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- Dec 5, 2013
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जहां एक तरफ संजू एक एक करके अपनी मामीयो को अपनी नीचे लाने की कोशिश में लगा हुआ था और अपनी दो मामी को तो वह अपनी वासना का शिकार बना चुका था ऐसा नहीं था कि एक औरत को प्राप्त करने की बात ना से सो समझे नहीं थी एक मर्द से सुख पाने के लिए उसकी दोनों मामीया भी तड़प रही थी,,,, बस अवसर की तलाश में थी और संजू के आने पर उन्हें वह सुनहरा मौका मिल गया था और,,, संजू के साथ-साथ उसकी दोनों मामी थी इस मौके को अपने हाथ से जाने देना नहीं चाहती थी और इस मौके का भरपूर फायदा उठाते हुए वह दोनों ने पहली बार एक जवान मर्द की मर्दानगी को अपनी चूत के अंदर महसूस की थी,,,,,,,,
संजू और मोहिनी
जहां गांव आने के बाद संजू अपना उल्लू सीधा करने में लगा हुआ था वहीं दूसरी तरफ शहर में मनीषा और मोहिनी दोनों एक दूसरे के बेहद करीब आती जा रहे थे मोहिनी पहले से ही अपनी मां के जिस्मानी अंग का आनंद ले चुकी थी इसलिए औरत के साथ संबंध बनाने में उसे बिल्कुल भी दिक्कत नहीं आती थी और इसी अनुभव का लाभ लेते हुए वहां अपनी मौसी की लड़की के साथ भी जिस्मानी ताल्लुकात बना लेती है और इस रिश्ते से वह दोनों बेहद खुश थी और किसी भी तरह से इस रिश्ते को अपने आनंद को और बढ़ावा दे रही थी और इसी के चलते वह दोनों शाम के वक्त बाजार में सब्जियां खरीद रही थी मनीषा अपने जरूरत की सब्जियों को खरीद चुकी थी लेकिन अब उनकी असली जरूरत की पूर्ति के लिए वह दोनों एक ककड़ी के ठेले पर जाकर खड़ी हो गई,,,,,,, मनीषा ठेले पर से कड़ी को उठाकर इधर-उधर घूमा कर उसकी मजबूती की जांच परख करने लगी,,, लेकिन ककड़ी बहुत नाजुक और कमजोर थी और पतली भी बहुत थी,,, मनीषा हाथ में ली हुई ककड़ी को मोहिनी की तरफ दिखाते हुए इशारों में ही पूछ रही थी तो मोहिनी बोली,,,,।
रहने दो दीदी ककड़ी कुछ ठीक नहीं लग रही है,,,, हम कहीं और से ले लेंगे,,,।
(इतना सुनते ही वह ठेले वाला बोला)
अरे अरे क्या कह रही हो बहन इतनी अच्छी तो ककड़ी है नरम नरम खाने में बहुत मजा आएगा,,,
नहीं नहीं रहने दो भैया ककड़ी कुछ ज्यादा ही कमजोर नजर आ रही है,,,(इतना कहने के साथ ही मनीषा हाथ मिली हुई कड़ी को ठेले पर वापस रख दी और आगे बढ़ने लगी कि तभी मन ही मन में धीरे से वह ठेले वाला बुदबुदाया,,,,)
संजू अपनी मौसी की लड़की क साथ
साली पता नहीं क्या करेंगी लोग नरम नरम ढूंढते हैं और यह दोनों कड़क ककड़ी ढूंढ रही है पता नहीं खाएंगी की गांड में डालेंगी,,,,,,,,
(उसे ठेले वाले की बुदबुदाने की आवाज दोनों ने सुन ली थी,,, और एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा दी क्योंकि चाहे जो हो वह ठेले वाला सच ही कह रहा था,,,, उसके कहने का मतलब को दोनों अच्छी तरह से समझ गई थी इसलिए वहां से आगे बढ़ जाना ही दोनों ने उचित समझा क्योंकि वह दोनों ठेले वाले से बहस करना नहीं चाहती थी,,,, उसे ठेले वाले से इस समय बहस करने का मतलब था कि दोनों को शर्मिंदगी उठाना इसलिए दोनों चलती बनी थी,,,)
क्या करें दीदी अपने काम का तो चीज मिला नहीं,,,(मोहिनी इधर-उधर नजर घूमाते हुए बोली,)
मैं तो कहती हूं ले लेना चाहिए था कुछ ना ही सही तो पतली काकड़ी ही सही,,,
नहीं दीदी उतने से मजा नहीं आने वाला था कुछ मोटा तगड़ा लंबा हो तो मजा आवे,,,,(मोहिनी इतना का ही रही थी कि उसे मार्केट के बाहर एक थैला नजर आया जिस पर बड़े-बड़े मोटे बैगन रखे हुए थे और वह उत्साहित होते हुए बोली,,,)
संजू अपनी छोटी वाली मामी की चुदाई करता हुआ
दीदी मिल गया वो देखो,,(उंगली से इशारा करते हुए मोहिनी बोली तो मनीषा भी उस ठेले पर रखे हुए बैगन को देखकर खुश हो गई और दोनों जल्दी-जल्दी उस ठेले के करीब जाने लगी,,,, दोनों बैगन के ठेले पर पहुंच चुके थे और उत्साहित भरे अंदाज में दोनों ठेले पर से बैगन हाथ में लेकर उसका भाव पूछ रहे थे ऐसा लग रहा था कि मानो उनके हाथ में बैगन नहीं बल्कि कोई मोटा तगड़ा लंड हो,,,)
अरे कैसे दिए भैया,,,(एक मोटा सा लंबा सा बैगन हाथ में लेकर मनीषा बोली)
20 रुपया का अढी सो हे बहन जी,,,,,(अपने तराजू पर लोहे का बाट रखते हुए बोला,,,)
अरे भैया 50 का अढी सो ग्राम दोगे तो भी दीदी ले लेगी,,,(मोहिनी एकदम से उत्साहित होते हुए बोली,,,)
ऐसा क्यों बहन जी,,,,( वह ठेले वाला आश्चर्य जताते हुए बोला ,,,,)
अरे तुम नहीं जानते भैया दीदी का यह फेवरेट सब्जी है इसे खाए बिना तो दीदी को नींद नहीं आती ,,,,,
संजू अपने मां क घर पर अपनी की चुदाई करता हुआ
यह बात है तब तो बहन जी हमारा घाटा हो गया पहले पता होता तो जरूर ₹50 लगा कर देता,,,,
चलो चलो रहने दो जल्दी से वजन करो हमें देर हो रही है घर जाना है,,,,( मनीषा मोहिनी को आंख दिखाते हुए बोली,,,,,, और वह खेलने वाला जल्दी से वजन करके बैगन को एक पॉलिथीन की थैली में भरकर मनीषा के हाथ में पकड़ा दिया वह नासमझ सीधा-साधा ठेले वाला मोहिनी की बातों को कहां समझ में वाला था उसे क्या मालूम था कि आखरी लड़कियां खाने वाली शब्जियो से भी अपनी वासना की पूर्ति करती हैं,,,)
तू एकदम बुद्धू है मोहिनी अगर वह ठेले वाला समझ जाता तो,,,,
संजू अपनी मौसी की छूट का मजा लेता हुआ
क्या दीदी तुम भी बेकार में डर रही हो अच्छी नहीं उसे ठेले वाले को कितना सीधा-साधा है उसे क्या पता कि हम बैगन का भर्ता बनाने वाले हैं या बैगन को अपने भोसड़ी में डालने वाले हैं,,,,।
बाप रे मोहनी तु कितनी बेशरम हो गई है,,,,
अब दीदी तुम्हारे साथ मजाक नहीं करूंगी तो किसके साथ करूंगी,,,,
चल ठीक है,,,,,, ले थैला पकड़ में स्कूटी बाहर निकालती हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही मनीषा हाथ में लिया हुआ तेरा मोहिनी को पकड़ा दिया और आगे बढ़कर स्कूटी जहां पार्क की थी वहां से स्कूटी चालू करके मुख्य सड़क पर आ गई ,,, और मुस्कुराते हुए मोहिनी स्कूटी के पीछे बैठ गई और दोनों अपने घर की तरफ निकल गए,,,,,,
