Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 7 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

एपिसोड 2



महक ने लंड को दबाते हुए कहा "अरे वही, रजनी काकी की बेटी, सुधा मेरी क्लास मेट है और मेरी अच्छी दोस्त। उसका बाप अपनी नौकरानी को रोज चोदता है और सुधा सब कुच्छ देखती है। सुधा की माँ भी सुबह काम पर चली जाती है। सुधा पूरा वर्णन करके चुदाई की बात बाद में बताती है। उसकी नौकरानी रेनू हमारी ही उम्र है, लेकिन पिछले एक साल से चुदवा रही है। जब पहली बार रेनू चुदवा रही थी तो सुधा ने देखा था और बाद में देखा कि रेनू के चूत से खूब खून निकला है।

महेक ने भाई के लंड को अपनी जांघो से रगड़ा और कहा “चूत मे उँगुली डाल कर मज़ा लो।।’

परम ने चूत मे उँगुली पेल दी और पूछा “ सुधा के बाप को नही मालूम की उसकी बेटी सब कुछ देखती है?”

“ अरे भैया, उसका बाप तो जान बुझकर सुधा को दिखा-दिखा कर रेणु की चुदाई करता है।’

“ तब तो उसने अपनी बेटी को भी चोद डाला होगा।’

“हो सकता है, लेकिन सुधा कहती है अभी तक उसके बाप ने उसे चोदा नही है ना ही कभी चोदने की बात की है। लेकिन सुधा डरती है की जल्द ही उसका बाप उसे चोदेगा।’

अब परम चूत मे दो उंगली डाल कर मज़ा ले रहा था। “बहन तुम्हारी चूत लंड लेने के लिए तैयार है।”

“भैया बस थोड़ा इंतज़ार करो। धीरे धीरे प्यार से मज़ा दूँगी, घर का माल है, जल्दी क्या है?”उसने भाई को चूमा और कहा .."वैसे भी तुमको मजा देने के लिए पूनम और रेखा है ही...तुम उनको चोदते क्यों नहीं हो...?"

उसने भाई को चूमा और बोली:“अब मुझे पकड़ कर सो जाओ।“ महेक परम की ओर पीठ करके सोने की कोशिश करने लगी।

परमने अपनी टाँग बहन के कमर पर रखी और एक स्तन को जकड़ कर सोने की कोशिश करने लगा। महेक ने चुत्तर को आगे पिछे किया और लंड उसकी गांड मे फँस गया। और उसकी गांड का छेद पहले से ही उसके भाई के लंड सुपारे से बात करने के लिए तैयार था। उसने अपनी गांड के छेद को थोड़ा ढीला किया और गांड को अपने भाई के लंड से बाते करने के लिए छोड़ दिया।


आप मैत्री और फनलव के द्वारा भाषांतरित की गई कहानी पढ़ रहे है।

बीच रात मे परम ने लाइट जला दी और आँख फाड़ कर अपनी बहन की नंगी जवानी का दीदार करने लगा। महेक शांत होकर सो रही थी। उसकी गठी हुई चुचि हौले-हौले उपर नीचे हो रही थी। चूत के उपर हल्के-हल्के घुँगराले बाल थे, लेकिन चूत साफ दिख रही थी। उसने हल्के से चूत की फाँक को फैलाया तो उसे गुलाबी माल दिखाई दिया। थोड़ी देर तक देखने के बाद उसने चूत को चूमा और उसकी चूतरस को थोडा चाटा और लाइट ऑन रखकर सोने लगा और कब सो गया मालूम नही।

********
 
सुबह दरवाजे पर मा की आवाज़ सुनकर दोनो की नींद खुली। फटाफट दोनो ने कपड़े पहने। महेक भाई को चूमकर बाहर निकल गयी और परम आँख बंद कर लेटा रहा। माँ अंदर आई और उसने भी परम को चूमा और बाहर आने को कहा।

परम बहुत खुश था। ना विनोद सुंदरी के बारे मे गंदी बात करता, ना ही परम माँ की मस्त धइले दबा पाता, ना ही अपनी प्यारी बहन की नंगी जवानी से खेल पाता। उसने सोचा की विनोद को थॅंक्स कहे और उससे चुदाई के बारे मे जाने। परम यही सोचता जा रहा था की उसकी बगल मे एक कार आकर रुकी और किसी लड़की ने उसे पुकारा।


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उसे यकीन नही हुआ। शेठ की बेटी रेखा उसे बुला रही थी। परम के नज़दीक पहुँचते ही रेखा ने दरवाजा खोलकर उसे अपनी बगल मे बैठा लिया।

