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मर्यादा और संस्कार की दीवार गिरे 24 घंटे भी नहीं हुए थे और मां बेटे जब भी मौका मिल रहा था तब एकाकार हो जा रहे थे।सुबह-सुबह ही रसोई घर के अंदर अपने बेटे की मनमानी और खुद की चाहत को पूरा करने के बाद सुगंधा खुद अपने बेटे को हिदायत दी थी किया अब से ऐसा बिल्कुल भी नहीं चलेगा लेकिन दो-चार घंटे में ही उसका मन नहीं माना और वह तड़प उठी अपने बेटे के लंड को लेने के लिए जिसके चलते खुद ही वह पूरी तरह से नंगी होकर बाथरूम का दरवाजा खोलकर नहाने लगी। ताकि उसका बेटा इस हाल में देखे तो उसे चोदे बिना ना रह सके और ऐसा ही हुआ अंकित अपनी मां कीनंगी जवान देखकर फिर से मदहोश हो गया और फिर बाथरूम में उसकी जमकर चुदाई किया,,,वासना का तूफान गुजर जाने के बाद मां बेटे दोनों नहा कर बाहर निकल गए मां बेटे के बीच अब शर्म कीबिल्कुल भी गुंजाइश नहीं रह गई थी दोनों बेशर्म बन चुके थे इसलिए तो सुगंधा बाथरूम से निकलने के बाद अपने बदन पर टावर लपेट बिना ही नंगी ही अपने कमरे में चली गई,,, अंकितअपनी मां के रूप को देख कर उसकी कातिल अदा को देखकर मंद मंद मुस्कुरा रहा था उसे इस बात पर करवा था कि वह उसने से भरी हुई अपनी मां पर काबू पा चुका था अब उसकी मां की जवानी पूरी तरह से उसके नाम हो चुकी थी जिसके साथ वह जब चाहे तब खेल सकता था अपनी प्यास बुझा सकता था।
अंकित तैयार हो चुका था और तैयार होने के बाद अपनी मां के कमरे में गया तो उसकी मां अभी भी तैयार हो रही थी वैसे तो वह बाजार जाने से पहले तैयार होती थी लेकिन अब उसके तैयार होने का रंग बदल चुका थापहले तो औपचारिक रूप से तैयार होती थी लेकिन मैं उसके जीवन में उसके बेटे के रूप मेंउसका प्रेमी आ चुका था जिसे वह हर पल रिझाने की पूरी कोशिश करती थी,,,वैसे तो वह अपने बेटे को अपनी जवानी का रस चखा चुकी थी लेकिन फिर भी वह पूरी तरह से अपने बेटे को अपनी जवानी का गुलाम बना देना चाहती थी ताकि उसका बेटा किसी और औरत की तरफ नजर उठा कर देखे भी नहीं,,, इसलिए वह कुछ अच्छी तरीके से सज रही थी,,, बरसों के बाद वह इसलिए स्लीव लेस ब्लाउज पहनने के लिए निकाली थी जिसमें बांह नहीं होती। जिसमें औरत की चूचियां और उसकी बांहे और भी ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक लगती है।अपनी मां को इस रूप में देखकर अंकित कमरे में दाखिल होते ही अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला।
अरे वह मम्मी आज तो तुमने नया ब्लाउज पहनी है इसमें तो तुम और भी ज्यादा सेक्सी लग रही हो,,,।
(पहली बार अंकित अपनी मां के लिए इस शब्द का प्रयोग कर रहा था इसलिए सुगंध अपने बेटे के मुंह से अपने लिए सेक्सी शब्द सुनकर एकदम से गनगना गई वह मुस्कुराने लगी लेकिन कुछ बोल नहीं पाई और अंकित से रहने की वह पीछे से अपनी मां को अपनी बाहों में भर लियाऔर सीधा अपने दोनों हथेलियां को ब्लाउज के ऊपर से ही चूची पर रखते हुए हल्के से दबाते हुए बोला,,,)
इस ब्लाउज में तो तुम्हारी चूचियां और भी ज्यादा बड़ी लग रही है,,,,।
आहहहह,,, आराम से छोड़ दे इसे अब,,,, ब्लाउज पुराना है इसलिए कसा हुआ है कहीं तेरे दबाने से फट न जाए,,,,।
खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां छोटे से ब्लाउज में घुसेडोगी तो फट तो जाएगा ही,,,,।
तू भी बहुत शैतान हो गया है रात को कुछ और फाड़ता है और दिन में कुछ और,,,(शर्म और उत्तेजित स्वर में सुगंधा बोली तो अपनी मां की बात सुनकर अंकित एकदम सेमदहोश होता हुआ सीधा अपनी हथेली को साड़ी के ऊपर से अपनी मां की बुर पर रखकर बुर को और हथैली में लेकर दबाते हुए बोला,,,)
तुम्हारी फट गई क्या,,,,,!
आहहहह छोड़ दुख रही है,,,,।
क्या मम्मी इसमें डाल दो तब भी बोलोगी दुख रहा है, दबा दो तब भी बोलोगी दुख रहा है अब करूं तो क्या करूं,,,।
अभी समय कुछ नहीं करना है बाजार चलना है और दो-तीन ब्लाउज सिलवाना है,,,।
ब्लाउज क्यों,,,?
तेरी शरारतें जो बढ़ने लगी है तेरी हरकतों की वजह से कहीं मेरे ब्लाउज फटने लगे तो इसलिए पहले से ही सिलवा ले रही हूं,,, ताकि ब्लाउज फटने के बाद दिक्कत ना आए,,,।
और कहीं बुर फट गई तो,,,(गर्दन पर चुम्बन लेते हुए अंकित बोल तो इस बात पर सुगंधा एकदम से शर्म से अपनी नज़रें नीचे झुका ली और बोली,,)
अगर बुर फट गई तो तुझे ही तकलीफ होगी तुझे चोदने को नहीं मिलेगा इसलिए आराम से,,,।
बात तो बिल्कुल सही है तुम्हारी बुर को अगर कुछ हो गया तो मेरे लंड की तो हालत खराब हो जाएगी अब तो तुम्हारी बुर में डाले बिना मेरे लंड को चैन हीं नहीं मिलता,,,(अभी भी अपनी हथेली अपनी मां की बुर को साड़ी के ऊपर से दबाए हुए वह बोला तो उसकी बात सुनकर सुगंधा बोली,,)
इसलिए तो कह रही हूं छोड़ दे उसको,,, तभी तु उसके साथ मजा ले पाएगा,,,।
को छोड़ दिया अब जल्दी से तैयार हो जाओ,,,,।
मैं तो तैयार हो गई हूं,,,, चल अब,,,, अच्छा रुक जा मैं ब्लाउज का कपड़ा तो ले लुं,,(इतना कहने के साथ ही सुगंधा अलमारी खोली और ब्लाउज सिलवाने का तीन कपड़ा ले ली और उसे एक थैली में रख ली. फिर इसके बाद मां बेटे दोनों घर से बाहर निकल गए बाजार जाने के लिए,,, मुख्य सड़क पर आते हीसुगंधा एक ऑटो को रोकने का इशारा की ओर ऑटो रुक भी गया यह देखकर अंकित अपनी मां से बोला,,,)
आज ऑटो क्यों पैदल ही चलते हैं ना,,,।
अरे उस दर्जी की दुकान बाजार से थोड़ा दूर है और आज पहली बार वहां पर ब्लाउज सिलवाने के लिए जा रही हूं,, सुनी हूं कि वह अच्छा ब्लाउज सिलता है,,,(इतना कहते हुए मां बेटे दोनों ओटो में बैठ गए,,,, जहां जाना था वहां का पता ऑटो ड्राइवर को सुगंधा ने बता दी थी और थोड़ी ही देर बाद ऑटो एक सड़क पर आकर रुक गई यह भी एक छोटा सा बाजार ही था,,, मां बेटे दोनों ओटो में से बाहर निकले और सुगंधा ऑटो वाले को उसका किराया देकर,,,, इधर-उधर उस दुकान को खोजने लगी,,,, दूर से ही उसे वह दुकान दिखाई दे गई थी जिसके बारे में उसकी ही सहेली ने उसे बताई थी और यह सहेली नूपुर नहीं थीस्कूल की ही थी लेकिन कोई और थी जिसके साथ उसकी ज्यादा बातचीत नहीं होती थी,,,, क्योंकि उसका ब्लाउज का डिजाइन सुगंधा को बहुत अच्छा लगा था और सुगंधा उसे ब्लाउज कहां सिलवाई इस बारे में पूछ रही थी उसी ने इस दुकान के बारे में उसे बताई थी,,,,, दुकान को देखते ही वह अंकित से बोली।)
वह रही दुकान अंकित,,,,(उंगली से अंकित को सड़क की दूसरी तरफ दुकान दिखाते हुए बोली तो अंकित भी उस तरफ देखने लगालेकिन अंकित को बड़ी जोरों से पेशाब लगी हुई थी इसलिए अपने हाथ में लिया हुआ थैला अपनी मां को थमाते हुए बोला,,)
ठीक है तुम जाओ मैं आता हूं,,,।
तू कहां जा रहा है,,,?
