Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 4 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

Update 04

रात के खाने के बाद सुधा महेक के साथ उसके बिस्तर पर बैठी और परम उसके बिस्तर पर लेटा। महेक ने दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया और सीधे मुद्दे पर आ गयी।




जब परम रूम में घुसा उस से पहले दोनों सहेलिया आपस में बात करती हुई....

महक: “आजा सुधा यहाँ आके बैठ।“

सुधा उसके पास जाके पलंग पर बैठी और बोलती है, “हां बोल क्या बात है?”

महक; “वैसे तो तुजे सब पता है अब बोलने में क्या है जो है अब एक्शन ही होगा ना!” उसने सुधा को अपनी ओर खींचते हुए और उसके बोबले को थोडा पकड़ते हुए बोली।

सुधा: “अरे यार ये क्या कर रही हो! छोडो यह सब तुम जानती तो हो की मेरा बाप और नौकरानी की चुदाई देख-देख के मई कितनी चुदासी महसूस कर रही हु और तू है की खजाने पर हाथ रख के उस आग को भडका रही हो।

महक: “हां, तो क्या बुरा है इस आग को बढ़ने दे ना यहाँ कौनसा तेरा बाप आके तुजे रोकनेवाला है!”

वैसे महक ने सुबह से ही तय किया था की आज अपने भाई को एक नया ताज़ा माल देगी और उसके लिए उसे सुधा से बात कर के थोड़ी गरम कर के उसकी चूत को गीली कर के भाई के सामने पेश करना होगा। और उसके लिए ही वह आज उसके साथ बाते करके सुधा को अपने भाई के लिए तैयार करने में लगी हुई थी।
आप मैत्री और नीता की अनुवादित रचना पढ़ रहे है



सुधा:”हा बात तो सही है लेकिन क्या करू कुछ समज नहीं आता! एक तरफ लगता है की कोई लंड ले लू और दूसरी तरफ डर भी लगता है की कही कुछ ऐसा वैसा ना हो जाए जिस से मेरी और माँ-बाप की इज्जत पर लांछन ना लग जाए।

महक:”अब इतना सोचेगी तो कुछ होनेवाला नहीं है, चल छोड़ अब ऐसी बाते नहीं करते जिस से तुम्हारी इज्जत जाने का डर बना रहे।

सुधा को लगा की बात कुछ बिगड़ गई, तो उसने तुरंत जवाब दिया; “अरे ऐसा भी नहीं है की हम बात नहीं कर सकते, वैसे भी मैंने कहा ना मुझे चुदासी का अनुभव होता है पर डर भी लगता है, वैसे एक बात कहू कोई भरोसेमंद लड़का भी तो मिलना चाहिए।“

महक को लगा ली अब रेलगाड़ी पटरी पे आई है;”देख ऐसा है और तू तैयार है तो मई आने भाई से बात करके तेरा शील तोड़ने का प्रबंध कर सकती हु। लेकिन तेरी रजामंदी होनी जरुरी है आखिर मैं भी तो फिमेल हु और मुझे तेरी फिकर भी है। महक ने दाना डाला।

सुधा: ”तू तो मेरी सबसे अच्छी सहेली है अब तुज से कुछ छुपा नहीं है , पर क्या परम मेरे बारे में ऐसा सोचता होगा!”

महक: “अरे, सोचता क्या होगा! वह तो कब से तेरी आस लगाए बैठा हुआ है तुम्हे क्या पता मेरी डार्लिंग!”

धीरे-धीरे महक ने सुधा के पेड़ो को चौड़ा कर दिया और उसकी परी पर अपना हाथ रखते हुए बोली: “देख अगर तू तेरा शील मेरे भाई के लंड को गिफ्ट करेगी तो मैं भी कुछ सोचूंगी ना तेरे बाप के बारे में!”

“ओह्ह तो तू भी मेरे बाप के साथ......!” सुध ने महक का हाथ थोडा दबाते हुए कहा।

अब हमारी चूत है की लंड के हाथ मार खाने को तो फिर सोच्नेवाल्ली क्या बात है हम दोनों मिल के कुछ करेंगे. लेकिन अभी नहीं, अभी तो सिर्फ तू मेरे भाई के लंड को ठंडा कर और खुद भी चुदाई का मजा ले, बस सिर्फ तू चाहे तो!”

थोड़ी सोचने के बाद सुधा ने हामी भर दी लेकिन शर्त राखी के वह अकेली नहीं रहेगी और महक भी साथ रहे गी और कुछ साथ भी देगी। इसतरह दोनों की सम्मति हो गई और दोनों ने मुस्कुराते हुए अपने-अपने हाथ एकदुसरे के बोबले पे रख दिया। और महक ने बता भी दीया की वह और परम एकदूसरे के साथ सोते है और एक दुसरे के साथ खेल भी चुके है बस चुदाई नहीं हुई।



तभी परम ने रूम में एंट्री मारी....
 
