Incest Porn Kahani Rishta - Page 16 - SexBaba
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Incest Porn Kahani Rishta

वेल, लव एंड हेट अरे थे तवो साइड्स ऑफ़ थे शामे कॉइन. इन माय व्यू इवन हेट इस ानोथेर फॉर्म ऑफ़ लव अस थे पर्सन हु हट्स इस रेमेम्बेरिंग यू.

अनीहौ, ी क्नोव यू अस ा राइटर एंड योर राइटिंग स्किल्स हैवे डेप्थ, व्हिच मैक्स यू ा ग्रेट राइटर, इर्रेस्पेक्टिवे ऑफ़ व्हाट ओठेर्स थिंक अबाउट यू.

विथ रेगार्ड्स तो थे प्रेजेंट स्टोरी, ी didn't वांट पास्ट एंड प्रेजेंट तो मिक्स, बूत दूर तो थे प्रेशर ऑफ़ रीडर्स, ी हद तो दो तहत.

वेल, नाउ यू don't नीड तो दिल्ली डाँग अस बोथ पार्ट्स अरे इन प्रेजेंट नाउ.

तेरे कुड बे फ्लैशेस ऑफ़ थे पास्ट.

थैंक्स
 
अपडेट 84

संध्या ने सम्भोग तू बहुत किया था लेकिन इस तरह का प्यार उससे पहली बार मिल रहा था और वो इस प्यार की बरसात में सब कुछ भूलती जा राजी थी की कैसे वो अपने सेज जवान बेटे से प्यार कर बैठी और आज इतना आगे तक बढ़ गयी जंहा से वापसी काफी मुश्किल थी. आदित्य के चुम्बनों ने उसको दूसरी दुनिया में ला पटका था और इस आनंद में वो सब कुछ भूल कर उसका साथ दिए जा रही थी. उससे होश hi नहीं रहा की कब आदित्य ने उसकी छीनी को उसके गले से निकल कर बहार कर दिया है. वो तू आदित्य द्वारा उसके उरोजों को दबाये जाने और उसके चुम्बनों में खोयी हुई थी की उससे जैसे hi आदित्य के होठों का स्पर्श उसके उरोजों की घाटी पर पड़ा तू उससे होश में ला दिया और उससे समझ नहीं आ रहा था की क्या करें. आदित्य उसके उरोजों की घाटी को बड़े hi मजे से चुम और छत रहा था. मजा तू संध्या को भी बहुत आ रहा था लेकिन शर्म ने उसके मजे लेने पर ब्रेक लगायी हुई थी. आदित्य ने अपनी जीभ निकल कर जैसे hi संध्या के उरोजों की घाटी में डालनी चाही तू वो सिहर उठी. वो दोनों अभी और आगे बढ़ते की तभी उन्हें किसी के आने का एहसास हुआ तू दोनों अलग होकर बैठ गए.

संध्या जल्दी जल्दी अपने आप को ठीक करने लगी और उसने जब अपनी चुन्नी को नीचे पड़े हुए देखा तू उससे समझ hi नहीं आया की ये कब हैट गयी. फिर कुछ सोचकर मन hi मन मुस्कुरा रही थी और चुन्नी उठाकर अपने सीने पर दाल ली. अब उससे आदित्य की तरफ देखने में बहुत जयादा शर्म आ रही थी.

आदित्य खिसक कर संध्या के पास पंहुच कर उसके गले में बांहों को डालकर अपने पास करते हुए 'कोई नहीं है'

संध्या 'नहीं नहीं कोई तू था'

आदित्य ने उससे कोल्ड ड्रिंक पीने के लिए दी और चिप्स भी दिए. संध्या ने देखा की आदित्य ने एक hi गिलास में कोल्ड ड्रिंक डाली थी और वो उससे पकड़ा दी थी तू उसने पूछा 'तुम नहीं पि रहे'

आदित्य ने कहा 'पियूँगा'

संध्या 'लेकिन तुम ने गिलास में तू डाली नहीं है'

आदित्य 'मैं तू इसी गिलास की कोल्ड ड्रिंक पियूँगा'

संध्या ने अपने हाथ में पकडे गिलास को उसकी तरफ बढ़ाते हुए 'लो, पियो'

आदित्य 'ऐसे थोड़ी न, मैं इस गिलास की पियूँगा लेकिन गिलास से नहीं बल्कि (उसके होठों को अपनी उंगली से छूकर) यंहा से'

संध्या उसकी बात सुनकर बहुत जयादा शर्मा गयी और पलकों को नीचे रखकर 'ऐसा थोड़ी न होता है'

आदित्य उसके होठों को अपने अंगूठे से मसलते हुए 'अब मेरी गर्लफ्रेंड नहीं चाहती तू कोई बात नहीं' और उसने संध्या के होठों से अपने अंगूठे को हटा लिया.

संध्या सोच में पद गयी और उससे लगने लगा की आदित्य जानभूझकर उससे तंग कर रहा है और सोचा की ऐसा नहीं करुँगी और सोच में पद गयी. फिर उसने आदित्य के कंधे पर हाथ रखकर अपनी तरफ किया और उसके होठों पर अपने होठों को रख दिया और मुंह में भरी हुई कोल्ड ड्रिंक उसके मुंह में पंहुचने लगी. इस क्रिया में कुछ कोल्ड ड्रिंक दोनों के होठों से बहकर उनकी गर्दन से होकर सीने पर जाने लगी. आदित्य उसके होठों को चुस्त हुआ नीची गर्दन पर चूसने लगा और फिर उसकी चुन्नी हटाकर उसके सीने पर अपने होठों से उस कोल्ड ड्रिंक को चाटने लगा. संध्या तू उसके छटने से हवाओं में तैरने लगी और आदित्य अपनी मनमानी करता रहा. संध्या उससे बार बार कहती रही की कोई आ जायेगा लेकिन वो नहीं मन. थोड़ी देर बाद एक आवाज़ सुनाई दी 'आज तू हमारी जगह पर कोई ओर कपल बैठा है' तब लड़की बोली 'चलो यंहा से उनको डिस्टर्ब न करो, दूसरी जगह चलते हैं' और फिर आवाज़े आणि बंद हो गयी. ये बातें सुनकर संध्या घबरा गयी और आदित्य से मिन्नत करते हुए कहना लगी 'चलो यंहा से'

आदित्य भी उसकी हालत देखकर ज़िद न करते हुए 'ठीक है जैसे आपकी मर्जी, वैसे घबराने की कोई बात नहीं है, यंहा पर ये सब नार्मल है'

संध्या 'किसी जान पहचान वाले ने देख लिया होगा तू बहुत बदनामी होगी'

आदित्य ने उसके चेहरे को पकड़ कर उसकी आँखों में झांकते हुए 'आप मेरी गर्लफ्रेंड हैं और मैं आपकी इज़्ज़त पर कोई आंच नहीं आने दूंगा, आप बिलकुल भी चिंता न करे' संध्या उसकी बात सुनकर भावुक होकर उसके गले लग गयी तू आदित्य ने उससे अपनी बांहों में कास लिया जिससे उसकी चूचियों ने आदित्य के सीने पर ग़दर मचा दिया, लेकिन वो अपने ऊपर नियंत्रण करते हुए उसकी कमर में हाथ डालकर साथ लेकर चल पड़ा. रस्ते में झाड़ियों के पीछे से वही लड़का और लड़की की आवाज़े सुनाई दी तू जिज्ञासावश संध्या ने आँखों के इशारे से आदित्य को कहा की 'देखते है की कौन हैं' वो दोनों धीरे से उस तरफ जाने लगे तू उन्हें एक लड़का और लड़की दिखाई दिए जो झाड़ियों के पीछे अपनी प्रेमलीला में व्यस्त थे. आदित्य ने चलने के लिए कहा लेकिन संध्या उन्हें देखना छह रही थी.

उन् दोनों की बराबर उस जोड़े पर नजर थी और देखा की कुछ देर किसिंग करने के बाद अचानक लड़की उस लड़के की गॉड से uṭhi और नीचे जमीन पर जा बैठी और baiṭhate hi कुछ तेज से बोली 'भैया क्या है, धीरे नहीं दबा सकते थे'

लड़का 'सॉरी दी, वो क्या है न की आज आप इतनी हॉट लग रही हैं की मैं क्या करूँ, कण्ट्रोल नहीं हो रहा था, अब धीरे धीरे करूँगा, प्लीज दी आओ ना वापिस मेरी गॉड में'

लड़की 'बिलकुल नहीं, कण्ट्रोल करो, अब कुछ नहीं करने दूंगी'

लड़का 'अच्छा मेरी प्यारी दी, आप अपनी जगह पर hi रहो, लेकिन काम से काम बब्बू तो सहलाने दो ना प्लीज दी, के ों'

लड़की 'अब यहां नहीं, घर पर दबा लेना और बब्बू पि भी लेना.

लड़का 'दी, आप घर पर बोलोगी , मम्मी आ जाएंगी, पापा को पता चल जाएगा और आप घर पर कुछ भी करने नहीं डौगी'.

लड़की 'अच्छा मेरे प्यारे राजा भैया प्रॉमिस. तुम रात को मेरे रूम में आ जनला, अब खुश, शांति से मूवी देखेंगे aur....aur...........'

