सुषमा की बातें सुगंधा के कानों में गर्म शीशे की तरह लग रही थी और कोई समय होता तो शायद सुषमा किस तरह की बातें सुगंधा को बड़ी दिलचस्प लगती लेकिन सुगंधा के हालात सुषमा के हालात से विपरीत थे सुषमा पूरी तरह से सुहागन थी और सुगंधा का सुख खो गया था,,,, इसलिए सुगंधा का सुषमा पर गुस्सा करना लाजमी था सुगंधा के नजरिए से,,, क्योंकि आज जिस तरह के बदलाव सुगंधा को अपने अंदर महसूस हुआ था उसे बदलाव के पीछे सुषमा का ही हाथ था नव अपने घर फिल्म देखने के लिए ले जाती ना गंदी फिल्म देखी ना उसका मन बहकता,,,,।
Sugandha ki madhosh kalpna
अब तो सुगंधा का मन बिल्कुल भी काबू में नहीं रहता था चाहे जहां भी उसे गंदे ख्याल आने लगते थे बार-बार उसकी आंखों के सामने उसे फिल्म के हीरो का टन टनाया हुआ लंड नजर आता था,,, जिसके चलते उसकी बुर कब गीली हो जाती थी उसे पता ही नहीं चलता था,,, अब तो सुगंधा स्कूल से आने के बाद तुरंत अपनी जवानी की प्यास बुझाने में पूरी तरह से लिप्त हो जाती थी अपनी नाजुक उंगलियों को अपने कार्य में लगाकर पूरी तरह से तृप्त होने की कोशिश करती थी,,, लेकिन यह बात उसे बिल्कुल भी नहीं मालूम थी की जवानी की आज बदन की प्यास जितना बुझाओ उतना ज्यादा भडकती है,,, जिसके चलते उसकी मां पूरी तरह से व्याकुल और विचलित होने लगा,,, अब तो न जाने की उसका आकर्षण जवान मर्दों की तरफ बढ़ने लगा था,,, गठीला बदन चौड़ी छाती,,, इस तरह के मर्दों में वह पौरुष तलाशती रहती थी,,,, वह अपने मन में किसी भी जवान मर्दों को देखकर उसके बारे में कल्पना करने लगती थी खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच के हथियार के बारे में वह अपने मन में सोचती थी कि उसका कैसा होगा कैसा दिखता होगा खड़ा होने के बाद कितना बड़ा होता होगा यही सब सो कर वह बार-बार अपनी बुर गीली कर देती थी जिसके चलते उसे दिन में दो बार अपनी पैंटी बदलनी पड़ती थी,,,
और यही हाल तृप्ति का भी था ट्यूशन से घर लौटते समय शाम को जिस तरह का वाक्या उसके साथ हुआ था वह कभी सपने में भी नहीं सोची थी संदीप जिस तरह से उसका हाथ पकड़ कर अंधेरे का लाभ लेते हुए पतली गली में उसके साथ चुंबन चाटी किया था वह सब तृप्ति के लिए बिल्कुल ही नया और अलग अनुभव था जिसके चलते उसे पहली बार एहसास हुआ था कि उसकी बुर पुरी तरह से गीली हो चुकी थी उसकी बुर से पानी निकल रहा था और वह नादान इतना नहीं समझ पा रही थी कि उसकी बुर से आखिरकार गीला गीला क्या निकल रहा था,,, जिसे वह तुरंत घर जाकर बाथरूम में अपनी पेंटिं बदल दी थी,,, उसे ऐसा ही प्रतीत हो रहा था कि शायद पेशाब के जोर के चलते ही उसकी पेंटिं गीली हो गई थी,,, लेकिन सीधी-सादी तृप्ति को कहां मालूम था की जवानी की पहली फुहार थी जो कि उसकी सूखी जमीन पर नमी पन लेकर आई थी,,,,।
Sugandha kalpna me hi chudai ka sukh lete huye
