Incest यह क्या हुआ - Page 41 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

मंच पर भगत और उसके दोस्त पहुंचे। राजेश ने दिव्या से उनका परिचय कराया।

राजेश _दिव्या ये भगत है मेरा बेस्ट फ्रेंड

भगत _नमस्ते भाभी,,

दिव्या _जी, नमस्ते मुझे आप लोगो से मिलकर बड़ी खुशी हुई।

भगत _भाई भाभी बहुत सुंदर है, आप दोनो की जोडी बहुत अच्छी लग रही है।

उसके बाद मंच पर प्रिया और उसका पति पहुंचे।

समीर _अरे साले साहब शादी की आप दोनो को बहुत बहुंत शुभकामनाएं ।

राजेश _थैंक क्यू जीजू

दिव्या जी, ये मेरी बहन प्रिया और ये मेरे जीजा जी है। दोनो डॉक्टर है।

प्रिया _वैसे सुना है दिव्या भी तो एक डॉक्टर है न।

दिव्या _जी दीदी।

दिव्या और राजेश दोनो ने प्रिया समीर का पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

प्रिया _तुम दोनो सदा खुश रहो। ये लो हमारी तरफ से तुम दोनो की तोहफा,,

राजेश _या क्या है दी?

प्रिया _ये एक घर की चाबी है। मैंने राजधानी में 10करोड़ में तुम्हारे लिए एक घर खरीदा है।

ये हम दोनो की तरफ से तुम दोनो को शादी का तोहफा।

राजेश _दीदी इतना महंगा गिफ्ट ,, दीदी इसकी क्या आवश्यकता थी?

दिव्या _दीदी हम ये गिफ्ट कैसे ले सकते हैं?

प्रिया _अपने भाई के लिए मैं इतना तो कर ही सकती हूं। राजेश क्या तुम अपनो दीदी को निराश करोगे?

समीर _अरे रख लो यार इसमें तुम्हारी दीदी का प्यार छुपा है।

दिव्या ने राजेश की आंखों में देखा।

राजेश ने हां में इशारा किया।

दिव्या ने वो चाबी ले ली।

दिव्या _थैंक यू दी।

प्रिया _वैसे तुम्हारी दुलहन बहुत सुंदर है।

राजेश _थैंक्स दी।

सभी मेहमानों ने दिव्या और राजेश को शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिए। सभी इधर डिनर कर रहे थे उधर स्वीटी और आरती, पूनम सुप्रिया सुहागरात के लिए सेज सजा रही थी।

पूनम _क्यू न हम राजेश के साथ एक खेल खेले।

स्वीटी _कैसा खेल भाभी?

हम दुलहन की सेज में दुलहन की जगह किसी और को बिठा दे। और राजेश की प्रतिक्रिया की मजा लेते हैं। बोलो तुम लोग कहते हो।

सुप्रिया _वाह, ये तो बहुत अच्छा सुझाव है, राजेश कैसा रिएक्ट करता है मजा आयेगा।

सुप्रिया _switi तुम क्या कहती हो।

स्वीटी _मां को पता चल गया न तो बहुत डांट पड़ेगी।

सुप्रिया _ये बात हम चारों के सिवा किसी को पता नहीं चलेगी। और बुआ को पता चल भी गया तो मैं सम्हाल लूंगी।

राजेश कैसा प्रतिक्रिया करता है देखकर मजा आ जायेगा। इतनी आसानी सी दिव्या की पास जाने नही देंगे।

स्वीति _, पार यू सब होगा कैसे?

पूनम _हम दो कमरों में सेज सजाते है। एक कमरे मे किसी और को बिठा देंगे, और राजेश को पहले उसी कमरे में भेजेंगे। फिर बाद में मजाक के लिए माफ़ी मांग कर उसे दिव्या के कमरे मे भेज देंगे।

पूनम _आइडिया तो अच्छा है पर दुलहन बनाकर किसे बिठाएंगे।

आरती _हम सेज पर किसी आंटी को दुलहन बनाकर बिठा देते है। आइडिया तो अच्छी है पर, इसके लिए कौने तैयार होगी।

पूनम _पर i

तभी वहां रीता पहूंच गई।

रीता _क्या फुसुर फुसुर हो रही है भई तुम लोगो के बीच। वैसे सेज तैयार huwa की नही। क्यों स्वीटी बेटा।

स्वीटी _मम्मी सेज तो तैयार हो गया है। पर हम लोह एक खेल खेलना चाहते है।

रीता _कैसा खेल बेटा?

Switi _मम्मी जी आप किसी को बताना मत नही तो सब मजा खराब हो जाएगा।

रीता _नही बताऊंगी बेटा अपनी होने वाली सासू मां पर भरोसा करो।

स्वीटी न सारी योजना के बारे में बता दिया।

रीता _या तो बड़ी अच्छी योजना है ।

राजेश के साथ फ्लर्ट करने में मजा आयेगा।

सुप्रिया _पर आंटी जी सेज पर किसे बिठाए, समझ नही आ रहा, आप ही कुछ बताइए न, कौन बैठने के लिए तैयार होगी। आंटी जी आप दुलहन बनकर बैठ जाओ न।