लड़का 'ओह माय लव, कितने दिनों से बब्बू नहीं पिलाया है आपने याद है'

लड़की 'अब ज्यादा senṭi मत हो ... पागल आज सुबह hi तूने किचन में पीया था और किश भी किया ... तेरा तो पेṭ hi नहीं भरता है मेरे भाई'

लड़का - ( अपनी जगह से से थोड़ा uṭhakar लड़की को गले लगा कर एकदम से किश करने लगा और लड़की ने उसे कुछ मिनट बाद haṭa दिया) थैंक्स दी, लव यू सो मच माय सेक्सी दी, यू अरे माय बेसṭ दी'

लड़की 'और कितनी दी है तुम्हारी'

लड़का 'क्या बात कर रही हो बस आप hi हो' कुछ देर तक वो शान्ति से एक दूसरे को देखते रहे . फिर लड़के ने कहा 'माय लव, यंहा कोई नहीं है हमारे शिव, प्लीज आ जाओ न मेरी गॉड में' लड़की पहले तू न नुकुर करती रही, फिर पिघल गयी और लड़के की गॉड में आ गयी. लड़के ने उसके होठों को चूसते हुए अपने हाथों को उसके टॉप के नीचे से टॉप में घुसकर उसके बब्बू को पकड़ कर मसलने लगा. लड़की सिसकने लगी और लड़का अपनी क्रियाओं को तेज करता जा रहा था.

संध्या से अब बर्दाश्त नहीं जो रहा था तू उसने आदित्य का हाथ पकड़ कर उससे वंहा से चलने के लिए कहा. थोड़ी दूर आगे जाने पर उन्हें ओर कपल्स इस तरह से अपने प्यार में दुबे हुए दिखाई दिए. इन् सब को देखकर संध्या के मन में भी हलचल होने लगी.

आदित्य उसके कान में 'अगर आपका मन है तू वापिस चले'

संध्या 'नहीं अब रात होने वाली है, चलो घर चलते हैं'

आदित्य 'घर पर क्या करोगी, चलो आज डिनर बहार करेंगे'

संध्या 'पहले घर चलते हैं फिर तैयार होकर जंहा कहोगे चलूंगी'

आदित्य 'सिर्फ चलोगी' या कुछ करोगी'

संध्या उससे मुक्का मरती हुई 'चलो घर चलो ना'

उसके बाद आदित्य ने कुछ नहीं कहा और बाइक से घर पंहुच गए और फिर घर से तैयार होकर डिनर के लिए जाने लगे. जब संध्या आयी तू वाकई बहुत सुन्दर लग रही थी. उसने थोड़ा make-up भी किया हुआ था और बहुत अच्छा परफ्यूम भी लगाया हुआ था. आदित्य अपनी माँ की खूबसूरती को देखकर हैरान रह गया और उसके मुंह से निकला 'यू अरे लुकिंग गॉर्जियस'

आदित्य ने इस बार कैब बुक करवाई हुई थी और वो दोनों कैब में बैठकर पहले एक बहुत hi अच्छे मॉल में पंहुचे और वंहा से आदित्य ने संध्या को एक गोल्डन चैन दिलवाई और कहा 'मेरी जॉब लगने की ख़ुशी में मेरी प्यारी गर्लफ्रेंड को' संध्या बहुत खुश हुई और उसने आदित्य के गलों को चुम कर अपनी ख़ुशी जाहिर की. फिर आदित्य उससे एक फाइव स्टार होटल में ले गया जंहा पर उसने बुफे डिनर बुक करवाया था.

वंहा पर टेबल पर सॉफ्ट ड्रिंक्स लेकर वो एक टेबल पर बैठ गए तभी एक कपल आया और वो कहने लगे 'िफ़ यू don't मंद, कैन वे शेयर थे टेबल' आदित्य ने कहा 'No प्रॉब्लम'

वो कपल भी अपनी ड्रिंक्स ले आये और वेटर ने आकर आदित्य से पूछा 'सर आपके लिए कुछ लॉन'

आदित्य 'सॉफ्ट ड्रिंक्स'

उस कपल ने उन्हें हार्ड ड्रिंक्स लेने के लिए कहा लेकिन दोनों hi नहीं मने. फिर आदित्य फ्रूट्स लेने गया तू उससे वंहा पर िरा मैडम दिखाई दी और वो आदित्य को देखकर बहुत खुश हुई क्योँकि उससे जिसके साथ डिनर करना था वो नहीं आया था और अकेली बोआर हो रही थी.

उसने आदित्य से पूछा की वो अकेला आया तू उसने कहा 'आइये, आप को मिलवाता हूँ'

िरा मैडम उसके साथ आयी और संध्या से मिलकर बहुत खुश हुई और उन दोनों को अपनी रिजर्व्ड टेबल पर ले आयी.

आदित्य ने संध्या को अपनी गर्लफ्रेंड के तौर पर इंट्रोडस करवाया और संध्या को बताया की 'ये मैडम उस कंपनी की मालकिन हैं, जंहा पर part टाइम काम मिला है'

िरा मैडम ने वेटर को बुलाकर वाइन लेन के लिए कहा और उन दोनों को भी दी. आदित्य और संध्या मन करने लगे तू उसने बताया की खाने से पहले इससे लेना अच्छा होता है और ये हार्ड भी नहीं है. वो संध्या को समझा रही थी की ये तू लेडीज ड्रिंक्स है. वंहा पर िरा मैडम के बार बार कहने पर वो दोनों hi मन नहीं कर पाए और दो दो पेग ले लिए. िरा मैडम ने आदित्य से कहा 'योर गर्लफ्रेंड इस तू ब्यूटीफुल' जिससे सुनकर संध्या शर्मा गयी, लेकिन मन hi मन इस बात से खुश थी की एक मॉडर्न लड़की ने उसकी तारीफ़ की थी.

फिर खाना खाने से पहले िरा मैडम ने उन्हें डांस के लिए उकसाया तू वो दोनों डांस फ्लोर पर चले गए और थोड़ा बहुत डांस करके वापिस आने लगे. िरा मैडम ने उन् दोनों से कहा 'जोड़ी, बहुत अच्छी है, बस किसी की नज़र न लगे'

िरा मैडम ने संध्या से कहा की उसका भी मन डांस का कर रहा है, अगर उससे बुरा न लगे तू वो आदित्य के साथ डांस कर ले. संध्या ने कहा उससे तू कोई प्रॉब्लम नहीं है. असल में संध्या छाती तू नहीं थी लेकिन वो मजबूर थी क्योंकि िरा मैडम ने आदित्य का बहुत फायदा कराया था और आगे भी कराएगी.

वो दोनों डांस फ्लोर पर पंहुच कर एक दूसरे से चिपक कर डांस कर रहे थे जिससे देखकर संध्या को अच्छा तू नहीं लग रहा था परन्तु उसने अपने मन को मार लिया.

फिर खाना खाने के बाद वो दोनों िरा मैडम की गाड़ी में घर की तरफ चल दिए और घर में पंहुच कर जैसे hi संध्या अपने कमरे में जाने लगी तू आदित्य ने उससे पकड़कर अपनी बांहों में उठा लिया और उससे अपने कमरे में लेजाकर बीएड पर लिटा दिया.

संध्या 'ये क्या कर रहे हो'

आदित्य 'अपनी प्यारी गर्लफ्रेंड से प्यार करूँगा'

संध्या उठकर बैठ गयी तू आदित्य ने कहा 'आज आप बहुत सुन्दर लग रही हैं और उसको गले लगा कर उसके चेहरे पर चुम्बनों की बारिश कर दी.

आदित्य ने उसके होठों को अपने होठों में दबाकर जोर जोर से चूसने लगा. संध्या पहले तू प्रतिरोध करती रही, लेकिन फिर उसका साथ देने लगी. आदित्य ने उसके होठों को चूसते हुए अपने हाथों से उसकी चूचियों को दबाने लगा और फिर कपड़ों के ऊपर से hi उसके निप्पल्स को अपने अंगूठे और उंगली में पकड़ कर दबा दिया तू संध्या 'uuuu.....uuu....iii... K...KKK ..yy....aaa....kk ...आए ....rrr...aaa....hhh'.....eee...hhh'....ooo'

आदित्य उसकी आवाज़ों को नज़रअंदाज़ करते हुए उसके होठों को चूमते हुए जब साँसें उखाड़ने लगी तू होठों को छोड़कर उसके गलों और गर्दन को चूमने लगा और उसकी गर्दन को चूमने से संध्या की सिसकने की गति तेज होती जा रही थी. आदित्य अपने हाथों से उसके निप्पल्स को दबाते हुए अब उन्हें छोड़कर अपने हाथों को उसकी बगल में से निकलकर उसकी पीठ पर ले गया और पीठ पर हाथ फेरते हुए उसके नितम्बों पर पंहुच गया और उन्हें दबाने लगा. संध्या को अच्छा तू लग रहा था लेकिन उसकी बेचैनी भी बढ़ रही थी. उसने पता नहीं क्या हुआ की आदित्य को धक्का दे दिया. आदित्य इसके लिए तैयार नहीं था और संध्या उससे छिटक कर दूर होकर गहरी गहरी साँसें लेने लगी.

आदित्य ने उसके पास जाकर अपने होठों को उसके नग्न कंधे पर रख कर उसके पेट पर अपने होठों को लेजाकर उससे अपने साथ चिपटने लगा तू संध्या उसके हाथों को वंहा से हटाने लगी और कहने लगी 'नहीं न... न करो' आदित्य ने उसकी बात को सुनकर उससे अपनी बांहों में भर लिया और कहने लगा 'इतनी खूबसूरत लग रही हो और आप कहती हो की मैं आप से प्यार न करूँ, ये तू मेरी जान की बेइज़्ज़ती होगी, जबकि मुझे तू आपकी खूबसूरती को पूरी इज़्ज़त देनी है' इतना कहकर आदित्य ने उससे पीछे से जकड लिया और उसके लिंग का दबाव संध्या के नितम्बों पर पद रहा था. आदित्य ने अपने एक हाथ को संध्या के कुर्ते के गले से उसके उरोज को पकड़ने के लिए अंदर डालने लगा. संध्या के दोनों हाथ उस हाथ को निकलने में लग गए. इधर आदित्य ने संध्या की गर्दन को भी अच्छे से चूमते हुए उसकी भावनाओं में आग लगा दी थी.

