Incest मजबूरी या जरूरत - Page 21 - SexBaba
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Incest मजबूरी या जरूरत

इस कहानी का अब तक का सफर बहुत ही रोमांचक रहा मुझे पूरा उम्मीद हैकी आखरी प्रकरण भी आप लोगों को बहुतपसंद आएगा

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आराधना और अशोक का तलाक हो चुका था दोनों अब अपनी जिंदगी में आजाद हो चुके थे ,,, जितनी खुशी अशोक को थी आराधना से अलग होने की उससे ज्यादा खुशी आराधना को थी अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने के लिए अब वह अपने बच्चों के साथ हंसी खुशी से सारा जीवन बिता सकती थी क्योंकि उसके माथे से अशोक नाम का एक बोझ हट गया था। आराधना के साथ-साथ उसके दोनों बच्चे संजू और मोहिनी भी बहुत खुश थे। और इस पल को आनंददायक बनाने के लिए मोहिनी नहीं प्रस्ताव रखा था कि इस पल को यादगार बनाने के लिए कुछ ऐसा करना होगा जिसे जिंदगी भर याद रहे और इसका सुझाव उसने खुद ही दी थी सुहागरात मनाने के लिए क्योंकि वैसे भी औरत और आदमी के जीवन में सुहागरात का जो दीन होता है वह बेहद अहम होता है।

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मोहिनी के इस प्रस्ताव को संयुक्त और सहर्ष स्वीकार कर लिया था लेकिन इस प्रस्ताव के बारे में सुनते ही आराधना के गाल शर्म से लाल हो चुके थे वैसे तो उसके पास अपने बच्चों से मोहिनी से कुछ छुपाने लायक बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि तीनों मिलकर आपस में मजा लेते थे‌। लेकिन मोहिनी के मानने पर आराधना भी उसकी जीद के आगे झुक गई थी, वैसे तो सुहागरात के बारे में सुनते ही आराधना के भी अरमान मचल गए थे जो खेल सुहागरात के दिन किया जाता है वह खेल तो वह दोनों रोज खेला करते थे लेकिन सुहागरात का महत्व कुछ और ही था इस बात को आराधना भी अच्छी तरह से जानती थी इसलिए उसके मन में भी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी।

तीनों घर में एक ही जगह पर बैठे हुए थे मोहिनी के प्रस्ताव के बारे में सुनकर आराधना बोली।

देख मोहिनी तू जो कह रही है सुनने में तो अच्छा लग रहा है लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि सब मैनेज कैसे होगा।

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हां मम्मी ठीक कह रही है वैसे भी सुहागरात के दिन चुदाई होती है और वह तो मैं रोज मम्मी और तेरी करते आ रहा हूं इसमें कुछ खास नया मुझे नहीं लग रहा है। (संजू भी संदेह जताते हुए बोला)

अरे तुम दोनों पागल हो गए हो शादी के पहले प्रेमिका क्या एक दूसरे के साथ संबंध नहीं बनाते हैं क्या दोनों चुदाई का मजा नहीं लेते हैं लेकिन फिर भी शादी वाली रात पर सुहागरात के दिन वह दोनों कितना मजा लेते हैं क्योंकि सुहागरात का दिन ही ऐसा होता है। (मोहिनी दोनों को समझाते हुए बोली)

लेकिन मोहिनी उसके लिए खास तैयारी होती है लड़की दुल्हन के जोड़े में फूलों से सजी सेज पर बैठकर अपने पति का इंतजार करती है,,, लड़का दूल्हे की तरह सज कर कमरे में जाता है अपनी बीवी का घूंघट उठाता है यह सब उसके लिए पहली बार होता है लेकिन मेरे और मम्मी के बीच तो सब कुछ हो चुका है घूंघट उठाने के साथ साथ न जाने कितनी बार मैंने मम्मी की साड़ी कमर तक उठाकर चुदाई किया है।

यार तुम दोनों मुझे पागल कर दोगे तुम दोनों बस तैयार रहो बाकी सब मैं संभाल लूंगी।

लेकिन सुहागरात मनाना कब है,,(आराधना मोहिनी की तरफ देखते हुए बोली)

रविवार को,,,

क्या रविवार को परसों ही तो रविवार है। (इस बार संजू आश्चर्यजताते हुए बोला,,,)

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यार भाई तू तो ऐसा कह रहा है जैसे तेरा खड़ा ही नहीं होता अरे बुद्धू सुहागरात के दिन सबसे ज्यादा जरूरी होता है दूल्हे का खड़ा होना और दुल्हन का टांग फैलाना इसमें कोई ज्यादा तैयारी नहीं करनी पड़ती।

(मोहिनी किस तरह की बातें सुनकर आराधना बोली)

तू भी अब बड़ी हो गई है जल्दी ही तेरे हाथ पीले करवाने पड़ेंगे।

बड़ी तो हो गई है मम्मी तभी तो मेरा मोटा और लंबा लंड इतने आराम से ले लेती है।

अच्छा तो तुम दोनों मेरा पत्ता काट कर खुद मजा लूटना चाहते हो इतनी जल्दी में जाने वाली नहीं हूं।

तब क्या करेगी दिन रात अपने भाई के लंड पर चढ़ी रहेगी क्या,,!(आराधना चुटकी लेते हुए बोली)

तो क्या मुझे तो भाई के लंड की सवारी बहुत अच्छी लगती है।

और मुझे भी तुझे घोड़ी बनाने में बहुत मजा आता है मेरी प्यारी मोहिनी,,,(कुर्ती के ऊपर से उसकी चूची को दबाते हुए संजू बोला)

घोड़ा नहीं है तु सांड है,,, बहुत दम है तेरे में।

अभी तो तुम दोनों को घोड़ी बनाने में बहुत मजा आता है,, मेरे लंड में इतना दम नहीं होता तो तुम दोनों मेरे आगे थोड़ी झुकती।

(संजू के इतना कहते हैं तीनों हंसने लगे,,,)

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अच्छा चलो जाने दो मैं चाहता हूं की सुहागरात वाली दिन मम्मी लाल रंग की चड्डी और ब्रा पहने और तू भी मोहिनी लाल रंग की चड्डी और ब्रा में तुम दोनों बहुत ही ज्यादा खूबसूरत लगोगे।

लेकिन भाई जालीदार,,,।

हां मोहिनी तो सच कह रही है जालीदार ब्रा पेंटी में तो सच में तुम दोनों कयामत लगोगे।

नहीं नहीं जालीदार पहनने में मुझे शर्म आती है। (शर्म के मारे लाल होते हुए आराधना बोली)

अच्छा मेरी रानी जालीदार चड्डी पहनने में शर्म आती है और चड्डी उतार कर नंगी हो जाने में शर्म नहीं आती।

संजू तु पागल हो गया है।

मैं तो पागल हो ही गया हूं मेरी जान,,,(आराधना को अपनी बाहों में भरते हुए बोला यह देखकर मोहिनी बोली)

बस बस भाई यही शुरू मत हो जाना।

हाए तुम दोनों को देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है और फिर दिन देखा है ना रात और ना ही कोई जगह बस मन करता है कि तुम दोनों की गुलाबी चूत में डालकर पड़ा रहुं।

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भाई तेरी बात सुनकर तो मेरी चूत पानी छोड़ रही है। और मुझे पूरा यकीन है की मम्मी की भी छूट पानी छोड़ रही होगी।

चल रहने दे ऐसा कुछ भी नहीं है,,(आराधना इतराते हुए बोली)

तो दिखा दो साड़ी उठाकर कि तुम्हारी चूत पानी छोड़ रही है कि नहीं।(अपनी मां की साड़ी उठाने की कोशिश करते हुए मोहिनी बोली)

हां मम्मी दिखा दो ना क्योंकि मेरा भी लंड खड़ा हो गया है तो जरूर तुम्हारी भी चुत पानी छोड़ रही होगी।

चल रहने दे मैं नहाने जा रही हूं आज गर्मी कुछ ज्यादा ही है।

तुम्हारी जवानी की गर्मी है मम्मी।

धत्,,,, तू पक्का मादरचोद हो गया है।

तू भी तो छिनार हो गई है रानी।

(संजू के मुंह से छिनार शब्द सुनते ही आराधना का मुंह एकदम से खुला का खुला रहेगा लेकिन अपने बेटे के द्वारा दी गई है गाली उसे अच्छी लग रही थी।)

हां भाई मम्मी तो एकदम छिनार हो गई है

मोहिनी मारूंगी तुझे,,, तू भी शुरू पड़ गई,,, मैं कौन सा दूसरों से चुदवाती हूं अपने बेटे से ही तो चुदवाती हुं। और तू भी तो छिनार हो गई है।

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हां भाई का ले लेकर भाई के मोटे लंड में मेरी चूत को फैला दिया है पता नहीं मेरा पति जब इसमें डालेगा तो क्या सोचेगा।

कुछ नहीं सोचेगा बस तू इतना करना की जरूरत तेरी चूत में डाले तो तू जोर-जोर से चिल्लाना उसे ऐसा ही लगेगा की पहली बार चुदवा रही है।

(आराधना कितना कहते हैं तीनों जोर-जोर से हंसने लगे..)

अच्छा जल्दी से तैयार हो जाओ हमें खरीदी करने जाना है।

खरीदी करने,,,(आराधना आश्चर्य से बोली)

अरे तुम दोनों के लिए लाल लाल चड्डी और ब्रा खरीदना है ना।

हां भाई मजा आ जाएगा।

लेकिन अभी ,,कल भी तो चल सकते हैं। (आराधना बोली)

काल करें सो आज कर और आज करे सो अब,,, बस अब जल्दी से फटाफट तैयार हो जाओ आज हम लोग एंजॉय करने चलेंगे।

लेकिन मुझे तो नहाना है।

मुझे भी,,,,(मोहिनी और आराधना दोनों एक साथ बोली तो संजू बोला)

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तब मैं क्या करूंगा मैं भी नहा लेता हूं लेकिन आज हम तीनों बाथरूम के बाहर एक साथ नहाएंगे,,,

एक साथ,,,,(आराधना आश्चर्य जताते हुए बोली)

हां मम्मी,,, बहुत मजा आएगा,,,,

बस फिर क्या है देर किस बात की कपड़े उतारना शुरू करो रुको मैं पहले दरवाजे की कड़ी तो लगा लूं,,,(सही संजू दरवाजे की तरफ आगे बढ़ गया और कड़ी लगाकर दरवाजे को बंद कर दिया ताकि कोई आ ना सके।)

शुरुआत में ही करती हूं,,,,(ऐसा कहते हुए मोहिनी अपनी कमीज को दोनों हाथों से पकड़ कर अपने हाथ को ऊपर की तरफ उठने लगी और देखते ही देखते वह अपनी कमीज को उतार फेंकी और फिर अपनी सलवार की डोरी खोलने लगी,,, यह सब संजू और उसके परिवार के लिए रोज का था लेकिन हर बार एक नया उमंग देखने को मिलता था। जो कि इस समय भी बरकरार था मां बेटे दोनों मोहिनी की तरफ देख रहे थे और मोहिनी पूरी तरह से बेशर्म होकर अपनी सलवार की डोरी खोल रही थी और अगले ही पल मुस्कुराते हुए वह अपनी उंगलियों को हरकत देते हुए डोरी को खींच ली और अगले ही पल सलवार की डोरी एकदम से खुल गई,,, और फिर मोहिनी सलवार को भी निकाल फेंकी इस समय वह अपनी मम्मी और अपने बड़े भाई के सामने ब्रा और पेटी में थी उसकी मदमस्त जवानी एकदम खुली हुई थी,, ।

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बेशर्मी की सारी हदें पार कर चुकी आराधना ना जाने क्यों इस समय शर्म महसूस कर रही थी,, अपनी मां को इस तरह से शरमाता हुआ देखकर संजू आगे बड़ा और बोला,,।

लगता है मुझे ही तुम्हारे कपड़े उतारने पड़ेंगे।(और इतना कहने के साथ ही संजू अपनी मां की साड़ी को कंधे पर से पकड़ कर उसे कंधे से नीचे उतार दिया और फिर उसकी साड़ी को खोलना शुरू कर दिया आराधना उसे बिल्कुल भी रोकने की कोशिश नहीं कर रही थी उसे भी अच्छा लग रहा था और देखते ही देखते संजू अपनी मां के बदन पर से साड़ी को उतार कर वही नीचे जमीन पर फेंक दिया,,, मोहिनी खड़ी होकर अपने भाई और अपनी मां की हरकत को देखकर मुस्कुरा रही थी संजू ठीक अपनी मां के पीछे खड़ा होकर उसे बाहों में लिए हुए ब्लाउज के ऊपर से उसकी बड़ी-बड़ी चूची पर दबाता हुआ उसके गर्दन पर चुंबन करने लगा जिससे आराधना एकदम से मचल उठी अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूची को देखकर मोहीनी बोली,,।)

हाए न जाने कब मेरी चूचियां तुम्हारे जैसी बड़ी-बड़ी होगी जिस दिन बड़ी होगी मजा आ जाएगा,,,।

भाई मेहनत तो कर रहा है देखना एक दिन बड़ी हो जाएगी,,,(आराधना अपने बेटे की बाहों में मचलते हुए बोली,,,)

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सहहहह,,, मम्मी तुम्हारी चूचियां भी बड़ी होने में बहुत समय ली है तभी तो आज इतनी रसेदार हो गई है,,,,(संजू अपनी मां के ब्लाउज के बटन को खोलते हुए बोला,,,)

सच कह रहा है तू,,,, मेरी चूचियां बड़ी होने में बहुत समय ली है लेकिन जब से तेरे हाथ में आई है तब से कुछ ज्यादा ही निखर गई है,,,(अपनी बड़ी-बड़ी गांड के बीचों बीच अपने बेटे के लंड की चुभन को महसूस करते हुए आराधना बोली,,, और देखते ही देखते संजू अपने मां के ब्लाउज के सारे बटन को खोल दिया और ब्लाउज के दोनों पट को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे पीछे की तरफ खींचते हुए उसकी बाहों में से बाहर निकलने लगा और आराधना भी अपने बेटे की मदद करते हुए अपने दोनों बांहों को पीछे की तरफ फैला दी और संजू ब्लाउज को उतार कर नीचे जमीन पर फेंक दिया और फिर ब्रा के ऊपर से ही एक बार दोनों चूचियों को पकड़ कर कर से दबाते हुए अपनी कमर को आगे की तरफ ठैल कर अपने खड़े लंड को पेटिकोट के ऊपर से ही उसकी गांड में घुसाने का प्रयत्न करने लगा वह पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था,,, संजू की उत्तेजना एकदम साफ झलक रही थी यह देखकर मोहिनी बोली,,।

भाई तू तो एकदम चुदवासा हो गया है।

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क्या करूं मोहीनी मम्मी की जवानी देखकर मुझे बर्दाश्त नहीं होता,,,,।

सहहहह आहहहहह,, और मुझे यह तेरे,,,(अपना एक हाथ पीछे की तरफ ले जाकर पेट के ऊपर से ही संजू के लंड को पकड़ते हुए) लंड की चुभन बर्दाश्त नहीं हो रही है।

कहो तो निकाल कर डाल दु तुम्हारी चूत में,,,,(अपनी हथेली को पेटिकोट के ऊपर से ही अपनी मां की चूत पर रखते हुए बोला।)

तेरा मन करेगा तो मेरे मन करने पर भी तु कहां मानने वाला है।

बात तो सही है मेरी रानी,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह अपनी मां की पेटिकोट की डोरी को उंगलियों से पकड़ लिया,,, और उसे एक झटके से खींच दिया आराधना की पेटिकोट उसकी कमर पर एकदम से ढीली पड़ गई और संजू अपने दोनों हाथों की उंगलियों को उसकी पेटिकोट के अंदर की तरफ डालकर पेटीकोट को पूरी तरह से ढीली कर दिया और उसे कमर से ही नीचे छोड़ दिया और उसकी पेटिकोट खूबसूरत नाटक की प्रस्तुति करते हुए पर्दे की तरह नीचे जमीन पर गिर गया। और आराधना के बदन पर केवल बराबर पेटी रह गई सचमुच में पेटी आगे की तरफ पूरी तरह से गीली थी यह देखकर मोहिनी बोली।)

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देखो मम्मी, (उंगली से अपनी मां की पेटी की तरफ इशारा करते हुए) कह रही थी ना कि तुम्हारी चूत पानी छोड़ रही है देखो पूरा गीला हो गया है।

(मोहिनी की बात सुनते ही आराधना अपनी पैंटी की तरफ अच्छी सचमुच में उसकी पेंटिं पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और अपनी हालत को देखकर वह शर्म से पानी पानी हो गई,,,, संजू पूरी तरह से मस्ती के मूड में आ चुका था,,, इसलिए एक झटके से अपनीहथेली को अपनी मां की चूत वाली बात पर रखकर पेटी सहित वह उत्तेजना से उसे अपनी हथेली में दबोच लिया उसकी हरकत पर आराधना एकदम से कसमसा गई,,, यह सब देखकर मोहिनी की भी हालत खराब हो रही थी उसकी भी छूट पानी छोड़ रही थी क्योंकि उसके भी पेंटिं के आगे वाला भाग गीला हो रहा था जिस पर नजर पड़ते ही आराधना बोली।)

तू भी तो पानी छोड़ रही है रे,,,

यह तो होना ही था मम्मी,, जब मां बेटे इस तरह की हरकत करेंगे तो देखने वाले का तो अपनी ही छूटेगा,,,(और इतना कहते हुए अपने दोनों हाथों के पीछे की तरफ ले जाकर अपनी ब्रा का हुक खुद ही खोलने लगी,,, और देखते ही देखते हो अपनी ब्रा को उतार कर नीचे फेंक दी उसकी छाती पर कई हुई मौसंबी बहुत खूबसूरत लग रही थी जिस पर नजर पडते ही संजू के बदन में मदहोशी जाने लगी और वह तुरंत अपनी मां की ब्रा को नीचे से पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठा दिया और उसकी पपैया जैसी चूचियां एकदम से बाहर निकल गई। और फिर संजू उसे अपनी दोनों हथेली में भरकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया संजू से दबा दबा कर पल भर में ही टमाटर की तरह लाल कर दिया चूची दबवाने और मसलवाने की उत्तेजना आराधना के चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था उसकी आंखें उत्तेजना के मारे बंद हो चुकी थी और चेहरा सुर्ख लाल हो चुका था।

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संजू से उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी वह तुरंत अपनी मां की ब्रा का हुक खोलकर ब्रा को भी उतार फेंका,,, अब आराधना के बदन पर केवल उसकी छोटी सी पेंटिं रह गई थी और संजू ने उसे भी जल्दी उतार कर अपनी मां को पूरी तरह से नंगी कर दिया,,, दूसरी तरफ मोहिनी खुद अपने हाथों से अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो चुकी थी बाथरूम के बाहर मां बेटी दोनों पूरी तरह से नग्न अवस्था में थे लेकिन संजू के बदन पर अभी भी कपड़े थे इसलिए आराधना बोली,,,।

