Incest Story EK MAA PART-2 - Page 2 - SexBaba
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Incest Story EK MAA PART-2

अपडेट-8




दीपा फ़ोन पैर,

दीपा- मुझे लगता ह आपने आने का समय हो गया ह, अब उसे दुनिया का ज्ञान देने का वक़्त आ चुक्का ह

उधर से कुछ कहा गया,

दीपा- वो पूरी तरह तैयार ह लेकिन उसका इम्तेहान तो आपको hi लेना होगा,

उधर से कुछ कहा गया,

दीपा- वो हर तरह से अपने बाप पैर गया ह, लेकिन औरतो के साथ वो कैसा ह ये अब पता चलेगा मैंने आज hi उसे इसकी आजादी दी ह, जैसा आपने कहा था अब तक उसको रोका हुआ था, इस सब से दूर रखा हुआ था,

उधर से कुछ कहा गया

दीपा- मैंने उसे पूरा नंगा देखा ह वो अपने बाप से आगे hi हो सकता ह पीछे तो किसी भी तरह से नहीं ह,

उधर से कुछ कहा गया

दीपा- ये मेरा फर्ज था, वो तुषार का बीटा ह उसे ऐसा hi बनना था, आप आ जाइये उसकी मुलाकात वह हुई ह और उसके सवाल शुरू हो चुके हैं,

उधर से कुछ कहा गया और दीपा ने फ़ोन काट दिया,

वही चंडीगढ़ में आफत उतर चुकी थी दृष्टि के रूप में, क्या क़यामत रूप था उसका, सिंपल से फिटिंग की जेनस टॉप में वो जहा जहा से गुजर रही थी लोगो की नजर बस उसी पैर टिक जाती थी, वो चंडीगढ़ के मशहूर कॉलेज में एंट्री क्र रही थी, ये शनाया और दिया वाला hi कॉलेज था,


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कॉलेज के हर लड़के ने उसे पलट क्र जरूर देखा, लेकिन वो बिना किसी को देखे सीधे प्रिंसिपल के रूम में गई और अपने पेपर्स जमा करवाए,

प्रिंसिपल- तुम इतनी दूर से यहाँ ट्रांसफर लेकर आई हो कोई खास वजह

दृष्टि - मेरा लक्ष्य बड़ा ह तो उसके लिए मुझे बड़े कॉलेज से hi पढ़ना था, और ये hi कॉलेज मेरे लक्ष्य को पूरा करवा सकता ह,

प्रिंसिपल- वैरी गुड, तुम अपने पप्पेर अकाउंट ऑफिस में दे दो वो तुम्हे तुम्हरी ईद वगेरा दे देंगे,

दृष्टि वह से निकल क्र अपने डाक्यूमेंट्स क्लियर करा क्र निकल गई अपने लिए रूम का इंतजाम करने, वो हॉस्टल में नहीं रुक रही थी,

आज का दिन सबके लिए बड़ा hi व्यस्त रहा, किसी को नया लक्ष्य मिला तो कोई अपने लक्ष्य की तरफ अगसर हो गया,

अगले दिन कॉलेज खुले,

हिमाचल में ह्रदय के कॉलेज में उसका सम्मान किया जा रहा था, वो कॉलेज का नाम रोशन करके जो आया था, पूरा कॉलेज तालियों से उसका स्वागत कर रहा था, मंदिर और कल्पना बेसबरी से ह्रदय से अकेले में मिलने का मौका ढूंढ रही थी, तभी प्रिंसिपल ने आर्डर निकला की, कॉलेज में कुछ और गेम्स भी ऐड किये जा रहे हैं जिसमे से कुश्ती भी एक गेम होगा, और कुश्ती की इंचार्ज मिस तम्मना जी होंगी, तम्मना जी कुश्ती में डिस्ट्रिक्ट लेवल की खिलाडी हैं, उम्मीद करता हु हमारे कॉलेज की लड़किया इसमें भाग लेंगी,

अगर हमने ाचा प्रदर्शन किया तो बॉयज के लिए भी कुस्ती के टीचर बुलवाये जायेंगे, लेकिन तब तक तम्मना जी hi लड़को को भी सिखाएंगी,

लड़के तो ख़ुशी से उछाल पड़े, वही ह्रदय के दिमाग में आया की चलो कुश्ती भी सीखते हैं, कभी इसकी भी जरुरत पद hi सकती ह,

वही तम्मना के फेस पैर एक कातिल मुस्कान थी,

प्रिंसिपल- जो भी इसमें भाग लेना चाहते हैं अपने अपने नाम लिखवा दे,

काफी लड़को ने तो तम्मना जी के नजदीक रहने के लिए अपने नाम लिखवा दिए, ह्रदय ने भी अपना नाम लिखवा दिया, अब मंदिर ने आगे बढ़ क्र अपना नाम लिखवाया ताकि किसी गेम में तो ह्रदय के साथ रह सके, तभी कल्पना ने भी अपना नाम लिखवा दिया,

तम्मना को लगा भीड़ इकठी हो रही ह तो उसने एक विचार किया

तम्मना- मैं एक बार सबका टेस्ट लुंगी और जो उस टेस्ट में पास होंगे उन्हें hi इस गेम में आगे सिखाया जायेगा, बाकि सबको उसे देख क्र सीखना होगा, अगली बार उन्हें जोड़ा जायेगा,

सभी ने हामी भर दी,

वही चंडीगढ़ में शनाया दिया रैना आशना कॉलेज पहुंची तो सामने हनी खड़ा था,

शनाया- तुम ठीक हो न,

हनी- तुम कैसी दोस्त हो मैं तुम्हारे लिए गुंडों से पिता गया और तुम मुझे देखने तक नहीं आये,

दिया सर निचे कर मुस्कुरा दी,

शनाया- श्री यार वो घर में पार्टी थी की कुछ याद hi नहीं रहा, तुम ठीक तो हो न अब

हनी- है अब ठीक हु, वैसे उन गुंडों का पता चला वो कोण थे,

दिया- पुलिस ढूंढ रही ह जिस दिन हाथ आ गए न उनकी खेर नहीं,

हनी थोड़ा सा सकपका गया, तभी पीछे से एक लड़का दौड़ता हुआ आया,

लड़का- अरे हनी तू आ गया, यार सही टाइम पैर आया ह वो देख कॉलेज में नै आइटम आई ह, कसम से सुपर हॉट माल ह यार, पूरा कॉलेज उसके पीछे पागल हो गया ह सुबह से जिधर से गुजर जाती ह, वही लड़को की भीड़ लग जाती ह,

सबने उधर देखा तो सामने से दृष्टि चली आ रही थी, एक अलग hi ऐटिटूड, चल में अलग hi नशा कपड़ो में कोई दिखावा नहीं लेकिन फिटिंग ऐसी की एक एक अंग अलग hi निखार कर आ रहा था,


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शनाया उसे देख क्र फुल ऐटिटूड में आ चुकी थी, हनी की जीभ मुँह से बहार आ चुकी थी, दृष्टि उन सब के पास से बड़े स्टाइल से गुजर गई,

आशना- ये क्या आफत ह, इसने हमे देखा तक नहीं

दिया- क्यों हम सब अप्सराये हैं क्या

हनी- शनाया किसी अप्सरा से काम भी नहीं ह

शनाया- ठंकु हनी

दिया- बस बस ज्यादा माखन मत लगा, ये ह कोण ऐटिटूड तगड़ा ह लड़की में

हनी का दोस्त- पता नहीं आज hi कॉलेज में आई ह, कही से ट्रांसफर करवा क्र

शनाया- चलो देखते हैं,

सब क्लास की तरफ चल दिए, दृष्टि भी इन्ही की क्लास में थी,

टीचर ने सबको दृष्टि का इंट्रो दिया, कुछ लड़किया जो शनाया से चिढ़ती थी उन्होंने दृष्टि को शनाया के विरुद्ध खड़ा करने का फैसला कर लिया और दृष्टि से दोस्ती करने आगे बढ़ गई,

कॉलेज ख़तम होते होते hi दृष्टि का एक ग्रुप बन गया और वो उस ग्रुप की लीडर भी बन गई,

हनी के दिल में बहुत आया की दृष्टि से दोस्ती करे लेकिन शनाया के दर से हिम्मत नहीं हुई,

उधर सचिन ने विनय तम्मना के भाई के घर एक लेटर भिजवाया की ठीक होते hi अंजलि ग्रुप में आकर ज्वाइन करने का ऑफर था,

विनय के घर में खुशियों की लहार दौड़ गई,

वही आज ह्रदय अलग hi रूप में कॉलेज में खड़ा था, उसकी आँखों में लड़कियों को देखने का तरीका बदला हुआ था, कोई गन्दगी नहीं थी लेकिन आज वो हर लड़की की स्माइल का जवाब स्माइल से hi दे रहा था, हर एक इस बात से थोड़ा सरप्राइज था, सबको लगा ह्रदय में चंदगड जाकर बदलाव हुआ ह, वही तम्मना मैडम के दिमाग में आ रहा था की जो हरकते उसने ह्रदय के साथ की हैं उससे ह्रदय के विचार बदल रहे हैं,

तम्मना ने सबका टेस्ट लेने के लिए एक जगह बुला लिया, लड़को के जोड़े बनाये और एक दूसरे से कुश्ती करवाई, कुश्ती किसी से आती hi नहीं थी, लेकिन यहाँ देव से ज्यादा ताकत का प्रदर्शन होना था, और ताकत में ह्रदय को कोई भी गिरा नहीं सकता था, तो ह्रदय को बिना टेस्ट के hi चुन लिया गया, उधर लड़कियों का भी ऐसे hi टेस्ट लिया गया, कल्पना और मंदिर ने पूरी हिम्मत से टेस्ट दिया और टेस्ट में चुन भी ली गई,

तम्मना ने 12 लड़के और 10 लड़किया चुन ली कुश्ती के लिए, बाकि का बाद में देखने का बोल दिया, तम्मना ने अगले दिन सबको कुश्ती के लिए ड्रेस लेन का आर्डर दे दिया,

वही एक खूबसूरत औरत सेक्सी बदन की मालकिन गयम में पसीना बहा रही थी, गयम के टाइट कपड़ो में एक एक अंग उभर का आ रहा था, पसीने की वजह से कपडे और उसके बदन से चिपके हुए थे, शरीर का ेके क उभर नुमाया हो रहा था, वो थी निधि जो पूरा पसीना भने में लगी हुई थी,


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तभी गयम में अशोक आ गया,

अशोक अपनी hi बहु को बहुत hi गन्दी नजरो देख क्र लार टपका रहा था, फिर वो आगे बढ़ा और निधि की कमर पैर हाथ रखा, निधि एक दम चौंक गई, पीछे मुद क्र देखा की अशोक ह तो रेलसे हो गई,

अशोक- बहुत महेनत करती ह तू बेटी

निधि- महेनत नहीं करुँगी तो मोती हो जाउंगी

अशोक- इतना खूबसूरत बदन ह तेरा और महेनत करेगी तो न जाने क्या हो जायेगा

निधि- आप भी न पापा कैसी कैसी बात करते हो,

कुछ काम था क्या ऑफिस नहीं गए अब तक

अशोक- है काम ह जरुरी काम ह,

निधि- बताइये क्या हुआ

अशोक- हनी उसके अंदर का दर अब तक ख़तम नहीं हुआ ह, मैं सब कुछ क्र चुक्का हु, वो ायश बन गया लेकिन बहादुर नहीं बना, जो मुझे चाहिए था वो नहीं बना,

निधि- मैंने तो पहले hi कहा था मुझे उसमे वो बात नजर नहीं आती,

अशोक- उसे मैंने क्या सोच क्र तैयार किया था लेकिन वो उसके जैसा नहीं बन पाया, उन्हें बर्बाद करने के लिए मैंने क्या नहीं किया पैसा ताकत सब इकठा की लेकिन फिर भी वह तक नहीं पहुंच पाया, अगर ये लड़का अंजलि ग्रुप की बेटी शान्या को फसा ले तो कुछ काम बन सकता ह,

निधि- आप अब भी अँधेरे में तीर चला रहे हैं,

अशोक- क्या करू फिर, मैं उन्हें बर्बाद कर दूंगा,

निधि- करेंगे करेनेगे लेकिन उनके टक्कर का कोई ढूंढ़ना पड़ेगा,

अशोक- वही बात करने आया था मैं, मेरे पास फ़ोन आया था एक लड़का ह बहुत जबरदस्त हुनर ह उसमे, हनी के कॉलेज के सभी गेम्स जीत लिए उसने गजब की ताकत ह उसमे, फुर्ती ताकत और सुंदरता का नायब नगीना ह वो, अगर वो हमे मिल जाये तो हम उसे और निखार देंगे फिर शायद वो हमारा काम कर दे,

निधि- कोण ह वो

अशोक- कोई ह्रदय ह हिमाचल से आया था,

निधि- तो आप क्या चाहते हैं

अशोक- मैं चाहता हु तुम उसे यहाँ ले आओ, तुम खुद उसे परखो उसकी ताकत को परखो और अगर वो इस लायक लगे तो अपने साथ मिला लो,

निधि- जैसा आपको ठीक लगे, रवि को यहाँ बुला लीजिये तब तक वो ऑफिस देख लेगा,

अशोक- नहीं उसे वही रहने दो, मुझे पूरी रिपोर्ट चाहिए, और मुंबई से कुछ रिपोर्ट आई हम कहा तक पहुंचे

निधि- काफी नजदीक हैं, एक लड़की बहुत महेनत से इसी पैर काम कर रही ह, जल्दी hi हमे कामयाबी मिलेगी,

अशोक ने निधि की कमर पैर थपथपाया- बहुत बढ़िया

फिर वो बहार चला गया, निधि मिरर में खुद को देखने लगी, और फिर से एक्सरसाइज में लग गई,


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सब अपने अपने काम में बिजी थे, नैना और काम्य अंजलि ग्रुप की डिटेल्स निकलने में लगी हुई थी, इंटरनेट से जो मिल सकता था ढूंढा जहा से उन्हें जानकारी मिली शनाया दिया आशना और रैना की जिनकी जान इन दोनों ने उस रात बचाई थी,

नैना- काम्य देख ये वही लड़किया ह जिनकी जान हमने बचाई थी उस रात ये अंजलि ग्रुप के ओनर्स की बेतिया हैं,

काम्य- वह ये तो ऊपर वाला भी चाहता ह हमे इसके बारे में पता करे, इसलिए उसने हमे पहले hi इनसे मिलवा दिया, हमारा अहसान भी ह इन पैर तो इनके साथ दोस्ती करके बहुत कुछ पता चल सकता ह,

नैना- सही कहा लेकिन हम इन्हे ढूढ़े कहा,

काम्य- अरे ये देख इनका कॉलेज इसी में चलते ह न, ये बहुत बड़े लोग हैं इनके बारे में सब कुछ अखबारों में न्यूज़ में आता ह, तो सब जानकरी यही मिल जाएगी,

दोनों ने कॉलेज जाने का फैसला क्र लिया,

यहाँ ये सब अपनी अपनी जिंदगी की उधेड़ बन में लगे हुए थे उधर अमेरिका में कांड हो गया,

अमेरिका के एक पब में रिंकी रम्य और अन्य नशे में धुत नाच रही थी, ड्रग्स का जोर चल रहा था की तभी वह पुलिस की राइड पद गई, और उस वक़्त रिंकी डग्स के नशे में थी, और उससे भी खतरनाक उसकी पॉकेट में ड्रग्स भी था,

पुलिस की राइड में जो ड्रग्स डीलर पकड़ा गया उसने वह पब में जो जो उससे ड्रग्स खरीदता था उन सबके नाम ले लिए थे, जिसमे रिंकी का नाम टॉप लिस्ट में था,

रम्य और अन्य ने थोड़ी सी होश्यारी दिखते हुए रिंकी को वह से लेकर भाग गई, पुलिस उनके पीछे लग गई थी,

रम्य ने अनीता को फ़ोन किया,

रम्य- दादी हमारे पीछे पुलिस लगी ह, माँ पैर ड्रग्स केस हो गया ह,

अनीता जानती थी अमेरिका में ड्रग्स केस में कोई समझौता नहीं ह काम से काम 5 साल तो अंदर जाएगी hi, अनीता के हाथ पाओ फूल गए वो बुरी तरह घबरा गई,

अनीता- ये ये कैसे हुआ मैं कितना समझती थी सम्हाल जाओ लेकिन मेरी किसी ने सुनी hi नहीं,

रम्य- दादी ये सब बाद में कर लेना अब ये बताओ करना क्या ह

अनीता ने घेरि साँस बाहरी,

अनीता- सुनो अभी केस रजिस्टर नहीं हुआ होगा तुम लोग सीधे एयरपोर्ट पहुँचो रस्ते में गाड़ी कही छोड़ देना मैं तुरंत तुम्हारे टिकट बुक करती हु इंडिया के और पासपोर्ट लेकर पहुँचती हु, बस जब तक मैं नहीं आ जाती छुपे रहना, पुलिस का हाथ मत आ जाना,

रम्य अन्य और रिंकी ने रस्ते में गाड़ी छोड़ दी और टेक्सी बदल बदल क्र एयरपोर्ट पहुंच गए, वही अनीता ने घर में रखे पप्पेर लिए घर को लॉक किया और जरुरत का सारा सामान लेकर निकल गई, उसने ऑनलाइन hi अपने चारो के टिकट बुक क्र दिए थे, सीधे एयरपोर्ट पहुंच गई,

और वह से सीधी फ्लाइट इंडिया के लिए पकड़ी, और अगले दिन इंडिया में लैंड कर गई, इंडिया पहुंचने मुंहे रात हो चुकी थी,

और सीधे पहुंची अपने पुराने शहर में जहा वो पहले रहा करती थी, जहा तुषार ने अनीता और रिंकी को घर किराये पैर दिलवाया था, अपने गाओं के नजदीकी शहर में, और एक होटल में रूम लिया,

रम्य और अन्य बहुत दरी हुई थी, कोई भी लड़की तब तक hi बिगड़ी हुई रहती ह जब तक किसी मुसीबत में नहीं पड़ती, मुसीबत आते hi सबसे पहले दिमाग ठिकाने आता ह,

अनीता- देखो तुम लोगो की वजह से क्या हो गया, कितना समझाया तुम लोगो को ये सब बंद क्र दो लेकिन,

रिंकी- चिल माँ कुछ नहीं होगा, इस जिंदगी से तो जेल भी अच्छी थी, लेकिन तुम हमे यहाँ क्यों ले आई, माँ यहाँ नहीं लाना छाइये था,

अनीता- बस रिंकी खुद को सम्हाल, कब तक ऐसे खुद को तबाह लारती रहेगी,

रम्य- कुछ बात ह क्या माँ जो हमे नहीं पता, आप ऐसी बाते क्यों क्र रही हो,

रिंकी खुद को सम्हालते हुए- कुछ नहीं बच्ची बस जिंदगी का कोई लक्ष्य hi नहीं ह, और जब जिंदगी का कोई लक्ष्य नहीं होता तो जिंदगी ऐसी hi हो जाती ह,

अनीता- फिर तूने इन दोनों लड़कियों को कोई लक्ष्य क्यों नहीं दिया, इतना ज्ञान तेरे पास था फिर भी तूने इन्हे सही दिशा नहीं दिखाई,

आने- दादी अब थोड़ी शांति रखते हैं न, ये सोचिए वह हमारा पूरा बिज़नेस ह वो सब बर्बाद हो जायेगा,

अनीता- वो सब मैं देख लुंगी तुम तीनो खुद को देखो और सुधारो खुद को,

सुबह सूरज निकल आया था, हर कोई अपने अपने सफर पैर निकल चुके थे, शनाया दिया रैना और आशना कॉलेज गई, दृष्टि उनसे पहले hi कॉलेज पहुंच चुकी थी, जो अपने ग्रुप के साथ कड़ी थी, शनाया ने देखा हनी भी उसके साथ खड़ा ह,

शनाया का गुस्सा सातवे आसमान पैर चढ़ गया था, वो गुस्से में अपनी क्लास की तरफ चली गई,

दृष्टि के फेस पैर स्माइल थी,

वही काम्य और नैना शनाया और दिया के कॉलेज की तरफ निकल गई थी, आज उन्होंने उनसे दोस्ती करने का फैसला कर लिया था,

वही ह्रदय अपने कॉलेज पहुंच गया था, आज कुश्ती के लिए सेलेक्ट किये हुए बच्चे कुश्ती की ड्रेस लेकर आये थे,

कल्पना और मंडिया बहुत एक्सीटेंड थी, ह्रदय के साथ कुश्ती करने के लिए, वही तम्मना भी खुद के लिए कुश्ती के कपडे लेकर आई थी उसके दिमाग में भी बहुत कुछ चल रहा था,

वही निधि निकल चुकी थी हिमाचल के लिए, उसका टारगेट था ह्रदय के बारे में पता करना, निधि के लिए ह्रदय का एड्रेस निकलवाना कोई मुश्किल काम नहीं था,

अनीता रिंकी रम्य और अन्य को इंडिया का टाइम और अमेरिका के टाइम की वजह से उन्हें प्रॉब्लम हो रही थी तो वो बस रेस्ट क्र रहे थे,

सबसे पहले चलते हैं नैना और काम्य के पास

काम्य- नैना हम कॉलेज में आ तो गए हैं लेकिन क्या बोलेंगे क्यों आये हैं

नैना- बोल देंगे हम इस शहर में नए हैं तो एडमिशन के बारे में सोच रहे हैं,

काम्य- वैसे इस कॉलेज के रंग ढंग अमेरिका से काम नहीं हैं, मैंने तो सुना था इंडिया में बहुत अच्छा कल्चर ह लेकिन यहाँ तो लड़किया अमेरिका को टक्कर दे रही हैं,

नैना- दुनिया बदल रही ह तो ये भी बदल गए, हमे क्या करना ह हमे कोनसा यहाँ रहना ह, बस इस बहाने एक देश घूम लिया, चल उन्हें ढूंढ़ते हैं,

दोनों कॉलेज में घूमने लगी, लेकिन क्लास चल रही थी तो कोई मिला नहीं, वो जाकर कैंटीन में बैठ गई, कुछ घंटे इंतजार के बाद चारो बहन उन्हें आती हुई दिखी, उन्हें देख क्र काम्य और नैना एक दम अपने आप में बिजी हो गई जैसे उन्होंने धयान hi न दिया हो,

वो चारो बहन भी उनके साइड वाली टेबल पे रबइठ गई, वो अपने आप में hi बिजी थी, शनाया गुस्से में बड़बड़ा रही थी

शनाया- बहुत तेवर दिखा रही ह वो,

दिया- छोड़ न हमे क्या करना ह,

शनाया- ऐसे कैसे छोड़ दू, हमारा शहर और हमे hi आँख दिखा रही ह,

दिया- तू फिर शुरू हो गई, तूने कहा थान ा चेंज हो जाउंगी,

शनाया- दिया मैं चेंज हुई हु और हो रही हु, लेकिन उन्ही के लिए जो ये चेंज डेसेर्वे करते हैं, अगर कोई सामने से आकर ऐटिटूड दिखायेगा तो फिर मुझेबरदास्त नहीं होगा, मैं समझ रही हु अच्छा बनना अच्छी बात ह लेकिन इतना अच्छा न बनो की कोई भी आकर तुम्हारी मार क्र चला जाये,

रैना- सही बात ह यार ये हमारा कॉलेज ह और हम अपने कॉलेज में ऐसे hi कोई भी हमे ऐटिटूड कैसे दिखा सकता ह,

काम्य और नैना उन सब की बात सुन रही थी, काफी देर हो जाने के बाद जब चारो ने इन दोनों पैर धयान नहीं दिया तो काम्य कड़ी हुई और उनकी टेबल के समाने आकर बोली- नैना आ चल देर हो रही ह

नैना एक दम बोखला गई,

काम्य की आवाज सुनकर चारो लड़कियों ने उसे देखा और पहेली नजर में hi पहचान लिया,

दिया- अरे आप यहाँ

काम्य- जी आप कोण

दिया- आपने हमे नहीं पहचाना हम वही लड़किया हैं जिसकी जान आप दोनों ने बचाई थी उस रात,

काम्य- अच्छा अच्छा श्री श्री वो अँधेरा था न वह और इतना सब हुआ की दिमाग से निकल गया था,

शनाया- आइये हमारे साथ बैठिये न, उस रात आपको ठीक से ठंकु कहने का मौका भी नहीं मिला,

नैना- इसकी जरुरत नहीं ह ये तो इंसानियत केन एते हमारा फर्ज था,

दिया ने दोनों के हाथ पकड़ क्र अपने hi पास बैठा लिया,

रैना- आप दोनों हमारे कॉलेज में,

नैना- हम यहाँ अभी शिफ्ट हुए हैं तो एडमिशन लेने की सोच रहे थे कहा ले वही सोच रहे थे, इस कॉलेज का नाम काफी सुना था तो सोचा देख आये,

शनाया- बिलकुल सही किया आपने, ये कॉलेज बेस्ट ह

फिर इनमे इधर उधर की बाते होने लगी, और कुछ hi देर में दोस्ती हो गई,

वही हिमाचल में ह्रदय और बाकि सब स्टूडेंट्स एक बड़े से हॉल में खड़े थे, बिच में गद्दे बिछे हुए थे, और सभी अपनी कुश्ती की ड्रेस में थे,

और सामने कड़ी थी तम्मना कुश्ती की टाइट फिटिंग की ड्रेस में जिसमे उसके बड़े बूब्स अलग hi दिख रहे थे, और गांड का आकर तो इतना भेतरीन था की पूछो मत, बाकि लड़किया भी बहुत सेक्सी लग रही थी लेकिन हर लड़के की नजर बस तम्मना पैर थी, एक भरे हुए बदन की लड़की और कमसिन लड़कियों के शरीर में काफी अंतर होता ह, जो यहाँ साफ़ पता चल रहा था,


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तम्मना कड़ी हुई सबको कुश्ती के देव सीखा रही थी, कुछ तो बड़े धयान से सुन रहे थे कुछ के दिमाग में अश्लीलता घूम रही थी,

तम्मना एक एक को बुला रही थी और उसे देव बता रही थी और कुछ देर में भेज देती थी, सभी लड़को को बिना हाथ लगाए hi देव सिखाये,

तम्मना सबको सीखा क्र उनकी क्लास में भेज देती, लास्ट में बस 4 स्टूडेंट रह गए, जिसमे कल्पना ह्रदय और दो लड़के और,

तम्मना ने कल्पना को रोक लिया था तम्मना कल्पना के साथ दवा लगा क्र सबकी सीखा रही थी, फिर उन दोनों लड़को को भी बेज दिया, अब वह तम्मना ह्रदय और कल्पना रह गए थे,

तम्मना- तुम दोनों के अंदर कुश्ती खेलने की हिम्मत और ताकत दिखाई देती ह मुझे बस तुम्हे देव सिखने होंगे, ह्रदय तुम आगे आओ, कल्पना अब तुम देखो मैं कैसे देव लगाती हु उसके बाद तुम्हे और ह्रदय को वही देव लगाने हैं,

कल्पना तो खुश हो गई,


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ह्रदय- मम लड़के और लकड़ी की कुश्ती कैसे हो सकती ह,

तम्मना- तुम शर्मा रहे हो, लड़के लड़की की कुश्ती तो 30-40 साल पहले भी हुआ करती थी, और तुम्हे इस ज़माने में शर्म लग रही ह,

ह्रदय- मम मैं तो कल्पना की वजह से बोल रहा था

कल्पना- मैं कोई पुराने ज़माने की नहीं हु मुझे कोई ऐतराज नहीं ह,

तम्मना- देखा उसे कोई ऐतराज नहीं ह, अब आगे आओ,

ह्रदय आगे आ गया, तम्मना ने ह्रदय को देव बताने शुरू किये, वो ह्रदय से चिपक क्र सरे देव दिकः रही थी, वो अपनी चूचिया ह्रदय से रगड़ रही थी,

एक देव में तम्मना ह्रदय के पीछे आ गई और ह्रदय को उठा कर पीछे पलटना का देव दिखा रही थी, जिसमे उसने ह्रदय को पीछे आकर पकड़ लिया इससे तम्मना की चूचिया ह्रदय की कमर में डाब गई, तम्मना ने ह्रदय को उठाने के लिए ताकत लगाई जिससे तम्मना की छूट ह्रदय की बैक पैर रगड़ गई,

तम्मना ह्रदय को उठा तो नहीं पाई लेकिन वो दवा लगाना बता रही थी,

फिर वैसे hi उसने ह्रदय से कहा तो ह्रदय तम्मना के पीछे आ गया, और शामे तम्मना की तरह उसने तम्मना की कमर में हाथ दाल क्र बहो में कास क्र पकड़ लिया इससे तम्मना की चूचिया ह्रदय के हाथो में डाब गई, ह्रदय ने देव लगाया जिससे ह्रदय का लुंड तम्मना की गांड में ाचे से रगड़ गया, जिसे तम्मना ने अच्छे से फील किया, ह्रदय ने तम्मना को उठा लिया और पिच ेघुमा क्र पटक दिया, और उसके उप्पेर आ गया जिससे तम्मना ह्रदय के निचे डाब गई तम्मना की गांड ह्रदय के लुंड के सामने थी,

तम्मना को बड़ा मजा आ रहा था, वैसे तो ये देव यही ख़तम हो जाना था लेकिन तम्मना ने ह्रदय को रोका hi नहीं और निचे से जान बुझ क्र जोर लगाने लगी, जिससे ह्रदय का लुंड और जोर से उसकी गांड पैर दबाव बनाये, वो जोर लगाने के बहाने अपनी गांड को रगड़ रही थी,

फिर दोनों खड़े हुए तो, तम्मना ने कल्पना से वैसे hi देव लगाने को कहा, और कल्पना ने भी अच्छे से ह्रदय के शरीर से खुद को अचे से रगड़ा और वो तो खुद अपनी गांड को और पीछे क्र रही थी जिससे वो और अच्छे से फील क्र सके,

ह्रदय ये सब अच्छे से समझ रहा था लेकिन वो खुद को कण्ट्रोल कर रहा था, तम्मना ने एक देव बताया जिसमे दोनों पैरो के बिच हाथ दाल क्र सामने वाले को पलटना था, तम्मना ने ह्रदय के पैरो के बिच हाथ डाला तो ह्रदय के लुंड तम्मना के हाथ के निचे आ गया, और लुंड को हाथ लगते hi ह्रदय के अंदर तूफ़ान सा आ गया, उसका कण्ट्रोल छूटने लगा था, तम्मना ने भी देव के बहाने ह्रदय के लुंड को अच्छे से फील किया,

लेकिन ये देव ज्यादा देर नहीं चला क्योकि ह्रदय खुद hi पलट गया, लेकिन अब बरी थी तम्मना की ह्रदय ने भी वैसा hi देव लगाया तो तम्मना की छूट जो गीली हुई पड़ी थी ह्रदय के हाथ के निचे आते hi तम्मना मचल उठी, ह्रदय उसे पलटने लगा तो तम्मना जोर लगाने लगी जिससे ह्रदय को और जोर लगाना पड़ा जिससे तम्मना की छूट अच्छे से रगड़ गई,

फिर बरी थी कल्पना की अब कल्पना थोड़ी झिजक रही थी, लेकिन वो एक्सीटेंड भी बहुत थी, कल्पना ने भी देव लगाया और तम्मना की तरह ह्रदय के लुंड को रगड़ दिया, लेकिन जल्दी hi हैट गई, फिर ह्रदय ने लगाया और कपङा की छूट रगड़ते hi कल्पना झाड़ गई, उसका बदन अकड़ने लगा, उसने ह्रदय को कास कर पकड़ लिया,

तम्मना ने ये महसूस क्र लिया था, ह्रदय को समझ नहीं आया था क्योकि उसने कभी किसी लड़की को झड़ते न देखा था न hi उसे पता था इसके बारे में,

तम्मना- ठीक ह ह्रदय अब तुम जाओ अपनी क्लास में ये देव रोज करने हैं,

ह्रदय वह से निकल गया, कल्पना वही गद्दे पैर बैठी थी,

तम्मना- मजा आया न

कल्पना ने चौक क्र तम्मना को देखा तम्मना सामने कड़ी मुस्कुरा रही थी,

कप्लना झेप गई,

तम्मना- शर्माओ नहीं ऐसा होता ह और ह्रदय जैसा लड़का तुम्हारे बदन को ऐसे छुए तो ये होना लाजमी ह,

कप्लना- मम वो मैं

तम्मना- घबराओ नहीं मैं किसी से नहीं कहूँगी, तुम्हे मैंने इसी लिए चुना था, मैं जानती हु तुम ह्रदय को पसंद करती हो, लेकिन उससे अपने दिल की बात नहीं बोल प् रही हो, इसलिए मैंने तुम्हे ये मौका दिया ह, अब तुम्हारे पास मौका ह सब कुछ करने का,

कल्पना शॉकेड सी तम्मना को देख रही थी,

कल्पना- मम आप सच बोल रही हैं

तम्मना- है लेकिन ये बात हमारे बिच hi रही चाहिए, मैं भी एक लड़की हु तुम्हारी फीलिंग्स को समझती हु,

कल्पना उठी और तम्मना के हाथ पकड़ क्र ठंकु बोलने लगी,



तम्मना ने उसे गले से लगा लिया,
 
बहुत बहुत धन्यवाद डिअर,

पहले मैं ये hi सोचती थी की कहानी में बस सेक्स हो तो लोग पढ़ेंगे, लेकिन अब समझ आया की सेक्स तो यहाँ सभी कहानियो में होता ह, और सेक्स सब कहानियो में एक जैसा hi होता ह, लेकिन कहानी अलग हो तो लोग उसे पढ़ना छाते हैं,

आज कल लोग पोर्न में भी कहानी देखने लगे हैं, डायरेक्ट पोर्न देखना बंद क्र दिया लोगो ने,
 
