Incest Porn Kahani - EK MAA - Page 9 - SexBaba
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Incest Porn Kahani - EK MAA





अपडेट-52





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पूरा घर सजा हुआ था बहुत भीड़ थी बड़े बड़े लोग आये हुए थे, शहर की बड़ी बड़ी हस्तिया आई हुई थी, मंत्री जी भी आये थे और उनके साथ थी ननदनी,

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ननदनी की जान बचाई थी तुषार ने और ननदनी ने जीवन का असली मजा भी तो लिया था तुषार के साथ, मंत्री जी को अंजलि के साथ मिलने में ज्यादा भलाई लगी, वही कमिश्नर भी आये हुए तो, कोमल जेल में थी, सरकारी गवाह बन चुकी थी, कमल भी जेल में था उस पैर इतने संगीन जुर्म लगे थे की उसे न बैल मिल सकती थीं ा hi किसी से मिलने की परमिशन थी,

वही अनीता और रिंकी भी आई हुई थी, तुषार ने बुलवाया था,


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वर्षा और अलका भी आई हुई थी, सब एक से एक खूबसूरत लग रही थी,

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अलका- दीदी हम यहाँ क्यों आये हैं हमे तो तुषार के पास जाना थान ा,

वर्षा- उनसे भी मिलेंगे

फिर जीने से उतरती हुई आई तीन परिया, सीमा दीपा और रूचि सबकी निगाहे उन्ही पैर रुक गई, क्या खूबसूरत लग रही थी, तीनो ने लांचा पहना हुआ था,


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उनके hi साथ में थे कपिल और सचिन सूट में,

राजेश ने आज कुरता पायजामा पहना हुआ था, सभी पार्टी में बिजी थे, फॅमिली वाले शादी की तैयारी में मंडप सजा हुआ था दोनों दूल्हे अपनी जगह बैठ गए थे,

पंडित जी- दुल्हनों को बुलवाओ

दुल्हनों को बुलवाया गया रश्मि और आशिमा लाल रंग के लहंगे में बड़ी खूबसूरत लग रही थी, उनके साइड में दीपा और रूचि थी, जिनके सामने दुल्हन थोड़ी फीकी पद रही थी, तभी पीछे से आई ब्यूटी क्वीन, जिसे देख क्र पूरी पार्टी की सांसे hi रुक गई, वो थी अंजलि


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कोई औरत हो या मर्द सबकी नजर अंजलि की तरफ थी, ऐसा लग रहा था जैसे कोई पारी उतर आई ह आसमान से,

दुल्हनों को उनकी जगह बैठा क्र तीनो भेने अंजलि के पास आ गई,

वह खड़े हद आदमी के मुँह पैर एक hi बात थी ये सब कितनी खूबसूरत हैं,

वर्षा और अलका भी अंजलि के पास आकर कड़ी हो gai,nanadani भी वर्षा के पास आ गई और धीरे से बोली वर्षा मेरी गलतियों के लिए मुझे माफ़ क्र देना, वर्षा ने बस ननदनी का हाथ पकड़ा और सब ठीक ह का इशारा किया, अंजलि ने अनीता को भी अपने hi पास बुला लिया था,

Uuufffffffffffffffffff क्या नजारा था एक साथ इतनी खूबसूरती देख क्र वह खड़े हर आदमी की हालत ख़राब हो चुकी थी,


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वह 9 लेडीज थी जिनमे दो औरते थी लेकिन कोई उन्हें बता hi नहीं सकता ये इनमे बड़ी ह, सब एक जैसी hi लग रही थी, अंजलि और अनीता उनकी बस बड़ी बहन लग रही थी,

अगर किसी से ये फैसला करने को कहा जाये की इनको 1 से 9 तक no देने हैं तो वो कभी फैसला नहीं क्र पायेगा की किसको 1 पैर रखे किसको 2 पैर 9 के लिए तो कोई सोच hi नहीं सकता,

सब शादी में बिजी थे,

अनीता- अंजलि जी वो खा ह

रिंकी- हमे बुला क्र खुद यहाँ नहीं ह

अलका बड़ी कंफ्यूज थी ऐसा कोण ह जिसके लिए सब इतने पागल हैं,

अलका- दीदी ये किसकी बात क्र रहे हैं

वर्षा- खुद देख लेना

वही टीवी की स्क्रीन पैर शादी का नजारा चल रहा जिसे देख रहे थे सोनिया और सुरेश

सोनिया की आँखों में आंसू और चेरे पैर भयानक गुस्सा था, वो किसी नागिन की तरह फुंकार मर रही थी, सोनिया ने अंजलि के महेमानो में अपना एक आदमी भेजा हुआ था जो वह से लाइव वीडियो भेज रहा था सोनिया और सुरेश को,

सुरेश- सब कुछ निकल गया हाथ से

सोनिया ने बस है में गार्डन हिलाई

सुरेश- ये देख वो मंत्र और कमिश्नर भी उसकी तरफ हो गए, सालो ने मेरे बेटे को फसाया और वो तेरी बेतिया कैसे सज क्र गई रंडी बन क्र उसके पास,

सोनिया- नहीं छोडूंगी इस बार नहीं छोडूंगी, ऐसी मोत दूंगी की अगले जनम में पैदा होने से भी मन क्र देंगे सब के सब,

सुरेश- मोत तो तब देगी जब हम यहाँ रुक पाएंगे, उस मंत्री ने हमारे खिलाफ भी केस दाल दिया ह, अगर हम यहाँ से नहीं गए तो कभी जेल से बहार नहीं निकल पाएंगे, हमारे पास आज का hi टाइम ह कल से पूरी पुलिस फाॅर्स हमारे पीछे होगी,

सोनिया- जायेंगे कहा

सुरेश- शकील ने सब इंतजाम क्र दिया ह तू बस यहाँ से निकल सोहन को लेकर

सोनिया- मेरी बेतिया वो तो

सुरेश- वो रंडिया उस अंजलि के तलवे चाट रही हैं, तुझे लगता ह वो तेरे साथ आएँगी

सोनिया- मैंने उनके लिए इतने सालो तक अपने आप को बदले रखा, वो hi मुझे धोका दे गई,

सुरेश- तूने कभी उन्हें हमारे परिवार जैसा बनाया नहीं

सोनिया- मैंने उन्हें उनकी जिंदगी जीने की आजादी दी थी, पता नहीं ऐसी कैसे बन गई

सुरेश- तेरे सब अपने धोका दे गए तेरे उस कमल ने भी धोका hi दिया था जिसके नाम पैर तूने मेरे बेटे का नाम रखा ह

सोनिया- वो धोका नहीं दे सकता वह कुछ जरूर हुआ होगा

सुरेश- पता नहीं अगर वो वापस आ जाता तो ये दिन न देखना पड़ता

उधर पार्टी में,

अंजलि सभी लेडीज को लेकर सेकंड फ्लोर पैर आ गई, नंदनी रिंकी अनीता भी साथ थी,

अलका- दीदी हम यहाँ क्यों हो वो क्यों नहीं आ रहा

वर्षा- सबर तो क्र

अनीता- अंजलि जी पार्टी तो निचे ह हम यहाँ क्यों ह

अंजलि- क्योकि वो अभी सबके सामने नहीं आएगा इसलिए, और आप सब पैर मैं ट्रस्ट क्र रही हु की यहाँ हम जो बाते क्र रहे हैं वो हम तक hi रहे, ये बात अंजलि ने अलका नंदनी और रिंकी की तरफ देख क्र कही, क्योकि वो hi थे जो इस सब से अनजान थे,

दीपा- तो मिलिए हमारे जाने भर जिगर के चले से

सबने पलट क्र देखा

सबकी नजर एक साथ उधर गई तो ब्लैक सूट में तुषार आ रहा था,


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सभी औरतो के दिल जोर से धड़क गए, वह कड़ी हर औरत के दिल में बस तुषार hi था, वर्षा जो अब तक उसे अलका का दोस्त देखती थी, पिछले कुछ दिनों में हुए हादसों और तुषार की ताकत और उसकी हीरोपंती देख क्र वो भी उसकी तरफ कब झुक गई उसे पता hi नहीं चला,

तुषार को वह देख क्र नंदनी और अलका चौंक गए, अलका ने वर्षा को देखा

वर्षा मुस्कुराई-

अलका- दीदी क्या ये इनका बीटा ह

वर्षा ने है में सर हिलाया

तुषार के फेस पैर एक स्माइल थी, और सामने कड़ी सभी औरतो के दिल की धड़कन तेज थी,

तुषार जैसे hi नजदीक आया, तो हर औरत दौड़ क्र तुषार से लिपटना चाहती थी, लेकिन तुषार किसके पास जाने वाला था ये देखने वाला था, सबके दिल में तुषार था लेकिन तुषार के दिल में सबसे ज्यादा कोण ह, ये देखने वाली बात थी,

और ये hi चिंता तुषार के दिमाग में घूम रही थी, सामने हर लड़की औरत उसके लिए खास थी बस नंदनी के अलावा, नंदनी के लिए तुषार के दिल कुछ खास फीलिंग्स नहीं thi,lekin हसीं पल तो वो उसके साथ भी बिता चुक्का था, तुषार असमंजस में था,

तुसाहर थोड़ा नौरवसे सा सबके नजदीक आया तो अलका भाग क्र तुषार से गले लग गई,

अलका- तुम ठीक हो तुम्हे कुछ हुआ तो नहीं न, मैं बहुत दर गई थी, वो पागल कुछ भी क्र सकता ह

तुषार भोचका सा खड़ा था, साडी औरते बस उन्हें hi देखे जार hi थी, सबके फेस पैर जलन साफ दिख रही थी,

तुसाहर ने अलका को सीधा किया, मैं ठीक हु अलका जी और मुझसे बड़ा पागल शायद अभी तो कोई पैदा नहीं हुआ आप चिंता मत करो, और देखो सब हमे hi देख रहे हैं

अलका ने मुद क्र देखा तो वो शर्मा गई,

तुसाहर चलता हुआ सबके पास आया, और वो सबसे पहले अंजलि के पास गया, और उसे गले से लगा लिया, आज वो तुषार की पत्नी थी ऑफिसियल पत्नी,

फिर तीनो बहन एक साथ चिपक गई, बेचारी अनीता और रिंकी शरमाई सी कड़ी थी, उन्हें पता था यहाँ कुछ भी करना ठीक नहीं था, वही वर्षा उसे तो समझ hi नहीं आ रहा था उसे हो क्या रहा ह वो इतना नाराज सी क्यों ो रही ह,

नंदनी कड़ी देख रही थी, वो तुषार के नजदीक आई और बोली- तुम ठीक हो अब तबियत ठीक ह न

तुषार ने मुस्कुराकर- है मैं ठीक हु आप ठीक ह कोई तकलीफ तो नहीं ह न

बस ये नहीं पूछना था तुषार को वह कड़ी वर्षा और अलका के अलावा सब समझ गई तुषार क्या पूछ रहा ह, क्योकि सब जानती थी तुषार का लुंड लेने के बाद ठीक रहना पॉसिबल नहीं ह,

दीपा- सीमा के कान में लगता ह इसकी भी खोल दी

सीमा- ये पता नहीं किस किस की खोलेगा

रूचि- इन सब के चेरे देख रही हो, ये सब पागल हुई पड़ी ह इसके लिए, दीपू ये मेरे तुषार को चीन लेंगी

दीपा- चिंता मत क्र बाबू इनकी छूट फाड़ दूंगी जो तुसाहर पैर नजर डाली तो,

तुषार गोपियों के बिच खड़ा बैचैन सा हो रहा था,

अंजलि- आप सबसे एक रिक्वेस्ट ह की तुसाहर जिन्दा ह ये बात कही बहार न जाये और मेरा बीटा तुषार और सुरेश चोपड़ा की कंपनी में काम करने वाला तुषार एक hi ह ये भी राज रहे, अलका नंदनी और रिंकी चौंक गए,

अलका- लेकिन ये सब क्यों किस लिए

वर्षा- मैं समझा दूंगी तुझे

अंजलि- ननदनी ये तुम्हारे लिए थोड़ा अजीब होगा, तुमने मेरे बेटे की हेल्प की इसलिए तुम मेरे परिवार की तरह यहाँ हो, बाकि तुसाहर तुम्हे समझा देगा,

और जिनको कुछ शंका ह उन्हें तुषार समझा देगा, बस आप सभी तुषा रकि फ़िक्र करती हैं इसलिए आपको यहाँ लेकर आई हु ताकि आप टुशु को देख सके, और अपनी चिनाये काम क्र सके,

अब चलो पार्टी में चलते हैं, सभी लेडीज तुषार से दूर नहीं जाना चाहती थी लेकिन जाना पड़ा,

मंत्री- आइये आइये अंजलि जी आप बड़ी कमल हो आपने तो सब कुछ बदल दिया एक hi झटके में

अंजलि - सर अगर आपने अपनी बेटी की चिंता पहले की होती तो शायद आपको आज ये सब न देखना पड़ता, राजनीति में आने के लिए आपने अपनी hi बेटी उन जानवरो के बिच भेज दी

मंत्री- अंजलि जी मुझे नहीं पता था वो लोग ऐसे हैं

अंजलि- सर जो औरत आपके निचे लेट क्र अपने बेटे का रिश्ता मांग रही ह तो उसके बेटे कैसे रहे होंगे ये तो सोचना छाइये थान ा, आपकी बेटी कभी बोली नहीं आपकी इज्जत की वजह से

मंत्री- मैं समझ गया हु, राजनीती परिवार से बड़ी नहीं होती, मैंने अपनी बेटी को hi मोहरा बना दिया था, लेकिन अब जो उसका दिल करे वो करेगी

तभी नंदनी आ गई वह,

ननदनी- क्या बाते हो रही हैं

मंत्री- कुछ नहीं बीटा बस अंजलि जी मुझे मेरी गलतियों का अहसास करा रही थी

नंदनी- पापा इनकी जैसी मजबूत औरत मैंने कभी नहीं देखि, ऐसा परिवार आज से पहले कभी नहीं देखा

मंत्री- वो तो देख लिया मैंने, और मैं तुझसे माफ़ी मंटा हु बीटा मेरी वजह से तू उन जलादो में फास गई

नंदनी- भूल जाइये बस वो कमल बहार नहीं आना चाहिए

मंत्री- नहीं आएगा उस पैर इतने केस हैं की शायद फांसी तक हो जाये

तभी पीछे से आवाज आई- मेरी बेटी को बचा लीजिये मंत्री जी

ये कमिसिनोर तेज प्रताप थे

मंत्री- अरे तेज साहिब वो तो इस लड़के ने पहले hi बचा लिया अपनी बेटी को सरकारी गवाह बना क्र और नंदनी ने भी उसे माफ़ क्र दिया वर्ण मैं माफ़ी देने वाला नहीं था, अब तो आप कानून जानते hi हैं हो सकता ह कुछ महीने या साल की सजा और जुरमाना लगे

तेज प्रताप- अगर आप चाहे तो बस जुर्माने से काम बन जाये मैं उसे कही दूर भेज दूंगा

मंत्री- अभी जब तक ये केस चल रहा ह तब तक तो वो जेल में hi रहेगी मैं कोशिश करूँगा उसे सजा न हो,

इधर शादी पूरी हो गई, दूल्हा दुल्हन सबका आशीर्वाद लेने लगे, तभी एक औरत बड़े गुस्से में अंदर आई, लेकिन वह भीड़ और हालत देख क्र शांत कड़ी रह गई,

धीरे धीरे महेमान जाने लगे, जैसे hi वह भीड़ काम हुई तो वो दूल्हा दुल्हन के पास पहुंची

औरत- ये सिला दिया तुम दोनों ने हमारे लाड प्यार का, इसी लिए तुम्हे पढ़ाया था खुद से दूर भेजा था, ये hi दिन दिखने थे तो मर जाती क्यों हमारा नाम मिटटी में मिला दिया तुम दोनों ने,

रश्मि- माँ हम इनके बिना नहीं रह सकते

औरत- तूने मेरा सर आज शर्म से झुका दिया, और तुम दोनों तो इनके दोस्त बांके आये थे हमारे घर, इतना बड़ा धोका दिया हमे,

आशिमा- माँ ख़बरदार जो हमारे पतियों को कुछ कहा तो,

औरत- अच्छा अब ये इतने खास हो गए तुम्हारे लिए,

आशिमा- ये पति ह हमारे

औरत- जान से मर दूंगी मैं तुम्हे

कपिल- रुकिए रुकिए थोड़ा गुस्सा ठंडा कीजिये

औरत- दूर हटो मुझसे तुम जैसी ओरल दी माँ बाप का नाम मिटटी में मिलती हैं, आज कल के बच्चे थोड़ा बड़े होते hi खुद को सबसे समझदार समझने लगते हैं, जैसे उन्हें सबा पता हो देख लेना तुम दोनों ये लड़के तुम्हे धोका देकर भाग जायेंगे

तभी वह राजेश पंहुचा, क्या हुआ भेजी

औरत ने राजेश को देखा तो चौंक गई, वही राजेश की भी वही हालत थी, राजेश की आँखों में आंसू थे,

राजेश कनपटी हु आवाज में- कामिनी

जी है ये कामिनी थी,

राजेश- कामिनी तुम यहाँ

राजेश के फेस पैर ख़ुशी और आंसू एक साथ थे, लेकिन कामिनी के फेस पैर कोई ख़ुशी नहीं थी,

कामिनी- तुम यहाँ क्या क्र रहे हो, ओह्ह्ह तो तुम यहाँ के नौकर हो और तुम्हे ने इन लड़को को मेरी बेटियों के पीछे लगवाया होगा ह न

राजेश- ये क्या बोल रही हो कामिनी, बेतिया तुम्हारी बेतिया

कामिनी- दूर हटो मुझसे मैं नोकरो से बात नहीं करती उसने राजेश को दूर धकेल दिया

तभी सरे बच्चो की आवाज एक साथ गूंज गई, ख़बरदार जो हमारे पापा को हाथ भी लगाया, हम भूल जायेंगे आप कोण हैं

कामिनी ने पलट क्र देखा 6 बच्चे उसके पीछे खड़े थे, जिनमे दोनों दूल्हे भी थे,

कामिनी- चौंकते हुए बच्चे इसके बच्चे हहहहहह क्या मजाक ह

राजेश बेचारा सर निचे करके खड़ा था,

तुषार- बस चुप हो जाइये आप भाभियो की माँ ह इसलिए मैं चुप हु वर्ण ठीक नहीं होगा

तुषार भी वह आ चुक्का था क्योकि बहार के सभी लोग जा चुके थे,

सचिन- चुप हो जाइये बुआ जी

सचिन के मुँह से बुआ सुन क्र वह खड़े सब आदमियों का मुँह खुला रह गया, तुषार सीमा दीपा रूचि रश्मि आशिमा, सब सचिन को देखने लगे

सचिन- है ये हमारी बुआ हैं पापा की बहन कामिनी

अंजलि अभी वह नहीं थी वो सभी महेमानो को बहार विदा क्र रही थी, वह बस अंजलि का परिवार खड़ा था,

कामिनी- मैं किसी की बुआ नहीं हु

कपिल- आप हमारे पापा की बहन हो न

तभी रश्मि और आशिमा उनके पास आई

रश्मि- ये क्या बोल रहे हो ये कैसे हो सकता ह तुम मेरे भाई नहीं नहीं ये कैसे हो सकता ह, ये तो अनर्थ ह ये तुमने क्या किया

कामिनी- है बताओ तुमने क्या किया ह मैं तुम्हारी बुआ हु न तो तुमने अपनी बहन से शादी क्र ली,

कामिनी- देखा रश्मि देखा इन दोनों की चाल ये तुमसे प्यार नहीं करते धोका दे रहे हैं

राजेश- नहीं नहीं बीटा ये कोई धोका नहीं दे रहे हैं, ये सब मुझे पिता मानते हैं बस मैं इनका पिता नहीं हु

सरे बच्चे एक साथ- पापा नहीं

राजेश- बच्चो तुम्हारी बुआ सब जानती ह,

बच्चियों मैं पिता नहीं बन सकता, बस ये सरे मुझे पिता मानते हैं ये मेरे बच्चे नहीं हैं तुम्हारे भाई नहीं हैं,

रश्मि और आशिमा को थोड़ी रहत हुई,

कामिनी- क्या हुआ भाई नहीं ह तो ये एक हरा हुआ इंसाने ह जो अपने परिवार को नहीं सम्हाल पाया इन्हे क्या सम्हालेगा, ये सब कुछ दिखावा ह इस आदमी के पास तो खाने का भी पैसा नहीं ह ये सब तुम्हे फ़साने की चल ह, इस आदमी के पास कोई खुश नहीं रह सकता फिर ये बचे कैसे इस ेपिता मन सकते हैं

तभी एक आवाज आई,- जैसे तुम छोड़ क्र भाग गाइट hi अपने लचर भाई को, लेकिन ये मेरे बच्चे हैं अपने पिता के लिए जान भी दे देंगे,

कामिनी ने पलट क्र देखा तो सामने अंजलि कड़ी थी, अंजलि को देख क्र कामिनी थोड़ी चौकी वही अंजलि भी चौंक सी गई जैसे पहले कभी मिले हो,

कामिनी- हूऊऊऊह्ह्ह्ह ये आदमी दे भी क्या सकता ह

अंजलि- इनका नाम राजेश ह अगर भैया नहीं बोल सकती तो नाम ले लो

कामिनी- तुम्हे बड़ा प्यार आ रहा ह

अंजलि- वो मेरे बच्चो के पिता ह

कामिनी- ओहो किसकी नाजायज औलादे हैं ये जिन्हे इसने गॉड ले लिया ह और यहाँ महल में घुस गया ह

कामिनी- जबान सम्हाल क्र कामिनी, ये इस घ रके मालिक हैं समझी, और तुम अभी कुछ देर पहले अपनी बेटियों को संस्कारी का ज्ञान दे रही थी, उन्हें शर्म सीखा रही थी,

तुम वही औरत हो न जो मोत से लड़ते हुए अपने भाई को छोड़ क्र किसी के साथ भाग गाइट hi, तब तुम्हे अहसास नहीं था की परिवार की इज्जत क्या होती ह, माँ बाप भाई की इज्जत क्या होती ह, तुम्हारे भागने के बाद तुम्हारे भाई का क्या होगा, उसके बाद वो जिन्दा बचा या मर गया तुम पूछने भी नहीं आई,

रश्मि- ये क्या बोल रही ह मम्मी आप

कामिनी- खामोश

अंजलि- इन्हे क्यों खामोश क्र रही हो, इन्हे पता होना चाहिए तुमने क्या किया ह, जिस ासिक के साथ तुम भागी थी कोण था ो क्या करता था उसके पास पैसे के लिए तुम उसके साथ भाग गई और जब वो तुम्हे छोड़ क्र भाग गया तो तुमने रश्मि के पिता से शादी क्र ली,

कामिनी- बस करो

अंजलि- जब तुम्हे खुद भागते हुए एक बार नहीं सोचा तुम्हारे परिवार का क्या होगा भाई का क्या होगा अब तुम इन बच्चियों को ज्ञान देने आई हो,

इन बच्चियों को अपने माँ बाप की फ़िक्र ह ये आज भी तुम्हे अपना मानते हैं तुम तो अब भी अपने भाई को भाई नहीं मान रही,

कामिनी- क्या करती मैं तुम्हे पता ह क्या हालत थी उस टाइम, मेरी शादी भी नहीं हो रही थी इनकी वजह से, कुछ भी नहीं था हमारे पास, मेरी लाइफ बर्बाद हो रही थी,

अंजलि- जब इनके पास कुछ नहीं था तब भी इन्होने तुम्हारी पढाई वह के सबसे अच्छे स्कूल में करवाई, जब इनके पस कुछ नहीं तहत ुम गाओं में सबसे अच्छे कपडे पहनती थी,

ये क्यों नहीं खेती तुम्हे अयाशी की आदत पद गाइट hi, तुम भी जानती थी उस लड़के के परिवार वाले तुम्हे नहीं अपनाएंगे फिर भी तुम भाग गई, और कभी लोट क्र नहीं आई,

कामिनी- इन्होने खून किया था

अंजलि- पूरा गाओं इनके खिलाफ था और तुम भी हो गई, जब अम्मा इनके सतह थी तो तुम्हे अपने भाई पैर तो यकीन करना चाहिए था,

कामिनी- मैं बस दूर रहना चाहती थी

आशिमा- अब हम आपसे दूर रहना चाहते हैं नहीं रखना कोई रिश्ता आपसे

कामिनी- ऐसा मत बोलो

रश्मि- क्यों न बोले जब आप अपनी ख़ुशी के लिए अपने भाई को मरता हुआ छोड़ सकती हैं तो हम तो फिर भी आपको सही सलाम छोड़ रहे हैं

कामिनी- तुम दोनों मेरी जान हो

अंजलि - तुम भी अपने भाई की जान थी,

कामिनी वही बैठ क्र रोने लगी तो राजेश ने उसके कंधे पैर हाथ रखा,- मत रो बहन मत रो, अंजलि बस करो इसकी गलती नहीं थी, उस टाइम मेरे साथ जॉब hi रहता बर्बाद hi हो जाता, आज ये सुखी ह इससे ख़ुशी की बात और क्या होगी मेरे लिए, बस एक hi इच्छा थी की एक बा राइज देख लू तो सकूं से मर सकूंगा आज तुमने मेरी ये भी इच्छा पूरी क्र दी, आज मेरी साडी िछाये पूरी हो गई, अब तो मोत भी आ जाये तो गम नहीं

तुषार और रूचि- पापा दुबारा ऐसा मत बोलना

सरे बच्चे राजेश से लिपट गए- आप हमारे साथ हो तो हम पूरी दुनिया से लड़ सकते हैं

कामिनी बहुत बैचैन सी सब देख रही थी, उसका दिल टुटा जार है था,

अंजलि- देखा इस इंसाने को ये आज भी तुम्हारी खुशिया चाहते हैं, आज ये इस देश के सबस ेज्यादा आमिर इंसानो में से एक हैं,

कामिनी ये सुनकर शोकेड थी,

कामिनी- मुझे माफ़ क्र दो भाई मैं बहक गई थी

राजेश- बस बस बहन भूल जॉव ो सब तेरी बेतिया इस घर की बहु हैं ये मेरे लिए बड़ी ख़ुशी की बात ह,

अंजलि- रश्मि और आशिमा अपनी माँ का आशीर्वाद लो

अंजलि की बात मानते हुए दोनों ने कामिनी के पेअर छुए,

अंजलि देख प् रही थी की कामिनी के मन में राजेश के लिए अभी कोई खास लगाव नहीं दिख रहा था, शायद बेतिया उससे दूर न हो जाये और ये परिवार बहुत पैसे वाला लग रहा था इसलिए कामिनी शांत हो गई थी,

लेकिन अब सब बड़ा खुशनुमा लग रहा था, राजेश सबसे ज्यादा खुश था, कामिनी और अंजलि एक साथ खड़े थे बाकि सब खुशिया मन रहे थे,

कामिनी- तुम मेरे बारे में बहुत कुछ जानती हो

अंजलि- है जानती हु और वो भी जानती हु जो कोई नहीं जनता

कामिनी ने अंजलि को देखा- और क्या जानती हो

अंजलि- तुमने 2 जुड़वाँ लड़को को जनम दिया थान ा

कामिनी की गांड फैट गई इतना सुनते hi, उसने पलट क्र इधर उधर देखा

अंजलि- कोई नहीं सुन रहा

कामिनी- तुम्हे कैसे पता

अंजलि- तुमने उन दोनों बच्चो को एक औरत को दे दिया था

कामिनी- कोण हो तुम कैसे जानती हो ये सब

अंजलि- पहचाना नहीं मुझे तुमने, पहले मैंने भी नहीं पहचाना था लेकिन तुम्हारी बात करने का स्टाइल और ये आवाज आज तक मेरे दिमाग में अटकी हुई ह चेरा तो उस टाइम यंग था अब ये चश्मे लग गए ह तुम्हे, थोड़ी मुश्किल हुई पहचानने में, लेकिन मैं तो वैसी की वैसी हु, जिसे तुम अपने बच्चे देकर गाइट hi,

कामिनी- तुम तुम वही औरत हो

अंजलि- है मैं वही हु

कामिनी- कहा ह मेरे बच्चे

अंजलि- ख़बरदार जो उन्हें अपने बच्चे बताया तो

कामिनी- है है तुम्हारे बच्चे कहा ह एक बार मिलवा दो

अंजलि- वही हैं जिनसे तुम्हारी बेटियों की शादी हुई ह

ये सुनते hi कामिनी को चक्कर सा आ गया, वो भौचक्की सी कभी अंजलि को कभी सचिन कपिल को देख रही थी,

अंजलि- वही हैं, अब ड्रामा मत करना, जो हो गया उसे बदल नहीं सकते लेकिन अगर तुमने कुछ बोलने की कोशिश की तो सब बर्बाद हो जाएगा, दोनों घर उजाड़ जायेंगे, सचिन कपिल को तो मैं समझा दूंगी लेकिन आशिमा और रश्मि को नहीं समझा पाऊँगी अभी, और तुम भी जवाब नहीं दे पाओगी ये क्यों हुआ, तुम hi कटघरे में कड़ी होगी,

कामिनी की आँखों में आंसू थे उसकी गलती की वजह से आज क्या हो गया था, उसके पास शब्द नहीं थे,

कामिनी- तुम तो जानती थी फिर क्यों नहीं रोका, तुमने ये होने दिया

अंजलि- मैं नहीं जानती थी की तुम वही औरत निकलोगी

कामिनी- ये क्या पाप हो गया ह भगवान् हमे कभी माफ़ नहीं कर्जा

अंजलि- भगवान् जब सजा देंगे हम शनि hi होगी, लेकिन मैं अपने बच्चो को सजा नहीं दे सकती, अब वोट क दूसरे को प्यार करते हैं, और उनको सच बता क्र उनकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी,

कामिनी- मैं ये सब सहन नहीं क्र प् रही हु

अंजलि- तो अपनी बेटियों को आशीर्वाद दो और चली जाओ यहाँ से, वैसे भी तुम्हे अपने भाई ये कुछ लगाव तो हुआ ह नहीं

कामिनी- मेरी बेतिया

अंजलि- एक दिन तुमने अपने बेटे दिए थे मुझे आज मैं बेतिया ले रही हु और वडा करती हु उनका भी वैसा hi ख्याल रखूंगी जैसा सचिन कपिल का रखा ह,

कामिनी- तुम बहुत बुरी औरत हो तुमने एक माँ से उसके बच्चे चीन लिए,

अंजलि- हाहाहाहा ये तुम बोल रही हो जो अपने बच्चो को अनाथो की तरह फेकने जार hi थी, खेर छोड़ो, मैं कैसी भी औरत हु लेकिन अपने बच्चो के लिए मैं कुछ भी क्र सकती हु कुछ भी,

अब इन बातो का कोई फायदा नहीं ह बच्चो आशीर्वाद दो और चली जाओ यहाँ से, अगर तुम्हारे दिल में राजेश जी के लिए मुझे कुछ प्यार दिखाई देता तो मैं तुम्हे जाने नहीं देती, लेकिन तुम नहीं बदलोगी इसलिए यहाँ से चली hi जाओ, तुमने जो आज कुछ भीतर व्यव्हार ुबके साथ किया ह उससे hi वॉक हश हैं और उनकी ख़ुशी hi मेरे लिए मायने रखती ह,

कामिनी- मेरे चारो बच्चे यहाँ ह

अंजलि- मैं फिर वार्निंग दे रही हु मेरे बेटो को अगर अपना बच्चा कहा तो अच्छा नहीं होगा, और आज से वो दोनों लड़किया भी मेरी बेतिया हैं समझी, मैं एक माँ हु तो तुम्हारा दर्द समझ क्र इतनी परमिशन दे रही हु की कभी कभी मिल सकती हो तुम,

कामिनी के मुँह से कुछ न निकला, अंजलि कामिनी को सबके पास ले आई, कामिनी के फेस पैर झूटी स्माइल थी, वो बस सचिन और कपिल को देखे जार hi थी, फिर कामिनी ने सबको आशीर्वाद दिया,

अंजलि- बच्चो अपनी माँ से बात क्र लो फिर वो चली जाएँगी

रश्मि- माँ हम खुश ह की हमारी शादी में आप यहाँ हो आपके सामने हमारी शादी हुई वर्ण हमे तो लगा था की माँ बाप का आशीर्वाद भी नहीं मिलेगा

अंजलि- बीटा इन्हे तो आना hi था, जल्दी hi तुम्हारे पिता भी मान जायेंगे,

आशिमा- वोन hi मानेंगे

अंजलि- जरूर मानेंगे

दोनों बहेनो की आँखों में आंसू आ गए,

रश्मि- माँ पापा से बोलना अब हम हमेशा के लिए उनके सामने से चले गए हैं अब वापस नहीं आएंगे

कामिनी की आँखों में आंसू थे वो दोनों लड़कियों के गले लग गई, अंजलि को रश्मि की बात थोड़ी अजीब लगी, सबकी आँखों में आंसू थे, राजेश सबसे ज्यादा रो रहा था,



