सुगंधा का परिवार पूरी तरह से बदलाव के राह पर चल दिया था,,, एक तरफ मां बेटे थे जो एक दूसरे के आकर्षण में धीरे-धीरे एक दूसरे के सामने खुलते चले जा रहे थे और दूसरी तरफ तृप्ति थी जो अपने ही कॉलेज के सहपाठी के साथ,,, मर्यादा की सीमा लांघने के लिए तड़प रही थी,,, एक तरह से सुगंधा का पूरा परिवार जवानी के नशे में चूम रहा था तीनों की अपनी अपनी ज़रूरतें थी जो वह तीनों पूरा करना चाहते थे,,,, एक तरफ सुगंधा थी जो पति के देहांत के बाद अपने परिवार के पालन पोषण में एकाकी जीवन की रही थी लेकिन कुछ महीनो से उसके अंदर बदलाव आना शुरू हो गया था जवानी की तड़प बढ़ती जा रही थी अपने बदन की जरूरत को वह समझने लगी थी और अपनी जवानी की प्यास को अपने बेटे से बुझाया चाहती थी,,,।
दूसरी तरफ अंकित क्योंकि पूरी तरह से जवान हो चुका था औरतों के अंगों के बारे में जानने लगा था यहां तक की अपनी मां को कई बार वह अर्धनग्न अवस्था में संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में देख चुका था जिसे देखकर वह अपने लंड की कठोरता को शांत करने के लिए मूठ मारना भी शुरू कर दिया था,,,, भाभी अपनी मां की तरह ही अपनी मां के साथ हम बिस्तर होना चाहता था अपनी जवानी की प्यास को अपनी मां की जवानी से बुझाना चाहता था,,, और इन सबसे अलग की तृप्ति जिसका आकर्षक और झुकाव परिवार में नहीं बल्कि बाहर के लड़के में था शुरू-शुरू में उसे लड़के की हरकत से वह परेशान हो चुकी थी गुस्सा हो चुकी थी उसे इस तरह की हरकत अच्छी नहीं लगती थी लेकिन धीरे-धीरे उसे भी संदीप की हरकतें अच्छी लगने लगी चुंबन के साथ-साथ स्तन मर्दन उसकी दबी हुई ख्वाहिश को उभारने लगी थी,,, अगर संदीप अपनी तरफ से अपनी हरकत को आगे बढ़ते हुए उसकी दोनों टांगों के बीच पहुंच जाए तो इसमें अब तृप्ति को भी कोई दिक्कत नहीं थी,,,।
लेकिन तीनों में एक बात सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण थी मर्यादा और इज्जत,,,, सुगंधा भी अपने बेटे की हरकत को समझने लगी थी उसके अंदर की तभी ख्वाहिश को देखकर अपने बेटे की इच्छा को समझने लगी थी वह जानती थी कि उसका बेटा उसकी तरफ आकर्षित है लेकिन फिर भी वह इतनी ज्यादा अपने बेटे से खुल नहीं गई थी कि सामने से एकदम निमंत्रण दे दे संभोग करने का,,,, और यही बात सुगंधा में भी थी सुगंधा जवानी से भरी हुई थी खूबसूरत और हुस्न से लदी हुई थी वह चाहती तो एक ही साड़ी पर अपने बेटे को अपनी दोनों टांगों के बीच ले लेती लेकिन ऐसा करना किसी रंडी से कम ना होता वह नहीं चाहती थी कि उसका बेटा उसके कहने पर उसके साथ हम बिस्तर हो वह चाहती थी कि यह खेल धीरे-धीरे ऐसे कगार पर पहुंच जाए जहां पर दोनों एक दूसरे में समाने के लिए व्याकुल हो जाए जिसमें किसी भी तरफ से पल ना हो बस मौके और हालात की नजाकत पर निर्भर रखता हो,,,।
