Incest Asli Haqdaar ❤️( incest /Action) - Page 4 - SexBaba
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Incest Asli Haqdaar ❤️( incest /Action)

अपडेट -22

फ़्लैश बैक

बात उस वक़्त की जब ये दोनों परिवार एक hi गाओं की सीमा में रहा करते थे जहा का जान जीवन ें द्प्नो के घराने की बदौलत hi चलता जिसकी वजह थी गाओं हरित भूमि जो बहुत उपजाऊ और ओसधि से लिप्त थी जिस का पता जब मिताली के पिता के सौतेले पिता यानि सुदर्शन उर्फ़ टल्ली को चला तो वो लालच में गाओं लौट आया पैसे के लालच में

अरे रघुवीर काका आप आयी ये आयी ये बैठिये और बताइये घर बार में सब कैसे है और हमारा शैतान कारन कैसा है (सुरेश मिताली के पिता )

Raghvir-bus सब ठीक है मैंने सुना सुदर्शन भाई आये है तो मिल ने चला आया कहा है वो दिख नहीं रहे

सुरेश- काका वो खेतो की तरफ गए है आते hi होंगे

रघुवीर - खेतो पैर वो भी सुदर्शन भाई कमाल है

सुरेश - हां काका अजीब तो मुझे भी लगा पैर में अब क्या बोलू उनका सुभाव तो आप जानते hi हो

परनाम दादू कैसे है आप

रघुवीर- अरे मेरी गुड़िया में ठीक हु सच पूछो तो तुझे देख कर hi दिल खुश हो जाता है ऊपर से तेरी ये नीली आँखे क्या hi कहु ( प्यार से मिताली के सर पैर हाथ फिरते हुए बोले)

सुरेश - ये तो सच कहा काका आप ने मेरी रानी बिटिया सच में बहुत प्यारी है इसे देखता हु तो साडी थकान भूल जाता हु बिलकुल अपनी माँ जैसी है ये

रघुवीर- हां सुरेश बीटा बेटियों की यही खसियत है ाचा अब में चलता हु

मिताली- दादू हम भी चले आप के साथ आरती से मिलने

रघुवीर- मेरी बच्ची मेरा बस चलता तो तुझे हमेसा के लिए अपने घर रख लेता पैर क्या करू ये बिरादरी वाले लोग है न

सुरेश - अरे तो क्या हुआ काका अभी भी तो ये आप की बिटिया hi है और वैसे भी हमारे बिच ये बिरादरी कहा से आ गयी

रघुवीर- बात तो तुम्हारी भी सही है बीटा पैर शायद तुम समझे नहीं में मिताली बेटी को अपने कारन के लिए सोचता हु जानता हु ये उस से बड़ी है पैर सच पूछो तो मेरा दिल नहीं मानता कुछ भी

सुरेश- काका इतना स्नेह करते है आप मिताली से तो आज से ये आपके कारन की हुई जब दोनों बच्चे जवान होंगे तो हम धूम धाम से इनकी शादी करेंगे ये मेरा वादा है आप से क्यों मिताली बीटा

नहीं बाबा मिताली कभी उस कारन से नहीं मिलेगी देखो उसने क्या किया मेरा सर फोड़ दिया ( खून से लथपथ अर्जुन सुरेश के समीप आते हुए बोलै )

सुरेश- अरे ये क्या हुआ तुझे कितना खून बह रहा है और कारन ने क्यों मारा तुझे वो तो तुझे भैया कहता है न

अर्जुन- मुझे नहीं पता पैर अब में उसे नहीं छोडूंगा देख लेना

सुरेश- ये कैसी भाषा का प्रयोग कर रहे हो अर्जुन क्या मैंने तुम्हे यही सिखाया है और तुम मिताली बीटा जाओ कारन को बुला कर लाओ

अपने पिता की बात सुनकर मिताली तुरंत कारन को बुला ने दौड़ गयी जिस के जाते hi रघुवीर सिंह बोले

रघुवीर- मैं कारन की तरफ से माफ़ी मांगता हु सुरेश बीटा

सुरेश - अरे काका आप भी क्या बच्चो की शरारत से बह कर हाथ जोड़ ने लगे पहले कारन को आने दीजिये तभी सच और झूट का पता चलेगा में उसे अछि तरह से जानता हु वो ऐसा नहीं है जरूर इस में hi उसे उकसाया होगा और तुम जाओ मरहम पट्टी करवाओ अंदर जा के

अर्जुन- आप अपने बेटे का साथ दे ने की बजाये उस कारन की पैरवी कर रहे है सच कहते है दाद्दु आप ें सिंघो से दबते है पैर में नहीं और रही बात मिताली की तो वो मेरी बहिन है माँ के बाद मैंने hi उसका ख्याल रखा है तो उसे में इनके घर की बहु तो बन ने नहीं दूंगा

शाबाश मेरे शेर तू सच मेरा पौता है देख न एक दिन पुरे इलाके पैर तेरा राज होगा और रघुवीर तुमसे मुझे तुम्हारी वो जंगल से लगती ज़मीन चाहिए

रघुवीर- वो तो में नहीं दे सकता भाईसाब क्युकी वो मेरे कारन और राहुल के नाम है पैर आप को क्यों चाहिए आप तो गाओं में जायदा रहते भी नहीं

अभी कुछ और बात होती उस से पहले hi मिताली कारन का हाथ थामे घर के अंदर आयी जिसे देख कर सुरेश बोलै

सुरेश- कारन बीटा तुम ने अर्जुन भैया को क्यों मारा

कारन - काका अर्जुन भैया आरती और सुरभि दीदी के लिए गन्दा गन्दा बोल रहे थे और जब मैंने इन्हे टोका तो ीन्हो ने मेरे पेट में लात मारी तो मैंने पत्थर उठा कर मार दिया वर्ण ये और मारते मुझे

सुरेश - देखा काका मैं ने कहा था न कारन को इस ने अक्षय होगा और पिता की आप क्यों इस के दिल में नफरत भरते रहते है ये सही नहीं है

सुदर्शन- मुझसे जुबान लड़ता है अपने बाप से अरे क्या है ें सिंघो के पास जो तू इन के पीछे दम हिलता फिरता है जैसा तेरा दादा फिरता था जिसकी वजह से ये इतने फल फूल रहे है वर्ण इनकी औकात यहाँ खड़े रह ने की भी नहीं और ये मुझे ज़मीन दे ने से मना कर रहा है

रघुवीर- सुदर्शन में इज़्ज़त करता हु इस का मतलब ये नहीं की तुम कुछ भी कहते रहोगे और में सुनता रहूँगा अगर में तुम्हे कुछ नहीं बोल रहा तो इस की सिर्फ एक वजह है शर्मा परिवार से हमारी पुरखो की यारी और भागीदारी न की तुम्हारी वजह से

सुदर्शन- देख रहा है तू कैसे तेरे बाप से बात कर रहा है खैर तुमसे में कोई उम्मीद भी नहीं रखता मुझे मेरे पौटे अर्जुन पैर पूरा भरोषा है वो ें को इनकी औकात दिखा कर रहेगा और हां इनके साथ कोई रिश्ता तो भूल hi जाओ वर्ण अंजाम बहुत बुरा होगा

सुरेश- ये मेरे बच्चे है पिता जी और आप सिर्फ मेरी माँ के दूसरे पति जिसकी वजह से में आप की इज़्ज़त करता हु बाकि रही ें से रिश्ते की बात तो मिताली बीटा सुनो आज से में कारन hi तुम्हारा पति और जीवनसाथी होगा बोलो तुम अपने बाबा का वादा निभाओगी न

मिताली - जी बाबा आज से हम आप के वाडे को पुरे दिल से निभाएंगे और जब भी आप हमारी शादी करेंगे हम बिना किसी ऐतराज़ के कर लेंगे

रघुवीर- सुरेश बीटा तू ने मिताली हमारी झोली में दाल कर हमें धन्य कर दिया लो मिताली बीटा शगुन

कारन - तो अब मिताली दीदी हमें नहीं मारेगी दादू और माँ की तरह हम्हारी बात भी मानेगी

कारन की बात सुनकर सुरेश मिताली और रघुवीर हसने लगे

सुरेश - हां बीटा नहीं मारेगी पैर अब ये तुम्हारी दीदी भी नहीं है अब से ये तुम्हारी जीवन साथी है जिसका ख्याल तुम्हे साड़ी ज़िन्दगी रख न होगा बोलै रखोगे न

कारन - जी काका रखूँगा पक्का वादा

अर्जुन- उस से पहले में तुझे जान से मार दूंगा कुत्ते के पिल..........

चाटटककक चात्तट्ठाकककक दो जोर दर थप्पड़ गाल पैर पड़ते hi अर्जुन निचे गिर पड़ा जिसे सहारा देकर खड़ा कर के सुदर्शन बोलै

सुदर्शन - तूने आज जो किया है उस का खामियाज़ा तुम सब को भुगत न होगा याद रख न चल बीटा अर्जुन तेरा बाप इनकी गुलामी hi करेगा

दोनों के वह से जाने के बाद सुरेश मिताली से बोलै

सुरेश- देखो मिताली बीटा कारन अभी थोड़ा नासमझ है पैर आगे भविस्ये में ये एक हों हार युवा बनेगा मेरा दिल कहता है इसलिए तुम इस बात का ख़याल रख न की इसे मैंने तुम्हारे लिए चुना है और मुझे यकीन है तुम मेरी बात का मान रखोगी

मिताली- पिता जी आप यकीन रखिये में समझती हु आप ने मेरे लिए कुछ सोचा है तो ाचा hi सोचा होगा इसलिए में भी आप से वादा करती हु की शादी जब भी हो पैर आज से कारन मेरे लिए मेरा जीवन साथी मेरा पति है

रघुवीर- शाबाश मेरी बची भगवान् तुम्हे सदा खुश रखे ाचा सुरेश में चलता हु और तुम भी अर्जुन को प्यार से समझाओ जवान हो रहा है ऐसे गुस्से में कही कोई गलत कदम न उठा ले

सुरेश- ऐसी बात का दर है लका ऊपर पिता जी दिन रात न जाने क्या क्या उसके मैं में भरते रहते है खैर कोई नहीं आप जाइये में समझाता हु उसे

सुरेश दे विदा ले कर रघुवीर सिंह कारन को साथ लिए घर लौट गए जब की सुदर्शन अपने कमरे में बैठा अपनज जीत की ख़ुशी मना रहा था पेग लगा कर क्युकी आज उस ने अर्जुन से पहला गुनाह करवा दिया था कारन की औरतो पैर हाथ डलवा के और कही न कही एक नफरत की चिंगारी भी फूक दी थी सुरेश के खिलाफ


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सुदर्शन पेग पीटा हुआ आगे के बारे में सोच रहा था की तभी सुरेश कमरे में दाखिल हुआ और सुदर्शन को दारु पीटा देख बोलै

सुरेश- ये क्या कर रहे है आप पिता जी जानते है न हमारे खानदान में कभी किसी ने दारु को हाथ तक नहीं लगाया और आप हो की दिन में hi चालू हो जाते हो

Sudharshan-mujhe मत सीखा क्या करना है और क्या नहीं वर्ण दाना पानी भी बंद कर दूंगा समझा अब अगर पेग लगा न है तो बोल वेर न निकल यहाँ से


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सुरेश- आप भूल रहे ये सब शानो शौकत और ज़मीदारी का वारिश में हु और मेरे बाद अर्जुन इसलिए जितनी जल्दी हो सके अपनी आदत सुधार लो और एक बात मेरे बेटे के कान भर न बंद कर दीजिये

सुदर्शन- ाचा बड़े पर निकल आये है तेरे पहले तो तेरी जुबान नहीं खुलती थी ( सुरेश की तरफ कुर्सी घुमा कर देखते हुए बोलै )

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सुरेश - क्युकी बात अब मेरे बच्चो की है इसलिए में अब कोई भी गलत बात सेहन नहीं होगी इस बात को जितनी जल्दी समझ लो उतना ाचा है आप के लिए

सुरेश सुदर्शन को बोल कर कमरे से निकल जहा वो अपना एक पेग और बनाते हुए मैं में आगे के बारे में सोच ने लगा


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अपडेट - 23

सुदर्शन के कमरे से निकल कर सुरेश अर्जुन के कमरे में गया जहा वो गोल गोल चक्कर लगा रहा था जवानी की दहलीज़ पैर कदम रख चूका अर्जुन इस वक़्त बहुत गुस्से में था उसे अपने बाप और कारन पैर बहुत गुस्सा आ रहा जिसे बढ़ावा दिए सुरेश की आवाज़ ने जो पुकारता हुआ उसके रूम में दाखिल हुआ