रात के 11:00 बज रहे थे मोहिनी और मनीषा जल्दी-जल्दी खाना खाकर झूठ बर्तनों को साफ करके घर की साफ सफाई करके दोनों कमरे में इकट्ठे हो गए थे,,,,, मनीषा ने पहले से ही बाजार से ले हुए बैगन को एक मोटे तगड़े बैगन को अपने साथ कमरे में ले आई थी,,,,, जो की टेबल पर रखा हुआ था जिसे देखकर मोहिनी बोली,,,।
संजू की मामी नहाते हुए
दीदी आज तो बहुत मजा आएगा ,,,,
अरे इसीलिए तो खरीद कर लाई हूं उंगली से ज्यादा मजा नहीं आता,,,
सच कह रही हो दीदी,,,,, रुको मैं पेशाब करके आती हूं,,,,,(इतना कहने के साथ ही मोहिनी चलने को हुई तो पीछे से आवाज लगाते हुए मनीष बोली रुक मैं भी आती हूं मुझे भी बड़े जोरों की लगी है,,,, और थोड़ी देर में दोनों बात के दरवाजे तक पहुंच गई,,,, मोहिनी बाथरूम का दरवाजा खोल कर अंदर प्रवेश करने के बाद दरवाजा बंद करने ही जा रही थी कि मनीषा तुरंत अपना हाथ आगे बढ़कर दरवाजे पर अपना हाथ रख दिया और उसे रोकते हुए मदहोशी भरे नजरों से मोहिनी की तरफ देखते हुए बोली,,,)
मोहिनी और मनीषा
आज दोनों साथ में करते हैं,,,,,।
(और इतना कहने के साथ ही मनीषा भी बाथरुम के अंदर घुस गई और दरवाजा बंद कर दी रात के 11:00 बज रहे थे और इस समय मनीषा के पापा खाना खाकर अपने कमरे में आराम कर रहे थे और वैसे भी मनीषा के पापा एक बार खाना खाने के बाद कमरे में प्रवेश करते थे तो सुबह ही कमरे से बाहर निकलते थे इसलिए मनीषा पूरी तरह से निश्चित थी आज उसके दिलों दिमाग पर वासना का तूफान छाया हुआ था आज उसे संजू की कमी महसूस हो रही थी आज वह अपनी चूत में संजू के मोटे तगड़े लंड को महसूस करना चाहती थी लेकिन इस समय ऐसा मुमकिन नहीं था,,,, क्योंकि संजू गांव गया हुआ था,,,,,
दोनों चचेरी बहनों की आंखों में मदहोशी साफ नजर आ रही थी,,,, बाथरुम का दरवाजा बंद करते ही मनीषा मोहिनी का हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींची और उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपने बदन से एकदम से चिपका दी उसके लाल-लाल होठ दहक रहे थे जिस पर मनीषा अपने हॉट रखकर उसे चुंबन करना शुरू कर दी,,,, पल भर में ही दोनों एकदम मस्त हो गई मनीषा मोहिनी के लाल-लाल होठों का रसपान करते हुए अपने दोनों हथेली को उसके गोल-गोल नितंबों पर रखकर उसे कसके अपनी हथेली से दबा ली और उसे एकदम से अपनी चूत से सटा ली,,,,
नंगी गांड देखने क बाद संजू
दोनों ने कुर्ती और पैजामा पहनी हुई थी दोनों का बदन जवानी की आग से झुलस रहा था,,,, मनीषा का चुंबन लगातार जारी था मोहिनी भी पूरी तरह से मत हो जा रही थी और वह भी मनीषा की तरह दोनों अपने हथेली को मनीषा की गांड पर रखकर उसे जोर-जोर से दबा रही थी दोनों जवानी से भरी हुई थी दोनों की गांड एकदम नरम नरम और मुलायम थी,,,,,,, दोनों पागलों की तरह एक दूसरे के नितंबों से खेल रही थी,,,,,, तभी मनीषा हाथ ऊपर करके शौवर चालू कर दी और शावर में से ठंडे पानी की बौछार उन दोनों पर होने लगी और वह दोनों भीगने लगी देखते ही देखते दोनों का कुर्ता और पैजामा ठंडे पानी से भीग गया लेकिन दोनों लगातार चुंबन से जुड़ी हुई थी दोनों पागलों की तरह एक दूसरे की गांड से ही खेल रही थी कुर्ते का कपड़ा पतला होने की वजह से पल भर में ही गीला होते ही दोनों की संत्री जैसी चूचियां एकदम से उजागर हो गई,,, और मनीषा मोहिनी के नितंबों पर से अपनी दोनों हथेली को हटाते हुए दोनों हथेलियों को मोहिनी के संतरो पर रखकर उसे दबाना शुरू कर दि और मोहिनी के मुख से गरमा गरम शिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,,,।
मनीषा और मोहिनी
सहहहह आहहहहहह दीदी,,,,, बहुत मजा आ रहा है दीदी,,,,,,,,,।
(इतना सुनते ही कमातुर होकर मनीषा मोहिनी के कुर्ते की दोनों ऊपर के बदन को खोल दी जिसकी वजह से उसकी चूची एकदम साफ नजर आने लगी क्योंकि वह कुर्ते के अंदर ब्रा नहीं पहनी थी,,,, मोहिनी की नंगी चूची और चूची की शोभा बढ़ा रहे उसके छुहारे को देखते ही मनीषा का धैर्य जवाब देने लगा और वह तुरंत अपना होठ मोहिनी की चूची पर रखकर उसे पीना शुरू कर दी मोहिनी मनीषा की हरकत से पूरी तरह से पागल होने लगी और वह कुर्ते के ऊपर से ही मनीषा की चूची को दबाना शुरू कर दी दोनों एक दूसरे की चूची से मजा ले रहे थे दोनों पागल हो जा रहे थे बाथरुम के अंदर दोनों पेशाब करने के लिए आई थी लेकिन दोनों मस्ती के सागर में डूब गए और दोनों पेशाब करना भूल गए देखते ही देखते मनीषा बेसब्र होते हुए एक-एक करके मोहिनी के कुर्ते के सारे बटन खोल दी और उसे तुरंत उसके बदन से हटाकर कमर के ऊपर वह से पूरी तरह से नंगी कर दी ऐसा करने के साथ ही मनीषा बारी-बारी से मोहिनी की दोनों चूचियों को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दी और दूसरी तरफ मोहिनी अपनी हथेली को धीरे से मनीषा के पजामे के अंदर डालकर उसकी नंगी चूत को मसलना शुरू कर दी जो की पूरी तरह से ठंडे पानी में डूबने के बावजूद भी एकदम गरम महसूस हो रही थी दोनों के मुख से गरमा गरम शिसकारी की आवाज फूट रही थी,,,, दोनों एक दूसरे से कुछ भी नहीं कह रहे थे बस एक दूसरे के अंगों से बहुत कुछ कह दे रहे थे,,,,,
मनीषा और मोहिनी
मनीषा तो मोहिनी की चूची से कैसे खेल रही थी जैसे मर्द औरत की चूची से खेलता है दोनों एक दूसरे को मजा देने में लगे हुए थे देखते ही देखते खुद मनीषा मोहिनी की चूची को मुंह में भरकर पीते हुए ही अपने हाथों से ही अपने कुर्ते का बटन खोलने लगी और उसे पर घर में ही अपने बदन से आजाद करके बाथरूम में फेंक दी वह भी कमर के ऊपर नंगी हो चुकी थी और फिर जो क्रिया वह मोहिनी की चूची के साथ कर रही थी वही क्रिया वह मोहिनी से भी करवाना चाहती थी इसलिए अपना हाथ आगे बढ़कर बिना कुछ कहे मोहिनी के सर पर हाथ रखकर उसे अपनी तरफ खींचने लगी और देखते ही देखते मोहिनी भी मनीषा की चूची को दशहरी आम का टिकोरा समझ कर मुंह में भरकर पीना शुरू कर दी इससे मनीषा पूरी तरह से मदहोश हो गई और वह अपने हाथों से ही अपने पजामी को नीचे सरकाना शुरू कर दी और जैसे ही वह धीरे-धीरे अपने पजामी को सरकाना कर घुटनों तक लाई वह पर के सहारे से अपने पजामी को अपनी लंबी चिकनी टांगों से बाहर निकाल कर बाथरूम के अंदर पूरी तरह से नंगी हो गई,,,,,,
