Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 11 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ९४

इतना सुनतेही भुमीका अपने दोनो हाथोमे अपना चहेरा छुपाके जोरोसे रोने लगी.. जीसे देखकर अ‍ेक बारतो मंजु ओर सृती दोनोही डरने लगी.. ओर विचलीत होने लगी.. तब सृती जटसे खडी होगइ ओर पानी लेने कीचनमे चली गइ.. तबतक मंजु भुमीकाकी पीठको सहेलाते उनके सामने देखती रही..

तभी सृती पानी लेकर आगइ ओर अपनी मम्मीको पानी दीया.. तब भुमीकाने पानी पीकर ग्लास सृतीको वापस दीया ओर सृती ग्लास रखने चली गइ फीर वापस आकर अपनी जगाहपे बैठ गइ तब भुमीका उनके सामने देखती रही.. फीर मंजुका हाथ थामते उनके सामने देखकर मंजुके हाथको उठाकर अपने सरपे रखके जुक गइ.. फीर....अब आगे

भुमीका : (आंसु बहाते) बेटी.. आजतो तुमने मेरी जोली खुसीयोसे भरदी.. अ‍ैसा लगता हे आज साक्षात देवी मेरे घर खुसीया लेकर आइ हे.. जो बात आज तक मुमकीन नही हुइ.. वोही बात आज मुमकीन होती नजर आ रही हे..

मंजु ओर सृती भुमीकाका अ‍ैसा व्यवहार देखकर डर गइथी.. लेकीन जब उसने मंजुको ये बात कही तब सृती ओर मंजुने राहतकी सांसली.. ओर खुसीसे दोनोका चहेरा दमकने लगा.. तब मंजुने कहा..

मंजुला : (खुसीसे हसते) बुआ.. आप कीस बातके बारेमे बात कर रही हे..? हमे कहीयेनां..?

भुमीका : (प्यारसे गाल सहेलाते धीरेसे अ‍ेक चपत लगाते) बदमास.. सब बुआके मुहसे उगलवाना चाहती हे.. तुजेतो सब पताही हे.. तो फीर क्यु पुछती हे.. क्या मेरी सृतीकी बात तुम नही जान पाइ..?

मंजुला : (हसते हाथ थामते) नही बुआ.. बताइअ‍ेना.. हम आपके मुहसे सब सुनना चाहते हे.. ये बात सृतीको थोडीना पता हे.. उनकोभी पता चलेकी मेरी बात कहा चलीथी.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) हां.. देखा..? तु सब जानती हे.. फीरभी मेरे मुहसे सब उगलवाना चाहती हे.. तो सुन.. तुमने सही कहा.. मेने ओर सृतीके पापा जबवो जीन्दा थे तब सृतीभी काफी छोटी थी.. हम दोनोने सृतीका रीस्ता देवुके साथ करवानेका तैय किया था.. जब हम बात करने वालेथे तब अ‍ेक दिन किशन घरपे अ‍ेक मीठाइका बोक्ष लेकर आया.. क्युकी तब राजीव ओर किशनके बीच तुम्हारे रीस्तेकी बात हो गइथी.. ओर उसने तुम्हारी ओर देवु दोनोके रीस्तेकी बात कहे दी.. तब हम दोनो मीया बीवी खुब नीरास होगये..

मंजुला : (हसते) बुआ तो क्या हुआ.. फीरभी आपको मेरे ससुरसे इस बारेमे बात करनी चाहीअ‍ेथी..

भुमीका : नही बेटी.. तब हमारे दिमागमे अ‍ैसी बात आइही नही.. फीर हमने किशनसे सृतीकी कुछ बातही नही की.. ओर सृतीकी दुसरी जगाह सादी करदी.. ओर ये हमारी सबसे बडी भुल थी.. तबही हमे सोचना चाहीयेथा.. की देवुकीतो दुसरी सादीभी होसकती हे.. ओर देखो आज भगवानने हमारी सुनली..

मंजुला : (हसते) तो बुआ क्या इसे मे हां समजु..? ये रीस्ता पका करदे..? हें..हें..हें..

भुमीका : (जोरोसे हसते मंजुकी जांगपे अ‍ेक चपत लगाते) तो क्या अभी तक मे भजीया तल रहीथी..? हें..हें..हें.. अरे बेटी तु ये रीस्ता पकाही समज.. बस तु अ‍ेक बार सृतीको पुछले उसे कोइ अ‍ेतराजतो नही..? तो फीर मुजे क्या प्रोबलेम.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते सृतीकी ओर देखते) बुआ.. वोतो राजी हे.. इनफेक्ट दिलके अ‍ेक कोनेमे वोभी मेरे देवुसे प्यार करती हे.. बस कमीनी जताती नही.. हें..हें..हें..

इतना सुनतेही सृती सर्मसार होते अपने दांत पीसते मुस्कराते मंजुको पीठमे मुका जड देती हे.. तब भुमीका ओर मंजु दोजोही खुसीसे हसने लगती हे.. तब सृती अ‍ेकदम सरमाते हसते हुअ‍े खडी होकर कीचनमे चली गइ.. तब पीछेसे भुमीका ओर मंजु हसते हुअ‍े उनको जाते देखती रही.. तब भुमीका की आंखोसे खुसीके मारे दो बुंद आंसुके गीरते हे.. ओर वो मंजुका हाथ थामते उनकी ओर घुमजाती हे ओर धीरेसे मंजुसे बाते करने लगती हे..

भुमीका : बेटी.. आज मे बहुत खुस हु.. मेरी सृतीका घर बस जायेगा.. क्या इस बारेमे देवुको पता हे..?

मंजुला : नही बुआ.. आजही बाबासे बात हुइ.. ओर मुजे पहेले आपसे बात करना उचीत लगा.. तो आपको पुछ लीया.. अब आपने हां कहेदी हेतो मे बातको आगे बढाउगी..

भुमीका : बेटी अच्छा कीया.. तुम देवुसे भी अ‍ेक बार बात करलेना फीर मुजे फोन करके बता देनां..

मंजुला : बुआ.. वोतो मे करलुगी.. लेकीन मे चाहती हु देवु ओर सृती दोनोही इस बातपे खुद आगे बढे.. मुजे पुरा यकीन हे सृती भी देवुसे प्यार करती हे.. तो मेरे देवुको वोही प्यार करनेमे विवस करदेगी.. क्युकी मेरा देवुभीतो वोही राजाका अंस हे.. तब हम उन दोनोकी सादी करदेगे.. क्या कहेती हो आप..?

भुमीका : (हसते) चल ठीक हे जैसे तुजे अच्छा लगे.. ओर ये सहीभी हे.. मेने कइ बार देखा हे वो देवुकी बाते करते थकतीही नही हे.. भगवान करे सब ठीक होजाये.. अब मुजे सृतीकी चीन्ता नही.. सब ठीक होगया..

मंजुला : बुआ.. कुछ बाते अ‍ैसीहे.. मे आपको कैसे बताउ.. दरसल हम सब देवुके साथ कइ जन्मोसे जुडी हुइ हे.. तो हमे देवुको पानाही हे.. ओर इनमेसे हमारी सृतीभी अ‍ेक हे.. जो कइ जन्मोसे देवुके साथ जुडी हे..

भुमीका : (हसते) बेटी.. क्या तुजे सब ज्ञात होजाता हे..? मुजेतो यकीन ही नही हो रहा.. मंजु मुजे इस बारेमेभी कुछ बताओनां.. क्युकी कुछ बाते हेजो.. अब मे तुजे कैसे कहु..

मंजुला : बुआ.. आप इस बातकी बीलकुल फीकर मत करो.. मेने आपसे कहानां.. की कुछ राज मे सीर्फ अपने तकही सीमीत रखना चाहती हु.. वो कीसीको नही बताना.. ओर आज आपको अ‍ेक सच बताही देती हु.. वास्तमे हम सब परीया हे.. ओर मेरा पोताजो मेरे इस विजयकी बीवीकी कोखसे जन्म लेगा.. वोही हम सब परीयोका राजा हे.. ओर सभी परीया अपने आप इनके रीलेशनमे आही जाती हे..

भुमीका : (आस्चर्यसे धीरेसे) क्या..? सभी उनके रीलेशनमे आजानेका मतलब..?

मंजुला : (हसते) बुआ.. हम सभी उनके साथ कोइना कोइ रीस्तेसे जुडी हुइ हे.. तो हम सभी वहा उस लोकमें परीया होगी.. तभीतो हम सब मेरे देवुके साथ जुडी हुइ हे.. ओर मेरा देवुभी उनकाही अंस हे.. बस उन्ही अंसके माध्यमसे वो राजा पैदा होगे.. बस अभी मे आपको इतनाही बता सकती हु..

हम सब वो हिमाचलके राजाकी रानीया थी.. जो सब वापस इस धरतीपे दुबारा जन्म लेकर आइ हे.. ओर जबतक उनका मक्सद पुरा नही होता हम सब आती जाती रहेगी.. क्या पता आप ओर मेरी मम्मीभी उनमेसे अ‍ेक हो.. ओर अगले जन्ममे मेरे पोतेकी रानी हो.. हें..हें..हें..

भुमीका : (जोरसे हसते अ‍ेक चपत लगाते) बदमास.. कुछभी बोलती हे.. तुम क्या क्या कहानी बनाती हे.. हें..हें..हें.. क्या वाकइ ये सब चस हे..? तुम हम सबके बारेमे सचमे सबकुछ जानती हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. बुआ.. कुछ बाते हे जो मुजे आपके मुहसे सुननी हे.. वो जब हम दोनो अकेली होगी तबही हम इसके बारेमे बात करेगे.. ताकी आपके दिलका बोजभी कुछ हल्का होजाये.. क्या मे सच केह रही हुना्..?

भुमीका : (सरमाते धीरेसे मुस्कराते) बेटी.. मुजे लगता हे तुम वाकइ हमारे बारेमे सबकुछ जानती हे.. ठीक हे हम दोनो कभी इस बारेमे फुरसतमे बात करेगे.. तेरे साथ बाते करते आज जी हल्का होगया.. दुनीयामेभी क्या क्या कहानीया चल रही हे.. हर अ‍ेक ओरतकी अपनी कहानी हे.. हें..हें..हें..

मंजुला: (जोरोसे हसते खडी होते) बुआ.. ये कोइ कहानी नही हे.. में सच केह रही हु.. अब आप बैठीये मे सृतीकी कुछ मदद करती हु..

भुमीका : (हसते) अरे तुम इधर बैठनां.. वो सब करलेगी तु क्यु इस हालतमे तकलीफ लेती हे.. इधर बैठ..

मंजुला : (हसते जाते) नही बुआ.. उनको कंपनी मील जायेगी.. ओर कुछ बातेभी होजायेगी..

भुमीका : (हसते) अच्छा अच्छा.. चल जा.. लेकीन कोइ काम मत करना समजी..

तब मंजु हसते हुअ‍े कीचनमे चली गइ तब सृती खडे खडे सब्जीया काट रहीथी.. जैसेही मंजुको अंदर आते देखा वो सब छोडके खुसीके मारे मंजुसे लीपट गइ ओर सरमाते हसती रही.. तब मंजुने हसते हुअ‍े उसे जोरोसे बाहोमे भीच लीया तब सृतीके मुहसे आउच.. नीकल गया.. तभी मंजुने सृतीको अपने आपसे अलग कीया ओर उनके सामने देखकर मुस्कराती रही तब सृती सरमाकर नजरे चुराने लगी..

मंजुला : हां तो मेरी सौतानजी.. अब लगजाओ मीशन देवुपे.. हें..हें..हें.. देख मेने तेरा आधा कामतो करदीया.. अब हमारे देवुसे बात करनेकी जीम्वेवारी तेरी.. देखले कैसे मेरे देवुको पटाती हे.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते धीरेसे हसते) मंजु प्लीज.. यार मुजे बहुत सरम आ रही हे.. मुजेतो अभीभी ये सब अ‍ेक स्वप्नकी तराह लग रहा हे.. की तुम खुद उनकी बीवी होकर मुजे ये सब केह रही हो.. आइ कान्ट बीलीव.. क्या आजके जमानेमे भी ये सब पोसीबल हे..? कीतना अजीब हेनां..?

मंजुला : हां सृती ओर ये सब सच हे.. ओर अ‍ेक सच तुभी जानती हे.. मे सीर्फ दो तीन सालकी महेमान हु.. फीर मुजे वापसभी तो आना हे.. तेरी बहु बनकर..

सृती : (जोरोसे बाहोमे भीचते आंसु बहाते) नही मंजु.. मत कर अ‍ैसी बात.. हम सब तेरे बीना कैसे जीयेगे..? तुहीतो हे जो हम सबका खयाल रख सकती हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) नही सृती.. बस यही बात आज में तुमसे कहेने वाली हु.. जो मेने अभी तक कीसीको नही बताया.. आज बाबाने मुजे अपनी कसमसे मुक्त कीया हे.. तभी तो मे तुमसे कुछ बात कहेना चाहती हु जो आगे जाकर तुजे ओर पुनमको ही सब हेन्डल करना हे.. ताकी तुजे सब सम्हालने समजनेमे आसानी रहे.. ओर आज मे कुछ राज तुमसे सैर करना चाहती हु.. चल मे नीचे बेठकर सब्जी काटती हु तु कुछ दुसरा काम करले.. ओर यही नीचे बेठजा.. बात करनेके आसानी रहेगी..

सृती : (सबजी ओर कटर नीचे रखते) अरे तुम अ‍ैसेही बेठती.. मे सब करलेती.. तु क्यु तकलीफ लेती हे.. तु इधरही बैठ मे सब नीपटा लुगी..

मंजुला : (हसते) अरे लानां.. अकेली अकेली बेठकर क्या करुगी.. वहा भीतो कुछ करनेका नही.. दे..मुजे..

कहेते मंजु धीरेसे नीचे बैठ गइ तब सृती अ‍ेक बर्तनमे आटा नीकालते वोभी मंजुके पास नीचे बेठ गइ ओर आटेमे पानी डालकर उसे गुंदने लगी.. तब मंजुभी सब्जीया काटने लगी ओर दोनो बाते करने लगी..

सृती : (हसते) हां.. मंजु अ‍ेक बात बता.. मम्मीने वो विरजी अंकलकी बात आधी क्यु छोडदी..? कहाकी मंजुसे पुछ लेना.. क्या राज छुपा रही हे मम्मी.. ओर विरजी अंकलने मम्मीके साथ कोनसी जबरदस्ती की..?

मंजुला : (हसते) सृती कुछ बाते हम ना जाने तोही बहेतर हे.. हमे ये सब सुनकर दुख होता हे..

सृती : नही मंजु.. अबतो तुम्हारे साथ रेहकर मेभी बहुत कुछ सीख गइ हुं.. मुजे कोइ बुरा नही लगता.. बतानां.. कुछतो मम्मीके साथ बुरा हुआ होगा.. तभीतो आधी बात बताइ.. ओर तुजेतो सब पता चल जाता हे.. तो बताना मुजे अब बुरा नही लगेगा.. अबतो विरजी अंकलभी नही हे..

मंजुला : (सब्जी काटते) सृती.. विरजी अंकल भुमीका आंटीका अपहरण करके उसे जबरदस्तीसे अपने घर लेगये.. ओर वहा उनके साथ बलात्कार किया.. ओर वो इनमे कामयाबभी होगये.. लेकीन तेरे पापाको ये बात पता चल गइ ओर वो मेरे ससुरको लेकर आगये.. ओर भुमीका बुआको उनसे छुडालीया.. ओर दोनोने मीलकर विरजी अंकलको खुब मारा..

फीरतो विरजी अंकलको अपनी गलतीका अहेसास तबही होगया.. ओर बुआके पैरमे गीरके माफी मांगने लगा.. तो सबने दोस्तीकी वजहसे उसे तबतो माफ करदीया.. फीरतो विरजी अंकलने कोलेजही छोडदी.. ओर उनकी सरलाचाचीसे सादी भी होगइ.. लेकीन ये बात भुमीआंटी नही भुल पाइ..

सृती : (मुस्कुराते) हंम.. इतनातो मम्मीने भी कहा.. लेकीन बलात्कारकी बात नही बताइ.. फीर क्या हुआ..?

मंजुला : फीर क्या.. सबनेतो माफ करदीयाथा लेकीन बुआने विरजी अंकलको मनसे माफ नही कीयाथा.. उनके दिलके अ‍ेक कोनेमे विरजी अंकलसे बदला लेनेकी भावना थी.. ओर उसने मेरे ससुरसे अकेलेमे मीलके भाइ बहेनके रीस्तेका वास्ता देकर विरजीसे अ‍ैसा बदला लेनेकी बात कही.. ओर अ‍ैसा बदलाकी मुजेभी बतानेमे सरम आती हे.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) क्या मम्मीने..? अ‍ैसा कोनसा बदला लेना चाहती थी वो..? जो किशन अंकल उनकी बात मान गये.. हें..हें..हें.. फीर किशन अंकलने बदला लीया क्या..? ओर कैसा बदला लीया.. प्लीज.. बताओना.. सुननेमे बडा मजा आ रहा हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) कमीनी तुजेतो मजाही आयेगानां.. वहा विरजी अंकलको तो पताभी नही था.. की उनके साथ क्या होने वाला हे.. हें..हें..हें.. सुन.. लेकीन ये बात तुम कीसीको बताना नही.. अब जो बात तुजे कहे रहीहु इस बातका कीसीको पता नही हे.. तो बी केरफुल..

सृती : (हसते धीरेसे) अरे बताना.. मे कीसीको कुछ नही कहुगी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) सुन.. जब विरजी अंकलकी सादी होगइ तब वो हमारे खेतोपे मेरे ससुरके साथ थे.. तब मेरे ससुरने विरजी अंकलको चाइमे अ‍ेक जडीबुटी पीलादी.. ओर उनका हथीयार बेकार करदीया.. हें..हें..हें.. मानलोना वो कीसी कामका नही रहा.. मतलब वो बच्चा पैदा करनेमे काबील नही रहे.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) क्या.. अ‍ैसे कोइ बदला लेता हे..? बेचारे..हें.हें..हें.. तो फीर उनकी बीवी बेचारी कहा जायेगी.. बेचारी सरलाचाची.. मंजु.. तो फीर वो भानुभाइ ओर लता कैसे पैदा हुअ‍े..?

मंजुल : (हसते) वो भी बडी दिलचस्प कहानी हे.. तुजे पता हे विरजी अंकलकी सादी जल्दीसे आनन फानन मे क्यु करदी गइ..? तो सुन.. अ‍ेकतो भुमीआंटीके हादसेसे वो बहुतही अपसेट थे.. तो दुसरी ओर सरलाचाचीका भी उनके मायकेमे इस्यु चल रहाथा.. सरलाचाचीने जबसे जवानीकी दहेलीजपे कदम रखा..

तबसे उनका अपने भाइके साथ पांच छे सालसे फीजीकल रीलेशन था.. ओर वो अपने भाइसे प्रेगनेन्ट भी होगइ थी.. तब उनकी माको सब पता चल गया.. ओर उसे सहेरमे लेजाकर उनका बच्चा गीरवाके विरजी अंकलसे जल्दी सादी करदी.. सरलाचाची बहुतही कामी ओरत हे.. उनकी माने उसे उनकी विदाइके वक्तही मायकेमे कभी नही आनेको केहदीया था..

सृती : (हसते) अरे.. तबतो विरजी अंकलके साथ इतने सालो तक कैसे रेह पाइ..? हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) अरे सुनतो सही.. फीर क्या हुआ.. सरलाचाचीको विरजी अंकलसे वो सुख नही मीलपाया.. वो विरजी अंकलसे संतुस्ट ही नही होतीथी.. ओर उपरसे उनकी माने उसे कभी मायकेमे ना आनेकी बात कहेदी.. तो उनके भाइकोभी नही मील सकती थी.. तब उनके सबसे ज्यादा नजदीक उनके पतीके खास दोस्त मेरे ससुरही थे..

ओर दोनोका बार बार मीलना होताथा जीनकी वजहसे वो मेरे ससुरके साथ बडी आसानीसे रीलेशनमे आगइ.. फीरतो अपनी जवानीका मजा मेरे ससुरके साथ फीजीकल होकर लेती रही.. तो मेरे ससुरभी विरजी अंकलको कीसी कामके बहाने सहेर भेज देते ओर पीछेसे विरजीअंकलके घर चले जाते..

सृती : (जोरोसे हसते) अरे किशन अंकलतो बडे रसीये कीस्मके आदमी नीकले.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) अरे सुनतो सही.. फीरतो मेरे ससुर ओर सरलाचाची पुरा दीन फीजीकल होते प्यारका खेल खेलते.. ओर उन्हीसे भानुभाइका जन्म हुआ.. तब विरजी अंकलको कुछ पता नही चला.. वोतो यही समजतेथे की भानुभाइ उनका बेटा हे.. लेकीन कुछ सालोके बाद सरलाचाचीको मेरे ससुरने फीरसे प्रेगनेन्ट करदीया.. तब विरजी अंकलको पता चल गयाथा की वो अब बच्चा पैदा करनेमे सक्षम नही हे.. फीरभी सरला कैसे प्रेगनेन्ट हुइ..? तबसे उनको सरलाचाचीपे सक हुआ ओर उनपे नजर रखने लगे..

ओर अ‍ेक दिन मेरे ससुर ओर सरलाचाचीको संभोग करते देखलीया.. अ‍ेकतो वो सनकी थे.. ओर वो ये बरदास्त नही कर पाये.. उनको तबही दिलका दौरा पड गया.. ओर वो चल बसे.. फीर कुछ महिनोके बाद सरलाचाचीने लताको जन्म दिया.. जबतब मेरे ससुर जींदा रहे तबतक सरलाचाचीके साथ रीलेशनमे रहे.. ओर उन्होने भानुभाइ ओर लता सरलाचाचीकी पुरी जीम्वेवारी उठाइ.. तो ये हे भुमी आंटीके बदलेकी बात.. हें..हें..हें..

सृती : (हसते) किशन अंकल ओर मम्मीने बहुत डेन्जर बदला लीया.. हें..हें..हें.. मम्मी ओर किशन अंकलको अ‍ैसा नही करना चाहीयेथा.. बेचारे विरजी अंकल..

मंजुला : छोडना सृती.. सायद उनकी यही सजाथी.. लेकीन तुमने अ‍ेक बातपे गौर नही कीया..?

सृती : (हसते सवालीया नजरोसे) अब कौनसी बात..? हें..हें..हें..

मंजुला : सृती.. इस नाते भानुभाइ ओर लताभी हमारे भाइ बहेन हुअ‍े.. ओर तुजेतो पता हे लताकीभी सादी लखनसे हो रही हे.. तो इस नाते वो दोनोभी भाइ बहेन हुअ‍े नां..? हें..हें..हें..

सृती : (जोरोसे हसते) अरे हां.. हें..हें..हें.. देखा तुम सभी भाइ बहेनकी आपसमे सादी हो रही हे.. हें..हें..हें..

इधर दोनोही कीचनमे हसी मजाक करते बाते कर रहीथी तब बहारकी ओर भुमीकाआंटी दिखनेमे तो कोइ धार्मीक कीताब बढ रहीथी.. लेकीन मंजुके जातेही उनके दिमागमे विचारोका घमासान युध्ध चल रहाथा.. ओर अपने अतीतकी सब पुरानी बाते याद कर रहीथी.. मंजुसे सब बाते करते उनको पता चल गयाकी मंजु सब बाते जानती हे.. तो वो बातसे थोडी डरी हुइभी थी.. लेकीन मंजुने उनको विस्वास भी दियाथा की वो कुछ बाते कीसीके साथ सैर नही करेगी.. उस बातसे वो थोडी नीस्चीत भी होगइ थी..

तभी सबसे दुर सहेरमे देवायत चंदा धिरेन पुन लता लखन ओर नीलम सब मार्केटमे जाकर खरीदी कर रहेथे.. तब चंदा ओर देवायत दोनोही नये सादीसुधा जोडेकी तराह अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडकर चल रहेथे.. ओर हस हसके आपसमे धीरेसे बाते कर रहेथे.. तो पुनमभी ना चाहते हुअ‍े भी धिरेनके साथ चल रहीथी ओर बार बार देवायत ओर चंदाकी ओर देख रही थी.. उनको आज अ‍ैसा लगने लगाथाकी उनकी सास चंदाने उनसे अपना पती छीनलीया हो..

तो दुसरी ओर लखन ओर लताभी अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडते साथ चल रहेथे.. ओर मस्तीकी बाते कर रहेथे.. तब लखनकी बाते सुनकर कइ बार लता सर्मसार होकर हसने लगती थी.. तब नीलमभी पुनमके साथ चल रहीथी.. ओर आज सबको जोडीमे देखकर.. ओर अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडते चलते देखकर नीलमको पहेली बार प्यारकी परीभासा समजमे आने लगी.. सीर्फ वोही अकेली लडकीथी जो उनका कोइ साथी नही था.. तब नीलम अपने आपको कभी लताकी जगह तो कभी पुनमकी जगह इमेजींग करने लगी..

आज उनको सुबह धिरेनकी कही हुइ सब बाते याद आने लगी.. उनको धिरेन पढालीखा ओर समजदार लडका लगा जो अपनी इजतदार बेंककी नोकरीसे अपने बल बुतेपे खडाथा.. तो धिरेनकी बेंककी नोकरी उसे इजतदार लगी.. ओर धिरेनका बात करनेका अंदाज.. बस उसीके बारेमे सोचते वो धिरेनकी ओर ढलने लगी.. ओर उसे धिरेन अच्छा लगने लगा.. तभी उसने धिरेनके साथ उनकी दोस्ती कबुल करनेका फैसला करलीया.. तब इधर सृतीके घरमे..

सृती : (हसते धीरेसे) मंजु तु कुछ तेरे बारेमे बताने वालीथी.. प्लीज बताओनां.. मे तेरे बारेमे सबकुछ जानना चाहती हु.. तुम तेरे पोतेकी कुछ बात कर रही थी.. ओर अभी कहाकी मे तेरी बहु बनके वापस आउगी..

मंजुला : (हसते) हां सृती.. सुन आज तुजे वो राज बता रही हु.. जो अभीतक कोइ नही जानता.. तुमने वो राजाकी कहानीतो सुनी हेनां..?

सृती : हां मंजु.. में उन कहानीको (ये केसी अनुभुती) कइ बार पढ चुकी हु.. लेकीन उनसे तेरा क्या तालुक..? बाबाभी कुछ उनकी बाते कर रहेथे..

मंजुला : हे..सृती.. सीर्फ मेरा नही हम सबका उस कहानीसे गहेरा तालुकात हे.. उनमे वो देवयानीदेवी हेनां.. वोही मे हु.. जो थोडे समयके लीये.. मे उन राजाके अंसके साथ सादी करके फीरसे उन राजाके साथ जुड जाउगी.. इसीलीये मुजे वापस जाना होगा..

सृती : (थोडा सीरीयस होते) मंजु अ‍ैसे नही.. मुजे जरा खुलकर बता.. ताकी मे उस टाइम तुजे पहेचान सकु..

मंजुला : सृती.. देवु उस राजाकाही अंस हे.. ओर मुजे उस अंसके माध्यमसे हमारे स्वामीको जन्म देना हे.. ओर उसी उदेस्यसे मेरा जन्म हुआ हे ताकी मे देवुसे सादी करके हमारे राजाके जन्म लेनेका रास्ता बना सकु.. ओर मुजे उनको मेरी कोखसे जन्म देना हे.. फीर उसीके साथ सादी करके मे मेरा अपना संसार बसालुंगी..

सृती : (चोंकते) क्या..? तुम तेरे बेटेके साथही सादी करलेगी..? कीतना अजीब हेनां..?

मंजुला : हां सुती.. मे तबभी उनकी माइ थी.. ओर बादमे उनकी बीवी होगइ.. ओर आजभी मे विजयकी मां हु ओर दुसरे जन्ममे उनकी बीवी होजाउगी.. फीर उन्हीके बेटेको जन्म दुगी.. जो हमारे राजा होगा.. जब वो बडा ओर जवान होजायेगा तबमे फीरसे उनकी भी बीवी होजाउगी.. अ‍ेकही जन्ममे मेरे जीवनमे दो दो पती आयेगे.. सृती आज अ‍ेक राजकी बात बता रही हु.. ये बातका जीक्र तुम कीसीके साथ नही करना.. बस.. सब देखती रहेना.. क्या होता हे..

सृती : (मंजुके सामने देखकर) मंजु तु फीकर मत कर ये राज सीर्फ मेरे तकही सीमीत रहेगा.. बस मुजेतो तेरे बारेमे सब जानना हे.. सायद इसीलीये तुजे इस घरतीसे जल्दी बुलालीया होगा..

मंजुला : हां सृती.. तुजे पता हे मेरी जानका खतरा होनेके बावजुद मेने विजयको क्यु जन्म दिया..? ताकी मे वापस इस दुनीयामे आसकु.. सृती आज देवु ओर मौसीके साथ भानुभाइ ओर उनकी मामीकी भी सादी होगइ.. अब हमारी भावु भानुभाइसे काफी दुर हो चुकी हे.. ओर हमारी भावु आगे जाकर हमारे देवुके साथ रीलेशन रखेगी.. ओर उनसे प्रेगनेन्ट होगी.. तब मुजे उनकी कोखसे लडकीके रुपमे पैदा होना हे.. ओर वो लडकी मेरे विजयकी बीवी होजायेगी.. तब उस लडकीकी कोखसे वो राजा पैदा होगे..

ओर उन लडकीका यानी मेरा विजयसे सब रीस्ता खतम होजायेगा.. ओर वो विजयके बच्चेको पाल पोसके बडा करेगी.. ओर अ‍ेक दिन अपने बेटेके साथही रीलेशनमे आकर उनसे सादी करलेगी.. ओर हम दोनो मां बेटा अपना रीस्ता सबसे छुपाके अपना अ‍ेक अलगही संसार चलायेगे.. यानी मे मेरेही बेटेको जन्म देकर उनसे सादी करलेती हु.. फीर उनके बेटेको पैदा करके मे फीरसे मेरे बेटेके साथ सादी करके जुड जाती हु.. ओर ये चक्र चलताही रहेता हे.. मेरा कामही यही हे.. सायद इसीलीये मे सबकी जननी हु..

