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राज-- सुनैना आप बहुत सुंदर हाँ, इस रूप में तोह क़यामत ध रही हाँ. इतनी सुंदर होक भी आपने कभी खुद पर धयान नहीं दिए.
सुनैना खुश हो गई. एंटी देर से खुद को अपने पति के लिए सजा रही थी. राज ने तारीफ करि तोह उसे लगा, उसकी म्हणत सफल हुई. उसके होंटो पर एक दिलकश मुस्कान टेरने लगी.
राज-- सुनैना मैं अब क्या कहता है आपका.
सुनैना बोलना तोह चाहती तोह पर बोल न पाई और राज को देखने लगी.
राज- अब भी आप में जीजाक बाकि है सुनैना. जो भी मन में आ रहा है, आप कर सकती हाँ.
सुनैना- पतिदेव जी, मन में तोह बहुत कुछ आने लगा है. पर सोचती हों कहीं आपको बुरा न लग जाये. आप मुझे लेके कुछ और न सोचने लगें. एक पत्नी हमेशा अपने पति से डर्टी रहती है न.
राज-- क्या हम केवल पति पत्नी hi हाँ. कुछ और नहीं. क्या आपको शक है, मुझे जो आपसे मोहब्बत है. या आपको मुझसे जो मोहब्बत है. उसे लेकरके कुछ डाउट में हाँ.
सुनैना- नहीं ऐसी बात नहीं है जी.
राज- तो फिर करें आप अपने मन की. राज बीएड से नहीं उतरा था. सुनैना को और भी खोल रहा था. उसकी जीजाक काम कर रहा था.
सुनैना- हर लड़की, हर औरत की छह होती है. वो अपनी प्रेमी को, अपने पति को सबसे सूंदर दिखे. सुनैना हिम्मत पकड़ते हुए बोली
राज- हाँ ये बात तो है. और होनी भी चाहिए
सुनैना- कभी मेने भी सपने देखे थे. अपने पति के साथ खूब प्यार करने के, मस्ती करने के. पर ऐसा कभी कर नहीं पाई थी. अब फिरसे मेरे मैं में हलचल मचने लगी है. फिरसे बरसों पहले देखे सपने पुरे करने की छह मन में पलने लगी है.
राज-- ये तोह और भी अच्छी बात है सुनैना जी
सुनैना- एक पति अपनी पत्नी से प्यार भी करता है, और विश्वास भी. एक पत्नी का सब कुछ उसके पति का hi होता है न. तोह पत्नी फिर अपने पति के सब कुछ को जैसे चाहे दिखा सकती है.
राज सुनैना का मतलब समझते हुए.
राज-- तो आपका भी मैं हो रहा है मुझे अपने शरीर के जलवे दिखने का.
सुनैना हाँ में सर हिला गयी. उसका चेहरा कुछ लाल पड़ने लगा था.
राज-- तो दिखाइए अपने पति को अपने जलवे. अपने सुंदर शरीर के नज़ारे दिखा कर हमें मोहित कर दें. हमें आज आपके शिव कुछ और दिखाई न दे. ऐसी बिजलिया गिराएं आप हमपर.
सुनैना शर्मा कर स्माइल मंद मंद मुस्कुराने लगी. उसे सब बहुत अच्छा लग रहा था. ऐसे जैसे वह जॉन हो गई हो और नयी नवेली पत्नी के जैसे अरमान अपने अंदर पलने लगी थी. ऐसे पति के लिए जो उसका प्रेमी भी हो.
सुनैना राज को स्माइल से देखती हुई अपनी साड़ी का पल्लू साइड कर गयी.
राज देखता रह गया. कमरे में लगी लाइट की रौशनी में सुनैना का सुंदर और गोरा शरीर चमकने लगा था.
सुनैना साइड हुई और ब्लाउज की ज़िप खोलने लगी.
राज सुनैना की धीरे धीरे खुलती ज़िप के कारण दिख रहे सुनैना के मस्त बदन को देखने लगा. चुचु पर नज़र पड़ी तोह राज बोल पड़ा-- वह क्या बात है, कुछ hi देर में इतने चमकदार हो गए हाँ आपके चुके सुनैना रानी.. सुनैना खुश हो गई और एक साइड से पूरा ब्लाउज खोल कर राज को देखने लगी.
सुनैना मस्त मूड में आती जा रही थी. राज का लुंड तोह था hi ऐसा. एक hi दृश्य उसके लुंड को खड़ा कर दिए करता था.
सुनैना-- स्वामी में कैसी दिख रही हों आपको.
राज-- रानी.. बिलकुल एक रानी से भी सुंदर.
सुनैना खिल उठी. राज बोलै-- और भी दिखाओ न मुझे अपने इस सुंदर शरीर के जलवे. राज अपने लुंड को मसलते हुए बोलै तोह सुनैना राज के खड़े लुंड को देख कर है पड़ी. ुस्य खूब बाज़ा आ रहा था. राज के साथ अपने मैं की करते हुए. अपने जलवो पर राज को बेचैन देख कर वह और भी खुश हो रही थी.
सुनैना राज को और भी ज़यादा गर्माने के लिए ब्लाउज उतर कर साड़ी के साथ पोज़ बना के राज को देखने लगी. बड़ी चमक बढ़ने लगी थी, सुनैना की आँखों में, सुनैना के चेहरे पर.
राज से रहा नहीं गया और बीएड से उतर पड़ा. सुनैना देख कर है पड़ी और राज को अपनी और आता देख कर निहारने लगी. और भी मस्त पोज़ बना के राज को घायल करने लगी. राज सुनैना के सामने पोहंचा और उसके चुके पकड़ लिए.
राज-- सुनैना रानी हमें आपके ये चुके बहुत पसंद आये हाँ. इनका सारा दूध निकल कर मैं पीना चाहता हों क्या आप मुझे अपने चुचु का सारा दूध पिलायेंगी.
सुनैना को और क्या चाहिए था. यही तोह छह थी उसकी. यही तोह बरसों से मैं में दबाये जी रही थी. अपने मैं पंसद मर्द के साथ ऐसे मस्ती करे, प्यार करे. मिलान करे. इस के शिव कुछ और चाहा भी तो नहीं था कभी सुनैना ने.
राज ने सुनैना के चुके छोड़े तोह सुनैना अपने चुके पकड़ कर राज से बोली..
सुनैना- स्वामी इन चुके की भी एक हसरत हुआ करती है. ये भी प्यार के भूके हाँ. बच्चू को दूध पिलाये समय ये कभी खुश हो लिया करते थे. पर पति के प्यार के लिए ये भी उम्र भर तरसते रहे हाँ. हवस के चलते इनके साथ बहुत खेला गया है. इन्हे मज़े भी मिले हाँ. पर मन की शांति कभी नहीं मिली. ये मेरे मैं से जुड़े हुए हाँ न. मुझे प्यार नहीं मिला तोह ये भी प्यार को बरसों से तरसते रहे हाँ.. बरसों बाद आज मेरे साथ साथ इनकी भी किस्मत खुली है. मेरे साथ साथ आज इन्हे भी प्यार प्राप्त होने लगा है स्वामी जी. ये hi नहीं, मेरा एक एक अंग असली प्यार के लिए, आपके प्यार के लिए मचल रहा है. सम्मान के लिए मचल रहा है. जैसा प्यार और सम्मान आप दे रहे हाँ स्वामी जी. वैसे कभी मुझे या मेरे किसी अंग को प्राप्त नहीं हुआ. मुझ समेत आज मेरे एक एक अंग की किस्मत को बदल दें स्वामी जी. देर न करें आपकी पत्नी आपके असली प्यार के लिए बोहत मचल रही है.
राज तोह सुनैना की तड़प पर खुद भी तड़प उठा था. जितना दर्द काम करता था, उतना hi बाकि रह जाता था. जब तक राज सुनैना को पूरा नहीं प् लेता. तब तक सुनैना ऐसे hi मचलती रहने वाली थी.
राज ने सुनैना की आँखों में देखा तोह राज के लिए प्रेम की इन्तहा थी. राज ने सुनैना को गले से लगा लिया और चूमने लगा. सुनैना भी राज के गिर्द बहन लपेट कर राज के प्यार को महसूस करने लगी. सुनैना के अंदर अब सही मानो में सुरूर उतर रहा था.
राज के एक एक स्पर्श कर सुनैना मदहोश होती जा रही थी. राज ने खड़े खड़े hi सुनैना के पुरे चेहरे को चूमना शुरू कर दिया था. राज का खड़ा लुंड सुनैना की छूट पर दस्तक दे रहा था. पर राज ने या सुनैना ने उसपर धयान नहीं दिए. सुनैना तोह राज के चुम्बन पर hi मदहोश होने लगी थी.
