Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta - Page 11 - SexBaba
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Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta

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सब अनीता को देख रहे थे और अनीता सर झुअए कश्मकश में थी. कैसे वह अपने कपडे उतर कर सिर्फ ब्रा और पंतय में हो सकती थी. ऐसा कभी उसकी लाइफ में पहले कभी कोई सन नहीं बना था. ऐसे रंग कहाँ उसकी ज़िन्दगी में पहला कभी आये थे. वह बहुत ज़यादा नर्वस होने लगी थी.

दीपिका ने सबको इशारा कर दिए. अनीता सबको अपनी और बढ़ते देख कर कुछ समझ नहीं पायी.

दीपिका-- हम जानती हाँ अनीता जी. ये सब आपकी लाइफ में नया है. पहले कभी आपकी ऐसी सिचुएशन का सामना नहीं करना पड़ा. पर समय हमेशा इंसान की लाइफ में बदलाव लता रहता है. जैसे राज के आ जाने से आपकी लाइफ में चेंज आये हाँ. उसी तरह से बाकी चंगेस को भी आपको एक्सेप्ट करना होगा. नहीं करेगी तोह आपके लिए मुश्किलिलत बढ़ने लगेंगी.

अनीता सब समझ रही थी. पर हिम्मत नहीं कर प् रही थी. सब एक गिर्द आ कड़ी हुई और अनीता को स्माइल से देखते हुए उसके कपडे पर हाथ रख दिए.

अनीता अब समझ गई थी उसके साथ क्या होने जा रहा है. उसके दिल की धड़कन बांधने लगी. सर्दी में भी पसीना आने लगा. बंद कमरे में सर्दी का एहसास नहीं था. पहले उसे पसीना नहीं आया था. पर अब जैसे hi उसे अंदाज़ा हुआ, उसके बदन पर मौजूद कपडे उतरे जाने वाले han.soch कर उसके मुसमो से पसीना उगलना शुरू कर दिए था.

उसके हथु पैरों की हथेलियों ने भी पसीना से गीला होना शुरू दिए था. पसीने के बहार निकलना तब और भी ज़यादा हो गया. जब उसकी कमीज़ उसके बदन से अलग हुई. फिर सबने मिलकर अनीता के बदन पर केवल ब्रा और पंतय hi छोड़ी. अनीता का सर बहुत ज़यादा झुक गया था. बहुत शर्म आ रही थी उसे. उसका बस नहीं चल रहा था. अपने कपडे उठा कर भाग जाए. वह दूसरी होकर अपने दिख रहे बदन को छुपाने की कोशिश करने लगी.

भावना-- अरिसुन्दर.. माँ भाभी बहुत सुंदर हाँ.

आराधना-- हाँ कितनी पायरी है मेरी बहु

नंदनी-- हेहेहे.. हे मेरी होने वाली सौतन जी. अनीता जी आपकी बहु नहीं हाँ. ये तोह आपकी होने वाली सौतन हाँ. हम सबकी होने वाली सौतन हाँ. यहाँ बहु कोई भी नहीं है. देखो मेरे पेट को देखो. मैं भी आपकी सौतन hi हो. देखो आपके होने वाले पति का बच्चा मेरे पेट में है.

सब हसने लगे

दीपिका-- सब साइड हो जाएँ. मुझे अनीता जी को देखने दें.

सब साइड हुए तोह दीपिका अनीता जी को देखने लगी. दीपिका अपनी माँ और बहनो के साथ बहुत खुली हुई थी. अब तोह लेस्बियन सेक्स भी शुरू हो चूका था. अनीता जी का मस्त बदन देख कर दीपिका के बदन में सिहरन दौड़ने लगी. वह उठी और गांड गांड मटकते हुए अनीता के पास जा पोहंची.

दीपिका किसी लॉफ लड़के के जैसे अनीता के चेहरे पर उँगलियाँ फेरने लगी. आँखों में खुमारी लाते हुए अपनी उँगलियाँ निचे लाने लगी-- अनीता जी आप बहुत सुंदर हाँ. बड़ी आग भी है आपमें. हमारे बदन में भी बहुत सैलून से आग भड़की हुई है. हमारे हरामी भाई ने हमें बहुत परेशान किया है. हम सब अपने अंदर बढकने वाली आग पर कभी भी काबू नहीं प् सकीय. अब वही आग आपके अंदर भी भड़काएंगी हम. आपको भी हमारे जैसे hi जलना होगा. लेकिन पहले आपके सभी गुप्त अंगों को देखेंगी हम. छुएं गई हम. राज से भी पहले हम आपका रास टास्ते करेंगी. देखेंगी आप के बदन के अंदर की आग ने आपके रास को पका कर कितना स्वादिष्ट बना दिए है. क्यों मैंने सही कहा न.

दीपिका की बात पर सब हाँ हाँ बोलने लगी.

दीपिका के हाथ को अपने चेहरे पर प् कर अनीता के बदन के मस्ती बढ़ने लगी थी.

दीपिका की उँगलियाँ फिसलती हुई निचे आने लगी. के हाथ से दीपिका ने अपनी ब्रा को को ऊपर करके अपने चुके नंगे किये. दूसरे हाथ को अनीता की ब्रा पर लाते हुए उसकी ब्रा भी ऊपर कर दी.

दीपिका के ऐसा करने पर सबने भी अपनी अपनी ब्रा ऊपर सरका दी. सबके चुके नंगे हो गए. अनीता एक लम्बी सांस लेकर रह गई. दीपिका अपने दोनों हथु से अपने चुके थाम कर अनीता के निप्पल्स के साथ अपने निप्पल्स जोड़ने लगी. अनीता की आँखों में देखा तोह वहां भी नशा छाने लगा था.

दीपिका अपने निप्पल्स अनीता के निप्पल्स के साथ रगड़ते हुए- पहले कभी ऐसा सन बना है आपकी लाइफ में अनीता जी

अनीता मदहोश होने लगी थी. सेक्स के नशे में नहीं आई थी वह. माहौल का नशा होने लगा था उन्हें.

अनीता-- haaann...nn..nahi..pehle कभी मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ

दीपिका के होंटो पर स्माइल आ गई तोह सब भी मुस्कुरा पड़ी.. अनीता हड़बड़ा गई थी

दीपिका--- किसके साथ बना था ऐसा सन

अनीता घबरा kar--kisi के साथ नहीं

दीपिका ने अपने चुके अनीता के चुके से अलग किये और अनीता की पंतय निचे करके उसकी छूट पर हाथ फेरते हुए-- बताओ न अनीता जी. आपकी छूट पर भी कभी किसी के हाथ चलें हाँ.

अनीता अपने टांगों को हिला कर दीपिका के हाथ से होने वाली बेचैनी से बचने के लिए

अनीता-- नहीं किसी ने नहीं छुआ मुझे वहां. अनीता नज़रें चुराते हुए बोली

"ये झूट बोल रही है"

"इससे सच बुलवाना होगा"

"ज़रूर ये अपनी बेहेन के साथ मस्ती करती रही होगी"

"हाँ हाँ वही अनीता जी के लिए स्पेशल है. ज़रूर अनीता जी ने दिशा के साथ मज़े किये होंगे"

"फिर तोह जान कर खूब मज़ा मिलेगा हम सबको"

सब बारी बारी कुछ न कुछ बोलने लगी. अनीता के दोनों गाल बेपनाह लाल होने लगे. जहाँ उसे ऐसा सब सुनकर अजीब लग रहा था. शर्म से वह लाल हो रही थी. वही वह खुश भी थी, किसी ने ये नहीं कहा था, अनीता ने किसी लड़के के साथ ऐसा सब किआ होगा. कितना सब अच्छा लगने लगा था उसे. उसका परिवार ज़िंदा होता तोह सबके साथ मिलकर वह कितना एन्जॉय करती.

अनीता-- हाँ मेरी दिशा जब नयी नयी जवान हुई थी तोह बड़ी चुलबुली हो गई थी वह. मुझसे लिपट कर सोती थी वह. मैंने उसकी ज़िन्दगी बनाने के लिए खुद को बदल लिया था. पर दिशा जब जवान हुई तोह मेरे साथ छेड़ छड़ करने लगी. मेरे अंदर की सोइ हुई लड़की भी जागने लगी. दिशा की छेड़ छड़ पर मैं भी कण्ट्रोल से बहार होती चली गई.

दीपिका अनीता की छूट की फंखो में एक ऊँगली रेगुलर चला रही थी. अनीता की छूट बहुत गीली होने लगी थी. उसे बहुत मज़ा आने लगा था. धीरे धीरे वह मस्त होती चली गई

अनीता-- शुरू शुरू में मैंने उसे बहुत रोका था. पर वह नहीं रुकी थी. एक दिशा hi बची थी मेरे परिवार में. मैं उसे हर्ट नहीं कर सकती थी. मेरे अंदर भी आग लगने लगी थी. फिर मैं भी उसका साथ देने लगी. जब तक उसकी शादी नहीं हुई तब तक हम दोनों बहने मिलकर मज़े कर लिया करती थी. फिर शादी के बाद मैंने दिशा को खुद से दूर कर दिए. मुझसे कण्ट्रोल छूटने लगा था. दिशा नहीं मान रही थी. पर मेरी ख़ुशी के लिए खुद को रोक गयी. अब भी जब कभी मैं खुद पर कण्ट्रोल खोने लगती हों तोह दिशा hi मेरे काम आती है. एक मर्द से मिलने वाला मज़ा दिशा से मुझे कभी नहीं आया. पर मेरे अंदर की बेचैनी इस हद तक ज़रूर काम हो जाया करती थी. मेरा खुद कर कण्ट्रोल बनने लगता था. इतने बरस मैंने बिना एक मर्द के बिता दिए थे. फिर कैसे मैं जल्दबाज़ी से काम लेकर अपनी लाइफ को बर्बाद करती. मेरी लाइफ के साथ जुडी हुई थी मेरी जान से भी पायरी बेहेन की लाइफ. मैं खुद को ऐसे hi किसी के हवाले नहीं करना चाहती थी. मुझे राज जैसे की hi छह थी. जो अब पूरी हो चुकी है

अनीता मदहोशी में बोलती चली गई. अनीता की बेचैनी को समझते हुए दीपिका ने अपनी ब्रा और पंतय उतर दी. उसे देख कर सबने भी ब्रा और पैंतीस उतर दी. सब कमरे में नंगी हो गई थी.

दीपिका झुकी और अनीता की छूट के साथ मोह जोड़ कर अपनी जीब अनीता की छूट में घुसा गयी.

अनीता-- उम्मम्मम आज फिरसे मेरा खुद पर कण्ट्रोल तूने लगा है. बहुत दिनों की आग मेरे अंदर है. आज दिशा भी नहीं है मेरे पास. प्ल्ज़ मुझे शांत कर दो.

आराधना ने अनीता के कंधे पर हाथ रख दिए. तोह अनीता नशीली आँखों से आराधना को देखने लगी. भावना अनीता के पीछे बैठी और अनीता के दोनों चुत्तड़ खोल कर अनीता की गांड चाटने लगी.

अनीता-- आह्ह्ह्ह ये पहले कभी नहीं किया दिशा ने मेरे साथ. उम्म्म्म कितना मज़े आने लगा है मुझे. आरती ने अनीता के चेहरे को थाम कर उसके होंटो को अपने होंटो में ले लिया. अनीता ने ऑंखें खोल कर आरती को देखा तोह बेसब्री के साथ वह भी आरती के होंठ चूसने लगी. अब उसे होश hi नहीं रहा था. वह पागल होने लगी थी.

नंदनी और अंजलि ने अनीता का एक एक चुका पकड़ लिया और मसलने लगी. अनीता हर साइड से घेरे में आ गई थी. मर्द के साथ जितना मज़ा तोह उसे नहीं मिल सकता था. पर सबके एक साथ उसके शरीर के साथ खेलने पर वह मदहोशी की आखरी सीमा पर पोहंचती जा रही थी. बहुत मज़ा आने लगा था उसे. एक हाथ छूट चाट रही दीपिका के सर पर था तोह दूसरा हाथ गांड चाट रही भावना के सर पर था.

चची मस्त मूड में आते हुए आराधना के चुके को पकड़ कर दबाने लगी. आराधना चची को देख कर हसने लगी. चची भी हसने लगी.

कुछ देर में कमरे में अनीता की सिसकियाँ उरूज पर थी. देर नहीं लगी और अनीता अपनी छूट के अंदर से भल भल पानी छोड़ने लगी. वह सुस्त पड़ने लगी तोह दीपिका उठ कड़ी हुई और सबको बोल दिए. अनीता को सोफे पर बिठा दिए जाए. खुद जा कर अपनी सीट पर जा बैठी.

दीपिका -- हमारे चेहते हरामी को पेश किया जाए. भावना गई और राज को ले आई.

राज एक अंडरवियर में था. वह अंदर आया तोह बस अनीता को hi देखता रह गया. बाकि सबको तोह वह नाना देख hi चूका था. अनीता को पहली बार देख रहा था. अनीता की सुंदरता देख कर वह मोहित होने लगा. दीपिका ने इशारा किया तोह राज के पीछे कड़ी भावना ने एक कसके चांटा राज के चुत्तड़ पर मार दिए.

राज ने मुद कर भावना को देखा-- साली दीदी मुझे मार रही है

दीपिका-- भावना राज हरामी को हमारी अदालत में गाली देने पर दो चांटे और मारो

भावना राज के चुत्तड़ को लाल करने लगी तोह राज ने उसका हाथ पकड़ लिया.

राज--- साली hi तोह है मेरा. गली कहाँ दी है मैंने.

आराधना राज के सामने, सबके सामने नंगी थी तोह शर्मा रही थी. बाकि सब राज की बात पर कहि कहि करने लगी.

दीपिका-- अदालत की तौहीन मत कर हरामी

राज-- तौहीन कहाँ की है मलिका अलिअ

दीपिका-- जज साहिबा बोल हरामी... मलिका अभी नहीं बानी हों में.

अनीता की साँसे बहाल हो चुकी थी. राज के आते hi उसके सर झुक चूका था. बोहत ज़यादा शर्म उसे भी आ रही थी. हो रहे ड्रामा का भी उसे बहुत मज़ा आ रहा था. पर शर्म ज़यादा थी. सब नंगी थी, तोह उसे कुछ हौसला मिल रहा था. वर्ण उसका सर उसके घुटनो में आए जाता.

राज-- चुके और छूट नज़र आये तोह जज कैसे कह सकता हों मैं आपको. राज दीपिका के चुके और छूट को देखता हुआ बोलै तो दीपिका ग़ुस्से में आ गई.

दीपिका-- गुस्ताख़ तू एक लेडी जज के अंगो को घूर रहा है. तुझे सजा मिलेगी. भावना उतर इस हरामी का कच्चा. कर दे इसे भी नंगा

राज-- मैं खुद hi उतर देता हों. किसी आउट से कहने की क्या ज़रूरत है. राज अपने hi रंग में था. सब दबी हंसी हसने लगी थी. अनीता के होंटो पर भी स्माइल आ गई थी.

राज खुद से अंडरवियर उतरने के लिए निचे झुका तोह उसके नंगे हो चुके चुत्तड़ो पर भावना ने दीपिका के इशारा पर कसके एक थप्पड़ मार दिए.

दीपिका-- फिरसे कोई और गुस्ताखी की तोह अगली बार तेरे लौड़े पर थप्पड़ पड़ेगा.

राज-- फिर तोह मेरा काम hi हो जायेगा. खड़े लुंड पर थप्पड़ पड़ने से मेरा लुंड कई दिनों तक सेवा करने से जाएगा. कितनी hi छूट मेरे लुंड के बिना पियासी रह जाएँगी.

दीपिका-- भावना, आरती, अंजलि आगे की कार्रवाई शुरू की जाए.

अंजलि-- जज साहिबा इस हरामी ने हमारे अंदर आज लगा कर हमारे फ्यूचर को बर्बाद कर दिए है. जवान होते hi इस हरामी की छेड़ छड़ पर मचल उठी. अब हम इस कदर इस हरामी की छेड़ छाड़ की आदि हो चुकी हाँ. जब तक ये हमें छेड़े न हमें चैन नहीं मिलता. और एक भर्तीअ नारी होने के नाते, एक प्रेम करने वाला दिल होने के नाते अब हम इस हरामी से दूर भी नहीं रह सकती. हमारे शरीर इसके स्पर्श के आदि हो गए हाँ. दूसरे इसके छू लेने के बाद अब हम भी अपने शरीरो को किसी और का हाथ लगते नहीं देख सकती. अब से ये हरामी hi हम सबकी ज़िन्दगी का मालिक है. हम सबका एक सम्मान पति है. पर हम इस हरामी की माँ बहने भी हाँ. खुल कर जी नहीं सकती, खुल कर इसके बच्चू को जनम भी नहीं दे सकती. न इस हरामी के प्यार के बिना हम रह सकती हाँ. और न hi बिना बच्चू को जनम दिए. इसलिए हमें हमारा फ्यूचर खतरे में दिखाई दे रहा है. कैसे हम बहने होने के नाते अपने hi भाई की पत्नी बन सकती हाँ. कैसे हम अपने hi भाई के बच्चू को जनम दे सकती हाँ. समाज हमें ऐसा करना नहीं देगा. जब भी कभी ऐसा हुआ, जब भी हमारी हक़ीक़त समाज के सामने आयी, हमारे पास मरने के शिव कोई और ऑप्शन नहीं होगा. हमें हमारे फ्यूचर को लेके बहुत चिंता है जज साहिबा.