रीता _न बाबा, सबको पता चलेगा तो रोहन और उसके डैड क्या सोचेगा मेरे बारे में,,,

सुप्रिया _तो आप ही बताइए न किसे बिठाए,,,

रीता कुछ देर सोचने लगी,,

फिर बोली,,

मेरी नजर में है एक महिला , मुझे यकीन है वो मना नहीं करेगी,,

पूनम _आंटी जी जल्दी बताइए न कौन है वो।

रीता _वो देखो, एक महिला जो कुर्सी में बैठी है।

स्वीटी _वो महिला,,

वो तो सुजाता है निशा की मां,,, इस राज्य की सबसे अमीर महिला,,,

रीता _अरे उससे क्या मतलब, वो कोन है, हमे तो बस राजेश से फ्लर्ट करना है।

मुझे यकीन है वह दिव्या की जगह सेज पर दुलहन की जगह बैठ जाएगी।

उससे जाकर बात तो करो।

स्वीटी _, मुझे तो कुछ ठीक नहीं लग रहा, उसे दुलहन बनाना।

सुप्रिया _अरे यार बस एक खेल ही तो खेल रहे हैं,, मै अभी जाकर उससे बात करती हूं।

रीता _हा उसे न बताना की मैने कहा है।

स्वीती चलो हम लोग यहां से चलने है हमें देखेगी तो सुजाता नही मानेगी।

सुप्रियाऔर पूनम सुजाता के पास चली गईं,,,

सुप्रिया _नमस्ते मैम।

सुजाता _नमस्ते

माफ करना मै आप लोगो को पहचाना नहीं।

पूनम _मै राजेश की भाभी हूं।

सुप्रियां _और मै राजेश के दी।

सुजाता _ओह आप लोगो से मिलकर बड़ी खुशी हुई।

सुप्रीय_मैम हम लोग आपसे एक हेल्प चाहते हैं।

सुजाता _मै आप लोगो के क्या हेल्प कर सकती हूं।

पूनम _हम लोग राजेश के सुहागरात में एक उससे फ्लर्ट करना चाहते हैं।

सुजाता _कैसा फ्लर्ट

सुप्रिया _हम चाहते है कि राजेश के सुहागरात की सेज पर दिव्या की जगह किसी आंटी को बिठाना चाहते है। और हमें इसके लिए आपकी मदद चाहिए।

सुजाता _तो आप लोग चाहती है कि सुहागरात की सेज पर मै बैठू।

पूनम_जी मैम।

सुजाता _देखो राजेश के साथ ये फ्लर्ट करना ठीक नहीं है। मै तो तुम लोगो से यही कहूंगी की उससे इस तरह की मजाक मत करों।

सुप्रिया _हम तो आपसे मदद मांगने आए थे।

लगता है कि आप हमारी मदद नहीं करेंगी। पूनम चलो हम किसी दूसरे से मदद लेंगे।

दोनो जाने को हुवे तभी सुजाता ने दोनो को आवाज दी।

सुजाता _अच्छा रुको,,,

सुप्रिया _जी,,

सुजाता _अच्छा ठीक है मै आप लोगो की मदद करने तैयार हूं।

लेकिन अगर कुछ भी बवाल हुवा तो उसकी जिम्मेदारी तुम लोगो को उठानी पड़ेगी।

सुप्रिया _आप उसकी टेंशन मत लीजिए। अगर कुछ huwa तो हम लोग कह देंगे की यह आइडिया हम लोगो का था। हमने आपसे मदद मांगी थी, आपका कोई दोष नहीं।

सुजाता _ठीक है फिर चलिए।

सुजाता उन दोनो के साथ चली गई।

पूनम और सुप्रिया ने सुजाता को दुलहन की तरह तैयार कर दी।

सुप्रिया _वाह मै आप तो सच में नई नवेली दुलहन लग रही है। कही भईया राजेश आपको देख कर सच में फिसल न जाए। आरती और पूनम हंसने लगी।

पूनम _अच्छा आप सेज पर बैठ कर घूंघट डाल दीजिए। हम लोग राजेश को कमरे मे भेजते है।

इधर रीता, अपने आप से,,,

आज तो फिर मौका मिल गया सुजाता को बेइज्जत करने का, अब देखना मजा आयेगा।

इधर राजेश दोस्तों के साथ, गपसप कर रहा था। दोस्त उन्हे सुहागरात के लिए टिप्स बता रहे थे।

राजेश _अरे यार मुझे समझ नहीं आ रहा है मै दिव्या जी को सुहागरात में कैसा फेस करुंगा।

भगत _अरे भाई अब तक पता नहीं कितना किला फतह कर चुका है अपने औजार के दम और अब नर्वस हो रहे हो।

राजेश _पता नही यार, मुझे ऐसा क्यों लग रहा हैकि मै उसके साथ ,,,

भगत _अरे भईया आप फालतू नर्वस हो रहे हो रहे हो,, भाभी खुद सम्हाल लेगी सब,,,

तभी वहां पूनम पहुंची,,,

पूनम _अरे देवर जी,, आप यहां क्या कर रहे हों?

चलो तुम्हारी दुल्हन कमरे में तुम्हारा इन्तजार कर रही है।

भगत _भाई, जाओ भाभी तुम्हारा इन्तजार कर रही है बेस्ट ऑफ लक

राजेश का हाथ पकड़ के पूनम उसे अपने साथ ले गया।

वहा सभी लड़कियां मौजुद थी।

सुप्रिया _जाओ राजेश क्या सोच रहे हो,,,

दुलहन तुम्हारा इन्तजार कर रही है।

राजेश को धक्का देकर कमरे में भेज दिया और कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया।

इधर सुजाता की दिल की धड़कन बढ़ चुकी थी।

राजेश देखा दिव्या घुघट डाल कर बेड पर बैठी है।

वह धीरे कदमों से बेड के पास गया। और आवाज निकाल कर दिव्या को कमरे में आने का अहसास कराया।

राजेश बेड पर बैठ गया।

राजेश को समझ नही आ रहा था क्या बोले,,

राजेश _दिव्या जी आप खामोश क्यों बैठी है कुछ बोलो न,,,

सुजाता चुप बैठी थी।

राजेश _क्या मै ये घूंघट,,,, उठा,,,, दू,,,

सुजाता ने कोई जवाब नही दिया,,,

तब राजेश ने उसका घूंघट हाथो में लेकर उठाने लगा।

सुजाता का दिल जोरो से धड़क रहा था।

जैसे ही घूंघट उठा। राजेश ने दिव्या की जगह सुजाता को देख कर चौंक गया।

राजेश _मैम आप ये कैसा मजाक है?

