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- Dec 5, 2013
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मधु और आरती अब परीक्षा की तैयारी में ध्यान दे रही थी। एग्जाम नजदीक था। राजेश खुद की तैयारी करने के साथ साथ दोनो की मदद भी कर रहा था।
आखिर वह दिन आ ही गया जब प्राथमिक शिक्षा में डिप्लोम के लिए प्रवेश परीक्षा होना था।
मधु और आरती को परीक्षा देने। धरम पुर जाना था।
परीक्षा का समय सुबह 10बजे से 1बजे था।
राजेश उन दोनों को अपने बाइक में बिठाकर सुबह 8बजे ही सूरज पुर से धरम पुर के लिए निकल गया।
वे आधा घंटा पहले ही परीक्षा केंद्र पहुंच गए।
सूचना फलक पर पता किए की कोन से कमरा में उनका रोल नंबर लिखा हुआ है।
घंटी बजते ही मधु आरती दोनों परीक्षा हाल में चले गए।
राजेश परीक्षा केंद्र के सामने गार्डन था, वहा जाकर पेड़ के नीचे बैठ गया। और अपना तैयारी करने लगा।
दोपहर 1बजे मधु और आरती एग्जाम सेंटर से बाहर आए। दोनों के चेहरे पर मुस्कान थी।
दोनों राजेश के पास पहुंचे।
राजेश _कैसा गया तुम दोनों का एग्जाम?
आरती _बहुत अच्छा भईया।
राजेश _और मधु तुम्हारा।
मधु _मेरा भी बहुत अछा गया है भईया।
राजेश _ये तो बडी अछी बात है।
आरती _भईया भूख लगी है, चलो न किसी होटल या ढाबे पर जाकर भोजन करते है।
राजेश _भूख तो मुझे भी लगीं है। चलो किसी अच्छे से ढाबे में चलते हैं।
तीनो बाइक से ढाबे पे जा रहे थे की रास्ते में आरती की नजर पोस्टर पर पढ़ी।
आरती _भईया ये तो टाकीज है न ।
राजेश _हा,
आरती _भईया, मैंने अब तक कभी टाकीज में मूवी नही देखी है। चलो टाकीज में मूवी देखते हैं।
मधु _राजेश भईया, आरती ठीक कह रही है मैंने भी कभी टाकीज में मूवी नही देखी है, चलो न चलते है।
राजेश _तुम दोनों की इच्छा है तो ठीक है, पर मूवी 2बजे शुरू होगी, चलो पहले ढाबे में जाकर भोजन कर लेते हैं।
राजेश ने दोनो को एक अच्छे से ढाबे में ले गया।
आरती और मधु से पूछकर उनका पसंदीदा भोजन आर्डर किया।
तीनो भोजन किए।
भोजन तीनो को बहुत पसंद आया।
भोजन करने के बाद तीनों टाकीज पहुंचे।
रानी मुखर्जी की मर्दानी मूवी लगीं थी।
आरती _भईया ये हीरोइन तो रानी मुखर्जी है न।
राजेश _हा तुमने सही पहचाना।
राजेश ने तीन बालकनी का तीन टिकट लिया।
और तीनो टाकीज के अन्दर गए।
जब तीनो बालकनी में गए, तो वहां कोई नहीं था।
मधु _भईया यहां तो कोई दर्शक ही नहीं है।
राजेश _शायद लोगो को मूवी पसंद नही आ रही है।
राजेश ने बालकनी से नीचे झांका नीचे काफी कम दर्शक बैठे थे।
कुछ देर बाद एक लड़का और लड़की बालकनी में आए शायद दोनों प्रेमी युगल थे।
वो दोनों कोने वाले सीट पर बैठ गए।
मूवी चालू हो गई।
हाल का लाइट ऑफ कर दिया गया।
पूरे सिनेमा हाल में अंधेरा छा गया।
आरती _भईया हाल में तो पूरा अंधेरा छा गया, मुझे तो डर लग रहा है।
राजेश _अरे मै हूं न फिर डरने की जरूरत नहीं मूवी पे ध्यान दो।
पहले मधु बैठी थी, फिर आरती उसके बाद राजेश।
तीनो मूवी देखने लगे।
कुछ देर बाद मधु को कुछ आवाजे सुनाई पड़ा, उसने कोने पर बैठे लड़का और लड़की की ओर देखा।
बीच बीच में पर्दे की रोशनी तेज होने पर मधु ने जो देखी उससे वह दंग रह गई।
लड़का ने लड़की को अपने गोद में बिठा लिया था।
और उसकी चुचियों से खेल रहा था।
लड़की सिसक रही थी।
मधु _ने आरती के कानो में फुसफुसाई। आरती उधर देखो, क्या कर रहे हैं दोनों लड़का और लड़की।
आरती ने भी गौर से उस ओर देखा।
जब स्क्रीन से तेज रोशनी आने पर जो उसने देखा, वह भी दंग रह गई।
मधु _ये दोनों कितने बेशर्म है, इन्हे कोई शर्म नही।
आरती _सिनेमा हाल में ये सब भी होता है। मैंने कभी सोंची ही नहीं थी।
राजेश _क्या बात है? तुम लोगो का ध्यान मूवी पर क्यू नही?
आरती _भईया उधर देखो, उधर, दोनों क्या कर रहे है।
राजेश ने _कोने में बैठे लड़का और लड़की की ओर देखा।
राजेश _ये लोग वही कर रहे है जो करने आए है। तुम लोग उस तरफ ध्यान मत दो, मूवी पर ध्यान दो।
आरती _भईया यहां ये सब भी होता है ।
राजेश _ये लोग मूवी देखने के बहाने मजा करने आए हैं। तुम लोग उस ओर ध्यान मत दो।
राजेश मूवी देखने लगा।
इधर मधु और आरती का ध्यान मूवी पर कम लड़का और लड़की पर ज्यादा था।
कुछ देर बाद,,,
मधु _आरती, क्यू न हम भी मजा करे,, फुसफुसाते हुए बोली।
आरती _मै समझी नहीं।
मधु _जो ये दोनों कर रहें है,,,
हम भी,,
आरती _पर कैसे?
मधु _तू, राजेश भईया के बाजू वाले सीट पर चली जा, मै तेरी सीट पर बैठती हूं।
फिर दोनों राजेश भईया को गरम करेंगे। अपने हाथ और मुंह से।
आरती _कही भईया भड़क न जाए,,
मधु _उसने कहा था न परीक्षा तक कुछ नहीं हमने उसका कहना माना,अब तो परीक्षा हो गई है। अब भईया को हमारा कहना मानना होगा।
आरती _ठीक है।
आरती अपने सीट से उठ कर राजेश के बाजू दूसरी सीट पर बैठ गई।
मधु आरती के सीट पर बैठ गई। राजेश बीच में बैठा था। आजू बाजू दोनो।
राजेश _तुम दोनो सीट क्यू चेंज कर रही।
मधु _भईया मेरी सीट ठीक नहीं है। इसकी फोम बैठ गई है।
कुछ देर आरती और मधु दोनों मूवी देखने का नाटक करने लगी उसके बाद वे अपने एक एक हाथ राजेश के पर रख दिए।
राजेश के जांग को सहलाने लगीं।
राजेश _ये क्या कर रहे हो तुम दोनों।
आरती _कुछ नही, मूवी में तो मजा नही आ रहा इसलिए हमने भी ये सोचा कि क्यूं न हम भी उन लड़का लड़की की तरह मजा करे।
राजेश _नही नही ये ठीक नहीं है।
मूवी अच्छी नहीं लग रही तो चलो घर चलते है।
मधु _भईया अब तो मजे करके ही घर जायेंगे।
आरती ने राजेश की ओंठ को अपने मुंह में भर कर चूसना शुरु कर दी।
इधर मधु ने राजेश की पैंट का चैन खीच कर लंद बाहर निकाल कर मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी।
धीरे धीरे राजेश भी उत्तेजित होने लगा।
उसका लंद मधु के मुंह की रगड़ से शख्त हो गया।
मधु अपनी पेंटी निकाल दी और अपनी बैग में डाल दी।
फिर राजेश के लंद को पकड़ कर उसे अपनी योनि में सेट की और बैठ गई। सामने वाली कुर्सी को पकड़ कर उठक बैठक करना शुरू कर दी।
लंद लंद boor में अन्दर बाहर होने लगा।
मधु को बहुत मजा आने लगा, वह कुछ देर में ही झड़ने लगी।
वह उछलना बंद कर सुस्ताने लगी।
अब आरती ने अपनी पेंटी उतार दी और उसे राजेश के मुंह में ठूंस दी।
आरती _मधु, अब उठो भी, हो गया न तुम्हारा, अब मुझे बैठने दे।
मधु राजेश के लंद से उठ गई। राजेश का लंद मधु की boor का पानी पीकर और लंबा मोटा हो गया था।
आरती ने राजेश का लंद पकड़ कर अपनी chut में सेट कर बैठ गई।
फिर लंद पर उछलने लगी।
लंद आरती की योनि में पूरी गहराई नाप रहा था।
आरती को बहुत मजा आने लगा। कुछ देर में वह भी झड़ने लगी।
इधर मधु फिर से गर्म हो चुकी थी।
मधु _आरती तुम्हारा हो गया न अब हटो।
आरती राजेश के गोद से हट गई।
अब मधु राजेश की ओर मुंह कर उसके लंद को chut में डाल कर बैठ गई।
राजेश के मुंह से पेंटी निकाल, उसके ओंठ को मुंह में भर कर चूसते हुए उछल उछल कर चुदाने लगी।
उसे फिर से बहुत मजा आने लगा।
इधर राजेश को भी मजा आने लगा।
वह मधु की कमर पकड़ कर अपने लंद पर पटकने लगा।
कुछ देर में ही मधु फिर से झड़ने लगी।
मधु लंद से उठी तो आरती लंद पर बैठ गई। और तब तक चुदती रही जब तक फिर से वह झड़ ना गई।
इंटर वेल होने वाला था।
राजेश _लाइट ऑन होने वाला है, चलो जल्दी अपने कपडे ठीक करो, तुम दोनों और तरीके से बैठ जाओ, अपनी कुर्सी पर ।
तीनो अपने कपडे ठीक किए।
कुछ देर में इंटरवेल huwa, हाल की लाइट ऑन हो गया।
आरती _भईया मूवी में मजा नहीं आ रहा चलो मार्केट चलते है, हमे कुछ जरूरत की चीजे खरीदनी है।
तीनो सिनेमा हाल से निकल कर मार्केट आ गए।
मधु और और आरती दोनों अपनी जरूरत की समान खरीदी।
उसके बाद तीनों घर के लिए निकल पड़े।
आरती _मधु, माधूरी मैम हमे अपने घर आने के लिए आमंत्रित करती है क्यू ना आज हम उनके घर चलें।
मधु _हा, कुछ समय रुक कर निकल जायेंगे।
अभी समय क्या huwa है?