सुरेश- अर्जुन क्या बेटे ऐसे चक्कर क्यों काट रहे हो कमरे में

अर्जुन- क्यों अब अपने कमरे में टहल ने के लिए भी आप की मंजूरी लेनी होगी

सुरेश - अपने गुस्से को पीना सीखो अर्जुन अक्षर जायदा गुस्सा इंसान को बर्बाद कर देता है और में नहीं चाहता की तुम उस राह पैर आगे बढ़ो मेरे बच्चे

अर्जुन- ये झूठा प्यार मुझे तो मत hi दिखाओ में जानता हु आप मुझे पसंद नहीं करते उस कारन को करते हो

सुरेश - ऐसा कुछ नहीं है मेरे लाल तू मेरा खून है मेरा वारिश बस तो राह से भटक गया है और में तुझे वापस लाना चाहता हु और रही बात कारन की तो वो अब शर्मा परिवार का जमाई है

अर्जुन - राह में नहीं आप भटक गए हो पिता जी और जमाई तो में उसे बन ने नहीं दूंगा फिर चाहे मुझे उसका खून hi क्यों न कर न पड़े

सुरेश - इतनी नफरत क्यों है तुझे उन लोगो से आखिर उन्हों ने तेरा क्या बिगाड़ा है जो तू हमेशा उन्हें घिरना की नज़रो से देखता है मेरी बात मान मेरे बच्चे अपनी पडाहै फिर से शुरू कर और एक नाइक दिल इंसान बन जिसे दुनिया याद करे

अर्जुन - दुनिया जरूर याद करेगी पैर मेरे खाफ को देख लेना और इन सिंघो की तो पूरी जाट hi मिटा दूंगा में अब आप भी जाइये यहाँ से वर्ण कही ऐसा न हो की शुरुवात मुझे आप से करनी पड़े समझे आप ( गुस्से से सुरेश की आँखों में देखते हुए )


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सुरेश को तो मानो काटो तो खून नहीं उसे यकीन hi नहीं हुआ जिस बच्चे को उस ने ऊँगली पकड़ कर चल न सिखाया था आज वो उसे मार ने तक की सोच रहा है इस लिए वो वह से चुप चाप बहार निकल गया वो समझ गया था की उसके सौतेले बाप ने अर्जुन की रगो में दौड़ रहे खून में ज़हर भर दिया जिसे निकाल न शायद अब उस के बस में नहीं है यही सोचता वो घर से निकल कर सीधा रघुवीर के पास गया और उसे सब बताते कर कारन को किसी सेफ जगह भिजवाने और घर की पहरे दरी का समझा कर घर लौटा तो घर में अँधेरा छाया हुआ था जिसे देख कर उसे कुछ अजीब सा लगा पैर सब नज़र अंदाज़ करता वो आगे बढ़ा तो एक भरी भरकम चीज़ उसके सर से टकराई जिस के टकराते hi वो बिना चीखे hi ज़मीन पैर गिर पड़ा जिस के साथ उसके सर से खून बहने लगा और सांस उखड ने लगी

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सुदर्शन- जा अब ऊपर जा के वारिश बन यहाँ में संभल लूंगा और तुम लोग जाओ उस सिंघा के घर वालो ऊपर की सैर करवा के आओ और हां उस पिल्लै को मारना नहीं यहाँ लेकर आना उसे मेरा पौता अपने हाथो से जहनुम की सवारी पैर भेजेगा और हां इस की लाश को भी यहाँ से हटा कर साफ़ करो

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बात पूरी होने से पहले hi सुरेश की लाश को घोषित कर वह से हटवा दिया गया जिस के बाद सुदर्शन अर्जुन से बोलै

सुदर्शन- ये सब ख़तम कर ने के बाद तुम सुबह होते hi मिताली को बहार भेज दो पढ़ ने के लिए पैर याद रहे उसे जरा भी बहनक नहीं लग नई चाहिए समझे वर्ण वो जाने से इंकार कर देगी

अर्जुन - जैसा आप कहे दादा जी में तो बस उन सिंघो की मौत की खबर का इंतज़ार कर रहा हु फिर पूरा गाओं हमारा होगा

सुदर्शन- पूरा गाओं hi नहीं बेटे यहाँ से पैदा हो ने वाली साड़ी दौलत हमारी होगी देख न तुम कल एक नयी सुनहरी किरण निकलेगी

वही सुरेश के जाते hi रघुवीर जी सतर्क हो गए थे क्युकी वो सुदर्शन को अचे से जानते थे की वो देर नहीं करेगा ऐसा कुछ कर ने में इसलिए उन्होंने पहरा डबल कर दिया था और घर की औरतो को एक कमरे में रहने का बोल कर कारन को उसी वक़्त एक भरोशे के आदमी के हाथो क्सक्सक्स सेहर भिजवा दिया और खुद शेरा के साथ आने वाले तूफ़ान का इंतज़ार कर ने लगे

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और थोड़ी देर बाद ठीक वही हुआ जो उन्होंने सोचा था हवेली में भागदौड़ सी होने लगी पैर रघुवीर जी इस सब के लिए पहले hi तैयार थे इसलिए हमलावर नाकाम याब हो गए और एक एक कर के मर ने लगे जिस पूरी हवेली चीखो से गूंज उठी सभी हमलावर मारे गए


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हर तरफ खून के चीते बिखरे पड़े थे ऐसा लग रहा था जैसे आज हवेली खून से नहला दी गयी हो सब को ख़तम कर ने के बाद खून से नहाये रघुवीर जी अपना चस्मा ठीक करते वो अपने आदमियों को लिए वो सुदर्शन की हवेली की तरफ चल दिए

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वही दूसरी तरफ सुदर्शन को पता चल चूका था जिस के बाद hi वो अर्जुन को साथ लिए वह से गायब हो गया मिताली को बेहोश कर के जिस के कुछ महीनो बाद जब उस ने हुम्ला बोलै तो परताप अपना हाथ गवा बैठा और राहुल को ज़िंदा जला दिया गया जिस के बाद से रघुवीर आज तक अपने गाओं और वह की सम्पत्ति को बचा ने की भरपूर कोशिश करते रहे है जिस में वो कभी नाकाम तो कभी सफल भी हुए

फ्लैशबैक एन्ड

मिताली के वह से जाने के बाद कारन भी उसके पीछे पीछे चल कर पीछे से उसे बाहो में भर कर खड़ा हो गया तो मिताली मुस्कुराते हुए बोली


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मिताली -बड़ा प्यार जाता रहे हो मिस्टर इरादे तो नाइक है न तुम्हारे

कारन - हां तो प्यार तो आएगा hi इतने सालो बाद अपनी बीवी से जो मिला हु और सच पूछो तो अब तुम से दूर हो ने का मैं नहीं है मेरा बिलकुल भी

मिताली- जानती हु और में भी अब दूर नहीं रहना चाहती इसलिए मैंने सोच लिया है में जल्द hi अर्जुन भाई से बात करुँगी हमारी शादी की अगर वो माने तो ठीक वर्ण किसी मंदिर में शादी कर लेंगे

कारन - जैसा तुम कहो बाँदा हाज़िर हो जायेगा बस तुम इशारा कर देना हल्का सा सब के सामने उठा ले जाऊंगा अपनी जान को

कारन की बात सुनकर मिताली ने प्यार से सर घुमा कर उसकी आँखों में देखा जहा उसे अपने लिए बेइन्ताह प्यार नज़र आया

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मिताली - दूरी ने बहुत कुछ सीखा दिया जनाब को पैर याद रहे ये बीवी थोड़ी मॉडर्न है

कारन - हम्म पता है मुझे बता ने की जरुरत नहीं है जान तुम तो बस जल्द से जल्द मेरी ज़िन्दगी में आ जाओ मुझे बहुत प्यार कर न है तुम्हे हर तरह से

मिताली - जैसे मर्ज़ी और जितना चाहो प्यार कर लेना में तुम्हारी hi हु हमेशा से जान ( कारन की आँखों में देखते हुए)

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कारन - जानता हु मिताली पैर अब महसूस कर न चाहता हु

प्यार से मिताली की आँखों में देखते हुए अपने होठ मिताली के होठ से जोड़ दिए जिस का सुवागत मिताली ने आंख मुंड कर किया


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जिसे दोनों ने सकूं से महसूस किया जिस के बाद जब दोनों अलग हुए तो एक दूसरे को देख कर मुस्कुरा उठे

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मिताली- उम्र में hi छोटे हो हरकतों में नहीं अब चलो उधर बैठो में कॉफ़ी बना कर लाती हु

कारन - कॉफ़ी फिर कभी मिताली आज तो में तुमसे मिल ने आया था अब मुझे जाना होगा दादू को बिना बताये आया हु वो टेंशन में होंगे

मिताली- इतनी जल्दी अभी तो आये हो

कारन - तुम्हारे पास जायदा देर रुका न तो खुद को रोक नहीं पाउँगा बहक ने से इसलिए फिलहाल मेरा जाना hi ठीक रहेगा

मिताली- अगर आप का मैं है कुछ कर ने का तो में रोकूंगी नहीं आपकी होने वाली पत्नी हु में आप का हक़ है मुझ पैर

कारन - जानता हु तुम नहीं रोकेगी तभी तो जाना चाहता हु इसलिए अब कोई सवाल नहीं समझी चुप चाप चलो

मिताली तो मंत्रमुग्ध सी कारन को देखते हुए उसके साथ चल पड़ी


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चलते हुए जब दोनों निचे पहुंचे तो अर्जुन को थोड़ा सकूं मिला की जल्दी hi दोनों निचे आ गए है इसलिए झूटी मुस्कान लिए मिताली से बोलै

अर्जुन- क्या हुआ गुड़िया बड़ी जल्दी आ गए हो गयी बाते

मिताली- कहा भैया इन्हे जाना है इसलिए वर्ण मेरा तो मैं नहीं था अभी खैर कोई नहीं अब तो वैसे भी इनके साथ गुज़ार नई है साड़ी ज़िन्दगी तो बाते भी होती रहेंगी क्यों

कारन - बिलकुल मेरी जान बस थोड़ा इंतज़ार फिर ले जाऊंगा तुम्हे तुम्हारे भैया की नगरी से हमेशा के लिए पैर फिलहाल मुझे इज़ाज़त दो में चलता हु और हां अर्जुन भैया जी ख्याल रखना मेरी होने वाली बीवी bye bye


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अपडेट -24

कारन के वह से जाते hi सुदर्शन की गाड़ी हवेली में दाखिल जिस में से उतारते hi सुदर्शन अर्जुन से बोलै

सुदर्शन - ये गाड़ी में लड़का कोण था अर्जुन और इतनी शान से क्यों निकला है

अर्जुन जवाब दे उस से पहले hi मिताली चहकते हुए बोली

मिताली- वो इस हवेली के जमाई और मेरे पापा की पसंद कारन सिंह थे शर्मा जी

सुदर्शन- क्या वो रघुवीर का पिल्ला था और तुमने उसे ऐसे hi जाने दिया अरे टुकड़े टुकड़े क्यों नहीं कर दिए उस हरामी के

मिताली - जुबान सम्भालिये शर्मा जी वो पति है मेरे समझे आप ऐसा न हो की हम हमारी तमीज भूल जाये

सुदर्शन - देख रहा है कैसे बात कर रही है ये अपने दादा से और तू चुप चाप खड़ा सुन रहा है आखिर क्यों तूने इसे इतनी छूट दे राखी है

मिताली - उनसे पहले में जवाब देती हु आपको सुनिए न तो आप मेरे दादू है न मेरा आप से कोई रिश्ता है और रही बात मेरे पति की तो वो पिल्ला नहीं शेर है जिस दिन सामने आओगे न फाड़ के रख देगा और अगर दोबारा उनके बारे में कुछ गलत बोले तो कही उस से पहले में hi गोली न मार दू तुम्हे इसलिए अगली बार सोच समझ कर मुँह खोल न

अर्जुन - गुड़िया ये क्या तरीका है बड़ो से बात कर ने का हां और क्या पति पति लगा रखा है तुम ने में कुछ कहता नहीं इस का मतलब ये नहीं की तुम कुछ भी बोलती रहोगी आज मेरी बात कान खोल कर सुन लो तुम्हारी शादी कब और किस से करनी है ये में टॉय करूँगा न की तुम समझी अब जाओ अपने रूम में