सुजाता _हां ये एक मजाक है।

राजेश बेड से उठ कर जाने को huwa

सुजाता _राजेश एक मिनट रुको,,,

राजेश _मैम आपको इस तरह का मजाक नहीं करना चाहिए था।

सुजाता _राजेश तुम्हारी बहनों ने मुझे यहां बिठाया, क्यों की वो तुमसे फ्लर्ट करना चाहते थे। मै नही बैठती यहां कोई और होती,,,

राजेश मै जानती हूं तुम मुझसे नाराज़ हों न उस दिन के लिए जब तुम मेरे ऑफिस आए थे मैने तुमसे बात नही की।

मै जानती हूं मेरे बुरा बर्ताव से आहत होकर दिव्या से शादी कर ली।

राजेश _नही ऐसी कोई बात नही है?

सुजाता को पीछे से पकड़ कर चिपक गई।

सुजाता _राजेश मुझे माफ कर दो प्लीज। मुझे नही पता था कि मेरे बुरे बर्ताव से तुम आहत होगे।

राजेश मै तुम्हारे से बिताए पल अब तक भूल नहीं पाई हूं। आज भी तुम मेरे सपनो में आते हो।

प्लीज राजेश मुझे एक बार अपने गले से लगा लो।

राजेश _मैम ये आप क्या कह रही है? मेरी शादी हो गई है। मै दिव्या का भरोसा नहीं तोड़ सकता

सुजाता _नही राजेश प्लीज मुझे अपने गले से लगा लो,,

सुजाता ने राजेश को घुमाया और उसे अपने ओर कर के उसके गले से लिपट गई।

राजेश _मैम ये आप क्या कर रही है। छोड़ों मुझे प्लीज, मै दिव्या का भरोसा नहीं तोड़ सकता। आप मुझे भूल जाओ, इसी में हम सबकी भलाई है।

सुजाता _नही राजेश मै तुमको नही भूल सकती, प्लीज मुझे अपनी बांहों में ले लो,,,

राजेश ने जोर लगाकार खुद से सुजाता से दुर किया और दरवाजा खोलो करके पीटने लगा।

सुजाता राजेश को फिर से जकड़ ली

सुजाता _नही मै तुम्हे नही जाने दूंगी,,,

प्लीज मुझे बाहों में ले लो,, सुजाता रोने लगी,,,

राजेश _दरवाज़ा खोलो प्लीज,,

इधर सभी लड़कियां मजे ले रहे थे,,,

दरवाज़ा पीटने की आवाज सुनकर सुनिता वहा पहुंची,,,

सुनीता _क्या हो रहा है यहां पर,,,

अंदर से दरवाज़ा कौन पीट रहा है,,

दरवाज़ा खोलो,,,

पूनम और सुप्रिया, सुनिता को देख कर सहम गई,,

सुनीता ने दरवाज़ा खोला अंदर का दृश्य देख कर उसकी आंख फटी की फटी रह गईं,

सुजाता राजेश को जकड़ी हुई थी, वह रो रही थी और राजेश को मैं तुम्हे नही जाने दूंगी बोल रही थी।

दरवाज़ा खुलते ही, राजेश और सुजाता ने सामने सुनिता को देखा तो उन दोनो के भी होश उड़ गए।

कुछ देर तक सुनिता राजेश और सुजाता को ही देख खड़ी रहीं,,

सुप्रिया _बुवा हमे माफ कर दीजिए प्लीज़, हम लोग तो राजेश के साथ मजाक कर रहे थे, उसने सारी बात बता दी,,

वहा पर रीता भी खड़ी थी उसे बहुत मजा आ रहा था

सुनीता_सविता तुम राजेश को ले जाओ बहु के कमरे में, और सभी लोग यहां से जाओ,,

सभी लोग वहां से चले गए,,,

अब सिर्फ सुनिता और सुजाता ही वहा पर थी।

सुनीता _सुजाता जी मुझे पहले ही डर था तुम कुछ ऐसी हरकत न कर दो जिससे राजेश की शादी में कोई बाधा पहुंचेऔर जब शादी हो गई तो ऐसी हरकत, तुम्हारे और तुम्हारी बेटी के कारण वह बिलकुल टूट चुका था। मै ही जानती हूं कितना मुश्किल से सम्हला है राजेशऔरआप फिर उसकी खुशियां छीनने चली आई।

मै आप से हाथ जोड़कर भीख मांगती हूं प्लीज मेरे बेटे की जिंदगी से दुर हो जाइए।

सुजाता _तुम ठीक कह रही हो सुजाता, मुझ्से गलती हो गई। मुझे माफ कर दीजिए। पता नहीं मुझे क्या हो गया था। मै भावनाओ में बह गई थी। पर मै आपसे वादा करती हूं। मै राजेश को अब कभी परेशान नहीं करूंगी।

सुनीता वहा से चली गईं।

सुजाता दरवाज़ा बंद कर फूट फुट कर रोने लगी।

इधर राजेश अभी हुई घटना से अपसेट हो गया था।

सविता _राजेश देखी अभी जो कुछ भी huwa उसे भूल जाओ। उसे समझा रही थी।

तभी सुनिता वहा पहुंची,,,

राजेश _मां, मुझे माफ कर दो,,,

सुनीता _बेटा, तुम क्यो माफी मांग रहे हो? इसमें तुम्हारी कोई गलती नही,,,

बेटा अपने मन को शांत रखो और बहु के पास जाओ वो तुम्हारा इन्तजार कर रही है। जो कुछ भी huwa उसके बारे ने बहु को कुछ न बताना नही तो पता नही वो क्या समझेगी।

तभी वहां रीता पहूंच गई।

रीता _ये सुजाता ने अच्छा नही किया,, चलो मानती हूं लडकियो ने राजेश के साथ फ्लर्ट करने के लिए ये सब किया, सुजाता को इसके लिए मना करना था, वो तो मना करने के बजाए खुद ही दुलहन बनकर सेज पर बैठ गई। अब बैठ गई तो बैठ गई वो तो राजेश के साथ जबरदस्ती करने लगी।छी,, उसे ज़रा भी शर्म नहीं आई, सब क्या सोचेंगे?

