चलिए अब आगे बढ़ते है इस कहानी में एक नए एपिसोड के साथ............
पूनम ने महक को पकड़ लिया और उसकी फ्रॉक उतारने की कोशिश की। महक ने कुछ देर तक विरोध किया और फिर पूनम के आगे झुक गई। वैसे महक खुद्यः चाहती थी की उसके साथ इन दोनों में से कोई एक या दोनों उसके साथ जबरदस्ती करे। क्यों की अब तक जो भी हुआ था उस कारण उसकी चूत २ बार तो झड ही चुकी थी और उसका रस उसकी झंगो के बिच से नीच बह रहा था। एक बार तो बड़ा सा लौंदा उसकी छुट ने उगल दिया था जब वह रसोईघर में थी। महक ने अपनी फ्रॉक अपने बदन से अलग होने दी और अब बाकी दोनों की तरह वह भी नंगी थी। उसके स्तन सूजे हुए थे और निप्पल तने हुए थे। वह पूनम से कहीं ज़्यादा सेक्सी और खूबसूरत थी। पूनम का फिगर दुबला-पतला था, जबकि महक स्वस्थ और मालदार थी। उसके स्तन बड़े थे। टाँगें लंबी और जांघें मोटी और सुडौल थीं।
पूनम ने महक को बिस्तर पर लिटा दिया और एक मर्द की तरह उसके ऊपर सवार हो गई। उसने अपनी चूत महक की चूत से रगड़ी, साथ ही स्तनों को दबाया और महक को चूमा। मुनीम उनके पास बैठा था। उसने अपना हाथ पूनम के कूल्हों पर रखा। पहले उसने उन छोटे उभारों को सहलाया और धीरे-धीरे अपना हाथ चूत की दरार पर सरका दिया। उसका हाथ दोनों लड़कियों की चूत को सहला रहा था। महक भी उतनी ही उत्तेजित थी। उसने अपने कूल्हों को ऊपर उठाया और दोनों योनियाँ आपस में जुड़ गईं। मुनीम ने अपनी बेटी की चूत का चीरा देखा और दोनों हाथों से चूत के होंठ खींचे। महक को मजा आया और वह कराह उठी। पूनम की चूत महक की पूरी तरह से उजागर चूत पर घूम रही थी। मुनीम ने भी अब उसका हाथ पूनम की कुलहो पर रगड़ दिया और धीरे धीरे उसकी गांड की दरार को फैलाने लगा, जब वह फैलाता तब उसकी गांड का छेद उसे मुस्कुराके स्वागत कर रही थी। तो वहा पूनम की चूत में मुनीम का बचा हुआ माल स्पष्ट दिख रहा था। मैत्री और फनलवर की अनुवादित रचना।
महक के चूत के अंदर का गुलाबी माल मुनीम को साफ दिख रहा था। वो घुटने पर बैठा और अपने लंड को दोनो चूत के ऊपर पोजीशन किया। मुनीम का लंड बेटी के चूत को रगड़ रहा था और हर रगड़ के साथ महक ऊपर से उछल रही थी।
मुनीम के लंड को बेटी के चूत का छेद मिल गया था और मुनीम अपने सुपाड़े को बेटी के चूत में दबाने लगा। महक भी गरम थी उसने भी नीचे से धक्का लगाया और सुपाड़ा चूत में, बेटी के चूत के मुँह में घुस गया.. शायद महक को होश आ गया था। उसने जल्दी से हाथ बढ़ा कर लंड को चूत के बाहर खींच लिया और उसकी पोजीशन में लंड को पूनम के चूत की ओर से डायरेक्ट किया। तभी पूनम अलग हो गई और 69 पोजीशन में हो गई।
अब दोनो एक दूसरे का चूत चाट रही हो। पूनम ने देखा कि मुनीम का लंड तना हुआ है और मुनीम ने दोनो हाथों से अपनी बेटी का चूत के होठों को पूरा फैला दिया है और लंड चूत से रगड़ खा रहा है। पूनम एक साथ महक का चूत के नीचे का माल भी खा रही थी और साथ ही साथ मुनीम के लंड को भी चाट रही थी। कुछ देर चाटने के बाद पूनम ने मुनीम से पीछे जाकर चूत में लंड घुसाने को कहा।
मुनीम पीछे गया और बेटी के मुँह के ऊपर चला गया तो महक समज गई उसने पिताजी का लंड को पकड़ा और पूनम के चूतद्वार के आगे रख दिया और वह मुनीम के अंडकोष से खेल ने लगी। महक ने थोडा ऊपर देखा और बाबाजी को आँख मार के कहा माल को छोड़ो और मुनीम ने पूनम के चूत में लंड पेल दिया। चूत बिल्कुल गिली हो गई थी। और उसकी गांड का छेड़ भी पूनम के गीलेपन से चमक रही थी। अब महक एक साथ पूनम का लंड और अपने बाप का लंड जो पूनम के चूत के अंदर जा रहा था उससे चाट रही थी। पूनम की चूत से बूंद बूंद महक के मुंह में टपक रहा था। एक बाद चुदाई करते करते मुनीम का लंड चूत से फिसल कर बाहर निकल गया तो मुनीम ने उसे बेटी के मुँह में घुसेड़ दिया।