अपडेट-9



हिमाचल की पहाड़ियों में एक खूबसूरत बाला घूम रही थी, और फोटोज ले रही थी,

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पहाड़ो से घूमती हुई वो निचे आई जहा एक छोटा सा गाओं था, जिसमे सबसे ऊपर बने घर के सामने जाकर उनसे दरवाजा खटखटाया,

दरवाजा खुला तो दीपा सामने कड़ी थी,

दीपा- जी आप कोण

औरत- जी मेरा नाम निधि ह चंडीगढ़ से यहाँ पहाड़ देखने आई थी लेकिन थकन ज्यादा हो गई, अब निचे नहीं उतरा जा रहा, क्या पानी मिल सकता ह

दीपा ने उसे पानी लेकर दिया

दीपा- आप इधर क्यों आई, इधर इतनी खास पहाड़िया नहीं ह, टूरिस्ट प्लेस तो दूसरी तरफ ह,

निधि- मुझे भीड़ में घूमना पसंद नहीं और जो शांति यहाँ ह वो कही नहीं मिली मुझे,

दीपा- ये तो ह शांति तो बहुत ह यहाँ,

निधि- क्या यहाँ मुझे कोई गेस्ट हाउस मिल सकता ह रुकने के लिए मैं कुछ दिन यहाँ रुकना चाहती हु,

दीपा- ऐसा कोई गेस्टहाउसे तो यहाँ नहीं ह, निचे किसी से पूछ सकती हु अगर कोई रखना चाहे तो रख सकता ह,

दीपा निधि को अपने साथ लेकर निचे आ गई और एक दो घर में पूछने पैर एक हस्बैंड वाइफ मान गए निधि को रुकवाने के लिए, इसके लिए निधि अच्छे पैसे दे रही थी,

निधि को अच्छी जगह मिल गई थी ह्रदय के करीब रहने के लिए,

शाम को ह्रदय जब घर आया तो उसने दिन भर की साडी घटना दीपा को बता दी, तम्मना और कल्पना के साथ हुई घटनाओ को भी बताया,

दीपा- तेरे पास अच्छा मौका था आज खुद को टेस्ट करने का

ह्रदय- माँ पता नहीं सब ठीक सा नहीं लग रहा था, फीलिंग्स आ रही थी लेकिन खुद hi शांत हो जाती थी,

दीपा सोच में पद गई,

दीपा- कोई बात नहीं जल्दी hi सब ठीक हो जायेगा, कल अगर उनकी हरकत फिर से हो तो तू अपनी तरफ से आगे बढ़ना

ह्रदय- माँ आप कैसी कैसी बाते कर लेती हो

दीपा- मैं क्या कर सकती हु ये तू नहीं जनता, जितना बोलै उतना किया कर

ह्रदय- समझ गया माँ

दोनों माँ बीटा बात कर रहे थे तभी दरवाजा बजा, ह्रदय ने उठ क्र दरवाजा खोला, और सामने एक बहुत hi कामुक बदन की मालकिन निधि कड़ी थी,


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ह्रदय- जी आप कोण

निधि- कोई और ह घर में

निधि की आवाज सुन क्र दीपा भी आ गई

दीपा- अरे आप आइये आइये

ह्रदय साइड में हो गया, निधि ह्रदय को बड़ी घेरि नजरो से देखती हुई अंदर आ गई, तीनो बैठ गए,

दीपा- बीटा ये निधि जी हैं, यहाँ घूमने आई हैं, कोई गेस्ट हाउस नहीं मिल रहा था तो मैंने मिश्रा जी के घर में रुकवा दिया,

ह्रदय- ok ok

निधि- मैंने तो आपसे मिलने चली आई, उप्पेर घूमने जा रही थी, कोई उधर जाना hi नहीं चाहता सोचा आपको साथ ले चालू,

दीपा- मैं इस वक़्त तो नहीं जा पाऊँगी,

निधि- अच्छा ok मैं खुद hi चली जाती हु,

निधि ने उदास सा मन बना क्र कहा

दीपा- आप ह्रदय के साथ चली जाइये, वो आपको दिखा लाएगा, उप्पेर अकेले जाना ठीक नहीं ह,

निधि- तुम चलोगे मेरे साथ,

ह्रदय ने दीपा की तरफ देखा और ok बोल क्र खड़ा हो गया,

निधि अपने अंदर की ख़ुशी को दबती हुई उठ क्र चल दी,

दोनों पहाड़ो पैर जाने लगे, बर्फ पैर ठेलने लगे,

निधि- तुम बात नहीं करते क्या

ह्रदय- मैं आपको जनता भी नहीं तो क्या बात करू,

निधि- हहम्म्म्म ये तो ह, मेरा नाम निधि ह, चंडीगढ़ से आई हु यहाँ घूमने, परिवार की चिक चिक से दुखी आ गई थी इसलिए एकांत में समय बिताने आई हु,

ह्रदय- अच्छी जगह चुनी ह आपने

निधि- मेरा नाम निधि ह, मुझे फोर्मलटीएस पसंद नहीं ह, तुम मुझे निधि बुला सकते हो,

ह्रदय- आप बड़ी हैं मुझसे,

निधि- ये सब पुराणी बाटे ह बड़े छोटे की, क्या मैं तुम्हे बड़ी लगती हु, अभी तो मैं एक दम जवान हु, हहहहहहए मजाक क्र रही हु, लेकिन मुझे ये बड़ा बनने का शोक नहीं ह, सो प्लस मुझे निधि hi बोलना ok

ह्रदय- ok निधि जी

निधि- चलो इतना भी चलेगा,

तभी निधि का पेअर लड़खड़ाया और वो गिरने लगी तो ह्रदय ने तुरंत उसे पकड़ क्र खींच लिया और ह्रदय के एक हाथ में निधि का हाथ दूसरा हाथ निधि की गांड पैर था, जिसे ह्रदय ने कास क्र पकड़ रखा था,

निधि भी बिना झिजक ह्रदय से चिपक गई थी, उसे जरा सा भी ऐतराज नहीं था ह्रदय से चिपकने में, ह्रदय ने निधि को छोड़ा तो वो ठंकु बोलने लगी,

फिर दोनों काफी देर घूमे और निचे आ गए, और अपने अपने घर में चले गए, निधि जिस घर में रुकी थी वह सबसे दीपा और ह्रदय की पूरी जानकरी निकल रही थी,

अगले दिन कॉलेज में क्लास के बाद तम्मना ने फिर से कुश्ती की क्लास ली, आज फिर तम्मना ने ह्रदय और कल्पना को रोक लिया और वैसे hi देव लगवाए, आज ह्रदय ने कोई शर्म नहीं की थी, जब भी उसका हाथ तम्मना और कल्पना की चुकी या छूट पैर रगड़ता तो ह्रदय उसे और अच्छे से दबा देता, ह्रदय का लुंड आज अपनी औकात में आने लगा था, जिसका उभर उसकी टाइट स्किन फिट लोअर में दिख रहा था, उसका साइज देख क्र तम्मना के दिल की तम्मनाए मचल उठी थी,

कल्पना में भी बहुत हिम्मत आ गई थी, उसने भी आज ह्रदय के लुंड को अच्छे से फील किया था, आज की प्रैक्टिस कुश्ती की नहीं थी, आज कुछ और hi चल रहा था और तीनो इस बात को अच्छे से समझ रहे थे, और सबसे बेवकूफ थी कल्पना वो ये hi नहीं समझ पाई की तम्मना उसका भला क्र रही ह या अपना,

ह्रदय आगे बढ़ना चाहता था लेकिन खुद आगे बढ़ क्र कैसे करे ये समझ नहीं आ रहा था, जब से दीपा ने उसे परमिशन दी थी तब से उसका लुंड बहुत उछाले मर रहा था,

शाम को घर आया तो निधि पहले से hi घर बैठी थी, ह्रदय को देखते hi मुस्कुरा पड़ी ह्रदय ने भी मुस्कुरा क्र जवाब दिया,

दीपा- बीटा निधि जी तेरे साथ घूमने के लिए आई हैं, बोल रही थी तेरी कंपनी अच्छी लगी उन्हें,

ह्रदय- मुझे ख़ुशी हुई ये जान कर,

दीपा- आजा पहले तू खाना खा ले फिर चले जाना,

दोनों अंदर आ गए,

ह्रदय- माँ तुम मुझे ये ऐसे hi किसी के साथ भेज दे रही हो,

दीपा- तुझे मैं पागल लगती हु क्या,

ह्रदय- पागल तो नहीं हो मैं जनता हु कुछ तो दिमाग में चल रहा होगा,

दीपा- ये औरत अपने घर से इतनी दूर यहाँ अकेले समय बिताने आई ह, इसका मतलब वो प्यासी ह, उसे अपने पति से सुख नहीं मिल रहा ह, उसकी आँखों में भूक देखि ह मैंने, तू तरय करेगा तो आराम से पैट जाएगी

ह्रदय- माँ तुम मेरी माँ हो कोई डीलर नहीं हो जो मेरे लिए लड़कियों औरतो का इंतजाम करोगी, मैं कोई हवसी हु क्या

दीपा- तेरे लिए तो मैं दलाल भी बन जाउंगी बीटा और हवसी नहीं ह तो बन जा मैं बोल तो रही हु

ह्रदय- साडी उम्र तो मुझे ऐसे पला ह की किसी की तरफ धयान न भटके अब बोलती हो कुए खोद दे,

दीपा- कमीने तेरी उम्र hi अब हुई ह कुए खोदने की, तो अब hi तो करेगा ये सब,

ह्रदय झेप गया,

दीपा- अब जितना बोलै ह उतना कर, तेरे पास ऐसा कुछ ह जिससे तू अनलिमिटेड औरतो का भला क्र सकता ह, अगर वो बेचारी कुछ भला चाहती ह तो क्र दे न,

ह्रदय- माँ ऐसे कैसे जाकर बोलू उससे की मुझे तुम्हारा भला करना ह

दीपा- अगर वो तरय करे तो मौका मत चूकना बस,

ह्रदय- ठीक ह देखूंगा, अब खाने को तो दे दो,

दीपा ने खाने को दिया फिर ह्रदय निधि के साथ निकल गया घूमने, आज निधि ह्रदय से चिपक कर चल रही थी, ह्रदय दीपा की बात सोच सोच क्र एक्सीटेंड हो रहा था, उसका लुंड उसकी जेनस में से फुंकार मर रहा था, लेकिन किसी से लड़ने से ज्यादा हिम्मत किसी को छोड़ने के लिए चाहिए होती ह, और दीपा ने उसे लड़ने की तो बहुत हिम्मत दी थी लेकिन छोड़ने की हिम्मत देनी भूल गई,

निधि – तुम्हारे पापा कहा ह, उन्हें कभी देखा नहीं

ह्रदय- यहाँ मैं और मेरी माँ रहते हैं बस,

निधि- वो कही बहार जॉब करते हैं क्या,

ह्रदय- मैंने उन्हें कभी नहीं देखा,

निधि- मैं कुछ समझी नहीं,

ह्रदय- निधि जी आप उनके बारे में बात मत कीजिये प्लस

निधि समझ गई मामला ज्यादा गंभीर ह,

निधि- ok ok नहीं करती, मैंने तो इस लिए पूछा क्योकि दीपा जी सिन्दूर लगाती हैं, इसका मतलब वो जिन्दा हैं, यहाँ नहीं देखे तो पूछ लिया,

ह्रदय- वो कहा ह हम नहीं जानते,

निधि- तुमने ढूंढ़ने की कोशिश नहीं की,

ह्रदय- माँ ने कभी जाने hi नहीं दिया

निधि- अब तो तुम जवान हो अब तो तुम खुद ढूंढ सकते हो, क्या पता तुम्हरी माँ दर की वजह से ढूंढ़ने नहीं दे रही हो, अगर तुम उन्हें ढूंढ लाओगे तो उन्हें भी ख़ुशी होगी,

ह्रदय- वो उन्हें ढूंढ़ना छाती तो मुझसे जरूर बोलती,

निधि- मैं एक औरत हु और दूसरी औरत को पचन्ति हु, वो सिन्दूर लगाती ह मतलब तुम्हारे पापा से अब भी बहुत प्यार करती हैं, और उन्हें यकीन ह वो जिन्दा हैं, अगर वो तुम्हे ढूंढ़ने के लिए नहीं बोल रही उन्हें शायद दर ह तुम भी न चले जाओ,

ह्रदय सोच में दुब गया

निधि- एक अच्छे बेटे का फर्ज ह अपने माँ बाप को एक करना, तुम्हारी जिम्मेदारी ह अपने पापा को ढूढ़ क्र लाना,

ह्रदय- लेकिन माँ शायद जाने न दे

निधि- ये फैसला तुम्हे खुद लेना छाइये अब तुम जवान हो और देखने में अच्छे खासे दम दर भी लगते हो तो तुम्हे ये फैसला आगे बढ़ क्र लेना चाहिए, जब तुम अपने पापा को ढूडन लाओगे तो तुम्हारी माँ को भी खसुहि मिलेगी,

ह्रदय घेरि सोच में दुब गया,

निधि का तीर सही जगह लग गया था,

ह्रदय- लेकिन मैं कहा ढूंढूंगा उन्हें

तभी सामने से किसी के गुरने की आवाज आई और दोनों ने उस तरफ देखा तो निधि तो दर की वजह से कंपनी लगी थी, एक बार तो ह्रदय भी हड़बड़ा गया था, सामने थी hi ऐसी चीज,

एक टाइगर जो की किसी भी नार्मल टाइगर से काफी बड़ा और भयंकर था, आँखे लाल थी,


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निधि के हर जगह से पसीने निकल गए थे, उसकी जबान वही बंद हो गई थी, ह्रदय ने निधि का हाथ पकड़ा और अपने पीछे कर लिया,

वो टाइगर गुरया और एक जोर की दहाड़ मरी, उसकी दहाड़ से पुरे पहाड़ गूंज गए थे,

निधि- ये हमे मार देगा

ह्रदय- कुछ नहीं करेगा, वो शायद रास्ता भटक गया ह,

लेकिन तभी टाइगर ने छलांग लगा दी उनके उप्पेर, ह्रदय भी उसके उप्पेर कूद पड़ा, टाइगर ने ह्रदय को पंजा मारा जिससे उसकी छाती में जखम हो गए, निधि की चीख निकल गई,

इधर ह्रदय ने सम्हालते हुए टाइगर की गार्डन को अपने बाजुओं में भींच लिया, टाइगर ने निधि की तरफ देखा और ह्रदय को लेकर उसकी तरफ डोडा लेकिन ह्रदय ने अपने पेअर एक पत्तर में गड़ाए और टाइगर को रोका, फिर पूरी ताकत लगा क्र टाइगर को घुमा कर दूर फेंक दिया,

टाइगर एक पेड में जाकर लगा जिससे वो पेड टूट गया, जितनी ताकत से ह्रदय ने टाइगर को फेंका था उससे तो टाइगर की पसलिया तक टूट जनि चाहिए थी लेकिन टाइगर अगले hi पल उछाल क्र समाने आ गया, और ह्रदय की तरफ डोडा, उसने ह्रदय पैर हुम्ला किया ह्रदय ने उसके दोनों पंजे पकडे और खड़ा हो गया, टाइगर जोर लगाने लगा, लेकिन ह्रदय से खुद को छुड़ा नहीं प् रहा था,

फिर ह्रदय ने टाइगर के निचे अपना सर डाला और उसे अपने कंधे पैर उठा लिया और दुरी साइड पटक क्र दे मारा, टाइगर फिर से खड़ा हुआ तभी कुछ आहात सी महसूस हुई तो टाइगर ने मुद क्र पीछे देखा और तुरंत वह से भाग गया, ह्रदय ने भी वो आहात महसूस की थी,

ह्रदय ने पलट क्र निधि को देखा वो भोचकी सी कड़ी देख रही थी, उसकी आँखे फटी हुई थी, पसीने में भीगी हुई, बर्फ में कड़ी हुई को भी पसीने आ रहे थे, वो पालक तक झपकना भूल गई थी,

ह्रदय उसके पास आया

ह्रदय- निधि जी निधि जी आप ठीक हैं,

निधि होश में आई और ह्रदय को देखने लगी, और न जाने उसे क्या सुझा उसने ह्रदय के बालो में हाथ डाला और अपने हॉट ह्रदय के होतो से मिला दिए, ह्रदय कुछ समझ पता तब तक निधि ने उसके होतो का रास चूसना शुरू क्र दिया था, ह्रदय की आँखे हैरत से खुली हुई थी, ये उसका पहला किश था वो भी अपने से लगभग दुगनी उम्र की औरत क साथ, वैसे निधि कही से भी 38 की आगे की नहीं लगती थी,


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कुछ देर हॉट चूमने के बाद निधि अलग हुई, ह्रदय हैरत से उसे देख रहा था,

निधि- ठंकु ह्रदय ठंकु तुमने आज मेरी जान बचा ली, मैं तुम्हारा ये अहसान कभी नहीं भूलूंगी,

ह्रदय- ये किश

निधि- ओह्ह ये मेरे ठंकु किश था,

ह्रदय- हेल्प करने पैर ठंकु के साथ किश भी मिलता ह क्या

निधि- जो तुमने आज किया ह उसके लिए तो मैं सब कुछ दे सकती हु, बताओ क्या चाहिए तुम्हे

ह्रदय- जी क्या को कुछ नहीं

निधि मुस्कुरा पड़ी,

निधि- मैं तो तुम्हारी हिम्मत और ताकत देख क्र hi फ़िदा हो चुकी हु, आज से मैं तुम्हारी अहसान मंद हु, तुम्हे जो भी हेल्प छाइये जीवन में मैं करुँगी, तुम्हारे पापा को ढूढ़ने में भी मैं तुम्हारी हेल्प करुँगी

ह्रदय- ये कोई अहसान नहीं ह

निधि- दोस्ती तो बोल सकती हु, मुझे अपनी दोस्त तो बोल सकते हो न

ह्रदय- है दोस्त ठीक ह,

निधि- तुम मेरे साथ चलो मैं तुम्हारी हेल्प करुँगी जो मुझसे बनेगा मैं उससे भी ज्यादा करुँगी,

ह्रदय- उसकी जरुरत नहीं ह निधि जी,

निधि ने फिर से ह्रदय को गले लगा लिया, इस बार ह्रदय ने निधि कड़क और बड़े बूब्स को महसूस किया,

निधि- मैं दिल से करना छाती हु, तुम मेरे साथ चलो

ह्रदय- लेकिन माँ को क्या बताऊंगा

निधि- उन्हें बता दो किसी कम्पटीशन में जा रहे हो,

ह्रदय को निधि की बात सही लगी, आज पहेली बार ह्रदय के दिमाग में दीपा से झूट बोलने की बात आई,

किसी ने सही कहा ह औरत कुछ भी करवा सकती ह, लेकिन ये किसे पता की ये अच्छे के लिए हो रहा ह या बुरे के लिए,

ह्रदय- हम्म्म्म देखता हु क्या कहना ह,

निधि ने तुरंत ह्रदय को कास क्र पकड़ लिया, जैसे कोई प्रेमिका अपने प्रेमी से लिपट रही हो,

ह्रदय ने भी उसकी कमर पैर हाथ रखा, निधि ने फिर से अपना मुँह उप्पेर किया और फिर से ह्रदय के हॉट चुम लिए,

इधर ह्रदय निधि के होतो में खोया था उधर दिया और शनाया के दिल में ह्रदय की यादे उभर रही थी, वो बैचैन थी उन्हें ह्रदय की याद सत्ता रही थी, वही दृष्टि की वजह से शनाया का दिमाग और भी ख़राब था, उधर नैना और काम्य के दिमाग में भूचाल उठा हुआ था, उन्होंने दिया शनाया आशना और रैना से दोस्ती तो क्र ली लेकिन जानकरी कैसे निकली जाये ये समझ नहीं आ रहा था,

जब ह्रदय घर आया तो उसके कपडे फाटे हुए थे, वो जैसे hi अंदर घुसा तो दीपा उसे देख क्र घबरा गई,

दीपा- ये क्या हु ये कैसे हुआ

ह्रदय- कुछ नहीं माँ एक टाइगर आ गया था, गाओं के नजदीखि आ गया था, तो उसे भागना पड़ा,

दीपा- ठीक तो ह न

ह्रदय- है मैं मैं ठीक हु मुझे क्या होगा

दीपा- तुझे नहीं पूछ रही उस टाइगर को पूछ रही हु वो ठीक ह न, तूने उसे कुछ किया तो नहीं न,

ह्रदय- माँ तुम भी न, है वो ठीक ह, बस एक पंजा मर गया, और मेरी जैकेट ख़राब कर गया,

दीपा मुस्कुराई शाबास बीटा ,

अगले दिन कॉलेज की छुट्टी थी तो ह्रदय घर पैर hi लेता था, उधर तम्मना और कल्पना बैचैन हो रही थी, उन्हें ह्रदय के साथ रगड़े में इतना मजा आने लगा था की वो बस चाहती थी की ह्रदय उन्हें ऐसे hi रगड़ता रहे,

निधि ह्रदय से मिलने आई लेकिन वो अपने रूम में लेता हुआ मोबाइल पैर रॉल्स देख रहा था धड़कन की,

दीपा ने निधि को आते देखा, निधि धीरे कदमो से आ रही थी,

दीपा- कैसी ह निधि जी

निधि एक दम चौंक गई,

निधि- मैं ठीक हु आप कैसी हैं,

दीपा- मैं ठीक हु आइये आइये कुछ लेंगी क्या, कॉफ़ी बना रही हु ह्रदय के लिए आप भी लेंगी क्या

निधि- ह्रदय घर में hi ह कॉलेज नहीं गया,

दीपा- आज संडे ह न

निधि- ok ok

दीपा- आप ह्रदय के रूम में बैठिये मैं वही आती हु कॉफ़ी लेकर,

निधि चहकती हुई ह्रदय के रूम में चली गई, जहा ह्रदय मोबाइल में खोया हुआ था, निधि ने अंदर आकर धीरे से ह्रदय की चेस्ट पैर हाथ घुमाया, ह्रदय एक दम चौंक गया, वो तुरंत उठ क्र बैठ गया, निधि ने तुरंत उसके होतो पैर अपने हॉट रख दिए,


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ह्रदय को कुछ समझ नहीं आया, किश करने के बाद निधि अलग हुई,

ह्रदय- ये किश किस लिए

निधि- तुम अब मेरे दोस्त हो तो दोस्तों को ऐसे किश करने में कोई ऐतराज नहीं ह

ह्रदय- अच्छा जी कितने दोस्त ह आपके जिनके साथ आप ऐसे

ह्रदय ने जोश जोश में पूछ तो लिया लेकिन वो घबरा गया, कही निधि बुरा न मान जाये, लेकिन निधि मुस्कुराई

निधि- तुम पहले हो जिसके साथ मेरी दोस्ती ह, ऐसा कोई लायक इंसान नहीं जो मुझसे दोस्ती क्र सके,

ह्रदय ने स्माइल दी, तभी दीपा आ गई कॉफ़ी लेकर, तीनो बैठ क्र कॉफ़ी पिने लगे,

दीपा- आप लोग बात करो मैं जरा पड़ोस में होकर आती हु कुछ काम ह मुझे,

ह्रदय रोकता रह गया लेकिन दीपा उठी और चली गई, निधि अंदर hi अंदर खुश हो रही थी,

दीपा के जाते hi निधि ह्रदय से चिपक क्र बैठ गई,

निधि- तो क्या सोचा तुमने चलोगे न मेरे साथ,

ह्रदय- है मैं चलूँगा, मैं अपने पिता को जरूर ढूंढूंगा,

निधि- ये हुई न बात,

निधि फिर से ह्रदय के गले लग गई,

ह्रदय- तुम ये हर बात पैर गले क्यों लग जाती हो

निधि- तुम्हे अच्छा नहीं लगता क्या

ह्रदय- वो मैं वो

निधि हसी- तुम बहुत बुद्धू हो,

फिर निधि ने बड़ा बोल्ड कदम उठाया और ह्रदय के उप्पेर लेट गई, निधि की चूचिया ह्रदय की चेस्ट में डाब गई, ह्रदय का लुंड जो पहले से hi टाइट हो रखा था निधि के लोअर में से उसकी जांघो के बिच महसूस होने लगा,


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ह्रदय- ये ये क्या कर रही हो

निधि- अपने बुद्धू दोस्त को थोड़ा ज्ञान दे रही हु,

इतना बोल क्र निधि ने ह्रदय के होतो पैर हॉट मिलाया और चूसने लगी, ह्रदय खामोश लेता रहा कोई हरकत नहीं, निधि ने ह्रदय के हाथो को पकड़ा और अपनी गांड पैर रख दिया,


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अब सरे मतलब साफ़ थे, निधि क्या चाहती ह कोई पागल भी समझ सकता था, अगर अब भी ह्रदय नहीं समझ तो बिलकुल बेकार ह,

लेकिन हमारा ह्रदय बेकार कैसे हो सकता ह, उसे तो बहुत कुए खोदने हैं, उसे ये ज्ञान तो हासिल करना hi होगा,

ह्रदय ने हालत को समझते हुए तुरंत निधि की टाइट गांड को अपने मजबूत हाथो में पकड़ लियाऔर कास क्र दबा दिया,


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निधि के मुँह से आह निकल गई, निधि ने बड़े जोश में ह्रदय के हॉट चूमने शुरू क्र दिए, ह्रदय ने भी साथ देना शुरू क्र दिया, ह्रदय के हाथ निधि की गांड का अच्छे से जायजा ले रहे थे,

निधि का फील हो रहा था असली मर्द के हाथो का अहसास, दोनों की हरकते बढ़ती जा रही थी तभी ह्रदय का फ़ोन बज उठा, दोनों का किश टूट गया, ह्रदय ने फ़ोन देखा तो वो तम्मना का था, निधि एक दम से ह्रदय के ऊपर से उतर गई,

ह्रदय- ी ऍम श्री निधि जी वो मैं

निधि- अरे मेरे भोले भंडारी तुम क्यों श्री बोल रहे हो शुरू तो मैंने किया था,

तुम बात करो मैं तो ये बताने आई थी की मैं वापस जा रही हु, कुछ जरुरी काम ह, लेकिन तुम चंडीगढ़ आ जाओ मैं तुम्हारे साथ तुम्हारे पापा को ढूंढूंगी, और वही पैर तुम्हारा सवाद चखूंगी

ह्रदय- सवाद

निधि- ले लो मेरा कार्ड चंडीगढ़ आकर मुझे कॉल करना, तुम एक भेतरीन मर्द हो लेकिन तुम्हे असली मर्द मैं बनाउंगी,

इतना बोल क्र निधि ह्रदय के होतो को चूमकर चली गई, ह्रदय उसे देखता रह गया, दो दिन पहले यहाँ आई थी एक दम अनजान थी और दो दिन में hi इतनी खास दोस्त बन गई और बात यहाँ तक पहुंच गई, आज तक किसी लड़की के साथ भी ऐसा नहीं हुआ जो निधि के साथ हो गया, क्या खुस्भु ह इतना टाइट बदन ह, uffffffffffffffff

तभी उसका फ़ोन फिर से बजा,

ह्रदय- ोुह्ह्हह्ह मम

Hello मम

तम्मना- कहा हो ह्रदय कब से फ़ोन मिला रही हु,

ह्रदय- वो मैं थोड़ा बिजी था

तम्मना- अच्छा तुम मेरे घर आ सकते हो क्या,

ह्रदय- है जी जरूर कोई जरुरी काम था क्या,

तम्मना- है वो तुम्हारी प्रैक्टिस आगे बढ़ानी थी,

ह्रदय- आज संडे को भी

तम्मना- है तुमने अभी तो स्टार्ट किया ह बिच में गपे ठीक नहीं ह, तुम घर आ जाओ मैं तब तक रेडी होती हु,

फ़ोन काटने के बाद.

ह्रदय मन में- लगता ह तम्मना मम काफी उतावली हो रही हैं, आज कुछ कर hi लेना छाइये वैसे भी निधि ने आग hi लगा दी ह बदन में,

तभी दीपा आ गई,

दीपा- अरे वो चली क्यों गई,

ह्रदय- क्यों चली गई मतलब, यही रखना था क्या

दीपा- तुम लोगो के बिच कुछ हुआ नहीं क्या, मैं तो इसी लिए अकेला छोड़ क्र गई थी कुछ होगा तुम लोगो के बिच, तूने कुछ गड़बड़ तो नहीं क्र दी

ह्रदय- माँ कैसी बात कर रही हो तुम, मैंने कुछ नहीं किया

दीपा- वही तो इसी लिए चली गई वो तूने कुछ भी नहीं किया होगा, ऐसे कैसे काम चलेगा बीटा कुछ तो करना पड़ेगा, अभी तो तेरी सील भी नहीं टूटी,

ह्रदय- सील मेरी सील क्या बोल रही हो माँ

दीपा- ले पागल को ये भी नहीं पता, जैसे लड़कियों की सील होती ह वैसे hi लड़को की भी सील होती ह, जब पहेली बार कर्जा तो तुझे भी दर्द होगा, इसलिए जब भी करे तो आयल लगा लेना अच्छा सा वर्ण दर्द होगा

ह्रदय- माँ तुम मुझे डरा रही हो

दीपा- ले लड़किया डर्टी नहीं ह ऐसा मुसल लेने से तू दर रहा ह,

ह्रदय- माँ तुम क्या क्या बोलती रहती हो, मेरा खाना बना दो मैं तम्मना मम के घर जा रहा हु,

दीपा- वह क्यों

ह्रदय- वो कुश्ती के देव सीखने वाली ह आगे के,

दीपा- सही ह आज साडी कुश्ती सिख क्र hi आना और अच्छे से खेल क्र आना

ह्रदय- वो टीचर ह मेरी

दीपा- बीटा निचे वाले के पास दिमाग नहीं होता उनकी समझ में रिश्ते नहीं आते, तू जा और झंडे गाड़ क्र hi आना आज,

ह्रदय बाथरूम में घुस गया और नाहा धो क्र तैयार हो गया, दीपा ने नाश्ता बना दिया, जब ह्रदय घर से निकला तो दीपा ने दही खिला क्र कहा- मुँह मीठा करके निकल सफलता मिलेगी,

ह्रदय- माँ तुम तो मुझे ऐसे भेज रही हो जैसे मैं किसी मिशन पैर जा रहा हु

दीपा- ये भी एक मिशन ह बीटा तू नहीं समझेगा, जब पहेली बार करेगा तब समझ आएगा,

ह्रदय- तो तुम साथ hi चलो न सामने बैठ क्र देखती रहना कैसा कर रहा हु,

दीपा- है है ये सही रहेगा, चलती हु मैं भी

ह्रदय- माँ तुमसे जीतना नामुमकिन ह, दुनिया में तुम्हारे जैसी माँ होना नामुमकिन ह, मैं जा रहा हु bye,

ह्रदय के जाने के बाद दीपा मन में- बीटा तुझे अभी पता hi क्या ह माँ कैसी होती ह, अगर तू हमारी माँ या यु कहु तेरी असली माँ से मिला होता तो समझ आता माँ कैसे पलटी ह,

उधर अनीता परेशां अपने होटल के रूम में बैठी थी, रिंकी ड्रग्स के लिए तड़प रही थी, रम्य और अन्य परेशां थी, उन्हें समझ आ रहा था वो लोग कितनी बड़ी गलती करके आये हुए हैं, अमेरिका से उनके पास जानकरी आ चुकी थी, पुलिस रिंकी को ढूंढ रही ह, अब उस पैर ड्रग्स लेने के अलावा डीलिंग का भी आरोप लग चुक्का था,

तभी डोर बेल्ल बजी, अनीता ने दरवाजा खोला तो सामने खड़े थे राजेश जी, राजेश ने तुरंत अनीता के सामने हाथ जोड़ लिए, कैसी हैं छोटी मालकिन,

अनीता- ये क्या कर रहे है आप, आप मुझसे बड़े हैं और अब मैं कोई मालकिन नहीं हु,

राजेश- समय बदल सकता ह लेकिन राजेश नहीं बदल सकता,

रम्य और अन्य शॉकेड सी राजेश को देख रही थी, राजेश अपने आप में काफी अमीर दिख रहा था, और अनीता को छोटी मालकिन बोल रहा था,

अनीता- आप पहले एक बार रिंकी को देखिये उसकी हालत बहुत ख़राब ह,

राजेश रिंकी के पास पंहुचा, रिंकी ने एक बार राजेश को देखा तो वो तुरंत कड़ी हो गई और दौड़ क्र राजेश के पेअर छुए,

राजेश- खुश रहो बेटी, ये क्या हाल बना रखा ह तूने

रिंकी- आप सबने दूर क्र दिया था तो मैं कैसे जीती


रिंकी राजेश के गले लग क्र रोने लगी, इधर दोनों बहन सुरप्रीसेड सी कड़ी देख रही थी,
 
अपडेट-9



हिमाचल की पहाड़ियों में एक खूबसूरत बाला घूम रही थी, और फोटोज ले रही थी,

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पहाड़ो से घूमती हुई वो निचे आई जहा एक छोटा सा गाओं था, जिसमे सबसे ऊपर बने घर के सामने जाकर उनसे दरवाजा खटखटाया,

दरवाजा खुला तो दीपा सामने कड़ी थी,

दीपा- जी आप कोण

औरत- जी मेरा नाम निधि ह चंडीगढ़ से यहाँ पहाड़ देखने आई थी लेकिन थकन ज्यादा हो गई, अब निचे नहीं उतरा जा रहा, क्या पानी मिल सकता ह

दीपा ने उसे पानी लेकर दिया

दीपा- आप इधर क्यों आई, इधर इतनी खास पहाड़िया नहीं ह, टूरिस्ट प्लेस तो दूसरी तरफ ह,

निधि- मुझे भीड़ में घूमना पसंद नहीं और जो शांति यहाँ ह वो कही नहीं मिली मुझे,

दीपा- ये तो ह शांति तो बहुत ह यहाँ,

निधि- क्या यहाँ मुझे कोई गेस्ट हाउस मिल सकता ह रुकने के लिए मैं कुछ दिन यहाँ रुकना चाहती हु,

