Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 8 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ६८

तब थोडीही देरमे देवायत चारुके सीनेपे सर रखते ढेर हो गया.. तब चारु अ‍ेक हाथसे उनका सर तो दुसरा हाथ पीठकी ओर लेजाते उनको सहेलाती रही.. ओर दोनोही अपनी सांसे कंट्रल करते रहे.. दोनो काफी देर अपनी सांसको दुरस्त करते हुअ‍े अ‍ैसेही पडे रहे.. तब देवायतका लंड अभीभी चारुकी चुतमे अ‍ेसेही सख्त होते अंदर घुसा हुआथा.. जो आमतोरपे रमेशसे चुदती तब रमेशका लंड जडतेही सीकुडके बहार नीकल जाता.. तब चारुकोभी आज थोडा अजीब लगा.. तब उसने साइडमे पडी चदर खीचके देवायतके उपर डालदी.. ओर खुस होते देवायतसे प्यार भरी बाते करने लगी....अब आगे

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चारु : (सरमाते हसते) देवरजी अब उपरसे उतरना नही हे क्या..? कीतना पानी नीकालते हो.. कही मुजे प्रेगनेन्ट करनेका इरादातो नही हे..? हें..हें..हें.. अंदर अभी भी गरम लग रहा हे.. आपनेतो मुजे अ‍ेकही बारमे नीचोड लीया.. पता हे मे तीन बार जड चुकी हु..

देवायत : (हसते) हां करले पैदा हमारा बच्चा.. हें..हें..हें.. ओर अभी मुजे उपरसे नही उतरना.. चारु मुजे तुमसे ओर प्यार करना हे.. कीतने दिनोके बाद हमे ये मौका मीला हे.. आज मे तेरी सारी कशर पुरी कर दुगा..

चारु : (सरमाते हसते) ओ बापरे तबतो मेरी आज खैर नही.. तो पहेले आजाना चाहीयेनां.. देखना बाबा मुजे मेरी चुतको सही सलामत रखना हे.. वरना आपके भाइको में क्या जवाब दुगी..? मेतो आपकी दीवानी होगइ हु.. ओर हां आप सादीकी क्या बात कर रहे थे..? आपके दोस्तकी बीवी हु.. फीरभी मुजसे सादी करोगे..? हें..हें..हें.. फीर आपके भाइको क्या जवाब दोगे..? लेकीन आपको मुजसे सादी क्यु करनी हे..? हमतो अ‍ैसेही बीना सादी पती पत्नी वाला कामतो करही रहे हे.. मे आपको कहा मना करती हु..

देवायत : सुन चारु.. मेरा अ‍ेक सोख रहा हे.. क्युकी मे अ‍ेक राजवी खानदानसे हु तो मुजे कइ रानीयोका सोख हे.. में जीसके साथभी रीलेशन रखता हु उनको मे यातो सादी करता हु या फीर उनसे गांधर्व विवाह करके अपनी सीक्रेट बीवी बना लेता हु.. ताकी हम दोनोही आपसमे अ‍ेक दुसरेका अधीकार मानते खुलके प्यार कर सके.. क्युकी मे कीसीको रखेलकी तराह इस्तेमाल करना नही चाहता.. ओर तुजपे तो सुरुसे ही मेरा दील आगया हे.. आप बहुतही खुबसुरत हे जो मुजे पागल कर देती हे.. मे सुरुसे ही तुजे पसंद करता हु..

चारु : (सरमसे पानीपानी होते हसते) ओ..हो.. तभी आप मुजसे सादीके लीये केह रहेथे..? सोचलो फीर जींदगी भर मुजे जेलना पडेगा.. हें..हें..हें.. वैसे आपके विचार जानके मुजे खुसी हुइ.. कास आप मुजे पहेलेही मीलते.. मे आपसेही सादी कर लेती.. फीर भलेही हम दोनोकी उम्रमे कीतनाभी फर्क हो..

देवायत : (हसते गलेको चुमते) हां चारु मे चाहता हु की तुजे जबभी मेरे प्यारकी जरुरत पडे तब मुजसे खुलके मील सके.. इसीलीये मेने मेरी सीक्रेट बीवीओके लीये अ‍ेक घरका भी इन्तजाम कर लीया हे.. जहा मे मेरी सभी बीवीयोको मील सकु.. ओर सबकी इजतभी बरकरार रख सकु..

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चारु : (हसते होंठ चुमते) थेन्कस देवरजी.. मुजे नही पता था आप मुजे इतना चाहते हे ओर हमारे लीये आपने बहुत सारे इन्तजामभी कर लीये हे.. लेकीन आपके भाइको पता चल गया तो मेरा क्या होगा वो कभी सोचा हे..? मुजेतो घरसेही नीकाल देगे.. ओर आपके सबंध खराब होगे वो अलग..

देवायत : हां.. तब आजाना मेरी हवेलीका दरवाजा तेरे लीये खुलाही हे.. ओर वहा नही तो मेरी अ‍ेक ओर सीक्रेट वाइफ हे उनके साथ रहेना.. बोल अब क्या जानना हे.. बाकी रमेशको कभी पताही नही चलेगा.. ओर पता चलेगातो मे देख लुगा.. बस मुजे तुम चाहीये.. मे वाकइ तुमसे प्यार करता हु..

चारु : (सरमाते खुस होते) कहीये कब करनी हे मुजसे सादी..? मे तैयार हु.. आपके लीयेतो मे कुछभी कर सकती हु.. ओर पता हे आपसे ज्यादा मे आपको प्यार करती हु.. बना लीजीये मुजे आपकी सीक्रेट वाइफ.. मे वादा करती हु जींदगीभर आपको अ‍ैसेही प्यार देती रहुगी.. ओर हां.. वेसे कीतनी सीक्रेट वाइफ हे आपकी..? ओर मे कीसके घरमे मीलुगी आपसे..?

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देवायत : चारु ये बात सीर्फ तेरे तकही सीमीत रखना.. वो रश्मीभाभी.. तेरी ही तराह मेरी सादी नही हुइथी तबसे उनके साथ मेरा रीलेशन हे.. आज वो मेरी सीक्रेट वाइफ हे.. मेने उनके साथभी सादी करली हे.. ओर तु उनके साथ दोस्ती करले.. ओर हम वही मीलते रहेगे.. अबतो वैसेभी वो अकेलीही हे.. तु जबभी चाहेगी हम वहा मीलते रहेगे.. बोल क्या कहेती हो..?

चारु : कोन वो रश्मी.. सरपंचकी बीवी..? वो भी आपकी बीवी होगइ..? ओर दुसरी..?

देवायत : (हसते) अभी तो सीर्फ रश्मी तक सीमीत रख.. बाकी तुजे धीरे धीरे सब पता चल जायेगा.. क्युकी आने वाले वक्तमे तुजे बहुत कुछ नया दीखनेको मीलेगा जीसकी तुमने कभी कल्पनाभी नही की होगी..

चारु : (आस्चर्य से देखते) क्या केह रहे हे आप..? क्या दीखनेको मीलेगा मे समजी नही.. आप कीसके बारेमे बात कर रहे हे..?

देवायत : चारु तब तुम कुछ अ‍ैसे रीस्तेको देखेगी जीसकी हम कभी कल्पनाभी नही कर सकते.. जो सब आपसी रीस्तोमे सादी करेगे.. तुमने वो हिमाचलके राजाकी कहानीतो (ये केसी अनुभुती) सुनी होगी..? बस.. वोही सब अब मेरे घरमे ओर यहा गांवमे होने वाला हे.. बाकी मे तुजे अभी कुछ नही बता सकता.. बस कुछ समयका इन्तजार करले.. फीर तुजे सब पता चल जायेगा..

चारु : अरे हां.. वो कहानी (ये केसी अनुभुती) तो कइ बार सुनी हे.. ओर मेने तो पुरी बुक कइ बार पढी हे.. मुजेतो बहुत अच्छी कहानी लगी.. उनमे रीस्तेकातो कोइ मायना ही नही हे.. जीसे जीनसे चाहे वो उनसे सादी कर सकता हे.. उनमेतो भाइ बहेन.. मा बेटे.. यहा तम दादीसे भी सादी करते हे.. तो क्या वो सबभी वहा होने वाला हे..? आप इतने यकीनसे कैसे केह सकते हो..? हमारे गांव वालेतो वैसे भी पुराने खयालातके हे.. वो कतइ अ‍ेसे रीस्तेको स्वीकार नही करेगे.. मे नही मानती.. कहेदो आप जुठ बोल रहे हो..

देवायत : नही चारु.. मे जुठ नही बोलता.. ये बात सच हे.. चारु वो सब मे तुजे बादमे बताउगा.. अभी इनके बारेमे बतानेका वक्त नही हे.. हमे काफी देर हो चुकी हे.. इस बारेमे हम फुरसतमे बात करेगे..

चारु : (सरमाते हसते) हां.. अब उपरसे उतरो.. कबसे मेरे उपर पडे हो.. हें..हें..हें.. आपके गधे जैसा हथीयार अभी भी अंदर अ‍ैसेही हे.. क्या ये कभी बैठनेका नाम लेता हे की नही..? हें..हें..हें.. की अ‍ैसे ही खडा रहेता हे.. मे जबभी देखती हु हमेसा खडाही होता हे.. आपको पेन्टके अंदर दर्द नही होता..?

देवायत : नही इनका भी रीझन हे.. जो तुजे बादमे पता चल जायेगा.. ओर अभी नही उतरना.. मुजे अ‍ेक बार ओर तुजे चोदना हे.. चल तैयार होजा आजतो मुजे तुमपे बहोत प्यार आरहा हे..

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चारु : (बुरी तराह सरमाते) ओ बापरे.. यार मे अब आपको नही जेल पाउगी.. वेसे भी आपने तो मुजे अ‍ेकही बारमे नीचोड लीया हे.. (कामुक नजरोसे देखते) क्या मेरा होनेवाला पती सचमे करना चाहते हे..?

देवायत : हां.. बस अ‍ेक बार.. फीर मुजे भी जाना हे..

कहेते देवायत अपने उपरकी चदरको हटा देता हे.. ओर चारुके होंट चुमने लता हे तब चारुभी उनका साथ देने लगती हे ओर देवायत धीरे धीरे करते वापस अपनी कमर हीलाते चारुको चोदने लगता हे.. तब चारुभी फीरसे काम अग्नीमे जलते देवायतसे अपनी कमर हीलाते साथ देने लगी.. तभी देवायत हाथके बल उचा होते उनके पैरके बीच बैठ गया ओर चारुका हाथ पकडते उसेभी खीचके अपनी गोदमे बीठा दीया.. तब चारु उनके गलेमे हाथ डालके उनको पकड लेती हे ओर अपनी कमर हीलाते देवायतसे चुदवाने लगती हे..

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दोनोही अपनी अपनी कमर हीलाते तालमेलमे चुदाइ करने लगे.. तब थोडीही देरमे चारु बेठेही देवायतको अपनी बाहोमे भीचलेती हे ओर कमरको जटके मारते मुह पीछे डालके जडने लगती हे.. जब वो जड गइ तब थकके चकनाचुर होगइ.. ओर देवायतको बाहोसे आजाद करते बेडपे लैट गइ तो देवायत उनकी कमरको पकडते चारुको जोरोसे सोट मारते चोदने लगा.. तब चारु अ‍ेसे ही बेसुध जैसे पडी रही ओर देवायतके जबरदस्त धकेको सहेन करते देवायतसे चुदवाती रही..

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तभी देवायत चारुके उपर चुदाइ करते जुकता हे ओर उनके सरपे हाथ रखते उनकी आंखोमे देखते लंबे लंबे सोट मारते चारुको चोदने लगता हे तो चारुभी वापस उनका साथ कमर हीलाते देने लगती हे ओर अ‍ेक बार फीरसे दोनोके बीच घमासान चुदाइका दोर चल पडा.. तभी चारु अ‍ेक बार फीरसे देवायतको अपनी बाहोमे भीच लेती हे ओर होठोको लीपलोक करते अपनी कमरको जटके मारने लगती हे ओर जडके सांत हो जाती हे..

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चारु : (दर्दसे) बसस.. बसस.. यार अब बसभी करो.. कीतना चोदोगे.. आजतो चोद चोदकर मुजे थका दीया.. सीइइइ हंममममम मरगइइइ देवुउउउउ बसस.. नहीइइ सहा जाता.. कीतनी देरर हेहेहे... पानी नीकालोनां.. हंमम उउउइइइइ मां ससइइइ.. बस देवु.. मत चोदो मुजे.. बहुत जल रही हे..

तब देवायत ने चारुकी अ‍ेक ना सुनी.. ओर वो चारुके गलेमे मुह डालके पुरा जुक गया ओर कमर उछालते लंबे लंबे सोट मारते चारुको चोदताही रहा.. तब चारुनेभी अपने दोनो पैर फैलाके घुटनोसे मोड लीया ताकी उनकी चुत थोडी खुलजाये ओर देवायतके लंडको अच्छेसे जेल पाये.. देवायतका हर धका वो आहे.. भरते बरदास्त करती रही.. क्युकी हर बार लंड उनकी बच्चेदानीसे टकरा रहाथा.. जीनकी वजहसे उनकी बच्चेदानीका मुख खुल जाताथा ओर चारुको दर्द होताथा.. इसीलीये वो ओर अ‍ेसेही पडी रहेते आहे भरते देवायतसे चुदवाती रही.. क्युकी वो जानतीथी आज देवायत उनको छोडने वाला नही हे..

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तभी अचानक देवायत चोदनेकी स्पीड अ‍ेकदम बढा देता हे तब चारुकी जोरोसे चीखे नीकलने लगी ओर वो छटपटाते बेटपे पैर पटकने लगी.. क्युकी देवायतके तगडे लंडको जेलना उनके लीये मुस्कील होने लगा.. तब देवायत चारुको जोरोसे बाहोमे भर लेता हे तो चारुभी उनको कसके बाहोमे भीच लेती हे.. ओर दोनोके होठ मीलतेही लीपलोक कर लेते हे तब चारु बडी आंख करते देवायतको देखने लगती हे ओर देवायत कमरको जटके मारते लंडको जडतक घुसा देता हे ओर जडते चारुकी चुतको भरने लगता हे..

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तब चारुभी अपने गर्भासयपे देवायतका गरम विर्य महेसुस करते उतेजीत हो जाती हे ओर वोभी देवायतके साथ कमरको उछालते जडने लगती हे.. तब देवायत जोरोसे कमर हीलाते चारुकी चुतको भरने लगा.. ओर वो जडतेही जटसे चारुकी चुतसे लंड नीकालते अलग होजाता हे.. तब चारु दर्दके मारे बहोसी जैसी हालतमे करवट लेके पैर सीकुड लेती हे.. ओर ओर मुह बीगाटते ढेर होजाती हे.. आज वाकइ देवायतने चारुकी चुतकी धजीया उडादी थी.. उनको चारु ओर उनकी चुत बहुत पसंदथी.. ओर वो जबभी चारुको चोदता अ‍ैसेही चारुकी हालत बीगाडते चोदता.. ओर चारुको दो दीन तक आराम करना पडता..

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तब देवायत बेडसे उतर जाता हे ओर चारुको गोदमे उठाके बाथरुमकी ओर लेजाता हे.. फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेको साफ करते साथमे नहा लेते हे ओर बहार आके अपने अपने कपडे पहेनके तैयार हो जाते हे.. ओर बहार होलमे आजाते हे तब चारु धीरे धीरे लंगडाके चल रही थी.. ओर बहुतही सरमा रहीथी.. तब बहार आते वो देवायतकी पीठमे हसते हुअ‍े सरारतसे मुका मारने लगती हे ओर सरमाते हसने लगती हे..

चारु : (सरमाते हसते) देवरजी.. अ‍ेसेही कोइ करता हे.. कीतना जोसमे करतेथे मेतो लगभग बेहोस जेसी होगइ थी.. ओर आज आपने मुजे दर्दभी बहुत दीया हे.. मुजसे कोनसी दुस्मनी नीकाल रहे थे.. हें..हें..हें..

देवायत : (पलटके हग करते) नही चारु आज वाकइ तुमपे बहोत प्यार आरहा था.. कास तुम मेरी बीवी होकर मेरे साथ रहेती.. तब मे तुजे अ‍ेसे ही दीन रात चोदताही रहेता.. क्या मस्त लग रही हे तु.. दिलतो चाहता हे अभी भी तुमसे प्यार करता रहु.. लेकीन मुजे आज जानाभी हे.. कास तु मेरी बीवी होती..

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चारु : (अ‍ेकदम सरमाते) बीवी नही हु तो होजाउगी.. हम दोनो गांधर्व विवाहतो कर ही रहे हे.. कहो.. कब मुजसे सादी करोगे मे आपसे सादी करनेके लीये रेडी हुं..? सारा इन्तजाम आपको करना पडेगा.. ओर आपके भाइको भी आपको हेन्डल करना पडेगा.. मे रेडी हु.. अबतो मे आपकी बीवी बनके ही रहुगी.. इतना प्यारतो आपके भाइने भी कभी नही दीया.. देवु.. आइ लव यु सो मच..

देवायत : (होंठ चुमते) लव यु टु चारु.. बस चारु कुछ दीन इन्तजार करले.. फीर हम मौका मीलतेही सादी कर लेगे तबतक हम रश्मीभाभीके यहा मीलते रहेगे.. तुम उनसे बात करलेना..

चारु : नही देवरजी.. अबतो आपके भाइ सरपंच होगये हे तो आयेदीन घरसे गायब रहेगे.. ओर वंदनाभी ट्युसनपे होती हे तो अबमे घरमे अकेली ही रहुुगी.. आपको फोन करदुगी तब आजाना.. अबतो हमे बहुत सारे मोके मीलते रहेगे.. तब हम मीलेगे.. आप बैठो मे चाइ बनाके लाइ..

देवायत : नही चारु तुम आराम करो.. मे खेतोपे जा रहा हु.. वेसेभी देर होगइ हे मे वही पीलुगा..

चारु : (सरमाते) देरतो होगीनां.. जनाबको दो बारजो करना था.. आजतो मुजे पुरी नीचोडली.. अभीभी मुजे नीचे बहुत जलन हो रही हे.. मेरा पुरा सरीर आज आपने तोडके रख दीया..

कहातो देवायत चारुको अ‍ेकबार फीरसे बाहोमे भर लेता हे ओर दोनोके होंठ मील जातेहे.. तब देवायतका प्यार देखकर चारुकी आंख गीली होगइ.. ओर देवायत वहासे नीकल गया ओर सीधे अपने खेतोपे आगया.. तब वहा लखन टे्रक्टर चला रहाथा ओर भानु रामुकाकाके पास बेठे देवायतका वेइट कर रहाथा.. जेसेही देवायतको देखा खडा होके गोडाउनकी ओर चलने लगा ओर रीटाको चाइकी आवाज लगाने लगा.. ओर दोनो गोडाउनमे आकर बेठ गये..

भानु : क्यु भाइ आनेमे देर होगइ..? कही गयेथे क्या..? धरसेतो कबसे नीकल गये हो.. कहा अटक गयेथे..?

देवायत : घरपे फोन कीयाथा क्या..? बोल क्या कामथा..? होगइ तुम दोनो मीया बीवीमे सुलह..? हें..हें..हें..

भानु : (हसते) काहेकी सुलह.. बस अब कुछ ज्यादा बोलती नही.. ओर रमासे तो अब हस हसके बात करती हे.. भाइ इनकाभी मेरी कुछ समजमे नही आता.. की वो मुजसे क्या चाहती हे..

देवायत : (हसते) यार तु टेन्सन मत ले.. बस तुमने उनसे अपने ओर मामीके रीस्तेकी बात छुपाइ इसीलीये तुमसे थोडी नाराज हे.. ओर कुछ नही.. धीरे धीरे सब ठीक होजायेगा.. बोल कब कर रहा हे मामीसे सादी..?

भानु : (हसते) भाइ वो तीन दीनके बाद मामाक सब कार्य खतम होजायेगा.. तब कर लेगे सादी.. मेरी तराह उनकोभी (रमाको) जल्दी हे हें..हें..हें.. वैसे सादीकी खरीदारी करने कब जाना हे..? अब सादीमे दीन ही कीतने बचे हे.. भाइ पता नही सब काम कब करलेगे हम..

देवायत : भानु अ‍ेक बात कहु..? तु मामीके साथ सादी करले.. फीर तुम दोनो लता ओर नीलमको लेके चले जाना.. ओर सब खरीदी अ‍ेकही दीनमे नीपटा लेना.. तो रमाभाभीको भी अच्छा लगेगा.. ओर वो मामाको भी जल्दी भुल जायेगी.. अब तुजेही उनको सम्हालना हे..

भानु : (हसते) ठीक हे भाइ.. तो फीर आपकी खरीदारी कैसे करोगे..? क्या नइ बीवीको लेकर जाओगे.? हें..हें..हें.. लेजाओ दोनो सास बहुको.. दोनोकी खरीदारी अ‍ेक साथ होजायेगी..

देवायत : (सीरीयस होते) भानु.. हम मंजुको दीखाने जायेगे तब दोनो सीधे हमारे घरपेही आजायेगी.. मुजसे ज्यादा मंजुको जल्दी हे की मौसी जल्दी घर आजाये.. ओर हमारी सादी होजाये..

भानु : भाइ तो उसमे गलतभी क्या हे वेसेभी सादी अभी करो की सादीके बाद.. उनको आनाहेतो इसी घरमे.. तो फीर आपभी सादी करलो.. फीर हम चारोकी सादी आरामसे करेगे.. हमे कहा कोइ तामजाम करना हे..

देवायत : चल ठीक हे देखते हे आगे क्या होता हे.. फीलहाल तो दो दीन वेइट करना हे.. फीर देखतेहे क्या करना..

भानु : भाइ आप अ‍ेक बार भावुसे खुलके बात करलो की वो क्या चाहती हे.. मुजसे बात क्यु नही करती..?

देवायत : भानु तु उनकी चीन्ता मत कर.. बस कुछ वक्त लगेगा.. फीर वो तुमसे बातभी करेगी..

रीटा : (सरपे पलु डालके चाइ लाते) मालीक.. लीजीये चाइ.. मे कप बादमे लेजाउगी..

कहेते रीटा चली गइ ओर दोनो चाइ पीने लगे.. तब दुसरी ओर चारुके घरपे देवायतके जातेही चारु सब दरवाजा बंध करके धीरे धीरे लंगडाते चलते फीरसे बाथरुममे घुस गइ.. ओर टबमे बेठकर अपनी चुतकी गरम पानीसे सीकाइ करने लगी.. तब जाके उनको थोडी राहत महेसुस हुइ.. फीर बहार आकर अ‍ेक पेइन कीलर ओर आइपीलकी गोली खाकर अपने रुममे चली गइ.. ओर लेटकर आराम करते सोचने लगी..

चारु : (आंख बंध करते मनमे सोचते) बडाही जालीम हे.. पहेलीबार मे ही मेरी जबरदस्त चुदाइ करली.. ओर आज उनको क्या होगया की मुजे बीना बहार नीकाले दुसरी बारभी चोद लीया.. ओर चोद चोदकर मेरी हालत बीगाडके चला गया.. क्या मे वाकइ उनको इतनी अच्छी लगती हु..? दुसरी बारमे कैसे जालीमने मुजे रगड रगडके बेहरेहमीसे चोदा.. अभी भी मेरी मुनीया(चुत) जल रही हे.. ओर वो जालीम चोदता भी मस्त हे.. इतना तो रमेशने भी मुजे कभी नही चोदा हे.. रमेश का लंडतो इनसे आधा हे.. मुजसे ठीकसे चोदभी नही पाता.. ओर मुजे प्यासी रख देता हे.. ओर देवुका लंड..? ओ बापरे.. मानो कीसी गध्धेका लंड हो.. मेरी चुतकी धजीया उडा देता हे.. तभी तो मुजे अच्छा लगता हे.. क्या मे उनसे सादी करलु..? मुजे जींदगीभर अ‍ैसेही चोदकर खुस रखनेको केह रहाथा.. ओर इसमे हर्जभी क्या हे..? मुजे कोनसा उनके साथ रहेना हे.. बस यही रमेशके साथ रहेकर देवुकी सीक्रेट बीवी बनके तो रहेना हे.. ताकी मुजे आजकी तराह खुस करता रहे वोही मेरे लीये काफी हे.. (तभी चारुके फोनकी रींग बजती हे ओर वो फोन उठालेती हे)

वंदना : (फोन उठाते ही) मम्मी मे इधर पुनमके पास रुक गइ हु.. ओर खाना इधर ही खाकर आउगी.. तुम ओर पापा खा लेनां..

चारु : (धीमी आवाजमे) नही वंदना.. अभी तेरे पापाभी आजायेगे ओर मेने खानाभी नही बनाया हे.. सुन मेरी तबीयत भी अचानक खराब होगइ हे.. प्लीज आज खाना तुही बनाले.. वहा फीर कभी खा लेना..

वंदना : (थोडी चींतीत होते) मम्मी क्या हुआ..? अभीतो मे वहासे गइ तबतो आप ठीक थी..?

चारु : (धीरेसे जुठ बोलते) वंदना मे थोडी देर पहेले बाथरुम मे गइथी.. तो पैर फीसल गया.. ओर पैरमे मोच आगइ.. तो बेटा मे आराम कर रही हु.. मुजसे चला नही जाता.. ओर थोडा टेम्परेचर जैसा भी लग रहा हे.. प्लीज तु आजानां..

वंदना : (जटसे) ठीक हे मम्मी मे अभी नीकलती हु.. आप डोक्टरको दीखादो.. कही कुछ हुआ तो नही..?

चारु : अरे नही नही.. इतनाभी दर्द नही हे.. बस तु आजा.. अभी गोली खाइ हे मे बेडपे आराम कर रही हु..

तो वंदनाने फोरन फोन कट कर दीया.. ओर पुनमको कहेके वो जटसे वहासे नीकल गइ.. तब पुनमभी अपने बेडपे आराम करने लगी.. उधर वंदना घरपे पहोची तो उनकी मम्मी अपने रुम मे आराम कर रही थी..

वंदना : (चारुके पास बेठते उनके सरपे हाथ रखकर चेक करते) मम्मी क्या हुआ..? कुछ ज्यादा तो नही लगी.. डोक्टरको दीखाना हे..? ओर टेम्परेचरभी तो मामुली हे.. अच्छा हे ज्यादा नही हे..

चारु : (जुठके दर्दसे मुह बीगाडते) नही बेटी.. कुछ आराम कर लुगी तो ठीक होजाउगी.. तु टेन्शन मतले.. वरना हम सामको देखेगे.. नही आराम हुआ तो डोक्टरको दीखा देगे.. तु आज खाना बनाले.. कीतनी चीन्ता करती हे तु..

वंदना : चीन्तातो करुगीनां आपके मेरे सीवा हे ही कोन..? तो फीर मुजे अ‍ेक भाइभी दे देना चाहीयेनां.. हें..हें..हें... मम्मी अभीभी कुछ नही बीगडा हे.. सबलोग कहेते हे की आजभी आप मेरी बडी दीदी लगती हे, हें..हें..हें..

चारु : (सरमातते अ‍ेक मुका मारते) चल बदमास तु फीर सुरु होगइ.. जा पहेले खाना बनाले अभी तेरे पापा आजायेगे.. (हसते धीरेसे) भाइ चाहीये तो तु खुद सादी करले.. फीर अपना बच्चा पैदा करलेना.. तुजे भाइकी नही अ‍ेक बेटेकी जरुरत हे.. हें..हें..हें.. ओर क्या कर रही हे पुनो..? क्या उसे मीलने गइ थी..?

वंदना : (सरमाते) नही मम्मी वो देवायतजीको पुछने गइथी.. वो जरुरी पेपर सबमीट करने हे तो..

चारु : (हसते) बेटा वो तो इधर आयेथे.. सायद इसीलीये आये होगे.. लेकीन तुम नहीथी तो पानी पीकर चले गये.. (मनमे) बेटी तुजे क्या पता आज तु नहीथी तो तेरी मांको चोद चोदके वोही हालत खराब करके गये हे.. उन्हीकी वजहसे तेरी मां बेडपे पडी हे.. अच्छा हुआ मेने आइपील लेली वरना आज जालीम पका मुजे प्रेगनेन्ट करके जाता.. पता नही तु जवान होते हुअ‍े भी कैसे अकेली रेह पाती हे.. मेतो पतीके होनेके बावजुद देवायतसे चुदे बीना नही रेह सकती.. क्या तुजे अ‍ेक लंडकी जरुरत नही हे..? पता नही बीना लंडके तु कैसे अकेली रेह लेती हे.. ओर वोभीतो राजा हे वो कीतनीभी सादी कर सकते हे.. कास तेरी सादी देवुसे हो जाती.. तो हम मां बेटी दोनोको वो सम्हाल लेते..

वंदना : मम्मी क्या सोच रही हो..? वो..वो मुजे उनके साथ अ‍ेक बार जाना पडेगा.. तो पुनमको पुछने चली गइथी.. वो मेरे साथ चल रही हे..

चारु : (वंदनाकी ओर देखते) क्या पुनमभी साथ आ रहीहे..? तो फीर उनके साथही चली जाना.. वरना मेही तुम्हारे साथ आने वालीथी.. अबतो तेरे पापाको टाइमही नही मीलेगा.. ठीक हे कब नीकलना हे..?

वंदना : (हसते) अरे अभी नही.. पहेले मे सब पेपरके बारेमे जानलु फीर जब वो कहेगे तब नीकलना हे..

चारु : चल ठीक हे पुनम साथ हेतो कोइ दीकत नही हे.. तु चली जाना.. तेरे पापासे अ‍ेक बार बात करलेना..

तब वंदना खाना बनाने चली गइ.. ओर पुनमकी कही सब बातोके बारेमें सोचते खाना बनाने लगी.. आज पुनमकी बातोने उसे जंजोरके रख दीयाथा.. ओर वंदनाको अ‍ेक बार फीर आशाकी नइ कीरण नजर आने लगी.. ओर सोचते सोचते उसने पुनमके कहेने मुताबीक आगे बढनेका फैसला करलीया.. वो देवायतके बारेमे फीरसे सोचने लगी.. तो उनकी चुतमे तेज हलचल सुरु होगइ.. ओर चुतकी दोनो पंखुडीया फडफडाते पानी छोडने लगी....

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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ६९

तब वंदना खाना बनाने चली गइ.. ओर पुनमकी कही सब बातोके बारेमें सोचते खाना बनाने लगी.. आज पुनमकी बातोने उसे जंजोरके रख दीयाथा.. ओर वंदनाको अ‍ेक बार फीर आशाकी नइ कीरण नजर आने लगी.. ओर सोचते सोचते उसने पुनमके कहेने मुताबीक आगे बढनेका फैसला करलीया.. वो देवायतके बारेमे फीरसे सोचने लगी.. तो उनकी चुतमे तेज हलचल सुरु होगइ.. ओर चुतकी दोनो पंखुडीया फडफडाते पानी छोडने लगी....अब आगे

उधर भानु ओर देवायत चाइ पीते सब प्लानींग कर रहेथे तब रीटा चाइके खाली कप लेने आगइ.. तब वो देवायतके लंडकी ओर कामुकभरी तीरछी नजरसे देखते खाली कप लेके नीकल गइ.. क्युकी वो कइ दिनोसे अपने पतीसे नही चुदी थी.. पहेले वल बहुतही संस्कारी ओरत थी कीसी गैर मर्दके सामने आंख उठाकरभी नही देखती थी.. लेकीन जबसे वो सरपंच राघवके चंगुलमे कर्जके कारण फस गइ..

ओर जब अ‍ेक दिन घरपे रश्मी नहीथी.. तब राघवने रीटाके पतीको कीसी कामके बहाने दुर भेज दिया जो सामतक लोट ना सके.. तब उसी दिन रीटा अपना सबकुछ लुटा बैठी.. उसी दिन राघवने उसे कर्जके पैसेका हवाला देकर उनको जबरदस्तीसे भोद लीया.. ओर अ‍ेक दो घंटेकी अंतरालमे साम तक रीटाको चोदता रहा.. ओर रीटाकी हालत खराब करके रखदी.. तब उसी दिन रीटाको मालुम हुआकी चुदाइ क्या होती हे..

वोतो अपने पतीके छोटे लंडसेही खुस थी.. इसके बादतो राघव रीटाको आये दिन बुलाकर चोदता रहा.. ओर रीटाकोभी राघवसे चुदवानेकी आदत होगइ.. फीरतो राघवका इसारा देखतेही छुपकेसे राघवके रुममे चली जाती ओर उनसे जमकर चुदवाकर वापस बहार आजाती.. ओर अ‍ेक दिन रीटाके पतीने दोनोको रंगे हाथ पकडलीया तब रीटाने परीस्थीतीका फायदा उठाया ओर रोने लगी..

ओर उनके पतीको कहेने लगीकी राघवने कर्जके पैसेके बदले उनके साथ जबरदस्तीकी ओर उनका फायदा उठाने लगा हे.. वो सब बताके रोने लगी.. ओर छोटु उसी दिन राघवसे जगडा करके रीटा ओर उनके बच्चेको लेकर वहासे नीकल गया.. देवायतके खेतोपे काम करने लगा.. ओर जब वो अपना सामान लेने राधवके घर गया तब राघवने उनको मार मारके उनकी टांगे तोडदी.. ओर वो अभीभी खटीयापे पडा हे..

तबसे रीटाको चुदवानेकी आग लगी हुइ थी.. अब वो बीना लंड खाये नही रेह सकती थी.. जबभी बच्चा बहार खेलने जाता तब वो अपने पतीके लंडके साथ खेलने लगती ओर उनको जडाकर अपने पतीसे उनकी चुतको चटवाके ओर उंगलीसे अपनी आगको सांत करवाती.. ओर अ‍ेक दिन देवायतने उन दोनोको अ‍ैसे खेलते देखलीया तब वो खुब सरमाइ ओर अंदर रुममे जाकर छुपकेसे देवायतके पेन्टके उभारको देखलने लगी.. तब इतना बडा उभार देखतेही वो सोक्ट होगइ.. ओर देवायतका लंड देखनेके लीये इच्छुक होने लगी..

तभीसे वो देवायतकी ओर आकर्सीत होने लगी ओर आये दिन उनके पेन्टके उभारको चोर नजरोसे देखती रहेती.. ओर आजभी खाली कप लेने आइ तब देवायतके पेन्टकी ओर देखकर कप लेकर चली गइ.. उनकी आगे बढनेकी हिंमत नही हो पा रही थी.. तभी लखनभी अंदर आगया ओर भानु देवायतके पास बैठ गया.. तब भानु ओर देवायत सादीकी बाते करते सब प्लनींग कर रहेथे तब वो गौरसे सुन रहाथा.. तभी..

भानु : (लखनकी ओर) लखन जब हम खरीदारी करने जाये तब तुमभी हमारे साथ चलना.. ताकी तुम्हे जो कपडे पसंद आये तुम लेलेना.. ओर लताकोभी खरीदारीमे आसानी रहेगी..

लखन : (सरमाते हसते) भाइ इनमे मेरी क्या जरुरत हे..? आप जो लोगे मुजे पसंद हे..

भानु : (हसते) यार तु इतना सरमा क्यु रहा हे.. मेने मेरी बहेन दे दी तो क्या हुआ.. हमारा रीस्तातो वोही रहेगा.. पहेले तो मुजसे केसे खुलके बात करता था.. मे देख रहा हु जबसे तुम्हारी सगाइ हुइ हे तबसे तुम मुजसे कुछ ज्यादा ही सरमा रहे हो.. हें..हें..हें..

लखन : (अ‍ेकदम सरमाते हसते) नही भाइ अ‍ैसा कुछ नही हे.. बस ये तो..

