Incest मुझे प्यार करो,,, - Page 4 - SexBaba
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Incest मुझे प्यार करो,,,

सुगंधा फिल्म समाप्त होते ही वहां रुकना उचित नहीं समझी वह इससे आगे नहीं देखना चाहती थी इसलिए सुषमा को टीवी बंद करने के लिए कहकर खुद अपनी जगह से खड़ी हो गई और दरवाजा खोलकर कमरे से बाहर निकल गई,,,, उसे फिल्म का एक-एक दृश्य उसके दिलों दिमाग पर पूरा छाया हुआ था,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,, आज तो कुछ नहीं इस तरह की फिल्म के बारे में सुनी ही नहीं थी,,, वह कभी सोच भी नहीं सकती थी कि इस तरह की भी कोई फिल्म होती है लेकिन आज अनजाने में वह गंदी फिल्म को देख चुकी थी,,,,। अभी तो 2:45 बजे थे अगर कोई हिंदी फिल्म लगती तो 5 बज जाते लेकिन सुषमा अनजाने में ही अंग्रेजी फिल्म लगा दी थी जिसे देखकर दोनों की हालत खराब हो गई थी,,,,।

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इस तरह की फिल्म को देखकर सुषमा का तो कुछ बिगड़ता वाला नहीं था बल्कि वह पूरी तरह से उत्तेजित होकर अपने पति के साथ अपनी जवानी की गर्मी को बुझ सकती थी लेकिन इस गंदी फिल्म का असर सुगंधा के ऊपर बहुत ही बुरी तरह से हो रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह जल्दी-जल्दी अपने घर में प्रवेश कर गई और दरवाजा बंद करके पंखा चालू करके कुर्सी पर बैठ गई,,, उसे गंदी गरम फिल्म का असर उसके बदन पर बुरी तरह से हो रहा था,,,, पंखा फुल स्पीड में चालू होने के बावजूद भी उसे गर्मी का एहसास हो रहा था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह कुर्सी पर आराम से बैठकर उसे फिल्म के बारे में सोचने लगी,,, कितना गंदा काम कर रहे थे दोनों,,,क्या इस तरह की फिल्म बनाने के लिए मां-बाप इजाजत दे देते हैं,,, फिल्म की हीरोइन कितना गंदा काम कर रही थी मुझे तो सोच कर ही शर्म आती है पेशाब करने के लिए खुद दरवाजा बंद करके किसी की नजर ना पड़ जाए इस तरह से बैठती हूं,,, और कभी कभार बाहर पेशाब करना पड़ जाए तो भी जंगली झाड़ियां का सहारा लेकर या दीवार की ओट मैं भी बैठने से पहले 10 बार चारों तरफ नजर घुमा कर देख लेती हूं कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन उस हीरोइन ने तो बेशर्मी की सारी हदों को पार कर दी,,, कितनी बेशरम बनाकर एकदम से वेट कर पेशाब कर रही थी और वह भी पेंटी को बिना उतारे,,,।

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फिल्म की हीरोइन का पेशाब करता हुआ दृश्य जैसे ही सुगंध के दिलों दिमाग पर छाने लगा वैसे ही उसकी हालत खराब होने लगी,,, वह अपने मन में सोचने लगी कि वह जब भी पेशाब करती है तो बर से निकलने वाली सिटी की आवाज को जितना हो सकता है उतना दबाने की कोशिश करती थी लेकिन उसे हीरोइन ने तो ऐसा कुछ भी नहीं की बल्कि ऐसा लग रहा था की जान बुझ कर दिखा रही है तभी तो पेड़ के पीछे छुपा हीरो कैसी गंदी हरकत कर रहा था उसे देखकर और तो और अपना लंड बाहर निकाल कर हीला रहा था,,, पेड़ के पीछे छुपे हीरो का ख्याल आते ही उसका लंबा मोटा लंड उसकी आंखों के सामने तैरने लगा उसे यकीन नहीं हो रहा था कि किसी मर्द का इतना मोटा और लंबा भी होता है क्योंकि आज तक अपनी वैवाहिक जीवन में उसने अपने पति के ही लैंड के दर्शन किए थे जो कि उसे हीरो के लंड से आधा भी नहीं था और पतला सा था और ऊपर ना चाहते हुए भी अपने मन में यह सोचने लगी कि अगर इतना मोटा तगड़ा लंड उसकी बुर में जाता तो क्या होता इस बारे में सोचते ही उसकी बुर से पानी बहने लगा,,,।

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सुगंधा के लिए यह पहला मौका था जब वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी वरना अपने पति के देहांत के बाद उसने अपनी अरमानों का गला घोट दी थी अपनी उत्तेजना पर काबू करके अपने जीवन में अपने बच्चों के साथ खुशी से जीना सीख गई थी लेकिन सुषमा की एक गलती ने उसके दिलों दिमाग को बदल कर रख दिया था ना चाहते हुए भी वह संभोग के बारे में सोच रही थी उसे हीरो के मोटे तकदीर लंड के बारे में सोच रही थी जो की बड़े आराम से उस हीरोइन की छोटी सी बुर में अंदर बाहर हो रहा था और वह हीरोइन भी बिना डरे बिना घबराए बिना दर्द के उस लंड को अपनी बुर में लेकर मजे लेकर चिल्ला रही थी,,,

सुगंध को एहसास होने लगा था कि उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हलचल हो रही है,,, उसे अपनी बुर में झनझनाहट महसूस हो रही थी सुरसुराहट महसूस हो रही थी जो कि यह बरसों बाद हो रहा था,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह बार-बार उसे फिल्म से अपना ध्यान भटकाने की कोशिश करती थी लेकिन ऐसा मुमकिन नहीं हो पा रहा था कि उसका ध्यान उसे दृश्य से उसे फिल्म से हट जाए,,,, जांघों के बीच की स्थिति बेहद नाजुक होती जा रही थी,,,, वह अपनी दोनों टांगों के बीच की स्थिति का जायजा लेना चाहती थी उसे देखना चाहती थी उसके बदलाव को परखना चाहती थी इसलिए,,,, धीरे से कुर्सी पर से उठकर खड़ी हो गई,,, और धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी,,,,,, बंद कमरे के अंदर अपने ही हरकत पर भी उसे शर्म महसूस हो रही थी और बार-बार वह दरवाजे की तरफ देखने की जोकी उसने खुद बंद कर दी थी,,,, देखते देखते वहां धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाते हुए अपनी कमर तक ले आई और अपनी नजरों को अपनी दोनों टांगों के बीच लाल रंग की पेटी पर डालते ही वह एकदम से चौंक गई क्योंकि पेंटी के आगे वाला भाग पूरी तरह से गिला हो चुका था मानो कि जैसे उस पर पानी गिरा दिया गया हो उसे यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी बुर इतना पानी छोड़ रही है,,,, अपनी ही बुर से निकले हुए पानी से गीली हुई अपनी लाल रंग की पेंटिं को देख कर उसके तन बदन में हलचल होने लगी और औपचारिक वश वह अपना नीचे की तरफ ले गई और पेंटी के ऊपर रख दी और उसकी ईस हरकत पर उसकी बुर मानो उत्तेजना को बर्दाश्त नहीं कर पाई और पानी का तेज फवारा बुर से झटका मार मार के बाहर निकलने लगा,,, उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी सुगंधा को समझते देर नहीं लगी थी कि वह झड़ रही है,,, वह हैरान थी आश्चर्य से उसकी आंखें चौड़ी हो चुकी थी,,, बरसों से जिस गरम लावा को वह अपने अंदर दबा कर रखी थी वह उसकी एक नादानी से फूट पड़ा था मानो के जैसे पहाड़ में दबी हुई ज्वालामुखी फूट पड़ी हो,,,,, झड़ते हुए उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी और अनजाने में ही उसकी हथेली एकदम से उसकी बुर पर चिपक गई थी और वह हल्के-हल्के पेंटी के ऊपर से ही उसे रगड़ रही थी मसल रही थी ऐसा करने में उसे झड़ने में और भी ज्यादा आसानी और मदहोशी का एहसास हो रहा था,,,, वह पूरी तरह से पागल हो गई थी उसका पूरा बदन पसीने से कर बदल हो चुका था आखिरकार देखते ही देखते हैं उसकी बुर से गरम लावा की एक-एक बुंद बाहर निकल गई,,,,।



झड़ने के बाद वह एकदम से कुर्सी पर धप्प से बैठ गई,,, अभी भी उसकी साड़ी कमर तक कटी हुई थी और वह कुर्सी पर बैठकर जोर-जोर से सांस ले रही थी और धीरे-धीरे अपनी सांसों को दुरुस्त कर रही थी अनजाने में ही हुई अपनी इस गलती से उसके बदन को इतना सुकून और आराम मिल रहा था कि पूछो मत ऐसा लग रहा था कि वह अपने ही अंदर के इस ठिकाने को भूल चुकी थी अनजान थी कभी भूले भटके भी इस जगह से गुजर नहीं रही थी इसीलिए तो इस मंजिल पर पहुंचने पर कितना आनंद और सुकून मिलता है वह भूल चुकी थी और आज अनजाने में ही उसे जगह पर पहुंचते ही उसके जीवन में पुराने ख्याल आने लगे वह मदहोश होने लगी उसे याद आने लगा कि किस तरह से उसका पति बिस्तर पर उसके साथ प्यार करता था भले ही उसे हीरो से उसके पति का लंड छोटा था लेकिन वह जी भरकर प्यार करता था और वह अपने पति के छोटे से लंड से भी बहुत खुश थी,,, पति के रहने पर बिस्तर पर तड़पना तो नहीं पड़ता था आज उसी तरह का सुख उसे अपने ही हाथों से मिला था हालांकि उसने अपनी बुर में अपनी एक उंगली तक को प्रवेश नहीं कराई थी लेकिन फिर भी वह इतनी ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी की पेंटिं के ऊपर से ही अपनी हथेली को बर पर रखते ही बुर अपनी खुद की उत्तेजना को संभाल नहीं पाई और भरभरा कर बहने लगी,,,,।

