Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta - Page 12 - SexBaba
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Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta

हाहाहा

कैसा रहा ट्विस्ट... कहाँ लिखा मैंने ऐसा कुछ.. जिससे लगे सिरमन और दिनेश की शादी हो गई है. अभी तोह बहुत कुछ सामने आएगा बीआरओ.. कुछ बी गलत नहीं हुआ.. राथेर बहुत कुछ बढ़िया हुआ है... जान्ने के लिए कुछ वेट करना पड़ेगा..

हाहाहा... सब कन्फूसिओं दूर होंगे वह भी जल्द hi..

वह कहते हाँ न.. जो दिखा है, वह होता नहीं. और जो होता है वह दीखता नहीं..

यहाँ भी कुछ hi सन है... :स्मार्ट्म:
 
अरे भाई.. ये सुसप है

मेरे पहले के कमैंट्स के रिप्लाई भी रीड कर लें यारा.. सब समझ में आ जायेगा..

क्या होगया है सभी रीडर्स को.. सब एक जैसा hi क्यों सोचने लगे.. ऐसा कैसे हो सकता है. स्टोरी साडी कैसे बदल सकती है.. स्टोरी आप सबके लिए hi तोह लिख रहा हों. और आप सब के लिए स्टोरी को स्पेशल बनाने के लिए ऐसा मैंने किया है.. यक़ीनन ऐसा टर्न आज तक आपको किसी दूसरी स्ट्रोय में देखने को नहीं मिला होगा.

इसलिए ऐसा बोल रहे हाँ...

जो आप समझ रहे हाँ, वैसे कुछ भी नहीं है मेरे भाई.. तीन महीनो से आप स्ट्रोय के साथ जुड़े हुए हाँ. कैसे आप सब के लिए स्टोरी का सत्यानाश किया जा सकता है.. स्टोरी में वह सब कुछ है. को आप चाहते हाँ. बस कुछ सुसप रख दिए है मैंने.

अब हर राइटर का अपना एक अंदाज हुआ करता है. मेरा अंदाज सबसे अलग था तोह आपको परेशानी होने लगी :)

don't बे डिसअप्पोइंटेड भाई..
 
सिमरन ने कहा था...

राज उसकी लाइफ में रहे या न रहे.. पर राज के शिव कोई और मर्द कभी भी किसी भी हाल में उसकी लाइफ में नहीं ा सकता.. राज इकलौता मर्द है उसकी लाइफ में आने वाला...

कहानी में ट्विस्ट आते देख क्र बहुत से रीडर्स का मैं ख़राब हो गया :लॉघकलप:

कहानी सही से पढ़ नहीं रहे हो आप सब क्याआ.. ????


जो दीखता है, वह होता नहीं..

और जो होता है, वह दीखता नहीं..
 
104

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फ्लैशबैक

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राज के लुंड का सुपड जब अनीता के छूट के छेड़ में फंसा तोह राज का लुंड दिशा के हाथ में था.

जहाँ अनीता पूरी जान से चीख पड़ी थी. दर्द से बिलबिला उठी थी. वहीँ दिशा अपनी दीदी की छूट को खुलता देख कर बहुत ज़यादा खुश हो गई थी..

राज का लुंड अनीता की छूट में घुसा तोह

अनीता-- aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh marrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

वही दिशा राज का लुंड छोड़ कर बेपनाह ख़ुशी के साथ उछालते हुए

दिशा-- yaaaaaaaaahhooooooooooo दीदी की छूट में एक लुंड घुस गया.. ी सो हैप्पी टुडे.

राज दोनों को बारी बारी देखने लगा. अनीता अपने दर्द को भूल कर दिशा को देखने लगी. अभी उसकी सील नहीं टूटी थी. अनीता के चेहरे पर दर्द के भाव थे तोह उसके होंटो पर दर्द भाई मुस्कान आ गई. मुस्कान बेपनाह ख़ुशी लिए हुए थी..

राज-- हाहाहा.. क्या सन है.. एक बेहेन लुंड लेके चीख रही है. तो दूसरी बेहेन अपनी बेहेन की छूट में लुंड घुसवा कर चहक रही है..

अनीता शर्मा गई तोह दिशा चहकते हुए राज के होंटो को अपने होंटो में ले गई. बड़ी शिद्दत के साथ वह राज होंटो को चूसने लगी..

कुछ देर बाद उसने राज के होंटो को छोड़ा और फिरसे राज के लुंड को थाम लिया..

दिशा-- जीजू एक बार फिरसे धक्का मारो न प्ल्ज़.. दीदी की सील अभी नहीं खुली है..

राज-- okay..

राज ने अनीता को देखते हुए उसकी कमर को कसके पकड़ते हुए फिरसे धक्का मर दिए. और इस बार का धक्का अनीता के होश गम कर देने क लिए बहुत था.

अनीता फिरसे हलक़ पहाड़ कर चीख पड़ी. दिशा ने अपनी दीदी छूट की सील खुलते देखि, छूट से बहार निकल रहे खून की बूंदो को देखा तोह फिरसे ख़ुशी के मारे चीखने लगी..

राज रुक कर फिरसे दोनों को देखने लगा. एक कराहने लगी तोह दूसरी ख़ुशी से झूम रही थी..

राज-- बड़ी अजीब हो तुम दिशा..

दिशा फिरसे निचे बैठी और राज के लुंड पर हाथ फेरते हुए.. जीजू जी आपका लुंड बड़ा मस्त है. कितना दर्द दे रहा है दीदी को..

अनीता-- दिशा की बच्ची तुम मेरे दर्द पर भी इतनी खुश हो रही हो..

दिशा-- क्या करूँ दीदी. बरसों पुराण सपना आज पूरा हुआ है.. जीजू एक धक्का और मारो न

अनीता दर गई-- नं.. नहीं नहीं राज.. प्ल्ज़ कुछ देर के लिए रुक जाइये..

दिशा-- नहीं जी दीदी.. अभी रुके तोह बाद में ज़यादा दर्द होगा.. जीजू सारा दाल के रुकना प्ल्ज़.. मुझे सारा लुंड दीदी की छूट में देखना है.

राज-- अनीता जी मुझे लगता है, दिशा आपकी दुश्मन है

अनीता-- हाँ मुझे भी आज पूरा पूरा एहसास हो रहा है

दिशा-- ेहेहेहे.. हों दुश्मन आपकी.. अब खुश.. चलो जीजू.. मुझसे अब और वेट नहीं होता..

राज हस्ता हुआ अनीता की छूट में फंसे अपने लुंड को देखने लगा.. जिस पर दिशा बड़े प्यार से हाथ फेर रही थी...

राज ने अपने लुंड को हिला कर थोड़ा सा पीछे खेंचा तोह अनीता फिरसे दर्द से कराह उठी.

राज ने तीन धक्के और मार कर पूरा लुंड अनीता की छूट में उतार दिए था. हर धक्के पर अनीता चीख पड़ी थी तोह दिशा ख़ुशी से उछाल पड़ी थी...

सारा लुंड अनीता की छूट में देखा तोह दिशा लेट क्र अनीता की छूट को चाटने लगी.. एक हाथ से उसके निप्पल्स को मरोड़ने लगी..

ऐसे वह अपने मज़े भी कर रही थी और अपनी दीदी की छूट के दर्द को भी काम कर रही थी..

कुछ देर में अनीता शांत हो गई..

दिशा उठी और राज को किश करने लगी.. फिर वह अनीता के मोह पर अपनी छूट रख कर बैठ गई.

अनीता अब सुकून से थी. वह दिशा की छूट चाटने लगी.. राज दोनों को मज़े करते देख कर अपने लुंड को पीछे खेंचने लगा..

कुछ देर में राज का लुंड अनीता की छूट में रवानी से अंदर बहार हो रहा था. खून के साथ साथ राज के लुंड पर अब अनीता की छूट का पानी भी लगा हुआ था..

दिशा बहुत बेचैन होने लगी. वह राज के लुंड को अपनी दीदी की छूट में उतारते हुए देख रही थी.. अनीता के उसकी छूट चाटने से भी उसके अंदर बहुत बेचैनी बढ़ने लगी थी.. दिशा एक हाथ से क्लीट को मसलने लगी तोह दूसरे हाथ से अपने दूध को दबाने लगी..

राज उसे देखता हुआ अब कुछ स्पीड से अनीता को छोड़ रहा था. राज की बढ़ती स्पीड दिशा को और भी पागल करने लगी.

हालत तो अनीता की भी बहुत ख़राब होने लगी थी.. राज का लुंड उसे एक नयी hi दुन्या में पोहंचा रहा था. जहाँ से हसीं मनज़र उसे पागल कर रहे थे. ऊपर से वह दिशा की छूट के भी मज़े ले रही थी..

उसकी भी बेचैनी बढ़ने लगी..

राज-- दिशा ऐसे hi अपनी दीदी से छूट चटवा कर झड़ना चाहती हो.

दिशा शराबी अंदाज़ में-- क्या करूँ जीजू.. अब सहन नहीं हो रहा..

राज-- अनीता जी जल्द hi झड़ने वाली है. फिर तुम्हारी छूट में लुंड दाल कर निकल देता हों पानी.

दिशा सुनकर खुश हो गई. वह उठी और साइड बेथ कर चुदाई देखने लगी..

अनीता-- उफ्फफ्फ्फ़ राज जी, कैसा मज़े दे रहे हाँ आप.. हम्म्म मैं पागल हो जाऊँगी राज..

दिशा-- जीजू थोड़ी स्पीड और बढ़ाएं न

राज ने स्पीड बधाई तोह अनीता-- आह्हः ओह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है मुझे. उफ्फ्फफ्फ्फ़ कितना मज़े भी आ रहा है मुझे.. ओह्ह्ह मायआ मैं तोह गई

अनीता की सहन शक्ति जवाब देने लगी. राज की स्पीड और भी बढ़ी तोह कुछ hi देर में अनीता सिसकते हुए झटके खाने लगी..

टाइट छूट में सख्त लुंड अनीता के छक्के छुड़ाए हुए था. कितनी देर सहन करती अनीता..

उसकी छूट खन के साथ साथ भल भल पानी भी छोड़ने लगी..

दिशा अपनी दीदी के साथ hi घोसी बन गई और बैक साइड से अपनी छूट को रब करते हुए सेक्सी अंदाज़ में राज को देखने लगी..

राज-- आ रहा हों दिशा डार्लिंग..

दिशा-- देखो जीजू, कैसे मेरी छूट की फंखे कुलबुला रही हाँ.. घुसा दें अपना बड़ा लुंड मेरी छूट में..

राज-- क्यों गांड में नहीं लोगी तुम..

दिशा-- किन नहीं लूंगी जीजू.. मैं तोह हर छेड़ में लुंगी. पर पहले मुझे छूट में लेना है. एक बार मुझे लुंड से शांत कर दें. फिर जहाँ मैं करे, दाल कर छोड़िये मुझे..

राज अपना लुंड थाम कर दिशा के पीछे हुआ. छूट के लिप्स को अपने लुंड से खोलता हुआ छेड़ पर सेट करने लगा.

राज ने थोड़ा सा दबाओ बढ़ाया तोह उसे दिशा की छूट भी कुछ टाइट लगी.. राज समझ गया, विराट का लुंड किस साइज का होगा..

राज ने थोड़ा सा दबाओ और बढ़ा कर धक्का मार दिए.

दिशा-- आह्ह्ह्ह जीजू.. थोड़ा और ज़ोर से धक्का लगाएं न.. राज ने दिशा की छूट में भी खूब मज़ा आने लगा था. जूसी छूट में अनीता के चुतरस से सना लुंड घुसा तोह राज के डबल मज़े हो गए थे..

राज ने फिरसे एक ज़ोर दर धक्का मारा तोह उसका लुंड 6इंच तक दिशा की छूट में उतर गया..

दिशा भी चीख पड़ी-- आह्हः जीजू आपके लुंड बहुत मोटा है.. अब पता चला दीदी क्यों इतना चीख रही थी. उफ्फफ्फ्फ़ जीजू बहुत मज़ा है आपके लुंड में..

राज -- अभी सारा नहीं गया है दिशा डार्लिंग

दिशा-- क्या..?

