Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta - Page 4 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta

सिमरन अंधी तूफ़ान की तरह गाड़ी दौड़ती हुई कोठी जा पोह्ची. जितना ग़ुस्सा उसे आज आ रहा था. इतना ग़ुस्सा पूरी ज़िन्दगी में नहीं आया था.

ऐसा मामलो में लड़कियां रोटी पीटती हाँ. उन्हें लगता है, कोई उनके जज़्बात के साथ खेल गया है. पर सिमरन न दुखी थी, न रोइ चिल्लाई थी.

सिमरन छिलाई थी तोह ग़ुस्से की शिद्दत से. राज की हिम्मत बी किसी हुई उसकी मांग भरने की. इस दुन्या में कोई ऐसा लड़का था hi नहीं जो सिमरन की नज़रों में उतर सकता. सिमरन खुद को लड़की समझते हुए भी लड़कियों वाली लाइफ नहीं जीती थी. लड़को से उलझन थी तोह बस लव, शोवा, शादी वादी के मामलो पर थी. सिमरन कभी कसी लड़के की ऑर्डर इस एंगल से अट्रैक्टिव नहीं हो सकती थी. और न hi उसकी सोच की धरा िर दिशा में मुद सकती थी.

सिमरन खून भरी मांग के साथ कोठी पर पोहंची तोह कोठी में मौजूद घर के सभी मेंबर्स अपने अपने कमरों दे दूर बंद करके खिड़की से सिमरन को देखने लगे.

सिमरन की खून भरी मांग देख के सब के सब खुश हो गए थे. सिमरन का चेहरा ग़ुस्सा से लाल था. आँखों से आग बरस रही थी. तंतानति हुई वो कोठी में दाखिल हुई और फिरसे दोनाली उठा ली. उसके अंदर कारतूस भर के घर में राखी चीज़ों पर फायर करने लगे.

सिमरन की माँ जो अपने कमरे से निकल के स्टैर्स के पीछे छुप गई थी. अपने मोह पे हाथ रखे सिमरन को देख रही थी.

साथ hi सिमरन की छोटी बहन सान्वी भी साथ थी.

सान्वी-- मम्मी दीदी कितनी प्यारी लग रही है न खून भरी मांग के साथ. सान्वी अपनी हंसी दबाते हुए धीरे से बोली. मम्मी ने सान्वी को देखा और अपने होंठ भींच के सान्वी को देखते हुए बोली.

मम्मी-- हाँ सान्वी बेटी, मेरी बेटी आज हमेशा से सुन्दर दिख रही है. शुक्र है भगवन का मेरी बेटी शादी वाली हो गई.

सान्वी-- हेहेहे दीदी की शादी कितने रोमांटिक अंदाज़ में हुई है न. संवी सिमरन की मांग को देखती हुई बोली. तो मम्मी कुछ बोलने वाली थी. एक कार्टून उसके करीब फायर हुआ तोह मम्मी और सान्वी दोनों चीख पड़ी.. दोनों उठ कड़ी हुई.

सिमरन ने एक पल हैरत से दोनों को देखा. दोनों को खुद की और आँखों में चमक और होंटो पे दबी दबी मुस्कान लिए देखा था दोनाली उनकी और सीढ़ी क्र दी.

ऊपर छुपे घर की दूसरे मेंबर्स भी सिमरन को देखने लगे. सिमरन की चची बोली. आप दीदी को ऊपर वाला hi बचा सकता था. चची की बेटी अन्य बोली. और सान्वी को भी.

सिमरन दानली दोनों की ऑर्डर सीढ़ी की तोह सान्वी तुरंत अपनी मम्मी के पीछे हो गई. वो दरी भी थी. पर है भी रही थी. मम्मी का भी कुछ ऐसा hi हाल था. मम्मी ने भी सान्वी को बाज़ो से पकड़ा और खनेच के अपने आगे कर दिए. मम्मी अपनी छोटी बेटी के पीछे छुप के सिमरन को देखने लगी. सान्वी चीख पड़ी थी.

और सिमरन दोनों की नौटंकी देख कर और भी ज़यादा ग़ुस्से में आने लगी. एक फायर दोनों माँ बेटी के पास किया तो दोनों चीखती हुई उछाल पड़ी.

मम्मी-- sss..simran बेटी ये हमारा घर है, कोई गन शूटिंग एरिया नहीं है.

सिमरन खुनी मांग, खुनी आँखों से... अछहहहहाआ मुझे तो पता hi नहीं था. एक तोह मैं इतने ग़ुस्से में हों और दूसरा आप सब मिलके मेरे ग़ुस्से को और भी बढ़ा रहे हाँ.

उस हरामी को तोह मैं नहीं छोडूंगी. पर आप भी आज मेरे हथु से नहीं बचने वाली. सिमरन ने फिरसे डबली सीढ़ी कर ली और दूसरी और कुछ फैसले पर फायर कर दिए.

मम्मी और सब जानती थी सिमरन का ग़ुस्सा कैसा है. सिमरन फिरसे कारतूस भरने लगी.

राकेश वर्मा भी पोहंच गए.

वर्मा-- wahh..wahh क्या बात है मेरी शेरनी बेटी घर को hi मैदान इ जुंग बनाये हुए है.

सिमरन ने पलट कर दाद्दु को देखा तो दानली को उनकी और कर दिए.

सिमरन ग़ुस्से से दाद्दु को देखते हुए.. दाद्दु उस हरामी की इतनी हिम्मत नहीं हो सकती थी. ज़रूर अपने hi उसे ऐसा करने को कहा होगा. आज मई आपको भी नहीं छोडूंगी. सिमरन ने दाद्दु के पैरों में फायर कर दिए. दाद्दु तो चीखते हुए उछाल पड़े.

मम्मी-- न न सिमरन बेटी, पापा को गोली लग जाएगी.

सान्वी-- सिमरन को डरते हुए.. दीदी फिर आपको पुलिस पकड़ कर ले जायेगी.

ऊपर से चची बोली.. और पुलिस वळून की मार से तोह भगवन hi बचाये सबको.

अन्य बोली. हाय, दीदी की टंगे इतनी बहार निकल आएगी जब दीदी को फँसी लगेगी.

सान्वी अपनी कोहनी पर हाथ रखते हुए बोली. और दीदी की गर्दन भी इतनी लम्बी हो जायेगी.

सिमरन-- जब को जान से मार दूंगी मैं. किसी को भी ज़िंदा नहीं छोडूंगी. सब के सब मिले हुए हाँ. सब के सब मेरा मज़ाक बना रहे हाँ. एक तो मेरे साथ उस हरामी ने इतना गलत कर दिए और ऊपर से आप सब मेरे साथ ऐसा कर रहे हाँ.

दाद्दु-- ख़बरदार जो किसी ने बी मेरी पोती बारे ऐसा सब बोलै तो..

सान्वी.. तोह दाद्दु उसे घर से निकल देंगे.

मम्मी-- नहीं नहीं मैं किसी को घर से जाते हुए नहीं देख सकुंगी. मम्मी तस्वी बहाने लगी. सान्वी मम्मी के गले लग के मम्मी को दिलासा देने.

सिमरन सबकी नातनकी देख रही थी. उसका ग़ुस्सा और भी बढ़ रहा था. घर के मच मेंबर्स कॉलेज, ऊनि में तोह कुछ ऑफिस में थे. वर्ण खूब हंगामा बढ़ता.

सिमरन एक एक की और दानली सीढ़ी कर रही थी. कभी कभी किसी की और फायर भी कर जाती थी. दोनाली से निकली फायर साइड से गुज़र कर किसी चीज़ को चकना चूर कर जाता था. पर मजाल है जो किसी के चेहरे पर भी दर के भाव आये हों. सबके सब होंठ दबाये है रहे थे. मुस्करारा रहे थे.

चची और अन्य भी निचे आ गई. दादी पहले hi निचे थी. वो छुप कर सब देख रही थी. सब एक साथ सिमरन के सामने ाँ खड़े हुए. सब सिमरन के हथु में दोनाली देख कर थार थार कंपनी का नाटक भी कर रहे थे.

सिमरन सबको बरी बरी देख रही थी.

दाद्दु-- सिमरन बेटी राज बीटा तुम्हारे लिए परफेक्ट है.

सान्वी-- क्या जीजू का नाम राज है. ववव that's ग्रेट.. क्या कपल बना है. {RAJ-SIMRAN}

मम्मी-- लेजायेंगे लेजायेंगे दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे.

अन्य ने सान्वी का हाथ पकड़ा और डांस करने लगी. सिमरन सब को खुनी आँखों से देखने लगी. इतने ग़ुस्से में थी वह, इतने फायर भी कर दिए थे उसने, मजाल है जो किसी को फ़र्क़ भी पड़ा हो.

दाद्दु भी सबको देख के मुस्कुरा रहे थे.

मम्मी-- पापा केसा है राज बीटा.

दाद्दु राज को पलकें बंद करके देखते हुए बोले.. ऐसा जो मैंने अंदाज़ा लगाया था, उससे भी कई गुना बढ़कर. समझ लो तोह राज hi अकेला लड़का है इस दुन्या में, जो हमारी सिमरन के लिए बना है. हे इस ा परफेक्ट गाए. दाद्दु फिर ठाणे वाली और रोड वाली बात डिटेल में बताने लगे. सब शांत होक सुनने लगे. जैसे hi दाद्दु चुप हुए तोह दानली गन के साथ hi मम्मी ने सिमरन को अपनी बहन में भर लिया और चेहरा चूमने लगी.

मम्मी-- मेरी बेटी कितनी किस्मत वाली है जो उसे राज मिल गया. ुम्मम्हा..

चची-- हाय अभी पिछले महीने hi तोह मैंने अपनी भतीजी की शादी करि है. 3 महीने लगा के शॉपिंग करि थी. मैं तोह थक गई थी. सोचा था कुछ महीने रेस्ट मिल जाएगी. पर अब तोह सिमरन बेटी के लिए फिरसे महीनो माल्स के चक्कर लगाने पड़ेंगे.

अन्य-- कभी ज्वेलरी शॉप पर तोह कभी गारमेंट्स शॉप पर.

सान्वी-- कभी ये मैच नहीं कर रहा तोह कभी वो मैच नहीं कर रहा. मम्मी मैं इस बार दीदी की शॉपिंग दुबई से करुँगी. सान्वी बड़े लड़ से बोली. सिमरन सबको देख रही थी. सबकी नौटंकी ख़तम होने में hi नहीं आ रही थी.

दाद्दु पल पल बदल रहे सिमरन के भाव देख रहे थे.

सिमरन ने एकदुम्म से दोनाली की नाल दाद्दु के माथे पर लगा दी. सब चुप कर गए.

सिमरन-- आप हाँ न एक सरे खेल को रचने वाले. आपके कहने पे hi उस हरामी ने मेरी मांग भरी है न.

दाद्दु थार थार कंपनी लगे.

दाद्दु-- nn..nahi नहीं सिमरन बेटी.. मैंने कुछ नहीं कहा था उससे. सब राज ने अपनी मर्ज़ी से किया है.

मम्मी-- सिमरन बेटी मुझे राज बहुत पसंद है.

सान्वी-- और मैं तोह आज hi जीजू से मिलूंगी.

anaya--me भी तुम्हारे साथ जाऊँगी सान्वी.

चची माथे पर हाथ मरते हुए... उफ्फ्फ मुझे दो महीने की रेस्ट नहीं मिल सकती क्या.

दादी जो बड़ी देर से सबका नाटक देख रही थी. राकेश वर्मा के रहते वह कैसे न उनके जैसी होती.

दादी-- कोई ज़रूरत नहीं शॉपिंग वाप्पिंग की. अरे अब तो ज़माना बदल गया है. बीच सड़क पर उसने मेरी फूल सी पोती की मांग भरी है. शादी में खर्चा करने की क्या ज़रूरत है. पुरे शहर को पता चल गया होगा. सिमरन अब राज की पैंटी है. मैं तोह कहती हों, राज को बुलवाओ और शाम तक सिमरन की रुखसती कार्डो.

हाहाहाहाहा सब दादी की बात पर हसने लगे. सिमरन ने बंदूक दाद्दु की और से हटा के दादी की और की तो दादी चीखती मम्मी के पीछे जा छुपी..

सिमरन-- हड्डियों में जाएं नहीं रही और मेरे लिए डायलाग बोलती हाँ आप.

दादी-- ss..simran ..bb.beti मैंने तो ऐसे hi कहा था. माफ़ करदे मुझे बेटी.

सिमरन ने एक बार फिरसे सब को देखा और दोनाली फ़ेंक दी. सिमरन एकदुम्म से पुरसुकून नज़र आने लगी.

सिमरन- आप सब बहुत खुश हाँ न मेरी भरी मांग को देख के. सिमरन का लहजा जान के दाद्दु समेत सबके कान खड़े हो गए.

सिमरन-- मम्मी आपको राज बहुत पसंद आया है न.

मम्मी भी सिमरन के बदले लहजे पर अंदर से हिल गई थी. वह कभी हाँ में तोह कभी न में सर हिलने लगी.

सिमरन-- क्यों चची आप अपनी भतीजी की शादी की शोप्प्पिंग करके थक चुकी हाँ और अब मेरी शादी के लिए शॉपिंग नहीं कर पाएंगी.

चची अपने माथे पर आये पसीने को साफ़ करने लगी. गन से भी जो नहीं डरे थे, अब सिमरन के बदले रूप को देख कर डरने लगे थे. सिमरन का ये ऐसा रूप था, जब भी सिमरन पर तारी हुआ करता था. सिमरन कुछ ऐसा कर जाती थी. जिसकी चोट बहुत हुआ करती थी. और सिरमन कुछ भी कर जाया करती थी.

सिमरन-- सान्वी मेरी और राज की जोड़ी परफेक्ट जोड़ी है न. सान्वी अपनी मम्मी के पीछे छुपते हुए अपने खुश्क होने रहे होंटो पर जीब फेरने लगी.

सिरमन-- क्यों अन्य मेरी शादी की बात पर तुम्हे इतनी ख़ुशी मिली है, तुम नाचने लगी हो. अन्य भी अपनी मम्मी के पीछे हो गई. सिमरन दाद्दु की और मुड़ी तोह दाद्दु आस पास देखने लगे. वह किसके पीछे जा छूपेण. कोई नहीं मिला तोह सिमरन को देखने लगे.

सिमरन-- हे इस ा परफेक्ट गाए दाद्दु.. इस पूरी दुन्या में राज के शिव कोई भी नहीं है मेरे लायक. सिमरन आगे बढ़ी और दाद्दु के गले में बहन दाल दी. सिमरन बड़े प्यार से दाद्दु को देखने लगी.

सिमरन-- सच कहा आपने दाद्दु, मुझे भी आज तक राज के जैसा कोई मर्द नहीं मिला. उस जैसी बात किसी में भी नहीं. इतनी डरे है उसमे, बीच सड़क पर मुझे किश करता है. उसकी बाइक को थोक दिया. फिर भी मुस्कुराता हुआ उठ खड़ा हुआ और अपने खून से मेरी मांग भर कर मुझे अपनी पत्नी बना दिए, और फिरसे एक लम्बी किश मुझे सबके सामने बीच सड़क पर करदी. ी एग्रीड दाद्दु! राज बहुत ख़ास है. और मुझे उसके जैसा फिर कभी नहीं मिलेगा. और फिर अब तोह मैं न चाहते हुए भी उसकी पत्नी बन चुकी हों तोह क्या आप मुझे मेरे पति के बारे में कुछ नहीं बताएँगे.

