Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 33 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

Sugandha ki fantasy hakikat se bilkul bhi kam nahi he

Ankit kalpna me apni ma ki chuchiyo se khelta hua
 
Bilkul sahi Ankit apni ma se khulna chahta he taaki ye scene create ho jaye
 
धन्यवाद दोस्त,,,

सुगंधा और अंकित के कल्पना की दुनिया
 
बहुत-बहुत धन्यवाद दोस्त

अपनी कल्पना की दुनिया में मस्त मां बेटे
 
दवा खाने में जो कुछ भी हुआ था उसमें से अधिकतर बातों को अंकित ने झूठ बताया था,,,, जो कुछ भी हुआ था उसे नमक मिर्च लगाकर बताया था और सुगंधा अपने बेटे की बात पर पूरी तरह से विश्वास कर ली थी और विश्वास के साथ-साथ उसके बातों की जो मादकता थी उसके हर एक शब्द को अपने अंदर उतार कर वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,,,, सुगंधा इस बात से भी बहुत खुश थी उसका बेटा उसके सामने काफी हद तक खुल चुका था और यही तो वह चाहती थी,,,, सुगंधा को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,, उसकी हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी है इतनी अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव तो उसने अपनी सुहागरात वाली रात को भी महसूस की थी जितना कि आज अपने बेटे की बातों को सुनकर वह उत्तेजित हुए जा रही थी,,,,।



उसे आज भी अपनी सुहागरात की पहली रात बहुत अच्छे से याद थी आखिरकार यह रात औरत के जीवन का सबसे अहम हिस्सा बन जाता है चाहे जितना भी भूलने की कोशिश अगर औरत करें तो भी इस रात को नहीं भूल सकती क्योंकि उसके जीवन की सुहागरात उसके कौमार्य भंग की पहली रात होती है,,, एक मर्द के साथ मिलन की पहली रात होती है इस रात को औरत बहुत कुछ सिखाती है और बहुत कुछ मर्दों को सिखाती भी है यही रात उसके समर्पण की रात होती है यही रात उसके विश्वास की रात होती है जिसमें मर्द ओर औरत दोनों जिंदगी भर के लिए विश्वास के धागे से बंध जाते हैं,,, या यू कह लो की वैवाहिक जीवन की शुरुआत ही सुहागरात के संभोग क्रिया से होती है संभोग सुख के अद्भुत एहसास से होती है,,,, और ऐसा ही कुछ सुगंधा के साथ भी हुआ था,,,,।





सुगंध को अपने वैवाहिक जीवन की पहली रात बड़ी अच्छे से याद थी जिसे सुहागरात कहा जाता है जब उसकी शादी तय हो चुकी थी तब सुहागरात का जिक्र अक्सर उसकी सहेलियां उसके सामने छेड़ देती थी,,, जिसे सुनकर उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगती थी,,,, क्योंकि सुगंधा के सहेलियां में कुछ लोगों की शादी हो चुकी थी और उसकी सहेलियां शादी की रात के पहले अनुभव को उसे बताती थी जिनमें रोमांच भी भरा होता था,, और एक अजीब प्रकार का डर भी होता था,,, रोमांच तो उसे समझ में आता था लेकिन डर उसे इस बात से लगता था कि उसकी एक सहेली ने उसे बताई थी कि,,, देखना सुगंधा शादी की पहली रात को बचकर रहना और मेरी मां सरसों के तेल की शीशी अपने साथ रख लेना अगर तेरे पति का लंड मोटा हुआ तो पहली रात में ही तेरी बर फट जाएगी और उसमें से खून निकलने लगेगा तुझे दर्द भी बहुत होगा,,,।



उसकी इस बात को सुनकर सुगंधा पूरी तरह से डर गई थी उसे डर का एहसास उसे और ज्यादा परेशान करता था,,,, और वह नादानी भरे सवाल अपनी सहेली से पूछती थी,,,।

मोटा लंड (इस शब्द को कहने के लिए सुगंध पहले चारों तरफ नजर घुमा कर देख लेती थी कहीं कोई सुन तो नहीं रहा है लेकिन यह शब्द को बोलते हुए भी उसकी ज़बान लडखड़ा जाती थी,,,) मुझे कुछ समझ में नहीं आया इससे फटने वाली कौन सी बात है,,,.