रीता _वैसे राजेश अब तुम इस घटना को भूल जाओ , और जाओ दिव्या के साथ नई जिंदगी की शुरूवात करो।

सुनीता _जाओ बेटा बहु तुम्हारी राह देख रही होगी।

सविता _चलो राजेश मै तुम्हे दिव्या के कमरे तक छोड़ देती हूं।

सविता ने राजेश को कमरे तक छोड़ आया।

राजेश ने देखा सेज पर दिव्या बैठी थी।

पर उसके मन में डर आ गया था कही फिर दिव्या जी के जगह कोई और तो नहीं बैठी है। वैसे घटना के बाद से वह अपसेट था।

चारों तरफ कमरे को फूल से सजाया गया था। पुरा कमरा फूलो की खुशबू से महक रहा था ।

वह बेड पर जा कर बैठा और काफी देर तक खामोश बैठा रहा।

दिव्या ने जब देखा कि राजेश खामोश।

दिव्या _क्या huwa जी, आप चुप क्यो हो?

राजेश चौंका,,,

राजेश _दिव्या जी, आप मुझे जी क्यों बोल रही हो।

दिव्या _आप मेरे पति हो तो नाम नही ले सकती न मां ने तो यही सिखाया हैएक संस्कारी पत्नी को अपने पति का नाम नही लेना चाहिए।

और ये क्या अब टू मै आपकी बीबी हूं फिर मुझे दिव्या जी क्यो बोल रहे हो। अब मुझे सिर्फ दिव्या कहा करे।

राजेश _नही नही, मुझसे नही हो पाएगा, मै आपको दिव्या की ही पुकारूंगा। और आप मुझे राजेश ही कहा करे। आपके मुंह से जी सुन कर मुझे अच्छा फिल नही होता।

दिव्या _पर मै आपको आपके नाम से नही बुला सकती न, सब मुझ पर हसेंगे।

राजेश _अच्छा ठीक है। जब हम अकेले हो टू नाम से बुलाना, और कोई दूसरा हो तो स्वामी जी।

दिव्या _ये ठीक रहेगा, स्वामी जी।

अच्छा आप मुझे घूंघट में ही रखेंगे क्या?

राजेश _ओह सॉरी,,

अच्छा अभी उठाता हूं।

राजेश ने दिव्या का घूंघट उठाया।

दिव्या ने अपनी नजरे झुका ली।

राजेश दिव्या की खूबसूरती को देखता रह गया।

राजेश _सच में आप बहुत सुंदर हो दिव्य जी।

निशा शर्मा गई।

पर ये क्या आप नजरे क्यू झुका ली हो। मेरे तरफ देखो न।

दिव्या _नही मुझे शर्म आ रही है।

राजेश ने दिव्या की ठोडी को हाथ से ऊपर उठाया ।

दिव्या की नजर जब राजेश से मिली तो वो शर्मा गई। वह शर्मा कर राजेश से लिपट गई।

दिव्या _मुझे तो अब भी यकीन नही हो रहा है कि हमारी शादी हो गई है।

मैने तुम्हे पाकर दुनिया की सारी खुशियां पा ली।

राजेश _मै भी किस्मत वाला हूं जो इतना प्यार करने वाला बीबी मिली।

दिव्या _वैसे हम यहां सिर्फ दोनो ही नहीं है। यहां कोई और भी है।

राजेश _मुझे तो यहां कोई तीसरा दिख नही रहा,,

दिव्या _वो यहां है दिव्या ने राजेश का हाथ अपने पेट पर रख दिया।

राजेश _ओह मै तो भूल ही गया था।

दिव्या _4माह का हो गया है। हमारा बच्चा, मै बहुत ही उत्साहित हूं उसे जन्म देने के लिए।

राजेश _दिव्या जी तुम्हारे घर वालों ने समझाया कि बच्चे को गिरा दो फिर तुमने उनकी बात क्यों नहीं मानी।

दिव्या_क्यों की मै तुमसे प्यार करती थी।

राजेश _ये बात आपने कभी मुझसे कहा क्यों नहीं कि तुम मुझसे प्यार करती हो।

दिव्या _वो इसलिए की तुम निशा से प्यार करते थे, और मुझे डर था की तुम मेरे प्यार को ठुकरा न दी, अगर ऐसा होता तो मैं जी नही पाती। इसलिए मैं तुमसे अपनी दिल की बात कह पाने की कभी हिम्मत नही जुटा पाई।

पर भगवान भी यही चाहता था कि हम मिले तभी उसने तुम्हारा अंश मेरे पेट में भेज दिया। जिसने हमें मिलाया।

राजेश तुम खुश तो हो न इस शादी से, कही मेरी इस स्थिति पर तरस खा कर तो मुझसे शादी नही किया न।

राजेश _नही दिव्या जी ये आप क्या कह रही है, निशा के बाद अगर कोई मेरे दिल के इतने करीब आया तो वो तुम हो आई लव यू दिव्या जी।

