Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta - Page 10 - SexBaba
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Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta

सुक्रिया भाई. माँ बेटे का अनमोल होता है. राज की माँ भी तोह बरसों से काँटों के बिस्तर पर सो रही है. एक साथी के बिना नींद कहाँ आती है. राज अब वही साथी बन रहा है अपनी माँ का.

हम्म ये बात तो है. अभी और भी हाँ..

सिमरन अलग मंद की लड़की है. अभी राज को उसने एक्सेप्ट नहीं किआ है. देखते हाँ क्या करती है वह शिवानी की मदद से राज का.

सुक्रिया भाई
 
चची एक हाथ चुचु पर तो दूसरा हाथ छूट पर रखे कड़ी थी. चची हैरानगी से राज को देख रही थी.

राज-- क्या छुपा रही हो चची. देखने वाली चीज तो सभी को दिखनी चाहिए. जैसे ये मेरा लौड़ा आप को सलामी दे रहा है.

चची ग़ुस्से से-- राज तू इतना भी निचे गिर सकता है, मेने सोचा नहीं था.

राज हरामीपन से-- चची मैं गिरा नहीं हो. अरे चची में तोह आपको गिराने आया हों. क्या मस्त फिगर है आपका चची. कसम से आज आपको इस हाल में देख कर मेरे तोह मज़े hi हो गए.

चची और भी परेशान हो गई. वह होंटो पर जीब फेर कर इधर उधर देखने लगी. चची के कपडे भी राज की साइड में थे.

राज आगे बढ़ा तोह उसका झूल रहा लुंड चची को नज़र आ गया. चची राज के लुंड को देख कर चुचु पर रखा हाथ अपने मोह पर रख गई. चची ने इतना बड़ा लुंड पहली बार देखा था.

राज हस्ते हुए-- वाह्ह्ह चची मेरे लौड़े को देख कर अपने चुके दिखने लगी हाँ आप. क्या मस्त चुके हाँ आपके चची.. चची घबरा कर फिरसे अपने चुके छुपा गई. राज इतनी देर में चची के पास पोहंच चूका था.

चची-- राज तोह क्यों इतना बड़ा हरामी है. जा न बाथरूम से बहार. देख कहीं में शर्म से मर hi न जाओं.

राज-- आपने hi तो वडा किया था मेरे साथ

चची अनजान बनते हुए-- कैसा वडा.. मैंने कोई वडा नहीं किया था.

राज चची के हाथ को हटा क्र एक निप्प्के को पकड़ कर मरोड़ते हुए-- क्यों भोली बनती हाँ आप चची. बोल के यद् दिलों या छोड़ कर..

चची-- नहीं नहीं. मुझे सब याद है. तू कुछ मत करना मेरे साथ.

राज-- किन न करूँ चची. अब तोह आपके इस सुंदर शरीर को देख कर मैं खुद पर कण्ट्रोल भी भूल गया हों. अब तोह मौका मिला है मुझे आपके मज़े लेने का..

चची-- इस्स्स्सस्स्स्स... न कर न राज.. न मरोर मेरे निप्पल को. एक तोह तेरे चाचा--

चची बोलती बोलती चुप कर गई. राज हसने लगा.

राज-- चाचा को आपकी छूट में घुसने की छह नहीं रही है चची. चाचा तोह अब जवान लड़कियों और काम चूड़ी औरतों के रास्ता रह गए हाँ. क्यों वह अब आपको छोड़ेंगे. उन्हें आपके शरीर से मज़ा भी तोह नहीं आता.

चची दुखी होते हुए-- आज भी मेरे अंदर बड़ी छह है राज बीटा. पर तेरे चाचा अब मेरा ख्याल नहीं रखते. मेरे पास कई कई महीनो बाद आते हाँ.

राज आगे हुआ और चची के होंटो पर हल्का सा किश कर दिए.

चची होश में आई ुस्य याद आया वह क्या बोल गई है.

चची ने राज को पीछे हटा दिए और शर्माने लगी. राज बीटा तेरे चाचा भले मेरे साथ सब नहीं करते. पर तू मेरे साथ सब न कर.

राज-- चची अब तोह मैं आपके मज़े लिए बिना तोह नहीं जाने वाला. आपका सुंदर शरीर देखा कई बार है. पर प्यार करने का मौका कभी नहीं मिला मुझे.

चची-- तू समझता क्यों नहीं है राज.. मेरे शरीर पर तेरा कोई हक़ नहीं है.

राज-- हक़ तोह मेरा माँ और दीदी के शरीर पर भी नहीं है.

चची हैरान होक-- इस बात का क्या मतलब हुआ राज.

राज ने चची को अपनी बहन में भर लिया. चची का छूट पर धरा हाथ भी हटा कर अपने लुंड को चची की गीली छूट पर रख दिए. जो कभी सूखी hi नहीं थी. अब भी वह थोड़ी सी रिसने लगी थी.

राज ने अपने लुंड को चची की छूट पर रगड़ दिए. तोह चची सर पीछे को करके लम्बी सांस ले गई.

राज फिर धीरे धीरे चची की छूट पर लुंड को रगड़ने लगा

राज-- आप तोह जानती है चची माँ कितनी सालों से पियासी हाँ. अब मुझे hi माँ की पियास बुझानी होगी. सभी दीदी भी मेरे लिए मचल रही हाँ तोह मैं उन्हें भी प्यार करने वाला हों

चची-- ये पाप है राज बीटा. ऐसा कभी मत करना.

राज-- अच्छा ये सब पाप है

चची राज की मज़बूत बहन में फँसी हुई थी. रजा के लुंड को रेगुलर हो रही अपनी पर घिसाई से पागल होने लगी थी. राज का लुंड बड़ा और गरम था. राज जवान भी था, चची इतनी गर्मी बरसों बाद फील कर रही थी. थोड़ी hi देर में वह मस्त होने लगी थी.

चची थोड़ी सी ऑंखें खोल क्र राज को देखती हुई-- हाँ राज बीटा ये बहुत बड़ा पाप है.

राज-- तो फिर आपने मेरी पढाई को लेकर ये क्यों कहा था, मेरे साथ सब कर जाएँगी.

चची-- वह तो तेरे भले के लिए बोलै था मैंने. तू पढ़ लिख जाता तोह बड़ा आदमी बन जाता.

राज-- वह तो अब बन hi गया हों न.

चची-- हाँ सिमरन के सतह शादी करके तू सच में बड़ा आदमी बन गया है.

राज-- और अब से हम सब बड़े बनकर जियेंगे. किसी की भी ज़िन्दगी में कोई दुःख नहीं होगा. मेरे परिवार की कोई भी लड़की या औरत अब छूट के मामले में पियासी नहीं रहेगी.

चची-- तू क्या करेगा राज बीटा. एक अकेला किस किस की पियास बुझा सकता है. ऐसे तो तू कुछ समय में hi खली हो जायेगा

चची भी अब अपनी गांड आगे पीछे करके राज के लुंड को अपनी छूट पर घिस रही थी. राज तोह शुरू से hi सबसे खुला हुआ था. चची भी कब तक सहन करती. इतनी देर से राज के लुंड के मज़े ले रही थी. शर्म बाकि थी, पर मज़ा अब बहुत बढ़ गया था.

राज-- नहीं होगा मेरा लौड़ा कभी भी खली चची. और फिर मैंने और भी बहुत कुछ सोच रखा है आप सब के लिए.

चची-- क्या सोच रखा है तूने राज बीटा.

राज-- वह भी बता दूंगा चची. अब मेरे साथ खुल के मज़े करने का मैं है या मई ज़बरदस्ती करूँ.

चची नशीली आँखों से राज को देखने लगी-- राज बीटा तू क्या सिर्फ अपनी माँ और बहनो का hi दुलारा है. मेरा नहीं है क्या. तुझे ज़बरदस्ती किन करनी पड़ेगी. तू एक औरत के मैं को नहीं समझ सकता क्या. मैं खुल कर नहीं कह रही तोह इसका मतलब ये तोह नहीं है. मैं तेरे साथ आगे नहीं बढ़ना चाहती. आग में भले hi जल रही हों, पर हों तोह एक भर्तीअ नारी hi न. कैसे बेशर्मो की तरह से बोल सकती हों सब. मेरा मैं तेरे साथ सब करने का न होता तोह तुझसे वडा hi क्यों करती मैं. और तेरे मोह से निकली शब्द और तेरी आँखों के बदले सरे रंग भी मैं पहंचानति हों राज बीटा.

राज-- अच्छा मान गया मैं आपको. आप सब में मेरे बारे में सब जानती हाँ. चची भी हाँ आप और माँ भी. चलें तोह फिर अब आगे का खेल शुरू करे. देखें तोह सही कैसे मेरे लुंड की नसें अब फटने को हो रही हाँ. चची हस्ती हुई पीछे हुई और राज के लुंड को देखने लगी.

चची-- बहुत दिनों से इसके लिए भी मैं मचल रही थी. नंदनी को खुश करता रहता है, पर तूने कभी मेरा ख्याल नहीं किया.

राज हैरान होक चची को देखने लगा

चची-- ऐसे न देख मुझे. मई सब जानती हों. एक माँ हों मैं. और एक माँ अपनी बेटी के चेहरे पर आये हर रंग को जानती है. मैं तेरे और नंदनी के शरीर मिलान पर कभी ग़ुस्सा नहीं आया. जनता है क्यों. क्यूंकि अगर तोह सिर्फ हवसी hi होता तोह मेरी बेटी के चेहरे पर मुझे ख़ुशी कभी न दिखती. उसके चेहरे पर मैंने वह ख़ुशी देखि है राज बीटा. जो मेरे जमाई के साथ रहने पर भी मुझे मेरी बेटी के चेहरे पर दिखाई नहीं दी. मेरी एक hi बेटी है. उसकी ख़ुशी में मेरी ख़ुशी है. वह खुश तोह मैं खुश. तू भी तोह मेरा hi बीटा है न.

राज को झटके लग रहे थे. चची को वह जितना भोली समझता था. उतनी थी नहीं.

चची हस्ती हुई निचे बैठी और राज के लुंड को थाम कर मसलने लगी.

चची-- वैसे तेरा लुआंडा है बड़ा जानदार. इतनी सर्विस करने के बाद भी इसका दमखम काम नहीं हुआ है.

राज-- आह्हः चची आप तोह मुझे पागल hi कर देंगी.

चची-- ेहेहेहे हर मर्द की ऐसे hi आठ निकल जाया करती है एक नारी के आगे. तू मर्द होगा मर्दों की नज़र में. पर नारी की नज़र में भी तू--

राज-- बस बस और आगे न बोलेन.. क्यों मेरी मर्दानगी को शर्मिंदा कर रही हाँ आप चची. लो अब तोह मेरी मर्दानगी को मोह में ले लें.

चची-- हेहेहे.. दर गए न बच्चू.. चची हस्ते हुए राज के लुंड को मोह में भर कर चूसने लगी. चची चुदाई के सभी खेल में एक्सपर्ट थी. राज के लुंड को अंत तक अपने मोह में घुसा कर चूसने लगी. बाकि के बचे लुंड को मसलने लगी.

राज तो सच में पागल हो उठा था-- अह्ह्ह उफ्फ्फ चची पहले मान नहीं रही थी. अब मानी हो तो क्या ग़ज़ब के रूप में सामने आई हो. आठ चची क्या मस्त लौड़ा चुस्ती हो aap..chachi राज को देखे बिना पुरे जोश से राज के लुंड को चूस रही थी और राज की सिसकियाँ बाथरूम में गूंजने लगी थी.

राज जा हाथ चची के सर पर आ चुके था. उसका बस नहीं चल रहा था, चची के सर को पकड़ कर माउथ फूकिंग शुरू कर दे. इतना hi मज़ा उसे मिल रहा था. इतना hi बेचैन वह हो उठा था.

चची कुछ देर में राज के लुंड को चूस चूस कर लाल कर गई थी. वह उठी और राज को देख कर हसने लगी.

राज की आँखों में भी अब नशा उतर आया था.

चची-- हेहेहे क्या हुआ मेरे राजा.. क्या बज गया तेरा बजा.. हेहेहे

राज चची को नए रूप में देख कर जहाँ हैरान था, वही चची को इतना खुश और मस्त देख कर निहाल हो रहा था.

राज ने चची को अपने गले से लगा लिए.

राज-- चची मुझे आपका ऐसा रूप हमेशा देखना है.

चची फुल मस्ती में-- लौड़े को चूसने वाला रूप न.

राज चची को खुद से अलग करते हुए-- चची कसम से आज तोह आप इतनी बदली हुई लग रही है. मन होने लगा है एक धमाकेदार चुदाई का.

चची-- तोह जा करले अपनी माँ के साथ. मुझसे क्या बोल रहा है. चची हस्ते हुए बोली

राज ने चची को अपनी गॉड में उठा लिया और बाथरूम से निकल कर बीएड की और बढ़ने लगा. चची खिलखिला कर हसने लगी.

चची-- कहाँ ले जा रहा है मुझे राज. चची मस्त नज़रों से राज को देखते हुए बोलो

राज-- धमाकेदार चुदाई करने..

चची-- धमाकेदार चुदाई.. मुझे झेल लोगे तुम

राज-- हाँ क्यों नहीं. मैं तोह कइयों को झेल चूका हों.

चची-- मेरी बात अलग है. मैं पहले नहीं खुली थी. अब खुल रही हों तोह तुझे सच में तेरी नानी याद आ जाएगी.

राज चची को बीएड पर लिटाये हुए-- क्या खूब याद दिलाई है आपने नानी की.. क्या मस्त छूट और गांड है नानी की. माँ कसम नानी गांड के मामले में आज भी कुंवारी लड़कियों को पीछे करती हाँ. इतनी मज़ा उनकी छूट में नहीं, जितना गांड में है.

चची खुला मोह शॉकिंग फेस लिए राज को देखने लगी..

चची रुक रुक कर--- tum..ne..apni..nani..ko..bhi..chod..dia..

राज हस्ता हुआ चची के पैरों में आया और दोनों पेअर खोल कर चची की छूट की और मोह करते हुए बोलै

मुझसे बड़ा हरामी कोण है इस दुन्या में. जल्द hi आपको भी पता चल जाएगा. आप भी कहेंगी. राज तुझसे बड़ा हरामी इस दुन्या में पैदा भी नहीं हो सकता.. हाहाहाहाहा

राज ने जीब निकली और चची की छूट की फाँखें खोल कर उसमे घुसा दीं. चची कोहनियों के बल थोड़ा सा उठ कर अपनी गीली छूट में राज की चल रही जीब को देखते हुए सोचने लगी.

राज सच में बहुत बड़ा हरामी है. पता नहीं उसने मेरे लिए क्या सोच रखा है. चची को मज़ा भी आ रहा था और फ्यूचर बारे सोच कर कुछ चिंचित भी होने लगी थी.
 
चची बहुत ज़यादा चूड़ी हुई औरत थी. पर पिछले कुछ सैलून से चाचा चची की छूट की और काम hi धयान दे प् रहा था. जिसके कारन चची का भोसड़ा सुकड़ कर छूट बन गई थी.

उसकी फाँखें कुछ कुछ करीब ा गई थी. चची कड़ी होती तोह चची की छूट ऐसे दिखती, जैसे चची कोई 30-32 साल की महिला हों. पेट थोड़ा सा बहार को निकली हुआ था चची. ओवरआल चची बहुत मस्त माल थी.

राज को चची की छूट चाटने में बहुत मज़ा आने लगा था. राज ने एक ऊँगली चची की छूट में घुसा दी और छूट को मोह में भर कर चूसने लगा.

चची-- आह्हः राज बीटा क्या खाने का इरादा है मेरी छूट को. उम्म्म्म उफ्फ्फ आठ ओह्ह्ह्ह खा जाओ तुम्हारे hi नसीब में लिखा है इसे खा जाना. तेरे चाचा का हक़ तू hi प्रपात कर ले. खा जा मेरे बेटे अपनी चची की पूरी छूट को..

चची पल भर में hi बावली हो उठी थी. ऐसी छूट छाती hi कहाँ थी चाचा ने. शायद जवानी में कुछ धयान बढ़ा दिए होगा चाचा ने. राज की गर्म जीब और जोश के आगे चची पागल होने लगी थी.

चची अब थी कोहनियो पर उठी राज को देख रही थी. सिसक रही थी. अपने होंठ काट रही थी. राज उसकी छूट से नहीं हटा तोह वह हिम्मत हर गई और सर गिरा कर आहें भरने लगी.

चची -- राज बीटा, मत कर मुझे और पागल, घुसा दे अपना मूसल मेरी मुनिया में. आह्हः माआ उफ्फ्फ्फ़ आराधना तेरा बीटा कितना मज़ा देता है. उफ्फ्फ तू भी पागल हो जाएगी

राज उठा और चची को देखने लगा. चची अपने बड़े बड़े चुके हिला रही थी. लम्बी लम्बी साँसों के कारन उसके बड़े बड़े चुके बहुत दिख रहे थे. राज अपने लुंड को चची की छूट पर सेट करते हुए पुश करने के बाद चची के ऊपर झुक गया. चची ने ऑंखें खोल कर राज को देखा तोह राज को अपनी बहन में भर लिया और किश करने लगी. हलकी किश करने के बाद वह राज से बोली -- राज बीटा धीरे धीरे अंदर डालना, मुझे तेरे मूसल को पूरी तरह से महसूस करना है.