दीपा- ऐसा कोई गेस्टहाउसे तो यहाँ नहीं ह, निचे किसी से पूछ सकती हु अगर कोई रखना चाहे तो रख सकता ह,

दीपा निधि को अपने साथ लेकर निचे आ गई और एक दो घर में पूछने पैर एक हस्बैंड वाइफ मान गए निधि को रुकवाने के लिए, इसके लिए निधि अच्छे पैसे दे रही थी,

निधि को अच्छी जगह मिल गई थी ह्रदय के करीब रहने के लिए,

शाम को ह्रदय जब घर आया तो उसने दिन भर की साडी घटना दीपा को बता दी, तम्मना और कल्पना के साथ हुई घटनाओ को भी बताया,

दीपा- तेरे पास अच्छा मौका था आज खुद को टेस्ट करने का

ह्रदय- माँ पता नहीं सब ठीक सा नहीं लग रहा था, फीलिंग्स आ रही थी लेकिन खुद hi शांत हो जाती थी,

दीपा सोच में पद गई,

दीपा- कोई बात नहीं जल्दी hi सब ठीक हो जायेगा, कल अगर उनकी हरकत फिर से हो तो तू अपनी तरफ से आगे बढ़ना

ह्रदय- माँ आप कैसी कैसी बाते कर लेती हो

दीपा- मैं क्या कर सकती हु ये तू नहीं जनता, जितना बोलै उतना किया कर

ह्रदय- समझ गया माँ

दोनों माँ बीटा बात कर रहे थे तभी दरवाजा बजा, ह्रदय ने उठ क्र दरवाजा खोला, और सामने एक बहुत hi कामुक बदन की मालकिन निधि कड़ी थी,


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ह्रदय- जी आप कोण

निधि- कोई और ह घर में

निधि की आवाज सुन क्र दीपा भी आ गई

दीपा- अरे आप आइये आइये

ह्रदय साइड में हो गया, निधि ह्रदय को बड़ी घेरि नजरो से देखती हुई अंदर आ गई, तीनो बैठ गए,

दीपा- बीटा ये निधि जी हैं, यहाँ घूमने आई हैं, कोई गेस्ट हाउस नहीं मिल रहा था तो मैंने मिश्रा जी के घर में रुकवा दिया,

ह्रदय- ok ok

निधि- मैंने तो आपसे मिलने चली आई, उप्पेर घूमने जा रही थी, कोई उधर जाना hi नहीं चाहता सोचा आपको साथ ले चालू,

दीपा- मैं इस वक़्त तो नहीं जा पाऊँगी,

निधि- अच्छा ok मैं खुद hi चली जाती हु,

निधि ने उदास सा मन बना क्र कहा

दीपा- आप ह्रदय के साथ चली जाइये, वो आपको दिखा लाएगा, उप्पेर अकेले जाना ठीक नहीं ह,

निधि- तुम चलोगे मेरे साथ,

ह्रदय ने दीपा की तरफ देखा और ok बोल क्र खड़ा हो गया,

निधि अपने अंदर की ख़ुशी को दबती हुई उठ क्र चल दी,

दोनों पहाड़ो पैर जाने लगे, बर्फ पैर ठेलने लगे,

निधि- तुम बात नहीं करते क्या

ह्रदय- मैं आपको जनता भी नहीं तो क्या बात करू,

निधि- हहम्म्म्म ये तो ह, मेरा नाम निधि ह, चंडीगढ़ से आई हु यहाँ घूमने, परिवार की चिक चिक से दुखी आ गई थी इसलिए एकांत में समय बिताने आई हु,

ह्रदय- अच्छी जगह चुनी ह आपने

निधि- मेरा नाम निधि ह, मुझे फोर्मलटीएस पसंद नहीं ह, तुम मुझे निधि बुला सकते हो,

ह्रदय- आप बड़ी हैं मुझसे,

निधि- ये सब पुराणी बाटे ह बड़े छोटे की, क्या मैं तुम्हे बड़ी लगती हु, अभी तो मैं एक दम जवान हु, हहहहहहए मजाक क्र रही हु, लेकिन मुझे ये बड़ा बनने का शोक नहीं ह, सो प्लस मुझे निधि hi बोलना ok

ह्रदय- ok निधि जी

निधि- चलो इतना भी चलेगा,

तभी निधि का पेअर लड़खड़ाया और वो गिरने लगी तो ह्रदय ने तुरंत उसे पकड़ क्र खींच लिया और ह्रदय के एक हाथ में निधि का हाथ दूसरा हाथ निधि की गांड पैर था, जिसे ह्रदय ने कास क्र पकड़ रखा था,

निधि भी बिना झिजक ह्रदय से चिपक गई थी, उसे जरा सा भी ऐतराज नहीं था ह्रदय से चिपकने में, ह्रदय ने निधि को छोड़ा तो वो ठंकु बोलने लगी,

फिर दोनों काफी देर घूमे और निचे आ गए, और अपने अपने घर में चले गए, निधि जिस घर में रुकी थी वह सबसे दीपा और ह्रदय की पूरी जानकरी निकल रही थी,

अगले दिन कॉलेज में क्लास के बाद तम्मना ने फिर से कुश्ती की क्लास ली, आज फिर तम्मना ने ह्रदय और कल्पना को रोक लिया और वैसे hi देव लगवाए, आज ह्रदय ने कोई शर्म नहीं की थी, जब भी उसका हाथ तम्मना और कल्पना की चुकी या छूट पैर रगड़ता तो ह्रदय उसे और अच्छे से दबा देता, ह्रदय का लुंड आज अपनी औकात में आने लगा था, जिसका उभर उसकी टाइट स्किन फिट लोअर में दिख रहा था, उसका साइज देख क्र तम्मना के दिल की तम्मनाए मचल उठी थी,

कल्पना में भी बहुत हिम्मत आ गई थी, उसने भी आज ह्रदय के लुंड को अच्छे से फील किया था, आज की प्रैक्टिस कुश्ती की नहीं थी, आज कुछ और hi चल रहा था और तीनो इस बात को अच्छे से समझ रहे थे, और सबसे बेवकूफ थी कल्पना वो ये hi नहीं समझ पाई की तम्मना उसका भला क्र रही ह या अपना,

ह्रदय आगे बढ़ना चाहता था लेकिन खुद आगे बढ़ क्र कैसे करे ये समझ नहीं आ रहा था, जब से दीपा ने उसे परमिशन दी थी तब से उसका लुंड बहुत उछाले मर रहा था,

शाम को घर आया तो निधि पहले से hi घर बैठी थी, ह्रदय को देखते hi मुस्कुरा पड़ी ह्रदय ने भी मुस्कुरा क्र जवाब दिया,

दीपा- बीटा निधि जी तेरे साथ घूमने के लिए आई हैं, बोल रही थी तेरी कंपनी अच्छी लगी उन्हें,

ह्रदय- मुझे ख़ुशी हुई ये जान कर,

दीपा- आजा पहले तू खाना खा ले फिर चले जाना,

दोनों अंदर आ गए,

ह्रदय- माँ तुम मुझे ये ऐसे hi किसी के साथ भेज दे रही हो,

दीपा- तुझे मैं पागल लगती हु क्या,

ह्रदय- पागल तो नहीं हो मैं जनता हु कुछ तो दिमाग में चल रहा होगा,

दीपा- ये औरत अपने घर से इतनी दूर यहाँ अकेले समय बिताने आई ह, इसका मतलब वो प्यासी ह, उसे अपने पति से सुख नहीं मिल रहा ह, उसकी आँखों में भूक देखि ह मैंने, तू तरय करेगा तो आराम से पैट जाएगी

ह्रदय- माँ तुम मेरी माँ हो कोई डीलर नहीं हो जो मेरे लिए लड़कियों औरतो का इंतजाम करोगी, मैं कोई हवसी हु क्या

दीपा- तेरे लिए तो मैं दलाल भी बन जाउंगी बीटा और हवसी नहीं ह तो बन जा मैं बोल तो रही हु

ह्रदय- साडी उम्र तो मुझे ऐसे पला ह की किसी की तरफ धयान न भटके अब बोलती हो कुए खोद दे,

दीपा- कमीने तेरी उम्र hi अब हुई ह कुए खोदने की, तो अब hi तो करेगा ये सब,

ह्रदय झेप गया,

दीपा- अब जितना बोलै ह उतना कर, तेरे पास ऐसा कुछ ह जिससे तू अनलिमिटेड औरतो का भला क्र सकता ह, अगर वो बेचारी कुछ भला चाहती ह तो क्र दे न,

ह्रदय- माँ ऐसे कैसे जाकर बोलू उससे की मुझे तुम्हारा भला करना ह

दीपा- अगर वो तरय करे तो मौका मत चूकना बस,

ह्रदय- ठीक ह देखूंगा, अब खाने को तो दे दो,

दीपा ने खाने को दिया फिर ह्रदय निधि के साथ निकल गया घूमने, आज निधि ह्रदय से चिपक कर चल रही थी, ह्रदय दीपा की बात सोच सोच क्र एक्सीटेंड हो रहा था, उसका लुंड उसकी जेनस में से फुंकार मर रहा था, लेकिन किसी से लड़ने से ज्यादा हिम्मत किसी को छोड़ने के लिए चाहिए होती ह, और दीपा ने उसे लड़ने की तो बहुत हिम्मत दी थी लेकिन छोड़ने की हिम्मत देनी भूल गई,

निधि – तुम्हारे पापा कहा ह, उन्हें कभी देखा नहीं

ह्रदय- यहाँ मैं और मेरी माँ रहते हैं बस,

निधि- वो कही बहार जॉब करते हैं क्या,

ह्रदय- मैंने उन्हें कभी नहीं देखा,

निधि- मैं कुछ समझी नहीं,

ह्रदय- निधि जी आप उनके बारे में बात मत कीजिये प्लस

निधि समझ गई मामला ज्यादा गंभीर ह,

निधि- ok ok नहीं करती, मैंने तो इस लिए पूछा क्योकि दीपा जी सिन्दूर लगाती हैं, इसका मतलब वो जिन्दा हैं, यहाँ नहीं देखे तो पूछ लिया,

ह्रदय- वो कहा ह हम नहीं जानते,

निधि- तुमने ढूंढ़ने की कोशिश नहीं की,

ह्रदय- माँ ने कभी जाने hi नहीं दिया

निधि- अब तो तुम जवान हो अब तो तुम खुद ढूंढ सकते हो, क्या पता तुम्हरी माँ दर की वजह से ढूंढ़ने नहीं दे रही हो, अगर तुम उन्हें ढूंढ लाओगे तो उन्हें भी ख़ुशी होगी,

ह्रदय- वो उन्हें ढूंढ़ना छाती तो मुझसे जरूर बोलती,

निधि- मैं एक औरत हु और दूसरी औरत को पचन्ति हु, वो सिन्दूर लगाती ह मतलब तुम्हारे पापा से अब भी बहुत प्यार करती हैं, और उन्हें यकीन ह वो जिन्दा हैं, अगर वो तुम्हे ढूंढ़ने के लिए नहीं बोल रही उन्हें शायद दर ह तुम भी न चले जाओ,

ह्रदय सोच में दुब गया

निधि- एक अच्छे बेटे का फर्ज ह अपने माँ बाप को एक करना, तुम्हारी जिम्मेदारी ह अपने पापा को ढूढ़ क्र लाना,

ह्रदय- लेकिन माँ शायद जाने न दे

निधि- ये फैसला तुम्हे खुद लेना छाइये अब तुम जवान हो और देखने में अच्छे खासे दम दर भी लगते हो तो तुम्हे ये फैसला आगे बढ़ क्र लेना चाहिए, जब तुम अपने पापा को ढूडन लाओगे तो तुम्हारी माँ को भी खसुहि मिलेगी,

ह्रदय घेरि सोच में दुब गया,

निधि का तीर सही जगह लग गया था,

ह्रदय- लेकिन मैं कहा ढूंढूंगा उन्हें

तभी सामने से किसी के गुरने की आवाज आई और दोनों ने उस तरफ देखा तो निधि तो दर की वजह से कंपनी लगी थी, एक बार तो ह्रदय भी हड़बड़ा गया था, सामने थी hi ऐसी चीज,

एक टाइगर जो की किसी भी नार्मल टाइगर से काफी बड़ा और भयंकर था, आँखे लाल थी,


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निधि के हर जगह से पसीने निकल गए थे, उसकी जबान वही बंद हो गई थी, ह्रदय ने निधि का हाथ पकड़ा और अपने पीछे कर लिया,

वो टाइगर गुरया और एक जोर की दहाड़ मरी, उसकी दहाड़ से पुरे पहाड़ गूंज गए थे,

निधि- ये हमे मार देगा

ह्रदय- कुछ नहीं करेगा, वो शायद रास्ता भटक गया ह,

लेकिन तभी टाइगर ने छलांग लगा दी उनके उप्पेर, ह्रदय भी उसके उप्पेर कूद पड़ा, टाइगर ने ह्रदय को पंजा मारा जिससे उसकी छाती में जखम हो गए, निधि की चीख निकल गई,

इधर ह्रदय ने सम्हालते हुए टाइगर की गार्डन को अपने बाजुओं में भींच लिया, टाइगर ने निधि की तरफ देखा और ह्रदय को लेकर उसकी तरफ डोडा लेकिन ह्रदय ने अपने पेअर एक पत्तर में गड़ाए और टाइगर को रोका, फिर पूरी ताकत लगा क्र टाइगर को घुमा कर दूर फेंक दिया,

टाइगर एक पेड में जाकर लगा जिससे वो पेड टूट गया, जितनी ताकत से ह्रदय ने टाइगर को फेंका था उससे तो टाइगर की पसलिया तक टूट जनि चाहिए थी लेकिन टाइगर अगले hi पल उछाल क्र समाने आ गया, और ह्रदय की तरफ डोडा, उसने ह्रदय पैर हुम्ला किया ह्रदय ने उसके दोनों पंजे पकडे और खड़ा हो गया, टाइगर जोर लगाने लगा, लेकिन ह्रदय से खुद को छुड़ा नहीं प् रहा था,

फिर ह्रदय ने टाइगर के निचे अपना सर डाला और उसे अपने कंधे पैर उठा लिया और दुरी साइड पटक क्र दे मारा, टाइगर फिर से खड़ा हुआ तभी कुछ आहात सी महसूस हुई तो टाइगर ने मुद क्र पीछे देखा और तुरंत वह से भाग गया, ह्रदय ने भी वो आहात महसूस की थी,

ह्रदय ने पलट क्र निधि को देखा वो भोचकी सी कड़ी देख रही थी, उसकी आँखे फटी हुई थी, पसीने में भीगी हुई, बर्फ में कड़ी हुई को भी पसीने आ रहे थे, वो पालक तक झपकना भूल गई थी,

ह्रदय उसके पास आया

ह्रदय- निधि जी निधि जी आप ठीक हैं,

निधि होश में आई और ह्रदय को देखने लगी, और न जाने उसे क्या सुझा उसने ह्रदय के बालो में हाथ डाला और अपने हॉट ह्रदय के होतो से मिला दिए, ह्रदय कुछ समझ पता तब तक निधि ने उसके होतो का रास चूसना शुरू क्र दिया था, ह्रदय की आँखे हैरत से खुली हुई थी, ये उसका पहला किश था वो भी अपने से लगभग दुगनी उम्र की औरत क साथ, वैसे निधि कही से भी 38 की आगे की नहीं लगती थी,


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कुछ देर हॉट चूमने के बाद निधि अलग हुई, ह्रदय हैरत से उसे देख रहा था,

निधि- ठंकु ह्रदय ठंकु तुमने आज मेरी जान बचा ली, मैं तुम्हारा ये अहसान कभी नहीं भूलूंगी,

ह्रदय- ये किश

निधि- ओह्ह ये मेरे ठंकु किश था,

ह्रदय- हेल्प करने पैर ठंकु के साथ किश भी मिलता ह क्या

निधि- जो तुमने आज किया ह उसके लिए तो मैं सब कुछ दे सकती हु, बताओ क्या चाहिए तुम्हे

ह्रदय- जी क्या को कुछ नहीं

निधि मुस्कुरा पड़ी,

निधि- मैं तो तुम्हारी हिम्मत और ताकत देख क्र hi फ़िदा हो चुकी हु, आज से मैं तुम्हारी अहसान मंद हु, तुम्हे जो भी हेल्प छाइये जीवन में मैं करुँगी, तुम्हारे पापा को ढूढ़ने में भी मैं तुम्हारी हेल्प करुँगी

ह्रदय- ये कोई अहसान नहीं ह

निधि- दोस्ती तो बोल सकती हु, मुझे अपनी दोस्त तो बोल सकते हो न

ह्रदय- है दोस्त ठीक ह,

निधि- तुम मेरे साथ चलो मैं तुम्हारी हेल्प करुँगी जो मुझसे बनेगा मैं उससे भी ज्यादा करुँगी,

ह्रदय- उसकी जरुरत नहीं ह निधि जी,

निधि ने फिर से ह्रदय को गले लगा लिया, इस बार ह्रदय ने निधि कड़क और बड़े बूब्स को महसूस किया,

निधि- मैं दिल से करना छाती हु, तुम मेरे साथ चलो

ह्रदय- लेकिन माँ को क्या बताऊंगा

निधि- उन्हें बता दो किसी कम्पटीशन में जा रहे हो,

ह्रदय को निधि की बात सही लगी, आज पहेली बार ह्रदय के दिमाग में दीपा से झूट बोलने की बात आई,

किसी ने सही कहा ह औरत कुछ भी करवा सकती ह, लेकिन ये किसे पता की ये अच्छे के लिए हो रहा ह या बुरे के लिए,

ह्रदय- हम्म्म्म देखता हु क्या कहना ह,

निधि ने तुरंत ह्रदय को कास क्र पकड़ लिया, जैसे कोई प्रेमिका अपने प्रेमी से लिपट रही हो,

ह्रदय ने भी उसकी कमर पैर हाथ रखा, निधि ने फिर से अपना मुँह उप्पेर किया और फिर से ह्रदय के हॉट चुम लिए,

इधर ह्रदय निधि के होतो में खोया था उधर दिया और शनाया के दिल में ह्रदय की यादे उभर रही थी, वो बैचैन थी उन्हें ह्रदय की याद सत्ता रही थी, वही दृष्टि की वजह से शनाया का दिमाग और भी ख़राब था, उधर नैना और काम्य के दिमाग में भूचाल उठा हुआ था, उन्होंने दिया शनाया आशना और रैना से दोस्ती तो क्र ली लेकिन जानकरी कैसे निकली जाये ये समझ नहीं आ रहा था,

जब ह्रदय घर आया तो उसके कपडे फाटे हुए थे, वो जैसे hi अंदर घुसा तो दीपा उसे देख क्र घबरा गई,

दीपा- ये क्या हु ये कैसे हुआ

ह्रदय- कुछ नहीं माँ एक टाइगर आ गया था, गाओं के नजदीखि आ गया था, तो उसे भागना पड़ा,

दीपा- ठीक तो ह न

ह्रदय- है मैं मैं ठीक हु मुझे क्या होगा

दीपा- तुझे नहीं पूछ रही उस टाइगर को पूछ रही हु वो ठीक ह न, तूने उसे कुछ किया तो नहीं न,

ह्रदय- माँ तुम भी न, है वो ठीक ह, बस एक पंजा मर गया, और मेरी जैकेट ख़राब कर गया,

दीपा मुस्कुराई शाबास बीटा ,

अगले दिन कॉलेज की छुट्टी थी तो ह्रदय घर पैर hi लेता था, उधर तम्मना और कल्पना बैचैन हो रही थी, उन्हें ह्रदय के साथ रगड़े में इतना मजा आने लगा था की वो बस चाहती थी की ह्रदय उन्हें ऐसे hi रगड़ता रहे,

निधि ह्रदय से मिलने आई लेकिन वो अपने रूम में लेता हुआ मोबाइल पैर रॉल्स देख रहा था धड़कन की,

दीपा ने निधि को आते देखा, निधि धीरे कदमो से आ रही थी,

दीपा- कैसी ह निधि जी

निधि एक दम चौंक गई,

निधि- मैं ठीक हु आप कैसी हैं,

दीपा- मैं ठीक हु आइये आइये कुछ लेंगी क्या, कॉफ़ी बना रही हु ह्रदय के लिए आप भी लेंगी क्या

निधि- ह्रदय घर में hi ह कॉलेज नहीं गया,

दीपा- आज संडे ह न

निधि- ok ok

दीपा- आप ह्रदय के रूम में बैठिये मैं वही आती हु कॉफ़ी लेकर,

निधि चहकती हुई ह्रदय के रूम में चली गई, जहा ह्रदय मोबाइल में खोया हुआ था, निधि ने अंदर आकर धीरे से ह्रदय की चेस्ट पैर हाथ घुमाया, ह्रदय एक दम चौंक गया, वो तुरंत उठ क्र बैठ गया, निधि ने तुरंत उसके होतो पैर अपने हॉट रख दिए,


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ह्रदय को कुछ समझ नहीं आया, किश करने के बाद निधि अलग हुई,

ह्रदय- ये किश किस लिए

निधि- तुम अब मेरे दोस्त हो तो दोस्तों को ऐसे किश करने में कोई ऐतराज नहीं ह

ह्रदय- अच्छा जी कितने दोस्त ह आपके जिनके साथ आप ऐसे

ह्रदय ने जोश जोश में पूछ तो लिया लेकिन वो घबरा गया, कही निधि बुरा न मान जाये, लेकिन निधि मुस्कुराई

निधि- तुम पहले हो जिसके साथ मेरी दोस्ती ह, ऐसा कोई लायक इंसान नहीं जो मुझसे दोस्ती क्र सके,

ह्रदय ने स्माइल दी, तभी दीपा आ गई कॉफ़ी लेकर, तीनो बैठ क्र कॉफ़ी पिने लगे,

दीपा- आप लोग बात करो मैं जरा पड़ोस में होकर आती हु कुछ काम ह मुझे,

ह्रदय रोकता रह गया लेकिन दीपा उठी और चली गई, निधि अंदर hi अंदर खुश हो रही थी,

दीपा के जाते hi निधि ह्रदय से चिपक क्र बैठ गई,

निधि- तो क्या सोचा तुमने चलोगे न मेरे साथ,

ह्रदय- है मैं चलूँगा, मैं अपने पिता को जरूर ढूंढूंगा,

निधि- ये हुई न बात,

निधि फिर से ह्रदय के गले लग गई,

ह्रदय- तुम ये हर बात पैर गले क्यों लग जाती हो

निधि- तुम्हे अच्छा नहीं लगता क्या

ह्रदय- वो मैं वो

निधि हसी- तुम बहुत बुद्धू हो,

फिर निधि ने बड़ा बोल्ड कदम उठाया और ह्रदय के उप्पेर लेट गई, निधि की चूचिया ह्रदय की चेस्ट में डाब गई, ह्रदय का लुंड जो पहले से hi टाइट हो रखा था निधि के लोअर में से उसकी जांघो के बिच महसूस होने लगा,


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ह्रदय- ये ये क्या कर रही हो

निधि- अपने बुद्धू दोस्त को थोड़ा ज्ञान दे रही हु,

इतना बोल क्र निधि ने ह्रदय के होतो पैर हॉट मिलाया और चूसने लगी, ह्रदय खामोश लेता रहा कोई हरकत नहीं, निधि ने ह्रदय के हाथो को पकड़ा और अपनी गांड पैर रख दिया,


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अब सरे मतलब साफ़ थे, निधि क्या चाहती ह कोई पागल भी समझ सकता था, अगर अब भी ह्रदय नहीं समझ तो बिलकुल बेकार ह,

लेकिन हमारा ह्रदय बेकार कैसे हो सकता ह, उसे तो बहुत कुए खोदने हैं, उसे ये ज्ञान तो हासिल करना hi होगा,

ह्रदय ने हालत को समझते हुए तुरंत निधि की टाइट गांड को अपने मजबूत हाथो में पकड़ लियाऔर कास क्र दबा दिया,


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निधि के मुँह से आह निकल गई, निधि ने बड़े जोश में ह्रदय के हॉट चूमने शुरू क्र दिए, ह्रदय ने भी साथ देना शुरू क्र दिया, ह्रदय के हाथ निधि की गांड का अच्छे से जायजा ले रहे थे,

निधि का फील हो रहा था असली मर्द के हाथो का अहसास, दोनों की हरकते बढ़ती जा रही थी तभी ह्रदय का फ़ोन बज उठा, दोनों का किश टूट गया, ह्रदय ने फ़ोन देखा तो वो तम्मना का था, निधि एक दम से ह्रदय के ऊपर से उतर गई,

ह्रदय- ी ऍम श्री निधि जी वो मैं

निधि- अरे मेरे भोले भंडारी तुम क्यों श्री बोल रहे हो शुरू तो मैंने किया था,

तुम बात करो मैं तो ये बताने आई थी की मैं वापस जा रही हु, कुछ जरुरी काम ह, लेकिन तुम चंडीगढ़ आ जाओ मैं तुम्हारे साथ तुम्हारे पापा को ढूंढूंगी, और वही पैर तुम्हारा सवाद चखूंगी

ह्रदय- सवाद

निधि- ले लो मेरा कार्ड चंडीगढ़ आकर मुझे कॉल करना, तुम एक भेतरीन मर्द हो लेकिन तुम्हे असली मर्द मैं बनाउंगी,

इतना बोल क्र निधि ह्रदय के होतो को चूमकर चली गई, ह्रदय उसे देखता रह गया, दो दिन पहले यहाँ आई थी एक दम अनजान थी और दो दिन में hi इतनी खास दोस्त बन गई और बात यहाँ तक पहुंच गई, आज तक किसी लड़की के साथ भी ऐसा नहीं हुआ जो निधि के साथ हो गया, क्या खुस्भु ह इतना टाइट बदन ह, uffffffffffffffff

तभी उसका फ़ोन फिर से बजा,

ह्रदय- ोुह्ह्हह्ह मम

Hello मम

तम्मना- कहा हो ह्रदय कब से फ़ोन मिला रही हु,

ह्रदय- वो मैं थोड़ा बिजी था

तम्मना- अच्छा तुम मेरे घर आ सकते हो क्या,

ह्रदय- है जी जरूर कोई जरुरी काम था क्या,

तम्मना- है वो तुम्हारी प्रैक्टिस आगे बढ़ानी थी,

ह्रदय- आज संडे को भी

तम्मना- है तुमने अभी तो स्टार्ट किया ह बिच में गपे ठीक नहीं ह, तुम घर आ जाओ मैं तब तक रेडी होती हु,

फ़ोन काटने के बाद.

ह्रदय मन में- लगता ह तम्मना मम काफी उतावली हो रही हैं, आज कुछ कर hi लेना छाइये वैसे भी निधि ने आग hi लगा दी ह बदन में,

तभी दीपा आ गई,

दीपा- अरे वो चली क्यों गई,

ह्रदय- क्यों चली गई मतलब, यही रखना था क्या

दीपा- तुम लोगो के बिच कुछ हुआ नहीं क्या, मैं तो इसी लिए अकेला छोड़ क्र गई थी कुछ होगा तुम लोगो के बिच, तूने कुछ गड़बड़ तो नहीं क्र दी

ह्रदय- माँ कैसी बात कर रही हो तुम, मैंने कुछ नहीं किया

दीपा- वही तो इसी लिए चली गई वो तूने कुछ भी नहीं किया होगा, ऐसे कैसे काम चलेगा बीटा कुछ तो करना पड़ेगा, अभी तो तेरी सील भी नहीं टूटी,

ह्रदय- सील मेरी सील क्या बोल रही हो माँ

दीपा- ले पागल को ये भी नहीं पता, जैसे लड़कियों की सील होती ह वैसे hi लड़को की भी सील होती ह, जब पहेली बार कर्जा तो तुझे भी दर्द होगा, इसलिए जब भी करे तो आयल लगा लेना अच्छा सा वर्ण दर्द होगा

ह्रदय- माँ तुम मुझे डरा रही हो

दीपा- ले लड़किया डर्टी नहीं ह ऐसा मुसल लेने से तू दर रहा ह,

ह्रदय- माँ तुम क्या क्या बोलती रहती हो, मेरा खाना बना दो मैं तम्मना मम के घर जा रहा हु,

दीपा- वह क्यों

ह्रदय- वो कुश्ती के देव सीखने वाली ह आगे के,

दीपा- सही ह आज साडी कुश्ती सिख क्र hi आना और अच्छे से खेल क्र आना

ह्रदय- वो टीचर ह मेरी

दीपा- बीटा निचे वाले के पास दिमाग नहीं होता उनकी समझ में रिश्ते नहीं आते, तू जा और झंडे गाड़ क्र hi आना आज,

ह्रदय बाथरूम में घुस गया और नाहा धो क्र तैयार हो गया, दीपा ने नाश्ता बना दिया, जब ह्रदय घर से निकला तो दीपा ने दही खिला क्र कहा- मुँह मीठा करके निकल सफलता मिलेगी,

ह्रदय- माँ तुम तो मुझे ऐसे भेज रही हो जैसे मैं किसी मिशन पैर जा रहा हु

दीपा- ये भी एक मिशन ह बीटा तू नहीं समझेगा, जब पहेली बार करेगा तब समझ आएगा,

ह्रदय- तो तुम साथ hi चलो न सामने बैठ क्र देखती रहना कैसा कर रहा हु,

दीपा- है है ये सही रहेगा, चलती हु मैं भी

ह्रदय- माँ तुमसे जीतना नामुमकिन ह, दुनिया में तुम्हारे जैसी माँ होना नामुमकिन ह, मैं जा रहा हु bye,

ह्रदय के जाने के बाद दीपा मन में- बीटा तुझे अभी पता hi क्या ह माँ कैसी होती ह, अगर तू हमारी माँ या यु कहु तेरी असली माँ से मिला होता तो समझ आता माँ कैसे पलटी ह,

उधर अनीता परेशां अपने होटल के रूम में बैठी थी, रिंकी ड्रग्स के लिए तड़प रही थी, रम्य और अन्य परेशां थी, उन्हें समझ आ रहा था वो लोग कितनी बड़ी गलती करके आये हुए हैं, अमेरिका से उनके पास जानकरी आ चुकी थी, पुलिस रिंकी को ढूंढ रही ह, अब उस पैर ड्रग्स लेने के अलावा डीलिंग का भी आरोप लग चुक्का था,

तभी डोर बेल्ल बजी, अनीता ने दरवाजा खोला तो सामने खड़े थे राजेश जी, राजेश ने तुरंत अनीता के सामने हाथ जोड़ लिए, कैसी हैं छोटी मालकिन,

अनीता- ये क्या कर रहे है आप, आप मुझसे बड़े हैं और अब मैं कोई मालकिन नहीं हु,

राजेश- समय बदल सकता ह लेकिन राजेश नहीं बदल सकता,

रम्य और अन्य शॉकेड सी राजेश को देख रही थी, राजेश अपने आप में काफी अमीर दिख रहा था, और अनीता को छोटी मालकिन बोल रहा था,

अनीता- आप पहले एक बार रिंकी को देखिये उसकी हालत बहुत ख़राब ह,

राजेश रिंकी के पास पंहुचा, रिंकी ने एक बार राजेश को देखा तो वो तुरंत कड़ी हो गई और दौड़ क्र राजेश के पेअर छुए,

राजेश- खुश रहो बेटी, ये क्या हाल बना रखा ह तूने

रिंकी- आप सबने दूर क्र दिया था तो मैं कैसे जीती


रिंकी राजेश के गले लग क्र रोने लगी, इधर दोनों बहन सुरप्रीसेड सी कड़ी देख रही थी,
 
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हिमाचल की पहाड़ियों में एक खूबसूरत बाला घूम रही थी, और फोटोज ले रही थी,

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पहाड़ो से घूमती हुई वो निचे आई जहा एक छोटा सा गाओं था, जिसमे सबसे ऊपर बने घर के सामने जाकर उनसे दरवाजा खटखटाया,

दरवाजा खुला तो दीपा सामने कड़ी थी,

दीपा- जी आप कोण

औरत- जी मेरा नाम निधि ह चंडीगढ़ से यहाँ पहाड़ देखने आई थी लेकिन थकन ज्यादा हो गई, अब निचे नहीं उतरा जा रहा, क्या पानी मिल सकता ह

दीपा ने उसे पानी लेकर दिया

दीपा- आप इधर क्यों आई, इधर इतनी खास पहाड़िया नहीं ह, टूरिस्ट प्लेस तो दूसरी तरफ ह,

निधि- मुझे भीड़ में घूमना पसंद नहीं और जो शांति यहाँ ह वो कही नहीं मिली मुझे,

दीपा- ये तो ह शांति तो बहुत ह यहाँ,

निधि- क्या यहाँ मुझे कोई गेस्ट हाउस मिल सकता ह रुकने के लिए मैं कुछ दिन यहाँ रुकना चाहती हु,

दीपा- ऐसा कोई गेस्टहाउसे तो यहाँ नहीं ह, निचे किसी से पूछ सकती हु अगर कोई रखना चाहे तो रख सकता ह,

दीपा निधि को अपने साथ लेकर निचे आ गई और एक दो घर में पूछने पैर एक हस्बैंड वाइफ मान गए निधि को रुकवाने के लिए, इसके लिए निधि अच्छे पैसे दे रही थी,

निधि को अच्छी जगह मिल गई थी ह्रदय के करीब रहने के लिए,

शाम को ह्रदय जब घर आया तो उसने दिन भर की साडी घटना दीपा को बता दी, तम्मना और कल्पना के साथ हुई घटनाओ को भी बताया,

दीपा- तेरे पास अच्छा मौका था आज खुद को टेस्ट करने का

ह्रदय- माँ पता नहीं सब ठीक सा नहीं लग रहा था, फीलिंग्स आ रही थी लेकिन खुद hi शांत हो जाती थी,

