Incest Porn Kahani - EK MAA - Page 2 - SexBaba
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Incest Porn Kahani - EK MAA

अपडेट-9








कुछ दिन बड़े अच्छे गुजरे बस तुषार काफी शांत था उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी सीमा से बात करने की, सीमा ने कुछ दिन कॉलेज से छुट्टी ली, फिर जब वो कॉलेज गई तो उसके फेस की चमक देखते hi मेघा बोली

हे मेरी छमकछल्लो बड़ी चमक रही ह ये निखार कहा से आ गया कोई मुर्गा फास गया क्या,

सीमा- पागल ह क्या कैसा निखार सब नार्मल hi तो ह

मेघा- अरे छमिया मुझे मत सीखा मैं पिछले 2 साल से चुद रही हु मुझे पता ह जब लड़की की तसली होती ह तो कैसा निखार आता ह

सीमा- ऐसा कुछ नहीं ह यार तू ऐसे hi सोच रही ह

मेघा- नहीं बताना तो मत बता लेकिन झूट मत बोल

सीमा- तेरे से क्या झूट बोलूंगी यार, तू सही बोल रही ह कितने टाइम से जिस मर्द की तलाश थी वो मुझे मिल गया

मेघा- सच्ची कोण ह वो माँ का लोढ़ा जिसने तेरी सील तोड़ी

सीमा- हमारे गाओं का hi ह

मेघा- पैसे वाला ह क्या

सीमा- नहीं उसके पास पैसे नहीं ह लेकिन जो उसके पास ह वो दुनिया में शायद hi किसी के पास हो

मेघा- हे ऐसा क्या ह उसके पास पोर्न मूवी से भी बड़ा ह क्या

सीमा- पोर्न का तो मुझे पता नहीं लेकिन मैंने किसी का नहीं देखा

मेघा- सच में फिर तो उसने तेरी अच्छे से तसली की होगी, सील यादगार तरीके से तुड़वाई न

सीमा- मेघा ऐसी तोड़ी की जीवन में खुद को भूल सकती हु लेकिन पहेली चुदाई नहीं भूल पाऊँगी, सच में अगर सील तुड़वानी हो तो ऐसे hi तुड़वानी चाहिए और ऐसा मर्द मिल जाये तो दुबारा किसी की तरफ नजर hi न उठे

मेघा- अच्छा जी ऐसा क्या क्र दिया उसने जो इतनी दीवानी हो गई ह उसकी

सीमा- तुझे क्या बताऊ अगर कोई 4 बचो की माँ भी उसके निचे आ जाये तो उसका भी खून निकल दे वो

मेघा- क्यों इतना फेंक रही ह कोण ह वो मुझे भी मिलवा उसे

सीमा- वो गोअन से बहार नहीं जाता इसलिए ज्यादा चांस नहीं ह मिलने का बड़ी मुश्किल से पटाया ह उसे

मेघा- अच्छा बच्चू छुपा क्र रखना चाहती ह कही प्यार तो नहीं हो गया उसे

सीमा- सच में यार अगर उसके लिए मुझे जान भी देनी पड़े तो दे दूंगी उसके अलावा न कोई दिखाई देता ह न सुनाई देता ह, शुरुआत हवस से हुई थी लेकिन उसने दिल में ऐसा वॉर किया की अब छूट से ज्यादा दिल उसके लिए पागल ह

मेघा- कण्ट्रोल क्र सीमा तेरे गाओं का ह शादी कैसे करेगी उसे इसलिए बस यही रुक जा मजे ले इससे ज्यादा मत बढ़

सीमा- बढ़ तो अब चुकी हु और शादी हो या न हो मेरे दिल में उसके अलावा कोई नहीं होगा

मेघा- और अगर उसके दिल में तेरे अलावा कोई आ गया तो

सीमा- मुझे फरक नहीं पड़ता मैं उसकी रानी नहीं दासी बनना चाहती हु और जैसा वो ह उसकी एक रानी तो हो hi नहीं सकती वो राजा ह राजा और राजा जितनी चाहे रनिया रखे और जैसा उसका पुरुष ह वो 10 रानियों को भी खुस रख सकता ह

मेघा- यार तूने तो मेरी छूट में आग लगवा दी ऐसा क्या ह उसमे जो तेरे मुँह से इतनी तारीफे निकल रही हैं एक बार मिलवा दे न मैं भी तो देखु,

सीमा- बस तू उसके बारे में सुन देखने का मौका मिला तो दिखा दूंगी, सही समय आने दे,

मेघा के दिल में थोड़ी सी जलन हुई क्योकि वो पिछले 2 साल से अपने बर्फ से चुद रही थी उसे अब मजा आना बंद हो गया था, लेकिन उसका बर्फ काफी पैसे वाला था तो वो उसे गिफ्ट देता रहता जिससे वो खुश रहती लेकिन केवल गिफ्ट से hi लड़किया खुश नहीं रहती ये सीमा को देख क्र उसे समझ आ गया था, सबसे जरुरी ह तन की संतुष्टि और फिर मन की संतुष्टि, सीमा को दोनों हो गई थी,

एक दिन सीमा और तुषार अकेले कॉलेज जा रहे थे, ये अंजलि ने hi प्लान किया था दीपा और रूचि को रोक लिया की वो उसके साथ चले, रस्ते में तुषार ख़ामोशी से चला जा रहा था, सीमा के दिल में हलचल थी वो तुषार से बात करना चाहती थी लेकिन कहा से शुरू करे, काफी हिम्मत जूता का सीमा बोली तुषार मेरी बात सुन

सीमा के शब्द सुनते hi तुषार की आँखों में आंसू आ गए और रट हुए सीमा के पेअर पकड़ लिए दीदी मुझे माफ़ क्र दो मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई मैं जानवर हु मैंने आपके साथ जानवरो जैसा बर्ताव किया, मुझे सजा दो मुझे मारो जो दिल में आये वो करो

सीमा ने तुषार को खड़ा किया और बोली तुझे लगता ह तूने गलती की

तुषार- है दीदी बहुत बड़ी गलती

सीमा- तो तू उसकी सजा भुगतने को तैयार ह

तुषार- आप हुकुम करो मैं अपनी जान दे दूंगा

सीमा- मुझे जान नहीं एक वडा चाहिए

तुषार ने सुर्प्रीस्ली सीमा को देखा

सीमा- बोल करेगा वडा

तुषार- बोलो दीदी क्या वडा चाहिए

सीमा- सोच ले तोड़ मत देना

तुषार- अगर ये वडा तोडा तो मैं अपनी जान दे दूंगा

सीमा- तो वडा क्र तू मुझे कभी भी छोड़ क्र नहीं जायेगा कभी मुझसे नाराज नहीं होगा हमेशा मुझसे प्यार करेगा तेरी लाइफ में चाहे कोई भी लड़की आ जाये तू अपनी बहन का साथ नहीं छोड़ेगा

तुषार- दीदी आप कैसी बात क्र रही हो मैं कभी आपसे दूर नहीं जाऊंगा चाहे कुछ भी हो जाये

सीमा- तू मेरा भाई ह लेकिन मैं तुझसे प्यार करने लगी हु टुशु ी लव ु

तुषार- ये क्या बोल रही हो दीदी ऐसा कैसे हो सकता ह

सीमा- एक भाई बहन सेक्स क्र सकते ह तो प्यार क्यों नहीं क्र सकते मैं तुझसे शादी करने के लिए नहीं बोल रही बस ये चाहती हु की तू मुझे अपनी प्रेमिका की तरह प्यार करे ये प्यार बस हम दोनों के दिल में होगा दुनिया के लिए हम भाई बहन hi ह,

तुषार खामोश खड़ा रहा

सीमा- क्या हुआ नहीं दे पायेगा अपनी इस बहन का साथ क्या मेरा प्यार अधूरा रह जायेगा

तुषार- नहीं दीदी ऐसा मत कहो मैं मरते दम तक आपके साथ हु चाहे कुछ हो जाये आपसे वडा किया ह तोडूंगा नहीं

सीमा ने तुषार को गले लगा लिया और उसके हॉट चुम लिए

तुषार- दीदी क्या करती हो कोई देख लेगा चलो यहाँ से

दोनों आगे चलने लगे

तुषार- दीदी उस दिन आपको बहुत दर्द हुआ होगा न

सीमा- तुझे क्या पता कितना दर्द हुआ था

तुषार- श्री दीदी मैं गुस्से और हवस में बहक गया था

सीमा- श्री क्यों बोल रहा ह उस दिन जो हुआ तेरी गलती नहीं ह और वैसे भी जो हुआ अच्छा हुआ क्योकि मेरे लिए मेरी पहला सेक्स यादगार बनाना चाहती थी, इससे ज्यादा यादगार नहीं हो सकता, और तू दुखी मत हो मुझे बहुत मजा आया उस दिन ऐसा सेक्स किस्मत वाली लड़कियों को मिलता ह

तुषार- दीदी सच में आपको मजा आया

सीमा शर्मा गई हैट बेशरम बार बार पूछेगा

तुषार- अच्छा जी उस दिन तो गालिया भी दे रही थी आज शर्मा रही हो,

सीमा- वो तो जब हवस छड़ी हुई थी तो पता नहीं क्या क्या बक गई

तुषार- कोई नहीं दीदी आपके मुँह से गालिया भी अच्छी लगती ह,

सीमा- अच्छे बीटा और सुनौ तुझे गालिया

तुषार- है है सुनाओ न

सीमा- तू तो पक्का बेशरम हो गया ह,

तुषार- प्लस दीदी सुनाओ न

सीमा- अच्छा एक शरत पैर

तुषार- वो क्या

सीमा- तू मुझे अकेले में सीमा बोलेगा दीदी नहीं तू मेरा प्रेमी ह, सबके सामने भाई ह अकेले में प्रेमी समझा और मैं चाहती हु तू मुझे कण्ट्रोल करे, उस दिन मुझे अहसास हुआ की मुझे कण्ट्रोल करवाना पसंद ह डोमिनाते होना पसंद ह इसलिए अकेले में तू मुझे खुल क्र डोमिनाते करेगा

तुषार- ठीक ह मेरी जान अकेले में मैं आपको सीमा बुलाऊंगा अब दो गली

सीमा- ये आपको क्या होता भेनचोद मैं तेरी प्रेमिका हु इतनी इज्जत से बोलेगा

तुषार- ठीक ह मेरी जान अब से नहीं बोलूंगा अब से तेरे मजे लूंगा,

दोनों भाई बहन ऐसे hi गन्दी अश्लील बाते करते हुए अपने अपने कॉलेज पहुंच गए, शाम को जब सब वापस आये तो घर का माहौल एक दम खुशनुमा था, जिसे देख अंजलि बहुत खुश थी, उसने इशारे में सीमा से बात की की तुषार से बात चित ठीक हो गई तो सीमा ने भी मुस्कुराते हुए है में इशारा किया,

अंजलि को अब सकूं था, उसके दिमाग में बस एक hi बात होती की उसके बच्चे एक साथ खुश रहे, सब अच्छा चल रहा था

एक दिन सुबह से लेकर रात तक बारिश होती रही वो भी बहुत तेज राजेश जा चुक्का था काम पैर बेचारा मजदूरी भी एक ऐसी मज़बूरी ह की ऐसे मौसम में भी आराम नहीं लेने देती, या राजेश खुद घर में रुकना नहीं चाहता, जो भी हो वो तो चला गया था लेकिन बाकि परिवार घर में hi था,

आज सीमा और दीपा ने मिल क्र पकोडिया बनाई थी इस परिवार के लिए पकोडिया बनना भी किसी दावत से काम नहीं था, शाम के 6 बज रहे थे अँधेरा हो चुक्का था सभी मस्ती करते हुए पकोडिया खा रहे थे तभी बहार से किसी कार के हॉर्न की आवाज आई तो रूचि कूद क्र देखने चल दी,

अंजलि- बीटा मैं देख आती हु इस टाइम कोण ह तू कहा जा रही ह

रूचि- अरे माँ आप बैठो मैं बस अभी देखती हु शायद कोई रास्ता भटक गया ह

रूचि बहार चली गई कुछ hi पालो बाद रूचि के चीखने की आवाज आई maaaaaaaaaaaaaaaaaaa

आवाज सुनते hi तुषार कूद क्र बहार आ गया तो एक कार तेजी से घर के पास से निकली, तुषार उसके पीछे भागने लगा, अंजलि भी बहार आई और माजरा समझते हुए सीमा से बोली अंदर रहना और दरवाजा बंद कर लो, अंजलि ने एक कुलधि उठाई और दौड़ने लगी.

बारिश बहुत तेज थी बहार का कुछ दिख नहीं रहा था कार ज्यादा तेज चल नहीं सकती थी क्योकि रास्ता कच्चा था, लेकिन तुषार और अंजलि के लिए तो ये घर था उन्हें हर रस्ते का पता था, जब कार वालो को ठीक से रास्ता नहीं दिखा तो उनका बैलेंस बिगड़ गया कार एक खेत में फिसल गई, टायर फास गए न आगे जा सके न पीछे,

तो कार में से जल्दी जल्दी 5 लोग उतरे और उनमे से एक ने रूचि को कंधे पैर उठा लिया और कार के सामने जलती लाइट के सामने ले आये, पीछे तुषार को कार की आवाज आणि बंद हो गई थी, लेकिन वो दौड़े जा रहा था, उसे दूर कार की लाइट जलती दिखाई दी लेकिन तभी वो लाइट भी बंद हो गई, उन लोगो ने कार की लाइट बंद क्र दी,

उनमे सभी ने रूचि को घेर लिया और कार के बोनट पैर लिटा दिया रूचि के मुँह पैर बारिश बहुत तेज गिर रही थी जिससे वो जैसे hi छिलने को मुँह खोलती पानी की वजह से आवाज नहीं निकल पति, तभी एक आदमी ने उसका मुँह दबा दिया, दूसरे आदमी ने उसका सूट गले से पकड़ा और खींच दिया सूट फैट ता चला गया, अँधेरे में ठीक से दिखा तो नहीं लेकिन रूचि उनके सामने ब्रा में थी, तभी एक आवाज आई क्यों साली कुटिया मुझ पैर हाथ उठाएगी आज तेरी छूट को फाड् क्र चीथड़े न उदा दिए तो मेरा नाम भूरा नहीं. जी है ये भूरा था जिसका झगड़ा हुआ था रूचि से और पंचायत ने उसे 1 महीने की सजा दी थी.

भूरा ने जैसे hi रूचि की चुकी को हाथ लगाया तभी कार के उप्पेर से तुषार कूद क्र आ गया, ऐसी रात में रूचि जो कार के बोनट पैर हाथ मर रही थी उसकी आवाज बहुत दूर तक जार hi थी जिससे सुनते और लाइट का अनुमान करते तुषार वह तक पहुंच चुक्का था,

तुषार ने एक लात भूरा के मुँह पैर मरी और जल्दी से रूचि को खींच क्र खड़ा किया, तभी उनमे से एक ने कार की लाइट जला दी, तुषार ने जल्दी से रूचि को खेत की साइड में बैठा दिया और उन सभी पैर कूद पड़ा, तुषार गाओं का पला बड़ा था उसे ऐसे मौसम में अच्छे से सम्हालना आता था लेकिन शायद उन लोगो को नहीं आता वो जैसे hi तुषार की तरफ भागते फिसल जाते जिसका फायदा तुषार अच्छे से उठा रहा था, वो कूद क्र एक घुसा कभी एक के मुँह पैर मरता तो कभी दूसरे के मुँह पैर,


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कुछ hi देर में तुषार ने उनकी हालत ख़राब क्र दी थी, लेकिन तभी तुषार का पेअर फिसल गया और उसका सर कार से टकरा गया वो जब तक सम्हालता उन लोग ने तुषार को पकड़ लिया, और उसकी पिटाई करने लगे, लेकिन पीछे से एक शेरनी दौड़ती हुई आ रही थी, उसने आते hi एक कुल्हाड़ी का वॉर उन लोगो पैर जो उनमे से एक के सर पैर लगा कुल्हाड़ी उलटी थी वर्ण वो मर hi जाता,

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उसके मुँह से चीख निकल गई बाकि ने पीछे देखा तो अंजलि अपनी साड़ी उठा क्र अपने पेटीकोट में उनस राखी थी हाथ में कुल्हाड़ी थी कार की लाइट में बारिश में भीगती हुई वो किसी शेरनी से काम नहीं लग रही थी, भूरा जैसे hi अंजलि की तरफ आया तो अंजलि ने भूरा की गार्डन पकड़ ली और खींच क्र जमीं में दे मारा, इधर तुषार भी सम्हाल गया, अब दोनों माँ bête ने मिलकर जो धुनाई की उन सब की, उनमे से तीन लोग भाग लिए वह से अब बचे भूरा और एक 26-27 साल का लड़का,

तुषार ने उस लड़के की गर्दन पकड़ ली और अंजलि कुल्हाड़ी लेकर भूरा की छाती पैर पेअर रख क्र कड़ी थी,


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अंजलि- भूरा तूने मेरी बेटी को हाथ लगा क्र अपनी मोत को छुआ ह आज तू जिन्दा नहीं बचेगा, तेरी इतनी हिम्मत हो गई किट ु बहार के लोगो को गाओं में बुला लाया, आज रात hi पंचायत बुलाई जाएगी और तेरा फैसला होगा अउ राइज तो गाओं वाले hi मोत दे देंगे,

भूरा- हहहहह तू इसे मोत देगी जानती ह कोण ह ये

ऐसी हालत में भी भूरा के मुँह से हसी सुन क्र अंजलि बोखला गई उसने उस लड़के को गौर से देखा लेकिन पहचान नहीं पाई,

भूरा- ये ह सोहन चोपड़ा, सुरेश चोपड़ा का बीटा, J.S.S कंपनी का वरिष्ठ. जानती ह न तू सुरेश चोपड़ा को और J.S.S कंपनी को,

भूरा की बात सुनकर अंजलि का मुँह खुला रह गया उसकी आँखे लाल हो गई जो गुस्सा अभी तक उसकी बेटी के साथ ये हरकत करने का था अब उसे भी ज्यादा गुस्सा था, उसने उस लड़के की तरफ गौर से देखा और गुस्से में छिलाई, चला जा यहाँ से और भूल क्र भी यहाँ कदम मत रखना वर्ण कसम से जान से मर दूंगी, टुशु छोड़ दे उसे.

तुषार ने अचम्भे से अंजलि की तरफ देखा, लेकिन बिना कोई सवाल किये उसका गाला छोड़ दिया वो लड़का गिरता पड़ता वह से भागने लगा.

इधर भूरा है रहा था, अंजलि गुस्से में थी वो छिलाई भूरा तुझे ये नहीं करना चाहिए था नहीं करना चाहिए था इस सब से दूर hi रहना चाहिए था तुझे, छीलते हुए अंजलि ने कुल्हड़ी उठा क्र सीधे भूरा की गार्डन में मर दी.


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तुषार की आँखे फटी रह गई रूचि की तो चीख hi निकल गई, रूचि के चीखने से दोनों का धयान उसकी तरफ गया तुषार भाग क्र उसके पास पंहुचा और उसे गले से लगा लिया वो भी तुषार से चिपक गई, अंजलि भी उसके पास पहुंची अंजलि ने रूचि के सर पैर हाथ फेरा और पुचकारा बीटा घबरा मत सब ठीक ह सब ठीक ह,

अंजलि- तुषार चल यहाँ से जल्दी

तीनो जल्दी जल्दी घर की तरफ चल दिए, अंजलि के हाथ में अभी भी खून से सनी कुल्हाड़ी थी, वो घर पहुंचे वह सीमा और दीपा दोनों डरे हुए सहमे से बैठे थे, तीनो को वापस घर में आता देख उनकी आँखों से आंसू बहने लगे जो काफी देर तक रट रट रुक गए थे, जब उनकी नजर रूचि पैर गई तो दीपा भाग क्र एक दुपट्टा ले आई क्योकि रूचि का कुरता फटा हुआ था वो ब्रा में आधी नंगी तुषार से चिपकी हुई भीगी हुई चली आ रही थी उसे तो अहसास hi नहीं था उसकी क्या हालत ह उसे क्या तीनो में से किसी को भी ये अहसास नहीं था,


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सीमा ने जल्दी से गरम पानी रखा दीपा ने रूचि के कपडे बदले, लेकिन अंजलि और तुषार खामोश एक दम शांत दरवाजे के पास बैठे थे अंजलि के हाथ में अभी भी वो कुल्हाड़ी थी,

किसी की कुछ बोलने की हिम्मत नहीं हो रही थी रूचि सुबक रही थी, दीपा उसे शांत करवा रही थी, सीमा ने बाल्टी में अंजलि को गरम पानी दिया और बोली माँ गरम पानी से नाहा लो, सीमा की आवाज सुनकर अंजलि और तुषार की धयान भांग हुआ, तभी बहार से राजेश आ गया भीगता हुआ उसे देख क्र तुषार और अंजलि खड़े हो गए,

अंजलि के हाथ में कुल्हाड़ी देख क्र राजेश घबरा गया,

राजेश- क्या हु अंजलि क्या हुआ ये सब क्या ह,

अंजलि बस राजेश को देखे जा रहे थी उसकी आँखों में आंसू थे वो रोये जा रही थी, तभी पीछे से सीमा बोली पापा कुछ लोग रूचि को कार में उठा क्र ले गए थे,

राजेश गुस्से कोण था किसने इतनी हिम्मत की

तुषार- भूरा था वो

राजेश- उसकी तनी हिम्मत मैं उसे जान से मर दूंगा आज

तुषार- मर दिया माँ ने उसे मर दिया

इतना सुनते hi राजेश का मुँह खुला रह गया सीमा के हाथ से पानी की बाल्टी गिरते गिरते बची सभी बोखलाए हुए से अंजलि को देख रहे थे,

तभी राजेश ने अंजलि को गले लगा लिया और बोलै- नहीं अंजलि कुछ नहीं हुआ तुम घबराओ नहीं कुछ नहीं होगा मैं सम्हाल लूंगा खुद को सम्हालो हिम्मत मत हारना अपना सयम मत खोना बस खुद को रोको, मैं अभी आया

तुषार- कहा जार हे हो पापा

राजेश- टुशु बीटा कहा हुआ ये सब मुझे बता मैं वह सब ठीक क्र दूंगा तुषार- पापा अब वह जाकर क्या फायदा

राजेश- बीटा तेरी माँ के खिलाफ वह कोई सबूत नहीं होना चाहिए चल जल्दी बता कहा हुआ ये सब

तुषार- मैं भी चलता हु आपके साथ

अंजलि- मैं भी चलूंगी

राजेश- नहीं अंजलि तुम बच्चियों के साथ रहो हम दोनों क्र आएंगे

अंजलि- आप मत पदों इस बार इसमें

राजेश- अंजलि शांत हो जाओ सीमा बीटा अपनी माँ को गरम पानी से नहला और कपडे बदल हम अभी आये

फिर दोनों उस जगह की तरफ भागने लगे, काफी देर तक भागते हुए भी उन्हें वह कार नहीं मिली, कार वह से जा चुकी थी अँधेरा था तो ठीक से तुषार भी अनुमान नहीं लगा प् रहा था की असली जगह कहा थी लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला न hi कार न hi भूरा, काफी देर तक दोनों धुनते रहे लेकिन खली हाथ लोट आये,

घर में भरी मन से घुसे तो अंजलि ने पूछा क्या हुआ

तुषार- माँ वह कुछ नहीं ह न hi कार थीं ा hi भूरा सब गायब ह

अंजलि- वो लड़के वापस आकर कार ले गए होंगे और उस भूरा को भी

तुषार- अब क्या होगा माँ अगर उन्होंने केस क्र दिया तो हमारे पास तो कोई सबूत भी नहीं ह की उन्होंने हमारी बहन के साथ गलत किया इसलिए हमने उसे मारा

राजेश- तुम घबराओ नहीं अगर कुछ होता ह तो बस इतना कहना की तुम गाओं में नहीं थे

तुषार- ये क्या बोल रहे हो पापा

राजेश- जितना बोल रहा हु उतना की करना तुम और अंजलि गाओं से बहार गए हुए थे बारिश की वजह से वापस नहीं ा पाए

अंजलि- कोई फायदा नहीं ह सब ख़तम हो गया

अंजलि की हालत देख क्र राजेश ने सीमा से कहा बीटा सबके लिए चाय बना तुषार तू जाकर कपडे बदल दीपा रूचि के पास बैठ बीटा

सभी चले गए राजेश और अंजलि अकेले दरवाजे के पास खड़े थे,

राजेश – क्या हुआ कुछ गलत हुआ ह क्या

अंजलि- भूरा को पता चल गया, रूचि को उठाने वाला सोहन चोपड़ा था सुरेश चोपड़ा का बीटा भूरा उसे लेकर आया था

राजेश- ये कैसे हो सकता ह

अंजलि- पता नहीं अगर भूरा मर गया तो पुलिस केस होगा अगर बच गया तो इस बार बहुत लोग आएंगे,

राजेश- अब क्या करेंगे

अंजलि- हमे ये गाओं छोड़ना होगा जल्दी से जल्दी

राजेश- मैं कल पहले हालत देखता हु अगर सब ठीक रहा तो ठीक वर्ण कल रात में निकल चलेंगे,

तभी सीमा चाय लेकर आ गई

अंजलि- आप भी कपडे बदल लो,

फिर सभी एक साथ कपड़ो में बैठ क्र चाय पि रहे थे, एक दम ख़ामोशी थी रूचि तो उसके साथ हुए हादसे से शमी हुई थी तुषार के दिमाग में गुस्सा और अंजलि क चलाई वो कुल्हाड़ी घूम रही थी, सीमा और दीपा रूचि को सम्हालने में लगे थे, राजेश के फेस पैर चिंता साफ़ दिख रही थी, वही अंजलि के फेस पैर इतने मिले जुले भाव थे की समझ नहीं आ रहा था वो रोने वाली ह या गुस्सा करने वाली ह,

सभी ऐसे hi लेट गए सरे बच्चो को नींद आ गई राजेश भी सो गया लेकिन अंजलि जगती रही सोचती रही, क्या सोच रही थी ये तो बस अंजलि hi जानती थी
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अपडेट-10








सुबह सबसे पहले राजेश की आँख खुली तो उसने बहार देखा तो थोड़ा थोड़ा उजाला हो गया था बारिश अभी भी पद रही थी हलकी हलकी उसने तुषार क जगाया और बोलै चल बीटा वह के हालत देख क्र आते ह दोनों बाप बीटा सर पैर प्लास्टिक की बोरी ओढ़ क्र चल दिए, इधर सीमा की आँख खुली तो उसने धीरे धीरे घर में झाड़ू वगेरा की और सबके लिए चाय बनाई, अंजलि सो रही थी किसी ने उसे नहीं उठाया,

तुषार और राजेश वह पहुंचे तो उन्हें वह कार के टायर के निशान तो मिल गए लेकिन और कुछ नहीं मिला, खेत में पानी इतना भर चुक्का था की इसमें सबके पैरो के निशान ख़तम हो गए, फिर दोनों काफी आगे तक गए तो उन्हें बार कही कही टायर के निशान मिले, मतलब वो लोग कार को ले गए थे और साथ में भूरा को भी,

फिर वो वापस आ गए तो अंजलि भी उठ चुकी थी सीमा ने उन दोनों को भी चाय दी, अंजलि ने पूछा कुछ मिला

तुषार- नहीं माँ कुछ खास नहीं बस कार के टायर के निशान ह कही कही वो कार ले गए,

राजेश- तुम घबराओ नहीं बरसिह बंद होने दो मैं सब पता करके आता हु,

पूरा परिवार टेंशन में था किसी का खाना खाने का मन भी नहीं था, शाम तक सभी टेंशन में रहे राजेश बहार गया लेकिन कोई हल चल नहीं था, ऐसे hi 5 दिन बीत गए कोई भी स्कूल कॉलेज नहीं गया घर में hi बैठे थे. रूचि तो दर की वजह से नहीं जा रही थी अंजलि ने सीमा और दीपा को भी नहीं जाने दिया, जब 5 दिन भी कुछ नहीं हुआ तो सब नार्मल सा होने लगा, तुषार तीनो बहेनो को साथ लेकर जाता और साथ hi आता, अंजलि बस अपना दिमाग दौड़ाये जा रही थी की क्या हुआ क्यों हुआ क्या करना चाहिए,

वो दिन भर खामोश रहती थी, बाकि सब नार्मल होने लगे थे, और इसी बिच रक्षाबंधन आ गया, सचिन और कपिल नहीं आये थे क्योकि आने जाने में बहुत किराया लगता था उन्होंने वह से पड़ोस में रहने वाली रजिया के घर फ़ोन क्र दिया था,

गाओं में रजिया hi एक ऐसी थी जो अंजलि और उसके परिवार से कुछ हमदर्दी रखती थी क्योकि उसका पति दुबई में जॉब करता था, जो साल में एक बार hi आता 15 दिन के लिए, रजिया के 4 बच्चे थे चारो लड़किया थी, पढाई उसने उन्हें कराइ नहीं थी इसलिए घर में hi रहती थी, रजिया उन्हें कही आने जाने नहीं देती थी, रजिया पुरे गाओं में घूमती रहती पुरे गाओं से उसकी दोस्ती थी वो किसी से कभी कोई झगड़ा नहीं करती गेन के हर इंसाने की खबर रजिया को रहती थी,


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रजिया



रजिया के पास एक मोबाइल था जिससे वो दिनभर बात करती रहती थी, सचिन और कपिल उसी के फ़ोन पैर अपनी जानकारी दे देते थे,

रक्षा बंधन के दिन सीमा थोड़ी घबराई हुई थी, वो तुषार को कैसे राखी बंधे उन दोनों के बिच तो चुदाई का रिश्ता बन चुक्का था अब भाई बहन का रिश्ता कैसे बनाये, वो सुबह से भाग भाग क्र काम क्र रही थी, रूचि और दीपा एक दम तैयार होकर थाली सजा क्र बैठी थी लेकिन सीमा कभी ये काम करती कभी बहार का काम करती कभी कपडे लेकर बैठ जाती,

अंजलि- सीमा बीटा तू क्यों इतना बिजी ह आज जल्दी कपडे बदल और भाई को राखी बांध दे,

सीमा- माँ ये दोनों बांध देंगी मैं बाद में बांध दूंगी

अंजलि- ऐसा कभी हुआ ह क्या बड़ी बहन hi शुरुआत करती ह तू hi बंधेगी

सीमा के पास कोई रास्ता नहीं बचा वो बेचारी अधूरे से मन से आ गई कपडे बदल क्र, झिजक तो तुषार भी रहा था, लेकिन माँ के सामने कुछ नहीं क्र सकता था, बेचारो ने चुप चाप राखी बंधी, फिर दीपा और फिर रूचि ने बंधी, नियम के हिसाब से अंजलि बोली अब तीनो बहन अपने भाई से वडा मानगो,

बड़े लोग तो गिफ्ट या पैसे देते हैं लेकिन अंजलि ने नियम बनाया था की ईद न गिफ्ट न पैसे वडा माँगा जायेगा जो भियो को निभाना होगा,

सबसे पहले रूचि बोली- टुशु मैं क्या मांगू आज के दिन भाई बहन की रक्षा करने की कसम खता ह वो तो तूने पहले hi पूरी क्र दी, फिर भी एक वडा करना मुझसे ऐसे hi प्यार करना हर वक़्त मेरे साथ रहना,

तुषार- कैसी बात करती ह ये भी कोई कहें ेवाली बात थी, मैं हर हालत में तेरे साथ हु तुझे जब भी तकलीफ होगी तेरा भाई वह खड़ा मिलेगा,

फिर दोनों गले मिले, दीपा ने भी सात देने का वडा माँगा तब भी तुषार का ये hi जवाब था,

अब बरी सीमा किट hi,

सीमा- टुशु मैं तुझसे बहुत प्यार करती हु क्या तू मेरे प्यार की कदर क्र पायेगा तेरी लाइफ में जब कोई लड़की आ जाएगी तब तू मुझे भूल तो नहीं जायेगा, मैं तेरे और तेरी वाइफ के बिच नहीं आउंगी.

सीमा क्या बोल रही थी ये बस तुषार और अंजलि समझ रहे थे बाकि को लग रह अतः जैसे शादी के बाद लड़के बहेनो को भूल जाते ह सीमा उसके बारे में बात कर रही ह.

तुषार- कभी नहीं दीदी मैं कभी आपसे दूर नहीं जाऊंगा चाहे उसके लिए मुझे शादी hi न करनी पड़े.

अंजलि- क्या बात लेकर बैठ गए तुम लोग, मेरे बच्चे कभी अलग नहीं होंगे ये मैं वडा करती हूत ुम लोगो से मैं किसी को दूर नहीं जाने दूंगी,

फिर सरे अपनी माँ से लिपट गए, राजेश दूर बैठा सब देख रहा था, उसकी आँखों में भी आंसू थे,

दीपा- पापा आप क्यों रो रहे हो,

राजेश- कुछ नहीं बीटा तुम भाई बहेनो का प्यार देख क्र आँख भर आई.

अंजलि- दिल छोटा न करो एक दिन सब ठीक होगा

राजेश- सच में होगा क्या? बहुत टाइम हो गया

तुषार- किस चीज का बहुत टाइम हो गया.

अंजलि – कुछ नहीं तुम अपने पैर धयान दो और सीमा मेरे साथ चल भैंस को चारा डालते हैं, सीमा अंजलि के साथ चल दी,

अंजलि- सीमा क्यों दुखी ह बीटा आज के दिन तो खुश रहना चाहिए

सीमा- माँ आप तो जानती ह मैं और टुशु का क्या रिश्ता बन चुक्का ह फिर मैं राखी कैसे बांध सकती हु

अंजलि- मुस्कुराई, क्यों जब पहले राखी बांधती थी तो उसके बाद भी तो तुमने वो रिश्ता बनाया अब रिश्ता बन गया तो राखी नहीं बांध सकती,

सीमा- लेकिन माँ

अंजलि- अगर किसी से दूसरा रिश्ता बन जाये तो क्या पहला रिश्ता ख़तम हो जाता ह, अब तू मेरे bête के साथ सुहागरात बना रही ह फिर तो तू मेरी बहु हो गई तो क्या उसे तू मेरी बेटी नहीं रही,

अंजलि की बात से सीमा शर्मा गई

अंजलि- देख कैसे मुँह लाल हो गया, पागल लड़की ये फालतू की बाते मत सोच तुम लोगो का सबसे सच्चा प्यार ह, एक भाई जितना अपनी बहन को समझ सकता ह कोई दूसरा नहीं समझ सकता तो भाई बहन के बिच प्यार बहुत घेरा हो जाता ह, और अगर उसकी लाइफ में कोई और लड़की आती भी ह तो बहन कभी नहीं चिढ़ती तो तुझे कोई प्रॉब्लम भी नहीं होगी,

सीमा- है माँ मुझे कोईएतराज नहीं ह वो जिससे चाहे रिश्ता रखे बस मुझसे दूर न जाये,

अंजलि- कभी नहीं जायेगा पागल छोकरी चल जल्दी से काम ख़तम क्र.

अंजलि अंदर चली गई तभी तुषार बहार आया और सीमा की गांड पैर हाथ घुमा दिया सीमा डार्क र उछाल गई फिर तुषार को देख क्र शर्मा गई, उस चुदाई के बाद ये पहेली बार था जब तुषार ने ऐसा किया था, उस टाइम तो जानूं था हवस का लेकिन अब तो सब होश में था तो शर्माना तो बनता ह,

सीमा- क्या करता ह कोई देख लेगा

तुषार- कोई नहीं देखेगा मेरी जान तू अपने भाई को तोफा नहीं देगी

सीमा- तोफा भाई देता ह बहन नहीं

तुषार- तो मेरा तोफा ले ले देख कैसे खड़ा ह, तुषार ने सीमा का हाथ पकड़ क्र अपने लुंड पैर रख दिया, सीमा ने तुरंत वापस खींच लिया,

सीमा- हे बेशरम शर्म नहीं आती यहाँ खुले में ये सब क्र रहा ह किसी ने देख लिया तो क्या होगा, अउ राइज छुपा ले घर में और लोग भी हैं बेचारी दर जाएँगी इसे देख क्र.

तुषार- तुझे दर नहीं लगता क्या

सीमा- ये डरने की चीज तोडना ह प्यार करने की चीज ह

तभी अंजलि की आवाज आई टुशु खाना खा ले,

तुषार – आया माँ

सीमा- हहहहहए माँ की आवाज सुनते hi फैट गई तेरी

तुषार- माँ से तो अच्छे अच्छा की फैट जाती ह टब अच् क्र रहना माँ तेरी न फाड् दे.