देवायत : (हसते) हां लखन भानु ठीक केह रहा हे.. तु आजभी उनका छोटा भाइ हे.. तो सरमाना कैसा..?

लखन : (हसते) ठीक हे भाइ मे साथ चलुगा.. वरना हमतो खरीदी करने जाही रहेहे तब लेलुगा.. कहो कब जाना हे..?

भानु : (हसते अ‍ेक मुका पीठमे मारते) हां ये हुइना बात.. सुन वो तीन दीनमे मामाका सब कार्य नीपटा लेगे फीर हम जानेका प्रोग्राम करते हे.. मे तुजे बता दुगा तु तैयार होजाना..

लखन : (देवायतकी ओर देखते) भाइ वो पुनमके लीयेभी तो लेना हे.. उनका क्या..?

भानु : (हसते) लखन वो तेरी नइ भाभी पुनम ओर धिरेन इनके साथ चले जायेगे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां.. जेसे तु तेरी नइ बीवीको लेजा रहा हे..हें..हें..हें..

लखन : (हसते आस्चर्यसे) नइ बीवी..? वो कोन हे..

देवायत : (हसते) तो क्या तुजे मालुुम नही हे..? अरे कैसे मालुम होगा अभी कीसीसे बातही नही हुइ.. सुन लखन.. भानु उनकी मामीके साथ सादी कर रहा हे.. अब वो अकेली होगइ हे तो काकीने डीसाइड कीया हे की उनकी सादी भानुसे करदी जाये.. अबतो तेरी दोदो सहेलज होगइ हें..हें..हें..

लखन : (हसते) अच्छा..? चलो अच्छा हे.. वो विधवाको अ‍ेक सहारा मील जायेगा.. भाइ यही करना चाहीये.. ताकी यहा कोइ विधवाही नही हो.. सब सुहागन.. उन हिमाचलके राजाकी प्रथा बहुत अच्छी हे..

भानु : (हसते) तो क्या तुमभी उन राजाके बारेमे जानते हो..?

लखन : हां भाइ होस्टेलमे था तब मेरे पास उनकी कीताब थी.. सायद अभी भी धरपे हे.. वो पढी हे मेने..

तब देवायत गंभीर हो जाता हे ओर आने वाले वक्तके बारेमे सोचमे डुब जाता हे.. तब भानु ओर लखन उन राजाके बारेमे बाते करने लगते हे.. तभी मालती ओर हरीया अ‍ेक ट्रेक्टरसे उतरते हे ओर खेतोपे आजाते हे तब दोनो ही देवायतकी ओर देखते हसने लगते हे.. तो देवायतने मालतीकी ओर सवालीया नजरोसे देखातो मालती अ‍ेकदम सर्मसार होते नां मे गरदन हीलाते अपने रुमकी ओर चली जाती हे.. ओर हरीया सबके पास आकर नीचे बेठ जाता हे तब देवायत उनको पुछता हे..

देवायत : कहो हरीया सब अचानक कीधर चले गयेथे..? ओर क्या हुआहे जमीलाको..? सुना उनकी तबीयत ठीक नही थी.. तो कुछ दवाइ बवाइ लाये की नही..? कैसी हे वो..?

हरीया : (सरमाते हसते) नही मालीक कुछ नही हुआ.. वो..वो.. औरतोकी कुछ प्रोबलेमथी.. मालीतीको सब पता हे.. वो दोनोही हस्पतालमे गइथी.. इधरसे हमारे गांवमेही वो सुधीरवा डाक्टरहे उनको दीखाके ही गये थे.. वो अभी कबीलमे रुक गइ हे.. आप जाओतो उनसे अ‍ेक बार मील लेना.. बाकी मालतीको सब पता हे.. उनसेही पुछ लेना.. वो आपको बता देगी..

भानु : (हसते) हरीया.. चलो अच्छा हुआ तुम लोग आगये.. वो खाना खाके सब मजदुरोको केहना.. खेतोमे हल चलादे.. देख तेरे छोटे मालीक ट्रेक्टर चला रहे हे.. तुम लोगोका सब काम इन्होने करदीया.. हें..हें..हें..

हरीया : (हसते हाथ जोडके) छोटे मालीक.. आप क्यु तकलीफ लेतेहो हमतो आज आनेही वाले थे..

लखन : (हसते) अरे कुछ नही बस थोडा काम करलीया.. मुजे ट्रेक्टर चलानेका बहुत सोक हे.. तो चला लीया.. अबतो तुम लोग आगये हो..

हरीया : (हसते) ठीक हे मालीक कुछ चाइ बाइ पीयेगे..? अबतो हम आगये हे.. अभी मालतीके हाथो भीजवाता हु..

देवायत : नही हरीया अभी अभी वो छोटुकी बीवी बनाके पीला गइ.. अबतो खानेका वक्त होगया हे.. तुमभी खाना खाकर थोडा आराम करलो.. फीर काम करना.. अबतो कही नही जाना हेनां..?

हरीया : जी नही मालीक.. अबतो हम यही हे.. क्या भानुभाइका खाना बन गया..? वरना अभी मालती बना लेगी..

देवायत : चल भानु आज हमारे साथ घरपेही खाना खा लेना.. कीतने दिन होगये तुम आयेही नही..

भानु : नही भाइ आप जाके खाना खालो.. मेरा खानातो रीटाने बनालीया होगा मेने सुबह ही केह दीया था..

हरीया : ठीक हे मालीक कलसे हमही बना लेगे.. चलो जय रामजीकी..

कहेते हरीया अपने रुममे चला गया तब लखन ओर देवायतभी अपने अपने बाइक ओर कारमे हवेलीकी ओर चले गये.. ओर वहा पहोंचतेही फ्रेस होने अपने अपने रुममे चले गये.. तब पुनम कारकी आवाज सुनके जटसे बहार आगइ ओर खानेकी तैयारीया करवाने लगी.. जीसे देखके दया ओर रजीयाभी हसने लगी.. ओर पुनम खाना नीकालनेमे उनकी मदद करने लगी.. जैसे वो इस हवेलीकी मालकीन हो.. तब दया ओर रजीयाको नही पताथाकी पुनम अ‍ैसा क्यु कर रही हे.. तब लखन ओर देवायत अपनी अपनी जगहपे बेठ जाते हे तो पुनमभी देवायतके पास आकर बैठ गइ ओर दोनोको खाना देने लगी..

दया : छोटी मालकीन आप बैठो मे खाना दे देती हु.. फीर ससुराल जाके सबको देना.. हें..हें..हें..

लखन : (जोरोसे हसते) हें..हें..हें.. दया क्या बात कही तुने.. वाह.. हें..हें..हें..

पुनम : (थोडा चीडते) भाइ तुमतो चुपही बेठना.. फीर देखती हु लताभाभीके हाथोका खाता हे या दयाके हाथोका.. हें..हें..हें.. मेरी टांग खीचनेका अ‍ेकभी मौका नही छोडता..

दया : (हसते) हां तो बीवीके हाथोकाही खायेगे.. फीर हमारे हाथोका क्यु खाये.. क्यु छोटे मालीक..?

लखन : हां तो ससुराल जाके अपने पती धिरेनको खीलायेनां.. यहा क्यु हमे खीलाती हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (गुसा करते) भाइ अ‍ेक मारुगीनां.. (धीरसे बडबडाते) यहीतो कर रही हु.. अपने पतीको तो खीला रही हु.. तेरी समजमे नही आयेगा.. देवरजी..

लखन : (हसते) क्या मनमे बडबडा रहीहो जरा जोरोसे बोलनां.. हमेभीतो सुनाइदे..

देवायत : (हसते) बस बस.. क्यु जगडा कर रहे हो? पुनम दे रहीहे तो क्या प्रेबलेम हे..? पुनो तु मुजे देदे अब सीर्फ मुजेही देना.. समजी.. उनको दया दे देगी..

कहेते पुनमका पैर पैरसे सहेला दीया तो पुनम सरमाते खुस होगइ ओर सब समज गइ.. वो हसते हुअ‍े देवायत ओर खुदका खाना नीकालने लगी तो दयाभी हसते हुअ‍े लखनको खाना देने लगी.. फीर तीनो खाने लगे तब नीचेकी ओर पुनम ओर देवायत अ‍ेक दुसरेके पैरको सहेलाते खाना खाते रहे ओर उतेजीत होने लगे..

तभी पुनम टेबलकी ओर जुक गइ ओर दुसरा हाथ देवायतकी जांगोपे रखदीया ओर उनके पेन्टके उभारको सहेलाते खाना खाने लगी तब देवायतका लंड हरकतमे आके जटके मारने लगा तो उनसे कंट्रोल करना मुस्कील होने लगा.. तभी..

देवायत : लखन तुम खाना खाकर अकेला चले जाना.. मे तेरी भाभीके पास जा रहाहु.. पुनोभी साथ चल रही हे.. हम दोनो रातको देरसे वापस आजायेगे..

लखन : (हसते) हां भैया पुनोको दीखा आओ उनका ससुराल.. हें..हें..हें..

पुनम : देखा भैया.. फीर आप कहेते हो मे इनको डांटती हु.. हां ससुराल देखने जा रही हु तुभी जा..

देवायत : दया तुम दोनोभी खालो.. ओर घरका खयाल रखना.. अभी चार बजे तकतो हम हे.. फीर आराम करके चले जायेगे.. आनेमे भी देर होजायेगी कुछ काम होतो फोन करना..

दया : मालीक आपने मुजेभी साथ आनेको कहाथा.. वो मे वहा कुछ काम करलुगी.. तो मौसीको दीकत नही होगी.. क्या मेभी साथमे आजाउ..?

पुनम : (कुछ सोचते) ठीक हे दया तुमभी साथ चलना.. उधर दो दीनतो रुकना हे.. फीर हम भाभीको दीखाके उनको यही ले आरहे हे.. क्यु भैया..?

देवायत : हां दया चलना हे तो दो जोडी अपने कपडे लेले.. हमारे साथही वापस चली आना.. ओर मन करेतो वही रुक जाना.. वेसेभी कुछ दीन बाद पुनोभी उधर आजायेगी फीर उनको कंपनी देती रहेना हें..हें..हें..

पुनम : (जांगपे अ‍ेक चपत लगाते) भाइ अब आपभी.. मे कहा वहा अकेली हु.. सीर्फ हम दो लोगोकातो काम करना हे.. मे सब मेनेज करलुगी.. फीर आगे देखते हे.. अगर जरुरत पडीतो दयाको बुला लुंगी..

दया : (हसते) दीदी वहा कहोतो मे वहाभी साथ चली आउगी.. यहा रजीया सब सम्हाल लेगी.. वेसेभी अब चंपाकाकीभी इधर आती जाती रहेती हे.. कहेती थी अब इधर ही रहेने आजाउगी..

पुनम : (हसते) दया वो हम बादमे सोचेगे.. पहेले सादीतो होजानेदे.. फीर साथ चली आना.. हें..हें..हें..

अ‍ेसेही मस्ती मजाक करते सबने खाना खा लीया.. तब दया ओर रजीयाभी खानेके लीये बेठ गइ तो लखन अपने रुममे जाते जाते रजीयाको कुछ इसारे करता गया तो रजीया सरमसे पानीपानी होगइ ओर हसने लगी.. तब पुनमभी देवायतको इसारा करके अपने रुममे चली गइ ओर देवायतभी अपने रुममे आराम करने चला गया.. तो दया ओर रजीयाने खाना खाके सब काम नीपटा लीया ओर अपने रुममे चली गइ..

तभी पुनम मौका देखतेही अपना रुम बंध करके देवायतके रुममे छुपकेसे घुस गइ ओर धीरेसे दरवाजा बंध करलीया.. ओर दबे पांव बेडकी ओर चली गइ.. तब देवायत आंखोपे हाथ रखके आराम करते सो रहा था.. तो पुनम धीरेसे उनकी बगलमे लेट गइ ओर उनके सीनेपे हाथ रखके सीनेको सहेलाने लगी.. तब देवायतने हाथ हटाके देखातो पुनमथी.. तो उसने हसकर पुनमको अपनी ओर खीच लीया ओर बाहोमे भर लीया..

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तब पुनम उनकी ओर पीठ करते घुम गइ अपना नींतब देवायतकी कमरकी ओर सटालीया तब देवायतने उनको पीछेसे कसके बाहोके भीचलीया ओर उनके बुब्सपे हाथ रख दीये ओर दबाकर सहेलाने लगा.. तो पुनम छटपटाते हसने लगी.. ओर देवायत उनके गलेको चुमने लगा..

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पुनम : भाइ आपकी बाहोमे सोनेमे बहुत अच्छा लगता हे.. आपको आराम करना हे क्या..? चलोना थोडा प्यार करते हे.. जबसे आपने मुजे खानेपे छेडा हे तबसे कही चेइनही नही मीलता.. मुजे अ‍ेक बार प्यार करलोनां.. बहुत मन कर रहा हे..

देवायत : नही.. पुनो अभी कुछ भी नही.. जोभी करना हे हम रातमे करेगे.. चल सोजा.. हम पुरी रात प्यार करते हे.. फीर कुछ आरामभी करना चाहीये.. वरना तेरी तबीयत बीगड जायेगी..

पुनम : ठीक हे भाइ.. अब आपके बीना मुजसे नही रहा जाता.. मे वहा आपके बीना कैसे रहुगी..?

देवायत : जैसे अभी मेरी दोनो बीवीया वहा रहेती हे.. ओर मे तुजे मीलने आता जाता रहुगा.. तु फीकर मत कर..

पुनम : भाइ वोतो ठीक हे लेकीन आपकी आगोसमे आतेही मुजे कुछ होने लगता हे.. कुछ कीजीयेना.. फीर मुजे आपसे अ‍ेक बातभी कहेनी हे.. आज वो वंदना हमारे घरपे आइ थी.. आपसे मीलने..

देवायत : क्या..? वो इधर आइथी..? मेतो उनके घरपे गयाथा तो वो घरपे नही थी.. उनको बोल देना उनके सब पेपर तीन तीन कोपीमे तैयार रखदे.. उसे सबमीट करने जाना हे उनकी नोकरी पकी होगइ हे..

पुनम : भाइ.. वो मुजेभी साथ चलनेको केह रहीथी.. वो आपसे बहुत सरमाती हे.. तभीतो अपने दीलकी बात आपको नही बता पाइ.. भाइ वो भी मेरी तराह आपको अभीभी बहुत प्यार करती हे.. आप उनका प्यार कबुल करलो.. वरना बेचारी जींदगीभर अकेलीही रहेगी..

देवायत : (आस्चर्यसे) पागल होगइ हो क्या..? ये नही हो सकता.. अब बहुत देर होगइ हे.. मुजेतो मेरी इस खुबसुरत बहेन मील गइ हे मुजेतो जींदगीभर तुमको प्यार करना हे.. बस.. क्या तुजे जलन नही होती..?

पुनम : (बुब्सपे हाथ हे वो सहेलाते) नही भाइ.. वो मेरी अ‍ेकलोती खास सहेली हे.. मानलोना मेरी बहेनही हे.. ओर मे उनके साथ अपना प्यार बांटनेके लीये तैयार हु.. भाइ बेचारीने आपके लीये सादी ना करनेकी कसम खाइ हे.. कहेतीथी अब उनकी सादी होगइ हे.. मे उनकी लाइफमे इन्टरफेयर नही करुगी अ‍ेसेही उनकी यादोमे जींदगी बीता दुगी.. भाइ वो कितनी अच्छी हे.. अपने प्यारकी खातीर सादी ना करनेका फैसला कर बैठी.. वो अकेली जींदगी कैसे काटेगी..?

देवायत : (हसते) बीलकुल तेरी तराह पागल हे.. पुनो उनको समजाओ अकेली जींदगी काटना कैसा मुस्कील हे.. वोभी ओरतोके लीये.. तभीतो मे तेरी साससे सादी कर रहा हु.. ओर सुन अ‍ेक मजेकी बात.. अब वो भानुकी मामी भी विधवा होगइ हे.. तो मौसी उनकी सादी भानुसे करवा रही हे..

पुनम : (चोंकते) व्होट.. क्या इनके लीये वो भावनाभाभी तैयार होगइ..? उसने कुछ कहा नही..?

देवायत : पुनम तुमसे अ‍ेक बात कहु.. उनको बडी मुस्कीलसे मेने मनाया हे.. क्युकी उनको पता चल गया था.. की भानु ओर उनकी मामीके बीच उनकी सादीसे पहेलेही रीलेशन हे.. दोनो पहेलेसेही प्यार करते थे.. तबतक बहुत देर हो चुकीथी ओर भावुको दो दो बच्चेभी हो गये..

पुनम : भाइ तो फीर भानुभाइने भावनाभाभीसे क्यु सादी करली.. ओर दो दो बच्चेभी दे दीये.. क्या ओरते सीर्फ बच्चे पैदा करनेके लीये ओर पुरुषके मजे करनेके लीये हे..? आपनेही उनका रीस्ता करवाया थानां..?

देवायत : हां तब मुजे नही पताथा की वो उनकी मामीके साथ रीलेशनमे हे. ओर उनको प्यार करता हे.. वरना मे भावुकी जींदगी थोडीना खराब करता.. मुजेभी अब बहुत अफसोस हो रहा हे.. पर हम क्या करे..?

पुनम : भाइ ओरतोका भी क्या क्या रुप होता हे.. वो अपने प्यारको पानेके लीये कीसीभी हद तक जा सकती हे.. येभी नही देखती उनका संसार बीखर जायेगा.. ओर यही बात पुरुष सो बार सोचता हे.. जेसे आप वंदनाके बारेमे सोच रहे हो.. वरना आप कबका उनके प्यारका फायदा उठा चुके होते.. भाइ आइ अ‍ेम प्राउड फोर यु.. मे आपसे बहुत बहुत प्यार करती हु.. भाइ प्लीज.. आप वंदनाका प्यार कबुल करलो..

देवायत : नही बेबी.. ये नही हो सकता.. मे अ‍ैसा करके कीतनोको धोखा दु.. तुम मेरी मंजु चंदा.. सबको मे क्या कहुगा.. ओर वैसेभी मेरी कइ सीक्रेट वाइफ हे जैसेकी तुम रश्मी..

पुनम : भाइ कोइ धोखा नही.. सबको पता हे आप राजा हो.. ओर सब आपको राजा मानतेभी हे.. तो आपकी कइ रानीया होना लाजमी हे.. ओर हम आपसी सहमतीसेही सब केह रही हे.. हमे कीसीको कोइ अ‍ेतराज नही.. हमे कहा बहार ढंढोरा पीटना हे.. ओर मेने वंदनाको उनका प्यार पानेका वादा कीया हे.. भाइ आप उनको मेरे घर मीलते रहेना.. वहा हम दोनो मीलकर आपको खुब प्यार करेगी..

देवायत : पुनो मत भुल अभी हमारे बारेमे कीसीको नही पता.. ओर हमे कीसीको बतानाभी नही.. तो बी केरफुल.. रही बात तेरी भाभीकी तो मेरे खयालसे वो हम सबके बारेमे सब जानती हे.. पता नही उनके पास कोनसी शक्तिया आगइ हे.. उनके बारेमे बाबाभी कुछ खुलके नही केह रहे.. तुभीतो उनके ज्यादा करीब हो.. तुमभी तो सब जानती होगी.. क्या मुजे नही बतायेगी..?

पुनम : भाइ मे बाबासे ओर.. ओर..वो..वो.. भाभीसे वचनसे बंधी हु.. जबजत बाबाका आदेश ना मीले मे आपको नही बता सकती.. बस इतना जानलो भाभी हम सबके बारेमे सब जानती हे..ओर सायद हमारी सादीके बारेमे भी.. पता नही कोन हे वो.. बस हम दोनो कुछ ही दिनोमे बाबासे मीलने वाली हे..

इतना कहातो देवायत अ‍ेक बार फीर अतीतके बारेमे सोचने लगता हे.. जो बाते वो कीसीके सामने उजागर नही करना चाहता.. जब ये सुनाकी मंजु सबकुछ जानती हे तब देवायतको अपने अतीककी बातसे अ‍ेक डरसा लगने लगा.. तभी पुनम पलट गइ ओर फटाफट देवायतका सर्ट नीकालके अपना पाइजामा नीकालने लगी ओर नीचेसे नंगी होगइ.. फीर देवायतको बाहोमे भीचके उनके होंठ चुमने लगी तो देवायतभी अपनी सोचसे बहार नीकलते हाथ नीचेकी ओर लेजाता हे.. ओर पुनमकी चुतको सहेलाने लगता हे..

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कुछ देरे दोनो अ‍ैसेही प्यार करते रहे तभी पुनम देवायतको पीठके बल लीटाते उनके उपर पैर डालके चड गइ.. ओर लेट गइ वो देवायतके चहेरेको अपने हाथोमे थामके उनके होंठ चुमने लगी.. तब देवायतका लंड पुनमको पेन्टमेसे ही अपनी चुतपे महेसुस हुआ तो उनकी आंख नसीली होने लगी.. ओर आंखोमे वासनाके डोरे मडराने लगे.. तभी वो चुमते चुमते नीचेकी ओर सरक गइ ओर देवायतके पेन्टकी क्लीप खोलते पेन्ट थोडा नीचे करलीया फीर चडी नीचेकी ओर करतेही उनका लंड जटकेसे बहार आगया..

ओर उपरकी ओर लहेराने लगा.. तबलंडको देखतेही पुनमकी आंखोमे चमक आगइ ओर वो वासनाभरी नजरोसे देखते अपनी जीभ नीकालते लंडको नीचेसे उपरकी ओर चाटने लगी ओर लंड चाटते देवायतको नसीली नजरोसे देखती रही..

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तब देवायतका लंड सख्त होके लोहेकी रोडके माफीक होने लगा.. ओर जटकेपे जटका मारने लगा तब पुनम देखके हसने लगी ओर लंडको मुहमे भरके धीरे धीरे अंदर बहार करने लगी जेसे कीसी लोलीपोप चाट रही हो..

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जब देवायतका लंड सख्त होगया तब वो फटाफट देवायतका पेन्ट नीकालने लगी ओर उनकी चडीभी खीचके नीकालदी.. फीर खुदके कपडे नीकालके पुरी नंगी होगइ ओर देवायतकी कमरपे चडके बैठ गइ.. फीर धीरेसे लंड पकडके अपनी चुतपे सेट करने लगी.. उनकी बहेनकी चुदवानेकी तडप देखकर देवायत उसे लेटे लेटे हसते हुअ‍े देख रहथा.. तभी पुनम अपनी चुतके लव होलमे लंड सेट होतेही धीरे धीरे बैठने लगी..

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ओर लंडको धीरे धीरे चुतमे नीगलने लगी.. जैसे कोइ सांप चुहेको नीगल रहा हो.. जब पुरे लंडको अपनी चुतकी गीरफ्तमे ले लीया तब वो देवायतपे जुक गइ ओर उनके होठोको चुमते अपनी कमरको आगे पीछे करते देवायतको चोदने लगी.. तब देवायतभी मदहोस होते नसेही हालतमे चला गया ओर वो पुनमके सरमे हाथ डालके सरको सहेलाने लगा.. अपनीही बहेनको अ‍ैसे अपने उपर चडके चुदवाते देखकर उनकी कामाग्नी ओर भडक गइ.. ओर नीचेसे अपनी कमर उछालते पुनमका चुदवानेमे साथ देने लगा..

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पुनम काफी देर अ‍ेसेही देवायतको कमर हीलाके चोदती रही.. आज सुबहसेही वो अपने भाइ देवायतसे चुदवानेका मन बना चुकीथी.. ओर उपरसे वंदनाके साथ अपने भाइकी बाते करते ओर कामाग्नीमे जलने लगी थी.. तो वो कबसे अपने भाइके आनेका इन्तजार कर रहीथी.. ताकी उनसे चुदवा सके.. तभी देवायत पुनमके बाहोमे भरते हाथके बल उचा होकर बेठ गया ओर पुनमको अपनी गोदमे पैरपे बीठा लीया तब पुनम अपने भाइके गलेको पकडते अपनी कमर हीला हीलाके देवायतसे चुदवाने लगी ओर उनके होंठ चुमती रही..

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तभी नीचेकी ओर दयाकी आंख अभी लगही रहीथी तब रजीया धीरेसे खडी होके दरवाजा खोलके दबे पांव उपरकी ओर चली गइ.. ओर सीधे लखनके रुममे घुस गइ तब लखन नंगा होकर बेडपे लंड हीलाते रजीयाका वेइट करते बेठाथा.. तो रजीया अंदर आतेही दरवाजा बंध करके फटाफट नंगी होगइ.. ओर लखनके पास चली गइ.. जातेही लखनने उनको अपनी बाहोमे भरलीया ओर होंठ चुमलीया..

रजीया : मालीक जल्दी कीजीये वरना वो दया अभी अभी सोइ हे.. कही जागते इधर ना आजाये..

लखन : बस रजीया अ‍ेक बार.. अ‍ेक बार तुजे चोदलु.. तुमने क्या जादु करदीया हे तुजे देखतेही खडा हो जाता हे.. तुजे चोदनेमे बडा मजा आता हे.. अबतो तुजे जींदगीभर अ‍ैसेही चोदता रहुगा..

रजीया : (सरमाते हसते) मालीक येतो आपकी मुजपे महेरबानी हे.. जल्दी कीजीये मेरीभी हालत आपके जैसी हे.. अब आपही मेरी आग सांत कर दीजीये.. मुजेभी आप बहुत अच्छे लगने लगे हे..

कहेते वो बेडपे नंगीही लेट गइ तब लखन बेडसे उतर गया ओर रजीयाकी कमरको पकडके कीनारे तक खीचलीया तब रजीयाके दोनो पेर बेडके नीचे लटक गये.. तभी लखन उनके दोनो पैरकोके बीच खडा होगया ओर लंडको हीलाते रजीयाकी चुतपे घीसने लगा ओर गीला करने लगा तब रजीयाने दोनो पैर लखनकी कमरपे उचा करते टीका दीया.. तब लखनने लंड पकडते रजीयाकी चुतमे लव होलपे सेट कीया..

ओर थोडा फसाके उनकी कमरको दोनो हाथोसे पकड लीया ओर अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड रजीयाकी चुतमे उतारके रजीयाके उपर जुकके हाथको बेडपे टीका दीया ओर रजीयाको कमर हीलाके चोदने लगा.. तब रजीयाभी लखनके गलेमे हाथ डालके उसे पकड लेती हे ओर आहे भरते लखनसे चुदवाने लगती हे.

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दोनोही कामअग्नीमे जलते चुदाइ करने लगे.. तब नीचेकी ओर दयाकी आंख खुल गइ.. ओर रजीयाको ना देखते उनका वेइट करने लगी.. दयाने सोचाकी रजीया बाथरुम करने गइ होगी लेकीन काफी टाइम होगया वो नही आइ तब उनको कुछ आसंकाये हुइ की कही वो उनको छोडकर देवायतसे चुदवानेके लीये अकेली तो नही चली गइ..

तब वो धीरेसे दरवाजा खोलके उसे ढुढंने लगी.. फीर धीरेसे देवायतके रुमकी ओर बढ गइ.. ओर अंदर जांकनेकी कोसीस करने लगी.. लेकीन आज देवायतके रुमके सारे बारी दरवाजा अच्छेसे बंधथा तो वो नही देख पाइ तो वो उपरकी तरफ दबे पाव चली गइ.. तभी लखनके रुममे उसे कुछ अजीबसी आवाज सुनाइदी तो वो लखनके रुमकी ओर बढने लगी.. तब लखनके रुमकी अ‍ेक बारी थोडी खुली हुइ देखली.. तो वो धीरेसे बारीके पास खडी होकर अंदर जांकने लगी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७०

तब वो धीरेसे दरवाजा खोलके उसे ढुढंने लगी.. फीर धीरेसे देवायतके रुमकी ओर बढ गइ.. ओर अंदर जांकनेकी कोसीस करने लगी.. लेकीन आज देवायतके रुमके सारे बारी दरवाजा अच्छेसे बंधथा तो वो नही देख पाइ तो वो उपरकी तरफ दबे पाव चली गइ.. तभी लखनके रुममे उसे कुछ अजीबसी आवाज सुनाइदी तो वो लखनके रुमकी ओर बढने लगी.. तब लखनके रुमकी अ‍ेक बारी थोडी खुली हुइ देखली.. तो वो धीरेसे बारीके पास खडी होकर अंदर जांकने लगी....अब आगे

तब वो चोंक गइ क्युकी रजीया लखनके नीचे लेटे उनसे उछल उछलकर मजेसे चुदवा रही थी.. ओर उनको रजीयापे गुस्सा आने लगा क्युकी आज रजीयाने अपना वादा तोड दीयाथा.. दोनोके बीच डील हुइथी जहाभी चुदाइ करवायेगी साथमे करवायेगी.. ओर दया छुपकेसे दोनोकी चुदाइ देखने लगी.. वो दोनोकी चुदाइ देकर उतेजीत होने लगी ओर अनायासही उनका हाथ उनकी चुतपे चला गया ओर हल्केसे सहेलाने लगी..

तभी लखन चोदते चोदते नसेकी हालतमे जाने लगा ओर आंख चडाके बडबडाते रजीयाको जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. ओर अपनी कमरको जटके देते जडने लगा.. तब रजीया लखनकी कमरको दोनो हाथोसे पकडते अपनी चुतपे दबाव बनाते अपनी कमरको आडी टेडी करने लगी.. ओर जडनेकी कोसीस करने लगी.. तब लखन उनके सीनेपे ढेर होगया.. तब रजीयाने जडनेकी कोसीस छोडदी ओर लखनको मनही मन गुस्सा होके मनमे गालीया देने लगी..

ओर लखनकी पीठ सहेलाने लगी.. तब लखन जटसे लंड नीकाल लेता हे ओर बाथरुममे घुस जाता हे तो रजीयाभी वही पडी अपनी पेन्टी उठा लेती हे ओर अपनी चुतको साफ करने लगती हे.. तभी लखन अपना लंड साफ करते बहार आगया ओर दोनो अपने अपने कपडे पहेनने लगे तब..

रजीया : (सरमाते धीरेसे) मालीक अ‍ेक बात कहु.. आप बुरा मत मानना.. आप मुजे तीन चार बार चोद चुके हो.. ओर हर बार जल्दी पानी नीकालते जड जाते हो.. अ‍ैसेमे तो मे प्यासी रेह जाती हु.. आप कुछ अपना इलाज कीजीये.. क्युकी अभी आपकी सादी होने वाली हे.. तो अपनी बीवीको कैसे संतुस्ट कर पाओगे..?

लखन : (थोडा चीडते) तो क्या हुआ मे कोसीस तो कर रहा हु.. धीरे धीरे सब ठीक हो जायेगा.. तु चीन्ता मत कर.. बस तुमतो मुजे खुस रखा कर.. तबकी तक देखा जायेगा.. अगर तेरे पास कोइ रास्ता हेतो दीखाना..

रजीया : (हसते सरमाते) मालीक मेरे पास कहा रास्ता हे.. बस अ‍ेकही जीच हे.. मे अगली बार ट्राइ करुगी..

तभी दया वहासे जटसे नीकल गइ ओर नीचे आगइ.. तभी उसे कुछ याद आया तो वो देवायतके दरवाजेके पास जाके खडी होगइ ओर जुकके की होलसे देखनेकी कोसीस करने लगी.. तो देखकर अ‍ेकदम चोंक गइ.. ओर थोडी देर अ‍ेसेही जुकके देखती रही.. तब पुनम ओर देवायत दोनोही भाइ बहेन बैठे बैठे चुदाइमे मसगुल थे.. तभी अचानक पुनम देवायतके कंधेपे सर रखके ढेर होगइ तो देवायत उनको बेडपे लीटाने लगा..

ओर खुद उनके पीछे लेट गया.. तब पुनम करवट लेके देवायतकी ओर पीठ करके लेट गइ ओर देवायतने उनके गलेमे अ‍ेक हाथ डालके अपनी ओर खीचलीया ओर पुनमकी चुतमे पीछेसे लंडको घुसा दीया.. तब पुनमकी हल्कीसी चीख नीकल गइ ओर देवायतने दोनो हाथसे उनके दोनो बुब्स कसके पकड लीये बुब्स मसलते पुनमको पीछेसे कमर हीलाते धनाधन चोदने लगा तब पुनमकी हालत पतली होने लगी..

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पुनम : (जोरोसे सीसकारीया करते) बससस बससस भाइ धीरे.. हंममम हां.. बससस अ‍ेसेही चोदो.. बहुत मजा आ रहा हे.. उइइइ मांइइइइइ सीसइइइइ हंमममम आज अपनी बीवीइइइको नीचोडडडड डालो.. उंहु..उंहुं.. आह..आह..आह.. आह.. इइइइइ मां.. भाइइइइ थोडा धीरे चोदो... ओह गोड...आह..इइइ सीसससइइइ...

कहातो दया चोंक गइ ओर जटसे खडी होके अपने रुममे चली गइ.. आज वो रजीयाको ढुंढने गइथी तो रजीयाके साथ उनको अ‍ेक ओर रीस्तेके बारेमे पता चल गयाथा.. जो भाइ बहेनके बीच था.. ओर वो अपने बेडपे लेटकर अपनी चुतको सहेलाते भाइ बहेनके रीस्तेके बारेमे सोचते उतेजीत होने लगी..

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दया : (मनमे) छोटी मालकीनने अ‍ैसा क्यु कहाकी आज अपनी इस बीवीको नीचोडलो..? क्या दोनो भाइ बहेनने सबसे छुपकर आपसमे सादी करली हे..? ओर दोनो पती पत्नी हे..? मे इस बातका जीक्र कीसीके सामने नही करुगी.. वेसेभी मालीक मुजे उनके हर रीस्तोके बारेमे बता देते हे.. ओर मेरा बहुत खयाल रखते हे.. ताकी मे उनकी मदद कर सकु.. तो क्या इनके बारेमेभी मुजे बतायेगे.. तभीतो पुनमदीदीके साथ जानेकी बात तो नही कर रहेथे..? ओर वो लखनभैया भी रजीयाको चोद रहाथा.. तो दोनोके बीच कबसे रीलेशन होगये..? मुजेतो पताही नही चला.. मुजे इस बारेमे रजीयासे बात करनी पडेगी.. कमीनी.. मेतो सीर्फ बडे मालीकसेही चुदवाउगी.. मुजे कीसी ओर लंडकी जरुरत नही हे.. अगर बच्चा पैदा करुगीतो सीर्फ बडे मालीकसे वरना नही.. मे भलेही बांज रहु.. क्या तगडा लंड हे उनका.. मुजे कीसी ओर लंडसे नही चुदवाना..

यही सब सोचते दया अपने बेडपे लेटी अपनी चुत सहेला रहीथी.. तभी रजीया धीरेसे दरवाजा खोलके अंदर आने लगी.. तब दयाने जटसे चुतसे हाथ हटाकर आंख बंध करके सोनेका नाटक कीया.. तो रजीया उनके पास आकर अ‍ेक नजर दयाकी ओर देखकर चुपचाप लेट गइ.. तभी बहारकी ओर बुलेटकी आवाज आइ तो दया समज गइकी लखनभैया खेतोपे जा चुके हे.. अब उसे देवायत ओर पुनमके बीचके रीस्तोको छुपाना पडेगा.. यही सोचते उनकी भी आंख लग गइ..

