Incest मजबूरी या जरूरत - Page 16 - SexBaba
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Incest मजबूरी या जरूरत

एक रंगीन रात गुजारने के बाद तीनों की नींद दूसरे दिन थोड़ा देर से खुली वैसे भी आज उन तीनों को गांव से जाना था इसलिए किसी ने उन्हें जगाने की कोशिश भी नहीं किया वैसे भी घर के लोगों को उन लोगों का जाना अच्छा भी नहीं लग रहा था खास करके संजू का क्योंकि संजू ने जिस तरह से अपनी मर्दानगी का पर्चा घर की तीनों औरतों को दिया था वह तीनों पूरी तरह से निहाल हो चुकी थी और सबसे छोटी वाली को तो मां बनने का सुख भी देने का वादा किया था और लगभग उसमें कामयाब भी हो चुका था जिसका एहसास संजू की छोटी वाली मामी को बहुत जल्द होने वाला था,,,,।

आराधना की मादक अंदाज

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दरवाजे पर हो रही दस्तक की आवाज सुनकर तीनों की नींद खुली तो तीनों एकदम से भौचकके रह गए,,, क्योंकि तीनों अपनी स्थिति पर नजर डालते ही उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि वह तीनों पूरी तरह से नंगे थे,,,, रात को जिस तरह का संजू ने अपनी मर्दाना ताकत का प्रदर्शन किया था उसे देखकर दोनों बहने पूरी तरह से निहाल हो चुकी थी वैसे तो दोनों को संजू की मर्दाना ताकत पर बिल्कुल भी शक नहीं था लेकिन उन दोनों ने कभी संजू के द्वारा गांड नहीं मरवाई थी लेकिन संजू की जीद के आगे दोनों को झुकना पड़ा था और यह तो दुनिया जानती है कि मर्द के आगे औरत जब झुकती हो तो क्या होता है,, और वही उन दोनों औरतों के साथ भी हुआ था संजू अपनी मां और मौसी दोनों की बराबर गांड मरा था और एक बार नहीं सुबह के 4:00 बजे तक लगभग तीन बार दोनों औरतों की गांड मार चुका था और वह भी बारी-बारी से हालांकि पहले गांड चुदाई से ही दोनों औरतें पूरी तरह से पस्त हो चुकी थी और नींद की आगोश में चली गई थी,,, और संजू इतना जोश से भरा हुआ था कि नींद में ही अपनी मां और अपनी मौसी दोनों की गांड दो बार और मारा था,,,, वह दोनों पूरी तरह से होश में नहीं थी गहरी नींद में थी लेकिन फिर भी दोनों बराबर मजा ले रही थी क्योंकि गहरी नींद में होने के बावजूद भी उन दोनों को संजू का लंड अपनी गांड के छेद में बराबर महसूस हो रहा था जिसकी वजह से उनके मुंह से रह रहकर,,, सिसकारी के साथ-साथ कराहने की आवाज भी आ रही थी,,,,, संजू ने दोनों को पूरी तरह से तृप्त कर दिया था और खुद भी पूरी तरह से संतुष्ट हो चुका था और यही वजह थी कि सुबह देर तक तीनों सोए रह गए थे तभी तो दरवाजे पर हो रही दस्तक की आवाज के साथ तीनों एकदम से हड़बड़ा कर उठकर बैठ गए थे और तीनों इस समय एक ही बिस्तर पर पूरी तरह से नग्नवस्था में ही थे,,,

बाप रे आज उठने में बहुत देर हो गई,,,(संजू जल्दी से बिस्तर से नीचे उतरकर अपनी चड्डी पहनते हुए बोला बाहर बार-बार दरवाजे पर दस्तक हो रही थी संजू जानता था कि दरवाजे पर उसकी बड़ी मामी है और इस समय बिस्तर पर अपनी मां और अपनी मौसी दोनों को नंगी देखकर संजू समझ गया था कि दरवाजा खोलना उचित बिल्कुल भी नहीं है क्योंकि इतनी देर में दोनों औरतें अपने वस्त्र पहनने में एकदम विवश है और उनसे इतनी जल्दी अपने कपड़े पहने भी नहीं जाएंगे,,,, और यही चिंता दोनों औरतों को भी थी आराधना और साधना दोनों एक दूसरे का मुंह देख कर संजू की तरफ देख रही थी संजू दोनों की स्थिति को जान गया था इसलिए अपनी पेंट पहनते हुए बोला,,,)

आराधना बिस्तर पर अपनी जवानी बिखेरती हुई

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हां मामी तुम जाओ मैं,,,, मम्मी और मौसी दोनों को जगाता हूं यह दोनों अभी सो रही हैं,,,,

ठीक है संजू बेटा जल्दी से जगा देना और जल्दी से तैयार हो जाना मैं नाश्ता तैयार कर देता हूं क्योंकि बस 10:00 बजे की है अगर समय पर नहीं पहुंच पाओगे तो आज फिर कोई बस नहीं है फिर कल सुबह इंतजार करना पड़ेगा,,,

ठीक है मामी,,,,

(संजू बंद दरवाजे के पीछे की हलचल को पहचानने की कोशिश कर रहा था और थोड़ी ही देर में उसकी मामी दरवाजे पर से चली गई तब जाकर तीनों की जान में जान आई संजू की मामी के जाते ही दोनों औरतें बिस्तर पर से नीचे उतरी और अपनी चड्डी ब्लाउज ब्रा ढूंढना शुरू कर दि और फिर धीरे-धीरे जैसे-जैसे कपड़े मिलते गए पैसे वैसे दोनों अपने बदन पर डालते चले गए,,,, संजू अच्छी तरह से देख रहा था कि दोनों की चाल कुछ बदली हुई लग रही थी,,,, और वह जानता था कि यह किस वजह से है इसलिए चुटकी लेते हुए बोला,,,।

तुम दोनों कुछ ज्यादा लंगड़ा कर नहीं चल रही हो,,,

हरामजादे,,,(आराधना अपनी गांड पर हाथ रखते हुए) रात भर गांड मारा है तो चाल तो बदलेगी ही,,, जरा भी रहम नहीं किया तूने,,,

अपने बेटे को मजा देती हुई आराधना

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सही कह रही आराधना तेरा बेटा बहुत जल्दी है एक बार घुसाया तो फिर सांड की तरह लग रह गया,,,

तुम दोनों भी तो गांड मेरे सामने गांड उठाकर हिला रही थी तो मैं क्या करता मैं भी चढ़ गया,,,,,

चल अब रहने दे,,,, जल्दी चल नहा कर तैयार होना है,,, वरना समय पर नहीं पहुंचे तो बस छूट जाएगी,,,

तो क्या हुआ अच्छा ही होगा एक रात और यहां पर रहने का मौका मिल जाएगा और फिर आज की रात फिर मैं तुम दोनों की गांड मारूंगा,,,

नहीं नहीं रहने दे,,,, यहां रुक जाते लेकिन आज रात की तेरी हरकत देखकर हिम्मत नहीं हो रही है,,,(आराधना फिर से अपनी हथेली को अपने पिछवाड़े पर रखते हुए बोली तो संजू मुस्कुराता हुआ आगे पड़ा और अपनी मां की गांड पर जोर से चपत लगाते हुए बोला,,,)

मेरी रानी बोल तो ऐसा रही हो कि जैसे तुम्हें मजा ही नहीं आया,,, रात भर दोनों रंडियां मजे ले रही थी और फिर सुबह नखरा दिखा रही हो,,,,

माँ बेटे दोनों एक दूसरे को मस्त करते हुए

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कमरे से बाहर निकाल आराधना तेरे बेटे का भरोसा नहीं है देख तेरी गांड पर हाथ रखा है कहीं ऐसा ना हो कि एक बार फिर से हम दोनों की गांड मार ले,,,,(साधना मुस्कुराते हुए बोली और उसकी बात सुनकर संजू और उसकी मां दोनों हंसने लगे और तीनों कमरे से बाहर निकल गए,,, घर में तीनों की कामलीला के बारे में किसी को कानो कान खबर तक नहीं थी सिवाय लल्ली के,,,, इसलिए वह तीनों हमेशा घर के सभी सदस्य के सामने एकदम सहज रहते थे और किसी को बिल्कुल भी साथ ही नहीं होता था कि एक ही कमरे में तीनों कौन सा गुल खिला रहे हैं,,,।

तीनों समय पर नहा धोकर तैयार हो गए और नाश्ता करके जाने के लिए तैयार भी हो गए थे संजू की बड़ी मामी खाने के लिए पूरी और सब्जी उनके टिफिन में भर दी थी ताकि रास्ते में तीनों खा ले उन तीनों को विदा करने के लिए घर के सभी सदस्य मौजूद थे संजू की छोटी वाली मामी भी उन तीनों की विदाई पर आ चुकी थी और उसके छोटे वाले मामा भी थे,,,, संजू की तीनों मामियों की आंखों में आंसू थे संजू से बिछड़ने का गम तीनों को महसूस हो रहा था और तीनों का गम भी एक ही था जो कि संजू अपने लंड से दूर करता रहा था,,,, संजू भारी-भारी से घर के सभी सदस्य के पैर छू रहा था संजू का यह व्यवहार बिल्कुल विरोध था वह पैर छूकर जल्द ही दोनों पैरों के बीच आ जाता था और ऐसा उसने तीनों मामियों के साथ किया था पहले पैर छुआ था और फिर अपने हाथों से तीनों की टांगे भी खोला था,,,,,,

संजू अपनी मौसी क साथ

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अंतिम में वह अपनी बड़ी मामी के पास आया और बाकी के लोग साधना और आराधना से मिलने में व्यस्त हो गए थे और उसी का फायदा उठाते हुए संजू तिरछी नजर से सब की तरफ देखकर तुरंत अपनी मामी का पैर छूकर खुद ही उनसे गले मिलने लगा और गले मिलते हुए उसने अपनी मामी को अपनी बाहों में लेकर कस के उसे अपनी तरफ दबा लिया था और ऐसा करते हुए उसे वह पल भर में ही उसकी भरावदार नितंबों पर हाथ रखकर उसे कस के दबोच दिया था और साथ ही तुरंत अपना हाथ आगे की तरफ लाकर एक हाथ से अपनी बड़ी मामी की चूची को दबा दिया था संजू की यह हरकत से वह पूरी तरह से चौंक गई थी,,, और तुरंत अपने चारों तरफ नजर दौड़ा कर देखने लगी थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है लेकिन उसकी किस्मत अच्छी थी कि कोई भी उन दोनों की तरफ देखा नहीं रहा था और यह देखकर संजू की बड़ी मामी संजू की तरफ देखकर मुस्कुराती संजू की इतनी हरकत से ही उसकी चूत एकदम से गीली हो गई थी और यही तो संजू के मर्दाना ताकत का असर था संजू पल भर में ही किसी भी औरत को पानी पानी कर देने में पूरी तरह से सक्षम था,,,।

यहां से मुख्य सड़क तक का रास्ता बेहद ऊपर खबर था केवल दो पहिया वाला वहां ही यहां से गुजर सकता था इसीलिए उन तीनों को मुख्य सड़क तक पैदल ही जाना था कुछ दूरी तक घर के सभी सदस्य उन तीनों के साथ आए और फिर उन तीनों ने ही उन्हें वापस लौट जाने के लिए बोला क्योंकि धूप तेज हो रही थी और फिर यहां से तीनों अकेले ही मुख्य सड़क की तरफ जाने लगे बीच में खंडहर आते ही तीनों की नजर उसे खंडहर पर पड़ी तो तीनों के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी,,,, साधना जो कि इस खंडहर में बीते पल को अपने मन में पूरी तरह से संजो लेना चाहती थी वह तुरंत अपने हाथ में पड़े हुए बैग को नीचे रखते हुए बोली,,,,।

संजू लल्ली क साथ

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यह खंडहर में जिंदगी में नहीं पहुंच सकती यह खंडहर अपने तीनों के मिलन की निशानी है इसलिए मुझे इस खंडहर में जाकर पेशाब करना होगा क्योंकि मुझे बड़े जोरों की पेशाब भी आई है,,,(और इतना कहकर वह खंडहर की तरफ जाने लगी,,, वैसे भी गांव का यह रास्ता एकदम सन्नाटे से भरा होता है दोपहर में भी यहां इक्का-दुक्का लोग ही नजर आते हैं जो कि शहर की तरफ या बाजार की तरफ जाते हैं तब और वैसे भी दोपहर का समय था इसलिए यहां से कोई आने जाने वाला नहीं था और यही सोचकर संजु अपनी मां की तरफ देखा और उसे आंख मार कर इशारा किया,,, आराधना अपने बेटे के इशारे को अच्छी तरह से समझ गई इसलिए तो आश्चर्य से उसका मुंह खुला का खुला रहेगा वह अपने बेटे को कुछ कह पाती से पहले वह भी अपना बैग जमीन पर रखकर जल्दी से खंडहर में घुस गया आराधना एकदम साफ तौर पर देख पा रही थी कि उसकी आंखों के सामने उसकी बड़ी बहन दीवार की ओट में जो की आधा दीवार से छिपी हुई थी राधा नजर आ रही थी वह बैठकर पेशाब कर रही थी और संजू ठीक उसके पीछे जाकर अपने पेट की चैन खोलकर अपने लंड को बाहर निकाल कर उसे आराधना के आश्चर्य के बीच हिलाना शुरू कर दिया था यह देखकर आराधना एकदम से चौंक गई थी क्योंकि उसे ऐसा लग रहा था कि संजू पेशाब करने जा रहा है लेकिन वह अपनी मौसी के ठीक पीछे खड़ा कर अपने लंड को हिला हिला कर तैयार कर रहा था पल भर में संजू के इरादे को भांप कर आराधना के तन बदन में सिरहन सी दौड़ने लगी,,,, इस बात से साधना बिलकुल बेखबर थी कि पीछे खड़ा संजू क्या कर रहा है उसे ऐसा ही लग रहा था कि संजू पेशाब कर रहा है लेकिन जैसे ही वह पेशाब करने के बाद खड़ी हुई और अपनी चड्डी को ऊपर करने के लिए अपने हाथों की उंगलियों का सहारा ली वैसे ही संजु तुरंत उसके पीछे जाकर उसकी साड़ी को कमर तक उठा दिया,,, संजू की हरकत से साधना एकदम से हैरान हो गई और कुछ समझ पाती से पहले ही संजू अपने लंड पर ढेर सारा थूक लगाकर अपनी मौसी को उसकी पीठ पर हाथ रखकर उसे झुकने के लिए इशारा किया,,, और फिर संजू अपने लंड को अपनी मौसी की चूत में डालकर चोदना शुरू कर दिया और अपनी मां की तरफ देखकर जोर से चिल्लाता हुआ बोला,,,।

अपने मां की लड़की क साथ संजू

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मम्मी कोई दिखाई दे तो आवाज देना,,,।

(उसकी मम्मी क्या कहती है वह तो संजू की हरकत से और उसकी बात सुनकर एकदम शर्म से पानी पानी में जा रही थी हालांकि संजू के साथ रात रंगीन करने के बावजूद भी आराधना संजू की किसी-किसी हरकत पर शर्मिंदगी से भर जाती थी और उत्तेजित भी हो जाती थी और इस समय भी उसके साथ यही हो रहा था जहां एक तरफ वह संजू की हरकत से शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी वहीं दूसरी तरफ उसकी चूत में भी पानी इकट्ठा होने लगा था वह भी उत्तेजित होने लगी थी वह बराबर देख रही थी कि संजू उसकी बड़ी बहन की कमर पकड़ कर जोर-जोर से अपनी कमर हिला रहा था,,,,।

संजू की हरकत इतनी मादकता से भरी हुई और इतनी उत्तेजनात्मक पूर्ण थी कि साधना अपनी उत्तेजना पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाई और गहरी गहरी सांस लेते हुए झड़ना शुरू कर दी यही तो संजू की मर्दाना ताकत की करामात थी पल भर में ही संजू अपनी मौसी को पानी पानी करते हुए उसे झाड़ दिया था लेकिन खुद झडा नहीं था इसलिए अपनी मौसी के झड़ने के बाद वहां दो-चार धक्के लगाने के बाद अपना खड़ा लंड अपनी मौसी की चूत से बाहर निकाल लिया और अपनी मौसी से बोला,,,)

लल्ली और संजू

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अब तुम जाओ मौसी और मम्मी को जल्दी से भेजो,,,,।

(इतना कहते हुए संजू अपने हाथों से ही अपने लंड को मुठीयाना शुरू कर दिया और साधना जल्दी से अपनी चड्डी को ऊपर चढ़ा कर अपनी साड़ी के नीचे गिरा दी,,, और फिर मुस्कुराते हुए खंडहर से बाहर आ गई,,, संजू को खंडहर में खड़ा होकर अपना लंड हिलता हुआ देखकर और मुस्कुराते हुए अपनी बड़ी बहन को बाहर आता हुआ देख कर आराधना का दिल जोरो से धड़क रहा था,,,, और जैसे ही साधना उसके पास आई और वही हुआ जो आराधना के मन में चल रहा था साधना मुस्कुराते हुए बोली,,,)

जा जल्दी जा तेरा बेटा तुझे चोदने के लिए बुला रहा है,,, मैं तब तक यहां खड़ी होकर देखती हूं,,,

संजू अपनी मौसी क साथ

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यह क्या कह रही हो दीदी थोड़ा तो शर्म करो कोई देख लेगा तो गजब हो जाएगा,,,(आराधना अपने चारों तरफ नजर घूमाते हुए बोली,,, एक तरफ वह अपनी बहन की बात मानने से अपने बेटे की हरकत से नाराज होने का ढोंग भी कर रही थी और अंदर ही अंदर उसे अपने बेटे की हरकत का मजा लेने का मन भी कर रहा था इसलिए तो वह चारों तरफ नजर घुमा कर देख रही थी कि कोई दिखाई तो नहीं दे रहा है और चारों तरफ सन्नाटा छाया हुआ था कोई भी दिखाई नहीं दे रहा था,,, इसलिए उसके मन में भी अपने बेटे की हरकत का आनंद लेने की उत्सुकता बढ़ने लगी,,,,)

आराधना कुछ इस तरह से

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अरे कुछ नहीं होगा जा तो सही तेरा बेटा आज कुछ ज्यादा ही जोश में ही देख कितनी जल्दी मेरा पानी निकाल दिया,,,।

नहीं दीदी मुझे शर्म आ रही है,,,(एक तरफ वह शर्माने का नाटक भी कर रही थी और दूसरी तरफ अपने बेटे की तरफ भी देख रही थी जो कि बड़े जोर से अपने लंड को ऊपर नीचे करके हिला रहा था और उसे अपनी तरफ बुला रहा था यह एक बेहद मदहोश कर देने वाली स्थिति थी,,,, एक बेटा अपने लंड को हाथ में लेकर अपनी मां को अपने पास बुला रहा था चोदने के लिए,,,,)

संजू खंडहर वाली जगज़ह पर अपनी माँ क साथ

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अब चल ज्यादा बन मत,,, रात भर गांड खोलकर मरवाई है और अब शर्माने का नाटक कर रही है जा जल्दी(आराधना को धक्का देते हुए) तेरा बेटा पागल हुआ जा रहा है,,,।

अब तो आराधना से भी रहा नहीं जा रहा था वह पूरी तरह से मत हो चुकी थी अपने बेटे मिलन के लिए वह अपने बेटे से एकाकार होना चाहती थी,,, उसकी चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और वह एक बार फिर से अपने चारों तरफ नजर दौड़ा कर,,, वह एक बार फिर से तसल्ली कर लेना चाहती थी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है और फिर तसल्ली कर लेने के बाद वह खंडहर की तरफ आगे बढ़ने लगी उसके एक-एक कदम आगे बढ़ाते हुए उसका दिल जोरों से धड़क रहा था,,,,,, और देखते ही देखते हो अपने बेटे के एकदम करीब पहुंच गई तो वह तुरंत अपनी मां का हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचते हुए बोला,,,)

कितना देर कर रही हो मेरी जान,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह अपनी मां को घुमा दिया और पैसे में उसकी पीठ संजू के सामने हो गई और संजू खुद अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठा दिया और अपने हाथों से उसकी चड्डी पकड़ कर नीचे करने लगा और जैसे ही उसकी चड्डी घुटने तक आई आराधना दीवार पड़कर झुक गई और अपनी गोल गोल गांड को हवा में ऊपर उठती संजू अपनी मां की गांड पड़कर अपने लंड का निशान उसकी चूत पर लगाया और पहले झटके में संजू का लंड पूरी तरह से आराधना की चूत में समा गया,,, और फिर संजू अपनी मां की कमर पकड़ कर उसे चोदना शुरू कर दिया,,,, आराधना की पूरी तरह से मत होने लगी आराधना अपने बेटे की इसी अदा पर तो पागल हो जाती थी क्योंकि वह जहां नहीं छोड़ना चाहिए था वहां भी चोदना शुरू कर देता था वह किसी भी पल को मौके में बदल देता था,,,

संजू अपनी माँ क साथ

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और फिर देखते ही देखते जबरदस्त धकको के साथ एक बार फिर से संजू अपनी मां को खंडहर में चोद दिया था,,, पहले आराधना झड़ी और फिर संजू जोर-जोर से धक्के लगाता हुआ अपना गरम लव अपनी मां की चूत में उड़ैल दिया,,,, तीनों सही समय पर मुख्य सड़क पर आकर खड़े हो गए थे और 5 मिनट ही गुजरे थे कि बस आ गई थी और तीनों अपने गंतव्य स्थल का टिकट कटा कर बस में बैठ चुके थे,,,, तीनों थक चुके थे इसलिए बस में बैठते ही तीनों सो गए,,, संजू ने घर पर फोन कर दिया था कि वह तीनों आने वाले हैं इसलिए दूसरे दिन दोपहर में पहुंचते ही तीनों बस स्टैंड पर रिक्शा करके अपने घर की तरफ निकल गए पहले साधना अपने घर पर पहुंची और फिर संजु आराधना भी अपने घर पर पहुंच गए,,,।
 
संजू अपनी मां के साथ अपने घर पर पहुंच चुका था,,, दोपहर का समय होने की वजह से घर पर मोहिनी नहीं थी दोनों काफी थक चुके थे घर की एक चाबी आराधना के पास थी जिसे वह अपने पर्स में से निकाल कर ताला खोलकर कमरे में प्रवेश कर गई,,,, दोनों इतने थके हुए थे कि दोनों एक ही बिस्तर पर सो गए और वैसे भी दोनों को अब इस बात से फर्क नहीं पड़ता था कि दोनों कहां सो रहे हैं किसके साथ सो रहे हैं क्योंकि घर में संजू मोहिनी और आराधना तीनों आपस में खुल चुके थे,,,,, थकान की वजह से मां बेटे दोनों गहरी नींद में सोए हुए थे और सोते-सोते कब शाम ढलने लगी दोनों को पता ही नहीं चला मोहिनी को मनीषा से पता चल गया था कि संजू और उसकी मां दोनों घर पर आ रहे हैं इसलिए वह पूरी तरह से निश्चित तिथि आज वह मोहिनी के घर नहीं बल्कि अपने घर आने वाली थी क्योंकि जब से संजू और आराधना गांव गए थे तब से मोहिनी मनीषा के घर पर ही रहती थी और रोज रात रंगीन करती थी भले ही दोनों की चूत में मर्दाना लंड प्रवेश नहीं कर पा रहा था लेकिन दोनों ने आपस में ही अपना जुगाड़ बना रखी थी दोनों रोज एक दूसरे के अंगों से खेल कर एक दूसरे के अंगों को चाट कर मसल कर दबा कर आनंद ले लेती थी और चूत में बैगन ककड़ी डालकर लंड की पूर्ति कर लेती थी,,,।

शाम को मोहिनी अपने घर पर पहुंची तो बाहर से ताला खुला हुआ था और अंदर से दरवाजा बंद था वह समझ गई की उसकी मां और उसका बड़ा भाई दोनों घर पर आ चुके हैं इसलिए उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी थी,,, इस बात की खुशी तो उसके मन में थी कि उसका बड़ा भाई और उसकी मां घर पर आ चुकी थी लेकिन इस बात की खुशी और भी ज्यादा थे कि आप उसकी भी रात रोज रंगीन होने वाली थी क्योंकि कुछ ज्यादा ही दिन गुजर गए थे उसे अपनी चूत में अपने भाई का लंड महसूस नहीं हो रहा था,,, मनीषा के साथ वह शारीरिक संबंध बनाकर उसके अंगों से खेलती जरूर थी लेकिन जो मजा उसे अपनी मां की चूत चाटने में आता था अपनी मां की बड़ी-बड़ी चूचियां दबाकर उसे मुंह में लेकर पीने में आता था वह मजा मनीषा से उसे उतना प्राप्त नहीं हुआ था हालांकि मनीषा दूसरे आनंद प्रमोद में डूबा देती थी लेकिन आराधना जितना मजा उसे मनीषा में नहीं आया था इसीलिए तो वह बहुत खुश नजर आ रही थी,,,।

मोहिनी दरवाजे पर दस्तक देने लगी,,,, लेकिन अभी भी आराधना के कमरे में दोनों मां बेटे एक ही बिस्तर पर एक दूसरे को बाहों में लिए चैन की नींद सो रहे थे,,,, मोहिनी जोर-जोर से दरवाजा खटखटा रही थी,,,, मोहिनी कुछ देर बाद,,, अपनी मम्मी को आवाज लगाते हुए दरवाजा खटखटाने लगी,,,,।

मम्मी,,,,ओ,,,, मम्मी,,,,, क्या कर रही हो,,,,,मममी,,,, अरे यार यह दोनों नहीं सुन रहे हैं,,,,।

(मोहिनी काफी देर से दरवाजे पर तुझ तक दे रही थी जिस तरह से दरवाजा बंद था और अंदर सन्नाटा छाया हुआ था उसे लेकर मोहिनी के मन में अजीब से ख्याल आने लगे थे वह अपनी मम्मी और अपने बड़े भाई की हरकत को अच्छी तरह से जानती थी वह दोनों कहीं भी शुरू हो जाते थे और उसे ऐसा ही लग रहा था कि शायद दोनों कमरे के अंदर चुदाई का खेल खेल रहे हैं तभी दरवाजा नहीं खोल रहे हैं,,,, थोड़ी देर बाद वह फिर से वह आवाज लगाते हुए दरवाजे पर दस्तक देने लगी,,,।)

मम्मी,,,,, क्या कर रही हो,,,,(एक बार तो उसका मन हुआ कि जोर से बोल दे की चुदवा रही हो क्या,,, लेकिन वह अपने आप पर काफी संयम रखी हुई थी लगातार वह दरवाजे पर दस्तक दे रही थी,,,, तभी थोड़ी देर बाद आराधना की नींद खुली,,, उसके कानों में दरवाजे की खटखटाहट की आवाज आ रही थी,,, वह एकदम से सक पका के उठकर बैठ गई,,,, उसके चूड़ियों की खनक सुनकर पास में सो रहा है संजू की भी नींद खुल गई और वह भी उठकर बैठ गया,,,,)

लगता है मोहिनी आ गई,,,,,(वह एकदम से बिस्तर से उठाते हुए बोली लेकिन उसके बिस्तर से उठने की वजह से हाथों में भरी हुई चूड़ियों की झांकने की आवाज एकदम मदहोश कर देने वाली रख रही थी संजू ने अपनी मां की चूड़ियों की खनक की आवाज को अपने अंदर महसूस करके एकदम उत्तेजना का अनुभव कर रहा था लेकिन इस समय वह कुछ कर सकता नहीं था लेकिन अपनी मां को बिस्तर से उठते हुए देखकर वह बोला,,,)

समय कितना हुआ है,,,

6:00 बज गए हैं,,,

बाप रे इतनी देर तक सोए रह गए,,,

वह तो अच्छा हुआ की मोहिनी आ गई है वरना सोए ही रह जाते,,,,(इतना कहते हुए आराधना अपनी साड़ी को दुरुस्त करके अपने कमरे में से बाहर निकल गई पीछे-पीछे संजू भी कमरे से बाहर आ गया दरवाजे पर अभी भी दस्तक हो रही थी बाहर खड़ी मोहिनी अपनी मां की चूड़ियों की खनक और पायल की छनक की आवाज को अच्छी तरह से पहचानती थी,,, इसलिए पल भर में उसके चेहरे पर राहत की रेखाएं साफ झलकने लगी,,,, वह दरवाजे पर दस्तक देना एकदम से बंद कर दी थी और थोड़ी देर में आराधना दरवाजा खोल दी दरवाजा के खुलते ही मोहिनी काफी दिनों बाद अपनी मां की खूबसूरत चेहरे को देख रही थी इसलिए उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और यही हाल आराधना का भी था अपनी बेटी को अपनी आंखों के सामने देखकर वह भी एकदम से खुश हो गई और उसे अपने गले लगा ली,,,, कमरे के अंदर प्रवेश करते हुए मोहिनी बोली,,,)