"भैया तुम भी मेरी चूत चाट-चाट कर चूत चोद ने के लिए ब्याकुल हो और सुधा भी रेनू को अपने बाप से रोज चुदवाते देख-देख कर लंड की दीवानी बन गई है। इसकी चूत भी लंड खाने के लिए तरस रही है। आ जाओ, साली को चोद-चोद कर पूरा मजा लो और दो, कुतिया की अभी तक सील भी नहीं टूटी है। एक दम कुंवारी है…समजे ना एकदम पेटी पेक माल है सभी जगह से! बस अपने चूत का टला खुलने की राह देख रही है। तुमने तो मेरी चूत को मसल-मसल कर और चाट-चाट कर फूला दिया है लेकिन इसकी चूत बिल्कुल कोरी है…। अपने इस मुसल चाबी से उसकी चूत का ताला खोलो और उसकी चूत के अन्दर अपने लोहे का सलिया डालो।”

महेक ने परम को अपने बिस्तर पर खींच लिया और उसको फटा-फट नंगा कर दिया। नंगा होते ही परम सुधा पर झपट पड़ा और उसका फ्रॉक और पैंटी उतार कर उसे भी नंगा कर दिया।

सुधा और महेक एक ही उम्र की थीं और शारीरिक बनावट भी लगभग एक जैसी थी। सुधा महेक की तरह गोरी तो नहीं थी लेकिन त्वचा पर चमक जरुर थी। उसके स्तन 34" आकार के थे और कूल्हे भी उसी आकार के थे। उसकी कमर पतली थी और जघन क्षेत्र बालों से भरा हुआ था। परम ने उसे बिस्तर पर सपाट लेटा दिया। उसने उसके प्रत्येक पैर को पकड़ लिया और जितना संभव हो उतना अलग कर दिया। पैरो के फैलते ही सुधा की चूत अपने आप बहार आके अपना मुह दिखाई देने लगी। उसकी जांघें पूरी तरह से विकसित हो गई हैं और सुंदरी की तरह मोटी नहीं हैं। परम ने सुधा की चूत पर अपने हाथ फेरे और चूत के होंठ और भगनासा को रगड़ा। महेक सुधा के पास बैठी थी और वह उसके बोब्लो को सहला रही थी। वह सुधा की चूत में लंड को घूमते और घुसते हुए देखने के लिए उत्सुक थी।

"भैया, माल (सुधा) पूरी गर्म है। चूत को चोदो और चूसो, सब से पहले साली को चुदाई का मजा दो, लंड चूत में पेल कर साली को एक मस्त औरत बना दो, चूत फाड़ डालो। मुझे चोदने के लिए तो रोज तैयार रहते हो और आज जब नंगी और अनछुई चूत सामने पड़ी है तो लंड छिपा रहा हो।” उसने अपने भाई का लंड हाथ में पकड़ा और अपने सहेली की चूत के सामने रख दिया। आप मैत्री और नीता की अनुवादित रचना पढ़ रहे है

परम कुंवारी चूत के छेद में प्रवेश करने के लिए तैयार ही था। सुबह उसने अपनी मां की पूरी तरह से चुदाई की थी और दोपहर के बाद परम ने रेखा की गांड मारी थी और करीब करीब चूत को चोद ही डाला था। यही सोचते-सोचते उसका जोश आया वह जोश उसके लंड पे चला गया और जोर से धक्का मारा।

“ओह माँ...ऊऊऊ ईईइ....म...आ...आआ....” सुधा चिल्लायी…”बाप रे बहुत दर्द करता है.... लंड बाहर निकालो…”

परम ने कस कर सुधा का कमर को जकड़ा और फिर जोर से धक्का मारा…”

सुधा को पसीना आने लगा। इस समय उसका मुंह और आंखें चौड़ी हो गईं थी, महेक ने सुधा के बोबे को बेरहमी से दबा दिया।। “चुदासी चिल्ला क्यों रही है।। अभी तक तो लौड़ा खाने के लिए मर रही थी और अब जब लौड़ा चूत में घुस रहा है तो बाप को याद कर रही है… तेरा बाप तो तुझे चोदेगा ही…” उसने परम की तरफ देखा और कहा भैया रुकना मत, साली की चूत फाड़ डालो…उसकी चूत को अब भोसड़ा बना दो।”

सुधा सचमुच दर्द में थी। उसे महसूस हुआ कि उसकी चूत से तरल पदार्थ की एक धारा उसकी जांघों तक बह रही है। उसने अपना हाथ वहाँ रखा और उसे देखा।

