Incest Porn Kahani Rishta - Page 6 - SexBaba
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Incest Porn Kahani Rishta

अपडेट 26

रुचिका ने मोहनलाल को देखकर कहा 'मैं अब नए रिश्ते के लिए तैयार हु' और इस बात को पक्का करने के लिए उसने अपना हाथ मोहनलाल के हाथ पर रख दिया और उससे कहा की 'आप चिंता न करो किसी को भी नहीं पता लगेगा की मैं आपकी बीवी नहीं हु, बल्कि हर कोई आपकी तारीफ करेगा' फिर रुचिका ने अपने पर्स में से कुछ कुछ निकलकर अपना मेकअप ठीक करने लगी. फिर ट्रैन रुकने के बाद दोनों ट्रैन से नीचे आये और रुचिका ने मोहनलाल के हाथ को इस तरह से पकड़ा हुआ था जैसे की नै नवेली दुल्हन अपने पति का हाथ पकड़ कर चलती हो

दोनों चलते हुए बहार आये तू वंहा उनको लेने के लिए एक टैक्सी आयी हुई थी तू दोनों को ड्राइवर ने ग्रीट किया और उनका सामान रखा और दोनों टैक्सी में बैठकर उस होटल में पंहुच गए जंहा उनके नाम से बुकिंग थी. वो टैक्सी से उत्तरकार रिसेप्शन पर पंहुचे और उनका सामान एक वेटर लेकर आ गया.

रिसेप्शन पर पंहुच कर उन्हें उनके कमरे के बारे में बताया गया और लिफ्ट से वो दोनों कमरे में आ गए और वेटर उनका सामान छोड़ कर जाने लगा तू उससे मोहनलाल ने टिप दी और उसके जाने के बाद कमरे को अंदर से बंद कर दिया.

रुचिका तू पहली बार किसी होटल में आयी थी तू होटल जो की एक फाइव स्टार होटल था को देखकर उसकी आँखें चुंघियां गयी थी और जब कमरे में पंहुचती है तू उस कमरे को देखकर मन में सोचती है की क्या कमरा ऐसा भी हो सकता है क्योंकि वो आज तक अपने घर के कमरे को hi सबसे अच्छा मानती थी और वो इतनी सफाई पसंद थी की उससे अपने कमरे में सबकुछ स्पीक एंड सपं (बेदाग़ सफाई) रखती थी लेकिन ये कमरा तू उसकी उम्मीद से काम से काम सौ दर्जे बेहतर था.

इस तरह का कमरा तू उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था क्योंकि वो बेचारी तू 5 स्टार तू बहुत दूर की बात है कभी किसी छोटे होटल में भी नहीं गयी थी तू उससे अच्चम्भा होना तू अवश्यम्भावी था. वो कमरा बहुत बड़ा था जिसमे आप टहल भी सकते थे, हर सुख सुविधा से परिपूर्ण था, जिसमे किंग साइज का बीएड जिस पर 12 इंच मोठे गद्दे और उसपर बहुत hi शानदार चादर बिछी हुई थी और बहुत सरे तकिये लगे हुए थे, साइड टेबल्स उनपर बहुत बढ़िया लैम्प्स, कीमती सोफे सेंटर टेबल, बहुत बड़ी खिड़की जिनपर बहुत उत्तम क्वालिटी के परदे और बालकनी, बाथरूम, फ्रिज, 65 इंच एलसीडी टीवी, केतली, बहुत साडी टोकरियां जिनमे ड्राई फ्रूट्स, चॉकलेट्स, बिस्किट्स और बहुत कुछ था. बाथरूम में हर तरह की सुविधा, कई तरह के साबुन, शैम्पू और ब्यूटी ट्रीटमेंट्स के लोशन्स. ये सब देखकर तू रुचिका ने मन में सोचा की उसने सही फैसला किया की वो अपने पापा की पत्नी बनकर आयी है, ये ख्याल आते hi उसके मन में गुदगुदी होने लगती थी. अभी वो कमरे की खूबसूरती में खोयी हुई थी की दूर पर नॉक हुआ तू मोहनलाल ने देखा की वेटर उनके लिए अनार का जूस लेकर आया है और बोलै की 'वेलकम ड्रिंक' और रखकर चला गया.

उसके जाने के बाद मोहनलाल ने रुचिका से पूछा 'कैसा लगा' तू उसने कहा 'बहुत hi अच्छा, मैं तू यह सोच रही हु की क्या कमरा ऐसा भी होता है, ये तू लाजवाब है"

उसकी बात सुनकर मोहनलाल ने उसके चेहरे पर आयी ख़ुशी को देखा तू कहा "चलो अच्छा है की मेरी बीवी को कमरा पसंद आया, यह तू अभी शुरुआत है और अब तुम मजे लेने के लिए तैयार हो जाओ"

उसके बाद मोहनलाल उसका हाथ पकड़कर उससे सोफे पर बैठ कर जूस का गिलास लाया और उसके मुंह से लगाकर उसे सिप करने का इशारा किया तू उसने सिप लिया और फिर गिलास को मोहनलाल के मुंह की तरफ लेजाकर उसको पीने के लिए कहा लेकिन मोहनलाल ने उसके हाथ के ऊपर हाथ रखकर गिलास को रुचिका के मुंह की तरफ वापिस लेजाकर उसे पीने के लिए कहा तू उसने अपने मुंह को हटा लिया तू मोहनलाल ने अपने दूसरे हाथ से उसका चेहरा पकड़कर बड़े प्यार से कहा "मेरी बीवी को इसकी जरुरत ज्यादा है"

रुचिका मुस्कराते हुए 'आप तू कह रहे थे की पति पत्नी में कोई फरक नहीं होता तू सिर्फ मैं hi क्योँ लू'

मोहनलाल ने उसके गाल को सहलाते हुए 'यही तू मैं कह रहा हु की तुमने लिया या मैंने लिया, बात तू एक hi है' और आँखों से इशारा करते हुए उससे पीने के लिए कहा तू रुचिका ने जूस के गिलास पर मुंह लगाकर बड़े प्यार से कनखियोँ से मोहनलाल को देखते हुए सिप करने लगी और जब कोई एक चौथाई बच गया तू रुचिका ने अपना मुंह हटा लिया और ज़िद करके गिलास को मोहनलाल के मुंह से लगा दिया. मोहनलाल ने रुचिका का हाथ पकड़े पकड़े hi पीने लगा और जूस पीते हुए वो बहुत hi प्यार भरी नजरो से रुचिका को देख रहा था, जिसका ताव रुचिका न ला पाई और आँखों की पलके झुका ली, लेकिन उसका मन अब मोहनलाल को देखने का कर रहा था तू उसने अपनी कनखियोँ से उससे देखा तू वो उससे hi देख रहा था. ये जानकर उसने अपनी पलके फिर झुका ली और थोड़ी थोड़ी देर बाद वो मोहनलाल को देखती तू वो हर वक़्त उससे hi देख रहा होता तू उसके दिल की धड़कन बढ़नी शुरू हो गयी थी.

रुचिका को उसके इस तरह देखते रहने से शर्म भी आ रही थी लेकिन मोहनलाल था की अपनी नज़रे उसके चेहरे से बिलकुल हटा नहीं रहा था तू रुचिका वंहा से कड़ी होकर जाने लगी तू मोहनलाल ने उसका हाथ छोड़ा hi नहीं और उससे वापिस बैठने के लिए कहा तू रुचिका ने अपनी झेंप मिटने के लिए कहा 'जूस लेकर आती हु' तब मोहनलाल ने सीरियस होते हुए उससे बैठने को कहा तू रुचिका पता नहीं क्या सोचकर बैठ गयी तू मोहनलाल ने उसका दूसरा हाथ भी अपने हाथ में लेकर पूछा 'क्या तुम वाकई मेरी पत्नी बनकर लोगों के सामने आना चाहती हो'

रुचिका 'क्या अब भी इस बात का कोई मतलब है'

मोहनलाल 'हाँ, बिलकुल है, क्योँकि अभी तक तुम्हारे बारे में कोई नहीं जनता, लेकिन मैंने तुम्हे एक बार ये कह कर इंट्रोडस करवाया की तुम मेरी वाइफ हो तू ये ओने वे ट्रैफिक है, फिर चाहे कुछ भी हो जाये हम दोनों hi इस बात से इंकार नहीं कर पाएंगे की हम पति पत्नी नहीं हैं'

रुचिका 'हम होटल वालो को तू बता hi चुके हैं की हम पति पत्नी हैं'

मोहनलाल 'होटल वालो को सिर्फ ये पता है की हम कपल बनकर आये हैं, लेकिन अभी तक उनको हमारे रिश्ते के बारे में नहीं पता. तुम अगर कहो तू मैं अभी जाकर उनको बता दूंगा की तुम मेरी बेटी हो और जो भी खर्चा होगा उसका 50% उनको दे दूंगा'

रुचिका 'पहली बात की तीन दिन का खर्चा कितना होगा और दूसरा क्या वो मान जायेंगे की आप अपनी बेटी के साथ फ्री वाले कमरे में रहो'

मोहनलाल 'तीन दिन का आधा खर्चा काम से काम 25 हज़ार होगा और दूसरी बात के लिए उनसे बात करनी पड़ेगी'

रुचिका 'ये तू बहुत महंगा है'

मोहनलाल 'ये भी डिस्काउंटेड रेट है नहीं तू रेट डबल होता, तुम खर्चे की चिंता न करो बल्कि ये सोचो की तुम क्या चाहती हो'

रुचिका 'मुझे तू एन्जॉय करना है, लेकिन इतना खर्चा सोचकर hi मेरा एन्जॉयमेंट ख़तम हो जाता है और मैं अपने आप को कुलप्रीत समझने लगाती हु'

मोहनलाल 'देखो अपने आप को दोषी मत मनो और तुम यही बैठो मैं बात करके आता हु और पैसे की बिलकुल चिंता न करो, वो तू हम और कमा लेंगे'

रुचिका 'नहीं, मैंने डीडे कर लिया है की मैं अब आपकी पत्नी बनकर hi लोगों से मिलूंगी, चाहे कुछ भी हो जाये, पीछे नहीं हटूंगी'

मोहनलाल 'रुचिका तुम इस सब का मतलब समझ नहीं रही हो'

रुचिका 'मैं सोच समझ कर hi कह रही हु'

मोहनलाल 'फिर कनिह कपल की डेफिनिशन की पहले की तरह समझ आ गया है और बाद में पछताना पड़े'

रुचिका 'मैं तू तैयार हु, अगर आपको मुझे वाइफ कहने में कोई तकलीफ है तू बात दूसरी है'

मोहनलाल 'मुझे तकलीफ इस बात से होगी की कहीं तुम बाद में दुखी न हो जाओ. मैं तुम्हे किसी भी हालत में दुखी नहीं देख सकता उसके लिए चाहे मुझे पूरी दुनिया से hi क्योँ न लड़ना पड़े'

रुचिका मोहनलाल की बात सुनकर बहुत भावुक हो गयी और अपनी बांहे मोहनलाल के गले में डालकर उससे चिपक गयी और बड़े प्यार से कहने लगी 'आप मुझे इतना प्यार करते हो' उसकी बात सुनकर मोहनलाल के मुख से निकला

'इतना प्यार तू मैंने खुद से भी नहीं किया जितना तुम से हो गया है'

रुचिका ने जैसे hi मोहनलाल की बात सुनी तू उसने मोहनलाल के गले में जो बांहे डाली हुई थी उससे उसका चेहरा अपनी तरफ करके और जोर से कास लिया. ऐसा करने से दोनों इतने नजदीक हो गए की एक दूसरे की साँसों को सुन सकते थे. रुचिका के उभारों ने मोहनलाल को बहकाने पर मजबूर कर दिया फिर भी उसने बस इतना hi किया की अपने हाथों को उसकी पीठ पर लेजाकर कास लिए और उससे ये हुआ की रुचिका के उभर तू मोहनलाल की छथि में धंस hi गए और उसके नरम नरम गालों ने पहली बार मोहनलाल के सख्त गलों का स्पर्श किया तू दोनों को एक झटका लगा और अपने गलों को थोड़ा सा पीछे करते हुए उखड़ती हुई साँसों से इतना hi कहा 'मुझे कोई तकलीफ नहीं होगी और आप मुझे अपनी वाइफ की तरह इंट्रोडस करवा सकते हैं'

मोहनलाल 'ये तुम्हारा आखिरी फैसला है'

रुचिका 'बिलकुल अब इस में कोई गुंजाईश नहीं है'

मोहनलाल उसकी पीठ को सहलाते हुए 'तू ठीक है फिर चलो तैयार हो जाओ और तुम्हे अपनी वाइफ बनाते हैं'

रुचिका 'क्या मैं आपकी वाइफ नहीं लगाती'

मोहनलाल उसकी पीठ को सेहला रहा था तू एक बार फिर से उसके हाथों को ब्रा के स्ट्राप का एहसास हुआ तू इस बार उस हिस्से को अच्छे से सहलाते हुए उसके कान के पास अपने मुंह को लेजाकर 'तुम खूबसूरत हो, लेकिन मेरी वाइफ को सबसे जयादा खूबसूरत लग्न चाहिए, इसलिए चलो तुम्हारा हुलिया बदलते हैं'

मोहनलाल ने रिसेप्शन पर फ़ोन करके टैक्सी के लिए बोलै तू कहा गया की नीचे आ जाइये तू उसने रुचिका को कहा 'चलो' और फिर वो दोनों नीचे आये तू रिसेप्शन पर कहा गया की 'आप बैठए, टैक्सी आ रही है'. वो दोनों आकर वंहा पड़े सोफे पर जाकर बैठ गए और दोनों ने एक दूसरे का हाथ पकड़ा हुआ था.

वो दोनों वेट कर hi रहे थे की एक आदमी वंहा पर रिसेप्शन पर लड़ रहा था तू पता लगा की उसका भी फ्री कपल टूर था और वो अपनी बहिन के साथ आ गया और उसने ये बात बताई तू होटल वालो ने कहा की उनको कपल वाला रूम नहीं मिल सकता और फ्रेश बुकिंग करनी पड़ेगी. उसने जब चार्जेज पूछे तू पता लगा की 3 दिन का पैकेज दो लोगों के लिए करीब एक लाख का था तू उसने कहा की रेट तू काम था, तू पता लगा की पहले से हुई बुकिंग पर डिस्काउंट था, लेकिन उससे नै बुकिंग पुरे रेट पर करनी पड़ेगी. वो कह रहा था की पुराणी बुकिंग का 50% दे देगा तू होटल वो ने साफ़ साफ़ मन कर दिया और कहा की आप अपनी वाइफ के साथ आइये तू कोई भी चार्ज नहीं है.

उसकी और होटल वाले की बातें उन दोनों के कानो में पद रही थी और जैसे जैसे बात समझ आ रही थी तू रुचिका का मोहनलाल की वाइफ बनने का निर्णय पक्का होता जा रहा था और उसने अपने दांये हाथ को मोहनलाल के बांये हाथ के नीचे से निकलकर उसकी बाजु को कसकर पकड़ लिया तू उसका दांया उरोज मोहनलाल की बाजु पर धंस रहा था. वो ये इसलिए कर रही थी की वंहा पर जो भी बैठा हो तू यही समझे की वो दोनों कपल हैं. मोहनलाल को रुचिका का इस तरह करना एक सुखद एहसास हो रहा था.

तभी एक आदमी आया और उसने 3 दिन के प्रोग्राम का एक पेपर दिया और ये कहा 'सर कल शाम को कपल्स के लिए स्पेशल प्रोग्राम है और उसके लिए ड्रेस कोड इस पेपर पर लिखा हुआ है' तू आप ेंसुरे कर लीजिये की वो ड्रेस आपके पास है नहीं तू उस प्रोग्राम में एंट्री नहीं होगी. ये कहकर वो चला गया.