दाद्दु भी अपने चेहरे पर आये पसीने को साफ़ करने लगे. वह जो 2 दिन से खुश थे, पुरसुकून थे, अब एकदुम्म से चिंतित हो गए थे. सिमरन कभी कभी hi ऐसे रूप में आया करती थी. और जब भी आती थी. कुछ न कुछ ऐसा कर जाती थी. जो बहुत भयंकर हुआ करता था.

सब सिमरन को ख़ौफ़ज़दा नज़रों से देख रहे थे. मम्मी ना में सर हिला कर दाद्दु को राज के बारे में बताने से मन कर रही थी. ऐसा hi हाल बाकि सबका भी था.

सिमरन-- बोलिये न दाद्दु, मुझे मेरे पतिदेव के बारे में जानना है. कहाँ मिलेंगे वह मुझे. क्या एक पत्नी को इतना जानने का हक़ भी नहीं है.

सिमरन की आँखों में मिठास और नरमी थी. पर आँखों के पीछे ऐसा भयंकर तूफ़ान थे, जिसे देख कर दाद्दु समेत सब की गोगटे खड़े हो गए थे.

दाद्दु लम्बी लम्बी साँसे लेने लगे.

सिमरन-- चलें मैं फ्रेश होक आती हों, तब तक आप सोच लें. आती हों मैं और बताना तोह आपको पड़ेगा दाद्दु. आखिर आप एक पत्नी से उसके पति की कोई भी बात कैसे छुपा सकते हाँ. सिमरन दाद्दु के गालों पर किश करके वहां से चल दी.

सब धड़ाम से पास पड़े सुफोन पर गिर पड़े और अपने अपने चेहरे पर आये पसीने को तसली से साफ़ करने लगे.

सब एक दूसरे को देख रहे थे. वह सोच भी नहीं सकते थे. सिमरन को फिरसे ऐसे रूप में भी देखना पद सकता है. सब जितने खुश थे, अब उतने hi परेशान भी थे.
 
राज से मिलके राकेश वर्मा को जहाँ बहुत अच्छा लगा था, वहीँ आस भी दिख गई थी, राज ज़रूर सिमरन को बदल देगा. पर सिमरन भी काम नहीं थी. अब उसके बदले रूप को देख के राकेश वर्मा समेत सब चिंचित थे.

राज पट्टी करवा कर घर पोहंच गया. बाजार से hi नए कपडे खरीद कर वही चेंज करके राज घर आया था.

नाना नानी राज के सर पर पट्टी बंधी देख कर परेशां हो गए.

नानी बावली होक भागी और राज के थाम लिया. क्या हुआ राज बीटा ये पट्टी कैसी है. नानी की आँखों में पल भर में hi आंसू आ गए थे.

नाना भी राज के पास आ गए. राज बीटा कैसे लगी ये चोट.

राज -- दाद्दु एक गाड़ी से टक्कर हो गई थी.

नानी-- क्या.. नानी ने दिल पे हाथ रख लिया.

राज-- कुछ नहीं हुआ मुझे दादी. मैं ठीक हों. देखो खुद से घर लौटा हों.

नाना नानी राज को कमरे में ले गए और राज को रेस्ट के लिए बोल दिए. नानी राज की सेवा में लग गई और नाना परेशानी भरे भाव के साथ राज को देखने लगे.

शाम तक राज को दोनों सलाह देते रहे, दिल्ली शहर की ट्रैफिक बारे बताते रहे. जैसे राज कोई छोटा बच्चा हो. राज भी बच्चा बन कर दोनों की बातें सुनता रहा.

राज आते हुए वियाग्रा की गोलियां ले आया था. नानी किचेन में खाना बना रही थी, राज किचन में घुस गया. नानी को पीछे से अपनी बहन में भर के चुम लिया.

nani--kya करते हो राज बीटा, मुझे खाना बनाने दो. राज ने पॉकेट से वियाग्रा गोलियां निकल ले नानी के हाथ पर रख दीं.

नानी-- ये किसी टेबलेट्स हाँ राज बीटा.

राज -- दादी खाने के बाद ये दो गोलियन दाद्दु को दूध के साथ देनी हाँ.

नानी हैरान होक-- वो किस लिए..

राज नानी की छूट में ऊँगली करते हुए. आज मैं आप दोनों के साथ सोऊंगा, और आप दाद्दु से मेरे सामने छोड़ेंगी.

नानी-- क्या.. राज बीटा पागल हो गए हो जो ऐसा बोल रहे हो.

राज-- कितने साल हो गए दाद्दु के लुंड को खड़े हुए. और फिर दाद्दु को भी तो थोड़ा सा बदलना है न. सब को साथ मिलाना है तोह ऐसा करना पड़ेगा. सब इतनी जल्दी तो बदलेंगे नहीं, कुछ वो बदल जायेंगे तोह कुछ दाद्दु को बदलना होगा दादी. जैसे आप बदल गई हाँ. इसी तरह दाद्दु को बदल कर मैं सबको एक कर दूंगा.

नानी सोच में पद गई. पर राज बीटा, मुझे बड़ी शर्म आएगी तेरे दाद्दु के साथ तेरे सामने सब करते हुए..

राज-- दादी इसमें श्रम की क्या बात है. आप मेरे साथ कितना कुछ कर चुकी हाँ.

नानी-- तेरे दाद्दु न मने तो. नानी की छूट पर राज की ऊँगली चल रही थी. नानी मस्त होने लगी थी.

राज-- मैं जल्दी सो जायेंगा न. तोह दाद्दु को बोल देना मुझे चोट की वजा से नींद की गोली दी है. सुबह तक होश नहीं आएगी.

नानी-- तो फिर तुम सब देखोगे कैसे. नानी लम्बी सांस लेते हुए बोली.

राज-- वो सब में देख लूंगा..

रात हुई तो बीएड पर राज बीच में था और बातें करते करते राज सो गया था.

नानी राज के सीने पर सर रखे हुए थी. दूसरी और नाना थे. नाना वियाग्रा खा के कुछ बेचैन थे, पर वो कुछ समझ नहीं प् रहे थे. नानी ने अपने हाथ को आगे बढ़ाया और नाना के लुंड को थाम लिया. नाना के लुंड को झटका लगा वो जागने लगा. वियाग्रा के कारण उसमे भी करंट आ गया था.

नाना को भी झटका लगा था. नानी राज के सामने ऐसा कर गई थी और वो भी इतने सालों बाद. नाना मोह खोल कर हेरात से नानी को देखने लगे. उनके लुंड की सख्ती नानी के मसलने के कारण बढ़ने लगी थी.

नाना लम्बी सांस लेते हुए-- मल्टी पागल हो गई हो, राज पास hi सो रहा है. नाना धीरे से बोले.

नानी-- राज बेटे को मैंने नींद की गोली खिला दी है शर्मा जी. कितने साल हो गए हाँ न शर्मा जी हमें ये सब किये हुए..

नाना अपने होंटो पर जीब फेरते हुए. अब हिम्मत hi कहाँ रही है मुझमे मल्टी..

नानी हस्ते हुए.. तो फिर ये क्यों इतना सख्त हो रहा है. इतना गरम क्यों हो रहा है.

नाना ने धयान दिया तोह उसका लुंड उनकी पत्नी के हतुं में पुरे जोबन पर था. नाना हेरात से अपने लुंड पर धयान देने लगे. कैसे प्रेशर बढ़ता जा रहा था उसका.. इतने सालों बाद एकदुम्म से इतना प्रेशर.

नाना कुछ परेशान हुए तोह बहुत ज़यादा खुश भी दिखने लगे.

नाना-- चलो मल्टी दूसरे कमरे में चलते हाँ

नानी-- नहीं शर्मा जी यहीं करते हाँ.

नाना- पागल हुई हो. राज बीटा उठ गया तो. नहीं दूसरे कमरे में चलते हाँ..

नानी-- नहीं राज बेटे को सर पर चोट लगी है, मई उसे छोड़ के नहीं जाऊँगी.

राज हरामी नानी को समझा चूका था, कैसे करना है. नानी ने नाना के ऊपर से रज़ाई हटाई और नाना के लुंड को बहार निकल कर हाथ से सहलाने लगी. फिर नानी राज के ऊपर से नाना के पैरों में आई और नाना का लुंड पकड़ कर मोह में भर लिया और दबा दबा के चूसने लगी.

नाना तो पागल हो गया वो नानी को देखने लगे. नानी ने पहले ऐसा नहीं किया था. नाना ने भी अपना लुंड पहले कभी नानी के मोह में नहीं दिया था. नाना नानी की लुंड चुसाई पर जितने हैरान थे, उतने hi मज़े में भी होने लगे.

नानी एक रात में राज का लुंड चूस कर कुछ खुल चुकी थी, कुछ सीख चुकी थी. वही सीख अब नाना के लुंड पर इस्तेमाल कर रही thi.nana के लुंड को पूरा पूरा मोह में लेकर चूस रही थी. और नाना वियाग्रा के ज़ेर इ असर पागल होने लगे थे. ऐसा मज़ा उन्हें पहले कभी नहीं मिला था.
 
नाना नानी को देख को जितने हैरान थे, उतने hi मज़े में भी थे. ये उनकी ज़िन्दगी का पहला चांस था, जब उनकी धर्मपत्नी उनका लुंड चूस रही थी. वो भी उम्र के इस हिस्से में.

नाना दो दो गोलियां खा के बड़े जोश में आ गए थे.

नाना-- आह्हः मल्टी ये कैसा नशा मुझपे छाने लगा है.

नानी ने नान का लुंड मोह से निकल के अपने पति को देखा और स्माइल करने लगी. शर्मा जी आप को मज़ा आया न.

नाना-- हाँ मल्टी ऐसा मज़ा तोह पुरु ज़िन्दगी नहीं आया. नानी खुश हो गई. नानी फिर से नाना के लुंड को मसल मसल कर चूसने लगी. नाना के अंदर तोह करंट hi इतना बढ़ गया था, उन्हें लग hi नहीं रहा था, वो बूढ़े हो चुके है.

नाना की नज़र राज के चेहरे पर पड़ी. जो ऑंखें बंद किये पड़ा था.

नाना-- मल्टी मुझे दर है, राज बीटा न उठ जाये.

नानी -- नहीं उठेगा शर्मा जी. देखो कितनी गहरी नींद सो रहा है.

नाना-- फिर भी मल्टी.. चलो लाइट hi बंद कर दो. या अहम दूसरे कमरे में चलते han.nana अपनी गनफ हिला के पूरा लुंड नानी के मोह में डालते हुए बोले. नाना से भी अब सहन नहीं हो रहा था.

नानी उठी और लाइट बंद कर दी. नानी बीएड के पास कड़ी होक नंगी होगी. अंधेर में नाना नानी के लिए बेचैन होने लगे. रह नहीं पाए और नानी के मोह से हुए गीले लुंड को अपने एक हाथ में लेके मसलने लगे. अपने लुंड की सख्ती और गर्मी जान कर नाना खुश हो गए. मैं में सोचने लगे, मैं आज भी एक मर्द hi हों. क्यों इतने साल मैंने इसपर धयान नहीं दिए. अब भी मेरे लुंड में इतनी जान है, मल्टी को दबा दबा कर छोड़ सकता हों. नाना के मैं में फूट रहे थे लड्डू. नाना बहुत खुश थे.

नानी आई और नाना के ऊपर आ के लत गई. शर्मा जी सच बनायें, जैसा मैंने किया आपको मज़ा आया न.

नाना अब शेर था. लुंड से भी और अँधेरे के कारण भी. वो धीमे से बोले. मल्टी तुमने ये सब किस से सीखा. बड़ा मज़ा आया मुझे. पहले तोह बहुत अजीब लगा. पर फिर बहुत मज़ा आने लगा.

नानी-- शर्मा जी, आज कल मोबाइल में ऐसा सब बहुत देखने को मिल जाता है.

नाना-- हाँ ज़माना बड़ा बदल गया है. हमारा ज़माना और था.

नानी- शर्मा जी आप भी मेरी छूट चाटें न.

नाना अपने होंटो पर जीब फेर के घबराने लगे.

nana--mmm..main..nn..nahi मल्टी मैंने ऐसा पहला कभी नहीं किया.

नानी-- तो मैं कौनसा रोज़ करती हों. प्ल्ज़ शर्मा जी, पता नहीं ज़िन्दगी कितनी है, जितनी भी है, मुझे भी अब सब तरह से प्यार करना है. सम्भोग के सरे तरीके अपनाने हाँ.

नाना- पर मेरा दिल नहीं कर रहा मल्टी. वहां मुझे बड़ा अजीब लगेगा. नाना मन में बदल रहे थे. पर ज़ुबान पे कुछ और था.

नानी- मुझे भी बड़ा अजीब लगा था. पर फिर मुझे भी मज़ा आने लगा.. नानी उठी और 69 में आ गई. नाना पहले तो न समझे. तब समझे जब नानी की छूट उनपे मोह पर आ के लगी. नानी ने फिरसे नाना का लुंड मोह में ले के चूसना शुरू कर दिए. साथ hi अपनी छूट भी नाना के मोह पर चलनी शुरू कर दी.

अँधेरे में राज ने भी अपने एक हाथ को नानी की गांड पे रख के चलना शुरू कर दिए. नानी भी समझ गई और मैं में मुस्कुराने लगी. कितना गलत हो रहा था. सब कितना अच्छा भी लग रहा था. एक नयी शुरुआत भी थी ये. नाना को बदलने के लिए ऐसा सब नानी कर रही थी. नानी एकदुम्म से कितनी बदल गई थी.

नाना भी अब सहन नहीं कर पाए. अपने की मस्ती के कारण नानी की छूट का पानी भी उनके लिए अब परफ्यूम में बदलने लगा था. नाना ने डरते डरते अपनी जीब निकल कर नानी की छूट पर लगा दी. फ़ौरन hi पीछे भी हटा ली. नानी की चुतरस को अपने मोह में महसूस करने लगे. फिर मैं में बोले. इतना भी बुरा टास्ते नहीं है. कितना अजीब सा एहसास हुआ था मुझे. नाना ने दो तीन बार जीब लगा कर देखि. कुछ भी बुरा नहीं था. पानी का टास्ते अब अच्छा लगने लगा था. नाना ने एक ऊँगली नानी की छूट में डाली और चाटने लगे. नानी की स्पीड और भी बढ़ी तोह नाना बेचैन हो उठे. वो भी पुरे मैं से नानी की छूट में ऊँगली और जीब दाल के चाटने लगे. वह इतने मस्त हुए सब कुछ भूलने लगे.

नानी एकदुम्म से उठने लगी. तो नाना बोल पड़े. रुको मल्टी अभी मेरा मैं नहीं भरा है.

राज दिल में तोह नानी खुल कर हंस पड़ी. क्यों शर्मा जी मज़ा आया मेरी छूट चाट के.

नाना-- हाहाहा मल्टी ये तुमने मुझे कौनसी दुन्या दिखा दी है. जवानी में, बाद में भी ऐसा सब नहीं किया था, ऐसी दुन्या नहीं देखि थी. अब जब मैं इस दुन्या का इंसान नहीं रहा था तोह तुम मुझे ये सब दिखा रही हो, सीखा रही हो.

नानी-- कितना मज़ा मिला शर्मा जी आपको मेरी छूट चाट के.

नाना-- बहुत आनंद मिला मुझे मल्टी. आज तो तुम भी किसी फ़िल्मी हीरोइन से काम नहीं लग रही. कितना खुल के बोल रही हो. नाना खुश होते हुए बोले.