हम दोनों को तो नंगी करवा दिया लेकिन खुद कपड़े पहना हुआ है।

यह बात है लो अभी उतार देता हूं,,,(और ऐसा कहते हुए संजू अपने बदन से कपड़ों को उतारकर वह भी पूरी तरह से नंगा हो गया इस समय मां बेटी और संजू तीनों संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में नहाने जा रहे थे और वह भी बाथरुम के बाहर,,, बाथरूम के बाहर क्योंकि बड़ा सा पानी का ड्रम रखा हुआ था जिसमें पानी भरा हुआ था और उसी में से तीनों को नहाना भी था लेकिन इससे पहले तीनों वासना और मदहोशी में नहा रहे थे,,, अपनी मां और बहन की तरह संजू भी अपने सारे कपड़े उतार कर पूरी तरह से नंगा हो चुका था अपनी मां की मदहोश जवानी देखकर उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था जो कि एकदम से टनटनाया हुआ था जिसे देखते ही मां बेटी दोनों की चूत से पानी झरने लगा,,,, संजू दोनों की मदहोशी बढ़ाते हुए अपने लंड को अपने हाथ में लेकर ऊपर नीचे करके हिला रहा था और हिलने पर उसका लंड और भी ज्यादा ताकतवर नजर आ रहा था और संजू की हरकत देखकर मां बेटी दोनों को बिल्कुल भी सब्र नहीं हुआ और दोनों तुरंत उसके पास आकर घुटनों के बल बैठ गए,,,।

संजू जानता था कि दोनों रंडियों के साथ क्या करना है वह अपने लंड को अपनी मां के गाल पर रगड़ते हुए बोला,,।

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अब देखना मैं तुम दोनों छिनार को कैसे मस्त करता हूं बारी बारी से तुम दोनों मेरे लंड को मुंह में लेकर चुसो,,,(ऐसा कहते हुए अपनी मां की गल से हटकर वह अपने लंड के मोटे सुपाडे को अपनी बहन के लाल लाल होठों पर रगड़ने लगा,, मोहिनी पूरी तरह से मस्त हो गई उसकी आंखों में चार बोतलों का नशा छाने लगा वह तुरंत अपनी लाल लाल होठों को खोलकर अपने भाई के आलू बुखारे जैसे बड़े सुपाड़े को मुंह में भरकर लॉलीपॉप की तरह चूसना शुरू कर दी,,, यह देखकर आराधना मस्त होते हुए तुरंत थोड़ा सा अपने होठों को नीचे की तरफ ले गई और अपने बेटे के दोनों गोटियों को अपने मुंह में भर ली संजू तो अपनी मां की हरकत पर पूरी तरह से मत हो गया और उत्तेजना के मारे अपनी कमर को एकदम आगे की तरफ ठेल दिया जिसकी वजह से मोहिनी के मुंह में उसका पूरा का पूरा लंड उसके गले तक उतर गया,,, संजू को अपनी मां से इस तरह की उम्मीद नहीं थी और ऐसा पहली बार हुआ था कि उसकी मां उसके दोनों गोटे को बारी-बारी से मुंह में लेकर चूस रही थी। संजू के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज फूट रही थी।

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सहहहह आहहहहहह ओहहहह रंडीयो ,,,, तुम दोनों तो मुझे पागल कर दोगे,,, भोसड़ा चोदी आराधना यह तो क्या कर रही है रे साली हराम जादी तूतो मेरी जान ले लेगी,,, आहहहहह,,, ऊमममममममम,,,(अपनी मां और बहन दोनों को गंदी-गंदी गालियां देता हुआ संजू होले होले से अपनी कमर को आगे पीछे कर रहा था संजू के मुंह से निकलने वाली गली मां बहन दोनों को इतनी अच्छी लग रही थी कि वह दोनों और ज्यादा उत्तेजित हुए जा रही थी मोहिनी तो बार-बार सुपाड़े पर अपनी जीभ घूमा रही थी।

अभी दोपहर का समय था गर्मी का महीना होने की वजह से मौसम चिलचिला रहा था ऐसे में लोग अपने-अपने घरों में आराम कर रहे थे लेकिन संजू अपनी मां और अपनी बहन के साथ बाथरूम के बाहर अपनी जवानी की प्यास बुझाने में लगा हुआ था। तीनों पसीने से तरबतर हो चुके थे एक पूरा हीटर मुंह मैं लेकर गरम हो रही थी और दूसरी ट्रांसफार्मर से खेल रही थी थोड़ी-थोड़ी देर पर दोनों अपनी जगह बदल ले रहे थे अपना स्थान नहीं बल्कि संजू के लंड को अपने मुंह में बारी-बारी से लेकर चुस रहे थे। कभी बेटी मुंह में लेती तो कभी मां,,,लेकिन बारी-बारीसे दोनों मजा लूट रहे थे संजू तोऐसा लग रहा था कि जैसे आसमान में उड़ रहा हूं वह पूरी तरह से मदहोश हो चुका था तभी उसने हाथ में मग लेकर ड्रम में से पानी निकाला और उसे अपनी मां और बहन दोनों पर डालने लगा लेकिन दोनों पर पानी डालने का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा था दोनों अपने तरीके से अपने-अपने कार्य में जुटे हुए थे संजू भी दो-चार मां अपने बदन पर डालकर ठंडा होने की कोशिश करने लगा लेकिन अपनी मां और बहन दोनों की जवानी की गर्मी से पूरी तरह से गर्म किए हुए थे।

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कुछ देर तक तीनों इसी तरह से मजा लूटते रहे,,, इसके बाद संजू अपने लंड को अपनी मां के मुंह में से बाहर निकाला तो देखा वह पूरी तरह से तैयार हो चुका था चूत की सफर के लिए लेकिन अभी कुछ समय बाकी था वह तुरंत दोनों को बाहों से पकड़ कर खड़ी किया और दीवार से सटा दिया और खुद नीचे घुटनों के बल बैठ गया और एक कंधे पर अपनी मां की टांग को उठा कर रखा और दूसरे कंधे पर अपनी बहन की टांग को रख दिया और फिर बारी-बारी से दोनों की कचोरी जैसी फुली हुई चूत को चाटना शुरू कर दिया,,, जिस तरह से दोनों मां बहनों ने उसे मदहोश किया था उसी तरह से सब जो भी कोई कसर नहीं रख रहा था अपनी मां बहन दोनों को मत करने में वह दोनों पागल हो जा रही थी और दोनों कस के संजू के बाल को अपनी मुट्ठी में भर ली थी। संजू भी दोनों को पानी पानी कर दिया था लेकिन अब समय आ गया था असली खेल खेलने का लोहा पूरी तरह से गर्म हो चुका था और हथोड़ा भी तैयार था इसलिए संजू धीरे से अपने लंड को अपनी मुट्ठी में भरकर धीरे से खड़ा हुआ और फिर दोनों को बोला।

तुम दोनों एकदम रंडी हो चुकी हो एकदम बाजारू औरत की तरह इतना मजा देती हो कि पूछो मत,,, मैं तो धन्य हूं क्या तुम दोनों को पकड़ तुम दोनों की गुलाबी चूत मुझे पागल कर देगी बस अब जल्दी से छिनार लोग दोनों दीवार पकड़ कर खड़ी हो जाओ अपनी गांड को बाहर निकाल दो बारी-बारी से आज तुम दोनों की लूंगा,,,।

हरामजादे न जाने कैसा जादू है तुझ में कि हम दोनों पागल हो गए हैं तेरे लिए तेरे लंड को अपनी चूत में लेने के लिए,,,।सहहहहह कसम से तेरा लंड पाकर तो हम दोनों धन्य हो गए हैं,,,,। जमकर सेवा करना हम दोनों की भोसड़ी की,,,,

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चिंता मत करो मेरी रंडियों आज तुम दोनों की भोसड़ी का भोसड़ा बना दूंगा,,,,।

(तीनों के बीच गंदी गंदी वार्तालाप हो रही थी और इस गंदी वार्तालाप में तीनों का जोश और ज्यादा बढ़ता जा रहा था गालियों के साथ चुदाई करने में चुदाई का मजा ही कुछ और होता है,,, यह कहावत यहां पर सार्थक हो रही थी मां बेटी दोनों,,, दीवाल पकड़ कर खड़ी थी और झुक कर घोड़ी बनी हुई थी दोनों की गांड एकदम उभरी हुई थी दोनों की गांड एक से बढ़कर एक लग रही थी एक तरफ मां की बड़ी-बड़ी गांड थी और दूसरी तरफ बहन की सुडोल गांड थी जो कि दोनों आने में गायक थे शुरुआत संजू अपनी मां की तरफ बढ़कर किया लेकिन उसकी मां की गांड को ज्यादा ही बड़ी थी जिसकी वजह से उसका गुलाबी छेद नजर नहीं आ रहा था और इसीलिए संजू एक खांसी अपने लंड को पकड़ कर दूसरे हाथ से अपनी मां की गांड की दोनों फांकों को पकड़ कर फैलाते हुए थोड़ा सा नीचे झुका और अपने आलू बुखारे जैसे मोटे सुपाड़े को अपनी मां की गुलाबी छेद पर रखकर जोरदार धक्का मारा और आराधना की पनिया ही छूट में एक झटके से संजू का पूरा का पूरा लंड अंदर की तरफ घुस गया,,, बच्चेदानी पर ठोकर लगते ही आराधना थोड़ा सा उछल गई और उसके मुंह से हल्की सी चीज भी निकल गई लेकिन तुरंत संजू उसके कंधों को पड़कर काबू में ले लिया और फिर जोर-जोर से अपनी कमर हिलाता हुआ बोला,,, ।

इसे कहते हैं छिनार की चुदाई आज देखना मैं तेरी छूट का क्या हाल करता हूं बहुत कचोरी की तरह फुला कर घूमती है ना,,,, आज देख कैसे सटासट मारता हूं,,,।

मादरचोद में भी देखती हूं तेरे में कितना दाम है बहुत अपने लंड पर घमंड करता है ना आज देखती हूं तु मेरी प्यास बुझा पाता है कि नहीं,,,,

हाय जल्दी-जल्दी कर भोसड़ी के मेरी तरफ भी ध्यान दे अपनी मां को चोदने के चक्कर में अपनी बहन को मत भूल जाना,,,,।

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तुझे कैसे भूलूंगा रंडी तेरी गर्म चुत में डाले बिना मुझे भी मजा नहीं आता रुक पहले तेरी मां की चुदाई कर दुं,,,

(संजू गंदी गालियों के साथ धकाधक अपनी कमर हिला रहा था आज से अपनी मां को चोदने में बहुत मजा आ रहा था दूसरी तरफ उसकी बहन भी अपनी गांड परोस अपने नंबर के लिए तरस रही थी,,, आराधना के मुंह से लगातार गरमा गरम शिसकारी की आवाज निकल रही थी। संजू की कमर बड़ी तेजी से हिल रही थी और उसके हर एक धक्के पर उसकी मां की भारी भरकम गांड पानी की लहरों की तरह लहरा उठ रही थी,,,, दो-चार धक्के और करने के बाद वह अपने लंड को बड़ी जल्दी से अपनी मां की चूत से बाहर निकाला और फिर अपनी बहन की चूत में डाल दिया और उसकी कमर पकड़कर उसे भी छोड़ना शुरू कर दिया क्योंकि वह भी इस सुख की पूरी हकदार थी,,, और इस समय संजू दोनों औरतों के लिए एक मर्द की जिम्मेदारी बहुत बखूबी से निभा रहा था। दोनों के प्यार में संजू बिल्कुल भी फर्क नहीं कर रहा था,,,।

तकरीबन 40 मिनट की घमासान चुदाई के बाद संजू अपनी मां की चूत में अपना गरम लावा निकाल दिया और फिर उसकी पीठ पर हांफने लगा,,,, और फिर इसके बाद तीनों नहा कर जल्दी से तैयार हुए क्योंकि दिन ढल गया था शाम हो रही थी और उन्हें खरीदी करने के लिए थोड़ा दूर जाना था संजू जानबूझकर उन दोनों को दूर खरीदी करने के लिए ले जा रहा था। जहां उन तीनों को कोई नहीं जानता हो। और फिर तीनों एक ही स्कूटी पर खरीदी करने के लिए निकल गए।

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संजू अपनी मां और बहन दोनों को स्कूटी पर बैठ कर खरीदी करने के लिए निकल गया था लेकिन खरीदी करने से पहले और घर से निकलने से पहले जिस तरह की घमासान चुदाई उसने अपनी मां और बहन के साथ किया था उसे देखते हुए ऐसा लग रहा था की सुहागरात वाले दिन वह पूरी तरह से धमका कर देगा,,,और सही मायने में इस तरह की अद्भुत धमाके की उम्मीद मां और बेटी दोनों को भी था,,,।

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अपने पति से तलाक लेने के,, आराधना पहली बार खरीदी करने के लिए निकल रही थी और वह भी अपने बेटे और अपनी बेटी के साथ,, यह आराधना के लिए बेहद रोमांचक था,,, क्योंकि आज उसे अपने बेटे में बेटा नहीं बल्कि एक मर्द नजर आ रहा था और उसे मर्द का दर्जा आज उसकी नजरों में एक पति और प्रेमी से बिल्कुल भी कम नहीं था,,, और वैसे भी आराधना के लिए संजू एक बेटे का फर्ज तो निभा ही रहा था लेकिन बेटे के रूप में नहीं बल्कि एक पति और प्रेमी के रूप में,,,। क्योंकि वैसे भी जो हक एक औरत पर प्रेमी और पति का होता है वही हक इस समय संजू का था वह प्रेमी और पति दोनों की जिम्मेदारी निभा रहा था घर के बाहर बेटे की और घर की चार दिवारी के अंदर पति और प्रेमी दोनों की जिम्मेदारी निभा रहा था वह किसी भी तरीके से आराधना को दुखी नहीं देखना चाह रहा था और इसीलिए वह अपनी मां को पूरी तरह से दुनिया का हर सुख देने के लिए,,, हरदम खड़ा था,,,।

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यह सब कैसे हो गया आराधना समझ ही नहीं पाई थी जिस लड़के के सामने वह अश्लील शब्दों में बात नहीं करती थी अपने बदन को एक मां के रूप में ही ढंक कर ही रखती थी,,, संजोग ऐसा बन गया था कि आज उसी लड़के के सामने इस बेटे के सामने और जब चाहे तब अपनी दोनों टांगें खोल देती थी,,, स्कूटी पर बैठे बैठे आराधना अपने बेटे के बारे में ही सोच रही थी समय कैसे तेजी से गुजर जाता है इस बात का पता तक नहीं चलता और वही आराधना के साथ भी हुआ था,,, संजू के साथ मां बेटे का रिश्ता उसे ऐसा लगता था कि कल तक ही तो था यह पवित्र रिश्ता लेकिन कब समाज की दीवारों को मर्यादा की चादर को कब अपने हाथों से दूर हटाकर वह अपने ही बेटे को संपूर्ण रूप से मर्द बन चुकी थी इस बात का पता तक नहीं चला था,,, आराधना के लिए जो कल तक मजबूरी थी आज वह पूरी तरह से जरूरत बन चुकी थी। और इस रिश्ते से आराधना पूरी तरह से खुश भी थी उसे मां बेटे के बीच के अवैध रिश्ते के चलते अपने मन में किसी भी प्रकार का मलाल नहीं था बल्कि वह इस रिश्ते से एक बार फिर से खुलकर जी रही थी।

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संजू स्कूटी को मध्धम रफ्तार से लेकर आगे बढ़ रहा था उसके मन में भी इस रिश्ते को लेकर बहुत कुछ चल रहा था वह कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसे चोदने को इतनी सारी औरतें मिलेगी और वह भी घर की ही जिसमें खुद उसकी सगी मां और सगी बहन शामिल होंगी,,, संजू भी बहुत सीधा-साधा ही लड़का था लेकिन वक्त और हालात नहीं उसे पूरी तरह से बदल कर दिया था जो चुदाई का च,,, तक नहीं जानता था,,, उसने अपनी मर्दाना ताकत से संभोग की महा गाथा लिख दिया था जिसमें प्रमुख रूप से उसकी मां शामिल थी जिसके साथ वह जिंदगी का पूरा लुफ्त ले रहा था अब तक उसके जीवन में जितनी भी औरतें आई थी सब एक से बढ़कर एक थी सबके नंगे बदन का आनंद ले चुका था सबके वस्त्र को अपने हाथों से उतर कर उन्हें पूरी तरह से नंगी करने के बाद ही मजा लिया था उनकी भारी भरकम गोल-गोल गांड खरबूजे जैसी चूचियां,,, और उनकी अलग-अलग आकार की चूत का आनंद व पूरी तरह से ले चुका था अपनी मौसी से लेकर के अपनी चचेरी बहन और अपनी तीन मामियों के साथ-साथ बड़ी मामी की जवान लड़की जिसकी शादी में वह खुद शामिल हुआ था उसे भी वह अपने लंड का स्वाद चखा दिया था।

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लेकिन जो मजा उसे अपनी मां के साथ आता था अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियों को दबाकर मुंह में लेकर पीने में आता था उसके साथ स्तन मर्दन में आता था,,,, वैसा मजा उसे किसी के साथ महसूस नहीं हुआ था हालांकि सबके साथ उसे आनंद जरूर आया था लेकिन जो आनंद की पराकाष्ठा उसे अपनी मां के साथ मिलती थी वह उसे किसी और के साथ महसूस तक नहीं हुई थी,,, वह अच्छी तरह,, से जानता था कि जो मजा उसे अपनी मां की चूत की मलाई को चाटने में आता था। वह मजा किसी और की चूत में उसे मिल ही नहीं था जो कसाव लंड डालने के बाद अपनी मां की चूत में महसूस होता था वैसा काश उसे ना तो मोहिनी और ना ही मनीषा और ना ही अपनी मामी की चूत में महसूस हुआ था जबकि मनीषा और मोहिनी तो पूरी तरह से जवानी की दहेज पर कदम रखकर पूरी तरह से जवान हो चुकी थी लेकिन फिर भी उन दोनों की चूत में अपनी मां की चूत जैसा कसाव उसे महसूस नहीं हुआ था,,,।

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यहां तक की नितंबो में भी अगर सही क्रम में लगाया जाए तो 1 से 10 नंबर तक केवल उसकी मां आराधना ही थी क्योंकि उसका मुकाबला नितंबो में भी कोई औरत नहीं कर पाती थी उम्र के इस पड़ाव पर भी उसके नितंबों का कसाव एकदम जवान लड़कियों की तरह था उसका आकर्षण अभी तक काम नहीं हुआ था इसीलिए तो आज भी संजू अपनी मां के नितंबों को देखते ही उत्तेजित हो जाता था अपनी मां के नितंबो से खेलने में उसकी भारी भरकम गांड से काम कीड़ा करने में जिस तरह का आनंद उसे महसूस होता था वह अद्भुत और अतुल्य था,,, इसीलिए तो वह इसी सुख को प्राप्त करने के लिए अपनी मां की गांड भी मर चुका था जिसमें भी उसे अत्यधिक उत्तेजना और आनंद की प्राप्ति हुई थी।

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स्कूटी अपनी रफ्तार से आगे बढ़ती चली जा रही थी मां बेटी और बेटे में अब किसी भी प्रकार का सामाजिक रिश्ता नहीं रह गया था जो कि घर के बाहर समाज के मित्रों में वह तीनों अभी भी भाई-बहन और मां के रिश्ते से जुड़े हुए थे लेकिन घर के अंदर प्रवेश करते ही दरवाजा के बंदे करते हैं घर की चारदीवारी के अंदर तीनों केवल मर्द और औरत बन जाते थे और इसमें उन तीनों को मजा भी आता था। अब इस रिश्ते को मोहिनी नया नाम देना चाहती थी अपने पति से तलाक लेने के बाद वह अपने पिता से अलग होने के बाद इस पल को पूरी तरह से जी लेना चाहती थी वह इस पल को इस तरह से आनंददायक बनाना चाहती थी ताकि जिंदगी भर याद रहे और इसीलिए सुहागरात वाली युक्ति भी उसी की ही थी जिसकी वह खुद तैयारी करने में लगी हुई थी और इसीलिए तीनों खरीदी करने भी जा रहे थे क्योंकि तीनों अच्छी तरह से जानते थे की सुहागरात के दिन औरत नए वस्त्र के साथ-साथ नए-नए अंतर्वस्त्र भी पहनती हैं,, जो की सही तरीका का पहना जाए तो सुहागरात का मजा ही कुछ और हो जाता है वरना संजू तो रोज ही अपनी मां और बहन दोनों की चड्डी अपने हाथों से उतारता था लेकिन,, संजू चाहता था कि उसकी बहन और उसकी मां उसकी दिलाए हुई चड्डी और ब्रा पहनें ताकि उसे उतारने में उसे पूरी तरह से मदहोशी छा जाए क्योंकि औरत से संभोग से पहले मर्दों का अत्यधिक उत्तेजना महसूस करना बेहद जरूरी होता है और कभी कभार तो औरत के अंगों से नहीं बल्कि उनके अंतर्वस्त्र से ही मर्द पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में डूबने लगते हैं इसलिए संजू उन दोनों को नए तरीके का ब्रा और पेटी दिलाने के लिए कपड़े की दुकान पर ले जा रहा था लेकिन वह भी मार्केट से थोड़ा दूर ताकि तीनों को कोई पहचान ना सके,,,,।

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संजू तू इतनी दूर क्यों लेकर जा रहा है मार्केट तो चली गई,,,,,(मार्केट की आखिरी दुकान के आगे निकल जाने पर आराधना उसे दुकान की तरफ देखते हुए संजू से बोली..)