दिव्या _i लव यू टू राजेश।

राजेश और दिव्या दोनो एक दूसरे से लिपट गए। फिर

दिव्या राजेश की आंखो में देखने लगी।

दिव्या राजेश के ओंठो पर अपनी ओंठ रख कर चूसने लगी।

राजेश ने भी दिव्या का ओंठ चूसना शुरू कर दिया।

दिव्या की ओंठ चूसते हुवे जब वह गर्दन को चूमते हुवे नीचे बड़ा,,,

राजेश _उफ,,

दिव्या _क्या huwa

राजेश _तुम्हारे ये गहने,,,

दिव्या हस पड़ी,

दिव्या _उतार दो न इसे अपने हाथो से, मुझे भी बहुत भारी लग रहे हैं।

राजेश एक एक कर के दिव्या के सारे गहने उतारता चला गया।

राजेश ने गर्दन को चूमना शुरु किया और चूमते हुवे आगे बडा फिर रुक गया।

दिव्या _अब क्या huwa

राजेश ये कपड़े,,

दिव्या शर्मा गई,,

दिव्या _नही मै तुम्हारे सामने कपड़े उतार नही पाऊंगी, मुझे बड़ी शर्म आयेगी। प्लीज ऐसे ही प्यार कर लो न।

राजेश _अच्छा आप ही बताओ कैसे प्यार करू।

दिव्या _मुझे क्या पता मैने पहले थोड़े ही किया है। पर तुम्ह तो बड़ा अनुभव रखते हो।

राजेश _अच्छा काम से कम साड़ी तो उतार सकती हो।

दिव्या _न बाबा, तुम्हारे सामने सिर्फ पेटीकोट और ब्लाऊज़ में रहूंगी तो बड़ी शर्म आयेगी।

राजेश _अच्छा गीता दी तो बता रहीं थी की ठंड से मेरी बचाने के लिए अपनी सारे कपड़े उतार के और मुझे भी नंगा करके साथ में सो गई।

दिव्या _चुप, मुझे बड़ी शर्म आती हैउसे याद करके, वो तो तुम्हारी जान बचाने के लिए कर गई। वरना कभी सपने में भी ऐसा करने की कभी सोंची नही थी।

राजेश _अच्छा ठीक है, तो हम एक दूसरे को बाहों में लेकर सो जाते हैं। हो गया हमारा सुहागरात ठीक है।

दिव्या _तुम तो नाराज हो रहे हो। अच्छा ठीक है मै सिर्फ साड़ी ही उतारूंगी।

पर पहले तुम अपना सेरवानी उतारो।

राजेश _अच्छा ठीक है, कहो तो पजामा भी उतार दूं।

दिव्या _ठीक है।

राजेश ने अपना ने सेरवानी और पजामा उतार कर चड्डी बनियान में आ गया।

दिव्या _राजेश को चढ़ी बनियान में देख कर हंसने लगी।

राजेश _हस क्यू रही हो चलो अब तुम अपना साड़ी उतारो।

दिव्या _ न, मै नही उतारूंगी।

राजेश _ये तो चीटिंग है।

,
 
राजेश _हस क्यों रही हो चलो अब तुम भी अपनी साडी उतारो।

दिव्या _न बाबा मै नही उतारूंगी।

राजेश _ये तो चीटिंग हैं।

प्लीज उतारो न मुझे आपको बिना कपड़ो में देखना है।

दिव्या _छी कितने गंदे हो तुम,,,

लगता औरतों को बिना कपड़ो में देख देख कर तुम्हारी आदत बिगड़ गई है। छी,,,

राजेश _देखो यदि तुमने कपड़े नही उतारे न तो,,,

दिव्या _तो,,,,

राजेश _तो,,

तो मैं,,

मै सो जाऊंगा,,,

फिर बाद में मत कहना सुहाग रात में कुछ किए नही,,,

दिव्या _ठीक है सो जाओ,,,

राजेश नाराज होकर दिव्या की ओर पीठ करके सोने लगता है।

दिव्या _लगता है मेरे भोले बलमा मुझसे नाराज़ हो गया। सॉरी , इधर देखो न

राजेश ने दिव्या की तरफ मुंह कर लिया।

अच्छा मै साड़ी उतारती हूं,,,

पर पहले लाईट बन्द कर दो न, मुझे बड़ी शर्म आयेगी।

राजेश _इसे अच्छा हम सो ही जाते है।

दिव्या _आज हमारी सुहागरात है ऐसे ही सो जाओगे। कल सब पूछेंगे, रात में क्या huwa तो क्या बताऊंगी।

राजेश _झूठ बोल देना, रात भर मैने तुम्हे सोने नहीं दिया।

दिव्या _न बाबा मै झूठ नहीं बोल पाऊंगी।

राजेश _तो फिर,, सच बता देना, मैने तुम्हे साड़ी उतारने कहा तुम नही मानी फिर मैं नाराज होकर सो गया।

दिव्या _सब मुझ पर हसेंगे।

राजेश _तो फिर,,,

दिव्या _अच्छा ठीक है मै साड़ी उतारती हूं,,, पहले तुम अपनी आंखें बंद कर लो,,

राजेश _लो मैने अपनी आंखें बंद कर लिया। राजेश अपनी दोनो हाथ अपनी आंखो पर रख लिया।

दिव्या बेड से उतरी और फिर अपनी साडी उतारने लगी,,

दिव्या _तुम देख तो नहीं रहे न,,,

राजेश _न,,,

दिव्या ने अपनी साडी उतार दी,,,

राजेश _अब मै आंखें खोलू?

दिव्या _हूं,,

राजेश ने अपनी आंखें खोला, सामने दिव्या पेटी कोट और ब्लाउज में थी।

अपने दोनो हाथ सीने में पर रखी थी और नजरे नीचे कर रखी थी।

राजेश हंसने लगा,,,

दिव्या _क्या huwa आप हंस क्यू रहे हैं?