सृती : (काम छोडके आस्चर्यसे देखते) ओह..माइ.. गोड.. मंजु.. तुजे इतना सब पता हे..? क्या ये सब सच हे..? मुजेतो यकीन ही नही हो रहा.. की तुम दुसरे जन्म मे तेरे ही बेटेसे फीर अपने पोतेसे सादी करके घर बसायेगी.. कीतना अजीब हेनां..? अपनेही पतीको अपनी कोखसे पैदा करना.. फीर बडा होतेही उनके साथ सादी करके फीजीकल होना.. कीतना अजीब हे.. क्या ये सब सच हे..?

मंजुला : (हसते) हां सृती.. यही सच हे.. तब मेरे बेटीकी कइ बीवीया होगी.. ओर तब काम ओर रतीभी अपने चरमपे होगे.. तब कइ लोग होगे जो आपसी रीस्तोमेही सादी करके घर संसार चलायेगे.. खुद मेरा बेटाभी अपनी बहेन ओर बुआसे सादी करलेगा.. ओर अ‍ैसी कइ उनकी सीक्रेट बीवीयाभी होगी.. जो अभी मेरे देवुकीभी हे.. वोभी तो मेरा ही अंस हे.. उनका कामही यही हे.. जीनकोभी बच्चा नही हो रहा.. वो सबको बच्चे देनेकी जीम्वेवारी अच्छी तराह नीभाता हे..

सृती : (आस्चर्यसे) क्या देवुकी भी सीक्रेट वाइफ हे..? तुजे सब पता हे..? तो तुजे दुख नही होता..?

मंजुला : नही सृती.. येभी हमारी दुनीयाका अ‍ेक हिसा हे.. हम पीरलोकमे या अप्सरालोकमे बहारके आदमीसे सादी नही करते.. क्या पता देवुकी जीतनीभी बीवीया हे वोभी परी यातो अप्सराये हो.. तभीतो उनके साथ रीलेशनमे आइ होगी.. फीर पता नही कीसीकी कोखसे कौन परी या अप्सरा जन्म लेकर आजाये.. ओर तुजे पता हे तुमभी अ‍ेक मेरी ही तराह अप्सरा हो.. तब क्या पता.. तुम ओर मेरी पुनमभी मेरे पोतेके साथ रीलेशनमे आजाओ..

सृती : (सर्मसार होकर चोंकते) मंजु.. तुम ये क्या बोल रही हो.. मे ओर पुनमभी..? नही अ‍ैसा नही होसकता..

मंजुला : (हसते) नही सृती.. क्युकी तब उनका आकर्सण ही इतना होगाकी तुम खुद अपने आपको उनके साथ रीलेशनमे आनेसे रोक नही पाओगी.. तब जीतनीभी लडकीया हो या ओरते जीनकोभी वो जानते होगे सबके साथ उनके रीलेशन होगे.. ओर उसी समय ये सब आम बात होगी.. फीर भलेही तब रीस्तेमे हमारी भावु उनकी नानी हो.. वोभी इनके साथ रीलेशनमे होगी..

सृती : (सरमाते हसते मुका मारते) ओह.. गोड.. कमीनी कुछतो सरम कर.. तुम कुछभी बोलती हे.. तब हमारी उमर क्या होगी तुजे पता हे..? बुढी हुगी मे.. बात करती हे.. ओर भावु..? तब उनकी उमर क्या होगी तुजे पता हे..? क्या कोइ पोतेकी उमरके लडकेसेके साथ रीलेशनमे आती हे..? तब हमारी काम शकितया भी खतम हो चुकी होगी.. बात करती हे.. मंजु तुमभीनां.. कुछ.. भी..?

मंजुला : (हसते) सृती.. तुजे अभी मेरी ये सब बातोपे विस्वास नही होरहा हेनां..? तुजे सब मजाक लग रहा हेनां..? इसीलीये मे ये बात कीसीके साथ सेर करना नही चाहती.. लेकीन तुम मेरी सब बाते बरोबर याद रखना.. ये बात सीर्फ तुम ओर पुनमही जानती होगी.. ओर ये सब होकर ही रहेगा.. क्युकी तुम भुल गइहो की हम सब परीया ओर अप्सराये हे..

हमपे ये उमरका ओर काम शक्तिका नीयम लागु नही होता.. तब मेरा पोता कुछभी कर सकेगा.. क्यु उन कहानीमे (ये केसी अनुभुती) उसने देवयानी ओर उनकी दादीको फीरसे जवान नही कीयाथा..? तब दादीकी उमर क्याथी..? उनकातो पीरीयड आना भी बंध हो चुकाथा.. फीरभी उनका पीरीयड फीरसे सुरु करके उनको प्रेगनेन्ट नही कीया..? फीर वोभी तो वापस जवान होगइ थी..

सृती : (थोडा सीरीयस होते) अरे हां.. मंजु.. मे तो सीर्फ मजाकमे केह रही हु.. वो देवयानीभीतो जवानथी.. उन्होनेतो दुनीयाको दीखानेके लीये दुसरा रुप लीया था.. तो तुमभी तो वही हो.. कही अभी अपनी पहेचान हमसेतो नही छीपाती..? हें..हें..हें.. अभी तुमनेही कहाकी मे देवयानी हु.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) सृती मे तेरे कहेनेका मतलब समज गइ.. तुम फीकर मत करो.. मेरे जानेसे पहेले तुजे पुनो चंदामौसी ओर मेरे देवुको मेरी असली पहेचान करवाके जाउगी.. हें..हें..हें..

सृती : (मुस्कराते) लेकीन क्या ये सब सचमे होगा..? आइ मीन.. (धीरेसे सरमाते) तेरा पोता मेरे साथभी..

मंजुला : हां सृती.. जब मेरा पोता तुम्हारी बेटीसे सादी करलेगा तब तुम खुद भी उनके साथ सामनेसे रीलेशनमे आजायेगी.. जब वो जन्म लेगा ओर जवानीके देहलीजपे कदम रखेगा तब हमारा देवु कीसी कामका नही रहेगा.. तब उनका रोल इस दुनीयामे पुरा होजायेगा.. उनकी सारी काम शक्ति उनके पोतेमे आजायेगी. ओर वो देवुकी जगाह ले लेगा.. तब सीर्फ तुम ही नही.. चंदामौसी पुनम.. सबके साथ उनका फीजीकल रीलेशन होगा..

ओर जब उनके पास वो सब शक्तिया आजायेगी तब संभोगके माध्यमसे तुम सबको अपनी खुदकी पहेचान करवायेगा.. ये बात तुम याद रखना.. तब तुजे पता चल जायेगाकी पीछले जन्ममे तुम कौन थी.. ओर तब वो तुम सबमे संभोगके माध्यमसे कामशक्ति वापस जगायेगा.. क्युकी उनका कामही यही हे.. वो स्वयंम कामका अंस होगा.. हमारे राजा.. मेरे स्वामी.. मेरा बेटा.. ओर मेरा पती.. मेरा सबकुछ..

सृती : (मुह फाडके आस्चर्यसे देखते) ओ माइ गोड.. मंजु.. मुजेतो यकीन ही नही हो रहा हे.. की तुम इतना कुछ जानती हो.. ओर मेरा मन केह रहा हे ये आजके जमानेमे ये सब पोसीबल नही हे.. ओर दिल तेरी बाते माननेको विवस हो रहा हे.. की ये सब होकरही रहेगा.. ओर मजेकी बात.. मे.. चंदामौसी ओर पुनम.. तबभी हम सबकी साक्षी होगी.. ओर ये सब अनुभव करेगी.. लेकीन अ‍ेक बात मेरी समजमे नही आइ..

मंजुला : (हसते) कमीनी.. इतना कुछतो जानलीया.. अब ओर क्या रेह गया.. बता कोनसी बात..?

सृती : मंजु उस हिमाचलके राजाका जन्म अ‍ेक खास उदेस्यसे हुआथा.. ओर वोहे.. वो भव्य शीवमंदिर.. तो फीर इस बार सबको जन्म लेनेकी क्या आवस्यक्ता पड गइ..? क्या कोइ खास मक्सदसे जन्म ले रहा हे..?

मंजुला : (हसते) देखा.. सब अपनी कामइच्छा पुर्ती करनेमे बीजी हे.. बस सीर्फ तेरे मनमेही ये खयाल आया.., इसीलीये मे तुजे सब बाते बता रही हु.. सुन.. हम सबका यहा जन्म लेकर आनेका अ‍ेक खास मक्सद हे.. तभीतो हम सब यहा जन्म लेकर आये हे.. बस हमे कुछ दिन इन्तजार करना पडेगा..

फीर वो मक्सदभी सामने आजायेगा.. मुजे बस इतना पता हे अ‍ेक बार हम सब मीलकर वो शीवमंदिरमे जाने वाले हे.. तब हम वहाके उस राजाके परीवारसे मीलेगे.. यानी हमारेही पर पौत्र पौत्रीओसे मुलाकात करेगे.. जो आजभी हमारी परंपरासे जीते आये हे.. वो सब अभीभी अपनीही बहेनसे सादी करके वहा संसार चला रहे हे..

सृती : ओह.. गोड.. मे कीतनी खुसनसीब हु.. की मेभी आप सब लोगोका हीसा हु.. क्या मे सचमे अ‍ेक अप्सरा हु..? मुजेतो अभीभी यकीन नही हो रहा.. दिलतो सोचकरही रोमांचीत हो रहा हे..

मंजुला : हां सृती.. तब मे देवयानी थी.. ओर तब मुजे वहा मेरी बेटीके कारण अ‍ेक श्राप मीलाथा.. तब मेरे राजने मुजे उस श्रापसे मुक्त कीया.. फीर हमने तीन दीन ओर दो रात लगातार बीना नीचे उतरे अ‍ेकही बंध कमरेमे संभोग करते अनुभुतीकी.. ओर मे उस राजाको अनुभुतीमे अप्सरालोकमे लेगइ ओर उनके माध्यमसे वहाकी सभी अप्सराओको संभोगके माध्यमसे प्रेगनेन्ट करवा दीया..

ताकी वहाकी अप्सरालोककी संख्या बढे.. जो वहा बहुतही सीमीत अप्सराये बचीथी.. ओर उनमेसे तुमभी अ‍ेक हो.. जो मेरे राजके साथ संभोग करते उसे हमेसाके लीये उनका साथ पानेकी प्रार्थना करती थी.. ओर आज इसीलीये तुमभी इस धरतीपे उसे मीलन करने आगइ.. वो सबकी सुनते हे.. सबकी मानते हे हम सभी परीया ओर अप्सराओका सन्मान करते हे..

सृती : (मुह फाडके सुनते) क्या मेभी..? मेनेभी अ‍ैसी प्रार्थना की होगी..? तबतो पका मुजे उनसे मीलना होगा.. हें..हें..हें.. मंजु लेकीन पुनमकीतो अभी धिरेनसे सादी होने वाली हे.. तो फीर वो कैसे देवुसे प्यार कर बैठी.. अगर बाबाके कहेने मुताबीक उसने देवुसे सादी करली हे तो फीर अभी धिरेनसे क्यु सादी कर रही हे..? कोइ खास रीजन..?

मंजुला : (हसते) हां सुन.. लेकीन ये बातका जीक्र तुम भुलसेभी दुसरोके सामने नही करना.. खास करके मौसीके सामने.. जबसे पुनमने अपनी जवानीके दहेलीजपे कदम रखा तबसे वो धिरेनको नही.. अपने भाइ देवुसे प्यार करती थी.. उनकी धिरेनसे सादी मेरे कहेनेपे हो रही हे.. सब हमारे स्वामीका नीर्माण हे.. तु सोच जब पुनम अपने भाइसे सादी करके हमारे साथ रहेगी ओर उनके बच्चे पैदा करेगी तब लोग क्या कहेगे..?

इसीलीये पुनमकी देवुसे सादी होनेके बावजुद धिरेनसे सादी करवा रहे हे.. क्युकी धिरेन अल्प आयु वाला हे.. तब पुनम विधवा होकर हमारे पास आजायेगी तब लोगभी उसके बारेमे कुछ नही बोलेगे.. सबको यही लगेगाकी पुनम विधवा होकर वापस आइ हे.. ओर तब पुनम सबसे छुपके अपने पहेले पतीको यानी मेरे देवुके साथ अपना संसार चलायेगी ओर मेरे देवुको प्यार देती रहेगी..

सृती : (धीरेसे) मंजु.. तुजे पता हे.. बाबाने पुनोको कुछ कहा हे.. मुजसे चेक करवानेकी बात कर रहेथे..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां सृती.. सुन.. तु वहा सादीमे आये तब कोइ कीटबीट लेकर आना.. ओर सबसे छुपकर तु अ‍ेक बार पुनोको चेक करलेना.. क्युकी इस बारेमे अभी कीसीको नही पता.. सी इस प्रेगनेन्ट.. वो मेरे देवुसे प्रेगनेन्ट हो चुकी हे.. जो पुनोको बाबाने कहाथा.. वो सब राजकी बात हे बस तु पुनोका खयाल रखना.. मुजे आजही तेरी तराह उसे सब ज्ञात करवाना हे.. ओर वोभी अनुभुतीमे.. तब खुद वो आयेगे जीनके हम सभी अंस हे.. हमारे स्वामी.. काम ओर रती.. आज पुरे गांवमे काम अपने चरमोपे होगा..

सृती : (आस्चर्यसे धीरेसे) मंजु.. क्या वाकइ धिरेनकी आयु अल्प हे..? तुजे सब कैसे पता..? क्या मौसीको इस बारेमे पता हे..?

मंजुला : (जटसे धीरेसे) नही कमीनी.. उनको कुछ नही पता.. बस तु उनसे बात करनेमे खयाल रखना.. सृती ये बात मुजे बाबानेभी कही हे.. ओर उसीने ये रास्ता ढुंढ नीकाला हे.. ओर सुन अ‍ेक दुसरी मजेकी बात.. कुछ सालोके बाद.. हमारा लखनभी.. (आंसुके साथ रुआंसी आवाज होजाती हे)

सृती : (गंभीर होकर चोंकते) क्या.. लखनभैयाभी..? तो फीर लताका क्या होगा..?

मंजुला : (आंसु पोछते) सृती.. हमारी लताभी अ‍ेक परी हे.. तु समज गइनां..? तब मेरा देवु उसे सादी करके सम्हाल लेगा.. ओर उनहीकी बच्ची मेरे पोतेकी खास ओर उनकी सबसे चहीती बीवी होगी.. मेरी.. नेनु.. सुन सीर्फ तुजेही बता रही हु.. वो बच्ची जन्मके साथही अपाहीज होजायेगी.. बस अभी तुजे इतनाही कहेना हे..

सृती : (आस्चर्यसे) मंजु वोही राजाकी बडी बहेन थीनां.. नेनु.. जीसे वो राजा सबसे ज्यादा प्यार करता था.. उन राजाकी कहानीमे उनके दुसरे जन्ममे अपाहीज होनेका जीक्रभी हे.. तो फीर उनकी दुसरी बहेन वो सोनु थी.. वो कौन होगी.. वोही उनकी पहेली बीवी थीनां..? ओर वो कीसकी कोखसे पैदा होगी.. प्लीज मुजे उनके बारेमे बताओनां..

मंजुला : (हसते) कमीनी तु धीरे धीरे करते मुजसे सब बाते उगलवा रही हे.. अब छोड ये सब बाते..

सृती : (हसते) नही मंजु बस ये आखरी बात बतादो फीर मे तुमसे कुछभी नही पुछुगी.. प्लीज.. मे सब याद रखुगी.. ताकी मुजे तुम सबको पहेचाननेमे आसानी रहे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (गंभीर होते) सुन सृती.. भावु जब देवुसे प्रेगनेन्ट होगी तब मे भावुकी कोखसे पैदा हुगी.. तब मेरा विजय मेरी ही छोटी बहेनसे यानी भावु ओर देवुकी दुसरी लडकीसे प्यार करता होगा.. तब मेरी छोटी बहेनके कहेनेपे विजय उनकी बडी बहेनके साथ यानी मेरे साथ धोखेसे विजयसे संभोग करवायेगी.. ओर नतीजा विजय मुजे प्रेगनेन्ट कर देगा..

ओर फीर मेरी छोटी बहेनके बजाय विजयकी सादी मुजसे करदी जायेगी.. ओर मुजे जो पहेली बच्ची होगी वोही हमारी सोनु होगी.. यानी मेरे पोतेकी पहेली बीवी.. तब मेराही बेटा अपनी बडी बहेनसे सादी करलेगा.. तुजे पता हेना.. उस राजाने सोनुको पहेली बीवी होनेका वचन दिया था.. जो आजभी हमारे स्वामी उसे वचनसे बंधे हे.. उनके हर अंसके साथ सोनुही उनकी पहेली बीवी होती हे.. बस इस जन्ममेभी वो रीस्ता कायम रखेगे.. मेरी सोनुही उनकी पहीली बीवी होगी..

सृती : (धीरेसे सरमाकर) मंजु.. अ‍ेक बात कहु.. तुम कहेती हो इनके मुताबीक क्या हमारा देवुभी उनका अंस हेनां..? तो फीर तुमही उनकी पहेली बीवी हो.. ओर तुमतो देवयानी हो.. तो फीर सोनुके वचनका क्या हुआ..?

मंजुला : (थोडा गंभीर होते) नही सृती.. आइ अ‍ेम सोरी.. मे तुजे इस बातका जवाब नही दे पाउगी.. उन दोनो आजभी अपने वचनसे बंधे हे.. हमारी सोनु आजभी मेरे देवुकी पहेली बीवी हे.. बस मे तुजे इस जन्ममे उनकी पहेचान नही करवा सकती.. मे तुजे सीर्फ इतना बता सकती हुकी मे हमारे देवुकी पहेली बीवी नही.. उनकी दुसरी बीवी हु.. बस सीर्फ दुनीया वालोकी नजरमे मे उनकी पहेली बीवी हु..

सृती : (हसते) मंजु.. मे समज गइ.. जरुर तेरी कोइ मजबुरी होगी.. इसीलीये तु उनका नाम नही लेपा रही.. कुछ रीस्ते होते हे.. जो हमे उसे सबके सामने उजागर नही करना चाहीये.. तुजेतो पुरी कहानी पता हे.. तो तुजे उस राजाकी सब बीवीयोके बारेमे पता होगा.. तो उनके बारेमेभी जानती होगी..

मंजुला : (जुठा गुसा करते) हां लेकीन कमीनी मे अभी तुजे कुछभी नही बताउगी.. जीतनी जरुरी बातेथी वो सब तुजे बतादी.. समजी..

सृती : (हसते) चल ठीक हे.. मे सब याद रखुगी.. देखती हु मे तुजे तब पहेचान जाती हुकी नही..

भुमीका : (बहारसे जोरोसे आवाज लगाते) अरे दोनो कबसे क्या बाते कर रही हो.. कुछ खाना बानाभी बनाती होकी सीर्फ बाते ही करती हो..

सृती : (जोरोसे) मम्मी खानाभी बन रहा हे.. ओर बातेभी हो रही हे.. आप फीकर मत कीजीये.. अभी मंजु वहा आती हे..

मंजुला : (खडी होते) सृती मेने सब सब्जी काटली हे.. तु खाना बना.. मे थोडी देर विजयको लेकर आंटीके पास बेठती हु.. देखती हु वो भुखा होगा.. उसे दुध पीलादु..

सृती : (जोरोसे हसते फीर धीरेसे मजाकमे) हां जा देखले.. अच्छेसे दुध पीलाना.. ताकी दुसरे जन्ममे तुजे अच्छेसे ठोक सके.. हें..हें..हें.. चल जा.. मे खाना बना लुगी.. अब सब्जी कुकरपे चडाके सीर्फ रोटी ही तो बनानी हे.. जा देखले फीर मेभी बहार आती हु..

मंजुला : (सरमाते हसते धीरेसे) कमीनी.. सीर्फ मुजेही नही ये तुजेभी ठोकेगा.. समजी.. हें..हें..हें..

कहेते मंजु हाथ धोकर बहार चली गइ ओर सृतीके रुममे जाकर बच्चेको देखने लगी तब बच्चेने पीपी करलीतो मंजुने उनका डायपर चेन्ज करलीया ओर बच्चेको लेकर भुमीका आंटीके पास बेठ गइ ओर अपना ब्लाउस उचा करते विजयको दुध पीलाने लगी.. तब भुमीकाने कीताब बंध करके साइडमे रख दीया.. ओर मंजुके सरमे हाथ घुमाते उसे प्यार देने लगी.. तब मजुभी सरमाकर मुस्करा उठी.. ओर भुमीका आंटीके सामने देखकर हसती रही..

तभी दुसरी ओर मार्केटमे सभी अ‍ेक सारीके स्टोरमे सारीया सीलेक्ट कर रहेथे.. तब धिरेन ओर लखन दुसरे स्टोरपे अपने अपने कपडे ले रहेथे.. तब उनके साथ नीलमभी गइथी.. जो लखन ओर धिरेन उनके साथ मजाक करते बाते कर रहेथे.. तब नीलमभी उन दोनोके साथ हसी कजाक कर रहीथी.. अबतो धिरेन भी नीलमका कुछ खास खयाल रखने लगाथा.. ओर अपने सब कपडे नीलमको दिखा दिखाकर उनकी चोइसका लेने लगा.. इस बातपे नीलमभी खुस हो रहीथी..

नीलमको धिरेनका साथ बहुतही अच्छा लगने लगाथा.. इसी बीच धिरेनने नीलमको आइसक्रिम ओर मंहेगी चोकलेटभी दीलवाइ.. फीर उनकी ओरसे नीलमको अ‍ेक मंहेगी ओर सेक्सी ड्रेसभी दीलवाइ.. जीसे देखकर नीलम खुब सरमाइ.. वो उसे लेनेको मना कर रहीथी उनके बावजुद धिरेनने उसे जबरदस्तीसे दिलवाइ.. जब लखन अपनी खरीदी करनेमे बीजी था तब नीलमके लीये कुछ सींगारका सामानभी लीया..

नीलम : (सरमाकर धीरेसे) जीजु.. मुजे कुछ नही चाहीये.. लता दीदी सब देखलेगी ओर मुजसे कुछ कहेगी तो मे क्या कहुगी..? मे अ‍ैसी ड्रेस नही पहेनती..

धिरेन : (धीरेसे हसते) अरे.. वहा नही.. तु सहेर होस्टेलमे पढने आयेगी तब पहेनना.. वो कुछ नही कहेगी.. कुछ कहेतो मेरा नाम लेलेना.. केह देना मेरे बोयफ्रेन्डने दिलवाइ हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) जीजु.. अ‍ेक मारुगी.. प्लीज.. यहा लखन जीजुभी हे.. कही सुनना ले.. मे कहासे आपकी गलफ्रेन्ड होगइ..? हें..हें..हें..

धिरेन : (हसते धीरेसे) क्यु..? क्या तुमने मेरी दोस्ती कबुल नही की..?

नीलम : (सरमाते हसते) हां.. वोतो की.. लेकीन..

धिरेन : (हसते) देखो नीलम तुम लडकी हो ओर मेरी दोस्त हो तो हो गइनां मेरी गर्लफ्रेन्ड..?

नीलम : (सरमाते हसते धीरेसे) जीजु.. आप बहुत नोटी हो.. बातोमे आपसे कोइ नही जीत सकता.. लेकीन गर्लफ्रेन्ड बोयफ्रेन्डका कीसीको पता चल गयातो..?

धिरेन : (धीरेसे कानमे) अरे कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. तुम मुजे फोन करना तब तुजे मे कुछ बताउगा.. नीलु.. कास तुम मुजे पहेले मीली होती.. मे तुमसेही सादी करलेता.. खैर.. अभी मेरी सालीतो हे.. ओर सालीभीतो आधी घरवाली होती हे..तो तुम मुजे आधाही प्यार देना.. हें..हें..हें..

नीलम : (सर्मसार होकर हहसते) जीजु.. प्लीज.. अ‍ैसी बाते मत करो.. मुजे सरम आ रही हे.. कोइ सुनेगातो क्या सोचेगे.. कुछतो सरम करो अपनी सालीसे अ‍ैसी बाते करते हो.. आप बहुत बदमास हो.. हें..हें..हें..

धिरेन : (धीरेसे कानमें) नीलु.. अब मुजे जीजु कहेना बंध करदे.. हम दोनो दोस्त हे.. मुजे मेरे नामसे बुलानां.. क्या मे तुजे अच्छा नही लगता..

नीलम : (सरमाकर हसते धीरेसे) जीजु.. प्लीज.. अच्छेकी बात नही हे.. कही कोइ सुननांले.. मुजे मार नही खानी.. मे कैसे आपको नामसे बुला सकती हु.. आप मेरे जीजु हे..

धिरेन : (हसते) अरे सबके सामने नाम लेनेको थोडी केह रहा हु.. बस.. जब हम दोनो अकेलेहो.. तब तुम मुजे नासे बुलाओगी बस.. ओर फोनपेभी मुजे नामसे बुलाना.. समजी.. कीसीको कुछ पता नही चलेगा..

नीलम : (सरमाकर हसते) जीजु.. देखना अ‍ेक दिन आप मुजे मरवाओगे.. हें..हें..हें.. आपका नंबर मेरे पास थोडीनां हे..? वोतो पुनम दीदीके पास होगा.. हें..हें..हें..

धिरेन : (धीरेसे कानमे) नीलु.. आइ लव यु.. मुजे तुमसे सचमे प्यार होगया हे.. मे तुजे अपना नंबर देदुगा.. मुजे अकेलेमे फोन करना..

नीलम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) जीजु.. प्लीज.. ये नही हो सकता.. हम दोनो सीर्फ दोस्तही अच्छे हे.. अगर कीसीको पता चल गयातो मेरी तो खैरही नही.. प्लीज. ये प्यारका भुत अपने दिमागसे उतारदो..

धिरेन : (धीरेसे कानमे) नीलु.. तु मुजसे प्यार करती हेतो जरुर मुजे फोन करोगी.. तुजे मेरी कसम..

तभी लखन धिरेनको आवाज लगाकर अपने पास बुलाता हे तब धिरेन ना चाहते हुअ‍ेभी लखनके पास चला गया.. तब नीलमनेभी राहतकी सांसली ओर वो धिरेनके सामने सरारतभरी मुस्कान करते उनके सामने अपनी जीभ नीकालते हसते हुअ‍े धिरेनके साथ लखनके पास चली गइ.. लेकीन आज धिरेनके प्रपोजसे नीलम मनही मन बहुतही खुस होगइ.. आज पहेली बार वो रोमांचीत होने लगी.. ओर उनकी चुतमे हल्कीसी हलचल होने लगी.. तब नीलम खुब सरमाइ..

तो दुसरी ओर चंदा पुनम लता ओर देवायत सारीके सोरुम मे थे.. तब चंदा सब सारीया देवायतको हस हसके दीखा दीखाकर सीलेक्ट कर रहीथी.. तब पुनमको आज चंदासे काफी ज्वेलेसी फील होने लगी.. तो दुसरी ओर लताभी बार बार देवायतके पेन्टके उभारको देखते सरमाते हसती रही.. क्युकी देवायतके पेन्टमे उनका विकराल लंडका उभार साफ दिखाइ दे रहाथा.. तब अ‍ेक दो बार देवायतनेभी नोटीस करलीया.. लेकीन उसने लतापे ज्यादा ध्यान नही दीया.. फीर अ‍ेक घंटेकी मसकसके बाद सबने कपडे खरीद लीये.. ओर दुसरी दुकानपे चले गये....

कन्टीन्यु
 
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ९५

तो दुसरी ओर चंदा पुनम लता ओर देवायत सारीके सोरुम मे थे.. तब चंदा सब सारीया देवायतको हस हसके दीखा दीखाकर सीलेक्ट कर रहीथी.. तब पुनमको आज चंदासे काफी ज्वेलेसी फील होने लगी.. तो दुसरी ओर लताभी बार बार देवायतके पेन्टके उभारको देखते सरमाते हसती रही.. क्युकी देवायतके पेन्टमे उनका विकराल लंडका उभार साफ दिखाइ दे रहाथा.. तब अ‍ेक दो बार देवायतनेभी नोटीस करलीया.. लेकीन उसने लतापे ज्यादा ध्यान नही दीया.. फीर अ‍ेक घंटेकी मसकसके बाद सबने कपडे खरीद लीये.. ओर दुसरी दुकानपे चले गये....अब आगे

वहाभी सबने कपडे ओर कुछ अंडर गारमेन्ट्स खरीद लीये.. फीर सभी लोग अ‍ेक ज्वेलेरी सोपमे चले गये वहा चंदाने पुनम ओर लताके लीये कुछ बाकी रेह गइ ज्वेलेरी लेली.. इसी बीच लता ओर लखनभी खुलकर साथ बाते करते रहे.. ओर सबके सामनेही अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडके चलते रहे.. धिरेनको अभी तक पुनमने कुछ करने नही दीयाथा.. वो सादीसे पहेलेही पुनमको चोदना चाहता था.. लेकीन पुनम उनसे हर बार दुरीया बनाकर रखती थी..

इसीलीये वो थोडा बोखलाया हुआ था.. जीनकी वजहसे उनकी पुनमसे दुरीया ओर नीलमसे नजदीकीया बढ रहीथी.. तभी धिरेनको नीलमके साथ चलते बातोसे पता चलाकी वो सहेरमे पढनेके लीये पुनमथी वोही होस्टेलमे आरही जहा पुनम ओर लखन थे.. तो ये बात सुनकर धिरेन बहुतही अ‍ेक्साइटेड होने लगा.. क्युकी वोभी सहेरमेही जोब करता था तो नीलमको मीलनेमे बडी आसानी रहेगी.. यही सोचते वो पुनमके साथ साथ नीलमकोभी महेंगी महेंगी गीफ्ट दीलवाके सेट करनेमे लगा हुआथा..