मिताली - ये हक़ किसी के पास नहीं है भैया क्युकी ये फैसला मेरे पापा ने कर दिया था मेरा हाथ कारन जी के हाथ में देकर और मर ने से पहले मुझसे कसम लेते हुए बोले थे की में कभी उनका साथ न छोड़ू तो ये तो आप भूल hi जाओ की में किसी और से शादी करुँगी इसलिए आप तो इन्हे समझा दो अगली बार में अपने पति के खिलाफ कुछ नहीं सुन ने वाली सीधा गोली मरूंगी हां नहीं तो तुमने भी सुन hi लिया होगा ( जाते जाते मुस्कुरा कर मुद के सुदर्शन को गोली का इशारा करते हुए )


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मिताली की बात सुनकर जहा अर्जुन के जबड़े भींच गए तो वही सुधारसँ की झाते सुलग गयी जिस से भीं भिनाय हुआ बोलै

सुधारसँ - ये तेरी hi छूट का नतीजा है मैंने पहले hi कहा था इसे भी तेरे बाप के साथ hi निपटा देते है पैर तू नहीं माना अब देख कैसे जुबान चला रही है

अर्जुन - सष्ठ सोच न भी मत कुछ ऐसा बहिन है वो मेरी जान बस्ती है उस में उसे मार न तो दूर की बात है उसकी आँखों में आशु का कटरा भी सेहन नहीं कर सकता में

सुदर्शन- तो क्या उस हरामी से शादी करवाएगा इस की

अर्जुन - ऐसा कभी नहीं होगा बल्कि जल्द से जल्द उसकी गर्दन काट के उसके दादा की आँखों के सामने उसकी पौतियो को नंगा नचाउंगा फिर मिताली खुद बा खुद उस हरामी को भूल जाएगी

सुदर्शन - बहुत जुबान चल ने लगी है दोनों की एक बार बस उन सिंघो का खत्म हो जाये फिर तुझे तेरे बाप के पास भेज कर उस रंडी मिताली को नंगी कर के दिन रात नंगा न घुमाया तो मेरा नाम सुदर्शन नहीं( मैं में ख़याली पुलाव बनाते हुए)

यहाँ एक अलग hi सोच जनम ले रही थी तो वही कारन मुस्कुराता हुआ अपने घर पंहुचा जहा उसके दादा उसे टहल ते हुए दिखाई दिए तो जो उसे देख कर मुस्कुराते हुए बोले

रघुवीर - हम्म तो मिल आये अपनी बीवी से

कारन - जी दाद्दु मिताली ने खुद से बुलावा भेजा था वो भी पुरे अधिकार से तो इंकार नहीं कर पाया माफ़ कीजियेगा अगर आपको बुरा लगा हो तो

रघुवीर - बुरा नहीं लगा बस थोड़ी फ़िक्र महसूस हो रही थी आखिर है तो वो दुश्मन का hi घर

कारन- दुश्मन hi सही पैर ससुराल भी तो है न दाद्दु और वैसे भी आपकी बहु जल्द से जल्द अपने घर आना चाहती है

रघुवीर - दिल तो हमारा भी बहुत है मिताली बिटिया को देख ने का पैर क्या करे

कारन - आप जब कहोगे तब उठा लाऊंगा दाद्दु में तो आपकी हां का इंतज़ार कर रहा हु

रघुवीर - ठीक है सोच कर बताता हु अब तुम जाओ और खाना खा कर आराम करो

कारन - जी दाद्दु

रघुवीर से बात करके कारन सीधा ऊपर की तरफ गया आरती से मिलने पैर जैसे hi दरवाज़े को ढलकया तो सामने आरती कपडे चेंज कर रही थी जिस से उसकी नंगी पीठ पैर काली ब्रा का हल्का नज़ारा उस मिल गया जबकि जैसे hi आवाज़ की तरफ मुड़ी आरती ने कारन को देखा तो हड़बड़ाते हुए बोली

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आरती - बाबू बहार जाओ में कपडे चेंज कर रही हु

कारन - जी दीदी सॉरी वो मुझे पता नहीं था

इतना कह के कारन बहार आ गया और सीधा सुरभि के रूम में घुस गया जहा सुरभि कुर्सी पैर बैठी थी तो कारन दूर लॉक कर के उसके पास जा कर बोलै

कारन - क्या पढ़ रही हो दीदी

सुरभि - कुछ नई भाई बोर हो रही थी तो पुराणी नावेल पढ़ रही थी तू बता कहा गया था

कारन - कही नहीं दी यही घूम रहा था वैसे आप का दर्द कैसा है अब

सुरभि - वो तो कब का दूर हो गया क्यों फिर से देने का मैं है क्या तुम्हारा

कारन - बिलकुल अगर आप चाहो तो जरूर वैसे मुझे लगता है आप का मैं तो पहले से रेडी है क्यों ( सुरभि की चुकी के दाने को मसल ते हुए )


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सुरभि - अब तू ऐसे छेद कहानी करेगा तो मैं तो करेगा hi न आआह्ह्ह्ह आराम से भाई

कारन - आप को देख के कण्ट्रोल hi नहीं रहता खुद पैर तो क्या करू दी

सुरभि - आअह्ह्ह बस मुझे प्यार कर मेरे भाई मेरा बहुत मैं है आज तेरे साथ वो पल फिर से बिताने का

कारन - तो देर किस बात की है दीदी चलो आप की इच्छा पूरी करते है


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सुरभि - ऐसे पीछे खड़ा रहेगा तू शुरुवात कैसे होगी मेरे भाई सामने आ ना स्स्स्सह्ह्हह्ह ऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

बात ख़तम होते hi दोनों भाई बहिन के होठ एक दूसरे से जुड़ कर मीठा रसपान कर ने लगे

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जिस्म बढ़ती गर्मी और एक दूसरे की रगड़ से जिस्म चीटिया सी रेंग ने लगी थी जिसकी तड़प को दूर कर ने के लिए दोनों मचल उठे जिस में एक कदम आगे बढ़ाते हुए सुरभि कारन के होठो को चूसते हुए कारन के मुसल को बहार निकल के मसल ने लगी


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दुनिया से बेफिक्र दोनों बहिन भाई एक दूसरे के अंगो से खेल ने में मगन कब बिस्तर तक पहुंचे ये भी खबर न हुई कुछ खबर थी तो बस ये की अब रुक न मुमकिन नहीं जिसके चलते सुरभि ने मचलते हुए अपनी पेंटी उतार फेंकी जिस के उतारते hi कारन ने एक पल न गवाया अपने मुसल को सुरभि की छूट के भीतर उतार ने में

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सुरभि - उउउउउम्मम्मम्म म्मम्माआआअह्हह्ह्ह्ह स्स्स्साआह्ह्ह्हह्ह एआरआम से भाई अभी इतनी भी नहीं खुली जो एक बार में hi अंदर समां लू स्स्स्सह्ह्ह्ह ऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आआ ह्ह्हह्हह्ह्ह्ह मेरे भईईई ये सच में बहुत ज़ालिम है तेरा घोडा पूरा अंदर जा कर लगता है

कारन - ऊऊह्ह्ह्हह्ह दीदी कुछ न कहो आप सच में बहुत मजा आ रहा है और आपकी छूट का तो सस्शह्ह्ह्ह पूछो hi मत किसी भट्टी की तरह तपी पड़ी हैई आआह्ह्हस्स्स्शह्ह्ह


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सुरभि - तो बुझा दे इसकी तपन को और निकाल दे साडी गर्मी आआह्ह्ह्ह स्स्स्सह्ह्ह्ह मममममहहहहहहह एआईसीई हीई आआअह्हह्ह्ह्हजहज बहुत ाचा लग रहा है उउउउउउफफ्फ्फ्फफ्ग mmmmmaaaaaaaaaaa कितना सकूं मिल रहा है आआअह्ह्ह्हह भाआईईई थोड़ी स्पीड बढ़ा उउउउम्म्म हहहहह जायदा देर नहीं झेल पाऊँगी मेऐईंण्णन aaaaaahhhhhhhhhhh स्स्स्सह्ह्ह्हआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ममअअअअ मारर्र गाय्यीइइइइइइइ करननननन ooooohhhhhhhhhhhh इतनी तेज़ नाहीईईओ bhaaaaaaiiiiiiiiiio ासाहह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मम्मीईई gaaaayyyyyiiiiiiiiiiiii aasaaahhhhhhhhhhhhhhhhh

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कारन - माफ्फ कर ना दीदी पैर अब रुकना मेरे बस में नाहीईई आआअह्हह्ह्ह्ह ककययआआ छुट्ट्ट्ट हीी अआप कोई उउउउउफफ्फ्फ्फ़ कसाम्म्म्म सीए बहुत बेचैंन था मइईईईन्न्नण

सुरभि - ाअय्यियीईईई माआआ भऐई आराम सीए रुकने को नहीं कह रही मेई भीईई आआआहहहहह स्स्स्सस्छ्हःहः ऑर्डर बेचैंन था तो मेरे पास क्यों नाहीईई आआआआ ाआहजहहहहहह bhaaaiiiiiaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh ससससससमममममममआयएस

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कारन - ोुह्ह्ह्ह दी बुस्स्सस्स थोड़ीई देर आआअह्हह्ह्ह्ह मिएनन भी ाआयास बुस्स्सस्स्स्ड उउउउउफफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ mmmmmaaaaaahhhhhhhhhhhhh ममैंनंन्न ाआयीयआआअ ddiiiiiiiiiii aaaaaashhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh


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गरम फुहार सुरभि की कमर और गांड पैर रुक रुक कर गिर ने लगा जिसका एहसास सुरभि को बहुत सुखद एहसास करवा रहा था जिसे महसूस करके वो मुस्कुराती हुई बोली

सुरभि - सच में एक बार को तो यमराज के दर्शन hi करवा देता है तू पैर बाद जो मजे की लहर उठती है न जिस्म में उसका तो पूछ hi मत कसम से कितनी वीरान थी मेरी ज़िन्दगी तेरे आने से पहले थैंक यू यार इतना सुखद एहसास करा ने के लिए

कारन - में भी तो आप से दूर रह कर ऐसी hi ज़िन्दगी जी रहा था दीदी प्यार तो घर आ कर नसीब हुआ है मुझे ( सुरभि संग चादर में लेत ता हुआ बोलै )


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सुरभि - चल छोड़ पिछली बाते वो तो दर्द hi देंगी और में दर्द याद कर ने के मूड में बिलकुल नहीं हु बल्कि में तो अपने भाई की बाहो में सोने के मूड में हु

कारन - तो सो जाओ वैसे भी मुझे भी नींद आ रही है ( प्यार से सुरभि की पीठ पैर हाथ फेरते हुए )
 
अपडेट - 25

कारन की आँख खुली तो वो बीएड पैर अकेला लेता हुआ था और सामने सुरभि कड़ी हुई अपनी ड्रेस की ज़िप को बंद कर ने की कोशिश कर रही थी जिसे देख कर कारन सुरभि से बोलै

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कारन - मुझे उठा दिया होता दीदी में अपने हाथो से कपडे पहना देता आप को

सुरभि - रहने दे भाई जानती हु तुझे की तू कितना शैतान है कपडे पहनता नहीं बल्कि फिर से शुरू हो जाता मुझे मसल ने को

कारन - वाह क्या बात है आप तो भविष्य में क्या होगा वो भी पता चल जाता है

सुरभि - अब जिस का तेरे जैसा भाई हो तो उसे कुछ तो सोच न hi पड़ेगा न अपनी सेफ्टी के लिए

कारन - हां जैसे आप का तो मैं था hi नहीं रुको आप अभी बताता हु आप को तो

कहते hi कारन ने सुरभि को लपक लिया और उसके होठो को चूमता हुआ उसे दिवार की तरफ ले जाने लगा गॉड में उठा कर


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सुरभि तो घु घु करती रह गयी और कारन उसके होठो को जब तक चुस्त रहा जब तक सांस लेने में तकलीफ नहीं हो ने लगी तो सुरभि के होठो को छोड़ कर बोलै

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कारन - छ्हम्म मजा आया या फिर से करू

सुरभि - बहुत मजा आया यार और अब मैं कर रहा है की एक बार और हो जाए

कारन - अरे तो फिर देर किस बात की है आओ न करते है फिर से

सुरभि - नहीं भाई अभी टाइम नहीं माँ बुला कर गयी इसलिए अभी तो बिलकुल भी नहीं समझा कर


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कारन - हम्म चलो कोई बात नहीं बाद में कर लेंगे कोण सा आप या में कही भागे जा रहे है

