अपडेट 84
संध्या ने सम्भोग तू बहुत किया था लेकिन इस तरह का प्यार उससे पहली बार मिल रहा था और वो इस प्यार की बरसात में सब कुछ भूलती जा राजी थी की कैसे वो अपने सेज जवान बेटे से प्यार कर बैठी और आज इतना आगे तक बढ़ गयी जंहा से वापसी काफी मुश्किल थी. आदित्य के चुम्बनों ने उसको दूसरी दुनिया में ला पटका था और इस आनंद में वो सब कुछ भूल कर उसका साथ दिए जा रही थी. उससे होश hi नहीं रहा की कब आदित्य ने उसकी छीनी को उसके गले से निकल कर बहार कर दिया है. वो तू आदित्य द्वारा उसके उरोजों को दबाये जाने और उसके चुम्बनों में खोयी हुई थी की उससे जैसे hi आदित्य के होठों का स्पर्श उसके उरोजों की घाटी पर पड़ा तू उससे होश में ला दिया और उससे समझ नहीं आ रहा था की क्या करें. आदित्य उसके उरोजों की घाटी को बड़े hi मजे से चुम और छत रहा था. मजा तू संध्या को भी बहुत आ रहा था लेकिन शर्म ने उसके मजे लेने पर ब्रेक लगायी हुई थी. आदित्य ने अपनी जीभ निकल कर जैसे hi संध्या के उरोजों की घाटी में डालनी चाही तू वो सिहर उठी. वो दोनों अभी और आगे बढ़ते की तभी उन्हें किसी के आने का एहसास हुआ तू दोनों अलग होकर बैठ गए.
संध्या जल्दी जल्दी अपने आप को ठीक करने लगी और उसने जब अपनी चुन्नी को नीचे पड़े हुए देखा तू उससे समझ hi नहीं आया की ये कब हैट गयी. फिर कुछ सोचकर मन hi मन मुस्कुरा रही थी और चुन्नी उठाकर अपने सीने पर दाल ली. अब उससे आदित्य की तरफ देखने में बहुत जयादा शर्म आ रही थी.
आदित्य खिसक कर संध्या के पास पंहुच कर उसके गले में बांहों को डालकर अपने पास करते हुए 'कोई नहीं है'
संध्या 'नहीं नहीं कोई तू था'
आदित्य ने उससे कोल्ड ड्रिंक पीने के लिए दी और चिप्स भी दिए. संध्या ने देखा की आदित्य ने एक hi गिलास में कोल्ड ड्रिंक डाली थी और वो उससे पकड़ा दी थी तू उसने पूछा 'तुम नहीं पि रहे'
आदित्य ने कहा 'पियूँगा'
संध्या 'लेकिन तुम ने गिलास में तू डाली नहीं है'
आदित्य 'मैं तू इसी गिलास की कोल्ड ड्रिंक पियूँगा'
संध्या ने अपने हाथ में पकडे गिलास को उसकी तरफ बढ़ाते हुए 'लो, पियो'
आदित्य 'ऐसे थोड़ी न, मैं इस गिलास की पियूँगा लेकिन गिलास से नहीं बल्कि (उसके होठों को अपनी उंगली से छूकर) यंहा से'
संध्या उसकी बात सुनकर बहुत जयादा शर्मा गयी और पलकों को नीचे रखकर 'ऐसा थोड़ी न होता है'
आदित्य उसके होठों को अपने अंगूठे से मसलते हुए 'अब मेरी गर्लफ्रेंड नहीं चाहती तू कोई बात नहीं' और उसने संध्या के होठों से अपने अंगूठे को हटा लिया.