यहां से नहीं मम्मी आज कहीं और से लेंगे जहां तीनों को कोई पहचानता न हो,,,

लेकिन ऐसा क्यों,,,?

क्योंकि जिस जगह पर हम तीनों जा रहे हैं वहां पर मैं चाहता हूं की दुकान वाला हम तीनों को प्रेमी समझे,,,

तेरा कहने का मतलब क्या है मैं कुछ समझी नहीं,,,

अरे यार मेरा कहने का मतलब साफ है कि मैं आज तुम दोनों को,,, पेंटिं और ब्रा दिलाने लेकर जा रहा हूं दुकान पर और वह भी तुम दोनों को अपनी प्रेमिका बनाकर वहां पर किसी को भी पता नहीं चलना चाहिए कि हम तीनों के बीच कौन सा रिश्ता है उन लोगों को ऐसा ही लगना चाहिए कि मैं तुम दोनों को पटाकर लेकर आया हूं,,,,

वाह भाई तब तो मजा आ जाएगा,,,,,(मोहिनी संजू की बात सुनते ही एकदम उत्साहित होते हुए बोली लेकिन आराधना कुछ देर खामोश रहने के बाद बोली)

लेकिन वहां पर किसी ने हम तीनों को पहचान लिया तो,,,,(आराधना को थोड़ा घबराहट भी हो रही थी लेकिन संजू की बात सुनकर उसके भी मन में उत्सुकता बढ़ गई थी वह भी आज दुकान पर संजू की प्रेमिका बनकर खरीदी करना चाहती थी वह देखना चाहती थी कि उन दोनों को प्रेमी प्रेमिका के रूप में देखकर दुकान वाले क्या सोचते हैं क्योंकि दोनों के बीच उम्र का कुछ ज्यादा ही फर्क था,,,,)

इसीलिए तो मैं शहर से थोड़ा दूर जा रहा हूं ताकि वहां पर कोई हम तीनों को पहचान ना ले और देखना बहुत मजा आएगा सच कहूं तो मेरा तो सोच कर ही लैंड खड़ा हुए जा रहा है,,,

दिखा तो भाई देखु तो,,,(इतना कहने के साथ ही मोहिनी एकदम से बेशर्मी दिखाते हुए अपना हाथ आगे की तरफ लाकर उसके पेंट पर रख दी जो कि वाकई में अच्छा खासा तंबू बना हुआ था संजू का लंड वाकई में खड़ा था उसके खड़े लंड को महसूस करते ही मोहिनी बोली,,)

सच में भाई तेरा तो खड़ा हो गया है मुझे तो लगता है की मम्मी की चुत भी पानी छोड़ रही होगी,,,

धत्,,,, हरमी,,,(प्यार से कंधे से मोहिनी को मारते हुए आराधना बोली तो संजू बोल पड़ा क्योंकि अभी भी मोहिनी का हाथ उसके पेंट के आगे वाले भाग पर था,,,)

अरे तू रंडी क्यों बन रही है अपना हाथ तो हटा कोई देख लेगा तो,,,,

देख लेगा तो देख लेगा वैसे भी तो तू हम दोनों को अपनी प्रेमिका बनाकर ले जा रहा है,,,,,

ऐसा कहीं की तो यही गाड़ी रोक कर पेड़ के पीछे ले जाकर तेरी चुदाई कर दूंगा,,,,

तो कर देना भाई,,,, मैं तो तैयार हूं तेरे लंड को अपनी चूत में लेने के लिए तेरी बातें सुनकर तो मेरी चूत पानी छोड़ रही है,,,,(संजू के पेट के ऊपर से ही उसके लंड को अपनी हथेली में जोर से दबाते हुए मदहोश होते हुए मोहिनी बोली तो संजू बोला,,,)

देख लो मम्मी तुम्हारी लड़की लंड लेने के लिए तड़प रही है कहो तो यही पेड़ के पीछे ले जाऊं,,

तुम दोनों की शरारत यहां भी शुरू हो गई मोहिनी तो ठीक से बैठ संजू को गाड़ी चलाने दे जो कुछ भी करना है घर पर पहुंच कर कर लेना यहां रास्ते पर नाटक मत कर,,,,,

सच कहूं तो मम्मी मुझे तो रहा ही नहीं जा रहा है तुम कहती हो तो सीधे से बैठ जाती हूं नहीं तो इसी समय संजू के पेट में से उसका लैंड निकाल लेती,,,,

तू तो एकदम छिनार हो गई रे,,,,(करने की बात सुनकर आराधना बोली)

छिनार की बेटी छिनार नहीं होगी तो और क्या होगी,,,,

तू बहुत बोलने लगी है,,,(एक बार फिर से धीरे से उसके सर में मारते हुए आराधना मुस्कुराते हुए बोली वाकई हालात ने उसे पूरी तरह से बदल दिया था पहले वह छिनार के मतलब को समझ नहीं पाती थी लेकिन अब उसे समझ में आने लगा की छिनार किसे कहते हैं क्योंकि वह पूरी तरह से समाज के रीति-रिवाज को बंधन को मर्यादा की दीवार को तोड़कर अपने सुख के लिए आगे बढ़ चुकी थी जिसमें सारे रिश्ते नातो को अपनी जरूरत के दलदल में डुबोते चली जा रही थी,,,,, अब उसे छिनार शब्द अच्छा लगने लगा था अपने आप पर इस शब्द को वह पूरी तरह से कसा हुआ समझती थी और वैसे भी जब उसे चोदते समय यह शब्द का उपयोग संजू करता था तो उसे और भी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव होता था वह पूरी तरह से मत हो जाती थी और अपने बेटे के मर्दाना अंग को अपने अंदर पूरी तरह से भींच लेती थी।

एक घंटा गाड़ी चलाने के बाद तीनों शहर के बाहर एक बड़े से कपड़े की दुकान पर पहुंच चुके थे इस जगह पर ना तो पहले कभी आराधना आई थी और ना ही मोहिनी लेकिन संजू वहां चुका था संजू इस जगह को देख चुका था इसीलिए वह बड़े आराम से यहां पहुंच चुका था कपड़े की दुकान काफी बड़ी थी संजू स्कूटी को पार्किंग में खड़ी कर दिया था कपड़े की दुकान के बाहर खड़े होकर मोहिनी बोली।

बाप रे यह तो बहुत बड़ी दुकान है।

हां मैंने यह बहुत बड़ी दुकान है और अंदर देखना कपड़े दिखाने वाली लेडिस ही हैं,,,।

(संजू की बात सुनते ही आराधना के चेहरे पर शर्म की हवाइयां उड़ने लगी उसे इस बात का डर था कि कहीं कोई पहचान वाला अंदर मिल ना जाए)
 
तीनों कपड़े की दुकान के बाहर खड़े थे संजू स्कूटी को पार्क करके अपनी मां और बहन दोनों के साथ बाहर खड़ा होकर कुछ देर तक दुकान को देख रहा था,,,, यह दुकान काफी बड़ी थी इस तरह की बड़ी दुकान में खरीदी करने के बारे में तो कभी आराधना सोची भी नहीं थी,,,, और वैसे भी कपड़े कितनी बड़ी दुकान वह पहली बार देख रही थी और इस जगह पर भी वह पहली बार आ रही थी,,,यह जगह भी उसके लिए अनजान थी और यह दुकान भी उसके लिए अंजाम थी वैसे भी किसी के देखे जाने का डर उसे हमेशा बना रहता था लेकिन संजू उन दोनों को इतनी दूर लेकर आया था की आराधना थोड़ा निश्चित थी लेकिन फिर भी चारों तरफ नजर दौड़ा कर देख ले रही थी कहीं कोई जान पहचान का तो नहीं है,,,।

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मम्मी में तो पहली बार इतनी बड़ी दुकान देख रही है और वह भी कपड़े की बाप रे बाप इतनी बड़ी भी दुकान होती है मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है,,,।

तो सच कह रही है मोहिनी मैं भी पहली बार ही इतनी बड़ी दुकान देख रही हूं अंदर तो खरीदी करने के बारे में सोच कर ही मुझे डर लग रहा है।

तुम दोनों भी खामखा डर रहे हो,,, जिंदगी में सब कुछ पहली बार ही होता है अंदर देखना इतने सारे कपड़े हैं कि सब कुछ खरीदने का मन करेगा और वह भी इंपॉर्टेंड,,,।

संजू महंगा मिलेगा तो क्यों यहां पर लेकर आया वहीं से खरीद लिए होते तो,,,

क्या मम्मी तुम अभी भी इस तरह की बातें कर रही हो अब तो मैं भी कमाने लगा हूं और वैसे भी ₹100000 जो मिला है,,,

अरे वह तो मैं तुम दोनों की पढ़ाई के लिए और मोहिनी की शादी के लिए रखने वाली हूं,,,, यह सब की फिजूल खर्ची में उड़ा देंगे तो कोई मतलब नहीं निकलेगा,,,

मैं जानता हूं मम्मी इसीलिए तो उसमें से ₹1 भी नहीं लिया हूं यह तो मेरी कमाई के हैं और कभी-कभी इंसान को अच्छा भी पहन लेना चाहिए जिसमें वह अच्छा महसूस करें वैसे भी तुम दोनों इतनी खूबसूरत कि तुम्हारे बदन पर महंगी चड्डी और ब्रा ही अच्छी लगेगी,,,

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लेकिन भाई तू तो हम दोनों को नंगी करने के बाद ही मानता है और रात भर नंगी ही रखता है तो इस तरह के कपड़े खरीदने का मतलब क्या है,,,।

(मोहिनी चुटकी लेते हुए बोली तो संजू भी मुस्कुराता हुआ बोला)

तेरी बात सही है लेकिन तुम दोनों को नंगी करने के पहले कपड़े भी उतारने पड़ते हैं और इस तरह के महंगे कपड़े हो इंपोर्टेड कपड़े हो तो नंगी करने का मजा ही बढ़ जाता है,,,,।

(संजू की मां अपनी बेटी की इस बात से पूरी तरह से सहमत थी लेकिन वह इसका जवाब बिल्कुल भी नहीं दे रही थी वह अपने मन में अच्छी तरह से समझ रही थी कि वाकई में अगर खूबसूरत बदन पर मैंने कपड़े हो तो उसे उतारने का मजा ही उतारने वाले को बढ़ जाता है और साथ ही पहनने वाली भी मस्त हो जाती है,,,, संजू की बातों को सुनकर आराधना के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फुट रही थी वाकई में उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे उन दोनों को खरीदी करवाने के लिए उनका बेटा नहीं बल्कि उनका प्रेमी आया है,,,, आराधना अभी भी चारों तरफ नजर दौड़कर इधर-उधर देख ले रही थी उसे इस तरह से चक्कर पड़ नजर उठा कर देखते हुए पाकर संजू बोला,,,)

इसे क्या देख रही हो मम्मी,,,,

अरे मुझे डर लग रहा है कि कहीं कोई पहचान का ना मिल जाए,,,,।

क्या मम्मी तुम भी खामखा डरती हो यह जगह बहुत दूर है और यहां पर कोई पहचान का मिलने वाला नहीं है और अगर मिल भी गया तो कौन सा हम कोई गलत काम करने के लिए यहां है हम तो खरीदी करने के लिए आए हैं,,,, ना कि गेस्ट हाउस में आए हैं इसलिए बिल्कुल भी चिंता मत करो,,

(संजू की बात सुनकर आराधना को थोड़ी राहत हुई तो वह बोली,,,)

अरे इस तरह से अब बाहर ही खड़े रहेंगे की अंदर भी चलेंगे वैसे भी देर हो रही है,,,,।

देर हो गई तो क्या होगा वैसे भी आज घर पर खाना नहीं बनाना है,,, यहीं से खा कर चलेगे,,,।

(इतना कहते हुए संजू कपड़े की दुकान की सीढ़ियां चढ़ने लगा और पीछे-पीछे आराधना और मोहिनी भी सीढीया चढने लगी,,,,,, लेकिन सीढ़ियां चढ़ते समय आराधना के नितंबों में एक अद्भुत कशिश और लचक नजर आ रही थी,,,,, एक सीढ़ी चढ़ने के लिए जैसे ही वह ऊपर कदम उठाती थी तो उसके नितंबों का घेराव एकदम बड़े से तरबूज की तरह हो जाता था जो कि साड़ी फाडकर बाहर आने के लिए उतारू हो जाता था वैसे तो इस समय आराधना के ऊपर किसी की नजर नहीं थी लेकिन इतना तो निश्चित था कि अगर वह आराधना को इस तरह से सीढ़ियां चढ़ता हुआ देख लेता तो मन में न जाने कितने सपने देखने लगता आराधना को लेकर और उसके पीछे-पीछे बड़ी सी दुकान में भी चला ही आता,,,,। देखते ही देखते तीनों चिड़िया चढ़ चुके थे और दरवाजे पर खड़ा दरवाजा खुद ही दरवाजा खोला और मुस्कुरा कर तीनों का अभिवादन किया और तीनों दुकान के अंदर प्रवेश कर गए,,,।

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दुकान के अंदर प्रवेश करते ही मोहिनी और आराधना दोनों की आंखें आश्चर्य से फटी की फटी रह गई लेकिन संजू सहज बना रहा क्योंकि अपने दोस्त के साथ वह पहले भी यहां आ चुका था,,,। इसलिए इसमें उसके लिए कोई बड़ी बात नहीं थी,,,।

बाप रे भाई इतनी बड़ी दुकान,,,( मोहिनी चारों तरफ नजर दौड़ाते हुए बोली,,,, तो उसे बीच में टोकते हुए संजू बोला,,,)

भाई मत बोल,,,, यहां पर मैं तेरा प्रेमी हूं समझ गई ना,,,,

ओहहहह ,,,,सोरी,,,,(मुस्कुराते हुए मोहिनी बोली आराधना दोनों की बातें सुन रही थी और अंदर ही अंदर अजीब सी हलचल महसूस कर रही थी,,,, आराधना अच्छी तरह से देख पा रही थी की दुकान में कम से कम पांच काउंटर थे और सभी काउंटर पर लड़कीया ही थी,,, आराधना के मन में थोडी घबराहट भी थी,,, क्योंकि उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह कैसे अपने बेटे की मौजूदगी में उसे काउंटर वाली लड़की से ब्रा और पेटी मांगेगी,,, जबकि संजू पहले से ही कह चुका था कि वह उस दुकान पर दोनों को अपनी प्रेमिका बनाकर ले जा रहा है लेकिन फिर भी वह दुनिया की नजर में प्रेमी प्रेमिका हो सकते हैं लेकिन वास्तविकता तो यही थी कि दोनों मां बेटे ही थे और इस रिश्ते को वह अपनी नजर में कैसे ठुकरा सकती थी घर की चार दिवारी के अंदर भले ही वह एक कमरे में प्रेमी प्रेमिका और पति पत्नी की तरह व्यवहार करते थे लेकिन दुनिया की नजर में उसे ऐसा करने में शर्म महसूस हो रही थी और इसीलिए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि काउंटर पर क्या होगा इसलिए उसने सब कुछ अपने बेटे संजू पर ही छोड़ रखी थी,,,।

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दुकान में ज्यादा फिर बार नहीं थी पहले काउंटर पर ही केवल दो लोग खड़े थे बाकी के काउंटर अभी भी खाली थे और संजू सभी काउंटर पर नजर घूमर अच्छी तरह से जांच पड़ताल कर लेने के बाद कौन है में जो की एक खूबसूरत लड़की काउंटर संभाल रही थी मुस्कुराता हुआ उसी काउंटर की तरफ बढ़ गया,,, मोहिनी और आराधना दोनों का दिल धक कर रहा था दोनों के मन में थोड़ी बहुत घबराहट थी लेकिन संजू बिल्कुल भी घबरा नहीं रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे उसका तो यह रोज का काम हो जैसे ही वह काउंटर पर पहुंचा उसके बोलने से पहले ही काउंटर वाली लड़की मुस्कुरा कर बोली,,,।

वेलकम सर वेलकम मैम बताइए मैं आप सबके लिए क्या मदद कर सकती हूं,,,,(ऐसा कहते हुए वह आराधना की तरफ देखने लगी,,,, और आराधना मारे शर्म से गाड़ी जा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले संजू मन ही मन मुस्कुरा रहा था क्योंकि वह अच्छी तरह से समझ रहा था कि वह काउंटर वाली लड़की आराधना को क्या समझ रही थी,,,,। आराधना और संजु और मोहिनी मे उम्र का काफी फर्क था जो कि इस उम्र के फर्क को वह काउंटर वाली लड़की अच्छे से समझ रही थी,,, क्योंकि वह ऐसा ही समझ रही थी की आराधना ही दोनों को कपड़े दिलाने के लिए लेकर आई है लेकिन वह क्या जानती थी कि सब कुछ यहां उलट पलट रिश्ता हो चुका है वह काउंटर वाली लड़की मुस्कुरा कर कुछ बोल पाती ईससे पहले ही संजू बोल पड़ा,,,)

ईन दोनों के लिए अच्छी सी चड्डी और ब्रा दिखाओ एकदम इंपॉर्टेंड महंगी वाली,,,।

(इतना सुनते ही मोहिनी तो थोड़ा सहज बनी रही लेकिन आराधना के तो पसीने छूटने लगे वह शर्म से पानी पानी होने लगी और यही हाल काउंटर वाली लड़की का था हालांकि उसे शर्म तो नहीं महसूस हुई लेकिन वह हैरान जरूर थी क्योंकि जिस तरह से संजू ने एकदम खुले शब्दों में दोनों के लिए चड्डी और ब्रा लेने के लिए बोला था ऐसा उसने आज तक ना तो देखी थी और नहीं सुनी थी क्योंकि वह अच्छी तरह से समझ रही थी कि संजू उस औरत के बेटे की उम्र का था,,, वह काउंटर वाली लड़की हैरानी से कभी आराधना और मोहिनी की तरफ तो कभी संजू की तरफ देख रही थी संजू अच्छी तरह से समझ रहा था कि उसे काउंटर वाली लड़की के मन में क्या चल रहा है इसलिए सब कुछ साफ करते हुए वह बोला,,,।)