राज-- ओह्ह चची, मुझे भी आपकी छूट के दीवारों पर अपने लुंड की रगड़ को जानना है. देखना है मुझे, मेरे लुंड की राजन आपकी छूट के मॉस से टकरा कर मुझे कितना मज़ा देती हाँ.

चची ने राज के होंटो पर फिरसे एक किश किया और बोली -- राज बीटा तू कितनी मस्त बातें करता है. आज पता चल रहा है, बातें करते हुए लौड़ा लेने में कितना मज़ा आता है. कितना गरम है तेरा लौड़ा, उफ्फ्फ मेरी छूट भी खुलने लगी है. जलने भी लगी है. लगा धक्का पर धीरे धीरे अंदर डालना.

राज भी चची को किश करता हुआ अपने लुंड को पुश करने लगा. चची अपने दोनों पेअर राज की गांड पर रख गई थी. अपने दोनों हथु से राज की पीठ को सहलाने लगी थी. ऑंखें बंदकर राज के लुंड को धीरे धीरे अपने छूट में उतारते महसूस कर रही थी. राज के लुंड से धीरे धीरे खुल रही अपनी छूट की दीवारों पर अपना फोकस बढ़ा रही थी.

चची ऑंखें बंद किये हुए hi- मुझे ऐसा लग रहा है राज बीटा. जैसे मई अपनी hi छूट के अंदर रहते हुए तेरे लौड़े को धीरे धीरे घुसता हुआ देख रही हों. कितना मस्त सन मेरी बंद आँखों के सामने चलने लगा है.

राज थोड़ा थोड़ा कर पूरा लुंड चची की छूट में घुसा कर रुक गया. चची के एक होंटो को अपने डेंटन में भर कर खेंचने लगा.. चची ने ऑंखें खोल कर राज को देखा तोह राज को चची की आँखों में हज़ारों लीटर शराब का सा नशे दिखाई देने लगा.

राज-- चची आप कितने मज़े में दिख रही हाँ

चची नशीली आवाज़ में-- मई हों भी इन्तहा के मज़े में राज बीटा. मेरा बस नहीं चल रहा. इस समय मई एक रियासत की रानी होती और इस समय प्राप्त होने वाले आनंद के बदले वह साडी रियासत दान कर देती.

राज ने चची के चेहरे पर फूँक मार दी.

राज-- चची इतना मज़ा चाचा के साथ कभी नहीं आया.

चची-- कैसे आता राज बीटा.. ऐसे चुदाई भी तो कबि नहीं करि थी. और फिर जहाँ तक तेरा लौंडा पोहंचा हुआ है. वहां तेरे चाचा का कभी नहीं पोहच पाया था. वहीँ तोह है असली सुरूर.. असली मज़ा.. तभी तोह मुझे इतना नशा होने लगा है.

राज-- तोह फिर अब धमाकेदार चुदाई शरू हो जनि चाहिए.

चची-- हाँ राज बीटा. धीरे से मैंने तेरे लौड़े को महसूस कर लिया है. अब धमाकेदार अंदाज़ में मुझे छोड़. मुझे दूसरी तरह से तेरे लौड़े को महसूस करना है. निकल दे आग मेरे अंदर का सारा पानी. बुझा दे मेरी कई दिनों की आग को. दे दे मुझे वह सुकून जिसके लिए मैं भी मचल रही थी.

राज न अपने लुंड को सुपड तक खेंचा और एक ज़ोर का धक्का मार दिए. छूट तोह बहुत देर से पानी पानी थी. पांच की आवाज़ के साथ पूरा लुंड एक hi बार में सारा अंदर उतरा तोह चची सिसक उठी.

चची-- आठ माँ इस उम्र में भी इतना मज़ा मिलना था मुझे. दर्द भी हुआ राज बीटा. पर मज़े की क्या hi बताओं तुझे मैं. दर मत और छोड़ मुझे पूरी स्पीड से..

राज चची को किश करते हुए स्पीड से छोड़ने लगा. चची खुली आँखों से राज को देखते हुए किश में साथ देने हुए राज से छोड़ने लगी. अपने पैरों से भी वह दबाओ बढ़ा रही थी. पूरा पूरा लुंड निकल कर चची की छूट में अंत गहराई पर पोहंच कर तकरें मार रहा था. चची सहन नहीं कर पा रही थी. बहुत दिनों की आग थी. अंदर का पानी बहुत उबाल चूका था.

देर नहीं लगी और वह अंत सीमा पर ाँ पोहंची. राज भी समझ गया था चची के फोले चुके और अकड़े निप्पल्स को देख कर. राज की स्पीड और भी बढ़ती चली गई.

किश कब की टूट चुकी थी. चची राज को अपनी बहन में, अपने पैरों में कस्ती चली गई. राज की स्पीड और भी बढ़ती गई.

कुछ देर में चची का पूरा शरीर झटके पर झटके खाने लगा. देखते hi देखते चची की छूट भल भल पानी छोड़ने लगी. चची हांपने लगी, राज के गिर्द लिपटी अपनी बहन और टांगें ढीली करते हुए साइड में गिरा गई थी.

राज ने चची के गाल पर किश करते हुए लुंड निकल लिए. और साइड में लत कर चची को देखने लगा.

चची नार्मल होकर राज पर टूट पड़ी. राज के पुरे चेहरे को, पुरे बदन को वह चाटने लगी.

राज-- हाहाहा चची पागल हो गई हो क्या.

चची-- हाँ पागल हो गई हों. और तुझे भी कर दूंगी मैं पागल.

चची राज के चेहरे, सीने को चूमने चाटने के बाद निचे और फिरसे राज के लुंड को मोह में भर कर चूसने लगी. साथ अण्डों को भी सहलाने लगी.

राज-- लगता है चची अंदर से पूरी तरह जाग उठी हाँ. अब तोह चची एक लड़की बन गई है. चची मुस्कराती आँखों से राज को देखने लगी. लंड मोह से नहीं निकला.

कुछ देर में लुंड निकल कर उसपर बैठते हुए फिरसे छूट में लेकर छोड़ने लगी. झुकी और राज को किश करने लगी. कुछ देर की किश के बाद वह बोली

चची-- तूने मुझे जवान hi तोह बना दिए है राज बीटा. कितना मज़ा दिए है तूने मुझे. इतना मज़ा सच में मुझे कभी नहीं मिला.

राज-- इसी ख़ुशी में फिर गांड में लो न मेरे लुंड को.

चची-- हेहेहे.. इतना बेचैन भी न हो मेरे राजा.. एक तोह वह बोहत तंग है. दूसरा उसे सुकून से तुझे मैं दूंगी. अभी तोह तुम hi न यहाँ पर. जल्दी किस बात की है. पहले आराधना की अच्छे से बजा लो. उसकी भी गांड के मज़े ले लो. फिर मेरी और आना. तुझे खूब सजा कर दूंगी मई अपनी गांड.

राज चची की गांड पर हाथ चलते हुए बोलै-- चाचा ने लगता है आपकी गांड काम मारी है. ऊँगली भी सही से नहीं जा रही

चची-- उसे कहाँ कदर है मेरी गांड की राज बीटा. शुरू में कुछ महीने मज़े करवाए थे तेरे चाचा ने. पर उसके बाद उसे भूल hi गया.

राज-- कोई नहीं अब मैं हों न आपके दोनों द्वार खोलने के लिए.

चची फिरसे गर्म हो चुकी थी. फिरसे उनकी स्पीड बढ़ चुकी थी. जोश से उछालते हुए वह बोली.. अब तोह तुम hi तुम हो मेरे शरीर के मालिक. जो तुम्हारा मैं करे कर लेना.

राज चची की चुत्तरों की नीचे दोनों हाथ रख कर चची को सपोर्ट देने लगा. चची और भी स्पीड से ऊपर निचे होकर राज का लौड़े को अपनी छूट में लेने लगी.

चची फिरसे झाड़ गई. तोह राज चची को उल्टा लिटा कर पीछे से छूट में लुंड घुसा कर चची को छोड़ने लगा.

राज की जंगें बड़ी स्पीड के साथ चची के चुत्तड़ो पर टकरा रही थी. कुछ देर में राज भी चची की छूट में अपने लुंड को खली कर गया. राज चची के ऊपर hi गिर कर हांपने लगा.

कुछ देर में दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए के दूसरे की आँखों में देख रहे थे.

चची-- राज परिवार में चुदाई हो जाया करती है. गाओं में और भी परिवार थे जिनमे ऐसे रिश्ते बन गए थे. पर वहां मुझे हवस ज़यादा दिखी थी. पर तुम अपने अंदर कभी हवस न आने देना. प्यार से सब मिल जाता है. हवस एक तो मर्द को जल्दी खोखला कर देती है. दूसरे किसी की नज़र में इज़्ज़त में नहीं रहती. तुम जैसे हो हमेशा ऐसे hi रहना.

राज -- जनता हों चची. ऐसा न होता तोह आपकी छूट बरसों पहले hi छोड़ चूका होता. नंदनी दीदी को भी इसलिए छोड़ दिए था. वह भी नखरे करने के बाद भी मज़े से छोड़ने लगी थी. अब फिर उनकी छूट खुल चुकी थी न. तोह दर नहीं था, खुली छूट में कोई और लुंड जाए तोह पति को पता नहीं चलता न इसलिए.

राज हस्ता हुआ बोलै तोह चची भी हसने लगी.

चची-- अब बता मेरी छूट में ज़यादा मज़ा आया था या मेरी बेटी की छूट में.

राज चची के दूध को मसलते हुए-- पहले इनका दूध पि कर खली करूँगा. फिर बताऊंगा आपकी छूट का ज़यादा मज़ा है या आपकी बेटी की छूट में.

चची-- बात तोह बदलना तोह कोई तुमसे सीखे. अभी खली कर दो, और बताओ मुझे.

राज-- नहीं न. आपने hi तोह कहा था, धीरे धीरे आगे बढ़ेंगे. अभी तोह किश करि है और चुदाई कृ है. मेने आपकी छूट छाती है तोह आपने मेरा लुंड. दूध पीना बाकि है और गांड चेतना और खोलना बाकि है. हाँ नंदनी दीदी की गांड ज़रूर आपकी गांड से मस्त है. वह मुझे hi खोलने का मौका मिला था.

चची-- भूल जाओ, मेरी गांड के मज़े तुम्हे ज़यादा मिलेंगे. भले hi वह बहुत पहले hi चुद चुकी है. पर मेरी बेटी मुझसे बढ़कर नहीं हो सकती.

राज ने चची को पलट दिए-- अभी घुसा के देखता हों. आपकी गांड कमल की है या और नंदनी दीदी की.

चची-- हेहेहे.. ऐसे पता नहीं चलेगा. मन शांत हो और समय भी खूब पास हो, तब सही से पता चलता है. भागम भाग तोह कभी पता नहीं चलता. चल हैट मेरे पीछे से.

राज भी हस्ता हुआ बीएड से उतर गया.

चची-- अब कहाँ चल दिए

राज-- क्यों फिरसे खुजली होने लगी क्या

चची-- वह तोह जाने से रही. तुम्हे प् कर और तुम्हारे हथियार को देख कर खुजली हमेशा hi बढ़ती रहेगी. कभी काम नहीं होगी. छूट में भी और दिल में भी.

राज-- मुझे दिल में और छूट की खुजली नहीं देखनी है चची.. मुझे तोह आपकी गांड की खुजली देखनी है. जब वहां खुजली बढे तोह बताना मुझे.

चची-- हेहेहे.. वहां भी खुजली हुई तोह इकलौते तुम hi तोह हो मिटने वाले.

राज हस्ता हुआ कपडे पहन कर बहार निकल गया. चची खुश खुश बाथरूम में जा घुसी..

इंदौर सिटी की एक फेमस बिज़नेस वीमेन. जिसका नाम था अनीता महरा.. अनीता महरा की आगे 37 थी और आज तक वह कुंवारी hi थी. कोई भी अनीता महरा की ज़िन्दगी में नहीं आया था. जब जवानी उरूज पर थी तोह बहुत से उसकी ज़िंदगी के आये. पर अनीता महरा ने सब को साइड कर दिए. जब 17 साल की थी तोह एक हादसे में उसकी एक 8 साल की छोटी बेहेन को छोड़ कर बाकि सब एक एक्सीडेंट में मारे गए थे. खुशकिस्मती से दोनों उस दिन अपने परिवार के साथ नहीं जा पायी थी. अनीता के एग्जाम चल रहे थे तोह उसकी छोटी बेहेन दिशा जो एक पल भी अनीता से दूर रहने की आदि नहीं थी. वह भी उसी के साथ घर में hi रह गई.

बाकि उसके परेसन्ट्स, दादा दादी 3 छोटे भाई और चाचा का परिवार का सब दूर के एक सिटी में शादी के लिए चले गए थे. बीच रस्ते में hi एक भयंकर एक्सीडेंट के चलते सब मारे गए थे.

अनीता की लाइफ वहीँ थम कर रह गयी. अपनी पढाई और अपनी बेहेन के लिए वह बाकि सब कुछ भूल गई. अपने पुरे परिवार को खो कर वह भी बहुत दुखी थी. पर हिम्मत वाली थी. एक बेहेन बची थी जो उसकी जान भी थी. अब उसे वह खोना नहीं चाहती थी.

उसके लाइफ अपने दर्द को अपने अंदर दबा गयी. फिर पारिवारिक बिज़नेस को भी देखना था. न देखती तोह सब बर्बाद हो जाता. परिवार के खानदानी लॉयर ने बहुत साथ दिए था.

आज अनीता महरा एक सक्सेसफुल बिज़नेस वीमेन थी. पर इस बीच वह शादी नहीं कर पायी थी. उसके सरे खवाब परिवार के जाते hi ख़तम होकर रह गए थे. उसने अपने सरे खवाब अपनी छोटी बेहेन को ले के बना लिया था. उसकी शादी उसकी पसंद के लड़के से कर दी थी. वह भी साथ hi रहता. अच्छा लड़का था, दिशा और अनीता के बारे में सब जनता था. दोनों एक दूसरे से अलग नहीं रह सकती थी. इसलिए वो अपने परिवार को समझा कर साथ रहने लगा था. उस लड़का का परिवार साथ वाली कोठी में शिफ्ट हो गया था. जिससे सब अच्छा हो गया था.

पर अनीता की लाइफ के सरे रंग ख़तम होकर रह गए थे. औरत मर्द के बिना अधूरी है. अनीता ने तोह फिर भी अपनी जवानी के दौर में बहुत खवाब देख रखे थे. बहुत वह अपने लाइफ पार्टनर को लेके प्लान बना चुकी थी.

अब ऐसा कुछ नहीं रहा था उसकी लाइफ में. अब उसे कोई भी ऐसा नहीं मिल सकता था, जो उसके खवाब पुरे कर सकता. उम्र की जिस स्टेज पर वह पोहंच चुकी थी, अब उसे कोई मन चाहा साथी नहीं मिल सकता था. जो भी उसकी और देखता तोह बस उसकी दौलत के लिए या फिर उसकी खूबसूरती के लिए. कोई ऐसा उसकी लाइफ में नहीं आया था, जो उसके दिल को भ सके. और फिर वह अपनी इकलौती बेहेन को छोड़ कर भी नहीं जा सकती थी.

अनीता आज थकी हुई कोठी पर पोहंची तोह सोफे पर सर टिका कर ऑंखें मूँद गई.

दिशा ने देखा तोह भाग कर अपनी दीदी के साथ आ बैठी. अनीता ने ऐसे hi ऑंखें खोल कर देखा तोह अपनी पायरी बेहेन को अपने पास देख कर खिल उठी.

दिशा-- दीदी आज आप कुछ थकी हुई लग रही हाँ

अनीता दिशा के हाथ को पकड़ कर अपने होंटो से लगा कर चुम गई.

अनीता-- तुम्हारा चेहरा नज़र आ गया है न तोह मेरी साडी थकन उतर गयी है. मेरी बेटी मेरा बीटा कहाँ हाँ.

दिशा खुश होक : वो दोनों विराट के पास हाँ. मई अभी लाती हों. दिशा उठने लगी तो अनीता ने उसका हाथ थाम लिया-- तुम भी तोह मेरी बेटी hi हो न.

दिशा चहकते हुए-- एस माँ! मई आपकी असली वाली बेटी हों. इकलौती और लाड़ली बेटी.

तभी विराट भी दोनों बच्चू को लेकर वही आ गया. अनीता अपनी बेहेन के बच्चू को देख कर उठ कड़ी हुई

अनीता-- लाओ विराट मेरे शेर को मेरी गॉड में दो..

दिशा की बेटी मोह बनाते हुए-- मम्मी मुझे आपसे बात नहीं करनी. जब से छोटो आया है, आप उसे hi पहले उठती हाँ

सब हांसे लगे तोह अनीता अपनी भांजा को विराट से लेकर निचे घुटनो पर बेथ गई.

अनीता-- तोह मेरी जान सोनिआ को राहुल से जलन से होने लगी है. चलो हम इसे दूर भेज देते हाँ

सोनिआ -- नहीं.. मैं मेरे छोटू को दूर नहीं जाने दूंगी.