सब अंजलि की बात सुनकर "बिलकुल.. हमारी भी यही समम्स्या है"

अनीता तोह सब को देखती रह गई. जहाँ उसे मज़ा आ रहा था. वहीँ ऐसी समस्या के सामने ा जाने से वह सोचने लगी थी. राज के पास इसका कोई सलूशन भी होगा या नहीं. वह राज का ओपिनियन जान्ने के लिए राज को देखने लगी. राज ने उसे देखा, उसके चुके, फिर पुरे शरीर को देख कर एक फ्लाइंग किश करदी. अनीता हड़बड़ा कर सर झुका गई.

दीपिका-- भावना

भावना ने फ़ौरन hi राज की गांड लाल कर दी.

राज-- कर लो, मेरा टाइम भी आएगा. तेरे भी चुत्तड़ न सुजा दिए तोह मैं भी हरामी नहीं.

भावना दर के दीपिका को देखने लगी तोह दीपिका के होंटो पर स्माइल आ गयी थी.

दीपिका-- बाद का मैं कुछ नहीं कर सकती. इसलिए अभी से अपना हाथ हल्का रख सकती हो.

भावना-- जज साहिबा ये मेरे साथ नाइंसाफी है

दीपिका हस्ते हुए-- अदालत को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता.

दीपिका-- हाँ तोह राज हरामी, अंजलि की बात पर तुम कुछ कहना चाहोगे. बताओ, मैं भी जानना चाहती हों, तुम कैसे सबसे फ्यूचर को सिक्योर कर सकते हो.

राज हरामीपन से-- अभी मेरे दिमाग में कुछ नहीं आ रहा. इतने तंदूर मेरे चरों और जल रहे हाँ. मुझे पियास लगने लगी है. सबका एक साथ पानी पियूँगा तोह दिमाग काम भी करने लगेगा. अपने लुंड को मसलते हुए.. और फिर जब जब ये खड़ा होता है. दिमाग काम नहीं करता. पहले मेरी पियास का और मेरे लुंड का इंतेज़ाम करें. फिर hi जवाब दे सकूंगा.

दीपिका-- ठीक है, बोलो कैसे अपनी पियास बुझाना चाहोगे. कैसे अपने लुंड को ढीला करना चाहोगे.

राज-- सबकी छूट का गरमा गर्म पि कर hi मेरी पियास बुझेगी. सब मिलकर मेरे लुंड को चुम कर मेरे लुंड को ढीला कर सकती हाँ.

दीपिका-- नहीं सब नहीं कर सकती. अभी जिनके फ्यूचर का मसला है. वही ये काम कर सकती हाँ. आराधना, चची, नंदनी और अनीता जी के फ्यूचर का कोई मसला नहीं है. बाकि की तीनो तुम्हारा काम कर सकती हाँ

राज-- फिर तोह मेरा दिमाग सही से काम नहीं कर पायेगा

दीपिका-- तेरे दिमाग को मैं खुद से काम लायक बना लुंगी. तुम चिंता मत करो.

राज-- आप भी आ जाएँ, आपको भी तोह अपना फ्यूचर सिक्योर बनाना है न.

दीपिका-- तीनो का बन गया तोह मेरा फ्यूचर खुद से सिक्योर हो जायेगा. और मुझे अपने फ्यूचर की कोई चिंता भी नहीं है.

दीपिका राज को डेविल स्माइल से देखने लगी. अंजलि, आरती और भावना राज के सामने जा पोहंची.

राज ने अनीता को देखा, जो फिरसे बड़े शोक के साथ राज को सबको देख रही थी. नंगी सोफे पर बैठी थी. जैसे hi राज को खुद को देखते पाया तोह दोनों हथु से अपने चुके छुपा liye,dono टाँगें जोड़ कर अपनी छूट भी छुपा गई. उसका सर झुका हुआ था. पर उसके होंटो पर मंद मंद मुस्कान थी. बड़ी शर्मीली मुस्कान थी उसके होंटो पर. बहुत पायरी दिख रही थी अनीता.

राज के लुंड ने एक झटका मारा तोह आरती ने राज के लुंड को थाम कर दबा दिए.

आरती-- हरामी कुत्ते साले. अभी हमारा टाइम है तोह पूरा फोकस हम पर बनाओ.

दीपिका-- भावना राज हरामी कहीं और देखे तोह पीछे जा कर इसकी गांड चाट लेना.

राज सुनकर ज़ोर ज़ोर से हसने laga--hahahahahaha.. वाआआअह्ह्ह क्या बात है. शेर की गांड चाटने को बोल रही हो. उम्र भर मोह खोलने लायक नहीं रहेगी.

भावना-- ंन्न. नहीं नहीं मैं ऐसा कुछ नहीं करुँगी. भावना दर गई थी.
 
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आरती ने राज के लुंड को पकड़ कर पहले तोह दबाया, फिर सहलाया, फिर चाटने लगी. अंजलि अब जिजाकने लगी थी. पर दीपिका के सख्त बोलने पर वह भी राज के लुंड को आरती के साथ मिलकर चाटने लगी.

भावना मोह देखती रह गई. राज ने भावना को पकड़ और उठा कर अपने कंधो पर बिठा दिए. भावना चीख पड़ी. सब हसने लगी. राज भावना की छूट में जीब घुसा कर चाटने लगी. बहुत देर से सब की चुटु में आग लगी हुई थी. भावना की छूट में भी बहुत पानी आया हुआ था. राज भावना की छूट पर आया पानी चाटने लगा.

भणवा-- आह्हः कुत्ते चाट मेरी छूट.. उफ्फ्फ्फ़ हरामी साले तू कितना मज़ा देता है. भावना राज के सर के बालों को पकड़ कर खुद को काबू में रखे हुए थी. पर छूट पर चल रही राज की जीब से वह अपना बैलेंस नहीं बना प् रही थी. बड़ी दिक्कत हो रही थी उसे. पर राज ने स्ट्रॉन्ग्ली उसे थमा हुआ था.

अनीता देख कर मस्त होने लगी.. मस्त तोह आराधना, चची और दीपिका भी होने लगी थी. दीपिका उठी और अनीता के पास जा कर बेथ गई.

दीपिका अपने दोनों पेअर खोल कर-- अनीता जी दिखाएँ मुझे कैसे छूट चाटती हाँ. दिशा की भी छूट आपने छाती है. मेरी चाट कर बताएं, दिशा की छूट का पानी टेस्टी था, या मेरी छूट का है.

अनीता इतनी देर से माहौल में रंग चुकी थी. बस राज के आ जाने से कुछ शर्मा गई थी. राज को बिजी देख कर वह कुछ नार्मल थी. नीचे बैठी और दीपिका की दोनों टांगों को थाम कर अपने मोह से जीब निकल कर दीपिका की छूट पर लगा गयी.

अनीता-- जज साहिबा आपकी छूट का पानी भी काम टेस्टी नहीं है.

दीपिका- हमें ख़ुशी हुई अनीता जी आपको खुलते देख कर.

अनीता ने दीपिका की छूट पर निचे से ऊपर तक जीव फेरी और बोली-- यहाँ एक मेरा होने वाला पति है तोह बाकि सब भी मेरे पारी की होने वाली पत्नियां. सभी पत्नियां एक सम्मान होती हाँ. मुझे कुछ और देर लगेगी, फिर मैं भी पूरी तरह से खुल जाऊँगी. ऐस hi लाइफ के तोह कभी मैंने सपने देखे थे. सोचा नहीं था, इतने ज़बरदस्त तरीके से मेरे सरे सपने पुरे होंगे.

दीपिका अनीता के होंटो पर ऊँगली फेरती हुई- विराट ने दिशा की गांड में लुंड दाल लिया है क्या.

अनीता एक ऊँगली से दीपिका की छूट को कुरेदते हुए-- जी जज साहिबा, दिशा मेरी बेहेन बहुत लोविंग गर्ल है. वह प्यार करने के हर एक रंग में रंगी हुई है. विराट ऐसे hi तोह नहीं उसपर लट्टू है. दिशा बहुत मस्त लड़की है. उसे छूट और गांड दोनों में लुंड लेना अच्छा लगता है.

दीपिका-- हम्म्म ये तोह अच्छी बात है. तोह जब दिशा गांड में लुंड ले सकती है तोह अपने क्यों नहीं दिशा से कभी अपनी गांड छतवई.

अनीता फिरसे मस्त हो चुकी थी. वह मज़े में थी. दीपिका की छूट को चाटते कुरेदते हुए वह बोली-- मुझे वहां से सहन नहीं होता था. दिशा वहां हाथ लगा देती थी, फिर चाटने को बोलने लगी. मुझे लगा ऐसे मेरा खुद पर कण्ट्रोल ख़तम हो जायेगा. इसलिए मैंने कभी गांड नहीं चटवायी.

दीपिका-- अगर कभी राज का मैं दिशा पर आया, वह दिशा की छूट और गांड को और भी खुला करने में मूड में हुआ तोह तब आपके विचार क्या होंगे

अनीता दीपिका की आँखों में देख रही थी. बुसिनेसवमें थी, दीपिका की बात का असल मतलब भी वह समझ गयी थी.

अनीता-- प्यार के लिए कोई हद नहीं है. राज हवसी नहीं है, अगर कभी उसका दिशा के लिए मन बना तोह ज़रूर वह दिशा के मान सम्मान को पहले देखेगा. दिशा की मर्ज़ी के बिना वह कभी ऐसा नहीं करेगा. जब दिशा की भी मर्ज़ी शामिल होगी तोह फिर मुझे क्यों ऐतराज़ होने लगा. अब राज मिला है तोह एक मैं मेरा ये भी होने लगा है. काश राज पहले मिला होता तोह हम दोनों बहने एक साथ hi राज से शादी कर लेती.

दीपिका अपनी गांड सोफे पर हिलाते हुए-- इसका मतलब है, दिशा राज को और आपको लेकर अब भी ऐसा सोच सकती है.

अनीता-- ोू हैं, ज़रूर.. दिशा को मुझसे बड़ा प्यार है, जब वह जानेगी राज अपने hi परिवार के साथ प्यार करते हुए हर हद से गुज़र गया है तोह वह खुद को रोक नहीं पायेगी. राज मेरा हुआ तोह दिशा का भी खुद से हो जायेगा. मैं दिशा की हों और राज मेरा पति बन जाने पर दिशा के लिए मेरे जितना hi खास हो जायेगा. दिशा मेरी हर एक चीज के लिए पागल है. मेरे लिए वह विराट को भी छोड़ सकती है. अपने बच्चू से भी बढ़कर वह मुझसे मोहब्बत करती है. इस पूरी दुन्या में दिशा के लिए सबसे बढ़कर मैं हों.

दीपिका-- फिर तोह दिशा को साथ hi ले आना था.

अनीता हस्ते हुए-- मुझे पता होता तोह मैं उसे ले hi आती. जानती नहीं थी, यहाँ इतना मस्त प्रोग्राम देखने को मिलेगा.

दीपिका-- कोई नहीं उसके लिए अलग से ऐसा hi सन बना लेंगी हम सब मिलकर.

दीपिका अपनी गांड थोड़ा सा और सोफे से सरकती हुई बोली- छूट और गांड दोनों एक साथ छतो. अब बातें बंद. अब मेरी बेचैनी भी बहुत बढ़ गई है

अनीता दिशा की छूट और गांड बहुत बार चाट चुकी थी. इस काम में वह एक्सपर्ट थी. वह अपनी उँगलियों को भी दीपिका की छूट और गांड पर चलने लगी. उसके नाख़ून कुछ बढे हुए थे. जब भी अनीता के नाख़ून दीपिका की छूट को कुरेदते, दीपिका पागल होने लगती.

दीपिका-- आह्हः अनीता जी, आप बहुत अच्छी हाँ. राज ने लिए आप मुझे बहुत पसंद आई हाँ.

अनीता खुश हुई तोह जोश के साथ दीपिका की छूट और गांड चाटने लगी. दीपिका राज को देखने लगी. जो भावना की छूट का पानी निकल कर उसे निचे उतर चूका था. भावना फर्श पर बैठी हुई साँसे बहाल कर रही थी. उसकी छूट का पानी निचे फर्श को भिगो रहा था. राज का लुंड अंजलि के मोह में था और राज अंजलि के सर को पकड़ कर अपनी गांड हिला रहा था. राज अंजलि के मोह को छोड़ रहा था.

आरती अंजलि की छूट और गांड पर ऊँगली चला रही थी. अंजलि की बेचैनी भी उरूज पर थी.

वहीँ आराधना, चची और नंदनी भी बेचैन थी. वह भी अपनी टाँगें मसल कर अपनी छूट की बेचैनी से परेशान थी.

दीपिका किसी के लिए कुछ नहीं कर सकती थी. सबकी बेचैनी राज का लुंड hi ख़तम कर सकता था.

दीपिका अनीता से अपनी छूट का पानी निकलवा कर अपनी कुर्सी पर जा बैठी. अनीता अपने होंटो पर जीब देर कर दीपिका के स्वादिष्ट चुतरस को चाट रही थी. अपनी बेहेन के बाद आज उसे दूसरी छूट का टास्ते करने को मिला था. वह चुतरस से मस्त थी.

वह सन देख कर अपने चुके और छूट को मसल रही थी. वह फिरसे गर्म हो चुकी थी. राज ने एक नज़र उसे देखा था. पर इस बार अनीता को काम शर्म आई थी. छूट एक बार पानी बहा चुकी थी. दूसरी बार के लिए तैयार थी. एक घंटे से ऊपर एक समय हो गया था, उसे यहाँ आये हुए. कैसे अपनी शर्म बचा कर रख सकती थी.

राज बारी बारी सबके मोह छोड़ कर अपना लुंड खली कर गया.

फिर आरती और अंजलि की छूट चाट कर उनकी छूट का पानी निकल पर पि गया.

दीपिका-- हरामी अब तुम्हारा दिमाग काम करने लायक हुआ या नहीं.

राज दीपिका की छूट को देखता हुआ-- अगर आपकी छूट का भी पानी मिल जाता तोह पूरी तरह से काम करने लगता.

दीपिका, आराधना और अनीता को देखते हुए-- कुछ देर में तुम आराधना और अनीता की मांग भरने वाले हो. उसके बाद सबकी मांग भी तुम्हे आज के आज हु भरनी है. फिर तुझे सब का सब कुछ मिल जायेगा. उससे पहले उतावले हुए तोह ये प्रोग्राम पेंडिंग कर दिए जायेगा. फिर तरसते रहोगे.

राज-- नहीं मैं इंतज़ार कर लूंगा

दीपिका-- तो जवाब दो, मिस अंजलि की बातों का. कैसे तुम सबके फ्यूचर को सिक्योर करोगे.

राज-- मेरे लिए कोई मसला नहीं है. रेंट पे पति मिलता हाँ तोह सबके लिए भी ले ायूँगा..

दीपिका -- डिटेल में बताओ.

राज-- अब इंदौर में आया हों तोह अनीता जी से शादी करूँगा. उसका पार्टनर बनूँगा. यक़ीनन अनीता जी को भी एक अच्छा पार्टनर मिलने पर ख़ुशी प्राप्त होगी. फिर अपने हरामी दोस्तों से उनकी कोर्ट मैरिज कर दूंगा. एक और को भी गाओं से बुलवा लिया जायेगा. एक बड़ी कोठी में सब रहेंगे. दुन्या वळून की नज़रों में आप सब पत्नियां मेरे दोस्तों की होंगी. पर रियल में सब मेरी बांके रहेंगी. मेरे बच्चू को जनम देंगी.

दीपिका उठी और चल कर राज के सामने ाँ पोहंची. सब को लगा दीपिका को राज का आईडिया पसंद नहीं आया है. पर उन्हें सही लगा था.

दीपिका राज के सामने पोहंच कर राज को घूरने लगी. फिर एक थप्पड़ राज के गाल पर मार दिए. साथ hi उछाल कर राज की गर्दन में बहन दाल दीं. दोनों पेअर राज की कमर पर लपेट दिए. राज को वीलडली किश करने लगी.