टैक्सी से वो एक बड़े से मॉल में आ गए और वंहा पर सबसे पहले एक ब्यूटी पार्लर का पता किया और रुचिका को मेकओवर के लिए वंहा छोड़ दिया और मोहनलाल मॉल में घूमते हुए वंहा की दुकानों का निरिक्षण कर रहा था तू एक अच्छी सी गारमेंट्स की दूकान पर जाकर उस ड्रेस के बारे में पूछा तू वंहा की सलेसगिरल ने कहा की मिल जाएगी और साइज पूछने लगी तू बेचारे मोहनलाल को कैसे पता होता. उसने सलेसगिरल से कहा की अभी उसकी वाइफ आएगी, वो थोड़ी शाय है तू आप उसकी मदद कर देना, तू उस सलेसगिरल ने आश्वासन दिया की वो ड्रेस फाइनल करा देगी और जब उसने इनरवेअर के लिए पूछा तू मोहनलाल ने उससे कहा की आप मेरी हेल्प कीजिये और मेरी वाइफ को समझा कर उससे hi ये सब लेने के लिए ेन्सॉरगे करना है और जो ठीक लगे उससे लेने के लिए कहना है और इतना कहकर उसने सलेसगिरल को अच्छी सी टिप दी तू वो खुश हो गयी और बोली 'सर आप चिंता न करो, मैं सब संभल लुंगी'

मोहनलाल वंहा से निकलकर एक ज्वेलरी शॉप में गया और वंहा से खरीददारी के बाद वो वापिस ब्यूटी पार्लर गया और रुचिका को देखा तू उससे विश्वास hi नहीं हुआ की वो रुचिका hi है, वो बहुत hi खूबसूरत लग रही थी. मोहनलाल ने उसकी तारीफ की तू वो ख़ुशी से फूली नहीं समां रही थी और उससे पहली बार ऐसा लग रहा था की खुद को खूबसूरत बनाने के लिए भी म्हणत करनी पड़ती है.

मोहनलाल ने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ लेजाकर उस गारमेंट्स की दूकान पर ले गया और वंहा पर जैसे hi अंदर गए तू वही सलेसगिरल उनके पास आयी और कहा 'मई ी हेल्प यू' तू मोहनलाल ने उससे कहा की 'मेरी वाइफ के लिए कुछ अच्छी सी ड्रेस दिखाए', रुचिका के चेहरे पर मुस्कान थी की उससे नयी ड्रेसेस मिलाने वाली है और वो भी बहुत बड़े स्टोर से.

सलेसगिरल उन्हें एक काउंटर पर ले गयी और पूछा 'कोई पर्टिकुलर ड्रेस' तू रुचिका ने कहा 'सूट दिखाइए' तू वो सूट दिखाए उससे पहले hi मोहनलाल ने उससे थीम ड्रेस के बारे में पूछा तू सलेसगिरल ने कहा 'सर मिल जाएगी आप साइज बताइये' तू मोहनलाल ने रुचिका की और इशारा किया तू सलेसगिरल ने मज़े लेते हुए कहा 'क्या सर आपको आपकी वाइफ का साइज भी नहीं पता'

सलेसगिरल ने तू वो बात बहुत hi नार्मल तरीके से कही थी लेकिन उस बेचारी को क्या पता था की ये दोनों पति पत्नी नहीं, बल्कि बाप बेटी हैं और उसकी इस बात ने उन दोनों को ऐसी स्थिति में ला दिया था की दोनों को बहुत शर्म आने लगी.

रुचिका ने तू अपना चेहरा hi झुका लिया क्योँकि उसने तू इस तरह की सिचुएशन के बारे में अपने आप को तैयार hi नहीं किया था. मोहनलाल ने हिम्मत करते हुए सलेसगिरल से कहा 'आप इनका नाप ले लीजिये और उसके हिसाब से ड्रेस दे दीजिये'

सलेसगिरल इंची टेप लेकर उसका माप लेने के लिए उसने रुचिका से दुपट्टा हटाने के लिए कहा तू रुचिका उससे कहने लगी 'सेपरेट रूम नहीं है'

सलेसगिरल उससे चेंजिंग रूम में ले गयी और उसका माप लेने लगी तू जान भुजकर टेप को टाइट करके उसकी चूचियों को दबाया तू रुचिका के मुंह से 'आह' निकला तू सलेसगिरल ने कुटिल मुस्कान से कहा 'मैडम अगर अपने पति को रिझाना है तू थोड़ा सा टाइट नाप ले लू, जिससे आपकी चूचियां उभरकर दिखाई देने लगेंगे और आपका पति आप पर लट्टू हो जायेगा' तू रुचिका ने बस इतना hi कहा 'नहीं, बस नार्मल hi माप लो' तू सलेसगिरल ने उससे कहा 'मैडम आपके बूब्स की शेप बहुत hi बढ़िया है, परफेक्ट शेप में हैं और ऐसे बूब्स बहुत hi काम लेडीज के होते हैं, मेरा आप को सुझाव है की आप थोड़ी सी टाइट फिटिंग की ड्रेस लेंगी तू आप पर वो बहुत अच्छी लगेगी और आप कुछ जयादा खूबसूरत दिखाई देंगी'

रुचिका 'टाइट फिटिंग से उनकंफर्टबले होगा, इसलिए नार्मल साइज hi लो' तब सलेसगिरल ने उससे सुझाव दिया 'मैडम मेरी बात अगर मनो तू आप नार्मल साइज ले लो, लेकिन एक ड्रेस काम से काम थोड़ी टाइट ले लो और फिर देखना की उस ड्रेस में आपका पति आप के आगे पीछे कैसे घूमेगा'

रुचिका दुविधा में आ गयी तू उसने कुछ सोचकर उससे एक ड्रेस टाइट लेने के लिए हाँ कर दी. उसके बाद सलेसगिरल ने उसकी कमर और जब हिप्स का माप लेने लगी तू यंहा भी उसके नितम्बों को अच्छे से हाथों से सेहला लिया और उसके नितम्बों के बीच की लाइन पर उंगलियां भी फेर ली जिससे रुचिका को नशा छाने लगा. सलेसगिरल ने माप लेकर उसकी बहुत तारीफ की और उससे अच्छी वाली इनरवेअर लेने का भी सुझाव दिया और कहा 'मैडम आप इतनी खूबसूरत है और आपका फिगर एकदम परफेक्ट है, आपको तू कोई मॉडल होना चाहिए था, आप ये पुराने ज़माने की ब्रा पहनाने छोड़ दीजिये'

रुचिका 'मेरी ब्रा अच्छी तू है और कम्फर्टेबले भी' सलेसगिरल को लगा की शायद वो नाराज हो गयी तू उसने बड़ी चापलूसी से कहा 'मैडम मैं ये नहीं कह रही की आपकी ब्रा अच्छी hi नहीं है, मैंने तू बस इतना सुझाव दिया है की मॉडर्न ज़माने में ऐसी ब्रा आजकल की साधारण लेडीज भी नहीं पहनती और आप तू बहुत स्पेशल है. मेरे पुरे करियर में मैंने .आप जैसी खूबसूरत लेडी नहीं देखि है. मेरा काम तू सुझाव देना है, बाकि आपकी मर्जी'

रुचिका ने उसकी बात सुनकर अपने आप पर नाज़ करने लगी और करे भी क्योँ नहीं. तारीफ hi तू हर लेडी की कमजोरी होती है तू उसने कहा 'ठीक है, लेकिन एक रिक्वेस्ट है की मुझे इनरवेअर अकेले में दिखाना' सलेसगिरल ने मुस्कराते हुए कहा 'मैं समझ गयी आप अपने पति से बहुत शर्माती हो, अरे उनसे क्या शर्माना, ये शरीर उनके लिए hi तू है, अगर वो इसका मज़ा नहीं लेंगे तू कौन लेगा. आप उनसे शर्माना छोड़िये और अपने शरीर के जलवो से उनको बांध कर रखिये, नहीं तू पता नहीं कब दूसरी औरत के चक्कर में पद गए तू आपके आशियाने से उड़द जायेंगे और फिर आपको जयादा दिक्कत होगी'

रुचिका ने उसकी बात सुनी और उससे कहा 'सब ठीक है, लेकिन अभी आप मुझे अकेले में hi दिखाना' और सलेसगिरल बस मुस्करा दी और जब चेंजिंग रूम से बहार आने लगे तू रुचिका दुप्पट्टा उड़ने लगी तू सलेसगिरल ने कहा 'मैडम आप इसके बगैर जयादा खूबसूरत लगाती हैं, तू उससे न ूड़िये' , रुचिका ने उसकी तरफ देखा और स्माइल देते हुए कहा 'मुझे शर्म आती है' तब सलेसगिरल ने कहा 'मैडम अपने पति से भी क्या शर्माना, अपना खजाना उन्हें नहीं दिखाओगी तू किसको दिखाओगी'

रुचिका उसकी बात सुनकर एकदम से शर्मा गयी और फिर उसने बस इतना hi कहा 'आज नहीं, फिर कभी'. ये कहकर दोनों बहार आ गए और सलेसगिरल ने मोहनलाल से कहा 'सर यू अरे वैरी लकी तो हैवे सुच ा ब्यूटीफुल वाइफ, इनकी फिगर लाजवाब है, इन्हे तू कोई मॉडल होना चाहिए था'
 
अपडेट 27

रुचिका उसकी बात सुनकर एकदम से शर्मा गयी और फिर उसने बस इतना hi कहा 'आज नहीं, फिर कभी'. ये कहकर दोनों बहार आ गए और सलेसगिरल ने मोहनलाल से कहा 'सर यू अरे वैरी लकी तो हैवे सुच ा ब्यूटीफुल वाइफ, इनकी फिगर लाजवाब है, इन्हे तू कोई मॉडल होना चाहिए था'

मोहनलाल 'यह बात तू आप बिलकुल सही कह रही हैं की मुझे बहुत hi खूबसूरत वाइफ मिली है, अब आप मेरी वाइफ को ये थीम ड्रेस और जो भी अच्छी ड्रेसेस इन्हे पसंद आएं जल्दी से दे दीजिये' सलेसगिरल 'सूरे सर, आप चिंता न करें, आप की वाइफ को अच्छी से अच्छी ड्रेसेस दिखूंगी'

इसके बाद उसने रुचिका को काफी साडी ड्रेसेस दिखाई, जिसमे से कुछ ड्रेसेस अलग कर ली तू सलेसगिरल ने उससे तरय करने के लिए कहा तू रुचिका ने ट्रायल रूम में जाकर तरय की और फिर उससे बात करके कुछ साइज चेंज करवाया और फिर वंहा से ड्रेसेस फाइनल कर ली. अब उससे इनरवेअर लेने के लिए सलेसगिरल अलग ले गयी और जो भी उसने पसंद किया लेकर उससे पैक करवाया और बिल पाय करके जब वे बहार आने लगे तू एक बार फिर से मोहनलाल ने सलेसगिरल को टिप दी और थैंक्स कहा तू उसने अपना नंबर दे दिया और कहा की थीम ड्रेस कल मिलेगी.

वंहा से बहार आते हुए दोनों बाप बेटी जो की अब पति पत्नी बनकर घूम रहे थे तू इस तरह शुरू में hi उनको ये सब फेस करना पड़ेगा जो उनकी सोच से परे था, इसलिए चुप थे और मॉल में चले जा रहे थे और एक दूसरे की नजरो से बचते हुए. मोहनलाल को एक फुटवियर की शॉप दिखाई दी तू उसने रुचिका का हाथ पकड़ लिया और उससे फुटवियर की दुकान के अंदर ले गया और वंहा पर सेल्समेन से कहा 'मैडम के लिए फुटवियर दिखाए'

रुचिका 'फुटवियर की जरुरत नहीं है'

मोहनलाल ने आँखों से उससे तस्सली देते हुए 'जरुरत है'

सेल्समेन ने उन्हें बैठने के लिए कहा और साइज के लिए पेअर को मासुरिंग स्टैंड पर रखने के लिए कहा तू रुचिका ने जैसे hi पेअर को स्टैंड पर रखा तू मोहनलाल उसके इतने गोर पेअर की खूबसूरती को देखकर उसको कुछ कुछ होने लगा लेकिन दूकान में उससे किसी को उसकी भावनाओं को भी शो नहीं होने देना था तू वो बस रुचिका के पास बैठ गया और फिर सेल्समेन ने कई तरह के फुटवियर दिखाए, जैसे फ्लैट, फ्लॉप, हाई हील, कोन हील, अंकल हील और पता नहीं क्या क्या.

जब इतने सरे फुटवियर देखे तू रुचिका ने मन में सोचा की क्या फुटवियर भी अलग अलग तरह के होते हैं, उसके लिए तू फुटवियर का मतलब को ह और hi था तू उसने मोहनलाल से पूछा की 'कौन सा लू, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा' मोहनलाल ने उससे कहा 'पहनकर और चल कर देखो की कौन सा कम्फर्टेबले है'

रुचिका ने कई तरह की फुटवियर पहनकर देखे, उसको सब एक से बढ़कर एक अच्छे लग रहे थे और सोच रही थी की कौन सी लू. तभी उसने हाई हील्स पहनकर चलकर देखा तू उसके नितम्ब पीछे को निकल गए और जब चल रही थी तू उसके नितम्ब ऊपर नीचे होकर मोहनलाल के दिल की धड़कन को ऊपर नीचे कर रहे थे. वो लम्बी तू पहले से hi थी और हाई हील्स पहनकर उसकी हाइट मोहनलाल के बराबर हो रही थी और उसका दिल कर रहा था की उसको भी ले ले.

मोहनलाल ने पूछा की कौन कौन सी पसंद आयी तू उसने बस इतना hi कहा 'मैं तू कन्फ्यूज्ड हु, आप hi बताओ', तब उसने कहा 'तुम्हे जो जो पसंद हैं वो बताओ, मैं उनमे से चूसे कर दूंगा'

रुचिका ने 4 जोड़ी फुटवियर जिसमे हाई हील्स भी थी, अलग करके बताया की ये पसंद हैं तू मोहनलाल ने उन सबको पैक करने के लिए बोल दिया तू रुचिका खुश हो गयी और उसने मोहनलाल को 'थैंक्स' कहा तू मोहनलाल ने बहुत hi उदासीनता से कहा 'कोई बात नहीं'

रुचिका को लगा की मोहनलाल उससे नाराज़ हो गया क्योँकि उसने 4 जोड़ी ले लिए, इसलिए उसने कहा की एक hi ले लेते हैं. उसकी बात जैसे hi मोहनलाल को समझ आयी तू वो मुस्करा दिया और कहा 'मेरी बीवी को 4 तू क्या और भी पसंद हैं तू और ले लो'

रुचिका उसकी बात सुनकर परेशान हो गयी की मोहनलाल ने उदासीनता क्योँ दिखाई थी, समझ न आने पर चुप हो गयी. वंहा से निकलकर वो एक कास्मेटिक की दूकान पर गए और मेकअप का लेटेस्ट सामान लिया और रुचिका ने कुछ सलेसगिरल के कान में पैक करने के लिए कहा जिससे मोहनलाल ने नज़र अंदाज कर दिया.

अब समस्या ये थी की सामान काफी हो गया था और अगर होटल तक चला भी गया तू वंहा से घर कैसे जायेगा.