आरती अपनी मोबाइल पर समय देखी। साढ़े पांच huwa है।
राजेश _देखो, हमे अभी घर चलना चाहिए फिर कभी आ जाना, माधूरी मैम का घर।
आरती _भईया, अब हम साथ कब आयेंगे, क्या पता चलो ना, मैम का घर चलते है।
मधु _हां भईया चलो ना।
राजेश _तुम लोग बडी जिद्दी हो,,,
राजेश गाड़ी को माधुरी के घर की ओर मोड़ दिया।
जब वे घर पहुंचे।
माधूरी ने दरवाजा खोला,,
राजेश _नमस्ते मैम।
माधूरी _अरे तुम लोग, अचानक,,, तुम लोगो का तो आज एग्जाम था न।
आरती _, मैम हम एग्जाम देकर घर जा रहें थे की हमने सोचा क्यूं ना हम मैम का घर चलें हम उनका घर भी देख लेंगे।
राजेश _ये दोनों बडी जिद्दी है, मैना कहा फिर कभी आ जाना, शाम हो गई है, पर माने नही, मुझे मजबूरी में लाना पड़ा।
माधूरी _अरे अच्छा किए, आ गए, पता नही कब फिर तुम लोगो को इकट्ठा आने का मौका मिले।
मुझे बड़ी खुशी हुई, आओ अन्दर आओ।
सभी ड्राइंग रूम में बैठे।
माधुरी _देखो जी कौन आए है।
माधूरी का पति मनोज बेडरूम से बाहर आया।
मनोज _कोन है भई।
माधूरी _ये राजेश है।
राजेश _नमस्ते सर।
मनोज _अच्छा तुम ही राजेश हो, भई तुम्हारी बडी तारीफ सुनी है। अच्छा huwa आज मुलाकात भी हो गया।
माधूरी _ये मधु और ये आरती है, मेरे स्कूल में पढ़ाती है।
मधु, आरती _नमस्ते सर।
मनोज _नमस्ते, नमस्ते।
आप लोगो से मिलकर बडी खुशी हुई।
माधूरी, मधु आरती सभी बातचीत करने लगे।
मनोज _भई बाते ही करते रहोगे या मेहमानों को चाय नाश्ता भी कराओगे।
माधूरी _ओ हो मै तो बातो में भूल ही गई।
आरती _मैम रहने दो न, आप क्यूं कष्ट उठा रही, हम बना देते है, हमे किचन दिखा दो।
आरती मधु और माधुरी तीनों किचन में चले गए।
मनोज _राजेश, माधूरी बता रही थी की तुम आईएएस की तैयारी कर रहे हो, मैन एग्जाम क्लियर कर चुके हो, अब इंटर व्यू की तैयारी कर रहे हो।
राजेश _हां सर, कुछ दिनों बाद इंटर व्यू होना है। तैयारी तो करनी पड़ेगी।
मनोज _भाई, तुम अफसर बन जाओ ge तो हमे भी बडी खुशी होगी।
राजेश और मनोज बात चीत ही कर रहे थे कि माधुरी दोनों के लिए नाश्ता ले आई।
मनोज _लो भाई राजेश गरम गरम प्याज पकोड़ा खाओ।
माधूरी तो बहुत अच्छा पकोड़ा बनाती है।
राजेश ने पकोड़ा टेस्ट किया।
राजेश _सच में पकोड़ा बहुत अच्छा बना है।
कुछ देर बाद माधुरी, चाय लेकर आई।
मनोज और राजेश चाय और पकोड़ा का आनंद लेने लगे।
मधु और आरती कीचन में ही नाश्ता करने लगीं।
माधूरी _, वैसे तुम दोनों का एग्जाम तो 10से 1बजे तक था न, फिर आने में शाम कैसे हो गई।
क्या क्या किए धरमपुर में।
मधु _मैम, एग्जाम होने के बाद ढाबे में खाना खाए।
हमने कभी टाकीज में मूवी नही देखी थी न तो भईया को बोले टाकीज में मूवी दिखाने, भईया हमे टाकीज ले गया।
माधूरी _अच्छा अच्छा, वैसे कोन सी मूवी लगीं है टाकीज में।
आरती _वो रानी मुखर्जी की मर्दानी।
माधूरी _मूवी देखने में तो बड़ा मजा आया होगा।
मधु और आरती दोनों एक दूसरे का मुंह देखने लगे।
माधूरी _तुम दोनों एक दूसरे का मुंह क्यू देख रहे।
आरती _मैम अब आपको क्या बताए, हमे तो बताने में ही शर्म आ रही है।
माधूरी _क्यू ऐसा क्या हो गया वहां।
मधु _मैम अब क्या बताए, जब हम सिनेमा हाल में गए तो वहां तो कोई दर्शक था ही नहीं।
भइया ने बालकनी का टिकट लिया था।
कुछ देर बाद एक लड़का और लड़की आए, दोनों कोने में जाकर बैठ गए।
माधूरी _फिर, फिर क्या huwa?
आरती _मूवी चालू होते ही, सिनेमा हाल में अंधेरा छा गया।
माधूरी _वो तो होता ही है, मूवी चालू होने के बाद हाल की लाइट ऑफ कर देते है।
मधु _वो तो ठीक है , पर वो लड़का और लड़की, छी,, मुझे तो बताने में ही शर्म आ रही।
माधूरी _क्यू क्या किया उन दोनों ने,,
आरती _मैम अब कैसे बताए आपको, वो दोनों तो हम लोगो की कोई परवाह न करते हुए, छी,,,
माधूरी _अरे रुक क्यू गई, क्या किए उन दोनों ने।
मधु _लड़की, लड़का के गोद में बैठ गई, और उछलने लगी, मुंह से अजीब अजीब आवाजे निकालने लगी।
माधूरी _क्या?