राज-- हाँ

दिशा- जीजू! तो डालें न सारा लुंड मेरी छूट में.. मुझे भी पूरा पूरा दर्द और मज़े लेना है. मुझे भी फिरसे ऐसा फील करना है, जैसे आज पहली फर्स्ट नाईट है

अनीता हस्ते हुए-- आज तुझे भी नानी याद आ जाएगी

दिशा-- अछि बात है न दीदी.. ऐसे तोह याद आने से रही..

राज -- तोह फिर आज तुम्हे नानी के साथ साथ और भी कैयो की याद दिला देते हाँ.

दिशा-- हाय जीजू, क्यों बातो में टाइम व्यस्त कर रहे हाँ.

राज ने दिशा की चिकनी कमर को और भी कसके पकड़ लिया और एक ज़ोर का धक्का मार दिए..

पूरा लुंड दिशा को बेपनाह दर्द देता हो अंदर जा घुसा..

इस बार दिशा चीखी और अनीता लेते लेते हुए हसने लगी..

दिशा की आँखों में आंसू आ गए थे..

अनीता ने हथेली निचे करते हुए दिशा के आंसू अपनी हथेली पर ले लिए-- क्यों मेरी जान, अब पता चला असली खेल क्या होता है.

दिशा रट हुए हाँ में सर हिलने लगी.

राज अपने काम में लगा था. उसकी स्पीड धीरे धीरे बढ़ने लगी. पहले से खुली छूट और भी खुली होने लगी. अनीता दिशा के लटक रहे चुके मसलने लगी. तोह राज लुंड से दिशा की ठुकाई करने लगा

जल्द hi दिशा फॉर्म में आने लगी..

दिशा-- ओह्ह्ह जीजू.. यू अरे थे बेस्ट फूंककर.. yes...yes...fuck में हर्डर..

अनीता-- हेहेहे

राज-- ओह्ह्ह अंग्रेज की बच्ची..

दिशा-- यस.. जीजू.. मॉनिंग का असली मज़ा ेहलिश में hi आता है.. आह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह जीजू i'm किंग सो हार्ड.. फ़क में हर्डर जीजू..

दिशा अपनी गांड बड़ी स्पीड से हिला कर मोइंग करने लगी थी.. पहले से hi बेचैन थी.. बड़े लुंड ने उसकी छूट की ठुकाई जारी राखी तोह मज़े से पागल होने लगी..

उसकी छूट का जूस बढ़ने लगा. कुछ देर में राज की स्पीड और भी बढ़ी तोह दिशा खटको की लपेट में आने लगी..

कुछ देर बाद वह भी सिसकते हुए झाड़ गयी..

दिशा हप्ते हुए-- uffffffffff.. दीदी ये मेरी लाइफ की सबसे बढ़िया चुदाई थी. कसम से विराट से भी मुझे इतना मज़ा नहीं मिला..

राज ने एक हल्का सा थप्पड़ दिशा के गांड पर मार दिए-- तुम भी बड़ी रसीली हो दिशा. मज़ा आ गया तेरी छूट छोड़ के..

दिशा अपनी सांसे दुरस्त करते हुए-- दीदी की छूट में hi झड़ना जीजू..

राज समझ गया दिशा क्या कहना चाहती है.. लुंड के माल का असली एहसास अनीता को होना ज़रूरी था. वर्ण उसे चुदाई का असली मज़ा नहीं मिल पता..

राज फिरसे अनीता की छूट में लुंड डाले छोड़ने लगा.. अनीता जिसकी छूट अब सूजने लगी थी. उसे दर्द का एहसास होने लगा था.

वह कुछ देर कराहती रही. राज के लुंड की रगड़ से वह जल्द hi फिरसे गर्म होने लगी तोह दर्द को भूल कर मज़े लेने लगी.. राज इस बार अनीता के चुके पिता हुआ अनीता को छोड़ रहा था..

अनीता फिरसे झड़ी तोह राज का लुंड भी जवाब देने लगा था. जैसे hi अनीता झड़ी, उसे समय राज के लुंड ने भी अनीता जी की छूट में उलटियां करनी शुरू कर दी..

अनीता पहली बार छूट के अंदर गरमा गर्म माल ले रही थी. गर्म गर्म माल का एहसास पाते hi वह नशे में होने लगी..

कुछ देर में वह गेहटी नींद जा सोइ थी..

राज-- अनीता तोह सो गई.

दिशा अपनी दीदी को नींद में देख कर उसके गाल पर किश करती हुई. सोने दे. लाइफ में पहले बार चैन की नींद मिली है सोने को..

राज दिशा को किश करके उठा और बाथरूम में जा घुसा..

आज राज बहुत थक गया था. तीन छूट छोड़ी थी उसने. पर लुंड का माल ज़यादा बार निकल गया था. उसे कुछ थकन का एहसास तोह कुछ भूक का एहसास होने लगा..

राज नहाने के बाद रूम से बहार निकल गया.. दिशा दूर को अंदर से लॉक करके बाथरूम में जा घुसी...

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प्रेजेंट

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कुछ दिनों बाद रात के समय राज सो रहा था तोह उसे अपने ऊपर वज़न महसूस हुआ.. राज की आंख खुल गई. राज ने रख तोह मनोरमा उसके ऊपर चारि हुई थी.. राज के गालो पर किश कर रही थी. कभी कभी होंटो पर भी कर देती थी..

राज ने लेफ्ट हैंड से मनोरमा के गालो को छूटा तोह मनोरमा जो ऑंखें बंद किये राज के नशे में थी. ऑंखें खोल कर राज को देखने लगी.

जैसे hi उसे पता चला तोह मनोरमा शर्मा कर राज के ऊपर से उठने लगी..

राज-- कहाँ उठ के जा रही हो मेरी जान.

मनोरमा और भी शर्म से लाल होने लगी

राज-- तुम्हारी यही अदाएं मुझे खुद से बेगाना करने लगती हाँ मैंने मेरी जान.

राज धीमे से बड़े प्यार से बोलै तोह राज के रास घुलते शब्द मनोरमा को अपनी नस नस में उतारते हुए महसूस होने लगे..

मनोरमा ने राज की आँखों में देखा और स्पीड के साथ एक किश करके उठ कड़ी हुई. और दूर कड़ी होकर राज को ठेंगा दिखने लगी..

राज हसने लगा तोह मनोरमा भी हलके से है कर कुछ फैसले पर पड़ी खटिया पर लेट गई..

मनोरमा ने जान बूझ कर दूसरी और मोह कर लिए था..

राज-- मेरी और देखो न

मनोरमा-- नहीं मुझे शर्म आती है.

मनोरमा के अंदर में अब शोखी थी.

राज-- बड़ी आई शर्म वाली.. इतनी बेशरम लड़की मेने पहले कभी नहीं देखि..

मनोरमा एक दुम्म से पलट कर राज को देखने लगी.. वह ग़ुस्से से राज को देखने लगी-- मतलब क्या है तुम्हारा राज

राज-- मतलब का तोह पता नहीं. पर तुम हो बड़ी बेशरम..

राज उसे छेड़ते हुए बोलै तोह मनोरमा उठ कर राज की खटिया पर जा पोहंची. उसी समय राज ने लेफ्ट बाज़ो उसके गिर्द लपेट दिए.. राज मनोरमा को स्माइल से देखने लगा.

मनोरमा अब समझी, राज ने ऐसा क्यों बोलै था. खुद को राज की पकड़ में देख कर वह फिरसे शर्मा गई..

मनोरमा- तुम वह बड़े हो..

राज-- क्या वह

मनोरमा राज की आँखों में देखती नाह में सर हिलने लगी..

मैं में boli-kaise कहूं में तुमसे राज. तुम बड़े हरामी हो..

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फ्लैशबैक

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राज फ्रेश होक बहार निकला तोह सभी के पास जा पोहंचा.. वहां सोनिआ राज को देख कर चीख पड़ी

"पापा आ गए"
 
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फ्लैशबैक

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सोनिआ : पापा आ गए..

राज को देख कर सोनिआ दीपिका की गॉड से निकल कर भागना hi चाहती थी. दीपिका ने उसकी कलाई पकड़ ली.

दीपिका- अब कहाँ चली.. पापा के आते hi हमारी वैल्यू ख़तम.

सब है पड़े तोह राज भी हस्ता हुआ वहीँ दीपिका के बाजु में जा बैठा.

सोनिआ-- नहीं आंटी.. मेने ऐसा तो नहीं कहा.. सोनिआ कुछ कंफ्यूज हो गई थी.

राज ने उसका दूसरा हाथ पकड़ लिए.. मैं हों तुम्हारे साथ. ये भी तोह ख़ास हाँ न.

सोनिआ-- हाँ पापा आंटी बहुत अच्छी हाँ. सब बहुत अचे हाँ. मुझे सब बहुत प्यार कर रहे हाँ.

राज इधर उधर देखता हुआ-- छोटू कहा है

सोनिआ-- वह नहीं है

राज-- क्यों.. कहाँ गया वह

सोनिआ दीपिका का मोह देखने लगी

दीपिका है पड़ी-- उसे तेरे हरामी दोस्त ले गए हाँ. वह भी छोटू को देख कर मचल गए थे. छोटू के साथ छोटे बने खेल रहे हाँ.

वहां सब थी. सब हसने लगी.

राज ने अंजलि को देखा और बेशर्मो वाला इशारा कर दिए.. अंजलि शर्मा कर मोह घुमा गई. उसके होंटो पर स्माइल भी आ गयी थी.

आरती साथ बैठी थी. वह अंजलि की चीन को थाम कर बोली-- अपने पति से शर्माना hi चाहिए. हाय कितनी पायरी लग रही हो आप दीदी.

भावना-- कुछ देर बाद बताना दीदी.. दीदी अब भी सुंदर हाँ, ye(raj को देख कर) दीदी की सुंदरता को ग्रहण लग जायेगा

दोनों बड़े धीमे अंदाज़ में बात कर रही थी. सोनिआ पास थी तोह उसे सुनाई न दे.

राज-- बड़ी भूक लगी है. खाने को क्या है घर में..

दीपिका-- कुछ भी नहीं. आज तोह सबके हिस्से में खाना कुछ अलग किसम का है.. तुम्हे कैसे भूक लग सकती है. इतने स्पेशल किसम की डिशेस खाने को मिल रही हाँ तुझे..

सोनिआ-- पापा मुझे भी वह साडी डिशेस कहानी है..

सोनिआ की बात पर हंसी का तूफ़ान hi आ गया.. राज ने सोनिआ को पकड़ कर अपनी गॉड में बिठा लिया.. सोनिआ हैरानगी से सबको देखने लगी.

दीपिका-- बिन्नी को बोल दिए था. ऑनलाइन आर्डर द्वारा खाना आएगा आज. आज सब बहार का खाएंगे.

सोनिआ-- याहो फिर तोह मैं भी खाओगी

राज-- हाँ हाँ तुम्हे तोह मैं अपने हथु से खिलाऊँगा..

सोनिआ-- पापा फिर आप कैसे खाएंगे..

राज-- तुम मुझे अपने हथु से खिला देना.

सोनिआ खुश हो गई..

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निहारिका (दिनेश एल्डर सिस्टर) -- दिनेश मैं तुम्हारे लिए दुन्या की सबसे सुंदर लड़की ढूंढ निकलूंगी. सिमरन को भूल जाओ मेरे भाई.

दिनेश अजीब सी नज़रों से अपनी दीदी को देखने लगा-- दीदी आप जानती है, मैंने कभी ज़िद नहीं की. जो मुझसे प्यार करता है, मैं उससे कहीं बढ़कर प्यार करता हों. आज तक मैंने किसी लड़की की और आकर्षित भी नहीं हुआ. सिमरन hi क्यों मुझे पसंद आई. सिमरन की और hi क्यों मैं इतना आकर्षित हुआ. दीदी मैं नहीं जनता, क्यों सिमरन मुझे इतनी भा गई है. क्यों वह मेरे दिल में वहां जा बसी है. जहाँ पहले कभी कोई नहीं बस सकीय.. दीदी मैं ज़िद्दी नहीं हों. पर सिमरन के शिव मैं किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकता.. सिमरन नहीं तोह कोई और भी नहीं. सिमरन मेरी न हुई तोह मैं नहीं जनता मैं क्या कर जाऊँगा. सिमरन का चेहरा मेरी नज़रों से दूर हत्ता hi नहीं है.