नानी मन में... ये सब राज के कारण है शर्मा जी. उस बेशरम ने मेरी शर्म रहने hi कहाँ दी है. कितना बड़ा हरामी है वह, कैसे बताओं में आपको शर्मा जी. मुझे बुढ़िआ को भी आज के ज़माने की साड़ी सीख दे दी है उसने.

नानी नाना के लुंड पर बैठ गई और पूरा लुंड लेके छोड़ने लगी. इतने बरसों बाद लुंड गया था छूट में. कुछ दर्द हुआ था नानी को. पर नानी मस्त होक पूरा लुंड लेके छोड़ने लगी.

राज ने भी करवट बदली और अपना एक हाथ नाना के सीने पर रख दिए. नाना निचे से नंगे थे, ऊपर से नहीं. नाना का तोह दिल hi उछाल कर बहार आने को हो गया था. नानी ने भी महसूस कर लिया, नानी के पेअर पर राज का लुंड लगा था. नानी भी मैं में हसने लगी. बोली, शर्मा जी अब बच के दिखाना राज से. ऐसी hi हालत में अब मुझे ाआपसे छोड़ना होगा.

नाना मन में. आठ वही हुआ जिसका डर था. राज उठ गया.. नहीं नहीं मल्टी ने उसे नींद की गोली दी है. वो जाएगा नहीं है, बस नींद में करवट ली है.

नाना-- राज बीटा.. नाना डरते डरते बोले. पर राज नहीं बोलै तोह नाना को कुछ चैन मिला. नानी भी झुक के नाना को किश करने लगी. नाना हड़बड़ा गए. किश तोड़ के धीरे से नानी से बोले.. पागल हुई हो मल्टी तुम, राज उठ गया तो. देखो तो उसका हाथ हम दोनों के बीच कैसे दबा हुआ है. और तुम्हे शर्म नहीं आती, तुम्हारे चुके भी राज के हाथ पर हाँ.

नानी थोड़ा सा ऊपर हुई और राज के हाथ को अपने एक चुके पर रख के नाना के सीने पर दबा लिया. नाना ने महसूस किया तोह नाना के लुंड में ऐसा करंट बढ़ा, नाना निचे से धक्का लगा कर नानी की छूट में खुद से पूरा लुंड दाल गए.

नानी-- हाहाहा शर्मा जी, आपको क्या हुआ.. नाना एक हाथ से अपने चेहरे पर आये पसीने को साफ़ करने लगे.

नाना-- मल्टी ये सब कितना गलत कर रही हो तुम.

नानी-- क्या गलत है शर्मा जी. बच्चू का तोह पूरा पूरा हक़ होता है न चुचु पे. और माँ बनने के बाद चुचु के लिए विचार भी तोह बदल जाते हाँ.

नाना-- वह सब ठीक है मल्टी पर मुझे ये अच्छा नहीं लगा.

नानी- अच्छा जी, तो फिर आपने लुंड में करंट क्यों बढ़ गया है.

नाना ने भी धयान दिया तो सच में hi राज के बीच में आ जाने से उनके अंदर एक्ससिटेमेंट बढ़ गई थी. नाना कुछ हैरान हुए. फिर सर झटक कर नानी के दोनों हुक्ट्तादो को पकड़ कर निचे से धक्के मारने लगे.

नानी-- अब क्या हुआ शर्मा जी. अब नहीं गलत लग रहा.

नाना-- पता नहीं मुझे क्या होने लगा है. मैं ऐसा तोह नहीं था.

नानी-- जी नहीं शर्मा जी आप हमेशा से hi ऐसे थे. आराधना के कारण hi आप बदल गए थे. आराधना न भगति तोह आप भी हमेशा ऐसे hi रहते.

नाना-- शायद तुम सही कह रही हो. नाना अब हांपने लगे थे.

नानी भी स्पीड से ऊपर निचे होक लुंड लेने लगी. नाना बूढ़े थे, पर स्ट्रांग मन नहीं थे. दो दो गोलियां खा के जितनी पावर उनको मिल गई थी, ये भी बहुत थी. अब नाना के लुंड में हलचल बढ़ गई थी.

नाना लम्बी लम्बी साँसे लेने लगे. नाना बोले. मल्टी ऐसे मुझे चैन नहीं आ रहा, तुम निचे लेटो, मैं ऊपर आ के छोड़ता हों.

नानी उठी, लेती और नाना नानी के पैरों में आ के लुंड दाल के छोड़ने लगे. राज ने हाथ साइड हटा दिए था नाना ने. नाना नानी को छोड़ने लगे. तोह राज ने फिरसे हाथ नाना की कमर पर रख दिए. नाना फिरसे गड़बड़ाए. पर रुके नहीं. राज का हरकत हरकत में आया और नाना के चुत्तड़ पर चलने लगा. नाना मैं में बोले.. राज बीटा मर्दों के इस जगा हाथ नहीं लगते. नाना नानी को छोड़ते हुए एक हाथ से राज के हाथ को हटा गए. नाना कुछ देर में नानी की छूट में ढेर हो गए. नाना नानी के ऊपर hi गिर पड़े और लम्बी लम्बी साँसे लेने लगी.

कुछ देर में नाना नानी के ऊपर से साइड होक लेट गए. और बोले. मल्टी आज बहुत मज़ा आया मुझे. पर मुझमे इतनी पावर आई कहाँ से. याद है, 4 साल पहले भी एक बार किया था, 3-4 धक्कों में hi मैं झाड़ गया था. फिर मेरी हिम्मत नहीं हुई.

नानी-- शर्मा जी बहुत समय के बाद किया है न आपने. इसलिए पावर आ गई है. और आप अभी भी जवान hi तोह हाँ. बूढ़े कहाँ हुए हाँ आप.. नाना नानी के मोह से अपनी और अपने लुंड की तारीफ सुनके खुश हो गए.

नानी नाना से लिपट के राज की और गांड करके लेट गई. राज ने अपने हाथ को नानी के पुरे जिस्म पर चलने शुरू कर दिए. नाना अभी भी रिलैक्स नहीं हुए थे.

राज ने अपने लुंड को आज़ाद किया और नानी की छूट पर पीछे से रगड़ना शुरू कर दिए. नानी अभी झड़ी नहीं थी, नानी बहुत मस्त हो रही थी. वह भी राज के लुंड को एक हाथ से पकड़ के अपनी छूट पर रगड़ने लगी. नाना नानी दोनों बातें भी कर रहे थे.

राज ने नानी की छूट के छेड़ पर लुंड सेट कर दिए और हल्का सा धक्का मार दिए. नानी तोह ऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह करते हुए नाना से चिपक गई.

नाना-- क्या हुआ मल्टी.. '

nani--kk..kuch नहीं शर्मा जी. बस ऐसे hi.. आज मैं भी बहुत खुश हुई हों न इसलिए. आप आज भी पुरे मर्द है न. तोह कुछ समय पहले प्राप्त होने वाले आनंद को याद कर रही थी. ऐसा लगा जैसे मैं अब्ब भी आपके ऊपर बैठी पूरा लुंड लिए हुए उछाल रही हों. नानी ने एक हाथ से नाना का लुंड पकड़ क्र फिरसे सहलाना शुरू कर दिया था.

राज नानी की छूट में 3इंच तक लुंड दाल के थोड़ा थोड़ा नानी को छोड़ने लगा. आज नानी को राज का ऐसा करना बुरा नहीं लग रहा था. आज नानी बरसों बाद नाना का पूरा लुंड लेके खिल उठी thi.raj का लुंड तोह नानी के लिए अब बोनस था.

वियाग्रा के कारण नाना का लुंड फिरसे खड़ा होने लगा तोह नाना हैरान रह गए. आज नाना बड़े खुश थे, आज उनका लुंड उन्हें असली मर्द सबत कर रहा था. ऐसा नाना का मन्ना था.

असली मर्द तोह राज था, जो नानी की छूट में पीछे से थोड़ा सा लुंड डाक के नानी को छोड़ रहा था. राज की स्पीड के साथ साथ नानी की छूट की दीवारें भी खुलती जा रही थी. राज जनता था, नानी को ऐसे समय में hi छोड़ा जा सकता था. वर्ण तोह नानी हमेशा hi उसे रोक दिया करती.

नाना नानी के हाथ को पकडे अपने लुंड पर चलने का मज़े ले रहे थे. दूसरे हाथ से नानी के एक चुके को पकड़ कर मसल रहे थे.

पीछे से राज नानी की छूट में लुंड डाले ढके धक्के पर धक्के मर रहा था. जब भी राज का धक्का बढ़ता तोह बीएड हिलता और आवाज़ करता. नाना पूछते ऐसा क्यों हो रहा है. तोह नानी बोलती.. शर्मा जी ज़रा अपने लुंड पर तो धयान दें न, देखो तोह कैसे हार्ड होक आपको भी हिलने पर मजबूर कर रहा था. नाना बोलते सच कहा तुमने मल्टी.

नानी मन में-- आठ राज बीटा, तुमने दाल hi दिया न अपना लुंड मेरी छूट में. ाःह अब दाल hi दिया है तोह जल्दी से मेरा पानी निकालो, मुझे तेरे नाना को भी खुश करना है.

राज ने जैसे नानी की बात समझ ली. राज धयान से उठा और नानी के कान में घोड़ी बांके नाना के लुंड को चूसने का बोल दिए.. नानी दरी कहीं नाना को पता न चल जाए.

पर फिर वह भी दलेर बनती हुई घोड़ी बांके नाना के लुंड को चूसने लगी. राज नानी के पीछे आया और अपना लुंड नानी की छूट में दाल के नानी को छोड़ने लगा. नानी साथ में खूब हिल भी रही थी. जिससे नाना को कोई शक न रहे.

राज पूरा पूरा लुंड दाल के नानी को छोड़ने लगा.
 
राज ने नाना को नानी के जरिये वियाग्रा खिला कर मज़े नहीं कराया था, नानी की सूखी छूट में भी पानी निकलने के बाद लुंड का सवाद फिरसे दिलवा दिया था. बरसों बाद नाना का लुंड hi नानी की छूट में नहीं उतरा. राज ने भी इस मोके को ग़नीमत समझते हुए नानी की छूट में अपना लुंड घुसाने में देर नहीं लगायी थी.

नाना नानी के मज़े हो गए थे, तो राज के भी मज़े हो गए थे. राज के मज़े hi नहीं हुए थे. नानी राज की बेदम गुलाम बन गई थी. नाना भी नाना की लाइन पे चल निकले थे.

राज हरामियों का बाप था. कुछ ऐसा कर जाता था, जो कोई सोच भी नहीं सकता था. नाना को दो गोलियां खिला कर फिरसे जवान बना दिए. और नानी को अपने साथ रहते हुए नाना से छुड़वा भी दिए. खुद भी अँधेरे का फायदा उठाते हुए नानी को छोड़ने लगा.

राज ने नानी को छोड़ कर नानी की छूट से पानी निकला और फिरसे लेट के सो गया. नाना कुछ नहीं जान पाए. नानी फिर घोड़ी बांके नाना से छोड़ने लगी. नाना थके तोह राज फिरसे नानी को छोड़ने लगा. दूसरी बार झड़ने के बाद नाना थक के सो गए थे. राज फिर सुकून से नानी के साथ लेट के नानी की छूट में पीछे से लुंड घुसा के नानी को छोड़ने लगा. न तोह राज आवाज़ निकल सकता था, और न hi नानी. नाना अपने हिस्से के मज़े लेके सो गए तोह राज नानी को देर तक मज़े करवाता रहा. नानी ने ऐसी चुदाई कभी नहीं की थी. नानी दो घंटों तक दो दो लुंड से चुद के और भी खिल उठी थी.

थक के नानी कपडे पहन के, नाना को भी कपडे पहना के सो गई. राज भी अपने कपडे पहन के सुकून से सो गया.

अगली सुबह नानी hi सबसे पहले उठी और राज को उठा दिए. राज ने फिरसे नानी को पकड़ा तोह नानी राज को ऑंखें दिखते हुए खुद से दूर करने लगी. राज नानी को देख के स्माइल करने लगा. नानी का चेहरा खूब चमक उठा था.

नानी राज को लेके कमरे से निकली. राज को बहार वाले बाथरूम में भेज के खुद अंदर वाले बाथरूम में नहाने चली गई.

नानी आज बड़े मैं से नाहा रही थी. अपने जिस्म को मॉल मॉल के चमका रही थी. आज बरसों बाद नानी एक चुदाई भरी रत बिताने के बाद नाहा रही थी. नानी के होंटो पर मुस्कान थी और नानी के हाथ उनके पुरे शरीर पर बड़े चाओ से चल रहे थे.

नाना भी कुछ देर में उठ गए. उठते hi उन्हें अपने जिस्म में सुरूर के साथ साथ दर्द और थकन का भी एहसास हुआ. नाना कर लुंड के बार फिरसे जोबन पर आया हुआ था. नाना उठ के बैठे और अपने लुंड को मसलते हुए रात की चुदाई बारे सोचने लगे.

अब नाना पिछले कई सालों से अलग टाइप की लाइफ जी रहे थे. इतनी जल्दी तोह वो बदल नहीं सकते थे. नानी ने अपने पति के साथ रहते हुए अपने बच्चू से दूर हो गई थी. पर वह अपने पति के जैसी नहीं थी. उनकी सोच और लफिएस्टिले अलग था. बस पति को नहीं छोड़ सकती थी. इसलिए उसके साथ hi उनके जैसी बांके रहने लगी थी.

नाना रात भर के मज़े के बाद अब्ब भी कुछ सुरूर में थे. पर जो बात रात दिमाग में नहीं आ रही थी. अब्ब आने लगी.

नाना सोचने लगे.. राज के आने के बाद hi उसके अंदर और मल्टी के अंदर इतना चेंज आया है. चेंज आना अच्छी बात है. पर इतना और इतनी स्पीड से चेंज आना कुछ अजीब सी बात है. कैसे उनकी धर्मपत्नी इतनी बोल्ड होक राज के सामने hi चुद गई थी. भले hi राज सो रहा था. पर ऐसी बेशर्मी तोह कभी भी मल्टी के अंदर नहीं थी. और फिर चुदाई समय जैसा अंदाज़ मल्टी ने अपनाया था. वह भी बोहत बड़ा चेंज था. इतना ज़यादा चेंज नानी में आने पर नाना के अंदर जैसे कुछ खटकने सा लगा था.

जैसे विचारों के साथ वह सालों से जीते आये थे. रात की चुदाई और अपनी पत्नी में इतने चेंज पर उनके अंदर कहीं कुछ खटकने लगा था. वो गहरी सोच में डूब गए.

नानी नाहा के कमरे में आई तोह नाना को सोचों में गम देख के वो कुछ घबरा गई. ये तोह शुक्र था, नाना कुछ ज़्यादा hi अपनी सोचों में हम थे. नानी को आते नहीं देखा और न hi नानी की घबराहट जान पाए. नानी बहुत कुछ समझ गई थी. नानी ने फ़ौरन hi अपने भाव पर काबू बनाया और नाना के पास जा बैठी.

नानी-- क्या बात है शर्मा जी, किन सोचों में गम हाँ आप.

नाना ने सर उठा के नानी को देखा, और नानी की आँखों में घोर से देखने लगे. नानी के दिल की धड़कन बढ़ने लगी. पर नानी ने अपने दिल की हालत को अपने चेहरे पर नहीं आने दिए.

