीं उसने .......... काजल ड्राइव करते हुवे गाड़ी हॉस्पिटल की तरफ कर ते हुवे चल दी ....... माया आज घर पे hi रुक गयी माँ जी को देख भल करने के लिया

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इधर धर्म सहर मैं पहुँच गया था आवर वह अचानक ड्राइवर ने बारीक लगा दिया जो धर्म को झटका लगा

धरम : साला कैसे गाड़ी चला रहा है आवर तूने गाड़ी क्यू रुक दी गुस्से मैं ड्राइवर से कहा ....... मालिक वह बचा आगे आ गया था तू रुक दिया ड्राइवर ने डरते हुवे कहा

धरम : तू थोक देना था आगे से मेरी गाड़ी कभी मत रुकना नहीं तू मैं तेरी सांसे रुक दूंगा ........ तभी एक लड़के ने शीशे पे मुक्का मारा जो टूट गया ..... जब शिक्षा टुटा तू धर्म कौन है बे कहते हुवे गाड़ी से निकला

धरम : तेरी हिम्मत कैसे हुवा मेरी गाड़ी को चुने की सेल एहि पे थूक दूंगा

लड़का : जयादा फाड़े फाड़ा मत अभी इस बचे की जान जाने वाली थी अगर मैं नहीं आया होता तू ये सड़क तेरे बाप की नहीं है जो इतनी तीज गाड़ी चला रहा है ये बाजार है यह लोग गाड़ी धीरे चलते है न की तीज ......... धर्म को इतना गुस्सा आया की उसने गन निकल कर लड़के पे तान दी

धरम : मेरी गाड़ी है मैं चाहे कितनी भी तीज चलौ तुझे के मुझे तू जनता नहीं है एहि थूक दूंगा मेरा कोई कुछ नहीं बिगड़ सकता है ....... अभी धरम धमकी hi दे रहा था .... तब तक लड़के ने गन चीन कर धरम पे hi तान दिया

लड़का : सून बे सुवर के औलाद है गाड़ी तू तेरी है मगर सड़क तेरे बाप की नहीं है आवर तुझे पता होना चाहिए के सड़क पे लोग भी चलते है ......... तभी रखा गाड़ी से निकल कर कहा भाई मनाफ़ करदे गलती हो गयी .....

लड़का : ठीक है समझा देना वर्ण अच्छा नहीं होगा इस के लिए आवर चला गया ........ धर्म भी गुस्से की घुट पि कर चला गया

लड़का : सत्य एक सिगरेट पीला यार सेल ने दिमाग hi गुमा दिया

सत्य : के हुवा वीर तू इतना गुस्से मैं क्यू है ..... है भाई लोग ये कारन hi था .... आवर सत्य ने अपनी जीब से सिगरेट निकल कर दे दिया

वीर : साला हॉस्पिटल मैं मेरा दिमाग घूम गया था वह बस दवा का hi बड़बो आ रहा था तू सोच बहार जा कर एक phok.mar लो आवर फिर सत्य को बताया के हुवा अभी

सत्य : चल चोदे जाने दे कुछ लोग होते है कुत्ते की दम जो टेड़े hi रहते है ..... आवर तू हॉस्पिटल मैं के कर रहा था के हुवा है तुझे

वीर : अरे यार मेरी दीदी का एक्सीडेंट हो गया था मेरी दीदी को बहुत चोट लगी थी मगर अब ठीक है

सत्य : तू सेल मुझे क्यू नहीं बताया है तू मुझे भला क्यू बताइये गए मुझे तू अपना मंटा hi नहीं है

वीर : नहीं यार ऐसी कोई बात नहीं है मैंने तुझे इस लिए नहीं बताया के तू अपना सारा काम चोदे कर आ जाता मेरे साथ फिर यह काम कौन करता एक तुहि तू है काम करने वाला अपने घर का तेरा मां भी अब बीमार रहता है इस लिए नहीं बताया तुझे

सत्य : फिर भी यार ........ वीर ठीक है गलती हो गयी मनाफ़ कर दे .......अब सत्य भी कुछ नहीं बोलै जनता था वीर ने मांफी मांग लिया है अब कुछ बोलै तू ये कुछ भी कर सकता है साला आधा पागल hi है

सत्य : ठीक है भाई तू घर चले गए मेरे साथ मैंने माँ को बताया था के तेरी फॅमिली मिल गयी है जो इसी सहर मैं रहती है तू माँ खुश भी हुवे थी आवर नाराज़ भी के तुम ने माँ से मिलने नहीं गया

वीर : ठीक है भाई आंटी से मेरी तरफ से सॉरी बोल देना मैं जल्द hi तेरा घर आऊंगा मुझे अब जाना होगा दीदी पर्सन हो रही होगी मैंने उनेह बताया भी नहीं है ....... आवर वीर चल दिया हॉस्पिटल की तरफ

इधर काजल हॉस्पिटल के सामने गाड़ी रुक दिया आवर डाब उतर कर हॉस्पिटल के अंदर चले गए .काजल गाड़ी पार्क करने चली गयी ... मगर रागनी सब से पीछे चल रही थी आवर अपनी आँचल भी सर पे रख लिया था शांति कोमल आवर बाबा गीता के रूम मैं चली गयी मगर रागनी बहार hi रुक गयी ....... नैना भी रागनी को hi देख रही थी .. आवर नैना सोच भी रही थी िनेह कहा देखा है मुझे ऐसा क्यू लग रहा है के मैं िनेह अच्छे से जानती हुईं आवर जब से िनेह देखा है मुझे अंदर से बहुत खोसी हो रही है ......... नैना से रहा नहीं गया

नैना : आंटी के आप मुझे जानती है .......... जब नैना ने रागनी से बोलै तू उसे इतनी खोसी हुवी के उसे एक पल लगा के कह दे के मैं तेरी माँ हुईं आवर जी भर के गले लगा लू मगर कह न सकीय

रागनी : नहीं बीटा मैं तू तुमसे सुबह hi मिली हुईं तुमेह ऐसा क्यू लगा ....

नैना : नहीं आंटी मैंने जब से आप को देखा है लगता है मैं आप से पहले भी मिल चुकी हुईं आवर आप से बाटे करते हुवे भी मुझे इतनी खोसी हो रही है के मैं बता नहीं सकती .......... रागनी अंदर से खुश होते हुवे है बेटी मुझे भी उतनी hi खोसी हो रही है क्यू तुम मेरी दिल की धड़कन हो मैं तुमेह जल्द hi बता दूंगी के मैं तुम्हारी माँ हुईं

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अपडेट. 37

रागनी : ठीक है बेटी तुम जब चाहो मुझसे बात कर सकती हो मुझे भी अच्छा लगेगा ..... नैना मुस्कुरा कर ठीक है आंटी कह कर गीता के पास चली गयी .... मगर रागनी बहार hi रह गयी वह सोच रही थी अंदर जाओ की न अगर गीता मुझे पहचान गयी तू अच्छा नहीं होगा उस की फॅमिली के लिए ....... रूम के अंदर गीता बाबा को देख केर खुश थी

बाबा : गीता बेटी अब कैसी है तबियत तुम्हारी ठीक तू हो न तुम

गीता : है बाबा जी मैं ठीक हुईं मुझे खोसी हुवी के आप मुझे देखके लिए आये ....... है बेटी मुझे पता चला तू तुमेह देखने आ गया ..... कारन नहीं दिख रहा है कहा है बाबा चारो तरफ देखते हुवे कहा


पायल : बाबा जे कारन ज़रा घूमने गया है मैंने उसे कॉल किया है वह अत hi होगा ..... ठीक है बेटी बाबा ने कहा

............................................................ धर्म अपने अड्डे पे पहुँच कर इधर उधर टहल रहा आवर बोल रहा था सेल ने अच्छा नहीं किया मेरे साथ उसे कुत्ते की मूत बहुत जल्द मरूंगा ......... रखा अपने पंटरों को ले जाकर पता कर वह कौन था जिसने मुझसे पन्गा लिया है पहले उसे hi मरूंगा .......रखा जी छोटे मालिक बोल कर अपने पंटरों को लेकर चल दिया

बॉस आप के भाई का लॉस मिल गया है एक गुंडा डरते हुवे कहा धर्म से ........ कहा है मेरे भाई का बॉडी धर्म चिल्लाते हुवे कहा

गुंडा : बॉस अभी हॉस्पिटल लेकर गए है पुलिस वाले हम जब वह गए तू उनेह पुलिस एम्बुलेंस मैं लेकर जा रहे थे पोस्ट मातम करने के लिए........ ये के बक रहा है सेल मेरे भाई का पोस्ट मातम नहीं हो सकता है गुंडे कह गाला दबाते हुवे धर्म ने कहा ............ भीमा राणा को कॉल कर अभी धर्म ने अपने खास आदमी से कहा ......... ये लो सरदार भीमा ने तुरंत कॉल लगा दिया राणा को

धरम : hello राणा मैं धरम बोल रहा हुईं अभी पुलिस मेरे भाई को हॉस्पिटल ले गयी है पोस्ट मातम करने के लिए मैं कुछ भी नहीं जनता 30 मिनट के अंदर मेरा भाई मेरे पास होना चाहिए वर्ण कोई नहीं बच्चे गए मेरे कहर से

राणा : धर्म संत हो जा मैं अभी तेरे भाई को हॉस्पिटल लेकर अत हुईं तू अभी कुछ उल्टा पुल्टा मत करना .... आवर फ़ोन रख दिया

............................................................ मालिक पता है शमशेर का छोटे बेटे को किसी ने बेरहमी से मर दिया है हरिया ने राजेंद्र से कहा

राजेंदर : हरिया तुझसे कैसे पता चला ........ मालिक मुझे एक दोस्त ने बताया जो उसी गाओ का साथ आवर पता है अभी उसकी लॉस भी नहीं मिला है आवर वह बता रहा था शमशेर ने अपने बड़े बेटे धर्म को बुलाया है ... मगर शमशेर का बीटा धर्म तू कुछ सल्ल पहले hi मर गया था तू ज़िंदा कैसे हो गया

राजेंदर : नहीं वह अभी जिन्दा है शमशेर ने झोटी अफवाह उदय था ये बहुत बूरा हुवे वह एक सनकी है कुछ भी कर सकता है जिसने भी उसके भाई को मारा है वह उसे तू सैयद कुछ कर न सके मगर उसके फॅमिली के साथ हरामी पैन कर सकता है


............................................................आप कौन हो जब कारन हॉस्पिटल मैं आने के बाद गीता के रूम के बहार रागनी को देखा तू पोछा जो अंदर हॉल से देखने की कोसिस कर रही थी ........ रागनी जल्दी से अपने पल्लू से मुंह थकते हॉवे लाडे खडेति हुयी कहा वह मैं बाबा जी के साथ हुईं वह अंदर गए है

कारन : तू आप भी तू बाबा जी के साथ अंदर जा सकती है इस तरह देखने का के है ..... रागनी को कुछ सोझ नहीं रहा था के वह के बोले ... तभी नैना गेट खोल के निकल कर कहा आंटी बाबा जी बोलै रहे है आप को .... रागनी झट से अंदर चली गयी

नैना : भाई आप कहा गए थे मैं कब से आप को याद कर रही थी

कारन : अरे गुड़िया थोड़ा टहलने गया था गुड़िया पायल दीदी अंदर है के ....... नहीं भाई दीदी डॉ से बात करने गयी है के गीता दीदी को कब घर ले जा सकते है नैना ने कहा ............. कारन ठीक है चल हम भी चलते है डॉ के पास

रागनी अंदर आ गयी कारन से बच कर वर्ण उसे के जवाब देती

शांति : अरे बहन कहा चली गयी थी ....... मैं वह दीदी वाशरूम मैं चली गयी थी रागनी ने कहा .... अब रागनी तू अंदर आ गयी थी गीता बाबा जी से बात कर रही थी तभी रागनी पे उस की नज़र गयी जो शांति से बात कर रही थी मगर आँचल रागनी के सर पे hi था जो चेहरा सही से नहीं दिख रहा था

गीता : छोटी माँ ये कौन है

शांति : गीता बेटी ये बाबा जी के साथ आई है ........ अच्छा ठीक है छोटी माँ ....... ठीक है बेटी अब मैं चलता हुईं बाबा जी ने शांति से कहा

शांति : ठीक है बाबा रुकने से तू आप रुकेंगे नहीं कोई न कोई बहाना बना hi देंगे कारन भी अत hi होगा आप मिल कर जाते

बाबा : नहीं बेटी फिर कभी मिल लूंगा मुझे अब जंगल भी जाना है चलो रागनी बेटी चलते है ... बाबा आवर रागनी दुनो निकल गए

पायल : डॉ सर अब मेरी दीदी की तबियत कैसी है ...... है पायल अब तुम्हारी दीदी पहले से बेहतर है आप चाहे तू उनेह यह भी रख सकती है नहीं तू घर भी ले जा सकती है है मगर आप को एक नर्स की ज़रूरत पड़ेगी जो तुम्हारी दीदी के जख्म देख सके आवर सुई भी देना है 2 टाइम तू एक नर्स चाहिए

पायल : ठीक है डॉ सर आप एक नर्स को भेज दीजिये गए ठीक है न भाई...... कारन आवर नैना भी वह पहुंच कर सब सून रहे थे ठीक है दीदी कारन ने कहा आवर डॉ के ऑफिस से निकल गए भाई बहन .......लग भाग 2 ह मैं सब काम कर के गीता को लेकर घर आ गए जो एक नर्स भी साथ मैं आई थी

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इधर सूरज को लेकर पुलिस वाले हॉस्पिटल पहुँच गए थे पोस्ट मातम करने के लिए तभी फ़ोन बजा इन्स्पेक्टर अजय का


अजय : जय हिन्द सर ....... जय हिन्द अजय के तुम ने लॉस का पोस्ट मातम करा दिया सप ने कहा ......... नहीं सर करने hi जा रहा हुईं अजय ने कहा

सप : नहीं अजय तुम उस लॉस का पोस्ट मातम मर होने देना ये ऊपर से ोडेर है अभी कुछ लोग आएंगे तुम बॉडी उनेह दे देना ......... लेकिन सर वह अजय अभी कुछ कहता ...... उधर से सप ने कहा मैंने जो कहा वह करो आवर फ़ोन रख दिया ............ साला सब दल्ले hi भरे पड़े है अजय बोद्बोदय ......

