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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - ६८
तब थोडीही देरमे देवायत चारुके सीनेपे सर रखते ढेर हो गया.. तब चारु अेक हाथसे उनका सर तो दुसरा हाथ पीठकी ओर लेजाते उनको सहेलाती रही.. ओर दोनोही अपनी सांसे कंट्रल करते रहे.. दोनो काफी देर अपनी सांसको दुरस्त करते हुअे अैसेही पडे रहे.. तब देवायतका लंड अभीभी चारुकी चुतमे अेसेही सख्त होते अंदर घुसा हुआथा.. जो आमतोरपे रमेशसे चुदती तब रमेशका लंड जडतेही सीकुडके बहार नीकल जाता.. तब चारुकोभी आज थोडा अजीब लगा.. तब उसने साइडमे पडी चदर खीचके देवायतके उपर डालदी.. ओर खुस होते देवायतसे प्यार भरी बाते करने लगी....अब आगे
चारु : (सरमाते हसते) देवरजी अब उपरसे उतरना नही हे क्या..? कीतना पानी नीकालते हो.. कही मुजे प्रेगनेन्ट करनेका इरादातो नही हे..? हें..हें..हें.. अंदर अभी भी गरम लग रहा हे.. आपनेतो मुजे अेकही बारमे नीचोड लीया.. पता हे मे तीन बार जड चुकी हु..
देवायत : (हसते) हां करले पैदा हमारा बच्चा.. हें..हें..हें.. ओर अभी मुजे उपरसे नही उतरना.. चारु मुजे तुमसे ओर प्यार करना हे.. कीतने दिनोके बाद हमे ये मौका मीला हे.. आज मे तेरी सारी कशर पुरी कर दुगा..
चारु : (सरमाते हसते) ओ बापरे तबतो मेरी आज खैर नही.. तो पहेले आजाना चाहीयेनां.. देखना बाबा मुजे मेरी चुतको सही सलामत रखना हे.. वरना आपके भाइको में क्या जवाब दुगी..? मेतो आपकी दीवानी होगइ हु.. ओर हां आप सादीकी क्या बात कर रहे थे..? आपके दोस्तकी बीवी हु.. फीरभी मुजसे सादी करोगे..? हें..हें..हें.. फीर आपके भाइको क्या जवाब दोगे..? लेकीन आपको मुजसे सादी क्यु करनी हे..? हमतो अैसेही बीना सादी पती पत्नी वाला कामतो करही रहे हे.. मे आपको कहा मना करती हु..
देवायत : सुन चारु.. मेरा अेक सोख रहा हे.. क्युकी मे अेक राजवी खानदानसे हु तो मुजे कइ रानीयोका सोख हे.. में जीसके साथभी रीलेशन रखता हु उनको मे यातो सादी करता हु या फीर उनसे गांधर्व विवाह करके अपनी सीक्रेट बीवी बना लेता हु.. ताकी हम दोनोही आपसमे अेक दुसरेका अधीकार मानते खुलके प्यार कर सके.. क्युकी मे कीसीको रखेलकी तराह इस्तेमाल करना नही चाहता.. ओर तुजपे तो सुरुसे ही मेरा दील आगया हे.. आप बहुतही खुबसुरत हे जो मुजे पागल कर देती हे.. मे सुरुसे ही तुजे पसंद करता हु..
चारु : (सरमसे पानीपानी होते हसते) ओ..हो.. तभी आप मुजसे सादीके लीये केह रहेथे..? सोचलो फीर जींदगी भर मुजे जेलना पडेगा.. हें..हें..हें.. वैसे आपके विचार जानके मुजे खुसी हुइ.. कास आप मुजे पहेलेही मीलते.. मे आपसेही सादी कर लेती.. फीर भलेही हम दोनोकी उम्रमे कीतनाभी फर्क हो..
देवायत : (हसते गलेको चुमते) हां चारु मे चाहता हु की तुजे जबभी मेरे प्यारकी जरुरत पडे तब मुजसे खुलके मील सके.. इसीलीये मेने मेरी सीक्रेट बीवीओके लीये अेक घरका भी इन्तजाम कर लीया हे.. जहा मे मेरी सभी बीवीयोको मील सकु.. ओर सबकी इजतभी बरकरार रख सकु..
चारु : (हसते होंठ चुमते) थेन्कस देवरजी.. मुजे नही पता था आप मुजे इतना चाहते हे ओर हमारे लीये आपने बहुत सारे इन्तजामभी कर लीये हे.. लेकीन आपके भाइको पता चल गया तो मेरा क्या होगा वो कभी सोचा हे..? मुजेतो घरसेही नीकाल देगे.. ओर आपके सबंध खराब होगे वो अलग..
देवायत : हां.. तब आजाना मेरी हवेलीका दरवाजा तेरे लीये खुलाही हे.. ओर वहा नही तो मेरी अेक ओर सीक्रेट वाइफ हे उनके साथ रहेना.. बोल अब क्या जानना हे.. बाकी रमेशको कभी पताही नही चलेगा.. ओर पता चलेगातो मे देख लुगा.. बस मुजे तुम चाहीये.. मे वाकइ तुमसे प्यार करता हु..
चारु : (सरमाते खुस होते) कहीये कब करनी हे मुजसे सादी..? मे तैयार हु.. आपके लीयेतो मे कुछभी कर सकती हु.. ओर पता हे आपसे ज्यादा मे आपको प्यार करती हु.. बना लीजीये मुजे आपकी सीक्रेट वाइफ.. मे वादा करती हु जींदगीभर आपको अैसेही प्यार देती रहुगी.. ओर हां.. वेसे कीतनी सीक्रेट वाइफ हे आपकी..? ओर मे कीसके घरमे मीलुगी आपसे..?
देवायत : चारु ये बात सीर्फ तेरे तकही सीमीत रखना.. वो रश्मीभाभी.. तेरी ही तराह मेरी सादी नही हुइथी तबसे उनके साथ मेरा रीलेशन हे.. आज वो मेरी सीक्रेट वाइफ हे.. मेने उनके साथभी सादी करली हे.. ओर तु उनके साथ दोस्ती करले.. ओर हम वही मीलते रहेगे.. अबतो वैसेभी वो अकेलीही हे.. तु जबभी चाहेगी हम वहा मीलते रहेगे.. बोल क्या कहेती हो..?
चारु : कोन वो रश्मी.. सरपंचकी बीवी..? वो भी आपकी बीवी होगइ..? ओर दुसरी..?
देवायत : (हसते) अभी तो सीर्फ रश्मी तक सीमीत रख.. बाकी तुजे धीरे धीरे सब पता चल जायेगा.. क्युकी आने वाले वक्तमे तुजे बहुत कुछ नया दीखनेको मीलेगा जीसकी तुमने कभी कल्पनाभी नही की होगी..
चारु : (आस्चर्य से देखते) क्या केह रहे हे आप..? क्या दीखनेको मीलेगा मे समजी नही.. आप कीसके बारेमे बात कर रहे हे..?
देवायत : चारु तब तुम कुछ अैसे रीस्तेको देखेगी जीसकी हम कभी कल्पनाभी नही कर सकते.. जो सब आपसी रीस्तोमे सादी करेगे.. तुमने वो हिमाचलके राजाकी कहानीतो (ये केसी अनुभुती) सुनी होगी..? बस.. वोही सब अब मेरे घरमे ओर यहा गांवमे होने वाला हे.. बाकी मे तुजे अभी कुछ नही बता सकता.. बस कुछ समयका इन्तजार करले.. फीर तुजे सब पता चल जायेगा..