राज ने फिर सुनैना को उठाया और बीएड पर ले आया. वहीँ सुनैना को लिटा कर राज सुनैना की ट्रांसपेरेंट साड़ी को खोलने लगा. निचे केवल पंतय में hi थी सुनैना. साड़ी अलग हुई तोह राज सुनैना के पैरों में आया और सुनैना के पैरों को छत्ता हुआ ऊपर जाने लगा.
सुनैना ने सर उठा कर राज को देखा और मुस्कुरा पड़ी. राज का ये अंदाज़ उसे बहुत भय था. राज कितने चाओ से उसके पुरे शरीर को चुम चाट रहा था. ऐसा सब करने की ज़यादा भी छह नहीं थी सुनैना के मैं में. पर राज केप्यार के अंदाज़ को देख कर, शिद्दत को देख कर सुनैना खुश हो गहि थी. यही तोह एक छह हुआ करती है एक नारी की.
राज बहुत अचे से सुनैना के मैं की सब समझते हुए उससे प्यार कर रहा था. सुनैना अब पूरी मस्त होने लगी थी. राज सुनैना के एक एक इंच को चूमता छत्ता सुनैना की छूट पर आ पोहंचा. पंतय के ऊपर नक् लगा कर वह सुनैना की छूट की स्मेल लेने लगा. सुनैना की छूट एक बार फिरसे गीली होने लगी थी. राज को मस्त स्मेल अपने अंदर उतरती महसूस हुई तोह उसका लुंड और भी झटके मारने लगा.
राज ने पंतय को हाथ से पकड़ कर निचे खेंच दिए. सुनैना ने गांड उठा कर राज को अपनी पंतय उतरने में मदद दी. पंतय उत्तरी तोह सुनैना बीएड पर पूरी नंगी लेती हुई थी.
राज सुअनीना के पुरे बदन को देखने लगा.
राज-- सुनैना मेरी रानी.. कैसा संगे मर्मर के जैसा शफाफ बदन है आपका. कितनी हसीं है आप. मेरे तोह भाग hi खुल गए जो आप मेरी पत्नी के रूप में मेरे सामने हाँ.
सुनैना राज को देखती हुई-- ऐसा नहीं है जी.. भाग तोह आज मेरे बरसों बाद खुले हाँ, जो मुझे आपके जैस पति मिला है. मेरी ऐसी किस्मत पहले कहाँ थी. अब आप के मेरी ज़िन्दगी में आ जाने से hi मेरी ज़िन्दगी में रंग उतरने लगे हाँ. ये सब तोह आपके कारण hi है स्वामी जी.
राज मुस्कुराया और फिर खुद को नंगा करने लगा. सुनैना अपने पति को नंगा होते हुए देखने लगी. पहले भी अपने पति का लुंड देख चुकी थी. पर अब की बार का देखना उसे कहीं ज़यादा मज़ा देने लगा था. उसकी छूट में सरसराहट बढ़ी और दो बूंदें टपक के बेडशीट को भिगो गयी.
राज का विशाल लुंड सुनैना की आँखों में नशे बढ़ने लगा. उसकी निप्पल्स में भी सनसनी दौड़ने लगी. सुअनीना न चाहते हुए भी अपने होंटो पर जीब फेरने लगी. राज ने देख लिया था.
राज-- सुनैना जी अपने पति के लुंड को चूसना चाहेंगी आप..
सुनैना-- ये तोह मेरे मैं की छह है जी.. जैसे मेरा सब कुछ आप का है. वैसे hi आपका भी तोह सब कुछ अब मेरा है.
राज माहौल को फनी बनाते हुए.. मेरी गांड का कभी मत सोचना, वह केवल मेरी hi रहेगी
सुनैना-- एहहहहहहहहए.... सुनैना राज की बात पर दिल खोल कर हसने लगी.
राज-- अब से ऐसे hi हस्ती रहना. आप हस्ते हुए बहुत प्यारी दिखती हाँ.
सुनैना-- मेरी मुस्कान और हसनी तो अब आपके दम से है स्वामी जी. आपका प्यार मुझे कभी दुखी नहीं होने देगा.
राज-- और मेरे प्यार में आपको कभी कमी नहीं आने दूंगा..
राज लेट गया-- सुनैना जी अपने पति के लुंड को चूस कर खुद भी मज़ा लें और अपने पति को भी दें. सुनैना ख़ुशी से उठी और राज के लुंड पर झुकती हुई थाम कर अच्छे से देखने लगी. दबा दबा के उसकी सख्ती जांचने लगी.
राज-- कुछ देर पहले दादी की चीखों से अंदाज़ा नहीं हुआ आपको. मेरा लुंड कितना स्ट्रांग है.
सुनैना राज को देख कुछ शर्मा गई-- नहीं.. ww..wo मई
राज ने सुनैना की टांगों को पकड़ और दोनों पेअर अपने मोह के दोनों साइड्स करके सुनैना की छूट अपने मोह के बराबर कर दी.. देर नहीं लगाई और सुनैना की गीली लेकिन टाइट छूट में जीब घुसा कर चाटने लगा..
सुनैना तोह तड़प कर मचल hi उठी थी. कितनी जल्दी राज ने उसकी छूट अपने मोह पर रख दी थी. वह अभी राज के लुंड को दबा कर देख hi रही थी.
राज ने कुछ सेकंड अच्छे से सुनैना की छूट छाती फिर वह बोलै-- सुनैना जी, जीजाक को कम्प्लीटली ख़तम कर दें. तभी पुरे प्यार का मज़ा आएगा आपको.
सुनैना-- जानती हों स्वामी जी.. मैं भी मन बना चुकी हों. पर फिर भी कुछ तोह समय लगेगा न. आप hi अपने प्यार से मुझे पूरा बदल सकते हाँ. वर्ण मई ऐसी hi रह जाऊँगी.
राज ने एक ऊँगली छूट में दाल कर छूट चटनी शुरू कर दी. कुछ देर में सुनैना भी राज के लुंड को चूमने चाटने के बाद मोह में भर कर चूसने लगी. उसकी जीजाक जाने लगी थी. उसकी छूट में राज बहुत स्पीड से बहुत महारत से लगा हुआ था.
सुनैना की छूट में बारह आने लगी तोह वो राज के बड़े लुंड को आधे से ज़यादा मोह में भर कर चूसने लगी. सुनैना धीरे धीरे मस्त होने लगी. तोह लुंड चुसाई की स्पीड वह भी बढ़ा गयी.
कुछ देर में राज ने सुनैना को साइड कर दिए. तोह सुनैना भी राज के लुंड को मोह से निकल साइड बीएड पर गिर कर लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी. सुनैना को देख कर राज सुनैना के ऊपर आया और अपने लुंड को सुअनीना की गीली छूट पर रगड़ते हुए सुनैना के गालों को चूमने लगा. सुनैना खुसी से राज को देखने लगी. सुनैना ने अपने दू पेअर खोल दिए थे..
सुनैना- स्वामी जी जो बात बरसों से मेरे मैं में मचल रही थी. आज वो मैं आपसे कहने जा रही हों. स्वामी जी हमें आपसे बेहद प्रेम है. इतना कह हमने अपने जीवन में कभी किसी से भी नहीं किया. अपने बच्चू से भी नहीं.
राज ने सुनैना की आँखों को चुम लिया.. फिर नक् की नोक को और फिर होंटो को.
राज-- और सच कहें तोह हम देहली आये hi आपके लिए हाँ. हमारा आपसे प्रेम इतना है. हम ज़माने भर से लड़ जायेंगे. पर कभी भी आपको खुद से दूर नहीं होने देंगे. आपके लिए हम कुछ भी कर जायेंगे सुनैना जी. लोग कहते है, मैं आपके लिए आस्मां से तारे तोड़ कर ला सकता हों. तोह मैं आपके प्यार में ये कह सकता हों. मैं आपके लिए संसार की हर एक चीज आपके क़दमों में ला के ढेर कर दूंगा. इतना hi प्यार हम भी आपसे करते हाँ..
सुनैना को ऐसी ख़ुशी मिली, जो आज पूरा दिन भी नहीं मिल पायी थी. वर्ण पिछले कुछ घंटों से उसका एक एक पल बे इन्तहा ख़ुशी भरा बीत रहा था. पर राज के ऐसे शब्दों पर सुनैना को वह ख़ुशी मिली. जिसकी कोई हद hi नहीं थी.
सुनैना राज पर टूट पड़ी. राज के चेहरे को दोनों हाथ से थाम लिया और पुरे चेहरे को बड़ी शिद्दत से चूमने लगी.