मोहनलाल ने सोचा की एक सूटकेस ले लेते हैं जिससे सारा सामान आसानी से चला जायेगा, इसलिए वो रुचिका को लेकर एक दूकान पर जाकर सूटकेस दिखने के लिए कहा तू उसने पूछा की इसकी क्या जरुरत है तू मोहनलाल ने मुस्कुराते हुए कहा 'मेरी प्यारी बीवी के लिए' और उसके बाद वंही से रुचिका की पसंद का एक लेडीज बैग भी लिया तू रुचिका खुश हो गयी और उसने फिर से थैंक्स कहा तू मोहनलाल ने मुंह बना लिया. इस बार रुचिका ने पूछ hi लिया तू मोहनलाल ने उसके सर पर हाथ फेरते हुए बस इतना hi कहा 'खुद को थैंक्स नहीं बोलते' तू रुचिका को जब बात समझ आयी तू मुस्करा दी

फिर वो सारा सामन उस सूटकेस में रखकर वापिस होटल आ गए और मोहनलाल ने कहा "डिनर यंहा करोगी या दिंनिंग हॉल में चले' तू रुचिका ने कहा 'मैं दिंनिंग हॉल देखना चुंगी, इसलिए वंहा चलते हैं, बाकि आपकी मर्जी'

मोहनलाल 'रुचिका, मुझे वंहा जाने में कोई प्रॉब्लम नहीं है, लेकिन मैं नहीं चाहता की तुम्हे जयादा लोगों से अपनी वाइफ कहकर इंट्रोडस करवाऊं, इसलिए मेरी राइ है की खाना यही माँगा लेते हैं'

रुचिका उसकी बात सुनकर थोड़ी उदास हो गयी और उसके चेहरे पर ये उदासी साफ़ साफ़ नज़र आ रही थी और वो जाकर सोफे पर बैठ गयी और सर झुककर उसने बस इतना hi कहा 'आपकी जो इच्छा हो वैसे कर लीजिये'

मोहनलाल उसकी उद्दासी बर्दाश्त नहीं कर पाया, करता भी कैसे, उसने बेटी मानते हुए कभी उसकी बात नहीं ताली थी, आज तू वो वाइफ के रोले में थी, इसलिए उसके पास जाकर उसके सर पर बड़े प्यार से हाथ फेरते हुए ' देखो उदास न हो, मैं तुम्हे दुखी नहीं देख सकता, लेकिन शायद तुम समझ नहीं रही हो की हम जब लोगों से पति पत्नी बनकर मिलते हैं तू बहुत साडी बातें जो सिर्फ पति पत्नी के बीच hi हो सकती हैं वो उन लोगों के लिए नार्मल हैं, लेकिन हम दोनों चाहे पति पत्नी की तरह लोगों के सामने जाएँ, लेकिन असल में तू हम दोनों बाप बेटी हैं और नहीं चाहता की तुम बार बार ऐसी सिचुएशन का सामना करो जिसमे तुम्हे शर्मिंदा होना पड़े. मैं इसलिए ये बात कह रहा हु'

रुचिका मोहनलाल की बात सुनकर सोच में पद गयी. उससे याद आया की सलेसगिरल ने कहा था की 'पति को पत्नी का साइज नहीं पता, ऐसे कैसे हो सकता है'. ये बात हम दोनों के लिए hi आपर्टेशित थी और दोनों को बहुत शर्म आ रही थी, ये याद आते hi उससे समझ आया की उसके पापा क्या कहना छह रहे हैं और अब उससे शर्म भी आने लगी की जो बाप बेटी में अनुचित है, वो पति पत्नी के लिए साधारण सी बात है. उसके पापा ने उससे बहुत बार समझाया था की पति पत्नी वाला रोले करना आसान नहीं है, यंहा आने के बाद भी समझाया था की ये ओने वे ट्रैफिक है, लेकिन मैं नहीं मणि थी. अब क्या करूँ?

रुचिका के दिमाग़ ने काम करना hi बंद कर दिया क्योँकि अब वापिस फैसले को बदलना मुमकिन नहीं था. उसने नीचे रिसेप्शन पर उस आदमी को लड़ते हुए देखा था जिसने पहले hi बता दिया था की वो अपनी बहिन के साथ आया है तू उसको करीब एक लाख का नुक्सान हो रहा था. अगर अब वापिस बाप बेटी बनते हैं तू सिर्फ बेइज्जीति hi नहीं बल्कि जेल भी हो सकती है. उसके दिमाग़ में ये आते hi उसने निर्णय ले लिया की अब वाकई ओने वे ट्रैफिक में है और अब जो होगा देखा जायेगा और मैं सिर्फ और सिर्फ इनकी वाइफ हु, बेटी नहीं. अगर कोई ऐसी सिचुएशन आयी जो परेशानी भरी हो तू भी मैं इनकी किसी भी कीमत पर बेटी नहीं बल्कि वाइफ हु और मुझे इनसे भी कहना पड़ेगा की मैं आपकी वाइफ हु.

रुचिका अपनी सोचो में डूबी हुई थी तू की मैं तू वाइफ बनने के लिए तैयार हो रही हु, लेकिन बात कुछ और तू नहीं है. उसके मन में कई तरह के ख्याल आ रहे थे की तभी मोहनलाल ने कहा 'उदास न हो, अगर मन है तू दिंनिंग हॉल में चलते हैं'

रुचिका ने सर उठाते हुए 'नाराज़ इसलिए नहीं हु की दिंनिंग हॉल में जाना है की नहीं, बल्कि इसलिए हु की आप बार बार मुझे दुविधा में दाल देते हो'

मोहनलाल 'बीटा मैंने तुम्हे कब दुविधा में डाला'

रुचिका 'आप करते भी हो और कहते हो की मैंने कब किया'

मोहनलाल 'बीटा मैंने ऐसा क्या कर दिया जो मुझसे नाराज हो रही हो'

रुचिका 'आप बताओ, जब ये डीडे हुआ था की हम दोनों टूर ख़तम होने तक सिर्फ और सिर्फ पति पत्नी हैं तू आप बार बार मुझे बेटी बोलते हो और हर बार मुझे समझने की कोशिश करते हो की हम कपल नहीं बल्कि बाप बेटी बनकर टूर को एन्जॉय करें. इतना hi नहीं बाप बेटी बनने के लिए एक लाख का नुक्सान भी सहने को तैयार हो जाते हो. अब आप hi बताओ की जब मैं अपने आप को समझा लेती हु की मैं आपकी अब बेटी नहीं बल्कि वाइफ हु तू आप हो की मुझे फिर उसी तरफ धकेल देते हो.

मैं बिलकुल समझ गयी हु की आप यंहा अकेले आना चाहते थे, मैं तू जबरदस्ती आपके गले पद गयी हु तू आप पहले ये चाहते थे की मैं वापिस चली जॉन, जा रही थी तू आपने कहा की अकेले जाना ठीक नहीं है और दूसरे होटल में जाने का बहाना बना दिया और फिर आपने जानभूझकर यंहा ले आये. आप शुरू से hi चाहते थे की मैं कमरे में बंद राहु और आप जैसे पहले एन्जॉय करते थे उसी तरह अब भी मेरे होते हुए सबको कहोगे की आप अकेले हैं. मैं क्या समझती नहीं आपकी इन बातों को की आपने मुझे काफी साडी शॉपिंग करा दी ताकि मैं खुश हो जॉन और अब लगे हुए हैं की मैं आपकी बात मान लू और इस कमरे से बहार न जॉन. ये सब आपकी प्लानिंग है की अच्छे से शॉपिंग के एहसान टेल दबाकर और बाप बेटी के रिश्ते का इमोशनल ब्लैकमेल करके मुझे इस कमरे में कैद कर दो, मैं सब समझती हु'

इतना कहकर रुचिका वंहा से उठी और जाकर बीएड पर लेत गयी और गुस्से में कहा 'जाइये आप मैं अब इस कमरे से तीन दिन बाद hi निकलूंगी और आप को बिलकुल भी किसी चीज़ के लिए नहीं कंहूगी'
 
गुड पॉइंट.

वेल there's अब्सोलुतेल्य बैलेंस, होवेवेर मोहनलाल रुचिका part इन थे फ्लैशबैक इस फाइंडिंग मोरे स्पेस एंड लेस्स स्पेस इस गिवेन तो थे प्रेजेंट.

यू वोउल्ड सी आदित्य संध्या part इस प्रेजेंट एंड इस गेटिंग थे रिक्वायर्ड स्पेस.

वेल आदित्य संध्या एपिसोड्स वोउल्ड बे तेरे इंटेरेटेन्टलय, बूत इन लैसर नंबर तो कवर थे फ्लैशबैक एंड ब्रिंग थे स्टोरी तो प्रेजेंट टाइम.

स्टे कनेक्टेड

थैंक्स सो मच
 
डिअर फ्रेंड्स,

थिस स्टोरी है फ्लैशबैक अस वेल अस प्रेजेंट.

स्टोरी ात प्रेजेंट इस रनिंग इन फ्लैशबैक व्हिच फीचर्स मोहनलाल एंड रुचिका मोस्टली.

आदित्य एंड संध्या अरे प्रेजेंट.

ी ऍम गेटिंग कांस्टेंट रिक्वेस्ट्स तहत बोथ पेयर्स शुड गेट इक्वल स्पेस.

िफ़ ी दो थिस, तेरे वोउल्ड बे प्रॉब्लम ऑफ़ तिमेलिने, सो आईटी वोउल्ड बे बेटर तहत टिल थे टाइम फ्लैशबैक एंड प्रेजेंट के तो थे शामे तिमेलिने, मोहनलाल एंड रुचिका वोउल्ड गेट मोरे स्पेस

होवेवेर िफ़ यू फील तहत तिमेलिने doesn't मटर थें बोथ पेयर्स कैन गेट स्पेस ात थे शामे टाइम, बूत इन माय ओपिनियन आईटी wouldn't बे राइट.

प्लीज सुग्गेस्ट ात थे एअरलीएस्ट सो तहत यू गेट गुड उपदटेस व्हिच कुड एंटरटेन यू.

थैंक्स
 
प्यारे मित्रों,

इस कहानी में दो जोड़ियां बन चुकी है और दोनों का अलग दृश्य प्रस्तुत किया जा रहा है.

एक जोड़ी भूतकाल में चल रही है और दूसरी वर्तमान में.

मोहनलाल और रुचिका की जोड़ी भूतकाल में होने की वजह से उसके दृश्ये जयादा प्रस्तुत किये जा रहे हैं ताकि वो भी वर्तमान में आ सके.

मुझे बहुत से निवेदन आये हैं की आदित्य और संध्या का दृश्य भी साथ साथ दिखाया जाये.

जंहा तक हो सकेगा दिखाया जायेगा, दोनों दृश्य साथ साथ चलने में थोड़ी समय की दिक्कत आ सकती है, जिससे आपका मज़ा ख़राब हो जायेगा.

कोशिश होगी की दोनों दृश्य जंहा तक संभव होंगे दिखाए जायेंगे.

बाकि आप सब से रिक्वेस्ट है की आप बताये की भूतकाल को ख़तम करके वर्तमान में आएं या समय की चिंता छोड़कर दोनों दिखाए जाएँ जो मुझे अच्छा तू नहीं लगेगा लेकिन आप की इच्छा सर्वोपरि.

कृपया बताये की आप क्या चाहते हैं.

धन्यवाद
 
अपडेट 28

इतना कहकर रुचिका वंहा से उठी और जाकर बीएड पर लेत गयी और गुस्से में कहा 'जाइये आप मैं अब इस कमरे से तीन दिन बाद hi निकलूंगी और आप को बिलकुल भी किसी चीज़ के लिए नहीं कंहूगी'

मोहनलाल तू रुचिका की बात सुनकर हक्का बक्का रह गया की वो क्या बोल गयी. उसको रुचिका की ऐसी सोच पर गुस्सा भी बहुत आ रहा था, लेकिन वो अपनी लाड़ली को कभी भी दुखी नहीं देख सकता था तू आज कैसे देखता.

उसके मन में कई तरह के विचार आ रहे थे लेकिन सबसे जयादा अहम् था की रुचिका दुखी न हो तू उसने अपने गुस्से और ईगो को एक तरफ करते हुए रुचिका को मानाने की सोची और वो रुचिका के पास जाकर उसके सर पर जैसे hi हाथ रखा तू उसने झटक दिया और कहने लगी 'आप को जंहा जाना है, जो करना है करिये, लेकिन मुझे अकेला छोड़ दीजिये' और वो रोने लगी.

मोहनलाल उसके रोने से और जयादा दुखी हो गया और एक बार फिर से उसके सर पर हाथ रखा तू उसने फिर से झटक दिया तू मोहनलाल ने बहुत hi संजीदगी से कहा 'लगता है तुमने मुझे गलत समझ लिया है, मेरी मंशा सिर्फ इतनी सी थी की तुम्हे कोई तकलीफ न हो बाकि तुम जैसा चाहोगी मैं वैसे hi करूँगा, बस चुप हो है'

रुचिका 'मुझे कुछ नहीं कहना, आप को जो अच्छा लगे, आप वो करिये और मुझे अब इन सब से कोई फरक नहीं पड़ता' इतना कहकर फिर से सुबकने लगी.

मोहनलाल को कुछ समझ नहीं आ रहा था तू उसने कहा 'ठीक है जैसी तुम्हारी मर्जी, लेकिन जरा ठन्डे दिमाग़ से सोचना की मैंने कोई गलती की है की नहीं और जब गुस्सा उत्तर जाये तू फिर बात करेंगे' और कहकर सोफे बैठ गया.

रुचिका सुबकती रही और उसके सुबकने की आवाज मोहनलाल के कानो में पड़ती तू उससे बहुत पीड़ा होती थी और उसका मन करता था की वो उससे मनाये लेकिन कैसे, उसका गुस्सा उतरने का नाम ले hi नहीं रहा था. कुछ देर ऐसे hi बैठे रहने के बाद उसने एक गिलास में पानी लिया और उसके पास जाकर 'मेरी प्यारी बीवी, उठ जाओ न'

रुचिका 'कौन बीवी, मैं तू आपकी बेटी हु'

मोहनलाल 'अब उठ भी जाओ और मैं तुम्हारी बात मानूंगा'

रुचिका 'मैं अब आपकी चिकनी चुपड़ी बातों में नहीं आने वाली और आपको मेरी कोई बात मैंने की कोई जरुरत नहीं है'

मोहनलाल ने उससे कहा की 'पहले पानी पि लो फिर बात करेंगे'

रुचिका 'मुझे पानी पीना होगा तू मैं पि लुंगी, आपको मेरे लिए कोई तकलीफ करने की जरुरत नहीं है'

मोहनलाल 'मुझे तू तकलीफ तब होती है जब तुम दुखी होती हो, अगर तुम चाहती हो की मैं दुखी न होऊं तू ये पानी पि लो'

रुचिका ने पता नहीं क्या सोचा लेकिन पानी ले लिया और पीने लगी और जब उसने पानी पि लिया तू गिलास लेकर मोहनलाल टेबल की तरफ जाते हुए 'थैंक्स'

रुचिका 'मैं पहले hi कह रही थी की आपका समझ hi नहीं आता, अभी बीवी बोल रहे थे और अब थैंक्स बोल रहे हो'

मोहनलाल 'सॉरी, सॉरी'

रुचिका के चेहरे पर मुस्कान आ गयी 'आपने प्रोवे कर hi दिया की आप और मैं कपल नहीं हैं'

मोहनलाल उसको मुस्कराते देखकर कहने लगा 'तुम्हारे चेहरे पर मुस्कान देखने के लिए तू कुछ भी कर सकता हु, थैंक्स और सॉरी तू इसलिए बोलै है'

रुचिका 'मतलब आपने थैंक्स और सॉरी मन से नहीं बोलै'

मोहनलाल 'बीवी को भी कोई ये सब बोलता है, तू मैं क्योँ बोलूंगा, वो तू तुम्हे खुश करने के लिए बोलै था'

रुचिका जो बीएड पर उठकर बैठी थी वो दौड़कर मोहनलाल के पास आयी और गले लग गयी और कहने लगी 'जब आपने कहा था की हम एक दोनों दो नहीं एक हैं तू फिर बार बार आप मुझे कंफ्यूज क्योँ करते हो'

मोहनलाल 'मेरा आशय सिर्फ इतना hi था की तुम दुखी न हो, अगर तुम्हे कोई तकलीफ नहीं तू मुझे क्या परेशानी होगी' और ये कहकर उसने भी रुचिका को अपनी बांहो में भर लिया तू उसकी चूचियां जो छाती से लगी हुई थी और उसको ऐसा लग रहा था की आज वो जैसे कुछ जयादा hi उसकी छाती पर फील हो रही थी तू उसके अरमान भड़काने लगे और उसके हाथ धीरे धीरे रुचिका की पीठ पर चलने लगे.

