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- Dec 5, 2013
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भुवन ने अपने दोस्तो को फोन किया।
भुवन _अबे रवि, तू कितना समय आएगा बे।
रवि _अरे भाई भुवन मैं और विमल बस आ ही रहे है पहले ये बता खाने पीने की व्यवस्था किया है की नही।
भुवन _, अबे तू उसकी चिन्ता मत कर, चिकन मटन मछली,अंडा देशी और अंग्रेजी सब की व्यवस्था किया है।
रवि _अरे भाई तब तो मजा आ जायेगा।
भुवन _तुम लोग जल्दी , पहुंचो।
रवि _ठीक है भाई।
भुवन _अरे यार राजेश।
राजेश _बोलो भैया।
भुवन _यार, जरा बंसी काका के घर जाकर पता करते। सब चिकन, मटन सब तैयार huwa है कि नही।
राजेश _ठीक है भैया।
बंशी काका का घर बाजू में ही था। दोस्तो एवम पुरुष महमानो जो खाने पीने की शौकीन थे उनके लिए। खाने पीने की व्यवस्था उसी के यहां किया गया था।
क्यों की इस घर में तो मेहमानों की काफी भीड़ थी।
घर की महिलाए, चिकन मटन खाती नही थी तो घर में ये सब चीजें बनाया नही जा सकता था बाजू वाले घर में व्यवस्था किया गया था।
राजेश बंशी काका के घर पहुंचा।
बंशी काका _अरे राजेश बेटा आओ बैठो।
राजेश _पाए लागू काका।
बंशी काका _खुश रहो बेटा।
राजेश _काका, भुवन भैया ने मुझे भेजा है, पता करने की सारी सभी चीजे तैयार हुई है कि नही।
बंशी काका _अरे बेटा तुम्हारी काकी तो दोपहर से ही भिड़ी है सब चीजें बनाने में, मधु बिटिया भी सहयोग कर रही है।
बंशी काका ने मधु को आवाज़ लगाया।
अरे मधु बेटा देखो कौन आया है।
मधु कीचन में अपनी मार, मंगली की मदद कर रही थी।
वह अपनी बापू की आवाज़ सुन कर बाहर आई।
मधु _अरे बापू क्या huwa
बंशी _अरे बिटिया देखो कौन आया है।
मधु _राजेश भैया आप।
राजेश _अरे मधु, मैं पता करने आया था की सारी चीजे तैयार huwa है कि नही और कितना समय लगेगा।
मधु _मां बता रही थी की लगभग सभी चीजे तैयार होने वाली है।
अंदर से मंगली काकी ने आवाज़ दी, कौन है बेटी।
मधु _मां राजेश भैया आया है।
मंगली भी कीचन से बाहर आई,
मंगली _अरे राजेश बबुआ तुम।
राजेश _पाए लागू काकी।
मंगली _जीता रह बेटा।
राजेश_ओ काकी, क्या है न की भुवन भैया ने मुझे पता करने भेजा है कि सारी चीजे तैयार huwa है की नही।
मंगली काकी _बस बेटा कुछ देर में ही सारी चीजे तैयार हो जाएगी।
राजेश_काकी किसी चीज की आवश्यकता तो नही है।
मंगली _अरे बेटा, भुवन दोपहर में ही आकर सारी चीजे छोड़ गया था।
और किसी चीज की आवश्यकता नहीं है।
राजेश _अच्छा काकी मैं भुवन भैया को खबर दे देता हूं की सारी चीजे तैयार होने वाली है।
मंगली _, अरे बेटा कितने दिन बाद तु हमारे घर आया है, आते ही जाने लगे।
थोड़ा बैठो, अपने काका और मधु के साथ बतियाओ। मैं तेरे लिए चाय बनाती हूं।
मधु _हा, राजेश भैया, वैसे तो तुम हमारे घर आते ही नहीं।
काका _हा बेटा, मधु बिटिया और तुम्हारी काकी ठीक कह रही है, थोड़ी देर बैठ लो, चाय पी कर जाना।
राजेश _कुर्सी पर बैठ गया।
राजेश _, अच्छा मधु तुम्हारा तो एक बेटा है न, कही दिखाई नही दे रहा।
मधु _राजेश भैया, मुन्ने को मुहल्ले के बच्चे घूमाने ले गए है।
राजेश _मधु तुम्हारा, स्कूल में बच्चो को पढ़ाने कैसा अनुभव मिल रहा है।
मधु _भैया, मैं तो घर दिनभर घर में ही पड़ी रहती थी। मुझे तो जीवन बेकार लगने लगा था, पर जब से स्कूल जा रही बच्चो को पढ़ाने, बड़ा अच्छा लग रहा है।
राजेश _ये तो बड़ी अच्छी बात है।
मधु _ये सब आपकी मेहरबानी है भईया जो मुझे स्कूल में पढ़ाने का मौका मिल रहा है। मेरी बड़ी इच्छा थी कि मैं एक टीचर बनू।
राजेश _मधु अगर तुम टीचर बनना चाहती थी तो पढ़ाई बंद कर जल्दी शादी क्यू कर ली।
काका _अरे बेटा क्या बताया, मधु के लिए एक अच्छे घर का रिश्ता आया, तो हम लोग बिटिया शादी के बाद खुशी पूर्वक रहेगी करके शादी कर दिया।
पर हमारी यो किस्मत खराब था, लडका शराबी निकल गया। रोज शराब पीता है। इधर उधर पड़ा रहता है।शराब पीता है वो तो ठीक था, पर शराब पीकर मधु से मार पीट भी करता है।
अब मधु हमारी एक ही बेटी है, एक दिन तो मंगली मधु के ससुराल गई थी । उसके सामने ही मधु को पीटने लगा।
मंगली से देखा न गया। वह मधु को अपने साथ घर ले आई।
राजेश _ओह।
तभी मंगली चाय लेकर आई।
मंगली _अरे बाबुवा, इक मां अपनी बिटिया को कैसे उस नर्क में रहने दे सकती है, आखिर मधु के अलावा हमारा और कौन है?
