Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 32 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

जी बिलकुल अभी आगे जानेंगे की किस एपता चलता है..............
 
बहोत बहोत शुक्रिया दोस्त

बने रहिये
 
वाऊ, अब तक का सब से बेहतरीन कोम्नेट है।



सब से पहले तो आप मेरा धन्यवाद स्वीकारे।

मुझे बहोत अच्चा लगा की आपने अब तक की कहानी बहोत ध्यान से पढ़ी। और मुझे आनंद हुआ की मेरी लिखावट आप को पसंद आई। उसके लिए आपका बहोत बहोत धन्यवाद मित्र।

आपने अपने कुछ सुझाव दिए है, उसके बारे में अगर बात करे तो मैं बहोत ही संक्षिप्त में कहना चाहूंगी।

1 मेरी कहानी बहोत फ़ास्ट जा रही है। कहानी के किरदार को सही मौक़ा नहीं मिल रहा।

जी आप से कुछ हद तक सहमत हूँ दोस्त। यह कहानी बहोत लम्बी है। पूरा गाँव शयद इस कहानी में आ जायेगा यह अभी सिर्फ पहला चेप्टर चल रहा है और शायद यह चेप्टर ख़तम करते हुए मुझे कम से कम 250K वर्ड्स तक जाना पड़ेगा। उसके बाद कितना सपोर्ट मिलता है और आगे की इंतेजारी है तो आगे भी लिखूंगी। अगर मैं हर पात्र को लम्बाई से पेश करुँगी तो पता नहीं यह कहानी कब ख़तम होगी। दूसरी बात यह है की, हाँ लिखने में काफी दिक्कत की वजह से और जल्दी से अपडेट देने की वजह से शायद ऐसा हो सकता है की कुछ पात्रो को सही तरीके से न्याय ना दे पाती होगी। कोशिश करुँगी आगे से की सभी पात्रो को कुछ्ना कुछ लम्बाई मिले। जी, शायद हां मैं थोड़ी फ़ास्ट जाने की वजह से कुछ घटनाओ को थोड़े में निपटा देती हूँ। आपका यह सुझाव आगे कहानी में उपयोग कर के उचित न्याय देने का संपूर्ण प्रयास करुँगी। लेकिन ऐसी अश्लीलता से भरपूर कहानी लिखने में खुद को कंट्रोल भी तो करना पड़ता है। आप समजदार है

2 “आपके हिसाब से सुंदरी जो अभी तक बच्चे होने तक पतिव्रता थी............चुदाई बहोत आसानी से हो रही है.......

नहीं ऐसा नहीं है अगर आप परम और सुंदरी के संवाद पढेंगे तो उसमे जिक्र किया है की वह अब तक पांच लंड ले चुकी है, लेकिन शादी के पहले.....परम ने बार बार पूछा पर सुंदरी ने अभी तक बताया नहीं है..........हो सकता है की यह झूठ हो या सही मुझे भी पता नहीं की सुंदरी कब क्या कैसे क्यों करेगी!!! और कब अपना सस्पेंस खोलेगी

हाँ यहाँ सेक्सुअल पार्ट बहोत जल्दी हो रहा है, ख़ास सिद्युस नहीं करना पड़ता.............मेरे ध्यान में यही है की यह पूरा गाँव ही ऐसा है.....यहाँ सब कुछ नार्मल है जो हमारे लिए असामान्य है। शायद इसकी वजह यही है, फिर भी कोशिश करुँगी। विनोद को अभी आप साइड हीरो समज के चलिए, कहानी के प्लाट के बारे में अभी तो मैं नहीं बता सकती पर जैसे जैसे आप आगे पढेंगे जानेंगे।

परम हीरो है और आगे बहोत कुछ होनेवाला है उसके साथ और सुंदरी भी शायद कितनी शामिल हो रही है, पता नहीं।