दीपिका-- तोह सच में बहुत बड़ा हराम है रे. सोच सोच कर मेरा दिमाग ख़राब होने लगा था. कुछ समझ में नहीं आ रहा था. ये प्लान बहुत परफेक्ट प्लान है. इसे जितनी जल्द हो सके सक्सेसफुल बनाओ. हम देर नहीं कर सकती. तू अकेला है, बच्चू को लेके कितनी देर हो सकती है. इसलिए तू अभी से काम शुरू कर. बच्चे जितनी जल्दी हो जाएँ उतना hi अच्छा है. पता नहीं कब तेरे लौड़े में दुम्म कम् हो जाये. खुद को तेरे नाम करके कहीं हमें पछताना न पड़े..

दीपिका की आँखों में राज के लिए प्यार hi प्यार था. सब राज और दीपिका के गिर्द ाँ कड़ी हुई.. अनीता भी खुश हो गई थी. राज का दिमाग सच में बहुत कमल का था.

राज ने अनीता को स्माइल करते हुए उसका चुका पकड़ लिया. दीपिका ने अपने गांड उठा कर ज़ोर से राज के लुंड पर मार दी.

दीपिका-- हरामी साले, छोड़ उसका चुका. पहले मांग भर, फिर उसे हाथ लगाना. राज के हाथ लगते hi अनीता फिरसे लाल हो गई थी.

दीपिका उठी और फिर अगला कारिक्रम शुरू हुआ. सबसे पहले राज ने आराधना की मांग भरी. उसे किश किया, खड़े खड़े सबके सामने आराधना के चुके चूसे.. फिर आराधना के पैरों में बेथ कर उसकी छूट छाती, फिर गांड छाती. राज का लुंड फिरसे फटने वाला हो गया था.

आराधना के बाद अंजलि, फिर आरती, फिर भावना, फिर दीपिका, और बाद में अनीता की मांग भी भर दी राज ने.

जैसे hi राज ने अनीता की मांग भरी. अनीता की आंख से आंसू निकल आये. अनीता इमोशनल हो गई थी. मांग भरने का समय आया था. तभी से वह आयने वाले पल के लिए बहुत बेचैन थी. बड़ी मुश्किल से खुद पर काबू पाए हुए थी. राज के उसकी लाइफ में आ जाने के बाद उसे उम्मीद भी दिख गई थी. फिर भी एक दर सा था उसे. आअज hi उसकी भी मांग भरी जाएगी ये जान कर वह बहुत खुश हो गई थी.

मांग भरने के बाद वह खुद पर कण्ट्रोल भूल गयी और रोने लगी.

सब अनीता के दर्द को समझ सकते थे. अनीता बरसों से एक वरन लाइफ जीती आ रही थी. कैसी पहाड़ सी लाइफ बिना मर्द के जी थी उसने. सब को बहुत अच्छे से अनीता के दर्द का एहसास था. सब बारी बारी उसे गले से लगा कर प्यार दे रही थी. बधाई भी दे रही थी.

अराधाना-- मत रो अनीता, अबसे तुम्हारे बुरे दिन ख़तम हो गए हाँ

अनीता हिचकियो में रट हुए-- दीदी.. भगवन ने मेरी भी सुन ली.

चची-- भगवन सबकी सुनता है अनीता. जहाँ एक इंसान को बहुत से दुःख देता है तोह बहुत सी खुशियां भी एक साथ दे देता है. हम सब हाँ न तुम्हारे साथ. कभी तुम्हे दुःख नहीं आने देंगी.

सब अनीता को प्यार देने लगे.

दीपिका-- अनीता जी का दुःख तोह ख़तम हो गया है. उसे के आंसू बह रहे हाँ तोह बहने दो. कुछ देर में दर्द के आंसू भी बहेंगे. कब तक उसे चुप करवाती रहेंगी हम.

अनीता सुनकर रट हुए भी शर्मा गई.

दीपिका-- चल राज हरामी, सबसे पहले माँ के साथ मज़े कर.. फिर अनीता जी के साथ, फिर अंजलि के साथ मज़े करना.. अनीता जी बरसों से तड़प रही हाँ. मैं तोह था पहले अनीता जी की दोनों सील्स खुलती. उन्हें चैन भी मिलता और यकीं भी हो जाता. उनकी लाइफ में अच्छे लम्हे आ गए हाँ. पर माँ का हक़ सबसे पहले होता है.

अनीता-- माँ का हक़ सच में सबसे पहले होता है. माँ भी तोह बरसों से तड़प रही हाँ. मुझे कोई जल्दी नहीं है. अनीता सर झुका कर शरमाते हुए धीमे से बोली.

दीपिका ने अनीता की छूट पर ऊँगली रगड़ कर अनीता को दिखते हुए-- तोह ये पानी फिर क्यों आ रहा है इतना. अगर ज़यादा बेचैनी नहीं है तोह एक महीने बाद का महूरत रख दें.. दीपिका हस्ते हुए बोली तोह अनीता सर उठा कर दीपिका को देखने लगी. बोली कुछ नहीं, आँखों में रिक्वेस्ट थी, प्ल्ज़ ऐसा कुछ मत करना. अब राज से दूरी सहन नहीं होगी.

सब अनीता को देख कर हसने लगे. दीपिका सबको लेकर निकल गई. राज सबको पीछे से गांड मटका कर जाते हुए देखने लगा.

सब गए तोह राज ने आराधना को अपनी बहन में उठाया और दूसरे दूर से होते हुए आराधना के कमरे में जा पोहंचा. वहीँ बीएड पर आराधना को लिटा दिए.

आराधना तोह बस राज की आँखों में hi देख रही थी. राज ने आराधना की आँखों में देखा तोह आराधना बोली-- राज बीटा आज आप मेरे बेटे से मेरे पति बन गए हाँ. कैसे मैं इस मिलने वाली ख़ुशी को सहन करूँ.

राज आराधना की आँखों को चूमता हुआ-- जैसे मेरे लौड़े को सहन करेंगी. वैसे hi खुसी को भी सहन कर लेना..

आराधना जहाँ बहुत ज़यादा शर्मा गयी थी. वहीँ उसके होंटो पर मुस्कान भी आ गई थी...
 
98

**

अनीता दूसरे कमरे में बीएड पर लेती थी. उसका बैग उसके पास था. दीपिका ने कुछ देर के लिए अनीता को अकेले छोड़ दिए था. वह समझती थी, अनीता ज़रूर अपनी बेहेन से अपनी ख़ुशी को डिसकस करना चाहेगी.

अकेले में खुल कर अपनी जान से प्यारी बेहेन से बात कर सकती थी.

अनीता ऐसे hi नंगी लेती हुई, बेपनाह ख़ुशी के साथ अपने हाथ में मोबाइल थामे हुए मंद मंद मुस्कुरा रही थी.

दीपिका ने मांग भरते समय की वीडियो भी बना ली थी, और पिक्स भी निकल ली थी. वायरल होने पर बड़ा हंगामा मच सकता था. पर ऐसे हसीं पलों को वह हमेशा के लिए कैद कर लेना चाहती थी. सबने मंज़ूरी दे दी थी.

अनीता मोबाइल में वही पिक्स और वीडियो देखकर बहुत खुश थी. एक पिछ उसने अपनी जान से पायरी बेहेन दिशा को भी सहन कर दी.

पिछ को अनीता ने कप कर दिए था. सिर्फ चेहरे hi नज़र आ रहे थे. दिशा को पता नहीं चल सकता था, मांग भरते समय उसकी दीदी और सब नंगे थे.

दूसरे hi पल दिशा की और से कॉल आने लगी.. अनीता दिशा के नंबर से कॉल आते देख कर स्माइल करने लगी थी.

अनीता ने कॉल पिक करि तोह दिशा चीख कर बोली-- diiiiiiiiiiiddiiiiiiiii आपकी शादी हो गई. आपने मुझे बताया क्यों नहीं. मुझे बुलाया क्यों नहीं... दिशा खुश थी, उसे दुःख नहीं हुआ था.

अनीता-- कैसे बताती, सब अचानक से हुआ था. सबसे सामने फिरसे होगी बाद में. अभी मेरे दिल से दर को निकलने के लिए, मुझे राज की लाइफ में एंट्री मिल चुकी है. ये यकीं करने के लिए ये सब किया है राज की बहनो ने.

दिशा-- कोंग्रटुलतिओं दीदी. भगवन ने आपकी भी सुनली. मेरी भी सुनली.. मैं बहुत खुश हों दीदी. मैं बता नहीं सकती. मेरा दिल कितना खुश हुआ आपकी मांग भर्ती पिछ को देख कर. काश मैं भी वहीँ होती

अनीता हसने लगी-- वह यहाँ होती तोह बड़ी गड़बड़ हो जनि थी तेरे साथ.

दिशा समझ नहीं सकीय-- कैसे गड़बड़ दीदी.?

अनीता-- पहले ये बता, विराट कहाँ है.

दिशा- वह सोनिआ और छोटू के साथ दूसरे घर में है.

अनीता-- चल जल्दी से दूर लॉक कर, फिर तुझे कुछ स्पेशल बताती हों.

दिशा फ़ौरन ऊपर वाले फ्लोर पर गई और एक रूम में घुस कर दूर लॉक कर दिए. बीएड पर गिरते हुए दिशा बड़ी बेचैनी से बोली-- अब बताएं मुझे दीदी. मुझे लग रहा है, जैसे मुझे कुछ बहुत hi स्पेशल सुनने को मिलने वाला है

अनीता सब याद करते हुए-- हाँ बहुत special..itna स्पेशल, तुम इमेजिन भी नहीं कर सकती. इतना स्पेशल तुमने कभी सुना भी नहीं होगा.

दिशा की हालत बहुत पतली होने लगी थी-- दीदी प्ल्ज़ देर न करें. मेरा मैं ऐसे होने लगा है, जैसे मेरे सामंने चटपटे खानो का स्टाल लगा हो, मुझे भूक भी बहुत ज़यादा लगी हो और स्टाल को ओपन होने में देरी हो. ऐसे समय पर जो हलर होती है. शामे वही हालत मेरी अब होने लगी है दीदी.

अनीता-- हहहहए.. तू इतना बोलेगी तोह मैं कैसे सब बता पाऊँगी. तू चुप करेगी तोह मैं बोल पाऊँगी न.

दिशा और भी बेचैन होते हुए-- दीदी प्ल्ज़, अब वेट नहीं होता. बिना रुके, एकदुम्म से सब बता दें.

अनीता-- हेहेहे.. सब एकदुम्म से बता दिए तोह तुझे पूरा मज़ा नहीं आएगा

दिशा चीखते हुए-- दीदी कसम से, आप बहुत देर कर रही है. मेरी बेचिअनि को और भी बढ़ा रही हाँ. कहीं ऐसा न हो, मैं गाड़ी में बेथ कर वहीँ आ जाऊं.

anita--ye तोह और भी अच्छा होगा. तू यहाँ आ जाएगी तोह तुझे सब बताने में और भी मज़ा आएगा

दिशा-- सच.. पर आप भी तोह कुछ देर में वापिस आने वाली हाँ.

अनीता-- नहीं दिशा. मुझे लगता है, मैं आज नहीं आ पाऊँगा.

दिशा-- क्यों क्यों क्यों.. आप क्यों नहीं आएँगी. आपको पता है न, आपको देखे बिना मुझे नींद नहीं आएगी.

अनीता-- मैं नहीं आ पाऊँगी दिशा.. तू सब समझ सकती है न. कैसे एक पैंटी की पहली रा--

दिशा फिरसे चीख पड़ी-- डीइइइइइइइडीइइइइइइइ यू मैं सुहागरात.. वूववव दीदी, इतस अमेजिंग.. वंडरफुल.. उम्म्म्मः दीदी ी लव यू. ी रियली लव यू दीदी. अब तोह मुझे आना hi पड़ेगा. मुझे आपको तैयार करना है न

अनीता हस्ते हुए-- हाँ आ जा. विराट को लेकर आ जा. पर तुझे कुछ परेशानी हो सकती है.

दिशा-- कैसी परेशानी दीदी

अनीता-- फोन पर नहीं बता सकती मैं.

दिशा--- फिर मैं आ रही हों..

अनीता-- ठीक है तू आ जा. पर मुझे लगता है, तुझे अकेले आना चाहिए.

दिशा-- सोनिआ को कैसे समझूंगी.

अनीता-- तू ऐसा कर, विराट और बच्चू के साथ आ जा. विराट तुझे और बच्चू को छोड़ कर चला जायेगा. यहाँ राज की बहने हाँ, वो सब संभल लेंगी.

दिशा-- ठीक है दीदी मैं निकल रही हों.

दिशा बड़ी स्पीड के साथ कमरे से निकली और निचे जा कर विराट को राज की कोठी जाने का बोल दिए. विराट हैरान हुआ था दिशा को खुश देख कर. उसने पूछा तोह दिशा ने वहीँ पर बताने का बोल दिए.

कुछ hi देर में वह गाड़ी में बैठे राज की कोठी की और बढ़ रहे थे. सोनिआ ये जान कर बहुत खुश थी, वह पापा के घर जा रही है..

वहीँ अनीता ने भी दीपिका को दिशा और सबका बता दिए. सब बहने कपडे पहन कर दिशा के सवागत के लिए तैयार हो गयी.

1 घंटे बाद दिशा अनीता के साथ उसी रूम में थी. जिस रूम में रहते हुए अनीता ने दिशा को फोन किया था.

विराट 20 मिंट रुक कर चला गया था. वह अनीता की भरी मांग देख कर बहुत खुश हुआ था. कॉंग्रट्स बोल कर अनीता को बधाई भी दी थी.

वह समझ गया था, दिशा क्यों जल्दी जाने का बोल रही थी. वह समझ गया, अब अनीता की सील खुलने का समय हो गया है. वह दिशा को क्यूट स्माइल देकर वहां से निकल गया था.

सोनिआ और छोटू सभी को बहुत पसंद आये थे. अंजलि और अनीता की सील आज hi खुलनी थी. बाकि सब फ्री थी. तोह वह सोनिआ और छोटू के साथ खेलने लगी.

दिशा अनीता के ऊपर लेती हुई थी. दूर लॉक था. और दिशा अनीता के होंठ चूस रही थी. आज उसे मज़ा आ रहा था, अनीता के होन्स चूसने में. अनीता ने जल्दी में अपना माउथ वाश नहीं किया था. उसके होंटो पर दीपिका की छूट का रास लगा हुआ था.

दिशा-- दीदी किस की छूट छाती है आपने. बड़ा मज़े का टास्ते मिला मुझे आपके होंटो से

अनीता-- हेहेहे.. राज की सबसे छोटी दीदी दीपिका की

दिशा उठी और नंगी होने लगी

अनीता-- दिशा कपडे मत उतार. राज आता hi होगा. फिर तुझे कपडे पहनने में देरी होगी. कहीं ऐसा न हो, तुझे नंगा देख कर तेरे ऊपर hi चढ़ जाए.

अनीता हस्ते हुए बोली तोह दिशा अपनी शर्ट उतर कर फेंकते हुए अपनी ब्रा भी उतर गयी. देर नहीं करि और पंत भी अंडरवियर के साथ उतर कर अनीता कर टूट पड़ी.

दिशा अपनी छूट अनीता की छूट पर रगड़ते हुए-- साली आधे घर वाली होती है दीदी. मैं तोह पुरे घरवाली बांके रहूंगी.

अनीता-- हेहेहे.. मुझे पहले hi तुझपर शक था. तू कुछ ऐसा hi सोचेगी.

दिशा-- दीदी मैं तोह सोच कर hi बहुत एक्ससिटेड हो रही हों. आप मेरी छूट चाट रही होंगी और जीजू आप को छोड़ रहे होंगे.

अनीता-- पागल हुई है क्या. मैं ऐसा कुछ नहीं करुँगी.

दिशा-- हेहेहे.. नहीं दीदी ये तोह हो hi नहीं सकता. आपकी सील खुले और मैं देखों न. हम दोनों एक हाँ दीदी. जैसे मैंने कहा था न आपसे. विराट के साथ भी दोनों मिलकर सब कर लेती हाँ. भूल गई हाँ न आप. मुझे विराट को शेयर करने में कोई प्रॉब्लम नहीं थी. आज भी नहीं है.

अनीता-- पागल है तू सच में पागल है.

disha--haan आज मैं सच में पागल हो गई हों दीदी. कसम से मैं खुद पर काबू नहीं रख प् रही हों. मैं तोह सोच सोच कर hi एक्ससिटेमेंट की साडी हदें पार करने लगी हों.

अनीता-- जब तू सब जान जाएगी तोह फिर तू बिलकुल भी पीछे नहीं हटेगी.

दिशा खुश होक-- अच्छा ऐसा कुछ है क्या..

अनीता-- हाँ ऐसा hi कुछ है.

अनीता फिर दिशा को सब बताती चली गई. दिशा का पहले मोह खुला, फिर वह अनीता के हर एक शब्द पर उछलने लगी.

दिशा-- ववव दीदी, क्या मज़ेदार परिवार मिला है आपको.. मेरा मतलब है हमें. मैं भी तोह जीजू के परिवार से जुड़ गई हों न. दीदी इन्सेस्ट तोह हम दोनों के बीच में भी हो गया था. याद है, हमने कितनी रातें मिलकर रंगीन बनाई थी. ववव अब दोनों एक साथ मिलकर मज़े लुटेंगी.

अनीता-- विराट के साथ धोका नहीं हो जायेगा दिशा.

विराट-- क्यों धोका क्यों होगा. वह नहीं जनता क्या मेरे बारे में. उसे पता है मैं आपसे दूर नहीं रह सकती.

अनीता-- हेहेहे स्टुपिड उसे ये तोह नहीं पता न. तुम मेरे पति से भी चुड़ोगी.

विराट-- ी don't केयर दीदी. मुझे फर्क नहीं पड़ता. और फिर वह भी तोह सब जनता है. मैं आपके साथ कहाँ तक जा चुकी हों. मैंने तोह उसे आपके लिए भी कहा था. न आप मणि और न hi वह. उसे पता है, मैं आपके लिए किस्ती क्रेजी हों. आपकी हर चीज मेरे उसे में रही है.

अनीता स्माइल के साथ दिशा को देख रही थी.

अनीता-- तुम नहीं मानोगी न.

दिशा-- बिलकुल भी नहीं दीदी. हहहहए मैं तोह ये सोचे बैठी हों जीजू का लुंड अपने हाथ से आपकी छूट पर रखूं.. बड़ा मज़ा आएगा दीदी..

अनीता दिशा को खुश देख कर खुश थी. ये सच था, दोनों बहने अपनी मोहब्बत में किसी भी हद तक गुज़र सकती थी. जहाँ अनीता में कुछ शर्म थी तोह वही दिशा बहुत खुले विचारों की थी.

दिशा अनीता को किश करने लगी. साथ उसके चुके भी दबाने लगी. अनीता भी अपनी बेहेन का किश में साथ देने लगी.

कुछ देर में दिशा ने अनीता को भी नुदे कर दिए.

अनीता-- तुझे पता है दिशा. दीपिका कह रही थी, राज का मैं हुआ तोह वह तेरे दोनों छेड़ खोल सकता है. इसमें मैंने वही कहा था. जो तू अभी बोल गई है.

दिशा-- कहीं बताया आपने दीदी. प्यार की बात है. साली आधी घर वाली होती है. जीजा साली का प्यार बड़ा अनमोल भी होता है दीदी. जब जीजू अपनी माँ अपनी बहनो के साथ सब कर सकता है तोह अपनी साली के साथ क्यों नहीं. ऐसे प्यार मैं कैसे छोड़ सकती हों दीदी.

अनीता-- वह सब तोह ठीक है, पर तेरे जीजू का वह बहुत बड़ा है. मैं तोह देख कर दर गई थी. तुम भी नहीं ले पाओगी.

दिशा-- देख लुंगी दीदी जीजू के उसको भी. हम दोनों एक साथ हाँ न तो फिर जीजू को भी नानी याद आ जाएगी.

अनीता अपनी बेहेन के आ जाने पर फूल फॉर्म में आ गयी थी. दोनों फिर कर एक दूसरे के मज़े लेने लगी.

कोई देखता तोह वह यही समझता, अनीता एक एक्सपर्ट चुड़क्कड़ लेडी है. अनीता वर्जिन थी, पर इस समय वह एक सेक्स की माहिर दिखाई दे रही थी. दो बार छूट का पानी निकलवा कर तीसरे बार निकलवाने पर तुली हुई थी.
 
99

**

राज पुरे मैं से अपनी माँ के एक एक अंग को चुम रहा था, चाट रहा था. आराधना के मैं में कोई गिल्ट नहीं था. उसका बीटा अब उसका पति बन चूका था. उसकी मांग भर कर उसके जिस्म का मालिक बन चूका था. आराधना बहुत ज़यादा खुश थी.

राज उसके बदन के एक एक सेंटीमीटर को चुम चुम कर उसे और भी ख़ुशी दे रहा था.

राज फिर ने एक किश आराधना की छूट पर किया फिर ऊपर आ कर आराधना के होंटो पर किश करने लगा.

लुंड का लुंड आराधना के दोनों खुली टांगों के बीच में आया तोह आराधना ने दोनों पेअर क्लोज कर दिए. राज का लुंड आराधना की छूट के साथ लग कर आराधना की टांगों में कैद हो गया. राज का गर्म लुंड आराधना की गर्म पानी बहा रही छूट पर लगा हुआ था. आराधना को बड़ा रोमांचक फील हो रहा था. जितनी सिहरन उसके बदन में हो रही थी, उतनी hi उसकी छूट के अंदर और गांड के छेड़ में भी होने लगी थी.

बरसों बाद लुंड लेने वाली थी तोह उसके अंदर का सब बहुत हलचल मच्ये हुए था.

आराधना राज के लुंड को भींचते हुए राज को किश करने लगी. किश टूटी तोह राज आराधना को देखने लगा. आराधना भी स्माइल से देखने लगी.

आराधना-- क्या देख रहे हो पतिदेव जी..

राज-- पतिदेव.. हम्म्म सही है. अब तोह आपके तेवर hi बदल गए हाँ माँ

आराधना खिलखिला पड़ी-- वह तोह बदलेंगे hi पतिदेव जी. बड़ा परेशां किया है आपने मुझे और मेरी मुनिया को. बड़ी आएग भर दी है आपने मेरे अंदर. अब तोह मई आपको कच्चा hi खा जाओगी.

राज आराधना के नक् पर हल्का सा काटते हुए-- कहाँ से कच्चा खाएंगी, मोह से या छूट से.

आराधना-- हेहेहे जहाँ से भी मेरा मैं बना.. कोई भी रास्ता छोडूंगी नहीं मैं. अब मुझे पूरा हक़ मिल चूका है तोह मैं सब अपने मैं की करुँगी. आप देखते रह जाओगे अपनी आराधना की मस्तियाँ और जलवे

राज-- ाजी वही तोह देखने के लिए आपकी मांग भरी है हमने. बड़ी देर से आप के शरीर को प्यार कर रहे हाँ हम. पर हमें आपने अपने जलवे नहीं दिखाए

आराधना-- जवले दिखाए बिना तोह काम भी पूरा नहीं होगा पतिदेव जी. आपके उसको भींच कर मैंने अपने तेवर दिखा दिए हाँ आपको.

राज ने लुंड को खेंचने की कोशिश करि तोह वह फसा हुआ था. राज अपने लुंड आराधना की जकड से निकल नहीं गया.

आराधना-- हेहेहे.. वहीँ से तोह एक नारी ताकतवर हुआ करती है. वहां जितना ज़ोर एक मर्द लगता है. एक औरत का ज़ोर भी वहां मर्दों की बस करा देता है.

राज-- हाहाहा.. देख लूंगा वहां एक नारी के ज़ोर को भी.

राज झुका और अर्धना के थान को मोह में भर कर चूसने लगा

आराधना-- आठ राज आप बरसों बाद फिरसे दूदू पीने लगे. पि लें, ये आपका hi नसीब था. अब तोह अआप सदा के लिए इनके मालिक बन चुके हाँ.

राज एक चुके को मोह में भर कर चूसने लगा तोह दूसरे निप्पल को उँगलियों में लेकर मरोड़ने लगा.

आराधना-- बरसों बाद आज इन्हे प्यार मिल रहा है. बड़ी तड़प है इनके अंदर भी. मिटा दें आज मेरे अंग अंग की तड़प को..

आराधना की मदहोशी बढ़ने लगी थी. राज एक निप्पल को चूसने के साथ साथ जीब से भी कुरेद रहा था था. जीब का गर्म गर्म एहसास आराधना को पागल बनाये जा रहा था.

राज के गर्म लुंड ने भी उन्हें बेहाल करना शुरू कर दिए था. कुछ देर में राज ने दोनों चुके चूस चूस कर लाल भी कर दिए थे. सख्त भी कर दिए थे. दोनों निप्पल्स भी अकड़ चुके थे.

राज-- कैसा लगा मेरी जान को बरसों बाद एक मर्द का प्यार.

आराधना की आँखों में शराब hi शराब उमड़ आई थी. बड़े प्यार से राज को देखते हुए

आराधना-- बहुत अच्छा. बड़ा आनंद आया मुझे. ऐसा लगा जैसे लाइफ में पहली बार ऐसा आनंद प्राप्त कर रही हों.

राज फिरसे झुका और अकड़े हुए निप्पल पर हलके से काट लिया-- बहुत सालो से तरस रही हाँ न आप. इसलिए लग रहा है जैसे पहली बार मज़े ले रही हाँ

आराधना-- हाँ राज, मुझे ऐसा hi लग रहा है. जैसे लाइफ में पहली बार किसी मर्द से मुझे मज़े मिल रहे हाँ. तभी तोह ऐसा आनंद आ रहा है.

राज थोड़ा सा उठा और अपनी माँ की टांगों में फंसे अपने लुंड को देखने लगा.

आराधना-- हेहेहे वह नहीं निकलेगा राज. उसे एक माँ ने, एक पत्नी ने जड़का हुआ है. बरसों से उसके लिए कितनी बेचैन है एक माँ एक पत्नी.. कैसे वह और अपने शेर बेटे, अपने शेर पति के शेर को छोड़ सकती है. अब hi तोह उसे कैद करने का मौका मिला है.

आराधना जितनी मदहोश थी. उतनी hi मस्ती में भी आई हुई थी.

राज-- तोह टांगों से hi छेड़ बनवा कर चुदाई करवानी है क्या.

आराधना-- हेहेहे. वहां भी बनवा कर करवा लुंगी. मुझे तोह अपने सभी छेदों में आपके शेर को लेना है. एक नया बन गया तोह अच्छी बात है न. जितने छेड़ो में घुसेगा, मुझे तोह उतना hi मज़ा आएगा न

राज-- बड़ा नॉटी मूड हो रहा है जाने मैं का

आराधना-- मूड की क्या पूछते हाँ आप. मूड में तोह मैं बरसों से हों. बस परमिशन अब मिली है मुझे. मूड में तोह आऊँगी hi

आराधना हस्ते हुए अपने दोनों पारी ढीले कर गई. राज ने लुंड निकला तोह आराधना ने राज को साइड में गिरा दिए.

राज अपनी माँ के रंग hi देखता रह गया. आराधना राज के पैरों में आई और राज के पैरों को चाटने लगी

राज-- आह्हः माँ ये क्या कर रही हाँ आप

आराधना-- क्यों मज़ा नहीं आ रहा क्या

राज-- मज़ा तोह आया पर ऐसा भी आप कर सकती हाँ मुझे गुमान नहीं था.

आराधना क्यूट स्माइल के साथ-- बस देखते जाइये पतिदेव जी.. आपकी पत्नी आपको कितना प्यार देती है. बस अपने शेर का धयान रखना है आपने. कहीं पहले hi न उल्टियां करने लगे. आराधना हस्ते हुए राज के पैरों के तलवो को, उँगलियों को चाटने चूसने लगी.

राज को आज अजीब सा मज़ा मिलने लगा था. ऐसा राज ने भी कभी नहीं किया था. आराधना राज के दोनों परिजन की एक एक उँगलियाँ को चाट चूस रही थी. कभी राज के पेअर के तलवे को चट्टी. कभी अपने चुचु के साथ रगड़ती. कभी राज के पारी को बीएड पर रख कर, अंगूठा तोह कभी ऊँगली पर अपनी छूट रख कर रगड़ती. जितना आराधना को मज़ा आ रहा था. उतना hi वह राज को करा रही थी.

राज तोह धीरे धीरे पागल होने लगा था. उसे नहीं पता था. उसकी माँ सेक्स के मामले में इतनी बड़ी खिलाडी भी हो सकती है.

राज का लुंड झटके पर झटके खाने लगा. आराधना देख कर खिलखिला उठती..

आराधना फिर राज के परिजन को चट्टी हुई ऊपर आई और राज की जंटों को चाटने लगी. एक बार भी वह राज के लुंड की और नहीं बढ़ी. राज की एक जंग को चाटने के बाद वह अपनी जीब को ऊपर लाते हुए लुंड के ऊपर से चाटने लगी. ऐसे राज का लैंड आराधना की चीन पर गले पर लगने लगा. राज और भी पागल होने लगा. राज ने एक हाथ बढ़ा कर अपने लुंड को थमा और आराधना के चुके पर लगाने लगा

आराधना-- नहीं स्वामी जी. आप प्ल्ज़ अभी खुद को कण्ट्रोल में रखें

राज-- कण्ट्रोल में रखूं. कैसे रखूं खुद को कण्ट्रोल में. देख नहीं रही मेरे लुंड की नसों का क्या हाल होने लगा है. ऐसा लग रहा है, जैसे पहात जाएँगी. इतना सख्त मेरा लुंड पहले कभी नहीं हुआ

आराधना-- हेहेहे.. अभी तोह और भी इसकी नसें फूलेंगी स्वामी जी.. मुझे मेरा काम करने दें

राज-- हाँ भले hi मेरा काम हो जाये.

आराधना हसने लगी. राज ने अपने हाथ हाथ लिए. आराधना राज के लुंड के चरों और चाटने लगी. राज की बेकरारी अपनी आखरी सीमा पर थी. राज से सच में कण्ट्रोल नहीं हो प् रहा था. उसका लुंड आराधना के शरीर से छू कर और भी बेकाबू होने लगा था.

आराधना ने एकदुम्म से राज के नाभि में जीब डाली तोह राज अपनी गांड उठा कर उछाल पड़ा.

राज-- उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ आआह्ह्हह्ह्ह्ह आराधना जी आप तोह मेरा बुरा हशर कर रही हाँ. ऐसे जाटखे तोह मैंने कभी किसी को नहीं दिए. आह्हः मेरा लुंड माल छोड़ देगा.

आराधना नहीं हटी वो राज की नाभि में जीब घुसाए लगी रही. राज को जवाब भी नहीं दिए.

कुछ देर और राज को पागल करती रही. फिर वह ऊपर हुई और राज के निप्पल को मोह में भर कर चूसने लगी. राज को 440 वाल्ट का झटका लगा. शुक्र था लुंड ने माल नहीं छोड़ा था. वर्ण आराधना ने कोई कसार नहीं छोड़ी थी.

राज का लुंड अब्ब भी खड़ा हुआ था. आराधना के पेट पर उछाल कूद कर रहा tha.raj अपने हाथ आराधना की पीठ पर लाया और फिर साइड में लटक रहे ारधान के बड़े बड़े चुके पकड़ लिए...

इस बार आराधना ने कुछ नहीं कहा राज को. बारी बारी वह राज के निप्पल चुस्ती रही. राज के लुंड की अकड़न और भी बढाती रही

कुछ देर में वह उठी और 69 पर आ कर राज के ऊपर आ गई.

राज को सुकून मिला तोह वह अपनी माँ की छूट की फैंको को खोल कर उसमे जीब घुसा गया.

आराधना तोह राज से भी कहीं बढ़ कर खुद पर कण्ट्रोल बनाये हुए थे. वर्ण तोह उसका मैं था. जैसे hi रूम में घुसे थे. राज अपना मूसल उसकी छूट में दाल कर उसे छोड़ने लगा. एक लुंड पा कर कैसे वह देरी कर सकती थी.

पर उसे चाहिए था पूरा पूरा आनंद.. आराधना भी राज के लुंड को पकड़ कर मसले बिना hi मोह में भर कर चूसने लगी.

बहुत देर से दोनों एक दूसरे के अंगों से खेल रहे थे. दोनों ने स्पीड बढ़ने में देर नहीं करि. दोनों आखरी स्टेज पर थे. दोनों जोश के साथ लगे रहे.

राज एक ऊँगली आराधना की छूट में दाल कर चाटने लगा तोह आराधना कई दिन की भुकी के जैसे राज के लुंड को चूसने लगी..

कुछ hi देर में राज का मोह आराधना के चुतरस से भर गया तोह अराधाना का मोह राज के लुंड के माल से..

दोनों ऐसे hi लेते हुए हांपने लगे.. राज को ज़यादा झटके लगे थे. देर नहीं लगी और उसका लुंड फिरसे अकड़ने लगा..

आराधना ने जैसे hi धयान दिए तोह हसने लगी.. फिर उठ कर साइड लेट गई.

राज-- माँ आज तोह आपके कमल hi कर दिए.

आराधना-- हेहेहे कमल तोह अब उम्र भर करती रहूंगी मेरे लाल. देखते जाओ मैं कैसे कैसे मज़े करवाती हों अपने पति को.

राज-- मुझे तोह लगता है आप मुझे जितने मज़े देंगी. उससे कहीं बढ़कर आप मेरे मज़े लेंगी.

आराधना-- हेहेहे. तोह क्या न लूँ मई मज़े आपके. अब मुझे इस रंग में आने पर मजबूर किया है तोह भुगतना भी पड़ेगा.

राज-- तोह चलिए फिर आज की पहली चुदाई आप अपनी मर्ज़ी से करें और पुरे पुरे मज़े लें.