आरती _हम लोग तो शर्म से गड़ी जा रहीं थी।
मूवी पे हमारा ध्यान ही नहीं रहा।
मधु _भइया को इस बारे में बताए तो बोले, तुम लोग उस तरफ ध्यान मत दो।
पर हमारा वहा और बैठ पाना मुश्किल हो रहा था।
माधूरी उनकी बाते सुनकर हसने लगी।
माधूरी _फिर क्या किए।
मधु _फिर क्या? शर्म के मारे हमारा वहा बैठ पाना मुश्किल हो गया। हम मूवी बीच में ही छोड़ आए।
माधूरी _हसने लगीं,,, लो पहली बार मूवी देखने टाकीज गए थे बीच में ही छोड़ आए।
आरती_अब क्या करते? लड़की की अजीब अजीब आवाजे अब तक मेरे कानो में गूंज रही है!
टाकीज से हम मार्केट चले गए, वहा हमने अपने लिए कुछ सामान खरीदे फिर, गांव के लिए निकल पड़े।
माधूरी _क्या खरीदे? हमे भी तो दिखाओ।
आरती और मधु, माधूरी को समान दिखाने लगी।
माधूरी, मधु और आरती तीनो किचन से हाल में आ गए।
माधूरी _, राजेश, आरती और मधु बता रही थी की तुम लोग टाकीज गए थे मूवी देखने।
मुझे भी अगर बताए होते की तुम लोग टाकीज जाओगे तो मैं भी चली जाती तुम लोगो के साथ, मुझे भी काफी दिन हो गए टाकीज गए।
राजेश, आरती की ओर देखने लगा, कही इन लोगो ने सब बता तो नही दिया, वहा क्या huwa?
राजेश _मैम वो क्या है न कि प्लान अचानक से बना।
अच्छा मैम अब हम लोग चलते है। घर वाले चिंतित हो रहे होंगे?
हमे इजाजत दीजिए सर।
मनोज _ठीक है राजेश, अच्छा लगा तुम लोग आए, आते रहा करो।
राजेश _ज़रूर सर।
तीनो इजाजत लेकर बाइक से घर के लिए निकल पड़े।
रास्ते में,
राजेश _कही तुम दोनों ने मैम को टाकीज में क्या huwa सब बता तो नही दी।
आरती _भईया, हमने सिर्फ उस लड़का और लड़की के बारे में बताया की वे टाकीज के अन्दर हमारे सामने ही क्या कर रहे थे। हमने क्या किया ये नही बताया।
मधु और आरती दोनों हसने लगी। जब वे घर पहुंचे तो 7बज चुके थे।
रात में भोजन करने के बाद, पदमा किचन में कुछ काम कर रही थी।
राजेश कीचन में गया और पदमा को पीछे से बाहों में भर लिया।
पदमा चौंक गई।
दरअसल आरती और मधु दोनों ने टाकीज में अपनी प्यास तो बुझा ली थी।
राजेश झड़ा नहीं था, उसे chut मारने का मन कर रहा था।
पदमा _क्या कर रहा है मुआ, छोड़ कोई देख लेगा तो गजब हो जाएगा।
राजेश उसकी चूंची मसलते हुवे कहा _ताई आज बडा मन कर रहा है?
पदमा _अरे रात में आ जाऊंगी तेरे कमरे में, कर लेना अपनी इच्छा पूरी, अभी छोड़, आरती या ज्योति आ गई तो मुसीबत हो जायेगी।
पदमा फुसफुसाते हुए बोली।
राजेश पदमा को छोड़ दिया, और अपने कमरे की ओर जाने लगा।
पदमा राजेश को जाता देख मुस्कुराने लगी।
राजेश की हरकत से वह भी गर्म हो गई।
जब पदमा अपने कमरे में गई, उसका पति सो रहा था। वह बाजू में जाकर लेट गई।
आज राजेश से वह चुदेगी यह सोचकर उसकी boor पानी बहाने लगी।
जब उसे लगा की सब लोग सो गए होंगे। वह चुपके से उठी और अपने कमरे से निकलकर राजेश के कमरे की ओर जाने लगी।
उसने सभी के कमरे का मुआइना किया।
सभी के दरवाजे बंद थे।
वह राजेश की कमरे की ओर चली गई।
हल्के से दरवाजा धकेल कर कमरे के अन्दर चली गई।
राजेश उसी के आने का इंतजार कर रहा था।
राजेश पहले से ही उत्तेजित था।
पदमा ने देखा राजेश पहले से ही नंगा होकर अपना लंद सहला रहा है।
वह देखकर मुस्कुराने लगीं।
राजेश _ताई, आने में काफी देर कर दी।
पदमा _क्यू रहा नही जा रहा है क्या?
पदमा अपनी साड़ी उतारने लगीं।
राजेश उसे देख कर लंद सहलाने लगा।
पदमा साड़ी निकालने के बाद, अपनी ब्लाउज भी निकाल दी।
राजेश का लंद उसकी चूची देखकर झटके मारने लगा।
राजेश _ताई पेटीकोट भी उतार दो।
पदमा _जानती हूं, तुम्हे औरतों को नंगी करके चोदने में मजा आता है।
पदमा ने अपना पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया।
पेटीकोट उसकी पैरो में आ गई।
पदमा को नंगी देख राजेश का लंद और तन गया।
पदमा बेड के ऊपर आ गई।
और राजेश का लंद मुंह में भर कर चूसने लगीं।
राजेश उसकी बालो को सहलाने लगा।
पदमा _आज तो कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा लग रहा है re तेरा, लगता है आज तू मेरा मूत ही निकाल देगा।
पदमा बेड पर खड़ी हो गईं और राजेश का लंद पकड़ कर अपनी chut पे सेट की, उसके बाद उस पर बैठ गई।
लंद chut की चीरकर boor में समा गया।
पदमा के मुंह से आह निकल गया।
राजेश पदमा की चूची पकड़ कर मसलने लगा।
पदमा अब राजेश के लंद पर उछल उछल कर chudna सुरू कर दी।
उसकी योनि पहले से ही गीली थी।
लंद boor में आसानी सेफच फाच करता huwa अन्दर बाहर होने लगा।
राजेश और पदमा दोनों को बहुत मजा आने लगा।
पदमा के मुंह से कामुक सिसकारी निकलकर कमरे मे गूंजने लगी।
कुछ देर बाद
राजेश ने पदमा की कमर थाम लिया और नीचे से अपनी कमर उछाल उछाल कर पदमा की साथ देने लगी।
दोनों को संभोग का अपार सुख प्राप्त होने लगा।
इधर आरती, अब तक सोई नहीं थी। वह टाकीज में राजेश से किस प्रकार chudi उसे याद कर गर्म हो गई थी और अपनी boor सहला रही थी।
जब उसे बर्दास्त नही huwa तो, उसने राजेश के कमरे में जानें का फैसला किया।
उसने देखा ज्योति गहरी नींद में सो रही है वह अपने बेड से उठी और चुपके से कमरे से बाहर निकली।
उसने इधर उधर देखा।
चारो ओर सन्नाटा था।
वह राजेश के कमरे की ओर आगे बडी, जैसे ही वह राजेश के कमरे के दरवाजे के पास पहुंची उसे अंदर से किसी के सिसकने की आवाज सुनाई दी।
वह चौंक गई।
वह ध्यान से आवाज को सुनने लगीं।
आरती _लगता है अंदर कोई भईया से chud रही है।
कौन हो सकता है।
भाभी की कमरे का दरवाजा तो अंदर से बंद है।
और ज्योति दीदी तो कमरे में है फिर और कौन हो सकता है।
कही मां,,,
नही नही ये मै क्या सोचने लगीं।
मां तो बडी संस्कारी और भोली है वो नही हो सकती।
आरती दरवाजे पर कान लगाकर सुनने लगी।
इधर राजेश पदमा को घोड़ी बना कर जोर जोर से चोद रहा था।
पदमा बहुत अधिक उत्तेजित हो गई थी।
पदमा _बेटा और जोर से चोद मै झड़ने वाली हूं, चोद अपनी ताई को, और जोर से फाड़ दे अपनी ताई की chut
इन शब्दों को सुनकर आरती के होश उड़ गए।
हे भगवान अंदर तो सच में मां ही है। राजेश भइया से रंडियों की तरह chud रही है।
उसके हाथ पैर कपकपाने लगे।
उसने सपने में भी नहीं सोचा था उसकी संस्कारी मां, इस तरह अपने भतीजे से रंडियों की तरह चुदेगी।
वह अपने कमरे में आकर सोचने लगीं।
पता नही मां राजेश भइया से कब से chud रही है।
