Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 9 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७७

तब तीनोही अंदर चले गये.. तो आज मंजुभी सृतीके घर पहेली बार आइथी तो वोभी अंदर नजर घुमाते सब देखती रही.. भलेही बहारसे खंडहर जैसे दीखता हो लेकीन अंदरसे बहुतही सुंदर सजावट थी.. तब अ‍ेक खुरसीपे सृतीकी मम्मी बैठी नजर आइ.. जो कोइ कीताब पढ रही थी.. तब मंजु ओर देवायत उनके पास चले गये ओर उनके पांव छुके वही पासमे बैठ गये.. तब सृती भी दोनोके लीये पानी लेकर आगइ ओर पानी देते उनकी मम्मीसे कहने लगी....अब आगे

सृती : मम्मी ये मेरी बेस्ट सहेली हे.. मंजुला.. ओर ये हे उनके पती.. देवायतजी.. पासके गांवके रहेते हे..

सृतीकी मम्मीका नाम भुमीका हे अब हम कहानीमे उसे नामसे ही जानेगे..

भुमीका : (हसते) अच्छा अच्छा.. जीते रहे बेटा.. क्या हेना तुम लोगोको कभी देखा नही हेनां.. तो पहेचान नही पाइ.. बेठो सब.. (सृतीकी ओर देखते) बेटा इनके लीये कुछ चाइ नास्ता बनाले..

सृती : (मंजुकी ओर देखते हसते) मम्मी इनकी अभी अभी नइ सादी हुइ हे.. तो दोनो मीया बीवी सहेर घुमने आये हे.. दो तीन दीन अब यही रुकेगे.. फीर मेरी कोलेजमे भी छुटी हे.. तो इधर ही बुला लीया..

भुमीका : (हसते) अच्छा कीया..

कहातो मंजु जुठे गुसेके साथ आंख बडी करते सृतीको घुरने लगी.. तब सृतीकी हसी नीकल गइ तो अपने मुहपे हाथ रखके घुम गइ ओर हसने लगी.. तब देवायतभी हसता रहा.. क्युकी उनकोभी सृतीकी अ‍ैसी सरारत अच्छी लगी.. तब सृती मंजुकी ओर हसती हुइ कीचनमे चली गइ तब मंजुभी खडी होगइ.. ओर वोभी सृतीके पीछे जाने लगी.. तो सृतीकी मम्मी हसने लगी.. ओर मेरी ओर घुम गइ.. फीर बाते करने लगी..

भुमीका : बेटा आप लोग कीस गांवसे हे..? ओर क्या करते हे आप..?

देवायत : (हसते) जी.. आंटी मे --गांवमे रहेता हु.. ओर हमारा बहुत बडा धानका कारोबार ओर खेतीबाडी हे.. ओर मंजु अभी अपनी पढाइ पुरी कर रही हे.. वो ओर सृती दोनो साथमेही पढती हे..

भुमीका : (आस्चर्यसे हसते) अच्छा अच्छा.. तो आप उस गांवमे रहेते हे.., बेटा जब मे कोलेजमे थी तब उस गांवमें मेरीभी अ‍ेक सहेली थी.. नीर्मला नाम था उनका.. ओर कुछ दोस्तभी थे जो हम सब मीलके कोलेजमे बडी धमाल करते थे हें..हें..हें.. अ‍ेकतो वहाके ठाकुर साहबका लडकाथा.. किशन.. जो बहुतही नेकदील इन्सान था.. सबकी मदद करता रहेता.. फीर विरजी.. राजीव मेरा पती नरेश.. हम सब दोस्त थे.. ओर नीर्मला सायद किशनकी हवेलीमे रहेती थी..

देवायत : (आस्चर्यसे हसते) क्या आप जानती हो ठाकुर साहबको..?

भुमीका : (खुसीसे हसते) हां ठाकुर साहबको नही उनके लडकेको जानतीथी.. किशन.. मेरा मुह बोला भाइ.. जो हम सब अ‍ेकही क्लासमे साथ पढते थे.. हम सब दोस्त थे.. नीर्मलाभी उस गांवसे आतीथी.. मेरी खास सहेली.. जैसे सृतीकी ये तुम्हारी बीवी हे..

बडीही मासुम थी.. जो उन ठाकुर साहेबके लडके किशनसे प्यार करती थी.. फीर पता नही कहा चली गइ.. मुजे आजतक नही मीली.. ओर नाही उनका कोइ सुराग.. पता नही इस वक्त वो कहा होगी.. क्या तुमने उनको वहा कभी देखा हे..?

कहातो देवायत चोंक गया.. क्युकी वो उन्ही नीर्मलाकी बात कर रहीथी जीनसे देवायतने अभी अभी सादी कीथी.. तब देवायत बडाही दुवीधामे पड गयाकी उनके बारेमे सृतीकी मम्मीसे बात करनी चाहीये की नही.. अगर वो जान जायेगी की नीर्मलाकी बेटी ये मंजुही हे तो कीतनी खुस होजायेगी.. तब देवायत उनकी पहेचान छुपाके बाकी सब बातानेको राजी होगया.. ओर वो सृ.मम्मी भुमीकासे बात करने लगा..

देवायत : (हसते) हां आंटी में उनके बारेमे जानता हुं.. आपको मालुम हे ये मेरी बीवी मंजु कौन हे..? ओर आपकी सहेलीभी यही हे.. वो -- गांवमे रहेती हे ओर ये मंजु उन्हीकी बेटी हे..

भुमीका : (खुसीसे सोक्ट होते हसते) क्या..? ये मंजु मेरी नीमुकी बेटी हे..? हे भगवान.. देखो आखीर उसने मुजे मीलाही दीया.., कहा गइ मेरी बच्ची.. आनेदो उनको.. उनसे बहुत सारी बाते करनी हे.. पता नही वो कहा हे.. क्या आप उसी ठाकुरके गांवमे रहेते होनां..? क्या मुजे अ‍ेक बार नीमुसे मीलवा सकते हो..?

देवायत : (हसते) आंटी.. जब उनकी बेटीभी यही हेतो.. वोही आपको उनसे मीलवा देगी.. अभी आयेगी.. आप उन्हीसे बात करके सब पुछलो.. वो हमारे गांवमे नही रेहती..

सृती : (दोनो चाइनास्ता लाते) क्यु.. जीजु.. मम्मीसे क्या बाते हो रही हे.. कही मेरी बहेनकी सीकायततो नही कर रहे.. हें..हें..हें..

भुमीका : (मंजुको हसते) अरे.. आ बेटी तु इधर आ.. बेठ मेरे पास.. मुजेतो पताही नही थाकी तुम मेरी नीमुकी बेटी हो.. कहा हे वो.. ओर कैसी हे वो.. जबसे कोलेज छोडदी तबसे मुजे मीलीही नही..

सृती : (आस्चर्यसे खुस होते) मम्मी.. क्या तुम जानतीहो मंजुकी मम्मीको..?

भुमीका : (हसते) हां.. बेटी.. अभी अभी हम दोनो बाते कर रहेथे तो बातो बातोमे ही मुजे पता चलाकी तेरी सहेली मेरी खास सहेली नीमुकी बेटी हे.. मेने कीतना ढुंढा उसे.. कभी मीलीही नही.. तेरे मामा किशननेभी कभी इनके बारेमे नही बताया.. ओर देखो.. आज अनायासही मील गइ.. (मंजुको) बेटी.. कैसीहे मेरी नीमु..? कहा हे वो.. मुजे उनसे मीलना हे..

मंजुला : (असंमजमे हसते) जी..आंटी.. लेकीन.. वो.. वो.. आप मेरी मम्मीको.. मतलब उनको कैसे जानती हो..?

भुमीका : (हसते) अरे बेटी.. जीस तराह तुम ओर सृती साथमे पढती हो.. उसी तराह मे ओर नीमु साथमे अ‍ेकही क्लासमे थे.. हम दोनोभी पकी सहेलीथी.. हम सबने कोलेजमे खुब धमालकी हे.. हें..हें..हें.. हमारे कुछ ओर दोस्तभी थे.. ये तेरा पतीभी उसी गांवका हे जो तेरी मम्मी ओर हमारे दोस्त उस गांवके थे..

सृती : (हसते) मम्मी तबतो ये आपके भी जमाइ हुअ‍े.. हें..हें..हें.. तबतो इनकोभी जानती होगी.. हें..हें..हें..

कहातो देवायतने सृतीकी ओर आंखोसे इसारा करते ना पुछनेको मना करदीया.. तब सृती देवायतकी ओर देखते चुप होगइ.. ओर अ‍ेक नजरसे देवायतको देखती रही.. फीर सबने चाइनास्ता करलीया इसी बीच सृतीकी मम्मी मंजुसे हस हसके बाते करती रही.. ओर नीर्मलाके बारेमे जानकारीया लेने लगी..

तब सृती सवालीया नजरोसे देवायतको देखती रही.. फीर मंजु सृती देवायत कपडेकी बेग लेके उपरकी मंजीलपे चले गये तो वहाभी बहुत सारे कमरेथे.. तो सृती दोनोको अपने अपने कमरे दीखाने लगी.. तब देवायत अपने कपडे रखने रुमके अंदर चला गया तब मौका देखतेही मंजु सृतीके पास चली गइ ओर.. सरमाते मुस्कराते..

मंजुला : (धीरेसे सरमाते) सृती.. हम दोनो अ‍ेकही कमरेमे अ‍ेडजेस्ट करलेगेनां..

सृती : (कामुक मुस्कानके साथ धीरेसे दांत पीसते) कमीनी.. मत भुल.. अभी तुम लोगोने सादी नही की हे..

मंजुला : (सरमाते हसते) तो क्या हुआ.. मे जींदगीका हर मजा लेना चाहती हु.. अगर तुजेभी आना हे तो तुभी आजा.. दोनो मीलके इनको लुट लेगे.. हें..हें..हें.. अच्छा मौका हे.. चलनां.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही..

सृती : (सर्मसार होते मुका मारते धीरेसे) मुजे नही आना कमीनी.. जा तुही चुदवाले.. बेसर्म कहीकी.. कीतनी आग लगी हे तुजे.. देखना कही उंच नीच ना होजाये.. वरना पेट फुलाकर घुमती रहेगी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते हसते) सृती.. प्लीज. ये बात तुम कीसीको मत कहेना.. कोलेज खतम होतेही हम सादी करलेगे.. मम्मी लोग मानेगे तो ठीक हे वरना हम भागके सादी करके इधरही आजायेगे.. तु इनकी टेन्शन मतले.. तुमतो मेरे बारेमे सब जानती हो..

सृती : (हसते धीरेसे) चल ठीक हे आजाना.. चलो अब कही घुमने बुमने जाना हेकी यही रहेके इनसे चुदवाना हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते हसते) कमीनी.. कहा जायेगे.. इधरतो सब जगाह देखी हे.. यही रहेते हेनां.. हमारे पास तीन दिन ओर रात हे.. तुभी चलनां.. हम दोनोही इनकी रानीया बनजायेगी..

सृती : (हसते) कुती कहीकी.. मुजे नही आना तुही चुदवाले.. मुजे पताथा तुम इनको यहा कीसलीये लेकर आइ हो.. चल कोइ बात नही.. लेकीन सुन.. देख तेरी मम्मी ओर मेरी मम्मी मील जाये इससे पहेले इनसे सादी करले वरना तुम दोनोका भांडा मेरी मम्मी तेरी मम्मीसे बात करके फोड देगी.. जीजुने तेरी मम्मीके बारेमे बताकर गडबड करदी.. ओर वो खुद उनकी पहेचान मम्मीसे छुपा रहे हे.. पता नही क्यु..

मंजुला : (सरमाते हसते) तु फीकर मत कर इनसे पहेले हम दोनो मीलकर कुछना कुछ जुगाड तो करही लेगे.. तु उनकी टेन्शन मतले.. हें..हें..हें..

सृती : चल ठीक हे.. मे नीचे जाती हु.. मंजु.. तुम जीजुसे मीलन करनेसे पहेले अ‍ेक बार फीर सोचले.. क्युकी तुम बहुत बडा रीस्क ले रही हो..

मंजुला : (मुस्कराते) सृती.. मेने सब सोचलीया हे.. अब जोभी होगा देखा जायेगा.. इसीलीयेतो तुजे मे मेरे साथ सामील होनेका केह रही हु.. ताकी मेरे बाद तु मेरे देवुको सम्हाल सके..

सृती : (सरमाते हसते) नही मंजु.. थेन्कस.. तुने मुजपे इतना विस्वास कीया.. लेकीन मे अभी इन सब चीजोके लीये तैयार नही हु.. बस अ‍ेक बार डोक्टर बनजाउ.. ओर मम्मी पापाका सपना पुरा करलु.. फीर इस बारेमे हम सोचेगे.. अब तुजा मे नीचे जाकर कुछ तैयारीया करलु..

मंजुला : (हसते) ठीक हे.. तु जा.. फीर बात करते हे..

सृती : (नीचेकी ओर जाते मनमे सोचते) कैसे मंजुने उसे खुला ओफर देदीया.. मुजे सौतन बनानेकोभी तैयार होगइ.. कमीनी.. पहेले तुमतो ठीकसे चुदवालो.. फीर मुजे कहेना.. जीजुका पेन्टके अंदरसेही कीतना बडा दीखता हे.. जब वो रीयलमे तेरी फाडेगा तब तुजे पता चलेगा.. लेकीन जीजु दीखतेभी मस्त हे.. अ‍ेकदम हेन्डसम.. कास तुजसे पहेले वो मुजे मीलजाते.. तो आज तेरी जगाह मे होती.. कोइ बात नही आगे देखा जायेगा.. अगर तुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे तो फीर मुजे क्या अ‍ेतराज होगा..? देखती हु.. अगर जीजु मेरी ओर प्यारकी नजरसे देखते हेतो मेभी आगे बढनेका सोचुगीं.. क्या मस्त दीखते हे..

सोचते हुअ‍े सृती हसती हुइ नीचे आजाती हे.. तो दुसरी ओर मंजुभी सरमाते देवायतवाले कमरेमे अपने कपडे लेके अंदर चली जाती हे.. ओर धीरेसे दरवाजा बंध कर देती हे.. तब देवायत बाथरुममे फ्रेस हो रहाथा.. तो मंजु अपने कपडेकी बेग वही बेडपे रखके बैठ गइ ओर कमरेमे नजर घुमाते सब देखने लगी.. तब उसे सृतीकी आर्थीक हालत समजमे आइ.. ओर वो मनसे दुखी होने लगी.. तभी देवायत अपना सर पोछते बहार आगया.. ओर मंजुको देखते..

देवायत : (हसते) अरे मंजु तुभी इधर आगइ..? क्या सृतीको पता हे..? देखना कुछ गडबड ना होजाये..

मंजुला : (खडी होते सरमाते) हां.. अब आपकी बीवी हु तो इधर नहीतो कीधर जाउगी.. आजाओ बाबु..

कहेते देवायतकी ओर चली गइ.. तब देवायतने अपने दोनो हाथ फैला दीये तो मंजु देवायतकी बाहोमे चली गइ.. दोनोही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये ओर थोडी देर अ‍ैसेही खडे रहे.. तभी देवायतने उनका चहेरा हथेलीमे थामलीया तब मंजुने अपनी दोनो आंख बंध करली ओर उनके होंठ फडफडाने लगे.. ओर दोनोके होंठ मील गये.. तब मंजु मदहोस होने लगी ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होठोके रसपान करने लगे..

तभी मंजुको देवायतका हाथ अपने बुब्सपे मसलते महेसुस हुआ तो वो सरसे पांव तक हील गइ ओर कांपने लगी.. मंजुने जोरोसे देवायतको अपनी बाहोमें भीचलीया.. ओर उनके कंधेपे सर रखके खडी रही.. वो पुरी तराह कामवासनामे जलने लगी.. ओर उनके दिलकी धडकन तेज होगइ.. तब अ‍ेक बार फीर देवायतने उनके सरको पकडते होंठोसे होंठ मीला दीये.. तब मंजु आंधी आंख चडाते नसेमे देवायतका साथ देने लगी..

मंजुला : (कामुक होते) बुचचच.. बुचचच.. अंहहहह उहुंउउ उहुउउ.. देवुउउउउ.. हंमममम मंमम बुचचचच.. देवु.. मेरे.. दे..वु.. प्लीज.. कुछ करोनां.. मे आपके बीना नही रेह सकती..

देवायत : (होंठ छोडतेही) मंजु.. आज कुछ गलत ना होजाये.. अभी कंट्रोल करले.. अभी कुछ नही..

मंजुला : (सरमाते सीनेमे सर छुपाते) देवु वोहीतो नही होता.. इसीलीयेतो मे आपको इधर लाइ हु.. जानु अ‍ेक बात कहु..? अगर मम्मी पापा नही मानेतो हम क्या करेगे..? आपने दुसरे प्लानके बारेमे कुछ सोचा हे..? चलोना हम भागकर सादी करलेते हे.. हमारे पास ये तीन दिन हे..

देवायत : हां.. फीरभी हमारी सादी होजायेगी.. तुम फीरक मत करो क्युकी हमारे गुरुजीका आश्रम हे.. हम वही चले जायेगे.. ओर हम मंदिरमे सादी करलेगे.. वो हमारे कुलगुरु हे.. क्या तुम इसके लीये तैयार हो..?

मंजुला : (उत्सुक्तासे) हां.. देवु वो कीतनी दुर हे..? चलोनां हम अभी चले जाते हे.. हम वहा सादी करलेगे.. फीर मम्मी लोग मानेगे तो ठीक हे वरना हम केह देगेकी हमने मंदिरमे सादी करली हे.. चलोनां.. हम अभी जाते हे तो सामतक लौट आयेगे.. मे सादीके लीये रेडी हु..

देवायत : (हसते) पागल होगइ हो क्या..? पहेले अपनी मम्मीसे बात तो करले.. फीर नही मानेतो हम चले जायेगे.. ओर अभी सादी करलीतो भावुभी तेरे साथ हे उसे पता चल गया तो..?

मंजुला : अरे कीसीको पता नही चलेगा चलोनां.. अभी आप यही ठहेरो.. मे अभी आइ..

कहेते मंजु जटसे नीचे चली गइ ओर सृतीसे बात करने लगी.. तो सृती उसे कुछ समजाती रही लेकीन मंजु उनसे बात करके फटाफट वापस आगइ.. ओर देवायतके सामने देखते हसते हुअ‍े बाथरुममे घुस गइ तब देवायत उसे देखताही रहा.. फीर वो कपडे पहेनके अपने बाल बना रहाथा तब सृती कुछ कपडे लेकर उपर आगइ ओर बेडपे रखके देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते सरमाके हसती हुइ नीचे चली गइ..

देवायतको पताही नही चलाकी सृती उनके सामने इतनी क्यु सरमा रही थी.. तब थोडीही देरमे मंजु नहाके बहार आगइ ओर बेडपे पडे कपडोको पहेनने लगी तबतक देवायत उसे देखताही रहा.. तब मंजु अ‍ेक लाल सारी पहेनके तैयार होगइ ओर अ‍ेक दुल्हनकी तराह शींगार करने लगी.. तभी सृतीभी वापस आकर बेठ गइ ओर मंजुको देखते हसती ही रही.. तब देवायतभी दोनोके सामने बैठे हसता रहा..

सृती : (हसते) जीजु क्या पटी पढाइ आपने इसे.. येतो बीलकुल पागल होगइ हे.. क्या आपभी तैयार होगये..?

मंजुला : (हसते चुडीया पहेनते) कमीनी.. तु अभी तक तैयार क्यु नही हुइ.. चल जा ओर तैयार होकर आजा तुभी हमारे साथ चल रही हे..

सृती : (हसते) पागल हो क्या..? इधर मम्मीका खाना कोन बनायेगा..? तुम दोनोही चले जाओ.. ओर आप दोनोका खानाभी मे इधर बना रही हु.. दोनो जल्दी वापस चले आना..

मंजुला : अरे चलनां.. तु नखरे बहुत कर रही हे.. हम अभी आजायेगे.. मम्मीके लीये रास्तेसे खाना पेक करवा लेगे.. देवु इनको बोलो तैयार होजाये.. खानाका हम बादमे सोचेगे..

देवायत : हां सृती तुमभी चलोनां.. हम दो घंटेमे वापस आजायेगे यही पासही तो हे.. हमारे गांवके बीच..

सृती : नही जीजु.. मम्मीको बहारका खाना नही देना उनकी तबीयत बीगड जाती हे आप लोग चले जाओ..

मंजुला : ठीक हे तो फीर हम दोनोका खाना मत बनाना हम लंच करके आयेगे.. क्यु देवु..?

देवायत : (हसते) हां.. बस तुम अ‍ेक बार चलोतो सही.. बाबाही हमको बीना खाने नही आने देगे..

तभी मंजु शींगार करके खडी होगइ ओर देवायतका हाथ पकडके लगभग बहारकी ओर दोढ ही पडी.. तब सृतीभी दोनोके पीछे हसती हुइ आने लगी ओर दोनो कार लेके नीकल गये.. तब रास्तेसे देवायतने दो फुलोका हार लेलीया ओर दोनो हाइवेकी ओर जाने लगे.. तब मंजु देवायतके कंधेपे सर रखके बेठ गइ ओर सोचमे डुब गइ.. क्युकी आज वो इतना बडा डीसीजन लेके देवायतके साथ सादी करने जा रहीथी.. जो इस सादीको अभीके लीये सबसे छुपाके रखना चाहती थी..

तब २५ मीनीटकी ड्रइवके बाद दोनो आश्रम पंहोच गये तभी कारसे उतरतेही मंजु चारो ओर नजर घुमाते देखती रही.. ओर जाके देवायतका हाथ बाजुसे पकडलीया.. फीर दोनो अंदर जाने लगे.. मंजु आज यहा पहेली बार आइथी तो इतना बडा आश्रम देखते उनके दीलमे घभराट महेसुस करने लगी.. की आश्रम इतना बडा हेतो यहाके महंत कौन होगा.. क्या वो हमारी सादीके लीये मान जायेगे..? अ‍ैसे तराह तराहके सवाल उनके मनमे उठने लगे.. तब उनको पता नही थाकी आगे क्या होने वाला हे..

जेसेही दोनो आश्रमके होलमे गये तब सामने बाबा अपने आसनपे बीराजमान थे ओर दो सेवकसे कुछ बाते कर रहेथे.. तब देवायतके साथ मंजु वहा चली गइ ओर बाबाको गभराते देखती ही रही.. तब वहा पहोचतेही देवायतने बाबाको दंडवत कीये ओर पांव छुलीये तो मंजुनेभी देवायतका अनुकरण करते बाबाके पांव छुने लगी.. तब बाबाने उनको पांव छुनेसे रोक लीया.. तो मंजु आस्चर्य भावसे डरते उनको देखने लगी..

तब बाबा देवायतको आशीर्वाद देते मुस्कराते रहे.. वो दोनो सेवक देवायतको नमस्कार करके चले गये.. तो देवायत ओर मंजु उनके चरणोके पास बेठ गये तब बाबा देवायतके सामने देखके हसने लगे.. फीर मंजुकी ओर देखते अपना सीस नमाते उनके सामने दोनो हाथ जोड लीये.. तब मंजु ओर देवायतको बडाही आस्चर्य हुआ.. ओर दोनो बाबाके सामने हाथ जोडकर बैठे रहे.. तब बाबाने देवायतको कहा..

बाबा : (मजाकमे हसते) क्यु महाराज.. आखीर अपनी रानीसाहेबाको लेकर आही गये.. हें..हें..हें..

देवायत : (सरमाते हसते) क्या बाबा.. क्यु मजाक कर रहे हो.. अब काहेका राजा.. वो सबतो चले गये..

बाबा : (हसते) गलत.. बेटा तु चाहे जोभी कुछ कहे.. लेकीन तेरे गांववाले ओर कबीले वाले तुजे आजभी अपना राजा मानते हे.. (मंजुकी ओर देखते) क्यु बेटी.. आखीर तुमभी आही गइ.. तुने मुजे बहुत इन्तजार करवाया हे.. तुजे पताही नही होगाकी तुम कौन हो.. अब जाके सही जगह आगइ..

मंजुला : (सरमाते हसने लगी) जी.. वो..वो.. बाबा.. में..तो इधर पहेली बार आइ हुं.. क्या आप मुजे जानते हे..?

बाबा : (हसते) अरे बेटी.. इतना गभराती क्यु हो..? बाप हु तेरा.. कोइ बेटी अपने बापसे गभराती हे क्या..? इनसे सादी करना चाहती हेनां..? तो फीर इतनी क्यु गभरा रही हो..? मे अभी करवा देता हु तुम दोनोकी सादी.. बस..? फीर मुजे तुमसे ढेर सारी बात भी तो करनी हे.., तुम तो मेरी बहादुर बच्ची हे.. तुने जोभी डीसीजन लीया हे वो बीलकुल सही लीया हे.. बस अभी इतना जानले.. ये सब होनेही वाला था.. जो तुजे आगे जाकर पता चल जायेगा..

मंजुला (कुछ राहत महेसुस करते) जी.. बाबा.. हम.. हम दोनो आपसमे प्यार करते हे.. तो सादी करने आ गये.. पता नही मेरे घरवाले मांनेगे की नही.. तो.. हम इधर आगये..

बाबा : (हसते) मांनेगे क्यु नही..? इतना होनहार लडका हे.. तो जरुर मान जायेगे.. बस तुजे थोडी कसरत करनी पडेगी.. फीर मान जायेगे.. फीरभी ना मानेतो मेरा नाम लेलेना.. तेरे पास इस मंदिरमे सादी करलेनेका हथीयार हे.. इसे स्तेमाल करना फीर सब मान जायेगे.. ओर तुम्हारी सादी बडी धुमधामसे कर देगे.. क्या हार बार लाइ हो..?

मंजुला : (हसते हार देते) जी.. यही रहे.. मे साथ लेकर ही आइ हु.. लीजीये..

जबतक मंजु ओर बाबा आपसमे बाते कर रहेथे तबतक देवायत मंजुकी ओर देखते हसता ही रहा.. उनको आज मंजु बडीही मासुम ओर भोली लग रही थी.. आज उनके भोलेपनपे देवायतको बहुत प्यार आ रहा था.. वो सबकुछ भुलके मंजुकी ओर देखता ही रहा ओर मनही मन इसे पत्नीके रुपमे स्वीकार करने लगा तब बाबाने कहा..

बाबा : अब बेठे बेठे हस क्या रहा हे चलो दोनो.. तुम मंदिरमे जाओ मे अभी आता हु.. फीर तुम्हारी सादी करवाता हु.. जाओ..

तब देवायत खडा होगया तो मंजुभी मनही मन खुस होते मुस्कराते देवायतके साथ खडी होगइ.. ओर दोनो मंदिरकी ओर चलने लगे तबतक बाबा अपने रुममे चले गये ओर कुछ लेने लगे.. फीर वोभी मंदिरकी ओर चले गये.. तब वहा देवायत ओर मंजु मंदिरके सामने हाथ जोडके दर्शन कर रहेथे ओर बाबाका वेइट कर रहेथे.. जब बाबा आये तब दोनोही साइडमे हाथ जोडके खडे रहे ओर बाबाने दोनोको अंदर बुलालीया..

बाबा : मे जब कहु दोनो अ‍ेक दुसरेको हार पहेनादोगे.. फीर मे जोभी कहु तुम दोनो मेरे साथ दोहराओगे..

दोनो अ‍ेक साथ : जी..बाबा..

तब बाबाने हाथमे जल लेके कुछ मंत्र पढने लगे.. ओर जल मंजुके उपर छीडक दीया तो मंजुके सरीरमे अ‍ेक कंपनके साथ अलगही शक्तीका संचार होने लगा.. जो मंजु खुद महेसुस करने लगी तब बाबाने अ‍ेक बार ओर अ‍ैसा कीया.. अ‍ैसा तीन बार कीया तबतक मंजु सबकुछ भुल चुकी हो अ‍ैसा फील करने लगी.. ओर बाबा ने दोनोको अ‍ेक दुसरेको हार पहेनानेको केहदीया.. तो दोनोने अ‍ेक दुसरेके गलेमे हार पहेना दीया तब बाबा कुछ ओर मंत्र पढने लगे..

फीर दोनोको सप्तपदीकी सब कसमे खीलवाइ ओर अ‍ेक दुसरेको पती पत्नीके रुपमे स्वीकार करनेकी कसमे खीलवाइ.. तब बाबाने देवायतको मंजुकी मांग भरनेको कहा तब मंजु आंख बंध करते कांपने लगी ओर उनकी आंखोसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. तभी देवायतने उनकी मांग भरदी तब अपनेही हाथोसे चहेरा ढकते फुटफुटके रोने लगी.. तो देवायतने उनको सीनेसे लगाके सम्हाला तब बाबा हस रहेथे..

बाबा : बेटी सांत होजा.. तुजे पताही नही हे की तु कौन हे.. ओर तुमने कीनसे सादी की हे..

तब मंजु अपने आंसु पोछ देती हे ओर दोनो अ‍ेक बार फीर दर्शन करके बाबाके पैरमे जुक गये ओर पैर छुने लगे.. तब बाबाने उसे अखंडसौभाग्यके आशीर्वाद दीये ओर अपने साथ होलमे चलनेको कहा तब देवायत ओर मंजुने हार गलेसे नीकालके केरी बेगमे रखलीया.. ओर दोनो बाबाके पीछे चलने लगे ओर तीनो होलमे जाके बैठ गये.. तब मंजुको अपने सरीरमे कुछ अलगही फीरल हो रहाथा..

बाबा : बेटा भोजनमे कुछ वकत हेतो तुम दोनो मेरे रुममे आओ मुजे तुम दोनोसे कुछ जरुरी बात करनी हे..

तभी दोनो बाबाके पीछे उनके रुममे चले जातेहे तब बाबा अपने आसनपे बेठ जातेहे ओर ये दोनो उनके चरणोके पास बैठ जातेहे तब मंजुकीभी उत्सुक्ता बढने लगती हे..की बाबा हमे क्या कहेगे.. तब बाबा हिमाचलके उस राजाके बारेमे बताने लगते हे तो दोनोही इस कहानीको जानते थे.. फीरभी दोनो सुनते रहे..

तभी बाबाने उन राजाके पुर्न जन्मकी बात दोनोको कहेदी.. की तुम्हारा पोताही वो राजा होगा.. जो तुम्हारे घर जन्म लेगा.. तो दोनो सुनके सोक्ट होके बाबाकी ओर आसच्र्य भावसे देखने लगे.. फीर बाबाने उसे इस बारेमे बहुत कुछ बता दीया.. फीर देवायतको थोडी देर बहार कामसे भेजकर बाबाने मंजुको उनके बारेमे ओर देवायतके बारेमे ओर आने वाले समयके बारेमे बहोत सारी बाते बतादी जीसे सुनके मंजुभी अचभींत ओर सोक्ट होगइ..

तब बाबाने उनपे जब छीडकते कुछ शक्तियोसे अवगत करवाया.. ओर उन शक्तिीयोका असर अ‍ेक हप्तेके बाद सुरु होजायेगा अ‍ैसा कहेके बाबाने मंजुको अ‍ेक जडीबुटीकी पुडी देदी.. ओर इसे देवायतको छुपकेसे दुधके साथ मीलाकर देनेके लीये कहा.. तब मंजु बहुत सरमाइ.. ओर बाबाने उसे बहोत सारी बाते खुलके बतादी..

तब मंजुने भी अपनी सहमती जतादी.. ओर बाबाने उसे कुछ बाते दुसरोको ना कहेनेकी कसमेभी खीलवाइ.. फीर बाबाने मंजुकी खुदसे पहेचानभी करवाइ की वो कौन हे.. ओर कीस उदेस्यसे उनका जन्म हुआ हे.. तब मंजुको रीयलाइझ हुआकी वो कौन हे.. ओर उनका जन्म कीस उदस्यसे हुआ हे तो वो अपने आपको बहुत भाग्यसाली समजने लगी.. ओर ये सोचते बडीही रोमांचीत होने लगीकी मे इन सबकी जननी हु.. ओर मेरे ही संतानसे सादी कर रही हु..

तभी देवायतभी वापस अंदर आगया ओर बाबाने दोनोको साथमे बेठाया फीर हाथमे जल लेके कुछ मंत्र पढने लगे ओर दोनोके उपर छीडक दीया.. तब मंजु नसेकी हालतमे चलते वही ढल गइ ओर नींदकी आगोसमे चली गइ.. तब बाबा उनके सामने देखके हस रहेथे फीर देवायतको लेकर बहार जाते अपने रुमका दरवाजा अ‍ेसेही खाली बंध करदीया ओर होलमे अपने आसनपे जाके बैठ गये तब देवायतभी थोडा गभराते उनके पास नीचे बेठ गया.. तब बाबा उनकी मनोदसा समज गये ओर हसकर उनको बताने लगे..

बाबा : बेटा उनमे कोइ गभरानेकी बात नही हे.. वो अभी बहार आजायेगी.. आज मेरा अ‍ेक मक्सद पुरा हुआ हे.. उनको कुछ देना था तो देदीया.. तु चीन्ता मत करना.. ओर आगे जोभी होता हे उसे होने देना हे.. कीसीभी बातपे कोइ बाधा नही डालनी.. तुजे धीरे धीरे करते सब ज्ञात होने लगेगा.. बस अभीके लीये तुम उसके लीये परीपकव नही हो.. जब तुमभी सब समजने लगोगे तब तुजे मेरी इस बीटीयाही सबकुछ बता देगी..

देवायत : बाबा क्या वाकइ ये सच हेकी वो राजा ओर उनकी सभी रानीया फीरसे हमारे यहा जन्म लेकर आयेगे..? मुजेतो अभी भी यकीनही नही होरहा हेकी आजके जमानेभी अ‍ैसा कुछ होगा..

बाबा : बेटा आयेगे नही आ चुके हे.. बस ये सब उन्ही राजाके जन्मके लीये पहेले पुर्व तैयारीके भागरुपे आ गइ हे.. तेरी इस बीवीभी वोही हे ओर तुमभी वोही हो.. बस अभी तुम लोगोको उनका ज्ञान नही हे.. इसीलीये तुमको यकीन नही हे.. लेकीन जब जब वक्त बीतता जायेगा तब तुमको इस बातका ज्ञान होता जायेगा.. आगेतो तुजे बहुत कुछ नया दिखनेको मीलेगा..

देवायत : (सरमाते हसते) बाबा तबतो हो सकता हे हमारे यहाभी बहुत सारे रीस्तोमे परीवर्तन आयेगा..

बाबा : (हसते) आयेगा नही आचुका हे.. बस अभी मे तुजे इस बारेमे बात नही कर सकता.. लेकीन आगे तुजे सब पता चलता जायेगा.. क्युकी तुमभी इस रीस्तोसे छुट नही सकते.. ओर उनकी सुरुआत तुमसे तीन पीढीसे पहेले ही हो चुकी हे.. बस अभी तुम्हारे लीये इतनाही जानना जरुरी हे.. बाकी मेरी इस बेटी सब जान जायेगी.. ओर वो सब रहस्य आगे जाके तुम भी जान जाओगे..

अभी दोनो बातेही कर रहेथे तब दरवाजा खोलके मंजु बहार आके दोनोके पास बैठ गइ.. तब वो देवायतकी ओर देखते खुब सरमाइ ओर चुपचाप बैठी रही.. फीर भोजनका वक्त हो गयातो बाबाने दोनोको भोजनके लीये भेज दीया.. ओर दोनो भोजन करके बाबाकी इजाजत लेके नीकल गये..

तब मंजु कारमे चुपचाप बेठे आने वाले समयके बारेमे सोचमे डुबी हुइ थी.. तब देवायतभी बीच बीचमे उनकी ओर देखता रहा.. दोनोही असंमजमे खामोस बैठे रहे.. उनको पता ही नही थाकी दोनो सादीके लीये जा रहे थे तब अ‍ेक सामान्य मनुस्य थे.. ओर जब सादी करली तब वो सामान्य मानवी नही रहे....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७८

अभी दोनो बातेही कर रहेथे तब दरवाजा खोलके मंजु बहार आके दोनोके पास बैठ गइ.. तब वो देवायतकी ओर देखते खुब सरमाइ ओर चुपचाप बैठी रही.. फीर भोजनका वक्त हो गयातो बाबाने दोनोको भोजनके लीये भेज दीया.. ओर दोनो भोजन करके बाबाकी इजाजत लेके नीकल गये.. तब मंजु कारमे चुपचाप बेठे आने वाले समयके बारेमे सोचमे डुबी हुइ थी.. तब देवायतभी बीच बीचमे उनकी ओर देखता रहा.. दोनोही असंमजमे खामोस बैठे रहे.. उनको पता ही नही थाकी दोनो सादीके लीये जा रहे थे तब अ‍ेक सामान्य मनुस्य थे.. ओर जब सादी करली तब वो सामान्य मानवी नही रहे....अब आगे

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देवायत : (हसते) बेबी.. क्या सोच रही हे..? देखता हु जबसे तुम्हारी बाबासे बात हुइ हे तबसे तुम गुम सुम बैठी हो.. कुछ हुआ हे क्या..?

मंजुला : (मुस्कराते) नही.. जानु.. मे सोच रहीथी जब हम दोनो इधर आये.. तब मे कीतनी गभराइ हुइथी.. ओर अब हम वापस जा रहेहे.. तो अ‍ेक अलगही अनुभुती महेसुस कर रही हु.. मे कीतनी हीमत महेसुस कर रही हु.. कुछही वक्तमे कीतना कुछ बदल गया.. मेने तो सोचाही नही थाकी मे इतने बडे संतसे मीलुगी.. कोइ बडा संत इतना सरल हो सकता हे..? कैसे मेरे साथ अ‍ेक बेटीकी तराह बात कर रहे थे..

देवायत : अंजु तुजे नही पता वो हमारे कुलगुरु हे.. ओर मेने बापुसे सुना हे पीछली तीन पीढीसे यही गुरु हे.. उनकी उमरका कोइ पताही नही चलता.. उनके पास बहुत सारा ज्ञान हे उनके पास हमारे हर सालका जवाब हे.. हमारी हर समस्याका समाधान हे.. वो हमारे भुतकाल वर्तमान ओर भविस्यके बारेमे भी सब जानते हे.. पता नही कीस उदेस्यसे आये हे..

मंजुला : (हसते) जानु.. आपसे अ‍ेक बात कहु..? मुजे आज बाबाने अकेलेमे उसी उदेस्यके बारेमे बताया.. लेकीन बाबाने अभी कीसीको ना कहेनेकी मुजे कसमभी खीलवाइ हे.. तो सोरी.. मे आपको वो अभी नही बता सकती.. आगे आपको सब ज्ञात होजायेगा..

देवायत : (हसते) कोइ बात नही मंजु.. मेभी तुजे इन सब बातेको लेकर नही पुछुगा.. जब तेरी मर्जी होगी तब तुही मुजे बता देना.. क्युकी हमभी बाबाकी कोइ आज्ञाका उलंघन नही करते..

मंजुला : (सरमाते हसते) जानु.. आपसे अ‍ेक बात कहु..? जब हम गये तब मे अ‍ेक कुआरी लडकी थी.. जो में आपसे मीलन करनेके लीये तडप रहीथी.. इसीलीये मेने सादीकी जल्दी की.. ताकी हम दोनोका मीलन हो सके.. वैसेतो मे आपसे अ‍ैसेही मीलन कर सकती थी.. लेकीन पता नही क्यु.. मुजे आपसे सादी करनेकी बहुत इच्छा हुइ.. क्युकी मे अब हमेसा आपके साथही रहेना चाहती हु.. ओर अब मुजे लगने लगाहेकी अचानक मेरे अंदर अ‍ेक मेच्योरीटी आगइ हे.. मे अ‍ेक सादीसुधा होगइ.. ओर पता नही मेरे अंदर कोन कोनसा बदलाव आगया हे.. मुजे आज कुछ अलगही फील हो रहा हे..

अ‍ैसीही बाते करते दोनो वापस सृतीके घर आगये.. तब सृती बडी उत्सुक्ताके साथ बहार खडी रहेके दोनोका इन्तजार कर रहीथी.. दोनोके आतेही वो खुसीसे हसते हुअ‍े दोटके कारके पास आगइ.. ओर मंजु कारसे नीकलते ही सृती उनसे लीपट गइ.. फीर उनके सरकी ओर देखने लगी तो मंजुके बालोमे सींदुर लगा हुआ था ओर वो खुसीके मारे फीरसे मंजुके गले लग गइ.. फीर देवायतको ओर मंजु दोनोको हाथ मीलाकर कोन्ग्रेच्युलेशन कहेते मंजुका हाथ पकड लीया ओर उसे उपर लेगइ..

तब देवायत सृतीकी मम्मीके पास जाके बेठ गया.. तो वो उनसे हस हसके बाते करने लगी.. तब बातोही बातो मे पता चलाकी ये लोग इस घरको बेचना चाहते हे.. ओर अ‍ेक छोटा धर लेके बाकीके पैसे सृतीकी पढाइमें ओर अ‍ेक छोटा क्लीनीक लेनेकी सोच रहेथे.. क्युकी उनके पास इस मकानके रीनोवेशनके लीयेभी कुछ पैसे नही थे.. तो बेचारे ओर खर्चे कहासे करते.. धरका सब खर्चा उनके पतीके पेन्शनसेही चलाते थे.. तब देवायत बहुत कुछ सोचने लगा तब..

भुमीका : बेटा.. अब आपसे क्या छीपाउ.. अबतो आप हमारे घरके सदस्य जैसे हो.. ओर हमारे नीमुके जमाइ नीकले.. तो आपको सब बता दीया.. अब आपकी नजरमे इनका कोइ अच्छा खरीददार होतो बता देना.. ताकी मुजे सृतीकी पढाइकी कोइ चीन्ता ना रहे..

देवायत : आंटीजी मेरा अ‍ेक दोस्तहे वो यही सबका बीजनेस करता हे.. वो बील्डर हे.. अगर आप कहोतो मे उनसे बात करु..? हो सकता हे आपका काम ये अ‍ेक हप्तेमेही होजाये..

भुमीका : बेटा तबतो बडी महेरबानी तुम्हारी.. अब हम मा बेटी इनका ग्राहक कहा ढुंढने जाये.. ओर सबके लीये दुसरोपे भरोसाभी कैसे करे..? अब तुम्ही सब कर देना.. आखीर तुमभी तो हमारे नीमुके जमाइ हो.. ओर नीमु मेरी सहेलीही नही बहेन जैसी थी.. तो अब तुम हमारेभी जमाइ हो.. हमे तुमपे पुरा भरोसा हे..

देवायत : (हसते) आंटीजी तबतो ये समजलो आपका काम हो गया.. ये आपका मकान बीक गया.. आप नया मकान ढुंना सुरु करदो.. तबतक मे मेरे बील्डर दोस्तसे बात करलेता हु, आपका मकान मेइन रोडपे हे तो जल्दी बीक जायेगा.. ओर कीमतभी अच्छी खासी मीलेगी.. आप फीकर मत करना..

भुमीका : बेटा तबतो सोनेपे सुहागा.. भगवान तुमको खुब तरकी दे.. जो हमारी इतनी मदद कर रहे हो..

देवायत : (हसते) आंटीजी अबतो हम घरके लोग हे मे सृतीको अपनी सालीही मानता हु.. तो महेरबानी कीस बातकी..? देखना सृती अ‍ेक बडी डोक्टर जरुर बनेगी.. मुजे पुरा यकीन हे उनपे..

भुमीका : (खुस होते) बेटा.. आपके मुहमे घी सकर.. भगवान करे तुम्हारी बात सच होजाये.. ओर इनके पापाका सपनाभी पुरा होजाये.. उनका अ‍ेकही सपनाथा की में मेरी बेटीको अ‍ेक बडी डोक्टर बनाउगा..

देवायत : आंटीजी भगवानपे भरोसा रखीये.. ये नेकदील लोगोकी जरुर मदद करता हे.. आंटीजी अ‍ेक बात कहु..? क्या आप नीर्मलाजीके बहुत करीब थी..? तो उनके बारेमे थोडा बताइअ‍ेना..

भुमीका : (हसते) पहेलेतो मुजे आंटीजी मत कहो.. क्या मुजे अपनी सासकी तराह मम्मी जी नही केह सकते..?

देवायत : (हसते) सोरी मम्मीजी.. अबतो आपको मम्मीजी ही कहुगा.. हें..हें..हें.. अब बताइअ‍ेना.. प्लीज..

भुमीका : (हसते) हां.. हम दोनो खास सहेलीथी.. अरे सहेली क्या बहेनही समजो.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेसे हर बात सेर करती थी.. हमने कोलेजमे खुब धमाल की.. अब में..आपसे.. कैसे कहु..? क्युकी आपतो इनके.. मतलब अबतो हमारे जमाइ हो.. तो कुछ बाते मे आपसे नही कर सकती..

देवायत : (हसते) अरे मम्मीजी अबतो जमाना बदल गया हे.. मेने भी मंजुसे लव मेरीज की हे.. अब हमे अ‍ैसी बातोसे कोइ फर्क नही पडता.. आपके जमानेमे भीतो अ‍ैसा होता था.. सुना आप सब दोस्तो अ‍ेकही कोलेजमे थे..? इनके बारेमे कुछ बताइअ‍ेनां..