राज ने हरकत रोक दी थी. सुनैना बड़े चाओ से, बड़ी शिद्दत से उसे चुम रही थी. राज हिलता तोह सुनैना का ध्यान टूट सकता था.
सुनैना ने राज को छोड़ा तोह उसकी आँखों की चमक उसे सारा संसार मिलने जाने की गवाही दे रही थी. सब कुछ तोह किसी को भी नहीं मिलता. पर सच्चा प्यार मिल जाए तोह पूरा संसार hi मिल जाया करता है. सुनैना को भी आज पूरा संसार मिल गया था.
सुनैना-- हम अब से पहले दर रहे थे स्वामी जी. कसम से हम अपने बच्चू को लेके. अपनी बेहेन और भाइयो को लेके, अपने माता पिता को लेके भी दर रहे थे. हमें दर था, कहीं कुछ ऐसा न हो जाए. हमारे रिश्ते की बात खुल जाए तोह बाद में कोई बड़ा हंगामा न हो जाए. पर अब हम भगवन की सौगंध कहते हाँ स्वामी जी. हम किसी से भी नहीं डरेंगे. आपके प्रेम ने हमें हिम्मत hi इतनी दे दी है. हम किसी से भी टकराने की हिम्मत रखते हाँ. बात बिगड़ भी गई तोह आप हमें अपने साथ पाएंगे स्वामी जी. ज़िन्दगी दो दिन की मिले या अब सालों की. हम अपनी आखरी सांस तक ऐसे hi आपसे प्रेम करते रहेंगे. हमेशा आपका साथ देते रहेंगे. भले hi फिर मुझे सब छोड़ जाएँ. मुझे अब किसी की भी कोई परवा नहीं रही है. बचे बड़े हो चुके हाँ. खुद से अपनी ीफ़े सेट कर लेंगे. और फिर अब मेरी उनकी और से जिम्मेदारी भी ख़तम हो चुकी है स्वामी जी.. हमें बस अब हर पल आके साथ रहना है. आपका प्यार पाना है.
राज भी सुनैना की बातें और प्यार की शिद्दत को देख कर हैरान रह गया था. कितना प्यार, कितने काम समय में वह उससे करने लगी थी. राज को सुनैना पर गर्व होने लगा. उसके अंदर का हरामीपन तोह काम होने वाला नहीं था. पर अब उसका विश्वास प्यार पर भी कई गुना बढ़ गया था.
राज-- तो अब मेरी रानी आप अपने पहले प्रेम मिलान के लिए तैयार हाँ..
सुनैना भी सब समझती हुई-- जी स्वामी जी. मैं तोह बरसों से पर्म मिलान की छह में तड़प रही हों. अब और इंतज़ार न करवाइये स्वामी जी.
राज-- दर्द होगा मेरी रानी को. मेरा बहुत बड़ा है और आपकी मुनिया में भी काफी दिनों से नहीं गया है. और फिर मेरा मूसल भी तोह आपकी मुनिया के हिसाब से बड़ा है न.
सुनैना-- स्वामी जी. आप मेरी और मेरी मुनिया की चिंता छोड़ दें. प्रेम मिलान के लिए तोह मई कुछ भी सहन कर जाऊँगी. दर्द तोह हमेशा से अपनी आत्मा पर सहन करती आई हों. आज शरीर पर भी सहन कर लुंगी. पर आज दर्द काम और आनंद ज़यादा प्राप्त होने वाला है मुझे..
राज ने एक किश सुनैना के होंटो पर करि-- तोह अपने प्यारे हथु से अपने स्वामी जी के मूसल को अपनी मुनिया के गेट पर सेट करें. ऐसे प्रेम भी बढ़ेग और आनंद भी.
सुनैना ने एक हाथ बढ़ाया और राज के लुंड को थाम कर अपनी छूट के छेड़ पर फेरने लगी. अच्छे से गर्म लुंड के मोठे सुपड को अपनी छूट के छेड़ पर महसूस करने लगी.
राज-- मुझे आपकी आँखों से सब दिख रहा है सुनैना जी.
सुनैना-- दिखेगा hi स्वामी जी. मन की आँखों से सब दीखता है. प्रेम है न तोह दिखाई देना ज़रूरी है.. सुनैना ने राज के लुंड को अपनी छूट के छेड़ में थोड़ा सा घुसा कर कहा.. स्वामी जी अब आप प्रवेश अपने मूसल के साथ मेरी गुफा में प्रवेश कर सकते हाँ. मैंने तोह आपका पुरे मैं से सवागत कर लिया. अब मेरी मुनिया और अंदर का सब भी आपका और आपके मूसल का सवागत करने लगे हाँ. आप को प्रवेश करने की अनुमति देते हाँ.
राज ने एक किश और करा सुनैना के होंटो पर और अपने लुंड का दबाओ बढ़ा दिए. लुंड का सुपड छूट में घुसा तो राज ने धक्का मर दिए. सुनैना को सच में दर्द नहीं हुआ. राज सुनैना की आँखों में देख कर धक्का मर गया था. सनैना भी राज की आँखों में देख रही थी. कुछ दर्द आँखों में आया था. पर होंटो पर मुस्कान थी.
राज ने हल्का सा धक्का और मार दिए. थोड़ा सा लुंड और सुनैना की छूट को खोलता हुआ घुसता चला गया. सुनैना की आँखों में दर्द के भाव आने लगे थे. पर जाने कैसा प्यार वह राज से कर बैठी थी. राज की आँखों से नज़रें हटा hi नहीं रही थी. होंटो पर अब भी मुस्कान थी.
राज हरामी था. फिर भी हरामीपन नहीं कर सकता. ऐसे hi सुनैना की आँखों में देखता हुआ हलके हलके धक्के मार मार कर पूरा लुंड hi सुनैना की छूट में उतर दिए.
6 इंच के बाद का लुंड सुनैना को बहुत दर्द दे गया था. सुनैना ने अपने होंटो को भींच लिया था. आँखों में आंसू भी आ गए थे पर वह एक हाथ से आंसू साफ़ करके फिरसे राज की आँखों में देखने लगती थी. पूरा लुंड सुनैना की छूट में घुसा कर राज सुनैना की आँखों को चाटने लगा. बह रहे आंसू राज अपने अंदर उतरने लगा.
सुनैना को इससे बढ़ कर और क्या चाहिए था. कितना प्यार मिल रहा था उसे राज. इतना भी उसने नहीं सोचा था. कितना दर्द उसे होने वाला था. पर राज ने अपने प्यार के चलते उसे दर्द से भी बचा लिया था. कुछ दर्द के कारण जो आंसू बहे थे वह भी चाट रहा था.
सुनैना लम्बी सांस लेकर इन पलों को जैसे अपने अंदर सेव कर लेना चाहती थी. बरसों बाद एक लुंड उसकी छूट में समाया हुआ था. बहुत भी एक विशाल लुंड. एक मूसल लुंड. इतने बड़े लुंड की भी उसने कभी कल्पना नहीं करि थी. बड़े लुंड से ज़यादा आनंद भी मिलता है. इतने आनंद की भी कल्पना उसने नहीं करि थी.
अपनी छूट की अंत गहराई तक वह राज के लुंड को फील कर रही थी. कैसा फसा हुआ था राज का लुंड उसकी छूट में. सुनैना सोच कर hi आनंदी हो रही थी.
राज सुनैना के होंटो को भी चूस कर उसकी आँखों में देखने लगा.
राज-- कैसा लग रहा है सुनैना जी
सुनैना-- इतना अच्छा. इतना अच्छा. कह मैं बता नहीं सकती. सुकून की कोई हद नहीं होती. अगर होती है तोह उस आखरी हद से भी कहीं कर आनंद प्राप्त हो रहा है मुझे स्वामी जी.
राज-- दर्द तोह नहीं हो रहा है न अब.
सुनैना ने भी राज को किश करि- कैसे हो सकता था मुझे दर्द. आपका प्यार hi इतना था, मुझे दर्द का एहसास hi नहीं हुआ.
राज-- चल झूटी कहीं की.. फिर ये आंसू कहाँ से आ गए.. सुनैना भी है पड़ी राज के इन शब्दों पर.
सुनैना-- ये आंसू तोह अब के मिले दर्द के कारण नहीं हाँ स्वामी जी. ये तोह मेरे अंदर का बरसों पुराण दर्द था. जो आपके प्यार के कारण बहार निकलने लगा है.