तुम दोनों कर क्या रहे थे मैं इतनी देर से दरवाजा खटखटा रही हूं लेकिन कोई आवाज ही नहीं आ रही है कहीं तुम दोनों शुरू तो नहीं हो गए थे,,,,(जिस तरह का तीनों के बीच रिश्ता था उसे देखते हुए मोहिनी एकदम खुल चुकी थी इसलिए उसके मुंह से इस तरह की बात सुनकर ना तो संजू को ताजजुब हुआ था ना हीं आराधना को वह दोनों मुस्कुरा रहे थे और मुस्कुराते हुए आराधना बोली,,,)

पागल हो गई है क्या तुझे हर वक्त यही सुझता रहता है,,, बस के सफ़र से इतना थक गए हैं कि हम दोनों नहाए भी नहीं है बस बिस्तर पर पड़े तो पड़े रह गए,,,,।

ओहह तुम दोनों को देखकर ऐसा ही लग रहा है अच्छा एक काम करो जल्दी से तुम दोनों नहा कर फ्रेश हो जाओ मैं तब तक तुम दोनों के लिए चाय बना देता हूं उसके बाद खाना भी बना दूंगी,,,,।

संजु और आराधना

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नहीं तु चाय बना दे खाना में बना लूंगी,,,,,

ठीक है,,,,।

(संजू काफी देर से अपनी बहन की छातियो की तरफ देख रहा था जिसके ऊपर कुछ हद तक और भी ज्यादा बेहद खूबसूरत नजर आ रहे थे,,, संजू से रहा नहीं गया और वह अपना हाथ बढ़ाकर अपनी बहन की छाती पर रखकर उसकी चूची दबाते हुए बोला,,,)

वाह मोहिनी तेरी चुची तो बहुत मस्त हो गई है,,,।

आहहहह,,,,(संजू से मोहिनी को इस तरह की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी इसलिए संजू की तरह की हरकत से बचपन से क्यों कभी जीवन हल्का सा दर्द अपनी छतिया में महसूस कीजिए और दर्द से हल्की सी कराहते हुए वह बोली,,,)

क्या भैया क्या कर रहे हो,,,,

कुछ नहीं रे तेरी जवानी का अंदाजा ले रहा हूं,,,।

(दोनों की मीठी छेड़छाड़ देखते हुए आराधना मुस्कुराते हुए बोली)

तुझे बड़ी जल्दबाजी है रात को आराम से देख लेना,,,

संजू बाथरुम में अपनी मां की चुदाई करता हुआ

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हां यह भी ठीक है मम्मी,,,,(अपनी बहन की तरफ देखकर आंख मारते हुए वह बोला,,, और यह देखकर मोहिनी मुस्कुराते हुए रसोई घर में चली गई,,,,,। तीनों में किसी भी प्रकार की मर्यादा का बंधन नहीं था तीनों एक दूसरे के प्रति एकदम खुल चुके थे इसीलिए बाथरूम का दरवाजा खुला हुआ था और आराधना बाथरूम के अंदर अपनी साड़ी उतार रही थी,,, उसे अपने बेटे और बेटी के सामने किसी भी प्रकार की झिझक नहीं होती थी पर यह उसके लिए अच्छा भी था और वह इसे अच्छा भी समझती थी,,, एक औरत होने के नाते अपने बदन की प्यास को देखते हुए उसे यह सब कुछ अच्छा ही लगता था और वह सोच भी रही थी कि एक औरत को इसी तरह से रहना चाहिए क्योंकि इसी तरह से औरत असली सुख जिंदगी का ले सकती है और वह ले रही थी देखते-देखते वह अपने बेटे की आंखों के सामने अपनी साड़ी उतार कर अपने ब्लाउज का बटन खोलकर उसे अपने हाथों से उतार दी लेकिन ब्रा का हुक खोलने के लिए संजु खुद बाथरूम में प्रवेश कर गया और अपनी मां की ब्रा का हुक खोलकर उसे उसकी गोरी गोरी बाहों में से निकाल कर बाथरूम में फेंक दिया,,,, आराधना को बिल्कुल भी इस बात की चिंता नहीं थी की रसोई घर में उसकी जवान बेटी चाय बना रही है और फिक्र होती भी कैसे उसकी बेटी खुद जवानी का मजा दोनों के साथ मिलकर ले रही थी इसलिए आराधना भी निश्चित थी,,,, देखते ही देखते कमर से बंधी हुई साड़ी को भी संजू अपने हाथों से निकाल कर नीचे गिरा दिया,,,।

संजू बाथरुम में मजा लेते हुए

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मोहिनी आंखों के नीचे करतब शुरू हो गया था मोहिनी अनजान थी कि बाथरूम में क्या हो रहा है माहौल पूरी तरह से धीरे-धीरे गर्म होने लगा था और गर्म करने वाला था संजू क्योंकि कुछ देर पहले ही बिस्तर पर अपनी मां की चूड़ियों की खनक की आवाज सुनकर वह उत्तेजित हो चुका था और फिर अपनी बहन की चूची पर हाथ रखकर वह अपने लंड में अकड़न महसूस किया था और फिर अपनी आंखों के सामने ही अपनी मां को कपड़े उतारते हुए देख कर वह पूरी तरह से मस्त हो गया और इसी अवसर का,,, फायदा उठाते हुए संजू अपनी मनमानी करने पर उतारू हो चुका था और जिसमें खुद आराधना की भी सहमति नजर आ रही थी क्योंकि वह किसी भी तरह से अपने बेटे को रोकने का प्रयास नहीं कर रही थी बल्कि उसकी हरकतों का आनंद ले रही थी,,,,।

बाथरुम में मजा लेते हुए

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जब से इस खेल में संजू ने मोहिनी को शामिल किया था तब से वह पूरी तरह से खुल चुका था और संजू ही नहीं मोहिनी और आराधना भी पूरी तरह से खुल चुके थे और इस खुलेपन में ही वह तीनों स्वर्ग का आनंद लूट रहे थे,,,, ब्लाउज खुद आराधना ने अपने हाथों से उतरी थी और ब्रा को उतारने का सौभाग्य संजू को प्राप्त हुआ था और वह खुद अपने हाथों से अपनी मां की साड़ी को खोलकर बाथरूम में नीचे गिरा दिया था वह केवल पेटीकोट में थी सिर्फ़ पेटिकोट की डोरी खोलने की देरी थी और उसकी मां पूरी तरह से नंगी हो जाती लेकिन वह अपनी मां को संपूर्ण रूप से नग्नावस्था में चोदना नहीं चाहता था,,,,,, संजू कुछ देर तक अपनी मां की नंगी चूची से खेलना चाहता था इसलिए वह दोनों हाथों को आगे की तरफ लाकर अपनी मां के दोनों खरबूजा को पकड़ लिया और उसे दबाना शुरू कर दिया,,,, खुद आराधना भी अपने बेटे की कामुक हरकत की वजह से गर्म हो चुकी थी,,,, आराधना को अपने बेटे पर गर्व हो रहा था खास करके उसकी मर्दाना ताकत पर जिस तरह से वह एक साथ दो-दो औरतों की जमकर चुदाई करता था और वह भी बिना थके कि वह देखने और महसूस करने लायक था,,,। आराधना अपने बेटे की हरकत से इस बात से और ज्यादा उत्तेजित हो जाती थी कि उसका बेटा सिर्फ मौके की तलाश में रहता था वह जगह और समय बिल्कुल भी नहीं देखा था जैसा कि गांव से घर से निकलते समय रास्ते में खंडहर के अंदर ही दोपहर के समय ही वह दोनों बहनों की बराबर से बड़ी-बड़ी से ले लिया था और दोनों को पूरी तरह से संतुष्ट किया था और बस के अंदर भी वह चुदाई का सुख भोग लिया था,,,, और अब अपनी बहन की उपस्थिति में ही वह बाथरूम के अंदर शुरू हो चुका था,,,।

संजू की हरकत की वजह से आराधना पूरी तरह से उत्तेजित हुए जा रही थी खास करके संजू का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था और वह सीधे पेटिकोट के ऊपर से ही आराधना की गांड में दस्तक दे रहा था,,,, आराधना को अपनी गांड पर अपने बेटे के लंड की चुदाई बहुत ही ज्यादा उत्तेजित कर देने वाली और मदहोश बना देने वाली लग रही थी इसीलिए उत्तेजित होते हुए आराधना अपनी गोल गोल गांड को अपने बेटे के लंड पर गोल-गोल घूमाना शुरू कर दी थी इससे वह खुद उत्तेजित हो रही थी और अपने बेटे को भी मस्त कर रही थी,,।

आराधना और संजू

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कुछ देर रुक गया होता मोहिनी चाय बना रही है अगर वह आ गई तो,,,

तो क्या हो गया मम्मी मोहनी को भी अंदर खींच लेंगे और फिर एक साथ तुम मां बेटी दोनों की चुदाई होगी,,,(संजू इस तरह से अपनी मां की चूची को दबाते हुए और अपने लंड को अपनी मां की गांड पर गोल-गोल घूमते हुए बोला,,,)

सच में तु बहुत बेशर्म हो चुका है,,,।

गांव में तुम दोनों रंडी होना जिस तरह का सुख मुझे दिया है उसे पकड़ तो दुनिया का कोई भी मर्द बेशर्म बन जाए और बेशर्म बनने में ही सबसे ज्यादा मजा है वरना इस तरह का सुख भला किसे प्राप्त होगा,,,(संजू उसी तरह से अपनी मां की चूची को रगड़ते हुए बोला,,,)

चल रहने दे अब जल्दी कर मुझे नहाना भी है,,,,

बिल्कुल भी चिंता मत कर रानी अभी तेरी चूत में लंड डालता हूं,,,,(और इतना कहने के साथ ही संजु अपनी मां की चूचियों पर से अपने दोनों हाथ को हटाकर,,, वह अपनी मां की पेटीकोट को पकड़ लिया और उसे धीरे-धीरे ऊपर की तरफ उठने लगा देखते देखते संजू अपनी मां की पेटीकोट को कमर तक उठा दिया था और कमर तक पेटिकोट के उड़ने ही उसकी गोरी गोरी गांड पर लिपटी हुई उसकी लाल रंग की चड्डी नजर आने लगी,,, जिसे संजू बिल्कुल भी देर ना करते हुए अपने हाथों से अपनी मां की चड्डी को नीचे खींचते हुए से घुटनों तक लेकर आया और फिर,,, अपनी मां की पीठ पर हाथ रख कर उसे दबाव देकर झुकने के लिए इशारा करने लगा उसकी मां भी जानती थी कि उसे क्या करना है और वह भी अपने बेटे का इशारा पाकर झुक कर अपनी गांड को हवा में ऊपर उठा दी बस इसी का इंतजार था समझो को और संजू एक झटके में अपने पेट को उतार कर अपने खड़े लंड को बाहर निकाल लिया,,, और फिर एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर अपनी मां की गुलाबी चूत के अंदर प्रवेश कर दिया,,, चूत पहले से ही पनियाई हुई थी,,, इसलिए एक झटके में ही संजु का लंड पूरी तरह से चुत की गहराई में समा गया,,, आराधना की चूत अंदर से बेहद गर्म थी मानो कि जैसे कोई भट्टी जल रही हो लेकिन संजू भी काम नहीं था संजू का लंज भी गरम लोहा था जितना तपता था उतना ज्यादा मजबूत बनता था उतना ज्यादा निखर कर आता था और इस समय भी वही हो रहा था,,,, संजू की जगह अगर किसी और का लंड होता तो शायद आराधना की चूत की गर्मी वह सहन नहीं कर पाता और पहले झटके में ही ढेर हो जाता,,,

लेकिन आराधना से मुकाबला करने वाला उसका खुद का बेटा संजू था जो कि उसकी ही चुत से बाहर आकर खरा सोना बन चुका था,,, और अपने मर्दाना अंग से अपनी मां की चूत की गर्मी को शांत कर रहा था,,,,

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संजू अपनी मां की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था उसका मोटा तगड़ा लंड एकदम आराम से उसकी मां की चूत की गहराई तक पहुंच रहा था वह अपनी मां को गचागच चोद रहा था,,, वैसे भी संजू को अपनी मां की चुदाई करने में बहुत मजा आता था जो सुख उसे अपनी मां की चूत से प्राप्त होता था गाना तो अपनी मौसी की चूत से प्राप्त होता था और नहीं अपनी मामियों की चूत से यहां तक की चूत को लेकर अगर उसे ऊपर से नीचे क्रमांक में रखना हो तो वह 1 से 10 के अंदर अपनी मां की चूत को ही रखेगा बाकी इसके बाद के क्रमांक में ही आते हैं क्योंकि उम्र के इस दौर में भी उसकी मां की चूत एकदम जवानी से भरी हुई लड़की की तरह एकदम कसी हुई थी जिसमें उसका मोटा तगड़ा लंड एकदम फिट बैठता था,,,।

संजू के हर एक धक्के से आराधना पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी,,, उसके मुख से गरमा गरम शिसकारी की आवाज निकल रही थी,,,,,, यह पल बेहद उन्मादक था,,, आराधना सोची नहीं थी कि उसका बेटा ऐसे समय पर बाथरूम नहीं शुरू हो जाएगा लेकिन संजू से इस मामले में भी उसे कोई गीला शिकवा नहीं था,,,,,,,,, गजब की ताकत दिखा रहा था संजु उसका हर एक धक्का आराधना के बच्चेदानी तक पहुंच रहा था और हर एक हक्के पर आराधना छल जा रही थी उसे इतना मजा आ रहा था कि पूछो मत उसकी भारी भरकम गोल-गोल कर पानी भरे गुब्बारे की तरह लहरा रही थी संजू का हर एक धक्का उसकी बड़ी-बड़ी गांड पर ऐसा पड़ रहा था कि मानो जैसे शांत तालाब में कंकर मारा जा रहा हूं हर एक धक्के पर मक्खन जैसी गांड लहर उठ रही थी,,,।

मोहिनी दोनों से बेखबर अपनी मां और अपने बड़े भाई के लिए चाय बना रही थी क्योंकि वह लोग काफी थके हुए थे लेकिन वह कहां जानती थी कि उसका बड़ा भाई और उसकी मम्मी दोनों सफर का थकान भुलकर चुदाई का सुख भोग रहे हैं,,, संजू को बड़ा मजा आ रहा था संजू कभी अपनी मां की कमर पकड़ लेता तो कभी उसके दोनों खरबुजो को अपनी हथेली में लेकर मसलते हुए अपनी कमर हिला रहा था,,,।

संजू और ज्यादा उत्तेजित हुआ जा रहा था उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था ,,, ऐसा लग रहा था कि वह अपनी मां की चूत में ही घुस जाएगा इसलिए वह अपना लंड धीरे से निकाल कर अपनी मां को अपनी तरफ घुमा दिया और उसे अपनी बाहों में लेकर उसकी दोनों टांगों को उठाकर,,, अपनी कमर से लपेटते हुए उसे गोद में उठा लिया,,, और एक बार फिर से अपने खड़े लंड को अपनी मां की चूत में प्रवेश कराकर उसे धीरे से दीवार से सटा दिया,, और फिर धक्के पर धक्का लगाना शुरू कर दिया,,, आराधना उसे बिल्कुल भी मना नहीं कर रही थी,,, क्योंकि वह अपने बेटे को अच्छी तरह से जानती थी वह जो कुछ भी करता था उसे आराधना को मजा और संतुष्टि दोनों प्राप्त होती थी और इसमें आराधना की भलाई रहती थी इसलिए संजू का साथ देते हुए गरमा गरम आहे भर रही थी संजू और उसकी मां दोनों चरम सुख के बेहद करीब पहुंच गए थे संजू एकदम से उसे अपनी बाहों में दबोचते हुए अपने धक्के को तेज कर दिया और फिर देखते ही देखते दोनों एक साथ झड़ना शुरू हो गए,,,।
 
संजू और आराधना दोनों नहा चुके थे और मोहिनी क्या तैयार करके दोनों को एक-एक कहना चाहिए थाम कर खुद एक कप लेकर चाय पीने बैठ गई थी,,, मोहिनी काफी उत्सुक थी गांव में क्या-क्या हुआ शादी कैसी थी मामा की लड़की कैसी दिखती थी,,, इसलिए बात की शुरुआत करते हुए वह बोली,,,।

कैसा रहा गांव का सफर,,,,(चाय की चुस्की लेते हुए मोहिनी बोली)

बहुत बढ़िया इतना मजा आया कि पूछ मत तू भी साथ में होती तो और मजा आता,,,(आराधना खुश होते हुए चाय की चुस्की लेते हुए बोली तो संजू अपनी मां की तरफ देखकर अपनी मां को आंख मारते हुए बोला)

हां यह भी होती तो और ज्यादा मजा आता है कि कमरे में चार-चार मेरा तो पांचो उंगलियां घी में होती,,,।

एक ही कमरे में चार-चार में कुछ समझी नहीं,,,,(मोहिनी आश्चर्य जताते हुए बोली)

अरे मोहिनी तू होती तो अच्छे से समझ जाती,,,

संजू,,,,,(आराधना संजू को आंख दिखाते हुए बोली मोहिनी दोनों की तरफ देख रही थी मोहिनी को कुछ दाल में कुछ काला नजर आ रहा था इसलिए वह फिर से बोली,,,)

तुम दोनों मुझे कुछ बताओगे या एक दूसरे को आंख दिखाते रहोगे अरे मैं तुम लोगों के साथ जा नहीं पाई तो मुझे कुछ बताओगे भी नहीं,,,,।(इस बार मोहिनी थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए चाय का कप नीचे जमीन पर रख दी,,, और दोनों की तरफ देखने लगी आराधना आंख के इशारे से संजू को खामोश रहने के लिए बोल रही थी और संजू अपनी मां की तरफ देखकर मुस्कुरा रहा था,,,, वैसे तो आराधना जिस मामले में संजू को चुप्पी साधने के लिए बोल रही थी आराधना को संजू पर बिल्कुल भी यकीन नहीं था कि वह खामोश रहेगी क्योंकि इस मामले में वह बिल्कुल भी शांत नहीं था वह जानते थे कि वह जरूर बता देगा लेकिन फिर भी अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रही थी,,,। कुछ देर तक कमरे में खामोशी छाई रही मोहिनी उत्सुकता से दोनों की तरफ देख रही थी और दोनों एक दूसरे को देख रहे थे दोनों की खामोशी देखकर मोहिनी को थोड़ा गुस्सा आने लगा और वह फिर से थोड़ा जोर से बोली,,,)

अगर बताना ना हो तो बात को छेड़ने का कोई मतलब नहीं है,,,, नहीं बताना है तो मत बताओ लेकिन फिर मुझे भी कोई उम्मीद मत करना,,,,(मोहिनी संजू की तरफ देख कर बोली संजू मोहिनी के कहने के मतलब को अच्छी तरह से समझ गया था,,, संजू अच्छी तरह से जानता था कि अगर मोहिनी नाराज हो गई तो वह फिर उसे चोदने नहीं देगी,,, और फिर मोहिनी को मनाने के लिए उसे मनाना पड़ेगा मिन्नतें करनी पड़ेगी,,, इसलिए संजू अपना हाथ बढ़ाकर मोहिनी के हाथ पर रख दिया और बोला,,,)

देखो मोहिनी,,,,

संजू खामोश हो जा,,,, मोहिनी को बताना जरूरी नहीं है,,,।

(आराधना संजू को चुप करने की पूरी कोशिश कर रही थी और मोहिनी आश्चर्य से मुंह खोल दोनों की तरफ देख रहे थे उसे अपनी मां के व्यवहार पर कुछ अजीब लग रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि जब उन तीनों के बीच कुछ भी राज नहीं है तो फिर उसकी मां क्या छुपाना चाहते हैं ऐसा क्या हो गया गांव में और इसी को जानने के लिए वह उत्सुक थी,,,)

क्या मम्मी है क्या कर रही हो हम तीनों के बीच कुछ भी राज नहीं है सब कुछ खुला है फिर भी तुम ना जाने क्यों क्या है ऐसा की छुपाने की कोशिश कर रही हो अरे मैं भी तो जानू ऐसा क्या हो गया गांव में,,,,

मम्मी मोहनी सही कह रही है इससे छुपाने से कोई फायदा नहीं है एक न एक दिन इसे भी पता चल ही जाएगा,,,,

लेकिन मोहिनी को बताना जरूरी नहीं है,,,(आराधना फिर भी संजू को चुप कराने के उद्देश्य से बोली और संजू मुस्कुराता हुआ बोला,,,)

मम्मी बताने दो ना बहुत मजा आएगा,,,(संजू भी आखरी घूंट भरता हुआ बोला और फिर चाय के प्याले को नीचे रख दिया)

नहीं बिल्कुल भी नहीं संजू कुछ तो समझा कर,,,

नहीं मम्मी वहां जो कुछ भी हुआ मोहिनी को भी पता चलना चाहिए,,, तुम ही जरा सोचो अगर मोहिनी हम लोगों के साथ चलती तो वह भी उसे चीज का हिस्सा होती कि नहीं तब तुम क्या कर लेती,,,,।

लेकिन संजू,,,, कुछ तो छुपाने लायक रखा कर,,,

हम तीनों के बीच इस तरह का रिश्ता है मम्मी मुझे नहीं पता कि कुछ छुपाना चाहिए क्योंकि छुपाने से ज्यादा बताने में मजा आएगा,,,

तुम दोनों की नोक जोक से मेरा सिर चकरा रहा है,,,(इतना कहते हुए मोहिनी जमीन पर पड़े हुए तीनों चाय के प्याले को अपने हाथ में उठा ली और उठने लगी और बोली,,) लेकिन याद रखना आइंदा मुझसे भी किसी तरह की उम्मीद लगा कर मत रखना,,,,(और इतना कहने के साथ है मोहिनी चाय के प्यालो को लेकर रसोई घर में चली गई,,,, संजू और आराधना दोनों एक दूसरे को देखने लगी संजू की आंखों में शरारत थी लेकिन आराधना संजू की हरकत से थोड़ा गुस्से में थी लेकिन मन ही मन वह भी गांव में जो कुछ भी हुआ था उसे बताने के लिए तैयार हो चुकी थी क्योंकि इस बात को वह भी अच्छी तरह से जानती थी कि मोहिनी के बिना जो खेल वह लोग खेल रहे हैं उसमें मजा नहीं आएगा,,,, इसलिए आराधना ना चाहते हुए भी अपना सिर हिला कर और आंखों की पलकों को झुका कर संजू को सब कुछ बताने का इशारा कर दी,,,, इशारा बातें ही संजू अपनी जगह पर बैठा हुआ ही मोहिनी को आवाज लगाता हुआ बोला,,,)

मोहिनी,,,, ओ मोहिनी सुन तो तू तो बहुत जल्दी नाराज हो जाती है,,,(कोई और बात होती तो शायद मोहिनी अपने भाई के इस तरह से बुलाने से नहीं आती लेकिन वह भी जाना ना चाहती थी कि गांव में ऐसा क्या हुआ जिसको लेकर उसकी मां इतनी परेशान है और वह छुपाना चाहती है इसलिए संजू के बुलाते ही वह दरवाजे पर आकर खड़ी हो गई और संजू अपना हाथ बढ़ाकर उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लिया और अपने बगल में बैठा लिया,,, और बोला,,,)

गांव में जो कुछ भी हुआ उसके बारे में सुनेगी तो तू हैरान रह जाएगी,,,

अरे भाई तो मैं कब से पूछ रही हूं क्या हुआ गांव में लेकिन तुम दोनों बताने को तैयार हीं नहीं हो,,,,।

अच्छा सुन में बता रहा हूं,,,, जब हम लोग गांव में पहुंच गए तो बड़ी तेज से बारिश होने लगी पक्की सड़क से उतरकर हम लोग कच्ची सड़क पर जाने लगे और इतनी तेज बारिश होने लगी की हम तीनों भीग गए और बचने के लिए कोई सहारा ना देख कर एक टूटे-फूटे खंडहर में घुस गए,,,

फिर,,,(मोहिनी उत्सुकता दिखाते हुए बोली,,, आराधना भी संजू की बात सुन रहे थे लेकिन शर्म के मारे अपनी नजरों को दूसरी तरफ घूमा कर रखी थी,,,,)

खंडहर में घुसने के बाद,,, हम तीनों पूरी तरह से देख चुके थे मैं तो अपने गीले कपड़े उतार कर सिर्फ अंडरवियर में खड़ा हो गया मम्मी और मौसी दोनों की पूरी तरह से देख चुके थे लेकिन शर्म के मारे अपने कपड़े नहीं उतर रहे थे,,, और मोहिनी सच बताऊं तो मम्मी बरसात के पानी में देखने के बाद एकदम नमकिन हो गई थी उसे देखता ही बन रहा था,,,, मेरी नजर जैसे ही मम्मी पर पड़ी मेरी तो हालत खराब होने लगी और इसी के चलते हैं मेरा लंड खड़ा होने लगा अंडरवियर में पूरा तंबू बन गया,,,, और मैंने देखा की मौसी की नजर अनजाने में मेरे लंड पर पड़ गई जो की अंडरवियर में कैद होने के बावजूद भी पूरी तरह से तंबू बनाया हुआ था,,,

क्या बात कर रहा है भाई मौसी तेरा लंड देख रही थी,,,(मोहिनी एकदम से हैरान होते हुए बोली,,, और आराधना तिरछी नजर से मोहिनी की तरफ देखने लगी वह क्योंकि बड़ा लुफ्त लेकर संजू की बात को सुन रही थी और वैसे भी मोहिनी के मुंह से लंड शब्द सुनकर उसे कोई हैरानी नहीं हुई थी क्योंकि दोनों मां बेटी एक साथ संजू से चुदाई का मजा लुटती थी,,,)

हां मोहिनी मुझे तो यकीन नहीं हो रहा था की मौसी की नजर मेरे इस तरह से जाएगी,,, कि वह देखती रह जाएगी,,,

फिर क्या हुआ,,,?

फिर क्या खंडहर में एक साथ जवानी से भरी हुई दो-दो औरतें बरसात के पानी में भीगी हुई भला एक जवान लड़की की क्या हालत होगी मेरी तो हालत खराब हो रही थी मुझे समझ में नहीं आ रहा था क्या करूं अगर मौसी ना होती तो मैं मम्मी की चुदाई करके अपनी प्यास बुझा लेता लेकिन मौसी की मौजूदगी में मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी,,,।

(आराधना आश्चर्य भरी नजरों से संजू की तरफ देख रही थी क्योंकि वह जानती थी कि संजू कहानी को नमक मिर्च लगाकर बता रहा है और मोहिनी एकदम ध्यान से उसकी बात को सुनकर अंदर ही अंदर उत्तेजित हुई जा रही है,,, संजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,)

मुझे तो बिल्कुल भी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं लेकिन मुझे ऐसा लग रहा था की मौसी के मन में जरूर कुछ चल रहा है वह बार-बार मेरे अंडरवियर की तरफ देख रही थी और अपने होठों को दांतों से काट ले रही थी,,,,।

क्या बात कह रहा है भाई मौसी ऐसा कर रही थी इसका मतलब है कि पक्का तेरा लंड देखकर चुदवाने के लिए तड़प रही होगी,,,

अरे तू सुन तो सही मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा था की मौसी इतनी प्यासी औरत होगी,,,, क्योंकि वह मेरी उपस्थिति में एकदम खुले शब्दों में बोली ,,,

मुझे तो बड़े जोरों की पेशाब लगी है,,,,

और सच बताऊं मोहिनी मौसी के मुंह से पेशाब वाली बात सुनकर मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया एकदम लोहे की तरह,,,,(संजू की बनी बनाई बात को सुनकर आराधना भी उत्तेजित हो रही थी उसकी चूत से पानी निकलना शुरू हो गया था और यह यार मोहिनी काफी था मोहिनी अपने भाई की बात सुनकर अपनी मौसी के बारे में अत्यंत मदहोश कर देने वाली हरकत के बारे में सुनकर उसकी चूत भी पानी फेंक रही थी) मुझे तो समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं लेकिन मुझे मौसी की बात सुनकर तुरंत जवाब देने का मन किया और मैं खुद मम्मी से पहले ही बोला)

तो क्या हो गया मौसी जाकर कोने में कर लो यहां कौन देखने वाला है,,,,।

(मेरी तरह की बात सुनते ही मौसी के चेहरे पर मानो उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी वह एकदम से मदहोश हो गई और प्यासी नजरों से मेरी तरफ देखते हुए बोली)

मुझे शर्म आती है,,,,,,

इसमें शर्माने वाली कौन सी बात है मौसी,,,, तुम्हारी मर्जी मैं तब तक कुछ जलाने का बंदोबस्त करता हूं वरना भीगने की वजह से सर्दी लग जाएगी,,,,और इतना कहकर में अंडरवियर में ही खंडहर के अंदर इधर-उधर सूखी लकड़ियों कोई इकट्ठा करके उसे जला दिया और थोड़ी ही देर में खंडहर में जल्दी हुई लड़कियों से रोशनी फैल गई सब कुछ साफ-साफ नजर आने लगा जल्दी से मौसी और मम्मी दोनों जाकर जाती हुई लकड़ी के सामने बैठ गई और अपने बदन को गर्माहट देखने लगी लेकिन मेरे मन में मौसी को लेकर कुछ अजीब सा चलने लगा,,,.