राजेश _कुछ नही, बस ऐसे ही हसी आ गई,,

दिव्या जी आप बहुत सुंदर है।

दिव्या शर्मा गई।

राजेश बेड से उतर कर खडा हो गया।

राजेश दिव्या के पीछे गया और उसे अपनी बांहों में भर लिया।

दिव्या _क्या कर रहे हो, छोड़ों न,,,

राजेश _अपनी पत्नी को प्यार कर रहा हूं।

राजेश दिव्या के खुले पीठ के चूमने लगा।

दिव्या सिसकने लगीं।

राजेश दिव्या को जकड़ कर उसकी गर्दन को चूमने लगी।

दिव्या आंखें बंद कर सिसकने लगी।

राजेश ने दिव्या को घुमा कर अपनी ओर किया। दिव्या राजेश की आंखों में देखने लगा।

राजेश घुटने के बल नीचे बैठ गया।

फिर दिव्या की खूबसूरत नाभी को चूमने चाटने लगा।

दिव्या राजेश की बालो की सहलाते हुए आंखें बंद कर सिसकने लगी।

कुछ देर राजेश उसकी पेट और नाभि को चूमने के बाद खड़ा हो गया। फिर दिव्या को अपनी गोद में उठाकर बेड पर लिटा दिया।

राजेश बेड पर चढ़ गया।

वह दिव्या की पैर की उंगलियों को मुंह में लेकर चूसने लगा। । दिव्या के मुंह से सिसक निकलने लगी।

उसके बाद राजेश दिव्या की पैर चूमते हुए आगे बड़ा। अब पेटीकोट धीरे धीरे उठा करे उसके पैरो को चूमते चूमते उसकी जांघ तक जा पहुंचा।

उसकी जांघ को चूमने लगा। दिव्या आंखें बंद कर ली थी और सिसक रही थी।

राजेश जांघ की को चूमते हुए उसकी पेंटी तक । राजेश की हरकतों से पेंटी गीली हो चुकी थी।

राजेश ने दिव्या की पेंटी को सूंघा।

एक जनाना गंद,boor की पानी की गंध नाक में जाते ही वह मदहोश हो गया। राजेश ने पेंटी के ऊपर से ही boor को चूम लिया।

दिव्या सिसक उठी।

राजेश आगे बड़ा उसकी नाभी चाटने लगा। फिर आगे बड़ कर दिव्या की आंखो मे देखने लगा।

दिव्या भी राजेश की आंखों में देखने लगी वह तेज तेज सांस ले रही थी।

राजेश अचानक से उठ बैठा।

दिव्या चौंक गई।

दिव्या _क्या huwa?

राजेश _लगता है आपको अच्छा नहीं लग रहा है दिव्या जी।

अब बस करते हैं, आप सो जाइए।

दिव्या _मुझसे कोई गलती हो गई क्या?

राजेश _सिर्फ मै ही कर रहा हूं आप तो कुछ कर ही नही रही।

दिव्या उठ कर बैठ गई।

राजेश के सिर को पकड़ कर अपना ओंठ उसके ओंठ के पास ले गई फिर। राजेश का ओंठ अपने ओंठ में भर कर चूसने लगी।

राजेश की बनियान को उतार दी।

राजेश बेड पर लेट गया दिव्या उसके ऊपर आ गई।

राजेश के गर्दन को चूमने चाटने लगी उसके सीने को चूमते हुवे।

नीचे बड़ी।

राजेश का लंद खड़ा हो चुका था।

दिव्या को पता था राजेश का लंद बहुत बड़ा है।

वह पहले भी राजेश का लंद देख चुकी और अपने अंदर ले चुकी थी। उसे काफी दर्द huwa था।

दिव्या ने राजेश का चड्डी अपने हाथो से पकड़ कर टांगो से होते हुए अलग कर दिया।

राजेश का लंद हवा में लहराने लगा।

लंबा मोटा लण्ङ को कुछ देर दिव्या देखने लगी।

राजेश _क्या huwa दिव्या जी।

दिव्या _शर्म से,,,

कुछ नहीं,,

राजेश ने दिव्या का हाथ पकड़ कर अपने लंद पर रख दिया।

दिव्या राजेश के लंद को सहलाने लगी।

दिव्या _तुम्हारे घोड़े ने तो अच्छे अच्छे अनुभवी औरतों की चीखे निकाल देती होगी।

आपको नही लगता की तुम्हारा कुछ ज्यादा ही लंबा और मोटा है।

राजेश _अब मै क्या कर सकता हूं दिव्या जी, ऊपर वाले ने यही दिया है तो।

कुंवारी लड़कियां तो देख के डर जाती है, और अनुभवी औरते एक बार लेने के बाद दीवानी हो जाती है।

दिव्या _अब मै तुम्हे किसी के पास जाने नही दूंगी।

राजेश _आपकी इजाजत के बिना किसी के पास नही जाऊंगा। वैसे मेरा घोड़ा आपको पसंद आया की नही।

दिव्या _हूं, अब तो इस घोड़े की सवारी सिर्फ मैं ही करूंगी।

इसकी सवारी करने से पहले इसे प्यार तो करो।

दिव्या _कैसे?