मनीषा बिस्तर पर तड़पती हुयी
मोहिनी को यह एहसास होते ही की मनीषा पूरी तरह से नंगी हो गई है वह अपना हाथ उसकी दोनों टांगों के बीच ले जाकर उसकी चूत पर रखकर जोर-जोर से मसलना शुरू कर दी दोनों सावर के पानी में ऐसे भीग रहे थे मानो सावन के बरसात में भीग रहे हो,,,,, मनीषा के बदन में मस्ती छा रही थी एक तो उसकी चूची को मोहिनी मुंह में लेकर पी रही थी और दूसरे अपनी हथेली से उसकी चूत को रगड़ रगड़ कर गर्म कर रही थी और अगले ही पल मोहिनी शरारत दिखाते हुए अपनी बीच वाली उंगली को सीधे मनीषा की चूत में प्रवेश करा दी और उसे अंदर बाहर करने लगी जिसकी वजह से मनीषा के तन बदन में मदहोशी छाने लगी,,,,,,,,, मनीषा को मोहिनी की उंगली से चुदाई का मजा मिल रहा था वह मस्त हुए जा रही थी,,,,, देखते ही देखते मोहिनी भी अपने कपड़ों को उतार कर पूरी तरह से नंगी हो गई अब बाथरूम के अंदर दो-दो नंगी जवानी अपना जलवा बिखेर रही थी दुनिया से बेखबर,,,, होकर दोनों एक दूसरे के अंगों से मजा लूट रही थी,,,,,।
शावर से पानी लगातार झरने की तरह दोनों के बदन पर गिर रहा था,,, दोनों सावन की बौछार की तरह कृत्रिम बारिश में भीग रही थी और वह भी रात्रि के समय पानी ठंडा होने के बावजूद भी दोनों की जवानी की गर्मी को शांत करने में नाकामयाब होता जा रहा था,,,,,, मोहिनी मनीषा की दोनों चूचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर पी रही थी जिसकी वजह से मनीषा के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकल रही थी,,,,, मोहिनी पागलों की तरह उसके वक्ष स्थल से खेल रही थी जोकी धीरे-धीरे दशहरी आम की तरह रसीली होते जा रही थी,,,,, दोनों की चुचियों का आकार दशहरी आम के टीकोरे से बाहर निकाल कर दशहरी आम की तरह होती जा रही थी जो कि अपने पूरे शबाब पर खिलती चली जा रही थी,,,,।
मनीषा अपने कपडे उतारते हुए
दोनों लड़कियां चुदाई का आनंद लूट चुकी थी और वह भी एक ही लड़के के साथ और वह बात संजू संजू अपनी बहन के साथ-साथ अपनी मौसी की लड़की की भी जमकर चुदाई कर चुका था दोनों को मोटे तगड़े लंड का आनंद दे चुका था इसलिए तो दोनों पूरी तरह से मदहोश होकर संजू की के हाजिरी में अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए एक दूसरे के अंगों का सहारा ले रही थी,,,, मोहिनी के प्यास बढ़ते जा रही थी वह पानी में भीगते हुए धीरे-धीरे अपने होठों को उसके बदन से सटाते हुए नीचे की तरफ आ रही थी,,,, देखते ही देखते मोहिनी मनीषा की गहरी नाभी तक पहुंच गई और उसकी नाभि में अपनी जीभ डालकर चाटना शुरू कर दी,,, थी।
मनीषा पागल हुए जा रही थी वर हर तरीके से मोहिनी उसके ऊपर अपनी हरकतों से कब्जा जमाती चली जा रही थी,,,,,,, औरत के अंगों से खेलने उसे अच्छी तरह से आता था या खेल उसने अपनी मां के साथ ही खेली थी,,, और उसे अच्छा खासा अनुभव हो गया था,,,,।
सहहहह आहहहहह मोहिनी तू तो मुझे पागल कर देगी,,,,
ओहहहह दीदी तुम्हारा हुस्न भी मुझे पागल कर देगा तुम्हारी चुत कितनी कचोरी की तरह फूल गई है,,,,।(अपनी उंगली को चूत के फुले हुए हिस्से पर घूमाते हुए)
सहहहहहह,,,,,, मेरी चूत में आग लगी हुई है मोहिनी,,,,,
(मनीषा का इतना कहना था कि मोहिनी तुरंत अपने प्यार से होठों को मनीषा की चूत पर रख दी और जैसे ही मोहिनी ने मनीषा की चूत पर अपने होंठ को रखी मनीषा एकदम से तड़प उठी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें तुरंत ही उसके दोनों हाथ,,, मोहिनी के सर पर रख दिया और उसे कसके अपनी चूत से सटा दी मोहिनी ने तुरंत अपनी चीज बाहर निकाल कर उसे मनीषा की चूत के अंदर प्रवेश कर दी और उसकी मलाई को चाटना शुरू कर दी मनीष पागल हो जा रही थी मदहोशी उसके दिलों दिमाग पर छा रही थी वह बिल्कुल बदहवास सी हो गई थी उसे बिल्कुल भी होश नहीं था वह मस्ती के सागर में गोते लगाने लगी थी वैसे भी वह जब मोहिनी के साथ बाथरूम की तरफ आ रही थी तो वह पेशाब करने के लिए ही आई थी लेकिन बाथरूम के अंदर दोनों जवानी के नशे में इस कदर खो गए थे की पेशाब करना भूल गए थे लेकिन मोहिनी की कामुक हरकत की वजह से एक बार फिर से मनीषा को बड़े जोरों की पेशाब लगने लगी और पेशाब की तीव्रता बढ़ने लगी साथ ही उत्तेजना के चरम सीमा पर पहुंचकर वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाई और लाख रोकने के बावजूद भी उसे पेशाब की तीव्रता रुकी नहीं और उसकी गुलाबी छेद से पेशाब की धार फूट पड़ी,,,,, लेकिन जवानी और मदहोशी के जोश में खो चुकी मोहिनी पर इसका बिल्कुल भी प्रभाव नहीं पड़ा बल्कि वह तो मनीषा के ही हरकत से इस कदर प्रभावित हुई कि वह और भी ज्यादा उत्तेजना से भरकर अपने लाल लाल प्यास होठों को खोल दी और मनीषा अपने पेशाब की धार को मोहिनी के मुंह में गिरना शुरू कर दी यह हरकत मनीषा और मोहिनी दोनों के लिए लज्जा और शर्म से डूब जाने वाली जैसी थी लेकिन इस समय दोनों के सर पर वासना का भूत सवार था जिसके चलते पेशाब करने वाली हरकत भी बेहद मदहोश कर देने वाली लग रही थी,,,,,,।