आराधना-- नहीं ले सकती मैं पुरे पुरे मज़े.

राज-- क्यों

आराधना-- बरसों से बंद पड़े दोनों छेड़ टाइट हो चुके हाँ. पहली बार आपको hi सही से खोलने पड़ेंगे. जब दोनों छेड़ अच्छे से खुल जायेंगे तोह फिर मैं अपने मर्ज़ी भी कर सकुंगी. अभी खुद से करुँगी तोह दर्द भी मिलेगा मुझे और छेड़ भी सही से नहीं खुलेंगे. वर्ण मेरा तोह मैं था, आपके ऊपर चढ़ कर खुद से दोनों छेदों में बरी बरी लेती और खूब मज़े लेती. पर ऐसा हो नहीं पायेगा..

राज उठा और अपनी माँ के पैरों को खोलता हुआ बोलै-- चलें तोह फिर हम आपकी कुछ मदद कर देते हाँ. दोनों छेड़ पहले अच्छे से खोल देते हाँ. सुकृ दीवारों को अपने लुंड के हिसाब से खुला करते हाँ. यक़ीनन पहले इतना बड़ा लुंड भी आपकी छूट और गांड में नहीं गया होगा.

आराधना-- हाँ आपके पिता श्री का लौड़ा इतना बड़ा नहीं था.

राज-- फिर तोह मुझे पूरा पूरा ख्याल रखना होगा

आराधना-- जी हाँ. आप ख्याल रखेंगे तोह आपको भी मज़ा आएगा और मुझे भी.

राज अपने लुंड को थाम कर आराधना की छूट पर मसलने लगा. गीली छूट में लुंड का सुपड घुसा तोह छूट के लिप्स को खोलता हुआ छेड़ पर मालिश करने लगा.

राज-- कैसे लग रहा है जाने मैं अपने पति के लुंड को अपनी छूट पर पा कर.

आराधना-- हर पत्नी hi खुश हो जाती है लौड़े को अपनी छूट पर पा कर. मेरी ख़ुशी तोह फिर भी कई गुना बढ़ कर है. मेरा बीटा hi मेरा पति भी है और मेरे पति का लौड़ा आम मर्दों से भी बहुत बड़ा है. मुझे प्यार भी कैयो से बढ़ कर मिल रहा है. सो मुझसे बढ़कर आज कोई खुश नै होगी.

राज अपने फुल अकड़ चुके लुंड को अपनी माँ की छूट के छेड़ में अच्छे से सेट करते हुए-- तो फिर आपकी ख़ुशी को और भी बढ़ा देते हाँ.. राज ने अपने लुंड को थोड़ा सा पुश किया तोह वह छेड़ में फसने लगा. राज ने थोड़ा सा ज़ोर और लगाया तोह आराधना के चेहरे पर दर्द के भाव आने लगे.

राज-- दर्द होने लगा

आराधना-- हाँ वह तोह होगा hi. बहुत समाय से लौड़ा नहीं लिया है न. तोह कुछ कुछ मेरी मुनिया भी कुंवारी लड़कियों के जैसे हो गई है

राज-- फिर तोह सच में आपको बड़ा दर्द होगा

आराधना-- अच्छा है न. मुझे भी फिरसे सुहागरात मन कर ख़ुशी मिलेगी. दर्द के साथ पहली रात की चुदाई होने जा रही है. मज़े से मैं पागल हो जाऊँगी.

अच्छी से लुंड को आराधना की छूट में फंसा कर राज झुका और आराधना के ऊपर ा कर किश करने लगा. आराधना भी अपने जीगढ़ के टुकड़े के लुंड को अपनी छूट में प् कर किश का मज़ा लेने लगी..

किश करते हुए hi राज ने हल्का सा धक्का मार दिए. आराधना ने राज होंटो को भींच लिए. छूट बहुत टाइट थी. राज का मोटा लुंड उसे दर्द देने लगा था.

राज जनता था. ऐसे hi सोच कर छोड़ने लगा तोह रात हो जाएगी. अभी तोह अनीता और अंजलि को भी छोड़ना था. राज ने ज़ोर का धक्का मारा तोह आधा लुंड आराधना की खुली छूट में घुसता चला गया.

छूट पहले से hi फटी हुई थी. खून नहीं निकला पर आराधना को खूब दर्द का एहसास करा गया.

राज ने दो और हलके हलके धक्के मार कर 7इंच लुंड अंदर घुसा दिए. डेढ़ इंच अब बचा था. इतनी hi पहले आराधना की छूट खुली थी.

राज ने आराधना को देखा तोह उसकी आँखों से आंसू बह बह कर निचे गिर रहे थे. राज वह आंसू चाटने लगा.

राज का लुंड आराधना की छूट में फंसा हुआ था. आंसू चाटने के बाद राज फिरसे आराधना को किश करता हुआ लुंड को हिलने लगा

आराधना अब शांत थी. छूट की आग ज़यादा थी, खुली छूट वाली, हिम्मत वाली भी थी. जल्द hi दर्द को सहन कर गई.

आराधना ने किश करते हुए अपने हाथ को राज के लुंड कर रखा और चेक करने लगी, कितना उसकी छूट में जा रहा था. पता चला अभी भी पूरा नहीं गया.

आराधना ने किश तोड़ी-- राज सारा दाल कर पूरी hi खुली कर दो

राज-- दर्द होगा. आपकी छूट वहां ज़यादा टाइट है माँ

आराधना-- ये दर्द तोह मुझे चाहिए राज.. मुझे भी असली दर्द को एक बार फिर से प्राप्त करना है. मुझे लगने दो, जैसे मैं भी अभी कुँअरि हों.

राज- ऐसा क्या

आराधना-- हाँ राज

राज ने अपने लुंड को थोड़ा सा खेंचा और आराधना की आँखों में देखते हुए पुरे ज़ोर से धक्का मार दिए.

aahhhhhhhhhhhhhhhhh marrrrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiiiii

राज हस्ता हुआ-- बधाई हो माँ आप की सील के बाद की दूसरी सील भी खुल गई.

आराधना जो दर्द से तड़पने लगी थी. राज की बात पर दर्द भी मुस्कान उसके होंटो पर आ गई. अपने दोनों पेअर राज के चुत्तड़ो पर रख कर वह दबाने लगी. स्पीड से छोड़ो मुझे राज. मुझे ये दर्द ज़यादा चाहिए.

राज भी सब समझते हुए स्पीड से अपने लुंड को अपनी छूट की अंत गहराइयो में उतरने लगा.

आराधना को आज असली मज़ा मिल रहा था. मोटा और लम्बा लुंड उसकी छूट की अंत गहरैं में उतरता हुआ उसकी छूट को खुला कर रहा था.

बेपनाह आनंद का एहसास पा रही थी आराधना

आराधना अपने दर्द को भूल कर-- राज बीटा पुरे जोश के साथ मेरी छूट को खुला करो. अपनी माँ को अपनी पत्नी के बेपनाह आनंद को और भी बढ़ा दो. जितना दर्द मिल रहा है. उतना hi आनंद भी आ रहा है. आह्ह्ह्हह ह्म्म्मम्म सीईईई ufffffffffffff ऊऊओह्ह्ह्हह

haaaaaaaaaaannn ऐसे hi और भी स्पीड कर धक्के मारो आआआआअह्ह्ह्हह माआआआआ क्यों मैं इतने साल अपने बेटे से दूर रही.

अह्ह्ह्ह मेरी छूट में कितना मोटा लौड़ा उतर रहा है. उफ्फफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ राज मेरे पति

राज का लुंड जड़ तक आराधना की छूट में उतर रहा था. राज की जंगें आराधना के चुत्तड़ो को लाल कर रही थी.

कमरे में सिसकियों की आवाज़ों के साथ अब पांच पांच किआ ावेज़ें भी आने लगी थी.. आराधना की गीली छूट और भी गीली होने लगी थी.

बरसों से रुका अंदर का पानी खुल कर बहार आने लगा था. हर बार लुंड के बहार आने पर कुछ बूँदें बीएड शीट पर भी गिर रही थी.

आराधना की मदहोशी बढ़ी तोह अपने पैरों का दबाओ बढ़ा गई. राजको किश भी करने लगी. जो धीरे धीरे वाइल्ड होती चली गई.

आराधना कुछ देर में फिरसे झटके कहते हुए झड़ने लगी

राज सोचने लगा कितनी जल्दी उसकी माँ की छूट ने हार मान ली है. फिर राज ने सोचा जितनी स्पीड से वह छोड़ रहा था. कैसे उसकी माँ की छूट हार न मानती.

कुछ देर में आराधना रिलैक्स हुई तोह राज के पुरे चहेरे को चूमने लगी. राज के धक्के रुक गए थे.

कुछ देर में आराधना बोली-- राज बीटा अब मेरा दूसरे छेड़ को भी खुला करो

राज अपना लुंड निकल कर उठ खड़ा hua.aradhana मस्त घोड़ी बन गई. राज अपनी माँ को पीछे से देखने लगा. अपनी माँ के बड़े बड़े चुत्तड़ देख कर राज के लुंड झटके मरने लगा. छूट छोड़ कर भी बैक व्यू पर राज का लुंड झटके खाने लगा था.

राज-- माँ आपकी गांड देख के लगता है. पिता जी ने खूब पेली है आपकी गांड

अराधाना-- हाँ मुझे गांड में लेने में भी बहुत मज़ा मिलता था. कहा था न मैंने. मैंने तेरे पिता के साथ बड़ी खूबसूरत सेक्स लाइफ जी है. तेरे पिता का लौड़ा तेरे लौड़े से छोड़ा था. पर जानदार वह भी बहुत था.

राज-- हाहाहा.. सब समझता हों. ऐसे hi तो नहीं मेरे लौड़े में इतनी जान है. लौड़ा तोह विरासत में मिलता है.

आराधना भी है पड़ी-- हाँ पर पता नहीं तेरा लौड़ा तेरे पिता से बड़ा कैसे हो गया

राज-- हाहाहा छोटे होते hi आपकी छूट में ऊँगली कर दी थी. तोह उसी कारण ये बड़ा हो गया है.

आराधना भी हसने लगी-- चल अब मेरे गांड की सफाई कर..

राज भी हस्ता हुआ-- न करूँ तोह

आराधना-- मेरे पति की मर्ज़ी. मुझे ऐसे ज़यादा दर्द होगा. मज़ा भी काम आएगा और गांड भी सही से नहीं खुलेगी. आपको भी तोह मज़ा लेना है न तोह चाट के मज़ा लें. चेक भी तोह करना है न अपनी माँ अपनी पत्नी की गांड का टास्ते. छूट के मज़े ले लिए हाँ तोह गांड के भी लें. नहीं लेंगे तोह कैसे पता चलेगा. मेरी छूट में ज़यादा मज़ा है या गांड में

अपनी माँ की मस्त बातें सुनकर राज से सहन नहीं हुआ और वह झुक कर अपनी माँ की गांड चाटने लगा. बड़े बड़े चुत्तड़ो को दोनों हथु से मसलता हुआ वह अपनी माँ की गांड बड़े मज़े से चाटने लगा.
 
100

***

आराधना की गांड खुली हुई थी. पर बरसों से कोई लौड़ा नहीं घुसा था तो पहले जैसे हालत में आ गई थी.

राज बड़े मज़े से अपनी माँ की गांड चाट रहा था. कभी छूट चाट कर चुतरस गांड के छेड़ पर गिरा कर चाटने लगता.

आराधना को गांड चटवाने में भी खूब मज़ा आया करता था. वह अपनी गांड हिला हिला कर अपने मज़े में होने का बताने लगी.

राज गांड चाट कर सीधा हुआ तोह आराधना ने मुद कर देखा-- क्या हुआ पतिदेव जी

राज-- अभी तोह इसे हमेशा चट्टी रहने वाली है. इसे अच्छे से खोल दो. फिर चाटने में भी मज़ा बढ़ जायेगा

आराधना-- हाँ सही कहा. फिर करदें इसे भी खुला अपने मूसल से.

राज अपने लुंड को एक हाथ में थाम कर आराधना की गांड पर पटकने लगा. उसे बड़ा मज़ा आ रहा था. आराधना की बड़ी गांड पर लुंड को पटकने में.

फिर अपने लुंड को छूट पर रगड़ता हुआ गांड पर रगड़ने लगा. आराधना आने वाले पल के लिए और भी बेचैन होने लगी..

पहले से hi गीली लुंड को राज ने आराधना की गांड के छेड़ पर सेट किया. दोनों चुत्तड़ खेंच कर छेड़ को खुला किया.. फिर अपने लुंड को छेड़ पर सेट करते हुए हल्का सा धक्का मार दिए.

लुंड स्लिप हुआ तोह राज फिरसे लुंड को छेड़ पर सेट करते हुए अंगूठे से दबा कर पुश करने लगा. लुंड का सुपड थोड़ा सा छेड़ में फंसा तोह राज ने धक्का मार दिए.

पटखह की आवाज़ के साथ सुपड गांड के छेड़ में फस्स गया

आआआआअह्ह्ह्हह दर्द हुआ

राज-- अब तोह और भी होगा. मेरा लुंड तोह आपकी गांड में फस hi गया है माँ

आराधना-- हाँ मेरी गांड छूट के मुकाबले ज़यादा टाइट है

राज-- तोह आप सहन कर लेंगी

आराधना-- सहन नहीं करूंगी तोह मज़ा कैसे लुंगी. आप मेरी फ़िक्र छोड़ दें. जल्दी से मेरा दूसरा छेड़ भी खुला करदें.. फिर जोश के साथ मुझे छोड़ें. दर्द के साथ मज़े की क्या hi बात होती है

राज ने आराधना की कमर को कास के पकड़ा और एक ज़ोर का धक्का मार दिए.

marrrrrrrrrrrr gaiiiiiiiiiiiiiiiiii

आराधना चीख पड़ी. राज का लुंड 3इंच तक आराधना की टाइट गांड में जा घुसा था.

आराधना को ऐसा लगा, जैसे किसी ने बेलना उसकी गांड में घुसा दिए हो

राज ने लुंड को थोड़ा सा हिला कर एक धक्का और मारा तोह 2इंच और आराधना की गांड खुल गई.

आराधना चीखते हुए ज़ोर ज़ोर की सांस लेने लगी. उसे बहुत दर्द होने लगा था.

राज-- सारा डालूं या रुक जाओ

आराधना-- नहीं. रुकना नहीं है. सारा घुसा कर मुझे ऐसे hi उल्टा लिटा दीजियेगा.. फिर पुरे जोश के साथ धक्के मार मार कर मुझे छोड़ें. ऐसे मुझे बहुत मज़ा आता है.

ये मेरी मन पसंद पोजीशन है गांड में लौड़ा लेते हुए चुड़ते समय की.

राज-- वह माँ आप तो बहुत मस्त माल हाँ. कितने स्पेशल अंदाज़ आप गांड मरवाती हाँ.

आराधना-- क्या बताओं मैं आपको राज. जब तक आपके पिता जी ज़िंदा थे. मेरी ज़िन्दगी बहुत मज़े से काट रही थी. हर एक रात मेरे लिए मज़े से भरपूर रात थी. तभी तोह खुद पर कण्ट्रोल नहीं रख पाती थी. आपके सामने भी अपनी छूट में ऊँगली करने लगती थी.

राज अपनी माँ की बातें सुनकर और भी जोश में आने लगा. अपने फेज लुंड को और भी अपनी माँ की गांड में घुसा कर फंसता चला गया

आराधना की मज़ेदार सिसकियों के साथ चीखें भी निकलने लगी. आराधना की गांड राज के मोठे लुंड से पूरी hi खुल चुकी थी. इतना दर्द पहले उसे नहीं मिला था. इतना मोटा लम्बा लंड पहले उसकी गांड में नहीं घुसा था.

जितना उसे दर्द मिल रहा था. उतना hi वह मज़े में भी होने लगी थी.

सारा लुंड आराधना की गांड में उतार कर राज ने अपनी माँ के पेट पर हाथ रख दिए. आराधना ने पेअर लम्बे कर दिए. तोह राज ऐसे hi अपनी माँ को लिटाने लगा. साथ hi वह खुद भी लेटता चला गया.

आराधना के बड़े बड़े चुके निचे दबे थे. राज उसकी बैक पर लेता हुआ था. आराधना सिसक रही थी

आराधना-- अब ऐसे मुझे आपका लौड़ा बहुत अच्छे से अपनी गांड में महसूस हो रहा है राज.. सच में ऐसा लग रहा है. जैसे मेरी गांड में लौड़ा नहीं है बेलना है. उफ्फफ्फ्फ़ मज़ा इतना आने लगा है मैं बता नहीं सकती.

