अपडेट 10
घर जब पंहुचे तू मोहनलाल अपने hi ख्यालों में खोया हुआ था और उनके आने से वो ख्यालों से निकलकर अपने आप को संभालते हुए उन्हें बताया की रुचिका सो गई है, इसलिए शोर न करते हुए बाते करेंगे जो उन दोनों ने मान ली.
ड्राइंग रूम में आकर सब ने बैठ कर बातें करनी शुरू की
मोहनलाल: बीटा अब तुम्हारी पढाई कब तक ख़तम हो जाएगी.
आदित्य: पापा लास्ट सेमेस्टर है, 3-4 महीने और हैं, वैसे अगले हफ्ते से प्लेसमेंट शुरू हो रही है.
मोहनलाल: तुम प्लेसमेंट यंहा नज़दीक की लोगो या दूर की.
आदित्य: पापा, नज़दीक की जॉब में पैसे काम मिलेंगे और शुरू में hi अगर कोम्प्रोमाईज़ कर लिया तू फिर पूरी जिंदगी पछताना पड़ेगा.
मोहनलाल: तू तुम बहार की जॉब करोगे या फॉरेन की करोगे.
आदित्य: जो भी बेटर ओप्पोर्तुनिटी मिलेगी वो चाहे देश की हो या विदेश की उसे पाने की पूरी कोशिश करूँगा.
मोहनलाल: अगर तुम्हे बहार की या फॉरेन की जॉब मोल जाएगी, मुझे तू बहुत ख़ुशी होगी, लेकिन तुम्हारी माँ को फिर मेरे साथ या तुम्हारे साथ जाना पड़ेगा क्योँकि वो अकेले तू नहीं रह सकती न.
आदित्य: पापा ये बात तू आप ठीक कह रहे हैं.
मोहनलाल: संध्या अब तुम तयारी करलो मेरे साथ jane.ki
संध्या: अभी तू काफी टाइम है, अभी से परेशान क्योँ होना, जब वक़्त आएगा तब देखेंगे.
मोहनलाल: लेकिन सोचना तू पड़ेगा hi न
संध्या: आप कब से चिंता करने लगे, आप तू कभी भी किसी चीज से नहीं घबराते थे, अब क्या हो गया है.
मोहनलाल: गभरा नहीं रहा हु, आगे क्या करना है वो सोच रहा था, वैसे तू जो होना है वो होकर hi रहेगा.
संध्या: आपकी इन्ही बातों से hi तू मुझे शक्ति मिलती है.
मोहनलाल: आदित्य, यार ये बताओ की अब तुम बड़े हो गए हो और साथ में समझदार भी तू ये बताओ की कोई गर्लफ्रेंड भी बनाई है की नहीं.
आदित्य: क्या पापा आप भी न, मुझे पढाई और खेलकूद से hi फुर्सत नहीं मिलती
मोहनलाल: यार ऐसा कैसे हो सकता है, जवान हो, हैंडसम हो और पढ़ने लिखे भी हो, तू ये कैसे हो सकता है की किसी लड़की की तुम पर नज़र न पड़ी हो
आदित्य: पापा, छोडो न, आप भी क्या ले बैठे.
मोहनलाल: यार तुम तू ऐसे शर्मा रहे हो, जैसे लड़की हो, वैसे अगर नहीं बताना तू कोई बात नहीं.