भुमीका : (सरमाते हसते) हां..हां.. हमारे जमानेमेभी होता था.. बल्की हुआ भी हे.. (सरमाते) आपकी सास.. तुम्हारे गांवके ठाकुर साहबके लडके किशनजो हमारे साथ पढता था उनको प्यार करती थी.. ओर उनसे सादीभी करने वालीथी.. फीर पता नही क्या हुआ.. वो कोलेज छोडके चली गइ.. ओर मुजे इनके बारेमे आज तब पता नही चला.. कहा चली गइ.. कीस गांवमे रहेती हे.. कीनसे सादी करली.. कुछ पता नही हे..

देवायत : (हसते) अच्छा हमारी सासुमा भी इनकी बेटीकी तराह हे.. हें..हें..हें..

भुमीका : नही बेटा.. तुम दोनोने तो सादी करली हेनां.. लेकीन बेचारी उनकी नही होपाइ.. बस इतनाही पता हे.. हमारी टीममे हम दो लडकीया ओर चार लडके थे.. हम सब खास फ्रेन्ड थे.. इनमेसे अ‍ेकसे मेने भी सादी करली जो सृतीके पापा नरेश हे.. हम दोनोनेभी लव मेरीज कीहे.. ओर वो नीर्मला छोटे ठाकुरसे बहुत प्यार करती थी.. उन्हीकी हवेलीमे रहेती थी.. उनका अ‍ेक भाइभी हे वोभी हम सबका दोस्त था.. सीर्फ नीर्मलाने बीचमे कोलेज छोडदी.. बाकीतो हम सब मीलते रहे ओर पढाइ पुरी करली.. तब हम दोनोने सादी करली.. बस इतनाही पता हे.. फीर हमे सीर्फ किशनशी मीलता था.. क्युकी मेने उसे भाइ माना था..

सृती : (मंजुके साथ अंदर आते) अरे.. सासु जमाइ कबसे क्या बाते कर रहे हो.. आप दोनोकी बातेतो कभी खतमही नही होती.. ओर जीजु.. हमतो आपका वेइट उपर कर रहीथी.. चलीये दोनो.. अब चाइ नास्ता नही करना क्या..? पांच बज गयेहे.. देरसे आये..आरामभी नही कीया..

भुमीका : (हसते) हांतो बनाले.. हम दोनो बात करते हे तो तु क्यु जलती हे.. ये मेरा जमाइ हे.. मे जीतनी मर्जी बात करु तुजे क्या प्रोबलेम..? हें..हें..हें.. जा तु चाइ नास्ता बनाले..

सृती : (हसते) देखा मंजु.. अब जमाइ मील गया तो बेटीकोभी भुल गइ.. चल.. नास्ता बनाते हे.. हमारा यहा कोइ काम नही हे.. करने दे ये दोनोको बाते.. हें..हें..हें..

कहेके दोनोही हसती हुइ कीचनमें चली गइ.. दोनो बाते करते रहे.. जब नास्ता बन गया तो सृतीने दोनोको आवाज देकर बहार बुला लीया.. ओर सबने मीलके चाइ नास्ता भी करलीया.. तब बीचमे सृती बार बार देवायतको चोर नजरसे देखती रही.. ओर जब दोनोकी आंख मीलजाती तब सृती सरमाकर मुह घुमाते हसने लगती..

सबने चाइ नास्ता करते खुब मजाकभी कीया.. फीर सृती ओर मंजु अपनी स्कुटी लेके बाजारमे नीकल गइ ओर अ‍ेक घंटेके बाद कुछ सामान लेके वापसभी आगइ.. ओर सीधे उपर चली गइ तबतक देवायतने बहार नीकलकर घरपे उनके बापुसे कुछ बाते करली.. ओर भानुसे भी बात करली..

बडे ठाकुर देवायतसे बहोत प्यार करतेथे.. उसने आज तक देवायतकी कीसीभी बातको नही टाला.. उनको देवायतपे पुरा भरोसा था.. पता नही क्यु..? कभी कभी वो अकेले होते हे तो गुमसुम रहेते थे.. ओर उनकी बीवीको भी बहुत प्यार करते थे.. उनका उदास रहेनेका कारण सीर्फ वो तीन चार लोगही जानते थे..

तभी अचानक तेज होर्न बजनेकी आवाज आइ.. तब देवायत गभराकर अपनी सोचकी तंद्गासे बहार आगया.. देखातो सामने अ‍ेक टड्ढक बडी मुस्कीलसे उनकी कारकी ओर आ रहाथा.. तब देवायतने बडी मुस्कीलसे कारको कंट्रोल कीया ओर ट्रक कारसे टरकारते रेह गया..

(फ्लेसबेक खत्म)

देवायत बडीही मुस्कीलसे कारको कंट्रल करते आगे बढ गया.. देखातो उनके ससुरका गांव नजदीक आगया था.. तो कार सीधे उनके गांवकी ओर मोडदी.. उनके ससुरका गांव बहुतही बडा तालुका लेवलका था.. जो अ‍ेक छोटे सहेरके बराबर था.. आजु बाजु के सब गांय वालोकी वहा बडी खरीदारी होती थी.. वही मार्केटमे उनके ससुरकी दुकान थी.. जो वो कइ बार वहाभी जाचुका हे.. ओर वही अ‍ेक बडी होस्पीटल भी थी.. जो इनके ससुर वही अ‍ेडमीट थे.. तब देवायतने कार सीधी होस्पीटल लेली.. ओर वो कार पार्क करके अंदर चला गया..

देवायत : (रीसेपनीस्ट कांउटरपे) सुनीयेजी.. वो.. यहा कोइ राजीव नामके पेसन्ट अ‍ेडमीट हे..?

नर्स : जी.. सर.. माफ कीजीयेगा आप उनके कौन हे..? क्या उनके कोइ रीस्तेदार हे..?

देवायत : जी.. मे उनका दामाद हु.. क्यु..? क्या हुआ हे उनको..?

नर्स : जी दरसल उनके साथ सीर्फ उनकी बीवी ही हे.. जो अभी अभी मुजे ध्यान रखनेको कहेके घरपे गइ हे.. कहेतीथी आधे घंटेमे आजाउगी.. यहा उनका ओर कोइ नहीथा तो आपसे पुछलीया.. अब आप आगये हे.. तो आइअ‍े मेरे साथ.. सामने ही हे.. मे आपको लेके चलती हु..

देवायत : (साथ चलते) दरसल उनको हुआ हे क्या..?

नर्स : उनको पेरालीटीक सीवीयर अ‍ेटेक आया हे.. ओर वो अभी अन्कोसीयस हे..

देवायत : (अंदर जाते) क्या कुछ रीपोर्ट वगैरे कुछ कीया हे..?

नर्स : जी सर.. अभी अभी अ‍ेम.आर.आइ करवाके आयेहे.. दो पहोरको रीपोर्ट आजायेगी.. तबही कुछ पता चलेगा.. डोक्टरभी अभी सब चेक करके गयेहे.. थोडा सुधार हे बाकी तो आप डोक्टरसेही बात करलीजीयेगा.. ओर इनके सरीरमे कुछ हल चल होतो प्लीज.. मे यही हु.. मुजे इन्फोर्म करीयेगा..

देवायत : (अंदर नसके सामने) जी मेडम.. अब मे साम तक यही हु..

कहातो नर्स सब चेक करके वापस चली गइ ओर देवायत बेडके पास चला गया.. ओर उनके ससुर राजीवको देखता ही रहा.. उनके ससुरको ओक्सीजन मास्क लगा हुआथा ओर वो आंख बंध करते अ‍ैसेही बीना हीले अ‍ेक लासकी तराह बेडपे पडेथे.. तभी देवायत वही पडी चेरपे बैठ गया.. ओर अपने हाथोसे उनके ससुरका हाथ थाम लीया.. ओर अ‍ेक नजरसे उनको देखता रहा.. तब उनकी आंख गीली होगइ.. ओर वो मनमे सोचता रहा..

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क्युकी उनके सामने उनके ससुर नही.. उसे अ‍ेक लाचार बाप पडा नजर आ रहाथा.. जीनकी दो दो बेटीया ओर दामाद होनेके बावजुद अ‍ेक असाहयकी तराह जींदगीकी जंग लडते अभी बेडपे पडा हुआथा.. देवायतको फीरसे अतीतकी याद आने लगी.. राजीव अंकल बडेही नेकदील इन्सान थे.. जो बापुके बहुत करीब थे.. वो देवायतको अपने बेटेकी तराह मानते थे.. जबसे राजीव नीर्मलाने हवेलीको छोडा तबसे वो देवायतकी हवेलीपे कभी नही आये..

देवायतके बापु किशनके गुजर जानेके बाद हवेलीपे पहेली बार आये थे.. तब खुब रोये थे.. ओर देवायत मंजुको बडी हींमत देकर गये थे.. यहा तककी देवायतकी मंजुके साथ सादीके लीये अपनी बीवी नीर्मलासे बगावत करके कैसे देवायत मंजुका साथ दीया था.. क्युकी तब नीर्मलाही थी जो सबसे पहेले उसने देवायत ओर मंजुको अपने रुममे चुदाइ करते देख लीयाथा.. तब मंजु अपनी पढाइ पुरी करके घर आइथी.. देवायत मंजुके साथ बीताये पलको याद करते फीरसे अतीककी ओर चला गया..

(फीरसे थोडा फ्लेसबेकमे चलते हे)

कैसे मंजु ओर देवायत अ‍ेक दुसरोके प्यारमे पागल थे.. उस दीन दोनोने अ‍ेक दुसरेसे मीलन करनेकी लगनमे मंदिरमे जाकर सादी करली.. ओर सादी करके सृतीके घर वापस आगये ओर उसी रात सुहागरात मनाते देवायत ओर मंजुका पहेली बार मीलन हुआथा.. देवायतके लीये वो अ‍ेक अलगही अनुभव था.. वैसेतो देवायत कइ बार दुसरी ओरतोको चोद चुकाथा इनमे मंजुकी मम्मी नीर्मलाभी सामील थी..

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जो देवायतकी पहेली बीवी थी.. ओर आज उनकीही बेटी देवायतकी दुसरी बीवी होगइ.. ओर देवायतके नीचे लेटी हुइ थी.. तब मंजुकी चुतमे पहेलीबार लंड घुसतेही कैसे मंजु बेहोस होगइ थी.. उस रात खुद काम ओर रतीने अपनी मौजुदगीका अहेसास करवा दीयाथा.. दोनोही पुरी रात प्यार करते रहे.. रातभर देवायत मंजुको अलग अलग तरीकेसे चोदता रहा.. ओर मंजुकी चुतको अपने गाढे रससे भरता रहा..

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तब नाही देवायतके लंडमे बदलाव हुआथा ओर नाही मंजुको अपनी उन शक्तियोका कोइ ज्ञान था.. फीरभी उस रात देवायतको मंजुको चोदते अ‍ेक अलगही अनुभवका अहेसास हो रहा था.. उस रातमे तीन बार चुदाइ करते दोनोही तृप्त हो चुकेथे.. दुसरे दीन मंजु चलने फीरने लायक नही रहीथी.. तब सृतीने उनकी चुतकी सीकाइ ओर गोलीया खीलाकर खुब मददकी.. ओर मंजुको साम तक ठीक कर दीया..

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तब मंजुने अपनी हर बाते सृतीसे सेर की.. जीसमे मंजुने सृतीको देवायतके लंडके बारेमेभी बता दीया.. जीसे सुनकर सृतीभी सोक्ट होगइ.. ओर सृतीकी कामवासना फीरसे भडकने लगी.. ओर सृती अ‍ेक बार फीर देवायतके बारेमे सोचने लगी.. तब दुसरे दीन दोपहोरको ओर फीर रातको देवायतने मंजुको खुब रगड रगडके चौदलीया.. ओर मंजुकी हालत पतली करदी.. मंजुको पुरी तराह संतुस्ट करदीया..

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उन तीन दीनमे मंजु कलीसे फुल तो अ‍ेक लडकीसे ओरत बन चुकीथी.. सृती अब पुरी तराह देवायतको समर्पीत होकर अ‍ेक पत्नीका हक अदा कर रही थी.. तीसरे दीन देवायतने सबसे छुपके उनके दोस्त भानुको फोन करके सहेर बुलालीया.. तब भानु अ‍ेक बील्डरको लेकर सृतीके घर आगया.. ओर सृतीके घरका अच्छे दामोसे सौदा करवा दीया.. तब सृती ओर उनकी मम्मी घरके अच्छे दाम मीलनेसे बहुतही खुस होगइ.. ओर बार बार देवायतका सुक्रिया अदा करती रही..

फीर देवायत मंजुको वापस होस्टेलमे छोडके अपने घर आगया.. ओर अ‍ेक हप्तेके बाद वापस सहेर आकर सृती ओर उनकी मम्मीकी पसंदका दुसरे घरकाभी खरीदके इन्तजाम कर दीया.. ओर दोनो मां बेटी वही रहेने चली गइ.. तब सृतीकी मम्मी देवायतसे काफी घुल मील गइथी.. ओर उनको बेटा बेटा करते थकती नही थी.. उनको देवायत बहुतही अच्छा लडका लगा.. ओर उनको भा गया.. लेकीन देवायतकी सादी मंजुसे होगइ थी.. तो अपने दीलकी बात नही केह पाइ.. वरना वो सृतीके लीये देवायतको पसंद करने लगीथी..

तब उस बील्डरने वहा पुराना मकान गीरवाके अ‍ेक आलीसान बडी बील्डींग खडी करनेका प्लान बना लीया था.. तब सृती ओर उनकी मम्मी बाकी बचे पैसेको बेन्कमे रखके ब्याजके पैसे पढाइ मे खर्च करते रहे.. अ‍ैसेही समय बीतता रहा.. फीर रवीवारको सहेरमे आकर मंजुको छुटीके दीन लेकर चला जाता.. तो मंजुभी अपनी बहेन भावनाको बहाना बनाके चकमा देकर देवायतके साथ चली जाती..

ओर दोनो कीसी होटेलमे या कभी कभी सृतीके घर जाकर प्यारका खेल खेलते खुब चुदाइ करते रहे.. जब वो गांवमे होता तो उनका खयाल रखनेके लीये रश्मी हमेसा तैयार रहेती.. तो हप्तेमे अ‍ेक दो बार वो अपनी पहीली बीवी नीर्मला यानी मंजुकी मम्मीके साथ चुदाइ करके वापस आजाता.. तो कभी अपने दोस्त रमेशकी बीवी चारुकोभी कभी कभी चोद लेताथा.. इसी तराह जींदगी कटती रही.. तबतक मंजु भावु सृती सबके अ‍ेक्जामभी खतम होगये..

तब मंजु ओर सृतीने अच्छे परसन्टसे गे्रज्युअ‍ेशन खतम करलीया.. तब सृती मेडीकलकी तैयारीयामे दुसरे सहेरमे चली गइ.. तो भावु दो सबजेक्टमे रेह गइ.. तो दोनोही कोलेजसे अपने घर वापस आगइ.. तब अ‍ेक दिन देवायतने अपने पीता किशनको जो उसे बापु ओर माता विमलाको बा कहेके बुलाता था.. अ‍ेक दीन तीनो खानेपे अकेले बैठेथे ओर खाना खा रहे थे.. तब उनकी बा विमलाने मौका देखकर देवायतके पीताको कहा..

विमला : सुनीयेजी.. अब हमारे देवुने सब काम अच्छेसे स्महाल लीया हे.. ओर अब बडा भी होगया हे.. तो अब हमे इनकी सादीके बारेमे कुछ सोचना चाहीये.. आप कीसी अच्छी लडकी देखना सुरु करदो..

किरन : (हसते) अरे हां भागवान.. पहेले इनकोतो पुछले इन्होने कोइ लडकी पसंदतो नही करली..? हें..हें..हें..

विमला : (हसते) हां देवु.. तुही बता.. अगर तुमने कोइ लडकी पसंद करली हे तो हम वही बात चलायेगे.. हमे कोइ अ‍ेतराज नही.. तुतो जानता हेना हम सब खुले विचारोके हे.. हमारे यहा सबको अपनी पसंदकी लडकीसे या लडकेसे सादी करनेकी पुरी छुट हे.. बता कोइ पसंद करली हेतो.. हम वही तेरी बात चलायेगे..

किशन : (जोरोसे हसते मजाकमें) हां देवु.. तभी तो तुम्हारी माने मुजसे सादी करली.. हें..हें..हें.. क्युकी वो मुजे पसंद करती थी.. हें..हें..हें..

विमला : (कहेतेही वो किशनकी ओर आंखोसे ईसारा करते मना करने लगी फीर देवायतसे) हां देवु.. अगर तुजे कोइ पसंह हेतो कहेदे.. ओर हमे कोइ बीरादरी फीरदारी नही देखनी.. बस लडकी अच्छी होनी चाहीये..

देवायत : (थोडा सरमाते) बापु वो..वो.. मेने अ‍ेक लडकी पसंद करली हे.. ओर हम दोनो प्यारभी करते हे..

विमला : (खुस होते किशनको) देखा.. हें..हें..हें.. बीलकुल आपपे गया हे.. ठीक हे.. हमे बता कौन हे वो लडकी..? हम वही बात चलायेगे.. हमे कोइ अ‍ेतराज नही.. तेरे बापु उनके पीतासे बात कर लेगे..

किशन : हां बेटा.. तु सीर्फ इतना बता वो कीसकी लडकी हे.. ओर कीस गांवकी हे.. बाकी मे सब देख लुगा..

देवायत : (सरमाते हसते) जी..वो..वो आपके दोस्त हेना.. राजीवकाका उनकी बडी लडकी.. वो मंजुला..

इतना सुनतेही देवायतके पीता खाना खाते खांसने लगे.. फीर रुकके अ‍ेक नजरसे देवायत को देखते रहे.. तब थोडी देरतो उनकी पत्नी विमलाभी सोक्ट होगइ.. ओर खाना खाते रुक गइ.. मीया बीवी दोनोही राजीवका नाम सुनकर सोक्ट होगयेथे.. क्युकी उनका रीजन सीर्फ दोनो मीया बीवीही जानते थे.. फीरभी विमलाने हिमत करके बातको सम्हाल लीया..

विमला : (हीचकीचाते) हां..हां.. तो.. तो क्या हुआ..? हम उनसेही तेरी सादी करवा देगे.. तु फीकर मत कर.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.., क्यु जी..? आपतो कुछ बोलीये..?

किशन : (जैसे स्वप्नसे बहार आते) हं..? हां.. हां.. मे राजीवसे बात कर लुगा.. तु फीकर मत कर..

कहेते किशन जल्दी जल्दी खाना खाने लगा.. ओर फटाफट खाना खाके अपने रुममे चला गया.. तब देवायतको कुछ मालुमही नही था.. वोतो अपने माता पीताकी रजामंदीसे बहुत खुस होगया.. ओर सरमाते हसता रहा.. तो उनकी मां विमलाभी सोचमे डुबी चुपचाप खाने लगी.. उनको पता था किशनको इस बातपे राजी करनेके लीये उसे क्या करना हे.. वो किशनको रीजाना अच्छी तराह जानती थी..

तब देवायत खाना खाकर बहार चला गया.. उनकोतो पताही नही थाकी राजीवकी बेटी मंजुलाकी बात करके उन्होने कीतना बडा बोम्ब फोड दीया था.. तो विमला खाना खाकर उनके पतीके पास रुममे चली गइ ओर अंदर जातेही दरवाजा बंध करके किशनके पास बेडपे जाकर बैठ गइ.. ओर धीरेसे किशेनकी बगलमे पीठ करते लेट गइ.. तब किशनने पलटकर विमलाको पीछेसे अपनी बांहो मे भरलीया..

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तो विमलाने मुह घुमाते देवायतके होंठ चुमलीया.. दोनोही कामुक्तासे भरपुर थे.. मानो चुदाइ उनका सौक हो.. वो हब वक्त चुदाइ करनेके लीये रेडीही रहेते.. किशनका भी बहार कइ जगह अफैर चल रहाथा.. ये बातसे विमलाभी अच्छी तरेह वाकीफ थी.. क्युकी किशन विमलासे हर बात सैर करताथा.. ओर विमलाभी दुसरी ओरतोके साथ किशनकी चुदाइकी बाते सुनकर गरम होजाती.. फीर दोनो खुब जमकर चुदाइ करते..

विमलाने आज तक देवायतके अलावा कीसीको भावतक नही दीया.. वोतो उस बातसेही सोचते रोमांचीत होजाती की वो अपने भाइसे चुदवाती हे.. ओर आजभी रुममे वो वोही मक्सदके साथ आइथी.. ताकी किशनसे अपनी बात मनवा सके.. कुछ ही देरमे किशन ओर विमला दोनोही नंगे थे.. ओर विमला अपनी चुतमे किशनका विकराल लंड लेकर उनसे चुदवाते किशनसे बाते करने लगी..

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विमला : अरे आप इतनी जल्दी खाना खाके क्यु आगये..? पुरा खा लेते.. क्या बात हे..? लडकीभी अच्छी होगी.. आपने तो उसे देखा होगा.. कहीये नां वो दिखनेमे कैसी हे..?

किशन : विमु तुजे सब पता हे फीरभी..? क्या ये सही हे..? तुजे कोइ अ‍ेतराज नही..? तुम भी जानती हेना वो कीसकी लडकी हे.. फीरभी..

विमला : (सरमाते हसते) देखो किशन.. जो तुम कहेना चाहतेहो मुजे सब पता हे.. ओर मुजे इस रीस्तेमे कोइ बुराइ भी नही लगती.. मत भुलो हम दोनो भी वही हे.. ये तो अच्छा हे इस समाजको पता नही हे.. मांने मुजे बचपनमे इस लीये आश्रममे दे दीयाथा की हमारे दादाकी जान बच जाये.. लेकीन उनको तब ये नही पताथा की दो लडके होनेसे श्राप लागु होता हे.. लडकी पैदा होनेसे नही.., ओर अबतो वैसे भी बाबा उनका नीवारण करनेतो हमारे घर आही रहे हे.. ओर अच्छा हुआ मांने मुजे बचपनमे आश्रममे छोड दीयाथा.. वरना तुम मुजे थोडीना मीलते.. ओर आपकोभी अपनी बहेन चोदनेके लीये थोडीना मीलती..

किशन : बात तो तेरी सही हे.. पता नही वो क्यु चली गइ..? तो तुम दोनो ही बहेनकी तराह साथमे रहेती.. मे तुम दोनोसे सादी करलेता.. मुजसे क्या गलती होगइ.. वोभीतो बताके नही गइ.. बस अचानक चली गइ..

विमला : जानु.. जीस तराह मुजसे देवायत हुआ.. उसी तराह उनकोभी कोइ लडका होता तो..? पीताजीका क्या होता..? येभी कभी आपने सोचा हे..? अच्छा हुआ वो चली गइ.., क्या उनके हीसेका प्यार मे आपको नही देती..? फीरभी आपकी इच्छाको मे जानती हु.. बस अ‍ेक बार हमारे बाबा उसे श्रापका नीवारण करदे.. तो मे आपकी वो इच्छा भी पुरी कर दुगी.., फीर कर दीजीयेगा मुजे फीरसे प्रेगनेन्ट.. मे आपके दुसरे बच्चेकोभी जन्म दुंगी.. भाइ मे अभी भी आपके बच्चे पैदा कर सकती हु.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही..

किशन : हां मेरी प्यारी बहेना इसीलीयेतो मेने कोइ जीद नहीकी.. ओर जीस तराह मे उनको प्यार करताथा.. इनसे ज्यादातो तुम मुजसे प्यार करती थी.. ओर हमारी सादीसे पहेलेही देवायत ठहेर गया.. अच्छा हुआ हमारी मां तुमको बाबाके कहेनेपे वापस लेआइ.. वरना तेरा प्यार मुजे कभी नही मीलता.. विमु मे तुजे आजभी इतना चाहता हु जीतना पहेले चाहता था.. तब मुजे नही पताथाकी तुम मेरी बहेन हो.. अगर पता होता तबभी मे तुजे प्यार करता.. क्युकी हमारे बा बापुजीनेभी वोही कीया हे.. वो दोनोभी हमारे दोनोकी दोनो बीवीयोके बच्चे थे.. जो भाइ बहेन थे..

विमला : (सरमाते हसते) हां.. भाइ.. मुजे लगता हे ये हमारे आनदानकी परंपरा होगइ हे.. आपको पता हे.. जबसे प्यार क्या होताहे समजमे आया तबसेही मे भी आपको पसंद करने लगी थी.. तब सीर्फ मुजे पताथा की हम दोनो वास्तवमे सगे भाइ बहेन हे.. ओर आपको मेने कहा तब पता चला फीरभी सब जानते हुअ‍े मुजे प्यार करते रहे.. अ‍ैसी कोइ रात आपने नही जानेदी.. जो मुजसे प्यार करनेके लीये मेरे रुममे नही आये.. सबके सोतेही आप सबकी नजर बचाके मेरे रुममे आजातेथे.. ओर रात भर पागलोकी तराह मेरी चुदाइ करते थे.. मुजे सोनेभी नही देतेथे.. जैसेकी हम दोनो मीया बीवी हो.. फीर तो मुजेभी आपकी आदत होगइ थी.. पता नही मुजे आपने चोद चोदके कब प्रेगनेन्ट कर दीया.. ओर हमारा देवायत मेरे पेटमे ठेहर गया.. अच्छा हुआ तब पीताजी ओर बा चले गये थे.. ओर हम दोनो अकेले थे.. वो भी क्या सुहाने दीन थे.. किशन.. आज भी मे आपको उतनाही प्यार करती हु.. जीतना पहेले करती थी..

किशन : हां विमला वो दिन आजभी मुजे याद हे.. लेकीन अब उमरभी होने लगी हे.. फीर भी तुजे चुदाइके बीना नींद ही नही आती.. तुम ओर मेरी नीमु.. दोनोने मुजे खुब प्यार दीया.. तुम दोनोही बहुत कामी ओरत हो..

विमला : (मुस्कराते सरमे हाथ घुमाते) इसीलीये केह रही हु भुल जाओ सब.. हम दोनोने भाइ बहेन होनेके बादजुद भी प्यार ओर सादी कीहे.. हमारे बा बापुजीनेभी वोही कीया हे.. तो हमारा बच्चाभी वोही करेतो हमे क्या फर्क पडता हे.. सीर्फ हमे ओर नीमुको पता हे मंजु आपकी बेटी हे.. राजीव भैयाको थोडीनां पता हे..? वोतो आजभी मंजुको अपनी बेटी मानते हे.. आप बीना हीचकीचाके उनसे बात कीजीये..

किशन : (हसते) विमु राजीव उतना भी नासमज नही हे.., उनकोभी पता होगा मंजु मेरी बेटी हे.. क्युकी जब वो लोग इस हवेलीको छोडके गये तब मेरी नीमुभी तेरी तराह प्रेगनेन्ट थी.. तो क्या राजीवने उनको नही पुछा होगा..? लेकीन राजीव मेरा अच्छा दोस्त हे.. मेरी नीमुके बारेमे उनसे बातभी होगइ हे..

विमला : (हसते) जानु जोभी हो.. वो भलेही आपकी बेटी हो.. मुजे वो मेरे देवुके लीये चाहीये.. वो भी भलेही उनकी बहेनके साथ.. हें..हें..हें.. आप समज गेयनां.. हें..हें..हें.. (कहेते दोनो हसने लगे)

ओर दुसरेही दीन सुबह किशन राजीवके गांव सीधे उनकी दुकानपे चला गया.. आज साथमे बीजनेस करनेके बावजुद वो पहेली बार राजीवके पास आया था.. वो निर्मलाको फेइस करना नही चाहता था.. इसीलीये रावीवकी दुकानपे चला गया.. तो उनको देखतेही राजीव खुसीके मारे आंसु बहाने लगा.. ओर उनको कसके गले लगा लीया.. फीर दोनो दोस्तने साथ बैठकर कुछ पुरानी यादे ताजा करते बाते करने लगे.. ओर बातो बातोमे ही किशनने अपने दीलकी बात राजीवको बतादी.. की वो मंजुका हाथ देवायतके लीये मांगने आया हे.. तब सुनके राजीवकी आंखसे खुसीके मारे आंसु छलक गये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७९

ओर दुसरेही दीन सुबह किशन राजीवके गांव सीधे उनकी दुकानपे चला गया.. आज साथमे बीजनेस करनेके बावजुद वो पहेली बार राजीवके पास आया था.. वो निर्मलाको फेइस करना नही चाहता था.. इसीलीये रावीवकी दुकानपे चला गया.. तो उनको देखतेही राजीव खुसीके मारे आंसु बहाने लगा.. ओर उनको कसके गले लगा लीया.. फीर दोनो दोस्तने साथ बैठकर कुछ पुरानी यादे ताजा करते बाते करने लगे.. ओर बातो बातोमे ही किशनने अपने दीलकी बात राजीवको बतादी.. की वो मंजुका हाथ देवायतके लीये मांगने आया हे.. तब सुनके राजीवकी आंखसे खुसीके मारे आंसु छलक गये....अब आगे

राजीव : (हसीके साथ खुसीसे आंसु बहाते) भाइ क्या बात कर रहे हो तुम..? येतो बहुत खुसीकी बात हे.. हम दोनो दोस्त समधी होजायेगे.. मुजे ये रीस्ता मंजुर हे.. बस अ‍ेक मे मौका देखकर बार नीमुसे बात करलु..

किशन : (हसते) भाइ नीमु कैसी हे..? क्या वो मान जायेगी..? हांतो कहेगीनां..?

राजीव : (किशनका हाथ थामते) भाइ क्यु नही मानेगी..? मे तुमसे वादा करता हु.. की मेरी मंजु तेरे घरकी बहु बनेगी बस.., भाइ मेने रीस्तोमें हमारी दोस्तीको सबसे उपर रखा हे.. हम तीन पीढीयोसे दोस्त हे.. पता नही नीमु तुमसे अभी भी कीस बातके लीये नाराज हे.., जो होनाथा वो होगया.. भाइ कहेते हेना जोडीया उपरसे बनके आती हे.. तो हमारी कीस्मतमे भी वो सब लीखाथा.. तो हम उसे थोडी मीटा सकते हे.. भाइ आपने ओर मेनेभी क्या कीस्मत पाइ हे.. भाइ आपकी तराह मुजेभी मेरी बहेनसे सादी करनी पडी.. इस जमानेमें कोइ सोचेगा तो क्या कहेगे.. लेकीन तब सीचुअ‍ेशन भी अ‍ैसीथी तो हम क्या कर सकते हे..

किशन : (मुस्कराते) यार तु टेन्शन मत ले.. अ‍ैसे कइ लोग हे जो अ‍ैसे रीस्तो मे पुरी जींदगी गुजार देते हे.. मे इनको गलत नही मानता.. भाइ अबतो तुम्हारे बा बापुजी ओर मेरे बा बापुजीभी चल बसे.. वो दोनोभीतो दोस्त थे.. तेरे बापुको सब पता हे की मेरे बा बापुजी कोन थे.. वो दोनोभी तो भाइ बहेन थे.. भाइ छोड ये सब.. हमे कहा कीसीके सामने ढींढोरना पीटना हे.. अच्छा हे यहा तुजे कोइ नही जानता.. ओर नाही तुम्हारे कोइ रीस्तेदार हे.. ओर वहा हमारे गांवमे भी अभी कीसीको पता नही हेकी तेरी भाभी(विमला) मेरी बहेन हे.. तो फीकर कीस बातकी..?

राजीव : हां यार.. मुजे भी अ‍ैसे रीस्तोसे अब कोइ अ‍ेतराज नही.. तभीतो मेने तुजे मंजुके लीये हां कहेदीया.. भाइ.. तुमने मुजे हर तराहका बहोत सपोर्ट कीयाहे.. ओर अभी भी कर रहे हो.., क्या वो विरजी कभी मीलता हे की नही..? कमीना मुजेतो मीलता ही नही.. तेरे पास आता हे क्या..?

किशन : (हसते) हां.. अब वो उनके बापुकी तराह मेरी ही सब खेती बाडी सम्हालता हे.. (जोरोसे हसते) कमीना कहा जायेगा.. हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) भाइ.. अ‍ेक बार में सहेर गयाथा तोवो सरलाभाभीके साथ वहा आया था.. वही देखा मेने.. तो सरलाभाभी भी मुजे देखके खुस होकर हसने लगी.. मे जब दुकानमे जाकर बहार नीकला तो पता नही कमीना अचानक कहा चला गया.. मुजेतो पताही नही चला.. पता नही वो उलुका पठा कीस लीये मुजसे नाराज हे.. कमीना मुजे फोन तक नही करता..

किशन : (हसते) छोडना यार.. तुजेपो पता हे.. वो सुरुसे ही सनकी हे.. हमने कोलेजमे कम धमाल की हे? हें..हें..हें.. बस वो भुमीके साथ कुछ गलत होगया.. तबसे वो कीसीको मुह नही दीखाता.. वो इस बातके लीये आजभी सर्मींदा हे..

राजीव : (खुस होते हसते) क्या पुराने दीन थे.. जब हम कोलेजमे थे तब हमारे साथ वो नीमुकी फ्रेन्ड भुमी थी उसीकी बात कर रहे होनां..? पता चलाकी उसने कही सादी करली हे.. फीर तो कभी मीली ही नही.. कीतनी क्युटथी. हें..हें..हें.. भाइ क्या वो आपसे मीलती हेकी नही..? आपकी मुह बोली बहेन थीनां.. आपको भाइ भाइ कहेते थकतीही नही थी.. ओर नरेशभी उनके पीछे लगा रहेता था.. वो मीलता हे..?

किशन : (हसते) हां.. भाइ मुजे पता हे तुमभी उनके पीछे लगा रहेता था.. यार.. जबसे कोलेज छोडा तबसे मे कही जाताही नही हु.. बस सालमे अ‍ेक बार उनके घर राखी बंधवाने जाता हु.. ओर उसने नरेशके साथही सादी करली हे.. चल अब कुछ चाइ बाइ पीलादे फीर में चलता हु..

राजीव : (थोडा गंभीर होते) भाइ आज पहेली बार आये हो.. वो भी मेरी बेटीका रीस्ता लेकर.. तो फीर अ‍ेक बार घरपे चलोनां..? आपकी नीमुसे बातभी होजायेगी..

किशन : (मुस्कराते) नही यार.. आज रहेने दे.. इधर ही तेरी चाइ पीके मुह मीठा करते हे.. फीर सीधे मेरे देवा की जान लेकर ही आउगा.. ओर सुन.. निमुसे कोइ जोर जबरदस्तीकी बात मत करना.. उनको प्यारसे समजाना.. अगर उनको रीस्ता ना पसंद होतो मना कर देना.. हमारे रीस्तेमे कोइ फर्क नही पडेगा.. समजे..?

राजीव : भाइ क्या बात कर रहेहो..? वो क्यु मना करेगी..? डीसीजन मुजे ओर मेरी बेटीको लेना हे.. मेरी ओरसे तु ये रीस्ता पका ही समज.. मे तुजे फोन कर दुगा.. लोजी.. चाइ भी आगइ.. अभीतो मुह इनसेही मीठा करलो.. बाकी कोलेजके वो दीन कभी नही भुला.. जो हम सबने होटेलमे जाके खुब दारु भी पीली.. ओर खुब धमालभी कीया.. साला वीरजीतो बहुत पीताथा.. ओर लुढक जाता था तब हमेही उनको उठाके लाना पडता था..

किशन : (हसते चाइ पीते) कमीना आजभी उतनीही पीता हे.. अब तो वो देसीभी पीने लगा हे.. साला जल्दी मरेगा.. हें..हें..हें.. कमीनेको कीतना समजाया.. समजताही नही हे..

राजीव : (हीचकीताते) भाइ वो.. आप केह रहेथे.. आपके खानदानमें उन श्रापके बारेमे.. क्या उनका नीवारण हो गया..? भाइ आपके लीये वो जरुरी हे.. अब आप बाबासे मीलकर सब विधी करवालो..

किशन : (हसते) भाइ अच्छा याद दीलवा दीया.. सुनो अ‍ेक दो दीनमे ही बाबा वोही श्रापके नीवारणके लीये हमारे घर आ रहे हे.. अब वो समस्या नही रहेगी.. भाइ मे तेरी चीन्ता समजता हु.. देवु ओर मंजुकी सादीसे पहेलेही वो सब समस्या खतम कर दुगा तु टेन्शन मत ले..

फीर कुछ देर बाते करते किशन वापस हवेलीपे आगया ओर विमलाको राजीके साथ हुइ सब बाते बता दीया तो सुनके विमला बहुतही खुस होगइ.. तब दोपहोरको देवायत आगया सब खाना खा रहेथे तब विमलाने उनकोभी सब बतादीया तो देवायतभी सरमाते खुस होगया.. ओर खाना खाके अपने रुममे चला गया ओर फोन लगाके मंजुसे बाते करते सबकुछ बताने लगा.. तो मंजुभी खुस होगइ.. ओर उनको घरपे आनेके लीये केहते बाते करने लगी..

देवायत : मंजु आज काकाको मीलने बापुजी वहा आयेथे.. उन्होने हां केहदी..

मंजुला : (हसते) हें..हें..हें.. जनाब आपसे पहेले मेरी बापुजीसे बात होगइ हे.. मे हमारी दुकानपे उनको टीफीन देने गइथी.. तबही मुजसे आपके बारेमे सब पुछ रहेथे.. तो मेने बापुजीको केह दीयाकी हम दोनो अ‍ेकही कोलेजमे पढतेथे ओर हम दोनोमे आपसमे प्यार होगया हे.. ओर मे वही सादी करना चाहती हु.. सब बाते होगइ.. लेकीन जानु मे आपसे नाराज हु..

देवायत : (हसते) वो क्यु भला..? अब मेने क्या करदीया..?

मंजुला : आपने मुजे कभी बताया नहीकी आप किशन काकाके बेटे हो.. मुजसे ये बात क्यु छुपाइ..? क्या मे आपको मना करती..? सुनो.. आप आज दो पहोरको घरपे आजाओ.. घरपे कोइ नही हे..? मम्मी ओर भावु सहेर गेये हे कुछ खरीदी करने.. सामको देरसे आयेगे.. ओर मम्मीकोतो अभी कुछ पताही नही हे.. क्या आओगेनां..?

देवायत : अरे हमारी बीवी इतना प्यारसे बुला रहीहे ओर हम नां आये..? आजाउगा बेबी फीकर मत करो..

मंजुला : (सरमाते हसते) जानु आप कैसी आग लगाके गये हो.. अबतो आपके बीना रहाभी नही जाता.. कुछ करोनां.. वरना आपको लेकर मे कही भाग जाउगी.. केह देती हु.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) अरे आ रहाहुनां बाबा.. क्या मेरी बीवीने खाना खालीया..?

मंजुला : (हसते) हां खालीया.. क्या आपने खाना खालीया..?

देवायत : हां अभी खाना खाकर ही मेरे रुममे आया हु.. खाना खा रहेथे तबही बाने मुजे हमारे बारेमे बातकी की राजीवअंकलने हा कहेदी हे.. तभीतो तुमको फोन लगालीया.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते धीरेसे) जानु आप फोन रखदो ओर फटाफट वहासे नीकलजाओ.. तबतक मे कुछ काम भी नीपटालु.. फीर हम आरामसे प्यार करगे.. आजाओ बाबु..

देवायत : (सरारतसे हसते) प्यार या चुदाइ..? हें..हें..हें..

मंजुला : (सर्मसार होते हसते) छी.. कीतने गंदे लडके हो.. हें..हें..हें.. हां.. वोही.. हें..हें..हें.. मुंमममहा..

देवायत : (हसते) अरे सीर्फ फोनपे ही कीस देगी की वहाभी कीस मीलेगी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते हसते) नही.. यहा कुछ नही मीलेगा.. हें..हें..हें.. बाबु मे थोडीनां देती हु.. आप खुद ले लेते हो.. हें..हें..हें.. अब बातेभी करोगे की नीकलोगे भी.. अरे आजाओ बाबा क्यु टाइम वेस्ट करते हो.. मुंममहा... बाय..

कहेते मंजुने फोन रखदीया तब देवायतभी फटाफट नीचे आगया.. ओर तैयार होके अपनी बुलेट लेकर नीकल गया.. तब विमला उनको देखकर हसने लगी.. वो समज गइथी की देवा कहा जा रहा हे.. तब वोभी किशनके पास अपने बेडरुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करते बेडकी ओर चली गइ तब किशन आंखपे हाथ रखते आराम कर रहाथा ओर विमला उनकी बगलमे लेट गइ.. तब किशनने विमलाको देखकर पलटते विमलाको अपनी बाहोमे भरलीया..

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किशन : (विमलाके होंठ चुमते) विमु आज मे बहुत खुस हु.. अब मेरे देवाकी भी सादी उनकी बहेनसे होजायेगी.. क्या अबतो तुम खुस होनां..?

विमला : (हसते होंठ चुमते) हां भाइ.. क्या आपकी नीमुसे बात हुइ..? वो कुछ नही बोली..?

किशन : नही विमु.. मे सीधा राजीवकी दुकानपेही गयाथा.. वो इस बारेमे खुद नीमुसे बात करलेगा.. राजीवतो इस रीस्तेसे बहुतही खुस हे.. बस अब नीमु हां कहेदे.. तो गंगा नहाये..

विमला : (सरमाते हसते) भाइ अब कल बाबा वो हमारे घर श्रापका नीवारण करदे.. तो आप मुजे प्रेगनेन्ट करदो.. सबसे पहेले मेरे उपर ट्राइ करलो.. हमे इस बातपे देवासे कोइ रीस्क नही लेना.. आप मुजेही पेटसे करदेना.. ओर मेभी आपका दुसरा बच्चा चाहती हु.. मुजे आपके बच्चे पैदा करना अच्छा लगता हे..

किशन : (हसते विमलाके उपर चडते) अरे मेरी प्यारी बहेना तु कहेतो तुजे ओर बच्चेभी देदुगा.. तु आजभी अ‍ैसीही दीखती हे.. मे आज भी तेरा इतना ही दीवाना हु जो पहेले था.. चल कपडे नीकाल.. हम अभीसे ट्राइ सुरु कर देते हे.. हें..हें..हें..

विमला : (सरमाते हसते) भाइ आप आजभी उतनेही ठरकी हो.. मुजे चोदनेका अ‍ेकभी मौका नही छोडते..

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तब कुछही देरमे दोनो नंगे होजाते हे.. ओर किशन विमलाके उपर चड जाता हे ओर विमलाकी जबरदस्त चुदाइ करने लगता हे.. तब विमलाभी किशनसे चुदवाते बीच बीचमे उनसे बाते करलेती हे.. वो किशनको बहुत प्यार करती थी.. विमलाने किशनको पुरी तराह अपने वसमे करलीया था.. क्युकी वो पुरुषको कैसे अपनी वसमे करते हे वो विद्या आश्रमसे सीखकर ही आइ थी.. ओर कुछ ही देरकी धमासान चुदाइके बाद किशन विमलाकी चुतको अपने पानीसे भरते उनके उपर ढेर होजाता हे.. ओर विमला खुस होते किशनकी पीठ सहेलाती रहेती हे..

तब दुसरी ओर देवायत घरसे नीकलतेही सीधे ही मंजुके घर चला गया.. देखाकी घरमे कोइ नही हे.. तब उसने धीरेसे दरवाजा बंध करदीया ओर मंजुके रुमकी ओर चला गया.. तब मंजु अपने रुममे मीररके सामने बैठते गाना गुनगुनाते शींगार कर रहीथी.. तब देवायत धीरेसे उनके पीछे चला गया ओर उनको पीछेसेही अपनी बाहोमे भरलीया.. तब मंजु गभरा गइ.. ओर देवायतको देखतेही खडी होगइ.. ओर पलटके उनकी बाहोमे समा गइ..

मंजुला : (सरमाते हसते) आगये मेरे जानु..? वो दरवाजा बरवाजा बंध कीयाकी नही..?

देवायत : (हसते) हां करदीया.. कहा गइ हे मम्मी ओर भावु..? सहेर खरीदी करने गइ हे..?

मंजुला : हां जानु हम तीनोके कुछ अंडरगार्मेन्ट ओर दुसरी खरीदी करनीथी.. ओर हां.. मेने आतेही मम्मीको बता दीयाथा.. वो सृतीके मम्मीके बारेमे तो सुनकर वो बहुत खुस होगइ.. ओर मेने उनको फोनपे बातभी करवादी.. तब मम्मी ओर आंटी दोनोही फोनपे रो पडी.. सायद आज उनको मीलनेके लीयेभी जाये.. उनको भुमीका आंटीने उनका पता दे दीया हे..

देवायत : (थोडी चीन्तासे) पागल होगइ हो क्या..? अगर आंटीने हमारी सादी सुधाकी बात बतादीतो..? मंजु मुजे लगता हे अगर दोनो मीलेगी तो जरुर हमारेमे बारेमे बाते करेगी.. तो तेरी मम्मीको हमारे बारेमे सब पता चल जायेगा.. मेरीही गलती हे.. जो मेने तेरी मम्मीकी बात भुमी आंटीको कहेदी..

मंजुला : ओह..गोड.. मेतो भुलही गइ..की आंटीको हमने पती पत्नीके रुपमे परीचय करवाया हे.. (मुस्कराते) जानु.. कोइ बात नही.. मे सब हेन्डल कर लुगी.. ओर वेसेभी अबतो पापा खुद उनसे बात करेगे तो अब काहेका डर..? वैसेभी उनको पतातो चलही जायेगा, आप फीकर मत करो.. मे ओर पापा सब हेन्डल करलेगे..