अब तक मुझे मां पर कोई शक भी नहीं huwa
कुछ देर बाद आरती ने सोचा की चलो अच्छा huwa की यह राज मुझे पता चल गया।
अब मुझे मां से डरने की कोई जरूरत नहीं। अगर मैं राजेश भइया के साथ पकड़ी गईं तो, मै उसका मुंह बंद करा सकूंगी।
आरती अब और अधिक उत्तेजना महसूस करने लगीं।
यह जानकर उसकी मां राजेश भइया से रंडियों की तरह chud रही है।
उसकी boor और पानी छोड़ने लगीं।
वह उंगलियों से अपनी भग्नासा रगड़ने लगी और कुछ ही देर में झड़ने लगी।
इधर राजेश पदमा की जमकर chudai कर रहा था।
पदमा को जन्नत की सैर करा रहा था।
वह पदमा को बेड किनारे लिटा कर उसकी टांगो को अपनी कंधे में डाल कर हाथ से उसकी चूची मसल मसल कर तेज तेज धक्के लगा लगा कर चोद रहा था।
राजेश झरने के करीब आ गया,,,
राजेश _ताई मेरा आने वाला है,,,
पदमा _आज अंदर ही छोड़ दे,,,
राजेश _क्यू, कही तुम पेट से हो गई तो,,,
राजेश जोर जोर से चोदते हुए कहा,,
पदमा _यहां आने से पहले गोली खा ली थी,,
राजेश और तेज तेज चोदने लगा,,,
कमरे में पदमा की सिसकारी चूड़ियों की खनक फाच फच की आवाज गूंज रहा था,,
राजेश अब खुद को और न रोक सका और आह मां आह,,,,
आह ह ह,,, आह,,
करा हते हुवे अपनी वीर्य की फुहारे से पदमा की गर्भाशय को सींचने लगा।
गर्म गर्म वीर्य को अपने गर्भसाय में अनुभव कर फिर से झड़ने लगीं।
दोनों काफी थक गए थे। बेड पर लेट कर सुस्ताने लगे।
कुछ देर बाद,,
पदमा उठी और अपने कपडे पहनने लगी।
राजेश देखकर मुस्कुराने लगा।
कपडे पहनने के बाद वह राजेश के बगल में बैठ गई।
पदमा _देखो बेटा, अब तेरा इंटर व्यू पास आ गया है।
अब तू सिर्फ अपनी पढाई पर ध्यान लगा।
इंटरव्यू से पहले अब ये सब बंद कर।
कही तू इंटरव्यू में फैल हो गया तो,,, सारा दोष मेरे ऊपर आ जायेगा। मैंने ये सब करने से रोका क्यू नही। मै सुनिता को जवाब नही दे पाऊंगी।
मूझसे वादा कर इंटर व्यू से पहले अब इन चीजों से दूर रहेगा।
मै पुनम को भी बोल दूंगी तुमसे दूर रहने के लिए।
राजेश _, ठीक है ताई, आपकी आज्ञा सिर आंखों पर।
जाने से पहले एक किस तो देदो।
पदमा _चल हट बदमाश इतना करने के बाद भी तेरा जी नही भरा है।
अब तेरा इंटर व्यू से पहले कुछ नहीं मिलेगा।
पदमा अपनी गाड़ मटकाते हुवे कमरे से बाहर चली गईं।
अगले दिन से राजेश इंटरव्यू की तैयारी में जी जान से जुट गया।
पुनम और आरती ने भी समय की नजाकत को देखकर, राजेश से दूर ही रही।
राजेश को इंटर व्यू के लिए दिल्ली जाना था।
उसके एक दिन पहले संडे था।
दिव्या ने राजेश को से मिलने सूरज पुर आया।
पुनम _देवर जी आपसे मिलने के लिए, राजकुमारी दिव्या आई है।
राजेश अपने कमरे में पढाई कर रहा था।
राजेश _दिव्या जी आई है, अचानक,, कहा है?
पुनम _आंगन में बैठी है मां जी के पास।
राजेश अपने कमरे से बाहर आया।
राजेश _दिव्या जी आप, यहां अचानक।
दिव्या _कैसे हो राजेश, कैसे चल रही है तुम्हारी तैयारी।
राजेश _मै ठीक हूं दिव्या जी आप कैसी है? यूं अचानक कुछ काम था क्या? मुझे फोन कर देती। मै आ जाता।
दिव्या _तुमने बताया था न कि कल तुम इंटर व्यू देने दिल्ली जाओगे।
तो मिलने चली आई।
कल कितने बजे की ट्रेन है?
राजेश _जी सुबह 10बजे की।
दिव्या _राजेश, 10बजे तो मेरा भी ड्यूटी जाने का समय रहती हैं। तुम चाहो तो मैं तुम्हे स्टेशन छोड़ दूंगी।
राजेश _शुक्रिया दिव्या जी।
वार्तालाप चल ही रहा था कि ज्योति चाय लेकर आई।
दिव्या _कैसी हो ज्योती दीदी? कोई समस्या तो नही।
ज्योती _जी मै बिल्कुल ठीक हूं।
दिव्या _आपका बच्चा कैसा है?
ज्योती _वो भी बिल्कुल ठीक है, छोटी राजकुमारी जी।
पदमा _लो बेटी, चाय लो।
सभी चाय पीने लगे।
ज्योति, अपने बच्चे को लेकर आई।
दिव्या ने उसे अपने गोद में ले लिया और दुलारने लगी।
कुछ देर रुकने के बाद,,,
दिव्या _अच्छा राजेश अब मैं चलती हूं, तुम्हे भी अपनी तैयारी करनी है। मै कल तुम्हे लेने 9बजे आ जाऊंगी।
राजेश _ठीक है दिव्या जी।
दिव्या अपनी घर चली गई।
अगले दिन दिव्या 9बजे कार लेकर सूरज पुर पहुंची।
राजेश दिल्ली जाने के लिए अपना बैग तैयार कर चुका था।
दिव्या के आने के बाद, राजेश ने अपनी ताई और ताऊ जी का पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
भुवन ने राजेश को गले लगाकर शुभकामनाएं दिया। और राजेश का बैग उठाकर कार के डिक्की में डाला।
राजेश और दिव्या कार से स्टेशन के लिए निकल पड़े रास्ते में चाचा का दुकान आया, राजेश ने कार रोकने कहा।
राजेश ने अपने चाचा चाची का आशीर्वाद लिया। सविता और माधव ने परीक्षा में कामयाब होने के लिए शुभकामनाएं दिए।
और जल्दी वापस लौटने को कहा।
रास्ते में दिव्या ने राजेश से पूछा,,,
दिव्या _राजेश तुम्हारी वापसी कब होगी।
राजेश _दिव्या जी दिल्ली पहुंचने में ही 36घंटे लगेंगे।
इंटरव्यू के बाद दिल्ली से अपना घर राजधानी जाऊंगा। वहा कुछ दिन रुकने के बाद, यहां वापसी होगी। सप्ताह 2सप्ताह तो लगेंगे ही।
समय पर वे स्टेशन पहुंचे।
ट्रेन के आने का इंतजार करने लगें।
कुछ देर में ट्रेन भी आ गई।
राजेश _अच्छा दिव्या जी, अब मैं चलता हूं।
दिव्या _राजेश तुम अपना खयाल रखना। मुझे फोन करना।
राजेश _ठीक है दिव्या जी।
राजेश ट्रेन पर बैठ गया।
कुछ देर में ट्रेन छूट गई।
दिव्या _हाथ हिलाकर उसे बाई करती रही जब तक ट्रेन दूर न चली गई।
दिव्या के आंख भर आई थी।
वह अपने आंखों के आंसू, रूमाल से पोछी फिर स्टेशन से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चली गई।
राजेश को 36घंटे तक ट्रेन में ही सफर करना था।
अगले दिन हवेली में सुबह 9बजे नाश्ता करने के लिए डायनिंग टेबल पर बैठी थी। परिवार के अन्य सदस्य, रत्नावति, ठाकुर, और गीता भी नाश्ता कर रही थी।
दिव्या, अपने मुंह में दो निवाला डालने के बाद जैसे ही तीसरा निवाला लेने को हुई, उसे उबकाई आने लगीं।
वह डायनिंग टेबल से उठ कर बाथरूम में गई। सभी दिव्या की ओर देखने लगे।
आखिर उसे huwa क्या है ?
गीता _मां मै देखती हूं, बात क्या है?
गीता, दिव्या के पीछे गई।
उसने देखा, दिव्या बाथरूम के वाश बेसिंग में उल्टी कर रही थी।
गीता बहुत चिंतित होने लगीं।
गीता _दिव्या, तुम ठीक तो हो,,,,
दिव्या _हा दी,,
गीता ने दिव्या की आंखों में आंसू देखा,,,
गीता _, दिव्या, तुम मूझसे कुछ छिपा रही हो,,,
बताओ बात क्या है?