राज अपनी माँ की गर्दन छत्ते हुए-- माँ मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है.. सालों से आपके इस सुंदर शरीर के साथ प्यार करने के लिए मैं भी बहुत तड़प रहा था. होश संभाला तोह सबसे पहले आपका शरीर hi देखा था. आपसे बढ़ कर सुंदर शरीर मुझे किसी का नहीं लगता. अब जितना मज़ा मुझे आपके साथ आ रहा है. न पहले कभी मुझे इतना मज़ा आया था. और न hi बाद में कभी आएगा

आराधना-- आअह्ह्ह्ह आएगा न मज़ा बाद में भी. मेरे साथ रहते हुए आप को इससे से भी बढ़कर मज़ा आएगा. अभी तोह मैं ज़यादा दर्द में हों न.

नेक्स्ट टाइम देखना अपनी माँ के जलवे..

राज-- हाँ माँ वह तोह मैं अभी से hi इमेजिन कर सकता हों

आराधना-- अब ज़ोर ज़ोर से अपनी जंगें मेरे चुत्तड़ो पर मारें. पूरा पूरा लौड़ा निकल कर मुझे छोड़ें. मेरे दर्द को मत देखना. मुझे जितना दर्द होगा. उतना hi मज़ा भी आएगा. मैं सेक्स के लिए बहुत पियासी हों.

राज-- क्यों नहीं माँ. ज़रूर

राज अपनी गांड उठा कर अपनी माँ की गांड से अपने लुंड को निकलने लगा. आराधना आहें भरने लगी. उसे दर्द होने लगा था.

सुपड तक लुंड बहार निकल पर राज ने पुरे ज़ोर से के साथ अपनी जंगें आराधना के चुत्तड़ो पर मार दी

आराधना-- आआह्ह्ह्ह उम्म्म्म maaaaaaaaaaaaa uffffffffffff सीईईईई ऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह मज़ा आ गया राज बीटा.. ऐसे hi पूरा पूरा निकल कर ज़ोर ज़ोर से धक्के मारें..

राज अपनी माँ की छह को देखते हुए पूरा पूरा लुंड निकल कर पुरे ज़ोर के साथ अपनी माँ की गांड मारने लगा.

टाइट गांड की वजा से राज को भी बहुत मज़ा आ रहा था. ऐसी पोजीशन में ऐसे ज़ोर के साथ उसने किसी की गांड नहीं मारी थी.

राज जैसे नशे में होने लगा. फिर वह एक रिधम के साथ अपनी माँ को छोड़ने लगा..

आराधना-- आह्हः मा आज तोह लगता है. मज़े से मेरी जान hi निकल जाएगी. आठ ऐसा आनंद पहली बार प्राप्त हो रहा है. कितनी तरंगें दौड़ने लगी हाँ मेरे शरीर में. आठ राज बीटा आपका लौड़ा सच में बहुत कमल का है.. आपके पिता भी मुझे ऐसा मज़ा नहीं दे सके. आह्हः मेरी छूट फिरसे पानी पानी होने लगी है

राज के अंदर तोह जैसे जिन आ गया था. वह मज़े में बहुत मदहोश होने लगा था. ऐसी गांड सर्विस उसने पहले कभी नहीं करि थी. जोश के साथ उसकी स्पीड बढ़ती चली गई.

जैसे जैसे आराधना की गांड खुली होती गयी. वैसे वैसे वैसे वैसे राज के लुंड की नसें भी फूलने लगी.. राज को लगा ऐसे hi छोड़ता रहा तोह वह झाड़ जायेगा

राज-- माँ ऐसे तोह मेरा लुंड माल निकल देगा

आराधना-- निकलने दोना राज बीटा..

राज-- आप आज अपनी मर्ज़ी नहीं करेंगी क्या

अर्धना- ये सब भी तोह मेरी मर्ज़ी से हो रहा है. मेरे सभी छह पुरे हो रहे हाँ. बाकि के सुकून से करुँगी. अभी अनीता और अंजलि को भी छोड़ता है न आपको

राज- उन्हें कल छोड़ लूंगा. आज सुकून से आपकी सेरीवे करता हों

आराधना- नहीं वह इंतज़ार में होंगी. इंतज़ार भी बड़ा मज़ा और दर्द देता है. आज hi दोनों की सील्स भी खोल दो.

राज-- ठीक है

राज की स्पीड बढ़ती चली गई.

आराधना गांड में लुंड लिए hi छूट का पानी बहा गई. राज भी इतनी स्पीड के कारण अपने लुंड के माल को निकलने से बचा नहीं पाया. आराधना की गांड में वह माल छोड़ने लगा तोह आराधना ने बोल दिए.. चोट में सही रहेगा. ऐसे उसके अंदर हरियाली आ जाएगी.

राज ने गांड से लुंड निकल कर छूट में दाल दिए... वहीँ सारा माल उगला तोह आराधना के अंदर सब हरा भरा होने लगा. उसकी छूट अंत तक राज के माल से भर गई थी. बरसों बाद आराधना अपनी छूट के अंदर लुंड का माल प् कर असीम नशे में हो गयी थी.

वह बीन पर मदहोश नागिन के जैसे हो गई थी... वह ऐसे hi राज की तारीफ में बोलने लगी.

अब मर भी जाऊं तोह कोई ग़म नहीं है मुझे. ऐसा आनंद प्राप्त कर लेने के बाद और किसी चीज की छह नहीं रही है अब मुझे. राज ी लव यू.. मेरा शरीर आपका हुआ तोह मेरी आत्मा आपकी घुलम हो गई है. अब से मेरी एक एक सांस बस यही पुकारेगी

raj..raj..raj..raj..raj..raj..raj..

आराधना की छूट से राज ने लुंड निकला और आराधना की साइड में होकर लेट गया. आराधना को देखा तोह उसका फेस बहुत ज़यादा चमकने लगा था राज अपना चेहरा अपनी माँ के चेहरे के पास लाया और अपनी माँ को चेहरे को चूमने चाटने लगा. आराधना ने ऑंखें खोल कर राज को नहीं देखा. उसके चेहरे की चमक और भी बढ़ गई थी. उसके होंटो पर ऐसी मुस्कान आ गई थी. जो अब हमेशा रहने वाली थी.
 
101

***

अनीता हस्ते हुए-- बस कर दिशा मेरी जान कितना पानी निकलेगी.. कुछ अपने जीजू के लिए बचा रहने दे न.

दिशा अनीता की छूट का पानी निकल कर दूसरी बार फिरसे उसकी छूट चाटने में लगी हुई थी. दिशा अपनी दीदी की छूट के पानी से साणे अपने मोह को ऊपर करते हुए एक क्यूट स्माइल देने लगी-- क्या करू दीदी कसम से रुका hi नै जा रहा.. इतनी एक्ससिटेड हो रही हों मैं..

अनीता-- हेहेहे.. और इसी एक्ससिटेमेंट में कहीं ऐसा न हो तुम मेरी जगा ले लो और मुझे भूल hi जाओ..

दिशा -- हेहेहे दीदी.. होने को तोह ये भी हो सकता है दीदी. पर मैं मतलबी नहीं हों. पहले आपकी hi सील खुलेगी. फिर मेरा नंबर आएगा. आफ्टरऑल आप मेरी सब कुछ जो हाँ..

अनीता बड़ी खुश thi.itni देर तक उसने कभी मज़े नहीं किये थे. दो दो जइसे के डब्बे वह ख़तम कर चुकी थी. तीन बार छूट का पानी निकल कर वह कुछ थकन भी फील करने लगी थी.

पर मज़ा था कह बढ़ता hi जा रहा था.

दिशा ने एक ऊँगली से अनीता की गांड के छेड़ को कुरेदा तोह अनीता उछाल पड़ी-- दिशा की बच्ची वहां कुछ न कर. कहीं ऐसा न हो तेरे जीजू को समय से पहले hi बुलाना पद जाए.

दिशा हसने लगी. उसी पल दूर नॉक हुआ तोह दिशा सीढ़ी होकर बेथ गई तोह दिशा का दिल धक् धक् करने लगा. दिशा को अनीता के दिल की धड़कन सुनाई दी तोह वह सुनकर हसने लगी.

दिशा-- लो दीदी आ गए आपके चाहने वाले.. अब बस कुछ hi देर में आप भी पूरी औरत बन जाएँगी.

अनीता जो पहले बहुत एक्ससिटेड थी. एकदुम्म से कंफ्यूज होने लगी. दिशा उसके मज़े लेने लगी. दूर फिरसे नॉक हुआ तोह

दिशा-- दीदी में बाथरूम में जा रही हों. मुझे लगता है, मुझे अपनी एंट्री स्पेशल बनानी होगी. जीजू तोह मुझे देख कर शॉक hi हो जायेंगे. दिशा हस्ती हुई बाथरूम में घुस गई. अनीता मरे क़दमों के साथ, धड़कते दिल के साथ बीएड से उत्तरी.. और दूर के पास जा कर बोली

अनीता-- कोण है

राज-- वही जिसके इंतज़ार में मेरी जान अब तक बेचैन है

अनीता अपने दिल पर हाथ गयी थी. धक् धक् करते दिल के साथ उसने दूर खोल दिए. खुद साइड हो गई थी. राज अंदर आया तोह अनीता को नुदे देख कर हसने लगा

राज-- वह क्या बात है अनीता जी. आप तोह हमारे लिए पूरा पूरा इंतेज़ाम किये हुए हाँ.

अनीता शर्म से लाल चेहरा निचे कर गई. राज ने दूर बंद कर दिए. राज एक अंडरवियर में था.

अनीता को अपनी बहन में उठा कर वह बीएड की और बढ़ने लगा.. जैसे hi राज ने अनीता को बीएड पर लिटाया.. अनीता की नज़र बाथरूम की और गई. जहाँ से दबे पाऊँ आ रही दिशा को वह देखने लगी थी.

दिशा पास पोहंच कर एकदुम्म से दीपिका के जैसे राज की पीठ पर सवार हो गई.

राज-- ओह्ह दीदी आप भी यहीं हाँ..

अनीता खिलखिला कर हंसी तोह दिशा भी हसने लगी.. राज समझा था उसकी पीठ पर दीपिका है

दिशा-- जीजू मैं दीदी नहीं साली हों.

राज तोह सुनकर शॉक हो गया. दिशा को पकड़ कर भी बीएड पर गिरा दिए. दिशा राज को देख कर हसने लगी तोह राज दिशा को नुदे देख कर हैरान रह गया.

राज-- दिशा तुम कब आई.

दिशा-- कुछ देर हुई आई हों. कैसी राज रही हों मैं राज

राज दिशा के चुके और छूट को देखते हुए-- ऐसे कैसे बता डॉन. फिगर से तोह मस्त hi हो तुम. चख कर सही से बता सुकूँगा.. तुम कैसे लग रही हो.

दिशा-- ओह्ह्ह जीजू आप तोह बहुत मस्त हाँ यार. आज तोह सच में दीदी के साथ थ्रीसम का मज़ा hi आ जायेगा

राज जो सब समझ चूका था. एक बेहेन जब दूसरी बेहेन और उसके पति के सामने नंगी हो तोह क्या अर्थ बनता है.

अनीता अब फिरसे कॉन्फिडेंस में आने लगी थी.

राज-- तो अनीता जी आपने तोह हमें सुरप्रीसेड कर दिए.

अनीता आँखों में शर्म लिए-- दिशा मेरी जान है राज.. दिशा ने कहा मुझे आपको उसके साथ शेयर करना पड़ेगा तोह मैं इंकार नहीं कर सकीय. हम दोनों दो जिस्म एक जान हाँ राज.

राज-- आज से तीन जिस्म और एक जान बन जायेंगे हम.. क्यों दिशा सही कहा न मैंने.

दिशा-- ऑफ़ कोर्स जीजू..

राज बीएड पर आया और लेट गया... तोह कोण पहले मेरी सेवा करना चाहेगी.

दिशा-- जीजू आप थक गए हों न आंटी को छोड़ छोड़ के.. आपकी एनर्जी भी डाउन हो गई होगी.

राज हरामी था. सब मतलब समझ रहा था राज ने दिशा के चुके को पकड़ लिया-- हाँ मुझे वीकनेस होने लगी है. पिलाओ अपना दूध पिलाओ मुझे. मेरी वीकनेस दूर करो.

दिशा और अनीता दोनों है पड़ी

दिशा-- दीदी. जीजू तोह बड़े चालू हाँ. मेरे बोलने से पहले hi समझ गए

अनीता भी हस्ते हुए-- अब तुम इनके साथ खुल रही हो तोह आगे का भी तुम्हे hi भुगतना

पड़ेगा..

दिशा-- मैं डरने वाली नहीं हों दीदी. दिशा राज के ऊपर आई और अपने थान को पाकर कर राज के मोह में डालने लगी-- पियो जीजू अपनी साली का दूध. राज अनीता को देखता हुआ दिशा का दूध पिने लगा. अनीता भी खुश दिख रही थी.

दिशा-- पि ले मुन्ना मेरा सारा दूदू पि ले. शाबाश आह्हः काट मत मुन्ना.. नहीं तोह सारा दूदू निकल कर वास्ते हो जायेगा.

अनीता-- हेहेहे दिशा तोह कुछ ज़यादा hi नहीं बोलने लगी

दिशा-- देखो दीदी आजसे राज मेरा मुन्ना है और मैं राज की माँ. मेरा हक़ बढ़ गया है आपसे.. क्यों राज

दिशा स्माइल से बोली तोह राज ने एक हाथ से अनीता के चुके को पकड़ कर मसलना शुरू क्र दिए.. दूसरे से वह दिशा की गांड के छेड़ को कुरेदने लगा

दिशा-- आह्हः गन्दा मुन्ना. दूदू पिटे हुए अपनी माँ को परेशां नहीं करते. बच्चे अपनी माँ की गांड को नहीं कुरेदते

अनीता-- माँ भी जवान बच्चू को दूदू नहीं पिलाया करती

दिशा-- जी नहीं. जब भी माँ के थान दूदू से भर जाते हाँ. माँ अपने मुन्ने की उम्र नहीं देखती.. उसे तो बस अपने मुन्ने को दूदू पीला कर आनंद लेना होता है

दिशा दूसरे निप्पल को राज के मोह में दाल गई.

राज की ऊँगली एक तसलसल से दिशा की गांड को कुरेद रही थी. दिशा मस्त हने लगी थी.

दिशा-- दीदी जीजू के शरीर में गर्मी ज़यादा से विराट की निस्बत. मेरी गांड का छेड़ जलने लगा है..

अनीता-- तू बस देखती जा. कुछ देर में तोह कहेगी, इतना मज़ा मुझे विराट से भी कभी नहीं मिला.

दिशा-- ऑफ़ कोर्स दीदी.. ये तोह मई कहूँगी hi. आपके साथ मिलकर पहली बार मुझे

सेक्स करने का मौका मिल रहा है. मेरे लिए तोह ये आज तक के सबसे स्पेशल लम्हे हाँ दीदी.

राज की कुरेद से दिशा बेचैन हो उठी थी. अपना निप्पल राज के मोह से निकल कर-- अब कुछ मेरे बेबी के लिए भी बचा रहने दें जीजू..

दिशा अनीता के ऊपर ा कर उसे किश करने लगी-- दीदी जीजू का स्पर्श बड़ा ज़ालिम है. मेरे अंदर आग लगने लगी है दीदी. राज भी अंडरवियर उतार कर दिशा के ऊपर ा गया. अपने लुंड को पीछे से hi दिशा की छूट पर रगड़ते हुए बोलै- अब और भी गर्म हो जाओगी तुम दिशा रानी.

राज के लुंड का स्पर्श पा कर दिशा सच में पागल होने लगी. अनीता को वाइल्ड किश करने लगी. राज अपने लुंड को दिशा की छूट पर रगड़ने लगा. दिशा की गीली छूट और भी गीली होने लगी तोह उठा पीछे हुआ और दिशा की जंगों को पकड़ कर खोलता हुआ दिशा की छूट और गांड चाटने लगा.

दिशा-- जीजू मैं पागल हो जाऊँगी कसम से.. दिशा किश तोड़ कर बोली तोह अनीता हसने लगी-- अब बता.. कहा था राज से पन्गा न ले.. कहीं ऐसा न हो तेरा hi पहला नंबर लग जाए.

राज एक ऊँगली दिशा की छूट में दाल कर गांड चाटने लगा.

दिशा बिन पानी की मछली के जैसे तड़पने लगी.

दिशा-- उम्म्म उफ्फफ्फ्फ़ दीदी सोचा नहीं था मुझे इतना मज़ा मिलेगा. ी वांट मोरे दीदी. जीजू ी लव यू जीजू... लीक में बोथ व्होले वीलडली जीजू.. निकल दीजिये मेरी छूट का पानी.. आह्ह्ह्ह पि जाइये अपनी साली की छूट का रास.. आठ जैसे मैंने आपको अपना दूदू पिलाया है. ऐसे hi अपनी साली की चुतरस भी पि लीजिये..

दिशा भल भल पानी छोड़ने लगी तोह राज उठ कर साइड हो गया.. और हसने लगा.

