राज के चाचा के घर में..
निर्मल चाचा-- उम्र 52
रत्न चचाई-- उम्र 50
नंदनी -- उम्र 26
शेखर -- उम्र 24
अमन ----- उम्र 22
अमित ----- उम्र 20
राज चाचा के घर पोहंचा तो सब खाना खा कर बातों में लगे हुए थे. चाचा के घर में 5 कमरे थे. सब चाचा के कमरे में बैठे हुए बातें कर रहे थे. शाम के बाद सर्दी बढ़ गई थी तो सब रज़ाइयों में दुबके बैठे थे.
राज को देख कर चचाई बोली.. आ गया मेरे बीटा.. कितने दिन हो गए तुझे हमारे घर में चक्कर लगाए हुवे.. राज ने रज़ाई के अंदर hi अपनी चची के पैरों को हाथ लगा कर पर्णाम किया. साथ hi अपनी चची के पैरों को सेहला भी दिए.. चची की होंटो पर मुस्कान आ गई.. वो जान गई थी, चाचा की वजा से राज का हाथ आज ऊपर नहीं जा पाया था. वर्ण तो राज और माफ़ी दे दे, ये हो नहीं सकता था. राज ने चाचा के भी पेअर छुवे.. अपने भाइयों से मिला.
चाचा---- चल आ बैठ मेरे पास.
राज नंदनी को देखते हुए.. नहीं चाचा में आज दीदी के साथ बैठूंगा. दीदी मुझसे कुछ नाराज़ भी लगती हाँ..
चाचा-- हाँ हाँ जा बैठ जा अपनी दीदी के पास. और माफ़ी मांग कर उसकी नाराज़गी भी दूर कर देना.. चाचा हस्ते हुए बोलै तो नंदनी राज को घूर कर देखने लगी. राज के भाई और चाचा चची खुल कर हस्सन लगे.. नंदनी भी है दी.
राज चलता हुआ नंदनी के पास रज़ाई में दुबक पर बैठ गया.. उसके हाथ किसी को नज़र नहीं आने वाले थे. राज का हाथ सीधा नंदनी के पेट पर गया था. तो नंदनी को बड़ा आनंद मिला.. उसके बच्चे के बाप का हाथ था.. एक माँ के लिए इससे बढ़ कर और क्या बात होगी.. राज ने सबके सामने नंदनी के गाल पर किश कर दी.. नंदनी ने भी राज के गाल को चूम लिया. सब दोनों भाई बेहेन का प्यार देख कर खुश हो गए. असली प्यार बारे कोई नहीं जानता था. चची भी नहीं. चची बस इतना hi जानती थी, जैसे राज अपनी माँ और बहनो को परेशान करता है, ऐसे hi वो उसे और नंदनी को भी परेशान करता है. नंदनी को राज ने छोड़ दिए है, नंदनी के पेट में राज का बच्चा है ये बात कोई नहीं जानता था. और किसी की सोच भी इस तरफ नहीं आई थी कभी.
सब फिरसे बातों में लग गए, राज से भी वो कुछ न कुछ पूछने लगे.. राज 12तह के एग्जाम के बाद से कॉलेज नहीं गया था.
शेखर---- पढ़ ले राज मेरे भाई तू hi आगे बढ़ ले. देख हमारे खंडन में एक तू hi सबसे होशियार है, तू hi पढाई छोड़ बैठा है.. पढ़ ले यार तू hi आगे पढ़ कर हमारे खंडन का नाम बाण दे. हम तो ठहरे अनपढ़ गुणवार. तू तो पढाई में तेज़ है. पढ़ लिख कर बड़ा अफसर लग जाना, फिर हम भी अपनी मूंछों को ताओ दे सकेंगे.
ये सच था राज जितना पढाई से भागता था, उतना hi वह पढ़नी में तेज़ भी था. 12तह पास करके आगे कॉलेज में एडमिशन नहीं लिया था.
चची-- हाँ राज बीटा. सच कहूं तो मेरा बड़ा मैं है मेरा भी कोई बीटा बड़ा अफसर बने. तू भी मेरा hi बीटा है राज. छोड़ दे ज़िद पढ़ ले आगे.
