Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta - Page 2 - SexBaba
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Incest Sex Kahani Harami--Saala--Kutta

चची कम्पटी हुई-- राज बीटा तू मुझे, अपनी चची के साथ भी ज़बरदस्ती कर जाएगा. कुछ तो इज़्ज़त रहने दे अपनी चची की. राज ने अपने सोये हुए लुंड को चची की छूट पर रगड़ा.. चची कसमसाने लगी.

राज--- कसम से चची आपका ये गदराया हुआ जिस्म मुझे चैन से सोने नहीं देता. आप क्या जानो चची आज भी आपका ये जिस्म कितना सेक्सी है. राज की बात पर चची की सांस तेज़ होने लगी.

चची--- राज बीटा छोड़ दे मुझे कोई आ जाएग... चची को पता था जल्दी कोई नहीं आएगा. फिर भी वह राज से जान छुड़ाए के लिए ऐसा बोली

राज ने चची की गाल पर ऊँगली चलनी शुरू कर दी. पता है चची मुझे, इतनी जल्दी कोई नहीं आने वाला. में तो कहता हों चची यही पर थोड़ा से मज़े न कर लें. चची सर्दी में भी पसीना छोड़ने लगी थी. राज हरामियों का हरामी था. चची जानती थी.

चची ने ज़ोर लगा कर खुद को राज से छुड़वाया और भागने लगी. राज ने चची के एक हाथ को पकड़ लिया.. चची ने मुद कर राज को देखा. और आँखों से कहने वाली. छोड़ दे मुझे राज बीटा. क्यों इस उम्र में मुझे गन्दा करना चाहते हो. राज ने हस्ते हुए चची को खेंचा और फिरसे अपनी बहन में भर लिया.

राज --- चची कसम से इतनी सर्दी में भी आपके जिस्म की गर्मी ने मुझे पागल करना शुरू कर दिए है. आज छोड़ रहा हों चची. जल्दी hi मुझे आपको अपनी छूट देनी पड़ेगी चची. वर्ण.. इतना बोल कर राज चची को छोड़ कर निकल गया.

चची राज के जाने के बाद अपनी छूट को मसलने लगी. जिसमे पानी आने लगा था. राज किसी को छेड़े और वो गीली न हो ये हो नहीं सकता था. चची कभी राज को गलियां देती तो कभी अपनी रसीली छूट के पानी को कपडे के ऊपर से मसल के मज़े लेने लगती.

मैं तोह चची का भी ख़राब होने लगा था इतने सालों की राज की छेड़ छड़ से. पर वह आगे नहीं बढ़ना चाहती थी. अपने पति के शिव कभी किसी के सामने वो नंगी भी तो नहीं हुई थी..

राज घर पोहंचा तो घर का दूर खुला हुआ मिला. राज का घर बहुत खुला था. पहले वाला हिस्से में जानवर बंधे हुए थे. वहां दो नौकर भेंसो का दूध निकलने में लगे हुए थे.. राज दोनों से मिलकर अंदर जाने लगा.. अंदर का दरवाज़ा भी खुला हुआ था.

अंदर गया तो उसकी माँ और गाओं की एक औरत बैठी बातें कर रही थी. राज जा के उस औरत के पास जा बैठा.. राज को आते देख कर वो औरत घबरा कर उठ कड़ी हुई.. राज ने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी गॉड में बिठा लिया.. वह हलकी आवाज़ में चीख पड़ी. आराधन हस्सन लगी. वो औरत आराधना को देख कर बोली

औरत--- आराधना कितनी बड़ी भूल हुई मुझसे, जो इस हरामी को भूल कर में यहाँ चली आई.. आराधना हसने लगी. राज ने औरत को अपनी गॉड में बिठा कर उसकी गर्दन पर ऊँगली फेरनी शुरू कर दिए. औरत ने जर्सी पहनी हुई थी. उसके बड़े बड़े दूध उसे जर्सी में छुपे हुए थे. आराधना को पता था राज अब क्या करेगा.. वो हस्ती हुई उठ कड़ी हुई, औरत आराधना को जाते हुए देख कर बोली

औरत---- हटा ले अपने इस हरामी बेटे को आराधना.. ोीी माँ.. देख ने कैसा हरामीपन कर रहा है ये मेरे साथ

आराधना हस्ते हुए--- दीदी आपने भी इसे बिगड़ने में कोई कसार नहीं छोड़ी. अब में कुछ नहीं कर सकती. वर्ण ये मेरे पीछे पद जाएगा.. आराधना हस्ते हुए दूसरे कमरे में चली गई और राज ने औरत के गरेबान में हाथ दाल कर उसका एक चुका पकड़ लिया.

राज----- साली तू अंदर से कितनी गरम है, तेरे ये चुके कभी ठन्डे नहीं होंगे क्या.

राज उस औरत के निप्पल कास कास के मसलने लगा था. जल्द hi वो औरत भी गर्म होने लगी. वह औरत राज की हंसाई थी, राज का लुंड सबसे पहले उसी की छूट और गांड में गया था. वह तोह ऊपर ऊपर से आराधन के सामने ऐसा बोलती थी वर्ण तो वह राज के लुंड की दीवानी थी.

अरुआत---- राज बीटा तेरे जैसा लुंड जो औरत ले ले. फिर उसकी छूट, गांड या चुचु की गर्मी काम कैसे हो सकती है. चल न लगा न कुण्डी और कर दे मेरी अंदर की गर्मी को ख़तम.. वह भी मूड में आते हुए बोली.

राज नंदनी को जैम कर छोड़ चूका था अभी उसका मूड नहीं था. पर वह औरत उसकी सेक्स गुरु भी थी. राज को उसकी माननी hi थी. राज ने जल्दी से उठ कर दूर को अंदर से बंद किया और फिर नंगा हो गया.. वह साली चिन्तल औरत भी बिना देरी के नंगी हो कर राज के लुंड के छुपे लगाने लगी. राज उसके बालों को पकड़ कर उसके मोहन को छोड़ने लगा. वह भी मज़े से राज से लुंड से अपने मोहन को छुड़वाने लगी. बड़ी भरे भरे जिस्म की मालिक थी वो औरत.. बड़े बड़े चुके राज ने बहुत बार निचोड़े थे.

कुछ देर में वो राज को खटिया पर लिया कर उसके ऊपर आई और लुंड लेकर छोड़ने लगी.. राज भी उसे थप्पड़ मारते हुए छोड़ने लगा..

20 मिंट की चली चुदाई में औरत के अंदर की साडी गर्मी निकल गई. वो खुश हो गई. आज 2 महीने बाद वो राज के लुंड से चूड़ी थी. दोनों कपडे पहन कर कमरे से बहार निकले. वो औरत फिर वही नहीं रुकी, वो अपने घर चली गई. राज अपने कमरे में जाने लगा, उसकी गांड पर बड़े ज़ोर का डंडा पड़ा.. राज चीखता हुआ पीछे मुरा तो दीपिका हाथ में एक डंडा लिए कड़ी थी. उसकी ऑंखें ग़ुस्से से लाल थी. साथ भावना भी थी.

दीपिका ----- हरामी साले कुत्ते रत तुझे इसी लिए घर से भगाया था, सुबह आते hi उस हरमिजादि के साथ मोहन काला कर लेगा.

भावना ----- हरामी कुछ तो हमारा भी ख्याल कर लिया कर.

राज ढिटाई से बोलै-- वही तो कई सालों से करने की कोशिश कर रहा हों. आप हाँ कह मेरी शिव पर मुझे मरने लगती है. भावना और दीपिका को ग़ुस्सा आने लगा तो वो राज को फिरसे पीटने लगी. राज ने दीपिका को एक टाइम पर अपने शिकंजे में कस लिया. भावना दीपिका को बचती उससे पहले hi राज ने दीपिका को उठाया और अपने कमरे में ले जा कर दूर अंदर से बंद कर दिए.

दीपिका घबरा गई.. भावना चीख पड़ी. अंजलि, आरती और आराधना भावना से पूछने लगी "क्या हुआ"

भावना ---- राज दीपिका को उठा कर ले गया है

अंजलि, आरती -- kyaaaaaaaaaaa?

आराधना हसने लगी-- वो उठा के घर में hi ले गया है कहीं बहार नहीं.. और उठा कर, भगा कर कोई शादी नहीं करने वाला मेरा राज दीपिका से.. हहहहए आराधन बड़े खुल कर हसने लगी थी. तीनो अपने माथे पर हाथ मारने लगी अपनी माँ को हस्ते देख कर

दीपिका को भी लगा आज वो बुरी फँसी राज के शिकंजे में.. वो बुरी तरह से घबरा गई थी पर ऊपर ऊपर से वो राज को घुसा दिखने लगी.

दीपिका ---- छोड़ मुझे हरामी साले कुत्ते

राज ने दीपिका को बीएड पर पटका और दीपिका के ऊपर ा कर दीपिका के होंटो पर एक हलकी सी किश करदी. दीपिका तो अंदर तक हिल गई थी. दर उसकी आँखों में दिखने लगा था. पर वो राज को शो नहीं करवाना चाहती थी. राज भी हरामियों का हरामी था. वो कोई बच्चा तो था नहीं जो सब न समझ सकता. वो स्माइल करने लगा. उसकी स्माइल देख कर दीपिका के होश उड़ने लगे.

राज ---- दीदी हरामी हों तो हरामी बन के दिखाओगे. एक हरामी क्या कुछ कर सकता है. ये भी आपको अच्छे से पता होगा. परसो रात आपकी छूट में ऊँगली सही से नहीं कर सका था में.. आज करूँगा. बहुत दिनों से आपकी छूट भी नहीं देखि, वो भी देखूंगा. ज़िन्दगी में कभी आपकी छूट में जीब नहीं डाली, आज वो भी दाल के अआप्की रसीली छूट को टास्ते करूँगा.. राज की घिनौनी बातें सुनकर दीपिका की सांस अटकने लगी.. दूर बहार से कोई खटखटा रहा था. पर राज ने खोलने का मैं बदल दिए था. दीपिका भी छह कर खुद को बचा नहीं सकती थी. क्यों की राज हरामी होने के साथ साथ बहुत ताक़तवर और वज़नी था. दीपिका को आज अपना बहुत कुछ बिगड़ता हुआ महसूस होने लगा था. उसके चेहरे पर आने वाली पसीने की बुन्देव में इज़ाफ़ा होने लगा.
 
आज दूर नहीं खुलेगा.. फिरसे खटखटाओगी तोह दीदी के साथ बहुत कुछ गलत हो जाएगा. राज ज़रो से बोलै तोह दूर खटखाना बंद हो गया.

दीपिका रही हुई नज़रों से राज को देखने लगी. और राज हरामियों वाली मुस्कान से अपनी दीदी को देखने लगा. देर नहीं लगी और दीपिका के चेहरे hi नहीं पुरे जिस्म सर्दी में भी पसीना छोड़ने लगा.

दीपिका----- rr--raj mm--mera भाई प्ल्ज़ मुझे छोड़ दो.. मुझे जाने दो. कुछ मत करो मेरे साथ.

हाहाहा राज हस्ते हुए-- आज नहीं दीदी कसम से बहुत मन करने हो रहा है आपकी रसीली छूट में जेब डालने को. आज तो आप मुझे अपने इस सूंदर शरीर के मज़े ले hi लेने दो.. आज मुझे भी अपनी छूट के अमृत को टास्ते कर hi लेने दो. सच में दीदी आप को भी मज़ा आएगा. जैसे परसों रात आपको मज़ा कराया था. कैसे मेरे हाथ को आप अपनी छूट पर रगड़ रही थी.

दीपिका नज़रें झुका गई.

दीपिका --- नहीं मुझे मज़ा नहीं आया था.

राज---- नहीं आया तोह आज आएगा.. राज झुका और दीपिका के होंटो को अपने होंटो में ले लिया. दीपिका अपना मोहन साइड करने लगी. राज से कहाँ वो बच सकती थी. होंठ राज के होंटो में न आये तोह राज ने दीपिका की गर्दन पर किश करनी शुरू कर दी.

सीईईई मैट कर कुत्ते बहन हों मेरी तेरी. जा जा कर बहार मोहनन मार.. दीपिका फिरसे घुसे में आ गई.

राज ने अपने लुंड को दीपिका की छूट पर रगड़ दिए. दीपिका राज को खुनी आँखों से देखने लगी.. राज हरामी मुस्कान से दीपिका को देखने लगा. बाहर से आवाज़ आने लगी. पर राज ने कोई जवाब नहीं दिए. राज दीपिका के गाल पर तोह कभी उसकी गर्दन पर किश करने लगा. दीपिका अपने होंठ राज से बचने में सफल रही थी.

राज निचे आया और दीपिका के चुचु के ऊपर वाले हिस्से को चूमने लगा. दीपिका मचल उठी. वो भी एक लड़की थी, मरदाना स्पर्श पर कर वह भी बेचैन हो उठती थी. अपने भाई के ऐसा करने से उसे बहुत ग़ुस्सा आता था. पर ये भी सच था अपने है के स्पर्श पर वह भी मचल जाया करती थी.

दीपिका --- छोड़ दे मुझे हरामी साले कुत्ते ाःह मा देख ले माँ तेरा हरामी बीटा क्या क्र रहा है मेरे साथ. ufffffffffffffffffffffff

राज अपनी दीदी को बेचैन पा कर अंदर hi अंदर खुश हो गया. चुके दबाते हु वो अपनी दीदी को चूमने लगा. जल्द hi दीपिका भी बेबस होने लगी. उसकी छूट में पानी आने लगा. अंदर से वो विरोध नहीं करना चाहती थी. पर विरोध किये बिना वह रह नहीं सकती थी. वर्ण उसका भाई एक खुला सांड बन जाता. निचे आ कर राज ने दीपिका की कमीज ऊपर कर दी. और शलवार जो दीपिका ने पहनी हुई थी. उसका नाडा खोल कर एक झटके में दीपिका के चुत्तड़ को उठा कर निचे कर दी. दीपिका चीख पड़ी.

बहार राज की माँ और बहनो अब चुप क्र गई थी. वह जानती थी, जितना राज को बिलेंगी, उतनी hi राज दीपिका के साथ ज़यादा करेगा..

दीपिका भी ये बात जानती थी. दरी सेहमी, छूट की आग में जलती वह राज को रोक नहीं पा रही थी. उसकी छूट भी तो पानी छोड़ने लगी थी.

दीपिका ---- हरामी साले कुत्ते तूने फिरसे मुझे नंगा क्र दिए. वापिस पहना मुझे मेरी शलवार.. दीपिका लाल आँखों से बोली.'

राज--- दीदी आपकी आँखों में लाल डोरे क्यों आये हाँ.. क्या आप को भी मज़ा आने लगा है. देखता हों. सच में hi आपको मज़ा आ रहा है या नहीं.. राज ने दीपिका की पंतय भी उतार दी.. दीपिका अपनी छूट पर हाथ रख कर अपनी छूट छुपाने लगी.

raj--didi इसे मुझसे क्यों छुपा रही हो. कितनी बार तो देख चूका हों में आपकी रसीली छूट. राज हस्ता हुआ बोलै तोह दीपिका राज को गलियां देने लगी.

राज ने दीपिका के हाथ हटाए और अपना मोहन दीपिका की छूट में घुसा दी

दीपिका ---- आअह्ह्ह मर गई मा... साले कितनी गरम है तेरी जीब.. उफ्फ्फ्फ़ मत क्र हरामी साले कुत्ते. उम्मम्मम्हा दीपिका भी मज़े में होने लगी. राज भी नशे में होने लगा. राज स्पीड से अपनी जीब अपनी बड़ी बेहेन की छूट पर चलने लगा. कभी दीपिका की छूट के डेन को मोहन में भर कर चूसने लगता.. दीपिका पागल होने लगी थी. दीपिका भी सिसकने लगी. वो भी अब मदहोश होने लगी थी.

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जवानी से माला माल थी दीपिका भी. उसे भी ऐसे hi प्यार की छह थी. ऐसे hi एक भरपूर मरदाना स्पर्श की छह थी. वो भी अपने जिस्म से खेलते हुए किसी को देखना चाहती थी. पर अपने भाई के साथ नहीं.

भाई का स्पर्श पर भी वो बेखुद होने लगी. उसके मोहन से गलियां ख़तम होकर सिसकियों में बदलने लगी. राज ने सर उठा कर अपनी दीदी को देखा, उसे मस्त पाया तोह उठ गया.

बैठ कर अपनी दीदी को अपनी गॉड में बिठा लिया. उसकी कमीज और ब्रा भी निकल कर पूरा नंगा क्र दे.

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इस बार दीपिका ने कोई विरोध नहीं किया.. वो ऑंखें बंद कर के राज का साथ देने लगी.

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उसकी छूट अब झाड़ जाने के लिए बेचैन हो उठी थी. गुज़री रात की तरह वो इस बात भी अपने भाई के स्पर्श में खोने लगी थी. उसकी छूट की आग और भी बहुत बढ़ गई थी.

राज भी अपने कपडे उतार कर अंडरवियर में ह गया. दीपिका के काढ़े निप्पल अपने सीने में चिपकते हुए राज ने दीपिका की गर्दन पर किश करनी शुरू कर दी. इस बार दीपिका अपने भाई का पूरा साथ दे रही थी. अपने भाई से प्राप्त होने वाले स्पर्श का आनंद ले रही थी. अपनी छूट को अपनी भाई के अंडरवियर में क़ैद लुंड पर रगड़ने लगी.

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कुछ देर चूमने चाटने के बाद राज ने अपना अंडरवियर उतरा और दीपिका की पीठ अपनी और करके दीपिका को अपने लुंड के ऊपर बिठा दिए. राज के गरम लुंड को अपने निचे पा कर दीपिका और बी मचल उठी.

राज ने दीपिका के गाल को चाटते हुए दीपिका की छूट पर उँगलियाँ चलनी शुरू कर दिए. दीपिका की आग और भी बढ़ गई.

आठ साले क्यों करता है तू ऐसा मेरे साथ.. मारना चाहता है क्या मुझे. माआ उफ्फ्फ आह्हः उम्मम्मम न कर हरामी छोड़ दे मुझे.. दीपिका के मोहन से आप भी विरोध वाली बाटने hi निकल रही थी. पर वो पूरी मस्त हो चुकी थी.

जब राज को लगा अब दीपिका की छूट का पानी कुछ hi देर का मेहमान है तो राज ने दीपिका को लिया दिए. दीपिका ने राज को देखा, राज के लुंड को देखा तोह दर गई.. राज दीपिका को डरा हुआ देख कर हसने लगा.

राज ने अपना लुंड पकड़ा और दीपिका की छूट की ऑर्डर बढ़ने लगा..

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ये देख कर दीपिका के जिस्म में थरथराहट होने लगी.. दीपिका को लगा आज उसका भाई उसके कुंवारेपन को ख़तम करदेगा.

दीपिका ---- nn--nahi राज प्ल्ज़ ऐसा मत करना..

राज ने दीपिका के दोनों पेअर उठा कर दीपिका के सर की और मोड़ दिए अपने लुंड को दीपिका की छूट के लिप्स में से घुसा कर रगड़ने लगा..

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तीन चार बार ऐसा hi किया था. तो दीपिका को मज़े के साथ चैन भी मिल गया. वो समझ गई उसका भाई उसकी सील नहीं खोलने वाला.. सुख का सांस लिया दीपिका ने..

अब्ब दीपिका अपने भाई के मोठे लम्बे लुंड को अपनी छूट पर रगड़ कहते हुए मज़ा लेने लगी. राज ने अपनी दीदी को देखा..

राज--- क्यों दीदी दाल डॉन अंदर..

दीपिका --- मुझे पता है मेरा भाई इस दुन्या का सबसे बड़ा हरामी इंसान है.. पर वह अपनी किसी भी दीदी की सील नहीं तोड़ेगा. इतना मुझे यकीन है.

राज --- अच्छा तो फिर ये लो.. राज ने अपने लुंड को पीछे ला कर ज़ोर का धक्का मार दिए. राज का पूरा लुंड दीपिका के लिप्स में से होता हुआ पूरा ऊपर निकल गया.. दीपिका की चीख निकल गई.. दीपिका राज के तेवर देख कर दर गई थी.

राज हसने लगा. दीपिका ने राज को हस्ते देखा तो खिस्यानी हंसी हसने लगी.. वो राज के बेहवाके में आ गई थी.