नानी शरमाते हुए. ऐसे क्या देख रहे हाँ. नानी को शरमाते देख कर नाना के होंटो पर मुस्कान आ गई. उनकी सोच में पाजिटिविटी आने लगी.

नाना-- कुछ नहीं. बस रात जो हुआ उसके बारे में सोच रहा था. सोच रहा था. ऐसी रात तोह हमने अपनी पूरी ज़िन्दगी नहीं बीते..

नानी-- शर्मा जी आप hi कहते हाँ, समय के साथ साथ सब कुछ बदलता रहता है. इतने सालों से मैंने हमेशा आपके हिसाब से ज़िन्दगी गुज़री है. अब मेरे मैं में भी कुछ अरमान जागे हाँ तोह क्या मैं आपके साथ पुरे नहीं कर सकती.

नाना-- क्यों नहीं मल्टी सब कर सकती हो. पर राज बेटे के सामने, वो भी नए और बदले हुए अंदाज़ में. मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है. इतनी जल्दी इतना किसी में नहीं आता और तुम कोई जवान लड़की भी नहीं हो.

नाना को मैं में कुछ खटकने लगा, नानी समझ गई. अंदर से वह बहुत गहरा रही थी. पर बात को संभालना भी था. नानी ने नाना को अपने लुंड को मसलते देख लिया था. जब वो कमरे में आई थी. नानी को भी थोड़ी थोड़ी ठण्ड लग रही थी. नानी उठी और कमरे को अंदर से लॉक कर दिए और नाना के पैरों में आ के बैठ गई. नाना नानी को घोर से देख रहे थे.

नानी ने नाना के लुंड को पकड़ा और मसलने लगी. नाना ने नानी का हाथ पकड़ लिया.

नाना-- यही वो चेंज है मल्टी, जो कभी भी तुममे नहीं आया था. राज के आने के बाद hi ये सब चेंज आया है तुममे. वजा जान सकता हों मल्टी. नाना नानी की आँखों में देखते हुए बोले. तो नानी के लिए अपनी हालत पर कण्ट्रोल बना मुश्किल होने लगा.
 
नानी-- शर्मा जी आप ऐसे देख रहे हाँ मुझे. नानी बड़ी मुश्किल से अपनी हालत पे काबू पाते हुए बोली.

नाना-- नहीं जनता ऐसे क्यों देख रहा हों में तुम्हे मल्टी.

नानी एक औरत थी और औरत के पास मर्दों को राह पर लाने के अपने hi गुर हुआ करते हाँ. नानी ने भी एक लम्बी सांस ली और दुखी होक रोने जैसी सूरत बना गई.

नाना नानी को रट देख के परेशान हो गए.

नाना-- ये क्या मल्टी तुम रोने लगी.

नानी-- रोऊँ नहीं तो और क्या करूँ. एक तो बरसों बाद कोई पोता मिला है. बरसों बाद अपने पति का प्यार मिला है. बरसों बाद दर्द काम हुए हाँ, कुछ खुशियां मिली हाँ. तोह आप ऐसी बातें कर रहे हाँ. आप अजीब सी नज़रों से देख रहे हाँ.

नानी उठी और साइड में बीएड पर बेथ दूसरी और मोह कर लिए. वियाग्रा के कारण नाना का लुंड नहीं बैठा, वो खड़ा hi रहा. नाना को नानी के दुःख पर दुःख होने लगा. वो जो शक कर रहे थे. जो खटक उनके अंदर कहीं हो रही थी, वो जाती रही. नाना ने नानी को अपनी बहन में भर लिया और बड़े प्यार से बोले.

नाना-- मेने ये कब कहा तुम ने कुछ गलत किया है. नानी खुद को नाना की पकड़ से आज़ाद करने लगी. और नानी अपनी रूठी नानी को मानाने लगे. खड़े लुंड के साथ उनके अंदर अभी भी तरंग बाकी थी. नाना नानी को बीएड पर लिया क्र ऊपर टूट पड़े.

नानी नाना को खुद से दूर हटाने लगी.. पर नाना नहीं हेट. नाना अपनी पत्नी को खुश करने में लग गए. उनकी नाराज़गी दूर करने में लग गए. खुद भी मज़े में थे, अपनी पत्नी को भी मज़े देने लगी. नानी औरतों वाले सरे अंदाज़ अख्तियार करते हुए नाना के साथ लगी थी. नाना अपनी मर्ज़ी से नानी के बूढ़े शरीर के साथ खेलने लगे और नानी एक नाराज़ और नखरे वाली पत्नी बन कर नाना को इंकार करते हुए नाना को अपने जिस्म के साथ खेलने दे रही थी. अंदर से वो खुश थी तोह बहार से नाना से नाराज़गी का इज़हार करने लगी.

नाना फिरसे नानी को नानी को नंगा करके छोड़ने लगे और नानी फिरसे नाना का लुंड अपनी छूट में लेके मस्त होने लगी. नाना को कुछ अजीब भी लगा. रात नानी की छूट टाइट थी तो अब खुली हुई. नानी की छूट में नाना का लुंड बिना कहीं ज़यादा छूट की दीवारों से रगड़ खाये जा रहा था. नाना ये नहीं सोच सके.. ज़रूर रत राज ने उनकी पत्नी को छोड़ के उनकी छूट खुली कर दी है. इतनी खुली करदी है. अब उनका लुंड भी बिना रोक टोक के बड़े आराम से अंदर जा रहा था.

नानी ने भी अपनी छूट को राज के मोटा लम्बे लुंड के हिसाब से जान लिया था. एक बार वो फिरसे दरी, कहीं शर्मा जी को शक न पद जाये. पर वो अपनी नाराज़गी बरक़रार रखते हुए नाना से छोड़ने लगी. जब तक नाना नानी को छोड़ते रहे. नानी मज़े में होते हुए भी अपने चेहरे के भाव से नाना के लिए नाराज़गी hi दिखती रही.

नाना नानी को मानते हुए छोड़ने लगे. पर नानी ने भी ठान लिया था. आज ऐसे hi रहेगी. नाना नानी की छूट में अपने लुंड को खली करके साइड में गिरे हांपने लगे तोह नानी उठ के एक कपडे से अपनी छूट साफ़ करने लगी.

नानी कपडे पहनने लगी तो नाना ने उनका हाथ पकड़ लिया.

नाना- अभी भी मुझसे नाराज़ हो मल्टी.

नानी-- नहीं मैं क्यों आपसे नाराज़ होने लगी. मैं आपसे नाराज़ होक कहाँ जाऊँगी. मेरा तो अब आपके शिव कोई है भी नहीं. नानी नाराज़गी वाले भाव रखते हुए भी नाराज़ नहीं है, बोलने लगी.

नाना हसने लगे. नानी को खेंच कर अपने ऊपर गिरा लिया.

नानी-- क्यों अपनी और मेरी हड्डियां तोड़ने का इरादा है. ऐसी खेंचा तानी अब इस उम्र में सही नहीं है शर्मा जी.

नाना-- तो फिर अपना मूड सही करो.

नानी-- मेरा मूड ठीक है शर्मा जी.

नाना-- मुझसे बेटर कौन समझ सकता है मेरी पत्नी के मूड को. मान जाओ na.pata नहीं क्यों मैं वो सब सोच गया था. अब ऐसा कुछ नहीं है मेरे मैं में. और तुम जानती मैं झूट नहीं बोलता.

नानी नाना की आँखों में देखने लगी.

नानी-- शर्मा जी समय ने हमेशा बदलाव लाया है हमारी ज़िन्दगी में.

नाना-- हाँ ये बात तो मैंने भी कई बात तुमने की है.

नानी-- तो क्या अब समय के बदलाव पर आप फिरसे कोई गलत फैसला लेंगे. फिरसे कोई--

नाना-- नहीं नहीं अब मैं ऐसा कुछ नहीं करना चाहता मल्टी. अब खोने के लिए मेरे पास है hi क्या. एक तुम hi तो हो मेरे पास. तुम्हे नहीं खो सकता. तुमने मेरे लिए बहुत कुछ झेला है. मेरे लिए बच्चू से भी दूर हो गई हो तुम..

नानी-- शर्मा जी, आपको नहीं लगता अब हमें भी खुद को बदल देना चाहिए. इस दुन्या से जाने से पहले हम भी अपने बच्चू के साथ कुछ दिन बिता सकें.

नाना लम्बी सांस लेने लगे. ऐसी छह तोह हमेशा से मेरे दिल में भी है.

नानी-- शर्मा जी आपको नहीं लगता अब आपको भी अपने विचारों में बदलाव लाना चाहिए.

नाना-- क्या मतलब कैसे विचार..

नानी-- आराधना बेटी के कारण आपके अंदर जो आ गए थे. उन्ही विचारो के कारण hi तोह सब हमसे दूर हुए हाँ.

नाना-- मल्टी ये कैसे बात कर रही हो तुम. पहले तोह कभी ये बात तुमने नहीं बोली. अब क्यों ऐसा बोलने लगी हो.

नानी-- शर्मा जी, अगर बच्चे हमारे जैसे नहीं बन सके, तोह हमें उनके जैसा बन जाना चाहिए..

नाना-- ये बड़ी गलत और घट्टिया बात कही तुमने मल्टी. आज कल के बच्चे जैसी सोच रखते हाँ, जैसी ज़िन्दगी वह गुज़र रहे हाँ. मैं वो सब नहीं देख सकता. जिसे मेरे पास रहना है, उसे मेरे जैसा बनना होगा.

नानी.. शर्मा जी आप भूल गए हाँ, कल रात हमने किसी चुदाई की थी. आप ने भी आज के ज़माने के हिसाब से मेरे साथ सब किया था. रात हम दोनों ने ऐसी बिताई है, पूरी ज़िन्दगी नहीं बीते. अब आप कह रहे हाँ, आप अभी भी पहले जैसे रहेंगे. आपने ये भी नहीं जाना, आपके अंदर इतनी पावर कैसे आ गई. सालों से आपका घोडा खड़ा नहीं हुआ, कैसे रात से अबतक रेस में बिना रुके दौड़ रहा है.

नाना नानी की इस बात पर हैरान रह गए.

नाना-- इस बात का क्या मतलब है मल्टी. नाना की आवाज़ में कुछ सख्ती ा गई.

नानी नाना की आँखों में देखते हुए बोली. मुझे लगता है हमें राज बेटे को इस घर से निकल देना चाहिए. नानी ने ऐसे लहजे में कहा, नाना देख के दांग रह गए.

नाना-- क्या मलतब.. राज का इस मामले से कैसा सम्बन्ध.

नानी-- राज ने hi मुझे सेक्स पावर की टेबलेट्स ला के दी थी. वहीँ मैंने दूध में मिला के आपको पिलाई हाँ शर्मा दी. तभी तोह आपके अंदर इतनी पावर आई है. तभी तोह आप रात से मुझे छोड़ रहे हाँ. अब भी आपके लुंड की अकड़न जा नहीं रही है.

नाना-- ये क्या बकवास कर रही हो तुम मल्टी. राज ऐसा कैसे कर सकता है. और तुमने उसे कुछ भी नहीं कहा.

नानी-- वही तोह कह रही हों राज की हिम्मत भी कैसे हुई ऐसा सब करने की शर्मा जी. क्या हुआ, जो मैं बरसों से पियासी हों. क्या हुआ, जो मैं अपने पति के बनाये असूलों के कारण अपने बच्चू से दूर हों. क्या फ़र्क़ पड़ता है शर्मा जी अगर उन्हें फिरसे देखे बिना मैं इस दुन्या से चली जाऊं. क्या फर्क पड़ता है शर्मा जी, अगर मुझे बरसों बाद भी गुज़री एक रात और नसीब नहीं होती है तोह. राज को घर से निकल hi देना चाहिए शर्मा जी. वह हमें भी बदल रहा है. वह चाहता है, कुछ हम बदलें कुछ वो हमारे बच्चू को बदल देगा. इस ज़माने में बच्चे तोह पुरे बदल नहीं सकते. हम न बदले तोह वह कभी हमसे मिलने नहीं आएंगे. हम उनसे मिले बिना hi इस दुन्या से चले जाएंगे. क्या फ़र्क़ पड़ता है शर्मा.. ख़ुशी ख़ुशी अपने बच्चू से मिले बिना इस दुन्या से चले जाएंगे. फिरसे कभी गुज़री रात के जैसी छह अपने दिल में नहीं पालूंगी. राज को घर से निकल दूंगी मैं शर्मा जी. राज बहुत घट्टिया लड़का है. हम दोनों से भूल हुई शर्मा जी. राज भी आज के ज़माने का लड़का है. हम दोनों को इस ज़माने के हिसाब से थोड़ी सी खुशियां देना चाहता है. थोड़ा सा बदलना चाहता है. मुझे आपके साथ आजके ज़माने के हिसाब से सब करने को बोलता है. बहुत hi घट्टिया लड़का है शर्मा जी. बोहत hi घट्टिया लड़का..

नाना तोह नानी के आंसू देख रहे थे. नानी की बातें सुन रहे थे. नानी ने कभी ऐसी और इतनी बातें नहीं की थी. कभी भी ऐसा अंदाज़ नहीं अपनाया था. इतने दर्द में नाना ने नानी को पहले कभी नहीं देखा था. नानी के होंटो से कितने ज़हर में बुझे शब्द निकले थे. सुनके को नाना को अपने कानो से धुंआ निकलता हुआ महसूस होने लगा.

नाना के अंदर बरसों बाद सही मानो में हलचल मची थी. ऐसी हलचल जो बहुत कुछ बदल दिया करती थी. नाना खुद में जो कुछ भी थे. अपने बाछहु से जितने भी नाराज़ थे. अपने बच्चू के लाइफस्टाइल से जितने भी तंग थे. पर अपनी पत्नी के लिए कभी नहीं कठोर बन सकते थे. उनकी पत्नी ने पति धरम निभाते हुए क्या कुछ नहीं अपने दिल पर बीता था.

नाना के अंदर जैसे तूफ़ान से आने लगे थे.

वर्मा हाउस में सब डाइनिंग टेबल पर बैठे हुए सिमरन की hi बातें कर रहे थे. सिमरन की मांग भरी जा चुकी थी. ये जान कर सब बहुत खुश थे. सिमरन के पापा, चाचा, भाई और भचा के बेटों समेत सब hi खुश थे. सब को ज़यादा ख़ुशी इस बात की थी. राज का ज़िक्र राकेश वर्मा ने बड़े अच्छे शब्दों में किया था. सब को सिमरन के लिए राज बहुत पसंद आ गया था.

सिमरन के दोनों भाई स्टडी पूरी करके बिज़नेस में अपने पापा और चाचा का हाथ बता रहे थे. बड़े की सगाई हो चुकी थी. शादी को कुछ समय था. छोटे के लिए लड़की देखि जा रही थी. सिमरन से छोटी सान्वी(21) थी, उससे छोटी मानवी(19) थी.

सब खुशगवार माहौल में बैठे हुए सिमरन का वेट कर रहे थे. सिमरन के आने से पहले कोई भी ब्रेकफास्ट नहीं करता था. ये सिमरन के लिए प्यार था.