निहारिका अपने भाई को देख दीपपरेसेड होने लगी. उसका भाई ऐसा कभी नहीं था. वह तोह सबपर प्यार लौटने वाला था. यहाँ भी सिमरन को लेके भी वह प्यार की hi भाषा में बात कर रहा था. पर प्यार का ये रंग देख कर निहारिका के अंदर हलचल मच उठी थी.

सिमरन की आवाज़ सुनकर, उसके शब्द सुन और जान कर उसे ख़ुशी भी मिली थी. सिमरन कैसी नेचर और कैसे इरादों वाली लड़की है. ये भी वह जान गई थी. सिमरन एक शादीशुदा लड़की है. वह राज के शिव किसी और की और धयान नहीं दे सकती. ये भी वह बहुत अच्छे से समझ गयी थी.

सिमरन आम लड़कियों जैसी होती तोह वह अपने भाई के लिए कुछ भी कर जाती. पर राज और सिमरन का मटर बहुत अलग था. वह कुछ भी नहीं कर पाएगी. ऐसा उसे अंदाज़ा हो गया था..

अपने भाई के हाथ को थाम कर वह धीरे से बोली- भाई हमारे परिवार में बहुत प्यार है. दुःख क्या होता है, हमने आज तक नहीं जाना. और जानना भी नहीं चाहती. भाई तुम क्या करोगे मैं नहीं जानती. पर इतना कहूँगी, कुछ भी ऐसा मत करना, जिससे सबकी लाइफ में हलचल मच उठे. कहीं ऐसा न हो, बरसों से जो परिवार खुशियों में जी रहा है.. उसकी लाइफ के आगे के सभी पल दुखो में बदल जाएँ. मैं भगवन से यही प्रार्थना करुँगी, भगवन मेरे भाई को सदा खुश रखे. मेरे भाई की को भी मंज़िल हो, जो भी गोआल हो, भगवन मेरे भाई को सफलता दे. अगर सिमरन का साथ तुम्हारे नसीब में लिखा है. तोह कुछ ऐसा हो, किसी का भी दिल न दुखे. दुःख हमें मिलें या सिमरन या राज को मिले. सिमरन या राज के परिवार के किसी सादड़ी को मिले. वह दुःख वह दर्द भी तोह हमारा hi दर्द होगा. हम न खुद को दुखो में घिरा देख सकते हाँ और hi किसी को..

निहारिका रोने लगी थी.. दिनेश अपने फैसले पर अटल रहते हुए अपनी दीदी को अपने सीने से लगा गया..

दिनेश- दीदी मैं नहीं जनता, मैं सिमरन को पाने के लिए किस हद तक जाऊँगा. पर मैं आपसे वडा करता हों. कुछ भी ऐसा नहीं करूँगा, जिससे आप सब का सर शर्म से झुक जाए. मैं तोह अपनी लाइफ से सबसे बड़ी ख़ुशी को प्राप्त करने के लिए सिमरन को अपनी लाइफ में शामिल देखना चाहता हों. अगर सिमरन मेरी ज़िन्दगी में आती है. और ऐसे अंदाज़ में आती है कह आप सब मुझसे दूर हो जाएँ तोह दीदी मैं ऐसा नहीं चाहता. जैसे सिमरन मेरे लिए ख़ास हो गई है. ऐसे hi आप सब भी मेरे लिए ख़ास हाँ. मैं बुरा इंसान नहीं हों दीदी. बस क्या करूँ, सिमरन के मामले में मैं ऐसा हो गया हों. ऐसा बन गया हों.

वहां और भी कई फॅमिली मेंबर्स आ गए थे. सब दिनेश और निहारिका की इमोशनल बातें सुनकर आंसू बहाने लगे.

दिनेश मम्मी -- दिनेश बीटा तू हम सब की आँखों का तारा है. हम सब एक दूसरे के साथ जुड़े हुए है. हममे से किसी को भी कुछ होता है तोह दुःख भी हम सभी को एक सम्मान मिलता है. इस खुशियों भरे परिवार में किसी की आँखों से दुःख दर्द के कारण आंसू बहे.

सब और भी इमोशनल हो गए.. दिनेश ऐसे सबसे वेड करने लगा.

वह जान कर भी अनजान बना हुआ था. जैसी मंज़िल का उसने चूसे किया था. उस मंज़िल को प्राप्त करने के लिए उसे किस हद तक जाना पद सकता है.

अभी तोह वह खुद से, सबसे वडा कर रहा था. बिना किसी को दर्द दिए hi वह अपनी manzil(simran) को पाने की छह दिल में पाले हुए था. ऐसा होना आसान नहीं था.

उसका लास्ट ईयर चल रहा था. वह अपना आखरी साल पिछले गुज़रे लास्ट सालों से भी बढ़िया बिताना चाहता था. इस बार वह और भी लगन से अपनी स्टडी में बिजी हो गया था. सिमरन को पाने के लिए भी उसे एक सक्सेसफुल इंसान के रूप में सामने आना था. अपने कुछ फ्रेंड्स और आदमियों को उसने राज और सिमरन के लिए मसरूफ कर दिए था.

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खाने के बाद सोनिआ आराधना और चची के साथ सो गई थी. दिशा छोड़ू के साथ अनीता के रूम में थी..

एक बड़े कमरे में नंदनी के साथ साथ दीपिका, भणवा, आरती और अंजलि भी मौजूद थी..

रूम में सब नंगे थे. राज चाट पते मसाले दर खाने खा कर फिरसे गर्म हो गया था. वह नंगा था और उनका लुंड कोहराम मचने के लिए तैयार था..

दीपिका यहाँ पर दिशा वाला रोले निभाने के लिए मौजूद थी. नंदनी बढे हुए पेट के साथ छूट के गीलेपन से परेशान थी. दीपिका ने एक hi रात में सबको निपटा देने का सोच लिया था. खुद सुकून से राज के साथ मज़े करने के मूड में थी..

दीपिका ने अपने लिए अलग से और स्पेशल से कुछ करने का मैं बना लिया था.. दीपिका जहाँ राज से कभी परेशान रहा करती थी. वहीँ अब वह राज को के बहुत से प्लान बनाये हुए थी. वह अपनी फर्स्ट नाईट या कहें तोह फर्स्ट टाइम बहुत स्पेशल बना देना चाहती थी.

सब का लुंड सबको नंगा देख कर झटके पर झटके खाये जा रहा था. सबसे पहले नंबर अंजलि का था. तोह शर्म से उसका चेहरा लाल होने लगा था..
 
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फ्लैशबैक

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मैं अंजलि दीदी के ऊपर लेता हुआ उन्हें किश कर रहा था. मेरा लुंड अंजलि दीदी की छूट पर दबा हुआ था. उनके चुके मेरे चौड़े सीने के निचे दबे हुए थे.

कुछ देर की जारी किश ने दीदी की जीजाक ख़तम कर दी थी. दीदी मस्त होक किश में मेरा साथ दे रही थी.. दीदी के दोनों हाथ मेरे पीठ को सेहला रहे थे तोह निचे से उनकी छूट भी हीट छोड़ कर मेरे लुंड को और भी गरमा रही थी.

दीदी सच में अपने पहले मिलान के लिए बहुत बेताब थी. अब तक तोह उनके साथ बिना उनकी मर्ज़ी के hi सब करता आया था.

अब पहली बार वह खुद के मैं से, पुरे मैं से मज़े कर रही थी.. किश टूटी तोह मैं अंजलि दीदी की अंकों में देखने लगा. दीदी भी मेरी आँखों में देखने लगी.

बड़ी चमक आई गई थी दीदी की आँखों में. बड़ी खुश दिख रही थी दीदी.

मैंने एक हल्का सा किश और दीदी के होंटो पर किया तोह दीदी ने भी सर उठा कर मेरे होंटो पर किश कर दिए..

अंजलि- आज लाइफ में पहली बार मज़ा आया राज.

राज-- और मुझे भी आपके साथ आज किश कर भरपूर मज़ा आया मेरी जान.

मैं निचे हुआ और दीदी को चूमता हुआ बूब्स पर आ पोहंचा. दीदी के बूब्स 36 साइज के थे. गोर चित्ते और निप्पल्स गुलाबी.

मैं एक निप्पल्स को मोह में भर कर चूसने लगा तोह दूसरे को बूब्स को थमने hi वाला था. भावना बोल पड़ी-- इसे मेरे लिए छोड़ दो. आज मुझे भी तुम्हारे साथ मिलकर दीदी का दूध पीना है.

मैं और दीदी दोनों स्माइल कर गए.. भावना भी झुकी और दीदी के दूसरे निप्पल मोह में भर कर चूसने लगी.

अंजलि-- राज बरसों से मेरे तन बदन भी असली प्यार के लिए तरसता आया है. आज उनकी साडी हसरतें पूरी कर दो. आज इनका पूरा हक़ दे दो.

राज- बदले में आपको भी मेरे शेर को उसका हक़ देना पड़ेगा.

दीदी स्माइल करती हुई-- अब तोह आपने और उसने पूरा पूरा हक़ प्रॉपर कर लिए है. मैं और मेरी वह इंकार भी करें तोह भी आप और आपका शेर पीछे नहीं हटेंगे.

हाहाहा सब है पड़ें.

आरती-- बस करो राज.. साडी मटकी खली करोगे क्या.. तुम निचे जाओ और जइसे पीओ.. बाकि का मुझे खली करने दो.

राज-- आपके पास हाँ, आप खुद hi खुद का पि लो. मुझे यही पीने दो.

आरती- वह तो आपको hi खली करने पड़ेंगे राजा जी.. अब उनके असली मालिक तोह आप hi हाँ न.

राज-- तोह जिनको खली कर रहा हों. उनका मालिक भी तोह मई hi हुआ न.

आरती- थोड़ा थोड़ा करके सरे मटको का दूध पीओ न. एक का hi पि कर पेट भरोगे क्या.

मैं हस्ता हुआ अंजलि दीदी को चूमता छत्ता निचे छूट पर आ गया..

जैसे hi दीदी की छूट पर पोहंचा तोह दीदी झटका खा गई. दीदी के बेपनाह गरम बदन झटका कहते हुए ऊपर को उठ गया था. धीरे धीरे मैं मंज़िल की और बढ़ रहा था. दीदी की लाइफ का असली खेल शुरू होने को था.

छूट पर पोहंचा तोह वह बहुत ज़यादा गीली थी.. मैं बेसब्रो की तरह दीदी की छूट पर मोह लगा गया.

नंदनी और दीपिका है पड़ें.

नंदनी-- पि lo..pi लो राज आपके hi तुम्हारा hi नसीब है अब तो ये. अब उम्र भर तुझे hi इसे पीना है.

राज सर उठा के-- उम्र भर मेरे हिस्से में hi आना होता तोह दूध के दोनों मटके भी मेरे हिस्से में रहते.. देखो तोह कैसे भूकून के जैसे दोनों टूट पड़ी हाँ.

भावना और आरती सर उठा कर दूध से गीले मोह के साथ स्माइल करने लगी..

दीपिका ने मेरे सर को अंजलि दीदी की छूट पर दबा दिए-- चल इसे चाट.. उन्हें बाद में देख लेना.. देख तोह जितना पानी छठा है. उतना और रिस्ता हुआ लिप्स पर जमा हो गया है.

सच में hi दीदी की छूट आज बहुत चुतरस छोड़ रही थी.

अंजलि-- हाँ राज.. आज सारा अमृत चाट जाएँ. बहुत स्टॉक है मेरे अंदर.. ाःह मा uffffffffff राज आईएस hi निचे से ऊपर तक जीव फेरो.. आठ कितना मज़ा आया था मुझे..

मैं निचे से ऊपर से जीब फेरने लगा तोह कुछ hi देर में छूट का सारा पानी मेरे मोह में था.. एक पल को रुका तोह फिरसे उतना hi वहां पर दिखाई देने लगा.

नंदनी-- हेहेहे.. आज नहीं ख़तम होने वला...

दीपिका ने मेरी गांड पर चांटा मार दिए-- चल मादरचोद.. अब बहनचोद बन.. दाल अपनी दीदी की छूट में अपना मुसल. पहाड़ दे अपनी बहनो की सबसे बड़ी छूट.. बना दे उसे उसे भोसड़ा..

मैं उठा और दीपिका को स्माइल करते हुए बोलै-- बरसों बाद मौका मिल रहा है. छोड़ने वाला तोह मई भी नहीं.

आरती-- हम भी कोनसी भागने वाली हाँ. मैं से आपको पति माना है तोह अब आप अपनी खैर मनाएं.