राणा : धर्म तुम अपना आदमी भेज कर बॉडी लेजा सकते हो क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स जगह से .... ठीक है राणा आवर फ़ोन रख दिया धर्म ने ........ साला पूरा सनकी है थैंक्स भी नहीं बोलै

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अब तुमेह कैसा लग रहा है जंगल मैं जाते हुवे बाबा जी ने पूछ रागनी से ........ बाबा आज मैं बहुत खास हुईं आज मैंने अनजाने मैं hi सही अपने बचाओ से बात की आवर पता है नैना ने के बोलै उसने बोलै ..... आप से बात कर के मुझे अंदर से खुसी हो रही है ये सब आप के वजह से हुवा बाबा जी नहीं तू मैं कब के मर जाती रागनी दुखी होते हुवे कहा

बाबा : नहीं बेटी तेरा पेयर सच्चा है आवर तुझे ये वरदान भी मिला था इस लिए hi तू तेरे साथ तेरे बच्चे भी फिर से जनम लिए है जब तेरी सच्चाई उनेह पता चलेगा तू वह तेरे बगैर नहीं रहेंगे

रागनी ; नहीं बाबा मैं उन सब के साथ रहना चाहती हुईं क्यू की इस जनम मैं उनेह एक नहीं तीन माँ मिली है ....... है बेटी कास ऐसा hi हो वह सब बहुत अच्छी है बाबा जी ने कहा आवर जंगल की तरफ चलते गए


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शांति आज फिर अपने कमरे मैं बीएड पे सो कर अपनी चोट मैं एक भिंडी ले कर अंदर बहार कर रही थी आवर आहे भी भर रही हे भगवन के कर मैं इस चोट का ह्ह्हह्ह्ह्ह ओह्ह शांति की छूट अभी भी टाइट थी वह छोटी भिंडी अपने छूट मैं पूरा नहीं दाल प् रही मगर उसकी छूट आग की तरफ गरम थी ओह्ह मा के करो शांति गरम भी बहुत थी शांति चोट मैं भिंडी धीरे धीरे दाल रही थी मगर जोश मैं पूरा दाल दिया आवर चिक पड़ी ............. तभी शांति के गेट कारन पिट कर पूछने लगा के हुवा माँ .... कारन पानी पिने जा रहा था मगर शांति के रूम के पास गया तू आवाज़ सून कर रुक गया आवर हॉल से देखने लगा अंदर शांति अपनी चोट मैं भिंडी दाल कर छूट धंदा कर रही थी आवर बोलब भी नहीं ऑफ किया था ..... कारन अपनी माँ की छूट देख कर मुंह फाड़े दिया था आवर सोच रहा था के छूट है माँ की कितना उजला लग रहा है आवर चिकना भी है लगता है माँ अपनी चोट हमेशा साफ़ रखती है .. अभी कारन सोचने मैं था तभी सन्ति चिक पड़ी कारन को समाज मैं नहीं आया के हुवा वह बस गेट पीटने लगा .... अंदर शांति तू बिलकुल नंगी थी आवर कारन गेट पिट रहा था शांति ने सिर्फ साड़ी लपेट कर गेट खोल दिया

शांति : के हुवा बीटा तुम को कुछ चाहिए के ....... कारन मन मैं है माँ मुझे तेरी ढूढ़ पीना है पीला दू न ..... कारन कहा खो गया बीटा .......

कारन : हहहहहह माआ मैं पानी पिने जा रहा तू आप की चीखा सून कर रुक गे आप ने चोखा क्यू था कही आप गिर तू नहीं गयी ....... कारन अपनी माँ का सरीर को देखने लगा कारन के छोटे hi शांति के हाँथ से छूटा तू सीने से पल्लू सरक गया ..... कारन शौक हो गया अपनी माँ की बड़ी बोस देख कर जो पूरी गोरी थी कारन से रहा नहीं गया आवर कारन एक चाची पकड़ लिया

शांति :. बीटा के कर रहा है चोदे उसे ........ शांति को अच्छा लग रहा था क्यू अभी शांति की पानी नहीं निकला था मगर अपने बेटे के साथ करना उसके लिया मुश्किल था इस लिए कारन को दूर कर रही थी ... मगर कारन ने एक चूंकि पकड़ कर मुंह मैं दाल दिया शांति हहहहहह कर के कारन के साथ बीएड पे गिर गयी ......... हहहहहह बीटा चोदे दे ये गलत है बीटा तू मेरा राजा बीटा है न अपनी माँ की बात नहीं मानेगा

कारन : माँ बस थोड़ी देर बस मुझे दूध पि लेने दू प्लीज .?.... शांति मन भी कर रही थी आवर सीस किरिया भर रही थी

शांति : ठीक है बीटा पहले लाइट ऑफ कर दे मुझे सरम आ रही है ....... शांति को कोई सरम नहीं हो रहा था वह तू अभी कोई दूसरा कोई होता तू सैयद न नुकुर कर के उसका लैंड अपनी बूर मैं भी ले लेती वह इतनी गरम हो गयी थी ....... जब कारन लाइट बंद कर के आया तू शांति ने अपनी चूंकि कारन के मुंह मैं दाल दिया आवर एक ऊँगली अपनी छूट मैं दाल कर अंदर बहार करने लगी हहहहहह बीटा अब हो गए चोदे दे कारन से कह भी राजी थी आवर अपनी छूट मैं उंगली भी कर रही थी ... कारन शांति की चूंकि को मुंह मैं लेकर चोस रहा था आवर कारन का लैंड फुल टाइट हो गया था ..... कारन अपना हाँथ से लैंड को पकड़ने के लिए नीचे ला रहा था तू उसका हाँथ सहमति के हाँथ से टाच हो गया जो हिल रहा था कारन देखने के लिए अपना हाँथ उधर hi करने लगा जहा शांति अपनी छूट मैं ऊँगली कर रही थी वह बस जोश मैं थी अभी बस उसे पानी निकलना था ....... कारन का हाँथ की ऊँगली शांति के बूर मैं चला गया कारन का ऊँगली का अहसास होते hi शांति की छूट ने पानी चोदे दिया जो कारन का पूरा हाँथ भीग गया झड़ने के बाद शांति कारन को दूर कर दिया शांति को गिल्टी फील होने लगा के अपने बेटे के साथ ये सब किया आवर मायुश भी हो गयी थी


शांति : कारन बीटा अभी तुम जाओ यह से .... कारन भी समझ गया था माँ को सैयद अच्छा नहीं लगा ... इस लिए कारन ने कहा

कारन : माँ मैं अब कुछ नहीं करूँगा मुझे बस आप के साथ सोना है के आप मुझे अपने साथ सोने दूगी ........ कारन इतना मासूमियत सा कहा तू शांति न कह सकीय ...... ठीक है मेरा जजा बीटा सो सकता है पहले मेरी कसम खाओ के कुछ नहीं करोगे शांति ने पेयर से कहा

कारन : माँ मैं आप के बहन मैं सूना चाहता हुईं आवर आप की कसम अभी कुछ भी नहीं करूँगा .... फिर माँ बीटा एक दूसरे के बहन मैं बहन दाल कर सो गए
 
अपडेट 38

नेक्स्ट मॉर्निंग....... आज शांति जल्दी hi उठ गयी उठे भी क्यू न रात जो करें उसका गर्मी जो ठंडा किया था तो वह आज फ्रेश महसूस कर नहीं थी .... मगर जब शांति बीएड से उठने लगी तू ... करें ने शांति को पकड़ कर बीएड पे गिरा दिया

शांति : चोदे बीटा के कर रहा है देख सुबह हो गयी है आवर माइक सू सू भी लगी है जाने दे

कारन : माँ अभी सुबह होने मैं अभी टाइम है कुछ देर आवर सो जाइये न मेरे साथ मुझे अच्छा लगा आप के साथ सो कर प्लीज ...... है जानती हुईं मुझे कितना अच्छा लगा है मैं hi जानती हुईं तूने वडा किया था कुछ नहीं करेगा मगर तू रात भर कोस्टा रहा देख यह लाल भी हो गया है शांति अपनी चूंकि की निपल देखते हूजे कहा

करें : माँ मैं तू सो रहा था आप झोट मत बोलिये ... आउट करें फिर से शांति के चूंकि पकड़ कर दबाने लगा ....... ह्ह्हह्ह्ह्ह चोदे सैतान लड़का तू अभी के कर रहा है शांति को भी मजा तू आ रहा था लेकिन अपने बेटे को सुच कर अच्छा नहीं लग रहा था शांति के छूट मैं भी अपनी आ रहा था ...... करें चूंकि पिटे हुवे अपना हाँथ नीचे ले जाकर शांति के छूट को मुठ्ठी बना कर पकड़ लिया ....... शांति ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कर के करें को धक्का दे कर बाथरूम मैं भाग गयी करें बीएड के नीचे गिर गया ....... बाथरूम मैं शांति के आँखों मैं ांसो आ गए थे ...... मैं ये सब नहीं कर सकती वह मेरा बीटा है मुझे करें को रुकना हो गए ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरी छूट कितनी बेहरमी से पकड़ लिया था करें ने मुझे रात को hi उसे रुकना देना चाहिए था मगर मैं के करू मेरी ये छूट भी लैंड मान्य रही है शांति बस बाथरूम अंदर अपने आप hi बाटे कर रही थी ......... इधर बेचारा करें बीएड नीचे hi पड़ा रहा सोचने लगा माँ को के हो गया रात तू कुछ भी नहीं कहा आवर सुबह भी माँ के दूध को दाना रहा था तू बस मन कर रही थी मगर जब छूट पे हाँथ रखा तू माँ ने मुझे धक्का दे दिया कही माँ दर्द की वजह से तू नहीं मुझे धक्का दिया मैं माँ को सॉरी बोल दूंगा कितना गरम थी माँ को छूट ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ......... शांति बाथरूम से निकल कर चली गयी करें के तरफ देखते भी नहीं ........ करें भी उठ कर बाथरूम मैं चला गया के सामान देख कर करें के होंठो पे मुस्कान आ गयी आवर उसे उठा कर अपने कच्चा के अंदर दाल कर मुठ मरने लगा ओह्ह्ह्ह माँ ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आवर कोई 1 मिनट्स के अंदर hi करें ने पानी अपनी माँ की पेंटी पे गिरा दिया ....

शांति नहाने के बाद जल्दी मैं पेंटी भूल गयी थी ...... कारन झरने के बाद पेंटी जहा थी वही रख दिया आवर नाहा कर अपने रूम मैं चला गया .................. छोटी कहा खोई है देख दूध उबाल रही है माया ने कहा .. जब माया किचन मैं आई तू देखा दूध उबाल कर नीचे गिर रहा है आवर शांति को पता भी नहीं चल रहा है .......... शांति जल्दी से दूध उतर कर कही नहीं दीदी मैं बस गीता बेटी के बारे मैं सोच रही थी के जल्द से जल्द थी हो जाये शांति ने झूट बोल दिया शांति कारन के बारे मैं सोच रही थी

माया : तू जयादा मत सोच गीता अब बिलकुल थी है चल मुझे जल्दी से कॉफ़ी बना कर दे मेरी सर दोख रहा है ......... शांति कॉफ़ी बनाने लगी ........

गुड़िया चल अब उठ भी जा सुबह हो गयी है आवर ऐसे hi सो गई थी के कोमल ने कहा नैना से जो ब्रा पेंटी मैं सो रही थी .......... दीदी तू के हुवा आप लड़का थोड़ी हो जो आप मेरी रेप कर दूगी नैना आँख मलते हुवे कहा

कोमल : गुड़िया तुझे ये गन्दी चीजे सब कौन सीखा रहा है तुझे कोई ऐसे बात करता है अपनी बड़ी बहन से ....... कोमल सब से हैट के है उसे बस स्टेडी करने मैं मन लगता है कोमल स्कूल से लेकर कॉलेज तक कई लड़की से दोस्ती की आवर टुडे भी दिया जो लड़की लैंड छूट या कोई लड़के की बात करता तू कोमल को अच्छा नहीं लगता इस लिए वह हमेशा दोस्त बदलती रहती है....... ओह मेरी भोली दीदी ये सब कोई भी बताता थोड़ी है सब ब्रा पेंटी मैं सोते है आवर आप को पता है गीता दीदी भी ब्रा पेंटी मैं hi मेरे साथ सोती है .......... है है ठीक चल मुझे मत बता आवर तुझे मेरे साथ सूना है तू अब ब्रा पेंटी मैं नहीं सूना नहीं तू मेरे हांथो से मार खायेगी .......ओह दीदी मेरे पास जो है वही तू आप के पास है तू फिर आप मुझे मन क्यू कर रही है आप भी ब्रा पेंटी मैं सो जाइएगा ........ जयादा बकवास मत कर जा मेरे लिए कॉफ़ी लेकर आ कोमल थोड़ी गुस्से मैं कहा ....... बेचारी नैना मुंह बनाते हुवे कहा दीदी आप गन्दी हो मैं कॉफ़ी नहीं लाऊंगी आवर जाने लगी ....... के नहीं लाएगी कॉफ़ी तू तो मेरी मासूम छोटी सी गुड़िया है कोमल ने बहुत hi प्यार से कहा ........ तू आप ने मुझे डाटा क्यू मैं ऐसे hi ब्रा पेंटी मैं आप के साथ सो जाउंगी नैना ने थोड़ी तयश मैं कहा ....... ठीक है मेरी राजकुमारी जी आप को जैसे सोना है सो लाना अब तू कॉफ़ी ला दू ....... नैना कोमल को किस करते हुवे मैं तू मजाक कर रही थी अभी कॉफ़ी लेकर अति हुईं आवर जाते हुवे कोमल के हुन्थो पे किस कर के भाग गयी ... ये गुड़िया भी न घोड़ी होती जा रही है मगर दिमाग से अभी बच्ची hi है आवर है दी

नैना : बड़ी माँ प्लीज कोमल दीदी को भी कॉफ़ी लेकर दे दीजिये न आवर माया को किस कर के बाथरूम मैं चली गयी ... नैना रूम से जब निकली तू माया कॉफ़ी पिटे हुवे आ रही थी..... ठीक है मेरी रानी साहेबा आवर है दी ..?....