दीपा सोच में पद गई,

दीपा- कोई बात नहीं जल्दी hi सब ठीक हो जायेगा, कल अगर उनकी हरकत फिर से हो तो तू अपनी तरफ से आगे बढ़ना

ह्रदय- माँ आप कैसी कैसी बाते कर लेती हो

दीपा- मैं क्या कर सकती हु ये तू नहीं जनता, जितना बोलै उतना किया कर

ह्रदय- समझ गया माँ

दोनों माँ बीटा बात कर रहे थे तभी दरवाजा बजा, ह्रदय ने उठ क्र दरवाजा खोला, और सामने एक बहुत hi कामुक बदन की मालकिन निधि कड़ी थी,


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ह्रदय- जी आप कोण

निधि- कोई और ह घर में

निधि की आवाज सुन क्र दीपा भी आ गई

दीपा- अरे आप आइये आइये

ह्रदय साइड में हो गया, निधि ह्रदय को बड़ी घेरि नजरो से देखती हुई अंदर आ गई, तीनो बैठ गए,

दीपा- बीटा ये निधि जी हैं, यहाँ घूमने आई हैं, कोई गेस्ट हाउस नहीं मिल रहा था तो मैंने मिश्रा जी के घर में रुकवा दिया,

ह्रदय- ok ok

निधि- मैंने तो आपसे मिलने चली आई, उप्पेर घूमने जा रही थी, कोई उधर जाना hi नहीं चाहता सोचा आपको साथ ले चालू,

दीपा- मैं इस वक़्त तो नहीं जा पाऊँगी,

निधि- अच्छा ok मैं खुद hi चली जाती हु,

निधि ने उदास सा मन बना क्र कहा

दीपा- आप ह्रदय के साथ चली जाइये, वो आपको दिखा लाएगा, उप्पेर अकेले जाना ठीक नहीं ह,

निधि- तुम चलोगे मेरे साथ,

ह्रदय ने दीपा की तरफ देखा और ok बोल क्र खड़ा हो गया,

निधि अपने अंदर की ख़ुशी को दबती हुई उठ क्र चल दी,

दोनों पहाड़ो पैर जाने लगे, बर्फ पैर ठेलने लगे,

निधि- तुम बात नहीं करते क्या

ह्रदय- मैं आपको जनता भी नहीं तो क्या बात करू,

निधि- हहम्म्म्म ये तो ह, मेरा नाम निधि ह, चंडीगढ़ से आई हु यहाँ घूमने, परिवार की चिक चिक से दुखी आ गई थी इसलिए एकांत में समय बिताने आई हु,

ह्रदय- अच्छी जगह चुनी ह आपने

निधि- मेरा नाम निधि ह, मुझे फोर्मलटीएस पसंद नहीं ह, तुम मुझे निधि बुला सकते हो,

ह्रदय- आप बड़ी हैं मुझसे,

निधि- ये सब पुराणी बाटे ह बड़े छोटे की, क्या मैं तुम्हे बड़ी लगती हु, अभी तो मैं एक दम जवान हु, हहहहहहए मजाक क्र रही हु, लेकिन मुझे ये बड़ा बनने का शोक नहीं ह, सो प्लस मुझे निधि hi बोलना ok

ह्रदय- ok निधि जी

निधि- चलो इतना भी चलेगा,

तभी निधि का पेअर लड़खड़ाया और वो गिरने लगी तो ह्रदय ने तुरंत उसे पकड़ क्र खींच लिया और ह्रदय के एक हाथ में निधि का हाथ दूसरा हाथ निधि की गांड पैर था, जिसे ह्रदय ने कास क्र पकड़ रखा था,

निधि भी बिना झिजक ह्रदय से चिपक गई थी, उसे जरा सा भी ऐतराज नहीं था ह्रदय से चिपकने में, ह्रदय ने निधि को छोड़ा तो वो ठंकु बोलने लगी,

फिर दोनों काफी देर घूमे और निचे आ गए, और अपने अपने घर में चले गए, निधि जिस घर में रुकी थी वह सबसे दीपा और ह्रदय की पूरी जानकरी निकल रही थी,

अगले दिन कॉलेज में क्लास के बाद तम्मना ने फिर से कुश्ती की क्लास ली, आज फिर तम्मना ने ह्रदय और कल्पना को रोक लिया और वैसे hi देव लगवाए, आज ह्रदय ने कोई शर्म नहीं की थी, जब भी उसका हाथ तम्मना और कल्पना की चुकी या छूट पैर रगड़ता तो ह्रदय उसे और अच्छे से दबा देता, ह्रदय का लुंड आज अपनी औकात में आने लगा था, जिसका उभर उसकी टाइट स्किन फिट लोअर में दिख रहा था, उसका साइज देख क्र तम्मना के दिल की तम्मनाए मचल उठी थी,

कल्पना में भी बहुत हिम्मत आ गई थी, उसने भी आज ह्रदय के लुंड को अच्छे से फील किया था, आज की प्रैक्टिस कुश्ती की नहीं थी, आज कुछ और hi चल रहा था और तीनो इस बात को अच्छे से समझ रहे थे, और सबसे बेवकूफ थी कल्पना वो ये hi नहीं समझ पाई की तम्मना उसका भला क्र रही ह या अपना,

ह्रदय आगे बढ़ना चाहता था लेकिन खुद आगे बढ़ क्र कैसे करे ये समझ नहीं आ रहा था, जब से दीपा ने उसे परमिशन दी थी तब से उसका लुंड बहुत उछाले मर रहा था,

शाम को घर आया तो निधि पहले से hi घर बैठी थी, ह्रदय को देखते hi मुस्कुरा पड़ी ह्रदय ने भी मुस्कुरा क्र जवाब दिया,

दीपा- बीटा निधि जी तेरे साथ घूमने के लिए आई हैं, बोल रही थी तेरी कंपनी अच्छी लगी उन्हें,

ह्रदय- मुझे ख़ुशी हुई ये जान कर,

दीपा- आजा पहले तू खाना खा ले फिर चले जाना,

दोनों अंदर आ गए,

ह्रदय- माँ तुम मुझे ये ऐसे hi किसी के साथ भेज दे रही हो,

दीपा- तुझे मैं पागल लगती हु क्या,

ह्रदय- पागल तो नहीं हो मैं जनता हु कुछ तो दिमाग में चल रहा होगा,

दीपा- ये औरत अपने घर से इतनी दूर यहाँ अकेले समय बिताने आई ह, इसका मतलब वो प्यासी ह, उसे अपने पति से सुख नहीं मिल रहा ह, उसकी आँखों में भूक देखि ह मैंने, तू तरय करेगा तो आराम से पैट जाएगी

ह्रदय- माँ तुम मेरी माँ हो कोई डीलर नहीं हो जो मेरे लिए लड़कियों औरतो का इंतजाम करोगी, मैं कोई हवसी हु क्या

दीपा- तेरे लिए तो मैं दलाल भी बन जाउंगी बीटा और हवसी नहीं ह तो बन जा मैं बोल तो रही हु

ह्रदय- साडी उम्र तो मुझे ऐसे पला ह की किसी की तरफ धयान न भटके अब बोलती हो कुए खोद दे,

दीपा- कमीने तेरी उम्र hi अब हुई ह कुए खोदने की, तो अब hi तो करेगा ये सब,

ह्रदय झेप गया,

दीपा- अब जितना बोलै ह उतना कर, तेरे पास ऐसा कुछ ह जिससे तू अनलिमिटेड औरतो का भला क्र सकता ह, अगर वो बेचारी कुछ भला चाहती ह तो क्र दे न,

ह्रदय- माँ ऐसे कैसे जाकर बोलू उससे की मुझे तुम्हारा भला करना ह

दीपा- अगर वो तरय करे तो मौका मत चूकना बस,

ह्रदय- ठीक ह देखूंगा, अब खाने को तो दे दो,

दीपा ने खाने को दिया फिर ह्रदय निधि के साथ निकल गया घूमने, आज निधि ह्रदय से चिपक कर चल रही थी, ह्रदय दीपा की बात सोच सोच क्र एक्सीटेंड हो रहा था, उसका लुंड उसकी जेनस में से फुंकार मर रहा था, लेकिन किसी से लड़ने से ज्यादा हिम्मत किसी को छोड़ने के लिए चाहिए होती ह, और दीपा ने उसे लड़ने की तो बहुत हिम्मत दी थी लेकिन छोड़ने की हिम्मत देनी भूल गई,

निधि – तुम्हारे पापा कहा ह, उन्हें कभी देखा नहीं

ह्रदय- यहाँ मैं और मेरी माँ रहते हैं बस,

निधि- वो कही बहार जॉब करते हैं क्या,

ह्रदय- मैंने उन्हें कभी नहीं देखा,

निधि- मैं कुछ समझी नहीं,

ह्रदय- निधि जी आप उनके बारे में बात मत कीजिये प्लस

निधि समझ गई मामला ज्यादा गंभीर ह,

निधि- ok ok नहीं करती, मैंने तो इस लिए पूछा क्योकि दीपा जी सिन्दूर लगाती हैं, इसका मतलब वो जिन्दा हैं, यहाँ नहीं देखे तो पूछ लिया,

ह्रदय- वो कहा ह हम नहीं जानते,

निधि- तुमने ढूंढ़ने की कोशिश नहीं की,

ह्रदय- माँ ने कभी जाने hi नहीं दिया

निधि- अब तो तुम जवान हो अब तो तुम खुद ढूंढ सकते हो, क्या पता तुम्हरी माँ दर की वजह से ढूंढ़ने नहीं दे रही हो, अगर तुम उन्हें ढूंढ लाओगे तो उन्हें भी ख़ुशी होगी,

ह्रदय- वो उन्हें ढूंढ़ना छाती तो मुझसे जरूर बोलती,

निधि- मैं एक औरत हु और दूसरी औरत को पचन्ति हु, वो सिन्दूर लगाती ह मतलब तुम्हारे पापा से अब भी बहुत प्यार करती हैं, और उन्हें यकीन ह वो जिन्दा हैं, अगर वो तुम्हे ढूंढ़ने के लिए नहीं बोल रही उन्हें शायद दर ह तुम भी न चले जाओ,

ह्रदय सोच में दुब गया

निधि- एक अच्छे बेटे का फर्ज ह अपने माँ बाप को एक करना, तुम्हारी जिम्मेदारी ह अपने पापा को ढूढ़ क्र लाना,

ह्रदय- लेकिन माँ शायद जाने न दे

निधि- ये फैसला तुम्हे खुद लेना छाइये अब तुम जवान हो और देखने में अच्छे खासे दम दर भी लगते हो तो तुम्हे ये फैसला आगे बढ़ क्र लेना चाहिए, जब तुम अपने पापा को ढूडन लाओगे तो तुम्हारी माँ को भी खसुहि मिलेगी,

ह्रदय घेरि सोच में दुब गया,

निधि का तीर सही जगह लग गया था,

ह्रदय- लेकिन मैं कहा ढूंढूंगा उन्हें

तभी सामने से किसी के गुरने की आवाज आई और दोनों ने उस तरफ देखा तो निधि तो दर की वजह से कंपनी लगी थी, एक बार तो ह्रदय भी हड़बड़ा गया था, सामने थी hi ऐसी चीज,

एक टाइगर जो की किसी भी नार्मल टाइगर से काफी बड़ा और भयंकर था, आँखे लाल थी,


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निधि के हर जगह से पसीने निकल गए थे, उसकी जबान वही बंद हो गई थी, ह्रदय ने निधि का हाथ पकड़ा और अपने पीछे कर लिया,

वो टाइगर गुरया और एक जोर की दहाड़ मरी, उसकी दहाड़ से पुरे पहाड़ गूंज गए थे,

निधि- ये हमे मार देगा

ह्रदय- कुछ नहीं करेगा, वो शायद रास्ता भटक गया ह,

लेकिन तभी टाइगर ने छलांग लगा दी उनके उप्पेर, ह्रदय भी उसके उप्पेर कूद पड़ा, टाइगर ने ह्रदय को पंजा मारा जिससे उसकी छाती में जखम हो गए, निधि की चीख निकल गई,

इधर ह्रदय ने सम्हालते हुए टाइगर की गार्डन को अपने बाजुओं में भींच लिया, टाइगर ने निधि की तरफ देखा और ह्रदय को लेकर उसकी तरफ डोडा लेकिन ह्रदय ने अपने पेअर एक पत्तर में गड़ाए और टाइगर को रोका, फिर पूरी ताकत लगा क्र टाइगर को घुमा कर दूर फेंक दिया,

टाइगर एक पेड में जाकर लगा जिससे वो पेड टूट गया, जितनी ताकत से ह्रदय ने टाइगर को फेंका था उससे तो टाइगर की पसलिया तक टूट जनि चाहिए थी लेकिन टाइगर अगले hi पल उछाल क्र समाने आ गया, और ह्रदय की तरफ डोडा, उसने ह्रदय पैर हुम्ला किया ह्रदय ने उसके दोनों पंजे पकडे और खड़ा हो गया, टाइगर जोर लगाने लगा, लेकिन ह्रदय से खुद को छुड़ा नहीं प् रहा था,

फिर ह्रदय ने टाइगर के निचे अपना सर डाला और उसे अपने कंधे पैर उठा लिया और दुरी साइड पटक क्र दे मारा, टाइगर फिर से खड़ा हुआ तभी कुछ आहात सी महसूस हुई तो टाइगर ने मुद क्र पीछे देखा और तुरंत वह से भाग गया, ह्रदय ने भी वो आहात महसूस की थी,

ह्रदय ने पलट क्र निधि को देखा वो भोचकी सी कड़ी देख रही थी, उसकी आँखे फटी हुई थी, पसीने में भीगी हुई, बर्फ में कड़ी हुई को भी पसीने आ रहे थे, वो पालक तक झपकना भूल गई थी,

ह्रदय उसके पास आया

ह्रदय- निधि जी निधि जी आप ठीक हैं,

निधि होश में आई और ह्रदय को देखने लगी, और न जाने उसे क्या सुझा उसने ह्रदय के बालो में हाथ डाला और अपने हॉट ह्रदय के होतो से मिला दिए, ह्रदय कुछ समझ पता तब तक निधि ने उसके होतो का रास चूसना शुरू क्र दिया था, ह्रदय की आँखे हैरत से खुली हुई थी, ये उसका पहला किश था वो भी अपने से लगभग दुगनी उम्र की औरत क साथ, वैसे निधि कही से भी 38 की आगे की नहीं लगती थी,


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कुछ देर हॉट चूमने के बाद निधि अलग हुई, ह्रदय हैरत से उसे देख रहा था,

निधि- ठंकु ह्रदय ठंकु तुमने आज मेरी जान बचा ली, मैं तुम्हारा ये अहसान कभी नहीं भूलूंगी,

ह्रदय- ये किश

निधि- ओह्ह ये मेरे ठंकु किश था,

ह्रदय- हेल्प करने पैर ठंकु के साथ किश भी मिलता ह क्या

निधि- जो तुमने आज किया ह उसके लिए तो मैं सब कुछ दे सकती हु, बताओ क्या चाहिए तुम्हे

ह्रदय- जी क्या को कुछ नहीं

निधि मुस्कुरा पड़ी,

निधि- मैं तो तुम्हारी हिम्मत और ताकत देख क्र hi फ़िदा हो चुकी हु, आज से मैं तुम्हारी अहसान मंद हु, तुम्हे जो भी हेल्प छाइये जीवन में मैं करुँगी, तुम्हारे पापा को ढूढ़ने में भी मैं तुम्हारी हेल्प करुँगी

ह्रदय- ये कोई अहसान नहीं ह

निधि- दोस्ती तो बोल सकती हु, मुझे अपनी दोस्त तो बोल सकते हो न

ह्रदय- है दोस्त ठीक ह,

निधि- तुम मेरे साथ चलो मैं तुम्हारी हेल्प करुँगी जो मुझसे बनेगा मैं उससे भी ज्यादा करुँगी,

ह्रदय- उसकी जरुरत नहीं ह निधि जी,

निधि ने फिर से ह्रदय को गले लगा लिया, इस बार ह्रदय ने निधि कड़क और बड़े बूब्स को महसूस किया,

निधि- मैं दिल से करना छाती हु, तुम मेरे साथ चलो

ह्रदय- लेकिन माँ को क्या बताऊंगा

निधि- उन्हें बता दो किसी कम्पटीशन में जा रहे हो,

ह्रदय को निधि की बात सही लगी, आज पहेली बार ह्रदय के दिमाग में दीपा से झूट बोलने की बात आई,

किसी ने सही कहा ह औरत कुछ भी करवा सकती ह, लेकिन ये किसे पता की ये अच्छे के लिए हो रहा ह या बुरे के लिए,

ह्रदय- हम्म्म्म देखता हु क्या कहना ह,

निधि ने तुरंत ह्रदय को कास क्र पकड़ लिया, जैसे कोई प्रेमिका अपने प्रेमी से लिपट रही हो,

ह्रदय ने भी उसकी कमर पैर हाथ रखा, निधि ने फिर से अपना मुँह उप्पेर किया और फिर से ह्रदय के हॉट चुम लिए,

इधर ह्रदय निधि के होतो में खोया था उधर दिया और शनाया के दिल में ह्रदय की यादे उभर रही थी, वो बैचैन थी उन्हें ह्रदय की याद सत्ता रही थी, वही दृष्टि की वजह से शनाया का दिमाग और भी ख़राब था, उधर नैना और काम्य के दिमाग में भूचाल उठा हुआ था, उन्होंने दिया शनाया आशना और रैना से दोस्ती तो क्र ली लेकिन जानकरी कैसे निकली जाये ये समझ नहीं आ रहा था,

जब ह्रदय घर आया तो उसके कपडे फाटे हुए थे, वो जैसे hi अंदर घुसा तो दीपा उसे देख क्र घबरा गई,

दीपा- ये क्या हु ये कैसे हुआ

ह्रदय- कुछ नहीं माँ एक टाइगर आ गया था, गाओं के नजदीखि आ गया था, तो उसे भागना पड़ा,

दीपा- ठीक तो ह न

ह्रदय- है मैं मैं ठीक हु मुझे क्या होगा

दीपा- तुझे नहीं पूछ रही उस टाइगर को पूछ रही हु वो ठीक ह न, तूने उसे कुछ किया तो नहीं न,

ह्रदय- माँ तुम भी न, है वो ठीक ह, बस एक पंजा मर गया, और मेरी जैकेट ख़राब कर गया,

दीपा मुस्कुराई शाबास बीटा ,

अगले दिन कॉलेज की छुट्टी थी तो ह्रदय घर पैर hi लेता था, उधर तम्मना और कल्पना बैचैन हो रही थी, उन्हें ह्रदय के साथ रगड़े में इतना मजा आने लगा था की वो बस चाहती थी की ह्रदय उन्हें ऐसे hi रगड़ता रहे,

निधि ह्रदय से मिलने आई लेकिन वो अपने रूम में लेता हुआ मोबाइल पैर रॉल्स देख रहा था धड़कन की,

दीपा ने निधि को आते देखा, निधि धीरे कदमो से आ रही थी,

दीपा- कैसी ह निधि जी

निधि एक दम चौंक गई,

निधि- मैं ठीक हु आप कैसी हैं,

दीपा- मैं ठीक हु आइये आइये कुछ लेंगी क्या, कॉफ़ी बना रही हु ह्रदय के लिए आप भी लेंगी क्या

निधि- ह्रदय घर में hi ह कॉलेज नहीं गया,

दीपा- आज संडे ह न

निधि- ok ok

दीपा- आप ह्रदय के रूम में बैठिये मैं वही आती हु कॉफ़ी लेकर,

निधि चहकती हुई ह्रदय के रूम में चली गई, जहा ह्रदय मोबाइल में खोया हुआ था, निधि ने अंदर आकर धीरे से ह्रदय की चेस्ट पैर हाथ घुमाया, ह्रदय एक दम चौंक गया, वो तुरंत उठ क्र बैठ गया, निधि ने तुरंत उसके होतो पैर अपने हॉट रख दिए,


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ह्रदय को कुछ समझ नहीं आया, किश करने के बाद निधि अलग हुई,

ह्रदय- ये किश किस लिए

निधि- तुम अब मेरे दोस्त हो तो दोस्तों को ऐसे किश करने में कोई ऐतराज नहीं ह

ह्रदय- अच्छा जी कितने दोस्त ह आपके जिनके साथ आप ऐसे

ह्रदय ने जोश जोश में पूछ तो लिया लेकिन वो घबरा गया, कही निधि बुरा न मान जाये, लेकिन निधि मुस्कुराई

निधि- तुम पहले हो जिसके साथ मेरी दोस्ती ह, ऐसा कोई लायक इंसान नहीं जो मुझसे दोस्ती क्र सके,

ह्रदय ने स्माइल दी, तभी दीपा आ गई कॉफ़ी लेकर, तीनो बैठ क्र कॉफ़ी पिने लगे,

दीपा- आप लोग बात करो मैं जरा पड़ोस में होकर आती हु कुछ काम ह मुझे,

ह्रदय रोकता रह गया लेकिन दीपा उठी और चली गई, निधि अंदर hi अंदर खुश हो रही थी,

दीपा के जाते hi निधि ह्रदय से चिपक क्र बैठ गई,

निधि- तो क्या सोचा तुमने चलोगे न मेरे साथ,

ह्रदय- है मैं चलूँगा, मैं अपने पिता को जरूर ढूंढूंगा,

निधि- ये हुई न बात,

निधि फिर से ह्रदय के गले लग गई,

ह्रदय- तुम ये हर बात पैर गले क्यों लग जाती हो

निधि- तुम्हे अच्छा नहीं लगता क्या

ह्रदय- वो मैं वो

निधि हसी- तुम बहुत बुद्धू हो,

फिर निधि ने बड़ा बोल्ड कदम उठाया और ह्रदय के उप्पेर लेट गई, निधि की चूचिया ह्रदय की चेस्ट में डाब गई, ह्रदय का लुंड जो पहले से hi टाइट हो रखा था निधि के लोअर में से उसकी जांघो के बिच महसूस होने लगा,


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ह्रदय- ये ये क्या कर रही हो

निधि- अपने बुद्धू दोस्त को थोड़ा ज्ञान दे रही हु,

इतना बोल क्र निधि ने ह्रदय के होतो पैर हॉट मिलाया और चूसने लगी, ह्रदय खामोश लेता रहा कोई हरकत नहीं, निधि ने ह्रदय के हाथो को पकड़ा और अपनी गांड पैर रख दिया,


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अब सरे मतलब साफ़ थे, निधि क्या चाहती ह कोई पागल भी समझ सकता था, अगर अब भी ह्रदय नहीं समझ तो बिलकुल बेकार ह,

लेकिन हमारा ह्रदय बेकार कैसे हो सकता ह, उसे तो बहुत कुए खोदने हैं, उसे ये ज्ञान तो हासिल करना hi होगा,

ह्रदय ने हालत को समझते हुए तुरंत निधि की टाइट गांड को अपने मजबूत हाथो में पकड़ लियाऔर कास क्र दबा दिया,


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निधि के मुँह से आह निकल गई, निधि ने बड़े जोश में ह्रदय के हॉट चूमने शुरू क्र दिए, ह्रदय ने भी साथ देना शुरू क्र दिया, ह्रदय के हाथ निधि की गांड का अच्छे से जायजा ले रहे थे,

निधि का फील हो रहा था असली मर्द के हाथो का अहसास, दोनों की हरकते बढ़ती जा रही थी तभी ह्रदय का फ़ोन बज उठा, दोनों का किश टूट गया, ह्रदय ने फ़ोन देखा तो वो तम्मना का था, निधि एक दम से ह्रदय के ऊपर से उतर गई,

ह्रदय- ी ऍम श्री निधि जी वो मैं

निधि- अरे मेरे भोले भंडारी तुम क्यों श्री बोल रहे हो शुरू तो मैंने किया था,

तुम बात करो मैं तो ये बताने आई थी की मैं वापस जा रही हु, कुछ जरुरी काम ह, लेकिन तुम चंडीगढ़ आ जाओ मैं तुम्हारे साथ तुम्हारे पापा को ढूंढूंगी, और वही पैर तुम्हारा सवाद चखूंगी

ह्रदय- सवाद

निधि- ले लो मेरा कार्ड चंडीगढ़ आकर मुझे कॉल करना, तुम एक भेतरीन मर्द हो लेकिन तुम्हे असली मर्द मैं बनाउंगी,

इतना बोल क्र निधि ह्रदय के होतो को चूमकर चली गई, ह्रदय उसे देखता रह गया, दो दिन पहले यहाँ आई थी एक दम अनजान थी और दो दिन में hi इतनी खास दोस्त बन गई और बात यहाँ तक पहुंच गई, आज तक किसी लड़की के साथ भी ऐसा नहीं हुआ जो निधि के साथ हो गया, क्या खुस्भु ह इतना टाइट बदन ह, uffffffffffffffff

तभी उसका फ़ोन फिर से बजा,

ह्रदय- ोुह्ह्हह्ह मम

Hello मम

तम्मना- कहा हो ह्रदय कब से फ़ोन मिला रही हु,

ह्रदय- वो मैं थोड़ा बिजी था

तम्मना- अच्छा तुम मेरे घर आ सकते हो क्या,

ह्रदय- है जी जरूर कोई जरुरी काम था क्या,

तम्मना- है वो तुम्हारी प्रैक्टिस आगे बढ़ानी थी,

ह्रदय- आज संडे को भी

तम्मना- है तुमने अभी तो स्टार्ट किया ह बिच में गपे ठीक नहीं ह, तुम घर आ जाओ मैं तब तक रेडी होती हु,

फ़ोन काटने के बाद.

ह्रदय मन में- लगता ह तम्मना मम काफी उतावली हो रही हैं, आज कुछ कर hi लेना छाइये वैसे भी निधि ने आग hi लगा दी ह बदन में,

तभी दीपा आ गई,

दीपा- अरे वो चली क्यों गई,

ह्रदय- क्यों चली गई मतलब, यही रखना था क्या

दीपा- तुम लोगो के बिच कुछ हुआ नहीं क्या, मैं तो इसी लिए अकेला छोड़ क्र गई थी कुछ होगा तुम लोगो के बिच, तूने कुछ गड़बड़ तो नहीं क्र दी

ह्रदय- माँ कैसी बात कर रही हो तुम, मैंने कुछ नहीं किया

दीपा- वही तो इसी लिए चली गई वो तूने कुछ भी नहीं किया होगा, ऐसे कैसे काम चलेगा बीटा कुछ तो करना पड़ेगा, अभी तो तेरी सील भी नहीं टूटी,

ह्रदय- सील मेरी सील क्या बोल रही हो माँ

दीपा- ले पागल को ये भी नहीं पता, जैसे लड़कियों की सील होती ह वैसे hi लड़को की भी सील होती ह, जब पहेली बार कर्जा तो तुझे भी दर्द होगा, इसलिए जब भी करे तो आयल लगा लेना अच्छा सा वर्ण दर्द होगा

ह्रदय- माँ तुम मुझे डरा रही हो

दीपा- ले लड़किया डर्टी नहीं ह ऐसा मुसल लेने से तू दर रहा ह,

ह्रदय- माँ तुम क्या क्या बोलती रहती हो, मेरा खाना बना दो मैं तम्मना मम के घर जा रहा हु,

दीपा- वह क्यों

ह्रदय- वो कुश्ती के देव सीखने वाली ह आगे के,

दीपा- सही ह आज साडी कुश्ती सिख क्र hi आना और अच्छे से खेल क्र आना

ह्रदय- वो टीचर ह मेरी

दीपा- बीटा निचे वाले के पास दिमाग नहीं होता उनकी समझ में रिश्ते नहीं आते, तू जा और झंडे गाड़ क्र hi आना आज,

ह्रदय बाथरूम में घुस गया और नाहा धो क्र तैयार हो गया, दीपा ने नाश्ता बना दिया, जब ह्रदय घर से निकला तो दीपा ने दही खिला क्र कहा- मुँह मीठा करके निकल सफलता मिलेगी,

ह्रदय- माँ तुम तो मुझे ऐसे भेज रही हो जैसे मैं किसी मिशन पैर जा रहा हु

दीपा- ये भी एक मिशन ह बीटा तू नहीं समझेगा, जब पहेली बार करेगा तब समझ आएगा,

ह्रदय- तो तुम साथ hi चलो न सामने बैठ क्र देखती रहना कैसा कर रहा हु,

दीपा- है है ये सही रहेगा, चलती हु मैं भी

ह्रदय- माँ तुमसे जीतना नामुमकिन ह, दुनिया में तुम्हारे जैसी माँ होना नामुमकिन ह, मैं जा रहा हु bye,

ह्रदय के जाने के बाद दीपा मन में- बीटा तुझे अभी पता hi क्या ह माँ कैसी होती ह, अगर तू हमारी माँ या यु कहु तेरी असली माँ से मिला होता तो समझ आता माँ कैसे पलटी ह,

उधर अनीता परेशां अपने होटल के रूम में बैठी थी, रिंकी ड्रग्स के लिए तड़प रही थी, रम्य और अन्य परेशां थी, उन्हें समझ आ रहा था वो लोग कितनी बड़ी गलती करके आये हुए हैं, अमेरिका से उनके पास जानकरी आ चुकी थी, पुलिस रिंकी को ढूंढ रही ह, अब उस पैर ड्रग्स लेने के अलावा डीलिंग का भी आरोप लग चुक्का था,

तभी डोर बेल्ल बजी, अनीता ने दरवाजा खोला तो सामने खड़े थे राजेश जी, राजेश ने तुरंत अनीता के सामने हाथ जोड़ लिए, कैसी हैं छोटी मालकिन,

अनीता- ये क्या कर रहे है आप, आप मुझसे बड़े हैं और अब मैं कोई मालकिन नहीं हु,

राजेश- समय बदल सकता ह लेकिन राजेश नहीं बदल सकता,

रम्य और अन्य शॉकेड सी राजेश को देख रही थी, राजेश अपने आप में काफी अमीर दिख रहा था, और अनीता को छोटी मालकिन बोल रहा था,

अनीता- आप पहले एक बार रिंकी को देखिये उसकी हालत बहुत ख़राब ह,

राजेश रिंकी के पास पंहुचा, रिंकी ने एक बार राजेश को देखा तो वो तुरंत कड़ी हो गई और दौड़ क्र राजेश के पेअर छुए,

राजेश- खुश रहो बेटी, ये क्या हाल बना रखा ह तूने

रिंकी- आप सबने दूर क्र दिया था तो मैं कैसे जीती


रिंकी राजेश के गले लग क्र रोने लगी, इधर दोनों बहन सुरप्रीसेड सी कड़ी देख रही थी,
 
अपडेट-10






ह्रदय तम्मना के घर के बहार खड़ा था, तम्मना ने दरवाजा खोला और ह्रदय को अंदर बुलाया फिर चारो तरफ देखा की को देख तो नहीं रहा, फिर दरवाजा बंद क्र लिया,

ह्रदय- आपके घर में कोई नहीं ह क्या मम

तम्मना- नहीं यहाँ मैं अकेली रहती हु,

ह्रदय- आपकी फॅमिली कहा पैर ह

तम्मना- वो यहाँ से बहुत दूर रहते हैं, मुझे यहाँ पहाड़ो में जॉब मिल रही थी तो मैं चली आई, मुझे यहाँ अच्छा लगता ह,

ह्रदय- अकेले रहना तो बहुत मुश्किल होता होगा न

तम्मना- है मुश्किल तो होता ह, लेकिन काट जाता ह टाइम,

ह्रदय- तो शुरू करे

तम्मना- क्या

ह्रदय- प्रैक्टिस

तम्मना- ोू है है करते हैं कुछ कहोगे क्या,

ह्रदय- नहीं मम मैं खा क्र आया हु,

तम्मना- चलो तो फिर दिखाओ अपने देव क्या क्या सिख लिया तुमने

ह्रदय- मम यहाँ कहा यहाँ तो गद्दे भी नहीं हैं चोट लग जाएगी,

तम्मना- आओ मैंने सब इंतजाम किया हुआ ह,

तम्मना ह्रदय को रूम में ले गई जहा उसने बीएड पैर से गद्दे जमीन पैर बिछाये हुए थे,

तम्मना- आज अपनी ताकत का पूरा इस्तेमाल करना जैसे मैं कोई पहलवान हु, भूल जाना मैं तुम्हारी मैडम हु, सोचो तुम्हारे सामने तुम्हारा प्रत्दुआडी ह, अपना हुनर दिखाओ,

ह्रदय मन में मुस्कुराया- आज कल बहुत मेरे हुनर की चर्चा हो रही ह, लगता ह अब अपना हुनर दिखाना hi पड़ेगा,

ह्रदय- ok मम

दोनों आमने सामने आये, और ह्रदय ने तुरनत तम्मना की जांघो के बिच अपना हाथ डाला और अगले hi पल वो चौंक गया क्योकि तम्मना ने जो टाइट लेग्गिंग फेनी थी उसके निचे पंतय नहीं फेनी थी, ह्रदय का हाथ सीधे तम्मना की छूट पैर रगड़ गया,

तम्मना की आँखे बंद हो गई, ह्रदय ने तुरंत तम्मना को उठा क्र गड्डो पैर पटक दिया और उसके उप्पेर ऐसे लेट गया जैसे एक पहलवान दूसरे पहलवान को चित क्र रहा हो, इससे तम्मना की चूचिया ह्रदय के निचे डाब गई,

तम्मना की आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह निकल गई,

ह्रदय- क्या हुआ मम दर्द हुआ क्या

तम्मना- अभी कहा हुआ दर्द, शाबाश ऐसे hi देव लगाओ,

दोनों फिर खड़े हुए तो ह्रदय ने इस बार तम्मना के पीछे जाकर अपना लुंड उसकी गांड से भिड़ा दिया, टाइट लगगंग में हिलती हुई गांड का अहसास ह्रदय के लुंड को भी हो चुक्का था, तम्मना ने भी अपने गांड को पीछे की तरफ दबाया, जैसे इशारा दे रही हो की फाड् दो इस टाइट गांड को,