राजेश _जैसे सभी औरते करती है। मुंह में लेकर

दिव्या _मै नही ले पाऊंगी। मुझे कोई अनुभव नहीं है।

राजेश _ठीक है आपको पसंद नही है तो मत लो।

दिव्या _नाराज तो नही होगे न।

राजेश_न।

दिव्या _अच्छा ठीक है मैं कोशिश करती हूं।

दिव्या ने राजेश का लंद का टोपा जीव से चांटा।

राजेश सिसक उठा।

राजेश को अच्छा फिल करता देख दिव्या टोपा को मुंह में भर कर चूसने लगी।

राजेश _आह दिव्या जी बहुत अच्छा फिल हो रहा है। थोड़ा और अंदर ले लो,,

दिव्या ने लंद को मुंह और अंदर कर लिया और चूसने लगी।

राजेश प्यार से उसकी बालों को सहलाने लगा।

राजेश _आह, आह,,,

दिव्या अब लंद को तेजी से अपने मुंह में अंदर बाहर करने लगी।

दिव्या _मै अच्छे से कर रही हूं न,,

राजेश _हां, बहुत अच्छा कर रही हों,,,

दिव्या तेज तेज चूसने लगी।

राजेश _आह आह,,

कुछ देर बाद,, हो गया अब बस करो दिव्या जी,,

दिव्या ने लंद चूसना बंद कर दिया।

राजेश उठ कर बैठ गया।

दिव्या को अपनी गोद में बिठा लिया।

दिव्या की ओंठ चूसने लगा।

फिर दिव्या की ब्लाउज की बटन खोल कर उसे अलग कर दिया।

उसकी ब्रा भी उतार दिया।

दिव्या की मस्त सुडौल बड़ी बड़ी चूचियां देख राजेश के लंद और शख्त हो गया।

राजेश ने दिव्या की एक चूची मुंह में भर कर चूसने लगा दूसरी चुकी हाथ से मसलने लगा।

दिव्या की योनि पानी फेकने लगा।

कुछ देर तक चुकी से खेलने के बाद राजेश ने दिव्या को बेड पर लिटा दिया। फिर नाभी चूमते चाटते हुए नीचे गया ।

पेटीकोट का नाडा खोल दिया और उसकी पेटीकोट को टांगों से खीच कर अलग कर दिया।

राजेश ने हाथ से ही दिव्या की योनि को सहलाने लगा।

दिव्या की सांसे तेज चलने लगी।

राजेश ने उसकी पेंटी भी खीच कर अलग कर दिया।

दिव्या की मस्त फूली हुई चिकनी chut देखकर राजेश का लंद झटके मारने लगा।

राजेश _दिव्या जी सच में आप बहुत सुंदर हो, बाहर से भी और अंदर से भी।

राजेश ने दिव्या की योनि को अपनी हाथ से सहलाया।

उसकी टांग को फैला कर अपना मुंह योनि में घुसा दिया।

दिव्या बहुत अधिक उत्तेजित हो गई उसके पुरा शरीर कपकपाने लगी।

वह राजेश की बालो को सहलाने लगी।

राजेश अपनी जीभ से उसकी योनि की भग्नासा को कुरेदना लगा।

राजेश की हरकत से दिव्या इतनी अधिक उत्तेजित हो गई की वह खुद को रोक न सकी और चीखते हुए झड़ने लगी। यह उसका पहला झड़ने का अनुभव था। उसने कभी सोचा नहीं था की इतना आनंद दायक अनुभव होगा।

इधर कुछ देर तक राजेश रुका रहा फिर, राजेश ने योनि चाटना शुरु कर दिया कुछ ही देर में दिव्या फिर उत्तेजित हो गई,,

दिव्या कपकपाते आवाज में बोली राजेश अब रुक जाओ,,,,, प्लीज,,

नही तो,,,, मर,,,,,जा,, उंगी,,,, आह मां आई,,,,,

राजेश रूक गया।

राजेश अब दिया के टांगो के बीच बैठ गया।

अपना लंद का टोपा दिव्या की योनी द्वार पर रख दिया

फिर एक हल्का दबाव डाला। लंद का टोपा अंदर चला गया।

दिव्या सिसक उठी अब राजेश दिव्या के ऊपर लेट गया

उसकी ओंठ चूसते हुए।अपना लंद धीरे धीरे उसकी योनि में उतरता चला गया।

दिव्या को थोड़ा दर्द huwa पर राजेश ने अपना मुंह उसके मुंह पर दबा रखा था।

अब राजेश लंद अंदर बाहर करने लगा।

दिव्या को दर्द की जगह मजा आने लगा।

दिव्या आनंद में सिसकने लगीं।

अब राजेश अपना स्पीड बढ़ाने लगा।

दिव्या को बहुत मजा आने लगा।

राजेश अब उकडू बैठ गया। और दिव्य की चुकी मसल मसल कर चोदना शुरू कर दिया।

दोनो काफी उत्तेजित हो गए दोनो स्वर्ग की सैर कर रहे थे।

राजेश को भी बहुत मजा आ रहा था। दिव्या तो संभोग की अलौकिक कामसुख प्राप्त कर रही थी।

राजेश जोश में आकर एक जोर का धक्का मार दिया।

दिव्या चीख उठी उसके पेट में दर्द होने लगा।

दिव्या _मां,,, आह,,,

राजेश _क्या huwa दिव्या जी,,,

दिव्या _पेट में दर्द हो रहा है राजेश,आह मां,

राजेश डर गया,,

वह लंद को बाहर निकाल लिया।

राजेश _अब ठीक हो,,।

दिव्या _आह मां,

बड़ा दर्द हो रहा है।

राजेश डर गया ये क्या हो गया?

दिव्या _राजेश किसी को बुलाओ,,,

मेरा पेट बड़ा दर्द कर रहा है?

राजेश तुरंत अपना पाजामा और बनियान पहना।

फिर वह दरवाज़ा खोल कर सुनिता के पास गया। वहा पदमा, कविता, प्रिया भी मौजुद थी वे सोए नही थे। बात चीत कर रहे थे।

सुनीता _क्या huwa बेटा तू घबराया हुआ क्यों है!

राजेश _मां दिव्या,,,

पदमा _क्या huwa बेटा बहु को,,

राजेश _उसे बहुत दर्द हो रहा,,,

सुनीता _क्या?

प्रिया _बुवा मै देखती हूं क्या बात है।

राजेश और प्रिया दोनो कमरे में गए।

प्रिया _दिव्य क्या बात है?

