Incest Sex Kahani Kasoor - Page 20 - SexBaba
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Incest Sex Kahani Kasoor

अपडेट 164

अब तक

"ठीक है. मेरा नाम है अरहना और तुम्हे इस काम के लिए ये स्टोन." अरहान ने एक रेड कलर का स्टोन उसकी और बढ़ते हुए बोली. गाड़फाथेर उस स्टोन को जैसे hi छुआ, धुएं में बदल कर उसके शरीर में समां गया. गाड़फाथेर की आँखे लाल हो गयी थी उसको अपने अंदर अपर शक्ति का एहसास हुआ. गाड़फाथेर उसके आगे झुकाते हुए बोलै, "आपका काम हो जायेगा डेविल क्वीन."

"गुफ्फी डायना मेरी बात ध्यान से सुन लो ये काम तुम्हे 3 साल के अंदर अंदर करना है. जब तुम्हे मेरी सबसे ज्यादा जरुरत महसूस हो तभी मुझे याद करना." अरहना अपनी बात कह वह से गायब हो गया. वह पर मौजूद सभी को समझ आ गया था की जो लड़की यहाँ आयी थी वो एक सुपरनैचरल शक्ति की मालकिन थी, और अब से गाड़फाथेर भी उन में से एक हो गया था. गाड़फाथेर ने सभी को काम पर लगा कर वहां से नक़ल गया.

वही अरहना ने ऐसे hi 5 माफिआ लीडर को अपना गुलाम बना कर उन्हें शक्ति प्रदान की थी. ये सरे वर्ल्ड की टॉप माफिआ थी.

अब आगे

रंगीन रिंगिंग रिंगिंग

"गुड मॉर्निंग माँ." खुशबू ने घाटे खुलते hi अपनी माँ को देख कर खुश होते हुए विश किया, फिर उसके गले लग गयी. उसकी माँ ने भी उसको सेल लगा लिया. नकुल और रानी दोनों hi गेट पर खड़े माँ बेटी के प्यार को देख रहे थे. उसकी माँ उसको अंदर ले कर चल दी. नकुल और रानी गेट पर hi खड़े रहे, इस तरह अंदर जाना नकुल को अच्छा नहीं लग रहा था इसलिए.

"अच्छा ये तो बात तेरी फ्रेंड कैसी है. जिसके लिए तू कल रुक गयी थी." खुशबू की माँ ने अपनी बेटी से पूछने लगी. उसको अपने अलग कर के. खुशबू अपनी माँ की बात सुन कर जब पीछे मुड़ी तो रानी और नकुल को न देख, गेट की तरफ भाग गयी. "अरे अब कहा जा रही है. अभी तो आयी है घर पर, और अभी चल दी."

"तुम दोनों अंदर क्यों नहीं आये." खुशबू गेट पर पहुंच कर नकुल और रानी कहा. "चलो अब अंदर." नकुल बिना कुछ कहे रानी को साथ ले कर खुशबू के पीछे चल दिया. वही खुशबू की माँ ने जब अपने बेटी के साथ 2 लोगो को देखा, तो कुछ सोच में पद गयी. क्योकि आज खुशबू ने किसी भी फ्रेंड्स को अपने घर नहीं लायी, सिर्फ ोक्सासिओंस को छोड़ कर.

"बेटी अपने फ्रेंड्स मुझे नहीं मिलाओगी." खुशबू की माँ ने अपनी बेटी कहा. खुशबू अपनी माँ के गले लग गयी और बोली "माँ ये है नकुल और ये इसकी सिस्टर रानी शर्मा. माँ आपको बताया तो था मैं ने देहरादून वाली इंसिडेंट."

"थैंक यू बीटा. मेरी बेटी की जान बचने के लिए. अगर तुम उस दिन नहीं आते तो न जाने क्या हो जाता." खुशबू के माँ ने नकुल के आगे हाथ जोड़ते हुए बोली. नकुल ने जब खुशबू की माँ को अपने आगे हाथ जोड़ते देखा, आगे बढ़ कर उनका हाथ पकड़ लिया और कहा, "माँ जी ये क्या कर रही है. अपने बेटे के सामने इस तरह हाथ जोड़ कर, अपने बेटे को पाप की भागी बना रही है. रही खुशबू को बचने की बात तो मैं नहीं होता तो मेरी जगह कोई और होता."

"अपने ये हाथ हमेश सिरवाद देने के लिए उठाया कीजिये." नकुल इतना कहने के बाद, खुशबू की माँ के पेअर को झुक कर छू लिया. खुशबू की माँ नकुल के सर अपना हाथ रखते हुए बोली, "भगवान् तुम्हे हमेशा खुश रखे. तुम्हे मेरी ुरम भी लग जाये."

"आंटी जी मुझे आपकी ुरम तो नहीं चाहिए, क्योकि आप hi नहीं रहेगी तो मेरे लिए दुआ को करेगा. मैं तो भगवन से यही प्राथना करूँगा की वो आप को लम्बी ुरम दे, ताकि आप हमेशा मेरी लिए दुआ कर सके." नकुल ने बड़े hi शालीनता से अपनी बात कही. खुशबू की माँ भी नकुल की बातो ने उन्हें बहुत प्रभावित किया. उनका ध्यान अभी रानी के तरफ नहीं गया था, इस लिए उन्होंने रानी के सर पर लगे चोट को नहीं देखा था. खुशबू की माँ नकुल देखने में hi खोई हुई थी.

"बीटा तुम्हारी बहिन के सर चोट कैसे." खुशबू की माँ नकुल से मिलाने के बाद जब रानी के तरफ ध्यान से देखा तो उसके सर पट्टी बंधा देख कर, नकुल से पूछा. नकुल ने बड़े शांत मैं से कहा, "वो क्या है आंटी जी ये सीढ़ियों से उतारते वक़्त सर के बल गिर गयी, इसके सर पर चोट लग गयी. रानी तुमने अभी तक आंटी को नमस्ते नहीं किया."

"भैया मैं आंटी को नमस्ते कर तो कैसे करू. आंटी तो आपसे लगी हुई है. मेरी तरफ तो आंटी ने देखा भी नहीं. और आप भी तो आंटी को नहीं छोड़ रहे थे." रानी ने अपने ाददात के अनुसार बोल पड़ी. खुशबू की माँ रानी की शिकायत सुन उसकी तरफ बढ़ गयी और उसको अपने लगे से लगा ली.

"अच्छ तो मेरी ये बेटी इस लिए नाराज़ है, क्योकि मैं उसे अनदेखा किया." खुशबू की माँ ने बड़े hi प्यार से उसके सर पर हाथ फेरते हुए बोली. "चल आ बैठ मेरे साथ." खुशबू की माँ रानी को अपने साथ ले कर सोफे पर बैठ गयी.

"माँ बाकि सब दिखाई नहीं दे रहे." खुशबू ने अपनी माँ से पूछा.

"बीटा, तेरे पापा तो आज अमेरिका चले गए किसी बिज़नेस मीटिंग के लिए. तेरे छाछ और चची ऑफिस चले गए. तेरी बहने कॉलेज." खुशबू की माँ ने अपनी बेटी से बोली. खुशबू अपनी माँ की और देखते हुए बोली, "और वो दोनों कहा है."

"अच्छा वो दोनों अपने रूम में." खुशबू ये सुनते hi सोफे उठी और सीढ़ियों के तरफ चल दी. सीडिया चढाने के बाद खुशबू एक तरड़ मुद गयी. फिर वह एक रूम का दूर ओपन कर अंदर चली गयी. नकुल और रानी खुशबू को hi देख रहे थे और सोच रहे थे ऐसा कौन है जिसका नाम खुशबू ने नहीं लिया.

"आंटी ये खुशबू किसकी बात कर रही थी. और हॉस्पिटल में भी मुझे नहीं बताया. जब मैं आप सब के बारे में उसे पूछा." नकुल ने खुशबू की माँ से वो लोगो के बारे में जाने के लिए अपनी बात कही. खुशबू की माँ नकुल की और देखते हुए बस मुस्कुरा दी

"बीटा बस इतना जान लो, वो दोनों हाँ तो मेरे अपने hi, और मुझसे पद में छोटे भी है. पर खुशबू की नज़र में वो हम सब से बड़े." खुशबू की माँ ने नकुल से कहा. नकुल खुशबू की माँ की बात को कुछ सोच में पद गया, ऐसा कौन हो सकता था, जो आंटी से पद में छोटा हो. नकुल ने सब के बार में सोच लिया था फिर कुछ सोच कर बोलै, "आंटी ये आपका सबसे छोटा देवर और देवरानी है ना.",

"बिलकुल ठीक समझे बीटा. है तो मेरे देवर और देवरानी पर खुशबू के लिए हम सबसे बढ़ कर है. वो किसी लिए ये तुम उससे hi पूछ लेना." खुशबू की माँ ने कहा. "वो देखो वो आ रही है उन दोनों को ले कर."

जब नकुल की नज़र उन दोनों के ऊपर पड़ी तो देख कर hi हैरान हो गया. उसे ये समझ नहीं आ रही थी की वो यहाँ क्या कैसे. नकुल बस उस और hi देख रहा था. और समझने की कोशिश कर रहा था. नकुल तो अपने hi ातीति में खो गया था, उसे तो पता hi नहीं चला कब खुशबू उसके पास दोनों को ले कर आ गयी.

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"शमशेर तुमने नकुल के बारे में पता किया. क्या वही है, जिसको इस कुत्तिया ने मार दिया था." जोगिन्दर ने शमशेर से पूछा. रेशमा ठाकुर वही एक तरफ कड़ी थी, बहुत hi हॉट ड्रेस पहने हुए थी, जिस में से उसके बूब्स के क्लीवे साफ़ दिखाई दे रहे थे. रेशमा ठाकुर गली सुनाने के बाद भी वहां पर चुपचाप बैठ हुई थी.

"जी मालिक मैं ने उस नकुल के बारे में पता कर लिया है. जैसा वो पहले था, अब वैसा नहीं है, उसके लिए बहुत से लोग काम कर रहे है. आपने माया का नाम तो सुना hi होगा." शमशेर ने नकुल के बारे में कुछ बाते बताने के बाद एक लड़की का नाम जोगिन्दर को बताया. जोगिन्दर कुछ देर उस नाम को लेकर सोचता रहा.

"कही तुम उस माया की तो बात नहीं कर रहे हो न जो रॉ की अनगिनत है." जोगिन्दर ने कहा. शमशेर न अपनी गर्दन हाँ में हिला दिया. "बीटा अब लग गए लौड़े. अब हमें नकुल को मरने ले लिए, बहुत hi ज्याद मेहनत करना पड़ेगा. क्योकि ये माया हमें उसे मरने नहीं देगी चाहे उसकी जान hi क्यों न चली जाये."

"मालिक, ये माया सिर्फ देखने के लिए hi रॉ एजेंट है, पर इंडिया के एक स्क्रेटे सर्विस से जुडी हुई है. जिसके बारे में सिर्फ कुछ लोगो को hi मालूम है. और मुझे इसके बारे में मेरे एक खास दोस्त ने बताया है." शमशेर ने कहा. जोगिन्दर माया के बारे में जान कर उसके पैरो टेल ज़मीन hi खिशक गयी. उसे समझ नहीं आ रहा था की अब नकुल को कैसे मरेगा. "बॉस अभी तो आप माया के बारे में जान कर ऐसे खो गए तो, जब नकुल के बारे में जानेगे तब क्या होगा आपका."

"तुम कहना क्या चाहते हो. की नकुल उस माया से ज्यादा खतरनाक है." जोगिन्दर ने कहा, उसके चेहरे के भाव को देख कर ऐसा लग रहा था की अभी बेहोश हो जायेगा.

"बॉस अपने बिलकुल सही सुना है. ये नकुल माया से ज्याद खतरनाक है. आप उस दिलावर को तो जानते hi होंगे." शमशेर ने जोगिन्दर की और देखते हुए बोलै, जोगिन्दर ने भी अपनी गर्दन हाँ में हिला दिया. "वो भी नकुल के सामने आने से डरता है. दिलावर ने एक लड़की को देहरादून से उठया था, जो नकुल की वाइफ है, उस दिलावर की हिम्मत नहीं हुई थी उसके रहते हुए उसको उठा सके. अब आप hi सोचो की नकुल क्या चीज़ है."

जोगिन्दर सब सच में सोच में पद गया था, की कैसे उस नकुल को मारा जाये. कुछ देर सोचने के बाद जोगिन्दर ने अपना सेलफोन निकल कर्मवीर को फ़ोन लाग दिया. थोड़े कर्मवीर से बात करने के बाद जोगिन्दर शमशेर से कहा, "शमशेर अभी तुम उस नकुल पर अपनी नज़र रखो. जब तक मैं न कहु तुम कुछ नहीं करोगे. और रेशमा आज से तुम्हारा काम ख़त्म हो गया है. तुम मेरे साथ चल रही हो. तुम अपनी पैकिंग कर लो."

"ठीक है. मैं एक बार घर से हो कर आ जाऊं." रेशमा ने कहा. जोगिन्दर ने अपनी गर्दन हाँ में हिला दिया. रेशम ठाकुर वह से निकल गयी. उस हॉल में सिर्फ जोगिन्दर और शमशेर रही रह गए थे.
 
अपडेट 165

अब तक

जोगिन्दर सब सच में सोच में पद गया था, की कैसे उस नकुल को मारा जाये. कुछ देर सोचने के बाद जोगिन्दर ने अपना सेलफोन निकल कर्मवीर को फ़ोन लाग दिया. थोड़े कर्मवीर से बात करने के बाद जोगिन्दर शमशेर से कहा, "शमशेर अभी तुम उस नकुल पर अपनी नज़र रखो. जब तक मैं न कहु तुम कुछ नहीं करोगे. और रेशमा आज से तुम्हारा काम ख़त्म हो गया है. तुम मेरे साथ चल रही हो. तुम अपनी पैकिंग कर लो."

"ठीक है. मैं एक बार घर से हो कर आ जाऊं." रेशमा ने कहा. जोगिन्दर ने अपनी गर्दन हाँ में हिला दिया. रेशम ठाकुर वह से निकल गयी. उस हॉल में सिर्फ जोगिन्दर और शमशेर रही रह गए थे.

अब आगे

"इनसे मिलो ये है मेरे चाचा राकेश कुशवाहा, और ये मेरी प्यारी सी चची सुनीता ठाकुर, जो अब हो गयी है सुनीता कुशवाहा मेरे चाचा से शादी करने के बाद से." खुशबू ने नकुल अपनी चची की और देखते हुए बोली. नकुल तो अभी सुनीता ठाकुर को hi देखे जा रहा था. उसे ये समझ नहीं आ रहा था की उन्होंने शादी कब कर ली. "चची ये मेरे सबसे प्यारा दोस्त नकुल कुशवाहा. और ये इसकी सिस्टर रानी."

"भाई सही है. जब चची मिल गयी तो चाचा को कौन पूछता है." राकेश ने खुशबू को चिढ़ाते हुए कहने लगा. खुशबू हँसते हुए अपनी चची के गले में अपनी बाहें दाल कर बोली, "ये तो अपने बिलकुल ठीक कहा. आप तो हो जाते हो काम में बिजी, फिर तो मेरे ख्याल तो रखते नहीं, रखती है तो मेरी प्यारी से चची."

नकुल बस खुशबू की बातो को सुन कर मज़े ले रहा था, पर उसका ध्यान सुनीता ठाकुर पर hi टिका हुआ था. खुशबू तो अपने में hi लगी हुई थी. "ोये मेरी चची को नज़र लगाओगे क्या. जब से आयी है बस घूरे hi जा रहे हो." खुशबू ने हँसते हुए बोली.