ह्रदय ने दोनों हाथ आगे लेजाकर सीधे तम्मना की चूचियों पैर रख दिए, इस बार ह्रदय ने कोई शर्म या झिजक नहीं की, सब कुछ साफ़ था तम्मना क्या चाहती ह, और जब लड़की खुद इतना आगे बढ़ रही ह तो पीछे हटने का कोई फायदा नहीं ह, वैसे भी निधि ने ह्रदय को सुबह सुबह बहुत गरम कर दिया था,

चूचियों पैर मजबूत हाथ पड़ते hi तम्मना की सिसकारी निकल गई, ह्रदय ने अच्छे से चूचियों को दबाया फिर तम्मना को उठा क्र अपने कंधे ऊपर को उतर क्र गद्दे पैर पटक दिया, और एक बार फिर से उसके उप्पेर लेट गया इस बार तम्मना उलटी लेती हुई थी और ह्रदय तम्मना की गांड पैर अपना लुंड सेट करके लेता था,

लुंड खड़ा हो चुक्का था, लोअर में से ह्रदय का लुंड पूरा अकड़ा हुआ था, जो सीधे तम्मना की गांड में घुस गया था,

तम्मना – aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

ह्रदय- क्या हुआ मम लगी तो नहीं

तम्मना- चोट तो नहीं लगी लेकिन कुछ और ह जो लग रहा ह

ह्रदय- क्या लग रहा ह,

तम्मना- तुम देव अच्छे सिख रहे हो,

ह्रदय- आप सीखा hi इतना अच्छा रही हैं, आप जैसी टीचर हो तो सब कुछ सिख जाऊंगा

तम्मना- सब कुछ hi तो सीखना चाहती हु मैं, तुम सिख hi नहीं रहे,

ह्रदय- आप जो जो बता रही हैं सब कर रहा हु न

तम्मना- कुछ बिना बताये भी कर लेना चाहिए इससे टीचर खुश हो जाती ह

ह्रदय- मैं एक आज्ञाकारी स्टूडेंट हु टीचर जो सिखाती ह उससे ज्यादा का पर्दर्शन करके टीचर का अपमान नहीं करूँगा,

तम्मना ने मन में सोचा- भेनचोद इतना तो सीखा दिया अब आगे बढ़ जा और घुस जा मेरी छूट में,

तम्मना ने निचे से अपनी गांड उचकाई और बोली- उठो तो बहुत भरी हो तुम

ह्रदय हड़बड़ा क्र उठा उसे तम्मना के उप्पेर लेते हुए मजा आ रहा था उसकी गदराई हुई गांड पैर अपना लुंड रगड़ने में बहुत मजा आ रहा था, मजा तो तम्मना को भी आ रहा था लेकिन आगे बढ़ने के लिए उठना तो था hi,

ह्रदय अपने लुंड के उभर को छुपता हुआ खड़ा हो गया, लेकिन तम्मना की नजर ह्रदय के लुंड के उभर पैर hi थी,

तम्मना- अब एक देव और सीखा रही हु ये बहुत hi काम का देव ह वैसे तो कुश्ती के नियम के खिलाफ ह लेकिन इसका इस्तेमाल मज़बूरी में कर लेना चाहिए, जब दुश्मन भरी पड़े तो इस देव को लगाने से दुश्मन की पकड़ ढीली हो जाएगी और तुम बच जाओगे,

तम्मना ने ऐसा देव लगवाया जिसमे तम्मना पूरी तरह ह्रदय के काबू में थी, फिर तम्मना ने हाथ निचे लेजर क्र ह्रदय का लुंड पकड़ लिया और उसके एंड भींच दिए, इससे ह्रदय एक दम चौंक गया और उसकी पकड़ ढीली हो गई तो तम्मना तुरंत उछाल क्र ह्रदय के उप्पेर आ गई और ह्रदय के दोनों कंधे गड्डो पैर मिला दिए,

और खुद ह्रदय के लुंड के उप्पेर बैठ गई और उछलने लगी

या हु ये ये ये ये मैंने हरा दिया तुम्हे देखा तुम्हारी जैसी ताकत वाला इंसान भी चित हो गया, तम्मना उछाल रही थी और ह्रदय का लुंड तम्मना की छूट से टकरा रहा था दोनों को इस बात का अहसास था, ह्रदय भी मुस्कुरा रहा था तम्मना की इस हरकत पैर,

तम्मना ह्रदय के ऊपर झुक गई, इससे तम्मना की छूट अच्छी तरह से ह्रदय के लुंड के उप्पेर आ गई, तम्मना ने एक बार अपनी छूट की ह्रदय के लुंड पैर रगड़ा और ह्रदय की आँखों में देखते हुए बोली

तम्मना- कैसा लगा देव, तुम्हे ज्यादा दर्द तो नहीं हुआ,

ह्रदय- दर्द वो क्यों होगा, बस थोड़ा सा चौंक गया था,

तम्मना- तुम्हे दर्द नहीं हुआ वह

ह्रदय- नहीं मुझे तो कोई दर्द नहीं हुआ,

तम्मना- तुम झूट बोल रहे हो मैंने इतनी जोर से दबाया था इससे कोई भी आदमी दर्द से चीख पड़ता

ह्रदय- मुझे तो ऐसा कुछ नहीं हुआ

तम्मना सुरप्रीसेड सी ह्रदय को देख रही थी

तम्मना- तुम सच बोल रहे हो न

ह्रदय- आप दुबारा आजमा क्र देख लो

तम्मना- दुबारा

ह्रदय- है मुझे कोई ऐतराज नहीं ह

तम्मना ह्रदय के उप्पेर से उतर गई और ह्रदय उसके सामने खड़ा हो गया, ह्रदय का लुंड लोअर में से टाइट हुआ खड़ा था, जिसे देख क्र तम्मना का गाला सुख गया था,

ऐसे में कोई अनजान होती तो वैसे hi शर्म से उठ क्र चली जाती लेकिन यहाँ अब प्रैक्टिस से अलग कुछ और hi शुरू हो चुक्का था, एक टीचर अब कुश्ती से हैट कर कुछ और hi ज्ञान देने की रह पैर चल दी थी, तम्मना की आँखों में चमक और छूट गीली गाला सूखा हुआ था,

तम्मना ह्रदय के सामने घुटनो पर बैठ गई, ह्रदय करने क्या आया था और अब क्र क्या रहा था, कोई भी वह देखता तो ये hi लगता की तम्मना ह्रदय का चूसने वाली ह,

ह्रदय- देख लीजिये मम

तम्मना ने कांपते हुए हाथो से ह्रदय का लुंड मुठी में भर लिया, इतना मोटा लुंड तम्मना की मुट्ठी में आ भी नहीं रहा था, तम्मना बड़े प्यार से उसे पकड़ रही थी,

ह्रदय- जोर लगाइये न मम

तम्मना ने उप्पेर देख क्र जोर से लुंड को मरोड़ा लेकिन ह्रदय के फेस से मुस्कराहट काम नहीं हुई, तम्मना ने दूसरे हाथ से ह्रदय की एंड पकड़ लिए और उन्हें भिचने लगी, लेकिन ह्रदय पैर कोई प्रभाव नहीं था,

तम्मना सुरप्रीसेड थी, उसने और जोर लगाया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ,

तम्मना – इस लोअर की वजह से शायद तुम्हे अहसास नहीं हो रहा,

ह्रदय- तो उतर क्र क्र लो

तम्मना- सच में कर लू तुम्हे ाइटर्ज तो नहीं ह

ह्रदय- आप टीचर हो मेरी आपसे मुझे क्या ऐतराज होना ह, आप कुछ ज्ञान hi सिखाऊंगी मुझे,

तम्मना ने घेरि साँस भरी और ह्रदय के लोअर में हाथ डाला और निचे खिसकने लगी, लोअर के साथ अंडरवियर भी था, जैसे hi तम्मना ने कपडे निचे किये तो ह्रदय का 10 इंच लम्बा और मोटाई तो किसी मर्द की कलाई से भी ज्यादा,


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उसे देख क्र तम्मना की साँस hi अटक गई,

हालत तो ह्रदय की भी ख़राब थी, जीवन में पहेली बार वो किसी लड़की के सामने नंगा खड़ा था अपने उस गधे जैसे लुंड को लेकर,

तम्मना बस एक तक उस लुंड को hi देखे जा रही थी, उसकी आँखे फटी हुई थी, हाथ कैंप रहे थे, छूट से फवारे निकल रहे थे जिससे उसकी लेग्गिंग भीग चुकी थी, हॉट कप कापा रहे थे,

वही ह्रदय खुद को कण्ट्रोल करने की कोशिश कर रहा था,

अब दोनों hi सोच में थे क्या आगे कसिए बढ़ा जाये, दोनों जानते थे इससे आगे क्या होना ह अब तक यहाँ क्या हो रहा था, ये हालत अचानक नहीं आये थे इसे आने में काफी टाइम लगा था, तम्मना ने बहुत महेनत की थी इस हालत को बनाने के लिए, अब वो कैसे रुक सकती थी,

तम्मना ने हिम्मत जुताई और लुंड को मुट्ठी में भर लिया और उसे हलके हलके हिलने लगी, वो लुंड पैर अपनी ताकत आजमाने वाली थी ये तो उसपर अपना प्यार लुटाने लगी थी,


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तम्मना- ये इतना बड़ा कैसे ह, तुमने कोई ओप्रशन करवाया ह क्या

ह्रदय- ओप्रशन कैसा ओप्रशन, ये नार्मल ह, ऐसा hi तो होता ह

तम्मना- अरे पगले ऐसा नहीं होता, किसी का ऐसा नहीं होता, धरती पैर 1% लोगो का भी ऐसा नहीं होगा, जिस देश में सबसे बड़े होते हैं वह भी इतना बड़ा नहीं होता,

ह्रदय- मुझे इसके बारे में जानकारी नहीं ह, लेकिन आपको बहुत ह

तम्मना थोड़ी शर्मा गई,

ह्रदय- अब लगाओ न ताकत मम

तम्मना ने ह्रदय को देखा और उसके ाँद मुठी में भर लिए और उन्हें सहलाने लगी,

तम्मना- तुम बहुत भोले हो ये ताकत दिखने के लिए नहीं ह प्यार दिखने के लिए ह,

इतना बोल क्र तम्मना ने ह्रदय के लुंड को अपने मुँह में भरने की कोशिश की, जिससे तम्मना का गाल चीरने लगे, लेकिन वो तो बावली हुई लुंड को अंदर घुसाए जा रही थी,


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लुंड तम्मना के होतो को लगते hi ह्रदय की आँखे मजे के कारन बंद हो गई, उसके दिमाग ने काम करना बंद क्र दिया, और लुंड ने सोचना शुरू क्र दिया, जिससे लुंड ने एक झटका मारा जिससे तम्मना की साँस hi अटक गई, उसने लुंड को बहार निकला और ह्रदय को देखा,

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तम्मना- मर डालोगे क्या, एक तो ये ह hi इतना बड़ा और तुम झटका मर रहे हो,

ह्रदय- मैंने जान बुझ क्र नहीं मारा मम, ये खुद हो गया

तम्मना ह्रदय की हालत पैर मुस्कुराई,

तम्मना- इससे पहले कभी ऐसा हुआ ह तुम्हारे साथ

ह्रदय- नहीं मम ये पहेली बार ह,

तम्मना- तो आज मैं तुम्हे एक नया ज्ञान दूंगी, लेकिन ये बात हम दोनों के बिच hi रही चाहिए, गलती से भी किसी के सामने इसका जीकर न हो जाये,

ह्रदय ने है में गार्डन हिलाई

तम्मना ने फिर से लुंड को मुठी में पकड़ लिया और अपनी जीभ से चाटने लगी,


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वो लुंड के टोपे को चाट ने लगी फिर निचे की तरफ बढ़ने लगी, पुरे लुंड को उप्पेर से निचे तक चाटने लगी, फिर ाँद को भी मुँह में भर क्र चूसने लगी,

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ह्रदय खड़ा हुआ बड़ी हैरत से तम्मना को देख रहा था, वो मजे से पागल हुआ जा रहा था,

तम्मना को लुंड चूसते हुए 10 मिनट्स से ज्यादा हो गए थे, वो कभी लुंड को चाटने लगी कभी चूसने लगी, तम्मना ने सोचा था मैंने ऐसे hi ह्रदय को झाड़ दूंगी लेकिन ह्रदय के लुंड को कोई फरक नहीं पद रहा था, वो तो और खूंखार होता जा रहा था, उसकी नशे दिखने लगी थी,

तम्मना अब चूस चूस क्र थक गई,

तम्मना- तुम झाड़ क्यों नहीं रहे

ह्रदय- कैसे झड़ते हैं, मैं कभी नहीं झाड़ा

तम्मना हैरत से उसे देखने लगी, फिर तम्मना ने आगे कदम बढ़ने का फैसला क्र लिया,

तम्मना – फिर तो आज तुम झाड़ क्र hi घर जाओगे,

तम्मना कड़ी हुई और ह्रदय की टी शर्ट उतर दी और नंगे ह्रदय से लिपट गई, तम्मना के टाइट टॉप में से उसकी अकड़ी हुई चूचिया ह्रदय की छाती में रगड़ने लगी, ह्रदय ने भी मौका देख क्र तम्मना की टाइट गांड पैर हाथ रख दिया और उसे मसलने लगा, निधि ह्रदय को इतना तो सीखा hi गई थी,

तम्मना ने ह्रदय के होतो पैर अपने हॉट रख दिए तो ह्रदय ने भी उसका साथ देना शुरू क्र दिया दोनों एक दूसरे के होतो में खो गए थे, फिर तम्मना ने जल्दी से अपना टॉप उतरा निचे उसने ब्रा नहीं फेनी थी, वो उप्पेर से बिलकुल नंगी थी,

ह्रदय ने तुरंत तम्मना की चूचियों को अपने हाथो में भर लिया और जोर से भींच दिया,


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Aahhhhhhhhhhhhhhhhh धीरे

तम्मना की चीख सी निकल गई,

ह्रदय ने तुरंत उसकी चूचियों पैर अपने हॉट लगा दिए, और चूसने लगा, तम्मना मजे में दोहरी हो गई, ह्रदय का एक हाथ तम्मना की गांड पैर था जो टाइट लोअर के निचे बिलकुल नंगी थी, ह्रदय ने अपनी उंगलिया तम्मना की गांड के बिच में घुसा दी थी,

तम्मना ह्रदय से और चुपक गई, ह्रदय का खड़ा लुंड तम्मना की जांघो के बिच में घुसा जार है था, तम्मना ने अपना एक पेअर उठा क्र ह्रदय की कमर में लप्पेट लिया जिससे लुंड सीधे तम्मना की छूट पैर रगड़ने लगा,


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कुछ देर किश करने के बाद तम्मना ने जल्दी से अपना लोअर निचे क्र दिया, तम्मना की गांड ह्रदय के मुँह की तरफ थी लवर निचे होते hi तम्मना की दिल के आकर की गांड ह्रदय के सामने आ गई, और उसमे से झांकती हुई वो छोटी सी छूट, बहुत प्यारी लग रही थी,

ये नजारा बहुत hi खूबसूरत था, ह्रदय के लुंड ने एक बार झटका मारा,

हरदान ने तुरनत तम्मना की नंगी गांड पैर हाथ फिराया और अपनी एक उंगली तम्मना की छूट की दरार पैर घुमाई इससे तम्मना की सिसकारी छूट गई,

ह्रदय जानबूझ क्र कुछ नहीं क्र रहा था सब उससे खुद hi होता जा रहा था, उसकी हरकतों से कोई नहीं कह सकता था ये उसका पहेली बार ह,

किसी ने कहा ह न शेर के बच्चो को शिकार करना नहीं सिखाया जाता और घोड़े के बचे को दौड़ना नहीं सिखाया जाता, वो खुद सब सीखे हुए होते हैं , ऐसे hi छूट के शिकारी की औलाद को कोण छोड़ना सीखा सकता ह, ह्रदय तुषार की औलाद ह, तुषार ने इतनी छूट छोड़ी थी तो उसके अंदर तो वो गन आने hi थे,

तम्मना भी सरप्राइज थी ह्रदय की हरकतों से, जिसने कभी नंगी लड़की तक नहीं देखि थी आज वो किसी मंझे हुए खिलाडी की तरह पेश आ रहा था,

तम्मना पलट क्र ह्रदय से लिपट गई, दोनों नंगे बदन एक दूसरे को अपने अपने बदन की गर्मी का अहसास करवा रहे थे, दो नंगे जिसम एक दूसरे शेला रहे थे, ह्रदय के हाथ तम्मना की कमर से लेकर गांड तक मसल रहे थे, वही तम्मना अपनी चूचियों को ह्रदय की छाती में रगड़ रही थी और अपनी छूट को ह्रदय के लुंड पैर रगड़ने की कोशिश कर रही थी, ह्रदय ने तम्मना को पलटा और बी तम्मना की गांड ह्रदय के लुंड के सामने आ चुकी थी, और ह्रदय के हाथ तम्मना की चुकी पैर पहुंच चुके थे, ह्रदय दोनों हाथो से तम्मना की चूचियों को मसलने लगी था,


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तम्मना मदहोश होती जार hi थी, फिर ह्रदय का एक हाथ तम्मना के पाई तको शीलता हुआ निचे तम्मना की छूट तक पहुंच चुक्का था, ह्रदय ने एक हाथ से तम्मना की एक चुकी और दूसरे हाथ से छूट को रगड़ना शुरू क्र दिया था, और ह्रदय के हॉट तम्मना की गर्दन को चुम रहे थे,

तम्मना क्या ज्ञान देती ह्रदय को यहाँ तो ह्रदय को तम्मना पैर भरी पद रहा था,

तम्मना पूरी तरह गरम हो गई थी, उसकी छूट से लगातार पानी भी रहा था, और जो ह्रदय का लुंड चूस क्र झड़ने के चाकर में थी वो ह्रदय की उंगली की रगड़े से hi झड़ने लगी थी, तम्मना ह्रदय से लिपट गई और अपनी छूट को ह्रदय की उंगली पैर रगड़ने लगी,

बस ये ज्ञान ह्रदय के पास नहीं था की इस हालत में क्या करना छाइये, वो शांत खड़ा हो गया, तो तम्मना ने ह्रदय का हाथ पकड़ा और खुद hi उसके हाथ को तेज तेज अपनी छूट पैर रगड़ने लगी, ह्रदय को समझ आया क्या करना चाहिए तो उसने भी छूट को जोर से रगड़ना शुरू क्र दिया,

तम्मना झाड़ क्र शांत हुई तो पलट क्र ह्रदय से लिपट क्र उसके हॉट चूमने लगी,

ह्रदय- आप ठीक ह न मम

तम्मना – मुझे मम मत बोलो तम्मना बोलो बस तम्मना, आज मैं तुम्हारी मम नहीं हु,

ये hi बात निधि ने बोली थी, ह्रदय को इतना समझ आया की जब औरत या लड़की गरम होती ह या सेक्स की फीलिंग्स रखती ह तो वो अपना नाम सुन्ना चाहती ह,

तम्मना ने ह्रदय को गड्डो पैर लिटाया और खुद उसे उप्पेर से निचे तक चूमने लगी, ह्रदय का लुंड किसी मीनार की तरह खड़ा था,

तम्मना- ये अब कैसे खड़ा ह, क्या तुम्हे कुछ फील नहीं हो रहा, क्या तुम्हे मजा नहीं आ रहा

ह्रदय- बहुत मजा आ रहा ह

तम्मना- तो फिर ये झाड़ क्यों नहीं रहा

ह्रदय- मुझे नहीं पता आप hi बताओ ये कैसे झाड़ेगा

तम्मना- अब ये अंदर जाकर hi झाड़ेगा,

तम्मना तुरंत आयल लेकर आ गई,

ह्रदय- इससे क्या होगा

तम्मना- ये मेरे लिए अगर ये बिना तेल के अंदर गया तो मेरी ऐसी फाड़ेगा की मैं टूबरा उठने लायक नहीं रहूंगी,

तम्मना ने आयल की बोतल ह्रदय के लुंड पैर उलट दी और पूरा लुंड आयल में डूबा दिया, फिर अपने हाथ में आयल लिया और अपनी छूट में अच्छे से मलने लगी, ह्रदय बड़ी शांति से ये सब देख रहा था,

फिर तम्मना ह्रदय के उप्पेर आ गई और लुंड को पकड़ क्र अपनी छूट पैर रगड़ने लगी, ह्रदय को बड़ा मजा आ रहा था, मजा तो तम्मना को भी बहुत आ रहा था, फिर उसने लुंड को अपणु छूट पैर सेट किया और उस पैर बैठने की कोशिश की लेकिन एक hi पल में उसकी चीख निकल गई और वो तुरंत उठ गई,

तम्मना- नहीं मुझसे नहीं होगा मैं मर जाउंगी, ये मैं नहीं झेल पाऊँगी

ह्रदय उठा और तम्मना की कमर सहलाने लगा

ह्रदय- कोई नहीं मम कोई बात नहीं आप आराम से बैठिये, मैं कुछ नहीं करूँगा

तम्मना ने ह्रदय को देखा उसे बड़ा प्यार आया ह्रदय पैर,

तम्मना मन में- कितना प्यारा ह ये इतना सब होने के बाद इस हालत में आने के बाद भी ये मेरी तकलीफ की वजह से कुछ नहीं क्र रहा ह, लेकिन अगले hi पल तम्मना के चेरे के भाव बदल गए, उसने एक निश्चय किया,

तम्मना- नहीं मुझे करना ह, मैं करुँगी, मैं आज तुम्हे ऐसा सुख दूंगी की तुम हमेशा मुझे याद रखोगे,

ह्रदय- आपको तकलीफ होगी मत कीजिये

तम्मना- तकलीफ के बाद जो सुख मिलेगा वो भी तो मुझे hi मिलेगा न, और मैं उस सुख उस ख़ुशी के लिए कुछ भी कर सकती हु,

तम्मना तुरनत ह्रदय के बराबर में लेट गई और अपने दोनों पेअर खोल लिए,

तम्मना- ह्रदय आओ मेरे दोनों पैरो के बिच में आ जाओ और अपना ये मुसल मेरी छूट में घुसाओ

ह्रदय सुरप्रीसेड था की सेक्स का नशा कितना खतरनाक होता ह, एक टीचर को क्या से क्या बना दिया,

ह्रदय को तम्मना पैर बहुत प्यार आ रहा था, आज तम्मना उसे दुनिया की सबसे प्यारी लड़की लग रही थी,

ह्रदय तम्मना के पैरो के बिच में आ गया, तम्मना ने ह्रदय का लुंड पकड़ा और अपनी छूट पैर लगाया,

तम्मना- ह्रदय अंदर घुसाओ लेकिन आराम से, जब मैं कहु रुकने को तो रुक जाना,

ह्रदय ने तम्मना के कहे अनुसार दबाव बनाया, लुंड के सामने छूट बहुत छोटी थी, ह्रदय ने दबाव बनाया तो लुंड फिसल गया

तम्मना ने फिर से लुंड को पकड़ा और इस बार छोड़ा नहीं,

तम्मना- अब ढकेलो

ह्रदय ने फिर से दबाव बनाया और आयल की चिकनाहट की वजह से ह्रदय के लुंड के टोपे ने तम्मना की छूट को चिर दिया, और दो दर्द भरी आवाजे के साथ गूंज गई,

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

तम्मना की छूट फैट गई थी, उसकी छूट में इतना मोटा लुंड घुस चुक्का था वही ह्रदय ने पहेली बार छूट में लुंड डाला था ो भी अपने लुंड के साइज के हिसाब से छोटी छूट में, जिससे ह्रदय के टोपे की स्किन पूरी तरह पिच एकीच गई जिससे ह्रदय की उस स्किन का ताका टूट गया जिससे ह्रदय को दर्द हुआ,

लेकिन ह्रदय उस दर्द को झेल गया, लेकिन तम्मना नहीं झेल पाई, वो लगभग बेहोश सी हो गई,

ह्रदय ने घबरा गया,

ह्रदय- तम्मना तम्मना आप ठीक हो

तम्मना ने उसे हाथ से शांत रहने के इशारा किया,

ह्रदय- मैं इसे बहार निकल लू

तम्मना ने हाथ ने न का इशारा किया,

ह्रदय रुक गया,

कुछ देर बाद तम्मना ने अपनी हिम्मत को बटोरा और फिर से आयल उठा क्र छूट पैर डाला और ह्रदय को इशारा किया ढकेलो, ह्रदय ने एक आज्ञाकारी बच्चे की तरह अपना लुंड तम्मना की छूट में धकेलना शुरू किया और 1 इंच के करीब घुसते hi तम्मना की चीख फिर से गूंज गई,

तम्मना- बस बस रुक जाओ रुक जाओ, बस इतना hi रहने दो

ह्रदय रुक गया,

तम्मना अपना सर इधर उधर पटक रही थी, कुछ देर में जब वो शांत हुई तो

तम्मना- कितना चला गया अंदर आधा घुस गया क्या

ह्रदय- आधा अभी तो 2-2.5 इंच hi गया ह,

तम्मना ने सर उठा क्र देखा तो पूरा लुंड बहार दिख रहा था,

तम्मना- हे मैं तो मर जाउंगी अगर ये पूरा अंदर घुस गया तो कसम से मेरी जान ले लेगा,

ह्रदय तुम इतने में hi हलके हलके धक्के लगाओ और अपने इस मुसल के लिए जगह बनाओ,

ह्रदय को धक्के लगाने नहीं आते थे, उसने तम्मना के कहे अनुसार धक्के लगाए, लेकिन वो कहते ह न अनादि के हाथ में छूट का सत्यानाश, वही ह्रदय ने किया हलके धक्को में एक धक्का थोड़ा तेज लगा दिया और इस धक्के में 2 इंच लुंड और अंदर घुस गया,


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तम्मना इस धक्के को बर्दास्त नहीं कर पाई और लगभग बेहोश हो गई,

ह्रदय तम्मना को हिलने लगा, दर्द की वजह से तम्मना का खुद पैर से कण्ट्रोल छूट गया था, वो ह्रदय की हरकतों को देख तो प् रही थी लेकिन कुछ कर नहीं प् रही थी, ह्रदय ने लूँ दबहार निकलना चाहा लेकिन छूट पूरी तरह अलुंड पैर फांसी हुई थी, जैसे hi ह्रदय ने बहार को खींचा तो तम्मना फिर से होश में आई और ह्रदय को रोक लिया,

ह्रदय चौंक गया, इतना दर्द होने के बाद भी तम्मना बहार नहीं निकलने दे रही थी, ह्रदय ये सोच सोच क्र hi हैरत में था,

तम्मना- तुमने ज्यादा अंदर घुसा दिया ह, अब जरा आराम से बस अपनी कमर को हिलाओ,

ह्रदय ने हलके हलके कमर हिलनी शुरू की, तम्मना को तकलीफ हो रही थी लेकिन उतनी नहीं, कमर हिलने से ह्रदय के लुंड की स्किन आगे पीछे हो रही थी जिससे ह्रदय को मजा आ रहा था,

कुछ देर में hi तम्मना की छूट ने जगह बनानी शुरू क्र दी थी, और लुंड को हिलने में आसानी होने लगी थी, अब दर्द के साथ साथ मजा भी आने लगा था, मजा दर्द से ज्यादा था तो दर्द का अहसास होना बंद हो चुक्का था, तम्मना निचे से सिसकारियां भरने लगी थी,

Ahhhhhhhhhhhhhh ह्रदय बस ऐसे hi करते रहो, रुकना मत मेरा होने वाला ह ऐसे hi करते रहो बहुत अच्छा कर रहे हो, ऐसा लुंड किस्मत से मिलता ह, तुम कमल के हो, ahhhhhhhhhhhhhhhhh

इसके साथ hi तम्मना झड़ने लगी थी, लेकिन ह्रदय को टाइम लगने वाला था,

ह्रदय ऐसे hi धक्के लगता रहा, तम्मना सरप्राइज थी कोई इतनी देर तक कैसे टिका हुआ ह और वो भीपहेली बार,

आज कल लड़के लड़कियों के बदन से रगड़ने से hi झाड़ जाते हैं, जबकि ह्रदय तो जब से यहाँ आया ह तम्मना के बदन के साथ बहुत अच्छे से रगड़े के मजे ले रहा था, रगड़े से लेकर चुदाई तक लगभग 1 घंटा हो चुक्का था, इतनी देर में तो कोई भी लड़का 4 बार झाड़ जाता, लेकिन ये कैसा इंसान ह जो झाड़ hi नहीं रहा,

ये hi सोचते सोचते तम्मना फिर से झड़ने लगी थी, इस बार तम्मना और जोर से झाड़ रही थी, जिसका असर ह्रदय पैर भी हो रहा था, तम्मना का झड़ना ह्रदय को और एक्सीटेंड क्र रहा था, उसके लुंड में और तनाव आने लगा था, और ह्रदय का लुंड अकड़ने लगा था, उस अकड़न ने ह्रदय का जोश और बछड़ा दिया, और उसी जोश में ह्रदय ने धक्को की रफ़्तार थोड़ी सी बढ़ा दी जिससे तम्मना की साँस hi रुक सी गई लेकिन ह्रदय अपने जोश में था और उसके लुंड ने लावा उगलना शुरू क्र दिया,

पहेली बार ह्रदय के लुंड से वीर्य का फवारा निकला था और वो इतना सारा निकला था की जैसे बढ़ आ गई हो, ह्रदय लगातार तम्मना की छूट में अपना वीर्य भरता रहा, तम्मना की छूट कितना वीर्य रोक पति उसकी छूट से वो वीर्य बहार भेने लगा,



ह्रदय के लुंड ने जब लावा उगलना बंद किया तो ह्रदय तम्मना के उप्पेर hi लेट गया,
 
अपडेट-11




तम्मना बेसूद सी ह्रदय के निचे पड़ी हुई थी, आज जो उसकी हालत हुई तो वैसी हालत तो उसने कुश्ती खेलते हुए किसी खिलाडी ने भी नहीं की थी,

कुछ देर बाद तम्मना थोड़ी रिलैक्स हुई तो उसने ह्रदय के सर अपना उंगलिया घुमाई, ह्रदय ने भी सर उठा क्र तम्मना को देखा,

तम्मना- कैसा लगा

ह्रदय- बहुत मजा आया मम, इतना मजा ह सेक्स में मैं नहीं जनता था,

तम्मना- ये तो कुछ भी नहीं ह ये तो पहेली बार था इसलिए थोड़ी तकलीफ हुई वर्ण इसमें तो इतना मजा ह की इसके अलावा कोई सुख अच्छा hi नहीं लगता,

ह्रदय- आपको मजा आया

तम्मना- बहुत मजा आया, लेकिन तुम्हारा बहुत मोटा और लम्बा ह, एक दो बार में जब छूट को इसकी आदत हो जाएगी तो और भी मजा आएगा, चलो उठो खुद को साफ़ क्र लो

ह्रदय उठा तो तम्मना की छूट से लुंड पुक की आवाज के साथ बहार आ गया, तम्मना की एक बार फिर चीख निकल गई, ahahhhhhhhhhhhhhhh माँ

ह्रदय- श्री श्री

तम्मना ने ह्रदय के लुंड को देखा जो अब भी खड़ा था,

तम्मना हैरत से उसे देख रही थी, इतनी चुदाई के बाद भी ये खड़ा ह, कसम से अगर इस जालिम ने छूट को नहीं पड़ा होता तो दुबारा चुद लेती,

तम्मना ने अपनी छूट देखि तो वह वीर्य के साथ खून भी था,

तम्मना- इस लुंड ने मेरी छूट से खून निकल दिया कोई सील पैक होती तो उसकी तो परखचे उदा देता,

ह्रदय- ये आपका पहेली बार नहीं था मम

तम्मना- ह्रदय मैं 30 साल की हु इस आगे तक खुद को कैसे रोक पति, लेकिन जो दर्द और सुख तुमने दिया ह वो तो पहेली बार में भी नहीं हुआ था, आज लगा ह जैसे मेरा पहेली बार हुआ ह,

ह्रदय- क्या मेरा पूरा अंदर जा पायेगा

तम्मना – एक दिन जरूर जायेगा,

तम्मना ने उठने की कोशिश की लेकिन दर्द की वजह से वही लेट गई,

ह्रदय- क्या हुआ अब भी दर्द हो रहा ह

तम्मना- ये दर्द हफ्तों में भी ठीक नहीं होगा, लेकिन तुम चिंता मत करो मैं ठीक हो जाउंगी, तुम मुझे बस उठा क्र बाथरूम में ले चलो,

ह्रदय ने तम्मना को गॉड में उठाया और बाथरूम में ले गया, और गयासुर से गरम पानी निकल क्र तम्मना को दिया, तम्मना ने गरमा गरम पानी अपनी छूट पैर डाला जिससे उसकी सिसकारी निकल गई, फिर उसने अपने हाथ से hi गरम पानी ह्रदय के लुंड पैर भी डाला और अपने हाथ से साफ़ किया, ह्रदय को हलकी सी जलन हुई,

तम्मना प्रेमिका की तरह ह्रदय के साथ व्यव्हार क्र रही थी, वही ह्रदय के अंदर भी तम्मना के लिए प्रेम के भाव जग चुके थे, किसी ने सच कहा ह पहला प्यार या पहेली चुदाई दिल में एक जगह बना लेती ह, वही जगह ह्रदय के दिल में बन चुकी थी,

ह्रदय ने तम्मना को बड़े प्यार से बीएड पैर लिटाया, और उसके उप्पेर चादर धक् दी, खुद अपने कपडे पहने

ह्रदय- आपको तकलीफ हो रही ह न

तम्मना- ये तकलीफ hi लड़की का सबसे बड़ा सुख ह, जब लड़की जवान होती ह और उसे सेक्स का ज्ञान होने लगता ह तो सबसे ज्यादा उसके दिमाग में बस ये hi घूमता ह की ऐसा मर्द कोण होगा जो उसके साथ सेक्स करेगा, कैसा होगा क्या क्या होगा कितना मजा आएगा, और जब उसे असली मजे का पता चलता ह तो बस एक hi इच्छा होती ह की कोई दुमदार मर्द मिले जो उसके अंदर की आग को बुझा दे,