शांति मेरी छोटी भाभी का कॉल आया था विकाश का रिस्ता तैय हो गया है तू भाभी ने मुझे बुलाया है मगर मैं सोच रही हुईं जॉन को नहीं माया ने कहा नास्ता करते हुवे जो सभी वही थी

शांति : ये तू अच्छी बात है दीदी आवर आप को गए हुवे भी बहुत दिन हो गए है तू आप जाइये गीता को फिकर मत कीजिये गीता मेरी भी बेटी ............... नैना मैं भी जाउंगी बड़ी माँ आप के साथ गाओ मैं बड़ा मजा अत है शादी मैं कोमल आवर काजल हम भी बड़ी माँ आप के साथ जाइये गए .......... मगर तुम सब की स्टेडी के होगा नहीं तुम सब नहीं जोओगी ..........जब शांति ने मन किया तू 3 बहने माया के तरफ देखने लगी ... आवर नैना तू माया के कमर पे कुटी भी काटने लगी ........... अरे जाने दे छोटी नहीं तू इन दुनो का तू पता नहीं मगर ये रानी साहेबा मुझे भी नहीं जाने देंगी माया नैना के गाल नोचते हुवे कहा ........ सही कहा मैं सोच hi रही थी आप की सरे कपडे छिपाने को ............ सभी नैना की बात सून कर हसने लगे ......... ठीक है दीदी आवर तू जयादा पर्सन मत करना दीदी को शांति नैना से कहा ......... ठीक है माता श्री

माँ मैं अपने दोस्त के घर जा रहा हुईं नास्ता करने के बाद करें ने शांति से कहा .. ठीक है बीटा मगर रात होने से पहले घर आ जाना ये बात माया ने कहा जब देखा शांति करें के बात जवाब नहीं दिया तू ......... करें भी चला गया के बार अपनी माँ को देख कर जो अपनी सर नीचे कर के नास्ता कर रही थी .................... छोटी आज कल तेरा धयान कहा रहता है माया ने शांति से कहा जो इस वकत शांति माया की पेअर की मालिश कर रही थी

........... कही नहीं दीदी आप ऐसा क्यू कह रही है मैंने तू कुछ भी नहीं किया है शांति थोड़ी पर्सन होते हुवे कहा

माया : देख मुझसे झोट मत बोल भले hi हम एक माँ की बेटी नहीं है मगर जब से तू मेरे साथ रही है मैंने मुझे अपनी छोटी बहन मन है है अगर तू मुझे अपनी बड़ी बहन नहीं मानती तू फिर के कर सकते है .. ये बात माया ने उदाश होते हुवे कहा

शांति : दीदी आप ाएसि बात मत कीजिये मैं आप को अपनी दीदी से भी बढकर मन है आवर ये बात आप भी जानती है मगर अभी आप मुझे इमोशनल ब्लैकमेल कर रही है .............. है तुझे तू एहि लगेगा अभी तूने कहा न के मुझे दीदी से भी बढकर मानती है तू बता दे के हुवा तुझे माया थोड़ी मुंह बनाते हुवे कहा ........... शांति को बताना hi पड़ा माया को की रात से लेकर सुबह तक के के हुवा मेरे आवर करें के बिच इस लिए मैं थोड़ी पर्सन हुईं दीदी .


माया : छोटी तेरे अंदर इतनी गरम कहा से आने लगी मुझे अब ठीक नहीं लग रहा है चल अभी डॉ के पास चलते आवर हमेह भी पता चल जाइएगा तुझे के बीमारी हुवा है ....... नहीं दीदी ये बीमारी नहीं है ये सब कमला की बहन कविता की वजह से हुवा है शांति ने कहा ........ फिर शांति माया को सब बता दिया जो भी गीता ने कहा था आवर फिर शांति माया के गुड़ मैं सर रख कर रोने लगी

माया : छोटी चल अब चुप हो जा मेरी बहन मुझे पता था वह एक्सीडेंट नहीं था सोची समझी एक्सीडेंट कराया गया था मगर उस वकत मैं कुछ कर नहीं पाई थी अकेली ौरात जो थी तुम तू सदमे मैं थी बच्चो को संभालती की के करती ........ कुछ देर मैं दुनो ने रो कर संत हो गयी ...... शाम को hi माया काजल कोमल आवर नैना को लेकर अपने माँ के घर चली गयी

............................................................

इधर शमशेर अपने बीटा का अंतिम संस्कार कर दिया था ........... रखा के उस लड़के के बारे मैं पता कर लिया तूने धर्म ने पूछ जो रखा अभी गाड़ी से निकल कर हवेली के अंदर आया था

रखा : नहीं भाई उसका अभी पता नहीं चला मगर एक बोरी खबर है अभी रस्ते मैं कमला का कॉल आया था बोल रही थी विक्रम को एक लड़के ने उठा लिया है ............. किसने उठाया है विक्रम को शमशेर ने चिल्ला कर कहा ... विक्रम hi एक जरिया था जो शांति को शादी मैं ला सकता था इस लिए शमशेर को अपने प्लान ख़राब होते दिखने लगा

रखा : मुझे नहीं पता मालिक है मगर कमला उसके साथ थी ... ठीक है अभी आराम कर कल सुबह hi निकल जाना आवर कमला से अच्छे से पूछ कर उस लड़के का पता करो मुझे किसी भी हालत मैं मुझे विक्रम चाहिए शमशेर ने कहा

धरम : नहीं रखा तू अभी के अभी निकल सहर के लिए आवर कुछ आदमी भी ले जा आवर मेरी एक बात का अच्छे से जान ले जब तक तू पता न लगा ले यह आना भी मत चल जा अब ....... साला तू नर्क मैं जाइएगा अभी तू आया हुईं कल चला जाता तू के हो जाता साला साला ये सनकी नहीं पूरा hi सनकी है लगता है ये जल्द hi मरने वाला है रखा मन मैं सोचते हुवे चला गया


............................................................करें कहा है छोटी सुबह से एक बार भी रूम मैं नहीं आया .. जब शाम को पायल गीता के रूम मैं गयी तू पूछा ...... दीदी भाई अपने दोस्त से मिलने गया है इस लिए नहीं आया होगा . इधर शांति भी पर्सन थी आवर सोच रही थी मैं करें को इग्नोर कर के गलती तू नहीं कर रही अभी वह न समझ है उसे प्यार से समझाना चाहिए था मेरा एक hi तू बीटा है नहीं मैं उसे प्यार से समझा ूँगी मगर अभी तक आया क्यू नहीं ..... शांति ने करें को कॉल लगा दिया

hello कहा है बीटा अभी तक नहीं आया शांति ने कहा

कारन : है माँ मैं अभी बस घर hi आ रहा हुईं ......... ठीक है बीटा जल्दी घर आ शांति ने कहा ....... ठीक है माँ कह कर करें ने कॉल रख दिया

कारन कोई 30 मिनट्स के बाद घर आया माँ आप यह के कर रही है .... शांति घर के बहार hi करें का इंटर कर रही थी .. जब करें अपनी माँ को बहार देखा तू पूछा आवर घर के अंदर चला गया .... शांति भी करें के पीछे आई

शांति : कारन चल जल्दी मुंह हाँथ धु कर आ खाना खाने ........ कारन पायल आवर शांति ने साथ मैं खाना खाया खाना खाने के बाद कारन गीता के रूम मैं चला गए आवर शांति आवर पायल टीवी देखने लगी

टीवी पर है मेम बता सकती है किसने किडनेप किया है आप के पति को एक रिपोटर ने औरत से पूछा नहीं मुझे नहीं पता मुझे एक कॉल आया था मैं पुलिस स्टेशन गयी थी रिपोर्ट लिखवाने मगर पुलिस वाले ने मन कर दिया लिखने से इस लिए मुझे यह आना पड़ा ........ माँ ये तू कविता बोवो है पायल चिंतित होते हुवे कहा

hello राणा साहब मैंने रिपोर्ट लिखने से मन कर दिया है अब बताओ मेरी पत्नी कहा है .............

राणा : गुड इंस्पेक्टर तेरी बीवी कल सुबह घर पांच जायेगी
 
अपडेट. 39

इधर कारन खाना खा कर गीता के रूम की तरफ जा रहा था तभी कारन का फ़ोन बजा कारन गीता के रूम मैं न जाकर छत पे चला गया फ़ोन उठाते हुवे

कारन : है बोल मेरा काम हो गया के ............. है होगया अब तुम मेरे बेटे को चोदे दू प्लीज मेरा एक वही बीटा है आवर तुमने जैसा कहा मैंने वैसा hi किया है राणा गिडगिडेटे हुवे कारन से कहा

कारन : ठीक है कल इस जगह तुम विक्रम को लेकर आ जाना आवर है सिर्फ तुम अकेले hi आना कोई चालाकी नहीं वर्ण तेरे लिए अच्छा नहीं होगा तेरे बेटे के लिए ......... नहीं तुम मेरे बेटे को कुछ मत कारन मैं अकेले hi विक्रम को लेकर वह आऊंगा राणा ने कहा ..तब तक कॉल काट दिया कारन ने ..... कारन गीता के रूम मैं न जाकर हॉल मैं चला गया क्यू हॉल से रोने की आवाज़ आ रही थी ....... के हुवा माँ आवर दीदी आप दुनो रो क्यू रही है कारन ने पूछा .... वजह तू कारन को मालूम तू था hi फिर भी पूछा

पायल : भाई विक्रम फोफा को किसी ने किडनेप कर लिया है देख न्यूज़ मैं कविता बौआ बोल रही है ........ये कैसे हो गया दीदी फोफा को कौन किडनेप कर सकता है उनकी किसी से के दुश्मनी हो सकती है ठीक है पहले आप दुनो चोप हो जाइये शांति आवर पायल कुछ जयादा hi दाहक कर रो रही थी इस कारन ने थोड़ी तीज आवाज़ मैं कहा ........ बीटा तू कैसी बाटे कर रहा है वह तेरे फोफा है शांति रट हुवे कारन से कहा ......... है माँ मैं जनता हुईं मगर आप दुनो ऐसे रोने लागगी तू फिर दादी आवर गीता दीदी का के होगा अभी उन दुनो का तबियत ख़राब है आवर आप लोगो को रट देख कर उन दुनो का के होगा सोचा है फिर करें ने अपनी बड़ी बौआ सुनीता से बात करा दिया हम सुबह चलते है न बौआ के यह इतना बोल कर करें अपने रूम मैं चला गया ......... शांति आवर पायल भी अपने रूम मैं चली गयी रट हुवे ..................... इधर गीता के रूम मैं कारन ने जब राणा से बात कर के फ़ोन रखा तू कुछ 5 मिनट्स के बाद गीता का फ़ोन बजा ...... है बोल शीतल के हुवा गीता ने फ़ोन उठाते hi कहा

शीतल : गीता तुम ने जिस नंबर को तारेश करने को कहा था न अभी उस नंबर पे राणा ने फ़ोन किया था कोई विक्रम के बारे मैं बात कर रहे थे बस एहि बताने के लिए कॉल किया है ........ ठीक है शीतल तुम इस नंबर का सभी कॉल रिकॉर्ड करते रहना आवर शांति प्लीज ये सभी रिकॉर्डिंग तुम सिर्फ मुझे देगी आवर किसी को नहीं वडा कर गीता ने कहा .............. पैर हुवे के है तू कुछ पर्सन लग रही है शीतल थोड़ी चिंतित होते हुवे पूछा ......

गीता : पहले वडा कर मैंने जो कहा करेगी .............. है ठीक है चल वडा किया अब बता के बात है शीतल ने कहा ............. शीतल कल तू घर आ मैं तुम को सब कुछ बताउंगी आवर फ़ोन काट दिया ......... तू तुम ने मारा है भाई उस कुत्ते सूरज को मगर तुम्हारा के दुश्मनी है आवर इसमें विक्रम फोफा कहा से आ गए कही कारन को पता तू नहीं चल गया है मगर कैसे गीता को कुछ समझ मैं नहीं आ रहा था के कारन को कैसे पता चला गीता रात घर सो नहीं पाई बस सोचते रही कारन ये सब मैं कैसे आ गया उसे कुछ हो गया तू नहीं मुझे कारन से बात करनी होगी गीता सोचते हुवे सुबह उसे निनाद लग गई ................... कारन सुबह hi अपनी माँ को लेकर अपनी बौआ के घर निकल गया ........ छोटी कारन को भेज मेरे रूम मैं आने को सुबह के 10 ऍम को पायल ने जब जयादा तू गीता ने पायल से कहा

पायल : दीदी भाई तू माँ को लेकर सुबह hi बौआ के यह चला गया ..... के करने गया है वह पे गीता ने थोड़ी बेचैन होते हुवे पूछा .......... जो टीवी न्यूज़ पे देखा था बौआ को सब बता दिया पायल ने गीता को ............... ठीक है जा देख दादी उठ गयी के आवर है तू कुछ भी मत बताना दादी को गीता ने पायल से कहा

............................................................ इधर सुबह होते होते माया अपने माँ के घर पांच गयी ..... माया के माँ आवर बाप दुनो मर चुके है माया के 2 भाई है आवर 2 बहन है

माया के दुनो भाई माया से बड़े है इस भाई का नाम दीनदयाल है आवर भाभी का नाम रूपा है ......... रूपा आवर दीनदयाल के 3 बच्चे है 1 लड़के आवर 2 लड़की लड़के का नाम मोनू है जो सबसे बड़ा है उस के बाद रानी है आवर सब से छोटी नीलू है ...... माया से चटाई बहन का नाम पद्मा है आवर छोटी बहन का नाम (शांति 2) है ! एहि वजह थी के माया शांति को अपनी बहन मानती है माया जब सहर कॉलेज मैं गयी तू कुछ दिन बाद उसे घर से फ़ोन आया की तेरी बहन अब इस दुनिया मैं नहीं रही माया ने सूना के उस की जान से पेरी बहन अब नहीं रही तो माया की जैसे जान निकल गयी अपनी बहन की याद में माया बस रोटी रहती थी माया के माँ पिता के बहुत झाने के बाद माया फिर से कॉलेज गयी आवर कुछ दिन बाद वह शांति आई जिसे देख कर माया को उस लड़की मैं अपनी बहन शांति देखे देती थी आवर एक दिन माया ने शांति से नाम पूछा तू शांति में अपना नाम जब बताया तू माया को इतनी खुसी हुवी के शांति को गले लगा लिया फिर शांति को माया अपने साथ रखने लगी शांति को भी अच्छा लगता था माया के साथ रहना इसी तरह दुनो मैं बहन जैसा रिस्ता बन गयी


बड़ी माँ ये आप का गाँव है तू आप सब मालूम होगा न यह के के है नैना ने माया से कहा जो अभी माया के गुड़ मैं सर रख कर सो रही थी ......... है मुझे सब पता है मेरे गाँव मैं कौन सी जगह कहा है जैसे तुझे पता है सहर मैं कौन सी जगह कहा पे है