"ऐसे कोई बात नहीं है, और बाला अपनों की कभी नज़र लगाती है क्या, जो मेरी लगेगी. अच्छा मैं चलता हु. घर पर आंटी मेरे इंतज़ार कर रही होगी." नकुल ने कहा.

"बेटे थोड़े देर रुक जाओ. लंच कर के चले जाना." खुशबू की माँ ने कहा. नकुल अभी भी सुनीता ठाकुर को hi देखे जा रहा था.

"ोये अब ताड़ना बंद कर दे. अगर ज्याद hi पसंद आ गयी है तो अपने साथ ले जा." खुशबू ने अपनी चची को नकुल की और धकेलते हुए बोली. नकुल खुशबू की बात सुन कर झेप गया.

"अच्छा मज़ाक बहुत हुआ. तुम रानी का ख्याल रखना. अगर कोई भी परेशानी हुई तो सबसे पहले मुझे कॉल करना. मैं उसी समय आ जाऊँगा." नकुल की बात सुन खुशबू हस्ते हुए उसकी और देखने लग गयी. जैसे उसके बिना वह कुछ भी नहीं कर सकती.

"नकुल तुम उसकी चिंता छोड़. और आराम से घर जाओ.", खुशबू ने नकुल से बोली. नकुल खुशबू की बात सुनाने के बाद सबको bye कर, वह से चला गया. अब वहां पर सिर्फ 5 hi लोग बचे हुए थे. रानी, खुशबू, खुशबू की माँ, राकेश और सुनीता ठाकुर.

"खुशबू मुझे तुमसे जरुरी बात करनी है. तो इसलिए आज तू मेरे साथ सो जाना." सुनीता ठाकुर ने खुशबू से कहा. खुशबू ने भी अपनी गर्दन हिला कर अपनी सहमति जाता दी, की वह उसकी के साथ रात में सोयेगी. सुनीता ठाकुर नकुल को देख कर hi सोच में पद गयी थी की ये उसका भतीजा hi है, पर उसे जो खबर मिली थी, इसलिए वह कुछ सोच में पद गयी थी. नकुल की मौत की खबर उसकी एक सहेली ने बताया था, जो उसके घर में पास hi रहती थी.

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वही अरहना के द्वारा अंडरवर्ल्ड को, जो काम दिया गया था, बड़े hi जोर से चल रहा था. अंडरवर्ल्ड के लोगो ने ये न्यूज़ फैला दी तह, जो कोई भी उस लड़की को ढूंढ कर लाएगा, जिसके ऊपर वो निशान होगा, उसे 1 मिलियन डॉलर मिलेगा. लोगो ऐसे लग गए थे की पूछ मत. हर रोज 1000स लड़की उनके पास आती, पर उनमें से कोई नहीं होती थी क्योकि पैसे ले लालच में लोगो उन लड़कियों के जिस्म पर मार्क्स बनवा कर लेट थे. कुछ लड़किया तो खुद hi उस निशान को अपने जिस्म पर बनवा कर चली आयति थी.

अंडरवर्ल्ड को अब लोगो उन सभी लड़कियों को वापस भेज देते थे. उन्हें उन में से किसी को भी अपने पास नहीं रखा रखते थे, नहीं उन लड़कियों को लोकल गुंडे भी हाथ लगते थे. पुलिस और मीडिया भी परेशां हो थी, पर वो कुछ नहीं कर सकते थे. पर हाँ ये बात जरूर हुई थी लड़कियों की किडनेपिंग काम हो गयी थी.

"बॉस हमें एक लड़की के बारे में पता चला है. जिसके जिस्म पर बचपन से वही मार्क्स (चिन्ह) है जो अपने हमें बताया था." डैविडसन के एक आदमी ने देवीसों को फ़ोन कर के कहा. जब डैविडसन फ़ोन आया उस समय वह एक लड़की को छोड़ा रहा था. अपने आदमी की बात सुन डैविडसन ने धक्का लग्न बंद कर दिया, उस लड़की को अपने अंदर लुंड को अंदर बहार न होता देख बोली, "व्हाट हप्पेनेड स्वीटहार्ट. अन्य प्रॉब्लम."

"नथिंग कटरीना." डैविडसन ने धक्के लग्न सुर कर दिया. और अपने आदमी से कहा, "स्मिथ तुम कुछ आदमियों को अपने साथ लो और उस लड़की को अपने पास ले आयो."

"OK बॉस." स्मिथ ने फ़ोन रख अपने साथियों के साथ उस लड़की लो लेने निकल गया. वही फ़ोन रखते hi डैविडसन ख़ुशी और जोश के साथ कटरीना को अपने विशाल और मोठे लुंड से छोड़ने लग गया.

उस लड़की के बारे में गाड़फाथेर को पता चल गया था. गाड़फाथेर ने अपने खास आदमी जिसने मार्क्स था उसे उस लड़की को लेन को भेज दिया.

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वही नकुल जब घर पंहुचा तो, सुमन उसे हॉल में hi मिल गयी, उसके साथ हीना और ज़रीने भी बैठी हुई टीवी देख रही थी. अनामिका अपने रूम में कंप्यूटर पर लगी हुई थी कुछ इनफार्मेशन निकलने में.

नकुल चलता हुआ सुमन के पास आ गया. सुमन हीना और ज़रीने टीवी देखने में इस तरह खोई हुई थी की नकुल उनके पास आ कर खड़ा भी गया था तभी उन्हें पता नहीं चला. यहाँ तक की वह सुमन के पास बैठ गया तब भी. जब नकुल देखा की सभी टीवी देखने इस कदर खोये हुए है तो उसने अपने बाँहों में सुमन को भर लिया. अचानक हुए इस हमले से सुमन की चीख hi निकल गयी. ज़रीने और हीना का ध्यान टीवी से हैट अपने सुमन की और चला गया.

नकुल को देख कर हीना और ज़रीने हांसे लग गयी, वही सुमन ने अपनी आंखे बंद कर ली थी, दर के मरे. सुमन हीना और ज़रीने को हँसते हुए देख कर जब उसने अपनी आँखे खोली तो अपने आप को नकुल के बाँहों में पाया.

"बड़ी जल्दी आ गए." सुमन ने नकुल तना मरते हुए बोली. सुमन अंदर hi अंदर खुश थी की वह नकुल के बाँहों में थी. नकुल सुमन के गलो की चुम्मा लिए और बोलै, "आ तो मैं सुबह hi गया होता. पर क्या करू. अपनी डडली बेटी ने रुक लिया और बोलै को ब्रेकफास्ट कर के चल जाना. उसने इतना प्यार से कहा की मैं मन नहीं कर पाया." नकुल एकदम साफ़ झूठ बोलै था. तीनो hi नकुल की बात सहमत भी थी क्योकि वह रानी को अच्छी तरह जानती थी.

"अच्छा तो ये बात है, चलो कोई नहीं अब ये भी बता दो की लंच यहाँ करोगे या वो भी कर के आये हो." सुमन ने फिर से तना दिया. नकुल सुमन की बात का कोई उत्तर न दे कर फिर से सुमन के गलो पर किश करने लग गया. "अब बस भी कर. सामने मेरी दो जवान बेतिया बैठी हुई है और तुम्हे मस्ती सूझ रही है. अब बालो लंच लगाऊं या रहने दू."

"बस भी कीजिये आंटी. आप तने में नहीं सुन सकता. रही बात मेरे खाने की तो मैं आपके हाथ से hi खाऊंगा. जब तक में फ्रेश हो कर आता हु." नकुल ने सुमन से कहा और चुम्मानो की बरषत कर दिया. हीना और ज़रीने नकुल और सुमन को देखे जा रहे थे, कैसे नकुल सुमन बनाने में लगा हुआ था.

"बस बस अब मेरी गाल को चेतना बंद कर. जा फ्रेश हो कर आ, मैं तेरे लिए खाना निकलती हु. आते समय अनामिका को लेते आना." सुमन ने नकुल को अपने से दूर करते हुए बोली. नकुल सुमन की बात सुन मुस्कुरा दिया, और अपना मुँह सुमन के कान के पास ले जा कर धीरे से कहा, "आज रात तैयार रहना, आपकी मुनिया से मेरा मुन्ना मिलना चाहता है. आपकी मुनिया की साडी ख्वाहिश पूरी कर देगा आज रात में मेरा मुन्ना."

नकुल की बात सुन सुमन की छूट से पानी बहाने लग गयी. सुमन की छूट पहले hi नकुल के चुम्मन के वजह से पानी बहन रही थी, नकुल के आखिर शब्द सुन कर उसकी छूट ने रो hi दिया था. नकुल सुमन के पास से उठ कर अपने रूम में फ्रेश होने चला गया, तो वही नकुल के जाने के बाद सुमन भी निचे अपने बैडरूम में चली गयी.
 
अपडेट 166

अब तक

"बस बस अब मेरी गाल को चेतना बंद कर. जा फ्रेश हो कर आ, मैं तेरे लिए खाना निकलती हु. आते समय अनामिका को लेते आना." सुमन ने नकुल को अपने से दूर करते हुए बोली. नकुल सुमन की बात सुन मुस्कुरा दिया, और अपना मुँह सुमन के कान के पास ले जा कर धीरे से कहा, "आज रात तैयार रहना, आपकी मुनिया से मेरा मुन्ना मिलना चाहता है. आपकी मुनिया की साडी ख्वाहिश पूरी कर देगा आज रात में मेरा मुन्ना."

नकुल की बात सुन सुमन की छूट से पानी बहाने लग गयी. सुमन की छूट पहले hi नकुल के चुम्मन के वजह से पानी बहन रही थी, नकुल के आखिर शब्द सुन कर उसकी छूट ने रो hi दिया था. नकुल सुमन के पास से उठ कर अपने रूम में फ्रेश होने चला गया, तो वही नकुल के जाने के बाद सुमन भी निचे अपने बैडरूम में चली गयी.

अब आगे

"मुझे मार क्यों नहीं देती. इतने सालो से मुझे यहाँ बंदी बना रखा हुआ. मेरे बिना मेरे पति मेरे बच्चो का क्या हो रहा होगा. मेरे पति और बच्चो ने तो मुझे मारा हुआ मान लिया होगा. आखिर तुम मुझे चाहित क्या हो." उस औरत ने सामने वाली औरत से रट हुए बोली. 18 साल हो गए थे उस औरत को यहाँ बंदी बने हुए. उस औरत को शरीर देख कर कोई नहीं कह सकता था की वो एक बहुत hi बड़े घर की बहु है. उस औरत के सामने जो औरत कड़ी थी बहुत hi जोर जोर से हांसे जा रही थी. "तू ने मेरे साथ नहीं किया है रंडी. भगवान तुझे ऐसी सज्जा देगा की तेरी रूह तक काँप जायेगी. तू ने मेरे घर वालो से मुझे अलग किया है, भगवान तुझे तेरे घरवालों से कर दे. तब तुझे पता लगेगा की बिना अपनों के कैसा लगता है. " इतना कहने के बाद से फिर वो औरत होने लगी.

"कितना रोटी है. जब तुझे पता की मैं तुझे यहाँ से जाने नहीं दूंगी, जब तक मेरा काम नहीं हो जाता. अगर तुझे मरना होता न तो कब का मर दी होती." सामने वाली औरत ने उस औरत के सामने बैठे हुए बोली. "तू क्या सोचती है मेरे अंदर दिल नहीं है. मेरे अंदर भी दिल है इस लिए मैं ने तेरे बच्चो वो सब दिया जो तू उन्हें देती." वो औरत उस औरत की बातें सुन कर खुश हो गयी थी, काम से काम उसके बच्चे तो सही सलामत थे उसके ना रहते हुए भी.

"तू सच कह रही है. इसका मतलब तो तू ने मेरे लाडले का भी ध्यान रखा होगा. अब तो वो बहुत बड़ा होगा." उस औरत के चहरे पर ख़ुशी और दुख भाव आ गए थे ये बात कहते हुए.. और सामने वाली औरत के पेअर कपडाते हुए बोली, "बस एक बार मेरे लाडले का फोटो दिखा दे. मैं ख़ुशी ख़ुशी वहां पर अपनी ज़िंदगी बिता दूंगी."

"हा हआ रेशमा ठाकुर, तुझे अपने बच्चे की फ़िक्र नहीं है अभी भी. तुझे तो अपने लाडले की फ़िक्र है, अरे हाँ क्या नाम था मुझे क्यों नहीं आ रहा. क्या तुझे याद है उसका नाम." उस औरत ने मुस्कुरातर हुए बोली.

"हाँ हाँ मुझे याद है उसका नाम. नकुल नाम है. अब तो दिखा दे मुझे उसकी फोटो." रेशमा ठाकुर ने रट हुए बोली. वो औरत रेशमा ठाकुर के पास से कड़ी हो गयी और दरवाजे के तरफ चल दी. "भगवन के लिए बस एक बार मुझे मेरे नकुल की फोटो दिखा दे."

"चिंता मत कर कुछ दिनों के बाद मैं तुझे आज़ाद कर दूंगी. जा कर मिल लियो अपने लाडले से. बस जब तक तू सोचती रहा." फिर वो उस औरत वहां से चली गयी. दरवाजा एक बार फिरसे बंद हो गया. रेशमा ठाकुर एक बार फिर से इस काल कोठरी में कैद हो गयी.

"मैडम अब क्या करना है इस औरत के साथ." एक आदमी ने उस औरत से पूछा. वो औरत मुस्कुराते हुए बोली, "अगर मैं 1 महीने के अंदर यहाँ नहीं आयी तो तुम इस औरत को छोड़ देना. और हाँ इसे ऐसा लग्न चाहिए की तुम ने इसकी मद्दत की है यहाँ से भागने में. ये रखो, 2कर है." फिर औरत वहां से चली गयी.

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सम नई चरक्टेर्स इंट्रोडक्शन

1. जगदीश खुराना ( ये दिल्ली का होम मिनिस्टर है. पहले ये लोकल गुंडा हुआ करता था पर अपना डिंगा प्रयोग करके पहले डॉन, फिर होम मिनिस्टर बना गया. होम मिनिस्टर बनाने से पहले अपने एरिया के मला के बेटी को पत्ता कर शादी कर ली थी और उसके बाद ये होम मिनिस्टर बना.)

2 सुशीला खुराना (40 वर्षीय एक सुन्दर महिला. ये जगदीश खुराना की वाइफ है. पैसे कोई कमी न होने और योग करने के कारन आज भी जवान दिखती है. किटी पार्टी, सोशल एक्टिविटीज और पब जाना इसकी रूचि है. इसके 3 संतान है 2 लड़की और एक लड़का. 1. दीक्षा खुराना पेशे से एक डॉ. है. 2. नीलिमा खुराना यह एक बिज़नेस वुमन है. 3. रणबीर खुराना ये नकुल के साथ hi स्टडी करता है.)

3. मोहन लाल महरा ( एक बिजनेसमैन, पुस्तैनी अमीर है. पहले ये बहुत hi शरीफ था. पर जगदीश खुराना से मिलने के बाद एक no का कमीना हो गया है. ये हर वो काम करता है, कानून के नज़र में gair-kanooni है.)