सिमरन कोठी के सेकंड फ्लोर पर बने एक रूम में रहती थी. डाइनिंग रूम में hi स्टैर्स भी थी. कुछ देर में सिमरन स्टैर्स से उतरती हुई दिखाई दी. सब उसे देख के खुश हो गए. जैसे hi सिमरन सब के पास पोहंची, सब उसे देख के शॉकेड हो गए..

cdb34ea24847e679cb7b607a776ecb7f.jpg


सिमरन-- गुड मॉर्निंग एवरीबॉडी .. सिमरन बड़े प्यार से बोली. इन्तहा की मिठास और प्यार अपने लहजे में लाते हुए बोली.. सिमरन को गम का रिप्लाई कहीं से भी नहीं आया. सब सिमरन के माथे पर घोर से देखने लगे.

सिमरन--- वह क्या है न कल मेरी शादी हो गई थी. अब मैं सिंगल नहीं रही हों न.

ezgif-com-gif-maker.webp


अब मैं राज की पत्नी बन चुकी हों. राज ने बीच सड़क पर, पुरे शहर के सामने अपने खून से मेरी मांग भरी है न. तोह इतनी डेरिंग के साथ, इतने प्यार के साथ राज मेरी मांग भरे, और मैं सबके सामने आप सबके सामने सूनी मांग के साथ आओ. ये तोह फिर बुरी बात है न. मेरा धरम मुझे इस बात की इजाज़त नहीं देता. मुझे मिले संस्कार भी मुझे इस बात की इजाज़त नहीं देते. अब से हमेशा मेरी मांग में सिन्दूर रहेगा.

सिमरन बड़े प्यार से, बड़े ठन्डे लहजे में बोली तोह सबकी बैकबोन में सनसनाहट सी होने लगी. सब सिमरन को खुआफजादा नज़रों से देखने लगे. सान्वी और मानवी जो अपनी दादी के दोनों साइड बैठी हुई थी. घबरा कर दादी के एक एक हाथ को थम गई.

सिमरन सुकून से अपनी चेयर पर जा बैठी और ब्रेकफास्ट करने लगी. सब उसे देखने लगे.

सिमरन-- आप सब ब्रेकफास्ट नहीं करेंगे क्या. सिमरन होंटो पर मुस्कान लाते हुए बोली.
 
राकेश verma..73--Simran दाद्दु

लक्ष्मी verma.72--Simran दादी

राकेश वर्मा के दो बेटे हाँ एक बेटी.

1--किशन verma..49--Simran पापा

अमीता वर्मा..48

हरीश वर्मा..26

रवि वर्मा....24

सिमरन वर्मा..23

सान्वी वर्मा..21

मानवी वर्मा...19

2--कुणाल verma...48--Simran चाचा

दीप्ति वर्मा..47

कारन वर्मा..24

संजय वर्मा.23

अन्य वर्मा..21

ेशा वर्मा...20

इशिता वर्मा.18

3--अरुणिता kumar..45---Simran बुआ

नरेश कुमार...47

मान्य कुमार.22

सूर्य कुमार..20

अमीता-- मेरी बेटी कभी नहीं सुधर सकती. अमीता आंसू बहते हुए बोली.

किशन-- ऐसा मत कहो. पापा ने राज को परखा है. ज़रूर राज हमारी बेटी सिमरन को बदल देगा.

अमीता-- आप भूल रहे हाँ किशन, सिमरन जितनी ज़िद्दी और लड़कों से एलर्जिक है, शादी के नाम पर भगति है. उतनी hi सिमरन खतरनाक भी है. मुझे दर है कहीं राज का कुछ कर न दे.

किशन-- हाँ ये बात तो है, पर जाने क्यों मेरा दिल बोल रहा है, राज hi वो लड़का है जो सिमरन को सुधर सकता है. जो हम नहीं कर पाए, राज कर गुज़रेगा. राज के जैसी डेरिंग भी कहीं नहीं देखि. और फिर पापा को राज ने अपना सच बता कर सबत भी कर दिए है, राज अनमोल है. वर्ण तो सब खुद को छुपाते हाँ. अमीता देखना राज सिमरन को अपना बना कर hi दम लेगा.

अमीता-- हाँ और राज को ऐसा करना भी पड़ेगा. अब तोह राज ने सिमरन की सबके सामने मांग भर कर सिमरन को अपनी पत्नी भी बना लिया है. मैं बता नहीं सकती किशन मैं कितनी खुश हों.

किशन-- ख़ुशी तोह मुझे भी बहुत मिली है अमीता. सिमरन अपनी ज़िन्दगी में कभी ऐसा समय नहीं आने देती. पता नहीं क्यों उसे शादी के नाम से hi छिड़ है.

सिमरन के मम्मी पापा बैडरूम में बैठे बातें कर रहे थे. दोनों टेंशन में भी थे और एक आस भी उनको मिल गयी थी.

वही सिमरन आज कई दिनों बाद यूनिवर्सिटी में थी. वहां उसके पोहचने से पहले hi उसके बारे में खूब बातें हो चुकी थी, और हो भी रही थी. सब जान गए थे. किसी लड़के ने बीच सड़क पर दो बार सिमरन को किश किया है और खून से सिमरन की मांग भी भरी है.

बहुत से लड़के सिमरन को पाने के लिए बेचैन थे. सिमरन जिस टाइप की लड़की थी. किसी में हिम्मत नहीं हुई थी कभी सिमरन से उलझने की. कुछ पैसे वाले थे, उनकी भी दाल नहीं गाल पायी थी सिमरन के आगे. कुछ आवारा किसम के लड़के थे, कइयों को सिमरन ने खुद से मज़ा चखा दिए तोह कुछ को पावर से अपने पैरों में ले आयी थी.

अब भी बहुत से बिगड़े हुए सिमरन की छह में थे. पर उनकी छह कभी पूरी नहीं हो सकती थी. सिमरन अब राज की हो चुकी थी. कुछ तोह इस बात पर बहुत हर्ट भी हुए थे. जो उम्मीद पे जी रहे थे. शायद स्टडी के बाद सिमरन में चेंज आये और सिमरन उनकी हो जाए. पर ऐसे के खवाब राज ने चकना चूर कर दिए थे.

सिमरन ऊनि पोहंची तोह उसकी फ्रेंड्स उसे देख के उसकी ऑर्डर भागी. सिमरन की मांग में सिन्दूर देख कर सब हैरान गई. देर नहीं लगी और पूरी ऊनि में ये बात फेल गई, सिमरन ने कल वाले इंसिडेंट के बाद खुद को बदल दिए है. अब सिमरन एक पत्नी के रूप में दिखा करेगी.

पर जो सिमरन का ये रूप देख चुके थे. सिमरन को अच्छे से जानते थे. वो जो सिमरन को पाने की छह रखते थे. समझ गए सिमरन अपने सबसे खतरनाक रूप में आ चुकी है.

सिमरन के कई रूप थे. चुलबुली नटखट भी थी, फ्रेंड्स कॉलेज, ऊनि में खूब मस्ती भी किया करती थी. परिवार में, रिश्तेदारों में खूब हंगामे भी किया करती थी. ज़िद्दी भी इन्तहा की थी, कोमल जैसे बदन की मालिक थी तोह चट्टानों सी सख्ती वाले इरादों की मालिक भी थी. लड़ना भी जानती और बात करना भी. लात, मुक्को और बातों में किसी को भी हरा दिया करती थी.

कई रूप थे सिमरन के, पर ये वाला रूप सिमरन का सबसे खतरनाक रूप था. इस रूप में सिमरन पहले भी कई बार आ चुकी थी. बहुत कुछ इस रूप के कारण कइयों का बेडा ग़र्क़ हो चूका था.

अब सिमरन इसी रूप के साथ राज को हैंडल करने वाली थी. सिमरन की फ्रेंड्स भी सिमरन को इस रूप में देख कर अंदर hi अंदर राज के लिए दुआ मांग रही थी.

नानी नाना को अपना दर्द सुना कर कपडे पहन के कमरे से निकल पड़ी थी. नानी ने दाना को अपना दर्द hi नहीं बताया था. नानी ने चालाकी से काम भी लिया था. नानी ऐसा न करती तोह नाना शक में भी पद सकते थे. नानी इतनी जल्दी इतनी बोल्ड बांके राज के सामने नाना से चुद गई थी. राज ने नानी को नाना के लिए सेक्स पावर की टेबलेट्स भी दी थी. ये बात भी नाना को ज़्यादा खटक सकती थी.

नानी राज के कमरे में पोहंची और राज को सब बता दिए. राज ने नानी को किश करि, चुके दबाये और बोलै. दादी मुझे कोई चिंता नहीं है. देखना सब ठीक हो जायेगा.

नानी-- पर मेरा दिल बड़ा भगरा रहा है राज बीटा. तेरे दाद्दु पिछले कुछ सैलून से बड़े शक्ति किसम के इंसान बन के रह गए हाँ. तुम अबसे धयान से रहना.

राज-- दादी कहा न आप चिंता न करें.. में सब देख लूंगा.

नाश्ते के बाद नाना नानी फिरसे कमरे में थे.

नाना-- मल्टी सही कहा तुमने समय के साथ बदलना भी पड़ता है. हम बूढ़े हो जाते हाँ, और समय के साथ सही से चल नहीं पते. हमारे बचे हमसे ज़्यादा फ़ास्ट हाँ, वो समय के साथ साथ चलते रहे और हम पीछे रह गए. हम भी समय के साथ चलते तो हमारे बच्चे हमारे साथ होते. नाना की आवाज़ में बी दर्द भर आया था.

नानी-- शर्मा जी ये ज़रूरी भी है.

नाना-- जान गया है मल्टी. तुम्हारी आज की बातों से मुझे उन बातों की भी समझ आई गई है. जिनपे में पहले कभी धयान नहीं दे पाया था. मल्टी रात से जो बदलाव तुम खुद में लाइ हो. मुझे भी कही कही बदल दिए है तुमने. राज बेटे ने जो भी किया हमारे प्यार के लिए किया,.. हमने उसे अपना माना तोह उसने भी हमारा अपना बांके हमारे अकेलेपन को समझा और उसे ख़तम किया. हम दोनों बरसों बाद फिरसे एक हो गए. मल्टी कुछ चीजे इंसान के अंदर से कभी नहीं जाती. शमशान पोहंचा कर उसकी जान छोड़ती हाँ. मल्टी तुम्हारे लिए मैं खुद को बदलने के लिए त्यार हों. में भी अपने बच्चू के लिए तड़प रहा है. मैं भी फिरसे उनके साथ के लिए कुछ भी कर जाऊँगा. खुद को बदल भी दूंगा. तुम चाहती हो न मैं और तुम आज के हिसाब से जियें तो ठीक है मल्टी, मई इस बात पर तुम्हारे सतह हों. राज आज के ज़माने का है. उसने वो कुछ कर दिए है, जो मैं कभी सहन नहीं कर सकता. फिर भी मैंने उसे अभी तक कुछ नहीं कहा. मैं पहले वाला होता तोह इस बात पर खूब सोचता. एक लड़का होक, अनजान होक क्यों वो मुझे सेक्स दोसे दे रहा है. पर नहीं, अब में नहीं सोचूंगा, पूछूंगा भी नहीं.

मैं खुद को सारा बदलने के लिए त्यार हों मल्टी. पर मैं आज भी वही हों, जो आराधना के समय था. आज भी मेरा सर झुका तोह मैं खुद में इतनी हिम्मत नहीं पता कह फिरसे सर उठा के समाज की नजरो का सामना कर सकें. तुम कुछ भी करो. राज कुछ भी करे, मैं तुम दोनों के साथ. बस मुझे समाज के सामने झुकना न पड़े. कोई भी ऐसी बात न कर जाए, जिसका जवाब में न दे पाऊँ. आराधना के जैसा फिरसे वही सब मैं नहीं देखना चाहता..

नाना इतना बोल कर कमरे से निकल पड़े. और नानी टेंशन में आ गई. नाना नानी को झटका दे गए थे. नानी ने तोह सोचा था, नाना इस मामले में भी बदल जाएंगे. पर नाना वही के वही थे. आज भी अपणु से ज़यादा समाज के बारे में सोचते थे.
 
नानी ने ये बात भी राज को बता दी.

नानी-- राज बीटा मुझे नहीं लगता तेरे दाद्दु कभी पुरे बदल सकेंगे. वो आज भी वहीँ हाँ. अब तोह मुझे ये भी दर लगने लगा है, कभी किसी गलती से वो हमें कुछ गलत करते न देख लें. फिर तो सब बिगड़ के रह जायेगा.

राज ने दूर बंद करके नानी की शलवार खोल के छूट चटनी शुरू कर दी.

नानी-- राज बीटा यही वो बात है, जो सबसे बुरी है. दो दिन से कितना ये सब हो रहा है. डर्टी हों कही कुछ गड़बड़ न हो जाए. राज ने अपने लुंड को निकला और नानी की छूट पे सेट करते हुए धक्का मार दिए. रात भर से नानी की छूट खुलती hi आ रही थी. अब राज का लुंड भी खड़े खड़े hi नानी की छूट में घुसता चला गया. राज नानी को छोड़ते हुए नानी से बोलै. दादी आप बताएं आप बदल गई हाँ न. अब आपको मज़ा आ रहा है न. मैं ये सब गलत तो नहीं कर रहा न.

नानी की छूट में राज का विशाल लुंड फस फस के अंदर बहार हो रहा था. नानी मस्त होते हुए बोली. राज बीटा मैं तेरे दाद्दु के जैसी कभी नहीं थी. मुझमे तोह हमेशा से ज़िन्दगी जीने की छह थी. और अब भी है. पर तेरे दाद्दु से दर लगने लगा है मुझे.

राज-- मैं हों न दादी, मैं दाद्दु को पूरा बदल दूंगा. देखना जल्द hi सब मिलके रहेंगे और दाद्दु को फिर कभी किसी से कोई गिला नहीं रहेगा. दाद्दु किसी को गलत सलत लेक्चर बी नहीं देंगे.

नानी- राज बीटा तेरी बातों से बड़ी आस मिलती है. बहार नाना बच्चू को पढ़ा रहे था नानी अंदर राज से चुद रही थी. राज नाना के मंद में खटक गया था. पर राज उनकी पत्नी को छोड़ता भी है. ऐसी खटक नहीं हुई थी उनके मंद में. इस मामले में नाना चिंतित नहीं थे.

राज नानी को छोड़ के उनकी छूट में अपना लुंड खली कर गया. नानी भी सुबह सुबह दूसरी बार चुद के मज़े में थी. रजा के लुंड जैसा मज़ा शर्मा जी के लुंड में कहाँ. नानी कपडे बदल कर बहार चली गई.

राज ने फोन निकला और घर फोन कर दिए. दीपिका ने कॉल पिक की.

दीपिका-- कैसे हो तुम मेरे भाई.

राज-- कुछ मज़ा नहीं आ रहा दीदी.. राज आठ भरते हुए बोलै.

दीपिका परेशान होक-- क्या मतलब भाई..

रजा-- मतलब ये कह मुझे हमेशा हरामी साला कुत्ता वाले नाम पसंद थे, आपके मोह से भाई मुझे अच्छा नहीं लगता. अरे इतना मीठा खाने की आदत जो नहीं है न मुझे.

दीपिका-- हाहाहा आदत तो हमें भी तुझे भाई बोलने की नहीं है. वो क्या है न किसी से अपने मतलब का कोई काम लेना हो न तो उससे मीठा hi बोलना पड़ता है. एक बार तुम माँ को नाना, नानी और सबसे मिलवा दो. सबसे माफ़ी भी दिलवा do.fir देखना तुम मेरे लिए, हम चरों बहने के लिए हरामी साले कुत्ते hi रहोगे. दीपिका हस्ते हुए बोली. तोह उसके हसने की आवाज़ पर सब वही आ गई.

