Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 5 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

हेलो दोस्तों

बहोत दुःख के साथ कह रही हु

आज शायद मैं अपडेट नहीं दे पाउंगी क्यों की कुछ कोमेंट ने मुझे विचलित कर दिया है, शायद मुझे फिर से अपने लिखावट पर रिव्यू करना चाहिए

लिखना मेरा शौक है पेशा नहीं, और मैं भी यहाँ अपने आप को मनोरंजन देने के लिए हूँ पर कुछ लोग ऐसा कर रहे है की हमारे लिए असहनीय है. हम लिख के अपने आप को मनोरंजन देते है और दूसरो की कहानी भी पढ़ के प्लोट बनाते है अगली कहानी के लिए.

कृपया....प्लीज़ आप अपने आप पर काबू रखे और आपकी उत्तेजना किसी को दुःख पहुचा सकती है

सब से निवेदन है ..........प्लीज़
 
“सब सुंदरी की इतनी तारीफ़ करते है, कभी तुझे अपनी माँ को चोदने का मन नहीं करता…!!!”



“मेरा मन तो बस तेरी बेटी रेखा को दम भर के चोदने को करता है…”

“फिर खाली, चाट के छोड़ दिया! चोदा क्यों नहीं…चोद देता तो मैं मना नहीं करती बेटे, तेरे लंड से वह चुद सकती है!!!”

"साली, उसकी माँ को चोदु, शादी के पहले सील नहीं तुड़वाना चाहती है, मैं उसे प्यार करता हूं इस लिए छोड़ दिया। लेकिन अपना लंड तो उसकी चूत में आधा घुसा ही दिया है। अब जब ससुराल से वापस आएगी तो कुतिया को तेरे सामने भी चोदूंगा। चुदवायेगी ना अपनी बेटी को तेरे सामने!" कहते हुए परम ने जोर से धक्का दिया और मोटी झड़ गयी। झड़ते ही शेठानी से अपने दोनों हाथो और टांगो से परम को पकड़ लिया। परम चूत के अंदर धंस गया और लंड ने चूत को पानी से भर दिया। थोड़ी देर तक दोनों चिपक रहे फिर शेठानी ने परम को अपने शरीर पर से उठाया, तब उसकी चूत में से काफी चुतरस और विर्या का मिलाझुला रस बहार की तरफ आ गया तभी उसने पूछा,

“रेखा की टाइट चूत का मजा लेने के बाद मेरा भोसडा (चूत) कैसा लगा…!!!”

परम ने चूत को मसलते हुए कहा “दिन रात इस चूत में लंड डाल कर बैठा रहूंगा, साली बहुत मस्त माल है तेरे पास। साली…मुझे तुम दोनों की चूत का भोसड़ा बनाने में मजा आएगी।”

शेठानी झुककर परम के लंड को थोड़ी देर चूसा और फिर कहा कि वो सुंदरी को चुदते देखना चाहती है। परम ने शेठानी को कहा कि वो सुंदरी को शेठानी के सामने शेठ से चुदवाने के लिए तैयार करेगा। शेठानी ने कहा कि शेठ उसकी चूत तो चोद ही नहीं पाता, सुंदरी को क्या चोदेगा!

शेठानी को क्या मालूम कि वही समय शेठ सुंदरी को अपने ऑफिस में खूब मजा लेकर चोद रहा है। शेठानी लंड चुस्ती रही और अपने चुतरस और वीर्य का मिलाजूला रस को चाट कर साफ़ कर रही थी पर लंड फिर अकडने लगा तो शेठानी ने कहा;

“अब तू जा नहीं तो फिर से लंड मेरी भोस में भर लुंगी।” शेठानी नंगी ही कमरे में गई और वापस आकर परम को कुछ रुपये दिए और बोली बीच में मौका निकाल कर लंड चूसा जाना, मुझे तेरा पानी पिने में मजा आता है, और हां, कभी-कभी रेखा को भी अपना पानी पिला दिया कर। उसे भी तो मजा देता रह अपने पानी से उसका पेट भरते रहना, और बस इशारा कर देना की रखा के मुह को चोदने जा रहा है मुझे कोई आपत्ति नहीं है की उसका मुह तुम कितनी बार चोद रहे हो। मेरी तरफ से बेपरवाह रह। बस उसकी गांड और मुह में तेरा लंड पेलता रह।

