Incest मैं अपने परिवार का दीवाना - Page 17 - SexBaba
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Incest मैं अपने परिवार का दीवाना

अपडेट 139

दिलीप- मैं शांति की चूत में नॉर्मल धक्के मारने लगा

साथ ही शांति की गान्ड पे तेल मलके शांति की गान्ड चिकनी करने लगा

शांति अब सिसकिया ले रही थी

मैं तेल शांति की गान्ड के छेद पे डालने लगा

उसके बाद मैं गान्ड के छेद को चारो तरफ से कुरेदने लगा

ऐसे में शांति की गान्ड का छेद खुलके बंद होने लगा

इधर मैं अपना लंड पूरी स्पीड के साथ शांति की चूत में पेल रहा था

अब सही मौका था

मैं अपना पूरा लंड शांति की चूत से बाहर निकाला और एक ही बार में पूरा डाल दिया

साथ में अपनी 1 उंगली भी शांति की गान्ड में डाल दिया

शांति को समझ ही नही आया कि वो कोन्से दर्द पे रोए

अब एक उंगली तो अंदर जा चुकी थी

मैं अपनी उंगली शांति गान्ड में रहने दिया और शांति की चूत में ताबड तोड़ धक्के लगाने लगा

शांति अब अया ऊवू कर रही थी

शांति की गान्ड बहुत टाइट थी

मेरी उंगली को फँसाए हुई थी

ऐसी चुदाई से शांति मस्त होने लगी

मैं धीरे धीरे अपनी उंगली शांति के गान्ड में आगे पीछे करने लगा

बड़ी मुश्किल से मेरी उंगली शांति की गान्ड में अंदर बाहर हो रही थी

अब वक़्त था दो उंगली डालने का

मैं अपनी उंगली शांति की गान्ड से निकाल लिया

गान्ड का छेद थोड़ा खुल गया था

मैं गान्ड के छेद में तेल डालने लगा

तब तक डालता रहा जब तक तेल छेद से बाहर तक नही गिरा

मैं अपनी दो उंगली तेल में डूबाया

और अपना पूरा लंड निकालके अपनी दोनो उंगली गान्ड के छेद पे लगाया

अपना पूरा लंड और अपनी दोनो उंगली एक ही बार में शांति की चूत और गान्ड में डाल दिए

इस बार की चीख पिछली से ज़्यादा बड़ी थी

बिम्ला खाट पे बैठके देख रही थी सिर्फ़ देख रही थी

मैं पूरी स्पीड से शांति को चोदने लगा

साथ ही अपनी दोनो उंगली धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा

थोड़ी देर बाद शांति का बदन अकड़ने लगा

मैं अपनी गति को तेज कर दिया

कमरे में फॅक फॅक की आवाज़ गूँज रही थी

एक लंबी आआह के साथ शांति की चूत पानी छोड़ दी

मैने शांति के पास से तकिया हटाया

तकिया पूरा आँसुओ से भीग चुका था

मैं दूसरा तकिया शांति को दिया

शांति अपना मुँह फिर से तकिये में दबा ली

मैने अपना लंड शांति की चूत से बाहर निकाल लिया

मेरी दोनो उंगली अभी भी शांति की गान्ड में थी

मैं शांति की गान्ड में अपनी उंगली अंदर बाहर करने लगा

शांति को दर्द हो रहा था

लेकिन शांति को दर्द तब होगा जब मेरा लंड शांति की गान्ड में जाएगा

अभी तो शांति दर्द सहेन कर रही थी

मैं शांति के बूब्स दबाते हुए शांति की गान्ड में अपनी उंगली अंदर बाहर करने लगा

शांति की गान्ड में दो उंगली अब आराम से अंदर बाहर होरही थी

मैने अपनी उंगली को शांति की गान्ड से बाहर निकाल लिया

शांति की गान्ड अब मैं फाड़ने वाला था

मैं थोड़ा सा तेल शांति की गान्ड में डाल दिया

शांति काफ़ी टाइम से घोड़ी बनी हुई थी

मैने शांति को पलट दिया

और अपना लंड शांति के मुँह में डाल दिया

शांति मेरा लंड चूसने लगी

सिर्फ़ सुपाडे को चूस रही थी

मैने शांति के दोनो हाथ को पकड़ लिया और शांति के मुँह को चोदने लगा

मैने शांति के मुँह से अपना लंड निकाल लिया

और शांति के बूब्स पे थप्पड़ मारने लगा

मैने एक कपड़ा शांति को दिया

शांति वो कपड़ा अपने मुँह में ठूंस ली

और घोड़ी बन गई

मैने ढेर सारा तेल अपने लंड पे लगाया

और बाकी तेल शांति की गान्ड के छेद पे डाल दिया...
 