इस ली मैं मधु को घर ले आई।
मधु _राजेश भैया, मेरी बड़ी इच्छा थी मैं पढ़ लिखकर टीचर बनू, क्या मैं माधुरी मैडम की तरह सरकारी शिक्षक नही बन सकती।
राजेश _अरे मधु, अगर तुम चाहो तो,तुम सरकारी शिक्षक अब भी बन सकती हो। पर इसके लिए मेहनत करनी पड़ेगी।
मधु _राजेश भैया, मुझे बताओ सरकारी शिक्षक की नौकरी के लिए मुझे क्या करना पड़ेगा।
राजेश _उसके लिए तुम्हे शिक्षक पात्रता की परीक्षा पास करनी होगी। और प्राथमिक शिक्षा में डिप्लोमा करना होगा। उसके बाद तुम शिक्षक की नौकरी के लिए एप्लाई कर सकती हो।
मधु _भैया ये सब होगा कैसे? कुछ मार्गदर्शन करते तो सदा आभारी रहूंगी आपकी।
राजेश _अरे मधु इसमें आभार वाली बात क्या है? ये तो मेरा फर्ज है। देखो राज्य सरकार हर साल शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन करती है। तुम अच्छे से तैयारी कर परीक्षा आसानी से पास कर सकती जो।
और रही डीपीई डिप्लोमा इन प्राथमिक एजुकेशन की बात ये मुक्त विश्व विद्यालय से घर में ही रहकर कर सकती हो।
मधु _सच भैया।
राजेश _हा, हा , और राज्य में शिक्षकों को भारी कमी है। नई सरकार आयेगी तो शिक्षको की भर्ती भी करेगी। तुम शिक्षक की नौकरी प्राप्त कर सकोगी।
पर थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।
मधु _भैया, आपने मुझे नया रास्ता दिखाया है। अब आपके मार्गदर्शन में मैं अपनी लक्ष्य तक अवश्य पहुंचूंगी। में जी तोड़ मेहनत करुंगी।
मंगली _राजेश बेटा, हमने तो मधु की जल्दबाजी में शादी कर दी, और उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी।
पर अब हम हमारे बेटी के साथ है जो वो चाहती है हम उसमें बाधा नहीं बनेंगे। उसकी सपना पूरी करने में तुम उसकी मदद कर दो बेटा, मैं तुम्हारी आगे हाथ जोड़ती हूं।
राजेश _अरे काकी ये तुम क्या कह रही हो। ऐसा करके मुझे शर्मिंदा न करो।
मधु का सपना जरूर पूरा होगा। ये वादा है आपसे।
मंगली _तू सच मे महान है बेटा, तू गांव के लोगो का उद्धार करने आया है।
राजेश चाय पीने लगा।
राजेश _काकी, चाय तो बहुत अच्छी बनी है।
बंसी काका _अरे बेटा, तुम्हारी काकी के द्वारा बनाई, चिकन, मटन और मछली खा कर देखना। क्या गजब की बनाती है।
राजेश _तब तो आज मजा आ जायेगा।
तभी लाउड स्पीकर में अलाउंस हुआ,कुछ ही देर में नाटक मंडली का कार्यक्रम चालू होने वाला है।
जन्मोत्सव की खुशी में पास के गांव के नाटक मंडली का कार्यक्रम रखा गया था।
वे अपने प्रोग्राम के लिए पहुंच चुके थे, उसके लिए मंच बनाया गया था।
राजेश _अच्छा काका, अब मैं चलता हूं भुवन भैया को जानकारी दे देता हूं सारी चीजे बनकर तैयार हो गया है।
काका _ठीक है बेटा।
राजेश वहा से चला गया।
भुवन को बताया की सारी चीजे बन चुकी है।
भुवन _अच्छी बात है, नाटक मंडली का प्रोग्राम चालू होने दो फिर उधर हम लोग अपना प्रोग्राम शुरू करेंगे।
नाटक मंडली के सदस्यों को चाय नाश्ता कराया गया।
कुछ देर में ही नाटक मंडली वालो का प्रोग्राम शुरू हो गया।
घर की महिलाए, एवम गांव की महिलाए मंच के सामने नाटक देखने बैठ गए।
नाटक शुरू होते ही।
भुवन, अपने चाचा माधव से कहा,,
भुवन _चाचा, पीने खाने की सारी व्यवस्था, बंसी काका के यहां हो चुका है। तुम जितने भी तुम्हारे समधी लोग है जो पीने खाने के शौकीन है उसे काका के घर लेकर चलो।
माधव _यहीं तो मैं पूछने वाला था व्यवस्था huwa है की नही,,
ठीक है सभी मेहमानों को लेकर मैं वहा पहुंचता हूं।
माधव, शेखर, केशव, अपने समधी और बाहर से आए अन्य मेहमान जो पीने खाने के शौकीन थे। उन्हे लेकर बंसी काका के घर ले गया।
भुवन ने बंसी काका के यहां दो कमरों में गद्दे बिछवा दिए थे।
क्यू की सभी मेहमान तो एक घर में आ नही सकते थे। इसलिए सोने की व्यवस्था भी बंसी काका के घर किया गया था।
बंसी काका ने मेहमानों को कमरे में ले गया जहां गद्दा बिछा huwa था।
मधु, नाटक देखने चली गई थी। मंगली कीचन में थी।
सभी मेहमान गद्दे में बैठ गए।
बात चीत करने लगे।
कुछ देर बाद भुवन काका के घर पहुंचा।
भुवन _काका मेहमान लोग, पहुंचगए न।
काका _हां बेटा।
भुवन, ने अंग्रेजी और देशी शराब के कई बाटल लाया था, उसमें से आधे को बंसी काका को दे दिया।
बंसी काका ने डिस्पोजल, शराब का बोतल, पानी लेकर कमरे में गया। माधव को दिया।
माधव ने बोतल खोलकर पैग बनाया।
इधर काकी कीचन में थाली में चिकन, मटन, मछली और अंडा निकाल कर रखी थी उसे बंसी काका
कीचन में जाकर, ले आया।
सभी लोग शराब पीकर, चखने का मजा लेने लगे और चखने की तारीफ करने लगे।
इधर भुवन और राजेश भी अपने दोस्तो और युवा मेहमानों को लेकर काका के यहां पहुंचे।
रवि विमल मोहन धीरज राजेश भुवन और अन्य लोग, दूसरे कमरे में जाकर बैठे, और वहा महफिल जमाया।
भुवन ने अंग्रेजी ओर देशी शराब की बोतल खोली सबके लिए पैग बनाया।
भुवन _राजेश, खाने के लिए कीचन में जाकर चिकन मटन प्याज, अन्य चीजे सब लेकर आओ।
राजेश कीचन में गया।
मंगली थाली में खाने की बनाई चीजे निकालती राजेश उसे कमरे तक पहुंचाता।
इधर भुवन पैग तैयार किया और सभी दोस्त जाम पैग पे पैग पीने और चखने का स्वाद लेने लगे।
धीरज _राजेश, तू भी तो पैग ले हमारे साथ।
भुवन _हा राजेश, ले तू भी ले।
राजेश _अरे भैया, उधर घर में कोइ पुरुष वर्ग है नही किसी चीज की जरूरत पड़ी तो, उन्हे पता चल जाएगा कि मैंने शराब पी है, फिर मां को क्या जवाब दूंगा।
ओ बड़ी नाराज हो जाएगी।
भुवन _हूं, ये भी बात है, अच्छा एक पैग मार ले। और मैने पान के ठेले से पान भी बनवा लिया है उसे चबा ले। शराब की गंध दब जाएगी।
मोहन _हा, राजेश हमारे साथ एक कम से कम एक पैग तो पीना ही पड़ेगा।
नही तो मजा नही आयेगा।
राजेश _अच्छा ठीक है, एक पैग उससे ज्यादा नही।
राजेश ने भी दोस्तो के साथ चेस कहते हुए एक पैग पी लिया।
इधर कुछ देर पीने का प्रोग्राम चलने के बाद,
शेखर _बंसी, चावल की व्यवस्था है की नही, भोजन भी कर लेते है।
बंसी _रोटी और चावल बना बनाया गया है। भैया।
शेखर _यहीं लगवा दो।
बंसी _ठीक है भैया।
बंसी सबके लिए पत्तल लगा दिया और रोटी चावल सब्जी परोस दिया, सभी लोग शराब पी पी कर भोजन का मजा लेने लगे।
सभी लोग को तेज़ नशा चढ़ गया।
भोजन करने के बाद। गद्दे को फिर अच्छे से बिछाकर लुड़क गए नशे में बात चीत करने लगे।
समधी जी मजा आ गया, बहुत अच्छी व्यवस्था किया है आपने। ज्योति के ससुर ने कहा।
इधर राजेश _भुवन भैया मैं घर तरफ जाकर देखता हू, किसी चीज की जरूरत तो नही।
भुवन _ठीक है राजेश, उधर की व्यवस्था देखो।
राजेश वहा से चला गया।
राजेश जब घर पहुंचा,,
सविता _राजेश तुम्हारा चाचा कहा है। अब हमे घर निकालना पड़ेगा। रात काफी हो चुकी है, घर बिल्कुल सुना है, कोइ चोर वगैरा आ गया तो।
जाओ अपने चाचा को बुला लाओ।
राजेश _ठीक है चाची।
राजेश बंसी काका के घर आया।
राजेश _चाचा, आपको चाची बुला रही है।
माधव, मेहमानों के साथ बतिया रहे थे।
माधव _क्यू राजेश कुछ काम था क्या?