समझ गए राज है फोन पे.

अंजलि-- ला फोन मुझे दे. मुझे बात करने दे भाई से..

दीपिका-- भाई .. हाहाहा.. भाई.. दीदी भाई बोलता है, मुझे भाई शब्द पर मज़ा नहीं आता. मुझे हरामी, साला कुत्ता hi कहा करो.

सब हसने लगी. अंजलि ने फोन लिया और बड़े मीठे अंदाज में बोली.. कैसे हो भाई.

राज-- हाय तेरी ऐसी ऐडा पे मैं मर न जाओ कहीं ऐ ज़ालिम लड़की.

अंजलि-- हाहाहा राज तुम बहुत रोमांटिक नहीं हो रहे.

राज-- दीदी आपने hi तो मुझे रोमांटिक बनने पे मजबूर किया है. वर्ण मुझे कब यकीं था, कभी आपकी छूट और गांड भी मुझे आपकी मर्ज़ी से मिलेगी.

सब है पड़ी. दीपिका ने लॉउडर ों कर दिए था. अंजलि घबरा के चरों और देखते हुए अपने होंटो पे जीब फेरने लगी.

भावना-- दीदी आपने हमारे सामने hi तो भाई से ऐसे बात करि थी. अब क्यों शर्माने लगी.

राज-- भावना दीदी मुझे लगता है, अंजलि दीदी अपनी बात से बदल जाएँगी. हाय फिर मेरा क्या होगा.

आरती-- हेहेहे तुम किसी और की में घुस जाना..

राज-- आरती दीदी आपको बड़ी हंसी आ रही है. मत भूलें आप भी अभी तक सील पैक hi हाँ. '

आरती ग़ुस्से से-- हरामी साले कुत्ते मेरे बारे में सोचना भी मत समझे. मैं सील पैक थी और शादी तक सील पैक hi रहूंगी. दीदी ने तुझे बोलै है तोह तू दीदी की एक क्या दोनों सील खोल सकता है.

अंजलि दी आरती को धप्प मार दी. आरती फिरसे हसने लगी.

आराधना आई उसके साथ बात हुई. फिर राज बोलै.

राज-- आप सब के लिए एक खबर है, अब पता है, वो खबर आप सब के लिए अच्छी है या बुरी नहीं जनता..

सब परेशान हो गई.

आराधना-- देख राज बीटा, तू हम सब से दूर है तो, कोई बुरी खबर मत सुनना. मई पहले से hi बड़े दुःख में हों. तेरे दूरी भी मुझसे सहन नहीं हो रही. तू कब लौट के आएगा मेरे बेटे. आराधना दरी भी और दुखी भी हो गई.

दीपिका-- चल हरामी अब खबर सुना. अच्छी खबर तो होगी नहीं तेरे पास. चल बुरी hi सुना दे...

राज-- आअह्ह्ह दीदी क्या बताओं. आकाश से उत्तरी हुई कोई अप्सरा है वो. इतनी सुन्दर, हिरणी की जैसी ऑंखें हाँ उसकी, मोर के जैसी चाल है उसकी.

दीपिका ग़ुस्से से-- हरामी ये तू हमें कोई खबर सुना रहा है, या किसी फिल्म की शूटिंग का हाल बता रहा है.

अंजलि-- सुनने दे न..

राज-- जब चलती है तोह कसम से उसके क़दमों की थक थक सीधे मेरे दिल की धड़कनो में हलचल पैदा कर देती है. जब वो ग़ुस्से से देखती है न तो मन करता है, उसे दहकता hi रहूं.

राधना बड़े शोक से-- कोण है वह राज बीटा..

राज-- अरे आप सब को बताया तो था.

सब-- क्याआआआ.. कब.

राज-- अरे सिमरन की बात कर रहा हों.

सब-- ओह्ह्ह हम सब उसे भूल hi गए थे. हमें क्या मालूम तू सच बोल रहा है. वो तुझे फिरसे भी कहीं मिलेगी.

राज-- सुनो माँ, कल मैंने उसे आपकी बहु बना दिए है.

आराधना- क्याआआ.. ये तुम क्या बोल रहे हो.

दीपिका-- माँ राज पक्का हरामी है. कह रहा है तोह बना ह लिया होगा सिमरन को हमारी भाभी.

राज-- सही बोली हाँ आप मेरी सील पैक छूट वाली दीदी.

दीपिका-- ज़यादा बकवास न कर. माँ बैठी है.

राज-- क्यों आपके सामने hi तोह माँ की छूट में थोड़ा सा लुंड डाला था भूल गई हाँ क्या. पूछ लो माँ से, अभी भी मेरे लुंड की हीट माँ अपनी छूट पर महसूस करती हाँ क नै.

आराधना ग़बत के इधर उधर देखने लगी.

अंजलि-- पूरी बात बता राज मेरे भाई.

राज-- कल मैं बाइक पर जा रहा था और

दीपिका-- तेरे पास बाइक कहाँ से आयी.. दीपिका तेज़ भाव के साथ बोली..

राज-- वो.. हाहाहा दिल्ली पोहचते hi एक hi दिन में एक कोठी पर तीन तीन लड़कियों को छोड़ा था. वहीँ मुझे दिखी तोह उठा ली..

दीपिका-- मुझे भी कुछ ऐसा hi लगा था. सच में hi तोह बहुत बड़ा हरामी है साले कुत्ते. वहां तू नाना नानी को मानाने गया है, सबको मानाने गया है, या किसी को छोड़ने. साले हरामी कुत्ते तू ज़रूर सब बिगड़ कर रहेगा.

आराधना टेंशन में आ गई. अंजलि आरती और भावना भी टेंशन में आ गई.

दीपिका सब को देखने लगी. देखती रही, वहां राज भी सबको नोटिस कर रहा था. वो कुछ नहीं बोलै.. दीपिका कुछ देर बाद ज़ोर ज़ोर से हसने लगी.

सब उसे देख के हैरान हुए तो दीपिका बोली.

दीपिका-- अरे राज हरामियों का हरामी है माँ, डीडीओ.. राज के लिए इस दुन्या का कोई काम ऐसा है hi नहीं जो वो न कर सकता हो. हाँ राज बांके करेगा तोह खुद की गांड मरवा बेतेहगा. हरामी बांके कोई भी काम करेगा तोह दुन्या का कोई भी हरामी हमारे हरामी से बड़ा हरामी नहीं है.

राज-- हाहाहाःहाहा अब्ब लगी हो तुम मेरी दीदी दीपिका डार्लिंग.. कसम से मैं वहां होता तो आपकी छूट चाट चाट के लाल hi नहीं करता. इतनी ज़ोर जोज़ से अपना लुंड रगड़ के आपकी छूट का पानी निकलता, कह पिछले सरे रिकॉर्ड टूट जाते.

दीपिका-- बस बस ज़्यादा उड़ने की जरूरत नहीं है हरमे साले.. सुन अब और बता न भाभी के बारे में.

राज-- कल मैं बाइक पे जा रहा था, तो सिमरन जो मेरे लिए दिल में खेद रखे हुए थे. पीछे से आई और मुझे थोक दिए..

सब-- kyaaaaaaaaaaaa.. तुम ठीक तो हो न.. सब चिंता में आ गए.

राज-- हाँ ठीक हों तो आप सब से बात कर रहा हों. फ़ौरन hi मुझे एहसास भी हो गया था. तेज़ी से साइड हुआ और बच गया. बाइक को थोड़ा सा नुकसान हुआ था. अब बाइक भी ठीक है और मैं भी.

आराधना ने तो अपने दिल पे हाथ hi रख दिए था. राज बीटा तू लौट आ. मेरे लिए खुद को खतरे में मत दाल मुझे सिरमन सही लड़की नहीं लगती.

भावना-- हाँ भाई सिरमन के शिव कोई देख लेंगे. तेरे लिए इस दुन्या की सबसे सुन्दर लड़की हम ढूंढ निकलेंगी, पर प्ल्ज़ तुम खुद को खतरे में मत डालना.

अंजलि-- भाई मेरे लिए और रिश्ते आ जायेंगे. तुम प्ल्ज़ लौट आओ.

दीपिका-- राज मेरे भाई. तू आगे बता. मुझे नहीं लगता भाभी तुमसे बेटर हो सकती है. जितना मैंने तुझे नोट किया है किसी ने नहीं किया. तुम एक महा हरामी हो भाई.

आराधना- दीपिका बेटी अब तो ऐसे मत बोल सुना नहीं तेरे भाई को कैसा खतरा है दिल्ली में.

राज---- अरे माँ आप भूल रही है. जब आपका कुछ भी नहीं बच सका मुझसे. डीडीओ के सामने मैं आपकी छूट पर लुंड दबा सकता हों तो सिरमन किस खेत की मूली है.

दूसरी बार राज के लुंड की आराधना की छूट में घुसने की बात हुई तोह आराधना को राज के लुंड का एहसास होने. आराधना राज के लुंड के गर्म एहसास के चलते गलती से अपनी बेटियों के सामने hi अपनी छूट को मसल बैठी. सब देख के हसने लगी. आराधना ने झट से हाथ हटा दिए. शर्म से आराधना के गाल लाल हो गए थे.

राज-- क्या हुआ, ऐसे क्यों हसनी आप सब..

दीपिका-- राज तू सच में बहुत बड़ा हरामी है. माँ की छूट में घुसे तेरे लुंड की बात आई तोह माँ अपनी छूट को मसलने लगी..

सुनके राज भी हसने लगा.
 
राज-- वो मैं लौट के देख लूंगा, मुझे माँ की छूट की हीट से hi पता चल जाएगा, माँ अब भी मेरे लुंड के एहसास में खोई हुई हाँ क नहीं.

दीपिका-- आगे बता, भाभी ने बाइक ठोकी तो उसके बाद क्या हुआ.

राज-- मैं गिरा तोह मेरे सर पे चोट लगी और --

सब-- क्याआआआ.. खून भी निकला होगा न फिर.. सब फिरसे परेशान हो गई..

राज-- उसी खून ने hi बहुत बड़ा काम किया था.

सब-- कैसा काम..

राज-- उसी खून से फिर मैंने बीच सड़क पर सबके सामने सिरमन की मांग भर दी.

सब सुनके शॉकेड हो गयी. सब एक दूसरे को देखने लगी. इस बार किसी ने "क्याआआआ" शब्द नहीं बोलै था. सब झटके में रह गई थी.

दीपिका कंपनते हुए.. राज तू सही बोल रहा है न.

राज-- दीदी आपकी आवाज़ क्यों काँप रही है..

दीपिका-- तू पहले बता तू सच बोल रहा है.

राज-- हाँ मुझे झूट बोलने की क्या ज़रूरत है.

दीपिका-- तूने ये भी बताया था, सिमरन दिल्ली शहर के सबसे बड़े बुसिनेस्स्में की पोती है.

राज-- हाँ ये भी बताया था.

दीपिका चिल्लाते हुए-- हरामी साले कुत्ते ये तुमने क्या क्र दिए. लड़कियों के साथ मस्ती करना, उनको छोड़ देना और बात है. अपने गाओं में दो चार से लड़ लेना और बात है. तू दिल्ली शहर में अकेला है. वहां कुछ भी हो सकता है. और तू क्या समझता है. ऐसे सिरमन तेरी पत्नी बन जाएगी. जैसे एक किश के बाद उसने बाइक ठोकी है. उससे साफ़ पता चलता है, वो किस नेचर की है. कितनी ज़िद्दी और घमंडी है वो. पैसे वाली भी है. वो और उसके परिवार वाले तेरे साथ क्या कर सकते हाँ, तूने इस सबब पर भी धयान दिए है क्या.. हरामी तू वहां है और हम सब यहाँ तुझे सोच सोच के परेशान रहेंगे.

आराधना सुनके ऊंची ऊंची आवाज़ में रोने लगी थी. अंजलि, आरती और भणवा भी रोने लगी थी. उन्हें राज की बहुत चिंता होने लगी थी. दीपिका भी राज पर चिल्लाते हुए दुखी भी हो गई थी. उसकी आँखों में भी आंसू आ गए थे.

सबके इमोशंस को समझते हुए राज भी जज़्बाती होने लगा. राज फिर नार्मल टोन में बोलै

राज-- आप सब मत रोयें. कुछ भी गलत नहीं हुआ है. सिमरन के दाद्दु से मैं मिला हों. मुझे स्पेसेलल्य उन्हों ने ढूंढ निकला और सिमरन के लिए सेलेक्ट भी कर लिया है. सिमरन के खंडन से सभी सदस्य भी मुझे दिल से अपना जमाई मान चुके हाँ. वह मेरे साथ हाँ, एक सिमरन hi मेरे अगेंस्ट है. बाकी सब मेरे लिए कुछ भी कर जाएंगे. सच कहूं तोह सिमरन hi वह लड़की है, जो मुझे भी बदल सकती है. मैं हरामी हों, शायद उम्र भर हरामी hi रहूं. पर कुछ आदतें ऐसी होती हाँ, जिनमे बलदाऊ आना ज़रूरी होता है. सिमरन के कारण hi वो सरे बदलाव मेरे अंदर आ सकते है.

आप सब के बाद, सिमरन hi वो लड़की है, जिसके लिए मेरे दिल की धड़कनो में हलचल मची है. वर्ण मैं जैसा हों आप सब अच्छे से जानती हाँ. दुन्या की कोई भी लड़की या औरत मेरे लिए एक शरीर hi हुआ करती थी और आज भी ऐसा hi है. सिमरन को देख के मेरे मैं में उसके सेक्स फीलिंग्स नहीं आई. समझो तो सिमरन मेरे लिए और मैं उसके लिए जन्मा हों.

कुछ देर और ऐसी hi बातें हुई, फिर सब नार्मल हो गए. राज ने सबको बता दिए, उसने नानी को भी छोड़ दिए था. एक बार फिरसे दीपिका राज को गलियां देने लगी. फिर वो हसने लगी.

दीपिका- राज अब तेरी यही औकात रह गई है. तुझे कोई जवान लड़की नहीं मिलती तोह तुम नानी जैसी बोधियों को छोड़ने लगते हो.. सब हसने लगी.

राज ने फिर माँ को दूसरे कमरे में भेज के नानी से चरों बहनो की बार करवाई. चरों बहने बड़ी खुश हो गई थी नानी से बात करके.. वो कभी नानी को दादी तोह कभी नानी कहने लगती. नानी को भी धीरे धीरे बदलना था.

नानी ने बहार मोबाइल लेजे नाना से भी चरों की बात करवाई तोह नाना की आँखों में आंसू आने लगे. अपने बच्चू से बात किये एक ज़माना बीत गया था. राज की बहनो से बात करके नाना खुश भी हुए और दुखी भी. एक बार फिरसे उन्हें ज़िंदगी के रंग दिखने लगे थे.

तीन दिन में राज के सर का ज़ख्म भी ठीक हो गया था. और राज नानी को जब मौका मिलता छोड़ भी देता. नाना आधा दिन बच्चू को पढ़ने में hi लगे रहते थे. घर जाने का समय नहीं मिलता था. उसी बीच राज जैम के नानी को छोड़ लिया करता था.

एक रात और नानी ने नाना को वियाग्रा पीला के नाना के साथ सेक्स किया. राज जितना मज़ा तो नानी को नहीं मिला. पर नाना को नानी ने ख़ुशी दिला दी थी.