और दूसरी तरफ थी तृप्ति वह भी अपनी मां के दिए हुए संस्कारों से बड़ी बड़ी हुई थी लेकिन कॉलेज में पहुंच चुकी तृप्ति के बदन की भी कुछ ज़रूरतें थी दूसरी लड़कियों की तरह वह भी चाहती थी कि उसे भी कोई प्यार करने वाला हूं जो कि संदीप के रूप में उसे मिल गया था लेकिन वह संदीप की फितरत से वाकिफ नहीं थी संदीप उसके बदन को चाहता था उसे भोगना चाहता था लेकिन इसी में तृप्ति को प्यार नजर आता था और तृप्ति भी उसकी हरकत का आनंद ले रही थी जो कि किसी भी वक्त तृप्ति को उसके बिस्तर तक ले जा सकता था जिसके लिए वह अंदर ही अंदर तैयार भी हो रही थी,,,,।
संदीप से मिलने के लिए तृप्ती की बेचैनी हमेशा बढ़ने लगी थी,,,, लेकिन कॉलेज की मुलाकात से उसका मन नहीं भर रहा था,,, वह संदीप से एकांत में मिलना चाहती थी जैसा कि बगीचे में मिली थी लेकिन बगीचे में भी आवारा लड़कों के आवागमन से वह परेशान हो गई थी इसलिए वह संदीप से किसी और जगह मिलना चाहती थी उसे संदीप ने उसे मिलने का अच्छी जगह और बहाना भी बता दिया था,,, लेकिन वहां जाने के लिए उसे अपनी मां की इजाजत लेनी थी, इसलिए घर का काम कर रही है अपनी मां से वह धीरे से बोली,,,।
मम्मी तुमसे इजाजत लेनी है,,,,
मुझसे,,,, कैसी इजाजत,,,?(झाड़ू लगाते हुए एकदम से रुक कर वह तृप्ति की तरफ देखते हुए बोली)
अरे मम्मी हमारे कॉलेज की मेम का जन्मदिन है और उन्होंने सभी को इनवाइट किया है,,,।
जन्मदिन है,,,(ऐसा कहते हुए फिर से झाड़ू लगाने लगी)
हां उनका जन्मदिन है,,,
कहां पर आमंत्रण दी है,,,(एक बार फिर से झाड़ू लगाना रोक कर तृप्ति की तरफ देखते हुए सुगंधा बोली,,,)
उनके घर पर सुबह 10:00 बजे पहुंचना है और फिर शाम को वापस आ जाना है,,,
कौन-कौन जा रहा है,,,?
क्लास के सभी लोग हैं मेरी सहेलियों भी जा रही है,,,
सहेलियां भी जा रही है तो ठीक है,,,, लेकिन जाना कब है,,,,
कल ही जाना है,,,,
ओहहहह,,,, इसका मतलब है कि कल कॉलेज नहीं जाना है,,,,
नहीं मम्मी,,, जब सभी क्लास के लोग जाएंगे तो क्लास में कौन होगा,,,,
सही कह रही हो,,, लेकिन कल पहनोगी क्या,,,?
वो,,,, मम्मी दिवाली पर जो सूट सलवार खरीदी थी ना वही पहन लूंगी अच्छी भी लगती है,,,
हां यह ठीक रहेगा चलो कोई बात नहीं चली जाना लेकिन समय पर घर पर आ जाना वैसे भी लड़कियों का ज्यादा देर तक घर के बाहर रहना ठीक नहीं है,,,।
मम्मी हमारी मेम अच्छी तरह से जानती हैं इसीलिए तो दिन में बुलाएंगे ताकि शाम होते होते सब लोग अपने-अपने घर पहुंच जाए,,,
बहुत समझदार है तुम्हारी मैडम,,,,, अच्छा तो जल्दी से सब्जियां काट दे,,,, मैं तब तक सफाई कर देती हूं,,,
ठीक है मम्मी,,,(और इतना कहने के साथ ही वह भी खुशी-खुशी सब्जी काटने लगी वह इस बात से खुश थी कि मैडम के जन्मदिन पर जाने की वजह से कुछ देर से संदीप के साथ वक्त गुजारने को जो मिल जाएगा,,, वक्त गुजारने के साथ-साथ संदीप की हरकतों का आनंद लेने की उत्सुकता उसके अंदर बढ़ती जा रही थी वह जानती थी कि संदीप अगर उसके पास रहेगा तो उसकी हरकत भी जारी रहेगी वह एक नया एक बहाने से उसके अंगों को स्पर्श करेगा तब आएगा छूएगा चुंबन करेगा और यह सब उसे अच्छा लगेगा,,,,।