“जी, ठीक है।“ परम ने सेठानी के मुंह में अपना लंड को हिलाया और बची हुई बुँदे भी लंड को दबाते हुए उसके मुंह में दाल दिया।

“चल मेरे लंड की रानी अब मैं जाता हूँ।“

परम के जाने के बाद शेठानी ने अंदर से दरवाजा बंद किया और नंगी अपनी बेटी के बगल में सो गई। रेखा ने एक आँख खोल कर देखा और मुस्कुराई अपनी माँ को नंगी देख कर और निचे गीली देख कर समज गई की परम का लोडा वहा सफ़र कर के गया है। वह मन ही मन खुश हुई की अब वह उसकी माँ के सामने परम का लोडा ले सकती है उसके सामने ही वह बिना डर और संकोच अपनी गांड मरवा सकती है।

परम बहार आकर टाइम देखा तो 3.30 बजे थे। सुंदरी को शेठ के साथ डेढ़ घंटा हो गया था। परम ने कल्पना किया कि शेठ सुंदरी को खुश नहीं कर पाया होगा और चूत में लंड घुसा ही झड़ेगा।



चलो अब वहा जाते है और सुंदरी और सेठजी की खबर भी लेते है।।।।।

अभी के लिए बस इतना लिख पाई हूँ .......बने रहिये अपनी राय देते रहिये ..........
 
शेठ सुंदरी को बिस्तर पर बैठा देख मस्त हो गया। वो बिस्तर पर सुंदरी के बगल में बैठ गया और उसे अपनी गोदी पर गिरा लिया।

“ओह, सुंदरी…” शेठ कुछ कह रहा था तो सुंदरी ने उसके मुंह पर उंगली रख कर कहा ” नाम से मत पुकारो, आपका मुनीम और मेरा सुहाग सुनेगा तो समझ जाएगा कि शेठ उसकी बीबी की चूत की खबर ले रहा है और पेल रहा है…!”

शेठ ने उसे बाहों में ले लिया और ज़ोर से चूमा मानो सालों से किसी औरत को छुआ ही न हो। यह सच था, उसने अपनी पत्नी को छह महीने से ज़्यादा समय से नहीं चोदा था और सुंदरी के बेटे ने कुछ ही दिनों में उसे दो बार चोदा। शेठ ने उसके कपड़े उतारने शुरू कर दिए। सुंदरी ने कोई विरोध नहीं किया और जल्द ही वह नंगी हो गई। शेठ ने उसे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया। वह उससे थोड़ा दूर हुआ और उसे ऊपर से नीचे तक देखा।

वह वास्तव में एक परी थी। अच्छे, छोटे पैर। बहुत ही सुडौल पिंडलियाँ और टांगें जो लगातार मोटी होती जा रही थीं और ऊपरी जांघें केले के तने की तरह मज़बूती से जमी हुई थीं। कहीं भी अतिरिक्त मांस नहीं। छोटा जघन क्षेत्र, उसकी पत्नी के विपरीत, जिसका आकार सुंदरी की चूत से दोगुना से भी ज़्यादा था। चूत सूजी हुई थी और पेट के स्तर पर उठी हुई थी। चूत के दो होंठ लगभग जुड़े हुए थे मानो ज़्यादा चुदी हुई न हो। भगनासा दिखाई दे रही थी और इसलिए चूत की पंखुड़ियाँ चूत की दरार से बाहर निकल रही थीं। भगनासा लगभग 1 इंच लंबी, दोनों गोलार्द्धों के बीच लगभग कोई अंतर नहीं था और दोनों उसकी छाती पर मजबूती से जमे हुए थे, मतलब ज्यादा दबाया हुआ नहीं लगता था। ये समान रूप से उभर रहे थे। निप्पल भी मोटे, लंबे और उभरे हुए थे। एरोला का व्यास लगभग 1 इंच से थोड़ा ज़्यादा और रंग गहरा काला था। उसके कंधे चौड़े लेकिन गोल थे और गर्दन चिकनी और लंबी थी। उसकी ऊपरी भुजाएँ उसकी कामुकता को और बढ़ाने के लिए तराशी हुई और मोटी थीं। उसका चेहरा गोल था, गालों पर गड्ढे थे और होंठ छोटे और अच्छे से सेट थे। उसने उसके होंठों की तुलना चूत के होंठों से की और उसने देखा कि चूत के होंठ उसके मुँह के होंठों से लगभग दोगुने आकार के थे।