सीमा- मेरी फाड़ने के लिए जो चाहिए वो तेरे पास ह माँ के पास नहीं समझे

तुषार- माँ के पास तो दो दो बम ह तेरी गांड मर लेंगी उनसे

सीमा- मुँह पैर हाथ रख हाआआ बत्तमीज माँ के बारे में ऐसा बोल रहा ह कुत्ते

तुषार- जब बहन को छोड़ सकता हु तो माँ के बारे में कुछ क्यों नहीं बोल सकता और गलत क्या बोलै माँ से बड़े पुरे गाओं में किसी के नहीं ह,

सीमा- भें छोड़ मैं तो खुद को hi इतनी बड़ी हवसी सोचती थी की अपने भाई के निचे लेता चाहती ठु तू तो मुझसे भी बड़ा हरामखोर ह अपनी माँ पैर नजर रखता ह मादरचोद

तुषार- साली नजर नहीं रख रहा था पैर ह hi इतने बड़े तो क्या करू नजर चली hi जाती ह

सीमा- मेरे भी तो काफी बड़े हैं देख , सीमा ने अपनी छाती फुला क्र तुषार को दिखाई

तुषार- देखूंगा देखूंगा अच्छे से और माँ जीतनेय बड़े भी क्र दूंगा

सीमा- मरूंगी तुझे कमीने

तुषार हस्ता हुआ अंदर बहग गया, उसका लुंड भागते हुए हिल रहा था अंदर घुसते hi दीपा की नजर उसके हिलते लुंड पैर चली गई, दीपा क आंखे चमक ुति फेस पैर एक स्माइल आ गई,

सभी भाई भें बहुत खुश थे, अंजलि बस अपने बच्चो को देख क्र खुश होती रहती थी, राजेश आज कल काम पैर नहीं जार है था उसका काम बस गाओं में क्या चल रहा ह उस पैर रहता था भूरा के बारे में कुछ जानकारी मिले या किसी को उस रात के बारे में कुछ पता तो नहीं, ऐसे hi दिन बीतने लगे और जन्मास्टमी का त्यौहार भी आ गया,

जन्मास्टमी की गले दिन सीमा ने कहा की वो स्कूल की तरफ से कुछ दिन के लिए दिल्ली जार hi ह, सभी बच्चे एक दम चौंक गए क्योकि अंजलि इतने सालो से जॉब क्र रही थी आज तक कभी गाओं से बहार नहीं गई थी,

सीमा- माँ एक दम कैसे वह क्यों जार hi हो

अंजलि- बीटा स्कूल की तरफ से हर बार कुछ टीचर की ट्रेनिंग के लिए दिल्ली की हेड ब्रांच भेजा जाता ह मैं हर बार ताल देती थी लेकिन इस बार मज़बूरी ह तभी मेरा इन्क्रीमेंट लगेगा,

दीपा- माँ हम सब कैसे रहेंगे

अंजलि- क्यों तू छोटी बच्ची ह क्या इतनी बड़ी घोड़ी जैसी हो गई ह

दीपा- नहीं माँ वो बात नहीं ह आज तक आपके बिना कभी रहे नहीं तो अजीब सा लग रहा ह

अंजलि- तुम्हरे पिता ह वो काम से जल्दी आ जाया करेंगे, और ये सीमा इतने दिन तक तुम्हारी माँ ह समझे सब इसकी बात मानेंगे

तुषार धीरे से फिर तो ये सबको छुड़वा देगी, ये बात सीमा ने सुन ली और झूठे गुस्से में तुषार को देखा

सीमा- समझ गए सब लोग जब तक माँ नहीं आती तुम सबको मेरी हर बात माननी पड़ेगी समझे वर्ण

रूचि- वर्ण क्या करोगी

अंजलि- रूचि बीटा मेरे सामने hi

रूचि- श्री माँ वो तो बस ऐसे hi

अंजलि- अच्छा ठीक ह मैं निकलती हु और टुशु बीटा ये सब तेरी जिम्मेदारी पैर हैं समझे न, किसी को कोई तकलीफ न हो

तुषार- माँ आप कब तक आएँगी,

अंजलि- वैसे तो 15 दिन को बोलै ह लेकिन थोड़ा बहुत उप्पेर निचे हो सकता ह,

अंजलि वह से चल दी साथ में राजेश भी था

राजेश- तुम सोच समझ क्र तो जार hi हो न

अंजलि- और कोई रास्ता नहीं ह अब भूरा को ढूंढ़ना hi होगा

राजेश- लेकिन कहा ढूँढोगी उसे

अंजलि- मैंने जानकारी निकली ह उस रात वो लड़के भूरा को कसबे के हॉस्पिटल लेकर गए थे वह डॉ. नहीं आया था तो वो उसे सिटी में ले गए, एम्बुलेंस वाले से पता चला ह कोनसे हॉस्पिटल लेकर गए थे, बस मुझे वह से पता करना हैं की वो जिन्दा ह या मर गया, और उसे पता कैसे चला ये सब कोण ह जिसने ये बताया, जब कोई मुझे hi नहीं जनता तो मेरे बारे में कैसे जानेगा,

राजेश- एक आदमी जनता ह अंजलि

अंजलि का फेस पैर भावुकता उभर आई, मेरा मन मैंने को तैयार नहीं हो रहा की वो ऐसा करेगा

राजेश- उम्मीद मुझे भी नहीं ह लेकिन उसके अलावा किसी को पता नहीं ह

अंजलि- मेरी एक गलती मेरे बच्चो पैर भरी न पद जाये

राजेश- घबराओ नहीं हम सम्हाल लेंगे

अंजलि- मुझे घबराहट अपनी नहीं ह अगर किसी ने मेरे बारे में बताया ह तो आपके बारे में भी बताया होगा,

राजेश- अब क्या फरक पड़ता ह

अंजलि- मुझे फरक पड़ता ह, अगर किसी ने आपकी तरफ उंगली उठाई तो मैं बर्दास्त नहीं क्र पाऊँगी चाहे उसमे मेरे बच्चे भी क्यों न हो.

राजेश- शांत हो जाओ कुछ नहीं होगा तुम आराम से जाना और सफल होकर लौटना,

अंजलि निकल गई अपने सफर पैर अपने अतीत को छुपाने की एक और कोशिश में, राजेश निकल गया अपने काम पैर,

और बच्चे उनके दिमाग में अपनी अपनी प्लानिंग चलने लगी, सीमा के दिमाग में बस इन 15 दिनों में चुदाई hi चुदाई दिख रही थी, तुषार को भी अपने लुंड में हलचल महसूस हो रही थी सीमा को देख क्र, वही दीपा के दिमाग में तुषार का लुंड देखने का सपना अब भी घूम रहा था, और रूचि वो आज तक उस हादसे से ठीक से उभरी नहीं थी, उसके दिमाग में बस उन लड़को के हाथ अपने सरीर पैर महसूस होते थे, वो किसी से कुछ नहीं खेती थी सबके सामने मुस्कुराती रहती थी, लेकिन उसे अजीब सा फील होता और बाद में तुषार का लड़ना और उसे चिपक क्र घर लाना तुषार के सामने नंगे बदन कड़ी होना ये रूचि के दिल में अजीब सी हलचल मचा देता था,

उस दिन को सोच क्र रूचि के दिल में जितनी नफ़रत उभरती उतना hi प्यार तुषार की तरफ उभर आता,

अंजलि पहुंच चुकी थी सिटी के हॉस्पिटल में खोजबीन करने से पता चला की उस रात ऐसा आदमी तो आया था लेकिन उसे दूसरे शरीर भेज दिया था बेसिक ट्रीटमेंट देकर,

अंजलि वह से निकल गई दूसरे शहर, वही घर में तुषार अपने लुंड को सम्हालता घूम रहा था जेस्पर सीमा और दीपा दोनों की नजर थी, छोटा सा घर था इसमें किसी को कभी एकांत मिल hi नहीं सकता था, शाम को राजेश भी वापस आ गया था, रात को खान ाखा क्र सब सोने लगे, तो सीमा तुषार के बराबर में लेट गई, दूसरी साइड रूचि लेट गई अपने भाई के प्रेम में, उसके दिमाग में कोई गलत भावना नहीं थी लेकिन प्रेम बहुत ज्यादा था बहुत hi ज्यादा,

बेचारी दीपा जो तुषार के पास लेटना चाहती थी मन मार क्र रूचि की साइड में लेट गई, राजेश अपनी चारपाई पैर सो गया, तुषार सीधा लेता था ो भी खुश था सीमा उसके पास लेती ह ज्यादा नहीं तो छेद चढ़ तो क्र hi सकता था, लेकिन रूचि तुषार से बिलकुल चिपक क्र लेती थी जिससे उसकी टाइट चूचिया तुषार के हाथ पैर दबी हुई थी, दोनों के मन में कोई भावना नहीं थी, सीमा चीड़ रही थी उन्हें देख क्र,

ये चीड़ उन दोनों के करीब आने की नहीं बल्कि रूचि के न सोने की वजह से थी, जब तक रूचि नहीं सोयेगी तब तक उसे छेद चढ़ करने का मौका नहीं मिलेगा,

जब काफी देर हो गई तो सीमा से कण्ट्रोल नहीं हुआ उसने तुषार की तरफ करवट ली और अपना हाथ तुषार की जांघ पैर रख दिया रौशनी ज्यादा नहीं थी तो किसी को साफ साफ कुछ दिखाई ने दे रहा था, तुषार ने एक सीमा की तरफ देखा जो तुषार की तरफ देख मुस्कुरा रही थी, तुषार भी मुस्कुरा दिया, सीमा का हाथ लगते hi तुषार का लुंड खड़ा होने लगा, कुछ hi देर में सीमा ने तुषार का लुंड लोअर के उप्पेर से hi पकड़ लिया, तुषार को एक दम झटका लगा वो पूरा हिल गया,

रूचि- क्या हुआ टुशु

तुषार- कुछ नहीं कुछ नहीं बस ऐसे hi

रूचि- कोई प्रॉब्लम ह क्या

तुषार- नहीं नहीं तू सो जा मचार ने काट लिया था

रूचि- अच्छा ये चादर ओढ़ ले

सीमा ने तुषार का लुंड मरोड़ दिया और बोली मोटा मच्छर होगा जो इतना तगड़ा झटका लगा, इस बार तुषार तैयार था ो हँसा और बोलै मच्छर की बीवी थी मैंने मचार मर दिया थान ा उसका बदला लेने आई थी तो जोर से कटा लेकिन उसे नहीं पता मेरे पास बड़े हतियार ह मैं फिर मच्छर मर दूंगा,

रूचि- क्या क्या बोल रहा ह सो जा

सीमा तुषार की बात समझ गई थी तुषार कोनसे मच्छर मरने की बात क्र रहा ह, उसने तुषार के लोअर में हाथ डाला और उसके नंगे खड़े लुंड को मुठी में भर लिया,


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लुंड हाथ में आते hi दोनों के मुँह से एक साथ उफ्फ्फफ्फ्फ़ निकल गई, लेकिन दोनों ने hi कण्ट्रोल क्र ली, तुषार ने सीमा का हाथ पकड़ लिया और ऐसे hi लेता रहा दोनों बहुत देर तक ऐसे hi लेते रहे,

सीमा की छूट में भूचाल आ चुक्का था उसके हाथ में इतना मोटा लोहे जैसा शकत लुंड था ये सोच क्र hi उसकी छूट झाड़ गाइट hi, तुषार का लुंड भी बिना कुछ किये झटके मर रहा था, लुंड जैसे hi झटका मरता सीमा की छूट में लैप लैप होती,

जब दोनों को लगा की सब सो गए ह तो तुषार ने रूचि को सीधा लिटाया और अपना एक हाथ सीमा की चुकी पैर रख दिया सीमा ने तुरंत उसका हाथ पकड़ क्र अपनी चुकी पैर दबा दिया, तुषार ने भी अपनी मुठी भींच ली और सीमा की एक चुकी अच्छे से दबा दी, कुछ देर तुषार ने सीमा की दोनों चूचिया अच्छे से मसली और सीमा तुषार के लुंड को अच्छे से हिला रही थी,


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फिर तुषार का हाथ सीमा की चूचियों से निचे पेट पैर फिसलता हुआ सलवार तक पहुंच गया, तुषार ने जैसे hi सलवार एक उप्पेर से सीमा की छूट पैर हाथ रखा सीमा ने तुषार का लुंड मुठी में भींच लिया तुषार ने भी जोश में सीमा की छूट मुठी में भींच ली, तुषार सलवार के उप्पेर से hi सीमा की छूट मसल रहा था छूट से इतना पानी निकल चुक्का था की सीमा की पंतय सलवार सब भीग गई थी,

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सीमा लुंड को अच्छे से मसल रही थी, तुषार ने सीमा की सलवार में हाथ डालना चाहा तो सीमा ने हाथ पकड़ लिया तुषार ने थोड़ा जोर लगाया सीमा ने भी जोर लगाया और जोर लगाने से क्या हुआ बस सलवार का नाडा टूट गया, सीमा का मुँह खुल गया वो जब तक कुछ क्र पति तुषार का हाथ सलवार और पंतय के अंदर छूट तक पहुंच गया, तुषार ने सीमा की गीली छूट को अच्छे से रगड़ दिया, सीमा ने भी तुषार के लुंड को अच्छे से मुठी में भर क्र उप्पेर निचे किया तुषार को बहुत मजा आ रहा था जब लुंड की चमड़ी उप्पेर निचे होती, वही सीमा की छूट का डेन पैर जब तुषार का मजबूत हाथ रगड़ता तो सीमा के मुँह से सिसकारियां निकलती,

वो एक हाथ से अपना मुँह दबा क्र लेट गई, तुषार ने एक उंगली सीमा की छूट में घुसा दी, सीमा ने भी तुषार का लुंड लोअर के बहार से निकल लिया और खुल क्र हिलने लगी, सीमा तो लुंड अच्छे से हिला प् रही थी लेकिन तुषार का हाथ उल्टा पद रहा था उसकी उंगली अच्छे से अंदर नहीं जार hi थी इसलिए वो उंगली अंदर दाल क्र बस चारो तरफ घुमा रहा था, ये सीमा के लिए और भी जानलेवा हो रहा था जो बहुत गरम हो चुकी थी, और कुछ hi देर में फिर झड़ने लगी और उसकी लुंड हिलने की राफ्तेर बहुत तेज हो गई, जिसका असर तुषार पैर भी हुआ और वो भी झड़ने लगा सीमा ने तुषार का हाथ पकड़ क्र अपनी छूट पैर दबा दिया और तुषार ने सीमा का हाथ पकड़ अपने लुंड को अच्छे से लम्बे लम्बे शॉट के साथ हिलने लगा, सीमा तो झाड़ क्र अपनी पंतय में hi पानी खली क्र गई लेकिन तुषार का लुंड तो एक दम खुला था और इतना मोटा लम्बा लुंड तो धार भी मोती और लम्बी मरेगा.

वही हुआ तुषार के लुंड ने जो धार मरी वो सीधे दीपा के मुँह पैर जाकर गिरी जो काफी देर से बैठी तुषार के लुंड को देखे जा रही थी ृष्णि ज्यादा नहीं थी लेकिन दीपा की आँखे उस रौशनी में तुषार के लुंड को हिलते हुए अच्छे से देख प् रही थी, उसका मुँह तो लुंड देख क्र hi खुला हुआ था इतना बड़ा मोटा लुंड देख क्र उसकी छूट झाड़ गई थी, वही उसकी बहन अपने भाई का लुंड हिला रही थी, ये hi उसके लिए बहुत एक्सीटेंड क्र रही थी, दीपा को तुषार का हाथ नहीं दिख रहा था उसे बस हिलता हुआ लुंड दिख रहा था उसे नहीं पता था, तुषार भी सीमा की छूट में उंगली क्र रहा ह,


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जैसे hi पहेली धार दीपा के गाल पैर पड़ी वो चौंक गई, दूसरे धार उसके गले पैर पड़ी,

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तीसरी से पहले hi तुषार ने अपने लुंड मुँह आगे से पकड़ लिया और धार को बहार उछलने से रोक लिया, तुषार और सीमा दोनों का हाथ लुंड के रास में पूरा भीग चुक्का था, दोनों क ीक एक हाथ सीमा के छूट रास में भीगे थे और दूसरे हाथ तुषार के लुंड क ेरस में, दोनों ऐसे hi शांत लेट गए, तुषार का पेट भी लुंड क ेरस में भीग चुक्का था, छूट और लुंड खली होते hi दोनों को अपने गीली साणे हुए कपड़ो का अहसास हुआ और अपने हाथो का भी, अब क्या करे, सबसे पहले सीमा उठी और धीरे से रसोई में चली गई, जल्दी से कपडे निकले और बदल लिए, जैसे सीमा हिली थी दीपा तुरंत लेट गई, दीपा ने अपने गाल पैर लगे वीर्य को उंगली में लिया और सूंघने लगी अगले hi पल उस उंगली को मुँह में भर लिया,

मजे में उसकी आंखे बंद हो गई और एक हाथ अपने आप छूट पैर चला गया फिर उसने गले पैर लगे वीर्य को भी छठा और अपनी छूट रगड़ने लगी, इधर तुषार धीरे से उठा और खुद को साफ़ करके आया और लेट गया, दीपा शांत होकर दोनों को सुनने लगी, लेकिन बिलकुल ख़ामोशी थी, कुछ देर बार पूछ पूछ की आवाज आई तो उसने थोड़ा उप्पेर होकर देखा तो सीमा और तुषार एक दूसरे को चुम रहे हैं. दीपा की छूट में हलचल हो रही थी लेकिन वो बिलकुल शांत होकर लेट गई क्योकि वो सीमा और तुषार वाली गलती नहीं करने वाली थी,

तुषार और सीमा को लग रहा था वो शांति से सब क्र रहे हैं वो भूल गए की जब इंसाने झाड़ता ह तो उसके मुँह से इतनी घेरि घेरि सांसे निकटि ह की कोई 20 कदम दूर लेता इंसाने भी अच्छे से सुन सकता ह, हमे वो सांसे खुद को सुनाई नहीं देती क्योकि हम तो चुदाई के नशे में दुबे होते ह लेकिन दूसरा आसानी से सुन सकता ह, वही दीपा ने उनकी घेरि सांसे सुनी तो उसकी आँख खुल गई वो तो ये देख रही थी की शायद किसी को कोई प्रॉब्लम ह लेकिन जैसे hi उसकी नजर तुषार के हिलते लुंड पैर गई बस उसके बाद तो उसने कुछ देखा hi नहीं लुंड को hi निहारती रही.



उसके दिमाग में तुषार का बड़ा लुंड और दोनों के बिच का रिश्ता घूमता रहा, वो बहुत देर तक सोचती रही इधर सीमा और तुषार घेरि नींद में चले गए, दीपा भी सोचती सोचती सो गई,
 
अपडेट-11



वही अंजलि पूरी रात इधर उधर भाग रही थी भूरा की खोज में, उसे अभी कामयाभी नहीं मिली थी, वो दूसरे शहर तो पहुंच गई थी लेकिन रात बहुत ज्यादा थी तो हॉस्पिटल में इस टाइम कोई जानकारी भी नहीं देता इसलिए वो रेलवे स्टेशन पहुंच गई वही निचे चादर बिछा क्र अपनी रात गुजारी और सुबह उजाला होते hi निकल गई हॉस्पिटल,

वही सुबह सबसे पहले राजेश उठा फिर रूचि, बाकि तीनो तो देर से सोये थे तो उठने में देर हो गई, राजेश ने तीनो को उठाया फिर सभी तैयार हुए सीमा और दीपा ने नाश्ता बनाया, इस बिच दीपा गुस्से में सीमा को घूरती और प्यार में तुषार को निहारती रहती, फिर सभी नाश्ता करके निकल गए स्कूल कॉलेज,

रस्ते में सीमा ने दीपा पैर धयान दिया वो बड़ी खामोश ह आज

सीमा- तुझे क्या हुआ ह इतनी चुप क्यों ह

दीपा सीमा से नाराज थी इसलिए नहीं की वो तुषार का लुंड हिला रही थी बल्कि इसलिए उसने दीपा से ये बात छुपाई तो दीपा ने भी उसे कुछ न बताने का फैसला क्र लिया

दीपा- कुछ नहीं तबियत कुछ ठीक नहीं ह

सीमा- तो घर पैर आराम करती

दीपा- अकेले घर में दर लगता ह,

सीमा- अच्छा ठीक ह कॉलेज की कैंटीन में रेस्ट क्र लेना

दोनों चुप चाप चले गए,

उधर अंजलि पहुंच गाइट hi हॉस्पिटल और उसे भूरा की जानकारी भी मिल गाइट hi लेकिन एक प्रॉब्लम थी, भूरा बशोष था उसे उस रात से अब तक होश hi नहीं आया था, अंजलि को भूरा से बात करनी hi थी उसे जानना hi था की भूरा को ये सब जान करि कहा से मिली, लेकिन वॉक र भी क्या सकती थी इंतजार के अलावा, उसके पास करने को कुछ नहीं था रहने को ठिकाना नहीं था इतने पैसे भी नहीं थे की होटल में रुक सके, उसने कुछ सोच क्र दिल्ली के लिए ट्रैन पकड़ी, और रात होने तक पहुंच गई दिल्ली रेलवे स्टेशन वह रात उनसे प्लेटफार्म पैर hi गुजारी,

इधर रात में फिर वही हुआ आज भी दीपा को तुषार के पास लेटने का मौका नहीं मिला, रात में सीमा और तुषार के बिच वही खेल चला लेकिन दीपा को आज कुछ चखने को नहीं मिला क्योकि दीपा ने आज एक कपडा रख लिया था अपने पास, दोनों बहन भाई एक दूसरे के अंगो को मसल मसल क्र हस्तमैथुन का मजा दे रहे थे, अगली सुबह सब नार्मल होता,

वही अंजलि सुबह होते hi निकल गई, वो पैदल hi चले जा रही थी उसे ये पता था कहा जाना ह लेकिन रस्ते ठीक से नहीं जानती थी इसलिए लोगो से पूछती पूछती वो लगभग 20 कम पैदल चलती हुई एक ऑफिस के सामने पहुंच गई, वो अंदर गई तो वह कुछ बच्चे कंप्यूटर पैर काम क्र रहे थे,

अंजलि- एक्सक्यूसमे में मुझे मर. शर्मा से मिलना ह

अननोन- कोण शर्मा यहाँ तो कोई शर्मा नहीं ह

अंजलि- ये मर. शर्मा का ऑफिस हुआ करता था,

तभी अंदर से एक आदमी निकल क्र आया मैडम मर. शर्मा अब यहाँ नहीं बैठते ये तो कंप्यूटर सेंटर ह उनका ऑफिस यहाँ से चेंज हो गया ह

अंजलि- क्या आप मुझे उनका एड्रेस दे सकते हो.

उस आदमी ने अंजलि को मर. शर्मा का एड्रेस दिया, जो वह से 7 कम की दुरी पैर था अंजलि बेचारी चल दी उस एड्रेस की तरफ चल दी. लगभग 2 हरष बाद वो मर. शर्मा के ऑफिस के बहार कड़ी थी, अंजलि की हालत बिलकुल एक एहति गाओं की औरत जैसी थी उसे देख क्र लगता था किस गाओं की गवर औरत ह, अंजलि जैसे hi अंदर घुसी तो गेट कीपर ने रोक दिया,

कहा जार hi ह अपॉइंटमेंट ह तेरे पास सर से मिलने का

अंजलि- अपॉइंटमेंट किस लिए मुझ ईएमआर. शर्मा से बात करनी ह

गेट कीपर- उनसे बिना अपॉइंटमेंट केन hi नहीं मिल सकते भाग यहाँ से

अंजलि- बड़े प्यार से भैया मैं बहुत दूर से आई हु उनसे मिलना बहुत जरुरी ह प्लस एक बार मिलवा दो

गप- एक बार बोलै न नहीं मिल सकती तो नहीं मिल सकती, जा यह से वर्ण ढके देकर निकल दूंगा

अंजलि- मैं आपके हाथ जोड़ती हुए क बार मिलवा दो प्लस

दोनों की आवाज सुनकर अंदर से एक लड़का आया क्या हुआ बल्लू कोण ह ये

उस गेट कीपर का नाम बल्लू था

बल्लू- सर देखिये ये जबरदस्ती शर्मा सर से मिलना चाहती ह इसके पास अपॉइंटमेंट भी नहीं ह

लड़का- कोण ह आप क्या चाहिए आपको

अंजलि- बीटा मेरी एक बार शर्मा जी से मुलाकात करवा दो.

लड़का- वो ऐसे नहीं मिलते उसका टाइम बहुत कीमती ह

अंजलि- ाचा ठीक ह उनसे एक बार ये बोल दो की अंजलि आई ह आपसे मिलने

लड़का- अच्छा ठीक ह लेकिन कहा से आई हो पूरा नाम क्या ह

अंजलि- बस तुम बता देना अंजलि आई ह मिलने 22 साल बाद

लड़का- ठीक ह वो अंदर चला गया,

कुछ hi देर के में एक 60-62 साल का आदमी हड़बड़ाता हुआ बहार आया और अंजलि को खड़े हुए देखता रहा जैसे पहचानने की कोशिश क्र रहा था, कुछ hi पालो में उसकी आँखे बड़ी हो गई और उनमे एक दर्द चालक आया जिससे आँखे नाम हो हो और वोट क दम से अंजलि को बहो में भर क्र रायणि आवाज में बोलै अंजू बीटा तू जिन्दा ह तू जिन्दा हे भगवान् ये छांटकर हो गया बीटा तू ठीक ह न ,

अंजलि- अंकल सब ठीक ह मैं ठीक ह अंदर बात करे

शर्मा को ऐसे देख क्र बल्लू और उस लड़के को बड़ी हैरत हुई आज तक उन्होंने शर्मा को किसी से ठीक से बात करते नहीं देखा था हमेशा अखाड तरीके से बात करता शर्मा को ऐसे देख क्र दोनों का मुँह खुला रह गया,

अंजलि- अंकल कुछ खाने को मंगवा दीजिये

शर्मा- समीर इधर आ जल्दी से सामने होटल से खाना पैक करवा क्र लेकर आ और सबसे अच्छा खाना होना छाइये.

अंजलि- नहीं अंकल अब इसकी आदत नहीं ह , समीर बीटा सिंपल दाल रोटी लाना, और चाय पिलवा देना,

समीर तुरंत दौड़ पड़ा बहार को,

शर्मा- कहा थी तुम बीटा कितना ढूंढा मैंने तुम्हे मैंने तो सोच लिया तहत ुम नहीं रही,

अंजलि- ऐसा hi समझ लो अंकल की मैं मर चुकी हु, और आप भी मुझे मरी hi समझना मैं बस आपसे कुछ बताने आई हु

शर्मा- ये क्या बोल रही ह बीटा

अंजलि-
नस्ले मैं वापस नहीं आना चाहती इस सब से दूर मैं खुश हु और अगर आप चाहते ह की मैं खुश राहु तो मेरा एक काम कीजिये,

शर्मा- बीटा तेरी ख़ुशी के लिए तो मैं कुछ भी करूँगा बता

अंजलि- आप चोपड़ा परिवार में पता कीजिये की वो जानते ह या नहीं की मैं जिन्दा हु या नहीं

शर्मा- उन्होंने कुछ किया क्या

अंजलि- अभी तो नहीं बस उनका बीटा मेरे गाओं तक पहुंच गया

शर्मा- तू घबरा मत बीटा मैं तेरे साथ हु

अंजलि- अंकल मैं दर नहीं रही हु बस वापस उस सब में नहीं पांडा चाहती,

शर्मा- ठीक ह मैं आज hi पता करता हु

अंजलि- मैं आपका कार्ड ले जार hi हु मैं खुद आपको कॉल करुँगी

तभी समीर खाना लेकर आ गया और जल्दी जल्दी टेबल पैर प्लेट में लगा दिया, पनीर मिक्सवेज छोले सलाद रायता मिठाई दाल बहुत कुछ था,

अंजलि ने बस दाल और रोटी ली, और बोली ये सब तुम खा लेना

शर्मा- बीटा ये सब तेरे लिए ह

अंजलि- अंकल ये सब मेरी औकात में नहीं ह, मैं अपने अतीत को याद नहीं करना चाहती और अपने आज को भूलना नहीं चाहती मेरा आज मुझे बताता ह की मुझे क्या खाना ह,

शर्मा नुम आँखों से अंजलि को देखे जार है था, फ़ी समीर चाय लेकर आ गया, चाय पीकर अंजलि बोली मैं चलती हु अंकल मैं कल फ़ोन करुँगी

शमरा- बीटा घर तो चल

अंजलि- नहीं अंकल ये बात आप यही भूल जाना की मैं आपसे कभी मिली थी ये बात किसी को पता न चले मैं यहाँ आई थी

शमरा- नहीं पता चलेगा

अंजलि वह से निकल गई, इस बार बल्लू ने अच्छा सलूट मारा अंजलि को अंजलि मुस्कुराती हुई चली गई पैदल रेलवे स्टेशन की तरफ,

शर्मा अंजलि को देखता रहा उसका दिल रो रहा था, उसने मन में बोलै शुकजा जी ये सब क्या हो गया,

अंजलि ने शाम को ट्रैन पकड़ी और रात में hi पहुंच गई शहर जहा भूरा एडमिट था, रात उसने फिर स्टेशन पैर hi गुजारी,

इधर आज रात तुषार ने सीमा की सलवार खोली और उसे साइड में करवट दिला क्र सलवार पंतय सहित निचे क्र दी, फिर खुद का लोअर भी निचे किया और अपने उप्पेर चादर दाल ली, और अपना लुंड सीमा की जांघो के बिच घुसा दिया, गरम लुंड सीमा की जांघो के बिच पंहुचा तो वो झूम उठी उसने भी अपनी गांड पीछे करके लुंड का स्वागत किया, तुषार ने सूट के अंदर हाथ दाल क्र सीमा की चूचिया मसलनि शुरू क्र दी और अपना लुंड उसकी जांघो में घिसना शुरू क्र दिया लुंड इतना बड़ा था की सीमा की जांघो को पर करके छूट के पास बहार निकला हुआ था जिसे सीमा आगे से अपने हाथ से शेला रही थी,


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लुंड की रगड़ सीमा की छूट पैर लग रही थी, तुषार सीमा के गार्डन गाल कान चुम रहा था सीमा पैर तीन तरफ से हुम्ला हो रहा था, मुँह से तुषार चुम रहा था हाथो से चूचिया दबा रहा था और लुंड छूट पैर रगड़ रहा था,

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सीमा इतना कहा बर्दास्त क्र पति वो झाड़ गई उसने तुषार का लुंड अपनी जांघो में भींच लिया, तुसाहर भी जल्दी जल्दी लुंड आगे पीछे करने लगा और जैसे hi वो झड़ने को हुआ उसने कपडा लेकर लुंड पैर रख लिया और पूरा रास उसमे भर दिया,

दोनों ने कपडे ठीक किये और सो गए, दीपा रोज की तरह उन्हें देख रही थी आज सब कुछ चादर के अंदर हो रहा था इसलिए ठीक से कुछ पता नहीं चला लेकिन उसे वो कपडा दिख गया था जिसमे तुषार ने अपना रास निकला, तुषार ने वो कपडा अपने तकिये के पास रख लिया था ताकि सुबह उठ क्र फेंक दे, लेकिन दीपा ने धीरे से वो कपडा खींच लिया और उसे सूंघने लगी, वो चिपचिपा रास उसकी उंगलियों पैर लग गया जिसे दीपा ने चाट लिया और उस कपडे पैर लगा पूरा रास दीपा चाट गई, दीपा के अंदर ये आदत कुछ अजीब थी उसे लुंड का रास चेतना बहुत पसंद आ रहा था,

उसका कारन था दीपा ने लाइफ में बार एक बार hi पोर्न मूवी देखि थी जिसमे 2 लड़की 5-6 मर्दो से चूड़ी थी और उनका रास अपने मुँह में भर क्र एक दूसरे के मुँह में दाल रही थी फिर पि रही थी, उसे चुदाई से ज्यादा उस रास पिने वाले सीन में मजा आया था और उसके दिल में लुंड का रास पिने की इच्छा इतनी बढ़ गई, और उसने तुषार के लुंड का रास चखा जब उसके अंडरवियर से तो उसके दिल की फीलिंग्स इतनी बढ़ी हुई थी की उसे उसमे एक अलग hi स्वाद आ गया, वो उसके लिए दीवानी होने लगी, उसका धयान बस लुंड क ेरस पैर hi होता.

ऐसे hi 8 दिन गुजर गए अंजलि वही शहर में पड़ी हुई थी अब उसने हॉस्पिटल में लेटने का इंतजाम क्र लिया था, भूरा अभी होश में नहीं आया था, और वो भूरा से मिले बिना जा नहीं सकती थी उसे जानना था की भूरा को जानकारी कहा से मिली,

इधर सीमा और तुषार रोज रात को अपनी काम क्रीड़ा क्र लेते और अपना रास निकल देते, दीपा बेचारी ऐसे hi तड़पती रहती, एक रात दोनों को मौका नहीं मिला कुछ करने का रूचि बहुत देर तक जगती रही और तुषार से चिपकी रही तो ज्यादा देर होजाने की वजह से वो सो गए, तुषार का लुंड और सीमा की छूट बैचैन रहे, जब वो अपने कॉलेज निकले तो सीमा के दिमाग में कुछ आया उसने रस्ते में तुषार को इशारा किया की स्कूल न जाये वापस घर चला जाये, तुषार ने वही किया वो स्कूल में गे और वापस निकल क्र घर आ गया सीमा ने भी यही किया अपनी क्लास में गई और जल्दी hi निकल क्र घर पहुंच गई.

उन दोनों बेवकुफो ने अब तक ये सोचा hi नहीं की वो ऐसा भी क्र सकते ह के रात दोनों को मौका नहीं मिला कुछ करने का रूचि बहुत देर तक जगती रही और तुषार से चिपकी रही तो ज्यादा देर होजाने की वजह से वो सो गए, तुषार का लुंड और सीमा की छूट बैचैन रहे, जब वो अपने कॉलेज निकले तो सीमा के दिमाग में कुछ आया उसने रस्ते में तुषार को इशारा किया की स्कूल न जाये वापस घर चला जाये, तुषार ने वही किया वो स्कूल में गे और वापस निकल क्र घर आ गया सीमा ने भी यही किया अपनी क्लास में गई और जल्दी hi निकल क्र घर पहुंच गई.