मोहनलाल के हाथो को अपनी पीठ पर उससे आज बहुत सुकून दे रहे थे, लेकिन उससे इसकी वजह नहीं पता लग रही थी. रुचिका के हाथ जो पहले से hi मोहनलाल की पीठ पर थे वो भी अपने आप ऊपर नीचे होने लगे. थोड़ी देर ऐसे hi चलता रहा, बीच बीच में दोनों एक दूसरे को कास लेते थे और फिर ढीला छोड़ देते थे, जैसे की एक दूसरे को सुकून दे रहे हो.

मोहनलाल को याद आया की डिनर भी करना है तू उसने अपने हाथ को रुचिका के सर पर फेरते हुए 'डिनर पर चलें'

मोहनलाल 'अब नाराज तू नहीं हो'

रुचिका 'नहीं'

मोहनलाल 'वाइफ के बेटी'

रुचिका ने एकदम से मोहनलाल को छोड़ दिया और बीएड की और जाने लगी तू मोहनलाल ने उसका हाथ पकड़ते हुए 'जवाब नहीं दिया'

रुचिका 'अब अगर एक बार भी इस टूर पर बेटी कहा तू मैं आपसे बात नहीं करुँगी'

मोहनलाल उसको अपनी तरफ करते हुए 'ठीक है मेरी बीवी' और जैसे hi रुचिका घूमी तू वो बिना दुपट्टे के थी, क्योँकि उसका दुपट्टा तू बीएड पर गिर गया था और बिना दुपट्टे के वो कुछ जयादा hi खूबसूरत लग रही थी. उसकी चूचियों के ऊपरी हिस्से और उनके बीच की घाटी साफ़ साफ़ नजर आ रही थी. रुचिका लम्बी तू थी लेकिन मोहनलाल से हाइट काम होने की वजह से उसकी चूचियों का अंदरूनी हिस्सा भी उससे नजर आ रहा था और उसका रक्त परवाह बढ़ने लगा.

वो एकटक रुचिका को देखे जा रहा था तू रुचिका ने उसकी नजरो का पीछा करते हुए पाया की उसके पापा की नजर कान्हा है और ये आभास होते hi की वो बिना दुपट्टे के है तू उसने अपने हाथों को ऐसे कर लिया जैसे वो अपनी चूचियों को धक् रही हो तू मोहनलाल की तन्द्रा टूटी और झेंप मीतटे हुए कहा 'फिर रेडी हो जाओ, चलते हैं' रुचिका ने उससे कहा की वो तू रेडी है, तब मोहनलाल ने कहा 'जाओ अपना चेरा वाश करलो नहीं तू लोग कहेगे की मियां बीवी लड़कर आएं हैं'

रुचिका उसकी बात मानकर बाथरूम में चली गयी और उसने जब बाथरूम में बहुत बड़े शीशे के सामने खुद को पाया तू उसने अपने आप को देखा तू उससे समझ आया की उसके पापा उसकी चूचियों की सुंदरता में कैसे खो गए थे तू उससे गुदगुदी होने लगी और सोचने लगी की क्या ये सही है, तब उसने सोचा की अभी तू वो पापा नहीं, पति हैं तू उससे बार बार सलेसगिरल की बात याद आने लगी की इस शरीर को अपने पति को नहीं दिखाओगी तू किसको दिखाओगी और उनको तुम्हारा साइज नहीं पता, ये कैसे हो सकता है'

उसके मन में द्वंद्व चल रहा था की वो पापा की पत्नी बन तू गयी है लेकिन है तू उनकी बेटी hi न तू मुझे क्या करना चाहिए जिससे मैं उनकी पत्नी भी बानी राहु और मर्यादा भी भांग न हो. मैं अगर नार्मल रहती हु जैसे एक बेटी तू कोई भी उस बेहेवियर को पकड़ लेगा और फिर अगर पता लग गया की हम बाप बेटी हैं तू बदनामी और सजा. नहीं नहीं मैं ये कभी नहीं कर सकती. अगर पत्नी की तरह करती हु तू जैसे की आज हुआ पापा मेरी और आकर्षित हो रहे हैं, वैसे तू पति पत्नी में ये सब कोई मायने नहीं रखता, लेकिन हम दोनों के रिलेशनशिप में फरक आ सकता है.

अब अगर मैंने पत्नी बनने का निर्णय ले लिया है तू उस रोले को निभाने के लिए कुछ तू करना hi पड़ेगा तभी तू वास्तविक लगेगा नहीं तू मुश्किल हो जाएगी. तू क्या पापा को अपने शरीर को निहारने दू? अगर वो मेरी तरफ आकर्षित हो गए तू? लोगों को अगर वास्तविक लगे तू इन सब चीज़ों को नज़र अंदाज़ करना पड़ेगा. अब तू वो पति है न की पापा और मैंने hi उन्हें बार बार मजबूर किया है की वो मुझे सिर्फ और सिर्फ पत्नी समझे तू अगर वो मेरी तरफ आकर्षित होते हैं तू उनका क्या दोष, वैसे भी मेरी फिगर और बॉडी से कोई भी आकर्षित हो सकता है, ऐसा उस सलेसगिरल ने भी कहा था. उसने तू ये भी कहा था की ये शरीर पति को नहीं दिखाओगी तू किसको दिखाओगी. मेरे शरीर को देखने का हक़ पापा को है, ये सोचते hi उसके दिल की धड़कन बढ़ गयी और सांस बहुत तेज चलने लगी.

थोड़ी देर बाद सामनाये हुई तू उसने अपने चेरे को अच्छी तरह से बहुत hi सुगन्धित साबुन से धोया तू उसने देखा की वंहा पर फेस वाश भी है तू उसने उससे भी अपने चेरे को धोया और उसके बाद तौलिया जो बहुत hi नरम और मुलायम था अपने चेरे से लगाया तू उससे जन्नत का मजा आ गया की ऐसे तौलिये भी होते हैं. फिर अपने आप को थोड़ा ठीक किया तू अब उससे बहार आना था तू उससे शर्म आने लगी क्योँकि दुपट्टा तू वो ले hi नहीं थी. उसने अपने आपको एक बार फिर शीशे में देखा तू उससे लगा की दुपट्टे के बिना वो जयादा खूबसूरत लग रही है, लेकिन पापा के सामने? उसने निर्णय लिया की दुपट्टे के बिना hi कॉन्फिडेंस से जाएगी.

उधर मोहनलाल रुचिका के जाने के बाद सोचने लगा की उससे क्या होता जा रहा है. वो फिर से रुचिका की तरफ कुछ जयादा hi आकर्षित हो रहा है और आज तू उसके उभरे हुए नितम्बों को याद करके और चूचियों को बिना दुपट्टे के देखकर तू उसके लिंग में भी थोड़ा तनाव आ गया था, वो तू वक़्त रहते संभल लिया था नहीं तू मुश्किल हो जाती.

अब क्या करू, सोचा था की उससे दूर रहुगा, लेकिन ये तू जबरदस्ती मेरी पत्नी बनने पर तैयार हो गयी. उससे बहुत बार समझा लिया लेकिन उससे तू मजे लेने हैं. मैं तू छह रहा था की थोड़े काम मजे ले ले ताकि मुझे उसको काम से काम लोगों से मिलवाऊं ताकि प्रॉब्लम काम हो, लेकिन मैडम के ऊपर तू एन्जॉय करने का बहुत सवार है तू मैं क्या करून. अब उसको क्या समझों की इस छाकर में कनिह लेने के देने न पद जाएँ और कोई ऐसी गलती हो जाये जिसका खामियाजा न वो उठा पाए और न hi मैं. अब क्या कर सकते हैं, जान वो बिना दुपट्टे के मेरे गले लगेगी तू मेरा उत्तेजित होना नेचुरल हैं क्योँकि सच्ची बात ये है की मैं उससे सच में प्यार करने लगा हु. अभी के लिए वक़्त पर छोड़ देते हैं की क्या होगा.

तभी बाथरूम का दरवाजा खुला और रुचिका बहार आयी तू वो खिली हुई लग रही थी, लेकिन शर्मा भी रही थी. उसने बहार आकर कहा 'मैं तैयार हु, चलें'

मोहनलाल ने उससे ऊपर से नीचे तक देखा तू बोलै ''कुछ कमी लग रही है'

रुचिका 'कैसी कमी'

मोहनलाल 'कुछ तू है, सोचो की क्या है'

रुचिका 'मुझे तू नहीं लग रही'

मोहनलाल ने उसका हाथ पकड़ा और वंहा पर पड़ी एक चेयर पर बैठा दिया और एक बॉक्स में खोलकर उसमे से कुछ निकला और रुचिका को आँखें बंद करने के लिए कहा तू उसने कर ली. मोहनलाल उसके पीछे गया और उसकी गर्दन से बाल हटाकर साइड में लिए और एक बहुत hi कीमती गोल्ड चैन उसके गले में डालकर पीछे से लॉक कर दिया और फिर बालों को दोनों कानो से बरी बरी हटाकर उसमे टॉप्स पहनाये और फिर रुचिका को आँखें खोलने के लिए कहा, लेकिन रुचिका तू मोहनलाल के हाथों के जादुई स्पर्श में खोयी हुई थी और उससे कुछ सुनाई hi नहीं दे रहा था.

मोहनलाल ने उसके कन्धों पर हाथ रखकर उससे खड़ा कर दिया तू उसने आँखें खोल दी लेकिन ऐसा लग रहा था जैसे उसकी आँखों में नशा उत्तर आया हो. मोहनलाल ने उसका हाथ पकड़कर दूसरे हाथ से बरी बरी दोनों हाथों में लॉक वाले ब्रेसलेट पहनाये. उसके बाद रुचिका को एक बहुत hi खूबसूरत रिंग दी और कहा की पहन लो तू रुचिका ने कहा की बाकि सब तू आपने पहनाया है तू ये भी आप पहना दीजिये न. मोहनलाल ने उसका हाथ पकड़ कर उसकी रिंगफिंगर में वो रिंग पहना दी और फिर उसको लेकर मोहनलाल शीशे के सामने ले गया और कहा देखो ये कमी थी मेरी बीवी में जो मैंने पूरी कर दी.

मोहनलाल रुचिका के बिलकुल पीछे खड़ा था और उसने रुचिका के कंधे पकड़ रखा थे तू शीशे में वो दोनों साथ खड़े हुए बहुत अच्छे लग रहे थे. चैन में एक लॉकेट था जो जाकर रुचिका की चूचियों के बीच की घाटी को छू रहा था और बहुत अच्छी लग रही थी.

रुचिका 'ये आप कब लाये'

मोहनलाल 'जब तुम ब्यूटी पार्लर में थी'

रुचिका 'ये गोल्ड की हैं

मोहनलाल 'बिलकुल शुद्ध'

रुचिका 'आपने इतना खर्चा क्योँ किया'

मोहनलाल 'मेरी बीवी के पास कोई भी जेवेलरी नहीं, ये कैसे हो सकता है. ये तू मेरी तरफ से तुम्हे पहले टूर के लिए गिफ्ट है'

रुचिका मोहनलाल की बात सुनकर भावुक हो गयी और मुड़कर उसके गले लग गयी और बहुत जोर से मोहनलाल को अपने से भींच लिया तू मोहनलाल कान्हा पीछे रहता तू उसने भी भींच लिया जिससे रुचिका की चूचियां मोहनलाल की चौड़ी छाती में कुचल hi गयी तू अब रुचिका को भी नशा चने लगा और उसने अपनी नक् से अपने पापा की नाक रगड़ते हुए "थैंक्स माय हस्बैंड' तू मोहनलाल ने उससे अपने साथ और चिंता लिया और उसका माथा चूमकर कहा ' No थैंक्स माय स्वीट डार्लिंग'
 
सबसे पहले तू आपका इस थ्रेड पर स्वागत है.

आपको ये कहानी पसंद आ रही है बहुत ख़ुशी की बात है.

दूसरी बात यंहा पर जो भी वरिटेरस हैं वो स्वेच्छा से हैं और शौकिया लिखते हैं बिना किसी मेहनताने के. हर राइटर चाहता है की उसका अपडेट जल्दी से जल्दी आ जाये, ऐसी मेरी सोच है.

किसी भी अपडेट को लिखने में 5 से 6 घंटे लगते हैं और लेखक को आप सब का भी जवाब भी देना पड़ता है जो कहानी लिखने में ब्रेक लगा देता है.

अब लेखक या तू छोटे छोटे अपडेट दे दे और जवाब देने में भी देर लगाए जो की मेरी नज़र में अच्छी बात नहीं है.

अब आप सोचो की एक अपडेट को पढ़ने में 5-6 मिनट लगते हैं लेकिन लिखने में........

जो भी हो कोई भी फिक्स्ड टाइम नहीं हो सकता अपडेट देने का. अगर फिक्स्ड टाइम हो और अगर अपडेट पहले तैयार हो जाये तू क्या पाठकों को इंतज़ार कराया जाये की अभी वक़्त नहीं हुआ. मेरी ऐसी मंशा कभी नहीं हो सकती.

मेरा मन्ना ये है की जल्दी से जल्दी अपडेट पोस्ट किया जाये, लेकिन आप लोगों से भी गुजारिश है की कृपया धैर्य रखिये ताकि आपको अच्छा अपडेट जल्दी से जल्दी दे पौन.

धन्यवाद्
 
अपडेट 29

रुचिका मोहनलाल की बात सुनकर भावुक हो गयी और मुड़कर उसके गले लग गयी और बहुत जोर से मोहनलाल को अपने से भींच लिया तू मोहनलाल कान्हा पीछे रहता तू उसने भी भींच लिया जिससे उसकी चूचियां मोहनलाल की चौड़ी छाती में कुचल hi गयी तू अब रुचिका को भी नशा चने लगा और उसने अपनी नक् से अपने पापा की नाक रगड़ते हुए "थैंक्स माय हस्बैंड' तू मोहनलाल ने उससे अपने साथ और चिंता लिया और उसका माथा चूमकर कहा ' No थैंक्स माय स्वीट डार्लिंग'

रुचिका को जब मोहनलाल ने थैंक्स कहा तू उसने कहा 'आप फिर मुझे थैंक्स बोल रहे हैं' तू मोहनलाल ने कहा 'मैं तू तुम्हारे थैंक्स को थैंक्स बोल रहा था' फिर दोनों hi इस बात से हंस पड़े और फिर मोहनलाल ने उसको बांहो में लिए लिए hi कहा 'चलें'

रुचिका 'नहीं'

मोहनलाल 'क्योँ, जब मैंने मन किया था तू नाराज हो गयी थी'

रुचिका 'अब नाराज नहीं हु, लेकिन अब जाने का मन नहीं है और दिल कर रहा है की आपके साथ अकेले में यही डिनर करू'

मोहनलाल 'सोच लो, यंहा डिनर तू आ जायेगा, लेकिन वो जो भेजेंगे वही खाना पड़ेगा और वैरायटी भी नहीं होगी और अगर नीचे जाते हैं तू हर तरह की वैरायटी होगी, बाकि मर्जी तुम्हारी'

रुचिका ' फिर पहले तू आप मन कर रहे थे'

मोहनलाल 'तब मैं तुम्हे बेटी समझ करा समझने का प्रयास कर रहा था लेकिन अब तू तुम मेरी बीवी हो तू फिर दर कैसा, जो होगा देखा जायेगा'

रुचिका एक बार फिर से मोहनलाल को अपनी बांहों में कस्ते हुए 'यस ी ऍम योर वाइफ' उसके इस तरह कहने और अपने हाथों से कसने से मोहनलाल की हालत ख़राब करनी शुरू कर दी थी तू उसने कहा 'फिर चलो कनिह डिनर ख़तम hi नहो जाये' और एक बार फिर उसका माथा चूमकर उसकी कमर में हाथ डालकर उससे लिफ्ट से नीचे दिंनिंग हॉल में आ गए.