“बाप रे....मेरी चूत फाड़ डाला.... खून निकल रहा है… साला हरामी इतना ही चोदने का जोश है तो मेरे चूत से लंड निकाल कर अपनी बहन के चूत में डाल दो।। बहुत प्यार से चुदवाएगी… रोज तो चटवाती है आज लंड को चूत के अन्दर भी ले लेगी… मा....र डा....ला सा....ला… जा कर अपनी माँ को चोद ह....रा....मी... बाप रे बाप बहुत दर्द कर रहा है....नहीं चुदना है मुझे।
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अब तक पूरा लंड सुधा की चूत में जा चुका था और अब परम हल्के-हल्के धक्के लगा रहा था। अब सिल की परदी तो वह चूत में थी ही नहीं, और हलके धक्को से अब सुधा का दर्द भी कम होने लगा और जल्द ही उसने परम को अपनी बाहों में जकड़ लिया। "आआह्ह्ह.... राजा.... आह्ह्ह.... अच्छा लग रहा है!"

महेक ने सुधा के गालों पर चुटकी लेते हुए कहा, "साली, अभी तक तो बाप-बाप चिल्ला रही थी और अब पूरा लंड अंदर गपक गई है। मरवाले बापचोदी, चूत को ढीला कर ले, अपने बाप से चुदवाने के लिए। तेरा सिल मेरे भाई के लंड से टूटना था तो तूट गया।"

सुधा ने अपने कूल्हे उचकाए: ”मादरचोद तू क्यों बक-बक कर रही है…तुझे चुदाई का इतना दुख है तो चल अपने बाप के मोटे लंड से चुदवा दूंगी…। बहुत मजा आएगा हरामजादी…। लेगी ना मेरे बाप का लंड तेरी इस खुबसूरत चूत में!”


इतनी देर में महेक भी चुदासी होकर नंगी हो गई थी। परम सुधा की चूत को चोद रहा था और महेक के चूत को प्यार से देख कर सोच रहा था कि अब जल्दी से अपनी बहन की चूत भी चोदेगा…

बने रहिये
 


दो-दो चूत को देखते-देखते परम खूब जोर-जोर से सुधा के चूत में धक्का लगाने लगा। हर धक्के के साथ सुधा अपनी कमर उछालती थी और आह…ओह्ह…कह कर मजा ले रही थी। इधर महेक चूत के अंदर बाहर जाते अपने भैया के लंड को पकड़ कर सहला रही थीं और बीच-बीच में लंड के साथ सुधा के चूत में लंड के साथ अपनी उंगली घुसेड़ देती थीं। चुदाई करते करते परम और सुधा दोनो झड़ गए और महेक भी चुदाई देख कर पूरी गीली हो गयी, उसकी चूतसे उसके चुतरस उसकी झांग तक रिस ने लगा था। लंड ढीला होते ही चूत के बाहर निकल गया और महेक झट से परम के लंड को दोनों हाथों में लेकर रगड़ने लगी।

"इससे अभी फिर से गरम करूंगी"

“क्यों, अपनी चूत में लोगी क्या!” सुधा ने परम को जकड़े हुए कहा।

“नहीं, हरामजादी तेरी गांड मारवाऊंगी!” महेक ने जवाब दिया।

“अरे जब चूत दीया तो गांड भी मरवा लुंगी...उसमे कौन सी बड़ी बात है।”

परम उठ कर बारी-बारी से अपनी बहन और सुधा दोनो की चूत और निपल से खेलने लगा। दोनों की चूत को मसल रहा था और दोनों लड़कियाँ एक दूसरे के स्तनों मसल-मसल कर गरम हो रही थीं।

“भैया, मेरी भी चूत ठंडी कर दो।” महेक ने कहा।

परम ने सुधा को पकड़ कर अपनी बहन के टैंगो के बीच बैठा दिया और उसे महेक का चूत चाटने को कहा। सुधा ने पहले तो मना किया फिर परम ने जबरदस्त उसका माथा पकड़ कर बहन के चूत से सटा दिया। सुधा अपने बाप को नौकरानी रेनू का चूत चाटते कई बार देख चुकी थी। उसने होले-होले महेक की चूत पर जीभ चलाना शुरू किया। महेक के टांगो को पूरी तरह फेला कर क्लिट को चूसने लगी और साथ ही चूत में फिंगरिंग भी कर रही थी। सुधा को महेक का चूत चटाते देख कर परम का लंड फिर टन गया। वह सुधा के पीछे आया और लंड से उसके चुताद को रगड़ने लगा। धीरे धीरे परम ने सुधा के चूतड को फैलाया और लंड को सुधा के चूत में पेल दिया।