4. ललिता महरा ( 43 वर्षीय एक सुन्दर और कामुक महिला. इनकी शादी मोहन लाल महरा से 18 वर्ष की आयु में hi हो गयी थी. इनका मनपसंदीदा काम पार्टी और पब है. इनकी भी 3 संतान है. 1. करती महरा, अपने पापा के साथ काम करती है. 2. नीरू महरा, अपना छोटा से बिज़नेस खोला हुआ है. ये उसी में लगी रहती है. 3. रुपेश महरा, रणबीर का खास दोस्त है. ऐसा कोई काम नहीं जो ये नहीं करता, मासूम लड़कियों धोके से पट्टा है, फिर वीडियो बना कर उस लड़की को अपने दोस्तों के रख देता है. न जाने कितनी लड़किया इसकी वजह से जान दे चुकी है.)

5. हमद खान ( होम मिनिस्टर का राइट हैंड, यह डॉन hai.Jagdish खुराना ने होम मिनिस्टर बनाने के बाद अपनी जगह पर इस को रख दिया. एक बार इसके आदमियों ने एक लड़की को छेड़ दिया था तो उसक लड़की के बाप ने उनके खिलाफ पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट कर दी. जब खान को पता चल तो वह अपने आदमियों के साथ उस लड़की और उसके बाप को सबख सीखने चल गे उसके घर. जब खान ने उसक लड़की को देखा तो उसका दिल आ गया. फिर उसने उस लड़की से सधी करने का प्रस्ताव उस लड़की के बाप के सामने रख दिया. या तो सधी कर दे उसकी मेरे साथ या अभी उसकी इज्जत... लड़की का बाप दर के मरे उसे अपनी बेटी की सधी करवा दी.)

6. हिमानी शर्मा उर्फ़ हिमानी खान (40 वर्षीय सुन्दर महिला. यह बहुत hi सरीफ और पति को hi अपना सब कुछ मानती है. पार्टी में जाना इसे पसंद नहीं है पर जरुरत मांडो की मद्दत जरूर करती है. पढ़ें और योग करना इसकी रूचि है. 2 संतान है. एक लड़की और एक लड़का. 2. रुकसाना खाना, पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद, एक प्राइवेट स्कूल में टीचर है. 2. रहीम खान, ऐसा कोई ऐब नहीं जो ये न करता हो. ये अपने बाप कर गया है. ये रणबीर का दोस्त है.)

7. सूरज मल्होत्रा (पोस्ट दिग. होम मिनिस्टर का जिगरी दोस्त. जगदीश खुराना को होम मिनिस्टर बनाने इसका सबसे बड़ा हाथ है. कच्ची काली का आशिक़ है और जब भी मौका मिलता है काली से फूल बनाने का तो हाथ से जाने नहीं देता.)

9. पायली मल्होत्रा (44 वर्षीय सुन्दर और कामुक महिला. पार्टी और पब में जाना इसको बहुत hi पसंद है. यह योग सिर्फ खुद को फिट रखने के लिए करती है. योग करते समय इसका सबसे ज्यादा ध्यान अपने बूब्स और अस्स पर रहता है, ताकि और ज्याद निखार आ सके. इसके 4 संतान है. 3 लड़की और एक लड़का. 1. तन्वी मल्होत्रा, शादी कर के अपने पति के साथ रहती है. इसके 2 बचे है. 2. मानवी मल्होत्रा, प्राइवेट स्कूल में कॉमर्स की टीचर है. 3. हामिश मल्होत्रा, नकुल के साथ hi स्टडी करता है और रणबीर का दोस्त है. कमीना एक no का. 4. रूही मल्होत्रा, अभी 12तह में है)

अब कहानी पर आते है.

"शमशेर तुम यहाँ के दिग और होम मिनिस्टर और यहाँ के बिज़नेस मन मोहन लाल महरा से मिल कर साडी बात समझाओ. और उस नकुल के ऊपर नज़र और उसे सचेत रहने के लिए बोल दो.) जोगिन्दर ने शमशेर को समझते हुए बोलै. जोगिन्दर दर लगने लगा था की नकुल जरूर वो सब जानने की कोशिश करेगा, जो भी उसके साथ हुआ था. नकुल ने उसकी शुरुवात जरूर कर दी होगी.

"ठीक है मलिका. इस लाजवंती का क्या करना है, जिस हमें रेशमा ठाकुर बना कर भेजा था. क्योकि इस का काम तो अब ख़त्म हो गया है यहाँ से. या आप इस लाजवंती को कुछ समय के लिए hi यहाँ ऐ भेज रहे हो." शमशेर ने लाजवंती उर्फ़ रेशमा ठाकुर के बारे में जानने की कोशिश की, अपने बातो के द्वारा. जोगिन्दर मुस्कुराते हुए शमशेर की तरफ देखा और एक तरफ चला हाय. वह बार काउंटर के पास जा कर रुका और एक पुराणी वाइन निकला, जिस पर विनाटगे बेर और तारिक 1978 लिखा हुआ था. जोगिन्दर उस वाइन को देखने के बाद फिर उसका ढक्कन खोल कर एक गिलास में डाला और वाइन के ढक्कन को लगा कर एक तरफ रख दी. फिर उस गिलास को उठा कर अपने होठो पर लग कर एक सिप लिया और बोलै, "लाजवंती का काम यहाँ से ख़त्म हो गया है. अगर वो यहाँ रही और उस नकुल के हाथ लग गयी तो तुम सोच भी नहीं सकते क्या हो सकता है. वो सब मालूम चल जायेगा जो उसे नहीं चलन चाहिए. इस लिए उसे मैं वापस राजस्थान भेज रहा हु."

"अगर वो यहाँ से ऐसे hi चली गयी तो क्या उसको ढूँढ़नेगे नहीं." शमशेर ने एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया, जोगिन्दर के सामने की उसको भी सोचने पर एक बार मजबूर कर दिया. जोगिन्दर वाइन की चुस्की लेते हुए सोचने लग गया, अब क्या करना चाहिए उसको.

"शमशेर फिलहाल तो मैं जो कहा वो करो. रही लाजवंती के यहाँ से जाने के बात तो मैं उसे बात करने के बाद hi कुछ कहुगा. मुझे लगता की उसने रेशमा ठाकुर जगह लेने से पहले उसने इस सबके बारे में जरूर सोचा होगा. इसलिए जब तक वो नहीं आ जाती तब तक हमें इस बारे सोचना बंद करना होगा." जोगिन्दर ने वाइन का आखिर सिप लेने के बाद गिलास एक तरफ रख दिया और शमशेर को अपना करने का ईशर करते हुए एक तरफ चला गया. शमशेर भी बिना कुछ कहे अपने काम पर निकल गया.

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"मैं एक महीने के लिए किसी काम से बहार जा रही हु. जब तक मैं वापस नहीं आ जाती इस घर का और सारा बिज़नेस महेन्दर और राज देखेंगे. और तुम सब अपने चाचा और चीच की बात मन." रेशमा ठाकुर हॉल में कड़ी हुई थी अपना बैग ले कर. और सरे घर वाले उस हॉल में मौजूद थे. जब रेशमा ठाकुर ने ये बात कही थी. रेशमा ठाकुर की बात सुन कर सब हैरान हो गए थे. खास कर राज ठाकुर और महेन्दर ठाकुर. पर इनमे से एक का चेहरा कुछ ज्यादा hi गंभीर हो गया था, वो सोचने पैर मजबूर हो गयी थी. पर अपने चहरे आये भाव को एक सेकंड में सामान्य कर लिया.

"माँ आप कहा जा रही हो. आपको पता है न नेक्स्ट वीक मेरा बर्थडे आने वाला है. फिर कैसे जा सकती है." रानी ठाकुर ने अपनी माँ से नाराज होते हुए बोली. रेशमा ठाकुर चल कर अपनी बेटी के पास आयी और अपने गले लग कर बोली, "बीटा मेरा जाना बहुत जरुरी है. ये बात तुम भी जानती हो. मैं ने कभी ऐसा नहीं किया है. पर क्या करू इस बहुत जरुरी है. पर तुम्हारी छोटी माँ रजनी यहाँ जरूर होगी. इस बार माफ़ कर दे बीटा."

"ठीक है माँ. इस बार तो माफ़ कर रही हु. पर अगली बार बिलकुल नहीं करुँगी." रानी ठाकुर ने अपनी ले गाल को चुम्मते हुए बोली. कारन ठाकुर अपनी माँ के पास गया और बोलै, "माँ नेक्स्ट मंथ मेरा बॉक्सिंग कम्पटीशन है. मैं चाहता हु तुम वहां पर रहो और मुझे जीता हुआ देख."

"ठीक है बीटा मैं नेक्स्ट मंथ यहाँ पर जरूर होगी." रेशमा ठाकुर ने कहा. फिर वह अपने बेटी करीना ठाकुर और काजोल ठाकुर के पास चली गयी. "तुम्हे भी कुछ कहना है अपनी माँ से."

"माँ मैं 4 दिन बाद पुलिस ट्रेनिंग के लिए जा रही हु. मेरा कॉल लेटर आ गया है." करनी ठाकुर खुश होते हुए बोली.

"ये तो बहुत hi अच्छी बात है, की मेरी बहादुर बेटी अब एक पुलिस अफसर बन जाएगी." रेशमा ठाकुर ने अपने बेटी का गाल में किश करने के बाद कहा. काजोल अपनी माँ के बाँहों में सिमटी हुई थी जैसे वह जाने नहीं देना चाहती हो. "बीटा मुझे पता है की तुम मुझे बहुत प्यार करती हो. और तुम मुझे जाने भी नहीं देना चाहती. पर बीटा मेरा जान बहुत जरुरी है. बस एक महीने की बात है. फिर कभी तुम्हे छोड़ कर नहीं जाउंगी."

"फिर आप कही गयी तो मैं भी आपके साथ चलूंगी. चाहे आप मुझे कितना भी मन क्यों न कर." काजोल ठाकुर बोली. अपनी बेटी बात सुन कर रेशमा ठाकुर ने उसके चहरे पर किश की बौछार कर दी. ये देख कर सभी हंस दिए.

"भाभी आप चिंता मत करो. मैं सबका ध्यान रखुगा. जब तक आप नहीं आ जाती. आपके फाइट का टाइम भी हो गया है." राज ठाकुर ने अपनी भाभी रेशमा ठाकुर से कहा. रेशमा ठाकुर भी समय को देख सबसे विदा ले कर घर से चली गयी. ऐसे लोगो के हाथ में घर और बिज़नेस का bag-dor दे कर, जो पैसे के लिए कुछ भी कर सकते थे.

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"तुम ने सभी जनम कुंडली निकली की नहीं अभी तक. 24 घंटे से ऊपर हो गए है." नकुल ने फ़ोन पर अपने सबसे खास व्यक्तियों में से बात कर रहा था जिसका नाम कविता राइ है. कविता नकुल की ट्रेनिंग कम्पलीट होने के बाद से वह नकुल के लिए काम करने लगी थी. वही कविता राइ के साथ सरे मेंबर भी नकुल के लिए काम कर रहे थे.

"नकुल कल तक साडी डिटेल तुम्हे कर दी जाएगी. अभी कुछ लोगी की जनम कुंडली ने समय लग रहा है. कास कर उस रणबीर खुराना के बाप का. और हामिश मल्होत्रा के बाप सूरज मल्होत्रा का. ये दो केस ऐसे जिनकी डिटेल निकलने टाइम लग रहा है." कविता राइ ने नकुल से कुछ समय मांगने ार्ज से ये बात कही थी.

"ठीक है. मेरे घर वालो के बारे में पता करने ले लिया भी कहा था. उसका काम कहा तक पंहुचा." नकुल ने फ़ोन पर hi एक और सवाल किया. एक ऐसा सवाल जिसके बारे में जाने के लिए कविता राइ की पूरी टीम की हालत ख़राब हो गयी थी. वो जितना पास पहुंचते वो उतना hi दूर हो जाते. उन्हें समझा नहीं आ रहा था की नकुल को मरने का कारन क्या था.

"नकुल तुम्हारा केस बहुत जटिल है. हम ने अभी तक जितनी भी जानकारी जुताई है, बहुत hi काम है या ये कह सकते वो किसी काम का नहीं है. इसके लिए हमें टाइम चाहिए और तुम्हे थोड़ा इंतज़ार करना पड़ेगा." कविता ने साफ़ शब्दों में नकुल को अभी के लिए मन कर दिया था. नकुल भी ये बात अच्छी तरह जानता था की इसमें समय लगने वाला है.

"ठीक है. तुम्हे जितना समय चाहिए ले लो. तुम अपना काम करो." नकुल ने कहा और अपना फ़ोन रख दिया. नकुल अभी फ़ोन रखना हुआ था की सुमन नकुल खाने के लिए बुलाने उसके रूम में आ गयी थी.

"तुम अपनी तक फ्रेश नहीं हुए." सुमन ने नकुल फ़ोन रखते हुए देख कर बोली.

"बस 5 मिनट्स आंटी. आप निचे चलो मैं फ्रेश हो कर आया. और आप अपनी मुनिया का ख्याल रखिये." नकुल इतना कहने के बाद बाथरूम मैं फ्रेश होने चला गया. वही सुमन अपनी छूट को मसलने के बाद निचे चली गयी.
 
अपडेट 167

अब तक

"नकुल तुम्हारा केस बहुत जटिल है. हम ने अभी तक जितनी भी जानकारी जुताई है, बहुत hi काम है या ये कह सकते वो किसी काम का नहीं है. इसके लिए हमें टाइम चाहिए और तुम्हे थोड़ा इंतज़ार करना पड़ेगा." कविता ने साफ़ शब्दों में नकुल को अभी के लिए मन कर दिया था. नकुल भी ये बात अच्छी तरह जानता था की इसमें समय लगने वाला है.

"ठीक है. तुम्हे जितना समय चाहिए ले लो. तुम अपना काम करो." नकुल ने कहा और अपना फ़ोन रख दिया. नकुल अभी फ़ोन रखना हुआ था की सुमन नकुल खाने के लिए बुलाने उसके रूम में आ गयी थी.

"तुम अपनी तक फ्रेश नहीं हुए." सुमन ने नकुल फ़ोन रखते हुए देख कर बोली.

"बस 5 मिनट्स आंटी. आप निचे चलो मैं फ्रेश हो कर आया. और आप अपनी मुनिया का ख्याल रखिये." नकुल इतना कहने के बाद बाथरूम मैं फ्रेश होने चला गया. वही सुमन अपनी छूट को मसलने के बाद निचे चली गयी.

अब आगे

सभी खाना का चुके थे. अनामिका और ज़रीन अपनी कमरे सोने के लिए चली गयी थी. वही नकुल और हीना हॉल में बैठी हुई टीवी देखा रहे थे. तो दूसरे तरफ सुमन किचन में बर्तन साफ़ कर रही थी. सुमन का हाथ बार पर अपनी योनि पर जा रहा था और बड़े मुश्किल से अपने हाथ को काबू कर पाती, पर उसके हाथ अपनी योनि से छू hi जाते.

"नकुल आगे क्या करना है मुझे. क्योकि यहाँ पर तो अपने ऑफिस के कोई भी ब्रांच नहीं है. हाँ पर अपनी एक गारमेंट्स कंपनी है. तो क्या मैं वहां पर चली जाऊं." हीना ने टीवी की तरफ देखते हुए hi ये सवाल नकुल से किया था. नकुल बिना हीना के तरफ देखते हुए एक कार्ड उसकी तरफ बढ़ा दिया और बोलै, "कल तुम यहाँ पर चली जाओ. और अपने साथ उस लड़की को भी ले जाना. जिसको हम हॉस्पिटल से यहाँ लाये है. क्या नाम था उसका याद नहीं आ रहा मुझे."