भावना-- बस फर्स्ट टाइम बीत जाये फिर दिखाएंगी हम अपनी वीमेन पावर.

अंजलि-- हेहेहे वीमेन पावर नहीं.. वाइव्स पावर..

नंदनी-- जी नहीं.. वीमेन पावर और न hi पत्नियों की पावर.. अब तोह एक लुंड अनेक छूट की पावर का पता चलेगा.. बड़ा उछलता फिरता था एक लुंड लेकर.. अब दिखाएंगी हम सब मिलकर छूट खुल जाने के बाद हम सब करती क्या हाँ..

राज ने एक ऊँगली नंदनी की छूट में घुसा दी-- इस छूट और गांड की पावर तोह मैं बहुत बार देख चूका हों.

नंदनी-- नहीं देखि तुमने राज.. अब तक तोह मैं और तुम छुप छुप कर सब करते आये थे.. अब तोह ओपनली सब करने को मिल रहा है. एक बार मेरा पेट हल्का हो जाये. फिर दिखायेंगी मैं तुझे अपनी असली पावर.. सच में मैं अभी तक खुल के तुझसे प्यार नहीं कर पाई. घर में रहते हुए हमेशा खुद को सेंट्र्ल में रखा था मैंने. पर अब जब सब एक सम्मान हो गयी हाँ तोह मैं तुझे अपना असली रंग दिखाऊँगी

राज-- हे साली के भी पर निकल आये हाँ

नंदनी-- साली हो तोह तेरी बहने.. मैं तोह घर वाली हों.. बच्चे वाली हों. तेरे बच्चे की होने वाली अम्मा हों.

राज-- तो तुम अपने पति के पास नहीं जाने वाली क्या.

नंदनी-- अब उसके पास क्या रखा है. और फिर जब सबको नकली पति यही बैठे बिठाये मिल सकते हाँ तोह मेरे लिए भी तोह कोई जुगाड़ लग सकता है न. मैं भी अब से हमेशा तुम्हारे साथ hi रहने वाली हों. मुझे क्या ज़रूरत है, तेरे बच्चे को जनम देने के बाद, सब के सामने हक़ीक़त खुल जाने के बाद उस काले कलोते के निचे लेटने की. अब से तुम hi मेरे असली पति हो सबके जैसे.

दीपिका ने नंदनी की छूट में ऊँगली कर और खुश होक बोली-- शाबाश दीदी.. एकदुम्म से मस्त लगी हो आज तो आप.

राज-- चल हटो अब, मुझे मेरी पत्नी की सील खोलने दो. देखो तोह कैसे मेरे लुंड उछाल कूद मचाये हुए हाँ. अब देरी करना सही नहीं होगा. वर्ण--

दीपिका-- वर्ण पलट कर तेरी hi गांड में जा घुसेगा..

हाहाहा सब ज़ोर से है पड़ी.

राज ने दीपिका को पकड़ा और लिटा कर उसके ऊपर आते हुए उसकी छूट पर लुंड सेट कर दिए..

राज-- लगता है आपकी छूट में कुछ ज़यादा hi झुजलि होने लगी है. पहले आपकी छूट की झुजलि hi मिटा देता हों. सील भी खुल जाएगी.. खुजली भी घाट जाएगी और मज़ा भी आ जाएगा. एक साथ कई काम हो जाएंगे.

राज ने दबाओ बढ़ा दिए था. दीपिका के चेहरे पर दर्द के भाव सज गए थे.

दीपिका- देख हरामी साले कुत्ते.. तू पति होगा सबका. सब घुलम होंगी तेरी. मैं सबके जैसी तेरी पत्नी न बानी हों और न hi कभी बनोगी. मुझे दर्द देने से पहले सो बार सोच लेना. जितना मुझे दर्द देगा. उतना hi तुझे भी झेलना पड़ेगा. तू भूल रहा है मैं दीपिका हों. सबसे अलग, सब से अत्रि

राज- हाय क्या ऐडा है. अब तोह पहले आपकी hi खोलनी पड़ेगी. कसम से आपके जैसे लड़की मेरी लाइफ में नहीं आई.. सिमरन की टक्कर की हाँ आप. बल्कि सिमरन से भी दो हाथ आगे हाँ. मेरी दीदी न होती तोह सच में आप जाने क्या कुछ कर जाती मेरे साथ.

दीपिका-- मुझे सिमरन के साथ मिलाओ. मेरा उसका कोई जोड़ नहीं है. वह होगी अपने महल की रानी. मैं मेरे महल की रानी हों, मुझे उससे क्या लेना. चल अब हैट मेरे ऊपर से. और हटा अपने लुंड को मेरी छूट पार्स.. मुझे दर्द हो रहा है.

राज का लुंड दीपिका की छूट के छेड़ पर सेट था.

राज-- अब निशाना सही जगा पर बैठा है तोह पीछे तोह नहीं हैट सकता. तैयार हो जाओ जाने मैं सील खुलवाने के लिए..

सब राज को देख रहे थी.. राज के तेवर देख कर दीपिका को भी लगा कह राज सच में उसकी सील सबसे पहले खोलने के मूड में है.. वह ज़ोर लगा कर राज को खुद से हटा देना चाहती थी..

उसी पल राज ने एक धक्का मार दिए..

aaaaaaaaaaahhhhhhhhh हराआआअमिईईईई kutteeeeeeeeee saaaaaaaaaaaaaaaaaaalleeeee

राज हस्ता हुआ उठ खड़ा हुआ तोह सब भी ज़ोर से हसने लगीं. दीपिका की नज़र राज के लुंड पर पड़ी तोह उसे चैन मिला. राज के लुंड पर उसकी छूट का खून नहीं लगा हुआ था.. मतलब उसकी सील बच गई थी..

फिर इतना दर्द क्यों हुआ.. वह झटके से बीएड से उतर कर निचे कड़ी हो गई.. और टांगें चौड़ी करके सर झुका कर अपनी छूट को देखने लगी. एक ऊगली छूट के छेड़ में घुसा कर देखने लगी. उसे दर्द भी हो रहा था. पर खून का कहीं नामो निशान नहीं था..

राज ने धक्का ज़ोर से लगाया तोह था. पर लुंड अपर नहीं, अपने ऊपरी बदन को झटका दिए था.. लुंड का सुपड आधे से कुछ ज़यादा hi दीपिका की छूट में जा घुसा था. उसी कारण दीपिका की दर्द भरी चीख निकल पड़ी थी..

राज के साथ साथ सब ज़ोर से है रही थी.. दीपिका अपनी छूट में ऊँगली दाल दाल कर कन्फर्म कर रही थी.. सील सच में बच गई है या पहात गई है. बस खून नहीं निकला.
 
107

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फ्लैशबैक

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दीपिका के साथ राज ने मस्त सन बना दिए था. सब खूब हसी थी.

राज फिरसे अंजलि के पैरों में आया और अपने लुंड को थाम कर उसकी छूट के छेड़ पर सेट कर दिए-- अंजलि डार्लिंग क्या आप रेडी हाँ अपनी ओपनिंग के लिए.

अंजलि ख़ुशी से- हाँ अब ये मेरे नसीब में लिखा जा चूका है तोह मैं बेहद खुश हों. फर्स्ट टाइम तोह कुछ घबरा भी रही हों. पर ख़ुशी बहुत बढ़के है राज.

सच में अंजलि के चेहरा दमक रहा था.. राज ने पहले उसके नाम होंटो का रास पिया. फिर सीधा हो कर एक थप्पड़ दीपिका की गांड पर मारा और एक धक्का मार कर अंजलि की छूट में लुंड घुसा दिए..

अंजलि भी चीख पड़ी. उसकी चीख रियल थी. राज के मोटा लुंड उसकी कोरी छूट की दीवारें खोलता हुआ अंदर घुसता चला गया था.. बेचारी अंजलि की आँखों से दरिया बहने लगा. भावना, आरती और नंदनी देखती रह गई. दीपिका अभी भी अपनी छूट के दर्द और बेयक़ीनी में थी.

राज ने एक धक्का और मार कर अंजलि की सील खोल दी. राज का लुंड अंजलि की छूट में 4इंच तक जा घुसा था. राज रुका और झुक कर अंजलि के आंसू पिने लगा.. अंजलि दर्द से बुरी तरह से तड़प रही थी. उसका दमक रहा चेहरे दर्द के कारण लाल हो गया था. छूट से खून निकलने लगा था तोह कुछ प्रेशर और पैन के कारण उसके फेस पर भी इकठा हो गया था..

आंसू पि कर राज अंजलि को किश करने लगा. साथ में उसके दोनों मटके कास कास के दबाने लगा.. अंजलि कुछ देर में रिलैक्स हुई तोह राज ने किश तोड़ कर अंजलि की आँखों में देखा. गीली आँखों में चमक नज़र आई तोह राज बोलै-- बधाई हो मेरी जान. आप काली से फूल बन गई हाँ

अंजलि सिसकते hue--kitna दर्द दे दिए राज आपने मुझे.. राज अंजलि की नक् को चूमता हुआ-- दर्द तोह अब कुछ मिंटो तक आपको बेहद होगा अंजलि जी. उसके बाद hi चैन सुकून और मज़ा मिलेगा.

अंजलि- राज जी प्ल्ज़ मुझे सारा दर्द देकर जल्दी से चैन, सुकून और मज़े दे दीजिये.. जहाँ मुझे दर्द से छुटकारा चाहिए वहीँ मुझे आनंद भी लेना है. अपनी लाइफ के फर्स्ट एक्सपीरियंस का भरपूर मज़ा भी लेना है.

राज-- क्यों नहीं जान. अपनी जान की हर बात मानूंगा मैं तोह.

राज ने अपने लुंड को हिला कर थोड़ा सा पीछे खेंचा और एक धक्का मार दिए. इस बार अंजलि अपने होंटो भींचे अपने दर्द को पि गई थी..

अगले धक्के में अंजलि की आँखों के साथ साथ उसका मोह भी खोल दिए.. पूरा लुंड अंजलि की छूट में घुसा तोह अंजलि की जैसे सांस hi अटक गई थी.. इतने दर्द का उसे गुमान भी नहीं था. आखरी धक्के में उसे एहसास करा दिए था. छूट की आखरी रुकावटें कितनी नाज़ुक होती है. बड़ा लुंड छूट की अंत गहराई में जा समाये तोह कितना दर्द देता है.

अंजलि की उखड़ी सांस को भूल कर राज अंजलि का दूदू पिने लगा.. जैसे hi राज ने एक निप्पल को मोह में लेकर चूसना शुरू किआ.. अंजलि के रोने की आवाज़ आने लगी.

अंजलि-- मार डाला राज आपने तोह अपनी अंजलि को. हाय कितना दर्द.. उफ्फ्फ इतने दर्द का मैंने नहीं सोचा था.. हाय मा आरती कुछ न मेरे दर्द का..

आरती हस्ते हुए-- राज कर तोह रहा है आपके दर्द का इलाज. देखना कुछ hi देर में कहोगी आप. उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ राज अभी तक खली नहीं किये आपने मेरे मटके.. आह्हः कितने सख्त हो गए है.. ओह्ह्ह निप्पल कितने अकड़ गए हाँ.

नंदनी ने आरती के निप्पल पकड़ कर मरोड़ दिए-- ऐसे hi अंजलि के निप्पल आकडेंगे न.

आरती-- आह्ह्ह्ह दीदी क्या करती हो आप.. छोडो.. दर्द होता है.

राज ने सच में hi कुछ hi देर में अंजलि के दोनों निप्पल चूस चूस कर अंजलि को दर्द क्या होता है, भुला दिए. अंजलि अपनी गांड हिलने पर मजबूर हो गई. राज भी समझ गई. छूट गीली होकर, गर्म होकर अंजलि को मज़ा देने लगी है. कुछ देर के लिए दर्द को भुला बैठी है.

राज ने अपने लुंड को हिलने की करि तोह अंजलि कराह उठी. पर लुंड हिल कर पीछे सरकने लगा.. जैसे जैसे लुंड बहार होने लगा. अंजलि कंपनी लगी..

कुछ देर में राज अंजलि को किश करते हुए नार्मल स्पीड से छोड़ रहा था. सुपड तक लुंड बहार निकल कर पूरा पूरा धीरे धीरे अंदर पेल रहा था.