"रानी पलट जाओ,मुझे तुम्हारी गांड देखने दो औरपना पीछे का खजाना दिखाओ की तुम्हारी गांड का छेद कैसा है।" शेठ फुसफुसाया और सुंदरी ने अपना पेट पलट दिया। उसकी नज़रें उसके दोनों कूल्हों पर टिक गईं जो गोल, बड़े और मज़बूत थे। बिल्कुल भी ढीले नहीं थे। उसने कुछ देर तक सुंदरी की खूबसूरती को निहारा और उसके सामने खड़ा हो गया। उसने अपना कुर्ता और फिर गंजी उतार दी। सुंदरी उसके 'तोंद' (फूले हुए पेट) को देखकर मुस्कुराई। उसे आश्चर्य हुआ कि वह चुदाई कैसे कर पाएगा। तभी उसने देखा कि शेठ धोती खोल रहा है। वह सिर्फ़ सूती सफ़ेद अंडरवियर में था। सुंदरी ने हाथ बढ़ाकर नाड़ा खींचा और अंडरवियर ज़मीन पर गिर गया। उसने जो देखा उससे वह हैरान रह गई। उसने जो सोचा था उसके विपरीत शेठ का लौड़ा उसके पति या उसके बेटे परम से भी बड़ा था,लेकिन अपने पति जैसा तो नहीं था, उसका सुपारा तो वाह। यह उसकी निचली कलाई जितना मोटा था। और यह पूरी तरह से तना हुआ, लोहे के खंभे जैसा सख्त था।

अब सुंदरी क्या सोच रही है वो कल .........
 
मोटा और कड़ा लंड देख कर सुंदरी के चूत और मुँह दोनों में पानी आ गया। उसने अपना हिस्सा थोड़ा आगे बढ़ाया और दोनों हाथो में लंड पकड़ कर सहलाने लगी। सुंदरी ने लंड को चमड़ी को कई बार आगे पीछे किया तो लंड का सुपाड़ा बाहर निकल आया। सुपाड़ा गीला हो चुका था और सुंदरी ने सुपाड़ा को चूसना शुरू किया। सुंदरी सुपाड़ा ऐसे चूस रही थी जैसे कोई छोटा बच्चा लॉलीपॉप चूसता है। सुंदरी ने 2 इंच से ज्यादा लंड मुँह के अंदर नहीं लिया और उसकी उपरी हिस्से को ही चूस रही थी। सेठ का लंड चूसने में इतना मजा आया उसे परम का लंड चूसने में नहीं आया था। उधर शेठ को सुंदरी के मुँह में लंड चुसाने में बहुत मज़ा आ रहा था और अगर उसका ज्यादा चूसा गया तो छूट जाएगा और सुंदरी का लंड चूसती रहेगी तो वो झड़ जाएगा लेकिन शेठ सुंदरी के चूत में पानी गिराना चाहता था। उसने लंड मुँह से खींचा, सुंदरी समझ गई कि शेठ उसे चोदना चाहता है। वो भी पलट कर सीधी हो गई और पैरों को ऊपर की ओर हवा में फैला दिया। शेठ ने सुंदरी के कमर के नीचे एक तकिया रखा। सुंदरी की चूत और ऊपर उठ गयी। शेठ ने सुंदरी की कमर को जकड़ा और सुपाड़ा को चूत के गेट पर रख कर धक्का मारा तो एक धक्के में ही पूरा लंड चूत के अंदर चला गया। आखि़र जाता क्यों नहीं। शेठ पुराना चुद्दाकर था और उसके शरीर का वजन भी 100 किलो से ज्यादा था और कहा सुंदरी मुश्किल से 60 किलो की थी। सुंदरी के मुँह से “अह्ह्ह्ह।।” निकला ओह्ह भेन्च्जोद और उसने कहा: यह मैत्री और फनलव की अनुवादित रचना है



“शेठ आपका लंड बहुत मोटा है, थोड़ा धीरे-धीरे चोदो और धीरे धक्का मारो, और आराम से चोदो मेरी चूत को।”