सरे बच्चे राजेश के समाने बैठ गए,
 
अपडेट-53


दीपा- पापा आप खुश ह न

राजेश- अंजलि की तरफ देखते हुए,

आज मैं इतना खुश हु की शायद दुनिया में कोई होगा, मैं एक हरा हुआ इंसान था जो बचपन से hi सबके लिए फालतू था, माँ बाप के बाद कभी प्यार नाम का शब्द hi नहीं सुना था, किसी ने अच्छे से बात नहीं की, अपने माँ बाप खो दिए, फिर अपना शरीर hi खो दिया बहन छोड़ क्र चली गई, न जमीन थीं ा परिवार न इज्जत न hi कोई पहचान, फिर एक लड़की मिली और मैंने उसकी सहायता क्र दी, उस दिन मैं अपने जीवन का अंत करने जार है था, शायद भगवान् ने hi उसे मेरी जिंदगी में भेजा था, मैंने उस लड़की को नै जिंदगी दें ेके लिए अपने जान न देने का फैसला क्र लिया था,

उस लकड़ी के रूप में मुझे एक परिवार मिल गया था, कोई था जो मेरे साथ भी रहना चाहता था, मैं उसके लिए जीने लगा, कुछ समय तक लगा मैं उसे जीवन दे रहा हु लेकिन जल्दी hi अहसास होने लगा की मैं उसे जीवन नहीं दे रहा वो मुझे जिन्दा रखे हुए हैं,

मैं उसके लिए बस रोटी जूता प् रहा था लेकिन वो मेरे लिए पूरा संसार झुकाने चल दी थी, इतने प्यारे बच्चे दिए मुझे, जिस इंसाने को बच्चे हो hi नहीं सकते थे, मैं तुम सबके लिए भी बस रोटी जुटाने में लगा रहा लेकिन वो तुम्हे अच्छा जीवन देने में लगी थी, और आज देखो उसने क्या क्या दे दिया मुझे, एक टूटे हुए छप्पर के निचे रहने वाला इंसान आज इस महल में खड़ा ह, मेरे पास सब्जी उगने की जमीन नहीं थी, आज उस गाओं में सबसे ज्यादा जमीन का मालिक खेलाया जाता हु,

इस देवी ने मेरे लिए जो किया ह वो तो कोई अपना भी नहीं क्र पता और वो मुझे भगवान् बोलती ह, देवी तो वो ह मेरे लिए जो मेरे लिए यहाँ तक आई ह, मन करता ह पेअर छू लू

राजेश की बात सुनकर वह हर इंसान के आँखों में आंसू और दर्द था,

अंजलि- आप जानते हैं आप क्या हैं, आप जैसा इंसान इस धरती पैर पैदा नहीं हुआ और न हो होगा, ये बात आपके सामने बैठे आपके बच्चो की आँखों में पढ़ भी सकते हो,

कामिनी को भी अहसास हो रहा था उसके भाई ने कितनी तकलीफ झेली ह लेकिन वो अब भी अपनी गलती मैंने को तैयार नहीं थी,

सरे बच्चे राजेश से लिपट गए, आशिमा और रश्मि भी, अनजलि की आँखों में अब सकूं दिख रहा था,

सुबह के 4 बज रहे थे, एक कमरे में कामिनी अपनी बेटियों के साथ बैठी थी, अंजलि सचिन और कपिल को कुछ समझा रही थी, तीनो भेने कुछ करने में लगी थी, राजेश अपने रूम में ाकून से रो रहे थे, तुषार भी सो गया था,

अंजलि- सचिन मैंने तुम्हे सब बता दिया ह हमारे साथ क्या हुआ क्यों हुआ सब कुछ और तुम दोनों ने समझा भी और साथ भी दिया, क्या अब तुम अपने माँ बाप का नाम नहीं जानना चाहोगे

सचिन- नहीं माँ हमे जरुरत नहीं ह उस औरत का नाम जानने की जो पैदा होते hi हमे छोड़ गई, हमारे लिए आप hi हमारी माँ हो और इसके अलावा हम कुछ नहीं सोचना चाहते

अंजलि- मुझे गर्व ह तुम दोनों पैर, अब तुम्हे ये बिज़नेस सम्हालना होगा,

कपिल- हमारी पढाई माँ

अंजलि- पढाई भी करनी होगी और बोस्निस भी समझना होगा

दोनों भाई- जी माँ

तभी सीमा अंदर आई- माँ इन्हे छोड़ दो थोड़ा आराम करने दो आज रात को इनकी सुहागरात ह कही दोनों फिश न हो जाये वह

अंजलि- शर्म क्र ले

सीमा- क्यों करू शर्म और इसमें शर्म की क्या बात ह, और तुम दोनों नाक मत कटवा देना वह झंडे गाड़ देना समझे

सचिन- जरूर गाड़ देंगे

अंजलि- तुम लोग आराम करो अब,

सभी लोग रेस्ट करने लगे, कामिनी दिन निकलने पैर चली गई,

आज सुहागरात थी, और रूम्स सज चुके थे, सेकंड फ्लोर पैर सचिन और कपिल दोनों के रूम थे, थर्ड फ्लोर पैर तीनो बहेनो के रूम थे, अंजलि का रूम भी सेकंड फ्लोर पैर था, तुषार का रूम थर्ड फ्लोर पैर था,

सचिन रश्मि के पास और कपिल आशिमा के पास अपने अपने रूम में बैठे हुए थे,

एक रूम और सजा हुआ था तुषार का रूम, आज अंजलि और तुषार की भी सुहागरात थी,

अब पुरे घर को राजेश और अंजलि का रिश्ता पता था तो राजेश ने खुद अपना रूम फर्स्ट फ्लोर पैर चुना था, उसने अलग रूम में रहना के फैसला किया था,

सीमा और दीपा अंजलि को दुल्हन की तरह तैयार क्र रहे थे,


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अंजलि- ये सब क्यों क्र रही हो तुम लोग

दीपा- माँ एक दम चुप आज आपकी सुहागरात ह तो आज आप कुछ नहीं बोलेंगी

अंजलि- ऐसा कोण करता ह अपनी hi माँ की सुहागरात कोण मानवता ह

सीमा- ये तो कमाल की बात ह माँ अपनी बेटियों की शादी करती ह और उनकी सुहागरात मानवती ह, आज पहेली बार बेटियों को माँ को दुल्हन बनाना के मौका मिला ह उनके लिए सेज सजाने का मौका मिला ह,

अंजलि- मुझे शर्म आ रही ह

दीपा- वो तो टुशु उतर देगा उछाल उछाल क्र

अंजलि- बेशरम लड़की शर्म क्र ले

दीपा- क्यों आज आप और हम एक hi जगह खड़े हैं हम तीनो को hi वो उछाल चुक्का ह फिर किसलिए शर्माना

अंजलि- फिर भी मैं तुम लोगो की माँ हु

सीमा- आज नहीं आज आप भाभी हो,

दीपा- और हो सकता ह कल सौतन भी बन जाओ

अंजलि- तुझे बड़ी जल्दी ह सौतन बनने की

दीपा- मैं तो मरी जार hi हु

तभी रूचि अंदर आई- सब तैयार ह चलो माँ जल्दी से रूम में पहुँचो टुशु के

अंजलि- वह क्यों

रूचि- बस चलो चुप चाप सब अपने अपने रूम में हैं,

फिर तीनो भें अंजलि को तुषार के रूम में ले गई, रूम पूरा सजा हुआ था, बीएड पैर गुलाब के फूल बिहरे हुए थे, अंजलि आज दुल्हन बानी थी, उसे अहसास हो रहा था जैसे वो 18 साल की जवान लड़की हो,

अंजलि- इस सब की क्या जरुरत थी

दीपा- माँ बस इस पल को खुल क्र जीना हर औरत का सपना होता ह ये पल आप का भी हक़ ह इस पल पैर तो आज पूरा क्र लो अपने सरे अरमान

अंजलि शर्मा गई,

सीमा- तुषार कहा ह

रूचि- उसे मैंने कुछ सामान लेने भेजा ह, आता hi होगा

अंजलि- रूचि उसे कभी घर के बहार मत भेजना आज के बाद वो किसी की नजरो में नहीं आना चाहिए, हो सकता ह सुरेश चोपड़ा के आदमी नजर रखे हुए हो हम पैर, इसलिए तुषार किसी की नजरो में नहीं आना चाहिए,

सीमा- क्यों माँ अब तो हम सामने की लड़ाई लड़ सकते हैं वैसे भी वो लोग कमजोर हो गए हैं

अंजलि- बीटा सुरेश चोपड़ा ने मुझे कमजोर समझने की गलती की थी, मैं वो गलती नहीं करुँगी और उस इंसान की पहुंच बहुत ह, और तुषार अंदर से hi लड़ेगा इसलिए उसे छुपा रहना जरुरी ह,

रूचि- समझ गई माँ वैसे वो कार से गया ह तो उसे कोई नहीं देख पायेगा और उसके पास कितना दिमाग ह आप जानती ह,

तभी निचे तुषार की आवाज आ गई,

दीपा- लो वो आ गया ह आप जाकर बैठो बीएड पैर

अंजलि- मुझे शर्म आ रही ह

दीपा- आणि भी चाहिए आपका पति आ रहा ह आपकी लेने

अंजलि- क्या बोली बेशरम लड़की

तीनो हस्ती हुई बहार चली गई

तुषार अपने रूम के समाने पंहुचा तो तीनो कड़ी थी,

तुषार- क्या हुआ ऐसे क्यों कड़ी हो

सीमा- ये दूर आज ऐसे नहीं खुलेगा

तुषार- क्यों क्या हो गया

दीपा- पहले हमे नेग देना होगा

तुषार- कैसा नेग

रूचि- अपनी दुल्हन को देखने का

तुषार- क्या बोल रही हो आप लोग

सीमा ने हलके से दूर खोल क्र तुषार को अंदर का नजारा दिखाया,

दीपा- आज तेरी सुहागरात ह और तेरी दुल्हन अंदर बैठी ह

तुषार- ये सब क्यों इसकी क्या जरुरत थी

रूचि- जरुरत थी बहुत जरुरत थी और बी तेरी जिम्मेदारी ह की हमारी माँ को वो साडी ख़ुशी मिले जिसकी वो हक़दार हैं

तुषार- जी ऐसा hi होगा

दीपा- उसके लिए तुझे अंदर जाना होगा और हमारा नेग देना होगा

तुषार- क्या चाहिए आपको

दीपा- हमारे लिए प्रॉमिस

तुषार – मांगिये

रूचि- अभी नहीं सही वक़्त पैर मांग लेंगे लेकिन वडा करो तुम पूरा करोगे

तुषार- वडा करता हु चाहे जान देनी पड़े लेकिन आपका माँगा हुआ वडा पूरा करूँगा

सीमा- अब जा अंदर और मजा ले माँ जैसी औरत किस्मत वाले को मिलती ह, आज खुल क्र अपनी किस्मत का मजा ले ले.

तुषार शर्मा गया, रुचे ने उसे अंदर धकेल दिया और दूर बंद क्र दिया,

अंदर का नजर देख तुषार की आँखे चमक उठी क्या खूबसूरत सजा हुआ था रूम और बीएड, बीएड के बिच में बैठी थी अंजलि दुल्हन के कपड़ो में,


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वीएस तो दोनों पहले भी चुदाई का मजा ले चुके थे, शादी भी क्र चुके थे, लेकिन दुल्हन बन क्र बीएड पैर बैठ क्र अपने पति का इंतजार करती अंजलि, जहा उसका बीटा hi उसका पति हो, ये बहुत hi अलग अनुभव था और तुषार के लिए भी ये बड़ा रोमाचरी था, दोनों शर्मा रहे थे,

तुषार शर्माता हुआ अंजलि के करीब पंहुचा, और उसके सामने बैठ गया,

अंजलि ने तुषार की तरफ देखा दोनों के फेस पैर बहुत hi प्यारी मुस्कान थी ऐसी मुस्कान जिसके लिए इंसान मरने को भी तैयार हो जाये,

तुषार- आप खुश ह न

अंजलि- जीवन का हर सुख मेरे पास ह, आज भगवान् से कोई शिकायत नहीं ह, की उन्होंने मुझसे ये चीन लिया यौ ो चीन लिया,

आज भगवान् ने मुझे सब कुछ दे दिया,

अंजलि- आप खुश हैं

तुषार- भगवान् ने बिना मांगे hi मुझे सबा दिया ह, ऐसे पिता जिनकी तुलना में शायद इस धरती पैर कोई और हो, ऐसी माँ जिसकी बराबरी इतहास के पन्नो में शायद hi कोई क्र सके, ऐसा परिवार जो एक दूसरे के लिए मरने को भी तैयार ह, और ऐसी पत्नी जो देवताओ को भी नसीब न हो, मुझसे ज्यादा खुश किस्मत इंसान कोण होगा,

अंजलि- आज मैं पुरे विधि वैट आपकी हो गई हु, आज से सिर्फ आपका अधिकार ह मुझ पैर

तुषार- मैं तो हमेशा से आपका hi था,

अंजलि- आज अपने प्यार की ऐसी वर्षा करो की मेरे अंदर का तूफ़ान शांत हो जाये,

तुषार ने अंजलि को बहो में भर लिया, और दोनों के हॉट आपस में मिल गए, और तुषार उन गुलाबी होतो का रसपान करने लगा,


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जल्दी hi तुषार के हाथ अंजलि की चूचियों पैर पहुंच गए, अंजलि के मुँह से aahhhhhhhhhhh निकल गई,

अगले कुछ hi मिनट्स में दोनों के कपडे उतर चुके थे, दोनों नंगे बदन एक दूसरे से लिपटे हुए एक दूसरे का रास चूस रहे थे, तुषार अंजलि की चूचियों को चूसने लगा फिर धीरे धीरे दोनों एक दूसरे को चूमते हुए 69 पोजीशन में आ गए, तुषार का लुंड अंजलि के मुँह के सामने था जिसे देख क्र अंजलि मंत्रमुग्ध हो गई,


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तुषार के पास था भी ऐसा लुंड जिसे देख क्र कोई भी लड़की औरत बस उसी में खो जाती थी, तुषार ने अंजलि की छूट पैर हाथ फेरा और दोनों हाथ की उंगलियों से छूट का मुँह खोलने लगा,

जिस छूट से वो निकला था उसी छूट के अंदर जीभ डालने लगा था, अंजलि के मुँह से आह्ह्ह्हह निकलने लगी, अंजलि ने भी लुंड को मुँह में भर लिया, दोनों एक दूसरे के अंगो को अच्छे से चूस रहे थे,


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अंजलि तो तुसाहर के चूसने से hi झड़ने लगी थी, वो अपनी छूट तुषार के मुँह पैर पटकने लगी थी, तुषार ने जल्दी से अंजलि को निचे लिटाया और अपना लुंड उसकी छूट पैर सेट किया और पूरा लुंड एक hi बार में घुसा दिया,

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Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh uuuffffffffffffffffffff आह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह अह्ह्ह

अंजलि सिसकिया लेने लगी, तुषार ने तेज धक्के लगाने शुरू क्र दिए, अंजलि जल्दी hi शांत हो गई लेकिन तुषार लगा रहा, फिर उसने अंजलि को घोड़ी बनाया और पीछे से लुंड उसकी छूट में घुसा दिया, और घरेरे धक्के मरने लगा, अंजलि खुद को कण्ट्रोल नहीं क्र प् रही थी, उसके मुँह से मस्ती भरी चीखे निकल रही थी,


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अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ahhhhhhhhhhhhh ऐसे hi छोड़ो ahhhhhhhhhhhh बहुत मजा आ रहा ह ऐसे hi अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरे पति छोड़िये अपनी पत्नी को uuuffffffffffffffffffff

कुछ hi देर में अंजलि फिर झड़ने लगी, लेकिन तुषार वो नहीं रुक रहा था, फिर उसने अंजलि को अपने उप्पेर बैठ्या और निचे से लुंड छूट में दाल क्र उसे उछलने लगा, ये चुदाई लगभग 1 हरष चली, जिसके बाद तुषार ने अपना रास अंजलि की छूट में भर दिया था,


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दोनों एक दूसरे से चिपक क्र लेट गए थे,

लो हो गई सबकी चुदाई का खेल ख़तम, हमारी छूट में को गरम करके ये सब तो ठन्डे होकर सो गए,

ये थी सीमा, तीनो भेने अपने अपने मोबाइल पैर तीनो कमरों में हो रही चुदाई को देख रही थी,

दीपा- ये दोनों भाई तो 20-25 मिनट्स में hi ढेर हो गए, और इनकी बीविया भी खुश होकर लेट गई,

रूचि- टुशु तो रुकता hi नहीं ह ये तो जान ले लेगा किसी की

सीमा- जणू ये hi असली मजा देता ह औरत किन अस नस तोड़ देता ह

रूचि- बस हो गया न अब बंद क्र दो अब वो सोयेंगे

दीपा- सोयेंगे आरी चुकी सुहागरात को कोण सोता ह, उम्मीद करती हु सचिन और कपिल भी ेके क राउंड और करेंगे और वो सैंड तो पूरी रात माँ की बेंड बजायेगा देख लेना

सीमा- सुबह को माँ से चला भी नहीं जायेगा

रूचि- इतनी देर कोण कर सकता ह

दीपा- वो क्र सकता ह देख जरा स्क्रीन पैर वो फिर शुरू हो गया ह,

तुषार और अंजलि फिर शुरू हो गए, इस बार तुषार ने अंजलि को अपनी गॉड में उठाया और खड़ा होकर अंजलि को लुंड पैर उछलने लगा,


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वही सचिन और कपिल भी शुरू हो चुके थे, सचिन और कपिल ेके क राउंड करके लेट गए, तब तक तुषार खड़ा खड़ा hi अंजलि को उछाल रहा था, फिर उसने अंजलि को दीवार से लगाया और छोड़ने लगा, फिर दोनों सामने फाडे सोफे पैर आ गए और अन्जाइ तुषार के लुंड पैर उछलने लगी,

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दीपा- देखा जितनी देर वो दोनों ने एक राउंड किया तब तक तो इसका इंजन गरम हुआ ह, ये सुबह तक हमारी माँ की छूट फाड़ देगा

रूचि- तू कितनी गन्दी ह कितना गन्दा बोलने लगी ह

दीपा- जब से इसके निचे आई हु मुझे ये बोलना hi सबसे अच्छा लगता ह

तुसाहर ने एक बार फिर अपना रास अंजलि की छूट में भर दिया था, और दोनों चिपक क्र लेट गए,

रूचि- अब तो बंद क्र दो अब तो हो गए अब वो सोयेंगे

सीमा- तुझे नींद आ रही ह क्या

रूचि- अब उन्हें रेस्ट करने दो चलो बंद करो अब इसे

दीपा- ठीक ह करते हैं लेकिन वो लोग नहीं सोयेंगे,

रूचि- कोई बात नहीं अब हम बंद करते हैं

फिर उन्होंने वीडियो बंद क्र दी और ले गई, तीनो के आँखों में बस तुषार और अन्जाइ की चुदाई घूम रही थी,

वही…

अंजलि- आज मैं बहुत खुश हु

तुषार- आपकी ख़ुशी hi मेरे लिए इम्पोर्टेन्ट ह

अंजलि- मुझे तो मेरी खुशिया मिल गई लेकिन बाकि सब का क्या

तुषार- कोण बाकि सब

अंजलि- सीमा, दीपा, अनीता, रिंकी, रजिया, ये सब भी तो आपकी प्रेमिका हैं इनका भी तो अधिकार ह आप पैर

तुषार- मुझ पैर बस आपका अधिकार ह

अंजलि- नहीं ये गलत होगा इन सबके साथ,

तुसाहर- अगर अनीता रिंकी और रजिया को हमारे रिश्ते के बारे में पता चला तो क्या सोचेंगे वो

अंजलि- उन्हें हमारे रिश्ते के बारे में कुछ मत बताना लेकिन उनका हक़ उन्हें मिलना चाहिए

तुषार- मैं उनके लिए जो कर सकता हु वो करूँगा

अंजलि- 2 लड़किया और हैं उनके बारे में क्या सोचा

तुषार- अब और कोण दो हों

अंजलि- अलका और

तुसाहर- अलका hmmmmmmmmmm उनके बारे में सोच क्र मुझे दर लगता ह, वो बहुत प्यार करने लगी हैं और न मैं उनसे अपना सकता हु न सच बता सकता हु, दूर गया तो वो कुछ क्र बैठेगी,

अंजलि- सच्चे प्यार को कभी दूर नहीं करना चाहिए

तुषार- लेकिन कैसे समझूंगा की मैं अपने परिवार का हुआ और वो कैसे बर्दास्त क्र पायेगी

अंजलि- मैं देखती हु क्या कर सकती हु इस बारे में

तुषार- और दूसरी कोण ह

अंजलि- आपकी सबसे प्यारी सबसे खास

तुषार- मैं समझा नहीं

अंजलि- रूचि

रूचि का नाम सुनते hi तुषार का मुँह खुला रह गया

तुषार- क्या ये ये नहीं हो सकता, ये कैसे हो सकता ह

अंजलि- वो आपको जी जान से प्यार करती ह, बस कभी दिखा नहीं पाई, या हालत ऐसे थे की मौका नहीं मिला

तुषार- लेकिन मैंने कभी उसके लिए ऐसा नहीं सोचा

अंजलि- शुरुआत में कोई नहीं सोचता लेकिन फिर हो जाता ह आपको उसे उसके हिस्से का प्यार देना होगा

तुषार- लेकिन कैसे मैं ये नहीं क्र पाउँगा

अंजलि- आपको करना होगा वो बहुत मासूम ह और अलका और रूचि hi आपकी असली प्रेमिका और पत्नी बनने की हक़दार हैं, क्योकि उन दोनों ने बस आपने प्यार किया ह, कोई हवस और इच्छा नहीं ह उन दोनों की, अउ रेज सच्चे प्यार को कभी इंकार नहीं करना चाहिए

तुषार- आप ठीक बोल रही हैं लेकिन ये सब होचपोच कैसे सम्हलेगी

अंजलि- रूचि को सब पता ह और अलका को मैं समझा लुंगी,

तुषार- लिस्ट में एक नाम और जुड़ गया ह

अंजलि- कोण

तुषार- नंदनी मुझे नहीं लगता वो मुझे भूल पायेगी,

अंजलि- वो मंत्री के बेटी ह तो खुल क्र कभी सामने नहीं आएगी, अगर आपको लगता ह उसे कुछ देना ह तो आप जरूर दीजियेगा

लेकिन अभी मुझे मेरा प्यार दीजिये,

अन्जाइ एक बार फिर तुषार के उप्पेर आ गई, और दोनों की चुदाई फिर शुरू हो गई, जो सुबह तक चली, फिर दोनों थक क्र सो गए,

अगली सुबह सबके फेस पैर एक चमक लेकर आई थी, रश्मि और आशिमा खुश थी एक चमक थी उनके फेस पैर, लेकिन वो फीकी लगने लगी जब अंजलि सामने आई,

दीपा- देकः मेरी चुकी माँ के फेस की चमक नै नवेली दुल्हनों को फ़ैल क्र रही हैं,

सभी एक साथ बैठे थे,

अंजलि- बच्चो मैं तुम लोगो के हनीमून का ट्रिप बुक क्र दिया ह गोवा का तो आज शाम को hi तुम लोग फ्लाइट पकड़ोगे वह के लिए, अपनी पैकिंग क्र लो

सचिन- लेकिन माँ यहाँ के हालत अभी ठीक नहीं ह

अंजलि- उसके लिए तुम्हारी माँ बैठी ह यहाँ तुम लोग चिंता मत करो, बस मेरी दोनों बेटियों को खुश रखना वह समझे

सचिन- जी माँ

अंजलि- सीमा और दीपा तुम दोनों कल से ऑफिस जाओगी और काम सिखोगी, सुमित और अनिल अंकल से

सीमा- जी माँ

रूचि- और मैं क्या करुँगी

अंजलि- तू अभी अपनी पढाई पूरी करेगी फिर ऑफिस ज्वाइन करेगी,

और तुम लोग हनीमून से आकर अपनी पढाई में लग जाना, तुम चारो की पढाई हमारे बिज़नेस को फायदा hi देगी इसलिए बिच में नहीं छोड़ना,

राजेश- मैं 2 दिन बाद गाओं जाऊंगा वह थोड़ा सा इंतजाम और करके आना ह

अंजलि- ठीक ह

तभी अलका और वर्षा की एंट्री हुई

वर्षा- हम भी ह परिवार में हमारे बिना hi सब प्लान हो रहा ह

अंजलि- अरे नहीं नहीं तुम दोनों के बिना कैसा प्लान आओ आओ

अलका को देख क्र तुषार की नजरो में एक बार फिर एक दर्द सा उभर आया और वही अलका की आँखों में एक चमक सी दिखाई दी,

अंजलि- मैं बस सबको उनका काम समझा रही थी,

वर्षा- तो हमारा काम कोण बताएगा

अंजलि- तुम क्या चाहती हो बताओ वैसा hi होगा

वर्षा- आप बड़ी हैं हमारी माँ सामान ह तो आप hi बताइये

अंजलि- ठीक ह तो

अलका तुम बहुत होशियार हो तो बिज़नेस को कमांड करो और अपनी दोनों बहेनो को सीमा और दीपा को भी सिखाओ, तुम तीनो एक साथ ऑफिस चलाओगी, और तुम्हारा hi डिसीसिव होगा कैसे क्या करना ह,

अलका- जी मैं पूरी महेनत से काम करुँगी

अंजलि- बीटा तू यहाँ एम्प्लोयी नहीं ह बेटी ह इस घर की और हम सब तेरा परिवार हैं, अब ये झिजक ख़तम क्र ले,

अलका- जी वो बस

वर्षा- हो जाएगी जल्दी hi हो जाएगी ख़तम

अंजलि- तुम जाओगी मिंबइ और अपना सपना पूरा करोगी,

वर्षा- लेकिन मैं आप सबके साथ रहना चाहती हु

अंजलि- रहोगी जल्दी hi साथ रहोगी लेकिन अभी तुम्हे वह जाना ह तुषार को साथ लेकर

वर्षा- अच्छा ठीक ह

वर्षा ने खुश होते हुए एक दम है क्र दी,

तुषार के दूर जाने की खबर से साडी लड़कियों के दिल पैर छुरी सी चल गई,

अंजलि सबकी हालत समझ गाइट hi,

अंजलि- कुछ दिन की बात ह टुशु जल्दी hi वापस आ जायगा

अंजलि- वर्षा तुम आज शाम को hi निकलोगी तुषार बाद में वही पूछ जायेगा, आज पूरी फॅमिली एक साथ लंच करेगी उसके बाद सब अपने अपनी मंजिल की तरफ निकलेंगे,

तभी अंजलि के पास एक कॉल आई,

अंजलि- टुशु तुम उप्पेर जाओ और अपने रूम में रहो

तभी सुमित वह आ गए, उनके साथ कुछ लोग थे,

अंजलि- आइये आइये सुमित जी

सुमित- अंजलि मैं ये कुछ लोग लेकर आया हु

मैं गेट पैर जो गार्ड हैं वो शर्मा जी के ऑफिस के गार्ड थे तो उन्हें भेज दिया ह, उनकी जगह ये दो हैं, आर्मी से रिटायर हैं, मेरे विश्वास के लोग हैं, और 4 गार्ड और हैं जो हमेशा घर की अस पास रहेंगे, ये दो लेडीज हैं जो घर की साफ़ सफाई करने के लिए, इनके रहने के लिए, हवेली के कार्नर पैर क्वार्टर्स बने हुए हैं वही रहेंगे,

सुमित आदमियों से- ये हैं इस घर के मालिक इनके आर्डर के बिना कुछ नहीं करना ह और घर के अंदर किसी को नहीं आना ह, सफाई के लिए टाइम होगा उसी टाइम अंदर आना ह तुम दोनों को, बाकि घर के बहार की सफाई hi करनी ह, बाकि अंजलि मैडम समझा देंगी,

अंजलि- गार्ड्स को अपना काम पता ह, आपके पास गन ह तो उसका इस्तेमाल इस परिवार के लोगो की सुरक्षा के लिए बिना चिंता किये करना, और तुम दोनों इस ग्राउंड फ्लोर की सफाई डेली होगी, सेकंड और त्रिर्द फ्लोर पैर बने हॉल और ओपन एरिया की सफाई होगी, किसी भी रूम के अंदर नहीं जाना ह, तुम्हे खली पड़े रूम की डिटेल्स मिल जाएगी बस उनकी सफाई करनी हैं, बाकि लोग अपने अपने रूम की सफाई खुद करेंगे, किसी को रूम्स के अंदर जाने की परमिशन नहीं हैं,

सही नौकर – यस मम समझ गए,

अंजलि- जाओ अपने काम पैर और किसी भी चीज की जरुरत होगी तो राजेश जी से बता देना उनकी मर्जी के बिना कोई कुछ नहीं करेगा,

सभी वह से चले गए

अलका- इतने लोगो का खाना कोण बनाएगा और खुद सफाई क्यों करनी आप लोगो को, और रूम में क्यों नहीं जाना

अंजलि मुस्कुराई- बीटा अपने बच्चो के लिए मैं खुद खाना बनती हु, ुर टुशु को हम चारो के हाथ का खाना hi पसंद ह, दूसरा कुछ काम खुद करने चाहिए, हम लोग उस गरीबी से आये हैं जहा दुसरो के काम करके घर चलता था, तो आदत ख़राब नहीं करनी चाहिए, तीसरा कमरों के अंदर राज होते हैं जो सबके सामने नहीं खुलने चाहिए, अभी हम एक युद्ध में हैं जहा अपने राज किसी को नहीं बता सकते, और सबसे बड़ा राज ह टुशु वो अभी किसी के सामने नहीं आएगा,

सबने है में सर हिलाया

अंजलि- चलो अब लंच करते हैं फिर सबको निकलन भी ह,

लंच करके सबने कुछ देर बाते की फिर रश्मि और आशिमा सामान पैक करने चली गई, अलका और वर्षा भी निकल गए,

रूचि- माँ टुशु फिर दूर चला जायेगा

अंजलि- अगर हम लोगो को खुश रहना ह तो टुशु को ये आखरी काम करना होगा वर्ण मुसीबत कब वापस आ जाएगी पता भी नहीं चलेगा

दीपा- और कितनी मुसीबत बची ह

अंजलि- बस जल्दी hi सब ख़तम हो जायेगा फिर तुम सबके लिए एक घर बनाउंगी जहा हम सब साथ रह सकेंगे

दीपा- माँ क्या हम टुशु के साथ रह पाएंगे

अंजलि- हम साथ होंगे मेरी बच्ची बस तुम सबको अपना दिल मजबूत करना होगा

रूचि- क्यों माँ क्या होगा कुछ गलत होने वाला ह क्या

अंजलि- बीटा तुमने मुझे तो टुशु की पत्नी बना दिया, ऐसे hi उसकी जिंदगी में हम सब के अल्वा भी कुछ और जिम्मेदारिया हैं, जिनके लिए तुम सब को सबर रखना होगा

दीपा- माँ टुशु की हर जिम्मेदारी में हम साथ हैं और हम सब कुछ बर्दास्त क्र लेंगे उसके लिए

अंजलि- शाबाश बीटा



तुम सबको तुम्हारे हिस्से की ख़ुशी मिलेगी
 
अपडेट-54



सचिन और कपिल अपनी पत्नियों के साथ एयरपोर्ट से गोवा के लिए फ्लाइट ली, लेकिन फ्लाइट से उतारते hi एयरपोर्ट से बहार निकलने से पहले hi उन्हें एक आदमी मिला,

आदमी- hello सचिन जी

सचिन- hello सर आप कोण

आदमी- मुझे अंजलि मैडम ने भेजा ह ये लीजिये आपके टिकट्स

सचिन- हमारे टिकट्स

आदमी- पहले मैडम से बात क्र लो

उस आदमी ने सचिन को फ़ोन दिया

सचिन- hello

फ़ोन पैर अंजलि थी,

अंजलि- पहुंच गए गोवा

सचिन- माँ आप ये सब क्या ह

अंजलि- बीटा हालत तो तुम जानते hi हो इसलिए ये सब किया ह, ये जो तुम्हारे सामने हैं ये रशीद जी हैं और इनके पास तुम्हारे टिकट्स हैं स्वीदरलैंड के, तुम लोग हनीमून के लिए स्वीदरलैंड जाओगे,

सचिन- लेकिन

अंजलि- जो बोल रही हु वैसा करो बस किसी को पता नहीं चलना चाहिए तुम लोग वह गए हो, और व्हाट्सप्प कॉल के अलावा किसी और तरीके से कॉल नहीं करोगे तुम लोग, और बस मुझसे बात करोगे बाकि किसी को नहीं बताओगे

सचिन- जी माँ समझ गया

फिर वो लोग टिकट्स लेकर वह से निकल गए स्वीदरलैंड

वर्षा पहुंच चुकी थी मुंबई, और अलका अपने सपनो की दुनिया में खो गई थी, उसके दिमाग में बड़ी उथल पुथल थी तुषार को लेकर, वो तुषार से प्यार करती थी लेकिन रिश्ते में उसकी मौसी थी, अब वो क्या करेगी कैसे अपने प्यार का इजहार करेगी, क्या अंजलि उसके प्यार को समझ पायेगी क्या तुषार उसका हो पायेगा