सुरभि - मेरा प्यारा भाई लव यू सो मुछ

कारन - लव यू 2 दीदी अब लाओ घुमु में आपकी ज़िप लगा देता हु


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सुरभि - थैंक्सस भाई अब निचे जा रही हु थोड़ी देर में तुम भी निचे आ जाना

कारन - जी आप जाइये में फ्रेश हो कर आता हु अभी

सुरभि - चल ठीक है बाद में मिलते है

हलकी फुलकी छेड़खानी के बाद दोनों भाई बहिन निचे हॉल में पाउच गए जहा रघुवीर जी पहले से मजूद थे जो कारन को एक नज़र देख ने के बाद सबको देखते हुए बोले

रघुवीर - देखो बच्चो जो बात में बता ने वाला हु वो ख़ुशी की बात भी है और चिंता का विषय भी इसलिए मेरी बात ध्यान से सुन न आप सभी

कारन - खुशिया आप देखिये दादू और चिंता मुझ पैर छोड़ दीजिये अब आप अकेले नहीं हो में हु आप के साथ

रघुवीर - में जानता हु कारन बेटे की तुम हमेशा मेरे साथ हो इसलिए तो में बिना झिझक के ये फैसला ले पाया हु जो इतने सालो से नहीं ले पाया

कारन - तो फिर अब वैसे hi अंदाज़ में बोलिये जैसे पहले बोलै करते थे

रघुवीर - दरसल बात ये है की आरती बेटी के लिए क्सक्सक्सगढ़ से कुंवर का रिश्ता आय्या है जिसे में काफी समय से टालता आ रहा था पैर अब कारन बेटे की बहादुरी देख मुझे भी हिम्मत मिली है इसलिए मैंने उनका रिश्ते के लिए हां कर दी

कारन - ये तो बड़ी ख़ुशी की बात है दादू और इसे आप चिंता का विषय बता रहे थे हद है

रघुवीर - मेरी चिंता का विषय अर्जुन और वो कपटी सुदर्शन है जो शादी की आड़ में कुछ भी कर ने से चुकेगा नहीं

कारन - चूक हम भी नहीं करेंगे दादू इसलिए मैंने गुरु जी से कह कर एक इंसान को यहाँ बुलाया है जो अकेला 20 पैर भरी है क्युकी में हर वक़्त हर जगह नहीं हो सकता इसलिए आज से ये आप सब की देखभाल करेगा

रघुवीर - कोण है वो

कारन - रोमन प्ल्ज़ के इनसाइड

कारन की आवाज़ सुनते hi एक हत्ता कट्टा पहलवान सा दिख ने वाला युवक धीरे से चलते हुए हॉल में गया जिसकी चाल hi उसकी रूप रेखा का वर्णन कर रही थी जो रघुवीर जी को देखता हुआ उनका करीब आ कर खड़ा हो गया जिसे देख कर रघुवीर जी की आँखों में भी चमक आ गयी


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कारन - आओ रोमन इनसे मिलो ये है मेरे ग्रांडफादर

रोमन कारन की बात सुनकर रघुवीर जी परनाम करते हुए बोलै
 
अपडेट -26

रोमन - परनाम करते है दादा जी गुरु जी ने बहुत कुछ बताया है आप के बारे में और आज आप को देख कर यकीं भी हो गया की कुछ गलत नहीं बताया था उन्होंने

रघुवीर - ये तो उनका बड़प्पन है बीटा वर्ण में बुद्धा इतनी तारीफ के काबिल नहीं खैर उनकी बाते तो होती रहेंगी पहले तुम नास्ता कर लो लम्बे सफर से आये हो

रोमन - मुझे यहाँ आये 2 दिन हो गए है दादा जी बस आप से मिल न आज हुआ है वर्ण तो हवेली का हर हिस्सा मेरी निगरानी में hi है 2 दिन से वो तो कारन ने मना किया है अभी किसी की भी नज़र में आ ने के लिए इसलिए

रघुवीर - तुम सच में बहुत आगे की सोच रखते हो कारन बेटे पैर क्या तुम ने रोमन बेटे को खतरे के बारे में अवगत करा दिया है न जिस में जान भी जा सकती है

रोमन - मुझे हर छोटी से छोटी सी बात भी कारन ने पहले hi बता दी जिस के बाद hi ये मुझे यहाँ लाये है इसलिए आप यकीन रखिये न तो मेरी जान जाएगी न hi आप के परिवार के किसी सद्श्ये की

रघुवीर - भगवान् करे ऐसा hi हो जैसा तुम बोल रहे हो बाकि प्रभु शिव शंकर की मर्ज़ी

रघुवीर जी को कारन की सोच और काम पैर आज गर्व महसूस हो रहा था जिस से मुस्कुराते हुए वो अपने कमरे में चले गए आराम कर ने

रघुवीर जी से बात कर ने के बाद कारन गाओं में घूम ने जाने से पहले अपनी माँ साक्षी से मिल ने गया जो अपने रूम कपडे चेंज कर रही थी जो इस वक़्त सिर्फ ब्रा और पेंटी में थी जिस में से उसकी चूचिया बहार झांक रही थी जिन्हे कारन खड़ा हुआ घर ने लगा जो उसकी आवाज़ सुनकर उसे देख रही थी मुस्कुरा कर इस बात से अनजान की वो किस हालत में है


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कारन - वावू माँ क्या बात है आप तो घर में आग लगा ने की फ़िराक में हो

कारन की आवाज़ सुनकर साक्षी को अपनी इस्थिति का ख्याल आया तो वो शर्म से अपनी आंखे बंद करके धीरे से बोली


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साक्षी - प्ल्ज़ धीरे बोलो कारन कोई सुनेगा तो क्या सोचेगा और पहले तुम बहार जाओ मुझे कपडे पहन ने है मुझे बहुत शर्म आ रही है

कारन - मुझसे क्या छुपा है माँ में तो इस सुन्दर काय को और भी अचे से देख चूका हु या यु कहु की महसूस भी कर चूका हु तो मुझसे क्या शर्माना पैर अगर आप फिर भी चाहती है तो में बहार जा रहा हु आप इत्मीनान से कपडे पहन लो

कारन की बात सुनकर साक्षी ने पलट कर कारन की तरफ देखा तो कारन वह नहीं था तो अपनी साड़ी को जिस्म पैर लपेटे हुए जाते हुए कारन को देख कर मैं में सोच ने लगी

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साक्षी - तेरा यु बिना कुछ किये चला जाना hi तो मुझे हर बार तेरा और भी दीवाना बना देता है मेरे लाल बस तू ऐसे hi सबर रख फिर देख न सही मौका मिलते hi तेरी माँ तुझे अपना सब कुछ सोप देगी जिस का तू hi असली हक़दार है

साक्षी के रूम से निकल कर कारन गाओं की हरियाली और दूर दराज़ से पानी लाती औरतो को देखता हुआ खेतो की तरफ बढ़ गया


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खेतो में पहुंचते hi उसकी नज़र शेरा की बीवी सुनीता पैर पड़ी जो बहुत hi कामुक नज़रो से उसे मुस्कुरा कर देख रही थी तो कारन मुस्कुरा कर उस के पास जा कर बोलै

कारन - क्या बात है भाभी बड़ा मुस्कुरा रही ऐसा क्या मिल गया तुम्हे यहाँ वीराने में

सुनीता - वो छोटे ..ओह्ह्ह मतलब की देवर जी बहुत प्यास लगी थी जिसे बुझा ने की आस दिखी है शायद आज बुझ भी जाए( वैसे hi आँखों में देखते हुए बोली )


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कारन - ाचा जी पैर मुझे तो यहाँ कही भी पानी नज़र नहीं आ रहा आप को कहा दिख गया

सुनीता - मैंने कहा न आस दिखी है अब अगर आप अपने औज़ार से गड्ढे में खुदाई करेंगे तो पानी भी आ जाएगा

कारन - वो तो में कर दू पैर आप को नहीं लगता ये जगह सेफ नहीं होगी आप की प्यास बुझा ने के लिए

सुनीता - इस सेफ क्या होगा जहा आज कोई नहीं आ ने वाला सब काम व्यस्त है बस अब तो आप की हां का इंतज़ार है देवर जी

कारन - अगर ऐसी बात है तो फिर इतनी दूर क्यों कड़ी हो भाभी जरा पास आओ और इन रसीले होठो का रसपान कराओ...


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कारन के होठो का एहसास होते hi सुनीता के जिस्म हलचल मच गयी शेरा की तरफ से न संतुस्ट सुनीता कारन की बाहो झूलती चली गयी और जल्द hi दोनों खेतो की धरदारी ज़मीन को गद्दा मान कर एक दूसरे के होठो मशोष हो कर चूस ने लगे

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सुनीता की छूट ने रिस न चालू कर दिया था जिस का गिला पैन उसे एक अलग hi सुख की अनुभति कर व ने लगा जिस प्यार की तलाश में वो कारन की तरफ आकर्षित हुई थी वो एहसास उसकी छूट पैर दस्तक दे रहा था जिस में मचलती वो सिसकते हुए बोली

सुनीता - देवर जी बस अब और देर मत करो और बहार निकालो अपने इस मुसल को ोुह्ह्ह्ह कितना बड़ा है ये ये तो मेरी छूट की अचे से खुदाई कर देगा ुउउम्म

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हहहहह कितना गरम महसूस हो रहा है

कारन - आप तो कुछ जायदा hi उतावली हो रही हो भाभी लगता है बहुत जल्दी है आप को इसे अपनी छूट में लेने की

सुनीता - जल्दी नहीं देवर जी बहुत तदपि हु में इस के लिए पैर अब और देर नहीं दाल दो पूरा का पूरा इसे मेरी छूट में और भर दो अपने गरम पानी से देवर जी बहुत तंग किया है इस ने यकीन नहीं तो खुद देख लो


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सुनीता की गोरी गांड सामने आते hi कारन का लोढ़ा झटके खाने लगा तो वो सामने घोड़ी बानी सुनीता की छूट को हाथ से फैला ने लगा तो सुनीता अपना हाथ पीछे ले जा कर कारन के हाथ को हटा कर उसके लुंड को मसलते हुए बोली

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सुनीता - देवर जी उंगलियों का एहसास बहुत कर चुकी है ये आज तो आप इसे लुंड का एहसास करा दो बस और अब और देर नहीं बस दाल दो अब इसे मेरी छूट में आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बताए कर तो डालटीई स्स्स्सह्ह्ह्ह ममममायआ फायतत्त गयीईइ रईईईई ज़ाएलीइमम्मम्म ऊऊह्ह्हह्ह स्स्स्सह्ह्हह्ह्ह्ह

कारन - मेरी प्यारी भाभी तेरी फूली हुई छूट आराम से छोड़ ने के लिए नहीं बानी इसे तो ऐसी hi चुदाई चाहिए जैसी में कर रहा हु


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सुनीता - ह्ह्हम्म्म्म आआह्ह्ह्हह्ह देवर जी बहुत दर्द हो रहा हीी आआह्ह्ह्ह थोड़ा आराम से कर लो पूरा अंदर तक लग रहा हीी आआअह्ह्ह्हह सससससस मममममआ ह्ह्हह्ह्ह्ह uuuuufffffffffffffff बहुत मोटा हैआईईई आआअह्हह्ह्ह्हह म्मम्माआआआ स्स्स्सस्स्स्शह्ह्हह्ह्ह्ह ममममआ ोुह्ह्हह्हह्ह्ह्ह

कारन - क्यों भाभी मजा नहीं आए रहा है क्या आपको मुझे तो बहुत आ रहा है

सुनीता - आअह्हह्ह्ह्ह पहले दर्द से उभर जाऊ फिर मजाआ भी लुंगीय उउउउम्मम्म asssshhhhhhhhhhh आआआअह्हह्ह्ह्हह ooooooohhhhhhhhhh मम्माआआ देवर जीईई सोचा नहीं था आआअह्ह्ह्ह इतना अंदर तक्क भी लुंड जाता हैआईईई ह्ह्ह्हम्म्म्म sssshhhhhhhhhhh aaaaahhhhhhhhhh


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सुनीता कारन के हर झटके पैर सिहर उठ रही थी पैर अब कही न कही उसकी छूट के बढ़ते गीलेपन से उसे भी कही न कही एक सकूं मिल ने लगा था जिसे महसूस करती वो हर धक्के का मजा लेने लगी

सुनीता - ूउम्मंहहहह देवर जी आईसीए hi आप ने तो चुदाई का असली सुख दे दिया मुझे ऊऊह्ह्ह्हह्ह म्मम्माआआ मेरी छूट ऊऊफफफफ्फ्फ्फ़ बहुत hi प्यारा और मीठा मीठा सा एहसास हो रहा है आआह्ह्ह्हह mmmmmmaaaaaaaaaaaa