अपनी हरकत पर तो खुद मनीषा शर्मसार हुए जा रही थी लेकिन मोहिनी की हरकत को देखकर वह लज्जा से मरी जा रही थी ,,,, लेकिन आनंद की प्रकाष्ठा से उसे बहुत आनंद प्राप्त हो रहा था वह मस्त हुए जा रही थी इस तरह के पल को उसने कभी जी नहीं थी और ना ही कभी इस हरकत के बारे में कल्पना ही की थी लेकिन आज कल्पना से परे वह इस पल को पूरी तरह से जी लेना चाहती थी और तब तक अपनी चूत को मोहिनी के होठों से सटाई रह गई जब तक की उसके गुलाबी छेद से पेशाब की आखिरी बूंद तक बाहर नहीं निकल गई और हैरान कर देने वाली बात यह थी कि मोहिनी भी तब तक अपने होठों को मनीषा की चूत से हटाई नहीं जब तक की उसकी चूत के गुलाबी छेद से निकले पेशाब की हर एक बंद को अपने गले के नीचे गटक ना ले गई,,,,,, दोनों मस्त हो चुके थे मोहिनी नहीं अपनी हरकत की वजह से मनीषा के तन बदन में उत्तेजना की वह लहर को उठाई थी कि जिसका शमन होना इस समय नामुमकिन सा लग रहा था,,,,,।
मोहिनी अपनी जगह पर खड़ी हो गई और उसे भी बड़े जोड़ों की पेशाब लगी हुई थी और वह भी अपनी गुलाबी छेद से पेशाब की धार मारना शुरू कर दी लेकिन सीधे मनीषा की चूत पर और उसके चुत पर पेशाब की धार बड़े जोरों की पड़ रही थी जिससे उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी थी अब वह दोनों अपनी उत्तेजना को दबाने में पूरी तरह से नाकामयाब साबित हो रहे थे जल्द से जल्द उन दोनों को अपनी चूत में एक मोटा तगड़ा बैगन चाहिए था क्योंकि लंड की व्यवस्था इस समय उन दोनों के पास बिल्कुल भी नहीं था इसलिए बेगन से ही काम चलाना था,,,।
अपने गीले कपड़ों को छोड़कर वह दोनों बाथरूम से एकदम नग्न अवस्था में ही बाहर निकल गए क्योंकि किसी के द्वारा देखे जाने का डर दोनों में बिल्कुल भी नहीं था और वह दोनों नंगी ही अपने कमरे तक चलकर गई और कमरे का दरवाजा खोलकर कमरे में प्रवेश करते ही कमरे का दरवाजा बंद कर दी और फिर जैसे ही मनीषा बिस्तर पर पीठ के बल लेटी मोहिनी तुरंत बिस्तर पर चढ़ गई और उसके कंधों के लग अपने दोनों पैर के घुटनों को इर्द-गिर्द रखकर अपनी चूत को उसके होठों से सटा दिया और अपनी गांड को गोल-गोल घूमते हुए अपनी चूत को उसके चेहरे पर रगड़ना शुरू कर दी मोहिनी को अच्छी तरह से मालूम था कि उसे अब क्या करना है और वह भी अपने दोनों हाथों को मोहिनी की गांड पर रखकर उसकी चूत पर अपने होंठ रख कर चाटना शुरू कर दी दोनों आनंद के सागर में गोते लगाने लगे,,,, मोहिनी तो अपना एक हाथ पीछे की तरफ लाकर मनीषा की दोनों टांगों के बीच के पतली दरार में अपनी हथेली को रखकर जोर-जोर से रगड़ना शुरू कर दी जिससे वह भी पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी,,,,, कुछ देर तक दोनों इसी तरह से मजा लेते रहे लेकिन अब दोनों को असली मजा चाहिए था इसीलिए मोहिनी धीरे से बिस्तर पर से नीचे उतरी और टेबल पर रखें मोटे से बैगन को अपने हाथ में ले ली लेकिन मनीषा जानती थी कि बैगन का आकार और मोटाई उसकी चूत के लिए कुछ ज्यादा ही बड़ा है इसलिए वह बोली,,,।
अरे मोहिनी थोड़ा सा सरसों का तेल ले ले इस तरह से घुसेगा नहीं,,,।
ठीक कह रही हो दीदी कहीं ऐसा ना हो कि मजे लेने के चक्कर में चूत फट जाए,,,,, रुको मैं अभी तेल लेकर आती हूं,,,,(और इतना कहने के साथ ही मोहिनी नग्न अवस्था में ही कमरे से बाहर निकल गई और थोड़ी ही देर में सरसों के तेल की कटोरी कमरे में लेकर आए और कमरे का दरवाजा बंद करके अच्छे से बैगन पर तेल लगाना शुरू कर दी मानो के जैसे एक मर्द अपने लंड पर छोड़ने से पहले तेल लगाकर उसकी मालिश करता है,,,,, मनीषा मोहिनी की हरकत देखकर पूरी तरह से काम ज्वाला में सुलगने लगी थी उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मानो उसके सामने मोहिनी नहीं बल्कि उसका भाई संजू अपने लंड पर तेल लगा रहा हो,,,, बैगन को अच्छी तरह से तैयार करने के बाद वह वापस बिस्तर पर घुटनों के बाल चढ़ गई और देखते ही देखते हैं वहां मनीषा की दोनों टांगों के बीच आ गई और इस बार मोहिनी उसे बेगन को अपनी दोनों टांगों के बीच लगाकर उसे मनीषा की चूत में डालने का प्रयास करने लगी मानो कि सच में उसके पास कोई लंड हो और इस तरह से मनीषा का भी आनंद बढ़ता जा रहा था वह मस्ती के सागर में गोते लगाने लगी थी पहले से ही वह संजू के लंड को अपनी चूत में ले चुकी थी इसलिए थोड़ी दिक्कत के साथ लेकिन धीरे-धीरे देखते ही देखते बैंगन पूरा का पूरा मनीषा की चूत में समा गया जैसे-जैसे बैगन छूट के अंदर प्रवेश कर रहा था वैसे-वैसे मनीष के चेहरे का हाव-भाव बदलते जा रहा था वह मस्त हुए जा रही थी,,,,,,।
अब कैसा लग रहा है दीदी,,,,,?
सहहहह ,,,,,,, मोहिनी बहुत अच्छा लग रहा है बहुत मजा आ रहा है तूने तो कमाल कर दी ऐसा लग रहा है कि सच में कोई मुझे चोद रहा है,,,,सहहहहहह आहहहहहह जोर-जोर से अंदर बाहर कर,,,,,आहहहहहह,,,।
सनुष्ट होने क बाद मोहिनी और मनीषा
फिर क्या था मोहिनी अपनी चूत से सटाकर बैगन को मनीषा की चूत में अंदर बाहर करने लगी उसे बहुत मजा आ रहा था दोनों मस्ती के सागर में गोते लगा रहे थे लेकिन मोहिनी को भी अपनी चूत में उसे बेगन को लेना था,,,, जल्दी-जल्दी वह मनीषा का पानी निकाल दी मनीष पूरी तरह से तृप्त हो चुकी थी और आप बड़ी थी मोहिनी की जिस तरह की क्रिया मोहिनी ने मनीषा के साथ की थी मनीषा भी खुले दिल से एक बार फिर से उसे पर सरसों का तेल लगाकर मोहिनी की चूत में डालना शुरू की और फिर मोहिनी एकदम मस्त हो गई दोनों झड़ जाने के बाद मनीषा ने बैगन को एक तरफ रखकर अपनी चूत को मनीषा की चूत से सटाकर ऊपर नीचे करके रगड़ना शुरू कर दी इस तरह से दोनों की गर्मी और ज्यादा बढ़ने लगी थी दोनों पागल हुए जा रहे थे दोनों एक दूसरे की चूचियां दिखा रहे थे और इसी तरह से कब दोनों एक दूसरों को बाहों में दिए नींद की आगोश में चले गए पता ही नहीं चला,,,,।