उधर देवायतके रुममे देवायत अभीभी पुनमको पीछेसे लंड घुसाते अंदर बहार करते चोद रहाथा.. तो पुनमभी मदहोसीमे छाकर देवायतसे अपनी कमर आगे पीछे करते कामुक्तासे बडबडाते चुदाइका मजा ले रहीथी.. दोनोही कामअग्नीमे जलते चुदाइमे मसगुल थे.. तभी देवायत कसके पुनमके बुब्सको पकड लेता हे ओर जोरोसे मसलते दबाने लगता हे.. तब पुनमकी हल्की चीख नीकल गइ.. ओर देवायत उनसे पीछे चीपक गया तब पुनम अपना मुह पीछेकी ओर घुमाती हे..

तभी देवायत पुनमके होठोको अपनी गीरफ्तमे लेते कमरको जटके मारते जडने लगाता हे.. तो पुनमकोभी अपने अंदर देवायतका गरम विर्य महेसुस होताहे ओर वोभी उतेजीत होते साथमे जडने लगती हे.. फीर दोनोही सांत होजाते हे.. तब पुनम वही पडी देवायतकी चडीसे अपनी चुतको साफ करलेती हे ओर अ‍ेसेही पडी रहेती देवायतके पेरको सहेलाने लगती हे.. आज देवायतने उसे पीछेसे जबरदस्त तरीकेसे चोद लीयाथा.. जीनकी वजहसे वो काफी थक गइथी.. फीर दोनोही नींदकी अगोसमे चले जाते हे..

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दोनोही चार बजे तक अ‍ेसेही नंगे अ‍ेक दुसरेसे चीपककर सोते रहे.. तभी उनका दरवाजा कीसीने खटखटाया तब पुनम चोंकते जटसे जाग गइ.. ओर अपनी सीचुअ‍ेशन देखकर अ‍ेकदम सरमा गइ.. फीर वो जटसे खडी होकर बाथरुममे धुस गइ ओर नहाने लगी.. फीर नहाके बहार आगइ ओर देवायतकोभी जगा दीया तो देवायतभी बाथरुममे चला गया ओर नहाके कंपलीट होकर बहार आगया.. तबतक पुनम मीररके सामने बेठते अपने आपको सवार रहीथी.. तब देवायत उनके पीछे चला गया तो पुनमने मीररसे देखलीया.. ओर वो खडी होगइ तब देवायतने उनको पीछेसे अपनी बाहोमे भरलीया.. तब पुनम मदहोसीमे जाने लगी..

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ओर पलटके देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमते अलग होगये फीर अपने अपने कपडे पहेनकर तैयार होगये.. तब अ‍ेक बार फीर दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये.. ओर होंठ चुमकर दोनोही अलग होते दरवाजेकी ओर बढ गये.. तब सबसे पहेले देवायत बहार नीकला तब दया कीचनकी ओर जाते देवायतकी ओर नैन नचाते कातील स्माइल करने लगी.. जब दया कीचनमे चली गइ तब देवायतने हाथके इसारेसे पुनमको बहार नीकलने कहा तो पुनम जटसे नीकलके अपने रुममे चली गइ..

तब उनको नही पताथा की दया कीचनकी खीडकीसे सब देख रही हे.. फीर देवायतभी सोफेपे जाकर बैठ गया.. तब पुनम अपने रुममे जातेही चेन्ज करने लगी ओर सारी ब्लाउस पहेनकर तैयार होने लगी.. क्युकी वो अपने ससुराल जा रहीथी जो गांवमे मोर्डन ड्रेसमे ससुराल जाना मतलब बातोका बतंगड होना.. ओर वो तैयार होकर बहार आगइ.. ओर देवायतकी ओर देखते कातील स्माइल करते कीचनमे चली गइ.. तब दया उसे देखतेही खुस होगइ ओर पुनमकी ओर देखके कामुक स्माइल करने लगी..

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दया : (हसते सरारतसे) अरे वाह.. दीदी आपतो अ‍ेकदम मस्त सादीसुधा ओरतकी तराह दीख रही हो.. ओर चहेरेपे भी काफी नीखार दीख रहा हे.. आखीर ससुरालजो जाना हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (थोडी जेंपते सरमा गइ फीर हसते) दया.. अ‍ेक लगाउगीनां.. चल मुजे तो इन सारीमे सरम आरही हे.. कैसा अजीब लग रह हे.. सादीके बादतद मे सारी नही पहेनुगी.. मुजे अच्छा नही लगता..

दया : दीदी अ‍ेक सच बात कहु..? आप इन सारीमे बहोत खुबसुरत लग रही हे.. फीर सादीके बाद भलेही घरमे ड्रेस पहेनके घुमो.. लेकीन इनमे आप सचमे अ‍ेक सादीसुधा ओरत लग रही हे.. आपको देखके कोइ नही केह सकता की आप अ‍ेक कुंआरी लडकी हो.. देखो.. अबतो आपके चहेरेपे भी काफी नीखार आ चुका हे.. जेसे सादी सुधा ओरतोके चहेरेपे आजाता हे.. आपके सरीरमेभी काफी बदलाव दीख रहा हे.. जैसे आपकी सादी होगइ हो.. क्या धिरेन जीजुने आपको प्यार.. मतलब..

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पुनम : (सरमसे पानीपानी होते) बस अब चुपभी..कर.. अ‍ैसा कुछभी नही हे.. तेरी अ‍ैसी बातोसे मुजे बहोत सरम आरही हे.. जोभी प्यार करना हे हम सादीके बाद करेगे.. समजी.. कमीनी कहीकी.. हें..हें..हें..

दया : (हसते) दीदी अ‍ेक बात कहु..? मुजेभी आप अपने साथ लेजाओ.. हम दोनो साथमे रहेगी तो आपकोभी अकेलापना नही लगेगा.. ओर मुजेभी आपके अच्छा लगेगा.. क्युकी मे जींदगीभर आपके साथ रहेके आपका साथ दुगी.. मुजे आपके साथ बहुत अच्छा लगता हे.. प्लीज..

पुनम : (हसते) तो फीर इधर कोन खयाल रखेगा.. भाभी भी तो अकेली होजायेगी.. हें..हें..हें..

दया : नही दीदी अब आपकी सासभी इधर आपकी नइ भाभी बनके आ रही हे.. ओर रजीया चंपाभाभी भीतो इधर हे.. प्लीज.. मुजे आपके साथ ले चलो.. मे वादा करती हु आपकी पर्सनल लाइफमे कोइ इन्टरफेयर नही करुगी..

कहातो पुनम अ‍ेक नजरसे दयाकी ओर देखने लगी.. ओर उसे मनमे कुछ आसंकाये आने लगी.. जैसे वो देवायतके ओर उनके बारेमे जान चुकी हो.. तब दया नजर जुकाते काम करने लगी.. तभी पुनमको खुलके दयाको पुछनेकी इच्छा होने लगी.. लेकीन तभी रजीयाभी कीचनमे आगइ.. तब दया उनके सामने घुरते गुस्सेसे देखती रही.. ओर पुनम कीचनसे बहार नीकल गइ ओर देवायतके पास जाके उनसे सटकर बेठ गइ.. ओर उनका सर देवायतके कंधेपे रखते धीरेसे देवायतकी जांगोपे हाथ रख दीया..

पुनम : (धीरेसे) भाइ.. मुजे आपसे अ‍ेक बात कहेनी हे.. ये दया मुजे कुछ अजीब लग रही हे.. उनकी बातोसे लगता हे वो हमारे बारेमे कुछ जान गइ हे.. मुजे कैसे अजीब अजीब सवाल पुछ रही थी..

देवायत : (हसते) कोन..? दया..? तु उनकी टेन्शन मत ले.. मे उनसे बात करलुगा.. उनसे डरनेकी जरुरत नही हे.. वो मेरी खास राजदार हे.. वो मेरे हर रीस्तोके बारेमे जानती हे.. यही समजले वो मेरी दीवानी हे.. हंम..

पुनम : (राहतकी सांस लेते हसते) भाइ अपकी अ‍ैसी कीतनी दीवानी हे..? हें..हें..हें.. जहा देखो अ‍ेक दीवानी होती हे.. कीतनी ओरतोको फसाया हे आपने.. हें..हें..हें.. ओर आप होभी इतना क्युट ओर हेन्डसम.. हम जैसी लडकीभी आपको देखकर पागल होजाती हे.. तो फीर ओरतोका क्या कहेना..

देवायत : (हसते धीरेसे) अ‍ेकभी नही.. जीतनीभी फसी हे वो सामनेसे फसी हे.. यही मानलो उन्होने ही मुजे फसाया हे.. हें..हें..हें.. जैसे तुमने मुजे फसाया.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते कामुक स्माइल करते) भाइ.. मेतो कबसे आपसे फसनेके लीये तैयार थी.. बस आपही नही देखते थे.. अच्छा तो फीर वंदनामे क्या प्रोबलेम हे.. अब वो भी रेडी हे.. भाइ वोभी आपको बहोत प्यार करती हे.. आप उनकोभी अपनालो..

देवायत : (हसते) तुम फीर सुरु होगइ.. अरे बाबा ये नही हो सकता.. वो बहुत अच्छी ओर सीधी लडकी हे..

पुनम : भाइ तभीतो मे उनसे रीलेशन रखनेको केह रही हु.. आप उनसे गांधर्व विवाह करलो.. वो आपसे सादी करना चाहती हे.. उनकी इच्छाभी पुरी होजायेगी.. फीर मेरी तराह आपकी सीक्रेट वाइफ बनके रहेगी.. प्लीज.. मेरी खातीर.. हम दोनो मीलकर आपको खुब प्यार देगी..

देवायत : (सीरीयस होते) पुनो तुजेतो पता हे.. रमेश ओर चारुको पता चलेगा तो उनपे क्या बीतेगी..? ओर चारुके साथ मेरा क्या रीलेशन हे वोभी तुजे पता हे.. तो मे उनको कैसे धोखा दु..?

पुनम : भाइ कोइ धोखा नही होगा.. उनकी सब जीम्वेवारी मेरी.. ओर सबके सामने कहा सादी करनी हे.. हम हमारी सीक्रेट जगाह चले जायेगे.. जहा आपने मेरी सांस से सादी की हे.. समज गयेनां..? बाकी उनको जबभी मीलनाहो आप मेरे घर मुजे मीलने आओगे तब उनसे मील लेना.. ओर चारुभाभीको मे समजा दुगी..

देवायत : (हसते) अच्छा तो मेरी बीवी पुरी प्लानींग करके बैठी हे.. क्या वंदनासे इस बारेमे बात हुइ..?

पुनम : (खुस होते हसते) हां भाइ.. सब बाते होगइ.. बस.. सीर्फ आप हां कहेदो.. बेचारी बहुत खुस होजायेगी.. वैसे हम तीनोको साथमे सहेर जाना हे.. तब मे बातको आगे बढाउगी.. आप हां केह देनां..

देवायत : (हसते) चल ठीक हे.. आगे जाके देखेगें.. अभीतो तेरी सादीमे फोकस करना हे.. फीर हम सोचेगे..

पुनम : (खुस होते हसते) ठीकहे भाइ.. लेकीन उनमे देर मत करना.. बाकी आप सब मुजपे छोडदो.. मे सब अ‍ेरेन्ज कर लुगी.. आपने हा कहा वोही मेरे लीये काफी हे.. थेन्कयु भाइ.. आइ लव यु सो मच..

देवायत : (कंधेसे पकडते अपनी ओर खीचते) लव यु टु बेबी.. बस तु खुस रहा कर..

दया : (हसते पीछेसे) दीदी चलीये चाइ नास्ता रेडी हे.. ओर मेभी रेडी हु.. मेने मेरे कपडे पेक करलीये हे..

देवायत : दया इधर रजीया अकेली हे.. तो चंपाभाभीको बुला लेना.. चलो पुनो..

दया : (हसते) मालीक फीकर मत करो उनको कहेलवा दीया हे वो आज या कल आजायेगी..

तब देवायत ओर पुनम चाइ नास्ता करने बेठ गये तो दया ओर रजीयाभी चाइनास्ता करने कीचनमे बेठ गइ सबने चाइ नास्ता करलीया तब पुनम ओर देवायत बहार नीकलने लगे तो दयाभी अपने कपडे लेकर आगइ ओर कारकी पीछली सीटमे बेठ गइ.. तो पुनम आगेकी सीटमे देवायतके साथ बैठ गइ ओर रजीयाको कहेके सब नीकलने लगे.. ओर देवायतने कारको चंदाके गांवकी ओर मोड दी.. ओर सब जाने लगे.. तभी..

देवायत : दया.. तु आज पुनोके ससुरालमे सब देखले.. फीर कहेना तुजे वहा अच्छा लगता हे की नही.. क्युकी अब तुजे पुनोकी सादीके बाद वही रहेना हे पुनोके साथ.. क्यु रहेगीनां..?

दया : मालीक मे तो दीदीसे पहेलेही केह चुकी हु.. फीरभी आपने पुछाहे तो बता रही हु मे दीदीके साथ कहीभी रहेना चाहती हु.. ओर वोभी अब हमेसाके लीये..

पुनम : दया.. अबतु भाइको मालीक मत कहे.. मुजे अच्छा नही लगता.. तु इनको बडे भैया नही केह सकती?

दया : (सरमाते हसते) जी.. बडे भैया..? लेकीन मे कैसे.. दीदी मालीकही ठीक हे.. हें..हें..हें.. मुजसे भैया नही कहा जायेगा.. आप नही समजोगी.. हे..हें..हें..

पुनम : (पीछे देखते हसते) मुजे सब पता हे तु भैयाको बडे भैया क्यु कहेना नही चाहती.. फीकर मत कर.. भैया फीरभी तेरा अ‍ेसेही खयाल रखेगे जैसे पहेले रखते थे.. हें..हें..हें..

कहातो दया सरमसे पानीपानी होगइ ओर मुह नीचे करते मुस्कराती रही.. तब पुनम ओर देवायतभी अ‍ेक दुसरेके सामने देखकर हसने लगे तब पुनमने देवायतकी ओर आंख मारते दयाकी ओर इसारा कीया.. तो देवायत सबकुछ समज गया.. ओर पुनमको आंखसे इसारोसे सांत रहेने कहा.. तभी देवायतने बातोका दौर सम्हाल लीया..

देवायत : दया.. पुनम ठीक केह रही हे.. आजसे तु मुजे बडे भैया करकेही बुलायेगी.. मुजे पता हे तु क्यु मना कर रही हे.. लेकीन फीकर मत कर.. मे तेरा अ‍ेसेही खयाल रखुगा जेसे पहेले रखता था.. क्युकी मुजे मेरी सब बहेने अच्छी लगती हे..

दया : (सरमाते हसते) जी.. माली..क.. सोरी.. सोरी.. जी बडे..भैया.. हें..हें..हें.. बस..?

देवायत : (हसते) दया तुजे पता हे.. मे तुजे पुनोके साथ रहेनेके लीये क्यु केह रहा हु..? अब हमारे गांव ओर हमारी हवेलीमे बहुत कुछ बदलने वाला हे.. मतलब हमारे सभीके रीस्तो मे काफी बदलाव आने वाला हे.. जो तुजे आगे पता चलेगा.. तु सब अपनी आंखोसे देखेगी..

दया : (सरमाते हसते) जी बेडे भैया.. अ‍ेक बार हमारी मालकीनभी यही बात केह रहीथी.. लेकीन उनको काफी वक्त होगया हे.. मेने थोडा बहुत सुना हे.. अब हमारे गांवमे भी उन हिमाचलकी तराह होने वाला हे.. मुजेतो सुनकर थोडा आस्चर्य हुआ.. लेकीन मालकीनने कहाकी सब होकरही रहेगा..

पुनम : (हसते) अच्छा तुमभी वो हिमाचलके राजाकी बाते जानती हो..? तुमने भाभीकी बात छुपके से सुनली क्या..? हें..हें..हें.. दया.. तुम बहोत डेन्जर हो.. हें..हें..हें..

दया : (हसते) नही दीदी.. छुपकेसे नही मेरे सामनेही सब बाते हुइ.. वो ओर चारुभाभी इसी बातकी चर्चा कर रही थी.. तब मे उनके साथही बैठी थी.. तो सुनलीया.. ओर मेतो वो राजाकी पुरी कहानी (ये केसी अनुभुती) पहेलेसे ही जानती हु.. हें..हें..हें.. कीतना अजीब हेनां..? वहा रीस्तोका कोइ मतलब ही नही हे.. सब आपसी रीस्तोमे प्यारभी करते हे ओर उनसे सादीयाभी कर लेते हे.. वहा आजभी अ‍ेक भी विधवा ओर त्यक्ता नही हे..

देवायत : (हसते) अच्छा तो सुन.. इनकी सुरुआत हमारी हवेलीसे ही होगइ हे.. वोभी पीछले तीन पीढीसे.. इस बातका अभी कीसीके साथ कोइ जीक्र मत करना.. तुम सब चुपचाप देखती जाओ.. अब तुजे अ‍ेसे कइ रीस्तोमे बदलाव दीखनेको मीलेगे.. तब तुम वीचलीत मत होनां.. समज गइ..?

दया : (सरमाते हसते) जी भैया.. आप फीकर मत कीजीये.. ये बात भी हमेसाकी तराह राज ही रहेगी.. हें..हें..हें.. क्या मेने आज तक कीसीसे कुछ कहा हे..? आप फीकर मत करो..

देवायत : (पुनम ओर दयाकी ओर देखते) दया.. आज मे तुमसे अ‍ेक बात कहेने जा रहा हु.. ये बातका जीक्र कभी भी कीसीके सामने भुलसे भी मत करना..

दया : (सरमाते धीरेसे) जी भैया.. आप फीकर मत करो.. क्या मेने आज तक कीसीसे कुछ कहा हे..? कहो..

देवायत : (थोडी देर पुनमकी ओर देखते फीर रुकते) दया.. मेने ओर पुनमने आपसमे सादी करली हे.. पुनम अब मेरी बहेनके साथ मेरी बीवी भी हे.. जीस तराह तेरे साथ मेरा रीलेशन हे.. उसी तराह अब पुनमके साथभी हे.. पुनम अब हमेसा मेरी सीक्रेट बीवी बनके उस धिरेनके साथ रहेगी.. इसीलीये तुजे इनका खयाल रखनेके लीये साथमे भेज रहा हु.. ये बातका जीक्र कीसीके सामने भुलसेभी मत करना..

दया : (सरमाते हसते पुनमकी ओर देखते) जी बडे भैया.. मे सब समज गइ.. आप फीकर मत करना ये राज भी राज रहेगा.. क्या मेने आज तक कीसीके कोइ बात कीहे..? भैया भलेही आप मुजे जो समजना चाहे समजे.. लेकीन मेतो आपको अपना पतीही मानती हु.. ओर मानती रहुगी.. भलेही हमने सादी ना कीहो.. लेकीन मे आजभी आपको अपना पती मानकर आपसे पुर्ण समर्पीत हु.. ओर सच कहु.. मुजे आज दोपहरको ही आप दोनोके बारेमे सब पता चल गया था.. जब आप दोनो अपने रुममे अ‍ेक दुसरेके साथ प्यार कर रहेथे.. तब आप दोनोकी आवाज बहार तक सुनाइ दे रहीथी.. तब सुनकर मुजे सब पता चल गया..

कहातो पुनम सोक्ट होते अ‍ेक नजरसे दयाको देखती रही.. आज उनको दयापे बहुत तरस आ रहीथी.. वो सोचने लगीकी दया भाइके प्रती कीतनी वफादार हे.. जो मनसेही अपने आपको भाइको पुर्ण समर्पीत कर चुकी हे.. यही सब सोचते वो दयाकी ओर प्यारसे देखती रही.. तब दया पुनमको अ‍ैसे देखते सरमा गइ ओर सरमाकर हसने लगी.. तब उनकी आंखोसे खुसीके मारे दो आंसु छलग गये.. तो पुनमने पीछे मुडके उनका हाथ थाम लीया.. ओर मुस्कराने लगी..

पुनम : (हसते) दयाबहेन.. तुम कीतनी अच्छी हो.. तुम फीकर मत करना.. तुमकोभी भाइका वोही प्यार वहाभी मीलता रहेगा जो यहा मीलता था.. हम दोनो मीलके भाइको खुब प्यार करेगी.. तु फीकर मत करना..

दया : (सरमाते आंसु पोछते हसते) जी दीदी.. सुक्रिया..

देवायत : (पुनमकी ओर देखते) पुनो दयाने मेरी बहुत मदद कीहे.. वो मेरी हर बात जानती हे.. जेसे मंजु जानती हे.. मेने रामुकाकासे दयाका हमेसाके लीये खयाल रखनेका वादा कीया हे.. बस अ‍ेकही अफसोस हे मे उनको कभी अपनी बीवीका दरजा नही दे पाया.. लेकीन मुजे उनका अ‍ेक कामतो करनाही पडेगा..

दया : (सरमाते) भैया आप फीकर मत करो.. आपने मेरा ओर मेरी हर जरुरतोका खयाल रखा यही बहुत हे.. भलेही आप मुजे बीवीका दरजा नही देपाये.. लेकीन मेने आपको हमेसा अपने पतीका दरजा दीया हे.. ओर हमेसा देती रहुगी.. बस अ‍ेकही तम्मना हे जो इश्वरने चाहातो वो भी पुरी होजायेगी..

पुनम : (दयाकी ओर सवालीया नजरोसे देखते) कोनसी तम्मना..? कोनसी इच्छा बाकी रेह गइ तुम्हारी..?

दया : (सरमाते नजर जुकाते) जी..वो..वो.. मे कभी मां बननेका सुख नही पा सकुगी..

पुनम : (हसते) कीसने कहा तुजे..? तु फीकर मत कर मेरे साथ रहेगी तो तेरे नसीबमे होगातो वो भी इच्छा पुरी होजायेगी.. तु फीकर मत कर.. हम दोनो हमारे बच्चे मीलकर पालेगे.. क्यु भाइ..?

देवायत : (हसते) हां.. अब मेरी इस खुबसुरत बीवीने कहाहे तो इतनातो करनाही पडेगा हें..हें..हें..

कहातो पुनम सरमाके हसने लगी ओर देवायतके बाजुमे मुके मारने लगी.. तब दयाभी सरमाती हसती रही अ‍ैसीही बाते करते तीनो चंदाके गांव आगये.. ओर कार पार्क करके अंदरकी ओर जाने लगे तब पुनमने जाकर दरवाजा खटखटाया तो चंदाने आकर दरवाजा खोला तब तीनोको देखके खुस होगइ ओर हसने लगी फीर पुनम ओर दयाको गले लगाया ओर दोनोका हाथ पकडते अंदरकी ओर चलने लगी.. तब....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७१

कहातो पुनम सरमाके हसने लगी ओर देवायतके बाजुमे मुके मारने लगी.. तब दयाभी सरमाती हसती रही अ‍ैसीही बाते करते तीनो चंदाके गांव आगये.. ओर कार पार्क करके अंदरकी ओर जाने लगे तब पुनमने जाकर दरवाजा खटखटाया तो चंदाने आकर दरवाजा खोला तब तीनोको देखके खुस होगइ ओर हसने लगी फीर पुनम ओर दयाको गले लगाया ओर दोनोका हाथ पकडते अंदरकी ओर चलने लगी.. तब..अब आगे

देवायत : (हसते) देखा.. ये दोनोको तो गले लगाया ओर मुजे आनेकोभी नही कहा.. हां भाइ अब बहु आगइ तो हमे कौन पुछेगा.. हें..हें..हें..

कहातो चंदा अ‍ेकदम सर्मसार होगइ ओर पलटके देवायतकी ओर देखते सरमाते हसने लगी.. जब कीसीका ध्यान उनपे नहीथा तो चंदाने अपनी जीभ नीकालके देवायतको दीखादी ओर हसने लगी.. तभी मंजु सबकी आवाज सुनके बहारकी ओर नीकली तो देवायतको देखतेही उनकी ओर जटसे आने लगी ओर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. तब दया पुनम ओर चंदा सरमाके हसने लगी ओर मंजु अ‍ेसेही बाहोमे खडी रही.. तब दया ओर पुनम बच्चेके पास चली गइ ओर दयाने बच्चेको (विजय) अपनी गोदमे उठालीया..

मंजुला : (चंदाकी ओर देखते) दीदी अ‍ेक डंडा उठाके लाओ.. जनाबको हमसे मीलनेका टाइमही नही मीलता.. आज हम दोनो मीलके इनको पीटेगे.. हें..हें..हें..

देवायत : (मंजुको बाहोमे कसते) हां मेरी बीवीया नही मारेगी तो कौन मारेगी.. बोल.. कैसी हे तु.. ओर हमारा वीजय.. सोगया हे क्या..?

मंजुला : (हसते अपने रुमकी ओर इसारा करते) नही देखीये आपकी लाडली ओर दया आतेही उनको लेकर बैठ गइ.. दोनो उनके साथ खेल रही हे.. (सीनेपे सर रखते) कैसे हो बाबु..? मुजे यहासे ले चलोनां.. हम वहीसे सृतीको दीखाने चले जायेगे.. आपके बीना यहा अच्छा नही लगता..

चंदा : नही.. कही नही जाना.. बस दो दीन रुकजा फीर हम वही चले जायेगे.. देवु अब आप आ गयेहो तो इनको समजाओ.. कलसे जानेकी रट लेके बैठी हे..

मंजुला : (हसते धीरेसे) दीदी आपभी तो वहा जल्दी आना चाहती हे.. आपभी साथ चल रही हे.. तो फीर क्या प्रोबलेम.. हम दोनो वहीसे दिखाने चले जायेगे..

कहातो चंदा अ‍ेकदम सरमाके पानीपानी होने लगी.. ओर वो सराती हसते हुअ‍े कीचनमे चली गइ.. तब मंजु उनको देखके हसने लगी ओर देवायतकी ओर देखके कीचनकी ओर इसारा करने लगी.. तो देवायत मंजुका हाथ पकडके कीचनकी ओर चलने लगा.. जब वहा जाकर देखातो चंदा सरमाते कीचनमे खडी रहेते पैरके नाखुनसे जमीन खरोद रही थी.. ओर मुह नीचे करते मुस्करा रहीथी.. तब उसने मंजु ओर देवायतको कीचनमे आते देखा ओर अ‍ेकबार फीर समारने लगी..

मंजुला : दीदी अब कब तक अ‍ैसे सरमाती रहोगी.. अबतो ये आपकेभी पती हे.. देवु आज दीदीको मेरे सामनेही मीललो ताकी उनकी जीजक खतम होजाये.. जाओ वरना आपको मे कसम दे दुगी..

चंदा : (सरमाते गभराते) नही मंजु.. अभी बहार वो पुनम ओर दया हे.. कोइ देखलेगा.. हम बादमे मीलेगेनां.. क्यु इनको उकसा रही हे.. येतो कहीभी कभीभी सुरु होजाते हे.. इनको काहेकी सरम..

मंजुला : (देवातको चंदाकी ओर धकेलते) नही वो दोनो अंदर हे.. आप फीकर मत करो.. मे इधर खडी हु.. सब सम्हाल लुगी.. देखुतो सही मेरा देवु मेरी सैतनको कैसे प्यार करता हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (आगे बढते) चंदा अबतो आजा.. आज मेरी बीवीने हुकुम करदीया हे.. तुभी जानती हे.. मे इनकी कसम नही तोड सकता..

चंदा : (सरमाते हसती हुइ दुर भागते) नही देवु.. अभी नही.. प्लीज..प्लीज.. उइइइ मां..मुंउउउउउ बुच..बुचच.. आह.. आइइइइ.. मुंमुंउउउउउ.. उइइइ सीइइइइ..

कहतो देवायतने चंदाको पकडलीया ओर अपनी बाहोमे भीचते उनके होठोपे अपना होंठ रखदीया ओर उनके उरोजोको मसलते उसे कीस करने लगा.. तब चंदा सरमसे पानीपानी होते मंजुकी ओर बडी आंख करते देखती रही ओर देवायतके होंठको अपने होठोपे महेसुस करती रही.. तब दोनोही गरम होगये तब देवायतने चंदाको कमरसे पकडके अपनी कमरसे सटा लीया तब चंदा कामुक होकर मंजुकी ओर देखती रही..

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तब देवायतने उसे जोरोसे होंठ भीचलीया ओर अ‍ेकदमसे चंदाको छोडके हसने लगा.. तब मंजुभी हस रही थी.. तभी चंदा देवायतको मुका मारते अपने होठोको सारीसे पोछते मंजुकी ओर आगइ.. ओर मंजुकी पीठमे मुका जड दीया.. ओर सरमाके हसने लगी.. ओर मंजुके गले लग गइ..

मंजुला : बस दीदी.. आप इसी तराह खुस रहीये.. ओर हमारे पतीको प्यार करती रहे..

चंदा : मंजु यार.. बहुत सरम आ रही हे.. अभी हमने सादीभी नहीकी ओर ये सब.. तु सब जानती तो हे..

मंजुला : दीदी गभराइअ‍े मत.. अब सादी दुनीयाको दीखानेके लीये सीर्फ ओप्चारीक रेह गइ हे.. बाकीतो आप दोनो मीया बीवी हो.. ओर मीया बीवी वाला सब काम कर चुके हो.. तो फीर अब काहेकी सरम..? हें..हें..हें..

चंदा : (सर्मसार होते मंजुको मुका मारते) मंजु चुप होजाओ.. बेसर्म कहीकी.. अब आप दोनो बहार बैठो मे हमारे पतीको चाइ नास्ता करवाती हु.. हें..हें..हें..

कहातो मंजु ओर देवायत हसते हुअ‍े बहार नीकलने लगे.. तब पीछसे चंदाने देवायतकी पीठपे अ‍ेक मुका जड दीया.. तो देवायतने हसते हुअ‍े पीछे मुडकर देखा तब चंदा उनके सामने जीभ नीकालके सरारतसे हसने लगी.. तब मंजु ओर देवायत फीरसे हसने लगे ओर बहार आकर सोफेपे बैठ गये.. तभी दरवाजेकी घंटी बजीतो मंजुने जाकर दरवाजा खोल दीया.. तो धिरेन बेंकसे आगया.. ओर देवायतको देखतेही खुसीसे उनके गले लग गया.. तब उनकी नजर पुनम ओर दया पे गइ तो..

मंजुला : (हसते) जा अपनी बीवी भी आइ हे उसेभी मीलले.. हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते हसते) क्या दीदी आपभी.. में अभी फ्रेस होकर आता हु..

कहेते वो सरमाते उपर चला गया तो देवायत ओर मंजु हसते रहे.. तब अंदरकी ओर दया ओर पुनम बच्चे(विजय)के साथ हस हसके खेल रहीथी ओर विजयकोभी हसानेकी कोसीस कर रहीथी.. तभी दया बच्चेको पुनमके हाथोमे थमाकर कीचनमे चली गइ ओर चंदाका हाथ बटाने लगी..तो चंदाभी खुस होते हसने लगी.. ओर दयाको सब सामन दीखाने लगी.. तभी पुनमभी बच्चेको जुलेमे डालके बहार आगइ ओर मंजुसे चीपककर बैठ गइ.. ओर उनके कंधेपे सर रख दीया..

मंजुला : (खुस होते गाल सहेलाते) कहो मेरी प्यारी गुडीगा कैसी हो..? घरपे सब ठीक तो हेनां..?

पुनम : (सरमाते हसते) जी भाभी.. सब ठीक हे ओर मे भी मजेमे हुं.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) हां मे देख रही हु.. आजतो ये सारी बारी.. ओर तेरा चहेरा भी खीला हुआ.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) भाभी.. आपभीनां.., भाभी.. आप घरपे कब आ रही हे..? चलोनां.. वहा आपके बीना अच्छा नही लगता..

मंजुला : देखते हे.. वो सृतीको दीखाके सीधे वही आयेगे.. तब तेरी सांस यानी तेरी नइ भाभीभी साथ चल रही हे.. हमेंसाके लीये.. हम आतेही तेरे भाइकी ओर उनकी सादी कर रहे हे.. वोभी सीर्फ हम घरवालोके बीच.. मे सोच रही हु दोनोकी आश्रममे जाकर सादी करदेगे..

पुनम : (सरमाते हसते) हां वही ठीक रहेगा.. भाभी.. तो फीर मे उनको क्या कहु..? मम्मीजी.. की भाभी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (जोरोसे हसते) इस घरमे रहो तब मम्मीजी कहेना ओर मायकेमे आओ तब भाभी कहेना हें..हें..हें..

चंदा : (चाइ लेके आते सुनलेती हे) मंजु अ‍ेक मारुगीनां तुजे.. मेरी बहुको क्या उलटी सीधी पटी पढा रही हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (जोरोसे हसते) कुछ नही दीदी पुनो पुछ रहीथी की मे अब मम्मीको क्या कहेके बुलाउगी..? तो मेने केह दीया.. यहा हो तब मम्मीजी कहेना ओर मायकेमे हो तब भाभी कहेना.. हें..हें..हें..

कहातो चंदा सरमसे पानी पानी होगइ ओर मंजुको चाइ रखके फीरसे अ‍ेक मुका जड दीया..

चंदा : पुनो तु चल मेरे साथ येतो बेसरम हे.. कुछभी बोलती हे इनकी संगतमे रही तो तुजेभी बीगाड देगी.. चल मेरी मदद कर.. सीर्फ नास्ता बहार रखना हे अभी धिरभी आजायेगा फीर हम सब साथमे चाइ नास्ता करते हे.. चल..

पुनम : (सरमाते हसते खडी होते) जी मम्मीजी.. चलीये..

कहेते पुनम गरदनको पीछे मुडके मंजुकी ओर हसते हुअ‍े कीचनमे चली गइ.. तबतक धिरेनभी आगया ओर पुनमको देखके खुस होने लगा.. तब पुनमभी उनकी नजरको पहेचान गइ ओर मंद मंद मुस्कराती रही.. ओर सब चाइ नास्ता करने लगे तब बातोही बातोमे मंजुने धिरेनको चंदाको घर लेजानेकी ओर सादीकी बात करली.. लेकीन धिरेनतो पुनमके पीछेही लगा हुआथा.. उनको अपनी मम्मीके यहा वहा होनेमे कोइ इन्टरेस्ट नही था.. उनकोतो सीर्फ पुनमही चाहीयेथी.. तब पुनमभी देवायतके सामने देखते रहस्यमइ मुस्कान करती रही ओर इस मुस्कानका राज चंदा ओर धिरेनके अलावा चारो लोग जानते थे..

मंजुला : धिरेन हम सृतीको दीखाके सीधा घरही चले जायेगे तब दो तीन दीनमेही तु अ‍ेक दीनकी छुटी ले लेना ताकी सहेर जाके सब खरीदारी होजाये.. तुम सीर्फ अपना कपडा बपडा ओर जो तेरा सामानहे वोही लेना बाकी हम सब देख लेगे..

धिरेन : (सरमाते हसते) जी दीदी..

मंजुला : ओर अ‍ेक बात.. अब दया इधरही रहेने वाली हे.. हंमेसाके लीये.. वो अब वहा सीर्फ सादीके लीयेही आयेगी.. क्युकी तुतो ओफीस चला जायेगा तब पुनोको यहा अकेला ना लगे ओर उनका काममे भी हाथ बट जायेगा..

दया : (हसते) दीदी मेरे होते हुअ‍े दीदी काम क्यु करेगी..? मे ही सब काम सम्हाल लुगी..

चंदा : (हसते) हां मेरी मां.. तुही काम करना पहेले नास्तातो करले.. तुजे कीचनमे सब दीखा तो दीया हे..

सभी बाते करते चाइ नास्ता कर रहेथे तभी चंदाको अपने पैरपे कीसीका पैर महेसुस हुआ तो वो समज गइ ओर नजर टेडी करते देखलीया तो वो देवायतका पैर था.. जो उनके पैरको सहेला रहाथा तब चंदा सरमसे पानीपानी होगइ ओर उनकी सांसे तेज चलने लगी वो उतेजीत होते देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखने लगी.. तभी देवायत उसे नजरोसे उपरकी मंजीलमे उनके कमरेमे जानेको केह रहथा तो चंदा नजरोसे हां कहेते सहमती देते हसने लगी.. ओर सबने चाइ नास्ता करलीया..