राज ने सुनैना को फिरसे चूमना शुरू कर दिए. साथ hi अपने लुंड को हिला कर बहार निकलने लगा. सुनैना राज के लुंड को बहुत अच्छे से महसूस कर प् रहा थी. राज का लुंड सुनैना के लिए बहुत बड़ा बहुत गर्म भी था.
राज अपना लुंड सुपड तक निकल कर प्यार से अंदर डालने लगा. राज बड़े चाओ से सुनैना को छोड़ रहा था. सुनैना भी राज का किश में साथ देती हुई राज के लुंड को पूरी तरह से अपनी छूट में अंदर बाहर होता हुआ महसूस कर प् रही थी.
उसकी छूट ने पानी छोड़ कर राज के लुंड को चिकना कर दिए था. अब आराम से राज का लुंड अंदर बहार हो रहा था. कसावट अब भी थी लुंड की सुनैना की में. फस फस hi जा रहा था. पर दर्द बहुत काम हो गया था.
राज ने धीरे धीरे स्पीड बढ़ानी शुरू की तोह सुनैना और भी मस्त होती चली गई. राज ने किश तोड़ी और एक चुके हाथ में थाम कर सुअनीना को छोड़ने लगा. साथ hi उसकी आँखों में देख रहा था.
धीरे धीरे सुनैना चरम की और बढ़ने लगी. आँखों में नशे बढ़ने लगा. सुनैना सिसकने लगी. आहें भरने लगी. राज जान गया था सुनैना अब मस्त हो चली है.
राज ने दोनों हाथ साइड पर करते हुए कुछ और स्पीड बढ़ा कर सुनैना को छोड़ना शुरू कर दिए
सुनैना-- स्वामी जी.. आपकी सुनैना को बहुत आनंद प्राप्त हो रहा है.
राज-- अब और भी बढ़ता चला जाएगा सुनैना जी
सुनैना-- जी स्वामी जी... राज ने स्पीड बधाई तोह सुनैना को ऐसा लगा, जैसे उसके बदन में एकदुम्म से hi आग बढ़ने लगी हो. छूट का पानी बहुत ज़यादा हीट छोड़ने लगा था. राज का गर्म लुंड उस गरम पानी में नहाते हुए स्पीड से सुनैना की छूट में घुस रहा था.
सुनैना सहन नहीं कर प् रही थी. उसके बड़े अड़े चुके हिलने लगे. झटके बढ़ने लगे. बरसों बाद, लाइफ में पहली बार प्रेम मिलान के कारण सुनैना की छूट का रास कुछ झटके सुनैना को दे के निकलने लगा..
सुनैना सुस्त पड़ने पड़ती चली गई. राज ने स्पीड जारी राखी और पानी को बहार निकलने के लिए चप्पू चलने लगा..
सुनैना नार्मल हुई तोह राज को अपनी बहन में कास गई.. चूमना शुरू कर दिए.
सुनैना-- आज मैं पूरी हो गयी स्वामी जी. आपने मुझे पूरा कर दिए. शरीर के साथ साथ मुझे आत्मा सुख भी दे दिए आपने.. आपकी दासी अब बहुत खुश है.
राज-- सुनैना जी..
सुनैना-- जी स्वामी जी..
राज-- सुनैना जी.. प्रेम मिलान मेरे साथ हुआ है आपका. बड़े अजीब अंदाज़ में हमारा विवाह हुआ है. न आपने सोचा था और न hi मैंने. मैं आपके बच्चू से भी छोटा हो. फिर भी आप मेरी पत्नी बानी हाँ. अपने भी मुझे स्वीकार कर लिया है. ये प्रेम मिलान है न
सुनैना-- हाँ स्वामी जी. ये प्रेम मिलान hi है.
राज-- इसमें हवस तोह नहीं है न कहीं भी.
सुनैना- ऐसा क्यों सोच रहे हाँ आप. हवस हो तोह एक औरत समझ नहीं सकेगी क्या. ये सारा प्रेम मिलान hi था स्वामी जी. प्रेम मिलान न होता तोह मुझे इतना आनंद कैसे प्राप्त होता. मेरा दर्द और न बढ़ जाता.
राज-- प्रेम मिलान.. आप अपने बेटे की उम्र के लड़के से प्रेम मिलान करके आनंद प्राप्त कर गई हाँ सुनैना जी. ऐस सोच के कुछ परेशानी नहीं बानी आपको.
सुनैना-- नहीं स्वामी जी. प्रेम मिलान में उम्र देखि hi कहाँ जाती है. और अब तोह आप मेरे पति भी तोह हाँ न.
राज-- फॉर एक्साम्प्ले.. जो कुछ मेने किया है. वही अगर अखिल करता.. जो प्रेम मुझसे आपको प्राप्त हुआ है. वही अगर अखिल से प्राप्त होता तोह तब आपके क्या विचार होते..
अखिल के नाम पर सुनैना को झटका लगा था. चुदाई के बीच वो अपने बेटे का ज़िक्र उसे कुछ अजीब लगा था.
सुनैना- स्वामी जी.. ये किसी बात कर रहे हाँ आप.
राज- वो भी बता दूंगा, में ऐसी बात क्यों कर रहा हों. आप बताएं, प्रेम तोह किसी से भी हो सकता है. हमारे बीच भी तोह सब इन्सिडेंटली हुआ है न. अगर ऐसा इंसिडेंट अखिल के साथ हुआ होता तोह..
सुनैना ने राज मैं से पति मन था. बात बड़ी अजीब थी. रूटीन से हटके थी. कोई और ऐसी बात करता तोह सुनैना खुद पर काबू भूल जाती. पर राज राज था... बड़े वाला हरामी था.
सुनैना-- नहीं जानती मैं क्या कर जाती. मैंने ऐसे कबि नहीं सोचा था. एक माँ, एक बेटे के बीच ऐसा सब हो भी कैसे सकता है भला.
राज-- बात इन्सिडेंटली की हो रही है सुनैना जी.. राज अभी भी अपना लुंड सुनैना की छूट के अंदर बाहर कर रहा था. वो रुका नहीं था. सुनैना फिरसे कुछ मस्त होने लगी थी.
सुनैना-- सच कहूं तोह जैसा आनंद मुझे प्राप्त हुआ है. ऐसे आनंद मुझे किसी से भी मिलता तोह मैं उसी की हो जाती. पर हर कोई आपके जैसा तोह नहीं हो सकता न.
राज-- मतलब जैसा आनंद मुझसे प्राप्त हुआ है आपको.. मेरी जगा अखिल आपको इतना hi सुख दे जाता तोह आपको सब अच्छा लगता.
सुनैना कुछ देर सोचने के बाद बोली-- हाँ एक औरत होने के नाते में ऐसा hi सब फील करती. और फिर-- सुनैना चुप कर गई.
राज-- बोलो न आगे. आप चुप न रहें. मन की साडी करें मेरे साथ
सुनैना-- हमारे मोहल्ले में hi एक लड़का अपनी माँ के साथ सेक्स रिलेशन में है. ये अंदर की बात है. सब नहीं जानते. मुझे भी पता चला था. पर वो माँ अपने बेटे से बहुत प्यार करती है.
राज-- ये तोह अच्छी बात है न. वहां भी हवस नहीं होगी. वहां भी प्यार hi होगा न.
सुनैना- पर में समझ नहीं पाई स्वामी जी. आप ऐसा सब क्यों बोल रहे हाँ.
राज-- मैं भी आपका अखिल hi हूँ.
सुनैना को झटका लगा-- मौसी..
राज-- हैं मेरा आपके साथ एक रिश्ता नहीं है मौसी.. मेरा आपके साथ एक और रिश्ता भी है. आप मेरी मौसी भी हाँ.
सुनैना की आँखों ने रंग बदलना शुरू कर दिए.
सुनैना-- आप अर्चना के बेटे नहीं हाँ तोह फिर--- सुनैना का सोच कर दिल धक् धक् करने लगा.. वह बहुत सही समझ गई थी... एकदुम्म से hi उसकी आँखों से आंसुओं की लड़ी निकली और बहती हुई निचे जाने लगी..
सुनैना-- आराधना..
राज-- हाँ मौसी मैं आपकी आराधना का बीटा राज हों. आप सब को एक करने के लिए, आप सबकी ज़िंदगियों के सरे दर्द दूर करने के लिए यहाँ आया हों.
राज ने अपना लुंड मौसी की छूट से निकला और मौसी के साथ लेट कर मौसी को अपने ऊपर गिरा लिया. मौसी राज के सीने पर सर रख कर आंसू बहाने लगी..
राज ने मोबाइल उठा कर अपनी माँ का नंबर डायल करना शुरू कर दिए.. बेल्ल की टोन के साथ साथ मौसी की सिसकियों की आवाज़ भी राज के कानो में गूँज रही थी.