तीन दिन तक राज खुद भी घर बात करता और नाना नानी से अपनी बहनो की बात करता. नाना नानी राज के ऐसे करने से बहुत खुश थे. नाना नानी को राज ने खुद के साथ और अपनी बहनो के साथ बांध लिया था. नानी को राज से दूर नहीं हो सकती थी. अब नाना को भी बहनो द्वारा राज ने अपने साथ कर लिया था.

दीपिका समेत छओरन भी बहुत खुश थी. चरों समझदार भी थी. नाना नानी से बात करते समय कोई गलती नहीं करि थी चरों ने.

आराधना खुश भी थी, उसे लगने लगा था. कभी वह भी अपनी माँ से बात करेगी. कभी वह भी अपनी माँ से मिल सकेगी. कुछ दूर रहते हुए अपने मोह में दुपट्टा घुसाए

नाना नानी की आवाज़ उनकी बातें आराधना सुन लिया करती थी. बहुत मुशील हुआ करता था, ऐसे समय उसके लिए खुद पर कंट्रोल बनाना.

शाम के समय राज किचन में गया तो नानी के साथ किचन में शीतल भी थी. शीतल नानी का हाथ बता रही थी. राज देख के खुश हो गया.. शीतल ने राज को देखा तोह hi बोल दिए. शीतल पहले वाले दिन की निस्बत आज कुछ खुल के बोली थी. राज आगे बढ़ा और हैंडशेक के लिए अपना हाथ आगे बढ़ा दिए. शीतल नानी को देखने लगी.

d641969fb02d2c5db99397b1a5c5220c.jpg


नानी मुस्कुरा पड़ी-- शीतल बेटी तेरा मैं है तो हाथ मिला ले. नहीं है तो मत मिला.

शीतल खुश होक राज से हाथ मिला गई. शीतल का हाथ बेहद नरम और गोरा था. राज ने हाथ नहीं छोड़ा.

शीतल-- नानी आप ने मुझे या राज को रोका नहीं. मेरी दादी और माँ भी मुझे लड़को से दूर रहने को बोलते हाँ.. आप और नाना भी बोलते है. पर आज--

शीतल खुश भी थी और हैरान भी. शीतल भी आज के ज़माने की लड़की थी. उसके घर वाले शर्मा जी के घर सोच समझ के आये थे. वो जतने थे, यहाँ रह के उनके बच्चे सुधर सकते हाँ. बिगड़ने से बच सकते है. वो भी कुछ कुछ शर्मा जी के जैसे विचारों वाले थे. पर आज कल की जेनेरशन का मुंड उसके जैसा नहीं था. शीतल को बड़ी ख़ुशी हुई, अपनी लाइफ में थोड़ी सी आज़ादी मिलने पर.

राज-- शीतल तुम बहुत अच्छी लड़की हो. बहुत प्यारी लड़की हो. बिलकुल नानी के जैसी.

नानी हसने लगी और शीतल शर्मा गई.

राज शीतल से कुछ बातें करने लगा, नानी खाना बनाने में लगी रही. एक समय पर हाथ ने शीतल का छोड़ा हुआ हाथ फिरसे पकड़ लिया. शीतल अजीब सी नज़रों से राज को देखने लगी. राज का ऐसा करना शीतल को अच्छा भी लग रहा था. पर वो इतना आगे कभी नहीं बढ़ी थी. नानी घूमी तो राज ने शीतल को खेंच के अपने सीने से लगाया और एक किश करके छोड़ भी दिए..

maxresdefault.jpg


शीतल तो अपने होंटो पर हाथ रखके हेरात से राज को देखती रह गई. उसके दिल की धड़कन बहुत बढ़ गई थी. राज शीतल को स्माइल करने के बाद वहां से चला गया. नानी को भी एहसास हो गया था. पर नानी घूम के देखि नहीं थी. शीतल नानी को देख के कुछ दरी थी. पर नानी का फेस दूसरी और देख के वो नार्मल हो गई थी.

शीतल के मैं में हलचल मच उठी थी. ये उसकी लाइफ का पहला किश था. शीतल कुछ देर और वहां रुक के ऊपर चली गई और सुहाने सपने देखने लगी. ऐसी hi लाइफ की कल्पना वो भी किया करती थी. वो भी अपनी लाइफ को एन्जॉय करना चाहती थी.
 
अगले दिन राज 10 बजे घर से निकला और महेश की फैक्ट्री जाने लगा. अब उसे महेश से मिलना था और उर्वशी से भी. उर्वशी के घर तो जा नहीं सकता था. एक बार महेश से मिलके फिर उर्वशी से मिलने की करता..

राज फैक्ट्री जा पोहंचा. राज ने पहले से महेश से बात नहीं करि थी. इसलिए मिलने में परेशानी बनने लगी. राज ने राकेश वर्मा का हवाला दिए तोह उसे फ़ौरन अंदर बुलवा लिया गया.

ऑफिस में बैठा राज अपना बड़े मौसा को देख रहा था. साला महेश सूरत से hi ठरकी दीखता था.

इंट्रो के बाद..

महेश-- जी राज बीटा कैसे मिलना हुआ मुझसे. वर्मा सर का हवाला क्यों दिए आपने मुझे. महेश बड़ी रेस्पेक्ट दे रहा था राज को.

दिल्ली के बिज़नेस किंग का हवाला काम कर गया था.

राज-- सुनने में आया है, आप एक मेहनती और तरक्की पसंद इंसान हाँ. महेश खुश हो गया.. राज आगे बोलै. इस शहर में ऐसे बहुत से लोग हाँ, जिनके साथ मिलके बिज़नेस किया जा सकता है. पर मैं कुछ और टाइप का लड़का हों. मुझे पता चला है, आप बहुत दिलचस्प इंसान भी है. बिज़नेस का नॉलेज भी खूब है आपको. और लाइफ को भी बहुत बढ़िया ढंग से जीते हाँ आप. महेश साब अभी मेरी उम्र hi क्या है, अभी तोह मेरी स्टडी भी अधूरी है, और मैं अपनी लाइफ को अपने हिसाब से जीना भी चाहता हों. आपकी नेचर और लाइफस्टाइल मुझे बहुत पसंद आया है. इसलिए सोचा आपके साथ मिलके बिज़नेस भी किया जाए. और लाइफ को एन्जॉय भी.

राज की बात पर महेश मन hi मन में बहुत खुश भी हो रहा था. पर राज को शक की नजरों से भी देख रहा था. राज हरामी से महेश की आँखों के पीछे छुपी बातें भी छुप न सकीय. वही हुआ महेश बोल पड़ा

महेश-- पर मैं आप पर विश्वास कैसे करूँ. हो सकता है, आप मुझे चीट करने के लिए, या किसी और मकसद के लिए ऐसा सब बोल रहे हों. महेश भी चालक इंसान था.

राज-- मई जनता था दाद्दु का हवाला भी काम नहीं आएगा. मुझे खुल के hi बताना पड़े.

महेश-- दाद्दु??

राज-- सुना तो होगा राकेश वर्मा की पोती सिमरन की, बीच सड़क पर किसी लड़के ने मांग भर दी थी.

महेश-- हाहाहा wooo..wooo.. ः वो तोह बड़ा डेरिंग लड़का निकला. मैं तो सुनके hi शॉकेड हो गया था. सिरमन वर्मा आग है आग, खूंखार बिल्ली है, मजाल है इस शहर में कोई उससे भीड़ के चैन से सो भी सके. फिर उसे कुछ याद आया. आपने राकेश वर्मा जी को hi दाद्दु कहा है न.

राज मुस्कुराता हुआ-- हाँ मैं hi वही लड़का हों, जिसने सिमरन की मांग भरी है. सिमरन अब मेरी पत्नी है. राज स्माइल से बोलै तो महेश झटके से उठ खड़ा हुआ.

महेश-- सर.. sir..aap..aap मेरी फैक्ट्री तक खुद चल के आये हाँ, मुझे विश्वास hi नहीं हो रहा. और फिर मेरे साथ पार्टनरशिप भी करना चाहते हाँ. मेरी इतनी औकात कहाँ सर.

महेश को इतनी ख़ुशी हुई के संभाली नहीं जा रही थी. राज आगे बढ़ा और महेश को गले से लगा लिया.

राज-- मैं बड़ा हों या छोटा. बस आपके साथ एक दोस्त के जैसे बिज़नेस करना चाहता हों.

महेश-- मेरे तो भाग hi खुल जायेंगे सर. जो आप मेरे साथ पार्टनरशिप में आ जायेंगे.

राज-- तोह बिज़नेस को बाद में रखते हाँ, पहले मनोरंजन करते हुए कुछ समय मिलके साथ बिता के एक दूसरे के करीब हो जाते हाँ.

महेश हसने लगा.

राज-- थ्रीसम के मामले में तो आप अनारी नहीं होंगे.. राज हरामी स्माइल से महेश से बोलै तोह महेश भी ठर्कियों वाली हंसी हसने लगा.

महेश-- थ्रीसोएम या ग्रुप सेक्स का भी अपना hi मज़ा है, पर आपके साथ थ्रीसम, मज़ा hi आ जायेगा. महेश बहुत खुश था. राकेश वर्मा की पोती का पति था राज. महेश जैसे वर्मा परिवार की ऊँचाई तक कहाँ पोहंच सकते थे. राज पल भर में hi वहां पोहंच गया था. महेश तोह राज को अपने पास पा के hi खुश हो गया था.

राज अपने लुंड को मसलते हुए. महेश यार चुदाई के नाम से hi मेरे लुंड में हलचल मचने लगी है. महेश राज के लुंड को देखते हुए हसने लगा.

महेश-- अभी आपके लिए स्पेशल आइटम का इंतेज़ाम करता हों. मेरे ऑफिस में hi है एक.

राज-- महेश यार कोई रंडी मत लाना, थोड़ी घरेलू टाइप की चलेगी. अगर रंडी टाइप है तोह फिर कमल की होनी चाहिए.

महेश-- मैं अपने दोस्त के लिए कोई सस्ती चीज तो मंगवाओ नहीं. मुझे भी सस्ता खाने की आदत नहीं है. महेश भी अपने लुंड को मसलते हुए बोलै तोह राज ने महेश के कंधे पे हाथ मार दिए.

राज-- आज यहाँ आते हुए रस्ते में एक मॉडल गर्ल देखि मैंने. आपसे मिलने की छह न होती तोह उसके पीछे लग के, उसे पता के, छोड़ के hi आता.

महेश एक ठंडी आह भरने लगा. राज यार मैंने भी खूबसूरत से खूबसूरत लड़की को देखने के बाद छोड़ा है, किसी पे दिल आया तोह खूब पैसा लुटा के छोड़ा है. महेश अपने होंटो पे जीब फेरने लगा.. राज यार एक लड़की है. वो साली भी रंडी है, पर अपने हर किसी से नहीं चुदती. मेरा उसपे बड़ा दिल है. बड़ा मन है उसे एक बार छोड़ने का. बड़े सेक्सी फिगर वाली है.

रज-- ऐसी बात है तोह फिर आजका मनोरंजन कैंसिल. अब तो उसी लड़की के साथ hi थ्रीसम होगा. राज अटल लहजे में बोलै तोह महसः राज को देखने लगा.

महेश- पर वो लड़की थ्रीसम में भी इंटेरेस्ट नहीं रखती. महेश मायूस होने लगा.

राज-- मेरे बारे में जान गए होना. चलो मुझे उसके बारे में बताओ. महेश राज को देखने के बाद मोबाइल से उर्वशी की पिछ निकल के दिखने लगा.

5202c45b53e7aeea5935276543a78e19.jpg


राज-- अरे इसे hi तो मैंने आज आते हुए देखा था. इसे hi तो मैंने छोड़ने का मैं बनाया है. महेश खुश हो गया और राज जल्द hi उर्वशी के साथ थ्रीसम का बोल के निकल पड़ा. आज कई महीनो बाद महेश के लुंड की अकड़ बांधने लगी थी. महेश जब भी उर्वशी को सोचता था, उसके लुंड की अकड़न बढ़ जाता करती थी. आज तो उसे राज की सूरत में उम्मीद की किरण भी दिख गई थी. अब शायद वो भी उर्वशी को छोड़ सकेगा. ये सोच के महेश बहुत खुश था.

एक फोन आया और महेश ख्यालों से निकलते हुए फोन सुनने लगा.

राज बाइक पे बैठा शहर में घूमने लगा. जहाँ जहाँ उर्वशी जाया करती थी, वहां के चक्कर लगाने लगा.

3 घंटे ऐसे hi बीत गए. एक रोड के किनारे एक चाय वाले के पास बैठ के राज चाय पीने लगा. कुछ देर बाद एक साइड से 3 गाड़ियां आती हुई दिखाई दी. तीनो गाड़ियां राज की बाइक से कुछ पीछे रुक गई. राज सबको देखने लगा. सबसे खूबसूरत गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर सिमरन को देख के राज खिल उठा. सिमरन आज हमेशा से ज़यादा खूबसूरत दिख रही थी.

सबसे पहले सिमरन hi गाडी से बहार निकली.

e450dc2776a23e3ea80904aa32e49a4c.jpg


उसके बाद तीनो गाड़ियों के सरे दूर एक साथ खुले और कई लड़कियों के साथ कई लड़के उन गाड़ियों से बहार निकले. सिमरन की नज़र राज पर hi थी. और राज को जान निसार नजरों से देख रही थी. ऐसी नजरो से, जिन नजरो से एक प्रेमी को hi देखा जा सकता था. राज चाय का कप रख के खड़ा हो गया और सिमरन को प्यार से देखने लगा. सिमरन भी आँखों में बेपनाह चमक और राज के लिए प्यार लिए हुए राज की और बढ़ने लगी.

आस पास के और सिमरन के साथ आये लड़कियां लड़के अपने दिल की धड़कन को बहुत अच्छे से सुन प् रहे थे. सब के दिल की धड़कनो में बेपनाह शोर मच उठा था. सिमरन बड़ी कातिल ऐडा के साथ चलती हुई राज की ऑर्डर बढ़ने लगी. सिमरन की सुंदरता देख कर राज के अंदर भी घंटियां सी बजने लगी थी. ऐसी फीलिंग्स का सामना राज को अपनी लाइफ में पहले कभी नहीं करना पड़ा था.

सिमरन राज के सामने जा पोहंची और बड़े चाओ के साथ राज को देखने लगी. राज को राकेश वर्मा ने सिमरन के सी रूप के बारे में बड़ी डिटेल से बताया था. राज भी हरामी था, किसी की भी आँखों में देख के बहुत कुछ जान लिया करता था. वो सिमरन की आँखों में देख के सिमरन को जांचने की कोशिश कर रहा था. पर सिमरन की आँखों में राज को कुछ दिखा तोह सिर्फ अपने लिए प्यार का ठाठें मारता हुआ समंदर. राज को यकीं hi नहीं आ रहा था, सिमरन इतने प्यार से भी उसे देख सकती थी.

यही कमल था सिरमन के इस रूप में. सिमरन के अंदर क्या चल रहा होता है, कोई कभी जान hi नहीं पता था. इस समय भी सिमरन की ऑंखें, सिमरन का एक एक अंग राज के प्यार को hi ज़ाहिर कर रहा था.

सिमरन ने अपने एक हाथ को आगे किया और मुठी खोल दी. राज ने देखा तोह वो सिंदूर की मिनी बॉक्स थी.