जब चाइ नास्ता करलीया तब धिरेन इसारोसे पुनमको उपर चलनेको केहता हे तब ना चाहते हुअ‍े भी पुनमको हां कहेनी पडी.. ओर धिरेन उपर चला गया तब मंजु ओर चंदा नीचे रुममे चली गइ तो दया सब खाली बरतन कीचनमे लेजाते काम करने लगी.. तभी पुनम देवायतसे इसारोसे बता देती हे की धिरेन उनको उपर मीलनेके लीये बुला रहा हे.. तो देवायतने उसे आंखोसे परमीसन देदी ओर पुनम धिरेसे उपर चली गइ..

तो देवायतभी खडा होते मंजुके पास चला गया तब मंजु विजयको दुध पीला रहीथी ओर उनके चुचे दीख रहेथे जब देवायत आया तब मंजु सरमा गइ ओर अपने चुचे सारीके पलुसे ढक लीया.. ओर सरमाते मुस्कराने लगी.. तब चंदाभी सरमा गइ ओर देवायत बेडपे चंदाके पास बैठ गया.. ओर चंदाको कमरसे खीचके अपने पास सटाकर बीठा दीया.. तो चंदा सरमसे पानीपानी होगइ ओर मुह दुसरी ओर घुमाके हसती रही..

मंजुला : (हसते) जानु थोडातो सबर करो.. वो धिरेन उपर हे.. ओर दरवाजा भी खुला हे.. कहोतो दोनोको बहार भेजदु..? या फीर उपर लेजाके अच्छे से मील लेना अपनी इस बीवीको.. फीर जी भरके इसे प्यार करलेनां..

देवायत : (हसते धीरेसे) मंजु इनको कबसे यहीतो केह रहा हु.. इनको बोल तेरे हिस्सेका प्यारभी मे इनसे वसुल करलुगा..

मंजुला : (हसते) तो बाबा मना कीसने कीया हे.. आप इसे उपर कमरेमे लेजाइअ‍े.. ओर कर लीजीये जीतना प्यार करना हो उतना.. ओर मेरे हिस्सेका प्यारभी इनसे वसेल करलीजीये..

कहातो चंदा अ‍ेक बार फीर बुरी तराह सर्मसार होगइ ओर हसते हुअ‍े बेठेही मंजुको अ‍ेक मुका जड दीया फीर सरमाते कहा..

चंदा : (मुस्कराते) कोइ जरुरत नही.. हम यही बैठे हे येभी बहुत हे.. अब तो दयाभी इधर आगइ हे ध्यान रखना.. वरना येतो कहीभी सुरु होजाते हे.. अभी पुनमभी इधर आजायेगी..

मंजुला : (हसते) दीदी दयाकी जरासीभी फीकर मत करो.. वो सब जानती हे.. की आप इनकी बीवी होने वाली हे.. तो उनसे डरनेकी जरुरत नही हे..

चंदा : (हसते धीरेसे) बीवी होने वाली हु नां..? हुइ तो नही.. तबकी तब सोचेगे.. जब मे इनकी बीवी होजाउ फीर जीतना प्यार करना हे करले.. लेकीन अभी नही..

देवायत : (सरारतसे मुस्कराते) अच्छा.. मेरी बीवी नही हुइ नां..? अ‍ेक बार फीरसे कहेदो..

चंदा : (अ‍ेकदम सरमाते हसते) नही.. आप बहोत कमीने हो.. ये में नही केह सकती.. आपकी बीवी हु में.. हें..हें..हें.. मंजु हमने मंदिरमेतो गांधर्व सादी करली हे..

मंजुला : (जोरोसे हसते धीरेसे) देवु दीदी बहोत नखरे कर रही हे.. अ‍ेक बार मेरे सामनेही उनको पटकके प्यार करलो (चोदलो).. फीर नही सरमायेगी हें..हें..हें..

चंदा : (जटसे खडी होके सरमाते हसते मंजुको मुका मारते बहार जाते) तुम दोनोही बहोत कमीने हो.. दोनोके दोनो बेसरम हो.. यहा बैठुगीतो खतरा हे.. तुम दोनो बैठो.. मे चली दयाकी मदद करने..

कहेते वो जटसे बहार भाग गइ ओर सीधी कीचनमे चली गइ.. ओर वहा दयाकी हेल्प करने लगी तब मंजु ओर देवायत जोरोसे हसने लगे.. तभी मंजुने बच्चेको उरोजोसे दुध पीते हटालीया ओर अपना ब्लाउस ठीक करके बच्चेको वही जुलेमे डालदीया.. ओर जटसे रुमका दरवाजा बंध करके देवायतको हाथ खीचके खडा करदीया.. ओर उनकी बाहोमे समा गइ.. ओर देवायतके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी..

तब देवायतभी मंजुको कसके बाहोमे भीच लेता हे ओर दोनोके होंठ मील जाते हे.. तब मंजु आंख बंध करते देवायतके होठोका रस पीने लगी ओर मदहोस होते आधी आंख चडाते स्मुच करती रही.. तभी देवायत उनके बुब्सको मसलते दबाने लगा ओर दोनोही कामातुर होके अ‍ेक दुसरेको प्यार करने लगे.. तभी देवायत अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते मंजुकी चुतको सहेलाने लगा तो मंजु सीसकारीया करने लगी.. ओर देवायतको कसके बाहोमे भीचलेती हे.. फीर अचानक जटसे अलग होगइ..

मंजुला : (हाथ पकडते बेडपे बीठाते) जानु.. प्लीज.. मुजसे रहा नही जाता.. ओर मे अभी कुछ करभी नही सकती.. क्या हम उपर उपरसे प्यार नही कर सकते.. सोरी जानु मे आपको अभी नीचे नही दे सकती..

देवायत : (हसते) बेबी मुजे पता हे अभी तु ठीकसे सही नही हुइ हे.. दो तीन महीनेका वक्त लगेगा.. फीर हम दोनो मीलकर खुब प्यार करेगे

मंजुला : बस बाबु वोही चीन्ता सता रही हे.. तबतक आप क्या करोगे..? आप घर जातेही मौसीसे सादी करलो.. ताकी वो आपको सम्हाल सके.. बाकी अभी ये तीन चार दीनतो आपकी चीन्ता नही हे.. जबतक मौसी वहा नही आती.. दोनो खुब मजे करलो..

देवायत : (चोंकते) क्यु.. ये तीन चाह दीन चीन्ता क्यु नही हे..? ओर हम दोनो मतलब..?

मंजुला : (तब उसे अपनी गलतीका अहेसास हुआ ओर वो गभरा गइ) वो..वो..कुछ नही बस अ‍ेसेही मुहसे नीकल गया.. आप मुजे मीलनेतो आते हो.. इसीलीये..कहा..

देवायत : (अ‍ेक नजरसे मंजुकी ओर देखते) मंजु.. मुजे कीतना चाहती हे मुजे..?

मंजुला : (उनकी आंखोमे देखते) क्यु..? अपनी जानसेभी ज्यादा.. कोइ सक हे आपको..? अ‍ैसा क्यु पुछा आपने..?

देवायत : तो फीर मुजसे बाबाकी सब बाते क्यु छुपाइ..? क्या मुजे कहेने लायक नही हे? मुजे तेरे बारेमे सब पता चल गया हे.. तु हम सबके बारेमे सबकुछ जान जानती हे.. सच बताना कौन हो तुम..? ओर कौन हु में..? बाबाने तुजे अ‍ैसी कोनसी शकित दीहे जो तुम हम सबके बारेमे जान जाती हे.. मुजे सच बताना..

कहातो मंजु देवायतके पास उनसे सटकर बैठ गइ ओर बैठेही देवायतको बाहोमे भीच लीया.. ओर उनकी आंखोसे आंसु टपकने लगे.. तब देवायतने उनके आंसु पोछ दीये ओर मंजुको बैठेही अपनी बाहोमे भर लीया.. ओर ैनके सरको चुमने लगा..

मंजुला : (आंसु टपकाते) जानु.. वो..वो.. मे आपको अभी कुछ बाते नही बता सकती.. बाबासे वचनसे बंधी हु.. बस कुछ दीन इन्तजार करलो अ‍ेक बार मे बाबाको मीललु.. फीर आपको सब पता चल जायेगा..

देवायत : (बाहोमे होंठ चुमते) ठीक हे बेबी तो मत बता मुजे.. लेकीन मुजे बहुत कुछ मालुम होगया हे.. की तुम हम सबके बारेमे बहोत कुछ जानती हो.. मेतो तुजे पाकर धन्य हो गया.. क्या ये पीछले तीन चार दीनमे क्या हुआ वोभी तो तुम सब जानती होगी..? तभीतो तीन चार दीनकी चीन्ता नहीहे की बातकी.. क्या ये सच हेनां..? तुम हमारे बारेमे सब जान चुकी हेनां..?

मंजुला : (सीनेमे सर रखते) हां जानु.. जो भी कुछ हो रहा हे होने दो.. सब प्रकृतीका खेल हे.. हमे उनमे इन्टरफेयर नही करना.. ओर ये तीन चार दीनमे जोभी कुछ हुआ इनमे मुजे आपसे कोइ सीकायतभी नही हे.. ये सब होनेही वाला था.. तो आप गील्टी फील मत करना.. ओर मेभी इस गलत नही मानती ना अभीके लीये ओर नाही भुतकालके लीये.. जोभी हुआ वो होने ही वाला था.. ओर आगे जोभी होगा वो होकर ही रहेगा.. हमे सीर्फ अपना कर्म करना हे.. आप कीसीभी.. रीस्तेको लेकर कभी गील्टी फील मत करना.. फीर चाहे वो रीस्तेमे कोइभी क्यु ना हो.., क्या बाबाने खुद तुम दोनो की सादी करवाइ हेनां..?

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देवायत : (बाहोमे कसते गाल चुमते) हां मंजु.. मुजेभी कुछ नही पता था.. जीस तराह तुम जानती हो.. उसी तराह वोभी बहुत कुछ जानती हे.. पता नही कौन हो तुम दोनो.. मंजु जीतना तुम मुजे चाहती हो.. उतना वोभी मुजे चाहती हे.. भले ही वो मेरी बहेन हो.. मे उनके प्यारके आगे विवस होगया मे उसे मना नही कर सका.. वो मेरे प्यारमे बीलकुल पागल हो चुकी हे.. ओर हमने सबकुछ करलीया हे.. तु समज गइनां..?

मंजुला : हां.. जानु अ‍ेक बात कहु..? जोभी हुआ या होने वाला हे.. उनमे आप कभी गील्टी फील मत करना.. मे हमेसा आपके साथ हु.. ओर साथही रहुगी.. आपके हर कार्यमे मेरी सहमती हे.. बस इतनाही केह सकती हु.. ओर अ‍ेक बात जो सायद तुम दोनो.. मतलब आप ओर पुनम नही जानते.. जो मे आपको बता रही हु.. ओर ये बात अभी हम तीनोके बीचही रखना..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? हम दोनो क्या नही जानते..?

मंजुला : (सरमाते धीरेसे) वो..वो..सायद.. सी इस प्रेगनेन्ट.. पुनमके गर्भमे कल ही आपका वो अंसभी आ चुका हे.. जीनका बाबा बरसोसे इन्तजार कर रहेथे.. ओर अ‍ेक सच मेरे बारेमे हे.. जो आपको जल्द पता चल जायेगा.. जो आप नही जानते.. ओर मे अभी नही बता पाउगी.. तब आपकी मेरे प्रती क्या फीलींग होगी वो मुजे नही पता.. बस मे इतना जानती हु मे आपसे बहुत प्यार करती हु ओर हंमेसा करती रहुगी.. आइ लव यु बाबु.. आइ लव यु सो मच.. बस मुजे कभी मत छोडना..

देवायत : तुम कोनसे सचकी बात कर रही हे..? जु तुम बहोत रहस्यमय बाते कर रही हे.. चल आगे देखते हे क्या होता हे.. बस मे इतना जानता हु मे मेरी मंजुसे बहोत प्यार करता हु ओर हमेसा करता रहुगा.. लव यु बेबी.. बस मे इस नये रीस्तेको लेकर तुमसे डरता था.. की मेरी मंजुको पता चलेगा तब क्या होगा.. ओर आज मे बहुत खुस हु.. लव यु बेबी.. लव यु सो मच.. बस मुजे अ‍ैसेही प्यार करती रहेनां

मंजुला : जानु आपसे अ‍ेक रीक्वेस्ट हे.. ये बात सीर्फ हम तीनोके बीचही रखना.. अब कीसीको मत बताना.. जीतनेभी जानते हे उतने तक ही सीमीत रखना.. बस ओर कुछ नही कहेना.. आगे सब ठीक होजायेगा..

देवायत : (हसते) बेबी अ‍ेक बात टाल गइ तुम.. तुम मुजसे तुम्हारी असली पहेचान कब कराओगी..? हें..हें..हें.. मे सब जानना चाहता हु.. ना बाबा कुछ कहेते हे ओर नाही तुम..

मंजुला : (हसते) जानु चीन्ता मत करो.. मेरे जानेसे पहेले मेरी असली पहेचान करवा दुगी.. हें..हे..हे..

देवायत : (रुआसी आवाजमे) यार तुम जानेकी बात मत करो.. मे सहेन नही कर पाउगा.. क्या जरुरत थी बच्चेकी.. (आंसु टपक जाते हे तब मंजु उसे जोरोसे बाहोमे भीचते आंसु पोछते हसते हुअ‍े कहेती हे)

मंजुला : जानु चीन्ता मत करो मे कहा आपसे दुर जारही हु.. बस यही समजलो मे सीर्फ ये सरीर बदलने जा रही हु.. मे वापस आकर आपको पीछला सब ज्ञात करवा दुगी.. तब आप मुजे पहेचान जायेगे.. की वास्तवमे हम सब कौन हे.. मे आप मौसी पुनो हम सब कइ जन्मोसे आपसमे जुडे हुअ‍े हे..

देवायत : बेबी.. लेकीन तेरा प्यार मे नही भुल पाउगा.. उनका क्या..?

मंजुला : (हसते) नही जानु.. मेरा प्यार आपको मीलता रहेगा.. सायद इसीलीये अपकी जींदगीमे ये दोनो आइ हे.. मे इनके माध्यमसे आपको वही प्यार करती रहुगी.. यही समज लेना मे आपको प्यार कर रही हु.. इनके लीये मेरी पुनम ही काफी हे.. वो ओर मौसी आपको खुब प्यार देगी.. आइ प्रोमीस..

देवायत : बेबी अ‍ेक बात कहेनी हे.. वो हमारी पुनम मुजसे बहोत प्यार करती हे.. यहा तक उनकी सादी टालनेकी बाते कर रहीथी बडी मुस्कीलसे उसे समजाया हे.. तु उनसे अकेलेमे बात करलेनां.. ओर उसे समजाना.. की अ‍ैसी नादानी ना करे..

मंजुला : नही जानु उनको कहो अ‍ैसा पागलपन करनेकी जरुरत नही हे.. मे वहा आउगी तब उनको समजा दुगी.. ओर हां.. आपके पास ये दो राते हे.. तब खुब प्यार देना उनको.. उसे हर तराहसे तृप्त करदो.. फीर पता नही कब आप दोनोका मीलन होगा.. वो बाबाके आदेशका बराबर पालन कर रही हे..

देवायत : मंजु अ‍ेक बात समजमे नही आइ.. क्या तुम उनका जवाब मुजे दे पाओगी..?

मंजुला : (हसते) अब कोनसा सवाल मनमे रेह गया हे.. हें..हें..हें..

देवायत : बेबी मेरी ये समजमे नही आरहा.. की बाबा अ‍ेक साधु होकर हमसे अ‍ैसा काम क्यु करवा रहे हे..? जो हर रीस्तेको तार तार करदीया.. हमारे बीच रीस्तोका कोइ मायनाही नही रहा..

मंजुला : (जोरोसे हसते) इनका जवाबतो आपको बाबाही अच्छेसे दे सकते हे..हें..हें..हें.. आप हर जन्ममे ये सवाल उनको पुछते हो.. तो वोही आपको अच्छेसे जवाब देगे हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) अच्छा चल मे उनसे मीलकरही पुछ लुंगा..

मंजुला : (अचानक गंभीर होते) जानु वो..वो.. आज मम्मीका फोन आयाथा.. पापकी तबीयत बहुत खराब हे.. वो होस्पीटलमे ओक्सीजनपे हे.. अब इस हालमे मे कैसे जा पाउगी..? भावु या भानुभाइ भी तो नही जा सकते.. क्या आप.. आप जाओगे..? प्लीज.. अ‍ेक बार मेरी खातीर..

देवायत : मंजु मे तेरे बगैर कैसे..? आइ मीन.. मुजे पता हे तुम हमारे बारेमे सब जानती हो.. तो फीर.. मे हमारी सादीके बाद वहा अकेला कभी नही गया.. ओर उनकी वजहभी तुम जानती हो..

मंजुला : जानु.. लेकीन आपको कल जाना पडेगा.. पापाके खातीर.. वो आपको अपना दामाद नही अ‍ेक बेटेकी तराह मानते हे.. प्लीज.. आप चले जाओ.. ओर ज्यादा तबीयत खराब होतो उसे सहेरकी होस्पीटलमे लेजाना.., बेचारे भानुभाइभी तो नही जा सकते.. वरना उनको ही भेज देती.. ओर धिरेनकोभी छुटीकी प्रोबलेम.. आप चले जाओ.. आप मेरी चीन्ता मत करो.. क्या पता सब सही होजाये..

देवायत : नही मंजु तु फीकर मत कर मे कल सुबह ही चला जाता हु.. ओर देखता हु क्या हो सकता हे..

मंजुला : बस जानु.. आपसे अ‍ेकही रीक्वेस्ट हे.. हो सकेतो आप सबकुछ भुल जाओ.. माफ करदो उनको.. तब वो गुसेमे बोल गइ.. अब बहुत पछता रही हे.. आपसे बात करनेके लीये वो बहुत तडपी हे.. आजभी दीन रात वो आपहीके बारमे सोचती रहेती हे.. बस अ‍ेक बार मेरी खातीर उसे माफ करदो..

देवायत : मंजु तुम ये सब बाते इतनी सहजतासे कैसे कर लेती हे..? क्या तुमको हमारे बारेमे सब जानके बुरा नही लगा..?

मंजुला : (हसते) नही.. सायद आपको अभी आपके बारेमे ज्ञात नही हे.. वरना आप मुजसे ये सवाल नही पुछते.. आपका कामही यही हे.. बस इतना फर्कहे आप सब काम डरके साथ कर रहे हो.. ओर वो जब आयेगा.. तब सब चरमो पे होगा.. वो सबको खुलके प्यार करेगा.. अगर बाबने मेरी खुदकी पहेचान मुजसे नही करवाइ होती तो मे भी अ‍ेक आम ओरतकी तराह सोचती.. (जोरोसे हसते) जानु आप बहुत ही कमीने हो.. धीरे धीरे करते मुजसे सब बाते उगलवा रहेहो.. हें..हें..हें.. चलीये अब बहार सब हे तो..

कहेते मंजु अपने रुमका दरवाजा खोल देती हे.. तब उपर क्या हुआ आइअ‍े देखते हे.. उपर धिरेन पुनमका वेइट करते अपने रुममे बैठा था जेसेही पुनम आइ वो जटसे खडा होगया ओर अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया.. फीर पलटके वापस आकर उसने पुनमको जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया.. तब पुनमकोभी कुछ अजीबसा डर लगने लगा.. ओर सरमसे धिरेनकी बाहोमे अ‍ैसेही यंत्रवत खडी रही....

कन्टीन्यु
 
सभी पाठको को मेरा नमस्कार.. इस कहानीको पढनेमे आसानी रहे इसीलीये बीच बीचमे मेने कुछ फोन्ट के कलर चेन्ज कीया हे.. धन्यवाद..

रेग्युलर कहानी ब्लेक कलरमे चलेगी.. ∙∙∙∙∙



कीसीके मनकी बात रेड कलरमे चलेगी..
∙∙∙∙∙



फ्लेसबेक कहानी ब्ल्यु कलरमे चलेगी..
∙∙∙∙∙
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७२

कहेते मंजु अपने रुमका दरवाजा खोल देती हे.. तब उपर क्या हुआ आइअ‍े देखते हे.. उपर धिरेन पुनमका वेइट करते अपने रुममे बैठा था जेसेही पुनम आइ वो जटसे खडा होगया ओर अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया.. फीर पलटके वापस आकर उसने पुनमको जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया.. तब पुनमकोभी कुछ अजीबसा डर लगने लगा.. ओर सरमसे धिरेनकी बाहोमे अ‍ैसेही यंत्रवत खडी रही....अब आगे

तभी धिरेन अलग होकर उनकी आंखोमें देखता रहा फीर अचानक पुनमके चहेरेको पकडके पागलोकी तराह चुमने लगा.. तब पुनम सरमसे पानीपानी होने लगी.. ओर ना चाहते हुअ‍ेभी धिरेनको प्यार करने देने लगी.. उनकोभी पताथा आज नही तो कल उसे धिरेनको सब कुछ करना देना ही पडेगा.. ओर वो चुपचाप खडी रहेके धिरेनका साथ देने लगी.. ओर दोनोके होंठ मील गये.. पुनमने अपनी आंख बंध करली ओर स्मुच करने लगे.. तब अनायासही धिरेनका हाथ पुनमके बुब्सपे चला गया..

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तो पुनम कांप गइ ओर अनकंन्फर्टेबल फील करने लगी.. फीरभी उनको धिरेनका साथ देना पडा.. ओर दोनो प्यार करते बहेकने लगे तब धिरेन धीरे धीरे करते पुनमको बेडकी ओर ले चला.. ओर बेडपे अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे कीस करते बैठ गये ओर धिरेनने पुनमके उरोजोको दबाते उसे बेडपे लीटा दीया ओर कामातुर होके उनपे जुककर होंठ चुमते अ‍ेक हाथ नीचेकीओर लेजाते पुनमकी चुतपे रखते उनको सहेलाने लगा..

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पुनम : (जटसे धिरेनका हाथ पकडते रीक्वेस्ट करते) नही.. नही.. सीइइइ बससस.. बससस.. धिरेन वहा अभी नही.. प्लीज.. अभी नही.. सब सादीके बाद..(कहेते जटसे बेडपे बैठ गइ)

धिरेन : (गीडगीडाते धीरेसे) पुनो प्लीज.. अ‍ेक बार.. सीर्फ अ‍ेक बार.. बहोत मन कर रहा हे.. यार मे तेरे बीना नही रेह सकता.. प्लीज मानजाओ.. सीर्फ अ‍ेक बार..

पुनम : (सर्मसार होते) नही धिरेन.. अभी नही.. प्लीज.. मान जाओ.. हमारी सादी होजानेदो.. फीर मे आपको मना नही करुगी.. प्लीज.. यही समजलो आज मेरा व्रत हे.. प्लीज.. मान जाओ बाबु..

धिरेन : (आस्चर्यसे धीरेसे) पुनो.. ये कैसा व्रत..? प्लीज.. क्या तुम मुजसे प्यार नही करती..?

पुनम : (गभराते जटसे) अरे नही नही.. बहुत करती हु.. लेकीन आज नही.. प्लीज.. मेरे अच्छे बेबी मान जाओ.. यार.. अब कैसे कहु.. (सरमाते धीरेसे मुह घुमाते जुठ बोलते) वो.. वो.. मेरा पीरीयड चल रहा हे..

धिरेन : (मुस्कराते) ओह.. आइ अ‍ेम सोरी.. यार मुजे नही पताथा.. क्या हमारी सादी तक तुम ठीकतो होजाओगीनां..? पुनो तुजे देखते ही मे पागल हो जाता हु.. आइ अ‍ेम सोरी..

पुनम : (सरमाते हसते) हां.. अब सादीमे दीन ही कीतने बचे हे.. येतो तीन दीनमे सब ठीक होजायेगा..

धिरेन : (सरमाते धीरेसे गाल चुमते) पुनो मे उस पलका कबसे इन्तजार कर रहा हु.. जब हमारा मीलन होगा.. मे इस बातको लेकर बहुत अ‍ेक्साइटेड हु.. क्या तुम नही हो..?

पुनम : (सरमाते मुह दुसरी ओर करते हसते) मुजे नही पता.. चलोना नीचे.. सब क्या सोचेगे..

धिरेन : यार थोडी देरतो बैठो.. तुम्हारे साथ कीतना अच्छा लगता हे.. अभी चलेगे..हंम..

पुनम : (सरमाते हसते) अरे चलोना.. वरना.. आप..आप फीरसे बहेकने लगेगे..

धिरेन : (बैठेही बाहोमे भीचते) पुनो.. आप नही.. तुम.. तुम सीर्फ मेरी होने वाली बीवीही नही.. मेरी दोस्तभी हो.. मेरी गर्लफ्रेन्ड.. पुनो तुजे पता हे मे मेरी पुरी कोलेज लाइफ आपके साथ जीना चाहता हु..

पुनम : (सरमाते हसते) आप नही.. तुम कहो.. हें..हें..हें.. धिरेन बुरा मत मानना.. मे सादीके दिन तुमको खुब प्यार दुगी.. लेकीन अभी मे नही दे सकती.. अब चलोभी.. सब क्या सोचेगे..

कहेते पुनम खडी होगइ तब धिरेनकोभी मजबुरन खडा होना पडा.. आज पुनम बडीही सीफततासे धिरेनको मीलके वापस नीचे आगइ.. तब देवायत मंजुके पास बैठाथा तो पुनम आतेही उनके सामने देखते मंजुसे नजर बचाते आंख मारते सरमाती हसने लगी ओर विजयके साथ खेलने लगी.. तब देवायत खडा होके बहार सोफेपे बैठ गया.. तो थोडी देरके बाद धिरेनभी बाथरुममे जाकर अपने आपको सांत करके नीचे आगया ओर देवायतके पास बैठ गया..

देवायत : कहो धिरेन बेंकमे सब अच्छेसे सेट होगया..? वहा कोइ प्रोबलेम तो नही..?

धिरेन : (हसते) नही जीजु.. सब स्टाफ मस्त हे.. सब बडीया चल रहा हे.. सायद कल मुजे छुटी लेनी पडे.. अ‍ेकतो सादीकी छुटी लेनी हे ओर ये.. मम्मीकोभी नही भेज सकता क्युकी यहा मंजु दीदी अकेली होजायेगी.. अभी मेने मंजु दीदीके अलावा कीसीको बतायाभी नही हे..

देवायत : (उनकी ओर देखते) कीस बारेमे..? क्या हुआ..? बता मुजे..

धिरेन : (धीरेसे) जीजु अभी कीसीको मत कहेना.. प्लीज.. मौसीने मना कीया हे.. सब चीन्तामे लग जायेगे.. वो..वो..आज बेन्कमे था तब निर्मला मौसीका फोन आयाथा.. आपकी सासुमाका.. वो मौसाजीकी तबीयत अचानक बीगड गइ हे.. ओर वो होस्पीटलमे अ‍ेडमीट हे.. सायद बात कुछ गंभीर हे..

देवायत : (चोंकते धिरेसे) व्होट..? क्या केह रहा हे तु.. तो फीर मुजे फोन करना चाहीयेनां..? मुजे या भानुको फोन क्यु नही कीया..?

धिरेन : (धीरेसे) जीजु मेनेभी वोही कहा.. तो कहाकी मंजु ओर भावनाकी डीलीवरी हेतो कोइ फ्रि नही होगे.. ओर खामखा चीन्ता करेगे.. तो मुजे बुला लीया.. में कल सुबह जा रहा हु.. क्युकी वो मुजे अपने बेटेकी तराह मानती हे.. ओर मेराभी फर्ज हे की मेही उनका खयाल रखुगा..

देवायत : तुजे कही जानेकी जरुरत नही हे.. तु कल बेन्क चलाजा.. तु उनका बेटा हे.. तो फीर हम कोन हे..? तु कल छुटी मत लेना मे सब देख लुंगा.. ओर वेसेभी मंजु इधर हेतो कोइ दिकत नही हे.. बस अभी तु ये बात कीसीको मत कहेना खामखा सब परेसान होगे..

धिरेन : (हसते) ठीक हे जीजु.. मेने सीर्फ मंजुदीदीसे बात कीहे.. तो वोभी आपकोही कहेगी.. आपही चले जाना वेसे भी काफी टाइम होगया आप ससुराल नही गये.. हें..हें..हें..

चंदा : (बहार अ‍ेक डीबा लेकर आते) धिरेन.. तु ओर पुनो जरा काका की दुकानसे शीखंड लेकर आजा.. ओर जल्दी आना.. फीर इन लोगोको गांवभी जाना हे.. रातमे देरसे जाना ठीक नही..

धिरेन : (पुनमका नाम सुनतेही खुस होते) जी मम्मी.. दीजीये अभी आजायेगे..

चंदा : क्या अभी आजायेगे..? अरे बाबा सहेर जाना हे आरामसे बाइक चलाना.. पुनम साथमे हे.. डर जायेगी.. मुजे कोइ रीस्क नही चाहीये.. समजे..

धिरेन : (हसते) अरे मम्मी मे बाइक धिरे चलाता हु.. ओर मे रोजतो सहेर जाता हु..

चंदा : (हसते) चल चल ठीक हे.. ओर पुनोका खयाल रखना उसे कुछ खीला पीला देना.. हें..हें..हें..

कहातो पुनम रुममे बैठे सब सुन रहीथी तो सर्मसार होने लगी.. तब मंजुने उसे इसारा करते जानेके लीये कहा तब बडी मुस्कीलसे ना चाहते हुअ‍ेभी जानेके लीये उठ गइ.. ओर मंजुकी ओर देखते पीठमे अ‍ेक मुका मारते बहार जाने लगी.. तब मंजुकी हसी नीकल गइ.. तब मंजुको कुछ याद आगया तो पुनमको वापस बुलाते धीरेसे कहेने लगी..

मंजुला : (पुनमको रोकते पास बुलाते धीरेसे) पुनो सम्हालके.. अभी कुछ उल्टा सीधा मत करने देना.. तेरे पीछे बीलकुल पागइ होगया हे.. तुजे कुछ नही होगा.. बस ये दो तीन दीन अपना खयाल रखना..

कहातो पुनम अ‍ेक नजरसे गभराते मंजुकी ओर देखती रही.. तब मंजुने हसते हुअ‍े उसे बहार धकेल दीया तो पुनम चुपचाप बहार चली गइ.. तबतक धिरेन उनका बहार वेइट कर रहाथा तो जातेही पुनमने उसे कोइ सरारत ना करनेको केह दीया फीर दोनो बाइकमे सहेरकी ओर चले गये.. तब बहार होलमे खडी रहेते चंदा देवायतकी ओर देखके मुस्कराने लगी.. ओर धीरेसे इसाा करते उपरकी ओर चली गइ..

तब मंजुने बहार आतेही देवायतकी ओर देखते उपरकी ओर इसारा कीया ओर हसने लगी.. तो देवायतभी धीरेसे खडा होकर मंजुके पास चला गया.. ओर उसे बाहोमे भरते होंठ चुमलीया तब दया कीचनसे देखते हसने लगी ओर देवायत उपरकी ओर चला गया.. तब चंदा अपने रुममे दरवाजेके पास देवायतका वेइट कर रहीथी जेसेही देवायतको अंदर आते देखा जटसे दरवाजा बंध करके देवायतको वही बाहोमे भरते लीपट गइ..

फीर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. ओर चहेरेपे चुंबनोकी बारीस करदी.. तभी अचानक अलग होगइ ओर फटाफट अपनी सारीको नीकालने लगी.. तब देवायत उसे हसते हुअ‍े देखताही रहा.. तब वो अपने कपडे नीकालते बहुतही सरमाइ.. तभी अचानक देवायतने उसे अपनी गोदमे उठालीया.. ओर बेडके पास जाकर उसे पीठके बल सुला दीया तो चंदानेभी देवायतका हाथ पकडके उसे खीचके जटका मारातो देवायत सीधा चंदाके उपर गीर गया..

चंदा : (जोरोसे हसते) ओ..बापरे.. हें..हें..हें.. मेरा जानु.. कीधर रहेते हो.. कभी इस बीवीकी याद नही आती क्या..? अबतो जटसे हमारी सादी होजाये.. तो ये इन्तजार करनेकी जंजटही खतम होजाये..

देवायत : (उपर लेटेही होंठ चुमते) अरे बहोत आती हे तभीतो तुम दोनोको मीलने इधर आया हु.. ओर सादीतो हमारी होगइ हे तो फीर आती क्यु नही..?

चंदा : (सरमाते धीरेसे) जानु मंजु केह रहीथी मुजे बाकायदा फेरे वाली सादी करके उधर आना हे.. बाबु अब जल्दी करो उन दोनो आजाये इनसे पहेले मेरी आग मुजे चोद चोदके बुजादो.. क्या करु आपको देखतेही सभी इच्छा होने लगती हे.. पहेलेतो कैसे मुजे चोदनेके लीये आजातेथे.. चलो फटाफट अपने कपडे नीकालो मे अ‍ेसेही ठीक हु.. वरना वो आजायेगे तो कपडे पहेननेकाभी टाइम नही रहेगा..

तब देवायत खडा होजाता हे ओर अपने कपडे नीकालने लगता हे.. तब चंदा अपने ब्लाउसके सभी बटन खोलने लगती हे ओर ब्साउस नीकालके अपनी ब्राको नीकालने लगती हे जेसेही ब्रा नीकाली उनके दोनो गोरे बुब्स उछलके बहार आगये.. ओर वो लेटते अपना पेटीकोटभी नीकाल लेती हे तबतक देवायतभी पुरा नंगा होते चंदाके बगलमे लेट जाता हे.. तब चंदा उसे खीचके अपने उपर चडा लेती हे.. आज उसे चुदवानेकी बहुत जल्दीथी.. वो अब देवायतसे कम मीलनेकी वजहसे दीनभर दीन कामुक होने लगीथी..

चंदा : (सरमाते लंड पकडते) देखो.. जनाबको जब देखो तब हमेसा रेडीही रहेता हे.. क्या कभी ये नीचे नही बैठता..? मेतो जबभी इनको देखती हु हमेसा खडाही होता हे क्या उनको मेरी चुत इतनी पसंद आगइ हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां तो फीर.. तेरे जैसी हसीनाको देखतेही अंदर जानेके लीये मचलने लगता हे..

चंदा : (सरमाते हसते) बाबु देर मत करो पहेले इसे अंदर घुसादो येभी(चुत) इसे अंदर लेनेके लीये मचल रही हे.. पता नही आपने हमपे क्या जादु करदीया हे.. जटसे मेरी आगको सांत करदो.. मुजे आपका हथीयार अंदर लेना बहुतही पसंद हे.. देखना सादीकी रात मे तुमसे पुरी रात चुदवाउगी.. ओर अ‍ेक सरप्राइजभी दुगी..

कहेते चंदा लंड पकडके अपनी चुतपे घीसने लगती हे ओर जब लंड गीला होगया तो अपनी चुतके लव होलमे थोडा फसा देती हे फीर देवायतके गलेमे दोनो हाथ डालके उसे जोरोसे अपने तनसे चीपका लेती हे ओर उनके होंठ चुमने लगती हे.. तभी देवायतने कमरको अ‍ेक जोरका जटका मारा तो चंदाकी चीख नीकल गइ.. क्युकी देवायतका पुरा लंड उनकी चुतमे घुस चुकाथा.. ओर वो दोनो हाथसे चदर पकडते बेडपे पैर पटकाते मचलने लगी.. ओर अपना मुह बीगाडते इधर उधर गरदन घुमाने लगी..