देवायत : (कुछ सोचते) हंमम.. चल बाततो तेरी ठीक हे.. लेकीन अ‍ेक डरसा लग रहा हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) बीलकुल डरपोक हो.. अरे बाबा मेभी नही डरती तो आपको कीस बातका डर हे.. हें..हें..हें..

तब देवायत मंजुको क्या जवाब देता की तेरी मां नीर्मलाभी मेरी बीवी हे.. तेरी सौतन, देवायतको बस अ‍ेकही बातका डरथा की जब नीर्मलाको पता चलेगाकी मे उनकी बेटीसे सादी करके उसे कइ दीनोसे चोद रहा हु तो उनका क्या रीअ‍ेक्शन होगा उन्ही बातको लेकर देवायतको डर था.. हांलाकी नीर्मलाभी जानतीथी की कभीना कभी देवायतकी कीसी ना कीसी के साथ सादीतो होगी ही..

क्युकी वो देवायतकी बीवी बनके उनका घरतो नही सम्हाल सकती.. नीर्मलाका खुदका भी परीवार था.. तो वो देवायतका घर कैसे बसा सकती थी.. उन्होनेतो देवायतसे सीर्फ प्यार कीयाथा.. ओर वोभी अपनी सारीरीक जरुरतको पुरा करने.. जो वो आये दीन देवायतको घर बुलाकर अपनी प्यास बुजवाकर पुरी करलेती थी..

ओर वो इस नाजायज रीस्तेसे काफी खुस भी थी.. उनके मनके अ‍ेक कोनेमे देवायतसे चुदवाकर किशनसे बदला लेनेका अ‍ेक संतोषभी मील रहाथा.. ओर इसके लीये वो हमेसा घरपे आइपील ओर पेइन कीलरकी टेबलेटभी रखती थी.. ताकी उसे कोइ देवायतसे प्रेगनेन्ट होनेका खतरा ना हो..

तभी मंजु देवायतको हाथ पकडकर उनके बेडकी ओर लेजाती हे.. ओर दोनो प्यार करने लगते हे.. तब कुछही देरके बाद दोनोके कपडे अ‍ेक टेबलके कोनेपे साथमे पडे दोनोकी कामलीला देख रहे थे.. कुछही देरमे दोनो नंगे होकर अ‍ेक दुसरोमे समा जानेकी कोसीस कर रहेथे.. मतलब सीक्स नाइन पोजीसनमे अ‍ेक दुसरेके अंगोको अपने मुहमे लेकर प्यारका खेल खेल रहेथे.. लेकीन मंजुको अपनी चुतमे लंड लेनेकी बडी जल्दीथी..

ओर वो जटसे पीठके बल लेट गइ ओर देवायतको कमरसे खीचके अपने उपर चडाने लगी.. तब देवायत मंजुके उपर चढ गया तो मंजुने अपने दोनो पैर फैला दीये.. ओर देवायत उनके पैरोके बीच बेठकर लंडको मंजुकी चुतपे टीकाते मंजुके उपर जुक गया ओर मंजुके होठोपे कीस करने लगा.. तब मंजुभी मदहोस हो चुकीथी.. ओर वो देवायतके लंड पकडके अपनी चुतके लव होलमे फसाने लगी..

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मंजुला : (सरमाते धीरेसे) जानु पहेले इसे अंदर डालदो.. इनकी बडी आदत होगइ हे.. क्या मस्त हथीयार हे आपका.. बहुत मजा आता हे.. जी करता हे दीन रात इसे अंदर लेके पडी रहु.. हें..हें..हें..

देवायत : मंजु तु बहोत ठरकी होगइ हे.. तुजे कीतना चोदता हु.. फीरभी तुजे संतोष नही मीलता..

मंजुला : (सरमाते हसते) हां.. नही मीलता.. ये मेरा लंड हे.. मेरी अमानत हे.. मे जब चाहु अपनी चुतमे घुसा सकती हु आपको कोइ अ‍ेतराज..? जानु क्या मस्त लंड हे.. देखना अ‍ेक बार हमारी सादी होजाने दो.. फीर पुरा दीन पुरी रात बीना बहार नीकाले ही चुदवाउगी.. मेरी बडी तम्मना हे..की मे पुरी रात आपसे चुदती रहु..

तभी देवायत मंजुकी बातोसे ओर गरम होगया.. ओर वो उनपे जुक गया उसने मंजुके होठोको अपनी गीरफ्तमे लेलीया तब मंजुभी मुह खोलके देवायतके मुहके रसको पीने लगी.. ओर दोनोही कामवासनामे जलने लगे.. तब देवायत मंजुके उरोजोको मसलते मंजुके रसको पी रहाथा तब मंजु पुरी तराह कामाग्नीमे जलने लगी ओर देवायतने अ‍ेक ही जटकेमे पुरा लंड मंजुकी चुतमे घुसा दीया..

तब मंजुकी चीख नीकल गइ ओर वो बेडपे अपने दोनो पैर पटकते छटपटाने लगी.. तब देवायत मंजुको जोरोसे कमर हीलाते चोदने लगा.. तब मंजुका मुह खुलाही रेह गया.. ओर उसने अपने दोनो पैर देवायतकी कमरमे आंटी लगाके फसालीया.. ओर देवायतके हाथको ओर चदर पकडते छटपटाते मचलने लगी.. ओर उनकी दर्द भरी आहे कामुक सीसकारीयोमे तबदील होने लगी..

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अब दो जीस्म अ‍ेक होचुके थे ओर देवायत मंजुकी धमासान चुदाइ कर रहाथा तब मंजुभी अपनी कमरको उछाल उछालके देवायतका पुरा साथ देने लगी.. देवायतकी चोदनेकी यही अदा उनको भा गइ थी.. जीनकी वजहसे वो देवायतसे हर वक्त चुदवानेको तैयार रहेती.. ओर अब तक वो दो बार जड चुकीथी.. ओर आखीर देवायत मंजुकी चुतमे जडतक लंड घुसाते जडने लगा तब मंजुभी अपने गर्भासयपे देवायतका गरम कामरस महेसुस करते कांपने लगी.. ओर देवायतके साथ अपना पानी छोडते जडने लगी..

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तब दोनोही अपने चरम पर पहोंच गये ओर देवायत मंजुके सीनेपे ढेर होगया तब मंजु अपनी सांसे कंट्रोल करते देवायतकी पीठ सहेलाती रही.. फीर दोनो बाथरुममे चले गये ओर अ‍ेक दुसरेको नहेलाने लगे तब देवायत मंजुके बुब्सपे साबुन लगाते उनको मसलने लगा तो मंजुभी कामुक नजरोेसे देखते देवायतके लंडको साबुन लगाते सहेलाने लगी तब दोनो फीरसे उतेजीत होगये ओर दोनो वही नीचे फर्सपे बेठ गये..

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मंजु देवायतकी गोदमे उनकी कमरके आसपास पैर पसारके बेठ गइ ओर गलेमे हाथ डालके लंडको अपनी चुतपे सेट करने लगी.. तब देवायतके लंडने जटके मारते अपने बीलका रास्ता ढुंढ लीया तो देवायतने बेठे बेठे ही मंजुकी चुतमे लंड घुसा दीया.. तब मंजुने

दोनोही अ‍ेक बार फीरसे काम वासनाकी आगमे जलते चुदाइमे मसगुल होगये.. ओर देवायतने अ‍ेक बार फीरसे मंजुकी धमासान चुदाइ करते उनकी चुतको अपने पानीसे सीचदी.. तब जाके मंजुको कुछ राहत महेसुस हुइ.. लेकीन आज उनकी देवायतने दो बार जबरदस्त चुदाइ करलीथी..

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जीनकी वजहसे मंजुकी चाल काफी बीगड चुकीथी.. फीर दोनोही नहके बहार आगये ओर फटाफट कपडे पहेनके तैयार होगये.. फीर बहार होलमे आके बैठ गये तब मंजुने मेइन गेइट खोलदीया तो बहार साम ढलने आइथी.. तब मंजु देवायतके पास उनसे सटकर बेठ गइ..

मंजुला : जानु आप कल फीर वापस आओगेनां..? क्या हेनां मम्मी आपको अ‍ेक बार देख लेगी.. ओर उनको कुछ पुछनाहे तो पुछ लेगी.. प्लीज.. मेरी खातीर.. आज सामको पापा उनसे बात कर लेगे..

देवायत : (कुछ सोचते) ठीक हे बेबी.. मुजे फोन कर देना.. तब मे आजाउगा.., बेबी क्या हम भाग जाये..? चलनां हम भाग जाते हे.. अब हमने सादीतो करली हे..

मंजुला : (आस्चर्यसे) अरे.. आप पागलतो नही हो गये..? अरे बाबा.. जब हम दोनोके पापाने खुद हमारा रीस्ता पका करलीया हे तो फीर हमे क्यु भागना..? जानु थोडा सबर करलो.. कुछना कुछतो होगाही..

देवायत : ठीक हे.. क्या हेनां.. वो.. अगर.. आपकी मम्मीने मना करदीया तो..? इसीलीये केह रहा था..

मंजुला : बाबु वो सब मे हेन्डल कर लुगी.. अब पापाने केह दीयाहेतो मुजे कीसीका डर नही.. फीरभी अ‍ैसी सीचुअ‍ेशन आइ तो मे खुद भागके आपके घर आजाउगी.. बस..? अबतो कोइ टेन्शन नही..?

देवायत : (हसते) ठीक हे चलो मे चलता हु कल फोन करना.. मे आजाउगा..

फीर देवायत मंजुके होठ चुमते वहासे चला जातहे.. ओर मंजु खुस होते गाना गुनगुनाते अपने काम पे लग जाती हे.. तभी अ‍ेक रीक्सा मे उनकी मम्मी नीर्मला ओर भावना आजाती हे ओर सब केरी बेग वही सोफे पे रखते ही दोनो थक के वही बेठ जाती हे.. तब मंजु दो ग्लास पानी लेके हसती हुइ आतीहे ओर दोनोके पानी पीलाती हे.. तब नीर्मला मंजुको अ‍ैसे लंगडाते चलते देखती हे.. ओर ैनके हाथोसे पानी लेकर पानी पीते मंजुकी ओर देखती रहेती हे.. जब पानी पीलीया तब ग्लास वापस देते पुछ ही लीया..

नीर्मला : मंजु.. क्या हुआ तुजे..? अ‍ैसे लंगडाते क्यु चल रही हे..? कही गीर गइथी क्या..?

मंजुला : (सकपकाते सरमाते) जी..वो..वो.. बाथरुममे थोडा पैर फीसल गयाथा.. तो पैरमे मोच आगइ..

भावना : (थकी आवाजमे) मंजुदी जटसे खाना बनालो यार.. बहुत भुख लगीहे.. ओर नींदभी जोरोकी आ रही हे.. आजतो मम्मीने मुजे चला चलाकर थका दीया..

नीर्मला : (हसते) तुजे कहा चलना पडा हे.. सब जगाह रीक्सेमेही तो गये हे.., हें..हें..हें..

भावना : मम्मी आपने कीतना सामान लीया हे.. सब मुजेही उठाना पडा.. आजतो बेडमे गीरतेही नींद आजायेगी..

नीर्मला : (हसते) चल ठीक हे खाना खाकर जल्दी सोजाना.. मंजु.. अभी तक तेरे पापा नही आये..?

मंजुला : (घडी में देखते) बस मोम आतेही होगे.. अब टाइम होगया हे.. चलो मुजे खानाभी बनाना हे..

मंजुला : (तब मंजु कीचनमे चली गइ.. ओर मनमे सोचने लगीकी) आजतो मम्मीके सवालोसे बाल बाल बच गइ.. जालीमने आज मुजे कीतनी बेहरेहमीसे चोद लीया.. ओर वोभी दो दो बार मेरी चुदाइ करली.. उनको मनाभी तो नही कर सकती.. आखीर मेरा पती जो हे.. अब उनको केह दुगी.. की जबतक हमारी सादी नही होजाती तबतक आरामसे मेरी चुदाइ करे.. ओर मेभी तो इनके बगैर रेह नही सकती.. क्या मस्त चुदाइ करते हे.. बापरे.. कीतना बडा लंड हे उनका.. आजको मेरी चुतकी चोद चोदके धजीया उडादी..

यही सब सोचते वो मुस्कराते खाना बना रहीथी.. तब नीर्मला सोफेसे उठकर फ्रेस होने बाथरुममे चली गइ तो वहा फर्सपे नीचे मंजुकी चडी पडी दीखाइदी.. जो आम तोरपे वो खुद धोकर बहार सुखा देती हे.. तो नीर्मलाने चडी उठाके देखा तो उनके हाथमें कुछ चीपचीपासा लगा.. ओर उपरसे मंजुकी बीगडी चाल.. नीर्मलाको मंजुके उपर कुछ आसंकाये होने लगी.. फीर वो हाथ मुह धोकर बहार नीकली..

तो रुममे बेडपेभी नजर चली गइ ओर उसने बेडकी चदरको अस्त व्यस्त देखा.. तो वो वहा नजदीक जाकर देखने लगी.. तो नीर्मलाको चंदरपे भी कुछ गीले धबे दीखे.. तब नीर्मला उन धब्बेपे उंगली लगाकर चेक करने लगी.. तो उसे वही चीपचीपचसा लगा जो मंजुकी चडीपे लगाथा.. तब नीर्मलाको जरासीभी समजनेमे देर नही लगी की यहा उनकी गैर मौजुदगीमे पीछे क्या हुआ हे..

ओर उनको मंजुपे गुसा आने लगा.. लेकीन इस बारेमे मंजुसे बात करे भी तो कैसे..? क्युकी अभी राजीवके घर आनेका वक्त होगया था.. ओर वो अभी इस बारेमें हंगामा करना नही चाहतीथी.. उसने इस बारेमे कल फुरसतमे अकेली मंजुसे बात करनेका फैसला कर लीया.. ओर वो बहार आकर सोफेपे बेठ गइ.. ओर कीचनमे मंजु खाना बना रहीथी.. उनकी ओर घुरते उसे गुसेसे देखती रही..

तभी राजीवभी धर आगया ओर सीधा बाथरुममे नहाने चला गया.. फीर नहाकर नाइटके कपडे पहेनके होलमे आगया.. ओर नीर्मलाके साथ उनसे सटकर बैठ गया.. तो नीर्मला राजीवकोभी घुरके देखने लगी.. तबतक खानाभी बन चुकाथा ओर सभी अ‍ेक साथ खाने पे बैठ गये.. सब खाना खाते रहे तभी भावना फटाफट खाके उपरकी मंजीलमे अपने रुममे सोने चली गइ.. तब खाना खाते राजीव ओर मंजु अ‍ेक दुरेके सामने देखके हस रहेथे.. तो दोनोको अ‍ैसे हसते देखकर नीर्मलाको बडा आस्चर्य हुआ.. ओर वो दोनोकी ओर घुरके देखने लगी.. तब राजीवने हसते हुअ‍े बातोका दोर सम्हाला....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ८०

तभी राजीवभी धर आगया ओर सीधा बाथरुममे नहाने चला गया.. फीर नहाकर नाइटके कपडे पहेनके होलमे आगया.. ओर नीर्मलाके साथ उनसे सटकर बैठ गया.. तो नीर्मला राजीवकोभी घुरके देखने लगी.. तबतक खानाभी बन चुकाथा ओर सभी अ‍ेक साथ खाने पे बैठ गये.. सब खाना खाते रहे तभी भावना फटाफट खाके उपरकी मंजीलमे अपने रुममे सोने चली गइ.. तब खाना खाते राजीव ओर मंजु अ‍ेक दुरेके सामने देखके हस रहेथे.. तो दोनोको अ‍ैसे हसते देखकर नीर्मलाको बडा आस्चर्य हुआ.. ओर वो दोनोकी ओर घुरके देखने लगी.. तब राजीवने हसते हुअ‍े बातोका दोर सम्हाला....अब आगे

राजीव : (हसते) नीमु.. आज हमारी मंजुके लीये अ‍ेक रीस्तेकी बात आइ हे.. वो लोग पहेचान वाले हे.. मानलोनां घरके ही लोग हे.. हें..हें..हें.. मेने तो हां कहेदी हे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (खाना खाते अटक गइ) राजीव आपने उन लोगोको हां.. भी.. कहेदी..? मंजुको पुछे बगैर..? (मंजुकी ओर घुरते) चलो अच्छा हुआ.. मंजु अब बहुत बडी होगइ हे.. करदो सादी इनकी.. वैसे भी लडकीया अपने घर चली जाये उतनाही अच्छा हे.. वरना खामखा बदनामीका डर रहेता हे..

राजीव : (थोडा गुसे होकर) नीमु तुम ये क्या बक रही हो..? हमारी लडकीया कोइ अ‍ैसी वैसी नही हे.. ओर मेरी लडकीया मुजपे बोज नही हे समजी.. मुजे नाज हे अपनी बेटीओपे..

नीर्मला : (मंजुकी ओर घुरते) हां हां.. पता हे.. मे हमारी लडकीयोकी बात नही कर रही.. समजे..? बताओ.. कौन लोग आयेथे.., लडका कौन हे..? ये भी बताओगे की अपने मनमे ही रखके बेटीओकी सादी कर दोगे..

राजीव : (हसते) अरे मनमे क्यु रखुगा.. ओर मेने मंजुकोभी पुछ लीया हे.. मंजुकोभी ये रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. इसे लडका पसंद हे.. अरे पसंद..? वोतो दोनो अ‍ेक दुसरेको जानते भी हे.. अ‍ेकही कोलेजमे तो पढते थे.. ओर.. ओर..(धीरेसे) दोनो अ‍ेक दुसरेको आपसमे प्यारभी करते हे..

नीर्मला : (चोंकते थोडा गुसेसे) व्होट..? दोनो आपसमे प्यार करते हे..? कोन हे वो लडका..? (मंजुकी ओर घुरते) हमने दोनोको सहेरमे इसीलीये तो पढनेके लीये भेजाथा.., ताकी इच्छेसे लडकेको ढुंढके प्यारका खेल खेल सके.., हमने इन दोनोको वहा पढाइ करने थोडीना भेजाथा.. अ‍ेकतो पढाइ अधुरी छोडके फैल होकर वापस आगइ.., वहा पढाइमे क्यु ध्यान देगी.. वोभी कीसी लडकेके चकरमे पडी होगी.. तभीतो फेल हुइ हे.. ओर आपभी खुस हो रहे हो..? बडा संस्कार दीया हे अपनी बेटीओको.. देख रही हु इनकी हरकते..

राजीव : (थोडा गुसेसे) नीमु.. अब ताने मारना बंध करोगी..? अ‍ेकतो पुरी बात सुनती नही ओर बीचमे ही सुरु होगइ..

नीर्मला : (थोडा सांत होते) ठीक हे..ठीक हे.., कहो.. कौन लोग आये थे रीस्ता लेकर.. लडका कौन हे..? उनके मां बाप कोन हे.. वो कीस खानदानसे हे.. अब बताओगे भी की नहीं..?

राजीव : (मुस्कुराते) वो.. वो.. हमारा किशन.. उन्हीका अ‍ेक लौता बेटा हे देवायत.. जो अब किशनका पुरा कारोबार सम्हालता हे.. वोही.. मंजु ओर देवायत अ‍ेक दुसरेको पसंद करते हे.. अगर नही करते तो भी मे हां केह देता.. लेकीन मंजुको पुछकर.. अब मंजुके लीये इनसे बहेतर कोइ रीस्ता थोडी मीलेगा.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (खाना खाते मुह खुलाही रेह गया धीरेसे) क्या.. दे..वा..य..त.. वो..वो.. (मंजुकी ओर देखते) मंजु तु उनको कबसे जानती हे..? ओर तुम दोनोका कीतने दीनोसे चकर हे..? आइ.. मीन.. तुम दोनो अ‍ेक दुसरेसे कबसे प्यार कर रहे हो..? मंजु मुजे सच सच बतानां.. फीर मुजे तुमसे ओर भी बात करनी हे..

मंजुला : (नजर जुकाते धीरेसे) मोम.. वो.. हम दोनो पीछले तीन महीनेसे.. (हिंमत करते) मोम.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेसे प्यार करते हे.. ओर मे उनसे ही सादी करना चाहती हु.. धेट्स ओल..

नीर्मला : (सोक्ट होकर अ‍ेक नजरसे मंजुको घुरते) देखा राजीव.. आपकी लाडलीका कैसे मुह चलता हे.. कैसे फटाफट बोल गइ.. इनको सरमभी नही आइ.. ओर आप भी..? आपको इस बारेमे अ‍ेकबार भी मुजसे पुछनेकी जरुरत नही लगी..? राजीव मत भुलो ये मेरीभी बेटी हे.. ओर..ओर.. ये दोनोके बीच सादी.. नही..नही.. में ये सादी नही होने दुगी.. आप उसे मना करदो.. मे कुछ नही जानती..

राजीव : (थोडी उची आवाजमें) यार तुम समती क्यु नही..? क्या मे किशनको मना करता..? क्या केहता उनको.. ओर उस खानदानमे क्या खराबी हे..? कीतना अच्छा खानदान हे.. हमारी तीन पीढीयोसे उनके साथ सबंध हे.. तुमभी तो सबको अच्छी तराह जानती हो.. ओर देवायतभी अक्सर घरपे आता हे.. तुमने भी उनको देखा हे.. वो कीतना अच्छा लडका हे.. ओर वो अ‍ेक रोयल फेमीलीभी हे.. क्या ये सब तुमको पता नही हे..? देखना मेरी बेटी उस घरकी रानी बनेगी.. हमारी मंजु वहा राज करेगी राज..

नीर्मला : (मनमे सोचते) राजीव.. मेरे भाइ.. अब तुजे कैसे कहु.. की अब वो मेराभी पती हे.. मे खुद उनकी रानी बन चुकी हु.. हम दोनोने यहा हमारे घरमेही मंदिरके सामने गांधर्व सादी करली हे.. ओर आये दिन यहा आकर तेरी बहेन कहु या तेरी बीवी.. आइ मीन.. मुजको चोदकर चोदकर मेरी हालत बीगाडके अ‍ेक पतीका हक अदा करता हे.. ओर मे मेरी ही बेटीको अपनी सौतन बनाउगी..? नही नही.. सोरी राजीव.. मे मेरे देवाको कीसी ओरके साथ नही बाट सकती.. चाहे वो मेरी बेटीही क्यु ना हो.. हम दोनोने मंदिरके सामने जींदगीभर अ‍ेक दुसरेका साथ नीभानेकी कसम खाइ हे.. ओर तबसे मे मेरी मांगमे देवाके नामका ही सींदुर लगाती हु.. राजीव अब मेने मेरे देवाको मेरे पहेले पतीका हक देदीया हे.. सोरी.. मे ये सादी नही होने दुगी.. वैसेभी तुजे भी पता हे.. मंजु किशनकी बेटी हे.. तो इस नाते मंजु देवाकी बहेन हुइ.. नही नही.. मे ये पाप नही होने दुंगी..

राजीव : (थोडा जोरोसे) नीमु.. कबसे क्या सोच रही हो..? कुछ..तो बोलो..

नीर्मला : (तंद्रासे बहार आते) देखो.. राजीव मेरे खयालसे हमे इस टोपीकपे अभी बात करनेकी जरुरत नही हे.. पहेले हम दोनो आपसमे सब डीसक्स कर लेगे.. फीर तुम उन लोगोको कोइ जवाब देना.. (मंजुकी ओर देखते) मंजु तु सब काम समेटके सो जाओ.. इस बारेमे मे तेरे पापाके साथ डीसक्स करके कल फैसला लुंगी.. ओर तुजे बात करके कल बता देगे.. तु सब काम नीपटाके सो जाओ..

मंजुला : (सरमाते) जी मोम..

कहेते मंजु सब बर्तन लेके वोसरुममे चली गइ.. ओर अपना काम नीपटाने लगी.. तो नीर्मला डाइनींगसे उठकर चुपचाप अपने रुममे चली गइ.. ओर अपने कपडे चेन्ज करके गाउन पहेनकर अपने बेडपे लेटते आंखोपे हाथ रखके अपने अतीतके बारेमे सोचती लेइट गइ.. तब राजीव सोफेपे जाकर बैठ गया.. ओर बेठकर टीवीपे न्युज देखने लगा.. तब मंजुनेभी सब काम नीपटा लीया ओर वो राजीवको गुडनाइट पापा.. कहेते उपरकी मंजीलपे सोने चली गइ.. तब रुममे जाकर देखातो भावना घोडे बेचके सो रहीथी..

दोनो बहेनका बेड अ‍ेकही रुममे अलग अलग था.. ओर मंजुने अपने कपडे चेन्ज करते गाउन पहेनलीया ओर बेडपे लेटतेही देवायतको फोन लगा दीया ओर उनसे धीमी आवाजमे आजके बारेमे हुइ सब बाते बताने लगी.. तब नीचेकी ओर कुछ देर न्युज देखकर राजीव टीवी बंध करके सभी लाइट दरवाजे बंध करदेता हे.. ओर अपने रुममे सोने चला जाता हे.. ओर अंदर जातेही अपने बेडरुमका दरवाजा धीरेसे बंध करके पलटके देखता हे..

तब नीर्मला गंभीर होकर आंखोपे हाथ रखते लेटी हुइ राजीवका इन्तजार कर रहीथी.. तब राजीव बेडकी ओर बढ गया ओर धीरेसे नीर्मलाके बगलमे उनके पास जाकर लेट गया.. तो नीर्मला तबभी अ‍ैसेही लेटी रही.. तब राजीवने नीर्मलाकी ओर देखा.. फीर करवट लेते नीर्मलाको कमरमे हाथ डालके अपनीओर खीचलीया तब नीर्मलाभी सरकते राजीवकी बाहोमे आगइ.. ओर राजीवने नीर्मलाके सरको अपने हाथका तकीया बनाते बाहोमे भरलीया.. फीर नीर्मलाके चहेरेकी ओर देखने लगा.. तब नीर्मलाकी आंख गीली थी..

तो राजीवने नीर्मलाकी आंख अपने हाथोसे पोछकर नीर्मलाको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके चहेरेकी ओर देखते नीर्मलाके होंठ चुमलीया.. तब नीर्मला राजीवको कसके बाहोमे भरलेती हे.. ओर फीरसे आंसु बहाने लगती हे.. तब राजीव उनके सरको सहेलाने लगा.. क्युकी उनको पताथा नीर्मला कीस लीये ये सादी के खीलाफ हे.. तब वो नीर्मलाके चहेरेको थामते उनकी आंखोमे देखते उसे समजाने लगा..

राजीव : (सरको चुमते) नीमु.. मुजे पता हे तु इस बातसे क्यु खुस नही हे.. लेकीन सोच हमारी बेटी उनको प्यार करती हे.. ओर मंजुने मुजे साफ साफ केह दीया हे.. की सादी करुगी तो सीर्फ देवायतसे वरना सारी जींदगी कुआरी रहुगी यातो मर..ओर.. ओर.. नीमु.. मुजे मंजुकी बातोसे लगता हे वो दोनो काफी आगे बढ चुके हे.. हमे इनकी बात मान लेनी चाहीये.. मे मंजुको तेरी तराह तडपते नही देख सकता..

नीर्मला : (आंसु बहाते) भाइ.. तुम सब जानते हो.. फीर भी..? क्या तुम्हे ये रीस्ता जायज लगता हे..? मे मानती हु देवा अ‍ेक अच्छा लडका हे.. उनके लीये सब जायज हे लेकीन.. हमारी बेटीभी वोही.. राजीव जरा सोचो इनकी सादीके बाद इस रीस्तेके बारेमे मंजुको पता चलेगा तो उनपे क्या बीतेगी.. तब मे ओर तुम वहा उनको सम्हालनेके लीये नही होगे.. मेरी बेटी टुट जायेगी..

राजीव : (सरपे हाथ घुमाते) नही नीमु.. हमारी मंजु इतनी कमजोर नही हे.. ओर रही बात जायज ओर नाजायजकी तो हां.. मेने अ‍ैसा सुना हे प्यार ओर जंगमे सब जायज हे.. तुमनेभी तो किशनसे प्यार कीया था.. ओर तब किशन तुमसे सादी करके तुजे अपनानेको भी तैयार था.. लेकीन तब तेरी क्या मजबुरी थी मुजे नही मालुम.. ओर आज तक तुमनेभी तो मुजे नही बताया.. लेकीन कीशनने मुजे सब सचाइ बतादी.. उनकी भी कुछ मजबुरी थी.. तो इनकी सजा हम हमारी बेटीको क्यु दे..?

नीर्मला : राजीव.. बात सीर्फ मजबुरीकी नही हे.. जो बात सीर्फ मेरे अलावा कोइ नही जानता उनकी हे.. तुम उनकी बहेन विमलाको नही जानते.. ओर मे उस बातको कहेनाभी नही चाहती.. राजीव अब मे सीर्फ तुम्हारी बहेन ही नही तुम्हारी पत्नी भी हु.. फीरभी तुमने उनको हां कहेदी..? उनको हां कहेनेसे पहेले अ‍ेक बार मुजे पुछ लेते.. क्या तुजे अब मुजपे विस्वास नही हे..

राजीव : नही नीमु.. बात विस्वासकी नही हे.. किशन केह रहाथा इस रीस्तेके लीये खुद विमलाने कहा हे.. ओर मत भुलो हमारा किशनके साथ तीन पीढीयोसे सम्बंध हे.. ओर हम दोनो आजभी अच्छे दोस्त हे.. तो मे उनको मना नही कर सका.. इसीलीये नही की उन्होने हमारी बहुत मदद की हे.. हमारे रीस्ते आजभी पहेलेकी तराह मजबुत हे.. ओर वो पार्टनर होने के बावजुद कभी भी यहा नही आये.. ओर नाही उन्होने हमे ये जताने दीयाकी वो हमारी मदद करते हे.. आज इतने बरसोके बाद पहेली बार दुकानपेही आया.. वरना सब कामके लीये देवाको ही भेजता हे..

नीर्मला : तो वो कोइ हमपे अहेसान नही करते.., हम उसे बीजनेसमे पैसे कमाके देते हे..

राजीव : (हसते) नही नीमु.. बस.. यही तुम्हारी गलत फेहमी हे.. वो हमारी दोस्तीकी खातीर हमे अ‍ैसेही मदद कर सकते थे.. लेकीन नहीकी.. उन्होने हमारे मान सन्मानका पुरा खयाल रखा.. इसीलीये हमे बीजनेसके जरीये पार्टनर बनाकर सपोर्ट कीया.. वरना सोचो.. उनको हमारे साथ अ‍ेक छोटी दुकानमे पार्टनरमे बीजनेस करनेकी क्या जरुरत थी..? क्युकी खुदकी इतनी बडी वीरासत हे.. खेती बाडी हे.. उनका बहुत बडा कारोबारभी हे.. ओर सुनाहे अबतो देवायतने वही गोडाउन बनाके बहुत बडा धानका बीजनेस सुरु कीया हे.. तो हमारे थोडेसे पैसोकी उनको क्या जरुरत हे..? नीमु वो अच्छा लडका हे.. मुजे देवापे पुरा यकीन हे.. वो हमारे बुढापेभी हमारा सहारा बनेगा.. बीलकुी किशनपे गया हे..

नीर्मला : (कुछ सोचते) राजीव फीरभी क्यु..? मेरा दील नही मानता.. वजह तुमभी जानते हो.. मे मंजुकी सादी देवायतसे कैसे कर सकती हु..

राजीव : (हसते) हां.. जानता हु.. ओर मे इस रीस्तेको गलत भी नही मानता.. मत भुलो.. क्युकी किशन विमलाकी तराह हम दोनोभी वही रीस्तो से बंधे हुअ‍े हमारी जींदगी जी रहे हे.. तो मेरी मंजु ओर देवाभी सादी करलेतो क्या हर्ज हे.. तुजे पता हेना किशनके बा बापुजीभी वोही भाइ बहेन थे.. पता नही वो अ‍ैसे रीस्तोसे कैसे बंधे हे.. ओर हम दोनोनेभी तो वही कीया हे.. ओर आजभी तुम बीसतरमे मेरी बहेन बनजाती हो.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (सरमाते हसते) राजीव.. वो..वो.. हमारी मजबुरी थी.., ओर तुमभी तो मुजसे प्यार करने लगे थे.. ओर वो हम दोनोको अ‍ेक दुसरोकी सख्त जरुरतभी थी..भाइ.. थेन्कस.. तुमने मुजे बहुत सम्हाला हे.. ओर मेरी हर जरुरतको तुमने पुरा कीया हे.. फीर चाहे वो मेरे तनकी ही क्यु ना हो.. भाइ मे आपसे बहुत खुस हु.. (कुछ सोचते) ठीक हे.. मे अ‍ेक बार मंजुसे इस बारेमे बात करना चाहती हु.. फीर हम कोइ फैसला लेंगे..

राजीव : (हसते) ठीक हे.. तुम कल आरामसे उनसे बात करलेना.. फीर मुजे फोन कर देना.. नीमु.. पता हे किशन जाते जाते क्या कहेके गया..? कहेता था राजीव.. अगर नीमु इस रीस्तेसे खुस नही हे तो तुम उनपे कोइ जोर जबरदस्ती मत करना.. मुजे मना कर देना.. हमारे रीस्तेमे कोइ फर्क नही पडेगा.. वो तेरा आजभी उतना सन्मान करता हे..

इतना सुनतेही नीर्मला राजीवके सीनेमे सर छुपाते आंसु बहाने लगी.. तब राजीव उनके सरको सहेलाने लगा.. ओर नीर्मलाने तभी उसी वक्त मनही मन मंजु ओर देवायतकी सादीको मंजुर करलीया.. ओर वो सोचने लगीकी प्यारमे उसे अ‍ेक बार फीरसे धोखा मील गया.. पहेले बाप ओर अब बेटा.. तब नीर्मलाने मनही मन देवायतके साथ बने अपने सादीके नये रीलेशनको हमेसाके लीये खतम करनेका फैसला करलीया..

नीर्मला : (सरमाते सीनेमे सर रखते) भाइ मत करो उनकी बात.. अब मुजे सीर्फ आपसे मतलब हे.. अब आपही मेरे पती हो.. मेने जींदगीभर आपका साथ देनेका वादा कीया हे.. तो मे आपका ही साथ दुंगी.. मे आपको कभी नही छोडुगी.. भाइ आज मुजे आपके प्यारकी जरुरत हे.. मुजे आपके अंदर समालो.. मे मेरा पीछला सब अतीत भुलना चाहती हु.. जो मेरा पीछाही नही छोडता.. भाइ मुजे आपकी आगोसमे लेलो..

राजीव : (बाहोमे कसते) अरे आजा मेरी बहेना.. तेरे लीयेतो मे हंमेसा तैयार ही रहेता हु..

ओर राजीव नीर्मलाके होठोपे होंठ रख देता हे ओर दोनोही मदहोस होते अ‍ेक दुसरेके होठोके रसपान करने लगे.. कुछ देर पहेले नीर्मलासे बात करते राजीवको नही पता थाकी थोडी देरके बाद उनकी बहेन उनके नीचे लेटनेको तैयार होजायेगी.. तब कुछही देरमे दोनो भाइ बहेनके कपडे उनसे अलग होते बेडके कोनेपे साथमे पडे थे.. ओर कुछही देरके बाद राजीव नीर्मलाकी चुतमे लंड डालते नीर्मलाको चोद रहाथा..

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तब नीर्मलाभी सब बाते भुलकर राजीवका साथ अपनी कमर हीलाते देने लगी.. लेकीन पता नही आज उसे राजीवके साथ चुदाइ करते राजीवके चहेरेकी जगाह देवायतका चहेरा नजर आ रहाथा.. चुदाइ करवाते उनका मन बार बार देवायतकी ओर चला जाता था.. जबसे देवायतके साथ रीलेशनमे आइ तबसे नीर्मलाने राजीवको हाथ तक नही लगाने दीयाथा..

ओर आज कीतने दिनोके बाद फीरसे अपने भाइके नीचे लेटे उनका लंड अपनी चुतमे घुसवाके उनसे चुदवा रहीथी.. जो नीर्मलाको राजीवका लंड कुछ खास फील नही हो रहाथा.. क्युकी वो देवायतका तगडा ओर मोटा लंड कइ बार अपनी चुतमे ले चुकीथी.. इसीलीये आज राजीवसे चुदवाते नीर्मलाको बार बार देवायतकी याद आने लगी.. ओर वो अपने भाइके चहेरेमे देवायतका चहेरा इमेजींग करते कमर उछालते राजीवसे जोरोसे चुदवाने लगी.. ओर राजीवको ओर जोरोसे चोदनेके लीये उक्साती रही..

नीर्मला : (आधी आंख चडाते) भाइ.. सीसससइइ आह..आह.. ओर.. जोरसे चोदो.. मेरे अंदर.. समा जाओ..

राजीव : (नसेही हालतमे) नीमु.. मेरी बहेन.. तु आजभी मस्त दीखती हे.. जीइइइ.. चाहता.. हेहेहे.. तुजे.. चोदताहीइइइ रहुहुउउउ... हंममम.. आह... डार्लींग.. आइइइइ लव..युयुयुउउउउ....

नीर्मला : (होंठ चुमते) लव..युयुउउउउ.. टुटुटुउउउ... भाइइइइ.. ओर चोदोओओ.. मुजे.. आज.. अपनी.. बहेनको.. नीचोड डालो..

ओर राजीव जोरोसे नीर्मलाको चोदने लगता हे.. तब नीर्मलाभी जडनेकी कगारपे पहोंच गइ ओर उसने राजीवको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया ओर आंख बडी करते राजीवके होठ लीपलोक करलीये ओर अपनी कमरको नीचे लेटे हुअ‍े जटके देने लगी.. तभी राजीवको अपने लंडपे नीर्मलाका गरम पानी लंडको भीगोते महेसुस हुआ.. ओर वोभी उतेजनासे कांपने लगा.. ओर कुछही धकोके बाद उनके लंटसे पीचकारीया छुट पडी.. ओर नीर्मलाकी चुतको भरने लगी.. तब नीर्मला राजीवको मुह खोलते जोरोसे बाहोमे भीच लेती हे..

ओर राजीक जडतेही नीर्मलाके सीनेपे ढेर होगया.. तब नीर्मला सरमाते राजीवकी पीठ सहेलाती रही.. आज बडे अरसोके बाद राजीवने उनको बडे जोसके साथ चोदलीयाथा.. तो यही सब सोचकर नीर्मलाको खुसीसे हसी आ रहीथी.. ओर वो राजीवकी पीठको सहेलाती रही.. तब कुछही देरमे राजीवका लंड सीकुडकर बहार नीकल गया.. तो दोनोका कामरस नीर्मलाकी चुतसे नीकलते बेडपे गीरने लगा.. तब नीर्मलाने सरमाते हसते हुअ‍े कहा..

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नीर्मला : (सरमाते सरको सहेलाते) भाइ अब उपरसे उतरोनां.. नीचे बेड गंदा हो रहा हे.. आज आप कीतना जोसमे चोद रहेथे.. इतने जोसमे तो मुजे आपने कभी नही चोदा.. क्या आज इस बहेनपे बहुत प्यार आ रहाथा..? हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) हां नीमु.. आज कीतने दिनोके बाद मेरी बहेनने मुजे सामनेसे प्यार करनेको कहा हे..

नीर्मला : (सरमाते हसते होंठ चुमते) भाइ अब आपकी बहेनकी ओरसे आपको अ‍ैसेही प्यार मीलेगा..

तब राजीव नीर्मलाके उपरसे हट जाता हे ओर बाथरुममे चला जाता हे तब नीर्मला बेडपे बैठकर नीकरसे अपनी चुत साफ करने लगती हे.. फीर बालोका जुडा बनाते वोभी उठकर बाथरुममे चली जाती हे तो वहा राजीव नहा रहाथा तो नीर्मलाको देखकर उसेभी हाथ पकडके खीचलीया तो नीर्मला सरमाते हसने लगी..ओर दोनो साथमे नहाने लगे तब राजीवने नीर्मलाके बुब्स दबाके उनसे छेडखानी की.. तो नीर्मला सरमाते उसे मना करने लगी.. ओर अपनी चुत साफ करने लगी.. ओर चुत साफ करते..

उसे अ‍ेक बार फीरसे देवायतकी याद आने लगी.. क्युकी अक्सर देवायत उनकी चुदाइ करलेता तब दोनोही साथमे नहाने जाते.. तब देवायत वहाभी नीर्मलाकी छेडखानी करते जबरदस्त चुदाइ करलेताथा.. ओर नीर्मलाकी हालत बीगाड देताथा.. ओर उसे पुरा दीन आराम करनेको मजबुर करदेता था..

तब नीर्मला देवायतका चोदनेका स्टेमीना देखकर हेरान रहे जाती थी.. फीर राजीव ओर नीर्मला नहाकर बहार आगये ओर गाउन पहेनकर अ‍ेक दुसरोके साथ चीपककर सोने लगे तब नीर्मलाको बार बार देवायतकी याद आने लगी.. फीरभी उनसे अब दुर रहेनेका मन बना चुकीथी..

वो यही सब सोचते नींदकी आगोसमे चली गइ.. सुबह मंजु जल्दी उठकर घरके सब कामोको नीपटाने लगी.. फीर वो नहाने चली गइ.. तबतक नीर्मला राजीवभी उठकर तैयार होगये थे.. तो भावना अभीभी सो रहीथी.. तब निर्मला किचनमे चाइ नास्ता बना रही थी.. जब मंजु नहाके तैयार होकर आइतो नीर्मलाका सब व्यवहार उनको नोर्मल लगा.. दोनो कीचनमे अकेली थी.. फीर भी नीर्मलाने मंजुसे कोइ बाते नहीकी..

तो मंजु मनही मन खुस होगइ.. मंजुको नही पताथाकी ये तुफानके आनेके पहेलेकी सांती थी.. ओर वो नीर्मलाका काममे हाथ बटाने लगी.. फीर तीनोने चाइ नास्ता करने बैठ गये तबभी नीर्मलाने मंजु देवायतकी बाते नही छेडी.. ओर तीनोने चुपचाप चाइ नास्ता करलीया.. तब राजीवभी राहतकी सांस लेते दुकानपे चला गया.. तभी अचानक नीर्मला मंजुको हाथ पकडके अपने रुममे लेगइ.. ओर दरवाजा बंध करलीया.. तब मंजु थोडी गभराके नीर्मलाको देखती रही..

नीर्मला : (मंजुकी ओर देखते) मंजु.. बेडपे बैठ जाओ.. मुजे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी हे..

मंजुला : (थोडा गभराते) जी मोम.. कहीये..

नीर्मला : हां.. तो मंजु.. अब मुजे सब सच सच बतानां.. तुम दोनो कबसे प्यार कर रहे हो..?

मंजुला : (सर जुकाते धिरेसे) मोम.. पीछले तीन महीनोसे.. ओर हम दोनो रीलेशनमे.. मतलब हम काफी नजदीक आगये हे.. हम दोनो आपसमे सादी करना चाहते हे.. बस..

नीर्मला : (कातील मुस्कानसे) अ‍ेक बार सादी होगइ फीरभी.. दुसरी बार सादी करना चाहती हो..? क्या दुनीयाको दीखाना चाहतीहो की हमने सादी करली हे..? मे कल सृतीकी मम्मीसे मीलीथी.. मत भुलो वो मेरी खास सहेली हे.. भुमीका नाम हे उनका.. तुमने नामतो सुना होगा..

मंजुला : (हीचकीचाते) जी..जी.. वो..वो..

नीर्मला : तुजे क्या लगा.. वो मुजे कुछ नही बतायेगी..? तुजे कुछ कहेनीकी जरुरत नही.. वहा तुम दोनो तीन दीन तक पती पत्नी बनके रहेथेनां.. ओर मेने सुना दोनो अ‍ेकही कमरेमे साथमें रहेते थे.. तो फीर.. मे क्या समजु..? ओर वो कलभी इधर आयाथा नां..?

मंजुला : (अब बात छुपानेका कोइ फायदा नहीथा तब सर जुकाते सरमाते धीरेसे) जी.. सोरी मोम.. हम उनके आश्रममे गयेथे.. वहाके मंदिरमे हम दोनोने सादी करली हे.. वहाके बाबाने खुद हमारी सादी करवाइ हे.. फीरभी वो चाहते हे आपही हमारी सादी करदे.. वो नही चाहते हम दोनोके खानदानको कोइ कुछ सुनाये..

नीर्मला : (अदब लगाते आस्चर्यसे) अच्छा..? तुम दोनोको हमारे खानदानकी इतनी चीन्ता हे..? क्या तुम लोगोने सचमे मंदिरमे सादी करली हे..? आइ मीन.. क्या वोही बाबाने तुम दोनोकी सादी करवाइ.. जीनके वो कुलगुरु हे..?

मंजुला : (नजर जुकाते धीरेसे) जी मोम.. वोही गुरुजीने हम दोनोकी सादी करवाइ हे..

नीर्मला : (थोडा सख्त लहेजेमें) तो फीर दोनो.. अबतक कीतनी बार मीले हो.. मतलब.. वो.. पती पत्नीके बीच होता हे.. तु समज गइनां..? कल भी दोनो यही मेरेही रुममे मेरेही बेडपे मीलेथेनां..? सब सच बताना..