पेशाब करने जा रहा हूं तुमको चलना है क्या,,,?(मस्ती लेते हुए अंकित बोला तो उसकी मां शर्मा गई और बिना कुछ बोले थैला हाथ में लिए हुए सड़क पार करने लगी,,,, सड़क पार करने के बाद सुगंधा धीरे-धीरे चलते हुए उस दुकान के पास पहुंच गई। दुकान कुछ ज्यादा बड़ी नहीं थी छोटी सी दुकान थी,,, कांच के अंदर सजावट के लिए अच्छे-अच्छे डिजाइन के ब्लाउज रखे हुए थे। जिसे देखकर ही सुगंधा समझ गई थी कि वाकई में अच्छा दरजी है,,, इसलिए खुशी-खुशी सुगंधा दुकान के अंदर प्रवेश कर गई,,, दुकान तो छोटी थी लेकिन अच्छी खासी थी इस समय दुकान पर कोई दूसरा ग्राहक नहीं था सामने ही काउंटर पर तकरीबन साइन 65 वर्ष के एक चाचा जी बैठे थे तो सुगंधा को देखते ही बोले,,)
आईए बेटा,,,, बोलिए क्या सेवा कर सकता हूं।
चाचा जी मुझे एक अच्छा डिजाइन वाला ब्लाउज सिलवाना है,,,।
ठीक है इसीलिए तो बैठे हैं,,,। किस डिजाइन का ब्लाउज सिलवाना है,,,,।
(उस दर्जी की बात सुनते ही, सुगंधाकांच में सजा के ब्लाउज की तरफ देखने लगी जिसमें से वह इस ब्लाउज को पसंद की जी डिजाइन को वह अपनी सहेली को पहने हुए देखी थी तुरंत उसकी तरफ हाथ से इशारा की जिसे देखते ही दर्जी बोला।)
यह हमारे दुकान की सबसे अच्छी डिजाइन है ज्यादातर औरतें यही डिजाइन पसंद करती हैं।
तभी तो मैं यहां आई हूं,,
इसीलिए मैं पहली बार देख रहा हूं,,,,(इतना कहते ही वह दर्जी काउंटर पर से उठकर खड़ा हो गया उसके हाथ में पट्टा बंधा हुआ था जिसे देखकर सुगंधा निराश हो गई बहुत जल्द ही वह दर्जी सुगंधा के चेहरे पर उपसी हुई परेशानी को समझ गया और बोला)
तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो,,, मैं समझ सकता हूं कि समय तुम्हारे मन में क्या चल रहा है लेकिन ब्लाउज मेरा बेटा चलता हैऔर तुम्हें कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है लेकिन एक बात की दिक्कत है कि इस समय तुम्हारे ब्लाउज का नाप नहीं ले सकूंगा और मेरा बेटा भी समय दुकान पर नहीं है अगर आप कल आ सके तो,,,,।
नहीं चाचा जी हम बहुत दूर से आए हैं अगर हो सके तो आज ही नाप ले लो,,,,।
लेकिन मैं कैसे ले सकता हूं मेरे हाथ में चोट लगी हुई है अगर कोई होता तो उसे कह देता,,,(उसका इतना कहना था कि तभी अंकितदुकान के दरवाजे पर पहुंच गया जिसे देखते ही वह दर्जी एकदम से खुश होते हुए बोला) बहुत सही समय पर कोई दुकान पर आया है इधर आओ बेटा तुम्हारी बहुत जरूरत है इस समय,,,,।
मेरी जरूरत,,,(इतना कहकर अपनी मां की तरफ देखो और फिर दर्जी की तरफ देखने लगा सुगंधा अपने बेटे को देखकर सामान्य ही थी वहउसे दरजी को बोलना चाहती थी कि यह मेरा बेटा है लेकिन तभी उसे दर्जी ने जो कहाउसे सुनकर सुगंधा खुद खामोश हो गई और कुछ बोल नहीं पाई,,)
हां बेटा तुम्हारे जैसे ही किसी नौजवान कि मुझे जरूरत थी जो इन मैडम का ब्लाउज का नाप ले सके क्योंकि मेरे हाथ में चोट लगी हुई है और मैं नाप ले नहीं सकता और यह मैडम कल दोबारा आ नहीं सकती क्योंकि बड़ी दूर से आ रही है,,,,।
ओहहह मैं सब समझ गया,,,(इतना क्या करो सुगंधा की तरफ देखकर हल्के से आंख मार दियाअंकित सब कुछ समझ चुका था जैसे ही उसने यह मैडम का नाप लेना बोला वह समझ चुका था कि वह नहीं जानता किवह दोनों मां बेटे हैं इसलिए वह इस फल का फायदा उठाना चाहता था और इशारों ही इशारों में उसने अपनी मां को भी कुछ ना कहने के लिए बोल दिया था,,,,सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी इस बात से की उसका ही बेटा उसके ब्लाउज का नाप लेने वाला है अब कैसे लेगा यह तो वह खुद नहीं जानती थी,,,,, अंकित दुकान के अंदर प्रवेश कर चुका था और उस दर्जी से बोला,,)
चाचा जी ईससे पहले मैंने कभी इस तरह से नाप नहीं लिया कहीं गड़बड़ हो गई तो,,,(सुगंधा की तरफ देखते हुए अंकित बोला और ऐसा व्यवहार कर रहा था मानो कि जैसे सच में वह दोनों अनजान हो )
तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो बेटा मैं हूं ना मैं जैसा कहता हूं वैसे ही करना,,,,,,।
ठीक है चाचा जी आप कहते हैं तो मैं नाप ले लेता हूं और वैसे भी सब आपकी जिम्मेदारी है कहीं मैडम का ब्लाउज खराब हो गया तो मुझे कुछ ना कहना,,(अपनी मां की तरफ मुस्कुराते हुए देखकर बोला,,, अपने बेटे के मुंह से अपने लिए मैडम शब्द सुनकर उसके बदन में भी सुरसुराहट होने लगी वह भी एकदम से अनजान बन गई थी,,,,)
तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो बेटा 40 साल का अनुभव है एक डोरा इधर से उधर नहीं हो सकता,,,, लो यह फीता और जैसा कहता हूं वैसा नाप ले लो,,,(इतना कहकर वह दर्जी अंकित की तरफ फीता बढ़ा दिया और अंकित ने भी चाचा जी के हाथ से फीता ले लिया और ठीक अपनी मां की आंखों के सामने खड़ा हो गया सुगंधा का दिल जोरो से धड़क रहा था,,, हाथ में फीता लेकर वह दर्जी चाचा से बोला)
बताइए कैसे लेना है अब नाप,,,,।
ठीक है बेटा अब फीता के किनारी को कंधे पर रखो,,,
और अंकित ने वैसा ही किया फीता के किनारी को अपनी मां के कंधे पर रख दिया,,,,(इस समय एक अनजान की आंखों के सामने सुगंधा की हालत तो खराब ही हो रही थी अंकित के तन-बदन में भी उत्तेजना की लहर उठ रही थी,,,,, गहरी सांस लेता हुआ अंकित फिर से बोला) अब क्या करना है चाचा जी,,,,,।
अब उसे फीता को नीचे की तरफ लेकर आओ जहां पर मैडम जी के ब्लाउज की निचली किनारी है वहां तक,,,,,,।
ठीक है चाचा जी ,,,,वैसे तो यह काम में पहली बार कर रहा हूं लेकिन न जाने क्यों ईस काम में मुझे अच्छा लग रहा है,,,,,।
बड़ी बारीकी वाला काम है बेटा,,,, नाप लेने में तो अच्छे अच्छों का पसीना छूट जाता है,,,,,(दर्जी सुगंधा की तरफ देखते हुए बोला और खासकर के उसकी चूचियों की गोलाई की तरफ देखकर वह बोला थाउसके कहने के मतलब को अंकित बड़ी अच्छी तरीके से समझ रहा था और सुगंधा भी उसके कहने का मतलब कुछ समझ चुकी थी लेकिन कुछ बोल नहीं पा रही थी। लेकिन इस बात से अंकित कोबड़ी खुशी में रही थी कि उसकी मां इस उम्र के मर्दों को भी रिझाने में पूरी तरह से समर्थ है इसलिए वह मुस्कुरा कर बोला,,)
बात तो सही कह रहे हो चाचा सच में पसीने छूट जाते हैं,,,,(इतना कहने के साथ हीं अंकित जानबूझ के उसे फीते को नीचे की तरफ लाते हुए अपनी मां की चूचियों पर दबाव बनाते हुए उसे नीचे की तरफ लेकर आयाऔर इस हरकत को उसे दर्जी ने अपनी आंखों से देख कर गर्म सांस छोड़ने लगा उसकी हालत खराब होने लगी और वह अंकित की हरकत पर एकदम से मत हो गया उसे यकीन नहीं हो रहा था कि आजकल के छोकरे कितने तेज होते हैं,,,, फीते को ब्लाउज के निचली किनारी पर लाकर अंकित फीते को वही रोक दिया और दर्जी की तरफ देखते हुए बोला,,,) देखो अब ठीक है ना,,,,।
(इतना सुनकर वह दर्जी थोड़ा नजदीक आया और सुगंधा की भरपूर चूचियों पर नजर डालते हुए फीते की तरफ देखा और बोला,,)
एकदम ठीक है,,(इतना कहकर वह एक हाथ से नाप को लिखने लगा यह देखकर अंकित बोला,,)
ठीक से देख लो एक बार और चाचा गोलाई तो सही है ना कहीं ऐसा ना हो की गोलाई का नाप कम हो जाए और फिर बाद में मैडम जी ब्लाउज के अंदर डालते ही रह जाए और गोलाई घूसे ना,,,(अपनी मां की तरफ मुस्कुराते हुए देख कर अंकित एकदम से मजे लेते हुए बोला तो उसकी बात सुनकर दरजी के भी होश उड़ गए थे,,,, सुगंधा खुद शर्म से पानी पानी हो गई थी। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका दी थी और दर्जी इसलिए हैरान हो गया था की कहीं अंकित की बातों को सुनकर उसकी ग्राहक नाराज ना हो जाए लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था न जाने क्यों अंकित की बातों को सुनकर जो कि उसे दरजी के लिए अनजान लड़का था उस दरजी के अरमान भी मचलने लगे कुछ देर खामोशी के बाद वह बोला।)