रेखा के बगल मे शेठ जी बैठे थे। परम ने उन्हे विश किया। कार चल दी। रेखा उससे बात करने लगी और परम को पता नही चला कब उसने अपना एक हाथ रेखा के जांघो पर रख दिया था।

कार चल रही थी, बात चल रही थी और परम का हाथ रेखा के जांघो पर उपर बढ़ रहा था। परम को तब होश आया जब उसके हाथ को गर्म महसूस हुआ। परम की आँख रेखा से टकराई तो उसने देखा की रेखा मुस्कुरा रही है और परम के हाथ को आँचल से ढक रखा है।

कल की घटना के बाद परम की हिम्मत बहुत बढ़ गयी थी। वो रेखा की जांघो को सहलाने लगा और सहलाते-सहलाते दोनो जाँघो के बीच ठीक रेखा के चूत के उपर हाथ रखकर दबाया। रेखा ने आँख बंद कर ली और होठों को काटा। परम को लगा की रेखा को मज़ा आ रहा है तो वह कपड़े के उपर से ही चूत को ज़ोर ज़ोर से रगड़ने लगा। दोनो मज़ा ले ही रहे थे की कार रुकी। परम का कोलेज आ गया था। मन मार कर परम उतरा तो रेखा ने उसकी तरफ नही देखा, शायद शरम से।

लेकिन शेठ जी कार से उतर गये। उन्होने परम को किनारे बुलाया और उसका हाथ अपने हाथ मे लेकर कहा,

“बेटा, अब तुम मेरी मदद कर सकते हो!”

“क्या मदद, शेठजी।”

“मै सुंदरी को चोदना चाहता हूँ, अगर जल्दी नही चोद पाया तो मै पागल हो जाऊंगा।”

“माँ तो आपके घर आती-जाती है, उससे बोलते क्यो नही। मै क्या करू?”

“बेटा कुछ भी करो, जितना बोलेगी दूँगा।। 10,20,30,50 हज़ार दूँगा, ज्वेलरी दूँगा । बस तुम कुछ करो और हम दोनो की मुलाकात करा दो प्लीज़।’

इतना कहकर शेठ जी ने परम का हाथ छोड़ा और कार मे बैठ गये।

कार स्टार्ट होने पर रेखा परम की तरफ देखकर मुस्कुराई। परम कोलेज की तरफ बढ़ा तो उसने देखा की शेठजी ने उसकी हाथ मे 100 के दस नोट रख दिए थे।

“माँ को चुदवाने की पेशगी।’

उसने रुपये पॉकेट मे रख लिए। उसके हाथ मे पहली बार इतना रुपया आया था।

कोलेज मे परम खुलकर विनोद के साथ अपनी माँ के बारे मे बात करने लगा। उसके पूछने पर विनोद ने बताया की चुदाई कैसे की जाती है।




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पहले औरत को नंगा करके उसके अंग–अंग को खूब चूमना चाहिए और मसलना चाहिए और जब औरत खुद गरम हो कर चोदने को बोले तब, चूत मे लंड पेल कर खूब दबा-दबा कर चुदाई करनी चाहिए। उसने कहा की कुछ भी हो सुंदरी को जल्द ही अपना लंड का स्वाद चखाएगा और पलटा कर उसकी मस्त उठी-उठी गांड मारेगा और शहर ले ज़ाकर अपने दोस्तो से भी चुदवाएगा।

उसने परम से कहा की एक चुदाई का दस हज़ार देगा।

परम हसने लगा और बोला, "अरे भोसडिके, उसने शेठजी का 30 हज़ार लौटा दिया और तुम दस हज़ार मे चोदोगे? और वो भी गांड के साथ? मुझे लगता है की 50 हज़ार मे शायद मान जाए।"

विनोद ने यह भी बताया की पिछले एक साल से अपनी माँ और शादीशुदा बड़ी बहन को चोद रहा है। उसके अलावा जब कोलकता जाता है तो रंडी को चोद कर आता है।

परम ने उदास होकर कहा की “उसने अभी तक कोई नंगी औरत भी नही देखी है और सुंदरी तो हाथ भी छुने नही देती है।“

“अरे जब सोती है तो धीरे धीरे उसके बदन को नंगा करो और अपना कड़क लंड दिखाओ। उससे खूब गंदी गंदी बाते करो, साली खुद ही तेरा लंड अपनी रसीली चूत मे लेगी।”