जब वो डाइनिंग हॉल में आये तू एक मंजर ने उन्हें कहा 'वेलकम सर एंड मैडम, व्हिच रूम?' मोहनलाल ने उससे बताया तू उसने उन्हें गाइड किया और वो अंदर आ गए.

रुचिका उस डाइनिंग हॉल की भव्यता को देखकर चकित रह गयी. वो तू सिर्फ एक दो बार रेस्टोरेंट में गयी थी, लेकिन ये तू बहुत बड़ा हॉल था, जिसमे एक तरफ बहुत सरे स्टाल्स लगे हुए थे. उन स्टाल्स पर हर तरह के फ्रूट, खाने, जूस, ड्रिंक्स, स्वीट डिशेस और पता नहीं क्या क्या... हॉल के एक तरफ बहुत साडी टेबल्स लगी हुई थी जिनपर लोग बैठ कर खाना खा रहे थे और बहुत सरे वेटर्स घूम घूम कर सर्वे कर रहे थे. रुचिका को ऐसा लग रहा था जैसे कोई सपना देख रही हो.

मोहनलाल उसका हाथ पकड़ कर पूछा 'क्या लेना पसंद करोगी'

रुचिका 'यंहा पर इतनी साडी चीज़े हैं की समझ hi नहीं आ रहा की क्या लू और क्या नहीं'

मोहनलाल 'तुम्हे जो सबसे जयादा पसंद हो उससे सबसे पहले तरय करो और उसके बाद दूसरी चीज़ लो, किसी चीज़ की कोई मनाही नहीं है'

रुचिका 'आप क्या लेंगे'

मोहनलाल ने बड़े प्यार से उसकी आँखों में देखते हुए कहा 'आज तू जो तुम लोगी मैं भी वही लूंगा'

रुचिका 'आपको अगर पसंद न आया तू'

मोहनलाल 'जब एक बीवी अपने मियां को प्यार से खिलाएगी तू पसंद क्योँ नहीं आएगा'

रुचिका उसकी बात सुनकर शर्मा गयी तू मोहनलाल ने कहा 'अब खिलाना है या भूखा रखना है' तू रुचिका मोहनलाल का हाथ पकड़ कर अपने साथ एक स्टाल पर ले गयी और वंहा से कुछ लिया और फिर इस तरह उससे जो भी पसंद था थोड़ा थोड़ा प्लेट में डालकर एक टेबल पर आकर बैठ गए.

रुचिका ने मोहनलाल से खाने का इशारा किया तू उसने सर हिलाकर मन कर दिया तू रुचिका ने कहा 'मैं तू पहले hi कह रही थी की आपको मेरी पसंद की चीज़ें आपको पसंद नहीं आएँगी, लेकिन आप मने hi नहीं' ये कहकर उसने उठाते हुए कहा 'मैं दूसरी प्लेट में आपकी पसंद की डिशेस डालकर लती हु'

मोहनलाल ने उसका हाथ पकड़ कर उससे बैठा लिया तू वो बैठ गयी.

रुचिका ने उससे खाने के लिए कहा तू मोहनलाल ने फिर सर हिलाकर मन कर दिया तू रुचिका को समझ hi नहीं आ रहा था की वो खा भी नहीं रहे और मुझे कुछ और लेने के लिए जाने भी नहीं दे रहे तू रुचिका ने भी कहा 'ठीक है अगर आपका मन नहीं है तू मैं भी नहीं खाउंगी' और उसने भी खाने की प्लेट एक तरफ सरका दी.

वंहा खड़े एक वेटर ने जब ये देखा तू उसने कहा 'मैडम आपको डिशेस पसंद नहीं आयी हैं तू आप चिंता न करें, आप बताइये मैं दूसरी ला दूंगा'

मोहनलाल 'नहीं, नहीं ऐसी कोई बात नहीं है, अभी टास्ते करके बताएँगे की पसंद आयी की नहीं' और उस वेटर को वंहा से जाने का इशारा किया तू वो स्माइल करते हुए ये बोलकर चल गया 'सर कोई भी दिक्कत हो तू बताइये, मैं सोल्वे कर दूंगा'

उसके जाने के बाद मोहनलाल ने रुचिका के दांये हाथ पर अपना बांया हाथ रखा और दांये हाथ से एक डिश को स्पून की मदद से उसके मुंह के पास ले गया तू वो अपना मुंह हटाने लगी तू उसने इशारे से मिन्नत करते हुए उससे खिला दिया जो उसने पता नहीं क्या सोचकर खा लिया, फिर दूसरी डिश उसे खिलाई तू उसके मुंह से निकला 'लाजवाब'. मोहनलाल ने इस तरह दो तीन और डिशेस उससे खिलाई, लेकिन खुद नहीं खायी तू रुचिका ने उससे खाने के लिए इशारा किया तू उसने फिर से सर हिला कर मन कर दिया.

अगली बार जब मोहनलाल ने उससे खिलने के लिए हाथ आगे बढ़ाया तू उसने भी मन कर दिया. मोहनलाल ने एक बार फिर कोशिश की तू उसने फिर मन कर दिया तू रुचिका ने कहा की पहले वो लेंगे तभी वो लेगी. मोहनलाल ने उसके अब अपने दांये हाथ में पकडे हुए स्पून को रख दिया और उस हाथ से रुचिका के बांये हाथ को पकड़ कर उससे प्यार से सहलाने लगा और खाने के लिए आँखों के इशारे से खाने के लिए मिन्नत कर रहा था. रुचिका को मोहनलाल का उसके हाथ को सहलाना आज पहली बार पता नहीं क्यों ाचा लग रहा था लेकिन उसने अपने चेरे पर गुस्से वाली अभिव्यक्ति लेकर अपना चेहरा एक तरफ घुमा लिया.

मोहनलाल ने दोनों हाथों को इस तरह सहलाने लगा जिससे रुचिका को सुकून मिले तू रुचिका ने अपने चेहरे को मोहनलाल की तरफ करके उसकी तरफ देखा तू वो उससे फिर खाने के लिए मिन्नत करता हुआ दिखाई दिया, जिससे रुचिका के चेहरे पर स्माइल आ गयी और वो अपना दांया हाथ छुड़ाने लगी तू मोहनलाल को एक पल में लगा की ये क्या हो रहा है कनिह वो फिर से नाराज़ होकर रूम में न चली जाये. फिर उसने गौर किया की उसने अपने बांये हाथ को छुड़ाने की कोई कोशिश नहीं की, ये उसके लिए सुकून की बात थी. वो उसका दांया हाथ भी छोड़ना तू नहीं चाहता था लेकिन फिर छोड़ दिया की दूसरा हाथ तू कमसे काम उसके हाथ में है.

रुचिका ने दांये हाथ से स्पून लेकर उसमे अपनी पसंद की डिश डालकर प्यार से मोहनलाल के मुंह की तरफ ले गयी तू उसने उसे अपने मुंह में लेकर खा लिया तू रुचिका ने फिर से ऐसे hi किया तू उसने फिर खा लिया और वो जब भी रुचिका खिलाती वो खता भी रहता था और बड़े प्यार से उसके हाथ को अपने हाथ से सहलाता भी रहता था जो रुचिका को भी अच्छा लग रहा था.

जब रुचिका ने स्पून रखकर मोहनलाल से खुद खाने के लिए कहा तू उसने फिर सर हिलाकर मन कर दिया. रुचिका मुंह बनाकर उससे चिढ़ाने लगी तू मोहनलाल ने अपने बांये हाथ से उससे खिलने लगा तू रुचिका ने खा तू लिया लेकिन उसने मोहनलाल को नहीं खिलाया और खुद कहती रही और प्लेट में सब ख़तम हो गया तू वो अपना हाथ छुड़ा कर प्लेट में खाना लेने चली गयी.

मोहनलाल मन में सोच रहा था की उसके और रुचिका के इस तरह बनते रिश्ते का क्या अंजाम होगा. अभी वो सोच hi रहा था की एक शख्स उसके कंधे पर हाथ रखकर 'क्या हाल है मोहन जी'

मोहनलाल ने सर उठाकर देखा की उसका एक मित्रे खड़ा है तू मोहनलाल भी उठ खड़ा हुआ और उससे गले मिलते हुए 'आप कैसे हो सूरज जी'

सूरज 'मैं तू अच्छा हु मित्रे, क्या बात है अकेले अकेले'

मोहनलाल 'नहीं नहीं मेरी वाइफ भी आई है'

सूरज 'ये तू बहुत अच्छी बात है, दिया भी आई है और दीपक और अवनि भी आये हैं. अगर पता होता की आप भी आ रहे हैं तू हम एक साथ hi कमरे बुक करवाते'

मोहनलाल 'उससे क्या फरक पड़ता है, हम यंहा इक्कठे मिल लिए उससे जयादा ख़ुशी की बात क्या होगी'

सूरज 'चलो हमारी टेबल पर चलते हैं'

मोहनलाल 'यार मेरी वाइफ थोड़ी शाय है और मुझसे अभी थोड़ा नाराज़ भी है तू बाद में न मिले'

सूरज 'सिनेस्स तू अवनि और दिया ठीक कर देंगी, हाँ नाराजगी तू आपको hi दूर करनी पड़ेगी' और फिर दोनों हंसने लगते हैं.

मोहनलाल ने सूरज से कहा की वो दुह्ड़ती हुई यंहा आएगी इसलिए थोड़ा वेट कर लेते हैं. अभी सूरज कुछ कहता उससे पहले hi रुचिका आती हुई दिखाई दी और जैसे hi वो वंहा पंहुची तू मोहनलाल ने उसका परिचय सूरज से करवाया तू सूरज 'नमस्ते भाभी जी'

रुचिका तू भाभीजी सुनकर अचम्भे में थी लेकिन एक पल में hi उससे समझ आ गया की अभी वो अपने पापा की वाइफ है तू उसने भी सूरज को नमस्ते की तू उसने कहा 'भाभीजी आइये हम उस टेबल पर चलते हैं और आपको सब से मिलवाता हु' रुचिका ने मोहनलाल की तरफ देखा तू उसने कहा 'आओ वंहा चलते हैं'

जब उस टेबल पर पंहुचे तू वंहा पर एक पुरुष और दो महिलाएं बैठी हुई थी. सूरज ने कहा 'देखो कौन आया है'

वो सब मोहनलाल को देखकर दोनों महिलाएं एक साथ 'भाई साहब नमस्ते' तू मोहनलाल ने उनका अभिवादन स्वीकार किया और दीपक से गले मिलकर सब वंहा बैठ गए.

मोहनलाल ने रुचिका को इन सबसे मिलवाया तू दीपक ने कहा 'भाभीजी नमस्ते' और वो दोनों महिलाएं अवनि और दिया ने रुचिका को गले लगाया और कहा की 'ये तू हमारी बहिन है और हम एक दूसरे को नाम से बुलाते हैं, आपको कोई दिक्कत तू नहीं'

रुचिका 'एक तू मुझे बहिन बना लिया, फिर मुझे आप क्योँ कह रही हैं, मुझे भी नाम से बुलाइये, अच्छा लगेगा' उन दोनों ने बात मान ली और रुचिका को अपने पास hi बैठा लिया.

अब उस टेबल पर दो ग्रुप बन गए एक तू मोहनलाल, सूरज और दीपक का और दूसरा रुचिका, दिया और अवनि का.

पहला ग्रुप तू बिज़नेस की डील के बारे में आपस में बात करने लगा और उन में ये बात चल रही थी की अगर मौका लगे तू मिलकर काम कर लेंगे, लेकिन कोशिश ये होगी की बिज़नेस उन्हें hi मिले. सूरज और दीपक तू पहले से hi पार्टनर्स थे, लेकिन दुनिया को दिखने के लिए अलग अलग थे. मोहनलाल पैसे के मामले में उन दोनों से बहुत कमजोर था लेकिन वो उसकी इतनी इज़्ज़त करते थे की बिना पैसे के भी उससे पार्टनर बनाने को तैयार थे, लेकिन मोहनलाल बहुत hi स्वाभिमानी व्यक्ति था और दोस्ती को रुपैये पैसे से बहुत उप्पर मंटा था तू उसने सिर्फ इतना hi कहा 'अगर मेरे बस में होगा तू जरूर करूँगा'

सूरज 'हम हैं न तू आप चिंता क्योँ करते हो'

मोहनलाल 'तुम दोनों मुझसे उम्र में छोटे हो और मेरे दोस्त नहीं भाई जैसे हो और मैं बिलकुल नहीं चाहूंगा की हमारा रिश्ता पैसे की वजह से बिगड़े'

दीपक 'मोहन भाई साहब, आप अपनी जगह बिलकुल सही हैं, अगर कुछ ऐसा अरेंजमेंट हो जाये की हम सब को फायदा भी हो और रिश्ता भी बना रहे तू'

मोहनलाल 'अगर ऐसा हो जाये तू फिर क्या कहने'

उधर दिया और अवनि भी पक्की सेहलियाँ थी और खूबसूरती (आगे बताया जायेगा) में एक से बढ़कर एक और उनके पति आपस में दोस्त थे जो बन गए थे पार्टनर्स और ये दोनों मोहनलाल की दिल से बहुत इज़्ज़त करती थी और उसको बड़ा भाई मानती थी. असल में मोहनलाल ने उन दोनों की अपनी जान पर खेलकर उनकी इज़्ज़त और इनके पतियों की जान बचाई थी, इसलिए ये दोनों परिवार उसके एहसानमंद थे और उसके लिए कुछ भी कर सकते थे, लेकिन मोहनलाल बहुत hi खुद्दार व्यक्ति के साथ साथ रिश्ते निभाने में भी विश्वास रखता था, इसलिए राखी पर उन दोनों की भेजी हुई राखी भी बंधी थी और उन्हें गिफ्ट भी भेजही थी.

दिया रुचिका की और देखते हुए 'उम्र में तुम हम से छोटी हो लेकिन रिश्ते में हम से बड़ी हो'

रुचिका 'वो कैसे'

दिया 'मोहन भाई साहब हमारे बड़े भाई है तू उनकी वाइफ हमारी बड़ी भाभी हुई की नहीं, इसलिए हम आपको भाभीजी कहेगे'

रुचिका 'अब अगर आप दोनों ने मुझे आप या भाभीजी कहा तू फिर हमारा रिश्ता ख़तम. थोड़ी देर पहले जब मैं आयी थी तू आपने मुझे बहिन कहा था, ये रिश्ता मुझे मंजूर है और बहिन से जयादा हम सेहलियाँ होंगी'

अवनि जो काफी देर से चुप बैठी थी उसने कहा 'इसमें गुण तू मोहन भाई साहब वाले हैं, वो भी अपनी बात मनवाने के माहिर हैं और ये भी. दोनों पक्के ज़िद्दी, क्या जोड़ी बनाई है, दोनों को इक्कठे खड़ा कर दो तू एक परफेक्ट कपल लगते हैं. ये बात बिलकुल ठीक है की हम तीनो सेहलियाँ hi होंगी जिमे प्यार बहनो वाला होगा और कोई भी किसीको आपस में आप नहीं कहेगा'

दिया और रुचिका दोनों ने एक साथ हाँ कहा. डिनर करते हुए वो रुचिका को छेड़ रही थी की 'यार एक बात तू बताओ तुम तू मोहन भाई साहब को टाइट करके रखती होगी'

रुचिका ' वो क्योँ'

दिया 'यार तुम इतनी खूबसूरत हो की भाई साहब तुम्हारे आगे पीछे घूमते होंगे तू तुम उन्हें टाइट तू रखती hi होगी नहीं तू वो तुम्हे रात को कभी सोने hi न दे'

अवनि 'रात तू क्या दिन में भी नहीं छोड़ते होंगे'

रुचिका तू ये सब सुनकर शर्म से गाड़ी जा रही थी, उसने तू इस सबका अनुमान भी नहीं लगाया था और ये सब सोचकर उसके कान लाल हो गए थे की उसके पापा (पति) उसके साथ दिन रात उसको छोड़ते hi नहीं होंगे.