वह बिस्तर पर संदीप की हरकत के बारे में सोचकर पूरी तरह से उत्तेजित हो जाती थी और ऐसा वह बार-बार करती थी ना चाहते हुए भी जब भी वह बिस्तर पर लेटती थी तब उसे संदीप वाली हरकत याद आ जाती थी,,,, लेकिन वह समझ नहीं पा रही थी कि ऐसा कैसे हो गया उसने आज तक किसी भी मर्द को अपने बदन को हाथ लगाने नहीं दी थी वह जानती थी कि यह सब गलत बात है जो की शादी के बाद ही करना चाहिए और ज्यादातर वह बदनामी से डरती थी,,, घर में पड़ी होने के नाते बातचीत तरह से जानती थी कि उसकी मां कितनी तकलीफ सहकार उसके और उसके भाई का पालन पोषण कर रही थी पिता के देहांत के बाद उसकी मां मां के साथ-साथ पिता का भी प्यार दे रही थी और इसी के चलते तृप्ति अच्छी तरह से अपनी जिम्मेदारियां के बारे में समझती थी और वह किसी भी तरह से अपनी मां को बिल्कुल भी दुख देना नहीं चाहती थी लेकिन संदीप के साथ जो कुछ भी हुआ था उसके अनजाने में हुआ था,,, वह जानती थी कि संदीप भले ही जान पूछ कर इस तरह की हरकत किया हो लेकिन उसकी तरफ से किसी भी प्रकार की हामी नहीं थी लेकिन उसे यह बात समझ में नहीं आ रही थी कि वह इतनी मजबूर कैसे हो गई कि संदीप को अपने बदन को छूने की इजाजत दे दी और यहां तक कि वह अपनी हरकतों को और ज्यादा आगे बढ़ाते लेकर चला जा रहा था,,,।
बार-बार तृप्ति को संदीप की हरकत के बारे में याद आ रहा था उसके चुंबन के बारे में याद आ रहा था पहली बार उसके होंठ पर किसी मर्द के होंठ स्पर्श हुए थे जिसके चलते उसके बाद में बिजली से दौड़ने लगी थी उसके बदन में सुरसुराहट सी दोड़ने लगी थी वह पूरी तरह से पागल हो गई थी,,, और तो और संदीप की हथेलियां को अपने नितंबों पर महसूस करके वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी सब कुछ कह दी मर्तबा हो रहा था पहली बार चुम्मन पहली बार किसी की हथेली अपनी नितंबों पर महसूस कर रही थी और वह भी संदीप जानबूझकर उसकी नितंबों को अपनी हथेली में पड़कर दबा रहा था और उसे अपनी तरफ खिंचे हुए था,, और तो और जिस तरह से उसने अपने दोनों हथेलियां के जोर से उसके नितंबों को पकड़कर उसे अपनी तरफ खींच कर रखा था उसके चलते उसे अपनी बर के द्वार पर कुछ कड़क और नुकीली चीज चुभती हुई महसूस हुई थी,,, और इस बात का अहसास होते ही की उसकी बुर पर चोदने वाली नुकीली चीज कुछ और नहीं बल्कि संदीप का मोटा तगड़ा लंड है वह पूरी तरह से पानी पानी हो गई,,, क्योंकि पहली बार तृप्ति लंड नाम के अंग से रूबरू हुई थी हालांकि पूरी तरह से तो मर्द के लंड से मुलाकात उसकी हुई नहीं थी लेकिन इतना ही उसके लिए बहुत था जिसके चलते उसकी बुर पूरी तरह से पानी छोड़ दी थी,,,, संदीप के मर्दाना अंग की ठोकर उसे अभी भी पूरी तरह से महसूस होती थी जिसके चलते उसके बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगती थी,,,, और ऐसा क्यों ना हो अगर तृप्ति की जगह कोई और जवान लड़की होती जो इस तरह के अनुभव से गुजरी ना हो रूबरू ना हो तो उसके बदन में भी इसी तरह की लहर उठना स्वाभाविक है तृप्ति तो पूरी तरह से मचल उठी थी,,, और न जाने क्यों सब कुछ जानते हुए भी वह संदीप को रोक नहीं पाई थी यहां तक की संदीप ने उसकी सलवार में अपने हाथ को भी डाल दिया था और उसकी पेंटिं के ऊपर से ही उसकी बुर को दबोच दिया था,,,, यह सब तृप्ति के लिए उत्तेजना से भरा हुआ था जो की बिल्कुल असहनीय था जिसका असर उसकी दोनों टांगों के बीच की उसे पतली दरार में बराबर दिखाई दे रहा था,,,,,,, यहां तक भी ठीक था तृप्ति की खामोशी को उसकी रजा मंदी समझ कर संदीप की हरकत और ज्यादा बढ़ने लगी थी,,, यहां तक कि वह अपनी हथेली को उसकी पेंटिं के अंदर डाल दिया था,,, तभी दूर से आ रही मोटरसाइकिल की तो इस रोशनी दोनों पर पढ़ते ही तृप्ति को इस बात का एहसास हुआ कि जो कुछ भी हो रहा है वह गलत हो रहा है वह तुरंत उससे दूर हो गई और मोटरसाइकिल के गुजर जाने के बाद वहां लगभग भागते हुए अपने घर की तरफ जाने लगी संदीप हाथ मिलने रह गया था हाथ में आया हुआ इतना अनमोल मौका चला गया था लेकिन फिर भी वह मदहोश कर देने वाली जवानी को अपने हाथों से महसूस करके पूरी तरह से मस्त हो चुका था,,,,।
SugAndha kalpna me
मां बेटी दोनों की हालत एक जैसी हो चुकी थी,,, सुगंधा बार-बार अपने हाथों से अपनी जवानी की प्यास को बुझाने की कोशिश करती थी और बार-बार अपनी गलती के चलते ग्लानि महसूस करके अपने आप को दोषी मानकर वहां बार-बार कसम खाती थी और दूसरे दिन भी अपने बदन की जरूरत के मुताबिक वह कसम तोड़कर फिर से वही गलती करती थी,,,, इसी तरह से धीरे-धीरे दिन देती धो रहे थे जहां एक तरफ मां बेटी पूरी तरह से जवानी की आग में झुलस रहे थे वहीं दूसरी तरफ अंकित अपने आप को इस तरह के दूषण से बचाया हुआ था,,,, और निरंतर सुबह-सुबह उठकर कसरत किया करता था,,। और उसका कसरती बदन देख कर किसी का भी आकर्षक उसकी तरफ बढ़ जाता था लेकिन अब तक परिवार में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था सुगंधा जवानी से भरे हुए मर्दाना ताकत से भरपूर अपने बेटे की तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं देती थी वह बाहर ही मन में कल्पना करके दूसरी मर्दों की तरफ आकर्षित होकर अपनी जवानी की प्यास बुझाने में लगी हुई थी,,,,।
एक शिक्षिका होने के नाते वह अच्छी तरह से जाती थी कि उसका एक भी गलत कदम उसकी बनी बनाई इज्जत को मिट्टी में मिला सकता था इसीलिए वहां इस तरह की कोई भी हरकत नहीं करना चाहती थी जिससे उसकी बदनामी हो उसके पद की गरिमा को लांछन लगे लेकिन वह अपनी क्लास के जवान लड़कों की हरकत के बारे में भी अच्छी तरह से जानती थी,,, जब से वह सुषमा के साथ गंदी फिल्म देखी थी तब से उसे मर्दों की नजर के बारे में कुछ ज्यादा ही मालूम होने लगा था यहां तक कि उसे इस बात का भी एहसास होने लगा था कि अपनी स्कूल में क्लास में पढ़ते समय उसकी क्लास के लड़के उसके अंगों को प्यासी नजरों से देखते रहते थे अब तक उसे इस बात का एहसास बिल्कुल भी नहीं था वह क्लास के हर बच्चों में मासूम अंकित का ही चेहरा देखते आ रही थी जिसके चलते उसके मन