मंजुला : (सरमाते नजर जुकाये धीरेसे) जी.. मोम.. अब मे उनकी पत्नी हु.. तो फीर.. उनको कैसे मना कर सकती हुं.. अबतक हम दोनो.. कइ बार मील चुके हे.. मोम.. मे उनके बगैर नही रेह सकती.. प्ली..ज..

नीर्मला : (कुछ सोचते) मतलब तुम दोनो काफी आगे बढ चुके हो.. ठीक हे.. जा कहेदे अपने पापासे.. उनको फोन करके हां कहेदे.. मे जल्दसे जल्द तुम दोनोकी सादी कर देना चाहती हु.. मे कोइ ओर रीस्क लेना नही चाहती.. लेकीन ये मत मानलेना की मे ये सादीसे सहेमत हु.. ओर ध्यान रखना.. भावुको इस बातकी भनकभी ना लगे.. मे नही चाहती भावनाको इस बारेमे कुछ पता चले.. वरना वोभी तेरी तराह.. जाओ तुम..

मंजुला : (सरमाते हींमत करके धीरेसे) मोम.. आप उनको अ‍ेक बार देखलो.. कुछ पुछाना होतो पुछलो.. आज आयेगे.. आपको मीलने.. मेने बुलाया हे उनको..

नीर्मला : (सख्तीसे नजर मीलाते) क्या तुजे लगता हे मुजे उनको मीलना चाहीये..? अब उनसे मीलनेकी कोइ जरुरत नही.. वैसेभी तुम दोनोने तो सादीभी करली हे.. ओर.. ओर.. मीलन.. तो फीर ये मुजसे मीलवानेका उनसे बात करवानेका नाटक क्यु..? मुजे उनसे अब कोइ लेना देना नही हे.. यहासे जाओ तुम..

मंजुला : (जटसे बेडसे खडी होकर जाते जाते पलटकर रुकते) मोम.. मे चाहती हु मेरी इस घरसे विदाइ हो तब सब मुजे खुसी खुसी विदाइ करे.. अगर आपने मनसे उसे स्वीकार नही कीया.. ओर हमारी सादीको मनसे स्वीकृती नही दी.. तो फीर सादीके बाद यहा आना मेरे लीये मुस्कील होगा.. तो मेनेभी फैसला करलीया हे.. जबजक आप उसे मनसे नही स्वीकार करेगी तबतक मे ये सादी नही करुगी.. धेट्स ओल..

कहेते मंजु गुस्सेसे रुमसे बहार नीकल गइ.. ओर नीर्मला मुह फाडके उनको देखतेही रेह गइ.. ओर मंजुने उपर जातेही अपने पापाको फोन करके बता दीयाकी मम्मीसे क्या बाते हुइ.. ओर वो मम्मीको क्या कहेके आगइ.. तब राजीवभी सुनके थोडा दुखी होगया.. ओर वो मंजुका फोन रखते ही निर्मलासे फोन मीलाके बात करने लगा..

तब इधर मंजुने देवायतको भी सब कुछ बता दीया.. की उनकी मोम हमने सादी करली तो हमसे कुछ नाराज हे वगैरे..वगैरे.. ओर उसने देवायतको नीर्मलाका मन बदलने तक कुछ दिन इन्तजार करनेको केह दीया.. तो देवायतभी उनकी सब बातोसे सहेमत होगया..

तब उधर हवेलीपेभी आज उस श्रापके नीवारणके लीये खुद बाबा आश्रमसे आयेथे.. ओर अभी हवेलीपे होम हवन हो रहाथा.. तब किशन ओर विमला दोनोही साथमे पती पत्नीके रुपमे बैठकर हवनमे आहुतीया डाल रहे थे.. तब उनके घरपे सीर्फ धरके सदस्योके अलावा उनका दोस्त वीरजी ओर उनकी पत्नी सरला आयेथे.. सरलाभी आज सजधजके आइथी.. ओर वो किशन ओर विमलाके पीछे बेठकर पीछेसे किशनको छुकर बेठीथी.. उनका रीजन सीर्फ किशन ओर सरलाही जानते थे..

विरजीको अभी इस बातकी भनकभी नहीथी की उनकी बीवी सरलाका कही सालोसे किशनके साथ टाका भीड हुआ हे.. ओर किशन आये दिन वीरजीको कामके बहाने सहेर भेजकर पीछसे वीरजीके घर चला जाता हे.. ओर उनके घर जाकर सरलाके साथ रंगरेलीया मनाते उनकी जमकर चुदाइ करता रहेता हे.. ओर उसीके नतीजेके फल स्वरुप सरला प्रगनेन्ट होते भानुको जन्म दे चुकी हे..

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ओर आजभी दोनोके बीच वही रीस्ता कायम हे.. इस बातकी विरजीको भनकभी नही हे.. क्युकी किशनभी सरलाके साथ अ‍ेक खास मक्सदसे रीलेशनमे आयाथा.. वरना किशन अपने भाइ जेसे दोस्तको धोखा थोडीना देता.. ओर भानु भी उमरमे देवायतसे कुछ अ‍ेक दो सालही छोटाथा.. तबसे सरलानेभी मनही मन किशनको पती मानलीया था.. क्युकी वो कभी भी विरजीसे संतुस्ट नही हुइ थी.. ओर वो आजभी अपनी मांगमे किशनके नामका सींदुर लगाती हे.. ओर किशनभी सरलाकी हर जरुरतको पुरी करता हे..

तभी बाबाने हवन कार्य संपुर्ण कीया.. ओर पुरी हवेलीमे चकर लगाते जायजा लेने लगे.. तब साथमे किशनभी उनके साथ चल रहाथा.. ओर उनके चहेरेपे खुसी आगइ ओर वो मुस्कराने लगे.. ओर बाकी सब होलमे बेठे थे.. तब बाबाकी मुस्कराहट देखते किशनभी खुस होने लगा ओर आखीर बाबाको पुछही लीया..

किशन : (हसते) बाबा आप बडे खुस लग रहे हे.. क्या कुछ श्रापका उपाय होगया..?

बाबा : (हसते) किशन तु बडा नसीब वाला हे.. खामखा गभरा रहाथा.. अरे मुजे पहेले बुला लीया होता..

किशन : (खुसीसे हसते) बाबा क्या केह रहे हो..? कुछ देखा आपने.. मुजे बताइअ‍ेनां..

बाबा : (हसते) अच्छा हे हम दोनो उपरकी मंजीलमे हे.. ओर सबलोग नीचे हे.. तु इधर रुममे आजा ओर दरवाजा बंध करले.. ये बात सीर्फ तुजेही बताउगा.. ये सीर्फ तेरे तकही सीमीत रखना.. समजे..

किशन : (रुममे जातेही दरवाजा बंध करते) बाबा क्या कोइ गंभीर समस्यातो नही हे..

बाबा : (हसते) अरे नही नही.. तु आतो सही.. तुजे सब बताता हु..

किशन : (हसते) जी बाबा आइअ‍े इधर सोफेपे बेठीये मे आपके चरणोमे बेठता हु..

बाबा : (सोफेपे बेठतेही) किशन.. तुमने खामखा इतना इन्तजार कीया.. यहा मेने सब देखा.. अब इधर कोइ श्रापका साया नही हे.. ओर ये तुम छोटे थे ओर पढ रहेथे तबही उस श्रापका नीवारण हो चुका हे.. क्युकी मेने अभी अभी उन दोनो आत्माओके साथ बातकी.. जो तेरे माता पीता हे.. उसे आजही इस हवन कार्यसे गती मील जायेगी.. क्युकी उस कार्यमे सीर्फ हवन कार्यही बाकी रेह गयाथा.. वोभी उस आत्माओकी मोक्षके लीये.. जो वो खुद नही कर सकते थे.. क्युकी इस श्रापके नीवारणमे दोनोने खुदकी बली देदी थी..

किशन : (हाथ जोडते) बाबा मे कुछ ठीकसे समजा नही.. क्या आप मुजे खुलके बता सकते हे..?

बाबा : (हसते) हां.. सुन.. तुजे पता हे तुम्हारे माता पीता कौन थे..? वो दोनोही भाइ बहेन थे.. तुम्हारे दादाने दो सादीया कीथी.. ओर दोनो बीवीओकी कोखसे अ‍ेक लडका अ‍ेकको लडकी पैदा हुअ‍े थे.. ओर ये दोनोही भाइ बहेन तुम्हारे माता पीता थे.. जब वो दोनो भाइ बहेन सहेरमे साथ पढते थे तब तुम्हारे पीता बहुत बार आश्रममे आकर इस श्रापके लीये छानबीन करते रहेते थे.. वो मुजसेभी कइ बार आकर इस बारेमे जानकारीया लेते रहे.. लेकीन तब मे भी साधनाके लीये हिमालय जा रहाथा तो फीर उनसे ज्यादा मुलाकात नही हुइ.. ओर वो खुद छानभीन करते काफी कुछ जान चुके थे.. ओर उसने ये बात उनकी बहेनको बतादी.. तो वो भी इस श्रापकी मुक्तीके लीये अपने भाइसे सादी करनेको आसानीसे तैयार होगइ..

किशन : (हसते) तो बाबा.. क्या मां ओर पीता भी आपसमे प्यार नही करते थे..?

बाबा : (हसते) सुरुमे नही करते थे.. लेकीन तेरे पीताने जब ये बात उनकी बहेनको बतादी तब तेरे मांका नजरीया तेरे पीताके लीये बदल गया.. ओर वो मनही मन उनके भाइको चाहने लगी.. दोनोही सहेरमें अ‍ेक रुममे साथ रहेकर पढाइ कर रहेथे.. तब तेरी ओर तेरी इस पत्नीकी ही तराह अ‍ेक दिन वो दोनो भी मील गये.. फीर क्या.. पढाइ पुरी होजानेके बावजुदभी दोनो वहा अ‍ेक पती पत्नीकी तराह रहेने लगे.. ओर इस श्रापके नीवारणके लीये दोनो भाइ बहेन साधु संतो ओर फकीरोसे से मीलते रहे.. जब दोनोको रास्ता मील गया तब दोनोने मंरिमे जाकर सादी करली.. ओर हवेलीपे आगये..

किशन : (हसते) तो क्या हमारे दादा दादीको इस बातका पता नही चलाकी दोनो भाइ बहेनने सादी करली हे.. हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) नही.. क्युकी तब तेरे दादा ओर उनकी अ‍ेक पत्नी अ‍ेक हादसेमे चल बसे थे.. तभीतो ये लोग वापस हवेलीपे आगये.. तब सीर्फ तेरे पीताकी मांही बची थी.. ओर वो तेरे पीताको कुछ नही केह पाइ.. ओर तेरे माता पीताकी सादीको स्वीकार करलीया.. तब इस हवेलीपे काम ओर रतीनेभी वास करलीया था.. जो उस महान कार्यके लीये उसे अ‍ेक अ‍ैसे जोडेकी तलासमे थे.. जो वास्तवमे दोनो भाइ बहेन होकरभी अ‍ेक पती पत्नीकी तराह जींदगी जीतेहो..

किशन : बाबा आप कीस महान कार्यकी बात कर रहे हे..? ओर फीर मेरे बा बापुजीने कोनसा कार्य कीया..? जो उन दोनोकी साथमे रहस्यमय मोत होगइ..

बाबा : उस महान कार्यमे अभी देर हे.. बस इनकी सुरुआत तुम्हारे माता पीताकी सादीसे ही होगइ हे.. तब कुछ लोगोको पता चल गयाथाकी भाइ बहेनने आपसमे सादी करली हे.. तब उस लोगोने हवेलीमे आना जानाभी बंध करदीया.. क्युकी सभी जानते थेकी तुम्हारे माता पीता अ‍ेक भाइ बहेन हे ओर आपसमे सादी करके अ‍ेक पती पत्नीकी तराह रहेते हे.. तब उस दिन हवेलीके लीये बडा संघर्सका दिन था.. सबने तुम लोगोसे रीस्ता तोड दीया था.. फीरभी तुम्हारे माता पीता उस श्रापके लीये अडग रहे.. ओर अ‍ेक दिन तुम्हारी मां पेटसे होगइ.. तबतक तेरे पीताकी मांभी चल बसी.. ओर नव महीनेके बाद तुम्हारा जन्म हुआ.. ओर दोनो पती पत्नी तुम्हारे आनेसे बहुत खुस थे.. ओर अपनी जींदगी खुसहालीसे जीने लगे.. ओर तुम बडे होते गये.. ओर तुम्हे भी तुम्हारे पीताजीने सहेरमे पढने भेज दीया..

किशन : (हसते) तो बाबा फीर ये विमला..?

बाबा : (हसते) अरे सुनतो सही.. तुम सहेरमे अ‍ेक होस्टेलमे रहेकर पढ रहेथे तब तुम्हारी मां फीरसे पेटसे होगइ.. जब उनको पता चला तब काफी देर हो चुकी थी.. फीर क्या उनको बच्चीको जन्म देना पडा.. तब दोनोही गभरा गयेकी अब क्या होगा.. क्युकी तब दोनोने उस श्रापका नीवारण नही कीया था.. ओर तुम्हारी मांको अपने पतीकी जानकी चीन्ता होने लगी.. तब कीसीके कहेनेपे उस बच्चीको लेकर अ‍ेक दिन अंधेरेमे आश्रममे छोडके चले गये.. तब मेभी १२ साल हिमालयमे रहेकर वापस आश्रमपे आगया.. ओर मेने अपनी शक्तिओके माध्यमसे जानलीयाकी ये बच्ची कीसकी हे.. मेने तेरे पीताके आनेका बहुत इन्तजार कीया लेकीन वो आयेही नही.. तब वो दोनोही पती पत्नी हवेलीमे अकेले रेह गयेथे.. वहाभी कोइ आता जाता नही था.. ओर मेने अ‍ेक दिन कीसीको भेजकर तुम्हारे माता पीताको आश्रम बुला लीया ओर उनको समजाया.. की बच्ची आनेसे श्राप लागु नही होता. तब जाके वो लोग माने.. ओर तुम्हारी बहेनको वापस हवेलीपे लेगये.. तबतक वो बच्चीभी जवान हो चुकी थी..

किशन : (हसते) अच्छा तभी मुजे पता नही चलाकी मेरी कोइ अ‍ेक बहेनभी हे.. हें..हें..हें.. मेरे पीताने बहुत कुछ मुुजसे भी छुपाया हे.. तो फीर उन दोनोकी मौत कैसे हुइ..?

बाबा : (हसते) सुनतो सही.. बेटा तुम्हारी बहेन आश्रममे रहेकर बुहत कुछ जान चुकी थी.. उनके पास बहुत सारी विद्या आ चुकी थी.. उनको येभी पताथाकी तुम उनके भाइ हो.. फीरभी वो तुम्हारी ओर आकर्सीत होगइ.. ओर तुमसे प्यार करने लगी.. ओर उनका रीजन सीर्फ अ‍ेकही था.. वो काम ओर रती.. जो उनको तुमसे प्यार करनेके लीये वीवस कर रहेथे.. क्युकी उनको सीर्फ भाइ बहेनके आपसी रीस्तेही मंजुर थे.. इसीलीयेतो तुम्हारे माध्यमसे उस अंसको इस धरतीपे लाना चाहते थे.. जो इस बातका ज्ञान तुजे नही हे.. तुजे उन हिमाचलके राजाके बारेमेतो पता हेनां..? ओर नही पता तो कीसीसे जानलेना.. बस वोही राजा तेरी चौथी पेढीमे तुम्हारे यहा जन्म लेगा.. ओर ये बात तेरे माता पीताभी जान चुके थे.. तबतक तो तुम ओर तेरी बहेनभी काफी आगे बढ चुके थे.. ओर तेरी मातानेभी अ‍ेक दिन तुम दोनोको देख लीयाथा..

किशन : बाबा तो फीर उनके मरनेका रीजन क्या हम दोनो थे..?

बाबा : नही किशन.. तुम्हारी माने उसी दिन तुम्हारे पीताको तुम दोनोकी बात कहेदी.. ओर उसी दिन दोनोने श्रापका नीवारण करनेकी ठानली.. उस्ी रात दोनोही उनका नीवारण करने बैठ गये.. ओर कुछ वीधी बहेन के साथ संभोग करते करनी थी.. जब सब वीधी संपन हुइ तब बलीकी बारी आइ.. ओर उन शक्तिने दोनो भाइ बहेनसे बलीमे दोनो भाइ बहेनको संभोग करते मांगलीया.. ओर दोनो भाइ बहेनने अपनी सहमती जताते संभोग कीया ओर खुदकी बली देदी.. क्या दोनो मर गये तब दोनो मीले हुअ‍े थेनां..?

किशन : (सरमाते धीरेसे) जी.. जी बाबा.. तब सीर्फ मे ओर विमलाही अंदर गये थे.. ओर तब हम दोनोही बहुत सरर्मींदा हुअ‍े.. हमको ये लगाकी ये दोनो हमारे रीस्तेको लेकरही मर गयेथे.. ओर हमने कीसीको ये बात नही बताइ.. ओर उनका अग्नी संसक्कार करदीया.. आज मुजे इनके मरनेकी असली वजह पता चली..

बाबा : बेटा.. तेरे खानदानका श्रापतो तबही खतम हो गयाथा.. वरना तुम अभी तक जीन्दा थोडीना रहेते..?

किशन : (प्रस्नार्थ भरी नजरसे देखते) बाबा क्यु.. मे क्यु मरता..? मेरातो अ‍ेकही बेटा हे.. देवायत..

बाबा : (हसते) ओर जो वो बहार दुसरी ओरत बैठी हे वो..? क्या उनका लडका तुम्हारा बेटा नही हे..? बेटा तु मत गभरा मुजे सब पता चल जाता हे.. क्या वो ओरत तुजे अपना पती नही मानती..? तो तुजेभी दो बेटे होगये.. तब भी तु जीन्दा हेनां.?. तुमने खामखा उन लडकीकोभी छोड दीया.. जो तेरे साथ पढती थी.. क्या उनकी बेटीभी तुम्हारी बेटी नही हे..? बस वोही बेटी सबकी जननी हे.. जो तेरे बेटेसे सादी करेगी..

किशन : (हसते धीरेसे) बाबा क्या इसीलीये पीछली दो पीढीसे हम भाइ बहेनके बीच रीस्ता बन रहा हे..?

बाबा : (हसते) हां बेटा.. अब तु सही समजा.. सुन.. अब आगेभी वोही होगा.. ओर इस रीस्ता तुम्हारे खानदानकी परंपरा होजायेगा.. सब अपनी बहेनसेही सादी करके अपना घर बसायेगे.. ओर सुन.. आगे तुम्हे अ‍ेक ओर लडका ओर अ‍ेक लडकी भी होगे.. जो लडकी उनके भाइके साथ सादी करलेगी.. अब तुम इस बातको लेकर वीचलीत मत होना.. अब ये आयेदिन तुम्हारे खानदाने मे देखनेको मीलेगा.. ओर आगे जाकर बहुत कुछ होगा.. ओर गांव वालोमे भी अब तेरी ओर इस खानदान की प्रतीष्ठा फीरसे बढेगी.. ओर सबलोग तुमसे फीरसे राजा मानने लगेगे.. यही मेरा आशीर्वाद हे.. अब चल नीचे.. मुजे आश्रममे छोडदे..

किशन : (हसते) बाबा भोजन करके जाना हे.. हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) हां करादे भोजन.. वैसेतो मे कीसीके यहा नही खाता लेकीन तुम कौन हो तुजे तो पता ही नही.. चल आजा भोजन करके जाउगा.. अब आगे जाकर बहुत कुछ होगा.. चल..

कहेते बाबा ओर किशन हस हसके बाते करते नीचे आगये.. तब विमला ओर सरला दोनोही खुस होते बाबाको भोजन कराने लगी.. तबतक किशन ओर विरजी बाबाकी सेवामे लगे रहे.. जब बाबाने भोजन करलीया तब किशन ओर विरजी दोनोही कार लेकर बाबाको आश्रम छोडने चले गये.. फीर वहा जाकर किशनने बाबाको तगडी दक्षीणा भी देदी.. फीर बाबाको छोडकर दोनो वापस हवेलीपे आगये.. ओर सबने साथ बैठकर भोजन करलीया.. तब रसला बार बार किशनको देखते मुस्कराती रही....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ८१

कहेते बाबा ओर किशन हस हसके बाते करते नीचे आगये.. तब विमला ओर सरला दोनोही खुस होते बाबाको भोजन कराने लगी.. तबतक किशन ओर विरजी बाबाकी सेवामे लगे रहे.. जब बाबाने भोजन करलीया तब किशन ओर विरजी दोनोही कार लेकर बाबाको आश्रम छोडने चले गये.. फीर वहा जाकर किशनने बाबाको तगडी दक्षीणा भी देदी.. फीर बाबाको छोडकर दोनो वापस हवेलीपे आगये.. ओर सबने साथ बैठकर भोजन करलीया.. तब रसला बार बार किशनको देखते मुस्कराती रही....अब आगे

जब सबने खाना खालीया तब होलमे आकर बेठ गये तब किशनने कुछ बाते छोडकर बाकीकी सब बाते तीनोको बतादी की बाबाने क्या कहा हे.. ओर सबको तसली होगइकी चलो श्रापका नीवारण होगया.. तभी विरजी खेतोपे चकर लगानेकी बात करते नीकल गया.. ओर विमलाभी थोडी देर बेठकर अभी आती हु.. कहेकर अपने कपडे चेन्ज करने रुममे चली गइ.. तब मौका देखतेही सरला किशनके पास सरकके आगइ.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमने लगे.. फीर सरला थोडी दुर बेठकर धीमी आवाजमे बात करने लगे..

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सरला : (धीरेसे मुस्कराते) किशन.. अब जीस कार्यके लीये ये हवन कियाथा वो कामेतो होगया.. अब देर मत करो.. हमारी उमर नीकल जाये इनसे पहेले हम दोनोको फीरसे पे्रगनेन्ट करदो.. मेभी आपसे अ‍ेक ओर बच्चा चाहती हु.. ओर हो सकेतो कलही इनको कही बहार भेजकर घरपे आजाओ.. ओर अभी टाइमभी सही चल रहा हे.. पुरी दिन दोनो मजे करेगे.. क्या कहेते हो..?

किशन : (हसते) भाभी तु बहोत ठरकी होगइ हे.., देखना अबतो विरजीकोभी पता चल गया हे.. की वो बच्चे पैदा करनेमे सक्षम नही रहा.. कही पेटसे होगइ तो गडबड ना होजाये.. हें..हें..हें..

सरला : (सरमाते हसते) अरे कुछ नही होगा.. वो सब मे देख लुगी.. आप टेन्शन मतलो.. इनकातो ठीकसे खडाभी नही होता.. अच्छा हे आप मुजे मील गये वरना मेरीतो जींदगीही बरबाद होजाती.. मे सीर्फ आपकी वजहसे ही इनके घरमे हु.. ओर मत भुलो आपने मेरीभी मांग भरी हे.. तो मेराभी हक बनता हेकी मे आपके बच्चेको जन्म दु.. अब इस नामर्दसे हमे डरनेकी जरुरत नही हे.. अब भलेही इनको सब पता चल जाये..

किशन : (हसते) बडी हिमत आगइ तुजमें.. अरे भानुतो देदीया अब कीतने बच्चे चाहीये तुजे..? हें..हें..हें..

सरला : (सरमाते धीरेसे) वो मे नही जानती.. बस मुजेतो अ‍ेक ओर बच्चा चाहीये.. ओर आपभी भाभीको फीरसे पेटसे करदो.. वोभी यही चाहती हे.. मेरी कुछ देर पहेले ही इनसे बात हुइ हे.. ओर वोतो मुजसेभी ज्यादा ठरकी हे.. हें..हें..हें..

तभी विमलाभी चेन्ज करके आगइ ओर तबतक सरला थोडी दुर जाकर बेठ गइ.. फीर तीनोने बाबाके बारेमे काफी बातचीत करली.. तबतक विरजीभी खेतोसे वापस आगया ओर वो किशनको आराम करनेको कहेते सरलाको लेकर नीकल गया.. तब मौका देखतेही विमलाभी किशनको लेकर अपने बेडरुममे चली गइ.. ओर अंदर जातेही विमलाने दरवाजा बंध करलीया..

अ‍ेकतो किशन सरलाकी बातोसे काफी गरम होगया था.. ओर वो पुरा चुदाइके मुडमे था.. तो उपरसे उनको विमला खीचकर बेडरुममे लेगइ.. फीरतो क्या कहेना.. किशनके बेडरुममे प्यारका तुफान भवंडर बनके तांडव मचाने लगा.. किशनने विमलाको चोद चोद नीचोडही लीया.. विमलाकी चुदाइ करते उनकी हालत बीगाडदी.. उनका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख दीया.. ओर विमलाको रातमे फीरसे तैयार रहेनेको केहकर वो खेतोपे चला गया.. तब बेडपे विमला बेसुध्ध जैसी हालतमे वही ढेर होकर सोगइ..

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उधर भावनाके दील दिमागमे भी देवायत घुम रहाथा.. वो अब उन्हीके सपने देखते अपने आपको देवायतकी पत्नीके रुपमे इमेजींग करते उनके नामकी कइ बार चुतमे उगली कर चुकी थी.. तब उनको नही पताथाकी अपनेही घरमे उनकी खुदकी बहेन देवायतसे कीतनी बार चुदवा चुकी हे.. ओर उनकी सादी देवायतसे तैय होगइ हे.. वोतो देवायतको मीलते ही अपने दिलकी बात कहे देना चाहती थी..

दो पहोरको खाना खाकर नीर्मला राजीवको टीफीन देने चली गइ ओर वहा दुकानपे थोडी भीड ज्यादा थी.. तो कुछ देर वही रुक गइ ओर राजीवको मदद करने लगी.. अ‍ैसा वो कइ बार कर चुकी हे.. तब मंजु ओर भावु सभी काम नीपटाके आराम करने अपने रुममें जाही रहीथी.. की देवायत आगया.. तो दोनो उनको देखके खुस होगइ लेकीन भावु खुसीके साथ थोडी सोक्ट भी होगइ.. की ये देवायत यहा कैसे..? तब मंजुने उसे प्यारसे होलमे बीठाया.. ओर देवायतके लीये पानी लेने चली गइ..

तब भावना उपर अपने रुममे दोडके चली गइ ओर फटाफट कागज पेन लेकर लेटर मे अपने दीलकी बाते लीखने लगी.. क्युकी मंजुके सामने देवायतसे बात करनेकी हीमत नही हो रहीथी.. तो सोचा देवायतके जाते ही यातो मंजुसे नजर बचाके वो कैसेभी करके उनको लेटर दे देगी.. तो भावना चली गइ तो मंजुने सोच लीयाकी भावना आराम करने चली गइ हे.. ओर वो देवायतको लेकर नीचे अपनी मम्मी वाले रुममे घुस गइ..

मंजुला : जानु.. मम्मी पापाको टीफीन देने गइ हे.. ओर भावु उपर आराम करने चली गइ हे.. तो साम तक वो नीचे नही आयेगी.. मम्मीके आनेसे पहेले मुजे अ‍ेक बार फटाफट प्यार करलो.. मुजसे रहा नही जात.. यही आजाओ..

तब मंजु अपना लोअर नीचे करते लेट गइ ओर टोप उपर करलीया तब देवायतभी पेन्टको थोडा नीचे सरकाके मंजुके उपर चड गया तब मंजुने लंड पकडके अपनी चुतमे फसालीया ओर देवायतने होंठ चुमते अ‍ेकही जटकेमे लंडको मंजुकी चुतमे घुसा दीया.. तब मंजुकी हल्की चीख नीकल गइ.. ओर देवायत कमर हीलाते मंजुको धनाधन चोदने लगा.. तभी भावना उपरसे लेटर अपने बुब्सकी दरारोमे छुपाके नीचे आगइ..

तो देखा होलमे कोइ नही था.. तब उनको अपने मम्मी पापाके रुममे कुछ अजीब आवाजे सुनाइ दी.. तब जल्द बाजीमे मंजु दरवाजा बंध करना भुल गइथी.. तो भावना धीरेसे अंदर जांकते देखने लगी ओर देखतेही सोक्ट होगइ.. उनकी आंखोसे आंसु बहेने लगे ओर वो चुपचाप दोडके उपर अपने रुममे चली गइ.. ओर बेडपे पेटके बल लेटते फुटफुटकर रोने लगी.. ओर अ‍ेक बारतो लगाकी अभीके अभी वो सुसाइट करले..

तब नीचे मंजुभी दो बार जड चुकीथी ओर उनकी मम्मीके आनेका टाइमभी हो गयाथा.. तो उसने जडतेही देवायतको अपने उपरसे हटा दीया ओर उनको नीचे खडा करके उनके पैरोके बीच नीचे बैठ गइ.. ओर उनका लंड अपने मुहमे लेके तेजीसे अंदर बहार करने लगी.. ताकी बेडभी खराब नाहो ओर देवायतकी प्यास भी बुज जाये.. लेकीन उन दोनोको नही पताथाकी उनकी मम्मी भावनाके उपर जातेही आचुकी हे..

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नीर्मला जेसेही अपने रुमके पास पहोंची तो दरवाजा थोडा खुलाथा ओर वो अंदर आही रहीथी की दोनोकी रासलीलाको दरवाजेसे देख लीया.. मंजु देवायतका लंड लोलीपोपकी तराह चुस रहीथी.. ओर वो देखतेही सोक्ट होगइ.. तभी देवायतका ध्यान नीर्मलापे गया.. तो फटाफट अपनी पेन्ट पहेनने लगा..

तबतक मंजुनेभी अपनी मम्मीको देख लीया ओर वोभी खडी होकर सरमके मारे अपने कपडे सही करने लगी.. जब दोनोने कपडे पहेन लीया तब नीर्मला अंदर आगइ.. ओर दोनोको अ‍ेकदम गुसेसे घुरके देखने लगी.. तो मंजु नीचे सर करते सरमाने लगी.. तो देवायत मंद मंद मुस्कराता रहा..

नीर्मला : (थोडी उची आवाजमें) मंजु.. तुम अपने रुममे जाओ.. मुजे देवायतसे अकेलेमे कुछ बाते करनी हे.. (जोरोसे) जा..ओ.. कहानां..

मंजुला : (हींमत करते) मो..म.. वो.. हमने..

नीर्मला : (जोरोसे) चुप.. अ‍ेकदम चुप.. बेसर्म कहीकी.. मेने कहा तुमने सुना नही..? जाओ यहासे..

तब मंजु सर नीचे करके फटाफट दोडके चली गइ.. ओर नीर्मलाने रुमका दरवाजा बंध करलीया तब देवायत समजताथा की अब नीर्मलाभी मुजे प्यार करना चाहती होगी.. इसीलीये मंजुको डाटके भगादीया.. क्युकी वोभी इनकी बीवीथी.. तब देवायत हसते हुअ‍े नीर्मलाकी ओर बढ गया.. ओर उसे बाहोमे भरलीया तब कुछदेर नीर्मला अ‍ैसेही आंख बंध करते खडी रही.. तभी देवायतने उनके होठोपे होठ रख दीये.. तभी नीर्मलाने उसे बाहोसे छुटतेही धका देदीया ओर अ‍ेक जोरोका तमाचा देवायतके गालपे जड दीया.. स..टा..क..

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नीर्मला : (गुसेसे धीरेसे) क्यु..? क्यु..? क्यु कीया मेरे साथ अ‍ैसा..? क्या कमी रेह गइथी मेरे प्यारमे..? जो अब मेरी बेटीके साथभी.. छी.. क्या इस बारेमें अ‍ेकभी बार मुजसे बात करनेकी जरुरत नही लगी..? तुम्हारा ओर मंजुका पीछले तीन चार महीनेसे रीलेशन हेनां..? फीर भी यहा आकर तुम मेरे साथ भी वो सब..? छी.. मां बेटी दोनोके साथ..? तुमको सरम भी नही आइ..? तुमने हमारे घरको क्या समज रखा हे..? ये कोइ रंडीखाना हे..? हंम..

देवायत : (उनके कंधेपे हाथ रखते) देखो नीमु..

नीर्मला : (बीचमेही हाथ जटकते) डोन्ट टच मी.. अ‍ेन्ड डोन्ट कोलमी नीमु.. तुमसे घीन आती हे मुजे.. आजके बाद तेरी जुबानसे मेरा नामभी मत लेना.. आजसे मे तुम्हारे लीये मर गइ हु.. मुजसे कभी अकेले मत मीलना.. मुजसे सादी कीथी नां..? मेरीभी मांग भरीथी नां..? तुम दोनोके दोनो अ‍ेकही नीकले.. छी.. सबके सब हवसके पुजारी हे.. कीसीको हमारे जजबातकी नही पडी.. सबको सीर्फ ये सरीरही चाहीये..

देवायत : (थोडा गुसेसे) चुप.. अ‍ेकदम चुप.., तुम समजती क्या हो अपने आपको.. हंमम..? तुमसे ओर तेरी बेटीसे प्यार कीया तो कौनसा गुनाह कीया..? हम दोनोने मंदिरमे सादी कीहे.., सादीतो मेने तुमसे भी कीहे.. क्या तुम मेरे साथ रहेके मेरा संसार चलाओगी..? नही..नां..? चलो मे तुम्हारे लीये मंजुको छोड दुगा.. तुम मेरे घर मेरी बीवी बनके आजाओ.. छोडदो राजीव अंकलको.. मे तुजे अ‍ेसेही अपनानेके लीये तैयार हु.. मे वादा करता हु सारी जींदगी मे तुम्हारे अलावा कीसी ओरसे सादी नही करुगा.. आओगीनां मेरे घर.. मेरी बीवी बनके..? हंमम..

नीर्मला : (थोडा सांत होते) नही.. तुमभी जानते हो मे ये नही कर सकती.. में ओल रेडी सादीसुधा हु.. मेरा पती राजीव हे.. मे उनको छोडके नही आ सकती..

देवायत : हां इसीलीये.., तो तुम क्या चाहती हो..? मे बीना सादीके अ‍ैसेही सारी जींदगी कुआरा रहु ओर तेरे साथ मे अपनी प्यास बुजाता रहु.. हंममं.. बोलनां..? मुजे कीसीना कीसीसे तो सादी करनीही थी तो फीर मंजु क्यु नही..? मेने सोचाथा की मंजुसे सादी करके मे तुमसे भी नजदीक रहुगा ओर मीलता रहुगा ओर खुस रखुगा.. लेकीन..

नीर्मला : (दुसरी ओर मुह करते धीरेसे) स्टुपीड.. तुम समजते क्यु नही..? वो..वो.. मंजुकी सादी तुम्हारे साथ नही होसकती.. वो तुम्हारी.. तुम्हारी.. मे नही बता सकती.. यार जाओ तुम यहासे..

देवायत : हां हां बोलनां वो मेरी क्या..? अ‍ेक बात कान खोलके सुनलो.. हम दोनोने मंदिरमे सादी करली हे.. बाबाने खुद हमारी सादी करवाइ हे.. सायद राजीवअंकल बाबाको जानते हे.. उनकोभी कोइ अ‍ेतराज नही.. तो आपको क्या प्रोबलेम हे..? ओर सुनलो ना मंजु मेरे बगैर रेह सकती हे ओर नाही मे.. आप हमारी सादी करवा रहेहो तो ठीक हे वरना मे मंजुको अ‍ैसेही घर लेजाउगा.. ओर आखरी बात.. अभी जो आपने कहा हे नां.. अब मुजसे कोइ रीस्ता मत रखना.. उन बातपे कायम रहेना.. ओर अ‍ेक बार ठंडे दीमागसे सोचना.. की जो में गुसेमे बोल गइ वो सही हे की नही.. मे चलता हु.. जो भी फैसला लो मेरे बापुको फोन करके बता देना.. ओर तुम मुजसे तो कभी बात ही मत करनां..

कहेते देवायत रुमसे बहार नीकल गया.. तब होलमें मेइन गेइटके पास मंजु खडी थी.. तो दोडके देवायतके गले लग गइ.. ओर फुटफुटके रोते आइ लव यु.. आइ लव यु.. कहेने लगी.. तब नीर्मला दोनोको देखती ही रेह गइ.. तो देवायतभी उनको कसके अपनी बाहोमे भीच लेता हे ओर आइ लव यु टु.. कहेते उनके सरको चुम लेता हे.. फीर अलग होतेही अ‍ेक नजर नीर्मलाकी ओर देखते वहासे जटसे नीकल जाता हे..

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तब मंजुभी दोडकर उपर चली जाती हे ओर भावनाके पास बेडपे बेठते जोरोसे रोने लगती हे.. तो भावना उनकी ओर देखती हे.. ओर उनको मालुम होनेके बावजुद रोनेका कारण पुछ लेती हे.. तब मंजुको उनकी मम्मीने भावनाको कहेनेसे मना कीयाथा उनके बावजुद रोते रोते सब बाते भावनाको बता देती हे..

जीसे सुनके भावनाभी सोक्ट होजाती हे.. तब उनको पता चलाकी ये दोनोतो तीन चार महीनेसे रीलेशनमे हे.. ओर मंदिरमे सादीभी करली हे.. ओर यहा उनके मम्मी पापा उनकी सादी करने वाले हे.. तब वो अपने आपको सम्हालती हे फीर मंजुको गले लगाके उसे आस्वासन देती हे..

भावना : (गले लगाते) दीदी आइ अ‍ेम सोरी.. मेने आपको गलत समजा था.. मुजे माफ करदो..

मंजुला : (आंसु बहाते) अरे पगली तुम क्यु सोरी बोलती हे.. क्या तुमभी देवुको पसंद करतीहोनां..?

भावना : सोरी.. दीदी मुजे नही पताथा आप दोनो काफी आगे बढ चुके हो..

मंजुला : भावु इसमे तेरी कोइ गलती नही हे.. मेरा देवु हे ही अ‍ैसा.. मेने उसे पहेली बार देखा तबही मे उसे चाहने लगी थी.. लेकीन तुम फीकर मत करो.. मे देवुसे इस बारेमे बात करुगी..

भावना : (जटसे अलग होते) नही दीदी आपको मेरी कसम.. अब इस बारेमे बात करनेका कोइ फायदा नही.. आपके लीये वो परफेक्ट हे.. आपही उनके साथ सादी करलीजीये..

मंजुला : (भावनाके आंसु पोछते) भावु तु मुजे प्रोमीस कर.. तु कुछ उल्टा सीधा नही सोचेगी.. वरना तुजे मेरी कसम.. मुजे प्रोमीस कर..

भावना : (सर जुकाते आंसु पोछते) जी.. जी दीदी मे प्रोमीस करती हु.. लव यु दीदी..

मंजुला : (बाहोमे कसते) लव यु टु मेरी बहेन.. बस मम्मी मान जाये..

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तभी मंजुने देवायतको फोन लगा दीया ओर उनसे बात करने लगी.. तब भावना भी वही बेठी दोनोकी बात सुा रहीथी.. ओर मंजुने उनकी मम्मीको मनानेकी बात कहेदी.. ओर देवायतसे अ‍ेक रीक्वेट करदी की जबतक मम्मी सामनेसे ना कहे तबतक दोनो सादी नही करेगे.. ओर अ‍ैसेही बहार मीलते रहेगे.. तब देवायतभी समजदार थातो उसने मंजुकी सभी बातको मानलीया.. ओर अब घरमे ना मीलते बहार मीलनेका तैय करलीया..

उधर देवायतभी अपने गांव धर चलाजाता हे.. तबतक साम ढल चुकीथी ओर ओर सभी खाना खा रहेथे.. देवायतने किशन ओर विमलासे अभी कुछ समय सादी ना करनेकी बात कहेदी.. तब किशन ओर विमला दोनोही सोक्ट होगये.. ओर दोनोही अनुमान लगाने लगेकी जरुर नीर्मलाने मना कीया होगा..

विमला : बेटा क्या तुम्हारी इस बारेमे कीसीसे बात हुइ हे.. आइ मीन मंजुसे..?

किशन : बेटा लेकीन राजीवने तो हां कहेदी हे.. तु कहेतो इस बारेमे मे राजीवसे बात करलु..?

देवायत : नही बापु.. आप लोग फीकर मत करो मे सादीतो मंजुसेही करुगा.. लेकीन हमे थोडा वक्त चाहीये.. ओर आपभी टेन्शन मतलो मे सामनेसे कहुगा.. तब आप मेरी सादी मंजुसे करवा देना..

किशन : (स्माइल करते) ठीक हे बेटा.. जैसा तुजे ठीक लगे.. तु जब कहेगा तबही करेगे..

देवायत : बापु.. अब मे सहेर जा रहा हु.. सोचता हु वही रहेके अपनी ओफीस खोलके अपना कारोबार थोडा सेट करलु.. वहाभी तो कुछ होना चाहीये..

किशन : (हसते) ठीक हे जैसे तुजे ठीक लगे.. लेकीन बेटा अ‍ेक बातका खयाल रखना.. ये सब विरासत तुजेही सम्हालनी हे.. वहा हमे ज्यादा दिन नही रहेना.. बस सब सेट करके कीसीको सोंपके इधर आजाना..

देवायत : (हसते) अरे बापु मुजे सब पता हे.. सीर्फ दो तीन सालकीतो बात हे.. फीर वही आदमी सेट करके आजाउगा.. ओर मेभी तो आता जाता रहुगा.. हमेसाके लीये थोडी जा रहा हु.. हें..हें..हें..

किशन : (हसते) बेटा.. वहा हमारा अ‍ेक बंगलो हे.. तु वही चलाजा मे विरजीसे आजही कहेके उसे ठीक करवाता हु.. कलही उनको भेजता हु..

देवायत : (हसते) जी बापु.. मेभी विरजीकाका के साथ चला जाता हु..

रातकोही किशनने विरजीको फोन करके दुसरे दिन देवायतके साथ सहेर जानेको बोल दीया.. उस रात किशन ओर विमला पुरी रात चुदाइ करते रहे.. किशनने कामोतेजक की गोली खाकर पुरी रात विमलाकी जमकर चुदाइ करली.. ओर विमलाकी हालत पतली करदी.. अ‍ेकतो दिनमे भी किशनने उनकी चुदाइ करके बेसुध्ध जैसी हालत करदीथी ओर रातमेभी उनकी जबरदस्त धमासान चुदाइ हुइ..

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तब विमलाको भी नही पताथा की दिन ओर रातकी उनकी जबरदस्त चुदाइके कारण उनकी चुतको किशन कइ बार भर चुकाथा.. जीसके कारण उनके गर्भमे किशनका बीज आ चुका हे.. ओर वो फीरसे प्रेगनेन्ट होगइ हे.. जब सरलाने उनको कहा तबही किशनने ठान लीयाथा की सरलाकी बात सच हे.. इनके फल स्वरुप आज विमलाकी सारी तम्मना आज पुरी करदी.. अब वो अगले दो दीन बीस्तरसे उठने वाली नही थी.. क्युकी उनकी चुतमे काफी सुजन आगया था..

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तब दुसरे दिन देवायत ओर विरजीभी सहेर चले गये.. ओर दोनो वहा बंगलेका मरम्मत करवाने लगे.. तब किशन ओर विमला दोनोही देरसे उठे.. तब विमलाकी चालही बदल चुकीथी.. ओर वो खुब सरमाइ.. तब किशन विमलाको आराम करनेको कहेते तैयार होकर सीधाही विरजीके घर चला गया.. उनको पताथा अभी सरला अकेली होगी.. ओर वो पुरा दिन सरलाकी चुतकी धजीया उडाता रहा.. सरलाकोभी चोद चोदकर उनकी चुत भरता रहा.. ताकी वोभी पेटसे होजाये.. जीनके नतीजेके फल स्वरुप सरलाभी प्रेगनेन्ट होगइ..

ओर दिन बितने लगे.. इसी दौरान देवायतभी सहेर चला गया.. ओर अपने बीजनेसको सेट करने लगा.. सब अपनी नोर्मल लाइफमे बीजी होगये.. इसी बीच मंजुभी सृतीको मीलनेके बहाने देवायतके पास चली जाती ओर देवायतसे जमकर चुदवाके सृतीके घर भुमीका आंटीसे मीलकर वापस आजाती.. तब नीर्मलाभी देवायतसे ना मीलनेकी वजहसे बैचेन रहेने लगी.. अब उसे देवायतकी कमी महेसुस होने लगी..

अब उसे देवायतके साथ बेरुखीका व्यवहारसे पछतावा होने लगा.. वो जबभी अकेली पडती तब देवायतके बारेमे सोचमे डुब जाती.. ओर घरमेभी गुमसुम रहेने लगी.. उसे धीरे धीरे समजमे आने लगाकी वो बहुत बडी गलती कर चुकी हे.. अगर देवायतकी सादी मंजुसे नही करवाती तो देवायत दुसरी लडकीसे सादी करलेता.. ओर उनसे हमेसाके लीये दुर हो जाता.. तो कमसे कम मंजुसे सादी करके वो उनके नजदीकतो रहेगा.. यही सब सोचते वो दो दो तीन तीन घंटे अपने बेडपे लेटते सोचमे डुबी रहेती..