दिया 'क्या बात है इतना क्योँ शर्मा रही है, तुम्हारे पति के बारे में hi बात कर रहे हैं और अगर हम अपने पति को खुश नहीं रखेंगे तू उन्हें कौन खुश रखेगा. इतना hi नहीं उनको खुश रखेंगे तू हम खुश रहेगे और फिर हमारे पति हमें खुश रखेंगे और हमारे नखरे तू वो भी तभी उठाएंगे जब हम से प्रासां होंगे. क्योँ मैं गलत कह रही हु तू बताओ'

अवनि 'बात तू तुम सही कह रही हो और ये हमारी बहिन रुचिका भी समझ रही है, लेकिन शायद हम से शर्मा रही है, कुछ दिनों में खुल जाएगी और फिर हमें तंग करेगी'

अवनि की बात सुनकर उसको आईडिया मिल गया और सर झुकाये हुए hi 'मुझसे आज तक किसी ने ऐसी बात नहीं की है तू शर्म तू आएगी न'

दिया 'हम जैसा कोई पहले मिला भी नहीं होगा न'

रुचिका 'आप सच कह रही हैं और मुझे कुछ वक़्त दो ताकि मैं अपने आप को थोड़ा इस मौहल के लिए तैयार कर लुंगी'

दिया 'कोई बात नहीं कल तक तुम त्रिनेड हो जाओगी और जो कल रात का कपल प्रोग्राम है उसके बाद हमें कुछ कहने की जरुरत hi नहीं पड़ेगी'

रुचिका 'कल क्या होने वाला है'

अवनि 'क्या तुम पहले कभी ऐसे प्रोग्राम में नहीं गयी'

रुचिका 'मैं तू प्रोग्राम तू छोडो, होटल में भी पहली बार बायीं हु'

दिया 'क्या हनीमून पर भी नहीं गयी थी'

रुचिका एक बार फिर शर्मा गयी और नज़रे चुराने लगी. ये देखकर अवनि ने कहा 'ये समझ लो की हमारी सेहली भाई साहब के साथ हनीमून पर आयी है'

अब तू रुचिका का चेहरा देखने लायक था जो शर्म से लाल हो गया था और वो अपनी नज़रे चुराने लगी और उसका मन कर रहा था की वंहा से वो भाग जाये, लेकिन मज़बूरी थी, इसलिए वो बैठी रही.

उसकी हालत देखकर दिया ने अवनि से कहा 'अब बस भी कर मेरी बहिन को तंग लिए जा रही है, चल इसक्रीम लेकर आये हैं'

फिर वो दोनों रुचिका को साथ ले गयी और वंहा पर बहुत साडी स्वीट डिशेस थी. उन दोनों ने तू आइसक्रीम ली लेकिन रुचिका ने आइसक्रीम के साथ त्रिफ़ल पुडिंग भी ली और वो सब आ गए और उन सबने मिलकर स्वीट डिश समाप्त की और कल सुबह मिलने का कह कर अपने अपने कमरे में चले गए.
 
अपडेट 30

फिर वो दोनों रुचिका को साथ ले गयी और वंहा पर बहुत साडी स्वीट डिशेस थी. उन दोनों ने तू आइसक्रीम ली लेकिन रुचिका ने आइसक्रीम के साथ त्रिफ़ल पुडिंग भी ली और वो सब आ गए और उन सबने मिलकर स्वीट डिश समाप्त की और कल सुबह मिलने का कह कर अपने अपने कमरे में चले गए.

मोहनलाल और रुचिका जब कमरे में आये तू रुचिका को एक बार लगा की शायद बच गई और चैन की सांस लेने लगी, लेकिन उसके मन में कई तरह के विचार ब्राह्मण कर रहे थे. अभी कुछ और सोच पति मोहनलाल ने उससे पूछा 'कैसा लगा'

रुचिका 'दिंनिंग हॉल तू मैं ऐसा सपने में भी नहीं सोच सकती'

मोहनलाल 'ये तू कुछ नहीं है, दूसरे होटल्स में तू इससे भी बढ़िया होते हैं'

रुचिका 'क्या इससे भी बेहतर'

मोहनलाल 'हाँ, उनमे और भी कई तरह की सुविधाएं होती हैं'

रुचिका 'लेकिन मेरी किस्मत में कान्हा हैं ऐसी सुविधाओं को भोगना'

मोहनलाल 'उसमे तू कोई जयादा मुश्किल नहीं है, क्योँकि तुम मेरे साथ जा सकती हो और उनका आनंद उठा सकती हो'

रुचिका 'आपकी वाइफ बनकर'

मोहनलाल 'ऐसी कोई बात नहीं है, तुम बेटी बनकर भी जा सकती, उसके लिए पहले से hi प्लानिंग करनी पड़ेगी'

रुचिका 'पहले आप बताइये की आप खाना क्योँ नहीं खा रहे थे'

मोहनलाल 'बीवी पास में हो तू खाना तू बीवी hi खिलाती है और जब तुमने खिलाया तू मैंने खा लिया, बताओ खाया की नहीं'

रुचिका 'आप बता देते न'

मोहनलाल 'बीवी को तू खुद समझ लेना चाहिए की उसके मियां को किस चीज़ की जरुरत है और क्या चाहिए और उससे पूरा करे'

रुचिका उसकी बात सुनकर थोड़ा शर्मा गयी लेकिन अपने आप को कॉंफिडेंट दिखते हुए 'धीरे धीरे सीख जाउंगी, लेकिन आप तू भूखे hi रह गए'

मोहनलाल उसके कन्धों पर हाथ रखकर थोड़ा झुखकर उसकी आँखों में देखते हुए 'पति पत्नी अलग नहीं होते बल्कि एक hi सिक्के के दो पहलु होते हैं, ये बात मैंने पहले भी कही थी तू तुमने खा लिया तू मैंने खा लिया और दूसरा तुम्हारे हाथ से पहला निवाला लेते hi मेरा पेट भर गया और तुमने तू मुझे बहुत कुछ खिला दिया था'

रुचिका तू बहुत शर्मा गयी तू मोहनलाल उसके कंधे पकडे पकडे hi कहा 'तुम चिंता न करो, जब तुम दिया और अवनि से बात कर रही थी मैंने कुछ खा लिया था, इसलिए मेरा पेट भर गया है, चलो अब सोते हैं, सुबह जल्दी उठाना है, मुझे मीटिंग की तयारी करनी है'

रुचिका ने कहा की वो तू ऐसे hi सो जाएगी तू मोहनलाल ने कहा 'क्योँ नाईट ड्रेस नहीं है क्या' तब रुचिका ने कहा की 'जब घर से चले थे तू आपने कहा था की नए कपडे ले देंगे इसलिए मैंने जयादा कपडे नहीं लिए थे, कल ले आउंगी'

मोहनलाल ने कहा की वो बदल कर आता है तू वो अपने कपडे लेकर बाथरूम में गया और T-shirt और हाफ पेंट पहनकर आ गया और रुचिका से कहा 'चलो सोते हैं'

रुचिका बीएड के एक तरफ और मोहनलाल दूसरी तरफ लेत गया और साइड टेबल पर लैंप जलाकर बाकि सब लाइट्स बंद कर दी और फिर टेबल लैंप की लाइट भी बंद कर दी और सोने लगे.

दोनों सफर करके आये थे और थके हुए थे सोते hi नींद आने लगी लेकिन दोनों के मन में आज की हुई बातों ने उथल पुथल मचाई हुई थी.

मोहनलाल के मन में रुचिका के लिए बहुत प्यार था और वो प्यार बेटी वाला जयादा था लेकिन हालत ऐसे बनते गए की प्यार का स्वरुप बदलने लगा, पहले उसकी सेहली की वजह से, उसने अपने ऊपर उससे दूर रहकर नियंत्रण करता रहा. अब तू उसने पत्नी बनने की थान ली तू उसका मन बदलना शुरू हो गया और प्यार बेटी वाला नहीं प्रेमिका वाला होना शुरू हो गया.

उससे रुचिका के रूप में एक प्रेमिका नजर आने लगी और उसकी सुंदरता को धीरे धीरे निहारते हुए मन hi मन में आनंदित होने लगा और प्यार के नए सुमन खिलने लगे. ये सब तू ठीक था लेकिन उसकी चिंता कुछ और hi थी एक तू वो लोगों को उससे अपनी पत्नी बनाकर इंट्रोडस करा रहा है तू उनमे से किसी एक को भी पता चल गया की वो उसकी पत्नी नहीं बल्कि बेटी है तू इतनी बदनामी होगी की वो झेल नहीं पायेगा. उससे अपने से जयादा रुचिका की चिंता थी, खुद की बदनामी तू वो किसी तरह झेल जायेगा लेकिन उसको अगर किसी ने कुछ कह दिया तू वो उसकी जान भी ले सकता है. परन्तु कितने लोगों को रोक पायेगा.

अब इस नादानी के लिए कोई भी रुचिका को दोषी नहीं मानेगा, हर कोई उससे hi दोषी मानेगा क्योँकि उससे तू नादाँ समझकर माफ़ कर देगा, बल्कि यही कहेगा की उसी ने लड़की को बहलाया होगा. चलो अगर इस ज़िल्लत को झेल भी लिया तू उसकी जिंदगी तू नरक बन जाएगी, उससे कौन शादी करेगा. क्या करूँ, अब तू बाज़ी भी उसके हाथ से निकल चुकी है. यही सोचते सोचते उसका सर फटने लगा और वो नींद के आगोश में चला गया.

उधर रुचिका जो अपने पापा की लाड़ली hi नहीं बल्कि उसकी जान थी और उसको कभी दुखी न देख सकने वाला बाप उसका पति बन चूका है. ये टूर शुरू हुआ बाप बेटी वाला लेकिन मज़बूरी या रुचिका की ज़िद कहो या कुछ भी लेकिन बन गए पति पत्नी. यंहा तक तू ठीक था लेकिन लोगों की बातें सुन सुन कर उसके नादाँ मन अब बगावत करने को तैयार था.

रुचिका मन में सोच रही थी की ये मुझे क्या हो जाता है, जब भी पापा मुझे छूटे है तू पता नहीं मुझे क्या होने लगता है और जब मैं उनके गले लगी थी उन्होंने ने जब भींचा था तू ऐसा लगा था जैसे मेरे संतरे उनकी छाती में धंस गए हो और जब ये हुआ था तू मेरे दिल की धड़कन बाद गयी थी, जो मेरी समझ से परे है. जब डिनर करते हुए वो मेरा हाथ सेहला रहे थे तू पता नहीं कैसे मुझे नशा च रहा था.

सलेसगिरल की बताइए मेरे मन के तार छेड़ गयी और मुझे ये भी एहसास करा गयी की शायद मैंने गलत फैसला किया है पत्नी बनने का. डिनर के वक़्त उन दोनों ने मेरे साथ जो भी बातें की उन्होंने मेरी आग में घी का काम किया है. क्या करूँ समझ में नहीं आ रहा, मैंने तू कभी सपने में भी ऐसी बातें कभी नहीं सोची. किसी भी लड़के से अपने आप को दूर रखा है और यंहा तू मुझे अपने पापा की पत्नी का रोले hi नहीं निभाना बल्कि मुझे वो कहती हैं की हम हनीमून पर हैं. ये बात अगर पापा ने सुन ली होती तू क्या होता, सोचते hi उसकी साँसें बढ़ने लगी, दिल की धड़कन अनियमित हो गयी और उसका दांया हाथ अपने आप hi कमीज के अंदर जाकर अपने बूब को सहलाने लगी. उसने दुपट्टा तू पहले hi हटाया हुआ था, लेकिन उससे हाथ को ब्रा के अंदर करने में दिक्कत होने लगी तू उसने अपनी ब्रा का हुक खोलने की सोची, लेकिन उससे ये भी दर तह की पापा साथ में हैं देख लेंगे तू?

उसने मुड़कर देखा तू अपने पापा को सोते हुए पाया तू उसने अपने हाथों से कमीज को थोड़ा ऊपर करके ब्रा के हुक को खोल दिया और कमीज को फिर से नीचे कर दिया. अपने पापा की तरफ पीठ करके अपने बूब को अपने hi हाथ से धीरे धीरे सहलाने लगी और सोचने लगी की पापा को उन दोनों ने कुछ डायरेक्ट कह दिया तू? क्योँकि वो दोनों उनकी बहने बानी हुई हैं, तब क्या होगा. क्या पापा मुझे छेडेनेगे या मेरे इस बूब को प्रेस करेंगे, ये सोचते hi उसके शरीर के हज़ारों छेदों ने एक hi वक़्त में पसीने की बुँदे उगल दी और उसकी साँसें धोकनी की तरह चलने लगी और वो एकदम से उठकर बैठ गयी.

जब थोड़ा सम्भली तू उसने साइड लैंप को जलाकर वंहा रखे जग से पानी पिया और िक्खत्ते एक नहीं बल्कि तीन गिलास पि गयी और उसकी नज़र अनायास hi अपने पापा की तरफ उठ गयी. उनको सुकून से सोता देखकर उससे भी अच्छा लगने लगा, पता नहीं क्योँ पहली बार उसके मन में अपने पापा के प्रति प्यार का अंकुर फूटा और सोचने लगी की पापा कितने अच्छे हैं उसका कितना ख्याल रखते हैं और मुझे तू आज पता नहीं क्या क्या लेकर दिया है और मैं जब उनसे गुस्सा हो गयी थी तू शायद उनको भी गुस्सा आया होगा लेकिन वो तू मुझसे मिन्नत करके मुझे मन रहे थे. सच में ये बहुत अच्छे इंसान हैं.

फिर रुचिका को याद आया की उसके पापा बिना दुपट्टे के उसके बूब्स को निहार रहे थे, तू क्या पापा को मेरे बूब्स आकर्षित कर रहे हैं. वैसे तू मेरा बदन है hi ऐसा की कोई भी आकर्षित हो जाये, इसलिए तू मैं हमेशा अपने आप को पूरी तरह से धक् कर रखती थी. लेकिन अब तू पापा ने मेरे बूब्स देख भी लिए हैं और उन्होंने अपनी चाहती पर फील भी किया है तू क्या वो मुझे चाहने लगे हैं.

अगर वो मुझे चाहने लगे हैं तू फिर बार बार मुझे बेटी बनने के लिए क्योँ कहते हैं. वो मुझे जब देखते हैं तू ऐसा लगता है की जैसे एक पति अपनी पत्नी को देख रहा हो. कुछ भी समझ नहीं आ रहा. कनिह ऐसा तू नहीं की मैंने उन्हें फाॅर्स किया की हम कपल बनेगे तू वो पति की एक्टिंग कर रहे हो और मन से मुझे बेटी मानते हो. फिर मैं क्या करून, अब तू मुझे पापा से प्यार होने लगा है. अगर मैं आगे बढ़ती हु तू हो सकता है की ये मुझे गलत समझे और कान्हे की कैसी बद्तमीज़ बेटी है. मुझे लगता है पापा को भी मुझसे प्यार हो गया है इसलिए इतने सरे गहने लाये हैं और जब पहना रहे थे तू अजीब सी फीलिंग हो रही थी और पता नहीं उन्होंने सरे गहने तू पहना दिए लेकिन रिंग क्योँ मुझसे खुद पहनाने को बोल रहे थे, समझ नहीं आया. मेरे कहने के बाद पहना भी दिया.