अंजलि अब मस्त होकर राज के होंटो का रास पिटे हुए राज का लुंड ले रही थी. दर्द अब रहत में बदल गया था. छूट खुली तोह अब लुंड के मज़े ले रही थी.. लाइफ के फर्स्ट एक्सपेरिंस को फील कर रही थी. उसकी ऑंखें बंद थे. वह एक एक इंच लुंड को अपनी छूट में उतरता हुआ महसूस कर प् रही थी.

धीरे धीरे किश वाइल्ड होने लगी. राज के धक्को की स्पीड कुछ बढ़ने लगी. अंजलि की छूट की दीवारें एक तसलसल से पानी छोड़ कर राज के लुंड को सैराब कर रही थी. अंजलि किश करते हुए राज की पूरी बैक पर दोनों हाथ फेर रही थी.

अंजलि झटको की लपेट में ै तोह किश तोड़ कर राज को देखने लगी-- आह्हः राज मेरी पति.. उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ अह्हह्ह्ह्ह ऐसे hi ज़ुर स्पीड से अपनी जणू को प्यार करो..

नंदनी-- उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ आआअह्ह्ह्ह की आवाज़ आने लगी अब तोह..

अंजलि ने स्माइल से नंदनी को देखा.. फिर एक हाथ से नंदनी के पेट को सहलाती हुई बोली-- तू किस्मत वाली है नंदनी.. जो तुझे पहले राज प् पूरा प्यार मिल गया. अब मुझे पूरा प्यार मिल रहा है तोह सोचने लगी हों. पहले इतनी देर क्यों कर दी..

नंदनी-- हेहेहे.. लुंड का सवाद hi ऐसा होता है अंजलि.. जैसे hi लुंड निकलेगा. बाद में दर्द होगा.. फिर करना ऐसी बात.

अंजलि-- अब तोह उम्र भर के लिए राज की हो गई हों. अब ऐसी hi बातें करुँगी.

राज-- आठ अंजलि डार्लिंग आपकी छूट मेरे लुंड को भेंचने लगी है.

अंजलि-- हाँ राज मेरा होने वाला है. इसी लिए भींच रही है.. आप स्पीड से करो.

राज ने स्पीड बढ़ा दी.. कुछ देर में अंजलि की निचे से हिल हिल कर राज का साथ देने लगी. फिर दोनों पेअर राज के गिर्द लपेट कर दोनों बहन भी राज के गिर्द कसने लगी.

राज के धक्के बढे तोह अंजलि अपने अंदर बढ़ रहे सवाद को कण्ट्रोल नहीं कर पाई. उसका बदन झटके खाने लगा.. एक तेज़ सिसकी के साथ वह ढीली पड़ती चली गई..

अंजलि ज़ोर ज़ोर की सांस लेने लगी तोह दीपिका ने राज की गांड पर फिरसे एक ज़ोर की लगा दी.

राज-- आह्हः साआआअली तू नहीं सुधरने वाली..

दीपिका-- हाहाहा.. साले तू भी कहाँ सुधर गया है.. मुझे hi तुझे सुधारना पड़ेगा.. चल हैट अब दीदी के ऊपर से..

आरती अब लाल पीली होने लगी थी.

दीपिका-- देखो आरती दीदी को देखा.. कितनी बेचैन हो रही है अपने खसम से छोड़ने के लिए. चल अब उसकी छूट पहाड़.

राज-- नहीं.. मैं तोह पहले आपकी पहाडोंगा.

दीपिका- ज़यादा शायना न बन.. हरामी देख कैसे मेरी छूट लाल कर दी तूने.

भावना-- हेहेहे दीपिका वह तोह अंजलि दीदी की भी हो गई. दीदी की छूट से निकला खून नहीं दिख रहा क्या..

दीपिका-- राज पहले इसकी hi खोल.. बड़ी उतावली हो रही है ये भी.

भावना-- ओह्ह दीदी बोलना भी भूल गई हो तुम तो.

दीपिका-- पत्नियां बबरार होती हाँ.

भावना-- अच्छा तोह फिर पहले बाद की क्या बात है. चल पहले तू hi चुद ले..

दीपिका-- मैं चूड़ी तोह फिर तुझे और सबको पुरे हफ्ते राज या राज लुंड नहीं मिलने वाला.. सोच लो..

दीपिका ऐसे मूड में बोली भावना और आरती सब चुप कर गई..

राज-- हाहाहा.. दीपिका चंडी देवी है. इससे बच के रहा करो. सबसे छोटी है. पर सबसे बड़ी भी है..

दीपिका-- हाहाहा.. पहली बार तू सही बोलै हरामी साले.. पहली बार तेरी बात पर तुझे चूमने को मैं होने लगा है..

राज खुश होक-- छूट चूमने डौगी या गांड

दीपिका-- मैं चूमुंगी न.. हाहाहा.. वहीँ जहाँ थप्पड़ लगाया है तेरे..

राज-- तू भी अपने आप में इकलौती पीेछे है कसम से..

अंजलि को छोड़ के सब हसने लगी..

राज खून से साणे लुंड को देख कर आरती पर झपट पड़ा.. आरती ने भी कोई शर्म नहीं करि और को अपनी बहन में जकड कर वाइल्ड किश शुरू कर दी. राज का लुंड उसकी छूट पर आया तोह आरती दोनों पेअर खोल कर राज के लुंड को भींच गई.. राज किश करते हुए ऐसे hi कैसे हुए लुंड को खेंच कर आरती की छूट पर रगड़ने लगा..

जब भी राज का लुंड ऊपर होता तोह आरती अपने टाँगें ढीली कर देती.. राज का लुंड ऊपर आ कर निचे आता तोह आरती की छूट के लिप्स के अंदर से रगड़ खा कर निचे घुस जाता..

4 5 बार ऐसा hi हुआ.. फिर जैसे hi आरती ने अपनी टाँगें खोली.. राज ने ज़ोर लगा था तोह दीपिका ने भावना को पहले hi इशारा कर दिए. भावना ने राज के लुंड को थाम लिया.. दीपिका ने दोनों हाथ राज की गांड पर रखते हुए पुरे ज़ोर से दबा दिए..

राज का लुंड आरती की छूट के लिप्स में घुसा तोह निचे जाता हुआ छेड़ में फस्स कर अंदर जा घुसा..

आरती की माँ भी साथ में hi चुद गई थी.. इतना दर्द हुआ उसे राज के होंटो को काट गई. राज भी चीख पड़ी..

दोनों किश तोर कर एक दूसरे को देखने लगे. आरती की आँखों में आंसू थे.. राज का लुंड सुपड समेत आरती की छूट में था..

दीपिका ने नंदनी को इशारा किया. दीपिका और नंदनी ने आरती के दोनों टाँगें पकड़ कर खोल दीं. राज तोह दोनों को देखता hi रह गया.

राज ने दोनों को नहीं रोका. वह जनता था, सब को रोक सकता है. पर दीपिका को नहीं. दीपिका सदा अपने hi मैं की करती है. राज का लुंड आरती की छूट में फंसा हुआ था. राज आरती के दोनों चुके पकड़ कर मसलने लगा. फिर एक को मसलते हुए दूसरे को मोह में भर कर आरती को मज़ा देने लगा.

आरती-- दीपिका कामिनी तुमने ये सही नहीं किआ.. मुझे बता देती.. इतना दर्द तो सहना पड़ता.

दीपिका-- दर्द तोह सब को सहना hi है दीदी. ज़यादा नाटक मत करो. अभी भावना का भी नंबर है. नंदनी दीदी की छूट पानी पानी हो रही है. उसकी भी बेचैनी को ख़तम करना है. उन्हें भी मज़े लेने देना है. आज तोह सिर्फ ओपनिंग नाईट है तो सील खुल कर कुछ दर्द लो और कुछ मज़े.. राज भी दिन भर से चुदाई कर करके थक गया होगा.

चल राज लगा दम.. घुसा सारा लुंड दीदी की छूट में..

राज ने आरती को देखा तोह वह होंठ को भींच गई. चाहती भी थी, सब फटाफट हो जाये.. पर हाय रे दर्द.. स्पीड से करने से दर्द भी ज़ायदा होता.. अब लगाम दीपिका के हाथ में थी. तोह उसकी hi सुन्नी पड़ने वाली थी..

राज चुके छोड़ कर धक्के मारने लगा.. हर धक्के पर आरती चीख पड़ती थी. उसके आंसू और भी बहने तेज़ हो जाते थे. सारा लुंड घुसा कर राज आरती को किश करते हुए उसके चुके दबाने लगा..

कुछ देर आरती भी रोटी रही. फिर वह भी मज़े में होने लगी. कुछ देर में राज का लुंड उसकी छूट में भी रवानी से अंदर बहार होने लगा..

आरती-- आठ कितना दरी हुई थी मैं.. ओह्ह्ह अब्ब कितना सुकून कितना मज़ा मिल रहा है मुझे. माआआआआ सोचा नहीं था चुदाई से इतना आनंद भी प्राप्त होता है. कितनी किस्मत वाली हों मैं जो मुझे राज मिल गया..

नंदनी-- हाहाहा राज नहीं राज का लुंड मिल गया. राज का लुंड छोटा होता तोह बोलती.. काश राज तेरा लुंड भी बड़ा होता तोह मज़ा बढ़ जाता..

दीपिका-- सही कहा आपने दीदी. साडी बात hi बड़े लुंड की है.. जैसे हम सालों से इस हरामी के लुंड को देखती आई हाँ. दिल का अच्छा होते हुए भी लुंड से हमें राज ज़यादा पसंद आया है.

राज-- ये गलत बोल रही हो दीदी

दीपिका-- गलत कहाँ बोल रही हों साले.. कोई भी लड़की एक स्ट्रांग लुंड देख कर. उस लुंड वाले से प्यार भी कर बैठे तोह फिर वह पीछे नहीं हटती.. तू भाई है हमारा.. लुंड के मामले के स्पेशल न होता तोह तुझे इतना भाव कभी न मिलता..

दीपिका हस्ते हुए राज को छेड़ते हुए बोली.

राज-- साली लुंड दाल के मैं पेल रहा हों एक एक को. बातों बातों में तुम मेरी गांड मर लेती हो..

हाहाहा.. सब हसने लगी. अंजलि भी नार्मल हो गई थी. वह भी आरती और राज की चुदाई देख कर, दीपिका की बातें सुनकर हसने लगी थी.

दीपिका को शरारत सूझी तोह अंजलि की छूट में ऊँगली घुसा दी

आआआआअह्ह्ह्हह क्या करती है. वहां ऊँगली मत दाल.. ाआईईई माआआआआ निकाआआआ

दीपिका हस्ते हुए-- कैसे लग रहा है मेरी बन्नू रानी.

अंजलि कुछ शर्मा गई-- जब लेगी तोह खुद hi पता चल जायेगा.. मुझसे मत पूछ

आरती भी कुछ देर में झटके कहते हुए जहर गयी..

भावना की साँसे चढ़ने लगी थी. अब उसका नंबर था.. वह होंटो पर जीब फेर कर एक एक को देखने लगी.. कभी राज के लुंड को देखने लगती. जो अभी भी आरती की छूट में था..

दीपिका-- चलें जी महारानी भावना जी.. अब आपकी िओपेनिंग का समय हो गया है..

भावना सबको देखती हुई शर्मा कर पीठ के बल लेट गई.. उसके चेहरे पर अंजलि और आरती के जैसी hi ख़ुशी और चमक आ गई थी..
 
108

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भावना की छूट ने बहुत ज़यादा पानी छोड़ दिए था. छूट की फाँखें तक कंप्नति हुई दिखाई दे रही थी. अंजलि और आरती की चुदाई देख चुकी थी. कितनी देर से अपनी छूट के पानी को अंदर दबाये हुए. आज किसी ने भी राज के रहते एक दूसरे से मज़े नहीं लिए थे.

बस अंजलि के दूध भावना और आरती ने मिलकर पिया था..

राज भावना की छूट से मोह लगा कर पिने लगा तो दीपिका राज के चुत्तड़ मसलने लगी.. राज एक झटके से उठ बैठा..

राज-- साली तू सुधरेगी नहीं.

दीपिका-- हाहाहा.. वैसे hi चेक कर रही थी. कुछ नहीं करने वाली..

राज हस्ते हुए-- तेरे कोई भरोसा नहीं है. मुझे तोह डाउट होने लगा है.. कहीं तेरी छूट खुलों तोह पड़ा चले अंदर से लुंड hi न निकलने लगे.