क्या चलने लगा भाई,,,,?(मोहिनी मदहोशी भरे श्वर में बोली,,)

तू समझ सकती है मोहिनी और यह बात मम्मी भी समझ सकती है कि एक भीगी हुई जवानी से भरी हुई औरत को देखकर एक जवान लड़के के मन में क्या चल रहा होगा और तब जब वह औरत खुद उसके लंड की तरफ प्यासी नजर से देख रही हो बस मेरे दिमाग में भी वही चलने लगा मैं आज तक मौसी के बारे में इस तरह से नहीं सोचा था लेकिन मौसी की नजर ने मेरे सोचने के रवैए को बदल दिया,,,

भाई सोच तो तू मम्मी के बारे में भी कभी ऐसा नहीं था लेकिन मम्मी का कुछ ऐसा देख लिया जो मम्मी को देख कर तेरा लंड खड़ा हो गया और फिर हम सब जानते हैं क्या हुआ,,,, तू आगे बता,,,,

(आराधना अच्छी तरह से जानती थी कि संजू बनी बनाई बात बता रहा है लेकिन उसकी बातों में इतना आनंद आ रहा था कि वह कुछ बोल नहीं पा रही थी और मोहिनी भी अच्छी तरह से जानती थी कि उन सब में किस तरह का रिश्ता है इसलिए आराधना को भी कोई एतराज नहीं था तीनों आनंद लेकर बातचीत का आनंद ले रहे थे संजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

मौसी की पेशाब वाली बात सुनकर मेरी हालत खराब हो गई थी और मेरे लंड की भी हालत खराब हो गई थी मुझे भी बड़ी जोरों की पेशाब लगी थी मैं भी पेशाब करना चाहता था लेकिन मैं देखना चाहता था कि मुझे पेशाब करते हुए क्या मौसी मुझे देखती है या देखने की कोशिश करती है मैं भी काफी उत्तेजना का अनुभव कर रहा था इसलिए अपनी जगह से खड़ा हुआ और बिना कुछ बोले बस थोड़ी सी दूरी पर जाकर अपने अंडरवियर को नीचे करके अपने खड़े लंड को निकाल लिया और पेशाब करना शुरू कर दिया,,, मेरा लंड पूरी तरह से अपनी औकात में था एकदम खड़ा बाहर बड़े जोरों की बारिश हो रही थी रह-रहकर आसमान में बिजली चमक जा रही थी सब कुछ डरावना था लेकिन खंडार के अंदर पूरी तरह से माहौल गर्म हो चुका था,,, मैं यह देखना चाहता था की मौसी मेरी तरफ देख रही है कि नहीं इसलिए तिरछी नजर से मौसी की तरफ देखा तो मेरे होश उड़ गए मौसी मेरी तरफ ही प्यासी नजरों से देख रही थी और मेरे हाथों में मेरा लंड था जो कि मैं अच्छी तरह से जानता था की मौसी को ठीक से दिखाई नहीं दे रहा होगा और मम्मी मेरी तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रही थी वह आग तापने में व्यस्त थी,,, और इसी का फायदा उठाते हुए मैं थोड़ा सा घूम गया और अपने लंड को हिलाते हुए पेशाब करने के बहाने मौसी को अपना नंगा लंड दिखा दिया और फिर क्या था मौसी तो एकदम पागल हो गई प्यासी नजरों से मेरे लंड को देखती रहेगी मैं भी कुछ देर तक अपने लंड को जानबूझकर अपने हाथ में लेकर हिलाता रह गया,,,,

बाप रे मेरी तो सुन के ही हालत खराब हो गई,,,,(गहरी सांस लेते हुए मोहिनी बोली)

तू ही सोच मोहिनी जब तेरा सुनकर यह बुरा हाल है तू मौसी की क्या हालत होती होगी,,,,

(आराधना इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि संजू का संबंध उसकी बड़ी बहन के साथ पहले से ही था और खंडहर में जो कुछ भी हुआ उसकी बड़ी बहन उसे खेल में आराधना को भी शामिल करना चाहती थी इसलिए जानबूझकर खंडहर में संजू के साथ संबंध बनाई थी और उसमें आराधना को शामिल कर ली थी लेकिन यह बात मोहिनी नहीं जानती थी कि उसकी मौसी के साथ उसके भाई का संबंध पहले से ही था इसीलिए संजू फनी बनाई बात बात कर मोहिनी को विश्वास में ले लेना चाहता था कि उसकी मौसी भी उससे चुदवाना शुरू कर दी है, , )

फिर तूने क्या किया भाई,,,,

मैं क्या करता मेरा तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं मेरी हिम्मत क्यों नहीं हो रही क्योंकि मम्मी जो पास में थी,,,,

अरे यार मम्मी को तो तू रोज ही छोड़ता है मम्मी को सब कुछ मालूम है तो मौसी को चोदने में क्यों डर रहा था,,,

मम्मी को मेरा चोदता हूं यह बात तो सिर्फ तू जानती है ना मौसी थोड़ी जानती है इसलिए मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी मैं अपनी जगह पर आकर बैठ गया थोड़ी ही देर में मम्मी को नींद आने लगी और मम्मी सो गई,,,, मेरी आंखों में नींद नहीं थी और यही हालत मौसी की भी थी मौसी मेरी तरफ देखते हुए अपनी जगह से उठी और मेरी तरफ प्यासी नजरों से देखते हुए मेरे सामने से होकर गुजरी और ठीक मेरे सामने जाकर खड़ी होगी जहां पर मैं खड़ा होकर पेशाब कर रहा था और मेरी आंखों के सामने ही अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर अपनी नंगी गांड गोल घूमाते हुए मुझे अपनी तरफ आकर्षित करने लगी और मेरी आंखों के सामने ही बैठकर पेशाब करने लगी,,,,।

सहहहहह तेरी बात सुनकर तो मेरी हालत खराब हो रही है भाई क्या सच में मौसी ऐसा कि मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है,,,

हा रे मोहनी सच में मौसी ने ऐसा ही की,,,,

फिर क्या हुआ,,,?

फिर क्या मैं मम्मी की तरफ देखा मम्मी तो गहरी नींद में सो चुकी थी मेरी आदत खराब हो गई थी और मेरे लिए तो खुला आमंत्रण था मैं भला अपने आप को कैसे रोक सकता था मेरा लंड अपनी औकात दिखा रहा था और मैं तुरंत अपनी जगह से खड़ा हुआ और सीधा मौसी के पास पहुंच गया,,,,, मुझे अपनी तरफ आता हुआ देखकर मौसी तुरंत खड़ी हो गई लेकिन साड़ी को नीचे लेकर आई हो अपनी कमर तक अपनी साड़ी को पकड़े रह गई और फिर तुरंत देखा था आगे बढ़कर अंडरवियर के ऊपर से ही मेरा लंड को पकड़ ली मेरा धैर्य एकदम से जवाब दे गया और फिर मैं मौसी को अंत तक खींच कर अपनी बाहों में भर लिया उनके लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख कर उनके होंठों को चूसना शुरू कर दिया मौसी पूरी तरह से पागल हो चुकी थी ,,,,वह मेरे लंड को पकड़कर मसलना शुरू कर दी,,,,।

(संजू की बातें बेहद मादकता भरी थी उसकी बातों को सुनकर मां बेटी दोनों की चूत से पानी निकलना शुरू हो गया था आराधना जानती थी कि सब कुछ अपने मन से बोल रहा है लेकिन उसकी बातों में इतना मजा आ रहा था कि वह कुछ बोल नहीं पा रही थी बस अपने बेटे की बातों का मजा ले रही थी,,,।)

मेरे तो होश उड़ गए मौसी के बारे में मैंने कभी ऐसा सोचा नहीं था और ना ही मैंने कभी अपने मन में यह ख्याल आया था की मौसी इस तरह की हरकत करती होगी लेकिन मेरे साथ जो कुछ भी हो रहा था वह हकीकत था,,, मौसी मेरे लंड को जोर से पकड़ कर हिला रही थी,,, मैं तुरंत मौसी के ब्लाउज का बटन खोलना शुरू कर दिया,,,,

1 मिनट,,,(मोहिनी बीच में ही रोकते हुए बोली) मौसी को सलवार कमीज पहन कर गई थी क्योंकि ब्लाउज का बटन कैसे खोलने लगा,,,,

(इस बार संजू को भी अपनी गलती पर हैरानी होने लगी लेकिन वह तुरंत बचाव करते हुए बोला)

अरे बुद्धू यहां से पहन कर भले ही सलवार कमीज गई थी लेकिन हम लोगों की सीट केबिन में थी और मौसी को सलवार कमीज में अच्छा नहीं लग रहा था तो जब एक जगह बस रुकी और मैं खाने पीने का सामान लेने गया तभी मौसी भी मेरे साथ नीचे उतरी और एक छोटे से होटल में जाकर चेंज कर ली और ऐसा लग रहा है कि तुझे मेरी बात पर विश्वास नहीं हो रहा है तो मम्मी से पूछ ले मम्मी झूठ थोड़ी बोलेगी,,,,।(इतना सुनते ही मोहिनी अपनी मां की तरफ देखने लगी और उसकी मां भी ना कुछ बोले हां मैं सर हिला दी और संजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

फिर उसके बाद में तुरंत मौसी का ब्लाउज उतार कर ब्रा को बिना उतरे खींचकर ऊपर कर दिया और मौसी की चूची इतनी बड़ी-बड़ी है कि पूछ मत मैं तो उसे दबा दबा कर पागल हुआ जा रहा था मैं ऊपर चूची दबा रहा हूं और मौसी नीचे मेरा लंड दबा रही है,,,

और मम्मी,,,,

मम्मी तो इन सब से बेखबर सो रही थी,,, कुछ देर तक हम तुम्हें इसी तरह से मजा लेते रहे तो मौसी तुरंत नीचे बैठ गई और मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दी मैं तो एकदम हैरान रह गया,,,, मौसी की हरकत देखकर मुझे मम्मी और मौसी में बिल्कुल भी फर्क नजर नहीं आ रहा था,,,, मैं तो अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था मैं पागल हुआ जा रहा था और फिर अपने हाथ से मौसी की बहन पकड़ कर उन्हें खड़ा किया और दीवार से सटाकर उनकी गांड को अपनी तरफ करके मैं पीछे से उनकी चूत में लंड डाल दिया और उन्हें चोदना शुरू कर दिया,,, सच कहूं मोहिनी तो मुझे बहुत मजा आया एक तरफ इतनी तेज बारिश हो रही थी बादलों की गड़गड़ाहट तूफान मचा हुआ था और खंडहर के अंदर दूसरा ही तूफान मचा हुआ था इस तरह की तूफानी बारिश में मुझे चोदने में इतना मजा आ रहा था कि पूछो मत,,,,

और मौसी,,,,

मौसी तो पागल हुए जा रही थी,,, मौसी ने ही मुझे बताई कि आज तक उसने इतना मोटा और लंबा लंड अपनी चूत में नहीं ली है,,,, और फिर मैं जमीन पर लेट गया और मौसी खुद मेरे ऊपर जाकर चढ़ गई है अपनी गांड पटकना शुरू करती है और इतने में मम्मी की आंख खुल गई,,,।

बाप रे फिर क्या हुआ,,,,?

फिर क्या मैं और मम्मी तो पहले से चुदाई का सुख भोग रहे थे हम दोनों के बीच कोई पर्दा नहीं था लेकिन मौसी को क्या मालूम था कि हम दोनों की बीच क्या चल रहा है मम्मी को देखकर मौसी के भी होश उड़ गए मौसी क्या करती मौसी की चूत में मेरा लंज पूरा घुसा हुआ था मौसी पूरी तरह से पल में जा रही थी एक तरफ मजा लूट रही थी और दूसरी तरफ मम्मी को देखकर उनके होश उड़ गए थे,,, पहले तो मम्मी अपनी बड़ी बहन को मेरे लंड पर देखकर एकदम हैरान हो गई क्योंकि उन्हें भी यकीन नहीं हो रहा था कि उनकी बड़ी बहन ऐसा कर सकती है,,,, वह एकदम हैरानी से हम दोनों की तरफ देख रही थी मौसी किसी भी तरह से मम्मी को मना लेना चाहती थी,,,, और फिर मौसी एकदम सहज होते हुए मम्मी की आंखों के सामने ही अपनी गांड को जोर-जोर से मेरे लंड पर पटकते हुए बोली,,,।

आहहह आहहहह बहुत मजा आ रहा है आराधना जिंदगी का सुख भोगना ही तो थोड़ा बेशर्म बन जा तेरा बेटा तुझे मस्त कर देगा,,,,

(मम्मी को तो जैसे खुला दौर मिल गया था मम्मी यही चाहती भी थी पहले तो मम्मी इंकार करती रही लेकिन हम दोनों को देखकर उनकी भी चुत पानी फेंक रही थी इसलिए जल्द ही मान गई और जानती है मोहिनी झड़ने के बाद जैसे ही मौसी मेरे लंड के ऊपर से उतरी,,, मौसी खुद मम्मी को पकड़ कर मेरे लंड पर बैठने लगी और मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़ कर मम्मी की चूत में डालना शुरू कर दी,,, और मम्मी भी ऐसा नाटक करने लगी ऐसा जोर-जोर से चिल्लाने लगी मानो कि जैसे पहली बार उनकी चूत में मेरा लड जा रहा हूं और सब कुछ खुला खुला हो गया,,, मेरे और मम्मी और मौसी के बीच किसी भी प्रकार का पर्दा नहीं बचा था,,,,।

और फिर हम लोगों की किस्मत अच्छी थी कि मामी ने रहने के लिए हम लोगों को एक ही कमरा दी थी हम तीनों एक ही कमरे में जितने दिन भी रहे रोज रात को हम तीनों नंगे होकर चुदाई का मजा लुटते थे,,,,।

(संजू की बातों को सुनकर आ रहा था ना और मोहिनी दोनों पानी पानी हो चुकी थी मोहिनी की पैंटी पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और वह हैरान होते हुए बोली)

बाप रे अगर एग्जाम ना होता तो मैं भी तुम तीनों के साथ मजा लूटती भाई तेरी बातें सुनकर ही मेरी पैंटी गीली हो चुकी है,,,,,,

आजकल तेरी चुत कुछ ज्यादा ही पानी छोड़ रही है जरा संभाल कर रखना और काफी देर हो चुकी है खाना भी बनाना है समझी,,,

क्या मम्मी तुम दोनों तो रोज गांव में सुहागरात मना रहे हो मुझे कह रही हो कि मेरी चूत कुछ ज्यादा ही पानी फेंक रही है तुम दोनों मजा लूट रहे थे तुम दोनों को क्या मालूम कि मैं यहां कैसे करवट बदल बदल कर दिन गुजार रही हूं,,,

अरे आप तो संजू आ गया है ना तो यह रोना बंद कर जल्दी से खाना बनाने की तैयारी करने खाना बना देती हूं,,,

ठीक है मम्मी,,,(इतना कहते हुए वह रसोई घर में प्रवेश करने लगी कि तभी रुक कर अपनी मां की तरफ नजर घुमा कर बोली,,,)

मम्मी में कह रही थी कि हम तीनों एक ही बिस्तर पर सोए तो कितना मजा आएगा,,,

हां मैं भी यही सोच रही थी लेकिन आज नहीं आज मैं थक चुकी हूं तुम दोनों आज अपने कमरे में सोओ कल से एक हीं बिस्तर पर तीनों सोएंगे,,,।

(इतना सुनते ही मोहिनी खुश हो गई और मुस्कुराते हुए रसोई घर में चली गई)
 
संजू और मोहिनी को इस समय पूरी तरह से अवकाश मिल चुका था,,,, वैसे तो मां बेटी और बेटे में किसी भी प्रकार की शर्म लिहाज और पर्दा नहीं रह गया था लेकिन फिर भी आज मोहिनी अपने कमरे में अपने भाई के साथ पूरी तरह से मस्ती के सागर में डूब जाना चाहती थी वैसे भी आराधना पूरी तरह से थक चुकी थी बस का सफर और फिर बाथरूम में संजू की मेहनत से वह पसीने से तरबतर हो चुकी थी इसलिए खाना खाने के बाद वह अपने कमरे में जाकर सो गई थी,,,,।

संजू और उसकी माँ एक hi बिस्तर में

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मोहिनी और संजू एक ही कमरे में सोते थे वैसे तो मोहिनी का प्रस्ताव था कि आप तीनों को एक ही बिस्तर पर सोना चाहिए था और यह प्रस्ताव उसकी मां को मंजूर भी था लेकिन आज की रात वह अकेले सोना चाहती थी क्योंकि वह किसी भी प्रकार से अब बिस्तर पर अपने बेटे का सहयोग नहीं कर सकती थी क्योंकि वह काफी थक चुकी थी इसलिए वह अपने बेटे और बेटी को पूरी तरह से मजे लेने की छूट दे चुकी थी,,, खाना खाने के बाद संजू को कुछ देर तक बाहर टहलने की आदत थी इसलिए वह खाना खाते ही घर से बाहर पहनने के लिए निकल चुका था और अपने कमरे में मोहिनी अपने भाई का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही थी वह जानती थी एक-दो दिन में उसकी मां और उसका भाई आने वाले हैं इसलिए वह क्रीम लगाकर अपनी चूत के रेशमी बालों को साफ करके एकदम चिकनी कर ली थी क्योंकि वह अपने भाई की मेहमान नवाजी में बिल्कुल भी कसर छोड़ना नहीं चाहती थी,,,,,,,।

संजू अपनी माँ क साथ

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तकरीबन 15 20 मिनट बाद संजू टहलकर घर वापस आ गया मोहिनी जानती थी कि उसका भाई थोड़ी देर में वापस आ जाएगा इसलिए वह दरवाजे की कड़ी अंदर से बंद नहीं की थी खुला छोड़ रखी थी केवल दरवाजे के दोनों पट को बंद करके रखी थी,,,, संजू भी आज तकरीबन सात आठ दिन बाद अपनी बहन की चूत चोदने वाला था इसलिए वह भी कुछ ज्यादा ही उत्सुक था अपने घर पर पहुंचते ही हुआ है धीरे से दरवाजे को खोल दरवाजा अंदर से खुला था इसलिए बिना किसी रुकावट की खुल गया और घर में प्रवेश करते ही वह दरवाजे को बंद करके कड़ी लगा दिया रात के तकरीबन 10:00 बज रहे थे और धीरे-धीरे सड़क पर वाहनों का आना-जाना कम होने लगा था पहले तो संजू अपनी मां के कमरे तक गया तो देखा कि उसकी मां के कमरे का दरवाजा बंद था वह अपनी मां को परेशान नहीं करना चाहता था वैसे तो सबसे पहले वह अपनी मां को चोदने के ही फिराक में था लेकिन अंदर से दरवाजा बंद होने की वजह से,,,, वह मन मसोस कर रह गया था यह जानते हुए भी की उसकी मां का मन इस समय चुदवाने का बिल्कुल भी नहीं है,,,। वह अपने कमरे की तरफ पैर आगे बढ़ा दिया,,,, संजू को ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे आज इसकी सुहागरात है क्योंकि बंद कमरे के अंदर उसकी बहन एक दुल्हन की तरह उसकी बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही थी अंदर ट्यूब लाइट जल रही थी जिसकी रोशनी दरवाजे से बाहर की तरफ आ रही थी संजू धीरे से दरवाजा खोला तो अंदर का नजारा देखकर दंग रह गया ट्यूबलाइट की दूधिया रोशनी में उसकी बहन मोहिनी पूरी तरह से नंगी बिस्तर पर लेटी हुई थी वह दरवाजा खुलते ही उसकी निगाह दरवाजे पर चली गई थी और अपने भाई की तरफ देखकर वह मुस्कुरा रही थी,,,, अपनी बहन को संपूर्ण लग्न अवस्था में देखकर संजू के होठों पर मादक मुस्कान तैरने लगी और वह मुस्कुराता हुआ अपनी बहन से बोला,,,।

माँ बेटे दोनों मजा लेते हुए

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अरे वाह मेरी रानी तुमसे पूरी तैयारी में हो,,,,(इतना कहते हुए संजू कमरे में प्रवेश की और धीरे से दरवाजा बंद करके उसकी कड़ी लगा दिया,,, वैसे तो घर का माहौल जिस तरह का था उसे देखते हुए संजू को दरवाजा बंद करने की कोई जरूरत नहीं थी अगर वह दरवाजा खुला रखना तो भी कोई दिक्कत नहीं थी लेकिन फिर भी जिस तरह का काम दोनों करने जा रहे थे वह बंद कमरे में कुछ ज्यादा ही आनंद देता है इसलिए वह दरवाजे को बंद कर दिया था और कड़ी लगा दिया था,,,, अपने भाई की बात सुनकर मोहिनी मुस्कुराते हुए जवाब देते हुए बोली,,,)

घोड़ी बनाकर चुदाई करता हुआ

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क्यों ना भाई तू तो गांव में जाकर खूब मजे उडाया और अब तो मौसी भी तेरे हाथ लग गई है और मेरा क्या और जब से तू गया है तब से मेरी चूत में आग लगी हुई है और इसे बुझाने वाला कोई नहीं है,,,,

अरे ऐसा है तो किसी को पकड़ कर ले आई घर में और डलवा लेती अपनी चूत में,,,

अगर ऐसा करती ना तो मुझे तेरी जरूरत नहीं पड़ती भाई,,, लेकिन मैं जानती हूं कि तेरे जैसा मजा मुझे कोई नहीं दे सकता,,,,

संजू और आराधना कुछ इस तरह से

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यह बात तो तूने सही कही मौसी भी यही कह रही थी,,,,(अपनी बहन के करीब घुटनों के बल बैठता हुआ बोला,,, इस कमरे में मोहिनी और संजू दोनों चटाई पर बिस्तर बिछाकर सोते थे क्योंकि इसमें पलंग नहीं थी और संजू को अपनी बहन की चटाई पर लेने में बहुत मजा आता था,,,,)

क्या कह रही थी भाई,,,(मोहिनी एकदम उत्सुकता दिखाते हुए बोली तो संजू उसकी एक नंगी चूची को अपनी हथेली में भरकर दबाते हुए बोला)

यही कि तेरे जैसा लंड मैं आज तक नहीं देखी बहुत दम है तेरे लंड में,,,,

फिर तू क्या बोला भाई,,,,

संजू और आराधना

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मैं बोला मौसी तेरी चुत,,,(मोहिनी की चूत पर हथेली रखते हुए) बहुत गर्म है मेरे लंड का लावा बहुत जल्दी पिघला देगी,,,,, तब तुझे पता है मौसी क्या बोली,,,( हल्के हल्के अपनी बहन की चूत को मसलते हुए)

क्या बोली,,,(संजू की हरकत की वजह से गर्म होती हुई मोहिनी एकदम मदहोशी भरे स्वर में बोली)

मौसी बोली की जब तक तेरा अक्षलावा निकलेगा तब तक तू मेरी मलाई को दो बार निकल चुका होगा,,,,

सही कही मौसी ने भाई,,,, तेरे लंड में,,(पेंट के ऊपर से अपने भाई के लंड को मसलते हुए) बहुत दम है,,,,.

(और इतना कहने के साथ ही वह अपने भाई के पेंट के बटन को खोलने लगी,,,, अपनी बहन की जल्दबाजी देखकर संजू की सांस ऊपर नीचे होने लगी,,, वह उत्तेजना के मारे अपनी बहन की चूत को अपनी हथेली में पूरी तरह से दबोच लिया जिससे मोहिनी के मुंह से भी गरम आह निकलने लगी,,,,)

सससहहहहह आहहहहह मोहिनी मेरी रानी तेरी चुत तो बहुत पानी छोड़ रही है,,,

तेरे लंड की जुदाई का गम इससे सहा नहीं जा रहा है मेरे राजा,,, इसलिए आंसू बहा रही है,,,।(इतना कहते हुए मोहिनी अपने भाई के पेट का बटन खोल कर दोनों हाथों से पेंट पड़कर नीचे घुटनों तक सरका दी,,,, लेकिन अंडरवियर अभी भी उसके लंड का कवच बना हुआ था जो की पूरी तरह से तंबू की शक्ल ले चुका था अपने भाई के अंडरवियर में बने तंबू को देखकर मोहिनी के मुंह में पानी आ गया उसे रहने जा रहा था और वह अपना दोनों हाथ अपने भाई के अंडर बियर पर रखकर उसे अपने हाथों की उंगलियों में फसाई और एक झटके से नीचे खींच दी और उसकी आंखों के सामने उसके भाई का मोटा तगड़ा और लंबा लंड हवा में लहराने लगा संजू जानता था कि उसकी बहन क्या करना चाहती है इसलिए कुछ बोल नहीं रहा था बस अपनी बहन की चूत को अपनी हथेली से मसल रहा था,,,। जिससे उसकी बहन पूरी तरह से चुदवासी हुए जा रही थी संजू को इस बात का एहसास हो रहा था कि उसकी बहन की चूत से ढेर सारा पानी निकल रहा था जिससे उसकी हथेली भीग रही थी और अपनी बहन की इस पानी के रीसाव से संजू पूरी तरह से उत्तेजित हुए जा रहा था,,,, मोहिनी से रहने की और अपने भाई के लहराते हुए लंड को हाथ आगे बढ़कर पकड़ ली और उसे मुठीयाना शुरू कर दी,,, बहुत दिनों बाद मोहिनी अपने भाई के लंड को अपनी हाथ में पड़ रही थी उसकी गर्माहट पाकर उसकी चूत उत्तेजना के मारे फूलने पिचकने लगी,,,,सहहहहह आहहहहहह ,,,,

मोहिनी अपने भाई क साथ

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भाई आज बहुत दिन बाद तेरे लंड को अपने हाथ में लेकर मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,,

तो जल्दी से इसे अपने मुंह में ले ले मेरा लंड तड़प रहा है तेरे मुंह में जाने के लिए,,,(संजू उसी तरह से अपनी बहन की चूत को मसलते हुआ बोला,,,, और अपने भाई की बात मानते हुए मोहिनी बिल्कुल भी देर किए बिना अपने हाथ की कोहनी का सहारा लेकर थोड़ा सा अपने चेहरे को ऊपर की तरफ उठाई और अपने लाल-लाल होठों को खोलकर अपने भाई के लंड के सुपाडे को अपने होठों के बीच भर ली,,,, अद्भुत अविस्मरणीय अतुलनीय एहसास से वह पूरी तरह से मदहोश होने लगी,,, हालांकि जब से उसका भाई गांव गया था तब से एक बार अपनी मौसी की लड़की के साथ शारीरिक सुख प्राप्त कर रही थी लेकिन उंगली और बैगन से कब तक जवानी से भरी हुई लड़की की प्यास बुझ पाती क्योंकि जो सुख मर्द का लंड दे पता है वह सब्जियों से कहां मिलने वाला था,,, और देखते ही देखते मोहिनी मदहोशी में अपनी आंखों को बंद किए हुए अपने भाई के लंड को गले तक उतार ली और उसे चूसना शुरू कर दी,,,,,।

अपने भाई क लुंड से खेलती हुयी

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ऊममममम ,,,,आहहहहह ,,,ऊमममममममम ओहहहह मेरी रानी,,,,(संजू एकदम मदहोश होता हुआ अपनी आंखों को बंद कर दिया और अपने दोनों हाथ को अपने बहन के सर पर रखकर अपनी कमर को होले होले से हिलाना शुरू कर दिया संजू को बड़ा मजा आ रहा था आनंद के सागर में हो पूरी तरह से डुबकी लगा रहा था बहुत दिनों बाद वह अपने लंड को मोहिनी के मुंह में महसूस कर रहा था उसके जीभ का लसलसा पन और मुंह के अंदर की गर्माहट पूरी तरह से संजू को मदहोश कर रही थी और उसके लंड में जान फूंक रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे उसकी बहन अपने थूक और लार से उसके लंड की मालिश कर रही हो,,,,।