बात तो तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो बेटे बाद में तकलीफ नहीं होनी चाहिए अगर गोलाई से कम साइज का ब्लाउज बन गया तो वाकई में मैडम को तो परेशानी हो जाएगी अंदर डालने में,,,(वह दर्जी भी मौके का फायदा उठाते हुए सुगंधा की खामोशी को देखकर अंकित के सुर में और मिलने लगा वह अंदर डालने वाली बात पर कुछ ज्यादा ही जोर देकर बोला था सुगंधा उसके कहने के मतलब को समझ रही थी और न जाने क्यों एक अनजान आदमी के सामने अपने बेटे की छेड़ छाड़ ऊसे भी अच्छी लगने लगी थी। वह दर्जी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) क्यों मैडम जी सही कह रहा हूं ना अभी से बता दो ब्लाउज कसा हुआ रखना है कि थोड़ा ढीला इस तरह से नाप ले सकेंगे,,,,
(सुगंधा की सांस ऊपर नीचे हो रही थी और अंकित इस तरह से उसे अनजान व्यक्ति के सामने फीते को अपनी मां की चूची पर दबाए खड़ा था,,, सुगंधा गहरी सांस लेते हुए बोली,,,)
थोड़ा कसा हुआ चलेगा,,,।
(सुगंधा की बात सुनते ही अंकित एकदम उत्साहित होता हुआ बोला)
देखा चाचा जी मैं कारहा था ना,,,, इसलिए कह रहा हूं मैडम जी बोलते जाइए वरना कहीं तुम्हारा सामान ब्लाउज के अंदर समा नहीं पाया तो खामखा इस दुकान को बदनाम कर दोगी,,,,(अंकित अपनी मां की चूची को समान शब्द कहकर संबोधन किया था जिससे एक बार फिर से दर्जी की हालत खराब हो गई थी और वहां सुगंधा की तरफ हैरानी से देख रहा था लेकिन सुगंधा की तरफ से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं थी बस वहां में सर हिला दी थी तब जाकर उसे राहत महसूस हुई और वह अंकित के जुमलेबाजी से पूरी तरह से हैरान हो गया था,,, इस बार फिर से अंकित कंधे पर से फीत को नीचे की तरफ लाते हुए अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूची पर थोड़ा दबाव बढ़ा रहा था और यह सब वह जानबूझकर कर रहा था ताकि वह दर्जी अपनी आंखों से सब कुछ देख सके वह उसे अनजान व्यक्ति के सामने अपनी मां के बदन से मस्ती कर रहा था और देखना चाहता था कि उसे बुजुर्ग की क्या हालत होती है और उसकी यह हरकत वाकई में दर्जी की हालत को खराब कर रहा था दरजी आंखें फाड़े अंकित की हरकत को देख रहा था उसे तरह से सुगंधा शांत खड़ी थी यह देखकर उसे हैरानी भी हो रही थी दर्जी की सांस ऊपर नीचे हो रही थी क्योंकि उसने साफ-साफ देखा था कि उसके लिए अनजान अंकित की उंगलियां उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों पर दब रही थी लेकिन इसका बिल्कुल भी वह विरोध नहीं कर रही थी,,,, आज अपने हाथ में पट्टा बंधा होने की बेबसी साफ उसकी आंखों में दिखाई दे रही थी। अंकित इस तरह से अपनी मां की चूचियों से खेलता हुआ ब्लाउज के निचले कीनारी तक फीते को लाया और वही रोक दिया और सीधे सुगंधा से ही बात करते हुए बोला,,)
अब देख लो मैडम जी अब ठीक है ना इसमें क्या है कि तुम्हारा ब्लाउज कसा भी रहेगा और तुम्हारा सामान तुम आराम से अंदर रख सकती हो तकलीफ नहीं होगी,,,,।
(सुगंधा की सांस ऊपर नीचे हो रही थी एक अनजान व्यक्ति के सामने वाकई में उसका बेटा पूरी तरह से खुलकर अनजान बनकर उसकी चूचियों से खेल रहा था जिसकी वजह से वह खुद उत्तेजित हुए जा रही थी और अपने बेटे की बात सुनकर वह धीरे से बोली)
हां यह ठीक है,,,,।
(इतना सुनते ही हैरानी के साथ वह दर्जी किताब में नाप लिखने लगा और मन ही मन सोचने लगा कि लड़का साला सच में एक नंबर का हरामि है अगर ज्यादा समय मिले तो इसी समय वह बातों में बहला फुसलाकर इसकी चुदाई भी कर दे,,, कितना हो जाने के बाद अंकित दर्जी की तरफ देखते हुए बोला)
अब क्या करूं चाचा जी,,,,।
अब जिस तरह से इधर का नाप लिए हो वही नाप दूसरी तरफ से भी ले लो।
मतलब की दूसरी गोलाई का,,!(जानबूझकर हैरान होने का नाटक करते हुए वह बोला और उसकी बात सुनकर उत्तेजना से वह चाचा अपने सूखे गले को अपने ही थूक से गिला करते हुए बोला)
हां बेटा दूसरी तरफ की गोलाई का,,,(इस तरह का शब्दों का प्रयोग दरजी कभी नहीं करता था लेकिन उसे लड़के की हिम्मत देखकर उसकी भी हिम्मत खोलने लगी थी इसलिए वह भी सुगंध के सामने उसकी चूची को गोलाई का संबोधन करते हुए बोल रहा था,,जिससे सुगंधा की बुर पानी छोड़ने लगी थी उसे दर्जी की बात सुनकर अंकित फिर से उत्साहित होता हुआ इस तरह से नाप लेने लगा,,,, इस बार में दरजी के सामने थोड़ा खुलने का कोशिश करते हुए फीते को कंधे के ऊपर लगाया और उसे फीते को नीचे की तरफ लाते हुए जानबूझकर उसे दर्जी की आंखों के सामने ही अपनी मां की चूची को हथेली में हल्के से दबा दिया और यह सब इतनी जल्दबाजी में किया कि बस वह दर्जी देख सके और वह फिर से फीते को नीचे की तरफ ले आया,,,, इस हल्की सी झलक को देखकर दर्जी की हालत एकदम से खराब हो गई उसके मुंह में पानी आ गया और उसकी धोती में उसका लंड खड़ा होने लगा भले ही वह 50-55 की उम्र का हो गया था लेकिन फिर भी सुगंधा की मदहोशीकर देने वाली जवानी उसे उत्तेजना का एहसास करा रही थी। वह पूरी तरह से पागल हुआ जा रहा था और अपने मन में ही कह रहा था कि साला लड़का सच में बहुत चालाक है खेल खाया लगता है तभी औरतों के अंगों से खेलना जानता है। अंकित बड़ी चालाकी से फीते को नीचे किनारी पर रखते हुए बोला,,,)
लो देख लो चाचा और लिख लो बराबर है ना,,,,
हां बिल्कुल ठीक है बेटा,,,(माथे पर ऊपर से पसीने की बूंद को अपने रुमाल से साफ करते हुए दर्जी बोला और नाप को लिखने लगा)
अब बोलो,,,, अब क्या करना है,,?(फिते को हाथ में लिए हुए अंकित बोला और उसकी बात सुनकर दरजी अपने मन में बोला आपके हाथ तो इसकी साड़ी उठाकर पीछे से पेल दे बस,,,, लेकिन यह बात उसने अपने मन में ही बोला था क्योंकि सुगंधा के सामने बोलने की इतनी हिम्मत उसकी बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए वह बोला,,,)
अब बेटा ब्लाउज के बीच में जो बटन है वहां पर फीते को पकड़ो और उसे उसी तरफ से ले जाकर के बांह के नीचे तक का माप लेना है,,,,।
ठीक है चाचा,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित फिर से फीते को ब्लाउज के पीछे-पीछे जहां पर बटन लगाया जाता है वहां पर रख दिया और दूसरे हाथ से फीते ब्लाउज के उसी भाग पर ले जाने लगा, और इस बार भी उसने वही हरकत को दोहराया इस बार भी उसने अपनी मां की चूची को हल्के से दबा दिया,,,, लेकिन इस बार जो उसने बोला उससे उसे दर्जी का कान के परदे लक हील गए,,,, वह हल्की सी अपनी मां की चूची को दबातेहुए बोला) ज्यादा बड़े हैं ना मैडम इसलिए थोड़ा दिक्कत हो रहा है.....(और दर्जी के सामने सुगंधा कुछ बोली नहीं बस शर्मा के हां में सर हिला कर नीचे नजर झुका ली यह सब दरजी के लिए असहनीय होता जा रहा था,,, उसे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था और उसका हाथ अपने आप ही उसकी धोती के ऊपर चला गया और इसकी यह हरकत को अंकित और सुगंध दोनों ने अपनी आंखों से देख लीए थे,,,, अंकित तब तक फिर देखो उसके सही जगह पर ले आया था और बोला,,)
देख लो चाचा जी ठीक है ना,,,।
बिल्कुल ठीक है बेटा,,,(उत्तेजना के कारण चाचा जी के मुंह से आवाज भी ठीक से नहीं निकल पा रहा था और वह धीरे से नाप को लिख लिए यही क्रिया उनकी दूसरी तरफ से भी किया और फिर बोला,,,)
अब कहां का नाप लेना है चाचा जी,,,,।
बस बेटा अब पीछे से नाप ले ले,,,।
ठीक है चाचा जी,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित खुद अपनी मां का हाथ पकड़ कर उसे घुमा दिया,, जिससे उसकी मां की पीठ अंकित की तरफ हो गई लेकिन यह देखकर करती हैरान हो गया था कि वह लड़का बिना कुछ बोले उसे अपने हाथ से ही घुमा दिया था और इस बात पर उसे मैडम ने बिल्कुल भी प्रतिक्रिया नहीं की थी वह पूरी तरह से उसके अधीन हो चुकी थी यह देखकर वह दर्जी यही सोच रहा था कि अगर यह चाहे तो इसकी चुदाई भी कर दे तो भी यह कुछ नहीं बोलेगी,,, जैसे ही सुगंधा की पीठ उसकी आंखों के सामने हुई,,,, अंकित एकदम से उसकी साड़ी कंधे से पकड़ कर अपने हाथ में लिया और उसे कंधे से नीचे करते हुए बोला,,,)
मैडम जी थोड़ी देर के लिए साड़ी को अपने हाथ में पड़े रहिए ताकि अच्छे से नाप लिया जा सके,,,,,।
ठीक है,,,(इतना कह कर वह साड़ी को अपने हाथ में पकड़ ली,,,, और अंकित उस दर्जी को और भी ज्यादा उत्तेजित करने के लिए बोला,,,)
बहुत चौड़ी और चिकनी पीठ हैं मैडम जी कोई क्रीम लगाती है क्या,,,?