अपनी मां से इजाजत मिलने के बाद मैं बहुत खुश थी वह रात को ही पहनने के लिए अपना सूट सलवार निकाल ली थी जो की पीले रंग का शूट ओर ब्राउन रंग की सलवार उसके गोरे रंग पर बहुत अच्छी लगती थी,,,, सुबह जल्दी उसकी नींद खुल गई और वह तैयार होने के लिए बाथरूम में चली गई,,, बाथरूम में प्रवेश करते ही वह अपने बदन से एक-एक करके सारे कपड़ों को उतार कर एकदम नंगी हो गई और अपने नंगे बदन को ऊपर से नीचे नजर उठाकर घूमा कर देखने लगी,,,, अपने गोरे रंग पर और अपने बदन की बनावट पर तृप्ति को गर्व महसूस हो रहा था और अपनी चूची की तरफ देखकर तो अपने आप ही उसके गोरे गाल शर्म के मारे सुर्ख लाल होने लगे,,, उसे अपनी चूची देखकर संदीप की हरकत याद आ गई जो कुर्ती के ऊपर से उसकी चूची को जोर-जोर से दबा रहा था,,,, और अपनी चूची चाहिए बात करते हुए धीरे से बोली,,,।
बड़ा जालीम है ना संदीप,,, तुम्हें बहुत जोर से दबाता है ना,,, तुम कुछ कहती क्यों नहीं उससे कहना चाहिए ना कि दर्द होता है धीरे से दबाए,,,,(ऐसा कहते हुए अपने दोनों हाथों से अपनी चूची को थाम ली और अपने आप ही उसे दबाते हुए बोली,,) लेकिन कर भी क्या सकती हो तुम्हें दबाने से उसे मजा भी तो बहुत आता है,,,,सहहहह जालिम अगर हरामजादे को ना रोको तो उसका बस चले तो तुम्हें खा ही जाए,,,,(ऐसा कहते हुए उसकी नजर अपनी दोनों टांगों के बीच चली गई तो देखी कि उसकी बुर पर हल्के हल्के बाल उगे हुए हैं और अपने बुर पर उगे हुए हल्के बालों को देखकर उसे याद आया कि उसकी मम्मी बाथरूम में ही बीट क्रीम को छुपा कर रखती हैं,,, जिसका वह खुद कई बार उपयोग कर चुकी है बीट क्रीम का ख्याल आते हैं उसकी दोनों टांगों के बीच उस पतली दरार में हलचल मचने लगी,,,।
वह तुरंत बाथरूम के अंदर ही ऊपर की तरफ थोड़ी सी जगह थी उसे जगह में थोड़ा कपड़ा भरा हुआ था जब वह उसे कपड़े को हटाई तो अंदर बीट क्रीम पड़ा था और बीट क्रीम को अपने हाथ में लेकर उसके चेहरे पर मुस्कान करने लगी वह जल्दी से क्रीम निकाल कर उसे अपनी बुर के बालों पर अच्छी तरह से लगा ली,,, और 5 10 मिनट तक इंतजार करने लगे उसे अपनी बर पर क्रीम लगाने में आज बेहद शर्म और उत्तेजना का अनुभव हो रहा था वैसे तो उसे संदीप के साथ केवल वक्त गुजारना था लेकिन उसे खुद समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपनी बुर क्यों चिकनी कर रही थी,,, अपने मन में उठ गए इस सवाल का जवाब उसे खुद समझ में नहीं आ रहा तेरे कर उसके मन में अनजाने में ख्याल आ जा रहा था कि संदीप से चुदवाने जा रही है,, और अपने ही मन में आए इस तरह के ख्याल से वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी,,,,।
देखते ही देखते 10 मिनट गुजर जाने के बाद अपनी पेंटिं को हाथ में लेकर उससे बुर पर लगी क्रीम को साफ करने लगी जिसके साथ उसकी झांट के बाल भी एकदम साफ होते जा रहे थे और देखते ही देखते उसकी पूरे एकदम मलाई की तरह चीकनी हो गई अपनी बर देखकर खुद उसके मुंह में पानी आ रहा था और वह अपनी हथेली को अपनी बर पर रखकर अपनी गुलाबी पतली दरार को अपनी हथेली के नीचे छुपा ली और अपने मन में सोचने लगी की जब इस पर संदीप का हाथ स्पर्श करेगा तब उसकी क्या हालत होगी,,, यह सोचकर उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,,, और फिर जल्दी-जल्दी नहा कर वह बाहर आ गई,,,।