शेठ उसे प्यार से चोद रहा था और सुंदरी भी मजे लेकर अपनी चूत मरवा रही थी।

चोदते चोदते शेठ उसकी जरूर जवान चुचियो को भी मसल देता था।

"रानी आज 16-17 साल के इंतजार के बाद तुम्हारी चूत का दर्शन हुआ है। बहुत मजा है, जितना सोचा था तुम्हारी चूत अभी भी उससे ज्यादा टाइट है।" कहते हुए शेठ ने जोर का धक्का मारा।

"ओउच्ह्ह…भेन्चोद, एक दिन में ही चूत का भरता बना दोगे क्या? दोबारा नहीं चोदना है क्या!!!"

“अब तो रानी, बार-बार चोदूंगा…पहले क्यों नहीं मिली…भोसड़ीकी, मादरचोद!”

"आप पहले बुलाते तो मैं आ जाती। कई बार मैं आपके सामने से निकली लेकिन आपने कभी हाथ भी नहीं पकड़ा!"

इस तरह से चुदाई करते रहे और शेठ ने सुंदरी के चूत में अपना पानी से छोड़ दिया और उसके ऊपर चिपक कर लेट गया। सुंदरी को उम्मीद से ज्यादा मजा आया था।

ठंडे होकर दोनों चुम्मा चाटी करते-करते बात करने लगे। बच्चों की बात हुई तो सुंदरी ने कहा कि उसका बेटा परम शेठ की बेटी से बहुत प्यार करता है। रेखा चली जाएगी तो सोच-सोच कर उदास रहता है। शेठ ने कहा कि रेखा भी परम को चाहती है और उसने दोनों को एक दूसरे का बदन सहलाते देखा है। शेठ ने कहा कि अगर रेखा परम से चुदवाएगी तो वो कुछ नहीं बोलेगा। शेठ ने सुंदरी को प्यार करते हुए अनुरोध किया कि वो अपनी छोटी बहू को चोदना चाहता है और इस में सुंदरी उसकी मदद करे।

“सुंदरी तुम जो मांगेगी दूंगा, अगर तुम मेरी बहु को मेरे लंड के निचे ला सको तो।”



सुंदरी ने जवाब दिया कि “पहले उसको आने दो, फिर देखु बहू को कितना गरम कर सकती हूं, उसकी चूत में कितनी भड़क है। इस काम में परम ज्यादा मदद कर सकता है, सेठजी।“

बने रहिये ..............
 
सुंदरी ने पूछा कि शेठ सुंदरी को फिर नहीं चोदेगा तो शेठ ने जवाब दिया कि अब जब एक बार उसका लंड सुंदरी की चूत का मजा लेकर मस्त हो गया तो आगे भी जिंदगी भर चोदता रहेगा, हो सकेगा तो एक बच्चा भी दे सकता है। शेठ सुंदरी को चूमने लगा और चूमते-चूमते उसकी चूत को कुत्ते की तरह चाटने लगा। अपना लम्बा जीभ निकाल कर चूत को चूसता रहा, चूत को चूसा और सुंदरी मस्त होकर चुतड उछालती रही। तब शेठ ने सुंदरी को कुतिया बना कर चूत में फचाक से लंड पेल दिया। गांड में उंगली करके चुदाई करने लगा, तभी परम धीरे से ताला खोल कर अंदर आया और अपनी माँ सुंदरी के चूत में शेठ के मोटे लंबे लंड को आता-जाता देख कर मजा लेता रहा। परम ने देखा कि उसकी मां खूब चुत्तर हिला-हिला कर लंड का मजा ले रही है। बस वह देखता रहा की शेठ का लंड उसकी माँ की चूत से “हाइड एंड सिक” खेल रहा है, कभी बाहर आके माँ की चूत में अद्रश्य होता है।



“माँ, मज़ा आ रहा है?” परम ने पुछा।

“तू कब आया?” वह ख़ास कुछ चौकी नहीं बल्कि उसकी हाजरी को सहज ले लिया और अपनी चुची मसलते हुए कहा “शेठजी बहुत बढ़िया चुदाई करते हैं, तुम्हारे बाप से बहुत अच्छा।”