हाहाहा सब ज़ोर से हसने लगे.

दीपिका भी हस्ती हुई सबको देख कर-- काश मेरे पास लौड़ा होता तोह जितनी मस्त मस्त जवानियाँ यहाँ पर हाँ तोह तेरे साथ मिलकर थ्रीसम थ्रीसम खेलती.. बड़ा मज़ा आता. एक लुंड छूट में होता तोह दूसरा गांड में.

राज-- तो अब भी तू ऐसा कर सकती है.

दीपिका हैरान होक- वह कैसे

राज-- आज कल नकली लुंड बहुत मिलते हाँ.

दीपिका उछाल पड़ी-- सचहहह.. ओह्ह्ह गाओं में मुझे मेरी एक दोस्त ने बताया था.. फिर तोह सच में मेरे मज़े हो जायेंगे.. चल जा मुझे नहीं तुझसे अपनी सील खुलवानी.. चल उठ भावना तू कल अपनी सील मुझसे खुलवाना.. कल मैं नकली लुंड से तेरी सील खोलूंगी..

नंदनी, अंजलि और आरती हसने लगी. आरती दर्द में भी है पड़ी थी.

भावना-- चल भाग कामिनी कहीं की. राज पहले इस कामिनी की गांड hi खोलना. बड़ी चीज बानी फिरती है. गांड खुलेगी तोह साडी हवा निकल जाएगी.

दीपिका- अब तोह कोई कुछ भी कह सकता है. मैं अपने इरादे से नहीं बदलने वाली.. राज तू कल मुझे मार्किट से लुंड ला देना.. अपनी दोनों सील्स तोह मैं तुझसे hi खुलवाऊँगी. मैं तोह ऐसे hi मज़े ले रही थी. पर कसम से मुझे सबके साथ नकली लुंड से भी मज़े करने है. मेरा बड़ा मैं होता है ऐसे करने को.

राज-- फिर तोह और भी कई लाने पड़ेंगे.. तू भावना की छूट में घुसायेगी तोह बाद में भावना तेरी छूट या गांड में..

भावना-- हाँ ये सही रहेगा. करेंगी तोह सब मज़े करेंगी.. नहीं तोह कोई नहीं करेगी.

दीपिका-- मैं राज के शिव कुछ नहीं लुंगी न अपनी छूट में और न hi अपनी गांड में. मैं हों यहाँ पर सबकी मलिका.. समझी आप सब.. यहाँ मेरा आर्डर चलेगा. और फिर राज के पास एक लुंड है. कितनो की सेवा करेगा.. कभी कभी मैं कर दिए करुँगी.

राज- चल भावना अपनी को ढीला छोड़. मुझे तेरे को छोड़ने दे.. ये तोह ऐसे hi बोलती रहेगी. इसे कोई चुप नहीं करवा सकता..

नंदनी-- एक हिसाब से दीपिका सही भी कह रही है राज.. हम सब आपस में मज़े करने लगी हाँ तोह इतना सब तोह चलेगा hi. लुंड का मज़े नहीं मिलेगा पर एक नयी शुरुआत करके हमें खूब लुत्फ़ भी मिलेगा..

दीपिका खुश होक नंदनी को किश कर गयी-- दीदी आप सच में मेरी अच्छी दोस्त हो. मेरी वेल विशेर हो. इसी ख़ुशी में सबसे पहले आपको छोडूंगी वह भी मज़े से धीरे धीरे करके.

सब हसने लगे तोह राज भावना की छूट पर लुंड सेट कर भावना को देखने लगा.

राज-- भावना मेरी जान अरे यू रेडी

भावना ने हाँ में सर हिला दिए.. वह अब कुछ दर गई थी. छूट में आग जतनी भी thi.do दो की चीखें वह सुन गई थी. अब हिम्मत टूटने लगी थी उसकी.

रजा सब समझते हुए अच्छी से अपने लुंड को भावना की छूट पर रगड़ने लगा.. फिर छेड़ पर सत्ता कर धक्का मार दिए..

भावना भी अंजलि और आरती के जैसे तड़प उठी.. राज फिर 3 बड़े धक्कों में hi पूरा लुंड भावना की छूट में घुसा कर भावना को चूमने चाटने लगा था.

भावना के आंसू भी बीएड शीट को भिगोने लगे थे. वह बिलक बिलक कर रो रही थी.

अंजलि-- राज जी आप छोड़ें भावना को.. मैं और आरती भावना को शांत करती हाँ.

दोनों बहने मिलकर भावना के चुके निचोड़ने लगी. राज अपने लुंड को धीरे धीरे करके बहार निकल कर पुरे पुरे लुंड से भावना को छोड़ने लगा..

कुछ देर में भावना भी मस्त हो गई.. वह भी राज की तारीफ में ज़मीन आस्मां एक करने लगी.

भावना भी झाड़ गयी तोह राज का लुंड भी पानी निकलने वाला होगा..

दीपिका को समझ आई तोह वो बोली-- राज अंजलि दीदी की छूट में माल डालो. भगवन करे सब को जल्दी जल्दी बच्चा हो जाये. बहुत लम्बी लाइन है. कोशिश करना हर बार किसी न किसी की छूट में hi लुंड को खली करना.. माल वास्ते मत करना. ये बहुत कीमती है राज. हम सब की ज़िन्दगी तुमसे जुड़ चुकी है तोह तुम्हे बहुत स्ट्रगल करनी पड़ेगी. सुना है बार बार लुंड का माल निकले तोह स्पेर्म्स की पावर डाउन भी होने लगती है. तुम अपना ख्याल रखना.

राज-- ओह्ह मेरी रानी.. तुझे तोह सब ज्ञान है.

दीपिका-- एक पत्नी को सब ज्ञान होना चाहिए.

राज ने अंजलि को घोड़ी बना कर छोड़ना शुरू कर दिए.. घोड़ी बनकर छोड़ने में अंजलि को ज़ायदा मज़ा मिला. पहले तोह सील खुली थी और दर्द भी बहुत हुआ था.. पर अब उसे सही से चुदाई का आनंद मिल रहा था.

कुछ देर में राज ने सारा माल अंजलि की छूट में दाल दिए.. अंजलि लम्बी लेट गई. वह झड़ी नहीं थी. पर माल अपने अंदर पा कर बहुत मस्त हो गई थी.

दीपिका बाथरूम में गई. एक टॉवल गीला कर लाइ राज के लुंड को क्लीन करने लगी.

दीपिका-- हर पत्नी का धरम होता है, अपने पति की सेवा करना.. देखो मैं पुरे मैं से अपने पारी की सेवा कर रही हों. मेवा भी मुझे पूरा चाहिए राज तुमसे.. डोज न मुझे मेरी सेवा के बदले मेवा.

राज दीपिका को पकड़ कर किश करने लगा. किश तोड़ी तोह बोलै-- आप सबसे स्पेशल हाँ दीदी. जितना भी भगवन को थैंक्स बोलों काम होगा. भगवन ने मुझे सब प्यार करने वाले दिए.. और आप को स्पेशल मेरी दीदी बना कर संसार में भेजा.

दीपिका अच्छे मूड में थी. जितने मज़े लेने थे वह ले गई तोह अब राज पर अपना प्यार लुटाने लगी थी. भावना मदहोश थी तोह नंदनी, अंजलि और आरती तीनो ख़ुशी से राज और दीपिका को देखने लगी.

कुछ देर में दीपिका ने राज को लिटा दिए और उसके लुंड को थाम कर चाटने चूसने लगी. बड़े चाओ के साथ वह राज के लुंड को चाट चूस रही थी.. राज दीपिका के सर के बालों में उँगलियाँ फेर रहा था.

भगवन ने कितना प्यार दे दिए था इस परिवार को..

कुछ देर में राज का लुंड फिरसे चार्म पर था. फिरसे पूरी तरह से अकड़ा हुआ था. दीपिका की थूक से सना हुआ सलामी दे रहा था..

दीपिका-- लें दीदी.. बहुत देर से आप भी मचल रही थी. वैसे आपका हक़ पहले बनता था. आप राज के बच्चे को जनम देने वाली है.

नंदनी-- नहीं हम सब एक सम्मान हाँ न. तोह सब का हक़ एक सम्मान है. तुम सब का पहले टाइम है तोह तुम्हे पहले मज़े करने चाहिए थे.. अच्छा हुआ तोह तीनो को मज़ा मिल गया.. राज कहाँ सा कहीं भगा जा रहा है. और प्यार की ज़रूरत मुझे और सब को है. तन का सुख तोह कभी भी पाया जा सकता है.

दीपिका-- चलें तोह फिर किश पोजीशन में लेंगी आप राज का लुंड.

नंदनी-- मैं तोह कहती हों तुम भी सील खुलवा hi लो..

दीपिका-- सच कहूं तोह दीदी. शायद मैं घर में मौजूद सबसे ज़यादा गर्म लकड़ी हों. सबसे ज़यादा बेचैन भी.. मेरी एक छह है.. मैं फर्स्ट टाइम राज के साथ अकेले में बिताना चाहती हों. बाद में तुम भले मुझे पुरे एक महीने के लिए राज से मिलने भी न दो. अगर किसी को कोई ऐतराज़ न हो तोह.

सब-- अरे तू तोह हम सब की दुलारी है. तुझे परमिशन की क्या ज़रूरत है.

दीपिका खुश हो गई-- चलो राज नंदनी दीदी को खुश करो.. आगे से भी और पीछे से भी..

आरती दीपिका की पानी पानी हो रही छूट को देख चुकी थी. कहु तोह मैं तुम्हारी छूट चाट कर एक बाद तुम्हे शांत कर सकती हों

दीपिका-- नहीं दीदी.. मैं वैर करुँगी. मैं आप सबके जैसे राज के साथ मज़े करते हुए झड़ने के मूड में हों.

राज ने नंदनी को अपनी बहन में लिया और किश करने लगा.. पीठ पर हाथ फेरते हुए नंदनी के होंटो का रास पीने laga..dhire धीरे राज का हाथ नंदनी की गांड पर आया और छेदको कुरेदने लगा..

नंदनी तोह बहुत देर से मस्त थी.. सहन नहीं कर प् रही थी. उसके बदन के अंदर हज़ारों वाल्ट का करंट दौड़ने लगा था.. राज का एक हाथ पकड़ कर वह अपने चुके पर रख कर दबाने लगी. राज एक हाथ की फिंगर्स से नंदनी की गांड कुरेदने लगा. दूसरे हाथ से नंदनी के चुके को मसलने लगा..

नंदनी को भी आज बहुत मज़ा मिल रहा था. छुप छुप के बंद कमरे में तोह वह कई बार राज से चुद चुकी थी. पर ऐसे सबके सामने पहली बार मज़े कर रही थी. सच में वह खुद को बहुत किस्मत वाली समझ रही थी.

कुछ देर में नंदनी घोड़ी बानी राज के लुंड से चुद रही थी. राज ने एक बार नंदनी की छूट का पानी निकला. फिर नंदनी की गांड में लुंड दाल कर छोड़ने लगा. नंदनी भी सिसकने लगी थी. टाइट गांड में मोटा लुंड लेकर वह निहाल हो उठती थी.

दूसरी बार नंदनी झड़ी तोह राज आरती को घोड़ी बना कर छोड़ने लगा.. फिर उसकी छूट में अपना माल दाल कर वहीँ लबा लेट गया..

अंजलि और आरती की छूट राज के माल से भर गई थी...

कुछ देर में सब वहीँ लेट कर सोने गई थी. दीपिका ने राज का हाथ पकड़ा और साथ वाले कमरे में ले जाने लगी.. राज ने दीपिका को अपनी गॉड में उठा लिया था दीपिका राज को निहारने लगी..

दूसरे कमरे में पोहंचा कर राज ने दूर को अंदर से लॉक किया और अपनी स्पेशल दीदी को स्पेशल टाइम देने के लिए रेडी हो गया..

दीपिका बड़े कातिल अंदाज़ में बीएड पर लेती हुई राज को देख रही थी.. उस के चेहरे पर ज़माने भर की खुशियां दिखाई पद रही थी.. राज जो उसका भाई था. अब उसका पति बनकर उसकी लाइफ में आ गया था..

राज पहले बाथरूम में घुस कर फ्रेस हुआ.. फिर आ कर दीपिका से चिपक गया..
 