अपडेट 139आ

दिलीप- मैं अपना लंड शांति की गान्ड के छेद पे सेट किया

और शांति की कमर को मजबूती से पकड़ लिया

शांति अपना चेहरा तकिये में दबा ली

मैं हल्का धक्का मारा

मेरा लंड फिसल गया

यह तो होना ही था

मैने एक हाथ से अपना लंड पकड़ा और आगे की तरफ दबाव डालने लगा

काफ़ी दबाव डालने के बाद मेरे लंड का सुपाडा शांति की गान्ड के छेद में फँस गया

शांति अपना पूरा जिस्म टाइट कर ली

शायद बहुत दर्द हो रहा था

मैं शांति की चूत मसल्ने लगा

थोड़ी देर बाद शांति थोड़ी सी शांत हुई

मैं फिरसे दबाव डालने लगा

पर मेरा लंड अंदर नही गया

मैने पूरी मजबूती से शांति की कमर को पकड़ लिया

और अपनी कमर पीछे करके एक हल्का धक्का मारा

शांति की गान्ड इतनी टाइट थी

कि मेरे लंड को जकड़े हुए थी

मैं अपनी आधी ताक़त से झटका मारा

मेरा आधा लंड शांति की गान्ड को फाड़ता हुआ अंदर चला गया

शांति इतनी ज़ोर से चीखी

कि मैं भी डर गया

एक तो उसके मुँह में कपड़ा था फिर भी मुझे उसकी चीख सुनाई दे रही थी

मैने अपने लंड को वैसे ही रहने दिया

एक हाथ से शांति की चूत मसल्ने लगा

दूसरे हाथ से बूब्स दबाने लगा

फिर भी शांति शांत नही हो रही थी

मैं झुकके शांति की पीठ चूमने लगा

पता नही कितनी देर तक मैं शांति की चूत मसलता रहा

बूब्स दबाता रहा

पीठ चूमता रहा

तब जाके शांति शांति हुई

और अपने बदन को ढीला कर दी

मैं अपना आधा लंड ही शांति की गान्ड में आगे पीछे करने लगा

शांति को दर्द हो रहा था लेकिन उतना नही

मैं तेल अपने लंड पे डालने लगा

जैसे मेरा लंड शांति की गान्ड से बाहर आता मैं उसपे तेल डाल देता

अब शांति की गान्ड मेरे लंड के हिसाब से खुलने लगी थी

लेकिन अभी तो आधा लंड ही

शांति की गान्ड में गया था

मैं अपने आधे लंड से ही शांति की गान्ड मारने लगा

और शांति की चूत मसल्ने लगा

अब शांति का झड़ना ज़रूरी था

थोड़ी देर तक चूत मसल्ने के बाद जब मुझे लगा कि शांति झड़ने वाली है

मैने अपनी पूरी ताक़त को एकट्ठा किया

जैसे ही शांति झड़ने लगी

मैं अपनी कमर पीछे करके धक्का मार दिया

शांति तड़पने लगी

शांति का एक पैर जन्नत में था

तो दूसरा पैर जहन्नुम में था

एक तरफ उसकी चूत पानी छोड़ रही थी

तो दूसरी उसकी गान्ड खून

शांति छटपटा रही थी

मुझसे छूटने के लिए आगे सरक रही थी

शांति को पता था कि अगर वो तकिये से अपना मुँह हटाएगी तो उसकी चीख कोई भी सुन लेगा

लेकिन इतना दर्द तो सहना ही पड़ेगा शांति को

मैं वापस शांति के बूब्स दबाने लगा

बूब्स मसल्ने लगा पीठ चूमने लगा

अब बारी थी शांति की गान्ड मारने की

मैं अपना थोड़ा सा लंड निकालके अंदर डाल दिया

ऐसी 10 मिनट तक मैं शांति की गान्ड मारता रहा

अब शांति सिर्फ़ कराह रही थी

मैने अपना आधा लंड शांति की गान्ड से बाहर निकाला और अंदर पेल दिया

अब मैं अपनी गति तेज़ करके शांति की गान्ड मारने लगा

शांति अया अया किए जा रही थी

शांति की मस्त गान्ड मारके मैं तो जन्नत की सैर कर रहा था

लेकिन बिम्ला शांति को मनाई कैसे

मैं शांति की गान्ड मारने में लगा हुआ था

शांति आज की चुदाई कभी नही भूलेगी

वो जब भी अपनी गान्ड और चूत को टच करेगी हमेशा मेरे लंड को याद करेगी

पूरी बेडशीट खून से लाल हो चुकी थी

अभी तक तो मैं नॉर्मल स्पीड से शांति की गान्ड मार रहा था

लेकिन अब वक़्त था शांति की गान्ड फाड़ने का

मैं शांति से पूरा सट गया

और आगे की तरफ झुकने लगा

इससे शांति पेट के बल पूरा लेट गयी

मैं दोनो हाथ को बेड पे टीकाया और लगा पूरी ताक़त से शांति की गान्ड मारने शांति को फिरसे दर्द होने लगा

आज मैं शांति को अपना वीर्य पिलाने वाला था

क्यूंकी गान्ड में लंड डालके चूत में लंड नही डाल सकते

कॉंडम ल गया हो तो अलग बात है

मैने शांति के मुँह से तकिया हटा लिया

यह तकिया तो पहले वाले से ज़्यादा भीगा हुआ था

मैं ताबड तोड़ अपना लंड शांति की गान्ड में पेले जा रहा था

शांति के मुँह में कपड़ा अभी भी था

मैने शांति के मुँह से कपड़ा निकाल दिया

शांति- दिलीप तुमने मेरी गान्ड फाड़ दी मेरी चूत का भोसड़ा बना दिया

तुम जल्लाद हो उई माआ दिलीप तुम अयाया आआआः ऊऊओ उम्म्म्म तुम बहुत अच्छे उम्म ऊवू आज तुमने मेरा सब कुछ लूट लिया अया

दिलीप- शांति की बात सुनके मेरा जोश और बढ़ गया आज इसी जोश में कुछ ज़्यादा ही ज़ोर शांति की गान्ड मारने लगा

शांति को फिर से दर्द होने लगा

होगा भी क्यूँ नही मेरा लंड जो सरला जैसी रंडी को रुला सकता है

बेचारी शांति कितनी मुश्किल से अपने दर्द को भूली थी एक बार फिर रोने लगी

मेरा भी अब निकलने वाला था

मैं शांति की गान्ड मारते हुए मस्त हो गया

10 15 धक्के मारने के बाद मैं अपना लंड शांति की गान्ड से निकाल लिया

और शांति को पलट दिया शांति के बूब्स पे बैठके अपना लंड हिलाने लगा

शांति अपना मुँह खोले हुई थी

थोड़ी देर बाद मैं अपना सारा वीर्य शांति के मुँह में डाल दिया

शांति मेरा सारा वीर्य पी गयी

मैं अपना लंड शांति के बूब्स पे रगड़ने लगा

हम दोनो पसीने से भीग चुके थे

बिम्ला रूम में आ गई

मैं टाइम देखा तो 2 घंटे बीत चुके थे...
 
अपडेट 140

दिलीप- काकी यह लो पेनकिलर और ट्यूब यह खिला देना और ट्यूब लगा देना

बिंला- मैं तो तेरी नौकर हूँ ना

दिलीप- ऐसा मत बोलो मैं आपको अपना मानता हूँ

मुझे पता है आप गुस्सा हो

एक बार मेरी एग्ज़ॅम ख़तम हो जाए

फिर तो आपकी ही बजाउन्गा

बिम्ला- मैं तो मज़ाक कर रही थी

मुझे पता है तू बहुत अच्छा है

दिलीप- मैं शांति के पास गया

अब आप अपना ख्याल रखना

शांति- तुमने मेरे लिए जो किया है वो मैं कभी नही भूलूंगी

दिलीप- मैं भी आपको कभी नही भूलूंगा

और हां रिपोर्ट्स मिलते ही विनय के साथ मेरे घर आजाना

शांति- सबसे पहले तुम्हारे पास आउन्गि

फिर अपने पति को बताउन्गी

दिलीप- पहले अपने पति को बताना पहला हक उसका है

अब चलता हूँ और सॉरी कुछ ज़्यादा कर दिया हो तो माफ़ कर देना

शांति- तुम कहो तो एक बार और कर लूँगी

[और शांति उठने लगी लेकिन गान्ड का दर्द उठने दे तब ना

दिलीप- आप आराम करो

और काकी आप मैं बिम्ला को किस करके घर आ गया

अपने रूम में आके नहा धोके तय्यार हुआ

थोड़ी देर बाद वँया आ गई

वँया- तुम अगर कल से कहीं गये तो तो विदयादि को बोल दूँगी

दिलीप- बोल दो मैं भी बोल दूँगा

वँया- क्या बोल दोगे दिन भर तो तुम घूमते रहते हो

दिलीप- मैं क्यूँ बताऊ

वँया- बताओगे कि जाके पिताजी को बोलू

दिलीप- बोल दो तुम्हारी मर्ज़ी और मैं किताब में घुस गया

वँया- रूको अभी पिताजी को लेके आती हूँ और वँया रूम से बाहर चली गयी

मुझे पता था वँया मामा जी के पास नही जाएगी

वो सिर्फ़ मुझे डरा रही थी

मैं अपने किताब में घुसा हुआ था

[वँया मेरे रूम से निकलके सीधा बड़े मामा के रूम पे गयी

बड़े मामा आराम कर रहे थे

वँया गेट नॉक की

बड़े मामा- आजाईए

[वँया अंदर गयी]