राजेश _चाची कह रही थी की घर में कोइ नही है, घर को रात में सुना छोड़ना ठीक नही है।
शेखर _अरे हा माधव तू घर जा, बहु ठीक कह रही है। माधव _ठीक है भैया। मैं तो कहता हू आप लोग भी मेरे घर चलते वही सो जाते।
केशव _अरे माधव हम लोग उठ कर चलने की स्थिति में नहीं है। सभी हसने लगे। तू जा।
माधव _मेहमानों से इजाजत लेकर , वहा से चला गया।
राजेश _अरे चाचा जी, तुम ऐसे हालात में कहा पैदल जाओगे।
चलो तुम्हे बाइक से छोड़ आता हूं।
माधव _अरे बेटा, तुम्हारी चाची भी तो है।
राजेश _उसे भी बाइक से छोड़ दूंगा।
माधव _अच्छा ठीक है।
राजेश अपना बाइक ले आया।
माधव को बिठाकर घर छोड़ आया।
घर आने के बाद,,
सविता _राजेश, तुम तो अपने चाचा को बुलाने गए थे। कहा रह गए थे,,
सुनीता _हां बेटा, जाओ अपने चाचा जी को बुला लाओ। सविता घर जाने के लिए देख रही है।
राजेश _मां मैने चाचा जी को घर छोड़ आया।
सविता _अरे तो मैं किसके साथ जाऊंगी।
राजेश _चाची, चलो आपको भी छोड़ आता हूं।
सविता _अच्छा ठीक है।
सविता सभी से इजाजत ले ली।
राजेश सविता को बिठाकर उसके घर ले गया।
राजेश _अच्छा चाची मैं चलता हूं।
सविता _अरे तू कहा जा रहा है। वहा तो सोने की जगह नही है। घर मेहमानों से भर गया है। तू यहीं सो जा।
राजेश_चाची वहा मेरी जरूरत पड़ सकती है, अभी नाटक मंडली का कार्यक्रम चल रहा है, उन्हे भोजन भी कराना है।
सविता _क्यू बांकी लोग भी तो है घर में,, कहीं तू नाराज तो नही है मुझसे सुबह की बात को लेकर,,
राजेश _अरे नही चाची, मैं भला आपसे क्यू नाराज होने लगा।
वैसे आपका पीछे का दर्द ठीक huwa, हंसते हुवे बोला।
सविता _चुप कर बेशरम, एक तो दर्द देता है और मजाक उड़ाता है अपनी चाची का।
जब तुम्हारे पिछवाड़े में कोइ डालेगा न तब पता चलेगा कितना दर्द होता है।
राजेश _सॉरी चाची । राजेश ने सविता को पीछे से बाहों में भर कर कहा।
राजेश _अच्छा चाची अब मैं चलता हूं। राजेश जाने लगा,,
सविता _मुझे लगता है तुम कुछ भुल रहे हो।
राजेश _क्या?
सविता _तू बड़ा मतलबी है,,,
राजेश सविता को अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसकी ओंठो को चूम लिया।
राजेश _अब चलू।
सविता _हूं।
राजेश वहा से चला गया।
जब वह घर पहुंचा तो नाटक मंडली का प्रोग्राम भी खत्म हो गया।
राजेश ने सभी को भोजन कराया। और उन्हें बिदा किया।
सुनीता ने घर के पुरुष मेहमानों के बारे में पूछा तो।
राजेश _मां, वे सभी बंसी काका के यहां, भोजन करके सो गए है।
सुनीता _अरे, भोजन तो यहां बना है फिर वहा भोजन क्यू किए।
पुनम _अरे भोली चाची, वहा सबके लिए पीने खाने का प्रोग्राम रखा गया था।
सुनीता _अच्छा तो ये बात है तभी तो सारे मर्द नजर ही नहीं आ रहे थे।
राजेश, कहीं तुमने भी तो नही पी है,,
राजेश _न मां, न, सूंघ कर देख लो।
सुनीता _देख, तू घर में जो हरकत किया था न, उस निशा और उसकी मां के चक्कर में वैसी हरकत यहां मत करना। अपनी मां को शर्मिंदा मत करना, सुनीता ने ने फुसफुसाते हुवे कहा।
सुनीता _बेटा यहां तो महिलाओं से घर भर गया है, तू भी वही सो जाना बंसी काका के यहां।
राजेश _ठीक है मां।
राजेश बंसी काका के यहां, पहुंचा।
उसने देखा सभी लोग नशे में आपस में बडबडा रहे थे।
बंसी काका थोड़ा होश में था।
बंसी _अरे बेटा तू आ गया।
तुम्हारी काकी तुम्हारा इन्तजार कर रही थी।
राजेश _क्यू?
काका _पर क्यू काका?
राजेश _सभी लोग भोजन कर लिए है बस तू ही बचा है, इसलिए।
राजेश _ओह।
तुम्हारी काकी अपनी कमरे में है, मैं बता देता हूं।
बंसी अपने कमरे में गया,,
बंसी _मधु की मां, राजेश आ गया है उसे भोजन दे दो।
मंगली कमरे से बाहर आई,,
मंगली _अरे बबुआ तू आ गया, चल कीचन में तू भी भोजन कर ले।
अरे सुनो जी मधु भी भोजन नही की है उसे भी बुला दो।
बंसी मधु के कमरे में जाकर उसे बुला लायर।
मधु और राजेश के लिए मंगली ने भोजन लगाया।
राजेश _अरे मधु तू भी अभी तक खाई नही।
मधु _राजेश भैया, मां ने बताया की आप भोजन नही किए हैं तो मेरी भी इच्छा नही हुई खाने की।
राजेश _ओह, मेरे कारण आप दोनो भूखे है।
काकी _अरे बेटा, हमारे घर में तू एक मेहमान ही तो है, और मेहमान के खाने से पहले हम कैसे खा सकते है?