महक ने लंड को चाटा और फिर पूनम के चूत में घुसा दिया। इस तरह तीनो मजा लेते रहे। लेकिन यह सब कितनी देर चलता! आखिर वह मुकाम भी आ गया और मुनीम के लंड ने वीर्य का फुवारा छोड़ दिया, मुनीम झड़ गया। उसने वीर्य को पूनम के चूत में गिरा दिया और लंड को थोडा बाहर खींच लिया.. पूनम के चूत से रस टपक टपक के महक के होंठ पर गिरने लगे और महक उसे बड़े मजे से अपने मुह में समाने लगी। फिर मुनीम ने लंड को बाहर निकाला तो महक ने उसके बाप का लंड पकड़ कर अपने मुँह में ले लिया और तब तब चूसा जब तक लंड पूरा ढीला नहीं हो गया। उसकी हर एक बूंद और मिक्स रस उसने अपने मुंह के द्वारा अपने पेट में उतार दिया। उसने थोड़ी देर अपनी बाप का ढीला लंड को चूसा और अंडकोष के साथ चाट चाट कर उसे क्लीन कर दिया। मैत्री और फनलवर की अनुवादित रचना।
एक तरफ महक खुश थी की उसने अपने बाप का माल अपने पेट में जमा कर दिया था, उसके लिए अब एक नया रास्ता खुला था और दूसरी तरफ मुनीम भी इसलिए खुश था की, यह मुनीम के लिए पहला मौका था जब किसी ने उसका लंड को चूसा था… और वह भी दो दो मस्त कमसिन लडकियों ने उसके अंडकोष को खाली कर दिया था, खास कर उसकी बेटी ने जो की उसका लैंड को एकदम साफ़ कर के छोड़ा था।
उसने सोचा कि आज रात वो सुंदरी से लंड चुसवायेगा। उसे क्या पता कि पिछले कुछ दिनों में सुंदरी तीन लंड को चूस कर मजा ले चुकी है।
तीनो खड़े हो गए। पूनम ने कहा कि बहुत मजा आया और दोनो से रिक्वेस्ट किया कि जो हुआ है उसके बारे में कोई किसी ना कहे। सबने एक दुसरे को प्रोमिस कर दिया। टाइम देखा तो रात के 9 बज गए थे। मुनीम ने दोनों से मुंह हाथ धो कर तयार होने को कहा। लेकिन महक कुछ और चाहती थी। उसने अपना एक पैर उठाया, पिता का सिर खींचा और उसे अपनी खुली चूत पर धकेल दिया। वह अपने आपे में नहीं थी वह एक बार और झाडना चाहती थी और वह भी अपने बाबूजी के मुंह में। वह अभी भी बिन चुदी ही अधूरी सी थी। मैत्री और फनलवर की अनुवादित रचना।
पूनम: “ठीक है, ठीक है काका, चूस लो वह बेचारी अभी अधूरी है। समय मिलने पर बेचारी की चूत को भोसड़ा बना देना काका।“
"जल्दी जल्दी चूस कर मज़ा लो"
मुनीम ने उसका सिर हटाने की कोशिश की, लेकिन महक ने उसे अपनी चूत पर ही रखा। मुनीम को अपनी बेटी की चूत के होंठों पर जीभ फेरनी पड़ी और महक ने अपनी चूत के होंठ चौड़े करके अपनी चूत पूरी तरह खोल दी ताकि बाबूजी की जीभ अन्दर तक जा सके। मुनीम ने अंदर से चूसा। उसका मुँह और नाक चूत रस से भीग गए। कुछ देर बाद महक ने उसे छोड़ दिया, लेकिन फिर पूनम ने उसे अपनी चूत पर खींच लिया और अपनी जीभ से उसकी चूत साफ़ करवाई। जब वह दोनों के साथ समाप्त हो गया, तो उन्होंने एक-दूसरे को चूमा, अपने चेहरे धोए और ऐसे कपड़े पहने जैसे कुछ हुआ ही न हो। फिर भी वह लडकिया ने अब बाउजी के सामने उन दोनों की गांड के छेद से खेलती रही लेकिन अब मुनीम को इंटरेस्ट नहीं रहा था।
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आज के लिए बस इतना
बने रहिये कहानी के साथ
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