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क्या हुआ ऐसे क्यों देख रही हो कोई अपनी प्रेमिका को चड्डी और ब्रा नहीं दिला सकता क्या,,!(संजू के शब्दों में पूरी तरह से शरारत छुपी हुई थी,,, और वह अपने शब्दों से अपनी बातों से उसे काउंटर वाली लड़की के तन बदन में भी हलचल जगाना चाहता था जो कि उसकी बातों को सुनकर ऐसा हो भी रहा था,,,। आश्चर्य से संजू की तरफ और आराधना की तरफ देखते हुए वह काउंटर वाली लड़की दबे शब्दों में बोली,,,)

दिला सकता है क्यों नहीं दिला सकता लेकिन,,,

मैं जानता हूं तुम क्या सोच रही हो मेरी उम्र में और उनकी उम्र में बहुत फर्क लग रहा है ना लेकिन प्यार तो किसी भी उम्र में हो सकता है,,,,(संजू की बातेंआराधना के तन बदन में आग लग रही थी वह शर्म से पानी पानी हो जा रही थी और उसके शर्म का पानी उसकी चूत में से बह रहा था,,, वह कुछ भी बोल सकते कि स्थिति में नहीं थी और उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोल क्या सफाई दे,,,, काउंटर वाली लड़की को संजू की बातों पर बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा था तो वह ना चाहते हुए भी आराधना से पूछ बैठी,,,)

क्या आप भी ईनसे प्यार करती हैं,,,।

(उसे काउंटर वाली लड़की की बात सुनकर आराधना कुछ बोल‌ तो नहीं पाई बस हां मैं सर हिला दी और शर्म से लाल हो गई,,, आराधना कि हामी सुनकर काउंटर वाली लड़की एकदम हैरान हो गई लेकिन उसे इतना तो पता ही था कि प्यार किसी भी उम्र में हो सकता है लेकिन वह इस तरह का प्यार पहली बार अपनी आंखों से देख रही थी,,, सुनी तो बहुत बार थी लेकिन पहली बार उसकी आंखों के सामने ऐसा प्यार नजर आया था और फिर वह मोहिनी की तरफ मुखातीब होते हुए बोली,,,)

और तुम,,,,

मैं भी इनसे प्यार करती हूं,,,(मोहिनी बेझिजक संजू की तरफ इशारा करते हुए बोली,,, मोहिनी की भी बात सुनकर वह काउंटर वाली लड़की एकदम से हैरान हो गई और अगला सवाल दागते हुए बोली,,,)

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बाप रे तुम दोनों एक ही लड़के से,,,,

हैरान मत होइए मैडम दोनों मां बेटी हैं और दोनों मुझसे बहुत प्यार करती हैं,,,,

(संजू की बात सुनकर तो काउंटर वाली लड़की की हालत और ज्यादा खराब हो गई उसकी आंखें आश्चर्य से फटी के फटी रह गई इस यकीन नहीं हो रहा था की मां बेटी एक साथ एक ही लड़के से प्यार कर रही थी,,,,,, वह एकदम आश्चर्य से बोली)

क्या कह रहे हो सर क्या सच में,,,,(संजू की तरफ देखने के बाद वह मोहिनी और आराधना की तरफ देखते हुए बोली तो दोनों मां बेटी हां मैं सर हिला दी दोनों के चेहरे पर शर्म और उत्तेजना साफ नजर आ रही थी,,,,, फिर संजय मुस्कुरा कर बोला,,,)

अब तो यकीन आ गया ना मैडम,,,।

(काउंटर वाली लड़की की तो हालत खराब हो गई थी,,,, उसकी तो बोलती बंद हो गई थी वह हैरान होकर तीनों को देख रही थी तब संजू मुस्कुराता हुआ बोला,,,)

परेशान होने की जरूरत नहीं है बस जो कह रहा हूं वह जल्दी से दिखाइए इनके लिए और उनके लिए चड्डी और ब्रा एकदम महंगी वाली जिसे पहनने के बाद उनके खूबसूरत अंग और भी ज्यादा खूबसूरत लगने लगे,,,,

(संजू इस तरह की अश्लील बातें उसे काउंटर वाली लड़की के सामने कर रहा था और उससे ही कर रहा था और वह लड़की भी हैरान थी क्योंकि आज तक इस तरह के शब्दों में उससे किसी ने बात नहीं किया था इसलिए संजू के मुंह से इस तरह की बातें सुनकर उसके तन बदन में भी अजीब सी हलचल होने लगी,,, वह समझ गई थी कि यह पूरा बेशर्म है,,,। तभी तो एक साथ दो दो को घुमा रहा था,,।)

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कौन सी साइज का दिखाऊं,,,(आराधना की तरह देखते हुए वह काउंटर वाली लड़की बोली तो आराधना से पहले संजू ही बोल पड़ा)

तुम्हें तो अनुभव होना चाहिए देखकर ही पता लगा लेना चाहिए कि कौन से साइज का है,,,(संजू अपनी मां की छातियों की तरफ देखते हुए बोला,,,, आराधना की तो हालत खराब हो गई थी उसे उम्मीद नहीं थी कि उसका बेटा एक अनजान लड़की से इस तरह से अश्लील बातें करेगा एकदम खुलकर संजू की बातों को सुनकर आराधना के चेहरे पर शर्म की रेखा साहब से रखने लगी उसके गोरे-गोरे गाल सुर्ख लाल होने लगे,,, वह अपने पैर से संजू के पर को जोर से दबाकर उसे चुप रहने का इशारा करने लगी लेकिन संजू कहां चुप रहने वाला था,,,, वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

मेरे हाथों में तो खरबूजे जैसे लगते हैं 38 डी का साइज निकालो,,,

(अपनी चुचियों का साइज अपने बेटे के मुंह से सुनकर एक बार फिर से वह शर्म से पानी पानी होने लगी और उसके बगल में खड़ी मोहिनी मंद मंद मुस्कुरा रही थी और वैसे भी जिसके हाथ में औरत की चूचियां होती है उससे बेहतर भला कौन उसके माप को समझ पाएगा,,,, संजू जिस तरह से खुले शब्दों में आराधना की चुचियों का साइज बता रहा था और वह भी अश्लील शब्दों का सहारा लेकर उसकी बात को सुनकर काउंटर वाली लड़की की हालत खराब हो रही थी वैसे तो उसने कभी भी अपने कस्टमरों से इस तरह की बातों की उम्मीद की नहीं थी लेकिन आज उसके साथ पहली बार हो रहा था कि कोई लड़का इस तरह की बातें कर रहा था और न जाने क्यों उसे भी इस तरह की बातें सुनने में मजा आने लगा था क्योंकि उसकी खुद की चूत उत्तेजना से पानी टपका रही थी,,,, संजू की बात सुनकर काउंटर वाली लड़की 38 के साइज का ब्रा निकलने लगी फिर आराधना धीरे से उससे बोली,,,)

पागल हो गया क्या तू किस तरह की बातें कर रहा है वह लड़की क्या समझेगी,,,

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तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो उस लड़की को तो मैं पहले ही समझा दिया हूं कि तुम मेरी प्रेमिका हो तुम दोनों मां बेटी मुझसे बहुत प्यार करती हो बस बात खत्म,,,,

सच में तू पागल हो गया है,,,,,।

(वह काउंटर वाली लड़की थोड़ी देर बाद ढेर सारी 38 के साइज की ब्रा लेकर आई हो काउंटर पर बिछा दी और बोली,,,)

लो इसमें से जो तुम्हें पसंद हो ले लो,,,,

(संजू उसमें से एक दो ब्रा को अपने हाथ में लेते हुए उसे काउंटर वाली लड़की से बोला)

अगर इनमें से तुम्हें पसंद करना पड़े तो कौन सी ब्रा पसंद करोगी,,,

(संजू की बात सुनकर आराधना थोड़ा घबरा गई उसे लगा की संजु की बातसे वह लड़की संजू पर गुस्सा करेगी इसलिए वह उस लड़की की तरफ देखने लगी लेकिन वह लड़की संजू की बात सुनकर बिल्कुल भी गुस्सा किए बिना मुस्कुरा कर ब्रा ढेर में से एक खूबसूरत ब्रा को निकाल जो की जालीदार था,,, और बोली,,,)

आप पर यह बहुत खूबसूरत जचेगी,,,,

(उसे लड़की की बात सुनकर आराधना फिर से शर्मा गई और उसके हाथ में से खुद संजू ब्रा लेकर एकदम बेशर्मों की तरह दोनों हाथों से ब्रा को खोलकर उसके बड़े-बड़े कप को नापने के लिए तुरंत उसे अपनी मां की छातियों पर रख दिया और मुस्कुराते हुए बोला,,)

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तुम सच कह रही हो यह ब्रा बहुत खूबसूरत लगेगी जब यह पहन लेंगी,,,,।

(संजू की हरकत और उसकी बातों को सुनकर आराधना की हालत ऐसी हो गई काटो तो खून नहीं वह पूरी तरह से स्तब्ध थी संजू की हरकत पर उसकी बातों पर उसे यकीन नहीं हो रहा था कि संजू इस तरह की बातें कर रहा है और इस तरह की हरकत कर रहा है और वह भी कपड़े की दुकान पर एक अनजान लड़की की आंखों के सामने,,,, जितना हैरान आराधना थी उससे भी कई ज्यादा हैरान व काउंटर वाली लड़की थी क्योंकि उसे भी अपने कस्टमर से इस तरह की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी आज तक उसने कभी भी इस तरह की हरकत अपनी आंखों के सामने होता हुआ नहीं देखी थी इसलिए वह भी आश्चर्य से संजू और आराधना दोनों को देख रही थी संजू के हाथों में अभी भी वह मखमली लाल रंग का बरा था जो की जालीदार था और वह सही माप के लिए अपनी मां की छाती पर उसे लगाया हुआ था जिसे शर्मा कर खुद आराधना अपने हाथ में लेकर अपनी छाती से अलग कर दी,,,,, काउंटर वाली लड़की भी कुछ नहीं बोल पा रही थी वह बस इतना ही बोली,,,)

अगर आप चाहे तो इसे पहन कर चेंजिंग रूम में देख सकती है,,,,।

नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है घर पर भी चेक कर लूंगी और वैसे भी यह मेरे माप का ही है,,,,।

(आराधना की बात सुनते ही वह काउंटर वाली लड़की संजू की तरफ देखते हुए धीरे से बोली)

सही माप लिए हो आपने,,,,।

(काउंटर वाली लड़की के खाने के मतलब को संजू मोहिनी और आराधना तीनों अच्छी तरह से समझ रहे थे संजू तो उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दिया था लेकिन आराधना की हालत खराब हो गई थी वह शर्म के मारे टमाटर की तरह एकदम लाल हो गई थी,,, काउंटर वाली लड़की की बात सुनकर संजू बोला)

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दिन रात जिसके हाथ में हो उसे तो सही माप का पता होगा ही,,,, मैं तो कहता हूं जाकर चेक कर लो बाद में कभी गड़बड़ हो गई तो इतनी दूर आना पड़ेगा,,,

नहीं नहीं बिल्कुल सही माप है,,,

कैसी बातें कर रही हो जान,,,,(संजू जानबूझकर काउंटर वाली लड़की के सामने अपनी मां को जान शब्द कहकर संबोधन किया था और इस शब्द को सुनकर काउंटर वाली लड़की की दोनों टांगों के बीच हलचल होने लगी थी उसने आज तक ऐसा फ्लर्ट करने वाला लड़का नहीं देखी थी,,,) जाकर जल्दी से चेक कर लो,,,, ताकि घर पर किसी भी प्रकार की दिक्कत ना आए,,,,।

नहीं नहीं ऐसे ही ठीक है मैं जानती हूं ना अपना माप,,,,

अरे तुम जितना जानती हो उससे ज्यादा मैं जानता हूं क्योंकि उतारना तो मुझे ही पड़ता है,,,,(एक बार फिर से संजू ने यह बात कह कर आराधना के साथ-साथ उसे काउंटर वाली लड़की की चूत से पानी की बुंद टपका दिया था,,,) इसीलिए कह रहा हूं जाकर जल्दी से चेक कर लो कहो तो मैं आ जाऊं,,,,

नहीं सर इसकी कोई जरूरत नहीं है अगर यह चेक करना चाहे तो अकेले जा सकती है,,,

(संजू की बात सुनकर वह काउंटर वाली लड़की को ऐसा ही लगा कि अगर यह अंदर चेक करने जाएगी तो यह भी पीछे-पीछे चल जाएगा और अगर ऐसा होता हुआ मैनेजर ने देख लिया तो गड़बड़ हो जाएगी इसीलिए उसे रोकते हुए बोली,,,, उसे काउंटर वाली लड़की की बात सुनकर आराधना ही बोली,,,)

नहीं इसकी कोई जरूरत नहीं है,,, मुझे चेक नहीं करना है,,,,

ठीक है मैडम कितनी ब्रा चाहिए,,,

बस एक ही,,

अरे एक ही क्यों दो-तीन ले लो अच्छा लगेगा,,,, एक काम करो मैडम यह नीली और ब्लैक वाली भी निकाल दो दोनों रंग गोरे रंग पर और ज्यादा खूबसूरत लगते हैं,,,,

(संजू की बातों और उसकी हरकत से काउंटर वाली लड़की के खुद का पानी निकलने शुरू हो गया था उसने आज तक कस्टमर को काउंटर पर संभालते के संभालते इस तरह की उत्तेजना का अनुभव अपने बदन में नहीं की थी लेकिन आज पहली बार संजू की मौजूदगी में उसकी बातों को सुनकर उसकी हालत खराब हो रही थी,,, वह जल्दी से तीन ब्रा पैक कर दी थी और फिर बोली,,,)

और कुछ चाहिए,,,

(काउंटर वाली लड़की की बात सुनकर आराधना कुछ बोल पाती इससे पहले ही संजू बोल पड़ा,,,)

अरे मैडम चड्डी भी तो दिखाओ बोल तो था,,, बिना चट्टी के ब्रा पहनने में मजा नहीं आएगा,,,,।

(संजू की बात सुनकर आराधना शर्मा के मारे अपनी नजरों को नीचे झुका ली,,, और काउंटर वाली लड़की अपने मन में सोचने के लिए की यह लड़का जब सबके सामने यह हरकत कर रहा है तो बंद कमरे में बिस्तर पर इसकी क्या हालत करता होगा,,, और अपने आप से ही बात करते हुए बोली जरूर इस लड़के में बहुत दम होगा तभी तो मां बेटी दोनों एक की ही दीवानी है,,,,)

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अब रहने दो बहुत देर हो गई है देखो 7:00 बज गए हैं (दुकान पर दीवार पर टंगी घड़ी की तरफ देखते हुए आराधना बोली )

अरे तो क्या हुआ जो लेने आए हैं उसे तो लेना ही पड़ेगा तुम जल्दी से चड्डी निकालो,,,,

क्या,,,?(संजू की बात सुनकर वह काउंटर वाली लड़की एकदम से चौंकते हुए बोली और संजू भी अपनी बात पर गौर करते हुए एकदम से बोला)

मेरा मतलब है जल्दी से अच्छी सी चड्डी दिखाओ,,,

साइज,,,?(गहरी सांस लेते हुए वह काउंटर वाली लड़की बोली)

देख तो रही हो,,,,(एकदम से आराधना के कंधों पर अपने दोनों हाथ रख कर उसे घूमाते हुए,,,) एकदम तरबूज जैसी है बड़ी-बड़ी,,,,(आराधना की गोल-गोल गांड को उस काउंटर वाली लड़की के सामने करते हुए संजू बोला तो वह लड़की एकदम से हकी-बकी रह गई,,,, आराधना भी एकदम से शर्म से पानी के साथ-साथ मदहोश हो गई संजू की हरकत एक तरफ उसे शर्मसार कर रही थी वहीं दूसरी तरफ उसके बदन में मदहोशी का रस घोल रही थी उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसकी चूत बहुत सारा पानी छोड़ रही थी जिसकी वजह से उसकी पेंटिं गीली हो रही थी,,, इस बार उसे काउंटर वाली लड़की ने ज्यादा सवाल जवाब नहीं की और तुरंत आराधना के माप की चड्डी भी निकाल दी,,, जिसे देखकर संजू बोला,,,)

अरे इससे भी जालीदार दिखाओ ना देखने में मजा आए जिसमें सबकुछ नजर आता हो,,,।

(संजू की बात सुनते ही काउंटर वाली लड़की आश्चर्य से आराधना की तरफ देखने लगी आराधना अच्छी तरह से जानती थी कि संजू अपनी मनमानी किए बिना मानेगा नहीं इसलिए बोली)

निकाल दो पहनना ही पड़ेगा,,,,

प्यार बहुत गहरा नजर आता है,,,,(इतना कहकर वह काउंटर वाली मुस्कुरा कर संजू के बताएं अनुसार जालीदार चड्डी भी ले आई जिसे हाथ में लेते ही संजू एकदम से मदहोश होता हुआ बोला,,,)

अब आएगा असली मजा जल्दी से पैक कर दो,,,,

(और फिर वह काउंटर वाली लड़की आराधना के सारे कपड़ों को पैक कर दी और फिर वह बोली,,,)

और इन मैडम के लिए कुछ नहीं लोगे,,,,(मोहिनी की तरफ देखते हुए वह पूरी तो संजू मुस्कुराता हुआ बोला ,,,)

लेंगे क्यों नहीं लेंगे अगर नहीं लेंगे तो नाराज नहीं हो जाएगी और नाराज हो जाएगी तो फिर देगी नहीं,,,,

( देगी नहीं के मतलब को,, काउंटर वाली लड़की अच्छे से समझ रही थी और वह एकदम से शर्मा गई और पल भर में अपने मन में कल्पना करने लगी कि अगर वास्तव में यह उसे लड़की के लिए चड्डी और ब्रा नहीं खरीदेगा तो घर पर जाकर वह लड़की सच में उसे चोदने नहीं देगी वह बार-बार उसे मनाएगा और वह रूठ जाएगी इस तरह के दृश्य को वह अपने मन में कल्पना करके वह पानी पानी हो गई,,,, मोहिनी भी एकदम बेशर्मी दिखाते हुए बोली,,,)

सही कह रहे हो अगर नहीं दिलाओगे तो मैं दूंगी भी नहीं सिर्फ मम्मी की लेते रहना,,,,

(मोहिनी की बात सुनकर आराधना उसे आश्चर्य से देखने लगी और मोहिनी को ही सिर्फ सुनाई दे इतने धीमे श्वर में बोली ,,,)

अब तू भी शुरू पड़ गई,,,,

साइज बताओ,,,,,,(गहरी सांस लेते हुए वह काउंटर वाली लड़की बोली तो इस बार भी संजू बीच में बोल पड़ा)

देख लो अभी तो मोसंबी जैसे हैं तीन-चार महीने बाद लेकर आऊंगा तो इसके भी कश्मीरी सेव की तरह हो जाएंगे,,,,