अब तक ये सोचा hi नहीं की वो ऐसा भी क्र सकते ह क्योकि रात में अपना रास निकल लेते थे तो सुबह जरुरत hi नहीं पड़ती थी, आज रास नहीं निकला तो हवस ने दूसरा रास्ता दिखा दिया, सीमा जैसे hi घर पहुंची तो उछाल क्र तुषा की गॉड में चढ़ गई, और उसके हॉट चूमने लगी, दोनों एक दूसरे को पागलो की तरह चूमे जार हे थे,

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तुषार ने सीमा को चारपाई परलितया और उसके उप्पेर आ गया और चूमने लगा, तुषार का एक हाथ सीमा की चुकी मसल रहा था सीमा तुषार के बाल शेला रही थी 10 मिन्तुइस तक दोनों एक दूसरे को चूमते रहे,

फिर सीमा की जब साँस उखड़ने लगी तो उसने तुषार को धकेला और जल्दी से उसकी शर्ट खोलने लगी तुषार भी सीमा का सूट उतरने लगा, अब तुषार सिर्फ पेण्ट में और सीमा ब्रा और सलवार में थी, तुषार ने सीमा की ब्रा से आधी झक्ति हुई चूचियों पैर मुँह रख दिया, सीमा ने उसका सर अपनी चूचियों पैर दबा दिया, सीमा का हाथ तुषार की पेण्ट पैर चला गया और उसकी पेण्ट खोलने लगी तुषार ने भी सीमा की सलवार का नाडा पदक और खोल दिया सलवार निचे गिर गई, तुषार की पेण्ट भी उतर गई, अब तुषार केवल अंडर वियर में था और सीमा ब्रा पंत सीमा ने उसका सर अपनी चूचियों पैर दबा दिया, सीमा का हाथ तुषार की पेण्ट पैर चला गया और उसकी पेण्ट खोलने लगी तुषार ने भी सीमा की सलवार का नाडा पदक और खोल दिया सलवार निचे गिर गई, तुषार की पेण्ट भी उतर गई, अब तुषार केवल अंडर वियर में था और सीमा ब्रा पंतय में,


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तुषार सीमा को उप्पेर से निचे तक चूमने लगा, सीमा आहे भरने लगी आज वो खुल क्र आहे भर रही थी, तुषार ने सीमा को अपनी गॉड में उठा लिया और उसकी ब्रा का हुक खोल दिया, सीमा के 34 साइज के दो विशाल कबूतर उछाल क्र तुषार के सामने आ गए तुषार सीम ाको गॉड में लिए हुए hi उसकी चूचियों की चूमने लगा सीमा भी अपनी चूचिया तुषार के मुँह पैर खुद से hi रगड़ने लगी तुषार ने फिर सीमा को लिटाया और उसकी चुकी को अच्छे से अपने हाथो से मसलने लगा,

तुषार एक चुकी को चूसने लगा और दूसरी को हाथ से मसलने लगा सीमा अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह करने लगी सीमा ने हाथ बढ़ाया और तुषार का अंडर वियर निचे खींचने लगी जो उसके लुंड पैर अटक गया था, सीमा तुषार की गांड को सहलाने लगी तुषार सीमा को चूमता हुआ निचे उसके पेट पैर पहच गया फिर पंतय को चूमने लगा, तुषार ने सीमा की पंतय पकड़ी और निचे खींचने लगा सीमा ने भी गांड उठा क्र उसकी हेल्प की,

तुषार सीमा के पास खड़ा हो गया सीमा ने तुषार का अंडर वियर निचे खींच दिया उसका लुंड उछाल क्र सामने आ गया, आज पहेली बार सीमा ने इतनी तसली से तुषार का लुंड देखा था उसकी आँखे फटी रह गई, इतना मोटा और लम्बा लुंड सीमा उसे बड़े प्यार से सहलाने लगी,

तुषार सीमा की टैंगो के बिच आ गया और आना मुँह सीमा की चुकी पैर रख दिया,

सीमा- चूस ले अपनी माँ की चुकी मेरे bête

तुषार ने हैरत से सीमा की तरफ देखा तो सीमा मुस्कुराती हुई बोली माँ जब गाइट hi तो उन्होंने hi तो कहा था की जब तक मैं न औ सीमा hi तुम्हारी माँ, तो अब तू अपनी माँ की चुकी चूस रहा ह,

माँ की चुकी चूस रहा ह ये लाइन सुनते hi तुषार के अंदर एक अलग hi ऊर्जा आ गई उसने पूरी ताकत से सीमा की चुकी मसल दी,

सीमा- आअह्ह्ह्हह भेनचोद उखड़ेगा क्या

तुषार- अरे नहीं मेरी जान इनका तो दूध पीना ह

सीमा- भेनचोद इतनी जोर से दबाएगा तो खून निकल आएगा दूध नहीं

तुषार- साली आज तुझे छोड़ क्र दूध निकल दूंगा इनका

सीमा- मादरचोद बन जायेगा आज तू भेनचोद तो बन hi चुक्का ह

तुषार- जब तेरे जैसे रंडी बहन और माँ होगी तो मैं ख़ुशी से भेनचोद मादरचोद बन जाऊंगा,

दोनों का जोश अलग hi लेवल पैर था और उसी जोश में तुषार ने लुंड सीमा की छूट पैर लगाया और एक जबरदस्त धक्का मर दिया, लुंड छूट को चीरता हुआ आधे से ज्यादा अंदर घुस गया,


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सीमा- अहहहहहहह भेंचदा फिर से फाड् दी मेरी छूट भोसड़ी के मरेगा क्या

तुषार- भोसड़ी की तुझे hi तो मजा आता ह न ऐसे छोड़ने में तो साली चुद न

सीमा एक hi बार चूड़ी थी और उस दिन एक अलग hi जोश था लेकिन आज उसे सही दर्द का अहसास हुआ वो तो छूट गीली थी वर्ण सच में बेहोश hi हो जाती

तुषार ने लुंड बहार खींचा और दूसरा धक्का लगा दिया लुंड पूरा जड़ तक अंदर घुस गया सीमा की आँखे hi बहार निकल आई,

सीमा- आह्ह्हह्ह चुद गई मेरी माँ आह्ह्ह्हह्ह भेनचोद फैट गई आह्ह्ह्हह्ह निकल ले प्लस एक बार निकल ले आहहहहहहह

तुषार- आज तेरी माँ छोड़ दूंगा साली अब नहीं निकलेगा ये बहार


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सीमा- आह्हः भाई प्लस एक बार बस अह्ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह बहुत मोटा ह आह्हः बहुत दर्द हो रहा ह,

तुषार रुका नहीं उसने धक्के लगाने शुरू क्र दिए वो धक्के तेज नहीं लगा प् रहा क्योकि लुंड छूट में फसा हुआ था इतनी टाइट छूट थी लुंड को जकड लिया था, तुषार की जगह कोई और होता तो अब तक छूट की गर्मी को जकड़न से hi झाड़ जाता, तुषार ने हलके हलके धक्के लगाने शुरू किये कुछ hi देर में सीमा झाड़ गई और उसकी छूट ने इतना पानी छोड़ा की निचे की चादर भी भीग गई, छूट इतनी चिकनी हो गई की लुंड अब आराम से अंदर बहार होने लगा, तुषार ने भी राफ्तेर पकड़ ली और धक्के मरने लगा, तुषार पूरी राफ्तेर से धक्के लगाए जार है था सीमा का दर्द लगभग गायब hi हो गया था मजा जो इतना आ रहा था,

सीमा भी उसका साथ देने लगी ाःहाहाःहाहा टुशु ऐसे hi छोड़ता रह आह्हः मेरे भाई मेरे आशिक मेरे यार बस ऐसे छोड़ता रह अपनी बहन को,

तुषार- अहहहहहहह तू बहन ह या माँ सोच ले पहले

सीमा- तू बस छोड़ता रह चाहे बहन हु या माँ आज माँ hi छोड़ ले सोच तेरी माँ तेरे निचे चुद रही ह छोड़ मादरचोद मुझे छोड़ अपनी माँ को

तुषार ने पूरी ताकत से धक्के लगाने शुरू क्र दिए 25 मिनट्स तक तुषार लगातार धक्के मरता रहा और दोनों पता नहीं क्या क्या गन्दा बकते रहे, सीमा तीसरी बार झड़ने लगी, तुषार भी अब झड़ने hi वाला था, सीमा तुरंत बोल पड़ी अंदर मत करना वर्ण मैं प्रेग्नेंट हो जाउंगी तुषार ने अपन अलुंड बाहर खींच लिया बहार निकलते hi लुंड ने धार मारनी शुरू क्र दी ज सीमा की चुकी और पेट पैर गिरने लगी, बहुत वीर्य निकला था तुषार का, वो निढाल होकर साइड में लेट गया,

सीमा- ची पूरी गन्दी क्र दी तूने मैं

तुषार- अरे ऐसे तोडना रोका जाता ह खुद को

सीमा उठी और खुद को साफ़ करने लगी तुषार ऐसे hi नंगा पड़ा रहा उसका लुंड छूट रास में भीगा हुआ चमक रहा था, सीमा वापस आई तो तुसाहर के लुंड को देख क्र उस पैर फिर मोहित हो गई लेकिन छूट में इतना दर्द था की वो कैसे खुद को साफ़ करने केलिए उठ क्र गई ये वही जानती थी, उसने तुषार को उठाया और बोली जय से साफ़ क्र ले तुषार चला गया तब तक सीमा ने कपडे पहन लिए, और चादर उठा क्र अलग रख दी, तुषार पीछे से नंगा आया और सीमा से चिपक गया,

सीमा- तूने मेरी जान निकल दी आज

तुषार- जान कहा निकली मजा दिया ह

सीमा- ऐसा मजा पाने के लिए तो मैं कुछ भी क्र जाऊ ी लव ु टुशु

तुषार- लव ु तू मेरी जान

सीमा- चल कपडे पहन ले जल्दी से

तुषार- एक बार और करते ह न

सीमा- न बाबा एक बार में hi बुरी हालत हो गई ह तू मेरे अकेले के बस में आने वाला नहीं ह तेरे लिए कोई और ढूंढ़नी पड़ेगी जो तुझे सम्हाल सके

तुषार- मुझे तेरे अलावा कोई नहीं चाहिए

सीमा- मेरी तो तू एक बार में hi फाड् देता ह और तुझे चाइये ज्यादा मुझ अकेली की तो तू जान ले लेगा,

तुषार- क्या क्या बोलती रहती हो, भूक लगी ह खाना दे दो जल्दी इतनी महेनत करवा दी,

दोनों हसने लगे तुषार ने कपडे पहने तब तक सीमा ने खाना लगा दिया दोनों ने खाना खाया और एक दूसरे से पति पत्नी की तरह चिपक क्र लेट गए,

सबके वापस आने से पहले तुषार निकल गया जिससे सबको लगे वो स्कूल से आया ह सीमा घर पैर hi रही उसने बोल दिया की आज क्लास जल्दी ख़तम हो गई थी,


रात को आज सीमा और दीपा एक hi साइड में लेती थी, सीमा तुषार के पास hi थी दूसरी तरफ रूचि आज सुबह इतनी तगड़ी चुदाई हूत hi तो सेमा को बड़ी घेरि नींद आ गई रात को उसकी आँख खुली तो टॉयलेट करने गई जब वो वापस आई तो दीपा तुषार के पास खिसक गई, सीमा भी चुपचाप साइड में लेट गई,
 
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कुछ hi देर में दीपा का हाथ तुषार की जांघ पैर पहुंच गया दीपा जो जग रही थी उसकी धड़कन बढ़ी हुई थी, लेकिन आज उसने कुछ करने का फैसला ले लिया था उसने अपना हाथ तुषार के लुंड पैर रख दिया, तुषार नींद में था उसे लगा सीमा ह वो कुछ नहीं बोलै बस दीपा का हाथ पकड़ क्र लुंड पैर मसल दिया नींद में hi, दीपा एक दम दर गई लेकिन जब उसे अहसास हुआ की तुषार सो रहा ह तो उसने धीरे धीरे लुंड सहलाना शुरू क्र दिया,

तुषार का लुंड अब अपनी औकात पैर आ चुक्का था तुषार की नींद भी थोड़ी थोड़ी खुल चुकी थी वो बस आलस में लेता हुआ था, दीपा उसके मोठे लुंड को बड़े प्यार से शाला रही थी, मन में घबराहट थी लेकिन वो अटल फैसला करके आई थी, उसने तुषार का लोअर हल्का सा निचे किया और लुंड को बहार निकल लिया और पुरे लुंड को उप्पेर से निचे तक नापने लगी,


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तुषार मजे से लेता रहा उसने एक हाथ दीपा को सीमा समझ क्र उसकी चुकी पैर रख दिया दीपा का साइज सीमा से थोड़ा काम था लेकिन लुंड जब खड़ा हो तो आदमी को किसी का साइज नहीं समझ आता, तुषार का हाथ अपनी चुकी पैर पड़ते hi दीपा की छूट लैप लैप करने लगी वो कुछ देर शांत लेट गई बस लुंड हाथ में पकडे रखा तुषार भी उसकी छुई को पकड़ क्र लेता रहा, दीपा ने फिर थोड़ी हिम्मत की और लुंड हिलने लगी, तुषार ने हाथ दीपा की छूट पैर लजाने लगा तो दीपा ने उसका हाथ पकड़ लिया,

तुषार धीरे से क्या हुआ, दीपा कुछ नहीं बोली,

तुषार- भेनचोद तेरा मन नहीं भरा क्या सुबह तो बोल रही थी दो बार नहीं झेल पायेगी अब फिर गर्मी चढ़ गई क्या

दीपा को पता चल गया की दोनों ने सुबह चुदाई की ह, दीपा का जोश बढ़ गयाउसका हाथ तेज चलने लगा,

तुषार- मत बोल भेनचोद करती रह हाथ लगाने नहीं दे रही तू हिलती रह मैं सो रहा हु,

तुषार चुप लेट गया कुछ देर बाद दीपा ने लुंड से हाथ हटा लिया तुषार को लगा सीमा नाराज हो गई ह, लेकिन अगले hi पल तुषार की साँस अटक गई उसके मुँह से एक ाः निकल गई, क्योकि दीपा ने तुषार का लुंड अपने मुँह में भर लिया था,


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ये तुषार के लिए ेलिए बहुत hi मजेदार पल था, उसने सीमा के साथ गुस्से में वो सब किया था लेकिन उसके बाद दोनों में से किसी ने भी ऐसा करने का सोचा भी नहीं था, लेकिन आज तुषा रको लगा सीमा खुद उसका लुंड चूस रही ह , दीपा को लुंड चूसना नहीं आता था इसलिए वो बस लुंड को मुँह में लेकर उस पैर अपनी जीभ घुमा रही थी और मुँह को उप्पेर निचे क्र रही थी,

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लुंड का एक चौथाई हिस्सा hi दीपा के मुँह में जार है था बाकि दीपा ने मुठी में भर रखा था तुषार पुरे मजे में आ चुक्का था, उसने दीपा के सर पैर हाथ रखा और लुंड निचे से हिलं ेलगा तुषार तो जैसे जन्नत की सैर क्र रहा था इतना मजा तो इतनी रातो में लुंड हिलने में भी नहीं आया दीपा 20 मिनट्स तक ऐसे hi तुषार का लुंड चुस्ती रही,

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तुषार को अपनी सिसकिया रोकने में बड़ी मुश्किल हो रही थी तुसाहर इतना गरम हो गया की झड़ने की कगार पैर पहुंच गया, उसने अपने हाथ से भी लुंड हिलना शुरू क्र दिया, जैसे hi उसका वीर्य निकलने को हुआ तो उसने सीमा उर्फ़ दीपा को हटाना चाहा लेकिन दीपा ने तुषार का हाथ हटा दिया और पुरे जोश से लुंड चूसने लगी पूरा लुंड दीपा के थूक में भीगा हुआ था, तुषार खुद को नहीं रोक पाया और एक तेज धार दीपा के मुँह में मर दी, जब तुषार झड़ने लगा तो उसने दीपा का सर पदक और लुंड पैर दबा दिया और उसके मुँह में झटके मरते हुए पूरा लुंड खली करने लगा,

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दीपा जितना जल्दी जालिद निगल सकती थी निगल गई लेकिन फिर भी बहुत सा रास उसके मुँह से बहार भेने लगा जो तुषार के लुंड से भेटा हुआ उसके पेट और उसके अंडो पैर गिरने गाला, तुषार को अपने झट काटने का भी टाइम नहीं था मतलब घर में मौका नहीं मिलता था तो उसके झट भी काफी बड़ी हो राखी थी जिनमे उसका वीर्य गिर रहा था, जब तुषार का पूरा रास खली हो गया तो दीपा ने उसके लुंड को अच्छे से चांटा शुरू क्र दिया, वो उप्पेर से निचे तक उसका लुंड चाट रही थी, फिर उसके पेट से वीर्य चाटने लगी और लास्ट में उसके ाँद भी चाटने लगी तुषार तो जैसे किसी और hi दुनिया में जा चुक्का था, दीपा ने तुषार के लुंड की जड़ में झाटो के बिच गिरे वीर्य जो दीपा के थूक के सतह मिल चुक्का था उसे भी चाटने लगी,

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दीपा तुषार की झाटो पैर अपने होतो और जीभ रगड़ रही थी कुछ hi देर में दीपा ने तुषार का पूरा रास साफ़ क्र दिया था, तुषार के लिए ये अहसास इतना जबरदस्त था की उसका लुंड 10 सेकण्ड्स में फिर से खड़ा हो गया या यु कहे बैठ hi नहीं पाया था, और दीपा का तो पूछो hi मत उसने आज पहेली बार लुंड का स्वाद चखा था उसे तो वो शहद जस्या लग रहा था और उसका रास वो तो अमृत जैसा फील हो रहा था, दीपा इतनी खुश थी जैसे उसे जीवन की साडी ख़ुशी मिल गई हो,

तुषार मजे में सर इधर उधर क्र रहा था की तभी उसकी नजर साइड में सो रही सीमा पैर गई, उसने जैसी hi सीमा को देखा उसकी तो साँस hi अटक गई, सीमा यहाँ ह तो ये कोण ह जो लुंड चूस रही थी, उसने दूसरी साइड देखा तो रुचे सो रही थी, तुषार एक दम चौंक गया और वो एक दम शांत खामोश स्तब्ध सा लेट गया उसे समझ hi नहीं आया ये क्या हुआ दीपा ने ये क्या किया उसकी दूसरी बहन उसका लुंड चूस रही थी,

दीपा ख़ामोशी से उठी और बहार चली गई, बहार दीपा ने अपनी सलवार खोली और अपनी छूट अच्छे से रागादि उंगली नहीं की, वो खुद की छूट से hi बोली, सबर क्र मेरी कम्मो सबर क्र आज मेरे मुँह को लुंड का स्वाद मिला ह जल्दी तुझे भी मिलेगा, वो खुद से hi मुस्कुराती हुई अपना मुँह साफ़ करके अंदर आई और सीमा की साइड में लेट गई, जैसे कुछ हुआ hi न हो, तुषार काफी बौखलाया हुआ था उसे समझ hi नहीं आ रहा था अभी क्या हुआ, लेकिन लुंड बोल रहा था बहुत मजा आया दिमाग ख़राब हो रहा था, उसने अपना लोअर उप्पेर किया और चुप चाप लेता रहा, उसे समझ hi नहीं आया क्या आकर कैसे रियेक्ट करे, फिर उसे नींद आ गई.

सुबह सब उठ क्र अपने काम पैर लग गए दीपा ऐसे रियेक्ट क्र रही थी जैसे कुछ हुआ hi न हो तुषार बार बार दीपा के फेस पैर कुछ ढूंढ़ने की कोशिश क्र रहा था लेकिन उसे वह कुछ दिखाई नहीं दिया, क्योकि दीपा को तो यही लग रहा था की तुषार उसे सीमा समझ रहा होगा, लेकिन पागल छोकरी को पता hi नहीं की सीमा ने कभी उसका लुंड नहीं चूसा और तुषार ने उसे पहचान लिया था,

तुषार ने भी नार्मल रहना hi ठीक समझा सोचा देखा जायेगा जो होगा, रात को फिर सीमा और तुषार का खेल चला जिसे दीपा देख रही थी तुषार किन अजर बार बार दीपा पैर जार hi थी उसे पता चल गया था की दीपा उन्हें देख रही ह, तुषार के लुंड को और मजा आ रहा था एक बहन के साथ वो मजे क्र रहा ह दूसरे उसे ताड़ रही ह, ऐसे hi 3 दिन निकल गए, फिर एक दिन सीमा और तुषार ने कॉलेज स छुट्टी मरी और अपना खेल खेला, तो रात में उनका खेल नहीं हुआ तो दीपा को मौका मिल गया उसने फिर वही किया, तुषार को बहुत मजा आ रहा था, उसे लुंड चुसवाने में मजा आने लगा,

अगली रात तुषार ने सीमा से मन किया की उसका मन नहीं ह इतने दिन से लगातार क्र रहे ह तो थकन हो रही ह आज सो जा, सीमा उसकी बात मन गई और सो गई तो दीपा ने फिर अपना कब्ज़ा जमा लिया ये hi तुषार चाहता था उसे लुंड चुसवाने में बहुत मजा आने लगा था अगले 3 रात दीपा ने तुषार का लुंड चूसा और उसका रास पिया,

इधर अंजलि हॉस्पिटल में hi पड़ी थी भूरा के उठने के इंतजार में, वो जैसे तैसे अपना टाइम निकल रही थी, क्योकि उसे उस इंसाने के बारे में जानना था जिसने भूरा को ये सब बताया,

सीमा को चूड़े कई दिन हो गए तो उसने तुषार को छुट्टी के लिए बोलै दोनों का प्रोग्राम बन गया, आज तुषार अलग मूड में था आज उसने सीमा को माँगा किया और उसकी चूचिया चूसने लगा फिर उसने अपने कपडे उतरे और अपना लुंड सीमा के सामने क्र दिया सीमा उसे सहलाने लगी,

तुषार- इसे चूस न

सीमा- पागल ह क्या

तुषार- क्यों पहेली बार भी तो लिया था मुँह में

सीमा- वो तो तूने जबरस्ती घुसा दिया था

तुषार- तो इस बार तू अपनी मर्जी से चूस न

सीमा- मुझसे नहीं होगा एक तो ये मोटा इतना ह और मुझे मुँह में नहीं लिया जाता

तुषार का मान उतर गया, लेकिन उसे धयान आया की सीमा को डोनेशन पसंद ह तो उसने सीमा के बाल पकडे और एक हाथ से उसका मुँह पकड़ा और अपना लुंड उसके होतो पैर रगड़ने लगा सीमा अपना सर इधर उधर क्र रही थी लेकिन तुषार की पकड़ मजबूत थी, वो कुछ नहीं क्र सकीय,


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तुषार अपना खड़ा लुंड सीमा के मुँह पैर रगड़ने लगा अपने लुंड से उसे थप्पड़ मरने लगा, फिर उसने सीमा के बाल जोर से खींचे जिससे उसका मुँह खुल गया तो तुषार ने अपना लुंड उसके मुँह में घुसा दिया और उसका मुँह हलके हलके छोड़ने लगा, सीमा बस मुँह खोले बैठी थी वो चूस नहीं रही थी तुषार को मजा तो आ रहा था मुँह छोड़ने में लेकिन जो मजा लुंड चुसवाने में आया वोन hi आया था,

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सीमा के मुँह से थूक टपक रहा था उसकी आँखो से आंसू भी रहे थे, तुषार काफी देर तक उसका मुँह छोड़ता रहा फिर तुषार ने सीमा को धक्का दिया और उसकी छूट में दो उंगलिया घुसा दी और आगे पीछे करने लगा सीमा पिअत के बल लेती थी जिससे उसकी गांड उप्पेर को उभरी हुई थी तुषार को चुदाई की साडी पोजीशन नहीं आती थी लेकि इस पोजीशन में उसे उसकी छूट बड़ी प्याइ लगी तो उसने अपन अलुंड सीमा की छूट पैर रखा और एक hi बार में पूरा लुंड सीमा की छूट में उतर दिया,

ये दोनों के लिए नया अनुभव था अलग पोजीशन में चुदाई करना तुषार सीमा के ुपीर लेट गया और धक्के लगाने लगा, सीमा को इसमें ज्यादा दर्द हो रहा था लुंड भी फास क्र छूट में जार है था, लेकिन पूरा अंदर नहीं जार है था क्योकि सीमा की भरी गांड बिच में आ जाती थी जिससे लुंड अंदर नहीं घुस प् रहा था तो तुषार ने एक हाथ से सीमा का चुत्तड़ पकडे और खोलने लगा, सीमा की गांड जैसी hi खुली लुंड और अंदर तक घुस गया, और सीमा की गांड का छेद भी थोड़ा खींच गया जिससे उसे दर्द हुआ लेकिन मजा भी आया, सीमा निचे से अपनी गांड उछलने लगी उप्पेर से तुषार धक्के लगाने लगा,


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थोड़ी देर इ सीमा थक गई तो वो सीधी होने लगी तुषार उसकी टैंगो के बिच आया और लुंड छूट में घुसा क्र धक्के लगाने लगा, तुषार पूरी ताकत से धक्के मर रहा था उसने सीमा की दोनों चुकी पकड़ी और धक्के लगाने शुरू क्र दिए सीमा दर्द और मजे में पागल हुए जार hi थी छोड़ माँ के लोडे अहहहहह छोड़ अपनी बहन को अहहहहहहह फाड् दे मेरी छूट अहहहहहह गुसा दे अपना लोढ़ा मेरी छूट में,

तुषार- आह्ह्ह्ह ले साली कुटिया ले आह्ह्ह्हह तेरी छूट का भोसड़ा बना दूंगा भेनचोद भाई छुड़ानी अहहह ले

दोनों पुरे जोश में थे गन्दी गन्दी गालिया दे रहे थे, दोनों बहुत देर तक ऐसे hi चुदाई करते रहे, फिर सीमा झाड़ गई अब वो 1 बार hi झड़ती थी उसे तुहार के लुंड की आदत पद गाइट hi तो वो भी तुषार के साथ एक बार hi झड़ती थी उसे थोड़ा अनुभव हो गया था कब झड़ना ह कैसे झड़ना ह, तुषार भी झड़ने लगा तो उसने लुंड बहार निकल लिया, तुषार ने अपना लुंड सीमा के मुँह में देना चाहा तो सीमा पीछे हो गई तो लुंड ने पूरा रास सीमा की चूचियों पैर उगल दिया,

सीमा- क्या करता ह मुँह में डालता क्या

तुषार- अह्ह्ह्ह मेरी जान ले लेना मुँह में

सीमा- पागल ह क्या मुँह में कोण लेता ह

तुषार- एक बार लेकर देख न मजा आएगा

सीमा- मुझे नहीं लेना

तुषार- भेनचोद एक दिन तेरे मुँह में मुतुंगा तब बता

सीमा- हरामखोर मैं भी तेरे मुँह में मूत दूंगी समझा

दोनों फिर एक दूसरे से चिपक गए और एक दूसरे के अंगो से खेलने लगे, फिर दोनों उठे और खुद को साफ़ किया, तुषार के दिल में दीपा का नशा चढ़ना शुरू हो गया था, उसका लुंड चूसना लुंड का रास पीना उसे बहुत एक्सीटेंड करता, लेकिन वो सब अँधेरे में हो रहा था उसे ये सब दिन के उजाले में उसकी मर्जी से चाहिए था लेकिन कैसे करे,

रात को कुछ करने का मौका नहीं मिला, अगली रात को तुषार ने अपना बिस्टेर अलग लगा लिया उसके दिमाग में कुछ चल रहा था, उसने सीमा को मन किया की आज उसका कुछ करने का मन नहीं ह, सीमा चुपचाप सो गई रूचि कुछ देर तक तुषार के पास hi लेती रही ये रूचि का रोज का नियम हो गया था ो तुषार की से चिपक क्र hi सोती थी, जब उसे नींद आने लगी थी तो वो अपनी जगह आ गई, घर में एक दम शांति हो गाइट hi, लेकिन दो लोगो को नींद नहीं थी तुषार और दीपा,

तुषार बैचेन था क्या दीपा फिर आएगी वही दीपा बैचैन थी वो क्या करे जाये या नहीं, काफी देर दोनों शांत लेते रहे, काफी देर इंतजार करने के बाद तुषार ने सोचा शायद वोन hi आएगी इसलिए उसने सोना hi ठीक समझा, और नींद की आगोश में चला गया, उसे नींद आई hi थी की उसे लगा कोई उसका लोअर कीच रहा ह, उसकी आँख खुली वोट क दम हड़बड़ा सा गया था लेकिन खुद को कण्ट्रोल किया, उसने अँधेरे में नजर डाली तो कोई उसके पैरो के पास बैठा था और उसके लुंड को बहार निकलने की कोशिश क्र रहा था, तुषार समझ गया की ये दीपा ह,

वो एक दम शांत लेट गया, दीपा ने उसका लुंड बहार निकल लिया और मसलने लगी, लुंड पूरी तरह खड़ा नहीं हुआ था, लेकिन कुछ hi पालो में वो अपनी औकात पैर आ गया था, दीपा बड़े प्यार से उसे शेला रही थी, फिर द्देपा ने अपना सर लुंड पैर झुकाया और लुंड का टोपा अपने मुँह में भर लिया, तुषार खुद को कण्ट्रोल नहीं क्र प् रहा था, दीपा का लुंड चूसने का स्टाइल दिन बा दिन सेक्सी होता जार है था, जैसे वो खुद से सिख रही थी लुंड कैसे चूसा जाता ह, दीपा पुरे मन से लुंड को अपने गले तक ले जाने लगी, जितना हो सके वो अंदर तक ले जाती, तुषार दीपा के सर पैर हाथ घूमने लगा, और मजा लेने लगा,

दीपा तब तक लुंड चुस्ती रही जब तक तुषार के लुंड ने अपनी पिचकारी उसके मुँह में नहीं भर दी, इतने दिन से लगातार तुषार अपना रास निकल रहा था तो आज उतना नहीं निकला इसलिए दीपा उसे पुरे को निगल गई एक भी बून्द गिरने नहीं दी, जैसे hi तुषार का लुंड खली हुआ दीपा उठने लगी लेकिन तुषार आज अलग मूड में था उसने एक दम दीपा का हाथ पकड़ लिया, जब तक दीपा कुछ समझ पति तुषार ने उसे अपने उप्पेर खींच लिया दीपा के मुँह से एक दम आह्ह्ह्ह निकल गई, दीपा की दोनों चूचिया तुषार की छाती में डाब गई दीपा का फेस तुषार के फेस के सामने था, दीपा बुरी तरह आदर गाइट hi, तुषार ने दीपा की कमर में हाथ डाला और उसे अपने से बिच लिया, दीपा की चूचिया पूरी तरह तुषार की चेस्ट से चिपक गाइट hi,

घर में अँधेरा था लेकिन इतनी रौशनी तो थी hi की 1 इंच की दुरी पैर किसी का फेस हो तो वो न दिखे, दीपा का फेस तुषार के सामने था, दीपा दरी शमी सी तुषार को देखे जार hi थी तुषार भी दीपा को देखे जार है था, दोनों काफी देर तक ऐसे hi देखते रहे, दीपा बुरी तरह श्रम गाइट hi, उसे समझ hi नहीं आ रहा था क्या करे,

तुषार- क्यों चुप क्र करती हो जब करना hi ह तो खुल क्र करो न दीपा दीदी

अपना नाम तुषार के मुँह से सुनते hi दीपा की साँस hi अटक गई उसक घबरास्त दर शर्म सब एक साथ उस पैर हावी था, दीपा ने कुछ जवाब नहीं दिया बस तुषार को चिकोटी काट ली, तुषार को दर्द हुआ जिससे उसकी पकड़ ढीली हो गई दीपा ने उसका फायदा उठाया और उसकी बहो से निकल गई और तुरंत अपनी जगह आ गई,

तुषार के फेस मुस्कराहट थी, लेकिन दीपा उसकी तो साँस hi कबो में नहीं आ रही थी, वो इतनी घबरा गाइट hi जैसे उसे चोरी करते पकड़ लिया हो और बी सजा मिलने वाली ह,

दीपा मन में अब क्या होगा उसे पता चल गया, ये मैंने क्या क्र दिया मुझे ये सब नहीं करना चाहिए था अब क्या होगा,

लेकिन मैं दर क्यों रही हु ये तो होना hi था एक दिन मैं भी तो यही चाहती थी, अगर उसे कभी पता hi नहीं चलता तो वो मेरे करीब कैसे आता, सीमा और टुशु दोनों इतना आगे बढ़ चुके ह जब उनको डारन hi लगा तो मैं क्वो इतनी घबरा गाइट hi जैसे उसे चोरी करते पकड़ लिया हो और बी सजा मिलने वाली ह,

दीपा मन में अब क्या होगा उसे पता चल गया, ये मैंने क्या क्र दिया मुझे ये सब नहीं करना चाहिए था अब क्या होगा,

लेकिन मैं दर क्यों रही हु ये तो होना hi था एक दिन मैं भी तो यही चाहती थी, अगर उसे कभी पता hi नहीं चलता तो वो मेरे करीब कैसे आता, सीमा और टुशु दोनों इतना आगे बढ़ चुके ह जब उनको डारन hi लगा तो मैं क्यों दारू, लेकिन मैं उसके सामने कैसे जाउंगी सुबह मेरी तो हिम्मत hi नहीं पड़ेगी सामने जाने की,

दीपा के मन में बहुत साडी बाते एक साथ चल रही थी, वो खुद से hi कंफ्यूज थी क्या करे सही हुआ या गलत हुआ, इन्ही खयालो में लेते हुए उसे नींद आ गई,

सुबह सब अपना अपना काम करके कॉलेज चल दिए दीपा तुषार की नजरो से बचने की कोशिश क्र रही थी, तुषार भी थोड़ा सा झिजक रहा था लेकिन दीपा ने तो नजर hi नहीं उठाई थी, अब तुषार को भी थोड़ी घबराहट हुई कही दीपा नाराज तो नहीं ह, उसे अब टेंशन होने लगी थी, शाम को वापस आकर भी दीपा और तुषार ऐसे hi रहे, दीपा की हिम्मत hi नहीं हो रही थी तुसाहर से नजर मिलाने की और तुषार की टेंशन बढ़ती जार hi थी, रात में आज कुछ नहीं हुआ सब शांति थी,

तुषार खुद को कोस रहा था ये उसने क्या क्र दिया अपनी बहन को नाराज क्र दिया उसने मजे के लिए अपनी बहन का दिल दुख दिया, वही दीपा बैचैन थी की वो क्या करे ऐसे तो घर में रह नहीं सकते एक दूसरे से नजरे चुरा चुरा क्र वो भाई ह और बी तो भाई से बढ़ क्र प्यार ह, मैं उसके बिना नहीं रह सकती उसके बिना एक पल नहीं जी सकती,

लेकिन सीमा का क्या होगा वो दोनों एक दूसरे के साथ सब कुछ क्र चुके ह अगर मैं बिच में आ गई तो, मुझे रुक जाना चाहिएक्या? लेकिन मैं क्यों रुकू सीमा की तरह मैं भी उसकी बहन हम एरा भी तो हक़ ह उस पैर जब मुझे उन दोनों के रिश्ते से ाइटर्ज नहीं ह तो सीमा को क्यों होगा, उसकी लाइफ में किसी और के होते हुए भी मैं उसे प्यार क्र सकती हु तो सीमा भी क्र सकती ह आखिर हम भेने ह,

दीपा के दिमाग में बड़ा भूचाल आया हुआ था, जैसे तैसे उसने रात गुजारी, सुबह उसने सबको बताया की आज उसकी तबियत ठीक नहीं ह वो घर पैर hi रुकेगी, सबको नार्मल लगा, लेकिन उसने तुषार की तरफ नजरे मिला क्र ( जो उस हादसे के बाद पहेली बार मिले थी) कहा जल्दी आना मैं अकेली रहूंगी, सबने है में जवाब दिया और चले गए,

तुषार उदास सा चला जार है था कॉलेज पहुंचने से पहले उसके दिमाग की घंटी बजी जो बहन दो दिन से नजर नहीं मिला रही थी बात नहीं क्र रही थी वो उसकी तरफ देख क्र इतने प्यार से बोली की जल्दी आना मैं अकेली हु, ये बाकि सबके लिए नहीं तुषार के लिए था ये बात तुषार के दिमाग में बड़ी देर से आई, वो चलता चलता ख़ुशी से उछाल पड़ा,

सीमा- क्या हुआ ऐसे क्यों कूद रहा ह

तुषार झेप गया, कुछ नहीं कुछ नहीं बस ऐसे hi कुछ याद आ गया था,

रूचि- बदरो की तरह ुहल रहा ह ऐसा क्या याद आ गया,

तुषार- कुछ नहीं तुम चलो बस

सीमा और रूचि कॉलेज चले गए, तुषार ने तुरंत वापस घर के लिए दौड़ लगा दी, इधर दीपा अपने आप को पूरी तरह तैयार करने में लगी थी, उसने एक टाइट लेगी और टाइट सूट पहना जिसमे उसकी चूचिया पूरी उभर क्र आ रही थी, लेग्गिंग में से जांघो का कटाव अलग hi दिख रहा था, दीपा ऐसे कपडे बहुत काम hi फेंटी थी, सेमा को बहुत शोक था ये सब पहनने का,

जब तक तुषार वापस आया दीपा ने पूरा घर साफ़ क्र दिया और जमीन पैर बिस्तर लगाया हुआ था जैसे अपनी सुहाग की सेज सजा रही हो, उसने बहार से कुछ लोअर तोड़े और बिस्टेर पैर बिछा दिए, उसे पता था ाज्यः क्या होने वाला ह, वो इतनी खुश थी जैसे दुल्हन शादी की अड़ सुहागरात के लिए बैठी हो, वो शर्मा भी रही थी और खुश भी हो रही थी, काफी देर वेट करने के बाद तुषार वापस आ गया, उसने जैसे hi दूर खोला सामने का नजारा देख क्र तुषार का मुँह खुला रह गया,

निचे बिस्टेर लगा हुआ ह जिस पैर फुल गिरे हुए ह और दीपा उस पैर बैठी ह, तुषार की तो हालत पतली हो गाइट hi, वो पागलो की तरह बस दीपा को देखे जार है था, दीपा भी शरमाई सी बैठी रही, दोनों ऐसे hi खामोश रहे, फिर दीपा ने हाथ से इशारा किया दरवाजे का, तो तुषार को होश आया उसने जल्दी से दरवाजा बंद किया, और अपना बेग साइड में रकह और चल क्र दीपा के नजदीक आ गया,