विनोद ने परम को थपथपाया और कहा जल्दी ही मै तुम्हे एक साथ दो-दो चूत के दर्शन कराउंगा लेकिन तुम सुंदरी को चुदवाने के लिए तैयार करो। मेरे लंड को सुदरी की चूत की प्यास है। मेरा लंड सुंदरी की चूत का प्यासा है। मुझे तुम्हारी माँ के सारे छेद चाहिए। और मेरा लंड तुम्हारी माँ की चूत में अपने अंडकोष खाली करने को बेताब है।“




घर वापस आते हुए परम ने कल से लेकर आज तक की बात सोची। उसे सबसे ज़्यादा मज़ा रेखा की चूत को कपड़े के उपर से दबाने मे आया था। लेकिन परम सबसे पहले आपनी माँ को ही चोदना चाहता था। महेक को तो जब चाहे तब चोद सकता है।

उसने अपने भगवान से प्रार्थना की कि रेखा के चूत का दर्शन करवा दे। भगवान ने उसकी सुन ली।

घर वापस आया तो देखा की महेक भी आ चुकी है। परम ने कपड़े बदले और तब उसकी माँ सामने आई। उसने सिर्फ़ पेटिकोट और उपर ब्लाउज पहन रखा था। ब्लाउज के उपर से आधे स्तन फुदक के दिख रही थी।

“बेटे, जल्दी से नाश्ता करके कपड़े बदल लो। मुझे शेठानी ने बुलाया है। नाश्ता ख़तम होने के बाद महेक बाथरूम गयी और परम ने पिछे से माँ को जकड़ लिया।

दोनो हाथो से माँ की बोबले को दबाने लगा।

“अभी छोडो, बेटी घर मे है। वापस आकर मौका मिलेगा तो मज़ा दुंगी।”

सुंदरी ने बेटी को कुछ समझाया और फिर साडी पहनकर परम के साथ बाहर निकल गयी। सायकल रिक्शा मे बैठ कर दोनो शेठ के यहा जाने लगे।

परम माँ से सटकर बैठा था और रास्ते मे जान पहचान के लोगो को विश भी करता जा रहा था। सुंदरी आराम से छाती तान कर बैठी थी।

परम ने शेठ और विनोद की सारी बात माँ को बतलाई। परम को लगा की 50 हज़ार का बात सुनकर माँ को अच्छा लगेगा।

सुंदरी ने फुस फुसाकर कहा “आज तक मै शेठ के साथ अकेली नही मिली हूँ। शेठानी या तेरा बाप हमेशा साथ रहता है।”


आप मैत्री और फनलव के द्वारा भाषांतरित की गई कहानी पढ़ रहे है।

सुंदरी ने बेटे का हाथ पकड़ कर अपनी जांघो पर रखा और कहा “ मौका मिलेगा तो शायद मै उससे चुदवा लूँगी।’

परम ने हाथ बढ़ा कर माँ के जांघो के बीच हाथ रखकर चूत को दबाया और शेठ का घर आने तक दबाता रहा।

दोनो घर के अंदर गये। शेठानी अपनी बेटी रेखा के साथ दिवान पर बैठी थी। परम को देखते ही रेखा अंदर चली गयी।

परम को सुबह वाली घटना याद आई और उसका मन किया की रेखा को प्यार करे। सुंदरी और शेठानी कुछ बाते कर रहे थे।

“शेठानीजी, क्या मै रेखा के कमरे मे जाऊ?” परम ने पूछा।




जवाब आप लोग भी दे सकते है ...........................रेखा के कमरे में ले जाऊ?????
 
“हा, जाओ!”

परम तुरंत अंदर गया। वहां रेखा सोफा पर बैठी थी। परम को देखते ही उसने दोनो हाथो से अपनी आंखे बंद कर ली।

रेखा ने फ्रॉक पहन रखी थी जो उसके आधे जांघो तक ही थी। परम उसके सामने ज़मीन पर बैठ गया ओर बिना झीझक के रेखा के दोनो घुटनो पर हाथ रख दिया।

रेखा ने अपने दोनो हाथो को आंखे से हटाकर जांघो के बीच रख लिया।

“तुम बहुत गंदे हो, कार मे क्या कर रहे थे!”

“और तुम बहुत सुंदर हो।” परम धीरे धीरे रेखा की नंगी जांघो को सहलाने लगा।

“क्या कर रहे हो, हाथ हटाओ!” रेखा ने फ्रॉक को चूत के उपर और ज़ोर से दबाया।

परम का हाथ धीरे धीरे जांघो पर उपर बढ़ा।

“रेखा तुम्हारी शादी होने वाली है। तेरा घरवाला बहुत किस्मत वाला होगो जो तुम्हारी मस्त जवानी का मज़ा लेगा।” उसने कुछ सोच कर फिर से बोला “तुम मुज से शादी क्यों नहीं कर लेती? तुमको तो पता है ना मैं तुम्हे बचपन से ही कितना प्यार करता हु..!