क्युकी वो जान चुकाथाकी नीलम सहेरमे अकेली पढने आ रही हे वो नीलमको बडी आसानीसे सेट कर सकताथा यही सब सोचते वो नीलमपे कुछ ज्याादाही ध्यान देने लगा.. हांलाकी नीलम अभी टीनअ‍ेजर थी.. ओर अभी अभी जवानीकी ओर कदम रख रही थी.. धिरेन पुनम ओर लखन लताको देखकर प्यारकी परीभासा समजने लगीथी.. धिरेनका नीलमकी ओर ढलनेका सीर्फ अ‍ेकही रीजन था..

पुनमने उसे अभी तक सेक्स करने नही दीया.. जो उनसे बहुत उमीद लेकर बैठाथा.. तो दुसरी ओर नीलमकोभी धिरेनका साथ अच्छा लगने लगा.. ओर वो पुनमके साथ रहेके धिरेनसे ज्यादासे ज्यादा नजदीक रहेके उनसे बाते करती रही.. तब बीच बीचमे धिरेन पुनमकी नजर बचाते हल्का मजाक करते नीलमको छुने लगता.. बातो बातोमे कभी नीलमको पीठमे मुका मार देता या उनकी कमरमे चीटकी काट लेता तो कभी नीलमकी गरदन दबोच लेता.. तो नीलमकोभी इस खेलमे बहुत मजा आ रहाथा..

नीलमकोभी धिरेनकी अ‍ैसी मस्तीया अच्छी लगने लगी ओर वो सरमाते मुस्करा देती.. भलेही धिरेनने उनसे प्यारका इजहार करलीयाथा ओर नीलमने कुछ जवाब नही दिया लेकीन नीलम मनही मन धिरेनके प्यारको अ‍ेक्सेप्ट कर चुकीथी.. तभी धिरेनने अ‍ेक कागजकी परचीमे कुछ लीखर सबकी नजर बचाते वो परची नीलमको देदी ओर कानमे धीरेसे घर जाके देखलेना कहेकर हसने लगा..

तो नीलमनेभी गभराते सबकी ओर देखते वो परची जटसे अपने हाथोमे छुपाली.. ओर धेरसे अपनी जेबमे रखली.. ये सब हरकतसे वो बहुतही रोमांचीत होने लगी.. जीनकी वजहसे आज उनकी चुतभी फडफडाते गीली होने लगी.. उनकोतो पताही नही थाकी सब क्यु हो रहा हे.. उनपेभी नइ नइ जवानी चडी हुइथी.. तब उनको धिरेनकी नीयतका पता नही था.. लेकीन इस बातको पुनम बरोबर नोटीस कर रहीथी..

उनकी तेज नजर धिरेनकी सब हरकते नोटीस कर रहीथी.. ओर इस बातका उसे कोइ अ‍ेतराजभी नही था.. उनकोतो सीर्फ अपने भाइ देवायतसे मतलब था.. लेकीन फीरभी धिरेन उनका होने वाला पतीथा.. ओर नीलम अभी इन सब चीजोके लीये छोटी थी.. ओर पुनमने धीरेसे इस बातको लेकर लताको आगाह कर दीया.. पुनमकी बात सुनतेही लताभी चोंक गइ..

लेकीन लखनका साथ होनेकी वजहसे लताने कुछ खास ध्यान नही दीया.. वो नीलमको अकेली मीलकर इस बारेमे उनसे बात करनेकी ठानली.. ओर वोभी कभी नीलम ओर धिरेनकी हरकतोपे नजर रखते ध्यान रखने लगी.. तब धिरेन ओर नीलम अपनीही मस्तीओमे खोये हुअ‍े थे.. तो दुसरी ओर इधर घरपे सृती खाना बना रहीथी तब मंजु ओर भुमीका आंटी सोफेपे बेठकर आपसमे धीरे धीरे बाते कर रहीथी..

भुमीका : (धीरेसे) मंजु बेटा बाय चान्स.. अरे बाय चान्स क्या मानलोना सृतीकी देवुसे सादी होगइ.. तो फीर सृती रहेगी कहा..? मेतो यहा अकेली होजाउगी.. क्या इस बारेमे तुमने कुछ सोचा हे..?

मंजुला : (हसते) बुआ.. आप इसकी चीन्ता तो छोडही दो.. सृती इधरही आपके पासही रहेगी.. बस देवु इधर आता जाता रहेगा.. क्युकी वहाभी उनकी रानीया ओर उनका कारोबार हे.. ओर मे येभी जानती हु सृती अ‍ेक डोक्टर हे ओर उनकी क्लीनीक यहा हे.. तो उनकाभी यहा रहेना जरुरी हे.. तो आप इस बातकी बीलकुल फीकर मत करना.. सृती इधरही आपके पासही रहेगी.. ओर वेसे देवुकी अ‍ेक रानी इधरभी तो होनी चाहीये.. हें..हें..हें..

भुमीका : (खुस होते हसते) बेटी.. तबतो ठीक हे.. वो मुजे मीलनेभी तो नही आता.. अब इनकी बीवीसे मीलनेके बहाने यहा आता जाता रहेगा.. लेकीन वो इतना कहा बीजी रहेता हे..? सृतीसे कीतनी बार कहेलवाया वो आयाही नही.. आज कल बहुत बीजी हो गया हे..

मंजुला : (हसते) बुआ.. बस ये चारोकी सादी होजाये.. फीर हम सब फ्रि होजायेगे.. ओर उपरसे मेरे पीता बीमार हे.. ओर वो भानुभाइके मामाभी गुजर गये.. ओर अभी गांवमेभी कोइ सरपंच नही था.. तो गांवकाभी देखना होता हे.. अभी अभी उनके अ‍ेक दोस्तको सरपंच बनाया हे.. अब वो वहासे फ्रि होगये हे.. लेकीन आपको उनसे कुछ कामथा क्या..? मुजे केह देयी.. आप कहीयेना मे देवुसे बात करलुगी..

भुमीका : (हसते) अरे कुछ खास काम नही था.. बस कीतने दिन होगेये उनकी सकल नही देखी थी.. ओर उनको सृतीकी क्लीनीकका भी पुछना था.. वो आदमी पीछले कइ महीनोसे कीराया लेने ही नही आया..

मंजुला : (हसते) बुआ.. उन कीरायेकी फीकर छोडदो वो देवु सब स्महाल लेगा.. बस आपतो मजेही करो..

भुमीका : (हसते) वोतो ठीक हे बेटी.. लेकीन पुरा बिल्डींग बनाकर हमेही कीरायेपे देदीया.. ओर अभी तक इनके मालीकको भी नही देखा.. बस उनका आदमी कीराया लेकर चला जाता हे.. ओर देखो.. बील्डींगका नामभी मेराही रखा हे.. भुमी.. तभी मे इनके मालीकको मीलना चाहती हु.. क्यु उनके घरमेभी कोइ भुमी नामका हे.. जो ये नाम रखा हे..

मंजुला : बुआ.. हो सकता हे ये सीर्फ संजोगही हो.. कोइ भुमी नामका होगा उनके घरमे हमे क्या लेना देना..

भुमीका : चल ठीक हे.. ये बता तुमने पुनमकी सादी कब रखी हे..? क्या वहा नीमुभी आरही हेनां..? तो मे ओर सृतीभी आजायेगे.. वही नीमुसे ओर राजीवकोभी मीलकर हाल चाल पुछ लुंगी.. कीतने साल होगये.. मेनेतो राजीवको देखाही नही.. ओर तेरी मम्मीभीतो कीतने सालोके बाद मीली..

मंजुला : बुआ.. वो सादीका मुहुर्त बाबाने नीकाला हे.. बस अब सादीमे सीर्फ अ‍ेक हप्ता रेह गया हे.. तो आप ओर सृती पहेलेही आजाना.. कीतने दिन होगये होगे.. सृतीनेभी कोइ छुटी नही रखी होगी.. तो सब साथ मीलके खुब अ‍ेन्जोय करेगे.. आप सृतीको केह देना वरना वोतो मेरी बात मानेगी ही नही.. आपको कमसे कम वहा तीन दिनतो रहेनाही पडेगा.. मे अभीसे केह देती हु.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) अरे तु फीकर मत कर.. उनकोतो मे कान खीचकर लेआउगी.. ओर आयेगी क्यु नही..? अब वोभीतो उनका ससुराल हे.. तो देखभी लेगी.. बस मेभी कोलेजमे थी तब सबके साथ दो तीन बार गइ हु.. क्या अबभी हवेली अ‍ैसीही हेकी कुछ चेन्ज होगया हे..?

मंजुला : अरे बुआ.. अबतो बहुत कुछ बदल गया हे.. बहारसे सबकुछ अ‍ैसाही हे बस अंदरसे अ‍ेक बडे बंगलोकी तराह करदीया हे.. ओर सब सुवीधाये हे.. आप अ‍ेक बार आकर देखीयेतो सही.. आपतो जानती हे मेरे ससुने यहा अ‍ेक बंगलो खरीदके रखा हे ओर अबतो देवुभी यहा सहेरमे दुसरा अ‍ेक बडा बंगला खरीदनेको केह रहाथा.. सायद लखनभैया ओर लताको वो यहा रहेने भेजदे.. देखते हे अब..

भुमीका : बेटी.. तु कहेती हे वहा देवुका इतना बडा कारोबार हे तो क्या वो अकेला स्महाल पाता हे..? क्या लखन वहा नही जाता..? तो फीर वो यहा कैसे आयेगा..?

मंजुला : (तभी सृतीभी काम नीपटाके आकर दोनोके साथ बैठ जाती हे) बुआ.. वहा उनके साथ भानुभाइ ओर लखनभी हे.. अब देखते हे आगे क्या होता हे.. वो अ‍ेक बार केह रहेथेकी लखनको सहेरमे भेज देना हे.. (सृतीकी ओर) सृती खाना बन गया..?

सृती : हां सीर्फ रोटीया ही तो बनानी थी.. बाकीकातो सब होगया हे ओर सब्जी पक रही हे.. तु थोडी देर बैठ मम्मीसे बात कर.. तबतक मे पासकी मीठाइकी दुकानसे कुछ लाती हु..

मंजुला : (हसते) अरे नही.. तु रहेने दे.. हम यही सादा खाना खा लेगे.. कुछ नही लाना.. बैठ इधर..

भुमीका : (हसते) अरे अ‍ैसे कैसे नही लाना..? अबतो देवु मेरा जमाइ होने वाला हे.. जा सृती कुछ लेकर आ.. कीतने दिनोके बाद सबलोग साथ आये हे.. मुजेतो अ‍ैसाही लगताहे आप सबलोग मेरी सृतीका रीस्ता लेकर आये हो.. हें..हें..हें.. जा जा.. कुछ बडीयासी मीठाइ लेकरआ.. हें..हें..हें..

कहातो सृती सर्मसार होते हसती हुइ खडी होगइ.. ओर कीचनमे चली गइ.. फीर अ‍ेक डीबा लेकर अपने स्कुटरपे चली गइ.. तबतक भुमीका ओर सुती बाते करते रहे तब थोडी देरके बाद सृतीभी बासुंदी लेकर वापस आगइ.. तो पीछे भी सभी लोग खरीदी करके वापस आगये.. ओर सब अ‍ेक अ‍ेक करते फ्रेस होकर होलमे आने लगे.. ओर सोफेपे बेठने लगे.. तब चंदा ओर पुनम सृतीकी हेल्प करने कीचनमे चली गइ..

चंदा अभीभी अ‍ेक दुल्हने लीबासमे चज रही थी.. उनके हाथोकी कलाइमे चुडीयोकी खनखनाहट ओर पैरमे जांजरकी जनकार सुनकर सबको अपनी ओर ध्यान खीच रहीथी.. ओर देवायततो उनकी आवाज सुनकर आज चंदाके पीछे पागलही हो गयाथा पुरी रास्ते उसने चंदाका हाथ नही छोडा.. ओर चंदाभी सादीके बाद देवायतसे बाते करनेमे काफी खुल गइथी.. जो पहेले सीर्फ देवायतसे अकेली होतीथी, लेकीन अब सबके सामने बीन्दास देवायतके साथ अ‍ेक पत्नी जैसा व्यवहार कर रहीथी.. जीसे देखकर कभी कभी धिरेन ओर पुनमभी सरमा जाते थे..

तब लता लखन धिरेन नीलम अभीभी आपसमे मस्ती मजाक करते सोफेमे बेठे थे.. तभी देवायतभी कार पार्क करके भुमीकाके पास आकर बेठ गया.. तो अब भुमीकाका नजरीया देवुको देखते ही बदल गया.. ओर वो प्यारभरी नजरोसे देवायतको अ‍ेक दामादके रुपमे देखने लगी.. ओर प्यारसे उनके सरमे हाथ घुमाते उसे अजीब नीगाहोसे देखते प्यार देने लगी.. तब देवायतको भी थोडा अजीब लगा..

आज सबके सामने भुमीका उसे प्यार दे रही हे.. ओर वो उनके सामने प्रस्नार्थ भरी नजरोसे देखकर मुस्कराने लगा.. तभी अचानक भुमीकाने देवायतको आंखोके इसारेसे कुछ बात करली.. तब देवायत सब कुछ समज गया.. दोनोने आंखोके इसारोसे क्या बाते करली कीसीको कुछ नही पता चला.. फीरभी उनकोतो पताही नहीथा की उनके जातेही पीछेसे उनके ओर सृतीके बारेमे क्या बाते हुइ हे.. सीर्फ देवायतही नही.. बाकीके सभी लोग इस बातसे अन्जानथे की उनका ओर सृतीका रीस्ता आपसमे तैय होगया हे..

देवायत : कहो आंटी.. बातो बातोमे हम सब चले गयेतो पुछना ही भुल गयाथा.. क्या काम था मुजसे..?

भुमीका : (हसते) तो क्या काम होगा तभी तु आयेगा..? अ‍ैसेही अपनी आंटीको मीलने नही आ सकता..? ओर आंटीके बच्चे ये आंटी आंटी क्या लगा रखा हे.. मे बुआ हु तेरी.. किशन मेरा भाइ था.. समजे..? (धीरेसे) की तुजे दुसरे तरीकेसे समजाना पडेगा..

देवायत : (हसते) सोरी बुआ.. समज गया.. मे आता जाता तो रहेता हु.. लेकीन आपतो जानती हे मे अभी कुछ काममे फसा हुआथा.. अब आजाउगा.. ओर वेसेभी अबतो मेरी बुआका घर हे मे कभीभी बिन्दास्त आजा सकता हु.. हें..हें..हें..

भुमीका : (हसते) हां ये हुइना बात.. देवु बेटा.. वो तेरा बील्डर दोस्तका आदमी पीछले कइ महीनोसे कीराया लेने ही नही आया.. जो मेने उनका कीराया सम्हालके रखा हे.. अब तु आज आयाहे तो लेकर जाना.. ओर वो मीलेतो उसे दे देना.. हमे इतनी बडी बील्डींग बनाकर देदी.. तो हमाराभी फर्ज बनता हे की हम उसे टाइमपे कीराया देदे..

देवायत : (हसते) छोडीये बुआ उसे.. जब उनको जरुरत पडेगी तब वो लेजायेगा.. तबतक आप रखीये.. हें..हें..हें..

तभी चंदा सब सारीया कपडे ओर ज्वेलेरी लेकर आगइ.. फीर मंजु ओर भुमीकाको दीखाने लगी.. तो दुसरी ओर पुनम लता नीलम सब खाना कीचनसे बहार लाने लगी.. तभी दो महेंगी सारीया नीकालके चंदाने भुमीका ओर सृतीके लीये देदी जो चंदा उनके लीये लाइ थी.. तो भुमीका मना करने लगी.. तब मंजुने जबरदस्तीसे उसे देदीया.. फीर सभी अ‍ेक साथ भारतीय बेठकमे खाना खाने बेठ गये..

सभी बाते करते ओर अ‍ेक दुसरोकी मस्तीया करते खाना खाते रहे.. तब सृती बार बार सरमाती हुइ देवायतको चोर नजरोसे देखती रही.. ओर मंजुके सामने देखते हसती रही.. तो लखन लताभी साथमे बैठकर खाना खाते अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया कर रहेथे.. तो दुसरी ओर धिरेनभी पुनमके साथ बेठकर खाना खा रहाथा तब नीलमभी धिरेनके साथ दुसरी साइड बैठ गइथी.. ओर धिरेनकी ओर देखकर सरमाते मुस्कराती रही..

तभी सबकी नजर बचाते धिरेन नीलमकी जांघोपे हाथ रखकर उनको छु लेता हे.. तब नीलम बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर गभराते सबकी ओर देखने लगी.. जब कीसीका ध्यान उनकी ओर नही था.. तब वो सरमाकर मुस्कराने लगती.. ओर धिरनका हाथ हटानेकी कोसीस करने लगी.. उनको धिरेनका अ‍ैसे छुपकेसे छुना बहुतही अच्छा लगने लगा.. फीरतो वोभी सामनेसे धिरेनको छुनेका पुरा मौका देने लगी..

ओर सबने बाते करते भोजन फीनीस कीया.. फीर सब सोफेपे बेठ गये तब सृती लता चंदा पुनम सबने मीलकर सब काम नीपटा लीया.. ओर सबके साथ आकर बेठ गइ.. तब मंजुने सभी सारीओमेसे अ‍ेक महंगी सारी नीकालकर सृतीके हातोमे देदी तो सृती सरमाते सारी लेनेको मना करने लगी.. तो भुमीकाने हसते हुअ‍े उनको सारी लेनेको हां केहदीया तब मंजुने उसे धीरेसे कानमे सगुनकी सारी हे.. कहा तो सृतीने सरमाते हसते हुअ‍े सारीको लेलीया.. तब चंदा पुनम लता सब आस्चर्यसे दोनोही ओर देखते रहे..

फीर थोडी देर सब साथमे बैठकर बाते करके रहे.. इसी बीच धिरेन ओर नीलम अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते रहे..र तब चार आंखे उन दोनोकी सभी हरकतोपे नजर जमाये देख रहीथी.. वो थी पुनम ओर लता.. फीर सब नीकलने लगे.. तो सृती नीरास होने लगी.. तब मंजु सब समज गइ ओर उसने सृतीको हग करलीया.. ओर जल्द अपने घर आनेको केह दीया.. तब सृतीके चहेरेपे स्माइल आगइ.. ओर सब भुमीकाके पैर छुकर नीकलने लगे..

देवायतभी भुमीकाके पैर छुनेके लीये जुका तब भुमीकाने फौरन उसे कंधेसे पकडकर खडा करदीया ओर कातील स्माइल करते देवायतको गले लगा लीया.. तब देवायतने सरारतसे भुमीकाको जरा जोरोसे बाहोमे भीज लीया तो भुमीका धीरेसे आउच.. करते मुस्कराने लगी.. ओर देवायतसे अलग होकर हसते हुअ‍े उनके कंधेपे मुका जडदीया तब उसे देखकर सृतीभी सरमाते हसने लगी..

फीर उसनेभी सरमाते हसते हुअ‍े देवायतको हाथ हीलाकर बाय कहा.. आज देवायतको वो अपना जीजाजी नही अपना होनेवाला पतीके रुपमे देख रहीथी.. आज पहेली बार देवायतके जानेसे वो नीरास लग रहीथी.. ओर ये बात भुमीकाभी नोटीस कर रहीथी.. ओर सभी कारमे बेठकर अपने गांवकी ओर नीकल पडे.. तब आज मंजुने चंदाको आगे देवायतके साथ बीठा दीया.. तो चंदा खुब सरमाइ..

तब बीच रास्तेमे सब मस्तीया करते जा रहेथे.. आज चंदा देवायतकी बगल वाली सीटमे बैठी हुइथी.. ओर बार बार देवायतकी ओर देखते सरमाते हस रहीथी.. तो देवायतभी उनकी ओर देखते कुछ कामुक इसारा कर देताथा.. तब चंदा खुुब सर्मसार होकर हसने लगती थी.. तो लखन ओर लता अ‍ैक साथ बेठे थे तो सामनेकी सीटमे आज धिरेन ओर नीलम अ‍ेक साथ लखन लताके सामने बेठे थे..

ओर रास्तेमे अंधेरेका फायदा उठाते अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करने लगे.. अंधेरीकी वजहसे कीसीको कुछभी दीखाइ नही देताथा.. ओर आज धिरेन उसी बातका पुरा फायदा उठाना चाहता था.. तब पुमन ओर मंजु विजयको लेकर बीचकी सीटमे बेठीथी.. ओर कार अंधेरेमे सडकपे दोड रहीथी.. तब मौका देखतेही लखन ओर लता अ‍ेक दुसरेके साथ छेडखानी करने लगे.. ओर लखनने अ‍ेक हाथ लताके गलेमे डाल दीया..

ओर लताको अपनी ओर खीचकर पासमे सटालीया.. तब लता खुब सरमाइ ओर हसती रही.. तभी उनको अपने बुब्सपे लखनका दुसरा हाथ महेसुस हुआ ओर वो सरसे पांव तक हील गइ.. ओर मुह घुमाते लखनके कंधेपे सर रख दीया.. उनकी चुत हरकतमे आगइ उनके दोनो होठ फडफडाने लगे.. पीछे कीसी कारकी रोसनी पडतेही नीलमकी नजर उन दोनोकी हरकतोपे चली गइ.. जीसे देखकर नीलम सममाते हसती रही..

तभी नीलमको अपने पेरपे कीसीका पैर महेसुस हुआ जो उनके पैरको सहेला रहाथा.. तब वो देखते समज गइ की ये धिरेन जीजुकी सरारत हे.. ओर वो सर्मसार होते अपने पैर दुर करने लगी.. ओर सबकी नजर बचाते वो इसारोसे धिरेनको हसते हुअ‍े मना करने लगी.. जब नीलमने हसते हुअ‍े सबकी नजर बचाते धिरेनका हाथ दबाकर इसारोसे मना कीया तो धिरेन समज गयाकी अब आगे बढनेका रास्ता क्लीयर हे..

ओर उसने धीरेसे नीलमकी जांगोपे अपना हाथ रख दीया.. ओर धीरे धीरे सहेलाने लगा.. तब नीलम अ‍ेकदम सर्मसार होने लगी.. उनको कुछ समजमे नही आ रहाथा की वो क्या करे.. उनकी जींदगीमे आज पहेली बारथा जो कीसी अंधेरेमे कोइ लडका उनको इस तराह छेड रहाथा.. धिरेनकी ये हरकत उनको बहुतही रोमांचीत करने लगी.. ओर वो सबसे छुपकेसे धिरेनका हाथ पकड लेती हे.. ओर सरमाते मुस्कराते हुअ‍े अपनी जागसे धिरेनका हाथ हटानेकी नाकाम कोसीस करने लगी..

नीलम : (धीरेसे हसते) जीजु प्लीज.. रहेने दीजीयेनां यहा नही.. कोइ देख लेगा.. आप बहुत सरारती हे..

धिरेन : (जांग सहेलाते धीरेसे उनके कानमे) कोइ नही देखेगा.. यहा बहुत अंधेरा हे.. नीलु तुम मुजे बहुत अच्छी लगती हो.. तुम वाकइ बहुतही सुंदर हो.. आइ लव यु.. मेने तुजे चीठीमे मेरा फोन नंबर दीया हे मुजे कल अकेलेमे फोन करना..

नीलम : (हसते धीरेसे कानमे) जीजु सरम करो.. अगर पुनमदीदीको पता चल गयातो आपको मार डालेगी.. हें..हें..हें.. में आपकी साली हु.. अपनी सालीपे ही लाइन मार रहे हो.. कीसीको पता चल गया तो..?

धिरेन : (धीरेसे कानमें) अरे कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. नीलु.. अभी यहा नही तु मुजे कल फोन करना मे घरपे अकेला ही हु.. तुजे सबकुछ बताउगा.. ओर वैसे सालीभी तो आधी घरवाली होती हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (हसते धीरेसे कानमें) भुल जाओ जीजु मे कोइ फोन बोन करने वाली नही हु.. मुजे मार नही खानी.. हें..हें..हें.. मे आपकी साली हु घरवाली नही.. पुनमदीदीको कहेना वो आपकी घरवाली हे.. वो आपको फोन करेगी.. हें..हें..हें..

धिरेन : (धीरेसे कानमे) प्लीज नीलु.. बस अ‍ेब बार मुजे फोन करना.. फीर मे तुजे कुछ बताउगा.. अगर तुमने मुजे फोन नही कीयातो तुजे मेरी कसम.. बस तुम अ‍ेक बार मेरी बात सुनलेना.. फीर खुद डीसाइड करना में तुजेही पुरी घरवाली बनाना चाहता हुं..

नीलम : (जुठा गुसा करते धीरेसे) जीजु.. मुजे नही बनना पुरी घरवाली.. कुछतो सरम करो.. अभी आपकी सादीभी नही हुइ ओर आप अ‍ैसी बाते कर रहे हो.. ओर आपने कसम क्यु दी..? मे कोइ फोन बोन नही करुगी.. पुनमदीदीको देखा हे..? वो क्या सोचेगी..? आप अपनी हरकतोसे बाज आओ.. वरना आपको में खुब पीटुगी.. हें..हें..हें..

धिरेन : (धीरेसे कानमे) ठीक हे.. अगर तु मुजे चाहती होगी तो मुजे जरुर फोन करोगी.. वरना मे समज जाउगा.. तु भी.. सबकी तराह.. जा मुजे तुमसे बात नही करनी.. मुजे बत बुलाना.. तुम सब लडकीया अ‍ेक जैसीही हो..

नीलम : (हसते धीरेसे कानमें) अरे आपतो नाराज होगये.. हें..हें..हें.. कोइ बात नही मे फोन करुगी.. लेकीन मेरे पास फोन नही हे.. मे लतादीदी या मेरी मम्मीके फोनसे फोन करुगी.. बस..? अब खुस..?

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धिरेन : (उनके गलेमे हाथ डालकर उसे अपनी ओर खीचते साथमे सटाकर) हां अब खुस.. ये हुइना बात.. नीलु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. क्या तुम मुजे आइ लव यु नही कहेगी..?

नीलम : (धीरेसे कानमे) जीजु.. प्लीज.. छोडीये मुजे.. मुजे बहुत सरम आ रही हे.. यहा नही.. सब बैठे हे.. हम अकेलेमे फोनपे बात करेगेनां.. अगर लतादीदीने देखलीया तो मेरी खैर नही छोडीये प्लीज..

दोनो अपनी मस्तीमे बीजी थे तब उनको पताही नही थाकी सामने बेठे लखन ओर लता अंधेरेका फायदा उठाते क्या क्या कर रहेथे.. दोनोही सबको भुलके अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमते अ‍ेक दुसरेके गुप्त पार्टके साथ खेल रहेथे.. ओर खेलते खेलते गरम हो गयेथे.. तब लखन लताकी चुतमे उंगली डालके हीला रहाथा तो लताभी देवायतके पेन्टके उभारको बार बार देखते कबसे कामातुर होगइ थी..

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ओर वो लखनके पेन्टके अंदर हाथ डालकर लखनका लंड अपनी मुठीमे पकड लेती हे.. ओर होले होले सहेलाने लगी.. दोनोही वासनाकी आगमे जलने लगे.. अगर दोनो अभी अकेले होतेतो लता पका इस वक्त लखनका लंड अपनी चुतमे लेकर उनसे चुदवाने लगती.. वो लखनका लंड कइ बार अपनी चुतमे ले चुकीथी.. ओर इसीलीये आज वो बीन्दास अ‍ेब बीवीकी हेसीयतसे लखनके साथ प्यार कर रही थी..

वो देवायतका लंड कइ बार उनकी मां सरलाकी चुदाइ करते वक्त देख चुकीथी.. ओर अपने रुमसे अक्सर अपने भाइको अपनी भाभी भावनाको चोदते हुअ‍े दखती रहेती थी.. जो लखनके ओर भानुके लंडको देवायतके लंडसे कंपैर करते उसे देवायतका लंड काफी बडा लग रहाथा.. लेकीन उसने बडी मुस्कीलसे अपने आपको कंट्रोल कीया था.. जबसे उनकी लखनके साथ सगाइ हुइ.. तबसे वो सीर्फ लखनके ही सपने देख रही थी..

ओर वो देवायतके लंडको इमेजींग करते लखनके लंडको अपनी मुठीमे पकडकर हीला रहीथी.. तो लखनभी लताकी चुतमे उंगली डालकर उसे अंदर बहार कर रहाथा.. ओर अ‍ेक हाथसे लताके बुब्सके साथ खेल रहाथा.. दोनोही कामातुर होते सबकुछ भुलकर अ‍ेक दुसरेके साथ प्यारका खेल खेल रहेथे.. तभी धिरेनकी नजर लखन ओर लताकी ओर चली गइ तब रातके अंधेरेमे हल्की रासनीमे लखन ओर लताकी हरकत देखकर वोभी गरम होने लगा.. ओर उसने तबही कुछ सोच लीया..

ओर वो नीलमको कानमे उसे लखन लताकी हरकतको देखनेके लीये कहेता हे.. तब नीलमका ध्यानभी लता लखनकी ओर गया.. ओर वो दोनोकी हरकत देखकर समरसे पानी पानी होगइ.. फीरा धिरेनसे दुसरी ओर मुह घुमाते मुस्कराने लगी.. नीलम लखन लताकी हरकत देखकर उतेजीत होने लगी.. तभी उनके छोटे संतरे जैसे बुब्सपे धिरेनका हाथ महेसुस हुआ जो उनको दबाते मसल रहाथा.. तब नीलमको बडा जटका लगा.. ओर वो सरसे पांवतक कांपने लगी..

वो जटसे आजु बाजु नजर घुकाते देखते गभरा गइ.. फीर नीलम अ‍ेकदम सर्मसार होगइ ओर वो समज गइकी ये धिरेनकी करतुत हे.. ओर वो गभराकर धिरेनके हाथको पकडते उसे हटाने लगी.. ओर धिरेनकी ओर गुसेसे देखकर बडी आंख करते उसे इसारोसे मना करने लगी.. तब अचानक धिरेनने उनके गलेमे हाथ डालकर नीलमके चहेरेको अपने मुहकी ओर खीचलीया ओर अपने चहेरेकी ओर जुका लीया..