सुनैना खुश हो गई. एंटी देर से खुद को अपने पति के लिए सजा रही थी. राज ने तारीफ करि तोह उसे लगा, उसकी म्हणत सफल हुई. उसके होंटो पर एक दिलकश मुस्कान टेरने लगी.
राज-- सुनैना मैं अब क्या कहता है आपका.
सुनैना बोलना तोह चाहती तोह पर बोल न पाई और राज को देखने लगी.
राज- अब भी आप में जीजाक बाकि है सुनैना. जो भी मन में आ रहा है, आप कर सकती हाँ.
सुनैना- पतिदेव जी, मन में तोह बहुत कुछ आने लगा है. पर सोचती हों कहीं आपको बुरा न लग जाये. आप मुझे लेके कुछ और न सोचने लगें. एक पत्नी हमेशा अपने पति से डर्टी रहती है न.
राज-- क्या हम केवल पति पत्नी hi हाँ. कुछ और नहीं. क्या आपको शक है, मुझे जो आपसे मोहब्बत है. या आपको मुझसे जो मोहब्बत है. उसे लेकरके कुछ डाउट में हाँ.
सुनैना- नहीं ऐसी बात नहीं है जी.
राज- तो फिर करें आप अपने मन की. राज बीएड से नहीं उतरा था. सुनैना को और भी खोल रहा था. उसकी जीजाक काम कर रहा था.
सुनैना- हर लड़की, हर औरत की छह होती है. वो अपनी प्रेमी को, अपने पति को सबसे सूंदर दिखे. सुनैना हिम्मत पकड़ते हुए बोली
राज- हाँ ये बात तो है. और होनी भी चाहिए
सुनैना- कभी मेने भी सपने देखे थे. अपने पति के साथ खूब प्यार करने के, मस्ती करने के. पर ऐसा कभी कर नहीं पाई थी. अब फिरसे मेरे मैं में हलचल मचने लगी है. फिरसे बरसों पहले देखे सपने पुरे करने की छह मन में पलने लगी है.
राज-- ये तोह और भी अच्छी बात है सुनैना जी
सुनैना- एक पति अपनी पत्नी से प्यार भी करता है, और विश्वास भी. एक पत्नी का सब कुछ उसके पति का hi होता है न. तोह पत्नी फिर अपने पति के सब कुछ को जैसे चाहे दिखा सकती है.
राज सुनैना का मतलब समझते हुए.
राज-- तो आपका भी मैं हो रहा है मुझे अपने शरीर के जलवे दिखने का.
सुनैना हाँ में सर हिला गयी. उसका चेहरा कुछ लाल पड़ने लगा था.
राज-- तो दिखाइए अपने पति को अपने जलवे. अपने सुंदर शरीर के नज़ारे दिखा कर हमें मोहित कर दें. हमें आज आपके शिव कुछ और दिखाई न दे. ऐसी बिजलिया गिराएं आप हमपर.
सुनैना शर्मा कर स्माइल मंद मंद मुस्कुराने लगी. उसे सब बहुत अच्छा लग रहा था. ऐसे जैसे वह जॉन हो गई हो और नयी नवेली पत्नी के जैसे अरमान अपने अंदर पलने लगी थी. ऐसे पति के लिए जो उसका प्रेमी भी हो.
सुनैना राज को स्माइल से देखती हुई अपनी साड़ी का पल्लू साइड कर गयी.
राज देखता रह गया. कमरे में लगी लाइट की रौशनी में सुनैना का सुंदर और गोरा शरीर चमकने लगा था.
सुनैना साइड हुई और ब्लाउज की ज़िप खोलने लगी.
राज सुनैना की धीरे धीरे खुलती ज़िप के कारण दिख रहे सुनैना के मस्त बदन को देखने लगा. चुचु पर नज़र पड़ी तोह राज बोल पड़ा-- वह क्या बात है, कुछ hi देर में इतने चमकदार हो गए हाँ आपके चुके सुनैना रानी.. सुनैना खुश हो गई और एक साइड से पूरा ब्लाउज खोल कर राज को देखने लगी.
सुनैना मस्त मूड में आती जा रही थी. राज का लुंड तोह था hi ऐसा. एक hi दृश्य उसके लुंड को खड़ा कर दिए करता था.
सुनैना-- स्वामी में कैसी दिख रही हों आपको.
राज-- रानी.. बिलकुल एक रानी से भी सुंदर.
सुनैना खिल उठी. राज बोलै-- और भी दिखाओ न मुझे अपने इस सुंदर शरीर के जलवे. राज अपने लुंड को मसलते हुए बोलै तोह सुनैना राज के खड़े लुंड को देख कर है पड़ी. ुस्य खूब बाज़ा आ रहा था. राज के साथ अपने मैं की करते हुए. अपने जलवो पर राज को बेचैन देख कर वह और भी खुश हो रही थी.
सुनैना राज को और भी ज़यादा गर्माने के लिए ब्लाउज उतर कर साड़ी के साथ पोज़ बना के राज को देखने लगी. बड़ी चमक बढ़ने लगी थी, सुनैना की आँखों में, सुनैना के चेहरे पर.
राज से रहा नहीं गया और बीएड से उतर पड़ा. सुनैना देख कर है पड़ी और राज को अपनी और आता देख कर निहारने लगी. और भी मस्त पोज़ बना के राज को घायल करने लगी. राज सुनैना के सामने पोहंचा और उसके चुके पकड़ लिए.
राज-- सुनैना रानी हमें आपके ये चुके बहुत पसंद आये हाँ. इनका सारा दूध निकल कर मैं पीना चाहता हों क्या आप मुझे अपने चुचु का सारा दूध पिलायेंगी.
सुनैना को और क्या चाहिए था. यही तोह छह थी उसकी. यही तोह बरसों से मैं में दबाये जी रही थी. अपने मैं पंसद मर्द के साथ ऐसे मस्ती करे, प्यार करे. मिलान करे. इस के शिव कुछ और चाहा भी तो नहीं था कभी सुनैना ने.
राज ने सुनैना के चुके छोड़े तोह सुनैना अपने चुके पकड़ कर राज से बोली..
सुनैना- स्वामी इन चुके की भी एक हसरत हुआ करती है. ये भी प्यार के भूके हाँ. बच्चू को दूध पिलाये समय ये कभी खुश हो लिया करते थे. पर पति के प्यार के लिए ये भी उम्र भर तरसते रहे हाँ. हवस के चलते इनके साथ बहुत खेला गया है. इन्हे मज़े भी मिले हाँ. पर मन की शांति कभी नहीं मिली. ये मेरे मैं से जुड़े हुए हाँ न. मुझे प्यार नहीं मिला तोह ये भी प्यार को बरसों से तरसते रहे हाँ.. बरसों बाद आज मेरे साथ साथ इनकी भी किस्मत खुली है. मेरे साथ साथ आज इन्हे भी प्यार प्राप्त होने लगा है स्वामी जी. ये hi नहीं, मेरा एक एक अंग असली प्यार के लिए, आपके प्यार के लिए मचल रहा है. सम्मान के लिए मचल रहा है. जैसा प्यार और सम्मान आप दे रहे हाँ स्वामी जी. वैसे कभी मुझे या मेरे किसी अंग को प्राप्त नहीं हुआ. मुझ समेत आज मेरे एक एक अंग की किस्मत को बदल दें स्वामी जी. देर न करें आपकी पत्नी आपके असली प्यार के लिए बोहत मचल रही है.
राज तोह सुनैना की तड़प पर खुद भी तड़प उठा था. जितना दर्द काम करता था, उतना hi बाकि रह जाता था. जब तक राज सुनैना को पूरा नहीं प् लेता. तब तक सुनैना ऐसे hi मचलती रहने वाली थी.
राज ने सुनैना की आँखों में देखा तोह राज के लिए प्रेम की इन्तहा थी. राज ने सुनैना को गले से लगा लिया और चूमने लगा. सुनैना भी राज के गिर्द बहन लपेट कर राज के प्यार को महसूस करने लगी. सुनैना के अंदर अब सही मानो में सुरूर उतर रहा था.
राज के एक एक स्पर्श कर सुनैना मदहोश होती जा रही थी. राज ने खड़े खड़े hi सुनैना के पुरे चेहरे को चूमना शुरू कर दिया था. राज का खड़ा लुंड सुनैना की छूट पर दस्तक दे रहा था. पर राज ने या सुनैना ने उसपर धयान नहीं दिए. सुनैना तोह राज के चुम्बन पर hi मदहोश होने लगी थी.