तुम एक असली मर्द हो जो किसी की भी आग को बुझा सकते हो, मेरी आगे 30 हो गई ह लेकिन मैंने अब तक ये सुख नहीं पाया था आज तुमने मुझे ये सुख दिया ह,

ह्रदय- आपने आज तक शादी क्यों नहीं की

तम्मना- तुम्हारे जैसा कोई मिला hi नहीं

ह्रदय- आपने बताया की ये आपका पहेली बार नहीं ह मतलब कोई तो मिला था आपको

तम्मना- वो जो मिला था उसी की वजह से आज तक शादी नहीं क्र पाई, और करना भी नहीं चाहती, मेरा पहला अनुभव बहुत ख़राब था तो दुबारा हिम्मत नहीं हुई, और तुम्हारे साथ करने के बाद मुझे पता ह दूसरा ऐसा कोई मिलेगा नहीं, तो अब जरुरत नहीं ह,

ह्रदय- क्या हमारे बिच जो हुआ वो सही ह, आप मेरी टीचर हो, गुरु के साथ ऐसा करना गलत ह न

तम्मना- हो सकता ह गलत हो लेकिन मैं एक औरत भी हु और तुम एक मर्द और वो भी अल्फ़ा मर्द तो तुम्हारा पहला कर्त्तव्य ह मेरे जैसी जरुरत मंद औरतो का भला करना, कोई रिश्ता कोई नियम तुम्हारे लिए लागु नहीं होता, आज के टाइम में चारो तरफ हवस hi हवस ह, हर कोई सेक्स में डूबा हुआ ह, लेकिन किसी भी औरत से पूछ क्र देखना उसने कभी सेक्स का असली मजा लिया ह तो तुम्हे 90% औरतो के चेरे लटके हुए मिलेंगे,

तुम वो मर्द हो जो उन सबको वो सुख दे सकते हो, तो तुम्हारा कर्त्तव्य ह उन्हें वो सुख देना,

ह्रदय- लेकिन अलग अलग लड़कियों के साथ सेक्स करने से उनके साथ धोका नहीं होगा क्या,

तम्मना- आज के टाइम में तुम ऐसा सोचते हो बहुत भोले हो, कोई इतना नहीं सोचता, लेकिन तुम सोच रहे हो ये अच्छी बात ह, लेकिन धोका तब होगा जब तुम किसी के प्यार में होंगे,

और जब तक प्यार नहीं तो ये गिव एंड टेक वाला काम हुआ न तुम भी मजा लो और सामने वाली को भी मजा दो,

ह्रदय- पता नहीं क्या सही क्या गलत

तम्मना- तुमने पहेली बार मेरे साथ किया ह, तो तुम मेरे लिए लॉयल रहना चाहते हो, लेकिन मैं तो पहले hi करवा चुकी थी, अब तुम किस बात से लॉयल रहोगे, और अगर रहना भी चाहते हो तो मेरी तरफ से तुम्हे आजादी ह किसी के भी साथ मजे करने की,

ह्रदय- मम आप

तम्मना- अकेले में मुझे मम नहीं तम्मना बोलै करो अब से, और ज्यादा मत सोचो अपने इस छोटे दोस्त श्री श्री इस बाहुबली दोस्त का ख्याल रखो मेरे जैसी 10 मिलकर भी इसे शांत नहीं रख सकती इसलिए इसकी ख़ुशी के लिए नै नै छूट दिलवाते रहना,

ह्रदय कंफ्यूज सा देखे जा रहा था, ह्रदय ने सोचा था तम्मना को निधि के बारे में बता देगा और निधि से दूर हो जायेगा लेकिन यहाँ तो तम्मना खुद उसे दूसरी लड़कियों के पास जाने को बोल रही थी, ह्रदय शांत रह गया उसने निधि के बारे में कुछ नहीं बताया,

ह्रदय – ठीक ह ये बाते बाद में करेंगे आप आराम करो इस टाइम, कुछ चाहिए तो बताओ मैं लता हु

तम्मना- नहीं तुम अब जाओ मैं सम्हाल लुंगी, और है अगले कुछ दिन मैं कॉलेज नहीं आ पाऊँगी, तुम और कल्पना प्रैक्टिस अच्छे से करना,

कल्पना का नाम सुनते hi ह्रदय को कल्पना की हरकते याद आ गई,

ह्रदय तम्मना से बात करना चाहता था लेकिन सोचा बाद में बात करूँगा, वो bye किश करके वह से निकल गया और सीधे घर पंहुचा, जहा दीपा उसका इंतजार कर रही थी,

दीपा- आ गया तू हुआ वह पैर कुछ

ह्रदय- माँ ऐसे कोण बताता ह,

दीपा- तू बताता ह अपनी माँ को, ज्यादा बकवास मत कर जल्दी बता क्या क्या हुआ वह तूने कुआ खोदा या नहीं,

ह्रदय सर निचे करके मुस्कुरा दिया,

दीपा ख़ुशी से ह्रदय से लिपट गई, शाबाश बीटा

ह्रदय- माँ ऐसे काम के लिए कोई माँ खुश होती ह क्या

दीपा- तेरी समझ नहीं आएगा तू ये बता किला फतह किया या नहीं, कैसा रहा सब मजा आया या नहीं, तेरा जल्दी तो नहीं हो गया था,

ह्रदय- माँ बस करो, भूक लगी ह कुछ खाने को दे दो,

दीपा- अरे है भूक लगी होगी, मैं कितनी बुद्धू हु, तू बैठ मैं लती हु,

वही दूसरी तरफ..

राजेश सबसे पहले रिंकी को हॉस्पिटल ले गया और उसका चेकउप करवाया, उसे दवाइया दिलवाई ताकि वो अपने ड्रग्स की हब्बित को कण्ट्रोल में कर सके, फिर उसने अनीता को गाओं में हवेली पैर चलने को कहा लेकिन अनीता ने मन क्र दिया तो राजेश ने अपना वो घर खुलवा दिया जो अंजलि ने खरीदा था, कसबे और शहर के बिच में, अब वह अच्छी खासी कॉलोनी बन चुकी थी बहुत लोग वह रहने लगे थे,

रम्य और अन्य सुरप्रीसेड थी, जिस देश के बारे में उन्हें कभी बताया तक नहीं गया वह उनका कोई जानकर भी ह,

अनीता राजेश से- दीदी कहा ह

राजेश जी- वो अपनी तलाश में लगी हुई ह,

अनीता- अभी तक

राजेश जी- माँ ह न आखरी साँस तक हार कैसे मान सकती ह, आप लोग यहाँ आराम से रहो कुछ चाहिए हो तो मुझे फ़ोन कर देना, मैं जरुरत का सारा सामान यहाँ भिजवा दूंगा,

रिंकी- अंकल मैं उनसे मिलना चाहती हु, एक वही हैं जो मुझे सही दिशा दिखा सकती हैं,

राजेश- जब सही समय आएगा वो खुद आएगी मिलने उसे सब पता ह क्या हो रहा ह, तू घबरा मत बेटी वो सब सही कर देगी तू आराम क्र और कोई प्रॉब्लम हो तो अपने अंकल को फ़ोन क्र देना, रिंकी को उप्पेर रूम में लिटाया, फिर राजेश वह से निकल गए,

अनीता सोफे पैर बैठ क्र सोचने लगी, रम्य और अन्य भी उसके पास आ गई,

रम्य- दादी ये किसका घर ह ये कोण थे और हमारा इनसे क्या रिश्ता ह,

अनीता- अभी नहीं बेटी अभी नहीं सब बताउंगी लेकिन अभी नहीं, मुझे थोड़ा रेस्ट लेने दो मैं इस भाग दौड़ में बहुत थक गई हु,

अन्य- रम्य बाद में बात करेंगे,

रात में ह्रदय एक के पहाड़ी के उप्पेर था और वो आगे बढे जा रहा था, ठण्ड में सिकुड़ा हुआ चला जा रहा था, चलते हुए वो एक गुफा के सामने पहुंच गया, गुफा अंदर से बहुत hi भयंकर थी, ह्रदय ठण्ड से कैंप रहा था और आगे बढ़ रहा था, वो गुफा के अंत तक पहुंच गया और वह उसे एक ताबूत दिखाई दिया, जिसके चारो तरफ आग जल रही थी लेकिन उसके उल्टा ह्रदय को ठण्ड लग रही थी, वो इंसान जिसे बर्फ में नंगे बदन सोने में भी ठण्ड न लगे उसे आग के सामने ठण्ड लग रही थी,

ह्रदय ठण्ड से कैंप रहा था और वो वही जमीन पैर गिर पड़ा और अपने होश खोने लगा, लेकिन तभी किसी ने उसके सर पैर हाथ फिराया ह्रदय ने पलट क्र देखा तो एक खूबसूरत औरत उसके सामने कड़ी थी, वो ह्रदय की पहचान में नहीं आई,

उस औरत ने ह्रदय को खुद से चिपका लिया, उस औरत के बदन की गर्मी से ह्रदय को रहत सी होने लगी, शरीर में ताकत सी महसूस होने लगी, उस औरत ने अपने कपडे उतरे और नंगे बदन ह्रदय के नंगे बदन से चिपक गई, ह्रदय के शरीर में गर्माहट के साथ साथ वासना भी जगाने लगी थी, उसका एक हाथ उस औरत के मुलायम गांड पैर पंहुचा की तभी एक धमाका हुआ और ताबूत टूट गया,

पूरी गुफा में पत्थर बिखरने लगे,

और इसी के साथ ह्रदय घबरा क्र उठ गया, वो एक सपना देख रहा था, बहुत hi अजीब सपना था, सब कुछ समझ से बहार, ह्रदय पसीने में लथपथ था, अभी उसे ठण्ड लग रही थी लेकिन यहाँ तो वो पसीने में भीगा पड़ा था, सब उल्टा पुल्टा हो रहा था, और सपने में वो औरत वो मुलायम बदन,

ह्रदय को लगा आज उसने पहेली बार सेक्स किया ह तो हो सकता ह उसका इफ़ेक्ट हो, इससे पहले उसे सेक्स से जुड़े सपने कभी नहीं आते थे लेकिन आज नंगी औरत दिख रही थी, तो जरूर सेक्स करने की वजह से फीलिंग्स बदल रही हैं,

ह्रदय लेट गया और उस औरत के बारे में सोचने लगा, सोचते सोचते फिर सो गया,

इधर चंडीगढ़ में नैना और काम्य एक पब में बैठी हुई थी और साथ में थी शनाया आशना और रैना, दिया उनके साथ नहीं थी आज,

काम्य- यार तुम्हारी फॅमिली तो काफी फेमस ह यहाँ चंडीगढ़ में,

शनाया- हमारा बिज़नेस hi इतना बड़ा ह

नैना- है सही कहा, ये तुम्हारी फॅमिली का पुराण बिज़नेस होगा न, तुम्हारी फॅमिली मतलब दादा उनके दादा इसी बिज़नेस में होने तभी तो इतना बड़ा ह

आशना- हमे कभी पूछा hi नहीं अपने बिज़नेस के बारे में, इतना बड़ा बिज़नेस ह तो पुराण hi होगा, वैसे भी हमारी कंपनी का लोगो ह न सीन्स 19** तो तभी से होगी,

नैना- बहुत बढ़िया यार तुम चारो बहन एक साथ रहती हो और कोण कोण ह तुम्हारी फॅमिली में,

आशना- मेरे पापा और चाचा मम्मी चची और बुआ, और हम चार भेने

नैना- बुआ भी साथ रहती हैं उनकी फॅमिली,

शनाया- हम कभी उस बारे में बात नहीं करते, प्लीज तुम भी मत करो,

काम्य- ओह श्री श्री सभी ससुराल वाले अच्छे नहीं होते, हम समझ सकती हैं,

नैना- शनाया तुम और दिया जुड़वाँ भेने हो क्या,

शनाया- जुड़वाँ

नैना- है दोनों की आगे शामे शामे सी hi लगती ह,

तीनो भेने एक दूसरे का मुँह देखने लगे, क्योकि उन्होंने तो कभी इस बारे में न सोचा न hi पूछा था,

काम्य- तुम्हारे दादा जी कोण थे, तुम किसी सुरेश चोपड़ा को जानती हो,

शनाया- आज तुम हमारे परिवार के बारे में इतने सवाल क्यों क्र रही हो,

नैना- अरे यार बात उठ गई तो पूछ लिया ऐसे hi,

शनाया- और ये सुरेश चोपड़ा कोण ह, हम नहीं जानते,

काम्य- मुझे लगा तुम्हे पता होगा, सचिन और कपिल अंकल से पहले वही तो अंजलि ग्रुप के ओनर थे, J.S.S ग्रुप के नाम से थी पहले ये तो 18 साल पहले hi अंजलि ग्रुप बना ह,

रैना- तुम दोनों बहुत कुछ जानती हु हमारी कंपनी के बारे में, इतना तो हमे भी नहीं पता,

आशना- हमे तो ये भी नहीं पता ये अंजलि कोण ह जिसके नाम पैर ये अंजलि ग्रुप ह,

तीनो बहन कंफ्यूज सी बैठी थी, और नैना और काम्य परेशां थी उन्हें कोई जानकारी नहीं मिल रही थी,

नैना- छोड़ो यार पार्टी पैर फोकस करो न ये सब बकवास ह, फिर कभी बात कर्नेगे,

पार्टी तो शुरू क्र दी लेकिन पार्टी में दिमाग नहीं लग रहा था इसलिए जल्दी hi अपने घर निकल गई,

नैना – काम्य ये कैसी लड़किया हैं इन्हे अपने परिवार के बारे में कुछ नहीं पता कोई इतनी बेवकूफ कैसे हो सकती हैं,

काम्य- जैसे हम हैं, हमे भी तो अपने परिवार के बारे में कुछ नहीं पता, इनके पास कुछ तो रिश्ते हैं लेकिन हमारे पास तो कोई भी रिश्ता नहीं था, तो हम इनसे भी बड़ी बेवकूफ हुई न

नैना चुप हो गई,

रात तो बीत गई, अगली सुबह एक नै किरण के साथ नै सोच और नै नै प्लानिंग के साथ आई,

नैना और काम्य ने अपना प्लान hi चेंज क्र दिया अब उन्होंने सीधे अंजलि ग्रुप में घुसना hi सही समझा, अब सुरेश चोपड़ा और सोहन चोपड़ा के बारे में कंपनी से hi जानकारी निकली जाएगी,

दीपा ह्रदय के पास बैठी हुई उसे निहार रही थी तभी ह्रदय की आँख खुली,

ह्रदय- माँ क्या हुआ ऐसे क्यों बैठी हो,

दीपा- कुछ नहीं बस मन किया देखने का तो देख रही हु,

ह्रदय मुस्कुरा क्र दीपा से लिपट गया,

दीपा- उठ तेरे लिए कॉफ़ी लती हु

ह्रदय- माँ बैठो न मुझे कुछ बात करनी ह,

दीपा- है है बोल

ह्रदय- माँ मुझे चंडीगढ़ जाना ह

दीपा- क्यों क्या हुआ कोई कम्पटीशन ह क्या, या चंडीगढ़ की सोनी सोनी कुडियो की याद आ रही ह, कल तूने खून चख लिया ह कही

ह्रदय- माआआ तुम कुछ भी बोलती हो ऐसा कुछ नहीं ह और कम्पटीशन भी कोई नहीं ह लेकिन मैं कुछ नया सीखना चाहता हु लेकिन यहाँ कुछ नया नहीं ह जो मैंने न सीखा हो,

दीपा- ये तो अच्छी बात ह, तू तैयारी क्र मुझे कुछ करना ह तो बता

ह्रदय- ोोू माँ तुम कितनी अच्छी हो,

दीपा- बीटा मैं तेरे लिए hi हु तेरी ख़ुशी मेरे लिए सबसे ज्यादा मायने रखती ह, कब जाना ह ये बता,

ह्रदय- आज कॉलेज में बात करके तब देखता हु,

दीपा- ठीक ह

वही सुबह सुबह रम्य घर की चाट पैर कड़ी देख रही थी, अमेरिका और इंडिया में बहुत अंतर ह, यहाँ बहुत कुछ बदला लेकिन बड़े शहरों में, छोटे शहर बस बड़े शहरों की नक़ल क्र रहे थे, लेकिन नक़ल करने के चक्कर में वो कही के भी नहीं रहे न hi अपनी संस्कृति से जुड़े न hi पूरी तरह बदल सके,

रम्य कड़ी सोच रही थी क्या करे अमेरिका जा नहीं सकते थे, पढाई भी छूट गई थी,

तभी निचे दो लड़के आपस में लड़ रहे थे, दोनों जवानी की तरफ कदम रख रहे थे,

एक लड़का- ोोू भोसड़ी के पहले मैंने देखा ह उन्हें,

दूसरा लड़का- तेरी माँ का भोसड़ा तूने देखा तो तेरा अधिकार हो जायेगा क्या,

पहला लड़का- पहला चांस मैं मरूंगा भेनचोद

दूसरा- चल ठीक ह लेकिन दोनों अलग अलग पैर तरय करते हैं न, मादरचोद दो दो ह न

पहला लड़का- है ठीक ह लेकिन बाकि दोस्तों को मत बता देना, भोसड़ी वाले पूरा ग्रुप आ जायेगा किस किस में बाटेंगे

दूसरा लड़का- uuuffffffffffffffff भोसड़ी के जब से देखा ह लुंड बैठ hi नहीं रहा, रात में 4-4 बार मुठी मार रहा हु, फिर भी शांत नहीं हो रहा,

रम्य की समझ में कुछ नहीं आ रहा था, उनकी वो गलियों वाली लांगूगे बड़ी अटपटी सी लग रही थी, काम्य निचे आई तो अनीता किचन में काम कर रही थी,

रम्य- दादी यहाँ की लैंग्वेज बड़ी अजीब ह

अनीता- क्यों क्या हुआ

रम्य- अजीब से वर्ड्स बोलते हैं, जैसे भोसड़ी के, माँ का भोसड़ा भेनचोद मादरचोद और भी न जाने क्या क्या बोल रहे थे

अनीता रम्य की बात सुनकर एक दम चौंक गई, और बोखला सी गई अब उसे कैसे बताये इन सब गलियों का क्या मतलब होता ह,

अनीता- तू पागल ह क्या कुछ भी सुनती रहती ह, इन सब पैर धयान मत दे, वो गंदे लड़के होंगे उन पैर धयान मत दे और उन लोगो से दूर hi रहना,

रम्य को अनीता की बात अजीब लगी क्योकि अनीता कभी ऐसे सकपका क्र बात नहीं करती,

रम्य- ठीक ह ठीक ह गुस्सा क्यों क्र रही हो,

रिंकी वही आ गई जो बहार कड़ी रम्य की बात सुन रही थी,

रिंकी- मैं बताती हु,

अनीता- तू पागल ह क्या

रिंकी- माँ मेरी वाली गलती मत करो, गलत चीजों को आपने कभी नहीं बताया इसलिए बहार के लोगो ने उन चीजों को गलत तरीके से मुझे बताया और मैं कुछ और hi बन गई, अगर माँ बाप खुद hi सब बाते समझा दे तो बहार वाले न समझी का फायदा न उठा सके,

अनीता चुप हो गई

रिंकी- बेटी मादरचोद मतलब मदर फुकेर ह, और अमेरिका में वेजिना कुँअरि लड़की की हो या सेक्स की हुई लड़की की उसे वेजिना hi बोलते हैं लेकिन यहाँ अगल गली देने में अलग अलग शैडो का इस्तेमाल करते हैं, सेक्स की हुई लड़की की वेजिना को भोसड़ी बोलते हैं, और माँ का भोसड़ा मतलब मदर’ स वेजिना, और भेनचोद मतलब सिस्टर फुकेर,

रम्य- उह तो वो लड़के गालिया दे रहे थे, वैसे यहाँ तो बस गलियों में ह दादी अमेरिका में ये सब रियल में होता ह, मेरी कुछ फ्रेंड्स के उनके भाई के साथ रिलेशन थे, वो हमे सब बताती थी,

रम्य की बात सुनकर अनीता और रिंकी एक दूसरे को देखने लगी,

तभी अन्य एक तस्वीर के साथ वह आई,

अन्य- दादी ये किसकी तस्वीर ह,

अन्य ने जैसे hi वो तस्वीर दिखाई तो रिंकी और अनीता की आँखे फटी रेहगाई वो दोनों बोखला गई, क्योकि वो तस्वीर अंजलि के पुरे परिवार की थी, जिसमे राजेश अंजलि सीमा दीपा रूचि सचिन कपिल और सबसे आगे बैठा हुआ वो स्मार्ट और भेतरीन परसनैत्य का मालिक तुषार बैठा हुआ था,

उस फोटो को देखते hi रिंकी की आँखों में आंसू आ गए,

अनीता- ये तुझे कहा मिली

अन्य- दादी वो जो निचे सामने वाला रूम ह न सबसे बड़ा उसी में अलमारी के अंदर राखी हुई थी,

अनीता- इसे वही रख दे

अन्य- ये ह कोण

रम्य- अरे पागल वो जो अंकल आये थे ये वही तो हैं ये उनकी फॅमिली होगी न, अब कही और रहते होंगे

अनीता- देख रम्य कितनी समझदार ह, वो सब समझ जाती ह, ये उनका परिवार ह, ये उनका घर ह तो उनकी तस्वीर तो यहाँ होनी hi थी,

अन्य मान तो गई लेकिन उसे रिंकी के आंसू खाल रहे थे,

इधर ह्रदय पंहुचा तम्मना के पास

ह्रदय- कैसी तबियत ह अब

तम्मना- काफी रहत ह मेरी जान

ह्रदय- जान

तम्मना- है अब मेरे पास अधिकार ह तुम्हे जान कहने का,

ह्रदय- दवाई ले ली थी आपने,

तम्मना- है लेली थी

ह्रदय- मेरा एक काम था क्या आप कर सकती हैं

तम्मना- है बोलो

ह्रदय- मुझे किसी काम से चंडीगढ़ जाना ह, क्या आप कॉलेज में मेरी अटैंडन्स सम्हाल सकती हैं

तम्मना- तुम कॉलेज से सबसे होशर स्टूडेंट हो तुम्हे कोई प्रॉब्लम नहीं होगी, और मैं बोल दूंगी की तुम्हे एक्स्ट्रा ट्रेनिंग के लिए चंडीगढ़ भेज रही हु, इस बहाने मैं भी तुम्हारे पास आ सकती हु न,

ह्रदय- आपको ठीक होने में टाइम लगेगा न

तम्मना- कोई नहीं ठीक होकर आ जाउंगी तुम्हारे बिना मन नहीं लगेगा न मेरा,

ह्रदय- मन तो मेरा भी नहीं लगेगा

तम्मना- जल्दी hi वह आ जाउंगी मन लगाने, और जब तक मैं नहीं आती वह कोई ढूंढ लेना जो तुम्हे शांत कर सके,

ह्रदय- वह हहहहए

तम्मना- अरे क्यों नहीं वो चारो भेने हैं चारो hi लट्टू थी तुम पैर चारो के कहते खोल देना

ह्रदय- क्या नहीं नहीं नहीं

तम्मना- तुम बड़े भोले हो, मैं एक लड़की हु दूसरी लड़की को पहचानती हु, वो चारो hi तुम्हारे निचे आने के लिए बैचैन थी, तुम तरय करना फिर देखन कैसे खुद नंगी होकर आती हैं,

ह्रदय खामोश सा खयालो में खो गया,

वही चंडीगढ़ में शनाया सीमा और रश्मि के साथ बैठी थी, दिया भी साथ थी,

सीमा- तो कैसी रही तुम लोगो की पार्टी कल रात में, आज बड़ी देर तक सोई हो कॉलेज भी नहीं गई,

शनाया- अच्छी थी माँ, मुझे कुछ जानना था माँ

सीमा- है बता क्या हुआ

शनाया- माँ हम किसी सुरेश चोपड़ा और सोहन चोपड़ा को जानते हैं क्या,

सुरेश चोपड़ा और सोहन चोपड़ा का नाम सुनते hi सीमा और रश्मि की साँस सी hi अटक गई, दोनों के फेस पिले पद गए, वोट क दूसरे का मुँह देखने लगे,

सीमा- तुझे किसने कहा, हम किसी को नहीं जानते हम कैसे जानेंगे,

शनाया को उनकी बात कुछ हजम नहीं हुई,

शनाया- ऐसा कैसे हो सकता ह, मां से पहले सुरेश चोपड़ा hi तो हमारी कंपनी के ओनर थे, अगर ये हमारा फॅमिली बिज़नेस ह तो वो हमारे फॅमिली के हुए न,

सीमा- तू ये सब क्यों पूछ रही ह, किसी ने कुछ कहा ह क्या, कुछ हुआ ह क्या

शनाया- कुछ क्यों होगा, लेकिन हमे अपने परिवार के बारे में तो पता होना चाहिए, हम चारो बहेनो को hi तो आगे चलकर ये बिज़नेस सम्हालना ह, तो हमे पता तो होना छाइये न,

सीमा- तू पहले पढ़ hi ले, ये बिज़नेस और इस सब के बारे में जानने का छोड़ hi दे,

शनाया- अरे आप तो गुस्सा हो रही हो, मैं पूछ hi तो रही हु,

दिया जो दोनों की बातो को बड़े धयान से सुन रही थी, उसका धयान हमेशा बात करने वाले के फेस पैर रहता था, वो कभी किसी की बात का मतलब नहीं निकलती थी वो बस उसके एक्सप्रेशन देखती थी, बात कहने का ढंग देखती थी उसी से जज करती थी,

और उसने परख लिया था सीमा और रश्मि कुछ छुपा रहे हैं,

दिया- शनाया चल यार क्या बाते लेकर बैठ गई, आजा तुझे एक खुशखबरी दूंगी

शनाया- कैसी खुशखबरी

दिया- अरे चल तो

शनाया उठ क्र चल दी,

चलते हुए शनाया मुड़ी और बोली- माँ ये अंजलि कोण ह जिसके नाम पैर हमारी कंपनी ह जो J.S.S से बदल रखा गया ह,

अंजलि नाम सुनते hi सीमा और रश्मि के कानो से धुआँ सा निकल गया,

दोनों के पास कोई जवाब नहीं था, वह एक दम सनता च गया था,

रश्मि- ये सब अपने मां से पूछना वही बताएँगे उन्हें सब पता ह,

शनाया मुद क्र दिया के साथ चली गई,

रूम में पहुंच क्र,

शनाया- क्या खुशखबरी ह

दिया- कुछ नहीं ह बस तुझे वह से लाना था इसलिए ऐसा बोलै

शनाया- क्यों मुझे जवाब लेना था तू यहाँ ले आई,

दिया- वो इसलिए क्योकि वह कोई जवाब नहीं देगा,

शनाया- मतलब क्यों नहीं देंगी जवाब

दिया- सवाल और भी हैं जो मैंने पूछे जवाब उनके भी नहीं मिले तो हमे खुद hi ढूंढ़ने होंगे जवाब

शनाया- कोनसे सवाल

दिया- ह्रदय से जुड़े सवाल, माँ उसे कैसे जानती हैं, उसकी पसंद का खाना कैसे बनाया, ह्रदय जो किसी होटल पैर भी नहीं खता उसने माँ के हाथ का खाना खा लिया, माँ ने खुद खाना बनाया, जिसने कभी हमारे लिए भी खाना नहीं बनाया, और माँ सचिन और कपिल मां के एक्सप्रेशन ऐसे थे जैसे वो उसे अच्छे से जानते हो,

शनाया- है यार ये मैंने भी नोट किया,

दिया- अब ये सवाल जो तूने उठाये हैं वो भी खड़े हो गए हैं, कंपनी से जुड़े सवाल ह तो जवाब कंपनी में hi मिलेंगे,

ये चारो भेने कॉलेज नहीं गई उधर दृष्टि ने कॉलेज के कुछ ऐसे लड़के लड़कियों से दोस्ती क्र ली थी जिससे वो कॉलेज के रिकॉर्ड रूम तक पहुंच गई थी, उसने वह से काफी रिकॉर्ड इकठा किये कुछ इंटरनेट से लिए, कुछ वो अपने साथ लेकर आई थी, और एक फाइल तैयार क्र ली,



दृष्टि खुद से- अब आएगा मजा अब होगा धमाका अब मचेगा बवाल,
 
अपडेट-12



ह्रदय ने चंडीगढ़ जाने के लिए बैग पैक क्र लिया था, और वो निकल गया अपने एक अनजाने सफर की तरफ, उसे ये तो पता था अपने पिता को ढूंढ़ना ह लेकिन कहा कैसे क्या करना ह कुछ भी समझ नहीं आ रहा था, उसके दिमाग में निधि hi आ रही थी की वो इस मामले में उसकी हेल्प क्र सकती ह,

इधर ह्रदय निकला उसके कुछ घंटे बाद hi दीपा भी एक बैग लेकर निकल गई,

ह्रदय बस से चंडीगढ़ पंहुचा रात हो चुकी थी, उसके पास कोई अपना ठिकाना तो था नहीं जहा वो चला जाता, वो बस स्टैंड पैर hi बैठ गया, ठण्ड का मौसम था, पूरा बस स्टैंड सुमसान पड़ा था, एक दो बस आती उनमे से सावरिया उतरती और निकल जाती, ह्रदय काफी देर तक बैठा था, तभी उसके कंधे पैर किसी ने हाथ रखा, ह्रदय ने पलट क्र देखा, और देख क्र पालक झपकनी तक भूल गया, सामने एक बहुत hi खूबसूरत लड़की कड़ी थी, क्या चमक थी उसके चेरे की, एक भोला पैन मासूमियत लेकिन आँखों में होश्यारी साफ़ साफ़ दिख रही थी,


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ह्रदय खड़ा होकर उसे देखता hi रहा, तभी उस लड़की ने ह्रदय के हिलाया और सुरीली आवाज में कहा, ऐसे hi देखते रहोगे क्या,

ह्रदय झेप गया,

ह्रदय- श्री श्री

लड़की- आप यहाँ काफी देर से बैठे हैं, किसी का इंतजार कर रहे हैं क्या

ह्रदय- नहीं मुझे किसी के पास जाना ह लेकिन रात में उन्हें परेशां नहीं करना चाहता इसलिए यही बैठ गया, आप इस टाइम यहाँ

लड़की- मेरी भी ऐसी hi कुछ प्रॉब्लम ह, आपको यहाँ बैठे देखा तो सोचा जब रात यही कटनी hi ह तो आपसे hi बात कर लेती हु,

ह्रदय- ऐसे रात में अकेली लड़की को ऐसे hi किसी से बात करने में दर नहीं लगा आपको

लड़की- आपको देख क्र नहीं लगता की मुझे आपसे डरना चाहिए,

ह्रदय मुस्कुराया,

लड़की- मैं यहाँ बैठ सकती हु

ह्रदय साइड में हो गया और बेंच पैर जगह दे दी, लड़की वही बैठ गई,

लड़की- आप भी बैठ जाइये न

ह्रदय उसके पास में बैठ गया

लड़की- मैं आपका नाम जान सकती हु

ह्रदय- मेरा नाम ह्रदय ह,

लड़की- अच्छा नाम ह

ह्रदय खामोश बैठ गया

काफी देर शांत रहने के बाद,

लड़की- आपने मेरा नाम नहीं पूछा

ह्रदय- आपको तकलीफ न हो तो बता दीजिये, मैं पूछ क्र आपको मजबूर नहीं करना चाहता

लड़की- लगता ह आप इस दुनिया के नहीं हैं, इस दुनिया में ऐसा इंसान मिलना न मुमकिन सा ह, जो लड़की खुद बात करने आई ह उससे नाम तक नहीं पूछता की लड़की को बुरा न लग जाये,

वैसे मेरा नाम वन्य ह, मुंबई से यहाँ आई हु,

ह्रदय- अच्छा नाम ह वन्य,

वन्य- तो अब पूरी रात यही बैठ क्र बितानी होगी क्या, मुझे तो भूक भी लगी ह,

ह्रदय- मैं इस शहर को थोड़ा बहुत जनता हु, यही पास में एक रेस्टोरेंट ह वह खाना भी मिल जायेगा और रुकने के लिए जगह भी, आप वह जा सकती हैं,

वन्य- कितनी दूर ह

ह्रदय- ह तो पास में hi लेकिन इस शहर में अकेली लड़की को बहार नहीं निकलना चाहिए,

वन्य- आप मुझे कमजोर लचर समझ रहे हैं

ह्रदय- नहीं मैं आपको कमजोर नहीं समझ रहा, लेकिन यहाँ के लोग अच्छे नहीं ह, यहाँ रात में लड़के ड्रग्स शराब के नशे में घूमते रहते हैं, तो प्रॉब्लम हो सकती ह, चलिए मैं आपको वह तक छोड़ देता हु,

वन्य को ह्रदय की बात सही लगी, दोनों अपना बेग उठा क्र चल दिए पैदल पैदल,

वन्य- आपकी फॅमिली में कोण कोण ह

ह्रदय- मैं और मेरी माँ

वन्य- अच्छा और कोई नहीं ह बस दो लोग,

ह्रदय- है जी, आपकी फॅमिली बड़ी होगी,

वन्य- बहुत बड़ी ह, मैं मेरी माँ और मेरी बहन,

ह्रदय- हहहहह ये बड़ी ह मुझसे एक hi मेंबर तो ज्यादा ह बस

वन्य ह्रदय को हस्ते हुए देख रही थी,

वन्य- आप हस्ते हुए अच्छे लगते हैं,

ह्रदय- ठंकु

वन्य- और मेरी फॅमिली बहुत बड़ी ह, बहुत बड़ी,

ह्रदय- अच्छा जी मान लिया आपकी फॅमिली बड़ी ह

दोनों चलते हुए रेस्टोरेंट पैर पहुंच गए,

ह्रदय- ये लीजिये आ गया रेस्टोरेंट,

वन्य- ठंकु, आप भी खाइये न

ह्रदय- श्री मम मैं बहार का कुछ नहीं खता, मेरी माँ ने खाना बना क्र भेजा ह, उसे hi खाऊंगा,