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नीलम कुछ समज पाती इनसे पहेलेही अचानकही धिरेन नीलमके होठोपे होठ रखते चुमने लगता हे.. ओर दुसरे हाथोसे नीलमके बुब्स दबाते उसे मसलने लगता हे.. तो नीलमभी अपना सब होंस खोबेठी ओर धिरेनका साथ देने लगी.. तभी उनको अचानक याद आयाकी सामने लखन लताभी बैठे हे.. ओर वो डर गइ.. निलम धिरेनकी ओरसे हुअ‍े अचानक इस हमलेसे गभरा गइ.. अ‍ेकदम सर्मसार होकर जटसे धिरेनसे दुर हट गइ.. उनको कुछ समजमे नही आयाकी वो क्या करे..

लेकीन धिरेन उनको अपनी ओर खीचकर बार बार छेडता रहा.. तब नीलमभी आज पहेली बार काफी गरम होगइ.. धिरेन कभी उनके होंठ चुमलेता तो कभी नीलमके गलेको चुम लेता.. तो कभी उनके छोटे संतरे जैसे बुब्सको दबाकर सहेलाने लगता तो कभी उननकी जांगोको सहेलाता.. ओर हदतो तब होगइ धिरेनने अ‍ेक दो बार निलमका हाथ पकडके उनके पेन्टके उपरसेही लंडपे रख देताथा.. तब नीलम गभराते अपना हाथ वापस खीचलेती थी.. ओर लखनने इस छेडखानीके बीच दो बार नीलमकी चुतको भी दबोच लीया..

तब नीलम सरसे पांव तक हील गइ.. वो धिरेनकी इस हरकतकी वजहसे बहुतही सरमाइ.. फीर वोभी कामातुर होगइ.. ओर धिरेनकी इस हरकतका विरोध करना सेस मात्र रेह गया.. अब इस खेलमे नीलमको धीरे धीरे मजा आने लगा.. ओर वो गरम होने लगी.. आज पहेली बार उनकी चुतमे हलचल तेज होगइ.. ओर वो कामातुर होने लगी.. उनकी चुतसे आज पानीका रीसाव होने लगा ओर चुत गीली होगइ.. आज पहेली बार कोइ लडका उनको इस तरीकेसे छेड रहाथा..

तब इधर सामनेकी सीटमे लखन ओर लताभी सबकुछ भुलकर कामातुर होकर अ‍ेक दुसरेके साथ प्यार कर रहेथे.. तभी कुछ ही क्षणमे लता ओर लखन दोनोने अपना अपना पानी छोड दीया.. दोनोही जड गये तब लताका हाथ लखके वीर्यसे भीग गया.. तब वो खुब सरमाइ.. तभी लखनने अपना रुमाल नीकालके उसे दीया.. तब वो अपना हाथ पोछते खुब सरमाइ ओर मुस्कराते रुमाल अपनी चुतपे रखकर पेन्टीको सही करते अपने कपडे सही करने लगी..

कपडे सही करते उनको होस आयाकी यहा सभी लोग साथमे हे ओर सामने धिरेन ओर नीलम बैठे हे.. ओर वो थोडा गभराते अंधेरेमे नीलमकी ओर देखनेकी कोसीस करने लगी की कही नीलमनेतो उसे देखतो नही लीया.. तब वो चोंक गइ.. क्युकी अंधेरेमेभी हल्की रोसनीमे धिरेन नीलमके गलेमे हाथ डालके उसे अपने साथ सटाकर उनके साथ छेडखानी कर रहाथा.. छेडखानी करते धिरेन नीलमके होंठ चुमलेता फीर उनका मुह नीलमके कानके पास लेजाता ओर उनको कानमे कुछ हसते हुअ‍े केह रहाथा.. तब नीलम हसते हुअ‍े बुरी तराह सरमा जाती..

फीर नीलम हसते हुअ‍े उसे मना करते उनसे छुटनेकी कोसीस कर रहीथी.. वो नीलम ओर धिरेनकी सब हरकते देखने लगी.. अभीभी धिरेन कभी नीलमके बुब्स सहेलाता तो कभी नीलमके होंठ चुमलेता तब नीलमभी हस हसके धिरेनका साथ दे रहीथी.. तो लताको नीलमकी ओर धिरेनकी हरकते देखकर धिरेनपे ओर नीलमपे बहुत गुसा आने लगा.. क्युकी नीलम अभी इन सब चीजोके लीये बहुतही छोटी थी.. उसने लखनको कहा..

लता : (धीरेसे कानमे) लखन सामने देखो.. मुजे धिरेनकी नीयत कुछ अच्छी नही लगती.. नीलु अभी छोटी बच्ची हे.. धिरेन कीतना कमीना हे.. ठरकी कहीका.. इस छोटी बच्चीकोही फसालीया.. उनकी हरकत देखो.. मुजे उनसे बात करनी पडेगी..

लखन : (धिरेन नीलमकी ओर देअते धीरेसे कानमे) अरे हां.. येतो बडा कमीना लगता हे.. तुम नीलुको समजा देना उनसे दुर रहे.. अब इसेभी तो हम कुछ केह नही सकते.. पता नही भाइने इनके साथ क्या सोचकर पुनोकी सगाइ करदी.. कमीना.. बडाही ठरकी लगता हे..

लखनको आज धिरेनपे गुसा आने लगा.. लेकीन उनकी वजह ये नहीथीकी धिरेन उनकी साली नीलमको सेट करके उनसे प्यार कर रहाथा.. उनको बस इस बातपे धिरेनपे गुसा आरहाथा की उनसे पहेले धिरेनने उनकी सालीपे हाथ मार लीयाथा.. ओर इस बारेमे नीलमको खुद बात करते उसे ब्लेकमेइल करते कैसे उनके नीचे लीटाये इस बारेमे सोचने लगा.. ओर आज वो पहेली बार नीलमको वासनाभरी नजरोसे देखने लगा.. ओर उनका लंड फीरसे जटके मारने लगा.. तभी..

लता : (धीरेसे कानमे) लखन.. तुम अभी इस बारेमे कीसीको कुछ मत कहेना.. मे नीलुको समजा दुगी..

लखन : (धीरेसे) ठीक हे.. लता तुम आजही नीलुसे इस बारेमे बात करलेना.. ओर सबके सोनेके बाद मेरे रुममे उपर आजाना.. हम दोनो खुब मजे करेगे..

लता : (धीरेसे) पागल होगये हो क्या..? अभी अभीतो कीया हे.. आज नीलु भी मेरे साथ होगी.. अब अ‍ेक हप्तेकीतो बात हे.. अ‍ेक हप्ते तक सबर नही कर सकते..? ना बाबा ना.. मे नही आउगी.. कीसीको पता चल गया तो..? हमारी बहुत फजीहत होजायेगी.. बाबु थोडा सबर करलो.. फीरतो मे तुम्हारी ही हु.. जब चाहो जैसे चाहो मुजसे प्यार करलेना..

लखन : (हसते) अरे कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. आजतो भाइकी सुहागरात होगी.. तो दोनो भाभीयातो वही होगी.. ओर पुनोदीदीभी अपने कमरेमे सोयेगी.. सायद आज मंजु भाभीभी उनके साथ सोयेगी.. तो तुजे ओर नीलमकोभी ये लोग नीचे ही सुलायेगे.. जब नीलम सोजाये तब उपर मेरे कमरेमे आजाना.. वरना मे वहा आजाउगा..

लता : (धीरेसे कानमे) लखन पागल मत बनो.. प्लीज.. अभी तो कीया हे.., क्या तुम अ‍ेक हप्ता इन्तजार नही कर सकते..? बाबा कोइ देख लेगातो मेरी फजीहत होजायेगी.. मुजेतो बहुत डर लग रहा हे.. नीलुभीतो साथ होगी.. कमीनी इनको साथ ना लाइ होती तो अच्छा था.. कमसे कम इस कमीनेसेतो बच जाती.. मुजे नीलुको उनसे दुर करना होगा.. वरना हमारी इजत मीटीमे मीला देगी ये लडकी..

लखन : (हसते धीरेसे) चल पहेले देखते हे.. कोन कहा सोता हे.. हम बादमे देखते हे.. लेकीन तुम आजही नीलुको समजा देना.. वरना मुजसे कहेना हम दोनो नीलुको समजायेगे..

लता : (हसते गाल चुमते धीरेसे) अरे मेरा बाबु.. मान गया.. हें..हें..हें.. जानु मे भी आपकी तराह तडप रही हु.. लेकीन सादी तक इन्तजार करलो.. इन्तजारके बाद मीलनका कुछ ओर ही मजा हे.. हें..हें..हें.. जानु आप धिरेनके साथ बैठो मे नीलमको इधर बुला लेती हु वरना वो कमीना उसे खराब करदेगा.. ओर पहेले मेही नीलुसे बात करलुगी.. वरना दखती हु.. हम दोनो उसे समजायेगे.. अभी ठहेरो.. ओर तभी..

लता : नीलु जरा इधर आना.. मुजे तुमसे कुछ बात करनी हे..

नीलम : (अ‍ेकदम गभराते) जी.. जी दीदी अभी आइ..

तब नीलम गभराकर जटसे धिरेनसे दुर होगइ.. फीर धीरेसे अपने कपडे सही करते लताके पास जाकर बैठने लगी तो लखनभी खडा होते धिरेनके साथ बैठ गया.. तब धिरेन अपने आपको सही करते काफी नीरास होगया.. ओर वो फीकी मुस्कानके साथ लखनकी ओर देखते हसने लगा.. तो लखन भी धिरेनकी ओर देखते कातील स्माइल करने लगा....

कन्टीन्यु
 
my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ९६

तब नीलम गभराकर जटसे धिरेनसे दुर होगइ.. फीर धीरेसे अपने कपडे सही करते लताके पास जाकर बैठने लगी तो लखनभी खडा होते धिरेनके साथ बैठ गया.. तब धिरेन अपने आपको सही करते काफी नीरास होगया.. ओर वो फीकी मुस्कानके साथ लखनकी ओर देखते हसने लगा.. तो लखन भी धिरेनकी ओर देखते कातील स्माइल करने लगा....अब आगे

तभी आगेकी ओर चंदाभी आज देवायतके साथ मस्ती करनेके मुडमे थी.. वो बार बार देवायतकी ओर देखते कामुक इसारा करते देवायतको छेड रहीथी.. कभी देवायतकी जागोको सहेलाती तो कभी उनके सामने देखकर आंख मार देती ओर हसने लगती.. तब देवायतभी उनकी ये सब हरकतोसे बहुत गरम हो गया था.. ओर चंदा यही तो चाहतीथी की देवायत आज बहुतही कामुक होकर सुहागरातमे उनकी जमकर चोदाइ करले..

जबसे सादी हुइ ओर दोनो मार्केटमे खरीदी करने गये.. तबसे चंदा बीनदास्त देवायतके साथ पत्नी जैसा व्यवहार करने लगीथी.. अब उनको देवायतसे बात करनेमे कीसीकी सरम नही रही.. वो देवायतके साथ हस हसके बाते कर रहीथी.. जब दोनो चलते तबभी वो देवायतका हाथ पकडकर उनके सटकर चलती थी.. ओर पत्नी होनेका हक जताते वो देवायतसे हसी मजाक भी करती रही.. जैसे वो अपने बेटे धिरेनको जता रही हो की देखो अब मे उनकी बीवी होगइ हु.. अब उसे धिरेनकाभी डर नही था..

इसी व्यवहारको देखते धिरेनभी आज देवायतसे काफी जलन महेसुस कर रहाथा.. जो उनकी मां जैसा व्यावहार देवायतकी बहेन पुनम उनके साथ नही कर रहीथी.. जबसे पुनमको पहेली बार देखा तबसेही वो पुनमके पीछे पागल था.. ओर उनको चोदनेकी फीराकमे था.. वो समजता था की पुनम सहेरमे पढी लीखी हे इसीलीये सादीसे पहेले उसे सेक्स करने देगी.. लेकीन पुनमने उसे कीस से ज्यादा आगे बढने नही दीया..

क्युकी उनको क्या पताकी उनकी हमसफर पुनम अपने भाइ देवायतकी अमानत होगइ हे.. ओर देवायतके साथ सादी करके सुहागरात मानाकर उनके साथ कइ राते रंगीन करचुकी हे.. ओर नतीजेके फल स्वरुप उनका बच्चाभी अपने पेटमे पाल रही हे.. ओर पुनमका मक्सदभी तो अपने भाइके बच्चेको पैदा करना था.. जबसे जवानीके दहेलीजपे कदम रखा तबसेही पुनम अपने भाइको मनसे पतीके रुपमे अपना चुकी थी..

पुनमभी आज अपनी सासके देवायतके साथ व्यवहारसे बहुतही जलने लगी थी.. तब बीचमे मंजु अपने उरोजको बार नीकालकर विजयको दुध पीला रहीथी तो पुनम मंजुके उरोज देखते उनके सामने देखकर मुस्करा रही थी.. तो मंजुभी पुनमकी मनोदसा भलीभांती जान चुकीथी.. ओर वो पुनमके सामने देखकर नैन नचाते मुस्कराने लगी.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके नजदीक मुह लाते धीरेसे बाते करने लगी..

पुनम : (धीरेसे) भाभी.. मुजे आपसे कुछ बात करनी हे.. आज मुजे कुछ अजीबसा लग रहा हे.. मेने सृती दीदीको कहा तो बोलीकी मे वहा आउगी तब तुजे चेक कर लुगी.. उसने कहाहे अभी मंजुके पास जो टेबलेट हे उसे ले लेना.. क्या आपके पास कोइ टेबलेट हे..? मुजे घर जातेही देना..

मंजुला : (मुस्कुराते) पुनो तु घर चल.. आज मे तेरे साथ सोउगी.. तब लेकर आउगी तु खा लेना.. क्या बैचेनी लगती हेनां..? ओर कोइ बोलेतो भी अच्छा नही लगता.. क्या अ‍ैसा कुछ होता हे..?

पुनम : (धीरेसे) हां भाभी.. बस अ‍ैसाही लगता हे.. जबसे बाबाको मीलकर आये तबसे कही चेइन ही नही मीलता.. ओर उपरसे वो धिरेन.. अब आपसे मे क्या कहु.. वोभी मेरे पीछे पडा हे.. आप समज गइनां..?

मंजुला : (हसते धीरेसे) क्यु..? अभीसे हींमत हार गइ..? जो चीजसे तु भाग रहीहे वो चीजसे तुजे अ‍ेक दीनतो फेस करनाही पडेगा.. पुनो तुजेतो आगे बहुत कुछ देखना हे.. आज मे तुजे सबकुछ बता दुगी.. जो मे जानती हु.. तु जानती हे वोभी ओर तु जो नही जानती वोभी.. ताकी तुजे बार बार अ‍ैसी सीचुअ‍ेशन देखके तकलीफ ना हो.. तुजेतो आगे जाके बहुत कुछ देखना हे ओर सम्हालना हे.. तब तुजे ओर सृतीकोही सब देखना पडेगा..

पुनम : (धीरेसे) भाभी क्या आपको पता हे.. मे क्या कहेना चाहती हु..? आपतो सब जानती हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे कानमे)) पुनो.. देख अब तु चीन्ता मत कर.. तु जो चाहतीथी वो सबतो होगया हे.. तेरे भाइका बच्चा तेरे पेटमे पल रहा हे.. तो अब धिरेनके साथ तुजे सेक्स करनेमे क्या प्रोबलेम..? ओर अबतो वैसेभी ये सब सादीके बादही होने वाला हे.. अब टाइमही कीतना बचा हे..?

पुनम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) भाभी.. वो सबतो ठीक हे.. लेकीन मे कुछ ओरही बात केह रही हु.. मुजे अब मेरी चीन्ता नही हे.. आपभी मीररसे पीछे देखो.. वहा सब क्या चल रहा हे..

मंजुला : (हसते धीरेसे) हां पुनो.. तु धिरेन ओर नीलमके बारेमे जानकर चींता करती हेनां..? तुम मुजसे उनके बारेमे बात करना चाहती हेनां..? तो सुन.. अभीसे दोनोके बीच प्यारका बीज बो चुका हे.. फीरभी तुजे उनसे सादी करनी हे.. ताकी तु तेरे भाइके साथ आरामसे रेह सके..

बाकी वो नीलमकी जींदगीसे खीलवाड करके ही रहेगा.. तब तुजे ही सब सम्हालना हे.. पता नही इस मासुमकी जींदगीसे क्यु खेल रहा हे.. सायद सब तेरी वजहसे.. क्युकी तुमने उसे अभी तक सेक्स करने नही दियानां.. तो वो सेक्सके लीये पागल होगया हे..

पुनम : (सरर्मसार होते धीरेसे) हां भाभी.. आपने सही कहा.. इनमेभी सायद वोही रीजन लगता हे.. वो मेरे साथ सेक्स करना चाहता हे.. लेकीन मेने सादी तक उसे मना करदीया हे.. सायद इसीलीये वो अभी नीलमके पीछे पडे हे.. ओर आप जानती हे.. मे अभी कोइ रीस्क लेना नही चाहती थी.. क्युकी रीजन आपको पता हे..

मंजुला : (धीरेसे पुनमको समजाते) पुनो.. अब तुजे इन सब चीजोकी आदत डालनी पडेगी.. आगे अ‍ैसा बहुत कुछ होने वाला हे.. तुजे अ‍ैसे बहुत कुछ रीस्ते दिखनेको मीलेगे.. जो तुम सोचभी नही सकती.. तु कीस कीसका ध्यान रखेगी..? देखती नही हमारा लखनभी कुछ कम नही हे..

अब आगे जाकरतो वोभी नीलमके साथ रीलेशनमे होगा.. पुनो.. सब रीस्ते नातेही खतम होजायेगे.. जो जीसकी मरजीमे आये उनके साथ सेक्स करेगे.. तो तुम कीसका ध्यान रखोगी..? ओर यही सबतो होने ही वाला हे.. बस हमे हमारी जींदगी हमारे तरीकेसे जीनी हे.. मे तुजे आज अ‍ेक बहुत बडी जीम्वेवारी सोंपने वाली हु.. तु बस उसे मत भुलना..

पुनम : (धीरेसे हसते) भाभी.. आप सबके बारेमे जानती हे.. फीरभी सांत होकर हसती रहेती हे जैसे आपको कुछ पताही नही हो.. हें..हें..हें.. मेभी आपहीकी तराह स्ट्रंोग बननेकी कोसीस करुगी.. क्या आप मुजे अभी इस बारेमे कुछ बता सकती हो..?

मंजुला : (मुस्कुराते) नही पुनो.. हम इस बारेमे रातमे आरामसे बात करेगे.. आज हमारे पास अच्छा मौका हे.. आज हम दोनोके पास वक्त ही वक्त हे.. मुजे तुमसे बहुत कुछ बताना हे.. तु सीर्फ यही मत मानना की जो लडकीकी सादी जीनके साथ होगी वो उनकीही बीवी बनकर रहेगी.. हम कुछभी नही केह सकते की कीसका कीसीसे कब रीलेशन चेन्ज होजाये.. ओर आज गांवमेभी अ‍ैसा बहुत कुछ होगा.. बस मे अभी सीर्फ इतनाही बता सकती हु..

पुनम : (आस्चर्यसे) हमारे गांवमें..? भाभी आपतो सब जानती हो बताओना क्या होने वाला हे..

मंजुला : पुनो.. बस.. अभी सीर्फ इतना जानले.. आज गांवमे सब रीस्ते उजागर होने वाले हे.. तुजे पताही नही हे की हमारे गांवमे अ‍ैसे कीतने नाजायज रीस्ते पल रहे हे.. बस आज रात तक इन्तजार करले.. ओर कुछ नही.. गांवमे सीर्फ तुमही नहीहो.. जो अपने भाइके साथ रीलेशनमे हो..

हमारे गांवमेभी कइ अ‍ैसे भाइ बहेन हे.. जो सबसे छुपकेसे अपनी जींदगी अ‍ेक पती पत्नीकी तराह जी रहे हे.. आज हमारे गांवमे हमारे स्वामी स्वयंम अपनी मौजुदीका अहेसास करवायेगे.. जीनकी वजहसे पुरे गांवमे वासनाका तांडव मचेगा.. तब कुछही दिनोके बाद अ‍ेक अ‍ेक करके बहुत सारे रीस्ते उजागर होने लगेगे..

पुनम : (आस्चर्यसे धीरेसे) भाभी.. क्या बात कर रही हो..? हमारे गांवमे भी..? ओर वोभी भाइ बहेनके बीच नाजायज रीस्ते..?

मंजुला : (धीरेसे हसते कानमें) हां पुनो.. तुम गांवमे अ‍ैसे कइ नाजायज रीस्तेको देखोगी.. सीर्फ भाइ बहेनके बीच नही.. अ‍ैसे कइ रीस्ते पनप रहे हे जीनके बारेमे हम सोचभी नही सकते.. बस कुछ दिनो इन्तजार करले.. वो सब रीस्ते खुदबखुद हमारे सामने आजायेगे..

दोनो धीमी आवाजमे बाते कर रहीथी.. तब पीछे धिरेन नीलमके लताके पास जानेसे थोडा गुसे ओर नीरास होगया था.. वो बार बार चोर नजरसे नीलमकी ओर देखता रहा.. तो नीलमभी धीरेनकी ओर पुरी ढल चुकीथी.. तो वो भी नीरास होते बार बार धिरेनकी ओर देखने लगी.. तभी अचानक धिरेनका गांव आगया.. तो धिरेनने कारको रोकनेके लीये कहा.. तब सबने उसे साथमे चलनेको कहा..

लेकीन कल धिरेनको जोबमे जानाथा.. ओर उपरसे नीलमके साथ छेडखानी करते बहुत गरम हो गयाथा.. तो वो जल्दसे जल्द अपने आपको हल्का करना चाहताथा.. इसीलीये सबको मना करते उतर गया.. ओर अ‍ेक नजर नीलमपे डालके बीना कुछ बोलेही कारसे उतर गया.. ओर आगे जाकर कारका दरवाजा खोलकर अपनी मम्मीके पैर छुने लगा.. तब लता ओर नीलम उसे देखती ही रही.. तभी..

चंदा : (आंखमे आंसुके साथ आशीर्वाद देते) जीते रहो बेटा.. बस अपना खयाल रखना.. ओर टाइमपे खाते पीते रहेना.. वरना तुम अपनी सादी तक उधरही आजा.. वहीसे जोबपे चले जाना..

धिरेन : नही मोम.. आप मेरी फीकर मत करो.. आप अपना खयाल रखना.. जीलो अपनी जींदगी.. ओर अ‍ैसेही खुस रहो.. आपकी खुसीमे ही मेरी खुसी हे.. ओर बातभी कीतने दिनोकी हे.. सीर्फ तीन चार दिनही तो नीकालने हे.. फीर मेभी उधर आजाउगा..

ओर उसने पुनमकी ओर अ‍ेक नजर डाली.. फीर सबको बाय बोलकर बीना सबके सामने देखे ही अपने घरकी ओर चलने गया.. तो सबको धिरेनके इस बेरुखी व्यवहारसे थोडा अजीब लगा.. लेकीन इस बातको पुनम ओर नीलम अच्छी तराह जान गइथी की धिरेन सीर्फ उनकी वजहसेही नाराज हे..

ओर वो मनही मन दुखी होने लगी.. तभी नीलमने मनमे धिरेनसे फोनपे बात करनेकी ठानली.. ओर यही उनकी सबसे बडी भुल साबीत होगी.. आज अ‍ेक बार फीर धिरेनका के.अ‍ेल.पी.डी. होगया था.. तब वो नीरास होकर घरमे चला गया..

ओर सीधा बाथरुममे घुसकर नीलमके साथ की हुइ छेडखानीको याद करते उनको इमेजींग करते अपना लंड नीकालकर जोरोसे हीलाने लगा.. तब कुछ ही देरमे अ‍ेक तेज सफेद धारकी पीचकारी छुटकर सामनेकी दीवालपे चीपकने लगी.. ओर धिरेन सांत मनसे वही लंड पकडकर खडा रहेते नीलमके बारेमे सोचने लगा.. उनको यकीन थाकी कल जरुर नीलमका फोन आयेगा.. क्युकी नीलमभी उनको प्यार करने लगी थी.. तब दुसरी ओर धिरेनके जातेही देवायतने कार अपने गांवकी ओर जाने दी..

तब नीलम बहुतही नीरास होगइ.. ओर धिरेनकी नाराजगी देखकर मनही मन अपने आपको कोसने लगी.. तब २० २५ मीनीटकी ड्राइवके बाद सब हेलीपे पहोंच गये.. सभी लोग कारसे सामान लेकर उतरने लगे.. तब पुनमने उतरकर बच्चेको अपने हाथमे लेलीया तब मंजुभी उतर गइ.. ओर सब घरमे आगये.. तभी दया ओर रजीयाभी सबको पानी देने लगी.. ओर सभी होलमे आकर सोफेपे बेठ गये..

तब रजया लखनको पानी देते उनके सामने देखकर कातीलाना मुस्कराने लगी.. तो लखननेभी हसते हुअ‍े पानी लेलीया.. तब उनको दो आंखे देख रहीथी.. जो उनपे कबसे नजर रख रहीथी.. वो थी पुनम.. आज पुनमकोभी लखन ओर धिरेनमे कुछ ज्यादा फर्क नजर नही लगा.. वो अब अ‍ैसे रीस्तोको बहुतही हल्केमे लेना चाहती थी.. आज उनकी मंजुके साथ इस बारेमे बहुत कुछ बाते हो चुकीथी.. तभी..

दया : (मंजुको) दीदी क्या सब खाना खाकर आये हे..? यहा आपने जोभी कहाथा सब कंपलीट हे..

मंजुला : (हसते) हां दया.. हम सभी खाकर आये हे क्या तुम दोनोने खा लीया..?

दया : (हसते) हां दीदी जब आपका फोन आयातो आपनेही कहाथाकी हम सब खाना खाकर आयेगे.. तो मेने ओर रजीयाने भी खा लीया हे.. ओर आपके कहेनेके मुताबीक सब कंपलीट हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) ठीक हे दया.. अगर सब काम होगया हेतो अब तुम दोनोभी जाकर सो जाओ.. हम सभी आज थक गये हे.. तो हमभी सब अभी सोजायेगे.. तु सब दरवाजा अच्छेसे बंध करलेना.. ओर हां.. सायद हम सब कल देरसे उठेंगे.. तो तुम दोनोभी अपना सब काम बादमे आरामसे नीपटालेना..

दया : (हसते जाते हुअ‍े) जी दीदी..

तब दयाके पीछे रजीयाभी लखनकी ओर सरमाते देखते जाने लगी.. तब लखनने सबकी नजर बचाते रजीयाको नामे गरदन हीलाके लताकी ओर इसारा करदीया.. तो रजीयाभी सरमाते हसती हुइ चली गइ.. लखनभी खडा होकर उपर सोनेके लीये जाने लगा.. तभी वो लताकी ओर देखकर कुछ इसारा करता हे तब लता सरमके मारे कुछ बोल नही पाइ.. ओर आंखोके इसारोसे उसने मना करदीया.. तो लखन चला गया तब नीलमने लताके इसारोको नोटीस करलीया.. ओर वो भी सरमाकर मनही मन हसने लगी..

तभी मंजुने पुनमको कुछ इसारा कीया तो पुनमभी खडी होगइ.. ओर चंदाको इसारा करते अपने साथ चलनेको कहा.. तब चंदा सरमके मारे पानीपानी होने लगी ओर वो सरमाते पुनमके पीछे जाने लगी.. तब पुनम चंदाको देवायतके रुममे लेगइ.. तो अंदर जातेही दोनो खुसीके मारे सोक्ट होगइ.. ओर चंदा खुब सरमाने लगी.. क्युकी दया ओर रजीयाने मंजुके फोन आतेही पुरा बेड फुलोसे सजा दीया था.. तभी..

पुनम : (सरारतसे हसते आज पहेली बार) भाभी.. आइअ‍े.. अब मे आपको भाभीही कहुगी.. आजसे आप मेरी बाकायदा भाभी हो.. मम्मी सीर्फ हमारे उस घरमे आओगी तबही कहुगी.. आइअ‍े.. में आपको थोडासा मेकअप करके ठीक करदेती हु.. आप आज भाइको खुस कर देना हें..हें..हें..

चंदा : (सरमसे पानीपानी होते) पुनो.. तुमभीनां.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. तुम वहाभी मुजे भाभी कहके बुला सकती हो.. ओर आज मुजे तेरे मुहसे भाभी सुनकर बहुत अच्छा लगा.. अब तुम मुजे भाभी कहेकर ही बुलाना.. मुजे तेरी सास बनकर नही तेरी भाभी होकर रहेना हे..

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तब पुनम उनके गले लग गइ तब चंदाने जोरोसे पुनमको अपनी बाहोमे भीच लीया ओर पुनमके गालको चुमते उनका सरभी चुमलीया तब पुनम सरमाकर हसती रही.. तभी पुनम चंदाको बाथरुममे लेगइ वहा चंदाको फ्रेस करवाया फीर बहार आकर सीसेके सामने लेगइ ओर चंदाका शींगार करने लगी.. तब चंदा बहुतही सरमाइ ओर मेकअप होतेही चंदा दुल्हनकी तराह दिखने लगी.. पुनम चंदाको बेडकी ओर लेगइ.. फीर चंदाको बेडके बीच घुंघट नीकालके अच्छेसे बीठा दीया तब चंदा खुब सरमाइ.. ओर सरमके मारे पुनमसे नजरे चुराने लगी.. तब..

पुनम : भाभी.. आप बैठो यहा दयाने सब कंपलीट करके रखा हे मे इस दुबको गरम करके लाती हु..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) पुनो वो.. जरा मंजुको इधर बुलादोनां..

पुनम : (दोनो ग्लास उठाते) नही भाभी.. आज मंजु भाभी मेरे साथही सोयेगी.. आज सीर्फ भाइ ओर आप दोनोकोही इधर सोना हे.. भाभी आज आपकी सुहागरात हे.. आप दोनो खुब मजे करना.. हम बगल वाले रुममे ही सोइ हे.. (हसते) देखतेहे आज आप कीतना चीलाती हे.. हें..हें..हें.. बस अब आपभी मुजे अ‍ेक भतीजा या भतीजी दे दीजीये.. हें..हें..हें..