आदित्य: पापा ऐसा कुछ नहीं हैं, एक है जिसका अभी पता नहीं की वो मेरी गर्लफ्रेंड बानी है की नहीं
मोहनलाल: (स्माइल्स) ये हुई न बात, अब लग रहा है मेरा बीटा जवान हो गया है, बन जाएगी अगर नहीं बानी तू, वैसे कैसी दिखती है
आदित्य: (संध्या को देखते हुए) पापा क्या बताऊँ, हैं तू वो बहुत hi खूबसूरत और दिल की भी बहुत अच्छी है लेकिन अभी पता नहीं की वो मेरी गर्लफ्रेंड बानी है की नहीं और ये भी क्लियर नहीं है की बनेगी भी की नहीं
मोहनलाल: देखो यार अगर तुम्हे पसंद है तू लगे रहो, गर्लफ्रेंड तू वो बन hi जाएगी, मुझे तुम पर पूरा विश्वास है
आदित्य: (चेरे पर दबी हुई मुस्कान ) पापा एक प्रॉब्लम और भी है बी ये है की वो मुझसे उम्र में थोड़ी बड़ी है
मोहनलाल: अरे यार उम्र का प्यार से कोई मतलब नहीं है, बस दिल मिलना चाहिए और जब दिल मिल गए तू वो सबसे अहम् है. सबसे बड़ी बात दोनों को एक दूसरे के प्रति समर्पण की भावना होनी चाहिए.
आदित्य: (संध्या को देखते हुए) पापा अभी तू ये भी नहीं पता की वो गर्लफ्रेंड है भी की नहीं
संध्या थोड़ा शर्माकर उन दोनों की बाते सुनकर वंहा से जाने लगाती है और कहती है "आप दोनों गप्पे मारो, मैं थोड़ा काम निपटा लेती हु". वंहा से जाने के बाद मन hi मन मुस्कराती है और सोचती है की "कितना बेशरम है बाप से बात कर रहा है और बाप को कह रहा की आपकी बीवी को गर्लफ्रेंड बनाने की बात कर रहा हु. और बाप है की अनजाने में बेटे को उकसा रहा है की जा बीटा बना ले गर्लफ्रेंड, उम्र का कोई मतलब नहीं हैं"
मोहनलाल: क्योँ बात नहीं हुई उससे अभी तक
आदित्य: हुई है एक दो बार, लेकिन कन्फ्यूज्ड लग रही थी
मोहनलाल: क्योँ
आदित्य: उसे शायद लग रहा हो की उसकी उम्र मुझसे थोड़ी जयादा है
मोहनलाल: अरे भाई उसके साथ घूमो फिरो, उसके साथ धीरे धीरे खुलकर बात करो और अगर तुम्हारे दिल मिलते हैं तू उम्र का कोई मतलब नहीं है
आदित्य: पर पापा लोग क्या कहेंगे और उसे क्या कहकर घूमने ले जॉन
मोहनलाल: दोस्ती तुमने करनी है या लोगों ने? अगर तुम दोनों को अच्छा लगता है की नहीं ये इम्पोर्टेन्ट है न की लोग क्या कहेगे. और घूमने के लिए तुम्हारे पास बहनों की कमी है जो इतना इंटेलीजेंट है की बचपन से hi नए नए बहाने बनाकर खेलकूद की चीज़े मुझसे ले जाता था वो ये नहीं कर सकता, मैं नहीं मान सकता
अभी ये दोनों बात कर hi रहे थे की रुचिका उठाकर आ गई और उन दोनों की बात सुनकर पूछने लगी "किस्से दोस्ती हो रही है"
आदित्य: दी, कुछ नहीं वो पापा बता रहे थे की किसी से दोस्ती कैसे की जाती है
रुचिका: हमें भी कोई गुर दो न की कैसे गर्लफ्रेंड और बॉयफ्रेंड बनाया जाता है और उससे घूमने के लिए क्या बहाने करने हैं
वो सब खिलखियकार हंसने लगे की तभी वंहा संध्या भी आ गई और कहने लगी "बीटा तुम उठ गयी हो तो पहले खाना खा लेते है क्योंकि तुम्हे कल जल्दी निकलना है"
रुचिका: मेरा तू अभी आपके पास रहने का दिल था लेकिन क्या करू कुछ समझ नहीं आ रहा है
संध्या: कोई बात नहीं, चलो जल्दी से दिंनिंग टेबल पर आ जाओ, मैं डिशेस लगाती हु
आदित्य: चलो मैं आपकी मदद कर देता हु
संध्या: नहीं रहने दे मैं कर लुंगी
आदित्य संध्या की बात न मानते हुए उसके पीछे पीछे जाते हुए कहता है "कोई बात नहीं, आज की पार्टी में मेरा भी योगदान होना चाहिए न"
किचन में जब वो दोनों पंहुचे तू खाने पीने का सामान बड़े बर्तनो में रखने लगे तू कुछ बड़े बर्तन कप्बोर्ड में ऊपर थे तू संध्या ने आदित्य से उतरने के लिए कहा तू आदित्य ने हाथ बढ़ा कर कप्बोर्ड को खोलने लगा तू वो क्योँकि संध्या के बिलकुल पीछे खड़ा था तू ऐसा लग रहा था की आदित्य एकदम से संध्या के ऊपर लड़ सा गया हो और इस सब में आदित्य की चाहती संध्या की पीठ से रगड़ खाने लगी, हुआ तू ये सब अनजाने में hi सही लेकिन दोनों के मन में एक चिंगारी लगा गया.