संध्या इसमें उलझी हुई थी की आदित्य ने अपने हाथ को कुर्ते के कटाव से ले जाकर उसके पेट पर रख दिया और उसकी सलवार का नाडा एक झटके में खोल दिया और अपने हाथ को उसकी योनि की तरफ ले जाने संध्या की तू हालत hi ख़राब होने लगी. उसका दिल बहुत तेजी से धधकने लगा. उससे जब होश आया और वो अपने हाथ से सलवार को पकड़ने के लिए हाथ नीचे लायी तू आदित्य ने उससे एकदम से अपनी बांहों में उठा लिया और बीएड पर ले आया और अपने हाथ को कुर्ते के अंदर कर दिया और ब्रा के ऊपर से उसकी चुकी को दबाने लगा. संध्या ने अपने हाथ को ऊपर करके उसका हाथ कुर्ते से निकलना चाहा तू आदित्य ने उसकी सलवार खींच कर उसकी टांगों से बहार कर दी.

संध्या को शर्म आने लगी, लेकिन एक तू वाइन का नशा और दूसरा िरा मैडम से जलन की वजह से वो आदित्य के साथ सख्त भी नहीं होना छह रही थी. आदित्य अब उसकी नग्न हो चुकी टांगों को सहलाने लगा. संध्या मचल रही थी और मुंह से 'eeee....eee..... Iiiii....iiii....ee.... OOO...OOO..hhh...

n....a.....hhhi....iii..n'

आदित्य ने अब दूसरे हाथ से उसका कुरता पकड़ कर पेट के ऊपर तक कर दिया और उसकी चूचियों को अपने होठों से कपड़ों के ऊपर से चूसने लगा.

आदित्य ने जबरदस्ती संध्या के गले से कुरता निकल कर बहार कर दिया जिससे संध्या के शरीर पर सिर्फ ब्रा और पैंटी रह गयी थी. आदित्य उसके चेहरे को चूमने लगा और चूमते हुए चूचियों पर आ गया और ब्रा में से झांक रही चूचियों को चूमने चाटने और दबाने लगा. संध्या अपने हाथों से आदित्य के कंधे से पकड़ कर उससे अपने से दूर करने की कोशिश करने लगी. वो जोर लगा कर उससे अपने ऊपर से हटाने लगी, लेकिन कामयाब नहीं हो पायी.

आदित्य ए.बी.ए. उसके पेट पर आकर उसके पेट को चूमते हुए उसकी नाभि के आसपास अपनी जीभ को चलने लगा.

संध्या अपनी उखड़ी हुई साँसों से 'uuu.....iiiii....... N...aa....hhii.... Ka....rr...ro.. naa...aa....... R.....uuuu.....KKK.... J.....aa......ooo'

आदित्य की जीभ ने चूसते हुए जैसे hi उसकी नाभि में प्रवेश किया और जीभ नाभि में अंदर बहार होने लगी तू संध्या 'nnn......a.aa...hhh...iii.... uuuu.......iiii......iiiiii..... M...aa...aa.. n...aa...hhh'...iii... K....aaa...rr...OOO..'

संध्या को आदित्य को हटाने का प्रयास कर रही थी एक डैम से उसकी सिसकारियों की आवाज़ 'aaaaa.......aaa.....hhh...... hhhh....a...aa....nnn aaaa....aa....h...... aa....aauu.....rr... kk...aa...rrr...ooo, hhhh....aaa....a...nnhhhh... aaa...iiiii...ssssee....eee....' बदल गयी और अब उसके हाथ आदित्य के सर पर पंहुच कर उससे अपने ऊपर दबा रही थी.

आदित्य उसके ऐसा करने से ऊपर आ गया और उसके चेहरे पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी. संध्या के हाथ भी आदित्य की T-shirt को नीचे से पकड़ कर बनियान समेत उसके गले से बहार कर दी. अब आदित्य भी ऊपर से नग्न हो चूका था. उसने जैसे hi संध्या की आँखों में देखा तू उसने अपनी नज़रे झुका ली. आदित्य ने उसको अपने आगोश में भर लिया और अपने हाथों को पीठ पर ले जाकर उसके ब्रा के स्ट्राप को भी खोल दिया और उसके खुलते hi संध्या के मुंह से बहुत hi तेज सिसकने की आवाज़ आयी. संध्या ने आदित्य को अपनी बांहों में कास लिया ताकि ब्रा निकलने न पाए. आदित्य ने अपने हाथों को उसके नितम्बों पर ले जाकर उसकी पैंटी में हाथ डालकर उसके नितम्बों को नग्न कर दिया और उसकी पैंटी को नीचे खिसकते हुए घुटनो तक ले गया और फिर अपने पेअर की मदद से उससे उसकी टांगों से बहार फेंक दिया. संध्या ने कोशिश तू बहुत की लेकि कामयाब न हो पायी और इस धींगामुश्ती में उसकी ब्रा भी उसकी बाजुओं से झूलकर उसके उरोजों को नग्न कर गयी. आदित्य ने उस आखिरी कपडे को भी उसके शरीर से अलग कर दिया.

आदित्य उसके शरीर को देखकर हैरान रह गया. इतना बेदाग और कैसा हुआ शरीर और बहुत hi सेक्सी फिगर देखकर उसके होश उड़द गए की ये उसकी माँ है. उससे विश्वास hi नहीं हो रहा था. उससे तू ये एक कंवरी लड़की hi लग रही थी. आदित्य का इस तरह देखने से संध्या बहुत बुरी तरह शर्मा गयी. पहले तू अपनी चूचियों को अपने हाथों से धक् रही थी, फिर जब आदित्य की नज़रों को अपनी नग्न हुई योनि पर देखा तू उसने अपनी जांघों को आपस में भींच लिया और फिर पलट गयी तू उसके नितम्बों ने आदित्य की उत्तेजना को चरम पर ला दिया.

आदित्य ने जल्दी से बाकि बचे हुए कपडे अपने शरीर से अलग किये और फिर संध्या की बेदाग चिकनी टांग पर जैसे hi हाथ फेरा तू उसके मुंह से 'आए ..aa...h' निकला तू आदित्य अपने हाथों को उसकी टांगों पर सहलाते हुए ऊपर की तरफ बढ़ने लगा और उसकी ऊपरी जांघों के अंदरूनी भागों पर हाथ फिरते hi संध्या की टाँगे कम्पनी लगी. आदित्य ने उसके नितम्बों पर हाथ फेरया और उन्हें दबाने लगा, जैसे hi वो उन्हें दबाता तू संध्या के मुंह से सिसकने की आवाज़े तेज़ होने लगाती.

आदित्य इस वक़्त बहुत जयादा उत्तेजित हो चूका था, इसलिए वो अब जयादा देर नहीं करना चाहता था. वो संध्या के बगल में लेट गया और उसकी पीठ पर हाथ चलते हुए कहने लगा 'यू अरे तू सेक्सी' और अपने हाथों से उससे पलट दिया और कहा 'आप बहुत खूबसूरत, प्यारी और सेक्सी हैं, आज आप से बहुत प्यार करूँगा'

संध्या 'n....aa...hi... ये गलत है '

आदित्य 'जान कुछ गलत नहीं है, आज आपको जिंदगी का आनंद दूंगा' इतना कहकर आदित्य ने अपने हाथ को उसकी योनि की तरफ ले जाकर वंहा पर सहलाना लगा तू संध्या को भी मस्ती आने लगी.

आदित्य ने उसके होठों को चूमते हुए जैसे hi उसके गले लगा तू दोनों के नग्न शरीरों ने पहली बार स्पर्श किया तू बहुत तेज झटका लगा और दोनों के हाथ स्वाट hi एक डस्ट के नजदीक आना छह रहे थे. दोनों के शरीरों का घर्षण उनकी भावनाओं और उत्तेजना को कब बढ़ा गया उन्हें पता hi नहीं चला.

आदित्य संध्या के ऊपर आ चूका था और उससे चूमने चाटने लगा और उसके लिंग ने कब संध्या की योनि द्वार को छुआ और कब आदित्य का लिंग उसकी योनि में प्रवेश कर गया उन्हें कोई होश नहीं रहा. संध्या को तब पता चला जब उससे बहुत तेज दर्द का अनुभव हुआ और उसके मुंह से एक चीख निकली.

आदित्य ने उसके होठों को अपने होठों में लेकर उन्हें जोर जोर से चूसने लगा. अपने हाथों को उसके उरोजों पर ले जाकर उन्हें मसलने लगा. काफी देर तक उसने अपने लिंग को जयादा अंदर नहीं किया. फिर मौका भांपकर एक जोरदार झटका लगाया जिससे उसका लिंग पूरा का पूरा संध्या की योनि में प्रवेश कर गया. संध्या की आँखों से आंसू निकलने लगे. उसकी आवाज़े तू आदित्य ने अपने मुंह में दबा दी थी, लेकिन आंसुओं को निकलने से नहीं रोक पाया.

जब संध्या को थोड़ा सा आराम मिला और उसके मुंह से अब 'gu...uu...n. ggg....uuu.....nn .' की आवाज़े आ रही थी तू आदित्य ने अपने होठों को उसके गलों पर ले जाकर उसके आसुओं को पीने लगा.

अब जब देखा की संध्या थोड़ा ठीक है तू आदित्य ने अपने लिंग को योनि से हलके से बहार खींचा और फिर अंदर कर दिया. इस तरह वो धीरे धीरे अंदर बहार करने लगा.