चंदा : (अ‍ेकदम सर्मसार होते हसते) पुनोदीदी.. प्लीज.. मुजे बहुत सरम आ रही हे..

पुनम : (हसते) अरे वाह.. अपनी बहुको दीदी.. हें..हें..हें.. अब ननंदसे क्या सरमाना.. ओर सरमाओगी तो मेरे भाइको प्यार कैसे करोगी.. हें..हें..हें.. आप बैठो मे अभी आइ..

कहेते पुनम चली गइ तब चंदा अ‍ेकदम सर्मसार होगइ ओर मुस्कराने लगी.. आज उनकी बहु.. उनकी नंनद होकर उनसे मस्तीया करके गइथी.. ओर चीलानेकी बात सुनकर उनको देवायतके साथ की हुइ हर चुदाइ याद आने लगी.. तब उनकी चुत हरकतमे आने लगी ओर फडफडाते पानी छोडने लगी.. वो चाहतीथी की देवायत आज उनको जी भरके चोदले.. क्युकी अबतक वो देवायतसे जीतनी बार चुदवातीथी उनके मनमे अ‍ेक डरसा लगा रहेता था.. की कही कीसीको दोनोके रीस्तोके बारेमे पता ना चल जाये..

ओर आज वो बाकायदा देवायतकी पत्नी हो गइथी.. ओर आज वो देवायतसे बीना डरके खुलकर चुदवाने वाली थी.. यही सब सोचते वो घुंघटमे खुब सरमाने लगी.. आज वो पुरा दिन देवायतके साथ मस्तीया कर रहीथी ओर आखीर वो पलभी आगया.. जीस पलके लीये वो पुरे दिन इन्तजार करते मचल रही थी.. ओर वो पल था देवायतका लंड जटसे अपनी चुतमे डलवानेका.. तभी कुछ ही देरमे पुनम दुधका ग्लास रखके जाते धीरेसे चंदाको कहेती गइ..

पुनम : भाभी आप रेडी होकर बैठो मे भैयाको अंदर भेजती हु.. बेस्ट ओफ लक.. हें..हें..हें..

कहके पुनम बहार चली गइ.. तब चंदाके दिलकी धडकर बढने लगी.. आज वो दुसरी बार अपनी सुहागरात मना रही थी.. जब पहेली बार अपने पहेले पतीसे सुहागरात मनाइ तब उनको कुछ पताही नही थाकी सुहागरातमे क्या होता हे.. ओर आज वो इस मामलेमे काफी अनुभवी होगइ थी.. ओर बहार पुनम देवायतकी ओर मुस्कुराते मंजुके पास बेठ गइ.. तब मंजु लता ओर नीलमको कुछ केह रही थी.. तब पुनम उनके पास बेठे देवायतकी ओर कामुक नजरोसे देखते कुछ इसारा करने लगी.. तब मंजुने कहा..

मंजुला : लता.. तुम ओर नीलम आज यही नीचे पुनोके बगल वाले रुममे सोजाओ.. जाओ.. सुबह तेरे जेठजी तुम दोनोको अपने गांव छोड जायेगे.. ओर देवु आपभी अब सो जाओ.. कल इन दोनोको आपकोही छोडने जाना हे.. ओर भानुभाइसे सब बातभी कर लेना.. वो लोग दो तीन दिन पहेलेही यहा आजाये.. फीर वहीसे आप मम्मी पापाके पास चले जाना.. ओर हो सकेतो उन दोनोकोभी कलही इधर लेके आना..

तभी लता ओर नीलम खडी होकर पुनमके बगल वाले रुममे चली जाती हे.. तभी नीलमका दिल जोरोसे धडकने लगता हे.. उनको डर थाकी कही धिरेनके साथ मस्तीया करते लतादीदीने उसे दखतो नही लीया..? ओर नीलमके अंदर आतेही लताने दरवाजा खाली बंध करलीया ओर नीलमके सामने दैखे बगैरही वो बाथरुममे धुस गइ.. तबभी नीलम डर रहीथी ओर वो लताके बहार नीकलनेका इन्तजार करने लगी.. तभी बहार..

देवायत : (खडा होते) मंजु तुभी आ रही हेनां.. चलना..

मंजुला : (हसते धीरेसे) नही देवु.. आज आप जाओ.. आज आप ओर दीदीकी सुहागरात हे.. मे पुनोके साथ ही सो जाती हु.. मुजे इनसे बुछ जरुरी बाते भी करनी हे.. प्लीज.. (पुनमकी ओर देखते) पुनो क्या तुजे साथमे जाना हे..? हें..हें..हें.. जा.. तो तेरी ओर तेरी सास दोनोकी सुहागरात साथमे होजायेगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते पीठमे मुका मारते मुस्कुराते) क्या भाभी आपभी.. मुजे नही जाना.. हें..हें..हें.. मेरा कामतो हो गया हे.. बस अब मेरी नइ भाभीकी बारी हे.. हें..हें..हें..

कहातो मंजु ओर देवायत दोनोही हसने लगे ओर देवायत ने पुनमको बाजुसे पकडकर अपने आपसे चीपका लीया तब पुनम सरमसे पानी पानी होगइ.. ओर सरमाते हसते हुअ‍े मंजुकी पीठमे अ‍ेक ओर मुका जड दीया.. ओर वो देवायतकी ओर कातील स्माइल करते हसती रही.. तब देवायत पुनमकी ओर देखते अ‍ेक आंख मार देता हे ओर हसने लगता हे तब मंजु ओर पुनमभी हसते हुअ‍े खडी होगइ.. तभी देवायतने मंजुको अपनी बाहोमे भरते भीचलीया तो मंजुने पुनमकोभी हाथ खीचकर अपने साथ सामील करलीया..

मंजु ओर पुनम दोनोही देवायतकी बाहोमे खडी रही.. तब देवायतने दोनोके होंठ बारी बारी चुमलीया तो दोनोही खुब सरमाइ ओर देवायत अपने रुमकी ओर जाने लगा.. तब पुनम बच्चेको सोफेसे उठाने लगी.. ओर मंजु पुनमभी अपने रुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करके बेडकी ओर चली गइ तब मंजुने बच्चेको वही रखे जुलेमे डाल दीया.. जो दयाने पहेलेही पुनमके रुममे रख दीया था..

तब दुसरी ओर देवायत जेसेही अपने रुममे गया तो रुममे हल्की रोसनी जल रहीथी.. ओर उनका पुरा बेड फुलोसे सजा हुआथा.. ओर बीचमे चंदा घुंघट डालके घुटनोसे पैर मोडके बैठी थी.. जीसे देखतेही देवायतकी खुसीके मारे हसी नीकल गइ.. ओर वो दरवाजा बंध करके बेडकी ओर बढने लगा.. तब देवायतको आते देखकर चंदाके दीलकी धडकन बढने लगी.. ओर वो सरमसे पानी पानी होने लगी.. आखीर वो दीन आही गया.. जो चंदा कबसे इस दिनका इन्तजार कर रही थी..

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देवायत धीरेसे बेडपे बेठ गया.. ओर चंदाका घुंघट उठाने लगा तब चंदा सरमसे पानीपानी होने लगी.. ओर अपनी नजर जुकाते मुस्कराती रही.. आज उनका चांदसा मुखडा कुछ अलगही लग रहाथा.. जैसे आसमानसे कोइ परी उतरके आइ हो.. ओर देवायतने जेबसे अ‍ेक डायमंड नेकलेस नीकालके चंदाको दे दीया.. तब चंदाने नजर जुकाते सरमाते वो नेकलेस अपने हाथोमे लेलीया..

ओर बोक्षमेसे नीकालकर वापस बीना कुछ कहे देवायतके हाथोमे वापस थमा दीया.. तब देवायतभी समज गया ओर हसते हुअ‍े चंदाके नजदीक बेठ गया ओर चंदाके मुहकी ओर जुकते नेकलेस चंदाको गलेमे पहेनाने लगा.. तब चंदा अ‍ेक लडकीकी तराह खुब सरमाते हसती रही.. ओर देवायतने नेकलेस पहेना दीया..

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देवायत : चंदा आज तुम बहोत खुबसुरत लग रही हो.. जी चाहताहे तुजे सुबह तक अ‍ैसेही देखता रहु..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) देवु.. अब मे बाकायदा आपकी अमानत होगइ हु.. आपको जैसा ठीक लगे अ‍ैसा व्यवहार मेरे साथ कीजीये.. क्युकी मेने पुनमकोभी अपनी बहु नही अपनी ननंद मानलीया हे.. मे अपने आपको बदलनेकी पुरी कोसीस करुगी.. ताकी मे इस हवेलीकी बहु बन सकु.. मेरा बरसोका सपना आज पुरा हो गया हे..

देवायत : नही चंदा तुम जैसी थी उसीमे मेने तुजे स्वीकार कीया हे.. तुजे बदलनेकी कोइ जरुरत नही.. मुजे मेरी वोही चंदा चाहीये.. जो मुजे बहुत सरमाती भी हे ओर मुजसे खुलके प्यारभी करती हे.. आइ लव यु चंदा..

चंदा : (सरमाते हसते) देवु.. आइ लव यु टु..

कहातो चंदाने बेठेही देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया ओर उनके कंधेपे सर रखके बेठ गइ.. तब देवायतनेभी चंदाको बाहोमे भरलीया ओर अ‍ेक हाथसे चंदाकी पीठ सहेलाने लगा.. दोनो काफी देर अ‍ैसेही अ‍ेक दुसरोकी बाहोमे खामोस बैठे रहे.. जब देवायतने चंदाको अपने आपसे अलग कीया तब चंदाकी आंखोमें आंसु बेह रहे थे.. तो देवायतने अपनी जेबसे रुमाल नीकालकर चंदाके आंसु पोछ दीये.. ओर सवालीया नजरोसे चंदाको देखने लगा..

चंदा : (आंसु पोछते हसते) सोरी.. देवु.. मे भावनाओने बहेक गइ थी.. येतो खुसीके आंसु हे.. आपको पता हे मेरा बचपन इसी हवेलीमे गुजरा हे.. ओर आज इसी हवेलीमे बहु बनकर आगइ.. मुजेतो अभीभी यकीन नही हो रहाकी हमारी सादी सबके सामने होगइ हे.. ओर मे आपकी अर्धांगीनी होगइ हु..

देवायत : (हसते) हां चंदा.. आखीर मेने तुजे पा ही लीया.. मेरी मंजुने सही फैसला लीया हे.. मुजे गर्वहे मेरी मंजुपे.. जो मुजे इस खुबसुरत बीवी दे दी.. आजा.. आज हम पुरी रात प्यार करेगे.. तुजे सुबह तक सोने ही नही दुंगा.. आज तुजपे इतना प्यार आ रहा हे.. आज मे सारा प्यार तुजपे लुटा देना चाहता हु..

चंदा : (सर्मसार होते धीरेसे) जानु.. आपतो मुजे अ‍ेकही बारमे थका देते हो.. तो मे पुरी रात आपको कैसे जेल पाउगी..? हम दो बार प्यार करेगेनां.. प्लीज..

देवायत : (बाहोमे भरते) नही मतलब नही.. आज हमारी सुहागरात हे.. मे इसे यादगार बनाना चाहता हु.. ओर ये मेरी मंजुका भी ओर्डर हे..

चंदा : (सरमाते हसते) सुबह मे चलने फीरने.. लायक ही नही रहुगी.. तो वैसेभी ये यादगार होजायेगी.. देखोना आपकी लाडली.. ओर मंजु मेरी कैसी मस्तीया करेगी.. अभी अभी आपकी लाडली ओर मेरी प्यारी ननंद मेरी मस्ती करके गइ हे.. कहेती थी.. हम सुनेगी की आप कीतना चीलाती हे.. हें..हें..हें.. कहेके गइ हे मुजे अ‍ेक भतीजा या भतीजी देदो.. देवु मुजेतो बहुत सरम आइ..

देवायत : (हसते) हां तो सहीतो कहा उसने.. चल आज तेरी कोख भरही देता हु.. हें..हें..हें..

चंदा : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) देवु.. प्लीज.. हम कुछ दिन ठहेर जाते हेनां.. फीर मे सामनेसे कहुगी.. प्लीज.. अभी नही.. कुछ महीनो मे आपके साथ अ‍ैसेही मजे करना चाहती हु.. प्ली..ज..

देवायत : (हसते) चल ठीक हे.. जैसी तेरी मरजी.. लेकीन अ‍ेक बात पकी हे.. मुजे तुमसे अ‍ेक बच्चा चाहीये..

चंदा : (सर्मसार होते धीरेसे) देवु.. मेरीभी यही तम्मना हे.. लेकीन अभी नही.. मुजे मंजुसे इस बारेमे बुछ बात करनी हे.. फीर हम दोनो प्लानींग करेगेंनां..

दोनोही बाते करते प्यार करने लगे.. ओर कब दोनोके होंठ मील गये पताही नही चला.. तब चंदाकी आंखोमे नसा छाने लगा वो आंधी आंख चडाके देवायतके होठोका रसपान करने लगी.. तब देवायत उनके उरोजोको मुहमे लेकर चुम रहाथा तब चंदा अ‍ेकदम गरम होकर काम अग्नीमे जलने लगी.. ओर धीरे धीरे करते दोनोके तनसे कपडे हटने लगे.. आज चंदा खुद नसीली आंखोसे देखते देवायतके कपडे नीकाल रहीथी..

चंदाके उपर पुरी तराह वासना हावी हो चुकी थी.. ओर वोभी पुरी तराह नंगी होगइ.. बस तनपे सीर्फ ब्रा ओर पेन्टी ही रेह गइ.. ओर देवायत पुरी तराह नंगा होगया.. उनका लंड चंदाका अ‍ैसा रुप देखकर हवामे लहेराते जटके पे जटका मार रहाथा.. जीसे देखकर चंदा सर्मसार होते बार बार चोर नजरसे लंडको देखती रही..

जीस लंडको वो कइ बार अपनी चुतमे ले चुकीथी.. वोही लंड आज चंदाको कुछ ज्यादा ही बडा दीख रहा था.. ओर वो थोडा गभरा रही थी.. क्युकी कुछही देरमे वो ही लंड उनकी चुतकी धजीया उडाने वाला था..

तभी देवायतने चंदाको बेडपे धीरेसे पीठके बल लीटा दीया ओर अ‍ेक पैर चंदाके उपर डालते उनके उपर चड गया.. तब चंदाने देवायतको अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर दोनोके होंठ अ‍ेकबार फीरसे मील गये.. ओर अ‍ेक दुसरेके होठोका रसपान करने लगे.. तभी देवायतने चंदाकी ब्रा खीचके नीकालदी तब उनके दोनो कठोर उरोज उछलकर बहार आगये.. तब देवायतने दोनो बुब्सको अपनी मुठीकी गीरफ्तमे लेलीया..

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ओर वो उसे मसलने लगा.. तब चंदा जोरोसे सीसकारीया करने लगी.. ओर वो सरमके मारे देवायतसे नजरे चुराने लगी.. देवायत उनके उरोजोको मसलते कभी हल्कासा दबा देता तो कभी बुब्सकी नीपलको अपने दातोसे दबाकर हल्कासा खीच लेता.. तो कभी नीपलको चुसने लगता.. तो कभी जुकते चंदाके गलेको चुमलेता.. चंदा देवायतकी अ‍ैसीही हरकतोसे पागल होने लगी.. ओर उनकी चुतसे पानी नीकलने लगा..

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तभी देवायत चंदाके पैरोके बीच बैठ गया ओर पेन्टीमे दोनो ओर उगलीया फसाकर पेन्टीको खीचकर नीकालने लगा तब चंदा अ‍ेकदम सर्मसार होगइ ओर अपनी कमर उची करते दोनो पैर घुटनोसे मोडकर देवायतको पेन्टी नीकालनेमे साथ देने लगी.. ओर देवायत पेन्टीको नीकालकर वही रखते चंदाकी चुतपे जुक गया.. तब चंदा होनेवाली हरकतसे बीलकुल वाकेफ होगइ..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) देवु.. नही.. प्लीज.. वहा नही.. उपर आजाओनां.. अब बरदास्त नही होता.. मुजे बुछ होने लगता हे.. मे ज्यादा बरदास्त नही करपाउगी.. आप मुजे अ‍ैसे ही जडा देते हो..

देवायत : (कामुक्त होकर) बस.. चंदा अ‍ेक बार.. अ‍ेक बार मुजे इसे छु लेनेदे.. फीर सुबह तक मुजे तेरे उपरसे उतरना ही नही.. आज तुजे सुबह तक खुब प्यार दुगा.. मे हमारी इस रातको यादगार बनाना चाहता हु..

कहातो चंदा सर्मसार होते मुस्कराने लगी.. ओर अपना मुह दुसरी ओर करते देवायतसे नैन चुराते दोनो हाथोसे चदरको पकडली.. क्युकी उसे पता था अब आगे क्या होने वाला हे.. तभी चंदाको अपनी चुतपे देवायतका मुह महेसुस हुआ ओर वो नजरको नीचेकी ओर टेडी करते देखने लगी तब देवायत उनकी कमरको पकडते अपनी जीभको चंदाकी चुतमे घुसानेके लीये तैयार था.. ओर अचानक देवायतने चंदाकी चुतमे जीभ घुसादी.. ओर चंदाकी चुतके दानेको अपनी जीभसे छेडने लगा..

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तब चंदाने जोरोसे अपनी आंख भीचली ओर उनके मुहसे अ‍ेक हल्की चीख नीकल गइ.. वो अ‍ेकदम कामुक होकर छटपटाने लगी.. अ‍ैसा नही थाकी वो ये सब पहेली बारही कर रही थी.. देवायत ओर चंदा दोनो इस खेलको कइ बार खेल चुके थे.. लेकीन चंदाको मालुम थाकी आगे क्या होने वाला हे.. देवायत चंदाको इस खेलमे कइ बार बीना चोदेही अ‍ैसे जडा देता हे.. ओर आज चंदा अ‍ैसेही जडना नही चाहती थी..

वो आज नही चाहती थीकी दोनोका कामरस अ‍ेसेही बहार व्यर्थ जाये.. ना देवायतका ओर नाही खुदका.. वो दोनोका कामरस आज अपनी चुतमे भरकर महेसुस करना चाहती थी.. क्युकी अब उसे कीसी बातका कोइ डर नही था.. उनके मनके अ‍ेक कोनेमे देवायतसे मां बननेका ख्वाब देख रहीथी.. इसीलीये वो चाहती थीकी वो देवायतके बच्चेकी मां बने इसीलीये देवायत उनकी चुतको पुरी रात भरता रहे..

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हालाकी वो अभी देवायतके बच्चेकी मां बनना नही चाहती थी.. लेकीन फीरभी वो आइपील लेकर इनसे बचना चाहती थी.. चंदाने जबसे पहेली बार देवायतको देखा तबसेही वो देवायतके लीये सारी हदे पार करना चाहती थी.. वो देवायतके व्यक्तीत्वसे बहुतही आकर्सीत हो चुकीथी.. सीर्फ चंदाही नही इस गांवमे अ‍ैसी कइ ओरते ओर लडकीयाथी जो देवायतके नीचे लेटनेको आजभी आसानीसे तैयार थी..

जब चंदासे बरदास्तसे बहार होने लगा वो अचानक बैठ गइ.. ओर देवायतके सरको पकडते अपनी ओर खीचलीया ओर वो लेट गइ.. ओर देवायतकोभी खीचकर अपने उपर लीटा दीया.. ओर उनके गलेमे दोनो हाथ डालमे अपने तनसे जोरोसे चीपकालीया तब देवायत उनके गलेको चुमने लगा.. तो चंदा ओर मदहोस होने लगी.. ओर आधी आंख चडाते देवातके सरको सहेलाती रही.. वो चाहती थी देवायत जटसे जट अपना लंड उनकी चुतमे घुसादे..

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तभी उसे अपनी चुतपे देवायतका लंड ठोकर मारते महेसुस हुआ.. जो अपने बीलमे जानेका रास्ता ढुंढ रहाथा.. उनका लंडभी चंदाकी चुतके बीलमे कइ बार जाकर उल्टीया कर चुकाथा.. तो इस चुतको वो कैसे नही पहेचाने.. उनको चंदाकी चुत जानी पहेचानी लगी..

ओर वो चंदाकी चुतमे घुसनेके लीये कामयाब होगया.. जैसेही लंड चुतमे घुस गया तब चंदाकी आंख खुलके बडी होगइ.. ओर वो देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचते आह.. कहेते आहे भरने लगी.. आज उसे देवायतका लंड कुछ जरुरतसे ज्यादाही मोटा फील हो रहाथा..

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तो दुसरी ओर चंदाकी चुतकोभी देवायतका लंड जाना पहेचाना लगा तो वोभी अपनी दोनो होठ जैसी नाजुक पंखडीयोसे देवायतके लंडको फडफडाते नीगलने लगी.. जैसे कोइ सांप चुहेको नीगल रहा हो.. देवायत ओर चंदा दोनोही मदहोस होकर चुदाइमे मसगुल होगये.. आज दो जीस्म अ‍ेक जान होगये.. ओर देवायतने पुरा लंड चंदाकी चुतमे उतार दीया.. तब जाके चंदाने राहतकी सांस ली.. ओर उनके चहेरेपे राहतकी मुस्कान आगइ.. जैसे उसने कोइ कीला फतेह करलीया हो.. चंदाने देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलीया..

तभी इस गांवसे दुर आज अ‍ेक ओर सुहागरात चल रही थी.. जीहां.. भानु ओर उनकी मामी रमाकी.. जो आज भानुकी बीवी होगइ थी.. रमाने भावनाको बहुत साथ आनेका आग्रह कीया लेकीन भावनाने बडी सीफततासे उनकी सुहागरातका हवाला देकर मना करदीया.. ओर वो अपनी बच्चीको लेकर बाजुवाले लताके रुममे सोने चली गइ.. ओर रुमके बीच अ‍ेक दरवाजा लगा हुआ था.. ओर भावना बच्चीको लेकर लताके बेडपे सो गइ.. जहासे दोनोकी आवाजे साफ सुनाइ दे रहीथी..

तब दश पंद्गह मीनीटके बादही बाजुके रुमसे भावनाको अ‍ेक तेज चीखकी आवाज सुनाइ दी.. तब वो समज गइकी भानु ने अपना लंड रमाकी चुतमे उतार दीया हे.. ओर वो रमाको चोद रहा हे.. ओर इतनी उमर होनेके बावजुद रमाकी चीख सुनकर उसे जरासीभी समजनेमे देर नही लगीकी भानु उसे कामोतेजक गोली खाकर चोद रहा हे.. तब वो खडी होकर दरवाजेके पास चली गइ ओर वहा कोइ छेद देखनेकी कोसीस करने लगी..

तभी वहा अ‍ेक कपडा लडकता नजर आया ओर उसने कपडेको हटाया तो वहा उसे बडा छेद नजर आया ओर वो वहा आंख लगाकर अपने रुमका नजारा देखनेकी कोसीस करने लगी.. तभी वो चोंक गइ.. क्युकी वहीसे उनका पुरा बेड उसे दीखाइ दे रहाथा.. रमा पुरी नंगी होकर भानुके नीचे लेटी हुइथी.. उनको दोनो पैर घुटनोसे मुडे फैले हुअ‍े थे.. ओर भानु रमाको पैरोके बीच बैठेही तेजीसे अपनी कमर हीलाते रमाको चोद रहाथा..

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भावना छेदसे देखने लगी तब भानु बडेही जोरोसे कमर हीला हीलाकर रमाकी चुदाइ कर रहाथा ओर रमा अपने बेडकी चदर पकटते अपना मुह इधर उधर करते छटपटा रहीथी ओर भानुके हर धकेको चीखते ओर आहे भरते जेल रहीथी.. तब भानुभी रमाको बडी बेहरेहमीसे चोद रहाथा.. तो रमाभी चुदवाते चीखती चीलाती रही.. ओर भावना कातील मुस्कान करते फीरसे बेडपे आकर सोगइ..

तभी उसे खयाल आयाकी ये रुमतो लताका हे.. तो क्या लताभी उनकी ओर भानुकी चुदाइ हर दिन देखती हे..? यही सब सोचकर वो सरमसे पानी पानी होने लगी.. ओर मुस्कुराते मनही मन लताको गालीया देने लगी.. लेकीन अबतो लता उनकी ओर देवायतके प्रेमकी राजदार होगइ थी.. तब उनको लताकी अ‍ैसी हरकतोपे हसी आगइ.. तब बाजुके रुममे चुदाइका भवंडर तुफान बनकर तांडव मचा रहाथा..

काफी देर तक भानु रमाकी चुदाइ करता रहा.. इसी बीच रमा भी दो बार जड चुकीथी.. फीरभी भानु उसे चोदेही जा रहाथा.. तब रमाको आज भानुकी इतनी चोदनेकी स्टेमीना देखकर समज गइकी भानु कोइ कामोतेजक गोली खाकर उसे चोद रहा हे.. तब कुछ पलके लीयेतो वोभी खुस होगइ.. लेकीन जैसे जैसे भानु उसे उछल उछलकर चोदने लगा तब रमासेभी चुदावाना बरदास्तसे बहार होने लगा..

अभी तब रमा तीनसे चार बार जड चुकीथी.. तो उनकी चुतमेभी जलन महेसुस होने लगी.. तकरीबन २५ मीनीटकी धका पैनी जबरदस्त चुदाइके बाद भानुके लंडने भी जवाब देना मुनासीब समजा.. ओर भानु रमाकी चुतमे जडतक लंड घुसाके जडने लगता हे.. तब रमाभी भानुको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलेती हे.. तभी जडतेही भानु रमाके सीनेपे सर रखते ढेर हो गया.. ओर रमा उनकी पीठ सहेलाते भानुसे नजरे चुराने लगी.. ओर उसने राहतकी सांस ली.. तबतक भावना भी नींदकी आगोसमे चली गइ थी....

कन्टीन्यु
 
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ९७

अभी तब रमा तीनसे चार बार जड चुकीथी.. तो उनकी चुतमेभी जलन महेसुस होने लगी.. तकरीबन २५ मीनीटकी धका पैनी जबरदस्त चुदाइके बाद भानुके लंडने भी जवाब देना मुनासीब समजा.. ओर भानु रमाकी चुतमे जडतक लंड घुसाके जडने लगता हे.. तब रमाभी भानुको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलेती हे.. तभी जडतेही भानु रमाके सीनेपे सर रखते ढेर हो गया.. ओर रमा उनकी पीठ सहेलाते भानुसे नजरे चुराने लगी.. ओर उसने राहतकी सांस ली.. तबतक भावना भी नींदकी आगोसमे चली गइथी....अब आगे

आज देवायतकी हवेलीमे काम ओर रती स्यंम अपनी मौजुदगीका अहेसास करवा रहे थे.. तो जाहीरसी बात हे आज पुरे गांवमे ओर आजु बाजु सब जगाहपे अपनी काम वासनाका असर दीखाता.. पुरे गांवमे कामोतेजनाकी लहेर छागइ.. जीतनेभी जवान ओर आधेड थे.. यहा तक सभी बुढेके तनमे भी हलचल तेज होगइ थी..

सबके तनमे अ‍ेक अलगही नसा छाने लगा.. सभी लोग वासनाकी आगमे जलते संमुदरमे डुबकीया लगाने लगे.. तभी नीचेकी ओर दया ओर रजीयाभी आपसमे नंगी होकर लेस्बीयनका खेल खेल रहीथी.. दोनोही सीक्स नाइन पोजीसनमे अ‍ेक दुसरेकी चुतको चाट रही थी..

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आज पुरे गांवमे वासना इस कदर हावी हो रहीथी.. जैसे पुरे गांवमे कीसीने जादु करदीया हो.. कीसीको कुछ पताही नही थाकी ये सब क्यु हो रहा हे.. ज्यादातर गांव वालोका आपसमे ही कीसीना कीसीके साथ अफेयर चल रहाथा.. कोइ अपनी विधवा बुआके साथ.. तो कोइ अपनी भाभीके साथ.. तो कोइ अपनी चाचीको सेट करते चोदता था.. तो कोइ अपनी कामुक बडी अम्माको सेट करके चोद लेता..

ज्यादातर जवान लडकीया बदनामीके डरसे अपनेही घरमे आपसी रीस्तोमे यानी अपने सगे भाइके साथ अगर सगा भाइ नही होता तो चाचाका लडका या बुआके यातो मामाका या बडे ताउके लडकेके साथ अफेयर करके अपने तनकी प्यास बुजाती थी.. ताकी बहार वालोको उनपे सकभी ना पडे ओर अपने यारको घरमे ही बीन्दास्त मील सके.. ओर लडकेभी कीसी बहारकी लडकीके बजाये अपनी बहेनको सेट करते उनसे प्यारके खेलमे लगे रहेते थे..

अ‍ेक घरमे तो लडका सहेरमे नोकरी करताथा तो महीनो तक नही आताथा.. ओर आताभी तो महीनेमे सीर्फ अ‍ेक बार.. तो उनकी बीवीका अपने ससुरसेही अफैर होगया था.. जो आये दिन उनसेही अपनी प्यास बुजालेती थी.. तो कोइ विधवा अपने देवरसे या भतीजेसे तो कोइ अपने भांजेको सेट करके उनसे चुदवाकर अपनी प्यास बुजाती.. ज्यादातर घरमे कीसीना कीसीके साथ अफेयर चल रहाथा.. ओर इस बारेके कीसीको भनकभी नही थी की.. गांवमेभी अ‍ैसा हो सकता हे..

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ओर ज्यादातर कुआरे लडके अपनी सगी बहेन यातो रीस्तेकी कजीन बहेनको सेट करते उनसे अपने तनकी आग बुजा लेतेथे.. जो आये दीन मौका मीलतेही उसे चोद लेते थे.. लेकीन आज सबके रीस्ते खुलकर उजागर होनेकी कगारपे आगये.. आज सबपे काम ओर रतीकी मौजुदगीका अहेसास होने लगाथा.. सबपे काम हावी होने लगा.. सब पागल जैसे होने लगे.. ओर अपने साथीके साथ मीलन करनेको तडपने लगे..