वही तुषार पहुंच चुक्का था अपने शहर वापस, अपने रूम पैर वह से उसने अपना सारा सामान हटा दिया, और वह से वो पंहुचा अनीता के घर, जहा यश अभी भी अपने ट्रॉमा में था, वो बस उदास सा लेता रहता था, अजय अभी भी हॉस्पिटल में एडमिट था, चंद्रो देवी और अलीशा रात में उसी के पास रूकती थी,

तुषार को देख क्र रिंकी और अनीता दोनों के फेस पैर एक चमक आ गई, लेकिन अगले hi पल दोनों माँ बेटी झेप गई, क्यों दोनों का एक hi आशिक ह और सामने खड़ा ह दोनों को एक दूसरे के बारे में पता ह,

यश तो बहार hi नहीं निकला देखने के लिए की कोण आया ह, रात में अनीता ने खाना बनाया और अनीता हॉस्पिटल चली गई खाना देने,

हॉस्पिटल जाते हुए अनीता ने तुषार के कान में धीरे से कहा- मैं खाना देकर आ रही हु तब तक तुम रिंकी को शांत क्र के सुला दो फिर पूरी रात मेरे साथ रहना ह,

तुषार ने अनीता की तरफ देखा तो अनीता शर्माती हुई बहार निकल गई,

रिंकी- क्या बोलकर गई हैं मम्मी

तुषार- तू क्या करेगी जान क्र

रिंकी- अच्छा बच्चू दोस्त से छुपायेगा

तुषार- तुझसे पहले वो मेरी दोस्त हैं समझी

रिंकी- अरे तो मैं कहा दोस्ती तोड़ने की बात क्र रही हु मैं तो पूछ रही हु

तुसाहर- चल तुझे बता देता हु क्या बोल क्र गई थी

रिंकी- बता बता

तुषार- वो बोल क्र गई हैं की मेरी बेटी बहुत प्यासी ह उसकी प्यास अच्छे से बुझा देना, उछाल उछाल क्र लेना उसकी

रिंकी- हैट बेशरम कही का

तुषार- ओहो आज तू शर्म वाली बन गई ह

रिंकी- मजाक मत क्र यार

तुषार- अब तुझे सच भी मजाक लग रहा ह तो मैं क्या करू

रिंकी- बताना ह तो बता वर्ण रहने दे

तुषार- बता तो रहा हु बोलकर गई ह की मैं हॉस्पिटल जार hi हु जो करना ह क्र लो

रिंकी- haaaaaaaaaa सच्ची में

तुषार- है

रिंकी- तुषार तू रिश्ते में मेरा भाई लगता ह

तुसाहर- दुबारा मत बोलना, वो इंसान मेरा कुछ नहीं लगता तो उसके हिसाब से कोई रिश्ता नहीं ह हमारा, तू दोस्त ह मेरी

रिंकी- अच्छा श्री श्री अब नहीं बोलिंगी

तुषार- बोलना ह तो पापा बोल रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप होते हैं नाम ह तुषार

रिंकी- कमीने कुत्ते बेशरम

तुषार- इसमें क्या गलत बोलै तेरी माँ छोड़ी ह मैंने तो हुआ न तेरा बाप

रिंकी- कोई बाप अपनी बेटी को छोड़ता ह क्या

तुषार- मैं सौतेला बाप हु न मैं छोड़ सकता हु तू तो माल ह मेरा आजा जल्दी से ठंडा क्र दे देख कैसे खड़ा ह,

तुषार ने अपनी पंत के उप्पेर से hi लुंड को शलया,

रिंकी भी मुस्कुराती हुई अपने घुटनो पैर चलती हुई तुषार के पास पहुंची और उसका लुंड सहलाने लगी, फिर जीन्स खोल क्र लुंड बहार निकल लिया


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फिर लुंड को चूसने लगी, तुषार आराम से सर पीछे करके लेट गया, कुछ देर चूसने के बाद रिंकी ने तुषार को सोफे पैर लिटाया और अपनी पंतय निकल क्र तुषार के मुँह पैर अपनी छूट रख क्र बैठ गई, और अपने कपडे निकल दिए,

तुषार- अंदर चले यहाँ कोई आ जायेगा

रिंकी- दादी और मम्मी यहाँ ह नहीं तो किसका दर

तुषार को नहीं पता था यश घर में hi ह, लेकिन रिंकी को पता था फिर भी वो ड्रिंगरूम में hi सब क्र रही थी,

तुषार ने रिंकी की छूट चुसनी शुरू क्र दी, कुछ देर बाद रिंकी तुषार के लुंड को पकड़ा क्र अपनी छूट में दाल रही थी, लुंड बड़ा तो था hi इतनी आसानी से कैसे घुस सकता था, तुषार ने थोड़ा सा जोर लगाया और रिंकी के मुँह से दर्द भरी आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह निकल गई,

थोड़ी hi देर में दोनों की चुदाई पुरे सवाब पैर थी रिंकी खुल क्र चुद रही थी, वो किसी पोर्न स्टार की तरह आवाजे निकल रही थी, तुषार थोड़ा सरप्राइज था रिंकी को ऐसा देख क्र लेकिन मजा बहुत आ रहा था उसे,


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रिंकी- ahahhhhhhhhhhhhhhhhhh जान uuufffffffffffffffffff फ़क में फ़क में फ़क योर बीच ahahhhhhhhhhhhhhh ी ऍम योर फूकिंग बीच, फ़क में योर बिग कॉक,

तुषार- ये ले मेरी जान

दोनों की चुदाई लगभग 1 घंटे से ज्यादा चली इस बिच रिंकी 3 बार झड़ी,

तुसाहर- आह्ह्हह्ह्ह्ह जान मेरा आ रहा ह

रिंकी- अंदर hi दाल दे बेबी मुझे फील करना ह aahhhhhhhhhhhh

तुषार ने पूरा रास रिंकी के अंदर भर दिया और दोनों वही सोफे पैर चिपक क्र लेट गए,

तुसाहर रिंकी की चूचियों में मुँह दाल क्र लेता था, जबकि रिंकी अपनी गार्डन घुमा घुमा क्र कुछ देखने की कोशिश क्र रही थी,

जब उसे तसली हुई तो उसके फेस पैर एक मुस्कान आ गई,

फिर दोनों ने कपडे पहने, और रिंकी तुषार के लिए जूस ले आई

तुषार- बड़ी सेवा क्र रही ह

रिंकी- तू महेनत hi इतनी करता ह की तेरी सेवा करने को दिल करता ह

तुषार- हे कितनी प्यारी दोस्त ह मेरी

रिंकी- जल्दी पि ले फिर खाना खा भी खाना ह फिर तुझे महेनत भी तो करनी ह

तुषार- तू रात में भी मेहनत करवाएगी मुझसे

रिंकी- हाहाहाहा दर गया क्या

तुषार- दर और मैं

तभी दूर बेल्ल बजी रिंकी ने दूर खोला, अनीता और अलीशा आ गए थे, तुषार को वह देख क्र अलीशा के फेस पैर भी एक स्माइल थी,

फिर सबने साथ में खाना खाया, फिर चारो लोग एक साथ बेथ क्र बाते करने लगे,

फिर रिंकी और अलीशा अम्मा के रूम में चले गए, घर में 3 hi रूम थे एक में अनीता और यश थे दूसरे में रिंकी अलीशा तीसरा रूम अम्मा का था, और एक ड्रिंगरूम था, तो तुषार रिंकी के रूम में लेट गया,

कुछ देर बाद अनीता अंदर आई एक बहुत hi कामुक सी निघ्त्य पहन क्र, जिसे देख क्र तुषार के फेस पैर एक नॉटी सी मुस्कान आ गई,


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तुषार मन में - हे रे किस्मत अभी कुछ देर पहले बहार बेटी चुद रही थी अब माँ आ गई छोड़ने ufffffffffff

अनीता- क्या सोच रहे हो

तुषार- कुछ नहीं

अनीता- मैं बताऊ यही सोच रहे हो न की अभी कुछ देर पहले बेटी का मजा लिया था अब माँ भी आ गई,

तुषार एक दम झेप गया जैसे उसकी चोरी पकड़ी गई हो

तुषार- वो नहीं मैं तो वो

अनीता- हहहहहए बस बस रहने दो मैं तो मजाक क्र रही थी,

ये बताओ क्या खातिर करू आज मैं, आज पहेली बार तुम मेरे घर में महेमान बांके आये हुए हो

तुषार- दोस्तों के घर जाने पैर खातिर नहीं होती

अनीता- लेकिन मैं तो करती हु

तुषार- तो आप अपने hi स्टाइल में कीजिये

तो अनीता तुरंत अपनी नाईट ड्रेस उतरती हुई तुसाहर के पास पहुंच गई एक दम नानाजी होकर

तुषार ने भी उसे अपने उप्पेर खींच लिया, दोनों में चूमा छाती शुरू हो गई, कुछ hi देर में तुषार के कपडे भी उतर चुके थे, और एक दूसरे के अंगो के साथ खेलना शुरू क्र दिया था, तुषार ने अनीता की छूट को चूस क्र hi झाड़ दिया था,

फिर अनीता तुषार के सामने घोड़ी बन गई और तुषार ने अपना लुंड उसकी छूट में घुसा दिया और छोड़ने लगा,


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Uuuuffffffffffffff बहुत मोटा ह तुम्हारा रिंकी कैसे झेलती होगी इसे

आज पहेली बार अनीता ने अपनी चुदाई के बिच में रिंकी का इस तरह जीकर किया था,

तुषार- जैसे आप झेल रही हैं

अनीता- ahhhhhhhhhhhhhhhhh aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh छोड़ो मुझे ahhhhhhhhhhhhhhhhhhh और तेज छोड़ो और तेज ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अनीता बहुत तेज तेज आवाज करके चुद रही थी जैसे उसे किसी का दर hi न हो, घर में रिंकी और अलीशा भी थी लेकिन अनीता तो बे फ़िक्र होकर चिल्ला रही थी, उसे इतना दर्द नहीं था लेकिन वो मजे में चिलए जार hi थी, आज पहली बार वो ऐसे चूड़ो जैसे शब्दों का इस्तेमाल क्र रही थी,

तुषार को जोश चढ़ने लगा था, 15 मिनट्स लगातार छोड़ने के बाद अनीता ने पीछे पलट क्र देखा तो उसके फेस पैर एक मुस्कान सी थी, तभी अनीता झड़ने लगी

Ahhhhhhhhhhhhh तुषार छोड़ो फाड् दो मेरी छूट अपने इस मोठे तगड़े लुंड से बहुत तगड़ा ह ये aahhhhhhhhhhhhhhhhh मैं तो तुम्हारे इस लुंड की दीवानी हो चुकी हु aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh,

तुषार की रफ़्तार बढ़ गई, तुषार ने अनीता को निचे लिटाया और छोड़ने लगा, 5 मिनट्स में hi अनीता फिर झड़ने लगी, ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh तुषार बहुत मजा आ रहा ह करते रो aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

तुषार को यकीन hi नहीं हो रहा था वो इतनी जल्दी दुबारा कैसे झड़ने लगी, अनीता झाड़ क्र शांत hi हुई थी की वो फिर से झड़ने लगी, तुषार को समझ नहीं आ रहा था, अनीता लगातार झड़ती जा रही थी और बहुत जोर जोर से चीख चीख क्र अपने मजे का प्रदर्शन क्र रही थी, अभी चुड़ते हुए 30 मिनट्स hi हुए थे की अनीता 7 बार झाड़ गई थी, अनीता के झड़ने स तुषार इतना एक्सीटेंड हो गया था की खुद को रोक नहीं पाया और अनीता की छूट में hi झड़ने लगा,

दोनों शांत होकर लेट गए,

तुषार- ये क्या था आप इतनी जल्दी जल्दी कैसे झाड़ रही थी

अनीता- इसे मल्टीपल ोर्गेसुम बोलते हैं, मैंने इसके बारे में बस पढ़ा था की ये औरत को तब आता ह जब तो बहुत ज्यादा मजे में आ जाये या कुस्की कोई फाण्टिकी पूरी हो रही हो, दुनिया में 1% औरत भी नहीं जिन्होंने इसे फील किया हो लेकिन आज मुझे वो मजा मिला ह, वो भी इतना लम्बा इतनी देर तक,

तुषार- आपकी क्या फाण्टिकी थी

अनीता- तुम्हारे लिए 4 तोफे थे जो पूरा हो गया

तुषार- मेरे लिए

अनीता- है धीरे से विंडो की तरफ देखो, पहला तोफा तो वही खड़ा ह

तुषार ने धीरे से विंडो की तरफ गार्डन घुमाई तो वह रिंकी के साथ अलीशा कड़ी थी, जो एक दम से वह से हैट गई थी,

तुषार- ये किस लिए

अनीता- अजय की बीवी तुमसे जरूर छुड़ेगी, तुम्हारा बदला जरूर पूरा होगा, मैंने वडा किया था न तो पूरा करना hi था

तुषार- लेकिन रिंकी

अनीता- उसे मैंने सब बता दिया ह और वो मेरा साथ दे रही ह

तुषार- ये आपने ठीक नहीं किया,

अनीता- हम दोनों माँ बेटी के दिल में बस तुम हो और ये बात हम दोनों ने एक दूसरे के समाने भी कबूल क्र ली ह तो अब मुझे कोई शर्म नहीं ह चाहे कुछ भी हो जाये अब हम दोनों तुम्हारे साथ हैं,

तुषार- ये तो एक तोफा हुआ बाकि 3 वो क्या हैं

अनीता- टाइम आने पैर खुद पता चल जायेंगे

तुषार- इतना सरप्राइज

अनीता- कुछ तोफे इसी सरप्राइज के लायक होते हैं

तुषार- मैं इंतजार करूँगा

वही दूसरे रूम में

रिंकी- क्यों चची कैसा लगा

अलीशा- आईटी इस वैरी बिग, बूत योर माँ हाउ कैन शी टेक आईटी.

रिंकी- क्यों उन्हें भी तो मजे लेने का अधिकार ह,

अलीशा- बूत हे इस योर बर्फ

रिंकी- आंटी जब अमेरिका में ये सब चल सकता ह तो मैं और माँ क्यों नहीं क्र सकती, वैसे भी उसका इतना बड़ा ह की दोनों को खुश क्र सकता ह, आप दोनों के आने से पहले वो मुझे अपने कॉक पैर उछाल रहा था, अब माँ को मजा दे रहा ह, अगर आप कहो तो मैं आपकी भी सेटिंग करवा सकती हु, और वो अभी भी आपको मजा दे सकता ह इतना दम ह उसमे

अलीशा- हाउ कैन ी दो थिस?

रिंकी- क्यों नहीं चाचा तो वैसे भी हॉस्पिटल में हैं और वो अब आपके साथ कुछ क्र भी नहीं सकते, और आपने तो वैसे hi बहुत मजे लिए हैं फिर क्या दर,

अलीशा- बूत

रिंकी- सोच लो आपक मर्जी

अलीशा सोचती हुई लेट गई, रिंकी भी मुस्कुराती हुई लेट गई, वही तुषार और अनीता नंगे hi सो गए,

इस सब में एक चीज और हुई थी जो आगे चल क्र एक बड़ा खतरनाक रूप लेने वाली थी,

अगली सुबह तुषार जल्दी उठा और अनीता के घर से निकल गया, वो अपने कसबे वाले घर पंहुचा और रजिया को कॉल करके बुलवा लिया, और आज का दिन और पूरी रात उसने रजिया के साथ बीते, रजिया को पूरी ख़ुशी देकर वो आदेश और उसके पिता से मिला,

फिर वो निकल गया मुंबई के लिए, मुंबई सपनो का शहर जहा लोग अपने सपने पुरे करने आते हैं, कुछ कामयाब हो जाते हैं तो कुछ खुद को बर्बाद क्र लेते हैं,

तुषार ट्रैन से वह पंहुचा उसे पहुंचने में 36 हरष लगे, वह पहुंच क्र उसने वर्षा को कॉल की तो वर्षा उसे लेने स्टेशन पैर hi आ गई,


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आते hi वर्षा ने तुषार को गले से लगा लिया, इस शहर में ये सब नार्मल था, वर्षा तुषार को देख क्र इतनी खुश थी की उससे अपनी ख़ुशी कण्ट्रोल hi नहीं हो रही थी,

वर्षा तुषार को लेकर अपने फ्लैट पैर पहुंची, जहा उसके साथ 2 लड़किया और रहती थी, ये दोनों भी अच्छी मॉडल थी,

वर्षा- तुषार ये मेरी फ्रेंड्स हैं अंशिका एंड कनिका


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तुषार- hello

दोनों- hello

अंशिका- तो ये ह वो तुषार जिसकी तू इतनी तारीफ क्र रही थी

वर्षा- चुप रह ांनी

कनिका- अरे इसमें चुप क्यों रहना बाई, हम झूट तोडना बोल रहे हैं

तुषार बस मुस्कुरा रहा था

वर्षा- अच्छा अभी बस करो तुषार यहाँ कुछ दिन के लिए रुकेंगे

अंशिका- तेरे रूम में hi रुकेगा न

वर्षा- नहीं नहीं

कनिका- यहाँ 3 hi रूम हैं और तीनो में हम लोग रहते हैं तो कहा रुकेगा ये बेचारा अपने रूम में hi रुकवा ले

तुषार- अरे कोई बात नहीं मैं ारेंगे क्र लूंगा, कुछ दिन की बात ह होटल में रुक जाऊंगा

वर्षा- कैसी बात करते हो मेरे होते हुए तुम होटल में क्यों रुकोगे, तुम मेरे रूम में रुकोगे और मैं अंशिका के रूम में सो जाउंगी

अंशिका- मैं नहीं सुलाने वाली तुझे मुझे अपने बर्फ से बात करनी होती ह तू साडी बाते सुन लेगी मेरी, मुझे शर्म आएगी

वर्षा- अच्छा मैंने तुझे पता नहीं क्या क्या करते देखा ह, जब शर्म नहीं आई थी जो अब आएगी

अंशिका- मजाक क्र रही हु यार क्यों मेरी पोल खोल रही ह,

तुषार- मेरी वजह से आप लोग क्यों परेशां हो रहे हैं

कनिका- हम तो इसकी तंग खींच रहे हैं डिअर तुम्हारी वजह से कोई प्रॉब्लम नहीं ह, हम दोस्त ह तो दोस्तों में ये सब चलता ह,

वर्षा- तुषार तुम रेस्ट करो थक गए होंगे मैं कफ लेकर आती हु तुम्हारे लिए

अंशिका- है बीएड पैर hi पिलाना कॉफ़ी,

दोनों सहेलिया हसने लगी, वर्षा शर्मा गई,

फिर वर्षा ने तुषार का हाथ पकड़ा और अपने रूम में ले गई, पूरा रूम फैला पड़ा था, सरे कपडे बीएड पैर पड़े थे जैसे कुछ देर पहले hi कुछ ढूंढ रही हो,

वर्षा- ओह श्री वो जल्दी में ड्रेस ढूंढ रही थी तो सब ऐसे hi छोड़ क्र चली गई,

वही वर्षा की ब्रा भी पड़ी हुई थी, नेट की ब्लैक ब्रा तुषार सब देख क्र मुस्कुरा रहा था

तुसाहर- आप इतनी होपलेस क्यों हो रही हो, रिलैक्स हो जाओ आराम से सब करो मैं तब तक फ्रेश हो लेता हु,

तुषार बाथरूम में घुस गया, वर्षा जल्दी से कपडे अलमारी में रखने लगी, तभी उसे याद आया की अंदर बाथरूम में तो उसके सुबह की नहाये हुए ब्रा पंतय भी ऐसे hi पड़े होंगे, वर्षा का मुँह लाल हो गया तुषार ने वो देख लिए होंगे,

वर्षा बहार आ गई,

कनिका- क्या हुआ वर्षो तेरा मुँह क्यों लाल हो रखा ह

वर्षा- अरे यार वो पूरा रूम फैला पड़ा था मेरे कपडे और इनर वियर भी ऐसे hi पड़े थे, और तुषार बाथरूम में गया ह वह मेरे गीले इनरवेअर पड़े हैं

अंशिका- तो क्या हुआ तू तो ऐसे शर्मा रही ह जैसे तू नंगी आ गई उसके सामने, अरे इन्ही कपड़ो में तू फोटो शूट करवा लेती ह तब तो नहीं सहमति उससे क्यों शर्मा रही ह, शूट पैर स्टाफ इन्ही कपड़ो को अपने हाथ में लेकर आकर तुझे देते हैं तब तो नहीं शर्माती आज उसके देखने से भी शर्म आ रही ह,

वर्षा- पता नहीं क्यों यार उसके सामने आते hi शर्म सी आ जाती ह

कनिका- अरे मेरी जेम्स बांड की भतीजी तुझे कुछ हो गया ह, तुझे प्रोडूसर तक डरता ह और तू ह की एक लड़के से शर्मा रही ह

तभी तुषार बहार आ गया

तुषार- काफी रहत हुई

वर्षा- ओह्ह्ह मैं तो कॉफ़ी बनाना भूल hi गई अभी बनती हु

तुषार- रहने डिजिजे, सभी बहार चलते हैं वही कॉफ़ी पि लेंगे और मुझे शहर भी घुमा देना,

वर्षा- लेकिन तुम थके हुए हो इतना लम्बा सफर करके आये हो

तुषार- मैं इतनी जल्दी नहीं थकता

कनिका- लम्बी रेस के घोड़े हो

तुषार ने कोई जवाब नहीं दिया,

वर्षा- ठीक ह चलो मैं रेडी होकर आती हु

तुषार- अरे इतनी तो खूबसूरत लग रही हो और क्या रेडी होना

अपनी टैरिफ सुनकर वर्षा शर्मा गई,

फिर चारो अपनी सोसाइटी से बहार एक काम्प्लेक्स में गए वह सबने कॉफ़ी पि, शाम का टाइम था, फिर चारो पैदल hi मुंबई की सडको पैर घूमने लगे, रात को वापस आकर सब सो गए,

अगले दिन तुषार जल्दी उठ गया उसे जल्दी उठने की आदत थी, लेकिन ये मुंबई ह यहाँ तो सब 11 बजे से पहले उठते hi नहीं, तुषार फ्रेश हुआ और फ्लैट के बहार आकर घूमने निकल गया, जब वो वापस पंहुचा तो वर्षा उठ क्र ड्रिंगरूम में बैठी थी,

वर्षा- तुम बहार से आ रहे हो मैंने सोचा अभी तक सो रहे हो

तुषार- माँ ने ऐसी आदत डाली ह की सुबह 5 बजे ताका आंख खुल hi जाती ह,

वर्षा ने दोनों के लिए कॉफ़ी बनाई, तभी अंदर से कनिका निकल क्र आई, शायद उसे ख्याल नहीं रहा होगा की अब इस घर में कोई मर्द भी ह, इसलिए वो अपनी नाईट ड्रेस में hi बहार निकल आई,


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कनिका को देख क्र तुषार और वर्षा दोनों की हालत ख़राब हो गई, तुषार ने तो अपना सर झुका लिया,

वर्षा जोर से – कनिका बेशरम कपडे तो पहन ले,

तब कनिका को अहसास हुआ वॉक इस हालत में ह वो भाग क्र रूम में घुस गई,

वर्षा- श्री तुषार उसे आदत नहीं ह, घर में पहेली बार कोई मर्द रुका हुआ ह

तुषार- कोई बात नहीं ऐसा हो जाता ह

अंशिका और कनिका रेडी होकर अपने काम पैर निकल गई वर्षा नहीं गई,

वर्षा- अब बताओ दीदी ने क्यों भेजा ह यहाँ

तुषार- घूमने के लिए

वार्सः- मैं बेवकूफ लगती हु क्या, अंजलि दीदी कोई काम बिना रीज़न केन hi करती ये मुझे अच्छे से पता चल चुक्का ह, तो बताओ मुझे क्या काम ह शायद मैं कुछ हेल्प क्र सकू

तुषार- मुस्कुरा क्र, आप हेल्प कर सकती हो इसीलिए माँ ने यहाँ बेजा ह

वर्षा- ऐसा क्या काम ह

तुषार- आप जानती हो न सुरेश चोपड़ा इस टाइम अंडरवर्ल्ड से कनेक्ट हो चुक्का ह

वर्षा- है जानती हु

तुषार- तो मुझे **************************************

तुषार ने वर्षा साडी बात समझा दी

वर्षा- ये रिष्की भी हो सकता ह

तुषार- अगर फॅमिली को सेफ करना ह तो रिष्क तो लेना होगा

वर्षा- अब तो उनके पीछे पुलिस ह अब किस बात का दर

तुषार- आप ऐसी बात करोगी ये उम्मीद नहीं थी, आप जानती हो सुरेश चोपड़ा को और सबसे ज्यादा खतरनाक आपकी माँ सोनिया चोपड़ा वो जब तक सबको ख़तम नहीं क्र देगी चैन से नहीं बैठेगी.

वर्षा- दुबारा उस औरत को मेरी माँ मत बोलना, और पिता क्या गारंटी ह सुरेश चोपड़ा मेरा बाप ह वो औरत जाने कितनो के साथ अपनी इजात की धजिया उड़वा चुकी ह, मैं उन दोनों को अपना कुछ नहीं मानती.

तुषार- श्री मेरी गलती ह मुझे नहीं बोलना चाहिए था, लेकिन वो लोग शांत नहीं बैठेंगे

वर्षा- ठीक ह जैसा तुम्हे ठीक लगे करो, कल मेरे साथ चलना मैं प्रोडूसर से तुम्हारी बात करवा दूंगी, लेकिन तुम उसे कैसे मनाओगे वो तुम देखना, क्योकि कोई भी ये सब बाते नहीं बताता,

तुषार- बस आप शिफारिश कर देना बाकि मैं सम्हाल लूंगा

वर्षा- ठीक ह अब बताओ आज का क्या सीन ह

तुषार- सीन क्या मुझे मुंबई घुमाइए और मुझे यहाँ गयम ज्वाइन करना ह जब तक यहाँ हु और एक फाइट क्लास

वर्षा- गयम तो तुम हमारे साथ hi चला करो, हम तीनो जाती ह इवनिंग में कभी मॉर्निंग, तुम अपना टाइम सेट क्र लेना और फाइट क्लास के लिए एक एक्शन डायरेक्टर हैं उनकेपास लेकर चलूंगी वो अच्छी जगह बता देंगे.

तुषार- ठीक ह

वर्षा- तो चलो पहले तुम्हे मुंबई घुटी हु फिर अंशिका और कनिका की शूट दिखती हु, फिर हम चलेनेगे डायरेक्टर के पास, शाम को चैलेंज गयम.

तुषार- ok चलो

दोनों निकल गए पहले वो अंशिका के शूट पैर गए जहा अंशिका बारिश में बिकनी शूट क्र रही थी, बड़ी hi कॉन्फिडेंट होकर,


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तुषार उसे बड़े धयान से देख रहा था, वर्षा को पसंद नहीं आया और वो उसे वह से लेकर कनिका के शूट पैर ले गई, वह का नजारा और भी हॉट था, कनिका एक किसिंग सीन क्र रही थी, वर्षा तुषार को वह से भी ले आई

तुषार- क्या हुआ आप मुझे ले क्यों आई

वर्षा- ऐसे गंदे सीन देखोगे क्या

तुषार- अब ये सीन सब इंटरनेट पैर भी तो आएंगे वह भी तो देखूंगा hi

वर्षा- वह अलग ह, चलो तुम्हे डायरेक्टर से मिलती हु,

वर्षा ने तुषार की एक्शन डायरेक्टर से मुलाकात करवाई, डायरेक्टर ने तुषार को एक एड्रेस दिया, जहा वो अच्छी फाइट सीख सकता है,

तुसाहर और वर्षा फाइट स्कूल गए और साडी बात क्र ली, इस सब में शाम हो गई, फिर वो दोनों गयम पहुंचे तो अंशिका और कनिका दोनों पहले से वही थी,


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क्या नजारा था गयम में चारो तरफ लड़किया hi लड़किया वो भी एक दम हॉट अवतार में,

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कनिका तुरंत तुषार के पास आई और उसका हाथ पकड़ क्र ले गई

कनिका- आओ मैं तुम्हे एक्सरसाइज सिखाती हु

वर्षा वह कड़ी रह गई उसके फेस पैर जलन साफ़ दिख रही थी,

तुषार ने पूरा गयम घुमा और कल से शुरू करने का बोल क्र वर्षा और तुषार वह से निकल गए, फिर दोनों मुंबई की नाईट का नजारा देखने लगे,

फिर घर आकर सबने खाना खाया, इनके यहाँ टिफ़िन सिस्टम था कोई खाना नहीं बनता था, लड़कियों का टाइम टेबल फिक्स नहीं था और वैसे भी इनमे से कोई भी खाना बनाना जानती hi नहीं थी, लेकिन तुषार उसे तो बहार का खाना पसंद hi नहीं था,

अगले दिन वर्षा तुषार को लेकर प्रोडूसर के पास पहुंची,

वर्षा- सर ये मेरा दोस्त ह और यहाँ बहुत hi इम्पोर्टेन्ट काम से आया ह,

प्रोडूसर जिसका नाम वैंकेट ाएर थे लोग उसे एना कहते थे,

एना- वर्षा लड़का स्मार्ट ह किसी ऐड फिल्म में डलवा सकता हु

तुषार मुस्कुराया

वर्षा- नहीं सर ऐसा काम नहीं ह कुछ अलग hi काम ह

तुषार- एना सर मैं यहाँ जिस काम से आया हु उसे और लोग भी करवा सकते हैं लेकिन आप वर्षा जी के लिए काफी खास ह आपने काफी हेल्प की ह इसलिए मैं आपके पास आया हु, आप मेरी हेल्प करेंगे मैं आपकी हेल्प करूँगा

तुषार की बात सुनकर एना और वर्षा दोनों शोकेड से तुषार को देख रहे थे, इतना कॉन्फिडेंस से बोल रहा था तुषार

एना- हहहहहह वर्षा ये बच्चा तो मुझे हेल्प ऑफर क्र रहा ह मुझे कुछ नहीं चाहिए इतना तगड़ा काम चल रहा ह मेरा

तुषार- तगड़ा होता तो आप भी इंडस्ट्री में एक बड़े डायरेक्टर होते ये छोटी छोटी ऐड फिल्म नहीं बना रहे होते,

एना- कहना क्या चाहते हो

तुषार- आपको कोई प्रोडूसर चाहिए जो आपको आगे बढ़ा सके

एना- मैं खुद प्रोडूसर हु

तुषार- आप पिछले 8 साल से अपनी 2 स्क्रिप्ट को लेकर घूम रहे हैं कोई बड़ा प्रोडूसर नहीं मिल रहा, आप यहाँ एक डायरेक्टर के तोर पैर आये थे लेकिन किसी ने मौका नहीं दिया, तो खुद hi प्रोडूसर बन गए लेकिन इतना नहीं कमा पाए की अपनी hi मूवी बना सके इसलिए पिछले 20 साल से छोटी ऐड फिल्म के प्रोडूसर बन क्र रह गए,

तुषार की बात सुनकर वर्षा मुँह फाडे तुषार को देख रही थी और एना बड़ी गौर से तुषार को देख रहा था,

एना- बहुत जानकरी जूता क्र आये हो, मतलब काम भी बड़ा ह

तुषार- ज्यादा बड़ा नहीं ह बस आपको मेरी मुलाकात किसी से करवानी ह, और कोशिश करनी ह वो मेरी बात मन जाये,

एना- किस्से मुलाकात करवानी ह


तुषार- रंगा से
 
अपडेट-55






एना- तुम्हारा उससे क्या काम उससे मिलना बच्चो के लिए ठीक नहीं ह

तुषार- वो मेरी प्रॉब्लम ह, और काम तो उसे hi बताऊंगा

एना- मैं क्यों मिलवौ

तुषार- आप नहीं मिलवाएंगे तो मित्तल मिलवा देगा उसकी भी तो पहचान ह उससे लेकिन जो फायदा आपको मिल सकता था अब उसे मिल जायेगा

एना- कैसा फायदा

तुषार- जो फिल्म्स आप बनाना चाहते हैं उनके लिए प्रोडूसर मैं दे सकता हु, और अगर मुलाकात आज hi हो जाये और बात बन जाये तो आप कल से hi अपनी पहेली फिल्म का नारियल फोड़ सकते हो,

तुषार की बातो से एना और वर्षा को झटके पैर झटके लगे जा रहे थे,

एना- तुम जानते हो मेरी फिल्म का बजट क्या ह

तुषार- बजट की चिंता आप मत कीजिये

एना- मेरी फिल्म 200 करोड़ के बजट की ह

तुषार- मैं 250 लगाने को तैयार हु

एना के फेस पैर एक दम चमक आ गई, और वर्षा के फेस पैर चिंता,

एना- ऐसा क्या ह जिसके लिए तुम इतना बड़ा रिस्क ले रहे हो,

तुषार- वो मेरा मटर ह उसमे किसी का इन्वॉल्वमेंट नहीं ह

एना- लेकिन जिससे मिलने जा रहे हो वो बिना अपने फायदे के कुछ नहीं करता

तुषार- इसमें उसी का फायदा ह

एना- उसे फायदे की क्या जरुरत, तुम उसे क्या दे सकते हो जो उसके पास नहीं ह

तुसाहर- आपको भी तो कुछ नहीं चाहिए था न, हर किसी को ुपीर उठने की इच्छा होती ह वो जहा ह उससे आगे बढ़ना छटा ह ,