राजेश _चलो साथ में खाते है।
काकी मुझे मटन मत देना, मुझे पसंद नही, चिकन और मछली, अंडा लगा देना ।
मधु _तू क्या खायेगी।
मां मैं तू मछली खाती हूं, बस वही लगाना।
तीनो आपस में बात चीत करते हुवे भोजन करने लगे।
राजेश _वाह काकी सच में आप तो चिकन, मछली बहुत अच्छा बनाती है। बड़ा स्वादिष्ट बना है।
काकी _अरे बेटा पहले मैं भी नही खाती थी, तुम्हारे काका बड़े शौकीन हैं वह जिद करके मुझे भी खाना सीखा दिया।
भोजन करने के बाद, राजेश कमरे में चला गया जहा भुवन उसके दोस्त सोए हुवे थे।
मधु भी अपने कमरे में जा कर सोने लगी।
बंशी काका, उस कमरे में सोने लगे जहा शेखर,केशव और उसके समधी लोग सोए थे।
सभी लोग नसे में धुत होकर घोड़े बेच कर सोने लगे। सभी की नाक बज रहे थे।
राजेश को ऐसे में नींद नहीं आ रही थी।
वह छटपटाने लगा।
इधर बंशी काका को भी नींद नहीं आ रही थी वह उठ कर अपने कमरे में गया।
मंगली के पास जा कर उसकी चूची मसलने लगा।
मंगली की आंखे खुल गई।
मंगली _मधु की बापू तुम,
बंशी _मुझे नींद नहीं आ रही। बड़ा मन कर रहा है चोदने का।
मटन खाने और दारू पीने के कारण बंशी का लंद खड़ा हो गया था उसका chudai करने का मन कर रहा था।
मंगली _क्या कर रहे हो घर में मेहमान है और,,, न बाबा आज नही।
बंशी _तुम ही तो कहती हो न मैं जल्दी झड़ जाता हूं, देखो आज मेरा बड़ा सख्त हो गया है। आज जल्दी नही झड़ेगा।तुम्हें देर तक मजा दूंगा।
मंगली _ये तो हमेशा ही कहते हो, और कुछ ही देर में ढेर हो जाते हो, और मैं प्यासी रह जाती हूं।
बंसी _और मेरी रानी, आज तो बात ही कुछ है तुम्हे छू कर देखो।
मंगली _अच्छा ऐसी क्या बात है मैं भी तो देखूं।
बंशी काका ने लूंगी हटाकर अपना लंद दिखाया।
मंगली ने उसे हाथ से पकड़ कर देखा।
मंगली _हां जी आज तो बड़ा सख्त लग रहा है।
बंशी _इसलीय तो कह रहा हूं मेरी रानी, आज मैं तुम्हे निराश नही करूंगा। खूब मजा दूंगा।
मंगली _पर बाजू वाले कमरे में मेहमान सोए है। खाट की आवाज सुनकर कोई उठ गया तो।
बंशी _चलो घर के पीछे चलते है।
अच्छा ठीक है तुम चलो मैं आती हूं।
बंशी घर के पीछे झोपड़ी में चला गया जहा जानवरो के लिए पैरा रखा huwa था।
कुछ देर बाद कंडील लेकर मंगली वहा पहुंची।
बंशी मंगली को पैरे पे लिटा दिया।
मंगली अपनी पेटीकोट ऊपर उठा दी।
बंशी, मंगली की boor चाटने लगा।
बंशी बहुत जल्दी झड़ जाता था इसलिए वह चोदने से पहले मंगली की boor चांट चांट कर उसका पानी झाड़ता था।
मंगली,बंशी के द्वारा boor चाटने मादक सिसकारी निकालने लगी।
इधर राजेश को नींद नहीं आ था, उसे
पेशाब लगा। पेशाब करने के लिए घर के पीछे, गया।
उसे किसी के सिसकने की आवाज सुनाई पड़ी।
राजेश आवाज की ओर आगे बड़ा, झोपड़ी में हल्की रोशनी थी।
राजेश आगे जाकर देखा, वह देखता रह गया।
बंशी नीचे लेटा था। और मंगली उसके लंद पर बैठ कर उछल उछल कर chud रही थी।
आज, मटन और दारू का असर था जो बंशी जल्दी झड़ नही था।
मंगली की ब्लाउज खुली ही थी। उसके बड़े बड़े सुडौल स्तन हिल रहे थे।
राजेश का लंद खड़ा हो गया।कुछ देर इस नजारा को देख रहा था, तभी मंगली की नजर राजेश पर पड़ी।
दोनो की नजरे
मिली।
राजेश वहा से चला गया।
इधर बंशी काका ने अपनी हार मान ली और झड़ गया। उसका लंद पानी छोड़कर ढीला हो गया।
मंगली अभी झड़ी नही थीवह झड़ने वाली थी उसके पहले बंशी झड़ गया, वह फिर निराश हो गई।
बंशी _ओ हो माफ करना मधु की मां तुम्हारे झड़ने के पहले ही झड़ गया।
मंगली _ये पहली बार तो नही। अब तो मुझे आदत सी पड़ गई है।
बंशी और मंगली दोनो अपना कपड़ा ठीक किए। और वहा से घर में आ गए।
मंगली अपने खाट पे जाकर लेट गई।
बंशी भी मेहमानों के रूम में जाकर देखा सब ठीक तो है। उसने राजेश को जगा पाया।
बंशी _अरे राजेश बेटा तू अभी तक सोया नही है।
राजेश _अरे काका, इन लोगो के खर्राटे के कारण नींद नहीं आ रही।
बंशी _ओ हो, बेटा एक काम कर तू अपनी काकी के कमरे में जाकर सो जा वहा मेरी खाट खाली है। मुझे तो मेहमानों के साथ सोना है। पता नही किसको क्या जरूरत पड़ जाए।
राजेश _नही काका, काकी को बेवजह तकलीफ होगी।
बंशी _अरे नही, मैं अभी मंगली से बात करता हूं।
बंशी मंगली के पास गया,,
मंगली _क्या huwa जी।
बंशी _मधु की मां, राजेश को नींद नहीं आ रही लोगो के खर्राटे के कारण। मैने उसे मेरे खाट पर सोने को कहा।
पर वह मान नही रहा कह रहा है की काकी को तकलीफ होगी। अब तुम ही उसे बोलो।
मंगली राजेश की पास गई।