“आहहह…!फिर चोदोगे?” सुधा ने कहा।

“साली तू मेरी चूत चाटती रह,बहुत मजा आ रहा है।” कहते हुए महेक ने सुधा के सिर को अपनी चूत पर दबा दिया। परम का लंड सुधा के चूत में फचा-फच अंदर बाहर हो रहा था। परम खूब जोर-जोर से धक्का मार रहा और हर धक्के के साथ सुधा महेक के चूत को और जोर से चूसने लगती थी। महेक अपनी गोल-गोल बोबले मसलती हुई अपनी चूत चुसाई का मजा ले रही थी। तीनो मजा ले रहे थे। परम ने धक्का मारते-मारते सुधा के गांड में उंगली घुसा दी, सुधा ने अपनी गांड को ऊपर खीचा, लेकिन महेक ने सुधा के मुंह को अपनी चूत पर दबाए रखा। परम का लंड सुधा के चूत को ढीला कर रहा था और उसकी उंगली गांड के टाइट छेद में नीचे आ-जा रहा थी। उंगली निकाल कर परम ने चूत के रस में डुबकी लगाई और फिर गांड में घुसा दिया। इस तरह चूतरस में उंगली को गांड में पेलता रहा। गांड गीला होने लगा और दो उंगली आराम से गांड में घुस गई।
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"महेक तेरी सहेली की गांड भी लंड खाने को तैयार हो गई है। साली की गांड भी मार दूं? " परम ने पूछा।



लेकिन महेक ने कहा कि आज खाली चूत का बाजा बजाएंगे अगली बार जब मिलेगी तो गांड मारना।

आप बताये की यह अपडेट कैसा लगा................
 
अब परम झड़ने बाला था, उसने जोर-जोर से और खूब जल्दी-जल्दी चोदना शुरू किया। सुधा को बहुत मजा आ रहा था, वह महेक के शरीर पर पूरा फैल गई। उसकी चूत ठीक महेक के चूत के उपर आ चुकी थी। परम को अपनी बहन का चूत का छेद दिख रहा था। परम को और जोश आया और उछल-उछल कर चुदाई करने लगा। सुधा स्खलित हो गई और महेक से चिपक कर ठंडी हो गई। परम भी झड़ने लगा और उसका 'कम' (वीर्य) सुधा की चूत से निकल कर महेक की चूत पर गिरने लगा। परम ने लंड बाहर खींचा और महेक के चूत पर रगड़ने लगा। थोड़ी देर रगड़ने के बाद उसने अपना लंड अपनी बहन महेक के मुँह में घुसा दिया। महेक चूसने लगी और साथ ही साथ सुधा भी लंड को चाटने लगी। दोनों लडकिया परम के पलंद को साफ़ करने पर तुली हुई थी, और चाट-चाट के लंड को एकदम साफ़ कर दिया जैसे कुछ हुआ ही न हो।



तीनो ठंडे हो गए, तीनो नंगे ही बहार निकले और एक साथ पेशाब कीया। परम ने अपने पेशाब का निशाना महेक और सुधा की चूत पर रखा। दोनो लड़कियों की चूत और जंघे परम के पेशाब से भींग गई। फिर तीनो कमरे में आकर एक दूसरे से चिपक कर सो गए।



********
 
सुबह सुंदरी उठी और देखा कि बच्चों का कमरा खुला है। अन्दर आई तो जो देखा और वह अवाक रह गई। दोनो लड़किया बिल्कुल नंगी परम के शरीर पर जांघें रख कर सोयी है। सुंदरी नजरीक गई, बेड पर खून के स्पॉट दिखे, वह समझ गई कि रात को परम ने सुधा की सील तोड़ी है। 'क्या पता अपनी बहन की भी चुदाई करता हो। माँ को तो चोद ही चुका है।'



सुंदरी ने थोड़ी देर तक दोनों की चूत को सहलाया और यह तय किया कि रात को अपनी बेटी के सामने परम से चुदवायेगी और बेटी को अपनी चूतरस का स्वाद चखायेगी। उसने परम के लंड की ओर देखा और उस लंड पर उसे प्रेम आया पर वह कुछ नहीं कर सकी। फिर से उसने अपनी बेटी की चूत पर हाथ रखा और देखा की बेटी की चूत गीली होक सुख गई थी और सुधा की चूत पर परम का वीर्य अभी भी सुख के जैम गया था, और काफी खून भी बह निकला था। उसने एक ऊँगली से सुधा की चूतद्वार पे ले गई और थोडा रब कर के अपनी ऊँगली पर उस चूत की गंदकी को लिया और सीधा अपने मुह में रख दिया। “स्वादिष्ट हो तुम सुधा!” वह थोडा मुस्कुराई और सुधा की गांड की और देखा उसने सोचा अभी गांड परम ने छोड़ दी है क्यों ??? और वह धीरे से कमरे से बहार निकल गई।