दिव्या _दी पेट में बड़ा दर्द हो रहा है आह मां,,,

प्रिया ने दिव्या को का चेक अप किया।

राजेश _क्या huwa दी दिव्या जी ठीक तो है न,,

प्रिया _राजेश, दिव्या की तुरंत हॉस्पिटल ले जाना होगा नही तो अनर्थ हो जायेगा।

वहा सुनिता भी पहूंच गई।

सुनीता _प्रिया बहु ठीक तो है न।

प्रिया _बुवा हमे दिव्या को तुरंत हॉस्पिटल ले जाना होगा।

नही तो अनर्थ हो जायेगा।

दिव्या को नाईटी पहनाया गया। राजेश ने दिव्या को गोद में उठाया और हॉस्पिटल की ओर भागा।हॉस्पिटल आश्रम के दूसरे छोर पर था।

हॉस्पिटल में दिव्या को एडमिट किया गया।

प्रिया ने मोर्चा संभाला।

आपातकालीन उपचार किया।

2घंटे बाद, प्रिया आपात कालीन रुम से बाहर आई

सभी उसी की इन्तजार कर रहे थे।रत्नवती गीता और राजवती को भी घटना की जानकारी हो चुकी थी वह भी हॉस्पिटल में मौजुद थी।

राजेश _दी दिव्या ठीक तो हैं न।

प्रिया _राजेश घबराने की बात नहीं है सब ठीक है।

राजेश _क्या मै दिव्या से मिल सकता हूं?

प्रिया _हां, जाओ मिल लो,,

सुनीता _प्रिया, क्या हूवा था, दिव्या को।

प्रिया _बुवा, लगता है राजेश दिव्या से संबंध बनाते समय इस बात का ध्यान नहीं रखा की वह गर्भ से है। अगर थोडा भी देर होता तो गर्भपात हो सकता था।

सुनीता _क्या हे भगवान,,

सभी महिलाएं काफी चिंतित हो गई।

प्रिया _अभी तो किसी तरह सब ठीक हो गया। लेकिन फिर आगे यह घटना huwa तो, संभाल पाना मुश्किल हो जाएगा।

दिव्या, जब तक बच्चे को जन्म नही दे देती, राजेश को दिव्या से दुर रहना पड़ेगा। जोश में आकर फिर से वही गलती कर सकते हैं।

सुनीता _मै राजेश को समझाऊंगी, वह बहु से दुर रहे।

आपातकालीनरूम से दिव्या को जनरल वार्ड में सिफ्ट किया गया।

राजेश _दिव्या जी आप ठीक तो हैं न।

दिव्या _हा में सिर हिलाया।

राजेश ने प्यार से उसकी माथे को चूम लिया।

सभी महिलाएं दिव्या से मिलकर उसकी स्वास्थ्य के बारे में बात चीत की।

सभी ने राहत की सांस ली।

सुनीता ने राजेश को अकेलेमें बुलाया ।

राजेश_क्या बात है मां?

सुनीता _ये सब तुम्हारे कारण हुआ है?

राजेश _मां मै समझा नही।

सुनीता _तुम्हे पता था न बहु पेट से है। फिर इसबात ध्यान नहीं रख सकता था। तू तो जोश में होश खो बैठता है।

तुम्हारे असावधानी के कारण बच्चे दिव्या का गर्भपात होते होते बचा।

राजेश _ओह, ये सब मेरे कारण huwa है?

मुझे माफ करना मां।

सुनीता _मुझसे क्यों माफी मांग रहा है। बहु से मांगना। और हा आज के बाद बहु जब तक बच्चे को जन्म नही दे देती। तुम उससे दूर ही रहना, तुम्हारा कोई भरोसा नहीं तू जोश में होश खो बैठता है।

राजेश _ठीक है मां,,

प्रिया दिव्या की चेकअप करने उसके कक्ष में गईं।

प्रिया _दिव्या अब कैसी महसूस कर रही हो।

दिव्या _ठीक हूं दी।

प्रिया _दिव्या तुम तो खुद ही एक डॉक्टर हो फिर, तुम प्रेगनेंट हो इस बात की सावधानी क्यों नही रखी। राजेश को समझा सकते थे।

प्रिया _मै इन डायरेक्टली उसे मना तो कर रही थी दी, पर उसका निराश चेहरा मुझसे देखा नही गया। फिर उसने जो जो कहा करती गई ताकि वह खुश रहे।

प्रिया _देखो अब भावनाओ में आकर ऐसी कोई गलती मत करना, ठीक है और डिलवरी तक राजेश से दूर ही रहना।

वैसे मैं राजेश को भी समझा दूंगी। वह तुम्हे फोर्स न करें। ओके

प्रिया _शुक्रिया दी।

अगले दिन सभी मेहमान वहा अपने अपने घर चलें गए।

आश्रम में केवल, रत्नवती, गीता, और राजेश के माता पिता चाचा ताई भाई भाभी ही रह गए।

रत्नवती _मां ऐसी हालात में दिव्या की देखभाल करना बहुत जरूरी मै दिव्या को अपने साथ ले जाना चाहती हूं।

राजवती _तुम ठीक कह रही हो बेटी।

सुनीता _समधीन जी, मै बहु को अपने साथ ले जाऊंगी। राजेश बेटा तुम भी चलो अब,, शादी के बाद बहु का मायका में रहने से लोग तरह तरह से बाते करेंगे।

राजेश _मां मै कुछ दिन और गांव में रहना चाहता हूं। कुछ काम अभी बांकि है।

सविता _मै तो कहती हुं। राजेश और दिव्या को हमारे घर में रहने दो। राजेश का मन अभी गांव में रहने का है। मै और पूनम और दीदी दिव्या का अच्छे से ख्याल रखेंगे।

पदमा _हां सुनिता, सविता ठीक कह रही है।

हम है न दिव्या की देखभाल करने और ठाकुराइन आप भी कभी भी दिव्या से मिलने आ सकेंगी।

तो सभी सहमत हुवे की राजेश और दिव्या सविता के घर रहेगी।