चाचा--- मुझे यकीन है राज बीटा, जैसे तूने 12वे में अच्छा नंबर लिए हाँ, आगे भी ऐसे hi लेगा. मान ले हम सब की बात.
ननदनी दीदी राज के हाथ पर हाथ रख कर चुटकी काटने लगी.
नंदनी---- मेरी भी तू नहीं सुनेगा, मुझे पता है राज. नंदनी ड्रामा करते हुए दुखी होने लगी. राज सब जनता था.
राज ने नंदनी को गले से लगा कर उसका गाल चूम लिया.
राज---- मई आप सब की मान लूंगा तो मुझे क्या मिलेगा.. क्यों चची आप मुझे क्या देंगी. राज चची को देख कर चची की छूट वाली जगा देखने लगा. चची राज की नज़रों को देख कर पहले तो ग़ुस्से से देखने लगी. फिर वो राज से बोली.
चची---- बड़ा शॉक है तुझे सेवा करवाने का. लालची कहीं का.. चल तू भी क्या याद करेगा. जो तेरे मैं में आये ले लेना. पर तुझे भी वडा करना पड़ेगा, तू आगे पढ़ेगा और बड़ा अफसर बनेगा.
राज खुश हो गया.. पढाई तो करने hi वाला था. बस थक गया था पढ़ पढ़ कर, तोह एक साल की रेस्ट पर था. इस बार वो दखल लेना वाला था कॉलेज में.
राज----- देख लेना चची बाद में आप कहीं बदल न जाएँ.
चाचा -- तू फर्क मत करो राज बीटा. तेरी चची को मई बदलने नहीं दूंगा. नंदनी दीदी राज की सब बातें समझ रही थी. अपनी माँ की भी वो समझ रही थी. उसे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था. राज उसकी माँ को चोदे या किसी और की माँ को या फिर अपनी माँ को. जब वो नहीं बच सकीय थी राज से तो किसी और के बारे में वो क्यों सोचती.
चाचा की बात पर राज नंदनी और चची के होंटो पर मुस्कान आ गई. चची ने अपनी बेटी को देखा तो कुछ परेशान सी हुई..
ऐसे hi बातें चलती रही. सोने का टाइम हुआ तोह नंदनी राज को लेके अपने कमरे में चली गई. नंदनी अकेली hi सोती थी. कमरे में प्रवेश करते hi नंदनी ने दरवाज़ा बंद किया और कस के एक थप्पड़ राज में मोहन पर जड़ दिए.
नंदनी --- हरामी साले मेरी माँ को तो बख्श दे. नंदनी को अपनी बहन में भर कर राज ने एक ज़बरदस्त किश किया.
राज --- क्यों तुझे क्यों अपनी माँ की चिंता होने लगी मेरी नंदू डार्लिंग.
नंदनी--- कमीना इस उम्र में उसे छोड़ के तुझे क्या मिल जायेगा. छोड़ना है तो मुझे छोड़. कितने दिन हो गए हाँ तुझे मेरी छूट में लुंड डाले हुवे..
राज------ तू पेट से है न, कहीं किसी दिन दबा के छोड़ दिया तो बच्चा को खतरा हो जाएगा.
नंदनी --- मेरे पेट में एक हरामी का बीज है कमीना. मुझे पता है ऐसे तो वो भी नहीं मरने वाला.. पता नहीं जब वो दुन्या में आएगा तो क्या क्या गुल खिलयेगा.
राज हस्ता हुआ--- मेरी तरह ये भी तेरी छूट का दीवाना निकलेगा
नंदनी भी हस्ते हुए-- जान से न मार डोंगी में साले के साले को.. अगर मेरी छूट की तरफ हाथ भी बढ़ाया तो
राज नंदनी को लेके खटिया पर पोहंचा. वही लिया कर उसे किश करने लगा. नंदनी को बड़े दिनों बाद राज का प्यार मिल रहा था. नंदनी की छूट कई दिनों से गीली थी. वो भी राज को किश करने लगी. दोनों की किश वाइल्ड होने लगी. नंदनी राज के ट्रॉउज़र को खोलने लगी.
राज घर से आते हुए ट्रॉउज़र शर्ट पहन आया था. राज के लुंड को बहार निकल कर नंदनी राज के लुंड को मसलते हुवे किश करने लगी. नंदनी पागलों की तरह राज के होंटो को चूस रही थी.