संध्या सोच में पद गयी और उससे लगने लगा की आदित्य जानभूझकर उससे तंग कर रहा है और सोचा की ऐसा नहीं करुँगी और सोच में पद गयी. फिर उसने आदित्य के कंधे पर हाथ रखकर अपनी तरफ किया और उसके होठों पर अपने होठों को रख दिया और मुंह में भरी हुई कोल्ड ड्रिंक उसके मुंह में पंहुचने लगी. इस क्रिया में कुछ कोल्ड ड्रिंक दोनों के होठों से बहकर उनकी गर्दन से होकर सीने पर जाने लगी. आदित्य उसके होठों को चुस्त हुआ नीची गर्दन पर चूसने लगा और फिर उसकी चुन्नी हटाकर उसके सीने पर अपने होठों से उस कोल्ड ड्रिंक को चाटने लगा. संध्या तू उसके छटने से हवाओं में तैरने लगी और आदित्य अपनी मनमानी करता रहा. संध्या उससे बार बार कहती रही की कोई आ जायेगा लेकिन वो नहीं मन. थोड़ी देर बाद एक आवाज़ सुनाई दी 'आज तू हमारी जगह पर कोई ओर कपल बैठा है' तब लड़की बोली 'चलो यंहा से उनको डिस्टर्ब न करो, दूसरी जगह चलते हैं' और फिर आवाज़े आणि बंद हो गयी. ये बातें सुनकर संध्या घबरा गयी और आदित्य से मिन्नत करते हुए कहना लगी 'चलो यंहा से'
आदित्य भी उसकी हालत देखकर ज़िद न करते हुए 'ठीक है जैसे आपकी मर्जी, वैसे घबराने की कोई बात नहीं है, यंहा पर ये सब नार्मल है'
संध्या 'किसी जान पहचान वाले ने देख लिया होगा तू बहुत बदनामी होगी'
आदित्य ने उसके चेहरे को पकड़ कर उसकी आँखों में झांकते हुए 'आप मेरी गर्लफ्रेंड हैं और मैं आपकी इज़्ज़त पर कोई आंच नहीं आने दूंगा, आप बिलकुल भी चिंता न करे' संध्या उसकी बात सुनकर भावुक होकर उसके गले लग गयी तू आदित्य ने उससे अपनी बांहों में कास लिया जिससे उसकी चूचियों ने आदित्य के सीने पर ग़दर मचा दिया, लेकिन वो अपने ऊपर नियंत्रण करते हुए उसकी कमर में हाथ डालकर साथ लेकर चल पड़ा. रस्ते में झाड़ियों के पीछे से वही लड़का और लड़की की आवाज़े सुनाई दी तू जिज्ञासावश संध्या ने आँखों के इशारे से आदित्य को कहा की 'देखते है की कौन हैं' वो दोनों धीरे से उस तरफ जाने लगे तू उन्हें एक लड़का और लड़की दिखाई दिए जो झाड़ियों के पीछे अपनी प्रेमलीला में व्यस्त थे. आदित्य ने चलने के लिए कहा लेकिन संध्या उन्हें देखना छह रही थी.
उन् दोनों की बराबर उस जोड़े पर नजर थी और देखा की कुछ देर किसिंग करने के बाद अचानक लड़की उस लड़के की गॉड से uṭhi और नीचे जमीन पर जा बैठी और baiṭhate hi कुछ तेज से बोली 'भैया क्या है, धीरे नहीं दबा सकते थे'
लड़का 'सॉरी दी, वो क्या है न की आज आप इतनी हॉट लग रही हैं की मैं क्या करूँ, कण्ट्रोल नहीं हो रहा था, अब धीरे धीरे करूँगा, प्लीज दी आओ ना वापिस मेरी गॉड में'
लड़की 'बिलकुल नहीं, कण्ट्रोल करो, अब कुछ नहीं करने दूंगी'
लड़का 'अच्छा मेरी प्यारी दी, आप अपनी जगह पर hi रहो, लेकिन काम से काम बब्बू तो सहलाने दो ना प्लीज दी, के ों'
लड़की 'अब यहां नहीं, घर पर दबा लेना और बब्बू पि भी लेना.
लड़का 'दी, आप घर पर बोलोगी , मम्मी आ जाएंगी, पापा को पता चल जाएगा और आप घर पर कुछ भी करने नहीं डौगी'.
लड़की 'अच्छा मेरे प्यारे राजा भैया प्रॉमिस. तुम रात को मेरे रूम में आ जनला, अब खुश, शांति से मूवी देखेंगे aur....aur...........'