संध्या के मुंह से इस क्रिया में 'aaa.....aa....hhh.. ी..... iiiiii.......eee......... Uuu...uuu.....nn.....hhh..... Uuu...uuuu.....nnn...hhh...

aaaa........aa.........hhh...... Oooooooo.........ooooo...' की आवाज़े आने लगी.

थोड़ी देर में इस तरह करने से संध्या को भी अब मजा आने लगा था. वो अब अपने नितम्बों को उठा उठा कर आदित्य का साथ देने लगी और उसके मुंह से मादक सिसकारियों के निकलने का सिलसिला जारी था. वो कह रही थी 'aaa....a....hh........ hhhhh....aa.....nnn.....hhh... आआ ...aa....aa....h...aa... Aa.....I......sssss...eee... हठियई. aaa...iii... ' करती रही और आदित्य उससे चूमते हुए बोल रहा था 'ी लव यू माँ, यू अरे माय स्वीट लव, माय गर्लफ्रेंड. मैं आपको बहुत प्यार करूँगा. तुम बहुत अच्छी हो माँ. यू हैवे ा परफेक्ट फिगर' और ये कहते हुए आदित्य अब जोर जोर से अपने लिंग को योनि के अंदर बहार करने लगा. संध्या अब अपने चरम पर पंहुचने वाली थी और लम्बी लम्बी साँसें लेने लगी. इधर आदित्य भी अपने चरम को प्रपात करने वाला था. अब दोनों hi तेज तेज योनि और लिंग का खेल खेलने लगे और एक दूसरे के अंदर सामने की लिए एक दूसरे का साथ दे रहे थे. और फिर वो वक़्त भी आ गया जब दोनों का स्खलन एक साथ हुआ और दोनों अपने चरम को पाकर एक दूसरे की बांहों में समां गए और एक दूसरे के होठों को अपने होठों में जकड लिया
 
अपडेट 85

हम चलते हैं मोहनलाल और रुचिका के पास

मोहनलाल 'इसमें तुम्हारी क्या गलती है, तुम अपने आप को बिलकुल भी दोषी नहीं मनो'

रुचिका 'मेरी आपसे गुज़ारिश है की आप सब कुछ भूलकर, अभी इसी वक़्त अपना हक़ ले लो और मुझपर अपने प्यार की भरपूर बारिश कर दो'

मोहनलाल 'तुम किस हक़ की बात कर रही हो, तुम तू मेरे पास hi तू हो, रही बात प्यार की बरसात की वो तू हमेशा hi मैं बरसता रहता हूँ'

रुचिका 'मैं जो कह रही हूँ, वो आप अच्छी तरह से समझ रहे हैं और फिर भी जानभूझकर मुझे बेहला देते हैं'

मोहनलाल उसकी पीठ को सहलाते हुए उससे अपने साथ चिपटने लगे और उसके माथे को चूमने लगे. उनके हाथ रुचिका की पीठ पर उसकी पूरी पीठ पर जा रहे थे और जैसे hi मोहनलाल का हाथ नीचे की ओर जाने लगता तू रुचिका सिसक पड़ती और हाथ जैसे hi उसके नितम्बों को छूटा तू उसके दिल में खलबली मचने लगती. मोहनलाल ये सब महसूस कर रहा था, लेकिन जैसे hi रुचिका के साँसों की गति बढ़ने लगती वो अपने हाथों को विश्राम देकर उसकी साँसों को नियंत्रित करने देता.

रुचिका के हाथ मोहनलाल की छाती पर घूम रहे थे और मोहनलाल की छाती पर घूम रहे हाथों से रुचिका उसके सीने को अपनी उँगलियों के पोरों से कुरेदने लगती. मोहनलाल की उत्तेजना बढ़ने लगती और कई बार तू ऐसा हुआ की मोहनलाल की उत्तेजना इतनी बढ़ जाती की उसका लिंग पाजामे में से झटके मरने लगता. असल में रुचिका अपने अंगूठे और उंगली में मोहनलाल के निप्पल्स को पकड़ कर जोर से दबा देती जिससे मोहनलाल अपने आप को उत्तेजित करने से नहीं रोक पता था, लेकिन उससे अपनी उत्तेजना पर काबू पाना hi था. इसलिए वो रुचिका के हाथ को पकड़ लेता, लेकिन रुचिका तू उसके हाथ को पकड़ने पर दूसरे हाथ को उसकी पीठ पर ले जाकर उससे सहलाते हुए उसके नितम्बों को पकड़ कर अपनी तरफ करने की कोशिश करने लगती. रुचिका के लिए इतना आसान नहीं था, लेकिन मोहनलाल इससे जानभूझकर आसान बना देता'

मोहनलाल ने जैसे hi पलटी खायी तू रुचिका उसके गले लग कर पूरा शरीर उससे चिपटा लिया. मोहनलाल को भी जोश आने लगा और अपने पैरों से रुचिका के मखमली पैरों को सहलाने लगा, जिससे रुचिका की भावनाएं भी भड़काने लगी और उसने अपनी बांहों का घेरा मोहनलाल की गर्दन में डालकर उसके बालों को सहलाने लगी. रुचिका के होठों ने मोहनलाल की गर्दन को स्पर्श किया और चूमने लगी. मोहनलाल भी जोश में आ रहा था और उसके हाथ रुचिका के नितम्बों पर पंहुच कर उससे अपने साथ चिपटने लगे और मोहनलाल का लिंग पाजामे में से hi रुचिका की टांगों पर प्रहार करने लगा तू रुचिका के होठों से सिसकने की आवाज़े आने लगी और उसने अपने होठों को गर्दन से नीचे की तरफ ले जाने लगी और उसका सीना चूमने लगी और जैसे hi मोहनलाल के लिंग ने उसकी टांगों पर प्रहार किया तू उसने अपनी टांगों में मोहनलाल की टांगों को लेकर भींचने लगी. मोहनलाल का लिंग अब बहुत कड़क हो चूका था और वो अब रुचिका के योनि भाग पर पंहुच कर रगड़ना शुरू कर चूका था. रुचिका पर भी उत्तेजना का खुमार चढ़ने लगा और उसने अपने डेंटन से उसके निप्पल्स को काट लिया. मोहनलाल को इतना जोश आया की उसके लिंग ने पैंटिंके ऊपर से hi रुचिका की योनि पर धक्का लगाया.

जैसे hi यह हुआ पता नहीं कैसे मोहनलाल एकदम से रुचिका को छोड़कर पलटी खा गया और लम्बी लम्बी साँसें लेने लगा.

रुचिका खिसकते हुए उसके पास पंहुची और उसकी छाती पर अपने हाथों को घूमते हुए 'क्या हुआ'

मोहनलाल 'बस तुम्हारे ऊपर प्यार आ रहा था'

रुचिका 'तू इस प्यार को अपने अंजाम तक पंहुचने दो, आज सब कुछ भूल कर इससे हो जाने दो'

मोहनलाल 'तुम छाती हो की ऐसा करके तुम मुझसे छुटकारा पाकर मुझे अकेला छोड़ कर जाना छाती हो. मैं तुम्हे इतनी आसानी से मुझसे अलग नहीं होने दूंगा'

रुचिका 'मैं आपको शारीरिक सुख देना छह रही हूँ, आपको छोड़ने के लिए नहीं कह रही'

मोहनलाल को उसकी बात सुनकर हंसी भी आने लगी, लेकिन चेहरे पर चिंता की लकीरे भी दिखाई देने लगी, जिन्हे वो बहुत hi चालाकी से छुपा गया और प्रत्यक्ष में रुचिका के सर पर हाथ फेरते हुए उससे कुछ इस तरह से कहने लगा.

मोहनलाल 'तुम समझती हो की सिर्फ शारीरिक मिलान से hi प्यार होता है. अगर तुम ऐसा सोचती हो तू बिलकुल गलत है. तुम्हारे साथ मेरी आत्मा का, मेरी रूह का मिलान हो चूका है, जिससे कोई बदल नहीं सकता. तुम अच्छी तरह से जानती हो की अभी तुम इस कंडीशन में नहीं हो की शारीरिक मिलान कर पाओ. तुम मुझे क्या ज़ालिम समझती हो? तुम मेरे दिल की मलिका हो, मेरे और अपने प्यार को इस शारीरिक मिलान तक hi स्थापित करके गली मत दो. चाहे, जिंदगी में हमारा कभी शारीरिक मिलान हो या न हो लेकिन हमारी आत्माओं का जो मिलान हो चूका है उससे कोई भी अलग नहीं कर सकता'

रुचिका की आँखों में उसकी बातें सुनकर नमी आ गयी और वो भराई हुई आवाज़ में करहने लगी 'आप महँ हैं और आपकी सोच के सामने मैं अपने आप को बहुत छोटी समझने लगी हूँ'

मोहनलाल ' यह कहकर अपने आप को इतना भी मत गिराओ जिससे मुझे लगने लगे की हम दोनों अलग अलग हैं. अगर तुम छोटी हुई तू मैं भी तू छोटा हो गया न, इसलिए आज के बाद ऐसा न कहना'

अभी और कोई बात होती उससे पहले रुचिका के फ़ोन की घंटी बज उठी, उसने फ़ोन पर बात की और मोहनलाल उससे देखने लगा तू रुचिका के चेहरे पर हंसी देखकर पूछा 'क्या हुआ'

रुचिका हँसते हुए 'आपकी बीवी आ रही है'

मोहनलाल 'मेरी बीवी वो तू मेरे बगल में hi तू है'

रुचिका 'आप जल्दी से तैयार हो जाओ, आपकी बीवी एक घंटे में लैंड करने वाली है, जाओ जल्दी से उन्हें लेकर आओ'

मोहनलाल थोड़ा कंफ्यूज हो गया और वो रुचिका की तरफ देखने लगा लेकिन उससे समझ आ गया की वो कुछ नहीं बताएगी. मोहनलाल जल्दी से तैयार हुआ और एयरपोर्ट के लिए निकल गया.