कही तुम,,,
दिव्या, गीता के गले लग कर रोने लगी,,,
आखिर वह दिन आ ही गया जब प्राथमिक शिक्षा में डिप्लोम के लिए प्रवेश परीक्षा होना था।
मधु और आरती को परीक्षा देने। धरम पुर जाना था।
परीक्षा का समय सुबह 10बजे से 1बजे था।
राजेश उन दोनों को अपने बाइक में बिठाकर सुबह 8बजे ही सूरज पुर से धरम पुर के लिए निकल गया।
वे आधा घंटा पहले ही परीक्षा केंद्र पहुंच गए।
सूचना फलक पर पता किए की कोन से कमरा में उनका रोल नंबर लिखा हुआ है।
घंटी बजते ही मधु आरती दोनों परीक्षा हाल में चले गए।
राजेश परीक्षा केंद्र के सामने गार्डन था, वहा जाकर पेड़ के नीचे बैठ गया। और अपना तैयारी करने लगा।
दोपहर 1बजे मधु और आरती एग्जाम सेंटर से बाहर आए। दोनों के चेहरे पर मुस्कान थी।
दोनों राजेश के पास पहुंचे।
राजेश _कैसा गया तुम दोनों का एग्जाम?
आरती _बहुत अच्छा भईया।
राजेश _और मधु तुम्हारा।
मधु _मेरा भी बहुत अछा गया है भईया।
राजेश _ये तो बडी अछी बात है।
आरती _भईया भूख लगी है, चलो न किसी होटल या ढाबे पर जाकर भोजन करते है।
राजेश _भूख तो मुझे भी लगीं है। चलो किसी अच्छे से ढाबे में चलते हैं।
तीनो बाइक से ढाबे पे जा रहे थे की रास्ते में आरती की नजर पोस्टर पर पढ़ी।
आरती _भईया ये तो टाकीज है न ।
राजेश _हा,
आरती _भईया, मैंने अब तक कभी टाकीज में मूवी नही देखी है। चलो टाकीज में मूवी देखते हैं।
मधु _राजेश भईया, आरती ठीक कह रही है मैंने भी कभी टाकीज में मूवी नही देखी है, चलो न चलते है।
राजेश _तुम दोनों की इच्छा है तो ठीक है, पर मूवी 2बजे शुरू होगी, चलो पहले ढाबे में जाकर भोजन कर लेते हैं।
राजेश ने दोनो को एक अच्छे से ढाबे में ले गया।
आरती और मधु से पूछकर उनका पसंदीदा भोजन आर्डर किया।
तीनो भोजन किए।
भोजन तीनो को बहुत पसंद आया।
भोजन करने के बाद तीनों टाकीज पहुंचे।
रानी मुखर्जी की मर्दानी मूवी लगीं थी।
आरती _भईया ये हीरोइन तो रानी मुखर्जी है न।
राजेश _हा तुमने सही पहचाना।
राजेश ने तीन बालकनी का तीन टिकट लिया।
और तीनो टाकीज के अन्दर गए।
जब तीनो बालकनी में गए, तो वहां कोई नहीं था।
मधु _भईया यहां तो कोई दर्शक ही नहीं है।
राजेश _शायद लोगो को मूवी पसंद नही आ रही है।
राजेश ने बालकनी से नीचे झांका नीचे काफी कम दर्शक बैठे थे।
कुछ देर बाद एक लड़का और लड़की बालकनी में आए शायद दोनों प्रेमी युगल थे।
वो दोनों कोने वाले सीट पर बैठ गए।
मूवी चालू हो गई।
हाल का लाइट ऑफ कर दिया गया।
पूरे सिनेमा हाल में अंधेरा छा गया।
आरती _भईया हाल में तो पूरा अंधेरा छा गया, मुझे तो डर लग रहा है।
राजेश _अरे मै हूं न फिर डरने की जरूरत नहीं मूवी पे ध्यान दो।
पहले मधु बैठी थी, फिर आरती उसके बाद राजेश।
तीनो मूवी देखने लगे।
कुछ देर बाद मधु को कुछ आवाजे सुनाई पड़ा, उसने कोने पर बैठे लड़का और लड़की की ओर देखा।
बीच बीच में पर्दे की रोशनी तेज होने पर मधु ने जो देखी उससे वह दंग रह गई।
लड़का ने लड़की को अपने गोद में बिठा लिया था।
और उसकी चुचियों से खेल रहा था।
लड़की सिसक रही थी।
मधु _ने आरती के कानो में फुसफुसाई। आरती उधर देखो, क्या कर रहे हैं दोनों लड़का और लड़की।
आरती ने भी गौर से उस ओर देखा।
जब स्क्रीन से तेज रोशनी आने पर जो उसने देखा, वह भी दंग रह गई।
मधु _ये दोनों कितने बेशर्म है, इन्हे कोई शर्म नही।
आरती _सिनेमा हाल में ये सब भी होता है। मैंने कभी सोंची ही नहीं थी।
राजेश _क्या बात है? तुम लोगो का ध्यान मूवी पर क्यू नही?
आरती _भईया उधर देखो, उधर, दोनों क्या कर रहे है।
राजेश ने _कोने में बैठे लड़का और लड़की की ओर देखा।
राजेश _ये लोग वही कर रहे है जो करने आए है। तुम लोग उस तरफ ध्यान मत दो, मूवी पर ध्यान दो।
आरती _भईया यहां ये सब भी होता है ।
राजेश _ये लोग मूवी देखने के बहाने मजा करने आए हैं। तुम लोग उस ओर ध्यान मत दो।
राजेश मूवी देखने लगा।
इधर मधु और आरती का ध्यान मूवी पर कम लड़का और लड़की पर ज्यादा था।
कुछ देर बाद,,,
मधु _आरती, क्यू न हम भी मजा करे,, फुसफुसाते हुए बोली।
आरती _मै समझी नहीं।
मधु _जो ये दोनों कर रहें है,,,
हम भी,,
आरती _पर कैसे?
मधु _तू, राजेश भईया के बाजू वाले सीट पर चली जा, मै तेरी सीट पर बैठती हूं।
फिर दोनों राजेश भईया को गरम करेंगे। अपने हाथ और मुंह से।
आरती _कही भईया भड़क न जाए,,
मधु _उसने कहा था न परीक्षा तक कुछ नहीं हमने उसका कहना माना,अब तो परीक्षा हो गई है। अब भईया को हमारा कहना मानना होगा।
आरती _ठीक है।
आरती अपने सीट से उठ कर राजेश के बाजू दूसरी सीट पर बैठ गई।
मधु आरती के सीट पर बैठ गई। राजेश बीच में बैठा था। आजू बाजू दोनो।
राजेश _तुम दोनो सीट क्यू चेंज कर रही।
मधु _भईया मेरी सीट ठीक नहीं है। इसकी फोम बैठ गई है।
कुछ देर आरती और मधु दोनों मूवी देखने का नाटक करने लगी उसके बाद वे अपने एक एक हाथ राजेश के पर रख दिए।
राजेश के जांग को सहलाने लगीं।
राजेश _ये क्या कर रहे हो तुम दोनों।
आरती _कुछ नही, मूवी में तो मजा नही आ रहा इसलिए हमने भी ये सोचा कि क्यूं न हम भी उन लड़का लड़की की तरह मजा करे।
राजेश _नही नही ये ठीक नहीं है।
मूवी अच्छी नहीं लग रही तो चलो घर चलते है।
मधु _भईया अब तो मजे करके ही घर जायेंगे।
आरती ने राजेश की ओंठ को अपने मुंह में भर कर चूसना शुरु कर दी।
इधर मधु ने राजेश की पैंट का चैन खीच कर लंद बाहर निकाल कर मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी।
धीरे धीरे राजेश भी उत्तेजित होने लगा।
उसका लंद मधु के मुंह की रगड़ से शख्त हो गया।
मधु अपनी पेंटी निकाल दी और अपनी बैग में डाल दी।
फिर राजेश के लंद को पकड़ कर उसे अपनी योनि में सेट की और बैठ गई। सामने वाली कुर्सी को पकड़ कर उठक बैठक करना शुरू कर दी।
लंद लंद boor में अन्दर बाहर होने लगा।
मधु को बहुत मजा आने लगा, वह कुछ देर में ही झड़ने लगी।
वह उछलना बंद कर सुस्ताने लगी।
अब आरती ने अपनी पेंटी उतार दी और उसे राजेश के मुंह में ठूंस दी।
आरती _मधु, अब उठो भी, हो गया न तुम्हारा, अब मुझे बैठने दे।
मधु राजेश के लंद से उठ गई। राजेश का लंद मधु की boor का पानी पीकर और लंबा मोटा हो गया था।
आरती ने राजेश का लंद पकड़ कर अपनी chut में सेट कर बैठ गई।
फिर लंद पर उछलने लगी।
लंद आरती की योनि में पूरी गहराई नाप रहा था।
आरती को बहुत मजा आने लगा। कुछ देर में वह भी झड़ने लगी।
इधर मधु फिर से गर्म हो चुकी थी।
मधु _आरती तुम्हारा हो गया न अब हटो।
आरती राजेश के गोद से हट गई।
अब मधु राजेश की ओर मुंह कर उसके लंद को chut में डाल कर बैठ गई।
राजेश के मुंह से पेंटी निकाल, उसके ओंठ को मुंह में भर कर चूसते हुए उछल उछल कर चुदाने लगी।
उसे फिर से बहुत मजा आने लगा।
इधर राजेश को भी मजा आने लगा।
वह मधु की कमर पकड़ कर अपने लंद पर पटकने लगा।
कुछ देर में ही मधु फिर से झड़ने लगी।
मधु लंद से उठी तो आरती लंद पर बैठ गई। और तब तक चुदती रही जब तक फिर से वह झड़ ना गई।
इंटर वेल होने वाला था।
राजेश _लाइट ऑन होने वाला है, चलो जल्दी अपने कपडे ठीक करो, तुम दोनों और तरीके से बैठ जाओ, अपनी कुर्सी पर ।
तीनो अपने कपडे ठीक किए।
कुछ देर में इंटरवेल huwa, हाल की लाइट ऑन हो गया।
आरती _भईया मूवी में मजा नहीं आ रहा चलो मार्केट चलते है, हमे कुछ जरूरत की चीजे खरीदनी है।
तीनो सिनेमा हाल से निकल कर मार्केट आ गए।
मधु और और आरती दोनों अपनी जरूरत की समान खरीदी।
उसके बाद तीनों घर के लिए निकल पड़े।
आरती _मधु, माधूरी मैम हमे अपने घर आने के लिए आमंत्रित करती है क्यू ना आज हम उनके घर चलें।
मधु _हा, कुछ समय रुक कर निकल जायेंगे।
अभी समय क्या huwa है?