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कारन - मुझे भी नहीं लगा था की आप की छूट इतनी टाइट होगी पैर आप तो उम्मीद से बढ़ कर निकली भाभी कसम से

सुनीता - आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह टाइट टी होगी hi न देवर जी आप के भैया सारा ध्यान पहलवानी में जो देते है आआह्ह्ह्हह जोरररर सीईए मुझे कुछ हो रहा है देवर जीईई aaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh sssssssshhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhaaaaaaahhhhjhhhhhhhhhhmeeeee gaaayyyiiiiiiiiii

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सुनीता का जिस्म अकड़ ते हुए झटके खा कर झाड़ ने लगा था अभी वो सकूं ले पाती उस से पहले hi दोनों की नज़र दूर से आती औरत पैर पड़ी जो उनकी तरफ hi आ रही थी जिसे देखते hi सुनीता के हाथ पाँव फूल गए और वो आगे को खिसक कर झाड़ियों में घुस गयी अपने कपडे ले कर
 
अपडेट -27

सुनीता के झाड़ियों में ओझल होते hi कारन अपने खड़े लुंड मुश्किल से पेण्ट में एडजस्ट करके आती हुई औरत के करीब गया जो उसे देखती हुई उसकी तरफ hi आ रही थी जिस के पास पहुंचते hi कारन बोलै

कारन - समय बुआ आप यहाँ अकेली इस तरह


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समय - क्यों मेरा खेतो पैर आना मना है क्या जो तुम मुझसे ऐसे पूछ रहे हो

कारन - नहीं मेरा वो मतलब नहीं था वो तो आप को अकेले यहाँ देखा तो मुँह से निकल वैसे आप ने बताया नहीं की यहाँ कैसे

समय - घर में घुटन सी हो रही थी तो सोचा खेतो पैर घूम औ क्युकी तुम्हारे पास भी तो अपनी बुआ की लिए टाइम नहीं है

कारन - ऐसा कुछ नहीं है बुआ चलिए घर चलते है फिर खूब बात करेंगे

समय - नहीं अभी नहीं पहले मुझे थोड़ा सकूं दे दो जो तुम घर पैर नहीं दे पाते

कारन - यहाँ खुले में आप समझ रही हो नहीं घर चलो फिर कुछ सोचता हु

समय - बहुत सोच चुके तुम और बहुत तड़प चुकी में अब और नहीं समझे चलो मेरे साथ में एक सेफ जगह जानती हु ( कारन का हाथ पकड़ कर उसे खींचते हुए बोली )

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कारन न चाहते हुए भी समय का हाथ थामे उसके पीछे चल न लगा क्युकी अधूरा तो वो भी रह गया था समय के आ जा ने से जिस की वजह से उसके लुंड में तनाव काम नहीं हुआ था और अब समय का खुला निमत्रण उसे उसकी दवा लग रही थी इस लिए पीछे पीछे चल पड़ा

समय के जिस्म में तो अभी से झुरझुरी सी मच ने लगी थी आगे के बारे में सोच कर hi और मचे भी क्यों न इतने दिनों बाद मौका जो हाथ आया था उसके इसलिए कारन को अपने साथ लिए पैदा की चार दीवारी में पहुंचते hi उसके अध् खड़े लुंड को बहार निकाल कर उसे देखते हुए बोली


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समय - ह्ह्हम्म्म बहुत तड़पाया है इस ने मुझे आज इसे अपनी छूट में लिए बिना नहीं रुक ने वाली में फिर चाहे मेरी छूट hi क्यों न फैट जाए ऊऊफफफफ्फ्फ्फ़ कितना गरम है ये

कारन - तो ठण्ड कर दो बुआ इसे तुम्हारे पास तो 3 /3 छेद है किसी में भी लेलो

समय - फ़िक्र मत कर आज इसे 3 न सही पैर 2 छेद की सैर तो करवा कर hi रहूंगी पैर पहले इसे इस की असली औकात में तो ले औ


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कारन - ऊह्ह्ह्ह ऐसे hi मसल मसल के निचोड़ डालोगी या कुछ दिल खुश भी करोगी

समय - करुँगी मेरी जान पैर सच कहु दर भी लग रहा है इसका साइज देख कर मगर आज ये मुझे अपने अंदर चाहिए फिर चाहे जो हो

कारन - तो आओ फिर करो शुरुवात जब सोच hi लिया है आप ने मेरी प्यासी बुआ रानी ( दरी सेहमी सी समय आगे बढ़ी और कारन के पुरे लुंड को धीरे धीरे मुँह में लेते हुए बोली)

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बड़ी सावधानी के बाद समय कारन के मुसल को मुँह में अंदर बहार करते हुए उस पैर जीभ फिर ने लगी जिस का असर ये हुआ की कारन की आँखे बंद हो ने लगी और वो मजे में सिसकिया लेते हुए बोलै

कारन - ोुह्ह्हह्ह बाआ आप सच में बहुत अचे से कर रही है बस ऐसे hi करती रहो उउउउम्मम्म बहुत मजा आ रहा है आआह्ह्ह्हह स्स्सस्स्स्शह्ह्हह्ह

कारन की बात सुनकर समय लुंड को दोनों हाथो से थाम कर टोपे को जोर जोर से अंदर बहार कर ने लगी जिस से कारन की तो आह्हः और भी तेज़ निकल ने लगी


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कारन - उउउउउम्म्मममस्स्स्सह्ह्ह्हह्ह आअह्ह्ह्ह बाआआ क्या जादू कर रही हो ऊऊफफफफफफ बहुत मजा आ रहा है आआस्स्स्शह्ह्ह म्मम्माआआआ

समय - आआआहहह कारन बहुत मोटा है मेरा मुँह दर्द कर ने लगा है प्ल्ज़ अब तू और देर मत कर और इसे मेरी छूट में दाल कर जोर जोर से छोड़ दे बहुत मैं कर रहा है ( लुंड को हाथो से मसलते हुए बोली )


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कारन तो जैसे कुछ सुन न hi नहीं चाहता था या यु कहे की इस मजे की इंतहा का अंत उसे मंजूर नहीं था इस लिए सुन कर भी अनसुना कर के उसके सर पैर दबाव बना कर मजे लेने लगा जिस पैर समय 2/4 बार अंदर बहार कर ने के बाद लुंड को बहार निकाल कर बोली

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समय - मेरी बेचैनी को भी समझो यार बहुत प्यासी हु मजे कर ने के लिए में कही भागी नहीं जा रही बस आज एक बार मुझे ढंग से छोड़ दो

समय कहा सुन कर कारन को एहसास हुआ की उसकी बुआ कितनी प्यासी है जो पहले दिन से उसके करीब रह न छह रही थी जिसे वो हर बार टालता आया था इसलिए प्यार से समय को हटा कर बोलै

कारन - माफ़ करना बुआ में सच में अपने मजे में खो गया था पैर अब में रेडी हु अब आप की साड़ी प्यास बुझा दूंगा

समय - कोई बात नहीं बस अब देर मत कर जल्दी से घुसा दे इस में

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समय का रंग गोरा था जिस की तारीफ तो सब करते थे पैर कारन ने जब अपनी बुआ की गोरी गांड देखि तो बस एक hi ख्याल आया इस में नहीं डाला तो कही न डाला पैर फिलहाल टारगेट छूट थी तो वही फोकस करते हुए कारन ने अपने लुंड को समय की छूट से मिलवाते हुए उसे अंदर का रास्ता दिखा कर समय की गर्मी से अवगत कराया तो समय की घुटी घुटी सी चीख निकल गयी

समय - स्स्स्सह्ह्ह्हह्ह कारण फैट गईई रीई थोड़ा आराम से कर आआह्ह्ह्ह अंदर तो ये और भी मोटा लग रहा है ाआउउउउउउम्मम्मम स्स्स्सस्ठ्ठ आअह्ह्ह्ह थोड़ा रुक पूरा दाल कर और फिर मत रुकना चाहे जो भी हो आअह्ह्ह्ह अस्स्सह्ह्ह्हह्ह म्मम्माआआआ ये क्या डालवा दिया मेरी छूट मई आआह्ह्ह्हग स्स्स्सह्ह्ह्हह्ह ooooohhhhhhhhhh कारन लव यू आआह्ह्हह्ह्ह्ह माअररर आईसीटी हीई चुद आअह्ह्ह्ह मेरे दर्द की परवहहहह मत कर ूऊमम्महहहहहह आआआअह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्ह स्स्स्सह्ह्हह्ह्ह्ह आआआह्ह्ह्हह्ह ooooooohhhhhhhhhh


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खुले आश्मान के निचे कुटिया बानी समय अपने भतीजे के मोठे मुसल चुद कर अपने जिस्म आनंद की अनुभूति महसूस कर रही थी जिस में उसके मजे की कोई इंतहा नहीं थी और होती भी कैसे महीनो से सुखी पड़ी छूट में मजे की लहर जो आज उफान पैर थी जिसका बांध कभी भी टूट सकता था

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समय - ऊऊह्ह्ह्हह्ह कारानंन्न मेरी छूट का सैलाब आने वाला हीी ऊऊफफफफफद तेज़्ज़ तेज़ज़्ज़ज़ आअह्ह्ह्हह ाऐसेवी हीईई उउउउउउम्मम्ममाआहहहहहह बहुत मजा आए रहा है पैर अब में नहीं रुक पाऊँगी आआआह्ह्ह्ह स्स्स्सस्छ्हःहःह mmmmmmmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa कारायणं म्मीएननं गयीईइ hhhheeeeeeeeee

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पहले सुनीता की छूट फिर समय की मुख चुदाई की वजह से कारन भी अपने लुंड की नशो तबाव महसूस कर के तुज तेज़ धक्के मरता हुआ उसकी छूट में झाड़ ने लगा जिस से लुंड में थिरकन हुई जिस का मजा भी समय ने लिया

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समय - थैंक यू सोऊ मच कारन वैसे सुनीता के साथ जायदा मजा आया या अपनी बुआ के साथ

कारन - क्याआआआ
 
अपडेट -28

समय के मुँह से सुनीता का नाम सुनकर पहले तो कारन चौक गया पैर फिर एक नज़र समय के नंगे बदन को देख ने के बाद मुस्कुरा कर बोलै

कारन - तो आप मेरा पीछा कर रही थी क्यों सच है

समय - हां आयी तो थी में तुम्हारे पीछे अपने लिए पैर जब सुनीता को देखा तो पीछे रुकना hi ठीक समझा क्युकी वो बेचारी भी प्यार के लिए तरसती रहती थी पैर तुम ने मेरे सवाल का जवाब नहीं दिया किस के साथ

कारन - ो मेरी प्यारी बुआ मजा तो दोनों के साथ hi भरपूर आया बस छोटे बड़े का फर्क है थोड़ा सा साआ

समय - छोटा बड़ा मतलब में समझी नहीं सही से बताओ न

कारन - मतलब की सुनीता भाभी के दूध और चूतड़ थोड़े फैले हुए और आप के ठोस जिन्हे दबाने में मुझे जायदा मजा आया मेरी बुआ जान और अब कोई सवाल नहीं चलो घर चलते है ( समय को गॉड में उठा का


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समय - आह्हः शैतान कही के छोडो मुझे ास्स्सह्ह्ह

कारन - अभी शैतानी देखि hi कहा है ये तो ट्रेलर था फिल्म तो आप को तसल्ली से दिखाऊंगा

समय - रह ने दो में ज़िद न करती तो ये ट्रेलर भी न देख ने को मिलता मुझे यही तड़पती रहती

कारन - आप फुर्सत से प्यार कर ने को बानी हो मेरी प्यारी बुआ इस लिए सही मोके का इंतज़ार कर रहा था पैर चलो कोई नहीं शुरुवात तो हुई अब बाकि का सफर मस्ती में कटेगा

समय - मुझे इंतज़ार रहेगा मेरे नॉटी भतीजे ूउम्म्माह्ह्ह

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थोड़ी सी मस्ती मज़ाक के साथ दोनों घर पहुंचे तो कारन अपने रूम की तरफ जाने लगा तो पीछे से अपनी चची की आवाज़ सुन कर रुक गया जो उसके पास आ कर धीरे से बोली


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शीला - कारन तुम नाराज़ हो मुझसे किसी बात को लेकर

कारन - नहीं चची भला में क्यों आप से नाराज़ हो ने लगा एक hi तो चची है मेरी शोणि सी सेक्सयययय सीईई