वानु आप कुछ चाहिए

वँया- पिताजी दिलीप मुझे परेशान कर रहा है

बड़े मामा- क्या किया दिलीप ने

वँया- वो कह रहा है मैं उसके साथ पढ़ाई ना करूँ

बड़े मामा- दिलीप ऐसा क्यूँ कह रहा है

वँया- वो आज कल बिल्कुल पढ़ाई नही करता

मैं जब उसके साथ पढ़ती हूँ तो उसको भी पढ़ना पड़ता है

इसी लिए वो मुझे अपने साथ पढ़ने के लिए मना कर रहा है

बड़े मामा- अच्छा चलिए हम बात करते हैं दिलीप से

दिलीप- मैं इधर किताब में घुसा हुआ था

तभी बड़े मामा की आवाज़ मेरे कानो में पड़ी

बड़े मामा- क्या हम अंदर आ सकते हैं

दिलीप- [जैसे ही मैं बड़े मामा को देखा मेरी फॅट के हाथ में आ गई

क्यूंकी बड़े मामा के पीछे वँया खड़ी मुझे ज़ुबान दिखा रही थी]

जी जी आइए

मैं खड़ा हो गया

बड़े मामा आके बेड पे बैठ गये

बड़े मामा- यह हम क्या सुन रहे हैं तुम ठीक से पढ़ाई नही कर रहे हो

दिलीप- जी जी जी पढ़ रहा हूँ

बड़े मामा- आगे से शिकायत नही आनी चाहिए

वानु आपका ध्यान रखेंगी

वानु अगर दिलीप ठीक से पढ़ाई ना करे

तो सबसे पहले आप हमे बताएँगी

हम विद्या को कुछ वक़्त के लिए लंदन भेज देंगे

दिलीप- नही नही अच्छे से पढ़ाई करूँगा फर्स्ट आउन्गा

[मैं रोनी सूरत बनाके बोला

बड़े मामा चले गये]

बड़े मामा के जाते ही वँया हँसने लगी

मैने वँया को घुरके देखा और पढ़ाई करने लगा

वँया मेरे पास आई

वँया- तुम्ही तो कह रहे थे जाके बोल दो

दिलीप- कोई बात नही पढ़ाई करो

[सच काहुब तो मैं सच में डर गया था

कहीं बड़े मामा सच में विदू को लंडन ना भेज दे

अगर वँया मेरे रूम में ना होती तो मैं रोने लगता

इसी लिए मुझे फर्स्ट तो आना ही पड़ेगा...
 
अपडेट 141

दिलीप- मैं पढ़ाई करता रहा रात के खाने का टाइम हो गया था

वँया- चलो खाना खाने

दिलीप- तुम जाओ मैं बाद में खा लूँगा

वँया- भूल गये क्या बड़ीदादी तुम्हारे साथ ही खाना खाती हैं

[वँया की बात सुनके मैं कुछ नही बोला नीचे गया खाना खाने

फिर मैं खाना ख़ाके अपने रूम में आ गया

वँया अपने रूम में चली गयी

मैं दोबारा पढ़ाई करने लगा

रात में विदू का फोन आया थोड़ी देर बात किया फिर पढ़ाई करने लगा

रात करीब 11 बजे कोई गेट नॉक करने लगा

इस वक़्त कॉन आ गया

मैं जाके गेट खोला

सामने बड़ी मामी खड़ी थी

बड़ी मामी- सोए नही अब तक

दिलीप- आधे घंटे में सो जाउन्गा

बड़ी मामी- सुबह 6 बजे उठते हो रात को 12 बजे सोते हो

जल्दी सोया करो

दिलीप- वो अगले हफ्ते से एग्ज़ॅम है ना इसी लिए

बड़ी मामी- यह बात तो नही है

दिलीप- सच बोल रहा हूँ

[मैं अपनी नज़रे नीची किए हुआ था]

बड़ी मामी- अगर तुम नही बताना चाहते तो ठीक है

लेकिन कभी झूठ मत बोलना

[और बड़ी मामी जाने लगी]

मैं बड़ी मामी का हाथ पकड़ लिया

दिलीप- मैं बताता हूँ आपको

बड़ी मामी बेड पे आके बैठ गयी

बड़ी मामी- अगर नही बताना है तो मत बताओ मैं बुरा नही मानूँगी

दिलीप- [मैने बड़ी मामी को बता दिया कि मैं अगर ठीक से पढ़ाई नही करूँगा तो बड़े मामा विदू को लंडन भेज देंगे]

बड़ी मामी- अच्छा तो इसलिए दामाद जी पढ़ाई कर रहे हैं

यह बताओ पहले तुम सेकेंड क्यूँ आते थे

दिलीप- बड़ी नानी कहती हैं कि पढ़ाई उतनी ही करो

जितनी कर सकते हो

दिमाग़ पे ज़्यादा ज़ोर डालोगे तो जो याद है वो भी भूल जाओगे

बड़ी मामी- अब बताओ अगर ज़्यादा पढ़ाई करके तुम्हारी तबीयत खराब हो गई तो

दिलीप- मैं फर्स्ट नही आउन्गा तो

बड़ी मामी- इन्हो ने कहा है तुम्हे एग्ज़ॅम में फर्स्ट आने को

दिलीप- बड़े मामा कह रहे थे क़ि अच्छे से पढ़ाई करो

बड़ी मामी- बात ख़तम अच्छे से पढ़ाई करो ना कि सिर्फ़ पढ़ाई करो

दिलीप- और अगर बड़े मामा विदू को लंडन भेज दिए तो

बड़ी मामी- नही भेजेंगे अपनी बड़ी मामी पे भरोसा रक्खो और अब सो जाओ

दिलीप- जी

[फिर बड़ी मामी चली गयी

मैं किताब समेट कर सो गया]