"रुचिका खन्ना नाम है उसक लड़की का." हीना ने कहा. नकुल टीवी का रिमोट लेते उठा कर चैनल चेंज करते हुए बोलै, "हाँ तुम रुचिका खन्ना को अपने साथ ले जाना. अच्छा ये बताओ वो है कहाँ. डिनर पर भी नहीं दिखी और नहीं लंच टाइम. कही गयी हुई है क्या?"

"हाँ सुबह hi किसी काम से निकल गयी थी, और कल आने का कह गयी. शायद उसे कोई जरुरी काम होगा." हीना ने नकुल से बोली, "ये सांग चलने दो. मुझे बहुत पसंद है."

"ऐसा क्या है इस सांग में जो इस तरह सुनाने लगी. मुझे तो कुछ नहीं समझ आ रहा है इसमें." नकुल ने हीना के तरफ देखा और कहा.

"तुम नहीं स्समझोगे नकुल इसमें क्या है." हीना ने मुस्कुराते हुए बोली. और सांग आ रहे सन को देखने लगी. नकुल ने जब उसे सन को देखा और बोलै, "अच्छा तो तुम इस लिए ये सांग देख रही हो."

"अब तुम कुछ करते नहीं तो काम से काम ये सब देख कर िमागतिओं तो कर सकती हु न." हीना ने नकुल देखते हुए बोली.

"अच्छा तो तुम्हे भी अपनी माँ की तरह मेरा चाहिए तो बोल दो मुझसे." हीना की और देखते हुए नकुल ने कहा और हंस दिया.

"आज नहीं फिर कभी. फ़िलहाल तो तुम माँ ख्याल रखो आज. कल देखते है." हीना ने कहा और उठ कर कड़ी हो गयी और अपने रूम की तरफ चल दी. हीना का जान हुआ था की सुमन किचन से बहार आ गयी. शायद हीना ने अपनी माँ के कदमो की आवाज़ सुन ली थी इसलिए ये वह उठ कर चली गयी.

"ये लो दूध. पी लो, मेहनत करते वक़्त ताकत की जरुरत पड़ने वाली है, इस लिए दे रही हु." सुमन नकुल के पास बैठे हुए बोली और गिलास नकुल ले होठ से लगा दी. नकुल बिना कुछ बोले सारा दूध पी गया. "5 मिनट के बाद मेरे रूम में आ जाना. जब तक मैं नहं लू." सुमन उठ कड़ी हुई और गिलास को रसोई में रख कर अपने रूम में चली गयी. नकुल हॉल में बैठा हुआ टीवी के चैनल बदलने लग गया.

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रूस, मास्को

आज पूरा शहर में कर्फ्यू लगा हुआ था. कोई भी व्यक्ति सड़क पर नहीं दिखाई दे रहा था. और हर घर की तलाशी ली जा रही थी. और वहां के लोकल गुंडे और बड़े से बड़े डॉन के लिया जो काम कर रहा था उनका एनकाउंटर हो रहा था. और उसका कारन था यहाँ के आर्मी चीफ की बेटी मारिषा उर्फ़ मार्श का किडनेपिंग हो जाना. जिस कारन गुंडों की समेत आयी हुई थी. उस को उठाने वाला था गाड़फाथेर उर्फ़ गोफर.

"बॉस आर्मी और पुलिस हमारे आदमियों के पीछे हाथ धो कर पड़े हुए है. जो सामने आ रहे या मिल रहे उसने शूट कर दिया जा रहा है. और सबसे एक सवाल पूछा जा रहा है, आर्मी चीफ की बेटी मार्श का किसीने किया है और तुम हमारा बॉस कहाँ पर छिपा हुआ है." डैविडसन का एक खास साथी जो पुलिस में था उसका फ़ोन दिवादसों के पास आया हुआ था और ये बात बोल रहा था.

"हमारे hi साथियों के साथ ऐसा क्यों हो रहा है. और हमारे आदमियों का हाथ कहाँ से आ गया." डैविडसन ने उस पुलिस वाले से पूछा. उस पुलिस वाले ने अपने आस पास देखा और जब उसे लगा की कोई उसे नहीं सुन रहा तो फिर से बोलना सुरु किया, "क्योकि उस लड़की के आसपास आपके आदमियों देखा गया था और मार्श को किडनैप करने की कोशिश भी की थी और वहां के कक्तव से पता चला है. पर हाँ आपके आदमियों के हाथ से वह बच कर निकल गयी थी उस समय."

"ये क्या बोल रहे हो. मेरे आदमी आर्मी चीफ की बेटी मार्श को क्यों किडनैप करेंगे. मैं तो उन्हें ऐसा करने को नहीं बोलै है." देवीसों ने उस पुलिस वाले से कहा.

"फिर आपके आदमियों ने उस पर हमला क्यों किया, इसका कोई जवाब है आपके पास. अगर मार्श 24 घंटे के अंदर नहीं मिली तो कोई भी गैंग , कोई डॉन ज़िंदा नहीं बचेगा." उस पुलिस वारनेड करते हुए डैविडसन को कहा. अभी वह आगे कुछ कहता या बोलता वहां पर उसका सीनियर आ गया और उस वजह से उसे फ़ोन रखना पड़ा.

वही दूसरे तरफ फ़ोन रखते hi डैविडसन ने अपने राइट हैंड को फ़ोन मिला दिया और इस बार में पता करने लगा. जब उसे पता चला की जिस लड़की को उसने किडनैप करने के लिए कहा था, वो मार्श थी तो उसके पैरो टेल की ज़मीन खिशक गयी. अब उसे ये समझ नहीं आ रहा था की उसके आदमियों ने जब मार्श को किडनैप नहीं किया तो किसने किया. डैविडसन वहां से निकल गया, गाड़फाथेर से मिलाने.

वही ये बात गाड़फाथेर को पता चल गया था की जिस लड़की को उसके आदमियों किडनैप कर के यहाँ लाये थे वो आर्मी चीफ की बेटी मार्श थी. गाड़फाथेर को अपने मरने की दर तो नहीं था पर अपनी फॅमिली का मरने का दर जुरार सत्ता रहा था. इस लिए उसने अरहना को याद किया. उसके याद करते hi अरहना वह पर आ गयी.

"बोलो किस लिए मुझे यद् किया. क्या वो लड़की मिल गयी." अरहना प्रकट होते हुए गाड़फाथेर से ये सवाल किया. गाड़फाथेर ने हाँ में अपना सर हिला दिया. "ये तो अच्छी बात है, तुम उसे अपने पास hi रखो, समय आने पर मैं उस लड़की तुमसे ले जाउंगी."

"आपकी बात ठीक है, डेविल क्वीन. पर एक समाया आ गयी है. वो लड़की यहाँ की आर्मी चीफ की बेटी है, अगर वह 24 हॉर्स में अपने घर नहीं पहुंची तो हम जैसे लोगो को मर दिया जायेगा." गाड़फाथेर ने कहा. अरहना ये सुन कर कुछ सोचते हुए बोली, "तुम अभी एक लड़की का बंदोबस्त करो."

"ठीक है." गाड़फाथेर ने अरहना से कहा और वहां से बहार चला गया. कोई 2 घंटे के बाद जब वह लौटा तो उसके साथ 2 लड़किया थी एक मार्श और ये लड़की और थी जिसका नाम एमी जॉनसन था. " डेविल क्वीन ये है वो लड़की मार्श और ये एमी जॉनसन. मार्श की जगह इसको hi रखना है."

"ठीक है. एमी इधर मेरे पास आओ." अरहना ने उस लड़की की तरफ देखते हुए बोली और अपने पास आने इशारा किया. एमी बिना के पल गवाए अरहना के पास आ गयी. अरहना ने एमी के ऊपर हाथ रख और उसका पूरा शरीर hi बदल गया. अब एमी मार्श की तरह दिख रही थी. "गुफ्फी उर्फ़ गोफर तुम इस लड़की को तुम खुद इसके घर ले कर जाओगे. अब मैं चलती हु."

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कल एक अपडेट और आएगा. आज के लिए इतना hi.
 
अपडेट 168

अब तक

"ठीक है." गाड़फाथेर ने अरहना से कहा और वहां से बहार चला गया. कोई 2 घंटे के बाद जब वह लौटा तो उसके साथ 2 लड़किया थी एक मार्श और ये लड़की और थी जिसका नाम एमी जॉनसन था. " डेविल क्वीन ये है वो लड़की मार्श और ये एमी जॉनसन. मार्श की जगह इसको hi रखना है."

"ठीक है. एमी इधर मेरे पास आओ." अरहना ने उस लड़की की तरफ देखते हुए बोली और अपने पास आने इशारा किया. एमी बिना के पल गवाए अरहना के पास आ गयी. अरहना ने एमी के ऊपर हाथ रख और उसका पूरा शरीर hi बदल गया. अब एमी मार्श की तरह दिख रही थी. "गुफ्फी उर्फ़ गोफर तुम इस लड़की को तुम खुद इसके घर ले कर जाओगे. अब मैं चलती हु."

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अब आगे

जब नकुल सुमन के बैडरूम में गया तो देखा की सुमन अभी तक बाथरूम से बहार नहीं आयी थी. नकुल कमरे का दरवाजा बंद करा और सुमन के बिस्तर पर जा कर लेट गया. नकुल बिस्तर पर लेटने से पहले अपने कपडे निकला दिए थे, सिर्फ अपना अंडरवियर छोड़ कर. नकुल सुमन का आने का इंतज़ार कर रहा था.

वही सुमन बाथरूम में जाने के बाद अपने कोमल और नाज़ुक अंग को एक क्रीम लगा कर और ज्यादा कोमल और नाज़ुक बनाने में लगी हुई थी. इस लिए उसे टाइम लग रहा था रेडी हो कर बहार आने में. सुमन ने हेयर रिमूवल क्रीम से अपने बगल के बाल और बूर के पास के बाल को, उस क्रीम को लगा कर निकल दी. और फिर सुमन के क्रीम लिया और अपने योनि और उसके ऊपर लगा कर कोई 5 मिनट्स तक मस्सगे की और उसके बाद गरम पानी से धो लगी. जब वो क्रीम वहां से हत्ता तो उसके योनि पर एक चमक सी आ गयी थी.

इस सब में सुमन को काम से काम 1 घंटे का समय लगा. सुमन बाथ लेने के बाद सिर्फ के नाईट पहन कर बहार आयी जो उसके विशाल और कोमल, सख्त सतांन के आधे से ज्याद भाग उजागर हो रही थी. वही वो निघ्त्य उसके कूल्हों को बड़े मुश्किल से धक् प् रही थी. जैसे नकुल ने बाथरूम का दरवाजा खुलने की आवाज़ सुनी तो अपने सेलफोन से ध्यान हत्ता कर उस तरफ दिया. सुमन को उस रूप में देख कर नकुल का दिल की धड़कन hi बढ़ गयी साथ hi उसके निचे तो भूचाल आ गया था. उसका कामदण्ड अपने पूर्ण आकर में आ गया था. उसका अंडरवियर उसके औजार को संभालने में na-kamayab हो रहा था.

सुमन नकुल की हालत देख कर मुस्कुराते हुए उसकी और बढ़ गयी. बड़े कामुक और मादक तरीके से चलते हुए उसकी आ रही थी, बिस्तर के पर आ कर उसने अपना एक पेअर बड़ी अदा के साथ ुरः कर बिस्तर पर रखा और नकुल को मुस्कुराते हुए देखने लग गयी. सुमन की इस हरकत की वजह से उसकी योनि नकुल से सामने आ गयी और इस असर ये हुआ की नकुल लिंग से कुछ बुँदे निकल कर उसके अंडरवियर को गिला कर गयी.

वही नकुल तो अभी, कभी सुमन के उन पर्वत सामान सतांन को देखता तो कभी उसके योनि को जो अपना अलग hi सम्मोहन बिखेर रही थी. नकुल तो अपनी सोचने समझने की शक्ति hi कुछ पल के लिए भूल गया था. उसे तो ये होश hi नहीं रहा की सुमन कब उसके पास आयी और उसके विशाल लिंग को उसके अंडरवियर से निकल अपने मुँह लिंगा का आगे का भाग ले चुकी थी, बड़े कुशलता के साथ चूस रही थी. नकुल तो बस सुमन को अपना लिंग चूसते हुए देखा जा रहा था. नकुल को तो होश तब आया जब सुमन ने अपने मुँह से उसके लुंड को निकल कर उसकी तरफ देखने लगी थी.

"तुम तो सच में मेरी जान ले कर मानोगी. आज तुम कामदेवी का रूप लग रही हो, तुमने तो सभी अफसरो को भी मात दे दिया है. तुम्हारे इस रूप ने आज ऐसे जादू किया की मैं खुद को भूल बैठा था," नकुल ने सुमन की तारीफ करते हुए बोलै और अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर उसके सर पीछे ले गया और उसके रेशमी बालो को पकड़ अपने पास खींच लिया. जैसे सुमन उसके पास आय उसने अपने होठ उसके होठ पर रखा और बहुत hi धीरे धीरे चूसने लग गया. सुमन भी नकुल का पूरा साथ दे रही थी, सुमन ने अपना मुँह खोल दिया और ताकि नकुल अपनी जीभ उसके मुँह में प्रवेश करवा सके, जो वह काफी देर से अंदर डालने के लिए कोशिश किये जा रहा था. नकुल ने अपना एक हाथ उसके नाज़ुक और मक्खन से भी नरम और शाक्त सतांन पर रख दिया और एक हलय में उनका मर्दन करने में लगा हुआ था. इस दोहरे हमले से सुमन के गुफा के अंदर भूचाल आ गया था और वो भूचाल कभी उस गुफा से बहार आ सकता था. कोई 10 मिनट के बाद नकुल ने अपने को सुमन से अलग करा.

"आआह सच में hi" अभी सुमन कुछ इससे आगे बोलती, एक बार फिरसे नकुल ने उन शहद से भरे होठो को अपने मुँह कैद कर लिया था. एक भर फिरसे सुमन उन उचाईयो पर फिरसे पहुंच गयी थी, जहाँ अभी थोड़े देर पहले थी. अभी मुश्किल से 2 मिनट hi हुए थे की सुमन का जिस्म कद गया और उसकी गुफा के अंदर जो भूचाल मचा हुआ था वो एक पानी के धरा के रूप में निकल कर बिस्तर के चादर को भीगोने में लगा हुआ था. सुमन की योनि से 1 मिनट तक योनिरस निकलता रहा. नकुल सुमन को अपनी बाँहों में कैद कर लिया था इस बिच और वह उसके सर पर अपना हाथ फेयर रहा था. सुमन बेशुद नकुल के बाँहों में पसरी हुई थी.

"तुम ठीक तो होना." नकुल ने सुमन को अपनी आंखे खोलते हुए देख कर उसे पूछा. सुमन ने मुस्कुराते हुए अपना चेहरा आगे ले कर आयी और नकुल होठो चुम कर बोली, "मैं ठीक हु. मैं तुम्हे नहीं बता सकती या मेरे पास शब्द hi नहीं है की मैं तुम्हे बता पाऊँगी की मैं कैसे महसूस किया. थैंक यू नकुल इस के लिए." सुमन ने के बार फिरसे नकुल को होठ को चुम लिया और उसके अलग हो गयी.

"अब मेरी बारी है तुम्हे वही आनंद देने की जो थोड़े पहले तुमने मुझे दिया." सुमन नकुल को बिस्तर पर लेटते हुए ये बात कही थी. सुमन की बात सुन नकुल बिस्तर पर पीठ के बल लेट गया. सुमन एक बार फिरसे नकुल के उस विशाल और मोठे कहते को अपने मुँह लेने के लिए झुका गयी. सुमन ने अपना हाथ आगे बढ़ा कर उसे विशाल दैत्याकार लिंग को पकड़ लिया और उस दैत्याकार का चेहरा देखने के लिए उसके वस्त्र यानि उसके खाल को निचे की तरफ खींचने लगी. मोटा सा टमाटर की सामान लाल रंग का सूपड़ा सुमन ने सामने आ गया. सुमन बिना के पल गवाए उस टमाटर के सामान सुपडे को अपने मुँह कैद कर लिया. उसक कैद करने के लिए सुमन को अपना मुँह पूरा खुलना पद.