शीला - शैतान चची को सेक्सी बोलता है शर्म नहीं आती न तुझे गन्दा बच्चा कही का ले चाय पिले


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कारन -आज कल चाय चोफ्फे नहीं दूध पिता हु चची वो ताज़ा ताज़ा àबी आप के पास दूध हो तो पीला दो

कारन की डबल मीनिंग बात और उसकी चूचियों खा जाने वाली नज़र देख कर शीला वो कड़ी न रह सकीय इसलिए चुप चाप नज़र झुकाये वह से खिसक कर सीधा अपने रूम में जाकर बीएड पैर गिर पड़ी और कमरे की चाट को देखते हुए मैं में बोली


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शीला - क्या कारन वो hi बोल रहा था जो में सोच कर वह से भाग आयी नहीं नहीं ये सच नहीं हो सकता में उसकी चची हु

दिल - उस से पहले तू एक औरत है शीला वो भी गदरायी हुई जिसे देख कर कोई भी उसे पाने की ीचा करेगा फिर कारन पैर तो जवानी अभी आयी है तो वो कैसे तेरे ये मोठे चुके देख ने की लालसा न रखे आखिर वो भी तो एक मर्द है जिसे अपनी चची सेक्सी नज़र आती

शीला - ओह्ह्ह नहीं प्ल्ज़ चुप हो जाओ वर्ण में पागल हो जाउंगी सस्शह्ह्ह अह्ह्ह्ह

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दिल - में तो चुप हो जाऊंगा पैर क्या खुद को रोक पाओगी उसके करीब जाने से जो उसके 2 दिन न बोल ने से hi मचल उठी थी और फिर भी यकीन न आये तो अपनी कच्ची में छुपी अपनी गीली छूट को देख ले जो सिर्फ कारन के नाम से hi रिस ने लगी है जिसे तो मसल कर रोक ने की कोशिश कर रही है

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सच hi तो था शीला के जिस्म की जरुरत अब उसे खाल ने लगी थी जो चाहती थी की उसे भी कोई मसल डाले उसकी छूट में उठ ते तूफ़ान से उसे निजात दिला दे जिस में वो जल रही थी बरसो से पति के दूर रह ने से यही सब सोचती वो कब झाड़ कर नींद के आगोश में गम हुई पता न चला जबकि कारन जब ऊपर गया तो आरती के कमरे में उसे रोटा पाया देख कर उस के पास जा के उसके आशु पोछते हुए बोलै


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कारन - क्या हुआ दीदी आप ऐसे रो क्यों रही हो किसी ने कुछ कहा क्या आप को

आरती - नहीं किसी ने कुछ नहीं कहा बस मुझे ये शादी नहीं कर नई अभी

कारन - आप ने द्र hi दिया था वैसे क्यों नहीं करनी शादी

आरती - कितने सालो बाद तू वापस आया है में तेरे साथ रह न चाहती हु कुछ टाइम पैर दादू जिद कर रहे है

कारन - सष्ठ शांत हो जाओ में बात करूँगा दादू से की अभी सगाई करते है शादी कुछ महीने बाद कर देंगे आखिर उस बेचारे हमारे जीजा को भी तो कुछ दिन चैन की सांसें लेने का हक़ वर्ण बाद में तो रोटा hi रहेगा 😜😜😜😜

पहले तो आरती की समझ में नहीं आया पैर जब कारन को हस्ता देखा तो सब समझ कर उसे प्यार से मार कर उसका गाला डालते हुए बोली


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आरती - उसका तो पता नहीं पैर आज तू बहुत रोयेगा मेरा मज़ाक उडाता है ये ले

कारन - आठ मर गया में इतनी तेज़ मारा है आप ने ुउउइइम्म्म्माआ दादू बचाओ इस जंगली बिल्ली से आअह्ह्ह्हह

आरती - आज कोई नहीं बचा ने वाला तुझे मेरे हाथो से बहुत बिगड़ गया है तू बहार रह कर

कारन के साथ मस्ती और जिस्म की रगड़ से आरती के जिस्म में बढ़ रही गर्मी ने अपना रंग दिखाया और उसने अचानक कारन के होठो से अपने जोड़ दिए जिस में कारन भी उसका साथ देने लगा


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आरती का जिस्म हवा में उजड़ ने लगा जिस का एहसास उसे एक अलग hi दुनिया में ले जाने लगा जिस में खो कर वो कब बीएड पैर पहुंची उसे पता न चला उसे तो बस कारन का स्पर्श महसूस हो रहा था जो ऐसे आनंद की अनुभूति दे रहा था

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एहसास जब हुआ जब दोनों की सांसें उखड ने लगी तो कारन के निचे दबी हुई शर्माती सी कारन की आँखों में देखते हुए बोली

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आरती - ी लव यू सोऊ मच बाबू प्ल्ज़ अब मुझसे कभी दूर मत जाना में बहुत तदपि हु तेरे लिए

कारन - कभी नहीं जाऊंगा दीदी वो में ये .

आरती - झिझक क्यों रहा है बोल न क्या बोल न चाहता है

कारन - मुझे आप को देख न है अचे से

आरती - हां तो देख ले तेरे सामने तो हु बाबू

कारन - ऐसे hi नहीं दीदी बिना कपड़ो के प्ल्ज़

कारन की बात सुनते hi आरती की छूट में चीटिया सीई रेंग ने लगी जिन्हे काबू करती वो कारन के होठो चूमते हुए बोली


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आरती - गंदी बात
 
अपडेट -29

आरती संग बढ़ती छेड़खानी की वजह से कारन की पेण्ट में तनाव बढ़ता जा रहा था जिसका एहसास आरती को जब अपनी कुंवारी मुनिया पैर हुआ तो वो सिहर उठी और सिसकी लेते हुए बोली

आरती - शैतान क्या कर रहा है मुझे कुछ चुभ रहा है

कारन - जब आप जैसी हॉट लड़की पास में होगी तो कुछ तो होगा न इस में मेरी क्या गलती है ऊपर से आप तड़पा रही है

आरती - मैंने कब तड़पाया तुम्हे उल्टा तुम hi मुझे बैचान कर ने में लगे हुए हो

कारन - ाचा मैं बैचान कर रहा हु और आप जो मेरी बात नहीं मान रही उसका क्या

आरती - मैंने कोण सी बात नहीं मानी तुम्हारी बाबू जो तुम इलज़ाम लगा रहे हो

कारन - वही जो मैंने कहा की में आप को बिना कपड़ो के देख न चाहता हु

आरती - तुम अभी तक वही अटके हो गंदे बच्चे और तुम्हे शर्म नहीं आएगी अपनी बड़ी दीदी को बिना कपड़ो में देख कर

कारन - शर्म क्यों आएगी बल्कि ाचा लगेगा खुदा की खूबसूरत कारीगिरी को देख कर प्ल्ज़ दिखा दो न

आरती - तुम सच में अपनी दीदी को बिना कपड़ो के देख न चाहते हो कारन

कारन - तो इतनी देर से क्या में मज़ाक कर रहा हु

आरती - मुझसे ये नहीं हो पायेगा बाबू प्ल्ज़ जिद मत कर मुझे शर्म आएगी बहुत

कारन - कोई बात नहीं दीदी जब आप का मैं हो और आप का दिल करे की अपने भाई की खवाइश पूरी कर सकती हो तो बोल देना में बेसब्री से आप का इंतज़ार करूँगा

आरती- तुम सच में इतने बेचैन हो मुझे बिना कपड़ो के देख ने को

कारन - अब कैसे यकीन दिलो दीदी आप को

आरती - तो ठीक है मेरे भाई में तेरी बेचैनी दूर कर ने की कोशिश करुँगी पैर तुम दूर से देखोगे हाथ नहीं लगाओगे वो भी तब जब में बोलू

कारन - जो आप कहेंगी वैसे hi होगा बस प्ल्ज़ इस जन्नत के दर्शन करा दो

कमरे में सन्नाटा पसर गया था जहा कारन आंख बंद किये अपनी दीदी की जवानी के दर्शन के लिए उत्शुक सा बैठा हुआ था की तभी आरती की धीमी सी आवाज़ उसके कान में गुंजी

आरती - प्ल्ज़ भाई मेरी आँखों में मत देख न और पास भी मत आना और अब आंख खोल कर जल्दी से अपनी बेचैनी दूर कर लो( कारन को देखते हुए बोली)


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सामने का नज़ारा देख कर कारन की आंखे हैरत से फ़ैल गयी उसे यकीन hi नहीं हो रहा था की उसकी बड़ी बहिन कपड़ो के भीतर इतनी कामुक काय छुपाये हुए है

आरती - बस कर भाई मुझे शर्म आ रही है और तू है की आंखे फाड़े मुझे घूरे जा रहा है

कारन - ओह्ह्ह दीदी आप नहीं जानती क्या चीज़ हो आप मगर ये पेंटी को नहीं उतरी इसे भी तो दिखाओ न

आरती - न बाबा वो नहीं होगा मुझसे और ये शो भी बंद हां नई तो ( ब्रा पहनते हुए बोली )

कारन - दीदी प्ल्ज़ दीदी ऐसा न करो एक बार और अचे से देख ने दो न अभी मैं नहीं भरा है

आरती - तेरा मैं नहीं भर ने वाला मुझे पता है ( ब्रा पेंटी बैठे हुए कारन की तरफ देख कर बोली )

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ऐसे बैठे रह ने के कारण कारन की नज़र उसकी छोड़ी गांड पैर पड़ी जिसे देख कर वो एक ठंडी ाः भरते हुए बोलै

कारन - आप को मेरी कसम है दीदी प्ल्ज़ एक बार अचे से दिखा दो में वादा करता हु फिर ज़िद नहीं करूँगा

आरती - ये क्या बचपना है कारन अपनी कसम क्यों दी तुमने हां ( कमर पैर हाथ रखे उसे खड़े हो कर देखते हुए बोली)


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कारन - तो और क्या करता आप मान hi नहीं रही थी और में इस सुंदरता की मूरत को देखे बिना नहीं रह सकता या तो आप कुछ न दिखती अब दिखाया है तो पूरा दिखाओ यु अधूरा न छोड़ो अपने भाई को

कारन की बात सुनकर आरती झूठा गुस्सा दिखते हुए अपने कपडे खोल कर बोली


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आरती - तुम न बहुत ज़िद्दी हो गए हो कसम अब जल्दी से देखो और ये सब ख़तम करो कही कोई आ गया तो मुसीबत हो जाएगी सुन रहे हो तुम तुम्हे hi कह रही हु

कारन तो मानो पालक झपकना भी भूल गया था सामने काम देवी सा रूप लिए कड़ी अपनी दीदी को देख कर


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आरती - अब बहुत हुआ अब में कपडे पहन रही हु क्युकी मुझे नहीं लगता तुम खुद से कहोगे की दीदी अपने कपडे पहन लो बेशरम कही का

कारन - ऐसा नज़ारा देख कर भी अगर बेशरम न बना तो मेरे मर्द हो ने का क्या फायदा दीदी अब प्ल्ज़ एक बार मुझे महसूस कर लेने दो इस मधूस कर देने वाले जिस्म के हर आंग को( आरती की नंगी गांड को मजबूती से हाथो में दबोचते हुए )

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आरती का तो सारा जिस्म गंगना गया इस अचानक के हमले से तो बस सिसकते हुए इतना hi बोली

आरती - ऊऊफफफफफ भाई ऐसा मत कर मुझे बहुत अजीब फील हो रहा है मेरे जिस्म में चीटिया सीई रेंग ने लगी है ोुह्ह्ह ममममआ एई क्या कर रहा है मान जा देख मैंने मना किया था न तुझे की छूना नहीं है और तुम हो की छूना तो छोडो मेरे जिस्म को मसल ने में लगे हुए हो आआअह्हह्ह्ह्ह मा ोोोूछहः मत कर भाई ssssssshhhhhhhhhh( अपनी गांड में कारन की ऊँगली महसूस करते hi चिहुँक के बोली )


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कारन - प्ल्ज़ दीदी बस थोड़ी देर मुझे खेल ले ने दो अपने इस तराशे हुए जिस्म के साथ वर्ण में पागल हो जाउंगी

आरती - ोुह्ह्ह तेरे खेल से मेरी बेचैनी बढ़ रही है भाई ऊऊफफफफफफफफ मम्माआ ये कैसा एहसास हैई ऊऊआआह्ह्ह्हह ोुह्ह्ह्हह्ह स्स्स्सस्शह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मम्माआ मेरिइइइ आअह्ह्ह्ह वाह्ह्ह सीए हाथ हटा ले भाई aaahhhhhhhhhhhhh