मोहिनी को ऐसा महसूस हो रहा था कि जैसे उसके भाई का लंड गांव जाने के बाद कुछ ज्यादा ही मोटा हो गया था उसका मुंह पूरी तरह से फैलता चला जा रहा था और उसके लाल-लाल होठ उसके लंड के ईर्द गिर्द छल्ले का रूप धारण कर लिए था,,, उत्तेजना के मारे मोहिनी अपने लाल-लाल होठों को अपने भाई के लंड पर कस लेती थी,,, जिसकी वजह से संजु का मजा दुगुना होता जा रहा था,,,, उसे बहुत मजा आ रहा था वह पागल हुआ जा रहा था लेकिन संजू से अपनी बहन की बहती हुई चूत देखी नहीं जा रही थी,,, इसलिए वह अपनी बहन के मुंह में से अपने लंड को बाहर निकालें बिना,,,, अपनी स्थिति को बदलने लगा अपने कमर का झुकाव वह अपनी बहन की तरफ आगे बढ़ाने लगा और अपने भाई की हरकत को समझते देर नहीं लगी मोहिनी तुरंत अपने भाई के द्वारा दिए गए दबाव की स्थिति में उसी तरफ धीरे-धीरे पीठ के बल लेट गई और फिर संजू अपने घुटनों को अपनी बहन के सर के ईर्द गिर्द रखकर अपनी बहन की दोनों टांगों के बीच झुकना शुरू कर दिया अपने भाई की हरकत देखकर मोहिनी के बदन में चिंगारियां फूटने लगी क्योंकि वह जानती थी कि उसका भाई क्या करने वाला है और देखते ही देखते वह अपनी प्यासी चूत पर अपने भाई के प्यासे होठों को महसूस करते ही पूरी तरह से मदहोश हो गई और वह अपनी उत्तेजना को अपने काबू में नहीं कर पाई जिसकी वजह से उसकी कमर अपने आप ही ऊपर की तरफ उठ गई जिसे उसका भाई अपने दोनों हाथों से दबोच कर,,,, उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया संजू को इस बात का एहसास हो रहा था कि उसकी बहन आजकल में ही,,, अपनी चूत के बाल को क्रीम लगाकर साफ की थी तभी तो एकदम मक्खन जैसी दिख रही थी रानी जा रहा था उसकी बहन की चूत उत्तेजना के मारे कचोरी की तरह फुल चुकी थी और संजू अपनी बहन की चूत के गुलाबी दरार के इर्द-गिर्द उससे हुए भाग को जीभ से चाटना शुरू कर दिया था मानों की जैसे वह आइसक्रीम की मलाई चाट रहा हो,,,।

मोहिनी अपने भाई को खुस करती हुयी

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कमरा पूरी तरह से उत्तेजना से गर्म हो चुका था,,, संजू और उसकी बहन दोनों 69 पोजीशन में थे दोनों एक दूसरे के अंगों को मजा दे रहे थे एक तरफ मोहिनी का कोमल अंग था तो दूसरी तरफ संजू का कठोर अंग था जिसे मोहिनी अपने मुंह में लेकर पूरी तरह से मस्त कर रही थी और अपनी चूत के लिए तैयार कर रही थी,,, संजू को अपनी बहन की चूत चाटने में इतना मजा आ रहा था कि पूछो मत वह जितना हो सकता था उतनी अपनी जीभ को अपनी बहन की चूत की गहराई तक पहुंच कर उसकी मलाई को चाट रहा था,,,, मोहिनी की गर्म सिसकारी से पूरा कमरा गूंज रहा था,,,, संजू से रहा नहीं जा रहा था और अपनी जीभ के साथ-साथ अपनी एक उंगली को भी धीरे से अपनी बहन की चूत में प्रवेश कर दिया और उसे अंदर बाहर करते हुए उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया संजू की हरकत से मोहिनी पूरी तरह से मदहोश होने लगी मदमस्त जवानी से भरी हुई मोहिनी अंगड़ाई लेने लगी उसके बदन की कसम से बढ़ने लगी उसके बदन में अकड़न सी छाने लगी,,, और फिर एक बार उसकी कमर हवे में लहराई और उसकी चूत से गर्म लावा का फवारा फूट पड़ा वह झाड़ रही थी उसकी चूत से नमकीन रस की बौछार हो रही थी जिसे संजू अपना होता लगाकर चाट रहा था निगल रहा था,,,, संजू अपनी बहन को झाड़ कर उसका मदन रस पूरी तरह से पी जाना चाहता था मानो कि जैसे कोई अमृत की बूंद हो रही जिसे पीकर वाहन पूरी तरह से ताकतवर हो जाएगा,,,, धीरे-धीरे मोहिनी शांत होने लगी लेकिन फिर भी संजू उसकी चूत पर अपनी जीभ जोर-जोर से रगड़ रहा था उसे फिर उत्तेजित कर रहा था,,, लेकिन दूसरी तरफ मोहिनी अपने भाई के लंज को अपने मुंह से बाहर निकली थी और उसे हाथ में लेकर उसके साथ खेल रही थी वह जानती थी कि कुछ ही देर में उसके भाई का मोटा तगड़ा लंड उसकी गुलाबी चूत में प्रवेश करने वाला है इसीलिए वह जोर-जोर से अपने भाई के लंड को मुठीया रही थी,,,,।

संजू अपनी बहन को मदहोश करता हुआ

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दोनों की हरकत लगातार जारी था और ऐसे में संजू एक बार फिर से अपनी बहन को उत्तेजित कर दिया वह मदहोश होने लगी कसमस आने लगी लेकिन इस बार उसे अपनी चूत में अपने भाई का मोटा तगड़ा लंड चाहिए था और इसीलिए वह बार-बार अपनी चूत को हवा में उठा दे रही थी यह एक तरह से इशारा था संजू के लिए की अब वह अपना मुंह हटाकर अपने लंड को अंदर घुसादे और उसकी जमकर चुदाई करें और संजू काफी समझदार था अपनी बहन के इशारे को जल्दी ही समझ गया इसलिए धीरे से अपनी बहन के ऊपर से उठा और अपनी बहन की दोनों टांगों के बीच जगह बना लिया,,,,।

मोहिनी की छूट चाट ता हुआ

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अपनी बहन को चटाई पर चोदने का मजा ही कुछ और था उसे अपनी बहन को चटाई पर चोदने में बहुत मजा आता था,,,, मोहिनी का दिल जोरो से धड़क रहा था,,, क्योंकि कुछ ही देर में उसके भाई का मोटा तगड़ा लंड उसकी चूत की गहराई नापने वाला था उसकी सांसों की गति के साथ-साथ उसकी संतरे जैसी चूचियां के ऊपर नीचे हो रही थी जिसे देखकर संजू के मुंह में पानी आ रहा था और संजू देखते ही देखते अपनी बहन की दोनों टांगों को थोड़ा सा खोलकर,,, अपने लंड के मोटे सुपाड़े को अपनी बहन की गुलाबी छेद पर रख दिया और उसकी कमर पकड़ कर अपनी कमर को आगे की तरफ से लेना शुरू कर दिया अपनी बहन की चूत की चिकनाहट प्रकार उसका मोटा तगड़ा लंड धीरे-धीरे उसकी चूत के अंदर प्रवेश करना शुरू कर दिया,,, जैसे-जैसे संजू का लंड मोहिनी की चूत में जा रहा था मोहिनी की आंखों के सामने,,, मूली गाजर केला बैगन सब कुछ नजर आ रहा था और उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि जो मजा मर्द के लंड से मिलता है वह मुली गाजर बैंगन में नहीं मिलता और देखते ही देखते संजू अपने समुचे लंड को अपनी बहन की चूत की गहराई में उतार दिया उसे चोदना शुरू कर दिया काफी दिनों बाद मोहिनी उसके नीचे थी इसलिए संजू पड़े जो उसके साथ अपनी बहन को छोड़ रहा था पहले ही धक्के साथ वह अपनी गति को बढ़ा दिया था,,,, हर धक्के के साथ मोहिनी चटाई पर आगे की तरफ फिसल जा रही थी और संजू बार-बार उसके कंधों को पकड़कर उसे अपनी तरफ दबा दे रहा था,,,, संजू जबरदस्त तरीके से अपनी बहन की चुदाई कर रहा था,,, और मोहिनी को अद्भुत आनंद प्राप्त हो रहा था उसकी छाती पर छोटे-छोटे संतरों को झूलता हुआ देख कर संजू से रहा नहीं गया और वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़कर अपनी बहन की चूची को पड़कर अपनी कमर को लहराना शुरू कर दिया मानो के जैसे घुड़सवारी कर रहा हो,,,,

मोहिनी को मस्त करता हुआ

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संजू के हर धक्के पर मोहिनी की चीख निकल रही थी वह मदहोश हो रही थी मस्त हो रही थी ऐसा आनंद उसे पहले कभी नहीं मिला था ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे आज पहली बार वह अपने भाई से चुदवा रही हो,,, उसकी गर्म सिसकारियो से पूरा कमरा गुजर रहा था लेकिन अब उसकी सिसकारी की आवाज उसकी मां के कमरे तक पहुंच भी जाए तो भी उसे बिल्कुल भी इस बात का डर नहीं था इसीलिए तो वह एकदम खुलकर अपने भाई से चुदाई का आनंद लूट रही थी,,,,।

चुदवाती हुयी मोहिनी

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तकरीबन 35 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद संजू और मोहिनी एक साथ झड़ गए और यह सिलसिला सुबह तक चलता रहा आखिरकार बहुत दिनों बाद जो संजु से मिला था पूरी कसर तो निकालना ही था,,,, दूसरी तरफ मनीषा बड़ी बेसब्री से संजू का इंतजार कर रही थी वह इतने दिन कैसे गुजारी इस बात को वही जानती थी,,,, इसलिए जल्दी से जल्दी संजु से मिलकर अपने मन में उठ रहे सवालों का जवाब प्राप्त कर लेना चाहती थी,,,।
 
, संजू बहुत खुश था,,, सब कुछ उसके मन के मुताबिक ही चल रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे दुनिया भर की खुशियां अपने आप ही उसकी झोली में आकर गिर गई थी,,,, इस तरह की जीवन के बारे में कभी उसने कल्पना भी नहीं किया था,,, और इसीलिए तो वह अपने जीवन से बहुत खुश था अपने आप पर गर्व भी होता था क्योंकि इस उम्र में जहां लड़के सिर्फ लड़कियों को सेटिंग करने में और उनके पीछे समय बर्बाद करके थक हार जाते हैं वही अब तक संजू ना जाने कितनी चुत को अपने लंड से तृप्त कर चुका था,,, जिसमें लगभग लगभग सारी घरेलू चुते ही थी,,, गांव से शहर आने पर भी पहले दिन ही वह बाथरूम में अपनी मां की जमकर चुदाई किया था और उसके बाद रात भर अपनी बहन की कमसिन जवानी से जी भर कर खेला था,,, वह इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि उसकी दसों उंगलिया घी में थी और वह जब चाहे तब अपने घर में अपनी बहन और अपनी मां की चुदाई करके अपनी गर्मी को शांत कर सकता था,,, और यही काम वह अपनी मौसी के घर पर भी कर सकता था वह अपनी मौसी और अपनी मौसी की लड़की दोनों की चुदाई कर चुका था लेकिन दोनों इस बात से पूरी तरह से अनजान थे कि वह दोनों एक ही लड़के से अपनी प्यास बुझा रहे थे,,,,।

मनीषा काफी व्याकुल और उत्सुक नजर आ रही थी संजू से मिलने के लिए संजू के बगैर इतने दिन वह कैसे गुजारी है यह तो वही जानती थी,,, रात को बिस्तर पर करवट बदलते बदलते कब सुबह हो जाती थी पता ही नहीं चलता था वह तो थोड़ी बहुत उम्मीद का चिराग मोहिनी के होने से जला हुआ था वरना उसकी जवानी बुझे दीपक की तरह हो चुकी थी,,, रात को मोहिनी के साथ वह अपनी बेलगाम जवान को अपने काबू में करने की बहुत कोशिश करती थी लेकिन बार-बार उसकी जवानी और भी ज्यादा बेलगाम होती जा रही थी वैसे तो मनीषा किसी भी लड़के के साथ शारीरिक संबंध बनाकर अपनी जवानी की प्यास बुझ सकती थी लेकिन संजू ने जिस तरह का तृप्ति का एहसास उसे करवाया था पहली बार में ही वह संजू की दीवानी हो चुकी थी और संजू के सीवा वह किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकती थी,,,, इसीलिए तो वह शाम के समय संजू से मिलने के लिए उत्सुक थी और उसे बड़ी बेसब्री से संजू का इंतजार भी था वह तैयार होकर कॉलेज के लिए निकल चुकी थी घर से संजू भी निकल चुका था लेकिन कॉलेज के लिए नहीं बल्कि अपनी मौसी के घर के लिए,,,।

अपनी मौसी के घर पर पहुंच कर दरवाजे पर देर तक देकर संजू दरवाजे पर ही खड़ा रहा थोड़ी देर बाद किचन में से बाहर निकाल कर उसकी मौसी,,, मन में ही बडबडाते हुए,,,।

पता नहीं ईस समय कौन आ गया,,(इतना कहते हुए वह साड़ी के पल्लू को अपनी कमर में खोसने लगी और दरवाजे के पास पहुंच गई वही बाहर खड़ा संजू घर में मौसी अकेली होगी इस बात को सोचकर ही पेंट के ऊपर से ही अपने लंड को दबा रहा था,,,,,, संजू की मौसी को नहीं मालूम था कि दरवाजे पर कौन है क्योंकि कुछ देर पहले ही मनीषा कॉलेज के लिए निकल गई थी और उसके पति ऑफिस के लिए निकल चुके थे वह घर पर इस समय एकदम अकेली थी और खाना बना रही थी लेकिन जैसे ही दरवाजा खोली और सामने संजू को खड़ा देखते ही वह एकदम से खुश हो गई और चहकते हुए बोली,,,..

संजू तू इस समय,,,,

क्यों क्या हुआ नहीं आ सकता क्या,,,(दीवार पर अपने बाजू का सहारा लेकर मुस्कुराते हुए बोला तो उसकी मौसी बोली)

तू तो जब चाहे तब आ सकता है लेकिन इस समय आएगा मुझे मालूम नहीं था तेरा तो कॉलेज है ना,,,

संजू और उसकी मौसी

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कॉलेज में तो किताबों का ज्ञान मिलता है लेकिन,, जो ज्ञान तुम्हारी दोनों टांगों के बीच मिलता है उसकी बात ही कुछ और है और उसी ज्ञान को आगे बढ़ाने के लिए आया हूं,,,,।

(संजू की इस तरह की बातें सुनकर मनीषा की मां अंदर ही अंदर शर्म से पानी पानी होने लगी और उत्साहित भी होने लगी जो कि उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था शर्म के मारे उसका गोरा मुखड़ा टमाटर की तरह लाल हो चुका था संजू की बातों को सुनकर वह मुस्कुराते हुए बोली)

क्या बात है आज इरादा कुछ और है,,,,

इरादा तो एकदम साफ है मौसी तुम्हारी दोनों टांगों के बीच की नदी में डुबकी लगाना है,,,

तेरी बातें सुनकर तो मेरी नदी में बाढ़ आने लगा है,,,

तो चलो तुम्हारी नदी पर बांध बनाते हैं,,, घर पर कोई है तो नहीं,,,,(संजू जानता था कि इस समय घर पर कोई नहीं है लेकिन फिर भी वह तसल्ली कर लेना चाहता था कि वाकई के घर पर कोई है तो नहीं क्योंकि वह आज अपनी मौसी के साथ खुलकर मजा लेना चाहता था संजू की बात सुनकर मनीषा की मां मुस्कुराते हुए बोली,,,)

कोई नहीं है मेरे राजा,,,,

ओहहह मेरी रानी आज तो मजा आ जाएगा,,,,(ऐसा कहते हुए शांति दरवाजे पर खड़े-खड़े ही अपनी मौसी की चूची को ब्लाउज के ऊपर से पकड़ कर दबा दिया और संजू की हरकत पर मनीषा की मां की नजर तुरंत बाहर इधर-उधर घूमने लगी कि कहीं कोई देख तो नहीं रहा है जब पूरी तसल्ली कर ली तो वह धीरे से बोली)

बाहर खड़े-खड़े मजा लेगा की अंदर भी आएगा,,,,

हाय मेरी रानी यही अदा तो मुझे पागल बना देती है,,,,।(ऐसा कहते हुए संजू कमरे में प्रवेश कर गया और मनीषा की मां इधर-उधर देखकर दरवाजा बंद कर दी वह पूरी तरह से निश्चित थी इस समय घर पर कोई आने वाला नहीं था और वह दोनों के पास बहुत ज्यादा समय था,,,,)

वैसे तुम कर क्या रही थी,,,

ठीक समय पर आया है तो अपने लिए चाय बना रही थी तेरे लिए भी बना देती हुं,,,(इतना कहते हुए मनीषा की मां कीचन की तरफ जाने लगी तो संजू उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लिया और उसे अपने सीने से लगा लिया,,, और उसकी आंखों में देखते हुए बोला,,,)

चाय अगर तुम्हारे दूध की बने तो मजा आ जाए,,,।

(संजू कितनी बात सुनते ही वह है एकदम से शर्मा गई और इस समय संजू पूरी तरह से उत्तेजित अवस्था में था उसका लंड अपनी औकात में आ चुका था और जिस तरह से उसने अपनी मौसी का हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचकर उसे अपनी बाहों में भर लिया था उसके चलते पेट में तना हुआ उसका तंबू सीधे-सीधे उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी चूत पर दस्तक दे रहा था जिसे वह साफ तौर पर महसूस कर पा रही थी और एकदम उत्तेजित में जा रही थी संजू की बात सुनकर वह शरमाते हुए बोली,,,)

अब इसमें दूध नहीं निकलता बस दबाने वाले को मजा आता है,,,,,।

दूध भले नहीं निकलता लेकिन इसी मुंह में लेकर चूस‌ तो सकता हु ना,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी मौसी की चूची दबाते हुए उसके ब्लाउज का बटन खोलने लगा तो वह उसे रोकते हुए बोली,,,,)

अरे यह क्या कर रहा है चाय तो बना लेने दे,,,,।

बना लेना चाहे लेकिन पहले अपने दूध को तो बाहर निकालो,,,(और इतना कहने के साथ ही थोड़ा जबरदस्ती करते हुए संजू अपने हाथों से अपनी मौसी के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया और उसकी लाल रंग की ब्रा में खेत उसकी बड़े-बड़े खरबूजे जैसी चूचियां एकदम से उछल पड़ी जिसे संजू खुद बिना ब्रा खोलें उसकी ब्रा के कप में से उसकी दोनों चूचियों को भारी-बड़ी से अपने हाथों से पकड़ कर बाहर पपीते की तरह लटका दिया जिसे देखकर संजू की उत्तेजना बढ़ते जा रही थी और संजू की हरकत को तिरछी नजरों से देखते हुए उसकी मौसी बोली,,,)

आखिर कर ही लिया ना अपनी मनमानी,,,

तुमसे मनमानी नहीं करूंगा तो किसके साथ करूंगा,,,,

अरे घर पर तेरी मां तो थी उसके साथ कर लिया होता,,,,

मम्मी को ऑफिस चली गई वरना,,,, लेकिन सच कहूं तो मम्मी से ज्यादा तुम्हारे साथ में कुछ ज्यादा ही मजा आता है,,,,,

संजू अपनी मौसी की चुकी से खेलता हुआ

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(संजू जानबूझकर अपनी मौसी की बढाई करते हुए बोल रहा था,,, और उसकी बात को सुनकर मनीषा की मां मां ही मन प्रसन्न हो रही थी वह अपने आप को संजू की बाहों की कैद से छुड़ाते हुए बोली,,,)

अरे अब जाने दे उबाल आ रहा होगा,,,(ऐसा कहते हुए वह संजू की बाहों में कसमसा रही थी,,, और उसकी बात को सुनकर संजू बोला)

उबाल तो मेरे नीचे आ रहा है मौसी जल्द ही इसका कुछ करो,,,,

मैं क्या कर सकती हूं जो भी करना है तुझे करना है,,,,(और इतना कहते हुए वह संजू की बाहों की कैद से आजाद होते हुए बोली,,, और इतना कहते हुए का किचन की तरफ जाने लगी लेकिन इस दौरान संजू उसकी साड़ी का पल्लू पकड़ लिया था और जैसे ही वह आगे बड़ी वह एकदम से रुक गई जैसे फिल्मों में हीरोइन की साड़ी को हीरो पकड़ लेता है इस तरह का नजारा कुछ इस समय इस कमरे में दिखाई दे रहा था संजू की मौसी इस तरह से रुकी रह गई और संजू की तरफ देखे बिना ही बोली,,,)

अब यह क्या है संजू जाने दे मुझे,,,,

संजू और उसकी मौसी

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नहीं ऐसे नहीं जाने दूंगा,,,(और ऐसा कहते हुए वह साड़ी को खींचने लगा और संजू की मौसी अपनी जगह पर गोल-गोल घूमने लगी क्योंकि उसकी मौसी जानती थी कि वह क्या करना चाह रहा है इसलिए वह संजू को खुश करने के लिए उसकी बात मानते हुए अपनी जगह पर गोल-गोल घूम कर संजू को उसकी साड़ी उतारने में मदद करने लगी और देखते ही देखते संजू ने अपनी मौसी के बदन से साड़ी को उतार दिया और इस समय वह केवल पेटिकोट और अध खुली ब्रा में थी जिसमें से उसकी पपाया जैसी चूचियां लटक रही थी यह नजारा बेहद मारता से भरा हुआ था और संजु मुस्कुराता हुआ अपनी मौसी की साड़ी को वहीं जमीन पर फेंक दिया,,,, और उसकी मौसी भी मुस्कुराते हुए इस अवस्था में ही किचन में प्रवेश कर गई भाभी पूरी तरह से निश्चित थी क्योंकि वह जानती थी कि कुछ घंटे तक उसके घर में कोई आने वाला नहीं था और इस बीच वह जिंदगी का सुख भोग लेना चाहती थी और वैसे संजू की हरकत से उसे भी बहुत ही मजा आ रहा था उसकी चूत पूरी तरह से पानी फेंक रही थी,,,,, थोड़ी देर में चाय बनाकर तैयार हो चुकी थी और मनीषा की मां एक ट्रे में तो कब चाय और नाश्ता लेकर किचन से बाहर आ गई ड्राइंग रूम में संजू बैठा हुआ था और अपनी मौसी की तरफ देख कर मुस्कुरा रहा था क्योंकि इस अवस्था में वह बेहद खूबसूरत लग रही थी और अपने मन की बात जाहिर करते हुए संजू बोला,,,)

कसम से तुम इस समय स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा लग रही हो इस अवस्था में तो सच में अगर कोई तुम्हारे दर्शन कर ले तो उसका लंड अपने आप ही पानी फेंक दे,,,

चल रहने दे अपनी मनमानी करवाने का तेरा तरीका मैं अच्छी तरह से जानती हूं,,,,(और इतना कहते हुए वह चाय वाली ट्रे को टेबल पर रखकर ठीक उसके बगल में ना बैठकर उसके सामने वाली सोफा पर बैठ गई और पेटीकोट में होने के बावजूद भी अपनी दोनों टांगों को थोड़ा सा खोल दी,,, पेटिकोट नीचे तक होने के बावजूद भी उसकी यह अदा बेहद कामुकता भारी लग रही है,,, ऐसा लग रहा था कि जैसे आज वह सब कुछ करने को तैयार है वह अपना पूरा रंडीपन दिखाना चाहती थी,,,,, संजू को अपनी मौसी की यह अदा बेहद कामुकता भरी लगी इसीलिए वह टेबल पर पड़ी चाय के कप को उठाते हुए एक हाथ से अपने लंड को दबाने लगा और कप उठाकर उसकी चुस्की लेने लगा,,,, और तिरछी नजर से अपनी मौसी की तरफ देखने लगी उसकी मौसी भी कब अपने हाथ में लेकर अपने लाल-लाल होठों से लगाकर पीते हुए संजू की तरफ देख रही थी उसकी हरकत को देख रही थी और साथ में अपने दोनों पैरों के घुटनो को हल्के हल्के हिला रही थी और एक तरह से संजू को अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी वैसे तो संजू को अपनी तरफ आकर्षित करना उसके लिए कोई जरूरी नहीं था क्योंकि संजू खुद उसकी जवानी का दीवाना था उसे चोदने के लिए ही उसके घर पर आया था,,, लेकिन उसकी मौसी को इस तरह की हरकत करने में आनंद की अनुभूति हो रही थी,,,,।

साधना संजू की पेण्ट उतरती हुयी

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चाय एकदम कडक है मौसी बिल्कुल तुम्हारी तरह,,,(चाय की चुस्की लेते हुए संजू बोला तो जवाब में उसकी मौसी मुस्कुराते हुए बोली,,)

चाय से भी ज्यादा कड़क मेरी चूत है,,,,(संजू की मौसी इस तरह से मुस्कुराते हुए जवाब दे उसका जवाब सुनकर संजू का लंड टनटना गया,,,,)

बात तो सही है मौसी चाय से ज्यादा मजा तुम्हारी चूत का रस पीने में आता है,,,, और मुझे पूरा यकीन है कि समय तुम्हारी चूत पानी छोड़ रही होगी,,,(संजू चाय का आखिरी घूंट भरता हुआ बोला और फिर कप को टेबल पर रख दिया,,,,)

तेरी हरकत ही ऐसी है कि किसी की भी चुत पानी छोड़ दे,,,

साधना और संजू

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बात तो सही है मौसी की किसी की भी छूट पानी छोड़ दे लेकिन तुम ज्यादा खुशनसीब हो कि तुम्हारी चूत का पानी निकाल कर संतुष्ट करने वाला मर्द भी तुम्हारे साथ है वरना इस उम्र में औरतें जवान लड़कों को तरस जाती है,,,, लेकिन सच कहूं तो इस उम्र में भी तुम्हारी जवानी एकदम उफान मार रही है,,, इसीलिए तो कॉलेज जाने के बहाने में तुम्हारे घर आ गया हूं,,,,

गांव में इतनी चुदाई किया तेरा पेट नहीं भरा क्या,,,,!(साधना भी आखरी घूंट भरते हुए बोली और फिर कप को टेबल पर रख दी,,,)

तुम्हारी दोनों टांगों के बीच जो छेद है ना मौसी उससे दुनिया का किसी भी मर्द की प्यास मिटने वाली नहीं है,,,,,।

संजू अपनी मौसी क साथ

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तू पागल है मेरे छेद के पीछे,,,

मैं क्या मौसी तुम किसी को भी दिखा दोगी तो वह पागल हो जाएगा,,,,

तेरी बातें सुनकर ही मैं मस्त हुए जा रही हूं,,,,(इतना कहते हुए साधना धीरे-धीरे अपनी पेटीकोट को बैठे हुए ऊपर की तरफ उठाने लगी यह देखकर संजू बोला,,,,)

तुम्हारी यही अदा तो मुझे पागल बना देती है दिखा दो अपनी चूत देखु तो सही पानी छोड़ रही है कि नहीं,,,

संजू और उसकी मौसी

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देखना चाहता है,,!(मुस्कुराते हुए साधना बोली (

तो क्या इतनी दूर चलकर किस लिए आया हूं,,,,

तू एकदम पागल हो गया है,,,,

तुम्हारी चूत के पीछे,,,,

(कुछ देर तक कमरे में खामोशी छाई रही,,,, लेकिन इस खामोशी के बीच साधना अपनी जवानी का जलवा दिखाने के लिए पूरी तरह से तैयार थी वह अपनी अदाओं से कमरे में जवानी का तूफान उठा रही थी साथ में अपनी पेटीकोट को भी देखते-देखते वह अपनी पेटीकोट को अपनी जांघों तक सरका दी थी,,, और फिर सोफा पर बैठे हुए हैं वह अपनी पेटीकोट को एकदम से ऊपर उठाते हुए अपनी पीले रंग की चड्डी को दिखाने लगी जो कि वाकई में आगे से पूरी तरह से भीग चुकी थी यह देखकर संजू से बिल्कुल भी रहा नहीं गया,,, और वह एकदम उत्तेजित और उत्साहित होते हुए अपनी जगह से उठते हुए बोला,,,)