नैना : तू बड़ी माँ आप तू गाँव मैं सीना तान कर चलती होंगी न

...... क्यू सीना तान कर चलूंगी मैं माया ने कहा ......... अरे भोली मेरी बड़ी माँ ये आप का गाँव है तो सभी लोग जानते होंगे वैसे भी ये एक छोटी सी जगह है हम्हारी तरह सहर थोड़ी है जो बहुत सरे लोग होंगे क्यू सही कहा न बोलिये नैना ने माया से कहा हस्ते हुवे

माया : है मेरी गुड़िया ने सही कहा ठीक है चल उठ मुझे आराम करने दे .......... बड़ी माँ आप अभी क्यू सो रही है चलिए न गाँव मैं घूम कर एते है आप की कोई दोस्त तू होंगी न ........ अब माया अपने सर पकड़ लिया आवर मन मैं कहने लगी कास इसे भी अपने साथ यह लती तू आज ये मुझे इतना पर्सन नहीं करती ..... माया ने काजल आवर कोमल को यह हर वकत लती थी जो दुनो को यह सब मालूम था मगर नैना यह आई तू थी मगर अपने माँ के साथ जो छोटी थी ........ अरे के सोचने लगी आप मैं आप को अभी नहीं सोने दूंगी आप तू सो जायेंगी तू मैं कहा जाउंगी दीदी भी पता नहीं कहा चली गयी है ...... अब माया को एक hi रास्ता बचा था नैना से बचने के लिए नहीं तू ये पीछा नहीं छोड़ेगी ....... ओह ओह मेरे पेअर ओह माँ के करू मैं इस दर्द का माया थोड़ी दर्द मैं कहा

नैना : कहा दर्द कर रहा है आप को दीजिये मैं दबा दू आप की माँ थोड़ी ज़िंदा है जो बोलै रही है नैना माया की पेअर की मालिश करने लगी ............ माया बस है रही थी नैना को मालिश करते हुवे देख कर ........ बड़ी माँ मेरा भी हाँथ दुखने लगा अब काजल दीदी आएँगी तू मैं आप की मालिश करा दूंगी नैना मुनाह बनाते हुवे कहा आवर माया से लिपट कर सो गयी ... है ठीक है मैं अपनी राजकुमारी को कल अपने दोस्त के पास ले जाउंगी माया ने कहा ....सोच मैं बड़ी माँ नैना खुश होते हुवे कहा ... है सोच मैं हम कल पूरा गाओ घूमेंगे अब कोई बात चलो सो जाओ .....

काजल दी बस थोड़ी देर बाद चलते है न नीलू ने कहा ... नीलू कोमल आवर काजल गाओ के hi छोटी दुकान पे गयी थी ....... जब काजल घर से निकली तब से 2 लड़के उसके पीछे लगे थे काजल भी ुनिह को बार बार देख रही थी इस लिए काजल जल्द hi दुकान से जाने लगी तू नीलू ने काजल को तूने को कहा

काजल : कोमल तुझे के लेने है ... दीदी मैंने ले लिया है बस कुछ गुड़िया के लिए ले रही हुईं नहीं तू वह गुस्सा हो जायेंगी कोमल ने कहा ........... चलो मैंने गुड़िया के लिए ले लिया है ...... आवर नीलू आवर के लेना है तुझे सब तू ले लिया है चल वर्ण देर होने के बाद बड़ी माँ गुस्सा हो जायेंगी काजल ने कहा दुनो से ठीक है दी. चलो नोलु ने कहा ............... रस्ते मैं एक लड़के ने काजल से कहा जो कब से पीछा कर रहा था ही जाने मन के नाम है तुम्हारा ......... काजल कुछ बोल नहीं रही थी बस कोमल आवर नीलू का हाँथ पकड़े हुवे चल रही थी .......... चलते हुवे hi लड़के ने काजल का दुपट्टा खींच लिया

नीलू : ये के बत्तमीज़ी है राहुल मेरी दी का दुपट्टा दू वर्ण अच्छा नहीं होगा........ नीलू बात कर रही थी मगर काजल ने एक ज़ोर का झटका दिया राहुल के गाल पे आवर दुपट्टा चीन लिया राहुल थोड़ी पीछे हैट गया

काजल : तेरा कुछ भी नाम हो मुझे के करना है तेरे जैसे कुत्ते बहुत भोकते है रहते है मेरे पूछे आवर अभी तू हाँथ से मारा है अगली बार ऐसा किया तू चप्पल से मरूंगी कुत्ता कही का ........ राहुल बस अपनी गाल पे हाँथ रख कर खड़ा तहत तब एक लड़के ने कहा जो उसके साथ था

लड़का : राहुल भाई आप ने कुछ किया क्यू नहीं वह आप की मार कर चली गयी ऐसे तू बदनामी हो जाएगी गाँव मैं आप की ...... तू सेल तू के झक मार रहा था साली में ऐसा मारा के मेरा सर hi घूम गया साली मैं बहुत आग है इस के बारे मैं अलग से सोचना पड़ेगा

दी अच्छा किया आप ने उसे मारा बहुत hi हरामी लड़का है हमेशा हमेह छेड़ता रहता है मगर दी वह बाद मैं कुछ ज़रूर कुछ करेगा घर आने के बाद नीलू ने काजल से कहा ..... ऐसे हरामी लड़का से मुझे अच्छे से पता है उनेह कैसे ठीक करना है तू चिंता मत कर अगली बार ऐसे मरूंगी की फिर कभी किसी लड़की को देखे गए भी नहीं

...........................................................क
राण अपनी माँ को लेकर बौआ के घर पहुँच गया ...... माँ मैं पुलिस स्टेशन जा रहा हुईं पता करने आप एहि रहिये कारन ने शांति से कह कर निकल गया वह से

कारन : hello राणा कहा पे है अभी

राणा : मैं अभी निकल रहा हुईं जहा तुम ने मुझे कहा है ......... नहीं तू ऐसा कर विक्रम का दुनो पेअर काट दे आवर उसे हॉस्पिटल मैं एडमिट कर दे आवर मुझे कॉल कर के बता किस हॉस्पिटल मैं है मैं तेरे बेटे की चोदे दूंगा कारन ने कहा

राणा ; ठीक है मैं इस का पेअर काट कर हॉस्पिटल भेज रहा हुईं तुम प्लीज मेरे बेटे की चोदे दू ...... चोदे दूंगा पहले अपना काम कर

सेल तू है कौन मैं तेरे साथ तेरे सभी परिवार को कुत्ते की मूत मरूंगा राणा ने फ़ोन रखने के बाद कहा .................. घर पे गीता सो रही थी तभी गीता का फ़ोन बजा पायल भी वही थी तू फ़ोन उठा लिया

पायल : hello कौन बोल रहा है .......... के मैं गीता मेम से बात कर रही हुईं शीतल ने कहा

पायल : नहीं मैं उनकी छोटी बहन बोल रही हुईं दीदी अभी सो रही है के काम है मुझे बताइये मैं बोल दूंगी दीदी जान उठेंगी तू

शीतल : नहीं मुझे गीता मेम से hi बात करनी है वह भी बहुत hi ज़रूरी बात है नहीं तू मैं फ़ोन रख रही हुईं .......... नहीं रुकिए मैं अभी दीदी को उठा रही हुईं पायल जल्दी से कहा ..... दीदी देखिये कोई लड़की आप से बात करना चाहती है गीता को उठाने के बाद पायल ने कहा ..... जब गीता ने नम्बर देखा तू पायल से कहा

गीता : छोटी प्लीज एक कॉफ़ी पीला दू ......... पायल तू जाना नहीं चाहती थी उसे भी जानना था आखिर के बात करनी है दीदी से उस लड़की को जो मुझे नहीं बताया मगर पायल गेट के बहार जा कर खिड़की से सोने की कोसिस करने लगी मगर अंदर से सिर्फ गीता का है ठीक है आवाज़ आरही थी जब कुछ नहीं सोने दिया तू पायल कॉफ़ी बनाने चली गयी .......... शीतल ने गीता को फिर कॉल के बारे मैं बताया की फिर उस नम्बर से राणा से बात हुवी है ............ फ़ोन रखने के बाद गीता ने कॉल लगा दिया

गीता : hello रहीम cha-cha कैसे है आप

रहीम: सब ठीक है गीता बेटी कोई काम है के .......... है cha-cha मुझे एक काबिल बाँदा चाहिए जो ताकतवर हो उसे बस दूर से hi कारन पे नज़र रखना है जब तक कारन को मदद की ज़रूरत न पड़े

रहीम : बेटी कोई पर्सनी तू नहीं है न वरना मैं इंडिया वापस आ रहा हुईं .......... नहीं cha-cha सब ठीक है आप फिकर न करे बस जोतना जल्दी हो सके बंदी को यह भेज दीजिये

कारन बस पुलिस स्टेशन जा कर बहार घूम रहा था कोई 1ह के बात फिर राणा का फ़ोन आया आवर उसने कारन को बता दिया के विक्रम को किस हॉस्पिटल मैं एडमिट किया है

....... ठीक है शाम तक तेरे बीटा अस जाइएगा कह कर कारन ने कॉल कर दिया ............... सेल बस मेरे बेटे को आ जाने दे फिर तुझे पता चले गए मैं के चीज हुईं राणा ने कहा ..

कारन अपनी माँ को फ़ोन कर दिया के विक्रम फोफा मिल गए है आवर इस हॉस्पिटल मैं है ोुए कारन हॉस्पिटल की तरफ चल दिया

दीदी किस का कॉल था कॉफ़ी देते हुवे पायल ने गीता से पूछा

गीता : छोटी वह एक मेरी दोस्त थी उसकी फॅमिली प्रॉब्लम थी जो उसने मुझसे पूछा के करना चाहिए

पायल छोटी माँ का कॉल तू नहीं आया न अभी तक गीता ने कहा

पायल : है दीदी माँ का कॉल आया था उन्होंने बताया के विक्रम फोफा अभी हॉस्पिटल मैं है बस इतना hi माँ ने कह कर कॉल काट दिया ...... दीदी मुझे चिंता हो रही है के मैं बड़ी माँ को कॉल करू

गीता : अरे छोटी कुछ नहीं होगा आ मेरे पास बाथ आवर तू रो क्यू रही है मैं तू समझती थी के मेरे बाद कोई बहादुर है तू मेरी छोटी बहन पायल मगर सैयद मैं गलत थी .................... दीदी मैं आप की तरह बहादुर नहीं हुईं मगर मैं कमज़ोर भी नहीं हुईं मगर देखिये के हो गया विक्रम फोफा के साथ कितना हेल्प किया है फोफा ने ................... है बहुत हेल्प किया है उसका गईं कर हिसाब दूंगी उसे गीता ने अपने मन मैं सोचा
 
अपडेट. 40

इधर हॉस्पिटल मैं कारन पहले पांच गया कुछ देर के बाद शांति सुनीता आवर कविता भी पांच गयी जो विक्रम को देख कर बहुत hi रो रही थी मगर कारन ने सब को बताया के विक्रम फोफा अभी खतरे से बहार है पर उनका गुंडों ने दुनो पेअर काट दिया है .... शाम को कारन अपने सुनीता बोवा को लेकर घर चला गया हॉस्पिटल मैं कविता आवर शांति रुक गयी .... कविता बौआ का घर से कारन का घर का रास्ता बस 30 मिनट्स का था तू कारन अपने घर आ गया सुनीता बॉस को लेकर .... कारन को घर आने मैं रात के 10 पं हो रहा था मगर कारन ने पहले hi पायल को फ़ोन कर दिया था ...... घर आने के बाद कारन ने भर पेट खाना खाया मगर पायल आवर सुनीता बौआ बस थोड़ी बहुत hi खाया सब अपने रूम मैं चला गए मगर सुनीता गीता के रूम मैं चली गयी

hello सुनीता कहा थी दिन भर तुम मैं तुमेह कब से कॉल कर रहा हुईं विनय ने कहा

सुनीता : है मेरा फ़ोन ऑफ हो गया था अभी घर आकर चार्ज किया है के कोई बात है ............ है दीनदयाल का कॉल आया था उसने अपने बेटे का शादी कर रहा है तुमेह नहीं पता माया ने तुमेह नहीं बताया के दीनदयाल ने सुनीता से कहा

सुनीता : नहीं जी मैं तू यह नहीं थी मैं अपने बहन के घर चली गयी थी ... आवर फिर सुनीता ने रट हुवे सब बता दिया विक्रम के साथ के हुवा है ......... है बहुत बोरा हुवा सुनीता तुमेह अपनी बहन के पास भी रहना पड़ेगा तू के मैं दीनदयाल को बोल दू हम नहीं आ सकते है विनय ने सुनीता के साथ देते हुवे कहा

सुनीता : नहीं जी मन मत करियेगा नहीं तू दीनदयाल तू नहीं मगर रूपा गुस्सा ज़रूर हो जायेगी आवर गाओ मैं कहती फिरेगी के उसका अपना तू कोई बच्चा नहीं है आवर हमने उनेह बुलाया तू दीदी नहीं आई ............ है तुम्हारा भी बात सही है तू के करे तुम्हारी बहन भी तू अभी दुःख मैं है विनय ने कहा

सुनीता : ठीक है जी यह शांति तू है न आप आ जाइये हम साथ मैं चलेंगे तब तक मैं अपनी बहन के पास hi रहती हुईं ...... ठीक जैसी तुम्हारी मर्ज़ी है सुनीता तुम्हारी लाड़ली की अब तबियत कैसी है विनय ने पूछा

सुनीता : है मेरी लाड़ली बेटी पहले से अब ठीक है अभी सो रही है के आप बात करोगे .... नहीं अभी सोने दू उसे मैं कल hi वह आ रहा हुईं विनय ने कहा आवर कॉल रख दिया ............. सुनीता गीता के बगल मैं लेट गयी आवर गीता को देखने लगी आवर सिसक भी रही थी ... जो गीता के चेहरे पे 1 2 बाउंड गिर रही थी तू गीता उठ गयी

गीता : के हुवा माँ आप रो क्यू रही है मैं बिलकुल ठीक हुईं आप hi तू कहती थी के मैं आप की बहादुर बेटी हुईं चढ़ी मुंह बनाते हुवे कहा ......... है मैं जानती हुईं के मेरी बेटी बहुत बहादुर है मगर हम्हारे साथ के हो रहा है पहले मेरे दुनो भाई मुझे चोदे के चले गए आवर अब तुझे इतनी चोट लगी आवर फिर किसी ने विक्रम के दुनो पेअर काट दिया सुनीता सब कह कह कर रो रही थी