मोहनलाल सोच में पद गया की संध्या कैसे आ सकती है, उससे विश्वास hi नहीं हो रहा था की संध्या भी वंहा आ सकती है और वो भी अकेली. वो सोचने लगा की हो सकता है आदित्य ने उससे बोर्ड करवा दिया हो और उसने सोचा होगा की यंहा तू मैं रिसीव कर hi लूंगा. वो अपनी सोचों में खोया हुआ था की संध्या क्योँ आ रही है और किसके कहने पर आ रही है. अभी सोच hi रहा था की सामने से दिया चली आ रही थी. वो सोचने लगा की रुचिका तू मेरी बीवी के आने के लिए कह रही थी, तू क्या ये संयोग है की दिया को भी उसी वक़्त आना था. दिया बहार आयी और मोहनलाल के पास आकर 'किसका इंतज़ार हो रहा है अब, चलना नहीं है क्या?'

मोहनलाल ने फ़ोन निकलकर रुचिका को फ़ोन किया और बताया की दिया यंहा पर है तू उसने कहा की उससे लेकर आ जाएँ तू उसने कहा की अभी संध्या तू आयी नहीं है तू वो हंसने लगी और कहने लगी 'दिया ने hi तू आना था, आप क्या समझे थे?'

मोहनलाल को कुछ समझ नहीं आ रहा की रुचिका क्या कहती है और क्या हो रहा है. कह तू रही थी की संध्या आ रही है और आ गयी दिया. उसने अपनी सोचों को झटकते हुए कैब को बुलाया और घर की तरफ चल पड़े. रस्ते में दिया बड़े प्यार से मोहनलाल को देखती रही और उसका हालचाल पूछती रहिए और अपना बताती रही.

घर पंहुच कर दिया रुचिका से मिली और रुचिका ने कहा की 'फ्रेश होकर आराम कर ले' तब उसने कहा की 'ठीक है' और वो चली गयी. उसके जाने के बाद मोहनलाल ने रुचिका से कहा 'ये क्या मज़ाक है'

रुचिका ने हँसते हुए 'क्योँ वो आपकी बीवी नहीं है'

मोहनलाल 'वो मेरी बहिन है'

रुचिका 'तू क्या हुआ, मैं भी तू आपकी बेटी हूँ फिर भी आपकी बीवी हूँ'

मोहनलाल 'तू क्या उससे बीवी बना लू'

रुचिका 'बना लो, अच्छा रहेगा'

मोहनलाल 'क्या बोल रही हो, जो मन में आता है बोल देती हो'

रुचिका 'आप मेरी बात कभी टालते नहीं हो, इसलिए कह रही हूँ की उससे अपनी बीवी बना लो, जैसे मुझे बनाया था. आपकी शारीरिक जरूरते भी पूरी हो जाएँगी'

मोहनलाल 'मैं तुम्हे कह चूका हूँ की ऐसी बेकार की बातें न किया करो और मेरी कोई शारीरिक जरुरत नहीं है'

रुचिका 'देखो आपने जैसे मुझे बीवी बनाया, वाइस hi दिया को भी अपनी बीवी बना लो'

मोहनलाल 'ये क्या ज़िद है, मैं तुम्हारी साडी बातों को मान लेता हूँ इसका ये मतलब नहीं है की मेरी इस बात का फायदा उठाओ और वैसे भी तुममे और उसमे ज़मीन आसमान का फर्क है:

रुचिका 'क्या फरक है'

मोहनलाल 'तुममे और उसमे फरक है'

रुचिका 'क्या फरक है, वो जवान है खूबसूरत है और सेक्सी भी है, क्योँ मैं कुछ गलत कह रही हूँ क्या'

मोहनलाल 'प्लीज ऐसी बातें क्योँ कर रही हो, वो मेरी बहिन है' बस'

रुचिका 'मैं कान्हा मन कर रही हूँ, लेकिन वो आपकी बहिन नहीं है, लेकिन बीवी भी तू है'

मोहनलाल 'मेरी बीवी कैसे हो गयी और तुम उससे मेरी बीवी बनाने पर क्योँ तुली हुई हो'

रुचिका 'मैं क्योँ ऐसा करुँगी, मैं तू वही कह रही हूँ, जो सच है'

मोहनलाल 'Tumhari.koi भी बात समझ नहीं आ रही है'

रुचिका 'मेरी बात आपको समझ तू आ गयी है और अगर नहीं आयी है तू वक़्त के साथ समझ आ जाएगी'

मोहनलाल 'ज़बरदस्ती मेरी बहिन को मेरी बीवी बनाने पर तुली हुई हो'

रुचिका 'मैं तू सिर्फ ये कह रही हूँ की अब अआप्की एक और बीवी आ गयी है तू आपका प्यार बाँट जायेगा'

मोहनलाल उसको बड़े ध्यान से देखने लगा और फिर उसके चेहरे को अपने हाथों में पकड़ते हुए 'ऐसी बातें करके तुम क्या कहना चाहती हो, मेरी समझ से बहार है, रुचिका ी लव यू और तुम्हारा प्यार कोई भी नहीं बाँट सकता'

रुचिका 'मुझे पता है और विश्वास है की दिया तू क्या और भी बीवियां आपकी जिंदगी में आ जाएँगी तब भी मेरा प्यार मेरा hi रहेगा'

मोहनलाल 'ये क्या कह रही हो की मेरी जिंदगी में और बीवियां आएँगी. मुझे सिर्फ और सिर्फ तुम चाहिए, और बीवियां नहीं चाहिए'

रुचिका 'आपके चाहने या न चाहने से क्या होगा. मुझे भी नहीं मालूम था की आपकी जिंदगी में और बीवियां आएँगी. लेकिन जब आप अमेरिका से वापिस आये थे और हम सब गुरु जी के पास मेरी बीमारी को ठीक करने के आशीर्वाद लेने के लिए गए थे, तब गुरूजी ने ये सब बताया था की आपकी जिंदगी में और बीवियां हैं'

अभी और कोई बात होती, दिया वंहा आ गयी और उनकी बातचीत का मुद्दा hi बदल गया.
 
गुड क्वेरीज रैसेड, व्हिच वोउल्ड बे अंसवेरेद थ्रू अपकमिंग उपदटेस, ोथेरविसे योर इंटरेस्ट इन थे स्टोरी वोउल्ड एन्ड बिफोर it's कंक्लूडेड.

प्लीज हैवे पेशेंस एंड यू वोउल्ड एन्जॉय मोरे.

फुरदर तेरे मई बे सर्टेन थिंग्स यू मिगहत नॉट लिखे थम, बूत कुड बे थे डिमांड ऑफ़ थे स्टोरी लाइन, व्हिच कन्नोत बे डिसकससेड ात थिस स्टेज.

मई बे व्हाट यू थिंक मई बे थे स्टोरी लाइन. Let's वेट.

अनीहौ it's ा गुड थिंग तहत यू स्पेल आउट योर मंद.

थैंक्स सो मच फॉर नीस रिव्यु एंड कांस्टेंट सपोर्ट
 
अपडेट 86

थोड़ी देर में इस तरह करने से संध्या को भी अब मजा आने लगा था. वो अब अपने नितम्बों को उठा उठा कर आदित्य का साथ देने लगी और उसके मुंह से मादक सिसकारियों के निकलने का सिलसिला जारी था. वो कह रही थी 'aaa....a....hh........ hhhhh....aa.....nnn.....hhh... आआ ...aa....aa....h...aa... Aa.....I......sssss...eee... हठियई. aaa...iii... ' करती रही और आदित्य उससे चूमते हुए बोल रहा था 'ी लव यू माँ, यू अरे माय स्वीट लव, माय गर्लफ्रेंड. मैं आपको बहुत प्यार करूँगा. तुम बहुत अच्छी हो माँ. यू हैवे ा परफेक्ट फिगर' और ये कहते हुए आदित्य अब जोर जोर से अपने लिंग को योनि के अंदर बहार करने लगा. संध्या अब अपने चरम पर पंहुचने वाली थी और लम्बी लम्बी साँसें लेने लगी. इधर आदित्य भी अपने चरम को प्रपात करने वाला था. अब दोनों hi तेज तेज योनि और लिंग का खेल खेलने लगे और एक दूसरे के अंदर सामने की लिए एक दूसरे का साथ दे रहे थे. और फिर वो वक़्त भी आ गया जब दोनों का स्खलन एक साथ हुआ और दोनों अपने चरम को पाकर एक दूसरे की बांहों में समां गए और एक दूसरे के होठों को अपने होठों में जकड लिया

काफी देर तक ऐसे hi एक दूसरे को जकड़े रहे और फिर आदित्य संध्या के ऊपर से हटकर साइड में हो गया और उसका लिंग संध्या की योनि से बहार आ गया था. जोश जोश में दोनों भावनाओं में बहकर प्रेम के फल का स्वाद चख चुके थे, लेकिन अब उन्हें जैसे hi इस बात का आभास हुआ की वो क्या कर बैठे हैं तू शर्म से एक दूसरे से आँख भी नहीं मिला पा रहे थे. दोनों hi अपनी पीठ के बल लेते हुए थे और शून्य में देखते हुए सोच रहे थे की ये ठीक हुआ या गलत. दोनों में से किसी की भी हिम्मत नहीं हो रही थी की दूसरे की तरफ देखने की.