संजू अपनी मौसी की पीछे से लेता हुआ

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बाप रे तुम्हारी चूत में तो बाढ़ आ गई है इसे जल्द ही रोकना होगा,,,(और इतना कहते हुए आगे बड़ा और बिना कुछ बोले अपनी मौसी को अपनी गोद में उठा दिया उसकी मौसी काफी भारी भरकम थी लेकिन संजू के द्वारा इस तरह से आराम से उठा ले जाने पर उसकी मौसी संजू की मर्दाना ताकत पर पूरी तरह से मस्त हो गई फिदा हो गई,,,,)

कहां ले जा रहा है मुझे,,,?(साधना उत्साहित और उत्तेजित कर में बोली लेकिन उसके सवाल का जवाब उसके चेहरे पर ही साफ दिखाई दे रहा था वह अच्छी तरह से जानती थी कि संजू उसे कहां ले जा रहा है और क्या करने के लिए ले जा रहा है लेकिन फिर भी वह जानबूझकर संजू से इस तरह का सवाल कर रही थी लेकिन संजू भी अपनी मौसी के सवाल का जवाब देते हुए बोला,,,)

तुझे तेरे कमरे में चोदने के लिए ले जा रहा हूं मेरी रानी,,, आज तेरी चुत का भोसड़ा बना दूंगा,,,,

(और इतना कहते हो अपनी मौसी के कमरे में पहुंच गया और दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था जिसे रात से मार कर वह पूरा खोल दिया और ले जाकर के नरम नारे गद्दे पर उठाकर पटक दिया नरम नरम गद्दे पर गिरते ही साधना का भारी भरकम बदन छल करने लगा साथ ही उसकी दोनों चुचीया भी फुटबॉल की तरह उछलने लगी,,,, ब्रा में से चूचियां पहले से ही निकली हुई थी जिसे संजू अपने हाथों में लेकर दबाते हुए उसे पीना शुरू कर दिया संजू पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था ऐसा नहीं था कि वह अपनी मौसी के साथ पहली बार चुदाई करने जा रहा हो संजू ना जाने कितनी बार अपनी मौसी को चोद चुका था लेकिन जितनी बार भी छोड़ता था ऐसा लगता था कि जैसे पहली बार चुदाई हो रही है,,,,।

संजू से चुदवाती हुयी साधना

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अब हालात बिल्कुल भी काबू में नहीं थे दोनों कमरे में एकांत थे और कुछ घंटे तक इसी तरह से अकेले ही रहने वाले थे इसलिए वह दोनों इस मौके का पूरी तरह से फायदा उठा लेना चाहते थे संजू पागलों की तरह अपनी मौसी की चूची दबा रहा था और उसकी मौसी गरम आहे भर रही थी उसके मुंह से गरमा गरम शिकारी की आवाज निकल रही थी,,,,)

सससहहहहह आहहहहह संजू मेरे राजा तूने तो मुझे पागल कर दिया रे,,,,आहहहहह जोर-जोर से दबाकर पी ,,,ऊमममममममम,,,,,सहहहहहहह आहहहहहह ,,,,

(अपनी मौसी की गरम से शिसकारी की आवाज सुनकर संजू की हालत खराब हुए जा रही थी संजू की पागल हुआ जा रहा था मैं जोर-जोर से अपनी मौसी की चूची दबा रहा था उसे पूरा टमाटर की तरह लाल कर दिया था बारी-बारी से मुंह में लेकर उसका रस पीने की कोशिश कर रहा था साधना की चूत में आग लगी हुई थी वह पागल हुए जा रही थी उसे रहा नहीं जा रहा था और वह खुद संजू के कपड़े उतारने की कोशिश कर रही थी जिसे संजू खुद अपने कपड़े उतार कर टी-शर्ट को बिस्तर पर फेंक दिया और साधना अपना दोनों हाथ आगे बढ़कर संजू के बेल्ट को खोलकर उसके पेट की चेन खोल दी और फिर उसने अपना हाथ डालकर उसके मोटे तगड़े लंड को बाहर निकाल कर चूसना शुरू कर दी,,,,।

गरमा गरम सिसकारी से पूरा कमरा गूंज रहा था लेकिन घर में कोई भी तीसरा मौजूद नहीं था इसलिए दोनों पूरी तरह से आनंद लेने में डूबे हुए थे दोनों जवानी के सागर में डुबकी लगा रहे थे संजू पागल हुआ जा रहा था वह अपनी हल्की हल्की कमर को आगे हिलाते हुए अपनी मौसी के मुंह में ही अपने लंड को डाल रहा था और उसकी मौसी भी अपने लाल-लाल होठों का छल्ला बनाकर संजू के लंड को ऐसा अपने मुंह में ले रही थी मानो कि अपनी चूत में उसके लंड को ले रही हो,,,,

अपनी मौसी के मुंह में लंड डालने में संजु को बहुत मजा आ रहा था,,,, वह अपनी मौसी के बालों के जुड़े को खोलकर उसके रेशमी बालों को एकदम आजाद कर दिया था खुले बालों में उसकी मौसी और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी उसकी हरकत एकदम रंडी की तरह थी वह पागलों की तरह जितना हो सकता था उतना अपने मुंह में लेकर चूस रही थी कभी बाहर निकाल कर अपने होठों पर उसके सुपाड़े को रगड़ती तो कभी अपने गालों पर थपथपी मारती,,,, संजू भी अपनी मौसी की हरकत से पूरी तरह से पागल हुआ जा रहा था अरे-रेकर वह भी अपने हाथ में अपने लंड को पकड़ कर बाहर निकलता और उसके माथे पर सुपाडे से थपथपाता,,, ऐसा करने में दोनों को अद्भुत आनंद प्राप्त हो रहा था कुछ देर तक यह खेल ऐसे ही चला रहा दोनों के पास समय पर्याप्त था,,,।

संजू कुछ देर बाद अपने लंड को अपने मौसी के मुंह में से बाहर निकले और फिर कंधों को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे धक्का देकर बिस्तर पर पीठ के बल लेटा दिया और फिर अपने हाथों से उसकी पीले रंग की चड्डी को पकड़ कर खींचने लगा भारी भरकम गांड के नीचे दबी हुई चड्डी संजू के प्रयास से निकल नहीं पा रही थी जिसके चलते साधना अपनी भारी भरकम् गांड को हल्के से ऊपर की तरफ उठाकर संजू को उसकी चड्डी निकलवाने में मदद करने लगी,,, संजू भी मौका देखकर झट से अपनी मौसी की चड्डी को निकाल कर नीचे फर्श पर फेंक दिया,,,, साधना पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी केवल उसके बदन पर उसका पेटिकोट ही था जो की कमर तक उठा हुआ था और संजू उसे भी उसके बदन पर रहने नहीं देना चाहता था इसलिए पेटिकोट की डोरी पड़कर झटके से खींच लिया और पेटीकोट के ढीले होते ही उसे भी बाहर निकाल कर फेंक दिया,,,,।

बिस्तर पर साधना पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी और नंगी होने के बाद तो एकदम क़यामत लग रही थी भले ही साधना आराधना से उम्र में बड़ी थी और थोड़ा शरीर में भी भारी थी लेकिन जवानी बरकरार थी,, और ऐसी भारी धड़कन जवानी से भरी हुई औरत के लिए संजू जैसा मर्द ही होता है जो उसकी जवानी की लगाम को अपने हाथों से कस कर रखता है,,,, और इसीलिए तो साधना भी संजू से ही काबू में आती थी अपनी मौसी को बिस्तर पर पूरी तरह से नंगी देखकर संजू की आंखों में वासना की चमक साफ दिखाई देने लगी,,,,,,, संजू भी अपने कपड़े उतार कर नंगा होने में बिल्कुल भी देरी नहीं क्या बिस्तर पर अब दोनों पूरी तरह से नग्न अवस्था में थे संजू का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में जाकर छत की तरफ मुंह उठाकर खड़ा था,,,,।

तैयार हो मेरी रानी,,,

हां मेरे राजा,,,,,

(अपनी मौसी का जवाब सुनकर संजू मुस्कुराता हुआ अपनी मौसी की दोनों टांगों के बीच पहुंच गया,,, लेकिन उसकी चूत में लंड डालता है इससे पहले अपनी मौसी की कचोरी जैसी फूली हुई चूत देखकर उसके मुंह में पानी आ गया और वह अपने आप को अपनी मौसी की चूत चाटने से रोक नहीं पाया और अपने ही पल अपने प्यासे होठों को वह अपनी मौसी की चूत पर रखकर चाटना शुरू कर दिया ,,वह पागलों की तरह अपनी मौसी की चूत को चाट रहा था उसकी मौसी भी पागल हुए जा रही थी उसे लग रहा था कि ,,, संजू अपने लंड को उसकी चूत में डालकर उसकी चुदाई करेगा लेकिन संजू उसकी आग को और भड़का रहा था,,,।

कुछ देर तक संजू इसी तरह से अपनी मौसी को मस्त करता रहा और इसके बाद धीरे से उठा और फिर अपनी मौसी की कमर पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींचा और ऐसे में साधना की आधी गांड उसकी जांघों पर चढ़ गई,,, साधना की सांस बड़ी तेजी से चल रही थी क्योंकि उसे मालूम था कि कुछ ही देर में संजू का मोटा तगड़ा लंड उसकी चूत में घुसने वाला है और फिर संजू भी बिल्कुल भी देर ना करते हुए अपने गरम सुपाडे को अपनी मौसी की गरम चूत पर रखकर हल्का सा धक्का मारा चूत की चिकनाहट पाकर संजू का मोटा तगड़ा सुपाड़ा फुच्च की आवाज करता हुआ अंदर प्रवेश कर गया और फिर किया था संजू अपनी मौसी की कमर पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया वह अपनी मौसी को चोदना शुरू कर दिया आज पहली बार ऐसा हो रहा था कि संजू अपनी मौसी को उसी के बिस्तर पर चोद रहा था वरना वह अपनी मौसी को उसके घर में सीढीओ पर और छत पर ही उसकी चुदाई कर पाया था,,,, लेकिन आज मनीषा और अपने मौसी की गहराई में उसे खुला दूर मिल गया था वह अपनी मौसी की जमकर चुदाई करना शुरू कर दिया था हर धक्के के साथ मौसी की हालत खराब हो जा रही थी लेकिन अद्भुत सुख महसूस कर रही थी वह पूरी तरह से मस्त हो गई थी,,,, संजू कभी उसकी कमर पकड़ लेता तो कभी उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को थाम कर अपनी कमर हिला था वह हर तरीके से अपनी मौसी को प्रसन्न कर रहा था और खुद भी मजा ले रहा था,,,,।

संजू अपनी मौसी की जैम क चुदाई करता हुआ

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तकरीबन 40 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद दोनों का पानी निकल गया,,, लेकिन यह सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक की मनीषा के आने का समय ना हो गया तब तक दोनों लक्षनग्न अवस्था में ही एक दूसरे के अंगों से खेलते रहे और तकरीबन तीन बार चुदाई का मजा लिए,,,, और जैसे ही मनीषा को आने में आधा घंटा रह गया संजू कपड़े पहनकर घर से निकल गया ,,,,। क्योंकि शाम को उसे कोचिंग भी जाना था,,,,।
 
संजू अपनी मौसी को तृप्त करके सही समय पर उसके घर से निकल चुका था क्योंकि उसे शाम को कोचिंग के लिए भी जाना था और बहुत दिनों बाद मनीषा से भी मिलना था वह जानता था कि उसके बिना मनीषा का दिल लग नहीं रहा होगा,,,, इसलिए शाम होने तक संजू घर नहीं गया यहां वहां टहलता ही रहा,,, और यही हाल मनीषा का भी था मनीषा जल्द से जल्द संजू से मिलना चाहती थी आखिरकार इतने दिनों तक वह भी तो प्यासी ही थी भले ही मोहिनी के साथ मिलकर अपनी जिस की आग बुझाने की कोशिश करती थी लेकिन उसकी आग और ज्यादा भड़क जाती थी,,,।

मनीषा की जवानी

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आखिरकार संजू सही समय पर कोचिंग क्लास पर पहुंच गया अभी कोचिंग के विद्यार्थी आए नहीं थे,, कोचिंग की एक चाबी संजू के पास भी रहती थी इसलिए वह ताला खोलकर कोचिंग क्लास में प्रवेश करके और बेंच पर बैठकर मनीषा का इंतजार करने लगा थोड़ी ही देर में मनीषा भी आ गई और कोचिंग का दरवाजा खुला देखकर पहले तो उसे थोड़ा आश्चर्य हुआ लेकिन अंदर नजर करते ही जब उसकी आंखों के सामने बेंच पर संजू बैठा हुआ दिखाई दिया तो खुशी के मारे झूम उठी और तुरंत जाकर उससे लिपट गई ऐसा लग रहा था कि जैसे बरसों बाद दोनों मिल रहे हो,,,, संजू भी पागलों की तरह उसे अपनी बाहों में कसकर अपने दोनों हथेलियां को तुरंत उसके नितंबों के गोलाकार अंग पर ले गया और तुरंत उसे अपनी हथेली में दबोच लिया,,, संजू की इस हरकत पर उसके मुख से हल्की सी आह निकल गई और यही तो चाहती थी मनीषा,,,, संजू की बाहों में मनीषा को सुकून मिलने लगा और देखते ही देखते दोनों के होंठ आपस में भिड़ गए दोनों एक दूसरे के होठों का रसपान करने लगे संजू पागलों की तरह उसकी गांड को जोर-जोर से दबाते हुए एक हाथ उसकी चूची पर रखकर कमीज के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया लेकिन संजू अपनी हरकत को और ज्यादा आगे बढ़ा पाता इससे पहले ही कोचिंग के बाहर कदमों की आहट पाते ही दोनों तुरंत एक दूसरे से अलग हो गए,,, धीरे-धीरे करके विद्यार्थी आना शुरू हो गए थे और संजू को देखकर विद्यार्थी भी काफी खुश नजर आ रहे थे वह लोग भी संजू को नमस्ते करके बेंच पर बैठना शुरू कर दिए इस समय मनीषा का मन पढ़ने में नहीं बल्कि संजू पर लगा हुआ था वह संजू के साथ एकांत चाहती थी लेकिन ऐसा मुमकिन नहीं हो पा रहा था,,,,,,, काफी दिनों बाद संजू की मनीषा से मिल रहा था इसलिए वह भी तिरछी नजरों से मनीषा की तरफ देख ले रहा था,,,,।

संजू का मोटा लुंड और मनीषा

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दोनों स्टूडेंट को पढ़ा भी रहे थे और नैनमट्टका का भी चला रहे थे,,,, मनीषा पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी आखिर ऐसा होना लाजिमी ही था क्योंकि दोनों बहुत दिनों बाद मिले थे दोनों के बीच हजार एक संबंध था दोनों एक दूसरे के बदन की प्यास बुझाते थे और ऐसे हालात में जब दो बदन इतने करीब हो तो उत्तेजना लाजमी है और ऐसे हालात में मनीषा की चूत पानी छोड़ रही थी उसकी पैंटी धीरे-धीरे गीली हो रही थी क्योंकि वह जानती थी कि संजू अगर उसके करीब है तो मौका मिलते ही उसकी चूत में उसका लंड होगा,,,,,।

आखिरकार धीरे-धीरे समय व्यतीत हो गया और कोचिंग में से सारे स्टूडेंट छूट कर अपने घर की तरफ जाने लगे जैसे ही पूरा कोचिंग स्टूडेंट से खाली हुआ मनीषा एक बार फिर से संजू के गले लग गई संजू ने फिर से अपने दोनों हाथों को उसके नितंबों पर रखकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,।

मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है संजू,,, अगर मुझे मालूम होता कि मेरा यह हाल होगा तो मैं भी तुम्हारे साथ गांव चल दी होती,,,,

तब तो बहुत अच्छा होता,,,(कमीज के ऊपर से ही मनीषा की चूची को दबाते हुए) मुझे यु तड़पना ना पड़ता,,,

मेरी याद में तड़प रहे थे,,,

संजू से मजा लेती मनीषा

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पूछो मत मनीषा की तुम्हारे बगैर मेरा क्या हालत हो रहा था,,,(इतना कहते हो मैं संजू मनीषा को अपनी भुजाओं के जोर से उठा लिया और ऐसे हालात में उसकी पेंट में तना हुआ तंबू सीधे जाकर सलवार के ऊपर से ही मनीषा की चूत पर दस्तक देने लगा मनीषा पूरी तरह से काम अग्नि में सुलगने लगी वह पूरी तरह से मदहोश होने लगी उसकी सांसे तुरंत तेज हो गई और वह मदहोशी भरे स्वर में बोली,,,)

तुम्हारा तो बिल्कुल खड़ा हो गया है संजू,,,

यह तो होना ही था मनीषा जब इतनी खूबसूरत लड़की पास में हो तो भला लंड कैसे शांत रह सकता है,,,, जल्दी से सलवार उतारो में आज तुम्हारे पीछे से लूंगा,,,

यहीं पर,,,(मनीषा संजू के कंधों पर अपनी दोनों हथेली रखते हुए बोली,,)

तो क्या इससे अच्छी जगह कहां मिलेगी,,,,

लेकिन जल्दी करना,,,

बिल्कुल भी देर नहीं करूंगा,,, बस निकला और डाला,,,(ऐसा कहते हुए संजू मनीषा को नीचे उतरा और फिर मनीषा भी जल्दबाजी दिखाने लगी,,, उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसकी चूत बहुत पानी छोड़ रही थी,,, उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी उतेजना के मारे उसकी चूत फुदक रही थी,,,, उसे रहने जा रहा था और वहां तुरंत अपनी सलवार की डोरी पर हाथ रखकर उसे खोलने के लिए खींचते ही वाली थी कि तभी दरवाजे पर किसी के होने की आहट सुनाई थी और वह तुरंत अपनी कमीज को नीचे गिरा कर अपने आप को दुरुस्त कर ली,,, तभी दरवाजे को हल्के से खोलकर एक स्टूडेंट जो की एक लड़की ही थी वह बोली,,,।

मेमक्या आप मेरी हेल्प कर सकती है,,,,?

(दरवाजे पर उसे देखते ही मनीषा को इतना गुस्सा आ रहा था कि पूछो मत लेकिन फिर भी वह किसी तरह से अपने गुस्से पर काबू करके थोड़ा सा चिड़चिड़ा पन में बोली)

बोलो क्या हुआ,,,?

मैं मुझे मैथ्स का एक क्वेश्चन समझ में नहीं आ रहा है अगर बता देती तो मेरे प्रेक्टिस पूरी हो जाती ,,,

कल बता दूंगी,,,(मनीषा किसी भी तरह से उसे लड़की को वहां से हटाना चाहती थी वह तो भूल से दरवाजे की कड़ी बंद करना भूल गई थी वरना अगर कड़ी बंद होती तो अपना काम पूरा करने के बाद ही वह दरवाजा खोलती,,)

प्लीज मैम बता दीजिए ना,,,,।

बता दो ना वरना उसका होमवर्क भी रह जाएगा,,,

संजू और मनीषा

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(गुस्सा तो उसे बहुत आ रहा था लेकिन कर भी क्या सकती थी आखिरकार वह उसकी स्टूडेंट थी और उसका फर्ज बनता था उसके सवाल का जवाब ढूंढना इसलिए वह उसे इशारे में अंदर आने के लिए बोली और बेंच पर बैठ गई और फिर उसे मैथ्स का क्वेश्चन हल करके दी,,,, जैसे ही प्रश्न हल हो गया वह मुस्कुराते हुए बोली)

थैंक यू मैम,,(और इतना कहकर वह अपनी नोटबुक लेकर बेग में डालने लगी,,, और फिर दोनों की तरफ देखते हुए बोली,,,) आप दोनों अभी तक यहां क्या कर रहे हैं आपको भी तो घर जाना चाहिए,,,,

(उसकी बात सुनते ही मनीषा के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या बोले लेकिन फिर संजू सारे मामले को संभालते हुए बोला)

अगले सप्ताह तुम लोगों का टेस्ट होने वाला है ना इस सिलसिले में क्वेश्चन का सिलेक्शन हो रहा था,,,

क्या बात कर रहे हैं सर,,,(एकदम खुश होते हुए),,,क्या मुझे क्वेश्चन बताएंगे

पागल हो गई हो क्या तुम्हें बता देंगे तो तुम फर्स्ट नहीं आ जाओगी और वैसे भी पहले से बता देने से तुम्हारी तैयारी अधूरी रह जाएगी इसलिए अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो टेस्ट अपने आप अच्छे से पास कर लोगी,,,

ओके सर,,,(थोड़ा सा उदास होते हुए वह बोली और फिर कमरे से बाहर निकल गई उसके जाते ही संजू तुरंत गया दरवाजा बंद करके कड़ी लगने लगा तो उसे रोकते हुए मनीषा बोली,,,)

रहने दो संजू मेरा मूड खराब हो गया है,,,,।

(संजू जानता था कि उसे स्टूडेंट के आ जाने से सारा मजा किरकिरा हो गया था इसलिए वह कुछ बोल नहीं पाया उसका क्या था वह तो कुछ देर पहले ही उसकी मां की जमकर चुदाई करके आ रहा था और घर जाएगा तो फिर घर पर भी उसे उसकी खूबसूरत नहीं हो उसकी जवानी से भरी हुई मां चोदने को मिल जाएगी मनीषा को ही अपनी उंगली से काम चलाना होगा लेकिन वह इस बारे में मनीषा से बोल नहीं पाया और फिर धीरे से दरवाजा खोल दिया मनीषा अपना बैग उठाकर कोचिंग क्लास से बाहर निकल गई और संजू दरवाजा बंद करके ताला लगा दिया,,,, और फिर दोनों स्कूटी के पास आ गए अभी शाम के 7:00 बज रहे थे,,,, मनीषा का मूड थोड़ा उखड़ा हुआ था और वह संजू से बोली,,,।

चलो मेरे घर चलते हैं कॉफी पीने के बाद ही दिमाग तरो ताजा होगा,,,,,

ठीक है,,,।

(और इतना कहने के साथ ही मनीषा के पीछे संजू बेड के और बैठते ही उसकी पतली कमर पर दोनों हाथ रख दिया,,,, संजू के कमर पर हाथ रखते ही मनीषा के बदन में फिर से उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी वह मदहोश होने लगी,,,, और वह स्कूटी को एक्सीलेटर देकर मुख्य सड़क पर दौड़ाने लगी और संजू से बोली,,,)

आज मेरा बहुत मन कर रहा है तुमसे करवाने का,,, अब करवाने के लिए मेरे कमरे से अच्छी जगह और कोई नहीं है,,,

लेकिन वहां तो मौसी होगी ना और उनके रहते कैसे हो पाएगा,,,

हो जाएगा तुम मेरे पर छोड़ दो,,,,।

(जितनी उत्साहित और उत्सुक मनीषा लग रही थी उससे कहीं ज्यादा उतावला संजू हुआ जा रहा था क्योंकि वह उत्तेजना के मारे मनीषा की कमर को अपने दोनों हाथों से कस के दबा दे रहा था उसका बस चलता तो स्कूटी पर ही मनीषा की चूत में लंड डाल देता,,,, मनीषा भी अपनी युक्ति से बहुत खुश नजर आ रही थी वह जल्द से जल्द संजू के लंड को अपनी चूत में लेकर अपनी प्यास को बुझा लेना चाहती थी,,, और थोड़ी ही देर में दोनों घर पर पहुंच गए अंधेरा हो चुका था,,, स्कूटी को खड़ी करके मनीषा और संजु दोनों स्कूटी पर से उतर गए और मनीषा दरवाजे की बेल बजने लगी बेल की आवाज सुनकर उसकी मां जो की रसोई में खाना बना रही थी वह तुरंत दरवाजे पर आई और दरवाजा खोलने लगी,,, दोपहर की तरह ही संजू के कानों में मनीषा की मां की चूड़ियों की खनकने की आवाज सुनाई देने लगी और दोपहर की याद उसके दिमाग में एकदम ताजा होने लगी,,, और एकदम से उसका लंड खड़ा हो गया,,,, और थोड़ी ही देर में साधना नहीं दरवाजा खोल दी दरवाजे पर एक बार फिर से मनीषा के पीछे संजू को खड़ा देखकर साधना के चेहरे पर मुस्कान तेरने लगी और उसके दिल और दिमाग पर भी दोपहर की याद ताजा हो गई किस तरह से संजू ने दिनभर उसकी जमकर चुदाई किया था और दो-तीन घंटे तक उसे पूरे कमरे में नंगी इधर से उधर घूमा कर जगह पर उसको चोदा था,,, )

अरे बेटा तुम ईस समय,,,,

(साधना अपने शब्दों को बड़े संभाल कर बोल रही थी क्योंकि वह ऐसा तो बोल नहीं सकती थी कि तुम फिर से ,,,,)

वो हां मौसी मनीषा दीदी कॉफी पीने के लिये लेकर आई है इसलिए,,,,।

हां मम्मी जल्दी से दो कप कॉफी बना दो हम दोनों मेरे कमरे में है,,,,

ठीक है मैं अभी कॉफी बना देता हूं,,,,।

(आगे आगे मनीषा चलने लगी और पीछे संजू और संजू नजर बचाकर अपनी मौसी की बड़ी-बड़ी गांड पर हाथ फेरते हुए मुस्कुराने लगा संजू की हरकत पर मनीषा की मां थोड़ा सा झेंप गई लेकिन मनीषा का ध्यान उन दोनों की तरफ बिल्कुल भी नहीं था इसलिए मुस्कुराते हुए किचन में चली गई,,,,।

मनीषा और संजू कमरे में आते ही मनीषा तुरंत उसे अपनी बाहों में भरकर उसके होठों को चूमना शुरू कर दी,,, मनीषा कुछ ज्यादा उत्तेजित थी यह जानते हो कि उसकी मां घर पर ही है लेकिन फिर भी वह पूरी तरह से मदहोश होकर संजू को अपनी बाहों में भरकर उसके होठों को अपने होठों से सटा ली थी संजू कहां पीछे हटने वाला था वह भी तुरंत इस तरह से पागलों की तरह उसकी गांड कोई दोनों हाथों से थाम लिया था वैसे तो संजू की शुरुआत ही इसी तरह से होती थी वह सबसे पहले औरतों की गांड को ही अपने हाथ में ले लेता था और उनसे खेलते हुए उत्तेजित करने के बाद वह आगे बढ़ता था,,,,।

संजू और मनीषा

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दोनों एक दूसरे के होठों का रस चूस रहे थे कमरे का दरवाजा अभी भी खुला हुआ था शायद मनीष इस बात से अवगत थी कि उसकी मां कितनी देर में कॉफी बना कर लेगी इसीलिए वह पूरी तरह से इत्मीनाम से मजे ले रही थी संजू पूरी तरह से उत्तेजित हो चुका था,,, वह तुरंत अपना हाथ मनीषा की सलवार में डालकर पेटी के ऊपर से ही उसकी चूत को टटोलना शुरू कर दिया था जो की पूरी तरह से गीली हो चुकी थी,,, मनीषा की गीली पेटी हथेली में महसूस होते ही संजू से रहा नहीं गया और वह तुरंत अपनी हथेली को पेटी के अंदर डालकर उसकी चिकनी चूत को अपनी हथेली में दबोच लिया मनीषा संजू की हरकत से पूरी तरह से मदहोश हो गई,,, संजू उसकी चूत को जोर-जोर से मसलते हुए बोला,,,।

बाप रे मनीषा तुम्हारी चूत तो पानी छोड़ रही है,,,

क्या करूं बहुत दिनों बाद मिले हो इसके लिए,,,,

अगर मौसी आ गई तो मनीषा,,,(संजू इस तरह से अपनी बीच वाली उंगली को उसकी चूत के अंदर प्रवेश कराते हुए बोला,,,)

सहहहह कुछ नहीं होगा संदु मुझे बहुत मजा आ रहा है,,,

लेकिन मौसी भी किसी भी वक्त काक्षोफी लेकर आ जाएंगी,,,,,

कुछ नहीं तुम इसी तरह से उंगली करते रहो,,,,आहहहह आहहहहह ,,,ऊमममममम,,,

संजू मनीषा की चुदाई कर्त हुआ

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(मनीष मस्त हुए जा रहे कि पागल हुए जा रही थी संजू की हरकत से हुआ एकदम दीवानी हो चुकी थी संजू पागलों की तरह अपनी आधी उंगली को उसकी चूत के अंदर बाहर कर रहा था उसकी चूत उत्तेजना के मारे कचोरी की तरह फुल गई थी संजू को इस बात का भी डर था कि कहीं उसकी मौसी ना आ जाए लेकिन मनीषा पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा था वह पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी,,, शायद उत्तेजना के मारे वह ऐसा कर रही थी,,,, संजू भी इसका पूरा फायदा उठा रहा था,,,, वह उसके लाल-लाल होठों का रस चूसने के साथ-साथ उसके नीचे वाले होठों को भी रौंद रहा था,,,)

कसम से मनीषा बहुत मजा आ रहा है मुझे तो यकीन नहीं हो रहा है कि मैं इतने दिन तुमसे अलग कैसे रह गया क्योंकि तुम्हारे बिना तो एक पल भी काटना मुश्किल हुआ जा रहा है लेकिन अगर मौसी आ गई तो गजब हो जाएगा,,,

कुछ नहीं होगा मेरे राजा,,,,

लेकिन सोचो मनीषा अगर मौसी ने हम दोनों को इस हालत में देख ली तब तब तो वह हम दोनों का मिलना जुलना भी बंद कर देंगी,,,,(संजू इतना बोला ही था कि तभी उसे बर्तन गिरने की आवाज आई और दोनों एकदम से एक दूसरे से अलग हो गए मनीषा जल्दी-जल्दी अपने कपड़ों को दुरुस्त करने लगे और संजू के पेट में तंबू बना हुआ था इसलिए वह अपना तंबू छुपाने के लिए बिस्तर पर बैठ गया,,,, और थोड़ी ही देर में ट्रे में दो कप कॉफी लेकर मनीषा की मां कमरे में दाखिल होने लगी,,,,)

लो तुम दोनों की कोफी हो गई तैयार,,,,।

(मनीषा का गोरा मुखड़ा उत्तेजना से लाल हो चुका था वह अपनी मां से अपना चेहरा छुपाने की कोशिश कर रही थी लेकिन तभी उसकी मां की नजर उसके चेहरे पर पड़ गई तो वह बोली,,,)

अरे क्या हुआ मनीषा,,,(एक हाथ में ट्राली हुए दूसरे हाथ से उसके सर पर हाथ रखते हुए) तेरी तबीयत तो ठीक है ना...