वहीं दूसरी तरफ आज संजू अपनी सुहानी मामी को विश्वास में लेकर अपनी सबसे छोटी वाली मामी को उसके घर से लेकर आया था गाना गाने के लिए और वह भी खुशी-खुशी गाना बजाना में शामिल होने के लिए बरसों की तकरार को मिटा कर एक होने के लिए आई थी और घर के सभी लोग उसका दिल से स्वागत भी किए थे जिससे वह बहुत खुश थी संजू की मेहनत रंग लाई थी संजू ने एक बार फिर से अपनी छोटी वाली मामी को इस घर से जोड़ दिया था इस बात की खुशी घर के सभी सदस्य को थी खास करके सुहानी को क्योंकि सुहानी भी यही चाहती थी,,,,, गाना बजाना खत्म होने के बाद रात के तकरीबन 11:45 बजे जब सब लोग अपने-अपने घर चले गए तो संजू सबकी राजा मंडी से अपनी छोटी वाली मामी को उसके घर पर छोड़ने के लिए जाने लगा,,,,।
संजू और मोहिनी
जहां गांव आने के बाद संजू अपना उल्लू सीधा करने में लगा हुआ था वहीं दूसरी तरफ शहर में मनीषा और मोहिनी दोनों एक दूसरे के बेहद करीब आती जा रहे थे मोहिनी पहले से ही अपनी मां के जिस्मानी अंग का आनंद ले चुकी थी इसलिए औरत के साथ संबंध बनाने में उसे बिल्कुल भी दिक्कत नहीं आती थी और इसी अनुभव का लाभ लेते हुए वहां अपनी मौसी की लड़की के साथ भी जिस्मानी ताल्लुकात बना लेती है और इस रिश्ते से वह दोनों बेहद खुश थी और किसी भी तरह से इस रिश्ते को अपने आनंद को और बढ़ावा दे रही थी और इसी के चलते वह दोनों शाम के वक्त बाजार में सब्जियां खरीद रही थी मनीषा अपने जरूरत की सब्जियों को खरीद चुकी थी लेकिन अब उनकी असली जरूरत की पूर्ति के लिए वह दोनों एक ककड़ी के ठेले पर जाकर खड़ी हो गई,,,,,,, मनीषा ठेले पर से कड़ी को उठाकर इधर-उधर घूमा कर उसकी मजबूती की जांच परख करने लगी,,, लेकिन ककड़ी बहुत नाजुक और कमजोर थी और पतली भी बहुत थी,,, मनीषा हाथ में ली हुई ककड़ी को मोहिनी की तरफ दिखाते हुए इशारों में ही पूछ रही थी तो मोहिनी बोली,,,,।
रहने दो दीदी ककड़ी कुछ ठीक नहीं लग रही है,,,, हम कहीं और से ले लेंगे,,,।
(इतना सुनते ही वह ठेले वाला बोला)
अरे अरे क्या कह रही हो बहन इतनी अच्छी तो ककड़ी है नरम नरम खाने में बहुत मजा आएगा,,,
नहीं नहीं रहने दो भैया ककड़ी कुछ ज्यादा ही कमजोर नजर आ रही है,,,(इतना कहने के साथ ही मनीषा हाथ मिली हुई कड़ी को ठेले पर वापस रख दी और आगे बढ़ने लगी कि तभी मन ही मन में धीरे से वह ठेले वाला बुदबुदाया,,,,)
संजू अपनी मौसी की लड़की क साथ
साली पता नहीं क्या करेंगी लोग नरम नरम ढूंढते हैं और यह दोनों कड़क ककड़ी ढूंढ रही है पता नहीं खाएंगी की गांड में डालेंगी,,,,,,,,
(उसे ठेले वाले की बुदबुदाने की आवाज दोनों ने सुन ली थी,,, और एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा दी क्योंकि चाहे जो हो वह ठेले वाला सच ही कह रहा था,,,, उसके कहने का मतलब को दोनों अच्छी तरह से समझ गई थी इसलिए वहां से आगे बढ़ जाना ही दोनों ने उचित समझा क्योंकि वह दोनों ठेले वाले से बहस करना नहीं चाहती थी,,,, उसे ठेले वाले से इस समय बहस करने का मतलब था कि दोनों को शर्मिंदगी उठाना इसलिए दोनों चलती बनी थी,,,)
क्या करें दीदी अपने काम का तो चीज मिला नहीं,,,(मोहिनी इधर-उधर नजर घूमाते हुए बोली,)
मैं तो कहती हूं ले लेना चाहिए था कुछ ना ही सही तो पतली काकड़ी ही सही,,,
नहीं दीदी उतने से मजा नहीं आने वाला था कुछ मोटा तगड़ा लंबा हो तो मजा आवे,,,,(मोहिनी इतना का ही रही थी कि उसे मार्केट के बाहर एक थैला नजर आया जिस पर बड़े-बड़े मोटे बैगन रखे हुए थे और वह उत्साहित होते हुए बोली,,,)
संजू अपनी छोटी वाली मामी की चुदाई करता हुआ
दीदी मिल गया वो देखो,,(उंगली से इशारा करते हुए मोहिनी बोली तो मनीषा भी उस ठेले पर रखे हुए बैगन को देखकर खुश हो गई और दोनों जल्दी-जल्दी उस ठेले के करीब जाने लगी,,,, दोनों बैगन के ठेले पर पहुंच चुके थे और उत्साहित भरे अंदाज में दोनों ठेले पर से बैगन हाथ में लेकर उसका भाव पूछ रहे थे ऐसा लग रहा था कि मानो उनके हाथ में बैगन नहीं बल्कि कोई मोटा तगड़ा लंड हो,,,)
अरे कैसे दिए भैया,,,(एक मोटा सा लंबा सा बैगन हाथ में लेकर मनीषा बोली)
20 रुपया का अढी सो हे बहन जी,,,,,(अपने तराजू पर लोहे का बाट रखते हुए बोला,,,)
अरे भैया 50 का अढी सो ग्राम दोगे तो भी दीदी ले लेगी,,,(मोहिनी एकदम से उत्साहित होते हुए बोली,,,)
ऐसा क्यों बहन जी,,,,( वह ठेले वाला आश्चर्य जताते हुए बोला ,,,,)
अरे तुम नहीं जानते भैया दीदी का यह फेवरेट सब्जी है इसे खाए बिना तो दीदी को नींद नहीं आती ,,,,,
संजू अपने मां क घर पर अपनी की चुदाई करता हुआ
यह बात है तब तो बहन जी हमारा घाटा हो गया पहले पता होता तो जरूर ₹50 लगा कर देता,,,,
चलो चलो रहने दो जल्दी से वजन करो हमें देर हो रही है घर जाना है,,,,( मनीषा मोहिनी को आंख दिखाते हुए बोली,,,,,, और वह खेलने वाला जल्दी से वजन करके बैगन को एक पॉलिथीन की थैली में भरकर मनीषा के हाथ में पकड़ा दिया वह नासमझ सीधा-साधा ठेले वाला मोहिनी की बातों को कहां समझ में वाला था उसे क्या मालूम था कि आखरी लड़कियां खाने वाली शब्जियो से भी अपनी वासना की पूर्ति करती हैं,,,)
तू एकदम बुद्धू है मोहिनी अगर वह ठेले वाला समझ जाता तो,,,,
संजू अपनी मौसी की छूट का मजा लेता हुआ
क्या दीदी तुम भी बेकार में डर रही हो अच्छी नहीं उसे ठेले वाले को कितना सीधा-साधा है उसे क्या पता कि हम बैगन का भर्ता बनाने वाले हैं या बैगन को अपने भोसड़ी में डालने वाले हैं,,,,।
बाप रे मोहनी तु कितनी बेशरम हो गई है,,,,
अब दीदी तुम्हारे साथ मजाक नहीं करूंगी तो किसके साथ करूंगी,,,,
चल ठीक है,,,,,, ले थैला पकड़ में स्कूटी बाहर निकालती हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही मनीषा हाथ में लिया हुआ तेरा मोहिनी को पकड़ा दिया और आगे बढ़कर स्कूटी जहां पार्क की थी वहां से स्कूटी चालू करके मुख्य सड़क पर आ गई ,,, और मुस्कुराते हुए मोहिनी स्कूटी के पीछे बैठ गई और दोनों अपने घर की तरफ निकल गए,,,,,,
रात के 11:00 बज रहे थे मोहिनी और मनीषा जल्दी-जल्दी खाना खाकर झूठ बर्तनों को साफ करके घर की साफ सफाई करके दोनों कमरे में इकट्ठे हो गए थे,,,,, मनीषा ने पहले से ही बाजार से ले हुए बैगन को एक मोटे तगड़े बैगन को अपने साथ कमरे में ले आई थी,,,,, जो की टेबल पर रखा हुआ था जिसे देखकर मोहिनी बोली,,,।