गीता : माँ सब ठीक हो जाइएगा प्लीज आप रोइये मत मैं आप के आँखों मैं ांसो नहीं देख सकती ....... गीता को विक्रम से तू कोई मतलब hi नहीं था मगर वह अपनी बौआ को रट हुवे नहीं देख पाई आवर गीता भी रोने लगी

नर्स : मेम प्लीज आप अभी इनके पास मत रोइये अभी इनकी तबियत का ख्याल कीजिये ........ नर्स के कहने पर सुनीता ने जल्दी से अपने ांसो पूछ लिया ....... देख मैं नहीं रो रही चल अब तू भी चुप होजा आवर सुनीता जल्दी से रूम से निकल गयी ......... नर्स ने गीता के जखम को देख कर दवा खिला कर बगल वाले कमरे मैं चली गयी जो उसे रहने को दिया गया था

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इधर नैना आवर माया एक साथ छत्त पे सो रही थी रात मैं नैना छत्त पे इधर उधर घूम कर नल देख रही थी मगर नैना को नल नहीं मिला नैना को पायस लगी जब नल नहीं मिला तू माया के पास गयी ....... बड़ी माँ उठिये न मुझे पानी पीना है नैना माया को हिलाते हुवे कहा ........ तू नीचे जाकर पिले गुड़िया माया ने निनाद मैं hi कहा ............ बड़ी माँ मुझे दर लग रहा है देखिये कितना अँधेरा है आप भी चलिए न मेरे साथ मुझे सो सो भी लगी है नैना ने फिर से माया को हिलाते हुवे कहा

माया : तुझे कहा था न गुड़िया पानी का एक बोतल लेले मगर मेरी बात सोंटी hi नहीं चल जब तक तू मुझे नहीं ले जाती मुझे सोने नहीं देगी तू आवर सर पे मर दिया ..... बड़ी माँ मुझे के पता था के छत पे नल नहीं होगा मैंने सोचा छत्त पे नल होगा तू पि लुंगी ......... है तुझे सब पता है चल अब माया ने कहा आवर दुनो नीचे चली गयी .......... माया नीचे जाकर बाथरूम मैं चली गयी आवर नैना भी माया के पीछे बाथरूम मैं चली गयी जो घर के बहार था बाथरूम

माया : गुड़िया तू बहार जा मैं अभी पेशाब कर के आ रही हुईं फिर तू कर लेना ....... नहीं मुझे दर लग रहा है मैं आप के साथ hi रहूंगी आवर माया के पल्लू पकड़ लिया नैना ने

माया : है है ठीक है मेरी डरपोक गुड़िया रानी मगर मेरी पल्लू तू चोदे कर दूसरे तरफ मुंह कर के खड़ा रह ......... मैं डरपोक नहीं हुईं बड़ी माँ वह तू गाओ है इस लिए चढ़ी दर लग रहा है सोनिये कैसी कैसी आवाज़े आ रही है गाओ मैं

माया : है मुझे पता है अब चुप होजा कोई सूने गए तू के कहेगा आवर माया साड़ी उठा कर बाथ कर मूतने लगी जो माया की छूट से सिटी की आवाज़ आ रही थी रात के अँधेरे मैं आवर भी जयादा आवाज़ कर रही थी .......... मगर नैना तिरछी नज़र से देख रही थी माया के बड़ी गंद को देख रही थी जो बैठने से माया की गांड बहुत hi बड़ी लग रही थी ...... कितनी बड़ी है बड़ी माँ की गांड नैना मन मैं सोच रही थी ........... गुड़िया गुड़िया कहा खो गयी चल जल्दी से पेशाब कर चलते है मैं बहार हुईं माया मूतने के बाद कहा ............ नहीं बड़ी माँ आप एहि रहिये वर्ण मैं पेशाब नहीं करुँगी .... ठीक है बाबा मैं एहि पे हुईं जल्दी कर मेरी पागल बेटी ........ नैना भी मूतने लगी मगर नैना जब पेशाब कर रही थी तू उसकी भी आवाज़ माया की तरह hi बाज रहा था सिटी की तरह ... ये के बड़ी माँ भी जब पेशाब कर रही थी तू उनकी भी सिटी की तरह आवाज़ आ रही थी आवर मेरी भी मगर ये कैसे हो सकता है बड़ी माँ की तू शादी हो गयी है आवर मेरी तू अभी नहीं हुवी है नैना पेशाब कर रही थी आवर सोच भी रही थी

नैना : बड़ी माँ आप मुझे सबसे जयादा प्यार करती है की नहीं छत्त पे आने के बाद कहा ............ है मेरी बदमाश गुड़िया रानी मैं तुमेह सबसे जयादा प्यार करती हुईं मगर इतनी रात को तू पूछ क्यू रही है चल अब सो जा

नैना : बड़ी माँ एक बात पूछो आप से गुस्सा तू नहीं करुँगी न ........ माया को पता था जब तक ये पूछ नहीं लेगी मुझे सोने नहीं देगी इस लिए माया ने पूछने को कहा

नैना : नहीं पहले मेरी कसम खाइये आप गुस्सा नहीं करेंगी ........... है ठीक है बाबा मेरी गुड़िया की कसम मैं तुझे कुछ नहीं कहूँगी अब जल्दी से पूछ के पूछना है गुड़िया मुझे निनाद आ रही है माया अंगराई लेते हुवे कहा

नैना : ठीक है आप ने मेरी कसम खली इस लिए पूछ रही हुईं ... बड़ी माँ जब आप पेशाब कर रही थी तू आप की वह से सिटी की आवाज़ आ रही थी आवर जब मैंने किया तू मेरी भी आप की तरह hi आवाज़ आ रही थी ये कैसे हो सकता है मेरी तू अभी शादी भी नहीं हुवी है तू एक जैसी आवाज़ कैसे हो सकती है ............. माया जो अभी उसे निनाद आ रही थी मगर नैना के सवाल से उसकी निनाद उड़े गयी ....... तू आज कल उल्टा सीधा बहुत बाटे करने लगी है चुप चाप सो जा नहीं तू मेरे हाँथ से मार खायेगी तू माया ने चढ़ी गुस्सा मैं कहा आवर पलट कर सो गयी ................. बड़ी माँ आप ने कहा था आप गुस्सा नहीं करेंगी जाइये मैं आप से बात नहीं करुँगी आवर नैना भी दूसरी तरफ मुंह कर के सो गयी ............ हे भगवन जी कैसी बेटी दिया है थोड़ी तू इसे अकाल दे देते अब जब तक इसे जवाब नहीं मिल जाता मुझसे बात भी नहीं करेगी इसे बताया hi पड़ेगा

माया : अरे मेरी गुड़िया बेटी सो गयी के ..... नहीं मैं आप की गुड़िया बेटी नहीं हुईं मैं बस गीता दीदी की गुड़िया हुईं मुझे कोई प्यार नहीं करता है आप ने झूट बोलै के सबसे जयादा प्यार करती है नैना झूठा गुस्सा देखते हुवे कहा .... मेरी गुड़िया मुझसे कितना प्यार करती है माया ने कहा ... अब माया तू इस का जवाब नहीं दे सकती थी तू थोड़ी अपना दिमाग लगाया

नैना : मैं तू अपनी बड़ी माँ से बहुत बहुत पैर करती हुईं ..... तू मेरी बस एक बात तू मान hi सकती है गुड़िया बेटी मेरी माया ने कहा ......... है मैं तू आप की हर बात मानती हुईं नैना ने मासूमियत से कहा .......तू ठीक है जब तुम्हारी शादी हो जायेगी तब मैं तुमेह सब बताउंगी ठीक है अब प्रॉमिस करो उससे पहले ये बात नहीं पूछोगी माया ने कहा ......... ठीक है जब मेरी शादी हो जायेगी तू पक्का आप बताइये गए न नैना ने तैश मैं कहा ........ है मैं सब अपनी गुड़िया को बता दूंगी चलो अब सोते है ...... नैना माया को पकड़ के सो गई ........... कैसी कैसी सवाल पूछती है ये लड़की अब इसे के बताती के मेरी छूट भी तेरी जैसी hi है क्यू की गीता ऑपरेशन से हुवी है माया ने मन मैं कहा

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काकी काकी कहा हो आप एक लड़का भागते हुवे आया ....... के हुवे भोला तू इतना भाग कर क्यू आ रहा है आवर परेश कहा है वह तू तेरे साथ hi तू लड़की काटने गया था रुक्मणि ने कहा

भोला : काकी परेश को छोटे राजा साहब ने पकड़ लिए है ........ राजा साहब ने पकड़ लिए है मगर क्यू रुक्मणि ने कहा ...... मुझे नहीं पता काकी हम तू लकड़ी काट रहे था आवर राजा साहब के आदमी आ कर परेश को ले गए भोला ने कहा ....... भोला तू एहि मेरे घर पे hi रहना गौरी आवर निम्मी घर आकर पूछे तू बता देना मैं जंगल गयी हुईं आवर रुक्मणि भागते हुवे राजा के क़िले चली गयी ..... मगर रुक्मणि किल्ला के बहार hi पहरदार ने रोक दिया .......... कौन हो तुम आवर कहा भागे जा रही है जानती नहीं है यह कोई अपने मर्ज़ी से अंदर नहीं जा सकता है पहरदार ने कहा

रुक्मणि : भैया भगवन के लिए मुझे अंदर जाने कीजिये मारा बीटा अंदर है मैं राजा साहब के पैरो गिर के मांफी मनाग लुंगी मेरे बेटे से कोई भूल हो गयी होगी तू मुझे जाने दे.... आवर पहरदार के पेअर पकड़ कर रुक्मणि रोने लगी ........ पहरदार से रुक्मणि का रोना देखा नहीं गया तू वह दूसरे पहरदार को अंदर भेजा बैठने के लिए .......... कुछ वकत बाद पहरदार आकर रुक्मणि को अंदर भेज दिया ......... रुक्मणि भागते हुवे जाकर चौकट पे अपने सर रख दिया आवर रो रो कर दया की भीख मांगने लगी

राजा कुंवर सिंह : तेरे बेटे ने बहुत बड़ा पाप किया इसने मेरी बहन को देखने की कोसिस की है आवर इस की सजा मौत है ........... हम पे रहम करे महाराज मेरे बेटे से भूल होगयी है आप चाहे तू उसकी जगह मुझे मार दीजिये मगर मेरे बेटे को छमा करे महाराज रुक्मणि ने दहकते हुवे कहा

कुंवर : नहीं पाप इसने किया है तू सहज भी इसे hi मिलेगा ........ तभी कुंवर के एक सेवक ने उसके काम मैं कुछ कहा आवर रुक्मणि की तरफ इशारा किया ...... कुंवर रुक्मणि के तरफ देख कर उसकी आँखों मैं छम्मक आ गयी
 
. अपडेट 41

रुक्मणि के साड़ी भी फटे हुवे था आवर आवर पल्लू भी सीने से नीचे गिरे थे तू आवर रुक्मणि नीचे बाथ कर हाँथ जुड़े रो कर रहम की भीख मांग रही थी मगर कुंवर रुक्मणि के आधी नंगी चूंकि देख रहा जो पसीने से भींग कर चमक रहा था आवर रुक्मणि के बेलौस भी कही कही से फटे थे

रुक्मणि : महाराज हम पे दया करे मैं अपने बेटे को लेकर इस गाँव से चली जाउंगी चोदे दीजिये महाराज मेरे बेटे को उससे अनजाने मैं भूल हो गयी होगी

कुंवर : देखो अनजाने मैं hi सही मगर तुम्हारे बेटे ने पाप किया है मेरी बहन को नहाते हुवे देखने की जो कभी उसे मैं मनाफ़ नहीं कर सकता ...... मगर तुम चाहो तू मैं उसे मनाफ़ कर सकता हुईं मगर तुमेह मुझे खुश करना होगा कुंवर रुक्मणि के आधी नंगी जिसम को हवसी नज़र से देखते हुवे कहा ..... रुक्मणि एक वकत के लिए कनाप गयी आवर नीचे hi देखते हुवे रोटी रही अपनी बेबसी पर

कुंवर : के सोच रही हो मैं चहुँ तू तुमेह पुरे गाओ के सामने तुम्हारी जवानी को लूट सकता हुईं मगर उसमे मजा नहीं आएगा मैं तुम्हारी मर्जी से भोगना चाहता हुईं जो हम दुनो को hi मजा आएगा तुम के चाहती हो जल्द मुझे जवाब दू नहीं तू कल सुबह गाँव के बेच चौराहे पे सजा दी जाएगी आवर सब को पता चल जायेगा की कुंवर सिंह के बहन को देखने की सजा सिर्फ मौत है ........ नहीं महाराज मुझे मंज़ूर है मेरे बेटे को चोदे दीजिये रुक्मणि अपने ांसो पोछते हुवे कहा ...... फिर ठीक है ..... इसे ले जाकर अच्छे से सजा कर मेरे कमरे मैं लाओ कुंवर अपने नौकरानी से कहा .............. एक लकड़ी जो बहार से चुप कर साडी बाटे सून रही थी वह वह से भागते हुवे एक कमरे मैं गयी जो भागने से हनफ़ भी रही थी

राजकुमारी : के हुवा बिल्लो तू हनफ़ क्यू रही है .......... राजकुमारी जी ये पाप होने से आप hi रुक सकती है नहीं तू आज एक माँ की इज़्ज़त लूट जाएगी बिल्लो ने कहा

राजकुमारी : तू के बोल रही है मुझे कुछ समझ मैं नहीं आ रहा है मुझे साफ़ साफ़ बता देख मैं पहले से hi चिंतित मैं हुईं के मैं अपने परेश को यह से कैसे बचाओ. ....... मैं भी वही कह रही हुईं राजकुमारी जी.... आवर जो कुछ भी सोना था राजकुमारी को बता दिया बिल्लो ने

राजकुमारी : ची कितना घटिया है मेरे भाई जो अपनी माँ की उम्र के औरत के साथ इतनी गन्दी काम करने वाला है मैं आवर ऐसे नीच भाई के साथ नहीं रह सकती तुम अभी जाकर भीमा को कहो वकत आ गया है के अब मैं यह की राजकुमारी बनूँगी तयारी करे भीमा आज रात को hi हमला करना है ..... ठीक है राजकुमारी जी कह कर बिल्लो चली गयी ......... बहुत सह लिए तुम्हारा अतयाचार तुमेह मरना hi होगा अब आवर तुमेह औरत आवर लड़की के ज़िंदगी बर्बाद नहीं करने दूंगी राजकुमारी ने कहा ........ कुंती तू अभी परेश के घर जाकर उसकी गौरी दीदी को सब बात बता आवर उनसे खाना अभी गुस्से मैं कुछ भी मत करने को कहना मैं परेश आवर माँ जी को कुछ भी नहीं होने दूंगी .......... ठीक है राजकुमारी जी कह कर कुंती भी गाँव की तरफ चल दी ............ इधर रुक्मणि बस रो रही थी अपनी किस्मत पर ..... रुक्मणि को अच्छे से नहला कर उसे रानियों वाला कपडे पहना कर कुंवर सिंह के रूम मैं लेकर चली गयी .. जैसे आज रुक्मणि की सोहागरात हो ........... महाराज आप बहुत hi किस्मत वाले है जो गाँव की सबसे खूबसूरत औरत की चौड़ाई करने वाले है .. जानते है गाँव के जवान को छोड़िये बोड़ेह भी इसके पीछे पड़े रहते है के कब इस छोड़ने का मक्का मिले मगर आज आप को छोड़ने का मक्का मिला मुंसी ने कहा .