जब दोनों की सांस उखड़ी तो दोनों अलग हो गए.
नंदनी-- हरामी तूने मुझमे कितनी आग भर दी है. मैं तो अपने पति के साथ भी ऐसा सब नहीं कर पाती तेरे साथ होते हुए पागल सी होने लगती हों. राज लेट गया. नंदनी साइड में बैठ कर राज के लुंड को मोहन में लेकर चूसने लगी.
राज------ साली दीदी तू कितना मस्त मेरे लुंड को चूसती है. नंदनी ने लुंड मोहन से निकल कर राज को देखा..
नंदनी--- मेरा तो मन होता है राज, तेरे लुंड को खा hi जाओ. फिर सोचती हों खा जाऊँगी तो फिर कहाँ से ऐसा लुंड ढूंढ में अपनी छूट में लूंगा. पता है तुझे हरामी साले अब मेरा अपने पति के घर में भी दिल नहीं लगता. अजब वो अपना 5 इंच का लुंड मेरी छूट में घुसता है तो मज़ा बिलकुल नहीं आता.
राज--- हाहाहा कैसे आएगा मज़ा मेरी नंदू तेरी छूट भी तो बहुत खोल दी है मैंने.
नंदनी फिरसे राज को लुंड को मोहन में लेकर चूसने लगी. राज साइड से नंदनी के चुचु पकड़ कर दबाने लगा. लुंड की चुसाई से राज भी मस्त होने लगा था. नंदनी के जिस्म था भी बहुत सेक्सी.. राज ऐसे hi तो नहीं ज़बरदस्ती उसे छोड़ गया था.
लुंड अच्छे से गीली करके नंदनी ने भी अपने कपडे उतार दिए. राज के मोहन पर आ कर अपनी छूट रख दी.. राज ने नंदनी की छूट को दोनों हाथो की उंगलियों से खोल कर अपनी पूरी जीब उसमे घुसा दी..
राज नंदनी की छूट चाटने लगा.. नंदनी बेचैन हो उठी थी. कमरे से बहार काम hi आवाज़ें जाती थी. दरवाज़ा मोती लकड़ी का था. फिर भी नंदनी अपनी सिसकियाँ दबाये हुए थी.
छूट चटवा कर नंदनी राज के लुंड पर आई, लुंड को पकड़ कर अपनी छूट पर सेट किया, फिर निचे बैठने लगी. पहले हमेशा एक hi धक्के में अंदर घुसा दिए करता था. अब नंदनी 7 महीने पेट से थी तोह राज उसका ख्याल कर रहा था.
पूरा लुंड लेकर नंदनी ऊपर निचे होने लगी.
नंदनी-- अब्ब जा क कहीं मुझे सुकून मिला है हरामी.. साले जब तक मैं यहाँ रहा करों इतनी दिन मुझसे दूर न रहा कर. तेरे लुंड के बिना अब मुझसे रहा नहीं जाता.
राज---- मैं भी तो तेरे इस सेक्सी और बड़े बड़े मुम्मो वाले बदन से दूर नहीं रहना चाहता.. पर क्या करूँगा नंदू डार्लिंग छोड़ने वळून की एक लम्बी लिस्ट बानी हुई है. सब का ख्याल रखना पड़ता है. राज नंदनी के चुत्तड़ो को दोनों साइड से मसलते हुए बोलै. नंदनी के दोनों चुके ज़ोर ज़ोर से उछलने लगे थे. इतनी सर्दी में भी दोनों पसीने में नहाने लगे थे.
राज--- आअह्ह्ह दीदी आज अपनी छूट में क्या लगाया है अपने मेरा लुंड कितना फस फस कर जा रहा है.
नंदनी-- मेरे हरामी भाई को मेरी छूट पसंद आ जाए, इसलिए इसे मैंने टाइट किया है. वर्ण तू तो मेरी छूट को खुला जान कर आता hi नहीं.
राज-- आठ दीदी ये गलत बात है आपकी छूट का तो मैं दीवाना हों. दीदी सच माँ आज कुछ ज़यादा hi मज़ा आ रहा है.