एना- बहुत तेज ह ये लड़का वर्षा इसका दिमाग तो कंप्यूटर ह, ये बहुत आगे जायेगा

वर्षा- सर बस इसलिए पूरी दुनिया इसके लिए दीवानी ह

एना- वो तो मैं देख रहा हु

वर्षा झेप गई,

एना- तो डिअर मुझे 1 घंटा दो, मैं सब सेट करता हु तब तक तुम लोग कुछ खाओ और मेरी स्टोरी की स्क्रिप्ट पढ़ो,

तुषार- उसकी जरुरत नहीं ह

एना फिर भी अपनी स्टोरी की स्क्रिप्ट तुषार को देकर बहार चला गया,

वर्षा- तुषार 250 करोड़ इतना अमाउंट बिना स्क्रिप्ट पढ़े वादा क्र दिया

तुषार- जिस काम के लिए हम यहाँ आये हैं उसके लिए ये भी काम ह, फॅमिली सेफ ह तो सब कुछ सेफ ह, और वैसे भी ये अच्छा डायरेक्टर ह, अच्छी फिल्म लिखेगा ये

वर्षा- तुमने एना के बारे में इतना सब कब पता किया

तुषार- यहाँ आने से पहले hi माँ ने सब पता क्र लिया था, तुम किसके पास काम क्र रही हो उसकी क्या पहुंच ह,

वर्षा- दीदी भी कितना आगे की सोचती हैं

फिर दोनों कॉफ़ी पिने लगे तभी एना वापस आ गया,

एना- तुषार बाबू रंगा मान तो गया ह लेकिन अगर उसके फायदे का सोडा न हुआ तो वो मेरी हालत ख़राब क्र देगा

तुषार- वो आपको हमेशा के लिए अपना साथी बना लेगा और इस इंडस्ट्री में फिर आपको डाउन करने वाला कोई नहीं होगा,

एना- तुम बाते बहुत खतरनाक करते हो,

वर्षा- काम उससे भी ज्यादा खतरनाक ह इनके

एना- चलो मेरे साथ

तुसाहर- वर्षा जी आप अपनी शूटिंग कीजिये मैं मिलकर आता हु

वर्षा- नहीं मैं तुम्हे अकेले को नहीं भेजूंगी

तुषार- वह लड़कियों के लिए जगह ठीक नहीं हैं

वर्षा- जब तुम साथ हो तो कैसा दर

तुषार- पहले मैं उससे मिल तो लू उसके बाद hi सब मेरे कण्ट्रोल में होगा, अभी मान जाइये

वर्षा मान गई, एना और तुषार चले गए रंगा से मिलने,

कुछ टाइम बाद एना और तुषार एक गेराज पैर बैठे हुए थे और सामने एक तगड़ा 6 फीता आदमी बैठा था, देखने में काफी स्मार्ट था,

रंगा- है भाई हीरो क्या काम ह

तुषार- तुम्हारे लिए ऑफर ह

तुषार की सीधी बात से एना का गाला सुख गया और रंगा के फेस पैर एक मुस्कान

रंगा- ः मुझे क्या ऑफर करेगा तू

तुषार- सबके सामने बताऊ या अकेले में

रंगा- वैसे तो मैं कभी किसी को मुलाकात का भी टाइम नहीं देता लेकिन तेरी बाते मुझे बहुत इम्प्रेस क्र रही हैं,

चलो रे कमरा खली करो, एना चल बहार इंतजार क्र,

एना चुप चाप उठा और बहार चला गया, बाकि आदमी भी चले गए,

रंगा- है तो हीरो अब बोल

तुषार- आप बताओ आपको क्या चाहिए

रंगा- हाहाहा तू मेरे काम के लिए आया ह या अपने काम के लिए

तुषार- अपना काम तो मैं खुद क्र लूंगा लेकिन आपको क्या चाहिए वो बताइये

रंगा- तेरी बाते मेरी समझ से बहार जा रही ह तू यहाँ मेरी हेल्प करने आया, मैंने तो कोई हेल्प नहीं मांगी,

तुषार- आया तो मैं अपने काम के लिए hi हु लेकिन उससे तुम्हारी हेल्प हो जाएगी

रंगा- खुल क्र बोलेगा या ऐसे hi पहेलियाँ बुझाता रहेगा

तुषार- सकील को जानते हो

रंगा- सकील दुबई वाला

तुषार- है वही

रंगा- उसे कोण नहीं जनता इस टाइम उसी का राज चल रहा ह अंडरवर्ल्ड पैर वो डॉन का खास आदमी ह इस टाइम

तुषार- वो इस टाइम इंडिया में hi आया हुआ ह

रंगा- है जनता हु इतनी खबर तो रहती ह हमारे पास किसी को ठिकाने लगाने आया ह

तुषार- जानते हो वो किसके लिए आया ह

रंगा- नहीं

तुषार- तुम्हारे सामने बैठा ह

रंगा- क्या सच में वो तेरे लिए आया ह,

तुषार- है लेकिन वो मुझे जनता नहीं ह

रंगा- तो तू चाहता ह मैं तेरे लिए सकील से भीड़ जाऊ, उसका नेटवर्क बहुत तगड़ा ह वो मेरा पूरा गैंग ख़तम क्र देगा

तुषार- तुम्हे उससे भिड़ने की जरुरत नहीं ह, बस इतना बताओ तुम्हे उसकी जगह चाहिए या नहीं,

रंगा- उसी जगह के लिए इतनी महेनत कर रहा हु

तुषार- अगर मैं वो जगह तुम्हे दिला दू तो

रंगा- कैसे

तुषार- वो मैं करूँगा जैसे भी करू, लेकिन जो भी होगा तुम्हे आगे आकर उसे अपने जिम्मेदारी पैर लेना होगा, और जैसा मैं कहु वैसा करना होगा

रंगा- अगर मैं सकील को तेरी पहचान बता दू तो

तुषार- उससे मेरा कुछ ज्यादा नहीं बिगड़ेगा, मैं तो अपना काम क्र hi लूंगा, लेकिन तुम्हे कभी कुछ नहीं मिलेगा

रंगा- तू मुझसे hi क्यों करवाना चाहता ह,

तुषार- क्योकि तुमने आज तक किसी गरीब और कमजोर को नहीं सताया ह, तुम क्राइम की दुनिया में तो हो लेकिन जमीर नहीं मारा अभी, अगर तुम वडा करो की तुम्हारा जमीर ऐसे hi जिन्दा रहेगा तो मैं तुम्हे सकील की जगह बैठा सकता हु

रंगा- तू बहुत hi खतरनाक आदमी ह, मैं तेरे साथ हु लेकिन अगर कुछ गड़बड़ हुई तो मैं बिच में नहीं आऊंगा

तुषार- जैसा मैं कहु वैसा hi करते जाना

रंगा- तेरा प्लान क्या ह कैसे करेगा

तुषार ने रंगा को कुछ बताना शुरू किया, जिसे सुनकर रंगा कभी खुश होता तो कभी परेशां

रंगा- तेरा प्लान तो तगड़ा ह लेकिन ह बड़ा खतरनाक

तुषार- फॅमिली का मामला ह खतरा तो लेना hi होगा

रंगा- तुझसे मिलकर मजा आया कोई दम दर आदमी मिला ह, लेकिन क्या तू अकेले वो सब क्र पायेगा

तुषार- कल मिलते हैं कही अखाड़े में फिर समझा दूंगा

रंगा- हहहह जनता ह मैं एक साथ 4 लोगो को चित क्र देता हु

तुषार- तो कल मिलते हैं अगर मैं जीता तो जैसा मैं बोल रहा हु वैसा करोगे, नहीं तो मैं वापस लोट जाऊंगा

रंगा- तेरे वापस जाने में मेरा क्या फायदा

तुषार- तुम hi रखो शरत

रंगा- अगर मैं जीता तो जो पैसा तू एना की फिल्म में लगाने वाला ह उसका प्रोडूसर मैं रहूँगा प्रॉफिट मेरा होगा

तुषार- मंजूर ह

रंगा- तो ठीक ह कल मिलते हैं यही पैर

तुषार वह से निकल गया एना को लेकर और घर आ गया, फिर साडी जानकारी अंजलि को दे दी,

अंजलि- सम्हाल क्र बहुत बड़ा रिस्क ह

तुषार- आप चिंता मत कीजिये मैं सब क्र लूंगा

वर्षा- तुमने ये क्या किया उस रंगा से लड़ाई का चैलेंज क्यों लिया

तुषार- आपको कैसे पता

वर्षा- एना ने बताया,

तुसाहर- कोई प्रॉब्लम नहीं ह मैं सम्हाल लूंगा

वर्षा- वो कोई छोटा मोटा गुंडा नहीं ह

तुषार- तो मैं भी कोई छोटा मोटा बच्चा नहीं हु

वर्षा- तुम नहीं लड़ोगे उससे

तुषार- अब तो चैलेंज ले लिया ह अब कुछ नहीं हो सकता

वर्षा- मैं भी साथ चलूंगी

तुषार- आप क्या करेंगी वह

वर्षा- बस मैं जाउंगी

तुषार- ok ok ठीक ह चलेंगे

शाम तक वर्षा परेशां रही वही तुषार खाना खा क्र सो गया पूरा रेस्ट किया, शाम को गयम गया वह उसने बहुत हैवी एक्सरसाइज की, अंशिका और कनिका तो बस तुषार के पास आकर hi एक्सरसाइज करने लगती जाती, दोनों hi गयम के ऑउटफिट में बड़ी हॉट लग रही थी,


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वर्षा भी गयम के ऑउटफिट में थी, और उसे देख क्र तो तुषार वैसे hi कण्ट्रोल खो देता था, तुषार पूरी कोशिश क्र रहा था वर्षा की तरफ धयान न दे लेकिन न चाहते हुए भी उसकी नजर वर्षा पैर hi चली जाती थी,

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जिसे वर्षा बड़े अच्छे से समझ रही थी, और खुश भी हो रही थी, वही अंशिका और कनिका भी इस बात पैर गौर क्र रही थी,

रात को घर आकर सबने खाया और तुषार सोने चला गया , अगले दिन तुषार वर्षा और एना के साथ रंगा के गेराज पैर था, काफी भीड़ थी वह, रंगा के बहुत से आदमी वह थे,

रंगा- आजा आजा मुझे लगा तू नहीं आएगा

तुषार- मैं चलेंगे से पीछे नहीं हैट ता,

रंगा- ये हेरोइन कोण ह, लवर लगती ह शायद तेरी चिंता करके आई ह

लवर सुनकर वर्षा शर्मा गई

तुषार- ये मेरी दोस्त हैं

रंगा- मुझे तो दोस्त से ज्यादा hi लग रही ह, खैर आजा तैयार ह न

तुषार- बिलकुल

रंगा- चलो रे खोलो अखाडा

दो आदमी सबको लेकर एक हॉल में आ गए जहा बिच में एक अखाडा खुदा हुआ था,

रंगा ने अपनी शर्ट उतेरी और खड़ा हो गया, एक संध जैसा आदमी लम्बा छोड़ा देख क्र किसी की भी हालत ख़राब हो जाये,

वही तुषार t-shirt में hi था, फेस से मासूम सा, लम्बा छोड़ा तुषार भी काम नहीं था लेकिन रंगा के समाने हल्का hi लग रहा था,

वर्षा घबरा रही थी, तभी एक औरत और उसके साथ 2 बच्चे वह आ गए,

औरत- क्यों जी आपका ये अखाडा फिर शुरू हो गया

रंगा- अरे धर्म पत्नी जी आज तो बस मजे के लिए ह आ क्र बैठ और देख

औरत- आपसे कभी जीता ह जो आज जीत पायेगा, क्यों बच्चे के हाथ पाओ तोड़ने जा रहे हो

बच्चे- पापा hi जीतेंगे हमारे पापा से तगड़ा कोई नहीं ह

रंगा हस्ता हुआ तुषार की तरफ बढ़ा और दोनों के हाथो के पंजे आपस में फास गए, और जोर लगाने लगे, कुछ hi सेकण्ड्स में रंगा को तुषार की ताकत का अंदाजा होने लगा था, वो समझ गया ये आसान टारगेट नहीं ह,

उसने फुर्ती दिखा क्र तुषार को पीछे से पकड़ा और पटकने की कोशिश कारण ेलगा, लेकिन तुषार ने भी खुद को उसकी पकड़ से आजाद किया, रंगा ने फिर दो लगया और तुषार को पटकनी देनी चाही लेकिन तुषार फिर बच गया, रंगा पूरी ताकत लगा रहा था लेकिन तुषार बस बचाव क्र रहा था, 15 मिनट्स तक दोनों का खेल चलता रहा, अब रंगा थोड़ा खीज सा गया,

रंगा- चल आजा देखा न कितना दूध पिया ह तूने अपनी माँ का

तुषार- ये नहीं बोलना था मैं इसे बस आपका चलेंगे मान रहा था लेकिन तुमने मुझे लड़ने की वजह दे दी ह, अब बात मेरी माँ के दूध पैर आई ह तो मैं दिखता हु मेरी माँ ने क्या दिया ह मुझे,

तुषार आगे बढ़ा और रंगा का हाथ पकड़ा और रंगा को अपने चारो तरफ घुमा दिया और अपनी कमर की तरफ से घुमा क्र दोनों हाथो से उप्पेर उठा लिया, और जोर से पटकने hi वाला था की दोनों बच्चे जोर से चीख पड़े papaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

तुषार ने उधर देखा तो तुरंत रंगा को धीरे से निचे फिसला दिया, रंगा तुरंत दूसरी तरफ घूम गया, देखने वालो को लगा रंगा खुद बचा ह, लेकिन वह जिस जिस ने धयान दिया वो समझ गए तुषार ने क्या किया ह, वही वर्षा को भी समझ आ गया था और रंगा की पत्नी को भी,

सबसे ज्यादा तो रंगा सरप्राइज था, वो तो दो तरफा शोकेड था, पहला तो तुषार की ताकत देख क्र दूसरा उसने ये क्यों किया,

तभी पीछे बच्चो के चीरे करने की आवाज आई, पटक दो पापा पटक दो,

तुषार मुस्कुरा रहा था, रंगा आगे बढ़ा और जोर लगाने लगा, तुषार उसके जोर लगाने से हिल भी नहीं रहा था, लेकिन कुछ पालो बाद तुषार ने खुद को ढीला छोड़ दिया और रंगा ने उसे गिरा दिया, तुषार के गिरते hi दोनों बच्चे रंगा से लिपट गए और ख़ुशी मानाने लगे,

ये हमारे पापा को कोई नहीं हरा सकता, ये ये ये ये ये

रंगा की पत्नी भी वह आई और तुषार को हाथ पकड़ क्र उठाया, और दोनों हाथ जोड़ क्र बोली आप बहुत अच्छे और समझदार हैं भैया,

तुषार बस मुस्कुरा दिया, तभी वर्षा भी दौड़ क्र आ गई,

वर्षा- तुम ठीक हो न

रंगा की पत्नी- तुम्हारा प्रेमी बहुत बहादुर और बहुत अच्छा ह इसका कभी साथ मत छोड़ना

वर्षा ने मुस्कुरा क्र औरत को देखा फिर तुषार की तरफ देख क्र- कभी नहीं

रंगा- बच्चो को अंदर ले जाओ

औरत- जी जरूर, भैया खाना खाये बिना मत जाना, मुझे ख़ुशी होगी आप मेरे हाथ का बना खाना खा क्र जायेंगे

तुषार- जी भाभी जी जरूर वैसे मैं एक दम शाकाहारी हु

औरत- मेरा नाम कल्पना ह और मैं शुद्ध शाकाहारी hi बनाउंगी

फिर कल्पना अंदर चली गई,

रंगा- अरे आज पहेली बार तुम्हारा बॉस हरा ह तो सालो इस टाइगर के लिए तालिया भी बजा दो,

तू टाइगर ह टाइगर, मैंने इतनी ताकत किसी में नहीं देखि और इतना कोमल दिल ह तेरा, तू जीत भी गया और मेरा सम्मान भी नहीं गिरने दिया, मेरे बच्चो के समाने मेरी इज्जत रख ली,

तुषार- बच्चो की नजरो में उनके पिता का हारना मतलब बच्चो का मनोबल टूट जाना, वो फिर कभी उप्पेर उठने की हिम्मत नहीं क्र पते

रंगा- तू सच में बहुत समझदार ह, तू मेरे भाई जैसा ह, अब जो तू बोलेगा वैसा hi होगा, तू बस बताता जा मैं करता जाऊंगा

तुषार- मैंने जो बताया ह वैसा hi करना ह बस,

रंगा- 15 दिन बाद तू वह होगा

तुषार- ठंकु रंगा जी

रंगा- कल्पना को भाभी बोलै ह तो मुझे भाई बोल सकता ह

तुसाहर- ठंकु बड़े भाई

रंगा- आजा खाना कहते हैं

फिर सबने खाना खाया, कल्पना ने बड़ी खातिर की तुषार और वर्षा की,

कल्पना तुषार को वर्षा के प्रेमी बताये जा रही थी, वर्षा एक बार भी उसे मन नहीं क्र रही थी, तुषार भी चुप hi रहा,

शाम को घर आकर..

वर्षा- तुम क्यों हरे उससे जब उसे हरा सकते थे

तुषार- बच्चो का दिल तोडना अच्छा नहीं लगा मुझे

वर्षा- तुम कितने अच्छे हो यार

तुषार- ठंकु माय प्रिंसेस

वर्षा खुश हो गई,

फिर रात में खाना खा क्र सब सो गए,

सुबह वर्षा सबसे पहले उठी और सीधे तुषार के रूम में पहुंची, और तुषार के पास बैठ गई, और उसे देखती रही,

काफी देर तक वर्षा तुषार को निहारती रही, कुछ दे रेज hi देखने के बाद, जाने वर्षा को क्या हुआ उसने अपने हॉट तुषार के होतो पैर रख दिए, बिना कुछ किये वो ऐसे hi होतो से हॉट मिलाये बैठी थी,

तभी तुसाहर की आँख खुल गई, तुषार एक दम से चौंक गया, तुषार के हिलने से वर्षा हैट गई, दोनों की नज़ारे मिली, तो वर्षा बस श्री बोल क्र वह से भाग गई,

तुषार मन में- यार मैं खुद इनसे दूर भाग रहा था ये खुद मेरे पास चली आ रही हैं, इनके पास आते hi वैसे hi मेरी धड़कन कण्ट्रोल से बहार हो जाती हैं,

अब कसिए सामना करूँगा इनका,

लेकिन मैं क्यों घबरा रहा हु, नजदीक तो वो आई हैं मैं तोडना, लेकिन क्या ये सही होगा, इनके साथ मेरा रिश्ता कोई नहीं समझ पायेगा कोई नहीं अपना पायेगा, क्या माँ से बात करू इस बारे में, है माँ से hi बात करूँगा,

तुषार उठा फ्रेश हुआ बहार आया तो पता चला की वर्षा जा चुकी ह, पूरा दिन तुषार का ऐसे hi काट गया, शाम को वर्षा गयम में भी नहीं आई, रात में देर से घर आई तुषार से मुलाकात नहीं हो पाई, अगला दिन भी ऐसे hi काट गया,

तिरसे दिन तुषार ने वर्षा से मिलने का फैसला किया, और रात में सोया नहीं और ड्राइंग रूम में बैठ गया, रात में वर्षा देर से आई और अँधेरे में hi अंशिका के रूम में जाने लगी तो तुषार ने एक दम से लाइट जला दी, जिससे वर्षा घबरा गई,

तुषार- ऐसे चुप क्र चोर आया करते हैं

वर्षा- वो मुझे देर हो गई थी न शूट पैर बहुत काम था इसलिए, मैंने सोचा कही कोई उठ न जाये इसलिए धीरे से जार hi थी,

तुषार- सब अपने रूम में सोते हैं तो ड्राइंग रूम की लाइट जलने में क्या दर, और क्यों देर हुई ये तो किसी ने पूछा hi नहीं

वर्षा- वो मैं

तुषार ने वर्षा का हाथ पकड़ा और अपने सामने बैठ आलिया

वर्षा के हाथ काँप रहे थे,

तुषार- आपने खाना खाया

वर्षा- है है मैंने खा लिया

तुषार- मुझसे झूट बोल रही हो

वर्षा- नहीं तो

तुषार- खाओ मेरी कहं

वर्षा- नहीं खाया

तुषार उठा और जल्दी से खाना परोस क्र ले आया

वर्षा- मुझे भूक नहीं ह

तुसाहर ने कुछ नहीं सुना और अपने हाथ से निवाला तोड़ क्र वर्षा की तरफ बढ़ा दिया,

तुषार- चुप चाप खाइये

वर्षा की आँखों में आंसू आ गए और उसने वो निवाला मुँह में ले लिया,

तुषार- रो क्यों रही हो

वर्षा- आज से पहले किसी ने मुझे अपने हाथ से कभी कुछ नहीं खिलाया, मेरी माँ ने भी नहीं

तुषार- आज आपकी साडी िछाइये पूरी हो जाएँगी

वर्षा चुप चाप तुषार के हाथ से खाना कहने लगी, खाना खा क्र

वर्षा- आज पहेली बार खाने में इतना स्वाद आया ह,

तुषार- मैं रोज ऐसे hi खिला दिया करूँगा

वर्षा- कब तक खिलाओगे, तुम्हारी मंजिल अलग ह और मैं तो तुम्हारी मंजिल के रस्ते पैर भी नहीं हु

तुषार- किसने कहा मेरी मंजिल कुछ और ह मेरी मंजिल मेरा परिवार ह और आप मेरे परिवार का hi हिस्सा हैं

वर्षा- इससे मेरे पास ये अधिकार नहीं आ जाते

तुषार- वो तो अधिकारी देने वाले पैर निर्भर करता ह की अधिकार देना ह या नहीं

वर्षा- मुझे उस दिन वो नहीं करना चाहिए था, अलका बहुत प्यार करती ह तुमसे

तुषार- अलका अपने दिल की क्र रही ह और आप अपने दिल की

वर्षा- ये उसके सतह गलत होगा

तुषार- मैंने कभी अलका को कोई प्रॉमिस किया क्या

वर्षा- वो तुम्हारे बिना नहीं जी सकती

तुषार- मैं एक जगह नहीं बांध सकता,

वर्षा- शादी तो करनी hi होगी तुम्हे

तुषार- मेरी पता नहीं लेकिन आपको तो शादी करनी होगी

वर्षा- मैं शादी नहीं करुँगी, मुझे शादी में विश्वास नहीं ह, मैंने आज तक कोई शादी सुक्क्सेस होती नहीं देखि, बस दर्द और तकलीफ देखि ह, लड़ाई झगडे और धोका देखा ह

तुषार- ये सब हमारे हाथ में ह, हम रिश्तो को कैसे निभाते हैं, क्या क्या उम्मीद रखते हैं, अगर मैं अलका को एक्सेप्ट करता हु तो क्या उसके साथ धोका नहीं होगा, आपको अंदाजा भी नहीं ह मैंने क्या क्या किया ह, और आगे भी करूँगा

वर्षा- तुमने जो भी किया होगा परिवार के लिए किया

तुषार- कुछ परिवार के लिए किया लेकिन बहुत कुछ अपने और प्यार के लिए किया

वर्षा- तुम किसी और से प्यार करते हो

तुषार- बहुत लम्बी लाइन ह

वर्षा- तुम ऐसा कैसे कर सकते हो लड़कियों को धोका दे रहे हो

तुषार- हाहाहाहा मैंने किसी को धोका नहीं दिया, जो भी मेरे पास आई वो खुद दूसरी को लेकर आई ये कहे क्र की ये भी मुझसे प्यार करती ह, मैंने तो बस सबका प्यार एक्सेप्ट क्र लिया, उन्हें एक दूसरे से प्रॉब्लम नहीं ह तो मैं उन्हें क्यों दर्द दू

वर्षा- अलका उसका क्या होगा

तुषार- अलका की चिंता मुझे आपसे ज्यादा ह, मुझे नहीं पता वो ये सब एक्सेप्ट क्र पायेगी या नहीं, क्योकि मैं किसी भी कीमत पैर सबको नहीं छोड़ सकता

वर्षा- मैं कैसे समझूंगी अलका को

तुषार- आप खुद को कैसे समझा प् रही हैं

वर्षा- मैं खुद को मतलब

तुषार- आप प्यार करती हैं मुझसे फिर भी खुद को रोक रही हैं

वर्षा- नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं ह

तुषार- हहहह आप बहुत होशियार ह बहुत समझदार हैं लेकिन प्यार कभी नहीं चुप सकता,

वर्षा- मत कहो कुछ ये अलका के साथ गलत होगा

तुसाहर- आप जानती थी अलका मुझसे प्यार करती ह फिर भी आप प्यार क्र बैठी,

वर्षा- दिल ह कण्ट्रोल नहीं हुआ

तुषार- आपने तो शादी न करने की सोची ह फिर प्यार क्यों क्र लिया

वर्षा- प्यार का शादी से क्या सम्भन्ध, प्यार पवित्र होता ह उसे किसी रिश्ते की मर्यादा की जरुरत नहीं, मीरा जी श्री कृष्ण जी से प्यार करती थी उन्हें किसी नियम की जरुरत नहीं थी,

तुषार- ये hi बात मैं समझाना चाहता था, आप प्यार करती हैं इससे किसी और रिश्ते में कैसे फरक पद सकता ह, श्री किर्श्ना ने राधा जी से प्यार किया था, लेकिन शादी रुक्मणि जी से की वो भी भगा क्र, उससे उनका प्यार राधा जी के लिए काम नहीं हुआ था, और रुक्मणि जी के अल्वा भी शादिया की उससे रुक्मणि जी के लिए प्यार काम नहीं हुआ था, न hi रुक्मणि जी के प्यार पैर कोई असर पड़ा था, अगर सामने वाला इतना प्यार दे सकता ह की किसी के पास कमी न पड़े तो तकलीफ क्यों होनी

वर्षा बस एक तक तुषार को देखे जार hi थी,

वर्षा- इतना लॉजिक कहा से लेट हो

तुषार- ये कोई लॉजिक नहीं ह और न hi कोई सलूशन, कोई इस बात को तारक बना क्र लड़कियों के साथ धोका नहीं क्र सकता, ये तारक तब तक hi सही ह अगर सामने वाली लड़कियों को एक दूसरे के साथ अपने प्यार को बाटने में तकलीफ न हो, अगर किसी को भी तकलीफ हुई तो वो रिश्ता वही ख़तम क्र देना चाहिए,

वर्षा- मुझे तकलीफ नहीं ह

तुषार- लेकिन आप तो शादी hi नहीं करेंगी

वर्षा तुरंत उठी और तुषार की गॉड में बैठ गई, और अपने हॉट उसके होतो से जोड़ दिए, और जबरदस्त तरीके से चूमने लगी, तुषार कुछ पल शांत रहा फिर वर्षा का साथ देने लगा,


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एक जबरदस्त किश करने के बाद वर्षा तुषार की आँखों में देखते हुए बोली- मुझे प्यार करने के लिए शादी की जरुरत नहीं ह,

और दोनों फिर एक दूसरे को चूमने लगे, चूमते चूमते कब कपडे उतर गए पता hi नहीं चला, दोनों ड्रिंगरूम में नंगे एक दूसरे से चिपके हुए थे,

आज वो लड़की जिसे देख क्र तुषार खुद बेकाबू हो गया था, जो उसके लिए सपना थी आज खुद उसकी बहो में नंगी चिपकी हुई थी,

इतना नाजुक बदन मक्कन जैसी चिकनी स्किन, तुषार का लुंड बेकाबू हो रहा था, जो निचे से वर्षा की जांघो के बिच घुसा जा रहा था, गरम और मोठे लुंड का अहसास अपनी जांघो में करने से वर्षा और गरम हो गई, और तुषार के हॉट काटने लगी,

तुषार का एक हाथ वर्षा की चूचियों पैर चला गया, वो बड़े प्यार से वर्षा की चुकी सहलाने लगा, दूसरा हाथ वर्षा की छूट पैर पहुंच गया, वर्षा ने तुषा रक आहत पकड़ लिया, लेकिन रोक नहीं पाई, तुषार की उंगलिया वर्षा की अनछुई छूट पैर पहुंच गई,

तुषार ने वर्षा का हाथ पकड़ा और अपने लुंड पैर रख दिया, वर्षा को करंट सा झटका लगा , उसने अपना हाथ हटा लिया तुषार ने फिर रख दिया और अपनी उंगली उसकी छूट की दरार पैर फिरै, वर्षा एक दम से सिहर उठी और तुषार के लुंड को मुठी में भींच लिया,

इतना मोटा और सख्त लोहे की रोड जैसा था, जिससे वर्षा और गरम हुए जार hi थी, फिर तुषार ने वर्षा को गॉड में उठाया और रूम में ले गया, फिर बीएड पैर लिटा क्र उसके पैरो के बिच में आ गया,

वर्षा शर्माए जा रही थी, तुषार ने अपने हॉट उसकी छूट पैर रख दिए, वर्षा के मुँह से सिसकारियां फुट पड़ी,

तुषार ने अपना जादू दिखाना शुरू क्र दिया, वर्षा के लिए ये पहेली बार था किसी ने उसकी छूट को छुआ था, उसने खुद भी कभी फिंगरिंग नहीं किट hi, बड़ी सख्त मिजाज किट hi वो, लकिन तुषार के सामने अपना कण्ट्रोल खो बैठी थी,

तुषार को चूसते हुए 5 मिनट भी नहीं हुए थे की वर्षा झड़ने लगी, उसने तुषा रको हटाना चाहा लेकिन तुषा रहता नहीं उसने वर्षा का पूरा रास चूस लिया था, फिर तुषार खड़ा हुआ तो उसका लुंड किसी मीनार की तरह खड़ा थे जिसे देख क्र वर्षा दर गई, उसकी आँखों में दर साफ़ दिख रहा था, उसने अपनी आँखे बंद क्र ली,

तुषार पहेली बार में hi वर्षा को लुंड चुसवाने के लिए फाॅर्स नहीं करना चाहता था, उसने आयल की बोतल उठाई और अपने लुंड को अच्छे से गिला किया फिर कुछ तेल वर्षा की छूट पैर डाला, और उंगली से अंदर तक लगाने लगा,

आज पहेली बार वर्षा की छूट में उंगली घुसी थी, जिससे वर्षा की aahhhhhhhhhh निकल गई, एक दर्द हुआ उसे, तुसाहर को समझ आ गया की मिशन बहुत हार्ड ह, बहुत संकरी गली ह और टॉप ज्यादा बड़ी ह, नुकसान न हो जाये इसका ज्यादा ख्याल रखना होगा,

तुषार- आप तैयार हैं

वर्षा ने बस हम्म्म कहा उसने आँखे नहीं खोली थी,

तुषार ने अपना लुंड वर्षा की छूट पैर लगाया और रगड़ने लगा, वर्षा के मुँह से सिसकारियां निकलने लगी,

तुषार ने टोपा छूट पैर लगाया और हल्का सा दबाव बनाया

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh आराम से

तुसाहर- अभी तो कुछ किया hi नहीं

वर्षा- बहुत बड़ा ह दर्द होगा

तुषार- प्यार का दर तो झेलना hi पड़ेगा

वर्षा- मैं प्यार में हर दर्द को झेल लुंगी

तुसाहर- प्यार में बहुत तकलीफे आती हैं दुनिया का सामना करना पड़ता ह

वर्षा- मैं किसी से नहीं डर्टी मैं हर तकलीफ के लिए तैयार हु, मेरा प्यार इतना कमजोर नहीं की ऐसे दर जाये

तुषार वर्षा को बातो में लगा क्र चैलेंज देकर मजबूत क्र रहा था और निचे से उसने एक धक्का लगा दिया जिससे तुषार का लुंड वर्षा की छूट को चीरता हुआ अंदर घुस गया,

लुंड घुसते hi वर्षा की साँस hi अटक गई, उसका मुँह लाल हो गया आँखों से आंसू थे, मुँह से कोई आवाज नहीं निकल रही थी, तुषार ने तुरंत अपने हॉट वर्षा के होतो पैर रख दिए और एक और धक्का लगया, आयल की वजह से लुंड आधा घुस गया, लेकिन इस बार वर्षा खुद को रोक नहीं पाई और उसके मुँह से दर्द बहरी चीख निकल गई,

Aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh टुशु ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मामाआ aahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

चीख इतनी तेज थी की पुरे घर में गूंज गई,

तुषार ने फिर वर्षा के होतो पैर हॉट रख दिए और चूमें लगा एक हाथ से चूचिया सहलाने लगा, और लुंड को बिलकुल हिलने नहीं दिया, हिलता भी कैसे लुंड तो पूरी तरह फास चुक्का था,

कुछ देर में वर्षा नार्मल सी हुई तो तुषार ने मुँह हटाया,

तुषार- आप तो बोल रही थी प्यार में सब झेल लुंगी

वर्षा- ये बहुत मोटा ह

तुषार- आपकी पर्स्नाल्टी और सुंदरता के हिसाब से ये hi काबिल ह आपके,

वर्षा- अच्छा जी लेकिन उब्नोर्मल ह

तुषार- आप भी तो उब्नोर्मल हो

वर्षा शर्मा गई अपनी टैरिफ सुनकर, तुषार फिर से वर्षा का धयान बातो में लगा रहा था और अपनी कमर हलके हलके हिलने लगा था,