109

***

दीपिका -- हाँ तोह मेरे हरामी साजन. कैसा लगा अपनी माँ और बहनो को छोड़ के.

दीपिका के शब्द नॉटी थे. पर आँखों में बहुत प्यार भरा था.

राज दीपिका की नक् से नक् रगड़ता हुआ-- माल खालिस हो और अपना हो. ऐसा अपना हो, जिसके मिल पाने की उम्मीद भी न हो तोह जो मज़ा आता है, वही मुझे भी आया

दीपिका हस्ती हुई राज के ऊपर आ गई. एक रगड़ राज के लुंड पर करि और राज के नक् पर एक बाईट कर दी..

दीपिका-- मेरा भी कुछ ऐसा hi सन है. मैंने कभी नहीं सोचा था, कभी तेरे सामने नंगी भी होंगी. पर तूने कई बार मुझे नंगा किया. मेरे गुप्त अंगों को मसल मसल कर उन्हें बड़ा किया. उनके अंदर आग भरी. जहाँ मुझे बहुत ग़ुस्सा आया करता था. वहीँ मुझे बहुत ज़यादा मज़ा भी मिलने लगा था. इस सब के होते हुए भी कभी ये नहीं सोचा था. कभी ऐसा समय आएगा मैं तेरे निचे लेती होंगी और तेरा लुंड मेरी छूट, मेरी गांड के छेड़ को खोल कर अंदर घुसता चले जायेगा.. पर देखो किस्मत ने कितना कुछ बदल कर रख दिए.. एक hi घटना ने सब बदल कर रख दिए. अच्छा हुआ दीदी की शादी टूट गई थी. वह न टूटती तोह ये अच्छा समय भी देखने को नहीं मिलता. अब देखो, अपने से भाई से चुदाई का मौका नहीं बना.. भाई की पत्नी बनने का चांस भी बना और उम्र भर के लिए भाई के नाम भी हो गई. सोचा नहीं था. लाइफ इतनी खूबसूरत भी हो सकती है मेरी हम सबकी. इतना बदलाव. कोई खवाब में भी नहीं सोच सकता..

मैं बहुत खुश हों राज.. इतनी खुश कह मेरा मैं करता है. मुझे इतनी छूट मिले. मैं पूरी दुन्या को चिल्ला चिल्ला कर बताओं. देखो भगवन ने मेरी झोली कैसी खुशियों से भर दी है. ऐसी खुशियों से जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था. यकीं करो, जितनी देर तक तुम तीनो दीदियों के साथ लगे रहे हों. मुझे ऐसा लगने लगा था. जैसे मैं कोई खवाब देख रही हों. गाओं से शहर में आ गई हों. इतने दिन से सब देख रही हों. सब बदल चूका है. पर यकीं नहीं हो रहा

राज दीपिका को पलट कर उसके ऊपर आया.. तोह काराओं यकीं ये सब सच है. कोई खवाब नहीं है.

दीपिका कुछ मदहोश सी होती हुई- हाँ इसी लिए तो तुम्हे सबसे अलग ले कर आई हों. सबके साथ ये चीटिंग है. पर मैं खुद को रोक नहीं पाई. सबको भी अकेले में तेरे साथ टाइम देने का मैं था. पर मैं ये भी चाहती हों तुम सब जल्दी से ख़तम करके लौट आओ. फिर सुकून से सब मिलकर रहेंगे.

राज-- मैं भी हमेशा आप सब के बीच में रहना चाहता हों. मुझे बहार की दुन्या की छह है. पर आप सब से बढ़कर नहीं.

दीपिका- मेरा शोना भाई. मेरा शोना पति..

राज-- मेरी शोणि दीदी.. मेरी शोणि पत्नी

दीपिका-- हेहेहे.. नक़ल करते हो

राज-- हों भी तोह आपका भाई न. नक़ल नहीं करूँगा तोह बात बनेगी नहीं. आप सबकी छूट और गांड देख देख कर मैं हरामी बना हों. अब जो भी बनुगा. वह सब भी तोह आप सब को देख कर hi बनुगा.

दीपिका-- ऐसी बातें करके तुम दिल में उतरने लगते हो राज. राज करो न मुझे प्यार.. बहुत तड़प रही हों मैं भी सबके जैसे.. कितनी देर से खुद पर काबू बनाये हुए हों.

राज -- हाँ वह दिख hi रहा है. चलो पहले छूट चाट कर एक बार पानी निकल देता हों. फिर सुकून से सब करेंगे.

दीपिका-- हाँ सही है. पर मैं अपने हिसाब से अपनी छूट चटवाऊंगी.

राज-- okay

दोनों अलग हुए तोह दीपिका बीएड पर गांड रख कर दोनों पेअर पुरे खोल कर, आधे फोल्ड कर के बेथ गई.. आओ राज छतो मेरी छूट को.. देखो कितना पानी चमक रहा है. सारा का सारा आग बना हुआ है राज. बहुत जला रहा है मुझे मेरी छूट का पानी. सारा निकल कर मेरे अंदर एक बार शांत कर दो.

राज-- ऐसे कैसे चारो छूट.. ऐसे तोह मोह भी सही नहीं आएगा.

दीपिका-- तुम आगे तोह बढ़ो. फिर देखना कैसे मेरी छूट पर तुम्हारा मोह फिट बैठता है.

राज आगे हुए तोह दीपिका दोनों हाथ पीछे करके सारा वज़न हथु पर दाल गई

राज-- अरे वाह्ह. दीदी.. तुम तोह किसी फ़िल्मी हीरोइन के जैसी दिखने लगी हो.

दीपिका-- क्या मैं हीरोइन नहीं हों. तुम एक हीरो हो तोह मैं हीरोइन क्यों नहीं हो सकती.

राज-- हम्म्म ये भी सही कहा आपने. राज फिर दीपिका की चाटने लगा.. राज को लगा उसका मोह जल जायेगा. इतनी हीट छोड़ रही थी दीपिका की छूट..

राज धीरे धीरे छूट के लिप्स पर लगा सारा पानी छत्ता चला गया.. पानी था कह और भी बढ़ने लगा था. काम होने का नाम hi नहीं ले रहा था..

दीपिका-- अह्ह्ह्ह भाई.. चाट लो सारा पानी.. ये पानी नहीं है, अमृत है. दुन्या का सबसे दवादिष्ट वाटर.. उम्म्म्म मैं ज़रूर आज पागल हो जाऊँगी. ज़िन्दगी में पहली बार अपनी मन मर्ज़ी से तुझे ये सब करने दे रही हों. अपनी छूट चाटने दे रही हों. आह्हः क्या बताओं कैसे हालत में होने लगी हों मैं.. अह्ह्ह्हह माआ तूने राज को जनम देकर हमारी लाइफ बना दी..

राज अपनी दीदी की कुंवारी बंद लिप्स वाली, चिकने वाटर वाली छूट को मज़े से चाटने लगा. राज के मज़े थे, कितनी hi छूट बदल बदल कर उसके सामने खुलती जा रही थी. जहाँ राज के लिए लाइन लगी हुई थी. वहीँ वहीँ अलग अलग चुतरस का टास्ते भी राज प्राप्त कर रहा था. राज की हसीं वादियों में राज पोहंचा हुआ था..

दीपिका पहले से hi अंतिम सीमा पर थी. अब राज की जीब अपनी छूट पर पाई तोह पागल हो उठी. देर नहीं लगी और उसकी छूट से प्रेशर के साथ चुतरस निकलने लगा. राज को चाटने की ज़रूरत नहीं पड़ी. सारा पानी फुहार उसकी जीब पर आया और राज उसे अपने अंदर उतरता चला गया.

दीपिका थक गई थी. पीछे को गिर पर लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी. राज भी दीपिका की छूट को छे से चाट कर उसके बराबर आ कर लत गया.. दीपिका ऑंखें बंद किये आनंद में डूबी हुई थी. वह रिलैक्स होक उठी तोह राज के लुंड को थम कर चाटने चूसने लगी.. अब वह रिलैक्स थी तोह बड़े सुकून से बड़े मज़े से राज के लुंड को चाटने चूसने लगी..

कभी कभी राज को मस्त नज़रों से देख कर स्माइल करने लगी. लुंड को अच्छे से चमका कर वह घोड़ी बन गई तोह राज देख कर हैरान हुआ.

राज-- ये क्या.. ऐसे सील खुलवाओ गई क्या.

दीपिका शारबी अंदाज़ में-- हाँ राज में मैं ऐसे hi अपनी सील खुलवाऊँगी.. वह भी बैक वाली. मुझे सबसे बढ़कर दर्द प्राप्त करना है. सबसे पहले मुझे गांड में लौड़ा लेना है. ासबसे पहले मुझे गांड की ओपनिंग करवानी है.

राज हैरान हुआ और खुश भी-- सच में आप मुझे अपनी गांड देने वाली हो.

दीपिका हस्ते हुए-- यकीं नहीं आ रहा न. चल पहले चाट.. फिर लौड़ा दाल. फिर तुझे यकीं भी आ जायेगा.

राज ख़ुशी से दीपिका के पीछे हुआ. पहले पूरी हथेली निचे छूट से लेकर ऊपर गांड तक फेरी. दीपिका सिसक पड़ी.. आह्हः राज बड़ा आनंद आया मुझे तेरे हाथ से.. एक बार फिरसे ऐसे hi करना. राज ने फिरसे छूट और गांड पर हथेली रगड़ दी. दीपिका को और भी मज़ा आया..

दीपिका-- चल अब मेरी गांड चाट राज.. देख कसी ने भी तुझे गांड नहीं दी. मैं पहले गांड तू फिर छूट की सील खुलवावी.. दोनों दर्द आज hi मुझे प्राप्त करने हाँ. मुझे भी तेरे माल को अपने छूट में लेना है. मुझे भी जल्द से जल्द तेरे बचे की माँ बनना है.

राज ने जीब निकल पर दीपिका की कुंवारी गांड पर लगाई तोह मस्त स्मेल से राज खुश हो गया.. वहीँ दीपिका की फिरसे सिसकी निकल गई.

दीपिका-- आठ ओह्ह्ह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ राज मंत्र से ऐसा सब किया जाए तोह मज़ा hi और होता है. आज तक तू खुद की मर्ज़ी से सब करता आया है. मेरी मर्ज़ी से कभी तूने मुझे नहीं छुआ.. आज मैं भी पुरे मैं से तुझसे मज़े कर रही हों तोह बता नहीं सकती. कितना मज़ा आने लगा है. आह्ह्ह्ह चाट राज मेरी गांड के छेड़ को चाट. बड़ा अजीब सा लग रहा है. थोड़ी सी खुजली भी हो रही है मुझे वहां.. पर मज़े की क्या hi बताओ मैं raaj..ummmmmmm uffffffffffff राज मेरे नितम्ब खेंच कर चाटो न.. आह्हः हाँ राज थोड़ा सा और कहना..

राज ने ऐसे hi किया तोह दीपिका की ऑंखें मस्ती से बंद होती चली गई.. आनंद के असीम एहसास के चलते वह वहां जा पोहंची थी. जहाँ पहले कभी नहीं पोहंच पाई थी. राज ने दीपिका को और भी मज़ा देने के लिए जीब छूट पर राखी और निचे से ऊपर तक फेरने लगा..

दीपिका-- आठ राज आज तुम मुझे पागल कर डोज राज.. उफ्फ्फफ्फ्फ़ इतना आनंद मैं कैसे सहन कर पाऊँगी. इतना मज़ा इतना करंट, इतने झटके.. उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ राज.. और करो राज

राज लगा रहा कुछ देर.. कभी गांड के छेड़ को अच्छे से छत्ता तोह कभी निचे से ऊपर तक छूट और गांड पर जीब फेरने लगता.. दीपिका घोड़ी बानी सर झटक रही थी. उसकी छूट फिरसे पानी पानी होने लगी थी.

कुछ देर में राज सीधा हुआ तोह दीपिका को कुछ सांस आई.

राज अपने लुंड को पकड़ कर छूट की फैंको में रगड़ने लगा.. फिर गांड के छेड़ पर रगड़ने के बाद छेद में सुपड को फिट कर दिए..

दीपिका-- आठ राज मुझपर आज दया मत करना..

राज-- हाहाहा. दया से काम लूंगा तोह हाथ कुछ नहीं आएगा. काम भी नहीं हो पायेगा और मज़ा भी अधूरा रह जाएगा.