कारन - ोुह्ह्ह दीदी यही तो वो जन्नत है जिसे देख ने को महसूस कर ने को में मचल उठा हु देखो तो कितनी गीली हो रही है ये

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आरती - ये जन्नत मुझे पागल कर रही है तेरी उंगलियों के खेल ने से आअह्ह्ह मम्माआ तुम ने ये क्या कर दिया है में पागल हो रही हु ऊऊफफफफ्फ्फ्फ्फ़ आआह्ह्ह्हह्ह स्स्स्सस्छ्हःहःहःह ममममहहहहहहहहाआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह म्मम्माआआ ईईई क्याआ कर रहा है uuuuufffffffffff ममममममअअअअअअअहहहहहह कारन मुझे कुछ हो रहा है aaaaahhhssssssshhhhhhhhhhhhaaaahhhhh ख्ह्हआआ ज्ज्ज्जाआआआ मेरे भईई उउउउम्मम्मह्ह्हह्हआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह


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ज़िन्दगी में पहली बार आरती को इतना मजा आ रहा था जिस में वो पागल सी होकर न जाने क्या क्या बाद बढ़ाये जा रही थी और अंत में उसका जिस्म उसका साथ छोड़ता सा लगा उसे ऐसा अनुभव जिस में जिस्म से जान निकाल गयी हो जैसे जिसे वो कण्ट्रोल न कर पायी और कारन की तेज़ तेज़ अंदर बहार होती उंगलियों को अपने मूट भिगो ने लगी तो खुद hi कारन का हाथ पकड़ दूर करके वह से उठ कर चली गयी

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आरती को बहुत शर्म महसूस हुई पैर जो होना था वो हो चूका था इसलिए कारन भी चुप वह से निकल गया जिसे अंदर से जाता हुआ देख कर आरती बोली

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आरती - आज भी अपने मैं की hi करता है मेरा प्यारा भाई पैर अब में कैसे उसके सामने जाउंगी वो भी क्या सोच रहा होगा मेरे बारे की इतनी बड़ी हो कर छियईईई

कारन की नज़र अपने कमरे की तरफ जाते हुए जब अपनी चची की खिड़की पैर पड़ी तो अंदर का नज़ारा देख कर उसके चेहरे पैर मुस्कान आ गयी और वो अपने कमरे में चला गया कुछ सोचते हुए


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अपडेट -30

शीला की तड़पती छूट को देख कर मुस्कुराते हुए कारन अपनी माँ के कमरे में पंहुचा जो शीशे के सामने कड़ी हो कर खुद को संवार रही थी जिसे देख कर कारन धीरे से बोलै


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Karan-Itna भी शीशे को न निहारो माँ की वो खुद पैर hi नाज़ कर ने लगे की दुनिया की सबसे सुन्दर औरत रोज़ उस में घंटो खुद को निहारती रहती है

साक्षी जो खुद में खोयी थी कारन की आवाज़ सुनकर शरमाते हुए बोली

साक्षी -इतनी भी सुन्दर नहीं हु जितनी तुम बोल रहे हो अगर इतनी सुन्दर होती तुम दूर दूर न भागते अपनी माँ से

कारन - भाग नहीं रहा हु माँ बस खुद को रोक रहा हु गलती कर ने से वर्ण आप को देखे बिना मेरा दिन कैसे गुज़रता है ये में hi जानता हु

साक्षी - तो क्यों दूर दूर रहता है अपनी माँ से ( प्यार से उसकी आँखों में देख कर नज़र झुकाते हुए बोली )


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कारन - जब पास आता हु तो आपको शर्म आती है और आप जाने को कह देती हो तो बताओ में क्या करू

साक्षी - हां तो उस वक़्त में कपडे चेंज कर रही थी तो और क्या कहती

कारन- तो क्या हुआ मेरा तो देखा हुआ था सब फिर मुझसे क्या छुपाना माँ

साक्षी- वजह तू जानता है कारन की क्यों मना कर रही थी फिर भी नासमझ बन रहे हो

कारन - मुझे पता है पैर क्या आपको पता है की आप खुले बालो में और भी सुन्दर लगती है ( बालो की क्लिप निकालते हुए बोलै)


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साक्षी - ये क्या कर रहे हो कारन

कारन - अपनी सुन्दर माँ को और भी सुन्दर बना रहा हु और क्या कर रहा वैसे भी आप को तो मुझ पैर प्यार आता नहीं है

साक्षी - में बहुत प्यार करती हु कारन बस दुनिया में बदनाम नहीं हो न चाहती नहीं तो मेरा भी मैं होता है की तेरे साथ कुछ हसीं पल बितौ पैर क्या करू कुछ समझ नहीं पा रही हु कारन ( प्यार से सर को कारन की छाती में छुपाते हुए बोली )


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कारन - अगर अपने बेटे को प्यार कर ने से भी डर्टी हो तो फिर प्यार है hi कहा पैर में आप से प्यार भी करता हु डरता भी हु की कही ये आप का दर कही मुझसे दूर न करदे

साक्षी - नहीं कारन मेरे बच्चे ऐसा मत बोल तेरी माँ मर जाएगी तेरे बिना

कारन - तो क्या करू आप hi बोलो में खुद को नहीं रोक पाटा आप के पास आने से

साक्षी - तो क्या सिर्फ तुम अपनी माँ के जिस्म को पाने के लिए hi मेरे पास आते हो 2 पल प्यार से बैठ कर बात नहीं कर सकते

कारन - बात अगर आप के जिस्म की होती तो आपको उस हालत में छोड़ कर नहीं जाता है जब आप खुद मेरे साथ बिस्तर पैर सब कुछ कर ने को तैयार थी

साक्षी - हां कर जाती में सब कुछ तेरे साथ और आज भी चाहती हु की तू वो सब करे मेरे साथ पैर कभी सोचा है किसी ने देख लिया तो क्या होगा बस यही वजह है जो में खुद को रोक रही हु कारन और सही वक़्त का इंतज़ार जिस में में अपने बेटे के साथ जी भर कर प्यार दे सकू जो वो मुझ से चाहता है

कारन जो कब से खुद को रोके हुए था साक्षी की बात सुनकर साक्षी को बहो में भर कर उसे चूमते हुए बोलै


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कारन - ऊह्ह्ह्ह ये भी कोई खुद को रोक ने की वजह है प्यार कर ने से माँ किसी को कुछ पता नहीं चलेगा वैसे भी आप के कमरे में तो पिता जी भी नहीं आते तो और कोण आएगा

साक्षी - ूउम्म्म पागल मत बनो कारन तेरी बहनो में से कोई भी आ सकता है अगर तुझे करना hi है तो रात को मेरे पास सोऊ जाना अभी मुझे जाने दी

साक्षी खुद को छुड़ा कर जाने लगी तो कारन उसकी साड़ी का पल्लू पकड़ कर उसे खेचते हुए बोलै

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कारन - प्ल्ज़ रुक जाओ न माँ कोई नहीं है अभी यहाँ थोड़ा प्यार तो कर ने दो फिर में खुद चला जाऊंगा माँ

साक्षी जाना चाहती थी पैर कारन के इतने प्यार से बुलाने पैर उसके कदम जैम से गए जिसका एहसास कारन को हुआ तो उसने साक्षी वही दीवार के साथ खड़ा किया और उसकी नावेल से खेल ने लगा जिस से साक्षी मचल उठी

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साक्षी -ऊऊफफफफफऊम्ममाआहहहह sssshhhhaaaaaaahhhhhhhhhhhh कारण ऐसा मत कर ाअस्स्सह्ह्हह्ह ऊऊह्ह्हह्ह कोई आ जाएगाआ ऊऊफफफफ्फ्फ्फ़ मम्माआ कारन में बहक जाउंगी स्स्स्सह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्हह sssshhhhhhhhhhhhhh रूककक जाआ कारन

कारन तो जैसे कुछ सुन्न hi नहीं रहा था उसकी उसे तो उसकी माँ के गोर जिस्म ने दीवाना सा बना दिया था जिस में डूबता वो साक्षी को बीएड पैर लिटा कर बेतहासा चुम ने लगे


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साक्षी की हालत ख़राब होती जा रही थी वो कारन को रोक न चाहती थी पैर जिस्म में बढ़ती गर्मी उसे कारन को रोक ने से रोक रही थी तो वही कारन उसके होठो पैर कब्ज़ा कर चूका था जिस में न चाहते हुए भी साक्षी कारन का पूरा साथ दिए जा रही थी जिसके चलते थोड़ा सा प्यार अब चरमसुख की और बढ़ ने लगा था जिसे दोनों hi रोकना नहीं चाहते थे

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साक्षी के बदन की खुसबू खुद में समेत ता कारन उसकी छाती को मुँह में भर कर चूस ने और मसल ने लगा तो साक्षी पूरा बदन गंगना ने लगा और वो तड़पते हुए बोली

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साक्षी - आआआह्ह्ह्ह आराम सीए दर्द हो रहा हीी ऊऊफफफफफफ स्स्स्सस्छ्हःहः mmmmmmaaaaaaaaaa ऊऊआआअह्ह्ह्ह कारन मी पागल हो जाउंगी स्स्स्सह्ह्हह्ह ऊऊफफफफफफ मत कर मेरे लाल आआअह्ह्ह्हहस्सस्स्स्स

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कभी होठ काट टी तो कभी चादर खेचती साक्षी को ये भी पता न चला की कब उसके लाल ने अपनी को नंगी कर दिया वो तो मदहोशी में अपने बेटे के निचे दबी हुई सिसकिया ले रही थी की अचानक वो गरम मुसल उसे अपनी उस मुनिया पैर महसूस जिस से उसका बीटा कभी दुनिया में आया था तो सिसकते हुए बोली

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साक्षी ,- आआअह्ह्ह्हह नाहीई कारण अभी नहीं अभी कोई भी आआ saakkttaaaaaaaaaaaa हाईइइइइइइइ ssssssssdshhhhhhhhhhhhhaaaasyyyyyiiiiiiiiiiiimmmmmmmmmmaaaaaasaaa मारर्र डायलाहा रईईई uuuuufffffcffffffffffff मेरे कारण आखिर अपने मैं की कर hi लीई aaaahhhhhhhhhhhhhhhhh स्स्स्सस्ठ्ठ

जब तक साक्षी कारन को रोकती कारन का कहता उसके बिल में गड चूका था जिसका एहसास साक्षी की कई सालो से ुंचुड़ी छूट के लिए मीठे मीठे दर्द से भरा था उसका पूरा जिस्म कपकपा रहा था फिर भी एक अलग सीई ख़ुशी उसके दिल में हो ने लगी


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कमरे में साक्षी की घुटी घुटी सिसकिया रूम में गूंज रही थी जहा एक माँ अपने बेटे के मोठे मुसल को अपनी छूट में महसूस करती मादक सिसकिया ले रही थी जिस के ऊपर चढ़ा कारन गहरे मगर हलके धक्के लगा रहा था

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साक्षी- ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह कारण मेरे लाल ये तो बहुत मोटा और बड़ा है स्स्स्सस्ठ्ठ बहुत अंदर तक लग रहा हैई आआह्ह्ह्हह ायरआमं सीई हीई करना वर्ण तेरी माँ मर जाएगीइइइइ स्स्सस्स्स्शह्ह्हह्ह ममममायआ

कारन - ोुह्ह्ह्ह मा आप बहुत गरम हो कसम से मुझे ऐसा लग रहा है जैसे ताप्ती भट्टी में दाल दिया हूँ आआह्ह्ह्हह मुझे जला दू मा इस तपन में में आप के अंदर समां जाना चाहता हूँ स्स्स्सह्ह्ह्हह्ह्ह्ह aaaaaahhhhhhhhhhh

कारन की बात सुनकर साक्षी ने उसे अपनी बाहो में भर लिया और प्यार से उसे सहलाते हुए बोली


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साक्षी- ाअस्स्सह्ह्ह्हह्ह्ह्ह उउउउउफफ्फ्फ मेरे लाल आज तूने अपनी माँ की उस जगह पैर.........