परम ने रेखा की आंखों में आंसू देखे.. लेकिन सिर झुका लिया..

“झूठ क्यों बोलते हो…..तुम मुझे नहीं पूनमको प्यार करते हो…..तभी तो रोज उसको चूमते हो और उसका माल दबाते हो…..” उसने परम की ओर देखा और कहा…

“वैसे भी तुम हम दोनो (रेखा और पूनम) से बहुत छोटे हो…..हम तुम्हारे साथ शादी नहीं कर सकते…हमें तो मर्द चाइये और तुम अभी बच्चे हो…।” उसने फीकी मुस्कान दी.

रेखा खुद परम को सबसे ज्यादा पसंद करती थी... लेकिन वह यह भी सोच रही थी कि परम उसके या पूनम के लिए अच्छा मैच नहीं है।

अचानक उसे जांघों के अंदरूनी हिस्से पर दबाव महसूस हुआ...

“परम, हाथ हटाओ” लेकिन परम ने फ्रॉक को पूरा उपर तक हटा दिया। अब कमर के नीचे सिर्फ़ चूत का भाग फ्रॉक से ढका था और रेखा ने उसे हाथो से दबा रखा था।

“परम, प्लीज़ छोड़ दो। कोई आ जाएगा!”

“ श... कितनी चिकनी है! बिल्कुल बटर जैसी! मन करता है की चाट जाऊ।”

इतना कहकर परम ने रेखा के पैर को फैलाया और अंदरकी जांघो को चाटने लगा।

रेखा सिहर गयी। उसको भी मज़ा आ रहा था। उसका मन किया की हाथ हटा कर परम को अपनी चूत चटवाए लेकिन उससे लाज आ रही थी। पहला मौका था की कोई उसकी जांघो को चूस रहा था। उसे लगा की परम थोड़ी देर और उसे चुसेगा तो अपने आप को नही रोक पाएगी।

इधर परम की जुबान जांघो के अंदरकी हिस्सो को चूम रही थी। उसकी जुबान ने रेखा के हाथ के नीचे से चूत को छुना चाहा लेकिन रेखा दोनो हाथो से चूत के उपर कपड़े को दबा कर बैठी थी। परम का हाथ रेखा के कमर से उपर बढने लगा और उसने दोनो बोबले को दबोच लिया और कस कर दबाया।

रेखा की चुचि भी बहन महेक के बोबले जैसी टाइट थी लेकिन उससे बड़ी-बड़ी थी। अब रेखा को लगा की अगर उसने परम को नही रोका तो खुद ही नंगी होकर परम से चुदवाएगी। पर उसने मन ही मन निश्चय किया की कुछ भी हो शादी के पहले चूत मे लंड नही लेगी,15 दिन के बाद ही शादी थी।

परम खूब प्यार से जांघो को चाट रहा था और बोब्लो को मसल रहा था। रेखा बोबले पर से परम का हाथ हटाना चाहती थी लेकिन उसे मालूम था की अगर उसने अपना हाथ हटाया तो परम चूत को चाटने लगेगा फिर रेखा चुदाई नही रोक पाएगी।

"आह.. परम बस बहुत हो गया। अभी तुम जाओ, कल तीन बजे आना जो देखना चाहते हो सब दिखाऊँगी।" वह अपने पहले प्यार परम को अपने शरीर पर महसूस करना चाहती थी और पूनम को परम के साथ सेक्स अनुभव बताना चाहती थी। वह हर बार कहती थी कि परम उसे चूमता था, दबाता था और उसे जलन होती थी। अब शादी तय हो गई थी... तो वह परम के साथ थोड़ी आज़ादी ले सकती थी।

उसने परम को ढकेल दिया और खुद खड़ी हो गयी। परम चुप चाप खडा हो गया।


बने रहिये....आपकी फीडबेक देते रहिये ........
 