शेठ ने कहा, "परम, तू बहुत अच्छा है, तू मदद नहीं करता तो मैं इस मस्त माल को नहीं चोद सकता। अब जिंदगी भर इसे चोदूंगा, तेरा मन करे तो मेरी बेटी को चोद, मेरी बहू को चोद और चाहे तो शेठानी को भी चोद। मेरे सामने भी चोदेगा तो कोई बात नहीं।" धक्के की स्पीड बढ़ते-बढ़ते शेठ ने फिर कहा, "मुझे एक बार अपनी छोटी बहू को चोदना है।"

सुंदरी को चोदते और छोटी बहू की जवानी को याद कद शेठ फिर झड़ गया। परम ने देखा कि उसकी माँ के चूत से सफ़ेद-सफ़ेद माल निकल रहा है। इस बिच सुदंरी भी दो बार झड चुकी थी, और अभी भी सेठजी की ऊँगली उसकी गांड मार रही थी। उसे उस उंगली से अपनी गांड मरवाती हुई देख कर दोनों माँ-बेटा के मुह पर प्रसन्नता छाई हुई थी।



सुंदरी और शेठ दोनों ठंडा हो गए।

बस बने रहिये इस कहानी में
 
“मुझे पेशाब करना है।” सुंदरी ने कहा, "बहुत जोर से लगी है, अब इंतज़ार नहीं कर सकती।" आख़िर दो बार शेठ ने उसकी चूत को बड़ा गढ़ा माल से भर दिया था। शेठ नंगा ही इधर उधर देखने लगा। कोने में एक घड़ा (मिट्टी का बर्तन) था जो पिने का पानी के लिए था। परम वो बर्तन लेकर आया, बर्तन आधा खाली था।



“इसी में मुत लो” शेठ ने कहा और सुंदरी ने चूत को बर्तन के मुँह पर पोजीशन किया और मुतने लगी। खूब जोर से दबाव था और उसी चूत से मूत और चुतरस और सेठजी के वीर्य सब कुछ दोनों छेद से बहार आ रहे थे, मूतने की आवाज शायद बाहर तक जा रही थी। दोनो शेठ और परम सुंदरी को मूतते हुए देखते रहे। ज्योंही सुंदरी खड़ी हुई शेठ ने घुटने पर बैठकर फिर कुत्ते की तरह सुंदरी की चूत को चाटने लगा। सुंदरी की चूत से अभी भी पेशाब की बुंदे गिर रही थी और शेठ खूब प्रेम से उन पेशाब की बुंदों और अपने चुदाई के दोनों रस को टपकते हुए, को चाट रहा था।

यह सब देख कर परम भी गर्म हो गया और अपना लंड बाहर निकाल लिया। परम ने सोचा कि सुंदरी उसके लंड को सहलायेगी लेकिन एक हाथ से सुंदरी को पकड़ कर शेठ ने दुसरे हाथ से परम का लंड पकड़ लिया और मुठियाने लगा। सेठजी परम के लंड की चमड़ी को आगे पीछे कर के उसके सुपारे को बाहर की और ले आने की कोशिश करने लगा। सुंदरी ने शेठ के मुँह को अपनी चूत से पकड़ कर रखा था और दूसरे हाथ से अपनी एक चुची परम के मुँह में घुसेड़ दी। परम चूचियो को मसलते हुए चूसने लगा और निचे शेठ सुंदरी की चूत को चाटना छोड़ कर परम के मस्त लंड को मुँह में लेकर चूस लिया। उसके लंड के टोपे पर अपनी जीभ फिरा के उसका प्रिकम चाट रहा था। लगभग 20-25 बार लंड को मुँह में लेकर बाहर निकालने के बाद शेठ ने परम के लंड को सुंदरी की चूत से रगड़ा।

“सुदरी, परम का लोडा बहोत मस्त है। बहोत स्वादिस्ट भी है मुझे यह उसका लंड बहोत पसंद आया। उसका सुपारा बहोत ही मस्त है, मुझे लगता है की यह लंड से बहोत ही मस्त और गाढ़ा और टेस्टी माल देता होगा।
मैत्री और फनलव की अनुवादित रचना है



“शेठजी नहीं, मेरा बेटा है… उसका लंड चूत से मत सटाओ।।” सुंदरी ने धीरे से कहा और एक पैर को उठा कर बिस्तर पर रख दिया।

"मैं थोड़े ही किसी से कहूँगा। उसे भी तो सबसे मस्त माल के चूत को चोद कर मजा लेने दो!!"