चंदा : (दर्दसे धीरेसे) जानु.. क्या कीया आपने.. धीरे धीरे नही डाल सकते..क्या.. फाडदी मेरी चुत..

देवायत : डार्लींग क्या करु.. तुजे देखतेही मे कंट्रोल नही कर सकता.. मेभी जल्द तुजमे समा जाना चाहता हु

कहातो चंदाने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. तब देवायत उनके गलेमे मुह डालके चंदाको जोरोसे चोदने लगा.. तो चंदाभी उनके गलेमे हाथ डालते मदहोसीमे देवायतके सरको सहेलाते मजेसे चुदवाने लगी.. ओर देवायतके हर धक्केको आहे भरते जेलने लगी.. चंदाको देवायतका हर सोट.. अपनी बच्चेदानीसे टकराते महेसुस होने लगा.. ओर हर सोटके साथ उनकी चीखे नीकलने लगी.. जो नीचे तब सुनाइ देतीथी..

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दोनोही कामातुर होते चुदाइमे मसगुल होगये.. तब नीचेकी ओर मंजु ओर दया दोनो चंदाकी जोरोकी चीख सुनके सीडीयोके पास आकर खडी होगइ.. चंदाकी चीखे नीचे तक सुनाइ देरही थी.. जीसे सुनके दोनो हस रहीथी.. दोनोकी बडी इच्छाथी की उपर जाकर दोनोकी चुदाइ देखे..

लेकीन मंजुकी अभी इतनी ताकात नहीथी.. की वो सीडीया चढ सके.. ओर दया मंजुकी हाजरीकी वजहसे उपर नही जा सकतीथी.. तो दोनो नीचेसेही चंदाकी चीखे सुनते मजा ले रहीथी.. तब उपरकी ओर देवायत हाथके बल उचा होके चंदाकी जोरोसे धमासान चुदाइ कर रहाथा.. ओर चंदा जोरोसे सीसकारीया करते देवायतके लंडको अपनी चुतमे जेल रही थी..

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जब देवायतक अपना लंड उनकी बच्चेदानीकी जडतक घुसाकर चोदने लगा.. तब चंदा चदर पकडते चुदवाते हुअ‍े छटछपटाने लगी.. ओर उनके गलेसे आवाजही नीकलना बंध होगइ.. तभी वो देवायतको जोरोसे बाहोमे भीच लेती हे ओर उनका सर पकडते अपने गलेमे डालके अपनी कमरको उछालते जटके मारते जडने लगती हे..

तब देवायतको अपने लंडको भीगोते चंदाका बहुतही गरम पानी महेसुस हुआ.. तो उनका सरीर कांपने लगा ओर वो बहुतही उतेजीत होगया.. तभी चंदाकी चुतमे जडतक अपना लंड घुसाके कमरको जटके देने लगा.. तो चंदाभी कांपने लगी ओर देवायतसे अ‍ेकबार फीर चीपक गइ..

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देवायतको अपनी बाहोमे कसते ही अपनी बच्चेदानीपे गरम विर्य महेसुस करने लगी.. ओर उतेजनासे उनके मुहसे अ‍ेक हल्की चीख नीकल गइ.. फीर दोनोही सांत होगये.. तब चंदा देवायतकी पीठ सहेलाती बेसुध जेसी हालतमे पडी रही.. फीर दोनोही थोडी देर अ‍ेसे सांत पडे रहे दोनोही पसीनेसे तरबोर होचुके थे.. तब चंदाको होंस आयाकी दोनो अभीभी अ‍ेसेही पडे हे ओर अभी धिरेन ओर पुनम आजायेगे..

तब वो देवायतके सीनेपे हाथ रखते उनको अपने उपरसे हटानेकी कोसीस करने लगी.. तब देवायत सर उचा करते चंदाको देखता हे ओर चंदाके होठ चुमते उपरसे हटने लगा.. तो लंड बहार नीकलतेही चुतसे फच..की आवाज आइ ओर चुतसे दोनोका काम रस बहारकी ओर बहेते चंदाके पैरोसे होते चदरपे गीरने लगा तब चंदाकी चुत अभीभी फडफडा रहीथी..

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तो चंदा सर्मसार होते जटसे अपनी चडी खीचके चुतको साफ करने लगी तबतक देवायत बेडसे उतर गया ओर चंदा कुछ समजे उनसे पहेलेही वो चंदाको अपनी गोदमे उठाकर बाथरुमकी ओर चला गया.. फीर दोनोही सावरके नीचे खडे होगये ओर अ‍ेक दुसरेकी चुत लंडको साफ करते फीरसे बहेकने लगे..

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तो देवायतने वही चंदाको अपनी ओर खीच लीया ओर दोनोके होंठ फीरसे मील गये.. ओर अ‍ेक दुसरेके होठोका रसपान करते फीरसे बहेकने लगे.. तभी चंदा पलटके खडी होगइ ओर थोडी जुकके पीछे देवायतकी ओर वासना भरी नजरोसे देखने लगी तो देवायतने उनकी कमरको पकडते पीछेसे उनकी चुतमे लंडको घुसा दीया..

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ओर चंदाको पीछेसे कमर पकडके चोदने लगा ओर थोडीही देरमे दोनोके बीच धुआधार चुदाइ होने लगी.. काफी देर चुदाइके बाद दोनोही अकडने लगे ओर अ‍ेक बार फीर दोनो साथमे जड गये.. तब चंदा जटसे अलग होगइ तो पानीकी वजहसे लंड फीसलते ही फच..की आवाज आइ तब देवायतकी हसी नीकल गइ तो चंदा सरमसे पानी पानी होगइ ओर दांत पीसते मुस्कराते देवायतके सीनेपे अ‍ेक मुका जड दीया..

फीर दोनो नहाके बहार आगये ओर फटाफट कपडे पहेनके रेडी होगये.. तब चंदाकी चाल थोडी बदल चुकीथी.. वो थोडी लडखडाते चल रहीथी.. तब देवायतने अ‍ेक बार फीर उनको गले लगालीया ओर उनके होंठ चुम लीया तो चंदा जुठा गुसा करते देवायतके सीनेपे अ‍ेक मुका मार देती हे..

ओर हसते हुअ‍े जटसे नीचेकी ओर भाग गइ.. तो देवायत हसते हुअ‍े धीरे धीरे सीडीया उतरते नीचे आगया.. तब चंदा सीधे मंजुके रुममे चली गइ तो वहा मंजु ओर दया दोनो बेठकर बाते कर रहीथी.. जेसेही चंदा अंदर आइ तो मंजु दया उनको देखके जोरोसे हसने लगी..

दया : (जोरोसे हसते) मौसीजी क्या हुआ..? अ‍ैसे क्यु चल रही हो..? कुछ हुआ क्या..?

चंदा : (सर्मसार होते हसते) कमीनीओ हस क्यु रही हो..? वो..वो उपर पावमे मोच आगइ..तो..

मंजु : (जोरोसे हसते) अच्छा पावमे मोच आगइ.. की कही ओर आगइ.. हें..हें..हें.. दीदी क्यु जुठ बोल रहीहो आपके चीलानेकी आवाज यहा नीचे तक आ रहीथी.. हें..हें..हें..

चंदा : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) तो..तो. क्या हुआ पावमे मोच आगइ तो चीलाउगी नहीतो क्या करुगी..

दया : (हसते) अच्छा..? मौसी गभराइअ‍े नही.. मालकीन ओर हमभी अ‍ैसे चीलाती हे.. हें..हें..हें.. क्यु मालकीन..?

चंदा : (बेडपे बेठते आस्चर्यसे दयाकी ओर देखते धीरेसे) हमभी मतलब..? मंजु.. ये दया क्या बोल रही हे..?

मंजुला : (हसते धीरेसे) दीदी गभराइअ‍े मत.. मेनेही छुट दे रखी हे.. आपतो जानती हे हम ओरतोकी भी कुछ जरुरत होती हे.. दया सादीके बाद कुछही महीनोमे विधवा होगइ थी.. ओर वो रजीयाकोभी उनके पतीने दो सालमे तलाक देदीया तबसे दोनोही हवेलीमे काम कर रही हे.. दया हमारे रामुकाकाकी लडकी हे.. तो दोनो अपनी सरीरकी जरुरीयात देवुसे पुरी करती हे.. ओर मुजे कोइ अ‍ेतराभी नही हे..

चंदा : (आस्चर्यसे) मंजु तुम..? कीतना विशाल दीलहे तेरा.. मुजे भी स्वीकार करलीया..

मंजुला : दीदी अभी नही.. इस बारेमे हम फुरसतमे बात करेगे.. मुजे आपसे बहुत कुछ बताना हे..

दया : (आंखसे आंसु टपकाते) माफ कर दीजीये मेने आपसे इस तराह बात की.. क्युकी हम मालकीनसे कभी कभी अ‍ैसे मजाक कर लेती हे..

चंदा : (दयाको गले लगाते) दया कोइ बात नही तुमभी हम सबकी बहेन हो.. हम कहा तुजे नौकरानी मानते हे.. ओर तुजे हम सबको मालकीन कहेनेकी जरुरत नही हे हमे दीदी ही कहेके बुलाना..

मंजुला : (हसते) हां सुनां..? दीदी इनको कीतनी बार कहा हे फीरभी मुजे मालकीनही कहेती हे..

चंदा : (हसते) अब मालकीन कहेतो मुजे बताना टांगे तोड दुगी इनकी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते खडे होते) दीदी चलो हमारे पती नीचे आके अकेले बैठेहे इनको कंपनी दे दो..

चंदा : (सरमाते हसते) तुही जाके कंपनी दे.. मे उनको उपर कंपनी देकर ही आइ हु.. वो भी दो बार.. हें..हें..हें.. हालत बीगाडदी मेरी.. मुजे कंपनी देकर ओर रीस्क नही लेना.. हें..हें..हें..

कहातो तीनो जोरोसे ठहाका मारते हसने लगी तब मंजु देवायतके पास आकर उनसे सटकर बैठ गइ.. तो चंदा ओर दया दोनोही देवायतकी ओर कातील स्माइल करते कीचनमे चली गइ.. तभी धिरेन ओर पुनमभी शीखंड लेकर आगये.. पुनमने कहाथा इसीलीये रास्तेमे धिरेनने कोइ सरारत नहीकी.. दोनोही प्यार भरी बाते करते रहे.. तब धिरेनने अपने फ्युचरके प्लानींगके बारेमे पुनमसे ढेर सारी बाते करली.. ओर दोनो घर आगये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७३

कहातो तीनो जोरोसे ठहाका मारते हसने लगी तब मंजु देवायतके पास आकर उनसे सटकर बैठ गइ.. तो चंदा ओर दया दोनोही देवायतकी ओर कातील स्माइल करते कीचनमे चली गइ.. तभी धिरेन ओर पुनमभी शीखंड लेकर आगये.. पुनमने कहाथा इसीलीये रास्तेमे धिरेनने कोइ सरारत नहीकी.. दोनोही प्यार भरी बाते करते रहे.. तब धिरेनने अपने फ्युचरके प्लानींगके बारेमे पुनमसे ढेर सारी बाते करली.. ओर दोनो घर आगये....अब आगे

तब पुनम देवायतकी ओर कातील स्माइल करते शीखंड लेकर कीचनमे चली गइ.. तो धिरेनभी नीचे फ्रेस होने चला गया तब मंजु देवायतके कंधेपे सर रखके बैठी थी.. ओर दोनो प्यार भरी बाते कर रहेथे.. तब धिरेनभी आके बैठ गया.. तबभी मंजु देवायतके कंधेपे सर रखके बाते कर रहीथी तभी खानाभी बन गया ओर दया पुनम सब खाना डाइनींगपे रखने लगी.. ओर चंदाने सबको बुला लीया..

सभी डाइनींग टेबलपे आगये तब मंजु देवायतके पास बेग गइ तो दुसरी ओर पुनमभी देवायतके साथ बेठ गइ तब मजबुरन धिरेनको उनकी मम्मीके साथ बेठना पडा ओर दया सबको खाना देने लगी.. जब खाना देदीया तो चंदाने उसेभी सबके साथ बीठा दीया ओर सब डीनर करने लगे तब खाना खाते पुनम देवायतके पैरको सहेलाने लगी तभी उनके पेरपे धिरेनका पैर महेसुस हुआ जो उनके पैरको टच कर रहाथा तब पुनम समज गइ ओर सरमाते खाने लगी उसने अपना पैर नही हटाया.. ओर सबने डीनर फीनीस कर लीया..

फीर कुछ देर बैठे बाते करते रहे तबतक अंधेरा हो गयाथा.. तो मंजुने पुनमकी वजहसे देवायतको घर जानेको केह दीया तो चंदा देवायतकी ओर देखते कातील स्माइल करने लगी ओर देवायत पुनमको लेके बहार नीकल गया तब दया वही रुक गइ ओर देवायत पुनम कारमे आके बेठ गये तब देवायतने कार अपने गांवकी ओर जानेदी तभी पुनम देवायतके कंधेपे सर रखके बेठ गइ ओर बाते करने लगी..

पुनम : भाइ कल मे नही आउगी.. वो..वो धिरेनके साथ कुछ अजीबसा लगता हे.. मुजे नही लगता मे उनके साथ रेह पाउगी, उनको मुजसे मीलन करनेकी बहुत जल्दी हे.. उनको बहुत आग लगी हुइ हे.. भाइ मे आपके साथ रहेना चाहती हु..

देवायत : पुनो पागल मत बन.. धिरेन तेरा होने वाला पती हे.. ओर तुमसे प्यारभी करता हे.. हमे इन सब चीजोको अ‍ेक्सेप्ट करना पडेगा.. कुुछ सालोकीतो बात हे.. ओर तेरी तो बाबाके साथ सब बाते हुइ हे.. बता कीतने साल उनके साथ रहेना हे.. ओर तु चीन्ता मत कर.. मे वहा आता जाता रहुगा.. आज नही तो कल.. जब तु उनकी बीवी होजायेगी तबतो तुजे उनके साथ सबकुछ करनाही पडेगा जो अ‍ेक बीवीका फर्ज होता हे..

पुनम : भाइ.. बाबा कुछ दो तीन सालका केह रहेथे.. फीर मे आपके पास चली आउगी.. मुजसे आपसे दुर नही रहा जायेगा.. भाइ ये दो रात हमारे पास हे.. इनमे आप मुजे प्रेगनेन्ट करदो.. वरना मे धिरेनको नही रोक पाउगी.. आज बडी मुस्कीलसे पीरीयडका बहाना बनाके उनसे छुटी हु.. उनको मे ज्यादा दीन मुजसे दुर नही रख पाउगी.. भाइ कुछ ओर हो जाये इनसे पहेले आप मुजे प्रेगनेन्ट करदो..

देवायत : बेबी.. सादीके बादतो तुजे ये सब करने देनाही पडेगा.. ओर तु बच्चेकी चीन्ता मत कर.. आजही मुजे पता चला हेकी तु प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. बस ये दो दीन सीर्फ हमे मजेही करने हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (जटसे अलग होते आस्चर्यसे) क्या..? मे प्रेगनेन्ट होगइ हु..? ओर आपको कैसे पता चल गया..? अ‍ेक मीनीट..(कुछ सोचते) भाइ.. कही आपकी भाभीसेतो इस बारेमें बात नही हुइ..? अ‍ेक वोही हे जो सब बाते जान जाती हे.. भाइ सच बताना भाभीसे आपकी इस बारेमे बात हुइ हेनां..?

देवायत : (हसते) हां.. आज उसीने मुजे बतायाकी उनका अंस तेरे गर्भमे आ चुका हे.. पुनो मेने तुजे प्रेगनेन्ट कर दीया हे.. तेरे गर्भमे हमारा बच्चा आ चुका हे.. अ‍ैसा कहा उसने.. ओर उनको हमारे बारेमे सब पता हे.. तु फीकर मत कर उनको हमारे इस रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराजभी नही हे.. अब हम दोनो भाइ बहेन खुलकर प्यार कर सकेंगे.. अब मे तेरी भाभीसे कहेकर भी तुजे मीलने वहा आ सकता हु.. तब हम दोनो खुब मजे करेगें..

पुनम : (खुस होते देवायतसे लीपटके कीस करते) ओह..भाइ आइ लव यु.. लव यु सो मच.. भाभी कीतनी अच्छी हे.. मुजे पताथा हमारी सब बाते वो जानती होगी.. ओर यही हुआ.. अब मुजे कोइ डर नही हे.. अबतो मे आपसे खुलके प्यार कर सकुगी.. बस अब सीर्फ मेरी सासका खयाल ही रखना हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) पागल मत बन.. सीर्फ मंनुको पता हे तेरी सासको नही.. हम कोइ खुलके प्यार नही करेगे.. पुनो मंजुने कहा हे.. ये दो रातमे आप पुनोको खुब प्यार करना ओर उसे तृप्त कर देना.. आगे जाके पुनम ओर चंदामौसी ही आपको सम्हालेगी.. तब सब ठीक होजायेगा..

पुनम : (खुसीसे सोक्ट होते हसते) क्या..? भाभीने अ‍ैसा कहा..? भाइ तबतो आपको मजे खुब प्यार करना पडेगा केह देती हु.. वरना मे भाभीसे सीकायत कर दुगी हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां इतना प्यार करुगाकी तु कल साम तक बेडसे उठ नही पायेगी.. हें..हें..हें.. पुरा दीन आराम करते रहेना.. हें..हें..हें.. ओर वेसेभी कल मुजे मेरे ससुराल जाना पडेगा.. वहा बापुजीकी तबीयत ठीक नही हे.. बस अ‍ेक बार तेरी सादी होजानेदे फीर देखना.. वहा आकर तुजे खुब रगड रगडके चोदुगा.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते कातील नजरोसे देखते) छी.. कीतना गंदा बोलते हो आप.. ठीक हे दीनमे कही भी घुमो.. रातको आप मेरे पास होने चाहीये.. केह देती हु.. ओर भाइ सादीके बादभी हप्तेमे कमसे कम मुजे पांच दीन मीलोगे.. येभी केह देती हु.. दिनमे बीवी बनकर आपका इन्तजार करुगी ओर रातमे बहेन बनकर आपका बीस्तर गरम करते आपसे खुब चुदवाउगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हें.. हें..हें.. तुभी कुछ कम नही हे.. ठीक हे.. चुदवाना.. ओर हुकुम तो अ‍ेसे दे रही हे जैसे मंजु देती हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (कातील स्माइल करते) हां तो फीर..? जीस तराह वो आपकी बीवी हे उसी तराह मेभी आपकी बीवी हु.. ये बात आप भुलना नही वरना मुजसे बुरा कोइ नही होगा.. हें..हें..हें..(जोरोसे हसते)

देवायत : (हसते) चल ठीक हे.. तुभी हुकुम चलाना.. फीर अ‍ेक ओर आजायेगी हुकुम चलाने वाली.. हें..हें..हें.. वोभी कुछ कम नही हे बीलकुल तेरी तराह मेरे पीछे पागल हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (देवायतकी ओर नैन नचाते हसते) भाइ.. सच बताना.. मे जब गइथी तबतो वो ठीकसे चल रहीथी.. तो क्या आप दोनोने.. मतलब.. दोनोका मीलन हुआ..? जब मे आइ तब वो थोडा लंगडाके चल रही थी.. हें..हें..हें.. भाइ सच बताना.. आपने उनके साथ सेक्स कीया हेनां..?

देवायत : (हसते) हां पुनो.. तुम दोनोके जाते ही वो उपर अपने रुममे मुजे इसारा करते लेगइ गइ.. ओर मेने उनको दो बार जमकर चोद लीया तो बीचारीकी चाइही बदल गइ.. हें..हें..हें.. वो आजभी अ‍ेक कुआरी लडकीकी तराह चुदवाती हे.. बेचारीकी हालत खराब होगइ.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) हां तो हो ही जायेगीनां.. आपके गधे जेसे हथीयारको अंदर लेना कोइ बच्चोका खेल नही हे.. आपनेतो पहेली बार मुजे बेहोस ही कर दीयाथा.. कीतना बडा हथीयार हे आपका.. मुजे बेहोसी मेभी चोद लीयाथा.. आप मेरीभी हालत खराब कर देते हो.. लेकीन भाइ मजाभी बहुत आता हे.. जी चाहता हे बस दीन रात आपसे प्यार करती ही रहु.. आप क्या मस्त चुदाइ करते हो.. तभीतो सभी ओरते आपके पीछे पागल हे.. बेचारी वो रश्मीभाभी दो दीन आराम करती रही.. आप कीतनी जोसमे चुदाइ करते हो..

देवायत : पुनो याद आया.. हम दो तीन दीनसे रश्मीसे नही मीले.. वोभी मेरी बीवी हे.. चल जरा देखके जाते हे क्या कर रही हे वो..

पुनम : भाइ देर नही होजायेगी..? आप उसे कल मील लेना.. चलोना घर चले जाते हे.. आपनेतो बातोसेही मुजे गरम करदीया.. भाइ बहुत चुदवानेकी इच्छा हो रही हे.. वो धिरेननेभी गरम करदीया.. भाइ उनको बहुत आग लगी हुइ हे.. मे क्या करु..?

देवायत : अब तेरा होने वाला पतीहे तो हम क्या कर सकते हे.. तु क्यु चीन्ता करती हे अ‍ेक दो सालकीतो बात हे.. फीर मेरे पास चली आना.. तब तुजे कोइ पुछेगा भी नही.. अब उसे सादी तक नही मीलना.. ओके..?

पुनम : (सरमाते) भाइ जबतक सादी नही होती तबतक आपको मुजे खुब प्यार करना पडेगा केह देती हु.. आप रश्मीभाभीसे बात करलेना.. मे उनके वहा चली जाउगी तब आप आजाना.. आप कार उधर लेलो..

तब देवायत कार सीधी रश्मी यानी राघवके घर लेजाता हे.. तब पुरे गांवमे अंधेरा छाया हुआ था.. कुछ घरोमे हल्की रोशनी नजर आ रहीहे तब देवायत ओर पुनम कारको बहार खडी करके अंदर चले जाते हे तब पुनम गेइट अच्छेसे बंध करलेती हे तब रश्मी राघव वाले रुममे अपने बेडपे लेटे कुछ कीताब पढ रहीथी.. तो देवायत ओर पुनमको देखते जटसे खडी होगइ ओर खुसीसे उछलते हसते हुअ‍े देवायतके गले लग गइ..

रश्मी : (हसते) क्या बात हे.. आज इस बीवीकी याद आगइ..? वो भी मेरी इस बहेन लाइ होगी.. तभी जनाब आये हे.. हें..हें..हें.. क्यु ठीक कहानां पुनो..?

पुनम : (हसते सरारतसे जुठ बोलते) ओर नहीतो क्या..? दीदी येतो आनेकोही तैयार नही थे.. मे जबरदस्तीसे इनको खीचके लाइ हु.. हें..हें..हें.. लो करलो प्यार हमारे पतीको..

देवायत : (हसते) अच्छा.. तो फीर आज मे मेरी इस बीवीके साथ इधरही रुक जाता हु हें..हें..हें..

पुनम : (जटसे हसते) नही नही नही.. दीदी.. मे नही.. ये मुजे जबरदस्ती इधर लाये हे.. हें..हें..हें..

कहातो तीनो हसने लगे तब रश्मीने देवायतके होंठ चुमलीये ओर अलग होकर पुनमको गले लगा लीया फीर उनका हाथ पकडते बेडपे बीठादीया तब देवायत वही राघवके बेडके पास पडी चेरपे बैठ गया ओर राघवकी ओर देखते हसते हुअ‍े उनका हालचाल पुछने लगा तो राघव गुसेसे तीलमीलाने लगा.. तब..

रश्मी : देखा देवु.. खटीया मे पडे हे हीलनेकी भी ताकात नही हे.. ओर गुसातो देखो.. (राघको) देखलो इनको अच्छेसे.. अब यही मेरा पती हे.. जो मुजे मां बननेका सुख देगा.. आज मे इन्हीकी वजहसे पेटसे हुइ हु.. ओर मुजे मुनीमकी जगाह नोकरीभी दे दी.. अब आपके सब करतुत मे गांव वालोके सामने लाउगी.. सबकी जमीन वापस कर दुगी.. बहुत दुख दीये हां गांव वालोको.. अब पडे भुगत रहे हे..

पुनम : (धीरेसे) भाभी छोडीयेना इनको.. अपनी करतुतोकी सजातो इनको मील गइ हे..

रश्मी : पुनोदीदी आप नही जानती.. इन कमीनेने मेरे साथ ओर गांवकी ओरतोके साथ क्या क्या जुल्म कीये हे.. अ‍ेकभी लाचार ओरतको नही छोडा.. यहा तक की बेचारे मजदुरोकी बीवीयोकोभी नही छोडा.. सामनेसे पैसे देके ब्याजके बदले उनका फायदा उठाते थे.. कइ ओरतोको तो यहा बुलकर रेपभी करलीया हे.. अपनी बहेनके साथभी इनका चकर था.. ओर मेरे पले पड गये.. अब पडे सब भुगत रहे हे..

कहा तो राघव रश्मीकी ओर देखते गुसेसे तीलमीलाने लगा.. तो रश्मी राघवके सामनेही हसती हुइ देवायतकी गोदमे बेठ गइ.. ओर गलेमे दोनो हाथ डालके देवायतके होंठ चुमने लगी.. तब देवायतभी रश्मीके बुब्स मसलते होंठ चुमने लगा तो राघव दुसरी ओर मुह करते गुसेसे आग बबुला होने लगा.. तो पुनम दोनोको देखते सरमाते हसती रही.. तभी रश्मी गोदसे उठ जाती हे ओर खडी होके अपनी सारी नीकालने लगती हे.. तो राघव उसे घुरके देखने लगा..

तो रश्मी उनके सामने देखते ब्लाउसभी नीकालने लगी तभी देवायतने उनकी पेटीकोटका नाडाभी खीच लीया.. तो पेटीकोट सरकते नीचे गीर गया तब रश्मी सीर्फ टु पीसमेही रेह गइ.. जेसे कोइ अप्सरा दीखती हो.. ओर उसने देवायतका हाथ पकडके खडा करदीया ओर कातील स्माइल करते देवायतकी ओर देखते उनके सर्टके बटन खोलने लगी.. फीर पेन्टकी क्लीप खोलके उसेभी नीकाल दीया ओर हाथ पकडके देवायतको वही बेडकी ओर लेगइ..

रश्मी : जानु.. अ‍ेक बार इनके सामने ही मुजे चोदलो.. ओर मेरी बहुत इच्छाभी हे.. दीदी क्या आपभी हमारे साथ सामील होगी..? आइअ‍ेना अब हमारे बीच कैसा पर्दा..हम दोनो मीलकर हमारे पतीको खुब प्यार करेगी..

पुनम : (सरमाते हसते) नही दीदी आपही प्यार करलो.. हमतो घर जाकेही सब करेगे.. आज पुरी रात बाकी हे.. मे इनको छोडने वाली नही हु.. इनको आज सोनेही नही दुगी.. हें..हें..हें..

रश्मी : (बेडपे पीठके बल हसते हुअ‍े लेटते) हां.. भाइ.. अब भाभी नही हे तो दोनोके तो मजे हे.. आपनेतो अभी नइ नइ सादी कीहे.. तो हर रात सुहागरात होगी.. दीदी आपकी सादीसे पहेले जी भरके मजे ले लो.. फीर पता नही ये कब आपके हाथ आयेगे..

कहातो पुनम अ‍ेकदम सरमा गइ ओर मुह दुसरीओर घुमाते मुस्कराती रही.. तब देवायतने रश्मीकी ब्राभी नीकालदी ओर उनकी पेन्टीमे उंगलीया फसाके खीचते नीकालने लगा.. फीर उनकी चडीभी नीकालदी तब देवायतका वीकराल लंड रश्मीकी चुत देखके जटके मारने लगा.. ओर देवायत रश्मीके उपर जुकते लेट गया तब रश्मीने उसे जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया ओर उनके होंठ चुमने लगी..

तब देवायतभी उनके बुब्स दबाते रश्मीका साथ देने लगा.. तब उनका लंड रश्मीकी चुतपे ठोकर मारते अपने बीलमे घुसनेका रास्ता ढुंढने लगा.. तो रश्मीकी चुतभी लंडको अपने बीलमे लेनेके लीये फडफडाते पानी छोडने लगी.. दोनोही आजु बाजु सब कुछ भुलकर अ‍ेक दुसरेके मुहमे मुह डालके कामातुर होगये.. तब देवायतके लंडने अपने बीलका रास्ता अपने आप ढुंढ लीया..

तो देवायतने कमरको अ‍ेक जटका मारदीया तभी रश्मीकी चीख नीकलके देवाफतके मुहमे दब गइ ओर उनकी आंख बडी होगइ ओर देवायतको देखने लगी.. तब देवायतने मुह हटालीया ओर हाथके बल उचा होगया.. तब रश्मी जोरोसे सीसकारीया करने लगी ओर छटपटाते दर्दसे तीलमीलाती रही.. तब देवायत उसे कमर हीलाते जोरोसे चोदने लगा तो रश्मी अपने मुहपे हाथ रखते हल्कासा चीखने लगी.. ओर उनकी आंखसे आंसु नीकलने लगे..

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पुनम : (देखते हसते) भाइ.. धीरे करोना.. अ‍ैसे जानवरोकी तराह भाभीको क्यु चोद रहे हो? भाभीको दर्द हो रहा हे..

देवायत : (चोदते) बेबी क्या करु इस बीवीको देखके पागल हो जाता हु.. मुजसे रहा नही जा रहा.. जी चाहता हे तेरी तराह इनको भी दीन रात चोदता ही रहु.. तुभी आजाना.. आज दोनोको यही पटक पटकके चोदलु..

रश्मी : (दर्दसे मुह बीगाडते धीरेसे चुदवाते) पुनमदीदी.. इनको जोभी करनाहे करने दीजीये.. मेनेही इसे अ‍ैसे चोदनेके लीये छुट दे रखी हे.. मुजे अ‍ैसे वाइल्ड सेक्सही पसंद हे.. क्या मस्त चोदते हे.. भलेही मुजे दर्द हो.. ओर आपभी आजाओ.. हम दोनो मीलकर पुरी रात इनसे चुदवायेगी..

पुनम : (सर्मसार होते हसते) नही भाभी.. अभी तो आपही चुदवालो.. मे घर जाकर चुदवाउगी..

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देवायत रास्तेमे पुनमसे चुदाइकी बाते करते गरमतो थाही.. तब देवायत रश्मीको जोरोसे कमर हिलाते चोदने लगा तो रश्मीभी चीखे मारते देवायतसे कमर उछाल उछालके चुदाइमे साथ देने लगी.. ओर दोनोके बीच धमासान चुदाइ होने लगी तब रश्मी ज्यादा देर टीक नही पाइ ओर देवायतको अपनी ओर खीचके कसके बाहोमे भीचते लीपलोक करलेती हे तो देवायतका सरीरभी अकडने लगा.. ओर उसने रश्मीकी चुतमे लंडको जडतक घुसा दीया.. ओर कमरको रुक रुककर जटके मारने लगा.. ओर दोनोही अ‍ेक साथ पानी छोडते जडने लगे..

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तब रश्मी देवायतके होंठ भीचते देवायतकी पीठ सहेलाने लगी.. ओर अपने गर्भपे देवायतका गरम गाढा पानी महेसुस करने लगी.. जब देवायतने होंठ छोडातो रश्मीके होंठोपे खुन उभर आया ओर उनके होंठ सुजने लगे तब देवायत रश्मीके उपरसे हट गया तो लंड फचच... आवाजके साथ बहार नीकल गया ओर वो बाथरुममे चला गया तब रश्मी कोनीके बल बेठते अपनी पेन्टीसे चुत साफ कर रहीथी.. तब पुनम उनके पास बेठते सामने देखते सरमाती हस रहीथी.. तब देवायत बहार आके अपने कपडे पहेनने लगा तो रश्मी अ‍ेसेही वापस बेडपे लेट गइ..

पुनम : (हसते) भाभी होगइ तसली.. देखो आपके होंठ सुज गये हे इतनी तकलीफ से क्यु करती हो..?

रश्मी : (सरमाते हसते होंठ चेक करते) पुनोदीदी आप नही समजोगी.. ये बहुत कम मेरे हाथमे आतेहे.. तो इनका दीया दर्द मुजे प्यारका अहेसास करवाते रहेता हे.. ओर इनकी यादोमे दीन नीकल जाता हे.. बस.. आपभी अपनी सादीके बाद कभी अ‍ैसी ट्राइ करना.. बहुत मजा आयेगा.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) भाभी तबकी तब देखेगे अभीतो आप आराम करलो.. अब हम घर चलते हे..

फीर दोनोही वहासे नीकलकर अपनी हवेलीपे आजाते हे.. तब हवेलीपे आज कोइ नहीथा.. ओर रजीया अकेलीथी तब मनही मन खुस होने लगीकी चलो आज दया नही हेतो बीना डरके पुरी रात लखनसे चुदवायेगी.. यही सोचते आज वो अच्छी तराह सज सवरके तैयार होगइ ताकी लखनको रीजा सके.. अबतक वो लखनसे चारसे पांच बार चुद चुकीथी.. ओर लखनके लंडसे आदी होगइ थी.. अब उसेभी लखनका साथ अच्छा लगने लगाथा.. ओर हमेसाके लीये लखनके साथ जुडनेका सपना देखने लगीथी..

क्युकी देवायत अब उसे बहुतही कम टाइम दे पाता था.. अभी पुनम देवायत नही आयेथे तब सामको लखन घरपे आया तो रजीयाको अकेला देखके पुछ लीया तो रजीयाने उसे बता दीयाकी सब कहा गये हे.. कहेके वो कीचनमे खाना नीकालने चली गइ.. तब लखन सुनकर बहुतही खुस हो गया.. ओर फ्रेस होकर सीधा कीचनमे चला गया.. ओर जातेही रजीयाको पीछेसे बाहोमे भरके दबोच लीया तब रजीया सरमाते हसते हुअ‍े पलट गइ.. तो लखन उसे अपनी बाहोमे कसके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा..

रजीया : लखनभैया प्लीज.. अभी नही वो लोग आजायेगे.. हम रातमे करेगेनां.. आज दयाभी नही हे.. पुरी रात आपके साथ रहुगी.. छोडीयेनां मुजे.. अभी मुजे काम करने दीजीये.. फीर मुजे प्यार करलेना..

लखन : (कामुक्तासे) बस.. रजीया अ‍ेक बार.. अ‍ेक बार करनेदे.. आज तु कयामत लग रही हे.. मुजे बोलना चाहीयेना घरपे कोइ नही हे.. मे जल्दी आजाता.. बस अ‍ेक बार चोदलेने दे.. फीर रातमे आरामसे करेगे.. तुजे अकेली देखके बहुत मन हो रहा हे.. अभी करलेगे.. चलनां.. क्या मस्त लग रही हे तु..

कहातो रजीया सर्मसार होते मुस्कराने लगी.. ओर लखनको चुमनेमे साथ देने लगी.. उनको पताथा अभी लखन उसे चोदे बीना मानने वाला नही हे तब उनकीभी चुत फडफडाते पानी छोडने लगी.. ओर वो लखनके होंठ चुमने लगी.. तब लखन पागल जेसा होगया ओर रजीयाका टोप खीच लीया तो वो फट गया ओर रजीयाके बुब्स बहार जांकने लगे तभी लखनने उनका लोअर ओर चडीभी खीचके नीकाल दी..