चारु : अरे हां.. वो कहानी (ये केसी अनुभुती) तो कइ बार सुनी हे.. ओर मेने तो पुरी बुक कइ बार पढी हे.. मुजेतो बहुत अच्छी कहानी लगी.. उनमे रीस्तेकातो कोइ मायना ही नही हे.. जीसे जीनसे चाहे वो उनसे सादी कर सकता हे.. उनमेतो भाइ बहेन.. मा बेटे.. यहा तम दादीसे भी सादी करते हे.. तो क्या वो सबभी वहा होने वाला हे..? आप इतने यकीनसे कैसे केह सकते हो..? हमारे गांव वालेतो वैसे भी पुराने खयालातके हे.. वो कतइ अेसे रीस्तेको स्वीकार नही करेगे.. मे नही मानती.. कहेदो आप जुठ बोल रहे हो..
देवायत : नही चारु.. मे जुठ नही बोलता.. ये बात सच हे.. चारु वो सब मे तुजे बादमे बताउगा.. अभी इनके बारेमे बतानेका वक्त नही हे.. हमे काफी देर हो चुकी हे.. इस बारेमे हम फुरसतमे बात करेगे..
चारु : (सरमाते हसते) हां.. अब उपरसे उतरो.. कबसे मेरे उपर पडे हो.. हें..हें..हें.. आपके गधे जैसा हथीयार अभी भी अंदर अैसेही हे.. क्या ये कभी बैठनेका नाम लेता हे की नही..? हें..हें..हें.. की अैसे ही खडा रहेता हे.. मे जबभी देखती हु हमेसा खडाही होता हे.. आपको पेन्टके अंदर दर्द नही होता..?
देवायत : नही इनका भी रीझन हे.. जो तुजे बादमे पता चल जायेगा.. ओर अभी नही उतरना.. मुजे अेक बार ओर तुजे चोदना हे.. चल तैयार होजा आजतो मुजे तुमपे बहोत प्यार आरहा हे..
चारु : (बुरी तराह सरमाते) ओ बापरे.. यार मे अब आपको नही जेल पाउगी.. वेसे भी आपने तो मुजे अेकही बारमे नीचोड लीया हे.. (कामुक नजरोसे देखते) क्या मेरा होनेवाला पती सचमे करना चाहते हे..?
देवायत : हां.. बस अेक बार.. फीर मुजे भी जाना हे..
कहेते देवायत अपने उपरकी चदरको हटा देता हे.. ओर चारुके होंट चुमने लता हे तब चारुभी उनका साथ देने लगती हे ओर देवायत धीरे धीरे करते वापस अपनी कमर हीलाते चारुको चोदने लगता हे.. तब चारुभी फीरसे काम अग्नीमे जलते देवायतसे अपनी कमर हीलाते साथ देने लगी.. तभी देवायत हाथके बल उचा होते उनके पैरके बीच बैठ गया ओर चारुका हाथ पकडते उसेभी खीचके अपनी गोदमे बीठा दीया.. तब चारु उनके गलेमे हाथ डालके उनको पकड लेती हे ओर अपनी कमर हीलाते देवायतसे चुदवाने लगती हे..
दोनोही अपनी अपनी कमर हीलाते तालमेलमे चुदाइ करने लगे.. तब थोडीही देरमे चारु बेठेही देवायतको अपनी बाहोमे भीचलेती हे ओर कमरको जटके मारते मुह पीछे डालके जडने लगती हे.. जब वो जड गइ तब थकके चकनाचुर होगइ.. ओर देवायतको बाहोसे आजाद करते बेडपे लैट गइ तो देवायत उनकी कमरको पकडते चारुको जोरोसे सोट मारते चोदने लगा.. तब चारु अेसे ही बेसुध जैसे पडी रही ओर देवायतके जबरदस्त धकेको सहेन करते देवायतसे चुदवाती रही..
तभी देवायत चारुके उपर चुदाइ करते जुकता हे ओर उनके सरपे हाथ रखते उनकी आंखोमे देखते लंबे लंबे सोट मारते चारुको चोदने लगता हे तो चारुभी वापस उनका साथ कमर हीलाते देने लगती हे ओर अेक बार फीरसे दोनोके बीच घमासान चुदाइका दोर चल पडा.. तभी चारु अेक बार फीरसे देवायतको अपनी बाहोमे भीच लेती हे ओर होठोको लीपलोक करते अपनी कमरको जटके मारने लगती हे ओर जडके सांत हो जाती हे..
चारु : (दर्दसे) बसस.. बसस.. यार अब बसभी करो.. कीतना चोदोगे.. आजतो चोद चोदकर मुजे थका दीया.. सीइइइ हंममममम मरगइइइ देवुउउउउ बसस.. नहीइइ सहा जाता.. कीतनी देरर हेहेहे... पानी नीकालोनां.. हंमम उउउइइइइ मां ससइइइ.. बस देवु.. मत चोदो मुजे.. बहुत जल रही हे..
तब देवायत ने चारुकी अेक ना सुनी.. ओर वो चारुके गलेमे मुह डालके पुरा जुक गया ओर कमर उछालते लंबे लंबे सोट मारते चारुको चोदताही रहा.. तब चारुनेभी अपने दोनो पैर फैलाके घुटनोसे मोड लीया ताकी उनकी चुत थोडी खुलजाये ओर देवायतके लंडको अच्छेसे जेल पाये.. देवायतका हर धका वो आहे.. भरते बरदास्त करती रही.. क्युकी हर बार लंड उनकी बच्चेदानीसे टकरा रहाथा.. जीनकी वजहसे उनकी बच्चेदानीका मुख खुल जाताथा ओर चारुको दर्द होताथा.. इसीलीये वो ओर अेसेही पडी रहेते आहे भरते देवायतसे चुदवाती रही.. क्युकी वो जानतीथी आज देवायत उनको छोडने वाला नही हे..
तभी अचानक देवायत चोदनेकी स्पीड अेकदम बढा देता हे तब चारुकी जोरोसे चीखे नीकलने लगी ओर वो छटपटाते बेटपे पैर पटकने लगी.. क्युकी देवायतके तगडे लंडको जेलना उनके लीये मुस्कील होने लगा.. तब देवायत चारुको जोरोसे बाहोमे भर लेता हे तो चारुभी उनको कसके बाहोमे भीच लेती हे.. ओर दोनोके होठ मीलतेही लीपलोक कर लेते हे तब चारु बडी आंख करते देवायतको देखने लगती हे ओर देवायत कमरको जटके मारते लंडको जडतक घुसा देता हे ओर जडते चारुकी चुतको भरने लगता हे..
तब चारुभी अपने गर्भासयपे देवायतका गरम विर्य महेसुस करते उतेजीत हो जाती हे ओर वोभी देवायतके साथ कमरको उछालते जडने लगती हे.. तब देवायत जोरोसे कमर हीलाते चारुकी चुतको भरने लगा.. ओर वो जडतेही जटसे चारुकी चुतसे लंड नीकालते अलग होजाता हे.. तब चारु दर्दके मारे बहोसी जैसी हालतमे करवट लेके पैर सीकुड लेती हे.. ओर ओर मुह बीगाटते ढेर होजाती हे.. आज वाकइ देवायतने चारुकी चुतकी धजीया उडादी थी.. उनको चारु ओर उनकी चुत बहुत पसंदथी.. ओर वो जबभी चारुको चोदता अैसेही चारुकी हालत बीगाडते चोदता.. ओर चारुको दो दीन तक आराम करना पडता..