दिशा और विराट भी मुस्कृते हुए एक दूसरे को देख कर निचे बेथ गए.

अनीता-- क्यों

सोनिआ-- क्यों मेरे छोटे से बहुत प्यार है.

अनीता सोनिआ के गाल पर किश करती हुई-- तो मई तुम्हारे छोटू से प्यार न करूँ.

सोनिआ-- करलो मम्मी.

अनीता झट से मान गई थी. अनीता सोनिआ को भी अपने लेकर सोफे पर बेथ गई.

दिशा और विराट दोनों एक दूसरे को देख कर स्माइल करने लगते. दोनों अनीता को बच्चू में गम देख कर बहुत खुश थे. दुखी भी थे, अनीता की ज़िन्दगी के रंग लिमिटेड होक रह गए थे.

कई बार दिशा और विराट दोनों अनीता से शादी के लिए बोल चुके थे. पर वह दोनों की नहीं सुनती थी.

सीधा अभी भी अपनी दीदी को खुद से दूर नहीं रह सकती थी. अक्सर रातों को विराट के पास से उठ कर अनीता से लिपट कर सो जाया करती थी. एक हिसाब से अब भी दिशा बच्ची hi थी.

"अरे भाई इस ख़ुशी के पलों में हमें भी याद कर लिया करो कभी कभी"

आवाज़ सुनकर सबने देखा

अनीता मैं में.. कमीना पीछे hi पद गया है. कितनी बेइज़्ज़ारी करदी है इसकी.. फिर भी आने से बाज़ नहीं आता.

विराट-- चाचू आप

चाचू-- हाँ यार तेरे घर में मुझे आने की परमिशन लेने पड़ेगी क्या.

विराट अनीता को, दिशा को देखने लगा. दिशा नक् सिकोड़ने लगी.

विराट-- चले आएं हम लॉन में बेथ कर बातें करते हाँ.

विराट का चाचू भी ुंमररिद था. लुच्चा इंसान था. शरीज बनने की बीमारी थी उसे. उसके लच्छन अच्छे नहीं थे. इसलिए शादी नहीं हो पायी थी.

चाचू-- क्यों भाई, यहीं पर बेथ कर बात कर लेते हाँ. दिशा बेटी हाँ, अनीता जी हाँ, बच्चे हाँ. बैठो यहीं पर मिलकर बातें करते हाँ.

अनीता ने देखा तोह बेशर्मो की तरह से वहीँ बेथ गया था. तोह वह खुद से उठने लगी.

राहुल को दिशा की गॉड में बिठा दिए और उठ कर अपने कमरे की और बढ़ने लगी.

चाचू-- घर आये मेहमान के साथ ऐसे बर्ताव करना अच्छी बात नहीं है अनीता जी.

दिशा-- चाचू मेरे दीदी के साथ ऐसे बात मत किया करें आप. कितनी बार कहा है आपसे आप-- दिशा आगे नहीं बोली वह विराट की वजा से चुप हो गई थी.

विराट भी अनीता और दिशा के आगे शर्मिंदा हो जाया करता था. कुछ बोलता तो उसका चाचू उसे घर जमाई होने का तना देने लगता था.

दिशा विराट दोनों कुछ देर वहीँ बैठे बातें करते रहे चाचू के साथ. वह घट्टिया इंसान डिनर करके hi फिर वहां से लौटा था. डिनर पर अनीता भी साथ में थी.

डिनर के बाद

विराट-- सॉरी दीदी चाचू की और से मैं माँ----

अनीता ने उसे टोक दिए-- नहीं विराट तुम जितने अच्छे हो, तुम्हारे चाचू उतने hi बुरे. तुम्हे सॉरी बोलने की ज़रूरत नहीं है.

अनीता सोनिआ को अपने साथ अपने कमरे में ले गयी.

दिशा-- विराट.. पता है न मुझसे दिशा की परेशानी नहीं देखि जाती. कसम से मेरी साँसे अटकने लगती है. दीदी ने मेरी वजा से खुद को त्याग दिए. अब चाचू दीदी के साथ मिस्बेहावे करते हाँ तोह मैं खुद को ब्लामे करने लगती हों.

विराट-- मैं भी सब समझता हूँ यार. सच कहूं तोह मुझे भी चाचू पसंद नहीं हाँ. बस घर में मामले ने बिगड़ जाएँ, यही दर रहते हाँ. चाचू कुछ क्रिमिनल मंद भी हाँ न. तोह तुम सब को लेकर भी दर सा लगने लगता है.

दिशा अपना सर विराट के कंधे पर रख गयी. अपने बेटे के सर में उँगलियाँ फेरते हुए अपनी दीदी के बारे में सोचने लगी.

दिशा-- विराट दीदी ऐसे hi रहेंगी क्या साडी उम्र. अब मुझसे सहन नहीं होता

विराट-- क्या कर सकते हाँ हम यार हम दोनों. कितना कहा था हम दोनों ने मिलकर दीदी को. पर हमारी वो सुनती hi नहीं हाँ.

दिशा-- मुझसे अब दीदी का अकेलापन देखा नहीं जाता विराट. दीदी ने अपनी ज़िन्दगी मेरे लिए त्याग दी. मेरी ख़ुशी के लिए कितना कुछ कर गई दीदी. अपने लिए कुछ भी नहीं कर सकीय. दीदी क्या साडी उम्र ऐसे hi रहेंगी. बिना हमसफ़र के कैसे वह पहाड़ सी ज़िन्दगी बिताएंगी. विराट मैंने दीदी की रातों की बेचैनी को नोट किया है. दीदी मुझसे कुछ नहीं कहती पर एक मन चाहे हमसफ़र की छह अब्ब भी उनके दिल में है. कहाँ से मिलेगा, कब मिलेगा दीदी को उनका मनचाहा हमसफ़र.

दिशा बहुत दुखी होकर विराट से बोल रही थी.

विराट-- दीदी ने समय रहते खुद के लिए कुछ नहीं किया. काश मैं दीदी के लिए कोई ऐसा हमसफ़र ढूंढ सकता जो दीदी के सरे ग़म खुद पर ले लेता. मतलब की इस दुन्या में, वह भी एक एज्ड लेडी के लिए कैसे मन चाहा हमसफ़र मिल सकता है. कितने लोग दीदी से शादी करने के लिए हमें परेशां करते रहते हाँ. पर सब के सब लालची और मतलब परास्त हाँ. कोई दीदी के मतलब का मिलता तोह दीदी भी इंकार न करती.

दिशा-- भगवन मेरी दीदी को उसका मन चाहा साथी मिला दे. नहीं तो मुझे---- विराट ने दिशा के मोह पर हाथ रख दिए.

विराट-- ऐसा मत बोलै करो दिशा. दीदी ने जितना तुम्हारे लिए किया है. ज़रूर भगवन ने दीदी के लिए कुछ अच्छा hi सोच रखा होगा.

दिशा एक लम्बी सांस लेकर रह गयी.. हाँ विराट मेरे दिल में भी ये बात है, भगवन ज़रूर मेरी दीदी की गुमशुदा खुशियां दीदी को लौटाएगा. पर कब विराट.. इंतज़ार करते करते मैं तोह अब थकने लगी हों. कब तक दीदी को पूरा होते हुए देख सकती हों. ऊपर से चाचू भी दीदी को परेशान कर रहे हाँ

विराट-- चाचू का कुछ न कुछ करना पड़ेगा दिशा. मुझे भी दीदी की इतनी इंसल्ट अब सहन नहीं होती. मुझे पापा से, माँ से और बुआ से दो टोक बात करनी hi होगी.
 
राज शहर घूमने के बाद पोहंचा और जो उसे मिल जाती. उसके साथ मस्ती करने लगता. सबकी सब बहुत खुश थी. बहुत जिखर गई थी. राज के लिए खुद को बना संवर क्र पेश कर रही थी.

पूरी कोठी में खुशियों की बरसात होने लगी थी. चची आराधना के साथ बैठी बातें कर रही थी और आराधना मौका मिलते hi चची को छेड़ने लगती थी. चची को भी राज ने बता दिए था. चची भी मस्ती करते हुए आराधना को आने वाले पल के लिए छेड़ रही थी. आराधना भी बहुत खुश थी.

खुश तो सब hi थे. चाचा को भी राज ने एक नयी लाइफ जीने का बोल दिए था. चाचा भी खवाब देखने लगे थे. वो अब बहार घूम फिर कर लड़कियों और औरतों को ताड़ने लगे थे. उनका ढीला लुंड शहर की गोरियों को देख कर सख्त होने लगा था. चाचा को राज की बातों के बाद शहर की ज़िन्दगी का मज़ा आने लगा था.

चाचा के बेटे पहले जैसे थे. वो भी सबको खुश देख कर खुश थे. अभी उनकी लाइफ में मनोरंजन का इंतेज़ाम नहीं हुआ था. पर राज हरामी था. कुछ न कुछ तोह कर hi जाता उनके लिए भी. उनके जीने का अंदाज़ भी बदल hi देता.

राज देर तक राज सबके बीच रहा, सबके एक किसी को भी कहीं भी हाथ लगा कर छेड़ देता. अब सब जान गई थी राज सबके साथ hi सब कुछ कर जाने वाला है. नंदनी के पेट में भी राज का बच्चा है, ये जान कर सब बहुत हैरान हुई थी. बाद में सब बहुत खुश हुई. राज के पहले बच्चे के आने में कुछ hi समय था. सब की चाहत उस बच्चे के लये बहुत बढ़ गई थी.

नंदनी को भी अपने बच्चे के पिता के लिए ऐसा सब बहुत अच्छा लगने लगा था. हर माँ की तरह उसका दिल था. उसका बच्चा किसी और के नाम से न जिए. अब जब सब घर की महिलाएं जान गई थी तो बाद में अपने बच्चे को भी बता देती तोह उसे कोई परेशानी नहीं होने वाली थी. नंदनी इस बात को लेकर बहुत खुश थी.

रात राज अपनी माँ के साथ hi सोया. खूब प्यार दिए राज ने अपनी माँ को बहुत मस्ती भी करि अपनी माँ के साथ. एकदुम्म से राज ने अपनी माँ को नहीं खोला था. पहले घर में जहाँ माँ का पेटीकोट खोल कर लुंड घुसा दिए करता था. अब वहीँ राज बड़े प्यार से अपनी माँ को प्यार दे रहा था. आराधना को बरसों बाद पूरी ख़ुशी, पूरी शांति मिल रही थी.

दोनों एक दूसरे की बहन में सिमटे सो गए थे.

अगले दिन संडे था.

दिन के 10 बजे राज बाइक पर निकला और अनीता की कोठी जा पोहंचा. राज नार्मल ड्रेस में hi वहां पोहंचा था. टिपटॉप होकर वहां नहीं गया था. जैसी उसकी पर्सनालिटी थी.

उसे खुद को ज़यादा मेन्टेन करने की ज़रूरत भी नहीं थी. और फिर इतना प्यार राज को वैसे hi बहुत निखार गया था.

अनीता के बारे में राज को उर्वशी और आदित्य से पता चला था. इसलिए राज ने इंदौर में hi अपना ठिकाना बनाने का सोचा था. अनीता hi उसके लिए, बिज़नेस के लिए बेस्ट राज ने सोच लिया था. राज हरामी था, बहुत से एंगल उसे बड़ी जल्दी समझ में आ जाया करते थे. और फिर सिमरन ने कहा था अपने दम पर सब करना है. उसके परिवार की कोई भी मदद नहीं लेगा

और राज सिमरन के परिवार की मदद के बिना अपने दम पर सब करने जा रहा था. पर हरामी था तोह उसका दिमाग भी हरामियों के जैसे hi आइडियाज लेकर आया करता था.

राज को देख कर गेटकीपर ने पुछा तोह राज ने बोल दिए. अनीता मैडम से कुछ काम है. चौकीदार ने बहस नहीं की और गेट खोल दिए.. राज बाइक लेकर अंदर घुसता चला गया.

राज ऐसे घर में घुस रहा था. जैसे ये उसका अपना घर हो. राज सीधा अंदर hi घुसता चला गया. किसी और तरफ धयान नहीं दिए.

अंदर कोठी में आज फिर विराट के चाचू आये हुए थे. अपने साथ साथ वह विराट के मम्मी पापा को भी ज़बरदस्ती लेकर आया था.

अंदर सब परेशान बैठे हुए थे.

चाचू-- मैंने कुछ गलत भी तोह नहीं कहा. अनीता को भी एक साथी की ज़रूरत है और मुझे भी. मुझसे अच्छा इंसान अनीता कहीं और मिलेगा भी नहीं. इस उम्र में कहाँ उन्हें मेरे जैसा मर्द मिलेगा. 2 साल से मैं अनीता के लिए पागल हों और आप सब को किसी बात की कोई परवा hi नहीं है. विराट बस बहुत हो चूका. मेरी अनीता से शादी नहीं हुई तोह तुम्हे भी दिशा को छोड़ना पड़ेगा. वर्ण

चाचू हरामी था. उसके लच्छन सच में अचे नहीं थे. विराट और उसके पापा शरीफ आदमी थे. उसके आगे कुछ बोल नहीं पाते थे. सालों से उसे झेलते आ रहे थे तोह उसके प्रेशर में जी रहे थे. विराट जो कल दिशा से कुछ और कह रहा था. अब वह भी कुछ कुछ कंफ्यूज हो गया था. चाचू के बदले तेवर पर वह भी चुटिया बन गया था.

दिशा की बेटी सोनिआ अपने छोड़ू के साथ वहीँ कुछ फैसले पर बैठी हुई थी. वह दिशा के कहने पर भी अंदर नहीं गयी. वह सबको देख रही थी. उसे सब समझ थी. 5 साल की थी वह. अपनी माँ और mummy(anita) से बहुत प्यार करती थी. चाचू पर उसे भी ग़ुस्सा आ रहा था. पर वह भी दरी सेहमी हुई थी.

अनीता को अपनी बहन की चिंता थी. वर्ण वह चाचू का वह हाल करती, पूरा शहर देखता.. क्रिमिनल मंद नहीं थी. बूत हिम्मत वाली लड़की थी. हमेशा ज़माने से लड़ती आई थी. इस मटर से जुड़ा हुआ था उसकी बेहेन का मटर.. जिसके लिए उसने खुद को कुर्बान कर दिए था. दिशा का मटर न होता तोह चाचू को बोलने की हिम्मत भी न होती. चाचू भी दिशा के कमज़ोर रिश्ते को ढाल बना कर बढ़चढ़ कर बोल रहा था.

दिशा अपनी दीदी को देख कर आंसू बहा रही थी. तोह विराट चूतिये अपने मम्मी पापा को देख रहा था. चाचू चेहरे पर ग़ुस्सा तोह आँखों में विजयी मुस्कान लिए सबको देख रहा था.

अनीता या कोई और कुछ बोलता.. उसी समय ड्राइंग रूम के खुले दरवाज़े से एक लड़का अंदर आता हुआ दिखाई दिए. सब उसे आते देख कर हैरान हो गए. वह ऐसे आ रहा था. जैसे कोई घर का मेंबर घर में आता है.

आने वाला राज था. राज ने सर नहीं घुमाया था. राज ने एक hi नज़र में पुरे ड्राइंग रूम कर सर्वे कर लिया था. राज चलता हुआ सोनिआ के पास जा पोहंचा. सब उसे देख कर और भी हैरान होने लगे.

एक था जो राज को देख कर दर गया था. वह था चाचू. चाचू की नज़र जैसे hi राज पर पड़ी थी. वह थार थार कंपनी लगा था. उसके चेहरे पर पसीना ऐसे आने लगा था. जैसे किसी ने शावर से उसका शेहरा भिगो दिए हो.

राज सोनिआ के साथ सोफे पर जा बैठा और सोनिआ को उसके भाई समेत उठा कर अपनी गॉड में बिठा लिया. सोनिआ के गाल पर किश करते हुए बोलै-- hello माय लिटिल प्रिंसेस कैसी हो आप.

राज का अंदाज़ बहुत मीठा और धीमा था. सोनिआ का दिल भी आनंदी हुआ तोह मासूम आवाज़ में बोली-- प्रिंसेस की माँ और मम्मी बहुत साद हाँ. इसलिए प्रिंसेस भी साद है.

राज-- ओह्ह माय लिटिल प्रिंसेस साद है

सोनिआ-- हम्म्म

राज-- दर भी लग रहा होः मेरी प्रिंसेस को

सोनिआ जैसे राज के प्यार के ट्रांस में आने लगी थी बोली-- थोड़ा थोड़ा लग रहा है

राज- क्यों दर लग रहा है मेरी प्रिंसेस को. प्रिंसेस तोह बहुत ब्रेव होती हाँ न.

सोनिआ के गालों पर कुछ रंगत सी आ गई-- हाँ प्रिंसेस ब्रेव होती है.

राज-- और.. आगे बताओ न मेरी प्रिंसेस

सोनिआ चहकते हुए-- और प्रिंसेस किसी से नहीं डर्टी..