सुबह में उठके नाहया धोके तय्यार हुआ नाश्ता करके लखन के साथ अखाड़े में गया

कसरत करने लगा

दिलीप- लखन तुम्हारे घर में कौन कौन है

लखन- आप सब ही मेरा परिवार हैं

दिलीप- हाँ वो तो हैं लेकिन घर में कौन है

लखन- कोई नही है

दिलीप- तो शादी कर लो

लखन- मुझसे कौन शादी करेगी पूरे 150 गाओं के लोग मुझे गुंडा समझते हैं

दिलीप- अरे तो तुम मामा जी को बोलो वो तुम्हारे लिए लड़की ढूंड देंगे

लखन- आप ही ढूंड दीजिए

दिलीप- [लखन इस दुनिया का आठवा अजूबा है मैं आज तक लखन को समझ नही पाया]

फिर मैं वापस कसरत करने लगा

कसरत करके कड़वा जूस पीके घर आ गया

और पढ़ाई करने लगा

थोड़ी देर बाद वँया आ गई

दोपहर में खाने के बाद मैं नई मामी के रूम में गया

1 घंटा तक पढ़ाई किया

वैसे मैं नई मामी के साथ पढ़ाई कम और सवाल ज़्यादा पूछता हूँ

इतना सवाल अगर कोई मुझसे पूछेगा तो

मैं उसके पास दोबारा बैठूँगा ही नही

मैं वँया के रूम में गया

जैसे ही गेट नॉक किया गेट खुल गया

वँया पढ़ाई कर रही थी

मेरी तरफ ध्यान भी नही दी

मैं धीमे कदमो से वँया के पास गया

इससे पहले मैं कुछ बोलता

वँया- बैठके पढ़ाई करो

[मेरा तो पोपट हो गया.,
 
अपडेट 141ए

दिलीप- तुम्हे कैसे पता कि मैं आ गया हूँ

तुमने तो मुझे देखा भी नही

वँया- बैल जब चलता है तो सबको पता चल ही जाता है

दिलीप- मैं कुछ नही बोला सिर्फ़ पढ़ाई करने लगा

आज कल तो सब मेरा पोपट ही कर रहे थे

शाम में मैं अपने रूम में आ गया

अब तो एग्ज़ॅम के बाद ही घूमना फिरना था

फिर से पढ़ने लगा

रात में खाना ख़ाके विदू से बात करके सो गया

मेरे रूम का गेट खुला और मेरी प्यारी विदू अंदर आई

विदू तो ऐसा कपड़ा कभी पहनती ही नही थी जिसमें उनके जिस्म का एक भी हिस्सा नही दिखता था

लेकिन आज पहली बार विदू फ्रॉक पहने हुए थी

मुझे पता था कि मैं सपना देख रहा हूँ

लेकिन मुझे इससे क्या

विदू धीमे कदमो से मेरे पास आ गई

और मेरे गले लग गयी

मैं अपने दोनो हाथ विदू की पीठ पे रख दिया

और अपनी विदू को फील करने लगा

तभी कोई मेरे बदन पे पानी डाल दिया

मैं हड़बड़ा के उठ गया

मैं देखा वँया हंस रही थी

दिलीप- आज नही छोड़ूँगा रुक

वँया ज़ुबान दिखा कर रूम से बाहर भाग गयी

मैं टाइम देखा तो 8 बज रहा था

शायद इसी लिए वँया मेरे पे पानी डाल दी

मैं नहा धोके तय्यार हुआ

पूरे रूम में पानी फैल गया था

सबसे पहले मैं अपना सीक्रेट चीज़ सब छुपा दिया

और नीचे आ गया

बड़ी नानी- तेरी तबीयत तो ठीक है ना

दिलीप- हाँ ठीक है बड़ी नानी

आपने अभी तक नाश्ता नही किया होगा

बड़ी नानी- मेरा प्यारा बेटा बड़ा समझदार है

दिलीप- मैं बड़ी नानी को अपने हाथ से नाश्ता कराया

बड़ी नानी भी अपने हाथो से मुझे नाश्ता खिलाई

फिर मैं कसरत करके घर आ गया

किरण मौसी कुछ परेशान दिख रही थी

मैं किरण मौसी के पास गया

दिलीप- क्या हुआ मासी

किरण मौसी- कुछ नही बस सर में दर्द है

दिलीप- आप मुझसे झूठ बोलेंगी

किरण मौसी- सच कह रही हूँ

[मैं रूम से बाहर आ गया और पढ़ाई करने लगा

वँया को आजकल कुछ ज़्यादा ही मस्ती सूझ रही थी

सबक तो सिखाना ही पड़ेगा

मुझे पता था वँया अभी आएगी ही

मैं सोचा क्यूँ ना आज ख़ुफ़िया रास्ता यूज़ करूँ

मैने अपनी अलमारी के पीछे हाथ करके एक बटन दबा दिया

अलमारी साइड हो गयी

मैं अंदर चला गया

अलमारी फिर से अपनी जगह पे आ गई

पूरा अंधेरा था दो आदमी के खड़े होने की जगह थी

मैं मोबाइल का लाइट ऑन किया

मैं आगे बढ़ने लगा

सब तरफ एक गेट था

मतलब कि हर एक गेट किसी रूम में खुलता था

मुझे तो पता ही नही था कि कॉन्सा गेट कोन्से रूम में खुलता है

मैं एक दम लास्ट जगह पे पहुँच गया

एक गेट था जिसपे

वीर परताप सिंग लिखा हुआ था मतलब यह मेरे नानाजी का रूम था

शायद यह वो रूम था जिसमें मुझे अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद जाना था

हर एक गेट को चेक करने में तो बहुत टाइम लगेगा

मैने वँया को डराने का इरादा रद्द कर दिया

और वापस अपने रूम में आ गया

कोई जोरो से गेट पीट रहा था

मैने गेट खोला

वँया- इतनी देर से खड़ी हूँ गेट नही खोलना था तो बता दो नही आउन्गि

दिलीप- अरे तो रो क्यूँ रही हो मैं बाथरूम में था अच्छा रोना बंद करो

वँया- [मैं तो डर ही गयी थी बेवकूफ़ कहीं का

आज भी कितना प्यारा लग रहा है एक दम गोरा चिकना

मैं सोची कि सुबह का बदला लेगा

पर यह बैल तो कुछ बोलता ही नही है]

दिलीप- वँया कहाँ खो गयी

वँया- कही नही चलो इतनी देर से खड़ी हूँ

दिलीप- वँया मुझे धक्का देके अंदर आ गई...
 