धन्यवाद आपका की आपको सेठजी के साथ वाली चुदाई का विवरण अच्छा लगा। सेठजी बस कुछ एपिसोड तक हमारे साथ जुड़े रहेंगे। यह सिर्फ सुंदरी को इस दुनिया में आगे जाने के स्टेप्स समज सकते है। उसी तरह परम के लिए भी ऐसा ही हो। यहाँ तक मैंने जताने का प्रयास किया है की सुंदरी के लिए मुनीम ही बेस्ट है वह सिर्फ मुनीम से दिल से प्रेम करती है और किसी को नहीं पर कामुकता से वह कुछ भी करना चाहती है, हवा में उड़ना चाहती है।

आगे और भी पात्रो आयेंगे जो आपको मजेदार लगेंगे, बस आप कहानी के साथ जुड़े रहिये। यही विनती है, क्यों की अभी आगे प्लाट के बारे में बता दूंगी तो शायद पढने में उतनी दिलचश्पी नहीं रहेगी। माफ़ करना।

सुंदरी के बारे में जितना प्लॉट्स दिए है वह आगे शामिल कर के आपको पता चल जायेगा की आपके सभी सुझावों को मैंने न्याय देने की कोशिश की है। हो सकता है सभी ना हो और एक साथ ना हो, धीरे धीरे लिखूंगी और शामिल कर दूंगी। तरिका अलग हो सकता है।

मैं ज्यादातर संवादों से जितना चाहती हु पर कभी कभी वर्णन भी उतना ही आकर्षक बनाने की कोशिश में रहती हूँ, जैसा की मैंने “
श्रुष्टि की वृत्ति” और “तीनो की संमती” और “सम्बन्ध एसा भी होता है” (संवादों पर ही टिकी हुई है) में किया हुआ है। अभी और एक कहानी चल रही है “लुइ के पन्ने” उसमे आपको कुछ नयी लिखावट का अनुभव हो सकता है। कहानी लिखते वक्त का मूड और बहोत कुछ रीजन से लिखा जाता है। मैं पेशेवर लेखिका नहीं हूँ दोस्त। सिर्फ शौक से लिखती हु।

बाकी आपने जो लिखा है, परम के बिना जानकारी से विनोद,और कुछ सब की मिलावट कर दूंगी आगे, लेकिन धीरे धीरे।

मैं समय मिलने पर मालती का कामुक संसार पढूंगी। उसमे से कुछ मिलेगा आगे के लिए।

अब इस कहानी की लम्बाई की बात करे तो इसे बहोत बड़ी लम्बाई देने का प्रयास करुँगी और भरपूर अश्लीलता की मिलावट करुँगी।

आपका बहोत शुक्रिया दोस्त और आगे भी ऐसे ही कोमेंट देके मुझे बेहतर करने की अपोर्चुनिटी प्रदान करते रहे।

आशा है की आगे की कहानी आपको पसंद आएगी।



जुड़े रहिये इस कहानी मे ............
 
चलिए दोस्त आगे की कहानी में जानते है की क्या हुआ.............
 
अब आगे............

“वह सब तुम मुज पर छोड़ दो, सब मैं कर दूंगी, और हां मेरा सौदा कर ही दिया है तो मैं तुम्हे निराश तो नहीं करुँगी पर सोचूंगी लेकिन किसी को यह पता नहीं चलना चाहिए की पति को पता है, इस से तुम्हारी इज्जत बनी रहेगी और यह बात हम दोनों ही जानेगे। बच्चो को भि नहीं वह सब मैं संभाल लुंगी तुम सिर्फ पैसे गिनते रहना।


सुंदरी ने आगे कहा “ देखो पति महाराज अगर सौदा करना है तो महक का भी कर देंगे उसकी सिल अभी नहीं टूटी तो किसी अच्छे लंड से तोड़वा देंगे बाद में उसका माल तुम खाए जाना, लेकिन यह बात सिर्फ हम दोनों के बिच में रहनी चाहिए। हमारे घर एपिसो कमी नहीं होगी अब। लेकिन यह सब मैं सोच के बताउंगी।“ सुंदरी को लगा अब साफ सेफ है।

“लेकिन सुंदरी, तुम्हे कैसे पता चला की मैं महक की चूत चाहता हु?”
मैत्री और फनलवरकी अनुवादित रचना