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उसका पूरा बदन पसीने से तरबतर हो चुका था,,, गर्मी का महीना होने के नाते पसीने से तरबतर अपना बदन उसे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था अभी अंकित और तृप्ति को आने में बहुत समय था इसलिए वह धीरे से कुर्सी पर से उठी और बाथरूम की तरफ जाने लगी नहाने के लिए वह अपने आप को ठंडा पानी से हल्का करना चाहती थी,,,, और फिल्म के शुरूर से अपने आप को बाहर निकालना चाहती थी,,,,,,।

घर में उसके सिवा और कोई नहीं था इसलिए बाथरूम में प्रवेश करते ही वह बाथरूम का दरवाजा बंद नहीं की,,,,,,, बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ था और वहां अपने कंधे पर से साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा दी,,,, उसकी सांसे अभी भी बहुत गहरी चल रही थी साड़ी का पल्लू उसकी छाती से नीचे गिरते ही वह नजर नीचे करके अपनी गोल-गोल छातियो की तरफ देखने लगी,,, वैसे भी उसकी छतिया बेहद आकर्षक थी और इस बात को वह अच्छी तरह से जानती थी क्योंकि सड़क पर चलते हुए वह मर्दों की नजरों को अपने बदन पर घूमती हुई देख लेती थी उसे समय तो उसके बदन में सिहरन सी दौड़ने लगती थी ,,, लेकिन कभी भी अपने बदन में उत्तेजना का अनुभव नहीं की थी लेकिन आज वह अपनी ही छातिया को देखकर उत्तेजित हुए जा रही थी,,,, अपने आप ही उसकी दोनों हथेलियां ब्लाउज के ऊपर आ गई और वह फिल्म वाली हीरोइन की तरह अपने आप ही अपनी चूची को दबाना शुरू कर दी,,,, सुगंधा का दिमाग उसके काबू में नहीं था वह समझ नहीं पा रही थी कि वह क्या कर रही है लेकिन अपनी हरकत पर उसे उत्तेजना का अनुभव हो रहा था उसे आनंद की प्राप्ति हो रही वह हल्के से अपनी आंखों को बंद करके अपने दोनों हथेलियां में अपने दोनों खरबुजो को भरकर दबा रही थी,,,, यहां पर उसके लिए आनंद से भरा हुआ था पहली बार वह अपने हाथों से अपने बदन को उत्तेजित कर रही थी,,,।

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बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ था दरवाजे पर सीटकनी कितनी लगी हुई थी,,, इसलिए वह बाथरूम का दरवाजा खुला होने पर भी निश्चित थी लेकिन उसके दिलों दिमाग पर जिस तरह का मदहोशी का बहुत छाया हुआ था उससे उसका चेता तंतु बिल्कुल भी काम नहीं कर रहा था सही गलत का फैसला करना अब उसके बस में बिल्कुल भी नहीं था,,,। उसका खुद की सांसों पर काबू नहीं उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी और सांसों की गति के साथ-साथ उसकी बड़ी-बड़ी छतिया भी ऊपर नीचे हो रही थी जो कि उसकी हथेली के कैद में थी लेकिन वह अपने खरबूजा को अपने दोनों कबूतरों को,,, अपने ब्लाउज के कैद से आजाद कर देना चाहती थी इसलिए वह धीरे-धीरे अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी,,,, आज उसे बाथरूम के अंदर अपने ब्लाउज का बटन खोलने में भी अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव हो रहा था वह मस्त हुए जा रही थी ,,, देखते देखते वह अपने ब्लाउज के सारे बटन को खोल दी और उसके ब्लाउज के दोनों पट अलग हो गए,,,, और वह धीरे से अपने ब्लाउज को उतार कर नीचे फेंक दी,,,,, लाल रंग की ब्रा में उसकी खरबूजे जैसी चूचियां बेहद मादक लग रही थी जिसे देखकर उसके खुद की आंखों में नशा छा रहा था और पल भर में उसे अपने मन में यह ख्याल आने लगा कि अगर उसे इस हालत में कोई जवान मर्द देख ले तो उसकी हालत क्या होगी और वह उसके साथ क्या-क्या कर सकता है,,,, क्योंकि वह समझ सकती थी एक औरत होने की नाते एक मर्द की दशा को उसके अंदर के इंसान को अच्छी तरह से जानते थे और वह अच्छी तरह से जानती थी कि अगर ऐसी हालत में वह किसी भी मर्द की आंखों के सामने खड़ी हो जाए तो वह मर्द उसके साथ कुछ भी करने को तैयार हो जाए,,,,,,,

फिल्म का दृश्य उसके मानस पटल पर पूरी तरह से छप चुका था बार-बार उसकी आंखों के सामने वह फिल्म वाली हीरोइन नजर आ रही थी जो अपने हाथों से अपनी नंगी चूचियों को दबा रही थी और इसीलिए सुगंधा ब्रा के ऊपर से ही अपनी बड़ी-बड़ी चूची को पकड़ कर दबाना शुरू कर दी और देखते ही देखते वह खुद ही अपने ब्रा के दोनों कप को हाथों से पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ खींच दी और रबड़ के गेम की तरह उसकी चूची एकदम से बाहर निकलते ही उछलने लगी,,, जिसे वह झट से अपने हाथों से पकड़ कर उसे काबू में कर ली,,,और जोर-जोर से दबाना शुरू कर दी मानो कि जैसे कोई मर्द उसकी चूची को हाथों में लेकर दबा रहा हो,,,,।

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ससहहहह आहहहहहहह ऊमममममममम ,,,,,,,(उसके आश्चर्य के साथ उसके मुख में से गरमा गरम सिसकारी की आवाज फूटने लगी और वह अपनी आंखों को बंद करके उस आवाज में उस पल में खोने लगी,,,,,, उसे आनंद आने लगा और इससे उसका उत्साह और साहस दोनों बढ़ने लगा,,, वह तुरंत अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले गई और तुरंत ब्रा का हुक खोलकर पल भर में ही अपनी ब्रा को भी उतार कर नीचे जमीन पर फेंक दी,,,, कमर के ऊपर व पूरी तरह से नंगे हो चुके थे उसकी खरबूजे जैसी चूचियां एकदम तनी हुई थी जिसे देखकर उसके खुद के मुंह में पानी आ रहा था और वैसे भी उम्र के इस पड़ाव पर उसकी चूचियां इतनी कड़क और तनी हुई थी मानो की जैसे कोई जवान लड़की के हो,,,, अपनी जवानी पर उसे गर्व था,,, लेकिन गर्व के साथ-साथ उसे इस बात का अफसोस भी था कि उसकी भरी हुई जवानी से खेलने वाला अब कोई नहीं था,,,, और इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि उसके सिर्फ इशारे की देरी थी वह अपने बिस्तर पर मर्द की लाइन लगा सकती थी,,,,।

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वह बड़े जोर-जोर से अपनी चूचियों को दबा दबा कर अपने हाथ से ही टमाटर की तरह लाल करती थी उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हलचल मचने लगी थी वह एक हाथ से अपनी चूची को पकड़ कर दूसरे हाथ को साड़ी के ऊपर से अपनी बुर पर रखकर दबा रही थी,,,, वह जानती थी कि जिस तरह का तूफान उसके बाद में उठा हुआ है वह किस तरह से शांत होगा इसलिए वह धीरे-धीरे अपनी साड़ी को भी खोलना शुरू कर दी देखते-देखते वह अपनी साड़ी को खोलकर बाथरूम में नीचे गिरा दी,,,,। अब उसके बदन पर केवल पेटिकोट रह गई थी जिसकी डोरी को पकड़ कर वह गहरी गहरी सांस लेते हुए अपनी नाजुक उंगलियों का हरकत देते हुए उसे खींच रही थी पर देखते ही देखते वह अपने पेटिकोट की डोरी को भी खींचकर उसकी गिठन को खोल चुकी थी,,,, पेटिकोट की गिठान खुलते ही कमर पर कई हुई पेटिकोट एकदम से ढीली हो गई लेकिन उसके नितंबों के उभार की वजह से वह उसकी कमर पर टिकी हुई थी जिसे वह अपने दोनों उंगलियों से पकड़ उसे थोड़ा और ढीली करते हुए उसे अपनी कमर से ही नीचे छोड़ दी और उसकी पेटीकोट एकदम से किसी नाटक के परदे की तरह भर भर कर नीचे गिर गई लेकिन नाटक में और इस खेल में फर्क इतना था की नाटक का पर्दा गिरता है तो खेल खत्म हो जाता है लेकिन,,, एक खूबसूरत बदन का पर्दा जब गिरता है तो खेल शुरू होता है और अब खेल शुरू हो चुका था पेटिकोट के नीचे गिरते ही सुगंध के बदन पर की लाल रंग की चड्डी नजर आने लगी और सुगंधा अपनी चड्डी के गौर से देख रही थी जो कि आगे से पूरी तरह से भीग चुकी थी,,,,।