जब आदित्य जो अपने पंजे के बल पर खड़ा था बर्तन लेकर नीचे लेन लगा तू उसका पेट ने नीचे आते हुए संध्या के नरम नरम नितम्बों से रगड़ खाई जो दोनों की भावनाओं को थोड़ा और भड़काने में मदद कर रहा थी. जब आदित्य को इस का एहसास हुआ तू वो थोड़ा पीछे हैट गया और अपनी भावनाओं को काबू में करने लगा और चुपके से कुछ बर्तन लेकर ड्राइंग रूम में चला गया.
उधर संध्या को भी एक अलग hi एहसास होने लगा और इस एहसास की वजह से वो दुविधा में आ गयी की ये क्या हो रहा है, एक तरफ तू उसकी सोई हुई भावनाएं भड़काने लगी और दूसरी तरफ उससे ये एहसास होने लगा की कुछ गलत हो रहा है. वो इन् बातो को लेकर अपने में hi गुमसुम होने लगी.
आदित्य वापिस किचन में आया तू देखता है की उसकी माँ गुमसुम लग रही थी तू उसे लगा की शायद उसकी माँ उससे नाराज़ है लेकिन इस वक़्त उसने इस बारे में कोई बात न करना hi ठीक समझा और चुपके से दो डिशेस के बर्तन लेकर वंहा से ड्राइंग रूम में आ गया. वो अपने मन में सोचने लगा की अभी अपनी माँ से दूर रहेगा.
संध्या किचन में सोच रही थी की वो ड्राइंग रूम में कैसे जाये क्योँकि सोच सोच कर वो कभी खुश होती तू कभी शर्मा जाती की ये क्या हो रहा है, उसकी साँसें तीव्र गति से चलने लगाती तू उससे लग रहा था की इस नए एहसास ने उससे एक नयी अल्हड़ युवती जैसा बना दिया है जो किसी मर्द के पहले स्पर्श को फील करके खुश भी होती है और शर्माती भी है.
उसने सोचा की कंही उसकी मनोदशा को कोई पहचान न ले, इसलिए उसने एक नकली हंसी अपने चेरे पर ोौड ली और ड्राइंग रूम में आ गयी जंहा पर तीनो थे. उसने सबसे कहा, "आ जाओ पार्टी करते हैं"
सब दिंनिंग टेबल पर आ गए और सुबह की तरह hi बैठे लेकिन इस बार माँ बीटा दोनों hi अपने ख्यालों में गुमसुम थे और नज़र झुकाये बैठे थे, लेकिन एक बात थी चिंगारी तू दोनों के दिलों में लग चुकी थी और इसलिए कनखियों से बिच बिच में एक दूसरे को निहार लेते थे और जब नज़रे मिलती तू ऐसा पेश करते जैसे कुछ हुआ hi न हो परन्तु दोनों के दिलों में तूफान उठना शुरू हो गया था.