अगली सुबह परम बेहद खुश था। रात में सुधा की वर्जिन चूत का मजा लिया, उसकी सिल को तहस नहस किया और खून से भर दिया। सुंदरी के पूछने पर परम ने चुदाई का पूरा किस्सा सुनाया। बाद में परम और महेक सुधा को लेकर उसके घर पहुंच गए। सुधा की चूत रात की चुदाई से अभी तक दर्द हो रहा था, उसे चलने में थोडा असहज महसूस हो रहा था पर रात के आराम की वजह ज्यादा भी नहीं। लेकिन यह तय था की सुधा की चाल में थोडा बदलाव जरुर था।

परम सुधा को घर छोड़ कर कोलेज गया। वहा गेट पर हाय विनोद मिल गया। परम ने खुश होकर विनोद से कहा कि उसने कल सुंदरी को पूरा नंगा कर दिया और उसकी मस्त मस्त निपल भी दबायी। उसने बताया कि सुंदरी, विनोद से चुदवाने को तैयार हो गई है। यह सुनकर विनोद बहुत खुश हुआ। परम ने कहा कि कल दोपहर में वो पूरा रुपया लेकर उसके घर आ जाए ठीक 2 बजे। विनोद हां सुनकर इतना खुश हुआ कि उसने परम का हाथ पकड़ कहा चल आज तुझे एक साथ दो-दो चूत का मजा दिलावाता हूं। विनोद, परम को लेकर सीधा अपने घर पर आया। वहा विनोद की बहन (उससे बड़ी) बहार के बरामदे पर कुछ लोगो के साथ बैठ कर कागजात देख रही थी और लोगो से रुपया वसूल कर रही थी। परम उसे जानता था इसलिए उसने उसे उसकी खबर पूछी।
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उसने उसे थपथपाया और डांटा कि “क्यों आजकल तू यहाँ उसके घर नहीं आ रहा है?



विनोद ने उससे कहा कि “जल्दी काम ख़त्म करो और दरवाज़ा बंद करके अंदर आ जाओ”।

अपने विचार जरुर दीजिये
 
फिर विनोद परम को घर के अंदर और शयनकक्ष में ले गया। उसने अपनी माँ को बुलाया जो लगभग 41-42 की थी, थोड़ी मांसल और इतनी पतली फिगर वाली नहीं थी। जैसे ही वह कमरे में दाखिल हुई, विनोद ने उसकी साड़ी उतार दी और कहा,



“परम को खुश करो…जो चाहता है सब करने दो, और उसके लंड को खाली कर के छोड़ना।” विनोद ने अपनी माँ की चुची दबाते हुए कहा जल्दी से नंगी हो जा और परम के लंड को चूस। विनोद की माँ ने बिना कुछ कहे अपना पेटीकोट और ब्लाउज़ उतारा और बिस्तर पर लेट गईं और पैरों को फैला कर चुतर उठाया। विनोद की मां ने झांट साफ किया था, एक दम क्लीन चूत थी। उसकी चुची सुंदरी के चुची से बड़ी और मोटी थी लेकिन पूरी पेट तक आकर लटक गई थी। परम ने अपना कपड़ा उतारा और विनोद की माँ की चूत को चूमने लगा।

"परम, चूत चाटने के लिए नहीं होती, लौड़ा नीचे डाल कर चोदो!" विनोद चिल्लाया। लेकिन परम को चूत का स्वाद पता था। उसने अपने दोस्त की माँ को चूसा और चोदा। उस औरत के मुँह में स्खलित होने के बाद विनोद ने अपनी माँ से गरम दूध लाने को कहा। वो अंदर गई और तभी विनोद की बहन बिन्नी आ गई। विनोद ने उसे बाँहों में भर लिया और उसके कपड़े उतार दिए।

"जाओ साली परम से मरवाओ!" विनोद ने उसे परम पर धकेल दिया। परमने उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसे भी वैसे ही संतुष्ट किया जैसे उसने उसकी माँ को किया था। बिन्नी और उसकी माँ, दोनों के लिए यह पहली बार था जब किसी ने उनकी चूत चूसी थी। दोनों को यह चुदाई से ज़्यादा पसंद था। हालाँकि विनोद पिछले एक साल से उसे और उसकी माँ को चोद रहा था, उसने न तो कभी उनकी चूत को मुँह में लिया था, ना ही कलकत्ता के होटलों में किसी और को, न ही उसके पति को, जो हर महीने कुछ दिन उससे मिलने आता है। उन्होंने परम से कहा कि वह ज़्यादा बार आकर उनको चोदे। जी भर के चोदे, वह दोनों चूते अब परम के लंड के लिए तैयार रहेगी। परम ने भी कहा जब भी समय मिलेगा तुम दोनों की चूत की मरमत करने आ जाऊंगा। और दोनों औरतो ने उसे मुस्कुराते हुए विदा किया।



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अपनी कोमेंट देना ना भूलियेगा प्लीज़............
 