(मनीषा समझ गई थी कि उसकी मां उसके चेहरे को देखकर ही बोल रही है इसलिए वह बात को बदलते हुए बोली)

कुछ नहीं मम्मी थोड़ा सर दर्द कर रहा था और अगले सप्ताह टेस्ट है ना उसकी तैयारी करना है इसके लिए,,,,(ट्रे में से काफी का कप हाथ में लेते हुए बोली और संजू भी हाथ बढ़ाकर कॉफी का कप ले हाथ में ले लिया उसकी मां कुछ देर तक वहीं खड़ी रही,,,,,, इस तरह से उसका खड़ा रहना संजू को नहीं बल्कि मनीषा को अच्छा नहीं लग रहा था वह चाहती थी कि जल्द से जल्द उसकी मां कमरे से बाहर चली जाए,,, लेकिन वह अपने मुंह से बोल भी नहीं सकती थी,,,। इसलिए खामोश रही और जैसे ही कोफी खत्म हुई वह अपना कप वापस ट्रेन में रख दी और संजू के हाथ से भी खाली कप लेकर ट्रे में रख दी और अपनी मां से बोली,,,,)

मम्मी हम दोनों टेस्ट के लिए पेपर तैयार करने जा रहे हैं बिल्कुल भी डिस्टर्ब मत करना और हां दरवाजा बंद कर देना और आधा घंटा तक कुछ भी पूछना नहीं वरना गलती हो जाती है,,,,।

ठीक है तुम दोनों अपना काम करो तब तक मैं खाना बना लेती हुं,,,,(इतना कहकर वह दरवाजे से बाहर निकलने को हुई की एकदम से वह रुक कर बोली,,)

लेकिन दरवाजा तो बंद नहीं होगा क्योंकि इसका लोक खराब हो गया है,,,,(इतना कहकर वह चली गई लेकिन अपनी बातों से मनीषा और संजू दोनों पर बम का धमाका कर गई थी दोनों एक दूसरे को आश्चर्य से देखने लग गए थे मनीष कभी दरवाजे की तरफ देखती तो कभी संजु की तरफ,,, वह काफी गुस्से में नजर आ रही थी और यह देखकर संजु वहां और ज्यादा देर रुके रहना उचित नहीं समझा और धीरे से उठकर कमरे से बाहर निकल गया और बिना अपनी मौसी को बताएं वह अपने घर के लिए निकल गया,,)
 
संजू के साथ संबंध ना बन पाने के कारण मनीषा काफी गुस्से में थी वह कोशिश तो बहुत की थी लेकिन सफल नहीं हो पाई थी कोचिंग क्लास में भी और घर पर भी उसे ऐसा ही लग रहा था कि घर पर वह बेझिझक संजू के साथ अपनी जवानी की प्यास बुझा पाएगी भले ही उसकी मां घर में मौजूद थी तो क्या हुआ वह कमरे का दरवाजा बंद करके टेस्ट का पेपर तैयार करने का बहाना भर कर वह निश्चित रूप से बंद कमरे में संजू के साथ चुदाई का मजा लूट सकती थी लेकिन एन मौके पर ही उसके दरवाजे का लोक खराब हो गया था और इस कारण वह अंदर ही अंदर जल भून जा रही थी,,,, संजू भी किसी सूरत में मनीषा की चुदाई नहीं कर पाएगा इस बात को जानकर वह धीरे से बिस्तर पर से उठकर घर से बाहर निकल गया था दुख उसे भी हुआ था क्योंकि वह भी काफी उत्तेजित था मनीषा को लेकर क्योंकि बहुत दिनों बाद मनीषा के साथ संबंध बनाने का उसे मौका मिला था हालांकि है कोई आखिरी मौका नहीं था लेकिन इस समय दोनों का मन बहुत कर रहा था लेकिन दोनों संबंध बनाने में कामयाब नहीं हो पाए थे,,,,।

घर पहुंचने में संजू को थोड़ी देर हो गई थी लगभग 9:00 बज गए थे इसलिए उसकी मां और उसकी बहन दोनों चिंतित थे संजू को लेकर लेकिन दरवाजे पर दस्तक होते ही दोनों के चेहरे पर राहत भरी मुस्कान नजर आने लगी और मोहिनी जल्दी से उठकर दरवाजे को खोल दी तो सामने उसका भाई ही था मोहिनी कुछ बोलती इससे पहले ही आराधना बोल पड़ी,,,।

आज इतनी देर कहां लगा दीया ,,,

अरे आज वो अगले सप्ताह टेस्ट है ना उसकी तैयारी करने में देर हो गई,,,,(संजू कमरे में प्रवेश करता हुआ बोल और उसकी बात सुनकर उसकी मां बोली)

हम दोनों कब से तेरा इंतजार कर रहे हैं जल्दी से हाथ मुंह धो ले मैं खाना लगा देती हुं,,,,

ठीक है मम्मी,,,(इतना कहने के साथ ही संजू हाथ पैर धोने लगा और आराधना खाना परोसने लगी और तीनों साथ में बैठकर खाना खाने लगे खाना खाते हुए संजू अपने मन में अपने परिवार को देखकर यही सोच रहा था कि उसके और उसके परिवार के बीच कितना खुलापन है कोई झिझक नहीं है कोई डर नहीं है जब चाहे तब वह किसी के साथ भी चुदाई का मजा लूट सकता है उसकी बहन के साथ और मां के साथ और फिर कभी-कभी दोनों के साथ ऐसा अक्सर होता आ रहा था इसलिए संजू अपने आप को बहुत ही भाग्यशाली समझ रहा था लेकिन आज जो कुछ भी मनीषा के घर पर हुआ था उसे देखकर वह अपने मन में यही सोच रहा था कि अगर जैसा उसके घर में सब कुछ खुलापन का वातावरण हो चुका है अगर मनीषा के घर में भी ऐसा हो जाए तो कितना मजा आए वह जब चाहे तब जाकर तभी मनीषा को तो कभी उसकी मां की चुदाई कर सकता है कभी दोनों की चुदाई कर सकता है और अपने मन में यह सोचकर और भी ज्यादा उत्साहित हो गया कि अगर ऐसा हो गया तो दोनों मां बेटी की एक ही बिस्तर पर लेने में बहुत मजा आएगा,,,, एक साथ दोनों मां बेटे की चुदाई करके दोनों की गरमा गरम सिसकारी को सुनने में कितना मजा आएगा जैसा कि वह रोज अपने घर में सुनता आ रहा था लेकिन यह होगा कैसे वह अपने मन में इन्हीं सबकी युक्ति सोच रहा था और यह सोचकर उत्साहित हो रहा था कि अगर किसी तरह से मनीषा मान जाए और मनीषा की आंखों के सामने वह उसकी मां की चुदाई करता हुआ मनीषा के हाथों पकड़ा जाए या फिर उसकी मां को मना कर कुछ ऐसा नाटक प्रस्तुत किया जाए जिसमें वह मनीषा की चुदाई कर रहा और उसकी मां अपनी आंखों से देख ले और फिर ऐसा संभव है कि फिर दोनों एक साथ चुदाई का मजा लूट सके और किसी का डर ना हो लेकिन यह सब होगा कैसे यही सोचकर वह थोड़ा परेशान नजर आ रहा था उसे इस तरह के ख्याल में डूबा हुआ देखकर आराधना बोली,,,,।)

क्या हुआ कहां खोया हुआ है,,,?

नहीं कुछ नहीं अपने मन में ही सवाल का जवाब ढूंढ रहा था,,,

मिला जवाब,,(भोजन का निवाला अपने मुंह में डालते हुए आराधना बोली,,,)

मिल जाएगा मुझे पूरा विश्वास है,,,,

(अभी यह सब बातचीत हो ही रही थी कि,,, बीच में मोहिनी बोल पड़ी,,,)

मम्मी आज से शुरुआत करें तीनों एक साथ सोने की बहुत मजा आएगा,,,,,(भोजन का निवाला मुंह में डालकर मोहिनी दोनों की तरफ देखते हुए बोली,,,)

मैं तो तैयार हूं वैसे भी मुझे तुम दोनों की एक साथ लेने में बहुत मजा आता है,,,,(संजू हाथ आगे बढ़कर अपनी मां की चूची को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाते हुए बोला,,, संजू की हरकत से आराधना थोड़ा चौक सी गई क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि संजू इस तरह की हरकत कर देगा लेकिन उसकी हरकत का अहसास होते ही आराधना के चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी,,,, लेकिन संजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) मम्मी की बड़ी-बड़ी गांड और तेरी छोटी छोटी गांड दोनों को एक साथ चोदने में बहुत मजा आता है,,,

मुझे भी भैया मां की चूत चाटने में बहुत मजा आता है मुझे तो पहले पता ही नहीं था की चूत चाटने में इतना मजा आता होगा तुम जब मेरी चूत चाटते थे मजा आता ही था लेकिन मुझे इस बात का एहसास नहीं होता था कि तुम्हें उतना ही मजा आ रहा होगा जितना कि मुझे मिल रहा था लेकिन जब मैं पहली बार मां की चूत को अपने होठों से लगे तो एकदम पागल हो गई और मुझे यकीन हो गया कि तुम्हें भी बहुत मजा आता होगा तभी तो तुम पागल हो जाते हो मेरी दोनों टांगों के बीच आने के लिए,,,,,

(भाई बहन एकदम खुले शब्दों में अपना अनुभव व्यक्त कर रहे थे यह देखकर आराधना मन ही मन मुस्कुरा रही थी और उसे मुस्कुराता हुआ देखकर संजू बोला)

मोहिनी को तो तुम्हारी चूत चाटने में मजा आता है लेकिन क्या तुम्हें भी मोहिनी की चूत चाटने में मजा आता है,,,,

क्यों नहीं,,,? आखिरकार चूत चाटने में दोनों को मजा आता है तो मुझे भी बहुत आता है खासकर के मोहिनी की चुची दबाते हुए मुंह में भरकर पीने में तो मुझे और भी ज्यादा मजा आता है,,,, सच कहूं तो मुझे मोहिनी की चूची बहुत अच्छी लगती है,,, छोटी-छोटी कश्मीरी सेव की तरह,,,,ऊमममममम,,,(ऐसा कहते हुए मन में ही सोचकर एकदम उत्तेजित हो गई और अपना एक हाथ बढ़ाकर मोहिनी की चूची को कुर्ती के ऊपर से ही दबा दी कहां पीछे हटने वाली थी वह भी तुरंत अपना हाथ आगे बढ़कर अपनी मां की चूची को ब्लाउज के ऊपर से दबाते हुए बोली)

मुझे तो मम्मी की चुची से बहुत मजा आता है,,,,

और मेरे लंड से,,,,

ओ भाई तेरा लंड तो गधा का लंड है,,, इतना मजा देता है कि पूछ मत क्यों मम्मी सच कह रही हु ना,,,,

हां तु सच कह रही है तेरे भाई का लंड इंसान का नहीं बल्कि गधा का हीं है,,,, और मोहिनी तेरे पापा का तो संजू से पतला और एकदम आधा ही था तू ही सोच भला ऐसे लंड से औरत को मजा मिल पाता भला,,,।

तुम सच कह रही हो मम्मी अब तो ऐसा लगता है कि अच्छा ही हुआ की पापा घर छोड़ कर चले गए हम लोगों को इतना मजा तो मिल रहा है और वैसे भी वह इस घर के लिए अब और तुम्हारे लिए किसी लायक नहीं थे,,,,

(मोहिनी के मुंह से इस तरह की बात सुनकर आराधना कुछ देर तक खामोश रही और फिर बोली)

सच कह रही है तू तेरे पापा इस घर के और मेरे लायक बिल्कुल भी नहीं थे अगर वह इस घर में होते तो शायद हम लोग जो इतना सुख भोग रहे हैं और आराम से जिंदगी जी रहे हैं शायद ऐसा मुमकिन न हो पाता,,,

हां मम्मी यह सच है जो कुछ भी होता है अच्छे के लिए होता है,,,, हम तीनों की किस्मत में इस तरह का सुख लिखा हुआ था इसलिए ऐसा हुआ,,,,

चलो ठीक है जल्दी से खाना खत्म करो बर्तन भी साफ करना है,,,,।

लेकिन आज से साथ में सोएंगे ना मम्मी,,,(मोहिनी बोली)

मन तो मेरा भी बहुत है लेकिन क्या करूं,,,, ऐसा हो नहीं पाएगा,,,(आराधना संजू और मोहिनी की तरफ देखते हुए बोली उसकी बात सुनकर संजू और मोहिनी दोनों आश्चर्य से अपनी मां की तरफ देखने लगे और मोहिनी बोली,,,)

लेकिन क्यों,,,?

क्योंकि आज से मेरा पीरियड शुरू हो गया है और कुछ दिन तक संभव नहीं है कि हम तीनों एक साथ मजा ले सकें,,,,।

(पीरियड वाली बात सुनकर संजू और मोहिनी दोनों का चेहरा उतर गया क्योंकि मोहिनी के साथ-साथ संजू का भी बहुत मन था दोनों की एक साथ चुदाई करने का लेकिन अपनी मां की बात सुनकर उसका अरमान पर पानी फिर गया था दोनों के उदास चेहरे देखकर आराधना दोनों को शांतव्ना देते हुए बोली,,,)

अरे तो क्या हो गया संजू तुम्हारे पास मोहिनी तो है ना जी भर कर उसकी चुदाई करो और मोहिनी तुम अपने भाई के साथ मजा लो ऐसा जीवन कहां मिलने वाला है,,,,

क्या मम्मी सुबह से सोच रही थी कि आज तुम्हारे साथ हम सब मिलकर मजा लेंगे और तुम,,,(मोहिनी थोड़ा उदास होते हुए बोली,,)

अरे यह सब मेरे बस में थोड़ी है यह तो सब प्राकृतिक है क्या मेरा मन नहीं कर रहा है मेरा भी मन बहुत कर रहा है लेकिन क्या करें,,,,(इतना कहते हुए आराधना खाना खाकर अपनी जगह से उठी और फिर सफाई में लग गई आज भी मोहिनी और संजू अपनी कमरे में मजा लूटते रहे,,,,)

दूसरे दिन संजू और मनीषा दोनों कॉलेज के रेस्टोरेंट में एक कोने में बैठे हुए थे और आपस में बात कर रहे थे मनीषा का मूड अभी भी खराब था वह कल की बात को लेकर थोड़ा गुस्सा भी थी और उसे शांत करने की कोशिश करते हुए संजू बोला,,,)

क्या मनीषा तुम भी बेवजह परेशान हो रही हो तुम तो ऐसा बर्ताव कर रही हो कि जैसे मौका मिलने वाला ही नहीं है,,,

तुम समझ नहीं रहे हो संजू कल मेरा बहुत मन था एक तो कई दिनों बाद तुमसे मिलना हुआ और उसमें भी,,,,, (थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए शांत हो गई उसकी बातें सुनकर संजू धीरे से अपना हाथ आगे बढ़कर टेबल पर उसकी हथेली को अपने हथेली में लेते हुए बोला)

तुम परेशान मत हो तुम्हारी ऐसी चुदाई करूंगा कि तुम लंगड़ा कर चलोगी,,,,,(संजू किस बात को सुनकर तिरछी नजर से मनीषा संजू की तरफ देखने लगी और मुस्कुरा दी उसकी हंसी छूट गई,,,, उसको हंसना देखकर संजू भी मुस्कुराने लगा और बोला,,,)

तुम हंसते हुए ही बहुत अच्छी लगती हो,,, उदास चेहरा तुम पर बिल्कुल भी नहीं जंचता,,,,, मैं तो कहता हूं अच्छा ही होता अगर मौसी हम दोनों को देख लेती तो कम से कम पर्दा तो है जाता और हम दोनों जब चाहे तब आपस में मजा कर सकते थे ,,,,

(संजू की यह बात सुनते ही मनीषा थोड़ा सा गुस्सा दिखाते हुए बोली)

अरे पागल हो गए हो क्या,,,? मम्मी अगर यह सब देख लेगी तो मुझे मार डालेगी,,,,

तुम भी मनीषा खामखा डरती हो तुम ही जरा दिमाग से सोचो अगर ऐसा हो जाए कि सच में हम दोनों को संबंध बनाते हुए मौसी देख ले तो फिर क्या होगा थोड़ा गुस्सा करेंगे तुम्हें मारेंगी मुझे भगा देंगे लेकिन उन्हें इतना तो पता चल जाएगा ना कि हम दोनों के बीच क्या चल रहा है और हम दोनों जब चाहे तब संबंध बना सकते हैं मैं तुम्हारे घर पर भी आकर तुम्हारी कमरे में संबंध बन सकता हूं तुम्हारी गांड मार सकता हूं यह सब जानते हुए भी मौसी कुछ नहीं कर पाएगी,,,,।

(संजू की बात सुनकर मनीषा को गुस्सा तो आ रहा था लेकिन कुछ देर तक वह सोचने के बाद बोली,,,)

तुम्हारा सपना सपना ही रह जाएगा ऐसा कुछ भी होने वाला नहीं है,,,,

क्यों नहीं हो सकता मनीषा जरा तुम दिमाग से सोचो अगर ऐसा हो गया तो फिर कितना मजा आएगा किसी से भी डरने की जरूरत नहीं है जैसा कि कल तुम्हारे मन की नहीं हो पाई वैसा बिलकुल भी नहीं होगा,,,(संजू किसी भी तरह से मनीषा को मनाना चाहता था वह मनीषा को मना कर दोनों मां बेटी के बीच की दूरी को खत्म कर देना चाहता था जैसा की साधना ने उसके और उसकी मां के बीच अपनी नजरिया में सारी दूरी खत्म कर दी थी संजू को इसका फायदा भी था अगर दोनों मां बेटी को एक दूसरे के बारे में पता चल जाता तो वह दोनों मां बेटी की एक साथ चुदाई करके आनंद लूट सकता था इसीलिए वह किसी भी तरह से मनीषा को मनाने का प्रयास कर रहा था,,,,)

नहीं नहीं मुझे तो सोच कर ही डर लगता है मैं और तुम एक साथ संबंध बनाते हुए अगर मां ने देख ली तो गजब हो जाएगा,,,,

कुछ गजब नहीं होगा मनीषा मैं जो कुछ भी कह रहा हूं उसके पीछे एक तर्क है और हकीकत भी तुम नहीं जानती कि मेरा दोस्त अपनी चाची के साथ संबंध बनाता है और तो और चाची की लड़की के साथ भी संबंध बनाया है और पता है यह सब कैसे हो गया,,,,

कैसे,,,?(मनीषा भी संजू की बात में दिलचस्पी लेते हुए बोली)

हुआ यू की मेरे दोस्त का संबंध उसकी चाची के साथ था,,, जोकि उसकी सगी चाची थी,,,, और उसकी भी जवान बेटी जैसा कि तुम,,, एक दिन शाम के समय जब उसकी मां खाना बना रही थी तभी मेरा दोस्त रसोई घर में गया और अपनी चाची को बाहों में जाकर उसकी साड़ी को कमर तक उठाकर उसकी चुदाई करना शुरू कर दिया उसकी चाची जानती थी कि शाम के समय उसका भतीजा इस तरह की हरकत करता है इसलिए वह चड्डी नहीं पहनती थी और उसकी किस्मत पहले तो खराब का लो क्योंकि इस समय उसकी बेटी ने सब कुछ अपनी आंखों से देख ली थी और हंगामा खड़ा कर दी थी हालांकि इस बात का पता परिवार के किसी सदस्य को नहीं चल पाया था और उसकी खुशकिस्मती कह लो कि उसके भतीजे ने अपनी सूझबूझ से उसकी लड़की को भी मना लिया उसकी चाची को तो मानना ही था क्योंकि अगर वह नहीं मानती तो उसकी बेटी अपने पापा को बता देती और फिर बदनामी हो जाती और इसी बदनामी के दर से उसकी मां भी खामोश रही और मेरा दोस्त अपनी ही चाचा की लड़की के साथ संबंध बना लिया और आज मेरा दोस्त एक साथ एक ही बिस्तर पर चाचा और उसकी लड़की दोनों की जमकर चुदाई करता है और दोनों खुश भी हैं,,,,।

(इस बात को सुनकर मनीषा की सांस ऊपर नीचे होने लगी लेकिन फिर वह बोली)

लेकिन तुम्हें कैसे मालूम,,,,?

मेरे दोस्त ने बताया और वह मेरा बहुत ही जिगरी और खास दोस्त है ,,, और वह मेरे से कुछ भी नहीं छुपा था उसने एक-एक शब्द मुझे बताया था और इसका सुबोध भी मुझे अपने घर ले जाकर दिया था और चोरी छुपे मुझे यह भी दिखाया था कि वह किस तरह से दोनों के साथ संबंध बनाता है कसम से यह देखकर तो मेरी हालत खराब हो गई थी,,,,, मेरा दोस्त एक ही बिस्तर पर मां बेटी दोनों को नंगी करके बारी-बारी से ले रहा था ,,, सच में वह दृश्य बहुत ही गरम था,,,।

(संजू अपनी बनी बनाई बात से मनीषा को लाइन पर लाना चाहता था अपना उल्लू सीधा करना चाहता था मनीषा भी उसकी बात सुनकर पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी लेकिन फिर थोड़ी देर बाद बोली)

नहीं ऐसा बिल्कुल भी नहीं हो सकता तुम्हारे दोस्त की चाची थी जिसको चुदवाते हुए उसकी बेटी ने देखी थी लेकिन यहां तो मैं हूं अगर मेरी मां देख लेगी तो जान ले लेगी,,,,

(मनीषा की बात सुनकर संजू को ऐसा एहसास हो रहा था कि वह भी अपने मन में यही चाह रही थी कि उसकी भी जिंदगी उसके दोस्त की चाची और उसकी बेटी की तरह हो जाए लेकिन अंदर ही अंदर डर रही थी और उसके इसी डर को दूर करने के लिए कुछ सोचने के बाद संजू बोला,,,)

तुम पागल हो मनीषा मौसी यह सब देखकर तुम्हारी जान नहीं लेंगी बल्कि गर्म हो जाएंगी,,,,

क्या बकवास कर रहे हो,,,, मेरी मां बहुत ही सख्त है,,,,

लेकिन तुम्हारी मां मेरी मौसी भी है तुम अपनी मां के बारे में बहुत कुछ जानती होगी लेकिन कुछ बातें तुम भी नहीं जानतीं,,,,

मैं कुछ समझी नहीं तुम क्या कहना चाह रहे हो,,,,

तुम्हें विश्वास नहीं होगा लेकिन मनीषा जो कुछ भी मैं तुम्हें बताने जा रहा हूं वह एकदम सच है मैं एक दिन तुम्हारे घर गया था दोपहर में रजा के दिन मुझे लगा कि तुम घर पर होगी,,,, घर पर पहुंचा तो दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था मैं बिना कुछ बोले घर में प्रवेश कर गया लेकिन कोई दिखाई नहीं दे रहा था तो मैं अंदर की तरफ बढ़ गया और मैं जैसे ही किचन की तरफ आगे बढ़ा अंदर से अजीब अजीब सी आवाज आने लगी मैं एकदम से घबरा गया और वही दीवार से सेट कर खड़ा हो गया और चोरी से अंदर की तरफ देखा तो अंदर का नजारा देखकर मेरा होश उड़ गया,,,,।

(संजू की बात सुनकर मनीष कभी दिल जोरो से धड़कने लगा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि संजू क्या बोलने वाला है लेकिन इतना तो समझ में आई गया था कि जो कुछ भी वह बताने जा रहा है वह शम नाक है,,,, इसलिए वह दबे श्वर में बोली,,,)

कैसा नजारा,,,?