आगे शब्द साक्षी मुँह में hi रह गए जब दरवाज़े पैर दस्तक हुई जिसे सुनकर साक्षी हड़बड़ा गयी


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साक्षी- फास गए न कारन इसलिए मना कर रही थी तुम्हे पैर तुम नहीं माने

कारन - डरो मत माँ और आराम से पूछो कोण है

साक्षी कारन की बात समझते हुई धीरे से बोली

साक्षी - कोण है में कपडे बदल रही हु

दीदी में हु बहार आओ बाबू जी बुला रहे है सब को ( गेट को फिर से नॉक करते हुए शीला बोली )


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साक्षी - तुम चलो में आती हु अभी हटो जल्दी से कारन और ऐसे उदास मत हो आज रात मेरे पास सोना में अपने बेटे को खूब प्यार दूंगी ( प्यार से समझते हुए बोली )

कारन - चची की माँ की ....
 
अपडेट -31

मुँह लटकाये कारन चुप चाप अपनी माँ के कमरे से निकल कर छत्त पैर चला गया उसका मूड ख़राब हो चूका था साक्षी की चुदाई बिच में छोड़ ने की वजह से जिस से उसे उसके बदन में अलग hi उत्तेजना महसूस हो रही थी जिसे शांत कर ने के इरादे से वो छत्त पैर आया था पैर सामने उसे उत्तेजना काम कर ने की जगह बढ़ती महसूस हुई अपनी बुआ समय को देख कर जिसकी वजह थी उसका बड़ा गाला जिस में से उसकी मोती चूचियों की झलक दिख रही थी जिसे देख कर कारन बोलै


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कारन - आप अकेली छत्त पैर क्या कर रही हो बुआ

समय - ऐसे hi टहल ने आयी थी निचे मैं नहीं लग रहा था तुम बताओ तुम कैसे ऊपर आये

कारन - पूछो मत बुआ क्युकी बता कर भी कुछ नहीं हो ने वाला खैर आप बताओ ये खुली छाती दिखा कर क्या कर ने का इरादा है

समय - पहली बात मेरा कोई इरादा नहीं है मेरे जायदातर सूट ऐसे hi है जिन में से ये छलकती रहती है और दूसरा कुछ होना न होना वो तो बाद की बात है पहले बताओ तो

कारन - मेरे लुंड में खिचाव सा हो रहा है ऐसा लग रहा है फैट जायेगा

समय - और ऐसा क्यों हुआ क्या कर रहे थे तुम जो ये यु अकड़ गया हां कही सुनीता के साथ तो कुछ नहीं कर रहे थे और फिर पूरा नहीं हुआ

कारन - ऐसा कुछ नहीं बुआ एक तो पहले से hi में दर्द में हु ऊपर से आपकी ये उभरी हुई मोती चूचिया देख कर और भी दिक्कत हो रही है मैं कर रहा है इन्हे मसल दालु

समय - मसल तो चुके हो तभी तो मेरा अंग अंग तुम्हे देखते hi मचल ने लगता है और हो भी क्यों न तुम मेरे अंदर तक जो समां चुके हो जिसका एहसास अब मुझे चैन से सो ने भी नहीं देता मैं करता है तुम्हारी बाहो में समां जाऊ और खूब प्यार करू ( शर्मा कर निचे देखते हुए बोली )


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कारन - ओह्ह्ह बुआ ऐसी बाते मत करो एक तो पहले hi बहुत बेचैन हु ऊपर से अभी कुछ कर भी नहीं सकता

समय - अगर दिल से चाहोगे तो सब सब कुछ हो सकता है फिर ये तो कुछ भी नहीं है कारन

कारन - क्या सच में बुआ इस वक़्त ये सब कर सकते है पैर कैसे और कहा दादू भी तो निचे hi है

समय - में हु न मुझ पैर विश्वाश करो और अगर खुद की बेचैनी और मेरी तड़प ख़तम कर नई है तो चुप चाप पीछे पीछे चले आओ बिना कोई आवाज़ किये ( कारन से नज़र चुराते हुए बोली)


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अँधा क्या चाहे दो आँखे वही हाल कारन का था उसे तो बस अपना पानी निकाल न था इसलिए चुप चाप समय के पीछे पीछे चल दिया बिना कोई सवाल किये और जल्द hi वो दोनों हवेली के आखिरी कमरे में खड़े एक दूसरे को देख ने लगे तो समय अपने कपडे खोलते हुए बोली जिसका सर उसके बोलते hi निचे को दबा दिया गया

समय- अब खड़े hi रहोगे या .......


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कारन का इशारा समझते hi समय ने उस के लुंड को मुँह में भर लिया और धीरे धीरे उसे अंदर बहार कर ने लगी जिस से कारन मस्ती से भर उठा और सिसकिया भरते हुए बोलै

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कारन - ओह्ह्ह्ह बुआए ऐसी ही पूरा मुँह में लो न स्स्स्सह्ह्ह्हह्ह बहुत मजा आ रहा है ूऊमम्महहहहह आआअह्ह्ह्ह स्स्स्सह्ह्ह्ह uuuuuffffffffff बुउआआआआ थोड़ा और अंडररर स्स्स्सस्छ्हःहः आआह्ह्ह्ह्हम्मम्मम्म

कारन की आँखे मजे में बंद हो चुकी थी जिस सकूं की तलाश में वो छत्त पैर गया था वो उसे इस बंद पड़े कमरे में मिल ने लगा था जिस की मस्ती में खोता वो जोर जोर की सिसकिया ले रहा था जिसे मस्त में खोता देख कर समय प्यार से उसके टोपे पैर जीब चलने लगी


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कारन का लुंड पहले से जायदा गरम होने लगा था जिसे समय का यु आराम से चुम न और बेचैन कर ने लगा तो उस ने समय को खड़ा किया और उसकी मोती चूचियों को मसलते हुए बोलै


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कारन - ऐसे मेरी बेचैनी और बढ़ रही है बुआ अब तो तुम्हारी छूट की गर्मी hi मेरे लुंड की बेचैनी को दूर कर सकती है इस लिए आप बस अपनी टाँगे खोलो बाकी का काम में खुद कर लूंगा

समय - ाःह धीरे दबा ना ऊऊफफफफफ उखड़ेगा क्या इन्हे ूउम्महहहहह स्स्स्सह्ह्हह्ह्ह्ह( कारन के हाथो पैर अपने हाथ रख कर अपनी चूचियों को दबाते हुए बोली )

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कारन - बुआ बातो में टाइम बर्बाद मत करो प्ल्ज़ पहले मेरी गर्मी शांत हो जाए फिर जितना चाहे मसलवा ले न अभी में पागल सा हुआ जा रहा हु बस अब तुम यही झुक जाओ

समय का जवाब सुने बिना hi अपनी बुआ की छूट पैर लुंड सेट करके उसे अंदर धकेलते हुए बोलै


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समय - आआह्ह्ह्हह कारन आराम से कर यार भाग नहीं रही हु ऊऊफफफफफफ मम्माआ कितना ज़ालिम है तू एक बार में hi पूरा दाल दिया स्स्स्सह्ह्हह्ह धीरे यार मम्माआ मारेगा क्या अपनी बुआ को ऊऊफफफफफफफफ स्स्स्सस्स्स्साआआअह्ह्ह आआआअह्हह्ह्ह्ह

कारन - ओह्ह्ह बुआए क्या करू तुम्हारी छूट है hi ऐसी की कण्ट्रोल नहीं होता आआह्ह्ह्ह मैं करता है आर पार कर दू लुंड को आपकी छूट मी सस्शह्ह्हुह्ह्ह्ह

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समय - आअह्ह्ह्ह तो कर ना पैर इंसानो की तरह में मना थोड़ी कर रही हूउउ ऊऊफफफफ्फ्फ्फ़ sssssshhhhhhhhhhh कितना मोटा और लम्बा हैई तेरा आआस्स्स्सह्ह्ह पूरा जिस्म गंगना जाता है आआअह्ह्ह्हह mmmmaaaaaaaaaaa देख तेरा पोता तेरी बेटी की छूट फाड़ रहा हीी आआआअह्हह्ह्ह्हह ससससस कारन मजा आ रहा है ूऊमम्महहहहहह आअह्हह्ह्ह्हह अब थोड़ा स्पीड बढ़ा आअह्ह्ह बहुत ाचा लग रहा हैई स्स्स्सस्ठ्ठ आआअह्ह्ह्ह आआअह्हह्ह्ह्ह एआईसीए होई वाह्ह्ह्हह्ह मेरे शररर आआह्ह्ह्हह आईसीई हीईई फाड़ दिए अपनी बुआ की छुट्ट्ट्ट mmmmmaaaaaaaaaa ह्ह्हह्ह्ह्ह सससससुउउउउउउम्मम्मम्मम्मूउउउउम्म्मममममममहहहहहहह

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कारन खुद जल्दी से फ़ारिग़ होना चाहता था उसके लुंड में जैसे कुछ जम सा गया था जिसका भारीपन उसे पागल कर रहा था जिसे वो जल्द से जल्द समय की छूट में भर देना चाहता था

कारन - आअह्ह्ह्ह फ़ायद दूंगा बुआ आज तुम्हारिई छूट को बहुत गर्मी है ना इस मेई आआअह्ह्ह्हह ाअजज साड़ी गर्मी निकाल दूंगा आआह्ह्ह्हुउउउउम्मम्ममाआहहह


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समय- आआह्ह्ह्ह मेरा होने वाला हीी आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मममममआ कारण ाममैंनं एआईईईई स्स्स्सस्छ्हःहः aaaahhhhhhhhhh मेररीई छुटत गईइइइइ रईईईई उउउउम्मम्मम आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ssssssssshhhhhhhhhhaaaaaaaammmaaaaaa

समय का बदन अकड़ चूका था पैर कारन अभी उसकी छूट में धक्के मारे जा रहा था जिस पैर समय उसके गहरे झटके झेलती हुई लगबगाग रट हुए बोली


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समय- आअह्ह्ह्ह कारण और कितना करेगा अब तो छूट में भी दर्द हो ने लगा ही आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ममममायआ मजे के बाद दर्द क्यों दे रहा हीी जल्दी से फ़ारिग़ हो जा ना ऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह स्स्स्सह्ह्ह म्मम्माआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

कारन तो जैसे गम हो गया था आज जितनी बेचैनी उस ने कभी महसूस नहीं की थी और इस का कारण था साक्षी का कैसा हुआ बदन जो उसे एक अलग hi दुनिया में ले गया था जहा वो अपनी माँ की छूट में समां जाना चाहता था पैर शीला की वजह से वो अधूरा रह गया जिसका अफ़सोस उसे फ़ारिग़ नहीं होने दे रहा था जब की समय की छूट लगातार अंशु बहाये जा रही थी कारन के हर झटके के साथ


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समय - मम्माआआआ मार डाला री तूंबीए तो सच मई ऊऊफफफफफ मम्माआ बहुत दर्द हो रहा है जल्दीए करररर नाआ रईईई आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह म्मम्माआआआआ

कारन - बस्सस थोड़ी देरर बुआ आआह्ह्ह्ह बहुत मजा आ रहा हैईईई आआअह्ह्ह्हह तुम्हारी छूट भी बहुत गीली हो गयीईइ आआह्ह्ह्हह्ह बुउआआआ ( समय के बाल पकड़ कर उसका मुँह बिस्तर में दबाते हुए बोलै )


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समय की हालत ख़राब हो चुकी थी जिस में उसकी छूट ने भी 2 श्री बार अपना दम तोड़ दिया था और अब बस वो निकल न चाहती थी कारन के निचे से वो भी जल्दीए और वही हुआ कारन का लुंड समय की छूट में झटके खाता हुआ उसकी छूट भर ने लगा जिसे महसूस कर के समय भी सकूं प्राप्त कर ने लगी

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कारन का गरम गरम कॉमर्स आज पहले के मुकाबले बहुत जायदा निकला था जो उसके लुंड के साथ hi बह कर बहार आने लगा था

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कमरे साँसों की आवाज़ के शिव कोई आवाज़ नहीं हो रही थी कारन भी शांत हो चूका था पैर अभी एक बेचैनी सीई थी उसके मैं में उसकी आँखों के सामने साक्षी का नंगा जिस्म घूम रहा था जिस आँखों में बसाये वो चुप चाप कमरे से बहार निकल गया समय को वैसे hi छोड़ कर अपनी माँ के जिस्म को अपनी आँखों में बसाये

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समय की सांसें दुरुस्त हुई तो अपनी हालत देख कर मुस्कुरा उठी और अपने कपडे पहन कर कड़ी हुई तो कारन का गाढ़ा विरए उसकी जांघो से बह कर निचे गिर ने लगा जिसे महसूस करती वो धीरे धीरे अपने कमरे की तरफ बढ़ ने लगी अपनी छूट में मीठा सा दर्द महसूस करती

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