“रेखा एक बार चूत को सहलाने दो।”

रेखा ने उसका हाथ पकड़ कर कहा, “तुम शैतान हो गये हो। तुम्हारी माँ से कहना पडेगा।”

दोनो बाहर आ गये। उसे दुख था की वो रेखा की चूत नही देख पाया। लेकिन साथ ख़ुशी थी की कल रेखा अपना चूत और बोबले दिखाएगी। पर साला,कल तक इंतेज़ार करना पड़ेगा। आप यह कहानी मैत्री और नीता के द्वारा अनुवादित कहानी पढ़ रहे है

तभी रेखा की एक सहेली आ गयी। रेखा सहेली के साथ अंदर गयी और तुरंत कपड़े बदल कर बाहर आई।

"माँ मै एक घंटे मे रंजू के घर हो के आती हूँ" कहकर सहेली के साथ चली गयी। सुंदरी शेठानी का पैर दबा रही थी। अचानक परम बोल उठा,

"तुम हट जाओ माँ, थक गयी होगी। शेठानीजी को मै दबा देता हूँ।"

"शेठानीजी, परम बहुत अच्छा दबाता है, मै भी इससे दबवाती हूँ।" सुंदरी ने कहा।

"ठीक है, सुंदरी तुम कुछ पराठे बना दो। तुम्हारे शेठ आते ही खाने को माँगेंगे।" शेठानी ने कहा।

फिर सुंदरी का हाथ पकड़ कर पूछा "शेठ को अपना "ख़ज़ाना" दिखाया की नही ?" तुझे बहुत पसंद करता है।"

"छी... शेठानीजी, क्या बोलती है आप!"

सुंदरी वहां से उठ कर किचन मे भाग गयी। शेठानी ने चिल्ला कर कहा "एक मीठी दाल भी बना देना।"

शेठानी ने परम की तरफ देखा और कहा, "चलो बेटे पूरा बदन दबा दो, बहुत टूट रहा है।"




रेखा की तरह सेठजी और सेठानी भी परम को बहुत पसंद करते थे...दरअसल सेठजी चाहते थे कि परम हमेशा उनके साथ रहे। लेकिन सेठानी नहीं चाहती थीं कि परम रेखा के साथ सोए लेकिन उन्हें हमेशा से ही एक जिंदादिल लड़का पसंद था...सेठानी को महक ज्यादा पसंद थी और उन्होंने कई बार इच्छा जताई कि महक उनके साथ रहे लेकिन सुंदरी इसके लिए राजी नहीं हुई।

शेठानी पीठ के बल लेट गयी। उसने एक भारी भरकम सारी पहन रखी थी और नीचे पेटिकोट, उपर ब्लाउज था। ब्लाउज बोबले को ढकने मे असफल था। बोबले का उपरी हिस्सा ब्लाउज से बाहर निकला हुआ था। परम शेठानी से सटकर बैठा और दोनो हाथो से एक पैर को दबाने लगा। कभी दबाता था तो कभी पिंडली की मांसपेशी को सहला देता था। परम ने आहिस्ता-आहिस्ता हाथ घुटने के उपर रखा और निचली जांघो को हल्के से मरोडकर कर दबाने लगा।

"कैसा लग रहा है शेठानीजी?"

"अच्छा लग रहा है, दबाते रहो।" शेठानी ने कहा।

परम की हिम्मत बढ़ी और उसने घुटने से लेकर ऊपरी जांघो तक खूब दबा-दबा कर मज़ा लिया। इसी तरह उसने दूसरे पैर को भी पूरा ऊपरी जांघो तक दबाया,चूत से थोड़ा नीचे तक।

उसने अपनी बहन और रेखा की जांघो को सहलाया था लेकिन शेठानी का जांघे खूब मोटी और गुदाज़ थी। उसने देखा की शेठानी को मज़ा आ रहा है और शेठानी ने दोनो पैर को फैला दिया है और सारी पूरी तरह तन गयी है।

"शेठानीजी आपकी साडी और अंदर का कपड़ा बहुत भारी है। आपको दबाने का पूरा मज़ा नही मिलता होगा,पतली साडी होती तो दबवाने मे आपको और आराम मिलता।" इतना कहकर परम दोनो पैरों को एक साथ दबाने लगा और दबाते-दबाते बिलकूल चूत के पास दबाने लगा।

शेठानी मोटी थी,खूब मस्त बाहें थी और पेट भी थोड़ा उठा हुआ था। उसकी उम्र 50 के करीब थी, दुध जैसा गोरा रंग और मख्खन जैसा बदन। परम का मन किया शेठानी के चूत के दर्शन करने को,लेकिन उसे नंगा तो नही कर सकता था। उसने एक उपाय सोचा। कभी कभी पिताजी के ऐसे ही पैर दबाता था तब उसे कई बार पिताजी का लंड दिखाई दिया था। उसने सोचा कोशिश करके देखते है।

रेखा भी घर मे नही थी और सुंदरी अंदर खाना बना रही थी।


 
"आप एक पैर मेरे कंधे पर रख दीजिए मै मसल-मसल कर दबाउंगा तो आपकी पूरी थकान उतर जाएगी।"