सोनिआ को यौन एक अजनबी से बातें करते देख कर, घुलते मिलते देख कर दिशा आंसू बहाना भूल गई. अनीता अपना दुखड़ा भूल गई. विराट की तोह ऑंखें hi हेरात से फटी पड़ी थी. उसके मम्मी पापा भी हैरानगी से राज को देख रहे थे. वहीँ चाचू के शरीर की थरथराहट और भी बढ़ती चली जा रही थी. जब से राज ड्राइंग रूम में एंटर हुआ. किसी ने भी चाचू पर धयान नहीं दिए था. वर्ण उसकी हालत देख कर वह शॉकेड हो जाते. कुछ देर पहले जो हरामी बना हुआ था. कुत्ते की तरह भोंक रहा था. अब कैसे वह थार थार काँप रहा था. कैसे उसके चेहरे पर ऐसे पसीना आने लगा था. जैसे उसे हैरतटक आने वाला हो.

राज ने सोनिआ के दोनों गाल फिरसे चुम लिए. साथ hi उसके भाई के गाल पर भी उँगलियाँ फेरने लगा.

राज-- बहुत क्यूट है आपका भाई

सोनिआ -- हाँ मेरी जान है मेरा छोड़ू.. मई बहुत प्यार करती हों अपने छोटू से. सोनिआ को जैसे याद आया वो बोली-- अंकल आप कोण हाँ.

राज ने सोनिआ के कान से मोह लगा कर कुछ बोलै तोह सोनिआ के चेहरे के रंगो में बेपनाह इज़ाफ़ा हो गया.

सोनिआ-- सच प्-- राज ने उसमे मोह पर हाथ रख दिए. फिरसे उसके कान में कुछ बोलै

सोनिआ-- हम्म्म ठीक है..

राज-- तो अब उस गंदे अंकल का क्या करना है.

सोनिआ हस्ते हुए-- उसे मुर्ग़ा बना दो.. ेहेहेहे मुझे अंकल को मुर्ग़ा बने देखना है.

सब के लिए ये साडी सिचुएशन समझ से बहार थी. फिर भी कोई बोल नहीं रहा था. दोनों को सेक्रेटली बातें करते सुनकर भी सब हैरान थे.

दिशा मैं में- मेरी बेटी तोह हमारे परिवार के शिव किसी के साथ ऐसे बातें नहीं करती. क्यों इस अजनबी के सामने वह इतनी जल्दी ऐसे घुल मिल गई. जैसे वो अजनबी न हो. कोई घर कर फारद हो.

अनीता तोह बस राज को hi देखे जा रही थी. या फिर सोनिआ के गुलाबी गालों को. सोनिआ इतनी खुश कभी उसके पास रहते हुए भी नहीं दिखी थी. अनीता ये जान कर बड़ी हैरान थी. जैसे दिशा उसकी जान थी. ऐसे hi दिशा के दोनों बच्चे भी उसकी जान थे. और जो उसकी जान को भा जाए. कैसे वह अनीता को पसंद नहीं आ सकता था. अनीता राज के लिए अच्छे विचार मन लेकर सोचने लगी. राज अनीता से आधी आगे का था. इसलिए अनीता ने दूसरे एंगल से नहीं सोचा.

राज ने सोनिआ को उसके भाई समेत उठाया और सबके बीच आ कर बेथ गया. सब मोह फाड़े उसे देख रहे थे.

राज-- माय लिटिल प्रिंसेस अपने भाई को मुझे दो और कड़ी होकर गंदे अंकल को सजा सुनाओ.. सोनिआ हेहेहे करती हुई अपने भाई को राज की गॉड में देकर उठ कड़ी हुई.. और सबके बीच में रहते हुए चाचू को देखने लगी.

किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था. क्या होने जा रहा है, सोनिआ क्या करने वाले है. आने वाले अजनबी ने सोनिआ से क्या कहा करने के लिए. सोनिआ इतनी जल्दी क्यों अजनबी से माणूस हो गयी.

सोनिआ-- गंदे अंकल चलें मुर्ग़ा बन जाएँ.

सोनिआ बिना डरे बोल गयी.

दिशा और अनीता तोह अपनी लाइफ का सबसे बड़ा हैरान कर देने वाला सन देख रही थी. ये भी वह जानती थी. चाचू के आने पर वह भी घबरा जाया करती थी. कैसे अब बिना डरे वह चाचू को मुर्ग़ा बनने को कह रही थी.

सोनिआ-- चलें.. चलें.. जल्दी से मुर्ग़ा बने..

सबसे चाचू को देखा तोह और भी शॉकेड हो गए. चाचू की हालत देखने लायक थी.

राज ने उसे घूरा तोह चाचू दर के मारे खड़ा हो गया. उसका पूरा वजूद ऐसे लरज़ रहा था. जैसे तेज़ अंधी के कारन छोटे मोठे पेड़ पड़े.

चाचू डरता है वहीँ झटके हुए मुर्ग़ा बनने लगा. पर दहशत में आया हुआ था. झुकते hi गिर पड़ा. सबकी हालत ऐसी हो रही थी. कोई सुई भी चाभु देता तोह पता न चलता.

सोनिआ-- हेहेहे.. गंदे अंकल आपको मुर्ग़ा बनना भी नहीं आता.. राज को देख कर पा-- अपने मोह पर हाथ रख कर बोलने वाले वर्ड को बहार निकलने से रोक दिए. फिर बोली... ये तोह मुर्ग़ा नहीं बन्न रहे हाँ..

राज-- तोह स्कूल में जैसे टीचर सजा देती है. आप भी वैसे hi सजा दें. अंकल को मुर्ग़ा बनना नहीं आता. आप उसे सजा देकर समझा दें. देखना कैसे वह मुर्ग़ा बनते हाँ.

सोनिआ आगे बढ़ी और चाचू की पीठ पर हाथ मार दिए.

दिशा-- सोनिआ

राज-- उसे कुछ मत कहो. बच्चू को उनके मैं की करने दी जाए तोह उनके अच्छा होता है. यही तोह है बच्चू की असली शिक्षा. जिसके साथ वह बुरा कर रही है. वह तोह बहुत hi घट्टिया इंसान है. ऐसे को सजा अगर बच्चे दें तोह आगे चल कर बुरों के लिए ऐसे hi बनेंगे वह. राज फिर चाचू से--- ताक़त नहीं है शरीर में तोह मैं मैं दूँ तुझे ताक़त.. चाचू कंपनता हुआ उठा और मुर्ग़ा बन गया. उससे बोलै भी नहीं जा रहा था.

राज-- मेरी प्रिंसेस को अपनी माँ का मम्मी के अपमान का बदला नहीं लेना है. गंदे अंकल कितने दिनों से आपकी माँ को आपकी मम्मी को परेशान कर रहे हाँ.

सोनिआ-- हाँ, मुझे भी घूर कर देखते हाँ.. मैं इनको सजा दूंगी.

सोनिआ अपने नन्हे नन्हे हाथ चाचू की पीठ पर मरने लगी.

विराट के पापा से नहीं देखा गया-- कोण हो तुम और मेरे भाई के साथ ऐसा क्यों कर रहे हो. बिना परमिशन के हमारे घर में घुस ए हो और अब मेरे भाई के साथ ऐसा कर रहे हाँ. मैं पुलिस को बुलवा कर अंदर करा दूंगा तुम्हे..

चाचू मुर्ग़ा बने हुए hi-- नहीं भाई साब आप कुछ मत बोलेन.

राज-- हाहाहा.. सुना कैसे लाइन पर आ गया है. ऐसे कुत्ते कैसे सीधा किये जाते हाँ. मैं अच्छे से जनता हों. चाचू से-- मैंने तुझे कहा था, ये शहर hi नहीं ये देश भी छोड़ दो. फिर क्यों नहीं मानी मेरी बात.

चाचू-- गलती हो गई सर मुझसे. मैं अभी ये देश छोड़ कर चला जाऊँगा.

राज- प्रिंसेस

सोनिआ-- यस

राज-- इसका मोह नहीं सुजैनेगी आप. कितने गंदे हाँ न ये

सोनिआ-- हाँ बहुत गंदे अंकल हाँ ये. सोनिआ चाचू के गालो पर मरने लगी.

अनीता- बंद करो ये सब.. कोण हो तुम और क्यों घुस आये हो मेरे घर में. क्यों कर रहे हो ये सब.

सोनिआ-- मम्मी ऐसे बात न करें आप मेरे प्---

सोनिआ फिर रु गयी. राज हसने लगा..

अनीता-- सोनिआ मेरी जान ये तुम क्या प् प् बोल कर रुक जाती हो. क्या बनता है प् से...

सोनिआ राज को देखने लगी.

राज-- चल उठ जा बे.. और जितनी जल्दी हो सके इस शहर, इस देश से निकल जा. तेर पास कुछ hi घंटे हाँ. तू मुझे इंडिया में दिखा तोह अगले hi पल--

चाचू-- नहीं नहीं मैं अभी चला जाऊँगा. एक पल भी और मैं अब इंडिया में नहीं रहूँगा. मुझसे बहुत बड़ी गलती हुई है. मुझे रत को hi निकल जाना चाहिए था.

राज-- हाहाहा.. तूने सोचा था. अनीता जी से शादी करके उसकी जायदाद लेकर निकल जाऊँगा. कितना बच्चू वाला मंद है तेरा. ऐसा थोड़ी न पैसा मिलता है. चल अब भाग यहाँ से.

चाचू उसी पल वहां से भागता हुआ निकल गया..

राज विराट के मम्मी पापा से-- वह आपका अपना है, ये सोच कर कमज़ोर नहीं पड़ना चाहिए था आपको. एक कमीने के कारण आपका पूरा परिवार बिखर कर रह जाता. आप हमेशा यही सोचते रहे. कुछ कहा तोह वह आपसे हमेशा के लिए दूर हो जायेगा. आपका एक hi भाई है, कैसे उससे दूर रह सकते हाँ. गलत सोच है आपकी. एक भाई को हमेशा साथ रखने के लिए आपने अपने पुरे परिवार को खो देने पर तुले हुए हाँ. कितने स्टुपिड हो जाया करते हाँ आप जैसे भाई.

विराट- तमीज़ से बात करो. मेरे पापा हाँ वह.

राज-- हाहाहा.. अभी कुछ देर पहले कैसे भीगी बिल्ली बने बैठे थे. बोलने की हिम्मत भी खुद में खो बैठे थे. कितने समय से ऐसे hi जी रहे हो. मर्द हो तोह मर्दों की तरह फैसले लेने भी सोचो. अपनी बेटी का भी नहीं सोचा तुमने. कैसे उस घट्टिया इंसान की वजा से उसके विचारों में बदलाव आने लगा था. कल तोह भगवन न करे कुछ ऐसा हो जाता, उस घट्टिया इंसान की बात पूरी हो जाती. एक साथ कितनी ज़िंदगियाँ बर्बाद हो जाती. अनीता जी जैसे अपनी बेहेन से मोहब्बत करती हाँ. अपनी उसी बेहेन की खुशियों के लिए एक दिन टूट जाती.

पर उनका टूटना पुरे परिवार को तोड़ देता. मुसिअबट सर पर आये तोह उसका सामना करते हाँ. ऐसे hi मोको पर तोह मर्दों का पता चलता है. बच्चे पैदा करने वाला hi मर्द नहीं होता.

विराट की बर्दाश्त ख़तम होने लगी थी.

राज उठा और विराट के सामने जा पोहंचा-- ग़ुस्सा आना बनता है तुम्हारा. सोचो तुम अपनी मर्दानगी पर हुए दो कमैंट्स सहन नहीं कर पाए. कल को तेरा चाचू hi तुझे ऐसे ताने देने लगता तोह फिर तू क्या करता. तेरे दो दो परिवार हाँ, वह बिखर जाते तो तू क्या करता. अब की मर्दानगी को ठेस पोहंचा देने वाली बातें भूल जा. आगे की लाइफ पर धायण दे. देख तेरी बेटी में कैसे मेरे दो hi बोलो ने डेरिंग भर दी. तू उसका डैड है. तुझसे उसे हिम्मत मिलेगी. एक बीटा भी है तेरा, उसे भी तोह एक मर्द hi बनना है. तू असली मर्द बनेगा तोह वो भी फिर तुझ जैसा hi मर्द बनेगा. क्या तू चाहता है, जैसा तू अब है, वह भी ऐसे hi रूप में एक दी सामने आये. कोई तेरी माँ, तेरी पत्नी के सामने बुरा बार्टन करे और वह रिश्तों की डोर में बंधा बस सोचता hi रह जाए. अभी तुम्हारी उम्र hi कितनी है. अभी भी तुम जवान हो. बड़ी उम्र पड़ी है तुम्हारी. आजसे अपने जीने का थांग बदल दो. ऐसा मर्द बनो. तेरे बच्चू और परिवार के सभी तुझे देख कर गर्व करें. तुझे फॉलो करें.

कितने रंग बदल लिए थे राज ने थोड़े से hi समय में. पहले सोनिआ को गॉड में लिए बैठा था तोह माँ दिखाई दे रहा था. प्यार करने वाला दिखाई दे रहा था. चाचू से बोलै तोह दरिंदा सिर्फ दिखाई दिए था.

अब बोलै तोह एक महान इंसान के रूप में सामने आने लगा था. अनीता तोह मोह फाड़े हुए राज को देख रही थी. उसने राज के जैसा एक भी नहीं देखा था आज तक. उसके अंदर सिर्फ एक बात आई. काश ये मेरी उम्र का होता. ऐसा hi एक हमसफ़र तोह मैंने चाहा था.

दिशा बरी बरी सबको देख रही थी. राज की बातें उसपर दिल पर भी असर कर गयी थी. वो भी राज को अब अच्छे अंदाज़ में देख रही थी. सोच तोह अब सबकी hi बदल कर रह गई.

विराट, विराट के मम्मी पापा भी राज की बातें दिल से समझ गए थे.

विराट के पापा ने राज से सॉरी बोल कर अपनी काम हिम्मती बारे बोल दिए. साथ hi अपनी गलती को भी स्वीकार कर लिया. विराट की मम्मी को भी अपने पति के बदल जाने जे बाद हिम्मत मिल गई थी वह भी राज को धन्यवाद बोलने लगी.

विराट ने राज को अपने गले से लगा कर खूब भेंचा. और उसे शिक्षा देने के लिए धन्यवाद बोलने लगा.

दिशा की आँखों में आंसू आ गए थे. आज उसकी दीदी प्र आयी मुसीबत hi नहीं ताली थी.

बहुत से बदलो उसकी लाइफ में आ गए थे. उसकी दीदी भी सेफ हो गई थी. उसकी बेटी का दर भी जाता रहा था. उसके पति को भी वो हिम्मत मिल गई थी. जो हर पत्नी अपने पति में देखने चाहती है.

अनीता अब अजीब से नज़रों से राज को देख रही थी. उसे अपने अंदर हो रही हलचल की कुछ समझ नहीं आ रही थी. वह भले hi एज्ड थी. पर मैं से वह अभी भी 18 की hi थी. 18 की हुई तोह सब कुछ hi थम कर रह गया था. अब उसे वही जवानी वाले विचारों ने घेरना शुरू कर दिए था. पर वह इससे अनजान थी अभी. समझ नहीं प् रही थी. राज उससे आधी उम्र का था. इसलिए भी वह अपने अंदर के बदलाव पर धयान नहीं दे रही थी.

गुज़री रत जब डिनर के बाद चाचू अनीता के घर से निकला था तो राज के तीनो हरामी दोस्तों ने उसे धार लिया था. उसे कोठी के पिछले रस्ते अंदर ले गए. वहां उसके साथ वो खेल खेला था. चाचू की गांड नहीं पहाड़ी थी किसी ने भी. पर चाचू को लगा बिना फटे hi पहात गई है.

राज भी वही आ गया था. तीनो हरामी दोस्त मोह कवर किये नंगे होकर चाचू के साथ लगे रहे थे. उसे घोडा बना कर उसकी गांड पर अपने लुंड घिस रहे थे. उसके मोह में दाल कर उसके मोह को छोड़ रहे थे. राज वीडियो बना रहा था.

चाचू बहुत दहशत में आ गया था. उसके साथ पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था. उसने कभी सोचा भी नहीं था. उसके जैसे मर्द के साथ भी कोई ऐसा कर सकता है.

पर नहीं जनता था, इंडिया में राज से बड़ा हरामी कोई नहीं है. बिन्नी ने तोह थोड़ा सा लुंड उसकी गांड में घुसा भी दिए था चाचू को डरने के लिए. बाकि तीनो ने चाचू के मोह को छोड़ छोड़ कर अपने लुंड खली कर दिए थे.

राज ने उसके सरे काले करतूत उसके मोह से उगलवा कर वीडियो में रिकॉर्ड करवा लिए थे. वह भी सब बकता चला गया था. राज का काम और बह आसान हो गया था. अपनी एंट्री को थांसू बनाने के लिए राज ने अनीता का ज़िक्र नहीं किया था.

जनता था इतनी जालिद ये हरामी बाज़ नहीं आएगा. वही हुआ भी था. अगले दिन चाचू फिरसे अनीता की कोठी जा पोहंचा था. चाचू अब कुछ hi दिनों में अनीता से शादी करके प्रॉपर्टी हासिल करके यहाँ से खिसक जाना चाहता था.

पर राज ऐसा होने नहीं दे सकता था. पोहंच है अपनी एंट्री को जानदार बनाने के लिए.