लड़का 'ओह माय लव, कितने दिनों से बब्बू नहीं पिलाया है आपने याद है'
लड़की 'अब ज्यादा senṭi मत हो ... पागल आज सुबह hi तूने किचन में पीया था और किश भी किया ... तेरा तो पेṭ hi नहीं भरता है मेरे भाई'
लड़का - ( अपनी जगह से से थोड़ा uṭhakar लड़की को गले लगा कर एकदम से किश करने लगा और लड़की ने उसे कुछ मिनट बाद haṭa दिया) थैंक्स दी, लव यू सो मच माय सेक्सी दी, यू अरे माय बेसṭ दी'
लड़की 'और कितनी दी है तुम्हारी'
लड़का 'क्या बात कर रही हो बस आप hi हो' कुछ देर तक वो शान्ति से एक दूसरे को देखते रहे . फिर लड़के ने कहा 'माय लव, यंहा कोई नहीं है हमारे शिव, प्लीज आ जाओ न मेरी गॉड में' लड़की पहले तू न नुकुर करती रही, फिर पिघल गयी और लड़के की गॉड में आ गयी. लड़के ने उसके होठों को चूसते हुए अपने हाथों को उसके टॉप के नीचे से टॉप में घुसकर उसके बब्बू को पकड़ कर मसलने लगा. लड़की सिसकने लगी और लड़का अपनी क्रियाओं को तेज करता जा रहा था.
संध्या से अब बर्दाश्त नहीं जो रहा था तू उसने आदित्य का हाथ पकड़ कर उससे वंहा से चलने के लिए कहा. थोड़ी दूर आगे जाने पर उन्हें ओर कपल्स इस तरह से अपने प्यार में दुबे हुए दिखाई दिए. इन् सब को देखकर संध्या के मन में भी हलचल होने लगी.
आदित्य उसके कान में 'अगर आपका मन है तू वापिस चले'
संध्या 'नहीं अब रात होने वाली है, चलो घर चलते हैं'
आदित्य 'घर पर क्या करोगी, चलो आज डिनर बहार करेंगे'
संध्या 'पहले घर चलते हैं फिर तैयार होकर जंहा कहोगे चलूंगी'
आदित्य 'सिर्फ चलोगी' या कुछ करोगी'
संध्या उससे मुक्का मरती हुई 'चलो घर चलो ना'
उसके बाद आदित्य ने कुछ नहीं कहा और बाइक से घर पंहुच गए और फिर घर से तैयार होकर डिनर के लिए जाने लगे. जब संध्या आयी तू वाकई बहुत सुन्दर लग रही थी. उसने थोड़ा make-up भी किया हुआ था और बहुत अच्छा परफ्यूम भी लगाया हुआ था. आदित्य अपनी माँ की खूबसूरती को देखकर हैरान रह गया और उसके मुंह से निकला 'यू अरे लुकिंग गॉर्जियस'
आदित्य ने इस बार कैब बुक करवाई हुई थी और वो दोनों कैब में बैठकर पहले एक बहुत hi अच्छे मॉल में पंहुचे और वंहा से आदित्य ने संध्या को एक गोल्डन चैन दिलवाई और कहा 'मेरी जॉब लगने की ख़ुशी में मेरी प्यारी गर्लफ्रेंड को' संध्या बहुत खुश हुई और उसने आदित्य के गलों को चुम कर अपनी ख़ुशी जाहिर की. फिर आदित्य उससे एक फाइव स्टार होटल में ले गया जंहा पर उसने बुफे डिनर बुक करवाया था.
वंहा पर टेबल पर सॉफ्ट ड्रिंक्स लेकर वो एक टेबल पर बैठ गए तभी एक कपल आया और वो कहने लगे 'िफ़ यू don't मंद, कैन वे शेयर थे टेबल' आदित्य ने कहा 'No प्रॉब्लम'
वो कपल भी अपनी ड्रिंक्स ले आये और वेटर ने आकर आदित्य से पूछा 'सर आपके लिए कुछ लॉन'
आदित्य 'सॉफ्ट ड्रिंक्स'
उस कपल ने उन्हें हार्ड ड्रिंक्स लेने के लिए कहा लेकिन दोनों hi नहीं मने. फिर आदित्य फ्रूट्स लेने गया तू उससे वंहा पर िरा मैडम दिखाई दी और वो आदित्य को देखकर बहुत खुश हुई क्योँकि उससे जिसके साथ डिनर करना था वो नहीं आया था और अकेली बोआर हो रही थी.
उसने आदित्य से पूछा की वो अकेला आया तू उसने कहा 'आइये, आप को मिलवाता हूँ'
िरा मैडम उसके साथ आयी और संध्या से मिलकर बहुत खुश हुई और उन दोनों को अपनी रिजर्व्ड टेबल पर ले आयी.