सिमरन बेपनाह प्यार के साथ राज से बोल.. राज.. बहुत खूबसूरत नाम है तुम्हारा राज.. मैं सिमरन और तुम राज.. राज सिमरन.. सिमरन राज. सिमरन राज.. राज सिमरन.. भगवन ने हमारी जोड़ी सच में hi स्पेशल बनाई है राज. मैं सोच भी नहीं सोच सकती थी मेरी ज़िन्दगी में तुम आओगे. राज तुमने सबके सामने अपने खून से मेरी मांग भरी थी न. आज सबके सामने इस सिन्दूर की एक चुटकी मेरी मांग में भरके एक बार फिरसे सबकी नज़रों में मुझे अपनी पत्नी सबत कर दोगे. मैं भी पुरे मैं से तुम्हारी पत्नी बनने के लिए बेहद बेचैन हों राज.

राज मुसलसल सिमरन की आँखों में hi देख रहा था. जहाँ राज को केवल अपने लिए प्यार hi प्यार दिखाई दे रहा था. कहीं भी छल दिखाई नहीं दे रहा है. कहीं से ऐसा नहीं लग रहा था. सिरमन राज के साथ खेल खेल रही है.

राज जैसा हरामी भी सिमरन की आँखों की गहराई में अपने लिए सिर्फ प्यार hi प्यार देख पाया.

सिमरन-- सोचो मत राज, भर दो फिरसे मेरी मांग. पहली से भरी मांग का रंग और बह गहरा कर दो. इतना गहरा कह धुलने पर भी ये रंग कभी जाएगा न राज.

राज के दिल में भी हलचल मची हुई थी. राज ने सिमरन के हाथ से सिन्दूर बॉक्स लिया, खोला और एक चुटकी सिन्दूर फिर सिमरन की मांग में भर दिया.

कहीं से कोई आवाज़ नहीं आई. सिमरन एक पैंटी की पूरी पूरी एक्टिंग करते हुए राज के पेअर छू गयी. सिमरन ने फिर मुद के अपने फ्रेंड्स को देखा तोह सबके सब मिलके क्लैपिंग करने लगे. सिमरन सबको एक नज़र देखने के बाद राज को फिरसे देखने लगी. सिमरन की आँखों में राज के प्यार की शिद्दर और भी कई गुनाह बढ़ गई थी.

सिमरन-- राज मुझे अपने सीने से नहीं लगाओगे. सिमरन की छह को देखते हुए राज ने सबके सामने सिमरन को अपनी बहन में भर लिया. चरों और क्लैपिंग के शोर में कोई और आवाज़ सुनाई नहीं दे रही थी.

शोर था तोह राज के दिल की धड़कनो में.. जहाँ बहुत कुछ था, सिमरन के इस रूप को लेके विचार भी थे. सिमरन की आँखों में खुद के लिए उमड़ रहे प्यार को देख के भी आये विचार थे.
 
राज सिमरन को अपने सीने से लगाए कुछ देर वैसे hi रहा.

f1d6371b0f12b15e2ce7f9e0f6390f73.jpg


सिमरन के शरीर को अपनी बहन में भर के राज को बहुत सुकून भी मिल रहा था. सिमरन राज की ज़िन्दगी में आने वाली सभी लड़कियों से हटके थी सिमरन.

सिमरन ने खुद को राज की बहन में ढीला छोड़ दिए था. राज को सिमरन का बदन फूलों सा नाज़ुक फील हुआ. राज सोचने लगा, इतनी ज़िद्दी और फाइटर सिमरन का शरीर कितना कोमल है.

सिमरन के बदन की महक ने भी राज को स्वर्ग की सैर करवा दी थी. सिमरन सच में hi एक नायब फूल की मानिंद थी. ुँतौचेड थी आज से पहले तक. कैसे न फिर इतनी सुन्दर, इतनी हसीं, इतनी कोमल हो होती. सिमरन के के लिए, सिमरन को पाने के लिए पागल हो उठे थे. राज सिमरन को पुरे मैं से महसूस कर प् रहा था.

सिमरन-- राज मुझे अपनी इन मज़बूत बहन में लिया है तोह कभी साथ मत छोड़ना.

राज-- साथ वो भी तुम्हारा. सिमरन एक तो तुम मेरी पत्नी बन चुकी हो और दूसरा सच में तुम्हारे जैसी इस दुन्या में कोई भी नहीं है. राज सिमरन की आँखों में देखता हुआ बोलै तोह सिमरन शरमाई नहीं. हाँ प्यार से देखती हुई बोली.

सिमरन-- राज चलो न आज तुम मेरे साथ कुछ समय बिताओ. मुझे भी तुम्हारे साथ कुछ समय बीनते का मैं है.

राज खुश हो गया-- हाँ चलो न, मैं भी तुम्हे छोड़ के किसी और काम में धयान क्यों दूंगा. एक पति के लिए उसकी पत्नी और प्रेमी के लिए उसकी मेहबूबा hi सबसे पहले हुआ करती है. बाकि सब बाद में.

सिमरन मुस्कुरा पड़ी. सिमरन ने राज का हाथ थमा और अपने फ्रेंड्स से बोली. जाओ अब तुम सब. कल मिलते हाँ हम ऊनि में. सब सिमरन के इस रूप को देख रहे थे. कितना स्ट्रांग दिख रहा था आज सबको सिमरन का ये वाला रूप. सिमरन इस रूप में इतनी परफेक्ट भी हो सकती है. किसी ने सोचा नहीं था.

सिमरन -- राज हम बाइक पे जायेंगे. लिखे ा रोमांटिक कपल.

राज-- हाँ चलो. राज ने चाय वले को पैसे दिए, बाइक स्टार्ट करि तोह सिमरन राज के पीछे बेथ गई. सिमरन ने अपनी एक फ़िरेन्द को बोल दिए गाड़ी के लिए.

राज ये भी सोच रहा था सिमरन अगर सच में hi उसके साथ कोई खेल खेल रही है तोह खेलने का पूरा हक़ भी रखती है. राज का मिशन था, सिमरन को पाना, वह राज ने पा लिया था. सिमरन की आँखों में उसे अपने लिए ढेरों प्यार दिखा था, राज सोचने लगा अगर ये प्यार मेरे लिए सच्चा है तोह अच्छी बात है. नहीं भी है तोह इन आँखों में हक़ीक़ी प्यार का रंग भर क्र रहेगा.

सिमरन दोनों दोनों साइड्स में करके बैठी थी. एक लवर कपल के से सरे अंदाज़ सिमरन अपनाये हुए थी. खुद भी राज के साथ लग के दोनों हथु को राज के गिर्द लपेट दिए था.

wp4726490.webp


राज के लिए ये लम्हे उसकी ज़िन्दगी के हसीं तरीन लम्हे थे. सिमरन के लिए कैसे थे वो तो बाद में hi पता चलना था. पर देखने वाले देख के कह सकते थे, ये लड़की अपने लवर के साथ ज़िदगी के हसीं तरीन पल बिता रही है.

ये था सिमरन का सबसे भयकर रूप.

सिमरन-- राज पहले हम मॉल चलेंगे, पैसे तोह हाँ तुम्हारे पास.

राज-- पैसो का क्या करना है मेरी जाना, तुम हो न मेरे साथ. तुम्हारे पास कोनसी कमी है पैसो की. तुम भर देना मेरा बिल.

सिमरन मन में राज को गलियां देने वाली. साला हरामी, खली जेब hi मुझ जैसी लड़की को ज़बरदस्ती अपनी पत्नी बना गया. तेरे तोह में वह हाल करुँगी बच्चे, जो कोई सोच भी नहीं सकता. फ़ौरन hi सिमरन राज से बोली.

सिमरन-- एक पति का सब कुछ उसकी पत्नी का होता है न राज. तोह एक पत्नी का सब कुछ कैसे उसके पति का नहीं हो सकता.

राज ने सिमरन के हाथ को पकड़ा और अपने होंटो से लगा लिया. सिमरन तुम्हारे सामने तोह इस दुन्या की साडी दौलत भी अपनी कोई हैसियत नहीं रखती. जिसके पास तुम जैसी पत्नी हो, उसके पास न भी हों तोह वो खुद को बेच कर भी तुम्हारे जैसी पत्नी की हर ज़रूरत को पूरी कर सकता है. पैसे की कमी नहीं है मुझे भी. हाँ बराबरी नहीं कर सकता किसी की.

सिमरन-- तोह फिर पहले क्यों ऐसा कहा तुमने, मेरे पास पैसे नहीं हाँ.

राज-- यहीं बाइक पर hi बता दूँ क्या.

सिमरन-- हाँ बता दो बाइक पर hi. कौनसी दूर दूर हों में तुमसे.

राज ने बाइक साइड में करि और सिमरन को अपने मज़बूर बाज़ुओं में पकड़ा और बाइक की फ्रंट सीट पर ले आया. सिमरन तो राज को देखती hi रह गई.

पास से गुज़र रहे भी सब देखते hi रह गए. कितनी आसानी से राज ने सिमरन को बैठे बैठे hi उठा के अपने सामने ला बिठाया था.

रोड के दूसरी और बस स्टॉप था. वहां के कपल खड़ा हुआ था. लड़की लड़के से बोली. कभी ऐसा प्यार तुम भी मुझसे करते तोह आज मैं भी उस लड़की के जैसी खुशनसीब होती. लड़का जो सिमरन को जानता था.

लड़का : जानती हो वो लड़की कोण है

लड़की : कोण

लड़का : सिमरन.. राकेश वर्मा की पोती..

लड़का लड़के को देख कर झटके से राज और सिमरन को देखने लगी. राज जो सिमरन को फ्रंट पर बिठा के किश करने में लगा हुआ था. और सिमरन न चाहते हुए भी किश में राज का साथ दे रही थी.

l.jpg


लड़की : ववव वो लड़की सिमरन है तोह वह लड़का वही है न, जिसने सिमरन की मांग भरी थी, वो भी अपने खून से.. लड़के के मोबाइल में व्हाट्सप्प नोटिफिकेशन बेल्ल हुई तोह लड़का खोल के देखने लगा.. सामने राज और सिमरन की hi पिछ थी, कुछ देर पहले वाली. जब राज सिमरन की मांग में सिन्दूर भर रहा था.

लड़का : ये देखो

लड़की : वाओ.. कितना खूबसूरत दिख रहे हाँ दोनों. सिमरन कितनी खुश है न. काश मेरे साथ भी कभी तुम ऐसा कोई सन बना दो.. हाय मेरी लाइफ भी सेट हो जाएगी. लड़की लड़के की गॉड में बैठते हुए बोली.

very-tender-picture-young-couple-sitting-face-face-car-he-is-holding-his-hand-her-neck-looking-girl.jpg


लड़का : हाहाहा जानती हो न सिमरन की नेचर की लड़की है.

लड़की : जानती हों सब यार. सिमरन बड़ी टेढ़ी लड़की है.

लड़का : फिर भी कहती हो ऐसे hi सन तुम्हे भी देखना है. अब सिमरन ने जो रूप धारण किया है, उस लड़के की खैर नहीं. सिमरन कुछ भी हो सकती है, पर एक लड़की वाली ओरिजिनल फीलिंग्स उसके अंदर नहीं आ सकती. सिमरन लड़की होक भी लड़की नहीं है. ज़रूर वो लड़के के साथ कुछ भयंकर करने की सोचे हुए हाँ.

लड़की राज और सिमरन को देखने लगी. जो फिरसे बैठे कहीं जाने लगे थे. सिमरन फिरसे राज के पीछे बैठे हुई अपनी बहन राज के फिरद लपेटे हुए थी.

लड़की : पर सिमरन क्यों इतनी खुश दिख रही है. देख के तो लगता है, वो इस किश से बहुत खुश है.

लड़का : भूल गई हो तो याद करो, किश के बाद पहली बार तुम्हारे चेहरे पर कैसे एक्सप्रेशंस आये थे. क्या वैसे hi एक्सप्रेशंस तुम्हे सिमरन के फेस पे दिखाई दिए हाँ.

लड़की : नहीं मुझे तोह नहीं दिखे..

लड़का : ये सिमरन है सलोनी.. सिमरन और सिमरन एक नागिन है. कितने hi लड़को ने उसके छेड़ छड़ की तोह सिमरन नागिन बांके ऐसे दासी उसे वह पानी भी नहीं मांग पाया.

लड़की सिमरन के बारे में डिटेल से सुनके डर गई थी.

राज बाइक पे बैठा सिमरन के साथ कुछ देर में एक मॉल पोहंचा. बाइक पार्किंग में कड़ी करके दोनों अंदर जाने लगे. राज का एक हाथ पॉकेट में था तोह सिमरन दोनों हाथो से राज के एक बाज़ो को थम के चल रही थी.

वहां 1 घंटा अच्छे से बिता के, दोनों नए कपडे पहन के, फिरसे वापिस निकल पड़े. सिमरन इस बेच बेहद खुश रही थी. खुश तो राज भी बहुत था. सिमरन का साथ उसे भी बहुत ख़ुशी दे रहा था. राज के अंदर हलचल मच उठी थी. सिमरन के बदन से आ रही मधुर खुशबु राज को नशे में किये हुए थी. राज होश में रहते हुए भी नशेडिओ के जैसे सिमरन के साथ चल रहा था और सिमरन को इस बात का एहसास था.

सिमरन सच में hi एक ऐसा फूल सी, जिसकी खुशबु से कोई भी मदहोश हो उठे.

राज हरामी था. पर सिमरन भी सिमरन थी.. अपने अलग अंदाज़ के साथ साथ वो ऐसे खुशबूदार, उजले और कमल के फिगर वाली लड़की थी. राज पर सिमरन का नशा सर चढ़कर बोलने लगा था. सिमरन ने रोड पर भी किश में राज का साथ दिए था. और राज हरामी होते हुए भी सिमरन की आँखों में देख के ये नहीं जान पाया सिमरन के लिए अब की बार का किश उसकी मन मर्ज़ी से हो रहा है ये सिमरन खेल खेलते हुए किश में भी अपनी बेस्ट पेरडोर्मंस दे रही है.

राज कुछ नहीं जान प् रहा था सिमरन के दिल के हाल बारे. दोनों फिरसे बाइक पर बैठे और जाने लगे. इस बार बाइक सिमरन की कोठी की और थी. मॉल में hi सिमरन ने कॉल करके बता दिए था वह राज के साथ आ रही है.

सिमरन के पापा, चाचा, भाई और सब कोठी पर ाँ पोहंचे थे. देखना चाहते थे, सिमरन राज के साथ क्या करने वाली है. सिमरन का खेल कोई जनता भी तोह नहीं था. कौनसा खेल खेलेगी, कब खेली, कैसे खेलेगी. सिमरन एक बार फिरसे राज के गिर्द बहन लपेटे हुए बाइक पर बैठी राज से हंसी मज़ाक कर रही थी.

दोनों 25 मिंट में कोठी पर जा पोहंचे. गेट को ाललरेअद्य पहले से hi खोल दिया गया था.

अंदर सब राज का सवागत करने के लिए तैयार थे या सिमरन की ऑर्डर से होने वाले किसी भयंकर रियेक्ट के लिए डरे सहमे हुए थे. ये तोह देखने से hi पता चलने वाला था.

बाइक अंदर दाखिल हुई तोह पीछे से एक गाडी भी कोठी में दाखिल होती हुई दिखाई दी. सिमरन ने मुद के देखा तोह देख के चहकती हुई गाड़ी की और देखने लगी. गाडी में बुआ का पूरा परिवार था. वह सब भी आ गए थे. सब सिमरन को देख कर खुश हुए कह नहीं पर सब बड़े धयान से गाडी के अंदर हुए hi सिमरन की मांग में सिन्दूर और राज को देखने लगे.
 
Back
Top