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बरसों बाद इस बंजर जमीन पर सावन की बौछार पड़ी थी जिसे पूरी बंजर ज़मीन गीली हो चुकी थी अब इस पर हरियाली लगने की खुशी सुगंधा के चेहरे पर साफ झलक रही थी वह चड्डी के ऊपर से ही अपनी बुर वाली जगह पर अपनी हथेली रखकर उसे दबाते हुए रगड़ने लगी जिससे उसके बदन में अजीब सी फुहार उठने लगी और वह जैसे-जैसे अपनी हथेली को अपनी बर पर घूम रही थी वैसे अपने नितंबों को लचका भी रही थी,,, कमरे के अंदर का दृश्य पूरी तरह से गर्म चुका था अगर ऐसी हालत में उसका सीधा-साधा जवान लड़का देख लेता तो शायद अपने आप को अपनी मां को चोदने से रोक नहीं पाता,,, क्योंकि सुगंधा की हरकत ही इतनी मादकता भरी थी कि दुनिया का कोई भी मर्द देख ले तो या तो उसकी चुदाई करके पानी निकाल ले या तो हिला कर पानी निकाल दे,,,, कुछ देर तक अपनी आंखों को बंद करके चड्डी के ऊपर से ही अपनी बुर से खेलने के बाद सुगंधा अपनी नाजुक उंगलियों को हरकत देते हुए अपने चड्डी के दोनों छोर को अपनी नाजुक उंगलियों में फंसा ली,,, और पल भर में ही उसे फिल्म की हीरोइन की चड्डी उसकी आंखों के सामने नजर आने लगी उसकी चड्डी इतनी छोटी थी की बड़ी मुश्किल से उसकी 2 इंच की बुर उसमें छुपा रही थी बाकी सब कुछ नजर आ रहा था और सुगंधा ने जिस तरह की चड्डी को पहनी थी उससे उसकी पूरी कायनात पर्दे में कैद थी,,,।

धीरे-धीरे सुगंधा अपनी उंगलियों के सहारे अपनी चड्डी को उतारना शुरू कर दी,,,, जैसे-जैसे उसकी चड्डी कमर से नीचे की तरफ जा रही थी वैसे वैसे उसकी दील की धड़कन बढ़ती जा रही थी,,,, वह अपने ही काबू में नहीं थी वह पूरी तरह से बेकाबू हो गई थी उसकी नज़रें उसकी चड्डी के उतरने का इंतजार कर रहे थे वह भी अपनी नंगी बुर को देखना चाहती थी उसकी हालत को देखना चाहती थी तड़पती हुई उसकी बुर कैसी दिखती है वह देखना चाहती थी,,,, और देखते ही देखते सुगंध अपने हाथों से अपनी चड्डी को अपनी खूबसूरत दूर से नीचे कर दी और उसकी बुर जो की हल्की-हल्के बालों की झुरमुटों से घिरी हुई थी नजर आने लगी,,,,,,, उत्तेजना के मारे वह पतली सी दरार कचोरी की तरह फूल गई थी,,, जो कि इस समय बहुत ही खूबसूरत लग रही थी,,,, जिस नजर भर कर देखने के बाद सुगंधा अपनी चड्डी को और नीचे की तरफ ले जाने लगी और देखते ही देखते हो अपने घुटनों से नीचे लाकर पैरों के सहारे उतार फेंकी,,, चड्डी के उतरते ही बाथरूम के अंदर वह अब पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,,, और ऐसा उसने पहली बार की आज तक उसने बाथरूम के अंदर अपने सारे कपड़े उतार कर नहाई नहीं थी,,,,,, लेकिन आज उत्तेजना बस मदहोशी के आलम में वह जो आज तक नहीं करी थी वह कर गुजर रही थी,,, बाथरूम का दरवाजा पूरी तरह से खुला हुआ था इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी वह खुद ही दरवाजा बंद नहीं कि थेटी क्योंकि वह जानती थी कि इस समय कोई घर पर कोई आने वाला नहीं था और वह भी मुख्य द्वार पर पहले से ही सिटकनी लगा चुकी थी,,,,।

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उत्तेजना के मारा उसका गला सूख रहा था और वह अपने ही थूक से अपने गले को गिला करने की कोशिश कर रही थी उसकी नजर अपनी ही बुरेट पर टिकी हुई थी वह मदहोशी के आलम में प्यासी नजरों से अपनी ही बुर को देख रही थी,,, जो की अत्यधिक उत्तेजना के मारे फुल पिचक रही थी,,, अपनी बुर की इस प्रक्रिया से वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी,,, वैसे भी उसे अपनी बुर के बाल अच्छे नहीं लगते थे लेकिन इस बार उसने सही समय पर क्रीम लगाकर अपनी बुर के बाल को साफ नहीं की थी,,, और अपने मन में ही वह कहने लगी थी की बहुत ही जल्द वह अपने बुर के बाल को साफ करके अपनी बुर को एकदम चिकनी कर लेगी,,,,।

उसकी बुर से अभी भी मदन रस का बहाव हो रहा था,,,, वह अपनी हथेली को धीरे से अपनी बर पर रख दी और अपनी हथेली के नीचे अपनी छोटी सी बर को पूरी तरह से ढंक ली,,, बुर की गर्मी उसे अपनी हथेली में महसूस हो रही थी जिसकी गर्मी में उसकी जवानी का रस पिघल रहा था,,, उसे अपनी बुर की जवानी बर्दाश्त नहीं हो रही थी ,,और वह हल्के हल्के अपनी बुर को अपनी हथेली से रगड़ना शुरू कर दी,,, अपनी बर को हथेली से रगड़ने में उसे इतना अत्यधिक आनंद प्राप्त हो रहा था कि पूछो मत वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी यह वैवाहिक जीवन के बाद का उसकी पहली हरकत थी जो अपने ही अंगों से वह खेल रही थी,,,,

सुगंधा की हालत खराब होती जा रही थी उसके बदन में उत्तेजना पूरी तरह से अपना असर दिख रही थी और वह एक हाथ से अपनी चूची को दबा रही थी उसकी आंखों में अजीब सी अकड़न छा रही थी,, उसके चेहरे के भाव पल-पाचल बदलते जा रहे थे,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था और इसी बीच उसने अपनी बीच वाली उंगली को धीरे से अपनी बुर के अंदर प्रवेश करा दी,,।

बरसों गुजर गए थे उसकी बुर में लंड घुसा नहीं था इसलिए वर्षों के बाद अपनी उंगली का प्रवेश बुर में करते ही उसे लंड का एहसास होने लगा वैसे भी,,, बरसों तक एक उंगली भी ना प्रवेश करने के कारण उसकी बुर कस चुकी थी,,, उसकी बुर का कसाव जवान लड़की की तरह हो चुका था,,, और इस एहसास से वह एकदम मस्त हुए जा रही थी,,, देखते ही देखते उसकी उंगली बुर के अंदर रफ्तार पकड़ ली थी और वह उत्तेजना के चलते अपनी उंगली को जल्दी-जल्दी अंदर बाहर कर रही थी और ऐसा करने में उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी वह मस्त हुई जा रही थी उसकी आंखें बंद हो चुकी थी,,, एक हाथ से हुआ अपनी चूची को दबा रही थी बड़ी-बड़ी से दोनों चूचियों को अपनी एक हथेली में लेकर वह दबाते हुए मजा लूट रही थी,,,,।

और अपनी आंखों को बंद करते ही वह कल्पना की दुनिया में खोने लगी और उसके कल्पना में वही फिल्मों वाला हीरो उसकी आंखों के सामने उसकी हरकत देखकर अपने मोटे तगड़े लंड को हिलाना शुरू कर दिया उसकी यह कल्पना,, इतनी जबरदस्ती की वह अपनी ही कल्पना में पूरी तरह से खो चुकी थी उसके मुंह से गरमा गरम शिकारी निकल रही थी और वहां कल्पना में देख रही थी कि वह फिल्म वाला हीरो उसकी तरफ आगे बढ़ने लगा और देखते-देखते वह भी बाथरुम के अंदर प्रवेश कर गया लेकिन बाथरूम के अंदर प्रवेश करने से पहले वह अपने बदन के सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगा हो चुका था उसकी ही तरह,,,,,,। और बाथरूम के अंदर प्रवेश करते ही वह तुरंत उसके लाल-लाल होठों को अपने होठों में भरकर उसे चुंबन करने लगा वह पागल होने लगी,,,, कल्पना की दुनिया में वह पूरी तरह से खो चुकी थी उसे फिल्म वाले हीरो का वह पूरी तरह से साथ दे रही थी कल्पना में वह हीरो उसका चुंबन करने के साथ-साथ उसकी दोनों चूचियों को अपने हाथ में लेकर दबा दबा कर मजा ले रहा था,,, बाथरूम के अंदर सुगंधा के मुंह से गरमा गरम संस्कारी की आवाज फूट रही थी वास्तविक रूप से उसकी एक ऊंगली उसकी बुर के अंदर बाहर हो रही थी और कल्पना में वह फिल्म वाले हीरो के साथ मजे लूट रही थी जिसके चलते उसका आनंद 2 गुना बढ़ता जा रहा था,,,,,,,