कुंवर : है मुंसी जी मैं भी कब से तडप रहा था इस के लिए इस लिए hi तू मैंने परेश को पकड़ लिया है पहले इसे अपना रंडी बनाऊगा भी इसकी बेटी गौरी को जो इसकी हो तरह खूबसूरत है .....

अरे भोला तू मेरे घर के कर रहा है आवर परेश कहा है .. जब गौरी घर आई तू देखा घर के बहार hi भोला खड़ा था तू पूछा आवर माँ माँ कहते हुवे घर के अंदर चली गयी जो अंदर रुक्मणि नहीं थी

गौरी : भोला तुम ने बताया नहीं आवर ये माँ कहा चली गयी छोटी तुझे भोक लगी है न ले खले ........ वह दीदी काकी जंगल की तरफ गयी है भोला नीचे देखते हुवे कहा जो सैयद रो भी रहा था उसे अब अपने दोस्त की फिकर भी हो रहा था आवर रुक्मणि भी चली गयी थी

गौरी : भोला के छुपा रहा है ऊपर मेरी तरफ देख कर बता देख मुझे अच्छा नहीं लग रहा है मुझे ऐसा लग रहा है जैसे कुछ बोरा हो रहा है मेरी माँ के साथ .......... दीदी मुझे मनाफ़ कर दू मुझे काकी ने बताने के लिए मन किया है भोला आँखों से ांसो पोछते हुवे कहा जो बार बार बाह रहा था

गौरी : देख भोला तुझे परेश के दोस्ती का वास्ता मुझे बता दे के हुवा है मेरी माँ के साथ नहीं तू मैं अभी अपनी जान दे दूंगी आवर कुल्हाड़ी उठा लिया ...... अब भोला के पास कोई रास्ता नहीं था बताने के सिवा तू भोला ने सुरो से बता दिया परेश को कैसे पकड़ के ले गए आवर फिर काकी भी चली गयी ........ गौरी को भोला जैसे जैसे बता रहा था वैसे वैसे गौरी की चेहरे का रंग बदल रहा था

गौरी : भोला तू छोटी को लेकर पहाड़ी वाली माता की मंदिर मैं जा मैं अभी माँ आवर भाई को लेकर आती हुईं मैं आज उस नीच इंसान को ज़िंदा नहीं छोड़ने वाली बहुत सह लिया हम गाँव वालों ने उसका जुलम आज वह रहेगा ये मैं ....... दीदी आप अकेले नहीं लड़ सकती उनसे मैं जनता हुईं आप बहुत बहादुर है मगर आप उसकी हजारो आदमियों से अकेली नहीं लड़ सकती है भोला ने कहा .......

गौरी : तू के करू मरने दूँ अपने माँ आवर भाई को तू जनता नहीं है कितनी दुःख किया है कितनी राते मैंने रो रो कर बीते है हर दिन घुट घुट कर जिया है मैंने तब जाकर आज मुझे एक भाई आवर बहन मिली है तू के मैं उसे ऐसे hi मरने दू नहीं बिलकुल नहीं मैं अपने माँ आवर भाई को बचा कर लाऊंगी या उन के साथ hi मर जाउंगी ....... दीदी मैं भी आप के साथ जाउंगी निम्मी ने कहा जो भूखी थी आवर खाना भी नहीं खा पाई थी अभी

गौरी : नहीं छोटी तू भोला के साथ जा मैं माँ आवर भाई को लेकर अभी अति हुईं आवर कुल्हाड़ी लेकर घर से निकल गयी ....... निम्मी भी गौरी के पीछे चल दी ...... मगर घर के बहार hi कुंती मिल गयी गौरी को ...... कहा जा रही है गौरी कुंती ने कहा जो गौरी की अच्छी सहेली भी थी

गौरी : कुंती मैं आज कुंवर को जान से मर दूंगी उसने मेरी माँ आवर भाई को पकड़ लिया है आवर तू जानती जिस को भी वह पकड़ कर ले जाता है उन की आज तक लास भी नहीं मिली है मैं उसे जान से मर दूंगी

कुंती : देख गौरी पागल मत बन पहले घर मैं चल मुझे राजकुमारी ने भेजा है ........ राजकुमारी के नाम सून कर गौरी घर के अंदर चली गयी साथ मैं भोला आवर निम्मी भी ........ एक राजकुमारी hi थी जो गाँव वाले की हमेशा hi मदद करती थी अपने भाई से छिपा कर .... ऐसा नहीं था के कुंवर सिर्फ गाँव के hi माँ बहन पे गन्दी नज़र रखता था वह अपनी बहन को भी अपने नीचे लाना चाहता था आवर ये बात कुंती ने गौरी को पहले hi बता चुकी थी .... आवर ये भी के राजकुमारी भी अब अपनी आदमी भी इखट्टा कर रही है कुंवर से छिपा कर वह एक दिन युद्ध भी कर सकती है इस लिए राजकुमारी की नाम सून कर गौरी घर के अंदर चली गयी

गौरी : कुंती तुझे पता है मेरी माँ आवर भाई कैसे है आवर राजकुमारी ने तुमेह यह क्यू भेजी है .... गौरी तू बिलकुल भी चिंतित मत हो राजकुमारी के रहते हुवे तुम्हारी माँ आवर भाई को कुछ भी नहीं हो सकता है .... जो राजकुमारी हम गाँव वालों को बिना कोई सवर्थ के मदद करती है वह अपने प्यार के लिए कुछ भी कर सकती है ... आवर फिर कुंती सब कुछ बता दिया जो राजकुमारी ने कहा था आवर ये भी के अब जंग होना तैय है ... मगर तुमेह अभी कुछ करने की ज़रूरत नहीं है इतना कह कर कुंती चली गयी .......... इधर बिल्लो जाकर भीमा से कह दिया जो भी राजकुमारी ने कहने को कहा था आवर ये भी के हमला आज रात को hi करना है .... ठीक है बिल्लो राजकुमारी से कह देना हमला आज रात को hi होगा हम कब से इस दिन का इंतज़ार कर रहे थे भीमा ने कहा

भीमा : शम्भो तुम अभी निकल पहाड़ी के पीछे मेरा दोस्त के पास आवर कहना आज hi हमला करना है वह अपने आदमियों को लेकर क़िले के पीछे मेरा इसारे का इंतज़ार करे .... ठीक है भीमा भाई कह कर शम्भो चला गया.......... तिलक तुम जाकर यह पे जितने भी राजकुमारी के वफादार है उनसे कहना मुझसे मिलने को खाने के बाद ..... ठीक है भीमा भाई कह कर तिलक भी चला गया

के मैं अंदर आ सकता हुईं राजकुमारी जी भीमा ने पूछा ........ है भीमा काका आ जाइये राजकुमारी ने कहा

भीमा : राजकुमारी मैंने साडी तयारी कर लिया है अब बस आप की होकम का इंतज़ार है

राजकुमरि : है भीमा काका पहले हमेह यह मेरे जितने भी वफादार है उनको साथ लेकर पहले परेश आवर माँ जी को बचाना है फिर हमला करेंग ..... है राजकुमारी जी हम ऐसे hi करें हे आप फिकर मत कीजिये आप के बहुत से है जो आप के वफादार है आवर कई कबीले के शारदार भी आप के साथ है भीमा ने कहा

राजकुमारी : ठीक है भीमा काका हम रात के अँधेरे मैं अचानक हमला करेंगे ..... ठीक है राजकुमारी जी आप अभी मेरे साथ चलिए आप की रह देख रहे है जो भी आप के वफादार है भीमा ने कहा

राजकुमरि : अभी काका मगर मेरे भाई को सक hi जाइएगा ..... नहीं राजकुमारी अभी वह सरब पिने मैं है आवर हम सभी क़िले के थाइये खाने मैं मिलेंगे भीमा ने कहा

राजकुमारी : ठीक है भीमा काका आप चलिए मैं आ रही हुईं ... आवर भीमा चला गया ..........

के हुवा कुंती तुम ने गौरी दीदी को बता दिया है न राजकुमारी ने जब कुंती को देखा तू पूछा ........... जी राजकुमारी जी मैंने गौरी को सब बता दिया है वह तू अकेले hi यह आ रही थी मगर आप के नाम सून कर मेरी बात मन गयी चलो भगवन का सक्रिय के वह यह अकेली नहीं आई गौरी दीदी राजकुमारी ने कहा

इधर बेचारी कमरे मैं रुक्मणि ज़िंदा लॉस की तरह पड़ी थी बस दाहक रही थी ..?. तभी वह कुंती आ गयी काकी काकी 2 3 बार कुंती के बोलने पर रुक्मणि ने देखा कुंती की तरफ जो उसकी आँखों से ांसो बहने पर लाल हो गयी थी

कुंती : काकी आप रोइये मत कुछ नहीं होगा आप को ........ बेटी मुझे अपनी नहीं परेश की फिकर है अगर उसे कुछ हो गया तू मेरी दुनो बेतिया का के होगा तुम जानती हो गौरी एक पल परेश को नहीं देखती तू पूरा गाँव मैं खोजती फिरती है अगर उसे पता चला तू वह भी यह आकर कुंवर को मर देगी या खुद मर जायेगी मैं बस अपने परेश को बचना चाहती हुईं चाहे मेरी इज़्ज़त hi चली जाये रुक्मणि ने रट हुवे कहा

कुंती : काकी आप फिकर मत करिये गौरी को सब कुछ पता है वह अभी यह नहीं आएगी मुझे यह राजकुमारी जी ने भेजा है आप को बताने की वह आप को आवर परेश को बचना लेंगी बस आप कुछ देर तक कुंवर को यह फसा कर रखिये गए ...... मैं कुछ समझी नहीं बेटी तुम कहना के चाहती हो राजकुमारी भला हम्हारी मदद क्यू करेंगी उनको वजह से hi तू मेरे बेटे को पकड़ लिए है कुंवर ने रुक्मणि ने आश्चर्य से कहा

कुंती : इस लिए राजकुमारी जी मदद करेगी काकी की वह परेश से बचपन से पैर करती है
 
अपडेट. 42

इधर कुंवर आज जैम के मस्ती मैं सरब पि रहा था आवर एक नौकरानी को अपने जांघ पे बैठा कर उसकी कभी चूंकि तू कभी अपना उंगली उस के छूट मैं दाल कर मजा ले रहा था औरत बस सिसक रही थी आवर सरब बना कर अपने हांथो से कुंवर को पीला रही थी

कुंवर : पारो के मेरी बुल बुल तैयार है सोहागरात मनाने के लिए .... ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह जी राजकुमार मैंने उसे आज ऐसे सजाया है के आप को उसे देख कर सबर भी नहीं होगा आप को उसका जिसम सोच मैं बहुत गदराई हुवी है उसे तैयार करते वकत मुझे भी उससे जलन हो रही थी पारो ने कहा

राजकुमार : सही कहा पारो रंडी तुम ने चल अब मेरा लैंड

कुंवर : ठीक है चल पहले मेरे लैंड की भी मालिश कर दे आज मुझे रात भर उसे छोड़ना है रुक्मणि को आवर पारो की चूंकि को मसलने लगा .... ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह राजकुमार ज़रा धीरे से दबाइये वर्ण मेरी साडी दूध गिर जायेगा तू मेरा बेटे भूख से रोटा रहे गए अब पारो ने कहा जो अब पारो के आँखों मैं ांसो था आवर सैयद दर्द भी ...... पारो जब से यह शादी कर के आई थी वह बस अपने पति के साथ बस 2 महीने hi बिता पायी थी फिर पारो पे राजकुमार की नज़र पड़े गयी तू उसे अपने क़िले मैं hi रख लिया राजकुमार ने पारो के पति भी साथ मैं रहता था मगर हर रात राजकुमार hi पारो की चौड़ाई करता था पारो को भी पता नहीं है के उसके बेटे का बाप कौन है

राजकुमार : साली जयादा नखरे मत कर नहीं तू तेरे बेटे के साथ पति को भी मर दूंगा चुप चाप लैंड की मालिश कर आज मैं बहुत खुश हुईं तू आज तुझे मैं तेरे पति के साथ सोने का कह रह हुईं .... के आप सच कह रहे है राजकुमार जी पारो को बहुत कैसी हुवी के आज वह अपने पति के साथ इतने दिन के बाद रात गुजरेगी ........ है तू आज अपने पति के साथ सो सकती है लेकिन ये गांड उसे मत मरने देना कुंवर पारो के गांड मैं उंगली डालते हुवे कहा

इधर भीमा राजकुमारी के जितने भी वफादार थे उन सब को लेकर तहखाने मैं राजकुमारी के आने का इंतज़ार कर रहा था .... जो जल्द hi राजकुमारी वह आ गयी

राजकुमारी : मुझे बहुत खुसी है के आप लोग आज भी मेरे पिता जी के वफादार है आवर उनके बाद आप सब मेरे साथ है मेरे भाई ने अब बहुत जुलम कर लिए है अब उसका पाप का घड़ा भर गया है अब उस घर को हम सब मिल के फोड़े देंगे के आप सब मेरे साथ है .... सभी ने अपनी तलवार उठा कर एक साथ कहा राजकुमारी हम सब आप के साथ है हम आप के लिए अपने जान भी दे देंगे आप बस हुलाम कीजिये

राजकुमरि : ठीक है आप सब तैयार रहिये आवर भीमा काका का इसारे का इंतज़ार करे .... काका अभी परेश कैसे है राजकुमारी ने भीमा से पूछा ..... राजकुमारी जी परेश को बहुत hi बोरी तरह से मारा है वह अभी सैयद बेहोश है भीमा ने कहा

राजकुमरि : ठीक है भीमा काका पहले हम परेश को hi बचना हॉग .. जैसा आप की होकम राजकुमारी जी भीमा ने कहा ..... आवर राजकुमारी चली गयी अपने कमरे की तरफ

शाम होने के बाद कुंवर नशे मैं अपने कमरे मैं गया तू देखा रुक्मणि लाल जुड़े मैं बैठी थी कुंवर रुक्मणि के पास जाकर रुक्मणि के पीछे से पकड़ लिए .... जब कुंवर ने रुक्मणि को पकड़ा तू रुक्मणि आगे बहार गयी रुक्मणि का सरीर एक पल के लिए कनाप गया .......