राज सोनिआ को गॉड में उठाये हुए दूसरे हाथ सोनिआ के भाई को थामे सोफे पर जा बैठा. कुछ देर की बातों के बाद विराट के मम्मी पापा चले गए.

दिशा ने सोनिआ को अपने पास आने का इशारा किया तोह सोनिआ राज को देखने लगी.

राज ने सोनिआ को जाने का सिंगल दिए तोह सोनिआ अपनी माँ के पास जा पोहंची.

विराट दिशा और सोनिआ को देखने लगा तोह अनीता राज को देख रही थी.

दिशा सोनिआ से-- अब बताओ क्या कहा था अंकल ने तुमसे.. और तुम प् बोल के रुक क्यों जाती थी. क्या है प्

सोनिआ ने फिरसे राज को देखा तोह स्माइल से सोनिआ को हाँ का इशारा करने लगा.

सोनिआ चहकते हुए-- माँ, डैड, मम्मी मुझे पापा मिल गए.. वह मेरे अंकल नहीं हाँ वह तो मेरे पापा हाँ. आप मेरी माँ, ये मेरे डैड, वो मेरी मम्मी और वह मेरे पापा..

kyaaaaaaaaaaaaaaaaaaa....???

सब फिरसे शॉकेड हो गए थे. ये वाला झटका कुछ हटके था.

दिशा अपने मोह पर हाथ रख गयी. विराट एक पल सोनिआ को देखता रहा फिर ज़ोर ज़ोर से हसने लगा..

अनीता झटके में उठ कड़ी हुई.

विराट हस्ता हुआ-- हाहाहा दीदी चाचू को भगा दिए.. अब इसे भगा कर दिखाओ..
 
अनीता की राज के लिए उमड़ रही फीलिंग्स बदल कर ग़ुस्से का रूप ले गयी.

अनीता-- शर्म नहीं आती एक बची के मंद में घट्टिया विचार भरते हुए. अपनी उम्र देखो और मेरी उम्र देखो. अनीता आग उगलती आँखों से राज को देखते हुए बोली तोह राज उसे स्माइल से देखने लगी.

राज सोनिआ से-- प्रिंसेस आपकी मम्मी को ग़ुस्सा आ गया है.

सोनिआ मासूम सा फेस बना के-- मम्मी आपको ग़ुस्सा क्यों आया है. पापा कितनी अच्छे हाँ.

अनीता-- सोनिआ तुम चुप करो. मुझे इससे बात करने दो.

अनीता सख्ती से बोली तोह सोनिआ मोह बसुरने लगी. उसका नन्हा सा दिल हर्ट हो गया था.

राज-- हे मेरी प्रिंसेस आपके दिल को चोट पोहंची क्या..?

सोनिआ हाँ में सर हिलने लगी

राज-- कहाँ गई वह पहले वाली ब्रेव प्रिंसेस..

सोनिआ-- हाँ! मैं ब्रेव प्रिंसेस हों.

राज-- गुड. अब अपने छोटू को लेकर अंदर रूम में जाओ.

सोनिआ फ़ौरन राज की सुनते हुए अपनी मम्मी से छोटू को लेकर रूम में जाने लगी. दिशा अब भी हैरान थी. उसे भी राज पसंद आया था. उसने विराट को देखा तोह विराट स्माइल से हाँ में सर हिलने लगा. दिशा और विराट को तोह अनीता का घर बास्ते देखना था. राज उम्र में काम था तोह क्या हुआ. इस आगे में अब अनीता को उसकी आगे का कोई तोह मिलने से रहा. मिलता भी तोह राज के जैसा नहीं हो सकता था.

अनीता-- क्या तुम दोनों नैना मटक्का कर रहे हो हाँ. अनीता दिशा और विराट को देख कर ग़ुस्से से बोली तोह दिशा होंटो पर जीब फेर कर विराट को देखने लगी.

विराट उठता हुआ-- चलो दिशा हम भी अंदर चलते हाँ. यही रहे तोह दीदी हमें कच्चा hi खा जाएँगी.

दिशा भी सब समझते हुए फ़ौरन उठी और विराट के साथ जाने लगी. राज को देखा तोह दिशा की आँखों में अपनी दीदी के लिए रिक्वेस्ट थी. राज की सूरत में दिशा को एक उम्मीद की किरण दिख गई थी.

अनीता हैरानगी से दोनों को जाते हुए देख रही थी. राज उठा और अनीता के हाथ को थाम लिया. अनीता ने झटके से राज का हाथ छुड़ा कर राज को देखा. अनीता अभी भी ग़ुस्से में थी.

अनीता- क्यों कर रहे हो तुम ये सब. उस लुच्चे को भगा कर जो काम किया था तुमने वह अच्छा थे. मेरी बेटी सोनिआ के साथ घुल मिल गए ये देख कर भी मुझे अच्छा लगा. विराट और उसके मम्मी पापा से भी बात करि तुमने तोह उनके बदले विचार जान कर भी मुझे अच्छा लगा. पर ये.. अपने हाथ को देखती हुई. तुमने मेरा हाथ थाम कर अच्छा नहीं किया. मेरी सोनिआ के मंद में गलत शब्द उतर कर अच्छा नहीं किया. तुम यहाँ मेरी घर में आये हो तो ज़रूर सब जान कर आये होंगे. तो ये भी तुम अच्छे से जान गए होंगे. मैं इस सब झमेलों से दूर रहने की आदि हों. फिरसे ऐसा कुछ बोलना. तुमने आज हमारी मदद भी करि है तोह कुछ अच्छा टाइम स्पेंड करके चले जा. मैं करे तोह कभी कभी आ भी सकते हो. पर जो कुछ भी तुम्हारे दिमाग में है. उसे अपनी आँखों में और ज़ुबान पर मत आने देना. वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा.

राज ने तिरछी नज़र से दूर देखा तोह दिशा अब भी एक कोने में कड़ी दोनों को देख रही थी. उससे रहा नहीं जा रहा था. वह जानना चाहती थी अपनी दीदी की लाइफ में आये इस नए मोड़ बारे.

राज ने उसी पल अनीता को अपनी बहन में भर लिया. अनीता के दिल की धड़कन तोह ऊपर निचे हुई hi थी. साथ hi दिशा के दिल की धड़कनो में भी हलचल मच उठी थी. सोचने लगी थी कितना अलग लड़का है. कितनी डेरिंग है उसमे. कितना रोमांटिक अंदाज़ है उसका. उफ़ कितने मस्त एक्सप्रेशंस आ गए हाँ उसके फेस पर. दीदी कितनी प्यारी लग रही है उस की बहन में. कितनी परफेक्ट जोड़ी है दोनों की.

अनीता तोह धड़कते दिल के साथ राज को देखती hi रह गई थी. राज क्यूट स्माइल के साथ अनीता को देख रहा था. भले hi उम्र में फर्क था. पर ऐसा मौका भी तोह अनीता ने कभी अपनी लाइफ में नहीं आने दिए था. राज पहला लड़का था जिसने उसे बहन में भरा था. राज के बदन की गर्मी पर अनीता के दिल की धड़कन और भी आउट ऑफ़ कण्ट्रोल होने लगी थी.

राज अनीता के चेहरे पर फूँक मारते hue--aaj के ज़माने में कोई भी बिना मतलब के किसी के काम नहीं आता. मैंने भी जो कुछ किया है. आपने मतलब के लिए किया है. आपके बारे में सुना तोह पता चला आप अभी तक वर्जिन हाँ. माँ कसम मैं में अजीब सी सिहरन होने लगी. मैं ठहरे लुच्चा किसम का लड़का. मस्त जवानियों का रास पीना मेरा शोक है. आपकी इस जवानी ने मेरे लहू को ऐसा गरमाया, मैं पागल हो उठा. तोह आपके बारे में सब जान कर यहाँ ाँ पोहंचा. यहाँ आते hi आपकी भांजी को अपने वाश में किया. एक लुच्चे से आपकी जान बख्शी करवाई और देखो कैसे अब आप मेरी बहन में हाँ. मैं बता नहीं सकता, कितना मस्त मस्त फील कर रहा हों मैं.. उफ्फ्फ आपका क़यामत ख़ेज़ बदन मेरे अंदर की हालत क्या बना रहा है. मैं शब्दों में बयां भी नहीं कर सकता.

राज के शब्द बड़े हटके थे. पर राज के धीमा अंदाज़ सीधा अनीता के दिल पर असर करने लगा था. लाइफ में पहली बार एक मर्द के शरीर के असली गर्मी वह महसूस कर प् रही थी. मेस्मेरिसे होने लगी थी वह. उसके खवाब डाब ज़रूर गए थे. पर थे तोह उसके अंदर hi. जज़्बात भी सोये नहीं थे. वह भी उसके अंदर hi कहीं दफ़न थे. राज कारीगर था. अनीता पर अपनी कारीगरी दिखने लगा तोह अनीता कैसे एक एज्ड वर्जिन लेडी होकर राज के आगे ठहर सकती. अनीता की आँखों में खुमारी सी उतरने लगी.

दूर कड़ी दिशा भी अपने दिल पर हाथ रख कर राज के चेहरे को hi देख रही थी.

दिशा मैं में- भगवन.. भगवन मेरी दीदी के लिए मुझे यही चाहिए.. उम्र में क्या रखा है. लड़की 20 30 साल पति से छोटी हो सकती तोह पति क्यों नहीं. हाय कितना हैंडसम, कितना लोविंग है ये लड़का. विराट भी दिशा के पीछे आ गया. दिशा के कंधे पर हाथ रखा तोह दिशा घबरा कर पीछे को हुई. फ़ौरन hi उसने विराट के मोह पर हाथ रख दिए. और चुपके से देखने को कहा. विराट ने देखा तोह देखता hi रह गया.

विराट से न रहा गया वह बोल पड़ा-- वाह्ह्ह्ह क्या अंदाज़ है.. दिशा अपने माथे पर हाथ मार गयी.

उधर विराट की आवाज़ सुनकर अनीता जैसे होश में आ गयी. राज ने भी स्माइल से दिशा और विराट को देखा तोह विराट ने थम्ब्स उप कर दिए. फिर हस्ते हुए दिशा का हाथ थाम कर अपने रूम की और बढ़ने लगा.

दिशा-- रुको मुझे देखने तोह दो.. कितने प्यारे लग रहे हाँ दोनों.. विराट सुनो तोह..

विराट हस्ते हुए-- क्यों बन रहा काम बिगड़ रही हो

दिशा-- पर मुझे देख कर बहुत अच्छा लग रहा था.

विराट हस्ता हुआ दिशा को अपनी बहन में भर गया. दिशा मैं में अपनी दीदी के लिए प्रार्थना करने लगी.

अनीता-- छोडो मुझे.. अनीता बड़ी मुश्किल से बोली थी.

राज-- छोड़ने के लिए नहीं थमा है आपको अनीता डार्लिंग.

अनीता-- डार्लिंग-- तुम कुछ ज़यादा hi अपनी हद क्रॉस नहीं कर रहे हो

राज आगे झुका और अपना चेहरा अनीता के चेहरे के क़रीबतर करता हुआ बोलै-- हद कोर्स होगी तोह hi सुख प्राप्त होगा मेरी जान. चलो चलते हाँ बैडरूम में. साडी हदें आज hi क्रॉस कर जाते हाँ.

राज वैसे hi मूड में था. जिस मूड में वह उर्वशी के साथ था. उर्वशी चुड़क्कड़ लड़की होते हुए भी पल भर में राज के स्पर्श पर ढेर होती चली गई थी. अनीता के लिए ये पहला मौका था. वह बहुत ग़ुस्से में आ जाना चाहती थी राज की इस डेरिंग पर. पर मरदाना स्पर्श ने उसके सोये अरमानो को जगाना शुरू कर दिए था. कैसे वह राज पर ग़ुस्सा करती. वह तोह अपने अंदर हो रही हलचल पर काबू पाने में लगी हुई थी.

अनीता-- pp..plz मुझे छोड़ दो. तुम अपनी उम्र की कोई लड़की देख लो. मैं नहीं हों वह लड़की जो तुम्हारे लिए बानी है. मैं अब शादी को लेके कभी नहीं सोचती.. ममम.. मैं..

राज ने उसके होंटो पर हाथ रख दिए. राज अनीता को लिए सोफे पर बेथ गया.

अनीता सम्मोहित हालत में राज के साथ जा बैठी. उसका खुद पर अखरियर टूटता जा रहा था. अपनी लाड़ली बेहेन को भी देख गई थी. ये भी जान गई थी, उसकी बेहेन उसे राज के साथ देख गई थी. फिर भी कुछ बोल नहीं प् रही थी.

राज-- राज है मेरा नाम. मेरे घर में मेरी माँ है या बहने हाँ.. राज उसे डिटेल से अपने बारे में बताता चला गया. दिल्ली में अपने नाना नानी, मौसियो और मामाओं के बारे में भी बता दिए. सिमरन का भी बता दिए. राज परिवार के हुए सेक्स बारे नहीं बताया. बाकि सब बता दिए शार्ट में.

20 मिंट में hi राज ने अनीता को सब बता दिए. अनीता राज के बारे में सब जान कर और भी राज से इम्प्रेस होने लगी. पहले जो उसके दिल में हलचल मची थी. अब वहीँ उसे कुछ मीठा मीठा सा दर्द भी होने लगा था.

उसके अंदर भी हलचल होने लगी थी. बरसों से खुद पर कण्ट्रोल बनाये हुए थी. राज की सूरत में उसे एक कंधे मिला तोह उसका दर्द उमड़ने लगा. खुद पर बनाया कण्ट्रोल वह खुद से तोड़ बैठी और राज के कंधे पर सर रख दिए.

अनीता-- तुमने अपने बारे में सब बता कर मुझे ये समझा दिए है. तुम मुझे अपनी लाइफ में शामिल करने के लिए कुछ भी कर जाओगे. राज मई सच कहूं तोह तुम्हारे hi जैसे के इंतज़ार में थी. तुम्हारे कुछ मिंटो में hi मैं बहुत जान लिया था. तुम सच में दुसरो से अलग हों. अब तुम्हारी बारे में डिटेल जान कर मैं खुद पर कण्ट्रोल भूल गई हों. राज बर्रों से तन्हाई की ज़िन्दगी जी जी कर मैं भी थक चुकी हों. तुम शायद मुझे जवानी में मिलते तोह मैं तुम्हे भी धुत्कार देती. पर अब मेरे पास कुछ बचा hi नहीं है. जो है वह मेरी बेहेन उसके बच्चे हाँ. और कुछ भी तोह नहीं है मेरे पास. डॉयलट है, वह मुझे सुख देने से रही.

तुमने सिमरन के बारे में बताया. वह तुम्हारे पत्नी है. तुमने कुछ भी नहीं छुपाया मुझसे. रिलेशन बनाने के लिए सच बोलना ज़रूरी होता है. तुमने सब सच बोल दिए. मुझसे उम्र में आधे होकर भी तुम पीछे नहीं हेट और मुझे पाने के लिए इतना कुछ कर गए.

राज-- तोह लड़की की तरफ से हाँ है.

अनीता ने राज की आँखों में देखा और स्माइल करते हुए हाँ में सर हिला दिए

राज ने सिमरन को बहन में भर लिया.. ऐसे नहीं बोल कर बताओ.

अनीता-- नं.. मुझे बड़ी शर्म आने लगी है राज.

राज-- उतार डॉन क्या..

अनीता पहले तोह नहीं समझी, पर जब राज की आँखों में देखा तोह राज के सीने पर एक धप मार दी.

राज हसने लगा.

अनीता-- जवान होती तोह खुल कर बोल भी देती. पर अब मुझसे नहीं बोलै जायेगा राज.

"मैं बोल देती हों.. राज दीदी को तुम बहुत बहुत बहुत पसंद हो"

राज ने झटके से सर घुमा कर पीछे देखा तोह दिशा के साथ साथ विराट और सोनिआ भी सोफे के पीछे खड़े थे.

अनीता खत से उठ कड़ी हुई-- दो सब कब आये.

तीनो सामने आ गए.. दिशा ने अपनी दीदी को गले से लगा कर उसके गाल को चुम लिया.

दिशा-- बहुत देर से. क्या करूँ दीदी मुझसे रहा नहीं गया. मई विराट को भी खेंच कर ले आई. यहाँ आई तोह देखा सोनिआ पहले से hi सोफे के पीछे छुपी मोह पर हाथ रख है रही थी.

सोनिआ-- हेहेहे मम्मी आपकी और पापा की बातें सुनकर मुझे बड़ा मज़ा आया. पापा कितने अच्छे हाँ न

अनीता-- सोनिआ की बच्ची.. यौन बड़ों की बातें नहीं सुनते.

सोनिआ-- मई अब बड़ी हों गई हों मम्मी.. है न पापा

दिशा हस्ते हुए-- चलो सोनिआ का काम भी बन गया. उसे एक पापा भी मिल गए.

अनीता शर्मा गई.

दिशा-- हाय दीदी आप शरमाते हुए कितनी पायरी लगती हाँ.

अनीता और भी शर्मा गई.

राज बस स्माइल कर रहा था.

विराट-- हाँ तोह राज कब लेके आ रहे हो बारात.

राज-- बारात किस लिए.

दिशा-- शादी नहीं करनी क्या दीदी से.