उसकी मां भी उठ गई थी और वह झाड़ू लगा रही थी,,, झाड़ू लगाते हुए वह उससे बोली,,,।
तू छोड़कर तैयार हो गई है लेकिन अभी राजकुमार सो रही जाकर उन्हें भी तो जगा दो,,,,।
अभी अंकित उठा नहीं,,,!(आश्चर्य जताते हुए दीवार में टंगी घड़ी की तरफ देखते हुए तृप्ति बोली)
नहीं अभी नहीं उठा है जाकर जल्दी से जगा दे,,,,।
ठीक है मम्मी पहले कपड़े पहन लु,,,(वह केवल टावल में ही थी,,,,)
ठीक है लेकिन जल्दी करना देर हो रही है फिर जल्दी-जल्दी करेगा तो नाश्ता किए बिना चला जाएगा,,,,
ठीक है मम्मी मैं जल्दी से जगा देती हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही तृप्ति अपने कमरे में चली गई और फिर जल्दी-जल्दी कपड़े पहन कर अंकित को जगाने के लिए उसके कमरे में जाने लगी दरवाजे पर पहुंची तो दरवाजे की कड़ी बंद नहीं थी क्योंकि दरवाजे पर हाथ रखते ही दरवाजा अपने आप खुल गया था और वह धीरे से कमरे में प्रवेश कर गई,,,, वह अपनी ही धुन में थी देखते देखते हो अपने भाई के बिस्तर के करीब पहुंच गई और जब वह अपने भाई को आवाज लगाने ही वाली थी तो उसकी नजर अंकित पर पड़ी और अंकित पर नजर पढ़ते ही उसके तो हो सके उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और उसका मुंह आश्चर्य से खुला का खुला रह गया,,,।
इसमें तृप्ति का दोष बिल्कुल भी नहीं था,,,,, नजर ही कुछ ऐसा था कि अगर उसकी जगह कोई और होती तो उसकी भी हालत तृप्ति की तरह ही होती,,,, तृप्ति की सांस ऊपर नीचे होने लगी थी क्योंकि बिस्तर में उसका भाई उनकी पूरी तरह से नग्न अवस्था में सोया हुआ था उसके बदन पर ना तो कपड़ा था और ना ही चादर और पूरी तरह से नंगा बिस्तर पर सोया हुआ था और इस हालत में उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आकर छत की तरफ मुंह उठाई खड़ा था,,, तृप्ति को अपने भाई के कमरे में इस तरह के नजारे की अपेक्षा बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए तो उसके होश उड़ गए थे और वह कभी सोचा नहीं थी कि वह अपने भाई को इस रूप में देखेगी,,,।
तृप्ति को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें बार-बार उसकी नजर ना चाहते हुए भी अपने भाई के खड़े लंड पर चली जा रही थी,,,, तृप्ति अपने जीवन में पहली बार एक जवान लड़के के लंड को देख रही थी और वह भी अपने ही भाई के,,, उसे तो अपनी आंखों पर भरोसा ही नहीं हो रहा था वह तो हैरान इस बात से थी कि क्या लंड ऐसा होता है इतना मोटा तगड़ा लंबा एकदम मुसल की तरह बाप रे,,, उसके मन में ही यह शब्द निकल पड़े वाकई में तृप्ति के लिए लड की लंबाई और चौड़ाई उसकी मोटाई सब कुछ हैरान कर देने वाली थी वह बड़ी गौर से अपने भाई के लंड को देख रही थी और दरवाजे की तरफ देख ले रही थी उसे इस बात का डर था कि कहीं उसकी मां दरवाजे पर न जाए,, वह खुद कमरे से बाहर निकल जाना चाहती थी लेकिन जवानी की कशिश उसे रोके हुए थी बार-बार वह अपने भाई के लंड को ही देख रही थी,,, और अनजाने में ही उसके मन में यह खेला गया कि संदीप का भी क्या ऐसा ही होगा,,,, इस ख्याल से उसके तन-बदन में अजीब सी हलचल होने लगी,,,।