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आज काम पुरी तराह सबपे हावी होने लगा तो कोइ अपनी बुआके रुममे चला गया तो कोइ अपनी भाभीको स्टोरेजके रुममे लेजाकर चोदने लगा.. तो कीसीने अपनी चाचीको अपनेही रुममे बुला लीया तो बहुने ससुरको इसारा करके बाथरुममेही बुला लीया ओर वो दोनो वहा खडे खडे चुदाइ करने लगे.. तो अ‍ेक लडकेने तो अपनी अम्माको देर रात कीचनमे पानी पीने आइ तबही दबोच लीया.. ओर पीछेसे लंड घुसाके उसे कीचनमेही चोदने लगा..

ओर मजेकी बात आज कोइ ओरत हो या लडकी कीसीको मना नही कर रही थी.. क्युकी आज सबके दिमागमे काम ओर रती हावी थे.. लडके या मर्द कीसीको चोदनेके लीये तडप रहेथे तो लडकीया ओर ओरते अपनी चुतमे अपने यारका लंड लेनेको तडप रहीथी.. ओर जीनके सेप्रेट रुम थे वो अपनी बहेनको वही बुलाकर चोदने लगे.. तो कइ लडके घरोकी छतमे टंकीके पीछे अपनी बहेनको बुलाकर चोदने लगा..

कीसीको कुछ पता नही थाकी आज सब क्या हो रहा हे.. सबके दिमागमे आज वासना हावी होकर तांडव मचा रहीथी.. आज पता चला की गांवमेभी अ‍ैसे कइ रीस्ते पनप रहे हे.. आज बाबाने कही हुइ भवीस्य वाणी सचमे साबीत होते दीख रही थी.. जो कुछही महीनोमे सबके रीस्ते सार्वजीक रुपसे उजागहर होनेकी कगारपे थे.. तब पता नही पुरे गांवमे कैसा तांडव मचेगा..

तभी रश्मी ओर चंपाभी अपनी चुतमे जोरोसे उंगली करते अपने आपको सांत करती रही.. तो आज गांवके डो. सुधीरभी अपनी बीवी नीशाको चोद रहाथा.. तब नीशाभी खुस होकर सुधीरसे चुदवाने लगी.. क्युकी सुधीर उनकी गलत आदतोकी वजहसे नीशाको बहुतही कम फीजीकल होताथा.. जीनकी वजहसे नीशाभी देवायतकी ओर ढलने लगी थी.. ओर जब आज उसे सुधीर चोद रहाथा तब नीशा सुधीरकी जगाह देवायतको इमेजींग करते चुदवा रहीथी..

ओर कुछही देरमे सुधीरके लंडने जवाब देदीया.. ओर नीशा सुधीरको मनही मन गालीया देने लगी.. ओर वही बेठकर अपनी चुतमे उगली करने लगी.. क्युकी नीशा बहुतही खुबसुरत ओर अ‍ेकदम गोरी पतली लडकीथी.. उनके लंबे बाल उनके घुटने तक लहेराते थे.. जीनकी वजहसे वो बहुतही खुबसुरत ओर आकर्सक दीख रहीथी.. जो नीशाके माबापने नीशाकी सादी सीर्फ सुधीरको डोक्टर होनेकी वजहसे करदी थी..

लेकीन नीशा इतनी खुबसुरतथी की सुधीर नीशाको देखतेही जड जाता था.. ओर नीशाको हमेसाकी तराह प्यासी रख देता था.. ओर इसी बातपे दोनोके बीच अक्सर काना सुनी होजाती.. तब नीशाको उंगलीसे अपने आपको सांत करना पडता था.. सुधीरका लंड बहुतही छोटा ओर पतलाथा.. नीशाने सुधीरको कइ बार अपना इलाज करवानेको कहा लेकीन सुधीर हर बार उनकी बातको बहेस करके टाल देता.. क्युकी उनका असली रीजन सीर्फ वोही जानता था.. वो देवायतके साथ कोलेजमे पढताथा तबसे ही वो गांडु था..

तब ना चाहते हुअ‍ेभी नीशा देवायतसे आकर्सीत होकर उनकी ओर ढलने लगी थी.. देवायत जबभी सुधीरको मीलने आता नीशा बस उनकोही देखती रहेती.. ओर उनसे बाते करनेकी कोसीस करती.. ओर मौका मीलतेही देवायतको कामुक इसारा भी करती.. इस बातको देवायतभी भली भांती जान चुकाथा.. की सुधीर नीशाको खुस नही रख पाता.. ओर देवायतभी उनका रीजन जानता था..

तो दुसरी ओर रमेशभी अपनी बीवी चारुकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा.. लेकीन वो ज्यादा देर टीक नही पाया.. ओर चारुकी चुतमे जल्दी खलास होकर उनके उपरसे उतर गया.. ओर चारुकी गालीया सुनकर सो गया.. तब चारु नंगीही उठकर फटाफट वंदनाके रुममे चली गइ तो वंदनाभी चदरके अंदर उंगली कर रहीथी.. ओर चारुने देख लीया.. तो वोभी दरवाजा बंध करके हसते हुअ‍े नंगीही उनके साथ सोते वंदनाकी चदरमे घुस गइ..

चारु : (हसते) वंदु अकेली अकेली क्या कर रही हे..? तु कीसीको सेट करके सादी करले.. कब तक अ‍ैसे उंगलीसे काम चलायेगी.. हें..हें..हें..

वंदना : (सरमाते हसते धीरेसे) मम्मी क्या हुआ..? क्या.. आजभी पापाने फीर आपको अधुरी छोड दीया..? मोम आपनेभी सादी करके क्या तीर मारलीया.. इनसेतो अच्छी मेरी उंगली हे.. हें..हें..हें..

चारु : (जुठा गुसा करते वंदनाको बाहोमे भरते) तु उस कमीनेका नाम ही मत ले.. अगर अ‍ैसा पती तुजे मीला होतातो तुजे पता चलता.. चल छोड ये सब बाते.. पहेले मुजे अ‍ेक बार ठंडी करदे.. फीर मे तुजे कर दुगी.. तेरे पापाने आजभी मुजे अधुरी छोड दीया.. पता नही तु मर्दके बीना कैसे रेह लेती हे.. मेतो अ‍ेक दिनभी लंडके बीना ना रहु.. ओर आज पता नही कैसी आग लगी हुइ हे.. क्या तुजे अ‍ेकबारभी इच्छा नही होतीकी कीसी मर्दका लंड अपनी चुतमे लेलु..?

वंदना : (चारुकी चुत सहेलाते) मम्मी तु फीर सुरु होगइ..? तु हे ना.. हम दोनो मां बेटी अ‍ेक दुसरेका अ‍ैसेही खयालतो रखती हे.. तो फीर मुजे मर्दकी क्या जरुरत हे.. ओर तुमने भी मर्दसे सादी करली हे.. क्या हुआ..?

चारु : (होंठ चुमते) बेटी.. अभी तक तुमने मर्दका स्वाद चखा नही हे इसीलीये तु अ‍ैसे बोल रही हे.. बस अ‍ेक बार कीसी असली मर्द से पाला पड जायेगा तब तु उनके बीना रहे नही पायेगी.. मेरी मान तु देवायतको पकडले.. वोतो राजा हे वोतो कीतनी भी सादीया कर सकते हे.. मुजे पुरा यकीन हे वो तुजे अपना लेगा.. ओर तुजे बहोत खुस रखेगा.. बस अ‍ेक बार उनसे प्रपोज करते तो देख..

वंदना : (सरमाते मुस्कुराते) मम्मी तुम फीर सुरु होगइ..? अरे बाबा उनकी सादी होगइ हे.. अब मुमकीन नही हे.. अगर तेरी बात मान भी लु तो क्या मंजुभाभी पुनो सब क्या सोचेगी..? ओर उसने मुजे युस करके सादी करनेसे मना करदीया तो..? तेरी ओर पापाकीही बदनामी होगी..

चारु : (कीस करते) बेटी जहा तक मे उसे जानती हु वो अ‍ैसा नही हे.. वो अ‍ेक रोयल फेमीली हे.. वो तुजे खुस रखेगा.. वैसेभी इन तेरे पापा जैसे नामर्दसे तो अच्छा उनकी रखैल बनके रहे.. अगर तुजेभी मेरे जैसा पती मील गया तो हम दोनोकी जींदगी नर्क बन जायेगी.. इनसेतो अच्छा हे तु उनकी बीवी होजा.. अ‍ेक बार बात करके तो देख.. वरना मुजे मौका मीलातो मे बात करलुगी..

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वंदना : (चारुकी चुत सहेलाते उनके मनको टटोलने लगी) मम्मी.. अ‍ेक बार फीर सोचले.., अगर मे इस बारेमे आगे बढु.. तो क्या तुम सहेन कर पाओगी..? ओर मेरा साथ दोगी..? अगर उसने मुजे प्रेगनेन्ट करदीयातो पहेले तुमही मुजे घरसे नीकाल दोगी.. हम दुनीया वालोको क्या मुह दीखायेगे.. हमारी बहुत बदनामी होगी.. ओर वो पापाके खास दोस्तभी हे..

चारु : (सीरीयस होते) नही बेटी.. तुमने मेरे बारेमे अ‍ैसा सोचभी केसे लीयाकी मे तेरा साथ नही दुगी..? वंदु अगर तुम सचमे उनके साथ जींदगी बीताना चाहती हे.. तो मे तुम्हारे साथ हु.. बस अ‍ेक बार उनसे सादी करले.. फीर तु उनके साथ हवेलीपे रहे या फीर यही हमारे घरमे.. हमे कोइ फर्क नही पडता..

वैसेभी तु हमारी अ‍ैकलोती बेटी हे.. हमारे बाद तुजेही तो ये सब सम्हालना हे.. अबतो तेरी नोकरीभी लग जायेगी.. तो वोभी हमे चीन्ता नही हे की तु अकेली कैसे तेरा गुजारा करेगी.. बेटा.. मे हंमेसा तेरे साथ हु.. ओर तेरा साथ देती रहुगी.. ओर रही बात तेरे पापाकी तो उनकोतो मे समजा दुगी.. वो कुछ नही कहेगे..

वंदना : (खुसीसे जोरोसे बाहोमे भीचते) ओह.. मम्मी आइ लव यु, मुजे पुरा यकीन थाकी तुम मेरा साथ जरुर दोगी, मम्मी इस बारेमे हम कल अकेले होगे तब बात करेगे, मुजे आपसे इस बारेमे कुछ बात करनी हे..

चारु : (हसते होंठ चुमते) अच्छा..? ठीक हे बेटा.. मुजे लगता हे इस बारेमे तुम कुछ आगे बढी हो.. हें..हें.. कोइ बात नही.. मे खुस हु.. बस तुम खुस रहेनी चाहीये.. मुजे तुम दोनोके रीस्तेसे कोइ अ‍ेतराज नही..

दोनोही मां बेटी अ‍ैसेही बाते करते गरम होने लगी ओर थोडी ही देरमे दोनो सीक्सनाइन पोजीसनमे अ‍ेक दुसरेकी चुतको चाटने लगी.. तब अचानक वंदना बेडसे उतर गइ ओर अलमारीसे बेल्ट वाला डील्डो नीकाल लीया ओर अपनी कमरपे बांधते चारुके उपर चड गइ ओर रबरका डील्डो चारुकी चुतमे घुसा दीया ओर अपनी मम्मीको अ‍ेक मर्दके भांती जोरोसे चोदने लगी.. तब चारु सातवे आसमानपे पहोंच गइ..

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जब चारु जड गइ तब उनकी बेटी वंदनाके उपर चड गइ ओर वंदनाके होंठ चुमते अ‍ेक उंगली वंदनाकी चुतमे डालकर वंदनाको जडाके सांत करदीया.. फीर दोनो अ‍ेक दुसरेको चीपकके सोगइ.. दोनो अक्सर अ‍ेक दुसरेको अ‍ैसेही सांत करतीथी.. जब चारु बोम्बे गइथी तब वो वहासे अ‍ेक रबरका बेल्ट वाला डील्डो लेकर आयी थी.. लेकीन वंदना उसे इस्तेमाल नही करती ताकी वो अपनी वर्जीनीटी बेकरार रख सके.. क्युकी दिलके अ‍ेक कोनेमे उसे देवायतको मीलनेकी उमीद आज भी जींदा थी..

जो पुनमके साथ बातोसे उनकी उमीदभी बहुत जल्द पुरी होने वाली थी.. इसीलीयेतो आज उसने मौका मीलतेही चारुको कल अपने दिलकी बात बतानेको केह दीया.. जब पुरे गांवमे वासनाका खेल हो रहाथा.. तब लता ओर लखनभी कैसे दुर रेह सकते थे.... सब सोने चले गये तब लता ओर नीलम दोनोभी अ‍ेक बडे बेडपे सोनेकी तैयारीया कर रही थी.. दोनोने अपने नाइडके कपडे पहेन लीये.. तब नीलम ओर लता अ‍ेक दुसरेकी ओर मुह करते सोनेकी तैयारीया करने लगी.. तभी मौका मीलतेही लताने नीलमको कहा..

लता : (धीरेसे डांटते) नीलु.. ये सब क्या हे..? मेने देखा हे तुम ओर धिरेन कारमे बहुत कुछ मस्तीया कर रहे थे.. मे तुमसे केह देती हु.. तुम उस धिरेनसे दुर रहेना.. दोनो गाडीमे क्या हरकत कर रहेथे मुजे सब पता हे.. वो तेरे पीछे क्यु पडा हे..? तुने उनको कुछ कहा हे क्या..? देखना अभी उनकी सादी होने वाली हे..

नीलम : (सुनकर गभराते गांड फटने लगी तब धीरेसे) नही.. नही.. दीदी.. वो.. वो.. सीर्फ मेरी मस्ती कर रहे थे.. मैने उनको बहुत मना कीया.. लेकीन वो मानते ही नही थे.. उसमे मेरी कोइ गलती नही हे..

लता : (धीरेसे) नीलु.. मुजे पता हे.. मेने सब देखलीया हे.. वो तुने कहा कहा हाथ लगातेथे.. सच बताना.. तुजे मेरी कसम हे.. उसने तेरे बुब्सकोभी दबाया हेनां..? ओर वहा.. तेरे नीचेभी हाथ डाला थानां..?

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. वो.. वो.. आप ओर जीजु मस्ती करते प्यार कर रहेथेनां..? तो धिरेन जीजुने मुजे देखनेके लीये कहा.. ओर मे देखकर बहेक गइ.. तभी वो भी मेरे साथ ये सब करने लगे.. इसमे मेरी कोइ गलती नही हे.. मेने उनको बहुत मना कीया.. उनको बहुत रोकनेकी कोसीस की.. लेकीन वो नही माने.. मेरी अ‍ेकभी नही सुनते थे..

लता : (थोडी सांत होते) देख नीलु.. मेरी ओर तेरे लखनजीजु की तो सादी होने वाली हे.. वो मेरे मंगेतर हे.. अब तीन चार दीनमे ही धिरेनकी पुनो दीदीके साथ सादी होने वाली हे.. तुम उनसे दुर रहेना.. ओर वो बुलाये तोभी उनके पास अकेली मत जाना.. मुजे या पुनो दीदीको साथ रखके जाना.. मुजे उनकी नीयत ठीक नही लगती.. ओर वैसेभी इन सब चीजोके लीये तु अभी बहुत छोटी हे.. तेरी उमरही क्या हे..? कीतने साल हुअ‍े तुजे..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे हसते) दीदी.. वो.. १७ वा साल चल रहा हे.. आपकी सादीके अ‍ेक महीनेके बाद अठारवा लगेगा..

लता : (हसते धीरेसे) हंम.. मतलब तुजपे नइ नइ जवानी चड रही हे.. नीलु तुजे इस उमरमे ही अपने आपको सम्हालना हे.. तुजे बहुत खयाल रखना पडेगा.. वरना तेरे कदम कही बहेक गयेतो भाभी भैया.. हम सब कही मुह दीखाने लायक नही रहेगे.. तु अपने आपको सम्हालना.. ओर वहा सहेरमेभी तुजे बहुत सम्हालना हे.. बस अ‍ेक बार अच्छेसे पढाइ करले.. फीर मे जेठजीको कहेके तेरे लीये कोइ अच्छा पढा लीखा लडका ढुंढुगी.. ओर उनसे तेरी सादी करवाउगी.. समजी.. इन सब चीजोके लीये अभी तेरी उमर नही हे..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. वो.. वो.. धिरेन जीजुने मुजे कल फोन करनेको कहा हे.. मे क्या करु..?

लता : (चोंकते धीरेसे) क्या..? धिरेनने तुजे फोन करनेको कहा हे..? लेकीन क्युं..? बडा कमीना हे ये धिरेन.. पता नही पुनोदीदीका क्या होगा.. तुजे उसे फोन करनेकी कोइ जरुरत नही.. तु कल मेरे साथही रहेना फीर मे उसे फोनपे बात कर लुगी.. कमीना कहीका.. दिखनेमेतो कीतना भोला भाला लगता हे.. ठरकी कहीका.. मुजे उनकी नीयत ठीक नही लगती.. अब सोजा.. कल हमे जेठजीके साथ वापस गांव जाना हे.. हम वही बात करेगे.. सोजा..

कहा तो नीलमने राहतकी सांस ली.. ओर वो दुसरी ओर करवट लेकर सोगइ.. लेकीन उनके मनमे धिरेनको लेकर विचारोका घमासान युध्ध चलने लगा.. अब वो लताको कैसे कहेकी धिरेनने उनको कहा कहा हाथ लगाकर छेडाथा.. उनके गलेको गालको ओर उनके होठोको चुमलीया था.. ओर कइ बारतो उनके छोटे छोटे सतंरे जैसे बुब्सकोभी दबा लीया था.. तो दो बारतो उनकी चुतकोभी दबोच लीयाथा.. ओर उनके लंडको भी पकडा दीयाथा.. भलेही तब नीलम सरमाइ.. लेकीन इस खेलमे उनकोभी बहुत मजा आ रहाथा..

तब नीलम धिरेनकी हरकतके बारेमे सोचकर बहुतही सरमाइ ओर मुस्कराने लगी.. जीनकी वजहसे उनकी चुतमे पहेली बार हरकत हुइ.. उनको चुतमे मीठीसी खुजली होने लगी.. ओर उनकी चुत फडफडाने लगी.. आज नीलमको पहेली बार कीसीने इस तराह छेडाथा.. ओर नीलम इसे अपनी जींदगीका पहेला प्यार समजने लगी.. यही सब सोचते उनकी चुत आज फीरसे अ‍ेक बार फीर फडफडाने लगी.. क्युकी आज उनके उरप भी रतीजो हावी थी..

तब मंजुके अलावा कीसीको नही पताथाकी नीलमभी उन सबकी जींदगीका अ‍ेक महत्वका हिस्सा थी.. ओर नीलमका हाथ अनायसही उनकी नीकरमे होते चुतपे चला गया.. ओर नीलम धीरे धीरे चुतको सहेलाने लगी.. फीर वो चदरके अंदरही हाथसे अपनी चडीको थोडी नीचे करलेती हे.. ओर दोनो हाथोकी उंगलीयोसे अपनी चुतकी पंखडीयोके साथ खेलने लगती हे.. ओर खेलते खेलते आज पहेली बार धीरेसे अ‍ेक उंगलीसे अपनी चुतको सहेलाते धीरेसे चुतमे डाल देती हे.. तब वो आंख बंध करते स्वर्गकी सेर करने लगती हे..

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तो दुसरी ओर नीलमसे बात करके लताभी काफी गरम हो चुकी थी.. क्युकी वो ओर लखनभी कारमे बहुत कुछ कर चुके थे.. ओर ये सब नीलमभी देख चुकीथी.. ओर उपरसे उसे लखनके वो इसारे याद आने लगे जो लखन उपर सोने जाते वक्त उसे करके गया था.. वो इसारोसे लताको अपने रुममे उपर आनेको केह रहाथा लेकीन लताने नीलमकी वजहसे उसे मना करदीया था.. अब वो मना करते बहुत पछता रही थी.. क्युकी उनकाभी मन लखनको मीलनेके लीये कर रहाथा..

तभी वो मुह घुमाकर अ‍ेक बार नीलमकी ओर देखकर चेक करने लगी की नीलम सोगइ की नही.. तब नीलमको दुसरी ओर मुह करते सोते देखकर वो धीरेसे बेडसे उतर गइ.. ओर वो हल्की रोसनी वाली लाइटभी बुजाकर वापस बेडपे आगइ.. ताकी उनकी कोइभी हरकत नीलम देखना सके.. ओर अपने नीकरमे हाथ डालकर लखनको याद करते अपनी चुतको सहेलाने लगी.. तभी उसे दरवाजेपे कुछ हल्की आहट सुनाइ दी.. तो लताने देखा कोइ साया उनके दरवाजेको खोलकर अंदर जांक रहाथा ओर वो देखती रही..

तो वो साया अंधेरेमे उनकी ओर बढता नजर आने लगा तो लता समज गइकी ये लखन हे.. तब वो सरमाती खुस होते गभरा गइ.. ओर जटसे नीलमकी ओर देखने लगीकी नीलम सोगइ हे की नही.. लेकीन नीलमकी ओरसे कोइ हलचल महेसुस नही हुइ.. तबतक तो लखन लताके बगलमे आकर लेट गया.. ओर लताको अपनी बाहोमे भरने लगा.. तब लता नीलमकी ओर देखते गभराते लखनसे छुटनेकी कोसीस करने लगी.. ओर लखनने धीरेसे लताके कानमे कहा..

लखन : (धीरेसे) लता.. चलना बहार चलते हे.. क्या नीलु सोगइ..?

लता : (धीमी दबी आवाजमे) मुजे क्या पता.. आप चले जाओनां.. कही नीलु जाग ना जाये.. प्लीज..

लखन : (धीरेसे दबी आवाजमें) अरे सो गइ लगती हे.. चलना बहार कोइ नही हे.. हम सोफेके पीछे चले जायेगे.. कीसीको मालुम नही होगा.. सोफेकी पीठकी आडमे हमे कोइ नही देखेगा..

लता : (दबी आवाजमे) लखन आप समजते क्यु नही.. तीन चार दिनकी तो बात हे.. थोडा सबर करलोनां.. यहा कीसीको पता चलेगातो मेरे बारेमे क्या सोचेगा..? जानु.. थोडा सबर करलो.. प्लीज..

लखन : (धीरेसे कामुक आवाजमें) वही तो नही होता चलनां.. बस अ‍ेक बार.. बहुत मन कर रहा हे.. फीर तु वापस यहा आकर सोजाना.. चलनां..

लता : (सहमती वाले अंदाजमें दबी आवाजमे) लखन.. प्लीज.. देखना कीसीको पता ना चले.. सीर्फ अ‍ेक बार करना.. फीर तुमतो मुजे छोडते ही नही हो..

लखन : (खुस होते धीरेसे) अरे हां बाबा अ‍ेक ही बार करुगा बस..? चल जल्दी..

कहेते लखनने लताके होंठ चुमलीया ओर बेडसे धीरेसे खडा होगया.. ओर लताका हाथ पकडके खीचने लगा.. तो लतानेभी हाथ छुडानेकी नाकाम कोसीसकी ओर वो खेचतान करती तो नीलमके जाग जानेका डरभी था.. ओर वोभी नीलमकी ओर देखते लखनके पीछे पीछे खीची चलने लगी.. तब उनको पता नही थाकी नीलमभी लखनको आते देख रहीथी ओर उसे पहेचान चुकीथी..

ओर लखनने बहार नीकलतेही धीरेसे लताके रुमका दरवाजा खाली बंध करलीया ओर लताको दबे पांव लेकर सोफेपे चला गया.. दोनोही सटकर बैठ गये.. ओर लखनने लताको अपनी बाहोमे भरलीया दोनोके होंठ मील गये ओर अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. तभी लखनने लताको वही सोफेपे लीटाते खुद उनके उपर चडके लेट गया ओर लताके होंठ चुमने लगा.. तब लताने सरमाते हसते हुअ‍े कहा..

लता : (सरमाते) आप बहुत नोटी हो.. क्या तीन चार दिन नही ठहेर सकते? आखीर अपनी मनमानी कर ही ली.. देखना कोइ इधर ना आजाये.. जोभी करना हे आप फटाफट करलो.. कही नीलु इधरना आजाये..

लखन : (गालको चुमते) अरे लता भाइतो अपनी सुहागरात मनानेमे बीजी होगे.. वोभी नइ भाभीको चोदते होगे.. ओर मंजु भाभी पुनो दीदीभी सो गइ होगी.. यहा कोइ नही आता.. चलना फटाफट कपडे नीकाल..

लता : (सरमाते हसते) अब आपही इधर लाये होतो आपकोही सब महेनत करनी होगी.. हें..हें..हें..

तब लखन लताके उपरसे उतर गया ओर लताके ओर खुदके कपडे नीकालने लगा ओर थोडीही देरमे दोनो बीलकुल नंगे होगये.. तब लता खुब सरमाइ ओर वो वापस सोफेपे लेट गइ.. तब लखनतो पहेलेसेही गरम था.. ओर वोभी लताके पैरके बीच बैठ गया तभी लताने अपने दोनो पैर थोडे फैला दीये ओर लखन लताकी चुतमे अपना लंड पकडकर सेट करने लगा.. तब लता सरमसे पानी पानी होने लगी..

दोनोही चुदाइके लीये बहार नीकल रहेथे तब अंधेरेकी वजहसे दोनोको नही पताथाकी नीलम चदरके अंदरसे दोनोको बहार जाते देख रही हे.. जब दोनोने खाली दरवाजा बंध करलीया तब नीलम फटाफट अपने बेडसे खडी होगइ ओर दरवाजेके पास चली गइ.. ओर हल्कासा दरवाजा खोलके वो अंदरसे ही बहारकी ओर देखने लगीकी दोनो क्या कर रहे हे.. तब लखन लताके ओर खुदके कपडे नीकाल रहाथा.. ओर नीलम दोनोको नंगा होते देखने लगी.. तब उनकी चुतमे अ‍ेक बार फीरसे तेज हलचल होने लगी..

ओर नीलम वही खडी रहेते बहारकी ओर देखते अपनी चुतको नीकरके उपरसेही सहेलाने लगी.. उसे अब इस खेलमे बहुत मजा आने लगाथा.. जब लखन नंगा होगया तब नीलमने आज पहेली बार कीसी मर्दका लंड अपनी आंखोसे देखा.. वो लखनके लंडको अ‍ेकनेरसे देखने लगी.. तब उनकी आंखोमेभी वासनाके डोरे मंडराने लगे.. तभी लता ओर लखन दोनोही चुदाइकी तैयारीमे मसगुल थे..

लखन ओर लताको नही पताथाकी सीर्फ नीलमकी दो आंखे नही उसे अ‍ेक ओर दो आंखे देख रही थी.. वो थी रजीया.. जो देर रात लखनके रुममे जानेके लीये अपने रुमसे दबे पांव नीकल रही थी.. तब लखन लता ओर नीलमके रुमके आसपास चकर लगा रहाथा.. जो बार बार दरवाजेसे जांकते अंदरकी ओर देख रहाथा तब रजीया वही अपने दरवाजेके पास ही रुक गइ ओर लखनकी हरकते देखती रही..

जब लखन अंदर चला गया तो रजीया छुपकेसे लता वाले दरवाजेके पास आगइ.. ओर वो दरवाजेसे अंदर जाकने लगी.. तब लखन लता बहारकी ओर आने लगे तब वो वहासे जटसे हट गइ.. ओर दोडके कीचनमे चली गइ.. क्युकी कीचनकी सर्वीस विन्डोसे पुरा होल दीख रहाथा.. तब लखन लताको सोफेपे लेगया जो रजीया कीचनसे साफ देख रही थी.. ओर वो वही अंधेरेमे खडी होकर दोनोकी हरकत देखने लगी..

तबतक लताभी अपने सब कपडे नीकालकर सोफेपे लेट चुकीथी ओर लखन उनकी चुतमे अपना लंड घुसानेकी कोसीस कर रहाथा.. तभी इधर नीलमने पहेली बार लताकी कामुक आवाजमे सीसकारीया सुनी.. तो नीलम अपने आपको रोक नही पाइ.. ओर वो दरवाजेसे अपना सर नीकालकर बहार देखने लगी.. तो उसे सोफेपे लता ओर लखन नही दीखाइ दे रहेथे.. तब नीलमकी लखन लताको देखनेकी उत्सुक्ता बढ गइ..

वो धीरेसे दबे पांव बहारकी ओर नीकल गइ.. ओर डरते धीरेसे सोफेकी ओर बढने लगी.. तब रजीयाभी नीलमको अ‍ैसे जांकते देखकर चोंक गइ.. तबतक लखन लताकी चुतमे अपना लंड डाल चुकाथा.. ओर वो होले होले कमर हीलाते लताकी चुदाइ कर रहाथा.. तब लताकी आंहे.. ओर सीसकारीया साफ सुनाइ दे रहीथी.. दोनोही चुदाइमे मसगुल होगये.. लता आधी आंख चडाते मदहोसीमे लखनसे चुदवाने लगी..

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तब उनको नही पताथाकी नीलम बहार नीकलके चुपकेसे दोनोकी चुदाइ देख रही हे.. ओर उन तीनोको रजीया कीचनसे देख रही हे.. नीलम लताकी कामुक सीसकारीया सुनकर अ‍ेकदम गरम होगइ.. ओर नीलमकी चुतभी गीली होने लगी.. आज वो पहेली बार कीसी लडके ओर लडकीको अपनी आंखोसे अपने सामने चुदाइ करते देख रही थी.. तब नीलमको ये सब देखते बरदास्त नही हुआ.. ओर उसने नीकरमे हाथ डालकर अपनी चुतमे उंगली घुसादी.. ओर दोनोकी चुदाइ देखते उंगली होसाने लगी.. जब उनकी बरदास्तसे बहार हो गया तब..