राज-- नहीं तोह.. मैंने कब कहा मैं शादी करने वाला हों. वह तोह मैं बस यौन hi ड्रामा कर रहा था. तुम सबने सीरियसली ले लिया.

विराट हसने लगा तोह अनीता पहले कुछ हैरान हुई फिर वह शर्माने लगी. दिशा भी देर से समझी फिर वह भी हसने लगी. सोनिआ बरी बरी सबको देखने लगी. उसे बड़ा मज़ा आ रहा था. सब को खुश देख कर.

सोनिआ-- याहूऊओ मैं नचाउंगी मम्मी पापा की शादी पर

हहहह सब हसने लगे..

दिशा-- अपने मम्मी पापा की शादी पर सब रट हाँ. तुम ख़ुशी से नाचोगी. दिशा हस्ते हुए बोली यह सब हांसे लगे.

anita--mm.. मैं अपने कमरे में जा रही हों.

विराट-- जाइये जाइये एक दुल्हन का यौन शर्माना तोह बनता hi है. जाइये जाइये अपने कमरे में जाइये..

अनीता वहां से भाग कर जाने लगी. कमरे में पोहंची तोह दूर को लॉक कर ड्रेसिंग टेबल के सामने जा कड़ी हुई. खुद को देखने लगी. अपने चेहरे पर हाथ फेरने लगी. आज उसे वह ख़ुशी मिली थी. जिसके लिए वह बरसों से राह देख रही थी.

दिशा और विराट राज से बातें करने लगे. सोनिआ राज की गॉड में बैठी हुई थी.
 
हाहाहा

ऐसा नहीं है भाई. इंदौर में आया hi बिज़नेस के लिए है. जहाँ उसे कमीने मिलेंगे, राज वहां कमीनगी दिखाएंगे. वहां प्यार मिलेगा. वहां प्यार लुटायेगा. कहानी में ये भी दिखाया जा रहा है. राज जैसे हरामी पर प्यार किस अंदाज़ में असर अंडज हो रहा है. राज का मिशन अच्छे से आगे बढ़ रहा है. जल्द hi अगला टर्न भी आएगा

स्टे विथ उस
 
दिशा राज के जाने के बाद उठ कर अपनी दीदी के कमरे की और बढ़ गई. दूर चेक किआ तो वह अंदर से लॉक था. दिशा ने दूर नॉक किया तोह कुछ देर में अनीता ने दूर खोल दिए. दिशा को सामने देखा, उसकी आँखों में चमक और होंटो पर मुस्कान देखि तोह शर्मा गई.

दिशा अनीता के गले लग कर उसे चूमने लगी-- ओह्ह दीदी ी लव यू.. ी लव यू.. आज में बहुत खुश हों दीदी. इतनी खुश हों. मैं बता नहीं सकती. आज मेरे लिए बहुत ख़ुशी का दिन है. थैंक गॉड जो भगवन ने राज को भेज दिए. वर्ण तोह कसम से दीदी मैं बहुत समय से ग्लानि से जी रही थी. मुझे लग रहा था. मेरे कारण आपकी लाइफ बर्बाद हो गई है. थैंक गॉड जो राज के कारण मेरे अंदर की ग्लानि ख़तम हो गई.

अनीता भी ख़ुशी से अपनी छोटी बेहेन को चुम गयी. तुम ऐसा कुछ मत सोचा करो. तुम मेरी जान हो. तुम्हे कभी रिग्रेट फील नहीं करना चाहिए. अब तोह मेरा यकीं और भी भगवन पर पक्का हो गया है. कितने इंतज़ार के बाद hi सही. पर भगवन ने मेरे सपनो

को पूरा कर दिए है. जैसा हमसफ़र मेने सोचा था. राज वैसा hi है. हाँ बस आगे का डिफरेंस है.

दिशा-- दीदी कुछ नहीं होता.. आगे का क्या है. दिल मिल जाये तोह आगे नहीं देखि जाती. दीदी राज कितना अच्छा, कितना सच्चा इंसान है. राज एक असली मर्द है दीदी. मुझे आपके लिए राज बेहद पसंद आया. राज तोह मेरे विराट से भी बहुत अच्छा है.

विराट : ुख्खूण मैं यही हों और सब सुन रहा हों.

दिशा और अनीता विराट को देख कर हस्स पड़ी..

दिशा मोह टेढ़ा करती हुई-- सही तो कहा है मैंने. राज तुमसे कहीं बेहतर है.

अनीता है पड़ी तोह विराट आगे बढ़ा और दिशा का कान पकड़ लिया-- शर्म नै आती दो दो बच्चे मुझसे ले कर भी तुम राज को मुझसे बेस्ट बोल रही हो.

दिशा -- आठ मेरा कान.. कहूँगी.. हज़ार बार कहूँगी राज तुमसे कहीं बढ़कर है. आअह्ह्ह और ज़ोर से नहीं विराट...

अनीता और भी खुल क्र हसने लगी. विराट दिशा का कान छोड़ कर हसने लगा. तोह दिशा भी हसने लगी. विराट ने अपनी बहन पहले और दिशा अनीता दोनों को एक साथ अपनी बहन में ले लिया..

विराट-- अब हमारी फॅमिली कम्पलीट होगी. शुक्र है भगवन का. बहुत इंतज़ार के बाद ये दिन देखना नसीब हुआ.

अनीता -- विराट तुम कहीं से भी राज से काम नहीं हो. तुम्हारे जैसा लड़का चिराग़ लेके ढूंढो तोह भी नहीं मिलेगा. कितना साथ दिए है तुमने हम दोनों बहनो का. वर्ण कोण दिशा से शादी करता. मैं और दिशा दोनों एक दूसरे के बिना रह भी तोह नहीं सकती.

थैंक्स विराट हम में शामिल होकर हमारी लाइफ को खूबसूरत बनाने के लिए.

noooooooooo.. आप सबकी लाइफ हमारे आने से ब्यूटीफुल हुई है मम्मी..

सोनिआ छोड़ू को गॉड में उठाये अंदर आते हुए बोली.

सब उसे देख कर स्माइल करने लगे..

अनीता-- ऑफ़ कोर्स आवर लिटिल प्रिंसेस.. आप एकदुम्म सही बोल रही हाँ.

सोनिआ-- मम्मी मुझे लिटिल प्रिंसेस पापा ने सबसे पहले बोलै था. आप किसी ने भी पहले मुझे प्रिंसेस नहीं कहा था. अब मुझे पापा hi प्रिंसेस कहेंगे. आप नहीं.

सोनिआ अपने छोटू को थामे ऊँगली तीनो की और सीढ़ी करती हुई बोली तोह तीनो हसने लगे. तीनो निचे बैठे और सोनिआ को थाम कर किश करने लगे.

आज सच में ये फॅमिली पूरी हो गई थी. खुशियों भरे कई और रंग इन के बीच आने लगे थे.

वही सुनैना के घर के दुर्बल बजी तोह संजना ने दूर खोला.. सामने शिवानी को देख कर ख़ुशी से चीख पड़ी..

व्हाट ा प्लीजेंट सरप्राइज दीदी.. आप कितने समय के बाद हमारे घर आई हाँ. संजना बहुत लॉडली बोली थी. सब सुनकर वहीँ आ गए. बड़ी मोहब्बत से शिवानी का सवागत किया गया..

शिवानी-- माय गॉड मौसी आप तोह पहचान में hi नहीं आ रही हाँ. कितनी सुंदर दिख रही हाँ आप.

शिवानी सुनैना से मिली तोह सुरप्रीसेड हो गई. सुनैना शर्मा गई तोह दादी., संजना स्माइल करने लगी.

सुनैना-- क्या मैं सुंदर नहीं दिख सकती शिवानी बेटी. बस मैं किया तोह खुद पर थोड़ा सा धयान देने लगी हों.

शिवानी ने सुनैना के गाल चुम लिया. भगवन बुरी नज़र से बचाये आपको. आपको फ्रेश देख कर बहुत ख़ुशी मिली मुझे.

दादी-- आज कैसे राज भूल गई हो शिवानी बेटी. पुलिस की वर्दी में hi. कहीं हमारे घर से तोह किसी को गिरफ्तार तोह नहीं करने आई हो.

सब है पड़े

शिवानी-- दादी आप भी एकदुम्म मस्त दिखने लगी हो. क्या बात है. कुछ hi दिनों के कितना चेंज आ गया है आपमें मौसी में.

शैफाली-- मुझे भी दोनों को देख कर चिंता होने लगी है didi..aisa hi रहा तोह मुझे लगता है माँ और भी जवान हो जाएँगी. फिर हमारे लिए आने वाले रिश्ते माँ की वजा से होते होते रह जायेंगे. सब कहेंगे हमे तोह ये वाली पसंद है.

हाहाहाहाहा सब खिलखिला कर हसने लगे तोह सुनैना बुरी तरह से शर्मा गई.

शिवानी- आये हाय मौसी कसम से आप तोह किसी नयी नवेली दुल्हन के जैसे शर्माने लगी हाँ.

सुनैना मैं में.. दुल्हन hi तोह हों मैं नयी नवेली. बस तुझे खबर नहीं है.

शिवानी-- अच्छा वह राज नहीं दिखाई दे रहा.. कहीं गया है क्या.

संजना कुछ बोलने वाली थी. सुनैना के दिमाग की बत्ती जाली.. तोह शैफाली सोचने लगी ये राज कोण है

सुनैना-- शिवानी बेटी तुम रघु का पूछ रही हो क्या.

शिवानी ने भी खुल कर बात करने का सोच लिए. वही तोह रघु hi तोह राज है. अखिल नहीं था यहाँ. शैफाली नहीं जानती थी. राज उसकी मौसी का लड़का है. राज का नाम भी सब नहीं जानती थी. सुनैना hi जानती थी.

सुनैना को कुछ चिंता सी होने लगी. घर में उसके शिव किसी को राज के असली नाम का नहीं पता. इसे कैसे पता चल गया. शिवानी पुलिस वाली थी. वह सुनैना के फेस को देखने लगी. ये तोह वो समझ गई के सुनैना राज के बारे में बारे में, उसके असली नाम के बारे में जानती है. ये भी ज़रूर जानती होगी वह कहाँ गया है.

शिवानी-- जी मौसी में रघु के बारे में hi पूछ रही हों. राज hi रघु है और रघु hi राज है.

सुनैना सब सुनकर टेंशन में थी तोह बाकि सुनकर हैरान हो गए थे.

शैफाली-- ये क्या कह रही हो. उसका नाम रघु है.

रुपाली-- हाँ शिवानी उसका नाम रघु है.

शिवानी स्माइल के साथ-- जानती हो आप सब रघु कोण है. उसका असली नाम राज है और वह सिमरन का राज है. कुछ दिन से शहर भर में सिमरन वर्मा के बारे में फेल चुकी न्यूज़ नहीं सुनी क्या तुम लोगों ने.

सब हैरान हुए तोह संजना भी हैरान हो गई. उसे इशिता की बातें याद आने लगी. तोह रुपाली जो राज के साथ मज़े कर रही थी. उसे कोई खास फर्क नहीं पड़ा. शैफाली को ज़रूर झटका लगा था.

दादी भी सुनकर हक्की बक्की रह गई थी.

दादी-- शिवानी बेटी ये क्या कह रही हो.

शिवानी-- सही कह रही हों दादी. कहाँ है वह राज का बच्चा.. मुझे उससे काम है. सिमरन मैडम ने एक मैसेज देकर भेजा है मुझे.

सुनैना जल्द hi खुद पर काबू प् गयी थी. बोली वह अपने गाओं गया हुआ है.

शिवानी-- कोनसे गाओं.. सुनैना ने सब बता दिए.

कुछ देर की बातों के बाद भी शिवानी के हाथ कुछ नहीं लगा तोह वह कुछ देर और बेथ कर खा पि कर, फिरसे मिलने का बोल कर निकल गई.

शैफाली-- राज तोह बड़ा फेमस लड़का है. हमारे घर में था और हमें खबर hi नहीं हुई.

दादी, सुनैना, संजना और रुपाली मैं में.. तुझे तोह कुछ भी पता नहीं है. राज खुद से hi तुझे बताएगा. वह भी अपने तरीके से. तब सब जान पायेगी तू.

रुपाली ने संजना को अपने साथ लिया और अपने कमरे में ले गयी.

संजना शोखी से-- दीदी मैं राज नहीं हों. मैं आपकी खुजली नहीं मिटा सकुंगी.

रुपाली जो संजना से कुछ और बोलने वाली थी. संजना की बात सुनकर पहले तोह उसका मोह खुला फिर वह ज़ोर से है पड़ी. सज्नना भी हसने लगी.

रुपाली-- संजना तू कुछ ज़यादा hi शरारती नहीं हो गई है

संजना-- आपसे तोह काम hi हों दीदी. मुझे आपके जितना पैट्रॉल मिल गया न तोह फिर शायद आपके जितनी शोखी मैं भी हो जाऊँगी. रुपाली ने संजना के चुके को पकड़ कर दबा दिए.

रुपाली-- बड़ी गर्मी छड़ी है तुझे. हाँ मुझसे बोल, मैं मिटा देती हों तेरी गर्मी.

संजना हस्ते हुए-- नहीं दीदी. ऐसे मेरी गर्मी ख़तम नहीं होगी. ऐसे तोह और भी बढ़ जाएगी. और फिर आपके पास तोह वाला गरमा गर्म रोड नहीं है न. उसके बिना गर्मी नहीं जाएगी मेरी.

रुपाली हसने लगी.. बड़ा मज़ा आ रहा था उसे राज से रिलेटेड बातें करने में. संजना से और भी खुल कर बातें करने में भी उसे बहुत मज़ा आ रहा था.

राज कोठी पोहंचा तोह उसे देख कर बिन्नू, विक्की और जूरी भागते हुए आगे.

बिन्नी-- क्या बना राज.

विक्की-- क्या बनना है. वही बना होगा जो इससे पहले बनता आया है. हरामी है एक नंबर का. कभी फ़ैल हो सकता है क्या.

जूरी-- मेरी शरीफ बजी इस हरामी के निचे लेटने के लिए पागल हो गई thi.anita तोह फिर भी इतने सैलून की पियासी है. मुझे तोह लगता है. छोड़ के आ रहा होगा

राज-- साले तेरी बेहेन की छूट की आग कुछ ज़यादा hi बढ़ी हुई थी. इसलिए जल्दी चुद गई. अनीता जी तोह बहुत शरीज हाँ.

बिन्नी-- मतलब तूने उसे नहीं छोड़ा.

विक्की-- हो hi नहीं सकता.

राज-- सालो मैं उससे शादी करने वाला हों. पहले से क्यों छोड़ डॉन. उसके लिए मामला चुदाई से बढ़कर दिल का है. इसलिए चुदाई के लिए पागल नहीं हुआ.

तीनो के मोह टेढ़े हो गए.

बिन्नी-- मतलब आज तेरे पास कोई चटपटी न्यूज़ नहीं है.

राज-- तुझे सुन्न्ना है चटपटी न्यूज़

बिन्नी-- तेरे पास रहते hi किस लिए है राज. चुदाई की मस्त बातें तुझसे hi सुनके मज़ा आता है.

राज - चल फिर अंदर.. अब तेरी गांड मार के तुझे लाइव चुदाई की बातें सुनाता हों.

जूरी और विक्की हसने लगे तोह बिन्नी राज को गलियां देने लगा. राज हस्ता हुआ अंदर जाने लगा.
 
राज कोठी में एंटर हुआ तोह उसे चची माँ और अंजलि ड्राइंग रूम में बैठी हुई दिखी.

जहाँ अंजलि राज को देख कर खुश हुई तोह चची का चेहरा ऐसे चमकने लगा. जैसे एक पत्नी शादी के कुछ दिनों बाद अपने पति देखती है. उस पत्नी की तरह जिस की सभी छह पूरी हो चुकी हों. तन से मन से उसकी पियास बुझ चुकी हो.

वही आराधना भी राज को देख कर खिल उठी.

राज भी तीनो को खुश देख कर खुश हो गया. ख़ुशी ख़ुशी राज तीनो की और बढ़ने लगा. जैसे hi वह सोफे पर बैठने को हुआ.

सोफे के पीछे से दौड़ क्र आ रही दीपिका एक जम्प लगा कर राज की पीठ पर जा कूदि और राज से चिपक गई.

राज बड़ी मुश्किल से खुद को काबू में किया था. वर्ण गिर पड़ता. दीपिका ने दोनों बहन राज के गले में डालें तोह दोनों टांगें राज के लौड़े पर ला कर राज को कसके पकड़ लिया.

आराधना, चची और अंजलि तो दीपिका को देख कर हैरान हो गई थी. ये सब क्या कर गई थी. दीपिका ऐसी तो नहीं थी.

राज भी हैरान रह गया था.

दीपिका-- चल चल मेरे घोड़े..

राज दीपिका की आवाज़ सुनकर ज़ोर से हसने लगा.

राज-- घोडा तोह मैं हों hi. कमरे में जाने को बोल रही हो क्या. वहीँ सैर करने का इरादा है क्या.

आराधना, चची और अंजलि है पड़ी तोह दीपिका ने अपने एक पेअर को थोड़ा सा उठा कर राज के लुंड पर मार दिए.