(एक बार फिर से संजू की बात को सुनकर काउंटर वाली लड़की ने गहरी सांस ली और अपनी मां से ही उसके साइज की ब्रा और पेटी निकलने लगी क्योंकि उसका साइज भी खुद उसके जैसा ही था वैसे तो इस तरह की बातें और हरकत पर किसी भी काउंटर वाली लड़की मैनेजर से शिकायत कर सकती थी लेकिन न जाने क्यों इस काउंटर वाली लड़की ने संजू की बात पर बिल्कुल भी विरोध नहीं किया था बल्कि उसकी बातों का आनंद ही ले रही थी तभी तो उसकी खुद की चूत पानी छोड़ रही थी,,,, थोड़ी ही देर में खरीदी हो चुकी थी दुकान से निकलते निकलते 8:00 बज गए थे काफी देर हो चुकी थी और वैसे भी संजू ने कुछ ज्यादा ही दूरी पर लेकर आया था तीनों जल्दी से स्कूटी पर बैठ गए और संजू थोड़ा तेज भागते हुए कुछ ही देर में अपने घर के पास वाले बाजार में पहुंच गया और वहां से खाना पैक करा कर वह तीनों घर पर पहुंच गए,,, इस सफ़र से तीनों काफी थक चुके थे इसलिए खाना खाकर तीनों एक ही बिस्तर पर सो गए,,,, उन तीनों को बेसब्री से सुहागरात वाली रात का इंतजार था।
 
आखिरकार वह दिन आ ही गया जिसका इंतजार पूरे परिवार को था ,,,, आराधना का दिल कुछ ज्यादा ही उत्तेजना से धड़क रहा था क्योंकि उसके जीवन में दूसरी बार सुहागरात वाली रात आने वाली थी पहली सुहागरात तो अपने पति के साथ मनाई थी लेकिन दूसरी सुहागरात उसे अपने बेटे के साथ मनानी थी,,, वैसे तो वह रोज ही अपने बेटे के साथ सुहागरात मानती थी और सुहागदीन भी,,, लेकिन आज की रात उसके जीवन की बहुत ही खास रात होने वाली थी और जिसका इंतजाम पहले से ही मोहिनी ने कर रखी थी और यह मोहिनी का ही सुझाव था सुहागरात मनाने का अपने पति से अलग होने का दुख नहीं बल्कि खुशी मनाना चाहती थी,,,,।

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वैसे भी कोई भी औरत अपने पति से अलग होना नहीं चाहती लेकिन संजोग इस तरह के बन जाते हैं कि उसे अपने पति से अलग होना ही पड़ता है क्योंकि हालात उसकी सोच के बिल्कुल विपरीत चलने लगते हैं जैसा की आराधना के साथ हो रहा था पति की पीड़ा से वह पूरी तरह से जूझ रही थी कुछ वर्षों से उसे पति का प्यार पति की तरफ से मान सम्मान बिल्कुल भी नहीं मिल रहा था और आए दिन गलत गलत इल्जाम लगाने से आराधना अंदर ही अंदर टूट गई थी और ऐसे हालात में उसे अपने बेटे का सहारा मिला और अपने बेटे का सहारा पाकर वह भावनाओं में बहकर अपने बेटे के साथ ही शारीरिक संबंध बन बैठी जिसका उसे अब कोई मलाल नहीं था और वह यही सोच रही थी कि अच्छा ही हुआ कि उसके पति से उसे छुटकारा मिल गया अब वह अपनी जिंदगी आराम से गुजार सकती थी अपने बच्चों के साथ,,,,।

आज मोहिनी काफी खुश नजर आ रही थी क्योंकि सब कुछ उसके सोच के मुताबिक हो रहा था,,,‌। उसकी मां और उसका बड़ा भाई यह बात अच्छी तरह से जानते थे आज की रात दोनों की सुहागरात थी लेकिन कैसे होगी यह वह दोनों नहीं जानते थे जिसका इंतजाम मोहिनी को खुद करना था,,,,। सुबह-सुबह ही रसोई घर में खाना बनाते हुए आने वाली रात के बारे में सोच कर आराधना मंद मंद मुस्कुरा रही थी और उसे मुस्कुराता हुआ देखकर रसोई घर में पानी पीने आई मोहिनी अपनी मां का मुस्कुराता हुआ चेहरा देखकर चुटकी लेते हुए बोली,,,।

क्यों मम्मी आज रात की सुहागरात के बारे में सोच कर मुस्कुरा रही हो ना,,,।

(मोहिनी के मुंह से इतना सुनते ही आराधना शर्म से पानी पानी हो गई,,, क्योंकि एक मां से एक बेटी इसकी सुहागरात के बारे में बात करें भला ऐसा कौन सी मैन चाहेगी लेकिन यहां पर हालात बिलकुल विपरीत थे,,,, और शायद ऐसा पहली बार हो रहा था कि अपनी मां की सुहागरात की तैयारी एक बेटी कर रही थी और वह भी अपने भाई के साथ होने वाली सुहागरात के लिए,,,,, बहने अक्सर अपनी भाभी के लिए सुहागरात की सेज सजाती है फूलों से महकाती है लेकिन यहां पर उसके बिल्कुल विपरीत हो रहा था यहां पर मोहिनी को अपनी मां की सुहागरात की तैयारी करनी थी और इसीलिए मोहिनी की बात सुनकर आराधना शर्म से पानी पानी होने लगे लेकिन वहां अपने चेहरे पर अपनी उत्सुकता को छुपाने में नाकामयाब साबित हो रही थी उसके चेहरे पर उत्तेजना और उत्सुकता के भाव बराबर दिखाई दे रहे थे और इसीलिए मोहिनी अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तुम आज की रात के लिए बेहद उत्सुक हो ,, और अंदर ही अंदर अपने आप को तैयार कर रही हो लेकिन तुम्हें रात के मुकाबले के लिए किसी भी प्रकार की तैयारी की जरूरत नहीं है क्योंकि इस तरह के खेल में तो तुम अच्छी तरह से माहिर हो,,,,।

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मोहिनी तु बहुत शैतान हो गई है,,, भला कोई अपनी मां से इस तरह की बातें करता है,,,।

मैं अच्छी तरह से जानती हूं मम्मी की बेटी के लिए अपनी मां के बारे में इस तरह की बातें करना ठीक नहीं है लेकिन एक औरत की होने वाली सुहागरात के बारे में उसकी सहेलियां उसके साथ बात करके चुटकी लेती है और यहां पर समझ लो कि मैं ही तुम्हारी सहेली हूं जो आज की सुहागरात के बारे में तुमसे हंसी मजाक कर रही है,,,।

तू भी ना मोहिनी एकदम पागल है क्या जरूरत है यह सब की,,,

क्यों नहीं जरूरत है आज से तुम्हारे जीवन की नई शुरुआत होने वाली है और इसीलिए आज का दिन बहुत खास होना चाहिए और एक औरत के लिए इसकी सुहागरात ही सबसे खास होती है इसीलिए तुम्हारे लिए मैं सारा इंतजाम करने जा रही हूं,,,।

मैंने तो ऐसा कुछ मत कर मुझे बहुत शर्म आ रही है,,,

वो हो,,, यह तो और भी अच्छी बात है वैसे भी दुल्हन को अपनी सुहागरात को लेकर शर्माना ही चाहिए जितना तुम ज्यादा शर्माओगी भाई उतना ज्यादा मजा देगा तुमको,,,,

अरे हां तेरा भाई कहां है आज दिखाई नहीं दे रहा है,,,।

रात की तैयारी में लगा होगा लंड पर तेल लगा रहा होगा,,, ताकि आज तुम्हारी चूत का भोसड़ा बना सके,,,,।

(इतना सुनते ही आराधना झूठ-मूठ का गुस्सा दिखाते हुए हाथ में बेलन लेकर मोहिनी को मारने के लिए आगे बढ़ी तो मोहिनी खिलखिला कर हंसकर वहां से चली गई,,,, और आराधना अपनी चूत को अकेली होती हुई महसूस करने लगी उसे अपनी बेटी की बातें बेहद मादकता भरी लग रही थी,,, और अपने मन में सोच कर परेशान भी हो रही थी की ये केसे हालात उसके परिवार में बन गए हैं की परिवार में किसी से भी किसी के लिए पर्दा नहीं है मां बेटे बेटी सब लोग एक दूसरे से खुलकर बातें करते हैं जो कि इस तरह की बातें किसी और के परिवार में नहीं होती होगी लेकिन जहां एक तरफ इस तरह की बातें सोचकर आराधना हैरान हो रही थी परेशान हो रही थी वहीं दूसरी तरफ वह इस बात से खुश भी थी कि तीनों के पीछे इस तरह के संबंध हैं तीनों को एक दूसरे की जरूरत पूरी करने का साधन एक दूसरे से मिल जा रहा है वरना आजकल जवान लड़के क्या औरतें भी राह भटकने में समय नहीं लेती,,, आराधना की खुद के बारे में भी यही धारणा थी कि,,,, अगर सही समय पर उसे अपनी बेटी का साथ ना मिलता तो शायद किसी और के साथ शारीरिक संबंध बना लेती,,,,।

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देखते-देखते दिन गुजरने लगा शाम को,,, सारी तैयारी कर लेने के बाद मोहिनी अपनी मां के कमरे का दरवाजा बंद करके उसमें ताला लगा दी थी और अपनी मां को साफ-साफ बोलती थी कि यह कमरा रात को 11:00 बजे ही खुलेगा जिसे वह खुद अपने हाथों से खोलेगी,,,, मोहिनी की बात सुनकर मां बेटे दोनों की सांस ऊपर नीचे हो रही थी उन दोनों को समझ में नहीं आ रहा था कि मोहिनी अंदर कैसा इंतजाम करके रखी होगी इसीलिए दोनों आश्चर्य से एक दूसरे की तरफ देख रहे थे लेकिन दोनों के चेहरे पर उत्तेजना वह आश्चर्य के भाव साथ झलक रहे थे दोनों 11:00 का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे,,,।

वास्तव में ऐसा लग रहा था कि जैसे उनके घर पर शादी वाला माहौल है ,,, मोहिनी के कहने पर उसकी मन खाने में छोले की सब्जी पूरी और खीर बना कर रखी थी जिसे तीनों एक साथ बैठकर खाकर तृप्त हो गए थे लेकिन असली तृप्ति तो अभी बाकी थी,,, क्योंकि अभी तो पेट की आग ठंडी हुई थी बदन की आग बुझाना तो अभी बाकी था,,,,।

खाना खाने के बाद मोहिनी और आराधना दोनों मिलकर बर्तन साफ कर दिए थे और आदत के अनुसार संजू कुछ देर के लिए बाहर टहलने के लिए गया था और यही मौका देखकर मोहिनी,,, जल्दी से अपनी कुर्ती में से चाबी निकाली जिसे वहां अपनी कुर्सी के अंदर ब्रा में डाल कर रखी थी मोहिनी का अपनी ब्रा में से चाभी निकालने का अंदाज आराधना को बेहद मोहक लगा था,,,,। वह चाबी अपने हाथ में लेकर अपनी मां से बोली,,,।

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इधर आओ मम्मी मैं सब समझाती हूं,,,,

(इतना कहने के साथ ही वह धीरे से दरवाजा खोली दरवाजे के दोनों पट को अपने हाथों से धक्का देकर जैसे ही उसने कमरे के अंदर प्रवेश की तो अंदर का नजारा देखकर पीछे खड़ी आराधना एकदम से हैरान रह गई कैमरा वाकई में पूरी तरह से सुहागरात के लिए ही सजा हुआ था मानो कि जैसे मोहिनी अपने भाई की शादी के बाद सुहागरात के लिए कमर सजाई हो आराधना तो हैरान हो गई थी क्योंकि इस तरह से तो इसकी सुहागरात में भी कमरा नहीं सजाया हुआ था जैसा कि आज उसकी लड़की ने उसके लिए कमरा सजा कर रखी थी,,,, आराधना की आंखें आश्चर्य से चोरी हो गई थी बिस्तर फूलों से सजा हुआ था बिस्तर के ऊपर फूलों की लड़कियां लगी हुई थी बीच में दो तकिया रखा हुआ था जिस पर दिल का निशान बना हुआ था और लाल चादर पर भी फूल बिछाए हुए थे अधिकतर गुलाब के फूलों का उपयोग किया गया था जिससे पूरा कमरा मंद मंद खुशबू से भरा हुआ था यह सब देखकर आराधना एकदम हैरान होते हुए बोली,,,।

यह सब क्या है मोहिनी,,,,!

तुम्हारी सुहागरात का इंतजाम है मम्मी आज की रात जिंदगी की सबसे यादगार रात बनने वाली है इसलिए तुम बिल्कुल दुल्हन की तरह सज जाओ,,,।

मतलब,,,,(फिर से आराधना आश्चर्य जताते हुए बोली)

रुको अभी बताती हूं,,,।

(इतना कहने के साथ ही मोहिनी अलमारी के पास गई और अलमारी को खोलकर अपनी मां के लिए लाल रंग की साड़ी लाल रंग का ब्लाउज लाल रंग की पेटिकोट और दो दिन पहले ही खरीदी गई लाल रंग की जालीदार ब्रा और पेटी दोनों निकालकर अपने हाथों में लिए हुए अपनी मां के सामने आ गई और कपड़ों को अपनी मां की तरफ करते हुए बोली,,,,)

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अब जल्दी से अपने पुराने कपड़ों को उतार कर सज धज कर इस कपड़े को पहन लो आज तुम्हे बिल्कुल दुल्हन की तरह लगना है,,,।

(मोहिनी के हाथों में लाल रंग के जोड़े को देखकर आराधना शर्म से मरी जा रही थी... उसे समझ में नहीं आ रही थी कि वह अपनी बेटी को क्या कहें हालात पूरी तरह से बदल गए थे मोहिनी में उसे अपनी बेटी नहीं बल्कि एक सहेली नजर आ रही थी जो उसकी मदद कर रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि कैसे वह अपने बेटी के हाथों से लाल रंग की जोड़े को ले ले,,, क्योंकि भले ही मोहिनी के लिए यह सब सहज था लेकिन आराधना के लिए बिल्कुल भी सहज नहीं था वह शर्म से मरी जा रही थी,,, इसलिए कुछ देर तक वहां मोहिनी की तरफ देखती रह गई तो मोहिनी खुद उसे कपड़े को अपनी मां के हाथों में पकडाते हुए बोली,,,,)

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जल्दी करो मम्मी भाई के आने से पहले तुम दुल्हन की तरह तैयार हो जाना,,,,(और इतना कहकर वह जाने लगी तो उसे रोकने के लिए वह बोली)

अरे सुन तो मुझे बहुत शर्म आ रही है,,,।

मैं कुछ भी सुना नहीं चाहती 15 मिनट में जल्दी से तैयार हो जाओ मैं बाहर से दरवाजा बंद कर देता हूं ताकि इस दरवाजे को भाई अपने हाथों से खोलें,,,,(और इतना कहने के साथ ही मोहिनी कमरे से बाहर निकल गई कमरे के अंदर आराधना शर्म से मरी जा रही थी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी उत्तेजना और उत्सुकता के मारे उसके बदन में हल्का कंपन हो रहा था उसकी टांगें थरथरा रही थी,,, अपने बेटे के साथ हमबिस्तर होना उसके लिए कोई बड़ी बात नहीं थी क्योंकि यह उसके रोज का काम था लेकिन आज की रात कुछ खास थी आज की रात उसे मन बनाकर उसका बिस्तर गर्म नहीं करना था बल्कि उसकी बीवी बनाकर उसका बिस्तर गर्म करना था और एक औरत के लिए तब यह ज्यादा मुश्किल हो जाता है जब वह मां का अदाकारी करते-करते बीवी बन जाए और वैसे भी जिस तरह के संबंध आराधना और संजू के बीच था उसे देखते हुए दोनों के बीच मां बेटे का काम बीवी और पति का रिश्ता कुछ ज्यादा ही था,,,,।

कमरे का दरवाजा बंद हो चुका था मोहिनी कमरे को बाहर से बंद करके अपने कमरे में चली गई थी आराधना इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि 15 20 मिनट में ही उसका बेटा घर पर वापस आ जाएगा और इसी बीच उसे दुल्हन की तरह तैयार होना था उसे अपने पुराने दिन याद आ गए थे जब पहली बार इसी तरह से वह सज-धजकर कमरे में अपने पति अशोक का इंतजार कर रही थी,,, लेकिन आराधना के लिए वह जितना खास दिन था उससे भी ज्यादा खास दिन आज लग रहा था क्योंकि अशोक तो उसका पति था एक बीवी का फर्ज था अपने पति को खुश करने का लेकिन आज वह एक मां थी और अपने बेटे के लिए उसे दुल्हन की तरह सजना था इसीलिए वह परेशान भी थी उत्सुक भी थी और उत्तेजित भी थी,,, उसे समय तो वह अपने पति के लिए सहज रूप से जैसा कि हर औरत अपने जीवन की सुहागरात वाली रात को सजती धजती है, उसी तरह से आराधना भी सजी हुई थी,,,, लेकिन आज इस तरह से एक दुल्हन के रूप में सजने में उसके पसीने छूट रहे थे उत्तेजना के मारे उसकी टांगें कांप रही थी,,, और मदहोशी के आलम में उसकी चूत में घुल रहा मदन रस उसके मुख्य द्वार तक आकर फिर वापस चला जा रहा था,,,। उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसकी चूत कचोरी की तरह फुल चुकी थी,,,।

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आराधना के पास वक्त ज्यादा नहीं था उसे 15 मिनट के अंदर ही तैयार होना था और वह जानती थी कि इसी तरह से खड़ी होकर सोचती रह गई तो समय निकल जाएगा और वह अपने बेटे को सरप्राइज नहीं दे पाएगी जैसा कि उसकी बेटी चाहती है,,, अच्छी तरह से जानती थी कि वह भले ही सुहागरात के लिए इंकार करते लेकिन अपने बेटे के साथ हम बिस्तर तो उसे हर हाल में होना है अपने बेटे के साथ चुदवाना उसके लिए भी बेहद जरूरी है इसलिए वह भी अपने आप को अपने बेटे के साथ होने वाली सुहागरात के लिए तैयार करने लगी,,,, और इसीलिए वह बड़े से आईने के सामने जाकर खड़ी हो गई,,यह आदमकद आईना कुछ महीना पहले ही उसने खरीदी थी क्योंकि वह अपने नंगे बदन को आईने में देखना चाहती थी,,,,। वह आईने में देखते हुए अपने वस्त्र को उतारना चाहती थी और वस्त्र को पहनना चाहती थी और इसी ख्वाहिश के चलते वह आदमकद आईने को खरीदी थी,,, और रोज ही इसके सामने खड़ी होकर वहां अपने कपड़े उतार कर नंगी होती थी और फिर अपने अंगों को देखकर कपड़े पहनकर मन ही मन प्रसन्न होती थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती अच्छी दो-दो बच्चों की मां होने के बावजूद भी आज भी उसके बदन की जवानी देखकर अच्छे-अच्छे का पानी निकल जाता था और,,,, अभी तक उसने अपने बदन को बरकरार बना कर रखी हुई थी।,,

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बड़े से आईने के सामने खड़ी होकर वह कुछ सेकेंड तक अपने आप को देखते रह गई आज भी वह बला की खूबसूरत लगती थी अपने आप को देखते देखते वह अपने कंधे पर से अपनी साड़ी के पल्लू को अपने हाथों से नीचे गिरा दी और ऐसा करने पर उसकी भारी भरकम छातियां ब्लाउज में कैद नजर आने लगी जिसे देखकर उसके होठों की मुस्कान और ज्यादा बढ़ गई,,, क्योंकि अच्छी तरह से जानती थी कि मर्दों को आकर्षित करने में औरतों की गोलाकार चुचीया अहम भूमिका निभाती है पर वह जानती थी कि उसकी चूचियां आज भी पूरी तरह से आकर्षक थी इसके आकर्षण में उसके खुद का जवान बेटा पागल हो चुका था उसका दीवाना हो चुका था,,,, धीरे-धीरे वह अपनी कमर पर बंधी हुई साड़ी को खोलना शुरू कर दी और अगले ही पल वह अपनी साड़ी को उतार कर,,,, एक कोने में रख दी और आईने के सामने वह केवल ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी थी,,,, और इस हालात में वह बला की खूबसूरत लग रही थी।,,,.