नीर्मला : (मनमे) उसने क्या गलत कहा.. मे थोडीना उनका संसार चला सकती.. सच ही तो कहेता था वो.. अगर मंजु नहीतो दुसरी लडकीसे सादी कर लेता तो फीर मंजुही क्यु नही..? ओर मे भी जलतीथी तो वोभी कीनसे..? मेरी ही बेटीसे..? जालीम मुजे प्यारभी तो बहुत करता था.. मेरी चीखे नीकला देता था.. बीलकुल अपने बापुकी तराह.. मेनेही उनको मुजसे हमेसाके लीये दुर कर दीया हे.. जालीम कहेके गयाकी अब अपनी बातपे कायम रहेना.. तो अब उनसे माफी मांगु.. तोभी कीस मुहसे.. अबतो मुजसे उनको मीलनेकी हीमतही नही होती.. क्या वो कभी मुजे माफ कर पायेगा..? जोभी हो.. जबभी मुजे अकेला मीलजाये.. मे उनके पैरोमे नाक रगडके माफी मांग लुगी.. मुजसे उनके बीना रहाभी तो नही जाता..

अ‍ैसेही समय बीतने लगा तब विमला ओर सरलाका पेटभी काफी नीकल गयाथा.. तब सरलाको प्रेगनेन्ट देखकर विरजीको सरलापे आसंकाये होने लगी.. क्युकी वो जानताथा.. की वो बच्चा पैदा करनेमे सक्षम नही हे.. तो सरला कैसे पेटसे होगइ..? इस बारेमे सरलासे बातभी की तो बच्चा उनकाही हे.. कहेते उल्टा सरलाने उनके साथ जगडा कीया.. तब विरजी उनके उपर नजर रखने लगा.

ओर अ‍ेक दिन वो कामसे सहेर गयाथा.. ओर जल्दी घर लौट आया.. तब घरके बहार किशनकी कार खडी थी.. पहेलेतो वो खुस हुआ.. फीर कुछ याद आतेही उनको संका होने लगी.. ओर वो धरके पीछे चला गया.. ओर अपने रुमकी खीडकीसे देखनेकी जगाह ढुंढते अ‍ेक खीडकीके पास चला गया ओर धीरेसे खीडकी खोलनेकी कोसीसकी तो खीडकी खुल गइ.. ओर थोडीसी खोलके देखने लगा तब उसे बहुत बडा जटका लगा..

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क्युकी अंदर सरला किशनके नीचे लेटी हुइ थी ओर किशन सरलाकी जोरोसे कमर उछालते चुदाइ कर रहा था.. ओर सरलाभी नीचेसे कमर उछाल उछालके किशनका साथ दे रहीथी.. विरजी सब देखता रहा.. जब दोनो चुदाइ करके साथमें जडते सांत होगये तब किशन अभीभी सरलाकी चुतमे लंड डालके पडा हुआथा.. ओर सरला किशनके बालको सहेलाते उनसे बाते करने लगी.. तब विरजी दोनोकी बात गौरसे सुनने लगा..

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किशन : (हसते) सरला तेरा पेट नीकल गया हे.. क्या विरजीको तुमपे सक नही हुआ..?

सरला : (हसते) किशन.. उनको सकतो होगया हे.. ओर इस बातको लेकर अ‍ेक बार हमारे बीच जगडाभी हुआ हे.. अब उनसे छुपाकर या जुठ बोलके अब कोइ फायदा नही हे.. अ‍ेक बारतो उनसे जगडा करके बातको टालदीया.. लेकीन अब मे सोच रही हुं उसे सबकुछ खुलकर बता दु.. लेकीन आपनेभी अभी तक नही बताया.. की अपने दोस्तको आपने कीस बातकी सजा दीहे.. अबतो बतादो ताकी मे उसे बात कर सकु.. मुजे पता हे जब उनसे बात करुगी तब हम दोनोही अलग होजायेगे.. तब आपकोही मुजे सम्हालना हे.. देखना बाबा मेने आपकोही अपना पती माना हे उनको आज तक पता नही चलने दियाकी भानुभी हमारा लडका हे..

किशन : (होंठ चुमते) सरला.. विरजीने मेरी मुह बोली बहेन भुमीकाके साथ गलत कीया हे.. उनका बलात्कार कीया हे.. बस उसीके कहेनेपे मेने विरजीसे बदला लीया हे.. हम सभी कोलेजमे दोस्त थे.. ओर विरजीने दोस्तीमेही गलत कीया.. अगर वो उनसे प्यार करती या बीना प्यार उनकी सहमतीसे सेक्स करती तो हमे कोइ अ‍ेतराज नही था.. लेकीन विरजीने उनका अपहरण करके उनके साथ बलात्कार कीया..

सरला : (मुस्कराते) सच कहेते हो..? क्या आपकी मुह बोली बहेनके लीये इतना बडा कदम उठालीया.. की अपने दोस्तके साथही.. हालाकी मे मानती हु इसमे मेरीही सहमती थी.. क्युकी सादीके दिनही मुजे पता चल गयाकी विरजी अ‍ेक नामर्द हे.. तभीभो मेने आपसे गांधर्व सादी करली.. ओर आपनेभी मुजे अ‍ेक बीवीही तराह हर सुख दीया ओर मुजे सम्हाला.. फीरभी मनमे कुछ सवाल आ रहे हे.. क्या मुजे सचाइ बताओगे..?

किशन : (हसते) अब कोनसी सचाइकी बात कर रही हे..? मुजे खुलकर बता..

सरला : (हसते) किशन आपकी खुदकी बहेनसे सादीसे पहेलेही आपका रीलेशन हे.. ओर सादीसे पहेलेही आपने उसे प्रेगनेन्ट भी करदीयाथा.. तो फीर येतो मुह बोली बहेन हे.. क्या उनको सचमे बहेन मातने हो..? की बात कुछ ओरही हे.. क्युकी मे जानती हु विरजीके साथ आपकी तीन पीढीयोसे रीलेशन हे ओर आप विरजीको अपना खास दोस्त समजते हो.. धंधेमे भी आपने उनको साथ रखा हे.. फीरभी अ‍ेक मुह बोली बहेनके कहेनेपे इतना बडा फैसला लीया..? बात कुछ समजमे नही आइ.. हें..हें..हें..

किशन : (गंभीर होते) सरला वो मे तुजे अभी नही बता सकता.. बस कुछ दिन इन्तजार करले.. अ‍ेक दिन तुजे सब सचाइ बता दुगा.. ओर कुछ राज हमे राज ही रहेने देना चाहयी.. भुमी आजभी मेरी बहेन हे.. बस मे तुजे अभी सीर्फ इतना ही बता सकता हु..

तब बहार विरजी सब बाते सुनकर सोक्ट हो जाता हे.. ओर उसे बहुत दुख होता हेकी उनके दोस्तने ही उनके साथ धोखा कीया.. ओर उनकी अ‍ेक गलतीकी इतनी बडी सजा देदी..? तभी उनको सीनेमे दर्द होने लगा ओर वो वही सीनेपे हाथ रखके नीचै बेठ गया.. तब कुछही देरमे उसे किशनकी कारकी आवाज आइ तो वो समज गयाकी किशन चला गया हे.. ओर वो बडी मुस्कीलसे घरमे आगया ओर चुपचाप भानुके कमरमे जाके खटीयापे लेट गया.. ओर आंसु बहाते सोचता रहा..

किशनके साथ धमासान चुदाइ करके सरलाभी थक गइथी.. ओर वो नहाने चली गइ तब पीछेसे विरजी आकर सो गयाथा.. ओर सरलाभी नहाकर अपने बेडरुममे चली गइ ओर सो गइ.. तब रातमे भानुभी घर आगया.. तब सरला कीचनमे खाना बना रहीथी.. उनको पताही नही थाकी विरजी भानुके रुममे सोया हुआ हे.. ओर भानु हाथ मुह धोकर अपने रुममे चला गया.. ओर वो जैसेही अंदर गया.. तो अंदर जातेही सोक्ट होगया.. ओर जोरोसे चीलाके सरलाको बुलाने लगा..

क्युकी विरजीके मुहसे जाग नीकल रहेथे.. ओर वो मर चुकाथा.. तब सरलाभी दोडके आगइ ओर विरजीको अ‍ैसी हालतमे देखकर गभरा गइ.. फीरतो सरलाने किशनको फोन करके बुला लीया ओर भानुनेभी डोक्टरको बुला लीया.. तब डोक्टरने उसे चेक करके केह दियाकी उनको दिलका दौरा पडा हे ओर मर चुका हे.. फीरतो सबने मीलकर विरजीको अंतीम विदाइ देकर उनका दाह संस्कार कीया.. ओर सब वापस घरपे आगये.. तब सरलाका पेट देखकर सब यही कहेने लगेकी विरजी अपने दुसरे बच्चेका मुह नही देख पाया..

ओर समय बीतने लगा.. सरला अब दुनीयावालोकी नजरमे विधवाकी जींदगी बीताने लगी.. लेकीन कीसीको ये बातकी भनकभी नही लगीकी वो अभीभी किशनकी सुहागनके रुपमे किशनके साथ उनका बीस्तर गरम करते अपना संसार चला रही हे.. ओर उनके साथ वो हब सुख भोग रही हे जो अ‍ेक सादीसुधा ओरत अपने पतीसे सुख पाती हे.. ओर समयके साथ भानुभी देवायतका दोस्त होकर उनके साथ धंधेमे जुड गया..

ओर अ‍ेक दिन विमलाने बच्चेको जनम देदीया.. ओर वोथा लखन.. तब साथमे सरलानेभी लताको जनम देदीया.. ओर सब अपनी लाइफ रुटीन जीने लगे.. तब लखन अ‍ेक सालका होगया तब किशनने विमलाको फीरसे पेटसे करदीया.. ओर ठीक नव महीनेके बाद विमलाने फीरसे पुनमको जनम देदीया.. ओर इसी तराह समय बीतने लगा ओर बच्चे बडे होते गये.. आज लखन ओर लता पुनम काफी बडे होगये थे..

अबतो देवायतभी सहेरमे सब कुछ सेट करके वहा कीसीको पार्टनरमे रखकर वापस गांवमे आ गयाथा ओर देवायत ओर भानुने मीलकर किशनका पुरा कारोबार सम्हाल लीयाथा.. इसी बीच मंजु ओर देवायत समय समयपे मीलते रहे.. ओर पती पत्नीका हर सुख भोगते रहे.. इस बातका पता अब नीर्मलाकोभी चल गयाथा.. ओर उसने इस बारेमे राजीवसे बात करली.. ओर मंजुसे मीलकर अपनी गलतीको मानली.. फीर नीर्मलाने मंजुकी सादी राजी खुसीसे देवायतके साथ करवानेका फैसला करलीया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ८२

अबतो देवायतभी सहेरमे सब कुछ सेट करके वहा कीसीको पार्टनरमे रखकर वापस गांवमे आ गयाथा ओर देवायत ओर भानुने मीलकर किशनका पुरा कारोबार सम्हाल लीयाथा.. इसी बीच मंजु ओर देवायत समय समयपे मीलते रहे.. ओर पती पत्नीका हर सुख भोगते रहे.. इस बातका पता अब नीर्मलाकोभी चल गयाथा.. ओर उसने इस बारेमे राजीवसे बात करली.. ओर मंजुसे मीलकर अपनी गलतीको मानली.. फीर नीर्मलाने मंजुकी सादी राजी खुसीसे देवायतके साथ करवानेका फैसला करलीया....अब आगे

तब मंजुने देवायतको फोन करके सारी बात बतादी ओर दोनोने सादी करनेका फैसला करलीया.. तब दुसरे दिनही सुबह किशनके फोनकी रींग बज उठी ओर वो खुस होते बाते करने लगा.. तभी देवायत समज गयाकी ये राजीवअंकलका फोन हे.. ओर दोनोके बीच सादीकी बातभी होगइ.. अ‍ेक महीनेके बादकी तारीख भी पकी करली.. तब विमला भी बहुत खुस होगइ.. ओर दोनोके घरपे सादीकी तैयारीया सुरु होगइ..

इसी बीच ना मंजुको पता चलाकी उनमे कुछ शक्तिया आचुकी हे.. जो बाबाने स्थापीत कीथी ओर नाही देवयातको पता चलाकी उनके लींगमे जडी बुटीकी वजहसे कीतना बडा बदलाव आचुका हे.. दोनोके अंदर बहुतही आकर्सण आचुका था.. मंजु कीसी अप्सराकी तरह दीखने लगीथी.. उनके चहेरेपे काफी नीखार आ चुकाथा.. तो अब देवायतभी कामदेवकी तराह दीखने लगाथा..

उनको देखते कोइभी लडकी हो या ओरत उनकी ओर आकर्शीत होने लगी थी.. सब मनही मन देवायतको पानेकी कामना करने लगी थी.. सभी ओरते देवायतके अ‍ेकही इसारेसे उनके नीचे लेटनेको तैयार रहेती थी.. ओर देवायतभी उनका फायदा उठाने लगा.. कोइभी ओरत या लडकी सामनेसे आती तो उनकी हर इच्छा पुरी करदेता.. वो अबतक कइ ओरतो ओर लडकीयोको चुद चुकाथा..

इस बातपे उनकी मां विमलाभी अन्जान नही थी.. उनकोभी देवायतके व्यक्तीत्वपे अभीमान होने लगाथा.. ओर वो अ‍ेक राजाकी फेमीलीहे तो देवायतका सबपे हक बनता हे यही सोचते वो देवायतपे गर्व करती रही.. ओर खुदभी देवायतके व्यक्तीत्वसे प्रभावीत हो चुकी थी.. लेकीन देवायत उनका बेटा था.. तो कुछ मर्यादा माननेको मजबुरथी.. जबभी देवायतको देखकर उतेजीत होजाती तब वो किशनसे जमकर चुदाइ करवा लेती..

उधर जबसे देवायत नीर्मलासे बात करके आया तबसे वो नीर्मलाके घर कभी नही गया.. देवायत ओर मंजु हर दीन फोनपे ही बात करते रहे.. ओर मंजुभी आयेदिन सहेरमे जाकर देवायतसे उनके बंगलेपे मीलती रही.. ओर दोनो वहा मीया बीवीकी तराह पुरे दिन साथमे रहेते ओर जमकर चुदाइ करते.. अब मंजुके सरीरमेभी काफी बदलाव आ चुकाथा.. उनका सरीर अब काफी भरावदार दीखने लगाथा.. जैसे कोइ सादीसुधा ओरत दिखती हो..

तो दुसरी ओर नीर्मलानेभी सादीके कामके लीये अपनी छोटी विधवा बहेन चंदाकोभी अपने घर बुला लीयाथा.. जो उनकी सादीके बाद तीन सालमेही बच्चेको जन्म देकर विधवा हो गइथी.. तो दुसरी ओर सृतीभी अपनी डोक्टरकी पढाइ कर चुकीथी.. तब देवायतने उनकेही मकानपे बने अ‍ेक आलीसान बील्डीगंमे अपने दोस्तको कहेकर सृतीको क्लीनीकके लीये रेन्टपे जगह दीलवादी.. ओर सृतीने वही अपनी लेडीसके लीये क्लीनीक खोलदी थी.. ओर मंजुने अपनी सादीमे सृतीकोभी जल्द घरपे आनेका नीमंत्रण दे दीया..

ये सब माहोल देखते भावनाभी सदमेसे बहार आगइ थी.. ओर उसने सुसाइडका विचार त्याग दीयाथा.. लेकीन उनके दीलसे आजभी देवायत बहार नही नीकल पाया.. उनका बोयफ्रेन्ट नहीतो जीजाजी ही सही.. यही सोचकर वो आजभी देवायतको इमेजींग करते उंगलीसे अपने आपको सांत करती थी.. अ‍ेकको छोडके सभी खुस थे.. बस वो अ‍ेक नीर्मला थी.. जो बहारसे खुस होनेका दीखावा कर रहीथी.. ओर अंदरसे अपने आपको कोस रही थी.. उनको अब देवायतकी कमी महेसुस होने लगी थी..

क्युकी वो देवायतके बारेमे काफी कुछ सोच चुकीथी.. नीर्मलाको देवायतकी अ‍ेक अ‍ेक बात सही लगी.. ओर उनको अपनी गलतीका अहेसास हो चुकाथा.. जब वो ओर राजीव सोने चले जाते तब कभी कभी राजीव उनको प्यार करने लगता.. तब वो राजीवकी जगाह देवायतको इमेजींग करती ओर दोनो चुदाइ करते.. तब यही सोचतीकी वो देवायतसे चुदवा रही हे.. जब वो राजीवसे प्यासी रेह जाती..

तब उसे होस आताकी वो केवल देवायतके सपने देख रही हे.. जब राजीव नीर्मलाको चोदकर उसे प्यासी रखके सो जाता तब वो नंगीही पडी रेहती ओर आंसु बहाते देवायतके बारेमे सोचने लगती.. लेकीन अब बहुत देर होचुकी थी.. वो रातमे करवटे बदल बदलके मनमे सीर्फ अपनी गलतीको कोसती रहेती.. अबतो हर रात यही सब सोचते वो नींदकी आगोसमे चली जाती..

ओर आखीर वो वक्तभी आगया.. जब किशन ओर विमला देवायतकी बारात लेके आये.. तब भानु देवायतकी सादीमे खुब नाचा.. तो सरलाभी सजधजके बारतमे आइथी.. तब चंदाने भी पहेली बार देवायतको देखा ओर उनका व्यक्तीत्व उनका सरीर सब देखके विधवा होनेके बावजुदभी चंदाका दील मचलने लगा.. उनकी दिलकी धडकन बढ गइ.. ओर वो बार बार देवायतको ही देखती रही..

तब उनको नही पताथाकी अ‍ेक दिन उनकी भांजी मंजुलाके कहेनेपेही वो देवायतकी बीवी होजायेगी.. आज कइ महीनोके बाद उनकी चुतमे हलचल तेज होगइ.. उनकी चुत देवायतको देखते लगातार पानी छोडने लगीथी.. जैसे अपने यारको पहेचान गइहो.. ओर वो बार बार बाथरुममे जाने लगी.. ओर दो तीन बारतो अपनी चुतमे उंगली डालकर अपने आपको सांत कर चुकी थी..

तबभी नीर्मलाकी हिंमत नही हुइकी वो कीसीके सामने जाये.. ना वो किशनसे तो नाही विमलासे तो नाही देवायतसे फेइस कर पाइ.. ओर उसने सादीका सब कार्य अपनी बहेन चंदासे करवाया.. वो सीर्फ अ‍ेकही बार राजीवके साथ कन्यादान देने बहार आइ.. तब विमलाने उसे देखा.. ओर वो सोक्ट होगइ.. क्युकी नीर्मला आजभी अ‍ेक अप्सराकी तराह सजधजके आइथी ओर वो पहेलेसेभी ज्यादा खुबसुरत होगइ थी..

लेकीन नीर्मलाने अ‍ेकबारभी सर उठाके कीसीके सामने नही देखा.. तब मंजुके पास सृती ओर चंदाभी सजधजके बैठीथी.. जब नीर्मलाने मंजुका कन्यादान करलीया तब वो वापस अंदर रुममे चली गइ.. ओर उनकी आंखोमे आंसु रुके नही रुकते थे.. कन्यादान देते समय वो बार बार नजर उठाके देवायतकी ओर देखती रही.. तब उनकी आंओमे देवायतको पस्च्यातापके भाव साफ दीख रहे थे.. जीसे देखते देवायतभी अ‍ेक पलके लीये वीचलीत होगया था.. उनको तब नीर्मलापे बडी तरस आने लगीथी..

लेकीन उसनेभी अपने आपको बडी मुस्कीलसे सम्हाल लीया.. अब उसने अकेलेमे नीर्मलासे कभी नही मीलनेकी ठानली.. तो दुसरी ओर चंदाभी देवायतकी ओर आकर्शीत होते अपने कपडे चेन्ज करके आगइ.. आज ब्लेक सारीमे वो कयामत लग रहीथी.. सभी मर्द चंदाको ही देखते रहे.. तो चंदा देवायतको लुभानेकी पुरी कोसीस करनेमे लगी हुइथी.. ओर बार बार देवायतके साथ मस्ती मजाक करते अपने जलवे दीखाते ईधर उधरका कामुक इसारा कर रहीथी.. उन इसारोको देवायतभी भली भांती जान चुकाथा..

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ओर मनही मन चंदाकी ओर ढलने लगाथा.. अबतो देवायतका लंडभी चंदाको देकर बगावतपे उतर आयाथा.. जबभी चंदा देवायतके साथ हसी मजाक करती तब देवायतका लंड पेन्टके अंदरही तांडव मचाते खडा होने लगता.. तो दुसरी ओर चंदाभी देवायतको लुभानेमे पुरी तराह कामयाब हो चुकीथी.. इधर सृती ओर भावनाभी देवायतके साथ जीजु जीजु करते हसी मजाक करती रही..

सृती ओर भावनाभी देवायतसे काफी प्रभावीत हो चुकीथी.. देवायतभी सृतीको भली भांती जानता था.. वो पहेली बार सृतीके घरही तीन दिन रुकाथा ओर वही आश्रममे सादी करके सृतीके घरपे मंजुके साथ सुहागरात मनाते पहेली बार मंजुसे फीजीकल हुआथा.. इसीलीये वोभी सृतीके साथ हसी मजाक करता रहा..

ओर सृती ओर चंदा देवायतसे काफी खुल चुकीथी.. ओर जीजा साली वाली मजाक पे उतर आयेथे.. तब विमला सब देखतीही रही.. उनको अ‍ेक अ‍ेक परीको देखके ज्वेलेसी फील होने लगी.. इनकोतो पताही नही थाकी सब लडकीया उनके बेटे देवायतके पीछे इतनी पागल होगी.. तब पहेली बार वो देवायतकी ओर गौरसे देखने लगी..

तब देवायत उनको बहुतही हेन्डसम ओर आकर्सीत दीखने लगा.. ओर वो सरमा गइ.. तब लखन पुनम ओर लता भी काफी बडे दीख रहेथे ओर मंजुके साथ भाभी भाभी कहेते मजाक करते रहे.. कहेते हेना लडकीया जल्दी बडी होजाती हे.. तब पुनम ओर लताभी टीनेजर हो चुकी थी..

लखन ओर पुनम दोनोही सहेरमे रहेकर अपनी पाइ कर रहेथे.. फीरतो फेरे हुअ‍े तो पुनम लता ओर लखनने दोनोके उपर खुब फुल बरसाये.. तो दुसरी ओर राजीव किशन दोनोही बहुत खुस होते अ‍ेक दुसरेके साथ बाते करते रहे.. इसी तराह देवायत ओर मंजुकी सादी संपन होगइ..

तब सृती ओर चंदाने देवायतको पर्सनल मीलके अपने घर आनेका बहुत आग्रह कीया.. तो देवायतनेभी दोनोके आग्रहको सहज स्वीकार करलीया तब दोनोही खुस होगइ तो मंजुभी सरमाकर हसती रही.. जब बिदाइकी बारी आइ.. तब नीर्मला मंजुको गले लगाकर खुब रोइ..

ओर धीरेसे उसे माफ करनेको कहेते देवायतकोभी उसे मांफ करनेको कहेने लगी.. फीर मंजु भावना सृती ओर उनकी चंदामौसीको मीलकेभी खुब रोइ.. तब चंदाने दोनो हसबन्ड वाइफको घरपे खानेके लीये आनेका न्योता दे दीया.. तब देवायतभी उनके साथही था.. जब जानेका समय हुआ तब नीर्मलाने आंसु बहाते देवायतकी ओर देखा.. ओर देवायतकी ओर दोनो हाथ जोडलीये.. तब देवायतके आंखसेभी आंसु टपक गये ओर वो जटसे बहार नीकल गया..

उस रातभी देवायत ओर मंजुने अ‍ैसी ही सुहागरात मनाइ जैसी पहेली बार सृतीके घर सादी करके मनाइथी.. दोनोही पहेली बार मील रहेथे तब सृतीने कैसे मंजुका अ‍ेक दुल्हनकी तराह शींगार कीयाथा.. ओर खुद शींगार करके तैयार होेकर कीसी अप्सरासे कम नही लग रहीथी..

वो बार बार नैन चुराते चोर नजरसे देवायतके पेन्टके उभारको देख रहीथी.. तब अ‍ेक बार देवायतका भी मन बहेक गयाकी वो सृतीको अभीके अभी यही पटकके चोदले.. ओर आजभी सृतीनेही मंजु चंदा ओर भावुको तैयार कीयाथा ओर खुदभी परी लग रही थी..

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जब देवायत देर रात अपने रुममे गया.. तब पहेली सुहागरातकी तराह मंजु बेडके बीच बैठीथी लेकीन तबकी अंजु ओर अबकी मंजुमे सीर्फ इतना फर्कथा की तब वो कुआरी कलीथी.. ओर आजकी मंजु कलीसे फुल बन चुकीथी ओर बहुतही मेच्योर होकर चुदाइके मामलेमे बहुतही अनुभवी हो गइथी.. ना जाने दोनो कीतनी बार चुदाइ कर चुकेथे लीकीन देवायत आजभी मंजुको चोदताहे तो अ‍ैसाही लगता हे वो मंजुको पहेली बार चोद रहा हे..

तब मंजुको नही पताथाकी उनके अंदर कइ शक्तिया वीद्यमान होचुकी हे.. मंजु पीछले जन्मकी तराह इस जन्ममेभी हर बारकी चुदाइके बाद जबभी नहाती अपना कौमार्य फीरसे कुआरी लडकीकी तराह वापस पालेती.. ओर इस बातसे मंजु अंजान थी.. इसीलीये जबभी मंजु चुदवाती तब कुआरी कलीकी तराह चीखती चीलाती.. जैसे पहेली बार चुदाइ करवा रही हो... ओर देवायत बेडपे आगया ओर बेठेही मंजुका घुंघट उठाने लगा.. तब मंजुने उसे हसते हुअ‍े हाथ जटकते रोक लीया..

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देवायत : (हसते) बेबी क्या हुआ..? अ‍ैसा क्यु कर रही हो..?

मंजुला : (हसते) अ‍ेक बार मेरे साथ सुहागरात मना चुके हो.. फीरभी नही पता की पहेले बीवी दुघ पीलाती हे ओर बादमे बीवीको बडीया गीफ्ट देनी पडती हे.. तब जाके बीवीकी मुह दीखाइ होती हे.. लीजीये दुघ पीजीये.. ओर पहेले मेरी गीफ्ट दीजीये.. फीर आप मुजे छु सकते हे.. वरना आज अ‍ैसेही सोजाइअ‍े..

देवायत : (हसते) मंजु अ‍ैसा थोडी चलता हे..? हम कहा पहेली बार सुहागरात मना रहेहे.. येतो..दुसरी..

मंजुला : (जुठा गुसा करते) हां हां पता हे.. आपने तबभी मुजे कोइ गीफ्ट नही दीयाथा.. लेकीन आज अ‍ैसेही मेरा मुह देखनेको नही मीलेगा.. लीजीये पहेले दुध पीलीजीये.. फीर लाइअ‍े मेरी गीफ्ट..

कहेते मंजुने घुंघटमेसे ही अ‍ेक दुधका ग्लास नीकाला ओर देवायतको पीलाने लगी जेसेही आधा ग्लास रेह गया तो मंजुने ग्लास वापस खीच लीया ओर खुद पीने लगी.. फीर ग्लासको साइडमे रख दीया ओर वापस सही बैठ गइ.. तब देवायतभी सब तैयारी करके आयाथा.. ओर उसने मुस्कराते हुअ‍े जेबसे अ‍ेक डायमंड नेकलेस नीकाला.. जो उनकी मां विमलाने उसे मंजुको देनेके लीये दीयाथा.. ओर देवायतने बोक्ष उनके हाथपे रख दीया तब मंजुने खुद घुंघट हटा दीया ओर खुस होकर मुस्कराते देखने लगी..

जैसेही डायमंड सेटको देखा तो उनकी आंख चौडी होगइ ओर खुसीसे देवायतसे बाहोमे लीपट पडी.. तब देवायतभी हसने लगा.. ओर मंजुको कसके बाहोमे भीच लीया.. तब मंजुके मुहसे आउच.. नीकल गया.. ओर मंजुने बोक्षमेसे सेट नीकालके देवायतके हाथोमे थमा दीया.. ओर आंखोके इसारोसे अपने गलेमे पहेनानेको कहेने लगी.. तब देवायतने हसते सेट मंजुके गलेमे पहेना दीया ओर मंजुकी ओर देखने लगा तो मंजु गलेसे सेटको हाथोमे लेकर देखने लगी ओर मुस्कराती रही.. तब देवायत बेडसे उतर गया..

मंजुला : (देवायतको देखते) अरे आप कहा जा रहे हे..? क्यु उतर गये..?

देवायत : (फटाफट अपने कपडे नीकालते) यहा मेरा फटा जा रहा हे ओर तुजे सेट देखनेकी पडी हे आजतो तु गइ.. बहुत नखरे करलीये.. चल फटाफट अपने सब कपडे नीकाल.. कीतना तडपायेगी मुजे..?

मंजुला : (जोरोसे हसते भागनेकी तैयारीमे) अरे आज मे थोडी नीकालुंगी.. हें..हें..हें.. आज आपको जरुरत हे खुद ही नीकाल लीजीये.. हें..हें..हें..

कहेते मंजुभी जोरोसे हसती हुइ दुसरी ओरसे बेडसे उतर गइ ओर भागनेके लीये इधर उधर देखने लगी तब देवायत पेन्ट नीकालतेही बेडपे चड गया ओर मंजुको पकडने उनके पीछे भागने लगा.. तो मंजुभी जोरोसे हसती हुइ बेडके आसपास इधर उधर भागने लगी ओर हसती रही..

तब बेडके बीच उपरसे नीकलते देवायतने मंजुको दबोच लीया.. तो मंजु जोरोसे हसते उनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. तब देवायतने पीछेसे बाहोमे जकडते उनको दोनो बुब्स मसल दीये ओर मंजु चीखते जटसे आगे पलट गइ ओर बाहोमे समा गइ..

तभी देवायत उसे गोदमे उठालेता हे ओर बेडपे जाके पटक देता हे ओर नंगाही उनके उपर लेट जाता हे तब मंजु हसते हुअ‍े देवायतको जोरोसे अपनी बाहीमे भीच लेती हे.. ओर देवायतकी आंखोमे अ‍ेक नजरसे देखते उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगती हे.. ओर दोनोके होंठ मील जातेहे तब मंजु आंधी आंख चडाके मदहोस होने लगती हे ओर देवायत उनकी सारी हटाके ब्लाउस उचा कर लेता हे..

ओर ब्रा उपर करते बुब्सको बहार नीकाल लेता हे.. तब उनके गोरे बुब्स बहारकी ओर जांकने लगे.. तब मंजु सरमके मारे पानीपानी होने लगी.. ओर देवायत अपना मुह सीधा बुब्सपे लगाते उनकी नीपलको चुसने लगता हे.. तब मंजु अपनी दोनो आंख बंध करते देवायतके सरको बुब्सपे दबाके उनके सरको सहेलाने लगती हे.. ओर सीसकारीया करते कामाग्नीमे जलने लगती हे..

मंजुला : सीससइइइ बस..बस..बस.. जानु पहेले कपडे नीकालदो खराब होजायेगे.. सुबह माजी देख लेगीतो..

देवायत : मंजुउउउ... देखने दो.. मंजु आज मुजे मत रोको.. मुजसे रहा नही जाता.. समाले मुजे तेरी अंदररर.. मंजु आज पुरी रा तुजे सोने नही दुगा..

मंजुला : (मदहोसीमे) हंममम बुच..बुचच.. हां.. आजाओ.. समा.. जाओ.. मुजमे.. इइइइ सीइइइइ आज मंजु आपको पृर्ण समर्पीत होगइ हे.. ओर अब मेरा ये तन.. मन.. धन.. सब आपका हो चुका हे..

तभी देवायत बेडपे बेठ जाता हे ओर मंजुका हाथ खीचके उसेभी बीठा देता हे फीर मंजुकी आंखोमे देखते उनके सब कपडे फटाफट नीकालने लगता हे तब मंजुभी कपडे नीकालनेमे साथ देने लगती हे.. क्युकी मंजुभी काफी गरम हो चुकीथी तो उनकोभी देवायतसे मीलन करनेकी बहुत जल्दी थी.. कुछही देरमे दोनो बीलकुल नंगे होजाते हे तब मंजु सरमाते नंगी होगइ.. वो अबभी पुरे शींगारमे थी.. ओर बेडके बीच बीलकुल नंगी होकर बैठ गइ..

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तभी देवायत उसे प्यारसे कंधेसे पकडकर पीठके बल सुलाने लगता हे.. तो मंजुभी पीठके बल लेट जाती हे ओर देवायतभी उन पर जुकते लेट जाता हे ओर मंजुके बुब्स चुमते मसलने लगता हे तब मंजु मदहोसीमे देवायतके सरको सहेलाने लगी.. तभी देवायत चुमते चुमते धीरेसे अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते उनकी चुतपे रख देता हे ओर सहेलाने लगता हे.. तब मंजु मदहोसीमे मचलने लगी.. तो देवायतने धीरेसे अ‍ेक उंगली उनकी चुतमे घुसादी ओर बुब्स चुमते चुतके दानोको उंगलीसे खरोदने लगा..

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तब मंजु पागल जैसी होने लगी.. फीर देवायत चुमते चुमते नीचेकी ओर सरकने लगा ओर मंजुकी चुतमे उंगलीसे चोदने लगा.. तो मंजु जोरोसे सीसकारीया करने लगी.. तभी देवायत सीधाही मंजुकी चुतपे मुह लगाते हमला कर देता हे.. तब मंजु छटपटाते चदर पकडके तडपने लगती हे.. ओर देवायत उनकी चुतमे जीभ डालके थोडी देर चाटने लगता हे ओर अचानक जीभको चुतमे घुसा दीया ओर उनकी चुतके भगन्साको छेडने लगा.. तब मंजु पागल जैसी होगइ.. ओर बीन पानी मछलीकी तराह छटपटाने लगी..

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तभी उसने हाथ लंबा करते देवायतके बालको पकडलीया ओर अपने उपर खीचके चडाने लगी.. तब देवायत मंजुके होठोको अपनी गीरफ्तमे ले लेता हे.. ओर दोनो वाइल्ड कीस करने लगते हे.. तब मंजुने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया ओर अपनी कमरको जटके देने लगी.. तब उनकी चुतसे अ‍ेक फवारा नीकल गया.. देवायतने उसे बीना चोदेही जडा दीया.. तब मंजुकी सांसे तेज चल रहीथी ओर वो सरमके मारे देवायतसे नजरे चुराने लगी.. तो देवायत अपना लंड मुठीमे पकडते उनके पैरके बीच बैग गया..

मंजुला : (धीरेसे सरमाते) जानु प्लीज.. धीरेसे डालना.. आज आपका ये.. कुछ ज्यादा ही बडा ओर मोटा दीख रहा हे.. क्या कोइ गोली बोली तो नही खाइ..? मुजेतो डर लग रहा हे.. हमारी वो पहेली सुहागरातमे आपनेतो मुजे बेहोस ही करदीया था.. बाबु इनमे कुछ नही होगानां..?

देवायत : नही बेबी.. अ‍ैसा दर्द सीर्फ अ‍ेकही बार होता हे.. बार बार नही.. अब तुजे कुछ नही होगा.. तु क्यु इतना डर रही हे..? हम पहेली बार थोडीना कर रहे हे..

मंजुला : जानु आपसे अ‍ेक बात कहु..? मुजे वो दर्द हर बार होता हे.. जबभी हम फीजीकल होतेहे तब हर बार मे वोही दर्द महेसुस करती हु.. जब हम दोनो पहेली बार मीलेथे तब हुआ था.. क्या मुजमे कोइ प्रोबलेमतो नही होगीनां..?

देवायत : (चुतपे लंड घीसते) नही मंजु.. अ‍ैसा कुछ नही होगा फीरभी तुजे आसंकायेहे तो अ‍ेक बार सृतीके साथ चली जाना.. ओर उसे अच्छी तराह दीखा देना..

अ‍ेक बारतो देवायतभी अपने लंडकी ओर नजर डालके देख लेता हे.. तब उनकोभी अपना लंड पहेलेसे बडा ओर मोटा लगने लगा.. लेकीन अभी मंजुके सामने इन बातोको कहेना उचीत नही समजा.. ओर देवायत मंजुकी चुतमे थोडा लंड फसाके उनपे जुक जाता हे ओर लीपलोक करलेता हे.. तब मंजुभी उनको बाहोमे भीच लेती हे ओर देवायत अपनी कमरको अ‍ेक जोरोका जटका लगा देता हे तब मंजु जोरोसे चीख पडी..

तो लीपलोककी वजहसे चीख देवायतके मुहमे ही दब गइ.. ओर मंजुकी आंखोसे आसुओकी धाराये बहेने लगी.. तभी देवायतने लीपलोक छोड दीया ओर मंजुकी ओर देखा तो मंजु बेहोस हो चुकीथी.. वो आंख बंध करके बेसुध्ध होकर पडीथी.. तब देवायत हाथके बल उचा होगया.. ओर मंजुको कमर हीलाते बेहोसीकी हालतमे ही जोरोसे चोदने लगा.. तबकी मंजुको होसमे ज्यादा तकलीफ ना रहे.. ओर देवायत जोरोसे चोदने लगा तब मंजुके दोनो बुब्स उछलते रहे..

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देवायतने आज मंजुको दुसरी बार बेहोस कर दीयाथा.. वो अपनी पहेली सुहागरातमे भी बेहोस हो चुकीथी.. इसके बाद वो कइ बार देवायतसे चुद चुकीथी.. लेकीन उनको हर बार अ‍ेक कुआरी लडकीकी तराह ही दर्द होताथा.. ओर आजभी वही हुआ.. वास्तमे मंजुमे वो बदलाव बाबाकी दी हुइ शक्तिके बादही आयाथा..

जो मंजु इनको नही पहेचान पाइ.. ओर देवायत उनको चोदताही रहा.. तब थोडीही देरके बाद मंजु दर्दके मारे अपना मुह बीगाडने लगी.. तब देवायत लंडको जडतक घुसाके रुक गया ओर मंजुपे जुकते उनके होंठ ओर बुब्स चुमने लगा..

मंजु : (होंसमे आतेही सीनेपे मुका मारते) कीतने कमीनेहो.. आजभी बेहोसीमे मुजे चोद लीया.. चलो अब सुरु होजाओ.. अब दर्द नही हे.. लगता हे आजतो आप पुरी गीफ्ट वसुल करेगे.. हें..हें..हें..

कहेते दोनोही चुदाइ करते हस पडे.. ओर देवायत मंजुके गलेको चुमते धीरे धीरे सोट मारते मंजुको चोदने लगा तो मंजुभी फीरसे मदहोसीमे छागइ.. ओर सीसकारीया करते देवायतके सरको सहेलाते चुदाइमे साथ देने लगी.. उसने अपने दोनो पैर फैला दीये ओर आंख बंध करते चुदाइका मजा लेने लगी.. मंजु उनकी अ‍ैसीही धमाकेदार चुदाइ तो चाहती थी.. इस चुदाइके लीये वो कीसीभी हदतक जानेको तैयार थी..

चाहे इस चुदाइके लीये उनको अपनी मम्मी पापाका घरही क्यु ना छोडना पडे.. उनकोतो बस देवायतका दमदार ओर तगडा लंडही चाहीयेथा.. जो अभी आंख बंध करके देवायतसे मजेसे चुदवा रहीथी.. तब उनको नही पताथाकी उनकी मम्मी नीर्मलाभी यही तगडे लंडसे कइ बार चुदवा चुकीथी.. ओर आजभी इसी लंडके लीये वो तरस रही हे.. जो उनकी अ‍ेक गलतीने खुदको इस दमदार लंडसे अलग करदीया था..

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इस सुहागरात मे मंजु चीखती रही.. चीलाती रही.. फीरभी देवायत उनको आज छोडनेके मुडमे नही था.. अबतक मंजु तीन बार जड चुकीथी फीरभी आज देवायत जडनेका नामही नही ले रहाथा.. वोतो बस हाथके बल मंजुकी चुदाइ कीयेही जा रहाथा.. तब मंजुकोभी देवायतके लंड लेनेको मुस्कील होने लगा..वोभी चाहतीथी की देवायत उनकी चुतको जल्द अपने गाढे पानीसे भरदे.. तभी देवायतने अपनी चोदनेकी स्पीड बढादी..

तो मंजुने अपने दोनो पैर मौडलीये ओर देवायतके कंधोको बाजुसे पकडलीये.. तो देवायत उनके लंडको मंजुकी चुतमे जडतक घुसाके उनके तनसे चीपकनेकी कोसीस करता हे.. ओर वो मदहोसीमे कमरको जडका देते कांपने लगा.. तभी मंजुको अपनी बच्चेदानीपे देवायतका गरम रस महेसुस हुआ.. ओर वोभी उतेजनामे कांपने लगी.. उनका मुह खुलाही रेह गया.. मानो वो कीसी स्वर्गमे चली गइ हो.. ओर वोभी कांपते हुअ‍े देवायतके साथ जडने लगी.. तब देवायत जडते ही मंजुके सीनेपे ढेर होगया..

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तब दोनोही पसीनेसे पुरे भीग चुकेथे.. तब मंजु देवायतकी पीठ सहेलाते अ‍ेसेही सीथील पडी रही.. दोनोका कामरस अपनी जगाह बनाते मंजुकी चुतसे नीकलते बहारकी ओर टपकने लगा.. लेकीन आज मंजुको अभी भी अपनी चुतमे देवायतका लंड सख्त महेसुस हो रहाथा.. ओर उनको आस्चर्यभी हो रहाथा.. तभी उनको बाबाने दी हुइ जडी बुटीकी याद आगइ.. जो देवायतको सृतीके घर उनकी पहेली सुहागरातमे ही दुधमे मीलाकर देदी थी.. तब उनके चहेरेपे सरमके मारे हसी आगइ.. ओर मनही मन खुस होने लगी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ८३

तब दोनोही पसीनेसे पुरे भीग चुकेथे.. तब मंजु देवायतकी पीठ सहेलाते अ‍ेसेही सीथील पडी रही.. दोनोका कामरस अपनी जगाह बनाते मंजुकी चुतसे नीकलते बहारकी ओर टपकने लगा.. लेकीन आज मंजुको अभी भी अपनी चुतमे देवायतका लंड सख्त महेसुस हो रहाथा.. ओर उनको आस्चर्यभी हो रहाथा.. तभी उनको बाबाने दी हुइ जडी बुटीकी याद आगइ.. जो देवायतको सृतीके घर उनकी पहेली सुहागरातमे ही दुधमे मीलाकर देदी थी.. तब उनके चहेरेपे सरमके मारे हसी आगइ.. ओर मनही मन खुस होने लगी....अब आगे

तब दुसरी ओर बाजुके रुममे आज विमला किशनके साथ सोइथी.. तो पुरा दिन सब लेडीसको देवायतके पीछे पागल होते देखकर विमलाभी देवायतके बारेमे सोचने लगीकी उनके बेटेके पीछे सब क्यु इतनी पागल हे..? विमला जानती थी अभी देवायत उनकी बीवीके साथ सुहागरात मना रहा होगा.. ओर वो येभी जानती थीकी उनकी बहु मंजुला वास्तमे उनके पती किशनकी ही लडकी हे ओर इस नाते देवायतकी बहेन हे.. विमलाको इस रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही था.. क्युकी खुद उसने अपने भाइके साथ सादी कीथी..

अंदर अभी उनका बेटा देवायत उनकीही बहेनके साथ सुहागरात मनाते उनको चोद रहा होगा.. यही सब सोचते विमलाभी उतेजीत होने लगी.. क्युकी वोभी अपने भाइकी बीवी थी ओर उसनेभी सादीसे पहेले अपने भाइसे खुदकी खुब चुदाइ करवाइथी.. जब किशनके साथ पहेलीबार फीजीकल हुइ तब वो कैसे चीलाते बेहोस होचुकीथी.. वही सब सोचते उसे मंजुकी चीखे सुननेकी इच्छा होने लगी..

ओर तब देर रात किशनके सोजानेके बाद देवायतके पास वाले रुममे आके सोगइ.. तब उनको मंजुकी चीखे सुनाइ देने लगी तो मनही मन खुस होगइ.. ओर कातील मुस्कान करने लगी जैसे कोइ नीर्मलासे पुराना हीसाब चुक्ते कर रही हो.. मंजुकी चीखे सुनते वोभी उतेजीत होने लगी..

ओर अपनी चुतको सहेलाते दिवालके सहारे खडी रहेके चुत सहेलाने लगी.. अपनी जवानीके पुराने दिनको मनमे याद करते अपनी चुतमे उंगली घुसाके आंख बंध करके उंगली अंदर बहार करने लगी.. ओर उसे पुरानी सब बात याद आने लगी..

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विमला : (चुत सहेलाते मनमे सोचते) क्या दिन थे वो.. मे आश्रममे थी.. तब वहीके लोगोसे पता चलाकी मुजे बचपनमे ---गांवकी ठकुराइन इधर छोडके गइथी.. ओर पहेली बारही मुजे पीरीयड हुआ था.. तब वोही ठकुराइन मुजे मनते करते वापस हवेलीपे लेकर आइ.. तब मुजे सीर्फ इतनाही कहाथाकी तु मेरी कोखसे पैदा हुइ हो.. तुम मेरी बेटी हो.. ये बात सीर्फ हमारी फेमीली तकही सीमीत रखना.. अ‍ैसा मुजे क्यु कहा..? ये बात आजतक मेरी समजमे नही आइ.. तब बाबाभी अपनी साधना पुरी करके वापस आये थे.. मेरे गुरुथे.. उन्हीके कहेनेपे मे ठकुराइनके साथ वापस आगइ..