कुछ देर तक राज दीपिका की छूट पर लुंड रगड़ता रहा. दीपिका फिरसे मस्त होने लगी. अब दीपिका को कोई चिंता नहीं थी. उसका भाई उसकी सील नहीं तोड़ने वाला था. दीपिका अपने भाई के लुंड का पूरा पूरा आनंद लेने लगी.

देर नहीं गुज़री और दीपिका कम्पटी हुई झड़ने लगी. राज का लुंड दीपिका के चुतरस से गीला हो चूका था. राज तब तक अपनी दीदी की छूट पर अपना लुंड रगड़ता रहा, जब तक उसके लुंड से वीर्य न निकल गया.. वीर्य उड़ता हुआ दीपिका के चुचु पर दीपिका के मोहन पर गिरने लगा.

दीपिका --- हरामी कुत्ते साले मेरे ऊपर क्यों गिरा दिए..

राज हैम्पटा हुआ साइड में गिर पड़ा. कल रात से उसके लुंड ने बहुत बार पानी निकल दिए था. राज की सांस चढ़ गई. राज किसी कुत्ते की तरह hi हांपने लगा था. वो दीपिका को उसकी बात का जवाब नहीं दे सका..

दीपिका उसकी हालत देख कर हसने लगी.

दीपिका --- हरामी तू उस बूढी की मार कर इतना थक गया. दूसरी बार तेल निकल कर तेरी ये हालत हो गई है.. हाहाहा

राज ने दीपिका को देखा.. पर बोलै कुछ नहीं. दीपिका ने एक कपडे से अपने ऊपर गिरे वीर्ये को साफ़ किया..

राज ने उठ कर दीपिका को खड़ा कर दिए. उसके दोनों चुके पकड़ कर दीपिका की छूट से मोहन लगा दिए. राज दीपिका की छूट प् रास पीने लगा.

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दीपिका अब हलकी हो चुकी थी. जो कुछ राज उसके साथ करना चाहता था, वो कर चूका था. ये सब दीपिका के लिए गलत होते हुए भी मज़े का था. राज उसके साथ ज़बरदस्ती करके भी उसे शांत hi करता था. और ये बात कहीं न कहीं दीपिका को भी पसंद थी. पर भाई बेहेन के रिश्ते का पास करते हुए वो हमेशा राज से दूर भी रहती थी. उसे सुधरने की कोशिश करती थी. पर वो सुधरता नहीं था.

राज को बीएड पर गिरा कर दीपिका नंगी hi बड़े बड़े चुके राज के सीने में दबाये हुए राज से बोली..

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दीपिका : साले हरामी तू भाई होकर अपनी बड़ी बेहेन के साथ ऐसा करता है.

राज----- क्यों मज़ा नहीं आया क्या दीदी आपको.. पुरे संसार में ऐसा भाई नहीं होगा किसी का. अरे मैं तो आप सब का भला hi करता हों. वर्ण तो शादी तक कैसे आप अपनी छूट के अंदर के रास को दबा के रखती.. मैं हर कुछ दिनों बाद इसे निकल कर आप सब का hi तोह भला करता हों. नहीं निकलता तोह आप सब को hi परेशान बन जाती.

राज हस्ता हुआ बोलै.. दीपिका ने उसे थप्पड़ मार दिए.

दीपिका ---- पता नहीं कैसे माँ ने तुझे पैदा कर दिए. तू न माँ के जैसा है और न hi पिता जी के जैसा. दोनों कितनी शरीफ थे और एक तुम हो. हरामियों में सब से नंबर 1 हरामी..

राज --- हस्ता हुआ.. अगर हरामी होता तोह क्या घर में अआप सब की सील बची होती. कितनी सीलें मई गाओं में खोल चूका हों.. पता तो होगा hi आपको.
 
दीपिका राज से दो बार अपनी छूट का पानी निकलवा कर बीएड से उत्तरी, जितना घुसा उसे राज पर था. उतनी hi अंदर से खुश भी थी. सब गलत था. पर वह फ्रेश भी हो गई थी.

राज कितनी hi बार तोह उसे नंगा देख चूका था, नंगा कर चूका था. शर्म आते हुए भी नहीं आती थी. दीपिका को पता था उसका भाई हरामियों का हरामी है. कोई भी बात खुद पर आने नहीं देगा. जितना उसे बड़काओगे उतना hi गले पड़ेगा.

दीपिका ने अपने कपडे उठाये और नंगी hi सर्दी में दरवाज़ा खोल कर बहार निकल पड़ी. बहार कुछ फैसले पर सब बैठी हुई थी. दरवाज़ा खुला तोह दीपिका को नंगी देख कर सब के मोहन खुले रह गए. दीपिका हाथ में कपडे लिए सब के बीच जा बैठी.

आराधना--- कुछ तो शर्म क्र दीपिका, ऐसे नंगी की आ गई. कपडे पहने ले.

दीपिका हस्ते हुए बोली--- माँ एक hi तो मर्द है हमारे घर में. वो मेरा hi नहीं आप सब का भी सब कुछ देख चूका है. आज फिरसे उसने देख लिया, मज़े भी लूट लिए. अब अब से क्या छुपाना.

भावना---- दीपिका अंदर तो नहीं डाला न राज ने.. भावना बोली तोह आरती ने उसके कंधे पर जड़ दी एक.

आरती--- अगर डालती तो क्या दीपिका ऐसे चल के आती. लंगड़ा कर न आती.. आरती दीपिका को देख के मस्ती से बोली.. ग़ुस्सा अब मस्ती में बदलने लगा था.

आराधना--- हे भगवन क्या मेरे घर का माहौल ऐसे hi रहेगा. मेरे बीटा अपनी hi माँ और बहनो को नंगा करके मज़े लेगा और मेरी बेटियां ऐसे बेशर्मो की तरह बातें करेंगी.

आराधना दुखी नहीं थी. बस ऐसे hi बोल गई थी. उसकी आदत बन गई थी ऐसा बोलने की.

राज बहार कपडे पहन कर बहार आया, अपनी माँ के जवाब में वो बोलै.

राज---- माँ एक बार आप भी मेरा लुंड अपनी छूट और गांड में ले लें. फिर सब ठीक हो जाएगा.

अंजलि उठ कड़ी हुई--- रुक हरामी तुझे तो में देखती हों. कभी तोह कोई और बात कर लिए कर. हर समय ऐसी hi घट्टिया बातें करता रहेगा.

दीपिका को ठण्ड लगी या वह राज से दर गई थी, दीपिका ने झट से कपडे पहनने शरू कर दिए थे.

अंजलि राज के पास क्र उसे मरने लगी थी. पर राज ने अंजलि को अपनी बहन में कस लिया. अंजलि के चेहरे पर फूँक मरते हुए वो बोलै.

राज---- दीदी किसने कहा ये सब घट्टिया है. देखन कैसे के दूसरे hi दिन कैसे आप भी अपने पति से कहेंगी.. "ाजी थोड़ा ज़ोर से धक्के मारो न"

राज बड़े स्टाइल से बोलै तो अंजलि शर्मा गई और सब है दिए.

राज ने भी हस्ते हुए अंजलि के गाल पर किश करके उसे छोड़ दिए.

आराधना--- अब्ब कहा जा रहा है तू राज बीटा.

राज---- गाओं में hi कहीं घूमने जा रहा हों माँ..

दीपिका---- जा जा मर जा कही भी. हमें तुझसे कोई मतलब नहीं. दीपिका कपडे पहन चुकी थी. वो कड़ी होक कमर पर हाथ रखते हुए बोली.

बह्व्ना----- हेहेहे दीपिका लगता है तेरे अंदर की गर्मी अभी ख़तम नहीं हुई. दीपिका जो ग़ुस्से से राज को देख रही थी. भावना की बात पर झिप गई. सब फिर से है पड़े. राज बहार निकल गया.

दीपिका भावना के साथ एक कमरे में थी.

भावना---- तोह आज तुमने फिरसे राज से मज़े ले hi लिए.

दीपिका ने भणवा को घूर के देखा.

दीपिका--- राज से कहुगी एक बार तो आपके साथ भी सब कर hi ले. फिर मुझे बताना, कितनी श्रम आती है और कितना मज़ा.

भावना----- उस हरामी ने मुझे भी छोड़ा hi कब है. कितनी बार तो मुझे पकड़ कर नंगा कर चूका है. कितना बार मेरा भी पानी निकल कर मुझे शर्म से पानी पानी कर चूका है.

अब दीपिका क्या बोलती. राज ने अपनी माँ को काम और बहनो को ज़्यादा परेशान किया हुआ था.

राज जा पोहंचा अपने हरामी दोस्तों के बीच..

रक्--- सुनाओ माँ के लौडो क्या हां हाँ तुम सब के. किस किस ने रत को अपनी माँ बहन की छूट, गांड देखि.

सब हसने लगे. सब एक साथ बोले---- हमारी ऐसी किस्मत कहाँ.

जूरी--- हमारे पास तेरे जैसी डेरिंग और -----

बिन्नी--- और तेरे जैसा लुंड कहाँ

विक्की--- साले तू है न हमारे हिस्से की चुदाई करने के लिए.

राज----- जूरी तू सुना तेरी माँ बेहेन अब कैसे हाँ.

जूरी अपने अध् खड़े लुंड को मसलते हुए बोलै-- वैसे hi हाँ यार दोनों.

बिन्नी--- हाहाहा तू क्यों अपनी माँ और बेहेन को देख कर अपने लुंड को मसल रहा है हरामी.

राज ----- कुछ तोह देखा है तूने बता मुझे.. राज जूरी के कंधे पर धप मारते हुए बोलै.

जूरी---- हाँ यार आज बजी मुझे रोटी देती हुए झुकी तो उसकी चुकी आधी दिख गई थी, तब से मेरे लुंड का बुरा हल है.

तीनो हसने लगे.

विक्की ---- बहनचोद जिस दिन तू अपनी बेहेन को नंगा देख लेगा उस दिन तेरा क्या होगा.

बींनणी-- हाहाहा होगा क्या वही खड़े खड़े लुंड ढीला कर लेगा.

राज----- जैसे तेरे लुंड का पानी निकल गया था अपनी माँ को नहाते देख क्र.

इस बार बिन्नी शर्मिंदा हुआ और तीनो है पड़े.

राज----- वैसे तेरी माँ भी पूरी पाठक है. तेरी दीदी आई के नहीं अपने घर से.

बिन्नी--- परसो आ रही है दीदी, बोली थी सास की सेहत कुछ अच्छी नहीं. परसो तक पोहंच जाएगी.

राज----- क्या ख्याल है बिन्नी मरेगा इस बार अपनी दीदी की छूट

बिन्नी थूक निगलते हुए--- नहीं यार मुजमे इतनी हिम्मत नहीं.

तीनो-- हाहाहाःहाहा

जूरी----- साले तो बड़ा बुज़दिल है, राज तेरी दीदी की मार लेता है और अब भी दर रहा है.

बिन्नी----- साले जिस दिन तुम दोनों अपनी अपनी माँ बेहेन को छोड़ लोगे न, उस दिन ऐसे hi मुझे है के दिखाना. माँ बेहेन मन भी जाएँ तो हिम्मत इतनी जल्दी नहीं आती. बिन्नी के चेहरे पर पसीना आने लगा था.

चरों हस्ते हुए ऐसी hi बातें करने लगे.. एक छोटा बच्चा भागता हुआ आया. चरों उसे देखने लगे. बच्चा 8 साल का था, वो पास पोहंचा तो उसकी सांस फूल चुकी थी.

बच्चा-- जूरी भाई, तेरी दीदी को दूसरे गाओं के लड़के छेड़ रहे हाँ.. बच्चे की बात सुनके हम सब झटके में उठ खड़े हुए.

राज----- चीखता हुआ.. कहाँ हाँ वो सब.. बचे ने बता तो सब बच्चे के साथ उस दिशा में भागने लगे..

गोअन से हटके जूरी के रिश्रेदारों के घर थे. राज और तीनो भाग कर वहां पोहंचे तोह 4 लड़के 2 मोटरॉयकलों पर खड़े हुए थे. जूरी की सिस्टर का नाम उज़्मा था. उज़्मा अपनी खला की बेटी के साथ थी.

राज और सबको आते देख कर चरों लड़के वहां से भाग निकले. राज सबसे आगे था.

जूरी--- बजी आप तो घर में थी न.. उज़्मा राज को देखते हुए..

ुंजा----- तो क्या मई हर टाइम घर में hi रहा करू. तुम घर से निकल सकते हो, में नहीं निकल सकती क्या. अंत में जूरी पर ग़ुस्सा करते हुए बोली.

उज़्मा की खला की बेटी उज़्मा के कान में बोली.. उसका नाम नौरीन था.

नौरीन--- कमीनी तोह राज हरामी को ऐसे क्यों देख रही है.

उज़्मा ने नौरीन को जवाब नहीं दिए. बिन्नी और विक्की साइड देखने लगे. जूरी रोज को देखने लगा.

राज---- सही कहा तुमने उज़्मा डार्लिंग, इस कुत्ते की हिम्मत भी कैसे हुई तुमसे पूछने की, तुम बी अपनी मर्ज़ी कर सकती हो. फिर जूसी से बोलै. जूरी चल अपनी नौरीन बाकि को घर ले जा. में तेरी बेहेन को लेके चलता हों. बिन्नी और विक्की मोह साइड करके अपनी हसी दबाये हुए थी. नौरीन ग़ुस्से से राज को देखते हुए बोली.

नौरीन--- चल चल हरामी कहीं का, चरों कुत्तों से बचा के अब तू आ गया है. चल निकल यहाँ से. उज़्मा ने नौरीन को घुसा से देखा. कोई कुछ नहीं बोलै.

उज़्मा---- तू क्यों हर वक़्त राज पर ग़ुस्सा होती रहती है नौरीन. कितना अच्छा तो है राज. राज के इशारे पे जूरी, विक्की और बिन्नी निकल लिए थे, बच्चा पहले hi चला गया था. इस साइड में कोई घर भी नहीं था. कोई देखने वाला बी नहीं था. 10 मीटर के बाद गाओं की गली शरू होती थी. ये गाओं का दूसरा इलाका था.

नौरीन--- सरे हरामी हाँ साले. जूरी तो सबसे बड़ा हरमे है कुत्ता. अपनी बहन को एक हरामी के पास छोड़ के चला गया.

राज और ुंजा हसने लगे. राज ने उज़्मा का हाथ पकड़ लिया. ुंजा ने आस पास देख के अपने हाथ नौरीन से नहीं छुड़ाया.

उज़्मा--- आज तो तुम बड़े टाइम पे आये राज. वर्ण वो--

राज--- उनको तो में देख लूंगा मेरी जान.. तुम परेशान न हो. जितना तंग उन कुत्तो ने तुजे किया है न, उससे कहीं बढ़कर उसके गाओं में घुस कर में उन्हें करूँगा.

ुंजा जान निसार नज़रों से राज को देखने लगी. नौरीन उज़्मा को घुसे से देख रही थी. तीनो धीरे धीरे चलते हुए गली की ऑर्डर बढ़ने लगे.

राज ने ुंजा को देखा, फिर आस पास देख कर ुंजा को छोड़ कर नौरीन का हाथ पकड़ क्र अपने सीने से लगा लिया.

नौरीन-- chhhh..chhod मुझे हरामी साले कुत्ते. कोई देख लेगा. अगले हफ्ते मेरी मांगनी होने वाली है. क्यों मेरी मांगनी होने से पहले hi बवाल खड़ा कर रहे हो.. नौरीन सच में दर गई थी. नौरीन भी साली गरमा गर्म जवानी की मालिक थी.

राज ने नौरीन को छोड़ दिए. ुंजा को देख के बोलै. मुझे क्यों नहीं पता इस छूट वाली की भी सगाई हो रही है.

ुंजा----- हेहेहे राज इसकी माँ को भी तेरा बड़ा दर रहता है. कहीं तू नौरीन को पकड़ क्र किसी दिन न पेल दे.

राज ने फिर आस पास देख क्र ुंजा को पकड़ लिया.... क्यों तेरी माँ को दर नहीं रहता तेरा.

ुंजा---- बड़ा दर रहता है उसे तेरा राज.. ुंजा हस्ते हुए बोली. तुझसे तो गाओं की हर माँ परेशान रहती है. तीनो फिरसे चलने लगे.

नौरीन---- है बी एक नंबर का हरामी न ये बी. दर तो लगेगा.

राज---- लगता है तेरी छूट की खुजली मुझे मिटने hi पड़ेगी. गली पास आ गई थी नरेन फिर शेर होने लगी.

नौरीन--- जा बे कुत्ते, खुद को बड़ा शेर समझता है. दम है तो अब पकड़ के दिखा.

राज ने देर नहीं की और नौरीन की छूट को पकड़ लिया. नौरीन चीख पड़ी. राज ने अच्छे से नौरीन की छूट में ऊँगली करके अपना हाथ हटा लिए. ुंजा मोह पर हाथ रख के हसने लगी. नौरीन की हलकी चीख सुनके गली के पहले घर की दिवार से एक औरत ने सर उठा के देखा. राज पे नज़र पड़ी तो फ़ौरन hi निचे झुकती चली गई. इस बार नौरीन बी हसे बिना न रह सकीय.

राज और ुंजा तो खुल क्र हसे थे.

ुंजा----- राज सच में तेरा साथ मुझे बड़ा ाचा लगता है.

राज----- किसी दिन टाइम निकल के तुजे खुला टाइम दूंगा मेरी जान. उस दिन नौरीन को बी साथ लाना. इसे बी थोड़ा सा मज़ा करा दूंगा.

नौरीन---- चल चल बड़ा आया मुझे मज़े करने वाला.

ुंजा---- है अब तो तेरे लिए बी मज़े होने वाले हाँ. बस एक बार तेरी मांगनी हो जाये, फिर जल्द hi शादी बी हो जाएगी और तेरे बी मज़े हो जायेंगे.

राज---- उससे पहले hi में hi इसे मज़े करा दूंगा. जितनी आग साली की छूट में लगी है न, मुझे लगता है मुझे hi ख़तम करनी पड़ेगी.

नौरीन ने राज को ग़ुस्से से देखा. ुंजा का घर कुछ दूरी पर रह गया था. राज ने दोनों को छोड़ा और निकल पड़ा.

गाओं की साडी लड़कियों के साथ राज शरू से खेलता आया था, सब के साथ राज की खुली बात थी. कुछ तो वक़्त के साथ बदल गई थी. और राज से दूर हो गई थी. तो कुछ ुंजा जैसी अब राज पे लट्टू हो चली थी. राज बी ऐसियो को खूब मज़े करवाता था.
 
राज एक गली से गुज़र था वह घर न जा क्र अपने दोस्तों के पास जा रहा था. सामने से राज को अपनी बचपन की स्कूल टीचर आती हुई दिखी. जो अब रिटायरमेंट ले चुकी थी. राज यस्य देख कर खुश हो गई. और वो राज को डेक के परेशान हो गई.

राज हस्ता हुआ अपनी टीचर के पास जा पोहंचा.

राज---- किसी हो मेरी टीचर डार्लिंग.. टीचर का नाम सुधा था, वो घबरा क्र इधर उधर देखने लगी. कोई नहीं दिखा तो चैन की सांस ली. राज ने बिना आस पास देखे hi सुधा को अपने गले से लगा लिया, साथ hi उसकी गांड में ऊँगली भी क्र दी.

राज---- क्या बात है मेरी सुधा डार्लिंग ने आज अपनी गांड को इतनी सर्दी में भी मेरे लिए नंगा रखा हुआ है.

सुधा--- छोड़ मुझे हरामी साले कुत्ते. कोई देख लेगा. क्या कहेंगे सब.

राज सुधा से अलग होक उसका हाथ पकड़ के उसके साथ चलने लगा. कुछ फैसले पे सुधा का घर था.

राज----- आज नहीं छोडूंगा तुजे में मेरी गदराई घोड़ी. बड़े दिनों के बाद तू मेरे हाथ आई है. आज तोह छूट और गांड दोनों में लुंड पेल के hi रहूँगा. सुधा के चेहरे पर सर्दी में भी पसीना आ गया था. कुछ देर में दोनों सुधा के घर के दरवाज़े पर पोहचे. राज देख के खुश हो गया.

राज----- वह आज तोह घर पे कोई भी नहीं है. कहा गए हाँ सब.

सुधा ने लॉक खोला अस पास देखा फिर राज के साथ अंदर चली गई. एक कमरे में पोहंच के राज ने ज़बरदस्ती सुधा को पकड़ कर बीएड पर गिरा दिए.