दीपिका-- मुझसे बच के रहना हरामी तू समझा. रात किस की गांड मार रहा था तू अपने दोस्तों के साथ.

आराधना-- दीपिका ये क्या बोल रही हो तुम

राज-- ओह्ह तो आपने देख लिए था.

दीपिका- उसकी चीखें hi इतनी दरी हुई टी. मैं कोठी के पीछे टहल रही थी. तू सुनकर जिज्ञासा में आ गई. रहा नहीं तोह वही जा पोहंची. देखा तोह तुम सब हरामी मिलकर एक आदमी की गांड मार रहे थे. कितने कमीने हो तुम सब. बताओ मुझे क्यों कर रहे थे तुम उस भले आदमी के साथ एक ऐसा. कुछ तोह शर्म किआ करो हरमे. भला एक आदमी की गांड मरने की क्या ज़रूरत है. माँ, दीदी है, अब तोह चची भी है.

तीनो शर्मा गई तोह राज हसने लगा.

राज-- निचे तो उतरो. फिर बताता हों.

दीपिका-- नहीं ऐसे hi बताओ मुझे. तू मेरा घोडा है न.

राज-- और तू मेरी घोड़ी

दीपिका एक बार फिरसे राज के लौड़े पर लात मर कर. मैं hi नहीं सब hi तेरी घोड़ियां हाँ.

राज -- पक्का आप भी मेरी घोड़ी हो.

दीपिका-- देख नहीं रहे हो. घोड़ी आगे हो या पीछे, घोड़े से hi चिपकी रहती है. मैं भी तोह चिपकी हुई हों तुमसे.

राज हरामी था. ऐसो मोके पर चुका लगाने से बाज़ नहीं आता था. दोनों हाथ पीछे ले जाकर दीपिका के चुत्तड़ थाम लिए और एक ऊँगली से दीपिका की गांड के छेड़ को कुरेदने लगा.

दीपिका ने राज के कान को डेंटन में ले लिया तोह राज चीखता हुआ दीपिका की गांड को छोड़ गया.

आराधना समेत चची और अंजलि हसने लगी. भावना और आरती भी वही आ गई.

भावना-- शाबाश दीपिका सही कर रही हो इसके साथ.

आरती-- कर लो, करलो, जितना परेशान राज को करना है करलो. फिर तुम्हारी चीखें hi गूंजेंगी इस कोठी में.

दीपिका-- मुझसे नहीं जीप सकता ये हरामी.

आराधना-- छोड़ दे न दीपिका मेरे बेटे को

दीपिका-- बीटा नहीं रहा ये अब आपका माँ.

भावना हस्ते हुए-- फिर तोह माँ भी माँ नहीं रही. माँ तोह हमारी सौतन हो गई न.

आराधना शर्मा गई तोह चची आराधना को देख कर हसने लगी.

राज सब को मस्ती करते देख रहा था.

दीपिका-- बताओ मुझे क्यों उस भले आदमी की गांड मार रहे थे तुम.

भावना और आरती-- क्याआ..?? किसकी..?? कब्ब..??

राज दीपिका को लिए सोफे पर बेथ गया. दीपिका भी राज को छोड़ कर राज की गॉड में बेथ गई. अब वह और मूड में थी.

चाचा और चाचा के बेटे बहार थे. तब hi सब मज़े से मस्ती कर रहे थे.

राज सबको सब बताने लगा.

दीपिका राज के गाल को चुटकी में भर गई. हरामी तूने एक और ढूंढ ली. राज हसने लगा.

आराधना और चची राज को प्यार से देखने लगी. बाकि राज को घूरने लगी.

भावना-- मुझे लगता है, राज हमारे हिस्से में प्रसद की तरह आएगा. थोड़ा थोड़ा वह भी कभी कभी..

चची खुल कर हसने लगी तोह आराधना मोह पर हाथ रख कर.

दीपिका-- तू अपने हिस्से की बात कर. मेरा हिस्सा ये किसी को देकर तो दिखाए. हरामी है तोह क्या हुआ. मैं भी इसकी इसकी दीदी.

राज-- मतलब मैं हरामी तोह आप हरमन

दीपिका राज की गॉड में बैठी और राज के निचले होंटो को अपने दांतो में जपद लिया. आँखों में शरारत लिए वह राज की आँखों में देखने लगी.. राज को बड़ा प्यार आया अपनी दीदी के ऐसा करने पर. राज दीपिका के गालों पर हाथ फेरने लगा तोह दीपिका ने राज का होंठ छोड़ दिए और राज से लिपट गयी.

दीपिका-- देख हरामी तू इतने प्यार से न देखा कर मुझे. तू हरामी है तोह हरामी बन के रहा कर. तेरा प्यार सहन नहीं होता. मेरा मैं भी बदलने लगता है. कुछ कुछ होने लगता है. जहाँ तू और भी प्यारा लगता है मुझे. ऐसा न हो. फिर तुझे किसी बहार वाली का होने न दूँ मैं.

दीपिका की बात पर सबके भाव भी बदल गए. सब दीपिका की बात का मतलब और रेट समझते हुए सीरियस हो गई थी. दीपिका को राज को प्यार से देखने लगी. नंदनी भी अपने पेट को थमते हुए वहीँ आती दिखाई दी.

वो सबके फेस को देख कर समझ गई. वह भी राज और दीपिका के पास जा बैठी और दीपिका की पीठ सहलाने लगी.

नंदनी-- राज हमारा था अरु हमेशा रहेगा दीपिका. कहीं नहीं जाएगा राज.

राज ने दीपिका को एक किश करि तोह दीपिका ने भी बदले में एक किश कर दी राज के होंटो पर. सब खुले में hi हो रहा था. कितने बदलने लगे थे सब के सब. राज ऐसे hi प्यार से पूरा का पूरा बदल रहा था. वर्ण उससे बड़ा हरामी कोण था. जहाँ उसपर प्यार की बरसात हो रही थी. वहीँ उसका हरामीपन भी बदल रहा था.

आराधना भी उठी और चल कर राज के पास आई गई. बैठे हुए दोनों से लिपट गई. और दोनों को चूमने लगी. एक एक करके चची, अंजलि, आरती और भावना भी वहीँ आ गई. सब राज को घेर कर कड़ी हो गई. राज एक एक के चेरहे को देखने लगा.

खुद को खुश किस्मत जान रहा था. अपनी किस्मत पर उसे बहुत गर्व होने लगा था. सब के साथ उसे शारीरिक मिलान करना था. फिर भी प्यार था. हवस का वहां कोई काम नहीं था. राज को ऐसा सब भी देखने को मिलेगा. उसने सोचा नहीं था.

दीपिका-- देख सब तुझसे कितना प्यार करती हाँ. तू भी ऐसे hi हम सबको प्यार देते रहना. अपनी गांड को ज़ोर से राज के लुंड पर भी रगड़ दिए. खुद को पॉवरफुल बना ले राज. इतना कह कभी प्यार बांटने पर भी काम न हो. वर्ण एक मर्द सबमे प्यार बाँट बाँट के थक जाता है. दीपिका एकदुम्म से मूड बदल गई थी. सब उसके बदले मूड पर अपने भाव बदल रहे थे. मस्ती से इमोशंस जागे तोह फिरसे मस्ती और शरारत भरे मूड में आने लगी थी.

भावना-- इसी लिए तोह कहा था, कहीं राज हमारे लिए प्रसाद न बन कर रह जाए.

आरती -- एआरटी के रहते प्रसाद कैसे काम हो सकता है. आरती है सदा आप सबके साथ तोह प्रसाद कभी ख़तम नहीं होगा.. आरती हस्ती हुई बोली तोह सब हसने लगी.

आराधना-- मेरा बीटा बड़ा प्यारा है.

दीपिका-- माँ अब भी. मैं तोह कहती हों राज, माँ की मांग भर कर माँ को पत्नी बना लो. राज और माँ दोनों मैं में हसने लगे.

चची-- हाँ तोह और क्या, सुनैना की मांग भर दी. वह भी तोह माँ है. आराधना की भी भर दे. ऐसे मेरी आराधना और भी खुश हो जाएगी.

भावना ने आराधना को गले से लगा लिया. और गाल को चुम लिया-- क्यों मेरी सौतन बनने का इरादा है न आपका आराधना जी. भावना शरारत से बोली तोह आराधना शर्म से दोहरी होने लगी. फिर तोह सब उसे छेड़ने लगी. राज सबको देख कर स्माइल करने लगा.

दीपिका तोह ने यह हद hi कर दी. सब आराधना को छेड़ने लगी तोह वह राज की मत मरने लगी. कभी चुटकी कटती तोह कभी किश करने लगती. राज के लुंड को वह छूट घिस घिस कर खड़ा कर चुकी थी. सब आराधना में बिजी थे तोह दीपिका को भी शरारत और मस्ती सूझने लगी थी. वही वह राज के लौड़े को नंगा करके निचे हुई और हथु में थाम कर मसलने लगी. फ़ौरन hi अपनी माँ को पकड़ कर वही राज के पैरों में बिठाया और राज का लुंड थमा दिए.

दीपिका-- हेहेहे माँ चलो हम सब के सब हम सब के इकलौते और असली पति की सेवा करो. देखो तोह कैसे गरम हो रहा है. कैसे उसकी नसें फूलने लगी हाँ.

आराधना के गाल लाल हो गए थे. बड़ी शर्म उसे आने लगी थी. सब दीपिका की बात पर ज़ोर ज़ोर से हसने लगी थी. अंजलि को याद दूर खुला है तोह वह भावना को कह गयी दूर बंद करने के लिए.

चाचा और भाई न आ जाएँ न अचानक से.
 
एकेला राज था जो मर्द था. बाकि सब महिलाएं थी.. सब राज को घेर कर कड़ी थी. राज एक पास एक लुंड था. पॉवरफुल लुंड..

लुंड न होता तोह ऐसा सन दीखता, लगा जैसे किसी लड़की की शादी हो रही हो और उसे उसकी सहेलियां घेर कर कड़ी हाँ. उसके साथ मस्ती कर रही हाँ.

पर राज मर्द था. असली मर्द. हरामी था सबसे बड़ा. उसके परिवार वाले भी उसी के जैसे थे. वह भी राज के साथ जैसे बनकर पेश आ रहे थे. राज को बहुत मज़ा आने लगा था.

राधना राज के लुंड को थाम कर बैठी हुई थी. उसे बड़ी शर्म आ रही थी. सब बड़े शोक से राज को उसके लुंड को, आराधना को देख रही थी. भावना ने आरती को टहोका मारा तोह आरती जो राज पर पूरा पूरा धयान लगाए हुए थी. पलट कर भावना को देखा तोह भावना की आँखों भरपूर मस्ती थी.

भावना ने मोह आरती के कान से जोड़ा और कुछ बोलने लगी. राज देखा तोह उसे लग गया, अब ये ज़रूर कोई ड्रामा करने जा रही हाँ.

भावना ने जो बोलै था. वह सुनकर आरती का चेहरा खिल उठा. आरती ने भावना का मोह चुम लिया.

आरती-- भावना तुमने क्या मस्त आईडिया दिए है. सच में ऐसा करके हमें खूब मज़ा आएगा.

दीपिका-- क्या आईडिया आया है दीदी.

आरती-- माँ आप राज से मांग भरवाने के मूड में हाँ न.

आराधना शर्मा gai.kuch नहीं बोली. राज का लुंड बेचारा आराधना के हाथ में ऐसे hi फनफना रहा था.

दीपिका-- माँ से क्या पूछना है दीदी. माँ की हाँ hi तोह है. देखो तोह कैसे शर्मा रही है माँ. राज हरामी के लुंड को थामे हुए है माँ. लेने भी वाली है तोह मांग भरना कोनसी बड़ी बात है. क्यों हरामी तुझे कोई ऐतराज़ है.

राज-- मुझे क्यों ऐतराज़ होने लगा. मैंने तोह माँ से पहले hi बोल दिए था. आज ये सब होने hi वाला था.

दीपिका ने राज के लुंड के सुपड पर चुकती काट ली.. हरामी कुत्ता न हो तोह. मैं में रखने से अच्छा था, अपनी गांड में रखता. हमें फ़ौरन नहीं बोल सटका था. राज तोह बस अपने लाल पद रहे लुंड को hi देखता रह गया था. दीपिका ने कुछ ज़ोर से चुटकी काट दी थी उसके लुंड पर.

चची-- क्या करती हो दीपिका. एक hi है हम सब के लिए. उसे भी ज़ख़्मी कर दिए तोह फिर कहाँ जाओगी.

सब हसने लगी.

दीपिका-- आप तेंज़िन न लें चची.. ये हरामी का लुंड है. पुरे गाओं की छूट और गांड की सैर कर चूका है. इसे कुछ नहीं होगा.

नंदनी हस्ते हुए-- इसे काट भी दो तोह भी अगली सुबह फिरसे उग आएगा

राज-- मेरा लुंड है कोई मूली काजर थोड़ी न हो, जो फिरसे उग आएगा. गलती से बी मत कटियो मेरे लौड़े को. ये न रहा तोह मुझे सिमरन कभी नहीं मिलेगी.

सब हसने लगी तोह दीयपका-- कुत्ते को अपनी माँ और बहनो की फ़िक्र नहीं है. है तोह बस उस गोरी चमड़ी वाली की.

राज-- तूने उसकी छूट नहीं देखि दीपिका. आफत है पूरी की पूरी. जिस दिन देख लोगी न. यही कहोगी. काश मेरे पास एक लुंड होता तोह मई सिमरन की छूट में घुसा देती. इतनी खूबसूरत है उसकी छूट.

दीपिका को ग़ुस्सा आ गया-- तोह हमारी छूट क्या कोई वैल्यू नहीं रखती. बरसों से मसल मसल कर सत्यानाश कर दिए तुमने. वह साली कभी अपनी छूट को दुइ भी नहीं होगी. जितने बरस तूने हमारी छूट के साथ छेड़ छड़ करि है. उतनी उसकी छूट के साथ हुई होती तोह उसकी छूट हमारी छूट से भी बुरी हो गई होती. बात करता है.

सब ज़ोर से हसने लगी. तोह आराधना भी खुल कर हसने लगी. दीपिका भी अपनी बात करने के बाद सबको हस्ते देख कर हसने लगी.

दीपिका-- वैसे किस रंग की है उसकी छूट. red,pink या मिछ कॉलर की. तूने सच कहा उसकी छूट स्पेशल है.

राज-- हाँ.. सही कहा मैंने.

दीपिका कड़ी हुई और अपनी छूट को मसलने लगी. कोई नहीं मेरे पास छूट है तोह क्या हुआ. उसकी छूट में खीरा या बेंगें तोह दाल के मज़े ले hi सकती हों न.

हाहाहाःहाहा.. सबसे और भी ज़ोर से हसने लगे.

राज भी हस्ता हुआ-- वह सीधा फायर मार देती है. उसकी और घूर कर देखने वाले को.

अंजलि-- तोह मेरी बेहेन कोनसी काम है.

भावना-- एक hi तोह शेरनी है हम बहनो में. हमारे आगे उसकी दाल नहीं गलने वाली.

दीपिका-- दीदी आप क्या बोलने वाली थी. क्या आईडिया आया था.

भावना चहकते हुए-- बहुत hi सेक्सी आईडिया आया है दीपिका. बड़ा मज़ा आएगा वह सन बना के. अब हम सब एक हाँ न तोह खुल कर लाइफ को एन्जॉय करना सही रहेगा.

आरती-- तू चुप कर मुझे बताने दे.

फिर आरती सबको बताने लगी. क्या करने का मैं है उसका.

सुनकर आराधना बुरी तरह से शर्मा गई तोह राज ज़ोर ज़ोर से हसने लगा.. और बाकि सब आरती और भावना की हाँ में हाँ मिलाने लगी..
 
अनीता भी राज की कोठी में 2ंद फ्लोर पर मौजूद थी. राज उसे लेकर आया था. राज अनीता को 2ंद फ्लोर पर बने एक 20 फ़ीट स्क्वायर के रूम में छोड़ कर चला गया था.

अनीता बड़ी हैरान थी. राज उसे कुछ भी बता कर नहीं लाया था. राज ने कहा था. वहीँ सब पता चल जायेगा.. अनीता राज से आज तोह मिली थी. अभी उसकी झिझक गई नहीं थी. उसके मैं में आया था, राज उसके साथ कुछ कहीं मस्ती के मूड में तोह नहीं ha.ye सोच कर अनीता के शरीर में अजीब सी तरंगें दौड़ने लगी थी. अजीब से मीठे और लज़्ज़त भरे दर्द में आ गई थी वह. राज के साथ वह आगे बढ़ना भी चाहती, उसे शर्म भी आ रही थी.

वो रूम में कड़ी हुई रूम को देख रही थी. उसी कमरे में मौजूद एक और दूर खुला और दीपिका आती दिखाई दी. दीपिका ब्रा और पंतय में थी. अनीता उसे ब्रा पंतय में देख कर हैरान रह गई.

अनीता दीपिका को देखने लगी तोह दीपिका अनीता को ऊपर से निचे तक. दिल hi दिल में दीपिका अनीता की सुंदरता की तारीफ किये नहीं रह सकीय. सोचने लगी, वर्जिन होते हुए भी कितना मेन्टेन कर रखा है अनीता ने खुद को.