चले अब कहानी में आगे चले!!!!!!!!!!!!!!!!
 
अब आगे।

जब परम घर पहुँचा तो दोपहर के करीब एक बज रहे थे। उसने सुंदरी को तैयार होने को कहा। सुंदरी अपने कमरे में गई और नयी साडी ली आयर उसका मेचिंग ब्लाउस और पेटीकोट निकाला और पहने लगी। तभी परम अन्दर आया उसने सुंदरी के कपड़ो को ऊपर उठाया और देखा की माँ की चूत साफ़ है की नहीं।

क्या देखता है बेटे! अब जाने दे अभी मुझे नहीं चुदवाना है, वो क्या है की सेठजी को पता चल जाएगा की मेरी चूत में किसी का वीर्य पड़ा है तो बात बनते बनते बिगड़ जायेगी। हो सकता है की सेठजी निकाल दे। अभी शुरुआत है बेटे बाद में सेठजी मेरे अलावा कही जानेवाला नहीं है। बस एक बात मेरे माल का स्वाद चख ले।“
फनलव और मैत्री की अनुवादित कहानी पढ़ रहे है



परम ने कहा नहीं माँ मुझे अभ तुम्हे नहीं चोदना है पर मैंने तुम्हारी चूत इसलिए देखि की तुमने अपना माल को साफ़ किया है या नहीं”

सुंदरी ने तुरंत अपना घाघरा ऊपर उठाया और अपनी चूत चौड़ी कर दिखाया, परम ने यह सुनिश्चित किया कि उसकी चूत पर बाल न हों। वे पैडल रिक्शा से शेठ की दुकान पर पहुँचे। वे भगवान से प्रार्थना कर रहे थे कि सुंदरी का पति उन्हें न देख ले। हालाँकि गर्मी की दोपहर थी, लेकिन इलाका बहुत भीड़भाड़ वाला था। हर कोई अपने काम में व्यस्त था। परम सुंदरी को कमरे के अंदर ले गया (याद रखें शेठ ने पीछे के दरवाजे की चाबी परम को दी थी)। उसने देखा कि कमरा पिछली शाम से काफ़ी बेहतर है। बिस्तर पर दो तकियों के साथ नई चादर बिछी थी। कुछ खाने-पीने की चीज़ें और कोल्ड ड्रिंक की बोतल एक आइस बॉक्स में रखी थी। उसने सुंदरी को चूमा और कहा कि उसका पति बस कुछ ही फीट की दूरी पर बैठा है और पूछा कि क्या वह चिंतित है! वह मुस्कुराई और कहा कि परम के पिता भी उसे शेठ के साथ चुदते हुए देखे तो भी वह बंद नहीं करेगी, लेकिन आगे चुद्वाती रहेगी आखिर माल (पैसो) का सवाल था, सुंदरी ने परम को जाने को कहा और शेठजी को जल्दी से अन्दर भेजने को कहा। लेकिन परम ने कहा कि उसे खुद नहीं पता। परम ने बहार से कमरा लोक किया और दूकान में वापिस आया। वह सीधा मुनीम (उसके पिता) के पास गया और उनको कहा की शेठजी को बोलो की उनका “माल” आ गया है। मुनीम ने जानना चाहा की माल क्या है तब परम ने जवाब दिया की उसे खुद को नहीं पता की माल क्या है बस माल है। आप जाके शेठजी को बताओ। उसके पिता अंदर गया और तुरंत शेठ के साथ बाहर आ गया। शेठ ने परम को देखा। तभी परम ने कहा शेठजी आपका माल आ गया है अब आप जानो और आपका माल।

शेठने जेब से कुछ नोट निकाले और उसे अपने घर जाकर शेठानी से कह देने को कहा कि शेठ आज जल्दी घर आ जाएगा। परम थोड़ी देर वही बैठा और सेठजी को इशारा में कहा की वह मुनीम का ध्यान रखे। सेठजी ने भी इशारों में कहा की उसे पता है की उसे क्या करना है और मुनीम का भी क्या करना है। परम ने मुनीम की तरफ देखा तो मुनीम उसे प्रश्नार्थ नजरो से कभी परम के सामने तो कभी सेठजी के सामने देख रहा था। शेठ ने कहा कि वह अंदर आराम करेगा और उसे कोई परेशान न करे। मुनीम को अब पता था कि कोई "माल" शेठजी का लंड अपनी चूत में लेने के लिए आई है और वह अंदर है। बेचारे को पता नहीं था कि वह 'माल' कोई और नहीं बल्कि उसकी पत्नी सुंदरी है। लेकिन उसे कुछ शक भी हुआ।

आपकी राय की प्रतीक्षा में...........
 