सुधा---- देख राज तू मेरे साथ ऐसा सब न किया कर. कुछ तोह ख्याल रखा क्र में तेरी टीचर भी रही हों न. सुदाह रिक्वेस्ट करते हुए बोली.

राज--- इतने दिन से धयान hi रो रख रहा हो मैडम जी. कसम से जितना में दूसरों को परेशान करता हों, उतना आपको नहीं करता. एक तुम हो कह मुझे hi बुरा कहती रहती हो.

सुधा--- जब तेरे पास पुरे गाओं की छूट है तोह मुझे माफ़ी क्यों नहीं दे देता तो राज बीटा. प्ल्ज़ मेरे साथ ऐसा सब मत किया कर. मुझे-------

राज----- सस्शह्ह्ह... मैडम जी जो मज़ा आपके साथ करने में आता है वह किसी और साथ नहीं आता. राज ने सुधा को किश करनी शुरू कर दी. सुदाह मचलने लगी, राज को रोकने लगी. पर राज नहीं रुका. राज ने किश के साथ सुधा के दोनों चुके भी दबाने शुरू कर दिए. थोड़ी देर में उसके और अपने सरे कपडे निकल दिए. सुधा बेबसी से राज को राज के लुंड को देखने लगी.

राज--- क्या देख हो सीधा डार्लिंग कितनी बार तो दाल चूका hi अपने लुंड को तेरी छूट में, तेरी गांड में. सुधु कुछ नहीं बोली मोह साइड कर गई. शुरू में उसे राज का ऐसा सब करना पसंद नहीं आता था. गर्म होने के बाद वह भी सतह देती थी.

राज झुका और सुधा के दोनों पेअर खोल क्र उसकी ठंडी छूट में जीव घुसा दी. राज जीब और एक ऊँगली से सुधा की छूट को गरम करने लगा. देर नहीं लगी और सुधा का राज के सर पर आ गया.

सुदाह-- आह्हः हरामी साले और अच्छे से चाट मेरी छूट को. जितनी जल्दी आग भड़कता है, उतनी जल्दी ठंडी भी कर दिए क्र. आठ माँ इस हरामी से कब जान छोटेगी मेरी. इसकी माँ की उम्र की हो गई हों फिर भी मेरे पीछे पड़ा हुआ है.

सुधा सिसकती हुई बोली तोह राज सुधा की छूट में hi स्माइल करने लगा. कुछ देर के बाद राज उठा और के मुँह पर आ गया.

राज-- चलो मैडम जी अब मेरे लुंड को भी मोह में लेकर गीला कर दो. या ऐसे hi घुसा दूँ. सुधा ने नशीली आँखों से राज को, राज के लुंड को देखा फिर पकड़ कर चाटने चूसने लगी. लुंड को मोह में लेने वाला काम भी सुधा सिर्फ राज के साथ करती थी. राज बड़ा हरामी था, सब अपनी मर्ज़ी से करता था.

कुछ देर लुंड चुसवाने के बाद राज ने अपने लुंड सुधा के मोहन से निकला और सुधा को घोड़ी बना दिए. सुधा कुछ नहीं बोली और घोड़ी बन गई.

राज पीछे आया और सुधा की गांड को भी चाटने लगा. अच्छे से उसकी गांड को गीला करके राज ने अपने लुंड को सुधा की गांड के छेड़ पर सेट किया. एक धक्का मारा आधा लुंड सुधा की गांड में..

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सुधा--- साले कुछ तोह मेरे दर्द का ख्याल रख कर. आराम से नहीं दाल सकता था क्या.

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मैडम मस्त होने लगी. मैडम अपनी छूट को मसलने लगी. राज की स्पीड बढ़ने लगी.

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राज-- क्या करूँ सुधा डार्लिंग आपकी गांड में प्यार से लुंड डालने का मज़ा नहीं आता और आप जो न न करके मेरे लुंड लेती है न मुझे बड़ा मज़ा आता है. राज ने एक धक्का और मारा और पूरा लुंड मैडम की खुली गांड में उतर दिए. मैडम सिसक पड़ी. सर्दी गर्मी में बदलने लगी. राज के धक्के भी बढ़ने लगे. सर्दी में भी पसीना आने लगा था दोनों को.

अब मैडम नशे में पूरी मस्त हो चुकी थी. वह भी अपनी गांड हिला हिला कर राज के लुंड को पूरा पूरा अपनी गांड में लेने लगी.

राज----- कसम से मैडम जी आपकी गांड जैसी कासी हुई गांड पुरे गाओं में किसी की नहीं है. राज मैडम के कमर और चुत्तड़ मसलते हुए, धक्के मारते हुए बोलै. मैडम थी भी भरे हुए शरीर की मालिक.

सुधा---- तू तेरे लिए तो नहीं ऐसा खुद को संवर के रखा मैंने हरमे साले. अपने पति के लिए सब करती हों. और तू लुटेरा बन कर मुझे लूट लेता है.

राज---- लुटेरा हाहाहा सही कहा मैडम जी आपने, आपके साथ ज़बरदस्ती करके बड़ा मज़ा अत है. राज ने लुंड निकल कर मैडम की छूट में दाल दिए. छूट बहुत पानी छोड़ चुकी थी. लुंड फिसलता हुआ अंदर जाने लगा. मैडम भी मस्त होकर गांड हिला हिला क्र राज का लुंड लेने लगी.

सुधा ----- साले हरामी तोह कितना मज़ा भी देता है मुझे. इतना मज़ा मुझे कबि अपने पति से भी नहीं मिलता.

राज--- तभी तोह आपका खेल करते हुए आपको छोड़ता हों मैडम जी.. मुझे फीलिंग्स भी बड़ी अच्छी आती है, एक स्टूडेंट अपनी टीचर को छोड़ रहा है. जिसके उसे मुझे ज़िन्दगी का पाठ पढ़ाया था. उसी की छूट और गांड में मेरा लुंड अंदर बहार हो रहा है.

सुधा--- चल अब स्पीड बढ़ा मेरा होने वाला है. अह्ह्ह ओह्ह्ह हाँ राज बीटा पूरा पूरा अंदर दाल के निकल.. ैई उफ्फ्फ मैडम कुछ देर में झड़ने लगी.

राज ने मैडम की छूट से लुंड निकल कर मैडम को सीधा किया. मैडम के ऊपर आ कर मैडम के दोनों बूब्स को दबा कर बीच में से लुंड रगड़ने लगा. मैडम की ऑंखें बंद थी.

कुछ देर में मैडम ने ऑंखें खोली राज को देखा.

सुधा--- तू मुझे हर जगा छोड़ने से बाज़ नहीं आएगा न.

राज----- मैडम आपके चुके भी तोह बड़े मस्त है. आज इनका दूध नहीं पिया तोह सोचा इन्हे छोड़ hi लूँ.

सुधा--- चल जल्दी कर अब मेरी बेटी आती होती.

राज----- आने दो उसे भी, उसपर भी मेरी नज़र है, बची हुई है वह भी मेरे हाथों से.

सुधा ने राज के लुंड को पकड़ कर लुंड के सुपड को अपने डेंटन में कास लिया,. राज को दर्द हुआ तोह चीख पड़ा. सुधा ने कुछ देर में राज के लुंड को अपने मोहन से निकल दिए.

सुधा---- हरामी साले कुत्ते, मुझे छोड़ क्र मेरी बेटी को भी छोड़ने की बात करता है. सच कहती हों जिस दिन तूने ऐसा किया न, कसम है मुझे में तेरे लुंड को hi चबा चबा कर आधा कर दूंगी. फिर डालते रहना किसी की छूट, गांड में. सुधा बड़े ग़ुस्से से बोली.

राज---- आह्ह्ह्हह साली मैडम आपने तोह मेरे लुंड hi काट डाला था. लुंड का सुपड लाल हो चूका था. मैडम ने राज को बीएड पर लिटाया, राज के ऊपर आ कर राज के लुंड को अपनी गांड में लेके उछलने लगी..

सुधा--- तू भी कभी मेरी बेटी के बारे में मत सोचना. वर्ण जो कसम मैंने खाई है, उसे पूरी भी कर जाऊँगी.

कुछ मिंटो की मैडम की उछाल कूद से राज के लुंड में माल छोड़ दिए. मैडम उसके ऊपर से उठी.

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सुधा---- चल उठ और कपडे पहन के निकल मेरे घर से.. हरामी कहीं का.. मैडम के होंटो पर अब मुस्कान थी. राज मैडम को देख कर स्माइल करने लगा.

राज को मैडम के यही रूप बहुत पसंद थे. मैडम की मस्त चुदाई करके राज ने कपडे पहने और निकल लिया मैडम के घर से. बहार निकला तोह मैडम की हंसाई ने राज को देख लिया.

वो बोली--- ओह्ह्ह तू आज फिर मैडम को छोड़ के जा रहा है. मुझे मैडम जी के पति को बताना hi पड़ेगा. तभी----

रक्-------- रुक हरामज़ादी तू, पिछली बार का भूल गई. लगता है, अब तेरी छूट में नहीं तेरी गांड में लुंड डालना पड़ेगा. उसे भी राज की ज़बर्दत चुदाई याद आई तोह शर्म के मारे दिवार से मोह निचे कर गई. राज हस्ता हुआ जाने लगा.
 
राज अपने दोस्तों के पास पोहचा.

बिन्नी ---- राज कहा रह गया था, कितनी देर से आया है.

विक्की ----- कही जूरी की बजी को छोड़ तोह नहीं दिए

जूरी झेप गया और सब हसने लगे.

राज ---- नहीं आज मास्टरनी मिल गई थी.

जूरी------ हाहाहा आज फिरसे उसकी बजा दी तूने साले.

बिन्नी ---- अब ज़रूर अगला नंबर उज़्मा बजी का होगा. बिनि हस्ता हुआ बोलै.

जूरी ---- राज तू hi कर ले मज़े, साला मेरे नसीब तो मेरे घर का माल है hi नहीं.

विक्की ---- जूरी के कंधे पर हाथ मरते हुए... हम भी तेरे जैसे हाँ यार..

राज ---- चलो उठो सब, दूसरे गाओं चलते हाँ. उन हरमजाजो को सबक़ सीखा के एते है. राज के रहते सब लड़ाई में शेर थे. अकेले किसी ने उतना दम नहीं था. सब उठ गए. दो मोटरसिक्लो पर बैठे सब दूसरे गाओं पोहंचे, वहां तीन लड़के मिले तीनो को पीठ कर वापिस आ गए. वो लड़के भी अपने गाओं में बदनाम थे. किसी ने नहीं बचाया.

कुछ दिन ऐसे hi बीत गए. राज ने अपनी माँ और डीडीओ के मस्ती चलती रही. सब कभी ग़ुस्सा करती तोह कभी राज के गर्म करने पर मज़े में आते हुए अपनी छूट का पानी निकल देती.

एक दिन मौका मिलने पर राज ुंजा को लेके विक्की के घर में जा घुसा. विक्की और उसके घर अपने रिश्तेदारों से मिलने किसी दूसरे गाओं गए हुए थे. विक्की से राज ने घर की छपी ले ली थी.

राज उज़्मा और नौरीन को लेके विक्की के घर में घुस गया. किसी ने नहीं देखा. कोई देखता भी तोह चुप hi रहता. राज से कौन भिड़ता. सब hi तोह उसके डर्टी थी.

नौरीन को बहार छोड़ कर राज उज़्मा को लेके अंदर कमरे में बंद हो गया. ुंजा नशीली आँखों से राज को देखने लगी. वह बहुत घरबाई हुई थी थी.

राज ---- क्यों मेरी जान, आज तेरा नंबर भी आ hi गया. छूट तोह ज़रूर तू चमका के आई होगी. उज़्मा भरी सांसो से राज को देखने लगी.

राज ने हस्ते हुए ुंजा को अपनी बहन में भर लिया. उज़्मा के गुलाबी होंटो पर किश करके वह फिरसे बोलै.

राज----- कसम से तू बड़ी हसीं है उज़्मा. चुके दबाते हुआ.. तेरे ये चुके बड़ी घाबज़ा के हाँ. आज तोह कास कास के इनके अंदर का सारा दूध पिऊँगा में.

उज़्मा ---- शर्मा कर... राज में भी सैलून से बहुत बेचैन रही हों तुम्हारे लिए. तुम्हारे लच्छन अच्छे नहीं हाँ. पर तू मेरे दिल को बहुत भाता भी है. तू दिल का भी बड़ा अच्छा है. पता नहीं क्यों सब तुझे गलियां देते हाँ.

राज ---- हस्ता हुआ... देने दो गलियां मुझे गलियों पर घुसा नहीं आता. मुझे तो मज़ा आता है.

ुंजा---- पर मुझे बहुत ग़ुस्सा आता है राज. जब सब तुझे गलियां देते हाँ.

राज --- चल छोड़ सब.. मज़े करते हाँ. राज का लुंड तोह उज़्मा के बदन से आ रही खुशबु से hi खड़ा हो गया था. उज़्मा की छूट पर दबा हुआ उज़्मा का हल बेहाल कर रहा था.

राज उज़्मा को किश करने लगा, उज़्मा भी तड़प कर राज के गर्म होंटो का रास पीने लगी. बहार नौरीन दरवाज़े से ऑंखें लगाए हुए सब देख रही थी. राज और ुंजा जानते थे. दरवाज़े के छेड़ है. ुंजा को शर्म तोह आ रही थी. पर आग बहुत बढ़कर थी. और नौरीन तोह उसकी पक्की सहेली थी, और सहेलिओ के सामने तोह ऐसा चलता hi रहता है.

किश के साथ साथ राज उज़्मा के चुके भी दबाने लगा. उज़्मा की कमर जितनी पतली थी, उतने hi उसके चुके बड़े थे, उतने hi उसके चुट्टाड़ भी बहार को निकले हुए थे. राज का एक हाथ ुंजा के चुत्तड़ पर पोहंचा और राज कास कास के दबाते हुए ुंजा को वाइल्ड किश करने लगा. ुंजा तोह राज के स्पर्श से hi पागल हो जाया करती थी. उसका एक हाथ राज के लुंड पर आया और वो उसे मसलने लगी. सांस फूलने पर किश तोड़ी. राज स्माइल से उज़्मा को देखने लगा और ुंजा फूली सांसों के साथ राज को.

राज ने एक नज़र दरवाज़े को देखा, नौरीन झट से पीछे हैट गई. उसकी साँसे भी भरी हो गई थी, उसकी छूट में भी खलबली मच उठी थी. वो लम्बी लम्बी सांसे लेते हुए देवर के साथ तक लगा क्र कड़ी हो गई. उसका एक हाथ खुद से उसकी छूट पर पोहंचा हुआ था.

राज नंगा होक ुंजा को नंगा करने लगा. उज़्मा बड़ी बेताबी से राज द्वारा नंगी होने लगी. नंगी होते hi वह फिरसे राज से लिपट गई. अपनी छूट को राज के लुंड पर दबाते हुए राज को किश करने लगी. राज तोह ुंजा की बेताबी देख के हैरान रह गया था. राज ने ुंजा को अपनी गॉड में उठाया और खटिया पर लिया दिए. निचे मोटा बिस्टेर बिछा हुआ था. बहार नौरीन फिरसे दरवाज़े के साथ जुड़ चुकी थी. अंदर का नज़ारा देख के उसकी छूट पर हाथ की रगड़ बढ़ने लगी थी.

गाओं की छोकरी थी. आग से भरी हुई थी. जल्द hi उसकी सगाई फिर शादी भी होने वाली थी. हर रत लुंड छूट को सोच कर सोता करती थी. ुंजा के साथ उसकी मस्ती चलती रहती थी. पर ऐसा सन उसकी ज़िन्दगी में पहले कभी नहीं आया था. बड़ी आग उसके अंदर से भड़क चुकी थी.

राज ने ुंजा की एक चुके को अपने मोहन में लिया और चूसने लगा.

ुंजा --- राज मेरे जणू कई सालों से में तेरे लिए रादप रही थी. पर तुझे मुझपे रह नहीं आया. आज मौका बना है तोह मुझे इतना प्यार दो, मई कभी भूल न पाऊँ.

इधर राज ुंजा को छोड़ने में लगा हुआ था. वही राज के चाचा के घर का माहौल बड़ा दर्दनाक बना हुआ था.

"निर्मल तुमने मुझे सच न बता कर बहुत बड़ा पाप किया है, बहुत बड़ा धोका दिए है. मैं ये रिश्ता तोड़ने आया हों"

राज की दीदी अंजलि का रिश्ता निर्मल चाचा के रिश्तेदारों में हुआ था. वही आ कर रिश्ता तोड़ रहे थे. निर्मल चाचा और चची तोह ये सुनकर काँप hi उठे थे.

निर्मल :- भाई साब ये आप क्या कह रहे हाँ.

"ठीक hi तोह कह रहा हों मैं निर्मल. एक घर से भागी हुई औरत की बेटी के साथ मैं अपने बेटे की शादी नहीं कर सकता. कल को वह भी किसी के साथ भाग गई तोह, हम क्या मुँह दिखाएंगे किसी को"

निर्मल चाचा चीख पड़े... भाई साब मैं आपका लिहाज़ कर रहा हों तोह इसा ये मतलब नहीं है आप मेरे घर की बेटी बारे ऐसे बात करेंगे. कुछ और मत बोलियेगा, वर्ण में भूल जाऊँगा हमारे बीच के रिश्ते को. रिश्ता तोडना hi है तोह तोड़ कर जा सकते हाँ आप. पर ऐसा बोलने वाले की में जीब गुड्डी से निकल दिए करता हों.

वह आदमी उठ खड़ा हुआ, निर्मल की बात पर घुसे में आ गया था. सर्दी का मौसम था, अपनी शाल को एक झटके में अपने कंधे पर धरा और ग़ुस्से से बोलै.

"जिनके साथ रिश्ता जोड़ना होता है, उनसे कुछ छुपाया नहीं जाता. मत भूलो तुम्हारी बेटी भी हमारे hi गाओं में बियाही हुई है"

चची और सब उसकी बात पर लरज़ कर रह गए. ग़ुस्सा भी बड़ा आया था उसकी बात पर. कोई हरामी पैन पर उतरे तोह बहुत कुछ कर जाया करता है. सब खून के घूँट पि कर रह गया. सच छुपा कर सबने सही किया था तोह दुसरो के लिए वही सच नज़म करना मुश्किल भी होता है.

"बात बिगड़ने की ज़रूरत नहीं है. हम दूर के रिश्तेदार हाँ, पर गैर नहीं हाँ. जो रिश्ता बना था, उसे ख़तम करके में जा रहा हों"

इतना बोल कर वह वहां से निकल पड़ा.. सब सदमे में आ गए.

चची --- हाय मेरी बच्ची कैसे सब सहन करेगी.. हाय मेरी बेहेन आराधना कैसे सब सहन करेगी. हाय वह तोह पहले से hi बड़ी दुखी है. घर से भागी थी, पर मैं की तोह अच्छी है ना. प्यार किया था, उस करम जाली ने. कोई गुनाह तोह नहीं किया था. हाय मेरी अंजलि बेटी.. चची सीने पर दो हाथ मरते हुए बन करने लगी.

नंदनी अपनी माँ से लीपर कर रोने लगी. तीनो भाई अपने पिता के साथ एक खटिया पर बैठ गए.

निर्मल ---- कैसे.. अब कैसे में अपनी भाभी को मुँह दिखाऊँगा.. हमारे शिव उसका है hi कौन. अब कौन शादी करेगा मेरी दूसरी बेटियों के साथ.

नंदनी --- राज को क्यों बता देते आप सब. वह कोई न कोई रास्ता निकल hi लेगा.

निर्मल ---- राज में वह बात नहीं है नंदनी बेटी, राज शुरू से hi और दिमाग वाला लड़का है. ऐसे मामलो में वह भी क्या कर सकता है.

नंदनी --- मुझे पूरा विश्वास है पिता जी. राज कुछ तोह ऐस ज़रूर करेगा, जो हम नहीं कर सकते.. और फिर सब जानना उसका भी हक़ है. शुरू में hi उसे सब बता देते तोह ाचा था. चची ने, सबने उसे कुछ पता नहीं चलने दिए. वर्ण वह ऐसा न बनता.

चची ---- चल कर आराधना को बताते हाँ. पता नहीं सब सुनके उसका क्या हाल होगा.