दोनों अपनी पीठ के बल लेते हुए थे लेकिन उनके शरीर आपस में मिले हुए थे और कोई भी न तू अलग होने की चेष्टा कर रहा था और न hi कोई बातचीत कर रहे थे. आदित्य का हाथ संध्या के हाथ के पास था तू जब दुबारा से हाथ टकराये तू दोनों का ध्यान थोड़ा सा भंग हुआ. आदित्य के हाथ ने थोड़ी हरकत की और अपने इसी हाथ की उँगलियों से वो संध्या के हाथ को सहलाने लगा. वो इतने प्यार से ये कर रहा था की इस तरह करने से संध्या को अच्छा लगने लगा. जब आदित्य के सहलाने की गति में थोड़ी सी तेजी आयी तू संध्या की भावनाएं फिर से भड़काने लगी और उसने अपने हाथ की उँगलियों में आदित्य की उँगलियों को कास लिया. ऐसा करते hi आदित्य ने भी उसकी उँगलियों को कसना शुरू कर दिया और फिर दोनों hi एक दूसरे की उँगलियों को कसने की होड़ में पद गए. ये इस बात का एहसास देने के लिए काफी था की दोनों अब एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं और जाता रहे थे की उनका प्यार दूसरे से जयादा है.

आदित्य ने कुछ देर बाद जकड़े हुए हाथ को उठाकर अपने मुंह के पास ले आया और उस हाथ को एक हलकी सी चुम्बिश दी. ऐसा करना था की संध्या के मुंह से हलकी सी सिसकने की आवाज निकली. आदित्य ने उसके हाथ की उँगलियों को बरी बरी से अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. संध्या के दिल की धड़कन फिर से तेज होने लगी. अभी थोड़ी देर पहले वो आत्मगलानी से भरी हुई थी लेकिन आदित्य के इस तरह करने से वो सब कुछ भूलने लगी. वो थोड़ा सा पलटकर आदित्य की तरफ हुई तू उसके उरोजों ने आदित्य की बाजु और उसकी छाती पर स्पर्श किया. ऐसा होने से आदित्य की सोई हुई उत्तेजना फिर से जागने लगी.

आदित्य ने भी थोड़ा सा पलटी खाकर दूसरे हाथ को संध्या की कमर पर ले गया और वंहा सहलाना शुरू कर दिया. दोनों hi एक दूसरे के शरीरों का आनंद लेने लगे. आदित्य का हाथ संध्या के पेट पर आकर उससे सहलाना शुरू किया hi था की उसके मुंह से सिसकने और तेज तेज साँसों की आवाज़ आने लगी. आदित्य ने अपनी एक उंगली को उसकी नाभि के पास जैसे hi फिरना शुरू किया तू संध्या ने भी अपने मन को काफी देर से रोका हुआ था उससे आजाद करते हुए अपने हाथों की मदद से आदित्य की छाती को सहलाना शुरू कर दिया. आदित्य अब जोश में आने लगा और उसके हाथ की उंगली नाभि के अंदर जाकर वो उससे जैसे hi अंदर बहार करने लगा तू संध्या ने अपनी कमर को ऊपर उठाकर अपने शरीर को कमान की तरह तान लिया.

आदित्य का हाथ फिसलकर संध्या के योनि प्रदेश पर चला गया और जैसे hi यह हुआ तू संध्या ने अपनी कमर को नीचे कर लिया. आदित्य का हाथ तब तक संध्या की योनि के मुख द्वार तक पंहुच गया तू उससे वंहा पर काफी गीला गीला महसूस हुआ. आदित्य ने थोड़ा सा उठकर पास में पड़े कपडे को उठाकर उसकी योनि को साफ़ करने लगा. संध्या के मुंह से मादक आवाज़े आने लगी. आदित्य ने उसकी योनि को साफ़ करने के बाद कपडे को साइड में रखकर अपने हाथ की उँगलियों से उसकी योनि के मुख को कुरेदने लगा. संध्या के मुंह से सिसकने और उसके शरीर में कमपन होने लगा.

संध्या ने उत्तेजना के बढ़ने से अपने हाथों से आदित्य की छथि को जोर जोर से सहलाना शुरू कर दिया और उसने अपनी टांगों को भींचना शुरू कर दिया जिससे आदित्य का हाथ उसके योनि प्रदेश पर उसकी टांगों के बीच डाब गया. आदित्य ने अपने फंसे हुए हाथ से वंहा जितना हो सकता था सहलाते हुए अब अपने दूसरे हाथ को ुकि गर्दन के नीचे से लेकर उससे अपनी बांहों में भरकर अपने ऊपर करने लगा. संध्या का हाथ आदित्य की छाती पर होने की वजह से वो सिर्फ थोड़ा सा hi उसके ऊपर हुई, लेकिन अब उसकी चूचियों ने आदित्य के नग्न शरीर पर केहर धना शुरू कर दिया. आदित्य का लिंग झटके मरने लगा जो जाकर संध्या की टांगों पर पठार कर रहा थे. संध्या को भी जोश आने लगा और वो ऊपर होकर आदित्य की छथि के बालों से कहने लगी और बीच में जैसे hi उसके बालों को खींचने लगी तू आदित्य ने उसके हाथ को पकड़ कर वंहा से हटा दिया और उसके होठों को अपने होठों की गिरफत में ले लिया और अपने सीने पर बालों को खींचने की वजह से हुई जलन को दूर करने के लिए उसके होठों को जोर जोर से चूसने लगा.

संध्या को भी अब मजा आने लगा और वो भी उसका साथ देने लगी और उसके होठों को चूसने लगी. आदित्य का लिंग अब अपनी पूरी औकात पर आने लगा और वो संध्या की टांगों पर प्रहार करने लगा जो की संध्या को बहुत उत्तेजित कर रहा था. जब दोनों की साँसें उखाड़ने लगी तू दोनों ने अपने होठों को छोड़ दिया और तेज तेज साँसें लेते हुए एक दूसरे की आँखों में देखने लगे. दोनों को एक दूसरे की आँखों में हवस से ज्यादा प्यार दिखाई दिया, लेकिन शर्म की वजह से कुछ भी नहीं बोल पा रहे थे, बस एक दूसरे को निहार रहे थे.

आदित्य का हाथ जो योनि प्रदेश पर था, वो टांगों के थोड़ा ढीला होने से अपने आप hi उसकी योनि के लबों को सहलाने लगा, जिससे संध्या ने शर्म और उत्तेजना के मिश्रित स्वरुप से अपनी आँखों को बंद कर लिया. आदित्य उसकी योनि के लबों को सहलाते हुए उसकी उत्तेजना को बढ़ने के लिए अपने हाथ को ऊपर लेजाकर उसके पेट और योनि प्रदेश की लाइन पर अपनी उँगलियों से सहलाने लगा तू संध्या के मुंह से कई आवाज़े निकलने लगी और उससे बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था, इसलिए उसने आदित्य को अपनी बांहों में जकड लिया. ऐसा करते hi संध्या की चूचियां आदित्य की छाती में दबकर चपटी होने लगी.

आदित्य का एक हाथ जो उसकी गर्दन के नीचे था उसने थोड़ा सा गर्दन पर आकर उसके कान के नीचे सहलाना शुरू किया, जो संध्या के लिए बहुत जयादा हो गया. वो खुद hi अपनी योनि को उसके लिंग पर रगड़ने लगी. संध्या की चूचियां आदित्य की छाती से और योनि उसके लिंग से रगड़ खाने लगी. आदित्य को मजा आने लगा. वो अपनी माँ की उत्तेजना को और बढ़ाना चाहता था, लेकिन उसके लिंग ने उससे ऐसा करने से रोक दिया. उसका लिंग तन्न कर एक लोहे की रोड बन चूका था और फटने को तैयार था.

आदित्य थोड़ा सा संध्या से अलग हुआ और अपने लिंग पर संध्या की योनि की रगड़ को महसूस करते हुए उसने अपने दोनों हाथों को उसकी पीठ के नीचे लेजाकर उसके नितम्बों को अच्छी तरह से पकड़ कर अपने लिंग को संध्या की योनि के मुख पर रखकर एक जोरदार झटका मारा जिससे उसका पूरा का पूरा लिंग संध्या की योनि में प्रवेश कर गया और संध्या के मुंह से एक जोरदार चीख निकली. संध्या की योनि के अंदर इतनी जोरदार प्रहार हुआ था की उसकी योनि के अंदर असहनीय पीड़ा होने लगी थी. संध्या ने उस पीड़ा को काम करने के लिए आदित्य की पीठ पर अपनी उँगलियों के नाख़ून गाड़ दिए. आदित्य को भी थोड़ा दर्द हुआ लेकिन वो इस दर्द का मजा लेने लगा. संध्या की आँखों से आंसू निकलने लगे तू आदित्य उन्हें चाट चाट कर पीने लगा और कहने लगा 'ी लव यू'

संध्या ने कुछ कहा तू नहीं बस उसके गाल को चुम कर अपने प्यार का इज़हार कर दिया. थोड़ी देर अपने लिंग को संध्या की योनि में रखने के बाद बहुत hi धीरे धीरे अपने लिंग को बहार निकलने लगा तू संध्या के मुंह से 'eeee.......eee.. . ' की आवाज़ आने लगी.

आदित्य ने लिंग को आधा hi बहार निकला था और फिर से एकदम अंदर कर दिया तू संध्या के मुंह से निकला 'aaa...uuu...cchhh'

आदित्य इस तरह धीरे धीरे इस क्रिया को दोहराने लगा और संध्या के मुंह से 'ooo....OOO.... हहहहहह uuuu...iii......maaa.... Aaaaa....aa....aa ...आ ....आए ...आ. .हहह...' निकलने लगा.

आदित्य उसके नितम्बों को तू अपने हाथों से पकड़ा हुआ था और थोड़ा सा ऊपर उठकर संध्या की गर्दन और उसकी चूचियों को अपने मुंह से चूसने और छत्ते हुए अपने लिंग की अंदर बहार करने की गति को बढ़ता जा रहा था. संध्या के मुंह से बार बार 'uuu....uu..nnn..hhh... उउउ.... iiiii......uuuu.... ीीी....