मंगली _बाबूवा, इस कमरे में समस्या हो रही है तो मेरे कमरे में आकर अपने चाचा के खाट पर सो जाओ। मुझे कोई समस्या नही होगी।
राजेश, उस कमरे से उठ कर काकी के कमरे मे चला गया।
मंगली ने बंसी के खाट को अपने खाट के बाजू में। लगा कर एक नया चादर बिछा दिया।
लो बाबूवा सो जाओ।
भुवन _अबे रवि, तू कितना समय आएगा बे।
रवि _अरे भाई भुवन मैं और विमल बस आ ही रहे है पहले ये बता खाने पीने की व्यवस्था किया है की नही।
भुवन _, अबे तू उसकी चिन्ता मत कर, चिकन मटन मछली,अंडा देशी और अंग्रेजी सब की व्यवस्था किया है।
रवि _अरे भाई तब तो मजा आ जायेगा।
भुवन _तुम लोग जल्दी , पहुंचो।
रवि _ठीक है भाई।
भुवन _अरे यार राजेश।
राजेश _बोलो भैया।
भुवन _यार, जरा बंसी काका के घर जाकर पता करते। सब चिकन, मटन सब तैयार huwa है कि नही।
राजेश _ठीक है भैया।
बंशी काका का घर बाजू में ही था। दोस्तो एवम पुरुष महमानो जो खाने पीने की शौकीन थे उनके लिए। खाने पीने की व्यवस्था उसी के यहां किया गया था।
क्यों की इस घर में तो मेहमानों की काफी भीड़ थी।
घर की महिलाए, चिकन मटन खाती नही थी तो घर में ये सब चीजें बनाया नही जा सकता था बाजू वाले घर में व्यवस्था किया गया था।
राजेश बंशी काका के घर पहुंचा।
बंशी काका _अरे राजेश बेटा आओ बैठो।
राजेश _पाए लागू काका।
बंशी काका _खुश रहो बेटा।
राजेश _काका, भुवन भैया ने मुझे भेजा है, पता करने की सारी सभी चीजे तैयार हुई है कि नही।
बंशी काका _अरे बेटा तुम्हारी काकी तो दोपहर से ही भिड़ी है सब चीजें बनाने में, मधु बिटिया भी सहयोग कर रही है।
बंशी काका ने मधु को आवाज़ लगाया।
अरे मधु बेटा देखो कौन आया है।
मधु कीचन में अपनी मार, मंगली की मदद कर रही थी।
वह अपनी बापू की आवाज़ सुन कर बाहर आई।
मधु _अरे बापू क्या huwa
बंशी _अरे बिटिया देखो कौन आया है।
मधु _राजेश भैया आप।
राजेश _अरे मधु, मैं पता करने आया था की सारी चीजे तैयार huwa है कि नही और कितना समय लगेगा।
मधु _मां बता रही थी की लगभग सभी चीजे तैयार होने वाली है।
अंदर से मंगली काकी ने आवाज़ दी, कौन है बेटी।
मधु _मां राजेश भैया आया है।
मंगली भी कीचन से बाहर आई,
मंगली _अरे राजेश बबुआ तुम।
राजेश _पाए लागू काकी।
मंगली _जीता रह बेटा।
राजेश_ओ काकी, क्या है न की भुवन भैया ने मुझे पता करने भेजा है कि सारी चीजे तैयार huwa है की नही।
मंगली काकी _बस बेटा कुछ देर में ही सारी चीजे तैयार हो जाएगी।
राजेश_काकी किसी चीज की आवश्यकता तो नही है।
मंगली _अरे बेटा, भुवन दोपहर में ही आकर सारी चीजे छोड़ गया था।
और किसी चीज की आवश्यकता नहीं है।
राजेश _अच्छा काकी मैं भुवन भैया को खबर दे देता हूं की सारी चीजे तैयार होने वाली है।
मंगली _, अरे बेटा कितने दिन बाद तु हमारे घर आया है, आते ही जाने लगे।
थोड़ा बैठो, अपने काका और मधु के साथ बतियाओ। मैं तेरे लिए चाय बनाती हूं।
मधु _हा, राजेश भैया, वैसे तो तुम हमारे घर आते ही नहीं।
काका _हा बेटा, मधु बिटिया और तुम्हारी काकी ठीक कह रही है, थोड़ी देर बैठ लो, चाय पी कर जाना।
राजेश _कुर्सी पर बैठ गया।
राजेश _, अच्छा मधु तुम्हारा तो एक बेटा है न, कही दिखाई नही दे रहा।
मधु _राजेश भैया, मुन्ने को मुहल्ले के बच्चे घूमाने ले गए है।
राजेश _मधु तुम्हारा, स्कूल में बच्चो को पढ़ाने कैसा अनुभव मिल रहा है।
मधु _भैया, मैं तो घर दिनभर घर में ही पड़ी रहती थी। मुझे तो जीवन बेकार लगने लगा था, पर जब से स्कूल जा रही बच्चो को पढ़ाने, बड़ा अच्छा लग रहा है।
राजेश _ये तो बड़ी अच्छी बात है।
मधु _ये सब आपकी मेहरबानी है भईया जो मुझे स्कूल में पढ़ाने का मौका मिल रहा है। मेरी बड़ी इच्छा थी कि मैं एक टीचर बनू।
राजेश _मधु अगर तुम टीचर बनना चाहती थी तो पढ़ाई बंद कर जल्दी शादी क्यू कर ली।
काका _अरे बेटा क्या बताया, मधु के लिए एक अच्छे घर का रिश्ता आया, तो हम लोग बिटिया शादी के बाद खुशी पूर्वक रहेगी करके शादी कर दिया।
पर हमारी यो किस्मत खराब था, लडका शराबी निकल गया। रोज शराब पीता है। इधर उधर पड़ा रहता है।शराब पीता है वो तो ठीक था, पर शराब पीकर मधु से मार पीट भी करता है।
अब मधु हमारी एक ही बेटी है, एक दिन तो मंगली मधु के ससुराल गई थी । उसके सामने ही मधु को पीटने लगा।
मंगली से देखा न गया। वह मधु को अपने साथ घर ले आई।
राजेश _ओह।
तभी मंगली चाय लेकर आई।
मंगली _अरे बाबुवा, इक मां अपनी बिटिया को कैसे उस नर्क में रहने दे सकती है, आखिर मधु के अलावा हमारा और कौन है?