(सुगंधा किस बात को सुनकर उसकी सहेली उसके नादानियत पर हंसने लगती थी और कहती थी,,,)

अरे बेवकूफ इसीलिए तुझे रहती हूं कि लड़कों को अपना दोस्त बना दे सबको सीख जाएगी लेकिन तू है कि एकदम सती सावित्री बनी रहना चाहती है अपने पति को अपनी बुर गिफ्ट करना चाहती है एकदम अनचुदी ,,,(और उसकी इस बात को सुनकर सुगंध नाराज होते हुए कहती थी)

Sugandha ki haseen boor





चलिए सब रहने दे मुझे तेरे जैसा नहीं बना है आखिरकार शादी के बाद तो यह सब होना ही है तो दूसरों के साथ यह सब करके बदनामी क्यों मोल ले,,, लेकिन तू बताई नहीं जो मैं पूछ रही हूं,,,।

अच्छा बाबा बताती हूं देख सुगंधा इतना तो मैं जानती हूं कि तू किसी लड़के के साथ दोस्ती नहीं रखी है तो अब तक शारीरिक संबंध भी नहीं बनाई होगी और इसीलिए तेरी बुर का छेद बहुत ही शंकरा होगा,,, मतलब की बहुत छोटा और तूने तो अभी तक लंड भी नहीं देखी होगी देखी है कि नहीं,,,।

(उसके सवाल पर सुगंधा कुछ बोल नहीं पाई बस ना में सिर हिला दी वैसे भी उसकी ईस तरह की बातों को सुनकर उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह मदहोश हुए जा रही थी,,,,,, सुगंधा का जवाब सुनकर उसकी सहेली मुस्कुराते हुए बोली,,,)

Sugandha ki kamuk harkat



मुझे मालूम था,,,,देख ,,, तु ऐसे नहीं समझेगी,,, रुक तुझे समझाती हूं,,,(और इतना कहने के साथ एक बात अपनी जगह से उठकर खड़ी हो गई और सीधे रसोई घर में चली गई थोड़ी ही देर में वहां से एक मोटा तगड़ा बेगम लेकर के उसके सामने आई और उसे दिखाते हुए बोली,,,)

देख सुगंधा,,, ऐसा ही होता है मर्दों का दमदार लंड,,,(बैगन के आगे वाले मोटे हिस्से की तरफ उंगली रखकर बोली) अब तु यह बता ईतना मोटा बेगन तेरी बुर के छोटे से छेद में कैसे घुसेगा,,,,,,।

(सुगंधा को आज भी वह पल बड़े अच्छे से याद था,, उस बैगन के मोटे हिस्से को देखकर उसके तो होश उड़ गए थे,,, वह समझ गई थी की उसके बुरे के छोटे से छेद में इतना मोटा बैगन वाकई में नहीं घुस सकता,,,, अपनी सहेली की बात सुनकर वह बोली)



तू सही कह रही है मुझे तो बहुत डर लग रहा है,,,।

देख कर डरेगी तो सुहागरात का मजा नहीं ले पाएगी इसलिए तुझे समझा रही हूं कि अपने साथ सरसों के तेल की शीशी रखना,,,।

सरसों के तेल की सीसी क्यों,,,?

अरे बुद्धू सरसों के तेल को तू अपने पति के लंड पर लगा लेना एकदम चिकना कर लेना और थोड़ा सा तेल अपनी बुर पर भी लगा लेना,,,

इससे क्या होगा,,,?(सुगंधा फिर से नादानीयत भरा सवाल पुछी,,,)



तू सच मेंपागल है,,, अरे सरसों का तेल तेरी बर और लंड को एकदम चिकनाहट से भर देगा और उसके बाद तेरी बुर में जाने में आराम रहेगा,,,, तब तुझे मजा भी बहुत आएगा,,,,