वर्षा को हल्का हल्का दर्द हो रहा था लेकिन उसका पूरा धयान तुसाहर की मीठी मीठी बातो में था, कुछ hi देर में वर्षा की छूट गीली होने लगी थी, लुंड को रहत सी हो गाइट hi, लुंड थोड़ा थोड़ा अंदर बहार होने लगा था, वर्षा को भी मजा आने लगा था,

कुछ दे रेज hi करने के बाद तुषार ने फिर दबाव बनाया तो वर्षा को दर्द हुआ,

वर्षा- बस बस ऐसे hi करो और अंदर नहीं मैं झेल नहीं पाऊँगी

तुषार रुक गया और आधे लुंड को hi अंदर बहार करने लगा, वर्षा की छूट से खून निकल रहा था जिसका अहसास उसे नहीं हुआ क्योकि दर्द की वजह से उसकी छूटे क दम सुन्न हो चुकी थी,

15 मिनट्स तक तुषार ऐसे hi हलके हलके धक्के लगता रहा, और वर्षा का मजा बढ़ता रहा, वर्षा झड़ने लगी और उसने तुषार के कंधो पैर अपने दन्त गड दिए,

वो अपनी कमर को जोर से हिलने लगी, उसी मजे का फायदा उठा क्र तुषार ने धक्के थोड़े तेज क्र दिए,

वर्षा- ufffffffffffff तुम्हारा अभी हुआ नहीं क्या

तुषार- अभी टाइम लगेगा

वर्षा- तब तक तो मैं मर जाउंगी

तुषार- ऐसे कैसे मरने दूंगा

वर्षा- अब थोड़ा और अंदर करके देखो शायद चला जाये

तुषार- वो तो कबका चला गया

वर्षा- क्या

तुषार ने वर्षा का हाथ पकड़ क्र उसकी छूट पैर लगा दिया जहा पूरा लुंड जड़ तक घुसा हुआ था, वर्षा का मुँह हैरत से खुला हुआ था,



तुषार ने हलके हलके धक्के लगाने शुरू क्र दिए, तुषार ने कोई पोजीशन नहीं बदली वर्ण वर्षा को तकलीफ होती, उसी पोजीशन में धक्के लगता रहा, दोनों की चुदाई 30 मिनट्स और चली, जिसमे वर्षा 2 बार और झाड़ गई, कुल मिला क्र वो 4 बार झाड़ चुकी थी, अब तुषार भी झड़ने वाला था, उसने लुंड बहार निकलना चाहा तो वर्षा ने रोक दिया और तुषार उसके अंदर hi झाड़ गया,
 
अपडेट-56




दोनों एक दूसरे में समां जाना चाहते थे, दोनों एक दूसरे से ऐसे चिपक गए जैसे दो सांपो का जोड़ा आपस में लपटा रहता ह, तभी तालियों की आवाज से दोनों चौंक गए, दोनों ने उस तरफ देखा तो अंशिका और कनिका दोनों खड़े थे, और मुस्कुरा क्र तालिया बजा रहे थे, तुषार तुरंत खड़ा हो गया, और उसका लुंड झटके से वर्षा की छूट से बहार निकल गया जिससे वर्षा को दर्द हुआ उसके मुँह से ahhhhhhhhhhhh निकल गई,

और वही अंशिका और कनिका का मुँह खुला रह गया तुषार का लुंड देख क्र, वो दोनों तो पालक झपकना hi भूल गए, वर्षा ने तुरंत अपने उप्पेर चादर डाली, तुषार तुरंत बाथरूम की तरफ दौड़ गया,

वर्षा- ये क्या बतमीजी ह

अंशिका- बतमीजी मेरी जान ये तो पार्टी वाली बात ह, हम कैसे रुक जाते

वर्षा- तुम्हे ऐसे नहीं आना चाहिए था

कनिका- हमारे बिच अब तक कुछ छिपा ह जो तू ये बात छिपाना चाहती ह

वर्षा- छिपाना नहीं चाहती लेकिन ऐसे दिखाना भी तो नहीं चाहती

कनिका- ये तो तेरी गलती ह तूने दूर बंद क्यों नहीं किया

वर्षा को अपनी गलती का अहसास हुआ

अंशिका- जब दूर खुला हो और अंदर इतना खूबसूरत नजारा हो तो कोई कैसे खुद को रोक सकता ह,

कनिका- कसम से मेरी जान खड़े खड़े hi 2 बार झाड़ गई हु, कोई इतनी देर तक कैसे छोड़ सकता ह वो भी तेरे जैसे सील पैक माल को, अच्छे अच्छे मर्दो का पंत में hi निकल जाता होगा तुझे देख क्र, और ये क्या बाँदा ह यार पुरे 50 मिनट्स से छोड़ रहा ह

वर्षा- बस करो यार और जाओ यहाँ से

अंशिका- ऐसे कैसे पहले तेरी सील टूटे की निशानी तो देख ले,

अंशिका ने चादर हटा दी तो बीएड शीट पैर खून hi खून था, जिसे देख क्र वर्षा का मुँह भी खुला रह गया,

वर्षा- तुम जाओ यहाँ से अब

कनिका- जा रहे हैं लेकिन इसकी पार्टी तो होगी, पूरी इंडस्ट्री तेरे पीछे पागल थी और तूने किसी को घास नहीं डाली, आज खुलवाई ह वो भी इस देसी पहलवान से

अंशिका- उसके पास ह भी ऐसा जिससे कोई भी खुलवाना चाहेगी, साली इतना तगड़ा तो गधे का भी नहीं होता

वार्सः- तुम जा रहे हो या नहीं

कनिका – जा रहे हैं कल बात करते हैं,

फिर दोनों बहार चले गए हस्ते हुए

वर्षा की शर्म से बुरी हालत थी, तुषार बाथरूम से बहार आया,

तुषार- गई वो

वर्षा- है गई

तुषार- कितनी बेशरम हैं ये दोनों

वर्षा- दोस्तों में ये सब चलता ह

तुषार- आपको दर्द हो रहा होगा, चलो फ्रेश हो जाओ

वर्षा ने उठाना चाहा लेकिन पेअर में जान hi नहीं थी, छूट में भयंकर दर्द की लहार दौड़ गई जिससे वो वही गिर गई, वर्षा ने चादर लपेटी हुई थी जो उसके हाथ से गिर गई तुषा रने तुरंत वर्षा को बहो में भर लिया और नानाजी को hi गॉड में उठा लिया,

वर्षा- मेरे कपडे

तुषार- अब उनकी जरुरत नहीं ह

वर्षा- मुझे शर्म आ ऋ ह

तुषार- कुछ देर पहले नहीं आ रही थी

वर्षा- उस टाइम बात कुछ और थी

तुषार- मुंबई की शेरनी शर्माती भी ह यहाँ आकर सब बेशरम हो जाते ह और आप शर्मा रही हैं

वर्षा- बस आ रही ह तो क्या करू

तुषार- कुछ नहीं बस ऐसे hi छुपी रो

तुसाहर वर्षा को लेकर बाथरूम पंहुचा और शीट पैर बैठा क्र बहार आ गया,

वर्षा ने किसी तरह खुद को साफ़ किया, तब तक तुसाहर ने अपने कपड़ ेपहां लिए थे, उसे पता था वर्षा दुबारा करवाने की हालत में बिलकुल नहीं ह,

वर्षा ने खुद बहार आने की कोशिश की लेकिन नहीं क्र पाई, उसने धीरे से तुषार को आवाज लगाई,

तुषार अंदर गया और वर्षा को गॉड में लेकर बहार आ गया था, तुषार ने अब तक चादर बदल दी थी, फिर वर्षा को बीएड पैर लिटा दिया, और उसके कपडे पहनने लगा,

वर्षा उसे रोक रही थी लेकिन तुसाहर उसे पुरे कपडे पहना क्र hi रुका,

तुषार- घर में कोई पैन किलर ह क्या

वर्षा- किसलिए

तुषार- आपको जरुरत पड़ेगी

वर्षा- मैं ठीक हु

तुसाहर- अभी ठीक हो लेकिन थोड़ी देर में hi दर्द बढ़ता जायेगा और सुबह तक फीवर भी आ चुक्का होगा

वर्षा ने उसे फर्स्ट ऐड बॉक्स बता दिया जिसमे से तुसाहर ने वर्षा को पैन किलर दे दी,

फिर दोनों एक साथ लेट गए,

वर्षा- टुशु क्या हमे सही किया ह

तुषार- क्या आप मुझसे प्यार करती हैं

वर्षा- बहुत

तुषार- फिर हमने कुछ गलत नहीं किया ह

वर्षा- हमारा रिश्ता मैं तुम्हारी मौसी लगती हु

तुषार- उस हिसाब से अलका भी लगती ह

वर्षा- पता नहीं सही ह या गलत लेकिन मैं खुश हु

तुषार- आपको क्यों प्यार हुआ मुझसे जबकि आप जानती ह अलका मुझसे प्यार करती ह

वर्षा- मुझे खुद नहीं पता मैं कब तुम्हे प्यार क्र बैठी, अलका हमेशा तुम्हारी टैरिफ करती रहती थी, उससे मेरे दिल में एक जगह सी बन गई, जब तुम सामने आये तो पहेली नजर में hi आँखों में बस गए लेकिन मुझे पता नहीं था की मुझे प्यार ह या कुछ और,

लेकिन जब पता चला तुम अंजलि दीदी के बेटे हो फिर तुमसे ऐसे आत्ताच होती चली गई की जाने कब अपना दिल हर बैठी,

तुषार- अब शादी का क्या विचार ह

वर्षा- मैं बिना शादी के hi साथ हु और हमेशा साथ रहूंगी मैं अलका का हक़ नहीं छीनूँगी

तुसाहर- अगर मैं कहु की अलका से पहले ये हक़ किसी और का ह वो अपना हक़ ले चुक्का ह तब

वर्षा- क्या कहना चाहते हो

तुषार- आप अभी तैयार नहीं हो वक़्त आने पैर बता दूंगा

वर्षा- मैं इंतजार करुँगी

फिर दोनों चिपक क्र सो गए,

अगले दिन वर्षा को फीवर आ hi गया, उससे उठा नहीं गया, तुषार ने उसके लिए दवाई लेकर दी, अपने हाथो से ब्रेकफास्ट कराया, वर्षा बहुत खुश थी जैसे दुनिया की साडी ख़ुशी उसे मिल रही थी, अंशिका और कनीना ने वर्षा ने उसी चुदाई की पार्टी ले लिट् hi,

वही अलका तुषार की यादो में सपने देख रही थी, अकेली तड़प रही थी, वो अब तक अंजलि और बाकि सब से ओपन नहीं हुई थी, वो बस दिन में एक बार आकर उनसे मिलती हे hello hi करती, वही सीमा और दीपा बिज़नेस में बिजी हो गयी थी, रूचि अपनी स्टडी और तुषार के सपनो में खोई थी, अंजलि अभी भी सतरंज पैर प्यादे बिछाने में बिजी थी,

तुषार रोज सबसे बात करता, अंजलि सीमा दीपा रूचि अलका रिंकी अनीता रजिया सबसे ननदनी से भी कभी कभी क्र लेता,

कमल को जेल हो चुकी थी, अब तक सोनिया और सुरेश कमल से नहीं मिल सके थे क्योकि वो दोनों खुद भागे फिर रहे थे, कोमल को 1 साल की जेल हो गई थी, सरकारी गवाह बनने की वजह से उसे रहत मिल गई थी,

एक दिन..

अनीता कॉल पैर- तुषार तुम्हे एक बात बतानी थी

तुषार - है जी बताओ

अनीता- मैंने तुमसे एक वडा किया था जो मैंने पूरा क्र दिया

तुषार- कोनसा वडा

अनीता- 4 सरप्राइज में से एक तुम्हे मिल चुक्का ह दूसरा दे देती हु, तुमने वो कारनामा क्र दिया जिसके लिए तुम मेरे पास आये थे

तुषार- कोनसा कारनामा

अनीता- यश के सामने उसकी बीवी को छोड़ने का

तुषार- क्या कब कैसे मैंने कब किया

अनीता- उस रात यश भी घर में था और मैंने hi प्लान करके ये सब किया था, तुमने उसी के समाने मुझे छोड़ा था इसी लिए मैं इतना जोर जोर से चुद रही थी

तुसाहर- ये आपने ठीक नहीं किया

अनीता- मुझे जो करना था मैंने क्र दिया

तुषार- ये अच्छा नहीं हुआ

अनीता- और तीसरा सरप्राइज ये ह तुमने यश के सामने उसकी बेटी को भी छोड़ दिया

तुषार- क्या

अनीता- है यश को अब अहसास होगा किसी और की बहु बेटी की भी इज्जत होती ह

तुषार- नहीं नहीं नहीं अब उसे कुछ अहसास नहीं होगा, उसे जो अहसास होना था वो हो चुक्का था अब वो फिर कुछ क्र सकता ह ये आपने सही नहीं किया

अनीता- मुझे उसे निचे गिरना था उसकी औकात दिखानी थी,

तुषार- खैर जो हो गया सो हो गया अब आप लोग सम्हाल क्र रहना, और मेरा एक काम ह जो आपको करना ह

अनीता- बोल क्र देखो

तुषार- आपको अलीशा के दिमाग में ************************** ये सब भरना होगा

अनीता- बड़े शोक से

तुषार- ठंकु, और छोटा सरप्राइज क्या ह

अनीता- उसका टाइम नहीं आया ह

तुषार- उससे कुछ और हंगामा न हो जाये

अनीता- कुछ नहीं होगा

फिर ऐसे 5 दिन गुजर गए, और एक घटना हुई जिससे तुषार के पुराने शहर में हंगामा हो गया था,

अंजलि को खबर लगी की यश ने गोली चला दी ह जो चंद्रो देवी को लगी ह वो हॉस्पिटल में ह, पुलिस ने यश को पकड़ लिया ह, अंजलि तुरंत वह पहुंची,

तुषार को भी खबर लगी वो भी आना चाहता था लेकिन अंजलि ने रोक दिया,

अंजलि- ये क्या हुआ कैसे हुआ

अनीता- सब मेरी गलती ह सब मेरी गलती ह तुसाहर ने मन किया था फिर मैं मैं नहीं मणि

अंजलि- हुआ क्या

अनीता- मैंने यश को निचे दिखने के लिए तुषार के साथ उसके सामने hi सम्बन्ध बनाये

अंजलि- तुषार ने ऐसी बेवकूफी कैसे की

अनीता- उसे तो पता hi नहीं था, मैंने उससे भी छिपाया, यश कुछ दिन तो शांत रहा लेकिन कल गुस्से में गन लेकर आ गया मुझे और रिंकी को मरने के लिए,

उसने गोली चलाई और अम्मा बिच में आ गई, अलीशा और मैंने बड़ी मुश्किल से उसे बंधा और पुलिस को बुलाया, और अम्मा को हॉस्पिटल लेकर आये हैं,

अंजलि- अब वो पुलिस के सामने साडी बकवास क्र देगा और तुम लोगो का नाम मीडिया में आ जायेगा तुषार का नाम मीडिया में आ जायेगा मीडिया हमारे घर तक पहुंचेगी और तुषार की फोटो वायरल हो सकती ह

अनीता- मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई ह,

अंजलि- ये गलती हमारी साडी महेनत को बर्बाद क्र देगी,

अनीता- अब मैं क्या करू मैं तो हेल्प करना चाहती थी

अंजलि- तुम शांत हो जाओ मैं कुछ सोचती हु

अंजलि- अब तुम्हे hi इस गलती को सुधारना होगा

अनीता- कैसे

अंजलि- यश को पागल साबित करके

अनीता- वो कैसे

अंजलि- जब अजय हॉस्पिटल में था तो यस अपना मानसिक संतुलन खो चुक्का था, तो तुम उस डॉक्टर से रिपोर्ट तैयार करवाओ की यश की मासिक हालत ठीक नहीं ह, और अपने भाई के गम में वो पागल हो चुक्का ह और अपनी hi माँ को मरना छठा ह,

अनीता ने तुरंत डॉक्टर को कॉल करके रिपोर्ट तैयार करने को कहा, फिर वो पुलिस स्टेशन पहुंची और यश के खिलाफ वही रिपोर्ट लिखवा दी, यश गुस्से में पागल हुआ जा रहा था वो अपनी पत्नी और बेटी को hi गन्दी गन्दी गालिया दिए जा रहा था, पुलिस को भी अहसास हुआ की इसका मानसिक संतुलन टिक नहीं ह,

पुलिस ने अगले hi दिन मजिस्ट्रेट से लिखवा क्र उसे हॉस्पिटल भिजवा दिया, वह अनीता और अंजलि ने सेटिंग बिठा क्र डॉक्टर्स से यश को पूरी तरह पागल करने का इंतजाम करवा दिया, लेकिन इस सब में चंद्रो देवी की मोत हो गई, उस दिन अंजलि बहुत रोइ थी, वो चंद्रो देवी को माँ मानती थी, अनीता भी बहुत रो रही थी, क्योकि इस घर में एक वही थी जो उसे समझती थी, अनीता को अपनी गलती पैर बहुत पछतावा था,

तभी एक कांड और हो गया, हॉस्पिटल में अजय की मोत हो गई, पुरे परिवार में मातम सा च गया, अजय की खबर से सबसे ज्यादा ख़ुशी रूचि को हुई थी, अजय की मोत का कारन भी अनीता hi बन गई, तुसाहर ने अनीता को जो काम दिया था, उसमे अनीता को अलीशा को अजय के खिलाफ भड़का क्र उससे तलाक लेकर चले जाना था, और अनीता ने उसी हिसाब से अलीशा को तैयार भी कर दिया था, ये कहे क्र की अब अलीशा की क्या जिंदगी ह, उसका पति अब कुछ क्र नहीं सकता इस जवानी में वो कैसे जियेगी, न वो पत्नी को खुश क्र सकता ह, न hi काम क्र सकता ह, कही और जिंदगी जियेगी तो उसके लिए अच्छा होगा तलाक ले लेगी तो कुछ पैसे मिल जायेंगे,

लेकिन अलीशा अनीता से कुछ ज्यादा hi होशियार निकली, उसने तलाक लेकर आधी प्रॉपर्टी लेने की जगह अजय को रस्ते से हटा क्र पूरी प्रॉपर्टी अपने नाम करने का प्लान बना लिया था, इसलिए उसने हॉस्पिटल में अजय की दवाई में कुछ ऐसी दवाई मिला दी जिससे उसे अटैक आ गया और वो वही मर गया,

चंद्रो देवी के मरने के 3 दिन बाद hi अजय का भी अंतिम संस्कार क्र दिया गया, और अलीशा 1 दिन बाद अमेरिका वापस लोट गई, क्योकि अजय का पूरा पैसा तो वही था,

अम्मा के तीसरे बेटे ने अम्मा का और फिर अजय का अंतिम संस्कार क्र दिया, अनीता और रिंकी ने शहर छोड़ दिया वो चंडीगढ़ चले गए, अंजलि ने उन्हें घर के नजदीक hi एक फ्लैट दिलवा दिया,

अंजलि ने तो घर पैर hi रहने को कहा लेकिन अनीता ने दूर रहना सही समझा, आज अंजलि का एक और दुश्मन दुनिया छोड़ चूका था,

ऐसे hi 15 दिन गुजर चुके थे, इन 15 दिनों में वर्षा और तुषार के बिच बस एक बार और सेक्स हुआ क्योकि सेक्स के बाद वर्षा को ठीक होने में 7 दिन से ज्यादा लग जाते थे जबकि तुसाहर बड़े प्यार से करता था, वर्षा की छूट बाकि लड़कियों के मुकाबले बहुत टाइट थी,

अब तुषार और रंगा का खेल शुरू हो चुक्का था, और खेल में 15 दिन और निकल गए, 15 दिन तक तुषार कही गायब रहा और अपना काम करता रहा,

वही सुरेश चोपड़ा और सोनिया और शकील बस एक hi आदमी को ढूंढ़ने में लगे थे, वो था तुषार

और इन सब में एक चूक हो गई थी अंजलि और तुषार से, यश नाम की चूक, उन्होंने उसे पागल खाने भिजवा क्र अकेला छोड़ दिया था, जिसका फायदा सोनिया ने उठा लिया वो पहुंच गई यश से मिलने क्योकि उसे शक हो चुक्का था, की यहस अपनी माँ पैर गोली ऐसे hi नहीं चलाएगा, सोनिया मौका निकल क्र यश से मिलने पहुंच गई,

इधर तुषार वापस चंडीगढ़ पहुंच रहा था, जसके स्वागत के लिए अंजलि ने बहुत इंतजाम किये हुए थे, पूरी फॅमिली तैयार कड़ी थी, सचिन और कपिल भी हनी मून से वापस आ चुके थे, अंजलि सीमा दीपा और रूचि तो थे hi, अलका भी वही आ चुकी थी, वर्षा भी मुंबई से वापस आ चुकी थी 2 दिन पहले, अनीता और रिंकी भी वही थे, ननदनी भी आज वही थी, उसे भी जानकारी लग चुकी थी,

पूरा परिवार इंतजार में था, तुषार को फ्लाइट से आना था, सब एयरपोर्ट पैर वेट क्र रहे थे, शायद वह खड़ा हर इंसान सोच रहा होगा कोई सेलिब्रिटी आ रहा ह जिसे लेने इतने लोग आये हैं वो भी सब लड़किया hi लड़किया एक से बढ़ क्र एक खूबसूरत लड़की, अंजलि घर पैर स्वागत की तैयारी क्र रही थी, उसने आरती की तैयारी की हुई थी,

सुबह के 4 बज रहे थे सब बेसब्री से तुषार का वेट क्र रहे थे लेकिन तुसाहर तो तुषार ह वो वह पंहुचा hi नहीं, वो भाईसाहब तो रात 11 बजे की फ्लाइट से hi चंडी गड पहुंच चुके थे,

काफी देर वेट करने के बाद जब तुषार नहीं आया तो सब उसक फ़ोन तरय करने लगे लेकिन फ़ोन नहीं लगा, सभी परेशां हो गए और अंजलि को फ़ोन मिलाया

सीमा- माँ टुशु नहीं आया हम कब से वेट क्र रहे हैं वो ठीक तो होगा न

अंजलि- तुम लोग वह क्यों वेट क्र रहे हो ये तो घर पैर हैं

सीमा- क्या, मैं आकर बताती हु उसे हमारे साथ ऐसा करता ह

सब एक साथ क्या हुआ

सीमा- हम यहाँ वेट क्र रहे हैं जनाब तो घर पहुंच भी चुके हैं

सब एक साथ क्या, आज नहीं छोड़ेंगे इसे

सब घर की तरफ निकले,

जब पूरा परिवार तुषार को एयरपोर्ट से लेने गया तो तुषार घर पंहुचा, अंजलि घर में अकेली थी, अंजलि ने तुषार की आरती उतर क्र स्वागत किया, तुषार ने अंदर आते hi अंजलि को गॉड में उठाया और बैडरूम में ले गया, और बिना देर किये उसके कपडे उतरे और दोनों ने सुबह सुबह hi एक जबरदस्त चुदाई का आननद लिया,

फिर दोनों फ्रेश होकर हॉल में बैठ गए, कुछ देर बाद पूरा परिवार वापस आया और आते hi तुषार पैर गुस्सा करने लगे,

अंजलि- अरे रुको तो सुनो तो

दीपा ने अंजलि के फेस पैर धयान दिया और उसके फेस की चमक से वो समझ गई की टुशु ने क्या किया ह, उसने शांत होते हुए कहा

दीपा- बस बस टुशु जो करता ह सोच क्र hi करता ह उसने सब कुछ सोच क्र hi किया होगा अब शांत हो जाओ

अंजलि- मेरी समझदार बेटी हमेशा समझ जाती ह

दीपा- मुझे रूचि बोल रही थी हम सब वह बेकार में जा रहे हैं वो उस टाइम नहीं आएगा जो टाइम दिया हुआ ह

अंजलि- सच में रूचि तूने ऐसा क्यों सोचा

रूचि- माँ जितना हम सब मिलकर सोचते हैं उतना तो आप दोनों नाश्ते में खा जाते हो, टुशु को अब तक छुपा क्र रखा गया ह तो आज ढोल बजा क्र दुश्मनो को तोडना बताया जायेगा की उनका दामाद आ रहा ह

अंजलि के फेस पैर एक मुस्कान थी- तू सच में वैसी ह जैसी तुझे होना चाहिए,

सीमा- अगर तुम सबकी होशियारी का प्रदर्शन हो चुक्का हो तो हम मिल ले इससे

सीमा तुरंत तुसाहर से लिपट गई, फिर दीपा फिर रूचि, सचिन और कपिल भी गले मिले दोनों भाभियाँ भी गले लग क्र मिली, वर्षा अनीता रिंकी ननदनी दूर hi कड़ी रही, सबसे पीछे थी अलका जो किसी उधेड़ बन में थी,

तुषार खुद आगे बढ़ा और सबसे पहले वर्षा को गले लगाया,

तुषार- आप क्यों दूर कड़ी हो आप इसी परिवार का हिस्सा हो

वर्षा खुश होकर गले लग गई,

फिर तुषार अनीता और रिंकी से भी गले लगा

तुषार- आप दोनों मेरी दोस्त हो आपका भी पूरा अधिकार ह,

और ननदनी जी आप खुद को अलग मत समझिये मेरी माँ की दुनिया में कोई पराया नहीं होता,

नंदनी ख़ुशी से तुषार के गले लग गई, फिर तुषार ने अलका को भी गले लगाया,

हर किसी के फेस पैर एक उत्तेजना और एक्सिटमेंट थी,

तुषार- मुझे ऐसा क्यों लग रहा ह जैसे आप सब मुझसे कुछ कहना चाहती हैं

सबने मुस्कुरा क्र गरदन निचे क्र ली, तब सबको समझ में आया की यहाँ कड़ी हर औरत कुछ कहना चाहती ह, सब एक दूसरे को देखने लगी,

रूचि एक कदम आगे बढ़ी की तभी अलका दौड़ क्र तुषार के गले लग गई,

अलका- कोई क्या कहना चाहता ह मैं नहीं जानती लेकिन मैं जो कहना चाहती हु आज कहे क्र रहूंगी चाहे कुछ भी हो जाये मुझसे अब बर्दास्त नहीं हो रहा,

वह खड़े सब लोग एक दम चौंक गए वर्षा और अंजलि की समझ में आ गया क्या होने वाला ह, वर्षा आगे बढ़ी अलका को रोकने के लिए लेकिन देर हो चुकी थी,

अलका- तुषार ी लव यू, ी लव यू, मैं तुम्हारे बिना नहीं जी सकती, अगर तुम मुझे नहीं मिले तो मैं मर जाउंगी, वह कड़ी सभी औरते जल भून गई, रश्मि और आशिमा अंजलि और वर्षा के अलावा, क्योकि अंजलि और वर्षा को तो पता था, लेकिन आशिमा और रश्मि सुरप्रीसेड थी, बाकि सभी लड़कियों के फेस पैर गुस्सा और जलन थी, वही रूचि क आँखों में आंसू थे, उसका दिल टूट चुक्का,

जिसे दीपा और अंजलि ने परख लिया था, लेकिन हालत ऐसे थे की कोई कुछ क्र नहीं प् रहा था, दीपा ने रूचि का हाथ पकड़ा और उसे तसली दी,

वर्षा- अलका अलका मेरी बात सुन बाबू हम बाद में बात करेंगे इस बारे में,

अलका- डीडू आप तो जानती ह न मैं तुषार से कितना प्यार करती हु

वर्षा- है जानती हु

अलका- तुषार तुम कुछ जवाब दो क्या तुम्हे मुझे पसंद करते हो या नहीं

तुषार- अलका जी ये फैसला हमे अकेले में करना चाहिए था, पुरे परिवार के सामने तो बाद में बताना चाइये था आपने जवाब भी परिवार के सामने माँगा ह, अब फैसला परिवार hi क्र सकता ह,

अलका- अगर अंजलि दीदी मन कर देंगी तो मैं कभी तुम्हारे सामने नहीं आउंगी, लेकिन अगर तुम मन क्र डोज तो मैं मर जाउंगी, मैं तुम्हे पाना नहीं चाहती बस प्यार चाहती हु, तुम मुझसे प्यार करते हो ये hi काफी ह मेरे लिए, मैं तुम पैर कोई अधिकार नहीं दिखाउंगी, न मुझे शादी करनी ह न hi साथ रहने के लिए फाॅर्स करुँगी

तुषार ने अंजलि की तरफ देखा, तो अंजलि ने आखो से है का इशारा किया,

तुषार- है अलका जी मेरा प्यार हमेशा आपके साथ ह, आपका प्यार हमेशा मैं सम्हाल क्र रखूँगा,

अलका ख़ुशी से तुषार से लिपट गई,

वह कड़ी हर औरत के दिल पैर सांप लोट रहे थे,

वर्षा- अब तो छोड़ दे उसे

अलका साइड में हो गई लेकिन रूचि रोटी हुई वह से चली गई, अंजलि तुषार और दीपा समझ गए, लेकिन सबके सामने कुछ नहीं क्र सकते थे,

अंजलि उसके पीछे जाने लगी तो आशिमा बोली मेरे पास एक न्यूज़ ह, अंजलि रुक गई

आशिमा- मैं सही मोके का वेट क्र रही थी और इससे अच्छा मौका शायद कुछ नहीं होगा

सब आशिमा की तरफ देखने लगे,

आशिमा- ी ऍम प्रेग्नेंट

अंजलि दीपा सीमा सचिन कपिल तुषार सब ख़ुशी से उछाल पड़े, तभी,

रश्मि- डबल न्यूज़ मैं भी प्रेग्नेंट हु

दीपा – ो माय गॉड वाओ डबल धमाका

Ruchiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii जल्दी निचे आ देख हमारे घर नन्हे मुन्ने आने वाले हैं, रूचि दीपा की आवाज सुनकर दौड़ क्र निचे आई, और ख़ुशी में शामिल हो गई,

तभी नंदनी- हे मैं भी कुछ कहना चाहती हु

सबने उसकी तरफ देखा

ननदनी- मैं भी प्रेग्नेंट हु

अंजलि- ये तो बड़ी ख़ुशी की बात ह

नंदनी- आप सोच रहे होंगे मैं आप सबको क्यों बता रही हु, वो इस लिए क्योकि अब मेरा कोई परिवार नहीं ह पिता का घर तो शादी के टाइम hi छोड़ दिया था तो वह अब मेरा परिवार नहीं ह, अब चोपड़ा परिवार से मेरा कोई रिश्ता नहीं ह लेकिन एक हिसाब से ये बच्चा इसी परिवार तो ह न, उसने तुषार की तरफ देख क्र ये बात कही,

अंजलि को समझ आ गया ये बच्चा तुषार का hi ह,

नंदनी- और कोमल भी प्रेग्नेंट ह

तुषार के फेस पैर ख़ुशी अलग hi झलक रही थी,

अंजलि ने नंदनी को गले लगा क्र धीरे से कान में कहा मुझे पता ह तुम दोनों के पेट में किसके बच्चे हैं, इन बच्चो की वजह से तुम इस परिवार का हिस्सा हो अब

तभी अनीता तुषार के पास आई और उसके कान में बोली

अनीता- वैसे तो मैंने सोचा था ये तुम्हारे लिए सरप्राइज होगा लेकिन मुझसे पहले hi बहुत लोग ये सरप्राइज दे रहे हैं, फिर भी तुम्हारा चौथा तोफा दे रही हु

तुषार ने अनीता की तरफ देखा

अनीता- तुम्हारा चौथा तोफा ये ह की हम दोनों माँ बेटी को तुमने प्रेग्नेंट क्र दिया ह

तुषार- क्या

तुषार इतनी जोर से बोलै की सबका धयान उसकी तरफ चला गया, अनीता एक दम घबरा गई, तुषार ने रिंकी की तरफ देखा तो वो शर्मा रही थी, अंजलि ने भी ये नोटिस किया

तुषार ने अंजलि की तरफ देखा और बेचारा सा मुँह बनाया,

तुषार सोफे पैर बैठ गया उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था की तभी वर्षा उसके पास आई,

वर्षा- क्या हुआ

तुषार- कुछ नहीं

वर्षा- एक खुश खबरि ह

तुषार- अब क्या

वर्षा- ी ऍम प्रेग्नेंट

तुषार- whattttttttttt

वर्षा शर्माती हुई कड़ी हो गई,

तुषार मन में ये हो क्या रहा ह सब एक साथ, ये क्या क्र दिया कमीने कुत्ते तूने इतनी खुशिया कैसे झेलेगा, तेरी गांड मर लेंगी ये सब की सब

अंजलि- सीमा बीटा सबके लिए ब्रेकफास्ट लगाओ, आज बड़ा ख़ुशी का दिन ह सब एक साथ एन्जॉय करेंगे