Aa.....aa ...aa...hhh....' की आवाज़े आ रही थी जो उस कमरे की मादकता को बढ़ा रही थी. संध्या को अब धीरे धीरे मजा आने लगा और उत्तेजना बढ़ती जा रही थी. उसकी योनि में छेङतियाँ चलने लगी थी, इसलिए अब आदित्य के हर प्रहार पर उसका भरपूर साथ दे रही थी और आनंद में आकर मुंह से सिसकने की आवाज़े कुछ इस तरह निकल रही थी '. Aaaaa.....aaa....hhh... OOO....OOO....rrr....... Uu...uu...iii........ii..... Oo..OOO... ooooo....rrrr.... Ttteeejjj.....kaaa.....rroooo.....'

आदित्य ने जैसे hi यह सुना उसके प्रहार की गति और दबाव दोनों hi बढ़ने लगे. आदित्य का लिंग जैसे hi संध्या की बच्चेदानी से टकराया तू उसके आनंद की सीमा hi नहीं रहती. उसने अपनी टांगों को उठाकर आदित्य की कमर पर लपेट लिया और वो आदित्य को अपने ऊपर दबाने लगी. दोनों hi अपनी उत्तेजना के चरम पर थे और दोनों ने अपने कॉमर्स को छोड़ दिया. आदित्य के लिंग से निकली पिचकारी ने जैसे hi उसकी बच्चेदानी पर प्रहार किया तू वो उस आनंद से निहाल हो गयी और दोनों ने एक दूसरे को आलिंगन में बांध लिया. काफी देर तक ऐसे hi पड़े रहने के बाद दोनों अलग हुए और आदित्य थका हुआ होने के कारन थोड़ी hi देर में नींद के आगोश में चला गया.

संध्या की जब साँसें नियंत्रण में आयी तू उससे आत्मगलानी होने लगी की वो क्या कर बैठी है. अपने hi बेटे से सम्भोग कर बैठी. संध्या ने जब से शादी हुई थी तब से लेकर आज तक अपना पत्नी धरम बहुत hi इम्मंदारी से निभाया था और सोच में डूबी हुई अपने आप से कहने लगी की आज ये क्या कर बैठी. फिर उससे याद आया की ये सब करने के लिए तू उसने hi आदित्य को उकसाया था. उससे लगाने लगा की आदित्य ने जो कुछ भी किया उसमे उसके उकसाने का बहुत बड़ा हाथ है.

संध्या ने जब आदित्य को सोता हुआ पाया तू बीएड पर पलटी खायी और वंहा पर पड़ी हुई चादर से अपने आप को ढककर बीएड से नीचे उतर कर बाथरूम में चली गयी. बाथरूम में पंहुच कर उसने अपने आप को फ्रेश किया और अपनी हालत का जायजा लिया तू उसने पाया की उसके शरीर पर कई जगह लाल लाल निशाँ पद गए थे. उसने अपने कपडे बदले और वापिस कमरे में आयी तू आदित्य को सोता हुआ पाया. उसके नग्न शरीर पर चादर डालकर अपने कमरे में चली गयी
 
आज काफी वक़्त के बाद आपके कमैंट्स फाड़ने को मिले बहुत ख़ुशी हुई.

वैसे आपको बात दूँ की आपके प्रश्न का जवाब पहले hi अपडेट 37 में दे दिया गया था की कैसे जान भुजकर संध्या ने दवाई नहीं खायी थी और अब दवाई खाने से वो नार्मल बेहवे कर रही है.

जंहा तक मुझे याद है आपने इस बात पर रियेक्ट भी किया था की खुद hi इलाज नहीं कर रही और दोष मोहनलाल पर.

धन्यवाद
 
ी ऍम हैप्पी तो नोट तहत यू don't हाईड योर इमोशंस व्हेदर यू लिखे और don't लिखे.

वेल, गोइंग थ्रू योर रिव्यु ी ऍम सॉरी तो से तहत यू didn't एन्जॉय अस आईटी हप्पेनेड सो अर्ली. आईटी मई बे सोमेतिमेस तहत थे स्टोरी इस नॉट गोइंग अस पैर योर एक्सपेक्टेशंस, बूत आईटी है बीन रिटेन अस थे रिक्वायरमेंट्स ऑफ़ थे स्टोरी लाइन.

थैंक्स सो मच
 
अपडेट 87

संध्या ने जब आदित्य को सोता हुआ पाया तू बीएड पर पलटी खायी और वंहा पर पड़ी हुई चादर से अपने आप को ढककर बीएड से नीचे उतर कर बाथरूम में चली गयी. बाथरूम में पंहुच कर उसने अपने आप को फ्रेश किया और अपनी हालत का जायजा लिया तू उसने पाया की उसके शरीर पर कई जगह लाल लाल निशाँ पद गए थे. उसने अपने कपडे बदले और वापिस कमरे में आयी तू आदित्य को सोता हुआ पाया. उसके नग्न शरीर पर चादर डालकर अपने कमरे में चली गयी.

आदित्य जब उठा तू उसने अपने आप को नग्न पाया तू उससे याद आया की क्या हुआ था, वो याद करते हुए मंद मंद मुस्कराने लगा और उन पलों को याद करके आनंदित होने लगा. जब उसने देखा की उसकी माँ वंहा है hi नहीं तू उसने अपनी माँ को ढूंढा. आदित्य ने देखा की उसकी माँ अपने कमरे में चली गयी है. वो तैयार हुआ और नाश्ता करने के बाद कॉलेज चला गया.

वापिस आने पर उसका सामना उसकी माँ से हुआ जो आदित्य को देखकर अपनी नज़रे चुरा रही थी. आदित्य ने उससे अपनी बांहों में भर लिया और उसके चेहरे को पकड़ कर उसके लबों पर अपने होठों को रखकर चूमने लगा लेकिन संध्या ने उससे कोई ख़ास रिस्पांस नहीं दिया. आदित्य को जब इस बात का एहसास हुआ तू उसने सोचा की वो शायद शर्मा रही है, इसलिए रिस्पांस नहीं दे रही. आदित्य भी उससे इस तरह करता देख, उसकी बेरुखी की वजह से थोड़ी देर में अपनी माँ को वंही छोड़कर अपने कमरे में चला गया. उस रात संध्या ने अपने आप को अपने कमरे में बंद कर लिया और आदित्य दरवाजा खुलवाने का यातन करता रहा लेकिन सफल नहीं हुआ और वो भी अपने कमरे में चला गया.

वक़्त बीतने लगा लेकिन संध्या के रुख में कोई ख़ास बदलाव नहीं आया. अब संध्या अपने में hi गुमसुम सी रहने लगी और आदित्य की छेड़खानी का कोई रिस्पांस नहीं देती थी. वो न तू आदित्य को किसी बात के लिए मन करती और न hi खुद से कोई उसके साथ कुछ करने की पहल करती. वक़्त बीतता रहा और संध्या के एग्जाम आ गए तू उसने अपना ध्यान एक्साम्स की तयारी में लगाना शुरू कर दिया. आदित्य भी कॉलेज और िरा मैडम के काम की वजह से जयादा वक़्त संध्या के लिए नहीं निकल पा रहा था. संध्या के एग्जाम समाप्त हो गए और उसने आगे की पढाई शुरू कर दी. आदित्य भी अपने में व्यस्त हो गया. वो पैसा कमाता रहा लेकिन संध्या की बेरुखी की वजह से उसने अपने आप को बिजी करना शुरू कर दिया. उसने पहले तू काफी कोशिश की, लेकिन संध्या न तू किसी बात का सही से रिस्पांस देती और न hi आदित्य को मन करती. आदित्य ने बहुत पूछा लेकिन उसने जैसे कसम खा ली थी की किसी बात का जवाब नहीं देगी. धीरे धीरे दोनों के बीच में एक दुरी आणि शुरी हो गयी और अब आदित्य संध्या पर ध्यान भी नहीं दे प् रहा था.

संध्या ने कभी भी आदित्य से कुछ नहीं कहा. वो अगर उसके साथ कुछ प्यार करने लगता तू वो ऐसा बर्ताव करती जैसे की उससे इस बात से कोई फरक नहीं पड़ता.

संध्या ने अपने मकान को बेच दिया और सारा पैसा उसने अपने नए अकाउंट में डलवा लिया. उधर आदित्य ने काफी पैसा कमा लिया था और उसने उस पैसे से एक फ्लैट खरीद लिया और अब दोनों वंहा शिफ्ट हो गए. लोग उन्हें पति पत्नी समझते थे, लेकिन संध्या को किसी भी बात का न तू बुरा लगता और न hi वो कोई जवाब देती और न hi कुछ करती जिससे मौहाल में ख़ुशी आये. वो तू जैसे उस दिन के बाद अपने में hi गुमसुम हो गयी. आदित्य ने जॉब ज्वाइन कर ली और उससे दूसरे शहर में जाना पड़ा और संध्या एक बार फिर अकेली रह गयी. उसने न तू आदित्य को उससे साथ ले जाने के लिए कहा और न hi आदित्य ने उससे साथ चलने के लिए कहा.

उधर मोहनलाल और रुचिका बात करते हुए उस दिन दिया के आने के बाद इस तरह चुप हो गए थे.

रुचिका 'आपके चाहने या न चाहने से क्या होगा. मुझे भी नहीं मालूम था की आपकी जिंदगी में और बीवियां आएँगी. लेकिन जब आप अमेरिका से वापिस आये थे और हम सब गुरु जी के पास मेरी बीमारी को ठीक करने के आशीर्वाद लेने के लिए गए थे, तब गुरूजी ने ये सब बताया था की आपकी जिंदगी में और बीवियां हैं'

अभी और कोई बात होती, दिया वंहा आ गयी और उनकी बातचीत का मुद्दा hi बदल गया.