आरती अपनी मोबाइल पर समय देखी। साढ़े पांच huwa है।
राजेश _देखो, हमे अभी घर चलना चाहिए फिर कभी आ जाना, माधूरी मैम का घर।
आरती _भईया, अब हम साथ कब आयेंगे, क्या पता चलो ना, मैम का घर चलते है।
मधु _हां भईया चलो ना।
राजेश _तुम लोग बडी जिद्दी हो,,,
राजेश गाड़ी को माधुरी के घर की ओर मोड़ दिया।
जब वे घर पहुंचे।
माधूरी ने दरवाजा खोला,,
राजेश _नमस्ते मैम।
माधूरी _अरे तुम लोग, अचानक,,, तुम लोगो का तो आज एग्जाम था न।
आरती _, मैम हम एग्जाम देकर घर जा रहें थे की हमने सोचा क्यूं ना हम मैम का घर चलें हम उनका घर भी देख लेंगे।
राजेश _ये दोनों बडी जिद्दी है, मैना कहा फिर कभी आ जाना, शाम हो गई है, पर माने नही, मुझे मजबूरी में लाना पड़ा।
माधूरी _अरे अच्छा किए, आ गए, पता नही कब फिर तुम लोगो को इकट्ठा आने का मौका मिले।
मुझे बड़ी खुशी हुई, आओ अन्दर आओ।
सभी ड्राइंग रूम में बैठे।
माधुरी _देखो जी कौन आए है।
माधूरी का पति मनोज बेडरूम से बाहर आया।
मनोज _कोन है भई।
माधूरी _ये राजेश है।
राजेश _नमस्ते सर।
मनोज _अच्छा तुम ही राजेश हो, भई तुम्हारी बडी तारीफ सुनी है। अच्छा huwa आज मुलाकात भी हो गया।
माधूरी _ये मधु और ये आरती है, मेरे स्कूल में पढ़ाती है।
मधु, आरती _नमस्ते सर।
मनोज _नमस्ते, नमस्ते।
आप लोगो से मिलकर बडी खुशी हुई।
माधूरी, मधु आरती सभी बातचीत करने लगे।
मनोज _भई बाते ही करते रहोगे या मेहमानों को चाय नाश्ता भी कराओगे।
माधूरी _ओ हो मै तो बातो में भूल ही गई।
आरती _मैम रहने दो न, आप क्यूं कष्ट उठा रही, हम बना देते है, हमे किचन दिखा दो।
आरती मधु और माधुरी तीनों किचन में चले गए।
मनोज _राजेश, माधूरी बता रही थी की तुम आईएएस की तैयारी कर रहे हो, मैन एग्जाम क्लियर कर चुके हो, अब इंटर व्यू की तैयारी कर रहे हो।
राजेश _हां सर, कुछ दिनों बाद इंटर व्यू होना है। तैयारी तो करनी पड़ेगी।
मनोज _भाई, तुम अफसर बन जाओ ge तो हमे भी बडी खुशी होगी।
राजेश और मनोज बात चीत ही कर रहे थे कि माधुरी दोनों के लिए नाश्ता ले आई।
मनोज _लो भाई राजेश गरम गरम प्याज पकोड़ा खाओ।
माधूरी तो बहुत अच्छा पकोड़ा बनाती है।
राजेश ने पकोड़ा टेस्ट किया।
राजेश _सच में पकोड़ा बहुत अच्छा बना है।
कुछ देर बाद माधुरी, चाय लेकर आई।
मनोज और राजेश चाय और पकोड़ा का आनंद लेने लगे।
मधु और आरती कीचन में ही नाश्ता करने लगीं।
माधूरी _, वैसे तुम दोनों का एग्जाम तो 10से 1बजे तक था न, फिर आने में शाम कैसे हो गई।
क्या क्या किए धरमपुर में।
मधु _मैम, एग्जाम होने के बाद ढाबे में खाना खाए।
हमने कभी टाकीज में मूवी नही देखी थी न तो भईया को बोले टाकीज में मूवी दिखाने, भईया हमे टाकीज ले गया।
माधूरी _अच्छा अच्छा, वैसे कोन सी मूवी लगीं है टाकीज में।
आरती _वो रानी मुखर्जी की मर्दानी।
माधूरी _मूवी देखने में तो बड़ा मजा आया होगा।
मधु और आरती दोनों एक दूसरे का मुंह देखने लगे।
माधूरी _तुम दोनों एक दूसरे का मुंह क्यू देख रहे।
आरती _मैम अब आपको क्या बताए, हमे तो बताने में ही शर्म आ रही है।
माधूरी _क्यू ऐसा क्या हो गया वहां।
मधु _मैम अब क्या बताए, जब हम सिनेमा हाल में गए तो वहां तो कोई दर्शक था ही नहीं।
भइया ने बालकनी का टिकट लिया था।
कुछ देर बाद एक लड़का और लड़की आए, दोनों कोने में जाकर बैठ गए।
माधूरी _फिर, फिर क्या huwa?
आरती _मूवी चालू होते ही, सिनेमा हाल में अंधेरा छा गया।
माधूरी _वो तो होता ही है, मूवी चालू होने के बाद हाल की लाइट ऑफ कर देते है।
मधु _वो तो ठीक है , पर वो लड़का और लड़की, छी,, मुझे तो बताने में ही शर्म आ रही।
माधूरी _क्यू क्या किया उन दोनों ने,,
आरती _मैम अब कैसे बताए आपको, वो दोनों तो हम लोगो की कोई परवाह न करते हुए, छी,,,
माधूरी _अरे रुक क्यू गई, क्या किए उन दोनों ने।
मधु _लड़की, लड़का के गोद में बैठ गई, और उछलने लगी, मुंह से अजीब अजीब आवाजे निकालने लगी।
माधूरी _क्या?
आरती _हम लोग तो शर्म से गड़ी जा रहीं थी।
मूवी पे हमारा ध्यान ही नहीं रहा।
मधु _भइया को इस बारे में बताए तो बोले, तुम लोग उस तरफ ध्यान मत दो।
पर हमारा वहा और बैठ पाना मुश्किल हो रहा था।
माधूरी उनकी बाते सुनकर हसने लगी।
माधूरी _फिर क्या किए।
मधु _फिर क्या? शर्म के मारे हमारा वहा बैठ पाना मुश्किल हो गया। हम मूवी बीच में ही छोड़ आए।
माधूरी _हसने लगीं,,, लो पहली बार मूवी देखने टाकीज गए थे बीच में ही छोड़ आए।
आरती_अब क्या करते? लड़की की अजीब अजीब आवाजे अब तक मेरे कानो में गूंज रही है!