वहीँ राज और ुंजा भी 69 पोजीशन में लगे हुए थे. राज ुंजा की छूट में गम था, तोह राज का मोटा लम्बा लुंड ुंजा के मुँह में. वह पागलों की तरह सर्दी में पसीने से नहाये हुए राज के मोठे लम्बे लुंड को कुल्फी समझ कर चूस, चाट रही थी.

राज खड़ा हुआ और खत्तियर से उतर कर एक नज़र दरवाज़े को देखा, जहाँ नौरीन भी पागल हुई आंख लगाए देख रही थी. राज फ़ौरन दरवाज़े पर पोहचा और दरवज़ा खोल कर नौरीन को भी अंदर खेंच लिया. दरवाज़ा को कुण्डी नहीं लगाई, वैसे hi बंद कर दिए.

राज ने नौरीन को मौका दिए बिना hi अपने खड़े लुंड को उसकी छूट के साथ जोड़कर उसके चुके दबाते हुए किश करनी शुरू कर दी. नौरीन तो बेचारी चीक भी नहीं सकीय. ुंजा ये देख कर हस्स पड़ी.

नौरीन खुद भी बहुत गर्म हो चुकी थी. नार्मल होती तोह राज को दो थप्पड़ मर कर खुद से दूर कर देती. प्र राज के लुंड को देख के, राज और उज़्मा के खेल को देख के वह सब भूली हुई थी.

राज ने कुछ देर की किश के बाद नौरीन को भी नंगा करना शुरू कर दिए. नौरीन जो अपनी सांसों को ठीक कर रही थी. धयान नहीं दे पाई. उसे तोह पता चला जब उसकी शलवार का खुल कर उसके पैरों में गिरी.

ुंजा भी हस्ती हुई निचे उतर आई.

ुंजा--- हेहेहे नौरीन तू राज के साथ कइँती सुन्दर दिख रही थी. नौरीन शर्म से लाल हो चुकी थी. एक हाथ से अपने चुके छुपा लिए उसने तोह दूसरा हाथ पंतय पर रख कर अपनी छूट को छुपाने लगी.

राज---- ुंजा गद्दा निचे बिछा दो. ुंजा भी सब समझ कर झट से गद्दा निचे बिछा गई. राज ने नौरीन को पकड़ा और गद्दे पर लिया दिए.. उसके चुके को मोहन में लेकर राज चूसने लगा.

नौरीन--- chhhh..chhhoodd दे मुझे हरामी.. आह्हः अम्मीईई नौरीन सर पटखनी लगी. उसकी ऐसी हालत पहले कभी नहीं हुई थी. ुंजा साइड बेथ के सब देखने लगी.

राज फिर नौरीन की छूट पर आया, उसकी पंतय उतर कर छूट पर मुँह लगा दिए. अब तोह नौरीन की बस हो गई थी. एक झटके के साथ वह अपनी गांड उठा गई. साथ hi उसकी छूट ने भी भल भल पानी छोड़ना शरू कर दिए.

राज उठा और ुंजा को लिया कर उसके पेअर खोल दिए. ुंजा मस्ती में आते हुए, एक हाथ से नौरीन के चुके दबाने लगी. जो ढीले हो चुके थे. राज ने अपने अपने को ुंजा की छूट की बंद फंखो में फंसा कर धक्का मार दिए.

maaaaaaaaaaaaaa. ुंजा चीख पड़ी. नौरीन ने उसे देखा, पर बोल न सकीय, उसकी साँसे अभी भी उसके काबू में नहीं थी. वह नशीली आँखों से, उछलत चुचु से ुंजा को देखने लगी. ुंजा का हाथ नौरीन की चुकी से हटकर अपने मुँह पर चला गया था.

चला तोह राज का लुंड भी थोड़ा सा ुंजा की छूट में गया था. कुंवारी छूट में राज का लुंड फस चूका था. राज ने ुंजा को देखा, फिर एक और धक्का मार दिए. राज का लुंड ुंजा की छूट को खुला करता हुआ सील तक जा पोहचा. ुंजा ने सख्ती से अपने मोह को बंद कर लिया था. कहीं उसकी आवाज़ न बहार चली जाए.

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राज ने एक धक्का और लगाया तोह ुंजा की घुटी घुटी सी चीख निकल hi गई.

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राज का लुंड उज़्मा की सील तोड़ चूका था. खून निकला और राज की हिनति में एक और का इज़ाफ़ा हो गया.

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बहुत सी सीलें राज गाओं में पहले भी खोल चूका था. आज उज़्मा की भी राज ने खोल दी थी.





राज ने अपने लुंड को थोड़ा सा पीछे खेंचा और एक धक्का और मार दिए. साथ hi राज ुंजा के चुके पे झुका और एक निप्पल को मुँह में भर कर चूसने लगा.. ुंजा बेचारी बहुत तड़प रही थी. पहली hi बार में उसकी नन्ही सी छूट में खोते का लुंड चला गया था. ुंजा के आंसू उनके कानो में भरने लगे थे. नौरीन बड़े धयान से ुंजा की हालत को देख रही थी. मैं में बोल रही थी. और ले साली उस हरामी का लुंड अपनी छूट में. कहा था, हरामी का लुंड बहुत बड़ा है. पर नहीं मानी. अब्ब खुद hi भुगते..

कुछ देर में ुंजा सुकून से हुई तोह अपने मुँह से हाथ हटा दिए.

ुंजा --- कितने ज़ालिम हो तुम राज. कितना दर्द दे दिए मुझे. में तोह मर hi गई थी.

राज ---- लुंड से कोई नहीं मरता डार्लिंग. लुंड तोह बना hi छूट के लिए है. पहली बार बड़ी हो या लुंड बड़ा हो. दर्द तोह होगा hi है.

राज ने फिर अपने लुंड को खेंच कर पीछे किया और ुंजा को किश करते हुए पुरे ज़ोर का एक धक्का मार दिए. इस बार राज का लुंड ुंजा की छूट के साडी दीवारें फाड़ता हुआ अंदर तक उतर गया. ुंजा तोह मरने जैसी हालत में हो गई थी. उसने राज के होंटो पर काट लिया.

राज--- आह्हः साली काटती क्यों है. मर ुंजा कुछ बोल नहीं पाई. राज ुंजा के चुकी को फिरसे मोह में ले गया और चूसने लगा. कुछ देर में ुंजा को सुकून हुआ तोह राज ने अपने लुंड को हरकत देनी शुरू कर दी.

ुंजा --- आठ राज दर्द होता है.

राज--- चला जाएगा.. अब्ब तो सारा अंदर चला गया है मेरी jaan.jitna दर्द होना था, हो गया. अब तू मेरे लुंड के मज़े ले और मुझे अपनी इस सुन्दर शरीर के मज़े लेने दे. कितनी टाइट छूट है तेरी.. उफ्फ्फ ज़रूर मेरा लुंड भी छील गया होगा.

नौरीन साइड बैठ कर राज के पुरे लुंड को ुंजा की छूट में गम देख कर हैरान थी. ुअय यकीन hi नहीं हो रहा था. इतना बड़ा लुंड लेके भी ुंजा कितनी जल्दी नार्मल भी हो गई.

राज --- नौरीन से... इसके बाद तेरी भी खुलूँगा मेरी जान. तुझे भी दर्द के बाद इतना hi मज़ा आएगा.

नौरीन -- भाबरा.. नहीं.. नहीं.. मैं नहीं लेने वाली..

दर्द में होते हुए भी ुंजा है पड़ी.

ुंजा---- राज तुझे मेरी कसम है आज उसकी छूट में भी लुंड डालना है.

नौरीन --- कमीनी तू मेरी सहेली होक ऐसा बोलती है. जानती नहीं मेरी मांगनी होने वाली है.

ुंजा---- तोह क्या हुआ, उस लल्लू को पता hi नै चलेगा, तेरी सील है भी क नहीं.

नौरीन शर्मा गई.. राज अपने लुंड को पूरा पूरा बहार निकल कर ुंजा को छोड़ने लगा. जल्द hi ुंजा की छूट में पानी बढ़ने लगा. जिससे पांच पांच पांच की आवाज़ होने लगी. ुंजा भी सिसकते हुए मज़े से छोड़ने लगी.

कुछ देर में ुंजा के हाथ राज की पीठ पर आये और राज की पीठ पर चलने लगे.

ुंजा ---- अब्ब मुझे बहुत अच्छा लगा रहा है राज. दर्द के साथ एक सुकून भरी लहार भी मेरे अंदर दौड़ जाती है राज. लाइव यू राज. तुम बहुत प्यारे हो. तुम्हारे लुंड भी बहुत बड़ा है. ऐसा hi लुंड तोह हर लड़की की छह होती है. पता है राज एक बार मैंने तुम्हे देख लिया था हमारी hi बिरादरी की एक औरत के साथ. तुम्हारा लुंड देख के मैं बहुत मचल गई थी. तब से मैं तुमसे छोड़ने के लिए बेताब थी.

राज --- ये बात तुमने पहले क्यों नहीं बताई. राज के धक्को की स्पीड बढ़ने लगी.

ुंजा---- सोचा था जब अपने अंदर लूंगा, तब बताऊँगी. नौरीन को बता दिए था मैंने.

राज ने नौरीन को देखा, जो फिरसे गर्म होने लगी थी. अपने एक ऊँगली से अपनी छूट को मसल रही थी.

राज ने अपने हाथ को आगे बढ़ाया और नौरीन की छूट पर चलने लगा. नौरीन ने अब की बार राज को कुछ नहीं कहा. कितना कुछ तोह राज उसके साथ कर चूका था. अब क्यों रोकती.

वो भी राज के हाथ के मज़े लेने लगी. उसकी ऑंखें बंद होती चली गई.

कुछ देर में ुंजा झड़ने लगी. राज ने अपना लुंड उसकी छूट से निकला और नौरीन को लिटा कर उसके ऊपर आ गया.

नौरीन ने देखा तोह बोल पड़ी... राज प्ल्ज़ मुझे मत छोड़ना.. नौरीन छोड़ना तोह चाहती थी. पर डर्टी थी. राज ऐसा मौका कैसे छोड़ सकता था.

राज --- नहीं छोड़ता मेरी रानी तुझे में. मज़े तोह करने दो. अपना दूध तोह पिने दो. नौरीन ऑंखें बंद कर गई. राज ने नौरीन की चुकी को भी मुँह में लेके चूसना शुरू कर दिए. उम्मम्मम्हा उफ्फ्फ आअह्ह्ह सीईईई की आवाज़े नौरीन के मोह से निकलने लगी.

कुछ देर में राज नौरीन के पैरों में आया और उसकी छूट फिरसे चाटने लगा. उसकी छूट के पानी को अंदर उतरने लगा. नौरीन की हालत और भी ज़यादा ख़राब होने लगी. अपनी मठों में बिस्तर को कस्ते हुए वो सिसकने लगी. राज एक ऊँगली से नौरीन की छूट के छेड़ को कुरेदने लगा तोह क्लीट को मोह में भर कर चूसने लगा. कैसे नौरीन राज की ऐसी दरिंदगी को सहन कर पति. उसके हाथ भी राज के सर पर आये और छूट पर दबाओ बढ़ने लगे. उसके मोह से भी आवाज़े निकलने लगी थी. ुंजा ज़यादा फ़ास्ट थी. वो उठी और नौरीन को किश करने लगी. नौरीन ने नशीली आँखों से उज़्मा को देखा, फिर ऑंखें बंद कर लीं.

राज ने सर उठा के ुंजा को देखा, उसकी नज़र ुंजा की खुनी छूट पर पड़ी तोह उसके होंटो पर स्माइल आ गई.

राज ने यही मौका सही जाना और सीधा होकर नौरीन के पैयर्न को खोल दिए. खुद भी अपने लुंड को हाथ में पकड़ कर नौरीन की छूट के लिप्स में रगड़ने लगा. नौरीन को डर भी लगा और मज़ा भी बढ़ गया. लुंड का एहसास छूट पर उसे किसी और hi दुन्या में लेजाने लगा. वह भी ुंजा को किश करने लगी.

राज ने अपने लुंड को छेड़ पर सेट करते हुए धक्का मार दिए. नौरीन ने ुंजा को धक्का दिए और चीख पड़ी.

नौरीन --- आठ राज नहीं.. नहीं प्ल्ज़ अंदर मत दाल.. आह्हः मर gaiiiiiiiiii आठ अम्मीय

अम्मम्मीईई अम्मम्मीईई मररररररर गईइइइइइइइ ाममममममी ooohhhhhhhhhhhhhhhh अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

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राज ने एक और धक्का लगा दिए था. ुंजा ये देख कर हसने लगी. नौरीन भी आंसू बहाने लगी. राज के एक और धक्के ने नौरीन की सील भी खोल दी. राज के तीसरे धक्के में नौरीन की छूट की दीवारें 5इंच तक खुल गई थी. नौरीन की साँसे अटकने लगी. राज को उसपर दया नहीं आई. राज ने अपने लुंड को खेंचा और आखरी धक्का मार दिए. बचा हुआ लुंड भी पूरा पूरा नौरीन की छूट में उतर कर उसकी बच्चेदानी पर ठोकरें मरने लगा.

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नौरीन की चीख नहीं निकली. उसकी ऑंखें बड़ी हो गई थी. उसकी सांस अटक गई थी, उसका मोह खुला रह गया था. राज झुका और नौरीन के एक निप्पल को मोह में भर कर चूसने लगा. ये पहले मौका था राज की ज़िन्दगी में, जो उसने जो मुस्लिम लड़कियों की एक hi टाइम में सील तोड़ी थी. वर्ण 3 मुस्लिम सीलें वह गाओं की पहले hi खोल चूका था. एक साथ दो कभी भी किसी की नहीं खोली थी. राज बहुत खुश था.

कुछ देर में नौरीन की सांस बहाल हो गई..

नौरीन---- रट हुए... में बर्बाद हो गई, में लूट गई.. हरामी तू ने मुझे कहीं का नहीं छोड़ा.. मेरी शादी होने से पहले hi तुड़वा दी तूने. हरामी साले कितना कहा था मैंने अंदर मैट डालो.. ammmmmmiiiiiiiiii ाममममममममीीीीी ammmmmmmmmmmmmmmiiii नौरीन बड़े दुःख से रोने लगी.

राज --- ुंजा ये तोह सच में बड़ी दुखी हो गई है. उज़्मा भी नौरीन को देख कर परेशान हो गई थी. उसे लगा था, नौरीन भी बाद में नार्मल हो जाएगी.

नौरीन को दर्द तोह था पर दुःख ज़यादा था. उसी दुःख के कारन वह रो रही थी.

ुंजा -- घबराई हुई si....raj तुम इसे छोड़ो. शायद बाद में मज़ा मिले तोह सुकून से हो जाये.. पर राज और ुंजा दोनों को लगने लगा था. नौरीन जल्द नार्मल नहीं होगी. ुंजा को लगा उसने कसम देकर गलती की है. पर राज को कसम से कोई फर्क नहीं पड़ता था. वह तो छूट देख कर मन बना लिया करता था. ऐसी कई गलियां वो सुन चूका था. ऐसे कई रोने वह देख चूका था. राज सर झटक कर नौरीन को छोड़ने लगा. नौरीन का रोने मज़े में बदलने लगा. राज का मोटा लम्बा लुंड पूरा पूरा नौरीन की छूट में ोधाम मचा रहा था.

नौरीन भी झाड़ गई. राज भी जल्द hi झड़ने वाला था. उज़्मा को घोड़ी बना कर राज छोड़ने लगा. झड़ने वाला हुआ तोह लुंड बहार निकल लिया. और ुंजा की बैक पर माल गिराने लगा.

नौरीन उठी अपने कपडे पहनने लगी. नौरीन मज़े के बाद फिरसे सीरियस हो गई थी. कराहते हुए वह अपने कपडे पहन रही थी. जल्द hi वह कपड़ो में हो gai.usne दरवाज़ा खोला और बहार कड़ी हो गई. उसके आंसू फिरसे जारी हो गए थे.

राज और ुंजा ने भी कपडे पहने और कमरे को टाला लगा कर बहार खड़े होकर नौरीन को देखने लगे. नौरीन ने दोनों को नहीं देखा. दोनों के आते hi वह लंगड़ाते हुए बहार जाने लगी.

ुंजा ---- राज उसे ज़्यादा दर्द हो रहा है. कैसे लंगड़ा कर चल रही है. कहीं किसी को शक हो गया तो.

राज आगे बढ़ा कर नौरीन को पकड़ लिया.

राज --- चल अंदर तझे दर्द की दवा देता हों.. नौरीन ने झटके में अपना हाथ छुड़ाया और ऊँगली राज की आँखों की ऑर्डर करते हुए घुसे से बोली.

नौरीन ---- पता है एक लड़की के लिए उसके कुंवारेपन की कितनी अहमियत हटी है. जा पूछ जा के अपनी बहनो से. जा जा के उन्हें भी छोड़, ज़बरदस्ती कर उनके साथ. फिर मुझे बताने उनका क्या हाल होता है. तेरे घर में पांच पांच हाँ, एक माँ 4 बहने, पांचू को भी रोज़ छोड़ेगा तोह बहार मोह मरने से बचा रहेगा. ******** करे अगर मेरा घर बनने से पहले टूटे तोह तेरी भी किसी बेहेन का घर का घर सलामत न रहे.

राज ने हमेशा सील टूटे दर्द देखे थे, टूटे दिल का दर्द उसने कभी नहीं देखा था. उसे नहीं पता था. उसके साथ ऐसा सब भी होगा. जब पहले बार उसके अपनी हंसाई को छोड़ा था. तोह वह राज से बोली थी, "राज जितना बड़ा और मोटा लुंड तेरा है न, जितनी देर तुम छोड़ते हो न, कोई भी लड़की तेरे लुंड को उम्र भर भूल नहीं पाएगी. दर्द के बाद जो मज़ा उसे आये न, तोह सब भूल कर वह तुझसे लिपट जायेगी. ऐसा दुमदार लुंड है तेरा"

राज को समय की बातें कभी नहीं भूली थी. चुदाई का खेल तोह उसके लिए एक आम बात बनकर रह गई थी. उसकी माँ उसके सामने अपनी छूट में ऊँगली लिया करती थी. राज ने भी अपनी माँ की छूट में ऊँगली करनी शुरू कर दी. अपनी बहनो के साथ, अपनी ताई के साथ, अपनी नंदनी दीदी के साथ, गाओं की दूसरी लड़कियों और औरतों के साथ. ज़बरदस्ती वाला सन जब भी बना था, बाद में सामने वाली लड़की या औरत उससे लिपट कर उसे चूमा करती थी. धीरे धीरे गलत वाला शब्द hi उसे भूलने लगा. वह तोह राज काम hi मूड में आता था. वर्ण तोह रोज़ hi किसी न किसी की सील खोल देता.

राज को उसकी माँ और बहने भी तोह मारा करती थी. पर कभी भी ऐसे आंसुओं के साथ राज को सही गलत नहीं बताया था. राज नौरीन के आंसू देख कर, उसके शब्द सुनकर जहाँ का तहँ खड़ा रह गया. लाइफ में पहली बार राज को झटके लग रहे थे. दिल का अच्छा न होता तोह कबका अपनी माँ को छोड़ चूका होता, अपनी बहनो की सील खोल चूका होता. नंदनी दीदी न उसे इतना प्यार दे रही होती.

ऐसी नेचर की hi वजा से टीचर भी राज से चुद कर कभी मज़े लेती तोह कभी राज को बुरा भला सुना दिए करती थी. एक औरत के साथ कोई ज़बरदस्ती कैसे कर सकता है. अगर करता तोह क्या वह गाओं में रह सकता था. नहीं रह सकता था.

सब को राज का अंदाज़ भा भी गया था. और सब राज से चालू भी थे. पर कोई भी नौरीन जैसा बर्ताव नहीं कर पाई थी. नौरीन के बर्ताव ने राज को झंझोर कर रख दिए.

ुंजा और नौरीन दोनों राज को उसी हालत में छोड़ कर चली गई. ज़्यादा देर वो रुक भी नहीं सकती थी. और ुंजा भी नौरीन को छोड़ नहीं सकती थी. नौरीन गई तोह ुंजा को भी जाना पड़ा. उसे भी तो नौरीन से माफ़ी मांगनी थी. वह भी नौरीन की कसूरवार थी.

कुछ देर बार बिन्नी और जूरी आये और राज को झंझोड़ने लगे..

बिन्नी--- राज क्या हुआ है तुझे.