आदित्य ने संध्या को अपनी गर्लफ्रेंड के तौर पर इंट्रोडस करवाया और संध्या को बताया की 'ये मैडम उस कंपनी की मालकिन हैं, जंहा पर part टाइम काम मिला है'
िरा मैडम ने वेटर को बुलाकर वाइन लेन के लिए कहा और उन दोनों को भी दी. आदित्य और संध्या मन करने लगे तू उसने बताया की खाने से पहले इससे लेना अच्छा होता है और ये हार्ड भी नहीं है. वो संध्या को समझा रही थी की ये तू लेडीज ड्रिंक्स है. वंहा पर िरा मैडम के बार बार कहने पर वो दोनों hi मन नहीं कर पाए और दो दो पेग ले लिए. िरा मैडम ने आदित्य से कहा 'योर गर्लफ्रेंड इस तू ब्यूटीफुल' जिससे सुनकर संध्या शर्मा गयी, लेकिन मन hi मन इस बात से खुश थी की एक मॉडर्न लड़की ने उसकी तारीफ़ की थी.
फिर खाना खाने से पहले िरा मैडम ने उन्हें डांस के लिए उकसाया तू वो दोनों डांस फ्लोर पर चले गए और थोड़ा बहुत डांस करके वापिस आने लगे. िरा मैडम ने उन् दोनों से कहा 'जोड़ी, बहुत अच्छी है, बस किसी की नज़र न लगे'
िरा मैडम ने संध्या से कहा की उसका भी मन डांस का कर रहा है, अगर उससे बुरा न लगे तू वो आदित्य के साथ डांस कर ले. संध्या ने कहा उससे तू कोई प्रॉब्लम नहीं है. असल में संध्या छाती तू नहीं थी लेकिन वो मजबूर थी क्योंकि िरा मैडम ने आदित्य का बहुत फायदा कराया था और आगे भी कराएगी.
वो दोनों डांस फ्लोर पर पंहुच कर एक दूसरे से चिपक कर डांस कर रहे थे जिससे देखकर संध्या को अच्छा तू नहीं लग रहा था परन्तु उसने अपने मन को मार लिया.
फिर खाना खाने के बाद वो दोनों िरा मैडम की गाड़ी में घर की तरफ चल दिए और घर में पंहुच कर जैसे hi संध्या अपने कमरे में जाने लगी तू आदित्य ने उससे पकड़कर अपनी बांहों में उठा लिया और उससे अपने कमरे में लेजाकर बीएड पर लिटा दिया.
संध्या 'ये क्या कर रहे हो'
आदित्य 'अपनी प्यारी गर्लफ्रेंड से प्यार करूँगा'
संध्या उठकर बैठ गयी तू आदित्य ने कहा 'आज आप बहुत सुन्दर लग रही हैं और उसको गले लगा कर उसके चेहरे पर चुम्बनों की बारिश कर दी.
आदित्य ने उसके होठों को अपने होठों में दबाकर जोर जोर से चूसने लगा. संध्या पहले तू प्रतिरोध करती रही, लेकिन फिर उसका साथ देने लगी. आदित्य ने उसके होठों को चूसते हुए अपने हाथों से उसकी चूचियों को दबाने लगा और फिर कपड़ों के ऊपर से hi उसके निप्पल्स को अपने अंगूठे और उंगली में पकड़ कर दबा दिया तू संध्या 'uuuu.....uuu....iii... K...KKK ..yy....aaa....kk ...आए ....rrr...aaa....hhh'.....eee...hhh'....ooo'
आदित्य उसकी आवाज़ों को नज़रअंदाज़ करते हुए उसके होठों को चूमते हुए जब साँसें उखाड़ने लगी तू होठों को छोड़कर उसके गलों और गर्दन को चूमने लगा और उसकी गर्दन को चूमने से संध्या की सिसकने की गति तेज होती जा रही थी. आदित्य अपने हाथों से उसके निप्पल्स को दबाते हुए अब उन्हें छोड़कर अपने हाथों को उसकी बगल में से निकलकर उसकी पीठ पर ले गया और पीठ पर हाथ फेरते हुए उसके नितम्बों पर पंहुच गया और उन्हें दबाने लगा. संध्या को अच्छा तू लग रहा था लेकिन उसकी बेचैनी भी बढ़ रही थी. उसने पता नहीं क्या हुआ की आदित्य को धक्का दे दिया. आदित्य इसके लिए तैयार नहीं था और संध्या उससे छिटक कर दूर होकर गहरी गहरी साँसें लेने लगी.