संजू की मामी नहाते हुए
दीदी आज तो बहुत मजा आएगा ,,,,
अरे इसीलिए तो खरीद कर लाई हूं उंगली से ज्यादा मजा नहीं आता,,,
सच कह रही हो दीदी,,,,, रुको मैं पेशाब करके आती हूं,,,,,(इतना कहने के साथ ही मोहिनी चलने को हुई तो पीछे से आवाज लगाते हुए मनीष बोली रुक मैं भी आती हूं मुझे भी बड़े जोरों की लगी है,,,, और थोड़ी देर में दोनों बात के दरवाजे तक पहुंच गई,,,, मोहिनी बाथरूम का दरवाजा खोल कर अंदर प्रवेश करने के बाद दरवाजा बंद करने ही जा रही थी कि मनीषा तुरंत अपना हाथ आगे बढ़कर दरवाजे पर अपना हाथ रख दिया और उसे रोकते हुए मदहोशी भरे नजरों से मोहिनी की तरफ देखते हुए बोली,,,)
मोहिनी और मनीषा
आज दोनों साथ में करते हैं,,,,,।
(और इतना कहने के साथ ही मनीषा भी बाथरुम के अंदर घुस गई और दरवाजा बंद कर दी रात के 11:00 बज रहे थे और इस समय मनीषा के पापा खाना खाकर अपने कमरे में आराम कर रहे थे और वैसे भी मनीषा के पापा एक बार खाना खाने के बाद कमरे में प्रवेश करते थे तो सुबह ही कमरे से बाहर निकलते थे इसलिए मनीषा पूरी तरह से निश्चित थी आज उसके दिलों दिमाग पर वासना का तूफान छाया हुआ था आज उसे संजू की कमी महसूस हो रही थी आज वह अपनी चूत में संजू के मोटे तगड़े लंड को महसूस करना चाहती थी लेकिन इस समय ऐसा मुमकिन नहीं था,,,, क्योंकि संजू गांव गया हुआ था,,,,,
दोनों चचेरी बहनों की आंखों में मदहोशी साफ नजर आ रही थी,,,, बाथरुम का दरवाजा बंद करते ही मनीषा मोहिनी का हाथ पकड़ कर उसे अपनी तरफ खींची और उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपने बदन से एकदम से चिपका दी उसके लाल-लाल होठ दहक रहे थे जिस पर मनीषा अपने हॉट रखकर उसे चुंबन करना शुरू कर दी,,,, पल भर में ही दोनों एकदम मस्त हो गई मनीषा मोहिनी के लाल-लाल होठों का रसपान करते हुए अपने दोनों हथेली को उसके गोल-गोल नितंबों पर रखकर उसे कसके अपनी हथेली से दबा ली और उसे एकदम से अपनी चूत से सटा ली,,,,
नंगी गांड देखने क बाद संजू
दोनों ने कुर्ती और पैजामा पहनी हुई थी दोनों का बदन जवानी की आग से झुलस रहा था,,,, मनीषा का चुंबन लगातार जारी था मोहिनी भी पूरी तरह से मत हो जा रही थी और वह भी मनीषा की तरह दोनों अपने हथेली को मनीषा की गांड पर रखकर उसे जोर-जोर से दबा रही थी दोनों जवानी से भरी हुई थी दोनों की गांड एकदम नरम नरम और मुलायम थी,,,,,,, दोनों पागलों की तरह एक दूसरे के नितंबों से खेल रही थी,,,,,, तभी मनीषा हाथ ऊपर करके शौवर चालू कर दी और शावर में से ठंडे पानी की बौछार उन दोनों पर होने लगी और वह दोनों भीगने लगी देखते ही देखते दोनों का कुर्ता और पैजामा ठंडे पानी से भीग गया लेकिन दोनों लगातार चुंबन से जुड़ी हुई थी दोनों पागलों की तरह एक दूसरे की गांड से ही खेल रही थी कुर्ते का कपड़ा पतला होने की वजह से पल भर में ही गीला होते ही दोनों की संत्री जैसी चूचियां एकदम से उजागर हो गई,,, और मनीषा मोहिनी के नितंबों पर से अपनी दोनों हथेली को हटाते हुए दोनों हथेलियों को मोहिनी के संतरो पर रखकर उसे दबाना शुरू कर दि और मोहिनी के मुख से गरमा गरम शिसकारी की आवाज फूट पड़ी,,,,।
मनीषा और मोहिनी
सहहहह आहहहहहह दीदी,,,,, बहुत मजा आ रहा है दीदी,,,,,,,,,।
(इतना सुनते ही कमातुर होकर मनीषा मोहिनी के कुर्ते की दोनों ऊपर के बदन को खोल दी जिसकी वजह से उसकी चूची एकदम साफ नजर आने लगी क्योंकि वह कुर्ते के अंदर ब्रा नहीं पहनी थी,,,, मोहिनी की नंगी चूची और चूची की शोभा बढ़ा रहे उसके छुहारे को देखते ही मनीषा का धैर्य जवाब देने लगा और वह तुरंत अपना होठ मोहिनी की चूची पर रखकर उसे पीना शुरू कर दी मोहिनी मनीषा की हरकत से पूरी तरह से पागल होने लगी और वह कुर्ते के ऊपर से ही मनीषा की चूची को दबाना शुरू कर दी दोनों एक दूसरे की चूची से मजा ले रहे थे दोनों पागल हो जा रहे थे बाथरुम के अंदर दोनों पेशाब करने के लिए आई थी लेकिन दोनों मस्ती के सागर में डूब गए और दोनों पेशाब करना भूल गए देखते ही देखते मनीषा बेसब्र होते हुए एक-एक करके मोहिनी के कुर्ते के सारे बटन खोल दी और उसे तुरंत उसके बदन से हटाकर कमर के ऊपर वह से पूरी तरह से नंगी कर दी ऐसा करने के साथ ही मनीषा बारी-बारी से मोहिनी की दोनों चूचियों को मुंह में लेकर पीना शुरू कर दी और दूसरी तरफ मोहिनी अपनी हथेली को धीरे से मनीषा के पजामे के अंदर डालकर उसकी नंगी चूत को मसलना शुरू कर दी जो की पूरी तरह से ठंडे पानी में डूबने के बावजूद भी एकदम गरम महसूस हो रही थी दोनों के मुख से गरमा गरम शिसकारी की आवाज फूट रही थी,,,, दोनों एक दूसरे से कुछ भी नहीं कह रहे थे बस एक दूसरे के अंगों से बहुत कुछ कह दे रहे थे,,,,,
मनीषा और मोहिनी
मनीषा तो मोहिनी की चूची से कैसे खेल रही थी जैसे मर्द औरत की चूची से खेलता है दोनों एक दूसरे को मजा देने में लगे हुए थे देखते ही देखते खुद मनीषा मोहिनी की चूची को मुंह में भरकर पीते हुए ही अपने हाथों से ही अपने कुर्ते का बटन खोलने लगी और उसे पर घर में ही अपने बदन से आजाद करके बाथरूम में फेंक दी वह भी कमर के ऊपर नंगी हो चुकी थी और फिर जो क्रिया वह मोहिनी की चूची के साथ कर रही थी वही क्रिया वह मोहिनी से भी करवाना चाहती थी इसलिए अपना हाथ आगे बढ़कर बिना कुछ कहे मोहिनी के सर पर हाथ रखकर उसे अपनी तरफ खींचने लगी और देखते ही देखते मोहिनी भी मनीषा की चूची को दशहरी आम का टिकोरा समझ कर मुंह में भरकर पीना शुरू कर दी इससे मनीषा पूरी तरह से मदहोश हो गई और वह अपने हाथों से ही अपने पजामी को नीचे सरकाना शुरू कर दी और जैसे ही वह धीरे-धीरे अपने पजामी को सरकाना कर घुटनों तक लाई वह पर के सहारे से अपने पजामी को अपनी लंबी चिकनी टांगों से बाहर निकाल कर बाथरूम के अंदर पूरी तरह से नंगी हो गई,,,,,,