अपडेट 142

दिलीप- फिर हम दोनो पढ़ाई करने लगे

ऐसे ही वँया के साथ पढ़ाई करते हुए पूरा हफ़्ता बीत गया

इसी बीच मैं किरण मौसी से बहुत बात किया

लेकिन उनसे मुझे कुछ पता नही चला

आज सनडे था मतलब कल से पेपर देना था हमे

आज तक डर नही लगा

लेकिन आज लग रहा था पहले विदू जो साथ नही थी

और बड़े मामा की तलवार जो हमेशा मेरी गर्दन पे लटकी रहती है

वो भी नही थी

वँया एक दिन पहले ही चार्ट ले आई थी स्कूल से

वँया को बोला कि मैं जाता हूँ तो वो बोली तुम पढ़ाई करो

बाहर जाओगे और घूमने लगॉगे

समझ लीजिए की यह पूरा हफ़्ता मैं घर पे ही रहा

मैं दोपहर में बेड पे लेटा हुआ था

तभी मेरा फोन बजने लगा

मैं फोन उठाया

विदू- क्या बात है पतिदेव जी बहुत डर लग रहा है

दिलीप- आपको नही लग रहा है

विदू- मुझे क्यूँ डर लगेगा भला

दिलीप- वो इस लिए मेरी प्यारी प्यारी विदू कि पेपर तो आपके भी हैं

विदू- हां हैं लेकिन अगले मंडे से और मैं किसी से नही डरती हूँ

दिलीप- कॉकरोच को छोड़ कर

विदू- मैं नही डरती हूँ

आप डरते हैं वो भी इस बात से कि पिताजी मुझे लंडन भेज देंगे

मैं लंडन अकेले थोड़े ही जाउन्गी

दिलीप- तो किसके साथ जाएँगी आप लंडन

विदू- आप ही बता दीजिए आप ही तो कहते हैं कि आपको मेरे बारे में सब पता हैं

और हां अगर कुछ ग़लत बोले हैं तो दो महीने नो किस

दिलीप- मम्मी

विदू- मम्मी के साथ जाउन्गी

माँ जो मेरे साथ शहेर भी नही जाती हैं

दिलीप- अरे वो तो डर से मैं बोल दिया

वरना मुझे तो पता है कि आप मेरे साथ ही जाएँगी

विदू- तो फिर डर क्यूँ रहे हैं

दिलीप- सब मुझे बॉल बनाए हुए हैं

जो भी देखता है छक्का मारने की सोचता है

विदू- यह क्या बात हुई मुझे सिर्फ़ नाम बताइए कॉन मेरे पतिदेव जी को बॉल समझता है

दिलीप- और कौन आपकी बहेन वँया

जब देखो बड़े मामा की धमकी देती रहती है

विदू- क्यूँ धमकी देती है ज़रा यह भी तो बताइए

दिलीप- पढ़ाई करो बाहर मत जाओ टाइम पे खाना खाओ

उपर से बाथरूम भी जाना हो तो नही जाने देती है

विदू- बाथरूम वाली बात आप बनाके बोल रहे हैं

दिलीप- हाँ तो ठीक है लेकिन और सब बात तो ग़लत है ना

विदू- बिल्कुल सही है

दिलीप- आप मेरी तरफ हैं या अपनी बहेन की तरफ

विदू- मैं तो आपकी तरफ हूँ

दिलीप- अगर आप मेरी तरफ हैं तो मुझे फिल्म दूल्हे राजा का वो सीन क्यूँ याद आ रहा है जिसमें जौनी लीवर की नज़र क़ादिर ख़ान पे रहती है लेकिन उंगली गोविंदा पे

[विदू हँसने लगी]

बस बस पेट दर्द करने लगेगा

[विदू और ज़ोर्से हँसने लगी]

विदू- क्या करूँ हँसी रुक ही नही रही है

दिलीप- इसका मतलब मैं सही हूँ

विदू- हां

दिलीप- हां

विदू- नही नही वो तो मेरे मुँह से निकल गया

दिलीप- मैं सब समझता हूँ आप दोनो बहनों को

दोनो मिलके मुझे परेशान करती हैं

[विदू फिरसे हँसने लगी]

दिलीप- बहुत हँसी आरहि है आपको एक बार मिलिए आप

विदू- क्यूँ आप कुछ करेंगे मेरे साथ

दिलीप- ज़्यादा कुछ नही बस चुम्मा लूँगा

विदू- हूँ बड़े आए चुम्मा लेने वाले

दिलीप- वो तो आप मिलेंगी तब ना

इतनी ज़ोर्से चुम्मा लूँगा कि

[इससे ज़्यादा मैं कुछ बोल ही नही पाया

क्यूंकी कोई गेट नॉक नही कर रहा था

गेट पीट रहा था

और यह वँया चुहिया के अलावा कोई हो ही नही सकता है]

विदू- क्या हुआ आप चुप क्यूँ हो गये

दिलीप- ज़्यादा कुछ नही आपकी बहेन हमेशा की तरह गेट पीट रही है

आज नही छोड़ूँगा

विदू- अच्छा क्या करेंगे आप

दिलीप- ज़्यादा कुछ नही बस एक बाल्टी पानी .

विदू- अगर आप ऐसा करेंगे तो आपका बहुत नुकसान होगा

दिलीप- मुझे कोई फरक नही पड़ता

विदू- आप मेरी बात नही मानेंगे

दिलीप- [विदू यह बात इतनी मासूमियत के साथ बोली कि मेरा दिल झूम उठा]

ठीक है पानी नही मारता हूँ

[वँया और ज़ोर्से गेट पीटने लगी]

देखिए अपनी बहेन का

विदू- अरे तो जाके देखिए हो सकता है आपके लिए कुछ गिफ्ट लाई हो

दिलीप- देखता हूँ

मैं जैसे ही गेट खोला मेरा मुँह खुला का खुला रह गया...
 