ओर खुदने भी फटाफट पेन्ट नीकालदी तब रजीया समज गइकी ये उस्े चोदे बीना मानने वाला नही हे अबतो मेरी कुटाइ करतेही मानेगा.., ओर लखनने रजीयाको वही जुकाके घोडी बना लीया.. तब रजीयाभी लखनका साथ देते कीचनका प्लेटफोर्म पकडते जुक गइ.. ओर होने वाले हमलेके लीये तैयार होगइ.. तभी लखनने लंड कपडते पीछेसे चुतमे घुसा दीया तो रजीया दर्दसे मुह बीगाडने लगी..

ओर कीचनका प्लेटफोर्म कसके पकडलीया.. तब लखन उनकी कमरको पकडके सोट मारते रजीयाको चोदने लगा ओर रजीया जुकते चुदवाने लगी.. तब थोडी देरके बाद उनकोभी मजा आने लगा ओर वो सीसकारीया करते अपनी कमरको पीछे धकेलते चुदवाने लगी.. रजीयाभी बहुत कामुक्त ओरत थी.. ओर चुदवानेकी काफी सौकीनभी थी.. तब आज उजकी पहेली बार जबरन ओर जबरदस्त चुदाइ हो रहीथी..

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आज लखन उसे काफी देर तक खडे खडे चोदता रहा तो रजीयाभी खुस होने लगी.. तभी अचानकही लखन तेज चोदने लगा तो रजीयाकी हालत पतली होने लगी ओर ओर दोनोही अ‍ेक साथ जडने लगे.. तब रजीया मनही मन खुस होगइ की चलो आज उनकी अच्छेसे चुदाइ हुइ हे ओर दोनो अलग होगये.. तब रजीया अ‍ेक पैर उचा करते अपनी चडीसे चुतको साफ करने लगी ओर सरमाते हसती रही.. तो लखनभी खुस होके हसता रहा.. ओर अपना लंड पोछते चडीमे अ‍ेडजेस्ट करने लगा.. तभी..

रजीया : (सरमाते हसते) लखनभैया आप बहुत नोटी हो.. अ‍ैसेभी कोइ करता हे.. हम रातमे आरामसे प्यार करतेनां.. अबतो दया मौसीके घर गइ हे तो मे अब अकेली ही हु.. ओर सायद आप दोनोकी सादीके बाद मे अकेलीही रहुगी.. दयाभी सायद पुनमदीदीके साथ जा रही हे..

लखन : (बाहोमे भरते) चलो अच्छा हे.. रजीया आज तुम अकेली थी तो दो पहोरको मुजसे कहा क्यु नही..? मे पहेलेही आजाता.. आज बहुत इच्छा हो गइथी.. ओर अबतु मुजे बहुतही अच्छी लगने लगी हे.. पता नही तुजे देखते मे पागल होजाता हु.. कही मुजे तुमसे प्यारतो नही होगया..? क्या मेरी सीक्रेट बीवी बनेगी..?

रजीया : (सरमाते हसते) लखनभैया हमतो आपकी नौकरानी हे.. हमारे अ‍ेसे नसीब कहा जो आप हमे प्यार करने लगे.. मुजे बीवी बनालीयातो कही मालीकको पता चल गयातो आपकोतो कुछ नही कहेगे.. लेकीन हमे मार मारके नोकरीसे जरुर नीकाल देगे.. इसीलीये ये प्यार ब्यारका चकर छोडीये.. में कहा आपको चुदवानेके लीये मना कर रही हु.. जबभी मन करे मुजे इसारा करदीजीयेगा मे हाजीर हो जाउगी.. तब जी भरके मुजे चोद लीजीयेगा.. अब मुजेभी आपसे चुदवानेमे बहुत अच्छा लगता हे..

लखन : (अपनी पेन्ट पहेनते) नही रजीया.. हमने तुम दोनोको कभी नौकरानी नही माना.. हम तुम दोनोको अपने घरकी सदस्यही मानते हे.. तु अपने आपको नीचा मत समज.. ओर सच कहु तो मुजेभी तुम्हारी आदत पड गइ हे.. जब मे तुजे दीनमे अ‍ेक बार चोद नही लेता मुजे कही चेइनही नही मीलता.. सच केह रहा हु..

रजीया : लखनभैया अब आपकी सादी होने वाली हे.. जब लताभाभी आजायेगी ओर उनसे हर रात चुदाइ करने लगोगे तब ये रजीयाको भुल जाओगे.. इसलीये केह रहीहु अपने मनसे ये प्यारका भुत उतारदो..

लखन : नही रजीया मुजे सचमे तुमसे प्यार हो गया हे.. ओर तबकी तब देखेगे.. लेकीन मे तुजे अ‍ैसेही प्यार करता रहुगा पहेले तुजे इस नजरसे नही देखाथा तबकी बात अलग हे.. लेकीन अब तु मुजसे अ‍ेक बीवीकी तराह चुदवाती हे ओर मुजे सब सीखा दीया.. तो मे तुजे अब नही छोड सकता.. तुम मुजे प्यार करो या ना करो.. मे तुमसे प्यार करता रहुगा.. भलेही लता आजाये.. मे तुजे नही भुलुगा.. ओर इसी तराह तुजे प्यार देता रहुगा.. आइ प्रोमीस.. ओर जरुरत पडी तो मे तुमसेभी सबसे जुपकर सादी करलुगा..

कहेते लखन कीचनसे बहार नीकल गया तो रजीयाभी भावुक होकर अपने कपडे पहेनने लगी तब उनका टोप फटा हुआ पाया तो वो अपने रुममे जाकर चेन्ज करके आगइ.. तबतक लखनभी डाइनींगपे आकर बैठ गया ओर रजीया खाना नीकालने लगी तो लखनने उनकाभी खाना नीकालने कहा ओर अपनी गोदमे बेठनेके लीये कहा तो रजीया सरमाते लखनकी गोदमे बेठकर उसे खाना खीलाते खुदभी खा रहीथी..

जब खाना फीनीस कीया तब लखनने रजीयाको भाइके आजानेके बार उपर तैयार होकर आनेको कहा तो रजीयाने सरमाते हसकर हां मे गरदन हीलाके हां केह दीया.. ओर मनही मन बहुत खुस होने लगी.. क्युकी आज लखनने उनसे प्यारका इजहार कीया जो वो पहेलीबार कीसीका प्यार पा रहीथी.. ओर मनही मन लखनको समर्पीत होनेका सोचते उनके सपने देखते देवायत ओर पुनमका वेइट करते बेठी थी..

तभी देर रात देवायत ओर पुनम आगये तब रजीयाने सब दरवाजे अच्छेसे बंध करलीया तब पुनमने उसे दोनो खाना खाकर आयेहे कहा.. ओर रजीयाको सोनेके लीये बोल दीया ओर देवायत पुनम अपने अपने रुममे चले गये.. जैसे कोइ अ‍ेक दुसरेसे अन्जान हो.. तब रजीयाभी अपने रुममे चली गइ ओर नहा धोके बाथरुमसे बहार आइतो उसे अपनी सादीका जोडा याद आगया.. तो उनके चहेरे पे सरमसे स्माइल आगइ ओर वो सादीके कपडे नीकालके पहेनने लगी.. फीर अच्छेसे शींगार करते तैयार होने लगी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७४

तभी देर रात देवायत ओर पुनम आगये तब रजीयाने सब दरवाजे अच्छेसे बंध करलीया तब पुनमने उसे दोनो खाना खाकर आयेहे कहा.. ओर रजीयाको सोनेके लीये बोल दीया ओर देवायत पुनम अपने अपने रुममे चले गये.. जैसे कोइ अ‍ेक दुसरेसे अन्जान हो.. तब रजीयाभी अपने रुममे चली गइ ओर नहा धोके बाथरुमसे बहार आइतो उसे अपनी सादीका जोडा याद आगया.. तो उनके चहेरे पे सरमसे स्माइल आगइ ओर वो सादीके कपडे नीकालके पहेनने लगी.. फीर अच्छेसे शींगार करते तैयार होने लगी....अब आगे

इधर पुनमभी नहाने चली गइ देवायतभी रश्मीको चोदकर आयाथा तो वोभी नहाने चला गया.. फीर बहार आकर दोनोने अपने अपने नाइटके कपडे पहेन लीये तब पुनम मीररके सामने बेठते हल्कासा शींगार करने लगी.. वेसेभी वो नेचरल ब्युटीतो थी ही लेकीन शींगारसे वो कीसी कांचकी पुतलीकी तराह अप्सरा जैसी दीखने लगी.. जीसे देखकरही देवायत पागल हो जाता.. जब सज सवरके तैयार होगइ तो अपने रुमकी सब लाइटे बंध करके बहार आगइ ओर बहार जांककर देखा तो बहार कोइ नही दीख रहाथा.. तब वो धीरेसे अपने रुमका दरवाजा बंध करके देवायतके रुमकी ओर चली गइ..

तब देवायत बेडपे लेटे पुनमका इन्तजार कर रहाथा.. तभी पुनम तैयार होकर आगइ ओर धीरेसे दरवाजा लाइट बंध करके देवायतके पास जाके उनकी बगलमे लेट गइ.. तो देवायतने उसे देखतेही अपनी बाहोमे भीचलीया ओर उनके होंठ चुमते उनके बुब्सको मसलने लगा आज वो पुनमको देखकर पागल हो गयाथा.. दोनोही अ‍ेक दुसरेके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगे.. तब थोडी देरके बाद दोनोही कामाग्नीमे जलने लगे ओर दोनोके बदनसे अ‍ेक अ‍ेक करके सभी कपडे हटने लगे.. कुछही देरमे दोनोके नाइटके कपडे ओर चडी पेन्टी ब्रा सब अ‍ेक कोनेमे साथमे पडे अपनी कीस्मतपे रो रहेथे..

आज दोनोही कबसे अ‍ेक दुसरेमे समा जानेका मन बना चुके थे.. जबसे देवायतने पुनमके होंठ चुमते उनके उरोजोके साथ खेलना चालु कीया तबसे पुनमकी नाजुक चुतकी पंखुडीया फडफडाते पानी छोडने लगी थी.. वो चाहती थी उनका भाइ जल्दसे जल्द अपना मुसल हथीयार उनकी चुतमे घुसादे.. तो दुसरी ओर देवायतका लंडभी पुनमकी चुतको देखकर जटके पे जटका मारते उनके बीलमे घुसनेको बेकरार हो रहाथा..

तब दुसरी ओर थोडी देरके बाद रजीयाभी अपने रुमसे सादीके जोडेमें बहार नीकलते अंधेरे मे सब जगाह नजर घुमाते दबे पांव कीचनमे चली गइ.. ओर दो दुधका ग्लास भरके अ‍ेक ग्लासमे अपने पास पडी अ‍ेक कामोतेज्नाकी गोली डालके हीलाने लगी.. फीर धीरेसे उपरकी मंजीलकी सीडीया दबे पांव चडने लगी ओर लखनके रुमके पास आगइ.. तब अ‍ेक बार फीर चारो ओर नजर घुमाते धीरेसे दरवाजा खोलकर लखनके रुममे चली गइ तब लखन चुदाइकी वजहसे बेडपे आधी नींदमे सो रहाथा.. ओर रजीया के बारेमे सोचता रहा..

लखन : (आंख बंध करते मनमे) की रजीया कैसे उसे सेक्सका ज्ञान दे रही थी.. जैसे वो सचमे उनकी बीवी हो.. ओर दीखतीभी सेक्सी हे.. क्या सचमे मे उनसे प्यार करने लगा हु..? मुजे पहेले पता होतातो मे उसे कबका चोद चुका होता.. जो भी हो अब मे उसे रखेल नही मेरी सीक्रेट बीवी बनाके रखुगा.. भलेही मेरी दो दो बीवीया हो.. मे उसे बच्चाभी दुंगा.. ओर लताकोभी मना लुंगा..

तो दरवाजेकी आहट सुनके लखन आंख खोलकर देखने लगा तब वो जटसे बेडपे बेठ गया क्युकी रजीया अ‍ेक दुल्हनके लीबासम तैयार होकर आइथी.. तब लखन रजीकाको दुल्हनके लीबासमे देखकर खुसीके मारे पागल जैसे होने लगा तभी रजीया हसते हुअ‍े दुधका ग्लास वही टेबलपे रखके दरवाजा लाइट बंध करने लगी.. फीर वो बेडकी ओर बढ गइ ओर धीरेसे बेडके बीच पैर धुटनोसे मोडके अपने दोनो हाथ घुटनोपे रखकर घुंघट नीकालके नजर जुकाकर बैठ गइ.. तब लखन उसे मुह फाडके देखताही रहा..

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रजीया : (सरमाते धीरेसे) लखनभैया अब देखतेही रहेगे की अपनी दुल्हनको प्यारभी करेगे.. देखीये में ये सब आपहीके लीये तैयार होकर आइ हु.. अब आपने मुजे अपनी सीक्रेट बीवी जो मानलीया हे.. तो मेराभी फर्ज बनताहे मे मेरे पतीको हमारी सुहागरातका अहेसास करवाउ..

लखन : (उनको बाहोमे भरते) ओह..रजीया.. आइ लव यु.. आइ लवयु सो मच.. मुजेतो यकीन ही नही हो रहाहे की मे आज तुम्हारे साथ सुहागरात मनाउगा.. क्या मस्त दुल्हन बनके आइ हो.. इस लीबासमे तु बहुतही खुबसुरत लग रही हो.. अबतो सचमे तुजे अ‍ेक बीवीकी तराहही रखुगा..

रजीया : (सरमाते हसते धीरेसे) अब घुंघट उठाइअ‍े.. इनमे बीवीको बडीया गीफ्ट देनी पडती हे.. आपको मालुमतो हेनां..? अभी आपके पास कुछ होगातो नही तो बादमे दे दीजीयेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते रजीयाके पास बेठते) हां रजीया.. तुमने मुजे बहुत कुछ ज्ञान दीया हे.. तुजे मे जरुर गीफ्ट लाकर दुंगा.. ओर अ‍ेक गीफ्टतो अ‍ैसी दुगा जो इसके लीये तु कही सालोसे तरस रही हे..

रजीया : (सरमाते हसते) अच्छा.. कोनसी गीफ्ट दोगे मुजे..? बताइअ‍ेनां..

लखन : (हसते धीरेसे) रजीया.. अगर भगवानने चाहातो मे तुजे हमारा अ‍ेक बच्चाभी दुंगा.. ओर उनको मेरा नामभी दुगा.. आजसे तु मेरी सीक्रेट वाइफ हे.. बस कुछ महीनो ये बात सबसे छुपाले.. फीर मे तुम ओर लता हमारी अ‍ेक अलग दुनीया बसायेगे.. तब मे तुजे सबके सामने स्वीका करलुगा..

रजीया : (आंख गीली करते) लखाभैया अभी कोइ जल्द बाजी मत करना.. मुजे खुसी हे आपने मुजे अपनी बीवीका दरजा दीया ओर हमारे बच्चेको आपका नामभी देनेको तैयार होगये.. लेकीन अभी सम्हलके.. हम इस घरको छोडकर कही नही जाना चाहते.. हम आपकी बीवी बनके इधरही रहेना चाहती हे..

लखन : (हसते) ठीक हे.. तो फीर मेभी यही रहुगा.. वरना बडेभैया सहेरमे अ‍ेक बंगला लेनेकी बात कर रहे थे..

रजीया : लखनभैया आप बडेभैया ओर भाभीको कभी मत छोडना.. वो आपको ओर पुनमदीदीको बहुत प्यार करते हे..

कहातो लखन भी हसने लगा ओर रजीयाका घुंघट धीरेसे उठालीया तब रजीया बहुतही सरमाने लगी जेसे आज सचमे उनकी सुहागरात हो.. वो लखनको दुध पीलाकर बाते करते सब सीखाती रही ओर कुछ देरके बाद दोनोही जन्मजात नंगे होगये.. ओर प्यारके आगोसमे चले गये.. दोनोही आज कामातुर होके अ‍ेक दुसरेके पार्टके साथ खेलने लगे ओर सीक्स नाइन पोजीसनमे प्यार करने लगे.. तब लखनके बदनमे गोलीका असर होने लगा.. ओर वो रजीयाकी चुदाइ कनेके लीये बेकरार होने लगा..

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तो रजीयाभी लखनके साथ मीलन करनेके लीये बेकरार होने लगी.. ओर वो बेडपे पैर फेलाकर लेट गइ ओर लखनको खीचकर अपने उपर चडा दीया.. फीर कुछही देरके बाद दोनोका जीस्म अ‍ेक होगया ओर प्यारके नसेमे चुदाइ करने लगे.. ओर अ‍ेक दुसरेमे मसगुल होगये..

तब लखन होले होले रजीयाको चोदने लगा तो रजीयाभी मदहोसीके नसेमे आंधी आंख चडाते लखनसे चुदवाने लगी.. आज लखनका लंड उसे अपनी नाजुक चुतमे अ‍ेक स्टीलके रोडकी माफीक फील हो रहाथा.. आज वो सुहागरातका पुरा मजा लेना चाहती थी.. इसीलीये लखनको कहे बगैरही पहेलीबार वियाग्राकी गोली पीलादी.. ताकी लखन उनकी पुरी रात जमकर चुदाइ कर सके..

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तब नीचेकी ओर देवायत ओर पुनमभी चुदाइमे मसगुल थे.. आजकल काम ओर रती देवायत ओर पुनमपे कुछ ज्यादाही महेरबान थे.. दोनोही अ‍ेक पती पत्नीकी तरार बीन्दास चुदाइ कर रहेथे.. आज हवेलीपे कोइ नहीथा तो पुनमकोभी डर नही था ओर वो जोरोसे सीसकारीया करते देवायतको अपने उपर चडाके मजेसे चुदवा रहीथी.. ओर अपनी कमर हीलाते देवायतका साथ दे रही थी.. तो देवायतभी पुनमके गलेको चुमते उसे धीरे धीरे चोद रहाथा.. तब पुनम आधी आंख चडाते चुदाइके नसेमे छाइ हुइथी..

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देवायत पुरी रात अपना लंड पुरा खीचके जड तब घुसाते आगेसे.. पीछेसे.. साइडमे लीटाकर बेठे बेठे.. पुनमकी जमकर चुदाइ करता रहा.. ओर उनकी नाजुक चुतको भरता रहा.. ना जाने पुरी रातमे पुनम कीतनी बार जडी होगी.. लेकीन देवायत पुनमकी पुरी रातमे पांच बार धमासान चुदाइ कर चुकाथा.. तब पुनमकी चुत सुजकर पांव जैसी हो गइथी.. फीर दोनोही नहाके नंगे अ‍ेक दुसरेसे चीपकके वही सो गये.. तो उपरकी ओर आज लखनभी उछल उछलके रजीयाकी जमकर चुदाइ कर रहाथा ओर चुदाइका दोरभी लंबा चल रहाथा..

अब लखन चुदाइमे अनाडी नही रहा.. वो अब रजीयाको बरोबर संतुस्ट करता रहा.. लखनने पुरी रातमे रजीयाकी चार बार धमाकेदार चुदाइ करली.. ओर रजीयाकी चुतको अपने पानीसे सींचके हरी भरी करदी.. दो बारकी चुदाइमेतो रजीयाको तीन तीन बार जडा चुकाथा ओर ये सब उस गोलीका कमाल था.. लखन अबभी रजीयाकी धजमकर चुदाइ कर रहाथा तब आज पहेली बार रजीया भी चुदाइ करवाते थकके चकनाचुर हो चुकी थी.. उनके सरीरका अ‍ेक अ‍ेक अंग लखनने चोद चोदके ढीला कर दीयाथा.. ओर उनकी चुत भी दर्द कर रही थी..

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आज कीतने अरसोके बाद रजीयाकी अ‍ैसी धमाकेदार चुदाइ हुइ थी.. जब दोनो साथमे जड गये तब रजीया हीलने तककी स्थीतीमे नहीथी.. तब लखन रजीयाको गोदमे उठाके बाथरुममे लेगया.. ओर दोनोने नहा लीया फीर बहार नीकले तो रजीयाकी चाल आज बदल चुकीथी.. जीसे देखके लखन बहुतही खुस हो रहाथा ओर अपनी मर्दानगी पर गौरव कर रहाथा.. ओर रजीया वही लखनके पास अ‍ेक बीवीकी भांती उनसे चीपकके सोगइ.. नेसे लखन उनका सचमे पती हो..

सुबह सभी बहुत देरसे जागे.. तब रजीया जागतेही गभरा गइ.. ओर फटाफट अपने कपडे पहेनकर नीचे अपने रुममे चली गइ.. ओर नहाने लगी अच्छा हुआ होलमे कोइ नहीथा तो बच गइ.. यही सोचते वो नहाने लगी.. तब पुनम ओर देवायत अभीभी अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे चीपकके सोयेथे.. तब बहार कीसीके चलनेकी आवाज आइतो पुनमकी आंख खुल गइ ओर वो बेडसे उतरकर अपने नाइटके कपडे पहेनने लगी..

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फीर देवायतके पास चली गइ ओर उसे प्यारसे देखते होंठ चुमते जगा दीया.. तो देवायतने उसे खीचके अपने उपर गीरा दीया ओर उनको बाहोमे भरके होंठ चुमने लगा तब थोडी देर पुनमभी बहेकके उनका साथ देते गरम होने लगी.. फीर अचानक अलग होगइ ओर देवायतका हाथ खीचके खडा करदीया ओर हसते हुअ‍े बाथरुममे धकेल दीया फीर देवायतके कपडे बेडपे रखके खुदभी अपने रुममे चली गइ.. ओर बाथरुममे धुसके अपनी चुतको सहेलाते नहाने लगी..

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तब रजीया फटाफट नहाके तैयार होगइ ओर सबके आनेसे पहेलेही कीचनमे घुस गइ.. उसे अभीभी अपनी चुतमे मीठासा दर्द हो रहाथा.. वो आज बहुतही खुस लग रहीथी ओर फटाफट चाइ नास्ता बनाने लगी तभी पुनमभी तैयार होके बहार आगइ ओर रजीयाके पास जाकर वापस देवायतके रुममे चली गइ तब देवायतभी कंपलीट हो चुकाथा तभी पुनम उनके पास चली गइ ओर उनके हाथमे सींदुरकी डीबी थमादी..

पुनम : (सरमाते हसते धीरेसे) चलीये पतीदेव.. फटाफट अपनी बीवीकी मांग भर दीजीये.. अबतो मे आपके हाथोसेही अपनी मांग भरवाउगी.. पता हेना वो राजाभी यही करता था.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते पुनमकी मांग भरते) तो मे थोडीनां वो राजा हु.. तेरेभी क्या क्या सोक हे..

पुनम : (मीररमे मांग छुपाते) तो फीर.. आपतो मेरे लीये वोही राजा हो.. चलो फटाफट चाइनास्ता करलो फीर आपको अपने ससुरालभी जाना हे.. तो मुजे रास्तेमे वंदनाके घर छोडदो.. अबतो आप सामकोही आयेगे..

देवायत : अरे हां.. चल उस वंदनासे बातभी होजायेगी.. फीर हमे सहेरभी तो जाना पडेगा.. तुभी साथ चल रही हेनां..? चलनां.. ताकी उनको अकेला ना लगे..

पुनम : (देवायतकी बाहोमे समाते) भाइ.. आप अ‍ेक बार उनके बारेमे सोचनां.. वो बहुत अच्छी लडकी हे.. मेने उसे आपको मीलवानेका वादा कीया हे.. आप उसे स्वीकार करलीजीये..

देवायत : (उनका सर चुमते) हांमम.. चल ठीक हे अब मेरी इस खुबसुरत बीवीकी बाततो माननीही हे..चल..

फीर दोनोही बहार आके डाइनींगपे बेठ गये तबतक लखनभी नीचे आके दोनोके पास बैठ गया.. वो आज काफी थका हुआ लग रहाथा.. तभी रजीया चाइ नास्ता लेकर आइ तब लखनको देखतेही सरमसे पानीपानी होने लगी.. जेसे आज सुहागरात मनाकर अपने पतीको पहेली बार देख रही हो..

ओर कातील नजरोसे उनके सामने देखते मुस्कराती रही ये बात पुनम नोटीस करने लगी.. ओर आस्चर्यसे दोनोकी ओर तीरछी नजरोसे देखने लगी.. तो लखनभी रजीयाको देखते सरमा रहाथा.. ओर रजीयाकी ओर देखकर मुस्कराने लगा.. तब पुनमको कुछ आसंकाये होने लगी.. ओर दोनोपे नजर रखनेको ठानली..

पुनम : (रजीयाकी ओर देखते) भाइ आप वंदनाको कहेना वो इधरही आजाये हम साम तक इधर साथही रहेगी.. आज मुजे कही जानेका मन नही कर रहा..

देवायत : (हसते) क्यु..? क्या हुआ..? ठीक हे बााबा.. केह दुगा..

कहातो लखन ओर रजीयाका मुड खराब होगया ओर दोनोके मुह सेड होगये तो पुनम देखतेही मनही मन मुस्कराने लगी.. ओर सभी चाइ नास्ता करने लगे.. तब देवायत फटाफट चाइ नास्ता करके नीकल गया..

तो लखनभी रजीयाकी ओर देखते अपने खेतोपे चला गया.. ओर पुनम अपने रुममे जाकर आराम करने लगी तो रजीयाभी घरके काममे बीजी होगइ तभी चंपाभाभी भी आगइ ओर रजीयाका हाथ बढाने लगी..

तब देवायतभी रमेशके घर चला गयातो रमेश घरपेही था.. तो देवायतको देखतेही खुस होगया ओर उनको गले लगा लीया तब चारु दोनोकी आवाज सुनके जटसे बहार आगइ.. ओर देवायतकी ओर कातील स्माइल करते देखती रही फीर रमेश देवायतका हाथ पकडते उसे सोफेपे बीठा देता हे ओर चारु दोनोके लीये पानी लेकर आगइ फीर ग्लास लेकर चाइ बनाने चली गइ तब रमेश देवायतकी ओर घुमता हे..

रमेश : भाइ.. कल पुरा दीन हमारे पंचायतकी ओफीसमे था.. ओर सब कागजात चेक कर रहा था.. इस कमीनोने बहुत भ्रस्टाचार कीया हे.. अब फरीयाद करकेभी कोइ फायदा नही.. अ‍ेकतो मर गया ओर दुसरा मरनेकी कगारपे हे.. वो रश्मीभाभीको भी बुला लीया था.. उन्होने बहुत सारे कागजात गलत नीकाले.. बहुतही होशीयार हे.. अच्छा कीया आप उसे मुनीमकी नोकरीपे लगा रहे हो..

देवायत : रमेश वो बहुतही नेक ओर इमानदार हे.. मुजेभी गांवके बहुत सारे गीरब मजदुरोके कागजात दीये हे.. जो उनके पतीने लोगोसे ब्याजके पैसेके बदले हथीया लीयेथे.. हमे वो सभी लोगोको बुलाके उनकी जमीनके कागजात वापस लौटाने हे.. तुम देखलो कीन कीनके कागजात हे मे कल लेकर आउगा.. मुजे पुरी लीस्ट बनाकर देना.. हम सबकी जमीन वापस दे देगे..

रमेश : भाइ कल आपको आनाही पडेगा मेने सभी पंचायतके सदस्योको बुलाया हे कुछ ठरावभी करने हे कल वो रश्मीभाभीका भी ठराव करना हे.. उनको मुनीमकी जगाह अ‍ेपोइन्ट करके लेटरभी देना हे आप आजाना..

देवायत : ठीक हे कल देखते हे.. वो वंदना कीधर हे? उनको कुछ पेपरके बारेमे कहेना हे.. उनको लेकरभी अ‍ेक बार जाना हे.. इसीलीये इधर आया हु.. फीर अभी ससुरालभी जाना हे.. तु बुला उनको..

रमेश : भाइ कलही चारु उनसे बात कर रहीथी कहेतीथी वो पुनमदीदीभी साथ आ रही हे.. उनकी सहेलीजो हे.. दोनोकी आपसमें बहुत बनती हे..

देवायत : हां यार वंदना अकेली मेरे साथ सरमायेगी.. मे साथमे चारुभाभीको लेकर जाने वालाथा लेकीन पुनम आ रहीहे तो कोइ दिकत नही हे उनकी फ्रेन्ड जो हे.. तुम उनकी टेन्शन मतलो..

तभी चारुभाभी चाइ लेकर आइ ओर देवायतको कप देते कातील स्माइल करते उनके हाथको छुलीया.. ओर देवायतकी बगलमेही बेठ गइ फीर वंदनाकोभी आवाज देकर बुलाया तो अपने रुमसे बहार आगइ ओर देवायतको देखतेही सरमाइ ओर मुस्कराती रही.. तब देवायतने उनको पेपरके बारेमे सबकुछ बता दीया तो वो समज गइ ओर उनको अभी पुनमने घर बुलाया हे.. कहा तो हां मे गरदन हीलाके वापस अंदर चली गइ..

ओर देवायत रमेश दोनो चाइ पीने लगे.. तब चारुभाभी रमेशकी नजर बचाते धीरेसे हाथ पीछे लेगइ जहासे रमेश उनकी कीसीभी हरकतको नही देख सकता था.. ओर वो देवायतकी कमरको सहेलाती रही ओर दोनोसे बाते करती रही.. तब चारुकी हरकतकी वजहसे देवायतका लंड खडा होने लगा ओर पेन्टमे तंबु होगया.. तो चाइ पीकर देवायत जटसे खडा होगया ओर जाने लगा..

चारु : (मनमे हसते) देवरजी बैठीयेनां.. आपतो आते ही भागने लगते हे.. कभी फुरसतमे आइअनां.. आपको मस्त खाना खीलाती हु.. कीतने दीन हो गये हमने साथमे खाना नही खाया.. आपके भाइतो आपको बुलायेगेही नही.. अबतो बीजीही रहेगे..

रमेश : (खडे होते हसते) अरे बाबा वो मंजुभाभीको घर आनेदे.. फीर सबको बुलाके मस्त पार्टी देगे.., अब पुनमदीदीकी सादीभी तो हे.. इनको बहोत सारे कामभी होगे.. क्यु भाइ..?

देवायत : हां यार.. अ‍ेकतो सादी उपरसे वो भानुके मामाभी चल बसे.. उनकाभी कल सब कार्य खतम होजायेगा.. ओर कल मंजुकोभी दीखाने जाना हे.. ओर अभी मेरे ससुरल जा राह हु.. वहाभी मेरे ससुरकी तबीयत ठीक नही हे.. मुजे कलही मालुम हुआ.. जाकर देखताहु क्या हुआ हे.. चल मे नीकलता हु..

तब रमेश आगे नीकल गया तो चारु देवायतके साथ चलने लगी ओर उनका हाथ उंगलीया फसाके पकड लीया ओर जोरोसे दबाते कातील नजरोसे देवायतको देखते हसने लगी.. तब देवायतनेभी हाथ पीछे लेजाते उनके नीतंब दबा दीये..

तब चारु अ‍ेकदम सर्मा गइ.. ओर कातील नजरोसे अपने बेडरुमकी ओर इसारा करते वापस आनेका इसारा करने लगी ओर मुस्कराती रही.. तब देवायतभी इसारोसे हां कहेते बहार नीकल गया ओर कार लेके चला गया तबतक रमेश ओर चारु बहार खडे उसे जाते हुअ‍े देखते रहे..

देवायतने कारको सीधेही अपने ससुरके गांवकी ओर मीड दी.. तब उनके दीलकी धडकने तेज होने लगी.. आज कही महीनोके बाद वो अकेला अपने ससुराल जा रहाथा.. क्युकी सादीके बाद वो कभी अपने ससुरालमे अकेला नही गया..

कभी मंजुको छोडने तो कभी मंजुको लेनेके लीयेही जाताथा.. बाकी वो हीसाबके लीये सीधे अपने ससुरकी दुकानपे ही जाताथा ओर वहीसे उनको मीलकर वापस लौट आताथा.. ओर कारको दोडाते अपने ससुरालके बारेमे सोचते विचारोमे डुब गया..

(फ्लेशबेक)

उनकी सादीसे पहेले अपने बापुके कहेने पर कैसे अक्सर अपने ससुरके घर जाताथा.. उनके बीजनेसका हीसाब देखता ओर उनकी मदद भी करता.. तब मंजुला ओर भावना सहेरमे होस्टेलमे रहेके कोलेजमे पढती थी..

तब देवायतको नही पताथा की मंजु ओर भावु इनकी बेटी हे.. देवायतके बापु मंजु ओर भावुकी पढाइका खर्चा भी उनके हाथो भेजते थे.. उनको आज तक समजमे नही आयाकी वो लोग कोन हे.. जो बापु उनकी बहुत मदद करते थे.. उनको बस इतनाही मालुम थाकी उनके बीजनेसमे बापु पार्टनर हे..

बस ओर ज्यादा इस जमेले मे नही पडा.. वोतो बस अ‍ेकही मक्सदसे जाता था.. उनके बापुके पार्टनर राजीवकी बीवी.. नीर्मला.. जो नीहायती खुबसुरत ओर अ‍ेकदम गोरी स्कीन.. जो कीसीकाभी मन मोह ले.. उनकी उमर ५० की होनेके बावजुद ३२ की लगतीथी..

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लंबी छे फुट हाइट, उनके बालभी लंबे घुटनो तक.. अ‍ेवरेज सरीर भरावदार नीतंब.. उनके उरोज.. ना बडे ओर नाही छोटे.. बीलकुल अ‍ेक अप्सराकी तराह दीखती थी.. जो देवायतको पहेली बार देखा तबसे बार बार उनको देखनेके लीये बेचेन रहेते उनकी ओर आर्कसीत होगइ थी.. बस उनकी ओर आकर्सीत होनेका रीजन सीर्फ उनकोही पताथा..

देवायत जबभी उनके घर जाता तो वो देवायतको ही देखती रहेती.. तो दुसरी ओर देवायतभी उनकोही देखनेके लीये जाता.. बस कामतो अ‍ेक बहाना था.. उनकी आंखोमे कीतनी मासुमीयत थी.. कीतना भोलापन.. तब देवायतभी सीर्फ उनको ही देखता रहेता..

दोनो अ‍ेक दुसरेके सामने कभी नही बोले.. बस दोनो आंखो ही आंखोमे अ‍ेक दुसरेकी फीलींग्सको समज लेते.. अ‍ेक बार देवायतके हाथो उनके बापुने कुछ पैसे भेजे.. तब वो उनके घर गया.. तो पता चला नीर्मलाका पती राजीव सहेर गया हुआ हे..

तब वो पैसे उसने नीर्मलाको देदीये.. तब हाथमे पैसे लेते नीर्मलाकी आंख गीली होगइ.. तो आज देवायतने हींमत करते आंख गीली होनेका कारण पुछही लीया.. तब वो बातको सीफततासे टाल गइ.. तो दीवायतको जबरदस्तीसे पुछना ठीक नही लगा, ओर वो उनकी इजाजत लेके नीकलने लगा..

तो उस दीन नीर्मलाने उनसे पहेली बार बातकी.. जब देवायत उनको पैसे देकर वापस जाने लगा.. तब नीर्मलाने हींमत करते देवायतको अपने घरपे जबरन रोक लीया.. ओर चाइ नास्ता करके जानेको कहा.. तब देवायतभी उनकी बातको नही टाल सका.. ओर वो आज पहेली बार रुक गया.. तो दोनोही सोफेपे बेठ गये तब बेठते ही देवायतने हीमत करके पुछा..

देवायत : नीर्मलाजी.. अगर आप बुरा ना माने ओर आपकी इजाजत होतो.. मे आज आपसे अ‍ेक बात पुछ सकता हु..?