बहुत कन्फूसिओं है जब मुझे नीचे डिनर के लिए ले जा रहे थे तू मेरी कमर में ऐसे हाथ दाल कर गए थे जैसे अपनी लवर को ले जा रहे हो, लेकिन जब वापिस कमरे में आये तू सो गए. अगर लवर समझते तू क्या ऐसे अकेले सो जाते.

दिया और अवनि तू सहेल्यां अच्छी हैं लेकिन वो तू मुझे पापा की वाइफ hi समझती हैं और उनकी छेड़छाड़ ने तू मेरे दिल के तारों को छेड़ दिया था और उनके पति ने जब मुझे भाभीजी कहा तू मुझे अच्छा क्योँ लगा, तू क्या मैं अपने आप को सच में उनकी वाइफ समझने लगी हु. सच बात ये है की मैं पापा में अपने लवर को दुन्हद्ने लगी हु. उसके ये सोचते hi फिर से उसका हाथ अपने आप उसके बूब्स पर पंहुचने में देर नहीं लगी और उससे सहलाने लगी और सहलाते सहलाते hi सो गयी.

सुबह मोहनलाल जब उठा तू रुचिका सो रही थी और उसकी कमीज थोड़ी ऊपर उठी हुई थी और पीछे से वो कमीज सलवार से भी ऊपर हो चुकी थी. उसकी गोरी पीठ का थोड़ा सा हिस्सा दिखाई दे रहा था. ये हिस्सा जंहा पर सलवार का नाडा बांधते हैं उसके ऊपर का था. उसके नितम्ब पुरे पुरे दिखाई दे रहे थे जो मोहनलाल की भावनाओं को सुबह सुबह भड़काने में मदद कर रहे थे. मोहनलाल उसको थोड़ी देर देखता रहा लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी की वो कुछ करे.

मोहनलाल उठकर बाथरूम गया और फ्रेश होकर वापिस आया और चाय के लिए इण्टरकॉम पर बोलने के लिए फ़ोन की तरफ जाने लगा जो की उस साइड टेबल पर था जिस तरफ रुचिका सो रही थी और फ़ोन करके जैसे hi मुदा तू एकदम उत्तेजित हो गया. उसके उत्तेजित होने का कारन था रुचिका का हाथ उसकी कमीज में जाकर उसके एक बूब पर और दूसरा बूब थोड़ा फैलकर कमीज से बहार आकर दिखाई दे रहा था. मोहनलाल इस दृश्ये को देखकर बहुत उत्तेजित हो गया और उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी की इसको और आगे देखे क्योँकि उसका रकत परवाह उसके लिंग की तरफ होना शुरू हो गया था. वो वंहा से हटकर सोफे पर आकर बैठ गया लेकिन उसके मन से ये दृश्ये जा नहीं रहा था. वो बीच बीच में अपनी जगह पर बार बार खड़ा होकर वंही से देख लेता था.

वेटर ने बेल्ल बजायी तू उसने दूर खोला तू वो आकर चाय रखकर चला गया. उसके जाने के बाद उसने रुचिका को आवाज लगाकर उठाया तू वो तीसरी आवाज में कुनमुनाई और पलटी खाकर पीठ के बल हो गयी तू उसकी लम्बी टैंगो के बीच में उसका फुला हुआ योनि प्रदेश बिना कमीज के बहुत hi आकर्षक लग रहा था लेकिन मोहनलाल ने तू सोचा भी नहीं था की एक दिन में इतने जलवे देखने को मिलेंगे.

रुचिका जब उठी तू अपनी हालत देखकर उससे शर्म आने लगी, उससे लगा की उसके पापा ने शायद उससे देख लिया है. मोहनलाल ने उससे कहा जल्दी से फ्रेश होकर आओ और चाय पि लो.

रुचिका बाथरूम में गयी तू सोचने लगी को उसके पापा ने उसके बूब्स पर उसका हाथ देख लिया होगा, फिर अपने आप को तस्सली देने लगी की देख लिया हेंतु क्या कर सकते हैं, अभी तू पापा नहीं पति हैं और उनको हक़ है तू चिंता किस बात की. वो फ्रेश होकर बहार आ गयी तू मोहनलाल ने चाय बनाकर उसको दे दी, लेकिन खुद नहीं ली.

रुचिका ने उससे चाय लेने के लिए कहा तू उसने मन कर दिया जिससे उसके चेहरे पर स्माइल आ गयी और उठकर चाय बनाई और मोहनलाल की तरफ बढ़ा दी तू मोहनलाल ने वो चाय रुचिका के मुंह की तरफ ले जाने लगा तू उसने कहा 'मेरे लिए बनाई तू है आपने'

मोहनलाल 'मैंने पहले भी कहा था फिर दोहराता हु की पति पत्नी एक सिक्के के दो पहलु होते और अगर तुम मेरी पत्नी हो तू दो कप क्योँ'

रुचिका 'सॉरी भूल गयी थी'

मोहनलाल ने उसकी सॉरी सुनकर स्माइल दी तू रुचिका ने बात को समझते हुए कहा 'आगे से नहीं करुँगी' और चाय मोहनलाल की तरफ बड़ाई तू उसने उसके हाथ पर अपना हाथ रखकर बड़े प्यार से पहले रुचिका को सिप कराइ और फिर मोहनलाल ने की और बरी बरी से इस तरह चाय ख़तम की. दूसरा कप उठाकर फिर से पिने लगे तू मोहनलाल के मोबाइल पर सूरज का नंबर था तू उसने उठाते हुए 'गुड मॉर्निंग' का आदान प्रदान हुआ और उसके बाद उसने बताया की दिया को भाभीजी से बात करना चाहती है, अगर वो पास हो तू बात करा दीजिये.

रुचिका ने मोबाइल पकड़ते हुए 'Hello' कहा तू उधर से दिया ने मज़े लेते हुए 'क्या बात है भाई साहब ने रात भर सोने नहीं दिया क्या'

रुचिका 'यार तुम भी न, अभी उठे हैं और चाय पि रहे हैं'

दिया 'क्या बात है भाई साहब ने इतने प्यारे गुलाब के फूल को कमरे के इतने रोमांटिक मौहल में मसला नहीं, ऐसा कैसे हो सकता है, कनिह भाई साहब से लड़ तू नहीं ली'

रुचिका 'तुम कुछ भी बोले जा रही हो, वो तू कल हम थके हुए थे तू जल्दी सो गए'

दिया 'बड़े शरीफ हैं भाई साहब, की तुम्हरे जैसी हुस्नपरी को अपने पहलु में होते हुए कुछ नहीं किया वो भी हनीमून पर, बड़े hi दुःख की बात है'

रुचिका 'प्लीज कुछ और बात करो न'

दिया 'शर्म आ रही है'

रुचिका 'हाँ'

दिया 'कोई बात नहीं जल्दी त्रिनेड हो जाओगी और फिर कहोगी की ऐसी बातों में मज़ा आता है. एनीवे मैंने ये कहने के लिए फ़ोन किया है की हम तीनों ब्रेकफास्ट के बाद घूमने जा रही हैं. ये मर्द लोग तू अपनी मीटिंग में बिजी हो जायेंगे, इसलिए चलो तैयार हो जाओ एन्जॉय करने के लिए और हाँ मेरा नंबर ये है और अपना नंबर बताओ'

उन दोनों ने अपना नंबर एक्सचेंज करके फ़ोन बंद कर दिया लेकिन अब रुचिका उसकी बातों से थोड़ा परेशान लग रही थी की ये तू रोज रोज उससे तंग करेगी' तू उसके सवालो का क्या जवाब देगी. उससे याद आय की सलेसगिरल ने कहा था की ये कैसे हो सकता है की हस्बैंड को वाइफ का साइज नहीं पता तू उसने सोचा की इसका उल्टा मतलब की पत्नी को पति का साइज नहीं पता ये कैसे हो सकता. उससे वाकई नहीं पता था तू वो सोच रही थी की कैसे पता करूँ. तभी मोहनलाल ने रुचिका को जहां चिंतन में देखा तू पूछा 'क्या बात है'

रुचिका को समझ नहीं आ रहा था की बात कैसे शुरू करे लेकिन उससे मोहनलाल की बात याद आयी तू उसने मोहनलाल से कहा 'आप एक बात बताओ की ये जो आप बार बार केहतेहो की पति पत्नी एक सिक्के के दो पहली है, इसका क्या मतलब होता है'

मोहनलाल 'दोनों में कोई भी फरक नहीं होता'

रुचिका 'मतलब की अगर कोई बात एक से पूछी जाये और वो कोई जवाब दे और यही सवाल अगर दूसरे से भी किया जाये तू दोनों का जवाब शामे होना चाहिए या अलग'

मोहनलाल 'ऑफ कोर्स शामे'

रुचिका 'अगर ऐसा कोई सवाल जो बहुत आसान हो और दोनों का जवाब अलग हुआ तू क्या होगा'

मोहनलाल 'दोनों पकडे जायेंगे और पूछने वाले को पता चल जायेगा की ये दोनों झूठ बोल रहे हैं'

रुचिका 'अगर हम दोनों का झूठ पकड़ा गया तू'

मोहनलाल 'बहुत बदनामी हो जाएगी, कुछ हुआ है क्या'

रुचिका 'हुआ नहीं है लेकिन होने के पुरे पुरे चान्सेस हैं, क्योँकि हम दोनों एक दूसरे को जानते hi नहीं हैं क्योँकि हम दोनों सिर्फ नाम के पति पत्नी हैं'

मोहनलाल 'क्योँ नहीं जानते, मैं तुम्हे बचपन से जनता हु और तुम्हारे बारे में सब जनता हु'

रुचिका 'वो आप अपनी बेटी को जानते हो न की मुझे'

मोहनलाल ' तुम hi तू हो मेरी बेटी'

रुचिका 'नहीं मैं बेटी नहीं बल्कि पत्नी हु'

मोहनलाल 'Ok, पत्नी हो'

रुचिका 'कब मिले थे अपनी पत्नी से पहली बार'

मोहनलाल 'बचपन से'

रुचिका 'यही पर पकडे जायेंगे, यही मैं कह रही हु की हम एक दूसरे को बिलकुल नहीं जानते'

मोहनलाल 'फिर क्या करें'

रुचिका 'सिंपल जैसे हम पति पत्नी बने हैं तू उन प्रशनो के उत्तर जो की पति पत्नी के बीच में नार्मल होते हैं वे हम दोनों के शामे होने चाहिए'

मोहनलाल 'कौन से प्रश्न?'

रुचिका ने बताया की जैसे पहली बार कान्हा मिले थे, मैरिज कब और कान्हा हुई थी, अरेंज्ड है या लव. आप क्या करते हो, मैं क्या करती हु. आपकी और मेरी क्वॉलिफिकेशन्स, फैमिलीज़, होब्बीएस और क्या पसंद और नापसंद है.'

मोहनलाल ने कहा 'ठीक है ये हम तय कर लेते हैं'

उन दोनों ने सोचते हुए आपस में डीडे कर लिया और फिर रुचिका ने शरमाते हुए कहा 'कुछ बाटे और भी हैं जो हम दोनों को पता होनी चाहिए'

मोहनलाल ने कहा 'कौनसी' तू रुचिका का शर्म के मरे बुरा हाल था तू मोहनलाल ने उससे हाथ से पकड़ कर बीएड पर बैठा लिया और कहा 'देखो हम दोनों जिस पोजीशन में हैं उसमे पति पत्नी में बहुत कुछ नार्मल होता है जो की हमारे पुराने रिश्ते की वजह से निषेध हो सकता है लेकिन इस सिचुएशन में हम दोनों को मिलकर hi इससे बहार निकलना पड़ेगा'

रुचिका से कुछ बोलै नहीं जा रहा था तू मोहनलाल ने उससे अपने आगोश में लेते हुए उसके कंधे को सहलाते हुए 'मुझ पर विश्वास करो और अपने पुराने रिश्ते को अभी के लिए भूल जाओ और अब हम सिर्फ और सिर्फ पति पत्नी हैं तू अपनी झिझक को मिटाओ और बताओ क्या कहना चाहती हो'

रुचिका ने अपने दोनों हाथों को अपने चेहरे पर रखकर उससे छुपाते हुए ' हमारा .... हमारा.... हमारा... हनीमून कब और कान्हा हुआ था'

मोहनलाल उसकी शर्म को भांपते हुए ' कह देंगे की हुआ hi नहीं'

रुचिका 'मैंने भी यही जवाब दिया है'

मोहनलाल 'लगता है तुम्हे वो दोनों छेड़ रही हैं'

रुचिका 'हाँ और अभी भी घूमने जाने के लिए कहा है और दर ये लग रहा है की उनके ऐसे सवालो का क्या जवाब दूंगी'

मोहनलाल उसके चेहरे से उसके हाथों को पकड़ कर हटाने लगा तू वो रेसिस्ट करने लगी तू मोहनलाल ने बड़े प्यार से उससे कहा 'मेरी बीवी इतनी कमजोर नहीं हो सकती की इन् छोटी बातों से घबरा जाएगी तू फिर इससे बड़ी बातों का सामना कैसे करोगी'

मोहनलाल की बात सुनकर उसने अपने हाथों की पकड़ को ढीला कर दिया लेकिन उससे हटाया नहीं तू मोहनलाल ने उसके हाथों को हटा लिया तू उसने अपने चेहरे को नीचे कर दिया तू मोहनलाल ने उसका एक हाथ अपने हाथ में रखा और दूसरे हाथ से उसके कंधे को सहलाते हुए पूछा 'हाँ बताओ क्या पूछना है'

रुचिका 'बातें तू बहुत सी हैं लेकिन.. लेकिन... आपके कपड़ो का साइज क्या है?'

मोहनलाल हंसने लगा 'इसके लिए तुम शर्मा रही थी, ये भी कोई शर्माने वाला प्रश्न है'

मोहनलाल ने उससे अपना साइज बता दिया और वो जानकार रुचिका कड़ी हो गयी और कहने लगी 'मैं जा रही हु तैयार होने'

वो जैसे hi जाने लगी तू मोहनलाल ने उसका हाथ पकड़ लिया तू रुचिका ने कहा 'छोड़िये न मुझे तैयार होना है'

मोहनलाल ने उसका हाथ नहीं छोड़ा और कहा 'तुमने तू मेरा साइज पता कर लिया, लेकिन मेरी बीवी के साइज क्या हैं'

रुचिका तू उसकी बात सुनकर ज़मीं में hi गाड़ी जा रही थी और उसकी सांस इतनी तेज़ हो गयी की उसके उरोजों ने ऊपर नीचे होकर डांस करना शुरू कर दिया और कुछ नहीं बोल रही थी तू मोहनलाल ने खड़े होकर पीछे से उसके कन्धों को पकड़ कर कहा 'अगर बेटी हो तू न बताओ लेकिन अगर बीवी हो तू बताओ, बाकि तुम्हारे ऊपर है'

रुचिका के लिए एक बहुत hi कठिन वक़्त था वो डीडे नहीं कर प् रही थी की क्या करे तू थोड़ी देर बाद मोहनलाल ने उसके कन्धों को छोड़ दिया और सोफे की तरफ जाने लगा तू रुचिका दुविधा में कड़ी रही.