(अपनी सहेली की बात सुनकर थोड़ी बहुत राहत उसे महसूस हुई थी लेकिन जल्द ही शादी की रात आ गई थी सुगंधा की शादी गांव में हुई थी उसके पति गांव में ही पढ़ाने का काम करते थे,,,,,,और शादी के बाद उनकी नौकरी शहर में लग गई एक अच्छे से स्कूल में जिसमें आज खुद सुगंधा भी पढाती है,,, शादी की पहली रात को ही इतनी खूबसूरत औरत पाकर सुगंधा का पति बहुत खुश था,,,,।

Sugandha or uska beta



सुगंधा को आज भी याद है पहली रात को ही,, सुगंधा के पति ने ज्यादा कुछ किया नहीं था बस बातचीत ही किया था और फिर बातचीत के अंत में केवल साड़ी को कमर तक उठाकर,, और सुगंधा की चड्डी उतार कर उसकी दोनों टांगों के बीच जाकर सिर्फ थोड़ा सा थूक लगाकर सुगंधा के बुर में डालने की कोशिश करने लगा लेकिन सुगंधा की बुर का छेद छोटा होने की वजह से सुगंधा का पति एकदम असफल रहा और उसका वीर्यपात हो गया,,,, ।

अपने पति के असफल रहने से वह पूरी तरह से निराश हो गई थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें इस बात को किसी से का भी नहीं सकती थी ना ही अपने पति से बता सकती थी क्योंकि सुगंधा दूसरी औरतों की तरह नहीं थी उसे इस बात का डर था कि अगर वह इस बारे में अपने पति से बात करेगी तो उसका पति उसके बारे में गलत धारणा बांध लेगा उसे चरित्रहीन समझेगा इसीलिए वह इस बात को का भी नहीं सकती थी,,,, उसे अपनी सहेली की बात याद आ रही थी मोटा और लंबा लंड बुर फाड़ देगा लेकिन उसे अच्छी तरह से एहसास हो रहा था कि उसके पति लंड कुछ ज्यादा लंबा और मोटा नहीं था बस काम भर का था,,,।

Sugandha or uska beta



दूसरे दिन वह फिर से अपने पति का इंतजार कर रही थी उसे बहुत डर लग रहा था,,,, क्योंकि जिस तरह का उसने अपने मन में सुहागरात को लेकर सपना संजोए थी वह पूरी तरह से चकनाचूर हो गया था,,, सब कुछ बिखरा हुआ सबसे नजर आ रहा था उसका इंतजार की घड़ी खत्म हुई और कमरे का दरवाजा खुला अपने पति को देखकर वह घबराने लगी थी,,, सुगंधा के चेहरे को देखकर उसके पति ने समझ लिया था कि सुगंधा क्या सोच रही है और वह उसके दर को दूर करके हुए बोला,,,।

Sugandha ki kalpna



मैं जानता हूं सुगंधा कल की मेरी हरकत की वजह से तुम डरी हुई हो,,, मैं तो तुम्हारी परीक्षा ले रहा था,,,(ईतना सुनकर सुगंधा आश्चर्य से अपने पति की तरफ देखने लगी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि उसका पति क्या बोल रहा है वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) कल मैं जानबूझकर तुमसे प्यार किए बिना तुम्हारे साथ शारीरिक संबंध बनाया था और असफल होने का नाटक किया था क्योंकि मैं देखना चाहता था कि अगर तुम दूसरी लड़कियों की तरह होगी तो इस बारे में जरूर मुझे शिकायत करो कि लेकिन तुमने मुझे एक शब्द भी नहीं कहा नहीं घर वालों को कुछ बताया और मैं समझ गया कि तुम बहुत ही सीधी शादी हो चरित्रवान हो ,,, तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो तुम्हें संतुष्ट करने की ताकत मुझ में है,,,,।

(अपने पति की बातें सुनकर सुगंधा पूरी तरह से भाव भीबोर हो गई थी कल रात को जो कुछ भी हुआ था उसके बारे में सोच कर वह सोच रही थी कि उसका जीवन पुरा तहस-नहस हो गया है इस तरह का पति पाकर,,, लेकिन उसके पति ने सब कुछ साफ कर दिया था और उसके बाद रात भर जमकर सुगंधा की चुदाई किया था और पूरी तरह से संतुष्ट किया था लेकिन एक बात का हिसाब सुगंध का हो रहा था कि उसके पति का लंड उसकी सहेली ने जिस तरह से बताया था मोटा और लंबा उसे तरह का बिल्कुल भी नहीं था लेकिन फिर भी वह अपने पति के लंड से पूरी तरह से संतुष्ट थी,,,,,।