नीर्मला : (हसते) अरे आपको मेरी इजाजत लेनेकी क्या जरुरत हे.. आपतो हमे कुछ भी पुछ सकते हो..

देवायत : मे यहा कीतनी बार आचुका हु.. मुजे आज तक पता नही चला.. तो बताइअ‍ेनां हम दोनोके फेमीलीका आपसमे क्या रीस्ता हे..? ओर मे जबभी इधर आता हु तब आप प्यार भरी नजरोसे मुजेही देखती रहेती हो.. मेने आपकी आंखोमे मेरे लीये बेसुमार प्यारको महेसुस कीया हे.. ओर मेभी आपको देखते खुस हो जाता हु.. यही मानलोनां मे सीर्फ आपका दीदार करनेही इधर आता हु.. तो मे क्या समजु..?

नीर्मला : (सरमाते सरारतसे हसते) फेमीलीका तो आप अपने बापुसेही पुछ लीजीयेगा.. वोही आपको बता सकते हे.. मुजेतो इतना ही पता हे.. मेरे पती ओर आपके बापु बीजनेसमे पार्टनर हे.. ओर दुसरा देखनेकी बात.. तो फीर आपही बताइअ‍े आप मुजे क्यु देखते रहेते हे..? इनका उतर आपही दे सकते हो.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) वेरी स्मार्ट.. आप बातको बडी सीफततासे टाल गइ.. कोइ बात नही.. नही बतानाहे तो मत बताइअ‍े.. लेकीन मे मेरी बात कहु तो.. आप..आप मुजे बहोत अच्छी लगती हे.. बस ओर कुछ नही..

नीर्मला : (जोरोसे हसते) अच्छा..? आपतो काफी जवान हो.. पढे लीखेभी हो.. क्या अभी अभी कोलेज पुरी की हेनां आपने..? तो फीर वहा बहुत सारी लडकीयाभी होगी.. जो आपको देखतेही पागल होजाती होगी.. तो फीर मेतो अब आधेड हो चुकी हु.. तो मुजमे अ‍ैसा क्या देखलीया जो मे आपको अच्छी लगने लगी..

देवायत : (सरमाते हसते) नही.. बस आपकी ये मासुम आंखे ओर आपका मासुमीयत भरा चहेरा.. आपका भोलापन.. आपका मेरी ओर देखनेका अंदाज.. बस यही मुजे आपकी ओर आकर्सीत कर रहा हे.. ओर आपभी तो मुजे देखती रहेती हो.. बस इसीलीये आपको बार बार देखनाका दील कर रहा हे.. अगर मेने कुछ गलत बोल दीयाहो ओर आपको बुरा लगा तो सोरी..

नीर्मला : (सरारतसे हसते) अरे नही नही.. आप सोरी मत बोलो.. आप बहुत क्युट हो.. सरमीले हो.. ओर बातेभी अच्छी करते हो.. पता हे आपने जो अभी अपने दिलकी बात बताइ इसे क्या कहेते हे..? लगता हे आपने कोलजमे होनेके बावजुद भी कीसी लडकीको प्यार नही कीया हे.. क्या मे सच केह रही हुनां..?

देवायत : (सरमाते हसते) जी.. जी हां.. आपने बीलकुल सही कहा हे.. बताइअ‍ेना इसे क्या कहेते हे..

नीर्मला : अरे मेरे बुध्धु बलमा.. इसेही प्यार कहेते हे.. लेकीन.. वन साइड लव.. क्या कोलेजमे कीसी लडकीको देखते आपको अ‍ैसी फीलींग कभी नही आइ..? याद करके सच बताना.. हें..हें..हें..

देवायत : (सरमाते) अरे हां.. हे अ‍ेक लडकी.. मेरी ही कोलेजमे पढती हे.. लेकीन मेरी कोलेज खतम हो चुकी हे.. तो मे घरपे आगया.. ओर अब बापुका बीजनेसमे हाथ बटा रहा हु.. जेसे आप केह रही हे अ‍ैसी फीलींग उन लडकीको देखके आइथी.. ओर आजभी हे.. लेकीन मे मेरे दीलकी बात उनको नही बता पाया.. पता नही कौनथी वो.. मुजसे अ‍ेक साल जुनीयरथी, उनका नाम भी नही जान पाया..

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नीर्मला : (सरारतसे हसते) अच्छा..? अरे बुध्धु उनको अपने दीलकी फीलींग्सके बारेमे बता देना चाहीयेनां..? क्या पता वोभी आपको चाहती हो.. जाओ.. जाके अ‍ेक बार उनसे मीलके बात करलो..

देवायत : (हसते) अब सहेर जाउगा तब देखता हु.. वो मीलती हे की नही.. मीलेगीतो जरुर बात करलुगा.. आपने हींमतजो दी हे.. लेकीन जो मीली हे वो खुद मुजे जवाब नही दे रही उसका क्या..? हें..हें..हें..

नीर्मला : (बडी आंख करते हसते) कौन..? कौन मील गइ आपको जो जवाब नही देती..

देवायत : (हींमत करते केह देता हे) आप.., आपही मेरी फीलींग्सको अच्छी तराह पहेचान गइ.. जो मुजे उन लडकीके लीये आइथी.. मतलब मुजे आपसेभी वन साइड लव होगया हे.. तो अब आपसेही पुछ लेता हु.. क्या आप मेरा प्यार कबुल करती हो..? कहीये..

नीर्मला : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) प्लीज.. ये आप क्या केह रहेहे.. जानतेहो मे कौन हु..? मे अ‍ेक सादी सुधा ओरत हु.. आपके बापुके दोस्तकी बीवी हु.. (कुछ देरके बाद) क्या वाकइ आप मुजसे प्यार करने लगे हे..?

देवायत : (हीमत करते उनका हाथ थामते) जी.. जीहा.. मुजे आपसे सचमे प्यार होगया हे.. प्लीज.. आप मेरा प्यार कबुल करलो.. आपही मेरा पहेला प्यार होगी.. नीर्मलाजी.. आइ लव यु.. आइ लवयु सो मच.. प्लीज.. आप मुजे बहोत अच्छी लगती हो..

नीर्मला : (जटसे हाथ खीचते खडी होते) ये आप क्या केह रहे हे.. आप जानते हेना मे अ‍ेक सादीसुधा ओरत हु.. देवायतजी मे आधेड हो चुकी हु.. आप कीसी अच्छी लडकीसे प्यार करके सादी कर लीजीये.. मे आपका प्यार कबुल नही कर सकती.. आइ अ‍ेम सोरी.. में अ‍ेक बार.. सोरी देवायतजी.. आप बैठीये मे चाइ बनाके आती हु.. फीर आप जाइअ‍ेगा..

कहेते नीर्मला जटसे खडी होकर वहासे चाइ बनाने कीचनमे चली गइ.. तब उनके मनमे विचारोका धमासान युध्ध होने लगा.. की कैसे इस लडकेने उनकी सब फीलींग्सको पहेचान लीया.. ओर चाइ बनाते बनाते सोचने लगी..

नीर्मला : (मनमे) हे भगवान.. इस लडकेनेतो सचमे मुजसे अपने बापुकी तराह प्यारका इजहार करलीया.. उनके बापुनेभी मुजे अ‍ैसेही प्रपोज कीयाथा.. क्या पागल लडका हे.. बीलकुल अपने बापुकी तराह दीखता हे.. वोही आंखे.. वोही चहेरा.. वोही आकर्सण.. ओर मेभी इनकी ओर खीचीती चली गइ.. पता नही कही मेभीतो उनसे प्यार नही करने लगी..? नही नही.. वो उनका लडका हे.. क्या मस्त बोडी सोले डोले सब मस्त हे.. तो वो..भी.. इनके बापुकी तराह बडाही होगा.. पेन्टमे कीतना बडा उभार दीखता हे.. बस.. मेरी तो इनको देखतेही पानी छोडने लगी हे.. उनके बापुभी मुजे कैसे पटक पटकर चोदते थे.. थकतेही नही थे.. ओर हम ओरतोको चाहीये भी तो क्या..? यहीतो हमे खुस रख सकता हे.. उन्हीका लडका हे.. इनकाभी अ‍ैसेही बडा होगा.. बहारसेतो बडा दीखता हे.. क्या मे उनको हां कहेदु..? कमसे कम मे दुबारा वो चुदवानेका सुखतो पा सकुगी.. कीतने साल होगये.. मे उस सुखसे वंचीत हु.. अब मेरे पतीभीतो बुढे हो चुके हे.. उनसे सादी करना मेरीभी मजबुरी थी.. तब उनके सीवा मेरा था भी कौन..? मे बहार जाकर देवायतको थोडा तडपाउगी.. फीर देखती हु.. अगर वो कुछ आगे बढेगातो में उनका प्यार कबुल करही लेती हु.. कमसे कम वो मुजे वो खुसीतो दे पायेगा.. ओर मुजेभी वो बहोत अच्छा लगता हे कीतना सीधा सादा लडका हे.. अ‍ेकदम अपने बापुकी तराह.. मुजसे प्यार करता हे.. पागल कहीका.. हें..हें..हें..

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यही सब सोचते मनमे हस रहीथी.. की चाइ उबलके बहारकी ओर नीकलने लगी तो उसने जटसे स्टव बंध करदीया.. ओर चाइ नीकालके चाइ नास्ता लेकर बहार आगइ.. देखातो वहा होलमे कोइ नही था.. तब वो थोडा गभराके वीचलीत होगइ.. ओर चाइ नास्तावही टेबलपे रखते इधर उधर देखते बहारकी ओर दोड पडी ओर यहा वहा आजु बाजु सभी जगाह देखने लगी.. तब वहा कोइ नही दीखा तब नीरास होकर वापस अंदर आकर सोफेपे बेठते अपने आपको मनमे कोसने लगी..

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अपने पैरोके घुटनोपे दोनो हाथ टीकाके अपने मुहको दोनो हथेलीमे छुपाके बेठ गइ.. देवायतके प्यारको कबुल ना करनेकी गलतीको अपनी भुल मानते आंखसे आंसु बहाने लगी.. ओर वही सोफेपे बैठे अपने हाथोमे चहेरा छुपाते आंसु बहाती रही.. आज उनको अ‍ेक बार फीर अपना प्यार बीछडते हुअ‍े महेसुस होने लगा.. जो सख्सके प्यारके लीये वो कीतने सालोसे वंचीत थी.. वोही प्यार आज उनके बेटेके रुपमे उनके सामने फीरसे आगया था.. ओर वो मौका गवाते अपने आपको कोस रही थी.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७५

अपने पैरोके घुटनोपे दोनो हाथ टीकाके अपने मुहको दोनो हथेलीमे छुपाके बेठ गइ.. देवायतके प्यारको कबुल ना करनेकी गलतीको अपनी भुल मानते आंखसे आंसु बहाने लगी.. ओर वही सोफेपे बैठे अपने हाथोमे चहेरा छुपाते आंसु बहाती रही.. आज उनको अ‍ेक बार फीर अपना प्यार बीछडते हुअ‍े महेसुस होने लगा.. जो सख्सके प्यारके लीये वो कीतने सालोसे वंचीत थी.. वोही प्यार आज उनके बेटेके रुपमे उनके सामने फीरसे आगया था.. ओर वो मौका गवाते अपने आपको कोस रही थी.. तभी....अब आगे

तभी कोमन बाथरुमसे देवायत हाथ पोछते बहार नीकला जो बहुत पीसाब लगीथी तो बाथरुममे चला गयाथा.. तो नीर्मला जटसे अपना सर उठाके उसे देखती ही रेह गइ.. ओर आंखमे आंसु होनेके बावजुद देवायतको देखतेही खुसीके मारे उनकी हसी नीकल गइ.. ओर वो जटसे खडी होके देवायतकी ओर दोड पडी..

देवायत उसे आस्चर्य भावसे देखताही रहा.. वो कुछ समजता इनसे पहेलेही नीर्मलाने जटसे आकर देवायतको जोरोसे बाहोमे भर लीया ओर उनके चहेरेको सरसे पकडते पागलोकी तराह चुमने लगी.. तब देवायतभी सोक्ट होके सब देखता ही रहा की नीर्मलाको अचानक क्या हुआ.. जो उसे बाहोमे भरके चुमेही जा रही हे.. उनको कुछभी समजमे नही आ रहाथा..

नीर्मला : (चुमते) देवायत.. आइ लव यु.. आइ लव यु.. आइ लवयु सो मच.. मुजे आपका प्यार कबुल हे.. मुजे माफ करदो.. आप कीधर चले गये थे..?

देवायत : (उनका चहेरा हाथोमे थामते उनकी आंओमे देखते) नीर्मलाजी.. नीर्मलाजी.. सम्हालीये अपने आपको.. ये अचानक आपको क्या हुआ..? मेतो बाथरुममे गयाथा.. ओर आप रो क्यु रही हे..? कुछ हुआ हे क्या..? ओर आपने मेरा प्यार कबुल करलीया..? अभीतो मुजे सोरी बोलके गइ हो.. तो फीर अचानक.. अचानक आपको क्या हुआ जो आप मेरा प्यार कबुल कर रही हो.. क्या मे कोइ सपनातो नही देख रहा..?

नीर्मला : (हसते गाल चुमते) नही.. माय लव.. ये हकीकत हे.. देवायत आइ लव यु.. बस मेरी फीरसे जगी हुइ उमीदको कभी मत तोडना.. जबसे आपको पहेली बार देखा था.. तबसेही मुजे सचमे आपसे प्यार होगया था.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. मुजसे कभी मत बीछडना.. वरना इस बार में जी नही पाउगी..

कहेते देवायतके चहेरेको अपनी हथेलीमे थामते धीरे धीरे अपनी आंखे बंध करते अपना मुह देवायतके चहेरेकी ओर लेजाती हे.. ओर आखीर देवायतके होठोपे अपने होंठ रख देती हे.. जैसे उनको अपना पुराना प्यार फीरसे मील गया हो.. ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेके होठोका रसपान करने लगे.. ओर अ‍ेक दुसरेको चुमते हुअ‍े कामाग्नीमे जलने लगे.. जैसे आज नीर्मलाको फीरसे सबकुछ वापस मील गया हो.. उनके उरोजो सख्त होने लगे.. ओर चुतके दोनो नाजुक होंठ जो बरसोसे प्यासे थे.. वो फडफडाते पानी छोडने लगे..

तब अचानक नीर्मला देवायतसे अलग होगइ ओर जटसे होलका दरवाजा बंध करलीया.. फीर पलटकर जटसे देवायतकी ओर आगइ तब देवायत कुछ समजता इनसे पहेलेही नीर्मला उनका हाथ पकडके अपने बेडरुमकी ओर जाने लगी.. तो देवायतभी मनही मन खुस होते हसते हुअ‍े उनके साथ चलने लगा.. ओर नीर्मला देवायतको बेडरुममे लेगइ ओर उनकाभी दरवाजा बंध करके पलटकर अ‍ेक बार फीरसे देवायतकी बाहोमे समा गइ..

नीर्मला : देवायत मुजे इतना प्यार देना.. इतना प्यार देना की मे मेरा सारा अतीत ओर गम भुल जाउ.. मुजे आपकी आगोसमे लेलो.. मीटादो मेरा अस्तीत्व.. आज ये नीर्मला अपने आपको आपके हवाले करती हे..

देवायत : (बाहोमे कसते सरपे चुमते) हां नीर्मलाजी.. थेन्कयु सो मच की आपने मेरा प्यार कबुल करलीया.. आप मेरा पहेला प्यार हो.. जो मेनेभी आपको पहली बार देखा तबसे ही हो गयाथा..

नीर्मला : देवायत अब नीर्मलाजी नही.. मे सीर्फ आपकी नीमु हु.. पेरा पतीभी मुजे नीमु कहेके बुलाते हे.. अबसे मे आपके लीये सीर्फ आपकी नीमु हु.. ओर मुजे पता हे आपके घरवाले आपको कीस नामसे बुलाते हे.. तो मेभी आजसे आपको इस नामसे बुलाउगी.. देवा.. मेरा प्यारा मासुम देवा जो सीर्फ मेरा हे.. क्या मे आपका पहेला प्यार हुनां..? मे कीतनी खुसनसीब हु.. देवु.. आइ लव यु सो मच.. मुजे कभी मत छोडना..

देवायत : (गाल चुमते) हां.. हां नीमु.. तुम सचमे मेरा पहेला प्यार हो.. ओर मे वादा करता हु मे तुजे जींदगीभर अ‍ेसेही प्यार देता रहुगा.. चाहे मेरी कीतनीभी सादीया होजाये.. मेरा पहेला प्यार तु ही रहेगी.. मे तुजे कभी नही भुलुगा.. क्या तुम मुजसे सादी करोगी..?

नीर्मला : (बाहोमे भीचते) सादी..? ओह.. देवा आइ लव यु सो मच.. मे कीतनी बुसनसीब हु.. मुजे आपका प्यार मील गया.. मे ना जाने कीतने सालोसे इस प्यारके लीये तरस रहीथी.. जो आज मुजे फीरसे मील गया..

देवायत : (उनकी आंखोमे देखते) फीरसे मतलब.. क्या आप कीसी ओरसे प्यार करतीथी..? कोन हे वो.. खुसनसीब.. जीसे मेरी नीमु प्यार करती थी.. क्या आप दोनो अ‍ेक दुसरेसे बीछड गये हो..?

नीर्मला : (सीनेमे सर रखते) नही देवा.. मे उसे भुल चुकी हु.. उनकी सादी होगइ.. फीर मे उसे कभी नही मीली.. ओर मेने मेरे इस भा.. आइ मीन.. इस पतीसे सादी करली.. मत पुछो मेरे अतीतके बारेमे.. बडी मुस्कीलसे उसे भुला पाइ हु.. बस मुजे वो सुख देदो जीसके लीये मे बरसोसे तरस रही हु.. मे आपकी आगोसमे मेरा सारा अतीत भुल जाना चाहती हु.. अब आपही मेरा सबकुछ हो.. मुजे कभी मत छोडना.. वरना इस बार मेरा जीना मुस्कील होजायेगा.. मे आपके बीना नही जी पाउगी..

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कहेते वो देवायतको अ‍ेकदम अपनी बाहोमे भीचलेती हे.. फीर उनका हाथ पकडके बेडकी ओर लेगइ ओर दोनो बेडपे बैठ गये तब नीर्मला बेडपे लेटते देवायतको हाथ खीचकर उनके साथ लीटा देती हे.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेको बाहोमे भरते लेट गये.. ओर अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे होंठ मीलाके प्यारके आगोसमे खो गये..

फीर धीरे धीरे करते दोनोही कामाग्नीमे जलने लगे.. तब नीर्मलाकी चुत कुछ ज्यादाही फडफडाते पानी छोडने लगी.. क्युकी कही महीनोसे वो सुखी पडीथी.. उसे पानीसे सींचकर हरी भरी करने वाला कोइ मील गयाथा.. नीर्मला उनके प्रेमीसे बहुत बार चुदवा चुकीथी.. ओर उनके लंडकी आदी हो गइथी.. तबसे वो कुछ ज्यादाही कामी ओरत हो गइथी.. उनको हर रात लंड लेनेकी आदत पड चुकीथी..

जब अपने प्रेमीसे बीछड गइ तब वो बीना लंड तडपने लगी.. ओर आखीरकार अपने भाइके साथ सादी करके उनकी पत्नी होगइ.. ओर अपने पतीसे चुदवाकर अपनी प्यास बुजाने लगी.. लेकीन अब वोभी उमरकी वजहसे उनको ज्यादा चोद नही पाताथा.. तबसे वो फीरसे प्यासी रहेने लगी..

आज अ‍ेक बार फीरसे उनकी चुतके लीये लंडका इन्तजाम हो गयाथा.. जो वो कीसीभी हालमे इस मौकेको गवाना नही चाहती थी.. इसीलीये आज अपने लडकेकी उमरके अपने प्रेमीके बेटेको अपना दिल दे बेठी.. ओर प्यारका इज्हार करतेही वो उसे लेकर अपने बीस्तरपे लेआइ.. अब आप सोच सकते हो नीर्मला कीतनी कामातुर ओर प्यासी ओरत थी.. बीस्तरपे आतेही दोनोही कामातुर होके अ‍ेक दुसरेके अंगोके साथ खेलने लगे..

आज नीर्मलाके जीस्म वासनासे तप रहाथा.. वो कामुक होते वासनाभरी नजरोसे देवायतको देखती रही.. उसे जल्दीथी तो बस देवायतके लंडको देखनेकी.. ओर धीरे धीरे करते दोनोके जीस्मसे अ‍ेक अ‍ेक कपडे नीकलते गये.. तब नीर्मलाके गोरे गोरे कसे हुअ‍े बुब्स उछलके बहार आगये.. जीसे देखतेही देवायत पागल होगया ओर अपनी सुधबुध खो बेठा.. तब उनका वीकराल लंड चडीमे लहेराते जटके मारने लगा..

जब देवायतने अपनी चडीको नीकाल दीया तब लंड जटकेके साथ हवामे उपरकी ओर लहेराने लगा.. जीसे देखते नीर्मलाका मुह खुलाही रेह गया.. ओर खुसीके मारे उनकी आंखोमे वोही चमक वापस आगइ.. जीस चमक उसे देवायतके बापु कीशनके लंडको देखते आइ थी.. उनकी आंखोमे वासनाके डोरे मंडराने लगे.. ओर उसने फोरन देवायतके लंडको अपनी मुठीमे पकड लीया ओर देवायतकी आंखोमे देखते होले होले मसलने लगी..

वो जल्दसे जल्द इस लंडको अपने मुहमे ओर अपनी चुतमे महेसुस करना चाहती थी.. तब कुछही देरमे दोनो सीक्स नाइन पोजीसनमे होगये.. ओर अ‍ेक दुसरके कोमल अंगोके साथ मुहसे खेलने लगे.. तब नीर्मलाका पुरा सरीर कामाग्नीमे जलते तपने लगा जैसे उनको बुखार आया हो.. वो देवायतके लंडको पुरा मुह में लेकर अ‍ेक लोलीपोपकी तराह चुसने लगी.. तब देवायतसे कंट्रोल करना मुस्कील होगया..

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कुछही देरमे दोनो अ‍ेक दुसरेके मुहमे जडने लगे.. ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेका पानी गटक गये.. फीर दोनोने बाथरुममे जाकर मुहको साफ करलीया तब देवायतने वहीसे नीर्मलाको अपनी गोदमे उठालीया ओर बेडपे पीठके बल सुलाते खुदभी उपके उपर चडके लेट गया.. तब नीर्मलाने उसे जोरोसे बाहोमे भरते उनके होठोको अपने होठोसे दबाते लीपलोक करलीया ओर अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते लंडको अपनी मुठीमे पकडके अपनी चुतके लव होलपे सेट कर दीया.. वो जल्दसे जल्द अपनी चुतमे देवायतका लंड लेनेको मचल रही थी..

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तभी अ‍ेकही जटकेमे देवायतका दमदार लंड नीर्मलाकी चुतमे घुस गया.. तब नीर्मलाकी जोरोसे चीख नीकल गइ जो देवायतके मुहमेही दब गइ.. ओर उनकी आंखोसे तेज आंसुओकी धारा बहेने लगी ओर अपने दोनो पैर बेडपे पटकने लगी.. ओर देवायतसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. तब देवायतको भी अपना लंड कीसी गरम भठीमे डाल दीयाहो अ‍ैसा महेसुस होने लगा.. मानो कीसी कची कलीकी चुतमे डाला हो..

नीर्मलाभी देवायतसे छुटनेके लीये छटपटाते अपना मुह देवायतके होठोसे छुडानेकी कोसीस करने लगी.. तभी देवायतने उनके होंठ छोड दीये ओर उनके बुब्सको मुहमे लेके चुसने लगा तब नीर्मला दर्दके मारे तडपने लगी ओर अपना मुह बीगाडते इधर उधर घुमाते मचलती देवायतसे नजरे चुराने लगी.. जो दर्द वो अपना कौमार्य खोते पहेली बार किरनसे चुदवाते महेसुस कर चुकी थी.. वोही दर्द आज उनके बेटेका लंड अपनी चुतमे लेते महेसुस करने लगी..

बीलकुल वोही अहेसास.. जो अपने प्रेमीसे पहेली बार मीलन करते चुदवाते हुआ था.. जो आजभी वही अहेसास हो रहाथा.. वो तबभी अ‍ेसेही तडपी थी.. जो आज तडप रहीथी.. तब वो सादीसे पहेलेही अपने प्रेमीको अपना कौमार्य उनसे चुदवाके सोंप चुकीथी.. फीर उनके साथ कीतनी राते चुदवाते रंगीन करती रही.. ओर अचानक उनसे बीछड गइ.. फीर कीतने सालो तक अ‍ैसी दमदमर चुदाइसे वंचीत रही..

आज इतने बरसोके बाद फीरसे चुदवाते वोही दर्द महेसुस कर रहीथी.. ओर अपने आपको देवायतके प्यारको पानेमे बहुत ही खुसकीस्मत समजने लगी.. ये भी नही सोचाकी ये अपने पुराने यारका बेटा हे.. नीर्मलाको तो बस अ‍ेक बडे ओर तगडे लंडकी जरुरतथी.. जो उनसे चुदवाना था.. फीर चाहे वो लंड बेटाका हो या उनके बापका.. आज देवायतके लंडको अपनी चुतमे लेकर अ‍ेक सुकुनसा महेसुस करने लगी..

तब थोडीही देरमे उनका दर्द कम होगया.. नीर्मला जीस लडकेका प्यार थोडी देर पहेले वो ठुकरा चुकीथी वोही लडकेका दमदार ओर तगडा लंड अपनी चुतमे लेकर उनके नीचे लेटी हुइ उनसे चुदवा रही थी.. वो यही सब सोचते देवायतसे नजरे चुराने लगी.. तब देवायत उनके चहेरेको अपने हाथोमे थामते उनकी आंखोमे देखने लगा तब नीर्मलाने सरमके मारे अपनी नजरे चुराते जुकाली.. ओर देवायतने उनके होंठको अपनी गीरफ्तमे लेलीया ओर चुसने लगा.. तब उसनेभी थोडा मुह खोल दीया..

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वोभी सभी सरम त्यागके देवायतका साथ देने लगी ओर अपनी कमर हीलाने लगी तभी देवायत उनके गलेमे मुह लगाते चुमने लगा ओर उसे कमर उछालते होले होले चोदने लगा.. फीर कुछ देर अ‍ैसेही चोदता रहा तब वो हाथके बल उचा होगया ओर अ‍ेक हाथसे उनके बुब्सको मसलते थाम लीया फीर लंडको जडतक घुसाते धीरे धीरे सोट मारते चुदाइ करने लगा तब नीर्मलाको अपनी बच्चेदानीसे देवायतका लंड टकराते महेसुस होने लगा ओर वो हर धक्केके साथ आहे भरने लगी.. ओर पुरी तराह कामाग्नीमे जलते मदहोसीमे छाने लगी..

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नीर्मला : (चुदवाते) उंहु..उंहु..उंहु.. आइइइइ..सीससइइइ..आहह..आहह..आहह.. जा..नुु... बससस.. अ‍ैसेहीइइइ चोदो.. मुजे.. आहइइइ.. आह..आह.. आह.. उंहु.. हंममममममम सीसससइइइइअअअअअ.. देवु.. मुजे..इइइ बस.. अ‍ैसेहीहीहीइइइइ चोदते.. रहेना.. उइइइ मां सीइइइइइइ आह..आह...आह..आह..आह..

नीर्मलाकी जींदगी मे आज देवायत तीसरा मर्द था.. जो उनकी दमदार चुदाइ कर रहाथा.. वो कोलेजमे थी तब उनका दोस्तही प्रेमीके रुपमे उनकी चुदाइ कर चुकाथा.. फीर जब उनसे बीछड गइ तब ना चाहते हुअ‍े भी वासनाकी आगमे वो उस आदमीसे चुदाइ करवाने लगी जीनके साथ बादमे सादी करनी पडी.. ओर आज तीसरा मर्द देवायतथा.. जो अभी उनकी जमकर चुदाइ कर रहाथा.. कहेतेहे की जब ओरत अपनी चुतमे तीन लंड ले लेती हे तब उसे ओर लंडकी आदत होजाती हे.. तो पता नही नीर्मलाके साथ आगे क्या होगा..

आज वो अपने आपको बहुतकी खुसकीस्मत मानने लगी ओर देवायतके नीचे लेटे उनके दमदार लंडसे चुदवा रहीथी.. तब देवायतभी नीर्मलाके पैरके बीच बेठ गया ओर उनपे जुकते चोदता रहा तो नीर्मला दोनो हाथोमे उनके चहेरेको थामते उनकी आंखोमेही देखती रही ओर चुदवाते देवायतको अपनी आंखोमे बसाने लगी ओर धीरे धीरे करते देवायतने चोदनेकी स्पीड बढादी.. तब नीर्मलाकी ओर सीसकारीया नीकलने लगी..

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तभी नीर्मलाके तनमे सुरसुराहट होने लगी ओर उनका तन कांपने लगा उनको बहुतही रोमांचीत अहेसास होने लगा.. तो उसने देवायतके गलेमे हाथ डालके उनको अपने तनसे चीपका लीया.. ओर जोरोसे बाहोमे भरते लीपलोक करलीया फीर आंख बडी करते अपनी कमरको जटके देने लगी.. ओर अपने कामरससे देवायतके लंडको भीगोने लगी.. तब चुदाइ करते देवायत बेडसे उतर गया ओर नीर्मलाको कमर पकडते अपने लंडकी ओर खीच लीया, फीर नीर्मलाको जोरोसे चोदने लगा तो नीर्मला चुतपे हाथ रखते दर्दसे चीखने लगी..

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अबतक नीर्मला दो बार जड चुकीथी ओर बहुत खुसभी हो रहीथी.. वो खुस होभी क्यु ना हो..? क्युकी इतने सालोके बाद उनको अब जाके सही.. ओर दमदार लंड नसीब हुआथा.. तभी अचानक देवायत नीर्मलाके उपर लेटकर उनसे चीपक गया तब नीर्मलाने उसे जोरोसे अपनी बाहोमे कसके भीचलीया ओर दोनोके होंठ अ‍ेक दुसरेसे लोक होगये तब नीर्मला बडी आंख करते देवायतकी आंओमे देखती रही.. तब देवायत अपने लंडको नीर्मलाकी चुतमे जडतक घुसा देता हे ओर कमरको जटके देते अपने कामरससे नीर्मलाकी चुतको भरने लगता हे..

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तब नीर्मला तीलमीलाते देवायतसे होंठ छुडालेती हे ओर दर्दसे अपने मुहको इधर उधर करने लगती हे वो जोरोसे सीसकारीया करते अपनी चुतको लंडके पाससे सहेलाने लगती हे.. तब देवायत उनके सीनेपे ढेर होजाता हे.. तब नीर्मला अ‍ेसेही पडे रहेके देवायतके सरको सहेलाती रही ओर दर्दसे सीसकारीया करती रही.. उनको अभीभी यकीन नही हो रहाथाकी आज वाकइ इनकी जबरदस्त चुदाइ हो चुकी हे.. वो कीतने सालोके बाद तीन तीन बार जड चुकीथी.. आज वो पुरी तराह संतुस्ट हो चुकीथी..

उनको अभीभी अपनी बच्चेदानीपे देवायतका गरम कामरस महेसुस हो रहाथा.. जो इनके लीये बेहद सुखद अनुभव था.. इतना सुहाना अहेसासतो उनके पतीसे चुदवातेभी नही हुआथा.. आज वो मनही मन देवायतकी कायल होगइ थी.. क्युकी आधेड होनेके बावजुद भी देवायतने अ‍ेक कुआरी लडकीका अहेसास करवा दीया था.. वो अब हमेसाके लीये देवायतसे चुदवानेका मन बना चुकीथी.. तब देवायत उनके उपरसे हट गया..

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तो लंड.. आरामसे बहार आगया ओर मुरजा गया.. तब नीर्मला अभीभी अ‍ैसे बेसुध जैसी हालतमे पडीथी.. ओर उनकी चुतसे दोनोका मीश्रीत कामरस पैरसे होते नीचेकी ओर बेह रहाथा.. चुत अभीभी फडफडा रही थी.. तो देवायतने वही पडी अपनी चडी नीर्मलाकी चुतपे दबादी तब नीर्मलाकी आंख खुल गइ ओर दर्दसे सीसकारीया करने लगी..

फीर खुद अपनी चुतको धीरे धीरे साफ करने लगी फीर देवायतकी ओर आभारवस देखते उनके सामने हाथ उचा करलीया तब देवायत समज गया ओर उसे गोदमे उठाके बाथरुममे लेगया.. फीर अपने लंडको साफ करते वही नहाने लगा तब नीर्मलाने उसे गरम पानीका नल दीखाते उनकी चुतकी सीकाइ करनेको कहा..

क्युकी देवायतको चुदाइका कोइ ज्यादा अनुभव नही था.. तब उसने नीर्मलाकी चुतकी गरम पानीसे सीकाइ करदी.. फीर दोनो साथमे मीलकर नहाने लगे तब नीर्मला अ‍ेकबार फीर देवायतके गले लग गइ ओर उनके चहेरेको बेइम्ताह चुमने लगी ओर दोनो नहाके बहार आगये तब..

नीर्मला : मेरे छोटे बलमा आप बैठो मे अभी खाना बनालुगी.. फीर आप खाना खाके आरामसे चले जाना..

देवायत : (हसते कपडे पहेनते) क्या मे सचमे जाउ..? मुजे भुलतो नही जाओगी..?

नीर्मला : (जोरोसे बाहोमे भीचते) देवु.. ये आप क्या केह रहेहे..? मे आपको प्यार करती हु.. भुल क्यु जाउगी..? देखना अबतो जींदगीभर आपका पीछा नही छोडुगी.. बडी मुस्कीलसे तो मीले हो..

देवायत : (हसते उनके होंठ चुमते) तो फीर सादी करले मुजसे..

नीर्मला : (जटसे अलग होते आंखोमे देखते धीरेसे) आप मेरी परीक्षा ले रहे हो..? यकीन नही हे आपको..? ठीक हे चलो मेरे साथ..

कहेते नीर्मला देवायतको उनके घरके मंदिरके सामने लेगइ फीर वहाके अ‍ेक स्टोरेजसे अ‍ेक नया मंगलसुत्र नीकाला.. ओर देवायतके सामने आगइ.. ओर उनके हाथमे थमा दीया.. तब देवायत उसे देखताही रेह गया.. तब नीर्मलाकी आंख थोडी गीली होगइ ओर अ‍ेक नजरसे देवायतको देखती रही.. तब देवायतने डीबीसे मंगलसुत्र नीकाला तो अ‍ेकदम नयाथा.. जेसे इनका कभी उपयोग ही नही कीया हो..

नीर्मला : जब उसने मुजसे अपने प्यारका इजहार कीया तभी मेने सबसे छुपके इनको लीयाथा.. ओर आज तक छुपाके रखाथा.. सोचाथा उनसे सादी करुलुगी तब उनके हाथोसेही पहेनुगी.. लेकीन कीस्मतको कुछ ओर ही मंजुर था.. तबसे सम्हालके रखा हे.. लेकीन कीस्मत देखो वो नही तो आपही सही.. आखीर इस मंगलसुत्रको पहेनाने वाला आखीर मील ही गया..

देवायत : नीमु.. मुजे उनके बारेमे जानना हे आखीर कोन हे जो इस खुबसुरत लडकीको ठुकराके चला गया..

नीर्मला : नही नही.. उन्होने मुजे नही ठुकराया.. बस सीचुअ‍ेशनही अ‍ैसीथी की..की..मेने उसे छोड दीया..