राज ने फिर सुनैना को उठाया और बीएड पर ले आया. वहीँ सुनैना को लिटा कर राज सुनैना की ट्रांसपेरेंट साड़ी को खोलने लगा. निचे केवल पंतय में hi थी सुनैना. साड़ी अलग हुई तोह राज सुनैना के पैरों में आया और सुनैना के पैरों को छत्ता हुआ ऊपर जाने लगा.
सुनैना ने सर उठा कर राज को देखा और मुस्कुरा पड़ी. राज का ये अंदाज़ उसे बहुत भय था. राज कितने चाओ से उसके पुरे शरीर को चुम चाट रहा था. ऐसा सब करने की ज़यादा भी छह नहीं थी सुनैना के मैं में. पर राज केप्यार के अंदाज़ को देख कर, शिद्दत को देख कर सुनैना खुश हो गहि थी. यही तोह एक छह हुआ करती है एक नारी की.
राज बहुत अचे से सुनैना के मैं की सब समझते हुए उससे प्यार कर रहा था. सुनैना अब पूरी मस्त होने लगी थी. राज सुनैना के एक एक इंच को चूमता छत्ता सुनैना की छूट पर आ पोहंचा. पंतय के ऊपर नक् लगा कर वह सुनैना की छूट की स्मेल लेने लगा. सुनैना की छूट एक बार फिरसे गीली होने लगी थी. राज को मस्त स्मेल अपने अंदर उतरती महसूस हुई तोह उसका लुंड और भी झटके मारने लगा.
राज ने पंतय को हाथ से पकड़ कर निचे खेंच दिए. सुनैना ने गांड उठा कर राज को अपनी पंतय उतरने में मदद दी. पंतय उत्तरी तोह सुनैना बीएड पर पूरी नंगी लेती हुई थी.
राज सुअनीना के पुरे बदन को देखने लगा.
राज-- सुनैना मेरी रानी.. कैसा संगे मर्मर के जैसा शफाफ बदन है आपका. कितनी हसीं है आप. मेरे तोह भाग hi खुल गए जो आप मेरी पत्नी के रूप में मेरे सामने हाँ.
सुनैना राज को देखती हुई-- ऐसा नहीं है जी.. भाग तोह आज मेरे बरसों बाद खुले हाँ, जो मुझे आपके जैस पति मिला है. मेरी ऐसी किस्मत पहले कहाँ थी. अब आप के मेरी ज़िन्दगी में आ जाने से hi मेरी ज़िन्दगी में रंग उतरने लगे हाँ. ये सब तोह आपके कारण hi है स्वामी जी.
राज मुस्कुराया और फिर खुद को नंगा करने लगा. सुनैना अपने पति को नंगा होते हुए देखने लगी. पहले भी अपने पति का लुंड देख चुकी थी. पर अब की बार का देखना उसे कहीं ज़यादा मज़ा देने लगा था. उसकी छूट में सरसराहट बढ़ी और दो बूंदें टपक के बेडशीट को भिगो गयी.
राज का विशाल लुंड सुनैना की आँखों में नशे बढ़ने लगा. उसकी निप्पल्स में भी सनसनी दौड़ने लगी. सुअनीना न चाहते हुए भी अपने होंटो पर जीब फेरने लगी. राज ने देख लिया था.
राज-- सुनैना जी अपने पति के लुंड को चूसना चाहेंगी आप..
सुनैना-- ये तोह मेरे मैं की छह है जी.. जैसे मेरा सब कुछ आप का है. वैसे hi आपका भी तोह सब कुछ अब मेरा है.
राज माहौल को फनी बनाते हुए.. मेरी गांड का कभी मत सोचना, वह केवल मेरी hi रहेगी
सुनैना-- एहहहहहहहहए.... सुनैना राज की बात पर दिल खोल कर हसने लगी.
राज-- अब से ऐसे hi हस्ती रहना. आप हस्ते हुए बहुत प्यारी दिखती हाँ.
सुनैना-- मेरी मुस्कान और हसनी तो अब आपके दम से है स्वामी जी. आपका प्यार मुझे कभी दुखी नहीं होने देगा.
राज-- और मेरे प्यार में आपको कभी कमी नहीं आने दूंगा..
राज लेट गया-- सुनैना जी अपने पति के लुंड को चूस कर खुद भी मज़ा लें और अपने पति को भी दें. सुनैना ख़ुशी से उठी और राज के लुंड पर झुकती हुई थाम कर अच्छे से देखने लगी. दबा दबा के उसकी सख्ती जांचने लगी.
राज-- कुछ देर पहले दादी की चीखों से अंदाज़ा नहीं हुआ आपको. मेरा लुंड कितना स्ट्रांग है.
सुनैना राज को देख कुछ शर्मा गई-- नहीं.. ww..wo मई
राज ने सुनैना की टांगों को पकड़ और दोनों पेअर अपने मोह के दोनों साइड्स करके सुनैना की छूट अपने मोह के बराबर कर दी.. देर नहीं लगाई और सुनैना की गीली लेकिन टाइट छूट में जीब घुसा कर चाटने लगा..
सुनैना तोह तड़प कर मचल hi उठी थी. कितनी जल्दी राज ने उसकी छूट अपने मोह पर रख दी थी. वह अभी राज के लुंड को दबा कर देख hi रही थी.
राज ने कुछ सेकंड अच्छे से सुनैना की छूट छाती फिर वह बोलै-- सुनैना जी, जीजाक को कम्प्लीटली ख़तम कर दें. तभी पुरे प्यार का मज़ा आएगा आपको.
सुनैना-- जानती हों स्वामी जी.. मैं भी मन बना चुकी हों. पर फिर भी कुछ तोह समय लगेगा न. आप hi अपने प्यार से मुझे पूरा बदल सकते हाँ. वर्ण मई ऐसी hi रह जाऊँगी.
राज ने एक ऊँगली छूट में दाल कर छूट चटनी शुरू कर दी. कुछ देर में सुनैना भी राज के लुंड को चूमने चाटने के बाद मोह में भर कर चूसने लगी. उसकी जीजाक जाने लगी थी. उसकी छूट में राज बहुत स्पीड से बहुत महारत से लगा हुआ था.
सुनैना की छूट में बारह आने लगी तोह वो राज के बड़े लुंड को आधे से ज़यादा मोह में भर कर चूसने लगी. सुनैना धीरे धीरे मस्त होने लगी. तोह लुंड चुसाई की स्पीड वह भी बढ़ा गयी.
कुछ देर में राज ने सुनैना को साइड कर दिए. तोह सुनैना भी राज के लुंड को मोह से निकल साइड बीएड पर गिर कर लम्बी लम्बी साँसे ले रही थी. सुनैना को देख कर राज सुनैना के ऊपर आया और अपने लुंड को सुअनीना की गीली छूट पर रगड़ते हुए सुनैना के गालों को चूमने लगा. सुनैना खुसी से राज को देखने लगी. सुनैना ने अपने दू पेअर खोल दिए थे..
सुनैना- स्वामी जी जो बात बरसों से मेरे मैं में मचल रही थी. आज वो मैं आपसे कहने जा रही हों. स्वामी जी हमें आपसे बेहद प्रेम है. इतना कह हमने अपने जीवन में कभी किसी से भी नहीं किया. अपने बच्चू से भी नहीं.
राज ने सुनैना की आँखों को चुम लिया.. फिर नक् की नोक को और फिर होंटो को.
राज-- और सच कहें तोह हम देहली आये hi आपके लिए हाँ. हमारा आपसे प्रेम इतना है. हम ज़माने भर से लड़ जायेंगे. पर कभी भी आपको खुद से दूर नहीं होने देंगे. आपके लिए हम कुछ भी कर जायेंगे सुनैना जी. लोग कहते है, मैं आपके लिए आस्मां से तारे तोड़ कर ला सकता हों. तोह मैं आपके प्यार में ये कह सकता हों. मैं आपके लिए संसार की हर एक चीज आपके क़दमों में ला के ढेर कर दूंगा. इतना hi प्यार हम भी आपसे करते हाँ..
सुनैना को ऐसी ख़ुशी मिली, जो आज पूरा दिन भी नहीं मिल पायी थी. वर्ण पिछले कुछ घंटों से उसका एक एक पल बे इन्तहा ख़ुशी भरा बीत रहा था. पर राज के ऐसे शब्दों पर सुनैना को वह ख़ुशी मिली. जिसकी कोई हद hi नहीं थी.
सुनैना राज पर टूट पड़ी. राज के चेहरे को दोनों हाथ से थाम लिया और पुरे चेहरे को बड़ी शिद्दत से चूमने लगी.