शेठजी ने उस कमरे का दरवाजा खोला और अंदर से बंद कर लिया। सुंदरी को बिस्तर पर बैठा देखकर वह बहुत प्रसन्न हुए।



परम ने पैसे जेब में रखे और शेठजी के घर की ओर भागा। उसने पिछले दिन की तरह फिर से शेठजी की बेटी से भोग लगाने की सोची। वह शेठजी के घर में दाखिल हुआ और उसने देखा कि रेखा शेठानी और अन्य चार महिलाओं के साथ बैठी थी। वे बंडलों में से साड़ियाँ और अन्य कपड़े चुन रहे थे। परम को देखते ही रेखा के गांड में लपालप होने लगी और चूत गीली हो गई। बोब्लो में तनाव आ गया, रेखा का मन किया कि वही सबके सामने परम को अपना चूत चाटने को बोले।

इधर शेठानी की चूत भी चुदने के लिए फडफडाने लगी। शेठानी की चूत यह सोच कर ही अपना थोडा सा चूतरस को छोड़ दिया और लंड के आगमन के लिए अपने पैर थोड़े खोल दिए। लेकिन उन महिलाओं के सामने कुछ नहीं हो सकता था। परम भी सबके सामने रेखा या शेठानी को नहीं चोद सकता था। उसने शेठानी से पूछा “मालकिन आज कौन सा काम साफ कर दूं?”

शेठानी इशारा समझ गई और बोली, “बेटे आज इलाज वाला काम साफ कर दो। थोड़ी देर में मैं भी आती हूं…” फिर शेठानी ने रेखा की देख कर कहा, बेटी तू जाकर परम की मदद कर दे।”

“नहीं माँ, मुझे नींद आ रही है।” रेखा ने कहा और उठाकर नीचे चली गई। बहार बैठी औरतों को पता ही नहीं चला कि कौन किस काम के लिए गया। जब तक वो औरतें कुछ सोचती थी तब तक रेखा पूरी नंगी होकर बिस्तर पर पसर गई थी और परम उसकी चूत और गांड चाटने लगा था। बाहर औरतें साड़िया देखने और सिलेक्ट करने में ब्यस्त थे और रूम अंदर परम रेखा की गांड को कल जैसा ढीला कर रहा था। रेखा ने आज कल जैसा कोई नाटक नहीं किया। जब परम अन्दर आया उसने अपने आप ही अपने पैरो को फैला दिया और अपनी चूत को उजागर कर के परम को निमंत्रण दिया, उसकी चूत को चाट-चाट के ठंडा करे, और थोड़ी देर बाद उसने अपनी गांड पर एक ऊँगली रख के एक इशारा किया की उसकी गांड तेरे लंड से मार खाने के लिए तैयार है। परम भी इंतज़ार नहीं कर सकता था और उसका मुह तुरंत ही रेखा की चूत पे जा के चिपक गया और एक ऊँगली रेखा की गांड में चली गई। रेखा ने अपनी गांड को थोडा ढीला किया और गांड के होल में ऊँगली की प्रवेश को आसानी दे दी। आज रेखा ने जैमकार और खुश होकर अपनी गांड परम के लोडे को दे दिया और जैम कर अपनी गांड की मरामत करवा ली। उसकी गांड में परम का वीर्य से लबालब हो गई। रेखा गांड मरवा कर और चूत में कल दिन जैसा लंड रगड़वा कर बिल्कुल ठंडी हो गई थी और नंगे ही सोने की कोशिश करने लगी और सो भी गई।



बहार, औरतें साड़ी देख कर जाने की तैयारी में थी। परम कपडे पहन कर बाहर आया तो शेठानी ने उसे सबके लिए कोल्ड ड्रिंक बनाने को कहा। चारो औरतें ठंडा पी कर बाहर चली गईं और उनके जाते ही शेठानी ने अंदर से दरवाजा बंद कर परम को दबोच लिया।

आपकी राय की प्रतीक्षा रहेगी........
 
अब आगे........