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उसके बदन से साड़ी उतारकर कमरे के कोने में पड़ी हुई थी ब्लाउज में इसकी भारी भरकम खरबूजे जैसी गोल-गोल चूचियां जमाने में असमर्थ साबित होती थी लेकिन वह किसी तरह से अपने ब्लाउज के बटन को बंद करके अपनी बेलगाम चूचियों को काबू में करने की कोशिश करती थी इस हालत में अगर कोई भी आराधना के रूप को देख ले तो बिना कुछ बोल ही उसका लंड अपने आप खड़ा होकर अपनी औकात में आ जाए क्योंकि इस रूप में आराधना एकदम काम की देवी लगती थी,,,, ब्लाउज में उसकी भरी हुई ऐसा प्रतीत हो रहा था की बगावत पर उतर आई है ब्लाउज फाड़ कर बाहर आने को आतुर हो गई है लेकिन इसी आतुरता को आराधना खुद अपने हाथों से दूर करते हुए अपने ब्लाउज के बटन को खोलने लगी एक तरफ हुआ अपनी नाजुक उंगलियों को हरकत देकर अपने ब्लाउज के बटन खोल रही थी और दूसरी तरफ वह आईने में अपने आप को निहार रही थी ब्लाउज खोलने में भी उसका एक अलग अंदाज था जिसे देख पाना हर एक मर्द की ख्वाहिश होती है और आराधना की तरफ से एक ख्वाहिश केवल संजू के लिए पर्याप्त थी संजू अपने आप को इस तरह के नजारे को देखकर धन्य समझता था लेकिन अधिकतर वह खुद ब्लाउज को अपने हाथों से खोलना था ऐसा कमी होता था की आराधना अपने हाथों से ब्लाउज का बटन अपने बेटे के लिए खोल रही हो,,,,।

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धीरे-धीरे आराधना एक-एक करके अपने ब्लाउज के सारे बटन को खोल दी और ब्लाउज के दोनों पट अलग हो गए ब्लाउज के दोनों पट अलग होते ही ब्रा में किए थे उसकी दोनों चूचियां एकदम साफ नजर आने लगी आराधना की आदत थी कि वह अपने नाप के हिसाब से एक डोरा कम ही नाप का ब्रा पहनती थी ताकि उसकी चुचियों का कसाव बरकरार रहे,,,,, देखते ही देखते अपने होठों पर मुस्कुराहट भी खेलते हुए आराधना अपने ब्लाउस को उतार कर इस कोने में फेंक दी जहां पर साड़ी पड़ी हुई थी और फिर वह नजर भरकर ब्रा में कैद अपनी चूचियों को आईने में देखने के बाद अपने एक हाथ की उंगलियों को हरकत देते हुए उसे अपनी पेटिकोट की डोरी पर रख दी,,,, और अपने मन में सोचने लगी कि कुछ देर बाद उसके पेटिकोट की डोरी उसका बेटा अपने हाथों से खींच कर खुलेगा और यह खैर मन में आते ही उसके तन-बाद में उत्तेजना के लहर उठने लगी उसके बदन का हर एक तार झनकने लगा,,,, और फिर वह अपनी पेटीकोट की डोरी को अपनी उंगलियों में पकडते हुए खींच दी और उसके हिसाब करने पर कमर से कई हुई पेटिकोट एकदम से ढीली हो गई लेकिन पेटिकोट की डोरी वाली जगह आराधना की कमर के गोलाई में अपने लिए जगह बनाई हुई थी इसलिए उस‌जगह पर उसकी पेटीकोट ढीली होने के बावजूद भी टिकी रह गई थी क्योंकि वह अभी पूरी तरह से ढीली नहीं हुई थी,,,, और आराधना अपने दोनों हाथों की बीच वाली उंगली को पेटिकोट के अंदर डालकर उसे दोनों तरफ घूमर उसे अपनी कमर से ढीली कर ली और उसे उसी अवस्था में अपने हाथों से छोड़ने से पहले आगे से अपनी मुट्ठी में पकड़ ली और एक बार फिर से अपनी रूप लावण्य को देखने लगी,,,, आराधना अपनी जवानी अपना हुस्न देखकर अंदर ही अंदर गर्व महसूस कर रही थी,,, क्योंकि इस उम्र में भी वह पूरी तरह से जवानी से भरी हुई थी इस उम्र में भी उसकी ख्वाहिशें जवां थी,।

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वह आईने में अपने आप को साफ देख पा रही थी उत्तेजना के मारे उसकी सांसे गहरी चल रही थी और गहरी सांसों के चलने की वजह से उसकी चूचियां जो कि अभी भी ब्रा में खेती थी वह ऊपर नीचे हो रही थी और उसकी ऊपर नीचे हो रही चूचियां खुद उसकी हालत को खराब कर रही थी तो मर्दों की बीसात ही क्या थी,,, आराधना समय की मर्यादा को अच्छी तरह से जानती थी खुद तो वहां अपनी मर्यादा को लग चुकी थी लेकिन इस पल की मर्यादा को लांघना नहीं चाहती थी क्योंकि वह समय में रहकर अपने बेटे को आश्चर्यचकित कर देना चाहती थी जिसके लिए उसकी बेटी ने पूरी तैयारी करके रखी थी,,,। और इसीलिए वहां अपनी पेटीकोट को जो कि वह मुट्ठी में पकड़ रखी थी अपनी मुट्ठी को खोल दी और उसकी पेटिकोट मुट्ठी में सरकती हुई रेत की तरह भरभरा कर उसके कदमों में जा गिरी और आराधना आईने के सामने ब्रा और पेटी में आ गई,,,, इस रूप में भी आराधना का रूप यौवन पूरी तरह से मिला हुआ नजर आ रहा था वैसे तो वह कपड़ों में जिस तरह की सुंदरता की मूरत दिखाई देती थी उससे भी कई ज्यादा मदहोश कर देने वाली सुंदरता उसकी नग्नता में नजर आती थी,,,, और आराधना अपने बदन की नग्नता की ओर अग्रसर थी,,,, उसे संपूर्ण रूप से वस्त्र विहीन होने में अभी भी केवल दो वस्त्र ही रह गए थे जो औरतों की जवानी और मर्दों की उत्तेजना के केंद्र बिंदु बने रहते हैं उसकी ब्रा और उसकी पेंटिं जिसमें वह दुनिया का सबसे बेस्ट कीमती खजाना छुपाए बैठी थी,,, चुची और चूत,,,, यह दो शब्द ऐसे थे जिसके लिए मरद किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार रहता है औरतों के इस दो अंग को पाने के लिए वह पूरी ताकत झोंक देता है और इसे प्राप्त कर लेने के बावजूद भी अपनी मर्दाना ताकत दिखाने के लिए उसे अपनी जवानी का रस नहीं छोड़ देना पड़ता है जिसमें बहुत कम लोग ही कामयाब हो पाते हैं और जो कामयाब हो जाते हैं औरतें उनकी मर्दानगी की दीवानी हो जाती है जैसा की आराधना अपने बेटे की मर्दानगी की पूरी तरह से दीवानी हो चुकी थी,,,,।

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अब समय आ गया था आराधना को नंगी होने के लिए और इसीलिए वह अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर अपनी ब्रा का हुक खोलने लगी और अगले ही पल वह अपनी ब्रा कहो को खोलकर धीरे से नजाकत दिखाते हुए अपने दोनों हथेलियां को अपनी चूची पर रखकर ब्रा के कप को अपनी हथेली में लेकर उसे धीरे से अपनी बाहों में से ब्रा की डोरी को निकलने लगी और अगले ही पल उसकी छाती से उसकी ब्रा अलग हो चुकी थी और ब्रा के अलग होते ही उसकी सुंदरता में चार चांद लग गए थे जिसमें से दो चांद उसकी छाती पर नजर आ रहे थे,,,,, वैसे तो औरतें आसमान में चांद को देखकर अपना व्रत तोड़ती है लेकिन मर्द हर एक रात को अपनी बीवी के दोनों चांद को देखकर ही उसकी रोशनी में नहाते हैं,,,,।

आराधना आईने में अपनी दोनों चूचियों को देख रही थी जो की खरबूजे के आकार में एकदम गोल नजर आ रही थी और सबसे आश्चर्यचकित कर देने वाली बात यह थी कि अभी भी उसकी छातिया की शोभा बढ़ा रही है उसकी दोनों चुचियों में बिल्कुल भी ढलाव नहीं आया था उसमें जरा भी लचकपन नहीं था आज भी जवानी के दौर की तरह ही एकदम मजे हुए सैनिक की तरह जवानी के मुख्य द्वार पर सीना ताने खड़े थे,,,, आराधना की यह वही चूचियां थी जिसे देखकर अच्छे अक्षरों के मुंह में पानी आ जाता था हालांकि संजू से ज्यादा और कोई भी खुशकिस्मत नहीं था क्योंकि संजू तो अपनी मां की नंगी चूचियों के दर्शन रोज ही करता था और उनसे खेलते भी था लेकिन बाकी के मर्द तो केवल उन्हें वस्त्र में देख कर ही केवल अंदाजा लगाकर ही अपनी उत्तेजना को शांत करने के लिए अपने हाथों का प्रयोग करते थे जबकि संजू अपनी मां की दोनों जवानी से खेल कर उसके छोटे से गुलाबी छेद में अपना औजार डालकर अपनी जवानी का रस निकलता था,,,, अपनी कई हुई चूचियां देखकर आराधना के होठों पर मुस्कान तैरने लगी क्योंकि उसे इस बात का करवा था कि इस उम्र में भी उसकी चुचियों का कसाव बरकरार था और यह सब उसकी देखरेख और संजू के प्यार का नतीजा था,,,, एक बार ना चाहते हुए भी वह अपने दोनों हाथों को अपने दोनों चूचियों पर रखकर उसे हल्के-हल्के सहलाते हुए उत्तेजना के आसार में हल्के से दबा दी और उसे दबाते ही उसके चेहरे के भाव एकदम से बदल गए और वह अपनी ही नजर में शर्मा गई,,,,। वह इस बात से और ज्यादा उत्तेजित और उत्सुक थी कि थोड़ी देर बाद उसका बेटा उसकी दोनों जवानियों को अपने हाथों में लेकर जी भर कर खेलेगा उन्हें टमाटर की तरह लाल कर देगा,,,, और यही सोचते हुए आराधना अपनी पैंटी की तरफ नजर डालकर देखने लगी उसे अपनी दोनों टांगों के बीच अपनी पेंटी के निचले हिस्से पर गीलापन महसूस हो रहा था जो की आईने मे उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी पैंटी आगे से पूरी तरह से गिली हो चुकी थी। और अपनी स्थिति को देखकर वहां खुद आईने के सामने शर्म से पानी पानी होने लगी क्योंकि अभी तो शुरुआत थी अभी तो पूरी रात बाकी थी अभी तो वह कमरे में केवल अकेली थी अभी तो उसका साजन आना बाकी था जो उसे बिस्तर पर ले जाकर उसके बदन को अपनी बाहों में लेकर उसे तार-तार कर देने वाला था,,,, उसके छोटे से गुलाबी छेद को अपने औजार से फैलाकर भोसड़ा बना देने वाला था और इन सब के लिए वह अपने आप को पूरी तरह से तैयार कर रही थी वह जानती थी कि आज की रात उसके जीवन की यादगार रात होने वाली थी इसीलिए तो उसकी चूत बार-बार पानी छोड़ रही थी ,,,,।

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अपनी गीली पेंटी को नजर अंदाज करके वह अपने दोनों हाथों की नाजुक उंगलियों को हल्के से दोनों तरफ से अपनी पैंटी के अंदर प्रवेश कर कर उसे उंगलियों के सहारे से पकड़ ली और उसे धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरकाने लगी यह नजारा भी क्या खूब था,,, आराधना अपनी उंगलियों को हरकत दे रही थी और इस अंदाज को इस नजारे को वह आईने में देख रही थी जैसे-जैसे उसके बदन की चड्डी नीचे की तरफ जा रही थी वैसे-वैसे उसकी जवानी का केंद्र बिंदु आईने में साफ नजर आ रहा था,,,, चूत पर मखमली बाल का रेशा तक नहीं था क्योंकि आराधना की इबादत पड़ चुकी थी वहां दो-तीन दिन के बाद खुद क्रीम लगाकर अपनी चूत के बाल को एकदम साफ कर देती थी एकदम चिकनाहट भारी रखती थी ताकि उसके बेटे का इमान बार-बार उसे देखकर फिसलता रहे,,,,, और देखते ही देखते आराधना को आईने में उसकी खुद की कचोरी जैसी खुली हुई चूत एकदम साफ नजर आने लगी अभी वह चड्डी को केवल अपनी चूत के आकार के नीचे तक ले गई थी यह नजारा देखकर उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी वह जानती थी कि जब उसकी हालत हो रही है तो जब उसका बेटा अपने हाथों से उसकी चड्डी उतारेगा उसकी गुलाबी चूत को देखेगा तो उसकी क्या हालत होगी,,, लेकिन इतना तो वह जानते ही थी कि संजय के लिए तो यह उसका रोज का काम था,,, लेकिन वह इस बात को भी अच्छी तरह से जानती थी कि आज की रात इस तरह से उसके लिए खास थी उसके बेटे के लिए भी बेहद खास होने वाली थी इसलिए आज जो कुछ भी होगा उसके और उसके बेटे के जीवन में पहली बार होगा और आज की रात दोनों के जीवन को पूरी तरह से बदलकर रखने का इसीलिए वह उत्सुक थी कि जब उसका बेटा अपने हाथों से उसकी चड्डी उतरेगी और उसकी गुलाबी चूत देखेगा तो उसके चेहरे के भाव कैसे नजर आते हैं,,,। यही सब सोते हुए आराधना अपनी चड्डी को देखते-देखते अपने घुटनों के नीचे तक ले आई और उसके बाद खुद एकदम से खड़ी हो गई अपने पैरों के सहारे से अपने पैर में से अपनी चड्डी को उतार दी और अपनी ही चड्डी को अपनी पर के अंगूठे और उंगली का सहारा लेकर पड़कर उसे हल्के से ऊपर की तरफ उठाई और अपनी चड्डी को हाथ में लेकर वह अपनी चूत से निकल रहे काम रस को साफ करके पेंटिं को भी कमरे के कोने में फेंक दी,,,।

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पूरी तरह से नंगी हो जाने के बाद आराधना अपने आप को अपने रूप को आईने के अंदर देखने लगी और अपनी नितंबों को आईने की तरफ घूमर अपनी नजर को तिरछी करके आईने में अपनी गोलाकार गांड को देखने लगी जो कि एकदम जानलेवा नजर आ रही थी कमर से नीचे का भाग पूरी तरह से उन्नत पहाड़ की तरह उभर कर नजर आ रहा था जिसे देखकर उसके होठों पर मुस्कान तैरने लगी,,, और वह अपने मन में ही कहने लगी कि इस गाने को देखकर तो उसका बेटा चारों खाने उचित हो जाएगा,,, ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में उसका गोरा बदन एकदम दूध की तरह चमक रहा था वह बार-बार आईने में अपनी नितंबों को देख रही थी और अपने दोनों हथेलियां को उसे पर रखकर हल्के हल्के सहला रही थी,,,,, उसे अपनी नितंबों की त्वचा एकदम मक्खन मलाई की तरह फिसलते हुई महसूस हो रही थी और वह इस बात से खुश थी कि जब उसका बेटा अपने होठों से उसके नितंबों का स्पर्श करेगा तो वह मदहोश हो जाएगा और जी भर कर उसके नितंबों से खेलेगा उसके छोटे से छेद पर जीभ लगाकर चाटेगा,,,, अपने मन में यही सोचते हुए आराधना को एक शरारत सूझी और वह थोड़ा सा आगे की तरफ झुककर अपने नितंबों की तरफ देखते हुए अपने दोनों हाथों से अपनी गांड के दोनों आंखों को हल्के से फैला कर अपनी गुलाबी छेद और अपनी गांड के बुरे छेद की तरफ देखने लगी और दोनों ही छेद पूरी तरह से मर्दाना अंग को अपने अंदर लेने के लिए आतुर नजर आ रहे थे अपने छोटे से छेद को देखकर आराधना के तन-बदन में उत्तेजना की लहर उठने लगी,,, और वह अपने मन में सोचने लगी की औरत के यही दो छेद मर्दों को पूरी तरह से जीवन भर औरत का गुलाम बनाकर रख देती है,,,,,।

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थोड़ी देर में वह अपनी पूर्व वत स्थिति में आ चुकी थी,,, और टेबल पर पड़े अपने लाल रंग के जोड़े की तरफ देख रही थी कपड़ों को पहनने से पहले वह अलमारी की तरफ गई और उसमें से जो कि अभी भी अलमारी खुली हुई थी वह एक हल्के खुशबू वाला परफ्यूम निकाली और उसे हल्के से अपने हाथ को ऊपर करके अपनी कांख में उसे परफ्यूम को स्प्रे करने लगी ताकि उसमें खुशबू बरकरार रहे और फिर वह उसे परफ्यूम को हल्के से अपनी चूत पर भी मार कर उसे खुशबूदार बना दी ताकि जब उसका बेटा उस पर जीभ लगाकर चाटे तो वह उसकी खुशबू से और ज्यादा मदहोश हो जाए,,,,,, आराधना किसी भी तरह से इस यादगार रात को पूरी तरह से अपनी मधुर एहसास से भर देना चाहती थी ताकि उसका बेटा जिंदगी भर उसकी जवानी की प्यास बुझाता रहे,,,,।

अपने बेटे के द्वारा खरीदी गई चड्डी को अपने हाथ में लेकर उसे उत्तेजना के मारे अपनी चूत फूलती और पिचकती हुई महसूस होने लगी उसे जालीदार चड्डी को देखकर वह समझ गई थी किस पहनने के बावजूद भी अपनी चूत छुपाने का कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि सब कुछ नजर आ रहा होगा और यही सोचकर वह चड्डी को वापस टेबल पर रखती और फिर लाल रंग की बरा अपने हाथों में ले ले जो कि वह भी जालीदार था जिसमें से उसकी चूचियां उसकी निप्पल सब कुछ नजर आने वाली थी वह मुस्कुराते हुए ब्रा को पहनने लगी,,,, और देखते ही देखते अपने गर नंगे बदन पर ब्रा को पहनकर वहां दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर अपनी ब्रा का हुक बंद कर दी और आईने में अपने आप को देखने लगी,,, गोरे बदन पर लाल रंग की ब्रा बहुत ही खूबसूरत लग रही थी और जालीदार ब्रा में से उसकी नंगी गोरी गोरी चूचियां झलक रही थी और साथ ही उसकी चॉकलेटी रंग की छोटी सी कैडबरी जैसी चॉकलेट भी उत्तेजना के मारे तनकर अपना अस्तित्व दिख रही थी,,,, आराधना अपने दोनों हथेलियां को अपनी चूचियों पर रखकर उसे हल्का सा ऊपर की तरफ उठाकर उसे ब्रा में अपनी चूचियों को फिट करने लगी और फिर मुस्कुराते हुए वहां फिर से अपनी लाल रंग की चड्डी को अपने हाथों में ले ली और फिर नीचे की तरफ झुक कर उसमें एक-एक करके दोनों पैरों को डालकर अपनी चड्डी को ऊपर की तरफ उठने लगी और अगले ही पर वह अपनी छोटी सी गुलाबी छेद को उसमें छुपाने की नाकाम कोशिश करते हुए अपनी चड्डी को पहन ली लेकिन आईने में देखकर उसे साफ पता चल रहा था की चड्डी में उसका अंग बिल्कुल भी छुपा नहीं था ,,, जालीदार चड्डी में उसकी खुली हुई चूत का हर एक हिस्सा नजर आ रहा था और उसे जालीदार चड्डी से उसकी चूत पूरी तरह से चिपकी हुई थी इसलिए उसका आकार भी एकदम साफ नजर आ रहा था खुद अपनी चूत को देखकर आराधना के दिल की धड़कन बढ़ चुकी थी,,,,,