एक बार फिरसे वह सूपड़ा सुमन के मुँह के अंदर कैद हो चूका था. सुमन बड़े hi महारथ के साथ सुमन लिंग को चूसने में लग गयी थी. नकुल के मुँह से सिर्फ आअह्ह्ह्ह उउइइइइ आआह्ह्ह्ह की ाआवाज़ निकल कर कमरे में फैयल गयी. पूरा कमरा hi नकुल की आवाज़ और सुमन के चुसाई के आवाज़ से गूंज रही थी.

नकुल सुमन के मुँह से अपना लुंड को निकला और उसे बिस्तर पर पीठ के बल लिटा दिया और उसके पैरो फैला दिया. सुमन की योनि जो योनिरस से भीगी हुई थी नकुल के सामने आ गया. नकुल अपना मुँह योनि पर रखा और अपना जीभी निकला कर योनि के होठो के बिछे फिर दिया.

"आअह्ह्ह आआअह्ह्ह माआ नाकुल्ल." सुमन के मुँह से आवाज़ निकल गयी. नकुल एक बार अपना चेहरा उठा कर सुमन की तरफ देखा, जो उत्तेजना के भाव से भरा हुआ था. नकुल फिर से अपने काम में लग गया. नकुल अपनी जीभा का इस्तेमाल योनिरस निकलने में करने लगा. उसके जीभ सुमन के योनि के होठो के बिछे अपना कमला दिखा रहा रहा. सुमन तो बस अपना सर बिस्तर पर इधर उतर पटक रही थी, वही उसकी कमर (वैस्ट) ऊपर निचे हो रही थी. नकुल अपनी जीभ से उसकी छूट के देने (क्लीट) को छेड़ देता तो कभी योनि द्वारपर ला अंदर की तरफ धकेल देता.

"आअह्ह्ह मा नाआकुलललल मैं मर jaungi....aaaaa माआ ऐसे आयी hi आअह्ह्ह ईईईई कमिन्न्नन्ग." सुमन एक चीख के साथ अपना योनिरस योनि बहा दी, जो नकुल के मुँह में जाने लगा. सुमन ने इस बार पहले ज्यादा पानी बहाया था. नकुल ने उस योनिरस को अपने जीभ का प्रयोग करते हुए अपने मुख में भर अपने पेट में पहुँचता रहा. नकुल सुमन के योनि को 10 मिनट तक चूसता रहा, उसके झरने के बाद भी.

नकुल अपना लिंगा सुमन के छूट के मुँह पर रखते हुए उसके ऊपर आ गया. नकुल ने सुमन के होठ को अपने होठ से जकड लिया और माध्यम गति से 2 -3 धक्का लगा कर अपना लुंड सुमन के योनि के गर्भाशय में पंहुचा दिया. नकुल वही रुका नहीं, बल्कि वह धीरे धीरे धक्के लगाने लग गया. सुमन अपना पेअर फैलाये हुए उस विशाल काई लिंग को अपने अंदर महसूस कर रही थी. सुमन उस कामदण्ड के मोठे से भाग को अपने योनि के अंदर महसूस कर रही थी, कैसे वो कामदण्ड उसके योनि के अंदर हलचल मचाये हुए थी. नकुल सुमन के होठो को अपने होठो से आज़ाद कर दिया था और धक्के लगा रहा था. सुमन की मुँह से कामुक और माज़े की आवाज़ रूम में गूंज रही थी. ठप्प ढप्प की आवाज़ उत्पन हो रही थी, जब नकुल के जांघ के पत् सुमन के कोमल जांघ से टकराते. नकुल अपना लंग सुपडे तक भर लता और फिर पूरा अंदर दाल देता.10 मिनट के बाद सुमन के चीख के साथ फिरसे झाड़ गयी.

नकुल अपना लुंड उसकी छूट से निकल कर उसके बगल में लेट गया. 2 मिनट के बाद नकुल पीछे से फिरसे अपना लुंड सुमन के योनि में प्रवेश करा चूका था. और धक्के लगाने लग गया था. इस बार नकुल ढ़ाको के साथ सुमन के कठोर और कोमल मॉस के टुकड़ो अपने हाथ के गिरफ्त में ले चूका था और दबाने में लग गया था. सुमन फिरसे एक उस स्वर्ग में आ गयी थी जिसकी कल्पना कुछ महीनो से कर रही थी. आज नजाने कितनी बार वह इस स्वर्ग में आने वाली थी ये वक़्त हाथ में था. सुमन तो अपने hi दिया में खोयी हुई थी. वह अपने योनि में हर धक्के को महसूस कर सकती थी और उसे प्राप्त होने आनंद को भी. कुछ पालो के बाद सुमन फिर झाड़ गयी. नकुल ने एक फिर से अपना डंडा उसकी छूट से निकल दिया था. सुमन के योनि का छेड़ खुल गया था और उसके अंदर के लाल रंग के मास साफ़ दिखाई दे रहा था.

कोई 2 मिनट के बाद जब सुमन के सांस दुरुस्त हुए तो नकुल ने सुमन को डोगग्य पोज़ में लगा और अपना लंग उसकी योनि द्वार पर लगा उसकी कमर को पकड़ और जोर का धक्का लगा दिया. "आहहहा माआ मर गयी." सुमन के मुँह से ये आवाज़ निकली. क्योकि इस बार नकुल लुंड उसके बच्चेदानी पर जा लगा था जोर से. नकुल रुका नहीं वह जोर जोर से धक्के लगाने लगा. इन धक्को के कारन सुमन के चुकी के लाये में झूल रहे थे. नकुल उस वक़्त रुका जब उसके लिंग ने अपना रास सुमन के गुफा के अंदर भरने लगा. इस बिछे सुमन 3 बार झाड़ चुकी थी. थोड़े देर आराम करने के बाद फिरसे ये खेल सुरु हो गया था. .

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"शमशेर मालिक कहा पर है. मुझे उनसे मिलना है." रेशम ठाकुर उर्फ़ लाजवंती उस घर में दाखिल होते हुए बोली. शमशेर हॉल में बैठा हुआ शराब पी रहा था. जोगिन्दर की बात सुनाने के बाद से. लाजवंती आवाज़ सुन शमशेर उसकी तरफ देखा और उसकी बड़े से सतांन की और देखते हुए कहा, "मालिक अपने रूम में अभी अभी गए हुए है. तुम चाहो तो आराम कर के सुबह उनसे मिल सकती हो या अभी जा कर मिल सकती. मालिक ने ये तुम्हारे ऊपर छोड़ा है.",

"ठीक है मैं उनसे सुबह मिलूगी. अभी मैं आराम करने जा रही हु." लाजवंती ने शमशेर की तरफ देखते हुए बोली, वह ये अच्छी तरह से जानती थी की शमशेर उसकी सतांन को देख रहा था. लाजवंती अपना बैग उठा कर एक तरफ बने हुए रूम में चली गयी. शमशेर अभी लाजवंती के पास नहीं जा सकता था क्योकि जोगिन्दर ने उसे मन किया हुआ था. लाजवंती जा कर बीएड पर लेट गयी और अपने बीते हुए पालो को याद करने लग गयी.

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"चची अब बताइये आपको क्या बात करनी है. जो अपने चाचा को दूसरे रूम में सोने के किये भेज दिया." खुशबू में दाखिल होते हुए बोली. खुशबू के घर में सब्बि खाना का चुके थे. रानी खुशबू के रूम में सो रही थी. रात के 11 बज रहे थे जब खुशबू अपनी चची के रूम में आयी थी.

"मेरी रेलगाड़ी पहले दूर तो बंद कर और आराम से आ कर मेरे पास बैठ. फिर बताती हु. की मैं तुझे यहाँ क्यों बुलाया है." सुनीता ठाकुर ने खुशबू से कहा. सुनीता ठाकुर खुशबू को अपनी बेटी मानती थी. खुशबू अपनी चची काम फ्रेंड की बात सुन मुस्कुरा दी और पीछे मुद गयी. पहले उसने जा कर रूम का दूर लॉक्ड किया, उसके बाद अपनी प्यारी चची के पास आ कर बैठ गयी.

"अब बताओ क्या बात करनी है मुझसे." खुशबू अपनी चची के गले में अपनी बाहें दाल कर ये बात कही थी. सुनीता अपनी लड़ी बेटी के माथे को चुम कर बोली, "तुम इस लड़के को कब से जानती हो."

"किस लड़के को चची. आप किसीकी बात कर रही है." खुशबू ने न समझने का नाटक करते हुए ये सवाल अपनी चची से किया. सुनीता खुशबू के सर पर धीरे से चपत लगायी और बोली, "अपनी नौटंकी बंद कर और साफ बता सुबह जो लड़का तेरे साथ आया था, जिसकी बहन यहाँ पर रुकी हुई है. तूने उसका नाम नकुल कुशवाहा बताया था उस समय मिलते हुए हम सबसे."

"अच्छा तो आप उसकी बात कर रही है. मुझे लगा आप किसी और की बात कर रही है." खुशबू मुस्कुराते हुए बोली, "मैं उसे देहरादून में मिली थी, उसने मेरे इज्जत लड़ने से बच्या था. तभी से मैं उसे दिल दे बैठी. मैं जितना जानती थी मैं ने बता दिया."

"उसके परिवार के बारे क्या जानती हो." सुनीता ने एक अलग hi सवाल खुशबू से पूछ ली. जिसका जवाब खुशबू के पास होते हुए नहीं था. पर कुछ सोच कर बोली, "उसके परिवार में कोई नहीं है, और जो है दौलत के लिए उसे जान से मारा कर खाई में फेक दिया."

"तुम झूठ बोल रही हो उसके परिवार वाले ऐसा नहीं कर सकते. अगर उन्हें ऐसा किया तो उन्हें कुछ नहीं मिलेगा." सुनीता ठाकुर भाउक हो कर ये बात खुशबू के सामने बोल दी.

"आपको कैसे पता की उसके परिवार वाले ऐसा नहीं कर सकते. अगर कर दिया तो उन्हें कुछ नहीं मिलेगा." खुशबू ने अपनी चची को देखते हुए पूछा. "कही आप उसे पहले से hi तो नहीं जानती."

"खुशबू मैं तुम्हे अपनी बेटी मानती हु. इस लिए मैं तुम्हे यहाँ बुलाया है. उसके बारे में तुमसे पूछा." सुनीता ने बड़ी शांत पर करुणा भरी आवाज़ में अपनी ये बात कही. फिर थोड़े देर खुशबू को देख फिरसे बोलना सुरु किया, "जानती मैं ऐसा क्यों कहा की उसके मरने के बाद उसकी दौलत उसके परिवार को नहीं मिलेगी." खुशबू ने अपनी गर्दन न में हिला दी. "शायद तुम्हे ये जान कर शॉकेड हो जाउंगी. की नकुल मेरा भतीजा है. और मैं उसकी बुआ हु. उसके जनम के बाद कुछ बाद hi लंदन चली गयी थी स्टडी के लिया. उसकी सकल मेरे par-dada से मिलिटी है."

"क्याआआ? आप उसकी बुआ हो. पर उसने आपको पहचान क्यों नहीं." खुशबू ने हैरान होते हुए बोली. खुशबू का ये सवाल जायज भी था, पर इसका जवाब सिर्फ दो लोगो के पास था, एक नकुल और दूसरा पदमनी नकुल की माँ. पदमनी शायद इस दुनिया में थी नहीं तो उसे इस सवाल का जवाब मिलने से रहा. और नकुल से इस बारे में खुशबू पूछने की हिम्मत नहीं कर सकती थी, जो कर सकती थी वह जाना नहीं चाहती अभी के लिए.

"तुमने सही सुना. कुछ बात ऐसी है जिनके बारे में मैं तुम्हे बात सकती हु. पर तभी जब नकुल सामने हो." सुनीता ठाकुर ने कहा और इस के साथ बात को hi ख़त्म कर दिया था. पर कुछ सोचते हुए फिरसे खुशबू से बोली, "क्या तुम मेरे एक काम करोगी."

"क्यों नहीं चची. आप बस बोलो मुझे क्या करना है." खुशबू ने हँसते हुए कहा. उसके बाद सुनीता ठाकुर ने कुछ खुशबू को समझाया, उसके बाद उसने सोने जाने के लिए कह दिया. खुशबू बिना कोई सवाल किये उस रूम से निकल गयी. खुशबू के जाने के बाद सुनीता ठाकुर अपने ातीत के यादो में खो गयी.
 
अपडेट 169

अब तक

"तुमने सही सुना. कुछ बात ऐसी है जिनके बारे में मैं तुम्हे बात सकती हु. पर तभी जब नकुल सामने हो." सुनीता ठाकुर ने कहा और इस के साथ बात को hi ख़त्म कर दिया था. पर कुछ सोचते हुए फिरसे खुशबू से बोली, "क्या तुम मेरे एक काम करोगी."

"क्यों नहीं चची. आप बस बोलो मुझे क्या करना है." खुशबू ने हँसते हुए कहा. उसके बाद सुनीता ठाकुर ने कुछ खुशबू को समझाया, उसके बाद उसने सोने जाने के लिए कह दिया. खुशबू बिना कोई सवाल किये उस रूम से निकल गयी. खुशबू के जाने के बाद सुनीता ठाकुर अपने ातीत के यादो में खो गयी.

अब आगे

"कैसे हो दिग सर. सुना है आपकी बेटी जवान हो गयी है. और उसके सीने के आगे के बहुत बड़े है और उसके बड़े उसकी अस्स (कूल्हे) हो गए है. कही डंडे का प्रयोग तो नहीं करने लग गयी है बहार." एक अनजान लड़के के मुँह से ऐसी बात अपनी बेटी के लिए सुन कर आग बबूला हो गया थे, दिग सूरज मल्होत्रा. सूरज मल्होत्रा को समझ नहीं आ रहा था की बहार इस कोई रोका क्यों नहीं.

"अपनी जुबान को लगाम दो लड़के. तुम अंदर कैसे आ गए." दिग सूरज मल्होत्रा ने गरजते हुए कहा. उसकी आवाज़ सुन कर उसकी बेटी मानवी मल्होत्रा निचे आयी और साथी हुई बीवी पायल मल्होत्रा जो किचन में काम कर रही थी. "कौन तुम और तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई इस तरह से मेरी बेटी के बारे में बोलने की. लगता है तुम्हे अपनी मौत का दर नहीं है. जो इस तरह अपना मुँह उठाये यह चले आये."

"मौत का दर तो पहले चला गया था मुरली ुर सूरज मल्होत्रा. रही यहाँ आने की बात तो ऐसी कोई जगह नहीं जहाँ मैं जा नहीं सकता. और मुझे यहाँ पर आने पर मजबूर किया तेरे उस कुत्ते जाने, जिसे तुमने पैदा किया है." उस लड़के ने दहाड़ते हुए बोलै. उस लड़के की आवाज़ उसन कर एक पल के लिए वहां पर मौजूद सभी सहम गए. पर जल्दी hi उसे बहार भी आ गए.