में कभी भी गलत भावना पैदा नहीं हुई थी लेकिन अब उसका विचार भी पूरी तरह से बदल चुका था वह ब्लैक बोर्ड पर चौक से लिखते हुए अचानक की अपनी नजर को पीछे की तरफ घूम कर देख लेती थी और यह देखने की कोशिश करती ठीक ही उसके नितंबों की तरफ कौन-कौन देख रहा है और उसके आश्चर्य के मुताबिक क्लास के ज्यादातर लड़के उसकी भरी हुई बड़ी-बड़ी गांड की तरफ की प्यासी नजरों से देखते रहते थे जो की ब्लैकबोर्ड पर लिखते समय उसके नितंबों में एक अजीब सी धड़कन होती थी कई हुई साड़ी पहनने की वजह से उसकी गांड को ज्यादा ही उभरी हुई नजर आती थी जिसके चलते क्लास के लड़कों के मुंह में पानी आ जाता था,,,।
Sugandha dusre mardo ki kalpna karne lagi
उसे अब एहसास होने लगा था कि उसके खूबसूरत बदन को आदमियों के साथ-साथ जवान लड़के भी प्यासी नजरों से देखते थे और न जाने क्यों उसे लड़कों को अपनी जवानी की झलक दिखाने में एक अजीब तरह का आनंद प्राप्त होने लगा था और उसे अंदर ही अंदर काफी उत्तेजना का एहसास होने लगा था यहां तक की अब क्लास में बार-बार उसे अपनी बुर गीली होती हुई महसूस होने लगी थी,,, ब्लैकबोर्ड पर लिखते समय वह जानबूझकर थोड़ा आगे की तरफ झुककर अपनी बड़ी बड़ी गांड को बाहर की तरफ निकाल लेती थी,,, जिसके चलते आगे की बेंच पर बैठे हुए जवान लड़कों की तो हालत खराब हो जाती थी,,,,।
ऐसे ही एक दिन वह ब्लैकबोर्ड पर लिख रही थी और आगे की बेंच पर उसकी क्लास का विद्यार्थी अमन और मोहन बैठे हुए थे वह इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि वह दोनों कुछ ज्यादा ही उसके बाद उनको प्यासी नजरों से घूरते रहते थे और उन दोनों की हरकत देखकर सुगंधा के भजन में अजीब सी हलचल होने लगती थी उसे उनकी नज़रें अच्छी लगने लगी थी इसीलिए ब्लैकबोर्ड पर लिखती लिखकर अपनी चौक को नीचे गिरा देती थी ताकि उसे उठते समय उसकी गांड कुछ ज्यादा उभार लिए हुए नजर आए,,,, और जानबूझकर चौक गिरा कर जब वह उसे उठाने के लिए नीचे झुकती थी तो उसकी नजर अपने आप ही आगे की बेंच पर बैठे हुए दोनों लड़कों पर चली जाती थी और सुगंधा को साफ नजर आता था की उत्तेजना के मारे उनके पेट के आगे वाला भाग पूरी तरह से फुल चुका है,,,, जिसे देखकर सुगंधा के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी,,,,,, सुगंधा उन लड़कों के पेट के उभार को अच्छी तरह से देखना चाहती थी,,, इसलिए एक बहाने से वह बोली,,,।
Sugandha
अमन और मनोज दोनों खड़े हो जाओ,,,,।
(इतना सुनते ही दोनों एकदम से खड़े हो गए दोनों इस बात को भूल गए थे कि अपनी टीचर की मदमस्त कर देने वाली गांड और उसकी जवानी देखकर दोनों का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका है,,, उन दोनों के खड़े होते हैं सुगंधा की नजर सबसे पहले उन दोनों के पेंट के आगे वाले भाग पर ही गई क्योंकि अच्छा खासा तंबू बनाया हुआ था और उसे तंबू को देखकर उसके होठों पर हल्की सी मुस्कान आ गई उसके मन में तरंगें उठने लगी,,, उसे अपनी जवानी पर थोड़ा गर्म होने लगा कि इस उम्र में भी वह जवान लड़कों के लंड को खड़ा करने की ताकत रखती है,,, फिर उन दोनों से थोड़ा बहुत सवाल जवाब करके उन्हें बैठा दि,,, क्योंकि सुगंधा ने अपना मतलब पूरा कर ली थी उसे जो देखना था वह देख ली थी और उसे देखने के बाद उसे अपनी पैंटी गीली होती हुई महसूस हो रही थी,,,।