मनीषा कसम से बना चेहरा देखकर तो मैं झूठ नहीं बोलूंगा मेरा तो उस समय पूरा लंड खड़ा हो गया था,,,

लेकिन बताओगे क्या देख लिए थे,,,!(मनीषा भी काफी उत्सुक नजर आ रही थी संजू से सुनने के लिए कि आखिरकार उसने क्या देख लिया था संजू तो बनी बनाई बात बता रहा था ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था लेकिन यह सब कुछ नाटक वह मनीषा को राजी करने के लिए बता रहा था वह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

मनीषा मैंने देखा कि तुम्हारी मां किचन की दीवार से सेट कर खड़ी थी और उनकी साड़ी कमर तक उठी हुई थी और उनकी चड्डी उनके घुटनों में फंसी हुई थी वह अपनी दोनों टांगों को खोलकर हाथ में मोटी सी ककड़ी लेकर अपनी चूत में डालकर अंदर बाहर कर रही थी,,,, वह इतनी ज्यादा मदहोश हो गई थी कि उनकी आंखें बंद थी मैं कुछ देर खड़ा होकर उसे गरमा गरम नजारे को देखता रह गया कसम से उसे समय मेरा मन बहुत कर रहा था की रसोई घर में चला जाऊं और उसे ककड़ी की जगह मौसी की चूत में अपना लंड डाल दुं,,,,

क्या कह रहे हो संजू,,,(एकदम आश्चर्य से हैरान होते हुए मनीष बोली)

मैं एकदम सच कह रहा हूं मनीषा मैं यह सब बताना नहीं चाहता था लेकिन कल रात जो कुछ भी हुआ उसे देखने के बाद मेरे मन में यही ख्याल आया कि अगर इसमें मौसी भी शामिल हो जाती या उन्हें सब कुछ पता चल जाता तो शायद कल रात को तुम प्यासी ना रह जाती,,,,

मम्मी ऐसा कर सकती है मैं कभी सोच भी नहीं सकती,,,,

कसम से मनीषा उसे दिन तो वह सब देख कर मैं अपना इरादा बना लिया था कि किचन में जाकर मौसी की चुदाई कर दो और उसे समय सच कहूं तो मौसी मन भी जाती क्योंकि वह पूरी तरह से चुदवासी थी बस उन्हें सिर्फ मेरा लंड दिखाने की दे रही थी वह मेरे लंड के लिए अपनी टांग खोल देती,,,,

नहीं नहीं संजू ऐसा नहीं हो सकता मम्मी ऐसा नहीं कर सकती,,,,

क्यों नहीं हो सकता मनीषा एक औरत होते हुए भी तुम औरतों के मन को नहीं समझ पा रही हो आखिरकार मौसी बुढी नहीं हो गई है अभी भी उनके बदन में जवानी बरकरार है उनका बदन कितना कसा हुआ है जानती हो,,, मैंने देखा था उसे दिन मोती-मोती चिकनी जांघें केले के तने की तरह एकदम मजबूत,,, और उनकी चूत एकदम चिकनी गुलाबी देखकर ही मेरे मुंह में पानी आ गया था तुम जरा सोचो जब मौसी कोई हालत में देख कर एक जवान लड़के का लंड खड़ा हो सकता है तो क्या तुम्हें मौसी बुढी लगती है,,,

लेकिन यह कैसे हो सकता है,,,, मैं मम्मी के बारे में कभी इस तरह से सोच भी नहीं सकती थी,,,(मनीषा हैरान होते हुए बोली)

तुम पागल हो मनीषा एक औरत होते हुए भी औरत को नहीं समझ पा रही हो आखिरकार मौसी भी जवान है उनके भी अरमान है उनके भी बदन की कुछ ज़रूरतें हैं और मौसा जी को देखकर मुझे नहीं लगता की मौसी की जरूरत को मौसा जी पूरा कर सकते हैं होंगे और जरा इतना तो सोचो मौसी संस्कारी भी हैं भले ही उसे दिन अपने हाथों से अपनी प्यास बुझाने की कोशिश कर रही थी वह चाहती तो बाहर भी किसी दूसरे के साथ संबंध बना सकती थी और उनके एक ईशारे पर उनके साथ चुदाई करने के लिए बहुत से लड़के तैयार हो सकते थे,,,, क्या तुम्हें नहीं लगता की मौसा जी मौसी की इच्छा को पूरी नहीं कर पाते होंगे देखते नहीं हो दिन भर तो बैठे रहते हैं और तुम तभी कितनी बाहर निकली हुई है मुझे नहीं लगता की मौसा जी का खड़ा भी होता होगा,,,

संजू,,,,(संजू की बात सुनकर थोड़ा सा गुस्सा दिखाते हुए मनीष बोली)

मैं तो कहता हूं मनीषा इस खेल में मौसी को भी शामिल कर लेते हैं बहुत मजा आएगा उनकी भी इच्छा पूरी हो जाएगी और तुम्हारी भी झिझक खत्म हो जाएगी और जब चाहे तब अपने दोनों चुदाई का मजा लूट सकते हैं,,,,,(संजू की बात सुनकर मनीषा तिरछी नजर से उसकी तरफ देख रही थी वह थोड़ा गुस्सा भी कर रही थी और उसे गुस्से में देख कर संजू बोला) तुम समझ नहीं पा रही हो मनीषा तुम इस तरह से अपनी मम्मी की मदद कर सकोगी वरना किसी दिन अगर जवानी का तूफान उनके दिमाग से बाहर हो गया तो बाहर जाकर संबंध बना लेंगे और फिर ऐसे में बदनामी होने का भी डर रहेगा सब कुछ तुम्हारे हाथ में है अगर तुम चाहो तो सब कुछ हो सकता है,,,,

(संजू की बात सुनकर मनीषा भी मन ही मन तैयार होने लगी थी वह भी अपनी मां के बारे में सुनकर अपनी मां के प्रति थोड़ा सा नरम हो गई थी एक औरत होने के नाते उसे भी इस बात का अंदाजा था कि एक औरत के मन में कैसी प्रतिक्रिया होती है जब उसकी प्यास नहीं बुझ पाती जैसा कि कल रात उसके साथ हुआ था,,, कुछ देर तक सोचने के बाद वह धीरे से बोली,,,)

लेकिन यह सब होगा कैसे,,,!(मनीषा के चेहरे पर आशा की किरण साफ नजर आ रही थी लेकिन वह समझ नहीं पा रही थी कि अगर यह सब होगा तो होगा कैसे संजू मनीषा के इस प्रश्न पर मन ही मन प्रसन्न होने लगा क्योंकि वह अपनी चालाकी से मनीषा को लाइन पर ला चुका था और वह बोला,,,)

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो सब कुछ मैं सही कर दूंगा,,,, बस इस रविवार को छुट्टी के दिन देखना सब कुछ सही हो जाएगा,,

लेकिन अगर मम्मी तुम्हारी हरकत से गुस्सा हो गई तो गजब भी हो जाएगा,,,

ऐसा कुछ भी नहीं होगा मनीषा,,, मौसी की उसे दिन की चाहत और प्यास देखकर मुझे पूरा यकीन है कि मेरे लंड को देखकर मौसी की चूत पानी छोड़ देगी,,,

(संजू की बात सुनकर शर्म के मारे मनीषा का चेहरा लाल हो गया और होता भी क्यों नहीं क्योंकि वह उसकी मम्मी के बारे में ही बात कर रहा था फिर दोनों फुटकर वहां से चले गए)
 
संजू का सुझाव थोड़ा अटपटा था लेकिन मनीषा को भा गया था,,,, कभी-कभी उसे अपने फैसले पर शर्मिंदगी का भी एहसास हो रहा था कि वह यह कौन सी शर्त मान ले रही है,,, जिसमें उसकी खुद की बदनामी हो सकती है संजू की नजर में भले ही संजू इस बात को दूसरों को ना बताएं लेकिन उसके मन में तो यही रहेगा ना कि खुद के बदन की प्यास बुझाने के लिए वह अपनी मम्मी को भी इस खेल में शामिल कर ली,,,, कभी-कभी मनीषा को अपने फैसले पर पछतावा होता था लेकिन अपनी फैसले के परिणाम के बारे में सोचकर उसके चेहरे पर प्रसन्नता और उत्तेजना के भाव साफ नजर आने लगते थे और यही होता है जब दिल और दिमाग पर वासना पूरी तरह से सवार हो जाए तो अच्छे बुरे की पहचान कर पाना मुश्किल हो जाता है,,, और यही मनीषा के साथ भी हो रहा था वह भूल गई थी कि वह किसी राह पर बढ़ रही है अपने फैसले का या सीधा-सीधा कह लो अपने षड्यंत्र का क्या परिणाम आ सकता है इस परिणाम के बारे में भी अच्छी तरह से जानती थी वह जानती थी कि इसके फल स्वरुप वह और उसकी मम्मी एक ही बिस्तर पर होगी और अपनी एकदम नंगी और उन दोनों की टांगों के बीच होगा संजू,,,।

जहां एक तरफ मनीषा को यह सब सो कर थोड़ा अजीब लग रहा था वहीं दूसरी तरफ वह इस तरह की कल्पना की दुनिया में इस कदर खो जाती थी कि मदहोशी पूरे बदन पर छा जाती थी वह अपने मन में सोचने लगती थी कि कितना मजा आएगा जब वह और उसकी मम्मी दोनों बिल्कुल निर्वस्त्र में बड़े से बिस्तर पर नंगी लेटी रहेगी और संजु अपना मोटा तगड़ा लंड अपने हाथ में लेकर हिलाते हुए दोनों की टांगों के बीच बारी-बारी से दोनों की गुलाबी चूत का भोसड़ा बनाएगा यह सब सोच कर ही मनीषा की चूत पानी फेंक रही थी,,,, अपनी हालत और आने वाले पल की उत्सुकता को देखते हुए उसे किसी भी तरह से अपना फैसला गलत नहीं लग रहा था,,। वह अपने फैसले पर बहुत खुश थी,,,।

वहीं दूसरी तरफ संजू भी सातवें आसमान पर था क्यूंकि मनीषा ने उसके प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार कर ली थी वैसे अगर वह उसके प्रस्ताव को स्वीकार न भी करती तो उसे कोई ज्यादा दिक्कत होने वाली नहीं थी क्योंकि वह समय-समय पर मनीषा की मां और मनीषा दोनों की चुदाई करता रहा था बस एक ही बिस्तर पर मां बेटी दोनों के साथ मजा लेना चाहता था इसलिए संजू ने इस प्रस्ताव को मनीषा के सामने रखा था और वह सफल भी हो चुका था,,,, मनीषा के फैसले पर संजू मन ही मन यह सोच रहा था कि चुदाई चीज ही ऐसी होती है कि अच्छे-अच्छे संस्कारी औरतें को धराशाई कर देती है और अगर ऐसा ना होता तो शायद मनीषा उसके प्रस्ताव पर उसके गाल पर तमाचा मार दी होती क्योंकि उसके प्रस्ताव में एक ही बिस्तर पर उसकी मां को शामिल करने की बात थी,,,,, लेकिन संजू जानता था कि ऐसा बिल्कुल भी होने वाला नहीं है उसके प्रस्ताव को स्वीकार करना ही था इसलिए तो वह इतनी बड़ी हिम्मत कर गया था,,,,

बड़ी बेसब्री से मनीषा को रविवार का इंतजार था क्योंकि संजू ने रविवार तक का ही मोहलत दिया था मनीषा को मनीषा को पूरी उम्मीद थी कि संजू रविवार तक सबको सही कर देगा और ऐसा माहौल खड़ा कर देगा कि घर में भी वह खुलकर उसके साथ चुदाई का मजा लूट सकेगी,,,, संजू से मिलने से पहले मनीषा ऐसी बिल्कुल भी नहीं थी मनीषा एक सुधरी हुई और संस्कारी लड़की थी लेकिन संजू की संगत में उसके प्रभाव में जाकर वहां संजू के साथ शारीरिक संबंध बनाने पर मजबूर हो गई और एक बार का यह सिलसिला शुरू हुआ तो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था उसे चुदाई का नशा सा चढ़ गया था जब तक वह संजू के मोटे तगड़े लंड को अपनी चूत की गहराई में रगड़ हुआ महसूस नहीं करती थी तब तक उसे चैन नहीं आता था,,,, मनीषा अपने कमरे में बिस्तर पर लेटे-लेटे रविवार के बारे में ही सोच रही थी तभी उसे संजू की कहानी बात याद आई जब उसकी मां किचन के अंदर अपनी साड़ी कमर तक उठाए हुए अपनी दोनों टांगें फैला कर मोटी तगड़ी तगड़ी को अपनी चूत के अंदर बाहर कर रही थी यह ख्याल आते ही मनीषा के बदन में सनसनी से दौड़ने लगी और उसे अपनी मां के तरफ का यह रवैया थोड़ा अजीब लगने लगा क्योंकि वह कभी भी अपनी मां के बारे में इस तरह से सोची नहीं थी कि उसकी मां भी इस उम्र में चुदाई के सुख के लिए तड़प रही है,,,, वह अपनी मां के रवैया पर थोड़ा गहन अध्ययन करने लगी और अपने पापा की शारीरिक क्षमता के बारे में भी सोचने लगी,,, और उसका परिणाम यही हुआ की उसे भी इस बात का एहसास होने लगा कि उसके पापा में इस उम्र में वाकई में इतनी क्षमता नहीं थी कि उसकी मां की जवानी की प्यास को बुझा सके क्योंकि उनका शरीर भी थोड़ा भारी हो चुका था और आगे से तोंद निकली हुई थी और ऐसे में वह खुद सहारा लेकर चलते थे तो भला कैसे उसकी मां की जवानी की प्यास को अपने मर्दाना अंग से बुझा सकने की काबिलियत रखते,,,, एक औरत होने के नाते उसे भी इस बात का एहसास होने लगा कि वाकई में उसकी मां को भी उसी चीज की जरूरत है जिसके लिए वह खुद तड़प रही है। ,,,,,,, एक औरत होने के नाते अपनी मां की तरफ नरम रवैया रखने लगी क्योंकि वह जानती थी की हर औरत को जैसे खाने की भूख लगती है वैसे ही अपने जिस्म की भी भूख लगती है और समय-समय पर उसकी जरूरत पूरी भी होनी चाहिए अगर वह घर में सुख नहीं प्राप्त कर पा रही है तो ऐसे हालात में उसका बाहर निकलना उसकी मजबूरी बन जाती है,,, और उसे संजू की कही बात भी अच्छी तरह से याद थी,,,की उसकी मां में अभी भी जवानी पूरी तरह से बर्क र है उसे देखकर किसी का भी लैंड खड़ा हो जाएगा जैसा की किचन के अंदर उसकी हरकत को देख कर संजू का खुद का लंड खड़ा हो गया था और वह उसे चोदने का मन बना लिया था,,, और संजू नहीं अभी कहा था कि उसकी मां के की सैर पर उसे चोदने के लिए लड़कों की लाइन लग जाएगी और इसमें हकीकत भी था,,, क्योंकि ज्यादातर लड़की इस तरह की औरतों को ही बिस्तर पर ज्यादा पसंद करते हैं,,, उन्हें उम्र से कोई वास्ता नहीं होता उन्हें वास्ता होता है तो उनकी बड़ी-बड़ी गांड और उनकी गुलाबी चूत से,,,।

मनीषा के मन में बहुत सारी बातें चल रही और उसे यह भी अच्छी तरह से मालूम था कि संजू के बताएं अनुसार अगर वह चाहता तो उसकी मां की चुदाई कर सकता था बस उसे अपना लंड दिखाने की जरूरत थी और वाकई में इस बात को मनीषा से भला अच्छा कौन जान सकता है कि संजू के पास उसकी दोनों टांगों के बीच कैसा गजब का हथियार है जिसे देखने के बाद औरत की चूत से अपने आप ही पानी छोड़ जाता है और वाकई में संजू की कहानी बात सच हो जाती है अगर संजू जरा सा हिम्मत दिखा कर किचन में अपना लंड हिलाते हुए प्रवेश कर जाता तो उसकी मां जरूर उसके लिए अपनी दोनों टांगें खोल देती और यह नहीं देखता कि वह उसकी सगी मौसी है,,,,।

मोटी तगड़ी ककड़ी के बारे में ख्याल आते ही उसके जेहन में पुरानी बातें याद आने लगी उसे याद आने लगा कि वाकई में उसके घर में हमेशा कुछ होना हो ककड़ी और बैगन जरूर होते थे,,,, और इस बात को सोचकर मनीषा को पक्का यकीन हो गया था कि संजू की कहानी बात एकदम सच है क्योंकि वह हमेशा से किचन में ककड़ी और बैगन देखते आ रही थी,,,, और किचन की हालत को देखकर ही संजू ने बनी बनाई बात कह दिया था जबकि इसका हकीकत से कोई वास्ता नहीं था मनीषा की मां ने कभी भी अपनी जवानी की आग बुझाने के लिए ककड़ी और बैगन का सहारा नहीं ली थी,,,,

रात के 9:00 बज रहे थे और यह सब सोने के बाद उत्तेजना के मारे मनीषा की चूत कचोरी की तरह फूल गई थी और उसे भी इस समय ककड़ी का इस्तेमाल करना ही बेहतर लगा क्योंकि संजू की गैर मौजूदगी में उसकी बहन के साथ वह इसी तरह से मजा लेती थी कमरे का लॉक भी ठीक हो गया था इसलिए वह धीरे से किचन में कहीं और फ्रिज में से मोटी तगड़ी का ककडी निकाल कर अपने कमरे में ले आई और फिर उसे पर अच्छे से सरसों का तेल लगाकर अपनी सलवार को निकाल कर अलग कर दी और अपनी पैंटी को बिना उतारे,,,, सिर्फ उसकी किनारी पड़कर दूसरी तरफ खींचकर अपनी चूत को एकदम से बाहर निकाल दी क्योंकि उसकी चूत कचोरी की तरह खुली हुई थी जिसकी वजह से उसकी पेंटिं का दूसरा हिस्सा उसके दूसरे छोर पर एकदम से टिक गया था,,,।

ककड़ी के मोटे वाले हिस्से को वह अपनी चूत पर लगाकर अपनी आंखों को बंद कर ली और कल्पना करने लगी कि जैसे उसकी दोनों टांगें खेल है संजू अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी चूत में प्रवेश कर रहा है और वह धीरे-धीरे कपड़े को अपनी चूत के अंदर प्रवेश करना शुरू कर दी,,,, देखते ही देखते तेल से सनी हुई कड़ी चिकनाहट पाकर धीरे-धीरे मनीषा की चूत में प्रवेश करना शुरू कर दी अपने हाथ से मजा लेने का आनंद तब और ज्यादा बढ़ जाता है जब उसमें कल्पनाओं का तड़का लगा होता है और इस समय मनीषा के साथ भी यही हो रहा था क्योंकि वह कल्पना में संजू को महसूस कर रही थी संजू कल्पना में उसकी दोनों मोटी -मोटी जांघो को अपने हाथों से पकड़ कर उसे फैलाते हुए अपनी कमर हिलाकर उसकी चुदाई कर रहा था,,,।

इस तरह के कल्पना में रच कर मनीषा पूरी तरह से बावरी हो गई थी और बड़ी जोरों से उसे ककड़ी को अपनी चूत के अंदर बाहर कर रही थी और देखते ही देखते उसके मदन रस का फवारा उसकी चूत से फूट पड़ा और वह झड़ने लगी,,,,।

दूसरी तरफ आराधना का महीना चल रहा था इसलिए उसके साथ चुदाई संभव बिल्कुल भी नहीं थी,,, आराधना खाना बना रही थी और मोहिनी सब्जी काट रही थी संजू रसोई घर में प्रवेश किया और अपनी मां को पीछे से बाहों में भरकर उसकी चूची को दबाना शुरू कर दिया,,,।

ऊममममम यह क्या कर रहा है,,,,?(आराधना इस तरह से बिना हिचकीचाहट अपनी बेटी की आंखों के सामने ही अपने बेटे की हरकत का आनंद लेते हुए रोटी पका रही थी,,)

तुमसे प्यार कर रहा हूं रानी,,,(संजू अपनी मां की गर्दन पर अपने होठों को रगड़ते हुए बोला,,, उसकी इस हरकत से आराधना के बदन में सुरसुरी से दौड़ने लगी खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हलचल सी मचने लगी थी,,,,)

कह तो ऐसा रहा है कि जैसे कभी करता ही नहीं है,,,

करता तो रोज हो मेरी जान लेकिन क्या करूं जब भी तुमसे प्यार करता हूं तो ऐसा ही लगता है कि जैसे पहली बार कर रहा हूं इसलिए तो यह तडप बढ़ती जाती है,,,,।

(उनसे थोड़ी ही दूरी पर दरवाजे पर बैठकर सब्जी काट रही मोहिनी अपनी मां और अपने भाई की इस कमगीता को देखकर मंद मंद मुस्कुरा रही थी और उसकी नजर अपने भाई के पेट पर थी जिसमें तंबू बढ़ता चला जा रहा था और यह देखकर मोहिनी बोली,,,)

भाई तेरा तो खड़ा हो रहा है लेकिन कर कुछ पाएगा नहीं मम्मी तुझे करने नहीं देगी,,,,

यही तो रोना है मोहिनी मम्मी को चोदने का बहुत मन कर रहा है लेकिन क्या करूं मम्मी का पीरियड चल रहा है,,,,(ऐसा कहते हुए संजू अपने पेट में बना तंबू अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड पर रगड़ रहा था जिसका एहसास आराधना को पागल बना रहा था उसका भी मन बहुत कर रहा था अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में लेने के लिए लेकिन वह मजबूर थी,,,, इसलिए संजू की हरकत का मजा लेते हुए उसे सांत्वना देते हुए वह बोली,,,)

बस दो दिन और रह गए हैं उसके बाद खूब मजा कर लेना,,,

लेकिन अभी मेरा बहुत मन कर रहा है,,,,

मोहिनी है ना,,,,

मोहिनी की तो रात भर जम कर लूंगा लेकिन इस समय तो तुम्हारे से ही अपनी प्यास बुझाना है,,,,

तो फिर अपने लड़के को ऐसे ही गांड पर रगड रगड़ कर पानी निकाल दे,,,,।

(अपनी मां की बात सुनकर उसका जोश और ज्यादा बढ़ गया और वहां अपनी मां के कंधे को पकड़ कर उसे दोनों हाथों से घूमाकर उसकी खूबसूरत चेहरे को अपनी तरफ कर लिया और उसकी आंखों में देखते हुए बोला,,,)

ऐसे नहीं,,,(और इतना कहने के साथ ही अपने प्यास होठों को अपनी मां के लाल-लाल होठों पर रखकर उसके होठों का रसपान करते हुए उसे चुंबन करने लगा आराधना भी अपने बेटे की हरकत से पूरी तरह से पानी पानी में जा रही थी वह भी मदहोश हुए जा रही थी उसकी चूत में भी आग लगी हुई थी लेकिन वह अपने बेटे के लंड से समय अपनी चूत में नहीं ले सकती थी,,,,, संजू अपनी प्यास कैसे बुझाएगा उसे नहीं मालूम था और कुछ देर तक संजू अपनी मां के लाल-लाल होठों का रस पान करने के बाद उसके कंधों को पकड़ते हुए एक हाथ उसके सर पर रखकर और एक हाथ उसके कंधे पर रखकर उसे नीचे की तरफ ले जाने लगा आराधना को समझते देर नहीं लगी कि उसका बेटा क्या करवाना चाह रहा है लेकिन यह समय उसके भी बदन में मदहोशी पूरी तरह से अपना असर दिख रही थी और वह अपने बेटे की गुलाम बनी उसके इशारे पर नीचे अपने घुटनों पर जाकर बैठ गई,,,,, और अपनी मां को घुटनों पर बैठी हुई देखकर संजू गहरी सांस लेते हुए बोला,,,)

मेरी जान अब तु अच्छी तरह से जानती है तुझे क्या करना है,,,,।

(संजू प्यासी आंखों से अपनी मां की तरफ देखने लगा और मोहिनी भी अपनी मां को ही देख रही थी देखते-देखते आराधना अपना दोनों हाथ ऊपर की तरफ उठाकर अपने बेटे के पेट का बटन खोलने लगी और उसकी चैन खोलकर दोनों हाथों से उसकी पेंट और अंडरवियर दोनों को पकड़े हुए उसे नीचे घुटनों तक खींच दी अंडरवियर से बाहर निकलते ही उसका लंड हवा में लहराने लगा जिसे देखकर आराधना के मुंह में पानी आ गया और वह नापाक कर अपने बेटे के लंड को पकड़ ली उसके मोटे सुपाडे को अपने होठों पर रगड़ते हुए उसे धीरे से अपनी लाल-लाल होठों के बीच भर ली और से चूसना शुरू कर दी संजू पूरी तरह से मदहोश हो गया अपनी मां की ईस हरकत पर उसके बदन में सुरसुरी से दौड़ गई वह गहरी सांस लेते हुए अपना हाथ अपनी मां के सर पर रख दिया और धीरे-धीरे अपनी कमर को आगे पीछे करके हिलना शुरू कर दिया आराधना पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,,,, आराधना भी अपने बेटे के लंड को मुंह में नहीं बल्कि अपनी चूत में लेना चाहती थी लेकिन मजबूर थी पीरियड इसलिए वह भी मुंह में लेकर ही आनंद ले रही थी,,,,।

मोहिनी यह सब देखकर उत्तेजित हुए जा रही थी लेकिन वह वहीं बैठकर सब्जी काट रही थी और इस मदहोशी भरे नजारे का मजा लूट रही थी,,,, संजू पूरी तरह से उत्तेजना के शिखर पर विराजमान हो गया था और वह अपने दोनों हाथों से अपनी मां का सर पड़कर अपनी कमर को जोर-जोर से हिलता हुआ अपनी मां के लाल लाल होठों के बीच अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए उसके मुंह को ही चोद रहा था,,, और फिर देखते ही देखते यह कहे कि उसके बदन में अकड़न बढ़ने लगी और वह भर भरा कर अपनी मां के मुंह में ही झडना शुरू कर दिया और तब तक बाहर नहीं निकाला जब तक की उसके लंड से आखरी बूंद तक बाहर ना निकल गया,,,।
 
खेल की शुरुआत हो चुकी थी और इस खेल में बहुत मजा आने वाला था इस बात को संजू अच्छी तरह से जानता था,,, और अपने मन में साधना भी यही सोच रही थी की बहुत मजा आने वाला है लेकिन वह नहीं जानती थी कि वह खुद अपने ही बेटी और संजू के बिछाए जाल में फंसने वाली थी हालांकि इस तरह के जाल में फंसने के बावजूद भी उसका कुछ बिगड़ने वाला नहीं था बल्कि दुगुना मजा मिलने वाला था,,,,,

संजू और उसकी मौसी

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साधना किचन में दूध का गिलास लेने गई थी जिसमें काजू और बादाम डालकर वह संजू को पिलाकर उसकी ताकत को बढ़ाना चाहती थी क्योंकि उसे मालूम था कि कुछ घंटे के जैसा जो उसके पास है और वह इस पल का पूरी तरह से फायदा उठा लेना चाहती थी लेकिन अपनी मौसी को किचन में जाता देखकर संजू को कुछ याद आ गया था वह दरवाजा का लॉक खोलना भूल गया था,,,, अगर दरवाजा खुला नहीं छोड़ता तो उन लोगों का सारा प्लान फेल हो जाता और ऐसा संजू बिल्कुल भी नहीं चाहता था इसीलिए वह मौका देखकर दरवाजे का लॉक खोल दिया था ताकि मनीषा आराम से घर में प्रवेश कर सके,,,।

संजू को इस तरह से चोरी-छिपे अपनी मौसी की चुदाई करने में भी बहुत आनंद आता था इसीलिए तो अपनी मौसी से जरा सी छेड़छाड़ करने से ही उसका लंड अपनी औकात में आ जाता था और सामान्य तौर पर एक मर्द के लिए ऐसा होना स्वाभाविक ही था अगर वह जरा सी छेड़छाड़ या किसी के बारे में सोच कर भेजने का अनुभव करने लगे तो ही वह किसी भी औरत को संतुष्ट करने की क्षमता रखता है और अगर ऐसा नहीं है तो वह किसी भी औरत को वह सुख प्रदान नहीं कर सकता जैसा की औरत चाहती है,,,। साधना अपने मन में कोई अच्छा सा गीत गुनगुना रही थी और अपने मन में यही सोच रही थी कि अच्छा हुआ कि आज मनीषा अपनी सहेलियों के साथ फिल्म देखने चली गई आज उसे पूरा मौका मिला था संजू के साथ चुदाई का सुख भोगने के लिए,,,, और वह प्रसन्न होते हुए काजू और बादाम दोनों को हल्का सा कुटकर दूध के गिलास में मिल रही थी और थोड़ा सा केसर का टुकड़ा लेकर भी उसे दूध में डाल दी थी ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे उसकी याद सुहागरात हो और अपने पति के लिए वह दूध का गिलास तैयार कर रही थी,,, ऐसा नहीं था कि वह दूध के गिलास को इस तरह से पहली बार तैयार कर रही हो वह पहले भी इस तरह से दूध का गिलास तैयार कर चुकी थी लेकिन अपने पति के लिए क्योंकि जब तक वह संजू से नहीं मीली थी वह अपने पति के साथ पूरी कोशिश करती थी संभोग सुख प्राप्त करने के लिए और इसीलिए वह अपने पति को भी काजू बादाम और केसर वाला दूध देती थी ताकि उनके मर्दाना अंग में थोड़ी ताकत आ जाए लेकिन सब कुछ निष्फल रहता था,,,, और आज पहला मौका था जब वह संजू के लिए इस तरह का ताकतवर दूध तैयार कर रही थी वैसे तो संजू की ताकत उसके खुद के दूध को मुंह में लेकर ही बढ़ जाती थी लेकिन आज वह अपनी खुशी जाहिर करना चाहती थी,,,,।

संजू और उसकी मौसी

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संजू बाहर सोफे पर इंतजार कर रहा था और बार-बार अपनी मौसी के बारे में और मनीषा के बारे में सोच कर उत्तेजित हुआ जा रहा था इसलिए बार-बार पेट के ऊपर से ही अपने लंड को दबाने की कोशिश कर रहा था,,, वह अपनी मौसी को छोड़ने के लिए नहीं बल्कि मां बेटी दोनों को एक साथ चोदने के लिए उत्सुक था,,, वह अपने ही ख्यालों में खोया हुआ था कि तभी उसकी मौसी हाथ में दूध का गिलास लेकर मुस्कुराते हुए किचन से बाहर आई और ठीक संजू की आंखों के सामने खड़ी होकर थोड़ा सा चुप कर उसे दूध का गिलास थमने लगी तो उसकी भारी भरकम चूचियां एकदम से ब्लाउज फाड़ कर बाहर आने के लिए उतारू हो गई जिसे देखकर संजू की आंखों की चमक बढ गई और वह मुस्कुराता हुआ बोला ,,)

मैं तुमसे बोला था ना मौसी मुझे इस दूध की नहीं बल्कि तुम्हारा ब्लाउज में छुपे हुए दूध की जरूरत है,,,

धत् पागल पहले यह दूध पी ले बाद में तो उसे पीना ही है,,,,(ऐसा कहते हुए साधना अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसे दूध का गिलास थमाने लगी तो संजू बोला,,)

अपने हाथों से ही पिला दो मौसी तुम्हारे हाथों से बहुत अच्छा लगता है,,,

लेकिन मैं तो पहली बार तुझे दूध पिला रही हूं,,,

संजू अपनी मौसी की छूट चाट ता हुआ

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वह तो ग्लास से अपने हाथ से पिला रही हो इससे पहले भी तुम अपने हाथों में अपनी चूची पकड़ कर मेरे मुंह में डाल चुकी हो,,,।

धत् बदमाश तेरी बातें मुझे पागल कर देती है,,,, तेरी बातों को तो सुनकर मेरी चुत गीली हो गई,,,

उसका भी इलाज कर देंगे मौसी चिंता मत करो पहले मुझे दूध पिलाओ,,।

(इतना सुनते ही मुस्कुराते हुए साधना उसके बगल में बैठ गई और धीरे से गिलास को उसके होठों से लगाकर उसे दूध पिलाना शुरू कर दी एक अद्भुत आनंद का एहसास संजू के साथ-साथ साधना के बदन में भी दौड़ने लगा,,,, क्योंकि उसे दूध पिलाते हुए वह कुछ और सोच रही थी और मुस्कुरा रही थी उसे मुस्कुराता हुआ देखकर संजू इशारे से ही उससे पूछा कि क्या हुआ तो साधना मुस्कुराते हुए बोली,,,)

कुछ नहीं तुझे दूध पिलाते हुए मुझे कुछ याद आ रहा है,,,

साधना संजू को खुश करती हुयी

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क्या याद आ रहा है,,,?