तुषार- दीदी ये सब क्या ह

दीपा चुप रही

तुषार ने दीपा का फेस उप्पेर किया दीपा ने एक बार नजर उठा क्र तुषार को देखा फिर शर्म से आँखे निचे क्र ली,

तुषार- दीदी बताओ न ये क्या ह

दीपा ने तुषार को गले से लगा लिया गले क्या खुद को तुषार से चिपका लिया और बोली टुशु ी लव ु, ी लव ु सो मच,



तुषार- दीदी मैं आपका भाई हु
 
अपडेट-13








दीपा- तो क्या हुआ क्या भाई से प्यार नहीं किया जा सकता

तुषार- लेकिन दीदी भाई से ये वाला प्यार तोडना किया जाता ह

दीपा- माँ ने सिखाया ह हम लोगो के बिच प्यार होना चाहिए चाहे कोई सा भी हो माँ ने कहा था तुम कभी अलग मत होना और मैं तुझसे एक पल भी अलग नहीं होना चाहती

तुषार- लेकिन दीदी तुम्हारी शादी हो जाएगी फिर

दीपा- मैं शादी नहीं करुँगी तेरे अलावा और कोई नहीं होगा

दीपा उठी और तुषार के होतो पैर अपने हॉट रख दिए, तुषार एक दम शांत खड़ा था, उसके लुंड में तो पहले hi हलचल होने लगी थी लेकिनअब तो बगावत हो गाइट hi, दीपा बहुत hi शालीनता से तुषार के होतो को चुम रही थी, कोई जल्दनजी नहीं थी, तुषार ने भी दीपा का साथ देना शुरू क्र दिया था, तुषार के हाथ दीपा की गांड पैर चले गए थे जिनसे वो दीपा की गांड को बस शेला रहा था, दोनों की जीभ एक दूसरे के मुँह में घूम रही थी, लेकिन कोई हड़बड़ाहट नहीं थी 10 मिनट तक दोनों ऐसे hi एक दूसरे को चूमते रहे, तुषार के हाथ बस दीपा की कमर और गांड पैर बस घूम रहे थे, कोई मसला मसली नहीं थी,


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जब दोनों के हॉट अलग हुए तो दीपा की आंखे एक दम लाल हो चुकी थी, तुषार का लुंड पुरे उफान पैर था जो दीपा की जांघो के बिच गुसा हुआ था, दीपा बड़े प्यार से तुषार की शर्ट खोलने लगी, तुषर भी उसका साथ दे रहा था, फिर तुषार ने दीपा का सूट उतरना शुरू किया बहुत hi प्यार से दीपा ने शरमाते हुए अपने हाथ उप्पेर उठा दिए,

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सूट उतारते hi दीपा की 32 साइज की कठोर चूचिया ब्रा में से झाकने लगी, तुषार ने दीपा की गार्डन पैर अपने हॉट रख दिए दीपा की आह्ह्ह्ह निकल गई तुषार गार्डन चूमते हुए चूचियों की तरफ बढ़ने लगा, उसने दीपा की आधी नंगी चुकी पैर अपने हॉट रख दिए, दीपा ने तुषार का सर अपनी चूचियों पैर दबा लिया, फिर तुषार ब्रा के उप्पेर से hi चुकी चुस्त हुए एक हट से दूसरी चुकी को शीलता हुआ निचे बैठने लगा, और दीपा की नाभि को चूमने लगा, दीपा ने अपना हॉट अपने दातो निचे दबा लिया और तुषार का सर अपने पेट पैर दबाने लगी, तुषार के हाथ दीपा की गांड पैर थे जो टाइट लेग्गिंग में बड़ी hi टाइट लग रही थी,

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तुषार ने दीपा की लेग्गिंग में उंगलिया फसे और निचे की तरफ खिसका दी, इलास्टिक वाली लेग्गिंग थी बड़ी आसानी से खिसक गई, तुषार लेग्गिंग के साथ अपने हॉट भी दीपा की जांघो पैर फिरते हुए निचे जाने लगा, और दीपा की टंगे चूमने लगा, फिर उप्पेर आते हुए दीपा की जांघू को चूमते हुए अपने हॉट पंतय के उप्पेर से hi छूट पैर रख दिए,

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दीपा से बर्दास्त करना मुश्किल हो रहा था, दीपा ने तुषार के बाल जोर से पकड़ लिए और उसका सर छूट पैर दाना दिया,

तुषार अपना मुँह उसकी छूट पैर रगड़ रहा था, और एक हाथ से दीपा की गांड दबा रहा था, दीपा ने तुषार को उप्पेर खींचा और उसके हॉट चूमने लगी तुषार का खड़ा लुंड दीपा की जांघ पैर रगड़ रहा था, अब दीपा तुषार की चेस्ट चूमती हुई निचे बैठे लगी, तुषार का लुंड पंत में खड़ा हुआ अलग hi दिख रहा था दीपा ने बड़े प्यार से तुषार का लुंड शलया

फिर उसकी पंत खोलने लगी और तुषार की गांड पैर हाथ घूमते हुए पंत निचे क्र दी, तुषार का लुंड उसके अंडरवियर में समां नहीं रहा था, दीपा ने मुस्कुराते हुए तुषार की तरफ देखा और अंडरवियर के उप्पेर से लुंड को सहलाने लगी,


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फिर अपना हाथ अंडरवियर के अंदर घुसा क्र लुंड मसलने लगी,

थोड़ी देर बाद दीपा ने अंडरवियर के उप्पेर से लुंड क चुम लिया और मुँह में लेकर चूमने लगी,


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तुषार की तो जान hi निकल रही थी उसके लिए ये सब बहुत की कामुक था उसने कभी ऐसा अनुभव नहीं किया था, दीपा के लिए भी ये सब नया hi था, लेकिन वो लुंड देख क्र इतनी कामुक हो गई थी की सब कुछ खुद होता जार है था, फिर दीपा ने धीरे से तुषार का अंडरवियर निचे खिसकना शुरू क्र दिया, तुषार का लुंड उछाल क्र बहार आ गया,

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दीपा बड़ी कामुक नजरो से उसके लुंड को निहार रही थी फिर बड़े प्यार से लुंड को पकड़ा और अपने मुँह होतो पैर रगड़ने लगी उसकी खुशबु लेने लगी जिससे वो और मदहोश हो गई,

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फिर तुषार की नजरो में नजरे दाल क्र उसके लुंड को अपने मुँह में भर लिया, तुषार की तो मजे में आँखे hi बंद हो गई aahhhhhhhhhhh दीदी आप कितनी हॉट हो आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कितना मजा आ रहा ह, तुषार बड़े मजे से अपना लुंड चुसवा रहा था, दीपा बड़े सकूं से उसका लुंड चूस रही थी,

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फिर उसने तुषार के लुंड की जड़ तक लुंड को चेतना शुरू क्र दिया फिर उसके बॉल्स चाटने लगी चूसने लगी, तुषार की उत्तेजना का कोई ठिकाना नहीं था, वो तो मजे में अपनी आँखे खोल भी नहीं प् रहा था,

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दीपा जितना हो सके तुषार के लुंड को अपने मुँह में भरने की कोशिश क्र रही थी, 15 मिनट तक दीपा लुंड चुस्ती रही अब तुषार से बर्दास्त नहीं हो रहा था उसने दीपा को उठाया और उसकी ब्रा निकल दी और उसकी चुच्या चूसने लगा दबाने लगा फिर उसकी पंतय भी निकल दी, तुषार ने दीपा की छूट पैर हाथ घुमाया और अपनी उंगली उसकी छूट पैर रगड़ने लगा छूट बहुत गीली हो चुकी थी, तुषार ने अपनी उंगली दीपा की छूट में घुसाने की कोशिश की तो दीपा ने रोक दिया और बोली

नहीं अगर उंगली hi करनी होती तो वो मेरे पास भी ह मुझे ये चाहिए, दीपा ने तुषार के उछलते लुंड की तरफ इशारा किया, तुषार ने दीपा को बिस्टेर पैर लिटा दिया और उसकी टैंगो के बिच आ गया, और उसके दोनों पेअर खोल दिए दीपा की छूट उभर क्र सामने आ गई, दीपा पूरी तरह शर्मा गई, उसने अपनी आंखे बंद क्र ली और मुँह फेर लिया,

तुषार- दीदी ऐसे मुँह मत फेरो आपको इसका मजा लेना ह तो मुझे देखो मेरी आँखों में देखो और कहो मुझसे काया करू

दीपा- टुशु ऐसे मत तड़पा अपनी बहन को

तुषार- दीदी प्यार में शर्म कैसी आप मुझसे प्यार करती ह न

दीपा ने तुषार की तरफ देखा अउ रबोली आजमा रहा ह अपनी बहन के प्यार को,

तुषार मुस्कुराया क्योकि उसको जो चाहिए था वो हो गया

दीपा तुषा रकि तरफ देखते हुए टुशु अपना वो अपनी बहन के अंदर दाल दे,

तुषार- ऐसे नहीं दीदी इनके कुछ नाम भी ह

दीपा- अब तू मुझसे ऐसे नाम बुलवाएगा

तुषार- दीदी जब भाई बहन के प्यार में शर्म नहीं तो शब्दों में कैसी शर्म

दीपा- लेकिन ये मेरा पहेली बार ह

तुषार- दिन में पहेली बार ह वैसे तो बहुत बार हो चुक्का ह चूसना चुसवाना

दीपा- हैट बेशरम

तुषार- दीदी प्लस बोलो न प्लस

दीपा- अच्छा अच्छा टुशु अपना लुंड दाल दे मेरी छूट में अपना प्यार लुटा दे अपनी बहन पैर

तुषार- अभी लो दीदी सम्हालो अपने भाई का प्यार

तुषार ने दीपा की आँखों में देखते हुए अपन अलुंड दीपा की छूट पैर रखा और धकेल दिया, लुंड छूट से फिसल गया, दीपा को हसी आ गई

दीपा- पहले उसे रास्ता तो दिखा दे

तुषार- आप hi दिखा दो न उसे रास्ता अपनी गुफा का

दीपा- खुद दिखा

तुषार ने फिर से जोर लगाया वो फिर फिसल गया असल में वो दीपा की आँखों में देखते हुए लुंड घुसना चाहता था जिसकी वजह से वो सही जगह नहीं लग प् रहा था, जब कई बार ऐसा hi हुआ तो दीपा क िहालत ख़राब हो गई उसे बर्दास्त नहीं हुआ और उसने निचे हाथ लेजाकर तुषार का लुंड पकड़ लिया और तुषार की आँखों में देखते हुए उसका लुंड अपनी छूट के छेद पैर लगाया और बोली अब दाल मिल गया रास्ता,

तुषार ने मुस्कुराते हुए लुंड पैर जोर लगाया जोर थोड़ा ज्यादा लगाना पड़ा तुषार के लुंड का टोपा दीपा की छूट को चीरता हुआ अंदर घुस गया, अभी बस टोपा hi घुसा था की दीपा की चीख निकल गई, आह्ह्ह्हह्ह माँ अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह


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दीपा दर्द में थी लेकिन उसने लुंड नहीं छुड़ा बल्कि और टाइट पकड़ लिया, और ूसरे हाथ से चादर की मुठी भर ली, तुषार ने थोड़ा और जोर लगाया लुंड थोड़ा और खिशक गया , अब दीपा की आँखों से आंसू आ गए थे, आहहहहह टुशु बस रुक जा बस अहहहहहह माँ बहुत मोटा ह आहहहहह

तुषार रुक गया निकल लू क्या दीदी,

दीपा- नहीं बस रुक जा 1 मिनट

तुषार ने दीपा की चुकी शालनी शुरू क्र दी दीपा कुछ नार्मल हुई और बोली धीरे धीरे धकेल, तुषार ने जोर लगाया लेकिन लुंड तस से मास नहीं हुआ छूट ने लुंड को जकड लिया था, जब लुंड आगे नहीं बढ़ा तो दीपा बोली एक बार हल्का सा पीछे क्र और फिर दाल, तुषार ने वैसा hi किया और लुंड आगे खिसकने लगा, तुषार हलके हेल धक्के लगते हुए लुंड अंदर घुसा रहा था दीपा अपनी पूरी ताकत लगा क्र खुद को चीखने से रोक रही थी,

दीपा- रुक जा बस रुक जा अहहहहह मर जाउंगी बस आगे मत बढ़ा बहुत दर्द हो रहा ह आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

तुषार – दीदी जल्दी दर्द ख़तम हो जायेगा,

दीपा दर्द में भी मुस्कुराती हुई है भाई जरूर हो जायेगा बस तू धीरे धीरे क्र, तुषार हलके हलके धक्के लगाने लगा, 5 मिनट तुषार उसी पोसियों में धक्के लगा रहा था लुंड को थोड़ी आसनी होने लगी अंदर बहार होने में दीपा को भी थोड़ी शांति हुई, छूट पूरी गीली हो चुकी थी बाकि काम छूट फटने पैर निकले खून ने क्र दिया,

दीपा- टुशु कितना रह गया

तुषार- दीदी बस थोड़ा सा ह

दीपा- तो दाल दे अब

टुशु- दीदी दर्द होगा

दीपा- तू दाल दे मुझे पूरा लेना ह,

तुषार ने लुंड हिलाते हिलाते एक जबरदस्त धक्का मारा और पूरा लुंड छूट को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया दीपा की ेज जबरदस्त चीख निकल गई अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह फैट गई अहहहह मेरी छूट आअह्हह्ह्ह्ह माँ अहहहहहहह

तुषार दीपा के हॉट चूमने लगा और हलके हलके अपनी कमर चलने लगा, कुछ hi देर में छूट ने पानी छोड़ दिया दर्द की वजह से दीपा को पता hi नहीं चला वो कब झाड़ गई, लेकिन छूट पूरी चिप छिपी हो गई जिससे लुंड आराम से अंदर बहार होने लगी थी, दीपा को भी थोड़ा मजा आने लगा था, अब तुषार आधा लुंड बाहर खींचता और अंदर घुसा देता, दीपा फिर से झड़ने लगी वो निचे से जोर लगाने लगी तुषार ने अपनी राफ्तेर बढ़ा दी,


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तुषार पूरा लुंड अंदर बाहर क्र रहा था तुषार भी बहुत देर से खुद को रोक रहा था उसे भी अब रुकना मुश्किल हो गया और उसके धक्के तेज हो गए दीपा के झड़ते hi तुषार ने भी लुंड बहार खींचना चाहा तो दीपा ने उसे अपने उप्पेर खींच लिया और उसको अपनी बहो में भर लिया तुषार ने उठाना चाहा लेकिन दीपा ने मौका नहीं दिया, तुषार इतनी देर कैसे रोक पता और उसके लुंड ने दीपा की छूट में पिचकारी मारनी शुरू क्र दी, दीपा बड़े सकूं से तुषार के लुंड से निकली पिचकारी का आनद ले रही थी, तुषार भी अपन अलुंड खली करके दीपा के उप्पेर hi लेट गया, दोनों भाई बहन बहुत देर तक ऐसे हो चिपके लेते रहे,

फिर तुषार को होश आया की उसने दीपा की छूट में रास दाल दिया ह वो माँ बन सकती ह, वो तुरंत उठने लगा तो उसका लुंड जो अभी आधी कड़ी मुद्रा में था, दीपा की छूट से एक दम बहार आ गया, प्लप की आवाज के साथ और दीपा के मुँह से दर्द भरी आहहह निकल गई, लुंड के बहार आते hi छूट से खून में सना वीर्य बहार निकलने लगा,

तुषार का लुंड पूरा खून में सना हुआ था, दीपा ने उसके लुंड को देखा खून में सना ितं अभयंकर लग रह अतः, दीपा उठा क्र अपनी छूट और उसे निकले खून को देखना चाहती थी लेकिन देख नहीं पाई, तुषार ने उसे उठाने की कोशी की तो दीपा ने कहा तू जा क्र खुद को साफ़ क्र मैं उठ जाउंगी, तुषार ने अपना अंडरवियर फेन और नंगा बहार बने उस परदे वाले बाथरूम में जाकर खुद को साफ़ करने लगा, तब तक दीपा ने बड़ी हिम्मत दिखा क्र खुद को उठाया उसके पैरो में तो जान hi नहीं थी उसने बड़ी मुश्किल से खुद को सम्हाला, और कपडे से अपनी छूट साफ़ की,

वो बहार नहीं जा सकती थी तो उसने अंदर hi पानी से हलके हलके छूट को साफ़ किया और कपडे पहने फिर खून से सनी चादर को उठा क्र एक साइड रख दिया, इस वक़्त तो वो कुछ नहीं क्र सकती थी, और बहार जब तुषार नंगा अपना लुंड धो रहा था या धो चुक्का था बस बाकि शरीर पैर पानी दिरा रहा था तभी वह रजिया आ गयी, उसे उम्मीद नहीं थी वह कोई नंगा खा डा हो सकता ह और उसने पर्दा हटा दिया पर्दा हैट ते hi जो उसने देखा रजिया का तो मुँह hi खुला रह गया, तुषार नंगा खड़ा आने लुंड पैर पानी गिरा रहा था उसका लुंड अभी तक आधी कड़ी मुद्रा में था,

लुंड धो चुक्का था इसलिए रजिया को उस पैर लगा खून नहीं दिखा लेकिन इतना बड़ा लुंड देख क्र hi उसकी छूट गीली हो गई और गांड फैट गई, तुषार ने रजिय ाको देखा तो उसने तुरंत तोलिये से अपने लुंड को ढाका,

तुषार- चीची यहाँ क्या क्र रही हो

रजिया- माफ़ करना बीटा गलती हो गई

और रजिया वह से भाग गई, तुषर टोलिया लप्पेट क्र अंदर आया तो देखा दीपा चारपाई पैर लेती ह, तुषार ने कपडे पहने और दीपा का सर सहलाने लगन

तुषार- दीदी बहुत तकलीफ हो रही ह क्या

दीपा- नहीं तू मेरे लिए एक गिलास पानी ला दे और मेरा बेग दे दे

तुषार ने तुरंत बेग दिया और पानी लाया

दीपा ने बेग में से एक अनवांटेड की गोली निकली और ले ली

तुषार- दीदी ये क्या ह

दीपा- ये माँ न बनने की गोली ह

तुषार- आपने पहले से तैयारी की हुई थी

दीपा- बस तेरे प्यार के लिए

तुषार- दीदी ी लव ु सो मच

दीपा- अब तू कॉलेज चला जा वर्ण किसी को शक हो जायेगा

तुषार- लेकिन आपको अकेले ऐसे कैसे छोड़ जाऊ

दीपा- तू मेरी फ़िक्र मत क्र मैं खुद को सम्हाल लुंगी

तुषार घर से निकल गया, दीपा ने कुछ देर रेस्ट किया फिर एक दर्द की गोली खाई और घर को ठीक किया लेकिन उसकी हिम्मत जवाब दे चुकी थी इसलिए वो लेट गई, जब सीमा वापस आई तो दीपा सोइ हुई थी उसने दीपा को जगाया तो सीमा ने देखा दीपा को बहुत तेज फीवर ह, दीपा ने सुबह hi बताया तो की उसकी तबियत ठीक नहीं ह इसलिए सीमा ने कुछ गलत नहीं सोचा, फिर रूचि और तुषार भी आ गए,

सीमा ने दीपा को फीवर की मेडिसिन दी जो अंजलि हमेशा घर में फिरसताड़ बॉक्स में रखती थी, दीपा ने पूरा रेस्ट किया रात का काम सीमा और रूचि ने क्र लिया, तुषार का दिल ख़ुशी से उछाल रहा था उसे दो दो छूट मिल गाइट hi वो भी अपने hi घर में अपनी hi बड़ी बहेनो की, उसे तो लगने लगा की दुन्या का सबसे लकी इंसाने वो hi ह,

दीपा ने दो दिन कॉलेज की छुट्टी की, और रेस्ट किया, फिर कॉलेज जाने लगी, अब तुषार की छेद चढ़ बढ़ गई दोनों के लिए उसे जब भी मौका मिलता वो दोनों में से किसी के भी बूब्स दबा देता कभी गांड पैर हाथ फेर देता, दीपा उसे ऐसा चांस काम देती लेकिन सीमा खुल क्र मजे लेती, दीपा के दिल में सेक्स से ज्यादा प्यार था उसे तुषार के पास रहना उसके साथ रहने में ज्यादा ख़ुशी मिलती थी, वैसे मौका मिलने पैर वो भी सेक्स क्र लेती थी, अब जब तीनो में किसी को मौका मिलता चुदाई क्र लेते, सीमा को नहीं पता था दीपा भी छोड़ने लगी ह लेकिन दीपा को जरूर पता था सीमा चुदती ह तुषार से,

जब भी सीमा कॉलेज से छुट्टी करती दीपा समझ जाती, ऐसे hi 10 दिन और बिट गए, उधर अंजलि को घर से गए हुए लगभग 1 मंथ हो गया था, रुचे और राजेश अंजलि के लिए परेशां थे, लेकिन बाकि तीनो तो हवस की दुनिया में खो गए थे,

एक दिन दीपा कॉलेज से अकेले आ रही थी उसे रस्ते में एक औरत मिली लगभग 45 साल की, वोट क पेड के निचे बैठी थी जब दीपा उसके पास से गुजरी तो उस औरत ने दीपा से पूछा बेटी तुम्हारी पास पानी ह क्या बड़ी प्यास लगी ह, दीपा ने उसे अपनी बोतल से पानी दे दिया,

औरत- बहुत बहुत धनयवाद बेटी क्या नाम ह तुम्हारा

दीपा- जी दीपा, आप गाओं में जार hi हो क्या आपको कभी देखा नहीं इधर

औरत- है बेटी मैं गाओं में जा रही हु, वैसे मैं इसी गाओं की हु लेकिन बहुत सालो पहले ये गाओं छोड़ना पड़ा,

दीपा- अच्छा ऐसा क्यों आंटी

औरत- बस बेटी कुछ हालत ऐसे थे, मेरी छोड़ो अपनी बताओ कोण कोण ह घर में

दीपा ने पूरी फॅमिली का बताया

औरत- अच्छा तुम राजेश की बेटी हो,

दीपा- आप जानती हो मेरे पिता को

औरत- है जानती हु क्या तुम्हे यकीन ह तुम राजेश की hi बेटी हो

दीपा- क्या मतलब? आप कहना क्या चाहती ह

औरत- अरे कुछ नहीं बस पूछ रही हु,

दीपा अच्छा मैं चलती हु देर हो रही ह, दीपा वह से घर आ गई, वही आज अंजलि की किस्मत भी चमकी, आज भूरा को होश आ चुक्का था डॉ. उसे चेक क्र रहे थे, इस बिच उसे कोई िलने भी नहीं आया था, अंजलि दूर से देख रही थी, भूरा एक कॉमन रूम में लेता था जहा और भी मरीज थे, अंजलि को मौका नहीं मिल रहा था उससे मिलने का बस एक उम्मीद जरूर थी, उसे दो दिन और इंतजार करना पड़ा मोके का, भूरा जब बाथरूम गया तो अंजलि ने उसे बाथरूम में पकड़ लिया और उसका मुँह दबा दिया,

अंजलि को अपने सामने देख क्र भूरा की आँखों में दर उतर आया था उसे वो मंजर याद आ गया था जब अंजलि ने कुल्हाड़ी से लगभग उसकी गार्डन उदा hi दी थी,

अंजलि- एक दम खामोश रहना अगर शोर मचाया तो यही मर दूंगी

भूरा ने तुरंत उसके सामने हाथ जोड़ लिए, अंजलि ने उसके मुँह से हाथ हटाया

भूरा- अंजलि मुझे माफ़ क्र दे मुझसे गलती हो गई मैं कभी तेरी पिरवार की अस पास भी नहीं आऊंगा

अंजलि- मैं यहाँ तुझे मरने नहीं आई हु बस कुछ जानने आई हु अगर सच सच बता दिया तो छोड़ दूंगी वर्ण

भूरा- पूछ ले जॉब hi पूछना ह सब सच बताऊंगा

अंजलि- मेरे बारे में तुझे किसने बताया

भूरा- अजय ने वो गाओं में जब आया था तो दारू पि क्र बहुत कुछ बोल गया

अंजलि की आँखों में आंसू चालक आये बहुत दर्द था उस टाइम उसकी आँखों में जैसे उसके दिल पैर कितना जोर पद रहा हो, अंजलि ने खुद को सम्हलते हुए पूछा

अंजलि- और क्या बताय उसने

भूरा- राजेश के बारे में और उसके और

अंजलि- बस बस मैं समझ गई,

भूरा- अंजलि मुझे कोई मतलब नहीं ह तेरी और राजेश की लाइफ से बस तू मुझे माफ़ क्र दे मैं कही दूर चला जाऊंगा

अंजलि- मन तो नहीं क्र रहा तुझ पैर विश्वास करने का लेकिन एक मौका दे रही हु तुझे अगर तू दोबारा मुझे मेरे या मेरे परिवार के अस पास दिखा तो कसम से जिन्दे को hi जमीन में गाड़ दूंगी, और है यहाँ से मौका देख क्र भाग जाना तुझे बचने में लाखो का बिल बन चुक्का ह जिसे तुझे hi चुकाना पड़ेगा जिनको तू साथ लेकर आया था वो भाग गए, और कभी किसी से मेरे या राजेश जी के बारे में कोई बात की तो सोच लेना

भूरा- मैं कसम खता हु आज के बाद कभी गलती नहीं होगी,

भूरा ने उस दिन मोत को बड़े नजदीक देखा था और जो मोत को देख ले और सुधरे न ये तो हो hi नहीं सकता,

अंजलि वह से निकल क्र अपने घर की तरफ चल दी, उसके दिमाग में बस अजय अजय अजय hi गूंज रहा था, उसने ऐसा क्यों किया उसने ऐसा किया मेरे साथ,

इधर वो औरत जो दीपा से मिली थी वो रोज मौका मिलते hi कसबे में दीपा से मिलती उसने दीपा के दिल में अपने लिए जगह सी बना ली थी वो इतनी प्यारी प्यारी बाते करती की दीपा को उसके साथ अच्छा लगता,

अंजलि को वापस आने में 3 दिन और लग गए, तब तक उस औरत ने दीपा के दिमाग में बहुत कुछ भर दिया था,

दीपा- आंटी उस दिन आपने बोलै था की तुम्हे यकीन ह तुम राजेश की hi बेटी हो फिर बात घुमा दी थी ऐसा क्यों कहा था

औरत- बीटा मैं क्या बताऊ तुम्हे यकीन hi नहीं होगा

दीपा- ऐसा क्या ह जो यकीन नहीं होगा

औरत- बीटा तुम्हारे पिता का राज जो कोई नहीं जनता

दीपा- ऐसा क्या ह

उस औरत ने दीपा को कुछ बताना शुरू किया जिसे सुनकर दीपा की आँखे फटी रह गई,

दीपा- ये क्या बकवास क्र रही हो आप

औरत- मैंने कहा थान ा तुम्हे यकीन नहीं होगा लेकिन यही सच ह तुम्हारी माँ वैसी नहीं ह जैसी दिखती ह तुम खुद महसूस क्र लेना जो मैंने तुम्हे चेक करने को बोलै ह वो सच ह या नहीं,

दीपा बहुत hi दुखी और बौखलाई सी घर आ गाइट hi, आज अंजलि भी घर आ गई सरे बच्चे अंजलि से लिपट गए थे लेकिन दीपा अजीब से ढंग से अंजलि से मिली वो अंजलि को देख क्र खुश भी थी लेकिन सके दिमाग में बड़ी हलचल थी,

राजेश अंजलि को देख क्र खुश था लेकिन उसकी उदासी देख क्र वो परेशां हो गया था, रात को अंजलि और राजेश बहार बैठे थे र

राजेश- क्या पता चला अंजलि

अंजलि- जिसका डार्ट है वही अजय ने hi भूरा को बताया

राजेश- अब क्या होगा

अंजलि- कुछ नहीं होगा भूरा कभो लोट क्र नहीं आएगा

राजेश- क्या तुमने उसे

अंजलि- नहीं लेकिन मैंने उसे अच्छे से समझा दिया ह

राजेश- और वो लोग

अंजलि- उन लोगो को अभी कुछ नहीं पता भूरा उन लड़को को भएका क्र ले आया था वो मुझे नहीं जानते थे,

राजेश ने रहत की साँस ली

दीपा दूर से अंजलि और राजेश को ऑब्सेर्वे क्र रही थी,

रात को अंजलि बच्चो के बिच में सोइ एक तरफ रूचि दूसरी तरफ तुषार अंजलि से चिपके हुए थे, अंजलि बड़े प्यार से उनके सर शेला रही थी, आज सबके लिए ख़ुशी का दिन था लेकिन दीपा और अंजलि दोनों परेशां थे,

अंजलि अगले दिन चंरोदेवी से मिलने गई और उन्हें भूरा और जय की बात बताई, अंजलि की बात से चंद्रो देवी बहुत परेशां हो गई,

चंद्रो देवी- तू चिंता मत क्र मैं अजय से बात करती हु, तू बिलकुल मत घबरा और घर जा मैं आउंगी तुझसे मिलने कुछ और भी बात करनी ह,

अंजलि वह से घर आ गई सोचा चंद्रो देवी सब सही क्र देंगी,

इधर अंजलि ने अपने बच्चो पैर धियान दिया तो सीमा और दीपा का रूप एक दम निखार पैर था, वही तुषार के फेस पैर थकन अलग दिख रही थी, उसकी आँखों के निचे डार्क सर्किल हो गए थे, कस्फी कमजोर दिख रहा था,

सीमा का निखार तो अंजलि को समझ आ रहा था लेकिन दीपा उसमे ये निखार इसका मतलब दीपा का कही चक्क्र ह, अंजलि के घर आते hi सबकी चुदाई बंद हो गई अंजलि के सामने कोई कुछ नहीं करता था,

वही दीपा रोज उस औरत से मिलती थी, दीपा का मन अपनी माँ के लिए गुस्सा नाराजगी भर्ती जार hi थी जो अंजलि को महसूस हो रही थी, अंजलि काफी कोशिश क्र रही थी दीपा से सच जानने की लेकिन वो बात को ताल जाती,

एक अंजलि और सीमा बात क्र रहे थे

अंजलि- बीटा तेरा और तुषार का क्या चल रहा ह

सीमा- माँ सब अच्छा ह (सीमा शर्मा गाइट hi)

अंजलि- तुझे देख क्र लग रहा ह बहुत अच्छा चल रहा ह काफी निखार आ गया ह तुझ पैर

सीमा- माँ आप भी न कोई माँ ऐसे पूछती ह क्या अपनी बेटी से

अंजलि- अच्छा जी अब शर्म आ रही ह तुझे

फिर तुषार अंदर आ गया तो अंजलि उठ क्र बहार चली गई और कपडे धोने लगी, अंदर तुषार ने सीमा को बहो में भर लिया और चूमने लगा

सीमा- क्या क्र रहा ह माँ घर पैर ह

तुषार- यार माँ की वजह से पूरा मजा ख़राब हो रहा ह

सीमा- क्या क्र सकते ह यार मेरा भी बहुत मन क्र रहा ह कुछ क्र न

तुषार- मेरा तो इतना मन ह की तुझे इतना छोड़ू की तेरी माँ चुद जाये, कसम से मौका मिलते hi तेरी माँ छोड़ दूंगा

तुषार ने इतना hi बोलता था की उसके पीछे से उसकी गार्डन पैर एक जोर दर थपड लगा, तुषार ने झटके से पीछे देखा अंजलि कड़ी थी सीमा और तुषार की हवा टाइट हो गई,

अंजलि- मैंने ये hi सिखाया तुझे माँ बहेनो के लिए ऐसी बात करेगा तू

एक और थपड तुषार के गाल पैर पड़ा

तभी बहार से दीपा गुस्से में लाल होती हुई आ और बोली ये पूछ सकती ह, तुह्मारी हिम्मत कैसे हुई मेरे भाई पैर हाथ उठाने की,
 
अपडेट-14


दीपा का ये रूप देख क्र अंजलि और सीमा का मुँह खुला रह गया,

सीमा- क्या बोल रही ह दीपा

अंजलि- दीपा तुझे नहीं पता ये क्या बोल रहा था

दीपा- मुझे बीटा मत बोलो मैं कोई नहीं लगती तुम्हारी, और वो हमारा भाई ह जो चाहे बोले जो चाहे करे तुम्हे क्या प्रॉब्लम ह तुम होती कोण हो हमे रोकने वाली वो सीमा को चोदे या मुझे तुम अपने मजे करो न 1 महीना अपने यारो के साथ मजे करके आई हो न

अंजलि – दीपा जबान सम्हाल क्र बोल वर्ण

दीपा- वर्ण क्या करोगी और तुम हमारी लगती hi कोण हो जो कुछ करोगी

दीपा के मुँह से ये सुनते hi अंजलि के माथे पैर पसीना आ गया उसे समझ आ गया कोई ह जिसने दीपा को कुछ बताया ह

अंजलि- ये क्या बोल रही ह किसी ने कुछ कहा ह क्या

दीपा- आपको क्या लगता ह कोई मुझसे कुछ कहेगा क्या

अंजलि- बेटी किसी की बात पैर धयान मत दे और मुझे बता क्या हुआ ह

सीमा- दीपा क्या बोल रही ह तू

तुषार- क्या हुआ दीदी ऐसे क्यों बोल रही हो माँ से

दीपा- रट हुए ये माँ नहीं ह हमारी

अंजलि- चीला क्र दीपा मुँह बंद रख आपने मैं तुम सभी की माँ हु

दीपा- माँ कैसी माँ ाचा ये बताओ कोई जनता ह तुम कहा से आई हो तुम्हारा परिवार कहा ह राजेश जिसे हम अपना पिता मानते ह उन्होंने क्या किया ह,

अंजलि- बस दीपा रुक जा मैं खेती हु रुक जा

सीमा- ये सब क्या बकवास किये जा रही ह तू पागल हो गई ह क्या,

दीपा- है पागल हो गई हु

तुषार- दीदी माँ पापा के लिए क्या बोल रही हो

दीपा- ये हमारी माँ नहीं ह और वो हमारा बाप नहीं ह, वो एक खुनी ह, कातिल ह वो,

तभी एक झांकते दर थपड दीपा के गाल पैर आया, अंजलि पुरे गुस्से में छीलकर बोली ख़बरदार जो अपने पिता को कुछ कहा तो

दीपा- पिता दुबारा उन्हें मेरे पिता मत बोलना जो आदमी बाप बन hi नहीं सकता वो हमारा बाप कैसे हुआ और जब वो बाप hi नहीं बन सकता तो ये माँ कैसे बानी अगर बानी तो किसके बच्चे की या फिर ये रंडी ह,

एक और थपड दीपा के गाल पैर पड़ा इस बार ये थपड चंद्रो देवी का था, चंद्रो देवी जो आज पहेली बार अंजलि के घर आई थी उससे मिलने, चंद्रो देवी को वह देख क्र अंजलि की आँखों से आंसू भेने लगे तुषार और सीमा तो पहले hi शोकेड में खड़े थे,

दीपा ने चंद्रो देवी की तरफ देखा,

चंद्रो देवी- जबान सम्हाल क्र बात क्र लड़की ख़बरदार जो अंजलि के लिए एक भी गलत शब्द बोलै और राजेश के लिए कुछ बोलै तो, तू जानती hi क्या ह इनके बारे में

दीपा- मैं सब जानती हु, राजेश ने मेरी माँ के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की और मेरे पिता ने उन्हें पकड़ लिया तो राजेश ने मेरे पिता को hi मर दिया, और आपने उन्हें बचा लिया और मेरी माँ से मुझे चीन क्र इन लोगो को दे दिया मेरे पिता के कातिल को दे दिया, क्यों किया आपने ये सब, मेरी माँ कब से तड़प रही ह मेरे लिए और आप लोग कितने निर्दई ह,

अंजलि का हल बुरा हो गया था वो तो लगभग सदमे में जा चुकी थी,

चंद्रो देवी ने एक और थपड मारा और बोली मुझे खबर लग चुकी थी की तू उस रजनी से मिल रही ह और वो तेरे दिमाग में जरूर जहर भरेगी इसलिए hi आज मैं खुद यहाँ मिलने आई थी लेकिन यहाँ तो तू उसका भरा जहर उगल रही ह बिना सच जाने,

दीपा- इससे बड़ा सच क्या हो सकता ह तुम सब ने मिलकर मेरी माँ से मुझे दूर क्र दिया मेरी पिता की जान ले ली,

चंद्रो देवी सच सुन्ना चाहती ह तो सुन और सुन क्र अपना दिल सम्हाल क्र रखना

अंजलि- नहीं अम्मा ये अभी उतने बड़े नहीं हुए ह

चंद्रो देवी- नहीं अंजलि अब वक़्त आ गया ह इन्हे जानना hi होगा वर्ण ऐसे hi लोग निकल निकल क्र आते रहेंगे तेरे परिवार को तोड़ने के लिए,

अंजलि- लेकिन इनकी उम्र उतनी नहीं ह अम्मा अभी

चंद्रो देवी- ये 21-22 साल की हो चुकी हैं इन्हे अब तक अकाल नहीं आई तू तो 16 की hi थी तब

सीमा- मैं अभी 20 की हु और दीपा 19 की

चंद्रो देवी हसी- हँ तुम्हे तो अभी अपनी उम्र भी नहीं पता तुम इस त्याग की मूर्ति पैर इल्जाम लगाने चले हो,

चंद्रो देवी ने बोलना शुरू किया,

तुम लोगो को लगता तो होगा तुम्हारी उम्र जितनी बता रहे ह उतनी ह या ज्यादा ह ये तुषार अपने दोनों भाइयो से बड़ा लगता ह सीमा और दीपा कोई इनमे उम्र का अंतर बता hi नहीं सकता, क्योकि अंतर ह hi नहीं 2 महीने का अंतर ह,

सब एक साथ क्या

फ्लैशबैक…………………………………….