इस ली मैं मधु को घर ले आई।
मधु _राजेश भैया, मेरी बड़ी इच्छा थी मैं पढ़ लिखकर टीचर बनू, क्या मैं माधुरी मैडम की तरह सरकारी शिक्षक नही बन सकती।
राजेश _अरे मधु, अगर तुम चाहो तो,तुम सरकारी शिक्षक अब भी बन सकती हो। पर इसके लिए मेहनत करनी पड़ेगी।
मधु _राजेश भैया, मुझे बताओ सरकारी शिक्षक की नौकरी के लिए मुझे क्या करना पड़ेगा।
राजेश _उसके लिए तुम्हे शिक्षक पात्रता की परीक्षा पास करनी होगी। और प्राथमिक शिक्षा में डिप्लोमा करना होगा। उसके बाद तुम शिक्षक की नौकरी के लिए एप्लाई कर सकती हो।
मधु _भैया ये सब होगा कैसे? कुछ मार्गदर्शन करते तो सदा आभारी रहूंगी आपकी।
राजेश _अरे मधु इसमें आभार वाली बात क्या है? ये तो मेरा फर्ज है। देखो राज्य सरकार हर साल शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन करती है। तुम अच्छे से तैयारी कर परीक्षा आसानी से पास कर सकती जो।
और रही डीपीई डिप्लोमा इन प्राथमिक एजुकेशन की बात ये मुक्त विश्व विद्यालय से घर में ही रहकर कर सकती हो।
मधु _सच भैया।
राजेश _हा, हा , और राज्य में शिक्षकों को भारी कमी है। नई सरकार आयेगी तो शिक्षको की भर्ती भी करेगी। तुम शिक्षक की नौकरी प्राप्त कर सकोगी।
पर थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।
मधु _भैया, आपने मुझे नया रास्ता दिखाया है। अब आपके मार्गदर्शन में मैं अपनी लक्ष्य तक अवश्य पहुंचूंगी। में जी तोड़ मेहनत करुंगी।
मंगली _राजेश बेटा, हमने तो मधु की जल्दबाजी में शादी कर दी, और उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी।
पर अब हम हमारे बेटी के साथ है जो वो चाहती है हम उसमें बाधा नहीं बनेंगे। उसकी सपना पूरी करने में तुम उसकी मदद कर दो बेटा, मैं तुम्हारी आगे हाथ जोड़ती हूं।
राजेश _अरे काकी ये तुम क्या कह रही हो। ऐसा करके मुझे शर्मिंदा न करो।
मधु का सपना जरूर पूरा होगा। ये वादा है आपसे।
मंगली _तू सच मे महान है बेटा, तू गांव के लोगो का उद्धार करने आया है।
राजेश चाय पीने लगा।
राजेश _काकी, चाय तो बहुत अच्छी बनी है।
बंसी काका _अरे बेटा, तुम्हारी काकी के द्वारा बनाई, चिकन, मटन और मछली खा कर देखना। क्या गजब की बनाती है।
राजेश _तब तो आज मजा आ जायेगा।
तभी लाउड स्पीकर में अलाउंस हुआ,कुछ ही देर में नाटक मंडली का कार्यक्रम चालू होने वाला है।
जन्मोत्सव की खुशी में पास के गांव के नाटक मंडली का कार्यक्रम रखा गया था।
वे अपने प्रोग्राम के लिए पहुंच चुके थे, उसके लिए मंच बनाया गया था।
राजेश _अच्छा काका, अब मैं चलता हूं भुवन भैया को जानकारी दे देता हूं सारी चीजे बनकर तैयार हो गया है।
काका _ठीक है बेटा।
राजेश वहा से चला गया।
भुवन को बताया की सारी चीजे बन चुकी है।
भुवन _अच्छी बात है, नाटक मंडली का प्रोग्राम चालू होने दो फिर उधर हम लोग अपना प्रोग्राम शुरू करेंगे।
नाटक मंडली के सदस्यों को चाय नाश्ता कराया गया।
कुछ देर में ही नाटक मंडली वालो का प्रोग्राम शुरू हो गया।
घर की महिलाए, एवम गांव की महिलाए मंच के सामने नाटक देखने बैठ गए।
नाटक शुरू होते ही।
भुवन, अपने चाचा माधव से कहा,,
भुवन _चाचा, पीने खाने की सारी व्यवस्था, बंसी काका के यहां हो चुका है। तुम जितने भी तुम्हारे समधी लोग है जो पीने खाने के शौकीन है उसे काका के घर लेकर चलो।
माधव _यहीं तो मैं पूछने वाला था व्यवस्था huwa है की नही,,
ठीक है सभी मेहमानों को लेकर मैं वहा पहुंचता हूं।
माधव, शेखर, केशव, अपने समधी और बाहर से आए अन्य मेहमान जो पीने खाने के शौकीन थे। उन्हे लेकर बंसी काका के घर ले गया।
भुवन ने बंसी काका के यहां दो कमरों में गद्दे बिछवा दिए थे।
क्यू की सभी मेहमान तो एक घर में आ नही सकते थे। इसलिए सोने की व्यवस्था भी बंसी काका के घर किया गया था।
बंसी काका ने मेहमानों को कमरे में ले गया जहां गद्दा बिछा huwa था।
मधु, नाटक देखने चली गई थी। मंगली कीचन में थी।
सभी मेहमान गद्दे में बैठ गए।
बात चीत करने लगे।
कुछ देर बाद भुवन काका के घर पहुंचा।
भुवन _काका मेहमान लोग, पहुंचगए न।
काका _हां बेटा।
भुवन, ने अंग्रेजी और देशी शराब के कई बाटल लाया था, उसमें से आधे को बंसी काका को दे दिया।
बंसी काका ने डिस्पोजल, शराब का बोतल, पानी लेकर कमरे में गया। माधव को दिया।
माधव ने बोतल खोलकर पैग बनाया।
इधर काकी कीचन में थाली में चिकन, मटन, मछली और अंडा निकाल कर रखी थी उसे बंसी काका
कीचन में जाकर, ले आया।
सभी लोग शराब पीकर, चखने का मजा लेने लगे और चखने की तारीफ करने लगे।
इधर भुवन और राजेश भी अपने दोस्तो और युवा मेहमानों को लेकर काका के यहां पहुंचे।
रवि विमल मोहन धीरज राजेश भुवन और अन्य लोग, दूसरे कमरे में जाकर बैठे, और वहा महफिल जमाया।
भुवन ने अंग्रेजी ओर देशी शराब की बोतल खोली सबके लिए पैग बनाया।
भुवन _राजेश, खाने के लिए कीचन में जाकर चिकन मटन प्याज, अन्य चीजे सब लेकर आओ।
राजेश कीचन में गया।
मंगली थाली में खाने की बनाई चीजे निकालती राजेश उसे कमरे तक पहुंचाता।
इधर भुवन पैग तैयार किया और सभी दोस्त जाम पैग पे पैग पीने और चखने का स्वाद लेने लगे।
धीरज _राजेश, तू भी तो पैग ले हमारे साथ।
भुवन _हा राजेश, ले तू भी ले।
राजेश _अरे भैया, उधर घर में कोइ पुरुष वर्ग है नही किसी चीज की जरूरत पड़ी तो, उन्हे पता चल जाएगा कि मैंने शराब पी है, फिर मां को क्या जवाब दूंगा।
ओ बड़ी नाराज हो जाएगी।
भुवन _हूं, ये भी बात है, अच्छा एक पैग मार ले। और मैने पान के ठेले से पान भी बनवा लिया है उसे चबा ले। शराब की गंध दब जाएगी।
मोहन _हा, राजेश हमारे साथ एक कम से कम एक पैग तो पीना ही पड़ेगा।
नही तो मजा नही आयेगा।
राजेश _अच्छा ठीक है, एक पैग उससे ज्यादा नही।
राजेश ने भी दोस्तो के साथ चेस कहते हुए एक पैग पी लिया।
इधर कुछ देर पीने का प्रोग्राम चलने के बाद,
शेखर _बंसी, चावल की व्यवस्था है की नही, भोजन भी कर लेते है।
बंसी _रोटी और चावल बना बनाया गया है। भैया।
शेखर _यहीं लगवा दो।
बंसी _ठीक है भैया।
बंसी सबके लिए पत्तल लगा दिया और रोटी चावल सब्जी परोस दिया, सभी लोग शराब पी पी कर भोजन का मजा लेने लगे।
सभी लोग को तेज़ नशा चढ़ गया।
भोजन करने के बाद। गद्दे को फिर अच्छे से बिछाकर लुड़क गए नशे में बात चीत करने लगे।
समधी जी मजा आ गया, बहुत अच्छी व्यवस्था किया है आपने। ज्योति के ससुर ने कहा।
इधर राजेश _भुवन भैया मैं घर तरफ जाकर देखता हू, किसी चीज की जरूरत तो नही।
भुवन _ठीक है राजेश, उधर की व्यवस्था देखो।
राजेश वहा से चला गया।
राजेश जब घर पहुंचा,,
सविता _राजेश तुम्हारा चाचा कहा है। अब हमे घर निकालना पड़ेगा। रात काफी हो चुकी है, घर बिल्कुल सुना है, कोइ चोर वगैरा आ गया तो।
जाओ अपने चाचा को बुला लाओ।
राजेश _ठीक है चाची।
राजेश बंसी काका के घर आया।
राजेश _चाचा, आपको चाची बुला रही है।
माधव, मेहमानों के साथ बतिया रहे थे।
माधव _क्यू राजेश कुछ काम था क्या?