वह फिल्म वाला हीरो उसे चोदने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुका था वह अपने हाथ में अपने लंड को लेकर जोर जोर से मुठिया रहा था,,, सुगंधा कल्पना कर रही थी कि वह हीरो उसकी एक टांग को अपने हाथ से उठाकर अपनी कमर पर लपेट रहा है और हकीकत में वह खुद अपने आनंद को बढ़ाने के लिए अपने पैर को उठाकर नल के ऊपर रख चुकी थी और जैसे ही फिल्म वाला हीरो अपने लंड को उसकी बुर में प्रवेश करने लगा वैसे ही सुगंध अपनी दूसरी उंगली को भी अपनी बुर में डाल दी और कल्पना की दुनिया में हुआ फिल्म वाला हीरो अपने लंड को धीरे-धीरे उसकी बुर के अंदर पूरा का पूरा डाल दिया और उसकी कमर को पकड़ कर छोड़ना शुरू कर दिया और वह वास्तविक रूप से अपनी दोनों उंगलियों को अपनी बुर के अंदर बाहर करके मजा लूटने लगी,,,,।

सुगंधा की कल्पना इतनी जबरदस्त थी की वह पागल हुए जा रही थी,,, उसे ऐसा ही लग रहा था कि वह फिल्म वाला हीरो अपने मोटे तगड़े लंड से उसकी चुदाई कर रहा है लेकिन वास्तविक में वह अपनी दो उंगलियों से अपनी प्यास बुझाने में लगी हुई थी,,, देखते देखते उसे फिल्म वाले हीरो केलझटके बड़े तेजी से चलने लगे और सुगंधा की उंगलियां बड़ी तेजी से अपनी बुर के अंदर बाहर होने लगी देखते-देखते उसकी सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी,,, और उसकी कल्पना में फिल्म वाला हीरो अपने मोटे तगड़े लंड को उसके बच्चेदानी तक पहुंचा करता के पर धक्के लगा रहा था,,,,।

सुगंधा की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी और वह उसे फिल्म वाले हीरो का साथ देते हुए खुद अपनी कमर हिला रही है और देखते ही देखते बड़ी तेजी के साथ उसका पानी निकलने लगा वह झड़ने लगी,,, और जब आंख खुली और वह कल्पना की दुनिया से बाहर आई तो बाथरूम में वह केवल अकेली थी और नीचे की तरफ देखी तो उसकी बुर में उसकी दो उंगली घुसी हुई थी जिसमें से उसका मदन रस फव्वारे की तरह बाहर निकल रहा था वह इस दृश्य को देख कर एकदम शर्म से पानी पानी हो गई,,,, वह अपनी स्थिति को देखते हुए शर्म के मारे बाथरूम के दरवाजे को बंद कर ले और फिर ठंडे पानी को अपने बदन पर डालकर अपनी जवानी की गर्मी को शांत करने की कोशिश करने लगी लेकिन फिर भी भले ही वह इस समय अपनी हरकत की वजह से शर्म से पानी पानी हो रही थी लेकिन जो कुछ भी उसने अपने हाथों से की थी,, इसका एहसास उसके चेहरे पर साफ झलक रहा था जो की संतुष्टि से परिपूर्ण था,,,।
 
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सुगंधा के जीवन में रविवार का दिन किसी तूफान से काम नहीं था लेकिन यह तूफान उसके लिए बहुत से रास्ते खोलने का कारण बन चुका था वह अपने जीवन को नीरस बना चुकी थी,,,, लेकिन सुषमा की एक गलती है उसके जीवन में आशा की किरण लेकर आया था,,,,, बरसों गुजर गए थे संभोग सुख के एहसास से वह पूरी तरह से वंचित हो चुकी थी,,, पति के ज्ञान के बाद जीवन का लक्ष्य केवल अपने बच्चों का अच्छी तरह से परवरिश करना ही रह गया था अपने लिए तो वह जीना ही छोड़ दी थी,,,, बच्चों की खुशी में उसे अपनी खुशी नजर आती थी और वह हर एक कोशिश करती थी अपने बच्चों को खुश रखने का और वैसे भी वह अपने बच्चों की परवरिश में किसी तरह की कमी महसूस होने नहीं दी थी,,, और वैसे भी अपने बच्चों के परवरिश के लिए शिक्षिका की नौकरी उसके लिए काफी थी अंधेरे में यह नौकरी उसके लिए उजाले का काम कर रही थी क्योंकि अगर यह नौकरी ना होती तो शायद वह अपने पति के गुजरने के बाद अपने बच्चों की परवरिश ठीक तरह से ना कर पाती है और ऐसे हालात में वह अपने बच्चों को संस्कारी भी नहीं बन पाती क्योंकि वस्तुओं के अभाव में अक्सर बच्चे भटक जाते हैं उन्हें कोई राह दिखाई नहीं देती और ऐसे में वह गलत बच्चों का संगत भी कर लेते हैं लेकिन यह सुगंधा की शिक्षक वाली नौकरी और उसके सूझबूझ का ही नतीजा था कि उसके बच्चे अभी तक सही रास्ते पर थे लेकिन सुषमा की यह गलती के कारण उसके कदम डगमगा गए थे,,,।

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उसे गंदी फिल्म के चलते उसके दिलों दिमाग पर वासना का तूफान इस कदर से अपना असर दिख रहा था कि वह जो हरकत अभी तक नहीं की थी उसे करके वह अपने आप को तृप्त करने की पूरी कोशिश की थी और पल भर के लिए उसकी यह वासना तृप्त भी हो चुकी थी लेकिन यह तो शुरुआत थी,,,, बदन की आग ऐसी होती है कि इसे जितना भी बुझाने की कोशिश करो यह और भी ज्यादा प्रज्वलित हो जाती है और ऐसा ही सुगंधा के साथ भी हो रहा था,,, लंड के अभाव में अपनी उंगलियों को लंड की शक्ल देकर जिस तरह से सुगंधा ने अपनी कसी हुई बुर में डालकर उसी अंदर बाहर करते हुए चुदाई का सुख प्राप्त की थी,,,, वह अब और भी ज्यादा प्रज्वलित होने लगी थी वह अंदर ही अंदर परेशान हुई जा रही थी,,,, वह अच्छी तरह से जानती थी कि मर्द की जगह उंगलियां कभी भी नहीं ले सकती,,,, बिस्तर पर औरत को शरीर सुख के लिए अपनी वासना की पूर्ति के लिए उंगलियों के लिए बल्कि एक दमदार मर्द की जरूरत होती है,,,, जो अपनी बाहों में कस कर उसकी जवानी का रस पूरी तरह से नीचोड़ दे,,,।,,, लेकिन वह जानती थी कि इस तरह का सुख उसके कल्पना से पड़े था वह कल्पना में ही अपने बिस्तर पर एक मर्द का अनुभव कर सकती है बल्कि हकीकत में वह अपने बिस्तर पर किसी मर्द को लाना उचित नहीं समझ रही थी क्योंकि उसका पैसा एक शिक्षिका का था और ऐसे हालात में अगर वह किसी मर्द की संगत करती है तो बदनामी का डर बना रहता है और समाज में इज्जत जाने का भी खतरा अधिक हो जाता है और ईस तरह के खतरे को वह उठाना उचित नहीं समझ रही थी,,,।

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लेकिन वह दूसरी औरतों के बारे में भी सोच रही थी जो की मर्द की मौजूदगी में पति के होने के बावजूद भी वह दूसरे मर्दों के साथ शारीरिक संबंध बनाकर अपने आप को तृप्त करती रहती थी ऐसी ही एक औरत उसकी सह शिक्षिका थी,,, इसके बारे में उसने बहुत सी बातें सुन रखी थी कि उसका दूसरे मर्दों के साथ संबंध है और आए दिन उसका संबंध दूसरे मर्दों से बदलते ही रहता है,,, और समाज में ऐसी कहानी औरतें थी जिनका संबंध दूसरे मर्दों से था वह अपने मन में यही सोच रही थी कि उन औरतों को कैसा अनुभव होता होगा जब वह किसी गैर मर्द की बाहों में अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए बिस्तर पर ले जाती है कैसा लगता होगा कैसा महसूस होता होगा यही सब सो कर उसके बदन में अजीब सी उलझन हो रही थी,,,, और वह मन ही मन में सुषमा को ही कोस रही थी,,,, क्योंकि वह इसमें सारा दोष सुषमा का ही निकाल रही थी,,, ना सुषमा उसे फिल्म देखने के लिए अपने घर ले जाती और ना अनजाने में उसके हाथों गलत कैसेट लग जाती और ना ही वह उसे गंदी फिल्म को देखते और ना उसकी यह हालत होती,,,, जहां एक तरफ सुगंधा सुषमा को दोषी मान रही थी वही मन ही मन सुषमा की गलती को अपने लिए सुख का रास्ता खोजने का कारण भी मान रही थी,,, उसका ऐसा मानना था कि कुछ ना सही तो उंगली से ही काम तो चल जाएगा कुछ तो उसके बदन में हलचल होगी कुछ तो उसकी जवानी की उमंगे उछाल मारेंगी और ऐसा ही हो रहा था,,,,