राज ने हरकत रोक दी थी. सुनैना बड़े चाओ से, बड़ी शिद्दत से उसे चुम रही थी. राज हिलता तोह सुनैना का ध्यान टूट सकता था.
सुनैना ने राज को छोड़ा तोह उसकी आँखों की चमक उसे सारा संसार मिलने जाने की गवाही दे रही थी. सब कुछ तोह किसी को भी नहीं मिलता. पर सच्चा प्यार मिल जाए तोह पूरा संसार hi मिल जाया करता है. सुनैना को भी आज पूरा संसार मिल गया था.
सुनैना-- हम अब से पहले दर रहे थे स्वामी जी. कसम से हम अपने बच्चू को लेके. अपनी बेहेन और भाइयो को लेके, अपने माता पिता को लेके भी दर रहे थे. हमें दर था, कहीं कुछ ऐसा न हो जाए. हमारे रिश्ते की बात खुल जाए तोह बाद में कोई बड़ा हंगामा न हो जाए. पर अब हम भगवन की सौगंध कहते हाँ स्वामी जी. हम किसी से भी नहीं डरेंगे. आपके प्रेम ने हमें हिम्मत hi इतनी दे दी है. हम किसी से भी टकराने की हिम्मत रखते हाँ. बात बिगड़ भी गई तोह आप हमें अपने साथ पाएंगे स्वामी जी. ज़िन्दगी दो दिन की मिले या अब सालों की. हम अपनी आखरी सांस तक ऐसे hi आपसे प्रेम करते रहेंगे. हमेशा आपका साथ देते रहेंगे. भले hi फिर मुझे सब छोड़ जाएँ. मुझे अब किसी की भी कोई परवा नहीं रही है. बचे बड़े हो चुके हाँ. खुद से अपनी ीफ़े सेट कर लेंगे. और फिर अब मेरी उनकी और से जिम्मेदारी भी ख़तम हो चुकी है स्वामी जी.. हमें बस अब हर पल आके साथ रहना है. आपका प्यार पाना है.
राज भी सुनैना की बातें और प्यार की शिद्दत को देख कर हैरान रह गया था. कितना प्यार, कितने काम समय में वह उससे करने लगी थी. राज को सुनैना पर गर्व होने लगा. उसके अंदर का हरामीपन तोह काम होने वाला नहीं था. पर अब उसका विश्वास प्यार पर भी कई गुना बढ़ गया था.
राज-- तो अब मेरी रानी आप अपने पहले प्रेम मिलान के लिए तैयार हाँ..
सुनैना भी सब समझती हुई-- जी स्वामी जी. मैं तोह बरसों से पर्म मिलान की छह में तड़प रही हों. अब और इंतज़ार न करवाइये स्वामी जी.
राज-- दर्द होगा मेरी रानी को. मेरा बहुत बड़ा है और आपकी मुनिया में भी काफी दिनों से नहीं गया है. और फिर मेरा मूसल भी तोह आपकी मुनिया के हिसाब से बड़ा है न.
सुनैना-- स्वामी जी. आप मेरी और मेरी मुनिया की चिंता छोड़ दें. प्रेम मिलान के लिए तोह मई कुछ भी सहन कर जाऊँगी. दर्द तोह हमेशा से अपनी आत्मा पर सहन करती आई हों. आज शरीर पर भी सहन कर लुंगी. पर आज दर्द काम और आनंद ज़यादा प्राप्त होने वाला है मुझे..
राज ने एक किश सुनैना के होंटो पर करि-- तोह अपने प्यारे हथु से अपने स्वामी जी के मूसल को अपनी मुनिया के गेट पर सेट करें. ऐसे प्रेम भी बढ़ेग और आनंद भी.
सुनैना ने एक हाथ बढ़ाया और राज के लुंड को थाम कर अपनी छूट के छेड़ पर फेरने लगी. अच्छे से गर्म लुंड के मोठे सुपड को अपनी छूट के छेड़ पर महसूस करने लगी.
राज-- मुझे आपकी आँखों से सब दिख रहा है सुनैना जी.
सुनैना-- दिखेगा hi स्वामी जी. मन की आँखों से सब दीखता है. प्रेम है न तोह दिखाई देना ज़रूरी है.. सुनैना ने राज के लुंड को अपनी छूट के छेड़ में थोड़ा सा घुसा कर कहा.. स्वामी जी अब आप प्रवेश अपने मूसल के साथ मेरी गुफा में प्रवेश कर सकते हाँ. मैंने तोह आपका पुरे मैं से सवागत कर लिया. अब मेरी मुनिया और अंदर का सब भी आपका और आपके मूसल का सवागत करने लगे हाँ. आप को प्रवेश करने की अनुमति देते हाँ.
राज ने एक किश और करा सुनैना के होंटो पर और अपने लुंड का दबाओ बढ़ा दिए. लुंड का सुपड छूट में घुसा तो राज ने धक्का मर दिए. सुनैना को सच में दर्द नहीं हुआ. राज सुनैना की आँखों में देख कर धक्का मर गया था. सनैना भी राज की आँखों में देख रही थी. कुछ दर्द आँखों में आया था. पर होंटो पर मुस्कान थी.
राज ने हल्का सा धक्का और मार दिए. थोड़ा सा लुंड और सुनैना की छूट को खोलता हुआ घुसता चला गया. सुनैना की आँखों में दर्द के भाव आने लगे थे. पर जाने कैसा प्यार वह राज से कर बैठी थी. राज की आँखों से नज़रें हटा hi नहीं रही थी. होंटो पर अब भी मुस्कान थी.
राज हरामी था. फिर भी हरामीपन नहीं कर सकता. ऐसे hi सुनैना की आँखों में देखता हुआ हलके हलके धक्के मार मार कर पूरा लुंड hi सुनैना की छूट में उतर दिए.
6 इंच के बाद का लुंड सुनैना को बहुत दर्द दे गया था. सुनैना ने अपने होंटो को भींच लिया था. आँखों में आंसू भी आ गए थे पर वह एक हाथ से आंसू साफ़ करके फिरसे राज की आँखों में देखने लगती थी. पूरा लुंड सुनैना की छूट में घुसा कर राज सुनैना की आँखों को चाटने लगा. बह रहे आंसू राज अपने अंदर उतरने लगा.
सुनैना को इससे बढ़ कर और क्या चाहिए था. कितना प्यार मिल रहा था उसे राज. इतना भी उसने नहीं सोचा था. कितना दर्द उसे होने वाला था. पर राज ने अपने प्यार के चलते उसे दर्द से भी बचा लिया था. कुछ दर्द के कारण जो आंसू बहे थे वह भी चाट रहा था.
सुनैना लम्बी सांस लेकर इन पलों को जैसे अपने अंदर सेव कर लेना चाहती थी. बरसों बाद एक लुंड उसकी छूट में समाया हुआ था. बहुत भी एक विशाल लुंड. एक मूसल लुंड. इतने बड़े लुंड की भी उसने कभी कल्पना नहीं करि थी. बड़े लुंड से ज़यादा आनंद भी मिलता है. इतने आनंद की भी कल्पना उसने नहीं करि थी.
अपनी छूट की अंत गहराई तक वह राज के लुंड को फील कर रही थी. कैसा फसा हुआ था राज का लुंड उसकी छूट में. सुनैना सोच कर hi आनंदी हो रही थी.
राज सुनैना के होंटो को भी चूस कर उसकी आँखों में देखने लगा.
राज-- कैसा लग रहा है सुनैना जी
सुनैना-- इतना अच्छा. इतना अच्छा. कह मैं बता नहीं सकती. सुकून की कोई हद नहीं होती. अगर होती है तोह उस आखरी हद से भी कहीं कर आनंद प्राप्त हो रहा है मुझे स्वामी जी.
राज-- दर्द तोह नहीं हो रहा है न अब.
सुनैना ने भी राज को किश करि- कैसे हो सकता था मुझे दर्द. आपका प्यार hi इतना था, मुझे दर्द का एहसास hi नहीं हुआ.
राज-- चल झूटी कहीं की.. फिर ये आंसू कहाँ से आ गए.. सुनैना भी है पड़ी राज के इन शब्दों पर.
सुनैना-- ये आंसू तोह अब के मिले दर्द के कारण नहीं हाँ स्वामी जी. ये तोह मेरे अंदर का बरसों पुराण दर्द था. जो आपके प्यार के कारण बहार निकलने लगा है.
राज ने सुनैना को फिरसे चूमना शुरू कर दिए. साथ hi अपने लुंड को हिला कर बहार निकलने लगा. सुनैना राज के लुंड को बहुत अच्छे से महसूस कर प् रहा थी. राज का लुंड सुनैना के लिए बहुत बड़ा बहुत गर्म भी था.