ऐसा कह के उसने फिर से परम का लंड अपने मुह में ले लिया और थोडा आगे पीछे हो के शेठ ने परम के लंड से अपने मुह को चोदने लगा, थोड़ी देर के बाद उसने पूछा “परम तेरी माँ को चोदेगा! या फिर तेरा माल मुझे पिलाएगा?”

“आपको जो ठीक लगे।“परम ने अपना लंड को थोडा बहार की और खिंचा तो शेठ समज गया की वह भी अपनी माँ को चोदना चाहता है।



और शेठ परम के लंड को सुंदरी के चूत में घुसाने लगा।

मेरे साथ बने रहीये आगे कहानी में ...............
 
सुंदरी शेठ के सामने अपने बेटे का लंड चूत में नहीं लेना चाहती थी। आधा लंड अंदर घुस चुका था, सुंदरी ने चूत को दबाया और चुतड को पीछे किया, लंड बाहर निकल आया। उसने थोड़ा गुस्सा होकर शेठ से कहा कि वो ऐसा करेगा तो फिर कभी शेठ से नहीं चुदवायेगी। अगर शेठ को बहुत बुरा लगता तो परम के लंड को चूत के ऊपर के हिस्सों में रगड़ देता लेकिन अंदर न जाने दे, या फिर खुद ही परम के लंड को अपने मुह से छोड़ के खाली कर दे।

शेठ परम के टाइट लंड को पकड़ कर चूत की दरार पर रगड़ने लगा और साथ ही साथ लंड और चूत को एक साथ चूसने लगा। सुंदरी की चुचियो को मसलते हुए परम अपना लंड हिला रहा था तो सुंदरी भी पाओ उठा कर चुतर हिला रही थी। परम ने अपना एक पैर उठाकर अपनी माँ के पैरों पर रखा और लंड को चूत पर दबाया और लंड करीब आधा अंदर चला गया। सुंदरी ने बिना कुछ कहे हाथ से लंड को बाहर निकाल लिया और ऊपर रगड़ने लगी। उसका जब मन होता था तो लंड अंदर लेने का तो हाथ हटा देती थी और लंड गप से अंदर चला जाता था और फिर 15-20 सेकंड के बाद लंड बाहर खींच लेती थी। इस तरह मजा लेते-लेते परम झड़ने लगा तो शेठ ने सारा माल हाथों पर कलेक्ट किया और उसे सुंदरी के चूत पर रगड़ दिया। और वही से उस चूत को चाटने लगा, और परम का वीर्य और सुंदरी का चुतरस साथ में चाट-चाट के एकदम साफ़ कर दिया जैसे की बिना चुदी चूत।

“परम तेरा माल बहोत बढ़िया है, मुझे बहोत पसंद आया।मुझे तेरा माल खिलाते रहना बेटे।“

“जी शेठजी”, कह के उसने फिर से शेठजी के मुह में अपना ढीला लंड दाल दिया और शेठजी ने बिना कोई विरोध अपने मुह में समा लिया।

तीनो थक चुके थे।

सुंदरी के साथ संतोषजनक चुदाई के बाद शेठ बाहर आया। परम ने दरवाज़ा बंद कर लिया और अपनी माँ को गोद में लेकर पूछा कि क्या उसे मोटे शेठ के साथ चुदाई में मज़ा आया। उसने अपने बेटे के लंड को सहलाया और कहा कि चुदाई उसकी उम्मीद से कहीं ज़्यादा अच्छी थी और उसे शेठ के साथ दोबारा चुदवाने का मज़ा लेने में कोई आपत्ति नहीं होगी। वे कुछ देर तक सहलाते रहे। कपड़े पहने और शेठ के घर गए।

******


बाकि अपडेट कल समय मिलने पर.............
 
चलिए अब आगे चलते है कहानी में .............
 
अब आगे

यहाँ जब शेठ बाहर आया, तो उसके मुनीम (सुंदरी के पति) ने पूछा,

“शेठजी माल कैसा था, मज़ा आया। कैसा था उसका माल! अब आपने पसंद किया है और उसे बुलाया था तो मैं समजता हु की बेस्ट ही होगा उसका खजाना!”