फिर पता नहीं क्या हुआ रुचिका एकदम से पलटी और मोहनलाल को पीछे से पकड़ लिया और अपने हाथों को उसकी छथि पर लेजाकर उसको अपने हाथों में कास लिया, जिससे उसके बूब्स मोहनलाल की पीठ में धंस गए तू मोहनलाल को नशा चने लगा. रुचिका की साँसे अभी अनियमित थी तू उसके बूब्स मोहनलाल की पीठ पर रगड़ खा कर ऊपर नीचे हो रहे थे. उसने अपने हाथों को मोहनलाल की छथि पर सहलाते हुए उनको धीरे धीरे ऊपर करने लगी और पीछे से भी वो अपने पंजे पर कड़ी होने लगी तू मोहनलाल को ये दोहरा अटैक भरी पद रहा था और उसका रक्त परवाह बढ़ने लगा तू उसने अपने हाथ पीछे लेजाकर रुचिका को पकड़ लिया. रुचिका ऊपर उठकर मोहनलाल के कानो के पास अपने मुंह को लेजाकर उसके कान में 'आपकी बीवी का साइज है 34 23 34'
 
अपडेट 31

फिर पता नहीं क्या हुआ रुचिका एकदम से पलटी और मोहनलाल को पीछे से पकड़ लिया और अपने हाथों को उसकी छथि पर लेजाकर उसको अपने हाथों में कास लिया, जिससे उसके बूब्स मोहनलाल की पीठ में धंस गए तू मोहनलाल को नशा चने लगा. रुचिका की साँसे अभी अनियमित थी तू उसके बूब्स मोहनलाल की पीठ पर रगड़ खा कर ऊपर नीचे हो रहे थे. उसने अपने हाथों को मोहनलाल की छथि पर सहलाते हुए उनको धीरे धीरे ऊपर करने लगी और पीछे से भी वो अपने पंजे पर कड़ी होने लगी तू मोहनलाल को ये दोहरा अटैक भरी पद रहा था और उसका रक्त परवाह बढ़ने लगा तू उसने अपने हाथ पीछे लेजाकर रुचिका को पकड़ लिया. रुचिका ऊपर उठकर मोहनलाल के कानो के पास अपने मुंह को लेजाकर उसके कान में अपने साइज 'आपकी बीवी का साइज है 34 23 34'

मोहनलाल ने अपने हाथों से उसको पकड़ कर अपने से कास लिया तू उसके मुंह से 'आउच' निकलने पर मोहनलाल ने अपने हाथों को थोड़ा ढीला करके पूछा 'क्या हुआ' तू उसने मोहनलाल के कान में 'कुछ नहीं' अब वो बेचारी उससे क्या बताती की उसके बूब्स इतनी जोर से उसकी पीठ पर डाब गए थे की उससे बहुत तेज़ दर्द होने लगा था.

मोहनलाल उससे अपने हाथों से पकड़कर आगे ले आया तू उसने शर्म से अपने चेरे को उसकी छाती में छुपा लिया और मोहनलाल उसको अपनी बांहो में कस्ते हुए उसके कान में 'बहुत सुन्दर है मेरी बीवी और सिर्फ सुन्दर hi नहीं बल्कि समझदार भी है'

जब मोहनलाल उससे अपनी बांहो में कास रहा तह तू रुचिका के अरमान भी पहली बार भड़काने लगे उसके शरीर में ऐसा लग रहा था की जैसे चीटियां चल रही हो, उससे सुरसुरी हो रही थी तू उसने भी मोहनलाल की पीठ के पीछे हाथ लेजाकर उसके कन्धों को पकड़ लिया और उसकी नाक मोहनलाल की T-shirt के खुले हुए बटन की वजह से उसकी छाती पर डायरेक्ट टच हो रही थी तू उसने खुमार की वजह से अपनी नाक को उसकी छाती पर रगड़ने लगी तू मोहनलाल को भी नशा चने लगा तू उसने भी रुचिका को कमर से पकड़ कर ज़मीन से ऊपर उठा लिया तू मोहनलाल का चेहरा उसके बूब्स के ऊपरी हिस्से पर आ गया जिससे उसके मुंह से निकलने वाली गरम गरम सांस उसके बूब्स के बीच से होती हुई रुचिका के शरीर पर जाने लगी लेकिन उसका असर रुचिका के दिल पर होने लगा. अभी दोनों बाप बेटी इससे आगे बढ़ते दूर बेल्ल बजी तू उसने रुचिका को नीचे उत्तर दिया और दरवाजा खोला तू सामने वेटर खड़ा था जो चाय के बर्तन उठाने आया था.

जब वेटर चला गया तू मोहनलाल दरवाजा बंद करके जैसे hi अंदर आया तू रुचिका बीएड पर नज़र नीचे करके बैठी हुई थी तू मोहनलाल को लगा की कनिह रुचिका उसके ऐसा करने से नाराज न हो गयी हो, इसलिए उसके पास जाकर उसके सर पर हाथ रखकर उससे कुछ कहता वो उसके गले लग गयी तू मोहनलाल ने भी उसे फिर से अपनी बांहो के घेरे में ले लिया और उससे बड़े प्यार से कहा 'चलो तैयार हो जाओ'

रुचिका का मन तू नहीं था लेकिन वो अभी मोहनलाल के सामने ये नहीं जाताना छथि थी की वो बद्तमीज़ है, इसलिए उसकी बात मानकर चुपचाप बाथरूम चली गयी और बाथरूम में जाकर जब वो नहाने के लिए कपडे उत्तर रही थी तू उसके दिल में हलचल मची हुई थी की उससे क्या हो गया है. वो अपने पापा से कैसे चिपक गयी थी, उसके दिल से आवाज आयी की 'तुझे अपने पापा से प्यार हो गया है'. ये बात सोचते hi उसके दिल की धड़कन बढ़ गयी और वो अपने आप को शीशे में निहारने लगी और जब उसकी नजर अपने बूब्स पर पड़ी तू उसने देखा की उसके बूब्स थोड़े से लाल हो गए हैं.

उससे याद आया की उसके बूब्स, पापा के शरीर से डाब गए थे और रगड़ खाने से थोड़ा लाल हो गए हैं. वो अपने बूब्स को आराम आराम से सहलाने लगी तू उससे मज़ा आने लगा. फिर उसने शावर चला दिया और काफी देर तक शावर के नीचे अपने शरीर को मॉल मॉल कर नहाने लगी. उसने बॉडी वाश लगाकर काफी देर नहाती रही और जब उसका दिल भर गया तू तौलिये से अपने शरीर के हर अंग को अच्छे से साफ़ करके नयी ब्रा और पैंटी पहनी.

वो ब्रा पैंटी पहने फिर से अपने आप को निहारने लगी तू उससे लगा की ये ब्रा और पैंटी वाकई जयादा अच्छी और कम्फर्टेबले हैं. उसने नया सूट पहना और अपने आप को देखा और फिर बहार आ गयी.

मोहनलाल ने रुचिका को बड़े hi प्यार से देखा जो नहाने के बाद खिली हुई लग रही थी. पापा के इतने प्यार से देखने से वो शर्मा गयी और बीएड की तरफ जाने लगी. मोहनलाल ने भी बिना कुछ कहे बाथरूम की तरफ प्रस्थान किया.

मोहनलाल ने बाथरूम में पहले शेव की और उसके बाद नहाने के लिए कपडे उत्तर कर जैसे hi खूंटी पर टांगने के लिए हाथ बढ़ाया तू सामने रुचिका की ब्रा तंगी हुई थी. अनायास hi उसका हाथ ब्रा पर चला गया और उसको उत्तर कर पहले तू देखने लगा, फिर उसके कप पर अपना हाथ फेरने लगा और अपने हाथ से कप को मुठी में भींच लिया तू उससे लग रहा था की जैसे वो असल में उसके बूब्स को प्रेस कर रहा हो. ये करते हुए उसके लिंग में भी तनाव आने लगा लेकिन दूसरे hi पल उसका मन गलानि से भर गया और ब्रा को फेंक दिया. उसके दिमाग़ में एकदम से आया की क्या कर रहा है वो तेरी बेटी है. लेकिन उसके मन ने कहा की अब वो मेरी बीवी है. उसका दिमाग़ उस पर हंसने लगा और उससे समझने लगा की 'कोई तुम्हे कह दे की वो तुम्हारी पत्नी है तू तुम उसके साथ वही पति वाला व्यवहार करोगे, ये तुम अच्छी तरह से जानते हो की वो तुम्हारी सच्ची में बेटी है. वो चाहे हज़ार बार कहे की वो तुम्हारी पत्नी है लेकिन तुमने उससे बेटी सोचकर hi पेश आना है'

उसके मन ने कहा 'लेकिन यंहा तू हम पति पत्नी है तू पत्नी की ब्रा के साथ मज़े लेने में क्या बुराई है' दिमाग़ ने कहा 'पत्नी है नहीं बल्कि पत्नी होने का नाटक कर रही है ताकि तुम्हारे पैसे बच सके. वो नादाँ तू तेरी हेल्प कर रही है और तू है की उसकी नादानी का फायदा उठाकर उससे अँधेरे कुंए में धकेलने की तयारी किये बैठा है'

मन ने कहा 'लेकिन वो भी तू मुझसे चिपक रही थी और अपने आप मेरी पीठ पर बूब्स को रगड़ रही थी और अपने हाथों से मेरी छाती कुरेद रही थी' दिमाग़ 'बहुत खूब अपनी गलतियों की सजा उस बेचारी को. सेक्स की जरूरते तुम्हारी पूरी नहीं होती तू अपनी बेटी से hi उन जरूरतों को पूरा करने के लिए उससे बात बात पर उकसाते हो. हर बार ऐसी सिचुएशन पैदा कर देते हो की उस नादाँ को कुछ समझ नहीं आये और तुम्हारे बिछाये जाल में फंसकर वो कर बैठती हो जो उससे नहीं करना चाहिए. अगर उस ने कुछ कर भी लिया तू तुम्हारी कोई जिम्मेवारी नहीं है की उससे इन सब से मन करो और अगर नहीं कर सकते तू काम से काम उस से दूर रहो, उसकी जिंदगी को ख़राब न करो'

मन 'लेकिन मैं उससे प्यार करने लगा हु'

दिमाग़ 'अब निकली न तुम्हारे दिल की बात और उस बेचारी को तू पता hi नहीं है और तुम उससे फंसा लेना छाते हो. तुम उस से प्यार नहीं करते बल्कि उसके दुश्मन हो'

मन 'नहीं नहीं मैं उस से सच में प्यार करता हु:

दिमाग़ 'प्यार करते हो तू उससे दूर रहो और उससे भी भटकने से रोको और कोशिश करो की उससे दूर रहो ताकि वो कोई ऐसी गलती न कर बैठे जिससे बाद में पछताना पड़े'

मन 'मैं उससे बहुत प्यार करने लगा हु और अब उससे दूर रहना मुश्किल है'

दिमाग़ 'मेरा फ़र्ज़ था तुम्हे समझाना, वैसे भी कब तुम मेरी बात मानते हो. नहीं माननी तू जाओ उसकी जिंदगी में ज़हर घोलो, लेकिन बाद में न पछताना'

मोहनलाल पसीने पसीने हो गया और दुखी हो गया की क्या करू. अभी थोड़ी देर पहले वो इतना खुश था की पूछो मत. उससे लग रहा था की शायद रुचिका जिस तरह का बर्ताव कर रही है उससे लगता था की वो भी उससे प्यार करने लगी है. लेकिन उसकी अंतरात्मा ने उससे सच का आइना दिखाकर उससे आसमान से धरती पर ला पटका.

वो सोच सोच कर परेशान होने लगा की क्या करूँ और क्या न करूँ. उससे लग रहा था की अब शायद गाड़ी अपने गंतव्य पर पंहुचने वाली है की तभी पता लगा की वो गलत गाड़ी में है. सोच सोच कर उसका दिमाग फटने लगा और उसकी आँखों में नमी आ गयी.

तभी उससे याद आया की वो जिस मीटिंग के लिए आया है उसमे जाना जरुरी है तू वो नहाने लगा और नाहा कर बहार आया और तैयार हो गया, रुचिका तू पहले से hi तैयार थी और चहक रही थी. वो उसके पास आकर कहने लगी 'कैसी लग रही हु' तू मोहनलाल अपने चेहरे पर नकली हंसी लेट हुए 'बहुत अच्छी लग रही हो'

रुचिका अभी कुछ कहती सूरज का फ़ोन आ गया और वो पूछना लगा की कब तक आएंगे, वे दिंनिंग हॉल में वेट कर रहे थे.

मोहनलाल ने रुचिका से कहा 'चलें' तू वो बोली 'बिलकुल' तू मोहनलाल ने कहा 'उन सब के सामने अपनी अपनी प्लेट लेंगे' और वो दोनों दिंनिंग हॉल में आ गए और अभिवादन के बाद सब ने प्लेट ली और अपनी अपनी पसंद की डिशेस लेकर एक टेबल पर बैठ गए और ब्रेकफास्ट करने लगे.

मोहनलाल बहुत काम बात कर रहा था, वो जितना जरुरी होता था उतनी hi बात करता था, इसके विपरीत रुचिका दिया और अवनि के साथ बहुत हंस हंस कर बात कर रही थी और कल की बजाये आज कॉंफिडेंट लग रही थी और उनसे ऐसे घुलमिल गयी जैसे की बहुत पुराणी सहेलियां हो.

ब्रेकफास्ट ख़तम करने के बाद ये डीडे हुआ की 10 मिनट बाद लॉबी में मिलेंगे और गेट्स अपनी मीटिंग में जायेंगे और लेडीज घूमने जाएँगी और फिर शाम को मिलेंगे और कपल्स के प्रोग्राम में शिरकत करेंगे.

मोहनलाल और रुचिका अपने कमरे में आ गए तू रुचिका ने एक बार अपने make-up को ठीक करने लगी और कनखियों से मोहनलाल को देख रही थी, लेकिन जब उसने मोहनलाल को अपने में खोया देखा तू उससे अपने make-up करने के अंदाज को उसका नज़रअंदाज़ करना और उसके डीप गले की तरफ भी धयान न देना उससे अकहार रहा था की कनिह वो उससे नाराज तू नहीं हो गए हैं.

रुचिका मोहनलाल के पास आयी और कहने लगी की 'आप मुझ से नाराज हैं' मोहनलाल उसकी बात सुनकर हक्का बक्का रह गया और जवाब दिया 'नहीं तू, तुम्हे ऐसा क्योँ लगा' तू वो मोहनलाल के गले लग गयी तू मोहनलाल को कुछ सूझ hi नहीं रह था की क्या करे, रुचिका 'आपने अलग अलग प्लेट में खाने के लिए कहा और आप मेरी तरफ देख भी नहीं रहे हैं'

मोहनलाल को उसकी बात समझ तू आयी लेकिन वो तू बेचारा अभी खुद अपनी भावनाओं से hi लड़ रहा था तू उसको क्या कहता, लेकिन प्रत्यक्ष में 'वो मैं मीटिंग के बारे में सोच तहा था और नहीं चाहता था की हमारा प्यार सब को पता लगे, एक प्लेट में अकेले में खाएंगे' रुचिका को उसकी बात को सुनकर थोड़ा सुकून मिला की नाराज नहीं हैं.

रुचिका ने मोहनलाल को अपनी बांहो में कास लिया जिससे उसके बूब्स मोहनलाल पर कोई असर डालते उससे पहले hi मोहनलाल ने उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा 'चलो जल्दी, वो सब वेट कर रहे होंगे' और उसको कुछ पैसे और एक कार्ड देते हुए 'जो भी पर्चासिंग करो इससे कर लेना और पैसे की चिंता न करना और अचे से ाचा लेना और वो थीम ड्रेस भी ले लेना' रुचिका वो लेकर फिर उसके गले लग गयी तू मोहनलाल जो जल्दी से जल्दी उससे दूर होना चाहता था उसके कन्धों से पकड़ कर उससे अलग करने लगा ताकि अपनी भावनाओं पर काबू प् सके लेकिन उसको अपने से दूर करने के चक्कर में उसके बूब्स नज़र आ गए और अपने ऊपर काबू पते हुए वो दोनों वंहा से लॉबी में आ गए. रुचिका उन दोनों के साथ चली गयी तू मोहनलाल ने चैन की सांस ली
 
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