अपडेट 142ए

दिलीप- मेरे सामने मेरी जान मेरी प्यारी विदू खड़ी थी

विदू- कैसा लगा गिफ्ट

दिलीप- मैं आगे बढ़के इधर उधर देखा

कोई नही था

मैं विदू का हाथ पकड़ लिया

विदू अंदर आ गई

मैं गेट लॉक कर दिया

और विदू को गले लगा लिया

मैं विदू को गले लगाए हुए ही बेड पे लेट गया

आज मैं रोया नही क्यूंकी आज मेरी विदू मेरी बाहो में थी

मैने सोचा कही मुझे दौरा तो नही पड़ गया

जब भी गेट खोलता हूँ दौरा पड़ ही जाता है

मैं सोच में गुम था

विदू- यह कोई सपना नही है जो आप खोए हुए हैं

दिलीप- आप पहले बता देती

विदू- आपकी आँखों में खुशी जो देखनी थी

दिलीप- मैं विदू के माथे को चूम लिया

विदू शरमाने लगी

फिर मैं विदू के गोरे गालो को चूम लिया

विदू और ज़्यादा शर्मा गयी

फिर मैं विदू की दोनो आँखों को चूम लिया

अब बारी थी होंठो की

जिसका मैं बेसब्री से इंतेज़ार कर रहा था

मैने अपने होंठ विदू के होंठ पे रख दिए और चूसने लगा

विदू के होंठो का रस सबसे मीठा सबसे अच्छा था

विदू मेरे नीचली होंठ चूस रही थी

मैं विदू की उपरी होंठ चूस रहा था

फिर मैने किस तोड़ दिया

हम दोनो हाँफने लगे

मैं फिर विदू के होंठ चूसने लगा

विदू अभी भी मेरे उपर थी

विदू के बूब्स मेरे सीने में दब गये थे

ऐसा नही था कि मुझे हवस की वजह से यह सब महसूस हो रहा था

विदू जब मेरे पास होती है तो मेरा दिल सिर्फ़ प्यार महसूस करता है

हम दोनो किस में इतना खो गये कि हम साँस भी नही ले रहे थे

मैने किस तोड़ दिया

मैं कुछ बोल पाता उससे पहले ही विदू मेरे होंठ पे अपने होंठ रखके चूसने लगी

विदू बड़े प्यार से मेरे होंठ चूस रही थी

मैं भी बड़े प्यार से अपनी प्यारी विदू के प्यारे होंठ चूसने लगा

विदू मेरे होंठ चूस्ते हुए साँस भी नही ले रही थी

मुझे पता था इस बार विदू मुझे किस तोड़ने नही देगी

मैं अपने दोनो हाथ को विदू की कमर पे ले गया

और गुदगुदी करने लगा

फिर भी विदू मेरे होंठ चुस्ती रही

मैं पूरी गति के साथ अपनी उंगलिया विदू की कमर पे चलाने लगा

विदू मेरे होंठ से अपने होंठ अलग की और ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी

मैं विदू को गुद गुदि करना बंद कर दिया

और विदू को अपनी गोद में लेके बैठ गया

विदू- आप बिल्कुल भी रोमॅंटिक नही हैं

[विदू मुँह फूला कर बोली]

दिलीप- मुझे क्या पता कि रोमॅन्स कैसे करते हैं

आप ही सीखा दीजिए

विदू- मैं क्या आपको रोमॅन्स सिखाउन्गी

दिलीप- हाँ वो तो है ठीक है

मैं आपको अभी मानता हूँ

मैं विदू को अपनी गोद में लेके उठ गया

[डर भी लग रहा था कही मार ना पड़ जाए]

दिलीप- अपनी आँखें बंद कीजिए

विदू अपनी आँखें बंद कर ली मैं विदू को अपनी गोद में उठाए

अलमारी के पास गया बटन दबाया

अलमारी साइड हो गयी

मैं अंदर चला गया

चौथे गेट को पैर से धक्का दिया

गेट को धक्का देते ही गेट खुल गया

मैं जैसे ही अंदर गया

रूम देख कर मैं समझ गया कि यह वँया का रूम है

दिलीप- अब अपनी आँखें खोलके मुझे देखने लगी

विदू अपनी आँखें खोलके मुझे देखने लगी

जब विदू को पता चला कि यह वँया का रूम है

विदू- मैं यहाँ कैसे आई

दिलीप- मैं लेके आया

विदू- कहाँ से

दिलीप- मतलब

विदू- मतलब यह मेरे पतिदेव जी आपके रूम के बाहर आपकी सब बहने आपका इंतेज़ार कर रही थी

दिलीप- अच्छा तो यह बात है मतलब सब मुझसे मिलने आई हैं

आज मैं अपनी बहनो को बताउन्गा कि मैं भी उनका एक लौता भाई हूँ

रुकिये

[वँया के रूम में एक भालू की कोस्टूम थी

जिसे वो पहन्के बड़ी मामी को डराती थी]

आप यही पे बैठिए

मैं अपनी बहेनॉ को लेके आता हूँ

फिर मैं भालू वाली कॉस्ट्यूम पहन लिया..,
 
अपडेट 143

दिलीप- अब भालू की आवाज़ कैसे निकालु

मोबाइल बाबा किस दिन काम आएँगे

मैं भालू की आवाज़ डाउनलोड किया और चल दिया अपने रूम पे

मेरे और वँया के रूम बीच तीन और रूम थे

मैं जब अपने रूम के नज़दीक पहुँचा

तो मैं दंग रह गया

वो इसलिए की सब बहने अपने हाथ में मेरे लिए एक बाल्टी पानी और दूसरे हाथ में एक गुलाब का फूल शायद मेरे उपर पानी डालने के बाद मुझे मानने के लिए

मैं एक झटके में अपनी बहनो के पीछे खड़ा हो गया

सबकी पीठ मेरी तरफ थी

और सब मेरे रूम के गेट को गोल होके घेरे हुई थी

मैं भालू की आवाज़ पूरे वॉल्यूम के साथ प्ले कर दिया और भालू की आक्टिंग करने लगी

जैसे ही भालू की आवाज़ मेरी बहनो ने सुनी और पीछे मूड गया

हड़बड़ाहट में जो बाल्टी उनके हाथो में थी वो सब एक दूसरे के उपर डालने लगी

उपर से चीख भी रही थी

मेरी बहनो की चीख सुनके सब उपर आ गए

छोटी मामी बड़ी मामी बड़ी नानी किरण मौसी

इन सबके साथ एक और औरत थी

जिसको मैं नही जानता था

बड़ी मामी मुझे देख कर और मेरी बहनो की हालत देख कर

बड़ी मामी- वान्या तुमने फिरसे शरारत शुरू कर दी

[तभी वँया सबके बीच से बाहर निकली]

वँया- माँ मैं तो यहाँ पे हूँ

अरुणा- तो फिर यह कौन है

[अरुणा दी मेरे भालू के मास्क को पकड़ कर उतार दी]

सबके एक साथ- तू

[और सब बहने लगी मुझे मारने लेकिन प्यार से]

बड़ी नानी- चल बहू नीचे आज यह हमे पूछेंगी भी नही

लेकिन मेरी बहने मुझे मारती रही

फिर अरुणा दी मुझे गले लगा ली

अरुणा- कैसा है तू

कितने दिन बाद तुझे देख रही हूँ

[ फिर क्या था मेरे सब बहने मुझे गले लगा ली ]

दिलीप- आप सब कब आई

अरुणा- यह सब वँया का आइडिया था

मेघा- दी पहले फ्रेश हो जाते हैं देखिए ना हमारे लाल ने हमे गीला कर दिया

[फिर सब बहने अपने रूम में चली गयी अवनी को छोड़ के]

आप नही जाएँगी

अवनी- तुम तो मुझे भूल ही गये

[अवनी इससे आगे कुछ बोल ही नही पाई मैने उसको किस जो कर दिया था]

दिलीप- आपको पता है मैं आपको कभी नही भूल सकता

अब फ्रेश होके वँया के रूम में अजाईए

मैं वापस वँया के रूम में आ गया

जहाँ मेरी प्यारी विदू मेरा इंतेज़ार कर रही थी

मैं विदू के पास गया

और विदू को अपनी गोद में बिठा लिया

विदू- अब बताइए मार पड़ी कि नही

दिलीप- [मैं विदू को सब बता दिया]