तब मेने जवानीके देहलीजपे नया नया कदम रखाही था.. तब मेरा किशन.. हाये.. क्या हेन्डसम दीखताथा.. उनका कसरती गठीला बदन.. उनका व्यक्तीत्व.. उनका आकर्षण.. किशनने मुजे पागल करदीया था.. ओर मेभी उनकी ओर खीचतीही चली गइ.. तब सीर्फ मुजेही पताथा की किशन मेरा भाइ हे.. फीरभी मे उनकी ओर खीचती चली गइ.. ओर पताही नही चलाकी मुजे उनसे कब प्यार होगया..

तब मुजे नही पताथाकी वो निर्मलासे भी प्यार करता हे ओर किशन उनकी हरदिन चुदाइ करता हे.. तब दोनो बहुतही आगे बढ चुके थे.. तो मेभी किशनकी ओर ढलने लगीथी.. ओर उनके नजदीक रहेने लगी.. उनका हर काम मे खुद करने लगी.. जैसे वो मेरा पती हो.. मे उनको अपने जलवे दीखानेका अ‍ेकभी मौका नही छोडतीथी.. मे उनके प्यारमे इतनी पागल हो चुकीथी की मै भुल गइकी वो मेरा भाइ हे.. ओर मे उनकी बहेन.. बस यही मनमे थाकी पहेले वो अ‍ेक मर्द हे ओर मे अ‍ेक औरत..

जब प्यार चरमपे होताहेनां? तो मर्द ओर औरतमे रीस्तोकी कोइ अ‍ेहमीयत नही रहेती.. बस दोनोके बीच अ‍ेकही रीस्ता होता हे.. वो हे सेक्स.. मे किशनको रीजानेमे कामयाब रही.. जीनके फल स्वरुप किशनभी धीरे धीरे मेरी ओर ढलने लगा.. धीरे धीरे मेरी मस्तीया करते छेडखानी तक पहोंच गया.. कामके बहाने मुजे कहा कहा छुलेता.. कभी अपने रुममे तो कभी कीचनमे मुजे पकड लेता ओर मेरी मस्तीया करते कभी मेरी चुचीओसे खेलता तो कभी मेरे होंठ चुम लेता.. अ‍ेक दिन नहाने गइथी तब जालीम मेरे साथ बाथरुममे घुस गया..

ओर जालीमने वही पहेली बार मेरी मुनीयाको दबोच लीया.. तब हम दोनोही काम वासनामे जलने लगेथे.. ओर उसी दिन हमने देर रात मेरे रुममे मीलनेका तैय कीया.. तब मेने बडी मुस्कीलसे उनको रातमे मीलनेका वादा करते बाथरुमसे नीकाला था.. तब जाकर वो माना.. ओर मेभीतो उनको मीलनेके लीये तरस रहीथी.. जालीम उसी रात सबके सोनेके बाद मेरे रुममे घुस आया.. ओर दरवाजा बंध करलीया..

तब पहेलीबार रातमे कीसी लडकेको में अकेली रुममे मील रहीथी.. जैसे मेरी सुहागरात हो.. ओर किशनने वही मेरी मांग भरकर मुजसे क्या क्या वादे कीये.. ओर उस रात किशनने अपने विकराल लंडसे पहेली बार मेरा कौमार्य भंग कीया.. ओर मुजे बेहोस कर दीयाथा.. फीरतो हमारे बीच सबकुछ होगया.. जालीम पुरी रात मेरी चुदाइ करता रहा.. में दो दिन ठीकसे चलभी नही पाइथी..

फीरतो अ‍ेक रातभी अ‍ैसी नही गइ की हम दोनोने चुदाइ नहीकी.. मैनेभी किशनको मेरे पीछे इतना पागइ करदीया था की मेरे बगैर उनका जीना मु्स्कील होने लगा.. तब इस बातका हमारी मांकोभी पता चल गया.. ओर दुसरेही दिन सुबह ठाकुर ओर ठकुराइनके बीच क्या बाते हुइ मुजे नही पता.. दोनोही अ‍ेक दुसरोके साथ चुदाइ करते मरे हुअ‍े मीले.. सुबह नही उठे.. बस तब हवेलीमे सीर्फ किशन ओर मेही रेह गयथे..

हम दोनोही सुबह पहेले पहुंचे.. ओर हमने दोनोको अलग करके कपडे पहेनाकर सही कीया.. ओर दोनोका अग्नीसंस्कार कीया.. फीरतो किशन ओर मे दोनोही बीन्दास्त होगये थे.. ओर मौका देखकर दिनमेभी चुदाइ करने लगे.. ओर अ‍ेक दिन मुजे उल्टीया होने लगी.. ओर हम दोनो सहेर जाके सब चेक करवाके आगये.. तब पता चला मे किशनसे प्रेगनेन्ट होगइ हु.. ओर मेने उसे हमारे बच्चेका वास्ता देके बडी मुस्कीलसे मेरे साथ सादीके लीये मजबुर कीया.. ओर हम दोनोने मंदिरमे जाकर सादी करली..

तब गांवमे कीसीको नही पताथाकी वास्तवमे हम दोनो भाइ बहेन हे.. सब यही समजतेथे की ठाकुराइन इस लडकीको आश्रमसे लेकर आइ हे.. ओर मेने निर्मलाको मेरे किशनसे श्रापका बहाना करके दुर करदीया.. तब मुजे उनके साथ क्या क्या जुठ नही बोलना पडा.. ओर किशनको पानेमे मे कामयाब होगइ.. तब मुजे क्या पताथा की नीर्मलाभी मेरी तराह किशनसे प्रेगनेन्ट होचुकी हे.. मेने मेरे किशनको पानेके लीये क्या क्या हथकंडे नही अपनाये.. तब जाकर मुजे मेरा भाइ पतीके रुपमे मीला..

यही सब सोचते विमला जोरोसे चुतमे उंगली करने लगी.. ओर विमलाकी चुतसे फवारा नीकल गया.. तब वो सरमींदगी महेसुस करते जटसे अपने रुममे चली गइ.. फीर किशनके पास लेटतेही उनकी धोती उची करदी तब किशन ओर उनका लंड दोनोही सोया हुआथा.. फीरभी विकराल लंडको अपनी मुठीमे पकड लीया ओर होले होले सहेलाने लगी तब कीशनका लंड हरकतमे आने लगा ओर खडा होगया..

तब विमलाने देर ना करते किशनके लंडको अपने मुहमे लेलीया ओर जोरोसे अंदर बहार करते चुसने लगी.. तब किशनभी नींदसे जाग गया ओर विमलाकी हरकत देखने लगा ओर कोनीके बल बैठ गया.. वो बेठते मुस्कराते हुअ‍े विमलाकी हरकतको देखता रहा.. जब लंडने सख्त होते अपना विकराल स्वरुप लेलीया तब विमला लंडको मुहमे अंदर बहार करते कीशनकी ओर देखती हे तब लंडको मुससे बहार नीकालते कहा..

विमला : (लंड मुहसे नीकालते) जाग गये आप..? चलीये मुजे जल्दसे अ‍ेक बार ठंडी कर दीजीये.. लगता हे देवा बीलकुल आपपे गया हे.. हमारी बहु कीतनी चीलाती हे.. सालीने चीख चीखकर मुुजेभी गरम करदीया..

किशन : (हसते) विमु तो फीर तु वहा उनकी चीखे सुनने गइ ही क्यु..? तु आजभी उतनी ही चुदकड हे..

विमला : (पैर फैलाके लेटते) हां हां पता हे मुजे.. मे चुदकड हु लेकीन सीर्फ आपके लीये.. समजे.. कच्ची कलीथी मे.. तबसे आपसे चुदवा रही हु.. तो आपके दमदार लंडकी आदत पड गइ हे.. अब डालभी दो कीतना तडपाओगे.. वहा वो अपनी बहेनको चोद रहा हे तो आपभी यहा अपनी बहेनको चोद दीजीये.. चलीये..

कहातो किशन हसते हुअ‍े विमलाके पैरके बीच बैठ गया ओर लंड पकडके विमलाकी चुतपे सेट करते बेठे बेठेही घुसा दीया तब जाके विमलाको राहत महेसुस हुइ ओर वो आंख बंध करते मु्सकराती रही.. विमला आजभी अ‍ेक गदराये बदनकी मालीकथी.. उनकी चुत अभीभी अ‍ेक लडकीकी तराह कसी हुइथी.. पुरे दिनमे ओर रातमे किशन उनको अ‍ेक बार चोद नही लेता तबतक उनको चेइनही नही मीलता..

वो किशनसे हर वक्त चुदवानेके लीये तैयार ही रहेती.. उन्होने बडीही सीफततासे अपने ओर किशनके बीचके कांटेको नीकाल दीयाथा.. जब वो आश्रमसे आइ तब नीर्मला ओर किशनका प्यार चरमो पर था.. ओर उनको नीर्मलासे बहुत जलन हो रहीथी.. जब उनके माता पीताकी गैरसमज दुर होते ही उनको वापस हवेलीपे लेकर आये तब कुछही दीनोमे दोनो गुजर गये ओर कुछ राज अपने साथ ले गये..

तब सीर्फ विमलाकोही पताथाकी किशन उनका भाइ हे फीर भी उनका गठीला बदन देखके उनकी ओर आकर्सीत होगइ ओर हमेसा हमेसाके लीये भाइके साथ रहेके चुदवानेका फैसला कर लीयाथा.. ओर नीर्मलाको बडी सीफततासे अपने रास्तेसे हटा दीयाथा.. किशन विमलाकी धमासान चुदाइ कर रहा था.. तबतक विमला दो बार जड चुकीथी ओर आखीर किशनने मिलाकी चुतको अपने पानीसे सीचके हरी भरी करदी तब जाके विमलाको राहत महेसुस हुइ.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो गये..

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तब देवायतके रुममे मंजु करवट लेके सोइ हुइथी हुइथी तब देवायत उनको पीछेसे चुतमे लंड डालके अभी भी धनाधन चोदेही जा रहा था.. तब बीच बीचमे मंजु सर उठाके देवायतके होंठ चुम लेतीथी.. आज दोनोकी ओरसे आग बराबर लगी हुइ थी.. दोनोही सुबह तक अ‍ेक दुसरेको छोडनेके मुडमे नही थे.. ओर छोडेभी क्यु आखीर आज उन दोनोकी सुहागरातजो थी.. मंजुभी पुरी रात देवायतसे चुदवानेका मन बना चुकी थी..

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देवायत कभी मंजुको घोडी बानते चोदता रहा तो कभी पेटके बल सुलाके पीछेसे लंड घुसाके चोद लेता आज मंजुकी हर अ‍ेन्गलसे चुदाइ हो रहीथी.. अबतक मंजु कीतनी बार जडी होगी उनकोभी नही पताथा.. तो देवायतभी अभी तक मंजुकी चुतको चार बार अपने कामरससे भर चुकाथा.. दोनोके बीच रात भर चुदाइ होती रही.. ओर सुबह ४.३० बजे दोनो नहाने चले गये तब अक बार वहाभी मंजुकी खडे खडे चुदाइ होगइ..

मंजुला : (थकी हुइ आवाजमे) जानु.. अब बसभी करो.. आजतो आपने मुजे तृप्त करके थका दीया.. इतनी चुदाइतो हमने हमारी पहेली सुहागरातमे भी नहीकी.. आज आपको क्या हो गयाथा..? मुजे छोडते ही नहीथे.. देखो मेरी चुतकी क्या हालत करदी हे आपने..

देवायत : (हसते) बस बेबी अब यही प्यार तुजे रोज मीलने वाला हे.. अब तु मेरी बीवी बनके घरजो आगइ हे.. अबतो हर रात हमारी सुहागरात होगी.. ओर दिनमेभी तैयार रहेना.. तुजे कभीभी चोद लुगा..

मंजुला : (हसते) बीलकुल पागल होगये हो.. सच बताना वहा सादीमे कीसको देखके इतने गरम होगये.. कही मौसी या फीर आपकी दोनो सालीया सृती भावना.. कौन थी कमीनी जो मेरी चुतकी धजीया उडानेको आपको मजबुर कीया.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) यार कोइ नही थी.. तुम ओरते आपसमे सक करते जलती बहुत हो.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते हसते) हां तो सक तो करुगीनां.. कमीनी फटाका बनके आपके आसपासही घुम रही थी.. ओर मौसीतो.. हदही करदी.. आपको कैसे कैसे इसारा करती थी.. जानु अ‍ेक बात कहु.. मेने मौसीको विधवा होनेके बाद इतना खुस कभी नही देखा.. वो सीर्फ मेरी मौसीही नही मेरी सहेलीभी हे..

देवायत : (हसते) हां वो बहुतही खुबसुरतभी हे.. ओर मेरी दोनो सालीयाभी कम नही थी..

मंजुला : (जुठे गुसेसे सीनेमे मुका मारते) कीतने कमीनेको.. पहेले मुजेतो ठीकसे चोदलो फीर दुसरीके बारेमे सोचना.. बस कोइ अच्छी लडकी देखी नही ओर लाळ टपकाना सुरु.. हें..हें..हें..

अ‍ैसेही मजाक मस्ती करते दोनोने नहा लीया.. ओर नाइट सुट पहेनके दोनो अ‍ेक दुसरोकी बाहोमे चीपकके सो गये.. ओर अ‍ैसेही दिन गुजरने लगे.. इसी बीच नीर्मलाने देवायतसे फोनसे कोन्टेक्ट करनेकी बहुत कोसीसकी लेकीन देवायतने कभी उनका फोन नही उठाया..

तब नीर्मलाने कइ बार छुपकेसे फुट फुटके आंसु बहाते रो भी लीया.. सादीके कुछ दीनके बाद मंजु अपने माइके गइ तब नीर्मलाने मंजुसे बात करते देवायतकी माफी मागनेकी मनतेभी की.. लेकीन मंजुने देवायतसे मीलके बात करेगी.. कहेके बातको टाल दीया..

जब देवायतको मंजुको माइकेमे पहेली बार लेने जानाथा तोवो आधे घंटे पहेलेही सामको चला गया ताकी राजीव अंकल ओर घरके सभी सदस्य घरपे हो.. तब वो वहा गया तब नीर्मला बहुत खुस होगइ ओर देवायतसे बात करनेकी हर कोसीस की लेकीन देवायतने उनके सामने देखा तक नही.. तब निर्मला बहुत नीरास होगइ.. ओर सबके होते हुअ‍े वो ज्यादा कोसीसभी नही कर सकती.. फीर देवायत मंजुको लेकर वापस आगया तब वो अकेली रुममे जाकर खुब रोइ..

मंजु हर दीन आइपील लेना नही भुलती थी.. उनकी सादीको आज १० साल होगये थे लेकीन आजभी वो हवेलीमे नइ ब्याहके आइ दुल्हनकी तराह सज धजके रहेती ओर अपने पतीकी हर रात चुदाइ करवाके रंगीन करती.. इसी बीच उनकी छोटी बहेन भावनाकी सादीभी देवायतके दोस्त भानुसे करदी गइ..

तब लखन पुनम ओर लताभी काफी जवान हो गयेथे ओर लखन पुनम सहेरमे पढ रहेथे.. तब देवायतको नही पताथा जबसे उनकी बहेन पुनममे जवानीके देहलीपे कदम रखा तबसे वोभी अपनेभाइ देवायतको पसंद करने लगी थी.. इन १० सालो मे देवायत मजहब दश से बाराह बार अपने ससुरके घर गया होगा.. ओर आज तक उनकी सासुमां यानी नीर्मलासे बात तक नहीकी..

अ‍ैसा नहीथा की वो वहा नही जाता वो हर महीने राजीवअंकलसे मीलने दुकानपे जाता.. ओर वही हिसाब किताब करके मीलकर लौट आता.. अब नीर्मला बीलकुल टुट चुकीथी.. उनको अपने कीयेपे बहुतही पस्च्याताप हो रहाथा.. वो आजभी अपने दीलसे देवायतको बहार नही नीकाल पाइ..

बल्की अबतो देवायतके प्रती उनकी चाहत ओर भी गेहरी होगइ थी.. लेकीन क्या करे..? उनका आसीक उनसे रुठा हुआ जो था.. आज उनका पती होस्पीटलमे जींदगी ओर मौतसे जंग लड रहाथा.. तब अ‍ेक घंटेके लीये वो नर्सको ध्यान रखनेको कहेके धरपे खाना बनाने चली गइथी.. तब उनको देवायतसे आनेकी बीलकुल उमीद नही थी..

(फ्लेसबेक खतम)

इधर होसस्पीटलमे अपने अतीतके बारेमे सोचते देवायत आंख बंध करते राजीवके पास चेयरपे बेठा था, आज उनको मजबुरन आना पडा.. क्युकी भानुके मामाकी वीधीथी.. तो वो नही आ सकता.. तो दुसरी ओर धिरेनकोभी नोकरीमे छुटीकी प्रोबलेम थी.. ओर मंजु भावनाकी डीलीवरी हुइथी.. तब देवायतही अ‍ेक विकल्प बचाथा.. ओर उपरसे कल मंजुनेभी परमीशन देदी ओर उनकी मम्मीको माफ करनेकी बात कहेदी.. तो उनको आनाही था.. ओर नीर्मला मीलेतो उनसे बात करनेको तैयार था..

तभी दरवाजा खुलनेकी आवाज आइ तो देवायत विचारोकी तंद्रासे बहार आगया ओर उसने सर उठाके देखा तब नर्मला अंदर आतेही दरवाजा बंध कर रहीथी.. जैसे ही वो पलटी तब देवायतको देखतेही सोक्ट होके वही खडी रेह गइ.. उनको देवायतको यहा होनेकी बीलकुल उमीद नही थी.. ओर देवायतको देखतेही उनकी आखोसे अनायासही आंसुओकी धारा बहेने लगी.. ओर वो देवायतके सामने हाथ जोडके खडी रेह गइ..

तब देवायतको उनकी आंखोमे अपने लीये माफीके मनतके भाव नजर आये.. देवायतको आज अपने सामने नीर्मला नही दो बेटीओकी अ‍ेक लाचार मां.. ओर बीस्तरमे पडे बीमार लाचार पतीकी पत्नी नजरमे आइ.. तब देवायतकी आंओसेभी आंसु टपक गये.. ओर देवायतके दोनो हाथ अनायासही फैल गये..

तो नीर्मला जटसे दोडके आगइ.. ओर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. तब देवायतनेभी नीर्मलाकल जोरोसे बाहोमे कस लीया.. ओर नीर्मला बाहोमे समाकर फुटफुटके रोने लगी.. तब देवायत उनकी पीठ ओर सरको सहेलाने लगा.. तब उनकी आंखभी गीली होगइ थी.. ओर वोभी फीरसे आंसु बहाने लगा..

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नीर्मला : (सीनेमे सर रखते आंसु बहाते) देवु मुजे माफ करदो.. मुजे माफ करदो.. मेने आपको पहेचानने मे बहुत बडी गलती की.. (रोते हुअ‍े..) मे गलत थी.. में गलत थी.. मुजे माफ करदो..

देवायत : (सीनेमे सर भीचते) बस.. बस.. सांत होजाओ.. मेने आपको माफ करदीया.. बस.. देखो अंकलकी तबीयत ठीक नही हे.. अ‍ैसे नही रोते.. बस मेतो सीर्फ आपको अपनी गलतीका अहेसास करवाना चाहता था.. अब सांत होजाओ..

नीर्मला : (सर उठाके देवायतकी ओर देखते) देवु.. मुजे माफ तो करदीया हेनां..? अब मे कभी भी अ‍ैसी गलती नही करुगी.. वो मेरी सबसे बडी नादानी थी.. मुजे बस अ‍ेक बार माफ करदो..

देवायत : (उनहे आंसु अपने हाथसे पोछते) हां माफ करदीया हे.. बस अब रोना नही.. मे आगया हुनां..? चलो बैठो इधर.. पहेले कहो अंकलको क्या हुआ हे..?

तब नीर्मला देवायतका हाथ पकडके वही पडे अ‍ेक छोटे सोफेपे लेगइ ओर दोनो अ‍ेक दुसरोसे सटकर बैठ गये तभी नीर्मलाने अ‍ेक हाथ देवायतकी कमरमे डालके उनके कंधेपे सर रखदीया ओर दुसरे हाथसे उनके हाथको बाजुसे पकड लीया.. तब देवायतनेभी नीर्मलाकी कमरमे हाथ डालके उसे अपने आपसे चीपकालीया..

नीर्मला : देवु.. ये ठीक तो होजायेगेनां..?

देवायत : (नीर्मलाके गालको अ‍ेक हाथसे थामते) हां मम्मीजी.. भगवानपे भरोसा रखीये.. सब ठीक हो जायेगे.. वरना हम इनको सहेर लेजाकर बडेसे बडे डोक्टरसे इलाज करवायेगे..

नीर्मला : (देवायतकी ओर देखते सरमाते मुस्कराते) मम्मी..जी.. क्या अभी तक मुजे माफ नही कीया..?

देवायत : (हसते) हां करतो दीया.. हें..हें..हें.. आप अ‍ैसा क्यु पुछ रही हे..

नीर्मला : (सरमाते हसते नजर जुकाते धीरेसे) आप मत भुलो.. मेरे जमाइ होनेके साथ आप कुछ ओरभी हो..

देवायत : (हसते) ओर क्या हु..? मुजेतो इतना पता हे आप मेरी सासुमां हो.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (जटसे देवायतके चहेरेको अपने दोनो हाथोमे थामते आंखोमे देखते) बस सीर्फ सासुमां..? ओर कुछ नही..? देवु मत भुलो आपने मेरी मांग भरी हे.. ओर हमने जींदगीभर साथ नीभानेकी कसमे खाइ हे.. आप जमाइतो बादमे हुअ‍े..

देवायत : (उनकी आंखोमे अ‍ेक नजरसे देखते) नीर्मलाजी.. क्या ये सही होगा..? अब मे आपका दामाद हु..

नीर्मला : (आंखोमे देखते) देवु.. दामाद तो बादमे हुअ‍े.. ओर मेने कभी आपको अपना दामाद नही माना.. मे आजभी हर दिन आपके नामका सींदुर अपनी मांगमे भरती हु.. ओर जींदगीभर भरती रहुगी.. मे आजभी अपने वादेपे कायम हु..

देवायत : (चहेरेको सीनेमे थामते) तो फीर मंजुको लेकर मुजसे इतना जगडा क्यु कीया..?

नीर्मला : देवु.. आइ अ‍ेम सोरी.. देवु मे क्या करती..? जब पता चला आप ओर मंजु अ‍ेक दुसरेसे प्यार करते हो ओर काफी आगे बढ चुके हो.. फीर मेने अपनी आंखोके सामने आप दोनोको देखभी लीया.. तब मुजे मेरी ही बेटीसे ज्वेलेसी होने लगी.. मुजे अ‍ैसा लगाकी मेरी ही बेटी आपको मुजसे छीन रही हे.. ओर मेने गुसेमे आकर आपको उल्टा सीधा केह दीया.. ओर.. ओर आपपे हाथभी उठालीया.. भगवान मुजे कभी माफ नही करेगा.. मेने मेरेही पतीपे हाथ उठाया हे..

देवायत : (हसते) हां बहुत जोरोसे चाटा पडाथा.. पुरा गाल लाल होगया था.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते गाल सहेलाते) क्या बहुत लगीथी..? आइ अ‍ेम सोरी.. यार इनके लीये भगवान मुजे कभी माफ नही करेगे.. मेने अपने पतीपेही हाथ उठालीया.. सोरी देवु.. तब आपने कहाथानां की अ‍ेक बार ठंडे दीमागसे सोचनां..? तो मेने उसी रात बहुत सोचा.. ओर मुजे मेरी गलतीका अहेसास तभी होगया था.. ओर मे उस रात खुब रोइ.. मेने कीतनी राते आपकी यादोमे आंसु बहाये.. आपसे बात करनेकी कीतनी कोसीसे की.. यहा तककी मंजुसेभी कहेलवाया फीरभी आपने मेरे सामने देखा तक नही.. आपभी बहुत जीदी हो..

देवायत : (सीनेमे सर रखते सहेलाते) चलो.. अबतो सब ठीक हेनां..? अबतो कोइ गीला सीकवा नहीनां..?

नीर्मला : नही.. आज आपकी बाहोमें बडा सुकुन मील रहा हे.. देवु मे चाहती हु मुजे मेरा वोही प्यार वापस मील जाये.. मे अपने वादेपे आजभी कायम हु.. ओर हम दुनीयासे छुपके अ‍ैसेही पती पत्नी बनके रहे..

देवायत : (गालपे चुमते) चलो ठीक हे.. सासुमां जैसे आपकी मरजी.. हें..हें..हें..

कहतो नीर्मला सरमाते हसने लगी ओर देवायतके सीनेपे मुके मारने लगी.. तब देवायतने हसते हुअ‍े नीर्मलाको जोरोसे बाहोमे भीचलीया.. तो नीर्मला आउचच... करते हसने लगी.. तभी देवायतकी नजर राजीव अंकलकी ओर गइ तो राजीवका हाथ हील रहाथा तो वो जटसे खडा होगया.. ओर बहारकी ओर दोड पडा.. ओर काउन्टरपे इन्फोर्म कीया तो अ‍ेक नर्स दोडके आगइ ओर राजीवको चेक करने लगी..

नर्स : लगता हे इनको होस आ रहा हे.. मे अभी डाक्टरको बुलाके आइ..

कहेते वो दोडके चली गइ तब थोडीही देरमे तीन चार लोग आगये ओर राजीवको चेक करने लगे ओर उनका ओक्सीजन बढा दीया तब थोडीही देरमे राजीवने आंख खोलदी ओर वो अ‍ेसेही पडे रहे.. तब अ‍ेक डोक्टर उनको ड्रीप लगाने लगा.. तबतक नीर्मला गभराकर देवायतका हाथ पकडते उनकोही देखती रही.. फीर सभी डोक्टर बहार नीकल गये तब अ‍ेक डोक्टर देवायतके पास आगया ओर दोनोको अपनी केबीनमे आनेको कहा.. तब नीर्मला गभराते देवायतकी ओर देखती रही....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ८४

कहेते वो दोडके चली गइ तब थोडीही देरमे तीन चार लोग आगये ओर राजीवको चेक करने लगे ओर उनका ओक्सीजन बढा दीया तब थोडीही देरमे राजीवने आंख खोलदी ओर वो अ‍ेसेही पडे रहे.. तब अ‍ेक डोक्टर उनको ड्रीप लगाने लगा.. तबतक नीर्मला गभराकर देवायतका हाथ पकडते उनकोही देखती रही.. फीर सभी डोक्टर बहार नीकल गये तब अ‍ेक डोक्टर देवायतके पास आगया ओर दोनोको अपनी केबीनमे आनेको कहा.. तब नीर्मला गभराते देवायतकी ओर देखती रही....अब आगे

नीर्मला : (गभराते) देवु आपभी चलो.. वो क्या कहेना चाहते होगे..? आप जाके पुछ लोनां..

देवायत : अरे कुछ नही होगा गभराती क्यु हे.. मे साथ चल रहा हुनां.. चलो..

ओर दोनो अ‍ेक नजर राजीवपे डालके बहार नीकल गये.. जीर्मलाने अभीभी देवायतका हाथ बाजुसे थामके रखाथा.. ओर दोनो डोक्रकी केबीनमे चले गये तब वो डोक्टर जो अ‍ेम.आइ.आर. करवाया था उनकी रीपोर्ट अ‍ेक्सरेके साथ देख रहाथा.. ओर दोनोही उनके सामने बैठ गये..

डोक्टर : (दोनोके सामने देखते) जी.., आप लोग उनके रीस्तेदार हे नां..?

नीर्मला : जी.. मे..मे..उनकी.. वाइफ हु.. ओर ये हे इनके दामाद.. ठाकुर देवायत.. ---गांवसे हे..

डोक्टर : (मुस्कुराते हाथ मीलाते) माफ कीजीये ठाकुरसाहब मे आपको पहेचान नही पाया.. क्या आप किशन अंकलके बेटे हेनां..? मे उनको जानता हु.. मेने आपको कभी देखा नही हे.. सायद हमारी मुलाकातही नही हुइ.. आप लोगोका इस होस्पीटलमे बहुत बडा योगदान रहा हे.. क्या आप इनके ही दामाद हे..?

देवायत : (मुस्कराते) जी डोक्टर साहेब.. क्या हुआ हे मेरे ससुरको.. ओर आप..?

डोक्टर : माफ कीजीये मे वोही रीपोर्ट देख रहाथा.. उनके हाइ बीपीकी वजहसे उनके दिमागकी अ‍ेक नस डेमेज हुइ हे जीनकी वजहसे उनको पेरेलेटीक अ‍ेटेक आगया हे.. उनका आधा अंग अभी काम नही कर रहा.. हम दवाइआ दे रहे हे.. तो साम तक पता चल जायेगा.. फीर ही हम कुछ केह सकते हे.. सुक्र मनाइअ‍े उनको होस आगया हे.. वरना अ‍ेसे केसीस मे कहेना मुस्कील हे.. आदमी कोमामे भी चला जाता हे..

देवायत : सर.. आपसे अ‍ेक नीवेदन हे.. क्या हम इसे सहेर लेजा सकते हे..? कुछ फर्क पडता हेतो..

डोक्टर : (हसते) स्योर.. आपकी मरजी.. लेकीन वहा आप कीसको दीखायेगे.. न्युरो सर्जनकोनां..? वहा का डोक्टर कौन हे..? क्या आप जानते हे उनको..?

देवायत : (हसते) जी.. जानता तो नही.. लेकीन मेने इनके लीये स्पेसीयल न्युरोसर्जन डोक्टर राजेन्द्गका नाम सुना हे.. उन्हीको कन्सल्ट करेगे.. अगर इनकी पोजीसनमे कुछ सुधार होतो..

डोक्टर : (जोरोसे हसते) ठाकुर साहब.. कही जानेकी जरुरत नही हे.. मेही वो डोक्टर हु जीसकी आप बात कर रहे हे.. मेरा नामही राजेन्द्ग हे.. जो मेरी वहा कन्सल्टींग क्लीनीक हे.. ओर आपकी जानकारीके लीये बतादु.. आपहीके पीताजीके बदौलत मे डोक्टर बना हु.. मेरे पीता आपके पीता सब दोस्त थे.. क्या ये वोही राजीव अंकल हेनां..?

देवायत : (खुसीसे हसते) जी वोही हे.. अब इनको कही नही लेजाना.. हें..हें..हें..

डोक्टर : सच केह रहा हु.. ये लोग आये तब उनको नही पहेचान पाया.. लेकीन अभी आपसे बात हुइतो पहेचानमे आगया.. आप चीन्ता मत कीजीये ये घरकी ही होस्पीटल हे.. अब राजीव अंकलको ठीक करनेकी सब जीम्वेवारी मेरी.. बस.. ओर फरमाइअ‍े..

देवायत : (हाथ मीलाते) जी.. सुक्रिया..

फीर देवायत ओर नीर्मला हसते हुअ‍े बहार आगये.. तब नीर्मला पहेलेसे काफी खुस दीख रहीथी ओर वो देवायतका हाथ पकडते चल रहीथी जैसे दुनीयाको जता रहीहो की हम दोनो मीया बीवी हे.. ओर दोनो अंदर आगये तब उसने हाथ छोड दीया तब राजीव होसमे आ चुकाथा.. ओर देवायतको देखतेही उनके चहेरेपे स्माइल आगइ लेकीन वो मास्ककी वजहसे कुछ बात नही कर सकताथा.. तो देवायतको इसारोसे पास बुला लीया..

देवायत : (मुस्कराते) कैसेहो पापा.. वो डोक्टरतो आपके दोस्तका बेटा नीकला.. हें..हें..हें..

तब राजीवने मुस्कराते सीर्फ सरको हां मे हीलाया.. ओर वो नीर्मलाकी ओर देखने लगा.. तब उनकी आंखोसे आंसु नीकल गये.. तो नीर्मलाभी दुखी होगइ ओर वोभी आंसु बहाते राजीवकी दुसरी साइडमे उनका हाथ थामकर बैठ गइ.. तब राजीवने सरको नां मे हीलाते उनको आंसु बहानेको मना कीया.. तब नीर्मला आंसु होते भी मुस्कराते राजीवके चहेरेकी ओर देखती रही..

नीर्मला : अब आप चीन्ता मत कीजीये अबतो देवु आगये हे.. ओर साम तक यही रहेगे.. हम दोनो अबी अबी डोक्टरको मीलकर आये हे.. आपको कुछ नही हुआ हे..

देवायत : (हसते) पापा आप जबतक होस्पीटलमे हे.. रोज आउगा.. अबतो आपको घर लेकर ही जाउगा..

नर्स : (हसते अंदर आते) हेलो अंकल.. कैसे हो..? अब बाते कम करना.. चलो इन्जेक्शन लगाना हे आप आराम कीजीये.. अब कोइ टेन्शन नही.. आपके सब रीपोर्ट अच्छे हे.. अ‍ेक दो दीनमे आपको छुटी मील जायेगी..

तभी देवायत ओर नीर्मला सोफेपे जाके बैठ गये ओर नर्सने राजीवको इन्जेक्शन लगा दीया.. ओर ड्रीप चेक करके चली गइ.. तब भीरे धीरे करते राजीव नींदमे चला गया.. तब नीर्मला देवायतका हाथ पकडके बहार लेगइ ओर दोनो रीसेपनीस्टसे दुर अ‍ेक सोफेपे जाकर बेठ गये.. ओर नीर्मलाने देवायतके कंधेपे सर रखदीया ओर उनका हाथ अपने हाथोमे थाम लीया.. आज वो देवायतसे दुर रहेना नही चाहती थी..

नीर्मला : देवु.. मेरी मंजु ओर भावु कैसी हे..? इस टाइम मुजे इनके साथ होना चाहीये लेकीन देखो.. मे उनकी खबर तक नही पुछ पाइ.. हांलाकी मेरी चंदासे मंजुसे फोनपे बात होती रहेती हे.. चंदा आपकी बहुत तारीफ कर रही थी.. हें..हें..हें..

देवायत : नीर्मलाजी.. मुजे आपसे अ‍ेक जरुरी बात कहेनी हे.. पर कैसे कहु..? समजमे नही आता..

नीर्मला : (जांगपे चपत लगाते) फीर नीर्मला..जी.., आप मुजे पहेले की तराह नीमु कहके नही बुला सकते..? कहो क्या बात करनी हे..? क्या आपकी सादीके बारेमे हे नां..? मुजे पता हे.. मेरी चंदासे इस बारेमे बात होगइ हे.. कमीनी वोभी मुजपे गइ हे.. हें..हें..हें.. आखीर आपको फसाही लीया..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) तो क्या आपको बुरा नही लगा..? पता हे मे कीससे सादी कर रहा हु..?

नीर्मला : (जांगपे चपत लगाते) फीर आप..? अरे बाबा तुम या तु नही केह सकते..? मे आपकी बीवी हु.. मुजे इतना रीस्पेक्ट मत दो.. ओर मुजे आपके बारेमे सब पता हे मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. बल्की मेतो खुस हु.. की आपने समाजके कु रीवाजोसे हटके अ‍ेक विधवाकी जींदगीको सवार दीया.. वो मेरी छोटी बहेन हे.. देवु.. उनको खुब प्यार देना..

देवायत : (हसते) तो क्या आपको बुरा नही लगा में आपकी छोटी बहेन यानी मेरी सालीसे भी सादी कर रहा हु..?

नीर्मला : (गाल चुमते) नही.. बीलकुल नही.. बल्की मुजेतो बहुत खुसी हुइ.. अरे बाबा मेरी बेटीसे सादी करलीतो फीर येतो मेरी बहेन हे.. ओर सालीभी आधी घरवालीतो होतीही हे.. तो फीर पुरी घरवाली करनेमे क्या हर्ज हे.. ओर वोभी छोटी उमरकी विधवा.. जानु अब मे आपकी वो नीमु नही हु.. जो आप उसे छोडकर गयेथे.. जो सौतनोसे जलती थी.. ओर आपतो राजा हो.. कीतनी भी सादी करलो.. चाहे हमारे घरकी सारी ओरतोसे सादी करलो.. भावुका रीस्ता आप लेकर आये वरना उनकी भी सादी आपसे कर देती.. बस हमे हमारे हिसेका प्यार हमे देते रहीये.. हम सीर्फ इतनाही मांगती हे..

देवायत : नीमु मे चाहता हु.. धिरेन पुनमकी सादीसे पहेले चंदा हमारे घर सादी करके आजाये.. क्या कहेती हो तुम..?

नीर्मला :(हसते) अरे आजायेगी.. मे उसे फोनपे बात करलुगी.. देवु अ‍ेक बात कहु..? अ‍ैसा कहेनातो नही चाहीये.. लेकीन भगवान ना करे.. पर यही सीचुअ‍ेशन मेरी हुइ तो आप क्या करोगे..?

देवायत : पागल होगइ हो क्या..? अ‍ैसा सोचना ही क्यु..? भगवान अंकलको लंबी उम्र दे.. फीरभी.. अ‍ेसी सीचुअ‍ेशन आइ तो मे चंदाकी तराह तुजे भी अपना लेता.. बस.. वही सुनना थानां..?

नीर्मला : (बेठेही बाहोमे भीचते) देवु आइ अ‍ेक प्राउड फोर यु.. मुजे आपपे गर्व हे.. ओर अपने आपको खुसकिस्मत समजती हु की मेने आपको पतीके रुप मे चुना हे.. आजसे ये नीमु आपको पुरी समर्पीत होती हे.. अब मेरे पुरे जीवनपे सीर्फ आपका ही अधीकार रहेगा.. इसके लीये चाहे मुने कुछभी ना क्यु करना पडे..

देवायत : नीमु तुजे पता हे.. मेरी मंजु.. वो कोइ सामान्य ओरत नही हे.. उनपे हमारे बाबाकी बडी कुपा हे..

नीर्मला : (देवायतकी ओर देखते) मंजु..? सामान्य ओरत नही हे.. मतलब.. मे कुछ समजी नही..

देवायत : नीमु.. मेरे खयालसे उनके पास वो शक्ति हे जो हम सबके बारेमे सबकुछ जानती हे.. हमारा भुतकाल..वर्तमान..ओर हमारे भविस्यके बारेमे भी.. उन्होने ही मुजे तेरे पास भैजा हे.. ओर पता हे क्या कहा..? कहा की मम्मीको माफ करदो.., मुजे लगता हे वो हमारे रीस्तेके बारेमे सबकुछ जानती हे..

नीर्मला : (सोक्ट होते अ‍ेक नजरसे देखते) व्होट..? देवु ये आप क्या केह रहे हे.. तो फीर हम दोनो..फीरसे..

देवायत : नही नीमु.. आसंकाअ‍े मत कर.. अब हमे कोइ जुदा नही कर सकता.. वक्तके साथ मे तुजे सबके सामने भी अपनाउगा.. बस कुछ समय इन्तजार करले.. आगे जाकर बहुत कुछ होगा..

नीमु : नही देवु.. मुजे हमारे रीस्तोको दुनीयाके सामने उजागर नही करना.. मे अ‍ेक बार अ‍ैसा करके देख चुकी हु.. उनमे केवल दु:ख ही मीलता हे.. मे आपकी अ‍ैसेही सीक्रेट बीवी बनके रहेना चाहती हु.. क्युकी सबसे छुपके प्यार करने ओर मीलन करनेमे जो मजा हे वो खुले रीस्तोमे नही हे.. आपको नही पता.. जबसे हमारे बीच डीसप्युट हुआ हे.. तबसे मे दिन रात आपके बारेमे ही सोचती रहेती हु.. मेरी आपके प्रती चाहत ओर बढ गइ हे.. इसीलीये हम हमारे रीस्तोको सबसे छुपायेगे..

देवायत : (हसते) अब बातेही करेगीकी कुछ खीलायेगी पीलायेगी भी.. भुख नही लगी क्या..? तुम अंदर बैठो मे कुछ खानेको लेकर आता हु..

नीर्मला : (हसते) कही जानेकी जरुरत नही हे मे घरपे खान बनाने ही गइथी.. टीफीन लेके आइ हु.. चलो आज दोनो मीया बीवी साथमेही खाते हे.. हें..हें..हें..

ओर दोनो हसते हुअ‍े अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडते अंदर आगये राजीव तबभी गहेरी नींद सोये हुअ‍ेथे ओर दोनो ने अ‍ेकही डीसमे खाना खाया.. आज नीर्मला बडे प्यारसे देवायतको अपने हाथोसे खीलाने लगी.. तो देवायतने भी उनको खाना खीलाया.. फीर साम तक देवायत वही रहा.. ओर दोनो प्यारभरी बाते करते रहे.. सामकोभी देवायत बहारसे चाइ नास्ता लेकर आगया.. ओर दोनोने मील कर चाइ नास्ताभी कीया..

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नीर्मला इसी बीच अ‍ेक बार देवायतको हाथ पकडकर खीचके रुमके अ‍ेटेच बाथरुममेभी लेगइ.. ओर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. फोर देवायतका चहेरा दोनो हथेलीमे थामकर उसे देखती रही.. ओर दोनोके चहेरे अ‍ेक दुसरेकी नजदीक आने लगे.. पताही नही चला दोनोके होंठ कब मील गये.. अ‍ेक दुसरेके होठोके रसपान करने लगे.. तभी नीर्मला अचानक देवायतके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी..

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ओर देवायतभी उतेजीत होकर नीर्मलाके बुब्सको मसलते दबाते प्यार करने लगा.. आज कइ अरसोके बाद नीर्मला देवायतको प्यार कर रहीथी.. तब नीर्मलाकी सांसे तेज चलने लगी.. ओर वो कनमनग्नीमे जलने लगी.. दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे काफी देर खडे रहे.. ओर प्यार करते रहे.. ओर आखीर देवायतने नीर्मलाके नीतंबपे हाथ रखकर उसे अपने आपसे सटालीया ओर अ‍ेक हाथसे उनकी चुतको सहेलाते दबोच लीया..

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तब नीर्मला सरसे पांवतक हील गइ.. ओर सरमके मारे पानीपानी होने लगी उसने फोरन देवायतके हाथको पकड लीया.. ओर जोरोसे देवायतको बाहोमे भीचलीया.. ओर उनके चहेरेपे चुंबनोकी बारीस करदी.. फीर अचानक रुककर देवायतकी आंखोमे देखती रही.. तब देवायतको नीर्मलाकी आंखोमे अपने लीये बेसुमार प्यार नजर आने लगा.. ओर देवायतने अ‍ेक बार फीरसे नीर्मलाको अपनी बाहोमे भीचलीया..

नीर्मला : (उखडी सांसोसे) दे..वु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. अब मुजे कभी मत छोडना.. अब मे आपके बीना नही जी पाउगी..

देवायत : नीमु.. आइ लव यु टु.. अबतो मुजसे दुर होगी तो तेरी टांगे तोड दुगा.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (हसते) हां.. तोड देना.. ये हुइना बात.. अब आप मेरे पती लगते हो.. बस इसी तराह मुजे टांडकर सही करते रहेना.. देवु यहा नही.. हम घर जाकर खुब प्यार करेगे.. इतने सालोकी सारी कशर मे पुरी कर दुगी.. में आपके लीये बहुत तडपी हु.. मुजे वोही प्यार चाहीये जो मेरा देवु मुजे दे चुका हे..

देवायत : (हसते) हंम.. हां नीमु.. हम जबभी अकेले मीलेगे तुजे यही प्यार मीलता रहेगा.. बल्की इनसेभी ज्यादा प्यार मीलेगा.. अ‍ेक प्यार मेरी नीमुको मीलेगा ओर अ‍ेक प्यार मेरी सासको मीलेगा.. हें..हें..हें.. अब चल बहार राजीव अंकल कभीभी जाग सकते हे..

नीर्मला : (हाथ पकडके हसते बहार नीकलते) देवु.. क्या अपनी सासकोभी प्यार करोगे..? कीतने कमीने हो.. हें..हें..हें.. लेकीन आज मे बहुत.. बहुत.. खुस हु.. मेरा पतीजो मील गया हे..

इनके आगे दोनोने कुछभी नही कीया ओर साम ढलने लगी.. तब देवायत नीर्मलाको कल दोपहोरके बाद फीरसे आनेका वादा करके वहासे नीकलने लगा.. तब नीर्मला उनको कार तक छोडने गइ वहाभी कीसी को ना पाकर मोका मीलतेही देवायतके होंठ चुम लेती हे.. फीर कल सामको फीर आनेका कहेते देवायत वहासे नीकल जाता हे.. क्युकी कल सुबह देवायतको मंजुको दीखानेके लीये होस्पीटलमे सृतीके पास जाना था..

तब देवायतको कुछ याद आगया ओर उसने कारको सीधे भानुके गांवकी ओर जानेदी.. जब देवायत वहा पहुंचा तब भानुके मामाका अ‍ेक कार्य अभी अभी संम्पन हो चुकाथा.. तो घरके सभी लोग अ‍ेकठे बैठे थे तब देवायत वहा गया.. तो सबके चहेरे खील उठे ओर देवायतको बडे प्यारसे अवाकार दीया.. ओर देवायतभी अ‍ेक चैरमे सबके साथ बेठ गया.. तब सरला देवायतकी ओर देखते मुस्कराती रही..