“तूने रेखा को चोद लिया क्या?” शेठानी ने पूछा।


परम को सेठानी के सवाल की कहा पड़ी थी। परम ने सीधा सेठानी के ऊपर हमला कर दिया,परम ने शेठानी को पूरा नंगा कर दिया और उसके मांसल शरीर को सहलाते हुए कहा “नहीं रानी, तेरी बेटी की सिल नहीं तोड़ी है खाली चूत चाटी है और अपना लंड चुसाया है, और तेरी बेटी ने बड़े प्यार से मेरा लंड चूसा है और मेरा वीर्य को निगल गई और सो गई है, आ जा अब तुझे भी लंड चुसाता हूं।”

“अच्छा ठीक है लेकिन रेखा ने अच्छे से तेरे इस लौड़े को चूसा ना! ठीक से लंड का माल निकाला ना!”

“अभी सिख रही है तेरी बेटी, आदत हो जायेगी फिर वह भी तुम्हारे तरह मुझे अच्छे से चूसेगी और अपनी गांड भी फड़वाएगी तुम चिंता ना करो मेरे लंड की रानी। बस तुम अपने छेदों को जी भर के मेरे लंड को चोदने दो। तुम दोनों माँ-बेटी को मेरे लंड की आदत पड़ जाने दो। रानी, सही कह रहा हु न!”

“मुझे बस रेखा की चिंता थी बेटे, लेकिन अब तुम एक भरोसेमंद चोदु हो तो मुझे कोई तकलीफ नहीं आराम से उसके मुह को चोद और उसकी गांड की भी केर करता रह। फिर जब शादी के बाद आती है तो तेरा इस लंड से उसको गर्भवती भी कर देना और क्या चाहिए तुम्हे और मुझे भी! लेकिन इस रेखा के चक्कर में मेरी इस भोस को मत भूलना बेटे, आते जाते उसमे भी पानी डालते रहना। खुश हो के आशीर्वाद देगी बेचारी मेरी चूत।“

परम: “अरे, रानी फिकर क्यों करती हो,तुम चाहो तो अभी मेरे इस लंड से बच्चा ले सकती हो।“

अरे नहीं बेटे, मैं तो इस लिए कह रही थी की सब मर्दों को जवान और कमसिन माल में रस होता है, उसकी जवानी को तोड़ने में मजा होता है तो मैं समजी की तुम मुझे रेखा की मखमली चूत के सामने मुझे भूल जाओगे, इसलिए मैंने कहा बाकी मुझे मेरी बेटी को तुमसे चुदवाने में कोई रंज नहीं है, रेखा को जितना चोदेगा उतना तुम दोनों को मजा है और मुझे मेरी चूत में तेरा पानी ना सुख जाए बस।“

शेठानी गद्दे पर बैठ गई और परम के लंड को प्यार से चूसने लगी। थोड़ा देर चूसने के बाद परम से उसकी चूत चाटने को कहा। परम 69 पोजीशन में होकर चूत चूसने लगा। शेठानी की चूत सुंदरी की चूत का साइज से दोगुना हो गया। डबल रोटी जैसा फूला हुआ, लंबी फांक, करीब एक इंच लंबा क्लिट और फुद्दी / पंखुड़ियां बाहर निकले हुए। परम हर पार्ट्स को खूब मजे ले लेकर, जैसे कि चिकन की टांग चबा रहा हो, चूस रहा था। शेठानी भी लंड को कैंडी के जैसा प्यार से चाट रही थी। परम ने दोनों हाथो से मोटी मोटी जांघों को नीचे की तरफ खींच कर चूत को ऊपर उठा दिया था और उसकी गांड भी खुल गई थी। तभी शेठानी ने लंड मुँह से निकाला और कहा, “बेटा जल्दी चोदो नहीं तो कोई आ जाएगा तो मजा ख़राब हो जाएगा।”

परम निचे उतर कर उसकी एक टांग को अपने कंधे पर रख कर फचा-फच, फचा-फच चुदाई करने लगा। परम खूब दम लगा कर चोद रहा था।

“रानी, गांड मरवाओगी?”


"आज नहीं। शादी ख़त्म होने दो फिर दिनभर तुम्हारे लौड़े को चूत और गांड के अन्दर ही रखूंगी। अभी फटा-फट चोद के चूत को ठंडा कर दो।ज्यादा जोर से मारो बेटे, मेरी चूत कब से तेरे इस डंडे से मार खाने को तड़प रही है।" परम प्यार से मोटी-मोटी निपल दबा और शेठानी के होठों को चूम-चूम कर अपना लंड पाओ-रोटी जैसी चूत में पेलता रहा। शेठानी भी चुत्तर उछाल उछाल मजा ले रही थी और अपनी किस्मत को सराह रही थी की एक 45-46 साल की चूत को 20 साल का लौंडा प्यार से चोद रहा था। जैम के उसकी चूत की सर्विस कर रहा था। मैत्री और फनलव की अनुवादित कहानी पढ़ रहे है

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