विदू- अच्छा तो आपको मार पड़ी लेकिन प्यार वाली

दिलीप- अब बताइए यह सब कैसे हुआ

विदू- मैं तो कब से आपके पास आना चाहती थी

लेकिन पिताजी को कैसे बोलती

रात को मैं वँया को फोन करके बोली

कि वो पिताजी को कैसे भी मनाए

सुबह में वँया का फोन आया

वो बोली सबको साथ लेके आजाओ

यह बात मैने अरुणा को बताई अरुणा चाचा जी से पर्मिशन ले ली

फिर हम यहाँ पे पहुँच गये

दिलीप- अच्छा मतलब आप भी मेरा पोपट कर रही थी

विदू- मैं तो सिर्फ़ आपको प्यार कर रही थी

अब बताइए डर ख़तम हुआ

दिलीप- डर तो ख़तम हो गया

लेकिन कुछ कुछ ज़रूर शुरू हो गया है

मैं विदू के गले लग गया

तभी गेट खुला और मेरी बहने प्रकट हुई

सबको देख कर विदू मेरी गोद से उतर गयी

और शरमाने लगी

अरुणा- तुझे शरम नही आती

दिलीप- इसमें शरम की क्या बात है

अवनी- इसके सामने तो शरम भी शर्मा जाए

अरुणा- और दी आप इसके सामने बच्ची बन जाती हैं

दिलीप- अरे यह बच्ची थोड़े ही हैं

यह तो मेरी विदू है

अरुणा- हाँ पता है

इसी लिए हमे डराने आया था

दिलीप- आप भी तो मेरे लिए पानी लेके खड़ी थी

सुनीता- मुझे तो मेरे भाई से बात भी नही करने दे रही हो आप सब...
 
अपडेट 143ए

अरुणा- तू क्या बात करेगी दिलीप से

सुनीता- वही तो सोच रही हूँ

[सब मुझे देखने लगी मैं अपनी गर्दन ना में हिलाया फिर भी सब हँसने लगी लेकिन मैं नही हंसा]

दिलीप- आप वहाँ क्यूँ खड़ी हैं इधर आइए मेरे पास

[सुनीता दी मेरे पास आ गई]

सुनीता- तुम ही हो जो मुझसे बात करते हो

वरना यह सब तो मुझे अपने साथ बैठती भी नही हैं

[अवनी कुछ बोलना चाहती थी मैं उसको आँख दिखाया]

दिलीप- आप यहाँ पे बैठिए मैं तब तक नही उठुगा जबतक आप नही उठती

[फिर सुनतदि 1घंटे तक मुझसे यहंन वहाँ की बात करती रही

और मैं बड़े ध्यान से सुनता रहा

मैं समझ गया था कि सुनीता दी को बात करना बहुत अच्छा लगता है

लेकिन जब वो बोलना शुरू करती थी तो चुप ही नही होती थी

मैं जानता था कि जब आपको बात करने का मन हो और तब आपसे कोई बात ना करे तो कैसा लगता है]

सुनीता- बस इतना ही बोलना था

आज इतने दिनो बाद तेरे साथ बात करके बहुत अच्छा लगा

थॅंक यू दिलीप थॅंक यू

दिलीप- आपको जब भी मुझसे बात करनी हो आप मुझे फोन कर देना

सुनीता- ठीक है अब मैं नीचे जा रही हूँ

[फिर सुनीता दी के साथ मेघा दी भी नीचे चली गयी]

अरुणा- तू बहुत अच्छा है

दिलीप- वो कैसे

अरुणा- हमारे साथ इतना बात करती है

लेकिन हमे कभी थॅंक यू नही बोली

दिलीप- आप मुझे अपने स्पेशल पराठे नही खिलाएँगी

अरुणा- तू सच में खाएगा

दिलीप- आप अपने हाथ से खिलाएंगी तो ज़रूर खाउन्गा

अरुणा- अभी बनाके लाती हूँ

[अरुणा दी चली गयी उनके पीछे अवनी और वँया भी चली गयी]

[मैं विदू को देखने लगा]

लेकिन पहले गेट लॉक कर दिया

विदू- आप हर वक़्त मुझे प्यार ही करेंगे

दिलीप- मैं सोच रहा था कि आप मुझे प्यार करेंगी

लेकिन

विदू- लेकिन क्या

दिलीप- लेकिन आप तो मुझे प्यार ही नही करती हैं

[यह बात तो मैं जोश में बोल दिया लेकिन विदू यह सुनके अब मुझपे अपने प्यार की बरसात करने वाली थी]

और यह विदू मेरे सर को अपने दोनो हाथ से पकड़ ली

और अपने होंठो से मेरे चेहरे के हर हिस्से को चूमने लगी

मेरी आँखो को मेरी गालो को

मेरे माथे को अब बारी थी मेरे होंठो की

विदू बड़े प्यार से मेरे होंठो को चूसने लगी

मैं भी विदू का साथ देते हुए बड़े प्यार से विदू के होन्ट चूसने लगा

मैं विदू को अपनी गोद में बिठा लिया

विदू के दोनो पैर मेरी कमर पे थे

मैं अपने दोनो हाथ से विदू की कमर सहला रहा था

किस करते हुए हमे 10 मिनट हो चुके थे

विदू किस तोड़ दी

और मुझे बड़े प्यार से देखने लगी

विदू- आप तो मुझसे भी गोरे हैं

दिलीप- आपसे ज़्यादा नही हूँ

[मेरी बात सुनके विदू मेरी गर्दन पे अपने होंठ रखके चूमने लगी

मैं भी मदहोश होने लगा

विदू- अब बोलिए आप ज़्यादा गोरे हैं

दिलीप- विदू की बात सुनके मैं अपने होंठ विदू के गले पे रखके सहलाने लगा

विदू मेरे सर में अपनी उंगलिया फिराने लगी

मैं अपनी ज़ुबान से विदू के गले को चाटने लगा

विदू उम्म्म उम्म्म करने लगी

दिलीप- अब बोलिए आप ज़्यादा गोरी हैं

[मेरी बात सुनके विदू मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी]