आदित्य ने उसके पास जाकर अपने होठों को उसके नग्न कंधे पर रख कर उसके पेट पर अपने होठों को लेजाकर उससे अपने साथ चिपटने लगा तू संध्या उसके हाथों को वंहा से हटाने लगी और कहने लगी 'नहीं न... न करो' आदित्य ने उसकी बात को सुनकर उससे अपनी बांहों में भर लिया और कहने लगा 'इतनी खूबसूरत लग रही हो और आप कहती हो की मैं आप से प्यार न करूँ, ये तू मेरी जान की बेइज़्ज़ती होगी, जबकि मुझे तू आपकी खूबसूरती को पूरी इज़्ज़त देनी है' इतना कहकर आदित्य ने उससे पीछे से जकड लिया और उसके लिंग का दबाव संध्या के नितम्बों पर पद रहा था. आदित्य ने अपने एक हाथ को संध्या के कुर्ते के गले से उसके उरोज को पकड़ने के लिए अंदर डालने लगा. संध्या के दोनों हाथ उस हाथ को निकलने में लग गए. इधर आदित्य ने संध्या की गर्दन को भी अच्छे से चूमते हुए उसकी भावनाओं में आग लगा दी थी.
संध्या इसमें उलझी हुई थी की आदित्य ने अपने हाथ को कुर्ते के कटाव से ले जाकर उसके पेट पर रख दिया और उसकी सलवार का नाडा एक झटके में खोल दिया और अपने हाथ को उसकी योनि की तरफ ले जाने संध्या की तू हालत hi ख़राब होने लगी. उसका दिल बहुत तेजी से धधकने लगा. उससे जब होश आया और वो अपने हाथ से सलवार को पकड़ने के लिए हाथ नीचे लायी तू आदित्य ने उससे एकदम से अपनी बांहों में उठा लिया और बीएड पर ले आया और अपने हाथ को कुर्ते के अंदर कर दिया और ब्रा के ऊपर से उसकी चुकी को दबाने लगा. संध्या ने अपने हाथ को ऊपर करके उसका हाथ कुर्ते से निकलना चाहा तू आदित्य ने उसकी सलवार खींच कर उसकी टांगों से बहार कर दी.
संध्या को शर्म आने लगी, लेकिन एक तू वाइन का नशा और दूसरा िरा मैडम से जलन की वजह से वो आदित्य के साथ सख्त भी नहीं होना छह रही थी. आदित्य अब उसकी नग्न हो चुकी टांगों को सहलाने लगा. संध्या मचल रही थी और मुंह से 'eeee....eee..... Iiiii....iiii....ee.... OOO...OOO..hhh...
n....a.....hhhi....iii..n'
आदित्य ने अब दूसरे हाथ से उसका कुरता पकड़ कर पेट के ऊपर तक कर दिया और उसकी चूचियों को अपने होठों से कपड़ों के ऊपर से चूसने लगा.
आदित्य ने जबरदस्ती संध्या के गले से कुरता निकल कर बहार कर दिया जिससे संध्या के शरीर पर सिर्फ ब्रा और पैंटी रह गयी थी. आदित्य उसके चेहरे को चूमने लगा और चूमते हुए चूचियों पर आ गया और ब्रा में से झांक रही चूचियों को चूमने चाटने और दबाने लगा. संध्या अपने हाथों से आदित्य के कंधे से पकड़ कर उससे अपने से दूर करने की कोशिश करने लगी. वो जोर लगा कर उससे अपने ऊपर से हटाने लगी, लेकिन कामयाब नहीं हो पायी.
आदित्य ए.बी.ए. उसके पेट पर आकर उसके पेट को चूमते हुए उसकी नाभि के आसपास अपनी जीभ को चलने लगा.
संध्या अपनी उखड़ी हुई साँसों से 'uuu.....iiiii....... N...aa....hhii.... Ka....rr...ro.. naa...aa....... R.....uuuu.....KKK.... J.....aa......ooo'
आदित्य की जीभ ने चूसते हुए जैसे hi उसकी नाभि में प्रवेश किया और जीभ नाभि में अंदर बहार होने लगी तू संध्या 'nnn......a.aa...hhh...iii.... uuuu.......iiii......iiiiii..... M...aa...aa.. n...aa...hhh'...iii... K....aaa...rr...OOO..'