दिशा-- that's नॉट फेयर जीजू. मुझे आग में जला कर आप पीछे हैट गए हाँ..

राज अपने लुंड की और इशारा करते हुए.. पहले इसका कुछ करो. देखो कैसे खड़ा हुआ आप दोनों का मोह तक रहा है.

दिशा-- दीदी चलें मिलकर जीजू के लुंड को सुख करती है.

दिशा 69 पर आ कर अपनी छूट राज के मोह पर रखते हुए राज के लुंड को चूसने लगी. राज फिरसे दिशा की छूट में ऊँगली घुसा कर उसकी छूट और गांड चाटने लगा.

दिशा और अनीता मिलकर राज के लुंड को चूसने लगी.

दिशा- दीदी आज मेरा सपना पूरा हुआ. आज लाइफ में पहली बार आपके साथ मिलकर एक लुंड से खेल रही हों. आज मेरी सभी अधूरी इच्छाएं पूरी हुई दीदी.. आज सच में मुझसे बढ़कर कोई खुश नहीं है. aaaaaahhhhhhhhhh

राज ने दिशा की छूट को चबा डाला.

दिशा-- ये क्या किया जीजू आपने. मेरी छूट को क्यों खा रहे हाँ आप

राज-- ख़ुशी मिली है तो दावत तोह बनती है न. और दावत पर मीट खाना तोह बनता है न

अनीता-- हेहेहे राज दिशा का मीट खाएंगे आप.

राज-- मैं तोह आज बहुत कुछ खाऊँगा.

अनीता झींप गई राज का मतलब समझ कर

कुछ देर में दिशा और अनीता ने मिलकर राज के लुंड को चूस चूस कर लाल कर दिए तोह राज ने दिशा की छूट का पानी निकल दिए.

दिशा उठ कर साइड लेट गई तोह राज ने अनीता को खेंच कर अपने ऊपर गिरा लिया और किश करने लगा.. अनीता राज की आँखों में देखने लगी.

राज ने एक झटका मारा और अनीता को ऊपर उठा दिए. राज का लुंड अनीता की छूट के साथ लगा हुआ था. अनीता की छूट पर रगड़ हुई तो वह भी मस्त होने लगी. उसके अंदर करंट दौड़ने लगा.

कुछ देर की किश चली तोह दिशा रिलैक्स हो गई. दिशा ने अनीता को खेच कर लिटा दिए

दिशा-- जीजू दीदी की छूट देखें न. कितनी भाप छोड़ रही है. वहां कितना पानी आया हुआ है. पि जाएँ दीदी की छूट का भी पानी जीजू..

राज दिशा को भी एक किश करते-- तुम्हारा पिया है न. अनीता का भी पि जाऊँगा.

राज झुका और अनीता के पैरों को खोल कर उसकी छूट के साथ मोह लगा गया और चुतरस चाटने लगा..

दिशा राज की पीठ पर हाथ फेरने लगी-- जीजू कसम से आज लाइफ का सबसे बड़ा दिन है मेरा.. काश ऐसे hi दिन मुझे बार बार देखने को मिलें.

अनीता जो राज के छूट चाटने से बेचैन हो उठी थी. अपनी सिसकियाँ दबाये हुए थी.

दिशा ने देखा तोह अनीता के चुके को पकड़ कर ज़ोर से मसल दिए

अनीता-- आठ दिशा न कर दर्द होता है.

दिशा-- गलत बोली आप दीदी.. आह्ह्ह्ह माँ कितना दबती हो तुम दिशा.. उफ्फ्फ मेरे अंदर का करंट बढ़ने लगा है. मेरा बदन झटके मारने लगा है. आह्हः ओह्ह्ह उफ्फ्फ सीई मा और ज़ोर से दबाओ दिशा मेरे चुके को.. दीदी ऐसे बोलेन.. ऐसे पड़ी हाँ, जैसे लाश पड़ी होती. देखो तो जीजू कैसे मस्त आपकी छूट चाट रहे हाँ. और आप हाँ कह मोह से कोई आवाज़ hi नहीं निकल रही.

अनीता बुरी तरह से शर्मा गई. दिशा ने फिरसे कहा तोह भी अनीता कुछ नहीं बोली

राज ने अनीता की छूट के दाने को मोह में भर कर चूसना शुरू किया तोह

अनीता-- ोीीी माआआ मैं मर गई. राज प्ल्ज़ धीरे से करें. आह्हः नहीं.. प्ल्ज़ उफ्फफ्फ्फ़ धीरे से.

दिशा तोह अनीता को राज को देखती रह गई. फिर खिलखिला कर हसने लगी.

दिशा-- वाह्ह्ह जीजू आप सच में कमल के हाँ. क्या मस्त बोली दीदी. राज ने अनीता की गांड के निचे हाथ दाल कर छूट को ऊपर कर दिए और पुरे जोश के साथ अनीता की छूट को चूसने लगे.

अनीता तोह पागल होने लगी-- उफ्फ्फफ्फ्फ़ हाआआए raaaaaaaaaaaaaajj ये क्या कर रहे हाँ आप.. मैं पागल हो जाऊँगी.. धीरे से करें आठ मेरी छूट का पानी.. दिशा मेरी बेहेन ी ऍम किंग

दिशा-- हेहेहे दीदी इतनी जल्दी..

पर अनीता उसी समय राज के मोह में झड़ने लगी. राज ने अनीता को निचे छोड़ा और दिशा को पकड़ कर किश करने लगा.

दिशा भी अपनी दीदी का चुतरस राज के होंटो से वसूलने लगी..

कुछ देर में अनीता शांत हुई तोह राज किश तोड़ कर अनीता के परिरो में आ गया.

दिशा देख कर एक्ससिटेड हो गई.

दिशा--- याआहूऊओ दीदी वह समय आ गया.. जिसके इंतज़ार में थी मैं.. दिशा ने राज के लुंड को पकड़ा और अपनी दीदी की छूट पर रगड़ने लगी..

राज दिशा को देखने लगा.. फिर अनीता को देखा तोह वह फ्रेश्लय आईज से राज को अपनी दिशा को देखने लगी. उसके चेहरे पर डर और शर्म के भाव आ गए थे.

दिशा-- दीदी तोह आप तैयार हाँ, अपनी लाइफ की सबसे बड़ी ख़ुशी को प्राप्त करने के लिए. भगवन ने आपकी लाइफ में भी वह समय ला दिए है. जिसके इंतज़ार में आप, मैं बरसों से थी.

अनीता की आँखों में पल भर के लिए दर्द आया. गुज़रा समय याद करते हुए उसे दर्द का एहसास होने लगा था. पर भगवन जो दे रहा था. वह बहुत बढ़कर था. देर से hi सही, पर वह बहुत कुछ पाने जा रही थी. राज जैसे हमसफ़र के साथ वह ज़िन्दगी के हसीं सफर पर निकलने वाली थी. ये ख़ुशी उसके बहुत बढ़कर थी.

अनीता-- हाँ मेरी बेहेन इस पल के लिए तोह मैं कबसे तड़प रही थी. ख़ुशी ख़ुशी मैं नए सफर पर जाने के लिए तैयार हों.

दिशा चहकते हुए-- बहुत दर्द होगा दीदी..

अनीता-- खुशनसीब हों मई छोटी. जो मैं इस आगे तक पोहचने के बार्ड सहने जा रही हों. वर्ण तोह मेरी आगे की जवान बच्चू की माँ बन चुकी हाँ.

राज-- कोई नहीं आप भी अगले साल एक बड़े क़द काठ वाला बेबी जनम देंगी. जो हर महीने साल बराबर बड़ा होगा..

दिशा खिलखिला पड़ी तोह अनीता शर्मा गई. फिर दिशा राज के लुंड को अनीता की छूट के लिप्स में ऊपर निचे करने लगी. अनीता की अंदर दररर और मस्ती बढ़ने लगी.

कुछ देर ऐसे hi करने के बाद दिशा ने राज को इशारा कर दिए. दिशा ने राज का लुंड अनीता की छूट के छेड़ पर सेट किया तोह राज ने अनीता की कमर को कसके पकड़ लिया

फिर एक ज़ोर का धक्का मारा तोह लुंड का सुपड अनीता की छूट के छेड़ में फस्स गया.

ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अनीता बुरी तरह से चीख पड़ी... लुंड का सुपड छूट के छेड़ में घुस चूका था.

अपडेट पूरा नहीं लिख पाया तोह सोचा जितना लिखा है उतना hi पोस्ट कर दूँ...
 
आप सब के लिए स्टोरी को और भी दिलचस्प बनाने के लिए सस्पेंस ंद थ्रिलिंग स्टोरी बनाया जा रहा है..

102

***

आफ्टर फ्यू मोनथस....

दूर कहीं एक जंगल में नदी के किनारे पर पानी भरने के लिए आई कुछ लड़किआं एक दूसरे के साथ मस्ती कर रही थी..

हेहेहे परु तू तोह अगले महीने कमलेश की हो जाएगी. कच्ची काली से फूल बन जाएगी.

परु-- गौरी कामिनी तेरा विवाह भी तोह 4 महीने बाद होने वाला है. तू भी तो सूरज के निचे होगी.

गौरी -- हाय में तोह कबसे उसके निचे लेटने के लिए तैयार हो. कम्बख्त देर hi करता जा रहा है. कितने समय में मैं हर रत उसके लिए तड़प रही हों.

सब हसने लगी.

ऐसे hi सब मस्ती में लगी हुई थी. एक लड़की की चीख गूँज गई..

"ll....laaaaaaaaaaaaaassshhhhhhh"

"kk..kk..kahaaaaann"

सबकी मस्ती हवा हो गई. सब उसी दिशा में देखने लगी. देख कर सब चीखने लगी. एक लड़की जिसका नाम मनोरमा था. वह नहीं चीखी वह भाग कर लाश के पास जा पोहंची. और उसे पास से देखने लगी.

परु -- मरोरमा वापिस आ जा. मुझे दर लग रहा है. चल वापिस चल कर सबको बताते हाँ..

लाश जो दो पत्थरो के बीच में अटकी हुई थी. मनोरमा हिम्मत करके लाश के सीने पर हाथ रख कर चेक करने लगी..

मनोरमा चीख पड़ी-- ईई ज़िंदाआआआ हाआईई..

सब और भी दर गयी..

मनोरमा --यौन मोह खोल कर क्या देख रही हो. आ कर मेरी मदद करो. पता नहीं किस माँ का बीटा है ये..

डरते डरते सब उसके पास पोहंची और फिर सबने मिलकर उसे उठा लिया.. जैसे तैसे उसे नदी से बहार लाइ और ज़मीन पर लिटा कर उसे देखने लगी..

एक बोली-- कितना गबरू जवान लड़का है न ये..

मनोरमा लड़के को घोर से hi देखती रह गई थी--

परु-- अरे इसके हाथ पर देखो. ये कैसा निशा है.

गौरी-- मुझे लगता है, ये कोई नाम लिखा है..

मनोरमा-- अब हम hi इसे उठा कर बस्ती में ले चलती हाँ. किसी को बुलाने की सोची तोह देर हो सकती है. कहीं ये बेचारा मर hi नजाए.

मनोरमा सबसे ज़यादा जिगरे वाली लड़की थी. जल्दी से पानी भर कर जैसे तैसे उस लड़के को उठा कर वह अपनी बस्ती में जा पोहंची. बस्ती वाले लड़कियों के साथ एक लाश को देख कर भाग पड़े..

मनोरमा-- बाबा ये हमें नदी से मिला था. इसकी साँसे चल रही है. बाबा देखो न इसे..

बाबा बस्ती का हकीम था. वह लड़के की नॉब्स चेक करने लगा. जो बहुत धीमी चल रही थी. उसके सीने पर कान रख कर उसके दिल की धड़कन सुनने लगा. जो उसे सुनाई नहीं दी थी.

बाबा : इसे जल्दी से मेरी झोंपड़ी में ले चलो..

फ़ौरन hi उस लड़के को बाबा की झोंपड़ी में लजाया गया.. जहाँ बाबा अपने हिसाब से उस लड़के की देख रेख करने लगा..

कुछ देर बाबा लड़के के साथ लगा रहा. मनोरमा भी अंदर आई और बाबा से बोली-- बाबा कैसा है अब ये लड़का..

बाबा -- इसका ज़िंदा बच पाना बहुत मुश्किल है बेटी. इसके अंदर का पानी भी निकल दिए है मैंने. जड़ीबूटियां भी सुंघा दी है मैंने. हाथ पैरों के साथ साथ शरीर के कई और हड्डियां टूट चुकी हाँ. एक पसली तोह दिल के करीब घुसी हुई लगती है मुझे. जितना मुझसे हो सका मैं करूँगा. आगे भगवन की करनी मनोरमा beti.iski ज़िन्दगी हुई तोह बच जाएगा. नहीं तोह--

मनोरमा-- नहीं नहीं बाबा. इसे बचा लीजिये.. पता नहीं इस बेचारे की माँ कितनी दुखी हो जाएगी इसके न लौटने से..

मनोरमा जहाँ दिलवाली थी. वहीँ बड़े नरम दिल की भी थी.

मनोरमा वहीँ बेथ गई और बाबा को लड़के की सेवा करते हुए देखने लगी.. लड़के की हालत देख कर मनोरमा को बड़ा तरस आ रहा tha.woh लड़के के बारे में, लड़के की माँ और उसके परिवार के बारे में सोचने लगी.

मनोरमा फिर उठी और लड़के के पैरों के जुटे निकलने लगी.

बाबा ने देखा तोह- ओह मुझे धयान hi नहीं आया. मनोरमा बेटी, इसके सरे कपडे उतरने पड़ेंगे.. तुम मेरी मदद करोगी.

मनोरमा ने एक नज़र लड़के को देखा फिर बोली-- बाबा किसी की जान बचाना तोह धरम है न. फिर मैं क्यों ाधारामो वाले करम करुँगी. ये तोह पनइया का काम है बाबा. एक माँ की जिगर के टुकड़े को बचने के लिए मैं कुछ भी कर जाऊँगी.

मनोरमा लड़के के शूज उतार कर साइड रख गई. फिर एक चादर उठा कर लकड़ी की जंगों पर धरी और उसकी पंत खोलने लगी..

बाबा अपनी बेटी को देख कर मुस्कुरा रहा है.

बाबा-- मनोरमा बेटी भगवन ने तुझे मेरे घर भेज कर मुझे ज़माने भर की खुशियां दे दी हाँ. कोई नहीं है इस पुरे संसार में तुझ जैसी.

मनोरमा भी मुस्कुरा गई. फिर वह पुरे मैं से लड़के की सेवा में लग गई. एक एक करके उसके सरे कपडे उसके बदन से अलग किये..

मनोरमा-- इसके हाथ पर क्या बना है.

मनोरमा को याद आया तोह वह बाबा से बोल गई.. बाबा मनोरमा की नज़रों का पीछा करते हुए देखने लगा तोह उसे लड़के की एक कलाई पर कुछ लिखा हुआ दिखाई दिए..

बाबा झुक कर देखने लगा.. बाबा कुछ पढ़ा लिखा भी था..

बाबा-- मा शब्द लिखा है मनोरमा बेटी..

मनोरमा की नज़र ऊपर गयी तोह वहां भी लिखा हुआ था.

मनोरमा- बाबा ये भी लिखा हुआ है.

बाबा-- राज. बेटी इस लड़के का नाम राज है..

मनोरमा-- कितना प्यारा नाम है न बाबा. अपना नाम भी लिखा हुआ है इसने और अपनी माँ का नाम भी..

बाबा-- ज़रूर ये कोई अच्छा लड़का हो मनोरमा बेटी. शहरी लड़के तोह अपने नाम के साथ लड़कियों के नाम भी लिख जाते हाँ. पर इसने माँ शब्द लिखवाया हुआ है.

मनोरमा को राज का चेहरा और भी अच्छा लगने लगा. वह सोचने लगी, शायद राज की ज़िन्दगी में माँ के शिव कोई नहीं होगा.. इसलिए राज ने माँ शब्द लिखवाया है.
 
:ेविलौगह:

सोचा था क्या. हो गया क्याआ.

थैंक्स भाई..

ये सब बाद में सामने आने वाला था. मैंने पहले दिखा कर स्टोरी को आप सब के लिए मज़ेदार बड़ा दिए. ऐसा करना ज़रूरी था. मेरा भी पहले से मूड बन रहा था. आपने और कुछ और रीडर्स ने कहा तोह सोचा, ऐसा कर hi जाओ. तोह कर दिए..

अच्छा लगा ये देख कर आप सब ने मेरे इस स्टेप को सराहा.. आगे भी बहुत कुछ आपके लिए मज़ेदार होने वाला है.

अच्छा हुआ आप सब के लिए कई सवाल खड़े हो गए.. राज के साथ ऐसा करने वाला कोण है...
 
103

***

बाबा राज का इलाज करने में लगे रहे तोह मनोरमा राज की देख रख में. 4 दिन बाद राज के मोह से माँ शब्द निकला. वह अभी भी बेहोश था.