ये बात तब से ह जब राजेश के पिता राम कुमार और उनका भाई धर्म कुमार एक hi परिवार में रहते थे, राम कुमार बहुत hi सीधा इंसान था उसकी शादी हो गई लेकिन कोई संतान नहीं हुई, धर्म कुमार की शादी हुई तो उसकी 4 बेटे हुए, धर्म कुमार ने अपने पिता को भेला फुसला क्र साडी जमीन अपने नाम करवा ली, राम की कोई संतान नहीं ह भविष्य में उसकी जमीन किसी ने चीन ली तो क्या होगा जब तक राम कुमार ह वो अपने भाई की सेवा करेगा, और उसकी 4 बच्चे ह तो वो कैसे गुजरा करेगा आधी जमीन में,

उसके पिता धर्म की बातो में आ गए और साडी जमीन उसके नाम क्र दी, लेकिन किस्मत को कुछ और hi मंजूर था राम कुमार के घर भी बचा पैदा हो गया राजेश, राजेश के होने पर राम और उसके माता पिता जीतनेय खुश थे धर्म उतना hi दुखी था, फिर एक बेटी भी हुई कामिनी, बहुत सूंदर थी कामिनी, दोनों बच्चे बड़ी तेजी से बढ़ रहे थे,

राम के पिता को लगा जमीन बराबर बात देनी चाहिए तो वो राम को लेकर तहसील जा रहे थे रस्ते में उन्हें सांप ने काठ लिया और वही उनकी मोत हो गई, पूरा परिवार दुःख में चला गया, जब हालत नार्मल हुए तो धर्म ने राम कुमार को घर से निकल दिया जमीन उसके नाम थी राम कुमार कुछ नहीं क्र सका, तो राम कुमार अपनी माँ अउ परिवार को लेकर गाओं के बहार इस घर में आ बसा, ये घर राम की माँ के नाम था,

राम की माँ के नाम एक छोटी सी जमीन और थी जो उन्होंने राम को देना चाहा लेकिन धर्म ने कुछ तिगड़म भिड़ा क्र वो जमीन जमीदारो के अहा गिरवी रख क्र पैसा खा लिया, पैसा वापस न देने पैर जमीन जमीदारो की हो गई, राम के बस कुछ नहीं बचा था तो वो मजदूरी करने लगा, उसके साथ राजेश भी मजदूरी पैर जाने लगा, एक दिन राम कुमार की लाश रस्ते में मिली किसी को आज तक ये नहीं पता की उसे हुआ क्यात है, न शरीर पैर कोई निशान न hi कोई जखम,

राजेश सीधा था बच्चा था कुछ नहीं पता था धर्म और गाओं वालो ने जल्दी में राम का अंतिम संस्कार करवा दिया, अब राजेश अकेला रह गया उसकी दादी उसकी माँ उसकी बहन, सबकी जिमेदारी उसी के उप्पेर आ गई, राजेश मजदूरी करता और घर चलता और अपनी बहन को पढ़ा भी रहा था,

जल्दी hi उसकी दादी भी गुजर गई, लेकिन जाने से पहले उन्होंने वो घर राजेश के नाम क्र दिया, राजेश जब 25 का था और कामिनी 23 की तो राजेश की माँ बहुत बीमार हो गई, कामिनी इतनी सूंदर थी की उसके पीछे गाओं के लड़के कुत्ते की तरह घूमते, राजेश दिन भर बहार रहता उस बेचारे की दुनिया तो बस काम थी,

कामिनी थोड़ा पढ़ लिख ली सूंदर वो थी hi उसका एक लड़के के साथ चक्क्र चल गया, अउ रेज hi दिन गुजर रहे थे, एक दिन राजेश काम से वापस आ रहा था तो उसे गन्ने के खेत में से कुछ आवाजे आई, जब वो आवाज की तरफ गया तो वह एक आदमी और एक औरत नंगे रास लीला क्र रहे थे,

वो औरत थी धर्म कुमार के तीसरे bête सुनील की पत्नी, और वो आदमी था चंद्रो देवी का बड़ा बीटा यश, राजेश उन दोनों को देख लिया तो यश ने राजेश को धमकाया की वो किसी को न बताये, लेकिन उस औरत ने अपना रोना शुरू किया और राजेश के पेअर पकड़ लिए की देवर जी मुझे माफ़ क्र दो मुझसे गलती हो गई ये बात किसी को मत बताना,

राजेश बेचारा सीधा आदमी औरत को रोटा देख पिघल गया और वडा क्र दिया की किसी को नह बताएगा, यश वह से कपडे पहन क्र निकल गया वो औरत कपडे पहनने लगी तभी वह सुनील और उसका छोटा भाई मुकेश और उसका दोस्त चंगु आ गया, सुनील को अपनी पत्नी पैर शक था इसलिए आज वो उसका पीछा क्र रहा था लेकिन वह पहुंचने में देर हो गई और उस देर का नतीजा ये हुआ की राजेश वह मुँह घुमाये खड़ा था और सुनील की पत्नी कपडे फेन रही थी, देखने वालो के लिए ये hi लगता की राजेश और उस औरत के बिच hi कुछ हुआ ह,

उन तीनो ने राजेश को पकड़ लिया,

राजेश- भैया मैं नहीं था भैया आप गलत समझ रहे ह

सुनील- भोसड़ी के आज हट्टे चढ़ा ह बड़ा शरीफ बना घूमता था यहाँ अपनी hi भाभी को छोड़ रहा ह

राजेश- नहीं भैया ऐसा कुछ नहीं ह

मुकेश- भैया इस भेनचोद को गाओं के सामने पंचायत में सजा देंगे

Changu-are पंचायत में तो तुम्हारी hi बदनामी होगी इसे यही सजा देंगे,

उन तीनो ने राजेश को पीटना शुरू क्र दिया वो औरत मुँह छुपाये वही बैठी रही उसने एक बार भी नहीं बोलै की ये वोन hi ह, बहुत देर पीटने के बाद उन्होंने राजेश को नंगा क्र दिया,

चंगु- सुनील भाई जी इस मादरचोद का लुंड काट दो साला किसी के लायक नहीं रहेगा,

चंगु की बात सुनकर राजेश की साँस hi अटक गई वो रोटा रहा उनके सामने गिड़गिड़ाने लगा, लेकिन वो औरत अभी भी चुप कड़ी थी,

और सुनील ने गणना काटने के फरसे से राजेश का लुंड काट दिया, राजेश दर्द से चिक उठा उसकी चीख इतनी भयंकर थी की किसी पत्तर का भी दिल दहल उठे, लेकिन उन तीनो और उस औरत के दिल में एक लहार भी नहीं उठी, राजेश दर्द में पागल सा हो गया और उस दर्द और गुस्से में उसने वो फरसा उठाया और एक hi झटके में सुनील का सर धड़ से अलग क्र दिया, जब तक किसी को हालत समझ आते राजेश ने उन दोनों की गार्डन पैर भी जबरदस्त वॉर किया और दोनों को वही मर दिया, उन्हें मरते hi राजेश भी बेहोश हो क्र वही गिर गया,

अब उस औरत के होश गायब हो चुके थे, उसे कुछ समझ नहीं आया तब वाओ अहा से भागी सीधे जमीदारो की हवेली यश से मिलने, लेकिन चंद्रो देवी ने उसे वह घुसते देख लिया, जब वो यश को खेत में हुई घटना को बता रही थी तो चंद्रो देवी ने सब सुन लिया, चंद्रो देवी ने अपने bête यश और उस औरत के मुँह पैर थपड बरसाने शुरू किये और तुरंत अपने खास आदमियों को लेकर जंगल पहुंची और तुरंत राजेश को हॉस्पिटल पहुंचाया,

लेकिन गाओं में खबर फ़ैल गई की राजेश ने सुनील मुकेश और चंगु को मर दिया ह, किसी ने उन चारो क ीक साथ खेत में देख लिया था, लेकिन चंद्रो देवी ने मामला hi बदल दिया, उस औरत को धमका क्र ये बयां दिलवाया की कुछ डकैत वह छुपे हुए थे, उन्होंने उस औरत को पकड़ लिया था और ये चारो राजेश, सुनील, मुकेश, और चंगु वह पहुंच गए, और डकैतों ने उन्हें मर दिया और राजेश हॉस्पिटल में ह,

पुलिस और पंचायत ने उस औरत का बयां मान लिया लेकिन गाओं वालो किन अजर में अभी भी राजेश बेक़सूर नहीं था, सच न उसने कभी बताया न hi चंर्डो देवी ने न hi यश ने,

राजेश ठीक तो हो गया लेकिन उसकी माँ सदमा बर्दास्त न क्र सकीय और चल बसी, इधर कामिनी भी गाओं वाली की साइड हो गई और अपने hi भाई से नफरत करने लगी उसका कहें अतः राजेश की वजह से उसकी माँ मरी ह, कामिनी ने इस बात का फायदा उठाया और जिस लड़के के साथ उसका चक्क्र था उसके साथ भाग गई, और वो औरत प्रेग्नेंट हो गई,

प्रीसेट……….

चंद्रो देवी- और दीपा जानती हो वो औरत कोण थी रजनी जिसने तुम्हे राजेश और उसके कातिल होने की कहानी सुनाई, और सुनील जिसे तुम्हारा पिता बता रही थी, तुम्हारा पिता सुनील नहीं मेरा बीटा यश ह,

चंद्रो देवी की बाते सुनकर क्र सभी की आँखे मुँह सब खुले हुए थे आँखों से आंसू नदी की तरह भी रहे थे,

दीपा- रट हुए मैं कैसे मान लू की ये सच ह आप सच बोल रही हो

चंद्रो देवी- मैं एक माँ होकर अपने hi bête पैर इल्जाम लगा रही हु, राजेश का सच की बाप नहीं बन सकता बल्कि वो कभी किसी के साथ सम्बन्ध hi नहीं बना सकता, चाहो तो उसका चेकउप करवा लो या खुद hi देख लेना,

दीपा- तो मैं यहाँ कैसे पहुंची

चंद्रो देवी- बता रही हु

अंजलि- बस अम्मा बहुत बता दिया,

चंर्डो देवी- नहीं अंजलि इनकी आँखे खुलनी चाहिए

फ़्लैश बैक…………….

राजेश अकेला रह गया था जिस बेचारे ने कभी चाय तक न बनाई थी वो खुद के लिए खाना बना रहा था कभी भूका सोता कभी कच्चा पक्का खाना बना लेता, चंद्रो देवी ने बहुत कोशिश उसकी मदद करने की लेकिन उसने मदद नहीं ली,

इधर रजनी प्रेग्नेंट हो गाइट hi उसके परिवार वालो ने उसे अपनाने से मन क्र दिया, वो गाओं छोड़ क्र भाग गई, यश को चन्द्रदेवी ने अमेरिका भेज दिया, गाओं में किसी को ये नहीं पता था की राजेश के साथ क्या हुआ था बस कुछ लोगो को शक था की राजेश ने hi उन तीनो को मारा ह, कुछ लोग उस पैर जमीन की वजह से शक क्र रहे थे कुछ रजनी की वजह से,

राजेश की तकलीफ उसके अलावा कोई नहीं समझ सकता था एक जवान लड़का जो किसी औरत के पास भी नहीं जा सकता था, कुछ महीने तो उस बेचारे ने घर में कैद रह क्र गुजर दिए, लेकिन अब उससे बर्दास्त नहीं हो रहा था वो इतना परेशां हो गया की उसने आतम हत्या करने का फैसला क्र लिया और चल दिया कही दूर जिससे किसी को उसकी लाश भी न मिले, लेकिन होनी को कुछ और hi मेजर था, राजेश नदी के किनारे चला जार है था एक कुल्हाड़ी लेकर जिससे वो नदी में घुस क्र अपनी गार्डन काट सके, वो गाओं से बहुत दूर नदी के किनारे खड़ा अपने आप को तैयार क्र रहा था,

तभी उसे किसी के चीखने की आवाज आई तो उसने उस तरफ देखा तो एक लड़की भाग रही थी उसके पीछे कुछ आदमी थे, वो लड़की गर्भ से थी, उन आदमियों के हाथो में हतियार थे, उस बेचारी को ऐसे देख क्र राजेश के अंदर की अच्छे उसे उसकी तरफ ले गई, राजेश ने उसे बहो में भर लिया और उसे अपने पीछे करके उन आदमियों के सामने खड़ा हो गया, वो लोग 5 थे, राजेश तो वैसे भी घर से मरने निकला था तो उसे उन सबसे को डारन hi लग रहा था उसे फरक नहीं पड़ता अगर वो मर भी जाता, और यही राजेश ने उनसे बोलै

राजेश- ोोू भाइयो जरा रुक जाओ क्यों इस लड़की के पीछे पड़े हो

उनमसे ेके क आदमी- अरे ो निकल जय अहा से वर्ण फ्री में मारा जायेगा

राजेश- हस्ते हुए अरे भाई मैं तो घर से मरने hi निकला हूत ुम मारो या खुद मरू फरक नहीं पड़ता लेकिन तुम मुझसे भिड़े तो तुममे से 2 को तो मर hi दूंगा, अब देख लो फ्री में कोण मरेगा

राजेश की बात सुनकर उन पाछो की हवा टाइट हो गई, लेकिन वो मजबूर भी थे उन्होंने राजेश पैर हमला किया, लेकिन आज राजेश का दिन ठीक था उसके सरे देव सही जगह लग रहे थे, और राजेश ने उन पांचो को hi मर दिया, राजेश को भी यकीन नहीं हो रहा था की उसने ये सब कैसे क्र दिया, उधर वो बेचारी लड़की बैठी हुई सुबक रही थी, राजेश उसके पास पंहुचा

राजेश- तुम घबराओ नहीं मैंने उनको ठिकाने लगा दिया ह अब तुम सुरक्षित हो

लड़की- मैं कही सेफ नहीं हु वो लोग मेरा पीछा नहीं छोड़ेंगे

राजेश- कोण लोग कोण थे ये लोग

लड़की- मेरा नाम अंजलि ह मैं…… ( अंजलि ने अपनी कहानी राजेश को सुनाई जो चंद्रो देवी को भी नहीं पता)

राजेश ने अंजलि की पूरी बात सुनकर कहा तो अब तुम अकेली हो तो कहा जाओगी

अंजलि- पता नहीं मेरे पेट में बच्चा ह इसके साथ कहा जाऊ

राजेश- मेरे पास एक रास्ता ह अगर तुम्हे सही लगे तो

अंजलि- क्या रास्ता ह

राजेश- पहले मैं तुम्हे अपने बारे में बता दू फिर शायद तुम उस रस्ते को अपना सको

फिर राजेश ने अपने और परिवार के बारे में सब कुछ बताया और ये भी बताया की वो अपनी जिंदगी से दुखी होकर यहाँ मरने आया था,

राजेश की बात सुनकर अंजलि को बड़ा दुःख हुआ,

अंजलि- बहुत बुरा हुआ आपके साथ, बताइये क्या रास्ता ह

राजेश- देखो मैं भी अकेला हूत ुम भी अकेली हो अगर तुम्हे ठीक लगे तो तुम मेरी पत्नी बन क्र मेरे साथ मेरे घर चलो वह इस बच्चे को मैं अपना नाम दे दूंगा गाओं में ये हो जायेगा की मैं बाप बन गया और तुम सेफ रहोगी, मेरा गाओं इतनी दूर ह की वह से लोग भी शहर नहीं जाता शहर से तो कोई शायद आये hi न,

अंजलि कुछ देर सोचते हुए, लेकिन ये बच्चा कभी भी पैदा हो जायेगा उसका क्या कहोगे,

राजेश- उसके लिए भी सोचेंगे लेकिन तुम अच्छे से सोच लो मैं एक अनपढ़ गवर इंसाने हु मजदूर हु तुम्हे कोई सुच नहीं दे सकता न पति का सुच न hi पैसो का,

अंजलि- मैंने मैरो के सरे सुच देख लिए ह अब मुझे सुच नहीं चाहिए बस सकूं चाहिए और कोई अच्छा इंसाने और आपसे अच्छा इंसाने कोई नहीं हो सकता,

राजेश- ठीक ह तो चलो मेरे साथ पहले मैं तुम्हे हॉस्पिटल ले चलता हु तुम्हे इलाज की जरुरत ह,

राजेश अंजलि को कसबे के सरकारी हॉस्पिटल में ले आया, वह अंजलि को भर्ती क्र लिया कुछ दिन उसका चेकउप किया इलाज किया, अंजलि के पास काफी पैसे थे उसके पॉकेट में तो वह का खर्चा उसी ने उठाया, तब तक राजेश चंद्रो देवी के पास पंहुचा और उसे अंजलि की थोड़ी सी कहानी ुनै की वो किसी से बच क्र भागी ह और अकेली ह उसकी हालत के बारे में बताया फिर अपने और अंजलि के प्लान के बारे में बताया,

राजेश- अम्मा इससे मेरे भी जीने का सहारा हो जायेगा और गाओं थोड़ी बहुत इज्जत बन जाएगी,

चंद्रो देवी- मुझे ख़ुशी ह राजेश तेरे जीवन में ऐसा पल आया ये सही फैसला ह, मैं तेरी सहायता करुँगी

फिर चंद्रो देवी राजेश के साथ अंजलि से मिली, चंद्रो देवी ने अंजलि को बड़े प्यार से पुचकारा और बोली तुम शरीर से hi बड़ी लग रही हो बीटा लेकिन तुम्हारी उम्र मुझे 16 से ज्यादा नहीं लगती.

अंजलि- मजी सही पहचाना आपने मेरा शरीर 20 साल की लड़की जितना ह लेकिन मेरी उम्र अभी 16 hi ह.

चंद्रो देवी- मैं तुमसे उसका कारन नहीं पूछूँगी तुम्हारी निजी जिंदगी ह, तुम मुझे अम्मा बोल सकती हो, तुम दोनों आज hi **** सिटी में चले जाओ वह हमारा एक घर बन रहा ह राजेश वह उसकी देख रेख क्र लेगा, और कुछ सालो तक तुम दोनों वही रो, वह रहने की देख रेख की मजदूरी मैं देती रहूंगी,

दोनों चंद्रो देवी के बताये जगह चले गए, वह जाकर अंजलि ने एक लड़की को जनम दिया, बहुत सूंदर बच्ची थी, इधर रजनी भी माँ बनने वाली थी, जिसके बारे में केवल उसके माता पिता और भाई जानते थे, उन्होंने रजनी को घर में hi छुपा क्र रखा था ताकि किसी को पता न चले, वही रजनी को उसके गाओं में काम करने वाले एक लड़का पसंद आ गया जो उसके घर के सामने किराये पैर रहता था, दोनों के बिच चिट्टी से बाते शुरू हो गई लेकिन रजनी ने कभी उसे अपने फेस के अलावा शरीर नहीं दिखने दिया, उस लड़के को नहीं पता था रजनी प्रेग्नेंट ह, उसे बस ये पता था ये विधवा ह,

सूंदर तो थी hi, अंजलि के आने से पहले गाओं कीसबसे सूंदर औरत रजनी hi थी, इसलिए यश उसके पीछे पद गया था, रजनी बच्चा गिरा भी नहीं सकती थी 2 महीने बाद बचा पैदा होने से पहले वो चंद्रो देवी से मिली और उस बच्चे को यश का बता क्र उन्हें लेने को कहा, लेकिन चंद्रो देवी ऐसा नहीं क्र सकती थी तो उनके पास कोई रास्ता नहीं था,

जब चंद्रो देवी को कुछ नहीं सुझा तो वो रजनी को लेकर अंजलि के पास चली गई और अंजलि को साडी बात बताई, जब अजनाली को पता चला की रजनी hi वो औरत ह जिसकी वजह से राजेश की ये हालत ह तो रजनी ने उसकी हेल्प करने से मन क्र दिया, तो रजनी बोली ठीक अम्मा आप पैसे वालो हो तो मैं आपका तो कुछ नहीं बिगड़ सकती, लेकिन मैं अपनी जिंदगी बर्बाद नहीं करुँगी इस बच्चे को पैदा करना मृ मजबूरी ह, नहीं तो मेरी जान कोखतरा ह लेकिन पैदा होने के बाद मैं इसे फेंक दूंगी,

अंजलि- कैसी औरत ह तुम अपने बच्चे को फेंक डौगी,

रजनी- तुझे इससे क्या तू इस नाजायज बच्चे को पल रही ह तेरी जिंदगी में तो राजेश ह न जिसने इसे अपना नाम दे दिया लेकिन मैं ऐसी जिंदगी नहीं जी सकती, मैं जिससे प्यार करती हु उसे नहीं पता की मैं माँ बन रही हु,

अंजलि बहुत दुखी थी वो बोली ख़बरदार अगर बच्चे को कुछ किया तो जान से मर दूंगी तुम्हे, इसके पैदा होते hi इसे मेरे पास छोड़ देना और कसम कहना की दुबारा कभी लोट क्र नहीं आओगी कभी इस बच्चे को नहीं बताओगी तुम इसकी माँ हो,

रजनी- मैं वडा करती हु कभी नहीं आउंगी न इसके सामने न hi तुम्हारे,

फिर रजनी कुछ दिन अंजलि के पास रही और एक फुल सी बेटी को जनम देकर वह से चली गई, 16 साल की अंजलि 2 बेटियों की माँ बन गई और वो दोनों अंजलि और दीपा ह,

प्रेजेंट………

तो ये थी तुम्हारी माँ रजनी जो तुम्हे मरना चाहती थी अपनी जिंदगी ख़ुशी से जीने के लिए और ये हैं अंजलि और राजेश जिन्होंने तपश्या बना लिया अपनी जिंदगी को तुम लोगो के लिए, और तुम बाकि बच्चे,

चंद्रो देवी इतना hi बोल पाई थी की बहार से रूचि रट हुए अंदर आई जहा उसके साथ राजेश भी खड़ा था, बस बस बस बस बस बस बस और कुछ नहीं सुन्ना और नहीं सुन्ना वो दौड़ क्र ाज्जलि के गले लग गई और उसकी बहो में चुप गई और रोने लगी, आंसू सीमा तुषार और दीपा की आँखों में भी लगातार भी रहे थे, तुषार भी दौड़ क्र अपनी माँ से चिपक गया सीमा भी उनमे शामिल हो गई, दीपा अकेली कड़ी रो रही थी उसकी आँखों में आंसू थे उसका सर शर्म से जमीन में गदा जार है था, उसके पेअर जमीन में धस से गए थे वो हिल भी नहीं प् रही थी जब तक उसके कानो में अंजलि की आवाज नहीं पड़ी

अंजलि- दीपा बीटा अपनी माँ से ऐसे hi दूर कड़ी रहेगी



अंजलि की आवाज सुनते hi दीपा दिल खोल क्र रोने लगी और अंजलि के गले लग गई और रोटी रही बस रोटी रही,
 
अपडेट-15






अंजलि ने उसे चुप करने की कोशिश नहीं की, काफी दे रेज hi चिपके रहे फिर सीमा बोली- माँ 16 की आगे में कैसे सम्हाला आपने

चंद्रो देवी- ये 16 की थी इसी लिए मैंने इन दोनों को 8 साल वही रखा तुम लोगो को अच्छे से याद होगा तुम वह रहते थे,

सीमा- है मुझे याद ह

चंद्रो देवी- यहाँ आकर तुम लोगो को आगे काम करके लिख वे गई और सब की आगे में अंतर करवाया गया बड़ी मुश्किल थी लेकिन मैंने स्कूल मास्टर से बात करके सब कराया, तुम सबकी पढाई देर से धुरु हुई,

सीमा- अम्मा बाकि सब कैसे

रूचि- दीदी बस अब और कुछ नहीं पूछना न hi हमे जानना ह हम सब भाई बहन ह और ये हमारी माँ ह और वो हमारे पापा, और ख़बरदार जो किसी ने आज के बाद हमारे पैदा होने को लेकर कोई जीकर किया तो मैं हमेशा के लिए उससे बात नहीं करुँगी,

सीमा- श्री बाबू गलती हो गई आज के बाद कभी इस बारे में बात नहीं होगी

अंजलि- बीटा कभी तुम्हारे पापा को इस बारे में पता न चले, उन्होंने बहुत दुःख सही ह वो तुम सब को देख क्र hi खुश रहते ह जब तुम लोग उन्हें पापा बोलते हो उसी वजह से आज तक जिन्दा ह वो, उन्हें कभी दुःख मत देना

तुषार- माँ वो हमारे पिता ह और हमेशा रहेंगे और उनके जीवन के सरे दर्द दुःख अब ख़तम होंगे अब उन्हें और तकलीफ नहीं झेलनी होगी ये वडा ह मेरा

दीपा- माँ मुझे माफ़ क्र दो मेरी वजह से आज इस घर में इतनी बड़ी प्रॉब्लम आ गई मेरी बेवकूफी की वजह से,

अंजलि- नहीं बीटा इसमें तेरी गलती नहीं ह कोई भी ऐसी बात करेगा तो मन पैर असर पड़ता hi ह

दीपा- नहीं माँ आपने हमे ऐसी परवरिश दी ह इतना प्यार दिया ह फिर भी एक औरत ने मेरे दिमाग में ये सब भर दिया कमजोर मैं थी

अंजलि- नहीं गलती मेरी ह मुझे पहले hi तुम लोगो को सब सच बता देना चाहिए था

रूचि- नहीं माँ हमे कुछ नहीं जानना हु सब आपके बच्चे हैं इसके अलावा और कोई सच हमारे लिए नहीं ह

सरे भाई बहन एक साथ बोले है माँ हमे कुछ नहीं जानना, चंद्रो देवी की आँखों में भी आंसू थे

चंद्रो देवी- दीपा मेरे भी गले लग जा बीटा मैं भी तेरी दादी लगती हु

दीपा- मुझे माफ़ करना अम्मा मेरा मेरे माँ बाप के अलावा किसी से रिश्ता नहीं ह आपने उस रिश्ते को बहुत पहले ख़तम क्र दिया था मैं उसे दुबारा नहीं जोड़ना चाहती,

अंजलि- ऐसा मत बोल बीटा

दीपा- माँ सबने अपने लिए सोचा कभी उस बच्ची के बारे में सोचा क्या होगा उसका आप इतनी काम उम्र में कैसे दो बच्चियों को पलोगी किसी ने नहीं सोचा आज मैं किसी के बारे में नहीं सोचूंगी मेरे लिए बस आप मेरी माँ और वो मेरे पापा ह और हम सब भाई बहन बाकि दुनिया मेरी कोई नहीं लगती,

चंद्रो देवी- तू सही बोल रही ह बीटा मैं अब रिश्ते जोड़ क्र तुम्हारे रिश्तो के बिच में नहीं आउंगी, अब मैं चलती हु अंजलि ख्याल रखना

चंद्रो देवी थोड़ा दुःख थोड़ी ख़ुशी लेकर चली गई,

अंजलि- बच्चो गलती से भी तुम्हारे पापा को ये सब पता न चले

नहीं चलेगा चारो एक साथ बोले, शाम को राजेश भी आ गया आज दीपा और सीमा ने पूरी हलवा सब्जी बनाई जैसे कोई त्यौहार हो, राजेश भी खुश हो था सभी को खुश देख क्र, वही रूचि बस अपनी माँ से चिपकी बैठी थी बिलकुल शांत थी एक दम गंभीर, उसने अपने हाथ से अंजलि और राजेश को पहला पहला निवाला खिलाया, राजेश की आँखों में आंसू थे, आज से पहले उसकी माँ ने भी कभी उसे ऐसे खाना नहीं खिलाया था जब से उसने होश सम्हाला था,

इस सब में सीमा और तुषार के बिच जो हो रहा था ो दिमाग से hi निकल गया था, सीमा को ज्यादा प्रॉब्लम नहीं थी क्योकि वो जानती थी की अंजलि को उसके और तुषार के रिश्ते के बारे में पता ह, लेकिन तुषार के दिमाग में जरूर ये बात दर बैठा गाइट hi की उसकी माँ ने उसे और सीमा को गलत हालत में देख लिया ह, दूसरा उसके दिमाग में अपने परिवार को खुशहाल जीवन देने की सोच घूम रही थी,

वही अंजलि खुश और घबराई हुई थी क्योकि राजेश का सच जान क्र तो बच्चो पैर इतना प्रभाव पड़ा ह जब उसका सच सामने आएगा तब क्या होगा वो कैसे रियेक्ट करेंगे, उसे सबसे ज्यादा दर दो बच्चो का था एक था तुषार जिसे अंजलि जानती थी वो कुछ भी क्र सकता ह उसके अंदर गुस्सा ताकत हिम्मत जिद सब भरपूर भरा हुआ था, वो तो बस अंजलि hi थी जिसके लिए वो कभी गलत नहीं करता था लेकिन उसके पिता के साथ हुए अत्याचार से उस पैर घेरा असर पड़ेगा वो कुछ जरूर करेगा और दूसरी थी उसकी सबसे लाड़ली रूचि जो हमेसा खुश रहती थी लेकिन उसके अंदर कितनी घेरे थी ये कोई नहीं जनता था,

और आज जैसा रूचि ने बेहवे किया उसका सीधा मतलब था उसके अंदर बहुत कुछ भरा ह, यही सोच क्र अंजलि घबरा रही थी, उसे तुषार का दर था वो उसके अतीत के पीछे जरूर जायेगा,

रात को सभी अपनी अपनी सोच में खोये हुए लेते थे रूचि अंजलि से अलग नहीं हो रही थी रात में भी वो उसके साथ hi सोइ, दीपा के अंदर दर्द और दूध उसे खाये जार है था इतनी तकलीफ तो उसे रजनी की बात सुनकर नहीं हो रही थी जितनी उसे पूरा सच जान क्र हो रही थी, उसके अंदर दर्द था जो उसकी माँ ने किया जो उसके असली बाप ने किया, और उसने जो राजेश के लिए बोलै अंजलि के लिए बोलै सब कुछ उसके दिमाग में घूम रहा था जिससे उसे और तकलीफ हो रही थी,

ये बात अंजलि को अच्छे से पता थी की दीपा कैसा फील क्र रही होगी इसी लिए उसने दीपा को अपने पास सुलाया,

अगले दिन सब कॉलेज चले गए चारो बहन भाई एक साथ कॉलेज के लिए निकले,

सीमा- हम सरे भाई बहन हमेशा एक साथ रहेंगे चाहे कुछ भी हो जाये

तुषार- है दीदी चाहे कुछ भी हो अब हमारे बिच गलत फहमी नहीं आएगी,

दीपा- ये सब मेरी गलती से हुआ ह

तुषार- दीदी आप बार बार खुद को दोष मत दो हम सब एक साथ ह और हमेशा रहेंगे

ऐसे hi बात करते हुए सब चले जार हे थे तभी सामने दीपा को रजनी कड़ी दिखाई दी, जिसे देख क्र दीपा की आँखे गुस्से में लाल हो गई और वो रुक गई,

सीमा- क्या हुआ दीपू रुक क्यों गई

दीपा- वो औरत कड़ी ह मेरा मन क्र रहा ह इनका खून क्र दू

सबने रजनी की तरफ देखा

सीमा- चल यहाँ से तू आज के बाद उससे दूर रहना

तुषार- है दीदी चलो यहाँ से आप कभी इनसे नहीं मिलोगी

रूचि- नहीं तू क्यों दूर जाएगी तूने क्या गलत किया ह जो उनसे छुपेगी गलत उन्होंने किया ह छुपना भी उन्हें hi पड़ेगा जैसे आज तक छुपी हुई थी

इतना बोल क्र रूचि चल दी रजनी की तरफ, रूचि को अपनी तरफ आता देख रजनी थोड़ा सकपका गई, वही दीपा की धड़कन तेज हो गई, रजनी के पास पहुंच क्र

रूचि- कैसी हो तै जी?

रजनी- कोण तै जी किसकी तै जी

रूचि- आप सुनील ताऊ जी की पत्नी हो न तो मेरी तै जी लगी न मैं राजेश की बेटी हु

रजनी- ाचा अच्छा मैं ठीक हु

रूचि- तो मुझे भी ठीक रहने दो न क्यों टेंशन दे रही हो

रजनी- मैंने क्या टेंशन दी तुम्हे मैं तो तुमसे कभी मिली hi नहीं

रूचि- देखो तै जी तुम्हारी वजह से मेरी बहन ठीक नहीं ह वो ठीक नहीं तो मेरी माँ ठीक नहीं ह और मेरी माँ ठीक नहीं होती तो मैं कैसे ठीक हो सकती हु, और अगर मैं ठीक नहीं हु तो मैं किसी को ठीक नहीं रही दूंगी, अगर आप चाहती हो की आप ठीक hi रो तो मुझे ठीक रखना होगा और मैं तभी ठीक हु जब मेरी माँ ठीक ह और मेरी माँ तब ठीक ह जब हमारी फॅमिली ठीक ह इसलिए ठीक से रहो न,

रजनी का दिमाग घूम सा गया, क्या बोल रही ह लड़की

रूचि- ोफ्फूऊ बड़ी नादाँ हो आप तो चलो सीधे शब्दों में बताती हु, मेरी बहन से दूर रहो वर्ण किसी के पास जाने लायक नहीं रहोगी

रजनी- तुझे मुझे धमका रही ह तू जानती नहीं ह मुझे

रूचि- जानती हु सब जानती हु

रजनी- मेरी बेटी को भएको मत तुम सब मिलकर वर्ण तुम्हारे बाप के राज सबको बता दिए न तो सोच लेना सुनील के दोनों भाई तुम सबका क्या करेंगे.

रूचि- मुस्कुराते हुए और कड़े शब्दों में, ोोू तै अगर मैंने उन्हें तुम्हारे राज खोलने शुरू किये न तो मेरे पिता को तो बचने के लिए हम 6 हैं तुम्हे बचने कोण आएगा क्योकि तुमने अपने नए पति को तो नहीं बताया होगा न की तुमने क्या क्या गुल खिलाये हैं.

रूचि का ये खतरनाक रूप देख क्र रजनी की गांड फैट गई, वो गुस्से में रूचि को देख रही थी, वही सीमा दीपा और तुषार भी रूचि का ये रूप पहेली बार देख रहे थे,

रजनी तुरंत दीपा के पास गई, बीटा तू इनकी बातो में आई गई इन्होने तेरे बाप को..