यह क्या हो रहा है

विदू- आप ज़्यादा गोरे हैं

दिलीप- ठीक है मैं ही ज़्यादा गोरा हूँ

विदू मेरी बात सुनके मेरे गाल सहलाने लगी

दिलीप- आप सच में मेरी शर्ट उतार देती

विदू- अगर आप नही मानते तो

दिलीप- और अगर नही मानता तो

विदू- मुझे पता था आप ज़रूर मान जाएँगे

आप मुझसे बहुत प्यार जो करते हैं

दिलीप- वो औरत कौन है जो आप सबके साथ आई है

विदू- वो चाची की बहेन है

दिलीप- आपने लिपस्टिक क्यूँ नही ला गया

विदू- आपकी वजह से

दिलीप- मैने क्या किया

विदू- आप मुझे प्यार करते लिपस्टिक फैल जाती कोई देख लेता तो

दिलीप- देख लेता तो देख लेता

विदू- आप का क्या है शरम तो मुझे आती है

जब आपको लेके सब मुझसे मज़ाक करते हैं

[तभी कोई गेट नॉक करने लगा

मैने गेट खोला सामने पूरी टोली थी

अरुणा दी मुझे अपने हाथो से पराठे खिलाने लगी

मैने भी उनको अपने हाथो से खिलाया

फिर क्या था सब मुझे अपने हाथो से खिलाने लगी

यहाँ तक कि वँया भी मैं भी सबको खिलाया

विदू चुप चाप बैठी थी

अरुणा- जा रही हूँ दीदी अपने पतिदेव को अपने हाथो से खिलाना

और खुद भी खाना फिर सब चली गयी

मैं विदू को अपने हाथ से पराठा खिलाने लगा

एक नीवाला मैं ख़ाता तो दूसरा विदू

ऐसे ही प्लेट का सारा पराठा ख़तम हो गया

हम दोनो एक दूसरे को देखते रहे

तब तक शाम हो गयी...
 
अपडेट 144

विदू- याद है ना कल पेपर है

दिलीप- कितने अच्छे मूड का कबाड़ा कर दिया आपने

विदू- आप भी ना आपका बस चले तो आप हर वक़्त मुझे ही देखते रहे

दिलीप- हाँ तो आपको देखना मतलब सबकुछ

विदू- मेरा गिफ्ट

दिलीप- कौनसा गिफ्ट

विदू- यही कि आप रोएंगे नही

दिलीप- मैं क्यूँ रोउन्गा

विदू- यह हुई ना बात

दिलीप- आप क्या बोल रही हैं

मैं कुछ समझ नही पा रहा हूँ

विदू- आप भी क्या एक ही बात को लेके बैठ जाते हैं

दिलीप- एक तो आपकी बात समझ नही आ रही है

विदू- अच्छा एक बात बताइए

दिलीप- पूछिए

विदू- आप का रंग इतना गोरा क्यूँ है

दिलीप- आज आपको हो क्या गया है

आप तो मुझे छेड़ रही हैं

विदू- छेड़ कहाँ रही हूँ मैं तो आपको प्यार कर रही हूँ

दिलीप- सोच लीजिए अब मुझे भी मन का रहा है

विदू- तो कीजिए ना

दिलीप- अच्छा और मैं विदू को अपनी गोद में उठा लिया

बच्ची को जैसे उठाते है वैसे

गेट तो खुला ही था

मैं गेट से बाहर आ गया

विदू- यह आप मुझे कहाँ ले जा रहे हैं

दिलीप- प्यार करने

विदू- अभी लेकिन कहाँ

दिलीप- अपनी आँखें बंद कीजिए और मुँह बंद

विदू अपनी आँखें बंद करके अपने मुँह पे उंगली रख दी

मैं नीचे की तरफ आने लगा

तभी अरुणा दी का गेट खुला पूरी मंडली वही पे जमा थी

अरुणा- बेशरम यह क्या कर रहा है

[अरुणा दी की आवाज़ सुनके पूरी मंडली बाहर आ गई]

अवनी- दीदी को कहाँ ले जा रहे हो

दिलीप- प्यार करने

मेघा- मतलब

अरुणा- दिलीप तेरा दिमाग़ तो नही खराब हो गया है क्या बोल रहा है

दिलीप- शांत शांत आप जैसा सोच रही हैं वैसा कुछ नही है मैं बस गार्डेन में जा रहा हूँ

वँया- नीचे सब मिलके तुम्हारी आरती उतार देंगी

दिलीप- मेरे से ज़्यादा आपकी बहना की

इसी लिए आप सब जाके नीचे का रास्ता सॉफ कीजिए

अरुणा- क्या करूँ मैं तेरा

दिलीप- तल के खाएँगी या उबाल के

वँया- चलिए दी वरना यह हमे पका देगा

[फिर सब नीचे चली गयी

विदू मुस्कुरा रही थी

थोड़ी देर बाद मैं नीचे गया

पूरा रास्ता सॉफ था

मैं वहाँ से सीधा गार्डेन में गया

गार्डेन में 4 या 5 झूले लगे थे

दिलीप- जब तक मैं ना कहूँ तबतक अपनी आँखें मत खोलना

दिलीप- मैने एक झूले पे विदू को बिठा दिया

और विदू के दोनो हाथ पकड़ कर रस्सी पे रख दिया

दिलीप- ज़ोर से पकड़ लीजिए फिर मैं झूले के पीछे आ गया अब अपनी आँखें खोलिए

विदू अपनी आँखें खोलके अपनी गर्दन पीछे करके मुझे देखने लगी

आगे देखिए

फिर मैं विदू को झूला झूलने लगा

विदू भी सब कुछ भूलके एंजाय कर रही थी

विदू की आँखो में जो खुशी और अपने लिए बेपनाह प्यार देख कर मैं झूमने लगा था

जब मैं विदू को झूला झुला रहा था

तब बड़ी नानी बड़ी मामी मासी छोटी मामी मासी की बेटी और बहने मुझे देख रही थी

पता नही कितनी देर तक मैं विदू को झूला झुलाता रहा

विदू उतरना चाहती थी मैने विदू को आँख दिखाया

फिर बड़ी नानी मेरे पास आ गई

बड़ी नानी- अब चलके खाना खा ले

कल जल्दी उठना है

तभी गेट से बड़े मामा की गाड़ी एंटर हुई

जिसको देख कर मेरी फट गई

मैं विदू को झूले से उतरा और हॉल में एक सोफे पे विदू को बिठाया

और दूसरे पे मैं बैठ गया

मेरी बहने मेरी हालत देख कर हंस रही थी

बड़े मामा अपने रूम में चले गये

अरुणा- और मेरे शेर चाँद भाई बड़ा बहादुर बन रहा था

विदू- बहना अगर तू इनको परेशान करेगी तो मैं वो बात इन्हे बता दूँगी

दिलीप- जल्दी बताइए

अरुणा- दी मैं अपने जीजा जी से मज़ाक भी नही कर सकती

विदू- मैं भी तो मज़ाक कर रही थी

[फिर बड़े मामा आ गए हम सब खाना खा लिए और अपने अपने रूम में आ गए

आज विदू बड़ी मामी के रूम में सोने वाली थी

बड़ी मामी का हक़ था इतने दिनो बाद बड़ी मामी अपनी बेटी को देख रही थी

मुझे तो लग रहा था कि पूरी रात बड़ी मामी विदू के साथ बात करेंगी

मैं अपने रूम में आके सोगया....
 
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