संध्या को आदित्य को हटाने का प्रयास कर रही थी एक डैम से उसकी सिसकारियों की आवाज़ 'aaaaa.......aaa.....hhh...... hhhh....a...aa....nnn aaaa....aa....h...... aa....aauu.....rr... kk...aa...rrr...ooo, hhhh....aaa....a...nnhhhh... aaa...iiiii...ssssee....eee....' बदल गयी और अब उसके हाथ आदित्य के सर पर पंहुच कर उससे अपने ऊपर दबा रही थी.
आदित्य उसके ऐसा करने से ऊपर आ गया और उसके चेहरे पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी. संध्या के हाथ भी आदित्य की T-shirt को नीचे से पकड़ कर बनियान समेत उसके गले से बहार कर दी. अब आदित्य भी ऊपर से नग्न हो चूका था. उसने जैसे hi संध्या की आँखों में देखा तू उसने अपनी नज़रे झुका ली. आदित्य ने उसको अपने आगोश में भर लिया और अपने हाथों को पीठ पर ले जाकर उसके ब्रा के स्ट्राप को भी खोल दिया और उसके खुलते hi संध्या के मुंह से बहुत hi तेज सिसकने की आवाज़ आयी. संध्या ने आदित्य को अपनी बांहों में कास लिया ताकि ब्रा निकलने न पाए. आदित्य ने अपने हाथों को उसके नितम्बों पर ले जाकर उसकी पैंटी में हाथ डालकर उसके नितम्बों को नग्न कर दिया और उसकी पैंटी को नीचे खिसकते हुए घुटनो तक ले गया और फिर अपने पेअर की मदद से उससे उसकी टांगों से बहार फेंक दिया. संध्या ने कोशिश तू बहुत की लेकि कामयाब न हो पायी और इस धींगामुश्ती में उसकी ब्रा भी उसकी बाजुओं से झूलकर उसके उरोजों को नग्न कर गयी. आदित्य ने उस आखिरी कपडे को भी उसके शरीर से अलग कर दिया.
आदित्य उसके शरीर को देखकर हैरान रह गया. इतना बेदाग और कैसा हुआ शरीर और बहुत hi सेक्सी फिगर देखकर उसके होश उड़द गए की ये उसकी माँ है. उससे विश्वास hi नहीं हो रहा था. उससे तू ये एक कंवरी लड़की hi लग रही थी. आदित्य का इस तरह देखने से संध्या बहुत बुरी तरह शर्मा गयी. पहले तू अपनी चूचियों को अपने हाथों से धक् रही थी, फिर जब आदित्य की नज़रों को अपनी नग्न हुई योनि पर देखा तू उसने अपनी जांघों को आपस में भींच लिया और फिर पलट गयी तू उसके नितम्बों ने आदित्य की उत्तेजना को चरम पर ला दिया.
आदित्य ने जल्दी से बाकि बचे हुए कपडे अपने शरीर से अलग किये और फिर संध्या की बेदाग चिकनी टांग पर जैसे hi हाथ फेरा तू उसके मुंह से 'आए ..aa...h' निकला तू आदित्य अपने हाथों को उसकी टांगों पर सहलाते हुए ऊपर की तरफ बढ़ने लगा और उसकी ऊपरी जांघों के अंदरूनी भागों पर हाथ फिरते hi संध्या की टाँगे कम्पनी लगी. आदित्य ने उसके नितम्बों पर हाथ फेरया और उन्हें दबाने लगा, जैसे hi वो उन्हें दबाता तू संध्या के मुंह से सिसकने की आवाज़े तेज़ होने लगाती.
आदित्य इस वक़्त बहुत जयादा उत्तेजित हो चूका था, इसलिए वो अब जयादा देर नहीं करना चाहता था. वो संध्या के बगल में लेट गया और उसकी पीठ पर हाथ चलते हुए कहने लगा 'यू अरे तू सेक्सी' और अपने हाथों से उससे पलट दिया और कहा 'आप बहुत खूबसूरत, प्यारी और सेक्सी हैं, आज आप से बहुत प्यार करूँगा'
संध्या 'n....aa...hi... ये गलत है '
आदित्य 'जान कुछ गलत नहीं है, आज आपको जिंदगी का आनंद दूंगा' इतना कहकर आदित्य ने अपने हाथ को उसकी योनि की तरफ ले जाकर वंहा पर सहलाना लगा तू संध्या को भी मस्ती आने लगी.