तब देवायत बेडसे उतर जाता हे ओर चारुको गोदमे उठाके बाथरुमकी ओर लेजाता हे.. फीर दोनोही अेक दुसरेको साफ करते साथमे नहा लेते हे ओर बहार आके अपने अपने कपडे पहेनके तैयार हो जाते हे.. ओर बहार होलमे आजाते हे तब चारु धीरे धीरे लंगडाके चल रही थी.. ओर बहुतही सरमा रहीथी.. तब बहार आते वो देवायतकी पीठमे हसते हुअे सरारतसे मुका मारने लगती हे ओर सरमाते हसने लगती हे..
चारु : (सरमाते हसते) देवरजी.. अेसेही कोइ करता हे.. कीतना जोसमे करतेथे मेतो लगभग बेहोस जेसी होगइ थी.. ओर आज आपने मुजे दर्दभी बहुत दीया हे.. मुजसे कोनसी दुस्मनी नीकाल रहे थे.. हें..हें..हें..
देवायत : (पलटके हग करते) नही चारु आज वाकइ तुमपे बहोत प्यार आरहा था.. कास तुम मेरी बीवी होकर मेरे साथ रहेती.. तब मे तुजे अेसे ही दीन रात चोदताही रहेता.. क्या मस्त लग रही हे तु.. दिलतो चाहता हे अभी भी तुमसे प्यार करता रहु.. लेकीन मुजे आज जानाभी हे.. कास तु मेरी बीवी होती..
चारु : (अेकदम सरमाते) बीवी नही हु तो होजाउगी.. हम दोनो गांधर्व विवाहतो कर ही रहे हे.. कहो.. कब मुजसे सादी करोगे मे आपसे सादी करनेके लीये रेडी हुं..? सारा इन्तजाम आपको करना पडेगा.. ओर आपके भाइको भी आपको हेन्डल करना पडेगा.. मे रेडी हु.. अबतो मे आपकी बीवी बनके ही रहुगी.. इतना प्यारतो आपके भाइने भी कभी नही दीया.. देवु.. आइ लव यु सो मच..
देवायत : (होंठ चुमते) लव यु टु चारु.. बस चारु कुछ दीन इन्तजार करले.. फीर हम मौका मीलतेही सादी कर लेगे तबतक हम रश्मीभाभीके यहा मीलते रहेगे.. तुम उनसे बात करलेना..
चारु : नही देवरजी.. अबतो आपके भाइ सरपंच होगये हे तो आयेदीन घरसे गायब रहेगे.. ओर वंदनाभी ट्युसनपे होती हे तो अबमे घरमे अकेली ही रहुुगी.. आपको फोन करदुगी तब आजाना.. अबतो हमे बहुत सारे मोके मीलते रहेगे.. तब हम मीलेगे.. आप बैठो मे चाइ बनाके लाइ..
देवायत : नही चारु तुम आराम करो.. मे खेतोपे जा रहा हु.. वेसेभी देर होगइ हे मे वही पीलुगा..
चारु : (सरमाते) देरतो होगीनां.. जनाबको दो बारजो करना था.. आजतो मुजे पुरी नीचोडली.. अभीभी मुजे नीचे बहुत जलन हो रही हे.. मेरा पुरा सरीर आज आपने तोडके रख दीया..
कहातो देवायत चारुको अेकबार फीरसे बाहोमे भर लेता हे ओर दोनोके होंठ मील जातेहे.. तब देवायतका प्यार देखकर चारुकी आंख गीली होगइ.. ओर देवायत वहासे नीकल गया ओर सीधे अपने खेतोपे आगया.. तब वहा लखन टे्रक्टर चला रहाथा ओर भानु रामुकाकाके पास बेठे देवायतका वेइट कर रहाथा.. जेसेही देवायतको देखा खडा होके गोडाउनकी ओर चलने लगा ओर रीटाको चाइकी आवाज लगाने लगा.. ओर दोनो गोडाउनमे आकर बेठ गये..
भानु : क्यु भाइ आनेमे देर होगइ..? कही गयेथे क्या..? धरसेतो कबसे नीकल गये हो.. कहा अटक गयेथे..?
देवायत : घरपे फोन कीयाथा क्या..? बोल क्या कामथा..? होगइ तुम दोनो मीया बीवीमे सुलह..? हें..हें..हें..
भानु : (हसते) काहेकी सुलह.. बस अब कुछ ज्यादा बोलती नही.. ओर रमासे तो अब हस हसके बात करती हे.. भाइ इनकाभी मेरी कुछ समजमे नही आता.. की वो मुजसे क्या चाहती हे..
देवायत : (हसते) यार तु टेन्सन मत ले.. बस तुमने उनसे अपने ओर मामीके रीस्तेकी बात छुपाइ इसीलीये तुमसे थोडी नाराज हे.. ओर कुछ नही.. धीरे धीरे सब ठीक होजायेगा.. बोल कब कर रहा हे मामीसे सादी..?
भानु : (हसते) भाइ वो तीन दीनके बाद मामाक सब कार्य खतम होजायेगा.. तब कर लेगे सादी.. मेरी तराह उनकोभी (रमाको) जल्दी हे हें..हें..हें.. वैसे सादीकी खरीदारी करने कब जाना हे..? अब सादीमे दीन ही कीतने बचे हे.. भाइ पता नही सब काम कब करलेगे हम..
देवायत : भानु अेक बात कहु..? तु मामीके साथ सादी करले.. फीर तुम दोनो लता ओर नीलमको लेके चले जाना.. ओर सब खरीदी अेकही दीनमे नीपटा लेना.. तो रमाभाभीको भी अच्छा लगेगा.. ओर वो मामाको भी जल्दी भुल जायेगी.. अब तुजेही उनको सम्हालना हे..
भानु : (हसते) ठीक हे भाइ.. तो फीर आपकी खरीदारी कैसे करोगे..? क्या नइ बीवीको लेकर जाओगे.? हें..हें..हें.. लेजाओ दोनो सास बहुको.. दोनोकी खरीदारी अेक साथ होजायेगी..
देवायत : (सीरीयस होते) भानु.. हम मंजुको दीखाने जायेगे तब दोनो सीधे हमारे घरपेही आजायेगी.. मुजसे ज्यादा मंजुको जल्दी हे की मौसी जल्दी घर आजाये.. ओर हमारी सादी होजाये..
भानु : भाइ तो उसमे गलतभी क्या हे वेसेभी सादी अभी करो की सादीके बाद.. उनको आनाहेतो इसी घरमे.. तो फीर आपभी सादी करलो.. फीर हम चारोकी सादी आरामसे करेगे.. हमे कहा कोइ तामजाम करना हे..
देवायत : चल ठीक हे देखते हे आगे क्या होता हे.. फीलहाल तो दो दीन वेइट करना हे.. फीर देखतेहे क्या करना..
भानु : भाइ आप अेक बार भावुसे खुलके बात करलो की वो क्या चाहती हे.. मुजसे बात क्यु नही करती..?
देवायत : भानु तु उनकी चीन्ता मत कर.. बस कुछ वक्त लगेगा.. फीर वो तुमसे बातभी करेगी..
रीटा : (सरपे पलु डालके चाइ लाते) मालीक.. लीजीये चाइ.. मे कप बादमे लेजाउगी..
कहेते रीटा चली गइ ओर दोनो चाइ पीने लगे.. तब दुसरी ओर चारुके घरपे देवायतके जातेही चारु सब दरवाजा बंध करके धीरे धीरे लंगडाते चलते फीरसे बाथरुममे घुस गइ.. ओर टबमे बेठकर अपनी चुतकी गरम पानीसे सीकाइ करने लगी.. तब जाके उनको थोडी राहत महेसुस हुइ.. फीर बहार आकर अेक पेइन कीलर ओर आइपीलकी गोली खाकर अपने रुममे चली गइ.. ओर लेटकर आराम करते सोचने लगी..