वन्य- आपके पास खाना था फिर भी आप मुझे रेस्टोरेंट में ले आये,

ह्रदय- वो इसलिए की मैं केवल अपनी माँ के हाथ का खाना hi खता हु वो आपको खिला देता तो मैं क्या खता, आप तो फिर भी बहार का खा सकती हैं,

वन्य- हम्म्म्म, अच्छा यहाँ बैठ क्र मेरा साथ तो दे सकते हैं, मुझे यहाँ थोड़ा उनकंफर्टबले फील हो रहा ह, वो देखो अजीब से लड़के बैठे हैं,

ह्रदय ने धयान दिया वह काफी लड़के बैठे थे,

ह्रदय वन्य के साथ hi बैठ गया, वन्य ने अपना पर्स निकला और उसमे चेक किया और अपना रोयना सा फेस बनाया,

ह्रदय- क्या हुआ

वन्य- कुछ नहीं चलिए बस मुझे नहीं खाना

ह्रदय- अरे क्या हुआ कोई प्रॉब्लम क्या, आपको तो भूक लगी थी

वन्य- अब मर गई भूक

ह्रदय- क्या हुआ बताओ मुझे कोई प्रॉब्लम ह क्या,

वन्य- आप मुझे गलत समझेंगे

ह्रदय- अब इतनी समझ तो मुझमे ह किसे गलत समझना ह किसे सही, बताओ क्या हुआ

वन्य- वो मेरे पैसे ख़तम हो गए, और मोबाइल चार्ज नहीं ह जिससे मैं पेमेंट कर सकू,

ह्रदय- अरे बस इतनी सी बात, आपको जो खाना ह खाइये, मैं हु यहाँ आपको घबराने की जरुरत नहीं ह,

वन्य- ठंकु सो मच, मैं आपके पैसे वापस क्र दूंगी,

ह्रदय ने खाने का मेनू वन्य के सामने क्र दिया,

वन्य ने खाना मंगाया और खाने लगी, तभी वह बैठे लड़को का ग्रुप खा पि क्र उठा और लड़खड़ाते हुए ह्रदय और वन्य के नजदीक पहुंचे,

एक लड़का लड़खड़ाता हुआ उनकी टेबल पैर गिर गया जिसे ह्रदय ने बिच में hi पकड़ लिया और सीधा खड़ा कर दिया,

लड़के ने तुरंत ह्रदय के हाथ झटक दिए,

लड़के- अबे तूने मुझे हाथ लगाया जनता ह मैं कोण हु,

ह्रदय- मेरा पास इतना टाइम कहा ह जो मैं सबका बायोडाटा रखता फिरू,

ह्रदय की बात पैर वन्य की हसी छूट गई, जिससे वो लड़का और नाराज हो गया,

लड़का- मेरा मजाक उदा रहा ह, उसके बाकि दोस्त भी नजदीक आ गए,

ह्रदय- भाई जा यार कोई कुछ नहीं बोल रहा,

तभी वह मैनेजर आ गया, और सेकुरित्य वाले भी आ गए,

उन्होंने लड़को को दूर किया और वह से निकल जाने की वार्निंग दी,

वो लड़के गुस्से में ह्रदय को घूरते हुए चले गए,

लड़का- देख लूंगा तुझे तू मेरी नजरो में छाप गया ह,

लड़को के जाने के बाद मैनेजर- सर आप लोग आराम से खाना खाइये बस यहाँ से बहार निकलते समय थोड़ा धयान रखना, दूसरे स्टेट के लड़के हैं यहाँ घूमने आये थे, कुछ गड़बड़ करके भाग जायेंगे तो प्रॉब्लम होगी,

ह्रदय- आप टेंशन मत लीजिये, मैं सम्हाल लूंगा,

वन्य- बड़ी हिम्मत ह आप में इतने लड़को से अकेले hi भिड़ने चल दिए,

ह्रदय- मैं कब भीड़ वो hi आये भिड़ने, और वो इतने नशे में थे बेचारे क्या करते

वन्य मुस्कुरा दी,

फिर वन्य ने खाना ख़तम किया ह्रदय ने भी अपनी माँ का दिया हुआ खाना खा लिया, वन्य ने जींद करके एक रोटी ह्रदय के खाने में से ली और थोड़ी सी सब्जी भी,

ह्रदय- खाना तो हो गया अब आप यही पैर रूम लेकर आराम करो,

वन्य- सुबह के 3 बजने वाले ह अब कितनी देर के लिए रूम लुंगी,

ह्रदय- आप पैसो की चिंता मत कीजिये

वन्य- ऐसी बात नहीं ह, लेकिन आपके साथ मैं ज्यादा सेफ फील क्र रही हु

ह्रदय- जैसा आपको ठीक लगे, चलिए फिर शहर घूमते हैं ये शहर पूरी रात नहीं सोता, हम सिटी से थोड़ा बहार हैं इसलिए ये सुमसान ह,

दोनों चल दिए पैदल पैदल शहर में के अंदर, ह्रदय वन्य को घूमता रहा, कुछ नींद का असर और सफर की वजह से वन्य थक चुकी थी, लेकिन ह्रदय के साथ चली जा रही थी, दोनों काफी देर घूमे, दिन का उजाला होने लगा था, दोनों ने एक जगह बाथ क्र चाय पि फिर ह्रदय ने वन्य को कुछ पैसे दिए, जिससे वन्य टेक्सी लेकर अपनी मंजिल की तरफ निकल गई, वन्य ने ह्रदय का नंबर लिया और चली गई,

ह्रदय भी निधि से मिलने के लिए चल दिया,

ह्रदय ने निधि को कॉल किया, निधि अपने बिस्टेर पैर बिलकुल नंगी होकर सोइ हुई थी, उसके फ़ोन की बिल बजी तो उसने अलसाई हुई ने फ़ोन उठाया,


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निधि- hello

ह्रदय- hello निधि जी मैं

निधि- ह्रदय

ह्रदय- आपको मेरी आवाज याद ह

निधि- इस आवाज को मैं कैसे भूल सकती हु, इतनी सुबह सुबह कैसे याद किया

ह्रदय- मैं चंडीगढ़ आया हुआ हु

निधि एक दम बिस्टेर से कड़ी हो गई,

निधि- सच तुम यहाँ हो, कहा हो मैं लेने आ ह्री हु

ह्रदय- मैं यहाँ **** मॉल के पास हु, ऐसे आपके घर आना ठीक नहीं लगा इसलिए कॉल किया,

निधि- मैं आ रही हु बस तुरंत पहुंच रही हु,

निधि ने फ़ोन रखा और नंगी hi दरवाजे की तरफ भागी, दरवाजे के पास जाकर रुकी

निधि ने अपने सर पैर हाथ मारा और खुद से hi बोली- आरी कामिनी कपडे तो पहन ले नंगी hi मिलेगी क्या,

वो वापस मुड़ी और बिना ब्रा पंतय के hi टॉप और लोअर पहन लिया, और फ़ोन लेकर जल्दी सी बहार को भागी, पूरा घर सोया हुआ था इस टाइम कोई नहीं उठता था,

निधि गाड़ी लेकर कुछ hi देर में ह्रदय के पास पहुंच गई, जहा ह्रदय अकेला hi खड़ा था, निधि गाड़ी से उतारते hi ह्रदय के गले लग गई, निधि की बिना ब्रा की ठोस चूचिया ह्रदय की छाती में डाब गई, निधि के टाइट निप्पल जो उस टाइट टॉप में से उभरे हुए थे ह्रदय की छाती में रगड़े जिसका अहसास ह्रदय को भी हो गया था,


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ह्रदय ने भी निधि की कमर में हाथ दाल क्र उसे अच्छे से गले लगाया,

निधि ने बिना किसी झिजक क्र तुरंत ह्रदय के होतो से हॉट मिला दिए, ह्रदय एक दम इधर उधर देखने लगा,

निधि- यहाँ कोई किसी को नहीं देखता ये सब नार्मल ह

ह्रदय- ये लड़के लकड़ियों के लिए नार्मल होगा लेकिन आप शादी शुदा हैं और इस शहर में आपके जानकर भी होंगे उन्होंने देख लिया तो,

निधि- इस टाइम कोई मॉल में नहीं आता, और कोई देख भी ले मुझे फरक नहीं पड़ता, आओ घर चलते हैं,

ह्रदय- घर मैं घर क्या करूँगा मेरे हिसाब से ये आईडिया ठीक नहीं ह, घर पैर आपकी फॅमिली होगी उनके सामने क्या कह क्र मिलूंगा,

निधि- यही की तुम मेरे बॉयफ्रेंड हो,

ह्रदय- क्या

निधि- हहहहए अरे मजाक क्र रही हु घबराओ नहीं, मेरे यहाँ बहुत से घर हैं,

निधि ने ह्रदय को गाड़ी में बैठाया और चल दी, गाड़ी एक फार्महाउस के सामने जाकर रुकी, बहुत hi बड़ा फार्महाउस था, निधि ने सीट बेल्ट लगाई जो दोनों चूचियों के बिच में थी जिससे उसके निप्पल्स और टाइट होकर उभर रहे थे, ह्रदय की नजर बार बार वही जा रही थी, जिसे निधि भी परख रही थी,


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निधि गाड़ी लेकर सीधे फार्महाउस के अंदर पहुंची एक गार्ड दौड़ता हु ा गाड़ी के पीछे आया,

गाड़ी में से निधि उत्तरी उसके निप्पल्स अब और भी ज्यादा दिख रहे थे, गार्ड ने एक नजर निधि पैर डाली और नजरे निचे क्र ली, फिर ह्रदय उतरा तो गार्ड ने उसे गौर से देखा,

निधि गार्ड से- दीपक ये ह्रदय जी हैं ये कुछ समय तक यही रहेंगे, इनके लिए मेरा वाला रूम खुलवाओ और उसे अच्छे से साफ़ करवाओ, और इनके लिए खाने का इंतजाम करवाओ,

ह्रदय- नहीं खाने का नहीं मैं बहार का नहीं खता,

निधि- बिना खाये कैसे रहोगे,

ह्रदय- यहाँ किचन तो होगी न मैं अपने लिए खुद hi बनाऊंगा,

निधि- सुना दीपक जल्दी से किचन को साफ़ करवाओ और इनके हिसाब से जो भी मंगवाना ह जल्दी से मंगवा क्र रखो,

दीपक मुद गया

निधि- और है सुनो, जब तक मैं न कहु इस फार्महाउस पैर कोई नहीं आएगा, कपूर जी से भी बोल देना, कोई नहीं आएगा मतलब कोई नहीं आएगा,

दीपा- जी मैडम

दीपक तुरंत निकल गया,

निधि- आओ ह्रदय खाओगे नहीं लेकिन कॉफ़ी तो पि लोगे न

ह्रदय- है वो तो पि लूंगा

दोनों अंदर चले गए,

निधि- अब बताओ कैसा ह सब

ह्रदय- सब अच्छा ह लेकिन मुझे अब मेरे परिवार को ढूंढ़ना ह,

निधि- कहा से शुरू करना ह कुछ जानकारी ह तुम्हारे पास

ह्रदय- ज्यादा नहीं ह बस इतना पता ह मेरे पिता का नाम तुषार ह

निधि- हम्म्म्म ठीक ह तुम फ्रेश हो जाओ मैं घर होकर आती हु, और अपना सामान लेकर आती हु, मैं यही तुम्हारे साथ hi रहूंगी,

ह्रदय- मेरे साथ लेकिन आपकी फॅमिली

निधि- वो सब मैं देख लुंगी, तुम फ्रेश हो जाओ, काफी थके लग रहे हो,

ह्रदय- है वो रात में यहाँ आ गया था तो सो नहीं पाया

निधि- क्या तुम रात में hi आ गए थे तो तुमने मुझे बताया क्यों नहीं

ह्रदय- इतनी रात में परेशां करना मुझे ठीक नहीं लगा

निधि- ोोोू ह्रदय तुम कितने अच्छे हो, ी लव ु यार

ह्रदय शर्मा सा गया,

निधि- तुम ऐसा करो थोड़ा रेस्ट करो और सो जाओ मैं दोपहर बाद आती हु तुमसे मिलने, ऑफिस से सीधा इधर hi आ जाउंगी,

निधि ने ह्रदय को किश किया और निकल गई जैसे hi वो मुड़ी तो ह्रदय की नजर निधि की गांड पैर गई जिसे देखते hi पता चल गया की निधि ने पेंटी भी नहीं फेनी ह, उसके बट उप डाउन हो रहे थे, दोनों बूत थिरक रहे थे, क्या कातिलाना फिगर ह, ह्रदय के लुंड ने झटका मारा,

आगे जाकर निधि ने पलट क्र देखा तो ह्रदय की नजरो को परखा की वो उसकी गांड को निहार रहा ह, निधि ने अपने लोअर को थोड़ा ऊपर की तरफ खींचा जिससे वो उसकी गांड पैर और टाइट हो गया,


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ह्रदय की नजर निधि की नजरो से टकराई, तो निधि मुस्कुरा दी और बड़ी अदा के साथ अपनी गांड को और घुमा क्र चलती हुई निकल गई,

ह्रदय मुस्कुराता हुआ उसे देखता रह गया,

वही दूसरी तरफ,

काम्य – नैना हमारे नाना यहाँ के मंत्री रहे हैं उनके पास तो यहाँ की सब जानकारी होगी,

नैना- लेकिन वो हमे बताएँगे नहीं न,

काम्य- लेकिन उनसे जुड़े लोग तो बता सकते हैं

नैना- ऐसे किसको ढूंढेंगे हम

काम्य- वो कमिसिनोर अंकल उन्हें सब पता होगा, उनके पास चलते हैं शायद कुछ जानकारी मिल जाये,

नैना- है सही ह चल

दोनों तैयार हुई और चल दी

नंदनी- कहा जा रही हो तुम दोनों, जब से यहाँ आई हो पूरा दिन बहार hi घूमती रहती हो, ये अमेरिका नहीं ह यहाँ प्रॉब्लम हो जाती ह,

काम्य- हमे प्रॉब्लम देने वाले को प्रॉब्लम हो जाएगी क्यों ननु

राज प्रताप- हहहहह सही कहा बेटी तुम एन्जॉय करो,

काम्य- हम संजय अंकल के घर जा रहे हैं वो अकेले रहते हैं उनसे भी मिल आये

नंदनी- सही सोचा बेटी तुम्हे जरूर जाना चाहिए, उनका नंबर ले जाओ और एड्रेस लिख लो, और वो अंकल नहीं ह नाना हैं, मतलब नाना की तरह हैं

दोनों अड्रेस लेकर ड्राइवर के साथ निकल गई, नंदनी के संजय जी को फ़ोन केर दिया की काम्य और नैना आ रही हैं,

इधर शनाया और दिया कॉलेज की जगह पहुंची सीधी ऑफिस अंजलि ग्रुप के हेड ऑफिस में,

दिया ने जानकरी निकल ली थी की सचिन और कपिल की मीटिंग ह तो वो लोग बिजी रहेंगे, और रश्मि और आशिमा दूसरे ऑफिस में जाती हैं,

आशना और रैना कॉलेज चले गए,

इधर निधि घर पहुंची, अशोक कप्पोर ऑफिस के लिए रेडी बैठा नाश्ता कर रहा था, निधि को देख क्र चौंक गया, इतनी सुबह सुबह बहार से आती हुई वो भी ऐसी हालत में बिना ब्रा के,

अशोक- निधि बेटी इस टाइम बहार से कोई मीटिंग थी क्या

निधि- नहीं

अशोक- फिर इस टाइम तू तो 11 बजे से पहले कभी उठती hi नहीं ह

निधि- वो यहाँ आ गया ह

अशोक- कोण

निधि- ह्रदय

अशोक- सच, वाओ ये तो कमल hi हो गया ह,

निधि- मैं करू और काम न हो ये तो हो hi नहीं सकता,

अशोक- मैं जनता हु तेरी वजह से hi ये कंपनी कहा से कहा पहुंच गई ह, इसीलिए तू मेरी बहु ह,

अशोक ने निधि की कमर पैर हाथ फिराया और निचे तक ले गया और जैसे hi उसकी गांड पैर हाथ लगाया तो पाया की उसने पेंटी भी नहीं फेनी ह, निधि तुरंत आगे बढ़ी और चेयर पैर बैठ गई,


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निधि- अब आगे क्या करना ह,

अशोक- उसे अपने जाल में अच्छे से फसाओ जिससे वो हमारी बात ताल न सके,

निधि- वो एक अच्छा इंसान ह अगर हम उससे बात कर्नेगे तो शायद वो ऐसे hi हमारी हेल्प क्र दे

अशोक- हमारी हेल्प करने के लिए क्या करना पड़ेगा ये जान क्र अच्छे अच्छे योद्धाओ की गांड फैट जाएगी, पहले उसे तैयार करो, ये देखो की वो हमारे टेस्ट में खरा उतर सकता ह या नहीं,

निधि- ठीक ह जैसा आप कहे, मैं उसकी हेल्प करुँगी उस पैर अपना अहसान चढ़ाउंगी फिर उससे अपना काम करवाएंगे

अशोक- ये अच्छा विचार ह,

निधि- उसके लिए मुझे उसके साथ समय बिताना होगा, उसके साथ hi रहना होगा, अभी वो हमारे फार्महाउस पैर ह, मैं शाम को वही शिफ्ट हो रही हु, वही से ऑफिस आउंगी, जब तक हम कामयाब न हो जाये, तब तक कोई मीटिंग मत रखना और फार्महाउस पैर तो बिलकुल नहीं, वह सब सही रहना चाहिए, और हनी को वह से दूर रखना वो वह आयाशी करने न आ जाये,

अशोक- ठीक ह सब हो जायेगा, और नित्य को क्या बोलना ह

निधि- मैं उसे समझा दूंगी,

अशोक चला गया, निधि वही दिंनिंग टेबल पैर बैठी सोचने लगी,

इधर काम्य और नैना पहुंची संजय कुमार के घर, संजय पहले से hi सवागत में तैयार था,

सैन्य- आओ आओ बच्चियों आज मेरी याद कैसे आ गई,

काम्य- आप हमारे नाना ह न तो मिलने आ गए,

नाना सुनते hi संजय के चहेरे पैर हैरत और आँखों में आंसू थे,

संजय- नाना?

नैना- अरे आप हमारे नाना के दोस्त ह तो आप भी नाना हुए न

संजय- है है सही कहा मैं नाना hi तो लगता हु, आओ अंदर आओ,

दोनों अंदर गई और सबसे पहले जिस चीज पैर नजर गई वो थी कोमल की तस्वीर बहुत बड़ी तस्वीर थी जो घर में एंट्री करते hi हॉल में लगी हुई थी,

काम्य- कितनी सूंदर हैं ये, हैं नैना

नैना- है सूंदर तो हैं,

काम्य- ननु ये कोण हैं

संजय कुमार- बेटी ये मेरी बेटी ह कोमल,

नैना- ये कहा ह

संजय खामोश हो गए, फिर खुद को सम्हालते हुए,

सैन्य- ये लंदन रहती ह,

नैना- इनकी आँखे तुझसे बहुत मिलती ह काम्य,

काम्य- हैं सच्ची में,

संजय- आओ बैठो क्या खाओगी,

नैना- कुछ नहीं ननु बस आपसे मिलने का दिल किया तो आ गए, आप यहाँ अकेले रहते हैं,

संजय कुमार- है बेटी तुम्हारी नानी को गुजरे बहुत समय हो गया और एक बेटी थी वो भी साथ नहीं रहती,

संजय ने नौकर से खाने के लिए मंगवाया, तभी 4 पुलिस वाले आ गए, और संजय को सेलुटे किया,

संजय- इंस्पेक्टर तुम यहाँ

इंस्पेक्टर- सर हमे एक केस के सिलसिले में आपसे कुछ जरुरी बात करनी ह,

संजय- मैं बच्चो के साथ बिजी हु, बाद में करूँगा

इंस्पेक्टर- सर ये अर्जेंट ह, सीरियस मामला ह,

नैना- ननु आप कर लीजिये बात हम तब तक घर देख लेते हैं,

संजय- तुम्हे प्रॉब्लम तो नहीं होगी

काम्य- नहीं ननु हम ठीक हैं,

काम्य और नैना दोनों घर देखने लगे, एक नौकर उन्हें घर दिखने लगा,

काम्य नौकर से- अंकल इस घर में कोई एल्बम या फोटो नहीं हैं,

नौकर- बेटी सब कोमल मैडम के कमरे में रखे हैं, लेकिन वह कोई जाता नहीं

काम्य- हम ननु की खास हैं हम तो जा सकती हैं, वो बिजी वर्ण हम उन्ही से बोल देते, तुम खोल दो रूम हम देख लेंगे,

नौकर- लेकिन

नैना- खोल दो हम ननु से बात कर लेंगे,

नौकर असमंजस में पद गया, और मज़बूरी में कमरा खोल दिया,

दोनों भेने कमरे में गई बहुत सूंदर कमरा था, एक दम किसी राजकुमारी के जैसा, महंगी महंगी चीजे,

नैना- तुम जाओ हम देख लेंगे, निचे गेस्ट आये हैं उनके लिए कुछ खाने को दे दो,

नौकर अपना सर पकड़ क्र दौड़ गया,

दोनों बहाने एक एक चीज को देखने लगी, कोमल की बहुत सी तस्वीरें लगी थी,

काम्य ने अलमारी खोली तो उसने से एक बॉक्स गिर गया और उसमे से बहुत सरे डिलडो बिखर पड़े,


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दोनों बहेनो की आँखे फटी रह गई,

नैना- ये सब क्या ह

काम्य- लगता ह ननु की बेटी एक नंबर की आयाश लड़की ह, देख कितने बड़े बड़े साइज के डिलडो हैं, और ये देख कमर पैर बांधने वाला भी ह मतलब किसी और के साथ भी मजे लेती होगी,

नैना- चल यहाँ से

काम्य- रुक तो देखने दे कुछ और भी मिलेगा,

काम्य अलमारी में देखने लगी, वह कोमल के कपडे सामान बुक्स बहुत कुछ था, कुछ एलबम्स भी थी, काम्य ने एलबम्स उठा ली,

एक एल्बम में कोमल की hi तस्वीरें थी उसकी नंगी तस्वीरें पूरी एल्बम कोमल की नुदे पिक्स से बहरी पड़ी थी,


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काम्य- देख ननु की बेटी कितनी सेक्सी ह, और कितनी बोल्ड ह,

दूसरी एल्बम में कोमल लड़कियों के साथ सेक्स करती हुई नजर आ रही थी, डिलडो से


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नैना- ो तेरी की ये तो किसी पोर्न स्टार से भी उप्पेर की ह,

काम्य ने जब तीसरी एल्बम खोली तो उसमे कोमल दुल्हन बानी हुई थी,

काम्य- देख नैना दुल्हन में कितनी सूंदर लग रही ह.

नैना- यहाँ तो बिलकुल तेरे जैसी लग रही हैं इस एंगल से,

आगे पेज पालते तो दोनों बहेनो की नजर एक फोटो पैर रुक गई जिसमे कोमल और कमल सत्गे पैर थे और साथ में सुरेश चोपड़ा सोनिया चोपड़ा थे,

नैना- ये तो सुरेश चोपड़ा ह

अगले फोटो में नंदनी और सोहन साथ में थे, फिर एक पूरी फॅमिली का फोटो था, जिसमे सुरेश चोपड़ा सोनिया चोपड़ा सोहन चोपड़ा नंदनी कमल कोमल और दो लड़किया थी जो अलका और वर्षा थी,

उन्ही फोटो में आगे नंदनी सोहन की बहो में लेट क्र फोटो खिचवा रही थी,

उन फोटोज को देख क्र दोनों बहेनो की आँखे हैरत से फटी रह गई, दोनों एक दूसरे का मुँह देखने लगी,

नैना- जल्दी से सामान वापस रख और ये वाले फोटोज निकल क्र छुपा ले, दोनों बहेनो ने जल्दी जल्दी सामान अंदर रखा और एल्बम ने से कुछ फोटोज निकल लिए, और निचे आ गए,

दोनों के रंग उड़े हुए थे,

नैना- ननु हम चलते हैं,

संजय कुमार- बेटी कुछ देर बैठ जाते

नैना- नहीं ननु फिर कभी आएंगे आप बात कीजिये,

दोनों जल्दी जल्दी वह से निकल गए, संजय को उनकी चल और चेरे के भाव ठीक नहीं लगे, पुलिस वाला जो था, बदले हुए हरकतों को पहचान hi लेता, लेकिन वो इंस्पेक्टर के साथ बिजी हो गया,

दोनों बहन वह से निकल गाड़ी में बैठ क्र सीधे घर पहुंच गई, हॉल में कोई दिखा नहीं तो सीधे रूम में आ गई और फोटोज निकल क्र उन्हें देखने लगी,

नैना- ये सब क्या ह काम्य संजय ननु की बेटी की शादी सुरेश छोड़पा के बेटे से और हमारी की शादी दूसरे बेटे से,

काम्य- मैं सोच hi रही थी उस लड़की को कहा देखा ह, इंटरनेट पैर देखा था, सुरेश चोपड़ा के दूसरे बेटे की पत्नी की पिछ देखि थी ये वही थी,

नैना- ये तो बहुत उलझा हुआ मामला ह यार, अगर अंजलि ग्रुप वालो ने कुछ गलत किया था तो हमारा नाना मंत्री थे और संजय ननु कमिसनर वो कुछ क्यों नहीं कर सके,

दोनों बहन सोच सोच क्र परेशां हो रही थी,

वही शनाया और दिया ऑफिस में बैठी थी, वो सीधे सचिन और कपिल के केबिन में थी, ये बोल क्र की मां जब मीटिंग से फ्री होंगे तो यही मुलाकात क्र लेंगे,

तभी एक स्टाफ आया और एक फाइल टेबल पैर रख क्र चला गया

दिया- ये किस चीज की फाइल ह

स्टाफ- मम ये हमारे स्टाफ की फाइल ह आज जो जो प्रेजेंट ह,

दिया को एक आईडिया आया,

दिया- क्या तुम हमारे पुरे स्टाफ की डिटेल ला सकते हो, कितने स्टाफ ह और कब से हमारे पास काम कर रहे हैं,

स्टाफ- मम वो किस लिए

शनाया- तुम क्यों पूछ रहे हो, हम कुछ भी देखे

स्टाफ- मम मैं बॉस के आर्डर मंटा हु

दिया- अरे यार यहाँ आर्डर की बात नहीं ह, हम बताना तो नहीं चाहते थे लेकिन बता देते ह, तुम समझदार लगते हो इसलिए उम्मीद ह किसी को नहीं बताओगे, असल में हम सोच रहे हैं इस बार सबको अच्छा बोनस दिलवाया जाये, तो कितने स्टाफ ह और कितने पुराने ह उस हिसाब से बोनस में कुछ एक्स्ट्रा जुड़वाया जायेगा

दिया की बात सुनकर स्टाफ खुश हो गया,

स्टाफ सच में, बस 10 मिनट दीजिये मैं अभी लेकर आता हु, वो तुरंत बहार निकल गया,

शनाया- स्टाफ की लिस्ट से क्या फायदा होगा,


दिया- उसमे यहाँ काम करने वाले सबकी लिस्ट होगी, और कोई ऐसा भी होगा जो 18 साल पहले से यहाँ काम करता आ रहा ह,
 
अपडेट-13



इधर दृष्टि परेशां थी कॉलेज में दिया और शनाया नहीं आई थी, दृष्टि को उन दोनों का hi इंतजार था,

दृष्टि ने अपनी दोस्तों से जानकारी निकलवाई की दिया और शनाया नहीं आएँगी तो दृष्टि भी कॉलेज से निकल क्र अपने रूम पैर आ गई,

इधर दिया के हाथ में लिस्ट आ चुकी थी, जिसमे बहुत पुराने पुराने स्टाफ भी थे, जिसमे एक नाम था सुमित जो सबसे पुराण स्टाफ था पिछले लगभग 50 साल से इस कंपनी में था अब वो डायरेक्टर था,

दिया- हमे डायरेक्टर की लिस्ट मिल सकती ह क्या अब तक कितने डायरेक्टर्स रहे हैं इस कंपनी में,

स्टाफ- मम वो तो आपको इंटरनेट पैर hi मिल जायेंगे,

शनाया- तुम्हारा नाम क्या ह

स्टाफ- जी रोहित

शनाया- रोहित तुम्हे यहाँ 10 साल हो गए काम करते हुए लिस्ट के हिसाब से,

रोहित- जी मम

शनाया- तुम तो यहाँ सबको जानते होंगे,

रोहित- है जी

शनाया- किसी सुरेश चोपड़ा को जानते हो,

रोहित- सुरश चोपड़ा तो इस कंपनी के पुराने डायरेक्टर थे, कंपनी के सीईओ वही थे, जब ये कंपनी J.s.S ग्रुप के नाम से थी,

दिया- फिर ये अंजलि ग्रुप कैसे हुई,

रोहित- ये तो मैं नहीं जनता लेकिन कपिल सर और सचिन सर ने hi कंपनी का नाम चेंज किया था, क्योकि ये पूरी कंपनी अंजलि के नाम पैर hi ह, इस कंपनी के 85% शेयर अंजलि के नाम पैर hi हैं,

दिया- लेकिन अंजलि ह कोण

रोहित- मम कैसी बात कर रही हैं आप अंजलि को नहीं जानती, अंजलि जी सचिन और कपिल सर की माँ का नाम ह,

दोनों बहन सुरप्रीसेड थी,

दिया- और क्या जानते हो

रोहित- मम इससे ज्यादा मैंने जानने की कोशिश नहीं की,

शनाया- रोहित अगर तुम हमे इससे ज्यादा की जानकरी निकल क्र देते हो तो मैं वादा करती हु इस बार बोनस के साथ साथ परमोशन भी होगा तुम्हारा,

रोहित- ठंकु मम मैं आपको पूरी जानकारी निकल क्र दे दूंगा, लेकिन ये तो आपकी hi कंपनी ह आपको तो पता होना छाइये सब कुछ

दिया- इसलिए hi तो जानकरी निकल रहे हैं, हमे सब पता होना चाहिए, जल्दी hi हम कंपनी सम्हालने आएंगे तो हम चाहते हैं हम अपने मां को अपना हुनर दिखाए की हम कंपनी सम्हालने के लायक हैं,

रोहित- वेलकम मम आप दोनों का कंपनी में वेलकम ह, मैं सब कुछ जानकरी दूंगा,

शनाया- लेकिन ये बात किसी को पता न चले,

रोहित- नहीं चलेगा

दोनों बहन वह से निकल गई,

इधर रम्य और अन्य जब से इंडिया आई थी घर में hi बंद थी, बहार जा hi नहीं प् रही थी, आज उन्होंने बहार घूमने का फैसला किया और वो निकल पड़ी कसबे में घूमने के लिए,

वह के हिसाब से वो दोनों किसी अंग्रेज से काम नहीं थी, हर कोई उन्हें घर घर क्र देख रहा था, उनके लिए ये सब कॉमन था क्योकि लड़कियों को हर देश में एक hi नजर से घुरा जाता ह, तो उन्हें आदत पद जाती ह ऐसी नजरो की, दोनों बहन घूम रही थी, उन्हें कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था,

रम्य- अन्य चल यार यहाँ कुछ भी देखने लायक नहीं ह

अन्य- सही कहा ये सब गन्दगी पता नहीं कैसे रहते हैं लोग यहाँ. तभी पीछे से एक लड़का आया और अन्य की कमर पैर हाथ फिरता हुआ उसकी गांड तक ले जा hi रहा था की अन्य ने पलट क्र उसे एक थपड जड़ दिया,

थपड लगते hi लड़का गुस्से में आ गया, ये वही लड़का था जो उस दिन घर के निचे खड़ा होकर बात कर रहा था,

उस लड़के के दोस्त उस पैर है पड़े,

दोस्त- भोसड़ी के खा लिया न थपड, अमन ने थपड खा लिया, मादरचोद को बड़ा घमंड था अपने स्टाइल पैर

अमन वो लड़का जिसे थपड लगा था,

अमन- चुप भोसड़ी वालो, मैं इन्हे पटाने की कोशिश नहीं कर रहा था, सेल ये विदेशी माल हैं, न जाने कितनो से फड़वा चुकी होंगी, सूंदर ह इसलिए मजे लेने हैं, अब इसने मुझ पैर हाथ उठाया अब हम सब इनके मजे लेंगे, एक साथ मजे लेंगे, इन्होने कभी गैंगबैंग का मजा नहीं लिया होगा हम इन्हे गैंगबैंग का मजा देंगे,

रम्य- ोोू मुठेर फुकेर यू फूकिंग डॉग, चले जाओ यहाँ से वर्ण पुलिस को फ़ोन क्र दूंगी

अमन- हहहहहह ये तो गालिया भी देती ह, गली देकर छोड़ने में बड़ा मजा आता ह, और पुलिस वो मेरे घर की चौकीदारी करती ह, उठाओ रे इन्हे,

रम्य और अन्य को मामला बिगड़ता दिखाई दिया, तो रम्य ने तुरंत अपने फ़ोन से अनीता को कॉल लगा दी, और उन लड़को से बहस करने लगी,

रम्य- तुम जानते हो हम कोण हैं, अगर मेरी फॅमिली को पता चला तो तेरी वो हालत करेंगे कभी भूल नहीं पायेगा,

अमन- हहहहह देखो दोस्तों ये मेरी हालत ख़राब करेगी, इसे बताओ यहाँ हमारा राज चलता ह,