Sugandha ki kalpna



अपने बिस्तर पर बैठी हुई सुगंध अपनी सुहागरात की रात के बारे में सोच ही रही थी कि तभी उसके कानों में उसके बेटे की आवाज सुनाई दी,,,।

क्या हुआ मम्मी नहाना नहीं है क्या तुम्हारे लिए बाथरुम में हल्का कुनकुना पानी रख दिया हूं क्योंकि अभी ठंडा पानी से नहाओगी तो तबीयत और खराब हो जाएगी ,,,।

(अपने बेटे की बात सुनकर वह एकदम से सपनों की दुनिया से वापस आ गई और अपने बेटे की तरफ देखने लगी,,,, गहरी सांस लेते हुए बोली,,,)

ठीक है तु चल मैं आती हूं,,,,।

(ईतना सुनते ही अंकित वहां से दूसरा काम करने के लिए चला गया था लेकिन उसकी जाते-जाते उसके पेट के आगे वाले भाग पर सुगंधा की नजर फिर से चली गई थी जिसमें अभी भी अच्छा खासा तंबू बना हुआ था उसे देखकर सुगंधा की बुर में हलचल होने लगी वह समझ गई थी कि उसका बेटा कितना ज्यादा उत्तेजित है,,,, थोड़ी देर बाद वह बिस्तर पर से उठी और बाथरूम की तरफ जाने लगी,,,,,,, और बाथरूम से पहले चलते समय उसके कदम थोड़े से डगमगा गए,,, अंकित बाथरूम में साबुन रख रहा था उसकी नजर अपनी मां पर पड़ी तो वह एकदम से उसे संभालने के लिए उठकर खड़ा हो गया लेकिन तब तक सुगंधा दीवाल पर हाथ लगाकर संभल चुकी थी,,,)



संभाल कर मम्मी लगता है अभी भी तुम्हें चक्कर आ रहा है,,,,,।

(चक्कर की बात सुनते हैं सुगंधा के तन-बाद में अजीब सी हलचल होने लगी और वह जानबूझकर बोली,,,)

मुझे भी ऐसा ही लग रहा है,,,,।

तब रहने दो मम्मी मत नहाओ,,,,

नहीं नहीं नहाना पड़ेगा मुझे अच्छा नहीं लग रहा है,,,,।

ठीक है लेकिन बाथरूम का दरवाजा खुला रखना ताकि कोई गड़बड़ हो तो मैं देख सकूं,,,,।

(अंकित के मन में दोहरे विचार चल रहे थे एक तरफ से वह अपनी मां की चिंता भी कर रहा था और दूसरी तरफ वह बाथरूम का दरवाजा खुला रखने पर अपनी आंखों को सेंक भी सकता था,,,, अपने बेटे की बात पर सुगंधा को कोई एतराज नहीं था,,, क्योंकि उसके मन में भी बहुत कुछ चल रहा था वह अपने बेटे से खुलना चाहती थी,,,। इसलिए वह दीवार का सहारा लेकर बाथरूम के दरवाजे तक पहुंच कर बोली,, )



ठीक है,,,,(बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ था और वह धीरे से बाथरूम के अंदर प्रवेश कर गई,,, अंकित इतने में जल्दी से एक कुर्सी लेकर आ गया और ठीक बाथरूम के सामने किताब लेकर बैठ जा वह ऐसा जताना चाहता था कि वह पढ़ रहा है लेकिन वह अपनी मां पर ही नजर रखना चाहता था उसे देखना चाहता था नहाते हुए उसके खूबसूरत भजन को देखना चाहता था और इस बात का एहसास सुगंधा को भी था इसलिए उसके बदन में भी हलचल मची हुई थी,,,,।