जूरी --- बजी ने तोह कुछ नहीं कहा तुझे. साले जूरी को अपनी बेहेन से ज़्यादा राज की फ़िक्र होने लगी थी.

बार बार झंझोड़ने पर राज होश में आया और दोनों को देखने लगा. फिर आस पास नौरीन को देखने लगा.

राज कुछ नहीं बोलै. दोनों को छोड़ कर बहार निकल पड़ा. राज के अंदर भी तूफ़ान आये हुए थे. एक तूफ़ान उसका घर में इंतज़ार कर रहा था. और वो तूफ़ान भी कम् नहीं था. राज की ज़िन्दगी का बहुत कुछ बदल चूका था नौरीन की बातों के कारण. बाकि का अब बदलने वाला था.
 
राज का मैं नहीं हो रहा था, कहीं और जाने को, राज गाओं से बहार जाने लगा. गोअन से बाहर बैठ क्र वो सोचों में गम हो गया. नौरीन की बातों ने उसके अंदर हलचल सी मचा दी थी. चुदाई उसके लिए आम बात थी. पर ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था उसके साथ.

राज बहुत से विचारो में ुल्हजा रहा.

बहुत देर हो गई थी उसे बैठे हुए. बिन्नी दौड़ते हुए आया और राज को कंधे से पकड़ के झंझोड़ने लगा.

बिन्नी ----- राज तेरे घर में कोई लफड़ा हो गया है. पता चला है, बहुत देर से सब रो रहे हाँ. राज ज नौरीन की बातों से उलझा है tha.binni की बात सुनकर झटके से उठ खड़ा हुआ.

राज---- क्या बकवास कर रहा है तू..

बिन्नी -- घबरा के.. मुझे नहीं पता यार.. राज ने कुछ और नहीं पोछा, दौड़ता हुआ घर जाने लगा. घर पोहंचा तोह चाचा के भी सब वही थे. राज सब को देख कर हैरान नहीं हुआ. सबको दुखी देख कर हैरान था. राज पर सबकी नज़र पड़ी, पर कुछ नहीं बोलै.

राज सबके बीच पोहंच के वजा जान्ने लगा.

दीपिका ग़ुस्से में आ कर राज को कुछ सुनाने hi वाली थी. आरती ने उसे रोक दिए.

चची ---- राज बीटा तेरी दीदी की शादी टूट गई है.

राज --- क्या.. पर कैसे.. राज बड़ा हैरान हुआ.

दीपिका कड़ी हुई और राज का हाथ पकड़ कर अंदर लेजाने लगी. दीपिका बड़े ग़ुस्से में थी. कमरे में पोहंची, भावना भी पीछे hi आ गई थी. आज वह भी ग़ुस्से में आई हुई थी. नंदनी आंसू बहा क्र राज को देख रही थी.

कमरे में पोहंचे, दूर को लॉक लगा कर दीपिका ने राज के मोहन पर 2 थप्पड़ लगा दिए.

दीपिका--- हर घर में एक मर्द हुआ करता है हरामी. हमारे घर में एक मर्द है, पर उसे सिवाए मस्ती मज़ाक के कुछ और सूझता hi नहीं है. न अपनी माँ को माफ़ी देता है और न hi अपनी बहनो. जब दिल चाहा, जिसपर मैं बना उसे नंगा कर दिया.

राज का दिमाग पहले hi गर्म था. दीपिका को अपनी बहन में भर के कस लिया.

राज--- जो भी कहना हो दीदी कह देना. पर मुझे पहले सब बता दो.

भावना--- तू सुन्ना hi चाहता है तो सुन.. अंजलि की शादी टूट गई है. राज ने भावना को देखा, तो दीपिका के गिर्द लिपटी अपनी बहन ढीली कर बैठा. हैरत से उसका मोह खुला रह गया था.

राज----- क्याआआआ.. ये कैसे हो सकता दीदी..

राज को सब बता दिए भावना और दीपिका ने. उसकी माँ ने भाग कर शादी करि थी. ये सुनकर राज डोप कदम पीछे हैट गया था. एक hi दिन में दो बार राज को बड़े झटके लग रहे थे.

राज----- चीखता हुआ.. मुझे पहले किसी ने क्यों नहीं बताया. मेरे ननिहाल वाले भी हाँ.

दीपिका--- तू क्या कर लेता हरामी. तुझे बता के भी तोह कोई फायदा नहीं था. तुझे लुंड छूट के शिव कुछ दीखता hi कहाँ था. पैदा हुआ तोह माँ की छूट में ऊँगली करके तूने दुन्या देखनी शरू की. फिर हम सब के साथ छेड़ छड़ करने लगा. फिर गाओं में जिसे मन चाहा, पकड़ लिया.

भावना --- सब बता के भी कुछ हासिल नहीं होना था. कौनसा तूने कोई तीर मार लेना था. रहता तो तू वैसा hi, जैसा तू अब है.

दीपिका--- बड़ा मज़ा आता है न तुझे हम सब को नंगा करके. बड़ी छह है न तेरे दिल में हमें छोड़ने की.. दीपिका तोह जैसे पागल होने लगी थी. अंजलि दीदी की शादी क्या टूटी थी. उसके दिमाग का फ्यूज hi उड़ गया था. दीपिका नंगी हो गई और खटिया पर लेट कर दोनों पेअर खोल कर राज को अपनी छूट दिखने लगी. आ छोड़ ले मुझे.. आज तुझे मैं नहीं रोकूंगी.

राज के दिमाग का फ्यूज भी उड़ गया.. उसका ग़ुस्सा हवा हो गया.. राज ज़िन्दगी में पहली बार इमोशनल हो रहा था. नौरीन की बातों ने, अंजलि की टूटी शादी ने, अपनी माँ की हक़ीक़त ने राज को अंदर से हिला कर रख दिए था. दीपिका और भावना की आग उगलती बातें भी राज से सहन नहीं हो रही थी.

राज ------ सही कहा आपने दीदी मुझे सब बता कर हासिल भी क्या होना था. बड़ा परेशान किया है न मैंने आप सब को. रातों की नींद भी आप सब की हराम की है मैंने. मेरे कारण आप सब चैन से सो भी नहीं सके कभी. आप सब को भी भोगने का मैं भी है मेरा. मुझे आप सब के जिस्मो से, गाओं वाले hi क्या, दुन्या की हर नारी के जिस्म को देख कर अपनी भूक बढ़ती हुई महसूस होने लगती है. आपने टांगें खोल जैसे मुझे मेरी औकात बाटी है आपने दीदी. मुझे बता दिए है आपने दीदी, मेरी सोच कभी इस जगा से आगे बढ़ hi नहीं सकती.

राज ने एक लम्बी सांस ली.. फिर आगे बोलै.. मैं कसम खता हों दीदी, अब आप सब को मैं अपनी सूरत तब दिखाओगे, जब मैं सब ठीक कर डोंगा. मैं न केवल दीदी की टूटी शादी फिरसे ज़ोरोंगा. अपने ननिहाल वळून के साथ टूटे रिश्ते भी जोड़ कर रहूँगा. माँ सालों से अपने माँ पिता से, अपने भाई बहनो से, अपने सभी रिश्तेदारों से दूर रही हाँ न. मैं कुछ ऐसा करूँगा. सब फिरसे एक हो जाएंगे.

राज के बदले भाव, बदले विचार देख कर दीपिका ने अपनी खुली टाँगें बंद कर ले थी. वो उठ कर बैठ गई थी. भावना का ग़ुस्सा भी ठंडा पड़ने लगा था. राज के जाने का सुनकर दोनों का ग़ुस्सा झाग की तरह बह गया था. दीपिका झटके से उठी और राज के मोह पर थापर मार दिए.

दीपिका रट हुए बोली... गलती मुझसे हम सब से भी हुई है भाई. प्ल्ज़ तू जाने की बात मत कर. तुजे कुछ हो गया तो..

भावना--- न भाई तू कही नहीं जाएगा. तू जाएगा तोह हमें हर दम धड़का लगा रहेगा.

राज के जाने की बात पर दोनों पहले का सब भूल गई. अजीब मोहब्बत थी सब की राज से.

राज दोनों को देखने लगा.

राज--- जाना पड़ेगा मुझे दीदी. जाऊंगा नहीं तोह कैसे सब ठीक होगा. मैं नहीं जनता, मैं सब ठीक कर पाउँगा भी क नहीं. पर में अब कसम खा चूका हों. जब तक माँ को नाना का परिवार माफ़ नहीं कर देता, सब मिल नहीं जाते. दीदी का टूटा रिश्ता फिरसे जुड़ नहीं जाता लौटूंगा नहीं.

इस बार भावना ने राज के मोह पर थप्पड़ मार दिआ.

भावना-- तुझे समझ नहीं आ रही. तू कहीं नहीं जायेगा. जैसे तेरा मैं करे, कर लेना हमारे साथ. पर तू कहीं नहीं जाएगा.

दीपिका--- भाई हम तुम्हारे बिना जीने की आदत नहीं है.

राज---- और अंजलि दीदी का क्या. क्या वह अब कभी खुश रह पाएंगी. माँ का क्या, क्या वह ये सहन कर पाएंगी. उनके बीते कल के कारण उनकी बेटी का घर बनने से पहले hi टूट गया. एक नहीं चार चार बेटियन है उनकी. सब की परेशानी माँ को कहीं का नहीं छोड़ेगी दीदी. मुझे जाना hi होगा..

******

राज--- सुनो तुम सब मई जा रहा हों, मेरी माँ और बहनो का ख्याल रखना. किसी को कुछ न तोह फिर मेरा तुम सब जानते hi हो.

राज को सबने बड़ा रोका था. पर राज नहीं रुका था. रत के 2 बजे hi राज घर से निकल पड़ा था. अपने ननिहाल वळून के बारे में सब जान लिया था उसने. अब रेलवे स्टेशन पर खड़ा अपने दोस्तों को अपने परिवार का ख्याल रखने को बोल रहा था.

विक्की भी शाम को लौट आया था. चारो लफंगे एक साथ थे. राज को खुद से दूर जाते हुए देख कर आंसू बहाने लगे थे.

बिन्नी-- तू जा राज, तेरे घर वळून का हम धयान रखेंगे.

जूरी--- राज जल्द लौट कर आना यार. तेरे बिना गाओं में मज़ा नहीं आएगा.

विक्की-- साले तूने मेरे घर में भी चुदाई कर डाली. मेरे को ग़ुस्सा नहीं आया. जब भी तेरे दिल करे तू मेरे को बोल देना, मैं घर वळून को लेके निकल जाया करूँगा. पर तू जल्दी लौट कर आना. तेरे बिना गाओं में मुझे भी मज़ा नहीं आएगा.

राज को भी अपने हरामी दोस्तों पर नाज़ था. सब उसके जैसे हरामी थे, पर यारों के यार थे. ताज सबसे मिलकर ट्रैन पर सवार हो गया. ट्रैन दिल्ली जाने वाली थी. और राज का गाओं उप में था.

ट्रैन ने राज को सुबह के 9 बजे दिल्ली पोहंचा दिए. ट्रैन का पूरा सफर राज ने शरीफो के जैसे बिताया था. रत का समय भी था. राज ने कोई भी हरामीपन नहीं किया.

एक टैक्सी करके राज दिल्ली से बहरी इलाके में जाने लगा. शहर से बहार hi एक मोहल्ले में उसके ननिहाल वाले रहा करते थे.

राज के घर में फिरसे सब का रोना धोना मचा हुआ था. सब राज के लेटर को पढ़ कर रो रहे थे. सुबह राज के बीएड पर लेटर पढ़ा मिला था आराधना को. लेटर में राज ने वह बातें लिखी थी. जो राज ने कभी नहीं करि थी. राज ने अपनी माँ बहनो, चाचा, चची और सबके लिए ढेरों बातें लिखी थी. सब पढ़ कर बहुत रोये थे. सबसे बुरी हालत तोह नंदनी की हुई थी. वह अपने पेट पर हाथ फेर कर रह गई थी. राज ने नंदनी के होने वाले बच्चे के लिए नाम भी लिख डाला था. नंदनी का प्यार राज के लिए और भी बढ़ गया था. राज की दूरी पर वह भी तड़प गई थी.

राज टैक्सी में बैठा अपने ननिहाल के मोहल्ले में pohncha.karaya देकर टैक्सी वाले को रुखसत कर दिए. एक चाय वाले के पास बैठ कर चाय का आर्डर दिए.

चाय के साथ केक कहते हुए राज आस पास भी सब देख रहा था. एक लड़के को बुला कर राज उससे बोलै... यहाँ प्रोफ संजय शर्मा का घर कौनसा है.

लड़का 20 साल का था. वह राज के पूछने पर सोचने लगा. फिर वह बोलै.. यहाँ तोह कोई प्रोफ संजय शर्मा नहीं रहते.

राज----- तुम यहीं रहते हो.

लड़का--- हाँ में तोह यही पैदा हुआ हों. पर यहाँ कोई संजय शर्मा नहीं रहते.

राज निराश होक होटल से निकल पड़ा. एक बैग था उसके पास, जिसके कपडे वगेरा थे, बैग कंधे पर लटका कर राज मोहल्ले की गलियों के चक्कर काटने लगा. एक गली से गुज़रते हुए राज राज को एक बाबा चारपाई पर बैठा हुआ दिखा.

राज ---- बाबा जी यहाँ पर प्रोफ संजय शर्मा रहा करते थे.

बाबा घोर से राज को देखने लगा. राज को अपने साथ बैठने को कहा. राज बैठा तोह बाबा बोलै.. बीटा तुम कोण हो. और मास्टर साब के बारे में क्यों पूछ रहे हो.

राज--- बाबा जी मैं उनका दूर का रिश्तेदार हों. उनसे मिलने आया था, पर पता चला इस नाम का यहाँ कोई नहीं रहता.

बाबा--- बीटा वह तोह सालों पहले hi यहाँ से चले गए थे. इसी गली में उनका घर था. बाबा एक घर को देखते हुए बोले. तोह राज भी उसी घर को देखने लगा. घर बड़ा विप बना हुआ. 3 फ्लोर का घर था.

राज ---- अब कहाँ रहते हाँ वह बाबा जी..

बाबा-- नहीं पता बीटा, वह सब कहाँ चले गए.

राज-- ऐसा क्यों बाबा जी. राज समझ तोह गया था, ज़रूर उसकी माँ के भाग जाने के कारण hi सबने यहाँ का घर बेचा होगा.

बाबा--- बीटा क्या बताओ, बेटियां लाड प्यार का गलत फायदा उठा लेती हाँ. अपने hi माँ बाप की इज़्ज़त मिटटी में मिला देती हाँ. मास्टर जी की बेटी ने भी कुछ ऐसा hi किया था. किसी के साथ भाग गई थी. बेकहरे मास्टर साब की नज़रें झुक गई थी. कैसे वह यहाँ रहते. घर बेच कर सब यहाँ से चले गए.

राज परेशान हो गया था. वो बोलै.. बाबा जी कुछ तोह पता होगा आपको, वह सब कहाँ गए होंगे.

बाबा सोचों में गम हो गए. जैसे अपनी मेमोरी को खंगाल रहे थे. कुछ देर बाद वह बोले. बीटा ...... मोहल्ले में उनका एक दोस्त हुआ करता था. अब भी वह वही रहता है क नहीं, नहीं जनता. वह ज़िंदा भी हाँ क नहीं. ये भी नहीं जनता. तुम वहां जा के पता करो.

राज बाबा को धन्यवाद बोल कर निकल पड़ा. एक रिक्शा करवा कर राज अपने नाना के दोस्त के मोहल्ले में जा पोहंचा. लोगों से पूछ कर वह उस माकन तक जा पोहंचा, वह वही रहते थे. राज ने दूर नॉक किया तोह अंदर से एक लड़की निकली. सूरत देख कर hi राज समझ गया. घर के हालत सही नहीं हाँ.

राज ----- मुझे मास्टर जी से मिलना है.. नाना के दोस्त भी टीचर थे. लड़की ने राज को घोर से देखा, फिर साइड होक राज को अंदर आने दिए. घर में 4 कमरे थे, और सालों से रंग नहीं किया गया था. जगा जगा से पलस्तर भी उखड़ा हुआ था. राज लड़की के साथ के कमरे में जा पोंछा. अंदर एक खटिया पर एक हड्डियों का ढांचा लेता हुआ था. राज को मास्टर जी की हालत देख कर दुःख हुआ.

लड़की--- यही हाँ मास्टर जी, दाद्दु आपने ये लड़का मिलने आया है. मास्टर जी ऑंखें बंद कर पड़े हुए थे. अपनी पोती की आवाज़ पर ऑंखें खोल कर देखा. लड़की बहार चली गई. राज ने कुर्सी घसीटी और बाबा के पास बैठ गया.

मास्टर--- कोण हो बीटा तुम...

राज--- बाबा जी मुझे आपके दोस्त प्रोफ संजय शर्मा के बारे में जानना है.

मास्टर--- क्यों? कोण हो तुम.. मास्टर राज को घोर से देखते हुए बोले

राज--- जी में उनका दूर का रिश्तेदार हों. सालों बाद दिल्ली मिलने आया तोह पता चला वह पुराण घर बेच कर कहीं और चले गए हाँ.

मास्टर के होंटो पर स्माइल ा गई.

मास्टर -- दूर का रिश्तेदार.. उनके दूर का कोई रिश्तेदार ऐसा नहीं जिसे में न जनता हों. तुम ज़रूर आराधना के बेटे होंगे. राज बाबा की बात पर हैरान रह गया. राज का मोहन खुल गया था.

राज --- आपने कैसे अंदाज़ा लगाया मास्टर जी.

मास्टर --- 25 साल से ऊपर हो गए हाँ संजय को वह घर बेचे हुए, पहले कभी कोई उसका पता करने नहीं आया. अब तुम आये हो. ज़रूर तुम सब ठीक करने आये होंगे.

राज--- जी मास्टर जी. लड़की ट्रे में चाय ले आई.

राज-- इसकी क्या ज़रूरत थी..

लड़की कुछ नहीं बोली. मास्टर जी बोले.

मास्टर---- तुम मेहमान हो बीटा ले लो. राज ने कप पकड़ा तोह लड़की चली गई.

मास्टर --- बीटा अच्छा किया जो तुम आ गए. तुम्हारी माँ के अपनी मन मर्ज़ी की शादी क्र लेने से संजय टूट गया था. उसका सर झुक गया था. समाज में वह किसी को मोह दिखने लायक नहीं रहे थे. बहुत समय वह बीमार भी रहे. आराधना बेटी के भाग जाने से अपनी दूसरी दोनों बेटियों की शादी भी जल्दी और उनकी मर्ज़ी की बिना कर दी. तुम्हारे नाना दर गे कहीं वो दोनों भी न भाग जाएँ. इसलिए जल्दी जल्दी रिश्ते ढूंढ कर दोनों की शादी करदी. ऐसे hi फैसले संजय ने और भी किये, सबपर सख्ती बढ़ा दी. जिस कारन सब उससे दूर होने लगे. मेरा यार बहुत टूट गया था, बहुत दर गया था, आराधना बेटी के भाग जाने से. कोई और सख्ती झेल नहीं पाया. तेरे तीनो मां भी अपनी अपनी पत्नियों और बच्चों के साथ अलग रहने लगे. तुम्हारी मौसियां भी तुम्हारे नाना के फैसले से खुश नहीं थी. उन्हें बच्चे तोह हो गए पर उन्हें उनकी मन मर्ज़ी की ज़िन्दगी नसीब नहीं हुई. आज भी सब अपने घरों में बिन मर्ज़ी की ज़िन्दगी जी रही हाँ. तुम्हारे दोनों मौसा पैसे वाले तोह बन गए, पर तुम्हारी मौसियो को खुश नहीं रख पाए. तुम समझ रहे हो बेटे. तन का सुख भी चाहिए होता है एक नारी को. जो सही से उन्हें नसीब नहीं हुआ. ऊपर से तुम्हारे नाना ने उनके बच्चों पर सख्ती बढ़ानी शुरू कर दी. जिसका रिजल्ट ये निकला वह भी सब तुम्हारे नाना से दूर हो गए. अब तुम्हारे नाना और नानी दोनों एकेले जी रहे हाँ. कभी कभी खैरियत पूछने के लिए आ जाते हाँ. वर्ण तोह वो अपनी ज़िन्दगी की आखरी साँसे hi पूरी कर रहे हाँ. क्या नाम है तुम्हारा बीटा.