परम उठकर दोनो पैरों के बीच आया और बिना पूछे उसने कपड़े को खिसका कर शेठानी के घुटनो के ऊपर कर दिया और एक टाँग उठाकर अपने कंधे पर रख ली।

"आप आंखे बंद कर लीजिए, अच्छा लगेगा।"

परम एक हाथ से पैर को सहारा देकर दूसरे हाथ से घुटने के उपर जांघो को मरोडकर मसलने लगा और तभी उसे शेठानी की मोटी फूली हुई चूत दिखाई दी।

चूत पर छोटे-छोटे झाँटे थे,शायद 8-10 दिन पहले झाँटे साफ किया हो। परम का हाथ शेठानी के जांघो से नीचे से चूत तक फिसल रहा था।

शेठानी ने हौले से कहा, "खूब ज़ोर से मसलो!"

परम ने अंदरकी जांघो को दबाते दबाते चूत को मुठ्ठी मे भरकर मसलने लगा।

"और आगे आ जाओ।" वह चाहती थी कि परम उसे और उसकी चूत को अधिक से अधिक सहलाए।

परम ने पैर को कंधे से उठाया और कपड़े को बिल्कुल उपर तक उठा दिया। शेठानी की चूत साफ दिख रही थी। परम दोनो हाथो से चूत को मसलने लगा।

"शेठानीजी, आप अकेली कब रहती है मै आकर आपको पूरा मज़ा दूँगा, बहुत मस्त चूत है आपकी ….खूब प्यार से चोदूंगा…।"

"बेटा अभी 15-20 दिन कोई मौका नही मिलेगा,जहां दबाना है आज ही दबा दो।"




लेकिन सेठानी तो चुदाई के लिए आतुर थी... वो चाहती थी कि परम उसे वहीं चोद दे। उसे इस बात की ज़रा भी परवाह नहीं थी कि वो लड़का उससे 30 साल छोटा है और उसकी बेटी का ख़ास दोस्त है।

चूत को मसलते मसलते परम शेठानी के जांघो के बीच आ गया। एक हाथ से वो चूत को दबा रहा था और दूसरे हाथ से बोबला को दबाने लगा।

"चूत बहुत मस्त और रसीली है, लगता है शेठजी चुदाई नही करते है ठीक से?"

"6 महीने से उसने मुझे चोदा नही है, लेकिन तुम्हारी माँ को चोदना चाहता है। सुंदरी को बोलो की एक बार अपनी चूत मे शेठजी का लंड घुसा ले।"

उसने जोड़ा...

“हो सकता है सुंदरी की चूत को भोसड़ा बनाकर मज़ा लेने के बाद वो मुझे फिर से चोदना शुरू कर दे... हो सकता है, कौन जाने, ऐसा भी हो कि तेरी माँ की चूत हमेशा के लिए उसका लंड ले ले।”

“सेठानी जी, आप पहली औरत है ..जिसे मैने नंगा देखा है …और ये पहला चूत है जो मेरे हाथ में है…..मैं जिंदगी भर आपको चोद कर खुश करता रहूँगा…शेठजी की जरुरत शायद ही पड़े आपको....!”

परम को लगा की उसकी पैंट फट जाएगी और उसने पैंट का बटन खोलकर नीचे धकेल दिया। परम का लंड तना हुआ था उसने लंड को चूत के छेद पर रखा और ज़ोर से धक्का मारा।

शेठानी की चूत पूरी तरह से पनिया गई थी,पूरा लंड गप से अंदर चला गया। शेठानी ने परम को जकड़ लिया और परम बोबला को दबते-दबाते चुदाई करने लगा। 50 साल की औरत को चोद कर ऐसा लग रहा था कि शेठानी की बेटी रेखा को चोद रहा हो। सेठानी की चूत बहुत गर्म है।

"आओ बेटा.... ज़ोर-ज़ोर धक्के मारो, बहुत मज़ा आ रहा है, जल्दी जल्दी...कही तुम्हारी माँ ना आ जाए, वाह मस्त लंड है तुम्हारा बेटे।"

"वो देखेगी तो किसिको नही बोलेगी। उसके सामने भी तुम्हे चोदुंगा।" परम ने आश्वासन दिया और धक्के मारता रहा।

“ओह्ह…बेटा ..लगता है और बहुत लंबा दर्द हो रहा है…..बहुत टाइट से चूत को रगड़ रहा है……आआह मारो …और जोर से…।” वह वास्तव में आनंद ले रही थी...