दोस्त- यार यहाँ ज्यादा देर टाइम वैस्ट नहीं करते इन्हे उठा क्र निकलते हैं यहाँ से भीड़ आणि शुरू हो गई ह,

रम्य और अन्य ने मौका देखा और मार्किट की तरफ दौड़ लगा दी, वो लड़के उनके पीछे भागे,

दोनों जल्दी से एक बैंक के अंदर घुस गई, वह पुलिस गार्ड था तो उन्हें सेफ फील हुआ,

अमर अंदर जाने लगा तो दोस्तों ने रोक दिया, सेल वह कमरे ह हम सब रिकॉर्डिंग में आ जायेंगे, तो सभी लड़के वह से गायब हो गए,

रम्य- दादी कुछ लड़के हमारे पीछे पड़े हैं हम अब क्या करे,

अनीता- तुम लोग चिंता मत करो बस वह से जल्दी से निकल क्र कोई ऑटो वगेरा लेकर घर की तरफ आ जाओ

रम्य- लेकिन वो हमारे पीछे घर आ गए तो

अनीता- तुम चिंता मत करो वो कुछ नहीं कर पाएंगे बस वह से निकालो जल्दी,

दोनों बहन बहार निकली और ऑटो रुकवा क्र उसमे बैठ गई, तभी वो लड़के फिर से आ गए,

अमन- अब कहा जाओगी,

अन्य- भइया जल्दी से भगाइये प्लस

ऑटो वाला समझदार था उसने तुरंत ऑटो भगा लिया लड़के भी गाड़ी से पीछे हो लिए, जब तक सुमसान जगह नहीं आ गई लड़के पीछे hi रहे और जैसे hi सुमसान जगह आई उन्होंने गाड़ी आगे लगा क्र ऑटो को रोक लिया,

रम्य और अन्य उतर क्र भागने लगी तो लड़को ने उन्हें घेर लिया

अमन- ऍंगरेजी मैडम आज तो तेरे साथ ब्लू फिल्म बनूँगा बड़ा सम्पन था किसी अंग्रेजन को छोड़ने का,

तभी पीछे से आवाज आई, तो अपनी माँ को छोड़ न मादरचोद,

सबने उधर देखा तो एक तगड़ी सी गाड़ी के बोनट पैर हाथ में एक हॉकी लेकर एक बुजुर्ग सी खूबसूरत औरत कड़ी थी, आँखों में गुस्सा और चेरे पैर एक अलग hi ऐटिटूड,

अमन- अरे दादी चली जा यहाँ से तू हमारे लायक नहीं बची हम तो कच्ची कलियों के शौकीन ह

औरत- एक बार इस दादी के जलवे देख ले फिर किसी का शौकीन नहीं रहेगा, और वो औरत उछाल क्र उनके उप्पेर कूद पड़ी और हॉकी को इतनी फुर्ती से घूमना शुरू किया, जो भी सामने आ रहा था, बस एक hi वॉर में दूर जाकर गिर रहा था, दुबारा उठने की हिम्मत किसी में नहीं थी,

दोनों भेने उस औरत को देख क्र हैरत में थी इस आगे में इतनी फुर्ती और इतनी ताकत,

औरत- लड़कियों गाड़ी में जाकर बैठो इन हराम के जानो की माँ मैं छोड़ती हु,

औरत का ये रूप देख क्र लड़के वह से भागने लगे, उस औरत ने अमन को गिरा क्र उसपर जो हॉकी बरसै उससे अमन का हाथ और एक पेअर तोड़ दिया,

औरत- दुबारा किसी लकड़ी की तरफ नजर उठाई तो आँखे और ये गोटिया दोनों निकल लुंगी,

फिर वो औरत दोनों बहेनो को लेकर वह से निकल गई, अमन के दोस्त अमन को लेकर हॉस्पिटल की तरफ भागे,

दोनों बहन दरी हुई बैठी थी,

औरत- घबराने की जरुरत नहीं ह,

कुछ hi देर में गाड़ी घर के सामने कड़ी थी, अनीता और रिंकी दौड़ती हुई बहार आई, और दोनों बहेनो के देखने की बजाय दोनों माँ बेटी उस औरत के गले लग गई,

अनीता- अंजलि दीदी

रिंकी- अंजलि माँ

ये थी हमारी अंजलि, अनीता पैर रम्य का कॉल आते hi रिंकी ने राजेश को कॉल किया और राजेश ने तुरनत अंजलि को जानकरी दी,

अंजलि- अंदर चलो यहाँ से, अंदर बात करेनेगे

सब अंदर आ गए,

अंजलि- बच्चो तुम ठीक हो न,

रम्य- आप वो फोटो वाली हो न

अंजलि- फोटो कोनसा फोटो

अनीता- वो आपका और परिवार का एक फोटो रखा था यहाँ,

अंजलि तुम लोग ठीक नहीं हो ये जगह इन बच्चियों के लिए ठीक नहीं ह, यहाँ बहुत कुछ बदल चुक्का ह, लोकल गुंडों का दबदबा बढ़ चुक्का ह, इसलिए तुम चंडीगढ़ निकल जाओ, वह मैं एक एड्रेस दे रही हु, उस घर में जाकर रहो, मैं वह आउंगी तो मिलूंगी,

अनीता- सब ठीक ह न दीदी

अंजलि- सब ठीक हो जायेगा, जो होना ह वही होगा, वक़्त आ रहा ह,

अनीता- अन्य बेटी सबके लिए कॉफ़ी लेकर आ जरा, और रम्य बेटी पानी लेकर आ तू

दोनों बहन चली गई

अनीता- दीदी आपको यकीन ह सब सही होगा

अंजलि- अनीता जी मैं बिना यकीन के तो साँस भी नहीं लेती, बहुत इंतजार किया ह,

अनीता- आपके विश्वास पैर तो अब तक जिन्दा हैं हम सब

अंजलि- बस तो आप लोग वह पहुँचो, और है जो भी होगा उसे रोकने की कोशिश मत करना,

अनीता- क्या होगा

अंजलि- सब पता चल जायेगा, कुछ बाटे बता नहीं सकती, बस भरोसा रखना लेकिन कुछ भी रोकने की कोशिश मत करना

अनीता- ठीक ह जैसा आप कहे, लेकिन हमे पता कैसे चलेगा क्या नहीं रोकना ह

अंजलि- जब कुछ होगा तो सब समझ आ जायेगा क्या नहीं रोकना ह

अंजलि- अब मैं चलती हु,

अन्य कॉफ़ी लेकर आ गई

अन्य- आंटी कॉफ़ी पि लीजिये

अंजलि- बेटी तेरे हाथ की कॉफ़ी पिने फिर कभी आउंगी,

अंजलि वह से निकल गई,

रम्य- दादी ये ह कोण और इतनी बहादुर इतनी ताकतवर इस आगे में,

रिंकी- बेटी तुम जिंदगी में इनके जैसी औरत को नहीं देख पाओगी, बस जीवन में कुछ भी हो जाये लेकिन जब ये सामने आये तो इनका सम्मान हम से भी ज्यादा करना,

अन्य- ऐसा कुछ ह जो हमे जानना चाहिए

अनीता- वक़्त आने दो सब जान जाओगी, लेकिन अभी अपना सामान पैक करो हम चंडीगढ़ जा रहे हैं,

अगले कुछ hi घंटो में अनीता चंडीगढ़ के लिए ट्रैन की टिकट कुक करवा ले, जहा से अनीता बुकिंग करवा क्र निकली उसके पीछे एक लड़का घुसा और उसने जानकारी निकल ली की इस औरत ने चंडीगढ़ की 4 टिकट्स बुक की हैं,

ये अमन का दोस्त था जो अन्य और रम्य पैर नजर रखने के लिए लगाया हुआ था, उसका घर इनके घर के सामने hi था, वो hi साडी जानकरी अमन को देता था, की यहाँ लड़किया आई हैं और कब बहार निकलती हैं,

इधर चंडीगढ़ में शाम को

निधि अशोक से- वो लड़की आई हुई ह उसकी टीम का काम लगभग पूरा हो गया ह, अब हम मंजिल के बहुत नजदीक हैं,

अशोक- शाबाश तुम्हे इसका इनाम जरूर मिलेगा, तुमने बहुत कुछ किया ह मेरे लिए, तुम्हे इस घर में लाना मेरा सही फैसला था,

निधि- मेरा तो एक hi लक्ष्य ह आपको खुश रखना, इससे ज्यादा मुझे कुछ नहीं चाहिए,

अशोक- तू उस लड़के को तैयार क्र जल्दी से जल्दी, मैं और इंतजार नहीं कर प् रहा हु,

निधि- बहुत जल्दी मैं उसे तैयार क्र लुंगी,

अशोक- लेकिन क्या उसकी ताकत इस लेवल की ह की वो सब कर पायेगा

निधि- मैंने उसकी ताकत देखि ह, मुझे यकीन ह ये कर सकता ह

अशोक- हम जिससे मुकाबले की बात कर रहे हैं तुमने कभी उसकी ताकत नहीं देखि, अगर उसकी ताकत देखि होती तो पता चलता, वो इंसान नहीं ह,

निधि- मुझे लगता ह आपको एक बार इसे परखना चाहिए,

अशोक- सही कहा, उस लड़की को बुलाओ मैं उससे बात करना चाहता हु,

निधि अशोक को लेकर एक सेकरते रूम में गई यहाँ एक खूबसूरत लड़की बैठी हुई थी,

निधि- वन्य ये हैं मर. अशोक कपूर अपने प्रोजेक्ट की सफलता के बारे में इन्हे बताओ,

वन्य, जी है ये वही वन्य ह जो ह्रदय को मिली थी,

वन्य- सर प्रोजेक्ट एक दम तैयार ह, लेकिन उसमे एक प्रॉब्लम ह

अशोक- क्या?

वन्य- उसकी लिमिट फिक्स ह, उससे जायदा उसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता

अशोक- मुझे उससे ज्यादा चाहिए भी नहीं,

वन्य- फिर ठीक ह सर आप टेस्ट के लिए कब आ रहे हैं मुंबई

अशोक- मुंबई नहीं उसे यही लेकर आओ, बचा हुआ काम यही चंडीगढ़ में ख़तम करो, हमारा प्रोजेक्ट भी यही होगा और वो भी यही,

निधि- ठीक ह, वन्य अपनी टीम को बोलो सब कुछ यहाँ शिफ्ट करेंगे, और तुम्हे पैसे तो नहीं चाहिए,

वन्य- मम आपने ितं ेपैसे आलरेडी मुझे दिए हैं, पर्स भरा रहता ह हर तिमेपैसे से, जब ख़तम होंगे तो मैं बता दूंगी,

निधि- वैरी गुड अब जल्दी से काम ख़तम करो,

वन्य ok बोल क्र वह से निकल गई,

अशोक- हाहाहाःहाहा अब सब ठीक होगा,

निधि- बस ह्रदय जल्दी तैयार हो जाये

अशोक- तुम उस पैर तरय करती रो मैं तब तक प्लान बी पैर काम क्र रहा हु,

निधि- प्लान बी वो क्या ह

अशोक- समय आने पैर बता दूंगा,

निधि असमंजस में डूबी हुई बिना कुछ पूछे वह से निकल गई,

वह से निधि सीधे फार्महाउस पैर पहुंची, जहा ह्रदय लैपटॉप पैर लगा हुआ था कुछ सर्च कर रहा था, जैसे hi निधि अंदर आई और ह्रदय की नकार उस पैर पड़ी तो वो निधि को hi देखता रह गया, निधि लग hi इतनी सेक्सी रही थी, इतना हॉट सेक्सी फिगर की कोई भी देख क्र पागल हो जाये,


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निधि बड़ी अदा के साथ चलती हुई ह्रदय के पास पहुंची,

निधि- क्या कर रहे हो

ह्रदय- कुछ नहीं बस कहा से शुरू करू ये hi सब सोच रहा था,

निधि बिना झिजक के ह्रदय की गॉड में बैठ गई, जिससे उसकी ड्रेस साइड में हो गई उसकी खूबसूरत जंघे ह्रदय के सामने थी,

निधि- तुम चिंता मत करो हम तुम्हारे पिता को ढूडन लेंगे, अभी थोड़ा रिलैक्स होने का टाइम ह

निधि ने ह्रदय के होतो पैर अपने हॉट रख दिए, ह्रदय की आँखे बंद हो गई, ह्रदय ने तम्मना के साथ पहला सेक्स जरूर किया था लेकिन निधि के नजदीक रह क्र वो खुद उतावला सा हो जाता था, निधि ने उसे पहला किश किया था, और निधि के अंदर खूबी थी किसी को भी अपना दीवाना बना लेने की,


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ह्रदय उसके किश में खो सा गया, किसी की आहात से दोनों अलग हुआ, दीपक फार्महाउस का केयर टेकर आया था,

ह्रदय हड़बड़ा गया, लेकिन निधि बिलकुल शांत रही,

निधि- क्या हुआ दीपक

दीपक- मैडम आपके लिए खाने का अरेंजमेंट करू,

निधि- नहीं तुम मेरा सामना गाड़ी से निकल क्र मेरे रूम में रख दो, और उसके बाद चले जाओ, आज तुम्हारी छुट्टी, कल भी छुट्टी, मेरे अगले आर्डर तक तुम एन्जॉय करो

दीपक- लेकिन मैडम यहाँ की साफ़ सफाई

निधि- मैं कॉल क्र दूंगी जब करवानी होगी,

दीपक चला गया और निधि का सामान निकल क्र रूम में रखा और निकल गया,

ह्रदय- उसे क्यों भेज दिया

निधि- यहाँ सिर्फ मैं और तुम हैं और जब मैं और तुम साथ ह तो कोई और यहाँ नहीं हो सकता,

ह्रदय- वो आपके हस्बैंड को नहीं बताएगा या आपकी फॅमिली को,

निधि- नहीं वो कुछ नहीं बताएगा, ये आमिर लोगो के पीला हुए कुत्ते होते हैं, जो पलटा ह उसी के वफादार होते हैं,

ह्रदय- लेकिन आप अपने हस्बैंड को धोखा दे रही हैं क्या ये सही ह

निधि- धोका उसे दिया जाता ह जिस पैर विश्वास हो, हम पति पत्नी के बिच प्यार और विश्वास जैसा कुछ नहीं ह, वो मुझसे दूर रहना पसंद करता ह, और आज के टाइम में शादी का मतलब ये नहीं ह की हम अपनी जिंदगी नहीं जी सकते, अब तो सर्कार ने भी आजादी दी हुई ह शादी के बाद हम जिससे चाहे रिश्ता रख सकते हैं,

ह्रदय- सर्कार ने तो दे दी लेकिन संस्कारो ने नहीं दी,

निधि- संस्कार उन्ही के पास हैं जिन्हे कही कुछ करने का मौका नहीं मिला, मेरा पति न जाने कितनी hi लड़कियों के साथ सो चुक्का ह, अगर मैं करती हु तो धोखा कैसा,

और संस्कार वही तक चलते हैं जब पति पत्नी की ख़ुशी के लिए सोचता ह और पत्नी पति की ख़ुशी के लिए, मेरा पति बस अपनी ख़ुशी सोचता ह, तो मैं कब तक संस्कार सम्हालूँगी,

ह्रदय निधि की बात से खामोश हो गया,

निधि ये सब छोड़ो तुम चिंता मत करो, तुम कोई धोखा नहीं क्र रहे किसी के साथ, मैंखुद अपनी मर्जी से तुम्हारे पास आई हु, और जब औरत खुद आये तो उसका सम्मान करो, और उसे वो दो जिससे उसे ख़ुशी मिले, तभी वो तुम्हे साडी खुशिया देगी,

ह्रदय ने निधि की तरफ देखा और उसकी कमर में हाथ डाला और अपनी तरफ खींच लिया और वही सोफे पैर उसे अपने उप्पेर लेकर लेट गया, और उसके होतो पैर अपने हॉट रख दिए,

निधि भी तुरंत जोश में उसके हॉट चूमने लगी, दोनों एक दूसरे के होतो का रासी लगे थे, ह्रदय का लुंड निचे से फुंकार मरने लगा था, जिसका अहसास निधि को जल्दी hi हो गया, ह्रदय का लुंड निधि की जांघो के बिच घुसने लगा था, निधि और जोश में आ गई,

निधि- मेरे साथ शावर लेना चाहोगे

ह्रदय- आप जॉब hi देंगी मैं ख़ुशी से ले लूंगा

निधि हस्ती हुई उठी और ह्रदय का हाथ पकड़ क्र रूम में ले गई, और ह्रदय के कपडे उतरने लगी उसकी टीशर्ट उतर क्र ह्रदय के गठीले मजबूत बदन को देखने लगी, ह्रदय को इस सब की इतनी जल्दी की उम्मीद नहीं थी, लेकिन जब निधि खुद hi आगे बढ़ रही थी तो ह्रदय ने पीछे हटना सही नहीं समझा और निधि की गांड को पकड़ा और खुद से चिपका लिया, निधि ह्रदय के साइन से चिपक गई और अपनी चूचियों को तन क्र ह्रदय के साइन पैर रगड़ने लगी,

फिर निधि ने बड़ी ऐडा से ह्रदय को धकेला और बाटरूम की तरफ चली गई, ह्रदय भी मुस्कुराता हुआ उसकी पीछे चल दिया, निधि ने दरवाजा बंद क्र लिया, ह्रदय रुक गया लेकिन कुछ hi पालो में दरवाजा खुला, ह्रदय अंदर गया, अंदर घुसते hi उसकी आँखे खुली रह गई,

सामने निधि बिलकुल नंगी कड़ी थी, उसकी चूचिया एक दम तानी हुई थी, निप्पल्स कड़क होकर खड़े थे, चुहकइयो की गोलाई बहु थी भेतरीन थी, कही से भी लटकी हुई नहीं थी एक दम गोल, और एक दम सपाट पेट छूट के उप्पेर एक दम चिकनी, माखन जैसे स्किन, और जंघे वो तो बहुत hi खूबसूरत थी,

निधि के बदन से दीखता था वो गयम योग करती ह, ह्रदय उसे देख क्र खड़ा hi रह गया, निधि ने मुस्कुरा क्र ह्रदय का हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींच लिया जिससे दोनों के नंगे बदन एक दूसरे से चिपक गए, निधि की नंगी कड़क चूचिया ह्रदय की मजबूत छाती से चिपक गई,

निधि ने शावर चला दिया, गरम गरम पानी दोनों के उप्पेर गिरने लगा, निधि ह्रदय का सर पकड़ क्र उसके हॉट चूमने लगी फिर उसकी छाती को चूमने लगी, ह्रदय के हाथ भी निधि की नंगी कमर पैर घूम रहे थे, एक हाथ निधि की नंगी गैन दपर रखा और उसे जोर से मसल दिया, निधि ने ह्रदय की छाती में दन्त गदा दिए,

निधि ने ह्रदय की चेस्ट में निप्पल को अपनी जीभ से छठा और चूमने लगी, ये कुछ नया था, ह्रदय का जोश एक दम बढ़ गया उसने निधि की चुकी को मुठी में भर क्र जोर से भींच दिया जिससे निधि की ahhhhhhhhhh निकल गई,

निधि ने ह्रदय की आँखों में देखा और मुस्कुराती हुई निचे बैठने लगी, निचे जाकर उसने ह्रदय का लोअर निचे खिसका दिया अब ह्रदय अंडरवियर में उसके सामने खड़ा था, ह्रदय का मोटा लुंड अंडरवियर में से साफ़ दिख रहा था,

निधि की आँखों में एक चमक थी, निधि ने अंडरवियर के उप्पेर से hi लुंड को चाट लिया, ह्रदय के मुँह से सिसकारी निकल गई, निधि ने मुस्कुराते हुए ह्रदय को देखते हुए अंडर वियर में हाथ डाला और निचे खिसकने लगी, और जो निधि के सामने आया उसे देख क्र निधि की आँखे फटी रह गई,

एक मोटा लम्बा खूबसूरत लुंड किसी अजगर की तरह फुंकार रहा था, निधि अपनी पालक झपनी भी भूल गई,

ह्रदय- क्या हुआ

निधि- ये रियल ह न मैं कोई सपना तो नहीं देख रही,

ह्रदय- एक दम रियल ह चेक कर लो

निधि ने लुंड को मुठी में भरने की कोशिश की, उसने लुंड को इधर उधर करके देखा फिर अपने होतो पैर रगड़ा और जीभ निकल क्र चाटने लगी,

ह्रदय- पसंद आया

निधि- दुनिया में इससे ज्यादा खूबसूरत कुछ नहीं हो सकता, जिसके नसीब में ये ह उसे और किसी चीज की जरुरत hi नहीं ह,

निधि ने ह्रदय के लुंड को मुँह में भर लिया, निधि को एक्सपेरिएंस था वो तम्मना के मुकाबले बहुत hi अच्छे तरीके से लुंड को चूस रही थी,

और साथ साथ ाँद भी शेला रही थी, फिर निधि ह्रदय के पैरो में घूम क्र बैठ गई और लुंड को अपने कंधे पैर रख लिया, लुंड निधि के फेस से डबल लग रहा था,

निधि ह्रदय की जांघो के बिच में लूँ ढके निचे चाटने लगी, ह्रदय की आँखे बंद होने लगी थी उसका लुंड झटके पैर झट खा रहा था,

ये ह्रदय का दूसरी बार hi था उसे ज्यादा एक्सपेरिएंस नहीं था उसे नहीं मालूम था सेक्स में इतना मजा आता ह,

काफी देर लुंड चूसने के बाद निधि उठी ह्रदय ने तुरंत निधि की चूचियों पैर हुम्ला बोल दिया और मुँह में भर क्र चूसने लगा, निधि ने ह्रदय क ीक हाथ पकड़ा और अपनी छूट पैर रख दिया, जिस हर्दय ने तुरंत रगड़ना शुरू क्र दिया, शावर चल रहा था जिसमे पता नहीं चल रहा तह ए पानी छूट का ह या शावर का,

निधि- ahhhhhhhhhhhh ह्रदय आओ न करो न मेरे साथ मजे ले न, मेरी ले लो न

ह्रदय के लिए ये लैंग्वेज बिलकुल नै थी, लेकिन मजा बहुत दे रही थी,

ह्रदय ने निधि को गॉड में उठा लिया और उसके पेट को चूमने लगा,

निधि से अब बर्दास्त नहीं हो रहा था उसने खुद को निचे उतरा और ह्रदय के सामने झुक गई,

निधि- आओ ह्रदय मेरी छूट की घेरे को अपने इस मुसल से नाप लो, देखो ये लम्बा ह या मेरी छूट ज्यादा घेरि ह,

ह्रदय- आपकी तकलीफ होगी

निधि- दे दो न मुझे तकलीफ बहुत तड़प रही हु मैं इस तकलीफ के लिए,

निधि की छूट उसके झुकने की वजह से बहार को उभर आई थी, ह्रदय ने आगे बढ़ क्र निधि की छूट पैर अपना लुंड लगाया और दबाव बनाना लगा, शावर के पानी की वजह से छूट में चिकनाहट काम हो गाइट hi जिससे लुंड अंदर नहीं घुसा, बाकि निधि को बहुत दर्द हुआ,

निधि ने ह्रदय को रोका और वही राखी हुई एक क्रीम उठाई और ह्रदय को दी,

निधि- इसे अपने लुंड पैर और मेरी छूट में अच्छे से लगाओ,

ह्रदय ने वैसा hi किया, उसने अपनी उंगली से निधि की छूट में चेअरम को अच्छे से अंदर तक भरा,

निधि- अब डालो

ह्रदय ने फिर से लुंड को घुसाने की कोशिश की और पहले hi झटके में ह्रदय का लुंड का टोपा निधि की छूट में घुस गया, पहले वार में hi निधि की चीख पुरे बाथरूम में गूंज गई,

ह्रदय- दर्द हो रहा ह

निधि- मेरे दर्द की चिंता मत करो, तुम बस बहार मत निकलना, ये दर्द मैंने बरसो से महसूस नहीं किया ह, मुझे ये दर्द चाहिए, तुम घुसाओ,

ह्रदय ने जोर लगाया तो क्रीम की चिकनाहट की वजह से लुंड अंदर घुस गया, ह्रदय भी सरप्राइज था तम्मना की छूट में तो इतना लुंड भी नहीं गया था, निधि की छूट में एक बार में hi इतना घुस गया,

निधि की आँखे बहार आ गई थी,

निधि- ahhhhhhhhhhhhhhhhhhh यस aahhhhhhhhhhhhhh वेट वेट वेट

ह्रदय रुक गया,

निधि ये सही जगह नहीं ह इसे पूरा लेने की, मुझे बीएड पैर लेकर चलो,

ह्रदय ने लुंड बहार निकलना चाहा तो निधि ने रोक दिया,

निधि- बहार मत निकालो ऐसे hi लेकर चलो

ह्रदय- क्या ऐसे लेकिन

निधि- करो न

ह्रदय ने निधि के दोनों हाथ पकडे और बहार को लेकर चल दिया, क्या सीन था, ऐसा लग रहा था जैसे ह्रदय घोड़ी की सवारी कर रहा हो,

निधि ने ऐसे hi चलने का फैसला तो क्र लिया था लेकिन ये उसके लिए गलत hi साबित हुआ, इससे उसकी छूट में जो दर्द हुआ वो बहुत hi खतरनाक था, दोनों के चलने से लुंड हिल रहा था,

निधि से दर्द बर्दास्त नहीं हुआ तो वो खुद hi आगे बढ़ गया ुर लुंड उसकी छूट से बहार निकल गया, निधि ने जल्दी से टेबल से एक आयल उठाया और अपनी छूट पैर खुद hi डाला

निधि- ह्रदय जल्दी आओ अभी रास्ता खुला ह जल्दी से डालो

ह्रदय आगे बढ़ा और निधि के पैरो के बिच आ गया और लुंड छूट में घुसाया आयल की वजह से छूट और चिकनी हो गाइट hi, जिससे लुंड और अंदर घुस गया, इस बार आधा लुंड निधि की छूट में घुस चुक्का था, निधि की आँखे फैट गई थी, मुँह खुला रह गया था,

अब ह्रदय रुक वो समझ गया इससे आगे लुंड नहीं घुस पायेगा,

निधि ने ह्रदय के हाथ पकडे और अपनी चूचियों पैर रख दिए और अपने हाथ से दबाने लगी, ह्रदय भी समझ गया क्या करना ह, ह्रदय ने तुरंत निधि की चूचियों को दबाना शुरू क्र दिया, एक चुकी को मुँह में लेकर चूसने लगा, कुछ देर में निधि को रहत हुई,

निधि- uuuuffffffffffffffffffff जान hi निकल दी थी, कसम से ऐसा हतियार जीवन में पहेली बार लिया ह, काश तुम जवानी में मिले होते

ह्रदय- आप अब भी बहुत जवान हो

निधि- अब तो जवानी को रोक रही हु बस लेकिन तुम्हारी आगे में तुम मै होते तब असली सुख ले पति

ह्रदय- लेकिन फिर किसी और का नहीं ले पति

निधि- काश ऐसा हो पता मैं खुद को धन्य समझती,

ह्रदय- क्या

निधि- कुछ नहीं तुम हलकी हलकी कमर हिलनी शुरू करो, लुंड को थोड़ा सा बहार करना फिर अंदर बहुत धीरे धीरे,

ह्रदय ने वैसा hi किया, कुछ hi देर में लुंड आराम से अंदर बहार होने लगा था, निधि की छूट जल्दी hi ह्रदय के लुंड पैर एडजस्ट हो गई थी,

ह्रदय के धक्के धीरे थे लेकिन घेरे होने लगे थे वो लुंड को लगभग पूरा बहार करता और अंदर क्र देता, निधि मजे के सातवे आसमान पैर थी, और वो मजा जल्दी hi कई गुना बढ़ गया जिससे निधि झड़ने लगी,

अह्हह्ह्ह्ह hhhhhhhhhhhhhhhh ahaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh ऐसे hi छोड़ो मुझे छोड़ दो मुझे छोड़ दो लेलो मजा मेरा पूरा मजा ले लो, मैं तुम्हारे लिए hi हु तुम्हे मजा देने के लिए आई हु, मजा ले लो और मुझे मजा दे दो, आज मैंने असली मजा पाया ह, uuuufffffffffffffffffffffffffffff

ह्रदय ने रफ़्तार बधाई और लुंड और आगे तक घुस गया, निधि ने इससे ज्यादा घेरे में लुंड नहीं लिया था, लेकिन आज उसे असली मर्द मिला था, निधि ने ह्रदय को बहो में जकड लिया और कमर को थिरकने लगी,

जल्दी hi निधि एक दम पास्ट हो क्र लेट गई लेकिन ह्रदय रुका नहीं वो ऐसे hi छोड़ता रहा, 1 मिनट में hi निधि फिर से जोश में आ गई और निचे से कमर चलने लगी, निधि ने जोश जोश में निचे से कमर को उचकना शुरू क्र दिया जिससे लुंड और अंदर तक घुस गया, करीब 45 मिनट्स की चुदाई में निधि दूसरी बार झड़ने लगी और झड़ते हुए दोनों पूरा जोश दिखा रहे थे, और इसी जोश में पूरा लुंड निधि की छूट में उतर गया,

और तभी निधि फिर झड़ने लगी, ह्रदय का लुंड भी अकड़ चुक्का था उसने भी धक्को की रफ़्तार तेज कर दी और एक हुंकार के साथ निधि की छूट में झड़ने लगा, ह्रदय 5 मिनट्स तक झाड़ता हुआ धक्के लगता था, उसक अलुंड लगातार वीर्य उगलता रहा,

जितनी देर ह्रदय ने रास निकलते हुए धक्के मरे थे, उतनी देर में तो निधि के सामने कोई मर्द पूरा टाइम भी नहीं टिक पता था, निधि हैरत में थी, कोई ऐसा कैसे छोड़ सकता ह, ह्रदय निधि के उप्पेर hi लेट गया, और ह्रदय का लुंड छूट के अंदर hi झटके से मरता रहा, जिससे निधि की छूट में हलचल सी हो जाती थी,

फिर दोनों शांत होकर लेट गए, लुंड निधि की छूट में hi फसा हुआ था, निधि पूरी तरह थक गाइट hi, आज वो एक hi चुदाई में 3 बार झड़ी थी, लोग दवाई खा क्र भी ितं अनहि छोड़ पते जितना ह्रदय ने मजे मजे में छोड़ दिया,

निधि- मुझे बाथरूम ले चलो

ह्रदय उठा और लुंड पुक की आवाज के साथ बहार आ गया,

Aahhhhhhhhhhhhhhhhh

ह्रदय- श्री

निधि- कोई बात नहीं ये आवाज सुन्ना बहुत मुश्किल होता ह, तुमने मेरी छूट से ये आवाज निकल दी ये तो मेरे लिए ख़ुशी की बात ह,

निधि ने पेअर हिलाया तो छूट में भयंकर दर्द हुआ ahahhhhhhhhhhhhhhh माआआआ

ह्रदय- बहुत दर्द ह

निधि- है मेरी जान ऐसा दर्द आज के टाइम में बड़ी किस्मत से मिलता ह,

मुझे उठाओ और बाटरूम में ले चलो, ह्रदय ने निधि को गॉड में उठाया और बाथरूम में ले गया और कमोड पैर बैठा दिया,

निधि- टब में गरम पानी भर दो,

ह्रदय ने बाथ टब में गरम पानी भर दिया, इधर निधि ने अपनी छूट को धोया और ह्रदय के लुंड को भी अपने हाथो से धोया, फिर ह्रदय ने उसे बाथटब में लिटा दिया, ह्रदय hi उसके साथ hi लेट गया,

निधि ह्रदय के उप्पेर लेती हुई थी, गरम गरम पानी उसकी छूट को बड़ी रहत दे रहा था,

निधि एक दम शांत ह्रदय के साइन पैर सर रख क्र लेती हुई थी,

ह्रदय- आप खुश ह न

निधि- इससे ज्यादा खुश मैं कभी नहीं हुई, काश तुम मुझे पहले मिल गए होते,

ह्रदय- क्या जीवन में सेक्स hi सबसे बड़ी ख़ुशी होती ह,

निधि- नहीं लाइफ के लिए सब कुछ चाहिए लेकिन जब तक शरीर ठीक और खुश नहीं रहता तो जीवन का हर सुख काम लगने लगता ह, आदमी हो या औरत अगर शरीर संतुष्ट नहीं ह तो बाकि सब कुछ फीका फीका लगता ह, मेरे पास बाहत पैसा ह सरे सुख ह लेकिन मेरा शरीर सुखी नहीं था, इसलिए सबके साथ रह क्र भी मैं अकेला महसूस करती थी,

ह्रदय- क्या किसी और के साथ सेक्स करना गलत नहीं ह

निधि- आज के टाइम में ओने नाईट स्टैंड सबसे ज्यादा होते हैं, लड़किया अपनी शादी से पहले बेचलर पार्टी के नाम पैर छुड़वा रही हैं, लड़के लड़किया बुला क्र छोड़ते हैं, शादी के बाद टेस्ट बदलने के लिए चुदाई करते हैं, पति पत्नी स्वैपिंग का खेल खेलते हैं, जब तक सब मर्जी से हो तो कोई बुराई नहीं

ह्रदय- क्या मुझे किसी और के साथ भी सेक्स करना चाहिए

निधि- ये तुम्हरी खुद की चॉइस होगी, तुमने मेरे साथ किया वो मेरी ख़ुशी के लिए, तुम अपनी ख़ुशी के लिए किसी के साथ भी कर सकते हो, मैं तुम्हे रोकूंगी नहीं, मैंने पहले काफी सेक्स किया ह, अब तुम अपनी लाइफ जियो लेकिन मेरेलिए अब तुम हो बस मुझे तुम्हारे अलावा किसी की जरुरत नहीं ह,

ह्रदय- वैसे मेरा लक्ष्य अपने माँ बाप को ढूंढ़ना ह सेक्स करना नहीं,


निधि- माँ बाप? मैं कुछ समझी नहीं तुम्हारी माँ तो
 
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