अपडेट 19
मई मन ने सोचा सच hi खा था पागल लड़की ने अब तक की गयी साडी सेविंग इसी में खर्च क्र दी थी.
मई समझ hi नहीं पाया इस लड़की को..
इस प्रकार मैंने सभी के गिफ्ट देख क्र सो गया.
सुबह फिर से व्ही रूटीन सुरु नहाओ स्कूल के लिए रेडी हो जाओ .
मई ब्रेकफास्ट के लिए डाइनिंग टेबल पर पंहुचा .
मई काव्य के गोल्ड चैन में कविता का दिया हुआ लॉकेट को दाल क्र पहना था.
बुआ - ये चैन और लॉकेट तुम पर बहुत hi जांच रही है.
मई - थैंक्स बुआ, ये गिफ्ट देने वालो ने कुछ सोच क्र hi दिया होगा.
इसे मई अपने से कभी अलग नहीं करूंगा.
बुआ - क्या किसी स्पेशल नीड्स दिया है.
मई - है बुआ है कोई स्पेशल .
ये बोल क्र मई दोनों की तरफ देखा तो दोनों मुस्कुरा रही थी.
फूफा जी - और बरखुरदार पढाई कैसी चल रही है .
मई - ठीक चल रही है फूफा जी.
फूफा जी - इस बार भी पुरे स्कूल में तुम hi टॉप करना.
मई - जी फूफा जी पूरी कोसिस करूंगा.
बुआ - मेरे बेटो टक्कर दे सके अभी तक कोई नहीं है पुरे देहरादून में.
आप अपने इस बेटी को बोलो जो मेरे बेटे के आस पास भी नहीं पहुंच पति.
काव्य - माँ आपका बीटा को मई hi बताती हु उसका प्रॉब्लम मई hi सोल्वे करती हु तभी वो टॉप करता है और इस चक्कर में मई hi पढ़ना भूल जाती हु , ये सुन क्र सब हसने लगे.
ब्रेकफास्ट करने के बाद हम स्कूल के लिए निकल गए.
इस तरह दिन निकलने लगे , स्कूल से घर, घर से घाटी की taraf,ghati अब मई अपने साइकिल से जाता था. घाटी में जाकर पहाड़ो पर चढ़ना पेड़ो पर झूलना और रनिंग जो बहुत hi फ़ास्ट हो गयी थी .
फिर मई नाले के किनारे बैठ क्र सभी बातो को सोचने लगा की कैसे मुझे कोई अपने साथ खेलता नहीं है और मई कैसे मई बिना किसी सहारे के पहाड़ो पर चढ़ जाता हु मेरी रनिंग भी काफी फ़ास्ट हो गयी थी की जब मई रनिंग करता हु तो कोई देख भी नहीं पता.
लगता है मेरे अंदर कुछ तो पावर है मई और क्या क्या क्र सकता हु.
यही सब सोच क्र मई खड़ा हुआ और एक एक पेड़ को एक लत मरी वो झा पर लत मरी थी वह से टूट गए अब मुझे पूरा विस्वाश हो गया था की कुछ तो पावर है मेरे अंदर .
लेकिन इसे दुनिया वालो से छुपा क्र रखना होगा नहीं तो लोग मुझे अलग समझेंगे और मई अकेला हो जाउगा.
नहीं मुझे ये बात सब वे छुपा क्र नार्मल लोगो की तरह hi रहना होगा और जरुरत पड़ने पर hi उसे करूंगा.
यही सब सोच क्र मई घर की तरफ निकल गया .
घर पहुंच क्र थोड़े देर पढाई की फिर डिनर करके अपने रूम में आज्ञा और सोचा की कल से मई मॉर्निंग में जल्दी उठ क्र रनिंग और एक्सरसाइज करूंगा यही सोच क्र मई सो गया.
इस तरह कुछ साल और निकल गए अब मई 12तह में आज्ञा था कविता अब समिति बुआ के साथ कॉलेज जाती थी.
मई अपने साइकिल में hi स्कूल जाता था और काव्य बस में hi जाती थी .
काव्य ने खभी किसी को ये नहीं बताया था की मई उसमे मां का बीटा हु और उसी के घर में रहता हु, कविता को मेरे पास देख क्र उसकी सहेलियों ने पूछा जरूर था की तेरी बहन उसे कैसे जानती है तो उसने कह दिया की दूर का पहचान वाला है दीदी hi जानती है.
स्कूल में भी कभी मुझसे बात नहीं करती थी.
एक दिन की बात है स्कूल में रेसस्स के टाइम मई अकेला hi टिफिन क्र रहा था क्यों की कविता के कॉलेज जाने से मई अकेला hi हो गया था, मेरे साइड की लाइन के 2 बेंच पीछे hi काव्य अपने ग्रुप की लड़कियों के साथ लंच के रही थी उसमे से एक लड़की जिस का नाम रेखा था वो बोलती है यार इस साल हम लोगो का 12तह है फिर नेक्स्ट ईयर सी हम लोग कॉलेज में जायेंगे तो मैंने सोचा है की क्यों न यही से बॉयफ्रेंड बना लू .
काव्य - वह रे बहुत आगे जाएगी तू क्या सोचती है तो किसे फसायेगी ये भी बता.