कुछ देर तक सुगंधा बाथरूम में उसी तरह से खड़ी रही,,, जहां एक तरफ अपने बेटे की आंखों के सामने वह नहाने के लिए उत्सुक थी,,, वहीं दूसरी तरफ ना जाने क्यों उसे अपने बेटे की आंखों के सामने अपने कपड़े उतारने में शर्म महसूस हो रही थी जबकि उसके बेहोशी की हालत में उसके बेटे ने क्लीनिक के बाथरूम में उसकी चड्डी तक अपने हाथों से उतारा था ,,,,, फिर अपने मन में यह सोचकर की यही तो वह चाहती थी फिर अब क्यों शर्मा रही है अगर शर्माएगी तो जिंदगी का सुख नहीं ले पाएगी,,, कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है और यही सही मौका भी है,,,, मर्दों का दिमाग औरत की खूबसूरत बदन को देख कर ही खराब होता है फिर वह भले ही चाहे उसका भाई हो बेटा हो या चाहे जो भी हो उसे सिर्फ औरतों में सिर्फ औरत ही नजर आती है ना ही कोई रिश्ता नजर आता है,,,।



सुगंधा ऐसा अपने मन में सोच कर धीरे से अपनी साड़ी का पल्लू अपने कंधे पर से नीचे गिरा दी,,, और उसके ऐसा करने से उसकी भारी भरकम छाती एकदम से उजागर हो गई,,,,,,, वह अंकित तरफ मुंह करके खड़ी थी,,,, अंकित उसे तिरछी नजर से देख रहा था अपनी मां को इस तरह से अपनी साड़ी का पल्लू कंधे से नीचे गिरा था वह देखकर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी थी,,, अंकित किताब का पन्ना खोलकर भले ही किताब पढ़ने का नाटक कर रहा था जबकि हकीकत यात्रा की वह अपनी मां की खूबसूरत बदन के पन्ने को खुलता हुआ देखना चाहता था,,,, जिसकी शुरुआत उसकी मम्मी अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा कर कर चुकी थी,,,।

अंकित बहुत उत्साहित और उत्तेजित था,,,, बाथरूम के दरवाजे में बने छोटे से छेद से वह अपनी मां को पूरी तरह से नग्न अवस्था में नहाते हुए देख चुका था लेकिन फिर भी उसके बदन की प्यास अपनी मां को नंगी देखने की चाहत कम नहीं हुई थी यहां तक कि वह खुद अपनी मां की अंतर्वस्त्र को अपने हाथों से उतारा था लेकिन फिर भी उसके मन की ललक कम नहीं हुई थी,,,,।





बाथरूम के अंदर का माहौल धीरे-धीरे कम हो रहा था एक मां अपने बेटे के सामने अपने कपड़े उतार रही थी नहाने के लिए,,,सुगंधा ऐसा बिल्कुल भी ना करती है अगर उसके अंदर की एक औरत न जागी होती,,, क्योंकि उसके मन के चरित्र पर औरत का चरित्र को ज्यादा ही हावी होता जा रहा था जिसके चलते वह अपने बेटे के सामने कपड़े उतारने के लिए अपने आप को तैयार कर चुकी थी धीरे-धीरे वह अपने कमर पर भरी हुई साड़ी को खोलने लगी थी वह अपने दोनों हाथों से अपनी साड़ी को खोल रही थी और अंकित को ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे उसकी मां उसके लिए अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी होने जा रही है,,,। दोनों के बीच पूरी तरह से खामोशी छाई हुई थी आंखों ही आंखों में बहुत सी बातें हो रही थी अंकित बार-बार किताबों के पन्नों में अपनी आंखों को भरमाने की कोशिश करता था लेकिन उसका चित उसकी मां पर टिका हुआ था,,,, अपनी साड़ी को खोलकर सुगंधा अपनी साड़ी को बाथरूम में कोने में रख दी थी और वह बाथरूम में केवल ब्लाउज और पेटीकोट में थी ब्लाउज और पेटीकोट में उसका गदराया बदन और भी ज्यादा मादक लग रहा था,,,, जिसे देख कर अंकित का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ गया था,,,।
 
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