टाकीज से हम मार्केट चले गए, वहा हमने अपने लिए कुछ सामान खरीदे फिर, गांव के लिए निकल पड़े।
माधूरी _क्या खरीदे? हमे भी तो दिखाओ।
आरती और मधु, माधूरी को समान दिखाने लगी।
माधूरी, मधु और आरती तीनो किचन से हाल में आ गए।
माधूरी _, राजेश, आरती और मधु बता रही थी की तुम लोग टाकीज गए थे मूवी देखने।
मुझे भी अगर बताए होते की तुम लोग टाकीज जाओगे तो मैं भी चली जाती तुम लोगो के साथ, मुझे भी काफी दिन हो गए टाकीज गए।
राजेश, आरती की ओर देखने लगा, कही इन लोगो ने सब बता तो नही दिया, वहा क्या huwa?
राजेश _मैम वो क्या है न कि प्लान अचानक से बना।
अच्छा मैम अब हम लोग चलते है। घर वाले चिंतित हो रहे होंगे?
हमे इजाजत दीजिए सर।
मनोज _ठीक है राजेश, अच्छा लगा तुम लोग आए, आते रहा करो।
राजेश _ज़रूर सर।
तीनो इजाजत लेकर बाइक से घर के लिए निकल पड़े।
रास्ते में,
राजेश _कही तुम दोनों ने मैम को टाकीज में क्या huwa सब बता तो नही दी।
आरती _भईया, हमने सिर्फ उस लड़का और लड़की के बारे में बताया की वे टाकीज के अन्दर हमारे सामने ही क्या कर रहे थे। हमने क्या किया ये नही बताया।
मधु और आरती दोनों हसने लगी। जब वे घर पहुंचे तो 7बज चुके थे।
रात में भोजन करने के बाद, पदमा किचन में कुछ काम कर रही थी।
राजेश कीचन में गया और पदमा को पीछे से बाहों में भर लिया।
पदमा चौंक गई।
दरअसल आरती और मधु दोनों ने टाकीज में अपनी प्यास तो बुझा ली थी।
राजेश झड़ा नहीं था, उसे chut मारने का मन कर रहा था।
पदमा _क्या कर रहा है मुआ, छोड़ कोई देख लेगा तो गजब हो जाएगा।
राजेश उसकी चूंची मसलते हुवे कहा _ताई आज बडा मन कर रहा है?
पदमा _अरे रात में आ जाऊंगी तेरे कमरे में, कर लेना अपनी इच्छा पूरी, अभी छोड़, आरती या ज्योति आ गई तो मुसीबत हो जायेगी।
पदमा फुसफुसाते हुए बोली।
राजेश पदमा को छोड़ दिया, और अपने कमरे की ओर जाने लगा।
पदमा राजेश को जाता देख मुस्कुराने लगी।
राजेश की हरकत से वह भी गर्म हो गई।
जब पदमा अपने कमरे में गई, उसका पति सो रहा था। वह बाजू में जाकर लेट गई।
आज राजेश से वह चुदेगी यह सोचकर उसकी boor पानी बहाने लगी।
जब उसे लगा की सब लोग सो गए होंगे। वह चुपके से उठी और अपने कमरे से निकलकर राजेश के कमरे की ओर जाने लगी।
उसने सभी के कमरे का मुआइना किया।
सभी के दरवाजे बंद थे।
वह राजेश की कमरे की ओर चली गई।
हल्के से दरवाजा धकेल कर कमरे के अन्दर चली गई।
राजेश उसी के आने का इंतजार कर रहा था।
राजेश पहले से ही उत्तेजित था।
पदमा ने देखा राजेश पहले से ही नंगा होकर अपना लंद सहला रहा है।
वह देखकर मुस्कुराने लगीं।
राजेश _ताई, आने में काफी देर कर दी।
पदमा _क्यू रहा नही जा रहा है क्या?
पदमा अपनी साड़ी उतारने लगीं।
राजेश उसे देख कर लंद सहलाने लगा।
पदमा साड़ी निकालने के बाद, अपनी ब्लाउज भी निकाल दी।
राजेश का लंद उसकी चूची देखकर झटके मारने लगा।
राजेश _ताई पेटीकोट भी उतार दो।
पदमा _जानती हूं, तुम्हे औरतों को नंगी करके चोदने में मजा आता है।
पदमा ने अपना पेटीकोट का नाड़ा खींच दिया।
पेटीकोट उसकी पैरो में आ गई।
पदमा को नंगी देख राजेश का लंद और तन गया।
पदमा बेड के ऊपर आ गई।
और राजेश का लंद मुंह में भर कर चूसने लगीं।
राजेश उसकी बालो को सहलाने लगा।
पदमा _आज तो कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा लग रहा है re तेरा, लगता है आज तू मेरा मूत ही निकाल देगा।
पदमा बेड पर खड़ी हो गईं और राजेश का लंद पकड़ कर अपनी chut पे सेट की, उसके बाद उस पर बैठ गई।
लंद chut की चीरकर boor में समा गया।
पदमा के मुंह से आह निकल गया।
राजेश पदमा की चूची पकड़ कर मसलने लगा।
पदमा अब राजेश के लंद पर उछल उछल कर chudna सुरू कर दी।
उसकी योनि पहले से ही गीली थी।
लंद boor में आसानी सेफच फाच करता huwa अन्दर बाहर होने लगा।
राजेश और पदमा दोनों को बहुत मजा आने लगा।
पदमा के मुंह से कामुक सिसकारी निकलकर कमरे मे गूंजने लगी।
कुछ देर बाद
राजेश ने पदमा की कमर थाम लिया और नीचे से अपनी कमर उछाल उछाल कर पदमा की साथ देने लगी।
दोनों को संभोग का अपार सुख प्राप्त होने लगा।
इधर आरती, अब तक सोई नहीं थी। वह टाकीज में राजेश से किस प्रकार chudi उसे याद कर गर्म हो गई थी और अपनी boor सहला रही थी।
जब उसे बर्दास्त नही huwa तो, उसने राजेश के कमरे में जानें का फैसला किया।
उसने देखा ज्योति गहरी नींद में सो रही है वह अपने बेड से उठी और चुपके से कमरे से बाहर निकली।
उसने इधर उधर देखा।
चारो ओर सन्नाटा था।
वह राजेश के कमरे की ओर आगे बडी, जैसे ही वह राजेश के कमरे के दरवाजे के पास पहुंची उसे अंदर से किसी के सिसकने की आवाज सुनाई दी।
वह चौंक गई।
वह ध्यान से आवाज को सुनने लगीं।
आरती _लगता है अंदर कोई भईया से chud रही है।
कौन हो सकता है।
भाभी की कमरे का दरवाजा तो अंदर से बंद है।
और ज्योति दीदी तो कमरे में है फिर और कौन हो सकता है।
कही मां,,,
नही नही ये मै क्या सोचने लगीं।
मां तो बडी संस्कारी और भोली है वो नही हो सकती।
आरती दरवाजे पर कान लगाकर सुनने लगी।
इधर राजेश पदमा को घोड़ी बना कर जोर जोर से चोद रहा था।
पदमा बहुत अधिक उत्तेजित हो गई थी।
पदमा _बेटा और जोर से चोद मै झड़ने वाली हूं, चोद अपनी ताई को, और जोर से फाड़ दे अपनी ताई की chut
इन शब्दों को सुनकर आरती के होश उड़ गए।
हे भगवान अंदर तो सच में मां ही है। राजेश भइया से रंडियों की तरह chud रही है।
उसके हाथ पैर कपकपाने लगे।
उसने सपने में भी नहीं सोचा था उसकी संस्कारी मां, इस तरह अपने भतीजे से रंडियों की तरह चुदेगी।
वह अपने कमरे में आकर सोचने लगीं।
पता नही मां राजेश भइया से कब से chud रही है।
अब तक मुझे मां पर कोई शक भी नहीं huwa
कुछ देर बाद आरती ने सोचा की चलो अच्छा huwa की यह राज मुझे पता चल गया।
अब मुझे मां से डरने की कोई जरूरत नहीं। अगर मैं राजेश भइया के साथ पकड़ी गईं तो, मै उसका मुंह बंद करा सकूंगी।
आरती अब और अधिक उत्तेजना महसूस करने लगीं।