"शेठानी तेरी चूत पहली चूत है जिसे मै चोद रहा हूँ लेकिन मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है।"

"बेटा,रेखा चली जाएगी तो उसके बाद रोज मुझे चोदना।"

"हा रानी रोज चोदुंगा लेकिन मै तुम्हारी बेटी को चोदना चाहता हूँ।"
मौके का फायदा उठाते हुए परम ने इच्छा व्यक्त की...



“लेकिन मैंने तो सोचा था कि तुम रेखा और पूनम दोनों की चुदाई कर चुके हो…।” उसने कमर झटकाई और लंड के लिए और गहराई के जाने का रास्ता दे दिया और कहा,

"उसको भी चोदो, मेरी बहुओ (डॉटर इन लॉ) को भी चोदो। मै मना नही करूँगी, लेकिन मुझे हर दो-तीन दिन मे आकर चोदना पड़ेगा।"


 
"चोदुंगा रानी और गांड भी मारूँगा।"

परम ने ज़ोर से धक्का मारते मारते कहा, "लंड नही चुसोगी ? "

"चुसूंगी,लेकिन आज नही कभी अकेले मे।"

फिर दोनो जम कर चुदाई करने लगे और थोडी ही देर में शेठानी पस्त हो गयी।

"लंड बाहर निकाल लो, अब दर्द कर रहा है। मै सुंदरी जैसी जवान नही हूँ की लंड खाती राहु।"

लेकिन वह कहा सुननेवाला था,परम धक्का मारता रहा और उसके लंड ने शेठानी के सुखी हुई चूत मे पानी पानी का छंटकाव कर दिया और उसकी चूतरस से उसके वीर्य से मिला कर पूरी भर दी।

ठंडा होने के बाद परम शेठानी के उपर से उतरा और दोनो ने अपने कपड़े ठीक किए। शेठानी थोड़ी देर तक लंड को मसलती रही…..सच बेटा बहुत मस्त लंड है….और इतना मोटा सुपारा….रेखा की चूत फट जाएगी…मेरी बेटी को थोडा आराम से चोदना बेटे, वह शायद ही तेरे लंड को झेल पाए, एक-दो बार उसकी फट जायेगी पर बाद में तेरे लिए अपनी चूत खुली रखेगी।”




थोड़ी देर बाद सुंदरी बाहर निकली।

"शेठानीजी सब बना दिया है। अब हम लोग जाते है।"

सुंदरी ने कहा और फिर पूछा "परम तुमने ठीक से पाव दबाया ना।"

"अरे तेरा बेटा तो बहुत अच्छा दबाता है। फिर आना बेटा!"

शेठानी उठी और 1000 रुपये सुंदरी को दिया। "रख लो" और बहुत अच्छा लगता है..और तेरा ये बेटा बहुत प्यारा है..और जब तक शादी है आती रहना और परम को भी लाना। सेठानी ने सुंदरी के सामने परम के गालो को चुमते हुए कहा…। थोड़ी देर के लिए रोज आ जाया करो..” श और अनुरोध किया…
यह कहानी मैत्री और नीता के द्वारा अनुवादित कहानी पढ़ रहे है



और हा, एक बार मेरे शेठ को खुश कर दो। बेचारा पागल हो गया है तुम्हारा माल खाने के लिए…। और मुझे भी तो दिखा दे तेरा माल कैसा लग रहा है कि मेरा बंदा उसे खाने को बेताब हो गया है, एक बार अपने सारे छेद दिखा दे।"



यह सुनकर सुंदरी के गाल लाल हो गये। वो केवल मुस्कुराई और घर चली गई। वापसी में परम रिक्शे पर सुंदरी के बगल में बैठ कर पूरे रास्ते चूत को सहलाता रहा और शेठ से चुदवाने के लिए मनाता रहा। दोनों घर आ गये। परम शेठानी को चोदकर बहुत खुश था और उसने निश्चय किया की कल ही वो अपनी माँ को चोदेगा।

यह अपडेट कैसा लगा !!!!!!

अपनी राय देना ना भूलियेगा
 
चलिए कहानी में आगे बढ़ते है................
 