चारु : (आंख बंध करते मनमे सोचते) बडाही जालीम हे.. पहेलीबार मे ही मेरी जबरदस्त चुदाइ करली.. ओर आज उनको क्या होगया की मुजे बीना बहार नीकाले दुसरी बारभी चोद लीया.. ओर चोद चोदकर मेरी हालत बीगाडके चला गया.. क्या मे वाकइ उनको इतनी अच्छी लगती हु..? दुसरी बारमे कैसे जालीमने मुजे रगड रगडके बेहरेहमीसे चोदा.. अभी भी मेरी मुनीया(चुत) जल रही हे.. ओर वो जालीम चोदता भी मस्त हे.. इतना तो रमेशने भी मुजे कभी नही चोदा हे.. रमेश का लंडतो इनसे आधा हे.. मुजसे ठीकसे चोदभी नही पाता.. ओर मुजे प्यासी रख देता हे.. ओर देवुका लंड..? ओ बापरे.. मानो कीसी गध्धेका लंड हो.. मेरी चुतकी धजीया उडा देता हे.. तभी तो मुजे अच्छा लगता हे.. क्या मे उनसे सादी करलु..? मुजे जींदगीभर अैसेही चोदकर खुस रखनेको केह रहाथा.. ओर इसमे हर्जभी क्या हे..? मुजे कोनसा उनके साथ रहेना हे.. बस यही रमेशके साथ रहेकर देवुकी सीक्रेट बीवी बनके तो रहेना हे.. ताकी मुजे आजकी तराह खुस करता रहे वोही मेरे लीये काफी हे.. (तभी चारुके फोनकी रींग बजती हे ओर वो फोन उठालेती हे)
वंदना : (फोन उठाते ही) मम्मी मे इधर पुनमके पास रुक गइ हु.. ओर खाना इधर ही खाकर आउगी.. तुम ओर पापा खा लेनां..
चारु : (धीमी आवाजमे) नही वंदना.. अभी तेरे पापाभी आजायेगे ओर मेने खानाभी नही बनाया हे.. सुन मेरी तबीयत भी अचानक खराब होगइ हे.. प्लीज आज खाना तुही बनाले.. वहा फीर कभी खा लेना..
वंदना : (थोडी चींतीत होते) मम्मी क्या हुआ..? अभीतो मे वहासे गइ तबतो आप ठीक थी..?
चारु : (धीरेसे जुठ बोलते) वंदना मे थोडी देर पहेले बाथरुम मे गइथी.. तो पैर फीसल गया.. ओर पैरमे मोच आगइ.. तो बेटा मे आराम कर रही हु.. मुजसे चला नही जाता.. ओर थोडा टेम्परेचर जैसा भी लग रहा हे.. प्लीज तु आजानां..
वंदना : (जटसे) ठीक हे मम्मी मे अभी नीकलती हु.. आप डोक्टरको दीखादो.. कही कुछ हुआ तो नही..?
चारु : अरे नही नही.. इतनाभी दर्द नही हे.. बस तु आजा.. अभी गोली खाइ हे मे बेडपे आराम कर रही हु..
तो वंदनाने फोरन फोन कट कर दीया.. ओर पुनमको कहेके वो जटसे वहासे नीकल गइ.. तब पुनमभी अपने बेडपे आराम करने लगी.. उधर वंदना घरपे पहोची तो उनकी मम्मी अपने रुम मे आराम कर रही थी..
वंदना : (चारुके पास बेठते उनके सरपे हाथ रखकर चेक करते) मम्मी क्या हुआ..? कुछ ज्यादा तो नही लगी.. डोक्टरको दीखाना हे..? ओर टेम्परेचरभी तो मामुली हे.. अच्छा हे ज्यादा नही हे..
चारु : (जुठके दर्दसे मुह बीगाडते) नही बेटी.. कुछ आराम कर लुगी तो ठीक होजाउगी.. तु टेन्शन मतले.. वरना हम सामको देखेगे.. नही आराम हुआ तो डोक्टरको दीखा देगे.. तु आज खाना बनाले.. कीतनी चीन्ता करती हे तु..
वंदना : चीन्तातो करुगीनां आपके मेरे सीवा हे ही कोन..? तो फीर मुजे अेक भाइभी दे देना चाहीयेनां.. हें..हें..हें... मम्मी अभीभी कुछ नही बीगडा हे.. सबलोग कहेते हे की आजभी आप मेरी बडी दीदी लगती हे, हें..हें..हें..
चारु : (सरमातते अेक मुका मारते) चल बदमास तु फीर सुरु होगइ.. जा पहेले खाना बनाले अभी तेरे पापा आजायेगे.. (हसते धीरेसे) भाइ चाहीये तो तु खुद सादी करले.. फीर अपना बच्चा पैदा करलेना.. तुजे भाइकी नही अेक बेटेकी जरुरत हे.. हें..हें..हें.. ओर क्या कर रही हे पुनो..? क्या उसे मीलने गइ थी..?
वंदना : (सरमाते) नही मम्मी वो देवायतजीको पुछने गइथी.. वो जरुरी पेपर सबमीट करने हे तो..
चारु : (हसते) बेटा वो तो इधर आयेथे.. सायद इसीलीये आये होगे.. लेकीन तुम नहीथी तो पानी पीकर चले गये.. (मनमे) बेटी तुजे क्या पता आज तु नहीथी तो तेरी मांको चोद चोदके वोही हालत खराब करके गये हे.. उन्हीकी वजहसे तेरी मां बेडपे पडी हे.. अच्छा हुआ मेने आइपील लेली वरना आज जालीम पका मुजे प्रेगनेन्ट करके जाता.. पता नही तु जवान होते हुअे भी कैसे अकेली रेह पाती हे.. मेतो पतीके होनेके बावजुद देवायतसे चुदे बीना नही रेह सकती.. क्या तुजे अेक लंडकी जरुरत नही हे..? पता नही बीना लंडके तु कैसे अकेली रेह लेती हे.. ओर वोभीतो राजा हे वो कीतनीभी सादी कर सकते हे.. कास तेरी सादी देवुसे हो जाती.. तो हम मां बेटी दोनोको वो सम्हाल लेते..
वंदना : मम्मी क्या सोच रही हो..? वो..वो मुजे उनके साथ अेक बार जाना पडेगा.. तो पुनमको पुछने चली गइथी.. वो मेरे साथ चल रही हे..
चारु : (वंदनाकी ओर देखते) क्या पुनमभी साथ आ रहीहे..? तो फीर उनके साथही चली जाना.. वरना मेही तुम्हारे साथ आने वालीथी.. अबतो तेरे पापाको टाइमही नही मीलेगा.. ठीक हे कब नीकलना हे..?
वंदना : (हसते) अरे अभी नही.. पहेले मे सब पेपरके बारेमे जानलु फीर जब वो कहेगे तब नीकलना हे..
चारु : चल ठीक हे पुनम साथ हेतो कोइ दीकत नही हे.. तु चली जाना.. तेरे पापासे अेक बार बात करलेना..
तब वंदना खाना बनाने चली गइ.. ओर पुनमकी कही सब बातोके बारेमें सोचते खाना बनाने लगी.. आज पुनमकी बातोने उसे जंजोरके रख दीयाथा.. ओर वंदनाको अेक बार फीर आशाकी नइ कीरण नजर आने लगी.. ओर सोचते सोचते उसने पुनमके कहेने मुताबीक आगे बढनेका फैसला करलीया.. वो देवायतके बारेमे फीरसे सोचने लगी.. तो उनकी चुतमे तेज हलचल सुरु होगइ.. ओर चुतकी दोनो पंखुडीया फडफडाते पानी छोडने लगी....