नहीं यह तो ऐसे ही है,,,।(सुगंधा भी धीरे से बोली वह भी इस खेल में पूरी तरह से शामिल हो चुकी थी उसे भी मजा आ रहा था उसकी भी बुर पानी छोड़ रही थी,,,,)
सच में आप बहुत खूबसूरत है,,,,,(अंकित दर्जी की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोला दर्जी की हालत खराब थी वह समझ गया था कि सच में कितना हरामी लड़का है,,, और उसने आज तक ऐसा बिंदास लड़का नहीं देखा था जो औरतों के मामले में इतना तेज हो,,,, दर्जी की तरफ देखते हुए अंकित बोला,,,,)
अब कैसे लेना है नाप चाचाजी,,,?
बस बेटा आप पीठ की तरफ जहां से सिलाई शुरू होती है वहां पर फिता र ख और इस तरफ जहां पर सिलाई खत्म होती वहां पर रखकर नाप ले ले,,,,।
ठीक है चाचा जी,,,,(और इतना कहकर बाहर दरजी जैसा बोला वैसा ही किया लेकिन ऐसा करने के दौरान भी वह धीरे से जो बोला वह भी काफी हैरान कर देने वाला था दरजी को नाप लेते हुए अंकित दर्जी की तरफ देखते हुए बोला।)
चाचा जी अगर ब्लाउज उतार कर नाप लेना हो तो सही नाप लिया जाए पैसे में क्या मैडम जी भी खुश और ग्राहक खुश तो आप खुश,,,,।
(इतना सुनते ही फिर से दर्जी की हालत खराब हो गई वह फिर से मैडम की तरफ तो कभी अंकित की तरफ देखने लगा लेकिन वह हैरान था कि मैडम एक शब्द तक नहीं बोल रही थी और तब तक अंकित अपने हाथ में से फिते को कबाट पर रख दिया,,,,, कोई कुछ बोलता है इससे पहले ही मैडम मतलब की सुगंधा बोल पड़ी,,,)
कितने दिन में हो जाएगा चाचा जी,,,,।
तीन-चार दिन में हो जाएगा क्योंकि और भी ब्लाउज सिलना बाकी है ऐसा करो कि रविवार को आ जाना तुम्हारा ब्लाउज तैयार मिलेगा,,,,।
ठीक है चाचा जी,,,,
(थोड़ी देर में दर्जी ने पर्ची बनाकर सुगंधा को थमा दिया और सुगंधा भी मुस्कुराते हुए दुकान से बाहर निकल गई लेकिन अंकित वहीं खड़ा रहा क्योंकि वह जानना चाहता था कि दरजी के मन में क्या चल रहा है और सुगंधा के जाते ही वह दर्जी एकदम से उत्साहित होता हुआ अंकित से बोला,,,)
वाह बेटा बड़े तेज हो अगर दुकान में मै ना होता तो शायद तुम साड़ी उठाकर उसकी ले भी लिएहोते।
सच कहूं तो चाचा जी इरादा कुछ ऐसा ही था देख नहीं रही हो कितनी खूबसूरत औरत थी पूरा बदन जवानी से भरा हुआ था,,,।
एक बात बताओ जो इतना उसके साथ खुल रहे थे तुम्हें डर नहीं लग रहा था अगर कुछ बोल देती या थप्पड़ लगा देती तब क्या करते ।
तुम्हें लगता है चाचा जी की वह थप्पड़ लगा देती। अगर मैं खुलकर उससे उसकी बुर मांग लेता तो भी वह दे देती,,,,।
सच में बेटा तुम्हारा तो जलवा है,,,।
अच्छा चाचा जी सच-सच बताना कैसी लगी तुम्हेंवह औरत,,,।
क्या कहूं बेटा गजब की औरत थी मेरा तो देखते ही खड़ा हो गया था मैंने आज तक कितनी खूबसूरत औरत अपनी दुकान में नहीं देखा उसका ब्लाउज बनाने में भी मुझे बहुत मजा आएगा । अच्छा एक बात बताओ दो बार मैंने तुम्हारी हरकत देखा था दो बार तुमने उसकी चूची दबाए थे सच-सच बताना कैसी चुची थी नरम नरम थी या कड़क।
मिला जुला था चाचा जी कड़क भी और नरम भी ऊपर से कड़क लेकिन दबाने पर एकदम नरम तुम्हारा भी तो खड़ा हो गया था चाचा जी मेरी हरकत देखकर।
अब क्या कर सकता हूं बेटा बस देखकर ही मजा ले सकता हूं हमारी किस्मत में कहां इतनी खूबसूरत औरत है जो बिस्तर पर मजा दे।
वैसे भी चाचा जी इतनी गर्म औरत दिखाई दे रही थी कि बिस्तर पर तुम उसे ठंडा भी नहीं कर सकते बल्कि मुझे तो डर है कि कहीं अगर ऐसी औरत तुम्हें बिस्तर पर मिल जाए तो कहीं दिल के दौरे से ना मर जाओ।
(अंकित की बात सुनते ही वह दर्जी जोर-जोर से हंसने लगा,,,, और जब थोड़ा सामान्य हुआ तो वह बोला)
अच्छा यह बताओ बेटा तुम किस सिलसिले से यहां पर आए हो।
मम्मी ने भेजा था कि देखो दुकान खुली है या बंद,,, यही देखने के लिए आया था और तुम तो मेरे हाथों में खूबसूरत तोहफा दे दिए। (इतना कहकर मुस्कुराते बहन की दुकान से बाहर निकल गया दुकान से बाहर निकाल कर वाहन सड़क की तरफ देखा तो दूर पेड़ के नीचे उसकी मां खड़ी होकर उसका इंतजार कर रही थी अंकित मुस्कुराता हुआ अपनी मां के पास पहुंच गया तो उसकी मां थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली)
सच में तु बहुत हारामी है,,,,,
आप क्या कर सकता हूं वह दुकान वाला ही मुझे अजनबी समझ रहा था और यही सोचकर मैं थोड़ा मजा लेना चाहता था अनजान बनकर और सच में मुझे बहुत मजा आया तुम्हारे ब्लाउज का नाप लेकर।
अगर ब्लाउज उतार कर नाप देना हो तो मजा आ जाए ना,,,,(सुगंधा हल्के से अपने बेटे की पीठ पर मरते हुए बोली तो वह भी मुस्कुराते हुए बोला)
सच में अगर ऐसा हो जाए तो मैं भी दरजी बन जाऊं तब सब की खोल खोल कर नाप लु,,,।
बहुत शैतान हो गया है तू,,,,,
और वैसे भी मम्मी देख रही थी दर्जी की हालत उसका मुंह देखने लायक था अच्छी नहीं धोती में उसका ल़ड खड़ा हो रहा था।
हां रे देखी थी,,,, उसकी उम्र देखकर लगता ही नहीं है कि वह भी इन सब के बारे में सोचता होगा।
अरे तुम्हें क्या मालूम मम्मी उम्र का कोई लेना-देना नहीं होता वह भी अपने मन में तुमको लेकर न जाने कैसे कैसे ख्याल पका रहा होगा।
अच्छा यह बात है,,,, तुझे बहुत मालूम पड़ता है ना यह सब फिर से क्या बात हो रही थी मेरे आने के बाद।
वह दर्जी यही कह रहा था कि मैं तुम्हारे जैसा लड़का नहीं देखा इतनी जल्दी तुम औरतों के मामले में आगे बढ़ जाते हो मैं तो देख कर हैरान रह गया था ओर मालूम है तुम्हें वह क्या कह रहा था।
क्या कह रहा था,,,,?