Sugandha apni ungli se maja leti huyi



रात को खाना खाने के बाद दूरदर्शन पर आ रही सीरियल देखने के बाद अपने कमरे में जाते हैं उसके बदन में ऐंठन शुरू होने लगा,,, उसकी बुर में खुजली होने लगी उसके बदन में कसमसाहट बढ़ने लगी,,,, यह उसकी उत्तेजना की शुरुआत थी तो अपनी बिस्तर पर मत हो सोचने लगी उसे अपनी बिस्तर पर एक मर्द की जरूरत महसूस होने लगी वह अपनी एड़ियों को बिस्तर पर रगड़ने लगी उसकी जांघों के ईर्द गिर्द खून का दौरा बढने लगा,,,, उसे इस वक्त एहसास होने लगा कि इस समय उसकी बुर मे एक मोटे तगड़े लंड की जरूरत महसूस हो रही है वह पागल होने लगी वह तुरंत अपने दोनों हाथों को अपनी छतियो पर रखकर अपने खरबूजा को दबाना शुरू कर दी,,,, उसके बदन में गर्मी और उत्तेजना का संचार होने लगा,,,, पंखा तेजी से चलने के बावजूद भी उसके माथे पर पसीने की बूंदे उपसने लगी,,,, वह जोर-जोर से ब्लाउज में कैद अपनी चूचियों को दबाना शुरू कर दी और साथ ही उसके मुख से मद भरी आवाज आने लगी,,,

Sugandha





सससहहह आहहहहह ऊमममममममम ओहबहहबहह ,,,ससहहहहहह ,,,,( ऐडियो को बिस्तर पर रगड़ते हुए अपने सर को दाएं बाएं पटकते हुए वह ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी चूचियों को दबा रही थी,,,, उसके बदन में उत्तेजना के साथ-साथ आनंद की अनुभूति हो रही थी और वह इस आनंद को बढ़ाना चाहती थी अपने मजे को और भी ज्यादा उत्साहित करना चाहती थी इसलिए धीरे-धीरे अपने नाजुक उंगलियों का सहारा देकर अपने ब्लाउज का बटन खोलने लगी,,,,, यह उसे गंदी फिल्म का ही नतीजा था जो की सुगंधा अपने आप पर काबू नहीं कर पा रही थी और देखते ही देखते हो अपने ब्लाउज के बटन को खोलकर धीरे से उठी और ब्लाउज को उतार कर बिस्तर पर रख दी और साथ ही अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले गई और अपनी ब्रा का हुक खोलकर अपने ब्रा को भी अलग कर दि,,, अब उसकी दोनों चूचियां कैद से आजाद हो चुकी जिसे वह खुद अपनी हथेली में दबोच कर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दी और हद से ज्यादा बड़ी-बड़ी चूचियां उसकी खुद की हथेली में ठीक से समा नहीं पा रही थी मानो कि जैसे दो कबूतर अपनी जान बचाने के लिए फड़फड़ा रहे हो,,,,

Kalpna me sugandha or film wala hero



सुगंधा अपनी आंखों को बंद कर ली थी,,, और अपनी जवानी से भरी चुचियों के साथ खेल रही थी,,,। उसकी बेलगाम चूचियां ठीक तरह से उसकी हथेली में नहीं आ रही थी जितना वह पड़ती थी उससे ज्यादा उसकी हथेली से बाहर उमड रही थी,,, वैसे सही मायने में देखा जाए तो जिस तरह से सुगंधा जवानी से भरी हुई थी जैसे हालात में उसकी खुद की हथेली से इतना आनंद नहीं आता जितना की एक मर्दाना ताकत से भरे हुए मर्द के हाथों से उसे स्तन मर्दन करवाने में मजा आता,,,, और इस बात को अभी अच्छी तरह से जानती थी लेकिन अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही थी,,,,, देखते ही देखते सुगंधा ने अपने हाथों से अपनी चूचियों को टमाटर की तरह लाल कर उसके बदन में इतनी अधिक उत्तेजना और वासना समान हो चुका था कि वह अपनी चूची को पकड़ कर उसे अपने मुंह में डालने की कोशिश करती थी और थोड़ा सा उसके होठों से दूर उसकी निप्पल रह जाती थी और ऐसे में वह अपनी जीत बाहर निकाल कर अपनी चूची के निप्पल को चाटने का सुख प्राप्त कर ले रही थी लेकिन जैसे ही उसके जीभ का स्पर्श उसकी चूची के निप्पल से होता उसके बदन में सुरसुरी दौड़ने लगती,,,, उसकी आंखों में मदहोशी छाने लगी,,,, उसे अपने जानू के बीच की स्थिति अत्यधिक दयनीय नजर आने लगी,,,

Kalp a me sugandh or wo hero





जिसके चलते वहां जल्दी-जल्दी अपनी कमर से अपनी साड़ी को खोलना शुरू कर दी और अगले ही पल वह अपनी साड़ी को उतार कर बिस्तर के नीचे गिरा दी थी और फिर अपने पेटिकोट की डोरी खोलकर उसे भी एक झटके से उतार फेंकी,,,,, एक बार फिर उसे साफ नजर आ रहा था कि उसकी पेंटिं उसके मदन रस से पूरी तरह से भीग चुकी थी,,,, और वह बड़े ही मादक अंदाज में अपनी हथेली को अपनी बुर पर रखते हुए उसे हल्के-हल्के सहलाने लगी रगड़ने लगी पर अपनी आंखों को बंद करके एक अजीब ही दुनिया के एहसास में अपने अस्तित्व को डुबोने लगी,,,,।

Sugandha ki raseeli boor



सहहहह आहहहहहहह ऊमममममममम लगातार उसके मुख से इस तरह की आवाज़ें आ रही थी,,, उसका काहटबु उसके बदन पर बिल्कुल भी नहीं था,,, वह अपने बदन पर से अपने खुद के नियंत्रण को खो चुकी थी,,,,, उसके बदन में तूफान उठ रहा था वासना का तूफान जिसे शांत करना बेहद जरूरी था और वह जानती थी कि इस समय अपनी जवानी की तूफान पर कैसे काबू करना है इसलिए वह बैठे-बैठे अपनी पेंटिं को दोनों हाथों से पकड़कर उसे उतारने के लिए अपनी गांड को थोड़ा सा ऊपर की तरफ उठा ली और अपने हाथों को हरकत देते हुए अपनी पेंटिं को उतारने लगी और अगले ही पल उसके बदन से उसकी मखमली पहनती भी अलग हो चुकी थी और वह बिस्तर पर पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,,

Sugandha kalpna me



वह अपने जीवन काल में बहुत कम ही अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हुई थी और वह भी अपने पति के हाथों अपने हाथों से तो वह बाथरूम में भी अपने कपड़े उतार कर पूरी तरह से नंगी नहीं होती थी लेकिन सुषमा के द्वारा दिखाई गई गंदी फिल्म का असर था कि वह अपने हाथों से अपने कपड़े उतार कर दो बार नंगी हो चुकी थी एक तो बाथरूम में और दूसरा अपने खुद के कमरे में नंगी होते ही बिस्तर पर जवानी का तूफान करने लगा वह पागलों की तरह अपनी चूचियों को दबाते हुए एक हाथ से अपनी बुर को रगड़ना शुरू कर दी,,,, और एक बार फिर से उसकी कल्पना की दुनिया उजागर होने लगी,,,, फिर से उसकी कल्पनाओं में वह फिल्म वाला हीरो नजर आने लगा जो कि उसके कमरे का दरवाजा खोलकर दरवाजे पर खड़े होकर उसकी नंगी जवान को अपनी प्यासी आंखों से निहाल रहा था और कल्पना में सुगंधा उसे अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए,,, एक हाथ से अपनी चूची पकड़ कर उसे दबाते हुए और दूसरे हाथ से अपनी बुर को मसलते हुए मुस्कुराते हुए उसे अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी उसे बुला रही थी,,, वह फिल्म वाला हीरो दरवाजे पर ही खड़ा खड़ा मुस्कुरा रहा था तो सुगंध कल्पना में उसकी तरफ उंगली करके उंगली के इशारे से उसे अपनी तरफ बुलाने लगी और सुगंध का इशारा बातें ही वह फिल्म वाला हीरो पूरी तरह से बेकाबू हो गया और तुरंत कमरे में प्रवेश करते हुए अपने हाथों से दरवाजा बंद करके दरवाजे की कड़ी लगा दिया,,,,