नंदनी-- आज तो मैं तुझे सोने hi नहीं दूंगा. आज तो पूरी रत तुझसे छोडूंगी में. फिर पता नहीं कब तू मुझे मिले.
नंदनी पूरा पूरा लुंड निकल कर अपनी छूट में ले रही थी. राज नंदनी के बड़े बड़े चुके पकड़ कर निचोड़ने लगा.. निप्पल्स को नाख़ून से कुरेदने लगा. जल्द hi नंदनी की बास होने लगी. नंदनी ज़यादा स्पीड से नहीं उछाल सकती थी. कुछ देर बाद वो लेट गई. राज नंदनी की टांगों के बीच में आया और नंदनी की गीली छूट में लुंड घुसा कर छोड़ने लगा.
20 मिंट तक और ये खेल चला फिर राज नंदनी की छूट में झाड़ गया. नंदनी और राज दोनों हांपने लगे थे..
नंदनी ने अपना सर राज के सीने पर रख दिए. नंदनी राज के सीने को चूमने चाटने लगी. राज नंदनी नंगी पीठ सहलाने लगा.
फ़ो बार और राज ने नंदनी को छोड़ा. फिर दोनों सो गए.. सूबा नंदनी की आंख जल्दी खुल गई. अभी सब के उठने में देर थी. नंदनी को जी नहीं भरा था, रात की चुदाई से. वो फिरसे राज के लुंड को मोहन में लेकर चूसने लगी. फ़ौरन hi राज का लुंड खड़ा हो गया और राज भी उठ गया. नंदनी को देख कर राज ने नंदनी के सर को पकड़ा और अपने लुंड पर दबाने लगा.. नंदनी ने अपना मोहन खोल दिए. राज नंदनी के मोहन को छोड़ने लगा.
उसके बाद नंदनी खुद से घोड़ी बन गई. राज पीछे आ कर नंदनी की छूट चाटने लगा. नंदनी की छूट के बाद राज ने अपनी जीब नंदनी की गांड के खुले छेड़ में घुसा दी
नंदनी---- आईईईई मा राज क्या करता है.. वहां आज न कर न.
राज---- क्यों साली दीदी रात भर तो छूट में ले लिया आपने मेरा लुंड. अब गांड में भी जाने दो.
नंदनी-- राज गांड में फिर कभी कर लेना. अभी मेरी छूट को बड़ी ज़रूरत है तेरे लुंड की. नंदनी ने पीछे सर मोड़ कर राज को देखा.. पर राज ने अपनी मोहन नंदनी की गांड से नहीं हटाया.. राज ने अच्छी नंदनी की गांड को चाट चाट कर गीला किया.
फिर अपने खड़े मोठे लुंड के सुपड को नंदनी की छूट पर सेट कर दिए. छूट पर लुंड पा कर नंदनी के जिस्म में सिहरन दौड़ गई. नंदनी खुश हो गई.. राज ने धक्का मारा तो सारा लुंड नंदनी की छूट में उतर गया. नंदनी की कमर कर पकड़ कर राज नंदनी की ठुकाई करने लगा..
नंदनी झड़ी तो राज ने अपना लुंड निकल कर नंदनी के गांड के छेड़ पर सेट कर दिए. नंदनी हम्प रही रही. राज ने हल्का सा धक्का मारा तो नंदनी की सांस अटक गयी.. बहुत दिनों से उसने गांड में राज का लुंड नहीं लिया था.
नंदनी प्रेग्नेंट न होती तो राज उसक ख्याल किये बिना एक hi धक्के में सारा लुंड उसकी गांड में उतारर देता.. थोड़ा थोड़ा करके सारा लुंड नंदनी की गांड में घुसा कर राज नंदनी को छोड़ने लगा.
कुछ देर में नंदनी भी गांड मरवाने का मज़ा लेने लगी.. राज नंदनी पर झुक कर नंदनी के बड़े बड़े थान दोनों हाथों में पकड़ कर नंदनी को छोड़ने लगा.. जल्द hi नंदनी के दोनों थान फिरसे सख्त होने लगे..
राज नंदनी की गांड मारने लगा. 15 मिंट बाद राज नंदनी की गांड में झाड़ गया..