आदित्य ने उसके होठों को चूमते हुए जैसे hi उसके गले लगा तू दोनों के नग्न शरीरों ने पहली बार स्पर्श किया तू बहुत तेज झटका लगा और दोनों के हाथ स्वाट hi एक डस्ट के नजदीक आना छह रहे थे. दोनों के शरीरों का घर्षण उनकी भावनाओं और उत्तेजना को कब बढ़ा गया उन्हें पता hi नहीं चला.
आदित्य संध्या के ऊपर आ चूका था और उससे चूमने चाटने लगा और उसके लिंग ने कब संध्या की योनि द्वार को छुआ और कब आदित्य का लिंग उसकी योनि में प्रवेश कर गया उन्हें कोई होश नहीं रहा. संध्या को तब पता चला जब उससे बहुत तेज दर्द का अनुभव हुआ और उसके मुंह से एक चीख निकली.
आदित्य ने उसके होठों को अपने होठों में लेकर उन्हें जोर जोर से चूसने लगा. अपने हाथों को उसके उरोजों पर ले जाकर उन्हें मसलने लगा. काफी देर तक उसने अपने लिंग को जयादा अंदर नहीं किया. फिर मौका भांपकर एक जोरदार झटका लगाया जिससे उसका लिंग पूरा का पूरा संध्या की योनि में प्रवेश कर गया. संध्या की आँखों से आंसू निकलने लगे. उसकी आवाज़े तू आदित्य ने अपने मुंह में दबा दी थी, लेकिन आंसुओं को निकलने से नहीं रोक पाया.
जब संध्या को थोड़ा सा आराम मिला और उसके मुंह से अब 'gu...uu...n. ggg....uuu.....nn .' की आवाज़े आ रही थी तू आदित्य ने अपने होठों को उसके गलों पर ले जाकर उसके आसुओं को पीने लगा.
अब जब देखा की संध्या थोड़ा ठीक है तू आदित्य ने अपने लिंग को योनि से हलके से बहार खींचा और फिर अंदर कर दिया. इस तरह वो धीरे धीरे अंदर बहार करने लगा.
संध्या के मुंह से इस क्रिया में 'aaa.....aa....hhh.. ी..... iiiiii.......eee......... Uuu...uuu.....nn.....hhh..... Uuu...uuuu.....nnn...hhh...
aaaa........aa.........hhh...... Oooooooo.........ooooo...' की आवाज़े आने लगी.
थोड़ी देर में इस तरह करने से संध्या को भी अब मजा आने लगा था. वो अब अपने नितम्बों को उठा उठा कर आदित्य का साथ देने लगी और उसके मुंह से मादक सिसकारियों के निकलने का सिलसिला जारी था. वो कह रही थी 'aaa....a....hh........ hhhhh....aa.....nnn.....hhh... आआ ...aa....aa....h...aa... Aa.....I......sssss...eee... हठियई. aaa...iii... ' करती रही और आदित्य उससे चूमते हुए बोल रहा था 'ी लव यू माँ, यू अरे माय स्वीट लव, माय गर्लफ्रेंड. मैं आपको बहुत प्यार करूँगा. तुम बहुत अच्छी हो माँ. यू हैवे ा परफेक्ट फिगर' और ये कहते हुए आदित्य अब जोर जोर से अपने लिंग को योनि के अंदर बहार करने लगा. संध्या अब अपने चरम पर पंहुचने वाली थी और लम्बी लम्बी साँसें लेने लगी. इधर आदित्य भी अपने चरम को प्रपात करने वाला था. अब दोनों hi तेज तेज योनि और लिंग का खेल खेलने लगे और एक दूसरे के अंदर सामने की लिए एक दूसरे का साथ दे रहे थे. और फिर वो वक़्त भी आ गया जब दोनों का स्खलन एक साथ हुआ और दोनों अपने चरम को पाकर एक दूसरे की बांहों में समां गए और एक दूसरे के होठों को अपने होठों में जकड लिया