SugandhA



वास्तविक हालत में वह अपनी बुर को अपनी हथेली से जोर-जोर से रगड़ रही थी,,, और कल्पनाओं की दुनिया में वक्त फिल्म वाला हीरो धीरे-धीरे उसके करीब आ रहा था उसके बिस्तर के करीब आ रहा था,,,, और जैसे ही वह घुटनों के बाल सुगंधा के बिस्तर पर चढ़कर आगे बढ़ने लगा सुगंध अपनी दोनों टांगों को खोलकर उंगली के इशारे से उसे अपनी बुर चाटने के लिए बोली,,, और वह फिल्म वाला हीरो सुगंध का इशारा बातें ही उसकी बात मानते हुए तुरंत उसकी दोनों टांगों के बीच आ गया और अपने प्यास होठों को उसकी बुर पर लगाकर चाटना शुरू कर दिया कल्पना की दुनिया में पूरी तरह से अपने आप को मदहोश कर चुकी सुगंधा पागल हुए जा रही थी,,, वह जोर-जोर से अपनी बुर को रगड़ रही थी,,, और कल्पना में उस फिल्म वाले हीरो से अपनी बुर चटवा रही थी,,,,।

Sugandha bistar par hero k sath



सुगंधा कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि वह इस तरह से गंदी हरकत करेगी,,,, लेकिन बदन की जरूरत है उसे मजबूर कर दिया था इस तरह की हरकत करने के लिए इसीलिए तो अपने बिस्तर पर पूरी तरह से नंगी थी,,, कमरे का दरवाजा बंद था इसलिए वह निश्चित थी और रात के 12:00 बज रहे थे उसके बच्चे भी अपने-अपने कमरे में सो रहे थे और पंखे की आवाज इतनी तेज थी कि उसके मुख से निकली हुई शिसकारी की आवाज कमरे से बाहर निकल नहीं पा रही थी,,,, सुगंधा की दोनों टांगें खुली हुई थी उसकी हथेली उसकी बुर पर थी जो कि वह जोर-जोर से रगड़ रही थी और एक हाथ से अपनी चूची को दबा रही थी और कल्पना में वह फिल्म वाला हीरो उसकी बुर को चाटते हुए हाथों पर की तरफ लाकर उसकी चूची को पकड़ कर जोर जोर से दबा रहा था,,,, जिससे सुगंधा को और भी ज्यादा आनंद की प्राप्ति हो रही थी,,,, तभी कल्पना में वह फिल्म वाला हीरो उसकी बुर से अपने मुंह को हटाकर उसकी तरफ प्यासी नजरों से देखा और अपने खड़े लंड को उसके लाल-लाल होठों पर रगड़ना शुरू कर दिया,,, जिसे सुगंधा अपने होठों को खोलकर उसे अपने मुंह में ले ली और चूसना शुरू कर दी,,,, कल्पना में भी सुगंधा को अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी वह पागल हुए जा रही थी,,,।

Sugandha or hero



और कुछ देर बाद वह फिल्म वाला हीरो उसकी दोनों टांगों के बीच घुटनों के बाल बैठ गया और अपने हाथों से उसकी कमर पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और उसकी आधी गांड उसकी जांघों पर आ गई और ऐसे में वह अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बुर में डालना शुरू कर दिया और दूसरी तरफ हकीकत में सुगंधा अपनी उंगली को अपनी बुर में प्रवेश करा दी,,, और अपनी उंगली को अंदर बाहर करने लगी और कल्पना में वह फिल्म वाला हीरो अपने लंड को उसकी बुर में अंदर बाहर करते हुए उसे चोदना शुरू कर दिया,,,

सुगंधा वास्तविक जीवन में अपनी उंगली से मजा ले रही थी और कल्पना करके उसे फिल्म वाले हीरो के लंड बुर में अंदर बाहर करवा रही थी,,,, उसे बहुत मजा आ रहा था आनंद की पराकाष्ठा पर वह पूरी तरह से पहुंच चुकी थी और देखते-देखी उसकी सांसों की गति बड़ी तेजी से चलने लगी और उसकी बुर से मदन रस का फवारा फुटने लगा,,, वह पूरी तरह से मदहोश हो गई मस्त हो गई उसके मुख से गरमा गरम सिसकारी फूट रही थी और जैसे-जैसे उसकी बुर। से पिचकारी बाहर निकल रही थी वैसे-वैसे उसकी सांसों की गति ऊपर नीचे हो रही थी,,,

वासना का तूफान शांत होने के बाद उसकी आंख खोली तो बिस्तर पर वह अकेली थी और उसकी उंगली उसकी बुर के अंदर थी वह अपनी हालत पर ही शर्मिंदा हो गई लेकिन उसके चेहरे पर संतुष्टि और मुस्कुराहट दोनों साथ नजर आ रहे थे वह,,,, वह गहरी गहरी सांस ले रही थी और गहरी सांसों के साथ-साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां भी ऊपर नीचे हो रही थी,,,,, वासना शांत होते ही वह अपने बीते हुए कल के बारे में सोचने लगी और कब नींद कि आगोश में चली गई उसे पता ही नहीं चला,,,।
 
सुगंध को अपनी हरकत पर शर्मिंदगी महसूस हो रही थी,,, जिस पर उसके दिलों दिमाग पर वासना का भूत सवार होता था तब तो उसे अपनी हरकत पूरी तरह से वाजबी लगती थी और वह अपने बदन के साथ अपनी कोमल अंगों के साथ वह सब कुछ करती थी जो एक औरत के साथ एक मर्द करता है और इसी में उसे संतुष्टि का एहसास भी होता था लेकिन जैसे ही वासना का तूफान उसके जहां से गुजरा था उसके दिलों दिमाग से बाहर निकलता था वह अपनी हरकत पर शर्म से पानी पानी हो जाती थी अपनी हरकत पर शर्मिंदगी महसूस करती थी क्योंकि वह दो जवान बच्चों की मन हो चुकी थी और अपनी ही हरकत पर अपने आप को ही दोषी मानने लगती थी क्योंकि दो बच्चों की मां होने के साथ-साथ वह पेसे से शिक्षिका थी,,, और एक शिक्षिका दूसरों को सही राह दिखाती है ना कि खुद गलत राह पर भटक जाती है और उसके साथ कुछ ऐसा हो रहा था वह अब तक तो सही रास्ते पर चल रही थी लेकिन सुषमा के द्वारा दिखाई गई गंदी फिल्म का असर उसके पूरे जिंदगी में एक अजीब सा तूफान लेकर आया था जिसके चलते वह अपनी राह भटक गई थी लेकिन वह अपने आप को संभालना चाहती थी अपने हाथों से अपनी बदन की संतुष्टि प्राप्त करके उसे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था अपने आप से ही ग्लानि महसूस हो रही थी,,, लेकिन अब इस तरह की हरकत दोबारा न करने की कसम खाकर वह वापस अपने जीवन में व्यस्त रहने लगी,,



चार-पांच दिन गुजर गए थे सुषमा से उसकी मुलाकात नहीं हुई थी सुषमा खुद उसकी आंखों के सामने आने से कतरा रही थी क्योंकि उसके मन में यही डर था कि सुगंधा क्या सोच की कि वह लोग इस तरह की फिल्में देखते हैं जबकि अनजाने में ही सब कुछ हुआ था इसमें सुषमा का भी कोई दोस्त नहीं था फिर भी शर्मिंदगी का एहसास उसे एक दूसरे से नजर मिलाने से कतरा रही थी,,,,,,, कुछ ही दिन में सब कुछ सहज हो गया था,,, सुगंधा अपना ध्यान दूसरे कामों में लगाकर रात को अपनी बिस्तर पर कोई अच्छी सी किताब पढ़ कर सो जाती थी वह किताब इसलिए पढ़ती थी ताकि उसका ध्यान दूसरी तरफ ना जाए और सब कुछ फिर से पहले जैसा ही चलने लगा था,,,।

लेकिन तृप्ति जो की पूरी तरह से जवान हो चुकी थी उसकी नजर संदीप नाम के लड़के से लड़ चुकी थी और आए दिन कभी कबार उससे मुलाकात हो जाती थी ऐसे ही एक दिन शाम ढल चुकी थी और वह ट्यूशन से घर की तरफ आ रही थी और रास्ते में संदीप उसका इंतजार कर रहा था,,, तृप्ति घर के पीछे वाले रास्ते से आ रही थी यहां पर भीड़भाड़ बहुत कम रहती है और यहां पर अंधेरा भी रहता है क्योंकि स्ट्रीट लाइट यहां पर नहीं रहती इस रास्ते से घर जल्दी पहुंच जाता था इसलिए तृप्ति कभी कबार जब देर हो जाती तो इस रास्ते का उपयोग करती थी,,,, वह बेफिक्र अकेले ही ट्यूशन से अपने घर की तरफ लौट रही थी शाम ढल जाने की वजह से अंधेरा छा चुका था लेकिन तृप्ति के मन में बिल्कुल भी भय नहीं था,,, लेकिन जैसे ही वह एक पतली गली से गुजरी की तभी उसका हाथ पकड़ कर संदीप ने अपनी तरफ खींच लिया और वह एकाएक संदीप की बाहों में चली गई,,, अपने साथ हुई इस तरह की एकाएक हरकत से तृप्ति एकदम से घबरा गई वह शोर मचाने ही वाली थी कि संदीप तुरंत उसके मुंह पर हाथ रखते हुए बोला,,,।