रेखा - फ़साना नहीं है यार सब कुछ ठीक रहा तो पूरी लाइफ के लिए hi सेट क्र लुंगी .
काव्य - मई कह रही थी न की तू बहुत hi आगे जाएगी, अब बता भी दे कोण है वो.
रेखा - वो देख वो बैठा है नीली आखो वाला मेरा टाइगर.
काव्य मन में - साली को मेरे hi मॉल पर डाका डालना था मैंने उसके साथ फ्यूचर प्लान सेट क्र लिया है और तू अपना फ्यूचर बनाने की सोचा रही है कामिनी
काव्य- अरे वो अकड़ू , देखा है कभी उसे किसी लड़की से बात करते हुए , देख रही है वो अकेला hi रहता है कोई उस से दोस्ती भी नहीं रखता तू उसे बॉयफ्रेंड बनाने की सोच रही है.
रेखा - पहले किसी ने सायद तरय नहीं किया हो गए और उसकी नीली आखो में तो मई खो सी जाती हु.
मेरी नजर तो उस पर बहुत पहले से है ,तू देखती जा मई क्या करती हु जस्ट वेट एंड वाच.
ये कह क्र वो मेरी तरफ आगयी .उधर काव्य और उसकी फ्रेंड रेखा को देखते hi रह गए.
इधर...
रेखा - hi... टाइगर मेरा नाम रेखा है तुम जानते होंगे मुझे.
मई - hi ! कैसे नहीं जाँऊगा इतने सालो से साथ में पढ़ है .
रेखा - क्या मई यह बैठ सकती हु .
मई - है है क्यों नहीं बैठिये न .
लंच हो गया तुम्हारा?
रेखा - है मैंने अपने फ्रेंड्स के साथ क्र लिया है ,आप क्या लाये है?
मई - सिंपल hi लंच करता हु रोटी एंड टमाटर की सब्जी है , तुम भी लव न
फिर रेखा ने रोटी कस एक टुकड़ा लेके सब्जी के साथ खाई .
रेखा - आप जानते है काव्य ने भी शामे लंच ले थी और सब्जी का टेस्ट भी शामे था .
मई मान में - जब दोनों का एक hi घर में टिफ़िन तैयार हुआ है तो शामे तो होगा hi .
मई - रेखा जी ये सिर्फ इत्तेफाक हो सकता है.
रेखा - वैसे मई आपसे दोस्ती करना चाहती हु . क्या आप मुझे दोस्ती करोगे.
मई - पर आप मुझसे दोस्ती करना क्यों चाहती हो.
रेखा - क्यों की आप पढाई में टॉप हो और क्या है इस साल 12तह भी है तो आप जैसा दोस्त होगा तो मुझे भी पढाई में थोड़ा हेल्प हो जाएगी.
मई - कुछ सोच क्र ठीक है रेखा जी मई आपका दोस्त बनने के लिए तैयार हु.
रेखा - तो इसी बात पर मिलाओ हाथ.
फिर हम दोनों ने हाथ मिलाया.
इधर काव्य ये देख क्र पूरी तरह जल भून गयी, लेकिन कुछ नहीं क्र पायी.
अपने मन में बोलने लगी लड़की मिली नहीं और चालू होगया तेरी तो मई घर चल के खबर लेती हु .
छुट्टी के बाद हम दोनों घर आये.
डिनर करने के लिए डाइनिंग टेबल पर आये.
आज काव्य मुझे घर रही थी जैसे कच्चा चबा जाएगी, मई उसे इग्नोर क्र के कविता की तरफ देखा तो वो कुछ परेशां लग रही थी, मैंने सोचा घाटी से आने के बाद पूछ लूंगा और डिनर करके मई निकल गया घाटी की और वह पहुंच क्र मई अपने पावर की नुमाइस की मतलब चेक किया और क्या क्या क्र सकता हु.
शाम को घर आया रूम में फ्रेश होक मई पंहुचा कविता के रूम में दूर खत खतया, अंदर से बुझी हुई आवाज में कोण है .
मई जवाब दिया मई हु टाइगर.
कविता - है आ जाओ.
अंदर देखा तो वो एक बुक लेके बैठी थी, मई भी बीएड पर जेक बाजु में बैठ गया.
थोड़ी देर तक सन्ति रही फिर मैंने पूछा.
मई - क्या हुआ कविता आज तुम कुछ परेशां दिख रही हो, कुछ बात है क्या मुझे बताओ ,किसी ने कुछ खा.
कविता - न hi मुझे कुछ परेशानी है और न hi किसी ने कुछ खा ,तुम ऐसा क्यों पूछ रहे हो.
मई - क्यों की आज तुहरे ये किते फेस पे मुस्कान गायब थी, क्या कॉलेज में कुछ...
मेरे इतना बोलना हुआ था की कविता ने टपक से बोलै.
कविता - नहीं कॉलेज में कुछ नहीं हुआ .
मेरा माथा ठनका उसने जैसे जवाब दिया.
मान में खा पक्का कॉलेज का hi लफड़ा है मुझे देखना होगा.
मैंने कुछ देर और इधर उधर की बात की फिर मई अपने रूम का दूर खोल के जैसे hi अंदर घुसा तो.....
तो बे कॉन्टिनोएड