“माँ हूँ और औरत भी हु, वैसे भी हमऔरते और यहाँ इस गाव की औरते जो कभी ब्रा और पेंटी नहीं पहनती तो पुरुष हो या बाप उसकी नजर बेटी हो या बहु चूत को तलाशती है, मैंने कई बार देखा है आपको उसकी चूत पर नजर करते हुए लेकिन कभी कुछ बोला नहीं क्यों की यह गाव में होता रहता है और लंड है तो चूत को तो खोजेगा ही। और जब से महक बड़ी हुई है तबसे वह भी तो अपने छेड़ की परवाह किये बिना आपके सामने बैठ जाती है और उठ भी जाती है ताकि अपने बाप की नजर उसकी चूत को देखे।“

सुंदरी तुम कितनी अच्छी हो, मैं वैसे भी तुम पे फ़िदा था, जब कोई मुझे कहता की मै नसीबवाला हु की एक मस्त औरत का माल चोदे जा रहा हु। लेकिन आज तुम पे और ज्यादा फ़िदा हो गया। उसने सुंदरी की चूत में ऊँगली करना चाहां पर सुंदरी ने झट से उसकी ऊँगली बाहर निकाल दी क्यों की उस चूत में विनोद का वीर्य भरा पड़ा था। तो मुनीम ने उसकी गांड में ऊँगली कर दी। सुंदरी ने उस ऊँगली से अपनी गांड मरवाई। और बोली “अब कुछ करती हु।“

“लेकिन याद रहे की जो भी बाते हुए सिर्फ हम दोनों तक रहे। और हां ठीक से गांड मारो।“ सुंदरी ने खुद ही अपने कुल्हे को चौड़ा कर दिया और ऊँगली के लिए अपनी गांड को खोल दिया।

*******

इधर परम के कमरे में...

महक पूनम को अपने साथ एक बिस्तर पर ले गईं और परम दूसरे पर सोने चला गया। परम, पूनम को देखकर खुश हो गया। वह उसे पसंद करता था लेकिन उस तरह नहीं जैसे वह रेखा को पसंद करता था और वह जानता था कि रेखा और पूनम बहुत अच्छी दोस्त हैं।

महक ने पूनम को कपड़े उतारने और परम के बिस्तर पर जाने के लिए कहा.. लेकिन पूनम ने यह कहते हुए मना कर दिया कि चूँकि मुनीम ने उसे पहले ही चोद दिया है इसलिए वह मुनीम के बेटे से नहीं चुदवाएगी। बाप बेटे से चुदाई करवाना पाप होगा।

"लेकिन तुमने शाम को देखा होगा कि मेरे पापा ने अपनी ही बेटी को लगभग चोद ही दिया था।” महक फुसफुसाई।

“आदमी कुछ भी कर सकते हैं, वो माँ-बहनों को भी चोद सकते हैं, लेकिन हमें औरतों को संयम बरतना चाहिए..” पूनम ने कहा। लेकिन

महक सुनने को तैयार नहीं थी। उसने पूनम के कपड़े उतारने की कोशिश की। पूनम ने विरोध किया और यह देखकर परम भी बिस्तर पर आ गया।

और दोनों भाई-बहन पूनम को नंगा कर दिया। परम ने पूनम की खूबसूरती की तारीफ की और उसके स्तनों को सहलाया, जबकि महक पूनम का हाथ अपनी चूत से हटाने की कोशिश कर रही थी।