कुंवर : ओह जाने मन कहा आगे भागे जा रही है आ आज मेरा भोक मिटा दे मैं सुबह hi तेरे बेटे को घर भेज दूंगा आवर फिर से रुक्मणि के गर्दन पे अपनी जीब से चेंज लगा .... रुक्मणि बस सिसक रही थी आवर अपने हाँथ से बिस्टेर को पकड़ रही थी ...... कुंवर रुक्मणि के गर्दन छत्ते हुवे अपना एक हाँथ ले जाकर रुक्मणि के पेट को पकड़ कर मलने लगा ... रुक्मणि के बस आहे भर रही थी ... ओह कमला का जिसम है तेरी आज मैं तेरी जिसम की साडी गर्मी निकल दूंगा आवर अपना हाँथ आवर लेकर रुक्मणि के सीने से पल्लू नीचे गिरा दिया हहहहह के चूंकि थी रुक्मणि की पहाड़ के जैसे बेलौस मैं टाइट लग रहा था कुंवर ने रुक्मणि के चूंकि को पकड़ कर दबाने लगा ओह्ह्ह्ह कितनी बड़ी है तेरी ये रास भरी चूंकि रुक्मणि जी आवर कुंवर रुक्मणि के जिसम से खेल भी रहा था आवर गन्दी बात भी कह रहा था रुक्मणि को गरम करने के लिए लेकिन रुक्मणि बस आँखों से ांसो बहा रही थी आवर भगवन से मिनट कर रही थी के मुझे इस नीच इंसान से बचा ले ...... मगर कुंवर रुक्मणि के जिसम से खेल रहा था कुंवर अपना एक हाँथ से रुक्मणि के साड़ी को उतर भी रहा था आवर अपने जीब से रुक्मणि के गर्दन से लेकर पीठ तक चाट रहा जो रुक्मणि का सरीर कनाप रहा था कुंवर रुक्मणि के साड़ी निकल कर बीएड के नीचे फेक दिया अब रुक्मणि सिर्फ पेटीकोट आवर बेलौस मैं थी आवर अपने हाँथ से अपने चूंकि को छिपाने की नाकाम कोसिस कर रही जो रुक्मणि के चूंकि कभी बड़ी थी .. कुंवर अब अपना एक उंगली रुक्मणि के होंठ पे सहलाने लगा रुक्मणि को भी अब सरीर गर्म होने लगा था कुंवर एक तरफ तू जीब से रुक्मणि सरीर से खेल रहा था आवर एक हाँथ की उंगली से रुक्मणि के होंठ को को रहा था आवर एक हाँथ से रुक्मणि के चूंकि मसल रहा था अब रुक्मणि की सरीर अब जवाब दे रही थी आवर नीचे से रुक्मणि के फूलनदेवी भी भींग रही थी कुंवर रुक्मणि के जिसम से कहते हुवे hi अपना होंठ रुक्मणि के होंठ पे सत्ता दिया आवर चूसने की कोसिस करने लगा ... मगर रुक्मणि अपना मुंह इधर उधर करने लगी ... मगर कुंवर भी साला खिलाडी था उसने रुक्मणि के कमर को दुनो हांथो से पकड़ कर अपने तरफ सत्ता लिया जो रुक्मणि का मुंह सीधे कुंवर के मुंह के सामने आ गया आवर तुरंत hi कुंवर ने अपना होंठ रुक्मणि के होंठ पे रख कर चूसने की कोसिस करने लगा मगर रुक्मणि अपना होंठ बंद करने की कोसिस कर रही थी जब देखा कुंवर ने की ये ऐसे नहीं मानेगी तू कुंवर ने रुक्मणि के जल्दी से पेटीकोट भी निकल दिया आवर बेलौस भी घीच कर फेक दिया जो बेलौस के बॉटम टूट कर गिर गए अब रुक्मणि सिर्फ नंगी बीएड पे अपने सरीर को छुपाने लगी एक हाँथ अपने छूट पे रख लिया आवर एक हाँथ अपने चूंकि पे जो उसकी एक चूंकि भी नहीं चुप रही थी अब कुंवर ने रुक्मणि के चूंकि पकड़ कर मुंह मैं लेकर चूसने लगा आवर एक हाँथ रुक्मणि के जिसम पे चला रहा था आवर धीरे धीरे उसे नीचे ले जा रहा था रुक्मणि के छूट की तरफ जो रुक्मणि के छूट भी अब पानी से भींग रही थी

इधर गौरी अपने घर के आँगन मैं बेचैन हो कर घूम रही थी आवर गौरी के पीछे निम्मी भी घूम रही थी ....... दीदी घूमने से के होगा चलिए न माँ आवर परेश भाई को लेकर कर एते है नहीं तू वह क़िले वाला बदमाश आदमी माँ भाई को जान से मर देगा दीदी मुझे माँ के पास जाना है निम्मी गौरी के हाँथ पकड़ कर कहा

गौरी : नहीं छोटी कुछ नहीं होगा माँ आवर भाई को अगर कुछ भी हुवा तू मैं उस क़िले मैं रहने वाला हर एक को मर दूंगी जो हम्हारी गरीबी का फायदा उठा कर हम्हारी इज़्ज़त को लूट लेता है ..... तू दीदी चलिए चलते है माँ आवर परेश भैया को बचने उस सैतान से निम्मी तंगी उठाकर अपनी गौरी दीदी से कहा........ गौरी अपनी छोटी बहन की तडप देख कर झट से अपने गले लगा लिया

गौरी : है हम जायेंगे माँ आवर भाई को उस सैतान से छोडने ठीक है मगर पहले हम माता रानी के मंदिर मैं जायेंगे फिर वह से माँ की पूजा करने के बाद माँ आवर भाई को बचने चैलेंज हम ठीक है ............. भोला तुम अभी छोटी को मंदिर लेकर चल मैं पूजा की सामान लेकर आ रही हुईं गौरी ने कहा ........

भोला : ठीक है गौरी दीदी मैं निम्मी को लेकर जा रहा हुईं आप भी आ जायेगा ....... दीदी मैं ये दुनो कुल्हाड़ी लेकर जा रही हुईं आप जल्दी पूजा का सामान लेकर आ जाना निम्मी ने कहा

गौरी : ठीक है छोटी मगर एक कुल्हाड़ी तू मुझे दे आवर है भोला भैया की बात सोना जब तक मैं मंदिर पे न आ जॉन ...... भोला निम्मी को लेकर चला गया उन दुनो के जाने के बाद गौरी अपने दुपट्टे को काश कर अपने चाहती पे बांध कर कुल्हाड़ी लेकर चल दिया क़िले की तरफ

इधर कुंवर रुक्मणि के छूट को जीब से चाट रहा था रुक्मणि बिस्टेर पकड़ कर कुंवर से मिनट कर रही थी के मुझे चोदे दू मैं तुम्हारी माँ के जैसी हुईं आवर सिसक भी रही थी मगर कुंवर रुक्मणि के जीब से तू चाट रहा था आवर हाँथ से रुक्मणि बड़ी चूंकि को बेदर्दी से मसल रहा था रुक्मणि दू तरफा हमला सह न पायी आवर अपने छूट से पानी चोदे दिया जो कुंवर रुक्मणि के छूट का सारा पानी पिने लगा रुक्मणि झड़ने के बाद सुस्त होकर बिस्टेर पर सिर्फ हांफ रही थी ....... चल जाने मन अब जल्दी से मेरे लैंड को गिला कर दे अपनी रास भरी होंठ से नहीं तू मुझसे सबर नहीं हो रहा है ऐसे hi तेरी छूट मैं दाल कर छोड़ने लग जाऊंगा गए कुंवर ने कहा मगर रुक्मणि अब कुछ बोल नहीं रही थी अब रुक्मणि बस लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी

इधर भीमा तेज़ी मैं भागते हुवे राजकुमारी के कमरे को पिटे लगा तू बिल्लो ने गेट खोला .... के हुवा भीमा काका आप ठीक तू है बिल्लो ने पूछा .........

भीमा : नहीं बिल्लो राजकुमारी कहा है ....... काका राजकुमारी अभी तलवार पे धार लगा रही है बिल्लो ने कहा आप एहि रहिये मैं अभी बोलै रही हुईं राजकुमारी गजब हो गया गौरी यह आ गयी है आवर क़िले के बहार सब को काट रही है हमेह अभी इस वकत hi हमला करना होगा नहीं तू गौरी मरी जाएगी भीमा ने कहा

राजकुमारी : ये तू अच्छा नहीं हुवा काका ठीक है आप हमला कर दीजिये मैं परेश को बचने जा रही हुईं ...... भीमा वह से सीधे तहखाने मैं गया आवर सभी को लेकर हमला कर दिया जो राजकुमार के सैयद सभी लोग नशे मैं थे ....... इधर गौरी क़िले के बहार कुल्हाड़ी से काट रही थी आवर उसे 1 2 तीर भी लगी थी मगर गौरी अपने जखम की परवाह किये बगैर लड़ रही थी तन तक कबीले के साथी भी गौरी के साथ आ गए जो राजकुमारी के इसारे के इंतज़ार मैं थे जब एक लड़की को अकेले लड़ते देखा तू वह सभी गौरी के साथ लड़ने लगे

इधर अब कुंवर अपना लैंड को पकड़ कर रुक्मणि के छूट मैं दाल ने जा रहा था तभी कुंवर के गेट पे किसी ने दूर दूर से पीटने की आवाज़ उस की कानो मैं गयी ..... कौन है साला मैया छोड़ जो मुझे शांति से छोड़ने भी नहीं दे रहा है सेल को आज ज़िंदा नहीं छोडूं गए कुंवर ने अपनी तलवार दिवार से उतर कर गेट खोल कर वॉर कर दिया .. जो आगे एक आदमी था उसका का सर काट गया आवर एक पीछे हैट गया

राजकुमार : मुंसी तू साला तेरी हिम्मत कैसे हुयी मेरे कमरे को पीटने की ............. राजकुमार अभी आप को यह से बहगना होगा हमपे हमला हुवा है मुंसी घुटने पे बाथ कर कहा
 
उपडेट 43

जब राजकुमार ने सोना तू हरण रह गया

राजकुमार : किस्मे इतनी हिम्मत हो गयी जो मेरे क्यू हमला करने चला आया है

मुंसी : अभी जयादा वकत नहीं है आप जल्दी से कपडे पहन चलिए राजकुमार मैं आप रस्ते मैं सब बता दूंगा नहीं तू आप के जान को खतरा है हमारे लग भाग बहुत से लोग मर गए जय

राजकुमार जल्दी से फिर कमरे मैं गया आवर अपने कपडे पहनने लगा

रुक्मणि अभी भी बीएड पे लेट कर सिसक रही थी अपने जिसम को बेडसीट लपेट कर

राजकुमार : रुक्मणि तेरी किस्मत साली अच्छी है जो बच गयी मगर मैं जल्द वापस आऊंगा आवर तुझे रंडी की तरह चौड़ाई करूँगा

राजकुमार जल्दी कीजिये हमें अब यह से जाना चाहिए मुंसी कुछ लोगो को तलवार से काटते हुवे कहा

राजकुमार भी जल्दी से अपनी तलवार ले कर कमरे से बहार निकला तू देखा मुंसी अकेले लाडे रहा था


राजकुमार भी लड़ते हुवे क़िले के दूसरे तरफ भगा जी एक गुप्त रास्ता था जो जंगल मैं निकलता था

मुंसी भी राजकुमार के पीछे चला जा रहा

इधर राजकुमारी परेश को जहा रखा गया था वह पहुंची आवर परेश को देख कर चीख पड़ी राजकुमारी के चीखे सून कर पहिरदार राजकुमारी को रुकने के लिए आगे बढ़ने लगे मगर राजकुमारी के पास जाने से पहले hi ज़मीन पे गिर गए

राजकुमारी के पीछे जो साथी थे तीर से वॉर कर दिया

परेश को लोहे की कमज़ोर से बंधा गया था आवर परेश के जिसम से जगह जगह से खून निकल रहा था परेश दर्द मैं कहर रहा था

राजकुमरि भाग कर जल्दी से परेश के पास जाकर परेश को ज़ंज़ीर से आजाद किया राजकुमारी परेश को अपने बहन मैं भर लिया

राजकुमारी ; परेश तुम ठीक तू हो न तुम्हे. ....... मगर परेश बोलने के लायक नहीं थी उसकी आँखे बंद हो रही थी

राजकुमारी अपने साथियों को कहा मेरे कमरे मैं लेकर चलने को

इधर गौरी किसी घायल शेरनी की तरह लाडे रही थी गौरी के पूरा कपडे खून से रंग गए थे कबीले वाले की मदद से गौरी का हौसला आवर भी जयादा बछड़े गया था जो कुछ hi वकत मैं सब को मर दिया जो वह थे

इधर भीमा भी क़िले के अंदर अपने साथियों के साथ लाडे रहा था मगर भीमा के साथी जयादा मर रहे थे जो भीमा अपने साथियों को मरते देख कमज़ोर पड़े रहा फिर भी भीमा भागने के बजाए वह लड़ते hi जा रहा था

बढ़ जी परेश ठीक तू हो जायेगा न राजकुमारी ने कहा जो अपने सिर्फ राजकुमारी के लिए रखे गए थे बढ़ जी उनसे राजकुमारी ने पूछा

बढ़ : राजकुमारी आप चिंतित मत हो मैंने इनके जिसम पे जड़ी बोटी लगा दिया है आप बस इनका धयान रखे मैं अभी अपने रूम मैं hi हुईं