अरे मैं हूं संदीप,,,,

(एकाएक हुई हरकत की वजह से तृप्ति के तन-बदन में अजीब सी हलचल हो गई थी वह एकदम से घबरा गई थी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी थी,,,, और जैसे ही संदीप ने अपने हाथ को उसके मुंह से हटाया तृप्ति गुस्सा दिखाते हुए एक तमाचा उसकी गाल पर लगा दी और बोली,,,)

आइंदा इस तरह का मजाक मेरे साथ बिल्कुल भी मत करना,,,, तुम नहीं जानते कि मैं कितनी घबरा गई,,, अगर तुम्हारी जगह कोई और होता तो,,,

अरे पागल ऐसे किसी की हिम्मत है क्या की कोई इस तरह से लड़की को पकड़ ले,,,,(गाल पर पड़े तमाचे को भुलते हुए संदीप बोला क्योंकि वह जानता था कि जिस तरह की हरकत उसने किया था वह गलत था और ऐसे में किसी को भी गुस्सा आ जाएगा,,,,)

लेकिन संदीप तुम्हें इस तरह की हरकत शोभा नहीं देता इस तरह से अंधेरे में मुझे पकड़ कर गली में,,,छी,,,, मुझे तो सोच कर ही इतना गंदा लग रहा है अगर कोई नहीं देख लिया होता तो मैं तो बदनाम हो जाती,,,,

(तृप्ति घबराहट भरे श्वर में बोली अभी तक उसके दिल की धड़कन बड़ी तेजी से चल रही थी,,,)

अरे बाबा सॉरी बस मुझे नहीं मालूम था कि तुम इतना गुस्सा करोगी मैं तो तुम्हें सरप्राइज देना चाहता था,,,,



सरप्राइज ऐसा होता है सरप्राइज,,,,

अरे बाबा सॉरी कहा ना,,, आते ही गाल पर तमाचा लगा दी लेकिन इतना भी नहीं सोच रही हो कि मैं इतनी दूर से चलकर तुमसे सिर्फ मिलने के लिए आया हूं,,,,।

(संदीप की बात सुनकर तृप्ति को जैसे होश आया हूं वह एकदम से सोचने लगी कि वाकई में संदीप को तकरीबन 3 किलोमीटर दूर रहता है और इतने दूर से चलते हुए वह यहां क्या करने आया था उससे सिर्फ मिलने के लिए अपनी गलती का अहसास होते हुए तृप्ति नरमी भरे स्वर में बोली,,,)

अरे बाप रे मैं तो गुस्से ही गुस्से में भूल गई कि तुम तो काफी दूर रहते हो और यहां क्या करने के लिए आए हो,,,

कहा तो सिर्फ तुमसे मिलने के लिए,,,,

बाप रे मुझसे गलती हो गई मैं माफी चाहती हूं,,,,

(तृप्ति को अपनी गलती का एहसास हो रहा था)

कोई बात नहीं गलती मेरी ही है जिस तरह की हरकत मैंने किया हूं एक तमाचा नहीं बल्कि चार-पांच तमाचा पडना चाहिए था मैं भी उत्साहित होकर कुछ ज्यादा ही आगे बढ़ गया,,,,,

एक बार फिर सोरी कहती हूं लेकिन मिलना ही था तो कॉलेज में मिल लिए होते इतनी दूर चलकर आने की क्या जरूरत थी,,

क्या करूं तृप्ति तुमसे मिलने का बहुत मन कर रहा था इसलिए बिना सोचे समझे इधर चलाया मैं जानता था कि तुम इधर से भी घर की तरफ जाती हो,,,, इसलिए यहां से अच्छी जगह मिलने के लिए और कोई हो ही नहीं सकती थी इसलिए तुम्हारा इंतजार कर रहा था और मेरी किस्मत देखा कि आज तुम इधर से ही आ रही थी,,,।

और अगर मैं इधर से ना आ रही होती तो,,,(तृप्ति थोड़ा सा इठलाते हुए बोली,)

तो फिर तुम्हारे घर पर मिल लिया होता किताब लेने के बहाने,,,,

नाना नाना ऐसा बिल्कुल भी मत करना मेरी मम्मी बहुत सवाल पूछता है और उसे समझते देर नहीं लगी की हम दोनों के बीच कुछ चल रहा है,,,,

क्या चल रहा है तृप्ति,,,(मौका देखते ही संदीप बोल पड़ा और अपनी बात का मतलब समझते ही प्रीति शर्मा गई और संजू एक कदम आगे बढ़ते हुए उसका हाथ पकड़ लिया वैसे तो वह तृप्ति के साथ इस तरह की हरकत बिल्कुल भी नहीं करना चाहता था लेकिन मौका और दस्तूर दोनों उसके पक्ष में थे क्योंकि चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ था और वह दोनों एक पतली सी गली में थे और यहां से कोई गुजरा भी नहीं था चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था इसलिए संदीप का मन कुछ ज्यादा मचलने लगा,,, इस तरह से संदीप द्वारा अपना हाथ पकड़े जाने पर तृप्ति के बदन में अजीब सी हलचल होने लगी वह भी जानते थे कि जिस तरह का माहौल था जिस तरह से अंधेरा छाया हुआ था ऐसे माहौल में एक जवान लड़का एक जवान लड़की के साथ छेड़खानी जरूर करता है इसीलिए वह अंदर ही अंदर घबरा भी रही थी और न जाने क्यों उसकी मां उत्सव भी हो रहा था संदीप के द्वारा किसी तरह की हरकत के लिए,,,, संदीप के सवाल का जवाब देते हुए तृप्ति घबराते हुए बोली,,,)

ककककक कुछ नहीं कुछ नहीं चल रहा है हम दोनों के बीच,,,,

तुम झूठ बोल रही हो होठों पर कुछ और है और मन में कुछ और,,,

नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है,,,,

तुम झूठ बोल रही हो ,,,(ऐसा कहते हुए संदीप तृप्ति के बेहद करीब आ गया और तुरंत उसकी कमर में हाथ डालते हुए उसे अपनी तरफ एकदम से खींच लिया एक जवान लड़की के बेहद करीब रहने की वजह से संदीप का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था और वह पेट में तंबू बनाया हुआ था और जिस तरह से उसने तृप्ति को अपनी तरफ खींचकर उसे अपने बदन से सताया था संदीप का तंबू सीधा उसकी दोनों टांगों के बीच दस्तक देने लगा पहले तो प्रीति को बिल्कुल भी समझ में नहीं आया कि उसकी दोनों टांगों के बीच कौन सी कड़क चीज चुभ रही है लेकिन जैसे ही उसे इस बात का एहसास हुआ वह एकदम से शर्म से पानी पानी होने लगी,,,, उसके सांसे पल भर में ही एकदम से तेज चलने लगी,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,, और संदीप इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि उसका लंड तृप्ति की बुर के ऊपर ठोकर मार रहा है भले ही सलवार के ऊपर से क्यों ना लेकिन इस एहसास से संदीप के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी एक अद्भुत संतुष्टि का एहसास हो रहा था उसे बहुत मजा आ रहा था क्योंकि वह इस बात को तो अच्छी तरह से जानता था कि तृप्ति उसे ज्यादा कुछ करने नहीं देगी लेकिन जितना भी इस समय वह कर रहा था उसके लिए तो मुंह मांगी मुराद थी उम्मीद से ज्यादा था और तृप्ति भी कभी सोची नहीं थी कि संदीप उसके साथ इस तरह की हरकत करेगा एक मोटे तगड़े लंड की ठोकर अपनी बुर पर महसूस करते ही वह पानी पानी हो रही थी साथ में उसकी बुर भी पानी छोड़ने लगी थी,,,,,, तृप्ति खामोश हो चुकी थी उससे कुछ कहा नहीं जा रहा था वह पूरी तरह से संदीप की बाहों में थी उसकी कमर पर संदीप का मजबूत हाथ था और इस समय तृप्ति को खामोश देखकर वह अपने दोनों हथेलियां को उसके उभरे हुए नितंबों पर रख दिया था और जैसे ही उसने अपनी हथेली को तृप्ति के नितंबों पर रखकर उसे हल्का सा तब पहुंचा था तृप्ति पूरी तरह से मदहोश हो गई थी उसके बदन में सुरसुराहट से दौड़ने लगी थी उसकी सांसे ऊपर नीचे हो गई थी वह कुछ बोल सकते में सक्षम नहीं थी और इसी का फायदा उठाते हुए संदीप धीरे से बोला,,,)