राज अपना लुंड सुपड तक निकल कर प्यार से अंदर डालने लगा. राज बड़े चाओ से सुनैना को छोड़ रहा था. सुनैना भी राज का किश में साथ देती हुई राज के लुंड को पूरी तरह से अपनी छूट में अंदर बाहर होता हुआ महसूस कर प् रही थी.
उसकी छूट ने पानी छोड़ कर राज के लुंड को चिकना कर दिए था. अब आराम से राज का लुंड अंदर बहार हो रहा था. कसावट अब भी थी लुंड की सुनैना की में. फस फस hi जा रहा था. पर दर्द बहुत काम हो गया था.
राज ने धीरे धीरे स्पीड बढ़ानी शुरू की तोह सुनैना और भी मस्त होती चली गई. राज ने किश तोड़ी और एक चुके हाथ में थाम कर सुअनीना को छोड़ने लगा. साथ hi उसकी आँखों में देख रहा था.
धीरे धीरे सुनैना चरम की और बढ़ने लगी. आँखों में नशे बढ़ने लगा. सुनैना सिसकने लगी. आहें भरने लगी. राज जान गया था सुनैना अब मस्त हो चली है.
राज ने दोनों हाथ साइड पर करते हुए कुछ और स्पीड बढ़ा कर सुनैना को छोड़ना शुरू कर दिए
सुनैना-- स्वामी जी.. आपकी सुनैना को बहुत आनंद प्राप्त हो रहा है.
राज-- अब और भी बढ़ता चला जाएगा सुनैना जी
सुनैना-- जी स्वामी जी... राज ने स्पीड बधाई तोह सुनैना को ऐसा लगा, जैसे उसके बदन में एकदुम्म से hi आग बढ़ने लगी हो. छूट का पानी बहुत ज़यादा हीट छोड़ने लगा था. राज का गर्म लुंड उस गरम पानी में नहाते हुए स्पीड से सुनैना की छूट में घुस रहा था.
सुनैना सहन नहीं कर प् रही थी. उसके बड़े अड़े चुके हिलने लगे. झटके बढ़ने लगे. बरसों बाद, लाइफ में पहली बार प्रेम मिलान के कारण सुनैना की छूट का रास कुछ झटके सुनैना को दे के निकलने लगा..
सुनैना सुस्त पड़ने पड़ती चली गई. राज ने स्पीड जारी राखी और पानी को बहार निकलने के लिए चप्पू चलने लगा..
सुनैना नार्मल हुई तोह राज को अपनी बहन में कास गई.. चूमना शुरू कर दिए.
सुनैना-- आज मैं पूरी हो गयी स्वामी जी. आपने मुझे पूरा कर दिए. शरीर के साथ साथ मुझे आत्मा सुख भी दे दिए आपने.. आपकी दासी अब बहुत खुश है.
राज-- सुनैना जी..
सुनैना-- जी स्वामी जी..
राज-- सुनैना जी.. प्रेम मिलान मेरे साथ हुआ है आपका. बड़े अजीब अंदाज़ में हमारा विवाह हुआ है. न आपने सोचा था और न hi मैंने. मैं आपके बच्चू से भी छोटा हो. फिर भी आप मेरी पत्नी बानी हाँ. अपने भी मुझे स्वीकार कर लिया है. ये प्रेम मिलान है न
सुनैना-- हाँ स्वामी जी. ये प्रेम मिलान hi है.
राज-- इसमें हवस तोह नहीं है न कहीं भी.
सुनैना- ऐसा क्यों सोच रहे हाँ आप. हवस हो तोह एक औरत समझ नहीं सकेगी क्या. ये सारा प्रेम मिलान hi था स्वामी जी. प्रेम मिलान न होता तोह मुझे इतना आनंद कैसे प्राप्त होता. मेरा दर्द और न बढ़ जाता.
राज-- प्रेम मिलान.. आप अपने बेटे की उम्र के लड़के से प्रेम मिलान करके आनंद प्राप्त कर गई हाँ सुनैना जी. ऐस सोच के कुछ परेशानी नहीं बानी आपको.
सुनैना-- नहीं स्वामी जी. प्रेम मिलान में उम्र देखि hi कहाँ जाती है. और अब तोह आप मेरे पति भी तोह हाँ न.
राज-- फॉर एक्साम्प्ले.. जो कुछ मेने किया है. वही अगर अखिल करता.. जो प्रेम मुझसे आपको प्राप्त हुआ है. वही अगर अखिल से प्राप्त होता तोह तब आपके क्या विचार होते..
अखिल के नाम पर सुनैना को झटका लगा था. चुदाई के बीच वो अपने बेटे का ज़िक्र उसे कुछ अजीब लगा था.
सुनैना- स्वामी जी.. ये किसी बात कर रहे हाँ आप.
राज- वो भी बता दूंगा, में ऐसी बात क्यों कर रहा हों. आप बताएं, प्रेम तोह किसी से भी हो सकता है. हमारे बीच भी तोह सब इन्सिडेंटली हुआ है न. अगर ऐसा इंसिडेंट अखिल के साथ हुआ होता तोह..
सुनैना ने राज मैं से पति मन था. बात बड़ी अजीब थी. रूटीन से हटके थी. कोई और ऐसी बात करता तोह सुनैना खुद पर काबू भूल जाती. पर राज राज था... बड़े वाला हरामी था.
सुनैना-- नहीं जानती मैं क्या कर जाती. मैंने ऐसे कबि नहीं सोचा था. एक माँ, एक बेटे के बीच ऐसा सब हो भी कैसे सकता है भला.
राज-- बात इन्सिडेंटली की हो रही है सुनैना जी.. राज अभी भी अपना लुंड सुनैना की छूट के अंदर बाहर कर रहा था. वो रुका नहीं था. सुनैना फिरसे कुछ मस्त होने लगी थी.
सुनैना-- सच कहूं तोह जैसा आनंद मुझे प्राप्त हुआ है. ऐसे आनंद मुझे किसी से भी मिलता तोह मैं उसी की हो जाती. पर हर कोई आपके जैसा तोह नहीं हो सकता न.
राज-- मतलब जैसा आनंद मुझसे प्राप्त हुआ है आपको.. मेरी जगा अखिल आपको इतना hi सुख दे जाता तोह आपको सब अच्छा लगता.
सुनैना कुछ देर सोचने के बाद बोली-- हाँ एक औरत होने के नाते में ऐसा hi सब फील करती. और फिर-- सुनैना चुप कर गई.
राज-- बोलो न आगे. आप चुप न रहें. मन की साडी करें मेरे साथ
सुनैना-- हमारे मोहल्ले में hi एक लड़का अपनी माँ के साथ सेक्स रिलेशन में है. ये अंदर की बात है. सब नहीं जानते. मुझे भी पता चला था. पर वो माँ अपने बेटे से बहुत प्यार करती है.
राज-- ये तोह अच्छी बात है न. वहां भी हवस नहीं होगी. वहां भी प्यार hi होगा न.
सुनैना- पर में समझ नहीं पाई स्वामी जी. आप ऐसा सब क्यों बोल रहे हाँ.
राज-- मैं भी आपका अखिल hi हूँ.
सुनैना को झटका लगा-- मौसी..
राज-- हैं मेरा आपके साथ एक रिश्ता नहीं है मौसी.. मेरा आपके साथ एक और रिश्ता भी है. आप मेरी मौसी भी हाँ.
सुनैना की आँखों ने रंग बदलना शुरू कर दिए.
सुनैना-- आप अर्चना के बेटे नहीं हाँ तोह फिर--- सुनैना का सोच कर दिल धक् धक् करने लगा.. वह बहुत सही समझ गई थी... एकदुम्म से hi उसकी आँखों से आंसुओं की लड़ी निकली और बहती हुई निचे जाने लगी..
सुनैना-- आराधना..
राज-- हाँ मौसी मैं आपकी आराधना का बीटा राज हों. आप सब को एक करने के लिए, आप सबकी ज़िंदगियों के सरे दर्द दूर करने के लिए यहाँ आया हों.
राज ने अपना लुंड मौसी की छूट से निकला और मौसी के साथ लेट कर मौसी को अपने ऊपर गिरा लिया. मौसी राज के सीने पर सर रख कर आंसू बहाने लगी..
राज ने मोबाइल उठा कर अपनी माँ का नंबर डायल करना शुरू कर दिए.. बेल्ल की टोन के साथ साथ मौसी की सिसकियों की आवाज़ भी राज के कानो में गूँज रही थी.