"औकात में रह कुत्ते. तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे भाई के बारे में बोलने की." मानवी मल्होत्रा ने गुस्से में बोली. वो लड़का हस्ते हुए बोलै, "रखेल है तू मेरी. और रखेल को अपनी औकात नहीं बुलानी चाहिए. ऐसा न हो की तेरे घर के नौकर भी तेरे ऊपर चढ़ाने लगे."

"बस बहुत हुआ, और तुमने बहुत बोल किया. चुपचाप यहाँ से चले जाओ, कही न हो की मैं तुम्हे यही पर शूट कर दू अपनी रिवाल्वर se."DIG सूरज मल्होत्रा ने गुस्से को बर्दास्त करते हुए ये बात बोलै था और अपनी गन 🔫 को उस लड़के की और तन रखा था. "एक शब्द और नहीं, निकल जाओ मेरे घर से, अपना गन्दा खून ले कर.",

"मैं यहाँ से जाने नहीं आया हु मुरली उर्फ़ सूरज मल्होत्रा. अपनी पिल्लै को निचे बुला और वही बताएगा मैं कौन हु. मुझे मत दिखा ये खिलौना. मुझे पता है तुमने ये पुलिस की वर्दी कैसे पायी है, अगर मैं ने अपना मुँह खोला न तो तेरी ये बेटी तेर मुँह में मोटे गई भी नहीं." उस लड़के ने पहले कही ज्यादा ुचि आवाज़ में बोलै था. दर के मरे सूरज मल्होत्रा के हाथ से उसकी गन 🔫 छूट कर निचे गिर गयी. "जल्दी कर मेरे पास ज्यादा टाइम नहीं है. क्योकि बेटी को नंगा भी तो करना यहाँ."

पायल मल्होत्रा बिना कुछ कहे hi ऊपर चली गयी. और अपने बेटे रूम में चली गयी, जो लैपटॉप पर लगा हुआ था. रूम का दूर धड़क से खुलने से उसका ध्यान दूर की तरफ गया तो पाया उसकी माँ गुस्से में वहां पर कड़ी हुई है. जल्दी उसने लैपटॉप बंद किया और अपनी माँ के पास आ गया.

"क्या बात है माँ. आप इतनी गुस्से में क्यों हो." हामिश ने अपनी माँ से पूछा. चटक्क की आवाज़ गूंज गयी गलियारे में और रूम के अंदर. "आप ने मुझे मारा क्यों. मैं ने क्या किया आप जो मुझे मर रही हो."

"ये बात वो लड़का कौन है, जो निचे तेरे बाप और तेरी बहन के ऐसी बेहूदी बाते कर रहा है." पायल मल्होत्रा ने गुस्से से बोली. और एक और थप्पड़ लगा दी उसे गाल पर.

"मुझे क्या पता वो कौन है. आप मुझे मरना बंद करो. चलो मेरे साथ देखु तो सही कौन आ गया है जो मेरी बहन और मेरे बाप से इस तरह बोल रहा है." हामिश ने कहा. और निचे की तरह चला गया. जैस hi सीढ़ियों से उतर कर हॉल में आया, सामने नकुल को देख कर उसकी आँखे hi बाहर आ गयी. उसे इस बात का बिलकुल भी अंदाज़ा नहीं था की नकुल इस तरह उसके घर आ जायेगा. "तुम यहाँ क्या कर रहे हो. तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे बहाना और मेरे बात ऐसे बात करने की."

"बड़ी मिर्ची लगी तेरे गांड में. अपनी बहन के बारे में सुन के. क्यों उस समय तो बड़ा जोश आ रहा था, जब तूने अपने दोस्तों के साथ मिल कर मेरी बहन की इज़्ज़त पुरे कॉलेज के सामने लुटाने वाला था. जब अपनी बहन पर आयी तो तेरी गांड फट गयी." नकुल चिल्लाते हुए बोलै. नकुल के मुँह से अपने बेटे के बारे में जान सुन पायल मल्होत्रा के पैरो टेल की ज़मीन hi खिसक गयी. उसे विश्वास hi नहीं हो रहा था की उसे बीटा ऐसा भी कर सकता था. मानवी को हैरान हो गयी थी.

नकुल तेज़ी से आगे बढ़ गया और सूरज मल्होत्रा के हाथ से गन 🔫 ले कर हामिश के सर पर लगा दिया और बोलै, "हाँ तो मादर्चोअद, अपना मुँह खोल और बता अपनी माँ और बहन को." पायल मल्होत्रा अपने के सर पर गन 🔫 देख कर दर गयी और उसके मुँह से के चीख भी निकल गयी थी, पर नकुल के इशारा के कारन अपने मुँह पर हाथ रख लिया था. मानवी और सूरज का हाल भी कुछ ठीक नहीं थे.

हामिश बिना टाइम बर्बाद किये भोकना सुर कर दिया. पायल मल्होत्रा और मानवी मल्होत्रा अपनी भाई और बेटे के बारे जान कर उन्हें बहुत दुःख हुआ उन्हें. वही सूरज मल्होत्रा गुस्से में था पर नकुल पर नहीं अपने बेटे पर. की उसने ये बात उसे क्यों नहीं बताई.

"प्लीज मेरे बेटे को छोड़ दो. मैं हाथ जोड़ती हु. मैं वडा करती हु ये आगे ऐसे वैसे कुछ नहीं करेगा." पायल ने रट हुए बोली. उसे दर लग रहा था कही नकुल उसके बेटे को जान से न मर दे.

"प्लीज मेरे भाई को छोड़ दो. वो आगे ऐसा कुछ नहीं करेगा." मानवी मल्होत्रा ने भी हाथ जोड़ते हुए अपने भाई की जान की भीख मनागने लगी.

"ठीक है. मैं तुम्हारे भाई को नहीं मरूंगा. पर मेरी एक शर्त है." नकुल ने कुछ सोचते हुए ये बात कही थी. मानवी मल्होत्रा ने अपनी गर्दन हाँ में हिला दी. नकुल ये देख कर फिरसे बोलै, "ठीक है. तुम अभी अपने सरे कैसे उतर कर मेरे सामने कड़ी हो जाओ. मैं यहाँ से बिना तुम्हारे भाई को कुछ किये बगैर चला जाऊंगा."

"नहीं बेटी तुम ऐसा कुछ नहीं करुँगी. कपडे उतरने की बात है तो वो मैं करुँगी." पायल ने नकुल की शर्त सुन कर बोली. अपने बेटे और बेटी की इजाज़्ज़त बचने के लिए, पायल अपने आपको निर्वत्र करने के ले लिए तैयार हो गयी थी. वही हामिश मल्होत्रा ये सब देख कर उस घडी को कोष रहा था जब उसने नकुल से पन्गा लिया था. सूरज मल्होत्रा बेटे के वजह से विवश था.

"नहीं माँ. आप कुछ नहीं करोगी." मानवी ने कहा. माँ बेटी दोनों hi टूटू मैं मैं लगी हुई थी, मैं करुँगी मैं करुँगी.

"चिल्लाना बंद करो तुम दोनों. अब ये तुम्हारे ऊपर है तुम दोनों में से पहले कौन करेगा. मेरे 3 गिणन्ते hi जिसने भी सबसे पहला कपडा उतरा वही अपने सरे कपडे उतारेगी." नकुल ने कहा और गिनना सुरु कर दिया. नकुल के तीन कहते hi मानवी मल्होत्रा ने अपनी टॉप को अपने हाथो से पकड़ उसे ऊपर अपने गले तक ले आयी. वही दूसरे तरफ पायल मल्होत्रा ने अपनी साड़ी को निकला सुर कर दी. दोनों hi माँ बेटी एक साथ अपने शरीर से कपडे लगा कर एक तरफ फेक दिया.

"क्या बात है दोनों एक साथ, ये तो कमल हो गया." नकुल की बात सुन मानवी मल्होत्रा अपनी माँ के तरफ देखते हुए आगे करने मन करने लगी. वही पायल मल्होत्रा ने अपने बेटी के सामने हाथ जोड़ लिए थे, की वह अपने कपडे न निकले. "देख तेरी जान के लिए कैसे तेरी माँ और बहन मेरे सामने अपने कपडे निकल रही है. और तेरा बाप बेबस सा एक तरफ खड़ा हुआ सब देख रहा है. कभी देखा है तू ने की एक माँ और बेटी अपने hi भाई और बाप के सामने अपने कपडे उतारते हुए. नहीं देखा न, चल देख ले." नकुल धीरे से हामिश के कान के पास अपना मुँह ला कर कहा. वही हामिश खून का घुट पी कर रह गया. आज उसे अपनी बेबसी का एहसास हो रहा था. वही सूरज मल्होत्रा अपनी के तरफ घर के देखा जा रहा था, उसके नज़र को देख कर कोई नहीं कह सकता hi वह एक बाप है. हवस उसकी नज़रो में साफ़ झलक रही थी.

जहाँ नकुल हामिश से बात कर रहा तह वही एक बार फिरसे माँ बेटे एक दूसरे की इज्जाजत बचने में लिए अपने कपडे उतरना सुर कर दिए थे. जहा एक तरफ मानवी अपनी बारे उतरना सुर कर दी थी वही पायल में पेटीकोट का नाडा खोलना सुर कर दी. मानवी ने देखा की उसकी माँ पेटीकोट का नाडा का ाकारी गांठ खोलना रह गया तो उसने अपनी ब्रा के अंतिम दोनों हुक एक hi झटके में टॉट दी और अपनी हाथ से निकलना सुर कर दी. पायल ये देख की उसकी बेटी अपने ब्रा को उसके हाथ में आ गया है तो उसने पेटीकोट का नाडा को एक सेकंड में hi खोल दिया और पेटीकोट उसके पैरो में आ गिरी. दोनों ने hi अपना दूसरा वाटर अपने अगल कर चुकी थी. पायल अपने पेटीकोट को अपने पैरो से ेल तरफ फेका तो वही अपनी माँ को देख मानवी ने उतना जल्दी अपने हाथ में लटकी हुई ब्रा एक तरफ उछाल दिया.

जहा मानवी अब सिर्फ निचे से जीन्स में थी और ऊपर से बिलकुल नग्न. उसकी सुडोल स्तन तीन मर्दो के सामने बेपर्दा थी. तो पायल ऊपर ब्लाउज में थी तो निचे सिर्फ एक par-darshi एक डोर वाली पंतय पहनी हुई थी. जो उसके योनि उभर को छुपाने असमर्थ थी. मानवी अपनी जीन्स के बटन खोलनी सुरु कर दिया था तो वही पायल अपने ब्लाउज के हुक को तोडा, ब्लाउज अपने जिसमे से अगल कर दी.

"बस रुक जाओ दोनों. आज तो मई तुम्हे और तुम्हारे इस निचे भाई/ बेटे को छोड़ कर जा रहा हु. पर अगली बार मेरे साथ उलझलने की कोशिश की तो उसे जान से मर तेरी दोनों बेटियों यहाँ से ले जाऊँगा और वो दोनों मेरी रखेल होगी. तेरी तीसरी बेटी को कुछ नहीं करूँगा क्योकि वह के माँ है, मैं कभी उसे अपने औलाद नहीं कर सकता इस लिए उसे छोड़ दूंगा. अगर फिर भी वह मेरे रस्ते में तो वो भी नहीं बचेगी." नकुल अपनी बात कह, हामिश को एक तरड़ धकेल दिया और घर निकल गया. नकुल के जाने के बाद मानवी और पायल वैसी hi हालत में अपने भाई और बेटे के पास चली गयी और देखने लगी कही चोट नहीं आयी.

"माँ और दीदी आप अपने कपडे पहन लो. मैं वादा करता हु आगे से ऐसा कभी नहीं होगा." हामिश वहां से निकल गया हुए अपने की तरफ चला गया. वही मानवी और पायल अपने भाई और बेटे की बात सुन शर्म से दोनों के चेहरा लाल हो गए. और दोनों उठ कर अपनी रूम की तरफ भागी. वही सूरज अपनी बेटी और बीवी को चुकी और कूल्हों को देखता रहा जब तक वो दोनों उसकी आँखों से ओझल नहीं हो गयी.
 
अपडेट 170

अब तक

"बस रुक जाओ दोनों. आज तो मई तुम्हे और तुम्हारे इस निचे भाई/ बेटे को छोड़ कर जा रहा हु. पर अगली बार मेरे साथ उलझलने की कोशिश की तो उसे जान से मर तेरी दोनों बेटियों यहाँ से ले जाऊँगा और वो दोनों मेरी रखेल होगी. तेरी तीसरी बेटी को कुछ नहीं करूँगा क्योकि वह के माँ है, मैं कभी उसे अपने औलाद नहीं कर सकता इस लिए उसे छोड़ दूंगा. अगर फिर भी वह मेरे रस्ते में तो वो भी नहीं बचेगी." नकुल अपनी बात कह, हामिश को एक तरड़ धकेल दिया और घर निकल गया. नकुल के जाने के बाद मानवी और पायल वैसी hi हालत में अपने भाई और बेटे के पास चली गयी और देखने लगी कही चोट नहीं आयी.

"माँ और दीदी आप अपने कपडे पहन लो. मैं वादा करता हु आगे से ऐसा कभी नहीं होगा." हामिश वहां से निकल गया हुए अपने की तरफ चला गया. वही मानवी और पायल अपने भाई और बेटे की बात सुन शर्म से दोनों के चेहरा लाल हो गए. और दोनों उठ कर अपनी रूम की तरफ भागी. वही सूरज अपनी बेटी और बीवी को चुकी और कूल्हों को देखता रहा जब तक वो दोनों उसकी आँखों से ओझल नहीं हो गयी

अब आगे

नकुल मौत और ज़िन्दगी के साथ जुआ खेलना सुरु का चूका था. अब देखना ये था की इस खेल में नकुल के हाथ क्या आता है ज़िन्दगी या मौत. और इसका फैसला वक़्त करने वाला था. नकुल ने हामिश के घर पर जो कांड किया था इसकी गूंज दूर तक जाने वाली थी. इतना तो तैय हो था की नकुल को आने वाले समय में दुःख के बदल इस कदर छाने वाले थे की मौत के लिए वो भीख मांगने वाला था, पर उसे वो अभी नसीब नहीं होने वाला था.

लाजवंती उर्फ़ रेशमा ठाकुर अपना खेल खेलकर जा चुकी थी, इस बात की भनक किसी को नहीं थी. उसने घर के हर सदस्य पर इस तरफ अपना प्रभाव छोड़ा था की उसे भूल पाना उसे सबके लिए बहुत मुश्किल था, खास कर महेन्दर के लिए. देखना अब ये था की जब असली रेशमा ठाकुर आएगी, तब क्या करेगी वो.

एक तरफ जहाँ कनिका अपनी ट्रेनिंग में लगी हुई थी, ताकि वक़्त पर वह अपने प्यार की मदद कर सके. वही दूसरी तरफ कुछ और भी लोग थे जो नकुल को ख़त्म करने की प्लानिंग में लगे हुए थे. ट्रेनिंग के दो भाग कनिका ख़त्म कर चुकी थी और कल से उसका अंतिम ट्रेनिंग सुरु होने वाला था, जहाँ उसे अपनी आध्यात्मिक शक्तियों को जागृत करना था. और ये वह कब तक कर पायेगी ये उसके आत्मशक्ति बल पर टिका हुआ था.

दिलावर अपने लिए खास इंजेक्शन अपने साइंटिस्ट्स से तैयार करवाने लगा हुआ था. उन्होंने भी काफी हद कर अपना काम पूरा कर चुके थे. फार्मूला बैंक तैयार हो चूका था, बस उस फॉर्मूले को मेडिसिन का रूप देने में कठिनाई आ रही थी. जब भी वो इंजेक्शन या मेडिसिन तैयार होता और उसकी टेस्टिंग की जाती फ़ैल हो जाता, उसका कारन उन्हें समझ नहीं आ रहा था, आखिर ऐसा क्यों हो रहा था. क्या कमी आ रही थी. इस लिए एक बार फिर से उस फॉर्मूले वो सरे साइंटिस्ट्स चेक करने में लग गए थे.