कह रहा था कि बेटा अगर मैं दुकान में नहीं होता तो शायद तुम साड़ी उठाकर उसकी ले भी लिए होते।
हाय दइया ऐसा कह रहा था वो।
तो क्या और जब मैं उससे यह कहा कि अगर तुम्हें ऐसी औरत मिल जाए बिस्तर पर तो तुम क्या करोगे।
तब उसने क्या कहा,,,?(सुगंधा भी जानना चाहती थी कि उसे देखकर उसे दरजी के मन में कैसे विचार जाग रहे थे अपनी मां की बात सुनकर अंकित बोला)
वह हंसने लगा और बोला कि इस उम्र में मुझे नहीं लगता कि मैं कुछ कर पाऊं लेकिन फिर भी अगर ऐसी औरत बिस्तर पर हो तो मैं पूरी कोशिश करूंगा,,,,।
(इतना सुनकर सुगंधा अपने बेटे की तरफ देखने लगी जो कि यह बात अंकित अपने मन से बोल रहा था जबकि उसे दर्जी ने सुगंधा के मामले में पहले ही अपने हाथ खड़े कर दिए थे और फिर अंकित अपनी बात को आगे बढ़ते हुए बोला)
उसकी बात सुनकर मैं बोला अगर यह औरत मतलब कि तुम तुम्हारे बिस्तर पर आ जाए तो मुझे लगता है कि तुम्हारा तो दिल के दौरे से ही मृत्यु हो जाएगी और इतना सुनकर वह जोर-जोर से हंसने लगा।
(अपने बेटे की बात कर सुगंधा भी हंसने लगी आज का यह अनुभव बेहद अद्भुत था मां बेटे के लिए सुगंधा इस बात से हैरान थी कि वह दर्जी जान नहीं पाया कि यह दोनों मां बेटे हैं दोनों को अजनबी ही समझ रहा था। उसी छोटे से बाजार में से सुगंधा कुछ सब्जिय खरीदी और मां बेटे दोनों थोड़ा नाश्ता करके ओटो पकड़कर घर वापस आ गए।)
अंकित तैयार हो चुका था और तैयार होने के बाद अपनी मां के कमरे में गया तो उसकी मां अभी भी तैयार हो रही थी वैसे तो वह बाजार जाने से पहले तैयार होती थी लेकिन अब उसके तैयार होने का रंग बदल चुका थापहले तो औपचारिक रूप से तैयार होती थी लेकिन मैं उसके जीवन में उसके बेटे के रूप मेंउसका प्रेमी आ चुका था जिसे वह हर पल रिझाने की पूरी कोशिश करती थी,,,वैसे तो वह अपने बेटे को अपनी जवानी का रस चखा चुकी थी लेकिन फिर भी वह पूरी तरह से अपने बेटे को अपनी जवानी का गुलाम बना देना चाहती थी ताकि उसका बेटा किसी और औरत की तरफ नजर उठा कर देखे भी नहीं,,, इसलिए वह कुछ अच्छी तरीके से सज रही थी,,, बरसों के बाद वह इसलिए स्लीव लेस ब्लाउज पहनने के लिए निकाली थी जिसमें बांह नहीं होती। जिसमें औरत की चूचियां और उसकी बांहे और भी ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक लगती है।अपनी मां को इस रूप में देखकर अंकित कमरे में दाखिल होते ही अपनी मां की तरफ देखते हुए बोला।
अरे वह मम्मी आज तो तुमने नया ब्लाउज पहनी है इसमें तो तुम और भी ज्यादा सेक्सी लग रही हो,,,।
(पहली बार अंकित अपनी मां के लिए इस शब्द का प्रयोग कर रहा था इसलिए सुगंध अपने बेटे के मुंह से अपने लिए सेक्सी शब्द सुनकर एकदम से गनगना गई वह मुस्कुराने लगी लेकिन कुछ बोल नहीं पाई और अंकित से रहने की वह पीछे से अपनी मां को अपनी बाहों में भर लियाऔर सीधा अपने दोनों हथेलियां को ब्लाउज के ऊपर से ही चूची पर रखते हुए हल्के से दबाते हुए बोला,,,)
इस ब्लाउज में तो तुम्हारी चूचियां और भी ज्यादा बड़ी लग रही है,,,,।
आहहहह,,, आराम से छोड़ दे इसे अब,,,, ब्लाउज पुराना है इसलिए कसा हुआ है कहीं तेरे दबाने से फट न जाए,,,,।
खरबूजे जैसी बड़ी-बड़ी चूचियां छोटे से ब्लाउज में घुसेडोगी तो फट तो जाएगा ही,,,,।
तू भी बहुत शैतान हो गया है रात को कुछ और फाड़ता है और दिन में कुछ और,,,(शर्म और उत्तेजित स्वर में सुगंधा बोली तो अपनी मां की बात सुनकर अंकित एकदम सेमदहोश होता हुआ सीधा अपनी हथेली को साड़ी के ऊपर से अपनी मां की बुर पर रखकर बुर को और हथैली में लेकर दबाते हुए बोला,,,)
तुम्हारी फट गई क्या,,,,,!
आहहहह छोड़ दुख रही है,,,,।
क्या मम्मी इसमें डाल दो तब भी बोलोगी दुख रहा है, दबा दो तब भी बोलोगी दुख रहा है अब करूं तो क्या करूं,,,।
अभी समय कुछ नहीं करना है बाजार चलना है और दो-तीन ब्लाउज सिलवाना है,,,।
ब्लाउज क्यों,,,?
तेरी शरारतें जो बढ़ने लगी है तेरी हरकतों की वजह से कहीं मेरे ब्लाउज फटने लगे तो इसलिए पहले से ही सिलवा ले रही हूं,,, ताकि ब्लाउज फटने के बाद दिक्कत ना आए,,,।
और कहीं बुर फट गई तो,,,(गर्दन पर चुम्बन लेते हुए अंकित बोल तो इस बात पर सुगंधा एकदम से शर्म से अपनी नज़रें नीचे झुका ली और बोली,,)
अगर बुर फट गई तो तुझे ही तकलीफ होगी तुझे चोदने को नहीं मिलेगा इसलिए आराम से,,,।
बात तो बिल्कुल सही है तुम्हारी बुर को अगर कुछ हो गया तो मेरे लंड की तो हालत खराब हो जाएगी अब तो तुम्हारी बुर में डाले बिना मेरे लंड को चैन हीं नहीं मिलता,,,(अभी भी अपनी हथेली अपनी मां की बुर को साड़ी के ऊपर से दबाए हुए वह बोला तो उसकी बात सुनकर सुगंधा बोली,,)
इसलिए तो कह रही हूं छोड़ दे उसको,,, तभी तु उसके साथ मजा ले पाएगा,,,।
को छोड़ दिया अब जल्दी से तैयार हो जाओ,,,,।
मैं तो तैयार हो गई हूं,,,, चल अब,,,, अच्छा रुक जा मैं ब्लाउज का कपड़ा तो ले लुं,,(इतना कहने के साथ ही सुगंधा अलमारी खोली और ब्लाउज सिलवाने का तीन कपड़ा ले ली और उसे एक थैली में रख ली. फिर इसके बाद मां बेटे दोनों घर से बाहर निकल गए बाजार जाने के लिए,,, मुख्य सड़क पर आते हीसुगंधा एक ऑटो को रोकने का इशारा की ओर ऑटो रुक भी गया यह देखकर अंकित अपनी मां से बोला,,,)
आज ऑटो क्यों पैदल ही चलते हैं ना,,,।
अरे उस दर्जी की दुकान बाजार से थोड़ा दूर है और आज पहली बार वहां पर ब्लाउज सिलवाने के लिए जा रही हूं,, सुनी हूं कि वह अच्छा ब्लाउज सिलता है,,,(इतना कहते हुए मां बेटे दोनों ओटो में बैठ गए,,,, जहां जाना था वहां का पता ऑटो ड्राइवर को सुगंधा ने बता दी थी और थोड़ी ही देर बाद ऑटो एक सड़क पर आकर रुक गई यह भी एक छोटा सा बाजार ही था,,, मां बेटे दोनों ओटो में से बाहर निकले और सुगंधा ऑटो वाले को उसका किराया देकर,,,, इधर-उधर उस दुकान को खोजने लगी,,,, दूर से ही उसे वह दुकान दिखाई दे गई थी जिसके बारे में उसकी ही सहेली ने उसे बताई थी और यह सहेली नूपुर नहीं थीस्कूल की ही थी लेकिन कोई और थी जिसके साथ उसकी ज्यादा बातचीत नहीं होती थी,,,, क्योंकि उसका ब्लाउज का डिजाइन सुगंधा को बहुत अच्छा लगा था और सुगंधा उसे ब्लाउज कहां सिलवाई इस बारे में पूछ रही थी उसी ने इस दुकान के बारे में उसे बताई थी,,,,, दुकान को देखते ही वह अंकित से बोली।)
वह रही दुकान अंकित,,,,(उंगली से अंकित को सड़क की दूसरी तरफ दुकान दिखाते हुए बोली तो अंकित भी उस तरफ देखने लगालेकिन अंकित को बड़ी जोरों से पेशाब लगी हुई थी इसलिए अपने हाथ में लिया हुआ थैला अपनी मां को थमाते हुए बोला,,)
ठीक है तुम जाओ मैं आता हूं,,,।
तू कहां जा रहा है,,,?