यही कि आज मुझे ऐसा लग रहा है कि जैसे मेरी सुहागरात है और मैं अपने पति के लिए काजू बादाम वाला दूध तैयार करके उन्हें पिला रही हुं,,,

सच मौसी में तुम्हारा पति लग रहा हूं,,,

सच कहूं तो इस समय हां,,, भले ही समाज के नजरिए से नहीं लेकिन बिस्तर पर जिस तरह से तेरा और मेरा संबंध है उसे देखते हुए इस समय तो मेरा पति ही है जो मुझे चोद कर मुझे पूरी तरह से संतुष्ट करता है,,,।

सच पूछो तो तुमने भी मुझे एक पत्नी की तरह ही सुख दि हो इसलिए मैं कह सकता हूं कि तुम इस समय मेरी पत्नी मेरी प्रेमिका सब कुछ हो अगर तुमने मुझे चोदना ना सिखाई होती तो,,, शायद मैं इस अद्भुत सुख से वंचित रह जाता मुझे कभी पता ही नहीं चलता कि एक औरत क्या होती है उसके साथ कैसा सुख प्राप्त होता है,,,,(दूध का आखिरी घूंट भरता हुआ संजू बोल और उस खाली ग्लास को साधना टेबल पर रखते हुए उसकी तरफ मुस्कुराते हुए देख कर बोली,,,)

ऐसा बिल्कुल भी नहीं है तो इतना हैंडसम है कि तुझे कोई ना कोई लड़की तो जरूर मिल जाती लेकिन उम्र कैसे पड़ाव पर मुझे तेरे जैसा जवान मर्दाना ताकत से भरा हुआ लड़का नहीं मिल पाता जो अपने लंड की ताकत से मेरी चूत का पानी नीचोड़ देता है,,,(इतना कहने के साथ ही साधना अपनी जवानी का जलवा दिखाते हुए अपने कंधे पर से साड़ी के पल्लू को पड़कर नीचे गिरा दी और उसकी भारी भरकम छतिया एकदम से उजागर हो गई जिसे देखकर संजू की आंखों में वासना की चमक साफ नजर आने लगी वह पागलों की तरह अपनी मौसी की मदमस्त कर देने वाली छातियो को देखने लगा,,,, और उसे बिल्कुल ग्रहण है कि अब अपने दोनों हाथों के बढ़कर ब्लाउज के ऊपर से ही अपनी मौसी की घर पहुंचे जैसी चूचियों को पकड़ लिया उसे जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया वह इतनी जोर से जोश में अपनी मौसी की चूची को दबाच रहा था कि उसकी मौसी को हल्का-हल्का दर्द महसूस हो रहा था लेकिन इस तरह के दर्द में भी औरत को अद्भुत आनंद की प्राप्ति होती है और इस दर्द के साथ-साथ आनंद की अद्भुत सिसकारी की आवाज भी साधना के मुंह से निकलना शुरू हो गई थी,,,,)

संजू और उसकी मौसी

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सहहहह आहहहहह , संजु,,,,ऊमममममममम,,,, मेरे बच्चे तू तो मुझे पागल कर देगा,,,(मदहोशी में अपनी आंखों को बंद करके गहरी गहरी सांस लेते हुए साधना बोली अपनी मौसी की हालत को देखकर संजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी,,, और वह अपनी मौसी के ब्लाउज के बटन को खोलना शुरू कर दिया संजू भी अच्छी तरह से जानता था कि उसके पास पर्याप्त समय है इसलिए वह बिल्कुल भी जल्दबाजी नहीं करना चाहता था क्योंकि वहां एक घंटे के बाद मनीषा को घर में प्रवेश करने का नहीं होता दिया था अगर वह जल्दबाजी में अपनी मौसी की चुदाई कर देता तो शायद मनीषा उन दोनों को रंगे हाथ ना पकड़ पाती इसीलिए संजू जानबूझकर पर्याप्त समय का पर्याप्त आनंद लेना चाहता था देखते ही देखते संजू अपनी उंगलियों का कमाल दिखाते हुए अपनी मौसी के ब्लाउज के सारे बटन को खोल दिया और ब्लाउज के दोनों पट को एक दूसरे से अलग करते हुए अपनी मौसी की लाल रंग की ब्रा जो की जालीदार थी उसे देखकर गहरी सांस लेते हुए अपनी मौसी से बोला,,,)

सहहहह,,,, मेरी रानी तुम्हारी चूचियों को देखकर कोई कह नहीं सकता की तुम एक जवान लड़की की मन हो कसम से तुम्हारी चुचियों का कसाव अभी भी पूरी तरह से बरकरार है,,,(और इतना कहने के साथ ही संजू ब्रा के ऊपर से ही अपनी मौसी की चूचियों को दबाना शुरू कर दिया साधना ने ब्रा भी छोटे कप वाला पहनी थी जिसे पहनने के बावजूद भी आदि से ज्यादा चूचियां बाहर को निकली हुई थी संजू रबड़ के गेंद की तरह अपने दोनों हाथों से अपनी मौसी की चूची दबा रहा था संजू पागलों की तरह अपनी मौसी की चूची पर पूरी तरह से जुट गया था उसकी मौसी भी मदहोश हो चुकी थी और सोफे पर अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ फैला कर अपनी छाती को थोड़ा सा और ऊपर उभार कर गहरी गहरी सांस ले रही थी,,,।

अपनी मौसी की इस अदा पर संजू पूरी तरह से मचल उठा और वह ब्रा खोल बिना ही अपने हथेली से अपनी मौसी की चूची पकड़ कर उसके दोनों कप में से भारी-भारी से उसके खरगोश जैसे चुचियों को बाहर निकाल लिया और फिर दोनों हाथ में लेकर जैसे किसी तराजू में तोड़ रहा हो उसे तरह से ऊपर नीचे करके मजा लेने लगा संजू की हर हरकत साधना के बदन में मदहोशी का नशा भर रही थी वह संजू की हर हरकत से तड़प रही थी,,,, देखते ही देखते संजू अपनी मौसी की चूची को अपने मुंह में भरकर पीना शुरू कर दिया वैसे भी उसे बाहर के दूध से ज्यादा ताकतवर अपनी मौसी का दूध लगता था वह पागलों की तरह बारी बारी से दोनों चुचियों का रस पीना शुरू कर दिया,,,, उत्तेजना के मारे मनीषा की चूची की निप्पल भी कैडबरी चॉकलेट की तरह एकदम तन गई थी जिसे पीने में संजू को और ज्यादा मजा आ रहा था,,,,।

उत्तेजना के मारे साधना की चूत पानी छोड़ रही थी उसकी चूत किसी तालाब की तरह नमकीन खारे पानी से भर चुकी थी जिसका रस चूत के कटोरी में से उबाल मार कर बाहर निकल रहा था,,,, और दूसरी तरफ अपनी मौसी की जवानी से खेलते हुए संजू का लंड रन के रोड की तरह एकदम से गर्म हो चुका था,,, वह इतना अत्यधिक उत्तेजित हो चुका था कि इसी समय वह अपनी मौसी की चूत में अपना लंड डालना चाहता था लेकिन वह इस तरह के मामले में एक औरत को सुख देने के मामले में काफी धैर्यवान था और इस समय भी वह अपना धैर्य दिखा रहा था,,,।

साधना की जवानी से भारी कम सिसकारियों की आवाज से पूरा ड्राइंग रूम गूंज रहा था लेकिन दरवाजा और खिड़कियां बंद होने की वजह से यह मादकता भरी आवाज कमरे से बाहर नहीं निकल पा रहे थे इसे सिर्फ संजू और खुद साधना सुन पा रही थी और इस तरह की मदहोशी भरी आवाज सुनकर संजू का जोश बढ़ता चला जा रहा था,, और अपने इसी जोश को दिखाते हुए संजू अपनी मौसी की गोरी गोरी चूचियों को टमाटर की तरह लाल कर दिया था वह पूरी तरह से पागल हो गया था और खुद साधना को भी पागल बना दिया था कुछ देर तक अपनी मौसी की चूचियों से खेलने के बाद संजू गहरी गहरी सांस लेता हुआ उसकी चूचियों से अपने मुंह को अलग किया और फिर अपनी मौसी को प्यासी नजरों से देखते हुए अपने शर्ट को निकाल कर वहीं फेंक दिया और फिर अपनी मौसी का हाथ पकड़ कर उसे अपने बाहों में भर लिया और गले लगे हुए मुद्रा में वह अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ ले जाकर अपनी मौसी के ब्रा का हुक खोलने लगा,,,। इस मुद्रा में,,साधना की बड़ी बड़ी चूचियां संजु की चौड़ी छाती से रगड़ खा रही थी जिसकी वजह से साधना के बदन में,,, उत्तेजना का संचार बड़ी तेजी से हो रहा था,,,।

संजू और साधना

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देखते ही देखते संजू,,, अपनी मौसी का ब्रा खोल दिया और उसे उतार कर सोफे पर ही रख दिया कमर के ऊपर उसकी मौसी पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी और इस नंगेपन का आनंद है लेते हुए संजू उसे कस के अपनी बाहों में भर लिया दोनों की नंगी चाहती आपस में टकराकर एक अद्भुत उत्तेजना दोनों के बटन में भर दे रही थी,,,। संजू अपनी मौसी की पीठ को सहलाते हुए धीरे से बोला,,,

सच कहु तो मौसी,,,,, मेरा तो यहां से जाने का ही मन नहीं करता मन करता है दिन रात तुम्हारी बाहों में यूं ही तुमसे प्यार करता रहूं,,,

तो रोका किसने है,,,

मुझे डर लगता है,,, मनीषा दीदी से अगर कहीं उन्होंने देख लिया या उन्हें हम दोनों के बारे में पता चल गया तो क्या होगा,,,(संजू जानबूझकर इस दर को अपनी मौसी के सामने जाहिर किया था वह देखना चाहता था कि उसकी मौसी क्या कहती है उसके चेहरे के हाव-भाव कैसे बदलते हैं लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ उसके इस डर का जवाब मुस्कुराते हुए साधना बोली)

ऐसा कुछ भी नहीं होगा संजू,,,, मनीषा कोई इस बारे में कभी भी पता नहीं चलेगा,,,

लेकिन मौसी मुझे डर लगता है कहीं पता चल गया तो मेरा तो इस घर में आना जाना बंद हो जाएगा और तुम्हारा भी शायद घर से निकलना बंद हो जाए,,,

मैं उसकी मां हूं वह मेरी मां नहीं है,,, ( ऐसा कहते हुए साधना पेट के ऊपर से भी संजू के लंड को पकड़ कर दबाने लगी जिससे संजू के बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी,,,)

लेकिन फिर भी ऐसा हो गया तो,,,,

ऐसा कुछ भी नहीं होगा अगर हो गया तो तब की तब देखेंगे,,,,,,(और इतना कहने के साथ है साधना अपने दोनों हाथों की उंगलियों का प्रयोग करते हुए संजू के पैंट की चैन खोलने लगी ऊपर का बटन खोल भी नहीं वह चैन को पूरी तरह से खोल दी,,,, संजू भी इस मुद्दे को यहीं पर ही खत्म कर दिया और अपनी मौसी के सुर में सुर मिलाता हुआ वह भी अपने मन में बोल सच कह रही है मौसी तब का तब देखा जाएगा,,,,)

बाप रे ऐसा लग रहा है कि तेरा तो इसमें से बाहर ही नहीं आएगा,,,(चैन खोलकर दोनों गलियों को उसमें डालकर संजू के लंड को बाहर निकालने की नाकाम कोशिश करते हुए साधना बोली,,,)

मेरा इतना छोटा नहीं है मौसी की इसमें से बाहर आ जाए उसे बाहर निकालने के लिए पेंट उतारना पड़ता है,,,

सच कह रहा है तू लेकिन दूसरों का तो इसमें से ही बाहर आ जाता है,,,(एक बार फिर से आखिरी कोशिश करते हुए साधना बोली)

उनका छोटा होता है मौसी मेरा तो तुम देख ही चुकी और ले भी चुकी हो फिर भी ऐसा कह रही हो,,,

तो सच कह रहा है मैं पहली बार इधर से बाहर निकालने की कोशिश कर रही हूं तभी अंदाजा नहीं लगा,,,,

रुको मैं निकालता हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही समझो सोफा पर से उठकर खड़ा हो गया और अपने पेट की बटन खोलकर दोनों हाथों से अंडरवियर और पेट पकड़कर उसे एक झटके में नीचे कर दिया और अगले ही पर उसका लंड हवा में झूलने लगा,,, हवा में लहराते हुए संजू के लंड को देखकर एक बार फिर से साधना आशचर्य से बोली,,,)

बाप रे तेरा तो एकदम गधे का लगता है,,,,(इतना कहने के साथ ही वह अपना हाथ आगे बढ़कर संजू के लंड को पकड़ लिया और उसे हल्का सा लंड पकड़े हुए ही अपनी तरफ खींचते हुए अपने प्यास होठों को भी उसके लंड की तरफ आगे बढ़ा दी और अगले ही पल वह अपने प्यास होठों को संजू के गम सपने पर रखकर उसे पर चुंबन करने लगी,,,, साधना के लाल-लाल होठों का स्पर्श संजू के लंड पर होते ही संजू के बदन में सुरसुरी सी दौड़ गई,,, उत्तेजना के मारे उसका पेट हल्का सा अंदर की तरफ पचक गया,, और देखते ही देखते साधना धीरे-धीरे लॉलीपॉप की तरह संजू के लंड को चूसना शुरू कर दी,,, अपनी मौसी की इसी अदा पर संजू पूरी तरह से बावरा हो जाता था वह अपनी कमर को धीरे-धीरे हल्का-हल्का आगे पीछे करके हिलाना शुरू कर दिया,,,, और संजू की इस हरकत का साधन पर बहुत ही उत्तेजनात्मक असर पड़ रहा था वह अपने लाल-लाल होठों को छल्ला बनाकर संजू के लंड पर कस देती थी और इस कसाव का आनंद संजू को और ज्यादा मदहोश कर दे रहा था,,,,।

साधना संजू का लंड मुंह में लेकर चूस रही थी और इस दौरान संजू अपने हर एक तरीके से आनंद ले रहा था और अपनी मौसी को आनंद दे रहा था एक तरफ वह अपनी कमर हिला कर अपनी मौसी के होठों को ही छोड़ रहा था और दूसरी तरफ अपने दोनों हाथों को नीचे की तरफ ले जाकर कभी चूची दबा देता तो कभी कैडबरी चॉकलेट की तरह तनी हुई निप्पल को चिकोटी भर लेता,, तो कभी चिकनी पीठ को अपनी हथेलियों में दबोच ले रहा था,,,,।

कुछ देर तक दोनों इसी तरह से मजा लूटते रहे,,,, और जब संजू को लगने लगा की मौसी के द्वारा उसके लंड चुसाई का आनंद आसानी हो रहा है ऐसे में कभी भी उसका पानी निकल सकता है तो वह,,, धीरे से अपने लंड को अपनी मौसी के मुंह में से बाहर निकाला,,,, उसकी मौसी को संजू की है हरकत अच्छी नहीं लगी वह कुछ देर और संजू के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना चाहती थी लेकिन वह कुछ बोल नहीं पाई बस गहरी गहरी सांस लेते हुए ललचाई आंखों से संजू के लंड को देख रही थी जो कि उसके थूक और लार से सना हुआ था,,,, संजू ने भी कुछ बोला नहीं बस अपनी मौसी की बाहों को पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठने लगा उसकी मौसी समझ गई कि उसका भतीजा कुछ करना चाहता है और वह भी सोफे पर से उठकर खड़ी हो गई,,,, संजू उसके खड़े होने के साथ ही अपनी पेंट निकाल कर पूरी तरह से नंगा हो गया और अपनी मौसी का हाथ पकड़ कर उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके लाल लाल होठों पर अपने हाथ रखकर चुंबन करना शुरू कर दिया साथ ही अपने दोनों हाथों को अपनी मौसी की गदराई गांड पर रखकर उसे जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,

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साड़ी के ऊपर से भी संजू अपनी मौसी की गांड को बड़े जोरों से दबा रहा था लेकिन शायद इस तरह से उसे कुछ ज्यादा आनंद की अनुभूति हो नहीं रही थी वैसे तो अगर पहली मर्तबा कोई भी मर्द इस तरह से औरत के अंगों से कपड़ों के ऊपर से भी खेलता है तो कैसे हालात में उसका लंड पानी फेंक देता है लेकिन,,, संजू के लिए यह कोई नई बात नहीं थी इसलिए उसे कुछ ज्यादा ही चाहिए था इसलिए वह अपनी मौसी के लाल-लाल होठों का रसपान करते हुए अपने हाथों से अपनी मौसी की साड़ी को कमर तक उठाकर उसकी नंगी गांड जो कि अभी भी लाल रंग की पेटी में कैद थी उसे पर जोर-जोर से चपत लगाता हुआ आनंद ले रहा था,,,,।

इन सब खेल में तकरीबन 40 मिनट गुजर चुके थे और मनीषा को दिए हुए समय में 20 मिनट अभी भी बाकी था इसलिए समझा अपने हाथों से अपनी मौसी की साड़ी को खोलकर उसे नंगी करने की शुरुआत को आगे बढ़ा रहा था और देखते देखते वह अपनी मौसी की साड़ी को उतार कर एक बार फिर से उसे अपनी तरफ खींच कर पीछे से उसे अपनी बाहों में भर लिया और इस अवस्था में साधना की भारी भरकम गोलाकार गांड संजू के खड़े लंड से रगड़ खाने लगी संजू भी अपनी मौसी की गांड का स्पर्श पाकर पूरी तरह से मदहोश होने लगा और इस मदहोशी में संजू अपनी मौसी के पेटीकोट की डोरी कोई कहां से पकड़ कर एक झटके से खींच कर खोल दिया और साधना की पेटीकोट जो कि कमर पर कसी हुई थी वह एकदम से ढीली हो गई,,, और संजू अपनी उंगलियों का सहारा देकर पेटिकोट को कमर से नीचे करने लगा और पेटिकोट साधना के कदमों में जाकर गिर गई और वह पूरी तरह से नंगी हो गई,,,, साधना की नंगी होते ही संजू अपना हाथ उसकी दोनों टांगों के बीच ले जाकर कचोरी जैसी फुली हुई चूत पर रखकर उसे जोर-जोर से मसलना शुरू कर दिया,,, संजू को अपनी मौसी की एक आदत सबसे अच्छी लगती थी जब से वह समझो से मिली थी तब से वह अपनी चूत के बाल को बढ़ने ही नहीं देती थी हमेशा क्रीम लगाकर मक्खन की तरह चिकनी करे रहती थी और इसीलिए संजु को अपनी मौसी की चूत कुछ ज्यादा ही मलाईदार लगती थी,,,,।

सहहहह आहहहहह मौसी तुम्हारी चिकनी चूत,,, मुझे पागल कर देती है,,,

तेरे लिए ही तो है कल ही क्रीम लगाकर साफ की हुं,,,,

ओहहहह मौसी तुम कितनी अच्छी हो,,,( ईतना कहने के साथ ही संजु उसके ठीक सामने घुटनों के बल बैठ गया,,, और अपनी मौसी की एक टांग पकड़ कर उसे सोफे पर रख दिया जिससे उसकी गुलाबी चूत एकदम से खुलकर सामने आ गई और फिर दोनों की नजर आपस में टकराई और संजू अपनी मौसी की तरफ देखते हुए अपने प्यासे होठों को अपनी मौसी की चूत पर रख दिया और उसे चाटना शुरू कर दिया,,,,।

संजू की इस हरकत से साधना पूरी तरह से पागल हो गई मदहोश हो गई और वह अपनी कमर को आगे की तरफ करके अपनी चूत को कस के संजू के होठों से चिपका दी,,,, संजू भी पागलों की तरह जितना हो सकता था अपनी जीभ को अपनी मौसी की चूत में डालकर उसकी मलाई को चाटना शुरू कर दिया,,,, गरमा गरम सिसकारी की आवाज से पूरा कमरा गुंजने लगा,,,, संजू एक तरफ अपनी मौसी की चूत चाट रहा था और दूसरी तरफ दीवार में टंगी घड़ी की तरफ देख रहा था जो कि पूरा एक घंटा समय व्यतीत होने का इशारा कर रहा था संजू का समय आ चुका था अब असली खेल करने का इसलिए वह। ,,, धीरे से उठकर खड़ा हुआ और अपनी मौसी को गोद में उठा लिया भारी भरकम शरीर वाली मौसी संजू की मर्दाना ताकत को देखकर हाकी-बाकी रह गई वह बड़े आराम से भारी भरकम शरीर होने के बावजूद भी उसे गोद में उठा लिया था और उसे गोद में उठाए हुए उसके कमरे की तरफ ले जा रहा था यह सब साधना के लिए बेहद अद्भुत और आश्चर्य चकित कर देने वाला था क्योंकि उसने कभी सोचा ही नहीं थी कि संजू इतने सहज रूप से उसे अपनी गोद में उठाकर आराम से चलते हुए उसे उसके कमरे तक ले जाएगा लेकिन इसी बीच चलते हुए संजू का मोटा तगड़ा लंड उसकी पीठ पर उसके नितंब पर इधर-उधर रगड़ खा रहा था जिससे साधना की मदहोशी और ज्यादा बढ़ती चली जा रही थी साधना जल्द से जल्द संजू के लंड को अपनी चूत में ले लेना चाहती थी,,,।

देखते ही देखते संजू अपनी मौसी को गोद में उठाए हुए उसके ही कमरे में ले जाकर नरम नरम गद्दे पर पटक दिया,,,, संजू अच्छी तरह से जानता था कि किसी भी वक्त मनीषा घर में दाखिल हो जाएगी और पैसे में उसकी आंखों के सामने संजू उसकी मां को चोदते हुए दिखाना चाहता था इसलिए जल्दी से बिस्तर पर चढ़कर वह अपनी मौसी की दोनों टांगों को खोलकर उसकी कमर पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींच लिया ऐसा करने से साधना की भारी भरकम आधी गांड उसकी जांघों पर चढ़ गई और फिर संजू मुस्कुराते भी अपने मोटे तगड़े लंड का सुपाडा अपनी मौसी की चूत के गुलाबी छेद से सटाकर एक करारा धक्का मारा और एक बार में ही पूरा का पुरा लंड साधना की चूत में समा गया,,, एक हल्की सी चीख साधना के मुंह से निकली थी और फिर संजू अपनी मौसी की कमर पकड़ कर उसे चोदना शुरू कर दिया था,,,

और दूसरी तरफ तकरीबन एक घंटा से ऊपर बीत जाने पर मनीषा अपनी स्कूटी लेकर वापस अपने घर की तरफ पढ़ने लगी और अपने घर की कुछ ही दूरी पर अपनी स्कूटी को खड़ी कर दी थी ताकि उसकी स्कूटी की आवाज उसकी मां को सुनाई ना दे,,, वरना वह स्कूटी की आवाज सुनकर सतर्क हो जाती और फिर सारा खेल बिगड़ जाता है,,, वह धीरे-धीरे में गेट को खोलकर अपने घर की तरफ आगे बढ़ने लगी और फिर दरवाजे पर पहुंच कर देखी तो दरवाजा खुला हुआ था दरवाजा खुला हुआ देखकर उसके चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे उसका दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह अंदर जाए कि ना जाए अंदर क्या हो रहा होगा इस बारे में सोचकर ही उसकी दोनों टांगों के बीच की स्थिति गड़बड़ होती हुई महसूस हो रही थी,,,।

वह कुछ देर तक दरवाजे पर खड़ी होकर अपने मन में सोचने लगी कि अगर वाकई में संजू कामयाब हो चुका होगा तो इस समय संजू का लंड उसकी मां की चूत में घुसा हुआ होगा और उसकी मां मजे लेकर चुदवा रही होगी यह नजारा देखना वैसे तो मनीषा के लिए शर्मनाक था लेकिन यह नजारा देखने की उत्सुकता भी उसके मन में बड़ी तीव्रता से हो रही थी वह अपनी मां को चुदवाते हुए देखना चाहती थी वह देखना चाहती थी कि मोटा तगड़ा लंड उसकी मां की चूत के अंदर बाहर होता हुआ कैसा नजर आता है और एक मोटे तगड़े लंड को अपनी चूत में लेने से उसकी मां के चेहरे के भाव कैसे बदलते हैं उसे कैसा लगता होगा यह सब देखने की उत्सुकता है उसकी बढ़ती जा रही थी इसीलिए वह धीरे से कमरे में प्रवेश की ओर दरवाजे को धीरे से बंद करके लॉक कर दी,,,,

अंदर कमरे में संजू अपनी मौसी की घमासान चुदाई कर रहा था क्योंकि वह जानता था कि किसी भी वक्त मनीषा घर में प्रवेश कर सकती है वह अभी तक अपनी मौसी की दोनों टांगों के बीच अपना आसन जमा कर उसे छोड़ रहा था लेकिन कुछ देर बाद वह अपनी मौसी को घोड़ी बनाकर पीछे से चोदना शुरू कर दिया था यहां तक कि वह कुछ ही देर में आसान बदलते हुए अपने मोटे तगड़े लंड पर अपनी मौसी को बिठा दिया था और उसकी मौसी उसके लंड पर कूद रही थी,,, वह जानबूझकर मनीषा को दिखाने के लिए इस आसन का प्रयोग कर रहा था वह मनीषा को दिखाना चाहता था कि उसकी मां कितनी चुदवासी है चुदवाने के लिए,,,।

संजू अपनी मौसी की चुदाई करता हुआ

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मनीषा इधर-उधर देखकर तसल्ली कर लेने के बाद वह अपनी मां के कमरे की तरफ आगे बढ़ने लगी क्योंकि उसे अपनी मां के कमरे से हल्की हल्की सी शिसकारी की आवाज सुनाई दे रही थी और वह इस आवाज को अच्छी तरह से समझ रही थी क्योंकि इस तरह की आवाज में खुद अपने मुंह से निकाल चुकी थी चुदवाते समय,,,, उसका दिल बड़े जोरों से धड़क रहा था वह समझ गई थी कि संजू कामयाब हो चुका है अपने प्लान में और यह तसल्ली होने के बाद उसकी चूत की स्थिति खराब होने लगी उसकी चूत से पानी निकलने लगा वह धीरे-धीरे कदम बढ़ाकर अपनी मां के कमरे की तरफ आगे बढ़ने लगी दरवाजा खुला हुआ था जो कि संजू ने हीं खुला छोड़ रखा था,,,।

कमरे में साधना दुनिया से बेखबर होकर चुदाई का मजा लूट रही थी वह संजू के लंड पर बड़ी जोरों से अपनी गांड को पटक रही थी ना जाने इतनी ताकत उसने कहां से आ गई थी जो कि बिना था कि जोर-जोर से अपनी भारी भरकम गांड को अपने संजू के लंड पर पटक कर आनंद ले रही थी,,,, देखते ही देखते मनीषा अपनी मां के कमरे पर दरवाजे तक पहुंच गई और दरवाजे पर खड़ी होकर अंदर का दृश्य देखी तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई उसकी आंखें फटी की फटी रह गई अंदर का गरमा गरम नजारा देखकर उसके होश उड़ गए,,,,
 
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