कनिका का बाप कनिका को ढूंढने के लिए, अपनी पूरी ताकत लग दी थी पर वो कनिका को ढूढने असमर्थ था. कनिका कही भी पता नहीं चल पर रहा था. दिलवर भी परेशान था कनिका को लेकर. दिलावर को समझ नहीं आ रहा था की नकुल ने आखिर कनिका को कहा पर छुपा रखा है.

लाजवंती उर्फ़ रेशमा ठाकुर दिल्ली से राजस्थान जा चुकी थी. अब उसे आने में कितना समय लगने वाला था, ये तो वही जानती थी या जिसके लिए वो काम करती थी वो. हाँ पर अभी तक वो अपनी घर नहीं गयी थी, या यूँ कह सकते हो उसे जाने नहीं दिया गया था. वह अपने परिवार से मिलाने के लिए तड़प रही थी क्योकि उसे अपने परिवार वालो से मिले हुए 18 साल हो गए थे. 18 साल माईने रखता है एक व्यक्ति के जीवन में.

वही देहरादून में नकुल की बहन ज्योति ठाकुर काफी शांत हो गयी थी. वह अब किसी से नहीं बोलती थी, वह बस नकुल को लेकर hi सोच रही थी. उसे कुछ hi दिन पहले पता चला था की नकुल दिल्ली में है और वही एक कॉलेज में अपना एडमिशन ले ràkha है. माया अपनी टीम के साथ ज्योति ठाकुर पर नज़र बनायीं हुई थी. वही ज्योति ठाकुर ने अपने बड़ी माँ से कह कर, देहरादून से दिल्ली कॉलेज में अपना ट्रांसफर करवा लिया था, वो भी नकुल के hi कॉलेज में. जब ये बात माया को पता चली तो उसने अपने साडी टीम को hi दिल्ली भेज दी. सिर्फ इशिका को छोड़ कर, वह ज्योति के साथ hi वहां जाने वाली थी.

15 दिन हो गए थे उस काण्ड को हुए, नकुल से हामिश लगभग अलग hi हो गया था, पर ये सिर्फ लोगो की नज़र में. हामिश अपना बदला लेने के लिए मारा जा रहा था, वो उस वक़्त का इंतज़ार कर रहा था, जब नकुल कमज़ोर हो और उसे मर सके. रानी भी ठीक हो चुकी थी. सुनीता ठाकुर रानी को अपने प्यार में इस तरह फसा लिया या जादू किया था की वह उसके साथ सारा समय रहती थी कॉलेज से आने के बाद से. रानी से नकुल के बारे में सुनीता बहुत कुछ जान चुकी थी, पर वही जो उसको नकुल ने बताया था.

खुशबू अपना काम में लग चुकी थी, उसने इन 15 दिनों में नकुल के बारे में बहुत कुछ पता लगा चुकी थी, पर अब भी बहुत दूर थी, वह जितना सोचती वह नकुल के बारे में जान गयी, वह उतने hi दूर हो जाती. खुशबू अपनी शक्ति का प्रयोग नहीं कर सकती थी जब तक उचित समय नहीं आ जाता, इस लिए वो साधारण तरीके से hi नकुल के बारे में कोशिश कर रही थी.

मिनाक्षी धरती के ऐसे हिस्से में बैठी हुई अपनी शक्ति को बढ़ने में लगी, यह एक प्राचीन शिव मंदिर था, जो बहुत समय पहले hi बिलुप्त हो चूका था, इस मंदिर का ज्ञान से कुछ बुजुर्ग और प्रमुख पंडित समुदाय को hi ज्ञान था.

वही अरहना को बाकि के तीन लड़कियों के बारे में पता चल गया था जो की भारत में थी, पर कहा ये उसे अभी तक पता नहीं चला था. अरहना इस के बारे में खुद hi पता लगाना चाहती थी इस लिए उसने एक ऐसे आदमी की खोज सुरु कर दी थी जो उसके कार्य को पूरा सके.

एक जलायकु ऐसे गृह पर आया हुआ था, जो सात रंगो में था. वही के लोगो बहुत hi शक्तिशाली थे. वही लड़कियों की सुंदरता शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता था. वह की राजकुमारी अभी अभी बलिक हुई थी. आने वाले पूर्णिमा को उसकी शादी वही मंत्री के बेटे से होने वाली थी. जहाँ जलायकु आया हुआ था वह के आश्रम था, जो की जंगल में बना हुआ था. इस तरफ आने के लिए उस गृह के राजा ने मन किया हुआ था. वहां कोई न जा सके इसके लिए अपनी शक्ति से उस जंगल को बांध रख था. उस जंगल को कला जंगल भी कहते थे.

"प्रणाम गुरुवार." जलायकु ने बहुत hi वृद्ध सन्यासी को सर झुका कर अभिवन्द करा. उस सन्यासी के चेहरे पर चमक थी उसे एक अलौकिक चमक थी. उस सन्यासी ने अपना चेहरा उठा कर जा सामने देखा तो उसका चेहरा पर चमक और आ गयी

"आओ जलायकु. बर्षो से मैं तुम्हारा hi इंतज़ार कर रहा था. ये बढ़ी आँखे अब तक इस लिए बंद नहीं हुई क्योकि ये तुम्हारा hi इंतज़ार कर रही थी." उस सन्यासी ने जलायकु को देखते हुए बोलै. जलायकु भी घुटनो पर बैठ गया और झुक कर सन्यासी के पैरो अपने हाथो से पकड़ लिया. "उठो जलायकु. मुझे पता है तुम यहाँ पर क्यों आये हो. शक्ति को धारण करने से पहले तुम्हे मेरी दोनों बेटियों से विवाह करना हो. और जब तक उसने संतान प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक यहाँ से तुम नहीं जा सकते. मैं ऐसा क्यों रहा हु. इसका जवाब आने वाला समय देगा."

"गुरुवार मैं ने एक बार ाकि आज्ञा का उलंघन कर के देख चूका हु. इस कमीयाज अपनी शक्ति से वंचित हो कर और इतने वर्षो तक कैद रह कर भुगत चूका हु. अगर मैं उस दिन आपकी बात मन लेता तो आज मैं इस हालत में नहीं होता." जलायकु ने कहा. और उसका ये कहाँ कुछ लगता भी नहीं था. उसकी एक गलती ने उसका हालत कर दिया था. "बोलिये मुझे कब करना है विवाह."

"4 दिन बाद अवश्य को. उस दिन तुम्हारे विवाह मेरी बेटी हरिमा और शक्तिमणि से होगा." सन्यासी ने जलायकु से कहा. "हरिमा इधर आओ." एक केशरी रंग की साड़ी पहले hi पौधों पास में hi पानी दे रही थी, अपने पिता की आवाज़ सुन पानी देना बंद कर उनकी तरफ चल दी. उन वस्त्रो में भी सुंदरता की देवी लग रही थी. शरीर की हर हिस्सा अपना अलग hi चमक बिखेर रहा था. जलायकु उसकी एक चहरे को hi देख खो सा गया था.

"जी पिता जी कहिये. मैं क्या कर सकती हु." हरिमा ने अपने पिता के आगे शांत कड़ी हुई धीरे ऐ अपनी मीठी आवाज़ में बोली. जलायकु तो उस आवाज़ में इस तरह से खो गया की पूछो hi मत.

"बेटी इन्हे सामने वाले कुटिया में ले जाओ और हाँ शक्तिमणि दिखाई नहीं दे रही. कहाँ गयी है वो." सन्यासी ने अपनी बेटे शक्तिमणि बारे में पूछ और जलायकु ले जाने के लिए कहा.

"जी वो झरने के पास गयी है." हरिमा ने विनम्रता से अपनी छोटी बहन के बार कहा.

"मैं कितनी बार कहा है की उस झरने के पास में जायेगा कर, पर वो मेरी सुनती कहा है. अपनी मनमानी करती रहती है." सन्यासी ने गुस्स दिखते हुए कहा. एक बाप के लिए गुस्स होना सही भी था क्योकि वो झरना जंगल के अंत में था जो की राजा के शक्ति के अंदर आता था. इस लिए सन्यासी अपनी बेटी को जाने से मन करता था. पर वो शक्ति दिवार शक्तिमणि को नहीं रोक पति थी.

"पिता जी आप शांत हो जाईये. उसे कुछ नहीं होगा. वो अपनी रक्षा करना जानती है. वो बस आती hi होगी." हरिमा ने अपनी पिता से बोली.

"ठीक है तुम इन्हे ले जाओ." सन्यासी ने कहा. हरिमा जलायकु को ले कर वह से चली गयी.

अब देखना ये था की शक्तिमणि की विवाह जलायकु से हो पति है की नहीं. अगर उसकी शादी जलायकु से हुई तो बहुत कुछ बदलने वाला था. पर ये तो वक़्त hi बता सकता था की क्या होने वाला है.
 
अपडेट 171

अब तक

पिता जी आप शांत हो जाईये. उसे कुछ नहीं होगा. वो अपनी रक्षा करना जानती है. वो बस आती hi होगी." हरिमा ने अपनी पिता से बोली.

"ठीक है तुम इन्हे ले जाओ." सन्यासी ने कहा. हरिमा जलायकु को ले कर वह से चली गयी.

अब देखना ये था की शक्तिमणि की विवाह जलायकु से हो पति है की नहीं. अगर उसकी शादी जलायकु से हुई तो बहुत कुछ बदलने वाला था. पर ये तो वक़्त hi बता सकता था की क्या होने वाला है.

अब आगे

"मुझे तुम बताओ की तुम ने वो चीज़ को कहा पर रखा है. शायद तुम ये भूल रही हो की तुम्हारा बीटा मेरे पास है. और उसकी जान भी जा सकती है. इसलिए मेरी बात मनो और मुझे वो दे दो." एक साक्ष उस गुफा के अंदर खड़ा था और सामने बंधी हुई सूरत से कुछ मांग रहा था. उसको देख ऐसा लग रहा था की उसके जिस्म पर एक वस्त्र न हो. अगर हो भी तो उस अँधेरी गुफ्फ़ में अंधेरे के कारन दिख नहीं रहा था.

"मैं तुमसे कितनी बार कहु की मेरे पास ऐसी कोई चीज़ नहीं है. मैं तुम्हे पहले भी बता चुकी हु." वो औरत चीखते हुए बोली. उसकी आवाज़ इतनी तेज़ थी की गुफ्फ़ से निकल बहार जांगले में फ़ैल गयी, और उस आवाज़ की वजह से पेड़ो पर बैठे हुए पंक्षी उड़ गए आवाज़ करते हुए. वो साक्ष भी उसकी चीख सुन हांसे लग गया. उसे हँसते हुए देख उस औरत को गुस्सा आ गया और जोर चिल्लाते हुए बोली, "पापी दुष्ट कपटी आज तेरी वजह से hi मैं यहाँ पर कैद हु. और मुझे पता है की मेरे बीटा अब तक मर चूका होगा. मुझे वो दिन भी याद hi कैसी तूने मेरी जगह उस औरत को मेरा रूप दे कर लेता दिया. और मुझे यहाँ पर ला कर कैद कर दिया. मैं आज भी वो दिन नहीं भूली."

"तुम ने तो मेरी शक्ति का नज़ारा भी देखा था उस दिन. फिर भी मुझसे नहीं दर रही हो." उस साक्ष ने हँसते हुए बोलै. चाँद आसमान में निकल चूका था उसकी रौशनी उस गुफा के ऊपर से जो छेड़ था उसमे से प्रवेश कर जब उस औरत पर पड़ी तो उसका बंदन चमक उठा. उस औरत के जिस्म को देख कर वो साक्ष पागल सा hi गया और आगे बढ़ उसकी एक उभर को कास के पकड़ जोर से मिश्र दिया. जिस वजह से उसके मुँह से दर्द भरी आवाज़ निकल गयी. "आज भी तेरे ये मांस के टुकड़े उतने hi कठोर और कोमल है, जैसे पहले थी. मैं तेरे इस जिस्म को भोग नहीं सकता, सिर्फ खेलने के सिवा. और ये उसी के वजह से है."

"तुझे मैं एक दिन अपने निचे लेकर रहूँगा. पर उसे पहले मुझे वो चीज़ चाहिए, जो उस दिन साधु ने दिया. जब तू मंदिर से निकल रही थी, अपनी इष्ट देवी की पूजा कर के." जैसे hi उस साक्ष ने ये कहा, वो औरत फिर से उस लम्हे को याद करने लगी. कैसे उसने उस भूखे साधु को भोजन कराया, जब उसने उस औरत से खाना माँगा, बदले में उसने आशीर्वाद के रूम में एक फल दिया उसको.

"बेटी तुमने इस भूखे साधु को भोजन कराया है. बेटी ये फल लेती जाओ. हाँ इसका भोग अपना व्रत तोड़ने के बाद hi करना. ईश्वर तुम्हे और तुम्हारे होने वाले बचे को समलमत रखे. वो साधु वह से चला गया. रात को व्रत खोलने के बाद सबसे पहले उस औरत ने उस फल का hi भोग गयी. उस फल को खा कर उसे ऐसा लगा ने लगा की उसने अमृत का सेवन किया हो." वो साक्ष उस औरत को सोचने में देख एक बार फिरसे आगे बढ़ और उसकी दूसरी चुकी को चूचक को पकड़ को जोर से खींच दिया. और जिस वजह से एक बार फिर से वो औरत बिलबिला उठी, उसकी शरीर में एक पीड़ा की लहार डूअड़ उठी. उसकी योनि के अंदर भी खलबली मच गयी थी पर उसके योनि से एक बून्द भी रास न निकल.

"सोचना बंद कर और ये बता उस साधु बे तुझे क्या दिया था, उस समय मेरे गुप्तचर ने मुझे बताया था की तुझे एक फल दिया था उसने. पर मुझे पता है उस फल के अंदर कोई चीज़ तो जरूर थी जो तुझे रखने के लिए दिया था." उस साक्ष ने उस औरत से पूछा. "देख आज भी मेरे सामने nir-vastr कड़ी है. और ये तेरे मादक जिस्म मुझे हमेशा पागल कर देते है, और एक भर से भड़क गया अपने लक्ष्य से."

"जब तुझे पता है hi की मुझे उस साधु ने फल दिया था. और उस फल को कब खा गयी हु. अब तुझे मैं कहा से लग कर दू." फिर से उस औरत ने अपने सामने खड़े साक्ष से बोली. और हंसने लगी. उस अब पूरा विश्वास हो गया था की उसको और उसके बचे को कुछ नहीं होगा. चाहे कोई कुछ भी कर ले उसे मरने के लिए. "मिल गया मेरा जवाब तुझे."

"आज तो मैं का रहा हु. पर फिर कल आऊंगा तेरे पास, कल तेरे साथ वो होगा जिसको कल्पना शायद तूने कभी न की हो." उस साक्ष ने कहा और फिर से उसकी दोनों चुकी को बेहरमी से दबा दिया और वह से चला गया. उसके गुफ्फ़ से जाते hi उस औरत के योनि से कॉमर्स की धार बहा निकली. योनि रास हवा में hi रुक कर इक्कठा हुआ और एक ऊर्जा रूप में ले कर वह से गयाब हो गया. यह उसके साथ 20 वर्षो से होता आया था. आज भी वही हुआ.