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वह मुस्कुराते हुए अपने लाल रंग के ब्लाउज को अपने हाथों में ले ली और उसे पहनने लगी और एक-एक करके अपने सारे बटन को बंद करके वह ब्लाउज को व्यवस्थित करके पेटिकोट की तरफ हाथ बढ़ा दे पेटिकोट को पहनने के बाद उसे इस बात का एहसास होगा कि लाल रंग की पेटिकोट उसके नितंबों से एकदम चिपकी हुई थी पेटिकोट का कसम उसके नितंबों पर एकदम जबरदस्त कसा हुआ था जिसकी वजह से उसके नितंबों का आकार भी एकदम खुलकर सामने नजर आ रहा था,, वहां पेटीकोट को पहन कर उसकी डोरी को गीठान मारते हुए आईने की तरफ घूम कर अपने नितंबों को देख रही थी जो की काफी ऊभरी हुई नजर आ रही थी,,, और फिर देखते ही देखते वहां लाल रंग की साड़ी को पहनकर एकदम दुल्हन की तरह तैयार हो चुकी थी,,,,, लेकिन अभी भी उसका सिंगार बाकी था,,,।

वह धीरे से अलमारी की तरफ गई और ड्रोवर खोलकर,,, उसमें से अपने गहने और चूड़ियां निकलने लगी और उसे एक-एक करके अपनी कलाइयों में सजने लगी देखते-देखते वह अपनी दोनों कलाइयों में ढेर सारी चूड़ियां लाल रंग की हरी रंग की पीले रंग की पहन ली थी और उसकी चूड़ियों की खनक से पूरा कमरा मधुर संगीत से गुंज रहा था,,,, वह धीरे-धीरे अपनी शादी के गहने भी पहने लगी और फिर माथे पर बिंदी लगाकर वह लाल रंग की लिपस्टिक अपने होठों पर लगाकर अपने रूप यौवन को और भी मादकता प्रदान करने लगी लाल रंग की लिपस्टिक लगाकर तो वह वाकई में एकदम दुल्हन की तरह नजर आ रही थी जिसे देखने के बाद किसी भी दूल्हे का लंड खड़े-खड़े पानी छोड़ दे,,,, वह दुल्हन की तरह सज कर तैयार हो चुकी थी,,,,। और यह सब वह मोहिनी के द्वारा दिए गए समय मर्यादा में पूरा कर ली थी वह अपने आप को अपने रूप यौवन को आईने में देखकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी कि तभी बाहर का दरवाजा खुलने की आवाज आई और वह झट से बिस्तर पर फूलों की लाडो को अपने दोनों हाथों से हटाते हुए बिस्तर के बीचो-बीच दुल्हन की तरह सिमट कर जाकर बैठ गई,,,,, वह जान गई थी कि संजू वापस आ चुका था,,,।

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संजू अच्छी तरह से जानता था कि आज की रात उसके और उसकी मां की सुहागरात की रात थी लेकिन वह अपनी मां के कमरे में जाने से पहले अपने कमरे में गया जहां पर मोहिनी पहले से उसका इंतजार कर रही थी और उसे देखकर मुस्कुराते हुए बोली,,,।

आओ मेरे मम्मी के दुल्हेराजा,,,,

तेरा भी तो हूं,,,,,

वह तो है ही,,,, लेकिन आज की रात के लिए तो तुम मेरी मम्मी के दूल्हे राजा होना इसीलिए कह रही हूं कि एक दूल्हे की तरह तैयार हो जाओ,,,(इतना कहते हुए वह अपनी जगह से उठकर खड़ी हुई और पास में ही टेबल पर पड़े शेरवानी को उठाकर संजू की तरफ आगे बढ़ाते हुए बोली,,,) लो ईसे पहन लो,,, और एक दुल्हन के लिए दूल्हा बन जाओ,,,,।

(मोहिनी की बात और शेरवानी की तरफ देख कर संजू थोड़ा आश्चर्य में पड़ गया और बोला ,,,)

यह सब क्या है,,,?

दूल्हे की पोशाक,,,,

क्या मोहिनी,, तू भी ना,,,,

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अब मैं कुछ नहीं सुनना चाहती बस जल्दी से इसे पहन कर तैयार हो जाओ,,,,,,

तू अपनी जीद पूरी करके ही रहती है,,,।

जीद पूरी करने में ही तो मजा है,,,, लो जल्दी से समय मत बर्बाद करो,,,, कमरे में मम्मी तुम्हारा इंतजार कर रही है,,,,।

(थोड़ी ही देर में संजू की शेरवानी पहनकर एकदम दूल्हे की तरह तैयार हो गया,,,, शेरवानी में संजू और भी ज्यादा खूबसूरत और गठीले बदन का लग रहा था,,,, उसे ऊपर से नीचे तक देखते हुए मोहिनी बोली,,,)

वह भाई तु तो एकदम सच का दूल्हा लग रहा है,,,, तुझे देखते ही मम्मी का पानी निकल जाएगा,,,,,।

बस अब बकवास बंद कर,,,,(संजू थोड़ा सा शरमाते हुए बोला,,,, वैसे तो वह कभी भी समाधान नहीं था लेकिन आज दूल्हा बनने के बाद उसे भी शर्म महसूस हो रही थी और अच्छा भी लग रहा था,,,,)

चलो मैं तुम्हें मम्मी के कमरे तक छोड़ देती हूं,,,,(और इतना कहने के साथ है मोहिनी अपने भाई का हाथ पकड़ कर उसे अपनी मां के कमरे के पास लेकर गई और दरवाजे के बाहर से ही आवाज लगाते हुए बोली,, )

आ गया तुम्हारा दूल्हा,,,,,(और हंसते हुए अपने कमरे में चली गई,,,,,, अंदर आराधना फूलों से सजाई हुई सेज पर बैठी हुई थी,,, मोहिनी की आवाज सुनते की उसका दिल जोरो से धड़कने लगा वाकई में आज उसे दुल्हन बनने का एहसास हो रहा था,,,,,, इसलिए अपने दूल्हे को दरवाजे पर खड़ा हुआ महसूस करके उसके अंदर की दुल्हन पूरी तरह से जागरूक हो चुकी थी और यह दुल्हन का एहसास उसे अपनी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में बड़े अच्छे से हो रहा था,,,, जिस तरह की उत्सुकता आराधना के मन में हो रही थी उसी तरह की उत्सुकता संजू के मन में भी हो रही थी वह भी अपनी दुल्हन से मिलने के लिए बेकरार था वैसे तो वह रोज ही मिलता था लेकिन आज के बाद कुछ और थी आज वह अपनी मां से नहीं बल्कि अपनी दुल्हन से मिलने जा रहा था इसीलिए वह धीरे से दरवाजे की सीटकनी को खोला और सीटकनी के खुलने की आवाज से ही आराधना का दिल बड़ी जोरों से धड़कने लगा,,,,

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,,,कमरे का दरवाजा संजू ने अपने हाथों से खोल दिया था और सिटकनी की आवाज होते ही आराधना के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी शर्म और उत्तेजना के मारे उसका बदन फूलों के सेज पर संकुचाने लगा था,,,, उसका दिल बड़े जोरों से धड़कता था,,, ऐसा गजब का एहसास तो उसे अपनी सुहागरात वाली रात को भी नहीं हुआ था जैसा कि आज सिर्फ बनावटी सुहागरात वाली रात को हो रहा था,,,,,,, दोनों तरफ हाथ बराबर लगी हुई थी दोनों मां-बाप के जानते थे कि आज की रात को क्या करना है वैसे तो इस खेल को वह रोज रात को खेलते ही थे लेकिन आज की रात कुछ अलग ही थी आज की रात का जायका ही कुछ और था,, इसीलिए तो दोनों मिलन के लिए उत्सुक थे,,,, ना तो संजू ने और ना ही आराधना ने,,, कभी सपने में सोची थी कि उनके जीवन में ऐसा पल भी आएगा जब मां बेटे होने के बावजूद भी एक पवित्र रिश्ते को उतारकर करने के बाद एक अनोखे बंधन में बदलने के लिए उन दोनों को सुहागरात वाली रस्मो रिवाज से गुजरना होगा,,, लेकिन इसमें उन दोनों को किसी भी प्रकार का संकोच नहीं था बल्कि दोनों इस रस्मो रीवाज से गुजरने के लिए बेताब नजर आ रहे थे,,, ।

वैसे भी सुहागरात वाली रस्म बहुत ही गजब और अजीब भी है क्योंकि इसमें जो कुछ भी होता है सबको मालूम होता है जब लड़की का विवाह होता है तो उसके बाद पहली रात उसके जीवन की सुहागरात होती है जिसमें वर पक्ष को और वधू पक्ष को दोनों को पता होता है की सुहागरात वाली रात को क्या होने वाला है,,, लड़के के परिवार वाले,,, इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं कि सुहागरात वाली रात को उनका बेटा अपनी बीवी की चुदाई करेगा पहली चुदाई और लड़की के परिवार वाले भी अच्छी तरह से जानते हैं कि सुहागरात वाली रात को उनकी बेटी जमकर चुदवाती है अगर यही क्रिया को वह शादी से पहले करें तो समाज बातें होने लगती है थु थु होने लगता है लेकिन शादी के बाद उन्हें समाज की तरफ से कानून की तरफ से परिवार की तरफ से पूरा हक प्राप्त होता है कि वह जो चाहे वह कर सकते हैं,,,,।

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लेकिन अनुराधा और संजू के मामले में ऐसा बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि उन दोनों के बीच प्रेमी प्रेमिका या पति-पत्नी का रिश्ता बिल्कुल भी नहीं था दोनों के बीच मां बेटे का पवित्र रिश्ता था जो कि इस रिश्ते को वह दोनों पहले से ही तार कर चुके थे और बाकी कसर आज की रात को उतार लेना चाहते थे उन दोनों के रिश्ते को ना कानूनी तौर पर मान्यता थी और ना ही सामाजिक तौर पर,,,, लेकिन दोनों के बीच शारीरिक संबंध प्रस्तापित था,,,, क्योंकि दोनों के बीच शारीरिक संबंध एक दूसरे की जरूरत थी या आप इसे मजबूरी कह लो या जरूरत दोनों एक दूसरे के पूरक हो चुके थे,,,,।

और इसी संबंध को और भी ज्यादा परिपकव बनाने के लिए संजू अपनी मां के कमरे में दाखिल हो चुका था कमरे में दाखिल होते ही उसकी नजर अपनी मां पर पड़ी तो वह दिखता ही रह गया उसकी आंखें फटी की फटी रह गई,,, फूलों से सजे बिस्तर पर लाल रंग के जोड़े में अपनी मां को देखकर संजू की आंखों में वासना का तूफान को मरने लगा वह मदहोश होने लगा इस रूप में वह पहली बार अपनी मां को देख रहा था हालांकि वह अपनी मां को संपूर्ण रूप से हर एक रूप में दे चुका था चाहे वह कपड़ों में हो या नंगी हर एक रूप का मजा संजू ले चुका था लेकिन दुल्हन के रूप में वह पहली बार देख रहा था इसलिए तो उसकी हालत खराब होती जा रही थी उसे सच में ऐसा लग रहा था कि आज उसकी शादी हुई है और आज की रात उसकी सुहागरात है और उसकी दुल्हन बिस्तर पर उसका इंतजार कर रही है,,,,, कमरे में दाखिल होते ही संजू की उपस्थिति का अहसास होते ही आराधना के तन-बाद में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी उसके बदन में कम से हाथ जोड़ने लगी जिसके चलते उसके हाथों में सजी रंग बिरंगी चूड़ियां शोर मचाने लगी और उसे रंग बिरंगी चूड़ियों की खनकने की आवाज से संजू केतन बदन में मदहोशी छाने लगी उसकी आंखों में चार बोतलों का नशा छाने लगा,,, बिना शराब पिए ही उसका मन बहक रहा था क्योंकि उसकी आंखों के सामने शराब से भी ज्यादा मादक वस्तु जो पड़ी थी और वास्तव में औरत से ज्यादा मादक चीज दुनिया में और कोई नहीं है जिसे देखते ही चार बोतलों का नशा हो जाता है,,,,।

संजू इस समय दूल्हा बना हुआ था और बिस्तर पर उसकी मां दुल्हन बनी हुई थी दूल्हा का चोला पहनकर उसे इतना तो मालूम था की उसे क्या करना है,,, इसलिए वह धीरे से दरवाजा बंद किया और उसकी कड़ी लगाकर बंद कर दिया दरवाजे की कड़ी की आवाज सुनते ही न जाने आराधना के तन-बदन में कैसी हलचल होने लगती थी और वह मचल उठती थी ,,, शायद उसे इस बात का एहसास होने लगता था कि दरवाजा बंद होने के बाद संजू उसके साथ क्या करने वाला है उसकी चीज भर कर चुदाई करने वाला है,,,। और इसी एहसास मे वह पूरी तरह से डूबने लगती थी,,,, शेरवानी में संजू वाकई में दूल्हा लगता था और इस बात को आराधना अच्छी तरह से जान गई थी क्योंकि वह घूंघट होने के बावजूद भी उसमें से संजू को देख रही थी और अपने बेटे को दूल्हे के रूप में देखकर खुद उसके तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी फूट रही थी वह मदहोश हो रही थी,,,,। धीरे-धीरे संजू अपनी मां के बिस्तर के करीब आगे बढ़ने लगा और जैसे-जैसे उसके कदम बिस्तर की तरफ आगे बढ़ रहे थे वैसे-वैसे आराधना का दिल जोरो से धड़क रहा था और देखते ही देखते संजू बिस्तर के करीब पहुंच गया उसने चारों तरफ नजर दौड़ा कर देखा तो दंग रह गया वाकई में मोहिनी ने इस कमरे को एक दुल्हन के कमरे की तरह ही सजा दी थी,,,,। मोहिनी के सोच और उसके दिमाग की दाद देते हुए संजू मन ही मन प्रसन्न होने लगा और उसकी नजर टेबल पर पड़े दूध के गिलास पर गई जो की पूरी तरह से काजू बादाम और केसर से भरा हुआ था और वह अपने मन में सोचने लगा कि इसे पीने के बाद तो है सुबह तक अपनी मां को सोने नहीं देगा,,,,, और फिर टेबल की तरफ आगे बढ़कर दूध के गिलास को वहां अपने हाथ में उठा लिया संजू की हरकत को आराधना घुंघट के अंदर से देख रही थी और उसका दिल जोरो से धड़क रहा था,,,,। उसके मन में भी वही चल रहा था जो संजू सोच रहा था वह भी यही सोच रही थी कि इतना प्रोटीन वाला दूध पीकर तो उसका बेटा रात भर ना खुद सोएगा ना उसे सोने देगा,,,, भले इस बात से उसके चेहरे पर चिंता की लकीर ऊपर आई थी लेकिन अंदर से वह भी यही चाहती थी कि उसका बेटा जी भर कर उससे प्यार करें,,,,।

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संजू दूध को एक ही सांस में गटक गया,,, और पी लेने के बाद डकार लेते हुए बोला,,,।

आज तो तुम्हारी खैर नहीं है,,,,।

(संजू की बात सुनते ही आराधना का दिल जोरों से धड़कने लगा,,, क्योंकि संजू का यह कहना बहुत कुछ जाहिर करता था आराधना समझ गई थी कि आज की रात संजु उसकी चूत का भोसड़ा बना देगा,,, क्योंकि अभी से उसकी शेरवानी में तंबू नजर आ रहा था,,,, आराधना उत्तेजना से कसमसा रही थीं,,, मोहिनी ने आज पलंग पर एकदम नरम नरम गद्दा बिछाई थी जिसकी वजह से आराधना जिस तरह से बैठी थी उसके नितंबों का भार वह नरम गद्दा झेल नहीं पा रहा था और वहां गड्ढा जैसा पड़ गया था,,,,। संजू दूध का ग्लास टेबल पर रखकर धीरे से बिस्तर पर बैठ गया उसे भी बिस्तर की नरमी महसूस हो रही थी इसलिए वह दोनों हाथों से गद्दो को दबाते हुए बोला,,,)

वाह मोहीनी ने बहुत अच्छा इंतजाम करके रखी है इस पर तुम्हें पटक कर चोदने में बहुत मजा आएगा,,,(अपने बेटे की बात को सुनकर आराधना कितने बदले में उत्तेजना के लहर उठ रही थी उसके चेहरे पर शर्मो हया की लाली साफ नजर आ रही थी,,,, लेकिन वह कुछ भी कह नहीं पा रही थी ना जाने क्यों आज उसे बहुत घबराहट हो रही थी शायद आज उसका रूप बदल चुका था,,,। पहले वह एक औरत और एक मां के रूप में अपने बेटे के साथ संभोग सुख का मजा लूटते थे लेकिन आज वही दुल्हन का रूप ले चुकी थी जिसकी आज पहली सुहागरात थी और शायद यही वजह थी कि आज की रात सुहागरात होने की वजह से वह शर्मा रही थी सहम रही थी,,,, संजू कुछ देर तक इस तरह से बिस्तर पर बैठकर अपनी मां को दुल्हन के रूप में सजी हुई देखकर उसे देखता ही रह गया,,,,। आराधना घूंघट में थी लेकिन फिर भी घुंघट के पट से उसका खूबसूरत चेहरा नजर आ रहा था अभी भी कमरे में ट्यूबलाइट जल रही थी जिसकी धुधिया रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,,, संजू कुछ देर शांत रहने के बाद बोला,,,।)

वैसे तो तुम्हें घूंघट में पहली बार देख रहा हूं और तुम एकदम चांद की तरह खूबसूरत लग रही हो लेकिन,,,, मुझे असली चांद का दीदार करना है मैं आज तुम्हें दुल्हन की तरह सजी हुई देखना चाहता हूं मैं तुम्हारे खूबसूरत चेहरे को देखना चाहता हूं मैं देखना चाहता हूं की दुल्हन बनने के बाद तुम्हारा चेहरा कैसा निखर गया है,,,,।

(जवाब में आराधना कुछ भी नहीं बोल रही थी उसकी गहरी चलती सांस उसके मन की स्थिति को बयां कर रही थी संजू से रहा नहीं जा रहा था बहुत जल्दी से जल्दी इस खेल को शुरू करना चाहता था इसलिए अपना दोनों हाथ आगे बढ़ते हुए अपनी मां के घूंघट को दोनों हाथों से पकड़ लिया और बोला,,,,)