सीमा किचन में चली गई बाकि औरते भी उसके साथ लग गई जैसे ये उन्ही का घर हो,

अंजलि और तुषार सोफे पैर बैठे थे बाकि सब या तो बातो में लगे थे या काम करने में,

अंजलि- क्या हुआ

तुषार- एक साथ ये सब क्या हो गया, सबने मुझे फसा क्र अपनी कोक में बच्चा ले लिया

अंजलि- हहहह फसा क्र आपको कोई फसा सकता ह क्या

तुसाहर- मैं तो खुद मासूम सा बच्चा हु और मेरे इतने सरे बच्चे कैसे सम्हालूँगा

अंजलि- बताना तो मैं भी चाहती थी लेकिन मुझसे पहले इतनी लाइन लग गई

तुषार- आप आप क्या बताने वाली थी आपको पता ह इनके बारे में

अंजलि- इनके नहीं अपने बारे में

तुषार- अपने बारे में क्या

अंजलि- ी ऍम प्रेग्नेंट

तुषार- वाओ ो माय गॉड ो माय गॉड ो माय गॉड, हहहहहहहहह हहहहह ये ह बेस्ट न्यूज़ ये ह बेस्ट न्यूज़

तुषार को ऐसे उछलता देख सब वह आ गए

क्या हुआ क्या हुआ

तुषार को अहसास हुआ वो क्या क्र रहा ह,

तुषार- कुछ नहीं कुछ नहीं

सब एक साथ- बोलो क्या हुआ ऐसे क्यों उछाल रहे हो

तुषार- कुछ नहीं वो कुछ जानकारी मिली थी तो ख़ुशी से उछाल पड़ा जाओ तुम अपना काम करो

सब अजीब से मुँह बना क्र चले गए,

अंजलि- कण्ट्रोल कीजिये वर्ण सबको पता चल जायेगा

तुषार- मैं आपको बता नहीं सकता मैं कितना खुश हु

अंजलि- और कोण कोण ह प्रेग्नेंट

तुषार- नंदनी, कोमल, अनीता, रिंकी

तुषार ने वर्षा के साथ अपने रिश्ते को छुपा लिया, आज पहेली बार तुषार ने कुछ छुपाया था

तुषार- मेरी गलती नहीं ह

अंजलि- है पता ह आपकी गलती होती भी नहीं, गलती तो मेरी ह मैंने तुम्हे इतना हॉट एंड सेक्सी पैदा किया ह हर कोई पीछे पड़ी रहती ह

तुषार- अब अलका का क्या करू

अन्जाइ- उसके हिस्से की ख़ुशी उसे दो

तुषार- लेकिन वो हमारे परिवार के रिश्तो को समझ नहीं आएगी,

अंजलि- तो जहा वो समझ पाए वह लेजाकर ख़ुशी दो

तुषार- और रूचि

अंजलि- रूचि को उसका हक़ मिलना चाहिए अब टाइम आ गया ह

तुषार- ठीक ह

फिर सबने एक साथ ब्रेकफास्ट किया,

इस सब में राजेश वह नहीं था, वो गाओं गया हुआ था, जो शाम को आने वाला था,

अंजलि- आज सभी यही रुकेंगे शाम को हम सब पार्टी करेनेगे कोई बहार का नहीं होगा हम सब होंगे बस

सब खुश हो गए,



अंजलि- दीपा सबके रेस्ट करने के लिए रूम दिखा दो, दीपा सबको लेकर चली गई,
 
अपडेट-57






रूचि उदास सी अपने रूम में चली गई, तुषार उसके पीछे उसके रूम में गया तो देखा रूचि बीएड पैर उलटी लेती हुई ह, तुषार धीरे से उसके पास बैठ गया, और रूचि की कमर पैर हाथ रखा


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रूचि एक दम चौंक गई,

तुषार- क्या हुआ इतनी उदास क्यों हो

रूचि- नहीं नहीं मैं क्यों उदास रहूंगी

तुषार- मुझसे झूट नहीं बोल सकती जानती ह न

रूचि- आज इतनी ख़ुशी का दिन ह तो मैं क्यों दुखी होने लगी

तुषार- जब इंसान को उसकी ख़ुशी न मिले तब मन दुखी होता ह

रूचि- मेरी खुशिया तो परिवार की खुशियों में ह

तुषार- एक बात बताऊ, जब तुम किसी चीज के पीछे भाग रहे हो और वो चीज तुम्हसे दूर जा रही हो तो समझो भगवान् ने कुछ भीतर किया हुआ होता ह तुम्हारे लिए

रूचि- मुझे जो चाहिए उससे भीतर कुछ नहीं हो सकता

तुषार- दुनिया में सबकी कोई न कोई खवाहिश होती ह, सब अपनी ख्वाहिश पाना चाहते हैं लेकिन कोई ऐसा नहीं बनता जो सामने वाले के लिए ख्वाहिश बन जाये

रूचि- सबकी किस्मत तेरे जैसी नहीं होती जो सबकी ख्वाहिश बन जाये

तुषार- क्या पता तू उससे भी बेस्ट हो

रूचि- क्या मतलब

तुषार- पहले उठ और कड़ी हो जा

रूचि कड़ी हो गई

तुषार उसके सामने अपने घुटनो पैर बैठ गया,

तुषार- तू मेरे बारे में सब जानती ह कैसे सीमा दी के साथ रिश्ता बना फिर दीपा के साथ फिर रजिया चच्ची के साथ, फिर माँ फिर अनीता रिंकी नंदनी और कोमल और अब और अलका उसने तो खुद hi इजहार क्र दिया, माँ ने कहा की किसी का दिल न तोडू ये सब मेरे अपने हैं,

रूचि- मुझे क्यों सुना रहा ह अपनी रास लीला

तुषार- इन सब में एक बात कॉमन ह

रूचि- क्या

तुषार- ये सब खुद चलकर मेरे पास आई थी, जब ये मेरे पास आई तो इनमे से किसी के लिए मेरे दिल में प्यार नहीं था, सीमा और दीपा दी बहन थी तो प्रेमिका वाला प्यार नहीं था, माँ तो माँ ह hi उनसे तो प्यार अलग hi था, बाकि सब बस जुड़ गई मैं तो उनके प्यार का सम्मान क्र रहा हु, लेकिन तू इस धरती पैर पहेली ह जो मुझे सबसे ज्यादा और सबसे पहले से प्यार करती आ रही ह लेकिन एक बार भी तूने अपने अधिकार के लिए बात तक नहीं की,

सबके अधिकार और प्यार के लिए आगे बढ़कर साथ देती रही, जानती ह तेरे उस त्याग ने मेरे दिल में तेरे लिए प्यार कहा पंहुचा दिया ह, जहा माँ की जगह ह, तू माँ से भी आगे आ गई ह मेरे लिए, जिसके लिए मैं खुद आया हु अपने प्यार का इजहार करने,

रूचि क्या तू मुझे शादी करेगी, आने वाली जिंदगी के लिए मेरी साथी बनेगी, ी लव यू रूचि


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तुषार की बाते सुनकर रूचि क आँखों से जल की धरा भी रही थी, उसने तुरंत तुषार को उठाया और उसके गले लग गई,

ी लव ु टुशु, ी लव ु मैं हमेषा तेरे साथ हु, मरते दम तक मैं साथ हु चाहे कुछ हो जाये मैं तेरा साथ नहीं छोडूंगी,

तभी तालियों की आवाज से दोनों चौंक गए, अंजलि दीपा और सीमा तीनो दरवाजे पैर खड़े तालिया बजा रहे थे,

रूचि शर्मा गई,

अंजलि- मुझे ये रिश्ता मंजूर ह

सीमा- और मुझे भी

दीपा- मुझे भी

अंजलि- तुम दोनों की शादी होगी और आज hi होगी, दीपा तुरंत अर्रेंगे क्र हम अभी जायेंगे शादी के लिए इस शादी में कोई देरी नहीं होनी चाहिए शाम की पार्टी में रूचि तुषार की पत्नी के रूप में कड़ी होगी,

रूचि- माँ इतनी जल्दी

अंजलि- इनके पीछे बहुत सी दीवानी हैं लेकिन सबसे पहले तेरा हक़ ह,

दीपा ने तुरंत कॉल मिले और इंतजाम करने लगी,

रूचि- मेरी एक शर्त ह

अंजलि- क्या

रूचि- मेरे साथ साथ सीमा और दीपा की भी शादी होगी, इनका हक़ भी इन्हे मिलना चाहिए

अंजलि- मंजूर ह, तुम सब जल्दी से तैयार होकर आओ हम अभी जायेंगे,

फिर सभी कार से एक मंदिर पहुंचे जहा दीपा ने अरेंजमेंट क्र दिया था, वही पंडित जी आये हुए थे जिसने अंजलि की शादी करवाई थी, और फिर सबसे पहले रूचि की शादी हुई फिर दीपा की फिर सीमा की, सबने एक साथ शादी की,

सभी घर आ गए, तीनो भेने अपने अपने रूम में चली गई,

अंजलि- क्या सोच रहे हो

तुषार- नंदनी और रिंकी और अनीता भी मेरे बच्चे की माँ बनने वाली हैं मैं नहीं चाहता उन्हें

अंजलि- क्या वो सब एक दूसरे को बर्दास्त क्र पाएंगे

तुषार मुझे नहीं पता

अंजलि- मैं सबसे बात करती हु और अर्रेंगे करती हु आज ये सब ख़तम होगा कल से अलग दुनिया शुरू होगी

फिर अंजलि चली गई और 1 हरष बाद उसने तुषार को बुलाया और मंदिर लेकर चली गई,

सबसे पहले नंदनी आई वो बहुत खुश थी, सबसे पहले तुसाहर और नंदनी की शादी हुई, फिर नंदनी को वापस भेज दिया, फिर अनीता और रिंकी आई,

तुसाहर और रिंकी की शादी करवाई गई,

अंजलि- अब अलका को बुलाओ और उसकी शादी भी करवाओ क्योकि उसका रिश्ता भी ऐसा नहीं ह जिसमे सबके सामने शादी हो सके

वर्षा ने अलका को बुलाया और उसे समझाया की ये शादी चुप क्र होगी

अलका मान गई और उसकी भी शादी तुषार से हो गई,

अब सब तुषार की पत्निया थी, और सभी एक hi घर में थी, अंजलि और तुषार रूम में बैठे थे,

तुसाहर- सबसे शादी तो क्र ली लेकिन सबको एक दूसरे के बारे में कैसे समझूंगा

अंजलि- सब समझ जाएँगी बस सबको अलग अलग रखना होगा

तुषार- कसिए

अंजलि- अलका ये सब बर्दास्त नहीं क्र पायेगी उसे इस सब के बारे में पता नहीं चलना चाहिए, उसके लिए अलका को यहाँ से दूर लेकर जाना होगा, रिंकी और अनीता को एक दूसरे से ऐतराज नहीं ह इसलिए वो एक साथ रह सकती हैं, उनके लिए एक घर करेंगे क्र देंगे जिससे तुम उनके साथ टाइम बिता सको,

नंदनी मंत्री की बेटी ह तो जरूर राजनीती में जायगे उसके पास टाइम hi नहीं होगा, वो जहा रहना चाहे रह सकती ह,

हम चारो मैं सीमा दीपा और रूचि एक साथ रहेंगे,

सच्ची कपिल रश्मि और आशिमा को मैं विदेश भेजूंगी वही वो बिज़नेस सम्हालेंगे,

तुषार- और कोमल

अंजलि- उसके बच्चे को हम पालेंगे और जेल से आने के बाद वो नंदनी के साथ रहना चाहे तो रह सकती ह

तुषार- आपने तो सब सेट क्र दिया

अंजलि- इस लिए तो सबकी माँ हु

तुषार- लेकिन अब किसके पास जाऊ सभी मेरा वेट क्र रही होंगी

अंजलि- पहला हक़ रूचि का ह फिर अलका का लेकिन सुहागरात तो रात को होगी, इसलिए आज दिन में सीमा और दीपा को अधिकार दे दो,

तुषार- और आपका अधिकार

अंजलि- मेरा तो अधिकार हमेशा रहेगा hi, आज उन्हें उनकी खुशिया मिलनी चाहिए,

फिर अंजलि पहले रूचि के रूम में गई और फिर अलका के रूम में,

वही.

तुषार दीपा के रूम में गया लेकिन वह कोई नहीं था, फिर वो सीमा के रूम में गया तो देखा पूरा रूम खूब से महका हुआ ह, हल्का हल्का म्यूजिक चल रहा ह, बीएड पैर गुलाब की पंखुडिया पड़ी हुई हैं, तुसाहर दूर पैर खड़ा देख hi रहा था की तभी पीछे से धक्का लगा, उसे मुद क्र देखा तो, दीपा और सीमा दोनों दूर के पीछे से बहार निकली,

दोनों ब्लैक कलर की सेक्सी ड्रेस में थी, दीपा ने दूर बंद किया फिर दोनों बड़ी अदा से चलती हुई तुषार के पास आई

तुषार- दोनों एक साथ

सीमा- मेरा हमेषा से सपना था एक बार दीपा के साथ मजे करुँगी, आज मौका भी ह और अधिकार भी,

दीपा- जब से मुझे पता चला ह इसने माँ के साथ मिलकर आपके सतह मस्ती की ह तब से मैं भी बेताब थी

तुषार- आपके साथ इतना सम्मान

दीपा- है अब तक आप भाई थे तो वैसे बोलती थी, लेकिन अब आप पति हैं और पति को आप hi कहते हैं

तुषार- इतना सम्मान मैं कैसे सम्हाल पाउँगा

सीमा- जैसे आज हम दोनों को सम्हालोगे

फिर दोनों तुषार पैर टूट पड़ी, और उसके कपडे उतर दिए, दीपा आगे से तुषार को चूमने लगी सीमा पीछे चुम रही थी,


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दीपा आगे से लुंड चुने लगी वही सीमा पीछे से तुषार के बम्ब चाट रही थी, तुषार कण्ट्रोल खोता जार है था,

फिर तुषार ने दीपा को लिटाया और उसकी छूट चेतना लगा, और सीमा ने मौका देख क्र दीपा के मुँह पैर अपनी छूट रख क्र बैठ गई, तीनो के लिए नया एक्सपीरयंस था, लेकिन मजा बहुत आ रहा था, दीपा ने भी तुरंत सीमा की छूट चटनी शुरू क्र दी थी,


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फिर सीमा ऐसे hi छूट चतवते हुए दीपा के उप्पेर लेट गई, अब तुषार और सीमा दोनों के मुँह दीपा की छूट पैर थे, जिसे बरी बरी से दोनों चाट रहे थे और एक दूसरे को चुम रहे थे,

दोनों भेने एक बार तो ऐसे hi झाड़ गई,

तुषार- तो पहले कोण

सीमा- पहले दीपा के साथ

दीपा- नहीं तू बड़ी ह पहले तू hi लेगी वैसे भी इनकी गुरु तू hi रही ह तेरी hi वजह से आज हम कहा से कहा आ गए हैं तो पहला अधिकार तेरा ह

सीमा- दोनों एक साथ करेंगे, तू इस लुंड को पकड़ क्र दाल मेरी छूट में मैं तेरी छूट में डालूंगी,

सीमा लेट गई और दीपा ने तुषार का लुंड पकड़ क्र सीमा की छूट में डाला, और तुषार ने छोड़ना शुरू क्र दिया, सीमा को तो उसके लुंड की आदत सी हो चुकी थी, दर्द तो हुआ लेकिन मजा ज्यादा आ रहा था, दीपा सीमा की छूट को रगड़ रही थी, फिर दीपा भी बराबर में लेट गई तो सीमा ने लुंड पकड़ क्र दीपा की छूट में डाला, और दोनों भेने एक साथ छोड़ने लगी,

काफी देर तक पोजीशन बदल बदल क्र चुदाई चलती रही, कभी दोनों को उप्पेर निचे लिटा क्र तो कभी दोनों को घोड़ी बना क्र तो कभी दोनों को एक दूसरे के उप्पेर घोड़ी बना दिया, लगभग 1 घंटे की चुदाई चली जिसमे दोनों भेने 3-3 बार झाड़ चुकी थी,


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अब बरी थी तुषार के झड़ने की तो सीमा बोली- मेरे अंदर झड़ना मुझे वो ख़ुशी चाहिए जो निचे कड़ी साडी औरते महसूस क्र रही थी मुझे अपने बच्चे की माँ बना दे मेरे भाई, मेरी छूट से मेरे hi भतीजे निकलेंगे जो अपने मां को hi पापा कहेंगे, भर दे मेरी छूट अपने अमृत से,

तुषार ने भी हुंकार भरी और पूरा रास सीमा की छूट में भर दिया,

और तीनो चिपक क्र लेट गए, 30 मिनट्स रेस्ट करने के बाद फिर से एक राउंड और शुरू हो गया इस बार तुसाहर ने दोनों को खिलोने की तरह उछाल उछाल क्र छोड़ा, दोनों की छूट का भोसड़ा बना दिया था, ऐसी चुदाई हुई थी की जन्मो जन्मो की प्यास बुझ गाइट hi, इस बार तुषार ने अपना रास दीपा की छूट में भर दिया था,


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तीनो बहुत थक चुके थे, शाम के 6 बज चुके थे, दोनों भेने नंगी hi एक दूसरे से चिपक क्र सो गई, तुषार कुछ देर उनके पास लेता फिर धीरे से उठ क्र कपडे पहन क्र बहार आ गया, निचे देखा तो रूचि और अलका के अलावा सब वह बैठे थे, तुषार भी निचे आ गया,

तभी नंदनी उठी और तुषार के लिए चाय ले आई, आज इस घर में हर औरत तुषार की पत्नी थी,

अंजलि- आज हम सब पार्टी करेंगे खाना बहार से आर्डर कर देंगे और पूरी फॅमिली एक साथ एन्जॉय करेगी

रिंकी- हम सब मिलकर बना लेंगे न

अंजलि- आज नहीं फिर कभी खाउंगी तुम्हारे हाथ का खाना, आज सब एन्जॉय करेंगे

फिर सभी तैयार होने चले गए, और 1 घंटे बाद जब साडी लेडीज तैयार होकर निचे हॉल में आ गई, जब तुषार निचे आया तो उसे ऐसा लग रहा था जैसे स्वर्ग की अप्सराये उसके सामने कड़ी हो, पूरा घर सुंदरता से जगमगा रहा था, अंजलि और अनीता भी उन जवान लड़कियों से काम नहीं थी बल्कि दोनों उन जवान लड़कियों से 21 hi थी,


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वही अलका के फेस की चमक और ख़ुशी उसकी सुंदरता में अलग hi चार चाँद लगा रही थी,

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वही वर्षा उसे देख क्र तुषार हमेशा खो hi जाता था,

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वही आज रूचि सबसे खूबसूरत लग रही थी, आज वो अपने असली सुंदरता के निखार पैर थी, जैसे पूरी दुनिया की चमक आज उसी के चेरे में लगा दी गई हो,

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अंजलि और वर्षा की सुंदरता hi उसके सामने टिक प् रही थी, आशिमा ुर रश्मि भी बहुत खूबसूरत लग रही थी,

दीपा और सीमा भी अलग hi रूम में थी


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नंदनी भी अलग स्टाइल में रेडी हुई थी

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तुषार बेचारा किसे देखे सब उसकी दिल पैर चुरिया चला रही थी, पार्टी शुरू हो गई सबने डांस किया फिर एक साथ खाना खाया, और एक दूसरे से खुल क्र बाते की जिससे सब एक दूसरे से खुलने लगे,

वही चंडीगढ़ के बॉर्डर पैर एक सेफ हाउस में, सुबह के टाइम जब तुषार और अंजलि शादियों में बिजी थे,

सोनिया- मुझे वो आज hi चाहिए चोपड़ा जी मुझे वो आज hi चाहिए

चोपड़ा- लेकिन इतनी जल्दी कैसे होगा सब

सोनिया- मैं नहीं जानती कैसे होगा सकील को कॉल करो और बोलो की आज hi सब करेगा, उसने आदमी लगाए हैं न सब जगह

सुरेश ने सकील को कॉल लगाया

सकील- कहो चोपड़ा जी

सुरेश- सकील भाई मुझे अभी मिलना ह आज hi वो सब करना ह

सकील- लेकिन हमने तो 3 दिन बाद का तय किया था

सुरेश- उसे आज hi निकालेंगे और उसे भी ले आओ आज hi ये सब ख़तम करेंगे और डॉन से बात करके प्रिवेट प्लान का इन्तेजा रखो आज रात hi हम देश से निकल जायेंगे,

सकील- ठीक ह फिर तुम तैयारी करो, मैं उसे लेकर आता हु

रात हो चुकी थी, शहर में बहुत कुछ हो चुक्का था लेकिन तुषार खड़ा सोच रहा था की वो किसके पास जाये,

तुसाहर ने सबसे पहले अलका के पास जाने का फैसला किया ताकि उसे जल्दी से शांत करके वो पूरा टाइम रूचि के साथ बिता सके,

तुषार ने दीपा को कॉल करके कुछ समझाया फिर वो अलका के रूम में चल दिया,

तुषार जब अलका के रूम में एंटर हुआ तो अलका एक निघ्त्य में अपना बिस्टेर ठीक क्र रही थी,

तुषार को देखते hi वो शर्मा गई, तुषार उसके पास जाकर खड़ा हो गया


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अलका- आप खुश हैं

तुषार- आपके फेस की स्माइल देख क्र hi मैं खुश हो जाता हु

अलका- मैंने आपके साथ कोई जबरदस्ती तो नहीं की

तुषार- आपको लगता ह मेरे साथ कोई जबरदस्ती क्र सकता ह

अलका- मैंने जिंदगी में कुछ नहीं चाहा कोई रिश्ता मायने नहीं रखता था, लेकिन एक hi चाहत हुई आपको पाने की,

जब बाते ज्यादा इमोशनल होने लगी तो तुषार ने अलका की कमर में हाथ डाला और अपनी तरफ खींचा, अलका एक दम चौंक गई वो कुछ समझ पति तब तक तुषार ने उसके होतो से अपने हॉट मिला दिए थे,

आज पहेली बार अलका के हॉट किसी के होतो से मिले थे, अलका की आँखे बड़ी होती चली गई, लेकिन कुछ hi पालो में वो आँखे मजे की वजह से बंद होती चली गई, तुषार ने अलका के होतो को चूसना शुरू क्र दिया था,


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अलका भी उसका साथ देने लगी थी, दोनों 10 मिनट्स टेक क दूसरे के होतो का रसपान करते रहे, जब दोनों अलग हुए तो अलका की आँखे लाल हो राखी थी,

तुषार- बाते करने के लिए बहुत लम्बी जिंदगी ह आज कुछ और करते हैं

अलका- मैं तो आपकी hi हु जो चाहे क्र लो,

तुषार- कभी सोचा नहीं था ऐसा भी होगा

अलका- जब पहेली मुलाकात हुई थी तब हम क्या थे और अब क्या हैं

तुसाहर ने अलका को गॉड में उठाया और बीएड पैर लिटा दिया,

तुषार- उस दिन उन गुंडों से तुम्हरी इजात बचाई थी आज वो इज्जत मेरी ह

अलका- तो ले लो न रुके क्यों हो

तुसाहर ने अलका की चूचियों पैर मुँह लगा दिया निघ्त्य के उप्पेर से चूसने लगा, अलका आहे भरने लगी और तुषार का सर अपनी चूचियों पैर दबाने लगी,

फिर तुसाहर अलका के उप्पेर आ गया और एक हाथ कमर में दाल क्र घूम गया, उसने अलका को किसी गुड़िया की तरह घुमा क्र अपने उप्पेर क्र लिया था,

अब तुषार का एक हाथ अलका की मुलाम गांड पैर था, और दूसरा उसकी कमर पैर, अलका पूरी तरह गरम hi चुकी थी, अलका की चूचिया तुषार की छोड़ी छाती में धसी हुई थी, निचे से तुषार का लुंड अलका की छूट के उप्पेर दबा हुआ था,

अलका ने फिर तुषार के होतो से अपने हॉट जोड़ दिए, दोनों फिर किश में खो गए, तुषार अलका की गांड को मसल रहे थे, इसी मसला मसली में तुषार ने अलका की निघ्त्य खोल दी,

अलका ने शर्म से अपना सर तुषार के साइन में छुपा लिया, अलका बहुत शामिलि लड़की थी, आज से पहले किसी लड़के ने उसे हाथ तक नहीं लगाया था, वो लड़को से दोस्ती तक नहीं करती थी,

फिर तुषार ने बड़े प्यार से अलका की निघ्त्य अलग क्र दी, अब अलका ब्रा पंतय में तुषार के सामने लेती हुई थी, क्या खूबसूरत बदन था, जितनी नाजुक और सॉफ्ट हार्ट अलका अंदर से थी उतनी hi सॉफ्ट उसकी स्किन थी रुई की तरह,

तुषार ने अलका की जांघ पैर अपने हॉट रख दिए, जिससे अलका का रोम रोम खड़ा हो गया, तुसाहर चूमता हुआ उप्पेर बढ़ने लगा जैसे hi वो छूट के पास पंहुचा तो अलका ने रोक दिया,

वह नहीं प्लस

तुषार समझ गया वो बहुत ज्यादा शर्मा रही ह, तुषार ने भी उसके पेट को चूमना शुरू किया और चूचियों तक चूमते हुआ आगे बढ़ता रहा, फिर अलका की गार्डन चूमते हुए उसके होतो से हॉट मिला दिए,

अलका ने तुषार के कपडे खोलन शुरू क्र दिए थे, तुषार ने भी उसकी ब्रा खोल दी और पंतय निचे खिसकने लगा, कुछ hi देर में दोनों नंगे थे,

अलका की हिम्मत नहीं हो रही थी तुषार के लुंड को देखने की, और वो अपनी छूट भी पैरो को भींच क्र छुपाये हुए थी, तुषार ने अलका का हाथ पकड़ा और अपने लुंड पैर रख दिया, अलका ने हाथ हटा लिया

तुषार- ये कुछ hi देर में तुम्हारे अंदर जाने वाला ह कब तक शरमाओगी

अलका- मैंने आज तक पोर्न मूवीज भी नहीं देखि ह मुझे दर लगता ह

तुषार- दर ये तो प्यार करने की चीज ह दर कैसा

अलका- तो प्यार क्र लो न किसने रोका ह

तुषार- ये तुम्हारे नाजुक हाथो में खेलना चाहता ह

अलका- इसकी सही जगह हाथो में नहीं कही और ह

तुषार- वह तो ये जायेगा hi

अलका- तो पंहुचा दो इसकी सही जगह

तुषार- सोच लो चिल्लाना मत

अलका- मैं क्यों चिल्लाऊंगी

तुषार- जब ये अंदर जाता ह तो अच्छे अच्छे की चीख निकल जाती ह

अलका- सच में इतना दर्द होता ह

तुषार- दर्द तो होगा

अलका- मुझे दर लग रहा ह

तुषार- दर के आगे hi जीत ह

तुषार ने आयल की बोतल ली और बहुत सारा आयल अपने लुंड पैर डालने लगा, अलका ने पहेली बार तुषार के लुंड की तरफ देखा और लुंड देखते hi उसकी आँखे फटी रह गई,

अलका- ये ये क्या ह इतना बड़ा मैं मर जाउंगी

तुषार- इसी लिए इसे चिकना क्र रहा हु ताकि तुम्हे तकलीफ न हो

अलका- ये नहीं घुसेगा ये नहीं घुस सकता वह

तुषार- ये तो सब जगह घुस जाता ह

अलका- ये कैसे जा सकता ह वह

तुषार- अभी पता चल जायेगा,

फिर तुषार ने अलका के पेअर खोले, अलका मन क्र रही थी लेकिन तुषार ने बड़े प्यार से जंघे सहलाते हुए अलका को गरम करके उसके पेअर खोल hi दिए,

अलका की छोटी सी ुनचुइ छूट तुषार के सामने थी, छूट क्या एक पतली सी लाइन थी, तुसाहर भी सरप्राइज था छूट ऐसी भी होती ह बिलकुल बंद,

फिर तुषार ने बहुत सा तेल लेकर अलका की छूट पैर रगड़ा और अच्छे से अंदर तक तेल लगया, उंगली छूट में जाते hi अलका की दर्द भरी aahhhhhhhhhhhh निकल गई, लेकिन अलका पूइर तरह गरम थी, और छूट पानी छोड़ रही थी तो उसे दर्द काम मजा ज्यादा आया,

लेकिन वो मजा अब अलका को सजा लगने वाला था, तुषार अलका के पैरो के बिच आया और लुंड को छूट पैर रगड़ा, लुंड छूट के मुँह पैर ऐसा लग रहा था जैसे, चींटी के बांये हुए छेद में कोई सांप घुसने की कोशिश क्र रहा हो,

तुषार ने अलका की आँखों में देखते हुए लुंड पैर दबाव बनाया, अलका के मुँह से ahhhhhhhhhhhhhh निकल गई, लुंड के दबाव से hi उसकी चीख सी निकल गई, अभी तो लुंड छूट का मुँह हल्का सा hi खोला था, अलका को अहसास हुआ जैसे किसी ने वह से चिर दिया हो,

अलका- दर्द हो रहा ह

तुषार को पता था अगर ये रुक गई तो फिर बहुत टाइम लगेगा गरम होने में और दर और बढ़ जायेगा, इसलिए तुषार ने दबाव बढ़ाया और लुंड ने छूट को चिर दिया,

अलका बहुत जोर से चीख पड़ी, ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh नहीं नहीं नहीं बस बस बस बस ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh निकल लो प्लस निकल लो प्लस प्लस प्लस

लेकिन तुषार रुका नहीं उसने थोड़ा दबाव और बनाया तो एक चौथाई लुंड अक की छूट में घुस गया, अलका की आंखे बहार आ गई,

तुषार रुक गया उसने हिलना डुलना बंद क्र दिया, अलका ने तुषार की कमर में नाख़ून गड़े हुए थे, दर्द की वजह से, तुषार ने तुरंत अलका की चूचिया सहलानी शुरू क्र दी, और हॉट उसके होतो से मिला दिए, 5 मिनट्स तक तुषार ने बस वही किया लुंड को जरा भी नहीं हिलाया,

अब अलका को कुछ रहत थी, छूट में गिला पैन आ गया था,

छूट एक ऐसी जगह ह जहा कितन अभी आयल लगा लो लेकिन जो चिकनाहट छूट से निकले पानी से होती ह वो किसी आयल से नहीं हो पति,

तुषार ने हल्का सा लुंड हिलाया, लेकिन लूँ डीटीओ बुरी तरह फसा हुआ था, छूट से खून बहे जार है था, तुषार ने कमा को आगे पीछे हिलने की जगह साइड में हिलना शुरू किया, जिससे लुंड को जगह बन सके,

अलका को दर्द हो रहा था लेकिन तुषार रुका नहीं, जल्दी hi दर्द में भी अलका को मजा आने लगा था, और वो मजा अलका ज्यादा देर बर्दास्त नहीं क्र पाई और झड़ने लगी, अलका के झड़ते hi छूट और गीली हो गई, लुंड के लिए जगह बानी तो तुषार ने तुरंत लुंड को आगे पीछे हिलना शुरू किया,

अलका को दर्द तो हो रहा था लेकिन झड़ने में मजा बहुत आ रहा था, और इसी का फायदा उठाते हुए तुषार ने आधा लुंड अलका की छूट में उतर दिया था,

अलका की हालत नहीं थी की वो कोई पोजीशन बदल सके, इसलिए तुषार शामे पोजीशन में hi कमर हिलता रहा, एक बार झड़ने में hi अलका की छूट काफी खुल चुकी थी, तुषार आधे घुसे लुंड पैर hi चुदाई करता रहा, अलका झाड़ तो गाइट hi लेकिन उसे कोई थकन का अहसास नहीं था, बल्कि और एनर्जी बढ़ी हुई सी महसूस हो रही थी, अगले 15 मिनट्स तक तुसाहर आधे घुसे लुंड से hi अलका को छोड़ता रहा, और अलका फि झड़ने लगी, और छूट खुल बंद होने लगी, जिससे लुंड को और जगह मिल गई,

अब लुंड अलका की बच्चे दानी से टकरा रहा था, अब इससे आगे जाने की गुंजाईश नहीं थी, लुंड अभी भी बहार था, तुषार कुछ पालो के लिए रुका और फिर से छोड़ने लगा, अलका फिर तीसरी बार झड़ने लगी, लेकिन तुषार को अभी टाइम लगने वाला था,, लेकिन अब अलका की हालत ख़राब होने लगी थी, अब वो तुषार के धक्के बर्दास्त नहीं क्र प् रही थी,

उसकी छूट में जलन होने लगी थी

अलका- बस बस ahahhhhhhhhhhh मैं और नहीं शी सकती अह्ह्ह्हह्ह प्लस

तुषार अलका की हालत समझ गया और उसने पूरा फोकस अपने झड़ने पैर लगा दिया, जिसके वजह से उसके धक्के और तेज हो गए, और अलका के मुँह से जोर दर चींखे निकने लगी

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh बस बस बस बस ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

अलका एक बार और झड़ने लगी, जो अब तक बस बस क्र रही थी वही यस यस यस यस करने लगी, अह्ह्ह आइए hi ऐसे hi करते रो करते रो ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

तुषार ने भी जोर दर हुंकार भरी और दोनों एक साथ झड़ने लगे, तुषार ने पूरा रास अलका की छूट की गहराइयों में भर दिया,

अलका तो बेसुध सी होकर पद गई, तुषार भी उसे उप्पेर hi लेता रहा, कुछ देर बाद तुसाहर ने लुंड बहार खींचना चाहा लेकिन लुंड अभी भी फसा हुआ सा महसूस हो रहा था, और अलका को फिर दर्द का अहसास हुआ,