दीपिका वहीँ एक सिंगल सोफे पर बेथ गयी.

भावना ने तोह आरती को एक आईडिया दिए था. पर दीपिका सबसे तेज़ थी. शामे राज की कॉपी थी. उसका दिमाग भी राज से काम नहीं चलता था. अब जब राज के साथ वह खुल गयी थी तोह उसका दिमाग एक खुराफाती दिमाग भी बन गया था. दिमाग का उसे करते हुए उस आईडिया में चेंजिंग लाते हुए बहुत कुछ बदलाव कर दिए था.

अनीता को भी उसी के कहने पर लाया गया था. अनीता को देख कर दीपिका अनीता से बोली.

दीपिका-- मैं हों राज की दीदी दीपिका.. अनीता जान कर खिल उठी. पर उसके मंद में अभी भी दीपिका की ड्रेसिंग को लेके अजीब से प्रश्न उठ रहे थे.

अनीता-- गुड तो सी यू दीपिका.

दीपिका-- पर मुझे आपको देख कर ख़ुशी नहीं हुई.

अनीता परेशान हो गई. उसके दिल में दर्द होने लगा-- क्यों तुम्हे, मुझसे अच्छा नहीं लगा क्या. अनीता की आवाज़ बेथ गई थी. राज की दीदी को वह पसंद नहीं आई थी. उसके दिल को धचका लग गया था.

जिस दूर से दीपिका अंदर आई थी. उसी दूर से भावना, आरती और अंजलि आती दिखाई दी. वह सब भी ब्रा और पंतय में थी. पीछे नंदनी चची और आराधना भी आ रही थी. वह भी ब्रा और पंतय में थी. नंदनी पेट से थी तोह उसे अनीता घोर से देखने लगी.

दीपिका कमरे की दीवार के साथ बच पर रखे सोफे पर बैठी थी. उसके राइट साइड वाली दिवार के साथ आराधना, चची और नंदाई कड़ी हो गई. दूसरी साइड में बह्व्ना, आरती और अंजलि कड़ी हो गई थी.

अनीता और भी हैरान हो गयी सबको यौन खड़े देख कर. उसे कुछ भी समझ नहीं आ रही थी.

दीपिका के बिलकुल सामने कड़ी थी अनीता.

दीपिका ने आरती को देखा-- आरती बोलो क्या कहना चाहती हो तुम.

दीपिका किसी जज के जैसे बोली.

आरती अनीता के साथ जा कड़ी हुई. अनीता पागलों के जैसे मोह फाड़े अनीता को आरती को सबको देखने लगी थी. उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था. ये सब क्या हो रहा था. क्यों हो रहा था, उसे कुछ भी अंदाज़ा नहीं हो रहा था.

आरती-- जज साहिबा, सबसे पहले मैं मिस अनीता जी को सभी का परिचत करवा देना चाहती हों. कहीं अनजाने में hi कोई अपराध न हो जाये. इनका दिल न टूट जाए.

दीपिका हाथ उठा के-- अनुमति है.

आरती अनीता को देखते हुए, जिस का मोह अभी भी खुला हुआ था-- मिस अनीता जी, मैं हों राज की दीदी आरती और उसके होने वाले बच्चू की माँ, वह है भावना राज की दीदी और राज के होने वाले बच्चू की माँ, वह है राज की सबसे बड़ी दीदी अंजलि और राज के होने वाले बच्चू की माँ.

इस साइड जो सबसे पहले कड़ी हाँ, जो बहुत ज़यादा शर्मा रही हाँ वह हाँ राज की माँ आराधना, लवर एंड होने वाली पत्नी. आज hi राज आराधना की मांग भर कर उसे अपनी पत्नी बनाने जा रहा है. इस उम्र में आराधना बच्चे पैदा करने की हिम्मत और ताक़त रखती हाँ तोह राज के बच्चो की माँ भी बन सकती हाँ.

आराधना के साथ कड़ी हाँ मेरी चची रत्न, राज से अभी अभी चूड़ी है. ये बच्चे पैदा करने की स्टेज से गुज़र चुकी हाँ. अब शायद ये राज के बच्चू को जनम न दे सकें. चची के साथ कड़ी हाँ नंदनी दीदी, ये चची की बेटी हाँ. ये मैरिड हाँ पर इनके पेट में जो बच्चा है, वह राज का है.

अनीता जो पहले सबको देख कर हैरान हुई थी. सबका गेटउप देख कर जहाँ उसे शर्म भी आ रही थी. वहीँ ये जान कर उसे ख़ुशी भी हुई थी. यहाँ राज का पूरा परिवार मौजूद है. अब वहीँ ये जान कर उसे झटके लग रहे थे. राज का अपने hi परिवार की महिलाओं के साथ शारीरिक सम्बन्ध भी था. राज आज की डेट में अपनी माँ से शादी कर रहा था. उसकी माँ उसके बच्चे की माँ बनने जा रही थी. राज की बहने भी राज के बच्चू को जनम देने की छह रखे हुए थी.

आरती ने एक एक करके सबका परिचत कर दिए. सब अनीता को देख रहे थे. जो इतने झटके सहन नहीं कर प् रही थी. सब सुन और जान कर उसके चेहरे का रंग पीला पड़ने लगा था. उसकी आँखों से आंसू बहने लगे थे.

आरती-- जज साहिबा, मेरा सबसे पहला सवाल ये है, राज ने मिस अनीता को चूसे कर के सही नहीं किया है. देखें कैसे मिस अनीता सच जान कर आंसू बहाने लगी हाँ. इतने कमज़ोर दिल वाली महिला मेरे भाई राज की पत्नी नहीं बन सकती. राज जितना बड़ा हरामी है. उस हिसाब से उसकी लाइफ में आने वाली कोई भी नारी कमज़ोर नहीं हो सकती. मिस अनीता ने अभी एक साइड का सच सुना है, और सब जाने बिना hi आंसू बहाने लगी है. मैं ये कहना चाहुगी, मिस अनीता राज से शादी के लिए परफेक्ट नहीं है.

अनीता आंसू बहाना भूल गई. फिरसे बदली सिचुएशन पर उसका मोह खुला का खुला रह गया.

सब उसे hi देख रहे थे.

दीपिका अनीता से-- मिस अनीता, आरती ने जो आरोप आप पर पर लगाया है, उस पर आप

कोई चर्चा करना चाहेंगी.

अनीता को समझ नहीं आ रही थी वो क्या बोले. ये कैसे खेल उसके साथ खेला जा रहा था. अब दीपिका की बात पर वह कैसे अपने विचार पेश करे.

दीपिका-- अगर आप कुछ नहीं कहेंगी तोह आपको राज की लाइफ में एंटर नहीं होने दिए जायेगा.

अनीता-- mm..main क्या कहूं मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा ha.yy.. ये सब क्या है, और क्यों कर रही हाँ आप मेरे साथ.

दीपिका-- वह सब सामने आ जायेगा. आप अपने आरती की बात के बदले अपने विचार पेश करें. क्यों आप को लगता है, आप का राज की लाइफ में एंटर होना बनता है.

अनीता-- mm..main

दीपिका ने हाथ उठा दिए अनीता खामोश हो गई-- अनीता जी आप को कंफ्यूज होने की ज़रूरत नहीं है. आप खुल कर नहीं बोलेंगी तोह अपनी लाइफ के सबसे बड़े लोस्स से सामना करना पद सकता है आपको.

अनीता दर गयी.. nn..nahi मैं सब कहूँगी. राज जो देखा तोह मुझे लगा, राज hi वह लड़का है, जिसके इंतज़ार में मैं थी. पर इसकी आगे को देख कर मैं कन्फ्यूज्ड हो गई. फिर राज ने मुझे एक बड़ी टेंशन से मुक्त किया. मेरे बेहेन की बेटी सोनिआ को अपना प्यार देकर अपने साथ मिलाया तोह राज मेरे दिल में उतरने लगा. राज ने फिर अपने बारे में सब बताया मुझे और मुझसे शादी की बात कर दी. मैं भी राज जैसे hi एक हमसफ़र के लिए बरसों से तड़प रही थी. मैं राज को खुद के लिए फेरफेक्ट समझती हों. राज इस ा ओनली मेल फॉर में इन थिस वर्ल्ड. राज नहीं तोह कोई और भी नहीं.

अनीता खुल कर तेज़ तेज़ बोली तोह सब सुनकर ज़ोर से क्लैपिंग करने लगे.

दीपिका-- order..order..keep साइलेंस.. सब खामोश हो गई. अनीता को भी लग गया था ये सब क्या हो रहा है. अब उसे कुछ हौसला मिल रहा था. हिम्मत की तोह कमी नहीं थी उसमे.

दीपिका ने आरती को देखा तोह वो बोली-- जज साहिबा, मिस अनीता ये बात भी सहन नहीं कर पायी है, राज अपने hi परिवार की महिलाओं के साथ शारीरिक सम्बन्ध रखे हुआ है. इस बात के चलते भी मिस अनीता राज के लिए परफेसी नहीं हाँ.

दीपिका-- जी मिस अनीता, आप मिस आरती की और से लगाए गए इस आरोप कर क्या कहने चाहेंगी.

अनीता-- ये सब गलत है जज साहिबा.. एक मर्द कैसे अपने hi परिवार के साथ शारीरिक सम्बन्ध रख सकता है. ये पाप है, गुनाह है. समाज में इसकी कोई गुंजाइश नहीं है.

दीपिका ने आरती को देखा

आरती-- जज साहिबा-- मिस अनीता यहाँ भी गलत हाँ. क्या राज ने इन्हे ये नहीं बताया था, राज पहले से शादीशुदा है. सिमरन नाम की एक लड़की राज की पत्नी है. राज ने मिस अनीता को ये भी नहीं बता दिए है, राज के कई और लड़कियों से भी सम्बन्ध रह चुके हाँ.

दीपिका ने अनीता को देखा

अनीता-- ऐसा सब तोह चलता hi रहता है. हर दूसरा मर्द अनेक शादियां करता है, कई कई गिर्ल्फ्रेंड्स के साथ उसके अफेयर्स बन जाया करते हाँ. पर इन्सेस्ट के लिए समाज में कोई भी ऑप्शन नहीं है जज साहिबा.

नंदनी आगे बढ़ी तोह बोलने की परमिशन मांगी.. दीपिका ने सर हिला कर उसे बोलने की आज्ञा दी.

नंदनी-- जज साहिबा! मैं मिस अनीता से कहना चाहूंगी, इतने बरसों के इंतज़ार के बाद राज hi उन्हें पसंद क्यों आया. वह कोई ऐसा मर्द भी ढूंढ सकती थी. जो सिर्फ अनीता जी से hi सम्बन्ध रखे. अनीता जी के शिव किसी और की तरफ नज़र उठा कर भी न देखे.

अनीता-- ऐसा आज के ज़माने में मुमकिन नहीं है. बहुत काम ऐसा मर्द देखने सुनने को मिलता है. जो केवल अपनी पत्नी का hi होकर रह सके. मैं भी इसी बात के चलते बरसों बिता चुकी हों. राज hi वह इकलौता मर्द मेरी लाइफ में है. जिसे मेरे शरीर से ज़यादा, मेरी दौलत से ज़यादा मेरे दिल से प्यार है. इसलिए मेरी तलाश राज पर ख़तम हो गई. राज नहीं तोह फिर कोई और भी नहीं.

अनीता भी रंग में आने लगी थी. एक बेस्ट स्पीकर थी वह भी. अपना बिज़नेस चला रही थी वह. कैयो के साथ उसे बात करनी पड़ती थी हर प्रोब का सलूशन उसके पास हुआ करता था. फ़िलहाल वह राज के इन्सेस्ट रिलेशन वाली बात पर दुःख में होने की बजाये अपने लिए डिफेन्स फाइट कर रही थी.

दीपिका के साथ साथ सबकी आँखों में चमक आ गई. अनीता की ये बात खुद अनीता के बहुत से उत्तरो का जवाब था.

अंजलि ने बोलने की अनुमति चाही तोह पेर्मिशन मिलने पर वह बोली-- जुड़गा साहिबा मैं मिस अनीता जी से कहना चाहूंगी. जब बात प्रेम की आ जाती है तोह शरीर की अहमियत रह hi नहीं जाती. अनीता जी ने खुद से कहा है. वह राज के सरे काले करम जानते हुए भी राज की आँखों में हवस नहीं ढूंढ पायी. राज की आँखों में उन्हों ने अपने लिए प्यार और सम्मान hi दिखा था मिस अनीता को.

दीपिका- क्यों मिस अनीता जी.. मिस अंजलि सही कह रही हाँ

अनीता-- जी जज साहिबा.. मिस अंजलि एकदुम्म सही बोल रही हाँ

अंजलि-- तोह मिस अनीता जी, जहाँ शरीर प्रेम न हो, वहां आत्मा प्रेम हो तोह इन्सेस्ट की वलए वहां पर ख़तम हो जाती है. क्या मैंने सही कहा

अंजलि की बात पर अनीता लाजवाब हो गयी. अंजलि की बात का मतलब वह समझ गई थी. घर की सभी महिलाएं एक साथ राज के लिए बोल रही थी. इसका मतलब था, सब मैं से राज के साथ जुडी हुई थी. जहाँ दिल मिले हों, वहां वासना का काम hi कहाँ होता है. वासना तोह आत्मा मिलान के सामने आ hi sakti.raj का अपने परिवार से शारीरिक सम्बन्ध जो वह जान कर सन्नाटे में आ गई थी. दुःख में आ गई थी. अब वह दुःख जाता रहा था.

अनीता-- सही कहा आपने अंजलि जी. मैंने इस एंगल से नहीं सोचा था. शरीर की भी भूक हुआ करती है. पर जहाँ प्रेम हो, सच्चा प्रेम हो. जहाँ हवस न हो. वहां कोई भी कैसे भी रिलेशन क्यों न हो. उस रिलेशन को पाप नहीं बोल सकते. मैं शमा चाहती हों अपने पहले वाले विचारों पर.

अनीता अब पुरे मैं से सब के साथ हो गई थी.

दीपिका-- तोह आप अब राज के अपने hi परिवार के साथ शारीरिक सम्बन्ध पर कोई प्रश्न नहीं उठाना चाहती

अनीता-- जी नहीं जज साहिबा. सबको देख कर, जान कर मुझे बहुत खुली मिली. मुझे अपने चरों और सबकी नज़रों में राज के लिए प्रेम hi प्रेम दिख रहा है.

दीपिका-- एक केस ख़तम हुआ अब आगे की कार्रवाई शुरू की जाए.

अंजलि-- जुड़े साहिबा, हमारे भाई राज ने बिना हमारी प्रेमिशन के मिस अनीता को चूसे किया है. हमें खुद से, अपने हिसाब से मिस अनीता को परखना है. हम देखना है, मिस अनीता हमारे बीच रहने लायक हाँ या नहीं

अनीता अब पुरे पुरे मज़े ले रही थी. सब महिलाएं थी. सब राज से जुडी हुई थी. एक महिला दूसरी महिला के सामने जल्द खुल जाया करती है. अनीता भी खुलने लगी थी. एक बात, उसे इस सरे खेल में बहुत मज़ा आने लगा था. वह जान गई थी, ये सब क्यों हो रहा था. अंदर hi अंदर वह और भी खिलती जा रही थी. बहुत खुसी मिल रही थी उसे राज के परिवार से मिल कर. सब के मस्त लाइफ जेते देख कर.

दीपिका-- तोह मिस अंजलि जी, आप कैसे जांचना चाहेंगी मिस अनीता को.

अंजलि-- मिस अनीता को भी हमारे जैसे गेटउप में आना पड़ेगा. अब हम सब एक हाँ तोह हमारा या मिस अनीता का कुछ भी हमसे छुपा हुआ नहीं चाहिए. मिस अनीता को भी ब्रा पंतय में आना होगा.

अंजलि की बात सुनकर अनीता के चेहरे का रंग उड़ गया. वह अपनी जान से प्यारी बेहेन से शिव कभी किसी और सामने बर पंतय में नहीं आई थी. अनीता नर्वस होने लगी. उसे नहीं लगा था, उसे भी ब्रा पंतय में आना पड़ेगा.

अंजलि की बात पर सब कहने लगी. हाँ हाँ मिस अनीता को भी ब्रा पंतय में आना होगा.

आराधना चची के साथ कड़ी हुई अपनी लाइफ के मस्त मज़े ले रही थी.

चची ने उसे देखा तोह बोली-- आराधना हमने पहले ऐसे मज़े क्यों नहीं लिए. कितना सब अच्छा लग रहा है.

आराधना जो कुछ देर के लिए अपनी शर्म भूल गई थी--- क्या बताओं दीदी, मुझे भी बड़ा मज़ा आ रहा है. अनीता कितनी पायरी है. मेरी बच्चियां सब मिलकर कैसा मनोरंजन कर रही हाँ. सब बहुत अच्छा लग रहा है.

चची ने आराधना की चुकी पकड़ कर दबा दी-- कुछ देर में तेरे भी मज़े लेने वाली हाँ ते बच्चियां.

दीपिका-- तोह अनीता जी, आप कपडे उतर कर ब्रा पंतय में हो जाएँ.
 
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