भानु : अरे आगये.. भाइ सही मौकेपे आये हो.. अभी अभी मामाका सांती हवन रखाथा.. वो पुरा हुआ.. अभी सब पंडीत गये की तुम आगये.. कहो होआये ससुराल.. हें..हें..हें.. हमारे ससुरकी तबीयत कैसी हे..?

देवायत : (हसते) अब ठीक हे यार..

सरला : (हसते जोरोसे) अरे लता.. ओर लता.. देख तेरे जेठजी आये हे.. कुछ चाइ पानीतो पीला.. हें..हें..हें..

तब देवायतका नाम सुनतेही लता ओर भावना जटसे भावनाके रुमसे बहार आगइ.. ओर देवायतके सामने देखके मुस्कराने लगी तब भावना बहुतही सरमा रहीथी.. तब लता हसते हुअ‍े पानी लेने चली गइ.. ओर पानी लेकर आगइ.. लता कुछ अलगही नजरोसे देवायतको देखते मुस्कराती रही.. क्युकी अंदर रुममे लता ओर भावना देवायतके बारेमेही बात कर रहीथी.. ओर देवायत हाजीर होगया..

लता : (सरमाते मुस्कराते) लीजीये भैया.. अब भाभीकी तबीयत कैसी हे..?

देवायत : (पानी लेते हसते) अच्छी हे..

रमा : (जोरोसे हसते) देखा दीदी.. जेठके सामने कैसे सीधे मुह बात करती हे.. अ‍ैसा देखा हे कभी..? पहेले तो कैसे बात करनेमे सरमातीथी.. हें..हें..हें..

लता : भाभी.. (सरमाते हसते रमाकी पीठमे मुका मारते) हां.. करती हु.. ये सीर्फ मेरे जेठ ही नही हे मेरे भैया भी हे.. जेठतो बादमे हुअ‍े.. तुम अपनी कहो.. अभीभी सासको दीदी केहेके बुला रहीहो अबतो ये तुम्हारी सास हे दीदी नही.. बात करती हे.. हें..हें..हें..

कहातो रमा सरमाके हसती हुइ लताको मारनेके लीये खडी होगइ.. तब लता जोरोसे हसते अपने रुममे दोडके भाग गइ ओर रुमका दरवाजा बंध करलीया.. तो सभी तमासा देखते हसते रहे.. तब रमा सरमाती हसती हुइ भावनाके पास चली गइ ओर उनका हाथ पकडके उसे अंदर लेगइ तो भावनाभी देवायतकी ओर हसती हुइ उनके साथ अंदर चली गइ.. ओर दोनो बेडपे जाके बैठ गइ ओर हस हसके बाते करने लगी..

सरला : देखा देवु.. अबतो सारा दीन यही मस्ती मजाक चलता रहेता हे.. कीसीको पताही नही की मामा गुजर गया हे.. ओर ये रमा भी.. बीलकुल छोटी बच्चीकी तराह लताके साथ मस्तीया करती रहेती हे..

देवायत : (हसते) अच्छा हेना.. दुख जीतना जल्दी भुलजाओ उतना ही अच्छा हे.. जाने वाला तो चला गया.. तो उनके पीछे कबतक सौक मनाते रहेगे.. मुजेभी अच्छा लगा.. सब हसी मजाक करते हे..

भानु : भाइ वो अंकलकी तबीयत खराब हे तो.. फीर..

देवायत : तु फीकर मत कर मे वहीसे आरहा हु अब तबीयत ठीक हे.. ये बता कल भावुको लेकर होस्पीटल जाना हेकी नही..? कौन आरहा हे..? अबतो रमाभाभी आगइ हे तो रमाभाभी को साथ लेले..

सरला : हां ये तुने सही कहा.. वोही आयेगी.. ओर इनके मामाका फुलभी विसर्जन करना हे.. तो बीचमेही वो जगाह आतीहे वहा होजायेगा.. अ‍ेक घंटेका काम हे.. बस वही अ‍ेक आखरी वीधी बची हे.. तो नीलम लताभी साथ चल रही हे तो भावना बहुको दीखाके कुछ खरीदी भी होजायेगी.. सब सुबह जल्दी नीकलेगे..

भानु : हां भाइ कल साम तकका सब प्रोग्रम इन लगोने बनालीया हे.. आप कौन आ रहेहो..?

देवायत : देखता हु यार.. वो मंजुको दीखाके मुजे अंकलके पासभी जाना हे.. तुम आरामसे खरीदी करके आना मे सब देख लुगा.. फीर हम आरामसे खरीदी करते रहेगे.. कल मंजु ओर.. सब घर आजायेगे..

रमा : (बहार आते हसते) देवरजी.. आपको भावना बुला रहीहे.. उनके पीताके बारेमे कुछ पुछना हे..

सरला : हां देवु तु अंदर जाके उसे बात करले दो दीनसे वो अपने बापुकी बहुत चीन्ता कर रही हे..

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तब देवायत उठकर भावनाके रुममे चला गया तो वो दरवाजेके पासही साइडमे खडीथी.. जो वहा कीसीको नही देख सकते थे ओर बहारसेभी कोइ नही देख सकता था.. जेसेही देवायत उनके पास गया भावनाने उसे खीचकर जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. फीर जटसे देवायतसे अलग होगइ ओर अ‍ेक नजरसे देवायतको देखती रही तब उनकी आंखसे आंसु टपक गये ओर इतनाही बोल पाइ..

भावना : (धीरेसे) जानु.. वो पापा.. होस्पीटलमे हे.. कैसे हे वो..? आप मम्मीसे मीले..? उनसे कोइ बात की..? मुजे पापाके पास ले चलो.. मुजे उनको देखना हे..

देवायत : बस भावु आंसु मत बहा.. वो अब काफी ठीक हे मे वहीसे आरहा हु.. ओर तेरी मम्मी भी ठीक हे..

भावना : क्या आप दोनो बोलेने लगे..? मतलब.. आप मम्मीसे नाराज थे..तो..

देवायत : भावु सब ठीक होगया.. हमने साथमे खानाभी खाया.. अब हमारे बीच कोइ गीला सीकवा नही हे.. तु अब उनकी चीन्ता मत कर.. ओर इस हालतमे तुने वहा नही जाना.. वो हमारे घर सादीमे आयेगे.. तब मील लेना.. बोल अब क्या जानना हे तुजे..?

भावना : जानु बस मे ठीक होजाउ.. फीर आपको खुब प्यार करुगी.. हम कही अकेले मीलेगे.. आप सब इन्तजाम करलो.. अब आपके बगेर अ‍ेकभी दीन काटना मुस्कील हे.. आपकी बहुत याद आती हे..

देवायत : भावु अभी ये सब करना जोखीम हे.. हम मीलेगेना.. पहेले तुम ठीक होजाओ.. फीर मे तेरी सारी तम्मना पुरी कर दुगा.. चल अब बहार चलता हु.. वरना कीसीको सक होजागेगा..

भावना : (बहारकी ओर नजर डालते) होने दो.. अब मे कीसीसे नही डरती.. समज गयेनां..? हें..हें..हें..

देवायत : (चोंकते) क्या समज गयेना..? तु बहोत डेन्जर हे.. हें..हें..हें.. लगता हे तु कुछ उनके बारेमे जान गइ हे.. हें..हें..हें..

भावना : (सरमाते हसते) जानु.. वो हम बादमे डीसकस करेगे.. अभी आप जाइअ‍े.. हें..हें..हें..

फीर देवायत बहार आके सबके साथ बैठ गया.. तभी लता सबके लीये चाइ लेकर आगइ ओर सबको चाइ देकर बाकीकी चाइ लेके भावुके रुममे चली गइ.. फीर देवायत चाइ पीते सबसे उनके ससुरकी सादीकी तैयारी वगैरे वगैरे बाते करने लगा.. फीर साम ढलने आइतो वहासे नीकल गया ओर अपने गांवमें आगया..

तब काफी साम ढल चुकीथी ओर काफी अंधेरा छा गयाथा.. तब वो सीधाही चंपाभाभीके धर चला गया.. तो वो खाना खा रहीथी.. तो देवायतको देखतेही खडी होगइ.. ओर बीना कुछ बोलेही घरका दरवाजा बंध करलीया.. फीर देवायतका हाथ पकडके जबरदस्तीसे अपने साथ खानेको बीठा दीया..

चंपा : देवरजी आपतो बहुत बीजी होगये हो.. आतेही नही.. मे कीतनी बार हवेलीपे आइ फीरभी आप नही मीले.. क्या हमारी देवरानी आगइ..?

देवायत : भाभी उनको कल दीखाने होस्पीटल जाना हे फीर सीधे घरही आयेगे.. तब आप आजाना..

चंपा : देवरजी अब सोच रहीहु मे वही रहेने आजाउ.. क्या कहेते हो..?

देवायत : (पानी पीते) मेतो कबसे केह रहा हु आप ही नही आती..

चंपा : (सरमाते धीरेसे) वोतो इसीलीयेकी हम दोनो यहा आरामसे मील सके.. वहा सबके होते थोडी प्रोबलेम होगी.. अ‍ेक डरसा लगता हे.. ओर यहा हम खुलके मील सकेगे.. क्या कहेतेहो आप..?

देवायत : हां येभी ठीक हे.. आप यही रहीये.. दीनमे वहा रहेना ओर रातमे इधर आजाना.. फीरतो कोइ दीकत नही हेनां..?

चंपा : हा ये सही हे.. हम यही करेगे.. अब आप अंदर जाइअ‍े मे अभी आती हु.. कामतो बादमे करलुगी..

देवायत : (हसते) भाभी अभी मुजे घर जाना हे काफी देर होगइ हे.. हम दाबमे मीलते हेनां..

चंपा : (सरमाते हसते) क्या बादमे मीलते हे.. आप बैठो मे अभी आइ इतने दिनोके बादतो मीले हो.. बस अ‍ेक बार करेगे.. फीर आप चले जाना.. अबतो मुजेभी आपकी आदत होगइ हे.. बाबा यहा आया करो..

कहेते चंपाभाभी फटाफट सब लाइट दरवाजा बंध करलेती हे ओर रुममे आजाती हे ओर फटाफट अपने कपडे नीकालने लगती हे तब देवायतभी अपनी पेन्ट नीकाल देता हे तब चंपाभाभी बेडपे पैर फैलाके लेट जाती हे ओर देवायत उनके पैरके बाच बैठते अपना दमदार तगडा लंड चंपाभाभीकी चुतपे सेट करते उनपे जुक जाता हे ओर अ‍ेक जोरोसे जटका मारता हे तब चंपाभाभीकी चीख नीकल गइ.. ओर तडपने लगी..

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चंपा : उइइइ.. मां.. धीरेसे.. डालोनां.. दर्द होता हे.. अब धीरे धीरे चोदो मुजे.. कीतने दीन होगये..

फीर कुछही देरमे दोनोके बीच धमासान चुदाइ हो रहीथी तब चंपाभाभीभी अपनी कमर उछालके देवायतका साथ देती रही.. देवायतने चपांभाभीको चोद चोदके दो बार जडा दीया ओर आखीर अपना लंड उनकी चुतमे धुसाके उनसे चीपक गया तब चंपाभाभीने देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलीया ओर दोनो अ‍ेक साथ जडने लगे तब चंपाभाभी तेज सांसको दुरस्त करते देवायतकी पीठ सहेलाती रही..

चंपा : (सरमाते नजर चुराते) देवरजी.. आपतो अ‍ेकही बार मे मुजे थका देते हो.. कीतना जोसमे करतेहो.. मुज जेसी आधेडकी चीखे नीकलवा देते हो.. जो बेचाारी मुजसे छोटी हे उनकी क्या हालत होती होगी..

देवायत : भाभी जब तु हवेलीपे आजायेगीनां तब तुजे वहा अ‍ैसा बहुत कुछ दीखनेको मीलेगा.. तैयार रहेना..

चंपा : (मुस्कराते) हां पता हे.. आपतो राजा हो.. बस मुजे कीसीसे कोइ मतलब नही.. आप मेरा खयाल अ‍ैसेही रखीयेगा.. मेतो आपकी सचमे दीवानी होगइ हु.. क्या रश्मीको मीलते हो की नही..?

देवायत : (हसते) हां मीलता हु.. वोभी आपकी तराह मेरी दिवानी हे..

चंपा : (मुस्कराते) हां तो दिवानीतो होगीनां अभी जवान हे.. अबतो उस कमीना कीसी कामका नही रहा.. अबतो हम दोनोको आपकाही सहारा हे.. हो सकेतो उनको अ‍ेक बच्चा देदो..

देवायत : (हसते) कहोतो आपकोभी देदु.. हें..हें..हें..

चंपा : अबतो मे आधेड होचुकी हु.. ओर आपके भाइभी चल बसे.. तो मे दुनीयाको क्या जवाब दुगी.. की ये बच्चा कीसका हे.. अरे बाबा हमतो अ‍ैसेही मजे करेगे.. अगर आपके भाइ होतेतो मे जरुर आपका बच्चा पैदा करती.. अब उपरसे उतरना नही हे क्या.. देखो मेरी पुरी चुत भरदीहे आपने.. कही मे पेटसे ना होजाउ..

तब देवायत उपरसे हट गया तो लंड फचच.. आवाजके साथ नीकल गया तब चंपाभाभी खुब सरमाइ ओर जटसे अपनी चुतपे अपनी चडी रखदी ओर चुत साफ करने लगी.. फीर देवायतका लंड पकडकर उसेभी साफ करने लगी.. ओर दोनोने अपने कपडे पहेन लीये तब देवायतने उनको घरके खर्चेके लीये कुछ पैसे दीये तो चंपाभाभी देवायतकी बाहोमे लीपट गइ ओर आंसु नीकल गये.. फीर दोनोने होंठ मीलाके कीस कीया ओर देवायत वहासे नीकल कर हवेलीपे आगया....

कनटीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ८५

तब देवायत उपरसे हट गया तो लंड फचच.. आवाजके साथ नीकल गया तब चंपाभाभी खुब सरमाइ ओर जटसे अपनी चुतपे अपनी चडी रखदी ओर चुत साफ करने लगी.. फीर देवायतका लंड पकडकर उसेभी साफ करने लगी.. ओर दोनोने अपने कपडे पहेन लीये तब देवायतने उनको घरके खर्चेके लीये कुछ पैसे दीये तो चंपाभाभी देवायतकी बाहोमे लीपट गइ ओर आंसु नीकल गये.. फीर दोनोने होंठ मीलाके कीस कीया ओर देवायत वहासे नीकल कर हवेलीपे आगया....अब आगे

तब रातके १० बज चुकेथे ओर पुरी हवेलीमे अंधेरा छाया हुआथा.. आज हवेलीपे कोइ नही था.. जो था तो सीर्फ पुनम लखन ओर रजीया.. आज पुनम अपने रुम मे शीशेके सामने शींगार कर रहीथी तबही देर रात होतेही रजीया छुपकेसे उपर लखनके पास चली गइ.. अब वो पुरी तराह लखनको उनकी बीवी होनेका अहेसास करवा रहीथी.. अंदर जातेही लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनो प्यार करने लगे..

तब देर रात देवायतभी हवेलीमे पहोंच गया.. देवायत अपनी कारसे उतरकर अपने रुममे चला गया.. ओर लाइट जलादी तो उनके बेडपे पुनम दुल्हनकी तराह सजधजके शींगार करते हुइ जाग रहीथी.. जो बेडके कोनेपे बेठकर देवायतका इन्तजार कर रहीथी.. जेसेही देवायत अंदर आगया वो जटसे खडी होगइ.. ओर दोडके देवायतकी बाहोमे समा गइ तब देवायतने पुनमको कसके अपनी बाहोमे भीचलीया..

पुनम : भाइ आज आनेमे बहुत देर करदी..? क्या अंकलकी तबीयत बहुत खराब हे..?

देवायत : हां पुनो.. उनको बडी मुस्कीलसे होस आया हे.. उनको पेरेलीसीस होगया हे..

पुनम : (होंठ चुमते) भाइ चलो पहेले खाना खालो.. मेने आपका बहुत वेइट कीया.. बहुत भुख लगी हे..

देवायत : (पुनमके सरको चुमते) तो क्या तुमने अभी तक नही खाया..?

पुनम : नही मे मेरे पतीके बगैर केसे खा सकती हु.. अबतो आपही मेरे पती हे.. चलीये.. जबतक मे यहा हुं मे पत्नीका हर फर्ज नीभाउगी.. आइअ‍े..

देवायत : बेबी अ‍ेसा नही करते.. अगर अंकलकी तबीयत ज्यादा खराब हो ओर मे वहा रुक गया होतातो..?

पुनम : भाइ.. मेरा इस पती इतनाभी लापरवहा नही हे.. मुजे यकीन हे.. मुजे फोन करके बता देता..

देवायत : (बाहोमे भीचते होंठ चुमते) ओह.. बेबी तु मेरा कीतना खयाल रखती हे बीलकुल मंजुकी तराह.. वोभी अ‍ेसेही बात करती हे.. लगता हे अब मुजे तेरा बहुत खयाल रखना पडेगा..

पुनम : भाइ.. मत भुलो मे भी आपकी बीवी हु.. बाबाने खुद हमारी सादी करवाइ हे.. में आपसे कभी अलग होना नही चाहती..

देवायत : (पुनमको गोदमे उठाते बहारकी ओर लेजाते) सोरी.. चल आजतो मे मेरी इस बीवीको अपने हाथसे खीलाउगा.. क्या लखनने खालीया..? ओर वो रजीया.. सो गये दोनो..?

पुनम : (सरारतसे हसते) हा दोनोही खाना खाके सो गये हे.. उपर.. लखनके रुममे.. हें..हें..हें..

देवायत : (डाइनींग टेबलपे बीठाते आस्चर्यसे हसते) दोनो उपर सो गये हे..? मतलब..?

पुनम : (हसते) भाइ.. पहेले खाना खालो मे आपको बादमे अंदर सब बताती हु.. चलीये इधर बेठीये मे खाना लेकर आती हु.. फीर हम दोनोही मीया बीवी साथमे खाते हे..

कहेते पुनम डाइनींगसे उतर गइ ओर कीचनमे चली गइ तब उनके पैरोमे आज जांजरकी खनक ओर हाथोकी कलाइमे चुडीओकी खनकार सुनाइ दी.. तो देवायत तो देखताही रेह गया.. आज पुनम बीलकुल देवायतकी सुहागनकी तराह सजी हुइ थी.. जैसे इस हवेलीमे नइ नइ ब्याह करके आइ दुल्हन हो.. वो देवायतके लीये अ‍ेक पत्नीकी तराह अपना हर फर्ज पुरा कर रहीथी..

जो कलसे उनकी सांस आनेके बाद उनका इस तराह रहेना मुमकीन नही था.. फीर तो उनकी धिरेनके साथ सादी होनेके बाद ही सब सौक पुरा कर सकती थी.. इसीलीये आज उसने पुरी रात जागके देवायतसे प्यार करनेका फैसला करलीया था.. आज वो अपना सबकुछ देवायतपे लुटाना चाहती थी.. पुनम आज देवायतके साथ अ‍ेक बहेनकी तराह नही उनकी नइ नइ बीवीकी तराह पेस आ रहीथी..

पुनम : (खाना लाते) भाइ आपको फ्रेस होना हेतो जाइअ‍े तबतक मे सब खाना नीकालती हु..

तब देवायतको याद आयाकी वोतो आतेही पुनमके साथ चीपक गयाथा.. तो वो जटसे हाथ मुह धोकर फ्रेस होकर वापस आके बेठ गया.. तबतक पुनमभी खाना नीकाल रहीथी ओर देवायतके पास आकर बैठ गइ तभी देवायतने हाथ पकडके उसे अपनी गोदमे बीठा दीया तब वो खुब सरमाइ.. ओर देवायतकी जांगोपे बैठ गइ.. अ‍ेकही थालीमे खाना नीकालके रख दीया ओर अपने हाथोसे देवायतको खीलाने लगी तब देवायतभी पुनमको खीलाता रहा.. ओर दोनोही प्यारभरी बाते करते अ‍ेक दुसरेको खीलाते रहे..

पुनम : भाइ.. बस यही कुछ हसीन पल हे जो मेरी सादीके बाद बहुत मीस करुगी..

देवायत : (हसते मजाक करते) क्यु..? तु धिरेको भी अ‍ैसे खीला देना.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते अ‍ेक मुका जांगपे मारते) नही.. नही खीलाना मुजे कीसीको.. ये हक सीर्फ आपके लीयेही हे..

देवायत : बेबी धिरेनको अ‍ैसा कभी फील मत होने देनाकी तु उनको प्यार नही करती.. वो तुजे बहुत चाहता हे.. बाकीतो तु हमेसा मेरी बीवीही रहेगी.. ओर हमारा प्यार अ‍ैसेही बरकरार रहेगा.. आइ प्रोमीस..

पुनम : (गाल चुमते) भाइ.. आइ नो.. मुजे सब पता हे आप मुजे धिरेनसेभी ज्यादा प्यार करते हे.. लेकीन मेरे सामने जताते नही.. मुजे पता हे आपने अभी जोभी कुछ बोला वो दिलपे पथ्थर रखके बोला हे..

तब देवायत पुनमको जोरोसे बाहोमे भीचलेता हे ओर उनकी आंखसे आंसु नीकल जाता हे.. क्युकी पुनमने अभी जोभी कहाथा वो सब सचथा.. देवायतभी मनसे नही चाहता थाकी उनकी बहेन उनको छोडके चली जाये.. लेकीन दिलपे पथ्थर रखके वो सबकुछ करनेको तैयार था.. तब पुनमभी आंसु बहाते देवायतके आंसु पोछने लगती हे ओर देवायतका सर अपने सीनेमे भीच देती हे.. ओर उनके सरको चुम लेती हे..

पुनम : (आंसु पोछते) भाइ.. कुदरतने हम दोनोकी कैसी कीस्मत लीखी हे.. आपसे जुदा होनेका मनही नही करता.. पता नही मे वहा आपके बगैर कैसे रहुगी.. सोचते ही दिल गभरा जाता हे..

देवायत : पुनो.. मे तुजे इतना चाहता हुकी ये सीर्फ तेरे लीये नही.. मेरे लीयेभी उतनाही तकलीफ देही हे.. लेकीन मे वादा करता हु.. वहा में तेरे पास रेग्युलर आता जाता रहुगा ओर तुजे यही प्यार देता रहुगा..

दोनोही अ‍ैसी इमोश्नल प्यार भरी बाते करते खाना खा रहेथे.. तब उपरकी मंजीलपे लखनके रुममे प्यारका भवंडर तुफान बनके चुदाइका तांडव मचा रहा था.. आज लखन बडीही बेहरेमीसे रजीयाको चोदेही जा रहाथा ओर रजीयाभी चीखते चीलाते लखनसे उछल उछलके चुदवा रहीथी.. क्युकी रजीयाने आजभी लखनको आतेही वायग्राकी गोली उनसे छुपकर दुधमे मीलाकर पीलादी थी..

ओर उनका नतीजाभी रजीयाको आज दीख रहाथा.. नतीजेके फल स्वरुप रजीया लखनसे बेहरेहमी से चुदवाते भुगत रही थी.. तब रजीयाकी चीखे सुनने वाला उपरकी मंजीलमे कोइ नही था.. लखन हाथके बल उचा होकर कमर उछाल उछालकर रजीयाको जोरोसे बेहरहेमीसे चोद रहाथा.. तब रजीया के मुहसे आवाज तक नही नीकल रहीथी.. उनका मुह खुलाही रेह गया ओर वो लखनके हर धकेको सहेन करते चुदवा रहीथी..

रजीया : (दर्दसे रोने जैसे सुरतमे) उंहु.. उंहु.. बसस.. बसस.. मरर गइइइ.. धीरे... चोदोनां.. लखन.. मे मर.. जाउगी... उइइइ मां... आह..आह..आह..आह.. उइइइ.. सीइइइइइइइ.. हंम..हहहहहममममममम...

लखन : (जोरोसे सोट मारते) बीवी हेनां..तुउउउ मेरीइइइ..? हंम.. हमने.. कल सुहागरात मनाइइइ हेनां... हंममम.. अब तुजे.. में अ‍ैसे हीइइइ चोदुगाआआ... क्या.. मस्त मालल हेअ‍ेअ‍े.. तुतुउउउ..हंममम हंममम.. तुजे.. ओर लताको.. साथ..में.. चोदुगा...

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लखन रजीयाको जोरोसे चोदेही जा रहाथा तब रजीया तीलमीलाती लखनके हर जटकेको चदर पकडते छटपटाते जेल रहीथी.. अब लखन रजीयाकी ओर पुरा ढल चुकाथा.. अबतो रजीयाको देखतेही उनके लंडमे हरकत होने लगती थी.. वो रजीयाके पीछे इतना पागल हो चुकाथा की पीछले पांच छे दिनसे लताको फोन ककरनाही भुल गयाथा.. तब लताभी लखनके फोनके इन्तजारमे तीलमीला गइथी.. ओर बेचैन रहेने लगीथी..

तभी नीचेकी ओर पुनम ओर देवायत अ‍ेक दुसरेको खाना खीलाते प्यार ओर इमोश्नल बाते करते रहे ओर खाना फीनीस कीया तब पुनम सब बरतन समेटके कीचनमे रखके आगइ.. तब देवायत उनकी चुडीया ओर पायलकी जनकारसे पागल होने लगा.. आज उनको पुनम अ‍ेक अप्सराकी तराह दीख रहीथी.. ओर उसने वहीसे पुनमको अपनी गोदमे उठा लीया..

तब पुनम सरमके मारे देवायतके गलेमे हाथ डालमे उनके सीनेमे सर छुपा लेती हे ओर देवायत उसे अपने रुममे लेजाता हे.. फीर दोनोही अपने बेडपे आगये.. तब दोनोही अ‍ेक दुसरेसे मीलन करनेके लीये तडपने लगे ओर अ‍ेक दुसरेके होठोका रसपान करते प्यारके के भवंडरमे गोते लगाने लगे..

तब कुछही देरमे दोनोके कपडे अ‍ेक अ‍ेक करते तनसे अलग होते गये.. ओर अ‍ेक टेबलपे इकठा होते जीस तनसे अलग हुअ‍े उसी तनको अ‍ेक होते देखते रहे.. अ‍ैसा लग रहाथा आज देवायत ओर पुनम नही खुद काम ओर रती अपनी क्रिडा करनेमे मग्न हो गये हे.. पुरे रुममे अ‍ेक सनाटा छाया हुआथा ओर पुरे रुममे कामुक सुगंध फैल गइ.. जो दोनोके जीस्मसे आ रहीथी..

तब दोनोही अपनी सुध बुध खो चुकेथे ओर प्यारके महासागरमे गोते लगाते हल्केसे कमर हीलाते चुदाइका आनंद ले रहेथे तब दोनोकी आंखोमे केवल अ‍ेक दुसरेके लीये गहेरा बेसुमार प्यार दीख रहाथा.. ना कोइ वासना.. ओर नाही कोइ हवस.. बस थातो केवल अ‍ेक नीर्दोस प्यार.. जो दोनोही आंख बंध करते अ‍ेक दुसरोके अंदर समा जानेको बेकरार थे.. दोनोही पहेली बार अ‍ेक अलगही अ‍ैसी अनुभुती फील कर रहेथे..

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तब देवायतको पुनमको चोदते हुअ‍े उनके चहेरेमे कभी अपनी मासुम नीर्दोष बहेन पुनम दीखती थी जो इनके प्यारमे पागलथी.. तो कभी उनको बेसुमार प्यार करने वाली उनकी पत्नी मंजु दीखती थी.. आज देवायत ओर पुनम दोनोके लीये ये नया अनुभव था.. आज दोनोको चुदाइ करते अ‍ेक नइ अनुभुती फील हो रहीथी.. ओर आज अ‍ैसा क्यु हो रहाथा वो कीसीको पता नही था..

जो येसब कर रहीथी उनकोभी इस बातका पता नही था.. जोभी कुछ हो रहाथा वो सब अनायासही हो रहाथा.. वो थी.. मंजुला.. जो आज देवायतसे ना मीलनेकी वजहसे बहुतही बेचेन हो रहीथी.. ओर वो देवायतसे आज ना मीलनेकी वजहभी जानतीथी.. जो देवायत उनके पीताके पास गयाथा.. वो देवायतसे फोनके माध्यामसे सब जानकारी ले सकतीथी लेकीन नही लेपाइ ओर देवायतकाभी फोन नही आया..

ओर वो बच्चेकी देखभालमे बीजी रही.. तब रातमे सबने डीनर करलीया ओर सभी काम नीपडाके सब सो गये तब वो देवायतको याद करते अपने बेडपे करवटे बदलती लेटी रही.. अ‍ेक बार साइडमे मुह घुमाके देखा तो चंदा उनके पास गहेरी नींदमे सो रहीथी ओर मंजु अपने बेडपे उठकर बैठ गइ.. ओर वो आंख बंध करते देवायतके बारेमे सोचते बेठी रही.. तब उनके मनमे विचारोका धोध बहेने लगा..

ओर वो देवायतसे मीलन करनेकी कल्पनामे खो गइ.. ओर मनही मन देवायतसे मीलनकी प्रार्थना करने लगी.. तब उनको अपनी इस शक्तिके बारेमे पता नहीथा.. जो बाबाने उनके अंदर स्थापीत कीथी.. तब मंजुलाकी प्रार्थनाकी वजहसे देवायतने जीतनीभी लडकी ओर ओरतसे गांधर्व विवाह करते उनकी मांग भरीथी वो सभी ओरते संभोगकी अनुभुतीमे चली गइ..

इस बारेमे मंजुकोभी नही पताथा.. की उनकी अ‍ेक प्रार्थनाकी वजहसे सबको अनुभुती होने लगेगी.. ओर वो बैठे बैठे आंख बंध करते देवायतसे संभोगकी कल्पना करने लगी.. की वो देवायतके लीये शींगार करके बैठी हे ओर देवायत उनके पास आकर उसे प्यार करने लगता हे ओर पुरी रात अ‍ेक दुसरे प्यारकी आगोसमे साथ मे संभोग करते हे.. अ‍ैसी कल्पना करने लगी..

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ओर वो कल्पना करते ध्यानमे चली गइ तब उनकोभी नही पताथा.. देवायतने जीनकोभी अपनी पत्नी मानाथा वो सबकी चुत हरकतमे आगइ ओर चुतकी नाजुक पंखडीया जैसे संभोगमे अंदर बहार होते कामरस बहाने लगी.. अ‍ैसाही मंजुकी चुतमे होने लगा.. तब बेडपे चंदा गहेरी नींदमे सोइथी इसके बावजुद वोभी अपनी कमर हीलाते देवायतके साथ संभोगके सपने देखने लगी ओर अपनी कमर हीलाने लगी..

तब गांवमे रश्मी.. चारु.. चंपा दया रजीया ओर नीर्मलाभी होस्पीटलमे अपने अपने रुममे देवायतके साथ संभोगकी अनुभुती महेसुस करने लगी.. ओर हवेलीपे देवायत ओर पुनमभी आंख बंध करते अनुभुतीमे लीप्त अभीभी बेहोसीकी हालतमे संभोग कर रहेथे.. तब सबके मनमे संभोगकी अ‍ेक परम आंनदकी अनुभुती होती रही.. ओर सभी ओरत देवायतको अपना पती परमेश्वर मानते उनको पुरी तराह समर्पीत होने लगी..

अ‍ैसा आज सबके जीवनमे पहेली बार हो रहाथा.. ओर ये सीलसीला तबतक चलता रहा.. जबतक मंजु ध्यानमे बैठी रही.. तभी उनका बच्चा विजय रोने लगा.. तब नीर्मलाकी आंख खुल गइ.. ओर उसने मंजुको बेडपे ध्यानमे बैठे देखा तो वो आस्चर्यसे उसे देखती रही.. ओर हाथ लंबा करते मंजुको हीलाने लगी.. तब मंजु अचानक नींदसे जागी.. ओर डरके चंदाकी ओर आंख खोलते देखने लगी..

तब उनको विजयके रोनेकी आवाज सुनाइ दी.. तब मंजुने जटसे विजयको अपनी गोदमे उठा लीया ओर अपनी गोदमे लेके उसे दुध पीलाने लगी.. तभी चंदाको अपनी चुतके पास चीपचीपासा लगने लगा.. ओर वो जटसे बैठ गइ ओर नीचे नजर करते देखने लगी.. तब उनका मुह आस्चर्यसे खुलाही रेह गया क्युकी उनकी चुतके आसपास बहुत गीला हो चुकाथा.. जैसे कीसीने उनकी चुतको छेडा हो..

ओर वो मंजुकी ओर कुछ आसंकासे देखने लगी.. की कही मंजुनेतो नींदमे उनकी चुतको नही छेडा..? तब उनको नही पताथाकी अभी मंजुकी चुतसेभी बहुतसा पानी बेह रहा हे.. ओर कुछही देरमे मंजुकोभी अपने नीचे गीला महेसुस होने लगा.. ओर वो जटसे विजयको साइडमे सुलाके बेडसे उतरके खडी होगइ ओर अपना पेटीकोट उठाके देखने लगी.. तब पानी पैरसे उतरते महेसुस करने लगी ओर दोडके बाथरुममे घुस गइ..

फटाफट अपना पेटीकोट नीकालके नहाने लगी.. तबतक चंदाभी बेडसे उतरके अपने कपडे नीकालकर देखती रही.. उनको अभीभी कुछ समजमे नही आ रहाथा की ये सब क्या हो रहा हे.. तब वोही हाल आज नीर्मला.. रश्मी ओर चारुका भी हुआ.. कीसीको कुछ समजमे नही आ रहाथा.. लेकीन सबके जहेनमे सीर्फ अ‍ेकही सख्स धुम रहाथा ओर वो हे देवायत.. जो सभी उनके साथ संभोंगका स्वप्न देख चुकीथी..

देवायत अभी पुनमके सीनेपे सर रखके ढेर हो गया था.. ओर पुनम उनका सर सहेला रहीथी.. ओर सोच रहीथी की आज क्या हुआ.. भाइ कबसे उनके उपर पडेहे ओर अभी ४.३० बज गयेहे ओर अबभी मेरी चुतमे लंड डालके उपर पडे हे.. क्या अबतक वो बीना नीचे उतरे मेरी चुदाइ कर रहे थे..? ओर आज मेने क्या देखलीया..? भाइ मुजे कीतना प्यार करते हे.. मेरी पुरी रात चुदाइ करते रहे.. वो थकतेभी नही हे..

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तो फीर मुजे पता क्यु नही चला.. चुदाइके वक्त कीतना आनंद आ रहाथा.. मेरी आज तक अ‍ैसी चुदाइ भाइने कभी नहीकी.. कोन हे ये.. जो मुजे आज परम आनंदकी अनुभुती करवा रहाथा.. तब उनको बाबाकी याद आगइ जो अ‍ेक बार कहाथा की तुम लोग कोइ सामान्या इन्सान नही हो.. तब पुनमके मनमे कइ सवाल आने लगे.. ओर पुनमने तभी मंजुको ओर बाबाको अ‍ेक बार मीलकर सब पुछलेनीकी ठानली..

तबभी देवायत पुनमकी चुतमे लंड डालकर उनके सीनेपे ढेर होकर पडाथा.. ओर पुनम सब सोचते उनका सर सहेला रहीथी.. तो दुसरी ओर आज नीर्मलाभी रातमे देवायतके बारेमे सोचते होस्पीटलमे अपने पतीके बेडके पास नीचे चदर डालके लैटी हुइ थी.. तब उनको सुबह अपनी चुतके पास चीपचीपासा गीला फील होने लगा.. ओर वो जटसे बैठ गइ ओर आजु बाजु नजर घुमाके देखने लगी..

तब राजीव गहेरी नींदमे सो रहाथा तब उसने अपना गाउन उठाकर चुतकी ओर नजर डालके चेक कीया तो चुतसे पानी बहेकर चदरको गीला करदीया था.. ओर वो सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर जटसे खडी होकर चदर लेकर बाथरुममे धुस गइ.. आज वोभी स्वप्नमे देवायतके साथ जबरदस्त तरीके चुदवाकर संभोगकी अनुभुती कर चुकीथी.. ओर वो चदरको पानीमे डालकर साफ करते सोचती रही..

नीर्मला : (मनमे सोचते) हे भगवान ये सब क्या हो रहा हे..? कल मेरे सामनेही मेरी इजाजत लेकरतो गयेथे.. तो क्या रातमे वापस आये होगे..? अ‍ैसा लग रहा हे पुरी रात मेरे साथ.. नही नही.. वो अ‍ेसे छुपकेसे मेरे साथ क्यु करेगे..? मे उनकी बीवी हु.. वो मुजे बोलके सब कर सकते हे.. तो फीर..

यही सब सोचते नीर्मला चदर धोती रही.. फीर अपना गाउन नीकालके नहाने लगी.. तब जाकर उनकी चुतपे कुछ राहत महेसुस हुइ.. ओर वो नहाके कंपलीट तैयार होगइ.. तभी राजीवभी जाग गया तो नीर्मला उनकोभी ब्रस करवाके कंपलीट करने लगी.. तो दुसरी ओर आज चंपाभाभी चारु ओर रश्मीकाभी यही हाल था.. कीसीको कुछ समजमे नही आरहा था की ये सब कैसे हुआ.. सब अपनी अपनी दुवीधामे थी..

तब हवेलीपे आज लखन ओर रजीया नंगेही अ‍ेक दुसरेसे चीपकके गहेरी नींदमे सो रहेथे, जैसे दोनो मीया बीवी हो.. लेकीन देर रात रजीयाभी अनुभुतीमे चली गइ.. ओर उसे फील होने लगाकी इस वक्त वो लखनसे नही देवायतसे चुदवा रही हे.. तो दुसरी ओर लखन रजीयाकी चुतकी सुबह चार बजे तब धजीया उडाता रहा.. अबतक वो रजीयाकी तीन बार धमासान चुदाइ कर चुकाथा..

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ओर गोलीकी वजहसे चुदाइका दोरभी लंबा चलाथा.. ओर ये सब पीछली दो रातोसे हो रहाथा.. हर चुदाइके बीच दोनो अ‍ेक घंटे आराम करतेथे.. लेकीन लखनका लंड बैठनेका नामही नही ले रहाथा.. ओर वो रजीयाको वापस चोदने लगता.. पुरी रातमे रजीयाभी कीतनी बार जडीथी उनकोभी नही पताथा.. ओर तीसरी बारतो रजीया चुदवाते चुदवाते लगभग बेहोसीकी हालत मे चली गइथी..

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तब उनको नही पताथाकी वो मंजुकी प्रार्थनाकी वजहसे अनुभुती मे चली गइ हे.. अब वो लखनके साथ पुरा जीवन बीतानेके रंगीन सपने देखने लगीथी.. तो दुसरी ओर देवायत अभीभी पुनमके सीनेपे सर रखते सो गाथा.. तो पुनमने उसे कंधेसे पकडकर धीरेसे साइडमे सुला दीया.. तब उनकी चुतसे लंड फचचच.. आवाजके साथ नीकल गया.. तो पुनमकी हसी नीकल गइ..

ओर वो उठकर धीरे धीरे लंगडाते चलते बाथरुममे धुस गइ.. ओर कमोडपे बेठके अपनी चुत चेक करने लगी तो दोनो पेरपे कमरस बेहते नीचेकी ओर उतर रहाथा तब पुनम पीसाब करने लगी.. फीर नहाके बहार आगइ.. ओर अपना गाउन पहेनकर वापस देवायतके पास बेडपे चली गइ.. देखातो पुरा बेड गीला होगया था.. ओर वो देवायतको जगाने लगी.. तब मुस्कीलसे उसने आंख खोलदी ओर पुनमकी ओर देखने लगा..

तब पुनमने सरमाते हसते हुअ‍े हाथके इसारेसे बेडको दीखाया.. तो देवायत देखतेही जटसे बैठ गया ओर पुनमकी ओर आस्चर्यसे देखने लगा.. तब पुनम मुस्कुराते सरमाते बेडका बीछाना खीचने लगी.. तब मजबुरन देवायतको बेडसे उतरना पडा.. तबतक पुनम बीछाना लेकर बाथरुममे चली गइ तो देवायतभी उनके पीछे चला गया.. तब पुनम बीछानेको वोशींग मशीनमे डाल रहीथी..

आज पुनम गाउनमे भी पायल ओर चुडीओमे अ‍ेक सादीसुधा ओरत दीख रहीथी.. देवायतको आज अपनी बहेनमे उनकी बीवी दीख रहीथी.. जो उनको पुरी तराह समर्पीत हो चुकीथी.. उस्े पुनमको अ‍ैसे देखतेही उनपे प्यार आने लगा.. ओर तभी देवायतने पुनमको पीछसे अपनी बाहोमे भरलीया..

पुनम : (सरमाते हसते) भाइ.. क्या अभी आपका जी नही भरा..? आपको पता हे क्या हुआ हे..?

देवायत : (पुनमके कंधेपे सर रखते मुस्कराते) हां.. मुजे सीर्फ इतना पता हे आज हम दोनोने खुब प्यार कीया हे.. मे पुरी रात तेरे उपरसे उतरा नही हु..

पुनम : (मशीन का ढकन बंध करते) सीर्फ प्यार..? अरे जनाब आप पुरी रात बीना नीचे उतरे सुबह ४.३० बजे तक आप मेरी बजाते रहे हे.. ओर भाइ.. पता नही आज क्या हो गयाथा.. मुजेतो कुछ पताही नही.. की हम सुबह तक प्यार करते रहे.. कीतना आनंद मील रहाथा जैसे हम स्वर्गमे चले गये हो.. भाइ.. अ‍ेक बार बाबाको मीलने जाना हे.. आप जबभी उधर जाओ मुजे लेकर जाना.. वरना वंदनाको लेकरतो जाही रहे हे..

देवायत : (पीछसे गाल चुमते) ठीक हे बेबी.. हम तबही चलेगे.. थोडा जल्दी घरसे नीकलेगे..

तब पुनम पलट जातीहे ओर देवायतकी बाहोमे समा जाती हे.. तभी देवायत उसे जोरोसे बाहोमे भीचते उनके गलेको चुमने लगता हे तो पुनमकी चुडीयोकी खनखनाट उसे ओर पागल करदेती हे.. तब पुनम अपना सर उचा करते आंख बंध करलेती हे.. ओर दोनो मदहोस होने लगते हे.. तभी देवायत पुनमसे अलग होकर उनका गाउन नीकाल देता हे ओर वोशींग मशीनपे रख देता हे..

फीर पुनमको कमरसे पकडके मशीन पर बीठाके उनके पैरके बीच चला जाता हे.. तब पुनम सरमके मारे पानी पानी होने लगी.. ओर वो समज जाती हेकी आज अ‍ेक बार फीरसे उनकी चुदाइ होने वाली हे.. तभी देवायत अपना लंड पुनमकी चुतपे सेट करते धीरेसे चुतमे सरका देता हे तब पुनम देवायतके चहेरेको पकडके उनके होंठ चुमने लगती हे ओर देवायत धीरे धीरे कमर हीलाते खडे खडेही पुनमको चोदने लगता हे..

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अबतो पुनमभी देवायतके लंडको बडी आसानीसे अपनी चुतमे अंदर बहार करते देख रही थी.. जब देवायत पुनमको कमर हीलाते चोद रहाथा तब पुनम उनके होठोको चुमेही जा रहीथी.. तब थोडीही देरमे पुनम अकडने लगी.. ओर उसने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर अपनी कमरको जटके देने लगी तब देवायतने कसके पुनमको बाहोमे भीचलीया ओर दोनोके होंठ लीपलोक होगये..

ओर पुनम कमरको जटके देते जडने लगी.. तब उनकी पायल ओर चुडीयोकी जनकार जोरोसे सुनाइ देने लगी.. जब वो सांत होगइ तब देवायतने उसे मशीनसे उतार दीया.. ओर पुनमको दीवालसे सटा लीया तब पुनम पलटकर धुम गइ ओर थोडा जुक कर खडी होगइ.. तो देवायतने उनकी कमरको पकडकर पीछसे उनकी चुतमे लंड उतार दीया..

ओर पुनमको पीछेसे धनाधन चोदने लगा.. तब पुनम नलको पकडके जुककर खडी होगइ ओर जोरोसे दर्दके मारे आहे भरने लगी.. आज वो अपनी सारी कशर पुरी करना चाहती थी.. क्युकी आज मंजु ओर उनके साथ चंदाभी घर वापस आ रहीथी.. फीर पता नही उनका भाइ कब उनके हाथ आयेगा यही सोचते वो देवायतसे हर अ‍ेन्गलसे चुदवा रहीथी..

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पुनम : (कामुक आवाजमे) भाइ.. आज जीतनी मरजी हो अपनी बहेनको चोदलो.. फीर पता नही हमे कब ये मौका मीलेगा.. आज मुजे तृप्त करदो.. आइ होप..की भाभीकी बात सच होजाये..

देवायत : (चोदते) हां मेरी डार्लींग सीस्टर.. अबतो तेरी चुत मुजे रोज चाहीये.. मे कुछभी जुगाड करके तुजे चोदता रहुगा.. अब मे तेरी चुतके बगैर नही रेह सकता.. मे तुजे बहुत प्यार करता हु.. मे तेरी ससुरालमे आकर चुदाइ करता रहुगा..