अलका- नहीं नहीं अंदर hi रहने दो दर्द होगा

तुषार रुक गया उसने लुंड को शांत होने का टाइम दिया और जैसे hi लुंड ढिल्ला होने लगा तो अलका को छूट में खली खली सा महसूस होने लगा, तुषार ने फिर बड़े प्यार से लुंड को बाहर निकला तो अलका को ऐसा लगा जैसे उसके अंदर से कुछ निकल लिया गया हो, उसकी छूट का मुँह किसी बोरिंग की तरह खुल गया था जो दर्द की वजह से बंद नहीं हो प् रहा था,

और अंदर से खली खली लग रहा था, अलका की हिम्मत नहीं हो रही थी कुछ बोल पाने की, वो अपने पेअर भी बंद नहीं क्र प् रही थी, अलका दोनों पेअर खोले पड़ी रही, तुषार कुछ देर ऐस एही लेता रहा फिर उसने अलका को उठाया और बाथरूम में लजक्र शीट पैर बैठा दिया,

अलका- मुझस ेबैत नहीं जार है,

तुषार ने सहारा देकर उसे पकडे रखा और अलका ने अपनी छूट को पानी से धोया जिससे में लाल रंग का लॉस लैसा सा निकल रहा था, जो अलका की फटी हुई छूट से निकला खून था जो अलका और तुषार की रास के साथ मिल गया था,

फिर तुषार ने अपना लुंड भी साफ़ kiya,a ुर अलका को बाहर लेकर सोफे पैर लिटा दिया और बीएड शीट शंगे क्र दी, फिर अलका को बीएड पैर लिटाया, अलका में तो हिम्मत hi नहीं थी वो कुछ क्र एक यह पति,

तुषार ने अलका को उसकी निघ्त्य वापस पहनाई और चादर धक् दी, तुषार कुछ देर उसके पास hi लेता रहा, लेकिन अलका तो 5 मिनट में hi सो गई, फिर तुसाहर उठा और कपडे पहन क्र बहार आ गया,

अब उसे जाना था रूचि के पास तो उसने दीपा को कॉल की ,

दीपा- क्र दिया किला फतह

तुसाहर- रूचि कहा ह

दीपा- वो वेट क्र रही ह तेरा, ***** फार्म हाउस पैर, पूरा फार्म हाउस बुक ह तुम दोनों की सुहागरात के लिए

तुषार- ठंकु दी

दीपा- अब भी दी hi बोलोगे

तुसाहर- अब जॉब hi रिश्ता बन गया ह लेकिन वो रिश्ता कैसे ख़तम हो सकता ह

दीपा- ठीक ह , उसका ख्याल रखना उसे आज इतना प्यार देना की वो आज के दिन को कभी भूल hi न पाए, और है फार्महाउस 3 दिन के लिए बुक ह इसलिए 3 दिन आराम से एन्जॉय करना, कोई जल्दबाजी नहीं ह, माँ को मैं समझा दूंगी और बाकि सबको बता दूंगी किट ु किसी काम से बहार गया ह

तुषार- जी जरूर और जल्दी हु आप भी काम से काम 7 दिन के लिए मेरे साथ होगी फिर पूरा मजा दूंगा आपको

दीपा- मैं इंतजार करुँगी

तुषार ने फ़ोन कटा और निचे आ गया, लेकिन हॉल में अंजलि बैठी हुई मिल गई

कुछ परेशां सी थी

तुसाहर- क्या हुआ माँ कुछ परेशां लग रही हो



अंजलि- राजेश जी नहीं पहुंचे अभी उन्हें तो 11 बजे ताका ा जाना चाइये था लेकिन अब तक नहीं आये हैं, उनका फ़ोन भी नहीं लग रहा,
 
अपडेट-58






तुषार- हो सकता स्टेशन से कोई सवारी न मिली हो,

अंजलि- मुझे चिंता हो रही ह

तुषार- आपने मुझे क्यों नहीं बुलाया

अंजलि- आप की सुहागरात थी तो परेशां करना ठीक नहीं समझा

तुषार- परिवार से ज्यादा जरुरी कुछ नहीं होता,

आप चिंता मत कीजिये मैं एक बार स्टेशन तक देख आता हु, तब तक आप गाओं में कॉल कीजिये वह से निकले या नहीं

अंजलि- वह से तो निकल चुके

तुषार तुरंत रेलवे स्टेशन की तरफ निकल गया,

तुषार को निकले हुए 5 मिनट्स hi हुए थे की नंदनी ऊपर से दौड़ती हुई आई

आंटी आंटी कहा हो आप

अंजलि- क्या हुआ नंदनी

नंदनी- आंटी कमल जेल से भाग गया ह

अंजलि- क्या ये कैसे हो सकता ह

नंदनी- पापा का कॉल आया था अभी उन्होंने बताया की सम्हाल क्र रहे, अंडरवर्ल्ड का हाथ ह उसे जेल से भागने में

अंजलि- ये तो बहुत गलत हो गया, टुशु को कॉल करना होगा

तभी दूर की बेल्ल बजी,

अंजलि- लगता ह राजेश जी आ गए हैं,

अंजलि ने जालिद से दूर खोला,

वही तुषार स्टेशन पंहुचा लेकिन वह कोई नहीं था, तुषार ने अंजलि को कॉल मिलाया लेकिन किसी ने उठाया नहीं, 2-3 बार कॉल करने के बाद उसने दीपा को कॉल की उसने भी नहीं उठाया, एक एक करके तुषार ने सबको कॉल मिलाया, उसकी कार वापस घर की तरफ दौड़ रही थी, और वो सबको कॉल लगाए जा रहा था,

तभी रिंकी की कॉल आई,

रिंकी- hello तुषार तुषार

तुषार- है रिंकी क्या हुआ इतनी घबराई हुई क्यों हो

रिंकी- तुषार घर में कुछ गुंडे घुस आये हैं और सबको पकड़ लिया ह तुम कहा हो जल्दी आ जाओ

तुषार- मैं आ रहा हु तुम फ़िक्र मत करो बस आ रहा हु

रिंकी- मुझे दर लग रहा जल्दी आ जाओ

तुषार- कितने लोग हैं

रिंकी- मुझे नहीं पता मैं बाथरूम में थी तो पता नहीं चला बहार से एक दम चीखने की आवाज आई मैंने बहार निकल क्र देखा तो 2 आदमी मम्मी को ले जा रहे थे, मैंने धीरे से बहार आकर देखा तो 15-20 आदमी थे जिनके पास हतियार थे, और उन्होंने सबको बंदी बना रखा था,

उनमे से एक पूछ रहा था सब रूम चेक क्र लिए, तो सब बोल रहे है सब रूम चेक क्र लिया जीतनेय भी लोग यहाँ थे सब पकड़ लिए, शायद उन्हें पता नहीं होगा मैं और मम्मी एक hi रूम में थे उस टाइम,

तुषार- ये अच्छा हुआ तुम सेफ हो

रिंकी- पुलिस को कॉल करे

तुषार- नहीं ये पुलिस का रोल नहीं ह अब मुझे ये सब ख़तम करना hi होगा

रिंकी- अब मैं क्या करू

तुषार- तुम्हे एक काम करना होगा, थोड़ा रिस्की ह

रिंकी- तुम्हारे और परिवार के लिए जान भी लगा दूंगी

तुषार- तो धयान से सुनो मेरे रूम में जाओ जल्दी से और मेरी अलमीरा में…………………………………

रिंकी- ठीक ह

फिर तुषार ने किसी को कॉल लगया,

उधर से- hello

तुषार- hello बड़े भाई, खेल शुरू करो

उधर से- कितना टाइम

तुषार- 1 हरष बस

उधर से- ok

छोटा सा फ़्लैश बैक

जैसे hi अंजलि ने दूर खोला तो सामने से 5 लोग गन के साथ एक दम अंदर घुस गए, और सीधे अंजलि के सर पैर गन लगा दी, जब तक कुछ समझ आता, 10-12 लोग और आ गए, और नंदनी के सर पैर गन लगा दी,

बाकि आदमी सीधे रूम्स की तरफ दौड़े, उन्हें जैसे पुरे घर का नक्शा पता था, कुछ लोग निचे के रूम्स में गए कुछ उप्पेर के रूम्स में, और सबके रूम्स में से जो मिलता रहा उसे गन पॉइंट पैर निचे ले आये,

रिंकी उस टाइम बाथरूम में थी, और अनीता रिंकी से बात ाकरने आई थी, सभी रूम में ेके क मेंबर hi मिला था तो वो अनीता को पकड़ क्र ले गए,

तभी रिंकी ने तुषार को कॉल किया,

सबको बहार ले जाने लगे तभी रिंकी चिलाती हुई आई मम्मी मम्मी कहा ले जा रहे हो मेरी मम्मी को,

एक आदमी- सालो इसे कैसे छोड़ िद्या

दूसरा- पता नहीं कहा छुपी थी

पहला- अच्छा ह ये तो किसी चुटिया की औलाद लगती ह खुद hi बहार आ गई, पकड़ लो इसे

रिंकी को भी पकड़ लिया,

सीमा- अनीता जी आपकी बेटी पागल ह क्या ये बच सकती थी पागलो की तरह बहार आ गई

अनीता- मैं खुद सोच में पद गई हु मेरी बेटी इतनी बड़ी पागल कैसे हो सकती ह

रिंकी के फेस पैर कोई दर महसूस नहीं हो रहा था, जिसे देख क्र अंजलि धीरे से बोली- मुझे ऐसा नहीं लगता बात कुछ और ह,

फिर सबको कार्स में बैठा क्र ले गए चंडीगढ़ से बहार एक फार्महाउसे पैर, और अंदर लेजाकर बांध दिया गया,

सबके फेस से कपडा हटाया गया, सभी अपनी नाईट ड्रेस में hi थे, और सबसे बुरी हालत में थी अलका, जो बहुत hi पतली सी निघ्त्य में थी, उसकी हालत तो वैसे hi ख़राब थी, उससे तो ठीक से चला भी नहीं जा रहा था, वह खड़े हर गुंडे की नजर सभी औरतो को घूरे जा रही थी,

तभी सुरेश और सोहन अंदर आये.

सुरेश- तू एक बार फिर मेरे पास आ गई और साथ में तेरी ये तितलियाँ भी

ओहो आज तो मेरी बेतिया भी यही हैं,

अलका- पापा ये सब क्या हो रहा ह हमे यहाँ क्यों बंधा हुआ ह

सोहन- तुम लोगो को शर्म नहीं आई अपने बाप के दुश्मनो के साथ मिल गई

अलका- दुश्मन तुम ह उनके

सुरेश- इसी लिए तुम यहाँ बंधी हुई हो

तभी सकील अंदर आया

सकील- अरे यार ये सब तो बड़ी खूबसूरत हैं मेरे आदमियों की तो चंडी हो गई, आज अच्छा मजा मिलेगा

तभी पीछे से आवाज आई

वो कहा ह

ये सोनिया थी

एक आदमी- वह और कोई नहीं था

सुरेश- वो फिर निकल गया

सोनिया- वो कही नहीं जायेगा उसे आना hi होगा इस बार उसे सामने आना hi होगा

तभी एक लाइट और जाली, सबने उधर देखा तो राजेश एक साइड में बढे पड़े थे, उसकी बहुत बुरी हालत की हुई थी, खून से लथपथ थे,

सुरेश- अंजलि आज तेरा और तेरे परिवार का आखरी दिन ह,

अंजलि- तेरी इतनी औकात नहीं ह

अलका- माँ आप ऐसा कैसे क्र सकती हैं

सोनिया- बीटा तू hi दुश्मन के साथ मिल गई ह

अलका- हम आपकी बेतिया हैं और आप देख रही हैं मैं किस हालत में हु आपके ये गुंडे मुझे ऐसे hi उठा लाये

सोनिया- खोलो इसे

एक आदमी ने अलका को खोला वो जैसे hi कड़ी हुई वो लड़खड़ा गई, उसे एक तेज दर्द हुआ उसकी छूट में,

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh उसने तुरंत अपना पेट पकड़ लिया,

सोनिया- क्या हुआ

अलका- कुछ नहीं

सोनिया अलका की हालत देख क्र एक दम गुस्से में छिलाई

सोनिया- टब hi चुद गई उस सैंड से

अलका ने तुरंत सोनिया की तरफ देखा, वह बंधी हर औरत के फेस पैर स्माइल थी, आशिमा और रश्मि के अलावा

सोनिया- बांध दो इसे अब ये मेरी बेटी नहीं रही.

वर्षा- तुमने हमे बेटी मन hi कब था और ये आदमी जिसे तुम अपना पति मानती हो इसने कब बेटी मन हमे, हमेशा से गन्दी नजर राखी इसने हम पैर,

सोनिया- जो था घर में hi था न

वर्षा- घर में, तुम चाहती थी हमारा बाप अपनी hi बेटियों के साथ वो सब करे जैसे तुमने अंजलि दीदी के साथ करवाया था,

सोनिया- मैंने इसे मजे की दुनिया दिखाई थी लेकिन ये तो भाग गई

वर्षा- उस गंदगी को तुम मजे की दुनिया बोल रही हो

Soniya-ab कोनसा अच्छे इंसान के साथ ह ये अब भी तो ऐसे hi इंसान के साथ ह, जो जगह जगह मुँह मरता फिरता ह,

अलका- ख़बरदार जो उसके लिए कुछ कहा तो वो पति ह मेरा

सोहन- हाहाहाहा अपने भाई को तो हाथ लगाने नहीं दिया और चूड़ी भी ह तो अपने hi भांजे से

अलका- बस करो ये गन्दी बकवास

सुरेश- है बंद करो ये सब मर डालो सबको

तभी रिंकी के पास बैठी नंदनी के कान में रिंकी बोली, थोड़ी देर बकवास और करते रहो, आंटी के कानो तक खबर डालो तुषार को टाइम चाहिए,

तुषार का नाम सुनते hi नंदनी को जोश आ गया, वो एक दम बोली

नंदनी- तुझे शर्म नहीं आ रही ह न अपनी बहन के लिए ये सब बोल रहा ह, अरे जलील इंसान तू आज तक मेरे साथ तो कभी कुछ ठीक से क्र नहीं पाया और दुनिया की हर औरत के साथ करना चाहता ह

सोहन- रंडी चुप हो जा वर्ण सब पहले तू मारेगी, तू भी चूड़ी ह न उससे

रिंकी ने अनीता की तरफ टाइम वैस्ट करने का इशारा किया,

अनीता ने अंजलि की तरफ,

नंदनी- है चूड़ी हु कोण नहीं छुड़ा उससे

सोनिया- देखा अलका देखा किस किस को छोड़ चुक्का ह वो, इस नंदनी को इस अनीता और रिंकी ये दोनों माँ बेटी भी चूड़ी ह उससे,

अनीता- है चूड़ी हु और अपनी मर्जी से खुश होकर अपनी hi पति को दिखा दिखा क्र चूड़ी हु

सोनिया- है तेरी उसी गलती की वजह से तो उसका पता चला ह, तेरे पति ने hi उसकी पहचान बताई थी मुझे

अनीता को अपनी गलती का एक बार फिर अहसास हुआ,

नंदनी- तुम दोनों माँ बेटे क्या कर लोगे, मैं और कोमल दोनों एक साथ चूड़े हैं उससे तेरे बेटे के सामने चूड़े हैं

तभी क आवाज आई,

उसकी सजा भी मिलेगी तुम दोनों को

ये था कमल जो किसी जानवर की तरह अंदर आ रहा था,

सोनिया- मेरा बीटा तो बहार आ गया, और आज hi हम लोग ये देश छोड़ देंगे, लेकिन तुम सबका क्या होगा

नंदनी- तुम कही नहीं जा पाओगे

सोनिया- सुन रही ह अलका कितनी को छोड़ चुक्का ह वो, रजनी को कोमल को नंदनी को अनीता को रिंकी को और न जाने किस किस को

वर्षा- अपना नाम क्यों नहीं लिया मरस. सोनिया चोपड़ा

अलका की आँखों में आंसू थे उसे बहुत तकलीफ हो रही थी, उसे ये सब तुषार का धोका नजर आ रहा था, लेकिन सोइया का नाम भी इस लिस्ट में जुड़ने से अलका पूरी तरह टूट गई,

सोनिया- चुप क्र हराम जड़ी

नंदनी- वो क्यों चुप रहे बताओ न अपनी बेटी को और अपने पति को की तू कैसे अपने hi ऑफिस में तुषार के लुंड पैर उछाल रही थी,

और ये नामर्द भी तो देख चुक्का ह तुझे चुड़ते हुए उससे, और है वो पुराने स्टाफ उनका क्या उनसे भी तो चूड़ी ह न तू दो दो से एक साथ भी चूड़ी ह,

सोनिया गुस्से में नंदनी की तरफ चली

सुरेश- सोनिया ये सब क्या बोल रही ह ये

सोनिया- झूट बोल रही ह

सुरेश- हरामजादी तू उस कमीने से चुद रही थी, भें की लोदी तुझे कभी कुछ करने से मन नहीं किया फिर भी चुद रही थी,

ननदनी- मेरे पापा से भी तो चुद रही थी न उस दिन और वो कमिसनीयर से भी तो चुद क्र hi इस नल्ले कमल की शादी करवाई थी तूने

सुरेश- तू ये सब क्र रही थी

सोनिया- तो आपको क्या लगता था वो लोग ऐसे hi आपका साथ दे रहे थे,

सुरेश- रंडी ह तू

इतना सब होने के बाद अंजलि बोली

अंजलि- तो तूने क्या सोचा था जो औरत अपने ऑफिस में शादी शुदा मर्द से छोड़ने लगी हो वो कैसी होगी, पैसो के लिए hi तो शादी की थी इसने तुझसे जैसे तूने मेरी माँ से की थी,

सब कुछ तेरा hi तो था इतना पैसा देवी जैसी पत्नी, फिर भी तेरा दिल इस रंडी पैर आया था तो तुझे ये hi मिलने वाला था न,

तूने अपनी बेटी को प्रग्नेंट किया, और तुझे क्या इनाम मिलता, और जिन्हे तू अपनी औलाद समझता ह इसकी गारंटी ह ये तेरी hi औलादे हैं

सोनिया- ख़बरदार अंजलि मैं तुझे जान से मर दूंगी

सुरेश- क्या बकवास क्र रही ह कहना क्या चाहती ह तू

अंजलि- तूने सोचा कभी तेरे 4 औलाद हैं तो तेरी बेतिया तेरे बेटो से बिलकुल अलग सवभाव की क्यों हैं

सुरेश- सीधी बात बोल

अंजलि- क्यों कुटिया बता दू तेरा रान्दीपना

सोनिया- इसकी बात मत सुनो ये सब बकवास क्र रही ह

अंजलि- हहहहह बकवास तो तू दर क्यों रही ह

सुरेश- बोल क्या कहना चाहती ह

अंजलि- तेरी बड़ी बेटी वर्षा वो तेरी नहीं सुमित की बेटी ह

अंजलि के मुँह से इतना सुनते hi वह सबके मुँह खुले रह गए, और सबसे ज्यादा शॉकेड वर्षा थी, उसकी आँखों में आंसू आ गए थे,

सोनिया- चुप हो जा रंडी

सुरेश- रुक जा सोनिया रुक जा, तेरे पास क्या सबूत ह

अंजलि- सबूत तो इस सोनिया क आँखों में दिख जायेगा तुझे

सुरेश ने सोनिया की तरफ देखा, सोनिया नज़ारे चुराने लगी,

अंजलि- इसी लिए सुमित का लगाव वर्षा की तरफ था बचपन से hi, उसी ने वर्षा को संस्कार दिए और बाप का प्यार दिया,

सुरेश- ये सब क्र रही थी तू उसके साथ खास आदमी खास आदमी बोल क्र उससे चुद रही थी तू,

कमल- ये सब क्या बकवास लगा राखी ह तुम लोगो ने कोण किस्से छुड़ा क्या फरक पड़ता ह, कोनसे तुम लोग प्यार के बंधन में बंधे थे,

आज इन सब को मोत के घाट उतर क्र इनकी प्रॉपर्टी अपने नाम करके, यहाँ से निकल जायेंगे,

सोनिया- जब तक वो यहाँ नहीं आ जाता हम नहीं निकल सकते

कमल- एक एक को मरना शुरू करते हैं तब तक उसे भी ढूंढ लेंगे, आदमी लगे हुए हैं न उसे ढूंढ़ने में, फिर कमल अलका के पास पंहुचा और उसकी जांघ सहलाने लगा,

कमल- इसका स्वाद चखना ह मुझे

रिंकी- हहहहहहह तुम क्यों तकलीफ करते हो उसे ढूंढ़ने की वो खुद ढूंढ लेगा ooffffffffffffff श्री श्री श्री, ढूंढ लेगा नहीं, धुन दलिया ह,

सोहन- क्या बकवास कर रही ह

रिंकी- बकवास हाहाहाहा वो देख तेरी माँ को छोड़ने वाला तेरा असली बाप आ चुक्का ह,

तभी एक चाकू आकर कमल के हाथ में घुस गया,

अह्हह्ह्ह्ह aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

फिर तुषार इतनी फुर्ती से अंदर आया की जब तक सकील के आदमी हतियार तानते तब तक तुषार कमल के पास पहुंच चुक्का था और चाकू निकल क्र कमल की गार्डन पैर लगा दिया था,

तुषार- ख़बरदार अगर कोई हिला तो इसकी गार्डन को गाजर की तरह काट दूंगा

सोनिया- rukoooooooooooooooo

छोड़ दे मेरे बेटे को

तुषार- हहहहह बेटे की इतनी फ़िक्र ह और ये जो तेरी hi बेटी के साथ गन्दी हरकत क्र रहा था उसकी फ़िक्र नहीं ह तुझे

सोनिया- तुषार मैं खेती हु छोड़ दे उसे,

सकील- देख क्या रहे हो भून दो उसे

तुषार- ू चाचा रुक जा रुक जा ज्यादा मत उछाल कही तेरे उछलने के चक्क्र में ये कबूतर की तरह फड़फड़ाता गिरे

सुरेश- रुक जाओ सकील

सकील- तू यहाँ तक पंहुचा कैसे

तुषार- मैं तो पूरी बकवास देखता और सनटैन हुआ आ रहा था यहाँ, मुझसे पहले मेरे कैमरा यहाँ पहुंच गया था,

सकील- कैमरा, कोई गद्दार ह हमारे ग्रुप में

तुषार- हहहहह सेल तुझमे इतनी hi अकाल ह, यहाँ कोई गद्दार नहीं ह, गद्दारो को तो तू बहार की सत्ता देकर आया ह, यहाँ तो कैमरा तुम लोग खुद लाये हो उस लड़की रिंकी के रूप में,

अब जाकर पुरे परिवार को समझ आया की रिंकी क्यों खुद उछाल क्र गुण्डो के हटो में आ गई थी,

सकील- तू अकेला ह किस किस को मरेगा

तुषार- अबे चूतिये मैं अंदर आ चुक्का हु तो बहार कोई बचा होगा क्या, ह तो तू बड़ा वाला चुटिया,

सकील ने बहार जाने की कोशिश की तो

तुषार- आआआआआ रुक रुक रुक सेल हिला तो इसकी गार्डन गई, सब अपने अपने हतियार निचे रखो और इन सबको खोल दो,

सोनिया- रख दो सब रख दो

सब अपने हतियार रखने लगे लेकिन एक आदमी कुछ ज्यादा hi होशियार बन्न गया था जो था सोहन, उसे शायद किसी मूवी का सीन याद आ गया और वो उसी स्टाइल में गन को निचे रखते हुए तुषार को देख रहा था, और जैसे hi तुषार का धयान बाकि आदमियों पैर गया तो सोहन ने तुरंत गोली चला दी, और गोली सीधा छाती को चीरते हुए बहार निकल गई,

वह खड़े और बैठे सबकी चीख निकल गई, तुषार खून से पूरा भीग चुक्का था,

लेकिन ये खून तुषार का नहीं बल्कि कमल का था, सोहन निशाना सही नहीं लगा पाया उसने गोली अपने hi भाई को मर दी थी, कमल वही जमीन पैर गिर गया, तुषार भी एक दम भोचक्का रह गया था उसे ये उम्मीद नहीं थी, कुछ सेकण्ड्स के लिए तुषार खड़ा रह गया,

सकील- मारो सेल को

तुषार को होश आया और वो उछाल क्र आदमियों पैर टूट पड़ा, जब तक आदमी सम्हलते तुषार ने अपनी ताकत और फुर्ती का ऐसा प्रदर्शन किया की सरे आदमी चित पड़े हुए थे,

सोनिया कमल को गॉड में लिए बैठी थी, और रोये जा रही थी, और तुषार आदमियों को ठिकाने लगा रहा था,

तभी सुरेश ने गन अंजलि के सर पर तान दी,

सुरेश- रुक जा वर्ण इसे मर दूंगा

तुषार एक दम रुक गया, तभी पीछे से सोहन ने एक रोड उसके सर में मर दी, जिससे वो गिर गया, तभी सकील ने तुषार को दबोच लिया, दो आदमी और हिम्मत जूता क्र खड़े हुए और तुषार को पकड़ लिया और बांध दिया,

सकील- बहुत जान ह तुझमे लेकिन तू अब बच क्र नहीं जा सकता अब तुम सब यही मरोगे,

तुषार- हहहहहह यार तू बहुत बड़ा वाला चुटिया ह तुझे डॉन का राइट हैंड बना किसने दिया,

सकील- क्या बकवास क्र रहा ह

तुषार- तुझे मैं याद नहीं हु क्या

सकील- मुझे क्यों याद होगा तू

तुषार- अबे तुझसे मिला तो था मैं तेरे आदमियों के बिच रहा तो था 5 दिन तक

सकील- मुझे मुझे कब मिला

तुषार- सुरेश तूने गलत आदमी के साथ हाथ मिल लिया ह, इसकी सत्ता तो गई

सकील- तू फिर हमे कंफ्यूज करने की कोशिश क्र रहा ह

तुसाहर- ऐसा क्र जरा अपने उप वाले अड्डे पैर बात क्र फिर बिहार वाले पैर करना फिर बंगाल वाले पैर भी करना और है मुंबई वाले पैर सबसे पहले क्र, और है उसके बाद तू दुबई भी बात करना, उसके बाद मैं बताऊंगा

सकील- तुझे कैसे पता वह का

तुषार- अरे अभी तो 3-4 hi बताये बाकि तू खुद बात क्र ले

सुरेश- क्या बकवास हो रही ह ये सब

तुषार- चोपड़ा तूने गलत आदमी पैर दाव लगा दिया ह, ये तो बिलकुल नल्ला ह

सकील- तू जनता नहीं मुझे ठीक ह

तुषार- अरे मैं तो जनता हु तुझे मिला तो था तेरे अड्डे पैर तेरे आदमियों के साथ hi तो रहा था वह

सकील- क्या बकवास क्र रहा ह मैं कब मिला तुझे

तुषार- तुझे कैसे याद होगा तू तो उस टाइम तुषार को ढूंढ़ने में बिजी था ऊह्ह्ह्ह श्री मुझे hi ढूंढ़ने में बिजी था और मैं hi तेरे पास मेरी खबर लेकर आया था,

सकील ने थोड़ा दिमाग पैर जोर दिया

सकील- वो तू था लेकिन वो तो अपाहिज था

तुषार- इस लिए तू चुटिया ह सेल

सकील- तुझे क्या फायदा हुआ मेरे पास आने का

तुषार- तू पहले कॉल क्र ले तभी तो तुझे फायदे के पता चलेगा

सकील ने तुरंत कॉल लगाया, तो वह से किसी ने कॉल उठाया

अननोन- hello कोण

सकील- मैं सकील बोल रहा हु राणा कहा

अननोन- कोण सकील बे यहाँ कोई राणा वन नहीं ह ये रंगा भाई का अड्डा ह

सकील- क्या बकवास क्र रहा ह

उनकों- फ़ोन रख बे वर्ण वही आकर मरूंगा

सकील ने तुषार की तरफ देखा. उसने फिर दूसरी जगह फ़ोन मिलाया वह से भी यही जवाब मिला, ऐसे hi सकील ने अपने सब अड्डों पैर फ़ोन किया सबका एक hi जवाब था, सकील अपना सर पीटने लगा

तुषार- अरे रुक रुक पहले दुबई भी कॉल क्र ले

सकील ने दुबई कॉल लगाया

उनकों- hello

सकील- hello सोऐब भाई से बात करवाओ

उनकों- वो बिजी हैं अभी बॉस के साथ मीटिंग में ह

सकील- उनसे कहो सकील का कॉल ह अर्जेंट

उनकों- सकील अब तुम उनके लिए अर्जेंट नहीं हो, यहाँ रंगा आया हुआ ह उसके साथ मीटिंग ह

सकील ने गुस्से में फ़ोन को पटक दिया, और तुषार की गिरवां पकड़ ली कैसे कैसे किया तूने

तुषार- बहुत आसान था, तू जबसे डॉन का खास बना ह तूने अपने hi लोगो से दुरी बना ली तुझे लगा तू डॉन की तरह दूर रह क्र hi काम चला लेगा, लेकिन यहाँ किसको क्या चाहिए तूने सोचा तेरे पास कितने आदमी ह तूने कभी हिसाब लगाया,

मैंने बस तेरे आदमियों के सामने ऑफर रखा, जो बिकता रहा उसे खरीदता रहा जो नहीं बिका उसे पुलिस को देता रहा, यहाँ कमिशर और वह मला ऐसे hi बाकि दोस्त भी बन गए थे जिन्होंने हेल्प की, बाकि काम रंगा करता रहा, तुझे तो ये भी पता नहीं था जो आदमी तेरे साथ मुझे ढूंढ रहे थे वो ढूंढ नहीं रहे थे बल्कि, तेरे hi काम की रिपोटिंग रंगा को क्र रहे थे,

सकील गुस्से में तुषार को मरने लगा, वो तुषार पैर मुको की बरसात किये जार है था, वह बंधी तुषार की फॅमिली नहीं नहीं करके रोने लगी,

लेकिन तुषार हसे जा रहा था, तभी गोली चलने की आवाज आई,

सोनिया- तेरी वजह से मेरा बीटा मारा ह तो तेरे अपने भी मरेंगे और तड़प तड़प क्र मरेंगे,

सोनिया ने राजेश के दोनों पैरो में गोली मर दी थी,

तुषार- एक चिनगढ़ के साथ, सोनिया रुका जा वर्ण ऐसी मोत दूंगा की तेरी आत्मा दुबारा पैदा होने के लिए भी मन क्र देगी

सोनिया- मुझे डरा रहा ह मैं डरने वालो में से नहीं हु

अलका- तुम क्रिमिनल हो तुम सब क्रिमिनल्स हो

सोनिया- और ये क्या ह ये भी तो क्रिमिनल ह इसने भी तो खून किये हैं इसने भी तो लोगो को मारा ह,

वर्षा- ये तेरी गलत फहमी ह इसने तो किसी को मारा hi नहीं,

सोनिया- रजनी उसे किसने मारा

दीपा- मैंने

सोनिया- अजय को इसने मारा

अनीता- अजय को उसी की पत्नी ने मारा

सोनिया- मेरा बीटा इसकी वजह से मारा

वर्षा- उसे तो तेरे hi बेटे ने मारा ह

सोनिया- यश भी तो इसकी वजह से

रिंकी- उसे तो मैंने जेल भिजवाया ह

अंजलि- उस पैर तो कोई इल्जाम भी नहीं ह सोनिया, लेकिन तुम लोगो ने किस किस को मारा

सुरेश- तू जानना चाहती ह किस किस को मारा, तो सुन

सबसे पहले तेरे नाना और माँ का एक्सीडेंट मैंने hi करवाया था,

अंजलि की आँखों से आंसू आ गए

अंजलि- मुझे शक था की जरूर तूने hi किया होगा,

सुरेश- और आज तू और तेरा ये पूरा परिवार मरेगा, सकील मर दो सबको

सोनिया- इस तुषार को मैं मरूंगी इसकी वजह से मेरा पूरा परिवार तबाह हो गया,

सोनिया उठी और खंजर उठा लिया और तुषार के सामने आ गई,

अलका- नहीं नहीं नहीं माँ नहीं वो मेरे पति हैं आपकी बेटी के पति हैं उन्हें कुछ मत करना

सोनिया- पति तू इसे पति बोलती ह आज के बाद न ये रहेगा न hi ये किसी का पति बन सकेगा, बहुत गरूर ह तुझे तेरे इस लुंड पैर आज मैं इसे hi काट दूंगी,

सोनिया आगे बढ़ी वह बंधे सभी की चीख निकल गई, लेकिन तभी एक धमाका सा हुआ,

एक कार फार्महाउसे का दूर तोड़ती हुई अंदर आ घुसी, और सीधी टक्कर सकील में मरी, सब एक दम चौंक गए, तभी उसमे से रूचि उछाल क्र बहार निकली और सोनिया के फेस पैर एक लात मर दी, सोनिया दूर जाकर गिरी,

सब भोचके से देख रहे थे ये भूचाल कहा से आ गया, रूचि लग भी पूरी वेरियर रही थी, ब्लैक टॉप एंड जैकेट और लाठर की ब्लैक जीन्स, ये तो लड़ाई के हालत थे, वर्ण कोई रूचि को इस हालत में देखता तो खड़े खड़े पंत में hi झाड़ जाता, इतनी हॉट लग रही थी,