राज गिर कर हांपने लगा.. नंदनी भी फिरसे झाड़ गई थी. दोनों की साँसों की आवाज़ कमरे में गूंजने लगी. कुछ देर में दोनों ने कंडे पहने..
नंदनी--- राज दो महीने बाद में मैं तुम्हारे बच्चे को जनम देने वाली हों..
राज---- हाँ तो
नंदनी---- राज में चाहती हों तुम हमारे बच्चे का नाम रखो..
राज ---- मैं क्या नाम रखूंगा दीदी.. तुम खुद hi रख लो
नंदनी---- नहीं राज मेरा बड़ा मैं है तुम hi हमारे बच्चे का नाम रखो..
राज हस्ता हुआ.. नाम रखने से क्या होगा दीदी.. साडी उम्र तो आप इसे हरामी hi कहेंगी. नंदनी भी हसने लगी. राज की बात सच भी थी. नंदनी और सब राज को हरामी hi कहते थे. राज का बच्चा भी उसके जैसा hi होता.. ये नंदनी जानती थी.
नंदनी हस्ते हुए---- फिर भी राज तुम कोई नाम दो न मुझे.. नंदनी राज को किश करते हुए बोली..
राज ---- सोच के बताऊंगा.. अब चलता हों..
नंदनी-- ठीक है.. पर भूलना नहीं.
राज कमरे से निकल गया.. बहार उसे जानवरों वाले कमरे में चची दिखी जो जानवरों को चारा दाल रही थी. राज ने इधर उधर देखा कोई नहीं दिखा तो वो उस तरफ चला गया.. चची को पीछे से पकड़ कर साइड से चची के गाल को चूम लिया. चची एक बार तो हड़बड़ा hi गई थी. लेकिन फिर राज को देख कर उसने चैन की सांस ली..
चची-- तू उठ गया राज बीटा.
राज ने फिर अपनी चची के गाल को चूम लिया.. चची सीढ़ी हो गई. राज ने चची को सीधे से hi अपने गले से लगा लिया.. राज का लुंड सो रहा था. अभी कुछ देर पहले hi तो उसके लुंड से पानी निकला था.. चची भी काम गरम नहीं थी.
राज --- मैं तो उठा गया हों चची पर मेरा वो अभी तक सो रहा है.. राज की बात का मतलब समझ कर चची हसने लगी.
चची---- राज बीटा तो हर दम ऐसी hi बातें क्यों करता है.
राज---- क्या करो चची, जब से होश संभाला है. आपको माँ को देख कर मई ऐसा हो गया हों..
चची--- मुझे देख कर क्यों
राज--- क्यों चची अनजान बनती हाँ.. माँ के साथ लेट कर आप माँ के साथ कैसी बातें किया करती थी.. भूल गई क्या आप. बड़े मज़े मज़े से माँ को बताती थी आप चची.. चाचा ऐसे लुंड डालता है आपकी छूट में, आपकी गांड में..
चची राज के ऐसी बात कर शर्म से लाल होने लगी. पर राज को कोई शर्म नहीं थी.
चची---- गलती हो गई राज बीटा.. अब मुझे और अपनी माँ को बख्श दे.. कब तक तू ऐसे हमें इलज़ाम देता रहेगा.
राज ने चची के चुत्तड़ो को पकड़ कर अपने लुंड पर दबा लिया.. चची मचल उठी
राज----- इलज़ाम नहीं है ये चची.. अब तो आपने भी रात को मेरे साथ वडा कर लिया है.
चची को यद् आया कह रात बातों बातों में वो क्या बोल गई थी. चची को पसीना आने लगा.
चची--- नं.. नहीं राज बीटा.. वो तो मैंने ऐसे hi बोल दिए था..
राज--- न न न चची अब तो आप पीछे नहीं हैट सकती. अब तो आपको मुझे देनी होगी.. वर्ण.
चची बहुत घबरा गई थी.
चची--- वर्ण क्या?
राज--- सच कहता हों चची वर्ण मैं आपके साथ ज़बरदस्ती कर जाऊँगा. राज उसके साथ ज़बरदस्ती कर सकता है.. चची ये बात अच्छे से जानती थी. वो खुद को कोसने लगी.. क्यों उसने राज की पढाई के लिए ऐसा बोल दिए था.