वो जटसे दबे पांव अपने रुममे चली गइ.. ओर सीधी बाथरुममे घुस गइ.. वही अपने नीकरमे हाथ डालके अ‍ेक उंगली अपनी चुतमे घुसा देती हे ओर आंधी आंख बंध करते जोरोसे उंगली अंदर बहार करने लगी.. उसे नही पताथाकी हस्तमैथुन कैसे करना हे.. ओर वो थोडीही देरमे कांपने लगी उनके पुरे सरीरमे अ‍ेक तेज सुरसुराहट होने लगी जैसे हजारो चीटीया उनकी चुतकी ओर दोड रहीहो.. ओर वो आंधी आंख चडाते जडते हुअ‍े परम आनंदकी अनुभुती करने लगी.. ओर आज नीलमकी जींदगीमे ये सब पहेली बार था..

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तब उनकी चुतसे अ‍ेक तेज धारका फवारा नीकल गया जो उनके पुरे नीकरको भीगो दीया.. तब नीलम पुरी तराह कांप गइ तभी उनको होंस आयाकी उन्होने क्या कीया.. तब वो खुब सरमाइ.. ओर सरमाते हुअ‍े मुस्कराते अपने नीकरको नीकालने लगी.. फीर चुतको पानीसे साफ करने लगी.. ओर फटाफट अपनी पेन्ट पहेनकर हाथमे नीकर लेकर बहार आगइ ओर नीकरको अपनी बेगमे छुपालीया.. फीर अपने बेडपे जाकर सोगइ.. आज उनकी जींदगीका ये पहेले ओर्गेजम था.. जीसे वो बेहद खुस थी..

तब बहारकी ओर लखन आज लताको बडेही जोरोसे चोद रहाथा.. तो लताभी लखनकी अ‍ैसी चुदाइसे खुस होने लगी.. लखनने उनको इतनी देरतक कभी नही चोदाथा.. ओर वो मनही मन खुस होते अपनी कमर उछाल उछालके लखनका साथ देने लगी.. आज लताको लखनसे चुदवाते लखनका अनाडी पन नही लगा.. लखन अब इस चुदाइके मामलेमे काफी अ‍ेक्सपर्ट हो गया था..

लखनकी अ‍ैसी दमदार चुदाइ देखकर आज लताभी खुस होने लगी.. ओर वो लखनसे अपनी कमर उछाल उछालके चुदवाती रही.. अबतक लताभी बीचमे अ‍ेब बार जड चुकी थी फीरभी लखन उसे चोदेही जा रहाथा.. ओर काफी धकापैनी चुदाइके बाद लखन लतासे चीपक गया तो लतानेभी लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर लखन कमरको जटका देते लताकी चुतको भरने लगा..

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जब दोनो जड गये तब लता लखनकी पीठको सहेलाती रही.. तब दोनोही पसीनेसे तरबोर हो चुके थे.. ओर लखन लताके उपरसे हट गया.. तब लता सोफेपे बेठकर अपने नीकरसे अपनी चुतको साफ करने लगी.. फीर खडी होकर अपने कपडे पहेनने लगी.. जैसेही कपडे पहेनके चली.. उनके पेर डगमगाने लगे.. ओर लताने सोफेको पकडलीया.. ओर वो लखनकी ओर आस्चर्यसे देखती रही.. क्युकी उनकी इतनी जबरदस्त चुदाइ आज तक नही हुइ थी..

लता : (धीरेसे) जानु.. आपनेतो मेरी हालत खराब करदी.. अब मे अंदर कैसे जाउगी..? क्या कोइ गोली बोली खाकरतो नही आयेथे..?

लखन : (हसते) क्यु..? मेने तो कुछभी नही खाया अ‍ैसा क्यु पुछ रही हो..

लता : (सरमाते हसते धीरेसे) लखन आपने इतनी देरतक तो मुजे कभी नही चौदा.. इसीलीये पुछ रहीथी..

तभी लखन अपनी मर्दांगीपे गर्व करते लताको अपनी गोदमे उठा लेता हे ओर धीरेसे दरवाजा खोलकर लताको अपने बेडकी ओर लेजाता हे.. तब नीलम आंख खोलके दोनोको रजाइमेसे देखती रही.. ओर लखन लताको धीरेसे बेडपे सुलाके उनके होंठ चुमने लगता हे तो लतानेभी लखनको अ‍ेक बार जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर दोनोने कीस करली.. तब लखन लताके उपर चदर डालके बहार नीकल गया ओर दरवाजा बंध करके उपर अपने रुममे चला गया.. देखातो उनके बेडपे रजीया नंगी होकर लेटी हुइ थी....

कन्टीन्यु
 
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my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ९८

तभी लखन अपनी मर्दांगीपे गर्व करते लताको अपनी गोदमे उठा लेता हे ओर धीरेसे दरवाजा खोलकर लताको अपने बेडकी ओर लेजाता हे.. तब नीलम आंख खोलके दोनोको रजाइमेसे देखती रही.. ओर लखन लताको धीरेसे बेडपे सुलाके उनके होंठ चुमने लगता हे तो लतानेभी लखनको अ‍ेक बार जोरोसे अपनी बाहोमे भरलीया.. ओर दोनोने कीस करली.. तब लखन लताके उपर चदर डालके बहार नीकल गया ओर दरवाजा बंध करके उपर अपने रुममे चला गया.. देखातो उनके बेडपे रजीया नंगी होकर लेटी हुइ थी....अब आगे

लखन अपने रुम मे जातेही रजीयाको अ‍ैसे बेडपे नंगी लेटे हुअ‍े देखतेही खुसीसे सोक्ट होगया.. ओर वो मुस्कराने लगा.. क्युकी वहा उनके बेडपे रजीया अपने सब कपडे नीकालके लेटी हुइ थी.. ओर लखनका हसते हुअ‍े इन्तजार कर रहीथी.. जब लखन लताको उनके रुममे छोडने गया तब वो दबे पांव कीचनसे नीकलकर लखनके रुममे चली गइथी.. ओर अपने कपडे नीकालकर लखनका इन्तजार कर रहीथी.. लखनने हसते हुअ‍े फटाफट अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया ओर वो जटसे बेडकी ओर चला गया..

लखन : (खुसीसे हसते) रजीया.. व्होट अ‍े सरप्राइज..? मेनेतो तुजे आज आनेको मना कीयाथा.. फीरभी..

रजीया : (लखनको हाथ पकडके अपने उपर खीचते) पतीदेव मुजे पता हे आज आप अपनी बीवीको मीलना चाहते थे.. अबतो मील लीयानां..? तो चलीये अब इस बीवीको भी खुस कर दीजीये.. में आपको छोडने वाली नही हु.. उस बीवीके चकरमे कभी इस बीवीको भुल मत जाना.. समजे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते रजीयाके उपर लेटते) तो क्या तुजे पता था मे लताको मीलने गया था..?

रजीया : (लखनके गलेमे हाथ डालते होंठ चुमते) हां.. मुजे सब पता हे आप अभी अभी मेरी सौतान यानीकी अपनी बीवीकी बजाके आये हो.. मे वही कीचनमे खडी थी.. ओर आप दोनोकी चुदाइ देख रही थी.. आजतो बेचारीकी हालत पतली करदी आपने.. हें..हें..हें.. वोभी खुस हो गइ होगी..

लखन : (गाल चुमते हसते) हां.. डार्लींग तुम बहुत डेन्जर हो.. ये सब तुम्हारी ट्रेनींगका कमाल हे.. क्या दया सोगइ हे..? देखना वो कही जागते इधर ना आजाये.. हें..हें..हें..

रजीया : (सरमाते हसते) सो गइ नही.., मेने उसे सुला दीया हे.. हें..हें..हें.. अबतो वो सुबह ही उठेगी.. हें..हें..हें..

लखन : (होंठ चुमते) डार्लींग तु बहोत डेन्जर होगइ हे.. क्या उसे नींदकी गोली पीलाकर आइ हो..?

रजीया : (लखनका लंड सहेलाते) हां.. अब मेरे इस पतीको मीलनेके लीये मुजे कुछतो करनाही पडेगा.. चलीये इस बीवीको ठंडी कर दीजीये फीर मुजे जानाभी हे.. सुबह जल्दी उठना हे..

लखन : (सरमाते होंठ चुमते) बेबी मे अभी अभी तेरी सौतनको चोदकर आया हु.. तो इतनी जल्दी..

रजीया : अरे हां.. तो क्या हुआ लाइअ‍े मे कीस कामकी हु.. अभी इसे फीरसे तैयार कर देती हु आप लेट जाइअ‍े.. मुजे सब पता हे इनको कैसे खडा करना हे.. चलीये यहा कपडे नीकालकर लेट जाइअ‍े..

तब लखन हसते हुअ‍े अपने सब कपडे नीकालकर लेट जाता हे ओर रजीया उनके पैरके बीच बैठ जाती हे फीर जुकतेही लखनका लंड अपने हाथोमे लेकर थोडी देर सहेलाती हे.. फीर अपने मुहमे लेकर चुसने लगती हे जैसे कोइ लोलीपोप चुस रही हो.. तब थोडीही देरमे लखनका लंड फीरसे खडा होने लगा.. ओर तनके जटके मारने लगा.. तब रजीया उसे मुठीमे कपडते होले होले सहेलाने लगी.. ओर अपनी जीभसे लंडको चाटने लगी..

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तब लखनका लंड तनके लोहेकी माफीक सख्त होगया.. तभी रजीया बेडपे फटाफट पीठके बल लेट गइ.. ओर लखनको खीचके अपने उपर चडा लीया.. ओर उनका लंड पकडते अपनी चुतपे घीसने लगी.. तो उनकी चुतसे पानीका रीसाव होने लगा.. ओर रजीयाने लंडको गीला करदीया फीर लंडको मुठीमे पकडके अहीस्तासे चुतके लव होलमे फसाके सेट कर दीया.. ओर लखनके गलेमे दोनो हाथ डालकर अपने तनसे चीपका लीया..

रजीया : (लखनके गलेमे हाथ डालते) लखन अब आप पहेले इसे अंदर डाल दीजीये.. फीर मे आपको कुछ बताती हु.. पहेले मुजे चोदीये.. पता नही आज आपसे चुदवानेका बहुत मन कर रहा हे.. अब आपके बीना रहा नही जाता..

लखन : (बाहोमे कसते लंड घुसाते) मेरे बीना की मेरे लंडके बीना..? हें..हें..हें..

रजीया : (सरमाते मुस्कराते) हां.. वोही.. आपके लंडके बीना.. अब डाल दीजीयेनां.. आज मुजे जीभरके चोद लीजीये.. चलीये.. जल्दी कीजीये.. आज आपका लंड चुतमे लेनेका बडा मन कर रहा हे..

लखन : अरे डार्लींग इतनी जल्दी क्या हे.. हम आरामसे करते हेना.. अबतो यहा कोइ आने वाला नही.. पहेले बता तुम मुजसे क्या बात करने वाली हो.. (कहेते जोरसे कमर दबाके पुरा लंड चुतमे घुसा देता हे)

रजीया : (कामुक आवाजमे) आह इइइइइइ... सीइइइइ.. बाबा आरामसे.. धीरे करोनां.. मे कही भागी नही जा रही.. पहेले मुजे अ‍ेक बार चोदकर ठंडी करदीजीये फीर हम आरामसे बात करेगे.. आपहीके फायदेकी बात हे हें..हें..हें..

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तब लखन हाथके बल उचा होजाता हे ओर रजीयाको पुरा लंड अंदर बहार करते जोरोसे चोदने लगता हे.. तब रजीयाभी नीचेसे कमर उछालते लखनको चुदवानेमे साथ देने लगी.. ओर सीसकारीया करती रही.. दोनोके बीच धमासान चुदाइका युध्ध होने लगा जेसे दोनोही अ‍ेक दुसरेके अंदर समा जानेकी होडमे लगे हो.. तभी रजीया लखनके गलेके हाथ डालके लखनको अपने तनसे चीपका लेती हे.. दोनोके बीच काफी देरतक धमासान धका पैनी चुदाइ होती रही..

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तो लखनभी रजीयाके गलेमे मुह डालते गलेको चुमने लगता हे ओर रजीया लखनको अपनी बाहोमे भीचते कमरको जटके देते जडने लगती हे.. तब लखनभी जोरोसे कमर हीलाते रजीयाको चोदने लगता हे.. ओर पुरा लंड रजीयाकी चुतमे घुसाते कमरको जटके मारने लगता हे.. तब दोनोके होंठ लीपलोक होजाते हे..

तभी रजीया अपने गर्भासयपे लखनका गरम विर्य महेसुस करती हे.. ओर वो लखनकी पीठ सहेलाने लगती हे.. लखन जडतेही रजीयाके सीनेपे सर रखकर ढेर होजाता हे.. फीर दोनो सांत हो जाते हे.. दोनोकी तेज सांस चलनेकी आवाज अ‍ेक दुसरे कहेसुस करते हे.. तभी कुछ देरके बाद..

रजीया : (सरमाते सरको सहेलाते) लखन.. अब हटीये.. मेरीतो अ‍ेकही बारमे हालत खराब करदी आपने.. मेरी पुरी चुत लबालब भरदी आपने.. अब आप चुदाइमे मास्टर होगये हे.. देखो बेड गंदा हो रहा हे.. अब आपभी कीतना जडते हो.. कुछ दिन अ‍ैसेही चोदते रहे तो मे अ‍ेक दिन पका प्रेगनेन्ट होजाउगी..

लखन : (होंठ चुमते) हां.. तो करले पैदा मेरा अ‍ेक बच्चा.. रजीया ये सब तुम्हारा कमाल हे.. तुमने मुजे बहुत कुछ सीखाया हे.. चुदाइके मामलेमे तुम मेरी गुरु हो.. मे तुजे कभी नही भुलुगा.. क्या मेरे साथ रहेगी..? सादी करले मुजसे.. मे तुमसे बहुत प्यार करता हु.. जींदगीभर तेरा साथ नीभाउगा.. सच केह रहा हु.. मे तुमसे सादी करना चाहता हु..

रजीया : (प्यारसे गालको चुमते) लखन.. मेतो हमेसा आपके साथ हु.. अब सादीकी क्या जरुरत हे.. बस अ‍ेक बार आपकी लताभाभीसे सादी होजाये फीर हम कुछ सोचेगे.. अबतो मुजेभी आपकी आदत होगइ हे.. अबतो आपही मेरा पती हो मेरा सहारा हो.. मे हमेंसा आपसे अ‍ैसेही चुदवाती रहुगी.. मे आपको अपना पती मान चुकी हु.. लखन आइ लव यु.. मुजे सचमे आपसे प्यार हो गया हे..

लखन : (सरको चुमते) रजु.. आइ लव यु टु.. तुम मुजे कुछ बताने वाली थी..कहोना क्या बात करनी थी..

रजीया : (होंठ चुमते) हाये.. आपके मुहसे रजु.. सुनके कीतना प्यारा लगता हे.. आप मुजे रजु कहेके ही बुलाइअ‍े.. मुजे अ‍ैसा लगता हे मेरा पती मुजे प्यारसे बुला रहा हे.. हें..हें..हें.. सुनो आपको अ‍ेक बात कहेनी थी.. लेकीन ये बात सीर्फ आप तक ही सीमीत रखना.. कीसी ओरको पता नही हे.. ओर इसमे आगे बढना होतो मुजे कहीयेगा मे इसमे आपकी मदद करुगी में हमेसा आपका साथ दुगी.. कोइ जल्दबाजी मत करना..

लखन : (गाल चुमते) अरे बाबा.. पहेले बताओतो सही बात क्या हे.. कुछ सीरीयस मेटरतो नही..?

रजीया : (हसते) अरे नही नही.. लखन भाभीके साथ वो लडकी क्या नाम हे उनका..? हां.. नीलम.. आपकी साली हेनां..? आप ओर लताभाभी होलमे चुदाइ कर रहेथेनां..? तब वो सोफेके पीछेही खडी थी.. ओर आप दोनोकी चुदाइ देख रहीथी.. सीर्फ देखही नही रहीथी.. अपनी चुतमे उंगली करते सहेला रही थी..

लखन : (चोंकते धीरेसे) क्या नीलु..? लेकीन वोतो सो गइ थी.. तो फीर वहा कैसे..? क्या तुजे पुरा यकीन हे वो नीलु ही थी..? वो तो बहुत छोटी हे.. तो इस उमरमे ये सब..

रजीया : (हसते) लखन मुजेतो वो कोइ छोटी नही दीखती.. उसनेभी जवानीके दहेलीजपे कदम रखलीया हे.. वो टीनेजर लगती हे.. होगी कोइ १६ १७ सालकी.. यानी लंड खानेके लायक हो चुकी हे.. आपको नही पता इस उमरमेही लडकी आसानीसे फस जाती हे.. वैसेभी आपकीतो साली हे.. मतलब आधी घरवाली.. समज गयेनां..? अगर इनमे आपको मेरी कोइभी मदद की जरुरत होतो मुजे बेजीजक कहेना.. ओर आपतो राजा हो.. समज गयेनां..? हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते हलते) क्या रजीया तुमभी.. तेरी भाभीको देखा हे.. मार डालेगी मुजे.. हें..हें..हें.. पहेले मे तुम दोनोसे तो ठीकसे चोदलु.. फीर आगे देखते हे.. तब मे तुजे बता दुगा.. हें..हें..हें.. नीलु.. हें..हें..हें..

रजीया : (धीरेसे हसते) जानु.. आपको नही पता.. अगर आपने उसपे हाथ नही मारातो वो कही ओर चली जायेगी.. इनसे तो अच्छा हे आपही उनका काम तमाम करदो.. ओर दीखनेमे भी कडक माल लगती हे.. खुबसुरत हे.. जवान हे.. मेने कीचनसे मेरे फोनमे सुट करलीया हे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) रजु तुम बहुत डेन्जर हो.. ठीक हे.. वो क्लीप मुजे मेरे फोनमे भेज देना.. मे देख लुंगा.. अब वो वापस आयेगी तब तुमही देखलेनां उसे.. अभी अ‍ेक दो दीनमे यही वापस सादीमे आजायेगी.. तब देखते हे..

दोनोही अ‍ैसी बात कर रहेथे.. तब लखन अभीभी रजीयाके उपर उनकी चुतमे लंड डालके पडाथा.. अब रजीया लखनको ही अपना पती मानके उनके साथ रात रातभर सोती लखनका बीस्तर गरम करती थी.. बीवीका हर फर्ज वो नीभाती थी.. लेकीन आज वो उठकर अपने कपडे पहेनकर दयाके पास चली गइ.. ओर सोगइ.. क्युकी आज लता घरपे थी तो वो कोइ रीस्क लेना नही चाहती थी..

तो दुसरी ओर आज पुरे गांवमे वासनाका खेल चल रहाथा.. गांवकी हर ओरतो ओर लडकीयो की अपनी कहानी थी.. आज जीनकी बीवी कही महीनोसे नही चुदी थी.. वोभी अपने पतीके साथ संभोग कर रही थी.. ओर गांवमे ज्यादातर लडकीया ओर ओरते अपने पतीके बजाय नाजायज संबधो मे चुदवा रही थी.. गांवमे लगभग हर घरमे अ‍ेक नाजायज रीस्ता पनप रहा था.. लेकीन अ‍ेक दुसरेको इस बारेमे कीसीको कुछ भी पता नही था.. ओर अ‍ैसा आजसे ही नही.. कइ सालोसे चल रहा हे..

हर ओरत ओर लडकीके मनमे उनके स्वप्नका अ‍ेक राजकुमार होता हे.. फीर वो सादी कीसीसे भी करले.. लेकीन वो उनकी सादीसे पहेले यातो सादीके बाद अपने मनके राजकुमारको खोजकर उनसे मीलकर ही रहेती हे.. ओर सबसे छुपकर उनको समर्पीत होकर उनसे जानायज रीस्ता बना लेती हे.. ओर उसे अपना सब कुछ सोंप देती हे.. ओर ये सब सीर्फ आजही नही.. राजा महाराके कालमेभी होता रहा हे.. आज गांवमे ओर सहेरमे सब जगाह अ‍ैसा चल रहा हे.. तो आज इस गांवमे भी अ‍ैसे कइ रीस्ते पनप रहेथे..

ओर ये सब आज काम ओर रतीकी महेरबानी से हो रहाथा.. अ‍ैसा नही थाकी आज देवायत ओर चंदाकी सुहागरातथी इसीलीये काम ओर रती पुरे गांवपे हावी थे.. उसने इसीलीये सबको अपने वसमे करलीया था ताकी आज हवेलीपे कुछ अ‍ैसा होने वाला था.. जीनकी वजहसे काम ओर रती.. खुद अपने चरमो पे थे.. ओर वो कीसीका वो रुप देखने आयेथे.. जो सब परीओ ओर अप्सराओकी जननी थी..

जीहां.. में मंजुकी बात कर रहा हु.. जो अप्सरालोकमे सबकी जननी ओर चहीती रानीथी.. ओर इस धरतीपे अ‍ेक खास मक्सदसे अपनेही अंसको जन्म देने आइ थी.. जीनकी पुर्व तैयारीके रुपमे आज अपने स्वामीकी अ‍ेक चहीती रानीको उनसे रुबरु करवाने आज खुदकी पहेचान पुनमसे करवा रहीथी..

ओर अपनी सब शक्तिया पुनमके अंदर स्थापीत करने वालीथी.. ओर ये सब बाबाके आदेशके अनुसार हो रहाथा.. तब बाजुके रुममे देवायत ओर चंदा दोनोही चुदाइमे अ‍ेक बार साथमे जडके अ‍ेक दुसरेसे प्यार कर रहेथे.. देवायत अभीभी चंदाकी चुतमे लंड डालके उनके उपर लेटा हुआथा.. ओर दोनो प्यार भरी बाते कर रहेथे..

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तब इधर मंजु विजयको दुध पीलाकर उसे जुलेमें सुला देती हे ओर पुनमको लेकर बाथरुममे चली जाती हे.. दोनोने साथमे नहालीया तब मंजुने पुनमको अ‍ैसेही बीना कपडोके साथ बहार आनेको केह दीया ओर खुदभी बीना कपडोके साथ बहार आगइ.. तब पुनमको मंजुका सब व्यवहार कुछ अजीब लगा.. दोनोही नंगी बहार आगइ तो पुनम बहुतही सरमा रहीथी.. तभी मंजु शीसेके सामने बैठकर अपना शींगार करने लगी.. तब पुनम उनको शींगार करते देखती रही.. उनकी समजमे कुछभी नही आरहा था.. की भाभी क्या करने वाली हे..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) भाभी क्या मे नाइटके कपडे पहेनलु..?

मंजुला : (हसते) नही पुनो.. मेने तुजे कहाथाना की मे तुजे सब बताउगी.. तो सुन आज मे तुजे अनुभुतीके माध्यमसे सबकुछ ज्ञात करवाउगी.. ओर तुजे आज मेरी सब शक्तिओसे अवगत करवाउगी.. ताकी आगे जाकर तुजे सब सम्हालनेमे आसानी रहे.. आज मे मेरी सब शक्तिया तुजमे स्थापीत करदुगी.. ताकी मे दुबारा जन्म लेकर आउ तब मुजे वापस मील सके.. तबतक तुजे ओर सृतीकोही सब सम्हालना हे.. तो तुजे सब पता होना जरुरी हे.. तु बैठ मे अभी आती हु.. आज तुमसे बहुत कुछ बताना हे..

पुनम : (नंगीही बेडपे बेठते) क्या..? भाभी मुजे कुछ बैचेनी जेसा अजीब लग रहा हे कही कुछ होगातो नही..?..

मंजुला : पुनो वो तु चीन्ता मत कर.. मे तुजे अभी अ‍ेक गोली देती हु.. तु उसे खालेना.. तुजे कुछ नही होगा.. सब तेरी प्रेगनेन्सीकी वजहसे हो रहा हे.. बस अभी ये बात तु कीसीसे मत कहेना.. खास करके चंदा दीदीको.. उसे भी तुजे ओर सृतीकोही सम्हालना हे.. बस अ‍ेक बार वो हमारे राजा आजाये..

पुनम : (धीरेसे) भाभी.. क्या उनकी वजह कही धिरेनतो नही..? मुजे उनकी बहुत चीन्ता होती हे..

मंजुला : नही पुनो तुम उनकी चीन्ता मत करो.. मेरे बेटेके संपर्कमे आतीही वो फीरसे ठीक होजायेगी.. तबतक तुजे ओर सृतीकोही सब सम्हालना हे.. चल बेडके बीच ठीकसे बैठजा मे जल लेकर आती हु.. फीर हम सुरु करते हे.. ओर गभराना नही.. तुजे आज परम आनंदकी अनुभुती होगी.. तु आज सब अनुभुती करेगी..

कहेते मंजु दरवाजा अच्छेसे लोक करके सभी लाइट बुजा देती हे.. फीर अ‍ेक हल्कीसी रोसनीका बल्ब जलाते अ‍ेक छोटा टेबल बेडके पास खीचलीया ओर पानीका लोटा लेकर बेटपे आगइ.. उसने पुनमको बेडके बीच नंगी बीठा दीया.. फीर खुदभी नंगी पुनमके बीलकुल सामने उनसे नजदीक सटकर बेठ गइ.. दोनोके घुटने अ‍ेक दुसरेके साथ टच करने लगे.. तब पुनम सरमाते हसते हुअ‍े सीर्फ मंजुको देखती रही.. आज शींगार करते मंजु कोइ कादेवकी मुरत लग रहीथी.. जीनका रुप अ‍ेक बार चंदा देख चुकीथी..

अब मंजुको सब ज्ञात होने लगाथा.. उनको सब वीधीया पताथी की उनको क्या करना हे.. तभी पुनमभी सरमाते मंजुकी ओर देखती रही की ये क्या कर रही हे.. तभी मंजुने हाथमे जल लीया ओर आंख बंध करके कुछ मंत्र बोलने लगी.. ओर उसने जलको पुनमके उपर छीडक दीया.. तब जलको छीडकतेही पुनम अ‍ेक बार कांपते हुअ‍े हील गइ.. उनके सरीरमे कंपन फील होने लगा.. तब मंजुने दुबारा हाथमे जल लीया ओर उसी क्रियाको दुबारा दोहराया.. तब पुरे कमरेमे गुलाबकी खुस्बु आने लगी.. पुनमको कुज अजीब फील होने लगा..

ओर पुनमकी आंख बंध होगइ.. ओर वो अनायासही मंजुके सामने हाथ जोडके बैठ गइ.. उसे अ‍ैसा फील होने लगाकी वो हवामे उड रही हे.. ओर पुनम परम आनंदकी अनुभुती करने लगी.. उनका पुरा सरीर फुलके माफीक हल्का होने लगा.. हजारो चीटीया उनके सरीरमे रेदती महेसुस करने लगी.. ओर तीसरी बार जलके छीडकतेही पुनम बेहोसी जैसी ध्यानकी हालतमे चली गइ.. वो आंख बंध करके सुन होगइ.. तब मंजुने जलके लोटेको साइडमे रख दीया..

ओर खुद आंब बंध करते दोनो हाथोसे पुनमका चहेरा थामलीया.. ओर तब ना पुनमको होस रहा ओर नाही मंजुको.. सब अनायास ही अपने आप होने लगा.. मंजु मनमे होठ फडफडाते मंत्र बोलने लगी.. ओर पुनम परम आनंदकी अनुभुती करने लगी.. जैसे वो फुलोकी माफीक हल्की होकर हवामे उड रही हो.. दोनोकी चुत हरकतमे आगइ.. चुतके दोनो होठ फडफडाते अंदर बहार होने लगे.. तभी रतीने पुनमके सरीरमे प्रवेस करलीया.. तो कामभी मंजुके अंदर चला गया.. दोनोही उतेजीत होने लगी..

जैसे दोनोकी चुतमे लंड डालकर कोइ उनकी जबरदस्त चुदाइ कर रहा हो.. वो परम आनंदकी अनुभुती करने लगी.. ओर अ‍ैसा मंजुके साथ भी होने लगा.. तब मंजुने पुनमके चहेरेपे हाथ घुमाते नीचेकी ओर लेगइ ओर पुनमके दोनो उरोजोको अपनी हथेलीमे थामलीया.. तब पुनम कांपने लगी.. फीरभी वो हीलनेकी स्थीतीमे नही थी.. तभी मंजु अ‍ेक हाथ घुमाते नीचेकी ओर लेगइ.. ओर दुसरा हाथ पुनमके सरपे रखदीया..

तभी पुनमको बेहोसीकी हालतमेही अपनी चुतपे कुछ महेसुस होने लगा.. तब मंजु नीचे हाथ लेजाते उनकी चुतपे रखदीया.. तभी मंजुकी सब शक्तिया पुनमके अंदर स्थापीत होने लगी.. तब पुनम स्वर्गकी अनुभुती करने लगी.. ओर वो अपने आपको हवामे उडते हुअ‍े देखने लगी.. वो अपनी पीठमे पंखको महेसुस करने लगी.. जैसेकी वो कोइ परी हो.. तभी उसे हवामे ही अ‍ेक कपल उडते हुअ‍े अपनी ओर आते हुअ‍े दीखने लगा.. जो दोनोको पंख लगे हुअ‍े थे.. पुनाको बादलोके बीच सब धुंधलासा दीखने लगा..

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तब उनमे से पुरुषथा वो आतेही पुनमको गले लगा लेता हे.. ओर अपनी बाहोमे भरलेता हे.. तब नीचेकी ओर पुनम ओर मंजुकी चुत जोरोसे फडफडाने लगी.. ओर गांवमे भी जीतने लोग जीस पोजीसनमे थे उसी पोजीसनमे मदहोसीकी हालतमे चले गये.. कोइ सो रहाथा तो कोइ देवायत चंदाकी तराह प्यार कर रहाथा.. सब परम आनंदकी अनुभुतीमे चले गये.. ओर जोभी पोजीसनमेथे वोही पोजीसनमे रेह गये.. तब ज्यादातर लोग अपनी मासुकाके साथ संभोग करनेमे लीप्त थे.. तो सब अ‍ैसेही संभोगकी पोजीसनमे रेह गये..