कन्टीन्यु
अध्याय - ६८
तब थोडीही देरमे देवायत चारुके सीनेपे सर रखते ढेर हो गया.. तब चारु अेक हाथसे उनका सर तो दुसरा हाथ पीठकी ओर लेजाते उनको सहेलाती रही.. ओर दोनोही अपनी सांसे कंट्रल करते रहे.. दोनो काफी देर अपनी सांसको दुरस्त करते हुअे अैसेही पडे रहे.. तब देवायतका लंड अभीभी चारुकी चुतमे अेसेही सख्त होते अंदर घुसा हुआथा.. जो आमतोरपे रमेशसे चुदती तब रमेशका लंड जडतेही सीकुडके बहार नीकल जाता.. तब चारुकोभी आज थोडा अजीब लगा.. तब उसने साइडमे पडी चदर खीचके देवायतके उपर डालदी.. ओर खुस होते देवायतसे प्यार भरी बाते करने लगी....अब आगे
चारु : (सरमाते हसते) देवरजी अब उपरसे उतरना नही हे क्या..? कीतना पानी नीकालते हो.. कही मुजे प्रेगनेन्ट करनेका इरादातो नही हे..? हें..हें..हें.. अंदर अभी भी गरम लग रहा हे.. आपनेतो मुजे अेकही बारमे नीचोड लीया.. पता हे मे तीन बार जड चुकी हु..
देवायत : (हसते) हां करले पैदा हमारा बच्चा.. हें..हें..हें.. ओर अभी मुजे उपरसे नही उतरना.. चारु मुजे तुमसे ओर प्यार करना हे.. कीतने दिनोके बाद हमे ये मौका मीला हे.. आज मे तेरी सारी कशर पुरी कर दुगा..
चारु : (सरमाते हसते) ओ बापरे तबतो मेरी आज खैर नही.. तो पहेले आजाना चाहीयेनां.. देखना बाबा मुजे मेरी चुतको सही सलामत रखना हे.. वरना आपके भाइको में क्या जवाब दुगी..? मेतो आपकी दीवानी होगइ हु.. ओर हां आप सादीकी क्या बात कर रहे थे..? आपके दोस्तकी बीवी हु.. फीरभी मुजसे सादी करोगे..? हें..हें..हें.. फीर आपके भाइको क्या जवाब दोगे..? लेकीन आपको मुजसे सादी क्यु करनी हे..? हमतो अैसेही बीना सादी पती पत्नी वाला कामतो करही रहे हे.. मे आपको कहा मना करती हु..
देवायत : सुन चारु.. मेरा अेक सोख रहा हे.. क्युकी मे अेक राजवी खानदानसे हु तो मुजे कइ रानीयोका सोख हे.. में जीसके साथभी रीलेशन रखता हु उनको मे यातो सादी करता हु या फीर उनसे गांधर्व विवाह करके अपनी सीक्रेट बीवी बना लेता हु.. ताकी हम दोनोही आपसमे अेक दुसरेका अधीकार मानते खुलके प्यार कर सके.. क्युकी मे कीसीको रखेलकी तराह इस्तेमाल करना नही चाहता.. ओर तुजपे तो सुरुसे ही मेरा दील आगया हे.. आप बहुतही खुबसुरत हे जो मुजे पागल कर देती हे.. मे सुरुसे ही तुजे पसंद करता हु..
चारु : (सरमसे पानीपानी होते हसते) ओ..हो.. तभी आप मुजसे सादीके लीये केह रहेथे..? सोचलो फीर जींदगी भर मुजे जेलना पडेगा.. हें..हें..हें.. वैसे आपके विचार जानके मुजे खुसी हुइ.. कास आप मुजे पहेलेही मीलते.. मे आपसेही सादी कर लेती.. फीर भलेही हम दोनोकी उम्रमे कीतनाभी फर्क हो..
देवायत : (हसते गलेको चुमते) हां चारु मे चाहता हु की तुजे जबभी मेरे प्यारकी जरुरत पडे तब मुजसे खुलके मील सके.. इसीलीये मेने मेरी सीक्रेट बीवीओके लीये अेक घरका भी इन्तजाम कर लीया हे.. जहा मे मेरी सभी बीवीयोको मील सकु.. ओर सबकी इजतभी बरकरार रख सकु..
चारु : (हसते होंठ चुमते) थेन्कस देवरजी.. मुजे नही पता था आप मुजे इतना चाहते हे ओर हमारे लीये आपने बहुत सारे इन्तजामभी कर लीये हे.. लेकीन आपके भाइको पता चल गया तो मेरा क्या होगा वो कभी सोचा हे..? मुजेतो घरसेही नीकाल देगे.. ओर आपके सबंध खराब होगे वो अलग..
देवायत : हां.. तब आजाना मेरी हवेलीका दरवाजा तेरे लीये खुलाही हे.. ओर वहा नही तो मेरी अेक ओर सीक्रेट वाइफ हे उनके साथ रहेना.. बोल अब क्या जानना हे.. बाकी रमेशको कभी पताही नही चलेगा.. ओर पता चलेगातो मे देख लुगा.. बस मुजे तुम चाहीये.. मे वाकइ तुमसे प्यार करता हु..
चारु : (सरमाते खुस होते) कहीये कब करनी हे मुजसे सादी..? मे तैयार हु.. आपके लीयेतो मे कुछभी कर सकती हु.. ओर पता हे आपसे ज्यादा मे आपको प्यार करती हु.. बना लीजीये मुजे आपकी सीक्रेट वाइफ.. मे वादा करती हु जींदगीभर आपको अैसेही प्यार देती रहुगी.. ओर हां.. वेसे कीतनी सीक्रेट वाइफ हे आपकी..? ओर मे कीसके घरमे मीलुगी आपसे..?
देवायत : चारु ये बात सीर्फ तेरे तकही सीमीत रखना.. वो रश्मीभाभी.. तेरी ही तराह मेरी सादी नही हुइथी तबसे उनके साथ मेरा रीलेशन हे.. आज वो मेरी सीक्रेट वाइफ हे.. मेने उनके साथभी सादी करली हे.. ओर तु उनके साथ दोस्ती करले.. ओर हम वही मीलते रहेगे.. अबतो वैसेभी वो अकेलीही हे.. तु जबभी चाहेगी हम वहा मीलते रहेगे.. बोल क्या कहेती हो..?
चारु : कोन वो रश्मी.. सरपंचकी बीवी..? वो भी आपकी बीवी होगइ..? ओर दुसरी..?
देवायत : (हसते) अभी तो सीर्फ रश्मी तक सीमीत रख.. बाकी तुजे धीरे धीरे सब पता चल जायेगा.. क्युकी आने वाले वक्तमे तुजे बहुत कुछ नया दीखनेको मीलेगा जीसकी तुमने कभी कल्पनाभी नही की होगी..
चारु : (आस्चर्य से देखते) क्या केह रहे हे आप..? क्या दीखनेको मीलेगा मे समजी नही.. आप कीसके बारेमे बात कर रहे हे..?
देवायत : चारु तब तुम कुछ अैसे रीस्तेको देखेगी जीसकी हम कभी कल्पनाभी नही कर सकते.. जो सब आपसी रीस्तोमे सादी करेगे.. तुमने वो हिमाचलके राजाकी कहानीतो (ये केसी अनुभुती) सुनी होगी..? बस.. वोही सब अब मेरे घरमे ओर यहा गांवमे होने वाला हे.. बाकी मे तुजे अभी कुछ नही बता सकता.. बस कुछ समयका इन्तजार करले.. फीर तुजे सब पता चल जायेगा..