दीपा- ख़बरदार जो अपनी जबान से मेरे पिता का नाम लिया मेरे पिता राजेश ह समझी और माँ अंजलि ह

रजनी- तुझे इन्होने झूटी कहानी सुनाई होगी बेटी

दीपा- हहहह मैं बच्ची नहीं हु कहानिया कोण सुना रहा ह अच्छे से जानती हु, तुम्हे एक चेतावनी दे रही हु आज के बाद मुझसे दूर रहना वर्ण तुम्हे इस बार चंद्रो देवी या यश ठाकुर भी आस पास नहीं दिखेंगे

यश ठाकुर का नाम सुनते hi रजनी की हिम्मत टूट गई वो समझ गई दीपा को सब सच पता चल चुक्का ह, रजनी ने घेरि साँस ली और बोली

रजनी- मैं चाहती थी तुझे एक अच्छी जिंदगी दू इस गन्दगी से दूर कही किसी हॉस्टल में पढ़ो आज मेरे पास बहुत पैसा ह तुझे अपनी कोई रिश्तेदार बता क्र अपने घर में भी रख लेती खूब मजे की जिंदगी जीती, लेकिन तुझे तो ये गन्दगी पसंद ह ऐसे hi साद जाएगी इस गन्दगी में

सीमा- ीी कोण ह तू जबान सम्हाल क्र बात क्र वर्ण यही तेरी अमीरी का भूत उतर दूंगी

दीपा- दिखा दी अपनी औकात इसी पैसे के लिए तूने सुनील को धोका दिया इसी पैसे के लिए टुनमे मुझे मरना चाहा आज इसी पैसे का लालच दे रही ह, अगर तू मेरे पास माँ बन क्र आती तो शायद मैं तुझ पैर तरस खा क्र एक बार हमदर्दी भी दिखा देती तू तो सोडा करने आई ह, तुझमे आज भी मुझे अपनी बेटी खेनि की हिम्मत नहीं ह, चली जा मेरे सामने से वर्ण मैं अपना आप खो दूंगी,

रजनी- गुस्से में लाल होते हुए ठीक मर इस गन्दगी में लेकिन तुम लोगो ने जो मेरी बेइज्जती की ह उसे मैं कभी नहीं भूलूंगी इसका बदला जरूर लुंगी,

रजनी वह से गुस्से में पेअर पटकती हुई चली गई, दीपा की आँखों में आंसू थे, सबने उसे चुप कराया,

तुषार- दीदी ऐसी औरत के लिए क्यों रोटी हो आप

रूचि- है दीपा रो मत वर्ण वो जीत जाएगी तुझे दर्द देने hi आई थी वो अगर तू रोइ तो उसी की जीत होगी

दीपा- नहीं रोउंगी मैं मेरी माँ ने मुझे हारना नहीं सिखाया, लेकिन तूने ये कब सीखा

रूचि- क्या मैं क्या किया

दीपा- क्या किआ तूने उसके साथ हमारी भी हालत ख़राब क्र दी थी बड़ी खतरनाक बोलती ह तू

सीमा- है रूचि सच में

तुषार चलो सबको समोसा खिलता हु आज कॉलेज बाद में जायेंगे

रूचि- कॉलेज नहीं जायेंगे आज

सीमा- क्यों क्या हुआ

रूचि- कुछ बाते करनी ह जो घर में नहीं हो सकती थी, इसलिए तुषार समोसे पैक करवा और कही बैठने की जगह देख

तुषार ने समोसे पैक करवाए और कसबे की क पार्क में सरे बैठ गए

दीपा- है बता क्या बात करनी ह

रूचि- कल जॉब hi हुआ सही हुआ या गलत मुझे नहीं पता लेकिन ये जरूर होता और आगे भी हो सकता ह

सीमा- मतलब आगे क्यों होगा, अब तो दीपा को सब पता चल गया अब वो सब समझ गई ह

दीपा- है रूचि अब ये गलती नहीं होगी

रूचि- आप hi तो समझ गई अभी आपका सच सामने आया हैं बाकि पांचो का नहीं

सीमा- मतलब तू कहना क्या चाहती ह?

रूचि- जब माँ पापा से मिली थी वो प्रग्नेंट थी और बस 16 साल की, उस आगे में किसने उनके साथ वो सब किया होगा आपके पिता कोण ह, और हमारे पापा बाप नहीं बन सकते तो हम किसके बच्चे हैं, फ्यूचर में ऐसे hi कोई उठ क्र आ गया की हम उनकी औलाद ह तब क्या होगा, दीपा समझ गई क्योकि रजनी ने गलत किया, अगर कोई ऐसा आ गया जिसने मज़बूरी और हालातो की वजह से हमे अलग किया होगा और वो आज वापस आ गया तब क्या होगा कैसे उन्हें दूर करेंगे कैसे अपने माँ बाप से दूर होंगे

तुषार- हम कभी अपने माँ बाप से दूर नहीं होंगे रूचि चाहे कुछ भी हो जाये

रूचि- तुम समझ नहीं रहे हो टुशु, माँ ने हम सभी भाई बहेनो को किसी भी कीमत पर साथ रहना सिखाया ह और बचपन से बस ये hi समझाया ह की चाहे कुछ हो जाये तुम सब कभी झगड़ा मत करना एक दूसरे से अलग मत होना, उसके पीछे के ये सब मुख्या कारन हो सकते हैं, की कही कोई उठ क्र न आ जाये हमे अपनी औलाद बताने और उस टाइम बस हम भाई बहेनो का प्यार hi हम ीक दूसरे के साथ रख सकता ह हमे सही फैसला लेने में मदद क्र सकता ह,

और हमारी माँ उनका पास्ट कसिए था उनके वो 16 साल कसिए थे किसी को नहीं पता उनके साथ क्या हुआ क्यों वो यहाँ आई इतनी गरीबी में दिन गुजरे 6 बच्चे पीला क्यों इतनी सूंदर होकर पापा जैसे आदमी से शादी की, वो इतनी सूंदर ह की दुनिया में शायद hi उन्हें शादी के लिए मन क्र देता, जब वो यहाँ आई तो उनके पीछे गुंडे लगे हुए थे, वो आज तक खुद को यहाँ छुपा रही हैं, कोई तो ह जिससे उन्हें खतरा ह

दीपा- सही बोल रही ह तू

रूचि- और टुशु तुझे याद उस रात जब भूरा और उन लड़को ने मुझ ेउठाया था तो भूरा ने उस लड़के की तरफ इशारा किया था ये किसी चोपड़ा का बीटा ह नाम तो मुझे याद नहीं लेकिन इतना याद ह की उसने चोपड़ा नाम लिया था और माँ ने उसे छुड़वा दिया था और भूरा को ये कहे क्र कुल्हाड़ी मरी थी की तुझे ये नहीं करना चाहिए था,

तुषार- है मुझे याद ह

रूचि- ये चोपड़ा जरूर माँ की तित से जुड़ा हुआ ह

सीमा- रूचि तेरा दिमाग ह ये कंप्यूटर ह कितना सोच लेती ह तू, और एक मैं जिसे बस हवस दिखती ह. ये बात सीमा ने धीरे से कही लेकिन दीपा ने सुन लिट् hi,

दीपा- तो हमे क्या करना चाहिए अब

रूचि- हमे इस चोपड़ा का पता लगाना होगा लेकिन माँ को इसकी भनक न लगे

सीमा- लेकिन हम क्यों पता करे अगर माँ छुपाना चाहती ह तो छुपा hi रहने दो न

रूचि- अगर माँ और पापा को ख़ुशी देनी ह तो सबसे पहले उनके अतीत को जानना होगा आज हमे पता ह हमारे पापा की क्या तकलीफ ह और उन्हें कसिए ख़ुशी देनी ह ऐसे hi माँ का भी पता करना होगा,

तुषार – सही बोल रही ह, मुझे पढाई छोड़ क्र पैसे कमाने होंगे ताकि पापा और माँ को अच्छा जीवन दे सके

सीमा- तू पढाई नहीं छोड़ेगा हम बड़ी ह हम ये बीड़ा उठाएंगे

रूचि- हम सबको मिलकर hi करना होगा, सबसे पहले वो नाम याद करना होगा टुशु क्या नाम था,

तुषार- है यार लेकिन दिमाग में hi नहीं आ रहा वो तो,

सीमा- आ जायेगा उप्पेर वाला हमारा साथ देगा जल्दी hi याद आ जायेगा, चलो अब बहुत देर हो गई यहाँ बैठे बैठे,

फिर सब घर आ गए खुद को नार्मल रखते थे दीपा खुश रहने की कोशिश करती लेकिन उसके अंदर दर्द था जो धीरे धीरे काम हो रहा था, सरे बच्चे अंजलि और राजेश पैर और ज्यादा प्यार लुटाने लगे थे,

एक दिन अंजलि भैंस को चारा दाल रही थी की तुषार पीछे से दौड़ता हुआ आया और अंजलि को बहो में भर लिया तुषार का एक हाथ अंजलि की चूचियों के बिलकुल निचे था जिससे अंजलि की चूचिया उप्पेर की तरफ उभर गई, अंजलि की गांड बिलकुल तुषार के लुंड के सामने थी, तुषार का सोया हुआ लुंड भी दुसरो के खड़े लुंड से मोटा लगता था,


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तुषार- माँ माँ माँ माँ आज ख़ुशी का दिन ह

अंजलि- क्या हुआ बड़ा खुश लग रहा ह

तुषार- है माँ बात hi ख़ुशी की ह

तभी अंदर से दीपा आई जिसका धयान अंजलि और तुषार पैर गया तो उसकी नजर अंजलि की चूचियों पैर गई जो तुषार के हाथ से डाब क्र बहार आने को तैयार थी, वही अनजलि को भी तुषार के लुंड और अपनी दबी हुई चूचियों का अहसास था उसे बड़ा सकूं सा मिल रहा था उसने एक बार भी खुद को निचे उतरने को नहीं कहा, तभी सीमा आ गई

सीमा- अरे गिरायेगा क्या माँ को निचे उतर

तुषार ने अंजलि को निचे उतर दिया अंजलि के फेस पैर जो बदलाव आये उन्हें दीपा ने अच्छे से पढ़ लिया था,

सीमा- क्या हुआ क्यों चीला रहा ह

तुषार- अरे हमारे दोनों भाइयो ने फर्स्ट समेस्टर में टॉप किया ह पुरे कॉलेज में

अंजलि- क्या सच में हे भगवान् तेरा लाख लाख शुक्र ह

तुषार- है माँ अभी रजिया चीची के फ़ोन से बात हुई मेरी

पूरा परिवार बहुत खुश था

अंजलि- का बा रहे हैं वो दोनों

तुषार- माँ आने को तो नहीं कहा बोल रहे थे आने जाने में बहुत खर्चा होता ह इसलिए छुट्टियों में वही रह क्र पढ़ेंगे

अंजलि- मैं तो धन्य हो गई ऐसी औलाद प् क्र

रूचि- माँ आज हलवा बनाओ ख़ुशी में

अंजलि ने तुरंत हलवा बना दिया, शाम को राजेश को भी खुशखबरी दी जिसे सुनकर राजेश की आँखों में आंसू आ गए,

रूचि ने राजेश की आँखों से आंसू पूछे और बोली, पापा आप देखते जाओ आपके बच्चे आपका सर पुरे गाओं में सबसे ुचा क्र देंगे

तुषार- है पापा हम सब वो करके दिखाएंगे जो इस गाओं के पैसे वाले लोगो के बच्चे भी नहीं क्र पाए

राजेश- बीटा मुझे यकीन ह तुम जरूर ऐसा करोगे, बहुत कुश हु आज मैं,

पूरा परिवार खुश था ऐसे hi दिन गुजर रहे थे तुषार और रुचे को चोपड़ा का नाम याद नहीं आ रहा था, एक दिन तुषार जंगल से घूम क्र आ रहा था शाम का समय था, वोट क खेत के पास से गुजरा तो उसे खुसर पुसार की आवाज आई, उसने धयान लगा क्र सुना तो लगा जैसे कोई औरत किसी से कुछ कह रही ह, तुषार आवाज के करीब जाने लगा वो धीरे से निचे निचे रेंगता हुआ वह तक पहुंच गया, उसने वह जो देखा उसकी आँखे बड़ी हो गई, सामने का नजारा hi ऐसा था,

उसके सामने रजिया अपने हाथो पैरो पैर झुकी हुई थी और पूरी तरह नंगी थी उसकी भरी भरी 38 की चूचिया लटकी हुई थी, रजिया के पीछे गाओं का एक लड़का अपने घुटनो पैर खड़ा था और रजिया की छूट में धक्के मर रहा था, जिससे रजिया की चूचिया हिल रही थी जो बहुत hi खूबसूरत लग रही थी, ये नजारा देख क्र तुषार का लुंड एक hi झटके में खड़ा हो गया, तुषार को उस लड़के का लुंड तो नहीं दिख रहा था लेकिन रजिया उसे गुस्से में दाते जार hi थी,


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रजिया- अरे भड़वे जोर लगा न, दम नहीं ह क्या रंडी के घर के चक्क्र तो ऐसे लगता जैसे मेरी छूट फाड् देगा मादरचोद पैर रंडी के बीज में इतना भी दम नहीं की छूट के अंदर तक घुस सके,

तभी उस लड़के ने जोर से ाःह आह्हः करना शुरू क्र दिया वो झाड़ गया था रजिया की छूट में hi,

रजिया- हे भड़वे झाड़ गया हैट उप्पेर से पता नहीं कहा कहा से आ जाते हैं,

वो लड़का हटा तो तुषार को उसका लुंड दिखा जो बस 5 इंच का था,

लड़का- माफ़ करना चची वो मेरा पहेली बार थान ा अगली बार बहुत मजा दूंगा

रजिया- ोोू बहनचोद मजा दें ेके लिए लुंड होना चाहिए तेरी जैसी लुल्ली नहीं चल भाग यहाँ से और आज के बाद दिख मत जइयो मुझे वर्ण इसे भी काट क्र कुत्ते को खिला दूंगी,

वो लड़का जल्दी से उठा और अपन पेण्ट फेनी और तुरंत वह से भाग गया,

रजिया बड़बड़ाती हुई कपडे पहनने लगी, हे कितनी बुरी किस्मत ह मेरी इतने दिन बाद कोई मिला तो सेल में दम hi नहीं था, गरम भी ठीक से नहीं क्र पाया और कमीने ने अंदर hi माल गिरा दिया अब फिर दवाई लेनी पड़ेगी,

तुषार शांत बैठा रजिया को देख रहा था उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी, उसकी जगह कोई और होता तो अब तो रजिया को लिटा क्र छोड़ देता लेकिन वो थोड़ा घबरा रहा था, वही रजिया ने कपडे फेन लिए तो अपना हुलिया ठीक क्र hi रही थी की उसकी नजर छुपे हुए तुषार पैर पद गई, उसने तुषार को पहचाना तो नहीं लेकिन वो घबरा गई

रजिया- कोण ह कोण भोसड़ीवाले छुपा ह वह बहार निकल वर्ण शोर मचा दूंगी

तुषार दर गया वोट क दम भागने को हुआ

रजिया- ख़बरदार भगा तो वर्ण शोर मचा दूंगी की तू मेरा रपे करके भागने की कोशिश क्र रहा था

तुषार दर गया उसे अपने पिता के साथ हुआ हादसा याद आ गया

तुषार- नहीं चची शोर मत मचाना मैं हु तुषार

तुषार बहार निकल क्र आ गया. तुषार को देख क्र रजिया शर्म से पानी पानी हो गई वो बहुत दर गई क्योकि अंजलि के परिवार में उसकी बड़ी इज्जत थी

रजिया डरते हुए- तू यहाँ क्या क्र रहा ह

तुषार- वो मैं तो इधर से जार है था तो कुछ आवाज सुन क्र इधर आ गे

रजिया- क्या देखा तूने

तुषार चुप रहा

रजिया- बता न क्या देखा तूने

तुषार- सब कुछ

रजिया किन अजर तुषार के खड़े लुंड पैर पड़ी जो पेण्ट फाड् क्र बहार आने को तैयार था, रजिया के दिमाग में वो सीन घूम गया जब उसने तुषार को नंगा देखा था, रजिया की छूट में एक दम चीटिया सी दौड़ गई, उसके दिमाग ने कहा की आज तक उसने इस पैर धयान क्यों नहीं दिया,


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लेकिन अभी हालत को सम्हालना था,

रजिया- बीटा किसी को बताना मत वर्ण मैं बदनाम हो जाउंगी

तुषार- नहीं बताऊंगा चची लेकिन आप उस लड़के के सतह क्यों

रजिया- बीटा तेरे चाचा तो साल भर में आते ह और जिस उम्र में मैं हु उस उम्र में सेक्स की इच्छा बहुत बढ़ जाती ह मैं खुद को रोक hi नहीं पाई

तुषार- कोई बात नहीं चची मैं समझ सकता हु लेकिन आप उसे डाटा क्यों रही थी

रज्जिया- अब क्या करू सोचा था ो मेरी गर्मी शांत करेगा लेकिन कमीं अबाधा क्र चला गया, खेर छोड़ ये सब चल यहाँ से वर्ण किसी ने हमे देख लिया खेत में तो प्रॉब्लम हो जाएगी,

तुषार- है चची चलो

रजिया- मेरा हाथ पकड़ और उठा मुझे

तुषार ने रजिया का हाथ पकड़ा और उठाने के लिए खींचा तो रजिया उठते हुए डगमगा गई तो तुषार ने तुरंत हाथ जोर से खींचा तो रजिया तुषार के साइन से जा लगी रजिया की मोती भरी चूचिया तुषार की छाती में डाब गई, रजिया क सम्हालने के चक्क्र में तुषार का एक हाथ रजिया की मोती भरी गांड पैर चला गया,

कुछ पल के लिए दोनों ऐसे hi खड़े रहे तुषार का खड़ा लुंड रजिया की नाभि के पास महसूस हो रहा था रजिया गरम हो गाइट hi, वो तो पहले से hi गरम हुई बैठी थी अब तो वोट क मजबूत लुंड वाले मजबूत हाथो में थी तो बहकना तो बनता hi था,

रजिया ने नशीली आँखों से तुषार को देखते हु उसके होतो पैर अपने हॉट रख दिए तुषार कुछ समझ पता उससे पहले रजिया अलग हो गई और बोली ये तेरा इनाम ह मुँह बंद रखने का और आगे चल दी,

तुषार खुश होता हुआ रजिया के पीछे पीछे चल दिया उसकी मटकती हुई गांड देखता हुआ,

चची ये जमूरा था कोण वैसे

रजिया- ये सुरेश का भांजा ह 15 दिन पहले hi गाओं आया ह

सुरेश सुरेश छोड़पा है ये hi तो नाम लिया था उसने, तुषार के दिमाग की घंटी बज गई वो तुरंत बोलै चची मैं चलता हु माँ इंतजार क्र रही होगी

रजिया- अरे मैं भी तो चल रही हु

तुषार- आप आओ आराम से आप तक गई होगी महेनत करके मुझे जल्दी जाना ह मिलता हु फिर किसी दिन आराम से

तुषार दौड़ते हुए निकल गया



रजिया- हे कहा थकाया उस मुए ने टब hi भाग गया तू hi थका दे किसी दिन, चल रजिया इस घोड़े को तो पटना hi पड़ेगा,
 
अपडेट-16






तुषार घर पंहुचा तो अंजलि खाना बना रही थी सीमा बर्तन धो रही थी रूचि पढाई कर रही थी तुषार सबसे पहले रूचि के पास पाहकः

तुषार- आ गया याद

रूचि की आँखों की चमक बता रही थी जैसे उसे किसी कीमती खजाने के बारे में पता चल गया हो

तुषार- सुरेश चोपड़ा

रूचि- है यही नाम था अब बस हमे पता करना ह ये सुरेश चोपड़ा कोण ह, मेरे हिसाब से काफी पैसे वाला इंसाने ह वो

तुषार- सही कहा कल पता करता हु मैं

अंजलि- क्या खुसर पुसार क्र रहे हो यहाँ आओ और खाना खा लो

फिर सबने खाना खाया अगले दिन तुषार सीधे सिबेर साफé गया और नेट पैर सुरेश चोपड़ा सर्च किया, J.S.S कंपनी का नाम आ गया सुरेश इस कंपनी का ओनर था, तुषार को याद आ गया उस रात इस कंपनी के नाम भी लिया था भूरा ने, तुषार ने नेट से सुरेश चोपड़ा के बारे में सब जानकारी ली और घर आ गया,

उसने तीनो बहेनो को बताना शुरू किया

तुषार- सुरेश चोपड़ा J.S.S कंपनी का ओनर ह ये कंपनी **** सिटी में ह और इसकी एक ब्रांच हमारे सिटी में भी ह,

रूचि- और काया पता चला

तुषार- नेट वो ज्यादा कुछ पता नहीं चला वह उसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं लिखा बस इतना पता चला की उसके 4 बच्चे हैं 2 लड़के 2 लड़किया,

सीमा- उनका हमारी माँ से क्या कनेक्शन हो सकता ह

तुषार- दीदी कनेक्शन तो जरूर ह जिसका पता हमे उनके करीब जाकर hi मिल सकता ह

रूचि- सही कहा लेकिन जायेंगे कैसे

दीपा- नौकरी के लिए, नौकरी करने हम उनकी कंपनी में घुस सकते ह

सीमा- लेकिन नौकरी करेगा कोण हम तो अभी पढ़ रहे हैं

रूचि- आप करोगी आप hi क्र सकती हो आपकी क्लासेस ज्यादा नहीं चलती तो आप कॉलेज न भी जाओ तो फरक नहीं पड़ता,

सीमा- लेकिन माँ इतनी दूर नहीं जाने देगी

रूचि- उसके लिए हमे गाओं से बहार निकलना होगा

तुषार- वो कैसे होगा

रूचि- हमे कुछ तो जुगाड़ भिड़ना पड़ेगा उससे दो फायदे होंगे

दीपा- वो क्या

रूचि- एक तो हम जॉब क्र सकेंगे दूसरा माँ पापा को अच्छी जगह रख सकेंगे

तुषार- सही बोल रही ह, कुछ तिगड़म भिड़ना पड़ेगा

चारो की प्लानिंग चल रही थी लेकिन मंजिल तो बहुत दूर की बात अभी तो रस्ते का भी उन्हें ठीक से पता नहीं था,

कुछ दिन बाद दिवाली का त्यौहार आने वाला था तो घरो में साफ़ सफाई का काम शुरू हो जाता ह सभी जगह, उसी लिए एक दिन रजिया अंजलि के पास आई और बोली

अंजलि मुझे एक काम था क्या तुषार को मेरे साथ भेज सकती हो

अंजलि- है है क्यों नहीं चला जायेगा क्या हुआ बताओ

रजिया- अरे सानिया के अब्बू ने कसबे के बहार एक घर खरीदा था पिछले साल और उसमे किरायदार रहते थे अब वो खली करके जा चुके हैं, और इतना गन्दा करके गए ह की कोई और किरायदार आता ह तो गन्दगी देख क्र hi वापस चला जाता ह, इसलिए सोचा उसकी सफाई क्र औ लेकिन अकेले वह जाया नहीं जाता

अंजलि- है है तुषार चला जायेगा और सफाई करवा क्र hi आएगा, वैसे तुम वह क्यों नहीं रहती यहाँ गाओं में क्यों रहती हो

रजिया- वह अकेले मन सं hi लगता वह अभी ज्यादा घर नहीं बने 2-4 hi होंगे तो दिल नहीं लगता वह और अपने गाओं में तो सब जानते ह यही दिल लगता ह,

अंजलि- चलो ठीक ह कब जाना ह

रजिया- सुबह जाउंगी

अंजलि ने तुषार को आवाज लगाई

तुषार- है माँ क्या हुआ

अंजलि- टुशु बीटा कल अपनी रजिया चची के साथ चले जाना और उनके काममे हेल्प क्र देना चची जैसा बोले वैसा hi करना ठीक ह

तुषार- ठीक ह माँ

रजिया का दिल ख़ुशी से उछाल पड़ा और वॉक हश होती हुई घर ा गई, अगले दिन रजिया और तुषार पैदल कसबे पहुंचे, दोनों खामोश चले जा रहे थे रजिया का दिल तो ख़ुशी से कूद रहा था ो तो वह क्या क्या करना ह उसकी प्लानिंग क्र रही थी और तुषार की हिम्मत नहीं हो रही थी,

रजिया ने hi ख़ामोशी तोड़ी

रजिया- क्यों रे उस दिन तूने घर जाकर कुछ किया तो नहीं था

तुषार- किस दिन चची तुषार ने अनजान बनते हुए पूछा

रजिया- अरे जिस दिन तूने मुझे खेत में देखा था

तुषार – शरमाते हुए चची मैं क्या करता

रजिया- अच्छा तूने मुझे पूरी नंगी देखा था क्या

तुषार- शरमाते हुए हम्म्म

रजिया- तेरा मन नहीं किया क्या कुछ करने का

तुषार- चची मैं कैसे कुछ क्र सकता था

रजिया- अरे मन तो किया होगा तेरी जगह कोई और होता तो उस हिजड़े को हटा क्र खुद चढ़ जाता मेरे उप्पेर

तुषार- चची बिना किसी की मर्जी के ऐसा तोडना करना चाहिए

रजिया- क्या पता सामने वाली की भी मर्जी हो

तुषार- तो उसे कहना भी तो चाहिए

रजिया- तू तो बड़ा भोला ह, अच्छा तेरी कोई गर्लफ्रेंड ह

तुषार- नहीं चची गरीबो की गर्लफ्रेंड नहीं होती

रजिया- अरे बीटा पैसा देख क्र तो बीवी मिलती ह गर्लफ्रेंड के लिए सूंदर चेरा अच्छी कद काठी और अच्छा वो होना चाहिए, ये तीनो hi तेरे पास ह

तुषार- वो क्या चची

रजिया- तुझे वो नहीं पता, इसलिए तेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं बानी

तुषार- अब मुझे कैसे पता होगा वो का ( तुषार जान बुझ क्र अनजान बन रहा था उसे पता था रजिया किस वो की बात क्र रही ह)

रजिया- अरे तेरा वो जो अभी भी तेरी पेण्ट में खड़ा हो रहा ह

तुषार ने निचे देखा तो उसका लुंड रजिया की बातो से खड़ा हो चुक्का था, तुषार ने तुरंत अपना स्वेटर थोड़ा निचे खींचा

रजिया मुस्कुरा पड़ी

तब तक वो लोग कसबे में आ चुके थे, वह उन्होंने एक ऑटो पकड़ा और चल दिए कसबे से बहार, रजिया तुषार से चिपक क्र बैठी थी रजिया की जंघे तुषार की जांघो से चिपक रही थी तुषार का लुंड तो पहले से hi तना खड़ा था, ऑटो में और भी लोग थे इसलिए दोनों चुप बैठे थे, कसबे से लगभग 10 कम दूर रजिया ने ऑटो रुकवाया और उतर के पैसे दिए तुषार भी उतरा उसका लुंड अभी भी खड़ा था, वो साइड में खड़ा रजिया के पैसे देकर आने का वेट क्र रहा था, उसने देखा की एक 35-36 साल की औरत उसके पेण्ट पैर घूरे जार hi थी तुषार ने निचे देखा तो उसका लुंड खड़ा हुआ अलग hi दिख रहा था,


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तुषार ने अपना स्वेटर फिर निचे खींचा तो वो औरत उसकी तरफ मुस्कुरा दी और जैसी hi ऑटो चला तो उस औरत ने अपने हाथ से मस्त ह का इशारा किया, जिससे तुषार झेप गया, रजिया ने भी उस औरत को इशारा करते देख लिया था और तुषार के लुंड को भी, रजिया मुस्कुराते हुए तुषार के करीब आई

रजिया- लगता ह वो भी दीवानी हो गई तेरे वो की

तुषार- शरमाते हुए आप भी न चची

रजिया- हे अल्लाह कितना शर्माता ह तू चल अब

दोनों चल दिए कुछ दुरी पैर एक दो माजिला माकन बना हुआ था उसके आस पास कोई माकन नहीं था थोड़ी दुरी पैर कुछ घर और थे, रजिया ने लॉक खोला काफी अच्छा माकन था वो,

रजिया- देख क्या हालत करके गए ह वो लोग इस घर की

तुषार- तो चची आपने दे hi क्यों रखा था खुद क्यों नहीं रहे

रजिया- बीटा मेरा मन नहीं लगता गाओं में मजा आता ह

तुषार- है है जो गाओं में मिलेगा वो यहाँ कैसे मिलेगा

तुषार की बात का मतलब समझते हुए रजिया शर्मा गई

हैट बदमाश चची को छेड़ता ह चल जल्दी से सफाई करते हैं फिर बात करेंगे,

फिर दोनों साफ़ सफाई में लग गए 3 घंटे में दोनों ने पूरा घर साफ़ क्र दिया, दोनों धूल में गंदे हो गए,

रजिया- हम तो पुरे गंदे हो गए अब बिना नहाये कैसे जायेंगे ऐसा करते ह नाहा क्र षाले ह भूक भी लगी ह बहार कुछ खा भी लेंगे

तुषार- ठीक ह चची पहले आप नाहा लो

रजिया- बाथरूम में नहाने घुस गई,

तब तक तुषार घर की बालकनी में खड़ा देख रहा था उसके दिमाग में एक आईडिया आया क्यों न हम लोग इस घर में रहे यहाँ से क़स्बा भी पास में ह और शहर भी दोनों काम आसान हो जायेंगे, लेकिन रजिया चची फ्री में तो हमे घर देंगी नहीं और इतने पैसे हमारे पास ह नहीं तो क्या करेंगे,

तभी बाथरूम का दूर खुला और रजिया बहार आई तुषार अंदर रूम में गया और रजिया को देख क्र उसके लुंड ने एक झटका मारा क्योकि रजिया एक छोटा सा टॉवल लप्पेट क्र बहार आई थी,


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तुषार- हकलाते हुए च चची आप ने कपडे नहीं पहने

रजिया- वो अंदर पानी में भीग जाते इसलिए नहीं पहने और तू ऐसे क्यों शर्मा रहा ह तूने तो मुझे बिना तोलिये के भी देखा ह

तुषार- चची आप भी न वो शर्माता हुआ अंदर घुस गया और दरवाजा बंद क्र लिया, तुषार ने अपने कपडे निकले और अंडरवियर में आ गया तभी रजिया की आवाज आई तुषार अंडर वियर निकल क्र नहाना वर्ण भेज गया तो क्या पहनेगा, तुषार की समझ में बात आई और उसने अंडर वियर भी निकल दिया उसका लुंड एक दम तना खड़ा था, उसे बड़ी ख़ुशी सी हो रही थी औरते उसका लुंड देख क्र खुश होती ह,

तभी रजिया बोली बीटा देख अंदर खूंटी पैर मेरी ब्रा पंतय तंगी ह वो पकड़ा दे, तुषार ने देखा ब्लैक कलर की ब्रा पंतय तंगी थी तुषार ने उन्हें हाथ में पकड़ा बड़ी सॉफ्ट थी तुषार के लुंड ने एक और झटका मारा तुषार जोश में आ गया उसने ब्रा पंतय अपने लुंड पैर लप्पेट ली, उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ तुषार को खुद को रोकना बड़ा मुश्किल हो रहा था,

रजिया- क्या हुआ दे न

तुषार- है चची दे रहा हु वो मैं नंगा हु न कपडे पहन लू

रजिया- अरे हैट मुझसे शरमाएगा तूने मुझे नंगी देखा उस लड़के के साथ वो सब करते हुए मैं भी शर्मा रही हु क्या पागल ह तू, चल जल्दी खोल

तुषार ने दूर खोला और साइड में होते हुए ब्रा पंतय वाला हाथ बहार क्र दिया जब कुछ देर रजिया ने ब्रा पंतय नहीं पकडे तो उसने झक क्र देखा तो रजिया बिलकुल नंगी कुछ दुरी पैर कड़ी थी, रजिया को ऐसे एक दम नंगी देख क्र तुषार की आँखे फटी रह गई, क्या खूबसूरत बदन था एक दम गोरा दूध जैसा इतनी भरी भरी चूचिया,


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रजिया धीरे धीरे चलती हु तुषार के पास आई ब्रा पंतय पकड़ी और साइड में फेंक दी, और दरवाजा ढक क्र अंदर घुस गई तुषार तो बौखलाया सा सब देख रहा था, वो बस रजिया की चूचियों क घूरे जार है था, और रजिया तुषार के लुंड को घूरे जार hi थी,

कुछ देर बाद

रजिया- बहुत तगड़ा हटिया हतेरा

तुषार- चची आप अंदर क्यों आई

रजिया- तूने मुझे नंगा देखा मैं भी तो देखूंगी तुझे

तुषार- पहले आपने hi देखा था मुझे

रजिया- पैर तूने तसली से देखा ह मैं भी तसली से देखूंगी

तुषार- प्लस चची

रजिया- अरे बावले इतना तगड़ा हतियार लिए खड़ा ह और इतनी मस्त आइटम तेरे सामने नंगी कड़ी ह और तू शर्मा रहा ह अरे अब तक तो मेरे जैसी औरत के अंदर इसे घुसा चुक्का होता

तुषार- चची मैं तो आपकी शर्म क्र रहा था,

इतना कहे क्र तुषार ने रजिया को अपने करीब खींचा और उसकी चुकी पैर अपना मुँह लगा दिया, तुषार बड़ा उतावला होकर रजिया की वो मोती रुई जैसी मुलायम चुकी चूसने लगा उसका लुंड रजिया के पेट पैर रगड़ रहा था,


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गरम लुंड का अहसास पते hi रजिया और तुषार से लिपट गई, उसने हाथ निचे ले जाकर तुषार का लुंड पकड़ लिया और उसे सहलाने लगी, जल्दी hi वो उसे मरोड़ने लगी उसके हाथ सख्ती से तुषार के लुंड पैर चल रहे थे, तुषार का एक हाथ रजिया की गांड को दबा रहा था दूसरा हाथ रजिया की दूसरी चुकी को मसल रहा था,

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रजिया ने तुषार का मुँह पकड़ा और अपने हॉट उसके होतो पैर रख दिए और बड़ी तलीनता से उसके हॉट चूमने लगी, आज पहेली बार एक अनुभवी औरत से तुषार का पला पड़ा था अब तक उसने सीमा और दीपा को छोड़ा था जो खुद चुदाई की दुनिया में नै थी, लेकिन रजिया एक खेली खाई औरत थी जिसे चुदाई के सरे तरीके पता थे,

उसका चूमना भी तुषार की हालत ख़राब क्र रहा था रजिया अपनी जीभ से तुषार के मुँह की घेरे नाप रही थी,


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फिर रजिया धीरे धीरे तुषार को चूमती हुई निचे बैठने लगी, और तुषार का मोटा लम्बा लुंड अपने हाथ में लेकर उसे इधर उधर करके देखने लगी, फिर उसने एक चुमान तुषार के लुंड के टोपे पैर दिया, तुषार के मुँह से आह निकल गई,

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रजिया ने तुषार की आँखों में देखते हुए अपना मुँह खोला और तुषार के लुंड का सूपड़ा अपने मुँह में भर लिया,

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तुषार की तो सास hi रुक गई, रजिया ने बड़े प्यार से तुषार का लुंड मुँह में अंदर बहार करना शुरू किया, रजिया को तकलीफ तो हो रही थी इतना मोटा लुंड अपने मुँह में लेते हुए लेकिन उसे मजा भी उतना hi आ रहा था, रजिया जितना हो सकता लुंड को अंदर लेने की कोशिश क्र रही थी, उसने आधे से ज्यादा लुंड अपने मुँह में भर लिया था रजिया की आँखों से आंसू आने लगे थे मुँह से थूक टपक रहा था, लेकिन वो लुंड को अंदर घुसाए hi जा रही थी,

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जब उसकी शासन रुकने लगी तब उसने लुंड को बहार निकला और तुषार की तरफ मुस्कुराने लगी, तुषार का लुंड तो फटने को तैयार हो रहा था उसकी नशे लुंड पैर उभर आई थी, जो लुंड को और भी खूबसूरत बना रही थी,

फिर रजिया ने लुंड को मुँह में लिया और अंदर से अपनी जीभ उसके लुंड पैर घूमने लगी तुषार की तो हालत ख़राब हो गई उसे लगा वो अभी झाड़ जायेगा इतना कातिलाना तरीका था रजिया का, फिर रजिया ने लुंड को उप्पेर से निचे तक चेतना शुरू किया तुषार के ाँद भी चाटने लगी,


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तुषार का खुद को रोकना मुश्किल हो रहा था उसने रजिया का सर पकड़ा और लुंड मुँह में घुसाने लगा रजिया बोली रुक जा बीटा ऐसे तो तू झाड़ जायेगा,

तुषार- चची तुम बहुत मस्त हो मुझसे अब रुका नहीं जार है

रजिया- तभी तो बोल रही हु सबर कर सबर करने से फल मीठा मिलता ह

तुषार- चची फल तो सामने ह अब कैसे सबर करू

रजिया कड़ी हुई और तुषार को निचे बैठने लगी, तुषार भी उसके इशारे पैर निचे बैठने लगा,

रजिया- तेरा खून गरम ह जल्दी झाड़ जायेगा जब तक तेरा खून लुंड से उप्पेर आता ह तब तक तू मेरा खून मेरी छूट तक पंहुचा दे

तुषार कंफ्यूज सा रजिया को देख रहा था, मैं समझा नहीं चची

रजिया- मैंने तेरे लुंड को मजा दिया ह न अब तू मेरी छूट को मजा दे

तुषार- कैसे वो तो लुंड दाल क्र hi दूंगा न

रजिया- अरे पागल छोकरे लुंड का मजा तो बाद में लिया जाता ह पहले छूट का स्वाद तो चख ले, जैसे मैंने तेरा लुंड छठा तू मेरी छूट चाट