“अरे मुनीम जी पूछो मत, इतना मज़ा पहले कभी किसी को चोदने में नहीं आया था। क्या सही तरीके के छेदों है उसके! उसके छेद देख के कोई भी लंड खड़ा हो सकता है, वाह मजा आ गई आज तो उसे चोदने में, लंड को बेहद शांति मिली है मुनीमजी।” वह मुनीम की ओर देखकर मुस्कुराया जैसे उसे बता रहा हो कि उसने अभी-अभी उसकी पत्नी को चोदा है, उसने आगे कहा, “लेकिन तुम्हें क्या।। तुम तो रोज़ गाँव की सबसे मस्त माल को चोदते हो! अगर सुंदरी मेरी बीबी होती तो मैं रात दिन उसके चूत के अंदर लौड़ा डाल कर घुसा रहता!!”

मुनीम को आश्चर्य हुआ। शेठ पहले भी कईबार सुंदरी की खूबसूरती की तारीफ कर चुके हैं लेकिन शालीन तरीके से, आज शेठ बहुत गंदी-गंदी बातें कर रहा था। मुनीम को अच्छा लगा कि शेठ भी उसकी पत्नी को पसंद करता है। उसने सोचा अगर सेठजी उसकी पत्नी को पसंद करता है और उसके पीछे पागल है तो उसका फायदा लिया जा सकता है। सेठजी को सुदरी पसंद है और वो गाव की श्रेष्ठ महिला मानते है पर मेरे नजरो में महक से ज्यादा कोई अच्छा माल नहीं है। हो सकता है सुदरी को सेठजी के साथ भिड़ा देने से मेरे लिए महक की चूत तक का रास्ता साफ़ हो जाए। साली मेरी बेटी है पर क्या माल बनी बैठी है मेरा लंड को हमेशा परेशान करती रहती है। महक अब तो तुम्हे मेरे लंड के नीची आना पड़ेगा, मैं तेरी माँ को सेठजी के लंड तक पहुचा दूंगा तो तेरी चूत मुझे मिलनी चाहिए। और मुझे कोई आपत्ति भी नहीं, मजे सुदरी में कोई रस नहीं है। हो सकता है इस से मुझे सेठानीजी की छुट भी मिल जाए और रेखा की भी।

उसने जवाब दिया,

"हम लोग तो आपके गुलाम हैं, सुंदरी भी आपकी गुलाम हैं। आपने हमारे लिए बहुत कुछ किया है। आप जो भी कहेंगे हम करने को तैयार हैं, आप भी तो हमारा ध्यान रखेंगे।" मुनीम ने सोचा कि अगर शेठ उसकी पत्नी को चोदना चाहता है तो उसे कोई आपत्ति नहीं होगी, आखिरकार शेठ ने वास्तव में उनके परिवार की बहुत मदद की है। उसने आगे कहा,

“आपको जब भी मन हो, सुंदरी को अपने घर में रोक लीजिए, वो आपके पैर दबा देगी और सब सेवा करेगी, लेकिन अब तो वो बूढ़ी हो गई है!!” उसने अपनी सेफ साइड भी राखी ताकि सेठजी को कोई संदेह ना हो।

शेठ ने उसे टोका, '' क्या बात करते हो! आज भी सुंदरी से अच्छी माल अपने गांव या आस-पास के गांव में नहीं है...उसको एक बार चोदने के लिए लोग हजारो देंगे....फिर वह धीरे से बोला, ''मेरा भी मन करता है सुंदरी को चोदने को!!!”

“अरे शेठजी, क्या बोल रहे हो आप? आपको पता है किस के बारे में ऐसा बोल रहे हो!उसने एकतरफा नाटक करते हुए कहा।

“अरे मुनिमजी आप तो बेकार ही बुरा मान गए ऐसा कुछ नहीं यह मैं तो सुदरी की सुन्दरता का वजन दे रहा था।“

“ठीक है सेठजी मैं मानता हु की सुदरी जैसी कोई नहीं है पर वो मेरी पत्नी है। कोई मेरे सामने ऐसी बात करे तो मुझे बुरा तो लगेगा ही! समजो अगर मैंने आपकी सेठानिजी के बारे में ऐसा बोला होता तो......!”

मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता दोस्त, मैं तो कहूंगा की अगर चांस मिले तो मेरी बीवी को चोद सकते हो!” सेठजी ने भी पत्ता खोला।

कहानी जारी है .........बने रहिये ......
 
“मुझे माफ़ कर दीजिये सेठजी अगर आप इतना बड़ा सोच सकते हो तो मुझे भी सोचना चाहिए था।“

“मुनीमजी सोचो यह खुला वातावरण है यहाँ चूत सिर्फ चुद्वाती है और लंड उसे चोदता है बेकार के सम्बन्ध में ना पड़ो।“

“हां यह भी सही कहा आपने” मुनीम ने नाटक को बांध करते हुए कहा।

“अगर आपको सुदरी इतनी पसंद है तो.......सुंदरी भी आपका माल है, जब मन करे चोदिये लेकिन किसी और को पता नहीं लगना चाहिए।” मुनीम ने जवाब दिया।

शेठ को ख़ुशी हुई कि अब उसे अपने ऑफिस रूम में सुंदरी को चोदने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। घर में ही चोदेगा।

शेठ ने कुछ पासे मुनीम के हाथ में रखा और बोला “मुनीम क्या यह सब बताने वाली बात है? तेरी बीवी को मैं चोदुंगा और सब को बताउंगा भी? कैसी बात करते हो। तुम भी तो मेरी बीवी को चोद सकते हो और ऊपर से सुंदरी का सौदा के तौर पर तुम्हे मैं कुछ ना कुछ देके खुश करता रहूँगा।“

मुनीम की आँखे फटी थी क्यों की उसके हाथ में पैसे थे उसने पैसो को अपने खीसे में रखते हुए कहा “शेठजी इसकी कोइ जरुरत नहीं थी।“

“अरे रख ले मुनीम और अब भी सुंदरी की चूत में मेरा लंड जाएगा तुजे भी तो खुश करता रहूँगा।“

“जी शेठ जी आपका बहोत बहोत आभार, बस आप सुंदरी की चूत के मजे लिएते रहिये और मुझे देते रहिये।”

“हां यह तो एक प्रकार से व्यवहार है कह के मुनीम की गांड पर हाथ रख के कहा इसका भी ख्याल रखूँगा। यहाँ भी तो एक छेद है!”

मुनीम मुस्कुराते हुए बोला “जी, शेठजी और वह छेद भी तो आपका ही है।“ और उसने शेठ के हाथ को अपनी गांड पर थोडा सटा के रख दिया।

तब शेठ ने कहा “मुझे तुम जैसो पसंद है जो लंड लेते भी है और देते भी है”, और फिर उसके कान में कहा मैं भी ऐसा ही हु लेता भी हु और देता भी हु।”

मुनीम बस मुस्कुराता रहा और शेठ ने कपडे के ऊपर से ही मुनीम की गांड के छेद को छेड़ा।

“जब मुझे कोई चूत नहीं मिलेगी तब मुनीमजी मुझे इसकी जरुरत पड़ेगी, तैयार हो ना!”

“अब तो सुंदरी तो है ही शेठजी आपके लंड को शांत रखेगी फिर भी अगर जरुरत पड़ेगी तो मैं भी हु हरदम तैयार। बस आप हमारा ख़याल रखे हमारे छेद आपके लंड का ख्याल रखेंगे।“

शेठजी ने मुनीम के कान में जा कर कहा “मुझे वीर्य पीना पसंद है। और पिलाना भी। क्या तुम कर सकोगे?“

बस आपकी कृपा से सब होता रहेगा शेठजी मैं आपका माल गांड और मुह सब में लूँगा और आप जब चाहो मेरे लंड को अपने मुह में खाली करा सकते हो, आपकी मिल्कत है बस यही समजो।“
मैत्री और फनलव की अनुवादित रचना है

“बहोत खूब मुनीमजी, मुझे तुम पसंद आये एक तरफ तुमने तुम्हारी बीवी की चूत देके मुज पर एहसान किया और ऊपर से तुम्हारा इस खजाने का भी मालिक घोषित कर दिया। कह के सेठजी ने मुनीम को अपनी ओर खिंचा और ऑफिस की तरफ ले गए।

बने रहिये कहानी के साथ ....

जानेंगे आगे क्या हुआ मेरे साथ।....
 
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