रात में खाना खाने के बाद अपने कमरे में आया तो देखा की उसकी बहन बिल्कुल नंगी बैठी है और चूत को मसल रही है। परम ने महेक को बांहों में जकड़कर चूमा और चूची को दबाया। महेक ने फटाफट अपने भाई को भी नंगा कर दिया और बेड पर सीधा लिटा दिया। महेक भाई की जांघों के बीच घुटनों पर बैठ गयी और झुककर भाई के लंड से खेलने के लिए उसकी चमड़ी को ऊपर कर के लंड का सुपारे को बाहर आते देखा तो वह ज्यादा उत्साहित हो गई और मुँह में ले लिया। एक हाथ से लंड को जड़ से पकड़ी थी और दूसरे हाथ से बाल्स को भी दबा रही थी।



परम को बहुत अच्छा लग रहा था। ये पहला मौका था की किसी ने उसके लंड को मुँह में लिया था। परम बहन के बालों को सहला रहा था और आह्ह… आह्ह… करके मजा ले रहा था। महेक अपनी जीभ को पूरे लंड पर चला रही थी और कभी-कभी लंड को मुँह से निकालकर बोल्स को चाटती थी और गांड के छेद पर भी जीभ चलाती थी। इस तरह महेक खूब मजे से भाई के लंड का मजा ले रही थी। जीभ से सहला-सहलाकर गांड का छेद खुल गया था। महेक ने भाई की गांड में एक उंगली गाड़ दी और उंगली से भाई की गांड मारने लगी। फिर उसने गांड पर थूका और दो उंगली घुसाकर गांड मारने लगी। करीब 15 मिनट तक लंड को चूसने और गांड मारने के बाद परम के लंड ने पानी छोड़ दिया और जोश में अपनी बहन के सिर को लंड पर दबा दिया। महेक ने पूरा पानी गले के नीचे उतार लिया। लंड को जीभ से साफ करने के बाद उसने मुँह से लंड को निकाला और छपाक से दोनों उंगली को गांड से बाहर निकाला।

परम ने बहन को अपने सीने पर खींच लिया और पूछा-

“कहाँ से ये सीखा… बहुत मजा आया बहना…”

महेक ने भाई को किस करते हुवे कहा की उसकी दोस्त सुधा ने सिखाया- “आज उसका बाप और नौकरानी रिंकू ऐसे ही प्यार कर रहे थे। अब तुम मेरी चूत चाटो…” महेक दोनों पाँव फैलाकर सीधा लेट गयी- “भैया मेरी चूत तुम्हारा इंतजार कर रही है…”

परम ने जांघों के बीच बैठकर दोनों हाथों से उसकी कमर को जकड़कर चूत के क्लिट पर जीभ को ऊपर-नीचे किया।

महेक- “आहह… भैया… बहुत अच्छा…”

परम अपनी उंगली और जीभ से बहन की चूत और गांड को चाट रहा था। कभी-कभी दाँत से क्लिट को दबाकर खींचता था और महेक उछल पड़ती थी। चूत को चाटते-चाटते परम दोनों हाथ आगे बढ़ाकर टाइट बोबले को भी दबाने लगा। कभी उंगली से चूत की फांक को फैलाकर जीभ अंदर करता, तो कभी गांड चूसने लगता था। करीब 10 मिनट चाटने के बाद उसने एक उंगली बहन की गांड में घुसाया। गांड गीली हो गयी थी और एक नहीं दो-दो उंगली आराम से गांड के अंदर चली गयी। महेक ने अपनी गांड को ढीला छोड़ दिया ताकि भाई की उंगलिया आराम से उसकी गांड मार सके। हाला की थोडा दर्द हो रहा था पर उस आनंद के सामने यह दर्द कुछ भी नहीं था।

महेक ने अपने हाथों से दोनों टांगों को पकड़कर अपनी ओर खींच लिया था और चूतड़ उछाल-उछाल कर चूत चुसाई का मजा ले रही थी। परम एक साथ चूची दबा रहा था, चूत चाट रहा था और बहन की गांड में उंगली पेल रहा था। महेक खूब जोर-जोर से कमर उछाल रही थी और भाई से चुसाई का मजा ले रही थी, साथ-साथ अपनी गांड भी मरवा रही थी और उसका एक अलग ही आनंद ले रही थी।



लेकिन थोडा समय के बाद उसकी मंजिल आ ही गई,महेक की चूत ने पानी छोड़ दिया। चूत से सफेद गाढ़ा चूतरस बाहर आने लगा और परम ने चूत फैलाकर सारा रस चाट लिया। परम ने बहन की चूत चाटते हुए सोचा की कल दो और चूत, सुंदरी और रेखा की भी इसी तरह चाटेगा। परम से अब बर्दास्त नहीं हुआ। उसे लगा की झड़ जाएगा और फटाक से सीधा बैठकर लोडे को बहन की चूत पर रखा। लंड से सफेद रस निकलकर चूत पर फैलने लगा। महेक ने रस को चूत पर फैलाया और हाथों में उठा-उठाकर रस को प्यार से चाटने लगी। दोनों थक चुके थे। एक दूसरे को बाहों में लेकर सो गये।

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