पेशाब करने जा रहा हूं तुमको चलना है क्या,,,?(मस्ती लेते हुए अंकित बोला तो उसकी मां शर्मा गई और बिना कुछ बोले थैला हाथ में लिए हुए सड़क पार करने लगी,,,, सड़क पार करने के बाद सुगंधा धीरे-धीरे चलते हुए उस दुकान के पास पहुंच गई। दुकान कुछ ज्यादा बड़ी नहीं थी छोटी सी दुकान थी,,, कांच के अंदर सजावट के लिए अच्छे-अच्छे डिजाइन के ब्लाउज रखे हुए थे। जिसे देखकर ही सुगंधा समझ गई थी कि वाकई में अच्छा दरजी है,,, इसलिए खुशी-खुशी सुगंधा दुकान के अंदर प्रवेश कर गई,,, दुकान तो छोटी थी लेकिन अच्छी खासी थी इस समय दुकान पर कोई दूसरा ग्राहक नहीं था सामने ही काउंटर पर तकरीबन साइन 65 वर्ष के एक चाचा जी बैठे थे तो सुगंधा को देखते ही बोले,,)
आईए बेटा,,,, बोलिए क्या सेवा कर सकता हूं।
चाचा जी मुझे एक अच्छा डिजाइन वाला ब्लाउज सिलवाना है,,,।
ठीक है इसीलिए तो बैठे हैं,,,। किस डिजाइन का ब्लाउज सिलवाना है,,,,।
(उस दर्जी की बात सुनते ही, सुगंधाकांच में सजा के ब्लाउज की तरफ देखने लगी जिसमें से वह इस ब्लाउज को पसंद की जी डिजाइन को वह अपनी सहेली को पहने हुए देखी थी तुरंत उसकी तरफ हाथ से इशारा की जिसे देखते ही दर्जी बोला।)
यह हमारे दुकान की सबसे अच्छी डिजाइन है ज्यादातर औरतें यही डिजाइन पसंद करती हैं।
तभी तो मैं यहां आई हूं,,
इसीलिए मैं पहली बार देख रहा हूं,,,,(इतना कहते ही वह दर्जी काउंटर पर से उठकर खड़ा हो गया उसके हाथ में पट्टा बंधा हुआ था जिसे देखकर सुगंधा निराश हो गई बहुत जल्द ही वह दर्जी सुगंधा के चेहरे पर उपसी हुई परेशानी को समझ गया और बोला)
तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो,,, मैं समझ सकता हूं कि समय तुम्हारे मन में क्या चल रहा है लेकिन ब्लाउज मेरा बेटा चलता हैऔर तुम्हें कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है लेकिन एक बात की दिक्कत है कि इस समय तुम्हारे ब्लाउज का नाप नहीं ले सकूंगा और मेरा बेटा भी समय दुकान पर नहीं है अगर आप कल आ सके तो,,,,।
नहीं चाचा जी हम बहुत दूर से आए हैं अगर हो सके तो आज ही नाप ले लो,,,,।
लेकिन मैं कैसे ले सकता हूं मेरे हाथ में चोट लगी हुई है अगर कोई होता तो उसे कह देता,,,(उसका इतना कहना था कि तभी अंकितदुकान के दरवाजे पर पहुंच गया जिसे देखते ही वह दर्जी एकदम से खुश होते हुए बोला) बहुत सही समय पर कोई दुकान पर आया है इधर आओ बेटा तुम्हारी बहुत जरूरत है इस समय,,,,।
मेरी जरूरत,,,(इतना कहकर अपनी मां की तरफ देखो और फिर दर्जी की तरफ देखने लगा सुगंधा अपने बेटे को देखकर सामान्य ही थी वहउसे दरजी को बोलना चाहती थी कि यह मेरा बेटा है लेकिन तभी उसे दर्जी ने जो कहाउसे सुनकर सुगंधा खुद खामोश हो गई और कुछ बोल नहीं पाई,,)
हां बेटा तुम्हारे जैसे ही किसी नौजवान कि मुझे जरूरत थी जो इन मैडम का ब्लाउज का नाप ले सके क्योंकि मेरे हाथ में चोट लगी हुई है और मैं नाप ले नहीं सकता और यह मैडम कल दोबारा आ नहीं सकती क्योंकि बड़ी दूर से आ रही है,,,,।
ओहहह मैं सब समझ गया,,,(इतना क्या करो सुगंधा की तरफ देखकर हल्के से आंख मार दियाअंकित सब कुछ समझ चुका था जैसे ही उसने यह मैडम का नाप लेना बोला वह समझ चुका था कि वह नहीं जानता किवह दोनों मां बेटे हैं इसलिए वह इस फल का फायदा उठाना चाहता था और इशारों ही इशारों में उसने अपनी मां को भी कुछ ना कहने के लिए बोल दिया था,,,,सुगंधा के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी इस बात से की उसका ही बेटा उसके ब्लाउज का नाप लेने वाला है अब कैसे लेगा यह तो वह खुद नहीं जानती थी,,,,, अंकित दुकान के अंदर प्रवेश कर चुका था और उस दर्जी से बोला,,)
चाचा जी ईससे पहले मैंने कभी इस तरह से नाप नहीं लिया कहीं गड़बड़ हो गई तो,,,(सुगंधा की तरफ देखते हुए अंकित बोला और ऐसा व्यवहार कर रहा था मानो कि जैसे सच में वह दोनों अनजान हो )
तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो बेटा मैं हूं ना मैं जैसा कहता हूं वैसे ही करना,,,,,,।
ठीक है चाचा जी आप कहते हैं तो मैं नाप ले लेता हूं और वैसे भी सब आपकी जिम्मेदारी है कहीं मैडम का ब्लाउज खराब हो गया तो मुझे कुछ ना कहना,,(अपनी मां की तरफ मुस्कुराते हुए देखकर बोला,,, अपने बेटे के मुंह से अपने लिए मैडम शब्द सुनकर उसके बदन में भी सुरसुराहट होने लगी वह भी एकदम से अनजान बन गई थी,,,,)
तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो बेटा 40 साल का अनुभव है एक डोरा इधर से उधर नहीं हो सकता,,,, लो यह फीता और जैसा कहता हूं वैसा नाप ले लो,,,(इतना कहकर वह दर्जी अंकित की तरफ फीता बढ़ा दिया और अंकित ने भी चाचा जी के हाथ से फीता ले लिया और ठीक अपनी मां की आंखों के सामने खड़ा हो गया सुगंधा का दिल जोरो से धड़क रहा था,,, हाथ में फीता लेकर वह दर्जी चाचा से बोला)
बताइए कैसे लेना है अब नाप,,,,।
ठीक है बेटा अब फीता के किनारी को कंधे पर रखो,,,
और अंकित ने वैसा ही किया फीता के किनारी को अपनी मां के कंधे पर रख दिया,,,,(इस समय एक अनजान की आंखों के सामने सुगंधा की हालत तो खराब ही हो रही थी अंकित के तन-बदन में भी उत्तेजना की लहर उठ रही थी,,,,, गहरी सांस लेता हुआ अंकित फिर से बोला) अब क्या करना है चाचा जी,,,,,।
अब उसे फीता को नीचे की तरफ लेकर आओ जहां पर मैडम जी के ब्लाउज की निचली किनारी है वहां तक,,,,,,।
ठीक है चाचा जी ,,,,वैसे तो यह काम में पहली बार कर रहा हूं लेकिन न जाने क्यों ईस काम में मुझे अच्छा लग रहा है,,,,,।
बड़ी बारीकी वाला काम है बेटा,,,, नाप लेने में तो अच्छे अच्छों का पसीना छूट जाता है,,,,,(दर्जी सुगंधा की तरफ देखते हुए बोला और खासकर के उसकी चूचियों की गोलाई की तरफ देखकर वह बोला थाउसके कहने के मतलब को अंकित बड़ी अच्छी तरीके से समझ रहा था और सुगंधा भी उसके कहने का मतलब कुछ समझ चुकी थी लेकिन कुछ बोल नहीं पा रही थी। लेकिन इस बात से अंकित कोबड़ी खुशी में रही थी कि उसकी मां इस उम्र के मर्दों को भी रिझाने में पूरी तरह से समर्थ है इसलिए वह मुस्कुरा कर बोला,,)
बात तो सही कह रहे हो चाचा सच में पसीने छूट जाते हैं,,,,(इतना कहने के साथ हीं अंकित जानबूझ के उसे फीते को नीचे की तरफ लाते हुए अपनी मां की चूचियों पर दबाव बनाते हुए उसे नीचे की तरफ लेकर आयाऔर इस हरकत को उसे दर्जी ने अपनी आंखों से देख कर गर्म सांस छोड़ने लगा उसकी हालत खराब होने लगी और वह अंकित की हरकत पर एकदम से मत हो गया उसे यकीन नहीं हो रहा था कि आजकल के छोकरे कितने तेज होते हैं,,,, फीते को ब्लाउज के निचली किनारी पर लाकर अंकित फीते को वही रोक दिया और दर्जी की तरफ देखते हुए बोला,,,) देखो अब ठीक है ना,,,,।
(इतना सुनकर वह दर्जी थोड़ा नजदीक आया और सुगंधा की भरपूर चूचियों पर नजर डालते हुए फीते की तरफ देखा और बोला,,)
एकदम ठीक है,,(इतना कहकर वह एक हाथ से नाप को लिखने लगा यह देखकर अंकित बोला,,)
ठीक से देख लो एक बार और चाचा गोलाई तो सही है ना कहीं ऐसा ना हो की गोलाई का नाप कम हो जाए और फिर बाद में मैडम जी ब्लाउज के अंदर डालते ही रह जाए और गोलाई घूसे ना,,,(अपनी मां की तरफ मुस्कुराते हुए देख कर अंकित एकदम से मजे लेते हुए बोला तो उसकी बात सुनकर दरजी के भी होश उड़ गए थे,,,, सुगंधा खुद शर्म से पानी पानी हो गई थी। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका दी थी और दर्जी इसलिए हैरान हो गया था की कहीं अंकित की बातों को सुनकर उसकी ग्राहक नाराज ना हो जाए लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था न जाने क्यों अंकित की बातों को सुनकर जो कि उसे दरजी के लिए अनजान लड़का था उस दरजी के अरमान भी मचलने लगे कुछ देर खामोशी के बाद वह बोला।)