राजेश _चाची कह रही थी की घर में कोइ नही है, घर को रात में सुना छोड़ना ठीक नही है।
शेखर _अरे हा माधव तू घर जा, बहु ठीक कह रही है। माधव _ठीक है भैया। मैं तो कहता हू आप लोग भी मेरे घर चलते वही सो जाते।
केशव _अरे माधव हम लोग उठ कर चलने की स्थिति में नहीं है। सभी हसने लगे। तू जा।
माधव _मेहमानों से इजाजत लेकर , वहा से चला गया।
राजेश _अरे चाचा जी, तुम ऐसे हालात में कहा पैदल जाओगे।
चलो तुम्हे बाइक से छोड़ आता हूं।
माधव _अरे बेटा, तुम्हारी चाची भी तो है।
राजेश _उसे भी बाइक से छोड़ दूंगा।
माधव _अच्छा ठीक है।
राजेश अपना बाइक ले आया।
माधव को बिठाकर घर छोड़ आया।
घर आने के बाद,,
सविता _राजेश, तुम तो अपने चाचा को बुलाने गए थे। कहा रह गए थे,,
सुनीता _हां बेटा, जाओ अपने चाचा जी को बुला लाओ। सविता घर जाने के लिए देख रही है।
राजेश _मां मैने चाचा जी को घर छोड़ आया।
सविता _अरे तो मैं किसके साथ जाऊंगी।
राजेश _चाची, चलो आपको भी छोड़ आता हूं।
सविता _अच्छा ठीक है।
सविता सभी से इजाजत ले ली।
राजेश सविता को बिठाकर उसके घर ले गया।
राजेश _अच्छा चाची मैं चलता हूं।
सविता _अरे तू कहा जा रहा है। वहा तो सोने की जगह नही है। घर मेहमानों से भर गया है। तू यहीं सो जा।
राजेश_चाची वहा मेरी जरूरत पड़ सकती है, अभी नाटक मंडली का कार्यक्रम चल रहा है, उन्हे भोजन भी कराना है।
सविता _क्यू बांकी लोग भी तो है घर में,, कहीं तू नाराज तो नही है मुझसे सुबह की बात को लेकर,,
राजेश _अरे नही चाची, मैं भला आपसे क्यू नाराज होने लगा।
वैसे आपका पीछे का दर्द ठीक huwa, हंसते हुवे बोला।
सविता _चुप कर बेशरम, एक तो दर्द देता है और मजाक उड़ाता है अपनी चाची का।
जब तुम्हारे पिछवाड़े में कोइ डालेगा न तब पता चलेगा कितना दर्द होता है।
राजेश _सॉरी चाची । राजेश ने सविता को पीछे से बाहों में भर कर कहा।
राजेश _अच्छा चाची अब मैं चलता हूं। राजेश जाने लगा,,
सविता _मुझे लगता है तुम कुछ भुल रहे हो।
राजेश _क्या?
सविता _तू बड़ा मतलबी है,,,
राजेश सविता को अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसकी ओंठो को चूम लिया।
राजेश _अब चलू।
सविता _हूं।
राजेश वहा से चला गया।
जब वह घर पहुंचा तो नाटक मंडली का प्रोग्राम भी खत्म हो गया।
राजेश ने सभी को भोजन कराया। और उन्हें बिदा किया।
सुनीता ने घर के पुरुष मेहमानों के बारे में पूछा तो।
राजेश _मां, वे सभी बंसी काका के यहां, भोजन करके सो गए है।
सुनीता _अरे, भोजन तो यहां बना है फिर वहा भोजन क्यू किए।
पुनम _अरे भोली चाची, वहा सबके लिए पीने खाने का प्रोग्राम रखा गया था।
सुनीता _अच्छा तो ये बात है तभी तो सारे मर्द नजर ही नहीं आ रहे थे।
राजेश, कहीं तुमने भी तो नही पी है,,
राजेश _न मां, न, सूंघ कर देख लो।
सुनीता _देख, तू घर में जो हरकत किया था न, उस निशा और उसकी मां के चक्कर में वैसी हरकत यहां मत करना। अपनी मां को शर्मिंदा मत करना, सुनीता ने ने फुसफुसाते हुवे कहा।
सुनीता _बेटा यहां तो महिलाओं से घर भर गया है, तू भी वही सो जाना बंसी काका के यहां।
राजेश _ठीक है मां।
राजेश बंसी काका के यहां, पहुंचा।
उसने देखा सभी लोग नशे में आपस में बडबडा रहे थे।
बंसी काका थोड़ा होश में था।
बंसी _अरे बेटा तू आ गया।
तुम्हारी काकी तुम्हारा इन्तजार कर रही थी।
राजेश _क्यू?
काका _पर क्यू काका?
राजेश _सभी लोग भोजन कर लिए है बस तू ही बचा है, इसलिए।
राजेश _ओह।
तुम्हारी काकी अपनी कमरे में है, मैं बता देता हूं।
बंसी अपने कमरे में गया,,
बंसी _मधु की मां, राजेश आ गया है उसे भोजन दे दो।
मंगली कमरे से बाहर आई,,
मंगली _अरे बबुआ तू आ गया, चल कीचन में तू भी भोजन कर ले।
अरे सुनो जी मधु भी भोजन नही की है उसे भी बुला दो।
बंसी मधु के कमरे में जाकर उसे बुला लायर।
मधु और राजेश के लिए मंगली ने भोजन लगाया।
राजेश _अरे मधु तू भी अभी तक खाई नही।
मधु _राजेश भैया, मां ने बताया की आप भोजन नही किए हैं तो मेरी भी इच्छा नही हुई खाने की।
राजेश _ओह, मेरे कारण आप दोनो भूखे है।
काकी _अरे बेटा, हमारे घर में तू एक मेहमान ही तो है, और मेहमान के खाने से पहले हम कैसे खा सकते है?