घर पर पहुंचते ही वह अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई और बाथरूम के अंदर अपनी बुर में उंगली डालकर अपनी प्यास बुझाने की भरपूर कोशिश करने लगी,,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है पति के देहांत के बाद वह इस तरह की बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन अब उसकी काम पिपाशा कुछ ज्यादा ही प्रज्वलित हो चुकी थी जिसकी वजह से वह खुद बहुत हैरान थी,,,।
खैर जैसे तैसे करके दिन गुजर रहे थे,,, पुरुष संसर्ग का बहुत मन होने के बावजूद भी वह अपने मां पर संयम रखकर अपनी उंगलियों का ही सहारा लेकर अपनी भावनाओं को दबाने की कोशिश कर रही थी लेकिन जितना वह अपने भावनाओं को दबाने की कोशिश करती थी उससे ज्यादा उसकी भावनाएं उसे अपनी आगोश में लेकर बिखेर दे रहे थे,,,। दूसरी तरफ तृप्ति संदीप से दूरी बनाकर ही रहने लगी थी,,,, जिसकी वजह से संदीप उससे बार-बार माफ़ी भी मांग रहा था लेकिन वह उसे माफ करने को तैयार हीं नहीं थी,,,,,, तृप्ति एक समझदार लड़की थी उसे अपनी जिम्मेदारियों का एहसास था,,, वह किसी भी तरह से अपने परिवार की बदनामी होने देना नहीं चाहती थी क्योंकि वह जानती थी कि अगर उस दिन उससे और ज्यादा गलती हो जाती तो उसका क्या परिणाम होता,,,,।
और सुगंधा को अभी तक कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि उसे आगे क्या करना है जिस तरह की आज उसके बदन में लगी थी उसे बुझाना उसके लिए बहुत जरूरी होता जा रहा था पुरुष संसर्ग के लिए उसकी मन कुछ ज्यादा ही मचलने लगा था,,,। लेकिन वह एक समझदार औरत थी और उसके भयंकर परिणाम के बारे में भी जानती थी इसलिए तो वह अपना कदम आगे बढ़ाने में घबरा रही थी,,,, वह अपने कमरे में बैठे-बैठे उन औरतों के बारे में सोच रही थी जो कि अपने पति के होने के बावजूद भी दूसरे मर्दों के साथ संबंध बनाकर गुलछर्रे उड़ाती है,,, सुगंधा यही सोच रही थी कि ऐसी औरतों के पास तो खुद उनके पति होता है लेकिन फिर भी अपनी प्यास बुझाने के लिए की इस मर्दों का सहारा लेते हैं,,,, तो क्या इस तरह का रिश्ता उन औरतों के लिए सही है या गलत फिर अपने ही सवाल का जवाब अपने मन में देते हुए बोली कि जब तक पकड़ी नहीं जाती तब तक हर रिश्ता सही रहता है पकड़े जाने पर ही गलती का एहसास दिलाया जाता है,,,,,,,।