राजकुमारी : बढ़ जी आप अभी बहार मत जाइये उनका कोई भरोषा नहीं है वह आप को भी मार सकते है आप एहि रह कर परेश को देखते रहे मैं अभी अति हुईं

जाते हुवे राजकुमारी ने बिल्व को भी वही रहने को कहा

पारो तुम चिप क्यू रही हो जब राजकुमारी कमरे से बहार निकली तू पारो को चिपटे हुवे देखा

पारो : राजकुमारी जी मैं अपने बेटे को खोज रही हुईं वह कमरे मैं नहीं है

जब राजकुमारी ने पारो को देखा तू वह सोच मैं रो रही थी आवर उसकी आँखे भी रोने से लाल हो गयी थी

राजकुमारी : पारो रो मत तेरा बीटा बिल्व के पास है जा ले ले आवर सून तुझे पता है परेश की माँ कहा पे है

पारो : जी राजकुमारी राजकुमार के कहने पर मैंने उनेह राजकुमार के कमरे मैं लेकर गयी मुझे मनाफ़ कर दीजिये

पारो ने राजकुमारी पेअर पकड़ कर रट हुवे कहा

राजकुमारी : पारो रो मत तुमने कुछ भी गलत नहीं किया है मैं सब जानती हुईं तेरे बारे मैं चल जा तेरा बीटा भी रो रहा हुहा

पारो भागते हुवे गयी कमरे मैं

रसज्कुमारी भी तीजी से चलते हुवे अपने भाई के कमरे की तरफ गयी अपने साथियों के साथ

राजकुमारी : कुमार टुडे दे गेट को

कुमार ने एक लात गेट पे मारा आवर गेट खुल गया क्यू की गेट पहले से खोला हुवा था. गेट खुलते hi राजकुमारी अंदर चली गयी तलवार तने मगर वह राजकुमार नहीं था आवर रुक्मणि बस रो रही थी रुक्मणि अभी तक नंगी hi थी बस बेडसीट को लपेट लिया था रुक्मणि को मालूम भी नहीं चला था के यह युद्ध हो रहा है वह नस रो रही थी

राजकुमारी ने जब रुक्मणि के जिसम से बेडसीट खींचा तू

मुझे जाने दू राजकुमार मुझे चोदे दू कह कर रोने लगी

राजकुमारी : अरे माँ जी आप को कोई कुछ नहीं करेगा मैं हुईं राजकुमार. मीरा
 
उपडेट 44

गौरी अब धीरे धीरे किल्ले के अंदर जा रही थी सब को मरते हुवे आवर उसकी आँखे हर अपने माँ आवर भाई को ढूंढ रही थी मगर उसे माँ आवर भाई दिखाई नहीं दे रहे थे गौरी की हालत भी ठीक नहीं थी उसका बहुत कौन बाह चूका था अब राजकुमार के साथी भी बहुत काम hi ज़िंदा बच्चे थे जो बहार कबीले वाले थे अब वह भी अंदर आ रहे थे

इधर राजकुमारी भी रुक्मणि को लेकर उसी रूम मैं ले आई जिस रूम मैं परेश था जब रुक्मणि ने परेश को देखा तो वह अपना दर्द भूल गयी आवर परेश के पास जाकर चट्टी पिट कर रोने लगी

राजकुमारी : माँ जी आप रोइये मत परेश ठीक है अब कुछ देर तक राजकुमारी रुक्मणि को दिलासा देती रही तब जाकर रुक्मणि संत हुयी

राजकुमारी : बिल्व तुम एहि रहो मैं जा रही हुईं भीमा काका के पास. इतना कह कर राजकुमारी चली गयी राजकुमारी जैसा जैसा आगे बढे रही थी सब झुख कर राजकुमारी का सवागत कर रहे थे जब जब राजकुमारी जब किल्ले के दरबार तक पहुंची तो देखा राजकुमार के सभी साथी मरे गए है आवर राजकुमारी के जितने साथी घायल है उनेह ेलगे के लिए लेकर जा रहे

राजकुमारी : भीमा काका कहा पे है एक साथी से पूछा

राजकुमारी जी भीमा काका आवर गौरी का ेलगे हो रहा है साथी कहा

इधर राजकुमार गिरते भागते हुवे जंगल मैं निकल गया

मुंसी : राजकुमार अब हम कहा जायेंगे

राजकुमार : मेरे दोस्त के पास जो मेरा साथ देगा आवर मैं फिर से वह का राजकुमार बन जाऊंगा उसकी मदद से

आप का मतलब क्या है कही आप अर्जुन सिंह से मदद लेने तो नहीं चाहते आर्चाय से मुंसी ने कहा

राजकुमार : है मैं अर्जुन सिंह से hi मदद लेने वाला हुईं

मुंसी : आप को तो पता है वह कितना बड़ा कमीना इंसान है वह आप के साथ गद्दारी भी कर सकता है

अर्जुन सिंह : ये दोस्ती के नाम पर अब तक सब को धोका देते आया है पहले साथ मिल कर दूसरे गाओ के राजा को मरता है फिर अपने साथ लड़ने वाला राजा को भी मर कर खुद वह का राजा बन जाता है ये जहा भी अपना राज चलता है वह के लोगो का जीना हराम कर देता है इस के साथी जब चाहे किसी को जान से मर देते है किसी भी महिला को जहा चाहे वही पे चौड़ाई करने लगते है आवर उस लड़की या ोुरत के घर का मर्द बस देखते रहते है अर्जुन सिंह का खौप की वजह से अर्जुन सिंह के साथी भी बहुत ताकतवर है

राजकुमार : अब मेरे पास कोई रास्ता नहीं है उसकी मदद मुझे लेना hi पड़ेगा

आवर चल दिया अर्जुन सिंह के किल्ले की तरफ

इधर अब यहाँ की मीणा राजकुमारी बन गयी थी

निम्मी बहुत रो रही थी गौरी अभी तक नहीं आई थी सुबह से रात होने वाली थी वह मंदिर से बार बार नीचे देख रही थी मगर गौरी उसे दिख नहीं रही थी

निम्मी : भाई अब रात होने वाली है दीदी अभी तक नहीं आई दीदी ने झूट कहा था के पूजा की सामान लेकर आएँगी वह ज़रूर किल्ले पे गयी होंगी भाई मैं भी जा रही हुईं आवर निम्मी मंदिर से उतर कर चल दिया किल्ले के तरफ

इधर शाम को परेश होश मैं आया आवर अपनी माँ को पास देख कर उठने की कोसिस करने लगा मगर रुक्मणि ने परेश को उठे नहीं दिया

परेश : माँ आप यह हो तो दीदी आवर निम्मी कहा है आवर आप यह कैसे आई

राजकुमारी : परेश सब ठीक है तुम लेते रहो गौरी दीदी ठीक है आवर मैंने राणा को भेजा है वह निम्मी को लेकर आता hi होगा

निम्मी राणा को रस्ते मैं hi मिल गयी जो निम्मी ने राणा के साथियो पे हमला कर दिया कुल्हाड़ी से निम्मी राणा के 2 3 साथी को घायल भी कर दिया मगर वह सब निम्मी को मर नहीं रहे थे बस बच रहे थे निम्मी के वॉर से तभी राणा ने निम्मी का कुल्हाड़ी पकड़ लिया

निम्मी तुमेह डरने की कोई ज़रुरत नहीं है मैं तुम्हे कुछ नहीं करूँगा राणा ने कहा

निम्मी : नहीं मुझे चोदे दो मैं अपने दीदी को देखने जा रही

राणा : मेरे साथ चलो मैं तुमेह गौरी के पास ले जाऊंगा वह तुम्हारी माँ आवर परेश भाई भी है

अब निम्मी नहीं भी जाना पड़ता तब भी राणा ले hi जाता इस लिए निम्मी राणा के साथ चलने को राजी हो गयी

राणा को गौरी ने उसे बताया के निम्मी पहाड़ी वाली मंदिर मैं है इस लिए राणा मंदिर पर hi जा रहा था जो निम्मी रस्ते मैं मिल गयी

राणा निम्मी को लेकर किल्ले पहुँच गया निम्मी अपनी माँ को वह देख कर रुक्मणि से लीपा गयी आवर फिर अपने भाई को देख कर आवर भी ज्यादा रोने लगी

रुक्मणि : चलो सब ठीक है चोप हो जा देख तेरा भाई भी ठीक है

निम्मी : माँ मेरी गौरी दीदी कहा है मुझे दीदी को देखना है

राणा तुम निम्मी को गौरी के पास ले जाओ राजकुमारी मीणा ने कहा

राणा निम्मी को गौरी के पास ले गया जो गौरी बीएड पे लेती दरवाज़े की तरफ देख रही थी

अरे छोटी तुम सा गयी आ मेरे पास गौरी ने निम्मी को देखा तो कहा

निम्मी : दीदी आप ने झूट कहा था के आप पूजा का सामान लेने जा रही हो देखो आप को कितनी चोट लगी है मैं आप के साथ होती तो आप को कुछ भी नहीं होने देती आप अच्छी दीदी नहीं हो निम्मी के आँखों से ांसो भी गिर रहा था.
 
अपडेट 45

परेश आवर गौरी का जखम कुछ जल्दी hi ठीक हो रहा था 2 से 3 दिन मैं गौरी आवर परेश सही हो गए जो बढ़ को हैरानी हुवी बढ़ के हिसाब से इन को काम से काम ठीक होने मैं 15 से 20 दी लग जाते मगर ये दुनो 3 दिन मैं बिलकुल ठीक हो गए थे

राजकुमारी भी अब गाओ वालो को बहुत मदद करती थी मगर भीमा अभी जख्मी था आवर राजकुमारी को थोड़ी चिंत्ता होती थी

आज यह सभी लोग खोसी का जासं मन रहे थे कल इनकी राजकुमारी मीणा की शादी होने वाली थी

निम्मी : दीदी अभी कहा जा रही हो अभी मुझे आवर भी सामान लेना है गौरी को मेले से जाते देखा तो खा

गौरी : छोटी तुझे आवर क्या चाहिए सब कुछ तू ले लिया है आवर पैसे भी सब ख़तम हो गया है

इस गाओ मैं बाजार तो नहीं था बाजार जाने के लिए इन सब को 4 से 5 कोष दूर चल कर जाना पड़ता था यह सल्ल मैं एक बार पहाड़ी के नीचे मेला लगता था लोग दूर दूर से आकर पहड़ि वाली माता की मंदिर मैं पूजा करने एते थे तो यह बड़ी hi भरी मेला लगता था आवर मेले मैं hi गाओ के लोग अपना सामान ले लेते थे आवर इस मेले मैं गौरी निम्मी आवर उसकी माँ भी सामान लेने आई थी

निम्मी : दीदी मुझे एक लहंगा चोली लेना है मुंह बनाते हुवे खा

गौरी : क्या मगर अब मेरे पास पैसे नहीं है चल अगली बार मेला लगे गए तो लहंगा चोली लेलेंगे

निम्मी : ठीक है दीदी हम अगली बार लेलेंगे मगर मैं भाई के शादी मैं क्या पहनूंगी मेरा पास 2 3 hi तो कपडे है वह भी पुराने थोड़ी मायुश होकर खा

गौरी को अपनी बहन की चेहरा देख कर उसके दिल मैं दर्द हुवा

गौरी : मुझे मांफ कर छोटी मगर मेरे पास सोच मैं पैसे नहीं है आवर तेरी कपडे भी ज़रूरी है छोटी देख माँ आरही है तू माँ के पास जा मैं सामान के पैसे दे कर अभी आई

निम्मी मायुश होकर अपनी माँ के पास चली गयी

गौरी चाहती तो निम्मी को अच्छे कपडे दिला सकती थी राजकुमारी मीणा ने गौरी से कहा भी था पैसे लेने को मगर गौरी ने नहीं लिया था

सामान का पैसे देकर गौरी दूसरे तरफ एक सोनार के पास चली गयी आवर अपने गले की हार निकल कर उस सोनार को दिया

सोनार : क्या करना है बेटी इसका

गौरी : सेठ जी मुझे इसे बेचना है कइने पैसे दे सकते है

सोनार हार को अच्छे से चेक कर ने लगा कही नकली तो नहीं है

सोनार : बेटी इसके मैं सिर्फ 500 सोउ दे सकता हैं

गौरी : ठीक है सेठ जी दे दीजिये

गौरी पैसे लेकर लहंगा चोली के दुकान पे गयी आवर निम्मी के लिए 2 जुडी कपडे लिया आवर फिर अपनी माँ आवर बहन के पास चली गयी घर चले से पहले गौरी ने निम्मी आवर अपनी माँ को अच्छे से खाना खिलाया फिर घर के लिए निकल गए

........................................................................ राजकुमार इधर अर्जुन सिंह के साथ हमला करने के लिए आज्ञा था आवर राजकुमार को पता चल गया था के कल राजकुमारी की शादी है इसलिए वह शादी वाले दिन hi हमला करने वाला था

अर्जुन सींग : तो राजकुमार कबीर जी जब आप फिर से राजकुमार बन जायेंगे तो जो आप ने वेड के मुताबिक मैं जब चाहूंगा मैं वह आ सकता हुईं आवर कुछ भी कर सकता हुईं मुझे आप मेरे बिच मैं नहीं आएंगे

राजकुमार कबीर : अर्जुन सिंह मैं अपने वेड का पक्का हुईं जो वडा किया है वह निभाउंगा भी

अर्जुन सिंह : है मुझे तुम पर विश्वाश है

वही अर्जुन सिंह के 4 वफादार साथी बाटे कर रहे थे

साथी 1 : काली एक आवर किल्ला पे हमारा राज होगा

साथी 2 : अरे देख साला कितना खुश हो रहा है ये वह का राजकुमार तो क्या भिखारी भी नहीं रहे गए

आवर सभी हसने लगे

................................................................

गौरी बेटी तेरी गले की हार कहा है घर आने के बाद जब गौरी नाहा रही थी तो रुक्मणि ने गौरी के गले मैं हार नहीं देखा तो पूछा

गौरी अपने गले को अपने माँ के सामने देखने लगी अनजान बनते हुवे

गौरी : माँ लगता है हार मेले मैं गिर गयी

रुक्मणि : हे राम हार तेरे गले से गिर गयी आवर तुझे पता भी नहीं चला एक वही तो थी जो तेरी दादी की निसानी जो मरते वकत तेरी गले मैं दाल कर गयी थी
 
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