राज--- जी मास्टर जी मेरा नाम राज है.

मास्टर : राज बीटा, मुझे तुम दुसरो से अलग दीखते हो. कुछ ऐसा करो राज बीटा, मेरा यार पहले जैसा हो जाये. आराधना बेटी ने गलती करके भी नहीं की, जीवन में प्रेम किसी को भी हो जाता है. और ऐसी गलती भी हो जाया करती है. सुनने में आया था, आराधना बेटी एक बार मिलने भी आई थी, पर सब वहां का सब बेच कर चले गए थे. मेरे बारे में वह नहीं जानती थी. मेरे पास आती भी तोह मैं नहीं बताता. मुझे तेरे नाना ने कसम भी दी थी. राज बीटा मैं भी मरने से पहले अपने दोस्त को पहले जैसा देखना चाहता हों. बहुत दुःख झेले हाँ उसने. तुम चाहो तोह बहुत कुछ कर सकते हो.

राज ने एक लम्बी सांस ली. फिर वो बोलै... मास्टर जी मैं नहीं जनता मैं क्या कुछ कर सकता हों. पर हालत को ठीक करने के लिए मुझे कुछ भी करना पड़ा मैं करूँगा.

अपने नाना का पता मास्टर जी से लेकर राज निकल पड़ा. घर में कोई और नहीं था, सब कामो में निकले हुए थे, लड़की की माँ भी घर में नहीं थी. राज निकला तोह लड़की झुक कर घर के कामो में लगी हुई थी. झुकने से उसके दोनों अनार राज को दिखने लगे. राज था तोह बहुत बड़ा हरामी. पर यहाँ वह खुद पर काबू प् गया. वर्ण कोई न कोई हरकत किये बिना वह यहाँ से न जाता. लड़की भी राज को देख कर कड़ी हो गई थी.

राज बहार निकल कर चौक में गया, वहां से रिक्शा में बैठा मैं रोड पर आया, वहां से एक टैक्सी करि और दिल्ली शहर के दूसरी ऑर्डर जाने लगा.

राज जब अपने नाना के घर पोहंचा, जो एक मोहल्ले में था. राज पूरा बदला हुआ था. रस्ते में hi राज एक डेन्ट लड़का बन गया था. मास्टर जी ने कहा था, नाना से मिलना है तोह पढ़े लिखे, सुलझे हुए स्टूडेंट बन कर वहां जाना, वर्ण वह देखेंगे भी नहीं.

राज एक सुलझा हुआ लड़का बन कर अपने नाना के दो मंज़िला माकन के दरवाज़े पर खड़ा होक बेल्ल बजने लगा. कुछ देर में एक 10 साल के लड़के ने दरवाज़ा खोला राज को देख के साइड हो गया. राज की नज़र अंदर पड़ी तोह देखा उसके नाना कुछ बच्चो को पढ़ा रहे थे.

नाना से कुछ फैसले पर नानी भी बैठी हुई थी. नानी को देख कर राज को लगा जैसे वो अपनी माँ को देख रहा हो. राज की माँ और नानी की सूरतें बहुत मिलती थी एक दूसरे से.

राज को देख के नाना ने सर हिला कर अंदर आने को कहा.

राण ने जाते hi सबसे पहले नाना के पाऊँ छुवे फिर नानी के भी पैरों को छुवा. अपनी माँ, चाचा, चची या गाओं में किसी और बड़े के कभी पाऊँ नहीं छुए थे राज ने. पर यहाँ आ कर राज संस्कारी बन गया था. सूरत भी से राज संस्कारी hi दिख रहा था. हरामी था पुरे दिनों का. इतनी एक्टिंग तोह कर hi सकता था. नाना और नानी राज को देख कर, उसके संस्कार देख कर खुश हुए.

नाना --- कैसे आना हुआ बीटा. एक लड़की को कुर्सी लेन को बोल दिए था नानी ने.

राज---- मैं दिल्ली में नया हो दाद्दु.. यहाँ पढ़ना चाहता हों. रहने को कोई जगा नहीं थी. आपके बारे में सुना तोह दिल किया आपके पास hi रह लोन और आपसे मुझे स्टडी में भी हेल्प मिल जायेगी.

राज नाना को नाना तोह बोल नहीं सकता था. कहीं शक न हो जाए. बड़े मीठे अंदाज़ में वह अपने नाना को दाद्दु बोल गया. नानी और नाना दोनों राज के मीठे बोल और दाद्दु के शब्द पर मोहित हो गए. कुर्सी आ चुकी थी. राज को कुर्सी पर बैठने के लिए कहा गया. राज हरामी था कोई न हरामीपन तोह उसने करना hi था.

राज कुर्सी पर न बैठ कर अपनी नानी के पैरों में बैठ गया और घुटनो पर सर धार के नाना को देखने लगा. नानी और नाना बरसों से प्यार के लिए, सम्मान के लिए तरस रहे थे. राज की इस नौटंकी पर जज़्बाती हो गए. नानी तोह आंसू बहाने लगी और नाना ऑंखें भींच कर दूसरी और देखने लगे. दर्द तोह राज के दिल में भी उमड़ आया था. हरामी था, पर दिल वाला भी था. मतलब परसत भी था. पर दुसरो का एहसास भी दिल में रखता था. सेक्स का भूका था, तोह प्यार की भूक भी उसके अंदर थी.

नानी का हाथ राज के सर पर आया और राज के सर को थपथप्ने लगी.

नानी-- कोण हो तुम बीटा. कहाँ से आये हो.

राज-- आपका hi बच्चा hon..mm-- मेरा मतलब है दादी मेरे दादा दादी नहीं हाँ. मुझे अपना पोता hi समझ लें और रहता में .... के एक गोअन में हों. राज ने गलत पता बता दिए.

नाना --- बीटा तुम्हे और तुम्हारे संस्कार देख कर अच्छा लगा. तुम ख़ुशी से यहाँ रह सकते हो, पर तुम्हे मेरे कुछ रूल्स अपनाने होंगे. उसके बाद hi तुम यहाँ रह सकते हो. कराये की भी हमें कोई चिंता नहीं है. भगवन की कृपा से पेंशन और ऊपर वाले पोस्टिव का कराया hi बहुत है हमारे लिए. तुमसे हमें कुछ भी नहीं चाहिए बीटा. रहने के लिए कमरे भी फालतू हाँ.

नानी --- तुम मुझे अच्छे लगे हो बीटा. पर अपने दाद्दु को, उनके उसूलों को पहले समझ लेना. तुम्हारे लिए और हमारे लिए आसानी बने रहेगी. तुम्हारे दाद्दु को प्यार सौर सम्मान से hi लगाओ है. अपने रूल्स टूटते हुए भी नहीं देख सकते. अब तुम्हे क्या बताएं बीटा. बहुत दुःख भी देखे हाँ हमने और आज तक देख-----

नाना ---- मल्टी... नाना ने नानी को आगे बोलने से रोक दिए..

राज ---- मुझे तोह बस आप दोनों का प्यार चाहिए दादी और कुछ नहीं. पढाई भी होती रहेगी और साथ में मुझे दादा दादी का प्यार भी मिलता रहेगा.

नाना, नानी को राज का कमरे दिखने का बोल कर फिरसे बच्चो को पढ़ने लगे.

नाना मैं में सोचने लगे. जाने क्यों बच्चा अपना अपना सा लग रहा है. दिल को कितना सुकून मिल रहा है. कितने सालों से दिल को सुकून नहीं मिला, आज मिला है.

नानी राज को एक कमरे में ले गई.

नानी --- बीटा तुम्हारा नाम तोह मैंने पूछा hi नहीं.

राज --- जी दादी मेरा नाम राज है.

नानी --- राज बीटा ये तुम्हारा कमरा है. सुकून से रहो, बस ऊपर कभी मत जाना. ऊपर परिवार रहता है. तुम्हारे दाद्दु भी ऐसे मामले में बहुत सख्त हाँ.

राज -- खुश होक.. ज़रूर ख्याल रखूँगा... नानी जाने लगी. राज फिरसे बोलै.. दादी मैं आपके हाथ चूम सकता हों. नानी तोह मचल कर पीछे मुड़ी और हेरात से राज को देखने लगी. नानी की ऑंखें फिरसे चिलमिल करने लगी.

राज आगे बढ़ा और बड़े प्यार से नानी के दोनों हाथ अपने हाथो में लेकर चूम लिए.

नानी -- बस ीनता hi बोल सकीय.. सदा सुखी रहो मेरे बच्चे. नानी वापिस मुड़ी और कमरे से चल दी. नानी की आँखों में आंसू बहने तेज़ हो गए थे. राज की ऑंखें भी ज़िन्दगी में दूसरी बार नाम हो गई थी. कमरे को अंदर से कुण्डी करके राज ने बैग एक जगा फेंका और बिस्तर पर ढेर हो गया.. अपना मोबाइल निकल कर देखने लगा. जो साइलेंट पर था. घर से बहुत सी मिस्ड कॉल भी आई हुई थी. राज ने कॉल नहीं की, बस मैसेज कर दिए. और कॉल खुद से करना का बोल दिए था. कोई कॉल करता और नाना नानी सुन लेते तोह गड़बड़ हो सकती थी. वहां भी राज का मैसेज देख कर सब को चैन मिल गया था. वर्ण कॉल पिक न होने के कारण सब बेहद परेशान थे.

आराधना--- राज बीटा सफल होक लौटना. मुझसे हुई भूल को सुधर सको तो सुधर देना. अब वहां पोहंच hi चुके हो तोह पूरी कोशिश करना मैं फिरसे अपने परिवार में लौट सकूँ.

चरों भी आँखों में आंसू लिए ऐसी hi प्रार्थना करने लगी. राज की दूरी पर जहाँ तड़प उठी थी. वही अब राज की कामयाबी के लिए दुआ कर रही थी. अंजलि जो अपने रिश्ते के टूटने से ग़मज़दा थी. अब एक आस उसके दिल में जनम ले चुकी थी. वह भी अपने ननिहाल वळून में शामिल होने के लिए बेताब हो उठी थी.
 
राज का मिशन कोई आम मिशन नहीं था. राज एक हरामी िस्नान था. और हरामियों के लिए शरीफ बांके रहना बड़ा मुश्किल काम होता है. राज को बी अपने नाना नानी के पास शरीफ बांके रहना था.

एक गलती और काम बिगड़ा. राज कमरे में बिस्तर पे लेता हुआ hi सो गया था. 2 बजे के करीब उसकी आंख खुली तो उसने कमरे की खिड़की खोल के बहार देखा. सामने नज़र पड़ी तोह पडोसी के घर की छत पर नज़र गई. वहां एक ौराय कपडे तर पर दाल रही thi.raj को उसके चुके नज़र आने लगे.

राज--- कसम से शहर का माल कितना लज़्ज़तदार है यार. साली के चुके कितने गोर और बड़े बड़े हाँ. औरत 35 साल की थी, उसकी नज़र राज पे नहीं गई. राज उसे देखते हुए लुंड को मसलने लगा. ज़्यादा देर नहीं गुज़री थी, किसी ने दरवाजा खटखटा दिए. राज जैसे होश में आया. उसकी नज़र अपने लुंड पे गई. जो खड़ा हो चूका था.

राज---- साला में बी न.. लगता है में मामला सुधारूँगा नहीं. और बी बिगड़ दूंगा. साला यहाँ आते hi फिरसे हरामी पैन करने लगा. राज ने जल्दी से अपने लुंड को अंडरवियर में कैसा, जो औरत को देखते हुए साइड से निकल लिया था. राज दौड़ कर दूर खोलने लगा. यद् आया खिड़की तोह बंद hi नहीं की. झटके से रुका, फ़ौरन पलटा और खिड़की को बंद कर दिए. फिरसे दौड़ कर दूर खोला तोह उसकी कुछ फॉल चुकी थी. बहार नानी थी.

नानी राज को देखने लगी. राज की फूली साँस देख क्र कुछ हैरान रह गई.

नानी --- क्या कर रहे थे राज बीटा. सांस क्यों फूल रही है तुम्हारी.

राज को पहले तो कुछ नहीं सूझा, फिर दिमाग की बत्ती जाली तोह झट से बोल पड़ा.

राज---- अब में आप को क्या बातों. राज थोड़ा सा शर्मा गया. नानी और बी हैरान हुई. फिर उसे कुछ और लगा तोह पोछने लगी.

नानी ---- क्या मतलब में कुछ समझती.. नानी राज को शक की नज़रों से देखने लगी.

राज---- सर झुका क्र... दादी वह में अंडरवियर पहन के वर्ज़िश क्र रहा था. राज कुछ शर्माने की एक्टिंग करते हुए बोलै. दादी राज की बात पर हलके से है पड़ी. नानी राज के इस बहाने पे नार्मल हो गई थी.

नानी--- चलो आओ तुम्हारे लिए लंच बनाया है मैंने. बहार वाले बाथरूम में फ्रेश हो लो. फिर बहार चुप में अपने दाद्दु के पास बैठ के लंच कर लेना.

राज हाँ बोल कर निकल पड़ा. बाथरूम एक दरवाज़े के साथ hi था. राज वह बाथरूम पहले भी देख चूका था. कुछ देर में फ्रेश होक राज अपने दाद्दु के साथ चारपाई में बैठा हुआ था.

नाना --- सो गए थे क्या राज बीटा.. नानी ने नाना को राज का नाम बता दिए था.

राज--- जी दाद्दु लेता तोह नींद आने लगी फिर में सो गया.

नाना -- ाचा किआ बेटे तुमने जो सो लिए. नानी ने दोनों के बीच लंच रखा तोह राज ने नानी का हाथ पकड़ लिया.

नाना और नानी दोनों राज को देखने लगे.

राज--- दादी आप का खाना नहीं है यहाँ.

नानी --- आज में अंदर खा लुंगी बीटा, तुम पहले अपने दाद्दु के साथ खा लो.

राज खड़ा हुआ और नानी को पकड़ दाद्दु के सामने बिठा दिए. दाद्दु बड़े घोर से राज को देख रहे थे. उनकी आँखों में चमक बढ़ गई थी राज को देख के.. ऐसे hi प्यार और सम्मान के लिए वह तरस रहे थे.

राज भी चारपाई के किनारे पर गांड टिका के बैठ गया.

राज ने पहला निवाला अपने नाना के मोह में डाला दूसरा नानी को खिला दिए. दोनों की ऑंखें छलकने लगी थी. दोनों राज को खिलने भूल गए. दोनों राज को बस देखते hi रहे. नाना की नज़र पड़ी तोह खाना थोड़ा सा hi रह गया था. नाना ने राज का हाथ पकड़ लिया.

नाना--- बास मेरे बच्चे. तुम सारा लंच हमें hi खिला डोज क्या. खुद से कुछ नहीं खाओगे. नाना बड़े प्यार से बोलै. नानी ने इस बार नाना के सामने hi राज के सर को चूम लिया. नाना ये देख कर स्माइल करने लगे.

नानी---- राज बीटा अब तुम भी खा लो.

राज---- नानी मैं कितना हत्ता कट्टा हों, एक टाइम न खाने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा. आप दोनों को आज खिला कर मेरे मैं की आरज़ू भी पूरी हो गई है. मेरा कोई बड़ा नहीं है न इसलिए. पहले कबि किसी को खिला नहीं सका. ये बात राज के दिल से निकली थी. प्यार बाँटने से बढ़ता है. राज नाटक करते करते सच में hi जज़्बाती होने लगा था. उसके दिल में भी कुछ कुछ होने लगा था. अपना नाना नानी से प्यार तो सभी को होता है. राज को भी था. पर पहले के मुकाबले में अब की बार राज के अंदर का मौसम कुछ बदला हुआ था.

नानी --- पेट की भूक से बड़ी भूक होती है प्यार की भूक राज बीटा. हम तोह तुम्हारे हथु से खा पर प्यार अपने पेट में उतर रहे थे. पेट अब भरे या बाद में. कुछ घंटे तोह हम भी रह सकते हाँ. नानी ने एक निवाला राज में मोह में दाल दिए. राज नाना को देखते हुए खाने लगा.

नानी --- राज बीटा पा है, हमारा बहुत बड़ा परिवार है. मेरे बेटे हाँ, बेतिया हाँ, उनके बच्चे हाँ. पर कोई भी हमारे साथ नहीं रहता. राज हैरानी वाले भाव चेहरे पे ला के देखने लगा

नानी --- बड़े दुःख में हम अपनी आखरी साँसे पूरी कर रहे हाँ राज बीटा. आस पास वळून से हमें सम्मान तोह मिल जाता है. पर उतना नहीं जितना तुमसे हमें मिल रहा है.

राज--- ऐसा क्यों दादी.

नाना बोले-- मेरी वजा से बेटे. मेरी वजा से सब मुझसे दूर हो गए. संस्कारी हों न तोह सबसे संस्कारो भरी बातें करता हों. बेटियों को अच्छी सीख के साथ साथ हद में रहने वाली ज़िन्दगी देने को कहता हों.

नाना दुखी होक बोले.

राज--- ये तोह बहुत अच्छी बात है दाद्दु. इस बात पे किसी को बुरा कैसा लग सकता है.

नानी--- सब समझते हाँ, बेटियों पर दबाओ बना के उनके खवाबो को कुचल दिए जाता है. तेरे दाद्दु की बातों का यही मतलब होता है राज बीटा. तेरे दाद्दु चाहते हाँ, फिरसे कभी किसी की बेटी घर से न भाग जाए. फिरसे किसी का सर न झुक जाए.

राज की एक्टिंग कमल पर थी.

राज---- क्या मतलब में कुछ समझा नहीं.

नाना -- तेरी दादी ने बात खोल hi दी है राज बीटा तोह सुनो.. मेरी भी एक बेटी किसी के साथ भाग गई थी. तब से मेरा झुका सर कभी उठ नहीं सका.

राज को एक बार तोह लगा नाना से कह दे, नाना खवाब पुरे न हों तोह ऐसे कदम उठ hi जाया करते हाँ. संस्कार तोह अब बी माँ के अंदर कूट कूट कर भरे हुए हाँ. सालों से बिना पति के जी रही हाँ. सालों से मेरे लुंड से परेशान हाँ, फिर भी वह मेरा लुंड ले के अपनी छूट की आग नहीं बुझा सकीय. पर ऐसे बात राज कह नहीं सकता था. और नाना को बदलना नहीं था. नाना के हिसाब से चलते हुए कोई हल निकलना था.

और फिर यहाँ तोह पईरा परिवार hi बिखरा पड़ा था. सब को समेटना भी था.

राज --- ऍम सॉरी दाद्दु मुझे नहीं पता था, आप इतने दुखी हाँ. राज साद होक बोलै.

नानी --- उसके बाद तेरे दाद्दु ने दूसरी दो बेटियों की शादी जल्दी और उनकी पसंद के बिना कर दी. तीनो बेटे बी तेरे दाद्दु के लेक्चर सुन सुन के तंग आने लगे. फिर अपने अपने बीवी बच्चों को लेके अलग रहने लगे.

राज-- ये तोह बड़ी गलत बात है दादी. कितना गलत किया सब ने. माता पिता से बढ़कर भी कोई होता है.

थोड़ा सा लंच बचा था, वह बचा hi रह गया. नाना नानी दोनों दुखी हो गए थे. नाना और नानी बूढ़े हो चुके थे. राज का प्यार मिला, सम्मान मिला तोह भावनाओं में बह गए और राज को अपना दुःख बता गए. राज भी दोनों के साथ दुखी हो गया.
 
4 बजे के करीब राज, नाना और नानी फिरसे सहन में बैठे हुए थे. इस बार वो दूसरी दिशा में बैठे थे. धुप की दिशा बदल जाने से दूसरी साइड की दिवार के साथ चारपाई पर बैठे हुए थे. राज अपने नाना और नानी से और बी खुल गया था. बहुत सी बातें राज ने अपने नाना नानी से कर ली थी.

संजय शर्मा या उसकी पत्नी बी इतनी जल्दी राज के करीब यूँही नहीं हो गए थे. राज उनकी बेटी का बीटा था. अपनापन तोह मिलना hi था. दोनों तसरे हुए भी थे और राज खुद बी संस्कारी और डेन्ट लड़का बन कर दोनों से मिला tha.isliye भी दोनों राज से बड़ी जल्दी घुल मिल गए थे. राज नानी के साथ जा के सब्ज़ी भी ले आया था.

सब मोहल्ले वाले देख के हैरान बी हुए थे. नानी बड़ी खुश थी राज को अपने साथ ले जा के.