सुगंधा अपने मन में सोच रही थी कि अगर वह किसी गैर मर्द के साथ संबंध बना लेती है तो क्या होगा कैसा बदलाव उसके जीवन में आएंगे,,, वह अपने मन में इस तरह के रिश्ते के बारे में सोचने लगी कि अगर वह किसी गैर पुरुष के साथ संबंध बनाने की है तो वह उसके साथ चोरी छिपे मिलेगी उसके घर पर जब कोई नहीं होगा तब वह धीरे से उसके घर जाएगी और अपना काम खत्म करके वापस आ जाएगी ऐसे में किसी को कुछ भी पता भी नहीं चलेगा लेकिन अगर इस बारे में किसी को पता चल गया तो,,,, वह तो बदनाम हो जाएगी और इस बारे में अगर उसके बच्चों को पता चल गया तब तो वह उनसे नजर भी नहीं मिल पाएगी और अपने बच्चों की नजर में ही गिर जाएगी,,, अंकित और तृप्ति अपनी मां के बारे में क्या सोचेंगे,,,, यही सब सोच कर वह घबरा जाती थी और फिर अपनी भावनाओं का गलत फिर से इस तरह की जिंदगी जीने की मन में ठान लेती थी लेकिन,,, कुछ देर बाद फिर से वही सब ख्याल उसके मन में आता था और फिर वह उत्तेजित हो जाती थी,,,,।
ऐसे की एक दिन वह सुबह-सुबह धुले हुए कपड़ों को सूखने के लिए डालने के लिए छत पर पहुंच गई और छत पर पहुंचते ही उसकी नजर अपने बेटे अंकित पर गई जो कि केवल अंडरवियर में ही कसरत कर रहा था अंकित ने अपनी मां को नहीं देखा था और वह कसरत करने में पूरी तरह से मजबूर था लेकिन सुगंधा की नजर अपने बेटे पर पढ़ते ही वह कुछ देर के लिए एकदम से भूल गई कि वह उसका बेटा है वह केवल इसकी चौड़ी छाती गठीला कसरती बदन उसकी भुजाओ को देख रही थी सुगंध को पहली बार अपने बेटे में बेटा नहीं बाकी एक जवान मर्द नजर आ रहा था जिसे देखकर उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में अजीब सी सुसुराहट महसूस होने लगी थी सुगंधा की नजर जैसे ही अपने बेटे के अंडरवियर के आगे वाले भाग पर गई तो वह एकदम से मदहोश होने लगी क्योंकि सुषुप्त अवस्था में भी उसके अंडरवियर में अच्छा खासा तंबू बना हुआ था जिसे देखकर वह अपने मन में उसे गंदी फिल्म वाले हीरो की कल्पना करने लगी जिसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में खड़ा था,,,, पल भर में ही सुगंधा की सांस ऊपर नीचे होने लगी,,,, वह बड़े गौर से अपने बेटे के अर्धनग्न बदन को देख रही थी और अनजाने में ही कल्पना करने लगी थी कि अगर इस समय उसका बेटा पूरी तरह से नंगा होता तो कैसा नजर आता उसका मोटा तगड़ा लंड कैसा दिखता इन सब ख्यालों के चलते उसकी बुर पूरी तरह से पानी छोड़ने लगी इस बार उसकी बुर कुछ ज्यादा ही पानी छोड़ रही थी क्योंकि इस बार वह इसके बारे में कल्पना कर रही थी वह उसका जवान बेटा था इसलिए उसके बदन में कुछ ज्यादा ही जोश और उन्माद नजर आ रहा था,,,,, वह बड़े गौर से अपने बेटे की क्रियाकलाप को देख रही थी वह अपने ही ध्यान में पूरी तरह से मग्न होकर बड़े-बड़े वजनदार डंबल को उठाकर अपने हाथ के मसल्स को और ज्यादा मजबूती प्रदान कर रहा था,,, तभी कसरत करते-करते उसकी नजर अपनी मां पर गई तो वह एकदम से चेहरे पर मुस्कुराहट लाते हुए बोला,,,।
अरे मम्मी तुम,,,,, सुबह-सुबह यहां क्या कर रही हो,,,
(अपने बेटे की आवाज कानों में पढ़ते ही जैसे उसकी तंत्र भंग हुई हो वह एकदम से हड़बड़ाहट भरे स्वर में बोली,,)
,वो मैं धुले हुए कपड़े सुखाने के लिए आई थी,,,