बात तो तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो बेटे बाद में तकलीफ नहीं होनी चाहिए अगर गोलाई से कम साइज का ब्लाउज बन गया तो वाकई में मैडम को तो परेशानी हो जाएगी अंदर डालने में,,,(वह दर्जी भी मौके का फायदा उठाते हुए सुगंधा की खामोशी को देखकर अंकित के सुर में और मिलने लगा वह अंदर डालने वाली बात पर कुछ ज्यादा ही जोर देकर बोला था सुगंधा उसके कहने के मतलब को समझ रही थी और न जाने क्यों एक अनजान आदमी के सामने अपने बेटे की छेड़ छाड़ ऊसे भी अच्छी लगने लगी थी। वह दर्जी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,) क्यों मैडम जी सही कह रहा हूं ना अभी से बता दो ब्लाउज कसा हुआ रखना है कि थोड़ा ढीला इस तरह से नाप ले सकेंगे,,,,
(सुगंधा की सांस ऊपर नीचे हो रही थी और अंकित इस तरह से उसे अनजान व्यक्ति के सामने फीते को अपनी मां की चूची पर दबाए खड़ा था,,, सुगंधा गहरी सांस लेते हुए बोली,,,)
थोड़ा कसा हुआ चलेगा,,,।
(सुगंधा की बात सुनते ही अंकित एकदम उत्साहित होता हुआ बोला)
देखा चाचा जी मैं कारहा था ना,,,, इसलिए कह रहा हूं मैडम जी बोलते जाइए वरना कहीं तुम्हारा सामान ब्लाउज के अंदर समा नहीं पाया तो खामखा इस दुकान को बदनाम कर दोगी,,,,(अंकित अपनी मां की चूची को समान शब्द कहकर संबोधन किया था जिससे एक बार फिर से दर्जी की हालत खराब हो गई थी और वहां सुगंधा की तरफ हैरानी से देख रहा था लेकिन सुगंधा की तरफ से किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं थी बस वहां में सर हिला दी थी तब जाकर उसे राहत महसूस हुई और वह अंकित के जुमलेबाजी से पूरी तरह से हैरान हो गया था,,, इस बार फिर से अंकित कंधे पर से फीत को नीचे की तरफ लाते हुए अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूची पर थोड़ा दबाव बढ़ा रहा था और यह सब वह जानबूझकर कर रहा था ताकि वह दर्जी अपनी आंखों से सब कुछ देख सके वह उसे अनजान व्यक्ति के सामने अपनी मां के बदन से मस्ती कर रहा था और देखना चाहता था कि उसे बुजुर्ग की क्या हालत होती है और उसकी यह हरकत वाकई में दर्जी की हालत को खराब कर रहा था दरजी आंखें फाड़े अंकित की हरकत को देख रहा था उसे तरह से सुगंधा शांत खड़ी थी यह देखकर उसे हैरानी भी हो रही थी दर्जी की सांस ऊपर नीचे हो रही थी क्योंकि उसने साफ-साफ देखा था कि उसके लिए अनजान अंकित की उंगलियां उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों पर दब रही थी लेकिन इसका बिल्कुल भी वह विरोध नहीं कर रही थी,,,, आज अपने हाथ में पट्टा बंधा होने की बेबसी साफ उसकी आंखों में दिखाई दे रही थी। अंकित इस तरह से अपनी मां की चूचियों से खेलता हुआ ब्लाउज के निचले कीनारी तक फीते को लाया और वही रोक दिया और सीधे सुगंधा से ही बात करते हुए बोला,,)
अब देख लो मैडम जी अब ठीक है ना इसमें क्या है कि तुम्हारा ब्लाउज कसा भी रहेगा और तुम्हारा सामान तुम आराम से अंदर रख सकती हो तकलीफ नहीं होगी,,,,।
(सुगंधा की सांस ऊपर नीचे हो रही थी एक अनजान व्यक्ति के सामने वाकई में उसका बेटा पूरी तरह से खुलकर अनजान बनकर उसकी चूचियों से खेल रहा था जिसकी वजह से वह खुद उत्तेजित हुए जा रही थी और अपने बेटे की बात सुनकर वह धीरे से बोली)
हां यह ठीक है,,,,।
(इतना सुनते ही हैरानी के साथ वह दर्जी किताब में नाप लिखने लगा और मन ही मन सोचने लगा कि लड़का साला सच में एक नंबर का हरामि है अगर ज्यादा समय मिले तो इसी समय वह बातों में बहला फुसलाकर इसकी चुदाई भी कर दे,,, कितना हो जाने के बाद अंकित दर्जी की तरफ देखते हुए बोला)
अब क्या करूं चाचा जी,,,,।
अब जिस तरह से इधर का नाप लिए हो वही नाप दूसरी तरफ से भी ले लो।
मतलब की दूसरी गोलाई का,,!(जानबूझकर हैरान होने का नाटक करते हुए वह बोला और उसकी बात सुनकर उत्तेजना से वह चाचा अपने सूखे गले को अपने ही थूक से गिला करते हुए बोला)
हां बेटा दूसरी तरफ की गोलाई का,,,(इस तरह का शब्दों का प्रयोग दरजी कभी नहीं करता था लेकिन उसे लड़के की हिम्मत देखकर उसकी भी हिम्मत खोलने लगी थी इसलिए वह भी सुगंध के सामने उसकी चूची को गोलाई का संबोधन करते हुए बोल रहा था,,जिससे सुगंधा की बुर पानी छोड़ने लगी थी उसे दर्जी की बात सुनकर अंकित फिर से उत्साहित होता हुआ इस तरह से नाप लेने लगा,,,, इस बार में दरजी के सामने थोड़ा खुलने का कोशिश करते हुए फीते को कंधे के ऊपर लगाया और उसे फीते को नीचे की तरफ लाते हुए जानबूझकर उसे दर्जी की आंखों के सामने ही अपनी मां की चूची को हथेली में हल्के से दबा दिया और यह सब इतनी जल्दबाजी में किया कि बस वह दर्जी देख सके और वह फिर से फीते को नीचे की तरफ ले आया,,,, इस हल्की सी झलक को देखकर दर्जी की हालत एकदम से खराब हो गई उसके मुंह में पानी आ गया और उसकी धोती में उसका लंड खड़ा होने लगा भले ही वह 50-55 की उम्र का हो गया था लेकिन फिर भी सुगंधा की मदहोशीकर देने वाली जवानी उसे उत्तेजना का एहसास करा रही थी। वह पूरी तरह से पागल हुआ जा रहा था और अपने मन में ही कह रहा था कि साला लड़का सच में बहुत चालाक है खेल खाया लगता है तभी औरतों के अंगों से खेलना जानता है। अंकित बड़ी चालाकी से फीते को नीचे किनारी पर रखते हुए बोला,,,)
लो देख लो चाचा और लिख लो बराबर है ना,,,,
हां बिल्कुल ठीक है बेटा,,,(माथे पर ऊपर से पसीने की बूंद को अपने रुमाल से साफ करते हुए दर्जी बोला और नाप को लिखने लगा)
अब बोलो,,,, अब क्या करना है,,?(फिते को हाथ में लिए हुए अंकित बोला और उसकी बात सुनकर दरजी अपने मन में बोला आपके हाथ तो इसकी साड़ी उठाकर पीछे से पेल दे बस,,,, लेकिन यह बात उसने अपने मन में ही बोला था क्योंकि सुगंधा के सामने बोलने की इतनी हिम्मत उसकी बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए वह बोला,,,)
अब बेटा ब्लाउज के बीच में जो बटन है वहां पर फीते को पकड़ो और उसे उसी तरफ से ले जाकर के बांह के नीचे तक का माप लेना है,,,,।
ठीक है चाचा,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित फिर से फीते को ब्लाउज के पीछे-पीछे जहां पर बटन लगाया जाता है वहां पर रख दिया और दूसरे हाथ से फीते ब्लाउज के उसी भाग पर ले जाने लगा, और इस बार भी उसने वही हरकत को दोहराया इस बार भी उसने अपनी मां की चूची को हल्के से दबा दिया,,,, लेकिन इस बार जो उसने बोला उससे उसे दर्जी का कान के परदे लक हील गए,,,, वह हल्की सी अपनी मां की चूची को दबातेहुए बोला) ज्यादा बड़े हैं ना मैडम इसलिए थोड़ा दिक्कत हो रहा है.....(और दर्जी के सामने सुगंधा कुछ बोली नहीं बस शर्मा के हां में सर हिला कर नीचे नजर झुका ली यह सब दरजी के लिए असहनीय होता जा रहा था,,, उसे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था और उसका हाथ अपने आप ही उसकी धोती के ऊपर चला गया और इसकी यह हरकत को अंकित और सुगंध दोनों ने अपनी आंखों से देख लीए थे,,,, अंकित तब तक फिर देखो उसके सही जगह पर ले आया था और बोला,,)
देख लो चाचा जी ठीक है ना,,,।
बिल्कुल ठीक है बेटा,,,(उत्तेजना के कारण चाचा जी के मुंह से आवाज भी ठीक से नहीं निकल पा रहा था और वह धीरे से नाप को लिख लिए यही क्रिया उनकी दूसरी तरफ से भी किया और फिर बोला,,,)
अब कहां का नाप लेना है चाचा जी,,,,।
बस बेटा अब पीछे से नाप ले ले,,,।
ठीक है चाचा जी,,,(इतना कहने के साथ ही अंकित खुद अपनी मां का हाथ पकड़ कर उसे घुमा दिया,, जिससे उसकी मां की पीठ अंकित की तरफ हो गई लेकिन यह देखकर करती हैरान हो गया था कि वह लड़का बिना कुछ बोले उसे अपने हाथ से ही घुमा दिया था और इस बात पर उसे मैडम ने बिल्कुल भी प्रतिक्रिया नहीं की थी वह पूरी तरह से उसके अधीन हो चुकी थी यह देखकर वह दर्जी यही सोच रहा था कि अगर यह चाहे तो इसकी चुदाई भी कर दे तो भी यह कुछ नहीं बोलेगी,,, जैसे ही सुगंधा की पीठ उसकी आंखों के सामने हुई,,,, अंकित एकदम से उसकी साड़ी कंधे से पकड़ कर अपने हाथ में लिया और उसे कंधे से नीचे करते हुए बोला,,,)
मैडम जी थोड़ी देर के लिए साड़ी को अपने हाथ में पड़े रहिए ताकि अच्छे से नाप लिया जा सके,,,,,।
ठीक है,,,(इतना कह कर वह साड़ी को अपने हाथ में पकड़ ली,,,, और अंकित उस दर्जी को और भी ज्यादा उत्तेजित करने के लिए बोला,,,)
बहुत चौड़ी और चिकनी पीठ हैं मैडम जी कोई क्रीम लगाती है क्या,,,?