दीपिका-- नहीं आज मज़ा की कहीं भी कोई कमी नहीं रहनी चाहिए.. सब कर जाओ तुम. कुछ भी करके मुझे वह मज़ा दो. जिसकी मैं हक़दार भी हों और ज़रूरतमंद भी.

राज ने अच्छे से छेड़ पर लुंड सेट किया और दीपिका की कमर पकड़ कर लुंड को पुश करने लगा.. पर गांड का छेड़ था. आसानी से तोह नहीं खुलने वाला था.. लुंड स्लिप होक ऊपर निकल गया.. दीपिका इंतज़ार में रही.. राज ने दूसरी कोशिश करि, लुंड फिरसे स्लिप कर गया.

राज-- कुछ ज़यादा hi टाइट है आपकी गांड..

deepika--kunwari हों न. तोह टाइट तोह होनी hi है.

राज का लुंड पहले hi दीपिका की थूक से गीला था. फिर भी राज ने अपनी हथेली पर थूक दाल कर लुंड के सुपड को गीला किया और कुछ थूक गांड के छेड़ पर दाल दिए.

राज-- अब देखता हों कैसे नहीं जाता.

राज ने फिरसे लुंड को छेड़ पर रखा. सुपड पर अंगूठा रखा कहीं लुंड आगे को स्लिप न कर जाए. फिर पुषः किया तोह सुपड थोड़ा सा गांड के छेड़ में जा फसा.. दीपिका को कुछ दर्द हुआ तोह वह आगे को खिसक ली.. पर ज़यादा नहीं हुई.

दीपिका-- क्यों देर कर रहे हो राज. अब घुसा भी दो. घुसने से पहले hi देर के कारण दर ज़यादा लगने लगा है.

दीपिका की आवाज़ कैंप रही थी.

राज- हाहाहा.. डरो मत मेरी जान.. अब देर नहीं होगी. राज ने धक्का मर्डर दिए तोह पटककक की आवाज़ के साथ सुपड गांड के छेड़ में फस गया.. राज ने दीपिका को कसके पकड़ा हुआ था. दीपिका चीख पड़ी और खिसकने को हुई.. पर ने उसे नहीं छोड़ा

दीपिका-- आठ इतना दर्द..

राज -- अब देखना कितना दर्द होता है. राज ने पूरी जान लगा कर धक्का मार दिए. दीपिका हलक़ पहाड़ कर चीख पड़ी. उसकी चीख से साथ के कमरे में सोइ हुई भी उठ कड़ी हुई.. वह दूर पीटने लगी.

राज-- हाहाहा.. क्या हुआ. गांड पहात रही है दीपिका की. तुम सब सो जाओ. सुबह उठ कर देख लेना..

दीपिका-- हरामी साले कुत्ते. मई मर गई.

राज-- अभी कहाँ मेरी रानी. अभी तोह लुंड थोड़ा सा hi घुसा है. अभी तोह पूरा बाकि है...

दीपिका सोच कर परेशान हो गई. जितनी दलेर बनती थी. गांड फटी तोह साडी दलेरी भूल गई थी..

वह सुबकने लगी. राज नहीं रुका और एक धक्का और मार दिए.

दीपिका-- आठ mardarchod..behenchod.. निकल.. निकल अपने लुंड निकल मेरी गांड के अंदर से. मुझे नहीं मारवणी तुझसे गांड..

राज-- हाहाहा.. अब तोह नहीं निकलेगा मेरी रानी. लुंड है कोई मज़ाक नहीं. ऐसी गांड भी तोह कभी कभी hi मिलती है मुझे.. राज ने एक धक्का और मार दिए. 7 इंच तक लुंड दीपिका की गांड में उतर चूका tha..depiak मरने जैसी हालत में होने लगी थी. वह राज की मज़बूत पकड़ से छूट भी नहीं प् रही थी. हिलती तोह लुंड उसकी गांड को और भी ज़यादा दर्द देने लगता था.

दीपिका रेगुलर आवाज़ में रोने लगी थी. राज को गलियां देने लगी थी. राज अब रुक कर दीपिका की छूट रगड़ कर पानी निकल रहा था. शायद दीपिका को कुछ रहत मिले..

दीपिका की बहुत बुरी हालत हो चुकी थी. कुछ देर में दीपिका सुकून से हुई तोह सिसकते हुए बोली-- कसम से नहीं पता था. इतना दर्द भी होता है. मैंने तोह सोचा था, मैं सबसे अलग हों, तोह सहन भी कर जाऊँगी. पर मैं गलत थी. राज प्ल्ज़ और दर्द मत देना मुझे..

राज-- नहीं दूंगा.. अब तोह सारा लुंड चला गया है आपकी छूट में.

दीपिका ख़ुशी से चीख कर-- क्याआ.. मतलब मैंने सारा ले लिया अपनी गांड में.

राज दीपिका के मुलायम चुत्तड़ को मसलते हुए-- हाँ मेरी रानी.. सारा घुस गया है. जितना दर्द होना था हो गया. अब मज़े hi मज़े होंगे..

दीपिका-- मुझे यकीं नहीं आ रहा राज. इतना मोटा और लम्बा लुंड सारा hi मरी गांड में घुस गया है. दीपिका हाथ पीछे ले जाने लगी तोह राज ने पकड़ लिया.

राज-- क्या करने वाली हो..

दीपिका-- देखना है मुझे. तेरा लुंड मेरी गांड में घुस के कैसे दिख रहा होगा.

raj--dekh लेना.. पहले सही से गांड खुली तोह कर लेने दो. राज ने लुंड हिलाया तोह दीपिका दर्द से चीख पड़ी. अपने हाथ को फिरसे बीएड पर रखते हुए खुद को बैलेंस करने लगी..

दीपिका-- आह अभी भी इतना दर्द है. राज इस दर्द को ख़तम करो. और सहन नहीं होता.

राज अपने लुंड को हिला कर बहार निकलने लगा तोह दीपिका फिरसे चीखने लगी. राज सुपड तक लुंड को निकल पर फिरसे धीरे से अंदर डालने लगा.. दीपिका की गांड पहात गई थी. मास्स चिर गया था. खून निकलने लगा था. दीपिका दर्द और जलन से तड़पने लगी थी.

राज धीरे धीरे लुंड को अंदर बाहर करने लगा.. गर्म और खुश्क गांड ने राज के लुंड को सूखा दिया तोह राज फिरसे अपने लुंड पर थूक लगा कर गीला करके दीपिका की गांड में घुसाने लगा..

कुछ देर के दर्द के बाद दीपिका को मज़ा आने लगा. उसकी गांड राज के लुंड को अच्छे से लेने लगी थी.

दीपिका-- थैंक गॉड कुछ आराम मिला.. नहीं तोह मुझे लगने लगा था. आज तोह पक्का मई मर जाऊँगी.

राज-- मेरी जान लुंड से कोई नहीं मरता.. छूट और गांड तो बानी hi लुंड के लिए है. छूट और गांड का छेड़ जितना भी स्माल हो. लुंड जिंटा बड़ा भी हो.. लुंड घुस hi जाता है.

दीपिका-- हाँ अब प्रैक्टिकल किया है तोह पता चला है. वर्ण बिलीव कर पाना आसान नहीं है..

राज फिर दीपिका की गांड मारने लगा.. दीपिका अब मज़ा से गांड मरवा रही थी. उसे दर्द भी हो रहा था. पर मज़ा भी खूब आ रहा था. वह भी अब गांड हिला हिला कर लुंड ले रही थी.

दीपिका-- आठ पहले लगा गांड में लुंड डलवा कर मैंने गलत किया है. पर अब सही लग रहा है. इतना बड़ा लुंड लेके चुद रही हों. सोच कर hi हसी भी आ रही है और मज़े की शिद्दत से पागल भी होने लगी हों.

गांड को अच्छे से खोल कर दीपिका की छूट को और भी पानी पानी बना कर राज ने लुंड दीपिका की गांड से निकल दिए.

पटकक की आवाज़ के साथ लुंड बहार निकला तोह दीयपका लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी.

दीपिका-- क्या हुआ निकल क्यों दिए..

राज-- तुम लेटो.. अब छूट खोलता हों. फिर बरी बरी दोनों छेड़ो में घुसा कर छोडूंगा अपनी जान को.

दीपिका जो मज़े में थी.. क्याआ.. फिरसे दर्द.. no राज. प्ल्ज़ ऐसे hi मुझे छोड़ो. मैं अभी फिरसे दर्द में नहीं आना चाहती.. मुझे ऐसी hi मज़ा करने दो. दूसरा दर्द फिर कभी ले लुंगी. आज गांड के hi मज़े लेने दो.

राज-- देख लो. कहीं देर न हो जाए. बाद में

दीपिका -- कुछ नहीं होता. तुम मारो मेरी गांड. छूट बाद में

राज-- ok.. जैसी आपकी मर्ज़ी.. राज बीएड लेट गया.. अब तुम खुद से लो मेरा लुंड अपनी गांड में. इससे तुम्हे और भी मज़ा आएगा..

दीपिका-- हाँ.. मज़ा तोह मैं अंदाज़ में चुद कर लुंगी..

दीपिका राज के ऊपर आई और लुंड को अपनी गांड में लेकर छोड़ने lagi.woh झुकी और राज को किश करते हुए अपनी गांड को ऊपर निचे करने लगी..

राज और दीपिका फिर लगे रहे.. पोजीशन बदल बदल कर चुदाई करते रहे.. दीपिका की गांड का छेड़ अब राज के लुंड को ऐसे ले रहा था. जैसे दीपिका पहले भी कई बार राज का लुंड अपनी गांड में ले चुकी हो. दीपिका 2 बार चुतरस बहा चुकी थी. फिरसे झड़ी तोह राज भी दीपिका की गांड में माल निकल गया..

गांड मार के राज बोहत थक गया ता. एक hi दिन में कई बार लुंड का माल निकला था राज ने.. राज को पता भी नहीं चला.. कब वह दीपिका की गांड में लुंड डाले hi सो गया.

दीपिका भी चुदाई नशे में होते हुए नींद की वादियों में जा पोहंची..

____________________________

प्रेजेंट

*********

क्या बात है राज.. तुम कुछ ज़यादा hi मस्ती नहीं करने लगे हो मेरे साथ..

मनोरमा मीठी नज़रों से राज को देखते हुए बोली तोह राज ने उसे फिरसे पकड़ कर अपने ऊपर ऊपर गिरा दिए..

अब राज का दूसरा हाथ भी ठीक हो गया था. दोनों पाऊँ की हड्डियां अभी तक लकड़ियों से बंधी हुई थी.

दोनों बस्ती से दूर एक जगा बैठे हुए थे.. राज लेता और मनोरमा के साथ मस्ती कर रहा था.. मनोरमा की बात सुनी तोह उसे खेंच कर अपने ऊपर गिरा लिया..

राज-- क्या करूँ मेरी जान. तुम्हारा नशा hi इतना है. मुझे कुछ और सुझाई hi नहीं देता.. मन करता है, ऐसे hi तेरे बदन की इस मस्त खुशबु को सूंघता रहूं.

मनोरमा लज्जा गई. उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया.

मनोरमा-- चल झूठा..

राज-- मैं झूठा हों.

मनोरमा ऐसे hi मोह साइड किये हुए-- और नहीं तोह क्या. मुझसे भी सुंदर लड़कियां है इस बस्ती में.. मुझसे बढ़कर उसके सुंदर शरीर से महक आती है. तुम तोह ऐसे hi मुझे बांस पर चढ़ाये रहते हो.

राज-- अरे मेरे दिल से पूछो मेरी जान. तुमसे सुंदर तोह इस पूरी दुन्या में कोई नहीं होगी. भगवन ने तुम्हे खास बनाया है. बनाने के बाद फिरसे कोई तेरे जैसी कोई और सुंदर लड़की नहीं बनाई.

मनोरमा राज की ऐसी hi बातों की दीवानी थी. राज जब भी उसकी तारीफ करता था. वह खिल उठती थी. राज के आ जाने से उसे अपनी ज़िन्दगी बोहत हसन लगने लगी थी.

राज की अबकी बातें सुनी तोह चाहता गुलनार हो उठा मनोरमा का. खुद को दुन्या की सबसे भाग्यशाली लड़की समझने लगी थी वह..
 
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