अब राज निचे बैठा हुआ अपने सर में नानी से मालिश करवा रहा था. तीनो है कर बातें बी कर रहे थे.

सामने दूसरे पडोसी के घर की छत पर एक लड़की छड़ी जो कुछ मॉर्डन त्यर की थी. खुली शर्ट पहने हुए थी. वह राज को देखने लगी. राज ने भी उसे नज़र भर के देखा, फिर फ़ौरन hi अपना सर भी झुका गया. संजय शर्मा लड़की के छत पर आने के बाद बड़े धयान राज को देखने लगे थे. राज ने फ़ौरन hi सर झुका जाने से उन्हें बड़ी ख़ुशी मिली थी. ऐसे hi संस्कार तोह वो देखना चाहते थे. संजय शर्मा के दिल में राज के लिए कुछ डाउट ख़तम हो गया था. अपनापन राज से मिला था. पर अंदर से राज के लिए भी वही सोच बी थी. कहीं ये बी औरों के जैसा तोह नहीं है. लड़की बाज़ तो नहीं है.

पर राज को नजरे झुकाते देख कर संजय शर्मा के विचार कुछ बदल से गए थे.

नानी बी लड़की को देख के बोली... बड़ी hi बेशरम लड़की है. देख भी रही है, नज़रो के सामने एक लड़का है, फिर भी छत से निचे नहीं उतर रही.

नाना--- ठंडी आह भरते हुए... बेशर्मो के बारे में क्या बात करनी मल्टी. कितनी सीख दी थी मेने, तुमने उसे. पर जब बड़ी हुई तोह आना hi छोड़ गई.

राज ने फिरसे सर उठा के लड़की को देखा जो अब बी राज को देख रही थी. राज उसके फिगर को देखने लगा. अच्छे से देख के राज ने फिरसे सर झुका लिया.

राज--- मेरी बहन ऐसे कपडे पहन के कबि छत पर जाये तोह में तोह उसका सर hi काट दूँ.

नाना नानी से तोह राज ने ये बोलै.. पर मैं में वह बोलै. साली शहर की लड़कियों की बात hi अलग होती है. कितने बड़े बड़े मुम्मे हाँ इसके. दूसरे पड़ोस वाली आंटी से भी बड़े. और रंग में भी उससे बढ़के है.

नाना राज की बात से खुश होक.. शाबाश राज बीटा. ऐसे hi विचार सदा रखना. मुझे ख़ुशी हुई तुम्हारे विचार जान के.

नानी के हथु में प्यार बढ़कर राज के सर में उतरने लगा.

रत के खाने के तीनो नाना के कमरे में थे. राज एक चक्कर मोहल्ले का लगा कर आया था.

तीनो बीएड पे थे. नाना नानी लेते हुए थे, राज बीच में बैठा हुआ दोनों का एक एक पेअर दबा रहा था. साथ में बातें बी चल रही थी. अब तो नाना नानी बी राज को नहीं टोक रहे थे. राज लड़का था, दिखने में संस्कारी भी था. दोनों को बड़ा सम्मान बी दे रहा था. दोनों के पेअर दबाने लगा तोह एक बार के बाद फिरसे राज को नहीं रोका.

राज---- दाद्दु मुझे सब के बारे में बताएं आप.

नाना--- राज बीटा क्या करोगे तुम सब जान के. और अब मुझे उनकी बातें करना भी अच्छा नहीं लगता. क्या कुछ नहीं किया था मेने सबके लिए. उम्र भर कमा के खिलाया सबको. फिर भी सब मुझे छोड़ गए. कभी कभी चक्कर लगाने आ जाते हाँ.. ऐसे जैसे हमपे एहसान कर रहे हों.

नानी--- बड़ी तकलीफ होती है राज बीटा, जब बी वह आते हाँ. वह तोह बस रस्मी hi मिलने आते हाँ. वर्ण अब बी वह तेरे दाद्दु की बातें सुन्ना नहीं चाहते. कहते हाँ, पापा आप आज बी नहीं बदले. वही के वही रह गए.

नाना--- एक बाप कैसे अपने बच्चू को सलाह देने से बाज़ आ सकता है. एक बाप तोह आखरी साँसों तक अपने बच्चू को सीख hi देगा.

नानी--- ऐसी बातें न पहले किसी ने सुनी और न hi अब्ब सुनने को त्यार हाँ. बड़ा दिल दुखता है मेरा राज बीटा. नानी दुखी होते हुए बोली.

नाना--- मेरा नहीं ख्याल रखना चाहते तोह काम से काम अपनी माँ का hi रख लिया करें. मेरे कारण वह अपनी माँ से भी दूर हो गए हाँ. नाना ने नानी का हाथ पकड़ लिया.

राज--- दाद्दु आपने तोह पूरी ज़िन्दगी किताबें hi पढ़ी हाँ. इंसानो को देखा और परखा है. समय के साथ साथ बहुत से लोगों में बदलाव भी आ जाता है. हो सकता है, उन सब में भी बदलाव आ जाए. एक बार फिरसे सब आप के पास आ जाएँ. अपने गलत बर्ताव पर आप सब से माफ़ी भी मांग लें.

नाना फेकि से हंसी हंस पड़े... ऐसा सब किताबो में hi लिखा अच्छा लगता है राज बीटा. हक़ीक़त की दुन्या में ऐसा नहीं होता.

नानी--- होना होता तोह कबका हो जाता राज बीटा. अब तोह सालों बीत गए हाँ. जब हम मरेंगे तोह हमारे मरने पर सब एक साथ आएंगे, फिर सब मिलके रोयेंगे. पर माफ़ी हमसे तब भी नहीं मांगेंगे.

नानी आंसू बहाने लगी.

राज--- ऐसा नहीं है दादी. अब आपका पोता आ गया है न. आपकी अधूरी खुशियों को ज़रूर पूरा करेगा.

दोनों राज को देखने लगे. कुछ हेरात भी ा गई थी उनकी आँखों में.

नानी-- राज बीटा तुम क्या कर सकते हो.

राज--- दादी कुछ बी असंभव नहीं होता. हिम्मत और लगन से कुछ भी किया जाये तोह इंसान हर काम में सफल रहता है.

नाना--- बहुत बड़ी बात की तुमने राज बीटा. हिम्मत और लगन सच्ची हो तोह कोई काम ऐसा नहीं जिसे पूरा न किया जा सके. पर ये मामला कुछ हैट के है

राज--- हटके है तोह बी मैं इसे पूरा ज़रूर करूँगा दाद्दु.. गाओं में बी मुझसे किसी का दुःख देखा नहीं जाता था दाद्दु. और फिर आप तो मेरे बड़े बी हाँ. कैसे में आप दोनों का दुःख डेक सकता हों.

नानी-- भगवन तुजे हर मंज़िल पे सफल करे राज बीटा. तुम बहुत अच्छे हो.

राज--- दाद्दु सामने वाले घर की लड़की है, जो मुझे देख के बी निचे नहीं उत्तरी. अगर में उसे सुधर दूँ. वह आपके पास अच्छे कपड़ो में आये और आप दोनों से माफ़ी बी मांग ले तोह

दोनों -- क्याआ.. ये कैसे बात कर रहे हो तुम राज बीटा. ऐसा कैसे हो सकता है. तुम भला उसे कैसे सुधर सकते हो.

नानी--- पता बी है राज बीटा नेहा कितनी आगे निकल चुकी है. आज के तोह उसके कपडे बी कुछ ठीक थे. वर्ण तोह इतने गंदे कपडे पेहटी है, देख के hi शर्म आ जाये.

नाना-- राज बीटा तुम पढ़ने ए हो तो पढ़ो. ऐसे कामो में अपना समय ख़राब मत करो.

राज-- दाद्दु मेरा ये साल बी कुछ अपणु की वजा से जाया हो gaya.(raj झूट बोलने लगा) दादी एक साल जाया हो गया तोह अगले साल बी पढाई की जा सकती है. कुछ अपणु का बढ़ा दर्द काम करने के लिए एक साल और सही. दाद्दु आप तोह फिर हाँ hi मेरे साथ. आप मुझे पढ़ा देंगे, मेरी पढाई का लोस्स भी जाता रहेगा. बस मुझे सबके बारे में बता कर मुझे अपनी सेवा का मौका दें आप.

दोनों हेरात से राज को देखने लगे.

नानी--- राज बीटा तुम ये सब कर लोगे.

राज--- नहीं जनता. पर मुझे पूरा विश्वास है, में सब कर गुज़रूंगा. अच्छा करने वाले का साथ तो भगवन भी देता है.

नाना --- शाबाश राज बीटा. तुम्हारी बातें सुनके मेरी ख़ुशी और भी बढ़ गई है. आज तक तुम जैसा मुझे नहीं मिला. आज मिल के मैं बहुत खुश हुआ हों. नानी नाना को खुश देख कर बहुत खुश थी.

नानी--- राज बीटा, में भी अपना दर्द अपने सीने में छुपाये बैठी हों. राज बीटा एक माँ अपने बच्चू से दूर कबि नहीं रह सकती. बच्चे जैसे बी हों, एक माँ उनके बिना नहीं रह सकती. नानी रोने लगी. राज बीटा तुम ऐसा कर सको तोह में फिरसे जी उठेंगी और तेरे दाद्दु भी. तेरे दाद्दु पहले गलत नहीं थे. सिसकते हुए नानी बोली. मेरी बेटी के भाग जाने के बाद से ऐसे हो गए थे.

राज-- दादी में सब ठीक कर दूंगा. राज ठोस लहजे में बोलै. वह आया बी तो इसी मकसद से था.

कुछ देर बाद राज अपने कमरे में जा कर सो गया. और सोचने लगा कैसे करना है सब. जैसे उसके नाना की सोच थी. कुछ भी करना आसान नहीं था. कबि भी उसकी इमेज नाना नानी की नजरो में ख़राब हो सकती है. सब बहुत सावधानी से करना पड़ेगा. राज ये भी सोचने लगा.
 
राज जल्दी उठ गया. कमरे से निकल के फर्श हुआ तोह नानी भी बहार निकलती दिखाई दी. राज ने जा के नानी के पाऊँ छुवे

नानी-- खुश होक... राज बीटा तुम इतनी जल्दी, इतनी में भी उठ गे

राज--- दादी गाओं से हों तोह सुबह जल्दी उठने की आदत है. फिर सीना चौड़ा करके. गाओं में पला बढ़ा हों दादी, सर्दी क्यों लगेगी मुझे.

नानी है पड़ी. राज बीटा मुझे बड़ी ख़ुशी हुई तुम्हे सुबह जल्दी उठते देख के.

राज-- दादी यहाँ पास में कोई पार्क है कोई. मुझे सैर के लिए जाना है. नानी ने राज को पार्क का बता दिए. राज कमरे में जा के ट्रॉउज़र shirt,jacket पहन के निकल पड़ा. नानी राज को जाते हुए देखने लगी. कमरे में जा के राज के बारे में संजय शर्मा को बताया.

संजय-- घाबरू जवान है, गाओं का रहने वाला बी है. सर्दी से क्यों डरेगा. नाना बी खुश हो गए थे राज के जल्दी उठ जाने पर.

राज पार्क में पोहंचा और जॉगिंग करने लगा. सर्दी में भी उसका जिस्म पसीना छोड़ने लगा था. कुछ मिंटो में राज को नेहा भी दिखाई दे गई. राज उसे डेक के हैरान भी हुआ और खुश भी. नेहा अकेली थी. थोड़ी देर की वाक के बाद वह भी दौड़ने लगी. तीसरे चक्कर में राज ने उसे जा लिया. नेहा एक ऐसी जगा से गुज़र रही थी. जहा कोई और नहीं था. पास में पेड़ पड़े भी थे.

राज नेहा के बराबर पोहचा तो नेहा राज को देख के हैरान हो गई

नेहा-- तुम वही हो न. जिसे मेने शाम को शर्मा के घर में देखा था.

राज-- हाँ वही हों. राज नेहा के बराबर हुए बोलै.

नेहा--- ज़रूर फिर तुम बी उन दोनों के जैसे होंगे. नेहा के चेहरे पे नागवारी क भाव ा गए थे.

राज-- क्यों तुम उनके जैसी नहीं हो

नेहा रुकते हुए--- अपनी लाइफ को फीका बनाने का मैं नहीं है मेरा. वो तो चाहते हाँ, में संस्कारी लड़की बांके घर के बैठी रहूं. अपनी लाइफ को एन्जॉय न करू. मेरी लाइफ में है में जैसे चाहे जियु, वह कोण होते हाँ मुझे बार बार सलाह देने वाले. जब बी मिलते है, वही टिपिकल बातें करने लगते हाँ.

राज नेहा को ऊपर से निचे तक देखने लगा. नेहा माल थी पूरी. गर्म ट्रॉउज़र जैकेट पहने हुए थी.

राज ने साइड में देखा और एकदम से hi एक हाथ से नेहा की कमर को पकड़ के अपने साथ सत्ता लिया. नेहा हैरत से राज को देखने लगी. राज होंटो पर स्माइल लेट हुए उसे देखने लगा.

राज--- ऐसे hi ओपनली लाइफ जीने की अदि हो तुम. शमरा परिवार के दोनों बोधु की बातों से तुम इररेतते हो जाती हो. में बी तुम्हारे जैसी लाइफ जीने का अदि हों. यू क्नोव मिस नेहा, मैं तुमसे भी कहीं आगे का हों. राज ने साइड में देखा और फिर नेहा को उठा कर साइड में पेड़ के निचे ले गया. नेहा हड़बड़ा कर चीखने लगी. राज ने अपने होंठ उसके होंटो पर सत्ता दिए. हल्का सा किश नेहा के होंटो पर कर दिए.

नेहा दर भी गई थी, शॉकेड भी थी.

राज नेहा की कमर को पकड़ कर थोड़ा सा पीछे को पेड़ के साथ लगा कर बोलै.. जैसी लाइफ तुम जी रही हो, जीती रहो, थोड़ी सी ख़ुशी अगर उन दोनों को भी तुम दे दो तुम्हे क्या फ़र्ज़ पद जायेगा. जिओ अपनी लाइफ, पर उन्हें ठोस सा सम्मान देकर खुश कर दो.

राज जनता था, नेहा किसी लड़की है. लड़कियों की तोह राज ने पीएचडी कर राखी थी. रजा ने देर नहीं की और नेहा के ट्रॉउज़र में हाथ घुसा कर नेहा की छूट में ऊँगली दाल दी. नेहा को एक झटका लगा. वह हेरात से राज को देखने लगी. सेक्स की शैदाई वो बी थी, वह से लड़कों से रिलेशन उसने भी बना रखे थे. पर राज के जैसा किसी ने उसके साथ नहीं किया था. राज तोह सब कुछ ओपनली hi कर रहा था. राज सूरत से डेन्ट और शरीर से एक स्ट्रांग मन भी था.

राज की ऊँगली से नेहा सिसकने लगी. आठ हरमे साले कुत्ते ये क्या कर रहा है आठ माँ.. राज ने दूसरे हाथ से नेहा का चुका पकड़ लिया और दबाने लगा.

राज-- क्यों मज़ा नहीं आ रहा क्या. सुबह सुबह तुम्हे तुम्हारे मतलब का सब मिल रहा है. ऐसे खुले में एक स्ट्रेंजर तुम्हारे इस सुन्दर से शरीर के सुन्दर से पार्ट्स के मज़े ले रहा है. िह्नी part के गर्मी के कारण कल शाम तुम छत पार्स मुझे देख के भी निचे नहीं उत्तरी थी. राज की ऊँगली से नेहा की सिसकियाँ बढ़ने लगी.

पास से एक लड़की गुज़र रही थी. उसकी नज़र पड़ी तोह वही से बोल पड़ी. नेहा आज सुबह सुबह hi फाँस लिया किसी को. राज और नेहा हड़बड़ा कर लड़की को देखने लगी. लड़की स्माइल करते हुए आगे बढ़ गई.

राज-- सही अंदाज़ा लगाया न मैंने. तुम भी काम चालू नहीं हो. वैसे वह लड़की तुम्हारे आगे कुछ भी नहीं. राज ने फिरसे अपने होंठ नेहा के होंटो से जोड़ दिए. चुके दबाते हुए नेहा की छूट में ऊँगली की स्पीड राज ने और भी बढ़ा दी.

नेहा अब मस्त हो चुकी थी. किश में राज का साथ देने लगी. बड़े जोश से वह राज को किश करने लगी. जब नेहा की छूट में बारह आने लगी और नेहा के झटके बढे तोह राज ने नेहा के ट्रॉउज़र के अंदर से हाथ निकल कर डोरी लूसे करते हुए ट्रॉउज़र पंतय समेत निचे कर दिए. नेहा राज के ऐसा करने से कुछ घबराई भी. पर छूट की भयंकर आग ने उसे परेशान भी कर दिए था.

राज झुका और बिना देरी के नेहा की छूट में जीब दाल दी. नेहा की मत hi मारी जा चुकी थी. वह आहें भर्ती हुई राज के सर को अपनी छूट पर दबाने लगी.

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अह्ह्ह्ह उफ्फफ्फ्फ़ उम्मम्मम्मम्म सीईईईई ओह्ह्ह्हह नेहा सिसकने लगी और नेहा नेहा की छूट में जीब के साथ साथ एक ऊँगली भी घुसा कर नेहा की मत मरने लगा. देर नहीं लगी और नेहा झड़ने लगी. राज ने नेहा को पकड़ के वही बिठा दिए. सर्दी में भी नेहा पसीने पसीने हो चुकी थी. नेहा की तेज़ चल रही सांस को देख के राज उसे स्माइल से देखने लगा. जितनी देर में नेहा रिलैक्स हुई, उतनी देर में राज अपने लुंड को निकल चूका था.

"माय गॉड!! इतना बड़ा और स्टोरंग डिक"

आवाज़ सुनके नेहा और राज ने देखा तोह वही लड़की पेड़ की दूसरी साइड पे कड़ी थी.

नेहा--- साली में जानती थी तू ज़रूर आएगी. नैना भी चलती हुई राज जे पास पोहंची और बैठ के राज के लुंड को पकड़ लिया.

नैना-- नेहा कितनी खुश किस्मत है तू, जो तुझे इतना प्वॉयरफुल लुंड मिलने जा रहा है.

राज के लुंड को देख हैरान तोह नेहा भी थी. पर राज के लुंड को देख उसकी आँखों में चमक बहुत बढ़ गई थी. ऐसे hi लुंड के लिए नजाने वह कबसे तरस भी रही थी. अब तक इतना बड़ा और मोटा लुंड उसकी छूट में कभी नहीं गया था. उसके कसी भी बॉयफ्रेंड का लुंड राज के लुंड जिंटा नहीं था.

नेहा--- हेहेहे तू चाहे तोह ले सकती है. और ये मेरा बॉयफ्रेंड भी नहीं है.

नैना--- वहटट्ठ क्या कह रही हो. बर्फ नहीं है तोह फिर इतना सब.

नेहा-- बहुत बड़े वाला हरामी है ये नैना. ये शमरा सर के घर में आया हुआ है.

नैना---- क्या उनके घर में आया हुआ है. फिर भी ये ऐसा है. वह नहीं जानते क्या इसके बारे में.

राज --- भला जिसके पास ऐसा लुंड हो. वह कैसे शरीफ हो सकता है. और रहता में वहां इसलिए हों. वह दोनों जैसे भी हाँ, हमदर्दी के लायक तोह हाँ hi न. राज ने पूरी बात नहीं बताई दोनों को.

नैना राज के लुंड को मसलने लगी.

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नेहा--- ले ले साली मोह में अगर लेना है तोह, नहीं तोह मुझे टास्ते करने दे. देर बी हो रही है. कोई इस और न ा जाए.

नेहा की बात पे नैना को ऐसा लगा जैसे राज का लुंड उससे दूर होने वाला है. वह झुकी और राज के लुंड को मोह में भर लिया. मोटा लुंड मुश्किल से उसके मोहन में समाया. पर वह नहीं रुकी मोह में लेके चूसने लगी. पीछे से राज ने उसके ट्रोसेर में हाथ डाला और गांड के छेड़ को ढूंढ के उसमे ऊँगली डालने लगा. राज जनता था, जैसी दोनों लड़कियां हाँ, ज़रूर इनके दोनों छेड़ खुले होंगे. हुआ भी ऐसे hi, राज की ऊँगली थोड़ी मुश्किल से सही, पर नैना की गांड में घुस गई थी. नैना ने मोह से लुंड निकल कर राज को देखा. उसकी ऑंखें भी लाल हो गई थी. राज गांड और छूट के छेड़ से खेलने लगा. नैना फिरसे राज के लुंड को मोह में ले चूसने लगी. नेहा कड़ी होक चरों और देखने लगी. कोई नहीं दिखा तोह वो भी झुक के बैठी और नैना को राज के लुंड से हटा के खुद मोह में ले गई. कुछ देर राज के लुंड के टास्ते को अच्छे से चेक करने के बाद वह सीढ़ी हो गई.