चारु : अरे हां.. वो कहानी (ये केसी अनुभुती) तो कइ बार सुनी हे.. ओर मेने तो पुरी बुक कइ बार पढी हे.. मुजेतो बहुत अच्छी कहानी लगी.. उनमे रीस्तेकातो कोइ मायना ही नही हे.. जीसे जीनसे चाहे वो उनसे सादी कर सकता हे.. उनमेतो भाइ बहेन.. मा बेटे.. यहा तम दादीसे भी सादी करते हे.. तो क्या वो सबभी वहा होने वाला हे..? आप इतने यकीनसे कैसे केह सकते हो..? हमारे गांव वालेतो वैसे भी पुराने खयालातके हे.. वो कतइ अेसे रीस्तेको स्वीकार नही करेगे.. मे नही मानती.. कहेदो आप जुठ बोल रहे हो..
देवायत : नही चारु.. मे जुठ नही बोलता.. ये बात सच हे.. चारु वो सब मे तुजे बादमे बताउगा.. अभी इनके बारेमे बतानेका वक्त नही हे.. हमे काफी देर हो चुकी हे.. इस बारेमे हम फुरसतमे बात करेगे..
चारु : (सरमाते हसते) हां.. अब उपरसे उतरो.. कबसे मेरे उपर पडे हो.. हें..हें..हें.. आपके गधे जैसा हथीयार अभी भी अंदर अैसेही हे.. क्या ये कभी बैठनेका नाम लेता हे की नही..? हें..हें..हें.. की अैसे ही खडा रहेता हे.. मे जबभी देखती हु हमेसा खडाही होता हे.. आपको पेन्टके अंदर दर्द नही होता..?
देवायत : नही इनका भी रीझन हे.. जो तुजे बादमे पता चल जायेगा.. ओर अभी नही उतरना.. मुजे अेक बार ओर तुजे चोदना हे.. चल तैयार होजा आजतो मुजे तुमपे बहोत प्यार आरहा हे..
चारु : (बुरी तराह सरमाते) ओ बापरे.. यार मे अब आपको नही जेल पाउगी.. वेसे भी आपने तो मुजे अेकही बारमे नीचोड लीया हे.. (कामुक नजरोसे देखते) क्या मेरा होनेवाला पती सचमे करना चाहते हे..?
देवायत : हां.. बस अेक बार.. फीर मुजे भी जाना हे..
कहेते देवायत अपने उपरकी चदरको हटा देता हे.. ओर चारुके होंट चुमने लता हे तब चारुभी उनका साथ देने लगती हे ओर देवायत धीरे धीरे करते वापस अपनी कमर हीलाते चारुको चोदने लगता हे.. तब चारुभी फीरसे काम अग्नीमे जलते देवायतसे अपनी कमर हीलाते साथ देने लगी.. तभी देवायत हाथके बल उचा होते उनके पैरके बीच बैठ गया ओर चारुका हाथ पकडते उसेभी खीचके अपनी गोदमे बीठा दीया.. तब चारु उनके गलेमे हाथ डालके उनको पकड लेती हे ओर अपनी कमर हीलाते देवायतसे चुदवाने लगती हे..
दोनोही अपनी अपनी कमर हीलाते तालमेलमे चुदाइ करने लगे.. तब थोडीही देरमे चारु बेठेही देवायतको अपनी बाहोमे भीचलेती हे ओर कमरको जटके मारते मुह पीछे डालके जडने लगती हे.. जब वो जड गइ तब थकके चकनाचुर होगइ.. ओर देवायतको बाहोसे आजाद करते बेडपे लैट गइ तो देवायत उनकी कमरको पकडते चारुको जोरोसे सोट मारते चोदने लगा.. तब चारु अेसे ही बेसुध जैसे पडी रही ओर देवायतके जबरदस्त धकेको सहेन करते देवायतसे चुदवाती रही..
तभी देवायत चारुके उपर चुदाइ करते जुकता हे ओर उनके सरपे हाथ रखते उनकी आंखोमे देखते लंबे लंबे सोट मारते चारुको चोदने लगता हे तो चारुभी वापस उनका साथ कमर हीलाते देने लगती हे ओर अेक बार फीरसे दोनोके बीच घमासान चुदाइका दोर चल पडा.. तभी चारु अेक बार फीरसे देवायतको अपनी बाहोमे भीच लेती हे ओर होठोको लीपलोक करते अपनी कमरको जटके मारने लगती हे ओर जडके सांत हो जाती हे..
चारु : (दर्दसे) बसस.. बसस.. यार अब बसभी करो.. कीतना चोदोगे.. आजतो चोद चोदकर मुजे थका दीया.. सीइइइ हंममममम मरगइइइ देवुउउउउ बसस.. नहीइइ सहा जाता.. कीतनी देरर हेहेहे... पानी नीकालोनां.. हंमम उउउइइइइ मां ससइइइ.. बस देवु.. मत चोदो मुजे.. बहुत जल रही हे..
तब देवायत ने चारुकी अेक ना सुनी.. ओर वो चारुके गलेमे मुह डालके पुरा जुक गया ओर कमर उछालते लंबे लंबे सोट मारते चारुको चोदताही रहा.. तब चारुनेभी अपने दोनो पैर फैलाके घुटनोसे मोड लीया ताकी उनकी चुत थोडी खुलजाये ओर देवायतके लंडको अच्छेसे जेल पाये.. देवायतका हर धका वो आहे.. भरते बरदास्त करती रही.. क्युकी हर बार लंड उनकी बच्चेदानीसे टकरा रहाथा.. जीनकी वजहसे उनकी बच्चेदानीका मुख खुल जाताथा ओर चारुको दर्द होताथा.. इसीलीये वो ओर अेसेही पडी रहेते आहे भरते देवायतसे चुदवाती रही.. क्युकी वो जानतीथी आज देवायत उनको छोडने वाला नही हे..
तभी अचानक देवायत चोदनेकी स्पीड अेकदम बढा देता हे तब चारुकी जोरोसे चीखे नीकलने लगी ओर वो छटपटाते बेटपे पैर पटकने लगी.. क्युकी देवायतके तगडे लंडको जेलना उनके लीये मुस्कील होने लगा.. तब देवायत चारुको जोरोसे बाहोमे भर लेता हे तो चारुभी उनको कसके बाहोमे भीच लेती हे.. ओर दोनोके होठ मीलतेही लीपलोक कर लेते हे तब चारु बडी आंख करते देवायतको देखने लगती हे ओर देवायत कमरको जटके मारते लंडको जडतक घुसा देता हे ओर जडते चारुकी चुतको भरने लगता हे..
तब चारुभी अपने गर्भासयपे देवायतका गरम विर्य महेसुस करते उतेजीत हो जाती हे ओर वोभी देवायतके साथ कमरको उछालते जडने लगती हे.. तब देवायत जोरोसे कमर हीलाते चारुकी चुतको भरने लगा.. ओर वो जडतेही जटसे चारुकी चुतसे लंड नीकालते अलग होजाता हे.. तब चारु दर्दके मारे बहोसी जैसी हालतमे करवट लेके पैर सीकुड लेती हे.. ओर ओर मुह बीगाटते ढेर होजाती हे.. आज वाकइ देवायतने चारुकी चुतकी धजीया उडादी थी.. उनको चारु ओर उनकी चुत बहुत पसंदथी.. ओर वो जबभी चारुको चोदता अैसेही चारुकी हालत बीगाडते चोदता.. ओर चारुको दो दीन तक आराम करना पडता..