मनीषा बिस्तर पर तड़पती हुयी
मोहिनी को यह एहसास होते ही की मनीषा पूरी तरह से नंगी हो गई है वह अपना हाथ उसकी दोनों टांगों के बीच ले जाकर उसकी चूत पर रखकर जोर-जोर से मसलना शुरू कर दी दोनों सावर के पानी में ऐसे भीग रहे थे मानो सावन के बरसात में भीग रहे हो,,,,, मनीषा के बदन में मस्ती छा रही थी एक तो उसकी चूची को मोहिनी मुंह में लेकर पी रही थी और दूसरे अपनी हथेली से उसकी चूत को रगड़ रगड़ कर गर्म कर रही थी और अगले ही पल मोहिनी शरारत दिखाते हुए अपनी बीच वाली उंगली को सीधे मनीषा की चूत में प्रवेश करा दी और उसे अंदर बाहर करने लगी जिसकी वजह से मनीषा के तन बदन में मदहोशी छाने लगी,,,,,,,,, मनीषा को मोहिनी की उंगली से चुदाई का मजा मिल रहा था वह मस्त हुए जा रही थी,,,,, देखते ही देखते मोहिनी भी अपने कपड़ों को उतार कर पूरी तरह से नंगी हो गई अब बाथरूम के अंदर दो-दो नंगी जवानी अपना जलवा बिखेर रही थी दुनिया से बेखबर,,,, होकर दोनों एक दूसरे के अंगों से मजा लूट रही थी,,,,,।
शावर से पानी लगातार झरने की तरह दोनों के बदन पर गिर रहा था,,, दोनों सावन की बौछार की तरह कृत्रिम बारिश में भीग रही थी और वह भी रात्रि के समय पानी ठंडा होने के बावजूद भी दोनों की जवानी की गर्मी को शांत करने में नाकामयाब होता जा रहा था,,,,,, मोहिनी मनीषा की दोनों चूचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर पी रही थी जिसकी वजह से मनीषा के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकल रही थी,,,,, मोहिनी पागलों की तरह उसके वक्ष स्थल से खेल रही थी जोकी धीरे-धीरे दशहरी आम की तरह रसीली होते जा रही थी,,,,, दोनों की चुचियों का आकार दशहरी आम के टीकोरे से बाहर निकाल कर दशहरी आम की तरह होती जा रही थी जो कि अपने पूरे शबाब पर खिलती चली जा रही थी,,,,।
मनीषा अपने कपडे उतारते हुए
दोनों लड़कियां चुदाई का आनंद लूट चुकी थी और वह भी एक ही लड़के के साथ और वह बात संजू संजू अपनी बहन के साथ-साथ अपनी मौसी की लड़की की भी जमकर चुदाई कर चुका था दोनों को मोटे तगड़े लंड का आनंद दे चुका था इसलिए तो दोनों पूरी तरह से मदहोश होकर संजू की के हाजिरी में अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए एक दूसरे के अंगों का सहारा ले रही थी,,,, मोहिनी के प्यास बढ़ते जा रही थी वह पानी में भीगते हुए धीरे-धीरे अपने होठों को उसके बदन से सटाते हुए नीचे की तरफ आ रही थी,,,, देखते ही देखते मोहिनी मनीषा की गहरी नाभी तक पहुंच गई और उसकी नाभि में अपनी जीभ डालकर चाटना शुरू कर दी,,, थी।
मनीषा पागल हुए जा रही थी वर हर तरीके से मोहिनी उसके ऊपर अपनी हरकतों से कब्जा जमाती चली जा रही थी,,,,,,, औरत के अंगों से खेलने उसे अच्छी तरह से आता था या खेल उसने अपनी मां के साथ ही खेली थी,,, और उसे अच्छा खासा अनुभव हो गया था,,,,।
सहहहह आहहहहह मोहिनी तू तो मुझे पागल कर देगी,,,,
ओहहहह दीदी तुम्हारा हुस्न भी मुझे पागल कर देगा तुम्हारी चुत कितनी कचोरी की तरह फूल गई है,,,,।(अपनी उंगली को चूत के फुले हुए हिस्से पर घूमाते हुए)
सहहहहहह,,,,,, मेरी चूत में आग लगी हुई है मोहिनी,,,,,
(मनीषा का इतना कहना था कि मोहिनी तुरंत अपने प्यार से होठों को मनीषा की चूत पर रख दी और जैसे ही मोहिनी ने मनीषा की चूत पर अपने होंठ को रखी मनीषा एकदम से तड़प उठी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें तुरंत ही उसके दोनों हाथ,,, मोहिनी के सर पर रख दिया और उसे कसके अपनी चूत से सटा दी मोहिनी ने तुरंत अपनी चीज बाहर निकाल कर उसे मनीषा की चूत के अंदर प्रवेश कर दी और उसकी मलाई को चाटना शुरू कर दी मनीष पागल हो जा रही थी मदहोशी उसके दिलों दिमाग पर छा रही थी वह बिल्कुल बदहवास सी हो गई थी उसे बिल्कुल भी होश नहीं था वह मस्ती के सागर में गोते लगाने लगी थी वैसे भी वह जब मोहिनी के साथ बाथरूम की तरफ आ रही थी तो वह पेशाब करने के लिए ही आई थी लेकिन बाथरूम के अंदर दोनों जवानी के नशे में इस कदर खो गए थे की पेशाब करना भूल गए थे लेकिन मोहिनी की कामुक हरकत की वजह से एक बार फिर से मनीषा को बड़े जोरों की पेशाब लगने लगी और पेशाब की तीव्रता बढ़ने लगी साथ ही उत्तेजना के चरम सीमा पर पहुंचकर वह अपने आप पर काबू नहीं कर पाई और लाख रोकने के बावजूद भी उसे पेशाब की तीव्रता रुकी नहीं और उसकी गुलाबी छेद से पेशाब की धार फूट पड़ी,,,,, लेकिन जवानी और मदहोशी के जोश में खो चुकी मोहिनी पर इसका बिल्कुल भी प्रभाव नहीं पड़ा बल्कि वह तो मनीषा के ही हरकत से इस कदर प्रभावित हुई कि वह और भी ज्यादा उत्तेजना से भरकर अपने लाल लाल प्यास होठों को खोल दी और मनीषा अपने पेशाब की धार को मोहिनी के मुंह में गिरना शुरू कर दी यह हरकत मनीषा और मोहिनी दोनों के लिए लज्जा और शर्म से डूब जाने वाली जैसी थी लेकिन इस समय दोनों के सर पर वासना का भूत सवार था जिसके चलते पेशाब करने वाली हरकत भी बेहद मदहोश कर देने वाली लग रही थी,,,,,,।
अपनी हरकत पर तो खुद मनीषा शर्मसार हुए जा रही थी लेकिन मोहिनी की हरकत को देखकर वह लज्जा से मरी जा रही थी ,,,, लेकिन आनंद की प्रकाष्ठा से उसे बहुत आनंद प्राप्त हो रहा था वह मस्त हुए जा रही थी इस तरह के पल को उसने कभी जी नहीं थी और ना ही कभी इस हरकत के बारे में कल्पना ही की थी लेकिन आज कल्पना से परे वह इस पल को पूरी तरह से जी लेना चाहती थी और तब तक अपनी चूत को मोहिनी के होठों से सटाई रह गई जब तक की उसके गुलाबी छेद से पेशाब की आखिरी बूंद तक बाहर नहीं निकल गई और हैरान कर देने वाली बात यह थी कि मोहिनी भी तब तक अपने होठों को मनीषा की चूत से हटाई नहीं जब तक की उसकी चूत के गुलाबी छेद से निकले पेशाब की हर एक बंद को अपने गले के नीचे गटक ना ले गई,,,,,, दोनों मस्त हो चुके थे मोहिनी नहीं अपनी हरकत की वजह से मनीषा के तन बदन में उत्तेजना की वह लहर को उठाई थी कि जिसका शमन होना इस समय नामुमकिन सा लग रहा था,,,,,।