ये तुषार के लिए नया था उसने कभी छूट चाटने का नहीं सोचा था, रजिया ने उसे सोचने का टाइम भी नहीं दिया और सर पकड़ा और अपनी एक पेअर कमोड पैर राखी और तुषार का मुँह अपनी छूट पैर रख दिया, तुषार के हट रजिया की छूट के होतो पैर टिक गए,


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अह्ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह है बीटा ऐसे hi सोच ये मेरे हॉट ह चूस ले मेरे हॉट अपने होतो से

तुषार ने वैसा hi किया उसने अपने होतो से रजिया के छूट के हॉट चूमने शुरू क्र दिए,

रजिया- अब जरा अपनी जीभ भी घुसा अंदर और चाट क्र देख कैसा लगता ह,

तुषार ने अपनी जीभ रजिया की छूट के अंदर घुसा दी और उसे घूमने लगा रजिया की छूट का रास तुषार के मुँह में जाने लगा जिसका स्वाद उसके मुँह में घुलने लगा, एक अजीब सा नमकीन सा स्वाद उसके मुँह में जार है था, वो साझ नहीं प् रहा तह ाक्य करे लेकिन रजिया को बहुत मजा आ रहा था ो रजिया को पूरा मजा देना चाहता था तो वो छूट को ऐसे hi छत्ता रहा, कुछ hi देर में तुषार को छूट के उस नमकीन रास में ऐसा स्वाद आया की वो जीभ को और घेरे में लेजाकर चूसने लगा, रजिया को उस अनादि ने इतना गरम क्र दिया की एक खेली खाई औरत तुषार की चूसै से hi झाड़ गई, रजिया ने तुषा रखा सर पकड़ क्र अपनी छूट पर दबा दिया और अहहहहहह अहहहहहहह है बीटा बस ऐसे hi अहहहहहहह अहहहहहह बहुत मजा आ रहा ह अहहहह करके झाड़ गई,


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झड़ते hi रजिया अलग हुई और तुषार को खड़ा किया और हाथ दिवार पैर लगा क्र झुक गई और बोली बीटा छूट गीली ह दाल दे अपना लोढ़ा मेरी छूट में एक hi बार में दाल देना मैं इतने मोठे लोडे का स्वाद लेना चाहती हु, ये पोजीशन तुषार के लिए बड़ी मस्त थी इसमें छूट उभर का सामने आ गई थी, तुषार ने भी अपन अलुंड पकड़ा और एक हाथ से रजिया की गांड पकड़ी और अपना लुंड उसकी छूट पैर रगड़ा,

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आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मत तड़पा दाल दे जल्दी से

तुषार ने लुंड छूट पैर लगया और दोनों हाथो से गांड पकड़ी और एक जोर दर धक्का रजिया की छूट में लगा दिया, लुंड छूट को फाड़ता हुआ अंदर घुस gaya,rajiya के मुँह से चीख निकल गई, तुषार का लुंड था hi इतना तगड़ा की रजिया जैसी चुदकड़ औरत के मुँह से भी चीख निकल दी, आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भेनचोद बहुत मोटा ह फैट गई अह्ह्ह्हह्ह बच्चेदानी से टकराया ह बहुत तगड़ा ह अह्ह्ह्ह मजा आ गया बीटा पहेली बार ऐसा लग रहा ह मेरी छूट के लायक कोई लुंड मिला ह आज पहेली बार छूट की दीवारे खुली ह अच्छे से,

छोड़ बीटा अच्छे से छोड़ अपनी चची को आज मेरी छूट की तसली क्र दे, तुषार ने भी लुंड बहार खींचा और एक और तेज धक्का मारा, रजिया इस पोजीशन में थी की तुषार खड़े खड़े hi उसे छोड़ रहा था तो तुषार को जरा सिब hi प्रॉब्लम नहीं हो रही थी उसे बहुत ज्यादा मजा आ रहा था, उसके धक्के तेज हो गए थे रजिया को दिवार पकड़ क्र खड़े होना मुश्किल होता जार है था, तुषार के धक्के थे hi इतने तेज और तगड़े, तुषार का लुंड रजिया की छूट की जड़ तक पहुंच रहा था,


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15 मिनट्स तक तुषार रजिया को छोड़ता रहा, 15 मिनट्स बाद रजिया की छूट ने जवाब दे दिया और वो जोरदार चीख के साथ झड़ने लहि,

आअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अहहहहहहह फाड् दे मेरी छूट तू hi सबसे बड़ा मर्द ह अब तक कहा छुपा था भेनचोद छोड़ अहहहहहह फाड् दे आहहहहह मैं तो गुलाम बन गई हु तेरी आह्ह्ह्ह तू कहा था अब तक छोड़ बीटा

तुषार बिना रुके धक्क्के लगये जार है था, तुषार रजिया को सँभालने का मौका नहीं दे रहा था, रजिया बहुत चूड़ी थी लेकिन एक बार में इतनी देर तक कभी नहीं चूड़ी थी उसे आज तक ऐसा कोई नहीं मिला था जो उसे दो बार ठंडा क्र दे, लेकिन यहाँ तो तुषार उसे एक बार मुँह से दूसरी बार लुंड से ठंडा क्र चुक्का था और अभी भी चोदे जार है था, रजिया से खड़ा नहीं हुआ जार है था,

तुषार के धक्के तेज होते जा रहे थे उसका लुंड अकड़ने लगा था जिसे रजिया ने अपने अनुभव से महसूस क्र लिया था, लुंड अकड़ने से और टाइट होकर छूट में रगड़ रहा था जिससे रजिया फिर से झड़ने लगी और इस बार रजिया इतनी जोर से झड़ी की उसके साथ उसका मूत भी निकल गया आज लाइफ में पहेली बार वोट क hi चुदाई में 3 बार झाड़ रही थी और इस बार का झड़ना बड़ा खतरनाक था, रजिया की छूट ने फवारा छोड़ दिया,

आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भोसड़ी के बहुत ताकत ह तेरे में आआह्ह्ह्हह्ह ऐसी चुदाई मैंने कभी नहीं करवाई आअह्हह्ह्ह्ह

ले चची और ले अह्हह्हह्ह मेरा आ रहा ह चची कहा निकलू रजिया तुरंत निचे बैठ गई और तुषार का लुंड पकड़ क्र जोर जोर से हिलने लगी तुषार ने रजिया का सर पकड़ लिया और एक तेज धार रजिया के मुँह पैर मार दी, आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह चची अहःअहः


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फिर लगातार धार निकलती hi रही जो रजिया के मुँह पैर चूचियों पैर गिर रही थी इतना रास देख क्र रजिया भी हैरत में थी, किसी के लुंड से इतना रास कैसे निकल सकता ह, जब तुषार का लुंड पूरा खली हो गया तो रजिया ने उसके लुंड को चुम लिया और अपने होतो पैर रगड़ लिया, अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह चची आप बहुत मस्त हो

रजिया- मस्त तो तू ह मेरी जान आज तक तेरे जैसा मर्द नहीं देखा मैं ीक hi बार में मेरा मूत निकल दिया तूने क्या खा क्र पैदा किया ह तेरी माँ ने

तुषार शर्मा गया

फिर रजिया ने शावर चला दिया और दोनों उसमे नहाने लगे, रजिया ने तुषार को रगड़ रगड़ क्र नहलाया साबुन तो वह थीं hi बस पानी से hi नाहा लीये तुषार ने भी रजिया को अच्छे से रगड़ रगड़ क्र नहलाया, रजिया की चुकी छूट गांड सब अच्छे से मसली, फिर दोनों बहार आ गए और रजिया कपडे पहनने लगी,

तुषार- चची एक बार और करे क्या

रजिया बड़ी हैरत से उसे देख रही थी उसे यकीन hi नहीं हो रहा था की कोई इतनी तगड़ी चुदाई करने के बाद फिर से चुदाई के लिए तैयार ह

रजिया- बीटा मुझमे तेरी जितनी ताकत नहीं ह तूने एक hi बार में मेरी छूट की धजिया उदा दी ह फिर किसी दिन क्र लेना

तुषार- ठीक ह चची

रजिया- कसम से तेरे जैसा मर्द किसी औरत को मिलेगा वो जिंदगी भर तेरी गुलामी करेगी

तुषार- ऐसा क्यों चची सबका ऐसा नहीं होता क्या

रजिया- अरे बीटा तेरे से आधा भी किसी का हो जाये तो भी औरत खुश हो जाती ह तेरे जैसा लाखो में किसी एक का होता ह

तुषार- तो क्या कोई भी औरत मेरे लुंड के लिए कुछ भी क्र सकती ह

रजिया- है जिसने भी तेरा लूँ डेक बार ले लिया वो दुबारा कही नहीं जाएगी तेरी गुलाम बन जाएगी जैसे मैं बन गई हु

तुषार- औरतो को ऐसे लुंड पसंद आते ह

रजिया- बीटा तेरे पास वो चीज ह जिससे दुनिया की कोई भी औरत अपना सब कुछ तुझ पैर हार जाएगी औरत को पैसा पावर प्यार सब चाहिए होता ह लेकिन ये एक ऐसी चीज ह जो सब कुछ भुला देती ह, पैसा पावर प्यार तब तक किसी काम का नहीं ह जब तक कोई लुंड छूट को शांत न क्र दे छूट की गर्मी किसी भी पावर से ज्यादा ताकतवर होती ह समझे मेरे लुंढारी पहलवान, तू अगर पहलवानी शुरू क्र दे तो तेरा शरीर और डल हो जायेगा फिर तो कोई भी लड़की तेरे निचे पड़ी रहेंगी

तुषार- चची आप भी न बस ऐसे hi चढ़ा रही ह मुझे

रजिया- नहीं मेरे बच्चे मैंने बहुत चुदाई करवाई ह लेकिन तेरे जैसा दम किसी में नहीं था ऐसा लुंड किसी के पास नहीं था

तुषार- आपने कितनो के साथ चुदाई की ह चची

रजिया- क्या करेगा जान क्र राज को राज hi रहने दे अब तो मैं बस तेरी गुलाम हूत ेरे अलावा कोई हाथ नहीं लगाएगा मुझे

तुषार- सच चची इतनी मजा आया मेरे साथ

रजिया- अल्लाह कसम ऐसा मजा आज तक नहीं मिला

तुषार- चची एक बात पूछनी थी

रजिया- है पूछ बीटा

तुषार- चची ये घर कितने में दे रखा था किराये पैर

रजिया- निचे वाला 5000 रस महीना दिया था, तू क्यों पूछ रहा ह

तुषार- वो मैं माँ पापा बहेनो को गाओं से बहार रखना छठा था लेकिन इतने पैसे कहा से लाऊंगा,

रजिया- तुझसे पैसो की बात किसने किट ु ऐसे hi रह ले

तुषार- लेकिन चाचा नाराज हो जायेंगे

रजिया- चाचा की फ़िक्र न क्र तू वो मैं देख लुंगी, बस तू मुझसे दूर हो जायेगा तेरे बिना मैं कैसे रहूंगी

तुषार- ठीक ह मैं वही रहूँगा

रजिया- अरे उदास मत हो मैं यही आकर तुझसे चुद लिया करुँगी तू फ़िक्र न क्र

तुषार- लेकिन माँ नहीं मानेगी वो फ्री में नहीं रहेगी

रजिया- है ये तो ह वो बड़े उसूल की ह तेरी माँ क समझाना मुश्किल ह, एक रास्ता ह तू उन्हें बोले की तू किराया देगा कमा क्र तो शायद मान जाये

तुषार- कोशिश करूँगा

रजिया- अगर तुम लोग यहाँ आ गए तो हो सकता ह हम भी यही आ जाये

फिर रजिया ने तुषार को एक जबरदस्त किश किया फिर दोनों चल दिए वापस रस्ते में दोनों ने छोले भठूरे खाये, घर पहुंचने में शाम हो गाइट hi, रजिया की चल आज बदल चुकी थी कोई अनुभवी देख क्र बता सकता था रजिया चुद क्र आई ह लेकिन इतना कोण धयान देता ह

घर आकर तुषार ने तीनो बहेनो को रजिया के घर के बारे में बताया की वो घर ऐसी जगह ह जहा से माँ अपने स्कूल में जा सकती ह हम शहर भी जा सकते ह बस माँ को वह जाने के लिए मन्ना होगा,

सीमा- सबसे मुश्किल काम तो यही ह

दीपा- तुषार क्र सकता ह

तुषार- मैं कैसे करूँगा

दीपा- बस तू hi क्र सकता ह आज माँ की रजाई में सोना और प्यार से बात करना

रूचि- मैं तरय करू क्या

दीपा- नहीं तुषार hi करेगा वही क्र सकता ह



तुषार- ठीक ह कोशिश करूँगा,
 
अपडेट-17




गाओं में ठण्ड होने लगी थी तो राजैया निकल चुकी थी दिवाली पैर तो वैसे भी रजाई निकल hi जाती ह, सभी एक साथ सोते थे बस राजेश चारपाई पैर सोता था, आज तुषार बोलै माँ मैं आपके साथ सोऊंगा, अंजलि ने भी है क्र दी,

रात को तुषार बड़ी हिमायत क्र रहा था अंजलि से बात करने की लेकिन दर से बोल नहीं प् रहा था, उसने थोड़ा प्यार दिखाना शुरू किया और अंजलि को बहो में भर लिया, अंजलि की जंग तुषार की दोनों जांघो के बिच आ गयी तुषार का लुंड अंजलि को अपनी जांघ पैर महसूस हो रहा था, बस ये अहसास काफी था अंजलि को गरम करने के लिए, तुषार के छूटे hi अंजलि का शरीर गरम हो जाता था, तुषार का एक हाथ अंजलि की चूचियों के उप्पेर था,

अंजलि- बड़ा प्यार आ रहा ह आज माँ पैर

तुषार- प्यार तो हमेशा hi रहता ह

अंजलि- अच्छा बच्चू रोज तो नहीं सोता माँ के पास

तुषार- अब मैं बड़ा हो गया हु न इसलिए रोज नहीं सोता

अंजलि- है बड़ा तो तू हो गया ह उप्पेर से लेकर निचे तक, लेकिन माँ के लिए बच्चे बड़े नहीं होते

तुषार- जनता हु माँ,

तुषार और चिपक गया अब तुषार भी थोड़ा गरम होने लगा था उसका लुंड में सुरसुराहट होने लगी थी, जिससे वो खड़ा होने लगा था, लुंड के खड़े होने का अहसास अंजलि को भी हो रहा था, दोनों बहुत समय बाद साथ लेते थे दोनों को वो रेट याद आ गई जब दोनों ने एक साथ एक hi चारपाई पैर गुजारी थी, अंजलि पूरी तरह गरम हो गई थी, तुषार ने अपना हाथ अंजलि की चुकी पैर दबाया अंजलि की ाःह निकल गई, अंजलि ने करवट ले ली जिससे जहा तुषार की बाजु से चुकी डाभी हुई थी अब सीधा तुषार के पंजा अंजलि की चुकी के उप्पेर आ गया और अंजलि की गांड तुषार के लुंड पैर रगड़ गई,

अंजलि ने थोड़ा दबाव पीछे को दिया और बोली बहुत बड़ा हो गया ह, तुषार ने भी अंजलि की चुकी को हल्का सा दबाया और लुंड का दबाव गांड पैर दिया और बोलै सब आपका hi ह माँ आपने hi तो इतना बड़ा किया ह,

अंजलि- अच्छा इतना बड़ा होकर भी माँ क्र पास आता तो ह नहीं

तुषार- आपने कभी पास बुलाया hi नहीं तो कैसे आता

अंजलि- मैंने कब दूर किया तुझे तू hi नहीं आता

दोनों डबल मीनिंग बात करने लगे

तुषार- माँ टाइम कहा मिलता ह घर hi इतना छोटा ह पूरी भीड़ रहती ह आपके पास तो मुझे मौका hi नहीं मिलता

अंजलि- जैसे आज आया ह वैसे hi अजय क्र

तुषार- लेकिन अच्छे से मौका नहीं मिलता न

अंजलि पूरी तरह गरम हो चुकी थी लेकिन पूरा परिवार पास में hi लेता था तो कुछ भी करने का कोई मौका नहीं था इसलिए बस शांत होकर लुंड की गर्मी का आनद ले रही थी,

तुषार- माँ क्या हम कही और नहीं रह सकते इस गाओं से दूर

अंजलि- क्यों तुझे ये गाओं अच्छा नहीं लगता क्या

तुषार- माँ इस गाओं में अपना ह hi कोण जिसके साथ अच्छा लगेगा हम तो वैसे भी सबसे अलग hi रहते ह अकेले तो क्यों न कही बहार रहा जाये जहा बस हमारा परिवार हो,

अंजलि- विचार तो तेरा अच्छा ह लेकिन हमारे पास इतने पैसे नहीं ह जो हम किराया दे सके

तुषार- वो मैं क्र दूंगा

अंजलि- कहा से क्र देगा तू

तुषार- माँ आपको मुझ पैर भरोसा नहीं ह क्या

अंजलि- तुझ पैर तो पूरा भरोसा ह

तुषार- तो फिर ठीक ह मैंने एक घर का इंतजाम क्र दिया ह इस संडे को हम सब वही जायेंगे और पापा को अब मजदूरी करने की जरुरत नहीं ह

अंजलि- कहा क्र दिया इंतजाम और मजदूरी नहीं करेंगे तो क्या करेंगे

तुषार- वो रजिया चची का घर ह न कसबे से बहार वो उसे किराये पैर देती ह मैंने उनसे बात क्र ली वो हमे कुछ काम में दे देंगी क्योकि हम तो उसे अपने घर जैसा साफ़ रखेंगे न बाकि किराये दर तो घर को बर्बाद क्र देते हैं, और पापा को वही हम कुछ दुकान या कोई काम शुरू करवा देंगे

अंजलि- हए मेरा लाला पूरी प्लानिंग के साथ आया ह तू तो, लेकिन हर महीने कहा से आएंगे पैसे और दुकान के लिए भी पैसे चाहिए

तुषार- माँ वह दीदी को टूशन भी मिलजाएँगे आपको भी टाइम मिल जायेगा टूशन पढ़ने का मैं भी कुछ काम देख लूंगा सब कमाएंगे तो क्र लेंगे,

अंजलि- लेकिन तू अभी पढाई क्र तू क्यों कमायेगा

तुषार- माँ प्लस मान जाओ न तुषार ने हल्का सा दबाव बनाया अंजलि की गांड पैर, तुषार का लुंड अंजलि को कुछ सोचने hi नहीं दे रहा था, और हाथ से दबी हुई चुकी जो बार बार बोल रही थी मुझे मसल दे, अंजलि ने हस्ते हुए कहा ठीक ह कल रजिया से बात करुँगी,

तुषार खुश हो गया और ख़ुशी में अंजलि को कास क्र भींच लिया जिससे अंजलि की चुकी उसकी मुठी में आ गई और लुंड तो पूरा गांड में घुस hi गया था, अंजलि के मुँह से आह्ह्ह्ह निकल गई

अंजलि- मरेगा क्या अपनी माँ को बहुत ताकत आ गई ह तुझमे

तुषार- श्री माँ वो ख़ुशी में

अंजलि- है जानती ह उतेरी ख़ुशी और ये निचे वाली ख़ुशी किस लिए ह जो इतना उछाल रहा ह वो

अंजलि का इशारा समझते hi तुषार झेप सा गया अब तक दोनों चुप चाप इसका मजा ले रहे थे दोनों को पता था हम क्या क्र रहे हैं पैर फिर भी मजा ले रहे थे, लेकिन अंजलि ने इस बार तुषार को शरती अंदाज में टोक दिया,

तुषार- वो माँ वो ये तो बस श्री माँ

अंजलि- अरे मैंने तुझे डाटा तोडना ह, तू जवान हो रहा ह तो ऐसा हो जाता ह कोई नहीं मैं तुम्हारी माँ हु और सबसे पहले एक दोस्त इसलिए कोई भी बात बिना झिझके मुझसे कह सकता ह तू,

तुषार- ठंकु माँ लेकिन यहाँ सब होते ह कोई बात खेनि भी हो तो कैसे कहु,

अंजलि- अब तो तूने बड़े घर का इंतजाम क्र लिया ह न वह बता देना

तुषार- ोोू माँ कितनी अच्छी हो तुम

अंजलि- अब सो जा कल मैं रजिया से बात क्र लुंगी

तुषार अंजलि से चिपक क्र सो गया अंजलि की चुकी अभी भी उसके हाथ में थी और लुंड अंजलि की गांड में न hi अंजलि ने उसे हटाने की कोई कोशिश की न hi तुषार ने,


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अगले दिन तुषार ने सभी बहनो को बता दिया की माँ मन गई सब खुश हो गए, अंजलि ने रजिया से बात की रजिया ने बताया की पिछले किरायदारों ने बहुत नुकसान क्र दिया इसलिए किरायदार रखने से उसके पति ने मन क्र दिया ह, अगर तुम लोग वह रहोगे तो घर भी ठीक रहेगा और मैं भी वह तुमसे मिलने के भने आती रहूंगी, अगर तुम लोग वह सेट हो गए तो हो सकता ह मैं भी लड़कियों को लेकर वही आ जाऊ,

अंजलि- लेकिन किराया

रजिया- वो मेरे और तुषार के बिच ह उसने कहा ह वो किराया खुद देगा न मैं तुम्हे बताउंगी न hi तुम पूछोगी कितना ह

अंजलि- अच्छा जी अब चची भतीजे की आपस में इतनी तगड़ी दोस्ती हो गई ह

रजिया- अरे वो बहुत hi अच्छा बच्चा ह उसके लिए कुछ भी करने का मन करता ह

अंजलि- ये तो सही बोल रही हो, चलो ठीक ह फिर संडे को हम निकलेंगे और हमारी भैंस का क्या होगा

रजिया- अरे वह काफी जगह ह भैंस रखने की वह जीतनेय भी लोग रहते ह सबने अपने घर के सामने भैंस बंधी हुई ह, बस नाम का hi क़स्बा या शहर ह वो रहते सब देहाती hi ह वह,

अंजलि घर आ गई और सबको बता दिया की हम दिवाली से एक दिन पहले सारा सामान वह शिफ्ट क्र देंगे दिवाली यही मानेंगे अपने घर में और दिवाली से अगले दिन वह चले जायँगे,

राजेश को थोड़ा अटपटा लगा क्योकि वो काम कैसे करेगा लेकिन अंजलि ने समझा दिया की सब ठीक हो जायेगा वह भी काम मिलजायेगा,

सभी ने अपना सामान पैक करना शुरू क्र दिया, तुषार रोज थोड़ा थोड़ा सम्मान ले जाता और वह घर में रख आता संडे तक तो उसने आधे से ज्यादा छोटा सामान शिफ्ट क्र दिया था, संडे को राजेश अपने ठेकेदार का पिकअप ले आया और रात को सारा सामान शिफ्ट क्र दिया, गाओं में किसी को खबर तक नहीं लगने दी की यहाँ क्या हो रहा ह,

दिवाली का दिन आ गया सभी ने पूरा घर सजाया हुआ था अंजलि के घर बीएस दिए जल रहे थे, बड़ी ख़ुशी से त्यौहार मन रहे थे,

अंजलि- तुषार बीटा हम ीक बार अम्मा जी से मिलकर आना ह

तुषार- ठीक ह माँ मैं भी चलता हु

अंजलि- हम सब जायेंगे कल हम यहाँ से चले जायेंगे तो मुलाकात नहीं हो पायेगी,

अंजलि का असली मकसद दीपा को वह ले जाना था वो उसे साइड नहीं बोल प् रही थी इसलिए पुरे परिवार को लेजाने को बोलै

सभी चल दिए अम्मा से मिलने, हवेली पहुंच क्र उनकी आँखे चकाचोंध से भर गई इतनी खूबसूरत सजाई थी, अम्मा ने उन्हें हॉल में बैठाया अंजलि ने चंद्रो देवी को साडी बाते बता दी,

चंद्रो देवी- सही फैसला ह तेरा अब बच्चो को बहार निकलना चाहिए उन्हें बहार की दुनिया भी देखनी चाहिए,

सभी बैठे बाते क्र रहे थे की तभी एक खूबसूरत औरत अंदर आई

औरत- माँ जी आपका खाना लगा दू क्या

चंद्रो देवी- नहीं अनीता अभी नहीं मैं जरा बात क्र लू


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अनीता

वो औरत पुरे परिवार को देखे hi जा रही थी देख क्र hi लग रहा था ये कोई गरीब लोग ह, तभी एक आदमी अंदर आया अरे कहा मर गई तू तुझे माँ को बुलाने भेजा था तू भी वही रुक गई,

चंद्रो देवी- तुझे अकाल नहीं ह क्या बात करने की

आदमी- माँ इससे बात करने के लिए अकाल की क्या जरुरत ह

चंद्रो देवी- यश ये कोनसा तरीका ह अपनी पत्नी से बात करने का

यश नाम सुनते hi चारो बच्चो किन अजर उस पैर गई, दीपा की नजरो में एक दम गुस्सा और आँशु चालक आये, अंजलि समझ गई दीपा की हालत

अनीता बेचारी सर झुकाये कड़ी थी तभी बहार से एक और आदमी आया ये था अजय उसके साथ उसकी दूध से भी सफ़ेद अंगेज पत्नी,


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अजय क नजर जैसे hi अंजलि पैर गई उसकी आँखों में चमक आ गई, अंजलि ने अपनी नजर निचे क्र ली, चंद्रो देवी अंजलि को अपनी दोनों बहुओ से मिला रही थी वही यश और जय बड़ी hi गन्दी नजरो से चारो माँ बेटियों को घूरे जार हे थे, यश की गन्दी नजरो को देख क्र दीपा के मन में गुस्सा नफरत में बदलने लगा था वही अजय अंजलि और तीनो बहेनो को ताड़े जार है था उसका धयान रूचि पैर सबसे ज्यादा था, जिसे अंजलि ने भी भाप लिया था,

वही तुषार दोनों भाइयो को गुस्से में देखे जा रहा था, चंद्रो देवी को माहौल को समझते हुए बोली अंजलि काफी रात हो गई ह तू घर जा और त्यौहार मन अंजलि जी अम्मा हम षाले ह,

यश अपनी पत्नी के सामने hi सबको घूरे जार है था ऐसा लग रहा था अनीता का होना न होना उसे फरक hi नहीं डालता, वही अजय अपनी पत्नी से नजर बचा क्र ताड रहा था, हवेली ये बहार आते hi दीपा का रोना छूट गया,

अंजलि- क्या हुआ मेरी बच्ची रो क्यों रही ह

दीपा- आप क्यों ले मुहे यहाँ माँ, ऐसे इंसाने को दिखने के लिए ये गिरा हुआ जलील इंसाने मेरा बाप ह मुझे शर्म आ रही ह खुद पैर मैं इस आदमी की बेटी हु

अंजलि- तू मेरी बेटी ह समझी वो कोई नहीं लगता तेरा अउ रेज िसँ से दूर रहना मुझे नहीं पता था ो लोग यहाँ मिलेंगे, मेरी गलती ह ये सब

सीमा- माँ ये कितने गंदे लोग हकैसे घर रहे थे हम सबको

रूचि- माँ ये यश तो गन्दा ह समझ गई मैं उसकी नजरो में बस गन्दगी थी लेकिन ये दूसरा जो आया तो उसकी आँखों में अजीब सा कुछ था ो आपको ऐसे देख रहा था जैसे आपको जनता हो

अंजलि- नहीं नहीं मुझे क्यों जानेंगे वैसे hi लगा होगा दोनों गंदे इंसाने सबको ऐसे hi घूरते हैं, इनका बिच वाला भाई जो यही रहता ह गाओं में आदेश वो सबसे सही ह,

तुषार- दूर रहना सब इन लोगो से

फिर वो घर आ गए अच्छे से त्यौहार मनाया और रात में सो गए, रात को घर के बहार कुछ आहात हुई तो अंजलि की आँख खुल गई उसने बहार देखा तो एक कार कड़ी थी, पहले तो अंजलि दर गई उसे वो रूचि वाला सीन याद आ गया लेकिन जब नजर डाली तो वहअजय खड़ा था, अंजलि बस चुप कड़ी उसे देखती रही वो बहुत घबरा गाइट hi, अजय भी उसे देखे जा रहा था, 10 मिनट्स तक अजय ऐसे hi खड़ा रहा फिर वो अंजलि की तरफ बढ़ने लगा तो अंजलि पीछे हाथ गई तो अजय भी रुक गया, फिर अजय कार की तरफ गया और जोर से बोलै अब 2 महीने यही हु मिलने आऊंगा, और वो कार में बैठ क्र चला गया,

अंजलि की हालत ख़राब हो चुकी थी, वो दरी शमी सी अंदर आई दरवाजा बाद किया और लेट गई लेकिन उसकी नींद उड़ चुकी थी, उसका दिल जोर से धड़क रहा था, वही दीपा जो की यश की वजह से बैचैन थी जग रही थी उसने ये सब देखा और सुना और अंजलि क बेचैनी भी देखि, उसे समझ में आ गया की ये कोई ऐसा ह जो माँ के अतीत से जुड़ा ह, बस वो अजय को पहचान नहीं पाई थी दूर से,

अगली सुबह दिन निकलने से पहले hi राजेश भैंस को लेकर निकल गया बाकि सब भी बचा हुआ सामान लेकर निकल गए जो कपडे ओढ़ने बिछाने के थे उन्हें राजेश ने शाम को पिकअप से ले जाने का बोलै था, जब तक गाओं के लोग उठ ते उससे पहले अंजलि का परिवार रजिया के घर पहुंच चुक्का था, घर काफी बड़ा था,

निचे 1 ड्राइंग रूम 2 कमरे कीतचन एक लोभी थी, उप्पेर तीन कमरे किचन लॉबी थी, पूरा घर शेरी हिसाब से बना हुआ था आज तक सबने बस वही गाओं की कच्ची जमीन और निचे बैठ क्र चुल्ह पैर रोटी बनती देखि थी, गैस थी लेकिन बहुत काम इस्तेमाल होती थी, यहाँ तो किचन भी अलग थी वो भी खड़े होकर काम होता था, बाथरूम में शावर लगा था, निचे 2 बाथरूम थे एक बाथरूम दोनों बैडरूम के साथ आत्ताच था दूर कॉमन था महेमानो के हिसाब से उप्पेर भी दो बाथरूम थे 1 बाथरूम दोनों रूम के साथ दूसरा कॉमन, बाटरूम में दो दरवाजे थे जो दोनों बैडरूम में खुलते थे एक तरफ से उसे करने के लिए दूसरे को लॉक करना पड़ता tha,anjali के अलावा सभी घर की एक एक चीज को बड़े गौर से देख रहे थे,

सीमा ने मेघा के घर में ये सब देखा था ो सबको घूम घूम क्र समझा रही थी, वही निचे बीएड रूम में एक बीएड पड़ा था और उप्पेर एक रूम में एक बीएड पड़ा था, ये अच्छा हुआ था पहेली बार उन्हें बीएड मिला था सोने को अब कमरे फिक्स करने थे, तो सबसे पहले अंजलि का सामान निचे बीएड रूम में रख दिया, दूसरा रूम तुषार ने लिया,

उप्पेर तीनो बहेनो ने अलग रूम ले लिया, आत्ताच बाटरूम वाला रूम सीमा ने और दूसरा रूम दीपा ने लिया, जब कपिल और सचिन आएंगे वो तुषार के रूम में रहेंगे, चारपाई तुषार को मिल गई जब तक दूसरी चारपाई का इंतजाम नहीं होता तब तक तीनो बहन एक hi बीएड पैर सोयेंगे, सबको एक साथ सोन ेकी आदत थी,

पूरा दिन घर का सामान लगाने में लग गया सामान कुछ खास नहीं था बस कपडे और किचन का सामान था, अगर दो दिन में सब कुछ सेट हो गया,

वही गाओं में हल्ला मच गया राजेश का परिवार गाओं छोड़ क्र चला गया ह, चंद्रो देवी किसी को बताने वाली थीं hi और तुषार ने रजिया को मन क्र दिया था किसी को भी कुछ बताने से, अजय ने दो दिन में 20 चक्कर लगा दिए थे अंजलि के घर के,

जब कॉलेज खुल गए तो सीमा दीपा के साथ पहुंची J.S.S कंपनी के ब्रांच ऑफिस में जॉब के लिए, वह का मैनेजर बहुत hi ठरकी था दीपा और सीमा को देखते hi लार टपकने लगा, सीमा उसकी कमजोरी भाप गई और थोड़ी सी अदा बिखेरने लगी,

मैनेजर राहुल महेता- वैसे तो हमारे यहाँ अभी कोई जॉब नहीं ह लेकिन तुम मुझे ठीक लड़की लग रही हो इसलिए मैं कोशिश करूँगा तुम्हारा कुछ हो जाये तो,

सीमा- आपका बहुत बहुत ठंकु सर मुझे बहुत जरुरत ह जॉब की

राहुल महेता- अगले वीक तुम आना मैं देखता हु क्या क्र सकता हु

सीमा खुश होती हुई वह से निकलने लगी तभी एक लड़की सीमा के पास आई दीपा भी पास आ गई,

लड़की- hello मिस क्या मैं 1 मिनट आपसे बात क्र सकती हु

सीमा- है जी बोलिये

लड़की- मेरा नाम जूही ह मैं यहाँ जॉब करती हूत ुम यहाँ जॉब के लिए आई हो ह न

सीमा- जी है

जूही- यहाँ जॉब करने के लिए मैं तुम्हे कुछ बता दू बाद में हो सकता ह तुम्हे तकलीफ हो

सीमा- क्या मतलब मैं समझी नहीं

जूही- इस कंपनी के ओनर बहुत ठरकी इंसाने ह सभी ब्रांच में राहुल जैसे ठरकी मैनेजर रखे ह इसका काम बस सूंदर लड़किया जो काम न जानती हो उन्हें भर्ती करना ह काम न आने की वजह से बोस और मैनेजर उन्हें डरा क्र रखते ह फिर उनकी मज़बूरी का फायदा उठाते ह जब बोस का मन भर जाता ह तो ये मैनेजर उसके साथ मजे करते हैं

सीमा- तुम मुझे ये सब क्यों बता रही हो

जूही- क्योकि मैं ऐसे hi फांसी हुई हु मैंने मज़बूरी में काम शुरू किया था लेकिन इनके चंगुल में फास गई

सीमा- तुम चिंता मत करो मैं देख लुंगी सब

सीमा और दीपा वह से निकल आये

दीपा- सीमा वो लड़की सही कह रही थी तेरे साथ कुछ गलत हुआ तो वो लोग बड़े गंदे ह

सीमा- ये अच्छा ह हमारे लिए की वो लोग गंदे ह तभी तो मेरे हुसैन के जाल में फास क्र बॉस के पास पहुचायेंगे मुझे तभी पता चलेगा

दीपा- उसके लिए तुझे अपनी इज्जत लुटानी पड़ी तो

सीमा- देखा जायेगा

दीपा- नहीं तू ऐसा कुछ नहीं करेगी तेरी इज्जत बस टुशु के लिए ह

सीमा शोकेड होकर दीपा को देख रही थी,

दीपा- ऐसे मत देख मुझे सब पता ह पहले hi दिन पता चल गया था लेकिन मैं तुझसे गुस्सा थी की तूने मुझे क्यों नहीं बताया

सीमा- श्री बहन मेरी हिम्मत नहीं हो पाई अपने hi भाई से छोड़ने की कहानी तुझे बताने की माफ़ क्र दे

दीपा- अच्छा ठीक ह माफ़ किया लेकिन तू अकेली नहीं ह

सीमा- मतलब

दीपा- मतलब हम दोनों बहन एक hi नव में सवार ह अब

सीमा- सच्ची हे मेरी छमिया तूने कब बजी मर ली

दीपा- तुझसे गुस्सा होकर मैंने भी उसका मजा चख लिया, तू गुस्सा तो नहीं होगी न मैं तुषार के साथ ये सब

सीमा- अरे मेरी जान मैं तो बहुत खुश हु मुझे सकूं ह मैं अकेली भाई छोड़ नहीं हु,

दीपा- हैट गन्दी

सीमा- अच्छा भाई का लुंड छूट में ले सकती ह भाई छोड़ नहीं खेलवा सकती साली

दीपा - सीमा हमने गलती तो नहीं किन ा अपने भाई से चुद क्र फ्यूचर में क्या होगा जब उसकी शादी हो जाएगी तब उसकी पत्नी आ जाएगी, माँ हमारी भी शादी करवाएगी हम कैसे किसी और के साथ जायेंगे, क्या माँ समझ आएगी हमारे रिश्ते को

सीमा- तू फ़िक्र मत क्र माँ को पता ह टुशु मुझे छोड़ता ह उन्हें कोई प्रॉब्लम नहीं ह

दीपा की आँखे बड़ी हो गई शोकेड से क्यात ु सच बो रही ह

सीमा- है पहेली बार जब तुषार ने किया था तो माँ ने hi मुझे सम्हाला

सीमा ने दीपा को उस दिन की साडी कहानी सुनाई जिसे सुनकर दीपा एक दम शोकेड थी,

दीपा- सीमा ये कुछ अजीब नहीं ह एक माँ अपने bête से अपनी hi बेटी को छुड़वा रही ह उन्हें उससे कोई प्रॉब्लम नहीं ह और वो खुद भी तुषार के साथ गरम हो जाती ह

अब शोकेड होने की बरी सीमा किट hi, क्या मतलब

दीपा ने उस दिन तुषार और अंजलि के बिच की मस्ती को बताया

दीपा- इसी लिए मैंने उस दिन टुसु को माँ से बात करने के लिए कहा था वही माँ को समझा सकता था,

सीमा- मुझे इसके 3 कारन समझ आते हैं

दीपा- वो क्या

सीमा- पहला या तो तेरी तरह तुषार सागा भाई नहीं ह, दूसरा- माँ बहुत समय से प्यासी रही ह उन्हें औरत की पीस का पता ह इसलिए वो हमे नहीं रोकट ी और तीसरा- माँ ने अपने परिवार में पारिवारिक चुदाई देखि ह इसीलिए उन्हें इससे कोई ऐतराज नहीं ह

दीपा- तीनो hi कारन मजबूत ह कोइसा भी हो सकता ह, लेकिन एक बात तो ह हमारी माँ भी तो कब से प्यासी होगी उसे भी तो किसी मर्द की जरुरत होगी, जब हमारी माँ हमारे लिए इतना क्र सकती ह तो क्या हम माँ के लिए कुछ नहीं क्र सकते,

सीमा- बात तो सही ह लेकिन हम करेंगे क्या

दीपा- माँ टुशु की तरफ अट्रेक्ट ह हमे बस टुशु का धयान माँ की तरफ डालना ह

सीमा- ज्यादा महेनत नहीं करनी पड़ेगी चुदाई के वक्त टुशु माँ की बाते करता ह उसका धयान माँ की चूचियों पैर रहता ह

दीपा- बस तो हो गया आसान, वैसे कब चुद रही ह टुशु से

सीमा- यार तेरे मटर में इतना उलझ गए थे की मौका hi नहीं मिला लेकिन इस घर में खूब मौका मिलेगा अब दिल खोल क्र चुनेगे हम दोनों

फिर उन्होंने ऑटो पकड़ा और घर आ गए,

आज राजेश भी काम की तलाश में गया था दिन भर घूमने के बाद उसे कसबे में एक कपडा मिल में सामान धोने की नौकरी मिल गई तनखाह 8000 जो मजदूरी से थोड़े काम थे पैर टाइम से जाना टाइम से आना महीने में 4 छुट्टी त्योहारों पैर छुट्टी ये सब मिलने से राजेश परिवार के साथ टाइम बिता सकता था, मजदूरी करके भी इतने हाथ में नहीं आते थे क्योकि छुट्टी लेने पैर पैसे काट जाते थे अब पैसे भी और छुट्टी भी सब अच्छा था.