बाबा वहां नहीं थे. मनोरमा भाग कर बाबा को बुला लाइ.

मनोरमा-- बाबा इसने माँ कहा.

बाबा राज की नब्ज़ देखने लगे. देख क्र वो खुश हो गए..

बाबा-- अब लगता है, ये बच जायेगा.

मनोरमा-- शुक्र है भगवन का. ज़रूर राज की माँ राज के लिए प्रार्थना कर रही होगी. बाबा मुझे लगता है राज बहुत ाचा लड़का है. बुरा होता तोह भगवन क्यों इसे ज़िन्दगी देते.

बाबा के होंटो पर मुस्कराहट आ गई-- मनोरमा बेटी, जिसकी जितनी साँसे लिखी होती हाँ. वह पूरी करके hi इस दुन्या से जाता है. फिर वह बुरा हो या अच्छा.

मनोरमा-- नहीं बाबा, मुझे राज अच्छा लड़का लगता है. भगवन ने इसे बचाना न होता तोह हम वहां क्यों जाती. और फिर इसे भी वहीँ आ कर क्यों अटक जाना था. ज़रूर बहगवां भी चाहता है, राज ज़िंदा रहे.

बाबा मनोरमा की बातों पर मुस्कुरा जाते. वह राज के इलाज में भी लगे रहे.

अगला एक महीने बाबा और मनोरमा ने राज के लिए दिन रात एक कर दिए था. राज की हालत में सुधार आने लगा. कभी कभी उसके मोह से माँ निकल जाता. होश में नहीं ा रहा था.

बाबा को आस दिख रही थी. पर मनोरमा परेशान रहने लगी थी. 10 दिन बाद राज को होश आ hi गया.. वह कराहते हुए होश में आया था. मनोरमा राज के पास hi थी. भाग कर बाबा को बुला लाइ.

उसकी सांस बहुत पहली हुई थी. वह बाबा को भी भगा कर ले थी.

मनोरमा-- बाबा देखो राज होश में आ गया है.

बाबा-- मैंने कहा था न तुमसे.. राज जल्द hi होश में आ जायेगा. देखो ा गया होश में.

मनोरमा खुश हो के राज को देखने लगी. राज की ऑंखें सही से नहीं खुल प् रही थी. वह ऐसे hi पड़ा रहा.

मनोरमा-- राज्ज राज्ज तुम मेरी आवाज़ सुन रहे हो

बाबा-- मनोरमा बेटी राज को समय लगेगा पूरी तरह से होश में आने में.

मनोरमा-- बाबा इसके हाथ पेअर तोह टूटे हुए हाँ. इसे पता चला तोह..??

बाबा-- भगवन ने जहाँ इतना अच्छा कर दिए है इसे. बाकी का भी अच्छा कर देगा.

वह पूरा दिन राज होश में आता, अध् खुली आँखों से देखता, फिर बेहोश हो जाता. बाबा राज के साथ लगे रहे तोह मनोरमा टुकर टुकर राज को देखती रही.

अगले दिन राज को सही से होश आ गया. उसने उठे की कोशिश करि तोह कराहता हुए सर गिरा गया.

मनोरमा पास hi थी. वह राज के चेहरे पर झुक कर राज को देखने लगी.

मनोरमा-- राज.. ऑंखें खोलो राज..

राज आवाज़ सुनकर ऑंखें भेंचने लगा. कुछ देर में ऑंखें खोल कर देखा तोह उसे एक लड़की का चेहरा दिखाई दिए.

मनोरमा ख़ुशी से चहकता हुए-- शुक्र है भगवन का तुम्हे होश आ गया. मैं बाबा को बुला कर लाती हों.

राज कराहते hue--mm...mujhe क्या हुआ है..

मनोरमा राज को घोर से देखने लगी-- राज है न तुम्हारा नाम.

राज घोर करने लगा तोह उसका सर दर्द से फटने को हो गया.

राज-- आठ मेरा सर..

मनोरमा फिरसे भाग कर बाबा को बुला लाइ.

बाबा ने एक काढ़ा राज को पिलाया. जिससे राज को कुछ शक्ति मिली.

बाबा-- बीटा अब कैसा है तुम्हारे सर का दर्द

राज-- अब्ब बेहतर है बाबा. मम कहाँ हों बाबा

मनोरमा-- तुम हमारी बस्ती में हो राज..

राज-- raj...mera नाम राज है..??

मनोरमा परेशान होक बाबा को देखने लगी तोह बाबा भी कुछ चिंतित दिखाई देने लगे. मनोरमा कुछ बोलना चाहती थी. बाबा ने उसे इशारे से मन कर दिए.

बाबा-- हाँ तुम्हारा नाम राज है. तुम नदी में गिर पड़े थे. बहुत सी चोटों के साथ तुम्हारे सर पर भी चोट आ गई थी. शायद उस कारण तुम खुद को पहचान नहीं प् रहे हो.

मनोरमा को बड़ा दुःख हुआ वह दुपट्टे का पल्लू अपने मोह में दबती हुई बहार चली गई.. और बहार जा कर आंसू बहाने लगी.

कुछ देर में बाबा भी बहार आये. मनोरमा बाबा को देख कर उनके गले से लग गई.

मनोरमा रट हुए-- बाबा राज खुद को भूल गया है. राज की माँ का फिर क्या होगा बाबा.

बाबा-- भगवन भली करेगा मनोरमा बेटी. जितनी चोटें राज को आई थी. इसका बच जाना भी एक चमत्कार है बेटी. जहाँ भगवन ने उसे नै ज़िन्दगी दी है. ज़रूर उसकी याददाश्त भी लौटेगा.

मनोरमा-- कब बाबा.. कब तक.. तब तक कहीं राज की माँ

बाबा-- ऐसा मत बोल बेटी. भगवन से अच्छी की आशा करनी चाहिए. सब ठीक हो जायेया. भगवन अपने पायरो को आज़माता भी तोह है न. ज़रूर बेहेन जी भी ठीक होंगी.

राज खुद को भूल चूका था. धीरे धीरे उसके होश ठिकाने आने लगे थे. उसके हथु पैरों के साथ साथ उसके बदन की कई हड्डियां भी टूटी थी. ठीक होने में समय लगने वाला था.

कुछ दिनों बाद राज दीवार के साथ तक लगा कर बैठने लायक हो गया..

बाबा और सब जंगली लोग थे. जंगल की जड़ी बूटियों से राज बड़ी जल्दी अच्छा होने लगा था.

जब राज सो गया तोह मनोरमा ने बाबा से पूछा-- बाबा सुना है, शहर में अच्छे से इलाज होता है. वहां राज को ले जाएँ तोह राज जल्दी से अच्छा हो सकता है न.

बाबा -- नहीं मनोरमा बेटी. जैसी हालत में हमें राज मिला था. ऐसी हालत में शहरी मरीज के साथ साथ तरह तरह के तजुर्बे करके उसे उम्र भर के लिए अपाहिज बना देते हाँ. यहाँ जंगल की साफ़ सुथरी हवा और जड़ीबूटियों से राज जितना अच्छा हो सकता है. उतना शहर में रह कर नहीं हो सकता.

मनोरमा-- पर बाबा यहाँ पर तोह राज को बड़ा समय लग जायेगा.

बाबा मनोरमा के सर पर हाथ फेरते हुए-- समय लगता है तो क्या हुआ. एक दिन देखना राज पहले से भी अच्छा होक यहाँ से लौटेगा.. जानती तो हो न. जंगल की जिंदगी जीने वाला ज़िन्दगी की किसी मैदान में हारता नहीं है. राज जल्दी ठीक भी होगा और पहले से कई गुना ताक़तवर भी.

मनोरना के कानो में तोह बाबा की बस एक hi बात अटक कर रह गई. राज को अच्छा होकर यहाँ से लौटना भी तोह है न.

मनोरमा को अपने दिल की धड़कन ऊपर निचे होते हुए महसूस होने लगी. वह समझ नहीं सकीय उसके साथ ऐसा क्यों हो रहा है. राज के जाने की बात पर उसके दिल की धड़कन क्यों बढ़ गई थी. क्यों उसका दिल कहने लगा था. राज सदा उसके पास रहे.

बाबा बहार चले गए तोह मनोरमा राज के चेहरे को देखते हुए अपने अंदर आये बदलाव पर घोर करने लगी. वह ऐसी तोह कभी नहीं थी. अपनी सहेलियों के साथ मस्ती करने वाली लड़की थी. कहाँ वह राज के लिए ऐसा सोचने लगी थी.

सब सोचते हुए उसे राज के चेहरे को देख कर एक अजीब सा सकूँ मिलने लगा.

दिन गुज़रते चले गए और मनोरमा के अंदर का मौसम भी पूरी तरह से बदलता चला गया. वह समझ गयी वह राज के प्रेम जाल में जकड़ी जा चुकी है.

सारा दिन राज होता और मनोरमा होती. दोनों खूब सारा दिन बातें करते. राज चलने लायक नहीं हुआ था. मनोरमा राज को अपनी बस्ती की बातें सुनती तोह राज मनोरमा के मन मोहने मुखड़े और हंसी में खो जाता. उसे मनोरमा को सुन्ना बहुत अच्छा लगता था.

जब मनोरमा की सहेलियां राज से मिलने आती तोह मनोरमा को ढके छुपे शब्दों में छेड़ती तोह राज मनोरमा का लाल लाल चेहरा देख कर खिल उठता.. मनोरमा का ऐसा फेस राज को बहुत भाया करता था.

राज को बस्ती में आये 7 महीने हो चुके थे. सातवे महीने बैसाखी के सहारे झोंपड़ी से बहार निकलने लगा था. उसके हथु की हड्डियां तोह जल्दी अच्छी हो गई थी. पर पैरों की होने में देरी थी. बहुत बुरी तरह से उसके पैरों की हड्डिया का चूरा बना था.

बाबा ने बड़ी लगन से राज की शरीर की सभी हड्डियों को सही किया था. सारा सारा दिन जंगल में घूम फिर कर राज के लिए जाने क्या क्या ढूंढ लाते थे.

बस्ती वाले भी राज को ज़िन्दगी की और लौटते देख कर बहुत खुश हुए थे. वह भी राज से खूब बातें करते थे.

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दिल्ली के एक हॉस्पिटल में मेले का सा सामान था. हॉस्पिटल में जहाँ बहुत से लोग थे. वहीँ सिमरन का पूरा परिवार और दिनेश का पूरा परिवार भी वहीँ था..

हॉस्पिटल के एक रूम में सिमरन एक बीएड पर लेती हुई थी. उसके पास रखे हुए पलने में दो बेबी लेते हुए थे.

सिमरन ने दो जुड़वां बच्चू को जनम दिए था. सिमरन बड़े प्यार से अपने दोनों बेबीज को देख रही थी.

दूर खुला और सभी अंदर घुसते चले गए..

सबके सब सिमरन को बधाई देने लगे. दिनेश आगे बड़ा और पलने के करीब बेथ कर दोनों बेबीज के माथे पर किश कर दिए.. दिनेश की आँखों से ख़ुशी के आंसू निकल पड़े..

दिनेश की मम्मी दिनेश के पापा से-- सुनिए जी, आज पुरे शहर के मंदिरों में जितने भी ज़रूरत मंद हाँ. सभी को खाना खिलाएं और सभी में कपडे बाँटें. भगवन ने मुझे दादी बना कर मुझे ज़माने भर की खुशियां दे दी हाँ.

पापा भी खुश होक आगे बढे और सिमरन के फ़ोरेहेअद पर किश कर दी.. बधाई हो सिमरन बेटी.. सदा सुहागन रहो. भगवन कभी कोई तुम्हारे पास भी न आने दे.

पापा-- इस शहर में hi नहीं. मेरा तोह मैं कर रहा है. आज मैं अपनी साडी दौलत hi ज़रूरत मंदों में बाँट दूँ. मुझे कभी दौलत की छह नहीं रही है.

सिमरन दादा दादी कभी उन्हें देखते तोह कभी सिमरन के चेहरे की चमक देखते. आज उन्हें भी बड़े दिनों बाद एक बड़ी खुसी मिली थी..

कुछ और भी थे रूम में.. सब बारी बारी सिमरन को बधाई देने लगे.. सब कुछ न कुछ दान करने के लिए बोल रहे थे. दौलत की तोह जैसे किसी को कोई छह hi नहीं रही थी.

सिमरन की मम्मी, पापा और दूसरे सब भी सिमरन को ढेरों प्यार दे रहे थे. उसे चुम रहे थे.

सिमरन के दोनों बेबीज तोह ख़ास सबकी निघून में थे. कैयो की आँखों से ख़ुशी के ानुस बह कर बेबीज के चहरो पर गिरे थे.. वह दोनों मासूम गहरी नींद सोये हुए अपने लिए उतने प्यार से अनजान थे.

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मनोरमा राज के साथ एक जगह पर जा बैठी. एक तिनके से जंगली ज़मीन को कुरेदते हुए उसके होंटो पर बड़ी पायरी मुस्कान थी.

राज को मनोरमा की यही मुस्कान घायल कर दिए करती थी. राज के लेफ्ट हैंड की हालत सबसे अच्छी थी. राज ने मनोरमा की चीन को पकड़ कर ऊपर उठाया तोह मनोरमा शर्मा कर राज को देखने लगी.

राज-- भगवन ने कितना सुंदर चेहरा बनाया है. मन hi नहीं भरता इसे देखने से.. मैं करता है, इसे देखता hi रहूं.. अब तोह सोता भी हों तोह तुम्हारा ये पायरा मुखर मेरी आँखों के पीछे मुझे दिखाई देने लगता है.

मनोरमा के चेहरे की लाली बढ़ गई. राज की ऐसी बातें सुनकर उसके दिल की धड़कन जहाँ बढ़ जाया करती थी. वहीँ वह बहुत खिल भी जाया करती थी.

मनोरमा-- राज तुम भी तोह बहुत सुंदर हो. पूरी बस्ती में सबसे सुंदर..

राज एक ऊँगली से मनोरमा के होंटो को छेड़ते हुए-- सच

मनोरमा ने राज की आँखों में देखा और राज की ऊँगली की गुस्ताखी पर शर्म से लाल होकर मोह फेर गयी.. और धीमे से बोली-- मछःह..

राज फिर मनोरमा के पुरे चेहरे पर हाथ फेरने लगा. मनोरमा को राज का ऐसा करना बहुत भय करता था. दोनों पुरे नहीं खुले थे. फिर भी एक दूसरे के लिए बहुत आगे बढ़ चुके थे.

कुछ दूरी पर मनोरमा की एक सहेली भी एक पेड़ की ारः में कड़ी हुई देख रही थी. उसने एक पत्थर उठाया और फ़ेंक दिए.. पत्थर सही निशाने पर नहीं आया और राज की ज़ख़्मी टांग पर लग गया. राज चीखा तोह मनोरमा की तंत्र टूटी.

मनोरमा ने देखा तोह उसकी सहेली भगति हुई वहीँ आ गई.

सहेली-- शमा करना राज.. मैंने पत्थर तोह इस कामिनी को मारा था. कितने मज़े से तेरे हाथ को अपने मोह पर फिर रही थी...

सहेली राज के लिए दर्द तोह मनोरमा के लिए बनावटी जलन अपने लहजे में लिए बोली तोह राज हसने लगा. मनोरमा उठ कर उसके पीछे भागने लगी.. सहेली भी भाग कड़ी हुई थी

मनोरमा-- रुक.. तुझे बताती हों मैं.. कामिनी कहीं की.. रुक.. अब भाग क्यों रही है. रुक न.

सहेली-- हाय मुझसे गलती हुई मनोरमा-- तेरे रंग में भांग मिला दी मैंने..

मनोरमा वहीँ थम सी गई. उसे फिरसे शर्म आने लगी थी. उसकी सहेली भी रुक क्र खिलखिलाने लगी..

राज दोनों को देख कर कर मंद मंद मुस्कुरा रहा था.
 
ट्विस्ट वही अच्छे होते हाँ जो मज़ा दे जाएँ..

हाहाहा..

में राइटर हूँ स्ट्रोय का तोह सबका ख्याल रखना पड़ेगा. कुछ भी ऐसा वैसे नहीं होगा. जिससे लगे कहे "साला स्टोरी पढ़के टाइम िच वास्ते किया"

सीन्स अभी अधूरे हाँ. जल्द hi पुरे भी होंगे. पढ़ने में मज़ा नहीं आएगा..??

अब तोह ज़यादा आएगा. कैसे इतना चेंज आया स्टोरी में.. जान्ने के लिए बेचैनी तोह बढ़ती hi जाएगी.. साथ बने ाहिये और जाणिये व्हाट हप्पेनेड विथ राज एंड ओठेर्स.. इन 3 वीक्स सब क्लियर हो जायेगा.. ज़यादा देर परेशान नहीं करूँगा आप सबको :लाफिंग:
 
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