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तभी सकील के आदमी जो अब तक होश में आ चुके थे वो रूचि की तरफ दौड़े, लेकिन रूचि ने तुरंत के लम्बा सा खंजर उठा लिया और हवा में घूमना शुरू क्र दिया, सब एक दम रुक गए,

रूचि ने मौका देख क्र खंजर को तुषार की रस्सियों में फसाया और खींच दिया, जिससे तुषार की एक हाथ की रस्सी काट गई,

रूचि को बिजी देख क्र गुण्डे उस पैर टूट पड़े, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी, सोनिया दूर पड़ी हुई देख रही थी, तुषार की नजर सोनिया पैर hi थी उसके फेस पैर एक मुस्कान थी जिसे देख सोनिया के अंदर से अजीब सा दर पैदा हो गया,

जैसे hi गुंडे पास आये तुषार खड़ा हुआ और जो हाथ कुर्सी से बंधा हुआ था, उसे कुर्सी सहित घुमा दिया, और एक साथ 3-4 लोगो के जबड़े तोड़ दिए,

कुर्सी भी टूट गई, और शेर आजाद हो गया, फिर तुषार ने जो तांडव किया, की सकील सुरेश सोहन और उनके आदमी पल भर में hi जमीन में पड़े दिन में hi टारे गईं रहे थे, तब तक रूचि ने बाकि सब को खोल दिया था, राजेश जिसकी हालत बहुत ख़राब थी, अंजलि ने दीपा और सीमा को राजेश को हॉस्पिटल ले जाने को कहा,



तुषार ने जल्दी से राजेश को उठाया और कार में बैठने लगा, की तभी सोनिया ने गोली चला दी, वर्षा और रूचि दोनों एक साथ तुषार पैर कूद पड़े, जिस वजह से तुसाहर का बैलेंस बिगड़ गया और वो निचे गिरा, तुसाहर तो गोली से बच गया लेकिन गोली ने किसी और को अपना टारगेट बना लिया,
 
अपडेट-59






तुषार से बच क्र गोली सीधे सोहन को लगी जो पीछे से तुषार को मरने के लिए आ रहा था, गोली लगते hi सोहन बस माँ hi बोल पाया और जमीन पैर पड़ते hi मर गया, सोनिया जोर से दहाड़ क्र सोहन की तरफ भागी, इधर दीपा और सीमा राजेश को लेकर निकल गए,

सोहन के मरने पैर अलका का दिल दुख उससे उसकी माँ का रोना बर्दास्त नहीं हो रहा था, उसकी माँ जैसी भी थी पैर माँ तो थी सोहन और कमल भाई थे, नंदनी के फेस पैर अलग hi गुस्सा सा था,

सोनिया दहाड़े मर क्र रोये जार hi थी,

अंजलि- तेरी वजह से मेरी माँ मुझसे दूर हुई तेरी वजह से मेरे नाना मर गए, तेरी वजह से hi तेरा भाई कमल मारा गया राजेश जी के हाथो, तेरी वजह से तेरा बीटा कमल मारा गया और तेरी hi वजह से तेरे हाथो तेरा बीटा सोहन भी मर गया, क्या मिला तुझे क्या पाया तूने कितनी दौलत पाई तूने, न तू अपने पति की हो सकीय दूसरे मर्दो के साथ सोती रही, न अपनी बेटियों की हो सकीय उन्हें hi उनके बाप और भाई के साथ सेक्स करवाना चाहती थी,

न hi अपने बेटो की हो सकीय जिन्हे तूने गलत रस्ते पैर भेज दिया, ये जानते हुए भी की क्रिमिनल्स के साथ क्या होता, न तू अपनी बहुओ की हो सकीय, और मेरी तो तू कभी थी hi नहीं, किसी एक की तो हो जाती,

सोनिया बस रोये जा रही थी, तभी वह पुलिस आ गई, कमिश्नर भी साथ था, पुलिस ने सकील सुरेश और सोनिया को गिरफ्तार क्र लिया,

अंजलि सबको लेकर हॉस्पिटल पहुंची जहा राजेश की हालत बहुत ख़राब थी, गोली लगने और इलाज मिलने में बहुत देर हो चुकी थी, डॉक्टर्स ने गोली तो निकल दी थी लेकिन वो पैरो को ठीक नहीं क्र प् रहे थे,

अंजलि आज बहुत रो रही थी,

अंजलि- मेरी वजह से आज फिर उन्हें दर्द झेलना पद रहा ह, बहुत तकलीफे दी हैं मैंने उन्हें, मैं खुद को कभी माफ़ नहीं क्र पाऊँगी, तुषार उन्हें बचा ले, बचा ले उन्हें चाहे कुछ भी हो जाये उन्हें कुछ नहीं होना चाहिए,

तुषार- कुछ नहीं होगा माँ कुछ नहीं होगा,

तुषार तुरंत डॉक्टर के पास गया और बात की अमरीका ट्रांसफर करने की, मंत्री की पहुंच से तुरंत एयर एम्बुलेंस मिल गई, जिसका पूरा खर्चा अंजलि ने उठाया,

अगले दिन न्यूज़ थी की सुरेश ने कमल को जेल से भगाया और किसी बात पैर सकील और सुरेश का झगड़ा हुआ और सकील ने सोहन और कमल को मर दिया,

सोनिया अपने बेटो के गम में पागल हो गई, राजेश का अमेरिका में इलाज हो गया वो अपने पैरो पैर चलने फिरने लगा, इस सब में 1 मंथ गुजर गया, इस 1 मंथ तुषार अमेरिका में hi रहा,

जब वो राजेश को लेकर वापस आया तो यहाँ सब कुछ बदल चुक्का था, अब रंगा का कण्ट्रोल था जो तुषार के लिए बड़े भाई जैसा था, वही अलका कही चली गई थी किसी को नहीं पता वो कहा चली गई थी, वर्षा मुंबई चली गई थी, उसने किसी को अपना एड्रेस भी नहीं दिया था उसने खुद को सबसे दूर क्र लिया था,

रिंकी और अनीता अमेरिका चली गई थी, वह उनका घर था तो उन्होंने वही रहने का फैसला किया, वह उनसे कोई ये पूछने वाला नहीं था की ये बच्चे किसके हैं पति कहा ह साथ क्यों नहीं ह, शादी की या नहीं की, दोनों सकूं से वह रहने लगे,

कपिल और सचिन ने पूरा बिज़नेस सम्हाल लिया था, आशिमा और रश्मि भी दोनों के साथ लग गई,

राजेश ने गाओं में रहने का फैसला किया उसे शहर में रहना पसंद नहीं आ रहा था,

अंजलि दीपा सीमा और रूचि ने चंडीगढ़ छोड़ दिया और सबसे दूर हिमाचल में एक घर खरीद लिया, जिसमे चारो ने साथ मिलकर रहना शुरू क्र दिया, वही नंदनी चंडीगढ़ में hi रुकी, उसकी बहुत इच्छा थी की वो अंजलि के साथ रहे लेकिन अंजलि ने उसके भले के लिए उसे वही रखा,

अंजलि और तीनो बहेनो को सबसे अलग hi रहना था ताकि उनके और तुषार के रिश्तो की जानकारी किसी को न हो जाये,

तुषार की जिम्मेदारी थी वो टाइम टाइम पैर सबसे मिल आता था, नंदनी, अनीता रिंकी सबको एक दूसरे के बारे में पता था तो कोई भी तुषार पैर अपना अधिकार नहीं दिखती थी,

राजेश का इलाज करवा क्र वापस आये हुए 15 दिन हो चुके थे, अंजलि सीमा और दीपा हिमाचल की पहाड़ियों में एक बहुत hi खूबसूरत घर में बैठे हुए थे,

तीनो के हाथ में चाय थी,

सीमा- माँ अब क्या अब तो सब दुशमन ख़तम हो गए, अब हम क्या हमेशा ऐसे hi रहेंगे

दीपा- है माँ हमारा क्या भविष्य ह, क्या साडी जिंदगी हम ऐसे hi सबसे दूर रहेंगे, जब ये बच्चे पैदा होंगे हम इनके बाप का नाम क्या बताएँगे, समाज में कैसे फेस करेंगे,

अंजलि- बीटा वक़्त सब करवा देगा, जब तुम सब पैदा हुए थे मुझे भी नहीं पता था क्या करना ह, कैसे समाज में तुम्हारी पहचान बताउंगी, लेकिन आज तुम सबकी पहचान ह, तो ये बच्चे भी अपनी पहेचा लेकर आएंगे,

सीमा- माँ हम वैसे hi रह रहे हैं जैसे आपने कहा ह, लेकिन सचिन और कपिल हमेशा यहाँ आना चाहते हैं उन्हें कैसे रोकोगे, फ्यूचर में आशिमा और रश्मि भी यहाँ आने लगी तो कैसे बताएँगे उन्हें कैसे सम्हालेगी सब,

अंजलि- अभी जैसा मैंने बताया ह वैसे hi चलना ह, यहाँ के लोगो के लिए रूचि तुषार की पत्नी होगी, और तुम दोनों बहन hi हो और मैं माँ,

सीमा- लेकिन वो ह कहा कल रात से घर नहीं आये हैं, बहार इतनी ठण्ड ह बर्फ पद रही ह और वो लोग गायब हैं,

दीपा- आज उन्हें ठण्ड नहीं लगने वाली, आज दोनों के जिस्म आग में तप रहे होंगे, रूचि की तपश्या उसके प्यार का फल टुशु उसकी छूट में बरसा रहा होगा,

अंजलि- दीपू कितनी गन्दी हो गई ह तू

दीपा- मैं कुछ गलत तोडना बोल रही हु आज उसकी छूट की धजिया उदा रहा होगा, उसे आज अहसास हो रहा होगा टुशु से प्यार करके वो कितना दर्द देता ह,

सीमा- और मजा, उसका नहीं बताया मजा कितना देता ह

दीपा- है मजा दिख रहा ह हम तीनो की कोक में,

तीनो हसने लगी,

वही..

हिमाचल की पहाड़ियों में, बर्फ गिर रही थी, एक सुमसान जगह जहा बस बर्फ hi बर्फ थी, इंसानो को वह जाने की परमिशन नहीं थी,

एक नंगे बदन बाला की खूबसूरत लड़की जिसकी चूचिया किसी पहाड़ी की तरह तानी कड़ी थी, वो बर्फ पैर नानाजी लेती थी,


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उसके उप्पेर एक सैंड जैसा नौजवान मर्द लड़की के पैरो के बिच था,

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Ladka-Teyar ह न दाल दू

लड़की- दाल दो, मैं तो कब से तैयार हु इसे लेने के लिए

लड़का- दर्द होगा, ठण्ड में वैसे भी ज्यादा सुखी हो रही होगी

लड़की- मैं तुम्हारी बाकि प्रेमिकाओ की तरह नहीं हु, आज तुम्हे जन्नत न दिखा दी तो मेरा नाम भी रूचि नहीं,

ये दोनों तुषार और रूचि थे, जिन्होंने अपना पहला सम्भोग करने के लिए खुली पहाड़ी और उप्पेर से गिरती हुई बर्फ को चुना था,

तुषार ने लुंड रूचि की छूट पैर लगाया और दबाव बनाने लगा, पहेली बार में लुंड फिसल गया, जिससे रुचे हसने लगी, तुषार ने फिर कोशिश की लेकिन फिर वही हुआ लुंड फिसल गया,

इस बार तुषार ने लुंड को पकडे रख्हा और दबाव बनाया लुंड का टोपा रूचि की छूट में घुस गया,

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh

तुषार- दर्द हुआ न

रूचि की आँखों में आंसू थे लेकिन फेस पैर स्माइल थी,

रूचि- इस दर्द के लिए hi तो मैंने इतना सबर किया ह, तुम रुको नहीं अब आवाज नहीं आएगी,

तुषार ने फिर जोर लगाया, और लुंड छूट को चीरता हु अआधा घुस गया, रूचि की आँखों से लगातार आंसू भी रहे थे लेकिन फेस पैर से स्माइल गायब नहीं हुई, जिसे देख क्र तुषार भी शॉकेड था, तुषार को पता था उसके लुंड को झेलना किसी गाढ़ी के बास्के नहीं ह और रूचि इतनी आसानी से शी रही थी,

तुषार ने हलके हलके ढके लगाने शुरू किये,

रूचि- पूरा दाल दो

तुसाहर- बहुत दर्द होगा

रूचि- कोई बात नहीं बस दाल दो

तुषार ने एक जोर दर धक्का मारा और लुंड लागबहग पूरा घुस गया था, रूचि के मुँह से ahhhhhhhhhhhhh निकली और एक पल के लिए पहेली बार उसके फेस से स्माइल गायब हुई, लेकिन अगले hi पल वही स्माइल फिर उसके फेस पैर थी,

तुषार ने हलके हलके धक्के लगाने शुरू क्र दिए थे, ठण्ड में दोनों के शरीर एक दम सुन्न हो रखे थे, जिससे रूचि को दर्द का अहसास कुछ काम हो रहा था, निचे से रूचि की छूट से निकलने वाला खून सफ़ीद बर्फ को लाल क्र रहा था, 20 मिनट्स तक तुषार ऐसे hi हलके हलके धक्को से रूचि को छोड़ता रहा, रूचि भी निचे से कमा हिला क्र उसका साथ दे रही थी,

कुछ देर बाद रूचि ने तुषार को उल्टा और उसे निचे लिटाया खुद उसके उप्पेर आ गई, पहेली बार में hi रूचि तुषार के लुंड पैर सवारी क्र रही थी,


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बहुत हिम्मत थी रूचि में, तुषार को डबल मजा आ रहा था, आज कोई उसकी टक्कर की मिली थी, आज तुषार नहीं छोड़ रहा था बल्कि रूचि तुषार को छोड़ रही थी, तुषार की हालत ख़राब हो चुकी थी, वाइस इस बिच में रुचे एक बार झाड़ चुकी थी, लेकिन रूचि की जगह कोई और होती तो 2-3 बार झाड़ चुकी होती, दोनों की चुदाई 40 मिनट्स तक चली जिसमे रुचे 2 बार झड़ी,

तुषार- मैं आ रहा हु

रूचि- अंदर मत करना मुझे अभी माँ नहीं बनना

तुषार ने तुरंत लुंड बहार निकल लिया, और पूरा रास रुचे की चूचियों पैर निकल दिया,

दोनों ऐसे hi बर्फ में लेट गए,

रूचि- uuuffffffffffffffffffffffff मजा आ गया, जिंदगी का असली मजा आज आया ह

तुषार- तुम्हे अभी माँ नहीं बनना

रूचि- अगर मैं भी अभी माँ बन गई तो जो तीनो घर में ग्याभन होकर बैठी हैं उनके बच्चे कोण पलवायेगा

तुषार- ओह्ह्ह बड़ी दूर की सोची,

रूचि- चलो अब निचे चलते हैं बाकि वही करेंगे वर्ण अगर तुम्हे ठण्ड लग गई तो वो तीनो मेरी जान ले लेंगी,

फिर दोनों ने कपडे पहने, बर्फ पैर अपना खून देख क्र रूचि मुस्कुराई,

फिर दोनों निचे एक गेस्टहाउसे पैर आ गए,

जहा दोनों ने फिर चुदाई की और शाम को घर पहुंचे,

घर में अनजलि ने आरती उतर क्र दोनों का स्वागत किया,

रूचि- ये सब किस लिए माँ

अंजलि- तुम दोनों का ग्रह परवेस नहीं क्र पाई थी, आज तुम सपनी जिंदःगी कस एक और पड़ाव पार करके आई हो इसलिए स्वागत क्र रही हु,

फिर सबने एक साथ खाना खाया,

टाइम बड़ी तेजी से बीत रहा था, अब सबके पेट बहार दिखने लगे थे, अंजलि का 9 महीना चल रहा था, और सीमा दीपा का 8तह,

सबसे पहला फ़ोन जेल से आया था, कोमल ने एक बेटी को जनम दिया था, घर में सबसे पहेली बेटी ने कदम रखा था, लेकिनसबसे बुरा ये था की वो जेल में पैदा हुई थी, रूचि और तुषार दोनों निकल गए कोमल से मिलने,

कोमल बहुत खुश थी, तुषार भी बहुत खुश था उसका पहला बच्चा जो आया था इस दुनिया में, वह पता चला की कोमल को अगले महीने छोड़ दिया जायेगा उसके कुछ महीने माफ़ क्र दिए गए हैं अच्छे व्यव्हार के कारन,

6 दिन बाद नंदनी की कॉल आई उसने भी एक बेटी को जनम दिया ह, तुषार और रुचे वह भी पहुंचे,

नंदनी- आंटी नहीं आई

रूचि- वो आएँगी बाद में अभी उनकी तबियत ठीक नहीं ह,

तुसाहर- नंदनी मेरे लिए एक काम करोगी

नंदनी- कह दो बस

तुषार- कोमल को अपने साथ रखो वो बहुत तनाव में ह वो बच्चे को सही दिशा शायद न दिखा पाए,

ननदनी- तुम चिंता मत करो मैं उसके जेल से निकलते hi उसे लेकर लंदन चली जाउंगी,

तुसाहर- अमेरिका चली जाओ मेरे लिए थोड़ी रहत रहेगी

नंदनी- हसी ठीक ह अमेरिका चली जाउंगी, हमारे बच्चे वही रहेंगे, बस तुम मिलने आते रहना,

तुसाहर- जरूर आऊंगा

अंजलि रिंकी और अनीता तीनो को कभी भी बच्चे हो सकते थे, तुषार परेशां था अगर रिंकी या अनीता को बच्चा हुआ तो वो अंजलि को अकेले छोड़ क्र कैसे जायेगा,

लेकिन किस्मत ने साथ दिया पहले अंजलि को बीटा हुआ, जिसे देख क्र तुषा रकि ख़ुशी का ठिकाना नहीं था, वो बहुत खुश था क्योकि अंजलि hi उसके लिए पहेली और सबस ेमहत्वपुर्ण इंसाने थी,

दो दिन बाद रिंकी का कॉल आया की मम्मी को पैन होने शुरू हो गए हैं कभी भी डॉक्टर्स के पास जाना पड़ेगा, तुषार ने तुरंत अमेरिका के लिए फ्लैट पकड़ ली,

अंजलि ने रिंकी को कॉल क्या

अंजलि- रिंकी बीटा तुम दोनों की देलेवरी एक साथ एक hi दिन होनी चाहिए,

रिंकी- ऐसा क्यों आंटी

अंजलि- टाइम आने पैर बता दूंगी

रिंकी- ठीक ह

तुषार वह पहुंच गया तो पता चला दोनों माँ बेटी हॉस्पिटल में हैं, रिंकी ने खुद की देलेवरी भी प्लान क्र ली ह साथ में,

दोनों को बेतिया पैदा हुई, तुषार बहुत खुश था, बहुत खूबसूरत थी दोनों, वह दोनों बच्चो के पिता का नाम तुषार दिया गया,

वह से तुषार निकल गया वापस इंडिया आने के लिए, लेकिन वो घर नहीं पंहुचा,

सीमा- माँ टुशु वह से आ चुक्का ह घर क्यों नहीं आया,

अंजलि- कुछ जरुरी होगा इसलिए रुके होंगे आ जयेन्गे

अंजलि ने बोल तो दिया लेकिन उसे भी चिंता हो रही थी,

अंजलि ने पता करवाया तो पता चला की तुषार ने अमेरिका से फाइट मुंबई की लिट् hi,

अंजलि का माथा ठनका ऐसे में वो मुंबई क्यों गया ह,

तुषार पंहुचा था वर्षा के पास, जो मुंबई में अकेल ी रह रही थी सबसे दूर, इंडस्ट्री से भी उसने कनेक्शन ख़तम किया हुआ था, तुषार ने सचिन से बोल क्र एक ऑफिस मुंबई में खुलवा दिया था जहा वर्षा ने सम्हाल लिया था, वर्षा भी माँ बनने वाली थी और उसने भी एक बेटी को जनम दिया, तुषार के चारो तरफ बेतिया hi बेतिया थी,

तुषार वह से वापस घर आया,

अंजलि- कहा रह गए थे

तुषार- एक काम था

अंजलि- मुंबई में क्या काम

तुषार- किसी से मिलना था

अंजलि- आपको मुझसे छुपाने की जरुरत नहीं ह, मुझे यकीन ह की जो मैं सोच रही हु वाइस यही होगा इसलिए न तो झूट बोलने की जरुरत ह न hi छुपाने की

तुषार- श्री मैं छुपाना नहीं छटा था, लेकिन उस टाइम हालत ऐसे थे की कुछ बता नहीं पाया फिर बताने की हिम्मत नहीं हुई, लेकिन अब छुपा नहींसकता

वर्षा ने मेरी बेटी को जनम दिया ह,

अंजलि- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बस वही बची थी, मैं हमेशा सोचती थी वो कैसे बच गई उसे प्यार क्यों नहीं हुआ आपसे, लेकिन मैं गलत थी मुझे ख़ुशी ह लेकिन आपको छुपाना नहीं चाहिए था,

तुषार- इस बार माफ़ क्र दो आगे से गलती नहीं होगी,

तुषार- माँ पिछले 15 दिन में मैं 6 बच्चो का बाप बन चुक्का हु और शायद अगले 15-20 दिन में 3 और आ जायेंगे,

तभी दीपा ा गई

दीपा- तीन कैसे हम तो 2 ह न

अंजलि- अलका

दीपा- क्या वो भी माँ बनने वाली ह लेकिन वो ह कहा उस हादसे के बाद तो वो कभी आई hi नहीं मिलने न कोई वास्ता रखा

सीमा और रूचि भी वही आ गई,

अंजलि- उसने नहीं रखा तो क्या हुआ हमे तो रखना था न, मैं उससे मिलने नहीं जा सकती पेट की वजह से लेकिन ये हमेशा मिलते रहे हैं उससे,

दीपा- वो ह कहा

तुषार- गाओं में

सब एक साथ क्या, लेकिन क्यों हमे तो आज तक पता hi नहीं, पापा ने भी नहीं बताया कभी

तुषार- ये उसी का फैसला था किसी को इस बारे में जानकरी न दी जाये,

सीमा- लेकिन क्यों

तुसाहर- उस हादसे के बाद अलका बुरी तरह टूट गई उसकी पूरी दुनिया बदल गई, दोनों भाई मर गए माँ पागल हो गई पिता जेल चले गए, पति जेस्पर उसे सबसे ज्यादा विश्वास और प्यार था उसके अफेयर्स के इतने किस्से सामने आ गए की उसका विश्वास पूरी तरह टूट गया, वो सब छोड़ क्र चली गाइट hi, बड़ी मुश्किल से उसे ढूंढा फिर वर्षा और मैं ेउसे समझने की कोशिश की, तब मैंने वर्षा और अलका को पूरी कहानी सुनाई कैसे मुझे वो सब करना पड़ा और कोमल और नंदनी के साथ किन हालातो में करना पड़ा,

तब जाकर वो कुछ शांत हुई लेकिन उसकी एक शरत थी की वो सबके समाने नहीं आना चाहती, और समाज के समाने वो मेरी पत्नी की तरह रहना चाहती ह, यहाँ तो उसे सब जानते थे लेकिन गाओं में कोई नहीं जनता था, और मेरे लिए तो मेरा गाओं hi समाज ह, इसलिए उसने गाओं में रहे कर पापा की सेवा करने का फैसला किया,

गाओं में वो मेरी पत्नी की तरह रह रही ह, गाओं वालो को ये hi पता ह अलका मेरी पत्नी ह, और मैं शहर में काम करता हु, बाकि फॅमिली माँ के साथ कही बहार रहती हैं, और बाकि बहेनो की शादी हो चुकी ह,

रूचि- माँ आपको पता था ये सब

अंजलि- है मुझे पता था,

दीपा- तो कब आ रही ह वह से खुश खबरि

तुषार- आप दोनों के साथ hi क्योकि तुम तीनो को एक hi दिन में प्रेग्नेंट किया था,

सीमा- देख रही हो माँ तीनो को एक hi दिन में माँ बना दिया इसने, क्या खा क्र पैदा किया आपने इसे

अंजलि- अब मैं क्या कहु ये चाहे तो हम सब को एक साथ एक hi बार में प्रेग्नेंट क्र सकते हैं

रूचि- माँ अगले महीने अलका माँ बनेगी गाओं वालो की नजर में वो तुषार का hi बच्चा ह, तो हम सब कैसे जा पाएंगे ये सोचा ह आपने

अंजलि- जाना तो होगा, तब तक मैं कुछ ठीक हो जाउंगी, और तू चलेगी हमारे साथ

रूचि- अगर दीपा और सीमा दी की भी तभी दलेवेरय हुई तो क्या करोगी,

अंजलि- एडजस्ट करना पड़ेगा सबको,

रूचि- हम सब तो एडजस्ट क्र लेंगे लेकिन आशिमा और रश्मि की भी खबर कभी भी आ सकती ह, उनका क्या करोगी वह तो आपको जाना पड़ेगा,

अंजलि- कैसे मुसीबत में फसा दिया ह,

रूचि- टेंशन न लो मैं और टुशु सम्हाल लेंगे इसीलिए मैंने बेबी प्लान नहीं किया अभी पहले आपके बच्चे तो पाल लू,

सब हसने लगे,

फिर कुछ दिनों में hi आशिमा और रश्मि ने एक एक लड़की को जनम दिया, रूचि और तुषार दोनों वह गए, तुषार ने अंजलि की तबियत ख़राब का बहाना बना दिया,

फिर आया दिन जब अलका ने एक बेटी को जनम दिया, अंजलि रूचि तुषार सचिन वह पहुंचे, उसके दो दिन बाद सीमा और दीपा दोनों ने बेटियों को जनम दिया,

अब तुषार 9 बच्चो का बाप था,

जिसमे सबसे बड़ी बेटी



  • कोमल – काम्य बेटी
  • नंदनी- नैना बेटी
  • अंजलि- ह्रदय बीटा
  • अनीता- अन्य बेटी
  • रिंकी- रिया बेटी
  • वर्षा- वन्य बेटी
  • अलका- ाव्य बेटी
  • सीमा- शनाया बेटी
  • दीपा- दिया बेटी
और दो

आशिमा- आशना बेटी

रश्मि- रैना बेटी

टोटल 11 बच्चे थे जिनमे एक अकेला बीटा था ह्रदय

उसका नाम भी इसी लिए ह्रदय रखा था क्योकि वो इन सबका ह्रदय hi था,

सब कुछ बहुत बढ़िया हो गया था,

अमेरिका में रिंकी तुषार की पत्नी थी, अनीता ने जुगाड़ लगा क्र अपने बच्चे के बिरथ सर्टिफिकेट में अनीता की जगह रिंकी लिखवा दिया, दोनों का एक hi दिन और एक hi टाइम था लगभग तो रिकॉर्ड के हिसाब से रिंकी ने जुड़वाँ बच्चो को जनम दिया था, ये अंजलि ने hi आईडिया दिया अनीता को,

वही ननदनी और कोमल ने खुल क्र समाज के सामने बोल दिया की उनके पति क्रिमिनल्स थे इसलिए वो बच्चो को अपने पतियों का नाम नहीं देंगे, उनके बच्चो के बाप के नाम की जगह खुद का नाम hi लिखवाया, मंत्री की बेटी थी तो वो तुसाहर का नाम नहीं ले सकते थे, वर्ण मीडिया में तुषार का नाम आ जाता और मीडिया तुषार के पीछे लग जाती खोजबीन करने,

अलका ने खुल के नाम लिख hi दिया था, मुंबई में वर्षा ने अपने बच्चे के पिता में तुषार का नाम लिखवाया,

इधर दीपा और अंजलि के बच्चो की माँ बन गई दीपा, दोनों के नाम में माँ का नाम दीपा लिखवाया गया और पिता का नाम तुषार का,

सब बहुत बढ़िया चल रहा था, फिर 1 साल बाद रूचि भी प्रेग्नेंट हो गई, और उसकी डिलीवरी की डेट थी 17 मार्च, अंजलि के बर्थडे के दिन, 16 मार्च की रात को तुषार के पास एक फ़ोन आया और वो निकल गया बिना किसी को कुछ बताये हुए,

20 साल बाद एक बड़े से हॉल में गद्दे बिछे हुए थे, जिसपर 11 जवान लड़के लड़किया बैठे थे, जिसमे 10 लड़किया और 1 लड़का था, सामने दो बुजुर्ग 60-60 साल की औरते बैठी थी, कहने को तो बुजुर्ग थी लेकिन उनकी सुंदरता और चेरे की चमक ऐसी थी की कोई जवान भी उनके सामने फ़ैल हो जाये,

एक लड़की – बड़ी माँ फिर वो चले कहा गए ऐसा क्या होगया की वो तीनो hi लापता हो गए, जिस लड़के को इतने सरे गुंडे कुछ नहीं क्र सके, वो ऐसे कैसे गायब हो गए, किसी को तो पता होगा क्या हुआ

और माँ भी साथ थी,

औरत- बेटी ाव्य

ये लड़की थी ाव्य अलका और तुषार की बेटी, और जिस औरत से वो बात क्र रही थी वो थी अंजलि और अनीता

अंजलि- बेटी ाव्य ये hi राज ह की वह हुआ क्यात है और वो तीनो गए कहा, अलका तुषार और रूचि तीनो एक साथ उनको गायब हुए आज 18 साल हो चुके हैं, और रुचे उस टाइम प्रेग्नेंट थी,

काम्य ( कोमल की बेटी)- इस सब में हमारे सबके पिता का पता कैसे चलेगा वॉक ों ह कहा ह आज तक हम सबकी माओ ने हमारे पिताओ के बारे में कुछ नहीं बताया, बस ये पता ह की तुषार जी ने हमे अपना नाम दिया,

दिया (दीपा की बेटी)- वो इम्पोर्टेन्ट नहीं ह हमारे पिता कोण ह क्यों ह कहा ह, तुषार जी ने हमे अपना नाम दिया ह तो वही हमारे पिता सामान ह, हम अपनी माओ पैर कोई इल्जाम नहीं लगाएंगे, लेकिन अलका रूचि और तुषार जिग ए कहा और कैसे, जैसा बड़ी माँ ने बताया उनका दिमाग बहुत तेज था, वही तुषार जी दिमाग और शरीर दोनों hi बहुत तेज थे, फिर उन लोगो को कोई ऐसे कैसे गायब क्र सकता ह,

अंजलि- विश्वास बीटा विश्वास दिखा क्र कुछ भी करवाया जा सकता ह, मुझे यकीन ह किसी अपने ने hi विश्वास घाट किया ह उनके साथ,

ह्रदय- लास्ट जानकारी क्या ह उनके बारे में बड़ी माँ

अंजलि- बस इतना की दिल्ली के बहार एक फार्महाउस पैर 60 लोगो की लाशे पड़ी हुई थी, जिन्हे किसी ने किसी धारधार हतियार से काट दिया था, उस टाइम रूचि, अलका और मेरा टुशु वही थे,

लेकिन वो लोग वह क्यों थे और वह से वॉक अहा चले गए किसी को नहीं पता, क्योकि ये बताने के लिए वह कोई जिन्दा hi नहीं बचा, आज तक पुरे देश की पुलिस सीबीआई कोई भी एजेंसी ये जानकारी नहीं निकला पाई ह,

वन्य( वर्षा की बेटी)- हम ढूंढेंगे उन्हें, मेरी माँ खेती ह वो उनके लिए बहुत खास थे, और जो मेरी माँ के लिए खास ह वो मेरे लिए खास ह,

ह्रदय- अब चाहे धरती उन्हें निगल गई हो या आस्मां उठा क्र ले गया हो, मैं उन्हें ढूंढ क्र लाऊंगा, ये मेरा वडा ह

तभी एक आवाज आई

तुझे hi करना ह तुझे hi करना होगा, तुझे मैंने बनाया hi ऐसा ह किट ु ये क्र सके, तेरी परवरिश hi मैंने ऐसी की ह की दुनिया की कोई ताकत तुझे नहीं झुका सकती,

ये आवाज थी दीपा की

ह्रदय- माँ आप चिंता मत कीजिये मैं ले आऊंगा

वह कोमल, ननदनी, रिंकी, अंजलि, अनीता, वर्षा, सीमा, और दीपा सब खड़े थे जिनके फेस पैर एक चमक एक गुस्सा और एक उम्मीद की किरण दिखा दे रही थी,

ह्रदय- आप सब मेरे लिए माँ की तरह ह मैं आप सबक कसम खाकर कहता हु मैं उन्हें ढूंढ क्र लाऊंगा

वह बैठी सब लड़किया- हम सब तुम्हारे साथ हैं

सीमा- माँ आज तो केक काट लो, अब तो ह्रदय ने बोल दिया ह वो ले आएगा, आपने पछले 18 साल से जन्मदिन नहीं बनाया ह

अंजलि- आज के दिन मेरा बीटा और 2 बेतिया चली गई मैं कैसे जनम दिन मन सकती हु,

ह्रदय- बड़ी माँ आपके अगले जन्मदिन से पहले वो आपके पास होने,

अंजलि ने ह्रदय को गले से लगा लिया,



एन्ड ऑफ़ फर्स्ट PART

कहानी का पहला part यही खता करती हु, जल्दी hi इसका अगला part आएगा,
 
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