वही अंजलि ने स्कूल में एक और तुस्तिओं के बच को है क्र दी पहले गाओं में जाने की वजह से उसे देर हो जाती थी इसलिए एक hi बैच को पढ़ा पति थी लेकिन अब दूसरा बैच भी पकड़ लिया, अंजलि को स्कूल से 7000 मिलते थे तुस्तिओं से 5000 अब दूसरे बैच से 9000 और मिल जायेंगे, वही तुषार ने कसबे में एक गयम में काम देख लिया स्कूल के बाद 2 हरष गयम की साफ़ सफाई करने के लिए उसे 4000 मिल रहे थे, कुल मिला क्र परिवार के पास गुजरे के लिए ठीक थक इंतजाम होने लगा था, तुषार ने अंजलि को बता दिया की वो अपने पैसे से किराया दे देगा, लेकिन किराया तो रजिया लेती hi नहीं रजिया तो कुछ और hi ले रही थी किराये के रूप में,

शाम का खाना खाने के बाद सीमा ने तुषार के कान में कहा आज रात को मेरे कमरे आ जाना सबके सोन ेके बाद, तुषार खुश हो गया था सीमा की लिए हुए बहुत दिन हो गए थे वही दीपा ने उन्हें देख लिया सब अपने रूम में चले गए, दीपा सीमा के पास गई

दीपा- क्या बात ह आज टुशु को बुलाया ह क्या

सीमा- है यार बहुत दिन हो गए कुछ किये हुए बहुत मन क्र रहा ह

दीपा- मन तो मेरा भी बहुत ह चल आज तू देख ले मैं फिर कभी देख लुंगी

सीमा- अरे टब hi आ जाना साथ में करेंगे वो दोनों की फाड़ देगा एक hi बार में

दीपा- हैट बेशरम कुछ भी बोलती ह

सीमा- तेरी मर्जी ह बाथरूम का दूर खुला रखूंगी मन करे तो आ जाना

दीपा- मुझे नहीं आना तेरे बिच में तू hi झेल मैं अकेले करवाउंगी

सीमा- अरे मुझे कोई दिक्कत नहीं ह तेरे सामने छोड़ने से तू पता नहीं क्यों शर्मा रही ह,

दीपा- कुछ चीजे अलग hi रहे तो अच्छी ह और तुषार को भी मत बताना की हम दोनों को एक दूसरे का पता ह

सीमा- तू कुछ भी बोले क दिन हम दोनों एक साथ तुषार का हतियार लेंगे

दीपा- बकवास काम क्र मैं जार hi हु,

फिर दीपा अपने रूम में चली गई,
 
अपडेट-18


सीमा तुषार का इंतजार क्र रही थी, तुषार भी लेता हुआ िटजर में था कब माँ सोये कब वो सीमा के पास जाये, जैसे hi उसे लगा सब शांत हो गया ह वो धीरे से उठा और चल दिया सीमा के रूम की तरफ दरवाजा खुला हुआ था लेकिन रूम में अँधेरा था, तुषार को लगा सीमा सो गई ह, उसने धीरे से दूर बंद किया और धीमी आवाज में दीदी दीदी करता हुआ आगे बढ़ने लगा, अँधेरे में कुछ दिख नहीं रहा था, फिर भी वो अंदाजे से आगे बढ़ रहा था, उसका पेअर बीएड से टकरा गया उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह दीदी सो गई क्या,

कोई जवाब नहीं आया वो बीएड पैर चढ़ गया उसने धीरे से बीएड पैर हाथ घुमाया लेकिन वह कोई नहीं था, उसे लगा सीमा दीपा या रूचि के रूम में होगी उसे बड़ा गुस्सा आया, भें छोड़ मूड ख़राब क्र गई, खड़े लुंड पैर धोका दे गई, दीदी तेरी माँ छोड़ दूंगा अगली बार

एक दम रूम में रौशनी हो गई और आवाज आई तो छोड़ दे न मेरी माँ इंतजार क्यों क्र रहा ह, तुषार ने आवाज की तरफ देखा तो सीमा एक दम नंगी स्विच बोर्ड के पास कड़ी थी, जिसे देख तुषार के फेस पैर भी स्माइल आ गई,


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सीमा बड़ी ऐडा के साथ चलती हु तुषार के पास आई और तुषार को बीएड पैर धक्का दिया, और उसके उप्पेर चढ़ गई, वो बिलकुल नंगी थी उसमे जरा भी शर्म नहीं थी, तुषार ने जोश में सीमा को अपने उप्पेर खींच लिया जिससे सीमा की चूचिया तुषार की छाती में डाब गई,

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तुषार- तो मेरी जान बुला ले अपनी माँ को आज छोड़ देता हु

सीमा- मेरी माँ के सामने तेरा खड़ा भी नहीं हो पायेगा

तुषार- मेरे लोडे के सामने तेरी माँ हाथ जोड़ लेगी

दोनों पुरे गंदे शब्दों के साथ एक दूसरे को मजे दे रहे थे, सीमा को गंदे शब्दों के साथ चुदाई करने में बड़ा मजा आता था और तुषार की सबसे खास बात यही थी वो जैसा सामने वाली चाहती थी वैसा hi बर्ताव करता था,

तुषार सीमा की नंगी गांड को शेला रहा था सीमा तुषार के हॉट चूमने लगी, फिर सीमा उठी और तुषार के कपडे उतरने लगी, जब तुषार अंडर वियर में आ गया तो उसका लुंड अंडरवियर फाड़ने को तैयार था, सीमा निचे बैठ गई और अंडर वियर के उप्पेर से hi लुंड को मुँह में लेने लगी चाटने लगी,


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फिर उसने धीरे धीरे अंडरवियर निचे किया लुंड उछाल क्र सामने आ गया,

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सीमा ने लुंड को मुठी में भर लिया और उप्पेर निचे करने लगी और चाटने लगी, आज सीमा अपने आप लुंड को चुम चाट रही थी,

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फिर सीमा ने थोड़ी देर लुंड चूसा लेकिन उसे चूसने का कोई अनुभव नहीं था, लेकिन उसके गरम मुँह में लुंड देकर तुषार को बड़ा मजा आ रहा था, तुषार ने सीमा के मुँह में हलके हलके धक्के लगाने शुर किये,

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जब सीमा का मुँह दुखने लगा तो तुषार ने सीमा को उठाया और बीएड पैर लिटा दिया,

सीमा को लगा अब तुषार उसे छोड़ेगा लेकिन आज तुषार का अलग hi मूड था, वो सीमा के मुँह के पास गया और उसके हॉट चूमने लगा और एक हाथ से सीमा की चुकी दबाने लगा, तुषार चुकी को बुरी तरह से मसल रहा था फिर वो सीमा की गार्डन को चूमता हुआ उसके कंधे चूमता हुआ उसकी चूचियों को चूसने लगा और एक हाथ निचे लेजाकर उसकी छूट को सहलाने लगा,

सीमा मजे में उछलने लगी पूरी तरह गरम हो चुकी थी, कुछ देर चूचियों को अच्छे से चूसने के बाद तुषार पेट को चूमता हुआ छूट की तरफ बढ़ने लगा, छूट के पास पहुंच क्र तुषार रुक गया और उसने सीमा की तरफ देखा,

सीमा ने बहुत पोर्न मूवीज देखि थी मेघा के साथ उसे छूट चूसै होती ह कैसे होती ह बहुत बार देखि थी लेकिन उसका मजा क्या होता ह ये नहीं पता था,

सीमा- टुशु नहीं वह नहीं

लेकिन तुषार कहा रुकने वाला था, उसने अपने हॉट सीमा की छूट पैर रख दिए सीमा के मुँह से मस्ती भरी सिसकारी निकल गई उउउउउफफमममममममम, तुषार ने एक हाथ सीमा की चुकी पैर रखा और अपनी जीभ सीमा की छूट में घुसा दी,


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सीमा तो मजे में दोहरी हो गई, उसने तुषार का सर पकड़ा और अपनी छूट पैर दबाने लगी, तुषार भी अपना मुँह सीमा की छूट पैर जोर से रगड़ने लगा, सीमा इतने मजे में खो गई जैसे दुनिया में इससे बढ़ क्र कुछ हो hi नहीं सकता, अहहहहहहह टुशु अहहह बहुत मजा आ रहा ह भाई अहहहहह बस ाहाःहाहाः मत क्र अहहहहहहह मुझे कुछ हो रहा ह मत क्र अहहहहहह भेनचोद रुक जा ुऊफूऊऊऊफफफफफफफफफ इतना मजा हे मैं मर जाउंगी इस मजे में, इसी के साथ सीमा झड़ने लगी और अपनी छूट निचे से तुषार के मुँह पैर उछलने लगी, सीमा झाड़ तो गई लेकिन छूट शांत नहीं हुई थी क्योकि छूट को कितना भी मजा दे दो लेकिन बिना लुंड के छूट शांत नहीं होती,

सीमा- दाल दे जल्दी से अंदर ऊऊफफफफफफ

तुषार उठा और सीमा की टैंगो के बिच आ गया,

सीमा- दाल न भेनचोद

तुषार के दिमाग में कुछ और था उसने सीमा को पलट दिया और दोगी स्टाइल में ले आया, सीमा को पूरा अनुभव तो नहीं था फिर भी वो ठीक थक पोजीशन में आ गई, जिससे उसकी गांड उभर क्र सामने आ गई, बड़ी खूबसूरत गांड थी सीमा की और छूट के तो कहने hi क्या,

सीमा- कमीने अब तो दाल दे

तुषार ने अपना लुंड सीमा की छूट पैर रगड़ा


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सीमा- भें के लोडे तेरी माँ छोड़ तुंगी भोसड़ी के जल्दी दाल मेरी छूट में अपना लोढ़ा मादरचोद

तुषार सीमा के उतावले पैन पैर मुस्कुराया और एक जोर दर धक्का सीमा की छूट में लगा दिया लुंड सीमा की छूट को फाड़ता हुआ एक बार में hi अंदर घुस गया,


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आह्ह्ह्हह्ह मर गई भोसड़ी के फाड् दी अह्हह्ह्ह्ह

तुषार- ले भें की लोदी अपने भाई का लोढ़ा अपनी छूट में रंडी कुटिया साली अब बोल मादरचोद ले

सीमा- अह्ह्ह्हह्ह मर गई आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भेनचोद बहुत दर्द हो रहा ह aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh पैर मजा आ गया छोड़ अपनी कुटिया को

तुषार ने धक्के लगाने शुरू क्र दिए, उसके धक्को की राफ्तेर बहुत तेज थी वो लगातार धक्के लगाए जार है था, सीमा ने अपना मुँह तकिये पैर रख लिया था जिससे उसकी गांड उप्पेर उप्पेर हो गई थी, जिससे लुंड और घेरे तक जार है था सीमा अपनी अहहह अह्ह्ह्ह भरी सिसकिया रोक नहीं प् रही थी, काफी देर तक तुषार सीमा को ऐसे hi छोड़ता रहा सीमा भी अपनी गांड पीछे को धकेल रही थी,

अब सीमा का रुकना मुश्किल था वो झड़ने लगी थी उसकी छूट से निकलने वाला रास उसकी जांघो पैर भेने लगा था,

सीमा- आअह्ह्ह्ह गई रे तेरी कुटिया तो गई अहहहहहहह और तेज अहहहह और तेज पूरा घुसा दे अपना लोढ़ा अहहहहह मैं तेरी सच्ची की कुटिया हु मेरे भाई आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

सीमा से अपने पेअर पैर खड़ा नहीं हुआ जार है था इसलिए वो लेट गई तुषार ने जल्दी से एक तकिया उसके पेट के निचे रखा जिससे गांड उप्पेर हो गई और तुषर धक्के लगाने लगा, सीमा की छूट में जलन होने लगी लेकिन तुषार कहा रुकने वाला था,


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15 मिनट्स जबरदस्त छोड़ने के बाद जब वो झड़ने वाला था तो उसने अपना लुंड लिकल क्र सीमा को जल्दी से सीधा किया और उसके मुँह में दे दिया, सीमा उसे रोक नहीं पाई क्योकि वो तो तीसरी बार झाड़ क्र इतनी थक गई थी की उसमे रियेक्ट करने की हिम्मत नहीं बची थी,

तुषार ने पूरा लुंड उसके मुँह में उतर दिया, मुँह में घुसते hi लुंड से धार मर दी और लगातार धार लगती hi रही,

सीमा को मज़बूरी में रास गटकना पड़ा, काफी रास उसके मुँह से बहार आने लगा, तुषार पूरा रास निकल क्र hi अलग हुआ, सीमा जोर से खास्ती हुई उठी,

अह्हह्ह मरेगा भेनचोद अपनी बहन की जान लेगा क्या सच में कुटिया समझ लिया क्या

तुषार को अपनी गलती का अहसास hua,sry दीदी वो ज्यादा जोश में आ गया था इसलिए गलती हो गई माफ़ क्र दो

सीमा कुछ नार्मल हुई उसकी आँखे लाल थी आँखों से पानी भी रहा था फिर भी मुस्कुराती हुई तुषार को खुद से चिपका लिया,

सीमा- तू क्यों माफ़ी मांगता ह मेरी जान तेरा ये hi रूप तो मुझे मजा देता ह मुझे ये hi तो पसंद ह जब तू अपनी मनमानी करके मुझे छोड़ता हहहहह सच्ची मजा आ जाता ह बहुत मजा आया मुझे तूने मुझे सच में अपनी कुटिया बना लिया ह और कुटिया को ऐसे hi छोड़ा जाता ह समझे श्री मत बोल,

तुषार- आप कभी मुँह में नहीं करवाती न

सीमा- मैं क्या चाहती हु मुझे खुद नहीं पता मुझे बस इतना पता ह जब तू बेदर्दी से मेरे साथ मजा करता ह अपनी मनमानी करके मुझे रोंधता ह तभी मुझे सकूं मिलता ह तेरी इस मनमानी में भी मुझे मजा आया, और आज से तू मुझे कुटिया hi बोलै क्र तेरे मुँह से अच्छा लगता ह मुझे कुटिया सुन्ना,

तुषार- ठीक ह मेरी प्यारी कुटिया चल अब मुँह तो साफ़ क्र ले,

सीमा- पहले तू क्र आ

तुषार उठा और बाथरूम में चला गया, ये सब काम वासना का गन्दा खेल दीपा चुप क्र देख रही थी जो पहले मन क्र रही थी आने के लिए लेकिन सीमा की आवाजे बाथरूम से उसके रूम तक पहुंच रही थी, वो मजबूर होगी देखने के लिए और आज पहलीबार उसका हाथ खुद अपनी छूट पैर पहुंच गया था, जब तुषार और सीमा का खेल ख़तम हुआ तब तक दीपा 2 बार झाड़ चुकी थी, तुषार के उठते hi दीपा धीरे से अपने रूम में चली गई,

दीपा खुद से hi- सीमा कितनी गन्दी गालिया देकर छूटे ह खुद को कुटिया बोलवा रही ह, लेकिन मजा भी बहुत आया होगा टुशु छोड़ता hi इतना मस्त ह हे मेरी छूट, कोई नहीं कल मैं छोडूंगी, लेकिन अगर हम रोज ऐसे hi टुशु से चुड़ते रहे तो उसकी हेल्थ का क्या होगा नहीं कल नहीं 2 दिन बाद छोडूंगी,

इधर तुषार सीमा को छोड़ क्र अपने रूम में आकर सो गया, जब वो रूम में घुसा तो दरवाजा थोड़ा जोर से बंद हो गया जिससे अंजलि को पता चल गया की तुषार अभी रूम में आया ह बाथरूम एक होने से आवाज एक दूसरे के रूम चली जाती थी, और बाथरूम का दरवाजा बंद करने की अभी इन लोगो को आदत नहीं थी,

अंजलि समझ गई की टुशु चुदाई करके आया ह, उसके मन में चुदाई की भवन उठ कड़ी हुई

अंजलि मन में- मेरे बचे सेक्स का भरपूर मजा ले रहे हैं मेरी बेतिया चुद रही ह और उनकी माँ यहाँ प्यासी तड़प रही ह, वैसे मजे तो लेंगे hi औलाद किसकी ह

अगले दिन सब नार्मल था सीमा एक दम खिली खिली दीपा की आँखे प्यासी और अंजलि तो पूरी hi प्यासी थी लेकिन किसी को पता नहीं चलने देती थी, सभी अपनी मजिल की तरफ चले गए, तीन दिन ऐसे hi काट गए सीमा ने दीपा से कंपनी चलने को कहा

दीपा- उसने 1 वीक बाद के लिए बोलै था तू अभी से क्यों जार hi ह

सीमा- क्या पता कुछ बात बन गई हो वो हमे कैसे बताएगा हमारे पास तो फ़ोन भी नहीं ह

दीपा- ठीक ह चल

दोनों सिटी पहुंच गई मैनेजर से मिलने, मैनेजर उन्हें देख क्र खुश हो गया उसे लग गया की इन्हे नौकरी की बहुत जरुरत ह,

सीमा- सर कुछ बात बानी क्या

राहुल महेता- मैं कोशिश क्र रहा हु इतनी जल्दी कैसे बनेगी बात

सीमा- रोयना सा मुँह बनाते हुए सर क्या आप मेरी हेल्प नहीं क्र सकते आप तो यहाँ के बॉस हो

राहुल- अरे तुम दुखी मत हो, बैठो इधर मैं बात करके आता हु

कुछ देर बाद राहुल बहार आया मिस सीमा जल्दी से मिठाई खिलाओ तुम्हारी नौकरी पक्की करवा दी ह मैंने

सीमा- ोू ठंकु सर वैरी वैरी ठंकु मैं आपका ये अहसान कभी नहीं भूलूंगी

राहुल ने जूही को ऑफिस में बुलाया

राहुल- जूही ये ह मिस सीमा इनका जोइनिंग लत्तेर टाइप क्र अभी , सीमा कब से ज्वाइन करना ह

सीमा- सर मंडे से शुरू क्र दूंगी

राहुल – गुड

जूही- सर किस सेक्शन में रखना ह किस पोस्ट पैर

राहुल- ऐसा करो 1 मंथ तुम अपने साथ रखो, पोस्ट अभी मेरी सेक्रेट्री की दे दो

जूही- लेकिन सर वो तो मैं हु

राहुल- है है तुम hi रहोगी अभी पोस्ट दे रहा हु ताकि तुम्हारे साथ काम सिख जाये फिर बड़े बॉस या छोटे सर की सेक्रेटरी बन जाएगी उनके आने से पहले काम तो आना चाहिए न

जूही- ok सर, और सेल्लरी कितनी दालु

राहुल- अभी 12000 दाल दो अगर सर को काम पसंद आया तो वो खुद बढ़ा देंगे

सीमा के लिए तो 12000 भी बहुत बड़ी रकम थी, उसने तो बस यहाँ जगह पाने का सोचा था, लेकिन उसे नहीं पता था ये सबसे काम साल्लेर्य ह यहाँ जूही की भी 25000 थी, जूही खुश थी की ये उसके अंडर काम करेगी राहुल खुश था इतनी खूबसूरत लड़की उसके ऑफिस में रहेगी और सीमा खुश थी वो कंपनी में घुस गई,

राहुल- सीमा कंपनी के हिसाब से तुम्हे अपना ड्रेसिंग कोड बदलना होगा, ये कपड़ तुम्हारे ओल्ड फासिओं ह अभी तुम अच्छे सूट सलवार फेन सकती हो लेकिन बॉस के आने के बाद तुम्हे उनके हिसाब के कपडे hi पहनने होंगे,

सीमा- जरूर सर मैं मैंने ऑफिस में सबके कपडे देखे ह मैं उसी हिसाब से आउंगी

सीमा और दीपा खुश होती आ गई घर, लेकिन अंजलि से परमिशन कैसे लेंगे ये प्रॉब्लम थी, घर आकर सरे भाई बहेनो ने बात की तो रूचि बोली ये लत्तेर मुझे दो कल मैं कुछ करती हु,

अगले दिन रूचि लेटर लेकर सिबेर साफé गई और वह से एक और लेटर बनाया बस कंपनी का नाम चेंज क्र दिया ताकि अंजलि को कंपनी के बारे में पता न चले. शाम को सीमा अंजल के बैठी और बोली

सीमा- माँ आपसे से परमिशन चाहिए

अंजलि- किस बारे में क्या हुआ बताओ

सीमा- माँ वो मेघा ने एक जगह मेरा रिज्यूमे लगा दिया था तो वह से मेरे लिए जोइनिंग लेटर आया ह

अंजलि- क्या कहा किस कंपनी में

सीमा- ने वो लेटर अंजलि को दिखाया जो R.P.S कंपनी का था

अंजलि- लेकिन तेरी पढाई उसका क्या होगा

सीमा- माँ मेरी पढाई लगभग कम्पलीट सी हो चुकी ह बस एग्जाम देने ह उसके बाद भी तो जॉब करुँगी hi तो अभी से शुरू क्र दू

अंजलि- बीटा मुझे जॉब से ऐतराज नहीं ह लेकिन पढाई उसका नुकसान नहीं होना चाहिए और मैं तो चाहती हूत ु और आगे पढ़े

सीमा- माँ मैं इससे ज्यादा नहीं पढ़ना चाहती और ये B.A या M.A करके किसे बड़ी नोकरिया मिलती ह और हम इतने पैसे वाले तो ह नहीं की आगे की पढाई करते रहे, अगर मैं नहीं कामुनगी तो बाकि भाई बहन भी नहीं पढ़ पाएंगे

सीमा की बात सुनकर अंजलि ख़ुशी से रो पड़ी, और सीमा को गले लगा लिया बड़ी खुश किस्मत हु मैं जो मुझे ऐसे बच्चे मिले ह,

सीमा- माँ खुश किस्मत तो हम सब ह जिन्हे आप जैसी माँ मिली ह

अंजलि- बस बस इतना मत चढ़ा, ठीक ह कर ले नौकरी

सीमा- लेकिन माँ वह ये मेरे गाओं के कपडे नहीं चैलेंज वह थोड़े मॉडर्न कपडे पहनने पड़ेंगे

अंजलि- जानती हु कंपनियों में अच्छे कपडे सेक्सी मॉडर्न कपडे hi षाले ह तभी कोई आपको वैलुए देता ह, और मुझे कोई ऐतराज नहीं बीटा तुम तीनो भें कुछ भी फिनॉल मैं गाओं की देहाती नहीं हु बस आज तक पैसे नहीं थे जगह नहीं थी तुम्हे ये सब पहनने की अब तू कमाने लगेगी और हम अच्छी जगह रह रहे ह तो खुद भी अच्छे कपडे पहन और अपनी बहेनो को भी पहना,

लेकिन अपनी मर्यादा का धयान रखना, मैंने तुम्हे आजादी दी ह जीने की और तेरी जिंदगी में टुशु ह अब खुद को नीलम मत क्र देना किसीके सामने

सीमा- माँ आप भरोसा रखो मैं आपका सर झुकने नहीं दूंगी वैसे भी तुषार इस लायक छोड़ता hi कहा ह किसी और को देखु वो तो चले हिला देता ह

अंजलि- हस्ते हुए हैट बेशरम लड़की अपनी माँ के सामने कैसी बात करती ह

सीमा- अंजलि को बहो में भरते हुए माँ आप माँ बादमे हो पहले हम सबकी दोस्त हो आपने कभी हमे कुछ छुपाने लायक बनाया hi नहीं तो अपनी दोस्त से बात नहीं करुँगी तो किस्से करुँगी बताओ किसी बहार वाले करू क्या

अंजलि- अच्छा अच्छा ठीक ह क्र ले जो बात करनी ह मुझे ख़ुशी होगी तुम लोग खुल क्र मुझसे बात करते रहोगे,

सीमा ने अंजलि के गाल चुम लिए ऊऊफफफ माँ कितने मुलायम गाल ह

अंजलि- तुझे मुलायम गाल नहीं टुशु के मरदाना गाल चूमने चाहिए

सीमा- माँ आप भी न चलो सबको ये खुश खबरि देते ह

अंजलि- ऐसे नहीं तू सबको हॉल में बुला ले मैं हलवा बना क्र लती हु तब बतायेने

थोड़ी देर बाद सभी एक साथ थे अंजलि ने सबको हलवा दिया और सीमा की जॉब की खुश खबरि दी, चारो बच्चो को तो पता था लेकिन उन्होंने खुश होने का दिखावा सा किया दिखावा क्या खुश तो वो थे इस वजह से की उनकी माँ मान गई,

आज रात दीपा ने तुषार को इशारा किया उसके रूम में आने का, तुषार खुश हो गया उसे दीपा के साथ बहुत मजा आता था दीपा जब उसका लुंड चुस्ती थी वो सबसे बेहतरीन था, लेकिन जब से रजिया ने तुषार का लुंड चूसा ह उसे असली मजे का पता चल गया लेकिन दीपा अलग hi मजा देती थी,

रात को तुषार पहुंच गया दीपा के रूम में, दीपा का बिस्टेर निचे hi लगा जिस पैर कांबले में लेती थी, तुषार ने दूर बंद किया और दीपा के पास पंहुचा उसने धीरे से कंबल उठाया तो दीपा को देख क्र उसका मुँह खुला रह गया, दीपा मुस्कुराती हुई कड़ी हुई और आपकी कमर पैर हाथ रख क्र तुषार को इशारे से पूछा कैसे लग रही हु,


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दीपा ने इतनी शार्ट और टाइट ड्रेस फेनी हुई थी की दीपा की बड़ी बड़ी चूचिया आदि से ज्यादा बहार थी और स्कर्ट इतनी छोटी की गांड पूरी नंगी दिख रही थी, हलकी सी झुक जाये तो छूट भी दिख जाये अगर पंतय न पहनी हो तो, तुषार ने किसी को पहेली बार ऐसे कपड़ो में देखा था, उसकी आँखे खुली रह गई,

उसने दीपा का हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खींच लिया दीपा बेल की तरह तुषार से चिपक गई, तुषार के हाथ दीपा की आधी नंगी गांड पैर घूम रहे थे, और तुषार के हॉट दीपा के होतो को चूस रहे थे, दीपा भी तुषार के सर में अपनी उंगलिया फसा क्र पूरा साथ दे रही थी, किश करते हुए तुषार ने दीपा को गोद में उठा लिया दीपा ने भी अपने दोनों पेअर तुषार की कमर में लप्पेट लिए और तुषार की गॉड में चढ़ गई और उसे चूमने लगी,

तुषार के दोनों हाथ दीपा की गांड के निचे थे, काफी देर तक दोनों ऐसे hi चूमते रहे, फिर तुषार ने दीपा को निचे उतरा और उसे दीवार से चिपका दिया, और उसकी गार्डन चूमता हुआ चुकी चूमता हुआ निचे बैठने लगा, फिर दीपा का नंगा पेट चूमने लगा, दीपा सिसकारियां भरने लगी, दीपा ने भी जल्दी से तुषार की जैकेट और t-shirt उतर दी, ठण्ड के मौसम में दोनों के शरीर भट्टी की तरह तप रहे थे. तुषा रने एक काठ बढ़ा क्र दीपा की चुकी पकड़ ली और उसकी वो छोटी सी ड्रेस निचे खींच दी, फिर उसकी चुकी को मुँह में भर क्र चूसने लगा,

तुषार का चूसने का तरीका बहुत वाइल्ड था, दीपा अपने हाथ से दूसरी चुकी को दबाने लगी, तुषार ने एक हाथ दीपा की स्कर्ट में दाल क्र उसकी नंगी गांड को मसलळने लगा,

दीपा बहुत गरम हो गई थी, उसने जल्दी से तुषार को उठाया और उसका लोअर निचे क्र दिया, तुसाहर का लुंड हमेशा की तरह अंडर वियर में से बहार आने क उछलने लगा, दीपा ने अंडर वियर के उप्पेर से hi लुंड पैर अपना मुँह रगड़ना शुरू क्र दिया, फिर दीपा ने अपने मुँह से hi तुषार का अंडर वियर निचे खींचना शुरू क्र दिया अंडर वियर तुषार के लुंड पैर अटक गया जिसे दीपा ने जोर लगा क्र खींचा, तुषार का लुंड उछाल क्र बहार आ गया,

दीपा ने लुंड को मुठी में भर लिया और हिलने लगी फिर उसे अपने मुँह पैर रगड़ने लगी,


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और एक दम मुँह में भर लिया और चूसने लगी आज बड़े जोश में चूस रही थी, तुषार को बहुत मजा आ रहा था कभी दीपा लुंड को बहार निकलती कभी चूसने लगती काफी देर लुंड से खेलने के बाद तुषार ने दीपा को खड़ा किया और उसकी वो छोटी सी ड्रेस उतर फेंकी, और फिर दीपा को दीवार पकड़ क्र झुका दिया, दीपा को लगा तुषार सीमा की तरह उसे पीछे से छोड़ेगा लेकिन तुषार निचे बैठ गया और दीपा को दोनों जंघे पकड़ क्र खोल दी और अपन ामुह दीपा की छूट पैर रख दिया,

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uuuuffffffffffffff दीपा के हाथ दीवार से लगभग फिसल hi गए थे, दीपा का शरीर पूरा कैंप गया, तुषार ने जइब हैदर तक दाल दी, और जीभ को उप्पेर निचे हिलने लगा, दीपा तो मजे में पागल हुई जार hi थी, तुषार ने अच्छे से दीपा की छूट छाती जिससे दीपा झड़ने लगी, तुषार ने उसे पूरी तरह झड़ने भी नहीं दिया और खड़ा होकर अपना लुंड उसकी छूट की घेरे में उतर दिया, झड़ते टाइम दीपा का मजा डबल हो गया वो और जोर से कपङे लगी उसका पूरा शरीर थिरक रहा था, तुषार और दीपा दोनों के लिए ये अनुभव बिलकुल अलग था,

दीपा तो मजे में पागल सी हो रही थी, और तुषार ने अभी तक किसी को झड़ते टाइम ऐसे थिरकते नहीं देखा था, तुषार जोश में आ गया और धक्के लगाने लगा, तुषार का लुंड दीपा की छूट में जड़ तक जार है था, दीपा ने इतनी घेरे में लुंड महसूस नहीं किया था इससे पहले, दोनों पुरे मजे में चुदाई क्र रहे थे,


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जहा दीपा को पता था चुड़ते टाइम आवाज दूसरी तरफ जाती ह इसलिए उसने सोचा था ो अपनी आवाज दबा क्र रखेगी लेकिन तुषार इतनी जबरदस्त चुदाई क्र रहा था की वो खुद को रोक hi नहीं pai,aahhahhhhhh अह्हह्ह्ह्ह और तेज और तेज फ़ास्ट फ़ास्ट फ़ास्ट फकक फ़क फ़क फ़क फ़क फ़क फ़क फ़क में अहहहहहहह

पूरा घुसा क्र छोड़ मेरे भाई अहहहहहह छोड़ अपनी बहन को अहहहहहहहह,

तुषार भी नॉनस्टॉप धक्के लगाए जार है था, फिर तुषार ने दीपा को सीधा किया और उसकी कमर ठंडी दीवार से लगा दी और एक तंग हवा में उठाई और लुंड घुसा दिया छूट में,


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दीपा चुदाई में इतनी मस्त थी की उसे अहसास hi नहीं हुआ वो ठंडी दीवार से रगड़ रही ह उसे तो छूट में लुंड की रगड़ दिखाई दे रही थी, थोड़ी देर ऐसे hi छोड़ने के बाद दीपा फिर झाड़ गई तुषार भी झड़ने की हालत में पहुंच गया, तुषार के धक्के तेज हो गए, जैसे hi वो झड़ने को हुआ उसने अपना लुंड बहार निकल लिया दीपा तुरंत निचे बैठ गई और लुंड मुँह में भर लिया तुषार ने भी पूरा लुंड दीपा के मुँह में खली क्र दिया,

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दोनों एक साथ बाथरूम में गए और धीरे धीरे एक दूसरे के अंगो को अपने हाथो से साफ़ करने लगे, दीपा कोशिश क्र रही थी की सीमा तक आवाज न जाये लेकिन सीमा तो सब सुन रही थी और लेती हुई मुस्कुरा रही थी,

फिर दोनों अंदर आ क्र नंगे hi एक दूसरे से चिपक क्र लेट गए, आज पहेली बार दोनों ने नंगे लेटने का मजा लिया था, एक दूसरे से नंगे चिपक क्र सोने का भी अलग hi मजा था, तुषार को ऐसे चिपके हुए अंजलि के साथ वाली रात याद आ गई जिससे उसका लुंड फिर से खड़ा हो गया और दीपा की गांड से चिपक गया,


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दीपा- ये तो फिर खड़ा हो गया क्या बात ह मन नहीं भरा क्या

तुषार- तुम हो hi इतनी हॉट तुम्हारे पास आते hi इससे रुका नहीं जाता

दीपा- अच्छा तो इतने दिन में क्यों आता ह मेरे पास मैं तुझे मन करती हु क्या

तुषार- वो तो बस ऐसे hi अगर रोज छोड़ने लगा तो चुदाई का मजा ख़तम हो जायेगा



दीपा- सही बोल रहा ह इंतजार करके छोड़ने में असली मजा आता ह,
 
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