अपना खूबसूरत चेहरा तो दिखाओ मेरी जान,,,(और ऐसा कहते हुए वह अपनी मां के घूंघट को खोल दिया और घूंघट के ऊपर उठते ही आराधना का खूबसूरत चेहरा ट्यूबलाइट की रोशनी में चमकने लगा,,,, संजू तो देखता ही रह गया ऐसा लग रहा था कि जैसे पहली बार बार आराधना के खूबसूरत चेहरे को देख रहा हो,,, संजू से रहा नहीं गया और वह अपनी मां की खूबसूरती की तारीफ करते हुए बोला,,।)

मुझे तो अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा है दुल्हन बनने के बाद तो तुम और भी ज्यादा खूबसूरत हो गई हो ऐसा लग रहा है कि जैसे मैं पहली बार देख रहा हूं,,,,(इतना कहते हुए संजू अपना हाथ अपनी मां के चेहरे की तरफ आगे बढ़ाया और अपनी हथेली के ऊपरी भाग को तीन-चार उंगलियों से सर से लेकर उसके गोरे-गोरे गालों तक सहलाना शुरू कर दिया,,, और संजू की इस हरकत से वह उत्तेजना से सहन जा रही थी उसके होठ उत्तेजना से थरथरा रहे थे उसके चेहरे का रंग बदलता जा रहा था और आंखों में वासना का सागर उमड़ रहा था जिसे वह बर्दाश्त नहीं कर पाई और अपनी आंखों को बंद कर ली संजू को अपनी मां का यह रूप बहुत खूबसूरत लग रहा था संजू के बदन में भी उत्तेजना की लड़ाई उठ रही थी संजू अपनी उंगलियों को धीरे से अपनी मां के लाल लाल होठों पर लाकर उसे हल्के हल्के रगड़ना शुरू कर दिया उसकी ईस‌ हरकत पर आराधना की चूत से बदन रस का फवारा फूट पड़ा,,,, और उसके इस स्खलन से आराधना पूरी तरह से हैरान हो गई थी क्योंकि इतनी जल्दी वह झड़ती नहीं थी लेकिन न जाने क्यों आज उसका पानी निकल गया था,,, वह बहुत गहरी गहरी सांस लें रही थी,,,,, आराधना को साफ महसूस हो रहा था कि उसकी लाल रंग की चड्डी उसके मदनरस से तरबतर हो गई थी,,,, और इस बारे में संजू को भनक तक नहीं लगी थी उसे ऐसा ही लग रहा था कि उसकी मां उत्तेजित हो रही है और वह उसके लाल लाल होठों को अपनी ऊंगलियों से ही जोर-जोर से मसल रहा था,,,,,।

गुलाब और चमेली के फूलों की महक से वातावरण और भी ज्यादा मादक होता जा रहा था,,,, ऊपर से उसकी मां की गर्म जवानी पूरी तरह से उसे बेकाबू बना रही थी,,, संजू से रहा नहीं गया और वह अपनी मां के लाल-लाल होठों का मर्दन करते हुए अपने प्यासे होठों को अपनी मां के देहकते हुए होंठ पर रख दिया और एकदम से मचल गया वह पल भर में अपनी मां के लाल लाल होठों को अपने होठों के बीच रखकर जबरदस्ती उसके होठों का रस पीना शुरू कर दिया और साथ ही अपना एक हाथ उसके ब्लाउज के ऊपर रखकर उसकी खरबुजे जैसी चूचियो को दबाना शुरू कर दिया,,,, संजू की हरकत से उसकी मां पूरी तरह से उत्तेजना से चुर हो गई और कसमसाने लगी,,,, थोड़ी देर में वह भी उसका साथ देने लगी वह भी अपने होंठों को खोल कर उसकी जीभ को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी,,,,। संजू पागलों की तरह अपनी मां की होठो का रसपान करते हुए उसके चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से जोर-जोर से दबा रहा था,,, संजू यह सब अपनी मां के साथ रोज ही करता था लेकिन हर एक बार ऐसा लगता था की पहली बार कर रहा हो,,,, इस तरह के गहरे चुंबन की वजह से दोनों का लार एक दूसरे के मुंह में आदान-प्रदान हो रहा था लेकिन फिर भी दोनों को बहुत अच्छा लग रहा था दोनों पागल हुए जा रहे थे मदहोश हुए जा रहे थे दोनों मां बेटे का आज पहली बार सुहागरात होने वाली थी जिसे वह दोनों खूब मजा लेना चाहते थे और जिसकी शुरुआत संजू ने कर दिया था,,,,।

अपनी मां के लाल लाल होठों का रस पीते हुए संजू अपनी मां की साड़ी को उसके सर से उसके कंधे से हटाकर नीचे गिरा दिया था और फिर उसके ब्लाउज का बटन खोलते हुए उसके लाल लाल होठों का रसपान भी कर रहा था ,,,, उसकी मदहोश करते नहीं वाली चुचीया,, कबूतर की तरह ब्लाउज में फड़फड़ा रही थी जो कि आजाद होने के लिए मचल रही थी और संजू अपनी मां के दोनों कबूतरों को आजाद करना चाहता था इसलिए वह जल्दी-जल्दी अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोल रहा था,,,, संजू पर वासना पूरी तरह से सवार हो चुकी थी वह अपनी मां की जवानी में पूरी तरह से खो चुका था और उसके ब्लाउज के बटन को खोलते हुए बोला,,,)

तेरी चुचियों में बहुत दूध भरा है मेरी जान आज दबा दबा कर पियूंगा बहुत सीना तानकर चलती है आज असली मर्द से पाला पड़ा है आज तेरी जवानी का रस कैसे बाहर निकालता हूं देखना,,,,

निकाल कर दिखा ऐसा कोई मर्द बन ही नहीं जो मेरी जवानी की प्यास बुझा सके तेरे लंड में भी इतना दम नहीं है कि जो मेरी चूत की प्यास को बुझा सके,,, लंड पटक कर रह जाएगा लेकिन तुझसे कुछ हो नहीं पाएगा,,,,।(आराधना भी मदहोशी में अपने बेटे को पानी पर चढ़ाते हुए बोल रही थी,,,,)

यह बात है मेरी जान तो आज देखना मेरा लंड कैसे तेरी चूत का भोसड़ा बनता है बहुत चिकनी चिकनी चूत है ना तेरी मक्खन जैसी आज पूरी दही निकालता हूं,,,,(ऐसा कहते हुए संजू अपनी मां के ब्लाउज के सारे बटन को खोल दिया,,,, और दोनों तरफ से पकड़ कर उसे पीछे की तरफ करके अपनी मां की गोरी गोरी बाहों से उसे निकालने की कोशिश करने लगा जिसमें उसकी मां भी मदद करते हुए अपनी बाहों को पीछे की तरफ करती थी जिससे उसका ब्लाउज बड़े आराम से निकल गया था और ब्लाउज के निकल जाने के बाद लाल रंग की जालीदार ब्रा में उसकी चूचियां बहुत ही जानलेवा नजर आ रही थी,,,, संजू तो अपनी मां को उसकी चूचियों को जालीदार ब्रा में देखकर पागल हो गया और बड़ा निकले बिना ही वह दोनों हाथों से उसकी चूचियों को दबाते हुए एक बार फिर से उसके लाल लाल होठों पर अपने होंठ रख दिया और उसके लाल-लाल होठों का रस पीना शुरू कर दिया वैसे भी संजू को अपनी मां की खूबसूरत बदन से हरकत करते हुए उसके लाल-लाल होठों को पीने में बहुत मजा आता था,,, । संजू अपनी मां की चूची ऊपर से दोनों हाथों को हटाकर वह उसे बाहों में ले लिया और उसे करके अपनी तरफ खींच कर दबा दिया और उसकी नंगी चिकनी पीठ पर अपनी हथेलियों को घुमाना शुरू कर दिया,,,,।

आराधना पूरी तरह से मदहोशी के सागर में डुबकी लगा रही थी उसे मजा आ रहा था लेकिन कुछ अधूरा सा लग रहा था और संजू अपनी मां के मन की बात को जैसे समझ लिया था वह तुरंत अपनी बाहों के खेत से अपनी मां को आजाद किया और फिर अपने कुर्ते को उतार कर कमर के ऊपर से एकदम से नंगा हो गया उसकी चौड़ी छाती देखकर उसकी मां की चूत कल बुलाने लगी और फिर संजू एक बार फिर से उसे अपनी बाहों में कस कर दबाते हुए उसके लाल-लाल होठों को पीना शुरू कर दिया और उसकी नंगी चिकनी पीठ पर अपनी हथेली को घुमाना शुरू कर दिया इसकी चौड़ी चिकनी पीठ पर हाथ घुमाने में अपनी हथेली फिराने में संजू को बहुत मजा आ रहा था एकदम मक्खन सा एहसास हो रहा था,,,,।

दूसरी तरफ मोहिनी से रहा नहीं जा रहा था वैसे तो वह अपनी मां के साथ मिलकर ही अपने भाई से चुदाई का मजा लुटती थी,,,, लेकिन आज वह अपनी आंखों से देखना चाहती थी अपनी मां की चुदाई और वह भी दुल्हन के रूप में अपनी मां की सुहागरात है वह अपनी मां को चुदवाते हुए देखना चाहती थी अपनी मां के चेहरे के हाफ-भाव को देखना चाहती थी वह देखना चाहती थी कि उसकी मां दुल्हन बनने के बाद किस तरह से चुदवाती है और इसीलिए वह अपने मां पर काबू नहीं कर पाई और धीरे से अपने कमरे से बाहर निकल गई और फिर दबे पांव अपनी मां के कमरे के करीब पहुंच गई,,,। वह बिल्कुल भी आहट नहीं करना चाहती थी वह अपनी मां और अपनी बहन की सुहागरात में किसी भी प्रकार की खलल नहीं डालना चाहती थी वह चुपके से सब कुछ देखना चाहती थी इसलिए धीरे से दरवाजे की तरह से अपनी आंख सटकर अंदर की तरफ देखने लगी थोड़ी देर में अंदर का दृश्य सब कुछ साफ नजर आने लगा,,, उसकी किस्मत अच्छी थी कि अंदर ट्यूबलाइट चल रही थी और ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में उसे सब कुछ साफ नजर आ रहा था,,,,,। वह बिस्तर पर अपनी मां और अपने भाई को आलिंगन बद्ध देख रही थी,,, उसे साफ दिखाई दे रहा था कि उसकी मां के बदन से ब्लाउज उतर चुका था वह लाल रंग की ब्रा में थी,,, इस नजारे को देखकर उसके बदन में सिहरन सी दौड़ने लगी लेकिन एक बात की निराशा उसके मन में थी कि वह अपनी मां का ब्लाउज अपने भाई के हाथों से उतरता हुआ नहीं देख पाई,,,,। लेकिन ईस बात की खुशी भी थी कि अभी बहुत कुछ देखना बाकी था अभी तो शुरुआत हुई थी मंजिल अभी बहुत दूर थी और इस बात को अभी अच्छी तरह से जानती थी कि मंजिल से ज्यादा मजा सफर में आता है और अभी पूरा सफर बाकी था,,,,।

मोहिनी का दिल जोरो से धड़क रहा था उसका भाई अंदर कमरे में उसकी मां को अपनी बाहों में लेकर उसकी नंगी चिकनी पीठ पर अपनी हथेली फिरा रहा था,,,, मोहिनी थोड़ा सा देर में पहुंची थी लेकिन फिर भी सही समय पर पहुंच गई थी सब कुछ देखने के लिए,,,, मोहिनी की सांस अटक गई थी अंदर के दृश्य को देखने के लिए और किसी भी प्रकार की हलचल नहीं करना चाहती थी वह नहीं चाहती थी कि दरवाजे पर उसके होने के एहसास से दोनों के बीच हो रही काम लीला में विध्न आए,, इसलिए वह अपनी सांसों पर भी काबू रखे हुए थे,,,,।

कमरे के अंदर का दृश्य धीरे-धीरे और भी ज्यादा गर्म होता जा रहा था,,,, अपनी मां की चुची को अपनी छाती पर महसूस करके संजू और भी ज्यादा उत्तेजित होता जा रहा था लेकिन अभी भी उसकी मां की चूची ब्रा की कैद में थी और संजू चाहता था कि उसकी मां की नंगी चूची उसकी नंगी छाती से रगड़ खाए,,,, और कोई पल होता तो शायद संजू एक झटके में अपनी मां की ब्रा को उतार सकता लेकिन आज की रात के लिए ही संजू ने इस ब्रा को खरीदा था इसलिए वह इतनी जल्दी अपनी मां के बदन से उसकी जालीदार ब्रा को अलग नहीं करना चाहता था,,,, वह इस खेल में धीरे-धीरे आगे बढ़ना चाहता था इससे सुहागरात को याद कर रात बना देना चाहता था इसलिए इस तरह से अपनी मां को अपनी बाहों में लिए हुए वह उसके गर्दन पर चुंबन करते हुए बोला,,,।

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सच कहूं तो तुम्हें दुल्हन बनाने में और भी ज्यादा मजा आ रहा है मैं कभी सोचा नहीं था कि तुम अपने ही बिस्तर पर दुल्हन बनी हुई मुझे परोसी जाओगी,,, तुम मुझे दुनिया की सबसे खूबसूरत हसीन औरत लगती हो और आज तो तुम्हारी खूबसूरती में चार चांद लग गया है,,,,(अपनी मां के खूबसूरत चेहरे पर उसके मखमली बालों की लातों को अपनी उंगली से पकड़ कर उसे उसकी कान के पीछे की तरफ ले जाते हुए बोला संजू की इस हरकत से आराधना पूरी तरह से गदगद हो गई,,,, वाकई में उसे संजू में इस समय अपना पति नजर आ रहा था,,, बालों की लटो को दुरुस्त करते हुए वह अपनी मां के खूबसूरत चेहरे की तरफ देखने लगा और अपने बेटे के इस नजरिए से वह एकदम से शर्मा गई और अपनी नजरों को नीचे झुका दी,,, और उसका इस तरह से शर्माकर नजरों को झुकाना संजू के तन बदन में उत्तेजना की चिंगारी बड़का गया और वह एक झटके से बिना सोचे और बिना अपनी मां को मौका दिए हुए अपने हाथ को उसके सर के पीछे ले गया और अपने चेहरे को नहीं बल्कि उसके चेहरे को ही अपनी तरफ खींचकर उसके लाल-लाल होठों पर अपने होंठ को भिड़ा दिया,,,, अपने बेटे की ईस हरकत पर आराधना पानी पानी हो गई,,,,। और कमरे के बाहर खड़ी मोहिनी सब कुछ अपनी आंखों से देख रही थी अपने भाई की हरकत को देख रही थी अपनी मां के चेहरे पर शर्म की लकीरें देख रही थी सर में से उसका चेहरा टमाटर की तरह लाल हो गया था यह सब मोहिनी को अच्छी तरह से नजर आ रहा था संजू का अपनी मां से इस तरह से प्यार करना मोहिनी को उत्तेजित कर रहा था उसके तन-बदन में भी उत्तेजना की चिंगारी फूट रही थी लेकिन वह किसी तरह से अपने आप को संभाले हुए थी,,,,।

कुछ देर तक अपनी मां के लाल लाल हो तो का रसपान करते हुए जालीदार ब्रा के ऊपर से उसकी दशहरी आम को जोर-जोर से दबाते हुए संजू आनंद लेता रहा,,,, और फिर अपनी मां के होठों से अपने होठों को अलग करते हुए और गहरी सांस लेते हुए अपनी मां की चूचियों की तरफ देखने लगा जो कि कसी हुई ब्रा में और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी और दोनों चूचियों के आपस में सट जाने की वजह से बीच की लकीर और भी ज्यादा गहरी हो गई थी,,, जिसमें संजू का मन डूब जाने को कर रहा था,,, संजू अपनी एक उंगली को अपनी मां की चूचियों के बीच की गहरी लकीर में डालकर उसे ऊपर नीचे करते हुए बोला,,,,।

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तुम्हारी चूचियों के बीच के गहरी दरार तुम्हारी चूत से काम नहीं है मम्मी कसम से इसके अंदर अगर लंड डाला जाए तो भी चुत का मजा देगी,,,,।

यह खेल तो अनाड़ी करते हैं असली मर्द अपने लंड को चूत में ही डालता है ना कि इधर-उधर,,,,,(आराधना उत्तेजित स्वर में बोली उसकी बात सही पता चलना था कि वह इस समय कितनी ज्यादा चुदवासी हो गई थी,,, बाहर खड़ी मोहिनी भी अपनी मां का जवाब सुनकर उत्तेजना से पानी पानी हो रही थी और उसे अपनी मां की बात में सच्चाई नजर आ रही थी क्योंकि वह भी जानती थी की असली मर्द औरत को असली सुख देने के लिए अपने अंगों को असली जगह पर ही डालता है ना कि इधर-उधर डालकर केवल समय व्यस्त करता है,,,,।)

बात तो तुम सही कह रही हो मम्मी लेकिन तुम्हारी कहीं बात,,, तुम्हारे पर लागू नहीं होती वह तो आम औरतों के लिए होती है तुम बहुत खास हो तुम्हारा अंग अंग,,,,(जालीदार ब्रा में से झांकती हुई दोनों निप्पल को दोनों हाथ की उंगलियों से पकडते हुए) जवानी से भरा हुआ है तुम्हारा खूबसूरत बदन खरा सोना है तुम्हारे हर एक अंग में मदहोशी छुपी हुई है,,, तुम्हारे बदन में कहीं पर भी लंड रगडो तो भी मजा चुदाई जितना ही आएगा,,,,,,,।

(अपने बेटे की इस बात से और उसकी हरकत से आराधना और भी ज्यादा मद होश हो रही थी,,, संजू लगातार ब्रा में से झांक रही दोनों निप्पल को पकड़कर उसे अपनी उंगलियों से रगड़ रहा था दबा रहा था। और उसके ऐसा करने पर आराधना की सांस ऊपर नीचे हो रही थी उसके बाद में उत्तेजना के लहर उठ रही थी,,, और यह सब देखकर मोहिनी की सलवार में भी हलचल होना शुरू हो गया था,,,,,।)

सहहहहह,,,,ऊमममममममम,,,,आहहहहहहह,,,,, तू तो मुझे पागल कर देगा रे,,,,,।(आराधना एकदम मदहोश होते हुए और सिसकारी लेते हुए बोली,,,, अपनी मां की बात और उसकी गरमा गरम सिसकारी की आवाज सुनकर संजू बोला,,,)

क्या मम्मी अभी से तुम्हारी हालत खराब हो रही है अभी तो शुरुआत हो रही है और तुम पानी पानी हो रही हो,,,,(इतना कहने के साथ ही संजु ब्रा के ऊपर से अपनी मां की चूचियों को अपनी हथेली में लेकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,,,)

आहहहह ,,,, धीरे-धीरे से रे तू तो बड़ा जालिम है,,,,,

औरतों से प्यार करने के लिए जालिम बनना पड़ता है तभी औरत को भी मजा आता है,,,,,(इतना कहने के साथ ही संजू एकदम उत्तेजित होता हुआ अपनी मां की ब्रा की निचले हिस्से को दोनों हाथों से पकड़ कर एक झटके से ऊपर की तरफ उठा दिया जिससे उसके दोनों कबूतर एकदम से आजाद हो गए और खुली हवा में सांस लेने लगे अपने बेटे के ही हरकत पर प्यार भरा गुस्सा दिखाते हुए आराधना बोली,,,,)

अरे अरे यह क्या कर रहा है रे पागल हो गया क्या तू इतनी महंगी ब्रा है पहली बार में ही फाड़ देगा,,,,
 
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