तभी बाजुके रुममे चंदाभी आंख बंध करते परम आनंदकी अनुभुतीमे चली गइ तो देवायतभी चंदाके सीनेमे सर रखते ढेर हो गयाथा.. दोनोको कुछ पता नही चलाकी ये सब क्या हो रहा हे.. लेकीन दोनोकी कमर जोरोसे हील रहीथी.. ओर दोनोही चुदाइमे लीप्त हो चुकेथे.. ओर अ‍ैसा गांवमेभी हो रहाथा.. जो भी लोग चुदाइ कर रहेथे सबका यही हालथा.. तभी पुनमकोभी वो पुरुषकी बाहोमे चुदाइकी अनुभुती होने लगी..

उसे महेसुस होने लगाकी वो पुरुषका बडा लंड उनकी चुतमे हे ओर वो परुष उसे बाहोमे भरके चोद रहा हे.. उनकी चुत जोरोसे फडफडा रहीथी.. ओर वो चुदाइकी अनुभुती करते उन स्त्रीकी ओर देखती हे.. तब वो चोंक जाती हे.. क्युकी उसी स्त्रीके चहेरेमे उसे उनकी भाभी मंजु नजर आइ जो पुरी तराह नीवस्त्र दोनोकी प्रेमलीला हसते हुअ‍े देख रहीथी..

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जीनकी दस भुजाअ‍े थी.. जो खुद रतीका अवतार लग रहीथी.. ओर ये वहीथी.. सबकी जननी देवयानी जो अ‍ेक रानी अप्सराथी.. ओर अभी धरतीपे मंजुका जन्म लेकर आइथी.. वो बहुतही कामुक ओर आकर्सक लग रहीथी.. तब पुनमने जटसे अ‍ेक नजर उन पुरुषकी ओर डाली जो अभी भी उनको अपनी बाहोमे भरके हवामे उडते उनके साथ संभोगकी अनुभुती करवा रहाथा..

तो पुनम अ‍ेक बार फीरसे चोंक गइ.. क्युकी वो अ‍ेक बहुतही खुबसुरत पुरुष था.. जो देवायतकी सकलमे दीख रहाथा.. जो अ‍ेकदम जवान ओर कामकी माफीक आकर्सक दीख रहाथा.. तब उन पुरुषने पुनमको अपनी बाहोसे अलग कीया ओर उनका हाथ पकडते उसे वो स्त्रीके पास लेगया.. तब पुनम अनायासही उनके सामने हाथ जोडके खडी रेह गइ.. ओर उस स्त्रीने हसते हुअ‍े अ‍ेक हाथ पुनमके सरपे रख दीया..

तब नीचेकी ओर पुनमको सब ज्ञात होने लगा.. जो शक्तिया बाबाने मंजुके अंदर स्थापीत कीथी ओर उस समय मंजुने जोभी अनुभुती कीथी वोही अनुभुती आज पुनम कर रहीथी.. जो शक्तिया मंजुको समजनेमे इतनी देर लगी वोही सब शक्तिया पुनमके अंदर स्थापीत होने लगी.. ओर पुनम उसी पल सब समजने लगी.. पुनमके अंदर अ‍ेकही पलमे सब शक्तिया आगइ.. उसे सब ज्ञात होने लगा.. की वो वास्तवमे कौन हे..

तभी वो पुरुष दोनो स्त्रीओका हाथ पकडते हवामे उडने लगा तब पुनम ओर मंजु दोनोही हसती हुइ उनके साथ उडने लगी.. ओर तीनोही समुद्रकी ओर जाने लगे.. तब वो दोनोका हाथ पकडते समुद्रकी गहेराइओमे ले गया.. तब पुनम ओर मंजु दोनोही परम संभोगकी अनुभुती करने लगी.. ओर उनकी चुतसे पानी नीकलने लगा.. दोनोही जडने लगी.. ओर फीर तोनोही उपर आगये.. फीर कुछ देरके बाद वापस समुद्गकी गहेराइओ मे चले गये ओर गोते लगाने लगे..

पुनम ओर मंजु जीतनी बार समुद्रकी गहेराइओमे गइ उतनी बार जडती रही.. तब देवायतसे चुदाइ करते चंदाभी जडती रही ओर गांवमेभी जीतने लोग चुदाइ कर रहेथे उनके नीचे लेटी हुइ ओरत ओर लडकीया के साथ सभी मर्दोभी जडते रहे ओर नीचे लेटी हुइ लडकी या ओरतोकी चुतको अपने विर्यसे भरते रहे.... कीसीको कुछ पता नही थाकी ये सब क्या हो रहा हे.. कोइ अपनी भाभीको तो कोइ अपनी बहेनको तो कोइ अपने भाइकी बीवीको चोद रहाथा.. तब चारु ओर वंदनाभी लेस्बीन खेल रही थी..

ओर आखीर वो पुरुष दोनोको परीलोकमे लेगया.. तब पुनमको वहा बहुत सारे चहेरे दीखनेको मीले.. तब कुछ चहेरेको देखके पुनम अ‍ेक बार फीरसे चोंक गइ.. उनमे सबका चहेरा था जो वो उसे जानती थी.. वहा उनको उनकी मां विमला उनकी दादी फीर चंदा सरला चारु वंदना भावना लता नीलम रमा रश्मी चंपा दया रजीया ओर नीशा के साथ उसने सृती ओर उनकी मां भुमीका का चहेराभी देखनेको मीला.. ओर अ‍ेक चहेरा नीर्मलाका भी देखा.. तब पुनमको समजनेमे जरासीभी देर नही लगीकी हम सब परीया हे..

पुनमको सब कुछ ज्ञात होने लगा.. वो सोचने लगी..की अगर यही सब परीया हे तो सबका जरुर उनके भाइ देवायतके साथ जीस्मानी रीस्ता होगा.. पुनमको सबसे थोडी ज्वेलेसी भी फील होने लगी.. सब चहेरेमे उनको अपनी सौतन दिखने लगी.. तब वो थोडी वीचलीत होगइ.. वो अचानक जाग गइ.. उनकी आंख खुल गइ.. ओर गभराकते चारो ओर देखने लगी.. तभी उसने खुदको अपने बेडपे पाया ओर सामने मंजु अभीभी आंख बंध करते हाथ जोडकर बेठी हुइ थी..

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ओर पुनमने घडीकी ओर नजर डालीतो सुबह ४:३० बज चुके थे.. तब मंजुने भी धीरेसे आंखे खोलदी.. ओर पुनमकी ओर देखते मुस्कराने लगी.. वो पुनमकी सब मनोदसा जान गइथी.. तब पुनम सरमके मारे पानी पानी होगइ.. ओर वो मंजुके चरणोमे जुक गइ.. आजवो मंजुको पुरी तराह पहेचान गइथी.. तब मंजुने पुनमके सरपे हाथ रख दीया.. ओर मुस्कुराते सरको सहेलाने लगी.. आज मंजुने उनकी सब शक्तिया पुनमके अंदर स्थापीत कर दीथी.. क्युकी आने वाले समयमे पुनमही उनके देवायतकी देखभाल करने वाली थी..

उनको अपने बच्चे विजयकी कोइ चीन्ता नही थी.. क्युकी वो जानतीथी की चंदा उसे अपना बच्चा समजकर उनकी देखभाल करने वाली थी.. तब विजय सीर्फ चंदाकोही मा मानकर उनके लाड प्यारमे बीगड जायेगा.. वो पढाइमे होशीयार होनेके बावजुदभी अ‍ेक अयास आदमी बन जयेगा.. उनका कारणभी सीर्फ चंदाही होगी.. क्युकी तब वोभी अपने बेटेके प्यारमे अंधी होकर उनकी हर डीमांड पुरी करती होगी.. ओर नतीजेके फल स्वरुप उनकोभी अपनी गलतीका खामयाजा भुगतना पडेगा..

तभी गांवमे भी सबको धीरे धीरे होंस आने लगा.. तब कइ लडकीया अपने भाइके नीचे तो कइ ओरत अपने देवर या जेठतो कोइ अपने ससुरके नीचे लेटी हुइ थी.. सब चुदाइ करते थकके चकनाचुर हो चुकेथे.. सभी ओरत ओर लडकीका चुदाइकी वजहसे बुरा हाल हो चुकाथा.. कीसीको हीलने तककी स्थीती नहीथी.. कीसीको कुछ समजमे नही आयाकी सब क्या हुआ.. सब पकड जानेके डरसे गभराइ हुइ थी..

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तब चंदाभी होंसमे आकर देवायतके नीचे लेटी उनकी पीठ सहेला रहीथी.. देवायत अभीभी चंदाकी चुतमे लंड डालके उनके उपर पडा था.. दोनोमेसे कीसको पताही नही थाकी वो कीतनी देरसे चुदाइ कर रहेथे..

सब अ‍ैसेही पडे रहे.. आज चुदाइके बावजुदभी सबको अ‍ेक अलगही आनंदकी अनुभुती फील हो रही थी.. तभी पुनमको अपने नीचे कुछ गीला गीला महेसुस होने लगा.. तो पुनमका ध्यान उनकी चदरपे चला गया तो वो चोंक गइ.. क्युकी आज दोनोकी चुतसे जडकर इतना पानी नीकल चुकाथा की पुरी चदर गीली हो चुकी थी.. उसने नीचेकी ओर देखातो उनकी चुतसे ओर मंजुकी चुतसे अभीभी हल्का पानी नीकल रहाथा.. ओर वो थोडी डर गइ.. ओर मंजुकी ओर प्रस्नार्थ भरी नजरोसे देखने लगी..

मंजुला : (हसते) पुनो अनुभुतीमे ये सब आम बात हे.. इसे गभरानेकी जरुरत नही हे.. हमारे स्वामी अनुभुतीमे ही हम सबको संभोगकी फीलींग्स कराते हे.. परीलोक ओर अप्सरालोकमे वोही हमारे स्वामी हे.. जो उनका अ‍ेक अंस हमारे भाइ देवु हे.. जरा सोचो.. जब उनका अंसही हम सबको इतना खुस रख सकता हे तो जब वो स्वयंम आयेगे तब हम सबका क्या होगा..? ओर तु डर क्यु गइ..? क्या वहा कीसीको देख लीया..? जो तुम विचलीत होगइ थी.. अ‍ैसे डर मत..

पुनम : (सरमाते) हां भाभी.. मेने कुछ अ‍ैसे चहेरे देखे.. जो मुजे यकीन ही नही हो रहा.. की उनकाभी रीस्ता हमारे स्वामीके साथ होगा.. यहा अभीतो हमारे भाइ हे.. तो क्या उनकाभी रीस्ता भाइके साथ रहा होगा..? भाभी मुजे कुछ अजीब लगा.. मे भाइको कीसी ओरके साथ सेर नही कर सकती.. मुजे अ‍ैसा लगाकी हमारे भाइको सब हमसे छीनकर लेजायेगी..

मंजुला : (हसते) हां पुनो.. मत भुलो हमारे माता पीताजीभी वही थे.. ये सब पीछले तीन पीढीसे हो रहा हे.. तो जाहीरसी बात हे हमारे भाइभी वोही हे.. ओर उनकातो काम ही यही हे.. उनको अपनी सब रानीओको खुस रखना पडता हे.. वरना सोचो मे तुमारा रीस्ता तुम्हारे भाइके साथ कैसे अक्सेप्ट करती..? यहा पृथ्वीपे हम सब कीसीना कीसी रीस्तोसे बंधे हे इसीलीये हमे दुख होता हे.. लेकीन वहातो तुमने जीतनेभी चहेरे देखे सब उनकी रानीया हे.. तो यहा वो उनके स्वामीसे कैसे दुर रेह सकती हे..

पुनम : (सरमाते हसते) भाभी.. तो क्या अभी यहा भी भाइका सबके साथ रीलेशन हे.. आइ मीन.. आप समज गइनां..? क्युकी कुछ चहेरे.. मुजेतो अभीभी यकीन नही हो रहा.. क्या आप उनके बारेमे भी सुरुसेही सब जानती थी..?

मंजुला : (हसते) नही.. पहेले नइ जानतीथी.. लेकीन मुजे सब ज्ञात होने लगा तब मे सबके बारेमे जान चुकी हु.. अ‍ेक पलतो मुजेभी सोक्ट लगा.. लेकीन दुसरे ही पल मेरी समजमे आयाकी हम सब परीया ओर अप्सराये हे.. ओर यही सब मेरा अंस हे.. तो मे अपनी बच्चीओको हमारे स्वामीसे कैसे दुर रख सकती हु..

पुनम : (सरमाते हसते) हंम.. भाभी.. सीर्फ यहा हम दोनोही उनकी बहेन नही हे.. यहातो ओरभी हे.. जो मे आपको बता नही सकती.. कुछ रीस्ते तो अ‍ैसे हे जो मन उसे स्वीकार करनेको तैयार नही हे.. क्या आपको कुछ अजीब नही लगता..? आप सबके रीलेशन हमारे भाइके साथ कैसे अ‍ेक्सेप्ट कर सकती हे..?

मंजुला : (हसते) पुनो.. हमारी तराह सब अपनी भुमीका नीभाने इधर धरतीपे आइ हे.. जैसे हम दोनो उनकी बहेन बनके आइ हे.. तो बाकीकी सभी ओरतेभी कोइना कोइ भुमीका नीभाने आइ हे.. तो हम उसे अपने स्वामीसे प्यार करने कैसे मना कर सकती हे.. ओर तुम्हेतो आगे जाकर अ‍ैसे कइ रीस्तोको फेइस करना पडेगा.. बस हमे यही खयाल रखना हे की कीसी रीस्तेको सबके सामने उजागर नही करना.. सब अपने आप सामने आजायेगा तब हमे सब रीस्तेको सहजतासे स्वीकार करलेना हे.. समजी.. (हसते) क्या अबभी तुम मुजे भाभी कहेगी..?

पुनम : (सरमाते हसते) हां.. मुजे आपको बडी दीदीके बजाये भाभी कहेनेमे बहुत अच्छा लगता हे.. ओर मे बीस्तरमेभी भाइसे बहेन बनकर ही रीलेशनमे आती हु.. ओर मुजे ये अच्छाभी लगता हे.. भाभी.. क्या हमारी दयाभी हमारी बहेन..

मंजुला : हां पुनो.. उन बेचारीको तो पता भी नही हे.. रामुकाका हमारे पीताके खास दोस्त थे.. ओर हमारे साथ कइ बरसोसे जुडे हुअ‍े हे.. उनको कोइ सन्तान नही हो रहाथा.. ओर उनकी बीवी हमारे बापुके साथ रीलेशनमे आगइ.. दया उन्हीकी संतान हे.. हमारी बहेन.. इसीलीये तो मेने उनको हमारी नौकरानी नही समजा.. ओर इस बातका रामुकाकाको भी नही पता.. ओर.. हमारी सृती..भी.. हमारी लताभी..

पुनम : (आस्चर्यसे हसते) क्या सृतीदीदी ओर लताभाभी भी..? भाभी.. अ‍ेक बात पुछु..? हमारे बापुतो भुमी आंटीको राखी बांधते थेनां..? ओर भुमी आटीभी उनको अपना बेस्ट भाइ मानती थी.. तो फीर वोभी.. बापुके साथ कैसे रीलेशनमे आगइ..? क्या इस बातका कीसीको पता हे..?

मंजुला : (हसते) नही पुनो.. ओर तुमभी ध्यान रखना.. इस बातका आज तक कीसीको पता नही हे.. जो कोइ कोइ होता हेना तेरी तराह.. हें..हें..हें.. तो क्या तुमभी अपने भाइको राखी नही बंधती..? ओर तुमने राखीके तोहफे के बदले तो हमारे भाइका प्यार मांगलीया.. क्या ये सच हेनां..?

पुनम : (सरमाते नजर जुकाते मुस्कराते) जी भाभी.. मे भाइसे सुरुसे पसंद करती थी.. मेने उनको अपना भाइ मानाही नही.. वो सुरुसेही मेरे सपनोका राजकुमार हे..

मंजुला : (हसते) हां बस.. भुमी आंटीनेभी वोही कीया.. अ‍ेक दिन राखीके तोहफे मे उनकी गोद भरनेको केह दीया.. क्युकी उनकी भी गोदभराइ नही हो रहीथी.. ओर हमारे बापुके लाख समजानेके बावजुद मजबुरन उसे सब करना पडा.. क्युकी बाबाने भुमी बुआसे सब सचाइ बता दीथी.. तो हमारे बापुजीको भुमीबुआके साथ रीलेशनमे आना पडा..

पुनम : (हसते) अच्छा ये सीर्फ बच्चे तक ही सीमीत था.. ओर कुछ नही..

मंजुला : (हसते) नही पुनो.. वोभी कोलेजमे थी तब हमारे बापुको पसंद करतीथी.. लेकीन हमारे बापु मेरी मम्मीको प्यार करते थे.. हमारे बापुभी कामके अंस थे.. ओर हम सब परीया हे.. तो अ‍ेक बारमे कैसे संतोस मान लेती.. वोभी हमारी तराह हे.. बस अ‍ेक बार उनका स्वाद चख लीया.. फीरतो ये सीलसीला चलता रहा..

भुमी आंटी ओर हमारे बापुने कीसीको अपने रीस्तेके बारेमे आज तक पता चलने नही दीया.. जब नरेश अंकल गुजर गये तबतो दोनोको खुली छुट मील गइ थी.. दोनोने सबसे छुपकर सादी करली.. अकेलेमे दोनो ही मीया बीवीकी तराह रहेते.. ओर दुनीयाके सामने भाइ बहेन बनकर खुब प्यार करते रहे.. बीलकुल तेरी तराह.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) भाभी तो क्या आपको ये सब जानकर दुख नही होता..? आइ मीन आपकी मम्मी भी..

मंजुला : पुनो.. मे तेरा इसारा समज गइकी तु क्या कहेना चाहती हे.. अ‍ेक दो दिनमे तुजेभी सब ज्ञात होने लगेगा.. तब तु सबके बारेमे जान जायेगी.. तब आजकी तराह विचलीत मत होना.. तुजे अ‍ैसे कइ रीस्ते दिखनेको मीलेगे.. बस तुजे कीसीपे ज्यादा ध्यान नही देना.. तुम सीर्फ हमारे भाइको प्यार देती रहेना.. सायद बाबाने इसीलीये तेरा मौसीका ओर सृतीका चुनाव कीया हे..

पुनम : (हसते) भाभी मे आपकी तराह स्ट्रोंग नही हु.. हें..हें..हें.. मे भाइको दुसरी ओरतके साथ इमेजींग करती हुतो बुरा लगता हे..

मंजुला : (हसते) पुनो तुजे स्ट्रोंग बनना पडेगा.. जबभी तेरे सामने हमारे पतीके अ‍ैसे रीस्ते सामने आये तब यही सोचनाकी हम सब परीया ओर अप्सराये हे ओर सभी हमारे पतीकी रानीया हे.. बस.. तुजे दुख नही होगा.. आज हमारे बापु इस दुनीयामे नही हे.. तो उनकी जगह हमारे भाइ देवुने लेली हे.. हम सभी परीया ओर अप्सराये आज हमारे देवुके साथ जुडी हुइ हे..

पुनम : (सरमाते मुस्कुराते) तो भाभी.. आप केह रहीथीकी हम सब परीया ओर अप्सराये हे तो क्या इस वक्तभी वो सब हमारे भाइके साथ रीलेशनमे.. आइ मीन आप समज गइनां मे क्या कहेना चाहती हु..

मंजुला : (हसते) हां पुनो तुम जो सोच रहीहो अ‍ैसाही हे.. लेकीन हमे कीसीके रीस्तेको उजागर नही करना.. ओर जोभी हो रहा हे या होने वाला हे उसे होने देना हे.. फीर चाहे मेरी मम्मी हो या सरलाचाची या भुमीका बुआ.. तु सब समज गइनां..? सभी अपने तनकी प्यास अपने स्वामीसे फीजीकल होते बुजाती हे.. सब अपने स्वामीके प्यारमे पागल होजाती हे..

पुनम : (सरमाते हसते) हां भाभी.. समज गइ.. ओर मुजे अब कोइ अ‍ेतराजभी नही हे.. भाभी नीचे बहुत गीला लग रहा हे.. पहेले हम चदर चेन्ज करले..? फीर मुजे आपसे कुछ ओरभी जानना हे.. मेरे मनमे कइ सवाल आ रहे हे..

मंजुला : (हसते) हां चल उतर नीचे.. सुबह होनेको आइ हे.. सब आजही जानलेगी क्या..? हम अ‍ेक दो घंटा आराम करले फीर तुजे सुबह सब बताउगी.. लेकीन तब सीर्फ हम दोनोही होगी.. तभी मे तुजे बताउगी.. फीरतो तुम स्वयंम सब जानलेगी.. चल आजा..

कहेते दोनोही बेडसे उतर गइ फीर पुनमने चदरको चेन्ज करलीया ओर गीली चदर लेकर दोनोही बाथरुममे घुस गइ.. तब पुनमने चदरको वोसींगमे डाल दीया ओर दोनो नहाने लगी.. तब अचानक मंजु पुनमको लेकर बाथटबमे बैठ गइ ओर पानी चालु करदीया.. तब पुनम खुब सरमाने लगी.. ओर मंजु पैर फैलाकर पुनमके सामने बैठ गइ ओर पुनमकी कमरमे हाथ डालकर उसे अपनी ओर खीचलीया ओर पुनमके चहेरेको हाथमे थाम लीया.. फीर उनकी आंखोमे कामुक नजरोसे देखती रही..

पुनम : (अ‍ेकदा सर्मसार होते) भाभी.. प्लीज.. क्या कर रही हो.. मुजे नीचे कुछ हो रहा हे..

मंजुला : (सरमाते मुस्कराते) पुनो मे सीर्फ तेरी भाभी ही नही हु.. तेरी बडी बहेन भी हु.. मेरा भावुके साथ मौसीके साथ सृतीके साथ सबके साथ ये रीस्ता हे.. ओर आज मुजे मेरी इस बहेनपेभी बहुत प्यार आ रहा हे.. आज मेने मेरा सबकुछ तुजे सोंप दीया हे.. मेरा देवु भी.. तो आज मुजे मत रोको.. क्या वंदनाके साथभी तेरा रीस्ता हेनां..?

कहेते मंजु पुनमके चहेरेकी ओर अपना चहेरा लेजाती हे.. तब पुनम सरमके मारे अपनी आंख बंध कर लेती हे.. आज वो अपनी भाभीके साथ पहेलीबार अ‍ैसे रीस्तेमे आ रहीथी.. तभी उसे अपने होठोपे मंजुके होंठ महेसुस होने लगे.. जो मंजु उसे हल्कासा चुम रहीथी.. तब पुनमभी उतेजीत होने लगी.. ओर परंम आनंदकी अनुभुती करने लगी.. सब सरम त्यागकर वो मंजुका साथ देने लगी.. मंजुके साथ वो आज अ‍ेक अलगही कसीस फील कर रहीथी.. तब उसे क्या पताथाकी मंजु उनके अंदर कीसके माध्यमसे क्या ज्ञान दे रहीहे..

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दोनोही अ‍ेक दुसरेके होंठोके रसको पीने लगी.. तभी मंजुने अपने मुहके रसको पुनमके मुहमे उडेल दीया ओर पुनम उसे अपनी हलकमे उतारकर पी गइ.. तब वो अ‍ेकदम उतेजीत होगइ.. वासनाकी आगमे उनका तन कांपने लगा.. तभी दोनोही अ‍ेक दुसरेकी चुतको आपसमे रगडते अ‍ेक दुसरेके उरोजोके साथ खेलने लगी..

कुछ ही देरमे दोनोही जोरोसे सीसकारीया करते अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखते अ‍ेक दुसरेकी चुतमे उंगली डालकर जोरोसे हीलाने लगी.. दोनोही पुरी तराह कामुक हो चुकी थी.. तभी अचानक ही दोनो अ‍ेक दुसरेके तनसे चीपक गइ ओर दोनोने अपने होंठ लीपलोक करलीये..

फीर अपनी कमरको साथमे जटके देते साथमे जडने लगी.. तब दोनोने अपने होंठ छोड दीये.. फीर दोनो अ‍ेक दुसरेकी आंओमे देखती रही.. ओर मंजु पुनमकी ओर देखते कातील स्माइल करते हसने लगी.. तो पुनमभी सरमके मारे पानीपानी होते मुस्कराने लगी.. तभी पुनमको कुछ अजीब फील होने लगा ओर उनकी बैचैनी बढ गइ.. उसे उल्टी जैसा होने लगा.. तो वो जटसे टबसे बहार नीकल गइ.. ओर गेन्डीपे जाकर व्होमीट करने लगी.. तब मंजुने उनकी जटसे बाहर आते पुनमकी पीठको सहेलाया ओर पुनमको उल्टी होगइ..

पुनमने मुहको साफ करलीया.. ओर मंजुकी ओर देखने लगी.. तब मंजुने खुसीसे मुस्कराते पुनमको अपनी बाहोमे भरलीया.. फीर मंजुने अलग होकर पुनमके चहेरेको अपनी दोनो हथेलीमे थामलीया ओर उनकी आंखोमे देखकर मुस्कुराते हां मे सर हीलाने लगी.. तो पुनम खुसीके मारे फीरसे मंजुके गले लग गइ.. फीर दोनोही फटाफट नहाकर बहार आगइ.. तब मंजुने अपने पर्समेसे अ‍ेक गोली नीकालकर पुनमको खीलादी.. ओर अपने अपने नाइट गाउन पहेनकर बेडपे अ‍ेक दुसरेको चीपकर सोने लगी.. तब पुनमने सरमाते कहा..

मंजुला : पुनो.. अभी कीसीको ये उल्टीके बारेमे मत बताना.. ये प्रेगनन्सीकी वजहसे उल्टी हुइ हे.. हमारे भाइने मेरी तराह तुजेभी प्रेगनेन्ट करदीया हे.. ठीक नौ महिनेके बाद तु हमारे भाइकी बच्चीको जन्म देगी.. जो हमारी तराह परी होगी..

पुनम : (सरमाते हसते) जी. भाभी.. आज मे बहुत खुस हु.. भाभी आपको अचानक क्या होगया.. जो अ‍ैसा कीया.. मुजेतो आपके साथ बहुत मजा आया..

मंजुला : (हसते पुनमके बालको सहेलाते) पुनो.. मुजे हमारे भाइसे चुदाइकी आदत पड गइ हे.. मे उनसे चुदाइके बगैर नही रेह सकती.. इसीलये मे सृतीके साथ या चंदामौसीके साथ अ‍ैसा करती हु.. क्या तुम अब हमारे भाइके बगैर रेह सकती हो..?

पुनम : (सरमाते हसते) नही भाभी.. मेभी नही रेह सकती.. तभीतो में कभी कभी वंदनाके साथ अ‍ैसा करती हु.. क्या.. आपसे अ‍ेक बात पुछु..? जब भाइ कीसी ओरके साथ करते हे तब आपको बुरा नही लगता..?

मंजुला : (हसते) नही.. क्युकी मुजे पता हे मेरा देवु मुजे बहोत प्यार करता हे.. ओर सामको मेरे पासही लोटकर आयेगा.. आगे जाकर तुजेही हमारे देवुको मेरी तराह सम्हालना होगा.. ओर अबतो मे सबको पहेचान गइ हु.. अबतो मुजेभी सब पता चल गया हे की उनकातो कामही यही हे.. पुनो.. देवुके साथ जीनका भी रीलेशन हे वो सभी हमारी तराह परीया हे.. आगे जाकर तुमको बहुत कुछ देखना हे.. ओर सबको सम्हालना हे.. तु मेरी स्ट्रोंग बेटी हे.. ओर हमाराभी कर्तव्य हे की हम हमारे स्वामीके सभी अंसको खुस रखे..

पुनम : (अचानक मंजुकी ओर आस्चर्यसे देखते) सभी अंसोको खुस रखे मतलब..?

मंजुला : पुनो तु अभी इतनी परीपकव नही हुइ हे की सब बात समज सके.. तुजे धीरे धीरे करते सब ज्ञात होजायेगा.. तब तु सबकुछ समज जायेगी..

पुनम : (हसते) भाभी.. क्या वाकइ हम सब आपकी संतान हे..?

मंजुला : हां पुनो.. वास्तवमे हमारे बापुजी उनके बापुजी हमारा देवु तुम सब मेरी ही संतान हो.. हमारे स्वामीकी सीर्फ कुछही रानीया हे.. बाकी सब उन्हीका अंस हे.. जबभी हमे धरतीपे आनाहो तब मुजेही हमारे स्वामीके अंसको जन्म देके उनके साथही मुजे सादी करनी पडती हे.. ओर उनकेही बच्चे पैदा करना होता हे..

पुनम : (हसते) भाभी येतो बहुतही अटपटा हे.. मेरी तो कुछ समजमेही नही आरहा.. बहुत बाते हे जो मुजे आपसे जाननी हे.. कुछ चहेरे मेने देखे जो उनके बारेमे सब जानना हे..

मंजुला : (होठोपे कीस करते) मुजे पता हे तुम कीसके बारेमे बात करना चाहती हे.. अब बहुत देर होगइ हे कुछ आराम करले..? तुजे सब कुछ कल बताउगी.. मुजे पता हे तुजे कीसके बारेमे जानना हे.. चल सोजा..

तब दोनोही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे चीपकते सो जाती हे.. तब बाजुके रुममे चंदाभी पुरी रात देवायतके नीचे लेटकर चुदवाते थककर चकनाचुर हो चुकीथी.. वो देवायतके बालो ओर पीठ सहेलाती कब नींदकी आगोसमे चली गइ उनको पताही नही चला.. तब देवायतभी अभी तक उनकी चुतमे लंड डालके चंदाके सीनेपे सर रखके सो चुकाथा.. दोनो अनुभुतीमे पुरी रात चुदाइ करते रहे.. जीनकी वजहसे दोनोही थकके सो चुकेथे.. तब गांवमेभी जब सबको होंस आया तब सब फटाफट अपनी जगाह जाकर सोने लगे.. तब ओरते ओर लडकीयाभी महा मुस्कीलसे चलके अपने रुममे जाकर सोगइ....

कन्टीन्यु
 
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