तृप्ति को समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अगर इस अवस्था में वह अपने भाई को जगाती है तो उसके भाई के साथ-साथ वह खुद शर्मिंदगी से भर जाएगी और अगर बिना जगाए चली जाती है तो उसकी मां जगाने के लिए कमरे में आ जाएगी और अपने बेटे की इस हालत को देखकर वह भी न जाने क्या सोचेगी और वह भी समझ जाएगी की उसकी बेटी तृप्ति ने भी इस नजारे को अपनी आंखों से देख ली है,,,, इसलिए वह सोच समझ कर धीरे-धीरे कमरे से बाहर गई और दरवाजे को बाहर से बंद करके उसकी कड़ी को जोर-जोर से बजाने लगी,,,।
अंकित,,, कब तक सोता रहेगा ऊठ जा देर हो रही है,,, (तृप्ति के एक दो बार आवाज लगाने से अंकित की नींद खुल गई और वह अपनी हालत को देखा तो एकदम से घबरा गया रात को हुआ अपनी मां के ख्यालों में अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया था और अपनी मां को याद करके अपनी मां के बारे में गंदी कल्पना करके अपने लंड को हिलाकर मुठ मारा था उसे सब कुछ याद आते ही जल्दी से बिस्तर पर से उठा और बोला,,,)
हां दीदी आया,,,,।
(उसकी आवाज सुनकर तृप्ति अपने मन में ही बोली शुक्र है उठ तो गया,,,,)
चल जल्दी तैयार हो जा देर हो रही है,,,।
आया दीदी,,,,(इतना कहकर वह भी जल्दी से अपने कपड़े पहनने लगा,,,,,।
दूसरी तरफ नाश्ता करके तृप्ति जाने के लिए तैयार हो गई थी जाने से पहले वह रसोई घर में काम करिए अपनी मां से बोली,,,)
मम्मी में जा रही हूं सहेलियां इंतजार कर रही होगी,,,।
ठीक है समय पर आ जाना,,,,
जल्दी आ जाऊंगी मम्मी तुम चिंता मत करो,,,,
(और इतना कहकर वह घर से निकल गई,,,, संदीप ने उसे पहले ही बता रखा था कि कहां आना है इसलिए उसके बताएं अनुसार इस जगह पर तृप्ति पहुंच गई और थोड़ी ही देर में वहां संदीप भी आ गया अपनी मोटरसाइकिल लेकर,,,, मोटरसाइकिल को देखकर तृप्ति बोली,,,)
तुम्हारे पास मोटरसाइकिल भी है,,,।
दो है एक पापा ले जाते हैं एक ऐसे ही पड़ी रहती है जब कभी काम पड़ता है तो मैं ही चलाता हूं,,,
तब तो अच्छा है जल्दी जाएंगे जल्दी आ जाएंगे,,,,
हां इसीलिए तो मैं मोटरसाइकिल लेकर आया हूं और वैसे आज तो तुम एकदम माल लग रही हो,,,,(तृप्ति को ऊपर से नीचे की तरफ चलते हुए संदीप बोला तो अपने लिए माल शब्द सुनकर तृप्ति गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,)
क्या बोले,,,,,?
कककक ,,, कुछ नहीं मैं तो यह कह रहा हूं कि आज तो तुम एकदम परी लग रही हो,,,(उसका इतना कहते हैं संदीप के साथ-साथ तृप्ति मुस्कुराने लगी और वह उसके पीछे मोटरसाइकिल पर बैठकर जल्दी मैडम के घर,,,)