दिया 'लगता है कुछ ख़ास बातें हो रही हैं तू मैं बाद में आउंगी'

रुचिका 'अब तुम्हारे बिना भी कोई बात हो सकती है क्या? अब मैं तू हॉस्पिटल जा रही हूँ तू पीछे तू तुमने hi देखना है न'

दिया दौड़रकर आयी और रुचिका से गले लग गयी और कहने लगी 'तुम जल्दी ठीक हो जाओगी और फिर से अपनी जिंदगी को नार्मल तरीके से जीने लगोगी'

रुचिका 'अरे यार क्योँ झूठी दिलासा देती हो, इस बीमारी में ठीक होने के चान्सेस काम hi हैं और अगर ठीक भी हो जाओ तू नार्मल जिंदगी कान्हा मिलेगी, वो जिंदगी तू ऐसी होगी जैसे की जबरदस्ती की गाड़ी धकेल रहे हो'

दिया उससे जोर से गले लगाती है और उससे प्यार से डांटते हुए कहती है 'बस अब इससे आगे कुछ नहीं कहेगी, तुझे कुछ नहीं होगा'

रुचिका 'क्योँ जूठी दिलासा दे रही है'

मोहनलाल का फ़ोन बज उठा और फ़ोन को सुनने के लिए वो बहार चला गया और पीछे दोनों सहेलियां बात करती रही

फिर वो दिया के साथ इधर उधर की बात करते रहे और इस तरह तीन दिन निकल गए. दिया दोनों का ख्याल रखती थी. दिया मोहनलाल को बड़ी हसरत से देखती थी और रुचिका उससे देखता हुए मन hi मन खुश होती थी.

फिर सूरज जी के आ जाने के बाद सब रुचिका को हॉस्पिटल ले गए जंहा पर उसका पूरा चेक उप हुआ और कोई दो हफ्ते हॉस्पिटल में रहने के बाद उससे छुट्टी मिल गयी थी.

इस दौरान दिया उसकी देखबहाल करती रही और घर वापिस आने के बाद कोई एक हफ्ते के बाद वो मुंबई चली गयी. उसके जाने के बाद रुचिका को खली खली लगने लगा. उसकी देखबहाल के लिए एक लड़की को रख लिया गया था.

वक़्त बीतता रहा और रुचिका की हालत कभी ठीक होती और कभी बिगड़ जाती. एक दिन दिया का फ़ोन आया और वो रुचिका से बात करने लगी और उससे कहने लगी की वो मुंबई आ जाएँ और बड़े हॉस्पिटल में उसका अच्छे से इलाज हो जायेगा. रुचिका ने उससे कहा की 'मुझ बीमार को मुंबई बुला रही है, ये नहीं की खुद यंहा आ जाती'

रुचिका ने ठंढी सांस भरी और कहने लगी 'यार सच्ची बात ये है की जब से तुम गयी हो, मेरा दिल hi नहीं लग रहा है, काश की तुम उड़कर मेरे पास आ जाती'

दिया 'अरे यार तुम हुकुम करो, मैं उड़कर तुम्हारे पास आ जाउंगी'

रुचिका 'भगवन करे की ऐसा हो जाये'

दिया 'आखें बंद करके भगवन को सच्चे मन से याद कर और मुझे विश्वास है की भगवन तुम्हारी बात जरूर सुन लेंगे'

पता नहीं क्या सोच कर रुचिका ने वैसा hi किया और जब आँख खोली तू दूर बल बज उठी. उस लड़की को रुचिका ने दरवाजा खोलने के लिए कहा और सामने दिया को देखकर हैरान होते उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा.

फिर दोनों सहेलियां गले लगी और नाश्ता करने के बाद आपस में बातचीत करने लगी और फिर से दिया ने मुंबई जाने की बात कही.

रुचिका उसकी बात सुनकर हंसने लगी और कहने लगी 'मुंबई में मेरा इलाज होगा की तुम्हारा होगा'

दिया 'क्या मतलब'

रुचिका 'अरे यार अब भी मतलब की कोई गुंजाईश है'

दिया 'यार मुझे न तुम्हारी बात समझ नहीं आ रही है, मेरा सिर्फ इतना कहना है की तुम बस जल्दी से ठीक हो जाओ और उसके लिए जरुरी है सही इलाज जो की यंहा मुंबई में उपलब्ध है'

रुचिका 'मैं सब जानती हूँ और तुमने जो मेरी सेवा की वो कोई सगी बहन hi कर सकती है, लेकिन यार मेरी बीमारी ऐसी है की मैं शायद hi बच पौन'

दिया 'चुप हो जा, ऐसी अशुभ बातें न बोल. देख तू मेरी बहुत प्यारी सहेली hi नहीं, मेरी सगी बहिन से भी जयादा है और ऐसा लगता है की हमारा रिश्ता पता नहीं कितने जन्मो का हैं और तुम सोच रही हो की मैं तुम्हे कुछ भी होने दूंगी, बिलकुल भी नहीं, मैं जो कर सकती हूँ वो करुँगी'

रुचिका 'अरे यार जो होना है वो हो की hi रहता है, इसलिए जयादा परेशान होने की जरुरत नहीं है, मुझे तू सिर्फ इनकी चिंता है'

दिया 'तुम बिलकुल भी चिंता न करो, मैं सब शामबहाल लुंगी'

रुचिका 'वो तू मुझे पता है' और फिर वो हंसने लगी.

दिया 'यार तुम ऐसे hi हँसते हुए अच्छी लगती हो'

रुचिका 'हाँ जब तक हूँ तू हंस hi लूँ, दुखी होने से क्या फायदा, वैसे एक बात बताओ तुम मेरे पीछे इनका ख्याल रख लोगी न'

दिया 'क्योँ कोई शक है क्या'

रुचिका शरारत से 'शक तू नहीं है, लेकिन पता नहीं, तुम भैया भइया बहुत करती हो न'

दिया 'यार, अब भैया नहीं कान्हू तू और क्या कान्हू'

रुचिका 'अच्छा अमेरिका में बीवी बनकर भी भैया भइया करती थी'

दिया अचम्भे से 'तुम्हे कैसे पता'

रुचिका 'क्योँ पता नहीं होना चाहिए'

दिया 'लेकिन जो बात सिर्फ और सिर्फ हम दोनों के बीच थी, वो तुम्हे कैसे पता चली'

रुचिका 'अरे यार इसमें हैरान होने वाली बात क्या है, मैं उनकी बीवी हूँ और वो क्या करते हैं, क्योँ पता होना चाहिए की नहीं'

दिया 'लगता है मरस. ब्रिग्नेजा ने तुम्हे सब बता दिया'

रुचिका 'अरे यार वो सब छोडो, ये बताओ की उनकी बहिन बनने में जयादा मज़ा है या उनकी बीवी बनने में'

दिया 'मोहन भाई साहब इतने अच्छे इंसान हैं की उनके साथ कोई भी रिश्ता हो, वो हर रिश्ते को दिल से निभाते हैं. वो आपको पूरी इज़्ज़त देते हैं लेकिन आपकी शान में कोई भी गुस्ताखी हकीकत में तू क्या कभी सपने में भी नहीं करेंगे'

रुचिका 'वह! क्या कहने, कोई भी रिश्ता हो, मतलब की तुम्हारा बीवी वाला रिश्ता भी बहुत बढ़िया रहा'

दिया 'मैंने तू सिर्फ इतना कहा है की वो हर रिश्ते को बखूबी निभाते हैं'

रुचिका उसके चेहरे को पकड़ कर उसकी आँखों में झांकते हुए 'मैडम तुमने दोनों रिश्तों का अनुभव किया है और आनंद उठा लिया है, तभी तू तुम कह रही हो न की वो हर रिश्ते को बखूबी निभाते हैं'

दिया उसकी बात सुनकर जैसे सपनों की दुनिया से बहार आयी हो और उससे लग गया की उसके मुंह से अनजाने में काफी कुछ निकल गया है और वो अपनी नज़रे चुराने लगी.
 
मर्वेलौस रिव्यु.

यू हैवे शौन योर डिस्प्लेअसुरे ों ओने साइड तहत एव्री ओने इस साद एंड ों थे इतर ुंडेरलीनेड थे रेअसोंस फॉर सडनेस ऑफ़ संध्या.

वेल एच एंड एव्री अपडेट can't मेक यू हैप्पी अस थे अपडेट इस रिटेन अकॉर्डिंग तो थे स्टोरी लाइन.

होवेवेर ओने थिंग इस क्लियर तहत ओने एन्जॉयस हैप्पीनेस व्हॅनवर सडनेस इस तेरे फॉर सोमेटिमे, ोथेरविसे ओने can't बे हैप्पी.

सो वेट तो बे हैप्पी अस थस सडनेस wouldn't लास्ट लॉन्ग.

थैंक्स सो मच
 
आप जैसे जागरूक पाठकों की वजह से hi मुझे लिखने की ऊर्जा प्रपात होती है.

आपने जो जो प्रश्न पूछे हैं वो सब एक संजीदा पाठक hi पूछ सकता है और मुझे जितनी ख़ुशी हो रही है वो मैं आपको बता नहीं सकती.

आपके सभी प्रश्नों का उचित उत्तर मिलेगा, लेकिन अभी नहीं, अन्यथा इस कहानी का अंत हो जायेगा. आपसे इतनी hi विनती है की थोड़ा सा इंतज़ार और आप को इन् प्रशनो के उत्तर पाकर आनंदित होने का अवसर मिलेगा.

धन्यवाद
 
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