तब देवायत बेडसे उतर जाता हे ओर चारुको गोदमे उठाके बाथरुमकी ओर लेजाता हे.. फीर दोनोही अेक दुसरेको साफ करते साथमे नहा लेते हे ओर बहार आके अपने अपने कपडे पहेनके तैयार हो जाते हे.. ओर बहार होलमे आजाते हे तब चारु धीरे धीरे लंगडाके चल रही थी.. ओर बहुतही सरमा रहीथी.. तब बहार आते वो देवायतकी पीठमे हसते हुअे सरारतसे मुका मारने लगती हे ओर सरमाते हसने लगती हे..
चारु : (सरमाते हसते) देवरजी.. अेसेही कोइ करता हे.. कीतना जोसमे करतेथे मेतो लगभग बेहोस जेसी होगइ थी.. ओर आज आपने मुजे दर्दभी बहुत दीया हे.. मुजसे कोनसी दुस्मनी नीकाल रहे थे.. हें..हें..हें..
देवायत : (पलटके हग करते) नही चारु आज वाकइ तुमपे बहोत प्यार आरहा था.. कास तुम मेरी बीवी होकर मेरे साथ रहेती.. तब मे तुजे अेसे ही दीन रात चोदताही रहेता.. क्या मस्त लग रही हे तु.. दिलतो चाहता हे अभी भी तुमसे प्यार करता रहु.. लेकीन मुजे आज जानाभी हे.. कास तु मेरी बीवी होती..
चारु : (अेकदम सरमाते) बीवी नही हु तो होजाउगी.. हम दोनो गांधर्व विवाहतो कर ही रहे हे.. कहो.. कब मुजसे सादी करोगे मे आपसे सादी करनेके लीये रेडी हुं..? सारा इन्तजाम आपको करना पडेगा.. ओर आपके भाइको भी आपको हेन्डल करना पडेगा.. मे रेडी हु.. अबतो मे आपकी बीवी बनके ही रहुगी.. इतना प्यारतो आपके भाइने भी कभी नही दीया.. देवु.. आइ लव यु सो मच..
देवायत : (होंठ चुमते) लव यु टु चारु.. बस चारु कुछ दीन इन्तजार करले.. फीर हम मौका मीलतेही सादी कर लेगे तबतक हम रश्मीभाभीके यहा मीलते रहेगे.. तुम उनसे बात करलेना..
चारु : नही देवरजी.. अबतो आपके भाइ सरपंच होगये हे तो आयेदीन घरसे गायब रहेगे.. ओर वंदनाभी ट्युसनपे होती हे तो अबमे घरमे अकेली ही रहुुगी.. आपको फोन करदुगी तब आजाना.. अबतो हमे बहुत सारे मोके मीलते रहेगे.. तब हम मीलेगे.. आप बैठो मे चाइ बनाके लाइ..
देवायत : नही चारु तुम आराम करो.. मे खेतोपे जा रहा हु.. वेसेभी देर होगइ हे मे वही पीलुगा..
चारु : (सरमाते) देरतो होगीनां.. जनाबको दो बारजो करना था.. आजतो मुजे पुरी नीचोडली.. अभीभी मुजे नीचे बहुत जलन हो रही हे.. मेरा पुरा सरीर आज आपने तोडके रख दीया..
कहातो देवायत चारुको अेकबार फीरसे बाहोमे भर लेता हे ओर दोनोके होंठ मील जातेहे.. तब देवायतका प्यार देखकर चारुकी आंख गीली होगइ.. ओर देवायत वहासे नीकल गया ओर सीधे अपने खेतोपे आगया.. तब वहा लखन टे्रक्टर चला रहाथा ओर भानु रामुकाकाके पास बेठे देवायतका वेइट कर रहाथा.. जेसेही देवायतको देखा खडा होके गोडाउनकी ओर चलने लगा ओर रीटाको चाइकी आवाज लगाने लगा.. ओर दोनो गोडाउनमे आकर बेठ गये..
भानु : क्यु भाइ आनेमे देर होगइ..? कही गयेथे क्या..? धरसेतो कबसे नीकल गये हो.. कहा अटक गयेथे..?
देवायत : घरपे फोन कीयाथा क्या..? बोल क्या कामथा..? होगइ तुम दोनो मीया बीवीमे सुलह..? हें..हें..हें..
भानु : (हसते) काहेकी सुलह.. बस अब कुछ ज्यादा बोलती नही.. ओर रमासे तो अब हस हसके बात करती हे.. भाइ इनकाभी मेरी कुछ समजमे नही आता.. की वो मुजसे क्या चाहती हे..
देवायत : (हसते) यार तु टेन्सन मत ले.. बस तुमने उनसे अपने ओर मामीके रीस्तेकी बात छुपाइ इसीलीये तुमसे थोडी नाराज हे.. ओर कुछ नही.. धीरे धीरे सब ठीक होजायेगा.. बोल कब कर रहा हे मामीसे सादी..?
भानु : (हसते) भाइ वो तीन दीनके बाद मामाक सब कार्य खतम होजायेगा.. तब कर लेगे सादी.. मेरी तराह उनकोभी (रमाको) जल्दी हे हें..हें..हें.. वैसे सादीकी खरीदारी करने कब जाना हे..? अब सादीमे दीन ही कीतने बचे हे.. भाइ पता नही सब काम कब करलेगे हम..
देवायत : भानु अेक बात कहु..? तु मामीके साथ सादी करले.. फीर तुम दोनो लता ओर नीलमको लेके चले जाना.. ओर सब खरीदी अेकही दीनमे नीपटा लेना.. तो रमाभाभीको भी अच्छा लगेगा.. ओर वो मामाको भी जल्दी भुल जायेगी.. अब तुजेही उनको सम्हालना हे..
भानु : (हसते) ठीक हे भाइ.. तो फीर आपकी खरीदारी कैसे करोगे..? क्या नइ बीवीको लेकर जाओगे.? हें..हें..हें.. लेजाओ दोनो सास बहुको.. दोनोकी खरीदारी अेक साथ होजायेगी..
देवायत : (सीरीयस होते) भानु.. हम मंजुको दीखाने जायेगे तब दोनो सीधे हमारे घरपेही आजायेगी.. मुजसे ज्यादा मंजुको जल्दी हे की मौसी जल्दी घर आजाये.. ओर हमारी सादी होजाये..
भानु : भाइ तो उसमे गलतभी क्या हे वेसेभी सादी अभी करो की सादीके बाद.. उनको आनाहेतो इसी घरमे.. तो फीर आपभी सादी करलो.. फीर हम चारोकी सादी आरामसे करेगे.. हमे कहा कोइ तामजाम करना हे..
देवायत : चल ठीक हे देखते हे आगे क्या होता हे.. फीलहाल तो दो दीन वेइट करना हे.. फीर देखतेहे क्या करना..
भानु : भाइ आप अेक बार भावुसे खुलके बात करलो की वो क्या चाहती हे.. मुजसे बात क्यु नही करती..?
देवायत : भानु तु उनकी चीन्ता मत कर.. बस कुछ वक्त लगेगा.. फीर वो तुमसे बातभी करेगी..
रीटा : (सरपे पलु डालके चाइ लाते) मालीक.. लीजीये चाइ.. मे कप बादमे लेजाउगी..
कहेते रीटा चली गइ ओर दोनो चाइ पीने लगे.. तब दुसरी ओर चारुके घरपे देवायतके जातेही चारु सब दरवाजा बंध करके धीरे धीरे लंगडाते चलते फीरसे बाथरुममे घुस गइ.. ओर टबमे बेठकर अपनी चुतकी गरम पानीसे सीकाइ करने लगी.. तब जाके उनको थोडी राहत महेसुस हुइ.. फीर बहार आकर अेक पेइन कीलर ओर आइपीलकी गोली खाकर अपने रुममे चली गइ.. ओर लेटकर आराम करते सोचने लगी..