यह जानकर उसकी मां राजेश भइया से रंडियों की तरह chud रही है।
उसकी boor और पानी छोड़ने लगीं।
वह उंगलियों से अपनी भग्नासा रगड़ने लगी और कुछ ही देर में झड़ने लगी।
इधर राजेश पदमा की जमकर chudai कर रहा था।
पदमा को जन्नत की सैर करा रहा था।
वह पदमा को बेड किनारे लिटा कर उसकी टांगो को अपनी कंधे में डाल कर हाथ से उसकी चूची मसल मसल कर तेज तेज धक्के लगा लगा कर चोद रहा था।
राजेश झरने के करीब आ गया,,,
राजेश _ताई मेरा आने वाला है,,,
पदमा _आज अंदर ही छोड़ दे,,,
राजेश _क्यू, कही तुम पेट से हो गई तो,,,
राजेश जोर जोर से चोदते हुए कहा,,
पदमा _यहां आने से पहले गोली खा ली थी,,
राजेश और तेज तेज चोदने लगा,,,
कमरे में पदमा की सिसकारी चूड़ियों की खनक फाच फच की आवाज गूंज रहा था,,
राजेश अब खुद को और न रोक सका और आह मां आह,,,,
आह ह ह,,, आह,,
करा हते हुवे अपनी वीर्य की फुहारे से पदमा की गर्भाशय को सींचने लगा।
गर्म गर्म वीर्य को अपने गर्भसाय में अनुभव कर फिर से झड़ने लगीं।
दोनों काफी थक गए थे। बेड पर लेट कर सुस्ताने लगे।
कुछ देर बाद,,
पदमा उठी और अपने कपडे पहनने लगी।
राजेश देखकर मुस्कुराने लगा।
कपडे पहनने के बाद वह राजेश के बगल में बैठ गई।
पदमा _देखो बेटा, अब तेरा इंटर व्यू पास आ गया है।
अब तू सिर्फ अपनी पढाई पर ध्यान लगा।
इंटरव्यू से पहले अब ये सब बंद कर।
कही तू इंटरव्यू में फैल हो गया तो,,, सारा दोष मेरे ऊपर आ जायेगा। मैंने ये सब करने से रोका क्यू नही। मै सुनिता को जवाब नही दे पाऊंगी।
मूझसे वादा कर इंटर व्यू से पहले अब इन चीजों से दूर रहेगा।
मै पुनम को भी बोल दूंगी तुमसे दूर रहने के लिए।
राजेश _, ठीक है ताई, आपकी आज्ञा सिर आंखों पर।
जाने से पहले एक किस तो देदो।
पदमा _चल हट बदमाश इतना करने के बाद भी तेरा जी नही भरा है।
अब तेरा इंटर व्यू से पहले कुछ नहीं मिलेगा।
पदमा अपनी गाड़ मटकाते हुवे कमरे से बाहर चली गईं।
अगले दिन से राजेश इंटरव्यू की तैयारी में जी जान से जुट गया।
पुनम और आरती ने भी समय की नजाकत को देखकर, राजेश से दूर ही रही।
राजेश को इंटर व्यू के लिए दिल्ली जाना था।
उसके एक दिन पहले संडे था।
दिव्या ने राजेश को से मिलने सूरज पुर आया।
पुनम _देवर जी आपसे मिलने के लिए, राजकुमारी दिव्या आई है।
राजेश अपने कमरे में पढाई कर रहा था।
राजेश _दिव्या जी आई है, अचानक,, कहा है?
पुनम _आंगन में बैठी है मां जी के पास।
राजेश अपने कमरे से बाहर आया।
राजेश _दिव्या जी आप, यहां अचानक।
दिव्या _कैसे हो राजेश, कैसे चल रही है तुम्हारी तैयारी।
राजेश _मै ठीक हूं दिव्या जी आप कैसी है? यूं अचानक कुछ काम था क्या? मुझे फोन कर देती। मै आ जाता।
दिव्या _तुमने बताया था न कि कल तुम इंटर व्यू देने दिल्ली जाओगे।
तो मिलने चली आई।
कल कितने बजे की ट्रेन है?
राजेश _जी सुबह 10बजे की।
दिव्या _राजेश, 10बजे तो मेरा भी ड्यूटी जाने का समय रहती हैं। तुम चाहो तो मैं तुम्हे स्टेशन छोड़ दूंगी।
राजेश _शुक्रिया दिव्या जी।
वार्तालाप चल ही रहा था कि ज्योति चाय लेकर आई।
दिव्या _कैसी हो ज्योती दीदी? कोई समस्या तो नही।
ज्योती _जी मै बिल्कुल ठीक हूं।
दिव्या _आपका बच्चा कैसा है?
ज्योती _वो भी बिल्कुल ठीक है, छोटी राजकुमारी जी।
पदमा _लो बेटी, चाय लो।
सभी चाय पीने लगे।
ज्योति, अपने बच्चे को लेकर आई।
दिव्या ने उसे अपने गोद में ले लिया और दुलारने लगी।
कुछ देर रुकने के बाद,,,
दिव्या _अच्छा राजेश अब मैं चलती हूं, तुम्हे भी अपनी तैयारी करनी है। मै कल तुम्हे लेने 9बजे आ जाऊंगी।
राजेश _ठीक है दिव्या जी।
दिव्या अपनी घर चली गई।
अगले दिन दिव्या 9बजे कार लेकर सूरज पुर पहुंची।
राजेश दिल्ली जाने के लिए अपना बैग तैयार कर चुका था।
दिव्या के आने के बाद, राजेश ने अपनी ताई और ताऊ जी का पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
भुवन ने राजेश को गले लगाकर शुभकामनाएं दिया। और राजेश का बैग उठाकर कार के डिक्की में डाला।
राजेश और दिव्या कार से स्टेशन के लिए निकल पड़े रास्ते में चाचा का दुकान आया, राजेश ने कार रोकने कहा।
राजेश ने अपने चाचा चाची का आशीर्वाद लिया। सविता और माधव ने परीक्षा में कामयाब होने के लिए शुभकामनाएं दिए।
और जल्दी वापस लौटने को कहा।
रास्ते में दिव्या ने राजेश से पूछा,,,
दिव्या _राजेश तुम्हारी वापसी कब होगी।
राजेश _दिव्या जी दिल्ली पहुंचने में ही 36घंटे लगेंगे।
इंटरव्यू के बाद दिल्ली से अपना घर राजधानी जाऊंगा। वहा कुछ दिन रुकने के बाद, यहां वापसी होगी। सप्ताह 2सप्ताह तो लगेंगे ही।
समय पर वे स्टेशन पहुंचे।
ट्रेन के आने का इंतजार करने लगें।
कुछ देर में ट्रेन भी आ गई।
राजेश _अच्छा दिव्या जी, अब मैं चलता हूं।
दिव्या _राजेश तुम अपना खयाल रखना। मुझे फोन करना।
राजेश _ठीक है दिव्या जी।
राजेश ट्रेन पर बैठ गया।
कुछ देर में ट्रेन छूट गई।
दिव्या _हाथ हिलाकर उसे बाई करती रही जब तक ट्रेन दूर न चली गई।
दिव्या के आंख भर आई थी।
वह अपने आंखों के आंसू, रूमाल से पोछी फिर स्टेशन से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चली गई।
राजेश को 36घंटे तक ट्रेन में ही सफर करना था।
अगले दिन हवेली में सुबह 9बजे नाश्ता करने के लिए डायनिंग टेबल पर बैठी थी। परिवार के अन्य सदस्य, रत्नावति, ठाकुर, और गीता भी नाश्ता कर रही थी।
दिव्या, अपने मुंह में दो निवाला डालने के बाद जैसे ही तीसरा निवाला लेने को हुई, उसे उबकाई आने लगीं।
वह डायनिंग टेबल से उठ कर बाथरूम में गई। सभी दिव्या की ओर देखने लगे।
आखिर उसे huwa क्या है ?
गीता _मां मै देखती हूं, बात क्या है?
गीता, दिव्या के पीछे गई।
उसने देखा, दिव्या बाथरूम के वाश बेसिंग में उल्टी कर रही थी।
गीता बहुत चिंतित होने लगीं।
गीता _दिव्या, तुम ठीक तो हो,,,,
दिव्या _हा दी,,
गीता ने दिव्या की आंखों में आंसू देखा,,,
गीता _, दिव्या, तुम मूझसे कुछ छिपा रही हो,,,
बताओ बात क्या है?
कही तुम,,,
दिव्या, गीता के गले लग कर रोने लगी,,,