नेहा--- मस्त है तुम्हारा, बहुत मस्त. दो दो लड़कियों के चूसने पर भी माल नहीं छोड़ा इसने. लेने में मज़ा आएगा.

नैना--- हाँ नेहा में भी वही देख रही हों. क्या ख्याल है फिर.

नेहा--- अभी तोह नहीं ले सकती. टाइम निकल के लेना पड़ेगा.

नैना-- राज से बोली.. नाम क्या है तुम्हारा.. राज ने अपना नाम बता दिए.

नेहा-- राज तुमसे मिलके बहुत अच्छा लगा. ऐसे hi लड़के मुझे बहुत पसंद हाँ. अरे लड़की के साथ मस्ती, मज़े करने के लिए शर्म करने वाले भी कोई लड़के होते हाँ. साले शामृते रहते हाँ. शर्म तोह हम लड़कियों को नहीं आती और आज कल के लड़के शर्मणे लगते हाँ. नेहा हस्ते हुए बोली.. वैसे तुम हो बोहोत बड़े वाले कमीने.. नेहा आगे बढ़के राज को किश करने लगी.

नैना--- सुनके में हैरान तोह हुई हों नेहा, पहली hi मुलाक़ात में राज ने तुम्हे पकड़ कर इतना सब कर दिए.

नेहा--- नैना में तुझे बता नहीं सकती, पहले में कितना घबरा गई थी, कितना दर गई थी. मुझे लगा मेरा रपे हो जायेगा. पर तोह इतना ट्रेंनेड है सेक्स के मामले में, मज़ा hi आ गया. कहीं से लगने hi नहीं दिया राज ने मुझे, जैसे वह ज़बरदस्ती कर रहा हो, कुछ सेकण्ड्स में hi मेरी छूट में आग लगा दी राज ने.

राज---- रणदीव मेरे लुंड को ठंडा नहीं करुँगी तुम दोनों.

नैना--- हाहाहा देखा नेहा इसका बोलना भी हमारे हिसाब से है. सच में पूरा हरामी है ये तो.. नैना भी हस्ते हुए बोली तोह नेहा राज को बड़े प्यार से देखने लगी.

नेहा--- मन तोह बड़ा है राज अभी के अभी इसे अपनी छूट में लेके इतना उछलो कह धमाल मचा के रख दूँ. पर नहीं ले सकती.

राज ने नेहा के मोह अपने लुंड कर दबा दिया लुंड नेहा के मोह में घुसा तोह नेहा राज के लुंड को चूसते हुए मसलने लगी. साथ नैना के साथ भी छेड़ छड़ करने लगा.

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कुछ मिंटो में राज के लुंड का माल नेहा के मोह में भर गया. फिर तीनो उठे और कपडे पहन के पार्क से बहार जाने लगे. राज नेहा को लाइन पे ले आया था, साथ नैना जैसी रंडी भी उसे मिल गयी थी.

नेहा-- राज तुम्हे दर नहीं लगा, अगर में शर्मा जी की घर जा के अभी का सब कुछ बता दूँ तोह.

नैना-- ः तू अभी भी नहीं समझी इसे नेहा. राज को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला.

राज-- सही कहा तुमने मेरी जान. में तोह इतना बेशर्म हों तुम दोनों के घर में घुस के तुम दोनों के सामने तुम दोनों की माँ को छोड़ डालूं. वह भी ज़बरदस्ती.

नैना-- हाय राज किसी दिन तुम मेरी भाभी को भी ऐसे hi छोड़ डालो, तोह कसम से मज़ा hi आ जाए. साली है तोह मेरी भाभी पर मुझे उसकी वजा से बड़ी परेशानी भी रहती है.

राज---- क्यों ऐसी क्या बात है. तुम तोह पूरी रंडी हो, और रंडी भी भला किसी से डर्टी है.

नैना-- नहीं न, रंडी हों तोह क्या पुरे घर में ढंढोरा पीटती फ़िरों. राज सब कुछ उनकी नज़रों में रहते तो नहीं किया जा सटका न.

नेहा-- राज नैना की भाभी ने एक बार नेहा को देख लिया था, तब से इसे अपने निचे दबा के रखती है.

राज--- अब मेने सब का ठेका तोह नहीं ले रखा. मुझे क्या मिलेगा तुम्हारी भाभी को छोड़.

नैना-- हेहेहे एक छूट और एक गांड. तुम नहीं जानते राज, मेरी भाभी भाई के शिव किसी और के साथ सेक्स नहीं करती. और भाई भी बस ावें hi है. 4 साल हो गए हाँ शादी को और भी अभी तक भाभी को माँ भी नहीं बना सके.

राज--- तोह असल आग तुम्हारी भाभी को इस बात पर लगी है.

नेहा-- ये बात भी है राज. पर वह शर्मा जी के जैसे विचारो वाली है.

राज-- फिर तोह वह वहां भी आती hi होंगी.

नैना-- कभी कभी. पर मास्टर जी की रेस्पेक्ट के साथ साथ उसके कुछ आकर भी है. हमसे ज़यादा पैसे वाले परिवार से है न.

राज-- चलो पहले तुम दोनों को छोड़ लूँ फिर देखता हों क्या करना सही रहेगा. नैना अगली गली से मुद गई तोह राज और नेहा एक साथ घर वाली गली में दाखिल हो गए. दोनों को एक साथ देख के कुछ हैरान हुए. कल वह सब राज को मल्टी शर्मा के साथ देख चुके थे. आज नेहा के साथ देखा तोह सोचने लगे, शर्मा जी के साथ रहने वाले की सोच भी उनके जैसी hi होगी. फिर ये लड़का क्यों नेहा के साथ है.

नेहा-- राज तुमने तहरीमसोमे भी किया है कभी.

राज को लास्ट किया थ्रीसम याद आ गया. पर वह थ्रीसम था hi कहाँ. वह भी दोनों को अलग अलग करके छोड़ा था राज ने. उससे पहले भी राज कई के साथ थ्रीसम कर चूका था.

राज-- टाइम आने दो, फिर दिखा भी दूंगा थ्रीसम में मई कितना मास्टर हों. राज हरामी स्माइल से नेहा को देखते हुए बोलै.

नेहा-- 3 बजे तुम मुझे पार्क के बहार मिलना. में और नैना वही तुमसे आ के मिलेंगी. फिर चलेंगे एक ठिकाने पे. वही दिखाना अपना असली हरामीपन.

घर आया तोह नेहा अपने घर चली गई और राज अपने नाना के घर.
 
घर में घुसा तोह राज हरामी से शरीफ बच्चा बन गया. नाना नानी के पाऊँ छुवे. नानी ने राज के सर पर हाथ फेर दिए.

नाना--- आज तो तुम खूब पसीना बहा आये राज बीटा.. राज अपना सीना चौड़ा करते हुए थोड़ा सा ड्रामा करते हुए

रक्-- हों भी तोह गाओं का पहलवान दाद्दु. नाना और नानी है पड़े. राज कमरे में gaya,kuch देर बैठा फिर बहार बाजार से नाश्ते का सामान ले आया. नाना और नानी राज को सामान समेत देख कर कुछ दुखी हो गए.

नानी - राज बीटा तुम क्यों ले आये. हमारे पास इतने पैसे हाँ, तुम्हारे लिए नाश्ते में कबि कमी नहीं आएगी.

नाना-- राज बीटा ऐसा कबि नहीं हुआ हमारे साथ. तुम्हारे आने से हममे फिरसे ज़िन्दगी की लहार डूअड़ गई है. जो पैसा है, वो बचा के हम क्या करेंगे.

राज-- जब बच्चे जवान हो जाएँ न दाद्दु तोह वह अपने माता पिता पर बोझ नहीं बनते. आपके पास पैसे हाँ, आप बचा के रखें या मोहल्ले में बच्चू में बाँट दें. अब तोह में यहाँ हों. और सारा खर्चा भी में hi पूरा करूँगा. एक पैसा भी आपका लगने नहीं दूंगा. मेरी तोह किस्मत खुल गई है जो मुझे आप दोनों मिले हाँ दाद्दु. पैसे की मुझे और न hi मेरे घर में कोई कमी है. और फिर अभी तोह मेने साडी उम्र hi पैसे कमाने हाँ. अब तोह में आप दोनों को कभी भी नहीं छोडूंगा.

राज कुछ देर एक्टिंग के बाद सीरियस हो गया. यहाँ आ के अक्सर वह बदल जाया करता था. अब भी वह भावनाओं में बहने लगा.

नाना और नानी ने खड़े होक राज को एक साथ अपने साथ सत्ता लिया.

नानी-- हम भी तुझे अपने से दूर नहीं जाने देंगे राज बीटा.

नाना-- पता नहीं कितने दिन और बचे हाँ हमारी ज़िन्दगी के. जितने दिन भी हाँ, हम हमारे पास hi रहो. बरसों बाद इन आखरी पालो में कुछ सुकून मिलने लगा है. पैसे की तोह मेने बी कभी परवा नहीं की राज बीटा. किसी का एहसान लेने की आदत कबि नहीं रही मुझे. पर तुझसे कुछ ऐसा मन लगा है. तुम कुछ भी कृ तोह दिल कहता करने डॉन. अपने बनाये उसूल भी तोड़ देने को मैं करता है. पर ईंटे सालों से अपने बनाये उसूलों को साथ लेके चल रहा हों तोह छोड़ नहीं सकता. राज बीटा तुम्हारा जो दिल करे हमारे लिए करो. पैसे की हम भी परवा नहीं करेंगे. बस एक बात का ख्याल रखना. मेरा सर फिरसे कभी झुकने न देना. सालों से झुके सर को उठाये फिर रहा हों. एक बार फिरसे झुका तोह धड़ाम से गिर पडूंगा.

एक बार तोह राज का दिल hi देहल उठा. राज कुछ मिंटो में अंदर से कुछ बदला हुआ था. अपने नाना की बात सुनी तोह अंदर तक हिल के रह गया. जैसी नेचर राज की थी. राज छह के भी खुद को बदल नहीं सकता था.

राज की तोह घुट्टी में hi सेक्स था. अपनी माँ अपने पिता को होश सँभालते hi चुदाई करते देखा था. कुछ समझ बानी तोह अपनी माँ की छूट में ऊँगली करने लगा था. कुछ और बड़ा हुआ तोह अपनी माँ को, बहनो को नंगा करके मस्ती, मज़े करने लगा. गाओं की पड़ोसन की चुदाई से सिलसिला जो चला था. वह आज तक थम नहीं पाया था. गाओं की, बहार की कितनी hi लकड़ियों को, औरतों को वह छोड़ चूका था. अब कैसे पीछे हैट सकता था.

ऐसी नेचर के साथ राज को अपना मिशन भी पूरा करना था और ये मिशन कोई आम मिशन नहीं था. बाँदा मार देना आसान था उसके लिए. भले hi पहले किसी को नहीं मर सका था. पर यहाँ तोह राज को अपने नाना नानी की सोच hi नहीं बदलनी थी. सब को साथ मिला कर अपनी माँ को भी साथ मिलाना था. अपनी माँ के लिए सब के दिलों में वही पहले वाली मोहब्बत वापिस लानी थी.

नानी-- राज बीटा अपने पति के लिए मैंने भी अपने सरे बच्चू को छोड़ दिए है. अगर फिरसे शर्मा जी का शर्मा झुका तोह समझ लेना. हमारी साँसे उसी समय समाप्त हो जाएँगी.

नाना के बाद नानी की बाद सुनके राज को अपने पैरों के निचे से ज़मीं खिसकती hi महसूस होने लगी. राज कुछ देर और नाना नानी से बात करने के बाद कमरे में जा घुसा. नाना नानी ने बहुत कुछ दे दिए था राज को सोचने के लिए. राज जो कभी भी इतना सब सोच नहीं पाया था. राज अपणु के लिए दिल से अच्छा होने के बावजूद भी इतना ज़िम्मेदार कभी नहीं बना था. ऐसे मामलों का भी उसे कोई एक्सपीरियंस नहीं था. वह तोह बस अपनी दीदी की शादी तूने पे, ताने मिलने पर इतना सब करने के लिए घर से निकल पड़ा था.

अब उसे महसूस होने लगा कह उसके सामने बहुत बड़ा पहाड़ है. जिसे उसने सर करना है. कमरे में चारपाई पे बैठा राज बहुत कुछ सोच रहा था.

कल वो आया था यहाँ और आज दूसरे hi दिन उसे दो दो छोड़ने को मिल गई थी. राज में कुछ सबसे बढ़ कर था. तो वो था हरामीपन. राज अपने हरामीपन से hi सब मामलात सेट करने की सोच रहा था. पर हरामीपन हर मामले में काम नहीं अत.

राज के पास फ़िलहाल कोई और जुगाड़ भी नहीं था. कोई और रास्ता भी नहीं था. राज ने बहुत सोचा, फिर वह एक फैसले पर जा पोहंचा. हरामीपन hi करना सही रहेगा. शराफत के चलते वह नाना नानी को तोह अपने साथ कर सकता था. पर न तोह सब को साथ मिला सकता था. और न hi अपनी माँ के लिए अपने नाना नानी से माफ़ी मांग सकता था.

गाओं में जहाँ राज ने बहुत बड़ी उम्र की औरतों को छोड़ दिए था. वहां एक नानी भी सही. नानी को अपने डैम में ले आया, नानी को अपने लुंड का आदि बना दिए तोह काम के जल्द और अच्छे से हो जाने के चान्सेस है. राज जैसे हरामी को इससे शिव कोई और रास्ता भी दिखाई नहीं दिया.

राज बहार निकला तोह अपनी बूढी लेकिन अच्छी सेहत वाली नानी को पहली बार छोड़ने वाली नज़रों से देखता हुआ बाथरूम में घुस गया. नहाते हुए राज अपने लुंड को मसलने लगा.

साथ में वह सोचने भी लगा. नानी तोह भी काम मस्त नहीं है. इतनी आगे होने पर भी आप के चुके बड़े मस्त हाँ. नाना के लुंड में तो अब पक्का दम नहीं रहा होगा. ज़रूर नाना ने कई सालों से आपको छोड़ा भी नहीं होगा. अब मुझे hi आपकी सैलून से बंद छूट को खोलना होगा. तब hi आप मेरा मिशन पूरा होगा.

राज दूसरे एंगल से भी सोचने लगा. अगर नानी राज की निय्यत पहले hi भांप गई तोह भी गड़बड़ हो सकती है. अगर नानी बाद में नौरीन के जैसे रियेक्ट कर गई तोह भी गड़बड़ हो सकती है.

राज लुंड को मसलते हुए सोचने लगा. नौरीन का मामला और था. नौरीन मेरे लुंड से नहीं अपनी शादी के लिए इस हद तक चली गई थी. वर्ण उसे और उज़्मा को देख के कभी भी अपनी छूट में ऊँगली न करती. मेरी और उज़्मा की चुदाई देख के मस्त न होती. लुंड घुसने से पहले वो भी पूरा पूरा मज़े लेने लगी थी. इस बात पर राज को कुछ हौसला भी मिल रहा था.

अब बूढी नानी के लिए राज के बड़े लुंड से खतरा बन गया था. पता नहीं राज अपनी नानी का क्या हाल करने वाला था. कैसे करने वाला था. नहाने के बाद राज ने नाश्ता किया तोह बच्चे बढ़ने के लिए ा गए.

दिन ऐसे hi गुज़रा, राज कभी बहार मोहलणे में निकल जाता तोह कभी घर में नानी से बातें करने लगता. नाना बच्चू में बिजी रहे थे.

टाइम हुआ थ्रीसम के लिए तोह राज देर से शहर घूमने का बोल कर निकल पड़ा. पार्क के पास पोहंच कर नेहा और नैना का वेट करने लगा. दोनों को कुछ देर लगी. दोनों आते हुए दिखी तोह राज देख के अपने लुंड को मसले बिना नहीं रह स्का था. दोनों रंडियां बड़ी बन थान के आ रही थी. राज को अपने लुंड को मसलते देखा तो है पड़ी. पास पोहंच के नेहा बोली.. राज तुम तो अभी से हमारे जलवे देख के बेकाबू होने लगे हो.

राज--- सलीओ तुम दोनों हो भी बड़ी खूबसूरत ऊपर से इतने सेक्सी ड्रेस पहन के आई हो. में क्या कोई भी तुम दोनों को देख के लुंड को मसलने लगे. दोनों राज की बात में हस्स पड़ी.

नेहा-- राज जिस जगा जाना था. वहां तोह इंतज़ाम नहीं हो सका है. मेरी एक फ्रेंड अपनी कोठी पे अकेली है. उसे भी शामिल करना पड़ेगा. क्या तुम उसे भी साथ में ज्वाइन क्र सकते हो.

नेहा और नैना राज को इल्तिजै नज़रों से देखने लगी.

राज-- सलीओ मैं कोई प्लेबॉय हूँ क्या जो सबको छोड़ता फ़िरों.

नैना-- राज प्ल्ज़ इस बार मान जाओ. दोबारा से ऐसा नहीं होगा.

नेहा-- वो भी हमारी बेस्ट फ्रेंड है राज, प्ल्ज़ मान जाओ.. और भी तुम्हे भी तोह ेओ और छूट मिल जायेगी.

राज-- मुझे लालच मत दो साली. मेरे लिए कभी छूट की कोई कमी नहीं रही है कभी. जिसे चाहो छोड़ सकता हों. अपनी मर्ज़ी से चुदाई की है. किसी की मर्ज़ी से नहीं. खैर देखता हों, देखने लायक हुई तोह छोड़ भी लूंगा.

तीनो ने एक टैक्सी करि और दिल्ली के सेण्टर में बानी एक विप कोठी पर जा पोहंचे. राज तोह कोठी को देखता hi रह गया.

राज-- बड़ी सुन्दर कोठी है. तुम्हारी दोस्त भी कोठी जितनी सूंदर है या--

नैना-- राज तुम एक बार देखोगे तोह हमें भी भूल जाओगे.

राज-- देखते हाँ... टैक्सी से उतर के तीनो अंदर जा पोहंचे, गेट खुला हुआ मिला था तीनो को. तीनो कोठी के अंदर जाने लगे तोह लॉन की एक साइड से आवाज़ सुनाई दी.

"मैं यहाँ हों"

राज ने आवाज़ सुनके उस दिशा में देखा तोह देखा hi रह गया. राज उस लड़की को देख के मन में बोलने लगा. साली तोह पूरी बम है. माल खालिस हो या न हो, पर छोड़ने में मज़ा ज़रूर आएगा.

राज नहीं जनता था. जहाँ नेहा और नैना राज को लेके आई थी. नेहा और नैना की फ़िरेन्द जिसका नाम श्रुति था. वह कितनी बड़ी रंडी है. श्रुति को तोह नेहा और नैना भी नहीं जानती थी. श्रुति किसी मर्द को परख कर उसकी वीडियो बने के उसे ब्लैकमेल करके अपने मतलब के लिए इस्तेमाल किया करती थी. फिर आमिर कबीर मिलफ औरतों से लम्बी लम्बी रक़मे लेके राज जैसो से छुड़वाया करती थी. नेहा और नैना ने श्रुति को कॉल करके राज के लुंड बारे बता दिए था. और राज इस बाद से भी अनजान था कह कोठी में पोहचते hi वह कैमरा में भी आ गया था. नेहा और नैना इस हद तक सब जानती थी. बाद में राज कसी को परेशान न करे, इसलिए भी ऐसा करना पद रहा था.

ऐसा तोह कैयो के साथ होता आ रहा था. नेहा, नैना और श्रुति रंडियां hi नहीं थी, बहुत आगे की चीज भी थी. बहुत बड़ा फ्रेंड्स ग्रुप भी था इनका.

रीनो चलते हुए श्रुति के पास जा पोहंचे. राज और श्रुति दोनों एक दूसरे को निचे से ऊपर तक देखने लगे.
 
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