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नकुल अपनी क्लास में बैठा हुआ सामने देख रहा था की तभी एक लड़की आयी. और क्लास रूम के गेट के पास कड़ी हो गयी और प्रोफेसर को देखते हुए बोली, "मिस, मई ी के इन?"

"यस के एंड टेक योर सीट. गिव में योर ब्रीफ इन्फॉर्म." उस प्रोफेसर ने कहा. वो लड़की क्लास के अंदर दाखिल हुई और बोली, "hi एवरीवन I'm ज्योति ठाकुर. I'm मिस्टीरियस गर्ल. आप मेरे बारे में जितना जस्नेगे उतना hi काम लगेगा." इतना कहने के बाद ज्योति ठाकुर नकुल के सामने वाले बेंच पर बैठ गयी जहाँ पर पहले hi एक लड़की बैठी हुई थी.

प्रोफेसर एक बार फिर से पढ़ने सुर किया hi था की प्रिंसिपल आ धमकी और उसके साथ एक लड़की कड़ी थी. प्रिंसिपल और उस लड़की को पीछे देख नकुल का दिमाग hi घूम गया. उसे पहले ज्योति का समझ नहीं आ रहा था की वो यहाँ पर क्यों आयी है. अब ये आ धमकी. प्रिंसिपल को देखे प्रोफेसर ने कहा, "गुड मॉर्निंग ma'am. अगर कोई काम था तो मुझे मैसेज भिजवा देती किसी के हाथ, मैं आ जाती, आपको तकलीफ करने की कोई जरुरत नहीं थी."

"मरस. सबनम मुझे पता है. आप मेरे एक बार कहने पर आ जाती. पर मैं यहाँ पर इस बचे का ले कर आयी हु. के हेरे इशिका." प्रिंसिपल के पीछे से इशिका निकल कर सामने आयी. और क्लास में चारो तरफ देखने लगी. और उसको जो चाहिए ये एक तरफ मिल गया उसे देख उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी. "मरस. सबनम ये है इशिका और ये देहरादून से आयी है, मैं चाहती हु की आप इसे ध्यान रखे. और मैं इस लिए भी आयी थी की नेक्स्ट मंथ से स्पोर्ट्स कम्पटीशन सुरु हो रहा है. तो मैं बचो को इसके बारे में बता सकू."

"OK ma'am. आप सभी को बता दीजिये. और इशिका तुम सामने जा कर बैठ जाओ." उसके बाद इशिका एक लड़की के बगल में जा कर बैठ गयी. उसके बाद प्रिंसिपल ने स्पोर्ट्स टूर्नामेंट के बारे में सभी को बताया और उसका इंचार्ज मरस. सबनम को बना दिया. हमारा कॉलेज नेक्स्ट मंथ क्सक्सक्स शहर में क्सक्सक्स कॉलेज में जा रहा था. या वही शहर था जहाँ पर नकुल का जनम हुआ था, जहाँ इसका अपना घर था. पर सिर्फ नाम के लिए. प्रिंसिपल स्पोर्ट्स टूर्नामेंट के बारे में बता कर चली गयी. फिरसे प्रोफेसर सबनम ब्लैकबोर्ड पर पढ़ने लगी.

फ्रेंड्स एक अपडेट कल और देता हु.

तब तक आप इसे काम चला कीजिये
 
अपडेट 172

अब तक

"मरस. सबनम मुझे पता है. आप मेरे एक बार कहने पर आ जाती. पर मैं यहाँ पर इस बचे का ले कर आयी हु. के हेरे इशिका." प्रिंसिपल के पीछे से इशिका निकल कर सामने आयी. और क्लास में चारो तरफ देखने लगी. और उसको जो चाहिए ये एक तरफ मिल गया उसे देख उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी. "मरस. सबनम ये है इशिका और ये देहरादून से आयी है, मैं चाहती हु की आप इसे ध्यान रखे. और मैं इस लिए भी आयी थी की नेक्स्ट मंथ से स्पोर्ट्स कम्पटीशन सुरु हो रहा है. तो मैं बचो को इसके बारे में बता सकू."

"OK ma'am. आप सभी को बता दीजिये. और इशिका तुम सामने जा कर बैठ जाओ." उसके बाद इशिका एक लड़की के बगल में जा कर बैठ गयी. उसके बाद प्रिंसिपल ने स्पोर्ट्स टूर्नामेंट के बारे में सभी को बताया और उसका इंचार्ज मरस. सबनम को बना दिया. हमारा कॉलेज नेक्स्ट मंथ क्सक्सक्स शहर में क्सक्सक्स कॉलेज में जा रहा था. या वही शहर था जहाँ पर नकुल का जनम हुआ था, जहाँ इसका अपना घर था. पर सिर्फ नाम के लिए. प्रिंसिपल स्पोर्ट्स टूर्नामेंट के बारे में बता कर चली गयी. फिरसे प्रोफेसर सबनम ब्लैकबोर्ड पर पढ़ने लगी.

अब आगे

नकुल क्लास में बैठे हुए 4 पीरियड अटेंड किया और उसके बाद वह क्लास से निकल गया, क्योकि 2 पीरियड खली थे. जब नकुल निकल तो उसके पीछे पीछे ज्योति और इशिका भी निकल ली. वही नकुल कैंटीन में जा कर बैठ गया और रानी का इंतज़ार करने लगा. नकुल ने आते hi अपने और रानी के लिए आर्डर दे दिया था.

वही ज्योति नकुल के ठीक बगल में जा कर बैठ गयी. तो इशिका नकुल के पास जा कर कड़ी हो गयी. ज्योति ने अपने मैं में निश्चय कर ली थी, वह नकुल से तब तक नहीं बोलेगी, जब तक वह उसे अपनी बहन नहीं मान लेता या ये सिविकर नहीं कर लेता की वही नकुल है उसका भाई. नकुल इशिका को अपने सामने खड़े देख और अपने फ़ोन में लग गया जैसे वो उसे जनता hi नहीं हो.

"कैसे हो नकुल. शायद तुमने मुझे पहचना नहीं." इशिका ने खड़े रहते हुए बोली, और वह अभी तक बैठी भी नहीं थी. नकुल ने इशिका की बात सुनाने के बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दिया. "लगता है तुम्हे मुझसे बात नहीं करनी, इसलिए तुम्हे अभी तक कोई जवाब नहीं दिया."

"HI इशिका कैसी हो. यहाँ कैसे, कड़ी क्यों हो, बैठो." रानी जब कैंटीन में दाखिल हुई तो उसने अपने भाई नकुल के पास एक लड़की को कड़ी देखा तो चुपचाप चलती हुई उनके पास आ गयी. और वही नकुल इशिका की वजह से अपने फ़ोन में सर झुकाये लगा हुआ था, इसलिए उसको रानी के आने के पता नहीं चला. रानी उस लड़की चेहरे को देखा तो बहुत खुश होते हुए ये बात बोली थी.

"ओह रानी तुम यहाँ. तुम देहरादून में थी न." इशिका बोली, पर उसका ध्यान अभी ंसकुल के तरह hi था. वही रानी आगे बढ़ कर इशिका के गले लगी और फिर उसे पास में बैठा ली. "भाई आप जरा इशिका के लिए कुछ ले आओ खाने के लिए. और हाँ खुशबू अभी थोड़े देर में आ रही है." नकुल बिना कुछ कहे hi वह से उठ कर काउंटर पर चला गया और एक सॉफ्टड्रिंक और सैंडविच भेजने के लिए बोलै दिया. अपनी कॉफ़ी के कर दूसरे टेबल पर जा बैठा.

"दीदी ये आपका आर्डर." एक लड़का आ कर रानी से कहा और आर्डर रख कर चला गया. रानी ने भी कुछ नहीं पूछा उस लड़के से नकुल के बारे में. रानी ने अपनी नज़र कैंटीन में चारो तरह दौड़ाई तो नकुल को एक तरफ टेबल पर बैठा हुआ कॉफ़ी पी रहा था. "ये लो इशिका तुम्हारा सॉफ्टड्रिंक और सैंडविच."

"अब बताओ की यहाँ कैसे." रानी एक बार फिरसे उसी सवाल को दौराहया जप थोड़े देर पहले पूछी थी. इशिका भी सॉफ्टड्रिंक की एक घुट ले कर बोली, "यार क्या बताऊँ तुझे, मेरी बुआ इसी शहर में रहती है, पिछले साल से hi मुझे यहाँ पर बुला रही थी. पर मैं नहीं आयी क्योकि मैं ने वहां पर एडमिशन ले ली थी. पर इस बार उन्होंने ज्यादा hi ज़ोर देकर मुझे आया आने पर विवश कर दिया. मैं यहाँ आ गयी. मैं ने अपना एडमिशन भी इसी कॉलेज में करा लिया."

"ये क्यों नहीं कह रही की नकुल के बिना तेरा मैं नहीं लगा तो यहाँ चली आयी. उसके बारे में पता कर के." रानी ने सीधा hi बोल दिया. पर इशिका का इससे कोई मतलब नहीं था उसे तो बस नकुल के पास रहना था ताकि उसकी मदद कर सके. इसलिए वह मुस्कुराने लगी और नज़र चुरा कर बोली, "ऐसी कोई बात नहीं है रानी. मुझे पता है की उसकी पहले से गफ है."

"ओह हो तो ये बात है. तो मिस इशिका को मेरे भाई से प्यार हो गया है. कनिका भाभी के वजह से आप कुछ नहीं कर प् रही है. तोह मैं आपको बता दूँ की भाभी कुछ नहीं कहेगी. वो तो खुश hi होगी की कोई तो है जो उनकी मदद कर रहा है, हहहह हहह." रानी अपनी बात बिच में hi छोड़ कर जोर से हांसे लगी. रानी का बात जब इशिका समझ आयी तो उसकी कमर में चिकुटी काट ली. "ोोुच क्या करती हो इशिका. पता है कितना दर्द कर रहा है. मैं तो तुम्हारे फायदे की बात कर रही थी, पर तुम्हे तो....."

"हाँ हाँ मुझे पता है तू किस तरह की फायदे की बात कर रही है. अगर तेरे निचे ज्यादा चल हो रही है तो तू hi लेले अपने भाई कहा. साडी चल एक बार में hi निकल देंगे." इशिका ने मस्ती करते हुए बोली. उसकी बातो में जो शरारत थी रानी अच्छी तरह समझ रही थी और हांसे हुए बोली, "ठीक है, अगर तुझे नहीं चाहिए तो मैं hi ले लुंगी और अपनी फ्रेंड को भाई का दिलवा दूंगी. जब देखा है तब से hi पीछे पड़ी हुई है."

"हाँ हाँ दिलवा दियो. ये सब छोड़ ये बात कहा पर रह रही है. और आंटी और हीना कैसी है." इशिका ने कहा.

"यार मैं तो अभी खुशबू के घर पर हु. मुझे एड्रेस भी ठीक से पता नहीं. ऐसे कर ये no क्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्सक्स78 ये हीना का है. उसे बात कर पूछ लेना. और घर पर सब ठीक है."

"चल ठीक है. मैं चलती हु. तेरा भाई मुझे देख कर, देख कहा जा कर बैठा है, जैसे मुझे जनता hi नहीं. थैंक्स फॉर गिविंग no." इशिका इतना कहने के बाद वहां से चली गयी. पर जाते हुए नकुल से मिलकर bye करते गयी. वही इशिका के जाने के बाद रानी अपने भाई के पास आ कर बैठ गयी.

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"प्रिय तुम ने पता किया की नकुल आज कल कहा रहे रहा है. मैं और बर्दास्त नहीं कर सकती. देख मेरी हालत क्या हो गयी है." चांदनी रावत प्रिय के साथ अपने रूम में बैठी हुई थी और अपनी पंतय निचे कर उसमे से विषपर पद निकल कर दिखते हुए बोली. वो पद पूरा भीग चूका था अगर कोई उसे निचोड़ता तो काम से काम आधा कप पानी जरूर निकलता. चांदनी रावत दिन भर में ऐसे काम से काम 8 विषपर पद बदल देती थी या इसकी संख्या बढ़ भी जाती

"मैं ने पहले hi तुझे समझया था की उसे पन्गा मत ले. पर तेरी बूर में आग लगी थी न, जो अपने बाप को देख कर भड़क उठी और उसके बारे में जा कर शिकायत कर दी." प्रिय गुस्सा होते हुए बोली. उसका गुस्सा होना भी जायज था क्योकि उसकी hi वजह से प्रिय आज नकुल से नहीं मिल सकती थी और अपने बूर की आग शांत नहीं करा सकती थी. उसकी माँ 2 दिन पहले hi वापस नैना को ले कर अपने शहर चली गयी थी. "क्या हुआ, न तेरा बाप उसका कुछ कर सका, न तू. उलटा उसने hi दोनों बाप बेटी की गांड और छूट मर ली. यहाँ तक तेरी माँ को भी ले कर चला गया था. सोच क्या तेरी माँ को छोड़ा होगा. जरूर कुछ न कुछ किया होगा. तभी तो तेरी बात को न मान कर उसकी बात को मान रही है."

"अब तुहि बता मैं क्या करू. अगर 2 दिन के अंदर नकुल ने मुझे नहीं छोड़ा तो मैं मर जाउंगी या मुझे रंडी खाने जाना पड़ेगा अपनी बूर को संत करने के लिए." चांदनी रावत रट हुए बोली. सच में hi उसकी हालत बहुत hi खराब हो गयी थी. अब इसका एक जी इलाज था वो था नकुल या फिर अपने आपको रंडी बना देना.

"तू नकुल की रखेल बन जा. फिर वो तेरी ये हालत ठीक कर देगा. अगर वो नहीं मन तो मैं खुद उसके निचे आ जाउंगी. ताकि वह तेरी आग शांत कर सके." प्रिय एक कुटिल मुस्कान उसके चेहरे पर तैयार गयी, अपनी ये बात कहते हुए. उसे अब विश्वास था की चांदनी नकुल रंडी बनाने के लिए तैयार no जाएगी. "क्या सोच रही है. अगर तेरी हाँ है तो मैं नकुल से बात करू."

"ठीक है. मैं उसकी पर्सनल रंडी बनाने को तैयार हु. और तुझे उसके निचे आने की जरुरत नहीं है. पिछले बार भी मेरी वजह से तुझे वो सब झेलना पड़ा. मैं नहीं चाहती की फिर वो सब तू झेले." चांदनी रावत की बात सुन प्रिय अपना फ़ोन निकल नकुल को लगाने लगी. प्रिय कई बार उसके सामने hi उसके बारे में बात कर चुकी थी. इसलिए चांदनी को प्रिय पर सक नहीं था नकुल ने hi प्रिय को ऐसा करने को कहा था. "तू फ़ोन बाद में कर लेना. पहले मेरी इस छूट कर कुछ कर, तब से hi तो रही है."
 
विल्लन पृथ्वी पर आज़ाद नहीं हुआ था बल्कि वह कही और हुआ था पर इसका प्रभाव पृथ्वी के साथ कही और ग्रहो पर पड़ा

खुशबू ने ये बात अपने गुरु से इस लिए नहीं बताई क्योकि ये बात उन्हें भी पता चल गयी थी, की वह आज़ाद हो गया है, जब की खुशबू को सिर्फ अनुमान था की कुछ बुरा हुआ है, पर क्या ये उसे नहीं पता था, उसने मैं में ये सोच की सुबह पता लगाएगी. पर नेक्स्ट सब नार्मल hi था.

थैंक्स बीआरओ फॉर गिवेन योर िम्प्ट टाइम्स फॉर माय स्टोरी

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