पूनम ने परम से विनती की कि वह उसे न चोदे और जब उसका कोई असर नहीं हुआ, तो उसने धमकी दी कि वह रेखा को बता देगी कि उसने उसे नंगा करके चोदने की कोशिश की है। परम ने उसे बिस्तर पर धकेल दिया और कहा कि चाहे तुम पूरी दुनिया को बता दो, मैं तुम्हें चोदूँगा। परम ने पूनम के शरीर को अपने शरीर से ढक लिया और उसे चूमा। उसने निप्पल पर उंगलियाँ फिराईं और उन्हें चुटकी काटी। उसने स्तनों को चूमा और उसकी जांघों के बीच नीचे की ओर बढ़ा। पूनम ने उसका सिर पकड़ रखा था, लेकिन परम फिर भी अपना मुँह उसकी चूत पर ले आया और उसने पूनम की चूत को चबाया, जहा पहले से ही उसके बाप का वीर्य पड़ा हुआ था, उसे भी वह चाट गया। धीरे-धीरे पूनम शांत हुई और उसने खुद को समर्पित कर दिया। यह देखकर कि पूनम अब अपने भाई से चुदने वाली है,महक कमरे से बाहर आई और बाहर से कुंडी बंद करके बाहर चली गई। वह माता-पिता के कमरे के दरवाजे के पास खड़ी थी और ठीक उसी समय सुंदरी मुनीम के लंड को मुट्ठी में भर रही थी। अपने पिता का लंड देखकर उसकी चूत में खुजली होने लगी और उसने उसे सहलाया। मुनीम के दूसरी तरफ़ मुड़ने और सुंदरी के लंड छोड़ने के बाद, महक उसी चारपाई पर चली गई जहाँ शाम को उसके पिता ने उन्हें चोदा था। वह लेट गई और जल्द ही सो गई।

अंदर कुछ देर फोरप्ले के बाद परम ने पूनम की चूत में लंड डाल दिया। पूनम अभी तैयार नहीं थी और उसने अपना शरीर और कड़ा कर लिया। परम को उसकी चूत में लंड डालने में दिक्कत हो रही थी जो डर के मारे अभी भी गीली नहीं थी।

“ओह्ह्ह्ह… निकाल लो.. दर्द कर रहा है…” पूनम फुसफुसाई… और परम यह सोचकर खुश हुआ कि पूनम कुंवारी है। परम ने पूनम को चोदा। उसने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, लेकिन पूनम को वह आनंद नहीं मिला जो मुनीम ने उसे शाम को दिया था। उसने सोचा कि रेखा परम के साथ कैसे मज़े करती है..!

चूत रगड़ने के बाद पूनम को उत्तेजना और आनंद मिलने लगा। उसने अनायास ही अपनी कमर हिलाई और लंड चूत में गहराई तक चला गया। आख़िरकार पूनम एक जवान लड़की थी और सिर्फ़ तीसरी बार और दूसरे लंड से चुद रही थी। पूनम ने देखा कि परम का लंड अब चूत में गहराई तक जा रहा है और उसकी स्पीड उसके पिता से भी ज़्यादा है। उसे परम की चुदाई की स्पीड बहुत पसंद आई।


“तुमने रेखा को कितनी बार चोदा है..” उसने पूछा। मैत्री और नीता कि अनुवादित रचना

एक बार भी नहीं..” परम ने उसकी चूत पर तेज़ धक्का लगाते हुए जवाब दिया।

“आह्ह…लेकिन वो तो बोलती है तुम उसको बहुत मज़ा देते हो…”

“तुमको मज़ा नहीं आ रहा है।”


“आह्ह…बहुत मज़ा आ रहा है…” और दोनों ने मज़ा लिया।

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इस एपिसोड के बारे में आपकी राय....
 
बहोत बहोत शुक्रिया दोस्त



अगर कोई अच्छी सलाह मिलने पर उसे स्वीकारने में कोई बुराई नहीं

और बेहतर करने के लिए सब से ज्यादा विवेचक ही मदद करते है, उनकी आलोचना से ही बेहतर करने का प्रोत्साहन मिलता है

हाँ यह जरुरी नहीं की तुरंत उसका अमल हो पर कही ना कही उसका इस्तमाल किया जा सकता है तभी तो बाकि लोग को मनोरंजन मिलेगा और खुद को सब से ज्यादा

मेर एलिए जरुरी है की आप ध्यान से और सीरियस ले के कहानी पढ़ रहे है और खामी या और उपलब्धि दोनों ही आवकार्य है



आपके कोमेंट मुझे ओर बेहतर करने के लिए फ़ोर्स करेगा जो मेरे लिए ही अच्छा है....................मैं बहोत स्वार्थी हूँ................

:DD: :DD: :DD:

जुड़े रहिये कहानी के साथ............
 
आपका बहोत बहोत शुक्रिया दोस्त
 
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