चारु : (आंख बंध करते मनमे सोचते) बडाही जालीम हे.. पहेलीबार मे ही मेरी जबरदस्त चुदाइ करली.. ओर आज उनको क्या होगया की मुजे बीना बहार नीकाले दुसरी बारभी चोद लीया.. ओर चोद चोदकर मेरी हालत बीगाडके चला गया.. क्या मे वाकइ उनको इतनी अच्छी लगती हु..? दुसरी बारमे कैसे जालीमने मुजे रगड रगडके बेहरेहमीसे चोदा.. अभी भी मेरी मुनीया(चुत) जल रही हे.. ओर वो जालीम चोदता भी मस्त हे.. इतना तो रमेशने भी मुजे कभी नही चोदा हे.. रमेश का लंडतो इनसे आधा हे.. मुजसे ठीकसे चोदभी नही पाता.. ओर मुजे प्यासी रख देता हे.. ओर देवुका लंड..? ओ बापरे.. मानो कीसी गध्धेका लंड हो.. मेरी चुतकी धजीया उडा देता हे.. तभी तो मुजे अच्छा लगता हे.. क्या मे उनसे सादी करलु..? मुजे जींदगीभर अैसेही चोदकर खुस रखनेको केह रहाथा.. ओर इसमे हर्जभी क्या हे..? मुजे कोनसा उनके साथ रहेना हे.. बस यही रमेशके साथ रहेकर देवुकी सीक्रेट बीवी बनके तो रहेना हे.. ताकी मुजे आजकी तराह खुस करता रहे वोही मेरे लीये काफी हे.. (तभी चारुके फोनकी रींग बजती हे ओर वो फोन उठालेती हे)
वंदना : (फोन उठाते ही) मम्मी मे इधर पुनमके पास रुक गइ हु.. ओर खाना इधर ही खाकर आउगी.. तुम ओर पापा खा लेनां..
चारु : (धीमी आवाजमे) नही वंदना.. अभी तेरे पापाभी आजायेगे ओर मेने खानाभी नही बनाया हे.. सुन मेरी तबीयत भी अचानक खराब होगइ हे.. प्लीज आज खाना तुही बनाले.. वहा फीर कभी खा लेना..
वंदना : (थोडी चींतीत होते) मम्मी क्या हुआ..? अभीतो मे वहासे गइ तबतो आप ठीक थी..?
चारु : (धीरेसे जुठ बोलते) वंदना मे थोडी देर पहेले बाथरुम मे गइथी.. तो पैर फीसल गया.. ओर पैरमे मोच आगइ.. तो बेटा मे आराम कर रही हु.. मुजसे चला नही जाता.. ओर थोडा टेम्परेचर जैसा भी लग रहा हे.. प्लीज तु आजानां..
वंदना : (जटसे) ठीक हे मम्मी मे अभी नीकलती हु.. आप डोक्टरको दीखादो.. कही कुछ हुआ तो नही..?
चारु : अरे नही नही.. इतनाभी दर्द नही हे.. बस तु आजा.. अभी गोली खाइ हे मे बेडपे आराम कर रही हु..
तो वंदनाने फोरन फोन कट कर दीया.. ओर पुनमको कहेके वो जटसे वहासे नीकल गइ.. तब पुनमभी अपने बेडपे आराम करने लगी.. उधर वंदना घरपे पहोची तो उनकी मम्मी अपने रुम मे आराम कर रही थी..
वंदना : (चारुके पास बेठते उनके सरपे हाथ रखकर चेक करते) मम्मी क्या हुआ..? कुछ ज्यादा तो नही लगी.. डोक्टरको दीखाना हे..? ओर टेम्परेचरभी तो मामुली हे.. अच्छा हे ज्यादा नही हे..
चारु : (जुठके दर्दसे मुह बीगाडते) नही बेटी.. कुछ आराम कर लुगी तो ठीक होजाउगी.. तु टेन्शन मतले.. वरना हम सामको देखेगे.. नही आराम हुआ तो डोक्टरको दीखा देगे.. तु आज खाना बनाले.. कीतनी चीन्ता करती हे तु..
वंदना : चीन्तातो करुगीनां आपके मेरे सीवा हे ही कोन..? तो फीर मुजे अेक भाइभी दे देना चाहीयेनां.. हें..हें..हें... मम्मी अभीभी कुछ नही बीगडा हे.. सबलोग कहेते हे की आजभी आप मेरी बडी दीदी लगती हे, हें..हें..हें..
चारु : (सरमातते अेक मुका मारते) चल बदमास तु फीर सुरु होगइ.. जा पहेले खाना बनाले अभी तेरे पापा आजायेगे.. (हसते धीरेसे) भाइ चाहीये तो तु खुद सादी करले.. फीर अपना बच्चा पैदा करलेना.. तुजे भाइकी नही अेक बेटेकी जरुरत हे.. हें..हें..हें.. ओर क्या कर रही हे पुनो..? क्या उसे मीलने गइ थी..?
वंदना : (सरमाते) नही मम्मी वो देवायतजीको पुछने गइथी.. वो जरुरी पेपर सबमीट करने हे तो..
चारु : (हसते) बेटा वो तो इधर आयेथे.. सायद इसीलीये आये होगे.. लेकीन तुम नहीथी तो पानी पीकर चले गये.. (मनमे) बेटी तुजे क्या पता आज तु नहीथी तो तेरी मांको चोद चोदके वोही हालत खराब करके गये हे.. उन्हीकी वजहसे तेरी मां बेडपे पडी हे.. अच्छा हुआ मेने आइपील लेली वरना आज जालीम पका मुजे प्रेगनेन्ट करके जाता.. पता नही तु जवान होते हुअे भी कैसे अकेली रेह पाती हे.. मेतो पतीके होनेके बावजुद देवायतसे चुदे बीना नही रेह सकती.. क्या तुजे अेक लंडकी जरुरत नही हे..? पता नही बीना लंडके तु कैसे अकेली रेह लेती हे.. ओर वोभीतो राजा हे वो कीतनीभी सादी कर सकते हे.. कास तेरी सादी देवुसे हो जाती.. तो हम मां बेटी दोनोको वो सम्हाल लेते..
वंदना : मम्मी क्या सोच रही हो..? वो..वो मुजे उनके साथ अेक बार जाना पडेगा.. तो पुनमको पुछने चली गइथी.. वो मेरे साथ चल रही हे..
चारु : (वंदनाकी ओर देखते) क्या पुनमभी साथ आ रहीहे..? तो फीर उनके साथही चली जाना.. वरना मेही तुम्हारे साथ आने वालीथी.. अबतो तेरे पापाको टाइमही नही मीलेगा.. ठीक हे कब नीकलना हे..?
वंदना : (हसते) अरे अभी नही.. पहेले मे सब पेपरके बारेमे जानलु फीर जब वो कहेगे तब नीकलना हे..
चारु : चल ठीक हे पुनम साथ हेतो कोइ दीकत नही हे.. तु चली जाना.. तेरे पापासे अेक बार बात करलेना..
तब वंदना खाना बनाने चली गइ.. ओर पुनमकी कही सब बातोके बारेमें सोचते खाना बनाने लगी.. आज पुनमकी बातोने उसे जंजोरके रख दीयाथा.. ओर वंदनाको अेक बार फीर आशाकी नइ कीरण नजर आने लगी.. ओर सोचते सोचते उसने पुनमके कहेने मुताबीक आगे बढनेका फैसला करलीया.. वो देवायतके बारेमे फीरसे सोचने लगी.. तो उनकी चुतमे तेज हलचल सुरु होगइ.. ओर चुतकी दोनो पंखुडीया फडफडाते पानी छोडने लगी....
कन्टीन्यु