हम दोनों के बीच प्यार परत रहा है तुम मुझसे बहुत प्यार करती हो और मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं तृप्ति मैं तुम्हारे बिना जी नहीं सकता,,,,।(और इतना कहने के साथ ही संदीप उत्साहित और उत्तेजित होकर तुरंत उसके लाल होठों पर अपने होंठ रख दिया और उसके होठों का चुंबन लेने लगा उसके होठों का रस पीने लगा जीवन में यह तृप्ति का पहला चुंबन था इसलिए उसके बदन में झटका सा लगने लगा था उसके बदन में सुरसुराहट से दौड़ने लगी थी,,, लेकिन संदीप कई बार लड़कियों के होठों का चुंबन ले चुका था इसलिए वह लड़कियों को होंठों का रस पीना अच्छी तरह से जानता था और ऐसे माहौल में लड़कियों के अंगों से खेलना भी जानता था,,, संदीप के चुंबन से तृप्ति पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है लेकिन जो कुछ भी हो रहा था उसे आनंद की अनुमति हो रही थी उसी का फायदा उठाते हुए संदीप दोनों हाथों से खसखस के उसकी गोल-गोल गांड को दबा रहा था इसे दबाने में उसे अद्भुत सुख की प्राप्ति हो रही थी तभी वह इस पल को पूरी तरह से जी लेना चाहता था और आगे से अपने लंड को जो की तंबू बना हुआ था वह सलवार के ऊपर से उसकी बुर पर रगड़ रहा था और ऐसा करते हुए वह एक हाथ ऊपर की तरफ ले आया और उसके संतरों को हाथ में लेकर दबाना शुरू कर दिया वह अपनी हरकतों से तृप्ति को पूरी तरह से मदहोश कर देना चाहता था और तृप्ति संदीप की हरकत से पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी उसकी आंखों में चार बोतलों का नशा छा रहा था उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है,, उसे अद्भुत शांति अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी वह मदहोश हुए जा रही थी संदीप अपनी हरकतों को पूरी तरह से जारी रखते हुए उसके अंगों से खेल रहा था,,,,।

तृप्ति की चूची दबाते हुए एक हाथ से उसकी गोल गोल गांड को दबाते हुए और साथ ही उसके लाल-लाल होठों का रसपान करते हुए नीचे से जो वह अपने तंबू से उसके बुरे पर हरकत कर रहा था वह पूरी तरह से एक जवान लड़की के लिए पागल कर देने वाली हरकत थी,,,, इस तरह की हरकत का एहसास तृप्ति को पहले बिल्कुल भी नहीं था इसलिए वह पूरी तरह से पानी पानी हो रही थी और उसकी बुर पानी छोड़ रही थी जिसके चलते उसकी पेंटिं गीली हो रही थी,,,,, तृप्ति को आनंद के सागर में डूबता हुआ देखकर संदीप की हिम्मत बढ़ने लगी और उसकी हरकत भी बढ़ने लगी वह धीरे से अपना हाथ उसकी सलवार के अंदर डालना शुरू किया लेकिन इस बार तृप्ति उसे रोकते हुए अपना हाथ उसके हाथ पर रखकर कस के पड़े दे लेकिन संदीप बहुत चालाक था वह जल्दी से अपनी हथेली को उसकी सलवार के अंदर डाल दिया और पेंटी के ऊपर से ही अपनी हथेली को उसकी बुर पर रखकर उसे कस के उत्तेजना के मारे अपनी हथेली में दबोच लिया,,,,, यह हरकत तृप्ति के लिए उत्तेजना से जानलेवा थी वह पूरी तरह से मस्त हो गई तृप्ति संदीप को इस तरह की हरकत करने देना नहीं चाहती थी लेकिन वह अपने बदन के जोश और उसमें आ रहे बदलाव के आगे पूरी तरह से मजबूर हो चुकी थी,,,, संदीप के हाथ में तो गुलाब जामुन आ गया था वह जोर-जोर से पेंटी के ऊपर से ही उसकी बुर को रगड़ रहा था मसल रहा था और उसकी गर्माहट का एहसास अपनी हथेली पर भी महसूस कर रहा था लेकिन संदीप अपनी हरकत को और आगे बढ़ता है इससे पहले ही दोनों के कानों में गाड़ी के होरन की आवाज गुंजने लगी जोकी दूर से आ रही थी ,,, और तृप्ति को जैसे एकदम से होश आया हो वह तुरंत संदीप से अलग होने लगी और संदीप भी मौके की नजाकत को देखते हुए उसे अपनी बाहों की कैद से आजाद कर दिया लेकिन मोटरसाइकिल के हेडलाइट का उजाला दोनों के चेहरे पर पड़ता है इससे पहले ही संदीप ने उसका हाथ पकड़ कर पतली गली में थोड़ा सा और अंदर लेकर चला गया और मोटरसाइकिल गुजर गई लेकिन साथ ही तृप्ति के दीलो दिमाग से वासना का भूत भी उतर गया,,, वह तुरंत संदीप से हाथ छुड़ाकर गली से बाहर निकली और बिना कुछ बोल जल्दी-जल्दी अपने घर की तरफ जाने लगी संदीप वहीं खड़ा उसे आवाज देकर है लेकिन वह पीछे मुड़कर देखी भी नहीं और अपने घर पहुंच गई,,,,।

अपने घर पर पहुंचते ही तृप्ति कोई इस बात का एहसास हुआ कि वह बहुत बड़ी गलती करने जा रही थी आज उसके साथ बहुत कुछ हो सकता था आज संदीप उसके साथ मनमानी कर सकता था क्योंकि वह भी उसका विरोध बिल्कुल भी नहीं कर रही थी संदीप की हरकत का वह भी मजा ले रही थी,,,, वह तुरंत बाथरूम के अंदर गई,,, और अपनी सलवार की थोड़ी खोल कर सलवार उतार कर अपनी पैंटी को देखने लगी जो की पूरी तरह से गीली हो चुकी है ऐसा उसके साथ पहली बार हुआ था कि उसकी पेंटिं इस तरह की हरकत से गीली हो गई थी वह तुरंत अपनी पेंटि उतार कर पेशाब करके अपनी बुर पानी से धोने के बाद बाथरूम से बाहर आ गई और अपनी मां के काम में हाथ बंटाने लगी,,,,,,।

कॉलेज में वह संदीप से बात भी नहीं करना चाहती थी क्योंकि उसे नजर मिलाने में उसे शर्म महसूस हो रही थी,,, उसके मन में इस बात की भी खबर आरती की अगर उसे दिन कोई उसे देख लेता तो फिर क्या होता वह बदनाम हो जाती है घर से निकलना मुश्किल हो जाता और उसकी मां का भी नाम खराब हो जाता इस बारे में अगर उसकी मां को पता चलता तो फिर क्या होता उसकी मां भी शर्मिंदा हो जाती घर से निकलने में उसे भी शरम महसूस होती,,, यही सब सो कर वह संदीप से दूरी बनाकर चल रही थी और संदीप उससे बात करना चाहता था लेकिन प्रीति उससे बात के लिए तैयार ही नहीं थी,,,

ऐसे ही एक दिन सब्जी लेते हुए सुगंधा की मुलाकात सुषमा से हो ही गई वैसे तो सुषमा उसकी पड़ोसी थी लेकिन फिर भी उसे दिन से वह दोनों एक दूसरे से मिले नहीं थे लेकिन आज सब्जी मंडी में दोनों का सामना होते ही सुगंधा नाराजगी दिखाते हुए सुषमा से बोली,,,।

सुषमा तूने तो एकदम हद कर दी वह तो सोच तेरे हाथ में वह कैसेट आ गया अगर जरा सोच वह कैसे अगर कुसुम के हाथ में आ गया होता तब क्या होता अगर वह भूल से भी उसे फिल्म को देख लेती तो कुछ समझ में आता है कि इसका असर उसके ऊपर कैसा होता,,,(सुषमा की लड़की का नाम कुसुम)

तू सही कह रही है सुगंधा मैं भी यही सोच कर हैरान हूं अच्छा हुआ कि कुसुम के हाथ में यह सब नहीं पड़ा वरना गजब हो जाता वैसे भी मैं कुसुम के पापा से पूछी थी कि इस तरह की केशट तुम क्यों लाए तो,,, बोलने लगे की हम दोनों को देखने के लिए लेकिन उन्हें समय नहीं मिला और मुझे बताना भूल गए और सच कहूं तो सुगंधा मैं जिस दिन उन्हें बताई उसी रात को उन्होंने फिर से वही फिल्म लगे और हम दोनों वही फिल्म देखें और उसके बाद तो कुछ उनके पापा ने रात भर मुझे जगा कर रखा मेरी तो कमर दुखने लगी,,,(सुषमा हंसते-हंसते बात भी रही थी और शर्मा भी रही थी लेकिन उसके हंसी में एक आनंद छिपा हुआ था जो उसने खुद महसूस की थी लेकिन उसकी हंसी उसका आनंद देखकर सुगंधा के दिल में शूल चुभने लगा ,,,, उसे सुषमा पर गुस्सा आने लगा और वह भी इस बात पर की इतनी गंदी फिल्म दिखा कर वह तो अपने पति के साथ मजा लूट रही थी लेकिन उसका क्या वह किसके साथ मजा लूट थी और इस फिल्म के चलते वहां बिस्तर पर करवट बदलकर रात गुजरने लगी थी और अपने हाथों की हरकत से अपने आप को संतुष्ट करने लगी थी वह तो अच्छा हुआ कि अपना ध्यान वह दूसरे काम में लगाकर अपनी गलती पर अपनी भावनाओं पर पर्दा डाल दी थी लेकिन आज सुषमा के मुंह से उसके आनंद की बात सुनकर ना जाने क्यों सुगंधा के मन में भी अजीब सी हलचल होने लगी और वहां से वह बिना कुछ बोले खरीदी करने के बहाने है गई क्योंकि न जाने क्यों सुषमा से नजर मिलाने में उसे शर्म महसूस होने लगी थी,,,। सब्जी खरीद कर अपने बच्चों के लिए समोसे और जलेबी खरीद कर वह घर पहुंच गई थी,,,।
 
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