रुचिका मोहनलाल को कहते हुए निहार रही थी और कई बार ऐसा हुआ की कहते हुए उसके सर के बालों की लत आगे उसके चेरे पर आ गयी तू वो झटका देकर उसे पीछे करती तू मोहनलाल की नज़रे उसके चेरे पर जैम जाती और इशारो में पूछता की क्या हुआ तू वो आँखों के इशारे से कहती के सब ठीक है. बिच बिच में मोहनलाल उसकी गर्दन और उरोजों के ऊपर के हिस्से को निहारने लगते तू वो मोहनलाल को तंग करने के इरादे से अपने आँचल से अपने आप को इस तरह धक् लेती की उसके उरोज नज़र न आये.
मोहनलाल अपने चेरे को मोड़कर संध्या की तरफ करके इस तरह पेश आते की जैसे वो उससे चिढ़ाने के लिए संध्या के उरोजों को ललचाई नज़रो से इस तरह देखने लगता की रुचिका को बुरा लगे.
इस तरह चुहलबाजी करते हुए खाना ख़तम करके इसक्रीम खा रहे थे तू मोहनलाल ने सब को बैठा लिया और कहने लगे
मोहनलाल: देखो हो सकता है की मुझे एक जरुरी काम से विदेश जाना पड़े और हो सकता की मैं 6 महीने या उससे जयादा बहार राहु
संध्या: आपने पहले तू बताया नहीं
मोहनलाल: तुम्हारी बेटी आई थी तू इसलिए मैं तुम्हे डिस्टर्ब नहीं करना छह रहा था.
संध्या: कब जाना होगा
मोहनलाल: देखो अभी कह नहीं सकता लेकिन एक महीने के भीतर जाना hi पड़ेगा. इसलिए मैं तुम सब को जो बताने जा रहा हु उसे ध्यान से सुनो
1. ये मकान मैंने शुरू में hi संध्या के नाम करवा दिया था ताकि कोई प्रॉब्लम न हो.
2. संध्या का अकाउंट ऐसा है की अगर पैसा न निकले तू वो ऑटोमेटिकली फड़ में रहता है और आज की डेट में करीब 2 लाख है लेकिन 20 दिन से पहले उस पैसे को न निकलना नहीं तू 10000 इंटरस्ट का नुक्सान हो जायेगा. 20 दिन बाद जब मर्जी निकालो या सेविंग्स अकाउंट की तरह उसे करो.
2. आदित्य मैंने तुम्हारे हर बर्थडे पर कुछ न कुछ इक्कठा करने की चाहत से पैसा फड़ में डालता रहा ताकि बड़े होने पर काम आये. अब तुम एडल्ट हो चुके हो और तुम्हारी फड़ आज से ठीक 2 महीने बाद मातुरे हो जाएगी और इसका पूरा पैसा ऑटोमेटिकली तुम्हारे अकाउंट में जोकि करीब 10 लाख होगा पंहुच जायेगा.
3. रुचिका तुम्हारे अकाउंट में भी फड़ का पैसा 15 दिन बाद मातुरे होने वाली फड़ का करीब 2 लाख पंहुच जायेगा
ये सब मैं आप लोगों को बता रहा हु ताकि मेरे पीछे कोई प्रॉब्लम न हो
आदित्य: पापा आपने तू मुझे फंसा दिया
मोहनलाल : कैसे
आदित्य: आप बहार चले जाओगे, दी भी बहार जा रही है जॉब के लिए तू अगर मेरी भी जॉब बहार लग गयी तू क्या माँ अकेली रहेगी.
मोहनलाल: अरे यार अभी तू तुम यही पर हो न
आदित्य: पापा 3 महीने बाद तू जॉब के लिए बहार जाना hi पड़ेगा और तब तक आप के हिसाब से आप बहार hi होंगे.
मोहनलाल: अगर ऐसा हुआ और तुम्हे बुरा न लगे तू माँ को अपने साथ ले जाना
आदित्य: (संध्या की तरफ प्यार भरी नज़रो से देखते हुए) पापा मुझे तू कोई प्रॉब्लम नहीं होगी, लेकिन पता नहीं माँ मेरे साथ जाना भी चाहेंगी या नहीं