कहेते देवायत पुनमको जोरोसे जोरदने लगा तो पुनमका मुह खुलाही रेह गया.. ओर उनको देवायतके लंडको बरदास्त करना मुस्कील होने लगा.. तब वो दोनो आंख उपर चडाके देवायतके धकेको सहेन करने लगी ओर थोडीही देरमे देवायतने अपना कामरस पुनमकी चुतमे उडेल दीया.. ओर लंडको बहार खीच लीया तब पुनमकी चुत अभीभी फडफडा रहीथी.. ओर चुतसे देवायतका रस बहार नीकलके नीचे फर्सपे टपकने लगा..

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तब पुनम बडी मुस्कीलसे खडी रेह पाइ.. तब देवायतने उसे अपनी गोदमे उठालीया ओर दोनो सावरके नीचे खडे होगये ओर सावर चालु करदीया तब दोनोही पानीमे भीगते अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. ओर होंठ मीलाके स्मुच करने लगे.. फीर अ‍ेक दुसरेको मसल मसलके नहेलाने लगे जब नहा लीया तब पुनमने अ‍ेक बार फीरसे देवायतको अपनी बाहोमे भीचलीया ओर होंठ चुमते उनसे अलग होगइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ८६

तब पुनम बडी मुस्कीलसे खडी रेह पाइ.. तब देवायतने उसे अपनी गोदमे उठालीया ओर दोनो सावरके नीचे खडे होगये ओर सावर चालु करदीया तब दोनोही पानीमे भीगते अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. ओर होंठ मीलाके स्मुच करने लगे.. फीर अ‍ेक दुसरेको मसल मसलके नहेलाने लगे जब नहा लीया तब पुनमने अ‍ेक बार फीरसे देवायतको अपनी बाहोमे भीचलीया ओर होंठ चुमते उनसे अलग होगइ....अब आगे

पुनम : भाइ.. मे ये पांच छे दीन कभी नही भुलुगी.. ये दिन मेरी जींदगीके सबसे अनमोल दिन थे.. आज आपने मुजे खुस करदीया..

देवायत : पुनो.. जीतो चाहता हे मे तुमसे कभी अलगही नाहुं.. बस दिन रात तुजे प्यार करता रहु.. तुमभी मंजुकी तराह मेरी बेस्ट वाइफ हे.. बस अ‍ेक बार तु धिरेनसे सादी करके वापस इस घरमे आजा.. मे तुजे इतना प्यार दुगाकी तु तेरा सारा गम भुल जायेगी..

पुनम : भाइ.. मुजे सीर्फ वहा जानेकीही चीन्ता हे.. मे वहा नही जाना चाहती.. फीरभी मुजे वहा सादी करके जाना पडेगा.. मे खुसनसीब हु की मेरा भाइ ही मेरा पहेला पती हे.. अब चलीये बहार.. आजतो आपने मेरी चुदाइ करके हालत खराब करदी हे..

फीर दोनो अपने तनको पोछ लेते हे ओर नंगेही बहार आजातेहे तब पुनम आयनेके सामने खडी हो गइ ओर अपने आपको संवारने लगी.. तब देवायतको पुनम अ‍ेक मासुम अप्सराकी तराह दीख रहीथी जो अपना शींगार करते बहुतही कामुक लग रहीथी.. तब देवायत उनके पीछे चला गया ओर उनसे सटकर दोनो हाथ पुनमके पेटपे रख दीया ओर हल्कासा सहेलाने लगा तब पुनमको अपने पीछवाडेमे देवायतका लंड दरारमे महेसुस होने लगा.. ओर वो आंख बंध करते मदहोस होने लगी..

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वो आंख बंध करते देवायतके बालोको पीछे हाथ लेजाते सहेलाने लगी.. ओर देवायतने उनके कंधेपे सर रख दीया.. पुनम मदहोसीमे अपना तन देवायतके तनसे रगडने लगी.. ओर दोनो मीररसे अ‍ेक दुसरेके दिदार करने लगे.. तभी देवायत अ‍ेक हाथ बुब्सपे रखकर दुसरे हाथसे पुनमकी जांगको चुतके पास सहेलाने लगा.. तो पुनम आंख बंध करते फीरसे मदहोस होने लगी.. ओर वो धीरे धीरे सीसकारीया करने लगी..

पुनम : सीससइइइइ उंहु.. उंहु.. उहु.. बस बस.. भाइ.. अब ओर नही.. वरना मे फीरसे बहेक जाउगी.. मेरी चुत अब आपके हथीयारको नही जेल पायेगी.. वरना मे अभी आपसे फीरसे चुदवा लेती.. मेराभी बहुत मन कर रहा हे.. की आप मुजे दिन रात प्यार करते रहो.. लेकीन नही.. नीचे अभी बहुत जलन हो रही हे.. सोरी भाइ..

देवायत : पुनो.. मेराभी वोही हाल हे.. जीतो चाहता हे तुमसे मे कभी अलगही ना होउ.. पता नही तेरे जानेके बार मेरा क्या होगा..

कहातो पुनम जटसे पलट गइ ओर देवायतको जोरोसे बाहोमे भीच लीया ओर आंसु बहाने लगी.. वो देवायतके सीनेमे सर छुपाते रोने लगी.. तब देवायत उनके आंसु पोछने लगा ओर प्यारसे गालको सहेलाने लगा तब पुनमने अ‍ेक नजर उठाके देवायतके चहेरेको देखलीया तब देवायतकी आंखभी गीली थी.. तब पुनम देवायतके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. फीर रुकते ही उनके आंसु पोछने लगी..

पुनम : (देवायतके आंसु पोछते) भाइ.. आप अ‍ैसी बात करके मुजे कमजोर मत करो.. वरना मे सादी नही करपाउगी.. मे भी आपसे दुर नही रेह सकती..

देवायत : सोरी बेबी.. क्या करु.. मे तुमसे बहुत चाहने लगा हु.. मे वहा आता रहुगा.. तु फीकर मत कर..

पुनम : भाइ जबजक मेरी सादी नही होती हम हररोज रश्मीभाभीके घर मीलेगे.. वहा आकर कमसे कम मुजे आपको अ‍ेक बार प्यार करना पडेगा मे केह देती हु..

देवायत : बेबी वोतो तु नही कहेती तबभी मे तुजे वहा बुला लेता.. अब मे तेरे बीना नही रेह सकता..

पुनम : भाइ मे आपके साथ रेह सकु अ‍ैसा दुसरा कोइ रास्ता नही हे..? मेरी भी हालत आपहीकी तराह हे..

देवायत : नही पुनो.. मे तुजे मेरी कमी कभी महेसुस नही होने दुगा.. मे वहा आता जाता रहुगा.. ओर फीर दो तीन सालकी तो बात हे.. फीर मे तुजे हमेसा मेरे साथ रखुगा मेरी चहीती रानी बनाकर.. आयेगीनां..?

पुनम : (हसते) भाइ रानीतो मे अब भी आपकी हुं.. आपकी सीस्टर रानी.. हें..हें..हें..

देवायत : चल आज मंजुको दीखाने जाना हे.. तु साथ चल रही हेनां..?

पुनम : नही भाइ आज आपही चले जाओ.. मत भुलो आप मुजे पुरी रात बीना नीचे उतरे प्यार करते रहे हो.. आज मेरा पुरा सरीर दर्द कर रहा हे.. आपने मुजे चोद चोदके मेरा अ‍ेक अ‍ेक अंग ढीला करदीया हे.. हमने सुबह तक प्यार कीया हे तो थोडा आराम करलु.. वरना मेरी सासको आज यकीनन मुजपे सक होजायेगा.. ओर ओर.. मे वहा आकर धिरेनको फेइस करना नही चाहती.. रीजन आपभी जानते हे..

देवायत : बेबी इनको कभी ना कभी तो तुजे अपनाना पडेगा.. चल ठीक हे.. मे ही चला जाता हु.. फीर दोनोको सीधे यही लेकर आउगा.. तबतक तु आराम करले..

पुनम : भाइ.. अब आपभी तैयार होजाओ.. देखो सात बज गयेहे.. मे चाइ नास्ता बना देती हु.. ओर हां तैयार होकर आजाइअ‍े मेरी मांग भरनी हे आपको.. जबतक यहा हु हम दोनो पती पत्नीका फर्जतो पुरा करे..

देवायत : (हसते) चल ठीक हे.. ओर तु क्यु चाइ बनायेगी..? रजीया कीधर गइ..? वो तो सुबह पहेले उठती हेनां..?

पुनम : (सरारतसे सरारत भरी मुस्कानसे) भाइ.. आज वो ज्लदी नही उठेगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) क्यु..?

पुनम : वो..वो.. उपर होगी.. मेरे देवरके पास.. हें..हें..हें.. कल आप नही आयेथे तबसे वो मेरे देवरके पास चली गइ हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (जोरोसे हसते) ओह.. गोड.. लेकीन कब..? मेरा मतलब कबसे..? लगता हे तेरा देवर बीगड गया हे.. उनकी सादी जल्दी करवानी पडेगी.. हें..हें..हें.. ओर रजीयाभी..?

पुनम : (हसते) हां भाइ.. उनकोभी मजे करने दोना.. बेचारी अकेली होगइ हे.. कहा जायेगी..? मुजे लगता हे जबसे दया वहा गइ हे.. मतलब पीछले दो तीन दीनसे ही.. मुजे कल सुबह ही दोनोपे सक होगया था.. ओर रातके डीनरके बाद सब काम नीपटाके वो अपने रुममे तैयार होने चली गइ.. फीर मेरे रुममे अंधेरा होते ही वो छुपकेसे सींगार करके उपर चली गइ.. तब उनको नही पताथाकी मेने उसे देखलीया हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) चल ठीक हे.. देखना लखनकी सादीके बाद कुछ गडबड ना होजाये.. तु रजीयाको सब समजा देना.. बाकी दोनो भलेही मजे करे.. ये साली आगही अ‍ैसी हे..

पुनम : भाइ आप टेन्शन मतलो.. वो सब मे देख लुगी.. मेरी लताभाभी से अच्छी पटती हे..

फीर देवायत अपना गाउन पहेनके तैयार होने चला गया तो पुनमभी सारी पहेनके अ‍ेक सुहागनकी तराह तैयार होगइ.. तब देवायत तैयार होकर वापस पुनमके रुममे आगया.. ओर पुनमकी मांग भरदी.. तब पुनम देवायतके पांव छुकर उनके सीनेसे लग गइ ओर दोनोके होंठ अ‍ेक बार फीर मील गये.. काफी देरतक अ‍ेक दुसरेके होठोके रस पीते रहे.. फीर दोनोही साथ बहार आगये.. तब देवायत डाइनींगपे जाकर बैठ गया..

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ओर पुनम चाइनास्ता तैयार करने कीचनमे चली गइ.. ओर चाइ नास्ता बनाने लगी.. उसने फटाफट चाइनास्ता बनालीया.. ओर सब लेके बहार आगइ.. ओर देवायतके पास बैठ गइ.. तो देवायतने उसे हाथ खीचकर अपनी जांगपे बीठा दीया तब पुनम जटसे सरमाते आजु बाजु सब देखने लगी फीर थोडा गभराते देवायतकी गोदसे उतर गइ.. ओर पासमे खुरसीपे उनसे सटकर बैठ गइ..

पुनम : (चाइ नास्ता देते) भाइ.. अभी नही.. रजीया कभी भी आ सकती हे.. ओर हां.. आप भाभीको दीखाकर जल्दी आजाना.. मे आपका वेइट करुगी.. अब मुजे आपसे दुर नही रहा जाता..

देवायत : (हसते) हंम.. आजाउगा.. मेभी मेरी बहेनसे दुर रहेना नही चाहता.. पुनो मुजे अंजु ओर चंदाको उधर छोडके मेरे ससुरके वहाभी जाना हे.. वो अभीभी होस्पीटलमे हे..

पुनम : भाइ.. अ‍ेक बात कहु..? वहा सीर्फ वो दोनोही हे.. तो फीर आप उनको इधर लेकर आइअ‍ेनां.. हम उनकी अच्छेसे देखभाल तो कर सकेगे.. ओर भाभीको भी तसली मील जायेगी..

देवायत : चल देखता हु.. मेरी सास नही मानेगी.. फीरभी उनसे बात करलुगा..

दोनोही बाते करते चाइनास्ता करलेते हे.. फीर देवायत अपने रुममे चला गया तो पुनम जटसे उनके पीछे चली गइ ओर अ‍ेक बार फीरसे देवायतको अपनी बाहोमे भीचलीया ओर दोनो होंठ मीलाके स्मुच करने लगे.. फीर देवायत उनके सरपे चुमते बहार नीकल गया ओर कारमे बैठ गया तबतक पुनम भी उनको छोडने बहार तक गइ ओर उनको वही खडे रेहेते देखती रही.. ओर देवायतको हाथ हीलाते बाय कहेने लगी.. ओर देवायत नीकल गया..

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तब पुनम अपने रुममे चली गइ ओर रुमका दरवाजा बंध करके फीरसे सो गइ.. तभी उपरकी ओर रजीयाकी आंख खुल गइ.. तो घडीमे देखातो चोंक गइ.. ओर डरकर सीधे बेडसे उतर गइ ओर फटाफट अपने कपडे पहेनके नीचेकी ओर भागकर आगइ.. तो नीचे कीसीको ना देखकर अपने रुममे चली गइ.. ओर फटाफट नहाके तैयार होगइ.. ओर बहार आके सब काम करने लगी.. क्युकी तब सुबहके ९ बजनेको आयेथे..

ओर रजीयाको पुनमका डर लगने लगा.. क्युकी बहार देवायतकी कार नहीथी.. ओर उनको चाइनास्ता कीसने बना दीया होगा..? वही सोचके वो डर रहीथी.. ओर मनही मन अपने आपको कोसने लगी.. क्युकी पीछली दो रातोसे वो लखनके साथ सोतीथी.. ओर पुरी रात अ‍ेक बीवीकी तराह लखनसे चुदवातीथी.. जीनकी वजहसे आज जागनेमे देर होगइ थी.. तब लखनभी जाग गया ओर नहाके तैयार होकर नीचे आगया..

तब रजीयाने उसे फटाफट चाइनास्ता बनाके दीया.. तभी लखनने रजीयाको खचकर अपनी गोदमे बीठा दीया तो रजीया अ‍ेकदम डरते आजु बाजु नजर घुमाते देखने लगी.. ओर फटाकसे लखनकी गोदसे उतर गइ.. ओर वो गभराती वापस कीचनमे चली गइ.. वो लखनकी इस बीन्दास्त सरारतसे बहुतही गभरा गइ थी.. ओर कीचने जाकर खडी रहेते सोचती रही.. तब लखनभी उनके पीछे आगया..

लखन : रजीया.. क्या हुआ..? इतना क्यु डरी हुइ हे.. कीसीने कुछ कहा क्या..? चल.. तुमको चाइनास्ता नही करना..? चल मेरे साथही करले.. अभी यहा कोइ नही हे..

रजीया : लखन आप पागलतो नही होगये..? घडीमे देखाहे..? कीतने बज गये हे अभी पुनमदीदी उठ जायेगी.. अच्छा हुआ वो अभी तक सो रही हे वरना मेतो आज गइथी कामसे.. ओर मालीकभी चले गयेहे.. पता नही उनको चाइनास्ता कीसने बनादीया होगा.. कही पुनमदीदीने बना दीया तो मेतो गइ कामसे.. मे उनको क्या जवाब दुंगी..? की आज सुबह मे कहा थी..

लखन : (हसते) अरे कुछ नही होगा मे हुंना.. मे पुनमको समजा दुगा तु टेन्शन मतले चल चाइनास्ता करले..

रजीया : लखन आप वहा करलो मे यही करलुगी.. आज नही प्लीज.. जब हम दोनो अकेले हो तब बात अलग हे.. ओर आजतो सायद मालकीनभी आजायेगी.. लगता हे अब हमारा मीलना मुस्कील होगा.. ओर आपभी ध्यान रखना.. हमारे बारेमे कीसीको पता ना चले.. वरना मुजे यहासे नीकाल देगे.. ओर आपभी ध्यार रखना अब आपकीभी सादी होने वाली हे..

लखन : अरे अ‍ैसा कुछ नही होगा मे देख लुगा तु डरती बहुत हे.. ओर अगर अ‍ैसा हेतो मेही तुम्हारे रुममे देर से आजाउगा.. वहातो कोइ दिकत नही हेनां..? रजीया अब मे तेरे बीना नही रेह सकता..

रजीया : (जटसे) नही नही.. वहा दयाभी होगी.. मे ही देरसे सब देखके आजाउगी आप मत आना.. मुजे अब कोइ रीस्क नही लेना.. मे ही आजाउगी..

लखन : चल ठीक हे.. अब चाइ नास्ता करले.. अगर अ‍ैस लगेतो मुजे कहेना मे पुनमसे बात करलुगा..

रजीया : (सरमाते) जी.. ठीक हे आप जाइअ‍े.. वरना पुनमदीदी कभीभी आ सकती हे.. कही हमे साथमे देखना ले..

लखन : (हसते) चल ठीक हे तु यही नास्ता करले.. ओर हां.. आइपील लेना मत भुलना.. हें..हें..हें..

कहातो रजीया सर्मसार होगइ ओर मुस्कराते गरदन हांमे हीलाने लगी.. ओर लखन बहार आगया ओर चाइनास्ता करने लगा.. तब रजीयाभी कीचनमे चाइनास्ता करने लगी फीर लखन अपने खेतोपे चला गया.. फीर रजीया सभी काम नीपटाने लगी.. तबभी पुनम बहार नही आइ.. तो वो पुनमको देखने चली गइ ओर बहारसेही खडी रहेके खीडकीसे देखलीया.. तो पुनम घोडे बेचके सो रहीथी.. तब उसने राहतकी सांस ली..

उधर देवायत सीधेही चंदाके गांव चला गया तो वहा मंजु ओर चंदा तैयार होकर बैठीथी.. मंजुने ओर चंदाने अपने सभी कपडे बेगमे भरलीये थे.. तो धिरेनभी बेंक जानेकी तैयारीया कर रहाथा.. ओर वो तैयार होकर नीचे आगया.. तो मंजु अपने बच्चेके साथ बहार सोफेपे बेठके बच्चेके साथ खेल रहीथी.. तो धिरेनभी आकर उनके साथ बैठ गया ओर विजयके साथ खेलने लगा..

मंजुला : (धीरेसे मुस्कराते) भाइ.. आज हम सृतीको दीखाने जा रहेहे.. ओर वहीसे सीधे घरपे चले जायेगे.. मे मौसीको भी साथ लेजा रही हु.. (थोडी देर रुकते) हमेंसा के लीये.. क्या तु खुस तो हेनां..?

धिरेन : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. आप अ‍ैसा क्यु पुछ रही हो..? मेतो कबसे खुस हु.. मेने मम्मीको इतना खुस कभी नही देखा.. उनकी हर खुसीमे मेरी खुसी हे.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. आप बीन्दास्त मम्मीको लेजा सकती हे..

मंजुला : (हसते) फीरभी सोचा अ‍ेक बार तुजे पुछलु.. चल कोइ बात नही अब तु सामको छुटतेही वहा आजाना.. ओर तेरी सादी तक वहीसे अपडाउन करना.. ओर सादीके लीये तेरी छुटीका भी देख लेना..

धिरेन : दीदी.. वोतो मेने कबका अ‍ेप्लीकेशन देदीया हे.. आप मेरे खाने पीनेका टेन्शन मतलो..ओर माको खुसी खुसी लेजाओ.. बल्की मेतो बहुत खुस हु आपने इनके बारेमे इतना अच्छा सोचा.. ओर मे यही रहुगा..

तभी चंदा उपरसे अपनी बेग लेकर आगइ तो धिरेन उसे देखते ही खडा होगया.. ओर जाकर उनके पैर छुने लगा.. तब चंदाने उसे जटसे खडा करके उसे जोरोसे गले लगालीया ओर आंखसे आंसु बहाने लगी.. तो धिरेनभी आंसु बहाने लगा.. तब मंजु बच्चेको सोफेपे सुलाके उनके पास चली गइ ओर धिरेनके आंसु पोछने लगी.. तो चंदाभी अपने आंसु खुदके रुमालसे पोछने लगी.. ओर सरमाते धिरेनको देखने लगी..

चंदा : (रुआंसी आवाजमे) धिरेन.. अपना खयाल रखना.. ओर वहा आते रहेना..

धिरेन : (आंसु पोछते हसते) मोम.. मेरी बीलकुल चीन्ता मत करो.. ओर खुसीसे अपनी जींदगी जीलो.. मे वहा आता जाता रहुगा.. आप कहा कीसी अन्जान जगाहपे जा रही हे..? दीदीके घरही तो जा रही हे..

मंजुला : धिरेन कलतो सन्डे हे.. तेरी छुटी हेनां..? तो कल तु इधर तैयार रहेना हम तुजे यहीसे पीकअप करलेगे.. कल हम सब आश्रम जा रहे हे.. मौसी ओर तेरे जीजाकी वही मंदिरमे सादी कर देगे.. आओगेनां..?

धिरेन : (जोरोसे हसते) हां दी जरुर आउगा.. मेने मोमकी सादी नही देखी.. तो इस बार देख लुगा.. हें..हें..हें.. कल पहेली बार होगा जो कोइ बेटा अपनी मोमकी सादीमे जायेगा.. हें..हें..हें..

कहा तो चंदा सरमसे पानी पानी होगइ ओर हसते हुअ‍े धिरेनको पीठमे अ‍ेक मुका जड दीया.. ओर मंजु चंदा धिरन सब हसने लगे तब दयाभी तैयार होकर रुमसे बहार आगइ.. तभी देवायत भी कार लेके बहार रुका तो सबके चहेरे खील उठे.. सबके चहेरेपे स्माइल आगइ तभी देवायत अंदर आगया तो धिरेन उनको गर्मजोसीसे गले मीला तब दयानेभी उसे पानी पीलाया..तब..

धिरेन : जीजु कैसे हे मौसाजी..? सब ठीक हेनां..? कोइ दिकततो नही..?

देवायत : (हसते) अरे मस्त हे तु टेन्शन मत ले.. मे हुनां.. ओर आजभी इन सबको छोडके वहा जा रहा हु.. ओर डोक्टर छुटी देगेतो दोनोको इघर हवेलीपे लेकर आउगा.. यहा उनकी अच्छेसे देख भालतो हो सकेगी..

मंजुला : (सीरीयस होते) देवु.. क्या मोम इधर आनेके लीये मानेगी..? क्या आपसे उनकी बात हुइ..?

देवायत : (हसते) अरे हां तुम लोग टेन्शन मत लो.. हमने कल दोपहरको साथमे खाना भी खाया.. उनसे पहेलेही अंकलको होस आगया था.. ओर रीपोर्टमे भी कुछ खास नही हे.. हम दोनोही डोक्टरको मीलने साथमे गये थे..

चंदा : (हसते) चलो अच्छा हुआ दोनो मे सुलहतो होगइ.. हें..हें..हें.. बडीदी बहुत जीदी हे.. बीलकुल आपहीकी तराह.. हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते) थेनक्स जीजु.. आपने मेरी बहुतसी टेन्शन खतम करदी..

देवायत : (हसते) यार तु टेन्शन मतले मे हुनां..? तो चले..? सब रेडी हे..? ओर दया तुभी आ रही हे..? क्या इधर नही रुकनां..? रुकना हम तुजे यहा मीलने आते रहेगे.. हें..हें..हें..

दया : (जोरोसे हसते) अरे ना बाबा नां.. अभी यहा नही रुकना.. कुछ दिनतो मालकीनके साथ रहेलु फीरतो पुनमदीदीके साथ दहेजमे मुजे इधर ही आना हे..

कहातो सभी जोरोसे ठहाका मारके हसने लगे.. ओर सब बहारकी ओर चलने लगे तब चंदा अ‍ेक बार फीरसे धिरेनके गले लग गइ.. ओर धिरेनका सर चुमलीया.. उनको लगाकी आज वो मायका छोडके हमेसाके लीये अपने ससुराल जा रही हे.. फीर धिरेनने हसते हुअ‍े बच्चेको उठालीया ओर सबके साथ बहार आगया..

सब कारमे बेठने लगे तो धिरेनने बच्चेको चंदाकी गोदमे देदीया तब मंजु धिरेनके गले लग गइ ओर कल तैयार रहेनेको केह दीया तो धिरेन हां मे सर हीलाके हसने लगा.. ओर कार सहेरकी ओर दोड पडी.. तब कारमे ही..

देवायत : मंजु अ‍ेक बार तुमने सृतीको फोन तो करदीया हेनां..?

मंजुला : तो क्या अभी तक आपने उसे फोन नही कीया..? अरे बाबा वो कीतना चीलाती हे.. आप उनसे फोनपे बात क्यु नही करते..? वो कोइ चुडेल हे क्या.. जो उनसे इतना डरते हो.. अब मीलेगी तब देना जवाब उनको.. ना जाने मुजे क्या क्या सुनायेगी.. कमीनी..

देवायत : (हसते) यार मे काममे भुल जाता हु.. ओर कीतने दीन होगये मे.. भुमी आंटीको भी नही मीला.. वो मीलेगीतो उनकीभी डांट पडेगी.. हें..हें..हें..

मंजुला : देवु.. आप बीलकुल भुलकड हो.. देखना वोभी मीलेगी तो आपको कान खीचकर डांटेगी.. अब देते रहेना जवाब उनको.. ओर हां.. अ‍ेक खास बात.. कल आप कही मत जाना.. हम सबको आश्रम जाना हे.. आपका जोभी प्रोग्राम हो सब केन्शल.. हें..हें..हें..

देवायत : अरे अचानक आश्रम क्यु..? विजको लेकर जाओगी..? इतना छोटा बच्चा हे.. हें..हें..हें..

दया : मालीक इनकी चीन्ता आप मत करो.. मे इनको रखुगी.. अबतो मेरे पासभी रहेता हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : वहा क्यु जाना हे वो आपको वहा जाकर पता चल जायेगा.. बस ओर कुछ नही कहेना..

कहातो चंदा सरमसे पानीपानी होगइ.. ओर सर बहारकी ओर घुमाते मुस्कराती रही.. तब मंजुने सृतीको फोन लगा दीया ओर उनसे बात करने लगी.. तो फोन अपने मुहके पास लेजाते धीरेसे कहा.. कुती कमीनी गालीतो मत दे.. तेरे जीजु ओर हम सब साथमे हे.. तब चंदा देवायत ओर दया मंजुकी ओर देखते जोरोसे हसने लगे तब मंजुभी बात करते हसने लगी.. उसने फौरन फोन कट करदीया तब चंदा उनकी ओर देखते अबभी हस रही थी..

मंजुला : (हसते देवायतको पीठमे अ‍ेक मुका मारते) देखानां..? सब आपकी वजहसे हुआ.. मुजे खामखा इनकी गाली सुननी पडी.. देखना अ‍ेक दिन मे इनका जरुर बदला लुगी.. हें..हें..हें..

अ‍ैसेही मजाक मस्ती करते सब होस्पीटलपे पहोंच गये तब भानु भावना सबलोग नही आयेथे.. तो देवायत कार पाार्क करतेही उनसे बात करने लगा तो पता चलाकी वो लोग अपने मामाका कार्य खतम होगया हे बस नीकलते हीहे.. कहा तो देवायतने फोन काट दीया तबतक मंजु चंदा दया सब कारसे उतर गयेथे ओर अंदरकी ओर जा रहेथे.. तो देवायतभी कार लोक करके उनके पीछे अंदरकी ओर जाने लगा.. ओर सब अंदर चले गये.. अंदर जातेही..

रीसेपनीस्ट : (हसते) आइअ‍े मंजु मेडम.. अब कैसीहे आपकी तबीयत.. आप इधर बैठीये मेडम अभी अ‍ेक पेसन्टको देख रहेहे वो चले जाये तब आप चलेजाना..

मंजुला : (हसते) जी.. कोइ बात नही हम यही बेठे हे..

तब सब वहा सोफेपे बैठ गयेतो बच्चा चंदाके हाथमे था तो वो ओर दया कच्चेके साथ खेलने लगी.. तो मंजु देवायतके कंधेपे सर रखके बैठ गइ ओर हसने लगी.. तो देवायतभी हसने लगा.. तभी दरवाजा खोलके अ‍ेक कपल हसते हुअ‍े नीकलने लगा जो लेडीथी उनका पेट काफी बहार नीकल गयाथा.. तब रीसेपनीस्टने मंजुको अंदर जानेके लीये हसकर इसारा कीया.. तो चंदा बच्चेको लेकर खडी होगइ ओर मंजुभी उनके साथ अंदर चली गइ..

सृती : (दोनोको देखतेही हसते) आइअ‍े आइअ‍े.. मौसी.. इस कमीनीको भी साथ लेआये.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते चेरपे बेठते) कुतीया.. गालीयातो मत दे.. तेरे जीजाजी भी बहार बैठे हे.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) चल पहेले तुमसे तो नीपटलु.. उनकोतो बादमे देख लुगी.. उनको बहुत चरबी चड गइ हे.. मौसी आप यही बैठो मे इनको अंदर चेक करके आती हु.. फीर बच्चेको देख लेगे..

तब चंदा बच्चेको लेके वही बैठी रही ओर उनके साथ खेलने लगी.. तब मंजु ओर सृती दोनोही अंदरकी केबीनमे चले गये.. ओर मंजुको बेडपे सुलाके उनका लोअर नीकालने लगी ओर सरकाके नीचे करदीया.. फीर सृती टोर्च लेकर उनकी योनी चेक करने लगी.. तो उनको बडा आस्चर्य हुआ ओर वो चेक करते बार बार कभी मंजुको तो कभी मंजुकी योनीको देखती रही.. फीर चेक करके उनके कपडे सही करलीये.. ओर मंजु खडी होगइ..तो..

सृती : (धीरेसे) मंजु.. तु दो मीनीट इधर बैठ मुजे तुमसे कुछ जरुरी बात करनी हे..

मंजुला : (हसते) क्यु कोइ सीरीयस मेटर हे..? तो फीर डर क्या.. जोभी हे साफ साफ बतादे..

सृती : नही मंजु तु गभरा मत.. ये कोइ सीरीयस मेटर नही हे.. लेकीन मेने अ‍ैसा मेरी जींदगीमे पहेली बार देखा..

मंजुला : (थोडा सीरीयस होते) क्या देखा..? सृती सच बताना तु कुछ मत छुपाना.. क्या देखा तुने..

सृती : (धीरेसे) मंजु तु कोइ ओर दवाइ या कुछ आयुर्वेदिक दवाइतो नही ले रही..?

मंजुला : (आस्चर्यसे) नही.. तेरी दी हुइ दवाइके अलावा कुछभी नही लीया.. क्यु..? क्या बात हे..?

सृती : मंजु जब कोइ ओरत बच्चे पैदा करलेती हे.. वो उनकी योनी अ‍ैसी नही रहेती.. उनमे काफी बदलाव आजाता हे..

मंजुला : मतलब.. तु कहेना क्या चाहती हे.. कुछ प्रोबलेम हे क्या..?

सृती : (हसते) अरे नही नही.. मंजु तेरी योनी इतनी जल्दी ठीक कैसे होगइ..? ओर देख अभी कीसी कुआरी लडकी जैसी होगइ हे.. अ‍ेकदम वर्जीन.. जैसे तुमने कोइ बच्चा पैदा ही नही कीयाहो.. गजब हे यार..

मंजुला : (तभी बाबाकी कुछ शक्तिकी बात याद आती हे) सृती.. मुजे लगता हे वो सब उन शक्तियोके कारण हुआ होगा.. मेने तुजे वो बाबाके बारेमे कहाथानां..? लगता हे उन्हीकी कारण हुआ होगा.. सृती तुजे आज अ‍ेक बात बताती हु.. पता नही मेने अभी तक कीसीको नही बताया..

सृती : (धीरेसे हसते) अब कोनसी बात हे..?

मंजुला : सृती कुछ महीनोसे मुजे जीबसा फील होने लगता हे.. मे ओर तेरे जीजु जब करते हे.. तब मुजे हब बार पहेलीबारकी तराह दर्द होता हे मानो मे पहेली बार करवा रही हु..

सृती : (आस्चर्यसे धीरेसे) मंजु..? अ‍ैसे कैसे हो सकता हे..? इस नोट पोसीबल.. दर्द सीर्फ पहेली बारही होता हे..

मंजुला : पता नही सृती लेकीन यही सच हे.. ओर अ‍ेक बात.. आज कल मुजे सबके जीवनके बारेमे पता चल जाता हे.. उनका भुतकाल, वर्तमान ओर भविष्य.. मे कीसीकोभी देखती हु तो उनके बारेमे मुजे सब ज्ञात हो जाता हे.. मुजे लगता हे ये सब बाबाने दि हुइ शक्तिके कारण हो रहा हे..

सृती : अरे हां.. तु उस दिनभी कुछ बता रही थी.. मुजे उनसे मीलाने भी वाली थी.. बता कब जाना हे वहा..

मंजुला : सृती कल.. तु कल फ्रि हे क्या..? हम कल मौसीकी सादी तेरे जीजुके साथ वहा करने जा रहेहे तु साथ चलेगी..? चलना तेरा उनसे दर्शनभी करवा दुगी.. तु आन्टीको भी साथ लेले.. वोभी दर्शन कर लेगी.. मुजे तुजे लेकरही जाना हे.. तु अ‍ेक बार बाबाको मीलले.. फीर मे तुजे कुछ बताउगी.. ओर सोच रहीहु कल यहा खीरीदी भी नीपटालु..

सृती : (हसते) हां.. ये ठीक रहेगा.. कीतने दिन होगये मम्मीको कही नही लेगइ.. चल ठीक हे आजायेगे.. में अपनी कार लेलुगी बोल हम कहा मीलेगे..?

मंजुला : (हसते) वो रास्ता तु तेरे जीजुसे पुछलेना.. मुजे रास्तेके बारेमे ज्यादा कुछ नही मालुम.. बस इतना पता हे हमारे गांव ओर इस सहेरके बीचमे अ‍ेक रास्ता हे वहीसे हम जाते हे..

सृती : चल अभी जीजुसे ही पेुछ लेती हु.. ओर बता कुछ पुछना हे..? वैसे तु मेरे बारेमेभी सब जानती होगी..? हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते हसते) सृती.. हां सब जानती हु.. लेकीन आज नही.. बस तु अ‍ेक बार बाबाको मीलले.. फीर तुमसे कुछ बातभी करनी हे.. (सरमाते हसते) वैसे तु कहेती हे मेरी ये ठीक होगइ हे तो क्या मे ओर तेरे जीजु कुछ कर सकते हे.. आइ मी..न.. मतलब.. हमारा मीलन..

सृती : (जोरोसे हसते धीरेसे) कमीनी.. सीधे सीधे बोलना तुजे जीजसे चुदवाना हे.. कुती कहीकी.. तुजे कीतनी आग लगी हुइ हे.. कुछतो सरम कर.. अभी पांच दिन पहेले तेरी डीलीवरी हुइ हे.. (हसते) चल ठीक हे.. मीलना.. क्या अभी मीलना हे..? तो जीजुको अंदर लेके चलीजा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) नही.. यहा कोइ जोखीम नही लेना वरना कमीनी तुभी आजायेगी.. हें..हें..हें..

सृती : (अ‍ेकदम सरमाते मुका मारते) कमीनी.. कुछतो सरम कर.. मे सालीहु उनकी.. तुजे जलन नही होती..?

मंजुला : (हसते) तो क्या हुआ साली भी तो आधी घरवाली होती हे.. तु उपर उपरसेही मजे करना.. हें..हें..हें.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. कमीनी मेनेतो तुजे पहेलेभी साथमे आनेको कहाथा.. लेकीन तुमही नही आइ सरमकी पुछ.. वरना मेरा देवुतो तुजे चोदकर तेरे पीछे पागल होजाता.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) कमीनी.. कुती.. कुछतो सरम कर.. चल चल.. बहार.. कमीनी बीलकुल बेसर्म होगइ हे तु.. मौसी अकेली बैठी हे.. चल बहार..

फीर दोनो हसते हुअ‍े बहार आगइ तो चंदा उनकी ओर देखते हसने लगी.. ओर बच्चेको मंजुके हाथमे थमा दीया तो मंजु बच्चेको दीखाने लगी.. ओर सृतीने उनकोभी चेक करलीया.. फीर बच्चेको वापस देदीया..

सृती : मौसी येतो मस्त हे.. ओर दोनो बीलकुल ठीक हे, अब १५ दीनके बाद दीखाने आजाना ओर वोभी सीर्फ बच्चेको चेक करना हे इनको अब चेक करनेकी कोइ जरुरत नही हे (मंजुकी ओर कातील स्माइल करते)

चंदा : सृती.. अब तु घर कब आ रही हे..? तेरी मम्मीको लेकर आ.. वहा बडी दीदीकोभी बुला लेगे..

सृती : (हसते) ठीक हे मौसी.. मे उनको आपसे जल्द मीलवाउगी.. हें..हें..हें.. ओर हां कहा गये जीजु.. मम्मी उनको बहुत याद कर रही हे.. जनाब दीखतेही नही.. फोन तक नही कीया.. बहुत आलसी हे.. हें..हें..हें..

चंदा : सृती.. तेरी मम्मीको मंजुके बच्चेके बारेमे बतायाकी नही..?

सृती : बताया..? अरे वोतो सुनके पागल होगइ..? इसीलीये तो वो जीजाजीसे मीलना चाहती हे.. ओर कुछ उनको ओर कामभी हे..

चंदा : (बच्चेको लेकर उठते) ठीक हे तुम लोग बाते करो मे उनको अंदर भेजती हु.. यही हे.. हें..हें..हें..

सृती : (चंदाके बहार जातेही धीरेसे हसते) मंजु.. मौसीतो उनका नाम भी नही ले रही.. हें..हें..हें.. लगता हे अभीसे उनको अपना पती मान चुकी हे.. हें..हें..हें.. दोनोने कुछ कीया बीया हेकी नही..? हें..हें..हें..

मंजु : (हसते धीरेसे) कमीनी धीरे बोल वो आतेही होगे.. लोजी.. आगये.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते अंदर आते) क्यु.. दोनो मेरे बारेमे क्या बाते कर रही हो..? मंजु सच बताना..

मंजुला : (जोरोसे हसते) अरे कुछ नही.. ये सृतीको आपसे कुछ कामथा.. हें..हें..हें..

सृती : (जोरोसे हसते) कमीनी मेरा नाम क्यु ले रही हे.. नही जीजु मेने कुछ नही कहा.. हें..हें..हें..

देवायत : (चेयरपे बेठते) हां.. तुम दोनो कीतनी सातीर हो मुजे सब पता हे.. बोल सृती क्या कामथा..?

सृती : (कातील नजरोसे स्माइइ करते) क्यु..? आपको फोन करनेको कहाथा कुछ याद नही रहेता आपको..? मुजे नही मम्मीको आपसे कुछ काम था.. वो कबसे आपको याद कर रही हे.. लगता हे नजाबको टाइमही नही मीलता.. कहो घरपे कब आ रहे हो.. जीजु वो आपको बहुत याद कर रही हे.. अ‍ेक बार आकर उनसे मीललो.. ताकी मेरा दिमाग ना खाये.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) मीलनेदे उसे फीर कहेता हु तुम्हारी लडकी तुम्हारे बारेमे क्या केह रहीथी.. हें..हें..हें.. सृती आज देर हो रहीहे वरना आजही मील लेता.. मुजे राजीव अंकलके पास जाना हे.. वो होस्पीटलाइ हे.. उनको पेरेलेटीक स्ट्रोक आया हे.. कलही होसमे आये हे..

सृती : (गंभीर होते आस्चर्यसे) क्या.. राजीव अंकलको..? कमीनी.. तु तो कहेती भी नही हे..?

मंजुला : (आंख गीली करते) सृती.. मुजेभी परसो पता चला.. वोभी धिरेनसे.. ओर मे इस हालमे कैसे जाती.. तो तेरे जीजुको ही भेज दीया.. अब उनकी हालत काफी बहेतर हे.. कलही मम्मीसे मेरी बात हुइ..

सृती : (सरमाते हसते धीरेसे) जीजु.. क्या.. आंटीसे आपकी सुलाह होगइ..? दोनो नही बोलतेथे..

देवायत : (हसते) हां होगइ.. अब कोइ गीला सीकवा नही.. बस मेरी मंजु खुस रहेनी चाहीये..

कहातो मंजु अ‍ेकदम इमोस्नल होगइ ओर खडी होकर देवायतके गले लग गइ ओर आंसु बहाने लगी.. तो सृतीभी खडी होके उनके पास आगइ ओर मुस्कराते मंजुकी पीठ सहेलाती रही.. फीर मंजुके आंसु पोछके उनको पानी पीलाया ओर तीनो वापस चैयरपे बेठ गये.. तब सृती देवायतकी ओर देखके हसने लगी..

सृती : जीजु आइ अ‍ेम हेपी.. की मंजुको आप मीले.. दोनोके बीच कीतना गहेरा प्यार हे..

मंजुला : (हसते) तो तुभी आजा.. मेरा देवु तुजेभी इतना ही प्यार देगा.. हें..हें..हें.. क्यु देवु..?

सृती : (अ‍ेकदम समस्सार होते) कीतनी कमीनी हो.. कुछतो खयाल कर.. जीजु इधर बैठेहे.. कुछभी बोलती हे.. बेसर्म कहीकी.. ये सब छोड मुजे जीजुसे कुछ पुछना था..

देवायत : (हसते) क्या..? क्या..? अब क्या पुछना बाकी रेह गया.. हें..हें..हें.. ये बताओ आंटी कैसी हे..?

सृती : (हसते) अ‍ेकदम मस्त.. जीजु कल आप सब आश्रम जा रहेहे.. अगर मुजे आश्रम जाना होतो मे आपका वेइट कहा करु..? मे मेरी कारसे मम्मीको लेकर आ रही हु..

देवायत : अरे हमारे गांवके रोडपे बीचमे वो ---नाका आता हेनां..? वहीसे अ‍ेक रास्ता जंगलकी ओर जाता हे.. सायद वो रास्ता तुमने देखा होगा.. बस वही रास्तेसे हमे आश्रम जाना हे..

सृती : अरे हां वो तो मेने देखा हे.. वहां..?

देवायत : हां बस वही तुम आंटीको लेकर ९.३० बजे पहोंच जाना पहेले तुम आजाओतो हमारा वेइट करना वरना हम वही खडे रहेगे.. फीर दोनो साथ चले जायेगे.. ओर हां.. वहीसे सीधा हवेलीपे आना हे तेरा जोभी अ‍ेडजेस्टमेन्ट हे वो कर लेना मुजे कुछ बहाना नही चाहीये..

सृती : (हसते) जीजु हम सब वहीसे इधर आजायेगेनां.. आप सब कल हमारे घर आ रहेहे.. ओर रातका डीनर करके चले जाना.. क्ये कल यहा खरीदी करने नही आ रहे..? वहा हवेलीमे फीर कभी आउगी.. क्या वहा आप अंकल ओर नीर्मला आंटीको लेकर आ रहे होनां.. तो मम्मीको तभी वहा लेकर आजाउगी.. दोनो फ्रेन्ड वही मील लेगी.. क्या कहेते हो..?

मंजुला : (हसते) चल जैसे तेरी मरजी.. लेकीन तब आंटीको लेकर आना ओर वहा कमसे कम दोनोको तीन दीन रोकुंगी.. तब कुछ नखरे मत करना अभीसे केह देती हु..

सृती : (हसते) पका.. तब मे वहा रुकुगी.. ओर अभी तेरे देवर ओर पुनमकी सादी भी हेनां.. तबही आजाउगी..

देवायत : हां ये बेटर रहेगा.. तब अंकल आंटीभी वहा होगे.. तबही मील लेना.. ओर हां वो भावु लोग अभी आ रहेहे बीच रास्तेपे ही हे.. उनको जरा देख लेना..

सृती : जीजु आप भावुकी चीन्ता मत करो वो मेरी भी बहेन हे.. मे सब देख लुंगी..

मंजुला : (खडी होते) सृती.. चल अब हम चलते हे.. फीर तेरे जीजुको भी नीकलना हे.. चलो बाय..

तब सृती ओर देवायतभी खडे होगये ओर मंजु आगे चली गइ.. तब सृती जटसे देवायतके पीछे आगइ ओर उनसे सटकर उनका हाथ पकडलीया.. तो देवायतने हसते हुअ‍े उनकी ओर देखातो जटसे उनकी ओर आज पहेली बार आंख मारते इसारोसे फोन करनेको कहेने लगी.. ओर हाथ दबाकर छोड दीया तो देवायतने अचानक पीछे मुह करते सृतीके होंठ चुमलीये ओर हसने लगा..

तब सृतीको पहेली बार देवायतने होंठ चुमकर कीस करदी तो सृती सोक्ट होते मुह फाटते उनकी ओर देखती रही.. क्युकी पीछले कुछ महीनोसे वो सीर्फ देवायतके बारेमे ही सोचती रहेती हे.. ओर जबसे देवायतके पेन्टके उभारको देखलीया हे तबसे वो पागल हो रही हे.. ओर आज मंजुकी बातो ने आगमे घी डालनेका काम कीया.. तबतक देवायत बहार नीकल चुकाथा तो वो जटसे उनके पीछेकी ओर दोड पडी.. जैसे उनसे उनका पुराना यार बीछड रहा हो....

कन्टीन्यु
 
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