मोहिनी अपनी जगह पर खड़ी हो गई और उसे भी बड़े जोड़ों की पेशाब लगी हुई थी और वह भी अपनी गुलाबी छेद से पेशाब की धार मारना शुरू कर दी लेकिन सीधे मनीषा की चूत पर और उसके चुत पर पेशाब की धार बड़े जोरों की पड़ रही थी जिससे उसकी उत्तेजना और ज्यादा बढ़ने लगी थी अब वह दोनों अपनी उत्तेजना को दबाने में पूरी तरह से नाकामयाब साबित हो रहे थे जल्द से जल्द उन दोनों को अपनी चूत में एक मोटा तगड़ा बैगन चाहिए था क्योंकि लंड की व्यवस्था इस समय उन दोनों के पास बिल्कुल भी नहीं था इसलिए बेगन से ही काम चलाना था,,,।
अपने गीले कपड़ों को छोड़कर वह दोनों बाथरूम से एकदम नग्न अवस्था में ही बाहर निकल गए क्योंकि किसी के द्वारा देखे जाने का डर दोनों में बिल्कुल भी नहीं था और वह दोनों नंगी ही अपने कमरे तक चलकर गई और कमरे का दरवाजा खोलकर कमरे में प्रवेश करते ही कमरे का दरवाजा बंद कर दी और फिर जैसे ही मनीषा बिस्तर पर पीठ के बल लेटी मोहिनी तुरंत बिस्तर पर चढ़ गई और उसके कंधों के लग अपने दोनों पैर के घुटनों को इर्द-गिर्द रखकर अपनी चूत को उसके होठों से सटा दिया और अपनी गांड को गोल-गोल घूमते हुए अपनी चूत को उसके चेहरे पर रगड़ना शुरू कर दी मोहिनी को अच्छी तरह से मालूम था कि उसे अब क्या करना है और वह भी अपने दोनों हाथों को मोहिनी की गांड पर रखकर उसकी चूत पर अपने होंठ रख कर चाटना शुरू कर दी दोनों आनंद के सागर में गोते लगाने लगे,,,, मोहिनी तो अपना एक हाथ पीछे की तरफ लाकर मनीषा की दोनों टांगों के बीच के पतली दरार में अपनी हथेली को रखकर जोर-जोर से रगड़ना शुरू कर दी जिससे वह भी पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी,,,,, कुछ देर तक दोनों इसी तरह से मजा लेते रहे लेकिन अब दोनों को असली मजा चाहिए था इसीलिए मोहिनी धीरे से बिस्तर पर से नीचे उतरी और टेबल पर रखें मोटे से बैगन को अपने हाथ में ले ली लेकिन मनीषा जानती थी कि बैगन का आकार और मोटाई उसकी चूत के लिए कुछ ज्यादा ही बड़ा है इसलिए वह बोली,,,।
अरे मोहिनी थोड़ा सा सरसों का तेल ले ले इस तरह से घुसेगा नहीं,,,।
ठीक कह रही हो दीदी कहीं ऐसा ना हो कि मजे लेने के चक्कर में चूत फट जाए,,,,, रुको मैं अभी तेल लेकर आती हूं,,,,(और इतना कहने के साथ ही मोहिनी नग्न अवस्था में ही कमरे से बाहर निकल गई और थोड़ी ही देर में सरसों के तेल की कटोरी कमरे में लेकर आए और कमरे का दरवाजा बंद करके अच्छे से बैगन पर तेल लगाना शुरू कर दी मानो के जैसे एक मर्द अपने लंड पर छोड़ने से पहले तेल लगाकर उसकी मालिश करता है,,,,, मनीषा मोहिनी की हरकत देखकर पूरी तरह से काम ज्वाला में सुलगने लगी थी उसे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मानो उसके सामने मोहिनी नहीं बल्कि उसका भाई संजू अपने लंड पर तेल लगा रहा हो,,,, बैगन को अच्छी तरह से तैयार करने के बाद वह वापस बिस्तर पर घुटनों के बाल चढ़ गई और देखते ही देखते हैं वहां मनीषा की दोनों टांगों के बीच आ गई और इस बार मोहिनी उसे बेगन को अपनी दोनों टांगों के बीच लगाकर उसे मनीषा की चूत में डालने का प्रयास करने लगी मानो कि सच में उसके पास कोई लंड हो और इस तरह से मनीषा का भी आनंद बढ़ता जा रहा था वह मस्ती के सागर में गोते लगाने लगी थी पहले से ही वह संजू के लंड को अपनी चूत में ले चुकी थी इसलिए थोड़ी दिक्कत के साथ लेकिन धीरे-धीरे देखते ही देखते बैंगन पूरा का पूरा मनीषा की चूत में समा गया जैसे-जैसे बैगन छूट के अंदर प्रवेश कर रहा था वैसे-वैसे मनीष के चेहरे का हाव-भाव बदलते जा रहा था वह मस्त हुए जा रही थी,,,,,,।
अब कैसा लग रहा है दीदी,,,,,?
सहहहह ,,,,,,, मोहिनी बहुत अच्छा लग रहा है बहुत मजा आ रहा है तूने तो कमाल कर दी ऐसा लग रहा है कि सच में कोई मुझे चोद रहा है,,,,सहहहहहह आहहहहहह जोर-जोर से अंदर बाहर कर,,,,,आहहहहहह,,,।
सनुष्ट होने क बाद मोहिनी और मनीषा
फिर क्या था मोहिनी अपनी चूत से सटाकर बैगन को मनीषा की चूत में अंदर बाहर करने लगी उसे बहुत मजा आ रहा था दोनों मस्ती के सागर में गोते लगा रहे थे लेकिन मोहिनी को भी अपनी चूत में उसे बेगन को लेना था,,,, जल्दी-जल्दी वह मनीषा का पानी निकाल दी मनीष पूरी तरह से तृप्त हो चुकी थी और आप बड़ी थी मोहिनी की जिस तरह की क्रिया मोहिनी ने मनीषा के साथ की थी मनीषा भी खुले दिल से एक बार फिर से उसे पर सरसों का तेल लगाकर मोहिनी की चूत में डालना शुरू की और फिर मोहिनी एकदम मस्त हो गई दोनों झड़ जाने के बाद मनीषा ने बैगन को एक तरफ रखकर अपनी चूत को मनीषा की चूत से सटाकर ऊपर नीचे करके रगड़ना शुरू कर दी इस तरह से दोनों की गर्मी और ज्यादा बढ़ने लगी थी दोनों पागल हुए जा रहे थे दोनों एक दूसरे की चूचियां दिखा रहे थे और इसी तरह से कब दोनों एक दूसरों को बाहों में दिए नींद की आगोश में चले गए पता ही नहीं चला,,,,।
वहीं दूसरी तरफ आज संजू अपनी सुहानी मामी को विश्वास में लेकर अपनी सबसे छोटी वाली मामी को उसके घर से लेकर आया था गाना गाने के लिए और वह भी खुशी-खुशी गाना बजाना में शामिल होने के लिए बरसों की तकरार को मिटा कर एक होने के लिए आई थी और घर के सभी लोग उसका दिल से स्वागत भी किए थे जिससे वह बहुत खुश थी संजू की मेहनत रंग लाई थी संजू ने एक बार फिर से अपनी छोटी वाली मामी को इस घर से जोड़ दिया था इस बात की खुशी घर के सभी सदस्य को थी खास करके सुहानी को क्योंकि सुहानी भी यही चाहती थी,,,,, गाना बजाना खत्म होने के बाद रात के तकरीबन 11:45 बजे जब सब लोग अपने-अपने घर चले गए तो संजू सबकी राजा मंडी से अपनी छोटी वाली मामी को उसके घर पर छोड़ने के लिए जाने लगा,,,,।