देवायत : नीमु तो फीर मुजे तेरी पुरी स्टोरी जाननी हे.. तेरे अतीतके बारेमे.. कौनहो तुम.. ओर कौन थे वो..

नीर्मला : नही देवु.. प्लीज.. मेरीभी कुछ मजबुरी हे.. मे नही बता सकती आपको.. आप जीद मत करना.. कभी वक्तने मौका दीया तो जरुर आपको सबकुछ बता दुगी.. प्लीज.. मे मेरे अतीतको भुल चुकीहु.. जो वो केवल हमे दुखही देता हे.. मत याद करवाओ मुजे.. मे इसे आपके प्यारके आगोसमे भुल जाना चाहती हु.. आज आपने मुजे कीतना प्यारा अहेसास करवाया हे.. थेन्कयु वेरी मच.. आइ लव यु देवु.. मुजे कभी मत छोडना.. वरना इस बार मे जुदाइ नही सहेन कर पाउगी..

देवायत : (हसते) लव यु टु डार्लींग.. ठीक हे नही पुछुगा कभी नही पुछुगा.. अब बता क्या करना हे इसका?

नीर्मला : (समाते हसते) क्या आप कभी कीसीके सादीमे नही गयेहे..? जो मुजसे पुछ रहेहे.. पहेना दीजीये मुजे.. भर दीजीये मांग मेरी.. मे आपसे गांधर्व सादी कर रही हु.. ताकी आपको यकीन आजाये.. देवु आज हमारे भगवानके सामने मुजे ये मंगलसुत्र पहेनाकर स्वीकार करलीजीये.. आजसे मे आपकी अर्धागीनी होजाउगी.. अब आपही मेरे पती हो..

देवायत : ओह..नीमु.. आइ लव यु सो मच.. क्या वाकइ मुजसे सादी कर रही हो..?

नीर्मला : जानु तो फीर क्या मे मजाक करनेके लीये आपको यहा लेकर आइ हु..? हां हम सादी कर रहे हे.. पहेना दीजीये ये मंगलसुत्र ओर भर दीजीये मेरी मांग.. मे कसम खाती हु.. आजके बाद ये मांगमे सीर्फ आपके नामकाही सींदुर लगेगा.. आज मे हमेसा हमेसाके लीये आपको समर्पीत होती हु..

तब देवायत उनको हसते हुअ‍े मंगलसुत्र पहेना देता हे तभी नीर्मला मंदिरसे अ‍ेक डीबी उठाती हे ओर देवायतके सामने रखते मुस्कराने लगती हे.. तब देवायत उनमेसे चुटकी सींदुर उठालेता हे ओर नीर्मलाकी मांगको भरने लगता हे तब नीर्मला आंख बंध करते आंसु बहाते खडी रहेती हे ओर देवायत उनकी मांग भर देता हे तब वो देवायतको जोरोसे बाहोमे भीच लेतीहे ओर फुट फुटके रोने लगती हे..

देवायत : (हसते) क्या हुआ.. बेबी.. बस.. बस..सांत होजाओ.. आजसे तु मेरी सीक्रेट बीवी हे..

नीर्मला : (रोते सामने देखते) देवु मुजे कभी मत छोडना.. मे वादा करतीहु जबतक ये जींदगी रहेगी तबतक मे आपका साथ कभी नही छोडुगी.. अब मे हरदीन आपके नामकाही सींदुर लगाउगी.. फीर चाहे आप कीतनी भी सादी करलो.. आपकी पहेली बीवी मेही कहेलाउगी.. क्या आप इस बीवीको मीलनेतो आओगेनां? जानु मे हमेसा आपका वेइट करुगी.. आपको अपनी बीवी यही आपका इन्तजार करते मील जायेगी..

फीर नीर्मला देवायत दोनो मंदिरके सामने हाथ जोडके खडे रहेते हे तब नीर्मला देवायतको साथमे जीने मरनेकी ओर अ‍ेक दुसरेको पती पत्नीके रुपमे स्वाकार करनेकी कसमे खातेहे.. तब नीर्मला देवायतके पैरमे जुक जाती हे ओर उसे नमन करती हे तब देवायत उसे खडा करते जोरोसे बाहोमे भीच लेता हे ओर उनके होंठ चुमने लगता हे फीर दोनोही बहार होलमे आजाते हे ओर नीर्मला देवायतसे सटकर बैठ जाती हे..

ओर उनके कंधेपे सर रखते उनसे बाते करने लगती हे.. दोनो काफी देर अ‍ेक दुसरेकी आगोसमे बेठे प्यारभरी बाते करते रहे.. फीर वो कीचनमे चली जातीहे ओर दोनोके लीये खाना बनाने लगती हे तब देवायत कीचनके दरवाजेके पास खडा रहेते उनको देखतेही रहेता हे तब नीर्मला खाना बनाते सरमाने लगी ओर मुस्कराती रही.. तब देवायत उनके पीछे चला गया ओर उनको पीछेसे अपनी बाहोमे भरते उनका पेट सहेलाता रहा.. तब नीर्मला हसते हुअ‍े पलट जाती हे ओर कहेती हे..

नीर्मला : देवु प्लीज.. आप बैठोनां.. मुजे खाना बनानेदो.. फीर हम खाना खाके प्यार करेगे.. प्लीज..

नीर्मला अ‍ेक नइ नवेली दुल्हनकी माफीक देवायतसे बात करती रही.. ओर देवायत उनके सामने वही बेठा रहा जब खाना बन गया तो दोनोने अ‍ेकही थालीमे अ‍ेक दुसरेको खीलाया तब नीर्मलाकी अ‍ेकबार फीरसे आंख गीली होगइ.. आज उनको अपने नये पतीसे बहुत प्यार मील रहाथा.. उनको अ‍ेक बार फीरसे खुलके जीनेकी चाहत बढ गइ.. जब खाना खतम हुआ तो नीर्मलाने फटाफट सब काम नीपटा दीया..

तभी देवायत उनको गोदमे उठालेता हे ओर अ‍ेकबार फीर उनको बेडरुममे लेजाता हे.. तब नीर्मला खुब सरमाइ ओर मुस्कराती रही.. ओर अ‍ेक बार फीरसे दोनोके बीच धमासान चुदाइ हुइ.. इस बारभी नीर्मला दो बार जड चुकीथी ओर आखीरमे दोनो अ‍ेक साथ जड गये.. ओर काफी देर दोनो अ‍ेसेही लेटे रहे तब नीर्मला देवायतकी पीठ ओर सर सहेलाती रही.. फीर दोनो बाथरुममे जाकर नहाने लगे तब वहाभी देवायतने नीर्मलाकी खुब मस्तीकी तब नीर्मला बडी मु्सकीलसे देवायतसे छुटी ओर हसती हुइ नंगीही बहार भाग गइ..

फीर दोनोही तैयार होगये ओर देवायतके जानेका वक्त होगया.. तब नीर्मला देवायतकी बाहोमे समा गइ ओर आंसु बहाने लगी.. आज वो अपने आपको देवायतको पुरी समर्पीत कर चुकीथी.. जब देवायत नीर्मलाको अपनी बाहोमे भरके खडाथा तब उनकी नजर दीवालपे टंगी अ‍ेक तस्वीरपे चली गइ.. ओर उनकी आंखमे चमकके साथ हसीभी आगइ.. क्युकी वहा दो लडकीयोकी तस्वीर टंगी हुइथी.. ओर ये वही लडकी थी जो उनकी कोलेजमे पढती थी.. जीसे देखकर उनको वोही फीलींग आतीथी जो नीर्मलाको देखकर आइ थी.. जीनका जीक्र देवायत नीर्मलाके सामने कर चुकाथा.. फीर वो वहासे चला गया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७६

फीर दोनोही तैयार होगये ओर देवायतके जानेका वक्त होगया.. तब नीर्मला देवायतकी बाहोमे समा गइ ओर आंसु बहाने लगी.. आज वो अपने आपको देवायतको पुरी समर्पीत कर चुकीथी.. जब देवायत नीर्मलाको अपनी बाहोमे भरके खडाथा तब उनकी नजर दीवालपे टंगी अ‍ेक तस्वीरपे चली गइ.. ओर उनकी आंखमे चमकके साथ हसीभी आगइ.. क्युकी वहा दो लडकीयोकी तस्वीर टंगी हुइथी.. ओर ये वही लडकी थी जो उनकी कोलेजमे पढती थी.. जीसे देखकर उनको वोही फीलींग आतीथी जो नीर्मलाको देखकर आइ थी.. जीनका जीक्र देवायत नीर्मलाके सामने कर चुकाथा.. फीर वो वहासे चला गया....अब आगे

दुसरेही दीन देवायत सहेर चला थगा.. ओर कोलेजमे जाकर वही खडा रहा.. तब चार पांच लडकीया हस हसके बाते करती बहारकी ओर आने लगी.. उनमे वो दोनो बहेनभी थी.. नीसमे अ‍ेक लडकीभी थी जीसके लीये देवायतके दीलमे फीलींग्स आतीथी.. तब देवायत सीर्फ उनकोही देखता रहा.. लेकीन आज उन दोनो बहेनोने उनके सामने देखा तक नही.. ओर सभी लडकीया देवायत के पाससे ही गुजर गइ..

तब देवायत वापस हवेलीपे आगया.. ओर दुसरे दिनभी वही हुआ.. अ‍ैसा लगातार तीन दीन चला.. वो कोलेज चला जाता ओर उनको देखके वापस आजाता.. तब चोथे दीन ही उनकी छोटी बहेन भावनाने नोटीस करलीयाकी ये लडका रोज यहा आता हे.. ओर हमे घुरता रहेता हे.. फीर चला जाता हे.. वो देवायतको देखतेही उनकी ओर आकर्सीत होने लगी.. फीर भी उसने अपनी बडी बहेन मंजुलाको बता दीया..

तबसे दोनो बहेने बराबर नोटीस करने लगी.. ओर देवायतको देखतेही दोनोके दीलमे हलचल तेज होने लगती.. ओर धीरे धीरे दोनोके दीलमे आग लगने लगी.. वो कोइ ओर नही मंजुला ओर भावना थी.. ओर दोनोही इनके बारेमे सोचती तब उनकी दीलकी धडकन बढ लाती.. फीरतो दोनोही देवायतकी ओर आकर्सीत होने लगी.. जबभी मंजुला देवायतके पाससे गुजरती तो सबसे नजर बचाते देवायतकी ओर देखते स्माइल करती.. ओर दोनो आंखो ही आंखोमे अ‍ेक दुसरेकी फीलींग्सको समजने लगे..

तभी अ‍ेक दीन वो बडी बहेन मंजुलाको अकेला पाकर उनके पास चला गया ओर हिंमत करके अपने दीलकी बात बतादी.. तब मंजुलाने सरमाते हसते हुअ‍े देवायतका प्यार कबुल करलीया.. फीर दोनो केन्टीनमे चले गये ओर प्यार भरी बाते करते अ‍ेक दुसरेके बारेमे जानकारी लेने लगे.. तब मंजुको पता चलाकी ये वोही अंकलका लडका हे जो हमारे पापा(राजीव)के बीजनेसमे पार्टनर हे.. ओर वो वहाके राजा हुआ करता था.. ये सब जानके मंजु बहुत खुस होगइ.. ओर देवायतको पाकर अपने आपको खुस किस्मत समजने लगी..

फीरतो आये दीन दोनो केन्टीनमे मीलने लगे.. ओर फोनपे बाते करने लगे.. ये बातकी दोनोने कीसीको भनकभी नही लगने दी.. ओर आहीस्ता आहीस्ता दोनोके बीच प्यार बढता ही गया.. दोनो फ्रि होतेही कोलेजके गार्डनमे या केन्टीनमे मीलते जब वहा कोइ नही होता तब दोनोके होंठभी मील जाते.. ओर देवायत कभी कभी होंठ चुमते मंजुके उरोजोके साथभी खेलता.. ओर दोनोके बीच धीरे धीरे कामुक्ता बढती चली गइ..

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इसी बीच मंजुकी बहेन भावनाभी देवायतकी ओर काफी ढल चुकी थी.. लेकीन अब देवायत उनको कम ही दीखता था.. तब देवायतको मीलनेकी उनकी बैचेनी बढने लगी.. ओर मनही मन ठानलीकी अब देवायत मीलेगा तब वो अपने दिलकी बात उनसे केह देगी.. तो दुसरी ओर देवायतभी फोन करके नीर्मलाको दो बार ओर मील चुकाथा.. तब दोनोके बीच जमकर चुदाइ भी हो चुकीथी.. लेकीन देवायतने नीर्मलाको भी नही बतायाकी मे आपकी बेटीको प्यार करने लगा हु..

उधर मंजुने भी कीसीको अपनी दीलकी बात नही बताइ.. वो अभी देवायत ओर उनके बीचका प्यार सबसे छुपाकर रखना चाहती थी.. उनके बारेमे सीर्फ उनकी खास सहेली ही जानती थी.. वोथी.. सृती.. जो इन दोनोके प्यारकी साक्षीथी.. मंजुने उनकोभी कीसीको ना कहेनेकी कसम खीलवाइ थी.. कभी कभी सृतीको भी देवायतको देखके मंजुसे ज्वेसेसी फील होती थी..

क्युकी देवायतका व्यक्तीत्वही अ‍ेसाथा.. सुरुसे ही इतना आकर्सण था.. ओर देखनेभी अ‍ेकदम हेन्डसम ओर स्मार्ट अ‍ेक गठीले बदनका मालीक था.. कोइभी लडकी या ओरत उनको देखतेही उनकी ओर आकर्सीत होजाती.. अ‍ैसा क्यु था.. वो सीर्फ बाबाही जानते थे खुद देवायतभी नही जानता था.. की वो कौन हे.. अ‍ैसा नहीथा की देवायतका सम्बध सीर्फ नीर्मलाके साथही था.. तब हेलीपे दयाभी नइ नइ विधवा होकर आइथी..

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ओर कुछही दीन पहेले रजीयाभी आ चुकीथी.. तब ओल रेडी देवायत गांवकी कइ ओरते ओर लडकीयोको चोद चुकाथा.. उनमे रश्मीभाभी ओर चारुभाभीभी सामील थी.. लेकीन सादी कहो या गांधर्वसादी.. वो सबसे पहेले सीर्फ नीर्मलासे की.. जो अ‍ेक आधेड उमरकी महीला थी.. जो देवायत उनको सुरुसेही पसंद करता था.. जीसे आज देवायत अपनी बीवी मानने लगा था.. जो देवायतकी पहेली बीवी होगइ थी.. ओर उनसे जीस्मानी रीस्ताभी कायम होगया था.. अबतक देवायत उजको कइ बार चोद चुकाथा..

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अ‍ेक बार देवायत मंजुको मीलने कोलेज गयातो कीसी कारणवर्ष मंजु ओर सृती छुटीसे पहेलेही बहार आगइ थी.. तो देवायतको देखतेही हसते हुअ‍े उनके पास जटसे आगइ.. तब तीनो केन्टीनमे चले गये ओर पहेली बार मंजुने देवायतको सृतीसे मीलवाया.. तब सृती खुब सरमाइ.. ओर देवायतको तीरछी नजरोसे देखती रही.. तब उनके दिलकी धडकन बढने लगी.. ओर वोभी मनही मन देवायतको पसंद करने लगी..

देवायतको देकर आज उसे अपनी खास सहेली मंजुसेभी ज्वेलसी फील होने लगी.. तभी देवायतने चाइ नास्तेका ओर्डर दीया तो उनका मालीक खुब दोडा दोडा आगया.. ओर देवायतके पास अदबसे हाथ जोडके खडा रहा.. तब उनका नोकर चाइनास्ता रखते देवायतके सामने मुस्कराते हुअ‍े चला गया.. जेसे सब देवायतको पहेलेसेही जानते थे..

देवायत : (हसते) कहो गोलु कैसे हो.. धंधा बंधा सब ठीक चल रहा हेनां..? कोइ तकलीफ तो नही..?

गोलु : (हो. मालीक हाथ जोडते) जी ठाकुर साहेब आपकी महेरबानीसे सब बढीया चल रहा हे.. अब कोइ परेसानी नही.. अबतो लडके लडकीयाभी बहुत अच्छे आते हे.. कोइ पंगा नही.. साहब ओर कुछ चाहीये..? तो मे उधरही बैठा हु आवाज लगा दीजीयेगा.. ये आपहीका होटेल हे..

कहेते गोलु चला गया.. वो यहा केन्टीनका मालीक था.. तब कुछ लफंगे स्टुडन्ट इनके यहासे अ‍ेसेही उधारकी खाते ओर गोलुको पैसेके बदले गालीया देते थे.. जीनकी वजहसे गोलुका धंधा काफी बीगड गया था.. ओर वो कर्जमे डुब गयाथा.. तब देवायतने उसे कुछ पैसे देकर उनका उधार खतम करवाया ओर फीरसे सब मांल डलवाया फीर देवायत ओर उनके दोस्त विरजीने उन अ‍ेक अ‍ेक लडकेको पकड पकडके दोडा दोडाकर मारा..

ओर उन सबसे पैसे वसुल करवाया.. तबसे गोलुकी केन्टीनमे सांती छा गइ.. तब कीसीको नही पताथा की इस कोलेजमे उनके पीताजी किशनका बहुत बडा डोनेशन था.. ओर वो यहाके ट्रस्टी थे.. ओर इस बातका देवायतनेभी कभी फायदा नही उठाया.. ओर नाही कीसीको पता चलने दीया.. जीनकी वजहसे यहाके प्रीन्सीपाल ओर प्रोफेसरमे देवायतकी छबी अ‍ेक नेक इन्सानकी रही.. सभी देवायतकी बहुत इजत करते थे..

मंजुला : (हसते नास्ता खाते) अरे.. आपकीतो बडी इजत करता हे.. आप यहाके दादा या गुंडे मवाली थे..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) नही.. क्या मे आपको गुंडा मवाली दीखता हु..? सृतीजी आपने कैसी सहेली पालके रखी हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (जुठे गुसेसे अ‍ेक मुका मारते) पालके रखीहे मतलब..? क्या मे आपको जानवर दीखती हु.. कमीने कहीके.. सृती इनकी बातोमे नही आना.. ये बहुत पहोंची हुइ चीज हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) पहोची हुइ चीज मतलब..? मे कुछ समजी नही..

मंजुला : हमारे कोलेजमे जो ठाकुर साहबकी तस्वीर लगी हुइ हेनां..? वो ये जनाबके पीताजी हे.. हें..हें..हें..

कहातो सृती देवायतको मुह फाडते देखती ही रही.. तब मंजुलाने उनके चहेरेके आगे हाथ हीलाया तब उनको होस आया.. ओर देवायतके सामने सरमींदा होते हसने लगी तब देवायतने उनको कहा..

देवायत : (सरारतसे हसते) सृतीजी गभराइअ‍े नही येतो अ‍ैसेही केह रही हे.. ओर आपको कोइ खतराभी नही हे क्युकी मे आपको कोलेजसे नही नीकलवा दुगा.. हें..हें..हें..

कहातो तीनो हसने लगे फीर वहासे खडे होगये तब देवायतने गोलुको पैसे देदीये तब गोलु मना करने लगातो देवायतने जबरदस्तीसे देदीया.. फीर तीनोही गार्डनमे चले गये.. सृती इसी सहेरमे रहेती थी अपनी मां भुमीकाके साथ.. जो उनके पीता नरेश अ‍ेक सरकारी होस्पीटलमे क्लार्क की जोब करते थे.. उनका सपनाथा की अपनी बेटीको डोक्टर बनायेगे.. लेकीन किस्मतको कुछ ओर ही मंजुर था.. वो सृतीको डोक्टर बननेसे पहेलेही इस दुनीयासे विदाय होगये..

अब सृतीकी फेमीलीकी फाइनान्सीयल हालत इतनी अच्छी नही रही.. ओर मां भी ज्यादा चल फीर नही सकती थी.. जबतक देवायतके पीता किशन जींदाथे तब उनकी मददसे फीर उनके पतीके प्रोवीडंड फंडसे वो सृतीको पढा रहीथी.. वो सृती कोलेजमे डोक्टरकी पढाइ कर रहीथी.. जो उनमे बहुत खर्च आता था.. ये बात सीर्फ मंजुही जानतीथी सृतीने आजतक उनके घरके बारेमे कीसीको नही बताया.. फीर तीनो ही गार्डनमे जाके अ‍ेक बेन्चपे बैठ गये..

मंजुला : जानु हमारी कोलेजमे अ‍ेक हप्तेके बाद दो तीन दीनका प्रवास हे.. तो हम नही जा रहे हे.. तो आप आइअ‍ेना.. हम कही ओर घुमके आजायेगे.. क्यु सृती..? तुमभी चलोगीनां..?

सृती : नही यार.. तुजेतो पता हे मम्मीका खयाल रखना पडता हे.. मे नही आसकुगी सोरी..यार.. तु भावुको साथ लेजा वो आ रही हेनां..?

मंजुला : नही यार उनकी क्लासतो चालु हे सीर्फ हमारे तीन क्लासके लोगही जा रहे हे.. ओर वेसेभी अभी भावुको या कीसी ओरको हमारे प्यारके बारेमे नही पता.. ये बात सीर्फ तुही जानती हे..

देवायत : तो फीर तुमभी सबके साथ चली जाओनां.. यहा अकेली क्या करोगी..?

मंजुला : नही..तो फीर मुजेभी कही नही जाना.. जानु आप फ्रि..

सृती : तु अ‍ेक काम क्यु नही करती..? देवायतजीके साथ अपने घर चली जाना.. वो तुजे छोड देगे.. फीर तीन दिनके बाद वापस चली आना.. ये तुजे लेजायेगे..

मंजुला : (सरमाते अ‍ेक मुका मारते) कमीनी.. अब ये देवायतजी..नही तेरे होने वाले जीजाजी हे.. समजी..? तभीतो इनके साथ घुमने जाना चाहती हु.. सारा मुड ओफ करदीया..

सृती : कुती ये जीजा..जी.. हेतो तु मुजे कबाबमे हडी बनने साथमे क्यु लेजा रही हे..? तुम दोनो अकेलेही चले जाओ.. जाओ अ‍ैस करो.. हें..हें..हें..

मंजुला : (धीरेसे हसते) नही.. नही जा सकती.. हमारे बारेमे अभी वो भावुको नही पता.. अगर तु साथ चलतीतो येतो केह सकतीकी में सृतीके साथ गइथी.. समजी.. ओर घरपेभी अकेली नही जा सकती.. मम्मी अकेली गइतो हजार सवाल करेगी..

सृती : तो फीर अ‍ेक काम कर.. तु मेरे घर चल.. जीजु वही मीलने आजायेगे.. हम घरपेही तीनो तीन दीन खुब धमाल करेगे.. क्या कहेतेहो जी..जु... हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) आइडीया बुरा नही हे.. क्यु देवु..? आप आ रहे होनां..?

देवायत : (हसते) अब मेरी होनेवाली बीवीको नाराज तो नही कर सकता.. फीर सोचलो.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते हसते) जी नही.. वहा कोइ सरारत नही.. सृतीकी मम्मी होगी.. समजे.. बडे आये इस्क फरमाने वाले.. जानु.. अब आपके बीना अच्छाभीतो नही लगता.. मुजसे सादी करलो.. हें..हें..हें..

सृती : (सरारतसे हसते) जीजु आप फीकर मत करना हमारा घर पुराना हे.. लेकीन बडा हे उपरकी मंजीलमे अभी कोइ नही रेहता.. आप अपनी बीवीको लेकर उपर पडे इस्क फरमाते रहना.. मे खाना वही दे जाउगी.. हें..हें..हें..

कहातो मंजु जुठे गुसेसे दांत पीसते सृतीको मुका मारने भागने लगी.. तब सृती उछलती मेरे पीछे कंधेपे हाथ रखते जोरोसे हसती छीपने लगी.. ओर गोल गोल घुमती रही.. तब मंजुभी उनके पीछे मारनेके लीये भागती रही.. तब मेने मंजुको कमरसे पकड लीया ओर अपने पास खीचके बीठा दीया.. तब सृती अबभी हस रहीथी ओर वो हमसे थोडी दुर बैठ गइ.. तब मंजु मेरे कंधेपे सर रखके बेठ गइ.. ओर अ‍ेक हाथ मेरी कमरके पीछे लेजाते कमरको पकड लीया.. ओर सृतीकी ओर देखते हसती रही..

सृती : (हसते) जीजु तो फीर आप मेरी बहेनसे सादी कब कर रहे हो..? हमेभी बुलाओगेनां..? हें..हें..हें.. देखो आपके प्यामेतो बीलकुल पागल हो चुकी हे.. आप दोनो सादी करलो..

देवायत : (हसते) बस.. जब मेरी मंजु कहेगी तब हम करलेगे.. मुजे कहा घरपे कीसीकी परमीशन लेनी हे.. बस सीर्फ बातही करनी हे.. मेरे घरवाले खुले विचारोके हे मुजे कभी मना नही करते..

मंजुला : लेकीन जानु मुजे मम्मी पापासे बात करनी पडेगी.. अगर वो परमीशन नही देते तो हम भागके सादी कर लेगे.. लेकीन मुजे सादी सीर्फ आपसे ही करनी हे.. वरना.. मे..

सृती : (उची अवाजमे) वरना क्या..? पागल होगइ हे तु..? कुछ उल्टा सीधा मत सोचना वरना मुजसे बुरी कोइ नही होगी.. इतनी पीटुगी.. की.. की.. तेरी नानी याद आजायेगी.. बोल कब करनी हे सादी..?

मंजुला : (हसते) बस ये आखरी साल हे.. पढाइ खतम होतेही सादी करलुगी.. अब इनसे दुर भीतो नही रेह सकती.. मे इतना चाहतीहु इनको.. ओर ये हेकी.. मीलनेभी कम आते हे.. जानु पता नही.. लेकीन अब आपके बीना रहेना मुस्कील होने लगा हे.. मुजसे सादी करके अपने साथ लेजाओ..

कहेते अपनी आंख गीली करलेती हे.. तब देवायत उसे कमरमे हाथ डालके अपने तनसे चीपका लेता हे ओर उनका सर चुम लेता हे.. तब वो देवायतके कंधेपे सर रखते आंसु बहाने लगी.. तब सृतीभी उनके पास आगइ ओर उनके पास सटकर बैठते उनको हग करलीया.. फीर मंजुके आंसु पोछने लगी.. क्युकी मंजुकी असीलीयत सीर्फ वोही जानती थी.. तो मंजुभी आंसु बहाते मुस्कराने लगी.. फीर सृतीकी ओर हसते खुद अपने आंसु पोछने लगी..

मंजुला : (हसते) आइ अ‍ेम सोरी.. यार मे कंट्रोल नही कर सकी.. हम तेरे घरही चलते हे.. बस.. अब खुस..?

सृती : (हसते) हां खुस.. कमीनी कहीकी.. सुन वो..रीपोर्ट..

इतना कहाकी मंजुने सृतीका हाथ दबा दीया तो सृती बीचमेही रुक गइ.. ओर मंजुकी ओर देखती रही.. तभी मंजुने सृतीको आंखोके इसारोसे बतानेको मना कर दीया.. तभी सभी स्टुडन्ट बहार आने लगे तो मंजु जटसे खडी होगइ.. तो सृती हसने लगी तब मंजु फटाफट देवायतके होंठोपे कीस करते सृतीका हाथ पकड लीया ओर देवायतको बाय.. कहेते जल्दी गार्डनसे जाने लगी..

क्युकी दोनोके बीचका प्यार वो अभी सबसे छुपाना चाहती थी.. ओर देवायतभी दुसरे दरवाजेसे बहार नीकल गया.. ओर कार लेकर अपने गांवमे हवेलीपे आ गया.. तब देवायतके जातेही पीछेसे मंजु ओर सृती चलते बाते करने लगी..

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सृती : (दोनो साथ चलते) कमीनी मुजे बीचमे क्यु रोक दीया..? तु बहुत गलत कर रही हे.. यार वो तुजे दीलोजानसे चाहते हे.. ओर तुभी उनको हदसे ज्यादा प्यार करने लगी हे.. तो उनको अंधेरेमे क्यु रखना..?

मंजुला : (साथ चलते) नही सृती मे मेरा प्यार खोना नही चाहती.. बडी मुस्कीलसे तो ये मुजे मीले हे.. जो मुजे दीलोजानसे चाहते हे.. मे अ‍ैसेही प्यार करनेवालेके इन्तजारमे थी.. ओर भगवानने मेरी सुनली.. तुजे मेरी कसम हे जो कभी कीसीके सामने इस रीपोर्टके बारेमे बात की तो.. मेरा मरा मुह देखेगी..

सृती : (परेसान होते) यार.. तु बातको समजती क्यु नही हे..? क्यु उनकी जींदगीके साथ खीलवाड कर रही हे.. वो कीतने अच्छे हे.. मुजे यकीन हे वो फीरभी तुजे अ‍ेक्सेप्ट करलेगे.. तुजे पता हे रीपोर्टमे क्या हे.. मेरी डोक्टरसे बात होगइ हे..

मंजुला : क्या हे.. यहीनां की मे कभी मां नही बन सकती.. उनको कभी अपनी कोखसे बच्चा नही दे सकती.. कोइ बात नही.. फीरभी मे उनसे सादी करुगी.. अगर उनको बच्चा चाहीयेतो मे खुद उनकी दुसरी सादी करवा दुगी.. अबतो कोइ पैबलेम नही हे..?

सृती : नही मंजु बात सीर्फ बच्चेकी नही हे तु समजती क्यु नही.. इनमे तेरी जानका खतरा हे.. तु बेसक मां बन सकती हे लेकीन.. फीर तु ज्यादा दीन जीन्दा नही रेह सकती.. स्टुपीड.. वो तेरे बीना कैसे रेह पायेगे..?

मंजुला : (अचानक रुकते अपना सर पकडते) ओह गोड.. तो फीर मे क्या करु..? उनको केहदु की मे आपको बच्चा नही दे सकती आप सीर्फ मेरे साथ मजे करो.. क्या यही कहेदु..? बात करती हे.. सृती अगर मेने बच्चा पैदा करलीया तो मेरे पास कीतना वक्त होगा..?

सृती : (अ‍ेक नजरसे देखते) मंजु.. तो फीर.. धीरे धीरे तेरे सरीरमे कमजोरी आने लगेगी.. ज्यादा से ज्यादा दो से तीन साल.. तु सोच उनके बाद जीजुकी क्या हालत होजायेगी.. क्या वो तेरे बीना रेह पायेगे..?

मंजुला : (कुछ सोचते) ठीक हे.. सुन.. मे सादीके बाद चार पांच साल तक तो बच्चा पैदा नही करुगी.. फीर रही बात उनके अकेले रहेने की तो मेने इस बारेमे कुछ सोच लीया हे.. फीर मे बच्चा पैदाभी करुगी.. सृती मेरे पास सात आठ साल हे.. मे इन सालोमे उनके साथ पुरी जीदंगी जी लुगी.. नही जीना मुजे ज्यादा.. जीतनीभी जींदगी हे.. उतनी जींदगी मे खुसीया भर दु्रगी.. उनको इतना प्यार दुंगी..

सृती : (मुस्कराते धीरेसे) जीजुके प्यारमे बीलकुल पागल होगइ हो.. कमीनी उसके बादका सोचा हे..?

मंजुला : (सरारतसे हसते) हां सोच लीया हे.. मेरे जानेके बाद मेरे दुवुको तु सम्हाल लेना.. हें..हें..हें.. करलेना उनसे सादी.. हें..हें..हें.. वरना मेरे साथही तुभी इनसे सादी करले.. मेरा देवु हम दोनोको खुस रखेगा.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते हसते पीठमे मुका मारते) कमीनी ये तु क्या बोल रही हे.. बेसर्म कहीकी.. सरमभी नही आती.. मे उनके साथ कैसे सादी कर सकती हु..

कहेते सृती अ‍ेकदम सर्मसार होगइ ओर हसते दांत पीसते मंजुकी पीठमे मुका मारने लगी.. अ‍ैसेही बाते करते दोनो भावना ओर दुसरी लडकीयोके साथ जाके खडी रही.. फीर सभी अपने अपने घरकी ओर चले गये ओर भावना मंजुला अपनी होस्टेलपे आगइ.. अ‍ैसेही अ‍ेक हप्ता नीकल गया.. ओर इस अ‍ेक हप्तेके बीच देवायतने अ‍ेक बार चारुभाभी तो अ‍ेक बार रश्मीभाभी को ओर तीन बार नीर्मलाकोभी चोद लीया..

ओर इसी बीच दयाभी धीरे धीरे देवायतकी ओर ढलते सेट होने लगी.. ओर देवायत जीस पार्टनरको काका कहेते बुलाता वो धंधेपे चले जाते तब उनकी बीवी नीर्मलाके पास फोन करके चला जाता ओर पुरा दीन मीया बीवीकी तराह रहेते चुदाइ करते.. अबतो नीर्मलाकोभी देवायतसे चुदनेकी आदत लग गइ.. वो भी जबभी मौका मीलता देवायतको खुद फोन करके बुला लेती ओर उनसे जबकर चुदवाती..

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ओर आखीर वो दीनभी आगया ओर मंजुने सुबह ही फोन करके देवायतको बुला लीया.. ओर देवायत घरसे अपनी मां विमलाको तीन दीनका बोलके नीकल गया.. ओर सीधा कोलेज चला गया.. तब मंजु ओर सृती देवायतका वेइट करते कोलेजके बहारही खडीथी.. जब देवायत कार लेके सहेरमे पहोचा तो दोनो फटाफट देवायतकी कारमे बेठ गइ ओर सृतीके दीखाये हुअ‍े रास्तेपे कार दोडादी..

जब तीनो पहोंचे तब सहेरके मेइन रोडपे ही अ‍ेक छोटी हवेली जैसा मकान दिखा.. जो बहारसे खंडहरकी तराह दीखता था.. तब सृतीने कार सीधेही अंदर लेजानेको कहा तो अंदर बहुत बडी खाली जगाह थी तब कारसे तीनो उतर गये.. तो देवायत ओर मंजु पुरे घरको बहारसेही देखने लगे.. ओर देवायत समज गयाकी घरके मालीक कभी बहुत पैसे वाले होगे.. ओर ये विरासतमेही सृतीके पापाको मीला होगा..

सृती : (हसते) लीजीये जीजु हम आगये.. यहीहे हमारा गीरब खाना.. चलीये अंदर.. दीखाती हु आपको..

देवायत : सृती.. खबरदार जो आजके बाद घरको गरीब खाना कहातो.. अरे पगली यहीतो हमारा स्वर्ग हे.. जो हम यहा चेइनकी नींद सोते हे.. क्या तुजे ओर तेरे घरवालोको यहा अच्छा नही लगता..? अपने पुर्खोका घर हेनां..? इसे कभी गरीब खाना मत कहेनां..

सृती : (मुस्कराते) सोरी.. जीजु.. आजके बाद नही कहुगी.. आइअ‍े अंदर.. यहा सीर्फ हम मां बेटी ही रहेते हे..

तब तीनोही अंदर चले गये.. तो आज मंजुभी सृतीके घर पहेली बार आइथी तो वोभी अंदर नजर घुमाते सब देखती रही.. भलेही बहारसे खंडहर जैसे दीखता हो लेकीन अंदरसे बहुतही सुंदर सजावट थी.. तब अ‍ेक खुरसीपे सृतीकी मम्मी बैठी नजर आइ.. जो कोइ कीताब पढ रही थी.. तब मंजु ओर देवायत उनके पास चले गये ओर उनके पांव छुके वही पासमे बैठ गये.. तब सृती भी दोनोके लीये पानी लेकर आगइ ओर पानी देते उनकी मम्मीसे कहने लगी....

कन्टीन्यु
 
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