राजेश _चलो साथ में खाते है।
काकी मुझे मटन मत देना, मुझे पसंद नही, चिकन और मछली, अंडा लगा देना ।
मधु _तू क्या खायेगी।
मां मैं तू मछली खाती हूं, बस वही लगाना।
तीनो आपस में बात चीत करते हुवे भोजन करने लगे।
राजेश _वाह काकी सच में आप तो चिकन, मछली बहुत अच्छा बनाती है। बड़ा स्वादिष्ट बना है।
काकी _अरे बेटा पहले मैं भी नही खाती थी, तुम्हारे काका बड़े शौकीन हैं वह जिद करके मुझे भी खाना सीखा दिया।
भोजन करने के बाद, राजेश कमरे में चला गया जहा भुवन उसके दोस्त सोए हुवे थे।
मधु भी अपने कमरे में जा कर सोने लगी।
बंशी काका, उस कमरे में सोने लगे जहा शेखर,केशव और उसके समधी लोग सोए थे।
सभी लोग नसे में धुत होकर घोड़े बेच कर सोने लगे। सभी की नाक बज रहे थे।
राजेश को ऐसे में नींद नहीं आ रही थी।
वह छटपटाने लगा।
इधर बंशी काका को भी नींद नहीं आ रही थी वह उठ कर अपने कमरे में गया।
मंगली के पास जा कर उसकी चूची मसलने लगा।
मंगली की आंखे खुल गई।
मंगली _मधु की बापू तुम,
बंशी _मुझे नींद नहीं आ रही। बड़ा मन कर रहा है चोदने का।
मटन खाने और दारू पीने के कारण बंशी का लंद खड़ा हो गया था उसका chudai करने का मन कर रहा था।
मंगली _क्या कर रहे हो घर में मेहमान है और,,, न बाबा आज नही।
बंशी _तुम ही तो कहती हो न मैं जल्दी झड़ जाता हूं, देखो आज मेरा बड़ा सख्त हो गया है। आज जल्दी नही झड़ेगा।तुम्हें देर तक मजा दूंगा।
मंगली _ये तो हमेशा ही कहते हो, और कुछ ही देर में ढेर हो जाते हो, और मैं प्यासी रह जाती हूं।
बंसी _और मेरी रानी, आज तो बात ही कुछ है तुम्हे छू कर देखो।
मंगली _अच्छा ऐसी क्या बात है मैं भी तो देखूं।
बंशी काका ने लूंगी हटाकर अपना लंद दिखाया।
मंगली ने उसे हाथ से पकड़ कर देखा।
मंगली _हां जी आज तो बड़ा सख्त लग रहा है।
बंशी _इसलीय तो कह रहा हूं मेरी रानी, आज मैं तुम्हे निराश नही करूंगा। खूब मजा दूंगा।
मंगली _पर बाजू वाले कमरे में मेहमान सोए है। खाट की आवाज सुनकर कोई उठ गया तो।
बंशी _चलो घर के पीछे चलते है।
अच्छा ठीक है तुम चलो मैं आती हूं।
बंशी घर के पीछे झोपड़ी में चला गया जहा जानवरो के लिए पैरा रखा huwa था।
कुछ देर बाद कंडील लेकर मंगली वहा पहुंची।
बंशी मंगली को पैरे पे लिटा दिया।
मंगली अपनी पेटीकोट ऊपर उठा दी।
बंशी, मंगली की boor चाटने लगा।
बंशी बहुत जल्दी झड़ जाता था इसलिए वह चोदने से पहले मंगली की boor चांट चांट कर उसका पानी झाड़ता था।
मंगली,बंशी के द्वारा boor चाटने मादक सिसकारी निकालने लगी।
इधर राजेश को नींद नहीं आ था, उसे
पेशाब लगा। पेशाब करने के लिए घर के पीछे, गया।
उसे किसी के सिसकने की आवाज सुनाई पड़ी।
राजेश आवाज की ओर आगे बड़ा, झोपड़ी में हल्की रोशनी थी।
राजेश आगे जाकर देखा, वह देखता रह गया।
बंशी नीचे लेटा था। और मंगली उसके लंद पर बैठ कर उछल उछल कर chud रही थी।
आज, मटन और दारू का असर था जो बंशी जल्दी झड़ नही था।
मंगली की ब्लाउज खुली ही थी। उसके बड़े बड़े सुडौल स्तन हिल रहे थे।
राजेश का लंद खड़ा हो गया।कुछ देर इस नजारा को देख रहा था, तभी मंगली की नजर राजेश पर पड़ी।
दोनो की नजरे
मिली।
राजेश वहा से चला गया।
इधर बंशी काका ने अपनी हार मान ली और झड़ गया। उसका लंद पानी छोड़कर ढीला हो गया।
मंगली अभी झड़ी नही थीवह झड़ने वाली थी उसके पहले बंशी झड़ गया, वह फिर निराश हो गई।
बंशी _ओ हो माफ करना मधु की मां तुम्हारे झड़ने के पहले ही झड़ गया।
मंगली _ये पहली बार तो नही। अब तो मुझे आदत सी पड़ गई है।
बंशी और मंगली दोनो अपना कपड़ा ठीक किए। और वहा से घर में आ गए।
मंगली अपने खाट पे जाकर लेट गई।
बंशी भी मेहमानों के रूम में जाकर देखा सब ठीक तो है। उसने राजेश को जगा पाया।
बंशी _अरे राजेश बेटा तू अभी तक सोया नही है।
राजेश _अरे काका, इन लोगो के खर्राटे के कारण नींद नहीं आ रही।
बंशी _ओ हो, बेटा एक काम कर तू अपनी काकी के कमरे में जाकर सो जा वहा मेरी खाट खाली है। मुझे तो मेहमानों के साथ सोना है। पता नही किसको क्या जरूरत पड़ जाए।
राजेश _नही काका, काकी को बेवजह तकलीफ होगी।
बंशी _अरे नही, मैं अभी मंगली से बात करता हूं।
बंशी मंगली के पास गया,,
मंगली _क्या huwa जी।
बंशी _मधु की मां, राजेश को नींद नहीं आ रही लोगो के खर्राटे के कारण। मैने उसे मेरे खाट पर सोने को कहा।
पर वह मान नही रहा कह रहा है की काकी को तकलीफ होगी। अब तुम ही उसे बोलो।
मंगली राजेश की पास गई।
मंगली _बाबूवा, इस कमरे में समस्या हो रही है तो मेरे कमरे में आकर अपने चाचा के खाट पर सो जाओ। मुझे कोई समस्या नही होगी।
राजेश, उस कमरे से उठ कर काकी के कमरे मे चला गया।
मंगली ने बंसी के खाट को अपने खाट के बाजू में। लगा कर एक नया चादर बिछा दिया।
लो बाबूवा सो जाओ।