नहीं यह तो ऐसे ही है,,,।(सुगंधा भी धीरे से बोली वह भी इस खेल में पूरी तरह से शामिल हो चुकी थी उसे भी मजा आ रहा था उसकी भी बुर पानी छोड़ रही थी,,,,)
सच में आप बहुत खूबसूरत है,,,,,(अंकित दर्जी की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए बोला दर्जी की हालत खराब थी वह समझ गया था कि सच में कितना हरामी लड़का है,,, और उसने आज तक ऐसा बिंदास लड़का नहीं देखा था जो औरतों के मामले में इतना तेज हो,,,, दर्जी की तरफ देखते हुए अंकित बोला,,,,)
अब कैसे लेना है नाप चाचाजी,,,?
बस बेटा आप पीठ की तरफ जहां से सिलाई शुरू होती है वहां पर फिता र ख और इस तरफ जहां पर सिलाई खत्म होती वहां पर रखकर नाप ले ले,,,,।
ठीक है चाचा जी,,,,(और इतना कहकर बाहर दरजी जैसा बोला वैसा ही किया लेकिन ऐसा करने के दौरान भी वह धीरे से जो बोला वह भी काफी हैरान कर देने वाला था दरजी को नाप लेते हुए अंकित दर्जी की तरफ देखते हुए बोला।)
चाचा जी अगर ब्लाउज उतार कर नाप लेना हो तो सही नाप लिया जाए पैसे में क्या मैडम जी भी खुश और ग्राहक खुश तो आप खुश,,,,।
(इतना सुनते ही फिर से दर्जी की हालत खराब हो गई वह फिर से मैडम की तरफ तो कभी अंकित की तरफ देखने लगा लेकिन वह हैरान था कि मैडम एक शब्द तक नहीं बोल रही थी और तब तक अंकित अपने हाथ में से फिते को कबाट पर रख दिया,,,,, कोई कुछ बोलता है इससे पहले ही मैडम मतलब की सुगंधा बोल पड़ी,,,)
कितने दिन में हो जाएगा चाचा जी,,,,।
तीन-चार दिन में हो जाएगा क्योंकि और भी ब्लाउज सिलना बाकी है ऐसा करो कि रविवार को आ जाना तुम्हारा ब्लाउज तैयार मिलेगा,,,,।
ठीक है चाचा जी,,,,
(थोड़ी देर में दर्जी ने पर्ची बनाकर सुगंधा को थमा दिया और सुगंधा भी मुस्कुराते हुए दुकान से बाहर निकल गई लेकिन अंकित वहीं खड़ा रहा क्योंकि वह जानना चाहता था कि दरजी के मन में क्या चल रहा है और सुगंधा के जाते ही वह दर्जी एकदम से उत्साहित होता हुआ अंकित से बोला,,,)
वाह बेटा बड़े तेज हो अगर दुकान में मै ना होता तो शायद तुम साड़ी उठाकर उसकी ले भी लिएहोते।
सच कहूं तो चाचा जी इरादा कुछ ऐसा ही था देख नहीं रही हो कितनी खूबसूरत औरत थी पूरा बदन जवानी से भरा हुआ था,,,।
एक बात बताओ जो इतना उसके साथ खुल रहे थे तुम्हें डर नहीं लग रहा था अगर कुछ बोल देती या थप्पड़ लगा देती तब क्या करते ।
तुम्हें लगता है चाचा जी की वह थप्पड़ लगा देती। अगर मैं खुलकर उससे उसकी बुर मांग लेता तो भी वह दे देती,,,,।
सच में बेटा तुम्हारा तो जलवा है,,,।
अच्छा चाचा जी सच-सच बताना कैसी लगी तुम्हेंवह औरत,,,।
क्या कहूं बेटा गजब की औरत थी मेरा तो देखते ही खड़ा हो गया था मैंने आज तक कितनी खूबसूरत औरत अपनी दुकान में नहीं देखा उसका ब्लाउज बनाने में भी मुझे बहुत मजा आएगा । अच्छा एक बात बताओ दो बार मैंने तुम्हारी हरकत देखा था दो बार तुमने उसकी चूची दबाए थे सच-सच बताना कैसी चुची थी नरम नरम थी या कड़क।
मिला जुला था चाचा जी कड़क भी और नरम भी ऊपर से कड़क लेकिन दबाने पर एकदम नरम तुम्हारा भी तो खड़ा हो गया था चाचा जी मेरी हरकत देखकर।
अब क्या कर सकता हूं बेटा बस देखकर ही मजा ले सकता हूं हमारी किस्मत में कहां इतनी खूबसूरत औरत है जो बिस्तर पर मजा दे।
वैसे भी चाचा जी इतनी गर्म औरत दिखाई दे रही थी कि बिस्तर पर तुम उसे ठंडा भी नहीं कर सकते बल्कि मुझे तो डर है कि कहीं अगर ऐसी औरत तुम्हें बिस्तर पर मिल जाए तो कहीं दिल के दौरे से ना मर जाओ।
(अंकित की बात सुनते ही वह दर्जी जोर-जोर से हंसने लगा,,,, और जब थोड़ा सामान्य हुआ तो वह बोला)
अच्छा यह बताओ बेटा तुम किस सिलसिले से यहां पर आए हो।
मम्मी ने भेजा था कि देखो दुकान खुली है या बंद,,, यही देखने के लिए आया था और तुम तो मेरे हाथों में खूबसूरत तोहफा दे दिए। (इतना कहकर मुस्कुराते बहन की दुकान से बाहर निकल गया दुकान से बाहर निकाल कर वाहन सड़क की तरफ देखा तो दूर पेड़ के नीचे उसकी मां खड़ी होकर उसका इंतजार कर रही थी अंकित मुस्कुराता हुआ अपनी मां के पास पहुंच गया तो उसकी मां थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोली)
सच में तु बहुत हारामी है,,,,,
आप क्या कर सकता हूं वह दुकान वाला ही मुझे अजनबी समझ रहा था और यही सोचकर मैं थोड़ा मजा लेना चाहता था अनजान बनकर और सच में मुझे बहुत मजा आया तुम्हारे ब्लाउज का नाप लेकर।
अगर ब्लाउज उतार कर नाप देना हो तो मजा आ जाए ना,,,,(सुगंधा हल्के से अपने बेटे की पीठ पर मरते हुए बोली तो वह भी मुस्कुराते हुए बोला)
सच में अगर ऐसा हो जाए तो मैं भी दरजी बन जाऊं तब सब की खोल खोल कर नाप लु,,,।
बहुत शैतान हो गया है तू,,,,,
और वैसे भी मम्मी देख रही थी दर्जी की हालत उसका मुंह देखने लायक था अच्छी नहीं धोती में उसका ल़ड खड़ा हो रहा था।
हां रे देखी थी,,,, उसकी उम्र देखकर लगता ही नहीं है कि वह भी इन सब के बारे में सोचता होगा।
अरे तुम्हें क्या मालूम मम्मी उम्र का कोई लेना-देना नहीं होता वह भी अपने मन में तुमको लेकर न जाने कैसे कैसे ख्याल पका रहा होगा।
अच्छा यह बात है,,,, तुझे बहुत मालूम पड़ता है ना यह सब फिर से क्या बात हो रही थी मेरे आने के बाद।
वह दर्जी यही कह रहा था कि मैं तुम्हारे जैसा लड़का नहीं देखा इतनी जल्दी तुम औरतों के मामले में आगे बढ़ जाते हो मैं तो देख कर हैरान रह गया था ओर मालूम है तुम्हें वह क्या कह रहा था।
क्या कह रहा था,,,,?
कह रहा था कि बेटा अगर मैं दुकान में नहीं होता तो शायद तुम साड़ी उठाकर उसकी ले भी लिए होते।
हाय दइया ऐसा कह रहा था वो।
तो क्या और जब मैं उससे यह कहा कि अगर तुम्हें ऐसी औरत मिल जाए बिस्तर पर तो तुम क्या करोगे।
तब उसने क्या कहा,,,?(सुगंधा भी जानना चाहती थी कि उसे देखकर उसे दरजी के मन में कैसे विचार जाग रहे थे अपनी मां की बात सुनकर अंकित बोला)
वह हंसने लगा और बोला कि इस उम्र में मुझे नहीं लगता कि मैं कुछ कर पाऊं लेकिन फिर भी अगर ऐसी औरत बिस्तर पर हो तो मैं पूरी कोशिश करूंगा,,,,।
(इतना सुनकर सुगंधा अपने बेटे की तरफ देखने लगी जो कि यह बात अंकित अपने मन से बोल रहा था जबकि उसे दर्जी ने सुगंधा के मामले में पहले ही अपने हाथ खड़े कर दिए थे और फिर अंकित अपनी बात को आगे बढ़ते हुए बोला)
उसकी बात सुनकर मैं बोला अगर यह औरत मतलब कि तुम तुम्हारे बिस्तर पर आ जाए तो मुझे लगता है कि तुम्हारा तो दिल के दौरे से ही मृत्यु हो जाएगी और इतना सुनकर वह जोर-जोर से हंसने लगा।
(अपने बेटे की बात कर सुगंधा भी हंसने लगी आज का यह अनुभव बेहद अद्भुत था मां बेटे के लिए सुगंधा इस बात से हैरान थी कि वह दर्जी जान नहीं पाया कि यह दोनों मां बेटे हैं दोनों को अजनबी ही समझ रहा था। उसी छोटे से बाजार में से सुगंधा कुछ सब्जिय खरीदी और मां बेटे दोनों थोड़ा नाश्ता करके ओटो पकड़कर घर वापस आ गए।)